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Hindi Porn Stories

मुकेश और विजय Hindi Porn Stories दोनों बेतहाशा भागते हुये एक सरकारी मकान के अहाते में कूद पड़े। दोनों की सांसें धौंकनी के समान चल रही थी। फिर भी वे भागते हुये घर के पिछवाड़े में आ गये। मकान में अन्दर की ओर खुलता हुआ एक दरवाजा था। दोनों दबे पांव अन्दर आ गये। अन्दर का दरवाजा भी खुला हुआ था।

मुकेश ने कमरे में झांक कर देखा। टीवी चल रहा था पर कमरे में कोई नहीं था। तभी उनके कानों में बाथरूम से किसी औरत के गुनगुनाने की आवाज आई। दोनों ने इशारा किया और मुकेश पलंग के नीचे सरक गया। तभी घर के से बाहर पुलिस सीटी बजाती हुई निकली।

रात गहराने लगी थी। विजय ने खिड़की से झांक कर बाहर देखा। पुलिस के साये अंधेरे में दूर जाते हुये नजर आ रहे थे। विजय भी कमरे के एक कोने में दुबक गया। तभी बाथरूम का दरवाजा खुला। मुकेश के सामने दो नंगे पांव नजर आ रहे थे। उसे किसी जवान लड़की के होने का संकेत मिला।

तभी रिवॉल्वर की नाल पलंग के नीचे दिखी,”तुम जो भी हो बाहर आ जाओ, वर्ना गोली मार दूंगी !”

मुकेश की रूह तक कांप गई। वह चुपचाप पलंग के नीचे से निकल आया। सामने एक बेहद सुन्दर सी जवान लड़की रिवॉल्वर लिये खड़ी थी। एक तौलिया उसके वक्ष के उभारों से लिपटा हुआ कूल्हों तक था। वो कुछ और कहती उसके पहले ही पीछे से विजय ने लपक कर उसकी रिवॉल्वर छीन ली। उसके शरीर पर लपेटा हुआ तौलिया अचानक ही ढीला हो गया और नीचे गिरने लगा। मुकेश ने लपक कर तौलिया पकड़ लिया और उसे फिर से लपेट दिया।

“मुकेश, गिरने दे तौलिया… जवान जिस्म है … जरा मजा तो लें !”

युवती घबरा सी गई, तौलिया सम्भालते हुये भी उसने नीचे गिरा दिया। उसका चमकीला नंगा बदन ट्यूब लाईट की रोशनी दमक उठा । दोनों के बदन झनझना उठे।

उसे देखते ही दोनों की आखों में वहशत भरी एक चमक आ गई। विजय ने तो उसे पीछे से पकड़ ही लिया। उसका लण्ड कड़क होने लगा था। मुकेश भी इस हुस्न के आक्रमण को नहीं झेल पाया और सामने से वो उससे लिपट गया। पहले तो वो लड़की छटपटाई, पर कुछ भी नहीं कर पाने अवस्था में उसने अपने आप को दोनों के हवाले कर दिया।

“बस… मुझे नोचो मत … जो करना है प्यार से करो, आखिर मैं भी तो एक इन्सान हूँ!” युवती के मुख से एक कराह सी निकली। दोनों को अपनी इस जानवरों जैसी हरकत पर शरम आने लगी।

“सॉरी, आपको नंगा देख कर हमारा बांध टूट गया था।”

“आओ, जो करना हो बिस्तर पर करो… पर तुम दोनों भाग क्यूँ रहे हो…?” अचानक युवती का स्वर बदल सा गया। उसके कोमल स्वर में अब वासना का पुट आ चुका था।

मुकेश जरा नाजुक दिल का था सो सहानुभूति से उसकी रुलाई फ़ूट पड़ी…”हमारी गर्ल फ़्रेण्ड ने हमें घर पर रात को बुलाया था। पर उसी के सामने वाले फ़्लेट में एक खून हो गया था। पुलिस छान बीन कर रही थी तो हम डर गये।

पीछे की खिड़की से कूद कर हम भाग निकले और ये पुलिस वाले हमें ही कसूरवार मान कर पीछे पड़ गये !”

“मेरा नाम काजल है… तुम यहाँ बिल्कुल सुरक्षित हो… अब चुप हो जाओ… जो हुआ उसे भूल जाओ !” काजल ने उसे अपने पास लेटाते हुये चूम लिया।

“पर यह मत सोच लेना कि आप बच गई… आपको चोदना तो है ही…!” विजय बोल पड़ा।
“है तेरी हिम्मत … बड़ा आया चोदने वाला !” काजल ने आंखे तरेरते हुये उसे जोश दिलाया।

“क्या… साली को देख तो… अभी बताता हूँ … !”कह कर विजय ने उसे अपनी तरफ़ घुमाया और उसे दबोच लिया। वो एक बेबस चिड़िया की तरह फ़ड़फ़ड़ाने लगी। तभी दोनों के मोटे लण्ड उसके सामने आ गये।

“ले दबा इसे, दो दो मस्त लण्ड हैं !” काजल ने दोनों के मोटे मोटे लण्ड थाम लिये और मुठ मारने लगी। दोनों ही झूम उठे।
“चला हाथ मस्ती से साली… हां ये बात हुई ना … !”
काजल बड़े यत्न से और मस्ती से मुठ पर हाथ चलाने लगी।
“अब मुँह से चूस ले और जोर से चूसना…!”

काजल ने उनके लण्ड जम कर चूसना चालू कर दिया। कभी विजय का लण्ड चूसती और कभी मुकेश का लण्ड। दोनों के चूतड़ हिलने लगे और लग रहा था कि वे काजल का मुख चोद रहे हो।

तभी उसे अपनी गांड में लण्ड को छूने का अहसास हुआ।
“विजय, मार दे गाण्ड साली की … मै चूत सम्हालता हूं…” काजल दोनों के बीच में सेण्डविच हो गई थी। उसने भी अपने आप को एडजस्ट किया और अपनी टांगे चौड़ा दी। काजल मन ही मन उनसे चुदाने की तैयारी कर चुकी थी। पर थोड़ा बहुत नाटक तो करना था ना। दो दो लण्ड उसके शरीर की सतह पर तड़प रहे थे, उसके जिस्म में यहा वहां ठोकरे मार रहे थे। उसकी चुदाई की इच्छा बढ़ती जा रही थी।
“तुम दोनों एक बेबस लड़की के साथ यह सब रहे हो … देखना मैं उसकी सजा जरूर दूंगी… आह्ह !”

विजय का लण्ड काजल की चूत में घुस चुका था… उधर मुकेश का लण्ड भी उसकी गाण्ड में घुसने की कोशिश कर रहा था। जब उसकी चूत में लण्ड घुस गया तो काजल ने अपनी गाण्ड ढीली की। छेद को ढीला करते ही मुकेश का लण्ड अन्दर घुस गया।

काजल का मन हरा हो गया। उसने आनंद भरी एक सीत्कार भरी। उसके दोनों छोर पर लण्ड घुस चुके थे। वो एक करवट पर लेटी अपने चूतड़ हल्के से हिलाने लगी।
“आह हा … उह्ह्ह्… साली चूत हिला हिला कर चुदा रही है और मजे ले रही है…
अब तो हमें गाली तो मत दे…”

“ऊईईईईई… मेरे जिस्म में दो दो लण्ड गाड़ कर मुझे मस्त कर दिया है… तो दिल तो आपको धन्यवाद तो देगा ही ना … साले विजय चोद जरा मस्ती से… लगना चाहिये कि मर्द मिला है… आईईई मुकेश… तू क्या मेरी गाण्ड फ़ाड़ ही डालेगा… चल लगा तू भी जरा मस्त हो कर…”

दोनों के लण्ड जोर मारने लगे और काजल चुदने लगी… काजल दोनों तरफ़ से एक साथ कभी कभी नहीं चुदी थी। यह पहला अनुभव था… उसे लगने लगा था कि काश शादी भी दो मर्दों से होने चाहिये… वर्ना चुदाई का क्या मजा ?

“मुकेश , अब मुझे इसकी गाण्ड चोदने दे… तू इसकी चूत मार … !” विजय ने प्रस्ताव रखा। मुकेश तुरन्त मान गया और पोजिशन बदलने लगे। इतने में उसका दरवाजा किसी ने खटखटाया।
“कौन है…?” काजल ने खीज कर कहा।
“मैडम, सरदार सुरजीत सिंह, हेड कांस्टेबल रिपोर्टिंग…! ” विजय ने तुरन्त लपक कर रिवाल्वर उठा ली…
“तो आप भी पुलिस है… देखो मेरे हाथ में रिवॉल्वर है, उसे रवाना कर दो वर्ना…।”

काजल मुस्कराई और दरवाजे की ओर चल दी। उसने अपना गाउन पहना और तौलिया सर पर बांधा… तीन पुलिस वाले थे। तीनों पुलिस वालों ने उसे सैल्यूट मारा।
“क्या है?”
“मैडम ध्यान रखें… दो कातिल इधर ही भाग कर आये हैं… सावधान रहना…!”
“ठीक है, अब जाओ…” उसने दरवाजा बंद कर दिया।

मुकेश और विजय दोनों सावधान हो चुके थे। अन्दर आते हुई बोली,”चलो क्या हुआ लण्ड ढीले हो गये ?” वो हंसते हुई बोली। दोनों ही वहाँ से जाने की तैयारी करने लगे।
“अभी मत जाओ, बाहर पुलिस तुम्हें ढूंढ रही है।”
“बाहर भी पुलिस और अन्दर भी पुलिस… सॉरी मैडम… हमारे पास रिवाल्वर नहीं होती तो हम अन्दर ही होते !”
” वो तो मैं चाहती तो सब कुछ कर सकती थी…!”
“ओये चुप हो जा… इसी रिवाल्वर से तेरी गाण्ड में गोली नहीं उतार देता…” विजय कुछ विचलित सा होता हुआ बोला।

“खाली रिवाल्वर से गोलियाँ नहीं चला करती हैं जानी…!” अब विजय के चौंकने की बारी थी। उसने तुरन्त रिवाल्वर चेक की और उसने विस्मित नजरों से काजल को देखा। काजल के चेहरे पर मुस्कान तैर रही थी।

“अब कपड़े उतार ही दो … “काजल ने दोनों के लम्बे लम्बे हाथ से लण्ड पकड़ लिये, और दबाते हुये बोली,”अब मुझे वैसे ही चोदो जैसे पहले चोद रहे थे… देखो पूरा मजा देना !”
“आपने हमें जानबूझ के बचाया… जब कि हमने आपको जानवरों की तरह चोदा…!”

“मुझे पता था कि तुम बेकसूर हो, हमें मालूम हो चुका कि किसने वो सब किया था… फिर जानवरों की तरह चुदाने मुझे जो मजा आया है … उसका भी धन्यवाद !”
दोनों के लण्ड एक बार फिर से कड़क हो उठे।

“देखो, एक बार फिर से मुझे जानवरों की तरह से चोद डालो…!” एक बार फिर से दोनों के लण्ड उसके शरीर से चिपक गये और काजल फिर से सेंडविच बन गई। वह आह भरने लगी। दोनों के लण्ड आगे व पीछे के दरवाजे पर दस्तक देने लगे। कुछ ही क्षणों में काजल के जिस्म में दो गरम गरम मूसल घुस पड़े। उसके चूतड़ बीच में दब गये और दोनों दोस्त अपना अपना काम करने लगे। काजल ने दोनों को सहूलियत देने के लिये अपनी एक टांग कुर्सी पर उठा कर ऊंची कर दी और गाण्ड का द्वार ढीला कर दिया। लण्ड सीधे ही छेद को चीरता हुआ भीतर चला गया।

उधर विजय का लण्ड भी चिकनी चूत में सरक गया । काजल दोनों लण्ड के घर्षण से मचल उठी। लगा, शरीर में दो साण्ड आपस में भिड़ गये हो।

“भेन के लौड़ो… चलाओ अपना लौड़ा… फ़ोड़ दे साली गाण्ड को… !” काजल अपनी पुलीसिया भाषा पर उतर आई थी। दोनों के लण्ड फ़ूल कर फ़ड़फ़ड़ा रहे थे। दोनों की कमर तेजी से चलने लगी थी। डबल चुदाई से काजल मदहोश होने लगी थी। कभी कभी विजय और मुकेश दोनों ही हाथ बढ़ा कर एक दूसरे के चूतड़ दबा कर अपनी तरफ़ खींच लेते थे। इससे दोनों के लण्ड एक साथ पूरी गहराई में उतर जाते थे और काजल मस्ती में लहक जाती थी। मुकेश ने पीछे हटते हुये दीवार का सहारा ले लिया और अब काजल के पीछे जोर लगाने पर मुकेश का लण्ड गाण्ड की जड़ तक बैठ जाता था।

दोनों काजल से ऐसे लिपटे हुये थे मानो एक वृक्ष हो और दो लतायें… बेतहाशा काजल को चूमे जा रहे थे। चूंचियो की हालत दबा दबा कर, मरोड़ मरोड़ कर खराब कर दी थी। निपलों को मसल उसे बेहाल कर दिया था। तभी काजल चीख उठी, उसका शरीर कड़क सा हो गया और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया।

“मर गई रे हरामजादो … अब हटो… हाय रे… अब तो फ़ट ही जायेगी…” उसका सीत्कार सुन कर दोनों को होश में आ गये और मुकेश ने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया और मुठ मारने लगा और वीर्य उछाल मारता हुआ बाहर कूद पड़ा। पहली और दूसरी धार तो काजल के चूतड़ों पर गिरी, बाकी बूंद बूंद करके जमीन पर गिरने लगी। उधर विजय भी अपने सुहाने पलों के नजदीक पहुंच गया था और फिर काजल को दबाते हुये अपना लण्ड चूतड़ बाहर खींचते हुये निकाल लिया और आह भरते हुये वीर्य निकालने के लिये जोर लगाने लगा। मुकेश ने तुरन्त उसका लण्ड पकड़ा और मुठ मारने लगा। विजय काजल से लिपट पड़ा और आखिर उसने अपना वीर्य पिचकारी की तरह छोड़ना चालू कर दिया। मुकेश ने उसका वीर्य निकालने में पूरी सहायता की।

विजय और मुकेश बिस्तर पर आ कर बैठ गये और सुस्ताने लगे… जब कि काजल तरोताजा लग रही थी। दोनों ने अपने अपने कपड़े उठाये और पहनने लगे। काजल ने यह देख कर उन्हें ललकारा,”बस मेरे जवानो … थक गये क्या… जवानी का मजाक मत बनाओ… साले… नामर्दों… !”

दोनों ने उसे आश्चर्य से देखा… और दोनों ने आंखों ही आंखों में इशारा किया और काजल को झपट कर बिस्तर पर लेटा दिया।

“क्या कहा… नामर्द … थक गये हैं … तेरी तो मां चोदी… देख अब तेरा क्या हाल करते हैं…”
काजल खिलखिला कर हंस पड़ी…” देखा मस्त चुदना हो तो नामर्दी की बात कह दो … फिर देखो चुदाई का मजा… अरे मेरे नमूनो, बाहर पुलिस होगी, रात भर यहीं रहो, मुझे चोदो और जश्न मनाओ… दारू पीते हो…? चलो दो दो पेग लगाओ और चालू हो जाओ !”

ये सुनते ही दोनों ने उसे छोड़ा और दारू पीने बैठ गये। काजल मुकेश की गोदी में लण्ड के ऊपर दोनों पांव इधर उधर करके कमर में लपेट कर बिस्तर पर बैठ गई।

अब मुकेश के खड़े का लण्ड का दबाव सामने उसकी चूत पर पड़ रहा था। काजल को उसका लण्ड अपनी चूत में सरकाने में कोई परेशानी नहीं आई। बड़ी शान्ति से उसका लण्ड सरकता हुआ उसकी चूत में बैठ गया।
विजय को पता तक नहीं चला कि काजल की चुदाई फिर चालू हो चुकी थी। वो दारू पीने में मस्त था। मुकेश भी गिलास से एक एक घूण्ट हलक से नीचे उतारता और अपने चूतड़ो को हल्के से ऊपर नीचे करके एक शॉट मार देता…
काजल भी धीरे धीरे एक एक घूंट लेती और मस्ती से मुकेश से चिपक जाती… माहौल धीरे धीरे फिर से गर्म होने लगा था। काजल की गाण्ड भी चुदने को तैयार थी… दो जवान लण्ड उसे चोदने का फिर से यत्न करने लगे थे… Hindi Porn Stories

Sex Stories

चाय पीकर जीजाजी Sex Stories नहाने चले गए। बाथरूम से ही उन्होंने मुझे आवाज़ दी- राकेश आओ, तुम भी नहा लो।

मैं समझ गया कि उनका इरादा क्या है। पूरे दिन बाहर रहने के कारण वह दिन में एक बार भी मेरी गाण्ड नहीं मार सके थे।

मैं बाथरूम में आ गया। उन्होंने ही मेरे सारे कपड़े उतारे और बिना देर किए मेरे पोण्ड पर साबुन मलने लगे। उनका लण्ड पहले ही तन्नाया हुआ था, उन्होंने मेरा मुँह पकड़ कर लण्ड के पास कर दिया तथा कहा- इसे चूसो !

मैं थोड़ा हिचका, पर उन्होंने अपने लण्ड का सुपाड़ा मेरे मुंह में घुसा ही दिया। उनका लण्ड बहुत लम्बा और मोटा था। मैं और कोई चारा ना देख उनके लण्ड को लोलीपोप सा चूसने लगा, वह मेरे पोण्ड के छेद में उंगली करते रहे।

थोड़ी देर बाद उन्होंने मुझे अपनी गोदी में बिठा कर अपना पूरा लण्ड मेरी गाण्ड में घुसा दिया। इस बार उन्होंने साबुन भी नहीं लगाया था। मैं तड़प कर रह गया। उन्होंने अपने दोनों हाथ मेरे पोण्ड के नीचे लगा रखे थे और उनसे मुझे उठाकर ऊपर नीचे कर रहे थे। ऐसा करने से उनका पूरा लण्ड मेर गाण्ड में समा जाता था। १०-१५ मिनट तक लण्ड मेरी गाण्ड में अन्दर बाहर होने के बाद उन्होंने अपना रस मेरी गाण्ड में ही भर दिया। फिर नहा कर हम बाहर आ गए तो जीजाजी बोले- ‘सारा दिन बेकार हो गया योगी, रात में मैं पूरी कसर निकालूँगा, तैयार रहना !’

तैयार तो मैं था ही क्योंकि मुझे पता था की जीजाजी मुझे छोड़ने वाले नहीं हैं।

रात को खाने के आधे घंटे बाद ही जीजाजी ने मेरी पहली बार गाण्ड मारी। उन्होंने उस रात कुल चार बार तरह तरह से मेरी गाण्ड मारी। अपना लण्ड चूसाया, कभी उल्टा कर गाण्ड में लण्ड घुसाया तो कभी अपने ऊपर बैठा कर मेरी गाण्ड में लण्ड डाला तो कभी मुझे हाथों में ऊपर उठाकर नीचे से मेरी गाण्ड मारी। सुबह तक मैं सो ही नहीं पाया। उस दिन में मैं सात-आठ बार गाण्ड मरवा चुका था। मेरी गाण्ड काफी फूल गई तथा मुझे काफी दर्द भी महसूस होने लगा।

सुबह उठाने पर जीजाजी ने बताया- ‘ डी. एफ. ओ. साहब कल की घटना की जाँच के लिए आ रहे हैं। तुम उन्हें खुश कर दोगे तो मैं निलंबित होने से बच जाऊँगा तथा वह अपनी रिपोर्ट मेरे हक़ में दे देंगे !’

लगभग ११ बजे डी. एफ. ओ. साहब आ गए। जीजाजी ने उनसे मेरा परिचय कराया- ‘ ये मेरे छोटे भाई का साला है, काफी समझदार है, दिन में यह आपकी पूरी सेवा करेगा !’

दोपहर के खाने के बाद जीजाजी जंगल की ओर चले गए तथा मुझे डी. एफ. ओ. की सेवा करने को कह गए। डी. एफ. ओ. साहब लेट कर आराम कर रहे थे। जब मैं उनके कमरे में पहुँचा, मेरी आहट पाकर मुझसे बोले- दरवाजा बंद कर दो। सेवा का मतलब वह अच्छी तरह समझते थे।

डी. एफ. ओ. साब काले कलूटे लेकिन तंदरुस्त इन्सान थे। दरवाजा बंद कर जैसे ही मैं मुड़ा तो मैंने देखा वह पूरी तरह नंगे लेटे हुए हैं। उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर अपना मोटा लण्ड मेरे हाथ में दे दिया तथा उसे चूसने का हुकुम दिया। उनका काला लण्ड बड़ा ही भयानक लग रहा था।

मैं थोड़ा झिझका तो वह चिल्लाये – जल्दी कर !

मैं उनका लण्ड अपनी ऑंखें बंद कर चूसने लगा। उन्होंने बिना देर किए मेरे सारे कपड़े उतार दिए। कुछ देर बाद मुझे अपने ऊपर ६९ की अवस्था में लिटा लिया। अब उनका लण्ड मेरे मुंह में था तथा मेरा लण्ड उनके मुंह के पास था। पर उन्होंने मेरे लण्ड को अपने मुंह में नहीं लिया बल्कि मेरी गाण्ड के छेद को चाटने लगे।

थोड़ी देर तक ऐसा करने के बाद उन्होंने मेरी गाण्ड के छेद को चिकना कर दिया और मुझे उल्टा लिटा दिया। इसके बाद उन्होंने मेरे दोनों पोंड फैला कर गाण्ड का छेद थोड़ा बड़ा कर लिया और एक जोर का धक्का लगा कर एक ही झटके में अपना पूरा लण्ड मेरी गाण्ड में घुसा दिया। मेरी तो जान ही निकल गई। मैं चिल्ला दिया – मर गया …!

पर वह तो मस्ती में धक्के पे धक्का पेले जा रहे थे। थोड़ी देर बाद मुझे अच्छा तो लगा पर उनके रूप रंग के कारण मुझे बड़ी ही घिन आ रही थी। उस दोपहर उन्होंने तीन बार मेरी गाण्ड मारी। मैं दर्द से बिलबिलाता रहा पर उन्होंने जरा भी परवाह नहीं की। मेरी गाण्ड का छेद कई जगह से कट गया।

शाम को वह चले गए तथा जीजाजी को उनके हक़ में रिपोर्ट भेजने का कह गए। जीजाजी बहुत खुश हुए।

रात में उन्होंने मुझे कुछ ज्यादा ही प्यार किया। मेरी गाण्ड की हालत देख कर अफ़सोस तो जताया पर इसके बाद भी उन्होंने मुझे नहीं छोड़ा। गाण्ड के छेद में तेल भर कर उन्होंने उस रात मेरी तीन बार गाण्ड मारी। जब मेरी गाण्ड से ज्यादा खून निकलने लगा तो उन्होंने शिव को कमरे में बुला लिया। मेरे ही सामने उन्होंने शिव की भी दो बार और गाण्ड मारी। शिव तो काफी अभयस्त था इसलिए वह काफी मस्ती में गाण्ड मरवाता रहा।

उन दोनों को देख कर मेरा भी लण्ड फाड़ फड़ने लगा पर जीजाजी के सामने मैं कुछ कह नहीं सकता था। चुपचाप लेटे लेटे अपना लण्ड मसलता रहा। जीजाजी ने यह सब देख लिया तो उन्होंने मथारू को बुला लिया तथा मुझसे मथारू की गाण्ड मारने को कहा। मथारू आदिवासी था तथा वह भी काफी सीखा हुआ था। उसने मेरे लण्ड को चाटा, चूसा, अपने पोंड के छेद में मुझसे ऊँगली घुसवाई तथा बाद में मुझसे गाण्ड में लण्ड पेलने को कहा।

मुझे यह सब करके बड़ा आनंद मिला। मैं अपनी गाण्ड का दर्द भूल गया। मथारू की गाण्ड मारने के बाद जीजाजी ने मुझसे शिव की भी गाण्ड मारने को कहा। जब मैं शिव की गाण्ड मार रहा था तभी मथारू ने अपना लण्ड पीछे से मेरी गाण्ड में भी घुसा दिया। जीजाजी मथारू की गाण्ड में अपना लण्ड पेल रहे थे। यानि की एक बार में ही तीन लोगों की गाण्ड मारी जा रही थी।

हम लगभग एक सप्ताह जंगल में रहे। जीजाजी ने इस बीच इतनी बार मेरी गाण्ड मारी कि मैं गिनती करना ही भूल गया। मेरी गाण्ड का छेद अब तक काफी खुल गया था तथा जीजाजी का मोटा लण्ड भी अब आसानी से मेरी गाण्ड में चला जाता था।

जंगल से लौटने के एक सप्ताह तक जीजाजी को फिर मेरी गाण्ड मारने का अवसर नहीं मिला।

जब उन्हें अवसर मिला तो क्या हुआ पढ़िये अगली कहानी में ….. Sex Stories

Hindi Porn Stories
मेरा नाम अजय है, मैं बहुत दिनों से Hindi Porn Stories अन्तर्वासना की कहानियाँ पढ़ता हूँ। आज मैं आप लोगों के लिए सच्ची कहानी लिखने जा रहा हूँ।

बात उन दिनों की है जब मैं कॉलेज में पढ़ता था। मेरी उमर बीस साल थी और नेहा दीदी बाईस साल की थी। नेहा दीदी मेरे फ़ूफ़ा की लड़की है। फ़ूफ़ा बिज़नेस के सिलसिले में बाहर गए थे, घर में दीदी, फ़ूफ़ी और मैं ही थे।

गर्मी का महीना था, कोलकाता में गर्मी बहुत ज्यादा थी। रात को खाना खाकर हम लोग एक ही पलंग पर सो गए, दीदी बीच में फ़ूफ़ी फिर मै। मैं आप लोगो को बता दूँ कि नेहा दीदी को कभी मैंने ग़लत नजरो से नहीं देखा।

मैं गहरी नींद में सो रहा था और सपना देख रहा था करीना कपूर की चूची दबाने का, कि अचानक मेरे मुँह पर कुछ जोर से गिरा और नींद खुल गई, लाईट बंद थी और अँधेरा था मुझे लगा कि नेहा दीदी के दोनों पैर मेरे मुँह पर है। शायद फ़ूफ़ी को कोई परेशानी थी या गर्मी लग रही थी इसलिए वो नीचे चादर डाल कर सो गई थी।

मैंने अपने दोनों हाथों से दीदी के पैर हटाने चाहे तो पाया कि दीदी की टांगों पर कपड़ा नहीं था दरअसल रात को वो गर्मी के कारण पतली नाइटी पहन कर सोई थी, मैंने धीरे से उसके दोनों पैर अपने ऊपर से हटा कर बिस्तर पर कर दिए, करीना कपूर चूची दबाने का सपना ओर दीदी की नंगी टांगों के छूने से मेरा लंड में कसाव आने लगा और मेरी नीयत दीदी को छूने की होने लगी।

मैंने थोड़ी हिम्मत करके नेहा दीदी की टांगों पर हाथ रखा और धीरे धीरे ऊपर की ओर हाथों को सरकाने लगा। कमर तक पहुँचा तो पाया नाइटी नहीं है पर पैंटी पहनी हुई है। मैंने हिम्मत करके उसके पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को दबाने लगा। हाय क्या नरम मुलायम चीज़ थी और मुझे आनंद का अनुभव हो रहा था। मेरा लंड तो तन कर 8″ का हो गया।

मैं धीरे धीरे हाथ को ऊपर नाभि से लेकर छाती तक गया तो पाया कि नाइटी चूचियों के ऊपर ही है जिससे चूचियाँ ढकी है। मैंने धीरे से उंगलियों से नाइटी को हटाना शुरू किया और दीदी की चूचियाँ बाहर आ गई। मैंने धीरे धीरे सहलाना शुरू किया तो चूचियों के चुचूक कड़े होने लगे। मुझे लगा कि शायद दीदी की जवानी का जोश हिलोरें मारने लगा है।

मेरे शरीर में रोमांच भर आया… मन कर रहा था कि मैं दीदी की चूचियाँ पकड़ कर मसल दूं! लेकिन मैंने बड़े प्यार से दीदी के स्तन सहलाये… ओर नोकों को हौले हौले से पकड़ कर मसलते हुये घुमाया, अब मेरे इरादे बदलने लगे थे। मैंने अपनी टांगों से बार बार उसके चूतड़ों को छूना शुरू कर दिया। उसके पूरे के पूरे स्तन देखने को और दबाने को मिल रहे थे। फिर मैंने उसकी निप्पल को मुंह में ले लिया और धीरे से चूसने लगा।

अचानक मुझे लगा कि दीदी की नींद खुल चुकी है और चुपके से सोने का बहाना कर रही हैं। मेरी हिम्मत बढ़ने लगी। मैं भी अंजान बन कर निप्पल को धीरे से चूसने लगा। थोड़ी देर बाद मैं अपना हाथ उसकी पैंटी पे ले आया। उसकी चूत बहुत गरम हो गई थी तो उसकी पैंटी गीली हो चुकी थी और दीदी ने हलके से अपने पैरों को थोड़ा फैला दिया। मैंने दीदी की पैन्टी धीरे से नीचे खींच दी और पैन्टी को धीरे धीरे पैरों से अलग कर दिया और उसकी चूत पर हाथ रख कर रगड़ने लगा और फिर एक उंगली उसकी चूत में अन्दर बाहर करने लगा।

दीदी ने हलके से आपने पैरों को थोड़ा ओर फैला दिया। मैं उठ कर बैठा, उसने धीरे से खुद अपनी टांगें ऊपर कर ली, जिससे उसकी चूत खुल गयी। उसकी चूत देख कर मैं खुश हो गया । गुलाबी रस भरी चूत बड़ी प्यारी लग रही थी। उसकी चूत एक दम गुलाबी थी और चूत पर एक भी बाल नहीं था, उसकी चूत एक दम लाल सुर्ख हो गई थी ऐसी इच्छा हो रही थी कि उसकी चूत खा जाऊं।

मेरे मुंह में पानी आ गया। मैं उसकी चूत पर झुक गया। मादक सी गंध आ रही थी। मैंने धीरे से अपने होंठ उसकी चूत पर रख दिये वो तिलमिला उठी मैने अपनी जीभ उसकी चूत के होठों पर रख दी। वो हल्के से सिसक पड़ी। होले होले मैं उसकी चूत की पूरी दरार चाटने लगा। वो तिलमिलाने लगी, तड़फ़ने लगी। मैंने अपनी जीभ की नोक उसकी चूत के छेद मे डाली और अन्दर तक ले गया। वो तड़फ़ती रही। मैं जोर जोर से चूत रगड़ने लगा।

उसकी सिसकियां बढ़ने लगी, वो अब बहाना छोड़ कर दोनों हाथों से मेरे सर को अपनी चूत पर दबाने लगी। तभी वो काँपने लगी और उसने अपने चूत का पानी छोड़ दिया और मैं उसका सारा पानी पी गया।
मैंने देखा कि वो हांफ रही है और मेरी तरफ़ देख रही है, मैं उसके कान के पास जाकर फुसफुसा के कहा- कैसा लगा तो दीदी?

तो उसने कहा- हटो यहाँ से! तुम्हारा मेरा रिश्ता क्या है? तुम्हें पता है कि तुम क्या कर रहे हो? मैं तुम्हारी दीदी हूँ और यह सब पाप है!
मुझसे रहा नहीं गया मैंने फिर कहा- इतनी देर मेरे साथ मज़ा लेकर अब कह रही हो कि यह सब पाप है! मुझे तुमसे प्यार करना है तुम चाहो या न चाहो!
बोल कर मैंने उसकी बांई चूची मुंह में भर लिया और जोर जोर से चूसने लगा और अपनी लुंगी खोल कर दीदी के ऊपर लेट गया, अपना लंड उसके जांघों के बीच रख लिया।

मेरी जीभ उसके कड़े निप्पल को महसूस कर रही थी। मैंने अपनी जीभ को नेहा के उठे हुए कड़े निप्पल पर घुमाया। मैं दोनों अनारों को कस के पकड़े हुए था और बारी बारी से उन्हें चूस रहा था। मैं ऐसे कस कर चूचियों को दबा रहा था जैसे कि उनका पूरा का पूरा रस निचोड़ लूँगा। उसके मुंह से ओह! ओह! अह! सी, सी! की आवाज निकल रही थी। मुझसे पूरी तरह से सटे हुए वो मेरे लंड को अपनी जांघों से बुरी तरह से मसल रही थी और मरोड़ रही थी।

दीदी ने धीरे से कहा -‘भाई धीरे धीरे से जो करना है करो! तुम तो मान ही नहीं रहे हो! मुझे तो डर है कि कही माँ जाग न जाए!

फिर उसने मुझे किस करना शुरु कर दिया मेरे होंटों को वो बुरी तरह से चूमने लगी। मैं भी जोश में आ गया, उसको किस करने लगा और उसको अपनी बाहों में दबाने लगा। उसने मुझे बेड पे लिटा लिया और मेरी दोनो टांगो के बीच बैठ कर मेरा लन्ड चूसने लगी। मैं उसके मुलायम होठों को अच्छी तरह महसूस कर रहा था। ऐसा लग रहा था कि जैसे मैं किसी और दुनिया में हूं। मेरे जिस्म में चींटियां रेंगने लगी। उसने अपनी गति बढ़ा दी और जल्दी जल्दी लन्ड को चूसने लगी। थोड़ी देर में लन्ड से धड़ाधड़ पानी निकलने लगा जिसे उसने गड़प से पी लिया।

लन्ड कुछ देर शान्त बना रहा। मैं भी बेड पर निढाल सा पड़ा था।
वो उठ कर बोली- क्यों मर्द?… बस क्या?… या और कुछ करना है?
मैंने कहा- दीदी अभी तो पूरा रात बाकी है… बस एक मिनट… अभी तैयार हो जाता हूं!

वो हंसने लगी। मैं उससे लिपट गया, मैं उससे यूं लिपटा हुआ था जैसे उसके अन्दर ही समा जाउंगा। मैंने उसे बेड पे लिटा दिया। उसने खुद अपनी टांगे ऊपर कर ली, जिससे उसकी चूत खुल गयी। मैं चुपचाप उसके चेहरे को देखते हुए चूची मसलता रहा। उसने अपना मुंह मेरे मुंह से बिल्कुल सटा दिया और फुसफुसा कर बोली, अपनी नेहा दीदी को चोदो! दीदी हाथ से लंड को निशाने पर लगा कर रास्ता दिखा रही थी।

मैंने पूछा- दीदी तैयार हो क्या जन्नत की सैर करने के लिए?
तो वो बोली- ‘हाँ मेरे राजा भाई! आज इस चूत की खुजली मिटा दो, साली रात भर सोने नहीं देती हैं।
उसने कहा- प्लीज़ जल्दी से अपना मोटा सा लण्ड मेरी चूत में डाल दो।

फिर अपने लण्ड उसकी चूत पे रख कर उसे रगड़ने लगा। वो तो मानो पागल हो उठी। उसने मेरे बॉल खींच लिए और धीरे से बोली प्लीज़ मुझे और मत तड़पाओ, और जल्दी से अपना लण्ड अंदर कर दो। मैंने थोड़ा सा धक्का लगाया तो लण्ड का सुपाड़ा उसकी चूत पे जा कर अटक गया। और वो दर्द से तड़प कर बोली- आ…ह… उ…ई… बाहर निकालो प्लीज़।

उसकी आँखों में आंसू आ टपके। लेकिन मैं तो पूरे जोश में था। मैंने उसे अपने बाजुओं में कस कर पकड़ा और धीरे से प्रेशर देने लगा। फिर मैं रुक गया क्योंकि उसकी चूत काफ़ी टाइट थी और मुझे भी महसूस हो रहा था। मैं बस उतना सा ही घुसा कर उसके स्तन को चाटने लगा। थोड़ी देर बाद वो खुद ही अपनी गांड धीरे धीरे उचकाने लगी।

मैं समझ गया कि अब उसका दर्द ख़त्म हो गया है और वो अब पूरा लण्ड अपनी चूत के अंदर चाहती है। मैंने कुछ सोचा और थोड़ा सा लण्ड बाहर निकाल कर ज़ोर से धक्का मारा। फ़च्छ … की आवाज़ के साथ पूरा का पूरा लण्ड उसकी चूत में चला गया था। और दीदी ने अपने होंटों को दबा कर रोना शुरू कर दिया। मैंने उसके मुँह को अपने एक हाथ से ज़ोर से बंद किया और कहा कि अगर वो ज़ोर से चिल्लाएगी तो फ़ूफ़ी उठ जाएँगी और सारा मज़ा किरकिरा हो जाएगा। उसकी आँखो से आंसू छलक पड़े, लेकिन उसने आवाज़ निकालनी कम कर दी।

मैंने लण्ड को थोड़ा सा बाहर खींचा और धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा। वो अब मस्ती से कराहने लगी. आ…ह उम्म…ह… हाँ… ऐसे ही ठीक है…

मैं लण्ड की अंदर बाहर करने की स्पीड धीरे धीरे बढ़ाने लगा। उसे अब मज़ा आने लगा था। वो भी अब पूरा साथ दे रही थी अपनी गांड हिला हिला कर। मैंने स्पीड और बढ़ा दी। १० मिनट के बाद उसका ऑर्गेज़्म हो गया था। मैं उसकी चूत की लहरें महसूस कर सकता था। उसकी चूत का पानी निकल कर पूरी बेड शीट पर फैल गया था। मैंने उसकी टाँगे और फैला ली और लंबे लंबे धक्के लगाने लगा। वो आँखें बंद करके कराह रही थी।

थोड़ी देर बाद मैंने भी उसकी चूत के अंदर ही ढेर सारा वीर्य छोड़ दिया। हम दोनो इसी तरह आधे घंटे तक लेटे रहे। फिर मैंने धीरे से अपना लण्ड उसकी चूत से निकाला। वो काफ़ी टाइट से अटका था। फक्क की आवाज़ के साथ पूरा लण्ड बाहर आया तो उस पर मेरा वीर्य और थोड़ा खून भी लगा था। फिर दीदी धीरे से चुपचाप उठ कर चादर को लेकर बाथरूम चली गई।

दोस्तो, आपको मेरी कहानी कैसी लगी? Hindi Porn Stories
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अहमदाबाद एक बहुत बड़ा Antarvasna Stories शहर है, साबरमती के कारण उसकी सुन्दरता और बढ़ जाती है। मैं बिजनेस के सिलसिले में यहा आया था। मेरे बिजनेस पार्टनर मोहित के यहां मैं रुका हुआ था। उनके घर में मियां बीवी के अलावा तीसरा कोई भी नहीं था। शाम को आठ बजे के बाद वह घर आ जाता था। फिर मोहित और उसकी पत्नी काफ़ी देर तक दोनों व्हिस्की पीते थे। साथ में अधिकतर वो कवाब और मुर्गा खाते थे। तो मोहित ने मुझे भी बुला लिया। हम तीनों लगभग एक ही उमर के हैं… बातों बातों में खूब हंसी ठिठोली होती थी… वेज और नॉन वेज चुटकुले भी खूब सुनाते थे। अन्त में उन दोनों की हालत यह हो जाती थी कि वे बड़ी मुश्किल से बिस्तर तक जा पाते थे।

मैंने आज दोनों की मदद करके उन्हें सुला दिया, पर कोमल को ले जाते समय उसकी चूंचियों और चूतड़ों पर मेरे हाथ पड़ ही गये। बिस्तर पर गिरते ही उसका पेटीकोट भी थोड़ा ऊपर उठ गया था। मन ललचा गया। मैंने सावधानी से उनका पेटीकोट उठा कर उनकी चूत के दर्शन कर लिये। क्लीन शेव चिकनी चूत थी… मैंने इधर उधर देखा और फिर पेटीकोट बिल्कुल ऊपर उठा दिया। मेरा लण्ड उसे देख कर सलामी देने लगा। तन कर खड़ा हो गया। दिल में शैतान उतर आया।

मैंने धीरे से उसके ब्लाऊज के हुक खोल दिये, नंगी चूंचियां चमकती हुई भरी हुई गोल गोल और उस पर से उसके भूरे भूरे निपल… मेरे मुख से आह निकल गई। हिम्मत करके मैंने उसकी एक निपल मुख में ले ली और थोड़ा सा चूस कर छोड़ दिया। तभी मोहित ने करवट ली।

मैं घबरा कर दूर हट गया। पर वो गहरे नशे में था। मैंने लाईट बंद की और कमरे से बाहर आ गया और अपने कमरे में आ गया। मेरे लण्ड का बुरा हाल था। मैं अपने लण्ड को मसले जा रहा था।

अन्त तो मुठ मार कर हुआ… अन्दर से सारा वीर्य बाहर आ गया तो शान्ति मिली। पर रात भर मै कोमल के बारे में ही सोचता रहा। उनका मद भरा जिस्म मेरी आंखो के सामने घूमता रहा।

सवेरे मोहित को बाहर जाने की तैयारी देख कर मेरा मन खुश हो गया। उसने बताया कि वो दो तीन दिन के लिये सूरत जा रहा है और घर पर उसकी पत्नी का और घर का ध्यान रखना है।

उसे मैं स्टेशन छोड़ने गया फिर अपने काम से शाम तक अपना बिजनेस का काम करता रहा।

शाम को लौटते समय मुझे ध्यान आया कि शाम को उनकी आदत कवाब और मुर्गा खाने की है सो मैंने रास्ते से ये सब पैक करा लिया।

घर पहुंच कर मैंने कोमल को वो सब थमा दिया तो वो बहुत हंसी,”अरे ये तो मै मोहित के साथ ही लेती हूं, आप तो यूं ही ले आये !”

मैं झेंप सा गया। पर उसने कहा कि अगर मुझे ये अच्छा लगता है तो वो साथ दे देगी। मैं नहा धो कर फ़्रेश हो गया, कोमल भी नहा ली और फ़्रेश हो गई।

रात को वो मेरे लिये व्हिस्की ले आई। मैं आज भी उसे पिला पिला कर मदहोश कर देना चाहता था। वही हुआ भी, मैं तो केवल दो पेग ही पीता था पर कोमल ने तो रोज़ की तरह खूब पी ली थी।

रात गहराती गई… नशा भी गहराता गया… और आखिर वो घड़ी आ ही गई जिसका मुझे इन्तजार था। उसके हाथ पांव ढीले पड़ने लगे। वो सोफ़े पर ढुलकने लगी।

जाने कब उसके ब्लाऊज का एक हुक खुल गया था और उसके सेक्सी उरोज की झलक नजर आने लगी थी। मैंने सोफ़े पर बैठते हुये उसके शरीर को सम्हाला और उसे आवाज दी, साथ में उसके ब्लाऊज का दूसरा हुक भी खोल दिया।

“कोमल जी… चलो बिस्तर पर लेटा दूँ …” पर उसकी आंखें भारी हो कर बंद हो रही थी।

“वि…वि… जय … मुझे उठा लो… और वहां… ले चलो… !” मौका था, उसका मैंने फ़ायदा उठा लिया। मैंने उसके स्तन धीरे से सहला दिये… और चूतड़ो को दबा कर उसे उठा लिया… मैंने अपना मुख नीचे करके उसकी नाभि को चूम लिया। उसके ब्लाऊज का अन्तिम हुक भी मैंने खोल दिया था।

उसकी मस्त चूंचियों पर से परदा हट चुका था। उसे गहरे नशे में देख कर मैंने उसकी एक चूंची मुख में भर ली और चूसने लगा। शायद उसे मजा आया होगा। उसकी भारी आंखें एक बार खुली फिर वापस बन्द हो गई।

मैंने उसे बिस्तर पर उसका पेटीकोट पूरा ऊँचा करके लेटा दिया। उसे आराम मिला और उसके मुख से खर्राटे निकलने लगे। मेरा लण्ड बेहद तन्ना रहा था और बेहाल हो रहा था।

मैंने अपनी पैण्ट खोल ली और उतार कर एक तरफ़ रख दिया। उसकी चूत गीली थी । मैंने उसका पेटीकोट पूरा उतार दिया।

इतने में वो बड़बड़ाई, “मुझे सू सू आ रही है… मोहित … वहाँ ले चलो…” मुझे कुछ समझ में नहीं आया तो मैंने उसे अपनी बाहों में उठा लिया और बाथरूम में ले गया। पर बाथरूम में पहुंचते ही मेरी बाहों में उसने अपनी धार छोड़ दी।

“आह… आह … मोहित… अब आराम हो गया !” उसने ढेर सारी पेशाब निकाल दी फिर उसकी बेचैनी दूर हो गई। मेरी बांहो में ही वो सो गई।

मेरी टांगें उसके मूत्र से भीग गई थी। उसे फिर से बिस्तर पर लेटा दिया और मैं अपने चूतड़ों से लेकर नीचे तक पूरा नहा लिया और उसकी तौलिया से साफ़ कर लिया।

वो नंगी ही दूसरी करवट ले कर सो गई। मेरी हालत बुरी थी, लण्ड उबल रहा था पर मैं कुछ कर भी तो नहीं सकता था।

फिर मैंने एक हाथ से अपना लण्ड पर मुठ मारने लगा और दूसरे हाथ से कभी उसकी चूत मसलता और कभी उसकी चूंचियाँ … तभी वो कहने लगी,”मोहित आ जाओ ना… प्यार करो ना… !” वो नशे में मुझे अपना पति समझ रही थी।

मैंने सोचा कि इसे तो भरपूर नशा है इसे क्या पता चलेगा कि कौन चोद गया। मैं जल्दी से उसकी बगल में लेट गया और कोमल नशे में मुझसे लिपट पड़ी… मैं उसे चूमने लगा… मेरा लण्ड तड़प उठा।

मैं उसके ऊपर चढ़ गया और लण्ड को उसकी चूत पर दबा दिया। लण्ड भीतर घुस गया… और मैं धक्के मारने लगा। उसे भी नशे में चुदाई बहुत प्यारी लग रही थी। उसके मुख से सिसकारियाँ निकलने लगी थी। उसके चूतड़ अब नीचे से उछलने लगे थे।

मेरी हालत तो पहले ही खराब थी सो कुछ ही देर में मेरा वीर्य निकल गया। मेरा लण्ड बाहर आ गया था।

वो नशे में अभी भी अपनी चूत को उछाल रही थी। मैंने अपनी तीनों अंगुलियाँ उसकी चूत में घुसेड़ दी। कुछ समय बाद वो झड़ गई । नशे और थकान में उसने करवट ली और गहरी नींद में चली गई।

मैंने अपने लण्ड को साफ़ किया और कोमल को ठीक से कपड़े पहना दिये और अपने कमरे में चला आया। मेरा काम सफ़ल हो गया था। आज कोमल को चोदने की मेरी इच्छा भी पूरी हो गई थी।

सवेरे सब कुछ सामान्य था, कोमल की वही चिरपरिचित मुस्कान, वही बातचीत…

मैं निश्चिन्त हो गया कि रात गई बात गई … उसे कुछ याद नहीं था। मैंने नाश्ता किया और उसने मुझे फिर याद दिला दिया कि शाम को आओ तो कवाब और मुर्गा के साथ काजू भी लेते आना।

मुझे थोड़ी हैरत हुई फिर सोचा कि शायद मेरे लिये ही कह रही है।

शाम को फिर हम दोनों के बीच व्हिस्की आ गई… पर आज कोमल ने कहा कि व्हिस्की नहीं पियेगी पर मुझे अपने हाथों से पिलायेगी।

उसका कहना था कि वो रोज व्हिस्की नहीं पीती है, फिर कल मोहित के आने पर उसका साथ तो देना ही होगा। मुझे आज मेरी स्कीम फ़ैल होती दिखाई दी।

फिर ये सोच कर चुप रह गया कि साकी के हाथ से पीने का लुफ़्त भी उठाया जाये।

उसने मेरा एक पेग भरा और कहा कि “पास आओ… आज मैं आपको पिलाऊंगी…” और अपने हाथों से मुझे एक सिप दिया। कोमल उठ कर किचन में चली आई।

मैंने सोचा कि अधिक ना हो जाये तो फिर से मैंने उसे बिन में डाल दिया।

अब आलम यह था कि वो बार बार मुझे पिलाये और मैं उसे किसी ना किसी बहाने इधर उधर डाल दूं। मुझे अब ध्यान आया कि इसकी तरफ़ से तो मैं पांच पेग पी चुका हूँ सो मैंने भी बहकने का नाटक आरम्भ कर दिया।

अब मुझे शक हुआ कि वो मुझे जानबूझ कर के पिला रही थी … शायद उसे कल रात की घटना याद थी… मुझे लगा कि आज वही गेम मेरे साथ खेलना चाह रही है …

सो मैंने अब सोफ़े पर लुढ़कने का नाटक किया। मेरा शक सही था। उसने मुझे दो तीन बार हिलाया और पूछा। मैंने नशे में मदहोश होने का नाटक किया और कहा,”मुझे… हिच्च… मेरे कमरे तक … हिच्च … ले चलो…!” उसने मेरी एक बांह अपने कंधे पर डाली और मुझे उठाने के जोर लगाया।

मैं खुद ही उठ गया और जानबूझ कर के उसकी चूंचियों पर हाथ लगा दिया। मैं बिस्तर के पास आते ही ही लेट गया।

कोमल ने तुरन्त मेरे पजामे का नाड़ा खींच कर खोल दिया। मुझे आनन्द आ गया…

मैंने कल जो किया था वो कोमल आज कर रही थी… मेरा पजामा उसने नीचे खींच लिया।

मैं नंगा हो गया था। मेरा लण्ड तन कर खड़ा हो गया था। उसने मुझे आवाज दी… और मुझे हिलाया, मै बेसुध की भांति पड़ा रहा।

तब उसने मेरा लण्ड पकड़ लिया और उसका सुपाड़ा खींच कर बाहर कर लिया। मैं उसे बराबर उसे आंखें खोल कर चुपके से देख रहा था। बड़ी ललचाई नजर से उसने हौले से मुठ मारा और सुपाड़ा मुख में ले लिया। एक अद्भुत आनन्द … शरीर में बचैनी भरने लगी… वो मेरी गोलियों से भी खेलने लगी।

उसने मेरा लण्ड चूस कर फिर उसे अपनी चूंचियों से रगड़ने लगी। मैंने अपने आप को बहुत कंट्रोल में किया हुआ था कि कहीं वीर्य ना छूट जाये। अब उसने मेरे लण्ड पर थूक लगाया और मेरे ऊपर आकर पेटीकोट उठा कर अपनी चूतड़ों को खोल कर गाण्ड का छेद को लण्ड पर रख दिया।

उसने लण्ड पर जोर लगाया तो लण्ड सट से छेद में उतर गया। मैंने नशे में आंखे खोलने का प्रयत्न किया।

“कोमल जी… ये … आह… ये क्या कर रही हैं आप…?”

कोमल एक बार तो घबरा गई… फिर दूसरे क्षण लण्ड को गाण्ड में पा कर शरमा गई।

“विजय… हाय मैं तो मर गई… आंखे बंद कर लो ना…” लण्ड और भीतर उतर गया।

मैंने भी अपने लण्ड का जोर ऊपर लगा दिया।

“कोमल जी… … आप बहुत अच्छी हैं…” लण्ड गाण्ड में पूरा घुस चुका था।

वो इसी स्थिति में शरमा कर मुझसे लिपट गई।

“विजय … अच्छे तो आप है… हाय… मुझे ऐसे ना देखो… अब मै क्या करूं…!”

“मैं बताऊँ … अब शरम छोड़ो और जी भर कर चुद लो … शुरूआत आपने की है… वीर्य मुझे निकालने दो !”

“हाय जी… ऐसे ना कहो… आह सच है… चोद दो साजन मेरे…” कोमल मुझसे लिपटती गई। उसने अब सीधे बैठ कर ऊपर नीचे अपने चूतड़ों को धस्काते हुये गांड में लण्ड लेने लगी।

कुछ ही देर में उसने सिसकते हुये कहा,”अब मुझे नीचे दबा कर कल की तरह चोद दो…!” मुझे एक झटका सा लगा।

“तो कल का आपको सब याद है… आप बहुत शैतान हैं … मुझे तड़पा तड़पा कर मजा लिया है आपने ?”

कोमल हंस पड़ी। अपनी दोनों टांगें ऊपर उठाते हुए बोली,”लो जी अब तो लण्ड फ़ंसा दो अपना और चोद दो मुझे… मुझे तो परसों ही मालूम हो गया था जब आपने मेरी चूत की पप्पी ली थी… मेरी चूंची सहलाई थी…आज मन की निकाल लो मेरे सजना !”

“धत्त… साली… मुझे चूतिया बना दिया …” और लण्ड एक ही झटके में पूरा अन्दर तक पहुंचा दिया। मेरे लण्ड को सुकून मिल गया।

उसकी गरम गरम चूत मुझे बहुत भा रही थी। दोनों ने मस्ती से चुदाई का मजा लेना आरम्भ कर दिया… दोनों की कमर एक साथ चल रही थी। शरीर में मीठी सी कसक बढ़ने लगी थी।

कोमल के बोबे कड़क हो उठे थे। चूचक कड़े हो कर इठला रहे थे… बार बार मेरे मुख में चूचक लण्ड की तरह से घुस रहे थे। मेरी जीभ उसे जोर से रगड़ मार रही थी। धक्कों में तेजी आ गई थी। कोमल तो शादी शुदा और चुदी चुदाई थी… उसे बहुत मजा आ रहा था। शायद नये लण्ड के कारण।

मुझे तो बस हर धक्के में ऐसा ही लगता था कि अब झड़ा… और उसकी चुदाई चूत ने पूरी कर ली… एक दो झटकों की मार से वो चित्त हो गई और उसकी चूत ने मुह फ़ाड़ कर पानी उगल दिया।

वो मुझसे बेतहाशा लिपटने लगी। उसकी चूत में लहरें उठने लगी … तभी इसी सुहाने आनन्द को उठाते हुये मेरा वीर्य भी उसकी चूत में भरने लगा…।

मैं अपना लण्ड दबा दबा कर अपना पूरा वीर्य उसकी चूत में निकाल रहा था। कोमल भी चारों खाने पसरी हुई थी… मैं भी उसके ऊपर उसे चूमता हुया लिपट गया। वो मुझे अब अलग करने लिये झटके मार रही थी… मैं पूरा झड़ने के बाद उठ गया।

“तो आपको नशा ही नहीं हुआ था… वैसे ही जैसे कल मुझे नहीं हुआ था…” और वो खिलखिला कर हंस पड़ी।

“हटो कोमल जी… आप ने तो मुझे बेवकूफ़ बना ही दिया !” पर मुझे तो कल भी चूत मिल गई थी और आज भी… भले ही बेवकूफ़ बन कर मिली।

“विजय… कल तो मोहित आ ही जायेंगे… अब देर ना करो … फ़टाफ़ट अपनी इच्छायें पूरी कर लें !”

“अरे तो फिर मोहित से कैसे चुदवाओगी?”

“वो मुझे चोदता ही कब है… बस दारू पिया और लुढ़क जाता है…!” उसके मन का दर्द उभर आया। मुझे इससे कोई मतलब नहीं था कि उसका पति उसके साथ क्या करता है… बस मेरा लण्ड खड़ा था और उसे वही एक रसीला खड्डा नजर आ रहा था। मन कर रहा था कि उसे चोद चोद कर सारी खुमारी एक बार में ही उतार लूँ।

अभी तो मुझे अर्जुन की तरह मछली की आंख ही नजर आ रही थी… हम दोनों एक दूसरे को चूमते हुये फिर से अपना यौवन रस निकालने की तैयारी में लग गये … Antarvasna Stories

दोस्तो, आज मैं आपको वो बताने जा रहा हूँ, जो आपने पहले शायद कभी न सुना हो।
मेरा नाम अमित है और मैं नासिक में रहता हूँ। मेरा अपना बिज़नेस है। जब काम थोड़ा बढ़ा तो मैंने अपनी एक ब्रांच पुणे में भी खोल ली, वहाँ मेरा भाई रहता है जो मेरा काम संभालता है।
काम के सिलसिले में मुझे अक्सर नासिक और पुणे आना जाना लगा रहता है, कभी ट्रेन से तो कभी अपनी कार से।

एक बार की बात है मैं अपने काम से नासिक से पुणे आ रहा था। रात के करीब साढ़े गयारह बज रहे थे, अभी नासिक से कोई 50-60 किलोमीटर ही आया था कि मैंने देखा सुनसान सड़क पर एक औरत सफ़ेद साड़ी में खड़ी मुझे हाथ का इशारा कर रही है।

पहले तो मेरी फट गई कि कहीं यह कोई भूत-वूत तो नहीं। मगर मैंने देखा, उसके पास ही एक टोयोटा कार खड़ी थी और उस लड़की ने भी पूरा मेकअप किया हुआ था, पूरे गहने पहने थे, शक्ल से तो भूत नहीं लग रही थी।

मैंने हिम्मत करके कार रोक ली।
वो मेरे पास आई और खिड़की के पास आकर थोड़ा झुकी, जब झुकी तो उसके गोरे गोरे बूब्स के दर्शन हुये, उसने मुझे ताड़ते देख लिया मगर बड़ी मीठी मुस्कान के साथ बोली- एक्सयूज मी, क्या आप मुझे थोड़ा आगे तक लिफ्ट दे सकते हैं, मेरी गाड़ी खराब हो गई है और आस पास कोई गैरेज भी नहीं है।

मैंने भी पूछा- इतनी रात को आप अकेली इस सुनसान रास्ते पे क्या कर रही हैं?

वो बोली- दरअसल मैं फिल्मों में असिस्टेंट आर्ट डाइरेक्टर हूँ, हमारी फिल्म की शूटिंग चल रही है और मैं वहीं जा रही थी।

मुझे बड़ी खुशी हुई, वैसे वो खुद भी किसी हेरोईन से कम नहीं थी, मैंने पूछा- कौन सी फिल्म की शूटिंग है, कौन कौन है फिल्म में?

वो मुस्कुरा कर बोली- चलते चलते बात करें?

मुझे बड़ा फील हुआ- अरे सॉरी, प्लीज़ आइये।

मेरे कहने पे वो मुझे उंगली से एक मिनट रुकने का इशारा करके अपनी कार के पास गई और कार में से अपना, पर्स, मोबाइल और एक बड़ा सा पैक उठा लाई, सामान कार में रख कर बोली- चलिये।

मैंने गाड़ी चला ली- इस बैग में क्या है? मैंने पूछा।

‘वो हमारी शूटिंग का समान है।’ उसने कहा।
‘ओके…’ मैंने कहा- क्या मैं आपका नाम जान सकता हूँ?

वो बोली- मेरा नाम रेखा है, और आपका?

मेरी हंसी निकल गई और हंस कर बोला- अमित…

सुन कर वो भी हंस पड़ी।

‘तो रेखा जी, कौन सी फिल्म की शूटिंग कर रही हो आप?’

वो बोली- अमित जी, अब हर किसी की किस्मत रेखा जी जैसी तो नहीं होती, मैं तो छोटी मोटी फिल्मों में काम करती हूँ।

मुझे हैरानी हुई- छोटी मोटी फिल्में, मतलब?
‘मतलब, बी ग्रेड फिल्में…’ वो थोड़ा शर्मा के मुस्कुरा के बोली।

‘ओ हो, तो शीला की जवानी, कच्ची कली, गुलाबी जिस्म, ऐसी फिल्में?’ मैंने थोड़ा शरारती अंदाज़ में पूछा।

‘जी बिल्कुल!’ वो बोली।

‘तो क्या आप फिल्मों में एक्टिंग भी करती हो?’ मैंने पूछा।

‘जी नहीं, मैं सेट डिज़ाइनिंग का काम करती हूँ’ उसने कहा।

‘ओके, तो आप वो बिस्तर सजाती हैं, जिस पर हीरो और हेरोइन प्रेम लीला रचाते हैं।’ मेरे ऐसा कहने पर वो झेंप गई पर बोली कुछ नहीं।

‘बाई द वे, आप एक्टिंग क्यों नहीं करती, आप तो माशा अल्ला खुद भी बहुत खूबसूरत हो, जवान हो, और क्या कहूँ, सब कुछ हो?’ मैंने उसके गोल गोल स्तनों की तरफ घूर कर देखते हुये कहा।

साड़ी के पल्लू में से झाँकता उसका यौवन जैसे मुझे अपनी तरफ खींच रहा था, मेरा मन किया कि पकड़ के इसके दोनों स्तन दबा दूँ, मगर मैंने अपने आप को काबू करके रखा।

वो बोली- मैंने एक फिल्म में काम किया है।

‘अच्छा, कौन सी?’ मैंने चहक कर पूछा।

‘गुलाबी रातें!’ वो बोली।

‘अरे नहीं, कब आई यह फिल्म, मुझे तो पता ही नहीं चला, मैं ज़रूर देखना चाहूँगा।’ दरअसल मैं तो उसके नंगे बदन को देखने की ख़्वाहिश मन में पाले बैठा था।

‘कोई फायदा नहीं, मैं उसमें हीरो की बहन बनी थी और मेरा फिल्म में सिर्फ 2 मिनट का रोल था, वैसा कुछ नहीं जैसा आप सोच रहे हैं।’

उसकी बात सुन कर हम दोनों हंस पड़े।

कुछ देर बातें करने के बाद मैंने सिगरेट निकली और उसे ऑफर की, उसनें डिब्बी से एक निकली और अपने होंठों में दबा ली।

मैंने कहा- अपनी सुलगाइएगा तो मेरी भी सुलगा दीजिये।

उसने दो सिगरेट अपने होंठों में ली और लाईटर से दोनों जला दी, मेरी सिगरेट पे उसके लिपस्टिक के निशान बन गए।

मैंने उसे देखते हुये पहले उसके लिपस्टिक के निशान को चूमा और फिर सिगरेट का कश लगाया।

वो मुस्कुरा कर बोली- आप तो, लगता है, ज़्यादा ही लट्टू हो गए मुझ पर?

मैंने कहा- अरे रेखा और अमित की आशिक़ी के किस्से तो सारी दुनिया में मशहूर हैं।

वो हंसी और बोली- न तो आप वो अमित हैं, और न मैं वो रेखा हूँ।

‘हाँ, वो वाले नहीं हैं, मगर खुद को वो समझ तो सकते हैं।’ मैंने कहा।
तो उसने बड़ी गहरी निगाह से मुझको घूरा।

खैर बातें चलती रही और गाड़ी भी हम दोनों एक दूसरे से लगातार बातें करते रहे, मैंने उसके और उसने मेरे बारे में एक दूसरे को बहुत कुछ बताया और हम दोनों बातों बातों में एक दूसरे के बहुत अच्छे दोस्त बन गए। हमने बहुत खुल कर बातचीत की, मगर मैंने एक मर्यादा से बाहर जाकर कुछ नहीं किया।

एलीफेंटा पहुँच कर मैंने गाड़ी रोकी और उस से पूछा- रेखा क्या लोगी?

वो भी मस्ती में बोली- कुछ मर्ज़ी ले आओ यार।

मैं दुकान से कोल्ड ड्रिंक, सोडा, नमकीन वगैरह ले आया, शराब मेरे पास गाड़ी में थी।

मैंने गाड़ी बढ़ाई और काफी आगे जा कर जब रास्ता सुनसान सा हो गया, गाड़ी रोक दी।

मैंने बोतल खोली और दो पेग बनाए- किसके साथ लोगी, कोल्ड ड्रिंक, सोडा, पानी?

वो बोली- सोडा और पानी मिक्स!

मैंने दोनों पेग बनाए, एक उसको दिया- अपनी दोस्ती के नाम!

‘दोस्ती के नाम…’ कह कर हम दोनों ने एक एक घूंट पिया।

उसके बाद तो बातों का जो दौर शुरू हुआ, पूछो मत।
हम दोनों आधी से ज़्यादा बोतल गटक गए, सुरूर दोनों को पूरा हो गया था, बेवजह बात बात पे हंसी, ठहाके चल रहे थे।
बात करते करते उसकी साड़ी का पल्लू गिर गया और उसके ब्लाउज़ के लो कट से उसके आधे स्तन बाहर दिखने लगे।
वो अपना पल्लू ठीक करने लगी तो मैंने रोक दिया- मत कर यार, फिर गिर जाएगा, तू फिर ठीक करेगी, यह फिर गिर जाएगा।

तो वो बोली- इसका मतलब यह कि मैं तुझे अपनी छातियाँ बाहर निकाल के दिखाऊँ, या तू खुद इन्हें देखना चाहता है?

‘जैसा तू ठीक समझे!’ मैंने कहा- अगर दिखाना चाहती है तो दिखा दे, मुझे कोई ऐतराज नहीं!’ मैं उसे आँख मार के बोला।

‘भोंसड़ी के, छातियाँ मेरी, तू कौन होता है ऐतराज करने वाला’। मुझे उसके मुँह से गाली थोड़ी अजीब लगी, मगर बुरी नहीं लगी।

‘अरे यार, अगर तू फिल्म में एक्ट्रेस होती तो भी तो दिखाती, अब दिखा दे।’ मैंने कहा।

‘तू देखेगा?’ उसने पूछा।

‘अरे लवड़े की… दिखाएगी भी या बातें ही बनाएगी?’ मैंने भी उसे गाली दे ही दी।

उसने मेरी तरफ देखा और बोली- ले देख, हारामी, ठरकी साले!

कह कर उसने अपने ब्लाउज़ के हुक खोले, और ब्लाउज़ ब्रा दोनों उतार दिये।

वाह… क्या शानदार चूचे थे उसके, एकदम मस्त, गोल, भरे हुये और तने हुए।

मैंने देखते देखते उसके दोनों बूब्स अपने हाथों में पकड़ लिए- ओह रेखा, तुम बहुत लाजवाब हो।

कह कर मैंने उसके निप्पल को मुँह लिया और चूसने लगा।

वो व्हिस्की पीती रही और मैं उसके बूब्स चूसता रहा। बूब्स चूसते चूसते मैंने उसके पेट, बगलों, गर्दन और जहाँ तक हो सका, उसे चूमा भी और अपनी जीभ से चाटा भी।

उसकी साँसों की रफ्तार से मुझे पता चल रहा था कि वो भी पूरी गर्म हो चुकी है। अब मैं सोच रहा था कि इससे पूछूं कि आगे का क्या प्रोग्राम है।

तभी वो बोली- अमित, लेगा मेरी?

अरे मुझे तो मुँह मांगी मुराद मिल गई थी, मैंने कहा- अब इतनी आगे आकर पीछे मुड़ने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता।

कह कर मैं अपनी शर्ट के बटन खोलने लगा तो वो बोली- यहाँ नहीं, रुको ज़रा, बाहर चलते हैं।

‘बाहर कहाँ?’ मैंने पूछा।

उसने अपनी साड़ी का पल्लू अपनी कमर में ठूँसा और कार पिछली सीट पे रखा पैक उठाया और बोली- मेरे पीछे आओ।

मैंने भी कार को लॉक किया और उसके पीछे पीछे चल पड़ा। हम दोनों सड़क छोड़ कर पैदल ही सुनसान वीराने में चलते गए।
सड़क से काफी दूर एक बड़े से झाड़ के पीछे जाकर उसने पैक खोला, उसमें बिस्तर सा था, बिस्तर बिछाया और उस पर लेट कर बोली- आ जाओ।

यह तो जन्नत का नज़ारा था।

मैंने झट से अपने सारे कपड़े उतार फेंके और बिल्कुल नंगा होकर मैं उसके ऊपर लेट गया। मेरे लेटते ही उसने मेरा सर पकड़ा और अपने होंठ मेरे होंठों से लगा दिये।

होंठ क्या, मैंने साथ की साथ अपनी जीभ भी उसके मुख में डाल दी, जिसे वो बड़े मज़े से चूसने लगी।
जब उसने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाली तो मैंने भी जी भर के उसकी जीभ को चूसा और दोनों हाथों से उसके स्तन भी दबा रहा था। खुले आसमान के नीचे सेक्स करने का अपना ही मज़ा है।

‘अब सब्र नहीं होता जानेमन, अब तो यह साड़ी भी उतार दो।’ मैंने कहा तो रेखा ने अपनी साड़ी और पेटीकोट दोनों उतार दिये।

चाँदनी रात में उसका गोरा बदन चमक रहा था। मैंने उसके दोनों जांघों को अपने हाथों से सहलाया, अपने होंठों से चूमा, दांतों से काटा और उसकी चूत पे चुम्बन भी लिया।

उसने अपने टाँगें फैला दी- अमित, चाटो इसे! उसने कहा और मेरा सर पकड़ कर अपनी चूत से सटाया।
मैंने बिना कोई हील हुज्जत किए अपनी जीभ से उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया।

थोड़ा सा चटवाने के बाद वो बोली- घूम जाओ अमित, मैं तुम्हारा लवड़ा चूसना चाहती हूँ।

मैंने वैसे ही किया, उसने मेरा लण्ड अपने होंठों में पकड़ा और चूसने लगी। कितनी देर हम एक दूसरे को ऐसे ही चूसते रहे, फिर मैंने कहा- अब असल मुद्दे पे आया जाए!

वो बोली- नहीं, मेरे फुद्दे पे आया जाए!

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और खिलखिला कर हंस पड़ी।

मैंने अपना लौड़ा उसकी चूत पर रखा और धीरे से अंदर धकेल दिया।

आह क्या एहसास था, इतना चाटने के बाद भी उसकी चूत बिल्कुल सूखी पड़ी थी, मैंने कहा- तुम तो बिल्कुल ड्राई पड़ी हो?

‘वो बोली- हाँ, पता नहीं क्यों और औरतों की तरह मेरे पानी नहीं छूटता, मेरा बॉय फ्रेंड भी यही कहता है, इसी लिए उसका 2-3 मिनट में ही हो जाता है, तुम्हें देखती हूँ, कितना टाइम लगाते हो।

उसने कहा तो मेरा तो प्रेस्टीज़ इशू बन गया, जो मैं सोच रहा था कि आराम आराम से करूंगा, अब तो मैं पूरा लण्ड उसके अंदर तक डाल कर बाहर निकाल रहा था और जब अंदर डालता था तो कोशिश करता था कि अंदर ज़ोर से चोट करूँ।
मगर वो तो मुझसे भी दमदार थी, मेरी हर चोट कर जवाब वो ऐसे सिसकारी भर के देती जैसे उसे बहुत ही आनन्द आ रहा हो।
और कोई औरत होती तो शायद मना ही कर देती। दूसरा मेरा ध्यान घड़ी पर था, दो मिनट हुये, तीन मिनट हुए, पांच मिनट भी हो गए, करते करते नौ मिनट हो चले थे, मगर न तो वो झड़ रही थी और न ही मैं झड़ रहा था।

हाँ मेरे लिए करना अब मुश्किल होता जा रहा था, मैं सोच रहा था मैं इसकी फाड़ दूँगा, मगर अब तो मेरी फट रही थी। मुझे ऐसे लगने लगा था जैसे मेरा तो लण्ड ही छिल जाएगा। मैं और ज़्यादा बेदर्दी से उसके स्तनों को दबा रहा था, अपने दाँतों से काट रहा था और वो ‘ओह अमित, कम ऑन फक मी फक मी’ कर रही थी।

एक बार तो मैंने सोचा, कि गेम बीच में छोड़ देता हूँ, मगर वो इतने जोश से मुझे हौंसला दे रही थी कि मेरा बीच में छोड़ने का मन ही नहीं कर रहा था।

हर थोड़ी थोड़ी देर बाद मैं ऊपर से थूक कर अपने लण्ड को गीला कर रहा था। मगर लण्ड तो जैसे… खैर उसकी तेज़ चीख़ों और कराहटों के बीच मैं करीब 12 मिनट उसकी चुदाई करने के बाद झड़ गया।
झड़ा क्या, मैं तो फारिग होकर कटे पेड़ की तरह एक तरफ को गिर गया।

उसके बाद मुझे कुछ होश नहीं रहा।

सुबह जब आँख खुली तो देखा के मैं सड़क से काफी दूर, वीराने में नंग धड़ंग लेटा पड़ा हूँ, मेरे सारे बदन और मुँह के अंदर तक रेत घुसी हुई थी, रेखा का या उसके सामान का कोई पता नहीं था, शायद वो चली गई थी, मगर कब और किसके साथ?

मैं उठा तो दर्द से बिलबिला उठा, मेरा लण्ड सूजा पड़ा था और लण्ड के हर तरफ खरोंचें ही खरोंचें पड़ी हुई थी।

मैंने सबसे पहले कपड़े पहने, अपना मुँह हाथ धोये और गाड़ी में बैठ कर सीधा पुणे की तरफ दौड़ा।

मेरी हालत बहुत खराब थी, पुणे पहुँच कर मैं सीधा अपने डॉक्टर दोस्त के पास पहुंचा।

जब मैंने उसको सबसे पहले अपना लण्ड निकाल के दिखाया तो वो छूटते ही बोला- तो मिल आए तुम भी रेखा से?

मुझे बड़ी हैरानी हुई, मैंने पूछा- तुम्हें कैसे पता?

वो बोला- तुम पहले आदमी नहीं हो, मेरे पास तुम से पहले भी कई आ चुके हैं।

‘मतलब?’ मैंने पूछा।

वो बोला- रेखा एक भूत है और अक्सर सड़क पे आने जाने वाले अकेले मर्दों को अपनी हवस का शिकार बनाती है, और जो तुम सोच रहे होगे कि तुमने उसको चोदा है, दरअसल उसके मायाजाल में उलझे तुम पत्थर या रेत पे ही अपना लण्ड घिसाते रह होगे, इसीलिए इसकी यह हालत हुई है।

मैं तो हैरान रह गया, मतलब मैंने एक भूत को चोदा या भूत ने मुझको चोदा?
कानों को हाथ लगा लिए तभी कि आज के बाद मैं न रात को किसी अकेली लड़की को लिफ्ट दूँ।

आप अपना देखना, अगर भूत की लेनी है तो रोक लेना गाड़ी।

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