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Sex Stories

हाय … मेरा नाम संजू है…और आप सबो Sex Stories की फड़कती चूतों और भटकते लंडों को मेरे लौडे का सलाम..

मैं एक सॉफ्टवेर इंजिनियर हूँ और बंगलोर में जॉब कर रहा हूँ.

मै बहुत गोरा हूँ और लोग कहते हैं कि मै बहुत ही स्मार्ट और डैशिंग हूँ, और शायद इसी वज़ह से मै कॉलेज में बहुत सारी लड़कियों का कृश भी था.. मेरी हाईट ज्यादा नही है बस ५’ ५” ही है पर मेरी कुछ फ्रेंड कहती है की अगर मेरी हाईट थोडी और होती तो मै अच्छे अच्छो की छुटी कर देता.. खैर ये सब छोड़ कर मै कहानी पर आता हूँ.

बात उस समय की है जब मै कॉलेज में फिनल इयर का था (आज से लगभग ६ महीने पहले ) और उस समय मेरे फाइनल इयर प्रोजेक्ट का काम चल रहा था। कम्प्यूटर साइंस का स्टुडेंट होने क वजह से प्रोजेक्ट क लिए मुझे इन्टरनेट पे काफी समय बिताना पड़ता था. चूंकि कंप्यूटर मेरे फ्लैट पर ही थी इसलिए बोर होने पर मै चैटिंग करता था. एक बार मुझे चैटिंग करते समय एक लड़की मिली। उसने अपना नाम कृति बताया. वो वस्तुतः गुजरात की रहने वाली थी पर फिलहाल मुंबई में पढ़ रही थी. धीरे धीरे हमारी अच्छी दोस्ती हो गई. बाद में उस से फ़ोन पर बातें भी होने लगी.. हम लोग आपस में हर तरह की बातें करने लगे थे पर मैंने कभी लिमिट क्रॉस करने की कोशिश नही की.

जब मेरे एग्जाम ख़त्म हुए तो मै कोल्हापुर से वापस घर जाने वाला था. मै झारखण्ड का बोकारो का रहने वाला हूँ और ट्रेन पकड़ने के लिए या तो मुझे पुणे या फ़िर बॉम्बे जाना पड़ता था. जब ये बात कृति को पता चली तो उसने मुझसे जिद की कि मै ट्रेन मुंबई से ही पकडू. हालांकि मेरी ट्रेन मुंबई से ही थी पर मैने उस से झूठ बोल दिया कि मेरी ट्रेन पुणे से है. इस बात से वो नाराज़ हो गई और फिर फ़ोन काट दिया. मैंने सोचा- भोंसडे में जाने दे उसको और वापस कॉल नही किया.

जब मै वापस लौट रहा था तब अचानक उसका कॉल आया. चूंकि मेरी ट्रेन उस समय महाराष्ट्र में एंटर कर चुकी थी इसलिए रोमिंग की प्रॉब्लम ना होने कि वजह से मैंने फ़ोन रिसीव किया. उसने मुझे अपने उस दिन के बिहेवियर के लिए सॉरी बोला. उसने मुझ से बोला कि वो मेरे से बहुत मिलना चाहती है. मैंने बताया कि मै थोडी देर में कल्याण स्टेशन पहुचने वाला हूँ. यह सुन कर उसकी खुशी का ठिकाना न रहा.. उसने मेरा ट्रेन और बोगी नम्बर पूछा और बताया कि वो मेरे से मिलने आने वाली है. मैंने भी उसे मना नहीं किया, सोचा चलो मिल लेते है वरना फ़िर से इसकी खिट पिट सुननी पड़ेगी..

थोडी देर में ट्रेन मुंबई के कल्याण स्टेशन पर पहुच गई. मै प्लेटफ़ार्म पे उसका इंतज़ार करने लगा. मैंने देखा सामने एक धूप जैसी गोरी चिट्टी लड़की खड़ी है और किसी का इंतज़ार कर रही है. उसके सुनहरे बाल, बड़े बड़े मम्मे और स्लिम फिगर मुझ पे क़यामत ढहा रही थी खैर ये सोच कर कि ये चूत मेरे लंड के नसीब में नही मै वापस कृति का इन्तज़ार करने लगा. तभी उसका कॉल आया कि मै कहा पर हूँ मैंने जगह बताई और बताया कि मै सफ़ेद टी शर्ट और ब्लू जींस पहना हूं और हाथ में ब्लू कलर कि ट्रोली वाली बैग है. मैंने अभी फ़ोन काटा ही था कि देखा वो लड़की जो सामने खड़ी थी मेरे सामने मुस्कुरा रही है. मै हैरान था !! उसने नजाकत से मुझ से पूछा- आर यू संजू? मैंने बोला “या…क्या बात है !!!” उसने अपना हाथ बढाया और बोली “दिस इस कृति .. ” मै ये सुन कर थोडी देर क लिए ठंडा पड़ गया.. मुझे अब भी विश्वास नही हो रहा था कि मै इतना खुश नसीब हूं.

खैर उसने मुझे हग किया और मेरे हाथ में हाथ डाल कर स्टेशन के बाहर ले जाने लगी. मै अपनी ही दुनिया में था. वो बहुत कुछ बोल रही थी पर मुझे कुछ सुनाई नही दे रहा था। मै बस उसके स्पर्श को महसूस कर रहा था और उसकी पर्फ़्यूम की खुशबू मुझे दीवाना बना रही थी. जब मैं होश में आया तो मैंने पाया कि मै एक रेस्टोरेंट के सामने खड़ा हूं और वो मुझ से पूछ रही है कि मुझे क्या हुआ ? मैंने बोला नही बस थका हुआ हूं और कोई बात नही.. उसके बाद हम अन्दर गए और उसने एक कार्नर वाली टेबल पर बैठने को कहा. हम लोग बैठ गए और इधर उधर की बातें करने लगे.

तभी उसने मुझे कहा कि संजू ! एक बात बोलूं तुम्हे बुरा तो नही लगेगा .. मैंने बोला बोलो मुझे बुरा नही लगेगा.. उसने बोला कि तुम वाकई बहुत ही स्मार्ट और होट हो और अपने लिप्स पे हाथ रख कर खिलखिला कर हस पड़ी. मुझे लग रहा था कि वो मुझ पे काला जादू कर रही है और मै उसकी गिरफ्त में फ़ंसता जा रहा हूँ. उसकी खूबसूरती, उसकी हंसी .. उफ़ कमाल की थी.. मै भी हंस पड़ा उसकी इस बात पे .. मैंने फ़िर उस से कहा कि कृति मै थोड़ा फेस धो कर आता हूं.. और मै वाश रूम चला गया.. जब मै वापस आया तो देखा कि टेबल पर पहले से ही खाना रखा है. मै हैरान था कि उसे मेरे पसंद के बारे में कैसे मालूम था. तभी कृति ने बोला हैरान मत हो तुम ने मुझे फ़ोन पर बताया था कि तुम्हे ये सब काफी पसंद है.. और फ़िर उसकी फुलझड़ी वाली हंसी…उफ्फ्फ्फ्फ़

अब हम खाना खा रहे थे हंसी मजाक चल रहा था तभी मैंने उसे बताया कि मै रात की बस से कोल्हापुर जा रहा हूं. उसने मुझे बहुत इन्सिस्ट किया कि आज मै उसके एक फ्लैट पर रुक जाऊं और कल चला जाऊं. पर मैंने साफ़ मना कर दिया. वो फ़िर से उदास दिख रही थी..थोडी देर बाद उसने कहा कि ठीक है पर अगर मेरे फ्लैट पर आने में तुम्हे प्रॉब्लम है तो तुम्हे वादा करना पड़ेगा कि तुम दिन भर मेरे साथ रहोगे और हम फ़िर साथ में मूवी देखने चलेंगे.. मै राज़ी हो गया.. पर प्रॉब्लम ये थी कि मेरे पास लगेज थी और मै वो ले कर घूम नही सकता था और मै थका हुआ भी था इसलिए मैंने एक होटल में फ्रेश होने और लगेज रखने के लिए रूम बुक किया.. कृति मेरे साथ ही थी.. रूम बहुत ही साफ़ सुथरा था होता भी क्यों नही कृति को इम्प्रेस करने के लिए सबसे महंगे वाला ए सी रूम जो बुक किया था।

रूम में आते ही मै बेड पर लेट गया्। बिस्तर बहुत ही नर्म था. कृति भी मेरे बगल में बैठ गई और मुझे जिद करने लगी कि मै ज़ल्दी से फ्रेश हो जाऊं. मै उठा अपनी बैग खोला तौलिया निकाला और बाथरूम में नहाने चला गया..कृति वहीं टीवी देख रही थी। जब मै वापस निकला तब मै सिर्फ़ टी शर्ट और टोवेल पहना हुआ था, बाल गीले थे, और कृति मुझे देखे जा रही थी..

मैंने उससे पूछा क्या हुआ , वो कुछ नही बोली बस मुस्कुरा दी… फ़िर वो मेरे पास आई और उसने मेरे लिप्स पे अपने लिप्स लाक कर दिए और मुझे समूच करने लगी.. मै बिल्कुल जम गया था … वो मुझे पागलो कि तरह समूच किए जा रही थी..फ़िर मै भी गरम हो चुका था… और मै उसको हर जगह किस करने लगा…चूंकि मैंने सिर्फ़ टोवेल पहना था इसलिए वो कब खुल गई मुझे पता ही नही चला…

उसने अचानक मुझे बिस्तर पर धक्का दिया और मेरे लंड को एक ही झटके में अपने मुंह में भर कर ब्लो जॉब करने लगी मुझे ऐसा लग रहा था जैसी वो मेरे लंड से मेरे शरीर की सारी शक्ति चूसे जा रही हो . चूंकि ये सब मै पहली बार महसूस कर रहा था इसलिए मुझे लग रहा था कि मै बादलों पर आसमान में तैर रहा हूँ .. अचानक मेरे शरीर में कम्पन हुई तब जा के मुझे आभास हुआ कि मै झड़ चुका हूं . मैंने कृति को देखा कि मेरे स्पर्म्स उसके पूरे चेहरे पर गिरे हैं और वो कातिल मुस्कान के साथ मुझे देख रही.. है..

अब मेरी बारी थी वही पड़े टोवेल से मैंने उसका चेहरा पौंछा..और वापस समूच करने लगा… धीरे धीरे मै उसकी बूब्स को ग्रीन टॉप के ऊपर से ही दबाने लगा.. फ़िर एक ही झटके में उसकी टॉप निकाल कर फेक दी. ब्लैक ब्रा के अंदर उसका चंडी जैसा शरीर मनो क़यामत ढाने को अमादा था .. मै दो मिनट उसके शरीर को देखता ही रहा.. ब्लैक ब्रा के अन्दर जब उसकी तेज धड़कने अपनी रफ़्तार पकड़ रही थी तो ऐसा लग रहा था मनो उसके मम्मे ब्रा से बाहर नही बल्कि कोई आइस क्रीम पिघल कर सोफ्टी कप से बाहर टपकने वाली है.. तब मुझे अहसास हुआ कि अब मैंने अगर कृति के शरीर को कपड़ो से आज़ाद नही किया तो प्रलय आ जाएगा..

मैंने बिजली कि तेजी से उसके ब्रा, जींस और ब्लैक कलर की पैंटी उसके शरीर से निकाल फेंकी .. यकींन मानिए वो बिना कपड़ो में जब वो अपने हाथो से अपनी चुच्ची और जान्घों में अपनी बुर छुपा रही थी तो ऐसा लगा रहा था मनो कोई संगमरमर कि बनी अप्सरा कि मादक मूर्ति मेरे सामने रखी हुई हो .. अब तक मै अपने भी सारे कपड़े उतार चुका था..मै सीधा उसके पास गया .. वो अपने हाथो से अपने चेहरे को छुपाने की नाकाम कोशिश करने लगी.. मैंने अपने दोनों हाथो से उस के गालो को उठाया और पहली बार उसके खूबसूरती की तारीफ की… मैंने बोला “कृति .. सचमुच तुम बला की ख़ूबसूरत हो और मुझे विश्वास नही हो रहा कि तुम्हारे जैसी लड़की मेरी बाँहों में है.. “.

कृति ने फ़िर से मेरे ललाट पे चूम कर बोला “..संजू तुम्हे शायद पता नही कि तुम क्या हो.. तुम्हे पाने के लिए कोई भी लड़की अपना शरीर तुम्हे सौप देगी.. और मै तो तुम्हे दिल से प्यार करती हूं.. भला नै तुम्हे कैसे रोक सकती हूं ??” और उसके आँखों में आंसू आ गए..!! मै अपने लिए उसके दिल में इतना प्यार देख कर हैरान था .. मैंने उसे गले से लगा लिया… अब मेरे हाथ उसके मम्मो पर सरक रहे थे और उसके निप्पल सखत हो गई थी.. मैंने देर करना बिल्कुल मुनासिब नही समझा अब मै उसकी निप्पलों को चूस रहा था और एक हाथ मेरा उसकी जांघों के बीच उसकी गहराई को नाप रहा था… उसका लव होल बहुत ही गीला हो चुका था… अब हम दोनों तड़प रहे थे … मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा और धक्का दिया ..मेरा ६” का लंड उसके बूर के अन्दर आधा जा चुका था. मैंने महसूस किया कि दर्द के मारे उसके आँखों से आंसू निकल आए थे .. मैंने उसके गालो को चूम कर पूछा “ज्यादा दर्द हो रहा है..?”, उसने जवाब दिया “इस दर्द को पाने के लिए हर लड़की जवान होती है.. इस दर्द को पाए बिना हर यौवन अधूरा है “.

मै उसकी इस जवाब पे बस मुस्कुरा ही पाया क्योंकि मेरे पास बोलने को कुछ था ही नही.. वो मुझ में लिपटी हुई थी…और मै उसे चूम रहा था…वो मेरे नीचे थी और अपने पैरो को मेरे कमर के इर्द गिर्द लपेटे हुए थी मनो कोई सर्पिनी चंदन के पेड़ को अपने कुंडली से कसी हो..अब मैंने धीरे धीरे अपनी रफ़्तार तेज कर दी… पूरे रूम में मादक माहौल था… परदे के बीच से आती सूर्य कि रौशनी जब उसके चाँद से चेहरे पे पड़ रही थी तो मानो ऐसा लग रहा था कि मै चाँद को अपने बाँहों में समेट रखा हूँ… हमारी सिसकारियां कमरे में ऐसे गूंज रही थी मानो जलजला आने से पहले बदल गरज रहे हो… वो जलजला जल्द ही आया जब मै अपने कमर की हरकतों कि वजह से चरम सीमा पे पहुचने वाला था .. उधर कृति भी मुझे बोल रही थी…”.. संजू प्लीज और जोर से..और जोर से …मेरे शरीर में अजीब सी हलचल हो रही है “… मै समझ गया कि वो भी चरम सीमा पे है…इस पर मैंने अपनी रफ्तार काफी तेज कर दी देखते ही देखते हम उफान पर थे और सैलाब बस फूटने ही वाला था कि मैंने अपना लंड बाहर निकला और मानो मेरे लंड से कोई झरना फ़ूट पड़ा हो.. मै वापस उसके बाँहों में निढाल हो गया ..

बहुत देर बाद जब मै उठा और देखा कि कृति की जांघों पर खून गिरा है तब मै समझ गया कि वो अभी तक अन्छुई थी .. मुझे ये देख कर अपने किस्मत पर गर्व हो रहा था और साथ ही साथ कृति के लिए मेरे दिल में इज्ज़त काफी बढ़ गई थी ..क्योंकि वो ऐसी लड़की नही थी कि किसी को भी अपना शरीर सौप दे .. इतने दिनों से अकेले मुंबई में रहने के बाद भी वो आज तक अन्छुई थी…

मैंने पास में पड़े टिशु पेपर उठाया और उसके बूर के ऊपर लगे खून को साफ़ करने लगा..जब खून साफ़ हुआ तो मैंने एक बात गौर की और मुस्कुराने लगा .. कृति ने मुझ से पूछा कि”… तुम क्या सोच कर मुस्कुरा रहे हो ..” मैंने उसके बिल्कुल बिना बाल के गुलाब की पंखुड़ियों सी वेजिना लिप्स पर किस कर के बोला… ” जान सच बताऊँ तो .. मैंने तुम्हारी बूर अभी तक नही दे्खी थी.. और साफ़ करते वक्त अभी ही देखा…” और हम दोनों हस पड़े.. उस दिन मै वापस कोल्हापुर नही गया और साथ में ही रुके. आप समझ ही सकते है कि हमारे सैलाब में कितनी बार उफान आई होगी..

पर सब कुछ हमेशा सही नही होता.. और अब हम साथ नही है.. पर वो जहां भी होगी मुझे भरोसा है कि मुझे कभी नही भूल पायेगी… और कृति अगर तुम ये कहानी पढ़ रही हो तो..जान लो मै सचमुच तुम्हे आज भी उतना ही प्यार करता हूं.. तुम जहां भी रहो खुश रहो..मेरे दिल में तुम्हारी याद हमेशा रहेगी… Sex Stories

Antarvasna

मैं और जानकी बचपन की Antarvasna सहेलियाँ है. हम स्कूल से लेकर कॉलेज तक साथ साथ पढ़े. और अब मेरी और जानकी की शादी भी लगभग एक ही साथ हुयी थी. मेरा घर और उसका घर पास में था. जानकी का पति बहुत ही सुंदर और अच्छे शरीर का मालिक था. मेरा दिल उस पर शुरू से ही था. मैं उस से कभी कभी सेक्सी मजाक भी कर लेती थी. वो भी इशारों में कुछ बोलता था जो मुझे समझ में नहीं आता था. जानकी भी मेरे पति पर लाइन मारती थी ये मैं जानती थी. जब हमारे पति नहीं होते तो हम दोनों साथ ही रहते थे.

उन दोनों के ऑफिस चले जाने के बाद मैं जानकी के घर चली जाती थी. जानकी आज कुछ सेक्सी मूड में थी.

मैंने जानकी से कहा- ‘आज चाय नहीं..कोल्ड ड्रिंक लेंगे यार.’

‘हाँ हाँ क्यों नहीं…’

हम सोफे पर बैठ गए. जानकी मुझसे बोली- ‘सुन एक बात कहूं… बुरा तो नहीं मानेगी…’

‘कहो तो सही..’

‘देख बुरा लगे तो सॉरी… ठीक है ना…’

‘अरे कहो तो सही…’

‘कहना नहीं… करना है…’

‘तो करो… बताओ..’ मैं हंस पड़ी.

उसने कहा- ‘आरती.. आज तुझे प्यार करने की इच्छा हो रही है…’

‘तो इसमे क्या है… आ किस करले..’

‘तो पास आ जा..’

‘अरे कर ले ना…’ मुझे लगा कि वो कुछ और ही चाह रही है

जानकी ने पास आकार मेरे होटों पर अपने होंट रख दिए. और उन्हे चूसने लगी. मैंने भी उसका उत्तर चूम कर ही दिया. इतने में जानकी का हाथ मेरे स्तनों पर आ गया और वो मेरे स्तनों को सहलाने लगी. मैं रोमांचित हो उठी.. ‘ये क्या कर रही है जानकी…’

‘आरती मुझसे आज रहा नहीं जा रहा है… तुझे कबसे प्यार करने कि इच्छा हो रही थी…’

‘अरे तो तुम्हारे पति… नहीं करते क्या..’

‘कभी कभी करते है… अभी तो 7-8 दिन हो गए हैं… पर आरती मैं तुमसे प्यार करती हूँ… मूझे ग़लत मत समझना..’

उसने मेरे स्तनों को दबाना चालू कर दिया. मूझे मजा आने लगा. मेरी सहेली ने आज ख़ुद ही मेरे आगे समर्पण कर दिया था. मैं तो कब से यही चाह रही थी. पर दोस्ती इसकी इज़ज्ज़त नहीं देती थी. मुझे भी उसे प्यार करने का मौका मिल गया. अब मैंने अपनी शर्म को छोड़ते हुए उसकी चुन्चियों को मसलना शुरू कर दिया. वो मन में अन्दर से खुश हो गयी. वो उठी और अन्दर से दरवाजा बंद कर लिया. मैं भी उसके पीछे उठी और उसके नर्म नर्म चूतड पकड़ लिए. जानकी सिसक उठी. बोली -‘मसल दे मेरे चूतडों को आज… आरती… मसल दे…’

मैंने जानकी का पजामा और टॉप उतार दिया. अब वो मेरे सामने नंगी खड़ी थी. मैं भी अपने कपड़े उतारने लगी. पर वो बोली- नहीं आरती… तू मुझे बस ऐसे ही देखती रह… मेरे बूब्स मसल दे… मेरी छूट को घिस डाल… उसे चूस ले… सब कर..ले ‘

मैं उसे देखती रह गयी. मैंने धीरे उसके चमकते गोरे शरीर को सहलाना चालू कर दिया. पर मुझसे रहा नहीं गया. मैं भी नंगी होना चाहती थी. मैंने भी अपना पजामा कुरता उतार दिया, और नंगी हो कर उस से लिपट गयी. हम दोनों एक दूसरे को मसलते दबाते रहे और सिसकियाँ भरते रहे.

अब हम बिस्तर पर आ गए थे, हम दोनों 69 की पोसिशन में आ गए. उसने मेरी चूत चीर कर फैला दी और अपनी जीभ से अन्दर तक चाटने लगी. अचानक उसने मेरा दाना अपनी जीभ से चाट लिया. मैं सिहर गयी. मैंने भी उसकी चूत के दाने को जीभ से रगड़ दिया. उसने अपनी चूत मेरे मुंह पर धीरे धीरे मारना चालू कर दिया. और मेरी चूत को जोर से चूसने लगी. मैंने उसकी चूत मैं अपनी उंगली घुसा दी और गोल गोल घुमाने लगी. वो आनंद से भर कर आहें भरने लगी. मेरी चूत में उसकी जीभ अन्दर तक घूम चुकी थी. मुझे मीठा मीठा सा आनंद से भरपूर अह्स्सास होने लगा था. हम दोनों की हालत बुरी हो रही थी. लगता था कि थोडी देर में झड़ जाएँगी.

उसी समय मोबाइल बज उठा. जानकी होश में आ गयी. हांफती हुयी उठी और मोबाइल उठा लिया.

वो उछल पड़ी. मोबाइल बंद करके बोली- ‘अरे वो बाहर खड़े हैं… जल्दी उठ आरती… कपड़े पहन…’

‘जल्दी कैसे आ गए… ???????’

हम दोनों ने जल्दी से कपड़े पहने और बालकनी पर आ गए. नीचे अमन खड़ा था. वो दरवाजा खोल कर अन्दर आ गया.

अन्दर उसने मुझे देखा और मुस्कराया. मैं भी मुस्करा दी.

‘सुनो तुम्हे अभी मायके जाना है… मम्मी बहुत बीमार हैं…’

उसकी मम्मी शहर में 10 किलोमीटर दूर रहती थी. मैं जानकी से विदा ले कर घर आ गयी. उसे करीब 1 घंटे बाद कार में जाते हुए देखा.

शाम को मैं घर के बाहर ही फल, सब्जी खरीद रही थी. मैंने देखा कि अमन कार में घर की तरफ़ जा रहा था.

मैंने घड़ी देखी तो 4 बजे थे. मेरे पति 7 बजे तक आते थे. मेरे मन में सेक्स जाग उठा. मैंने तुंरत ही कुछ सोचा और सामान सहित जानकी के घर की तरफ़ चल दी. अमन घर पर ही था. मैंने घंटी बजाई. तो अमन बाहर आया.

‘मम्मी कैसी हैं ?…’

‘ठीक हैं, 4 -5 दिन का समय तो ठीक होने में लगेगा ही.. आओ अन्दर आ जाओ..’

‘तो खाना कौन बनाएगा… आप हमारे यहाँ खाना खा लीजियेगा…’

वो मतलब से मुस्कुराते हुए बोला- ‘अच्छा क्या क्या खिलाओगी..’

मैंने भी शरारत से कहा- ‘जो आप कहें… नारंगी खाओगे… जीजू…’ उसकी नजर तुरन्त मेरे स्तनों पर गयी. मेरी नारंगियों के उभारों को उसकी नजरें नापने लगी.

‘हाँ अगर तुम खिलाओगी तो… तुम क्या पसंद करोगी..’ अमन ने तीर मारा

‘हाँ… मुझे केला अच्छा लगता है…’ मैंने उसकी पेंट की जिप को देखते हुए तीर को झेल लिया.

‘पर..आज तो केला नहीं है…’

‘है तो… तुम खिलाना नहीं चाहो तो अलग बात है…’ मैंने नीचे उसके खड़े होते हुए लंड को देखते हुए कहा.. उसने मुझे नीचे देखते हुए पकड़ लिया था.

‘अच्छा..अगर है तो फिर आकर ले लो..’ अमन मुस्कराया

‘अच्छा मैं चलती हूँ… जीजू… केला तो अन्दर छुपा रखा है..मैं कहाँ से ले लूँ?.’ मैंने सीधे ही लंड की ओर इशारा कर दिया. मैं उठ कर खड़ी हो गयी. वो तुंरत मेरे पीछे आया और मुझे रोक लिया- ‘केला नहीं लोगी क्या… मोटा केला है…’

मैंने प्यार से उसे धक्का दिया- ‘तुमने नारंगी तो ली ही नहीं.. तो मैं केला कैसे ले लूँ..’ मैंने तिरछी नजरों का वार किया.

उसने पीछे से आ कर- धीरे से मेरी चुंचियाँ पकड़ ली. मैं सिसक उठी. मैंने अपनी आँखें बंद कर ली. ‘ये नारंगियाँ बड़ी रसीली लग रही हैं ‘

‘अमन… क्या कर रहे हो…’

‘बस आरती… तुम्हारी नारंगी… इतनी कड़ी नारंगी… कच्ची है क्या…’

उसका लंड मेरे चूतडों पर रगड़ खाने लगा. मैंने उसका लंड हाथ पीछे करके पकड़ लिया.

‘इतना बड़ा केला… हाय रे… जीजू ‘

‘ आरती… नीचे तुम्हारे गोल गोल तरबूज… हैं… मार दिया मुझे. उसके लंड ने और जोर मारा. लगा कि मेरा पजामा फाड़ कर मेरी गांड में घुस जायेगा.

मैंने मुड कर अमन की ओर देखा. उसकी आंखों में वासना के डोरे नजर आ रहे थे. मैं भी वासना के समुन्दर में डूब रही थी. मैंने अपने आप को ढीले छोड़ते हुए उसके हवाले कर दिया. उसने मेरी आंखों में आँखें डालते हुए प्यार से देखा… मैं उसकी आंखों में डूबती गयी. मेरी आँखें बंद होने लगी. उसके होंट मेरे होटों से टकरा गए. अब हम एक दूसरे के होटों का रस पी रहे थे.

अमन ने मेरे एलास्टिक वाले पजामे को धीरे से नीचे खींच दिया. मैंने अन्दर पेंटी नहीं पहनी थी. उसका हाथ सीधे मेरी चूत से टकरा गया. उसने जोश में आकर मेरी चूत को भींच दिया. मै मीठी मीठी अनुभूति से कराह उठी. उसके दूसरे हाथ ने मेरे स्तनों पर कब्जा कर लिया था. मेरे उरोज कड़े होने लग गए थे. मेरा पाज़ामा धीरे धीरे नीचे तक सरक गया। सहिल ने ना जाने कब अपनी पैन्ट नीचे सरका ली थी।

उसका नंगा लण्ड मेरी गाण्ड से सट गया। लण्ड की पूरी मोटाई मुझे अपने चूतड़ों पर महसूस हो रही थी। मुझे लगा कि मैं लण्ड को अन्दर डाल लूं और मज़ा लूं। मेरे चिकने चूतड़ों की दरार में उसका लण्ड घुसता ही जा रहा था। मैंने अपनी एक टांग थोड़ी सी ऊपर कर ली उसका लंड अब सीधे गांड के छेद से टकरा गया. गांड के छेद पर लंड स्पर्श अनोखा ही आनंद दे रहा था. उसने अपने लण्ड को वहां पर थोड़ा घिसा और मुझे जोर से जकड़ लिया. उसके लंड का पूरा जोर गांड के छेद पर लग रहा था. लण्ड की सुपारी छेद को चौड़ा करके अन्दर घुस पड़ी थी. मैं सामने की मेज़ पर हाथ रख कर झुक गयी और चूतडों को पीछे की और उभार दिया. टांगे थोड़ी और फैला दी.

‘आह… आरती… बड़ी चिकनी है… क्या चीज़ हो तुम. ..’

‘अमन… कितना मोटा है… अब जल्दी करो…’

‘हाय… इतने दिन तक तुमने तड़पाया… पहले क्यों नहीं आयी…’

‘मेरे राजा… अब गांड चोद दो… मत कहो कुछ ..’

‘ये लो मेरी आरती… क्या चिकने चूतड हैं…’

‘हाँ मेरे राजा… मैं तो रोज तुम पर लाइन मारती थी… तुम समझते ही नहीं थे… हाय मर गयी…’

उसने अपना पूरा लण्ड मेरी गांड की गहरायी में पहुँचा दिया.

‘राजा मेरे… अब तो मेहरबानी कर ना…’

‘बस अब… कुछ ना बोलो… अब मजा आ रहा है… हाय… आरती… मस्त हो तुम तो…’

अमन के धक्के बढ़ते जा रहे थे… मुझे असीम आनंद आने लगा था. वो गांड मारता रहा… मैं गांड चुदाती रही. उसके धक्के और बढ़ने लगे. उसका लण्ड मेरी गांड की दीवारों से रगड़ खा रहा था. छेद उसके लण्ड के हिसाब से थोड़ा छोटा ही था… इसलिए ज्यादा रगड़ खा रहा था. मेरी गांड चुदती रही. मैं आनंद के मारे जोर जोर से सिस्कारियाँभर रही थी.

अब अमन ने धीरे से लण्ड छेद से बाहर खींच लिया. और मुझे चिपका लिया मेरे हाथ ऊपर कर दिये. पीछे से उसने मेरी छातियाँ कस कर पकड़ ली और मसलने लगा.

‘आरती… अब मैं कहीं झड़ ना जाऊं… एक बार लण्ड को चूत का सामना करवा दो…’

मैं हंस पड़ी- ‘आज मैं इसी लिए तो आई थी… मुझे पता था कि जानकी नहीं है… तुम अकेले ही हो… और अगर आज तुमने लाइन मारी तो तुम गए काम से…’

दोनों ही हंस पड़े… हम दोनों बिस्तर पर आ गए… मैंने कहा…’अमन… मैं तुम्हें पहले चोदूंगी… प्लीज़… तुम लेट जाओ… मुझे चोदने दो…’

‘ चाहे मैं चोदूं या तुम… चुदेगी तो आरती ही ना… आ जाओ…’ कह कर अमन हंसने लगा.

वो बिस्तर पर सीधे लेट गया. उसके लण्ड कि मोटाई और लम्बाई अब पूरी नजर आ रही थी. मैं देख कर ही सिहर उठी. मेरे मन में ये सोच कर गुदगुदी होने लगी कि इतने मोटे लण्ड का स्वाद मुझे मिलेगा. मैं धीरे से उसकी जांघों पर बैठ गयी. उसके लण्ड को पकड़ कर सहलाया और मोटी सी सुपारी को चमड़ी ऊपर करके सुपारी बाहर निकाल दी. मैंने अपनी लम्बी चूत के होठों को खोला और उसकी लाल लाल सुपारी को मेरी लाल लाल चूत से चिपका दिया. पर अमन को कहाँ रुकना था. सुपारी रखते ही उसके चूतड़ों ने नीचे से धक्का मार दिया. सुपारी चूत को चीरते हुए अन्दर घुस गयी. मैं आनंद से सिसक उठी.

‘हाय रे… घुसा दिया अन्दर… मेरी सहेली के चोदू , मेरे राजा…’

कहते हुए मैं उस पर लेट गई. वो गया नीचे दबा हुआ था इसलिए पूरी चोट नहीं दे पा रहा था. पर मेरे आनंद के लिए उतना ही बहुत था. मैंने उसे जकड़ लिया. अब मेरे से भी उत्तेजना सहन नहीं हो रही थी. मैंने अपनी चूत लण्ड पर पटकनी चालू कर दी. फच फच की आवाजों से कमरा गूंजने लगा. हम दोनों आनंद में सिस्कारियाँभर रहे थे.

‘हाय मेरे राजा… मजा आ रहा है… हाय चूत और लंड भी क्या चीज़ है… हाय रे…’

‘आरती… लगा… जोर से लगा… और चोद… निकाल दे अपने जीजू के लण्ड का रस…’

मैंने अपनी गति बढ़ा दी. चूतड़ों को हिला हिला कर उसका लण्ड झेल रही थी. उसका लण्ड मेरे चूत के चिकने पानी से भर गया था.

‘हाँ ..मेरे राजा… ये लो… और लो…’

पर अमन को ये मंजूर नहीं था… उसने मुझे कस के पकड़ा और एक झटके में अपने नीचे दबोच लिया. वो अब मेरे ऊपर था. उसका लण्ड बाहर लटक रहा था. उसने अपना कड़क मोटा लण्ड चूत के छेद पर रखा और उसे एक ही झटके में चूत की जड़ तक घुसा डाला.

मुझे लगा कि सुपारी मेरे गर्भाशय के मुख से टकरा गयी है. मैं आह्ह्ह भर कर रह गयी. अपनी कोहनियों के सहारे वो मेरे शरीर से ऊपर उठ गया. मेरे जिस्म पर अब उसका बोझ नहीं था. मैं एक दम फ्री हो गयी थी. मैंने अपने आप को नीचे सेट किया और टांगे और ऊपर कर ली.

अमन ने अब फ्री हो कर जोरदार शोट मरने चालू कर दिए. मुझे असीम आनंद आने लगा. मैंने भी अब नीचे से चूतड़ों को उछाल उछाल कर उसका बराबरी से साथ देना चालू कर दिया. मैं अब कसमसाती रही… चुदती रही… उसकी रफ्तार बढती रही… मुझे लगने लगा कि अब सहा नहीं जाएगा… और मैं झड़ जाऊंगी… मैंने धक्के मारने बंद कर दिए .. और ऑंखें बंद करके आनंद लेने लगी… मैं चरम सीमा पर पहुच चुकी थी..

जैसे जैसे वो धक्के मारता रहा मेरा… रज निकलने लगा… मैं छूटने लगी… मैं झड़ने लगी… रोकने की कोशिश की पर… नहीं… अब कुछ नहीं हो सकता था… मैं सिस्कारियाँभरते हुए पूरी झड़ गयी… मैं ढीली पड़ गयी… अब उसके धक्के मुझे चोट पहुचने लगे थे… लेकिन उसकी तेजी रुकी नहीं… कुछ ही पलों में… सुहानी बरसात चालू हो गयी. उसने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया था… और उसका पानी मेरी छातियों को नहला रहा था. मैं हाथ फैलाये चित्त पड़ी रही. वो अपने वीर्य पर ही मेरी छाती से लग कर चिपक गया. उसका वीर्य बीच में चिकना सा आनंद दे रहा था… अमन मुझे चूमता हुआ उठ खड़ा हुआ… मैंने भी आँख खोल कर उसकी तरफ़ देखा. और प्यार से मुस्कुरा दी.
मुझे अपनी चुदाई की सफलता पर नाज़ था. Antarvasna

अगले भाग का इतंज़ार करें.

Hindi Sex Stories

मेरे पति काम के सिलसिले में ६ महीने के Hindi Sex Stories लिये यूएसए गये थे और मुझे घर पर छोड़ गये थे। मैं अपने मम्मी, पापा और छोटे भाई के साथ रहने लगी थी। मेरी उम्र २७ साल की थी। मेरा छोटा भाई राज मुझसे ८ साल छोटा था। अभी अभी उसको जवानी की हवा लगी थी। मै और राज एक ही कमरे में रहते और सोते थे।

एक शाम को मैं छत पर बैठी थी कि मैंने देखा कि राज घर में आते ही दीवार के पास खड़ा हो कर पेशाब करने लगा। उसे यह नहीं पता था कि मुझे छत पर से सब दिखाई दे रहा है। जैसे ही उसने अपना लन्ड पेशाब करने को निकाला, मेरा दिल धक से रह गया। इतना मोटा और लम्बा लन्ड… उसे देख कर मेरे दिल में सिरहन दौड़ गयी। पेशाब करके वो तो फिर अपनी मोबाईक उठा कर चला गया… पर मेरे दिल में एक हलचल छोड़ गया। दो महीनों से मेरी चुदाई नहीं हुई थी सो मेरा मन भटकने लग गया। ऐसे में राज का लन्ड और दिख गया… मेरी चूत में कुलबुलाहट होने लगी। मैं बैचेन हो कर कमरे में आ गई। मुझे बस भैया का वो मोटा सा लन्ड ही बार बार नजर आ रहा था। सोच रही थी कि अगर ये मेरी चूत में गया तो मैं तो निहाल ही जाऊंगी।

राज रात को 8 बजे घर आया। उसने अपने कपड़े बदले… वो अभी तक मेरे सामने ही कपड़े बदलता था…पर उसे क्या पता था कि आज मेरी नजरें ही बदली हुई हैं। पैन्ट उतारते ही उसका लन्ड उसकी छोटी सी अन्डरवीयर में उभरा हुआ नजर आने लगा। मुझे लगा कि उसे पकड़ कर मसल डालूं। उसने तोलिया लपेट कर अपना अन्डरवीयर उतार कर घर का सफ़ेद पजामा पहन लिया। तो राज सोते समय अन्डरवीयर नहीं पहनता है…तो सीधा सोएगा तो उसका लन्ड साफ़ उभर कर दिखेगा…धत्त… ये क्या… सोचने लगी।

मेरा मन चन्चल होता जा रहा था। डिनर के बाद हम कमरे में आ गये।

मैंने भी जानबूझ कर के राज के सामने ही कपड़े बदलना शुरु कर दिया पर उसका ध्यान मेरी तरफ़ नहीं था। मैंने उसकी तरफ़ पीठ करके अपना ब्लाऊज और ब्रा उतार दिया। और एक हल्का सा टोप डाल लिया। मैंने नीचे से पज़ामा आधा पहना और पेटीकोट उतारने लगी। मैंने जानबूझ कर पेटीकोट छोड़ दिया। पेटीकोट नीचे गिर पड़ा और मैं एकाएक नंगी हो गयी। आईने में मैंने देखा तो राज मुझे निहार रहा था। मैंने तुरन्त झुक कर पजामा ऊपर खींच लिया।

मुझे लगा कि तीर लग गया है। मैंने ऐसा जताया कि जैसे कुछ हुआ ही नहीं है। पर राज की नजरें बदल रही थी। मैं बाथरूम में गई उसके आईने में से भी राज नजर आ रहा था… मैंने वहाँ पर अपना टोप उतारा और अपनी चूंचियां ऐसे रखी कि राज उसे बाहर से आईने में देख ले। मैंने अपने स्तनों के उभारों को मसलते हुए वापस टोप नीचे कर लिया। राज ने अपना लन्ड पकड़ कर जोर से दबा लिया। मैं मुस्करा उठी।

मैं अब बाथरूम से बाहर आई तो उसकी नजरें बिल्कुल बदली हुई थी। अब हम दोनो बिस्तर पर बैठ कर टीवी देखने लगे थे… पर मेरा ध्यान तो राज पर लगा था…और राज का ध्यान मुझ पर था। हम दोनो एक दूसरे को छूने की कोशिश कर रहे थे।

मैंने शुरुआत कर दी…”क्या बात है राज… आज तुम बैचेन से लग रहे हो…? ”

“हां दीदी… मुझे कुछ अजीब सा हो रहा है… ” उसका लन्ड खडा हुआ था… उसने मेरी जांघो में हाथ फ़ेरा… मुझे सिरहन सी आ गयी… मैं उसकी हालत समझ रही थी… दोनों के दिल में आग लग चुकी थी। मैंने कुछ ऐसा हाथ चलाया कि उसके लन्ड को छूता हुआ और रगड़ता हुआ निकला। उसके लन्ड के कड़ेपन का अहसास मुझे हो गया। राज ने हिम्मत की और मेरी कमर में हाथ डाल कर मुझे खींच लिया। मैं जानकर उस पर लुढ़क गई… पर झिझक के मारे वापस उठ गयी… ।

रात के ११ बज रहे थे …पर नीन्द कोसों दूर थी। मैं उठी और बालकनी में आ गयी। राज ने कमरे की लाईट बुझा दी…और मेरे साथ बालकनी में आ गया। सब तरफ़ अन्धेरा था… दो मकान के आगे वाली स्ट्रीट लाईट जल रही थी। मेरे मन में वासना सुलग उठी थी। राज भी उसी आग में जल रहा था। उसका खडा हुआ लन्ड अन्धेरे में भी उठा हुआ साफ़ नजर आ रहा था। कुछ देर तो वह मेरे पास खड़ा रहा …फिर मेरे पीछे आ गया। उसने मेरे कन्धों पर हाथ रख दिया… मैंने उसे कुछ नहीं कहा… बस झुरझुरी सी आ गयी।

उसकी हिम्मत बढ़ी और मेरी कमर में हाथ डाल कर अपने लन्ड को मेरे चूतडों से सटा लिया।

उसके लन्ड का चूतडों पर स्पर्श पाते ही मेरे शरीर में सिरहन उठने लगी। उसका लन्ड का भारीपन और मोटा पन और साईज मेरे चूतडों पर महसूस होने लगा। मेरे पजामे में वो घुसा जा रहा था। मैंने राज की तरफ़ देखा। राज ने मेरी आंखों में देखा … मौन इशारों मे स्वीकृति मिल गयी।

राज ने अपने हाथ मेरे बोबे पर रख दिये..और दबा दिये… मैं हाथ हटाने की असफ़ल कोशिश करने लगी…वास्तव में मैं हाथ हटाना ही नहीं चाहती थी।

“भैय्या… हाय रे… मत कर ना…” मैंने उसकी तरफ़ धन्यवाद की निगाहों से देखा…और अपने स्तनों को दबवाने के लिये और उभार दिये… नीचे चूतडों को और भी लन्ड पर दबा दिया।

“दीदीऽऽऽ…” कह कर अपने लन्ड का जोर मेरी गान्ड पर लगा दिया… मेरे स्तन जोर से दबा दिये।

“भैय्या… मर गयी … हाऽऽऽय…” उसका लन्ड मेरे पज़ामे में से ही मेरी गान्ड में घुसा जा रहा था। राज ने मेरा ढीला सा पजामा पीछे से नीचे उतार दिया। मैं बालकनी को पकड़ कर झुक कर घोड़ी बनी जा रही थी। राज ने अपना पजामा भी नीचे कर लिया। अब हम दोनो नीचे से नंगे थे…मैं तो खुशी से मरी जा रही थी… हाय मेरी गान्ड में अब मोटा सा लन्ड घुसेगा… मैं भैया से चुद जाऊंगी… राज ने अपना लन्ड को मेरी गान्ड पर रगड़ छेद पर दबा दिया। उसका मोटा सुपाड़ा मेरी गान्ड मे घुस पडा। मैन आनन्द से कराह उठी।

“भैय्या… हाय मत कर ना… ये तो अन्दर ही घुसा जा रहा है…”

“जाने दे बहना… आज इसे जाने दे… वर्ना मैं मर जाऊंगा… दीदी … प्लीज…”

मेरी सिसकारी निकल पडी… उसका लन्ड मेरी गान्ड में प्रवेश कर चुका था। मेरे बोबे मसलने से मुझे खूब तेज उत्तेजना होने लगी थी। उसका लन्ड अब धीरे धीरे अन्दर बाहर होने लगा था उसके बलिष्ठ हाथों का कसाव मेरे शरीर पर बढता ही जा रहा था। उसका लन्ड मेरी गान्ड में जबरदस्ती रगड़ता हुआ आ जा रहा था। मुझे दर्द होने लगा था… पर मैंने कुछ कहा नहीं… ऐसा मौका फिर कहां मिलता। शायद उसे तकलीफ़ भी हुई…उसने मेरी गान्ड पर अपना थूक लगाया… और अब लन्ड आसानी से अन्दर बाहर फ़िसलने लगा था। हम दोनो मुड़ कर एक दूसरे की आंखो में आंखे डाल कर प्यार से देख रहे थे … उसके होंठ मेरे होंठों को बार बार चूम रहे थे।

“नेहा दीदी… आप कितनी अच्छी है… हाय…मुझे कितना मजा आ रहा है…” राज मस्ती में लन्ड पेल रहा था। मेरी गान्ड में अब दर्द तो नहीं हो रहा था… पर मेरी चूत में आग भड़कती ही जा रही थी…

“भैय्या … अब मेरा पिछाड़ा छोड दो ना प्लीज़… आगे भी तो आग लगी है राज…” मैंने राज से विनती की। पर उसे तो पीछे गान्ड मारने मे ही मजा आ रहा था।

“भैया… देखो मैं झड़ जाऊंगी… प्लीज़… अब लन्ड को चूत में घुसेड़ दो ना…।”

राज ने अपना लन्ड मेरी गान्ड से निकाल लिया और एक बार फिर से मेरे बोबे दाब कर पीछे से ही मेरी चूत मे लन्ड घुसेड़ दिया।

गली में सन्नाटा था… बस एक दो कुत्ते नजर आ रहे थे…कोई हमें देखने वाला या टोकने वाला नहीं था । मेरी चूत एकदम गीली थी … लन्ड फ़च की आवाज करते हुये गहराई तक उतर गया। आग से आग मिल गयी… मन में कसक सी उठी… और एक हूक सी उठी… एक सिसकारी निकल पड़ी।

“चोद दे राज… चोद दे… अपनी बहन को चोद दे… आज मुझे निहाल कर दे…” मैं सिसकते हुए बोली।

“हाय दीदी…इसमें इतना मजा आता है… मुझे नहीं मालूम था… हाय दीदी…” राज ने जोश में अब चोदना चालू कर दिया था। मुझे भी तेज मजा आने लगा था। सुख के सागर में गोते लगाने लगी… शायद भैया के साथ ये गलत सम्बन्ध… गलत काम … चोरी चोरी चुदाई में एक अजीब सा आकर्षण भी था… जो आनन्द दुगुना किये दे रहा था।

“राज… हाय तेरा मोटा लन्ड रे… कितना मजा आ रहा है…फ़ाड दे रे मेरी चूत…”

“दीदी रे… हां मेरी दीदी… खा ले तू भी आज भैया का लन्ड… मुझे तो दीदी… स्वर्ग का मजा दे दिया…”

उसकी चोदने की रफ़्तार बढती जा रही थी… मुझे घोड़ी बना कर कुत्ते की तरह चोदे जा रहा था… मेरे मन की इच्छा निकलती जा रही थी… आज मेरा भैया मेरा सैंया बन गया… उसका लन्ड ले कर मुझे असीम शान्ति मिल रही थी।

“अब जोर से चोद दे भैय्या … दे लन्ड… और जोर से लन्ड मार … मेरी चूत पानी छोड़ रही है… ऊऊउईईई… दे …और दे… चोद दे राज…”

मेरी चरमसीमा आ रही थी… मैं बेहाल हो उठी थी… मुझे लग रहा था मुझे और चोदे… इतना चोदे कि… बस जिन्दगी भर चोदता ही रहे … और और… अति उत्तेजना से मैं स्खलित होने लगी। मैं झड़ने लगी…मैं रोकने कि कोशिश करती रही पर… मेरा रोकना किसी काम ना आया… बस एक बार निकलना चालू हो गया तो निकलता ही गया… मेरा शरीर खडे खडे ऐंठता रहा… एक एक अंग अंगड़ाई लेता हुआ रिसने लगा… मेरा जिस्म जैसे सिमटने लगा। मैं धीरे धीरे जमीन पर आने लगी। अब सभी अंगों मे उत्तेजना समाप्त होने लगी थी। मैं राज का लन्ड निकालने की कोशिश करने लगी। पर उसका शरीर पर कसाव और पकड बहुत मजबूत थी। उसका लन्ड अब मुझे मोटा और लम्बा लगने लगा था… लन्ड के भारीपन का अह्सास होने लगा था… मेरी चूत में अब चोट लगने लगी थी…

“भैया…छोड़ दो अब… हाय लग रही है…”

पर उसका मोटा लन्ड लग रहा था मेरी चूत को फ़ाड डालेगा… ओह ओह ये क्या… राज ने अपना लन्ड मेरी चूत में जोर से गड़ा दिया… मैं छटपटा उठी… तेज अन्दर दर्द हुआ… शायद जड़ तक को चीर दिया था…

“राज छोड़…छोड़ … हाय रे… फ़ाड़ डालेगा क्या…”

पर वो वास्तव में झड़ रहा था… उसके अंगों ने अन्तिम सांस ली थी…पूरा जोर लगा कर … मेरी चूत मे अपना वीर्य छोड दिया था… उसके लन्ड की लहरें वीर्य छोड़ती बडी मधुर लग रही थी… अब उसका लन्ड धीरे धीरे बाहर निकलने लिये फ़िसलता जा रहा था। लगता था उसका बहुत सारा वीर्य निकला था। उसका लन्ड बाहर आते ही वीर्य मेरी चूत से बाहर टपकने लगा था। राज ने मुझे घुमा कर मुझे चिपका लिया…

“दीदी… आज से मैं आपका गुलाम हो गया… आपने मुझे इतना बडा सुख दिया है… मैं क्या कहूं…”

उसके होंठ मेरे होंठो से जुड़ गये और वो मुझे पागलों की तरह प्यार करने लगा। मैंने भी प्यार से उसे चूमा और अन्दर ले आई और बालकनी का दरवाजा बन्द कर दिया। अब हम दोनों बहन-भाई ना हो कर एक दूसरे के सैंयां बन गये थे। हम दोनो फिर से बिस्तर पर कूद पडे और पलंग चरमरा उठा… हम दोनों फिर से एक दूसरे में समाने की कोशिश करने लगे। हमारे बदन में फिर से बिजली भर गई… मेरे बोबे तन गये…राज का लन्ड फ़ड़फ़ड़ाने लगा… और… और… फिर मेरे शरीर में उसका कड़ापन एक बार फिर से उतरने लगा … मेरी चुदाई एक बार फिर से चालू हो गई…Hindi Sex Stories

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सबसे पहले गुरुजी को शुक्रिया Sex Stories और प्रणाम, फिर समूचे अन्तर्वासना स्टाफ को प्रणाम, फिर पाठकों का जिन्होंने इतने इ-मेल किये, मुझे याहू चेट के ज़रिये संपर्क किया, मेरी पहली कहानी “रिक्शा वाले से गांड मरवाई” को बेहद पसंद किया। दोस्तो, उनके लौड़ों से चुदने के बाद मुझे वो वापिस कभी नहीं मिले न उनको मेरी पहचान रही न मुझे !एक रात में क्या पहचान होगी? जाता तो मैं रोज़ ही था अपनी बुआ के घर ! मेरे साथ एक रोज़ हादसा भी हुआ। मैं वहां से रिक्शा लेने के लिए खड़ा था कि एक बन्दे को देख मुझे लगा कि वो वही है। मैंने थोड़ी मुस्कान सी दी, वो वैसे ही मुस्कुरा दिया। मुझे लगा वो ही है। उस रात दारू का नशा था। मैंने फिर स्टेशन जाने को कहा। रास्ते से दारू पी, जैसे ही रिक्शा एक कालोनी से निकल रहा था, मैंने कहा- कैसे हो?

बोला- ठीक !

मैं सीट और उसकी सीट के गैप में पाँव के बल बैठ सा गया और अपना हाथ आगे ले जा कर मैंने अपना हाथ उसके लौड़े पर ले जा लुंगी के ऊपर से उसको मसल दिया और फिर सहलाने लगा। वो चुपचाप अपनी ही मस्ती में चलाता रहा, मैंने सोचा वो ही है।

अँधेरा देख उसने रिक्शा साइड पे लगा लिया। मैंने उसका लण्ड निकाल मुँह में ले लिया। वो बोला- किस्मत खुल गई ! कोई चूसेगा गरीब का, सोचा नहीं था !

तभी पीछे से किसी ने कहा- पकड़ो इनको !

मैंने वहां से भागने की सोची और भाग गया। उसके बाद मुझे लौड़े मिलने में मुश्किल आने लगी। अपने आस-पास मैं यह काम करना नहीं चाहता था इसलिए मैं बेचैन रहने लगा। तभी मेरे साथ मेरे यह घटना घटी।

मैं अपने मोटर साइकिल से जा रहा था, एक छोरे ने मेरे से लिफ्ट मांगी। कुछ पल आगे जाकर उसने अपना बैग डिग्गी पे रख लिया और मेरा लौड़ा पकड़ कर बोला- कभी किसी की ली है? शादी हुई या अभी नहीं?

उसने जिप खोल हाथ डाल दिया।

मैंने कहा- यह सब?

बोला- यार मैं ऐसे ही अपने लिए लौड़े चुनता हूँ, ऐसे ही लिफ्ट लेकर हाथ जमाता हूँ अगर अगले बन्दे का मूड बन जाये तो ठीक, वरना ज्यादा से ज्यादा उतार देगा और क्या कर लेगा?

मैंने कहा- मैं गांड नहीं मारता, बल्कि मैं खुद गांडू हूँ, इसलिए उतर जाओ प्लीज़ !

उसे उतार मैं आगे निकल गया। वहां एक पार्किंग में बाइक पार्क किया और खुद केन्ट रोड पर पहुंचा जहाँ कोई ऑटो और रिक्शा नहीं चलते !

मैं हूँ बहुत चिकना !

काफी इन्तज़ार के बाद बुल्लेट मोटर साइकिल से हेलमेट डाले दो बन्दे आते दिखे। आर्मी का था वो बुल्लेट ! मैंने लिफ्ट के लिए डरते डरते हाथ दिया, पहले ही दो थे, ऐ चिकने, यहाँ क्यूँ खड़ा है?

जी कोई सवारी नहीं मिल रही ! मैंने मुस्कुरा के होंठ चबाते हुए कहा।

चल छोड़ देते हैं !

मैंने कहा- लेकिन कैसे? पहले ही दो लोग हो ! मुझे लेकर क्यूँ तकलीफ लेते हो ?

बैठ बीच में ! वो बोले।

डरते हुए मेरा हाथ उसके लौड़े की ओर गया अनजान सा बनते हुए मैंने सहला दिया !!!

वो बोला- अबे ओये चिकने ! ठीक से मसल !

पीछे वाले को कुछ कुछ माजरा समझ आया, उसने पीछे से दबाव देना चालू कर दिया। उसका खड़ा होने लगा और दो मिनट में मुझे चुभने लगा। आगे वाले का मैंने पहले ही खड़ा कर दिया था।

दोनों बोले- मादरचोद, तुझे देख कर ही मैं जान गया था कि लिफ्ट काहे के लिए लिया गया !

उसका लौड़ा बहुत लंबा निकला। एक हाथ पीछे ले जाकर दूसरे के को पकड़ा, उसका भी काफी बड़ा निकला। दोनों गर्म थे। दोनों ने बाहर ही एक मकान किराए पर लिया हुआ था। सीधा जाकर वहीं रुके। पीछे वाले का नाम था रामशरण और दूसरे का पुरुषोत्तम था।

राम मुझे लेकर घर गया, उसकी उम्र ३३ साल थी और पुर्शोतम की ३६ साल ! वो बाईक पार्क करके अन्दर आया, ए.सी ऑन करने के बाद राम भी कमरे में आया, दोनों ने मिलकर मुझे नंगा कर दिया। सिर्फ अंडरवियर छोड़ा जिसमें मेरा लौड़ा बन्द था। मेरी छाती देख वो भी अन्य पहले मिले लोगों की तरह हैरान से हुए।

बहुत मस्त मॉल मिला है आज !

अब मेरी बारी थी। पहले मैंने एक की पैंट उतारी फ़िर दूसरे की ! फिर एक की शर्ट साथ में ही दूसरे की ! दोनों मेरे सामने सिर्फ कच्छों में थे, फूले हुए थे। मैंने पहले राम का कच्छा उतारा और लौड़ा मुँह में डाल लिया। उसके मुँह से अहऽऽ निकला। उसका चूसते हुए ही मैंने दूसरे का कच्छा उतारा, उसका आधा खड़ा लौड़ा पकड़ा।

राम बोला- पहले इसका खड़ा करवा !

दोनों ने पेनेग्रा नाम की आधी-आधी टेबलेट ली और मुझे तब तक मसलते रहे। कुछ पल में ही दोनों के लौड़े दहाड़ने लगे। उस टेबलेट से इतनी जल्दी इतना असर देख मैं भी हैरान था। राम फ़्रिज से तीन ठंडी बियर लाया। दोनों मेरे चेहरे के करीब बैठ गए मैंने अपना मग डकार लिया, उसको और डालने को कहा। दो मग अन्दर गए। कभी एक का चूसता कभी दूसरे का ! वो बियर पीते हुए मुझसे चुसवाते देख मस्त थे। मैं उनको पूरा खुश करना चाहता था। ताकि आगे से भी मुझे उनके लौड़े मिलते रहें।

वाह यार ! तू ग्रेट है !

मैंने नशे में रंडी का रूप ले लिया था और वैसे चूस रहा था, मैंने कहा- अब मेरी गांड खुश कर दो !

वो अपने मुँह से थूक निकाल लौड़े पर लगाते हुए बीच में आया। मैं पहले से ही अपनी गांड में उंगलियाँ डाल गीला कर चुका था। उसने लौड़ा रखा, आठ इंच का लौड़ा, उसने सोचा कि इसको दर्द होगा ! लेकिन मैंने उसे कहा- बेरहम हो जाओ साईं !

उसने झटका लगाया और उसका मोटा लंबा लौड़ा घुसता गया, देखते ही पूरा अन्दर डाल दिया और लगा चोदने ! एक लौड़ा मेरे मुँह में था। गुप गुप सी सी सिसकारियाँ ले ले में उनका जोश बढ़ाने लगा- और तेज़ औ औ अह अह और और तेज़ !

वो भी मशीनगन की तरह तेज़ होता गया और एक दो जोर से झटके लगाते हुए उसका माल मेरी गांड में गिरते ही मैंने आंखें मूँद ली। साफ़ पिचकारी महसूस की थी मैंने !

उसने निकाल कर मेरे मुँह में डाल दिया और पुरुषोत्तम ने गांड में घुसा दिया और अब वो लगा मेरी जलन पूरी तरह से ख़त्म करने !

मैंने राम का लौड़ा साफ़ कर दिया और दूसरे ने मेरी गांड पे ज़बरदस्त धक्के लगाने शुरु किये। उसको गांड मारने का असली तरीका पता था जिससे मुझे भी मजा आ रहा था। उसने मालूम नहीं क्या किया- मेरी गांड के अन्दर गांड की कोई गुठली पर लौड़ा रगड़ना शुरु किया जिससे मैं पागल हो गया, आसमान में उड़ने लगा। उसकी एक एक रगड़ मुझे औरत जैसा मजा देने लगी। इतना गर्म हुआ कि पास में बैठे राम के सोये हुए लौड़े को मुँह में लेकर चूसने लगा। दूसरे ने मुझे कहा- दीवार को पकड़ कर खड़ा हो !

मेरे पाँव के नीचे उसने कुछ रख लिया और खुद पीछे खड़ा हुआ उसका लौड़ा मेरी गांड के अन्दरूनी भाग में ऊपर वाले एरिया से घिसने लगा। एक एक रगड़ जब ऊपर घिसती, मेरी आंखें बंद हो जाती। उसने घोड़ा भी बनाया और लगा रौंदने !

मैंने फिर से सामने राम के लौड़े को मुँह में डाल लिया। पुरुषोत्तम तेज़ तेज़ धक्के देता हुआ पानी छोड़ गया और निकाल कर मुँह में डलवा साफ़ करवाया। फ़िर वो मुझे बाथरूम ले गए, शॉवर खोला, साथ नहाने लगे। मेरी गांड की धुलाई की और वहीं चुसवाने लगे। पानी के नीचे चूसने का मजा अलग था। जैसे ही दोनों के तन गए मुझे पौंछकर बिस्तर पे लिटा दिया।

राम सीधा लेट गया, मैं उसके लौड़े पर बैठ गया। उसने मुझे अपने और खींच सीने से लगाया और झटके देने रोक लिए। पुरुषोत्तम पीछे से आया, राम के लौड़े के साथ अपना लौड़ा लगा दिया। राम ने निकाल लिया, दोनों ने अपने अपने लौड़ों के सर जोड़ते हुए घुसा दिए।

मेरी फट गई- प्लीज़ रुक जाओ !

लेकिन दोनों नहीं माने ! राम ने तो पूरा घुसा लिया, पुरुषोत्तम का सिर्फ सर और थोड़ा हिस्सा घुसा। जब राम का आराम से हिलने लगा तो यह देख उसने भी झटका मारा और उसका भी पूरा घुस गया। मेरी फट चुकी थी, यह देख एक ने निकाल लिया और मुँह में दे दिया। राम तेज़ तेज़ रगड़ने लगा।

इस तरह यह नंगा नाच शाम तक चलता रहा। क्या सुख पाया था !

मैंने उनके मोबाइल नंबर लिए और वहाँ से कपड़े पहन राम ने मुझे वहीं छोड़ दिया जहाँ से लिया था। मुझे चलने में तकलीफ थी लेकिन जब मुझे चुदाई याद आती तो मेरा रोम रोम मस्ती से झूमने लगता। इस तरह मेरा लिफ्ट वाला आईडिया कामयाब हुआ।

उसके बाद क्या क्या हुआ, मैं अपनी गांड चुदाई के एक एक किस्से को सबके सामने लाता रहूँगा, मुझे प्यार देते रहना, इ-मेल, चेट करते रहना !

गुरु जी, प्लीज़, मेरे किस्से छापते रहना ताकि मैं लड़ीवार अपने किस्से भेजता रहूँ !

मुझे पूरा भरोसा है आप पर और अंतर्वासना पर !

एक बार फिर से प्रणाम ! Sex Stories

सभी पाठकों को मेरा नमस्कार.. मेरा नाम पंकज है और मेरा लण्ड साइज़ 6.2 इंच है.. मैं देखने में मस्त हूँ और काफी रोमाँटिक भी हूँ।
यह मेरी पहली कहानी मेरी और वालिया यानि मेरी पहली गर्ल-फ्रेंड की है.. अब उसकी शादी हो चुकी है। वो अपने पति से तो चुदती ही होगी, क्या पता दूसरों से भी चुदवाती होगी।
खैर.. उसकी चूत और उसे चुदवाने के लिए मेरी तरफ से पूरी छूट।

बात उन दिनों की है.. जब मैं रोज सुबह की तरह जॉब की तलाश में घर से अपनी बाइक लेकर निकल जाता था।

एक दिन जब मैं अपने शहर दिल्ली के करोल बाग में इंटरव्यू के लिए जा रहा था.. तो मैंने देखा एक लड़की बस स्टैंड पर परेशान सी खड़ी है.. वैसे तो मुझे पहले लड़कियों से बात करने में बड़ा डर लगता था।
इस बार मैंने उससे डरते-डरते पूछ ही लिया- क्या मैं आपकी कोई मदद कर सकता हूँ?

पहले तो उसने मुझे घूर कर देखा.. फिर कुछ सोच कर बोली- मुझे इंटरव्यू पर जाना है और मेरी बस छूट गई है।
मैंने उससे पूछा- आपको कहाँ जाना है?
तो उसने बोला- अब कोई फायदा नहीं है क्योंकि इंटरव्यू का समय सुबह ग्यारह ही बजे तक का था।
मैंने कहा- फिर भी मैं आपकी कोई मदद कर सकता हूँ?

तो उसने मुझे अपने बारे में बताया कि उसका नाम वालिया है.. वो दिल्ली में ही रहती है और वो अभी जॉबलैस है।
फिर बात करते-करते मैंने उससे पूछ ही लिया- कहीं बैठ कर चाय पीएं?
तो पहले तो वो हिचकिचाई.. फिर मान गई।

एक बात बताऊँ.. मुझे सड़क किनारे बैठकर चाय पीना बड़ा पसंद है।

तो हम सड़क के किनारे एक चाय वाले के पास बैठ कर चाय पीने लगे। इस तरह से हमारी दोस्ती हो गई।
दोस्ती होने के बाद हम इंटरव्यू साथ-साथ देने लगे और साथ-साथ घूमने भी लगे।
एक दिन उसने कहा कि वो मेरा घर देखना चाहती है।

तो मैंने उससे पहले साफ़-साफ़ बता दिया- मैं एक मिडिल क्लास परिवार से हूँ..
तो उसने कहा- उससे मुझे कुछ नहीं लेना-देना.. बस मुझे तो तेरा घर देखना है।
मैंने कहा- ठीक है.. आज तो नहीं.. कभी और दिन दिखा दूँगा।
उसने कहा- ठीक है.. मैं इंतज़ार करूँगी।

मैंने उससे उसकी फैमिली के बारे में पूछा तो उसने बताया- मैं भी मिडिल क्लास फैमिली से ही हूँ।
मैंने कहा- फिर तो यानि हम दोनों की चाय का हिसाब बराबर-बराबर रहेगा।
तो वो हँसने लगी और मेरा हाथ पकड़ कर ‘थैंक्यू’ बोला।
मैंने पूछा- थैंक्यू क्यों?
तो उसने कहा- मैं तेरे कारण थोड़ी थोड़ी दुनिया देखने और जीने लगी हूँ।

उसकी यह बात सुनकर मैंने उसके माथे पर एक किस कर दिया और ‘थैंक्यू’ कहा।
तो उसने पूछा- तुमने ‘थैंक्यू’ क्यों बोला..?
मैंने उससे कहा- उसके कारण अब मुझे लड़कियों से बात करने में डर नहीं लगता..
शायद उसे इस बात से कुछ बुरा सा लगा था।

उसने कहा- चलो अब चलते हैं।
मैंने कहा- नहीं.. आज तो मुझे अपना वादा पूरा करना है।
तो वो बोली- जिस-जिस लड़की से बात की है.. उन्हीं से वादे पूरे कर लेना और उन्हीं को अपना घर भी दिखा देना।
मैं समझ गया कि वो मुझसे प्यार करने लगी है।

तो फिर भी मैंने उससे कहा- चलो आज तुम्हें तुम्हारी मनपसंद चीज दिखाता हूँ।
वो थोड़ा सा मुँह बनाकर बाइक पर बैठ गई.. फिर उसे मैं अपने घर ले आया.. तो वो थोड़ी सी खुश लगी।
मैंने उससे कहा- मैं तुमसे बहुत प्यार करने लगा हूँ।

तो उसने भाव खाने चालू कर दिए.. यह देख कर मैंने उससे कहा- ठीक है जानू.. तो मैं फिर उससे ‘हाँ’ बोल देता हूँ जिसने मुझे कल प्रपोज किया था।
वो यह सुन कर वो रोने लगी.. यह देख कर मैंने उससे अपनी गोद में उठा लिया और प्यार से उसका माथा चूमा।
फिर मैं धीरे-धीरे से उसकी गर्दन पर हाथ डालते हुए मैंने उसके होंठों पर अपने होंठों को रख दिया।

वो थोड़ी-थोड़ी सी हिचकिचाने लगी.. तो फिर मैंने जोर-जोर से उसके होंठों को चूमना चालू कर दिया।
अब उसे भी मज़ा आने लगा और वो मेरा साथ देने लगी।
धीरे-धीरे हम दोनों मस्त होकर एक-दूसरे को गरम करने लगे।

तभी मैंने उससे कहा- एक मिनट रुको.. मैं वाशरूम से अभी आता हूँ।
मैं जानबूझ कर अपना पर्स उसको पकड़ा दिया और वाशरूम चला गया।

जो मैंने सोचा था उसने भी वही किया। उसने मेरा पर्स खोल कर देखा.. जिसमें एक डॉटेड कंडोम का एक पैकेट रखा था।
अब उसने कंडोम देख लिया था और मैंने उसे पर्स खंगालते हुए चुपचाप से थोड़ा सा दरवाजा खोल कर देख लिया था।

मैंने देखा कि वो कंडोम देख कर अपनी चूत को प्यार से सहला रही थी। फिर मैं समझ गया कि वो गरम हो चुकी है और अगर मैं उसकी चूत मारूँ तो शायद वो मना नहीं करेगी।
थोड़ी देर में मैं परफ्यूम छिड़क कर सफ़ेद बनियान में वाशरूम से बाहर वापस आया।
फिर जाकर मैं रसोई में गया और कोल्ड ड्रिंक और चॉकलेट लेकर वापस उसके पास बैठ गया।

मैंने धीरे से उसकी कमर में हाथ डाला और फिर से उसे किस करने लगा। उसने कोई एतराज नहीं किया तो धीरे-धीरे से मैंने उसका कुरता ऊपर को कर दिया और उसके चूचे दबाने लगा।

मैंने जब उसके चूचे देखे.. तो बस मैं पागल सा हो गया।
क्या मस्त उठे हुए चूचे थे.. गजब.. माल..
इतने कड़क चूचे कि जैसे शायद आज तक मेरी जान ने खुद भी अपने हाथों से नहीं दबाए हों.. दिखने में एकदम सख्त और सहलाने में ठोस लेकिन मुलायम अहसास लिए हुए थे।

फिर मैंने अपने होंठों से उसकी घुंडियों को पकड़ा और दबा कर पीने लगा।
वो गरम होने लगी.. मौका देखते हुए मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया और वो ‘धत्त’ कह कर शर्माने लगी।
फिर क्या था.. समझदार को इशारा काफी.. मैंने उससे अपने हाथों में उठाया और कमरे में ले गया.. बिस्तर पर लिटाने से पहले मैंने उसके एक-एक करके सारे कपड़े उतार दिए.. जो पहले से ही आधे उतर चुके थे।

फिर मैंने सीधे उसकी चूत पर हमला किया.. धीरे-धीरे से मैं उसकी चूत चाटने लगा.. और वो अपनी मादक सिसकारियाँ निकालने लगी जिन्हें सुनकर मेरा लण्ड और ज्यादा कड़क हो गया और वो अपनी चूत के साथ गोते खाने लगी।
आखिर मैं उसने बोल ही दिया- अब उससे रहा नहीं जा रहा.. प्लीज चोद दो.. आह्ह जान मेरी चूत को मजा दे दो..

कामातुर हो कर उसने मेरा लण्ड पकड़ लिया और अपनी चूत पर लगाने लगी।
मैंने धीरे से उसकी चूत में लण्ड टिकाया और पेल डाला.. वो दर्द से बिलखने लगी.. साली बिलखती भी क्यों नहीं.. आखिर मेरा लण्ड 6.2 इंच लम्बा जो है..
वो दर्द से कहने लगी- उह..माँ.. बहुत दर्द हो रहा है..
तो मैंने उससे कहा- जानू.. शुरू में तो दर्द होगा ही.. इसे प्लीज़ सह लो.. फिर तुम्हें भी मज़ा आएगा।

यह बोलते हुए ही मैंने एक झटके में अपना पूरा लण्ड उसकी चूत में उतार दिया।


उसकी चूत से खून की पतली सी धार फूट पड़ी.. वो दर्द से कांपने लगी।

फिर मैं थोड़ी देर में रुक गया.. जब उसने थोड़ी सी हिम्मत बनाई.. तो मैंने फिर से उसकी चूत की चुदाई जोरों से चालू कर दी।
अब उसे मज़ा आने लगा और वो भी कहने लगी- आह्ह.. जानू.. आज फाड़ दो चूत को.. साली बड़ा परेशान करती थी।
उसके ये बोलते ही मैंने जोर-जोर से झटके मारकर उसे ठंडा कर दिया।

फिर मैंने कहा- जानू अब मुझे ठंडा करो..
तो उसने कहा- कैसे?
मैंने कहा- मेरा लण्ड मुँह में ले लो..
यह सुन कर वो कहने लगी- मेरी चूत तो फाड़ दी.. अब क्या मुँह भी फाड़ोगे?
बोलते हुए मेरा पूरा लण्ड मजे से लेकर मुँह में चूसने लगी।

ऐसा करते-करते मैंने उसके मुँह में ही अपना माल झाड़ दिया.. जिसे वो पूरा मुँह में लेकर पी गई।

अब वो कहने लगी- ये मेरी चूत की तुम्हारे लिए चाहत थी.. और तुम्हारे लण्ड ने मुझे जी भर के चोदा.. वो तुम्हारे लण्ड का दीवानापन था..

चुदाई खत्म होकर हम दोनों ने विदा ली फिर तो गाहे-बगाहे उसकी चूत मेरे लौड़े की खुराक हो ही जाती थी।
तो मित्रोम यह थी वो काम रस से भरी कथा.. मुझे उम्मीद है कि आप सभी पसंद आई होगी।

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