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अन्तर्वासना में अपनी कहानियाँ भेजनेAntarvasnaवालों को एक बार फिर से गीता का प्रणाम! खुली फुद्दी से मेरी कहानी पढ़ने वालों को प्रणाम! सो दोस्तो अब तक चुदाई का सफ़र में मैं अब शादीशुदा हूँ लेकिन चुदाई का सफ़र में मेरी ज़िंदगी में पड़ोसी के बाद दूसरा लौड़ा किसने डाला?
मैंने बताया था कि पड़ोसी ने मेरे साथ अवैध संबंध बनाए वैसे भी मुझे शादीशुदा मर्दों से चुद कर मजा आता है पड़ोसी के ऑस्ट्रेलिया जाने से अब मेरी फुद्दी प्यासी थी तड़फ़ रही थी। एक दिन घर में मेरी बड़ी बहन का नंदोई आया था, मम्मी घर नहीं थी और वो किसी काम से शहर आया था। रात हो जाने के कारण उसको रुकना पड़ा।
मैं डिनर तैयार करने लगी। पापा उसको बिठा कर खुद बाहर ठेके से दारू की बोतल लेने गये। मैं किचन में काम करते वक्त चुन्नी नहीं लेती थी और वैसे भी मैं डीप-नेक और पीछे ज़िप वाले सूट पहनती हूँ।
वो किचन में ग्लास, पानी, नमकीन लेने आया, बोला- नमकीन दे दो!
मैं डिब्बे से नमकीन निकालने लगी जो उपर वाली शेल्फ पे था। मैंने कहा- रुकना! मैं स्टूल ले कर आती हूँ।
वो बोला- उसकी क्या ज़रूरत? उसने पीछे से आकर उठा दिया और बोला- लो डिब्बा उतार लो उसकी इस हरक़त में उसने मेरे चूतड़ों को हल्के से दबा डाला। जाते जाते मेरे मम्मों को भी दबा गया।
फिर पापा और वो बैठ कर पीने लगे। उसकी क्षमता काफ़ी लगती थी पापा को चढ़ गई लेकिन दूसरी बोतल भी खुल गई। पापा थोड़ा नमकीन और पानी लाने के लिए उठने लगे। वो बोला- प्लीज़ अंकल जी! आप बैठो मैं लाता हूँ।
रसोई में आकर उसने मुझे पीछे से दबोच लिया और मेरी गर्दन पे अपने होंठ रख दिए। मुझे गरम करने के लिए उसने मेरे मम्मों को दबाया और बिना बोले वहाँ से चला गया। उसकी मजबूत बाहों से मेरी प्यासी फुद्दी गीली होने लगी।
थोड़ी ढेर में पापा को ज्यादा चढ़ गई। तभी भाई का फोन आया कि वो आज अपने ससुराल में ही रुकने वाले है। मैंने गेस्ट रूम में बिस्तर लगा दिया। उसके लिए खाना लगाने लगी।
तभी वो एक पेग हाथ में लेकर मेरी तरफ आया और मुझे पिलाने लगा। मैंने मना किया लेकिन उसने पेग पिला ही दिया। सरूर जल्दी ही चढ़ने लगा। दोनों खाना खाने डाइनिंग टेबल पे बैठ गये। वो उठा और दो पेग बना लाया, बोला- गीता जी! एक जाम और मेरे नाम का!
मैं वो पेग गटक गई। खाना खाने के बाद मैं उठी, बर्तन वगैरा रख के अपने कमरे में चली गई और नशे में सरूर सा आने लगा। तभी वो कमरे में आया और कुण्डी चढ़ा दी।
उसने आते ही मुझे दबोच लिया, ज़िप खोल मेरा कमीज़ उतार दिया, ब्रा उतार कर मेरे मम्मों को मसलने लगा, बोला- गीता! तुम बहुत मस्त माल हो ,कैसी गोल-मोल गाण्ड! उफ़फ्फ़! कायल कर दिया तूने!
कहते ही मैंने भी उसके गले में बाहें डाल दी और बोली- आप भी असली मर्द हो। आपकी यह चौड़ी छाती, घने बाल, मर्दानगी की कायल तो मैं हो गई आपकी!
वो मेरी दोनों टांगों के बीच बैठ कर अपनी ज़ुबान से मेरी फुद्दी चाटने लगा। जब वो मेरे दाने को चबाता, कसम से आग मच जाती! अहह उह!!!
मैंने उसको धकेलते हुए पीछे किया और जल्दी से उसका लंड पकड़ लिया और घुटनो के बल बैठ कर चूसने लगी।
वो बोला- हाय जान! रानी! राण्ड! माँ की लौड़ी! चूस!
वो अपने पैर से नीचे मेरी गाण्ड के छेद में अंगूठा डालने की कोशिश करने लगा। फिर दारू में टल्ली उसने मुझे सीधा लिटाते हुए अपना मोटा लंड मेरी फुद्दी में धकेल दिया।
अहह धीरे!
बोला- कमीनी! चुप साली रंडी!
मैं ज़ोर ज़ोर से चुदने लगी। जब जब उसका लंड मेरी बच्चेदानी से रग़ड़ ख़ाता, मानो स्वर्ग बिस्तर पे आ गया लगता था।
अब मैं खुद नीचे से बोली- हाए मेरे ख़सम! फाड़ डाल! छोड़ना मत!
और मैं गाण्ड उठा उठा के चुदने लगी। उसने मुझे घोड़ी बना लिया और पेलने लगा। मैं झड़ गई लेकिन वो थमा नहीं। करीब 25 मिनट यूँ ऐसे ही गैर मर्द की बाहों में झूलती हुई जो चुदी।
उसने अपना गरम गरम पानी जब मेरी बच्चेदानी के पास में छोड़ा, मैं पागल हो गई। कितना लावा निकालता था उसका लंड!
सो दोस्तो था वो मेरी बहन का नंदोई लेकिन सारी रात उसके नीचे मैं सोई।
उसने मुझे 3 बार चोदा, 1 बार गाण्ड में!
यह था मेरी जिन्दगी का दूसरा लंड!उसके बाद वो मुझे मोबाइल से फ़ोन करता, जब हमारे शहर में आता तो मुझे कॉलेज से लेकर करके होटल में ले जाता और खूब चोदता।
2 महीने मेरा उसके साथ सम्बंध रहे। फिर मैंने उसे मुँह लगाना छोड़ दिया।
फ़िर भी अब कभी जब घर आता है तो मौका देख 1 बार चोद ही लेता है मुझे!
अगले गैर मर्द की बाहों की दास्तान! सफ़र चुदाई का लेकर जल्दी रुबरू हो जाऊँगी।
खाओ लंड, लो आनन्द, जाए चूत में लंड!
जय चूत लण्ड की! Antarvasna
हेल्लो दोस्तों! मेरा नाम सोना है। मैं पंजाब में Antarvasna रहती हूँ। मैं काफी लंबे समय से अपनी बात, अपना अनुभव आपसे बाँटना चाहती थी। अब मैं शादीशुदा हूँ, पिछले महीने मेरी शादी हुई। लेकिन ये अनुभव जो आपके साथ बाँटना चाहती हूँ ये शादी से कुछ महीने पहले का है। दोस्तो, मुझे सेक्स के बारे में पता तो था पर यह नहीं पता था कि लड़कियां आपस में भी सेक्स को एन्जॉय कर सकती हैं।
मेरी एक खास सहेली जिसका नाम काजल है, मेरे साथ कॉलेज में पढ़ती थी। हम अक्सर इकट्ठे पढ़ाई किया करते। और अगर वो मेरे घर ज्यादा देर तक रूकती तो मैं उसे रात को वापिस नहीं जाने देती थी। मेरा कमरा अलग है। और हम दोनों साथ सो जाया करते।
दोस्तो, एक रात हम यूँ ही देर रात तक पढाई करते रहे। पापा ने मुझे खाना बनाने को कहा। पर मैं अपने नोट्स समय पर बना लेना चाहती थी तो मैंने पापा को मना कर दिया। पापा ने मुझे अपने पास बुलाया और खूब बुरा भला कहा। माँ ने भी पापा का पक्ष लिया। इस बात से मुझे बहुत गुस्सा आया और मैं रोते रोते अपने कमरे में आ गई। मुझे बहुत बुरा लगा था। काजल ने मुझे बहुत समझाया पर मैं रोते रोते सो गई। कुछ देर बाद काजल भी सो गई। बत्ती बंद थी सिर्फ़ डिम लाइट बल्ब जल रहा था।
करीब आधे घंटे के बाद अचानक मेरी आंख खुली। मैंने देखा काजल मेरे पास सो रही थी। पर इतनी पास?? उफ़!! उसका चेहरा मेरे चेहरे से मुश्किल से एक या दो इंच दूर होगा। पता नहीं क्यूँ पर एक अजीब सी सिहरन से मेरी सांसें भारी हो गई। उसके गुलाबी होंठ मेरे होंठों से सिर्फ़ एक या दो इंच दूर थे। शायद एक उतेजना मेरे शरीर में भर रही थी। पता नहीं क्यूँ मेरा सारा ध्यान उसके गुलाबी होंठों पर हो गया और में लगातार उन्हें देखे जा रही थी।
अचानक मेरे हाथ उसके होंठों को सहलाने लगे। अजीब सी उतेजना से मेरा जिस्म कांप रहा था। और मैं अपने आप को रोक नहीं पा रही थी। अचानक मेरा ध्यान काजल की आँखों की तरफ़ गया। उफ़!! वो मुझे देख रही थी। मैं उसके होंठों को सहलाने में इतनी व्यस्त थी कि वो कब जाग गई पता नहीं चला। हम दोनों एक दूसरे की आँखों में झाँक रही थी। शायद काजल भी उसी उत्तेजना को महसूस कर रही थी जो आग मेरे बदन को जला रही थी। मेरे जिस्म से एक अजीब से भीनी भीनी महक उठ रही थी। और उत्तेजना से मुझे अपने नीचे कुछ गीलापन लग रहा था। मेरे होंठ कांप रहे थे।
और अचानक जाने क्या हुआ। काजल ने मेरे होंठों को ऊपर से चूम लिया। और मैं अपने आप को रोक न पाई और काजल के सुंदर गोरे चेहरे को अपने हाथों से पकड़ कर उसके होंठों में अपने होंठ डाल दिए। हाय!! क्या अजीब स्वाद था उसके गुलाबी होंठों का।मैं जैसे पागल हो गई और उसके होंठों में अपने होंठ डाल कर नशे में खो गई। उसके होंठों को चूसते हुए मुझे महसूस हो रहा था जैसे एक आग मेरे जिस्म में भर रही हो।
अचानक उसने मेरे मुंह में अपनी जीभ डाल दी। मैं धीरे धीरे उसे चूसने लगी। करीब पॉँच मिनट तक चूसने के बाद मेरी हालत क्या हो गई थी मैं बता नहीं सकती पर उस समय सब कुछ अच्छा लग रहा था। हम दोनों को आँखों में एक नशा सा भर गया था।
अब काजल ने मेरे कपड़े उतारने शुरू किए। मेरा सूट उतार देने के बाद वो मेरी अंगवस्त्र उतार रही थी, मुझे शर्म भी आ रही थी पर एक अजीब सा नशा हो चुका था। उसके बाद उसके अपने सारे कपड़े उतार दिए। मैं इतनी ज्यादा गीली थी शायद उससे बेड की चादर भी ख़राब हो रही थी।
और अब काजल ने फिर से मेरी होंठों को चुसना शुरू किया। मेरी ऊपर लेट कर मेरी नंगे जिस्म से अपना जिस्म रगड़ कर मुझे पागल कर रही थी। उसके नितंब मेरी नितम्बों से रगड़ कर मुझे पागल कर रहे थे। काजल ने अपनी जीभ पर थोड़ा थूक रख कर मेरी होंठों पर लगाया फिर मेरी होंठों को चूसा। फिर थोड़ा थूक अपनी जीभ पर रख कर मेरी मुंह में अपनी जीभ डाल दी। मुझे कुछ अजीब लगा पर उसके थूक का स्वाद मुझे अच्छा लगा और मैं सारा चूस गई।
उसके बाद उसके मेरी नितंब अपने गर्म होंठों में ले कर चूसना शुरू किया। और उसके हाथ नीचे की तरफ़ जाने लगे। मेरी जिस्म में एक चिंगारी सी भर रही थी। और अब वो मेरी गीली चूत तक पहुँच चुकी थी। उसके मेरी गुलाबी चूत को अपने हाथ से मसलना शुरू किया। मैं जैसे इस दुनिया में नहीं थी।
उसने एकदम अपनी दो उंगलियाँ मेरी चूत में घुसा दी। शायद ज्यादा गीली होने की वजह से दोनों उँगलियाँ अपना रास्ता बनते हुए अन्दर चली गई। मैं जैसे आसमान में थी। मेरा नशा बढ़ रहा था। काजल ने अब अपनी उँगलियाँ अन्दर बाहर करनी शुरू कर दी थी। मुझे मजा आ रहा था और मैं एक लय में उसका साथ देने लगी। सच उस वक्त काजल से चुदवाने में मजा आ रहा था। एक तरफ़ काजल मुझे अपनी उँगलियों से चोद रही थी तो दूसरी तरफ़ मैं उसकी जीभ को चूस रही थी। वो बार बार उँगलियों को निकालती और कभी मेरे और कभी अपने मुंह में दे देती। मुझे अपनी चूत का स्वाद अच्छा लग रहा था।
तभी उसने मुझे उल्टा कर दिया और वो गीली उँगलियाँ मेरे पीछे डाल दी। एकदम से डालने पर मुझे कुछ दर्द महसूस हुआ पर मैं हर मजा लेना चाहती थी। कुछ देर अन्दर बाहर करने के बाद अब अच्छा लगने लगा। अब मुझ से रहा नहीं जा रहा था। काजल मुझे पागल कर रही थी। कुछ देर के बाद काजल ने अपनी चूत मेरे मुंह की तरफ़ कर दी और अपना मुंह मेरी चूत की तरफ़, यानि ६९ की पोसीशन में आ गई। उसकी चूत से एक अजीब सी महक आ रही थी। उफ़!! वो भी गीली थी, बुरी तरह से।
अचानक मैंने काजल की गरम जीभ अपने अन्दर महसूस की। और पता नहीं कब मैं भी उसकी चूत को चाटने लगी। शायद मैं वो सारा रस चाट लेना चाहती थी जो उसके अन्दर से निकल रहा था। काजल कभी मेरी चूत चाट रही थी कभी मेरे पीछे अपनी जीभ डाल रही थी। मैंने भी पागलों की तरंह उसकी चूत में अपनी जीभ डाल अन्दर बाहर करने लगी। अचानक मुझे लगा कुछ निकलने वाला है। और आह … आह! मेरे अन्दर से पानी निकला आह आह काजल चूस ले चाट दे मेरी चूत चाट जोर जोर से चाट आह आह! पता नहीं क्या क्या बकने लगी मैं। और पानी की तेज धारा के बाद मेरा पूरा जिस्म कांपा और शांत हो गया। उसके बाद मैंने काजल की चूत को चाट कर उसे भी शांत किया।
हम कुछ देर ऐसे ही लेटी रही। उसके बाद हमने अपने कपड़े पहने और एक जोरदार किस करने के बाद सो गयी। मेरे मन में अजीब सी खुशी थी। दोस्तो, उसके बाद हमने बहुत बार एन्जॉय किया। मैं वो सब भी आपके साथ शेयर करुँगी। अब मैं शादीशुदा हूँ। मैंने अपने हसबंड को सब कुछ बता दिया है और वो भी चाहते हैं कि मैं उनके सामने किसी लड़की के साथ सेक्स करूँ।
मुझे बताना मत भूलना कैसा लगा मेरा अनुभव। Antarvasna
मेरी योनि के Hindi Porn Stories अन्दर घूमती उंगली ने मुझे मदहोश कर रखा था… स्स्स्स्सईई मेरी सिसकारी निकलने लगी… वो धीरे धीरे उन्गली अन्दर बाहर कर रहा था… पर मैं इतनी मस्त हो गई थी कि ना तो एक उंगली से गुजारा हो रहा था और ना ही इतनी कम स्पीड में अब मजा आ रहा था…
आज इन को क्या हो गया? इतनी देर से एक ही उंगली से करे जा रहे थे और वो भी इतनी धीरे धीरे… मेरी कामुकता इतनी बढ़ गई थी कि मैंने अपने आप ही उनकी दो उंगलियाँ पकड़ कर अपनी चूत में घुसेड़ कर जोर जोर से पेलने के लिये जैसे ही उनका हाथ पकड़ा… मैं सन्न रह गई… यह तो बड़ा मुलायम सा हाथ था… मेरे पति का हाथ तो घने बालों से भरा पड़ा है.
तभी मेरा दिमाग झन्नाया… मुझे याद आया कि मैं तो अपने एक रिश्तेदार के घर शादी में शामिल होने आई थी और खाली जगह देख कर कोने में सो गई थी। कमरे में अन्धेरा था, मैंने उसके हाथ को पकड़ कर दूर करना चाहा लेकिन मैं उस की ताकत के सामने हार गई, मेरा बदन कांपने लगा।
इस कमरे में तो मेरे आने से पहले तीन औरतें और एक छोटा सा बच्चा सो रहा था और कमरे में लाइट जल रही थी तो फ़िर यह कौन है? कब अन्दर आया और इतनी हिम्मत कर ली कि मेरे साथ यह सब?
मैं उस को पहचानने के लिये अपना हाथ उसके चेहरे पर ले गई तो वो मेरे कान में फ़ुसफ़ुसाया- मम्मी, मैं हूं बिल्लू!
मैं सन्न रह गई… यह मेरा अपना 12वीं में पढ़ने वाला 18 साल का बेटा ही मेरी चूत में उंगली घुसेड़ कर मज़े लूट रहा था।
“कमीने, यह तू क्या कर रहा है… शरम नहीं आती… अपनी माँ के साथ…? चल हटा अपना हाथ!” मैं उसके कान में फ़ुसफ़ुसाई।
“मम्मी, प्लीज… अब रहने दो ना… मजा आ रहा है।”
मैंने उसको समझाने की पूरी कोशिश की लेकिन वो अपनी जिद पर अड़ा रहा तो मैंने उस को जो कुछ भी करना है जल्दी करने को कहा।
बिना वक्त गवांये वो मेरे ऊपर आया… मेरी गीली चूत पर अपना लण्ड रखते ही धक्के मारने चालू किये, 6-7 धक्कों के बाद वो शान्त हो गया।
अगले दिन 11 बजे ऑटो से मैं और बबलू घर आये, रास्ते में हमारे बीच कोई बातचीत नहीं हुई। चूंकि उस दिन वर्किंग-डे था सो बबलू के पापा पड़ोस में चाबी देकर गये थे, पड़ोस से चाबी ले कर दरवाजा खोलने के बाद मैं अपने बेडरूम में गई और बबलू अपने रूम में। बैग से कपड़े निकाल कर मैं बाथरूम में चली गई।
कपड़े धोने और नहाने के बाद मैं हमेशा की तरह पेटिकोट और ब्लाउज पहनकर अपने बेडरूम में साड़ी पहनने के लिये गई। साड़ी पहनने से पहले मैं आगे की तरफ़ झुक कर तौलिए से अपने बाल सुखा रही थी कि तभी किसी ने पीछे से आ कर मेरी दोनों चूचियाँ जोर से भींच ली, उस का तने हुये लण्ड का स्पर्श मैंने अपनी गांड की दरार पर महसूस किया।
एक सेकेन्ड के लिये चौंकी… फ़िर अहसास हुआ कि बबलू के अलावा घर में कोई और है भी नहीं…
मैंने गुस्से में पलट कर जोर से उसके गाल पर एक जबरदस्त तमाचा जड़ा। उसने मेरी चूचियाँ इतनी जोर से दबाई थी कि मेरे आंसू निकल गये। वो मेरे तमाचे से बौखला गया… उसका चेहरा लाल हो गया… और जोर से चिल्ला कर बोला- चाचा से तो खूब करवाती हो… चिल्ला चिल्ला कर… मैं भी तो वही कर रहा था… फ़िर मारा क्यों…??
उस की बात सुनकर मेरी जबान कुछ कहने से पहले मेरे हलक में अटक गई… मैं फटी आंखों से उस को देखती रही… मैं अवाक रह गई।
“बोलो ना! अब क्यों नहीं बोलती कुछ?” उसने गुस्से में कहा।
थोड़ी देर खामोश रहने के बाद मैंने थोड़े गुस्से और थोड़े प्यार के लहजे में उस से कहा- क्या बकवास कर रहा है तू? कौन चाचा और कैसा चाचा?
“सहारनपुर वाले चाचा और कौन? जब वो पिछली बार जब वो दोपहर में आये थे, मैंने सब अपनी आखों से देखा था… पहले दिन अपने बेडरूम में और आपने जबरदस्ती उन को एक दिन और रोका था… वही करने के लिये और दूसरे दिन गेस्ट रूम में…! मैंने दोनों दिन देखा था और उन के जाने के बाद आप बहुत उदास भी हुई थी।” उस ने उसी गुस्से वाले अन्दाज में कहा।
मेरे पैर काम्पने लगे… मैं सिर झुका कर बेड पर बैठकर सोचने लगी… अब क्या करूं…???
उसको समझाने के लिये हिम्मत कर मैंने उस की तरफ़ देखा… पर उस की निगाहें दूसरी जगह टिकी देख मैंने अपने पेट के नीचे देखा… मेरे पेटिकोट के नाड़ेघर के पास के कट की सिलाई उधड़ी होने के कारण मेरा पूरा झांट प्रदेश साफ साफ दिखाई दे रहा था।
मैं जल्दी से उस जगह पर अपना हाथ रख कर खड़ी हुई और पेटीकोट को घुमा कर नाड़ेघर को साइड में कर उसको पकड़ कर अपने साथ बिस्तर पर बिठाया और उस को समझने लगी- देख, देवर भाभी और जीजा साली के रिश्ते में कभी कभी ऐसा हो जाता है… पर तू तो मेरा बेटा है… मां बेटे के रिश्ते में यह सब पाप होता है… गाली भी होती है।
“झूठ मत बोलो मम्मी! राजू भी तो अपनी मम्मी के साथ कभी कभी करता है।” बबलू ने झल्ला कर कहा।
राजू बबलू की बुआ का लड़का जो बबलू से एक साल छोटा है.
इस बात से मैं और चौंकी और पूछा- तुझे कैसे पता ये सब…?
वो जब रात को सोने की जगह नहीं मिली तो राजू और मैं उस कमरे में गये जहाँ आप सो रही थी… आप का एक पैर मुड़कर एक साइड में और दूसरा पैर सीधा था, जिस वजह से आपकी साड़ी पूरी ऊपर सरकी हुई थी और पूरी नंगी लेटी हुई थी। मैंने जल्दी से लाइट बन्द की और राजू का हाथ पकड़ कर नीचे ले गया। राजू ने नीचे आकर कहा कि आप की चूत बहुत सुन्दर है और उसकी मम्मी की तरह काली नहीं है।
जब मैंने उस से पूछा कि तेरी मम्मी तो गोरी है तो फ़िर उनकी चूत काली कैसे हो गई? और तुझे कैसे पता?
तो उसने बताया कि पहले वो छुप छुप कर गुसलखाने में नहाते समय दरवाजे के नीचे की झिरी से देखता था और एक दिन उसकी मम्मी ने उसको पकड़ लिया और तब से वो कभी कभी अपनी मम्मी के साथ वही करता है जो चाचा ने आपके साथ किया था। उसने यह भी बताया कि उन के पड़ोस में रहने वाले जडेजा अंकल के साथ भी उस की मम्मी वही करती है।
उस ने मुझ से कहा कि मैं ऊपर जा कर चुपचाप आप की बगल में लेट जांऊ और अपनी उंगली में थूक लगा कर आप की चूत में डाल कर धीरे-धीरे घुमाऊँ… फ़िर आप अपने आप मुझे अपने ऊपर लिटा कर करने को कहोगी… लेकिन आपने तो ऐसा कुछ नहीं किया… उलटा रात को मेरा हाथ झटक दिया और अभी मेरे गाल पर तमाचा जड़ दिया…क्यों??
अब मैं उस को क्या जवाब देती…? कुछ समझ में नहीं आया। अपनी उस गलती को याद करने लगी जब घर में उसके होते मैंने अपने देवर से… पर मैं करती भी क्या…? मेरे देवर का लण्ड था ही ऐसा जो एक बार देख ले चुदाये बिना रहना मुश्किल और एक बार चुदवा लिया तो जहन में आते ही चूत कुलबुलाने लगती है।
मेरी शादी के चार या पांच महीने बाद एक दिन सहारनपुर में उन्हीं के घर में मौका पाकर उसने मुझ से सम्बन्ध बनाने चाहे…
मेरे टालमटोल करने के बावजूद उसने एक रात मेरे कमरे में आ कर अपनी हसरत पूरी करनी चाही… और पूरी हो भी गई लेकिन बेचारे को आधे में ही भागना पड़ा क्योंकि दूसरे कमरे में लाइट जलने पर वो मेरे ऊपर से उतर कर बाहर भाग गया था। जिस कमरे में मैं सोई थी और बगल वाले कमरे (देवर और उनकी बहन का कमरा) के बीच में छत के पास एक रोशनदान था जहाँ से लाइट जलने का पता चला।
उस रात जो आठ दस धक्के मेरी चूत पर पड़े थे, उन को मैं आज तक नहीं भूल पाई हूँ। ऐसा लग रहा था जैसे एक के पीछे एक दो दो लण्ड अन्दर जा रहे हों और बाहर निकल रहे हों। एक दिन पहले पीरियड से फ़्री होने के कारण ठुकाई के लिये आतुर मेरी चूत और ऊपर से आठ दस धक्कों की रगड़ से और भड़की आग की तड़प से मैं पूरी रात सो नहीं पाई थी।
एक हफ्ता वहाँ रहते हुये हम दोनों ने बहुत कोशिश की लेकिन असफलता ही हाथ लगी और एक दिन मेरे पति आ कर मुझे अपने साथ दिल्ली ले आये।
आज से दो महीने पहले (जिस दिन की याद बबलू ने आज दिलाई) दोपहर को खाने के वक्त वो हमारे घर आये अपनी लड़की से कोई कोर्स करवाने के सिलसिले में मेरे पति से सलाह लेने!
उसको देखते ही मेरी काम पिपासा जाग गई… अठारह साल पहले पड़े आठ दस धक्कों की रगड़ याद आते ही चूत रानी मस्तानी हो चली थी। मेरे पति उस वक्त आफिस गये थे। बबलू खाना खाकर अपने कमरे में लेटा था। मैंने दो थालियों में खाना परोस कर डायनिंग टेबल पर रखा और दोनों (देवर और मैं) बैठकर खाना खाने लगे।
खाना खाते खाते मेरी निगाह बार-बार उसकी टांगों के बीच अटक जाती, जिसे भांप कर देवर ने मेरे पैर पर पैर मारा… मैंने जब उसकी तरफ़ देखा तो उसने मैक्सी ऊपर सरकाने का इशारा किया।
मैंने आंख और सिर हिला कर नहीं में इशारा किया तो वो कुर्सी और नजदीक खिसका कर अपना एक पैर मेरी मैक्सी के अन्दर डालकर मेरी टांगों के बीच में लाकर पैर के अंगूठे से मेरी चूत टटोलने लगा… और उसके आग्रह पर मैंने कुर्सी से उठकर अपनी मैक्सी ऊपर कर उसको अपनी… के दर्शन कराये और बैठ कर खाना खाने लगी।
मेरा देवर तेज दिमाग वाला इंसान है, उसने लुंगी के नीचे कुछ नहीं पहना था, वो बीच में से लुंगी फ़ैलाकर अपने अजूबे लण्ड को निकाल कर मेरी तरफ़ देखते देखते खाना खाने लगा। खाना खत्म करने के बाद मैं किचन से आम लेकर आई।
किचन का काम निपटा कर मैं बाहर आकर उसके पास बैठ कर उसके घर परिवार के बारे में जानकारी लेने लगी।
“तुम बैठक में जाकर सो जाओ, मैं अपने कमरे में जाकर थोड़ा सुस्ता लूं!” कहते हुये जैसे ही मैं उठी, उस ने खींच कर मुझे अपनी गोद में बिठा लिया, एक हाथ से मेरी एक चूची दबा दी।
“पागल हो गये हो देवर जी! जवान लड़का घर में है… छोड़ो ना…” मैंने विनती की।
उसने मुझे छोड़ दिया। मैं उठ कर अपने कमरे में चली गई। अन्दर जा कर मुझे पछतावा होने लगा। अठारह साल बाद ऊपर वाले ने मौका दिया था और मैंने गंवा दिया। मैं कुछ सोच कर पलटी ही थी कि देवर ने मुझे अपनी बाहों में ले लिया।
मन ही मन बल्लियों उछलते हुये मैंने नाटक करते हुये कहा- रुको देवर जी, मैं बबलू को देख कर आती हूँ।
“उसकी चिन्ता तुम मत करो मेरी जानेमन भाभी… मैं देख कर आया हूँ… वो अपने बिस्तर पर उल्टा हो कर सो रहा है।”
“छोड़ो तो सही… दरवाजा तो बन्द कर दूं!” मैंने कहा।
देवर बाहों में पकड़े पकड़े मुझे दरवाजे के पास लाया, अपने आप कुन्डी बन्द की और उसी अवस्था में ले कर बिस्तर पर आया… मुझे लिटाया… मेरी मैक्सी ऊपर सरका कर मेरे पैरों को फ़ैलाया और एक झटके में मेरी चूत की चुम्मी ले कर बोला- सच भाभी, भगवान की कसम, इन अठारह सालों तक कैसे कैसे बरदाश्त किया… उस दिन जल्दी जल्दी में कुछ मजा नहीं आया और मैंने तो तुम्हारी फ़ुद्दी के दर्शन भी नहीं किये थे।
मेरी चूत रस भरी की तरह अन्दर से भर चुकी थी, मैं किसी तरह भींच भींच कर पानी को बाहर निकलने से रोक रही थी। मैं आज तसल्ली से उसके लण्ड को देखना चाहती थी कि उस का आकार ऐसा क्यों है…??
मैं उठ कर बैठते ही अपना हाथ लम्बा कर उसकी लुन्गी के अन्दर ले गई… उसके लण्ड को पकड़कर लुन्गी से बाहर निकाल कर नजदीक से देखने लगी।
उसके लण्ड का टोपा नुकीला, टोपा खत्म होते ही (रिंग के पास से) फूला हुआ, 2 1/2 इंच के बाद जैसे 1/2 इंच की गांठ बंधी हो (पूछने पर देवर ने बताया कि बचपन में फोल्डिन्ग पलंग में उसकी लुली फंस गई थी, सात टांके आये थे, जिस कारण टांके वाली जगह से वो एक दम पतला और गिठा के आकार का हो गया था), उसके बाद तीन इंच पीछे की तरफ़ मोटा और जड़ के पास से आधा इंच पतला यानी कुल मिला कर करीब सात इंच लम्बा।
आज मुझे पता चला कि जिस रोज अठारह साल पहले इसने पहली बार मेरी चूत में डाला था उस वक्त मुझे क्यों अजीब लग था।
मेरे हाथ में ही उसका लण्ड झटके मारने लगा… इधर बैठे-बैठे मेरी चूत से फ़क से पानी पेशाब की तरह बाहर निकल गया और मेरे नीचे बेड सीट गीली हो गई। मेरी वासना पूरी तरह जाग चुकी थी…मैं बेड पर लेटी और बोली- आओ ना देवर जी… जल्दी करो… कहीं बबलू जाग ना जाये।
मैं आज अठारह साल पहले की भड़की आग को शान्त करना चाहती थी तसल्ली से।
देवर ने नीचे खड़े-खड़े मेरी चूत पर हाथ फ़ेरते हुये एक उंगली अन्दर सरका दी।
मैं बरदाश्त नहीं कर पाई… मैं समय बरबाद नहीं करना चाहती थी… उस को जोर से खींचते हुये मैंने अपने ऊपर लिटा कर कहा- बड़े कमीने हो तुम…! करते क्यों नहीं…??
“इतनी जल्दी क्या है मेरी जान…? तुमने तो मेरा तसल्ली से देख लिया… मैं भी तो देखूँ अपनी भाभी की मस्तानी फ़ुद्दी को…” वो बड़े इत्मिनान से बोला।
मेरी चूत से लगातार बूंद बूंद कर पानी रिस रहा था। हर औरत समझ सकती है कि ऐसा कब होता है और ऐसा होने पर अगर लण्ड नहीं मिले तो वो कुछ भी कर सकती है… कुछ भी। पर मैंने प्यार से काम लेना ही ठीक समझा और उसकी छाती पर उंगली फेरते हुए कहा- एक बार कर लो ना… फ़िर जी भर के देख लेना मेरे राजा।
“क्या कहा भाभी… जरा एक बार फिर बोलना जरा!” देवर बोला।
“मेरे राजा… एक… बार… कर लो… मेरी नीचे वाली तड़प रही है… उसके बाद जी भर कर जैसे मर्जी हो देखते रहना…” आधा बेशर्मी और आधा शरमाते हुये मैंने कहा और उसकी छाती में अपना मुँह छुपा लिया।
देवर- हाय मेरी जान… मुझे पता है तुम्हारी फ़ुद्दी टपक रही है… एक बार देखने दो…
मुझे खीज सी होने लगी थी- क्या है देवर जी… तंग मत करो ना… बोला तो है एक बार कर लो फिर जितना मर्जी देख लेना… कहते हुये मैं लेटे लेटे नीचे से अपने आप को एडजस्ट करने के बाद फ़िर कहा- अब नहीं सहा जा रहा है देवर जी… क्यों मेरा मजा खराब कर रहे हो… करो ना… नहीं तो मैं ऐसे ही झड़ जाऊँगी…
“अच्छा यह बात है!” कहते हुये देवर ने पहले मेरी चूत के बाहर रिसे प्री-कम से अपने लण्ड के टोपे को गीला किया और फ़िर रखते ही गपा…क से घुसेड़ दिया।
मैं शायद इसी वक्त के लिये अटकी थी… मैं तो नीचे से फ़ुदकने लगी… आआआआ अभी आधा लण्ड ही अन्दर घुसा था कि मैं तो झड़ गई। मेरा मूड खराब हो गया…
मेरा बिगड़ा चेहरा देख देवर बोला- अब क्या हुआ…? जो तुम चाहती थी, वो तो हो गया फ़िर…
“बहुत गन्दे और कमीने हो तुम देवर जी!” मैंने कहा- कब से बोल रही थी… तुम हो कि माने ही नहीं, अब तुम भी जल्दी से अपना पानी झाड़ो और दूसरे कमरे में चले जाओ।
“पर हुआ क्या, कुछ बताओगी भी?” देवर ने पूछा।
“मैं तुम्हारे डंडे के साथ मज़े लेना चाहती थी पर तुमने तो सारा काम ही खराब कर दिया!” मैंने कहा।
“बस इतनी सी बात…! अरे मेरी जान…! सब्र करो! ऐसा मजा दूंगा कि भाई साहब को भूल जाओगी और सपने में भी याद करोगी तो चूत से पानी टपकेगा!” देवर ने कहा।
मेरे ऊपर से उतरने के बाद उसने मेरी मैक्सी से मेरी चूत को साफ़ किया और दोनों पैरों के बीच में आने के बाद मेरे चूतड़ों के नीचे अपनी दोनों हथेलियों को रख कर अपना मुँह मेरी चूत पर रखकर चाटने लगा। कुछ ही पलों में मैं उत्तेजित हो गई… चूत चटवाने का यह मेरा पहला अनुभव था… लाजवाब अनुभव!
मेरी चूत के अन्दर फ़िर से सरसराहट होने लगी।
आगे क्या हुआ? जानने के लिए कहानी का अगला भाग : बेटा और देवर-2 Hindi Porn Stories
दोस्तो! मैं मोहित आगरा से। एक सच्ची कहानी Sex Stories बताने जा रहा हूं।
10 साल पहले जब मैं 19 साल का था, मेरे दूर के रिश्ते में चाचा चाची बरेली में रहते थे।
एक दिन पता चला कि वो हमेशा के लिये आगरा में आ गये हैं।
मैं और घर के सभी लोग उनसे मिलने गये।
लगभग 1 साल पहले उनकी लव मैरिज हुई थी पर कोइ बच्चा नहीं हुआ।
चाची की उमर 30 साल होगी।
मैंने चाची को देखा तो देखता ही रह गया।
लम्बी, गोरी चिटटी चाची का भरा बदन, चौड़ी कमर, बाहर निकले उत्तेजक हिप्स और ब्लाउज से बाहर झांकते बड़े-बड़े स्तन मेरे मन में हलचल मचाने लगे।
मेरे मन में उनको नंगी देखने और चोदने का ख्याल आने लगा।
मेरे चाचा अपना व्यापार करने की सोच रहे थे।
मैं अक्सर उनके घर आया जाया करता था। मैं चाची से खूब घुल मिल गया था और वो भी मेरा काफ़ी ख्याल रखती थी।
एक दिन चाचा को बाहर जाना था तो चाची बोली कि उन्हें रात को अकेले में डर लगेगा।
चाचा ने मेरी मां से बात की तो मां ने मुझे कहा- तुम रात को चाची के पास सो जाया करो।
मैं रात को 9 बजे चाची के पास पहुंच गया।
चाची बोली- मोहित, तुम्हारे लिए अलग बिस्तर लगायें या तुम मेरे साथ ही सो जाओगे?
मैंने कहा- जैसा आप ठीक समझें। मैं तो कहीं भी सो जाऊंगा।
चाची बोली- तो तुम इसी बिस्तर पर सो जाना।
फ़िर चाची अपने काम में लग गयी।
रात को 10 बजे चाची कमरे में आयी और साड़ी उतारते हुए बोली- मोहित, तुम अखबार पढ रहे हो, मैं सो रही हूं, जब तुम्हें नीन्द आये तुम सो जाना।
थोड़ी देर में मैंने लाईट बंद की और लेट गया।
मुझे नींद नहीं आ रही थी।
काफ़ी देर बाद चाची उठकर लाईट जला कर बाथरूम गयी और वापिस आकर लेट गयी।
मैं जाग रहा था लेकिन आंखें बंद करके लेटा था।
कुछ देर बाद चाची बोली- मोहित तुम सो रहे हो?
मैंने अचानक जगने का बहाना किया और बोला- क्या हुआ चाची?
चाची एकदम मुझ से लिपट गयी और बोली मुझे डर लग रहा है।
मैंने कहा- डर कैसा?
पर मुझे करंट सा लगा जब उनके बूब्स मेरी छती से छुये।
उनकी एक टांग मेरे ऊपर थी।
मैंने भी उनकी टांग पर एक पैर रख दिया और उनकी पीठ पर हाथ रखते हुए कहा- सो जाओ चाची।
चाची धीरे धीरे मेरी बांहों में सिमटती जा रही थी और मुझे मजा आ रहा था।
धीरे से मैंने उनके हिप्स पर हाथ रखा और धीरे धीरे सहलाने लगा।
चाची को मजा आ रहा था।
फ़िर चाची सीधी लेट गयी और मेरा हाथ अपने पेट पर रखते हुए कहा- तुम मुझ से चिपट कर सोना, मुझे डर लग रहा है।
अब मैं भी उनसे चिपट गया और उनके बूब्स पर सिर रख लिया।
मेरा लन्ड खड़ा हो चुका था।
मैं धीरे धीरे उनका पेट औए फ़िर जांघ सहलाने लगा।
तभी चाची ने अपने ब्लाउज के कुछ हुक खोल दिये यह कह कर कि बहुत गर्मी लग रही है।
अब उनके निप्पल साफ़ नज़र आ रहे थे।
मैंने बूब्स पर हाथ रख लिया और सहलाने लगा।
अब मेरी हिम्मत बढ चुकी थी। मैंने उनके बूब्स को ब्लाऊज से निकाल कर मुंह मे ले लिया और दोनो हाथों से पकड़ कर मसलते हुए उनका पेटीकोट अपने पैर से ऊपर करना शुरु कर दिया।
वह बोली- क्या कर रहे हो?
मैंने जोश में कहा- चाची आज मत रोको मुझे!
उनकी गोरी गोरी जांघों को देख कर मैं एक दम जोश मे आ चुका था। उनकी चूत नशीली लग रही थी।
मैंने उनकी चूत को चाटना शुरु कर दिया।
मैं पागल हो चुका था।
मैंने अपने पैर चाची के सिर की तरफ़ कर लिये थे।
चाची ने भी मेरी नेकर को नीचे कर लिया और मेरा लन्ड निकाल कर चूसने लगी।
वह मुझे भरपूर मजा दे रही रही थी।
कुछ देर बाद चाची मेरे ऊपर आ गयी और मैं नीचे से चूत चाटने के साथ साथ उनके गोरे और बड़े बड़े हिप्स सहलाने लगा।
चाची की चूत पानी छोड़ गयी।
अब मैं और नहीं रह सकता था, मैं उठा और चाची को लिटा कर, उनकी टांगें चौड़ी करके चूत में लन्ड डाल दिया और चाची कराहने लगी।
मैं जोर जोर से धक्के लगाने लगा।
चाची ने मुझे कस के पकड़ लिया और कहने लगी- मोहित एसे ही करो, बहुत मजा आ रहा है, आज मैं तुम्हारी हो गयी, अब मुझे रोज़ तुम्हारा लन्ड अपनी चूत में चाहिये. एएऊउ स्स स्सी स्स्स आह्ह्ह ह्म्म आय हां हां च्च उई म्म मा।
कुछ देर बाद मेरे लन्ड ने पानी छोड़ दिया और चाची भी कई बार डिस्चार्ज हो चुकी थी।
उस रात मैंने तीन बार अलग अलग ऐन्गल से चाची को चोदा।
चाची ने भी मस्त हो कर पूरा साथ दिया।
तब से जब भी चाचा बाहर जाते तो हम दोनो रात को खूब मजे करते।
हमारा यह रिश्ता दो-तीन साल तक चला।
इसी बीच चाची ने एक लड़का और एक लड़की को जन्म दिया।
चाची ये दोनो मेरे ही बच्चे बताती हैं और यह बात कोइ और नहीं जानता।
कैसी लगी मेरी सच्ची कहानी? Sex Stories
Antarvasna पर कहानियाँ पढ़ने के बाद मैंने भी एक कहानी लिखने की कोशिश की। यह एक सच्ची कहानी है। मेरी कहानी में एक नया अनुभव है
जो मेरा एक सबक है और मेरा पहला सेक्स है।
यह बात करीब छः साल पुरानी है जब मैं अपनी टी वी की दुकान पर बैठता था। मेरी दुकान पर एक औरत टीवी सुधरवाने आई। वो करीब बाईस साल की थी। मैंने उसे देखा तो वो गाँव से आई लगती थी। उसके टीवी में कुछ समस्या थी इसलिए वो टी वी शहर में लेकर आई। मैंने टीवी को देखा तो लगभग ठीक है बस बिजली सप्लाई में थोड़ी खराबी थी। मैंने उसे सौ रुपए का खर्चा बताया।
उसने कहा- मेरे पास रुपए कम हैं, आप इसे ठीक करके रखो। मैं इसे मंगल को ले जाउँगी।
मैंने फिर उसकी तरफ देखा तो वो मुझे कुछ परेशान लगी। अचानक उसने कहा- आप टीवी रविवार को मेरे घर पर ले आना ! मैं रुपए वहीं पर दे दूंगी ! मेरा घर ग्राम ……… सिहोर में है। और उसने फिर अपना मोबाइल नम्बर दे दिया।
फिर मैंने उसको ऊपर से नीचे तक देखा, वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी। उसके स्तन लगभग अमरुद के बराबर थे रंग थोड़ा सांवला और होंट गुलाबी न होकर कुछ गहरे रंग के थे पर एक सेक्स की अपील उसमें कूट कूट कर भरी थी। मैंने सोचा कि अब तक इसे मैं क्यों नहीं देख रहा था। इतने में चाय वाला चाय लेकर आ गया तो मैंने उससे चाय के लिए पूछा। पहले तो वो मना करने लगी पर मेरे ज्यादा जोर देने पर मान गई। फिर हम चाय पीने लगे। मैं चाय पीते पीते उसको ही देख रहा था। शायद उसको भी पता लग गया था कि मैं उसमें दिलचस्पी ले रहा हूँ तो वो भी थोड़ी सी खुल गई।
मैंने उससे पूछा- घर में कौन कौन है?
तो उसने कहा- मेरी सास और मेरे पति हैं, पति ड्राईवर है जो अक्सर बाहर रहता है, सास काम पर जाती है, मैं घर पर रह कर घर का काम करती हूँ।
उसने कहा- रविवार को आप ग्यारह बजे तक आना ! बिजली साढ़े दस तक आती है।
मैंने कहा- समय मिला तो आ पाउंगा और घर पर आने के लिए 50 रुपए अलग से देने होंगे।
इस पर वो कहने लगी- मेरे पास इतने रुपए तो नहीं हो पाएँगे, आप ही कोई रास्ता सोचो !
मैं उस वक्त दुकान पर था तो मैंने कहा- आपके घर पर आकर ही बात करेंगे !
मेरे ऐसा कहने पर वो मेरा मोबाइल नम्बर मांगने लगी तो मैंने मना कर दिया। पर वो बहुत ही जिद करने लगी तो मैंने अपना मोबाइल नम्बर दे दिया।
इसके बाद वो चली गई और मैं अपने काम में लग गया और बात मेरे दिमाग से उतर गई। पर रविवार को लगभग साढ़े ग्यारह बजे एक फोन आया- आप आ रहे हैं क्या ?
मैंने पूछा- आप कौन बोल रही हैं?
तो वो कहने लगी- मैं नीतू बोल रही हूँ !
मैं नीतू नाम से किसी को नहीं जानता था, मैंने कहा- मैं आपको पहचान नहीं पा रहा हूँ !
तो उसने कहा- आप टीवी लेकर आने वाले थे ना !
तब ध्यान आया कि यह वही औरत है। फिर मैंने कहा- आज तो मैं शायद नहीं आ पाउँगा क्यूंकि मैं आज भोपाल जा रहा हूँ।
तो वह कहने लगी- आपके रास्ते में ही तो पड़ेगा, आप थोड़ा समय निकाल कर आ जाओ !
तो मैंने जबाब दिया- मैं देखता हूँ !
फिर मैंने सोचा कि जाना ठीक रहेगा या नहीं !
इसी तरह सोचते हुए लगभग बीस मिनट हो गए। फिर सोचा- होकर तो आते हैं, जो होगा देखा जाएगा। इस तरह मैं उसके घर पहुँच गया। वो वहाँ पर बिल्कुल अकेली थी। मैं अकेला था तो टीवी तो नहीं ले गया तो उसने पूछा- टीवी कहाँ पर है?
मैंने कहा- मेरे साथ कोई नहीं था इसलिए टीवी तो नहीं ला पाया, वैसे टीवी तो सुधार दिया है, आप उसे ले आना !
तो वो मुझे पैसे देने लगी तो मैंने कहा- दुकान पर दे देना !
तो वो कहने लगी- मेरे पास पूरे पैसे नहीं हैं, आप अभी इतने ही रख लीजिये, मैं बाकी आपको दे दूंगी।
फिर वो चाय बनाने लगी, मैं वहीं पर बैठ गया और उससे बातें करने लगा। बात ही बात में चर्चा निकली- आपके पति तो बहुत दिनों में आ पाते होंगे ?
तो वो थोड़ी सी भावुक हो गई और कहने लगी- वो हमेशा ही बाहर रहते हैं और मैं जैसे तैसे घर का खर्चा चलाती हूँ, सारी तनख्वाह भी शराब में उड़ा देते हैं। अभी भी वो दो महीने से घर नहीं आये हैं।
यह कह कर वो रोने लगी तो मैं उसे चुप करने की कोशिश करने के लिये उसके पास गया और चुप कराने लगा तो वो मुझसे ही चिपक गई और और जोर जोर से सुबकने लगी।
यह सब अचानक हुआ, मैं तो एकदम ही उसके करीब था और वो मुझसे चिपक कर खड़ी थी। मैं उसे शान्त करने के लिये उसके बालों में हाथ फ़िराने लगा तो वो मुझसे और ज्यादा चिपक गई। अब तो मैं भी अपने को रोक नहीं कर पा रहा था, मैंने उसको धीरे धीरे सहलाना शुरु कर दिया। उसने भी कोई विरोध नहीं किया। मैंने धीरे से उसके होटों को चूम लिया, उसने भी मुझे जोरदार चुम्बन किया।
फिर तो मैंने कोई देर नहीं की और उसके कपड़ों को धीरे धीरे निकलना शुरु कर दिया। वो धीरे धीरे नारी सुलभ लज्जा के मारे सिमटी जा रही थी पर उसको भी मैं शायद पसंद आ गया था, इसी कारण वो भी धीरे से कोई शरारत कर देती थी जिससे मै और ज्यादा जोश में आ रहा था। मैंने उसके चुचूक को मुँह में ले लिया तो वो मारे उत्तेजना के सिसक उठी और मेरे कपड़ों को निकालना शुरु कर दिया।
फ़िर तो हमारे ऊपर कोई सीमा, कोई बन्धन नहीं रहा। मैंने उसके वस्ति-क्षेत्र पर एक जोरदार चुबन ले लिया और वो तो बहुत ही जोश में आ गई और मेरे शिश्न को हाथ में लेकर अपने योनिद्वार पर रगड़ना शुरु कर दिया। उसकी योनि से सम्पर्क होते ही मेरे अंदर एक जवालामुखी सा धधकने लगा और मैंने उसकी योनि के पास एक जोरदार चुम्बन ले लिया। इतना करने से तो उसने एकदम से ही मेरे शिश्न को हाथ में लेकर अपनी योनि के अन्दर डाल लिया और मुझसे चिपक गई, टांगों को मेरी कमर पर लपेट लिया और नीचे से अपनी कमर को हिलाने लगी। फिर तो मैंने भी देर न करते हुए अपने आपको पूरा उसके समर्पित कर दिया और जोरदार धक्के लगाने शुरु कर दिए। हर शॉट के साथ वह और ज्यादा उग्र होने लगी।
मैंने भी इस काम को अब अपने तरीके से करने की कोशिश करते हुए अपने धक्के एक लयबद्ध तरीके से लगाने शुरू किए। मैं धक्के लगाते लगाते अचानक रुक जाता और उसके बदन से खेलने लगता। इसी तरह हमारी कामातुर आवाजों से कमरा गूंजने लगा। मैं उसके कभी इस चुचूक को तो कभी दूसरे चुचूक को चूस रहा था। इस बीच में वह दो बार चरमोत्कर्ष से झड़ चुकी थी मगर मैं अभी भी नहीं झड़ा था।
इसके पहले उसके पति ने कभी उसे इतना संतुष्ट नहीं किया था। मैं भी अब तेजी लाया, वो मारे उत्तेजना के सिसकारी पे सिसकारी भर रही थी।मैंने उसे अब अपने ऊपर ले लिया और उसके दूध पकड़ के उसे अपने लिंग पर ऊपर-नीचे होने का कहा। वह सेक्स का पूरा मजा ले रही थी। मैं भी अब उत्तेजना के मारे चरमसीमा पर था। अचानक हम दोनों ने एक दूसरे को कस के जकड़ लिया और हम दोनों एक ही साथ स्खलित हो गए। वो मेरे ऊपर ही लेटकर मेरे होंठों को चूसती रही और बोली- आज मैं पहली बार तीन बार झड़ी हूँ, यह दिन मुझे हमेशा याद रहेगा।
उसके बाद हमारी चुदाई का एक राउंड और चला, वो पूरी तरह से थक चुकी थी। हमने उठकर कपड़े पहने। उसने एक बार और चाय बनाई। चाय पीते पीते वो बोली- मन तो नहीं कर रहा है आपको वापस भेजने का ! मगर मेरी सास काम से आने वाली है।
मैं भी लेट हो रहा था तो मैं भी उससे अगली बार मिलने का कहते हुए वापस घर आने लगा तो वो बोली- जाने से पहले मुझे एक बार चूमने तो दो !
फिर उसने मुझे बाहों में लेकर मेरे होंठों पर अपने मद भरे होंठ रख दिए।मगर समय का ध्यान रखते हुए मैंने उससे कहा- इस तरीके से तो तुम परेशानी में पड़ जाउंगी क्योंकि तुम्हारी सास भी तो आने वाली है।
मैंने उससे फिर किसी दिन आने का कहते हुए वापिस घर का रुख किया और उससे कहा- तुम मोबाइल से बता देना !
इसके बाद मैंने उसे उसी के घर पर पूरी रात कैसे उसके साथ चुदाई के नए नए आसनों के साथ गुजारी जबकि उसकी सास घर पर ही बगल वाले कमरे में थी।
वो मेरी अगली धड़कती फड़कती चुदाई की Antarvasna कहानी में !
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