Important Notice: 📧 Mail for rent: info@tottaa.com

Massage Girl in Farrukhabad: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Farrukhabad who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Farrukhabad that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Farrukhabad massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Farrukhabad who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Farrukhabad massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Farrukhabad massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Farrukhabad who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Farrukhabad employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Farrukhabad helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Farrukhabad

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Farrukhabad at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

Read Our Top Call Girl Story's

Indian Sex Stories

हेल्लो दोस्तों ! मैं कोई कहानीकार नहीं हूँ,Indian Sex Stories पर यहाँ कई कहानियाँ पढ़ने के बाद मैंने भी अपना एक अनुभव आपको बताने की कोशिश की है. उम्मीद है आपको पसंद आएगी.

बात उस समय की है जब हम एक महानगर के पास के एक छोटे से शहर में रहने गए. वो एक नई कालोनी थी और बाज़ार दूर था इस. उसी समय हमारे पड़ोस के मकान में एक परिवार रहने आया. पति पत्नी और उनका 6 महीने का बच्चा. उस औरत को जब भी देखता था तो मेरे लंड उससे सलामी देने लगता था. क्या ज़बरदस्त माल थी. उमर 21 साल. बच्चा होने के बाद भी अच्छा संवार कर रखा था उसने अपने आप को.

पतली कमर गोरा रंग और भरा हुआ शरीर. मुझे शुरू से ही भरे बदन की ज़बरदस्त आंटियाँपसंद हैं. आंटी को हिन्दी फिल्मों का बहुत शौक था. और मुझसे हर हफ्ते 1-2 फिल्मों की कैसेट मंगवा कर घर पर देखती थी. उसके पति का ट्रांसपोर्ट का बिज़नस था और उन दिनों उनके अहमदाबाद के कई चक्कर लगते थे.
वो महीने में मुश्किल से एक हफ्ता ही घर पे रह पाते थे. पर जब वो घर पर होते थे तो भी मुझसे ही फिल्में मंगवाया करते थे. विडियो लाइब्रेरी वाला उनका दोस्त था, वोह उससे फ़ोन कर देते थे और मैं कैसेट ले आता था. पर जब वो कैसेट मंगवाते थे तो मुझे फ़िल्म की स्पेल्लिंग असली स्पेल्लिंग से अलग लगती थी.

एक दिन अंकल घर आए, मुझसे एक फ़िल्म मंगवाई. अगले दिन मैं कॉलेज से वापस आया तो देखा कि घर पे ताला लगा है तो मैं आंटी के घर चला गया. आंटी ने बताया कि मम्मी को मार्केट जाना था तो वो अभी गई हैं, तुम यहीं इंतज़ार कर लो.

मैंने अंकल के बारे में पूछा तो पता चला कि उनका ट्रक ख़राब हो गया है तो वो सुबह ही चले गए हैं और 10 दिन के बाद आएंगे. आंटी का मूड बहुत ख़राब था. मुझे लगा कि वो अभी रो रही थी. मैंने पूछा तो वो बोली कि तबियत ठीक नहीं है. मुझसे कहा कि मैं नहा कर आती हूँ फिर चाय बना दूंगी.

मैं बैठ गया, अचानक मेरी नज़र उस कैसेट पर पड़ी और मैं सोच ही रहा था कि इस फ़िल्म कि स्पेल्लिंग भी कुछ अलग क्यों है. थोड़ी देर में आंटी नहा कर आ गई और चाय बना लायी. मैंने उनसे पूछा कि आंटी कुछ कैसेट की स्पेल्लिंग ग़लत क्यों लिखी होती है, तो वोह मुस्कुरा दी और बात को घुमा दिया. फिर अंकल और उनके काम के बारे में बात होने लगी तो वो कहने लगी कि अंकल के पास मेरे लिए समय नहीं है और अचानक फिर से रोने लगी और अपना सर मेरे कन्धों पर रख दिया. मैंने उनके कन्धों पे हाथ रखा और चुप कराने की कोशिश करने लगा.

उन्होंनें स्लीवेलेस सूट पहना था और उनकी चिकनी बाहों का स्पर्श मुझे मजा देने लगा. मेरा लंड खड़ा हो गया और पैंट से बाहर आने के लिए मचलने लगा. मैं आंटी को तसल्ली देने लगा और बोला कि आप जैसी सुंदर बीवी को छोड़ कर वो कैसे चले जाते हैं. अगर मैं आपका पति होता तो…

फिर चुप हो गया तो वो बोली कि अगर होते तो… आगे बोलो… मैंने कहा कि तो मैं आपको दिन रात प्यार करता. वो बोली कि फिर तुम्हारे अंकल क्यों नहीं करते… क्या मैं अच्छी नहीं हूँ…?

मैंने कहा कि आप बहुत सुंदर हो…फिर धीरे से मैंने उसके होठों को चूम लिया और हम दोनों धीरे धीरे एक दूसरे को किस करने लगे. धीरे धीरे हमने एक दूसरे को बाहों में भर लिया और ज़ोरदार किस चालू हो गई, होंठ होंठों को चूसने लगे। कभी मेरी जीभ उसके मुहँ में जाती और कभी उसकी जीभ मेरे मुहँ में।

अचानक वो बोली कि तुम पूछ रहे थे ना कि इस मूवी की स्पेल्लिंग ग़लत क्यों है? तो उस मूवी को ओन करो पता चल जाएगा। मैंने वीसीआर में मूवी लगा दी, वो बेड पे बैठ गई और आवाज़ कम कर दी. मैं भी उसके पास जाकर बैठ गया। वो एक नग्न मूवी थी।

ब्लू फ़िल्म देखते देखते हम उत्तेजित हो गए और मैंने किस करते करते उसका कुरता उतार दिया…मेरे हाथ उसकी पीठ पर फिरने लगे……क्या चिकना बदन था उसका…
फिर उसने मेरा शर्ट और बनियान निकाल दी… मैं एक बात बतानी भूल गया कि मैं जिम्नास्टिक का प्लेयर हूँ और इसी वजह से मेरी फिजिक ज़बरदस्त है… फिर धीरे से मैंने उसकी ब्रा खोल दी। उसके मस्त कबूतर फडफडा कर बाहर आ गए और मैं उन्हे धीरे धीरे दबाने लगा

उसने मुझे कस कर बाहों में भर लिया… उसका गर्म चिकना नाजुक शरीर .. मुझे ऐसा लगा जैसे इससे अच्छी फीलिंग कोई हो ही नहीं सकती… फिर मैंने धीरे धीरे उसके बूब्स बारी बारी से चूसना शुरू कर दिया… उसने मस्ती में अपने सर पीछे फ़ेंक दिया और मज़े में सिस्कारियाँलेने लगी… मैंने धीरे धीरे उसकी सलवार का नाडा खोल दिया।

अब मेरे हाथ उसके पूरे नंगे शरीर को सहलाने लगे पैरों से लेकर कंधे तक। और मैं चूसते और चूमते हुए नीचे जाने लगा। फिर मैंने उसकी नाभि पे जीभ फिरानी शुरू कर दी… फिर मैं उसके पैरों की तरफ़ चला गया और उसके पैर के अंगूठे और उँगलियों को एक एक करके चूसने लगा…
इससे वो और उत्तेजित होने लगी और मुझे प्यार से देखकर मीठी मीठी सिस्कारियाँ लेने लगी… फिर मैंने अपनी पैंट उतार दी और उसकी चूत को पैंटी के ऊपर से हलके हलके सहलाने लगा…

उसने फिर मेरे अंडरवियर में हाथ डालकर मेरे लंड को सहलाना शुरू कर दिया…… उसके हाथों के स्पर्श से मेरा लंड लकड़ी की तरह सख्त हो गया और मैंने उसकी पैंटी को अलग करके उसकी मस्त चूत को चाटना शुरू कर दिया और बीच बीच में जीभ को चूत के अंदर डालकर क्लिट्स को चाट लेता था।
थोड़ी देर सिस्कारियाँ लेने के बाद वो मेरा सर पकड़ कर जोर से चूत पे दबाने लगी और चूत को ज़ोर ज़ोर से हिलाने लगी… मैं समझ गया कि वो झड़ने वाली है।

थोडी देर में उसकी चूत से पानी निकलने लगा पर मुझे अच्छा नहीं लगता सो मैंने मुँह हटा लिया। वो धीरे धीरे साँसे लेने लगी… पर मेरी बेचैनी बढती जा रही थी।
मैंने फिर से उसके बूब्स से खेलना शुरू कर दिया और वो फिर से मस्त होने लगी। मैं उसके बूब्स मसलते हुए किस करने लगा और सारे बदन को सहलाता रहा थोडी देर मैं वो फिर से उत्तेजित होने लगी।

फिर उसने पलंग से नीचे बैठकर मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया… सच कहूँ तो ऐसी चुसाई का मजा मुझे और किसी ने नहीं दिया…और मेरी झाटों से खेलने लगी… थोडी देर में मेरे लंड का पानी निकल गया और उसने एक एक बूँद चाटकर साफ़ कर दी… फिर हम दोनों ने एक दूसरे को बाहों में भर लिया और मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा… वो बोली कि यह बड़ा शैतान है… देखो फिर से उठ गया… मैंने कहा कि मैंने तुम्हें कहा ही था कि मैं तुम्हे सारी रात प्यार कर सकता हूँ…

वो बहुत भावुक हो गई और मुझे ज़ोर से गले लगा लिया और मेरे होंठ चूसने लगी… अब हम दोनों पूरे जोश में आ चुके थे। मैंने उसको लिटा दिया और पैरों के बीच मैं आ गया… फिर मैंने उसके चूतड़ों के नीचे 2 तकिये रख दिए और उसके दोनों पैर अपने कन्धों पे रख लिए।
फिर मैं लंड को उसकी चूत पे रगड़ने लगा… वो पागल हो रही थी और लंड अंदर पेलने की मिन्नत करने लगी…… थोड़ा तरसाने के बाद मैंने एक ज़ोरदार झटका लगाया और मेरा लंड आधा उसकी चूत में चला गया… उसकी चूत बहुत टाइट थी…

उसने अपना निचला होंठ दातों में दबा लिया और मुझे रोकने का इशारा किया…… फिर बोली कि दर्द हो रहा हैं आराम से करो… मैं थोडी देर और रुका और फिर दूसरा धक्का लगाया तो मेरा लंड उसकी चूत को चीरता हुआ पूरा अंदर समां गया और वो दर्द से करह उठी।

मैंने फिर थोड़ा इंतज़ार किया… उसका दर्द कम हो गया था और उसने धीरे धीरे अपनी गांड हिलानी शुरू कर दी… .. फिर मैंने भी अपने धक्के तेज़ कर दिए और लंड पिस्टन की तरह अंदर बाहर होने लगा…

उसे भी पूरा मज़ा आ रहा था और वो मेरा साथ देने लगी… थोडी देर बाद मैंने अपने पंजे बेड पर टिका दिए और घुटने सीधे करके ज़ोर ज़ोर से ऊपर नीचे होने लगा… यह एक ज़बरदस्त पोसिशन होती है बिल्कुल ऐसे जैसे दंड बैठक करते हैं… इसमें बहुत मज़ा आता है… और वो झड़ के निहाल हो गई…

मैंने फिर से उसे किस करना शुरू किया… फिर वो बोली कि मैं ऊपर आ जाती हूँ… मैंने कहा ठीक है… तो वो मेरे ऊपर बैठ गई और पैर मोड़कर उछलने लगी… मेरा लंड पूरा अन्दर बाहर हो रहा था और उसे भी मज़ा आ रहा था… थोडी देर बाद वो फिर से झड़ गई।
फिर मैंने उसे नीचे लिटाया और एक पैर ऊपर कर कर ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगा… थोडी देर इसी तरह चुदाई करने के बाद मैंने उसे डोग्गी स्टाइल मैं आने को कहा तो वो डर गई… बोली पीछे से नहीं… बहुत दर्द होगा…

तो मैं समझ गया कि अभी गांड नहीं मरवाएगी… मैंने कहा कि नहीं मैं पीछे से चूत में ही डालूँगा…

वो धीरे धीरे डोग्गी स्टाइल में आ गई और मैंने पीछे से लंड उसकी चूत में डालकर धक्के लगाने लगा… वो मजे से सिस्कारियाँ निकालती रही और गांड को आगे पीछे करती रही… मैं उसकी गांड के छेद को धीरे धीरे मसलता रहा… और थोडी देर में हम दोनों एक साथ फिर से झड़ गए… फिर मैं लेट गया और वो मेरे साथ लगकर लेट गई…

हम दोनों को ही बहुत मज़ा आया था… इसके बाद हम कई दिनों तक रोज़ चुदाई करते रहे… मैंने उसको गांड मारने के लिए तैयार किया और गांड मारी… पर वो कहानी फिर कभी…

मैं अगली कहानी कब लिखूंगा और लिखूंगा या नहीं ये सब आपकी मेल पर निर्भर करता है… तो मुझे ज़रूर बताइयेगा कि यह कहानी आपको कैसी लगी… Indian Sex Stories

Antarvasna

आपकी कुसुम का Antarvasna चौड़ी टांगों, मदहोश जवानी से अंतर्वासना के पाठकों को एक बार फिर से प्यार एंड नमस्कार ! अपने बारे में ज्यादा न बताती हुई क्यूंकि अपनी कहानी के पहले भाग में मैंने अपना पूरा ब्यौरा दे दिया था।

सो दोस्तो, पति के ऑस्ट्रेलिया जाने के बाद किस तरह मेरा रिश्ता अपने ससुर जी से बन गया, यह आपने पढ़ लिया। अब तो मानो मैं उनकी दूसरी बीवी की तरह रहती ! हैरानी वाली बात थी कि ससुर जी में इस उम्र में एक जवान लड़के से ज्यादा जोर, दम था कि उन्होंने एक कमसिन, कामुक, आग जैसी जवान बहू को संभाल रखा था।

दोस्तो, जेठ जी को भनक पड़ गई और फिर उनकी मेरे ऊपर निगाहें टिक चुकी थी। ऊपर से जेठानी के जनेपे के लिए उनके पीहर भेज दिया जिससे उनकी वासना और बढ़ गई। करते भी क्या ! औरत पेट से थी तो लौड़े का क्या हाल होगा ! लेकिन मुझे तो ससुर जी ही नहीं छोड़ते थे लेकिन मेरा झुकाव अब जेठ जी की तरफ भी था, चाहती थी कि उनकी प्यास बुझाऊँ ! आखिर मौका मिल गया !

एक दिन ऐसा जरूरी काम पड़ा कि ससुर जी को सासू माँ के साथ बाहर जाना ही पड़ा और दोपहर को मैं घर में अकेली थी। लेकिन जेठ जी सुबह से घर नहीं थे, शायद उन्हें मालूम नहीं था कि मैं अकेली हूँ, वरना वो मौका कहाँ छोड़ते ! कोशिश ज़रूर करते !

मैंने उनके मोबाइल पर मिस-कॉल दे दी। उसके बाद वो फ़ोन पर फ़ोन करने लगे लेकिन मैंने नहीं उठाया। आधे घंटे के अंदर मेरा अंदाजा और तीर सही जगह लगा और वो घर आ पहुंचे। मैं अपने कमरे में कंप्यूटर पर बैठी सर्फिंग कर रही थी, बारीक सफ़ेद नाइटी अंदर काली ब्रा-पेंटी पहन रखी थी।
कुसुम ! तुमने कॉल की थी?
मैं पलटी- नहीं तो ! वो गलती से पॉकेट में बटन दब गया होगा !
ठीक है ! कहाँ हैं सब? अकेली हो आज?
जी हाँ अकेली हूँ ! बैठो ! अभी चाय लेकर आती हूँ !
नहीं भाभी !

उन्होंने मेरी कलाई पकड़ ली, खींच कर मुझे अपने सीने से लगा लिया और मेरे गुलाबी होंठों का रसपान करने लगे। मेरी और से ज़रा सा विरोध ना देख उनकी हिम्मत बढ़ चुकी थी।

बहुत सुन्दर हो भाभी जान ! बहुत आग है आप में ! बहुत तड़पाया है आपने अपनी जवानी से मुझे ! हर पल गोली मारती रहती हो !

मैं भी तो आपकी वासना आपकी आँखों में पढ़ती रही हूँ, लेकिन पहल नहीं कर पा रही थी !

ओह मेरी जान ! मुझे भी सब मालूम था ! मैं भी थोड़ा सा झिझक रहा था ! मुझे मालूम है तूने अपनी मर्ज़ी से मुझे मिस-कॉल दी थी !

और यह कहते ही वो मुझ पर सवार होने लगे। मैंने एक पल में उनके बटन खोल उनकी कमीज़ अलग कर दी और उन्होंने मेरी नाईटी उतार फेंकी और ब्रा के ऊपर से मेरे मम्मे दबाने लगे। मैं अश अश कर रही थी। मैंने उनकी बेल्ट भी खोल दी, अपने हाथों से जींस का बकल खोल नीचे कर अंडरवीयर के ऊपर से ही उनके लौड़े को मसलने लगी। उनकी आग बढ़ने लगी, लौड़ा तन कर डण्डा बन चुका था, कितना बड़ा हथियार था !

मेरी चूत में कुछ-कुछ होने लगा। सिहरन सी उठने लगी, जवानी बेकाबू हो रही थी। उन्होंने मेरी ब्रा उतार मेरे दोनों मम्मों को बारी बारी खूब चूसा। मैं नीचे बैठ गई, उनकी पूरी जींस शरीर से अलग कर उनके लौड़े को आराम से चूसने लगी।

कितना बड़ा है जेठ जी !
हां रानी ! इसको तेरे जैसी रांड पसंद है ! तेरी जेठानी तो ठंडी औरत है !

वो मेरे चूसने के अंदाज़ से बहुत खुश थे, मुझे बाँहों में उठा कर बिस्तर पर डाल लिया और मेरी टाँगें चौड़ी करवा ली। बीच में बैठ कर पहले प्यार से मेरी पूरी चूत पर हाथ फेरा, फिर मेरे दाने से थोड़ी छेड़छाड़ करने लगे। मैं बेकाबू हो रही थी, जल्दी ही उन्होंने लगाम लगा ली और अपना मोटा लौड़ा मेरी चूत में डालकर मुझे चोदने लगे।

अह अह और तेज़ करो जेठ जी ! जोर जोर से मारो ! अपनी जवान भाभी की जवान जवानी लूट लो !

यह ले यह यह साली कुतिया कब से तेरा आशिक हूँ ! तू है कि मेरे बाप से चुदवाती है !

क्या करूँ ! वो नहीं छोड़ते मुझे ! तेरे बाप में तेरे जितना दम ही है !

यह ले कमीनी ! अब से मुझे भी दिया करेगी?
हाँ दूंगी ! लो मेरी और मजे से लो !
चल घोड़ी बन ! तेरी फाड़ता हूँ गांड !

घोड़ी बना मेरी गांड मारने लगे !
हाय दुखती है !

तब फिर से चूत में डाल मेरी लेने लगे। पच्चीस मिनट की लम्बी चुदाई के बाद उनका घोड़ा छूट गया और हांफने लगा।

पूरी दोपहर जेठ से चुदवाया और फिर दोनों के साथ में अपनी जवानी लूटने लगी। अगले बार मुझे मासिक-धर्म नहीं हुआ। ससुर जी ने मुझे पेट से कर दिया।
सासू माँ बहुत खुश हैं !

उसके बाद मेरे अपने पड़ोसी के लड़के से संबंध बने !
वो अगली बार बताउंगी। Antarvasna

वैसे मैं पुणे से हूँ.
मैं दिल्ली यूपीएससी की तैयारी करने गया था.

वहां गए हुए मुझे एक ही महीना हुआ था कि मैं बीमार पड़ गया था.
मुझे वहां का खाना हजम नहीं हो रहा था और बार बार पेट खराब हो रहा था.

जब डॉक्टर से चेकअप करवाया तो पता चला पेट में इन्फेक्शन हुआ है.
इसलिए मैं वापस घर चला गया.

जैसे ही घर वापस आया तो घरवालों ने कहा- अगर ऐसी तबीयत खराब करनी है तो पढ़ाई मत करो.

मेरा शरीर इतना दुबला हो गया था कि लग रहा था कि मुझे कोरोना होकर गया हो.
मैंने पापा से कहा- पापा, मुझे वहां का खाना बिल्कुल पसंद नहीं आया. खाना पच ही नहीं रहा.

वैसे बता दूँ कि हमारा परिवार संयुक्त परिवार है.
हमारा एक घर पुणे में है और एक पुणे के पास गांव में है.

मेरे चाचा-चाची, दादाजी और दादीजी गांव वाले घर में रहते हैं और पुणे वाले फ्लैट में मम्मी-पापा, भाई, मेरा चचेरा भाई और चचेरी बहन रहते हैं.

मेरे भाई और बहन पुणे में रह कर अपनी कॉलेज और स्कूल की पढ़ाई करते हैं.

मैंने पापा से जब यह कहा कि वहां का खाना मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगा.
तब पापा ने कहा- ठीक ही और उधर किसी दूसरी जगह रह कर ट्राई करके देख ले, अगर पसंद आया तो ठीक … वरना वापस आ जाना और यहां से पढ़ाई कर लेना.

मैं जब वापस गया तब मैंने एक हफ्ते में 5 जगह जाकर उनकी मेस को ट्राई किया.
पर मुझे कोई पसंद नहीं आया.

मेरी पढ़ाई भी अच्छी तो नहीं कहूँगा, हां पर ठीक हो रही थी … तो वापस जाने का बिल्कुल मन नहीं था.

मेरे दादाजी ने पापा से कहा- अगर उसकी पढ़ाई उधर से ठीक हो रही है, तो उसकी चाची को उसके पास भेज देना. इससे उसका खाना भी अच्छा हो जाएगा और तबीयत भी ठीक रहेगी. यहां मेरा खाना उसकी दादी बना लेगी. इधर दो ही लोगों का खाना तो लगेगा.

जब ये बात पापा ने मुझे बताई, तब मैंने हामी भर दी क्योंकि वहां पढ़ाई का बहुत सही माहौल था.

मैंने एक फ्लैट देख लिया और जो जो जरूरी सामान लगने वाला था, वह सब चाँदनी चौक से खरीद लिया.
इसलिए सब कुछ बहुत सस्ते में निपट गया.

लगभग 15 दिन बाद मेरी चाची दिल्ली आ गयी थीं और दस ही दिन में हमारा सब कुछ सैट हो गया था.

मैं सुबह नाश्ता करके 9 बजे लाइब्रेरी चला जाता था.
दोपहर में एक बजे खाना खाने आता था और रात का खाना लगभग साढ़े सात बजे होता था.

अच्छे से दिन गुजर रहे थे. कभी कभार मोमोज वगैरह खाने चाची के साथ चला जाता था.
हमारे फ्लैट में मैंने वाईफ़ाई लगवाया था, तो कभी कभार रूम पर ही पढ़ाई कर लेता था.

बीच बीच में मेरा हस्तमैथुन भी हो जाता था. सब कुछ बहुत सही चल रहा था. तीन महीने तक मेरे किसी भी विचार में चाची नहीं आई थीं.

एक बार की बात है, जब मैं लंड हिला रहा था तो चाची ने मुझे देख लिया था.
मुझे तब पता नहीं लगा था, बाद में चाची ने बताया था.

एक बार ऐसे ही गूगल पर सर्फिंग करते समय मुझे अन्तर्वासना का पता चला था.

वहां एक सेक्स कहानी में मैंने मामी की चुदाई पढ़ी थी.
तब ऐसा खास कुछ ध्यान नहीं गया था पर मेरी नज़र चाची के मम्मों को देखने लगी थी.

अब मैंने ध्यान दिया था कि चाची के बूब्स बहुत बड़े है. हमारी बातें सामान्य ही होती रहती थीं.

अन्तर्वासना की कहानियों में मेरी रुचि बढ़ने लगी थी और साथ ही चाची की चूचियों को देखने का लगाव, सब इतनी तेज़ी से हुआ कि क्या बताऊं.

अब चाची को देखने का मेरा नज़रिया पूरी तरह से बदल गया था.
उसी चक्कर में मैं ज़्यादा समय फ्लैट पर बिताने लगा था.

एक बार चाची ने कहा कि मुझको कुछ कपड़े लेने हैं तो बाजार चलते हैं.
मैंने कहा- ठीक है, सरोजिनी मार्केट चलते हैं.

दो दिन बाद हम दोनों बाजार चले गए.
हम दोनों मेट्रो से गए थे.

वहां चाची ने कुछ कपड़े ले लिए.
उनको अपने लिए कुछ अन्दर पहनने वाले कपड़े खरीदने थे पर वे मेरी वजह से थोड़ा झिझक रही थीं.

मुझे समझ में आ गया क्योंकि वे बार बार मेरी तरफ देख रही थीं.

मैं- चाची आपको कुछ और लेना है क्या?
चाची ने झिझकते हुए कहा- नहीं … अभी और कुछ … नहीं लेना … बस जरा …

मैंने पहले ही फ्लैट पर देखा था कि चाची की ब्रा एक साइड से थोड़ी फट सी गयी थी.
पर मैं भी बात करने में थोड़ा डर रहा था.

लेकिन इतनी दूर आ गए थे और थोड़ी समझदारी भी आ चुकी थी, तो हिम्मत करके मैंने बात को आगे बढ़ाई- चाची, आप देख लीजिए. यहां और भी बहुत कुछ मिलता है … और बहुत सस्ता मिलता है.
चाची- नहीं राज … मुझे और कुछ नहीं लेना!
वे अभी भी थोड़ा अटक अटक कर बात कर रही थीं.

मैं- अरे कपड़ों से याद आया, मुझे अंडरवियर और बनियान लेना है. वह सब और ले लेते हैं, फिर वापस चलते हैं.
चाची- ठीक है.

जब मैंने मेरी अंडरवियर और बनियान ले लिए.
तो ऐसे ही मैंने चाची से थोड़ा खुल कर बात करने की कोशिश की और कामयाब भी हो गया- अरे चाची आपको भी अगर इनरवियर्स लेने हो, तो आप भी ले सकती हैं. यहां सब मिलता है.

चाची पहले तो एकदम से हक्की बक्की होकर देखने लगीं पर कुछ समय बाद वे भी बोलने लगीं- अरे हां, वह भी लेना है.
मैं- ठीक है, आप लेकर आओ. मैं यहीं हूँ शायद आपको मेरा वहां आना सही ना लगे.

चाची- ऐसा कुछ नहीं, तुम भी चलो. इनसे मोलभव कौन करेगा?
जब हम वहां गए तो चाची ने उस दुकानदार से कहा कि उन्हें 30 की ब्रा चाहिए.
तो दुकानदार चाची के चूचे देखता हुआ बोला- जी आपको 30 नहीं 32 साइज़ आएगा!

तभी पता नहीं मुझे क्या हो गया, मैंने बोल दिया- हां, तभी तो पहले वाली ब्रा फट गई है!
पर ये सब मैंने बहुत धीरे बोला, सिर्फ़ चाची को सुनाई दिया था.

यह सुनकर वे भी एकदम से मेरी तरफ देखने लगी थीं.
मुझे लगा अब वे गुस्सा करेंगी.

पर उन्होंने कुछ भी नहीं कहा और 32 की ब्रा ले लीं.
चाची ने 3 पीस ले लिए थे.

फिर अब हम दोनों वापस आने लगे.
मेट्रो स्टेशन से थोड़ा पैदल चलना पड़ता है तो मैंने एक ई-रिक्शे को रोक लिया और हम दोनों उस पर बैठ गए.

जब हम दोनों रिक्शे में थे तो उधर का रास्ता थोड़ा खराब था.
रिक्शा अपना संतुलन खो रहा था और वह पूरी तरह से एक तरफ को झुकने लगा था.

चाची ने खुद को संभालने के लिए मेरी जांघ पर हाथ रखा और जोर से पकड़ लिया.

जब रिक्शा ठीक हुआ, तब मुझे लगा कि अब चाची हाथ उठा लेंगी.
पर उन्होंने अपना हाथ वहीं लगाए रखा.

मुझे ऐसा महसूस हो रहा था कि वे अपना हाथ धीमे धीमे वहीं पर सरका रही थीं.
उनका लक्ष्य शायद मेरा लंड था.

यह सोच कर ही मेरे अन्दर तो एकदम से झटका सा लगा और अन्दर तक सनसनी सी फैल गई.
मेरा लंड खड़ा होने लगा.

धीरे धीरे उनका हाथ भी लंड के बहुत करीब आने लगा था.

अब तो उनका हाथ सिर्फ़ नाम के लिए जांघ पर था, बाकी तो मेरे लौड़े से टच होने लगा था.
शायद उनको भी लंड की तपिश महसूस हुई होगी और उसकी हलचल का भी अहसास हो गया था.

उन्होंने मुझे देखा और एकदम अलग सा भाव दिया.
उनके चेहरे पर थोड़ी अलग सी मुस्कान स्माइल आ गई थी.

पर उसके बाद चाची ने अपना हाथ हटा लिया था.
हम दोनों मेट्रो से सफर करने के बाद कुछ ही देर बाद अपने फ्लैट पर पहुंच गए.

मैंने चाची से कहा- चाची दुकान पर जो हुआ, उसके लिए सॉरी!
चाची- क्या हुआ? किस बारे में बोल रहे हो तुम?

मैं- अरे चाची, वह आपकी ब्रा फट गई है, मैंने उस बारे में बोल दिया था न!
चाची- अरे राज उसमें क्या है. सच पूछो तो मैं खास उसी की वजह से शॉपिंग के लिए गयी थी. आज पर तुम्हारे सामने कैसे कहूँ, इस वजह से मुझे शर्म आ रही थी.

मैं- अरे उसमें क्या है यार, हम दोनों इतनी बातें तो कर ही सकते हैं. वैसे भी हम लोग एक ऐसे शहर में हैं, जहां यह सब एक साधारण सी बात है. हम लोग इतनी बातें तो कर ही सकते हैं.
चाची- हां सही है राज!

ऐसे ही कुछ दिन बीत गए.
अब हम दोनों आपस में थोड़ा खुल कर बातें कर लेते थे.

एक दिन चाची बाहर सब्जी लेने गयी, तो मुझे लगा कि उनको आने में अभी वक्त लगेगा.
मेरा भी हिलाने का बहुत मूड था.

मैंने अन्तर्वासना पर कहानी पढ़ना चालू किया और कहानी पढ़ कर एकदम से मूड बन गया.
मेरा नहाना भी रह गया था तो मैं कच्छे में ही हो गया था.

मैं अपने बेडरूम में बैठ कर अपने लंड को सहला रहा था.
मैंने अपने 6.5 इंच के लंड को बाहर निकाला और धीरे धीरे हिलाने लगा.

मुझे पता ही नहीं चला कि चाची कब अन्दर आ गई थीं.

मेरा ध्यान जैसे ही उन पर गया, मैं एकदम से बौखला गया.
चाची ने यंग बॉय मास्टरबेशन का नजारा देख लिया था.

उस वक्त मुझे कुछ नहीं सूझा और मैं तुरंत बाथरूम में भाग गया.
मैं बहुत ज्यादा डर सा गया था.

मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि कैसे उनको मुँह दिखाऊं.
उस वक्त हुआ यह था कि चाची पैसे लेकर जाना भूल गयी थीं, इसलिए वे वापस आ गयी थीं.

मैं नहा कर तुरंत लाइब्रेरी चला गया और उनको मैसेज कर दिया कि दोपहर का मेरा खाना मत बनाना चाची, मैं दोस्त के साथ खाना खाने बाहर जा रहा हूँ.

उन्होंने मेरा मैसेज बस देखा और बिना कुछ कहे रह गईं.
अब मेरी और ज्यादा फटी.

रात को जब मैं फ्लैट पर गया तब चाची मोबाइल चला रही थीं.
मैं जाकर चुपचाप अपने बेड पर बैठ गया.

चाची ने मेरी तरफ देखा तो मुझे लगा कि अब वे बहुत गुस्सा करेंगी.

चाची- क्या हुआ राज … सुबह के गए अब आ रहे हो?
मैं चुप रहा.

चाची- बोलो कुछ!
मैं- सॉरी चाची.

चाची- अरे यार वह तो सब नॉर्मल है … तुम इतना क्यों टेंशन ले रहे हो.
मैं- मैं बहुत डर गया था इसलिए दोपहर में भी नहीं आया.

चाची- पागल हो यार तुम … इतना डरने की क्या बात है इसमें! तुम्हीं ने तो कहा था कि हम दिल्ली में रह रहे हैं, यहां ये सब नॉर्मल है. तुम लोगों को हफ्ते में 2 से 3 बार तो हिलाना ही चाहिए. उसी वजह से तुम्हारा मूड भी फ्रेश हो जाता है और पढ़ाई में भी कोई ग़लत असर नहीं पड़ता.
ये सब बातें सुनकर तो मेरे कान बजने लगे थे और मैं एकदम से किसी और दुनिया में खो गया था.

चाची मेरे कंधे को हिलाती हुई बोलीं- राज तुम किसी भी फालतू चीज़ का टेंशन मत लो … तुम बेवजह टेंशन ले रहे हो!
मैं- फिर से सॉरी चाची!

चाची- हां चल ठीक है … कोई बात नहीं, वैसे तुम पर अगर गुस्सा करना होता तो तभी कर देती जब तुम रात को अपने चादर के अन्दर हिला रहे थे, मैं तब भी जागी हुई थी.
मैं- अरे यार मतलब आप पहले ही मुझे पकड़ चुकी हैं?

हम दोनों थोड़ा सहज होकर हल्का हल्का सा हंसने लगे.
चाची मेरे साथ थोड़ा और खुल कर बातें करने लगीं.

Antarvasna

राहुल और सूरज नये नये Antarvasna कॉलेज में आये थे और शहर में ही कॉलेज के पास उन्होंने एक कमरा किराये पर ले रखा था। जवानी का नया नया जोश भी था और वो जवानी का पूरा लुत्फ़ भी उठाना चाहते थे। उन्हें स्वतन्त्र माहौल मिल गया था। मां बाप का कोई डर नहीं, यहां कोई भी कुछ कहने वाला नहीं था। सबसे पहले उन्होंने लुत्फ़ शराब का उठाया। वे दोनों लगभग रोज शाम को एक आधी बोतल ले आते थे और पीते थे। कुछ दिनों के बाद उन्होंने एक सी डी की दुकान से ब्ल्यू फ़िल्म भी किराये पर लाना आरम्भ कर दिया था। एक दिन…

शाम के आठ बजे थे। नहा धो कर वे दोनों ही बोतल खोल कर पीने बैठ गये थे। टिफ़िन आ चुका था। सूरज ने टी वी खोल कर कर किराये पर लाई हुई सीडी प्लेयर पर लगा दी और दारू का दौर चलने लगा। ब्ल्यू फ़िल्म भी चल रही थी। एक के बाद एक चुदाई के सीन आने लगे थे। राहुल और सूरज पर भी रंग चढ़ने लगा।

‘भेनचोद अन्ग्रेज औरतें क्या मस्त होती हैं…’ राहुल गर्म होता हुआ बोला।

‘हाँ यार, साली की चूत तो देख… लगता है अभी चोद डालूं…!’ सूरज अपना लण्ड पजामे के ऊपर से मसलता हुआ बोला। राहुल ने सूरज को देखा, सूरज का लण्ड खड़ा हुआ था। उसे देख कर राहुल का लण्ड भी जोर मारने लगा। पहले तो वो शरमा कर लण्ड दबा रहा था, पर सूरज को देख कर वो भी अपना लण्ड को हल्के हाथों से उपर नीचे करने लगा।

– अन्ग्रेजों का लण्ड भी देख कितना मोटा और लम्बा होता है… अपना तो उनके सामने कुछ भी नहीं है। राहुल ने अपना लण्ड सहलाते हुए कहा।
‘तो क्या हुआ, लण्ड तो तेरा भी बहुत जोर मार रहा है ‘ सूरज ने उसके लण्ड को मसलता हुआ देख कर कहा।
‘अरे ! ये मादरचोद… लण्ड को कैसे चूस रही है… ! हाय मेरा लण्ड भी ये मां की लौड़ी चूस ले…! ‘ राहुल ने अपना लण्ड दबाते हुए कहा।

‘उसे मां चुदाने दे…तू कहे तो…तेरा मसल दूं?’ कहते हुए सूरज ने उसकी जांघ पर हाथ रख दिया। राहुल एकबारगी सिहर गया। उसका हाथ हटाते हुए कहा- मत कर यार ! गुदगुदी होती है।

गुदगुदी तो होगी ही, पर मजा भी तो आता है, सूरज ने अपना हाथ लण्ड के पास राहुल के हाथ पर रख दिया और लण्ड पकड़ने की कोशिश करने लगा। पहले तो राहुल को अच्छा नहीं लगा, पर उसके हाथ की रगड़ से उसे मजा आने लगा। धीरे धीरे राहुल ने विरोध करना बंद कर दिया। अब लण्ड सूरज की गिरफ़्त में आ गया। पाजामे के ऊपर से ही वो लण्ड को सहलाने लगा। राहुल को मजा आने लगा। उसका लण्ड अब फ़ड़फ़डाने लगा।

सूरज, तेरा कैसा है?…लगता तो मस्त है! कैसे पजामे में से बाहर निकलने को बैचेन हो रहा है!’ राहुल ने अपना हाथ सूरज के लण्ड पर रख दिया और उसे दबा दिया। सूरज के मुख से आह निकल पड़ी। उसने कोई विरोध नहीं किया।
दोनो नशे में मदहोश थे। आंखें लाल हो चुकी थी। दोनों धीरे धीरे पास आने लगे और एक दूसरे को नशीली निगाहों से देखने लगे। राहुल के पाजामे का नाड़ा खुल चुका था। सूरज ने राहुल का लण्ड बाहर निकाल लिया। पास में देसी घी का डब्बा पड़ा था, सूरज ने उसमें से थोड़ा सा घी निकाल कर राहुल के लण्ड पर मल दिया और उसे चिकना कर दिया।

अब चिकने लण्ड पर मुठ मारने में सूरज को भी आनन्द आने लगा था। राहुल भी आहें भरने लगा था। अचानक सूरज ने राहुल को चूम लिया और चूमते हुए उसके होंठों तक आ गया। राहुल भी अपना आपा खो बैठा और और उसके होंठो से अपने होंठ मिला दिये और एक दूसरे को चूमने लगे।

– राहुल, आई लव यू…यार !
– सूरज, चूमते रह, मजा आ रहा है ! इतने दिन तक तू कहाँ था भोसड़ी के?
– मुठ मारने में कितना मजा रहा है, रस निकाल दे मेरे लौड़े का !

– हाँ रे ! बहुत मजा आ रहा है… और घिस दे यार…माँ चोद दे मेरे लण्ड की !’ दोनो के पजामे उतर चुके थे। लण्ड की घिसाई चल रही थी। दोनों के लण्ड फ़ड़फ़ड़ा रहे थे। मुठ अब जोर जोर से मार रहे थे। अचानक सूरज ने राहुल को जोर का धक्का दिया और वहीं चित लेटा दिया और उसका लण्ड अपने मुंह में भर लिया और जोर जोर से सुपाड़े को चूसने लगा। राहुल तड़प उठा और सूरज को खींचने लगा। सूरज ने इशारा समझा और 69 पोजिशन में आकर अपना लन्ड उसके मुँह में डाल दिया।

दोनो तरफ़ से कस कर लण्ड की चुसाई हो रही थी। इतने में राहुल का शरीर कसमसाया और उसके लण्ड ने लावा उगल दिया। सूरज ने तुरन्त मुँह हटा दिया और हाथ में वीर्य भर लिया। पर साथ में उसका लण्ड मसलता ही रहा। उसके लण्ड के आस पास उसका वीर्य फ़ैल गया था। इतने में सूरज भी छूट गया और राहुल का मुख वीर्य से भर उठा।

राहुल ने वीर्य को मुख से निकाल दिया और गले के पास से बहता हुआ नीचे बिस्तर पर गिरने लगा। दोनों ही झड़ चुके थे। ब्ल्यू फ़िल्म पर किसी का भी ध्यान नहीं था। पास में पड़ा तौलिया उठा कर दोनों ने अपने लण्ड और मुख साफ़ किये और नंगे ही बैठ गये। माहौल गर्म हो गया था। उन दोनों ने अब अपनी बनियान भी उतार कर मरजात नंगे हो गये थे। पंखे की हवा उनके शरीर को सहला रही थी। दोनों के जवान चिकने शरीर और उनकी कसी हुई मसल्स उभरी हुई दिख रही थी।

– मजा आ रहा है ना सूरज…
-हाँ यार, इसमें इतना मजा आता है मुझे तो पता ही नहीं था।
-देख घी लगा कर कितना चिकना लग रहा है तेरा लण्ड, राहुल।
– तू भी लगा ले यार…चल मैं लगा देता हूँ…

राहुल घी निकाल कर सूरज के लन्ड पर मलने लगा। सूरज का लण्ड फिर से तन्ना उठा। सूरज ने राहुल का लण्ड फिर से पकड़ लिया। दोनो फिर से झूम उठे। दोनों एक बार फिर एक दूसरे का मुठ मारने लगे।

अचानक सूरज बोला- राहुल मेरी गाण्ड में खुजली होने लगी है, शान्त कर दे यार ! सूरज ने अपनी गाण्ड राहुल की तरफ़ करते कहा।
राहुल ने घी के डब्बे में से घी निकाल कर उसकी गाण्ड के छेद पर लगाया और घिसने लगा। सूरज के मुख से सिसकारी निकल पड़ी।
‘राहुल यार पेल दे लौड़ा गाण्ड में, मजा आ जायेगा !
– सच ! पेल दूँ क्या?

सूरज घोड़ा बन गया। राहुल ने अपना कड़कता लण्ड उसकी गाण्ड की छेद पर रख दिया। उसकी चिकनी मस्कुलर गाण्ड पर हाथ फ़ेरा और लण्ड गाण्ड के फ़ूल पर दबाने लगा। छेद चिकना था, लण्ड अन्दर घुस पड़ा।

-मजा आ गया राहुल, चोद डाल साली हरामी गाण्ड को। राहुल ने जोर लगाया और लन्ड घी की सहायता से अन्दर घुसने लगा।
सूरज दर्द से भरे स्वर में बोला- तेरी तो टाईट गाण्ड है… मेरे तो लण्ड की भी मां चुद जायेगी यार, कहीं छिल ना जाये?
-हाय रे, राहुल, दर्द होता है, पर पेल दे लण्ड, इस की तो मां दी फ़ुद्दी।

राहुल ने लण्ड बाहर निकाल कर फिर से अन्दर पेल दिया। और अब धक्के चल निकले। सूरज की गाण्ड चुदने लगी। राहुल का लौड़ा फूलने लगा और कड़कने लगा। सूरज को भी अब दर्द कम हो रहा था। पर उसे गाण्ड मराने में मजा आ रहा था। सूरज का लण्ड भी नीचे फ़ुफ़कारे भर रहा था, लन्ड नीचे लटकता हुआ फ़ड़क रहा था। कुछ ही देर में राहुल का वीर्य छूट पड़ा और सूरज की गान्ड में भरने लगा। राहुल झड़ चुका था।

अब दोनों ने अपना पोज बदला और सूरज का कड़कता लण्ड राहुल की गाण्ड में टिका था। राहुल की गाण्ड टाईट नहीं थी, फिर देसी घी का असर, लण्ड फ़क से राहुल गाण्ड में घुस गया, राहुल एक बार तो दर्द से कराह उठा पर सम्भल गया।
सूरज अपना लण्ड राहुल की गाण्ड में पेलने लगा। राहुल गान्ड चुदाई को एन्जोय कर रहा था। वो धीरे से नीचे पांव पसार कर पेट के बल लेट गया और अपनी आन्खे बंद कर ली और गाण्ड मराने क भरपूर आनन्द लेने लगा।
सूरज राहुल की पीठ पर लिपट कर लण्ड पेल रहा था। गाण्ड के फ़ूल की चमड़ी लण्ड के साथ साथ बाहर निकल रही थी और अन्दर जा रही थी। दोनों के चिकने शरीर एक दूसरे में समाने की कोशिश कर रहे थे।

अचानक सूरज के लण्ड ने पिचकारी छोड दी और वीर्य निकल पड़ा। सूरज हाय कह कर राहुल की पीठ से चिपक गया और वीर्य राहुल की गान्ड में भरने लगा। सूरज अब पूरा झड़ चुका था। उसका लण्ड अपने आप बाहर आ गया था। अब सूरज और राहुल आराम से बैठ गये। उन्होंने शराब का अन्तिम जाम बनाया और आज के मजे के नाम पर चीअर्स करके पीने लगे।

आज दोनों जवानी का पूरा लुत्फ़ उठा कर सन्तुष्ट थे। जाम समाप्त हो चुका था और अब टिफ़िन की तैयारी हो रही थी।

वो दोनों इस बात से अन्जान थे कि उन्हें किसी जगह से मेरी दो आंखें उन्हें ये सब करते हुए देख रही थी। इस दौरान मैं दो बार अपनी भोसड़ी में अंगुली डाल कर रस निकाल चुकी थी।… हमेशा की तरह मैं उन दोनों से चुदने का कोई बढ़िया प्लान बना रही थी… उन्हें अपने चक्कर में लेकर दो दो लण्ड का मजा लेने का प्लान। Antarvasna

प्रेषक : उमेश Hindi Porn Stories

गुरूजी आपने मेरी सही Hindi Porn Stories अनुभव वाली कहानी स्वर्ग का अनुभव प्रस्तुत की, उसके लिए मैं आपका बहुत आभारी हूँ।

मैंने कभी सोचा भी नहीं था किमुझे इतने सारे मेल आयेंगे, खास करके लड़कियों और औरतो के मुझे बहुत मेल आए। आपका इतना प्यार देखकर मुझे एक और सही अनुभव वाली कहानी प्रस्तुत करने की प्रेरणा मिली है। इस कहानी में मेरी कोई कल्पना नहीं है बल्कि मेरे साथ जो हो चुका है वो ही मैं आपको बता रहा हूँ।कहानी को रसदार बनाने के लिए मैंने इसमें कोई बात भी अपनी तरफ़ से नहीं जोड़ी है।

कहानी प्रस्तुत करने से पहले मैं आपको अपना परिचय दे देता हूँ। मैं अहमदाबाद में रहने वाला लड़का हूँ, मेरी उम्र ३५ साल की है। दिखने में स्मार्ट हूँ। मैं एक लिमिटेड कंपनी में अकाउंट एक्जीक्यूटिव की जॉब करता हूँ। मैं जिस कंपनी में काम करता हूँ, उसकी मैडम के साथ मेरा सम्बंध है। उसकी उम्र ४५ साल है। वो दिखने में बहुत खूबसूरत है। उसको मेरे पर बहुत भरोसा है और वो भरोसा मैं कभी नहीं तोडूंगा। यह उसी की कहानी है।

एक दिन छुट्टी से पहले वाले दिन हमने छुट्टी के दिन कहीं पर मिलने का नक्की किया(कार्यक्रम बनाया)।

उसने कहा- घर मे मिलने से कोई न कोई आता जाता रहता है, इसलिए हम किसी होटल में मिलते हैं। तुम कोई अच्छा सा ए सी कमरा बुक करना।

फ़िर दूसरे दिन मैं सुबह होटल का कमरा खोजने निकल गया। मैंने एक अच्छे होटल में ए सी कमरे का रेट पूछा, उसने मुझे ४ घंटे के ७०० रूपए बताये, मैंने कमरा बुक कर लिया फ़िर मैंने मैडम को बताया के मैंने एसी कमरा बुक कर लिया है। मैंने होटल का पता मैडम को दे दिया और कहा- मैंने यहाँ पर अपने नाम बदल कर कमरा बुक किया है। आप यहाँ आ कर अपना नाम पूजा बताना और कहना कि मुझे अनिल से मिलना है जो २०३ नम्बर के कमरा में ठहरे हैं। तो उसने सब बात समझ ली और मुझे दोपहर को २ बजे वहाँ आने का बोल दिया।

मैंने तो १ बजे कमरे में जा कर स्नान कर लिया।

अब वो करीब २ बजे मेरे कमरे में आ गई। उसने भी ‘मैं फ्रेश होकर आती हूँ’ कह के स्नान कर लिया, क्योकि जब हम स्नान कर के सेक्स करते हैं तो मजा दुगना हो जाता है। फ़िर वो स्नान कर के सिर्फ़ तौलिया लपेट कर बाहर आ गई। मैं तो उसको देख कर देखता ही रह गया। वो तौलिये में बहुत खूबसूरत लग रही थी। मैं तो पहले से ही तौलिये में था।

फ़िर हम दोनों पलंग पर आ गए। हमने कुछ बीते हुए पलों के बारे में बात की। फ़िर मैंने उसके गाल पर और होठों पर किस किया, उसका तौलिया निकाला, उसने लाल रंग की ब्रा और पैंटी पहनी थी। मैंने उसे एक बार कहा था कि तुम पर लाल रंग की ब्रा और पैंटी खूब जमती है। उसने वो याद रख लिया था और ऐसा ही किया था। वो किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी।

फ़िर मैंने उसके सारे बदन पे चुम्मी ली। उसकी पैंटी के साथ में ही उसके चूतड़ को भी चूमा, उसके पैर के अंगूठे को भी चूमा, उसके कान को भी चूमा। उसका कोई अंग ऐसा नहीं रहा था कि मैंने उसे वहाँ चूमा न हो। फ़िर मैंने उसके होठों को अपने होठों से लगा लिया। हम दोनों काफ़ी वक्त तक एक दूसरे के मुँह में मुँह रख कर चूमते रहे। उसकी जीभ से अपनी जीभ लगा कर हम दोनों ने एक दूसरे का रसपान किया। हम दोनों दो नहीं बल्कि एक ही हैं ऐसा हमको महसूस होता था।

फ़िर मैंने उसकी ब्रा को निकाला। उसके स्तन बहुत बड़े और रसीले थे। मैं करीब ५ मिनट तक उनको चूसता रहा। मैं किसी जन्नत की सैर कर रहा हूँ ऐसा मुझे महसूस होने लगा। अब वो बहुत उत्तेजित हो चुकी थी। फ़िर उसने मेरे तौलिए को निकाला और मेरी छाती को चूसने लगी। फ़िर उसने मेरे होठों को चूमा, वो चूमते चूमते नीचे तक आई। मैंने अन्डरवीयर पहन रखा था, वो उसने निकाल दिया।

मैं भी बहुत उत्तेजित हो चुका था, उसने मेरे ७” लण्ड को अपने मुँह में ले लिया और लॉलीपोप की तरह वो तो उसे चूसने लगी। अब मैं आपे में नहीं रह पाया। वो करीब ५ मिनट तक मेरा लंड चूसती रही। उसके ऐसा करने से मैं झड़ गया। मैंने बाथरूम में जा कर साफ़ कर लिया। फ़िर मैं वापिस आ गया, मैंने उसे बोला- अभी तो शुरूआत है, अब मेरा सेक्स लम्बी देर तक चलता रहेगा।

फ़िर मैंने उसकी पैंटी को निकाला, उसने अपनी चूत के सारे बाल हटा के रखे थे। फ़िर मैंने उसकी चूत को चाटने का शुरू किया, उसकी चूत में से अजीब सा पानी निकल रहा था, मैं वो सारा पानी निगल गया। वो बहुत उत्तेजित हो चुकी थी और लम्बी लम्बी आहें भरने लगी थी। हम दोनों कहीं स्वर्ग में पहुँच गए हो और आनंद लूट रहे हों, ऐसा हम दोनों को महसूस हो रहा था। मैं अपनी जीभ को उसकी चूत में बहुत अन्दर तक ले जाता था।

फ़िर मैंने अपना ७” का लण्ड उसकी चूत में डाल दिया। फ़िर मैं उसे धीरे धीरे पेलने लगा. करीब २० मिनट तक मैं ऐसे ही पेलता रहा। मैं एक बार झड़ चुका था इसलिए दूसरी बार जल्दी झड़ जाने की कोई गुन्जायिश नहीं थी। अब मैं बहुत जोरों से धक्के देने लगा। वो भी उसमें धक्के दे कर मुझे साथ देने लगी। हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था। फ़िर हम दोनों साथ में ही झड़ चुके।

फ़िर थोड़ी बात हमने की और हम दोबारा शुरू हो गए। मैंने उसके साथ फ़ोर-प्ले शुरू कर दिया इसलिए वो दुबारा तैयार हो गई। मैंने उसकी चूतड़ को बहुत चाटा और फ़िर मैंने अपना लण्ड उसमें डाल दिया। फ़िर हम दोनों साथ में झड़ गए। यह झड़ना मेरा तीसरी बार का और उसका दूसरी बार का था। वो तो सोचते ही रह गई कि मैं एक ही साथ में तीन बार सेक्स कर सकते हूँ। उसने मुझे कहा- तुम्हारी पत्नी बहुत खुशकिस्मत है जिसे तुम जैसा पति मिला है। मेरे हसबंड बिज़नस के टेंशन में ही रहते हैं। और ६ महीने में एक बार सेक्स करते है और उसमें भी मुझे तो मजा नहीं आता। मैं तुम्हारा साथ कभी नहीं छोड़ सकती।

फ़िर मैंने भी उसे ऐसा वादा करके अपने गले से लगा लिया। हमने करीब ३ घंटे तक सेक्स किया। उसने कहा कि तुम्हारे साथ तो पूरी रात हो तो भी कम है। ऐसा स्वर्ग का अनुभव हम दोनों ने कभी नहीं किया. मैं अपने बारे में कम और उसके बारे में ज्यादा सोचता हूँ कि उसको ज्यादा से ज्यादा आनंद कैसे मिल पाये।

हम ऐसे ही होटल में एक ही बार नहीं बल्कि बहुत बार मिल चुके हैं।

ऑफिस से निकलते हैं तो रात को उसकी गाड़ी में भी अंधेरे में मिलते रहते हैं।

मैं कोई कथाकार नहीं हूँ, पर यह मेरे सही अनुभव की कहानी है इसीलिए मैं कहानी में जान डाल सकता हूँ।

मेरी सही अनुभव वाली दूसरी कहानी मैं बाद में बताऊंगा अगर तुम्हारे मेल मुझको आते रहेंगे तो ! ख़ास करके लड़की और औरत के। Hindi Porn Stories

TOTTAA’s Disclaimer & User Responsibility Statement

The user agrees to follow our Terms and Conditions and gives us feedback about our website and our services. These ads in TOTTAA were put there by the advertiser on his own and are solely their responsibility. Publishing these kinds of ads doesn’t have to be checked out by ourselves first. 

We are not responsible for the ethics, morality, protection of intellectual property rights, or possible violations of public or moral values in the profiles created by the advertisers. TOTTAA lets you publish free online ads and find your way around the websites. It’s not up to us to act as a dealer between the customer and the advertiser.

 

👆 सेक्सी कहानियां 👆