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मौसेरी बहन सरिता की चुदाई0 Antarvasna stories

सभी दोस्तों को मेरा नमस्कार Antarvasna stories...!

मेरा नाम बंटी है और मुझे इनसेस्ट सेक्स बहुत अच्छा लगता है।

अब मैं आपको अपनी इस कहानी में बताऊंगा कि मैंने कैसे मौसी की बड़ी लड़की सरिता की चुदाई की।

मौसी और मौसा जी की चुदाई के बाद शाम को मैंने उनसे अपना वायदा पूरा करने के लिये कहा जिसमें उन्होने अपनी बेटी सरिता को चोदने की इजाजत दे दी थी।

मौसा जी बोले- तुम शाम को उसे जब अकेले देखना और फिर मौका देखकर उसकी चुदाई कर लेना।

मैं इस प्लानिंग से मैं बहुत खुश हो गया।

शाम को हम सब एक साथ डिनर कर रहे थे। मेरी नज़र बार बार सरिता की चूची पर जा रही थी जो कि उसके नाईट सूट से बाहर आने को बेताब थी। दोस्तों उसकी फ़िगर 34-28-34 हैं। उसके चूंची अपनी मां की ही तरह सभी को बहुत तड़पाती होंगी।

खाना खाने के बाद प्रिया (छोटी बेटी) और नितेश (छोटा लड़का) बोले- भैया चलो ऊपर कमरे में चलकर कुछ खेलते हैं।

पर मेरा मूड तो कुछ और ही था, मैंने मौसी से कहा- मौसी आप और मौसा जी इन दोनों के साथ ऊपर जाकर खेलो, मैं अभी टीवी देख कर आ जाऊंगा।

उन्होंने कहा- ठीक है।

और वो ऊपर चले गये और साथ ही सरिता को मेरा ध्यान रखने को बोल गये।
मौसा जी कहने लगे- सरिता, भैया को अपनी सभी नई सीडी दिखा देना।
सरिता बोली- ओ के पापा।

हम दोनों अब टीवी के सामने दीवान पर साथ बैठे थे, वो बोली- भैया, आपको कौन सी मूवी देखनी है?
मैंने कहा- कोई भी बड़े बच्चों वाली लगा दो !
तो वो बोली- क्या मतलब?

मैं उसकी तरफ़ आंख मारकर बोला- वही जो लोग शादी के बाद देखते हैं।
इतना सुनकर वो बोली- धत्त ! तुम बड़े गन्दे हो !
और हंसने लगी। मैं समझ गया कि वो तैयार है। और थोड़ी सी तैयारी के बाद आसानी से काम बन जयेगा।

वो बोली- भैया, ऐसी तो कोई सीडी नहीं है मेरे पास।
मैं बोला- कोई बात नहीं ! मैं अभी मारकेट से ले आता हूं।

इतना कहकर मैं बाहर जाने लगा। मुझे उसके चेहरे पर एक अलग मुस्कान दिख रही थी। मारकेट में बहुत मुश्किल से मुझे एक ब्ल्यू फ़िल्म की सीडी मिल गई। जो कि हिन्दी में थी।
मैं अब वापस आकर सरिता से बोला- लो सीडी। स्टार्ट करो ! मैं अपनी ड्रेस चेंज करता हूं।
वो बोली- ठीक है।
उसने मुझे मौसा जी का एक पायजामा और कुरता लाकर दिया।

मैंने अपनी पैन्ट खोली तो उसकी नज़र मुझे ही घूर रही थी।
मैं मुस्कराने लगा।

कपड़े बदलने के बाद मूवी शुरु हो गई तो हम फ़िर साथ दीवान पर बैठ गये।

मूवी के पहले सीन में लड़की नहा रही थी। तभी एक लड़का भी बाथरूम में आकर उसके साथ छेड़छाड़ करने लगता है।

मैंने देखा कि सरिता का चेहरा एकदम लाल हो रहा था। मैंने तभी उसका हाथ पकड़ लिया। उसका पूरा बदन कांप रहा था।

मैं समझ गया कि ये सब बैचेनी मूवी के कारण है पर मैं अनजान बनकर उसे पूछने लगा- अरे, तुम्हें क्या हुआ? लगता है तुम्हारी तबियत खराब है, देखो, तुम्हारा पूरा बदन कांप रहा है। लाओ मैं तुम्हारा हार्ट बीट्स चेक करता हूं।

इतना कहते ही मैंने अपना हाथ उसके नाईट सूट में घुसा दिया और उसकी चूची दबाने लगा।

सरिता एकदम चौंक कर बोली- बंटी, यह क्या कर रहे हो। मैं आपकी बहन हूं और कोई आ गया तो बहुत बुरा होगा।

मैं उसको इमोशनल करते हुए बोला- सरिता, तुम मेरी बहन हो, यह मेरी मज़बूरी है नहीं तो मैं तुम्हें बचपन से जान से ज्यादा प्यार करता हूं और तुम्हारे बिना रह नहीं सकता।

इतना सुनकर वो इमोशनल होकर मुझसे चिपट गई और बोलने लगी- आई लव यू बंटी, तुमने पहले मुझसे ये सब क्यूं नहीं कहा।

मैं बोला- हम शादी तो नहीं कर सकते पर थोड़ी मस्ती तो ले ही सकते हैं।
वो बोली- अगर मैं प्रेगनेंट हो गई तो?

मैं बोला- तुम मुझ पर विश्वास करो मैं ऐसे कुछ नहीं होने दूंगा।
वो बोली- तब ठीक है।

अब हमारे बीच किसी तरह की कोई दूरी नहीं रह गई थी इसलिये मैंने पहले जाकर टीवी ओफ़ कर दिया जिससे पूरा ध्यान सरिता की चुदाई पर लगा सकूं।
दीवान पर आकर मैंने उसे लेटा दिया और उसके बगल में लेट कर उसके होठों को चूसने लगा।
वो भी मेरे पूरा साथ देते हुए अपने जीभ मेरे मुंह में अन्दर बाहर कर रही थी।

इस सब में इतना मज़ा आ रहा था कि मैं बता नहीं सकता। मैंने अपना कुरता उतार दिया और बनियान भी।

अब मैं केवल पायजामे और उसके अन्दर अन्डरवियर में था।

मैंने सरिता के नाईट सूट के बटन खोलने शुरू कर दिया। वो शरमा कर सिमटी जा रही थी। पहली बार कोई उसके जवान बदन को छू रहा था।

उसका नाईट सूट हटते ही उसकी चूची ब्रा में कैद होकर भी आधी से ज्यादा दिख रही थी।

मैंने ब्रा के ऊपर से ही उन्हें चूमना शुरू कर दिया, मेरा हाथ उसके पैन्टी को खोलने में लगा था और उसकी पैन्टी निकालने कि लिये मैंने उसे इशारा किया तो उसने अपने चूतड़ों को थोड़ा सा ऊपर कर दिया और मैंने उसे टांगों से बाहर निकाल दिया।

उफ़्फ़! उसकी गोरी और मांसल जांघे देख कर मेरा लौड़ा पजामा फ़ाड़ने को तैयार हो गया।

मुझसे अब रहा नहीं गया। मैंने अपना पजामा और अन्डरवियर निकालकर फेंक दिया।

वो मेरे खड़ा लण्ड देखकर बोली- बंटी ये लण्ड मेरी चूत में कैसे जायेगा, मैंने तो आज तक इसमें एक उंगली भी नहीं डाली।

मैं बोला- मेरी जान देखती जाओ! तुम्हारा दीवाना क्या क्या करता है।

मैं उसकी ब्रा का हुक खोलने लगा तो वो मुझसे चिपट गई।

मैंने उसकी ब्रा का हुक खोल दिया और उसकी पीठ को सहलाने लगा। मेरा लण्ड बार बार जोर मार रहा था और उसकी जांघो पर छू हो रहा था। आआह ह्ह ! यह एक अलग मज़ा था। मेरी छाती और उसकी चूंची के बीच बस उसकी ब्रा थी जो मैंने एक तरफ़ खींच कर निकाल दी।

उफ़्फ़! उसकी दूध जैसे गोरी चूची देखकर मन कर रहा था कि उसको काट लूं। उसके गुलाबी चुचूक को मैं मुंह में लेकर चूसने लगा। वो एकदम टाईट हो गये।

उसके हाथ मेरे बालों में घूम रहे थे और मैं बहुत बेचैनी के साथ उसकी चूची को सुसक कर रहा था।

थोड़ी देर के बाद मैं उसके पैर की तरफ़ आ गया और उसकी पैन्टी अपने दांतों से खींचने लगा।

उसको बाहर निकालकर मैं अपना हाथ उसके पैरों को छूते हुए जांघो पर घुमाने लगा। मेरे मुंह उसकी चूत पर था। उस पर बहुत घने बाल थे।

मैं सरिता से बोला- तुम कभी अपनी चूत शेव नहीं करती?
वो बोली- कभी इस तरफ़ ध्यान ही नहीं दिया।

मैं बोला- कोई बात नहीं, फ़िर कभी मैं साफ़ कर दूंगा।

मैंने अपनी जीभ उसकी चूत पर घुमानी शुरू कर दी। उसको बड़ा अज़ीब लग रहा था, वो बोली- बंटी, यह क्या कर रहे हो?

मैंने पूछा- क्यूं? मज़ा नहीं आ रहा क्या?
वो बोली- मज़ा तो बहुत आ रहा है।

उसकी सिसकारी सारे कमरे में सुनाई दे रही थी आआआह ह्ह्हह। बंटी … बस करो आआअह मैं मर जाऊंगी आआ आआअह!

मैं और भी जोश में आने लगा और उसकी चूत में अपनी जीभ घुसाने लगा।

मेरे मन था कि वो भी मेरे लण्ड चूसे पर अभी मैं उसे झिझक के मारे कह नहीं पा रहा था।

उसने एक हाथ से मेरा लण्ड ज़ोर से पकड़ा हुआ था और अपनी आंखें बंद करके आआअह ऊऊओह कर रही थी।

उसकी चूत एकदम गीली हो रही थी।
मैं समझ गया कि एक बार उसकी चूत पानी छोड़ चुकी है।

अब मैं उसे चोदने की तैयारी करने लगा।

मैंने उसकी गाण्ड के नीचे एक तकिया लगा दिया। उसकी चूत अब बहुत उभर गई थी।

मैंने उसकी दोनों टांगों को खोल कर बीच में आ गया।

अपने लण्ड मैंने जैसे ही उसकी चूत पर रखा तो मुझे लगा कि जैसे मेरे लण्ड में आग लग गई हो। उसकी चूत एकदम गरम हो रही थी।

मैंने अपना लण्ड उसकी चूत में घुसाना शुरू किया तो वो दर्द से तड़प कर एकदम हटकर बैठ गई।

सरिता बोली- बंटी। इतना दर्द मुझसे सहन नहीं होगा। तुम्हारा लण्ड मेरी चूत में नहीं जायेगा। मैं मर जांऊगी। तुम चाहे जो कर लो पर मैं चूत में लौड़ा नहीं लूँगी।

मैं बोला- जान, पहले तो सभी को दर्द होता है पर बाद में खूब मज़ा आता है। जरा सोचो अगर तुम्हारी मम्मी चुदने के लिये मना कर देती तो तुम कहां से पैदा होती।

बात उसकी समझ में आने लगी, वो बोली- ठीक है बंटी, तुम्हारे लिये मैं यह दर्द सह लूगीं, पर तुम थोड़ा सा तेल अपने लोड़े पर लगा लो।

मैंने कहा- ठीक है।

हमने तेल ढूंढना शुरू किया तो उस कमरे में तैल तो नहीं मिला पर दूध में से मलाई अपने लौड़े और उसकी चूत में लगा दी।

अब मैंने अपना लौड़ा उसकी चूत में डालना शुरू किया। लौड़े का सुपारा उसकी चूत में जाते ही उसकी चीख निकल गई, मैंने अपने हाथों से उसके मुंह को सील कर दिया और धीरे धीरे धक्के मारने लगा।

थोड़ी देर बाद उसको भी मज़ा आने लगा और उसने अपने चूतड़ उछालने शुरू कर दिये। पूरा कमरे में एक संगीत सा बजने लगा।

उसके हाथ लगातर मेरे चूतड़ पर घूम रहे थे और वो कभी कभी अपनी उंगलियाँ मेरी गाण्ड में डालने की कोशिश कर रही थी जिससे मेरा जोश और भी बढ़ जाता था और मैं और ज़ोर से धक्के मारने लगता।

मेरे पूरा लण्ड जब तक उसकी चूत में था और मेरे आण्ड उसकी गाण्ड से टकरा रहे थे।

लगातार धक्के मारने के वजह से मैं झड़ने वाला था। इसलिये मैंने लण्ड उसकी चूत से निकाल कर पानी उसके पेट पर झड़ा दिया।

मैंने देखा उसकी चूत से खून निकला हुआ था। मेरा लण्ड भी लाल हो रहा था।

यह देखते ही सरिता बोली- तुमने आज मेरी सील तोड़कर लड़की से औरत बना दिया है। आई लव यू।

वो मेरे लण्ड को सहलाते हुए बोली- मुझे कभी भूल तो नहीं जाओगे बंटी?

मैंने कहा- नहीं जान, मैं तो तुम्हारी शादी होने के बाद भी तुम्हें चोदना चहता हूं।

बहुत देर तक ऐसे ही एक दूसरे हो चूमते और सहलाते और बातें करते हुए ही लेटे रहे।

फ़िर सरिता बोली- चलो, अब ऊपर कमरे में चलते हैं, नहीं तो मम्मी पापा शक करेंगे।

उसे क्या पता था कि उसको चोदने का प्रोग्राम उसकी मम्मी ने ही बनाया है। मैं मन ही मन मौसी को धन्यवाद कर रहा था।

तो दोस्तो, यह थी मेरी दूसरी कहानी। मुझे आपके कई ई-मेल मिले, इसके लिये बहुत बहुत धन्यवाद।

अगली कहानी में मैं बताऊंगा कि मैंने कैसे प्रिया को चोदा।

Indian Sex Stories

म लोग शहर की घनी आबादी के एक Indian Sex Stories मध्यम वर्गीय मुहल्ले में रहते थे। वहां लगभग सभी मकान दो मंजिल के और पुराने ढंग के थे और सभी घरों की छतें आपस में मिली हुई थी। मेरे घर में हम मिया बीवी के साथ मेरी बूढ़ी सास भी रहती थी। य्ह कहानी मेरे पड़ोस में रहने वाले एक लड़के राज की है जो पिछ्ले महीने से ६-७ हमारे साथ वाले घर में किराये पर रहता था। राज अभी तक कुंवारा ही था और मेरा दिल उस पर आ गया था।

मेरे पति की ड्यूटी शिफ़्ट में चलती थी। जब रात की शिफ़्ट होती थी तो मैं छत पर अकेली ही सोती थी क्योंकि गरमी के दिन थे। राज़ और मैं दोनो अक्सर रात को बातें करते रहते थे। रात को छत पर ही सोते थे।

आज भी हम दोनो रात को खाना खा कर रोज की तरह छत पर बातें कर रहे थे। रोज की तरह उसने अपना सफ़ेद पजामा पहन रखा था। वो रात को सोते समय अंडरवियर नहीं पहनता था, ये उसके पजामे में से साफ़ ही पता चल जाता था। उसके झूलता हुए लण्ड का उभार बाहर से ही पता चल जाता था। मैंने भी अब रात को पेंटी और ब्रा पहनना बंद कर दिया था।

मेर मन राज से चुदवाने का बहुत करता था… क्युंकि शायद वो ही एक जवान लड़का था जो मुझसे बात करता था और मुझे लगता था कि उसे मैं पटा ही लूंगी। वो भी शायद इसी चक्कर में था कि उसे चुदाई का मजा मिले। इसलिये हम दोनों आजकल एक दूसरे में विशेष रुचि लेने लगे थे। वो जब भी मेरे से बात करता था तो उसकी उत्तेजना उसके खड़े हुए लण्ड से जाहिर हो जाती थी, जो उसके पजामे में से साफ़ दिखता था। उसने उसे छिपाने की कोशिश भी कभी नहीं की। उसे देख कर मेरे बदन में भी सिरहन सी दौड़ जाती थी।

मैं जब उसके लण्ड को देखती थी तो वो भी मेरी नजरें भांप लेता था। हम दोनो ही फिर एक दूसरे को देख कर शरमा जाते थे। उसकी नजरें भी जैसे मेरे कपड़ों को भेद कर अन्दर तक का मुआयना करती थी। मौका मिलने पर मैं भी अपने बोबे को हिला कर…या नीचे झुक कर दिखा देती थी या उसके शरीर से अपने अंगों को छुला देती थी। हम दोनो के मन में आग थी। पर पहल कौन करे, कैसे हो…?

मेरी छत पर अंधेरा अधिक रहता था इसलिये वो मेरी छत पर आ जाता था, और बहाने से अंधेरे का फ़ायदा हम दोनों उठाते थे। आज भी वो मेरी छत पर आ गया था। मैं छत पर नीचे बिस्तर लगा रही थी। वो भी मेरी सहयता कर रहा था। चूंकी मैंने पेंटी और ब्रा नहीं पहन रखी थी इसलिये मेरे ब्लाऊज में से मेरे स्तन, झुकने से उसे साफ़ दिख रहे थे… जिसे मैं और बिस्तर लगाने के बहाने झुक झुक कर दिखा रही थी। उसका लण्ड भी खड़ा होता हुआ उसके पज़ामे के उभार से पता चल गया था। मुझे लगता था कि बस मैं उसके मस्त लण्ड को पकड़ कर मसल डालू।

“भाभी… भैया की आज भी नाईट ड्यूटी है क्या…?”
“हां… अभी तो कुछ दिन और रहेगी… क्यों क्या बात है…?”
“और मां जी क्या सो गई हैं…?”
“बड़ी पूछताछ कर रहे हो… कुछ बताओ तो…!” मैं हंस कर बोली।

” नहीं बस… ऐसे ही पूछ लिया…” ये रोज़ की तरह मुझसे पूछता था, शायद ये पता लगाता होगा कि कहीं अचानक से मेरे पति ना आ जाएं।

हम दोनो अब छत की बीच की मुंडेर पर बैठ गये… मुझे पता था अब वो मेरे हाथ छूने की कोशिश करेगा। रोज़ की तरह हाथ हिला हिला कर बात करते हुए वो मुझे छूने लगा। मैं भी मौका पा कर उसे छूती थी।, पर मेरा वार उसके लण्ड पर सीधा होता था। वो उत्तेजना से सिमट जाता था। हम लोग कुछ देर तक तो बाते करते रहे फिर उठ कर टहलने लगे… ठंडी हवा मेरे पेटीकोट में घुस कर मेरे चूत को और गाण्ड को सहला रही थी… मुझे धीमी उत्तेजना सी लग रही थी।

जैसी आशा थी वैसा ही हुआ। राज ने आज फिर मुझे कुछ कहने की कोशिश की, मैंने सोच लिया था कि आज यदि उसने थोड़ी भी शुरूआत की तो उसे अपने चक्कर में फंसा लूंगी।

उसने धीरे से झिझकते हुए कहा -“भाभी… मैं एक बात कहूं… बुरा तो नहीं मनोगी ” मुझे सिरहन सी दौड़ गयी। उसके कहने के अन्दाज से मैं जान गई थी कि वो क्या कहेगा।

“कहो ना… तुम्हारी किसी बात का बुरा माना है मैंने…” उसे बढ़ावा तो देना ही था, वर्ना आज भी बात अटक जायेगी।

“नहीं… वो बात ही कुछ ऐसी है…” मेरे दिल दिल की धड़कन बढ़ गई। मैं अधीर हो उठी… मेरा दिल उछल कर गले में आ रहा था…

“राम कसम… बोल दो ना…” मैंने उसके चेहरे की तरफ़ बड़ी आशा से देखा।
“भाभी आप मुझे अच्छी लगती हैं…” आखिर उसने बोल ही दिया…और मेरा फ़ंदा कस गया।
“राज… मेरे अच्छे राज … फिर से कहो… हां… हां … कहो… ना…” मैंने उसे और बढ़ावा दिया।

उसने कांपते हाथों से मेरे हाथ पकड़ लिये। उसकी कंपकंपी मैं महसूस कर रही थी। मैं भी एकबारगी सिहर उठी। उसकी ओर हसरत भरी निगहों से देखने लगी।

“भाभी… मैं आपको प्यार करने लगा हूँ…!” लड़खड़ाती जुबान से उसने कहा।
“चल हट… ये भी कोई बात है… प्यार तो मैं भी करती हूँ…!” मैंने हंस कर गम्भीरता तोड़ते हुए कहा.
“नहीं भाभी… भाभी वाला प्यार नहीं… ” उसके हाथ मेरे भारी बोबे तक पहुंचने लगे थे।

मैंने उसे बढ़ावा देने के लिये अपने बोबे और उभार लिये। पर बदन की कंपकंपी बढ़ रही थी। उसे भी शायद लगा कि मैंने हरी झंडी दिखा दी है। उसके हाथ जैसे ही मेरे उरोज पर पहुंचे…मेरा पूरा शरीर थर्रा गया। मैं सिमट गयी।

“राऽऽज्… नहींऽऽऽ… हाय रे…” मैंने उसके हाथों को अपनी छाती पर ही पकड़ लिया, पर हटाया नहीं। उसके शरीर की कंपकपी भी बढ़ गयी। उसने मेरे चेहरे को देखा और अपने होंठ मेरे होंठो की तरफ़ बढ़ाने लगा। मुझे लगा मेरा सपना अब पूरा होने वाला है। मेरी आंखे बंद होने लगी। मेरा हाथ अचानक ही उसके लण्ड से टकरा गया। उसका तनाव का अहसास पाते ही मेरे रोंगटे खड़े हो गये। मेरे चूत की कुलबुलाहट बढ़ने लगी। उसके हाथ अब मेरे सीने पर रेंगने लगे। मेरी सांसे बढ़ चली। वो भी उत्तेजना में गहरी सांसे भर रहा था। मैं अतिउत्तेजना के कारण अपने आप को उससे दूर करने लगी। मुझे पसीना छूटने लगा। मैं एक कदम पीछे हट गयी।

“भाभीऽऽऽ … मत जाओ प्लीज्…” वह आगे बढ़ कर मेरी पीठ से चिपक गया। उसका एक हाथ मेरे पेट पर आ गया। मेरा नीचे का हिस्सा कांप गया। मेरा पेट कंपकंपी के मारे थरथराने लगा। मेरी सांसे रुक रुक कर निकल रही थी। उसका हाथ अब मेरी चूत की तरफ़ बढ़ चला। मेरे पेटीकोट के अन्दर हाथ सरकता हुआ मेरी चूत के बालों पर आगया। अब उसने तुरन्त ही मेरी चूत को अपने हाथों से ढांप लिया। मैं दोहरी होती चली गयी। सामने की ओर झुकती चली गयी। उसका लण्ड मेरी चूतड़ों कि दरार को रगड़ता हुआ गाण्ड के छेद तक घुस गया। मैं अब हर तरफ़ से उसके कब्जे में थी। वह मेरी चूत को दबा रहा था। मेरी चूत गीली होने लगी थी।

“राज्… हाऽऽऽय रे… मेरे राम जी… मैं मर गई!” मैंने उसका हाथ नहीं हटाया और वो ज्यादा उत्तेजित हो गया।

“भाभी… आप कितनी प्यारी है…” मैंने जब कोई विरोध नहीं किया तो वह खुल गया। उसने मुझे अब जकड़ लिया। मेरे स्तनो को अपने कब्जे में लेकर होले होले सहलाने लगा। उसके प्यार भरे आलिंगन ने और मधुर बातों ने मुझे उत्तेजना से भर दिया। जिस प्यार भरे तरीके से वो ये सब कर रहा था… मैंने अपने आपको उसके हवाले कर दिया। मेरा शरीर वासना के मारे झनझना रहा था। उसका लण्ड मेरी गाण्ड के छेद पर दस्तक दे रहा था।

“तुम मुझे प्यार करते हो…!” मैंने वासना में उसे प्यार का इज़हार करने को कहा।

“हां भाभी… बहुत प्यार करता हूं…तब से जब मैं आपसे पहली बार मिला था!”

“देखो राज…ये बात किसी को नहीं बताना… मेरी इज्जत तुम्हारे हाथ में है… मैं बदनाम हो जाऊंगी… मैं मर जाऊंगी…!” मैंने उस पर अपना जाल फ़ेंका।

“भाभी… मैं मर जाऊंगा…पर ये भेद किसी को नहीं कहूंगा…” मेरी विनती से उसका दिल पिघल उठा।

“तब देरी क्यूं… मेरा पेटीकोट उतार दो ना… अपने पजामे की रुकावट हटा दो…” मुझसे अब बिना चुदे रहा नहीं जा रहा था। उसने मेरे पेटीकोट का नाड़ा खोल डाला और पेटीकोट अपने आप नीचे फ़िसल गया। उसका लण्ड भी अब स्वतन्त्र हो गया था।

“भाभी… आज्ञा हो तो पीछे से शुरु करू… तुम्हारी प्यारे प्यारे गोल गोल चूतड़ मुझे बहुत पसन्द है…” उसने अपनी पसन्द बिना किसी हिचक के बता दी।

“राऽऽऽज… अब मैं तुम्हारी हू… प्लीज़ अब कहीं से भी शुरू करो… पर जल्दी करो… बस घुसा दो…” मैंने राज से अपनी दिल की हालत बयां कर दी।

“भाभी… जरा मेरे लण्ड को एक बार प्यार कर लो और थूक लगा दो…” मैंने प्यार से उसे देखा और नीचे झुक कर उसका लण्ड अपने मुंह में भर लिया… हाय राम इतना मस्त लण्ड!… वो तो मस्ती में फ़नफ़ना रहा था। मैंने उसका सुपाड़ा कस के चूस लिया। और फिर ढेर सारा थूक उस पर लगा दिया। अब मैं खड़ी हो गयी… राज के होंठो के चूमा… और अपने चूतड़ उघाड़ कर पीछे निकाल दी। मेरे गोरे चूतड़ हल्की रोशनी में भी चमक उठे। मैंने अपनी चूतड़ की प्यारी फ़ांके अपने हाथों से चीर दी और गाण्ड का छेद खोल कर दे दिया। मेरे थूक से भरा हुआ उसका लण्ड मेरी गाण्ड के छेद पर आ टिका। मैंने हल्का सा गाण्ड का धक्का उसके लण्ड पर मारा। उसकी सुपारी मेरे गाण्ड के छेद में फ़ंस गयी। उसके लण्ड के अंदर घुसते ही मुझे उसकी मोटाई का अनुमान हो गया।

“राज… प्लीज… चलो न अब… चलो…करो ना!” पर लगा उसे कुछ तकलीफ़ हुई। मैंने पीछे जोर लगाया तो उसने भी लण्ड को दबा कर अंदर घुसेड़ दिया। पर उसके मुख से चीख निकल गयी।

“भाभी… लगती है… जलता है…” मुझे तुरन्त मालूम हो गया कि उसने मुझे ही पहली बार चोदा है। उसके लण्ड की स्किन फ़ट चुकी थी। मेरा मन खुशी से भर उठा। मुझे एक फ़्रेश माल मिला था। एक बिलकुल नया लण्ड मुझे नसीब हुआ था। मेरे पर एक नशा सा चढ़ गया।

“राजा… बाहर निकाल कर धक्का मारो ना… देखो तो मेरा मन कैसा हो रहा है। ऐसी जलन तो बस दो मिनट की होती है…” मैंने उसे बढ़ावा दिया।

उसने मेरा कहा मान कर अपना लण्ड थोड़ा सा निकाल कर धीरे से वापस घुसेड़ा। फिर धीरे धीरे रफ़्तार बढ़ाने लगा। मैं उसका लण्ड पा कर मस्त हो उठी थी। मैंने अपने दोनो हाथ छत की मुंडेर पर रख लिये थे और घोड़ी बनी हुई थी। मैंने अपने दोनो पांव पूरे खोल रखे थे। चूतड़ बाहर उभार रखे थे। राज ने अब मेरे बोबे अपने हाथों में भर लिये और मसलने लगा। मैं वासना के मारे तड़प उठी। उसे लण्ड पर चोट लग रही थी पर उसे मजा आ रहा था। उसके धक्के बढ़ते ही जा रहे थे। उत्तेजना के मारे मेरी चूत पानी छोड़ रही थी। अचानक उसने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया… और मेरी तरफ़ देखा। मैं उसका इशारा समझ गयी। मैं बिस्तर पर आ कर लेट गयी।

“भाभी… आप बहुत प्यारी है…सच बहुत मजा आ रहा है… जिन्दगी में पहली बार इतना मजा आया है…” मुझे पता था कि जब पहली बार किसी चूत में लण्ड जायेगा तो …मजा तो नया होगा… इसलिये आत्मा तक तो आनन्द मिलेगा। और फिर मेरी तो जैसे सुहाग रात हो गयी… कई दिनों बाद चुदी थी। फिर कितने ही दिनों से मन में चुदने कि इच्छा थी। किस्मत थी कि मुझे नया लण्ड मिला।

राज मेरे पास बिस्तर पर आ गया। मैंने अपनी दोनो टांगे ऊपर उठा दी और चूत खोल दी। राज ने आराम से बैठ कर अपना लण्ड हाथ से घिसा और हिला कर चूत के पास रख दिया। मैं मुस्कुरा उठी… उसे ये नहीं पता था कि लण्ड कहां रखना है… मैंने उसका लण्ड पकड़ कर चूत पर रख दिया।

“राजा… नये हो ना… तुम्हे तो खूब मजा दूंगी मै…आ जाओ… मुझ पर छा जाओ…” मैंने चुदाई का न्योता दिया।

उसने हल्का सा जोर लगाया और लण्ड बिना किसी रुकावट के मेरी गीली चूत के अन्दर सरकता हुआ घुसने लगा। मुझे चूत में तीखी मीठी सी गुदगुदी उठने लगी और लण्ड अन्दर सरकता रहा।

“आहऽऽऽ … राज… मेरे प्यार… हाय रे… और लम्बा सा घुसा दे…अन्दर तक घुसा दे…” मेरी आह निकलती जा रही थी। सुख से सराबोर हो गई थी। उसने मेरे दोनो चूंचक खींच डाले… दर्द हुआ … पर अनाड़ी का सुख डबल होता है… सब सहती गयी। अब उसके धक्के इंजन के पिस्टन की तरह चल रहे थे। पर अब वो मेरे शरीर के ऊपर आ गया था…मैं पूरी तरह से उससे दब गई थी। मुझे परेशानी हो रही थी पर मैं कुछ बोली नही… वो अपना लण्ड तेजी से चूत पर पटक रहा था, जो मुझे असीम आनन्द दे रहा था।

“भाभी… आह रे… तेरी चूत मारूं… ओह हां… चोद डालू… तेरी तो… हाय भाभी…” उसकी सिसकारियां मुझे सुकून पहुंचा रही थी। उसकी गालियाँ मानो चुदाई में रस घोल रही थी…

“मेरे राजा… चोद दे तेरी भाभी को… मार अपना लण्ड… हाय रे राज…तेरा मोटा लण्ड… चोद डाल…” मैंने उसे गाली देने के लिये उकसाया… और राज्…
“मेरी प्यारी भाभी… भोसड़ी चोद दूं… तेरी चूत फ़ाड़ डालू… हाय रे मेरी… कुतिया…मेरी प्यारी…” वो बोलता ही जा रहा था।
“हां मेरे राजा … मजा आ रहा है… मार दे मेरी चूत …”
“भाभी …तुम बहुत ही प्यारी हो…कितने फ़ूल झड़ते है तुम्हारी बातों में… तेरी तो फ़ाड़ डालूं… साली!”

फ़काफ़क उसके धक्के तेज होते गये… मैं मस्ती के मारे सिसकारियाँ भर रही थी…वो भी जोश में गालियाँ दे कर मुझे चोद रहा था। उसका लण्ड पहली बार मेरी चूत मार रहा था। सो लग रहा था कि वो अब ज्यादा देर तक रह नहीं पायेगा।

“अरे… अरे… ये क्या…?” मैंने प्यार से कहा.
उसका निकलने वाला था। उसके शरीर में ऐठन चालू हो गई थी। मैं जानती थी कि मर्द कैसे झड़ते हैं।

“हां भाभी… मुझे कुछ हो रहा है… शायद पेशाब निकल रहा है… नहीं नहीं… ये …ये… हाय्… भाभी…ये क्या…” उसके लण्ड का पूरा जोर मेरी चूत पर लग रहा था। और … और… उसका पानी छूट पड़ा… उसका लण्ड फ़ूलता… पिचकता रहा मेरी चूत में सारा वीर्य मेरी चूत में भरने लगा। मैंने उसे चिपका लिया। वो गहरी गहरी सांसे भरने लगा। और एक तरफ़ लुढ़क गया। मैं प्यासी रह गयी… पर वो एक २२ वर्षीय जवान लड़का था, मेरे जैसी ३३ साल की औरत के साथ उसका क्या मुकाबला…। उसमें ताकत थी…जोश था… पूरी जवानी पर था। वो तुरन्त उठ बैठा। वो शायद मुझे छोड़ना नहीं चाह रहा था। मुझे भी लग रहा था कि कही वो अब चला ना जाये। पर मेरा अनुमान गलत निकला। वो फिर से मुझसे प्यार करने लगा। मुझे अब अपनी प्यास भी तो बुझानी थी। मैंने मौका पा कर फिर से उसे उत्तेजित करना चालू कर दिया। कुछ ही देर में वो और उसका लण्ड तैयार था। एकदम टनाटन सीधा लोहे की तरह तना हुआ खड़ा था।
“भाभी…प्लीज़ एक बार और… प्लीज…” उसने बड़े ही प्यार भरे शब्दों में अनुरोध किया। प्यासी चूत को तो लण्ड चाहिये ही था… और फिर मुझे एक बार तो क्या… बार बार लण्ड चाहिये था…
“मेरे राजा… फिर देर क्यों … चढ़ जाओ ना मेरे ऊपर…” मैंने अपनी टांगे एक बार फिर चुदवाने के लिये ऊपर उठा दी और चूत के दरवाजे को उसके लण्ड के लिये खोल दिया।

वो एक बार फिर मेरे ऊपर चढ़ गया… उसका लोहे जैसा लण्ड फिर मेरे शरीर में उतरने लगा। इस बार उसका पूरा लण्ड गहराई तक चोद रहा था। मैं फ़िर से आनन्द में मस्त हो उठी… चूतड़ों को उछाल उछाल कर चुदवाने लगी। अब वो पहले की अपेक्षा सफ़ाई से चोद रहा था। उसका कोई भी अंग मेरे शरीर से नहीं चिपका था। मेरा सारा शरीर फ़्री था। बस नीचे से मेरी चूत और उसका लण्ड जुड़े हुये थे। दोनो हो बड़ी सरलता से धक्के मार रहे थे। वार सीधा चूत पर ही हो रहा था। छप छप और फ़च फ़च की मधुर आवाजे अब स्पष्ट आ रही थी। वो मेरे बोबे मसले जा रहा था। मेरी उत्तेजना दो चुदाई के बाद चरमसीमा पर आने लगी… मेरा शरीर जमीन पर पड़े बिस्तर पर कसने लगा, मेरा अंग अंग अकड़ने लगा। मेरे जिस्म का सारा रस जैसे अंग अंग में बहने लगा। मेरे दोनो हाथों को उसने दबा रखे थे। मेरा बदन उसके नीचे दबा फ़ड़फ़ड़ा रहा था।
“मेरे राजा… मुझे चोद दे जोर से…हाय राम जी… कस के जरा… ओहऽऽऽ … मैं तो गई मेरे राजा… लगा…जरा जोर से लगा…” मेरे शरीर में तेज मीठी मीठी तरावट आने लगी… लगा सब कुछ सिमट कर मेरी चूत में समा रहा है… जो कि बाहर निकले की तैयारी में है।
“मेरे राजा… जकड़ ले मुझे… कस ले हाऽऽऽय… मेरी तो निकली… मर गयीऽऽऽ ऊईईऽऽऽ आहऽऽऽ … ” मैं चरमसीमा लांघ चुकी थी… और मेरा पानी छूट पड़ा। पर उसका लण्ड तो तेजी से चोद रहा था। अब उसके लण्ड ने भी अन्गड़ाई ली और मेरी चूत में एक बार फिर पिचकारी छोड़ दी। पर इस बार मैंने उसे जकड़ रखा था। मेरी चूत में उसका वीर्य भरने लगा। एक बार फिर से मेरी चूत में वीर्य छोड़ने का अह्सास दे रहा था। कुछ देर तक हम दोनों ही अपना रस निकालते रहे। जब पूरा वीर्य निकल गया तो हम गहरी गहरी सांसे लेने लगे। मेरे ऊपर से हट कर वो मेरे पास ही लेट गया। हम दोनो शान्त हो चुके थे…और पूरी सन्तुष्टि के साथ चित लेटे हुए थे। रात बहुत हो चुकी थी। राज जाने की तैयारी कर रहा था। उसने जाने से पहले मुझे कस कर प्यार किया… और कहा…”भाभी… आप बहुत प्यारी है… आज्ञा हो तो कल भी…” हिचकते हुये उसने कहा, पर यहा कल की बात ही कहां थी…

मैंने उसे कहा -“मेरे राजा…मेरे बिस्तर पर बहुत जगह है… यही सो जाओ ना…”
“जी…भाभी…रात को अगर मुझे फिर से इच्छा होने लगी तो…”
“आज तो हमारी सुहागरात है ना… फिर से मेरे ऊपर चढ़ जाना…और चोद देना मुझे…”
“भाभी…आप कितनी…”
“प्यारी हूं ना… और हां अब से भाभी नही…मुझे कहो नेहा…समझे…” मैंने हंस कर उसे अपने पास लेटा लिया और बचपन की आदत के अनुसार मैंने अपना एक पांव उसकी कमर में डाल कर सोने की कोशिश करने लगी। Indian Sex Stories

Hello
दोस्तो नमस्कार, Hindi Porn Stories

जब मैं बी.टेक. कर रहा था तभी Hindi Porn Stories गौरी नाम की लड़की से मेरी दोस्ती फोन पर हुई। मैंने उसे देखा नहीं था पर मैं उसे बहुत प्यार करने लगा था। धीरे-2 हम लोगों में इतना प्यार हो गया था कि हम एक दूसरे से फोन पर 4 घंटे तक रोज बात करते थे और जैसे -2 प्यार बढ़ता गया, हम मन से होते हुए तन पर चले गये। हम लोग फोन पर ही सेक्स करते थे। वो इतनी सेक्सी बातें करती थी कि वो वहाँ उंगली डाल कर अपनी आग बुझाती थी और मैं मुठ मार कर अपनी जवानी की तड़प शांत करता था। पर जब भी मैं उससे मिलने को कहता था वो कोई न कोई बहाना बना कर मुझे चुप करा देती थी। मुझे समझ में नहीं आता था कि उसके मन में क्या था.

धीरे-2 वक़्त गुजरता गया। हमारे इस चक्कर को 2 साल हो गये थे पर मैं उसे देख भी न सका था। मैं सुल्तानपुर से बी टेक कर रहा था और वो बनारस की थी। फिर भी मैं उसकी चाहत में मजबूर था।

मेरा यह भ्रम तो तब टूटा जब मैंने अपना कोर्स पूरा कर लिया और मेरी जॉब लग गई।

तो मैंने उससे शादी के लिए कहा तो उसने अचानक ही अपने सारे नंबर बंद कर लिए। मेरा दिमाग आपे से बाहर हो गया, मैं उसे ऐसे कैसे जाने देता जिसके लिए मैंने कितनी बार मुठ मारी थी। मैंने अपने कुछ दोस्तों की मदद ले के उसके नम्बर की आईडी निकलवाई और बनारस आ गया…

अपने दोस्तों को नीचे खड़ा करके जैसे ही मैं उस पते पर पहुंचा, वहाँ मेरे सपनों की मल्लिका ने नहीं, एक 35 साल की औरत ने दरवाजा खोला। फोन पर वो मुझे हमेशा 22 साल की लड़की बताती रही थी। मुझे बहुत तकलीफ हुई, मैंने उससे बदला लेने की अपने दिमाग में ठान ली…

वैसे मैं आपको बता दूँ कि वो 35 साल की औरत भी इतनी माल थी कि 18 साल की लड़कियों को पानी भरा दे। उसका फिगर 34-30-38 का था। मेरा तो लंड देख के ही फनफना गया पर जब सब बातें सामने आई तो वो रोने लगी, बोली- चाहे जो कर लो, पर मेरे पति को कुछ मत बताना, मेरा घर बर्बाद हो जायेगा.

मैंने कहा- ठीक है, मुझे खुश करना होगा सारी जिन्दगी!
और वो राजी हो गई…

वो मुझे अपने बेडरूम में ले गई। उसकी गांड और उभरे हुए स्तनों के उभरे हुए चुचूक देख कर मेरे लंड महाराज आपे से बाहर हो रहे थे। बेडरूम में आते मैंने उसको अपनी बाहों भर लिया और उसके रसीले होटों पर अपने होंट टिका दिए। मैं 10 मिनट तक उसके होटों को चूसता रहा। मेरा एक हाथ उसके पिछवाड़े को सहला रहा था तो दूसरा उसकी चूची को मसल रहा था।

मैंने उसको बेड पर गिरा दिया और उसके पल्लू को हटाया। जोश-2 में मैंने उसके ब्लाउज़ के बटन को तोड़ दिए। अन्दर वो काली ब्रा पहने हुई थी और चूचियाँ तो जैसे ब्रा को फाड़ कर निकलने को बेताब थी। मैंने उसको उल्टा लिटा कर ब्रा का हुक खोल दिया, एक चूची को मुँह में ले कर दूसरी को दबाना शुरु कर दिया…

उसके मुँह से आह आह ऊ ऊह आह… की आवाजें आ रही थी… उसकी गांड बहुत ही ज्यादा मस्त थी, उसको सहलाते हुए मैंने उसका पेटीकोट नीचे खिसका दिया… क्या माल थी! मैं कैसे बयाँ करूँ शब्द नहीं है मेरे पास! गोरी संगमरमर जैसी जांघें… काली पेंटी में बहुत ही खूबसूरत लग रही थी। मैंने महसूस किया कि उसकी पेंटी गीली हो चुकी थी। मैंने अपने दाँतों से उसकी पेंटी नीचे खिसका दी। उसकी चूत पर हल्के-2 काल बाल थे। मैंने अपने होटों को उसके नीचे के होटों से मिला दिया. और जी भर के चूसने लगा… वो आह अहः आह ओह्ह के साथ बोल रही थी- आज तुम्हीं मेरे मालिक हो! मेरी प्यास बुझा दो! मेरे पति से कुछ नहीं होता! मुझे गरम कर के खुद लुढ़क जाते हैं . आज तुम मिले हो, मेरी आग बुझा दो…

मैं उसकी चूत चूस रहा था, तभी वो पलटी और मेरी जींस उतार दी, अंडरवियर भी और मेरे 7 इंच के लंड को मुँह में ले कर लॉलीपोप की तरह चूसने लगी…

मैं भी जोश में आ कर उसके मुँह में धक्के मारने लगा। कुछ देर बाद मैं झड़ गया और यहाँ इसकी चूत ने भी पानी फेंक दिया… वो मेरा और मैं उसका सारा अमृत जल पी गये…

इसके बाद मैंने उसे कुतिया स्टाइल में होने को कहा। शायद वो सब जानती थी, झट से अपनी गांड खोल कर झुक गई। मैंने पीछे से उसकी चूत में लंड पेल दिया। कई सालों से लंड खा रही थी सो आराम से झेल गई मेरा 7 इंच का लौडा…
मैंने भी जोर जोर से चुदाई शुरु कर दी…

उसके मुँह से पता नहीं क्या-2 निकल रहा था… चोदो मेरे राजा… मेरे पति का तो अब खड़ा भी नहीं होता! सही से मुझे तुम से जवान मर्द की तलाश थी… भोसड़ा बना दो आज मेरी चूत का… आह्ह… ऊह… उम्म्म… राजा… आह्ह… उम्म्म… सीई… सीई . मेरे राजा मेरे मालिक…

मैं भी अपनी मस्ती में पेले जा रहा था… अचानक उसका जिस्म अकड़ने लगा- और जोर से मेरे राजा! मेरा होने वाला है! आज तीन साल बाद मेरी आग बुझेगी और जोर से. आह… उम्म्म्म… सीई… आः…

और उसकी चूत ने लावा फेंक दिया. मैं भी मंजिल पर पहुँचने वाला था… मैंने स्पीड बढ़ा दी… 10-15 झटकों में ही मैंने अपनी आग उसके भोंसड़े में भर दी…

यह थी मेरी दूसरी चुदाई चाची की चुदाई के बाद…

आपको मेरी यह वास्तविक कहानी कैसी लगी, जरूर जवाब दें! खासकर हर शादीशुदा और कुंवारी लड़की जो अन्तर्वासना से जुड़ी है…

आपके इन्तजार में Hindi Porn Stories

अनजान आदमी से फ्रेंड के साथ सेक्स किया हाय फ्रेंड्स मेरा नाम मालविका हैं मेरी उम्र 27 साल हैं और मेरा फिगर 36-34-38 हैं मैं दिल्ली से हूं। मेरे हसबैंड एक बड़े संस्थान में नौकरी करते हैं और मैं भी सरकारी नौकरी के लिए तैयारी कर रही हूं। ये मेरी रियल सेक्स स्टोरी हैं। यह मेरी और मेरी कोचिंग की क्लासमेट मीनाक्षी की हैं। हम लोग कोचिंग में हमेशा एक साथ बैठते हैं और वापस घर भी एक साथ ही आते हैं मीनाक्षी की उम्र 30 साल है और उसका फिगर 38 34 40 है वह मेरे से थोड़ी मोटी है और उसके बड़े-बड़े बस और बड़ी-बड़ी गांड मेरे से भी ज्यादा बड़े और सेक्सी लगते हैं। वह कोचिंग में हमेशा टाइट कपड़े पहन कर आती है और कोचिंग के टीचर और बाकी स्टूडेंट उसे घूर-घूर कर देखते रहते हैं। कोचिंग के बाद जब हम घर आते हैं तो कई बार वह मेरे साथ मेरे घर आ जाती है क्योंकि वह भी दिल्ली में अकेले रहकर ही तैयारी कर रही है उसकी फैमिली उदयपुर में रहती है और उसका हस्बैंड कोलकाता में नौकरी करता है। वह सेक्स में बहुत इंटरेस्ट लेती है और मेरे से भी मेरे और मेरे हस्बैंड की सेक्स लाइफ के बारे में रोज पूछती रहती है। एक बार हम कोचिंग से घर आए तो मीनाक्षी और में एक साथ बैठकर पोर्न देखने लगे और पॉर्न मूवी देखते देखते हम दोनों गर्म हो गई थी तो मीनाक्षी मुझे किस करने लगी और मैं भी उसे वापस किस करने लगी और हम एक दूसरे के बूब्स दबाने लगे और वह मेरे कपड़े उतारने लगी और उसने मेरे सारे कपड़े उतार कर मुझे नंगा कर दिया और खुद भी पूरी नंगी हो गई फिर वह आई और अपना बूब्स मेरे मुंह में दे दिया और बोली कि तुम इसे जोर-जोर से चूस हो और मैं उसके बूब्स को चूसने लगी वह मेरे बस को दबा रही थी और मैं उसके बूब्स को चूस रही थी कुछ देर बाद उसने मुझे सोफे पर लिटा दिया और मेरी चुत चाटने लगी। वह अपनी जीभ मेरी चुत के अंदर तक डालकर चाट रही थी और मेरे बूब्स को सहला रही थी। फिर उसने मेरे मुंह पर अपनी छूट रखनी और मेरी चुत चाटने लगे हम लोग 69 की पोजीशन में एक दूसरे की चुत चाट रहे थे। कुछ देर बाद हमारी चुत से पानी झड़ गया और हम एक दूसरे से अलग होकर सोफे पर नंगे ही बैठ गए। फिर उसने मुझे कहा कि तुम्हारे पास डिल्डो है क्या तो मैंने कहा नहीं मेरे पास तो नहीं है तो फिर वह बोले कि घर में लंड के जैसा क्या है तो मैंने कहा कि फ्रिज में खीरा रखा है तो वह बोली तो लेकर के आओ फिर मैं किचन में गई और एक लंबा खीरा लेकर आई मीनाक्षी ने मुझे कहा कि तुम्हारे हस्बैंड के कंडोम कहां पड़े हैं तो मैंने कहा कि वह अलमारी के अंदर है तो उसने एक कंडोम लिया और खीरे पर कंडोम चढ़ा लिया। फिर वह सोफे पर टांगे चौड़ी करके बैठ गई और मुझे कहा कि तुम मेरी चुत में खीरे को अंदर बाहर करो मैं उसे लंबे खीरे को अपने हाथ में पकड़ कर मीनाक्षी की चुत में डालने लगी वह बहुत ज्यादा गर्म हो गई थी इसलिए आहें भर रही थी। 6 7 मिनट तक खीर डालते रहने के बाद उसकी चुत ने पानी छोड़ दिया था और उसकी चुत में खीरा करने के कारण मैं भी गरम हो गई तो मैं मीनाक्षी से कहा कि साली रंडी तेरा तो पानी छुट गया है अब मुझे कौन शांत करेगा। मीनाक्षी बोली कि तुझे तो रोज रात में तेरे हस्बैंड का लंड मिलता है तुझे खीरे की क्या जरूरत तुम्हें बोली की हस्बैंड तो रात में आकर चोदेगा करीब 5-6 मिनट तक लगातार खीरा डालने के बाद मेरी चुत ने भी पानी छोड़ दिया। फिर हम लोगों ने कपड़े पहने और खाना खाकर मेरे घर पर ही सो गए। कुछ दिनों बाद हमारा सरकारी नौकरी का एग्जाम जयपुर में होने वाला था मेरा और मीनाक्षी का सेंटर जयपुर में आया तो मैं मेरे हस्बैंड से कहा कि आप हमारे साथ चलोगे क्या तो वह बोले कि मैं नहीं चल पाऊंगा मुझे ऑफिस जाना पड़ेगा तुम और मीनाक्षी एक साथ चले जाओ। फिर मैं थर्ड एसी के दो टिकट बनवा ली है और मीनाक्षी के साथ जयपुर जाने की तैयारी कर ली। मीनाक्षी बोली की दिसंबर का महीना है और जयपुर में दिसंबर के महीने में टूरिस्ट बहुत आते हैं तो हम भी एक-दो दिन बाहर रख कर वापस आएंगे तो मैं एग्जाम के दो दिन बाद वापस दिल्ली आने का टिकट बनवाया। संडे को दिन में हमारा एग्जाम था इसलिए हम शनिवार की रात को दिल्ली से ट्रेन में बैठे और सुबह जयपुर पहुंच गए वहां जाकर हम सीधे होटल गए और वहां से तैयार होकर में मेरे एग्जाम सेंटर की तरफ निकल गई और मीनाक्षी अपने एग्जाम सेंटर की तरफ निकल गई। शाम को पांच बजे तक हम दोनों वापस होटल आए थोड़ी देर हम लोगों ने रेस्ट किया और फिर हम लोग जयपुर सिटी घूमने चले गए। मैं और मीनाक्षी ने टाइट जींस और टाइट टी-शर्ट पहने हुए थे और उसके ऊपर स्वेटर पहने हुए थे जिसमें हमारा फिगर बहुत ज्यादा सेक्सी लग रहा था। लोग जयपुर के मार्केट में घूम रहे थे जो जंतर मंतर के पास था वहां पर बहुत सारे टूरिस्ट भी आए हुए थे वहां पर लोग हमें घूर घूर कर देख रहे थे। काफी देर घूमने के बाद हम लोग खाना खाने एक अच्छे होटल में चले गए वहां पर काफी टूरिस्ट भी खाना खा रहे थे वहां पर सारी टेबल बुक थी इसलिए हमने थोड़ी देर में ही खड़े रहकर वेट किया और फिर हमने देखा कि एक काला अफ्रीकन आदमी बैठा है और उसकी टेबल पर और कोई नहीं बैठा है वह अकेला ही वहां बैठा था तो मीनाक्षी ने उससे पूछा कि क्या हम यहां पर बैठ सकते हैं तो उसे फ्री करने कहा कि हां आप यहां बैठ जाइए। फिर हम लोग वहां बैठ गए और हमने ऑर्डर दिया हमें और मीनाक्षी उससे बातें करने लगे वह आदमी जयपुर किसी बिजनेस मीटिंग के लिए आया था और अकेला ही था वह अमेरिका में रहता था उसका नाम जॉर्ज था बातों ही बातों में उसने बताया कि उसकी उम्र 47 साल है और उसकी वाइफ फ्रांस की है और उसकी उम्र 27 साल है। और उन्होंने लव मैरिज की है। मीनाक्षी ने पूछा कि वह तो आपसे बहुत ज्यादा छोटी है तो लव मैरिज कैसे हुई तो उसने बताया कि वह मेरे ऑफिस में काम करती थी और हमें आपस में प्यार हो गया और हम लोगों ने शादी कर ली फिर उसने अपने फोन में अपनी और अपनी वाइफ की फोटो दिखाई जो किसी बीच पर थी। जिसमें वह दोनों किसी बीच के किनारे खड़े होकर फोटो खिंचवा रहे थे जिसमें उसकी वाइफ बिकनी पहने हुई थी और जॉर्ज ने केवल अंडरवियर पहना हुआ था। फिर जॉर्ज ने हमें पूछा कि आप लोग कहां रुके हो तुम मीनाक्षी ने बताया कि हम यही एक होटल में रुके हैं फिर जोश ने बताया कि वह भी यही पास ही एक होटल में रुका हुआ हैं। फिर खाना खाने के बाद वह भी थोड़ी देर हमारे साथ घूमने लगा और फिर वह बोला कि आप मेरे रूम पर चलो वहां हम लोग थोड़ी देर बातें करेंगे तो मीनाक्षी बोली की हम लोग आज एग्जाम देकर आए हैं और हमें थोड़ी थकान है इसलिए हम जाकर रेस्ट करेंगे तो वह बोला कि वह हमारी थकान उतार देगा मीनाक्षी बोली कि कैसे उतरोगे तो जॉर्ज ने कहा कि जैसा आप कहोगे वैसे आपकी थकान उतार दूंगा वैसे उसकी वाइफ उसकी बहुत तारीफ करती है क्योंकि वह बहुत अच्छी मसाज करता है और आप कहो तो आपकी भी मसाज कर सकता हूं। मैंने कहा कि मसाज की कोई जरूरत नहीं है हम ऐसे ही चलते हैं। फिर हम लोग जॉर्ज के रूम पर आ गए और वहां पर थोड़ी देर रुके और बातें करने के बाद हम अपने होटल के लिए निकलने लगे तो जॉर्ज ने निकलते समय हम दोनों को गले लगाया और बोला कि कल सुबह में आपका इंतजार करूंगा मीनाक्षी बोली कि कल हम लोग जयपुर घूमने का प्लान कर रहे हैं तो वह बोला कि मैं भी आपके साथ घूमना चाहता हूं तो हमने उसे कह दिया कि ठीक है हम तीनों कल एक साथ जयपुर घूम लेंगे फिर हम लोग अपने होटल आ गए। मैंने मीनाक्षी से कहा कि मीनाक्षी मुझे उसे जॉर्ज का इरादा ठीक नहीं लगता तो मीनाक्षी बोली की वह अफ्रीकन है उसके पास लंबा लंड है और हमारे पास एक अच्छा मौका है बड़े लंड से चुदवाने का इसलिए ज्यादा सोच मत और कल घूमने चलो। फिर दूसरे दिन सुबह मैं और मीनाक्षी वन पीस ड्रेस पहन कर जॉर्ज के होटल पहुंच गए वहां पर वह हमारा इंतजार कर रहा था और जॉर्ज के साथ ही ब्रेकफास्ट करने के बाद हम लोग कर टैक्सी में जयपुर घूमने चले गए उसे दिन हमने उसके साथ आमेर किला नाहरगढ़ फोर्ट हवा महल जंतर मंतर अल्बर्ट हॉल म्यूजियम और कई जगह घूमी दिन में हमने जॉर्ज के साथ लंच भी किया। दिन में जब हम घूम रहे थे तब जॉर्ज रह रहकर कभी मीनाक्षी तो कभी मेरे साथ चिपकने की कोशिश करता था। शाम को वह हमें अपने साथ अपने होटल लेकर गया और वहां हमने साथ में कॉफी पी। मैं बोली की जोर जब हम लोग अपने होटल जाते हैं तो वह बोला कि खाना यही खाकर जाना तो मैं बोली कि हमें लेट हो जाएगा तो वह बोला कि आज यहीं रुक जाओ तो मीनाक्षी ने कहा कि यहां तो सिर्फ एक बेड है हम तीनों कैसे रख सकते हैं तो जॉर्ज बोला कि हम तीनों एक साथ भी तो सो सकते हैं मीनाक्षी बोली कि तुम्हें कोई तकलीफ तो नहीं होगी जॉर्ज बोला कि तुम दो हसीनाएं अगर मेरे साथ रात में रखेगी तो मुझे क्या तकलीफ होगी। मीनाक्षी बोली कि जॉर्ज तुम्हारा इरादा क्या है बता दो तो जॉर्ज बोला कि अब तुम समझ ही रही हो कि मेरा इरादा क्या है मैं तुम दो हसीनाओं के साथ आज रात एंजॉय करना चाहता हूं क्या तुम तैयार हो तो मीनाक्षी बोली कि हमें क्या फायदा होगा जॉर्ज तुम्हें तो हमारी दो चुत चोदने को मिलेगी हमें क्या मिलेगा तो जॉर्ज बोला कि तुम्हें क्या चाहिए मैं तुम्हें देने को तैयार हूं तो मीनाक्षी बोली कि तुम क्या दे सकते हो तो जॉर्ज बोला कि तुम जो मांगो में देने को तैयार हूं तो मीनाक्षी बोली की क्या तुम हमें पेमेंट कर दोगे तो जॉर्ज बोला कि तुम जितना कहोगी मैं उतना पेमेंट कर दूंगा बस तुम दोनों आज रात मेरे साथ रुक जाओ फिर मीनाक्षी बोली ठीक हैं। फिर जॉर्ज के साथ हम लोगों ने खाना खाया और वापस उसके रूम में चले गए वहां हम लोग सोफे पर बैठकर बातें कर रहे थे थोड़ी देर बातें करने के बाद जॉर्ज ने मुझे अपनी गोद में बिठा लिया और मेरे बूब्स को दबाने लगा उसने मीनाक्षी को भी अपने पास बुला लिया हो मेरे वन पीस सूट के ऊपर से ही मेरे बूब्स को दबा रहा था थोड़ी देर बूब्स दबाने के बाद वह बोला तुम दोनों नंगी हो जाओ फिर वह खड़ा हुआ और उसने अपने सारे कपड़े निकाल दिए और नंगा हो गया हम उसके लंबे लंड को देखते रह गए उसका लंड बहुत ज्यादा कला और 10 इंच लंबा और 4 इंच मोटा था मैंने मीनाक्षी को कहा कि मीनाक्षी आज तो यह हमें मार ही देगा मीनाक्षी बोली कि ऐसा लंड लेने का मौका हमें बार-बार नहीं मिलेगा इसलिए आज से जी भर के चुदाई करने का मौका है इसलिए हम दोनों मजे से सेक्स का मजा लो। फिर जॉर्ज ने हमें भी नंगा कर दिया हम तीनों नंगे खड़े थे जॉर्ज ने खड़े-खड़े ही मुझे किस करना शुरू कर दिया वह मुझे किस करते हुए मेरी गांड को दबा रहा था वह अपने बड़े-बड़े हाथों से मेरी गांड को बहुत ज्यादा दबा रहा था फिर सोफे पर बैठ गया और मुझे अपने लंड पर बैठा लिया उसका लंड बहुत ज्यादा लंबा था इसलिए मुझे दर्द होने लगा लेकिन उसने कोई परवाह नहीं की और जबरदस्ती मेरी चुत में अपना लंबा काला लंड घुसा दिया उसने मीनाक्षी को पास बुलाया और उसका बूब्स अपने मुंह में लेकर चूसने लगा। मैं उसके लंड पर ऊपर नीचे हो रही थी और उसका पूरा लंबा काला लंड मेरी चुत में घुस रहा था मुझे ऐसा लग रहा था कि आज मेरी चुत फट जाएगी क्योंकि जॉर्ज का लंड मेरे हस्बैंड से कई गुना ज्यादा बड़ा था। थोड़ी देर बाद वह उठा और बेड पर लेट गया उसने मीनाक्षी को अपने लैंड पर बैठा लिया और मुझे बोला कि तुम तुम्हारी चुत मेरे मुंह पर रख दो मैं उसके मुंह पर अपनी चुत रख कर बैठ गई और मीनाक्षी उसके लंड पर बैठकर छुड़वाने लगी वह मेरी चुत के बहुत अंदर तक जीभ डालकर चोद रहा था। मीनाक्षी और मैं एक दूसरे के बूब्स दबा रहे थे। जॉर्ज बहुत तेजी से हम दोनों को एक साथ छोड़ने का मजा ले रहा था। थोड़ी देर बाद मेरी चुत ने पानी छोड़ दिया और जॉर्ज मेरी चुत का सारा पानी पी गया। फिर मैं है कर पास में बैठ गई और मीनाक्षी अभी भी उसके लंड पर ऊपर नीचे होकर सेक्स का मजा ले रही थी कुछ देर बाद जॉर्ज ने मीनाक्षी की चुत में ही अपना स्पर्म गिरा दिया और फिर वह दोनों भी अलग हो गए। दस पन्द्रह मिनट तक हम लोग आपस में बातें करते रहे फिर जॉर्ज का लंड वापस खड़ा हो गया तो वह बोला कि मीनाक्षी तुम बेड पर बैठ जाओ मालविका तुम्हारी चुत चाटेगी और मैं मालविका को डॉगी स्टाइल में पीछे से चोदूंगा फिर मीनाक्षी बेड पर बैठ गई मैंने उसकी टांगों को फैलाया और उसकी चुत चाटने लगी और जॉर्ज ने मुझे डॉगी स्टाइल में किया और पीछे से मेरी चुदाई करने लगा अब उसका लंबा लैंड मेरी चुत के गहराई तक अंदर जा रहा था और वापस बाहर निकाल कर वह बहुत तेज तेज ढके लग रहा था मीनाक्षी अपनी चुत चटवाते हुए मेरे बस को मसल रही थी और मेरा सिर पकड़कर चुत पर दबा रही थी जॉर्ज मेरी गांड पर तेजी से मर भी रहा था इस कारण मुझे दर्द भी हो रहा था लेकिन उसके लंबे लंड के कारण मुझे मजा भी बहुत आ रहा था। जॉर्ज करीब 10 मिनट तक इसी पोजीशन में हमें चोदता रहा मेरी चुत ने दो बार पानी छोड़ दिया था लेकिन जॉर्ज का लैंड अभी भी इतना हुआ था और वह तेजी से छोड़ रहा था। जॉर्ज ने फिर कहा कि अब तुम दोनों अपनी पोजीशन बदल लो अब मैं बेड पर बैठ गई और मीनाक्षी मेरी जगह डॉगी स्टाइल में उससे चुदवाने लगी थोड़ी देर बाद मीनाक्षी बोली कि जॉर्ज तुमने मेरी चुत को तो अपने स्पर्म से भर दिया है मालविका की चुत में भी तो अपना स्पर्म गिराओ तो बोला कि कोई बात नहीं इस बार मेरा सर इस पर मालविका की चुत में ही गिरेगा फिर थोड़ी देर बाद उसने मीनाक्षी की चुत से अपना लंड निकाल और बेड पर आकर मिशनरी पोज में वह मुझे चोदने लगा वह बहुत तेज स्पीड से ढके लग रहा था करीब दो-तीन मिनट तक उसने मेरी चुत में बहुत तेज तेज धक्के लगाने लगा और अपना सारा इस पर मेरी चुत में भर दिया फिर उसने अपना लंड बाहर निकल दिया मेरी चुत से उसका स्पर्म बाहर आने लगा तो मैंने उसे टॉवल से साफ किया। फिर मैंने जोर-जोर मीनाक्षी को अपने बैग में से निकाल कर चॉकलेट दी हमने चॉकलेट खाई और थोड़ी देर बातें करते रहे फिर जॉर्ज ने बोला कि तुम दोनों 69 की पोजीशन में एक दूसरे की चुत चाटा फिर मैं बेड पर लेट गई और मीनाक्षी मेरे मुंह पर अपनी चुत रखकर मेरी चुत चाटने लगी और मैं उसकी चुत चाटने लगी फिर जो आज आया और उसने मीनाक्षी की गांड पर क्रीम लगाई और अपनी एक अंगुली अंदर करने लगा मीनाक्षी बोली कि जॉर्ज तुम्हारा बहुत बड़ा है तुम धीरे-धीरे करना तो वह धीरे-धीरे अपनी अंगुली अंदर बाहर कर रहा था फिर उसने अपनी दो उंगलियां मीनाक्षी की गांड में डाल दिया और कुछ देर बाद उसने अपने लैंड पर क्रीम लगाई और वह मीनाक्षी की गांड मारने लगा मीनाक्षी को दर्द हो रहा था इसलिए वह आहें भरने लगी। जार्ज पांच छः मिनट तक उसकी गांड मारता रहा फिर उसने मुझे अपने सामने लुटाया और बोला कि अब मैं तुम्हारी गांड में अपना लंड डालूंगा तो मैंने कहा धीरे-धीरे डालना फिर उसने मेरी गांड पर भी क्रीम लगाई और धीरे-धीरे अपना लंड नेघुसने लगा थोड़ी देर बाद उसने अपना पूरा लंड मेरी गांड में घुसा दिया और 5 मिनट तक लगातार उसने मेरी गांड मारी फिर उसने मुझे अपने सामने बैठाया और मेरे बस पर अपना स्पर्म गिरा दिया। फिर हम तीनों थक चुके थे तो हम तीनों सो गए। रात में 3:00 बजे जॉर्ज उठा और उसने मीनाक्षी को मिशनरी पोजीशन में चोदना शुरू कर दिया मेरी भी नींद खुल गई थी मैंने देखा कि जॉर्ज बहुत तेज स्पीड से मीनाक्षी की चुत में धक्के लगा रहा था यह देखकर मैं भी गर्म हो गई और मैं भी मीनाक्षी के बूब्स को दबाने लगी और जॉर्ज को किस करने लगी। थोड़ी देर बाद उसने मुझे सामने से गोद में उठाया और मेरी चुत में अपना लंड डालकर चोदने लगा वह खड़ी-खड़े मुझे बहुत तेज स्पीड से छोड़ रहा था मीनाक्षी बेड पर देखकर यह देख रही थी जॉर्ज करीब छः सात मिनट तक इसी तरह खड़े-खड़े मुझे चोदता रहा फिर मीनाक्षी बोली कि जॉर्ज मालविका को अकेले ही छोड़ोगे या मुझे भी चोदोगे तो जॉर्ज बुला के तुम भी आ जाओ फिर उसने मीनाक्षी को भी अपनी गोद में उठा लिया और खड़ी-खड़े चोदने लगा। फिर उसने हम दोनों को अपने सामने बैठाया और हम दोनों के मुंह पर अपना स्पर्म गिरा दिया और बोला कि तुम यह स्पर्म चाट लो तो हमने उसका स्पर्म चाट लिया। फिर हम लोग सो गए ।सुबह सात बजे हम लोग उठे तो मीनाक्षी बोली कि जॉर्ज अब हम अपने होटल जा रहे हैं तो जॉर्ज बोला कि अभी एक बार और चुदाई करने दो फिर तुम चली जाना मीनाक्षी बोली कि जॉर्ज हमने तो चुदाई करने दी लेकिन तुमने अपना वादा नहीं निभाया तू जॉर्ज बोला कि मुझे मेरा वादा याद है और उसने एक लिफाफा मीनाक्षी को दिया मीनाक्षी ने वह लिफाफा खोलकर देखा तो उसमें एक लाख रुपये थे जार्ज बोला कि तुम खुश हो या और चाहिए तो मीनाक्षी बोली कि जॉर्ज हम खुश हैं फिर जॉर्ज नंगा ही बेड से खड़ा हुआ और बोला कि तुम दोनों मेरा लंड मुंह में लेकर चूसो फिर मैं और मीनाक्षी बारी-बारी से उसका लंड अपने मुंह में ले रहे थे फिर जॉर्ज ने हमें बेड पर लिटा दिया और मुझे मिशनरी पोजीशन में चोदने लगा वह करीब छः सात मिनट तक तेज स्पीड से मुझे चोदता रहा फिर बोला कि मीनाक्षी अब तुम आ जाओ फिर वो पांच छः मिनट तक चोदता रहा फिर उसने मेरे मुंह में अपना पूरा स्पर्म गिरा दिया और बोला कि मालविका तुम इसे पी जाओ फिर मैं उसका पूरा स्पर्म पी गई। फिर उसने मीनाक्षी को डागी स्टाइल में चोदना शुरु कर दिया वो मीनाक्षी को दस मिनट तक तेज स्पीड से चोदता रहा फिर उसने मीनाक्षी को सामने बैठाया और अपना लंड मीनाक्षी के मुंह में डाल दिया और अपना स्पर्म मीनाक्षी के मुंह में गिरा दिया। फिर हम वहां से वापस अपने होटल आ गए। उस दिन हम दिन में जयपुर घूमने गए। मीनाक्षी ने मुझे पचास हजार दिए और बोली कि ये लो जार्ज का गिफ्ट। फिर उस दिन शाम को हम वापस ट्रेन से दिल्ली आ गए। उसके बाद जार्ज कई बार दिल्ली आया मैंने और मीनाक्षी ने उसके साथ चुदाई की। anubabita1@hotmail.com

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