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Last Updated: 13 Apr 2026, 02:06 PM

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Sex Stoires

दोस्तो! मेरा नाम सुनील है, मैं Sex Stoires आपको अपनी मॉम की सेक्स स्टोरी बताता हूँ। मेरी मॉम की उम्र लगभग 45 साल होगी, वो बहुत ही सुंदर और सेक्सी है। मेरे पिता बाहर रहते हैं घर में मैं और मॉम ही होते हैं।

एक दिन हमारे घर में कोई मेहमान आये हुए थे, मेरे रिश्ते की चाचा! उनकी अभी अभी शादी हुई थी।
हमने उनको एक कमरा सोने को दे दिया और मेरी मॉम और मैं साथ सो गए।

रात को उनके कमरे से आवाज़ आने लगी तो मेरी नींद खुल गई और मैं इधर उधर देखने लगा तो मैंने देखा कि मॉम अपने बेड पर नहीं थी। मैं मॉम को देखने बाहर आया तो मैंने देखा कि मॉम अपना पेटीकोट उतारकर दरवाज़े के छेद से अंदर देख रही हैं और अपनी चूत में उंगली कर रही हैं।

मैं चुपचाप देखता रहा, कुछ नहीं बोला। जब मॉम झड़ गई तो उठ कर कमरे में आई और मुझे देख कर घबरा गई, बोली- क्या देखा तूने?
मैं बोला- कुछ नहीं!
मॉम बोली- अच्छा चल सो जा!

और हम दोनों सो गए पर मुझे नींद नहीं आ रही थी। अब मैं बार बार मॉम की तरफ देख रहा था। मुझे वो बड़ी सेक्सी लग रही थी।

सुबह चाचा लोग चले गए, फिर घर पर हम दोनों ही रह गये। मॉम ने नाश्ता बनाया और हम दोनों ने साथ बैठ कर खाया।

मॉम ने मैक्सी पहन रखी थी और अन्दर से कुछ नहीं पहना था। मुझे लगा कि उनको सेक्स करने का मन हो रहा है। नाश्ता करने के बाद वो बाथरूम में चली गई, बोली-मैं नहाने जा रही हूँ, तू कहीं जाना मत!
मैंने कहा- ठीक है!

फिर मॉम नहाने चली गई। हमारे बाथरूम के दरवाज़े में एक छेद है। जब मॉम को गए कुछ देर हो गई तो मैंने छेद पर जा कर देखा कि मॉम क्या कर रही हैं तो मैंने अन्दर देखा की मॉम बाथरूम में एक लम्बे बैंगन को अपनी चूत में जोर जोर से अन्दर बाहर कर रही हैं।

मैं यह खेल देखने में मशगूल हो गया। तभी अचानक मॉम ने दरवाज़ा खोल दिया। मुझे भागने का भी समय नहीं मिला और मैं पकड़ा गया। वो बहुत गुस्से में थी और अंदर जाकर बोली- रुक जा! तेरी शिकायत तेरे पापा से अभी करती हूँ!

पूरे दिन वो मुझसे नहीं बोली और अलग अलग ही रही। अब रात को जब सोने का समय हुआ तो मुझसे बोली- तू आज मेरे साथ ही सोयेगा!
मैं बोला- क्यों?
बोली- आज कल तू बहुत गलत बातें सीख रहा है, इसलिए!

मेरा तो मन उनके साथ सोने को हो ही रहा था क्योंकि वो रात को सिर्फ पेटीकोट पहन कर सोती हैं और नीद में उनका पेटीकोट ऊपर खिसक जाता है तो सब कुछ दिखता है।

फ़िर रात को हम सोने चले गए। मैंने पैन्ट पहन रखी थी। वो बोली- चल इसे उतार दे! सोने में परेशानी होगी!
मैंने कहा- मुझे कोई परेशानी नहीं होगी।
तो बोली- मुझे होगी! चल उतार!
अब हम दोनों सो गए। मॉम बोली- तू क्या देख रहा है?
मैं बोला- कुछ नहीं!
बोली- सच सच बता! नहीं तो पापा से बोल दूंगी!

मैं डर के मारे बोला कि रात को आप जब उंगली कर रही थी तो मैंने आप को देखा था। फ़िर सुबह आप सेक्सी लग रही थी तो मेरा मन आपको देखने का कर रहा था तो आपको देखा।
मॉम बोली- तुझे कुछ होता है?
मैं बोला- हाँ, बहुत कुछ होता है!

उन्होंने मेरे लंड को पकड़ लिया मेरा तो लौड़ा बिल्कुल खड़ा हो गया।
वो बोली- अब समझी कि तू आजकल क्या कर रहा है।
वो बोली- अब जब तू सब कुछ जानता है तो चल मेरे साथ सब कुछ कर!
मैं बोला- नहीं!
तो बोली- पापा से बोलना है क्या!
मैं बोला- नहीं!

बस फिर क्या था, मैं तो चालू हो गया, उनके पूरे कपड़े उतार कर उनको चाटने लगा और चूत चाट चाट कर तो उनको झाड़ दिया।
मैं बोला- कैसा लगा?
बोली- अच्छा लगा! लगे रहो!

फ़िर मैंने उनकी चूत मारी! काफी देर तक मारने के बाद वो झड़ गई, फिर बोली- बेटा! मजा आ गया!
कुछ देर बाद मैं भी झड़ गया। उस रात हमने चार बार चुदाई की।
अब तो रोज़ ही होता है!

एक दिन मेरे पापा को शक हो गया, लेकिन मॉम ने बात सम्भाल ली। अब मेरी मॉम और मैं रोज़ रात को साथ ही सोते हैं। मॉम और मैं बहुत ही खुश हैं।
आपको मेरी मॉम सेक्स स्टोरी कैसी लगी, मुझे मेल करना! Sex Stoires

लेखक : अरमान Hindi Porn Stories
मेरी यह कहानी Hindi Porn Stories अपने गुरु-भाई प्रेम गुरु और पूनम जी को समर्पित है।

……. गीता

मेरी कहानी पिछली मिस गीता का मुझे काफी अच्छा रेस्पोंस मिला इसलिए में आपके लिए एक और आप बीती बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ यह कहानी भी आप लोगों को अच्छी लगेगी।

जैसा कि आप लोगों को मालूम है अब मुझे जब भी मौका मिलता, मैं गीता को चोद लिया करता था। लेकिन हमें यह नहीं मालूम था कि हमें कोई छुप कर भी देखता है !

यह बात हम करीब ३-४ महीने के बाद मालूम पड़ी ! और देखने वाली थी गीता में छोटी बहन मीता। गीता की तरह मीता भी बहुत सुंदर थी एक दम गोरी, भरे भरे गाल, गुलाबी होंठ,काली बड़ी बड़ी आँखे, लम्बे बाल और फिगर ३६-३०-३४ इसलिए अभी उसकी गांड नही मारी थी किसी ने।

अब मुद्दे की बात करते हैं।

एक दिन मैं और गीता मस्ती कर रहे थे, उस दिन उनके घर में कोई नहीं था। अंकल आंटी मार्केट गये थे और मीता स्कूल गई थी। हम दोनों तो अपने काम में मस्त थे, हमें नहीं मालूम कि कब मीता आ चुकी और हमें खिड़की से देख रही है। अकेले होने की वजह से घर में कोई रोक टोक तो थी नहीं इसलिए मैं बाथरूम जाने के लिए निकल आया और सीधा बाथरूम में चला गया। लौट कर आया तो देखा मीता खिड़की की तरफ चेहरा करे हुए है और शायद उसकी आँखे बंद थी क्योंकि बहुत जोर जोर से मीता अपनी चूत में ऊँगली कर रही थी सलवार उतार कर।

मैंने भी उसे नही टोका और चला गया। आते ही मैंने गीता को इसके बारे में बताया तो वो बोलने लगी- बेचारी को अकेले ही तड़फने के लिए छोड़ आये?

मैंने कहा- मैं करता भी क्या ? तुम्हारी बहन है, अभी बुरा मान गई तो?

वो बोली- मादरचोद लड़की आधी नंगी खड़ी है और तुझे लगता है वो नाराज़ होगी।

ऐसा हो ही नही सकता ! चल मैं जाती हूँ और उससे तैयार करती हूँ। तुम १५ मिनट के बाद आ जाना।

मैं भी मान गया और बेड पर लेट गया और अपने लंड को ऊपर नीचे करने लगा और सोच रहा था कि मीता की चूत कैसी होगी। कहीं गीता की ही तरह मीता की भी तो चूत पहले से ही चुद चुकी है क्या ? और ना जाने क्या क्या सोचते सोचते १५ मिनट कब निकल गये मालूम ही नहीं चला।

और मैं मीता के कमरे में जाने लगा और गेट पर आकर रुक गया क्योंकि सामने का नज़ारा देखने लायक था। गीता मीता की चूत को २-३ ऊँगलियों से चोद रही है और चाट रही है। गीता कभी मीता की चूत चूसती तो कभी स्तन ! अब कब तक आँखें चार नहीं होगी, मीता ने अब मुझे देख लिया और वो एक दम उठ कर बेड के पीछे चली गई तो गीता ने कहा- वैसे तो गीता को बोलने के लिए चिल्ला रही थी अब क्या हो गया ?

मीता बहुत ही प्यार से थोड़ा शरमाते हुए बोली,“मुझे शर्म आती है !”

तो गीता बोली- गीता ! अब तुम ही इसकी शर्म दूर करो !

मेरा क्या था मैं तो रुका ही इसलिए था कि गीता या मीता खुद मुझ से बोले चोदने के लिए !

मैं अब धीरे धीरे बेड के पास गया और मीता का हाथ पकड़ कर उसे किस करने लगा, होठों को किस करने लगा। लेकिन मीता अभी भी शरमा रही थी और अपना चेहरा पीछे कर रही थी। मैंने भी सोच लिया था आज इसे इतने प्यार से चोदूंगा कि पूरी शर्म भाग जायेगी। मैं अभी भी मीता को किस कर रहा था और अपनी जीभ अन्दर बाहर कर रहा था। अब मीता थोड़ा थोड़ा खुलने लगी थी और मेरा साथ दे रही थी। अब किस करने में मज़ा आ रहा था क्यूँकि मीता मेरी जीभ को चूस रही थी और मैं उसकी।

अब मेरा हाथ उसके नंगे वक्ष पर था और दबा रहा था- ह्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म कितने नरम थे मीता के स्तन !

अब मेरे हाथ बहुत तेजी से चल रहे थे- कभी दांया स्तन दबता तो को कभी बाँयां ! और अब चूचुक भी चूस रहा था, काट रहा था। मीता के मुंह से सिसकारी निकल रही थी जोकि माहौल को और भी गर्म कर रही थी।

इसी तरह करीब २०-२५ मिनट निकल गये। मुझे तब याद आया जब गीता पास में आकर मेरा लंड हाथ में पकड़ कर बोली- मुझे क्यों अकेला छोड़ दिया है?

और गीता मेरा लंड चूसने लगी।

मुझे अब परेशानी हो रही थी शायद इसलिए कि बेड के पीछे जगह कम थी और दो दो हसीनाएं मेरे साथ काम-क्रिया कर रही थी।

मैंने कहा- बेड पर चलते हैं और मीता को गोद में उठाकर बेड पर ले आया और उसको अपने ऊपर कर लिया ताकि मैं आराम से उसके स्तनों को पी सकूँ, दबा सकूं, किस कर सकूं और गीता मेरा लंड आसानी से चूस सके। मैं दोनों तरफ से मजे ले रहा था।

अब यार एक बात बताओ एक लौड़ा हो और उसके पास दो दो सुंदर चूतें हों, वो कब तक अपना पानी रोक सकता है, मैंने भी अपना पूरा पानी गीता के मुँह में छोड़ दिया जिसे वो पूरा पी गयी और अपने होंठ पोंछते हुए हट गई। अब बारी मीता की जो थी।

लेकिन वो मना करने लगी। इस पर गीता ने उसकी गांड में लात मारते हुए गाली दी,“माँ की लौड़ी ! क्यूँ नखरे कर रही है, चुपचाप चूस ! नहीं तो तेरी चूत में पेट्रोल डाल दूंगी फिर ऊँगली डालते रहना रात भर !”

इससे एक फायदा यह हुआ कि मीता लंड चूसने लगी। वह तो गीता से अच्छा चूस रही थी।

अब मेरे मुंह में गीता ने अपनी चूत सटा दी और हिलने लगी। मैंने भी उसकी चूत को जीभ से खूब चाटा और चूसा। करीब १५ मिनट में मेरा फिर से पानी निकल गया और इस बार पानी मीता ने पीया था और गीता मेरे मुंह में झड़ गई, गीता का पानी मैंने पी लिया और गीता को हटा दिया ताकि वो मेरा लंड फिर से खड़ा कर सके। पता नहीं लेकिन गीता के हाथों में जादू था वो मुर्दे के लंड को भी खड़ा कर सकती थी।

मेरा लंड खड़ा करके गीता ने मीता से कहा- अब तू बेड पर लेट जा ! अब गीता तेरी चूत में अपना लंड डालेगा जो कि तुझे बहुत आराम से लेना है क्योंकि तू आज पहली बार चूत में लंड ले रही है तो तेरी झिल्ली फटेगी जिससे तेरे को दर्द भी होगा !

तो मीता बोली- दीदी, तुम टेंशन मत लो ! मैं आराम से ले लूंगी ! बस तुम क्रीम मेरी चूत में और गीता के लंड से लगा दो अच्छी तरह से !

गीता ने पूरी पौंड्स क्रीम मेरे लंड और मीता की चूत पर लगा दी और मीता को किस करने लगी।

मैं समझ गया कि अब सही समय है चूत से लंड का मिलन करने का !

मैंने मीता की चूत को पहले किस किया और उस पर लंड रगड़ने लगा जिससे मीता की उत्तेजना बढ़ती जा थी, वो सिसक रही थी ह्म्म्म्म्म्म्म……… आह्हनान्न्न्न्न्न………. यीयेय्ये इ,,,,,,,,,,,,,और ना जाने क्या क्या।

मीता के लिए अब बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था लेकिन मुझे उसे तड़फाने में मज़ा आ रहा था। आखिर मीता का सब्र का बाँध टूट गया और बोली,“मादरचोद चोदना हो तो अभी चोद दे, नहीं तो तेरे लंड को खा जाउंगी !”

मैं भी यही चाहता था कि मीता मुझ से मिन्नतें करे भीख मांगे …… लेकिन फिर भी उससे भीख ना मिले. इसके पीछे भी एक कारण था वो में फिर कभी बताऊंगा |

फिर मैंने धीरे से उसकी चूत पर लंड टिकाया और एक ही बार में पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया, जिससे वो तड़प उठी और जोर जोर से चिल्लाने लगी। मौके की नजाकत को समझते हुए गीता ने फिर से उसका मुंह अपने मुंह से बंद कर लिया और आवाज वहीं दब गई।

मैं भी नहीं रुका और शॉट पर शॉट मारता गया- १,२,३,४,…………….२४,२५, तब मैं कहीं रुका और मीता की चूत को देखने लगा। उसकी चूत में से खून निकल रहा था और मीता की आँखों से पानी। लेकिन वो कुछ बोल नहीं पा रही थी।

अब मेरा बदला पूरा हो गया था इसलिए मैं १० मिनट के लिए रुक गया और मीता का इंतजार करने लगा कि वो कब अपनी गांड हिलाती है। लेकिन इसके लिए मुझे ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ा ५ मिनट में ही वो अपने चूतड़ हिलाने लगी। मैं भी अब बड़े प्यार से लंड आगे पीछे करने लगा था। जिससे उसकी चीखें सिसकारी में बदल गई।

अब नज़ारा देखने और सुनने लायक था- मेरा लंड मीता की चूत को चोद रहा है और मीता गीता की चूत को चाट रही है और गीता मेरे होंठ चूस रही है किस कर रही है।

मीता की चूत अब काफी गीली हो गई थी इसलिए पूरे कमरे में फच फच …….फच की आवाजें आ रही थी और मेरा लंड बार बार फिसल रहा था।

मैंने तौलिये से उसकी चूत को साफ़ किया और लंड फिर अन्दर डाल दिया। अब मज़ा आ रहा था। धीरे धीरे लंड चूत में जाता और बाहर निकल आता ! मीता भी सिसकारी ले रही थी और गाली दे रही थी,“फाड़ ! फाड़ दे मेरे बालम ! मेरी चूत को फाड़ दे ! बहुत परेशान किया है इसने ४ महीने से ! आज इसकी गर्मी हो शान्त कर दे मेरे राजाआआ………… हम्म्मम्म्म्म ….. आआह्ह ह्ह्ह्हन्न्न्न्न्न्न फक्क मी फक्क या………… याआआआआ ……..गुड ,,,,,,,,” और ना जाने क्या क्या “मदरचोद अब कितनी देर तक चूत ही चोदेगा गांड भी मार ले लगे हाथ !”

मैंने कहा,“अभी नहीं ! पहले चूत का और लंड का मिलन तो होने दो सही से !”

और मैं फिर से चोदने लगा। बस अब दिल्ली दूर नहीं थी और मीता का पानी दूसरी बार निकल गया और साथ ही मेरा भी। मैं मीता के स्तनों पर ही मुंह रख कर लेट गया और चूसने लगा।

करीब १० मिनट बाद मैं उठा और कपड़े पहनने लगा तो गीता ने कपड़े छीनते हुए कहा,“कहाँ जा रहे हैं? आग लगा कर मेरी चूत कौन, तुम्हारा बाप आकर मारेगा या मेरा बाप !”

तो मैंने किस करते हुए कहा,“कहां जानेमन ! १० मिनट में आ रहा हूँ।”

क्योंकि अब मुझे ड्रिंक करने की जरुरत थी, इसके बिना अब और नहीं चोद सकता था इसलिए गीता के हैंडबैग में से ५०० रु. निकाल कर मैं विस्की लेने चला गया और आकर देखा तो वो दोनों अभी भी बिना कपड़ों के ही थी।

मैंने झट से अपने कपड़े उतार दिए। मीता मुझसे लिपट गई और मुझे किस करने लगी। लेकिन मुझे अभी कुछ अच्छा नही लग रहा था इसलिए उसकी गांड पर लात मार कर एक तरफ कर दिया।

इतने में गीता ३ ग्लास ले कर आ चुकी थी। मैं गीता और मीता के लिए बीयर लाया था जो उन लोगों ने अपने ग्लास में डाल ली और मेरा भी पैग बना दिया।

हम तीनों नंगे ही ड्रिंक करने लगे। मैंने जल्दी जल्दी ३-४ पैग डाले और मीता को ज़मीन पर ही पटक दिया और टाँगें चौड़ी करके एक बार में ही पूरा लंड अंदर कर दिया। इससे पहले कि वो चिल्लाना शुरू करे, मैं उसे किस करने लगा और चोदने लगा।

करीब १० मिनट तक मैं मीता को ऐसे ही चोदता रहा। उसके बाद उसको ज़मीन पर ही कुतिया बनाया और पीछे से चोदने लगा। ५-७ मिनट चोद कर देखा तो मीता की चूत डबल रोटी की तरह फूल गई थी। लेकिन मुझे उस पर बिलकुल भी रहम नहीं था। अब तक वो ३ बार झड़ चुकी थी और मेरा भी समय आ गया। मैंने अपना लंड निकाल कर उसके मुंह में डाल दिया और उसका मुंह चोदने लगा।

यह सब चल ही रहा था कि गीता उठी और मीता की टाँगे चौड़ी कर उसकी गांड का छेद खोलने में लग गई। ३-४ लम्बे शॉट के बाद मैं भी मीता के मुँह में झड़ गया और हट गया।

करीब ३० मिनट के बाद मीता के मुंह से आवाज निकली, उसने मुझ से कहा,“जब मैं पूरी तरह से तुम्हारी हो चुकी हूँ तो इतनी बेरहमी से क्यूँ चोद रहे हो ?????”

मैंने पूरी दम से खींच कर उसके गाल पर चांटा मारा और कहा- मीता डार्लिंग ! अब कुछ याद आया?

वो समझ चुकी थी आखिर क्यूँ मैं कुत्ते तरह उसे चोद रहा था।

फिर उठ कर मेरा लंड मुँह में लिया और चाटते हुए बोली,“सॉरी जो हुआ उसे भूल जाओ !”

उसके बाद मैंने मीता की गांड भी मारी और गीता को भी चोदा। लेकिन ये सब अगली कहानी में ! पहले आप इसको पढ़ो, मज़े लो और बताओ कैसी लगी कहानी ! यानी मेरी आप- बीती !

भाईयो और चूतो ! इसे कोरी बकवास मत समझना ! यह बिलकुल सच्ची कहानी है !

और अभी तो मुझे यह भी बताना भी है कि आखिर मीता ने किया क्या था?

उसके लिए अंतर्वासना में आते रहिये ! बहुत जल्द आगे का भाग भी आपके सामने आएगा।

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Hindi sex stories Antarvasna

कुछ दिन बाद मेरा जन्मदिन था। Hindi sex stories Antarvasna कोमल ने पूछा- क्या उपहार चाहिए? मैंने कहा- मैं तुम्हें बिना कपड़ों के देखना चाहता हूँ।

वो उपहार को कैसे मना करती, उसने कहा- ठीक है, पर देखोगे कहाँ? मैंने कहा- तुम्हारी किसी सहेली के घर पर !

उसने बोला- मेरी एक सहेली अकेली रहती है कमरा लेकर, मैं उससे बात करुँगी। पर तुम सिर्फ देखोगे।

मैंने कहा- सेक्स नहीं करूँगा, यह वादा करता हूँ!

उसकी सहेली मान गई। फिर तो मैं उस दिन का इन्तजार करने लगा और वो दिन भी आ गया। उसने सफेद स्कर्ट और काले रंग का टॉप पहना था। वो उस दिन बहुत सेक्सी लग रही थी। फिर हमने केक ख़रीदा और चले गए उसके घर !

कोमल की सहेली का नाम दीप्ति था। दीप्ति बहुत खुश हुई हमें देख कर !

हमने मिल कर केक काटा, लंच किया, फिर कुछ दीप्ति ने कहा- मुझे कुछ काम है, तुम दोनों बैठो। मैं 1-2 घण्टे में वापिस आउंगी।

और वो चली गई। अब हम दोनों अकेले रह गए थे। मैंने अब कोमल को बाँहों में लिया ले लिया और जोर से कस लिया। वो भी मुझसे चिपक गई। पहली बार हमें यह मौका मिला था। हम एक दूसरे की सांसें महसूस कर सकते थे। मैंने उसके होंठ चूमने शुरू कर दिए। वो भी आँखें बंद करके मेरे होठों को चूसने लगी। हम कोई दस मिनट तक एक दूसरे को चूमते रहे। उसकी सांसें तेज चले लगी थी।

मैंने कहा- कोमल मेरा उपहार कहाँ है?

उसने कहा- क्या?

मैंने कहा- जो वादा किया था ! मुझे बिना कपड़ों के अपना बदन दिखाओ !

वो शरमा गई और अपना सर मेरी छाती छुपा लिया।

हम बिस्तर पर बैठे थे, मैंने कहा- प्लीज़ जान !

वो बोली- मैं नहीं कर सकती। मुझे शर्म आती है।

मैंने कहा- क्या मैं खुद उतार लूं !

वो कुछ नहीं बोली और मुस्कुरा दी।

मैं समझ गया, मैंने धीरे से उसका टॉप ऊपर किया और उतार दिया। अब वो ब्रा में थी। उसने गुलाबी रंग की ब्रा पहन रखी थी। उसके चूचे अब दिखने लगे थे। उनका आकार कोई 32 होगा। वो बिलकुल गोरी थी। मैं तो पागल हो गया। किसी लड़की को पहली बार इस तरह तरह देख रहा था। वो शरमा गई और अपने चुचों को अपने हाथों से छुपा लिया!

मैंने उसके हाथ हटाये और चूम लिया। उसके चूचे बहुत मुलायम थे, जैसे ही मैंने उसके स्तन पर अपने होंठ रखे, उसके मुँह से आह-आह्ह निकल गई !

अब मैंने उसकी ब्रा के हुक खोल कर उसे उतार दिया। मेरी तो आँखें ही मानो फट गई- क्या चूचे थे उसके गोल गोल।

मैंने जैसे ही उनको छुआ तो उसकी तो आँखें ही बंद हो गई। मैं उसके वक्ष को चूमने लगा। वो अह्ह्ह अआः ह्ह्ह्ह ह्ह्ह्हम मम मम्ममम करने लगी। मैं चूचियों को हाथ में लेकर दबाने लगा और एक चुचूक मुँह में ले लिया और उस पर जीभ फिराने लगा। कोमल की तो हालत ही खराब हो गई। वो एकदम गर्म हो गई थी। मैंने जोर से चूसना शुरू कर दिया। उसने मेरे सर को अपने वक्ष पर दबा दिया। मैं और तेज चूसने लगा और उन्हें दबाने लगा।

मैंने कहा- अब अपनी छोटी जान को दिखाओ।

(मैं उसकी चूत को छोटी जान बोलता था)

वो कुछ कहने की हालत मे नहीं थी। मैंने उसकी स्कर्ट को नीचे किया और उतार दिया। वो लेट गई। अब उसकी बदन पर सिर्फ गुलाबी रंग की पैन्टी रह गई थी। मैं उसे चूमने लगा। मैं उसकी टांगों को चूमता हुआ ऊपर आने लगा। उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी। मैंने उसकी पैन्टी नीचे खिसका दी, उसकी चूत दिखने लगी, बिल्कुल साफ चूत थी, बाल साफ किये थे। उसने अपनी टांगें एक के ऊपर एक चढ़ा कर चूत को छुपा लिया। मैंने उसकी टांगें खोल दी और हाथ उसकी चूत पर रख दिया। उसकी चूत एक दम गर्म थी और चूत का रंग हल्का गुलाबी था। मैं उसे मलने लगा।

कोमल तड़पने लगी, उसके मुँह से कई आवाजें निकल रही थी- मम्म मम …..अआः ह्ह्ह ऊऊऊ जांण ऊऊईईईइ ऊऊओ ऊऊ य्य्यय्य।

उसकी चूत गीली हो गई थी।

मैंने कहा- मैं छोटी जान को चूमना चाहता हूँ।

उसने कुछ नहीं कहा। वो तो जैसे नींद में थी ……वो तो सिर्फ यही बोल रही थी- म्मम्म आआ ह्ह्ह्ह ऊऊओ जाआअन्न्न म्मम्मम मम्म आअ आआआ ऊऊउ ऊउऊओ ऊऊऊ।

मैंने अपने होंठ उसकी चूत पर रख दिए और उसे चूमने लगा, जीभ फ़िराने लगा। उसकी हालत और खरब हो गई, आवाजें और तेज हो गई …म्मम्मम आआह्ह्ह्ह आआह्हू ऊऊईइ ईईइ मम्म मम्म ।

उसने मेरा सर अपनी चूत पर दबा लिया। मैंने एक ऊँगली उसकी चूत में डाल दी और अन्दर-बाहर करने लगा।

वो पैर पटकने लगी। उसकी चूत का रस मेरी जीभ पर आ रहा था। मैंने पीना शुरू कर दिया। उस वक़्त तो वो भी अमृत लग रहा था। मैंने सारा रस चाट लिया। मेरी ऊँगली पर खून लगा था। शायद उसकी सील टूट गई थी। वो सेक्स के लिए तयार थी। पर मेरे पास कंडोम नहीं था और मैं रिस्क नहीं लेना चाहता था । मैंने उसे चौपाये स्टाइल में खड़ा किया और उन्गली से ही उसकी प्यास बुझाने लगा। वो मम्म मम्म मु ऊऊऊऊ ऊउईई ईई जांण कर रही थी। वो एकदम पागल हो गई थी …..वो बोल रही थी- तेज करो न और तेज करो . ऊऊयाआआ म्मम्म म्मम्म !

फिर वो गिर गई मेरी बाँहों में। उसकी आग ठंडी हो गई थी। लेकिन मेरी हालत खराब थी। वैसे भी फ़ोन सेक्स पर हम सब कुछ कर चुके थे और उसे अब सेक्स की हर बात का पता था। मैंने कहा- क्या लंड देखोगी?

उसने कहा- हाँ, मुझे देखना है।

मैंने जिप खोल दी और अपना लिंग निकाला।

वो उसे देखते ही बोली- ओह गॉड ! यह तो बहुत बड़ा है। मैंने तो सोचा ही नहीं था।

मैंने कहा- तो क्या सोचा था?

बोली- मैंने तो बच्चों के देखे हैं, वो तो छोटे होते हैं।

मैंने कहा- बच्चे बड़े होते हैं तो यह भी तो बड़ा होगा। इसे छू कर देखो।

उसने लंड को हाथ में ले लिया और मालिश करने लगी। फिर उसने एकदम से उसे चूम लिया।

मैंने कहा- यह कैसे कर लिया?

तो उसने कहा- जब तुम मेरी चूत को चूम सकते हो तो मैं क्यों नहीं !

मैंने कहा- आई लव यू सो मच जान।

वो मुस्कुराई और मेरे लंड को चूमने लगी। फिर उसे मुँह में लेकर आगे पीछे करने लगी। उसे भी मजा आ रहा था। मेरी तो हालत खरब हो रही थी, मैंने उसका सर पकड लिया और मुँह में ही सेक्स करने लगा। वो मम मम्म म्मम्म मम मम्म कर ही थी। मेरा सारा रस उसके मुँह में ही निकल गया। मैंने उसका सर पकड़ रखा था तो सारा उसके अंदर चला गया। उसे पता नहीं था कि कुछ निकलता भी है लंड से।

उसने पूछा- वो क्या था जो मेरे पेट में गया?

मैंने कहा- वही तो असली चीज़ थी।

उसे वो रस पसंद आया था।

फिर हमने एक दूसरे को गले लगा लिया। तभी दीप्ति आ गई। आज कोमल खुश थी कि मैंने अपना वादा निभाया था और उससे सेक्स नहीं किया।

कुछ दिनों बाद हमारी शादी की तिथि निश्चित हो गई। उसके मम्मी-पापा कुछ दिन के लिए घर से बाहर गए थे। अब उसके घर पर उसकी बहन पूजा और कोमल ही थी। हमने योजना बनाई कि हम घर पर ही मिलेंगे। पूजा तो जॉब पर चली जाती थी दिन को।

कोमल ने कहा- मुझे सेक्स का पूरा एहसास करना है।

मैंने कहा- ओके ! इस बार हम सेक्स करेंगे।

उसे दिन पूजा का ऑफिस था। मैंने कंडोम ले लिए और शनिवार शाम को दिल्ली से निकल गया. रात को कोई 12 बजे चंडीगढ़ कोमल के घर पहुँच गया। वो दोनों जाग रही थी। हमने खाना खाया और बातें करने लगे।

थोड़ी देर बाद पूजा सोने चली गई उसका तो ऑफिस था अगले दिन। जाते हुए बोली- कुछ् गलत मत करना ! ओके?

हम हंसने लग पड़े। एक घंटे तक हम बातें करते रहे। फिर कोमल उठी और मेरी गोद में आकर बैठ गई। मैंने उसे बाहों में जकड़ लिया और उसके होंठ चूसने लगा। वो भी मेरे होंठ चूसने लगी। उसने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी। मैंने उसे चूसने लगा। वो भी मेरी जीभ चूसने लगी। हम दोनों ही गर्म हो गए थे। हम दोनों अन्दर चले गए जहाँ मेरा बिस्तर था। हम रजाई में थे। मैंने उसकी कमीज ऊपर कर दी और उसके चूचों को चूमने लगा। वो भी मेरे कंधों, मेरी छाती पर चूम रही थी और काट रही थी।

मैंने उसकी सलवार को नीचे किया और रजाई के अन्दर ही उसकी चूत को चाटने लगा।

वो धीरे-2 सिसकारियाँ भर रही थी- म्मम्मम आआ आआः ह्ह्हह ह्हहह ऊऊ ऊऊओईई ईईई ईऊऊऊम मम मम्म।

उसने कहा- मुझे चोद दो अब जान ! फाड़ दो मेरी चूत को !

मैंने कहा- कंडोम मेरी पैंट में है।

पैन्ट दूसरे कमरे में थी जहाँ पूजा सो रही थी।

कोमल ने कहा- रहने दो ! वो जाग जाएगी।

मैंने ऊँगली उसकी चूत में दाल दी और अंदर-बाहर करने लगा। उसने भी मेरा लंड मुँह में ले लिया और चूसने लगी। ऊँगली से ही मैंने उसकी प्यास बुझाई और उसने मेरा रस पिया। फिर हम सो गए। फिर वो पता नहीं कब पूजा के पास चली गई सोने के लिए !

सुबह जब उठा तो पूजा ऑफिस के लिए तैयार हो रही थी। हमने नाश्ता किया और वो चली गई। अब हम दो ही थे घर पर। मैं तीन कंडोम लाया था। वो रसोई कुछ काम कर रही थी और मैंने उसे पीछे से पकड़ लिया। मैं उसे गर्दन पर चूमने लगा। वो मुड़ी और मुझसे लिपट गई। आज हम दोनों सेक्स के लिए तैयार थे।

मैंने उसे गोद में उठाया और लेजाकर बिस्तर पर लेटाया और ऊपर चढ़ कर हर जगह चूमने लगा। उसकी कमीज निकाल दी, उसके चूचों को चूमने लगा और हाथों से दबाने लगा। वो जोर जोर से सिसकियाँ भर रही थी …मम्म म्मम्म म्मम्म ऊऊ ऊऊम्म्म म्मम्म मम्मी ईईई ईईइऊईईई।

उसने मेरी शर्ट निकाल दी और मुझे हर जगह चूमने लगी। उसने मुझे अपने मम्मों पर कस लिया और कहा- इन्हें जोर से दबाओ……।

मैंने उसकी सलवार निकाल दी और पैंटी भी निकाल कर उसकी चूत को चूमना शुरु कर दिया। उसने टांगें पूरी फ़ैला दी थी। मैंने जीभ अन्दर डाल दी। वो जोर जोर से सिसकार रही थी- आआअ अह्ह्ह्ह ह्ह्ह्ह्ह हूऊ ऊऊऊओ ओऊ स्स्स् म्म्मम्मम्म म्माआआअम मम्मम्म !

उसने मुझे नीचे गिराया और मेरे सारे कपड़े उतार कर मुझे बुरी तरह चूमने लगी। मेरा लंड ऐसे चूस रही थी जैसे खा जाएगी ………

मैं उसके चूचों को चूस रहा था।

फिर वो बोली- अब मुझे चोद डालो ! मेरी चूत को फाड़ दो ! अपना लंड डालो और फाड़ दो इसे।

मैंने कंडोम लगाया, कोमल को नीचे लिटाया और ऊपर आ गया। फिर लंड को चूत पर रखा और धक्का लगाया। लंड का सर थोड़ा सा अन्दर गया। एक और धक्का दिया, लंड और अन्दर गया तो उसके मुँह से चीख निकल गई।

वो बोली- धीरे करो ! दर्द हो रहा है।

मैंने थोड़ा सा बाहर निकाल लिया फिर धक्का दिया। इस बार पूरा लंड अन्दर था, कोमल जोर से चिल्लाई, उसकी आँखों में पानी आ गया था, मैं रुक गया और उसके होंठ और स्तन चूमने लगा। जब दर्द थोड़ा कम हुआ तो धीरे धीरे धक्के लगाने लगा। अब उसका दर्द कम हो गया था और उसे मजा भी आ रहा था। वो भी नीचे से गांड हिला कर मेरा साथ दे रही थी और बोल रही थी- य्य्य्याआ आआआआअ आया तेज और तेज करो बेबी. मुझे चोदते रहो ….आआआ आआऊऊऊऊ मम्म म्मनन्न न्न्न्न स्स्सस्स्सम्मम्म म्मम् म्मम्म !

मैंने भी तेज तेज धक्के लगाने शुरू कर दिए। फिर मैंने उसे घोड़ी बना कर चोदा। जो भी सेक्स मुद्राएँ मैं जानता था, सब की …दीवार के साथ खड़ा करके, उसे गोद मैं लेकर चोदा। फिर वो मेरे ऊपर आ गई। वो सेक्स को पूरा मजा ले रही थी, जैसे इंग्लिश मूवी में करते हैं! उसकी चूत से खून भी निकल रहा था, उसकी सील पूरी टूट गई थी। अब उसकी चूत से पच पच की आवाज आ रही थी। हम एक हो गए थे।

उसके बाद हम साथ साथ नहाये। हमारा मूड फिर बन गया। तो हमने एक ट्रिप बाथरूम में और फिर लंच में किचन में भी एक ट्रिप लगाया। उस दिन जो तीन कंडोम ले के गया था वो सारे लगा दिए !

उसके बाद कोमल बोली- मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मैं शादी से पहले सेक्स करुँगी। आपके प्यार में यह एक ऐसा उपहार है जो कभी नहीं भूलूंगी। आई लव यू सो मच। और हम दोनों एक दूसरे की बाहों में समां गए।

आज हमारी शादी को दो साल हो गए हैं। हम खूब सेक्स करते हैं पर आज भी हमें बरसात का पहला किस और पहला सेक्स नहीं भूला है। हम उस पल को हमेशा याद करते हैं। Hindi sex stories Antarvasna

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घर पर खाना खाते खाते शाम के Sex Stories सात बज गये थे। मैने जो से कहा – “जल्दी करो वर्ना रात ज्यादा हो जायेगी…… फिर तुम्हारे पुराने वाले मकान को भी तो देखना है…”

अन्दर से मां बोली…- “उस पुराने मकान में मत जाना… सुबह जाना वहां पर…।”

“बस बस…ठीक है… हो गया…… ये बैग रख लो……”

जो जल्दी से उठा और कुछ सामान पेक किया और बोला,”चलो कामिनी ……”

हम दोनो ने अपना अपना सामान उठाया और नीचे आ गये। कार में सामान रखा और जो ने कार स्टार्ट कर दी।

“पहले समुन्दर के किनारे बीच पर चलते हैं……” मैं खुश थी कि आज बीच की सैर करने को मिलेगी। गाडी बीच की तरफ़ चल दी। मुझे लगा कि शायद बरसात होने वाली है। मैने मायूसी भरे शब्दों में कहा, “यार जो…… बरसात हो जायेगी तो फिर क्या मजा आयेगा………”

“नहीं होगी……यहां तो हमेशा ऐसा ही रहता है।”

लेकिन किस्मत खराब ही थी। बाहर वर्षा की फ़ुहारें पडने लगी थी। अचानक जो ने मुख्य सडक छोड दी। और एक सुनसान सी रोड पर आ गया।

“तुम ठीक कहती हो …… बारिश चढ रही है…… लगता है कुछ ही देर में तेज बरसात होने वाली है………”

एक बडे और सुन्दर मकान के सामने जो ने गाड़ी रोकी…… गेट कीपर अपना छाता लिये भाग कर आया …… करीब 65 साल का वो होगा…… कार में झान्कते हुए बोला…”साहब…किससे मिलना है……।”

“यहां एक पुराना बन्गला था……डा हन्टर का …कितनी दूर है……”

“यही है ………आप कौन है…?” जो ये सुन कर चकरा गया… मै जो को देख रही थी……वो कुछ परेशान सा दिखने लगा।

” मैं डा हण्टर का सबसे छोटा बेटा ……… जो हूं………”

“अरे…… जो बाबा ………आओ…आओ…उसने भाग कर मुख्य फ़ाटक खोल दिया …… बरसात तेज हो चुकी थी…। जो बडी असमन्जस की स्थिति में दिख रहा था। उसने गाड़ी मोड़ी और गेट के अन्दर कार लाकर सीधे पोर्च में छज्जे के नीचे खडी कर दी। बूढा गेट कीपर भी धीरे धीरे भागता हुआ आ गया … वो इतने में ही हांफ़ने लगा था।

“वो पुराना बन्गले का क्या हुआ……”

“वो तो डाक्टर साहब ने मरने से पहले ठीक करवाने को कहा था …… उसके लिये उन्होने जरूरत से ज्यादा पैसा दिया था………”

हम दोनो घर के अन्दर आ गये …… मेरी आंखे उसे देख कर फ़टी रह गयी………

“जो…… तुम यहां क्यों नहीं रहते हो…” गोवा की पुरानी इमारतें जिसे हेरीटेज प्रोपर्टीज कहते है… प्रसिद्ध हैं। पर जो भी उनमें से एक का मालिक है …मुझे नहीं पता था। इतने में मुझे उपर के कमरे में कुछ हलचल दिखाई दी…… बूढा भांप गया था।

“मेरा लड़का और बहू हैं………आपके कमरे की सफ़ाई कर रहे हैं…मैं आप के लिये कोफ़ी बना कर लाता हू…” बूढा बाहर चला गया।

जो उठा और ऊपर कमरे की ओर जाने लगा। मैं भी लपक कर जो दे साथ हो ली। सीढियां चढ कर जैसे ही हम खिडकी के पास पहुन्चे…… हमारी नजर खिडकी के अन्दर पडी। एकबारगी हम देखते रह गये। बूढे का लडका और बहू काम-क्रीड़ा में लिप्त थे। लडकी ने अपने दोनो हाथ सर पर रखे थे और अपने नन्गी चूंचियां आगे उभार कर आंखे बन्द करके खडी थी… और लडका उसके उरोजों को दबा रहा था…… मैने जो की बाहें कस कर पकड ली… लडके का लन्ड खडा था। वो लडका कुछ देर तक तो चूंचियों से खेलता रहा फिर उससे लिपट गया और अपने लन्ड को उसकी चूत पर मारने लगा।

नीचे कुछ आहट सुनाई दी… हम तुरन्त बिना किसी आवाज के नीचे आ गये। कोफ़ी आ गयी थी। ऊपर जो देखा था उससे मेरे दिल में वासना जागने लगी थी। बूढा कह रहा था –

“साहब… बाहर तो बरसात ……तेज हो गयी है … रात को यहीं रुक जाईये… कुछ चाहिये तो बेल हर रूम में है…बुला लीजियेगा…।” बूढा वहां से बाहर गेट पर अपने कमरे मे चला गया।

मैं थोडा रंग में आ रही थी… मैने जो का हाथ दबाया …जो ने मुझे अपनी बाहों में ले लिया। उसने अपने होन्ठ मेरे होन्ठों से लगा दिये। मेरे उरोजों को हल्के हल्के दबाने लगा। मुझे लगा कि कोई कमरे में है। मैने जो को अलग किया तो देखा वोही युगल जो कमरे में था मेरे सामने खडा था … मैं शरमा गयी। वो दोनो सामने खडे मुसकरा रहे थे।

“तुम यहां क्या कर रहे हो …… तुम कौन हो…”

” जी…मालिक मैं उनका दामाद हू ये उनकी लड़की है …” मैं समझ नहीं पाई…वो तो बहू और लडके की बात कर रहा था।

लडकी… ने इशारा किया तो वो बोला …

“मालिक… आप आये हैं है तो……ये आपकी सेवा करना चाहती है…और आपकी इच्छा हो हो तो मैं मालकिन कि सेवा कर दूं……” दोनो की मतलबी निगाहें कुछ इशारा कर रही थी।

“साफ़ साफ़ कहो …… हम किसी बात का बुरा नहीं मानते हैं…” मैं उनके इशारों को भांपते हुए बोली…

लडके ने जो के पास आ कर जो के कान मे कुछ कहा। जो ने लड़की को ऊपर से नीचे तक देखा … फिर मेरे से कहा …

“कामिनी ये कह रहा है कि ……ये रोज़ी को मेरे साथ मजे लेना है …… और तुम चाहो तो… सैम के साथ एन्जोय कर सकती हो…”

‘वोऊऽऽऽऽऽऽऽ …जो क्या बात है………पर तुम्हे कोई………”

” कामिनी जिन्दगी के मजे मिल रहे हैं तो ……भरपूर लो… आज की ही तो बात है………कुछ चेन्ज हो जाये…”

मेरे तो शरीर में सनसनी दौड़ गयी। नया माल……नया लन्ड… नई चुदाई…। जो से तो कितनी ही बार चुदा चुकी हूं … मजा आ जायेगा। मैने जो को आंख मार दी……

“तो फिर हो जाये …” इतने में एक आदमी और एक औरत साईड में से निकल कर बाहर चले गये। हमने उस ओर ध्यान नहीं दिया।

हम दोनो ऊपर के कमरे में चले आये। वहां दो शानदार गद्दे वाले बेड थे। हम चारो वहां का खुशनुमा माहौल देख कर फ़ूले नहीं समा रहे थे। मै बाथरूम में गयी और पानी से अपनी चूत और गान्ड साफ़ की और एक बडा तोलिया लपेट कर बाहर आ गयी। मैने देखा तो सैम और रोज़ी अपने पूरे कपडे उतार कर नन्गे खडे थे… सैम का शरीर कसा हुआ था उसका लन्ड भी मोटा और लम्बा था… रोज़ी भी मुझे बहुत सेक्सी लगी… रोज़ी का बदन गुआनी स्टाइल का था … उसके चूतड गोल गोल भरे हुए … पांव थोडे मोटे से छोटा कद ……उसे देख कर किसी भी मर्द का लन्ड खडा हो सकता था। मैं धीरे धीरे सैम के पास आ गयी… उसने मुझे प्यार से किस किया…… मेरा तोलिया उसने उतार कर एक तरफ़ रख दिया। मेरे शरीर फ़िगर देख कर सैम के मुख से आह निकल गयी।

“इतने प्यारे फ़िगर को चोदने को कितना मजा आयेगा…”

मैं तो उसकी ये बात सुनते ही आनन्द से भर गयी… “सेम … तुम भी कुछ कम नहीं हो……”

उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया। उसका शरीर बलिष्ठ था…उसके मसल्स कसे हुये थे… इतने में जो भी आ गया। जो ने अपना तोलिया एक तरफ़ रख कर रोज़ी को अपनि गोदी में बैठा लिया। सैम मुझे एक खिलोने की तरह उठा लिया। उसके ताकतवर शरीर का एक अलग ही मजा आ रहा था। मैने उसकी कमर में अपने पांव कस लिये। उसका लन्ड सीधे मेरी गान्ड पर लग रहा था। मैं उससे एक बेल की तरह लिपटी थी…… मेरे शरीर का बोझ उसे शायद बिल्कुल ही नही लग रहा था…वो मुझे उठाने के बाद भी लोहे की तरह तना हुआ था। मैने उसे तन्ग करने लगी……उसके गले में हाथ डाल कर मैने चूत को उसके लन्ड पर मारने लगी कि उसे बोझ लगे और मुझे उतार दे…पर उसके लोहे जैसे श्रीर पर कुछ असर नहीं हुआ। वो उतना ही आरम से खडा रहा और लन्ड को मेरे चूतडों कि दरारों में लगा दिया…… उसने एक हाथ मेरी चूतड पर रख कर मुझे थोडा सहारा दिया। मैं सोच में पड गयी कि इन्सान है या लोहे का पुतला। मेरे होंठ सैम के होंठो से से जुड गये…… उसके होंठ चूसने में गजब का मजा आ रहा था… उसका लोहे जैसा लन्ड मेरी गान्ड के छेद पर था। मुझे पता चल गया था कि वो मेरी गान्ड ही चोदेगा। मैने भी उसके लन्ड को गान्ड दे छेद पर सही तरीके से लगा दिया।

उसने मेरी चूंचियां बडे ही नरम तरीके से सहलायी। उसके हाथों में जादू था। उसके लन्ड का सुपाडा मेरी गान्ड में घुस गया… मेरी आह निकल गयी… पर तकलीफ़ जरा भी नहीं हुई…उसका लोहे जैसा लन्ड…कितना नरम था, गरम था … पर कड़ाई गजब की थी। मैने कहा- “सेम मुझे उतारो…… बिस्तर पर चोदना ना…”

सेम ने मुझे ऐसे ही लन्ड अन्दर डाले बिस्तर पर यूं रख दिया जैसे कोई खिलोना हो…… उसने तकिया ये कर मेरे चूतड के नीचे लगा दिया। मेरी गान्ड थोडी सी ऊंची हो गयी…… और सैम का काम बन गया। उसने हौले से लन्ड गान्ड में सरकाना चालू कर दिया। उसके मस्त लन्ड पर मैं मर मिटी थी। मीठी मीठी सी गुदगुदी करता हुआ अन्दर तक पूरा बैठ गया। उसने मेरी चूंचियां सहलाते हुए धीरे धीरे मसलना चालू कर कर दिया। मेरी चूत पूरी गीली हो चुकी थी। उसके धक्के बढ्ने लगे……… सैम में जादू था…… उसे चोदने की कला आती थी। उसके धक्के एक ही रफ़्तार से चल रहे थे…… मेरी चूत की हालत खराब हो रही थी…।

“सेम प्लीज़्…… अब मुझे चोद भी दो…।”

सेम मुस्कराया और उसने अपना लन्ड मेरी गान्ड से निकाल लिया……… और चूत के द्वार पर रख दिया। मुझसे रहा नही जा रहा था……

“सेम … घुसेडो ना ………हाय्………जल्दी करो……”

उसने लन्ड अन्दर सरका दिया…… मेरी चूत निहाल हो गयी …… मेरी उत्तेजना बहुत बढ गयी थी …… मुझसे उसका भारी लन्ड नहीं सहा जा रहा था……… मुझे लगा कि मैं झडने वाली हूं ……… और मैं चरम सीमा पर थोडी सी चुदायी के बाद पहुन्च गयी थी……… मेरा पानी छूट पडा…… मै झडने लगी। मैने सुख के मारे अपने होंठ भींच लिया। उसका लन्ड अभी भी लोहे की रोड की तरह कडक था…… वो धीरे धीरे चोदता रहा …… उसे पता था कि मैं झड चुकी हूं। फिर भी उसका जादू भरा लन्ड बहुत धीरे धीरे चुदाई कर रहा था……… कुछ ही देर मैं फिर गर्माने लगी …… चूत फ़िर से फ़डफ़डाने लगी …… मुझ में फ़िर से उत्तेजना भरने लगी……… सैम सब समझ रहा था………कुछ ही देर में धक्को का जवाब धक्को से रही थी। दूसरी ओर ……… जो और रोज़ी का जोश देखते बनता था………।

सेम भी अब उत्तेजना की चरम सीमा पर पहुंचने वाला था……… उसका लन्ड कडकने लगा था……… मुझे साफ़ मह्सूस हो रहा था …… सैम की सारी पहलवानी मेरी चूत में झडने वाली थी। अचानक उसने मुझे जकड लिया और मेरे से लिपट गया……… मेरी चूत ने भी जोर लगाया…… और मैं एक बार फिर झडने लगी……… इतने में सैम क लन्ड फ़ुफ़कार उठा ……… मेरी चूत में उसकी पिचकारी छूट पडी………… उसका कडक लन्ड पिचकारी मारता रहा और ढीला पड गया…… जो और रोज़ी पहले ही झड चुके थे…… तभी बिजली चली गयी। सारे मकान मेइन अन्धेरा छा गया……… बाहर बरसात जम कर हो रही थी……… हमें वैसे भी लाईट का क्या करना था……… दो बार झडने के बाद मैं थक चुकी थी……… इतनी सुन्दर और मनमोहक चुदाई के बाद पूरी सन्तुष्टी के साथ मैं नीन्द दे आगोश में समाने लगी………

सवेरे मेरी आंख खुली…… मैं नन्गी ही सो गयी थी…… अलसायी सी मैने करवट बदली…… मैने जो देखा तो मैं चीख उठी …… मेरी बगल में और कोई नही बल्कि एक नरकंकाल पडा था। जो भी मेरी चीख सुन कर उठ गया…… वो भी दह्शत के मारे चीख उठा उसकी बगल में भी एक नरकंकाल पडा था। वो उछल कर खडा हो गया…… मै भी घबरा कर बिस्तर से नीचे आ गयी।

मैने कमरे को देखा…हम रात भर यहां थे ? … एक पुराना सा कमरा जगह जगह जाले…… धूल से भरा कमरा…… बिस्तर पर मिट्टी…… और… हमने जैसे तैसे कपडे पहने और बाहर भागे…… कमरे से बाहर निकलते ही …… हम सन्न रह गये ……… जो बोल उठा।-” हे भगवान ………ये क्या है…कबाडखाना……चमगादड़ की गन्दगी…… एक अजीब सी बदबू … हम दोनो के चेहरे पर हवाईयां उडने लगी। हम दोनो तेजी से बाहर भागे …… जो फ़ुर्तीला था … मैं पीछे रह गयी…… जो बाहर आते ही कार में बैठा और स्टार्ट कर दी…… उसने दूसरा कार का दरवाजा खोल दिया मैं भागते हुए आयी और कार में बैठ गयी। जो ने गाडी मोडी और बंगले से बाहर आ गया…… मैन रोड पर जो ने कार रोकी …हमने कार से उतर कर देखा …… वो चमचमाता हुआ बंगला कहां गया… उजाड वीराना…… काला…काई से भरा … टूटा फूटा घर ………बडे बडे जन्गली पेड्…झाडियां …… लगता था उसमे बरसों से कोई नही आया …… मैं डर के मारे सिहर उठी ……

“जो… चलो यहां से … मैं लगभग रो पडी…… मैने रात को किसके साथ चुदाई की थी और जो ने…… सैम और रोज़ी कौन थे……… जो स्तब्ध खडा था।

तभी पास से एक आदमी साईकल से निकला …

” भाई साब … ये डाक्टर साब का बंगला है ना……”

” हां… सही पहचाना ………डाक्टर साब ने यहा नौकर की लडकी और उसके हसबेन्ड को मरवा डाला था … उनका दिल नौकर की बेटी पर था…।”

” शट अप … साले कुछ भी बोलने लग जाते है…” पर जो अन्दर ही अन्दर सब समझ गया था…… अनमने मन से वो कार में बैठा और गाडी स्टार्ट कर दी…

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