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Massage Girl in Mathura: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Mathura who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Mathura that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Mathura massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Mathura who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Mathura massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Mathura massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Mathura who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Mathura employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Mathura helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Mathura

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Mathura at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

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Antarvasna

मैं और जानकी बचपन की Antarvasna सहेलियाँ है. हम स्कूल से लेकर कॉलेज तक साथ साथ पढ़े. और अब मेरी और जानकी की शादी भी लगभग एक ही साथ हुयी थी. मेरा घर और उसका घर पास में था. जानकी का पति बहुत ही सुंदर और अच्छे शरीर का मालिक था. मेरा दिल उस पर शुरू से ही था. मैं उस से कभी कभी सेक्सी मजाक भी कर लेती थी. वो भी इशारों में कुछ बोलता था जो मुझे समझ में नहीं आता था. जानकी भी मेरे पति पर लाइन मारती थी ये मैं जानती थी. जब हमारे पति नहीं होते तो हम दोनों साथ ही रहते थे.

उन दोनों के ऑफिस चले जाने के बाद मैं जानकी के घर चली जाती थी. जानकी आज कुछ सेक्सी मूड में थी.

मैंने जानकी से कहा- ‘आज चाय नहीं..कोल्ड ड्रिंक लेंगे यार.’

‘हाँ हाँ क्यों नहीं…’

हम सोफे पर बैठ गए. जानकी मुझसे बोली- ‘सुन एक बात कहूं… बुरा तो नहीं मानेगी…’

‘कहो तो सही..’

‘देख बुरा लगे तो सॉरी… ठीक है ना…’

‘अरे कहो तो सही…’

‘कहना नहीं… करना है…’

‘तो करो… बताओ..’ मैं हंस पड़ी.

उसने कहा- ‘आरती.. आज तुझे प्यार करने की इच्छा हो रही है…’

‘तो इसमे क्या है… आ किस करले..’

‘तो पास आ जा..’

‘अरे कर ले ना…’ मुझे लगा कि वो कुछ और ही चाह रही है

जानकी ने पास आकार मेरे होटों पर अपने होंट रख दिए. और उन्हे चूसने लगी. मैंने भी उसका उत्तर चूम कर ही दिया. इतने में जानकी का हाथ मेरे स्तनों पर आ गया और वो मेरे स्तनों को सहलाने लगी. मैं रोमांचित हो उठी.. ‘ये क्या कर रही है जानकी…’

‘आरती मुझसे आज रहा नहीं जा रहा है… तुझे कबसे प्यार करने कि इच्छा हो रही थी…’

‘अरे तो तुम्हारे पति… नहीं करते क्या..’

‘कभी कभी करते है… अभी तो 7-8 दिन हो गए हैं… पर आरती मैं तुमसे प्यार करती हूँ… मूझे ग़लत मत समझना..’

उसने मेरे स्तनों को दबाना चालू कर दिया. मूझे मजा आने लगा. मेरी सहेली ने आज ख़ुद ही मेरे आगे समर्पण कर दिया था. मैं तो कब से यही चाह रही थी. पर दोस्ती इसकी इज़ज्ज़त नहीं देती थी. मुझे भी उसे प्यार करने का मौका मिल गया. अब मैंने अपनी शर्म को छोड़ते हुए उसकी चुन्चियों को मसलना शुरू कर दिया. वो मन में अन्दर से खुश हो गयी. वो उठी और अन्दर से दरवाजा बंद कर लिया. मैं भी उसके पीछे उठी और उसके नर्म नर्म चूतड पकड़ लिए. जानकी सिसक उठी. बोली -‘मसल दे मेरे चूतडों को आज… आरती… मसल दे…’

मैंने जानकी का पजामा और टॉप उतार दिया. अब वो मेरे सामने नंगी खड़ी थी. मैं भी अपने कपड़े उतारने लगी. पर वो बोली- नहीं आरती… तू मुझे बस ऐसे ही देखती रह… मेरे बूब्स मसल दे… मेरी छूट को घिस डाल… उसे चूस ले… सब कर..ले ‘

मैं उसे देखती रह गयी. मैंने धीरे उसके चमकते गोरे शरीर को सहलाना चालू कर दिया. पर मुझसे रहा नहीं गया. मैं भी नंगी होना चाहती थी. मैंने भी अपना पजामा कुरता उतार दिया, और नंगी हो कर उस से लिपट गयी. हम दोनों एक दूसरे को मसलते दबाते रहे और सिसकियाँ भरते रहे.

अब हम बिस्तर पर आ गए थे, हम दोनों 69 की पोसिशन में आ गए. उसने मेरी चूत चीर कर फैला दी और अपनी जीभ से अन्दर तक चाटने लगी. अचानक उसने मेरा दाना अपनी जीभ से चाट लिया. मैं सिहर गयी. मैंने भी उसकी चूत के दाने को जीभ से रगड़ दिया. उसने अपनी चूत मेरे मुंह पर धीरे धीरे मारना चालू कर दिया. और मेरी चूत को जोर से चूसने लगी. मैंने उसकी चूत मैं अपनी उंगली घुसा दी और गोल गोल घुमाने लगी. वो आनंद से भर कर आहें भरने लगी. मेरी चूत में उसकी जीभ अन्दर तक घूम चुकी थी. मुझे मीठा मीठा सा आनंद से भरपूर अह्स्सास होने लगा था. हम दोनों की हालत बुरी हो रही थी. लगता था कि थोडी देर में झड़ जाएँगी.

उसी समय मोबाइल बज उठा. जानकी होश में आ गयी. हांफती हुयी उठी और मोबाइल उठा लिया.

वो उछल पड़ी. मोबाइल बंद करके बोली- ‘अरे वो बाहर खड़े हैं… जल्दी उठ आरती… कपड़े पहन…’

‘जल्दी कैसे आ गए… ???????’

हम दोनों ने जल्दी से कपड़े पहने और बालकनी पर आ गए. नीचे अमन खड़ा था. वो दरवाजा खोल कर अन्दर आ गया.

अन्दर उसने मुझे देखा और मुस्कराया. मैं भी मुस्करा दी.

‘सुनो तुम्हे अभी मायके जाना है… मम्मी बहुत बीमार हैं…’

उसकी मम्मी शहर में 10 किलोमीटर दूर रहती थी. मैं जानकी से विदा ले कर घर आ गयी. उसे करीब 1 घंटे बाद कार में जाते हुए देखा.

शाम को मैं घर के बाहर ही फल, सब्जी खरीद रही थी. मैंने देखा कि अमन कार में घर की तरफ़ जा रहा था.

मैंने घड़ी देखी तो 4 बजे थे. मेरे पति 7 बजे तक आते थे. मेरे मन में सेक्स जाग उठा. मैंने तुंरत ही कुछ सोचा और सामान सहित जानकी के घर की तरफ़ चल दी. अमन घर पर ही था. मैंने घंटी बजाई. तो अमन बाहर आया.

‘मम्मी कैसी हैं ?…’

‘ठीक हैं, 4 -5 दिन का समय तो ठीक होने में लगेगा ही.. आओ अन्दर आ जाओ..’

‘तो खाना कौन बनाएगा… आप हमारे यहाँ खाना खा लीजियेगा…’

वो मतलब से मुस्कुराते हुए बोला- ‘अच्छा क्या क्या खिलाओगी..’

मैंने भी शरारत से कहा- ‘जो आप कहें… नारंगी खाओगे… जीजू…’ उसकी नजर तुरन्त मेरे स्तनों पर गयी. मेरी नारंगियों के उभारों को उसकी नजरें नापने लगी.

‘हाँ अगर तुम खिलाओगी तो… तुम क्या पसंद करोगी..’ अमन ने तीर मारा

‘हाँ… मुझे केला अच्छा लगता है…’ मैंने उसकी पेंट की जिप को देखते हुए तीर को झेल लिया.

‘पर..आज तो केला नहीं है…’

‘है तो… तुम खिलाना नहीं चाहो तो अलग बात है…’ मैंने नीचे उसके खड़े होते हुए लंड को देखते हुए कहा.. उसने मुझे नीचे देखते हुए पकड़ लिया था.

‘अच्छा..अगर है तो फिर आकर ले लो..’ अमन मुस्कराया

‘अच्छा मैं चलती हूँ… जीजू… केला तो अन्दर छुपा रखा है..मैं कहाँ से ले लूँ?.’ मैंने सीधे ही लंड की ओर इशारा कर दिया. मैं उठ कर खड़ी हो गयी. वो तुंरत मेरे पीछे आया और मुझे रोक लिया- ‘केला नहीं लोगी क्या… मोटा केला है…’

मैंने प्यार से उसे धक्का दिया- ‘तुमने नारंगी तो ली ही नहीं.. तो मैं केला कैसे ले लूँ..’ मैंने तिरछी नजरों का वार किया.

उसने पीछे से आ कर- धीरे से मेरी चुंचियाँ पकड़ ली. मैं सिसक उठी. मैंने अपनी आँखें बंद कर ली. ‘ये नारंगियाँ बड़ी रसीली लग रही हैं ‘

‘अमन… क्या कर रहे हो…’

‘बस आरती… तुम्हारी नारंगी… इतनी कड़ी नारंगी… कच्ची है क्या…’

उसका लंड मेरे चूतडों पर रगड़ खाने लगा. मैंने उसका लंड हाथ पीछे करके पकड़ लिया.

‘इतना बड़ा केला… हाय रे… जीजू ‘

‘ आरती… नीचे तुम्हारे गोल गोल तरबूज… हैं… मार दिया मुझे. उसके लंड ने और जोर मारा. लगा कि मेरा पजामा फाड़ कर मेरी गांड में घुस जायेगा.

मैंने मुड कर अमन की ओर देखा. उसकी आंखों में वासना के डोरे नजर आ रहे थे. मैं भी वासना के समुन्दर में डूब रही थी. मैंने अपने आप को ढीले छोड़ते हुए उसके हवाले कर दिया. उसने मेरी आंखों में आँखें डालते हुए प्यार से देखा… मैं उसकी आंखों में डूबती गयी. मेरी आँखें बंद होने लगी. उसके होंट मेरे होटों से टकरा गए. अब हम एक दूसरे के होटों का रस पी रहे थे.

अमन ने मेरे एलास्टिक वाले पजामे को धीरे से नीचे खींच दिया. मैंने अन्दर पेंटी नहीं पहनी थी. उसका हाथ सीधे मेरी चूत से टकरा गया. उसने जोश में आकर मेरी चूत को भींच दिया. मै मीठी मीठी अनुभूति से कराह उठी. उसके दूसरे हाथ ने मेरे स्तनों पर कब्जा कर लिया था. मेरे उरोज कड़े होने लग गए थे. मेरा पाज़ामा धीरे धीरे नीचे तक सरक गया। सहिल ने ना जाने कब अपनी पैन्ट नीचे सरका ली थी।

उसका नंगा लण्ड मेरी गाण्ड से सट गया। लण्ड की पूरी मोटाई मुझे अपने चूतड़ों पर महसूस हो रही थी। मुझे लगा कि मैं लण्ड को अन्दर डाल लूं और मज़ा लूं। मेरे चिकने चूतड़ों की दरार में उसका लण्ड घुसता ही जा रहा था। मैंने अपनी एक टांग थोड़ी सी ऊपर कर ली उसका लंड अब सीधे गांड के छेद से टकरा गया. गांड के छेद पर लंड स्पर्श अनोखा ही आनंद दे रहा था. उसने अपने लण्ड को वहां पर थोड़ा घिसा और मुझे जोर से जकड़ लिया. उसके लंड का पूरा जोर गांड के छेद पर लग रहा था. लण्ड की सुपारी छेद को चौड़ा करके अन्दर घुस पड़ी थी. मैं सामने की मेज़ पर हाथ रख कर झुक गयी और चूतडों को पीछे की और उभार दिया. टांगे थोड़ी और फैला दी.

‘आह… आरती… बड़ी चिकनी है… क्या चीज़ हो तुम. ..’

‘अमन… कितना मोटा है… अब जल्दी करो…’

‘हाय… इतने दिन तक तुमने तड़पाया… पहले क्यों नहीं आयी…’

‘मेरे राजा… अब गांड चोद दो… मत कहो कुछ ..’

‘ये लो मेरी आरती… क्या चिकने चूतड हैं…’

‘हाँ मेरे राजा… मैं तो रोज तुम पर लाइन मारती थी… तुम समझते ही नहीं थे… हाय मर गयी…’

उसने अपना पूरा लण्ड मेरी गांड की गहरायी में पहुँचा दिया.

‘राजा मेरे… अब तो मेहरबानी कर ना…’

‘बस अब… कुछ ना बोलो… अब मजा आ रहा है… हाय… आरती… मस्त हो तुम तो…’

अमन के धक्के बढ़ते जा रहे थे… मुझे असीम आनंद आने लगा था. वो गांड मारता रहा… मैं गांड चुदाती रही. उसके धक्के और बढ़ने लगे. उसका लण्ड मेरी गांड की दीवारों से रगड़ खा रहा था. छेद उसके लण्ड के हिसाब से थोड़ा छोटा ही था… इसलिए ज्यादा रगड़ खा रहा था. मेरी गांड चुदती रही. मैं आनंद के मारे जोर जोर से सिस्कारियाँभर रही थी.

अब अमन ने धीरे से लण्ड छेद से बाहर खींच लिया. और मुझे चिपका लिया मेरे हाथ ऊपर कर दिये. पीछे से उसने मेरी छातियाँ कस कर पकड़ ली और मसलने लगा.

‘आरती… अब मैं कहीं झड़ ना जाऊं… एक बार लण्ड को चूत का सामना करवा दो…’

मैं हंस पड़ी- ‘आज मैं इसी लिए तो आई थी… मुझे पता था कि जानकी नहीं है… तुम अकेले ही हो… और अगर आज तुमने लाइन मारी तो तुम गए काम से…’

दोनों ही हंस पड़े… हम दोनों बिस्तर पर आ गए… मैंने कहा…’अमन… मैं तुम्हें पहले चोदूंगी… प्लीज़… तुम लेट जाओ… मुझे चोदने दो…’

‘ चाहे मैं चोदूं या तुम… चुदेगी तो आरती ही ना… आ जाओ…’ कह कर अमन हंसने लगा.

वो बिस्तर पर सीधे लेट गया. उसके लण्ड कि मोटाई और लम्बाई अब पूरी नजर आ रही थी. मैं देख कर ही सिहर उठी. मेरे मन में ये सोच कर गुदगुदी होने लगी कि इतने मोटे लण्ड का स्वाद मुझे मिलेगा. मैं धीरे से उसकी जांघों पर बैठ गयी. उसके लण्ड को पकड़ कर सहलाया और मोटी सी सुपारी को चमड़ी ऊपर करके सुपारी बाहर निकाल दी. मैंने अपनी लम्बी चूत के होठों को खोला और उसकी लाल लाल सुपारी को मेरी लाल लाल चूत से चिपका दिया. पर अमन को कहाँ रुकना था. सुपारी रखते ही उसके चूतड़ों ने नीचे से धक्का मार दिया. सुपारी चूत को चीरते हुए अन्दर घुस गयी. मैं आनंद से सिसक उठी.

‘हाय रे… घुसा दिया अन्दर… मेरी सहेली के चोदू , मेरे राजा…’

कहते हुए मैं उस पर लेट गई. वो गया नीचे दबा हुआ था इसलिए पूरी चोट नहीं दे पा रहा था. पर मेरे आनंद के लिए उतना ही बहुत था. मैंने उसे जकड़ लिया. अब मेरे से भी उत्तेजना सहन नहीं हो रही थी. मैंने अपनी चूत लण्ड पर पटकनी चालू कर दी. फच फच की आवाजों से कमरा गूंजने लगा. हम दोनों आनंद में सिस्कारियाँभर रहे थे.

‘हाय मेरे राजा… मजा आ रहा है… हाय चूत और लंड भी क्या चीज़ है… हाय रे…’

‘आरती… लगा… जोर से लगा… और चोद… निकाल दे अपने जीजू के लण्ड का रस…’

मैंने अपनी गति बढ़ा दी. चूतड़ों को हिला हिला कर उसका लण्ड झेल रही थी. उसका लण्ड मेरे चूत के चिकने पानी से भर गया था.

‘हाँ ..मेरे राजा… ये लो… और लो…’

पर अमन को ये मंजूर नहीं था… उसने मुझे कस के पकड़ा और एक झटके में अपने नीचे दबोच लिया. वो अब मेरे ऊपर था. उसका लण्ड बाहर लटक रहा था. उसने अपना कड़क मोटा लण्ड चूत के छेद पर रखा और उसे एक ही झटके में चूत की जड़ तक घुसा डाला.

मुझे लगा कि सुपारी मेरे गर्भाशय के मुख से टकरा गयी है. मैं आह्ह्ह भर कर रह गयी. अपनी कोहनियों के सहारे वो मेरे शरीर से ऊपर उठ गया. मेरे जिस्म पर अब उसका बोझ नहीं था. मैं एक दम फ्री हो गयी थी. मैंने अपने आप को नीचे सेट किया और टांगे और ऊपर कर ली.

अमन ने अब फ्री हो कर जोरदार शोट मरने चालू कर दिए. मुझे असीम आनंद आने लगा. मैंने भी अब नीचे से चूतड़ों को उछाल उछाल कर उसका बराबरी से साथ देना चालू कर दिया. मैं अब कसमसाती रही… चुदती रही… उसकी रफ्तार बढती रही… मुझे लगने लगा कि अब सहा नहीं जाएगा… और मैं झड़ जाऊंगी… मैंने धक्के मारने बंद कर दिए .. और ऑंखें बंद करके आनंद लेने लगी… मैं चरम सीमा पर पहुच चुकी थी..

जैसे जैसे वो धक्के मारता रहा मेरा… रज निकलने लगा… मैं छूटने लगी… मैं झड़ने लगी… रोकने की कोशिश की पर… नहीं… अब कुछ नहीं हो सकता था… मैं सिस्कारियाँभरते हुए पूरी झड़ गयी… मैं ढीली पड़ गयी… अब उसके धक्के मुझे चोट पहुचने लगे थे… लेकिन उसकी तेजी रुकी नहीं… कुछ ही पलों में… सुहानी बरसात चालू हो गयी. उसने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया था… और उसका पानी मेरी छातियों को नहला रहा था. मैं हाथ फैलाये चित्त पड़ी रही. वो अपने वीर्य पर ही मेरी छाती से लग कर चिपक गया. उसका वीर्य बीच में चिकना सा आनंद दे रहा था… अमन मुझे चूमता हुआ उठ खड़ा हुआ… मैंने भी आँख खोल कर उसकी तरफ़ देखा. और प्यार से मुस्कुरा दी.
मुझे अपनी चुदाई की सफलता पर नाज़ था. Antarvasna

अगले भाग का इतंज़ार करें.

Hindi sex stories

Hindi sex stories....

पिछली रात तेरी यादों की झड़ी थी
मन भीग रहा था
जैसे-जैसे रात बढ़ती थी
चाँद से और जागा नहीं जा रहा था…

बेचारी नींद!!!
आँखों से यूँ ओझल थी
जैसे कि कुछ खो गया हो उसका
जब आँखों में नींद ही नहीं थी
तो क्या करता…?

तुम में मुझमें जो कुछ था
उसे तलाशता रहा सारी रात
सारी कहानी उधेड़कर फिर से बुनी मैंने
तुमने कहाँ से शुरु किया था
कुछ ठीक से याद नहीं आ रहा था
नोचता रहा सारी रात अपने ज़ख़्मों को
ज़ख़्म ही कहना ठीक होगा
दर्द-सा हो रहा था
साँस बदन में थम-थम के आ रही थी
कभी आँसू कभी ख़लिश
तुमने ग़लत किया – या मुझसे ग़लत हुआ
कोई तो रिश्ता था
जिसमें साँस आने लगी थी
मगर किसी की नज़र लग गयी शायद…
साँस तो आ चुकी थी मगर
रिश्ता वो अभी नाज़ुक़ था
अगर मैं कुछ कहता तो तुम कुछ न सुनती
न कुछ मैं समझने के मन से था
वक़्त बीतता रहा
जो तुम कर सकती थी – तुमने किया
जो मैं कर सकता था – मैं कर रहा हूँ

फिर भी तुम्हारी आँखों का सूखा नमक
यादों की गर्द के साथ उड़ता हुआ
मेरे ताज़ा ज़ख़्मों को गला रहा है
जाने किसका कसूर है
जिसको तुम भुगत रही हो
जिसको मैं भुगत रहा हूँ
एक दोस्ती से ज़्यादा तो मैंने कुछ नहीं चाहा
तुमको जितना दिया
तुमसे जितना चाहा…
सब दोस्ती की इस लक़ीर के इस जानिब था
वो कैसा सैलाब था?
जिसमें तुम उस किनारे जा लगे
मैं इस किनारे रह गया
और हमेशा यही सोचता रहा
कि तुम मिलो तो तुम्हें ये एहसास कराऊँ
कि तुमने क्या खोया
मैं सचमुच नहीं जानता कि
तुम किस बात से नाराज़ हो,
तुम्हारे ख़फ़ा होने की वजह क्या है?
मगर ये एहसास-सा है मुझको
कि तुम किसी बात के लिए कसूरवार नहीं हो
अगर मैं ये समझता हूँ
तुम इसे सोचती हो
तो दरम्याँ यह जो एक रास्ता है
तुम्हें दिखायी क्यों नहीं देता
पहले अगर तुमने पिछली दफ़ा बात की थी
तो इस दफ़ा क्यों नहीं करती
क्या वो दोस्ती फिर साँस नहीं ले सकती
क्या इन ज़ख़्मों का कोई मरहम नहीं

क्यों वो मुझे इस तरह से देखती है
जैसे कि तुम उससे कहती हो
“ज़रा देखकर बताना तो! क्या वो इधर देखता है?”

अगर मेरे पिछले दो ख़ाब सच हुए हैं
तो ज़रूर मेरे ऐसा लगने में
कुछ तो सच ज़रूर छिपा होगा
मैंने कई बार महसूस किया है
तुमको मेरी आवाज़ बेकस कर देती है
तुम थम जाती हो, ठहर जाती हो
कोशिश करते-करते रह जाती हो
कि न देखो मुझको-
मगर वो बेकसी कि तुम देख ही लेती हो

मैं कल भी वही था
मैं आज भी वही हूँ
मुझे लगता है कि तुम भी नहीं बदली
फिर क्यों फर्क़ आ गया है
तुम्हारे नज़रिए में-
मैं जानता हूँ ये नज़रिया बनावटी है, झूठा है
आइने की तरह तस्वीर उलट के दिखाता है

कभी-कभी ख़ुद को समझ पाना
कितना मुश्किल होता है
ऐसे में दूसरों का सच परखना सचमुच मुश्किल है
मैं यहाँ आकर आधी राह पर
सिर्फ़ तुम्हारे लिए ठहर गया हूँ
आधा चलकर मैं आ गया हूँ
बाक़ी फ़ासला तुम्हें कम करना है
मेरी आँखों में पढ़ लो सच-
ये अजनबी तो नहीं
कभी तो तुम भी इनसे आशना रह चुकी हो
सारी बात झुकी हुई आँखों में है
अपनी होटों से कह दो-
‘मैं और तुम कभी आशना थे!’

Sex Stoires

दोस्तो! मेरा नाम सुनील है, मैं Sex Stoires आपको अपनी मॉम की सेक्स स्टोरी बताता हूँ। मेरी मॉम की उम्र लगभग 45 साल होगी, वो बहुत ही सुंदर और सेक्सी है। मेरे पिता बाहर रहते हैं घर में मैं और मॉम ही होते हैं।

एक दिन हमारे घर में कोई मेहमान आये हुए थे, मेरे रिश्ते की चाचा! उनकी अभी अभी शादी हुई थी।
हमने उनको एक कमरा सोने को दे दिया और मेरी मॉम और मैं साथ सो गए।

रात को उनके कमरे से आवाज़ आने लगी तो मेरी नींद खुल गई और मैं इधर उधर देखने लगा तो मैंने देखा कि मॉम अपने बेड पर नहीं थी। मैं मॉम को देखने बाहर आया तो मैंने देखा कि मॉम अपना पेटीकोट उतारकर दरवाज़े के छेद से अंदर देख रही हैं और अपनी चूत में उंगली कर रही हैं।

मैं चुपचाप देखता रहा, कुछ नहीं बोला। जब मॉम झड़ गई तो उठ कर कमरे में आई और मुझे देख कर घबरा गई, बोली- क्या देखा तूने?
मैं बोला- कुछ नहीं!
मॉम बोली- अच्छा चल सो जा!

और हम दोनों सो गए पर मुझे नींद नहीं आ रही थी। अब मैं बार बार मॉम की तरफ देख रहा था। मुझे वो बड़ी सेक्सी लग रही थी।

सुबह चाचा लोग चले गए, फिर घर पर हम दोनों ही रह गये। मॉम ने नाश्ता बनाया और हम दोनों ने साथ बैठ कर खाया।

मॉम ने मैक्सी पहन रखी थी और अन्दर से कुछ नहीं पहना था। मुझे लगा कि उनको सेक्स करने का मन हो रहा है। नाश्ता करने के बाद वो बाथरूम में चली गई, बोली-मैं नहाने जा रही हूँ, तू कहीं जाना मत!
मैंने कहा- ठीक है!

फिर मॉम नहाने चली गई। हमारे बाथरूम के दरवाज़े में एक छेद है। जब मॉम को गए कुछ देर हो गई तो मैंने छेद पर जा कर देखा कि मॉम क्या कर रही हैं तो मैंने अन्दर देखा की मॉम बाथरूम में एक लम्बे बैंगन को अपनी चूत में जोर जोर से अन्दर बाहर कर रही हैं।

मैं यह खेल देखने में मशगूल हो गया। तभी अचानक मॉम ने दरवाज़ा खोल दिया। मुझे भागने का भी समय नहीं मिला और मैं पकड़ा गया। वो बहुत गुस्से में थी और अंदर जाकर बोली- रुक जा! तेरी शिकायत तेरे पापा से अभी करती हूँ!

पूरे दिन वो मुझसे नहीं बोली और अलग अलग ही रही। अब रात को जब सोने का समय हुआ तो मुझसे बोली- तू आज मेरे साथ ही सोयेगा!
मैं बोला- क्यों?
बोली- आज कल तू बहुत गलत बातें सीख रहा है, इसलिए!

मेरा तो मन उनके साथ सोने को हो ही रहा था क्योंकि वो रात को सिर्फ पेटीकोट पहन कर सोती हैं और नीद में उनका पेटीकोट ऊपर खिसक जाता है तो सब कुछ दिखता है।

फ़िर रात को हम सोने चले गए। मैंने पैन्ट पहन रखी थी। वो बोली- चल इसे उतार दे! सोने में परेशानी होगी!
मैंने कहा- मुझे कोई परेशानी नहीं होगी।
तो बोली- मुझे होगी! चल उतार!
अब हम दोनों सो गए। मॉम बोली- तू क्या देख रहा है?
मैं बोला- कुछ नहीं!
बोली- सच सच बता! नहीं तो पापा से बोल दूंगी!

मैं डर के मारे बोला कि रात को आप जब उंगली कर रही थी तो मैंने आप को देखा था। फ़िर सुबह आप सेक्सी लग रही थी तो मेरा मन आपको देखने का कर रहा था तो आपको देखा।
मॉम बोली- तुझे कुछ होता है?
मैं बोला- हाँ, बहुत कुछ होता है!

उन्होंने मेरे लंड को पकड़ लिया मेरा तो लौड़ा बिल्कुल खड़ा हो गया।
वो बोली- अब समझी कि तू आजकल क्या कर रहा है।
वो बोली- अब जब तू सब कुछ जानता है तो चल मेरे साथ सब कुछ कर!
मैं बोला- नहीं!
तो बोली- पापा से बोलना है क्या!
मैं बोला- नहीं!

बस फिर क्या था, मैं तो चालू हो गया, उनके पूरे कपड़े उतार कर उनको चाटने लगा और चूत चाट चाट कर तो उनको झाड़ दिया।
मैं बोला- कैसा लगा?
बोली- अच्छा लगा! लगे रहो!

फ़िर मैंने उनकी चूत मारी! काफी देर तक मारने के बाद वो झड़ गई, फिर बोली- बेटा! मजा आ गया!
कुछ देर बाद मैं भी झड़ गया। उस रात हमने चार बार चुदाई की।
अब तो रोज़ ही होता है!

एक दिन मेरे पापा को शक हो गया, लेकिन मॉम ने बात सम्भाल ली। अब मेरी मॉम और मैं रोज़ रात को साथ ही सोते हैं। मॉम और मैं बहुत ही खुश हैं।
आपको मेरी मॉम सेक्स स्टोरी कैसी लगी, मुझे मेल करना! Sex Stoires

लेखक : रिया

रिया का सबको और गुरुजी Sex Stories के साथ साथ अन्तर्वासना चलाने वाले एक एक कर्मचारी को गीली गांड से घोड़ी बन कर प्रणाम ! अन्तर्वासना ने मेरी हर चुदाई को अपनी वेबसाइट में जगह देकर मुझे विश्वास दिलाया कि यहाँ हर किसी की सुनवाई होती है। आज एक बार फिर से मैं अपनी नवीनतम चुदाई को लिख कर बयान करने जा रहाँ हूँ। उम्मीद है कि पहले की तरह ही मेरे दोस्तों की सूची में बढ़ौतरी होगी। दोस्तो, उम्मीद है कि पिछली सभी ठुकाइयों की तरह यह ठुकाई भी आप सबको गर्म कर देगी और सभी के लौड़े खड़े हो जायेंगे और किसी न किसी की गांड मारने के लिए बेताब हो जायेंगे।

दोस्तो, चुदाई के लिए जगह पता करना मेरी हॉबी में शामिल हो चुका है। आज जिस जगह के बारे में लिख रहा हूँ यह भी मेरे एक ऐसे दोस्त ने बताई है जिसके साथ आज तक सिर्फ याहू पर चैट हुई है या फिर मोबाइल पर रात को चुदाई ! उस बन्दे की उम्र ५९ साल की है। साठ के करीब पहुँच चुके मेरे इस दोस्त ने मुझे मेरे अपने ही शहर की ऐसी ऐसी जगहें बताई हैं जिनके बारे में शहर में रहकर भी नहीं जानता। वो बरसों पहले मेरे शहर में रह चुका है। उसने मुझे बताया कि शहर के बीचों बीच एक ऐसी जगह है जहाँ तुझे लौड़ा क्या लौड़े मिल जायेंगे एक फिल्म-टाकी जो थिएटर जितनी बड़ी तो नहीं है लेकिन वो एक ऐसे काम्प्लेक्स में है जहाँ रहने के लिए गेस्ट हाउस भी है और उस टाकी में सिर्फ ब्लू फिल्में लगतीं हैं सो उसकी बताई हुई इस जगह पर मैंने जाने की सोची।

बस-स्टैंड से मैंने रिक्शा वाले को अमृत-टाकी नाम की इस मिन्नी थिएटर जाने को कहा। उसने मुझे वहाँ उतार दिया। मैं उस कम्प्लेक्स में घुसा। गेस्ट हाउस ऊपर है और टाकी बेसमेंट में थी। पास में चाइनीज़ फ़ूड का रेस्तौराँ भी था। मैं बेसमेंट की सीढ़ियाँ उतरा, वहाँ ब्लू फिल्म के पोस्टर लगे हुए थे। फिल्म थी- वन लेडी-थ्री मैन

सामने टिकट-काउंटर था जिसपे अभी कोई नहीं था। फिल्म को शुरू होने में काफी समय था। वहाँ फिल्म देखने आने वाले लोग आने लगे। अभी तक सभी निम्न-वर्ग के लोग ही थे जिनमें रिक्शा चालक और पंजाब में बाहर से आकर बसे प्रवासी लोग जो मेहनत मजदूरी करते और हफ्ते में एक-आध बार मनोरंजन करने वहाँ फिल्म देखने आते क्यूंकि टिकट के दाम बहुत कम थे।

मेरे जैसा गोरा चिट्टा चिकना वहाँ कोई नहीं था। जब भी मैं चलकर इधर-उधर जाता, उनकी नज़र मेरी गोल मोल गांड पर टिकती। वहाँ खड़े लोगों में से दो मर्द ऐसे थे जो मेरे बारे में अपना अंदाजा लगाने की फिराक में थे। जब उन्होंने मेरी तरफ देखा तो मैंने होंठ चबा दिया और होंठों पर जुबां फेर उनको उकसाने की पहली कोशिश की और कुछ हद तक मैं कामयाब भी हुआ। मुझे देख एक ने अपना लुंड खुजलाया, जिसे देख मैं शरमाया झूठ-मूठ में, लेकिन हंस के होंठों पर जुबां फेरते हुए उनके लौड़े की ओर हवा में चुम्मा फेंका। वो चलते हुए टाकी के पीछे साइकिल स्टैंड में बने शौचालय में घुस गए। जब वो वापस न आये तो मैं टहलते हुए वहीं जा पहुंचा। कोई आसपास न देख मैं उनके पास खड़ा हो गया, कुछ नहीं बोला, न कुछ किया,

उनकी तरफ पीठ करके खड़ा हो गया। उनको समझ ना आया कि अब करें क्या !

तभी किसी ने पीछे से आकर मेरी गांड की गोलाइयों पर हाथ फेरना शुरु किया। मुझे बहुत मस्ती छाई लेकिन चुपचाप खड़ा रहा। उसने आगे हाथ बढ़ा मेरी पैंट खोलने की कोशिश की तो मैंने रोकते हुए उनकी ओर घूम कर देखा। तभी दूसरे ने घूम मेरे पीछे जा गांड पर हाथ फेरना चालू रखा। मैंने आगे वाले की जिप खोल हाथ डालते हुए उसको मसल दिया और घुटनों के बल होते हुए उसको निकाल मुँह में ले लिया। तभी किसी कि आने की आहट सुन हम रुक गए कपड़े सही किये। उस आदमी ने मुझे उसकी जिप बंद करते देख लिया। हम वहां से निकल आये। वो भी कुछ मिनट बाद वापस आ गया।

मेरे आशिक बोले- चल सिगरेट, चाय वगैरा पी कर आते हैं !

अभी चालीस मिनट थे फ़िल्म शुरु होने में ! वो भी सब मेरे जैसा कोई गांडू भालने कोशिश में ही थे। मैं वहीं रुक गया तो वो तीसरा बन्दा मेरे सामने खड़ा हो गया और लौड़े को बार बार खुजलाने लगा। मैंने थोड़ा मुस्कुरा सा दिया, आंख के एक इशारे से मुझे वहीं चलने को कहा जहाँ मैं उन दोनों के साथ गया था। उसने जाते ही लौड़ा निकाल लिया और सीधा मेरे हाथ में थमा दिया। मैंने प्यार से सर से लेकर जड़ तक सहलाया और झुकते हुए मुँह में डाल लिया। उसने मुझे बताया कि वो उसी काम्प्लेक्स के गेस्ट हाउस में रुका था। उसने अपना कार्ड दिया कुछ देर चुसवा उसने मुझे छोड़ दिया।

मैं वहीं जाकर खड़ा हो गया, दोनों आये, मुझे टाकी में ले गए और एक खाली कोना देख मुझे बिठा लिया। वहाँ सोफा-सीट्स थीं, बाहर से टिकट सस्ती थी लेकिन अन्दर हर तरह की सुविधा थी। कोई किसी को परेशान नहीं करता, बस पैसे लेते थे। अन्दर लाइट बंद हुई, मेरी पैंट घुटनों तक खिसका दी गई और उनके लौड़े तने हुए मुझे पुकार रहे थे। दोनों के बीच बैठ बारी-बारी मेरे मुँह में डालते। एक ने ऊँगली घुसा दी, फिर सोफा पर ही मेरी टाँगें चौड़ी करवा दीं और बीच में आकर आसन लगाकर लौड़ा गांड पर रखने लगा। मैंने अपनी जेब में से कंडोम निकाले उसके लौड़े पर डाल दिया और उसने अपना लौड़ा घुसा दिया। थोड़ी सी तकलीफ के बाद मुझे मजा आने लगा। दूसरा मेरे मुँह में चूपे लगवाने लगा।

अह… उह… मार मेरी और कर… हाय और कर…

मेरी गांड की गर्मी में वो जल्दी पिघल गया। उसने अपना माल कंडोम में छोड़ दिया। दूसरे ने कंडोम डाला और घुसा दिया। मुझे बहुत मजा आ रहा था कि दो-दो लौड़ों में खेल रहा था। तभी किसी ने हम पर टॉर्च मारी मुझे चुदवाते देख वो उसी तरफ आया। जल्दी से लौड़े बंद किये और सीधे बैठ गए। उसके जाने के बाद हमने इस बार सोफा की बजाये नीचे लेटना सही समझा। दूसरे ने मुझे दबा कर चोदा। तो पहले वाले का मैंने चूस कर फिर खड़ा करवा दिया। दो घंटे की फिल्म में दोनों ने दो दो बार मेरी ठुकाई की। पहली बार तो मेरी जवानी से पल में पिघल गए दूसरी बार जम कर ठोका। उन दोनों ने अपना नंबर दिया वो तीसरे बन्दे की नज़र मेरे ऊपर रही। मैं जैसे ही बालकनी से निकला, उनको विदा किया।

अभी थिएटर से निकला ही था कि तीसरे ने मुझे बाथरूम में फिर से आने का एक गरम इशारा किया वहां आने के लिए ! मेरे पहुँचते ही वो मुझ पर टूट पड़ा। उसने अपना लौड़ा हाथ में दिया, मैं बैठ कर चूसने लगा। उसने मेरे से मुठ मरवाई और लौड़ा भी खुल कर चुसवाया। उसके झड़ने का वक्त आते देख मैंने उसका माल घोड़ी सा बन अपने छेद पर गिरवा लिया। उसने अपना माल मेरी गांड पर मल दिया। उसने मुझे शाम ५ बजे अपने कमरे पर बुलाया और मैं सही समय पर वहां चला गया। उसने काफी पी रखी थी, बिलकुल नंगा था सिर्फ कच्छा डाला था। मुझे अन्दर घुसाते ही उसने जल्दी से दरवाजा बंद किया। वो बेड की ओट लेकर टांगें फैला कर बैठ गया। मैंने बीच में आते हुए उसला लौड़ा अपने मुँह में ले लिया और खूब दबा कर चूसा। उसने भी ६९ में हो मेरी गांड चाटी दबा कर मेरे मम्मे मसले। उसने मुझे दीवार को पकड़ थोड़ा झुककर खड़े होने को कहा और एक खिलाड़ी की तरह मुझे चोदा। बहुत मजा दे रहा था, पूरे ३ घंटे उसने मुझे दबा कर अपने लौडे पर उछाला, मुझे पूरी संतुष्टि दी। एक ही दिन में तीन लौड़े पाकर मैं खुश था।

उसके घर से प्यास बुझाकर निकला !

यह थी एक मस्त ठुकाई !

अपनी अगली चुदाई लेकर चुदक्कड़ गांडू जल्दी वापिस आयेगा। Sex Stories

प्रिय पाठको ! Antarvasna

पहले दिन रात को ममता (दीदी की ननद) को तीन बार Antarvasna चोद कर मैं वहीं सोफे पर सो गया था ! जब सुबह उठा तो देखा दीदी के सास ससुर और जीजू काम पर चले गए थे ! और ममता भी अभी तक उठी नहीं थी क्योंकि मैंने रात को उसको कॉलेज जाने के लिए मना कर दिया था। इसलिए वो अभी तक उठी नहीं थी।

सब के जाने के बाद दीदी मेरे पास आई, मेरी लुंगी खोल कर मेरे लंड से खेलने लगी और मुँह में लेकर चूसने लगी और कहा- कि कल तो जल्दबाजी में कुछ ज्यादा नहीं हो सका पर आज मैं तुमको नहीं छोड़ूंगी ! आज सारा दिन मैं तुमसे चुदवाउंगी ! तुम आज जी भर कर मेरी इतने दिनों की चुदाई की कसर पूरी कर दो !

मैंने कहा- वो तो ठीक है पर तेरे साथ ममता को भी चोदना पड़ेगा !

उसने कहा- क्या मतलब !

मैंने कहा- कल रात को ममता को लंड भी चुसा चुका हूँ और ३ बार चोद भी चुका हूँ ! बड़ी चुद्दकड़ है तेरी ननद ! बहुत मस्त भी है ! मजे ले ले कर नए नए तरह से चुदवाती है ! उसका मम्मे भी बहुत मस्त हैं !

दीदी ने कहा- तू तो बड़ा शैतान है !

मैंने कहा- दीदी क्या करूँ ! तुम लोगों ने जो आदत डाल दी है ! अब तो एक दिन भी चुदाई के बैगर नहीं रह सकता !

तब दीदी ने कहा- अब तो कोई समस्या नहीं है, चल कपड़े खोल जल्दी से और तेरा लंड दे मुझे !

मैंने कहा- दीदी तुमने कपड़े ही कहाँ छोड़े हैं जो उतारूँ !

उसने कहा- बनियान भी उतार दो ! आज शाम तक तुमको कपड़े नहीं मिलेंगें !

मैंने कहा- दीदी, पहले बाथरूम जाकर पहले फ्रेश तो हो लेने दो !

तो उसने कहा- एक बार लंड चूसने दो और चोद दो ! फिर जाना ! मैं कल शाम से तेरे लंड के लिए मरी जा रही हूँ !

खैर एक बार कुछ देर दीदी को लौड़ा चुसवा कर उसको चोदा फिर फ्रेश होने को चला गया और दीदी को कहता गया कि कपड़े मत पहनना !

दीदी हंस कर रह गई ! फिर मैं बाथरूम से नंगा ही बाहर आया और सोफे पर बैठ गया !

दीदी नाश्ता लेने चली गई !

इतने में ममता नंगी ही बाहर आई और मुझसे शिकायत करने लगी कि मैंने तो सोचा था कि तुम आओगे और अपने लंड का प्रसाद देकर मुझे उठाओगे !

मैंने कहा- मैं अभी अभी उठा हूँ ! अगर तुम और कुछ देर नहीं आती तो मैं ही अन्दर आ जाता तुझे उठाने को !

वह तुंरत मेरी गोद में आ बैठी और मेरे मुँह से अपना मुँह लगा दिया और अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी हम दोनों एक दूसरे को बहुत बुरी तरह चूम रहे थे साथ ही वो मेरा लंड सहला रही थी। मैं उसकी चूत में ऊँगली डाले हुए मस्ती कर रहा था !

उसने कहा- संजय मुझे तेरी रबड़ी खानी है ! कल रात को खाकर बहुत मजा आया था !

मैंने कहा- कौन मना करता है जी भर कर खाओ !

इतने में दीदी नाश्ता लेकर आ गई और हम लोगों को देख कर बोली- तो यहाँ यह सब चल रहा है !

ममता बोली- भाभी ! संजय ने मुझे रात को बहुत मस्ती से चोदा है ! सच में बहुत दिनों बाद इतना मजा आया है ! नाश्ता-वाश्ता छोड़ो, जल्दी से आ जाओ, आज संजय का ही नाश्ता करते हैं !

चूकिं दीदी भी नंगी ही थी, वह तुरंत हमारे पास आ गई और हम दोनों से लिपट गई ! फिर दीदी ने ममता से कहा कि तुमने या विनय (जीजू) ने कभी नहीं कहा कि विनय तुमको भी चोदता है ! अगर मुझे पहले पता होता हम दोनों एक ही साथ चुदवाते ! सच में तीन या ज्यादा मिलकर चुदाई करते हैं तो बहुत मजा आता है क्योंकि सबके पास कई ऑप्शन्स रहते हैं !

ममता ने कहा- पहले संजय से तो चुदवा लूँ ! इसका लंड बहुत मजेदार है !

और हम तीनों चुदाई में लग गए ! कभी दीदी मेरा लंड चूसती कभी ममता !

फिर ममता ने कहा- संजय अपना अमृतरस मुझे पिलाओ !

मैंने कहा- मेरी रानी, घबराती क्यों हो ! आज दिन भर तुम दोनों को चोद चोद कर थका दूंगा !

दोनों ने कहा- देखेंगे कि तुम कौन सा तीर मार लेते हो !

फिर सिलसिला चालू हो गया और मैंने दोनों को बुरी तरह चोदा ! ममता तो जल्दी ही पस्त हो गई पर दीदी अभी फिर से तैयार थी !

मैंने दीदी से कहा- यहाँ तो दिन के अलावा टाइम नहीं मिलता, क्यों ना मेरे साथ चलती !

दीदी ने कहा- मैं तो तैयार हूँ ! तुम मेरे सास-ससुर से बात कर लो !

तो ममता ने कहा- मैं भी तुम लोगों के साथ चलूंगी !

मैंने कहा- ठीक है ! जब मैं बात करूँगा तब तुम कह देना कि तेरे कोलेज में एक हफ्ते की छुट्टी है और तुम भाभी के बिना यहाँ अकेली बोर हो जाओगी!

इस तरह हम चुदाई में लगे रहे फिर कुछ देर बाद ममता बोली- संजय मेरी गांड मारो ना ! मुझे गांड मरवाने में बहुत मजा आता है !

तो दीदी ने कहा- अगर ऐसी बात है तो मैं भी मरवा कर देखूंगी !

तब ममता ने कहा- भाभी पहली बार गांड मरवाने में बहुत तकलीफ होती है !

दीदी ने कहा- कोई बात नहीं ! मैं सह लूंगी, मज़े के लिए मैं सब कुछ कर सकती हूँ !

इसके बाद ममता उठ कर गई और क्रीम की ट्यूब ले आई और मेरे लंड पर मलने लगी और मुझे कहा- तुम भाभी की गांड चूस कर गीला कर दो तो तकलीफ कुछ कम होगी! दीदी ने कहा- हट ! गांड को भी कोई चूसते हैं !

ममता ने कहा- चुसवा कर तो देखो भाभी ! बहुत मजा आयेगा !

इस प्रकार ममता ने दीदी की गांड में भी क्रीम लगा कर और ऊँगली डाल कर कुछ ढीला कर दिया ! फिर मुझसे कहा- आ जाओ संजय ! अब भाभी की गांड तैयार है !

मैं दीदी को घोड़ी बना के उसकी गांड के छेद में लंड डाल कर लंड का सुपारा अन्दर करने लगा, लेकिन छेद इतना टाइट था कि अन्दर जा ही नहीं रहा था !

तब ममता ने कहा- संजय जरा जोर लगाओ !

और दीदी के नीचे आकर उसके मुँह को अपने मुँह से दबा लिया ! इस बार मैंने जोर लगा कर अपने लौड़े का सुपारा दीदी के गांड में घुसा दिया ! सुपारा घुसते ही दीदी चिल्ला उठी- अरे मेरी माँ ! मैं तो मर गई संजय ! और जोर जोर से चिल्लाने लगी !

मैंने कहा- दीदी जो होना था, वो हो चुका, ज्यादा जोर से चिल्लाओगी तो आस पड़ोस वालों को शक ना हो जाये !

दीदी कहने लगी- नहीं संजय, निकाल लो ! बहुत तकलीफ हो रही है !

ममता ने कहा- मुझे भी हुई थी ! पर बाद में जब धीरे धीरे पूरा लौड़ा अन्दर बाहर होने लगा तो बहुत मजा आया !

तो दीदी ने कहा- जब इतना बर्दाश्त किया है तो थोड़ी तकलीफ और सही ! लेकिन धीरे धीरे प्यार से डालना !

मैंने कहा- ठीक है !

फिर मैंने धीरे धीरे पूरा लंड अन्दर कर दिया !

ममता ने कहा- भाभी मेरी चूत चूसो ! मैं तुम्हारी चूची दबाती हूँ !

इस तरह दीदी को बहलाकर ममता ने मुझे कहा- संजय ! अब अपना लंड आगे पीछे करो !

कुछ ही देर में दीदी ने कहा- संजय, अब मजा आ रहा है ! जरा जोर जोर से चोदो !

काफी देर चोदने के बाद ममता ने कहा- अब मेरी गांड भी मारो ! मैं अब बर्दाश्त नहीं कर सकती !

इस तरह कहकर वह भी दीदी के बराबर घोड़ी बन गई ! अब मैं कभी दीदी की, कभी ममता की गांड मारने लगा ! मुझे भी बहुत मजा आ रहा था ! मैंने कहा- अब मैं छुटने वाला हूँ !

तब दीदी और ममता ने कहा- हम दोनों तो अब तक दो दो बार छुट चुकी हैं !

दीदी और ममता ने कहा- अपना अमृतरस हम दोनों को पिलाओ !

मैंने अपना कामरस दोनों के मुँह में डाल दिया। दोनों ने थोड़ा थोड़ा अपने मुँह में लिया फिर दोनों ने आपस में मुँह से मुँह मिला कर काफी स्वाद ले ले कर सारा चाट लिया। फिर मेरे लौड़े पर जो कुछ बचा था वह चाट चाट कर साफ कर दिया !

सच ! मुझे इतना मजा कभी नहीं आया ! फिर हम लोगों ने कुछ देर आराम किया ! उसके बाद दोनों मेरे लौड़े पर भूखी शेरनी की तरह टूट पड़ी और मैं भी उनके चुचे दबाने लगा ! इस प्रकार हम लोगों ने एक फिर जम कर चुदाई का आनंद लिया और कपडे पहन कर शरीफों के जैसे बैठ गए !

कुछ ही देर में दीदी के सास ससुर आ गए, विनय कुछ देर बाद में आया ! मैंने उनसे दीदी को ले जाने की इजाजत मांगी तो पहले कुछ ना नुकुर करने लगे, लेकिन मेरे काफी जोर देने पर एक हफ्ते के लिए मान गए ! जैसा कि हम लोगों ने प्लान बनाया था- ममता भी कहने लगी जाने को ! जैसे तैसे उसको भी मंजूरी मिल गई !

तब मैंने कहा- कल सुबह निकाल चलते हैं ! दोपहर तक पहुँच जायेंगे !

इस प्रकार हम हम करीब आठ बज़े की बस से रवाना हो गए ! बस में मैं बीच में बैठा था एक तरफ दीदी और एक तरफ ममता ! थोड़ी देर बाद ममता ने एक चद्दर निकाल कर हम तीनों पर डाल ली क्योंकि ठण्ड का मौसम चालू हो गया था इसलिए किसी को शक भी नहीं हुआ ! मैं पीछे से हाथ डाल कर दोनों एक एक चूची दबाने लगा !

और वो दोनों मेरे लौड़े से खेलने लगी ! करीब चार घंटे का सफ़र था। जब बस चाय पानी के लिए रुकी तो हम सब ने नीचे उतर कर चाय पी ! दोनों मुस्करा रही थी ! मैं समझ गया कि दोनों गरम हो रही हैं, दोनों घर पहुँचते ही चुदवाना चाहेंगी ! अब दोनों ने अपनी जगह बदल ली क्योंकि दोनों अपनी एक एक चूची दबवा चुकी थी अब दोनों की दूसरी चूची दबाने लगा और उन्होंने मेरा लंड निकाल लिया ! इस बीच ममता को ना जाने क्या सूझा कि वो अपना सर चद्दर में डाल कर मेरी गोद में आ गई और मेरा लंड चूसने लगी। अब दीदी को कैसे बर्दाश्त होता ! कुछ देर बाद उसने ममता को हटाया तो उसने कहा- पहले तुम कोने में बैठी थी, तेरे पास मौका था तुमने उसका फ़ायदा नहीं उठाया !

बात सही थी जिस तरफ दीदी बैठी थी उस तरफ से कोई मौका नहीं था !

इस प्रकार हम मजा करते हुए घर पहुँच गए ! जब मैंने घर की घंटी बजाई तो सीमा दीदी दरवाजा खोलने आई। चूकिं किसी को कोई खबर नहीं थी तो सीमा दीदी और विजय भैया चौंक पड़े एवं स्तब्ध रह गए ! इसके बाद विमला दीदी पहले सीमा दीदी के गले लगी फिर दौड़ कर विजय भैया के गले लग गई और उनको जोर जोर से चूमने लगी ! विजय भैया भी कहाँ चुप खड़े रहने वाले थे, वो भी दीदी चूमने लगे और उनकी चूची दबाने लगे।

इधर हम भी कहाँ चुप बैठने वाले थे मैंने सीमा दीदी और ममता को अपने से चिपका लिया और दोनों के मम्मे दबाने लगा ! कुछ देर ऐसा ही चला फिर भैया ने कहा- तुम लोग सफ़र के थके हुए आए हो, कुछ देर आराम कर लो !

विमला दीदी ने कहा- नहीं भैया, हम लोग बिलकुल भी थके नहीं हैं, चलो एक राउंड चुदाई-चुसाई का हो जाये, फिर आराम कर लेंगे ! क्योंकि आज रात तो जागना ही है तुमसे चुदाये बहुत दिन हो गए हैं और तुमको नया स्वाद ममता का भी तो लेना है !

इस तरह हम चाय पीते हुए एक दूसरे से छेड़ छाड़ करते हुए एक दूसरे के कपड़े उतारने लगे ! इस तरह हम सब नंगे हो गए। ममता भी कम नहीं जा रही थी। वो उठ कर भैया के के पास चली गई और उनका लौड़ा मुँह में ले लिया और जोर जोर से चूसने लगी। अब विमला दीदी को कैसे बर्दाश्त होता, वो ममता से झगड़ा करने लगी !

मैंने कहा- दीदी झगड़ा क्यों करती हो? हालांकि तुझे भैया का लंड काफी दिनों बाद मिला है पर ममता को नए लंड का स्वाद चखने दो !

दीदी ने कहा- सिर्फ़ एक बार ही चूसने और चुदवाने दूंगी ! आज भैया केवल मेरा है ! कल से हम लोग सब मिलकर करेंगे, क्योंकि मुझे और ममता को एक हफ्ते ही रहना है !

इस पर सब राजी हो गए। फिर एक बार चुदाई के बाद हम सब कपड़े पहन कर आराम से बैठ गए ! इसके बाद पापा-मम्मी, ताउजी-ताईजी आ गए और विमला दीदी और ममता को देख कर काफी खुश हुए!

इस तरह हम पांचों ने पूरे हफ्ते बहुत मस्ती की जो कि मैं अगले भाग में बताऊंगा।

इंतजार करें और अपनी राय देना ना भूलें जिससे मैं इसको और रुचिकर शब्दों में पिरोकर आपके सामने प्रस्तुत कर सकूँ ! घटना बिल्कुल सच है ! Antarvasna

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