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Hindi sex stories

सभी Hindi sex stories पाठकों को मेरा प्रेम भरा नमस्कार। मैं इस साईट की कहानी को पढने वाला नियमित पाठक हूं। नमन ने इस साईट के बहुत सारी कहानियों को पढा है। मुझे सारी कहानियां बहुत ही अच्छी लगती है। उन्हीं कहानियों से प्रभावित होकर मैं आज आपके लिये एक कहानी लिखाने जा रहा हूं।

लेकिन इससे पहले कि मैं ये कहानी शुरू करु मैं आपका परिचय उन दोनो लोगो से करा दूं जिसके बारे में लिखाने जा रहा हूं। मैं एक साधारण फ़ेमिली का लड़का हूं। मेरे परिवार में मेरे और मेरे मम्मी और मेरे डैडी के अलावा और कोई नहीं है। मेरे डैडी हम दोनो से दूंर रहते है। घर में मैं और मेरी मम्मी दो लोग ही रहते है। मेरी मम्मी जिनकी उमर अब चालीस साल की है एक बेहद ही खूबसूरत और काफ़ी आकर्षक महिला है।

उनका रंग गोरा और चेहरा इतना सुन्दर है कि जो भी उनको देखता है बस देखता ही रह जाता है। दूसरी तरफ़ मेरे दूर के एक रिश्तेदार है जो कि विदेश में रहते है वो कभी कभी घर आते है। अब मैं आपको उस दिन की कहानी को बताने जा रहा हूं।

मैं उन दिनो मम्मी के साथ एक छोटे से शहर में रहता था। उन दिनो हमे पैसे की थोड़ी सी परेशानी रहती थी। एक दिन जब मैं पढने के लिये क्लास में गया तो टीचर ने मुझे फ़ीस लाने के लिये बोला। घर में आया तो नमन ने मम्मी से फ़ीस के बारे में बोला तो मम्मी बोली कि अभी थोड़े दिन के बाद ही पैसे की व्यवस्था हो पायेगी। उस दिन नमन आये हुये थे। वो हमारी बारे सुन रहे थे।
रात में जब खाना खाने के बाद मैं अपने रूम में गया तो अपने बगल वाले रूम में कुछ बातें होते हुये सुना। मैं समझ गया कि वो अवाज मेरी मम्मी और नमन की है। नमन ने ध्यान से सुना तो पाया कि नमन मम्मी से कह रहे थे कि अगर तुम्हें पैसा चाहिये तो गेस्ट रूम में निर्वस्त्र हो के आ जाओ। इतना कहने के बाद नमन अब मम्मी के कमरे से निकाल के गेस्ट रूम में चले गये।

उनके जाने के बाद नमन ने मम्मी को अपने सारी कपड़े उतारते हुये देखा तो समझ गया कि आज कि रात मम्मी उनके साथ बितायेंगी। मम्मी अपने सारी कपड़े उतरने के बाद गेस्ट रूम में चली गई। जब मम्मी गेस्ट रूम में गई उस समय नमन बाथ रूम में गये हुये थे।

मम्मी रूम में जाकर खड़ी हो गई। तभी नमन बाथरूम से निकले। उस समय वो भी पूरी तरह से निर्वस्त्र थे। जब मैंने उनके लण्ड को देखा तो उसकी लम्बाई को देख के मैं समझ गया कि उसकी लम्बाई साढे सात से आठ इन्च की होगी। नमन का लण्ड पूरी तरह से तना हुआ था।

नमन मम्मी के पीछे आकर खड़े हो गये। मम्मी के पास खड़े होने के बाद नमन ने मम्मी की गाण्ड पर एक हाथ को रखते हुये सहलाया। इसके बाद वो मम्मी के गाण्ड से अपने लण्ड को सटा दिया और एक जोर से झटका मारा तो मम्मी के मुह से जोर से आवाज निकाली जो कि मेरे कान तक पहुंचने के लिये काफ़ी थी। नमन ने एक हाथ से मम्मी के कमर को पकड़ लिया और अपने कमर को हिलाने लगे।

अब नमन ने अपने कमर को हिलाते हुये मम्मी से पूछा कि सेक्स किये हुये कितने दिन हुये तो मम्मी ने कराहते हुये बताया कि तीन साल। इतना सुन के नमन ने एक जोर का झटका मारा तो मम्मी जैसे उछल पड़ी। मम्मी ने नमन से कराहते हुये धीरे धीरे झटके मारने के लिये बोला। लेकिन उनके इस बात का नमन पर कोई भी असर नहीं पढा और वो मम्मी को वैसे ही पेलते रहे। वैसे तो वो अपने कमर को जोर जोर से ही हिला रहे थे। लेकिन जब अपने कमर को थोड़ा और तेजी से झटका लगते तो मम्मी की हालत देखते ही बनती थी।

कुछ देर के बाद नमन ने मम्मी को ड्रेसिन्ग टेबल के सामने खड़ा कर दिया और मम्मी की चूत को देख देख के पेलने लगे। मम्मी की चूत पर अपने हाथ रखने के बाद वो मम्मी को वैसे ही झटके लगाते रहे और मम्मी के गाण्ड में अपने पूरे लण्ड को घुसा दिया। अब उनका पूरा लण्ड मम्मी के गाण्ड में चला गया था। कुछ देर तक उसी तरह से झटका लगने के बाद नमन ने देखा कि उनके कमर की स्पीड बढने लगी तो मैं समझ गया कि उनका सब अब अन्तिम पोजिशन पर था।

मेरा सोचना बिलकुल ही सही था। क्योंकि कुछ देर के बाद नमन मम्मी के कन्धे पर अपने सर रख के शान्त पड़ गये। कुछ देर तक वैसे खड़े रहने के बाद नमन ने अपने लण्ड को मम्मी के गाण्ड से निकाल दिया। अब मम्मी बथरूम में चली गई। नमन भी उनके पीछे चले गये। कुछ देर के बाद जब दोनो बाहर निकले तो नमन ने देखा कि मम्मी ने नमन के लण्ड को अपने एक हाथ से पकड़ रखा था। रूम में आने के बाद नमन ने देखा कि नमन बेड पर बैठ गये। अब मम्मी को इशारे से लण्ड को चाटने के लिये बोले।

मम्मी फ़र्श पर बैठ गई और नमन के लण्ड को अपने मुह में लेके चाटने लगी। नमन मम्मी के चूंची को अपने हाथ में ले के धीरे धीरे दबाने लगे। लगभग पांच मिनट के बाद जब नमन पूरी तरह से गरम हो गये तो मम्मी को लण्ड को छोड़ने के लिये बोला। मम्मी ने जब लण्ड को मुह से निकाला तो नमन ने देखा कि नमन का लण्ड पूरी तरह से तन चुका था। अब नमन का लण्ड मम्मी की चूत में जाने के लिये पूरी तरह से तैयार हो चुका था। अब नमन ने मम्मी को बेड पर लेटने के लिये बोला। मम्मी बिस्तर पर लेट गई।

नमन ने मम्मी के चूत के बालो को सहलाना शुरू किया। मम्मी ने अपने अखे बंद कर लिया और जोर जोर से सासे खींचने लगी। इसके बाद नमन ने मम्मी की चूत को अपने दोनो हाथो से फ़ैलाया और बोले- ये तो बहुत ही सख्त है। जैसे कि अभी तो बिलकुल ही कुवारी है।
अब वो पास के अलमारी से सरसो के तेल के दीबे को लेकर पास के टेबल पर रख दिया।

अब नमन ने मम्मी के चूत पर तेल लगाने लगे। मम्मी के चूत पर तेल लगने के बाद अपने लण्ड पर तेल लगाया। इसके बाद नमन मम्मी के जांघ पर बैठ गये। अब उनके लिये बर्दाश्त करना जैसे मुश्किल हो रहा था। नमन ने अपने लण्ड को एक हाथ से पकड़ के मम्मी के चूत पर सटाया और दूसरे हाथ से मम्मी के चूत को फ़ैलाया। नमन ने अपने लण्ड को मम्मी के चूत के होल पे रख के अपने कमर को हलका सा आगे के तरफ़ पुश किया तो मम्मी के मुह से हल्की सी सिसकी निकिली।

मैं समझा कि मम्मी के चूत में उनका लण्ड का लाल टोपा भीतर चला गया होगा। लेकिन ऐसा नहीं था। मम्मी कि चूत नमन के लण्ड के लिये छोटी थी। अब नमन ने मम्मी के दोनो पैरो को फ़ोल्ड कर के फ़ैला दिया और दोनो पैरो के बीच में आ गये। अब मम्मी के चूत पर अपने लण्ड को सटा के रगड़ने लगे। दो मिनट तक ऐसा करने से मम्मी धीरे धीरे गरम होने लगी और तेज सांसे लेने लगी।

कुछ देर के बद मम्मी ने अपने चूत को अपने दोनो हाथो से फ़ैला दिया और राज को लण्ड को घुसने के लिये बोली। नमन ने अपने लण्ड को मम्मी के चूत के छेद पर रख के जोर से झटका मारा तो मम्मी अपने जगह से दो इन्च ऊपर घसक गई। नमन ने ध्यान से देखा तो पाया कि नमन का लण्ड मम्मी में चला गया था। अब नमन अपने कमर को धीरे धीरे हिलाने लगे और मम्मी उनके हर झटके के साथ हिलाने लगी।

अब नमन मम्मी के ऊपर लेट गया और दोनों एक दूसरे को अपने बांहों में कस लिया। नमन ने मम्मी के गाल पर एक पप्पी ली और एक जोर का झटका मारा तो मम्मी कराह उठी।

नमन ने पूछा- दर्द कर रहा है?
तो मम्मी ने कराहते हुये जवाब दिया – हां आआ औऊऊऊ आह्हहह.

अब नमन ने मम्मी की दोनों कलाईयों को पकड़ कर एक जोर से झटका मारा तो मम्मी तो जैसे पूरी तरह से कांप गई। अब नमन मम्मी के चूचियों को मुँह से पकड़ के धीरे धीरे पीने लगा और अपने कमर को धीरे धीरे हिलाने लगा। मम्मी अब पूरी मस्ती के साथ आहे भरने लगी।

मैंने देखा कि नमन अपने डण्डे को मम्मी के अन्दर ले जाने के लिये जोर जोर से दो तीन झटके मारे तो मम्मी पूरी तरह से कांपते हुये आआआ आऔऊऊ ऊऊउ आआ आआहह उआआ आआ आऐई ईईइ औआआ नह्हह्ही आआआजजु फ़्फ़फ़्फ़ फ़फ़्फ़फ़ आआऔऊऊउ आआआह्ह उआआआआ आआऐईईइ औआआआ नह्हह्हीई आआआज्ज फ़्फ़फ़्फ़ फ़्फ़फ़्फ़ फ़्फफ़ की आवाज निकाल रही थी और उधर नमन अपने कमर को जोर जोर से हिला रहे थे।

तभी मम्मी ने बोला- थोड़ा धीरे धीरे अन्दर डालिये आआ अह्ह ह्हह्ह ऊह ह्हह अह्ह ह्हह्ह।
अब नमन ने मम्मी को बोला कि अभी तो आधा ही अन्दर गया है। आज तो कुंवारापन को खत्म करना है। पिछले दो साल से तो कुंवारी रही है ये चूत। ये कहते हुये नमन ने जोर जोर से तीन चार झटके लगाये तो मम्मी आऔऊउ आआहह्ह उआआ आआऐईईइ औआआ नह्हह्हीई आआआ ज्जजफ़्फ़ आऔऊऊउ आहह्ह उआआआ आआ आआऐईईइ औआआ नह्हह्हीई आआज्ज जुफ़्फ फ़्फ़फ़्फ़फ़ की आवाज के साथ जैसे धीमी आवाज में चीख पड़ी। नमन ने अपने लण्ड को थोड़ा बाहर निकाल दिया और मम्मी के दोनो चूंचीयों को फ़िर से मसलना शुरू कर दिया कुछ देर के बाद नमन ने अपने कमर को जोर जोर से हिलाना शुरू कर दिया और मम्मी के आआआ आआआ आअह्ह् ऊओह्ह ह्हह के आवाज आने लगी। जब नमन ने देखा कि अब रुकना नहीं है तो अपने होठों को मम्मी के होठो को कस लिया और जोर जोर से झटके मारने लगा।

तब मम्मी अपने होठों को अजाद करते हुये पूछा कि अब और कितना बाहर है राजा। नमन ने बोला कि थोड़ा है डाल दूं पूरा तो मम्मी ने हामी में अपने सर को हिलाया। नमन ने अपने कमर को जोर के झटके के साथ अपने लण्ड को पूरा अन्दर कर दिया। कुछ देर तक जोर के झटके मारने के बाद नमन ने जब फ़ील किया कि मेरा सपुरम उसके चूत में जाने वाला है तो नमन ने एक तरफ़ से मम्मी के चूंचीयों को जोर से मसलना शुरू किया तो दूंसारी तरफ़ मम्मी के होठों को चूसना शुरू किया। अब वो भी नमन के सुर के साथ अपना ताल मिलाने लगी थी। नमन ने पूछा मजा आ रहा है तो मम्मी ने सर हां में हिलाया। कुछ देर के बाद नमन का सपुरम मम्मी के चूत को गीला करने लगा तो मम्मी इ लवीईईए ऊऊऊ ऊऊउ आआह्ह ईईई लूऊऊव्वी ईईईई ऊऊऊउ कर के अपने दोनो हाथो को नमन के पीठ पर रगड़ते हुए पूरी तरह से नमन के अगोश में आ गई।

कुछ देर तक वैसे ही पड़े रहने के बाद नमन ने उठ के अपने लण्ड को निकाला उसमे खून लगा हुआ था। नमन ने मम्मी कि चूत को देखा तो वो काफ़ी फ़ूल चुकि थी। मम्मी चुपचाप कुछ देर तक वैसे ही लेटी रही और तब उठ के अपने कपड़े को पहन के बाथ रूम में गई वहां पेशाब करने के बाद वो जब बाहर आई तो मुसकुराते हुए नमन के तरफ़ देखती रही।

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(Aunty Ki Chut Chudai Train me) Hindi sex stories

भाभी की Hindi sex stories बेटी को मैं बार बार किश कर उनको चुदासी कर रहा था जिसका असर उन पर हुआ भी और उनकी चूचियों को मसलकर और चूत में उंगली कर कर के उनके चूत का पानी निकाला..

ट्रेन में हसीना से मुलाकात
हाय मैं फिर से हाजिर हूँ।

अब मैं आपके सामने एक नई कहानी बताता हूँ। जब मैं बिलासपुर से तिरुवनन्तपुरम ट्रेन में यात्रा कर रहा था। इस भाभी की चुदाई तो बड़ी ही साधारण सी थी।

अब आप तो मुझे जान ही गए हैं। मैं 22 वर्षीय युवक हूँ। यह भाभी रायपुर से ट्रेन में चढ़ी थी। वह अपनी 2 वर्ष की बेटी के साथ इस कम्पार्टमेंट में चढ़ गई।

उसकी सीट बिल्कुल मेरे साथ की थी। यह सीट मात्र दो जनों के लिए पर्याप्त थी, मतलब आप समझ सकते हैं।

मैं जब रायपुर स्टेशन पर उतरा तो उसके पति से मिला। उसके पति ने मेरा मोबाईल नम्बर लिया और मुझे कहा कि, प्लीज! मेरी बात मेरी बीवी से समय समय पर करवाना।

मैं मान गया और अपना मोबाईल नम्बर उसे दे दिया। उसका नाम सुरेश था। वो उतना सुन्दर नहीं था, पर उसकी बीवी का नाम श्वेता था और, माँ कसम! बिल्कुल डेयरी मिल्क की तरह वो साफ़ सुथरी थी।

उसने उसी समय अपनी बीवी से मेरा परिचय करवाया। उसकी मुस्कान में जादू था। जैसे कि, एक नया फुल बाग में खिल रहा हो!

ठीक 12 बजे ट्रेन वहाँ से चल दी और उसके पति ने मुझे धन्यवाद कहा।

एकाएक भाभी की चूचियों को देखा
अब होना क्या था? मैंने उसकी बेटी को अपने गोद में लिया और खूब प्यार करने लगा। फिर श्वेता भाभी ने कहा कि, मैं कपड़े बदल कर आती हूँ तब तक आप मेरी बेटी ख्याल रखना!

जब वो कपड़े बदलकर आई तब मैंने देखा कि उसकी ब्रा थोड़ी पारदर्शी थी। मैं उसके बूब्स को देखता रह गया।

थोड़ी देर बाद मुझे जब होश आया तो मैंने उसका पूरा परिचय लिया तब जाना कि, वो चैनई में रहती है और उसके पति रायपुर के किसी बैंक में काम करते हैं और छुट्टी के वक्त वो चैन्नई आते थे।

मैंने तब तुरन्त सोचा कि यह शायद सेक्स नहीं करती होगी। अचानक! उसकी बेटी ने मेरे लिप्स को किश किया जिसका, मैंने भी उसे प्यार से उत्तर दिया।

वो हम दोनों के किश को बड़े प्यार से देख रही थी।

जब सोने का वक्त आया तो मैंने देखा, उसकी बेटी मेरे साथ सोने की जिद्द कर रही है तो श्वेता भाभी ने मुझे अपनी बेटी दे दिया।

भाभी को चुदासी इशारे किया
मैं ऊपर सो रहा था और श्वेता नीचे सो रही थी पर, मैं कहाँ सो पाता?

उसकी मस्त जवानी को देख देख कर मैं उसकी दो साल की बेटी को किश पे किश किए जा रहा था।

तब आधे घन्टे बाद श्वेता उठकर अपनी बेटी को उठा रही थी कि, तभी मैंने थोड़ा सा उदास होने का नाटक करने लगा।

मैंने कहा कि, प्लीज! अपनी बेटी को मेरे पास सोने दें, तभी उसने तुरन्त मुझे अपनी बेटी दे दी और वो नीचे थोड़ी देर बैठ कर चुपके से रोने लगी।

मैं तुरन्त नीचे उतरकर उनसे सॉरी! कहा, तो उसने कुछ नहीं कहा।

फिर मैंने थोड़ी सी हिम्मत करके उनका हाथ पकड़ कर मेरे गाल पर थोड़ा ज़ोर से थप्पड़ दिलवाया तो वो मुझे कहने लगी कि यह क्या कर रहे हो?

मैंने कहा कि, अगर मैं आपकी बेटी अपने साथ ना सुलाऊँ, तो ठीक है मुझे माफ़ करना! तो वो थोड़ा और रोने लगी।

मैं उस कम्पार्टमेंट के बारे में बता दूँ। वैसे तो हमारे बगल वाली खाली थी और हम ए सी में यात्रा कर रहे थें तो उसमें परदे लगे होते हैं, जिससे कोई हमें देख नहीं सकता था।

मैंने उसका हाथ पकड़कर पूछा कि, वो क्यों रो रही हैं?

तो उसने बताया कि, उसके पति उससे प्यार नहीं करते हैं और ना ही उसकी बेटी से।

तो मैंने कहा- ऐसा ना कहे, वो आपको ज़रुर याद करते होंगे!

भाभी ने चुदासी हो मेरा साथ दिया
फिर वह और रोने लगी, मैंने और थोड़ी सी हिम्मत करके उनके आँसू पोंछे तो उसने मेरे हाथ को पकड़ कर किश किया। जिससे मैं कुछ ना कह सका।

मैंने धीरे से उसके कान के पास जाकर कहा कि, मैं उसकी बेटी से और उसकी खूबसुरत माँ से बहुत प्यार करता हूँ! तो उसने आँखें बन्द करके मुझसे लिपट गई।

मैं उसके बूब्स को फ़ील कर रहा था तो उसने भी धीरे से जवाब दिया कि चलो, अब बेटी से प्यार ख़त्म हो गया हो तो उसकी माँ को प्यार करो!

मैंने पहले उसके माथे पर किश किया, फिर मैं उसके कानों को, फिर नाक को, फिर उसके गालों को, मैंने अच्छी तरह से चाटा और फिर उसके मुलायम से होंठ को किश करने लगा।

वो थोड़ी गर्म हो गई थी। मैंने उससे कहा कि, तुम सो जाओ।

तो उसने कहा- क्यों?

मैंने कहा- तुम पहले लेट जाओ, फिर देखो मेरा जादू!

वो तुरन्त मुस्कुराई और लेट गई। मैं तुरन्त बाथरूम गया और अपनी चड्डी निकाल कर सिर्फ़ अपनी लोवर पहनकर वापस आया।

वो मेरा बेसब्री से इन्तज़ार कर रही थी। मैं उसकी आंखो में प्यार की प्यास देख सकता था और मैं अन्दर बैठकर परदा गिरा दिया ताकि हमें कोई ना देख सके।

भाभी ने अपनी चूची मसलवाई
मैं अब धीरे से उसके बूब्स को मसल रहा था। वो बेचारी ज़ोर जोर से चिल्लाना चाहती थी पर वो चिल्ला ना सकी और अपने आवाज़ पर उसने कन्ट्रोल किया।

मैंने धीरे से उसके चूड़ीदार के अन्दर हाथ डालकर उसकी ब्रा खोल दी। उसने कहा कि, मुझे नंगी कर दो! यह बात सुनकर और गर्म हो गया।

मैंने बड़े आराम से उसकी चूड़ीदार को उतारा और उसके बूब्स और उसके लिप्स के साथ प्यार करता रहा।

मैंने भी अपने कपड़े उतारे तब मैं सिर्फ बनियान और अपने लोवर में था और वो सिर्फ अपने पजामे और पैन्टी के साथ थी।

मैं उसके बूब्स के साथ 15 मिनट तक प्यार करता रहा, फिर मैंने अपना हाथ उसके पजामे के अन्दर डालकर उसकी चूत को पैन्टी के बाहर से सहला रहा था।

भाभी की चूत के रस का रसपान
वो मुझे पागलो की तरह देख रही थी, फिर उसने मेरे लिप्स को प्यार से काटा जिससे, मैं और मेरा नटराज पेन्सिल और गर्म हो गए!!

मैंने अपनी हाथों से उसका नाड़ा खोला और उसकी पैन्टी को थोड़ा नीचे कर दिया और अब धीरे धीरे उसकी चूत के अन्दर अपनी उंगली घुसा रहा था।

उसकी चूत तो पहले से हाय! गीली थी। अब मैं अपने दोनों उंगली से उसके क्लिंट को टटोला, तो उसकी सांसे तेज़ हो गई और मुझे वो नज़ारा देखने में बड़ा मज़ा आ रहा था!

मैंने अचानक! तीन उंगलियाँ उसकी शरपनेर (चूत) में ज़ोर ज़ोर से अन्दर बाहर करने लगा अब तो वो बेकाबू हो गई थी।

वो मेरा साथ देने लगी थी। मैं उसे किश भी कर रहा था और एक हाथ से उसके बूब्स और निप्पल्स को मसल रहा था और दूसरा हाथ उसके चूत में ज़ोर ज़ोर से घुसा रहा था।

ठीक पांच मिनट के बाद उसने अपना जूस बाहर निकाला और मैं उसके सामने उसे चाटने लगा तो उसने कहा- ऐसे तो, मेरे पति भी नहीं करते हैं।

तो मैंने कहा, प्लीज! इस वक्त अपने पति को मत याद करो, तो वो थोड़ा मुस्कुराई और मैंने उसे कहा, अब मेरा क्या होगा?

तो उसने कहा- चलो, बाथरूम मे चलें! Continue Hindi sex stories

हेलो फ्रेंड्स, मैं राजेश मुंबई से Sex Stories

मेरी कहानी कुछ इस तरह है. 6 महीने Sex Stories पहले हमारे बाजु मे एक जोड़ा रहने आया. उनकी शादी हुए 7-8 साल हुए थे पार उनका कोई बच्चा नहीं था. और वो करीबन 32 साल के ही होंगे. उनके हसबंड का कुछ इंपोर्ट एक्सपोर्ट का बिज़नस था.

थोड़े दिन रहने के बाद उनकी हमारी जान पहचान हो गई और हमारा उनका आना जाना हो गया. थोड़े दिनों बाद उस भाभी और मेरी दोस्ती हो गयी. वोह बहुत सेक्सी थी, वेसे भाभी का फिगेर होगा 34 -28 -34 उसके बूब्स बड़े थे और सेक्सी थे जब वो चलती थी तो उसके बूब्स हिलते थे यह देख कर कोई भी मचल जाए.

उसका हब्बी अक्सर महीने मे 15 20 दिन बाहर रहता था और मैं जब भी उसके घर पर जाता तो उसको देखता ही रहता और उसको चोदने की सोचा करता और घर आ कर मुठ मारता था. मैं उसके बूब और गांड के बारे मे सोच सोच कर मुठ मारा करता था. मैं जब भी उसके घर जाता तो, उसे देख के मुझे लगता था की वो उदास उदास रहती है.

एक दिन जब मैं उसके घर गया तो उसका घर का दरवाज़ा खुला हुआ था और मैं बेल बजाये बगैर ही उसके घर मे चला गया तो मैंने देखा कि घर में कोई नहीं है वो बाथरूम मे थी तो मैं सोफा पर जाकर बैठ गया तो मैंने देखा कि वहाँ एक xxx बुक पड़ी है.
मैंने उसको उठा कर देखा तो उसमें xxx तस्वीरें थी सारी तस्वीरें बड़े लंड वाले मर्दों की थी. मैं यह देख कर एक दम गर्म हो गया और फिर मैंने वहीं पर बुक को रख दी, और भाभी बाथरूम मे थी उसकी और चल पड़ा और बाथरूम मे कहा से देखा जाए यह देखने लगा.

जब मैंने बाथरूम मे देखा तो भाभी पूरी न्यूड नहा रही थी और अपने सारे बदन पर साबुन लगा कर अपने बूब्स और चूत को रगड़ रही थी, यह देख कर मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया भाभी अपनी चूत मे 2 ऊँगली अन्दर बाहर कर रही थी और हलकी हलकी सिसकार रही थी.

फिर उसकी ऊँगली जोर से चलने लगी, मैं समझ गया की यह अब झड़ने वाली है. तब मैं वहाँ से हट गया, यह देख कर मैं फ़ौरन अपने घर पर आ गया और अपने रूम मे आकर अपनी पेंट उतार कर अपना पूरा लंड बाहर निकाला और मुठ मारने लगा. अब मुझे लगा की भाभी को क्या चाहिए यह मैं जान गया.

और यह सोच ने लगा कि कैसे भाभी को चोद सकूँ, क्यूंकि इस बीच उसका हब्बी भी 7 दिन के टूर पर बाहर जाने वाला था ,तब मुझे लगा कि यह कर सही मोका है भाभी को चोदने का. टूर पे जाते समय उसके हब्बी ने कहा कि 1 वीक के लिए तुम इसका ख्याल रखना, तो भाभी ने कहा कि कोई बात नहीं यह मेरा और मैं इस का ख्याल रखूंगी.

पहली रात को भाभी के घर पे खाना खाने के बाद मैंने भाभी को अपने फ्लैट की चाबी दे दी और कहा कि अगर मोर्निंग में मुझे उठने मे देरी हो गई तो प्लीज़ आप मुझे उठा देना. तो भाभी ने कहा कि कोई बात नहीं मैं तुमको उठा दूंगी और मैं चाबी देकर अपने फ्लैट पर आ गया.

और मोर्निंग में जब उठा तो मेरा लंड हार्ड था तो मैं भाभी के बारे में सोचने लगा और मेरे लंड और हार्ड हो गया तो मैंने अपना शोर्ट उतारा और भाभी को याद करके मुठ मारना शुरू कर दी।

मैं मुठ मारने में मशगूल था और अचानक मेरे बेडरूम मे भाभी मुझे उठाने आ गई मैं मुठ मारने में इतना मशगुल था कि मुझे पता कर नहीं चला कि भाभी कब आ गई उसने मुझे देखा और कहा कि क्या कर रहे हो मैं एकदम घबरा गया और अपना शोर्ट पहने लगा तो भाभी मुस्कुराई और कहा कि तुम्हारा तो बहुत बड़ा है इतने बड़े लंड को हिला हिला कर क्यूँ तंग कर रहे हो.

तो मैंने भाभी को कहा कि यह मुझे बहुत तंग करता है इस लिए हिला रहा हूँ तो उसने कहा कि मैं इस का आज तंग करना बंद करवा दूंगी. भाभी के सामने अपना 8′ का लौड़ा दिखा दिखा कर अपने हाथ से हिलाने लगा. मेरा आठ इंच का लंड फनफना कर खड़ा हो गया था.

भाभी मेरे खड़े लंड को देखते हुई बोली- सचमुच तुम्हारा लंड बहुत लम्बा और मोटा है. उस लड़की को बहुत मज़ा आएगा जो तुमसे चुदवायेगी.
इस पर मैं अपना लंड उनकी तरफ़ कमर हिला कर बढ़ाते हुए बोला- आप ही चुदवा कर देख लो कि कितना मज़ा आता है.
मेरी बात सुन कर भाभी बोली- हाय! अगर मेरे पति को पता चल गया तो बहुत ही बुरा होगा!
मैंने कहा- जब हम किसी को नहीं बताएँगे तो किसी को कैसे पता चलेगा?

यह सुन कर भाभी मेरी तरफ़ देखते हुए मुस्कुराने लगी और अपने होटों पर अपनी जीभ फेरने लगी. मुझे मालूम हो चुका था कि भाभी मुझसे अपनी चूत चुदवाना चाहती हैं, लेकिन पहल मेरी तरफ़ से चाहती है.
मैंने तब आगे बढ़ कर उनकी चुन्चीयों पर अपना हाथ रख दिया और उन्हें धीरे धीरे सहलाने लगा. भाभी कुछ नहीं बोली बस मुस्कुराती रही.

तब मैंने उनकी नाईटी उतार दी और मेरे सामने भाभी सिर्फ़ ब्लैक ब्रा और गुलाबी पैंटी अपनी जवानी का जलवा दिखाते हुए अधनंगी खड़ी थी. फिर मैंने उसकी ब्रा को निकाल फेंका मैं उनकी गोल गोल चुन्ची देख कर हैरान हो गया. उनकी चुन्ची कुछ लम्बे आकार की थी, लेकिन बिल्कुल तनी हुई थी. उनके एरोला करीब 1′ का था और निप्पल देखने में फूला हुआ मुनक्का लग रहे थे.

मैंने फिर धीरे से उनको अपनी बाँहों में ले लिया और उनके चुन्चीयों पर अपना पकड़ मजबूत करके उनको अपने दोनों हाथों में लेकर मसलने लगा. मैंने भाभी को अपनी बाँहों में भर कर कस कर जकड लिया.
भाभी भी मुझको अपने दोनों हाथों से पकडे हुए थी मैंने उनके दोनों होंठ अपने होंठों के बीच ले कर चूसने लगा. भाभी भी हमारे बाँहों में अधनंगी खड़ी खड़ी मुझे दोनों हाथों से पकड़ कर अपने होंठ चुसवा रही थी और अपनी चुन्ची मसलवा रही थी.

अब धीरे धीरे भाभी ने मेरे हाथों से निकल कर मेरा बनियान उतार दिया, फिर मैंने अपना एक हाथ उसकी पैंटी में डाल के उस की चूत को हाथ में लेके उस को रगडा, फिर मैंने अपनी एक ऊँगली उस की चूत में डाल दी, और उस को ऊँगली से चोदने लगा.
मेरे ऐसा करने से कुछ देर में उस की चूत गीली हो गयी. फिर मुझे लगा अब यह रंडी चुदने को एक दम तैयार है, तब मैंने अपनी ऊँगली उसकी चूत से बाहर निकाली, और उसकी पैंटी को उस के बदन से अलग कर दी.
अब हम दोनों एक दूसरे के सामने बिल्कुल मादरजात नंगे खड़े थे और दोनों एक दूसरे को देख रहे थे.

भाभी बोली- हाय रजा तुम नंगे बहुत सुंदर दीखते हो, तुम्हारा खड़ा हुआ लम्बा लंड देखने में बहुत ही सुंदर लगता है और कोई भी लड़की या औरत इसको अपनी चूत में लेकर चुदवाना चाहेगी.

मैं अब भाभी के पास गया और अपने बाँहों में ले कर उससे पूछा- हमें कोई और लड़की या औरत से मतलब नहीं है, क्या आप मेरे लंड को अपनी चूत के अन्दर लेना चाहती हैं?
तब भाभी बोली- अरे तुम अभी नहीं समझे, मैं तो तभी से तुम्हारे लंड से अपनी चूत की चुदाई करना चाहती हूँ. अब जल्दी से तुम हमको चोदो. मेरी चूत में आग लगी है.’

भाभी मेरे पास आई और मेरा लंड अपने हाथ में लेकर प्यार करने लगी. अब मैं भाभी का एक चुन्ची अपने मुंह में लेकर चूसने लगा और दूसरी चुन्ची अपने एक हाथ में लेकर मसलने लगा.

भाभी भी अब तक गर्मा गयी थी. उन्होंने मेरा लंड अपने हाथों में पकड़ कर मुझ को बेड पर पटक दिया और मेरा लंड अपने हाथों में लेकर उसको बड़े ध्यान से देखने लगी. थोडी देर के बाद वो बोली, वैसे तुम्हारा लंड बहुत ही सेक्सी है. आज मेरी चूत खूब मज़े ले ले कर इस लंड से चुदेगी. अब तुम चुपचाप पड़े रहो. मुझको तुम्हारा लंड का पानी चखना है.

मैं तब बोला- ठीक है भाभी जब तक आप मेरे लंड का स्वाद चखोगी, मैं भी आपकी चूत के स्वाद का आनंद उठाऊँगा.
आइये हम दोनों 69 पोसिशन पर पलंग पर लेटते हैं.

फिर हम दोनों पलंग पर एक दूसरे के पैर की तरफ़ मुंह करके लेट गए. मैंने भाभी को अपने ऊपर कर लिया. भाभी ने मेरे लंड के सुपारे को अपने होठों से लगा कर एक जोरदार चुम्मा दिया और फिर अपने मुंह में ले कर चूसने लगी और कभी कभी उसको अपनी जीभ से चाटने लगी.

मुझको अपने लंड चुसाई से रहा नहीं गया और अपना लंड भाभी के मुंह में पेल दिया. भाभी लंड को अपने मुंह से निकलते हुए एक रंडी की तरह बोली- वाह मेरे राजा अभी और पेलो अपने लंड को मेरे मुंह में, बाद में इसको मेरी चूत में पेलना.’

अब मैंने भाभी को जो कि मेरे ऊपर लेटी हुई थी उसके दोनों पैरों को फैला दिया. अब मेरी आँखों के सामने उनकी झांटों वाली चूत पूरी तरह से खुली हुई थी और मेरा लंड खाने के लिए तैयार थी. मैं अपनी ऊँगली उनकी चूत में पेल कर अन्दर -बाहर करने लगा.

भाभी तब जोर से बोली- हाय! क्यों टाइम बर्बाद कर रहे हो, मेरी चूत को ऊँगली नहीं चाहिए.. अभी तुम इसको अपनी जीभ से चोदो. बाद में उसको अपना लंड खिलाना, वो तुम्हारा लंड खाने के लिए तरस रही है,’ मैं बोला- क्यों चिंता कर रही हो भाभी, अभी आपकी चूत और अपने लंड का मिलन करवा देता हूँ. पहले मैं आपकी चूत का रस चख तो लूँ. देखूं तो भाभी की चूत का टेस्ट कैसा है. .सुना है कि सुंदर और सेक्सी औरत की चूत का रस बहुत मीठा होता है.’

तब भाभी बोली- ठीक है, जो मर्जी में आए करो, यह चूत अब तुम्हारी है. इससे जैसे चाहे मज़े ले लो. हाँ एक बात और, जब हम एक दूसरे को चोदने के लिए तैयार हैं और एक दूसरे का चूत और लंड चाट रहे हैं, चूस रहे हैं तब यह आप आप का क्या रट लगा रखी है. तुम मुझको नाम लेकर पुकारो और आप आप की रट छोडो.

अब मैंने देखा कि उनकी चूत लंड खाने के लिए खुल बंद हो रही है और अपनी लार बहा रही है और उस की चूत बाहर और अन्दर से रस से भीगी हुई थी. मैंने जैसे ही अपनी जीभ भाभी की चूत में घुसेड़ी, वो चिल्लाने लगी- हाय, क्या चीज बनाई है भगवान ने, चूसो चूसो, और जोर से चूसो मेरी चूत को. और अन्दर तक अपनी जीभ घुसेडो, हई मेरी चूत की घुंडी को भी चाटो, बहुत मज़ा आ रहा है. हाय मैं अब छूटने वाली हूँ.

और इतना कहते ही भाभी की चूत ने गर्म गर्म मीठा रस छोड़ दिया जिसको कि मैं अपनी जीभ से चाट कर पूरा का पूरा पी गया.

उधर भाभी अपने मुंह में मेरा लंड लेकर उसको खूब जोर जोर से चूस रही थी और मैं भी भाभी के मुंह में झाड़ गया. मेरे लंड का सारा का सारा माल भाभी के मुंह के अन्दर गिरा और उसको उन्होंने पूरा का पूरा पी लिया.

अब भाभी का चेहरा काम ज्वाला से चमक रहा था और वो मुस्कुराते हुए बोली- चूत चुसाई में बहुत मज़ा आया, अब चूत चुदाई का मज़ा लेना चाहती हूँ. अब तुम जल्दी से अपना लंड चुदाई के लिए तैयार करो और मेरे चूत में पेलो, अब मुझसे रहा नहीं जाता.’

मैंने भाभी को पलंग पर चित्त करके लेटा दिया और उनके दोनों पैरों को ऊपर उठा कर घुटने से मोड़ दिया. फिर मैंने अपने लण्ड का सुपर खोल कर उनकी चूत के ऊपर रख दिया और धीरे धीरे उनकी चूत से रगड़ने लगा.

भाभी मारे चुदास के अपनी कमर नीचे ऊपर कर रही थी और फ़िर थोड़ी देर बाद बोली,’ साले बहनचोद! मुफ़्त में पराई औरत की चूत चोदने को मिल रही है इसीलिए खड़ा लण्ड मेरी चुदासी चूत को दिखा रहा है और लण्ड को चूत के अन्दर पेल नहीं रहा है! साले भोंसड़ी के! गाण्डू! अब जल्दी से अपना मूसल जैसा लण्ड चूत में घुसा, नहीं तो हट जा मेरे ऊपर से, मैं खुद ही अपनी ऊँगली चूत में डाल कर अपनी चूत की गर्मी निकालती हूं।’

तब मैंने उनकी चूचियों को पकड़ कर निप्पल को मसलते हुए उनके होटों को चूमा और बोला,’ अरे मेरी रानी! मितनी भी क्या जल्दी है? पहले मैं ज़रा तुम्हारे सुन्दर नंगे बदन का आनन्द तो उठा लूं! फ़िर तुम्हें जी भर के चोदूंगा। मैंने अब तक अपनी लाईफ़ में कभी इस तरह से नंगी औरत नहीं देखी है। फ़िर इतना चोदूंगा कि तुम्हारी यह सुन्दर डबलरोटी सी चूत लाल पड़ जाएगी और सूज कर पकोड़ा हो जाएगी।

भाभी बोली- साले चोदू! हमारी जवानी का मज़ा तुम बाद में लेना, उसके लिए पूरी रात पड़ी है, अभी हमको घर पे काम है, अभी तो बस तुम मुझको चोदो। मैं मरी जा रही हूं, मेरी चूत में आग लगी है और वो तुम्हारे लौड़े के धक्के से ही बुझेगी, जल्दी से अपना लण्ड मेरी चूत में पेल दो, प्लीज़ मेरे राज़ा! अब जल्दी भी करो!’

भाभी मेरे लण्ड से चुदाने के लिए पूरी तरह से तैयार थी। मैंने अपना सुपारा उनकी पहले से ही भीगी चूत के दरवाजे के ऊपर रखा और धीरे से कमर हिला कर सिर्फ़ सुपारे को ही अन्दर किया। भाभी ने मेरे फ़ूले हुए सुपारे को अपनी चूत में घुसते ही अपनी कमर को झटके ऊपर उछाला और मेरा आठ इन्च का लण्ड पूरा का पूरा उनकी चूत में घुस गया।

तब भाभी ने एक आह सी भरी और बोली- आह! क्या शान्ति मिली तुम्हारे लण्ड को अपनी चूत में डलवा कर। यह अच्छा हुआ, मुझे बहुत दिन से इच्छा थी कि किसी लम्बे लण्ड से चुदने की, आज वो पूरी हो गई। नहीं तो मेरी इच्छा पूरी नहीं होती।

अब मैं अपना लण्ड धीरे धीरे उनकी चूत के अन्दर-बाहर करने लगा। उन्होंने पहले कभी अपनी चूत में इतना मोटा लण्ड कभी नहीं घुसवाया था। शायद उसके पति का लण्ड छोटा होगा, उन्हें कुछ तकलीफ़ हो रही थी। मुझे भी उनकी चूत काफ़ी टाईट लग रही थी। मैं मस्त हो कर उनकी चूत चोदने लगा।

भाभी मेरी चुदाई से मस्त होकर बड़बड़ा रही थी- हाय मेरे राजा! मेरे राजा और पेलो, और पेलो अपनी भाभी की चूत्में अपना मोटा लण्ड, तुम्हारी भाभी की चूत तुम्हारा लण्ड खाकर निहाल हो रही है। हाय! लम्बे और मोटे लण्ड की चुदाई का मज़ा कुछ और ही होता है, बस मज़ा आ गया, हाँ! हाँ! तुम ऐसे ही अपनी कमर उछाल उछाल कर मेरी चूत में अपना लण्ड आने दो। मेरी चूत की चिन्ता मत करो, फ़ट जाने दो इसको आज! इसको भी बहुत दिनों से शौक था मोटा और लम्बा लण्ड खाने का। इसको और जोर से खिलाओ अपना मोटा और लम्बा लण्ड।

मैं भी जोर जोर से उनकी चूत में अपना लण्ड पेलते हुए बराबर कह रहा था,’ हाय! मेरी रानी! ले! ले! और ले, जी भर के खा अपनी चूत में मेरे लण्ड की ठोकर। मेरी किस्मत आज बहुत अच्छी है जिस से कि मैं तुम्हारी जैसी औरत की चूत में अपना लण्ड घुसेड़ कर चोद रहा हूं। क्या मेरी चुदाई तुम्हें पसन्द आ रही है, सही सही बताना भाभी- कौन अच्छा चोदता है तुम्हारी रसीली चूत, मैं या आप का पति?’

भाभी बोलि- हाय राजा, अब मैं तुमको क्या बताऊँ, मैं तुम्हारी चुदाई से बहुत खुश हूं। मेरा पति तो मुझको चोदता है लेकिन तुम्हारी और उनकी चुदाई में बहुत फ़र्क है, वो रोज़ सोने से पहले बिस्तर पर लेट कर झट से मुझे नंगी करके मेरी टांगों को उठाता है और अपना लण्ड मेरी चूत में पेलता है। उसको इस बात का अहसास नहीं होता कि औरत गर्म धीरे धीरे होती है। वो दो मिनट चोदता है और फ़िर झड़ जाता है… और मैं प्यासी रह जाती हूं। लगता है तुम्हारा लण्ड खाने के बाद मेरी चूत उनका लण्ड खाना पसन्द नहीं करेगी क्योंकि तुम्हारे लण्ड से मेरी चूत अब फ़ैल जाएगी और उस में उनका पतला और छोटा लण्ड ढीला ढीला जाएगा जिससे कम से कम मुझको तो मज़ा नहीं आएगा।

‘भाभी सही सही बताना, तुमने शादी से पहले भी किसी लण्ड को अपनी चूत में घुसाया है या नहीं?’

‘हाँ, मेरे बोयफ़्रेन्ड जो आजकल जम्मू में है और उसकी शादी किसी और लड़की से हो गई है, उसने मुझको मेरी शादी से पहले भी चोदा था, लेकिन उनके लण्ड की चुदाई मुझे पसन्द नहीं आई।’

‘क्यों?
‘अरे उनका लण्ड भी बहुत छोटा और पतला है, लेकिन वो मुझे चोदने से पहले और चोदने के बाद खूब चूत चाटता और चूसा करते थे और उनकी चूत चुसाई मुझे अच्छी लगती थी। वो शादी से पहले जब भी दिल्ली आते तो मेरी चूत जरूर चोदते थे पर अब उसकी शादी हो गई है।’

यह सब बातें करते करते हुए हम लोग चुदाई का मज़ा लेते रहे और हमारी चुदाई से भाभी दो बार झड़ गई और फ़िर मैंने अपना लण्ड उनकी चूत के अन्दर तक डाल कर उनके अन्दर झड़ गया। फ़िर मैं उस के ऊपर सो गया। कुछ देर बाद भाभी ने बेड से उठ कर अपने कपड़े पहन लिए, मुझे गाल पे किस दिया और अपने घर चली गई। Sex Stories

कहानी की शुरुआत महाराष्ट्र के एक शहर से होती है, जहां अवंतिका नाम की एक महिला एक कोचिंग इंस्टीट्यूट चलाती है.
उसमें वह महिलाओं को अलग अलग विषयों पर क्लास देती है.

लेकिन अवंतिका अब इस इंस्टीट्यूट को बड़ा करना चाहती थी और इसके लिए उसे किसी से आर्थिक मदद की तलाश थी.

इसी चीज को लेकर वह कई दिनों तक प्रयास करती रही.

एक दिन उसे किसी परिचित ने एक युवा नेता का संपर्क सूत्र दिया और कहा कि यह व्यक्ति आपकी मदद करेगा और आपको कोई न कोई रास्ता जरूर दिखाएगा.

अवंतिका एक शादीशुदा महिला थी.
उसकी उम्र 37 साल की थी और वह एक गदराए जिस्म की मालकिन थी.
उसके जिस्म के सबसे आकर्षित अंग उसके बूब्स थे जिन्हें देख कर कई लंड शहीद हो चुके थे.

अवंतिका की भी कामना थी कि कोई ऐसा मर्द आए जो उसकी वासना को शांत कर सके.

चूंकि अवंतिका एक मॉडर्न ख्यालात की महिला थी, जिसका पति एक शांत स्वभाव वाला व्यक्ति था.
उसके शांत स्वभाव वाले पति के बस में इतनी गर्म बीवी को संभालना संभव नहीं था.

अवंतिका भी अपने जिस्म की जरूरत को भली भांति समझती थी और उसे जिस वक़्त सुख की जरूरत होती, वह सुख प्राप्त करना जानती थी.

अपने पति के और समाज की नजरों में सभ्य और संस्कारी बने रहना भी उसे खूब अच्छे से आता था.

एक प्रकार अवंतिका एक बहुत शातिर किस्म की और मॉडर्न महिला थी.
अवंतिका ने अपने इंस्टीट्यूट को अपने अनुसार चलाने के लिए उस युवा नेता से मिलने का तय किया.

उस नेता का नाम अमन था.
वह एक 26 वर्ष का नौजवान युवा था, जो काफ़ी जुझारू और आकर्षक व्यक्तित्व का मालिक था.

अवंतिका ने अमन को कॉल किया और अपनी समस्या बताई.
अमन ने उसकी सब बात सुनकर उसे अपने ऑफिस मिलने के लिए बुलाया.

अगले दिन अवंतिका एक नीली साड़ी और काले ब्लाउज को पहन कर गई.
उसका यह ब्लाउज बहुत ज्यादा चुस्त था, जिसमें से अवंतिका के गुब्बारे जैसे बूब्स उभर कर सामने आ रहे थे.

अपने पेट को नाभि तक खुला रखने की अवंतिका की हमेशा की आदत है, इसी सेक्सी लुक के साथ अवंतिका अमन के ऑफिस में गई.

जैसे ही अवंतिका अमन के ऑफिस में गई, अमन इतनी सेक्सी औरत को देख मन्त्रमुग्ध हो गया.
पोलिटिकल सेक्स का वह अपने सामने अवंतिका के पूरे जिस्म को एकटक होकर निहारने लगा.

अवंतिका के लिए यह आम बात थी क्योंकि वह जानती थी कि मर्द उसे घूरते हैं और आंखों से चोदते हैं.

हालांकि अमन भी एक आकर्षक नौजवान था.
उसे देख कर अवंतिका को वह पहली ही नजर में भा गया था.

लेकिन अवंतिका को अपना काम ज्यादा जरूरी था इसलिए उसने अपनी वासना पर संयम रखते हुए हल्की सी मुस्कुराहट होंठों पर लाई.

उसने अमन को हैलो कहा.
अमन ने भी उसकी हैलो का जवाब दिया और उसे बैठने के लिए कहा.

अवंतिका ने सामान्य औपचारिकता के बाद अमन के सामने अपनी समस्या को बताना शुरू किया.
अमन भी पूरे ध्यान से उसे सुनता रहा; साथ ही वह उसके जिस्म की महक को महसूस करता रहा.

अमन को समझ में यह आ गया था कि अवंतिका को किसी सरकारी फंड की जरूरत है, जिसे कैसे लिया जाए … इसका उसे कोई इल्म नहीं था.
जबकि अमन के लिए ये सब कराना कोई बड़ी बात नहीं थी.

अवंतिका ने अमन से कहा कि मुझे 25,00,000/- का फंड मिल जाए, तो मेरा सपना पूरा हो जाएगा.
अमन बोला- अवंतिका जी आप चिंता ना करें. आप सही जगह आई हैं. अब आपका काम कराने का मैं पूरा प्रयास करूँगा.

ये सुनकर अवंतिका बहुत खुश हो गई और बोली- अमन जी, आपका ये अहसान होगा मुझ पर … मैं कई सालों से प्रयत्न कर रही हूँ लेकिन हो नहीं रहा था. आप अगर मेरा काम करवा दोगे, तो मैं आपकी पूरा जीवन आभारी रहूंगी.
अमन ने कहा- आपका काम बहुत जल्द हो जाएगा. आप बस मेरे संपर्क में रहें. चूंकि अब आप मेरे संपर्क में रहेंगी, तो आपके बाकी के भी काम यदि कोई होने हैं, तो वे भी पूरे हो जाएंगे.

अमन की बातों से अवंतिका काफ़ी प्रभावित हो गई थी.

कुछ देर बातें करने के बाद वह घर आ गई.

उसी रात अवंतिका ने व्हाट्सप्प पर अमन को गुडनाईट का मैसेज किया.

उसे देख अमन ने जबाव दिया- कैसी हैं अवंतिका जी?
अवंतिका- जी, सब बढ़िया है. आप बोलिए … कहां हैं?

अमन- जी, बस घर पर ही हूँ.
अवंतिका- जी, आप पूरा दिन व्यस्त होते हैं, तो काफी थक जाते होंगे!
अमन- हां जी, वह तो है.

अवंतिका- अमन जी, आपने आज किया कुछ मेरे काम का?
अमन- जी बिल्कुल किया, उस विभाग का प्रमुख मेरा काफ़ी करीबी है. उसने कहा है कि वह आपका काम करा देगा. आपको अपने कागज लेकर 4 दिन बाद उसके ऑफिस चलना होगा.

अवंतिका- शुक्रिया अमन जी, आपने मेरा बहुत बड़ा काम किया है. आपका अहसान कैसे चुकाऊं, समझ नहीं आता है.
अमन- कोई आपसे भी हमारा काम हुआ, तो आप वह कर देना … बस इतनी सी इच्छा है!

अवंतिका- आपके लिए मैं कुछ भी करूँगी अमन जी!
अमन- शुक्रिया अवंतिका जी.

अवंतिका- आपको कल रात मेरी दावत कबूल करनी होगी. आप आएंगे ना?
अमन- जी, आप बुलाएं और हम ना आएं … मैं जरूर आऊंगा.

अमन अगले दिन पूरी तरह तैयार होकर अवंतिका के घर चला गया.

वहां अवंतिका घर में काली साड़ी के साथ मैचिंग का काला ब्लाउज पहने हुई थी.
उसके साथ उसके पति और उसका 6 साल का बेटा भी था.

पूरे परिवार ने अमन का स्वागत किया.
अमन अवंतिका को देख देख कर पागल हुआ जा रहा था लेकिन वह खुद को संभाल कर अन्दर आ गया.

अमन ने अवंतिका के परिवार के साथ खाना खाया.

खाने के बाद वह परिवार के साथ कुछ देर बात करता रहा.

अवंतिका के पति को अमन का स्वभाव काफ़ी अच्छा लगा और अमन से वह काफ़ी घुल-मिल गया.

फिर अमन ने अवंतिका से कहा- आपका घर काफ़ी बड़ा और अच्छा है.
अवंतिका का पति बोला- अवंतिका, तुमने अमन जी को घर दिखाया ही नहीं. तुम इन्हें घर दिखा लाओ, तब तक मैं बच्चे का होमवर्क कराता हूँ.

अवंतिका अमन को अपना घर दिखाने लगी.
और देखते देखते दोनों घर के दूसरी मंजिल पर आ गए जहां अवंतिका ने अमन को अपने रूम दिखाया.

कमरे में अवंतिका की कुछ बड़ी बड़ी फोटोज लगी थीं जिनमें अवंतिका काफ़ी सेक्सी दिख रही थी.
दो तस्वीरें तो एकदम नंगी थीं, जिनमें अवंतिका ने खुद को कुछ फूलों से छिपाया हुआ था.

अमन उन दोनों तस्वीरों को काफ़ी ध्यान से देखता रहा और बोला- अवंतिका जी, आपको बुरा ना लगे, तो एक बात कहूँ?
अवंतिका- अरे अमन जी आप कहिए ना … आपकी बात का क्या बुरा मानना भला!

अमन- आप काफ़ी खूबसूरत और मनमोहक लगती हो. आपकी तस्वीरें किसी हीरोइन से कम नहीं हैं.
अमन की इस बात पर अवंतिका शर्मा गई और उसने अमन को शुक्रिया कहा.

उस वक्त अमन अवंतिका के इतने करीब था जिससे उसे अवंतिका के जिस्म की गर्मी महसूस हो रही थी.

बातों बातों में किसी बात पर जोर से हंसी आने पर अमन ने अवंतिका की पीठ पर हाथ फेर दिया.
अवंतिका ने भी इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, उसने हंस कर अमन से बातें करना जारी रखा.

अब अमन अवंतिका की खूबसूरती की तारीफ करने लगा.
यह सब बात करते हुए वह अवंतिका की मुलायम गांड को भी अनजान बनते हुए एक दो बार छू लेता है.

उसके इस स्पर्श को अवंतिका ने गहराई से महसूस किया लेकिन वह अभी भी सामान्य बनी रही.

अवंतिका को अमन से बातें करना अच्छा लग रहा था, तभी अवंतिका के पति ने आवाज़ दी और दोनों नीचे चले आए.

उस रात अमन अपने घर वापस आया और अवंतिका के सेक्सी बदन को याद करते हुए अपना लंड मसलने लगा.

रात के बारह बजे थे … अमन से न रहा गया और उसने अवंतिका को मैसेज कर दिया ‘दावत के लिए शुक्रिया!’
अवंतिका ने तुरंत जवाब दिया- अरे आप तो अब हमारे परिवार के सदस्य हो, आप आए … ये हमारे लिए ख़ुशी की बात है.

फिर थोड़ी इधर उधर की बातें करते हुए अमन ने कहा- मैं तो सोच रहा था कि आप सो गई होंगी. आप अभी तक क्यों नहीं सोईं … साहब जगाए हुए हैं क्या?
अवंतिका- अरे नहीं बाबा, वे तो कब के सो गए. मुझे ही देर से सोने की आदत है.

अमन- क्या … वे सो गए? इतनी खूबसूरत बीवी होते हुए उन्हें नींद कैसे आ सकती है!
अवंतिका- क्यों नहीं आती नींद, खूबसूरत बीवी होने पर क्या होता है?

अवंतिका भी अमन के ख़ुशी के लिए उसके मन के हिसाब से बातें करने लगी.
अमन- अब आपको नहीं पता क्या?
अवंतिका- जी नहीं.

अमन- प्यार करते हैं … और उनके पास आपके जैसी बीवी है तो क्या ही कहूँ?
अवंतिका- कहिए ना!

अमन- आपको बुरा लगेगा!
अवंतिका- अमन जी आप कहिए, जो भी कहना हो. मुझे कुछ भी बुरा नहीं लगता.
अमन- सच बात तो यह है अवंतिका जी कि आप बहुत सेक्सी दिखती हैं. आपका पूरा हुस्न देख कर न …

अवंतिका- अरे रुक क्यों गए, खुल कर बोलिए ना … मेरा हुस्न देख … क्या?
अमन- मेरे अन्दर हलचल शुरू हो जाती है.

अवंतिका- अन्दर कहां, दिल में?
अमन- नहीं, कहीं और …

अवंतिका- कहां, बोलिए ना अमन जी?
अमन- छोड़िए … कल क्या कर रही हैं आप?

अवंतिका- आप बोलिए, कुछ काम है?
अमन- कल आपको दावत मेरी ओर से होटल में!

अवंतिका- जी जरूर, मैं मेरे पति को कहती हूँ … हम आ जाएंगे.
अमन- अरे अवंतिका जी, ये दावत सिर्फ आपके लिए है. हमारी दोस्ती के लिए … पति के साथ किसी और दिन!

अवंतिका- ओके जी, फिर कल कहां आना है?
अमन- आप मेरे ऑफिस के पास जो होटल है. वहां आइए … कल दोपहर को मिलते हैं.
अवंतिका- जी जरूर.

दूसरे दिन अवंतिका लाल साड़ी में पूरी सेक्सी लुक में तैयार होकर होटल आ गई.
वहां जाकर वह अमन को खोजने लगी.
लेकिन उसे अमन नजर नहीं आ रहा था.

कुछ देर बाद अवंतिका ने अमन को कॉल करके पूछा- कहां हो?
अमन ने उसे होटल के ही ऊपर एक कमरे का नंबर बताया और आने का कहा.

अवंतिका तो पहले ही समझ गई थी कि अमन के लौड़े में आग लग चुकी है और वह कमरे में बुला कर क्या चाहता है.
पर अवंतिका को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता था.
उसके लिए अमन हीरो था जो उसके काम आ रहा था.

अवंतिका उस रूम में चली गई.
यह कमरा काफ़ी रोमांटिक तरीके से सजा कर तैयार किया गया था.

अमन ने अवंतिका को देख लंड पर हाथ फेरा और उसे अन्दर बुलाकर बेड पर बैठने को कहा.

अवंतिका पूरे आत्मविश्वास से वहां बैठ गई.
दोनों बातें करने लगे.

कुछ ही देर में खाना आ गया तो वे दोनों खाना खाने लगे.

अमन अवंतिका से बातें करते हुए बोला- अवंतिका जी, आप इस साड़ी में बहुत हॉट लग रही हो!
अवंतिका- अच्छा जी … सच्ची!
अमन- सच्ची मुच्ची … आपका पूरा जिस्म में ही लाजवाब है.
अवंतिका- हम्म … वह तो है!

अमन- क्या आप मेरा एक काम करेंगी?
अवंतिका- आप बस हुकुम करो.

अमन- क्या मैं आपको एक बार गले लगा सकता हूँ!
अवंतिका- क्यों?

अमन- जब से आपको देखा है, तब से इच्छा है कि आपको एक बार गले से लगा सकूँ.
अवंतिका- अब आपने मेरे लिए इतना किया है, तो एक दोस्त के नाते गले लगना क्या बड़ी बात है!

अमन खुश हो गया और वह अवंतिका के करीब आ गया.
उसने अवंतिका का हाथ पकड़ कर उसे खड़ा कर दिया और उसकी कमर में हाथ डालकर उसे अपने सीने से चिपका लिया.

अपने सीने से चिपका कर उसने अवंतिका की गदराई हुई गांड को जोर से दबा कर खुद के दोनों हाथों में भर लिया.

इससे अवंतिका की चीख निकल गई.
चीख निकलने के बावजूद भी अमन अवंतिका की गांड को इसी तरह जोरों से दबाए रहा.

साथ उसने अपने होंठ अवंतिका के गले पर रख दिए और उसे चूमना शुरू कर दिया.
अवंतिका की चूत में भी अब आग भड़क गई थी.

वह अमन से बोली- अमन जी, क्या कर रहे हो यार … दर्द हो रहा है. आपको तो बस गले लगना था. पर आप तो कुछ और ही कर रहे हैं!
अमन- शहहह् …

अमन अवंतिका के पूरे जिस्म को चूमने लग गया और इसी तरह से वह उसके होंठों को चूमने लगा.

अवंतिका भी अब उसका साथ देने लगी.
वह पूरे जोश में अमन को चूमने लगी और उसके कपड़े उतारने लगी.

फिर अमन ने भी अवंतिका की कमर को चूमते हुए उसकी साड़ी को खोल दिया.
देखते ही देखते दोनों एक दूसरे के सामने नंगे हो गए.

अमन अवंतिका को पलंग पर लिटा कर उसके नर्म रसीले होंठों को चूसने लगा.

वह अपना लंड अवंतिका की चूत पर घिसने लगा.
इससे अवंतिका तड़प उठी और सिसिया कर बोली- आह अमन जी … प्लीज चोदिए ना अपनी अवंतिका की चूत को … आह पेल दीजिए अपना मूसल.

बस अमन ने अपना लंड अवंतिका की चूत में घुसा दिया और वह घप … घपाघप घप … अवंतिका की चुदाई करने लगा.
लंड की रफ़्तार और अवंतिका की कड़क चूत का घमासान चालू हो गया था.

अवंतिका जोर जोर से आहें भरने लगी थी. इससे अमन में और जोश आ गया था.
इसी तरह से अमन ने अवंतिका को पूरे 40 मिनट तक चोदा.
उसकी मदमस्त चुदाई के बाद अमन ने अपने लंड के झरने को अवंतिका की चूत में छोड़ दिया.

वे दोनों जोर जोर से सांसें भरते हुए एक दूसरे को तृप्त करने लगे.
चुदाई के बाद वे दोनों एक दूसरे की बांहों में यूं ही नंगे सो गए.

एक घंटा बाद उठने पर अवंतिका अमन के होंठों को चूसने लगी.
उसने कहा- अमन, तुमसे चुदाई करवा कर बहुत मजा आया. मालूम है, जब मैं तुमसे पहली बार मिली थी न … मैं तभी समझ गई थी कि तुम मेरा काम करो या ना करो लेकिन मेरी चुदाई जरूर करोगे!

अमन- तो तुम भी चुदना चाहती थी?
अवंतिका- नहीं, लेकिन जितना तुमने किया है … उसके लिए ये इनाम तो मैं तुमको देती ही. पर आज तुमने खुद ले लिया.

इसी तरह की बातों के साथ वे दोनों फिर से चुदाई के दूसरे राउंड को तैयार हो गए.
चुदाई करने के बाद अवंतिका अपने कपड़े पहन कर जाने लगी.

तब अमन ने कहा- अवंतिका अब कब चुदाई कर पाऊंगा तुम्हारी?
अवंतिका- अब ये चूत हमेशा के लिए तुम्हारी ही है, ज़ब चाहे अपने लंड से चोद लेना.

ये कहकर वह अपनी गांड मटकाती हुई चली गई.
पोलिटिकल सेक्स का मजा लेकर अमन ने उसको अपने लंड के साथ फंड भी दिला दिया.

अब अमन जब मन होता, तब वह उसको चोद लेता.
अवंतिका की मदद से अमन उसकी इंस्टीट्यूट की भी कई लड़कियों को भी चोद चुका है.

Antarvasna

अंश और अभिनव दोस्त हैं. अंश अपनी बहन उषा के साथ Antarvasnaअभिनव के गाँव गया है वहाँ अभिनव की छोटी बहन सपना उन से मिलती है अभिनव सुमन नाम की नौकरानी को अक्सर चोदता आया है अंश भी सुमन को चोदना चाहता है दीवाली के दिन होने से अभिनव की माताज़ी ने महेमान घर की सफ़ाई का काम निकाला है महेमान घर गाँव से बाहर है उषा और सपनासुमन के साथ वहाँ गयी है. अभिनव और अंश महेमान घर जा पहुँचते हें और उषा और सपना को चाय नाश्ता लेने बड़े घर भेज देते हें.सुमन अकेली रह जाती है दोनों दोस्त एक साथसुमन को चोदते हें.
चुदाई चालू है आगे पढ़िए:

अभिनव सुमन के सर के पास बैठ गया और अपना लंड उस के मुँह में धर दिया.सुमन को अपना मुँह पूरा खोलना पड़ा अभिनव का मोटा लंड अंदर लेने के लिए इधर मैंने उसकी जांघें फैला के लंड भोस पर टिका दिया और एक धक्के से सारा का सारा लंड चूत में घुसेड़ दिया. उधर अपने हिप्स हिला कर अभिनव सुमन का मुँह चोदने लगा तो मैं धीरे धक्के से उस की टाइट चूत चोदने लगा.सुमन के मुँह से उन न न न न आवाज़ आने लगी और उसके चुतड़ घूमने लगे.

थोड़ी ही देर में उसकी चूत ने फटाके मारने शुरू किया. मैंने लंड को पूरा बाहर निकल कर क्लाइटोरिस पर रगडा. अचानक सुमन का बदन अकड़ गया और रोएँ खड़े हो गये मैंने झट से लंड चूत में डाला और तेज़ रफ़्तार से चोदने लगा.सुमन की चूत ने सिकोड़ कर मेरा लंड निचोड़ लिया. जब उस का ओर्गेज़्म शांत हुआ तब हमने लंड निकाले. दोनों लंड कड़े ही थे क्योंकि हममें से कोई झड़ा नहीं था.
पद्मा बोली : हाय दईया, ऐसी चुदाई तो कभी नहीं करवाई.

हम दोनों ने कन्डोम लगाए. मैं पलंग पर लेट गया. अभिनव ने सुमन को मेरी जांघों पर बिठाया. मैंने लंड सीधा पकड़ रखा.सुमन ने लंड के मत्थे पर चूत टिकाई. जैसे उसने नितंब गिराए मेरा लंड स र र र करता चूत में घुसने लगा. जब मोन्स से मोन्स टकराई तब मूल तक का लंड चूत में पैठ गया था.
अभिनव ने कहा: अंश, अभी ज़रा रुकना, धक्के मत देना.सुमन, तू आगे झुक और गांड उधर कर.
मैं देख नहीं पाता था लेकिनसुमन के कराहने की आवाज़ से समझ गया कि अभिनव उसकी गांड में लंड डाल रहा था. जब पूरा लंड डाला गया तब अभिनवसुमन की पीठ पर झुका और बोला: अंश, मैं गांड मार रहा हूँ औरसुमन भी हिप्स हिलाएगी वैसे ही तेरा लंड चूत में आता जाता रहेगा तुझे धक्के लगाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी.

अभिनव उपर से सुमन की गांड मारने लगा. उस के धक्के सेसुमन के नितंब आगे पीछे हिलते थे. बिना कुछ किए मेरा लंड चूत में आता जाता था. जब सुमन गांड सिकॉड़ती थी तब साथ साथ चूत भी सिकुड़ती थी और मेरा लंड दब जाता था. अभिनव ने शुरुआत धीरे धक्के से की थी लेकिनसुमन की उत्तेजना तेज़ी से बढ़ने लगी अभिनव ने धक्के की रफ़्तार बढ़ाई पीछे से हाथ डाल कर अभिनव नेसुमन के स्तन थाम लिए थे. मैं उसका मुँह चूम रहा था. मैंने एक हाथ हमारे बदन बीच से भोस पर लगा दिया.सुमन की सारी भोस गीली हो गयी थी. जैसे मैंने उसकी कड़ी क्लाइटोरिस को छुआ वैसे उसको ओर्गाज़्म हो गया. हमने धक्के लगाने रोक लिए.

ओर्गाज़्म के फटाके शांत हुए तब अभिनव ने कहा :सुमन, प्यारी, तू कहे तो हम दोनों जगह बदल कर चुदाई करें?सुमन मुँह से बोली नहीं, छूट सिकोड़ कर जवाब दिया.

हमने जगह की अदला बदली की. गांड मारने का ये मेरा पहला अनुभव था. चूत के बजाय गांड इतनी टाइट होती है वो मैंने पहली बार जाना.

गांड में लंड डालने की तकनीक अलग है जो मुझे अभिनव ने सिखाई. जब मेरा लंडसुमन की गांड में पूरा बैठ गया तब अभिनव ने मुझे फिर चित लेटाया. अपनी गांड में मेरा लंड लिएसुमन ऊपर आ गयी उसने जांघे चौड़ी कर दी. अभिनव उपर चढ़ गया. एक ही धक्के से उसने अपना लंड चूत में घुसेड़ दिया. पाँच सात धक्के मार कर वो रुक गया और बोला : अंश, अब तेरी बारी. तू धक्के लगाएगा तब मैं स्थिर रहूँगा.

मैंने धीरे धक्के से गांड मारनी शुरू की. दोस्तो, चूत और गांड में बहुत फ़र्क है उसे चोदने का आनन्द भी अलग अलग है हाथ की मुट्ठी में पकड़ा हो वैसेसुमन की गांड ने मेरा लंड पकड़ा था, मानो कि वो गांड से मुठ मार रही थी. जब वो चूत सिकॉड़ती थी तब उसकी गांड भी सिकुड़ जाती थी और लंड और ज़ोर से भिंच जाता था. लंड में इतनी गुदगुदी होती थी कि वहाँ से निकल कर सारे बदन में फैल जाती थी.

थोड़ी देर बाद मैंने और अभिनव ने एक साथ धक्के लगाने शुरू किए. मैं अब पूरी ताक़त सेसुमन की गांड मारने लगा. अभिनव भी ऐसे ही उसकी चूत मार ने लगा. दूसरी दस मिनट तक चुदाई चली तबसुमन बोली : मैं तीन बार झड़ चुकी हूँ अब तो बस कीजिए.

हम दोनों ने तेज़ी से धक्के लगाए और एक साथ झड़े.सुमन भी एक बार और झड़ी.. लंड निकाल कर हम उतरे.

थकी हुईसुमन थोड़ी देर पड़ी रही, बाद में उठ कर बाथरूम में चली गयी हमने भी सफ़ाई की और कपड़े पहन लिया. आगोश में ले कर अभिनव नेसुमन को किस किया और पूछा : तुझे लगा तो नहीं न? मजा आया?
वो बोली : बहुत मजा आया
अभिनव : कैसा लगा मेरे दोस्त का लंड? फिर से चुदवायेगी?
धत्त कह केसुमन ने हलकी चपत लगाई और अपने आपको छुड़ा कर भाग गयी

पद्मा के जाने के बाद हम अगले कमरे में गये वहाँ सपना और उषा चाय नाश्ता साथ हमारी राह देख रही थी. हमें देख वो खिल खिल हँसने लगी अभिनव ने पूछा : कब की आई हो तुम? और ऐसे हँस क्यों रही हो?
एक दूजे की ओर देख कर वो दोनों फिर से हँसने लगी
मैं: चाय लाई हो या नहीं?
जवाब में उषा ने चाय नाश्ता लगाया. हम चारों ने नाश्ता किया. बाद में बातें चली.

उषा : अभिनव भैया, सपना कहती है कि आप दोनों को दूध पीना चाहिए.
अभिनव :क्यूं भला?
अपने मुँह पर हाथ रख कर सपना हँसती हुई बोली: इतना जो दूध अभी आपने निकाल दिया वो दूध पीने से नया बन जाएगा.
उषा : सपना, भैया ने जो निकाला वो दूध कहाँ था? क्रीम था क्रीम, दूध इतना खट्टा कहाँ होता है?
थोड़ी देर अभिनव सोच में पड़ गया, बोला: कितना क्रीम निकाला ये तुम्हें कैसे मालूम?
उन दोनों की हँसी बढ़ गयी.
अभिनव: समझा, अब मैं समझा. तुम दोनों ने हमारी चुदाई देख ली है सही ना? सपना?

सपना शर्म से हमसे नज़र नहीं मिला सकती थी. बोले बिना उस ने हाँ कही.
अभिनव: अंश, इन दोनों ने हमारी चुदाई देख ली है क्या करेंगे उनका?
सपना : दूध ले आ?
सपना ज़ोर से हँस पड़ी.

अभिनव : उषा, दूध की ज़रूरत नहीं है जहाँ क्रीम बनता है वो फेक्टरी ओवर टाइम काम करती है अभी काफ़ी क्रीम पड़ा है चाहिए तुझे?
उषा ने अपना चेहरा ढक दिया. आश्चर्य से सपना की आँखें फट गयी वो बोली : मैंने कहा था ना? अभिनव भैया को मत उकसाना? सुन लिया जवाब?
मैं: मेरे पास भी काफ़ी क्रीम है किस को चाहिए?
लड़कियों के मुँह से सेक्स की बातें सुन कर हमारे लौड़े खड़े होने लगे थे. उन दोनों की नज़रें बार बार उस तरफ़ जाती थी. दोनों के चेहरे लाल लाल हो गये थे.
मैं बनावटी मुँह लंबा कर के बोला : अभिनव ये तो बुरा हुआ. उषा तो कँवारी नहीं है उस के लिए चुदाई नयी चीज़ नहीं है लेकिन सपना?
अब की बारी थी अभिनव की खड़ खड़ हँसने की. वो बोला: सपना, तू कँवारी है?
सपना नज़र नीची कर बोली: ऐसे भी क्या पूछ रहे हैं भैया? आप जानते तो हैं.

ज़ाहिर हुआ कि सपना को भी किसी ने चोदा था. मैं मन ही मन ख़ुश हुआ कि चलो इस लड़की को चोदना आसान होगा. मैंने प्रार्थना की हे! भगवान एक मौक़ा दे दे मुझे इस कुड़ी को चोदने का.
अभिनव : उषा, ये बता कि तुझे किसने चोदा पहली बार?
सपना ने मेरी ओर इशारा कर दिया. अभिनव बोला: अच्छा तो ये है बहन चोद. कहाँ और कब?
उषा: मंजुला भाभी के घर उसी वक़्त.

अभिनव: उसी वक़्त? वाह रे मेरे शेर, तूने दो दो चूत मार दी एक साथ. लेकिन बदमाश, तू तो कहता था कि तूने अकेली भाभी को चोदा था.
मैं: मैं क्या करता? मुझे भाभी को चोदते देख उषा गर्म हो गयी और…
अभिनव: …और तूने उसे भी चोद लिया. शाबाश.
मैं: बात ये है कि… बताऊँ उषा?
उषा ने हाँ कहा.

मैं: बात ये है कि बचपन से ही उषा जल्दी गर्म हो जाती है मैंने तो तब जाना जब एक दिन…

एक दिन उषा के घर कुछ मेहमान आए तांगा लिए जैसे तांगा रुका, घोड़े ने अपना दो फुट लंबा लंड निकाला और पेशाब किया. अंश और उषा वहाँ मौजूद थे. बारह साल की उषा घोड़े का लंड देख उत्तेजित होने लगी उसकी पीकी गीली हो गयी वो अपनी पीकी खुजलाने लगी. रात को जब माताज़ी और पिताजी सो गये तब वो अंश के पास जा कर बोली : भैया, मेरी पीकी तो देखो, कितनी सूज गयी है और गीली भी हो गयी है.
अंश ने उस दिन पहली बार अपनी बहन की भोस देखी. उषा के बदन में जवानी खिल रही थी. सीने पर बड़े नींबू की साइज़ के स्तन उभर आए थे. भोस पर काले झांट उग निकले थे. अंश को मालूम था क्या करना. उषा को लेटा कर उसने उगालियों से भोस सहलाई और क्लाइटोरिस मसली. उषा बोली : भैया बहुत गुदगुदी होती है दो पाँच मिनट में उषा को ओर्गेज़्म हो गया. इसके बाद बैठकर अंश ने उसे समझाया कि लंड क्या है चूत क्या है चुदाई क्या है वग़ैरह.
मैं : याद है उषा तेरा वो पहला ओर्गेज़्म?

अभिनव : तब से ओर्गेज़्म का मजा लेती हो तुम?
उषा : शुरू शुरू में इतने ज़ोरदार नहीं होते थे.
अभिनव : अब कैसे होते हैं?
उषा : मैं क्या कहूँ? आप ही देख लीजिए न.

अभिनव ख़ुश हो गया. उसके लंड ने पाजामा का तंबू बना दिया.
अभिनव : सपना तो लंबे अरसे तक बेख़बर रही थी, क्यूं सपना?
मैं : आख़िर किस ने ज्ञान करवाया?
अभिनव : एक बार ऐसा हुआ कि…
एक बार सपना को साइकिल पर बिठा कर अभिनव कहीं जा रहा था कि रास्ते में एक गधी दौड़ आई. उसके पीछे गधा पड़ा था. जैसी गधी उनके पास आकर खड़ी हो गयी वैसे ही गधा ऊपर चढ़ गया और चोदने लगा. उसका दो फुट का लंड गधी की चूत में आता जाता सपना और अभिनव दोनों देखते रहे. सपना घबरा गयी और बोली : ये क्या कर रहा है? गधी मर जाएगी?
अभिनव ने सपना के कान में कहा : घर जा कर सब समझाऊँगा.

गधे गधी की चुदाई देख कर अभिनव का लंड तो खड़ा हो गया लेकिन सपना पर कोई असर पड़ा नहीं. घर पहुँचे तब घर में कोई था नहीं. अभिनव बहुत एक्साइट हो गया था. सपना की मौजूदगी की परवाह किए बिना वो बाथरूम में गया और मुठ मारने लगा. ताज्जुब हो कर सपना देखती रही. उस ने पहली बार बालिग लंड देखा था, बोली : भैया इतना तेज़ी से घिसते हो तो कहीं लग जाएगा.

अभिनव जवाब देने के मूड में नहीं था. फ़च्छ फ़च्छ करती वीर्य की चार पाँच पिचकारियाँ छोड़ कर वो झड़ा. अभिनव ने उस वक़्त सपना को समझाया कि चुदाई क्या है लोग क्यों करते हैं. सुनकर सपना बोली: चलो ना भैया, हम दोनों चुदाई करें?

अभिनव: न, अभी तू छोटी हो. तेरी चूत सिकुड़ी है तू ज़रा बड़ी हो जाए, तेरी महवारी शुरू हो जाए बाद में तू चुदवा सकेगी, इनसे पहले नहीं.
सपना: ऐसा? लेकिन भैया, जब मैं बड़ी हो जाऊँ तब आप ही मुझे पहली बार चोदना!
अभिनव: ऐसा हुआ भी सही, क्यों सपना?
उषा: अभिनव भैया, पूरी कहानी कही ये. कब, कहाँ, कैसे? आपने हमारी तो सुन ली है अब आपकी सुनाईये.

अभिनव: वक़्त आने पर कहूँगा. फिलहाल मैं देख रहा हूँ कि अंश के बदन में क्रीम का प्रेशर बढ़ गया है उसका कुछ करना पड़ेगा वरना बेचारे की गन फट जाएगी
अभिनव सच कह रहा था. मेरा लंड तन कर लोहे जैसा हो गया था.
मैं: उषा, हमारी चुदाई देख तुझे कुछ नहीं हुआ?
उषा: भैया, कैसी बात करते हैं आप? मैं पत्थर की बनी हूँ क्या?
मैं: तो अब तक तू राह किसकी देख रही है? निमंत्रण चाहिए तुझे? देखती नहीं है अभिनव का…
अभिनव बीच में बोला: अंश, उषा लड़की है बुलाए बिना नहीं आएगी, क्यूं उषा?

अभिनव उठकर उषा के पास गया. उसने बाहें लंबी की, उषा ने उसके हाथ पकड़ लिए खींचकर उषा को उसने खड़ा कर दिया और अपनी बाहों में भर लिया. उन दोनों के मुँह किस में जुट गये.
मैं सोफ़े पर बैठा था. हाथ लंबे करके मैंने सपना को बुला लिया. सपना मेरे पास चली आई और खड़ी हो गई. वो शरमा रही थी. दाँत से उंगली काट रही थी. उसका चेहरा लाल लाल हो गया था. दो तीन बार मुझसे आँख चुरा कर उसने अभिनव और उषा की ओर देखा. उन दोनों को चुंबन में लगे हुए देख सपना ज़्यादा शरमाई. बहुत प्यारी लग रही थी वो. उसने रेशमी चोली, घाघरी और ओढ़नी पहनी थी. चोली छोटी होने से उसकी गोरी गोरी कमर और सपाट पेट का काफ़ी हिस्सा खुला था. मैंने उसे कमर से थाम लिया. उसने अपनी बाहें मेरे गले में डाल दी. मैंने उसे पास खींच लिया. मेरा सिर उसके सीने से दब गया. सिर हिला कर मैंने उसके स्तन टटोला. ऐसे में ओढ़नी का पल्लू थोड़ा खिसक गया. खुले हुए गोरे पेट पर मैंने किस कर दिया. गुदगुदी से वो छटपटाई. उसे पकड़ कर मैं किस करता रहा.

आख़िर मेरे बाल पकड़ कर उसने मेरा सिर हटा दिया. बोली: मुझे बहुत गुदगुदी होती है
मैं: ये तो तेरा पेट है यहाँ (भोस पर हाथ रखते हुए) किस करूँगा तब क्या होगा?
उसने तुरंत मेरा हाथ हटा दिया. एक उंगली मेरे होठों पर रख कर बोली: धत्त, ऐसा नहीं बोलते.

मैंने होंठ खोल उंगली मुँह में ली और चूसने लगा. मेरा दूसरा हाथ कमर पर से उतार कर उसके भरे भरे नितंब पर जा पहुँचा. मैंने कूल्हे सहलाए और दबाए. उसने मेरे मुँह से उंगली निकाल ली और सिर झुकाकर अपने होंठ मेरे होंठ से लगा दिए जांघें चौड़ी कर मैंने उसे मेरी बाई जाँघ पर बिठा दिया. हमारे होंठ किस में जुटे हुए थे. बंद होंठ से ही मैंने उसके कोमल होंठ रगड़े. मुँह खोल मैंने उसके होंठ मेरे होंठ भींच लिए और जीभ से चाटे. फूल की पंखुड़ी जैसे कोमल उसके होंठ मुझे इतने मीठे लगे कि मेरा लंड अकड़ने लगा.
जीभ से मैंने होंठ टटोले तब वो फिर छटपटा गयी.

मैंने कहा : मुँह खोल तो ज़रा.
थोड़ी हिचकिचाहट के बाद उसने मुँह खोला. मेरी जीभ अंदर जाकर चारों ओर घूम चुकी और उसकी जीभ से खेलने लगी. मैंने जीभ लंड जैसी कड़ी बनाई. कड़ी जीभ अंदर बाहर करके मैंने सपना का मुँह चोदा. जब मैंने मेरी जीभ वापस ले ली तब उसने अपनी जीभ से वो सब किया जो मैंने किया था. हम दोनों एक्साइट होने लगे.

उधर अभिनव ने उषा को पलंग की धार पर लेटाया था और ख़ुद ज़मीन पर बैठ उसकी भोस सहला रहा था. भोस के होठ चौड़े करके वो जीभ से क्लाइटोरिस टटोल रहा था. उसकी दो ऊँगलियाँ उषा की चूत में डाली हुई थी जो उस के जी स्पोट का मर्दन कर रही थी. अचानक अभिनव ऊँगलियाँ तेज़ी से अंदर बाहर करके उषा की चूत को चोदने लगा. उषा के कूल्हे हिलने लगे. वो मुँह से सी सी सी आवाज़ करने लगी, अभिनव क्लाइटोरिस चूसता रहा और ऊँगलियों से चूत मारता रहा. किस चालू ही थी कि मेरा हाथ सपना के पेट पर चला गया. ओढनी का पल्लू हटा कर मैंने पेट सहलाया. उसकी बाहें मेरे गले में थी इसलिए दोनों स्तन खुले थे. पेट पर से मेरा हाथ चोली में क़ैद सपना के स्तन पर गया. पहले मैंने हलके स्पर्श से स्तन सहलाया, बाद में दबाया. चोली पतले कपड़े की थी और लो कट भी थी. मेरी ऊँगलियों ने कड़ी निप्पल ढूँढ निकाली. दो ऊँगलियों से टटोलने के बाद मैंने निप्पल चिपटी में ली.

सपना ने मेरी कलाई पकड़ ली और हाथ हटाने का प्रयत्न किया. मुट्ठी में स्तन भर के मैंने हटाने दिया नहीं. उधर फ़्रेंच किस की मस्ती में वो अपना स्तन भूल गयी चिपटी में पकड़ी हुई निप्पल मैंने मसली और खींची. उसकी बाहों की पकड़ ज़्यादा ज़ोरदार हो गयी निप्पल छोड़ मेरी ऊँगलियों स्तन के खुले हिस्से पर घूमने लगी मैंने चोली के अंदर उगली डालने का प्रयत्न किया लेकिन डाल न सका क्योंकि चोली छोटी और टाइट थी. किस करते करते मैंने एक एक कर चोली के सब हुक खोल डाले. चोली हटते ही उसके नंगे स्तन मेरी हथेलियों में क़ैद हो गये. सपना के स्तन इतने बड़े तो नहीं थे जितनेसुमन के थे. लेकिन संपूर्ण गोल और कठोर थे. दबाने से दबे नहीं जाते थे. अनजाने में मुझसे ज़रा ज़ोर से स्तन दब गया. सपना कराह उठी. किस छोड़ कर उसने अपना सिर मेरे कंधों पर रख दिया और बोली: मुझे दर्द होता है
मैंने स्तन सहलाया और कहा: जब तक तेरे स्तन बढ़ते रहेंगे तब तक उसे दबाने से दर्द होता रहेगा. पूरे विकसित हो जाने पर दर्द नहीं होगा.

अब मैंने उसकी ओढनी और चोली निकाल दिए उसने शर्म से आँखें बंद कर दी. उसके प्यारे प्यारे स्तन मैं अच्छी तरह देख सका. क्या स्तन पाए थे उस लड़की ने? इतने ख़ूबसूरत स्तन की मुझे उम्मीद नहीं थी. गोरे गोरे गोल गोल छोटे श्रीफ़ल की साइज़ के उसके स्तन कड़े थे. चिकनी मुलायम चमड़ी के नीचे ख़ून की नीली नसे दिखाई दे रही थी. स्तन की चोटी पर बादामी कलर की दो इंच की एरोला थी. एरोला के मध्य में कि के दाने जैसी कोमल छोटी सी नीपल थी. उस वक़्त एक्साइटमेंट से एरोला उभर आई थी और निप्पल कड़े हो गये थे. मैंने पहले हलके स्पर्श से सारा स्तन सहलाया, बाद में मुट्ठी में लिया. निप्पल को चिपटी में लेकर मसला. सपना के मुँह से आह निकल पड़ी.

स्तन साथ खेलते हुए मैंने सपना का हाथ लंड पर रख दिया. पाजामा के आर पार मेरे तने हुए लंड को छूते ही उसने हाथ हटा लिया.
मैं: पकड़ ले, डरती क्यूं हो? काटेगा नहीं.
उसे हँसी आ गयी मैंने फिर लंड पकड़ाया. इस वक़्त उसने मुट्ठी में लिया और होले से दबाया. लंड ने ठुमका लगाया.
मेरे आश्चर्य की हद न रही जब वो मेरे कान में बोली: इतना बड़ा और मोटा? मुझे मुँह में लेना है ले सकती हूँ?

इसके बाद क्या हुआ? कैसे सपना और उषा की चुदाई हुई? ये जानने के लिये अगला भाग अवश्य पढ़ें…
कहानी का अगला भाग : हम पाँच : बहनों की अदला बदली-2 Antarvasna

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