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सबसे पहले मैं अपने Hindi Sex Stories पाठको को धन्यवाद देना चाहूंगी जिन्होंने मुझे ढेर सारे मेल किये। आपकी प्रतिक्रिया ने मुझे उत्साहित किया कि मैं आपको अन्तर्वासना डॉट कॉम पर वो दास्ताँ सुनाऊँ जो मेरा पहला-यौन-अनुभव था या यूँ कह लीजिये कि मेरी पहली चुदाई!
दिसम्बर के महीने के आखिरी दिनों में पंजाब में बहुत से कश्मीरी आते हैं यहाँ कारोबार के लिए, जिन्हें हम झाँगी कहते हैं।
जब कश्मीर बिल्कुल बर्फ से ढक जाता है और वहाँ का कारोबार ठप्प हो जाता है तो ये कश्मीरी यहाँ आकर ऊनी कपड़ों का, शाल और कम्बल का स्टाल लगाते हैं।
ऐसे ही दो झांगी ने हमारे यहाँ कमरा किराये पर लिया, एक अंजुम जिसकी उम्र करीब 25 की और दूसरा मुश्ताक जिसकी उम्र 35-37 की थी।
उस वक़्त मेरी उम्र बीस साल थी, कॉलेज में बी.ए. की पढ़ाई कर रही थी, मेरी कामवासना चरम पर थी और मेरी जवानी लुटने को बेताब थी। मेरे सीने के उभार मसले जाने को तरस रहे थे, योनि में भी हलचल सी थी। मैं तब तक एकदम कोरी थी, कुंवारी थी, बिनचुदी थी.
सुबह की चाय हम उन्हें देते थे। दो दिन तक तो छोटू मेरा छोटा भाई उन्हें चाय देने गया। तीसरे दिन उसकी तबीयत ख़राब थी, इसलिए मैं उन्हें चाय देने गई।
जैसे ही अंदर पहुँची, मुश्ताक बाथरूम में था और अंजुम बिस्तर पर सिर्फ कच्छे में था। मुझे देख कर एकदम उठा और जल्दी से चादर ओढ़ ली।
मुझे हसीं आ गई और मैं शरमा कर भागती हुई नीचे आ गई पर मेरे अंदर हलचल सी हो गई थी क्योंकि मैंने उसके कच्छे के अंदर फुफकारता हुआ नाग देख लिया था और बार बार उसी के बारे में सोचती रही।
जब वो नौ बजे के करीब नीचे आया तो मेरी नज़रें उससे मिली, मैं फिर हँस पड़ी।
वो भी मुस्कुराता हुआ मेरे अंगों को नापने लगा। उसकी नज़र मेरे उभारों पर टिकी हुई थी जिसे मैं भांप गई थी और मैं भाग कर अंदर चली गई।
उनके जाने के बाद मैंने अपने वक्ष को टटोला। उस वक़्त मैं 32 इंच की ब्रा पहनती थी। उस दिन इनमें अजीब सी हलचल हो रही थी क्योंकि उसकी गोलाइयों को आज किसी ने बड़ी तीखी नज़रों से नापा था। सारा दिन मैं उसी के बारे मैं सोचती रही, रात भर भी सो न सकी।
अगले दिन भी सुबह मैं ही चाय लेकर गई, वो भी मेरा इंतज़ार कर रहा था। जैसे ही आई, वो पठानों जैसी आवाज़ में बोला- मेमसाब! आप कल क्यों हँस रही थी?
मैं चाय रख के भागने को हुई, उसने मेरा हाथ पकड़ लिया.
मैंने कहा- छोड़ो! अगर नीचे जल्दी न गई तो घर वालों को शक हो जायेगा।
उसने कहा- मेम्शाब, एक बार गले मिल के किस तो दे दो!
और मुझे बाँहों में भर के बेतहाशा चूमने लगा।
मैंने कहा- अंजुम छोड़ो, तुम्हारा साथी आ जायेगा!
उसने कहा- रात को जब सब सो जायेंगे तब आओगी?
मैंने कहा- यहाँ तुम्हारा साथी होगा! कैसे आऊंगी?
वो बोला- वो कम्बल लेकर सोया रहेगा, आओगी?
मैंने कहा- नहीं, मुझे डर लगता है! अब छोड़ो मुझे!
उसने कहा- पहले वादा करो कि रात को आओगी!
मैंने कहा- अच्छा देखूँगी!
किसी तरह अपने को छुड़ा कर भाग आई लेकिन उसने मेरी चूचियों को स्पर्श कर लिया था और मैं भी गर्म हो चुकी थी इसलिए मैंने भी आज अपनी जवानी लुटाने का मन बना लिया था।
रात को जब वो आया तो उसने इशारे से मुझसे पूछा- आओगी?
मैंने भी हाँ में सर हिला दिया।
रात को साढ़े बारह बज़े जब सब गहरी नींद में सो गए, मैं उसके कमरे में चली गई वो मेरा इंतज़ार कर रहा था।
उसने कहा- ओये जानेमन! हम तुम्हारा कब से इंतज़ार करता है! आ जाओ हमारा कम्बल में!
फिर कम्बल में आने के बाद उसने अपनी बाँहों में जकड़ लिया। उसका दूसरा साथी सोया हुआ था या सोने का नाटक कर रहा था। धीरे-धीरे उसने मेरी स्वेटर और कमीज़ ऊपर सरका दी और मेरे पेट को चूमता हुआ ब्रा के पास तक होंठ ले आया। पहले ब्रा के ऊपर हाथ फेरता रहा, फिर हल्के से ब्रा ऊपर सरका दी। दोनों चूचियों को अपने हाथ में लेकर मसलने लगा। मैंने आँखें बंद कर ली और मस्ती से भर गई।
मेरे चुचूक सख्त हो गए थे। फिर उसने मेरा दूध पीना शुरू कर दिया और दूसरे चुचूक को हाथ से सहलाता रहा। मेरी योनि पूरी तरह गीली हो रही थी। मैं पूरी गर्म हो गई थी और आँखें बंद की हुई थी। तभी मुझे एहसास हुआ मेरी एक चूची तो अंजुम के मुंह में थी तो दूसरी भी कोई चूस रहा है।
मैंने आँखें खोली तो देखा मुश्ताक भी चूची-पान कर रहा था। मैं अब क्या बोलती! बल्कि और ज्यादा ही मस्त हो गई। अब आप ही बतायें कि जिसके दोनों स्तन चूसे जा रहे हों वो कैसे सब्र कर सकती है। मैं तो स्खलित हो गई और दोनों के बालों में हाथ फेरने लगी। Hindi Sex Stories
सीमा को अलवर गए हुए Antarvasna एक हफ्ता बीत चुका था और इस एक हफ्ते में मैंने वो नजारे देखे थे जिनकी जीवन में कभी उम्मीद नहीं की थी। पायल जैसी हसीन और जवान लड़की मुझसे चुदवायेगी, मैंने सोचा न था।
खैर अगले दिन सुबह नाश्ता करके मैं बैंक चला गया और दोपहर को जब लंच करने आया तो पहले पायल की चूत मारी फिर खाना खाया और बैंक वापस चला गया। शाम को घर आया और कपड़े उतार कर सीधे नहाने के लिए बाथरूम घुस गया।
अभी नहाया ही था कि किसी ने दरवाजे पर दस्तक दी, मैंने जल्दी से तौलिया लपेटा और दरवाजा खोलने आ गया। दरवाजा खुलते ही देखा कि मेरी सीमा डार्लिंग हाथ में मिठाई और फ्रूट से भरी थाली पकड़े खड़ी थी, जो वह अलवर से लाई थी और मेरा हिस्सा मुझे देने आई थी। मैं दरवाजा खुला छोड़कर अपने कमरे की तरफ चल दिया मेरे पीछे पीछे वो भी मेरे कमरे में आ गई, सीमा ने थाली को पलंग पर रखा और मेरे सीने से लगकर मुझे चूमने लगी। मैंने अपने दोनों हाथों से उनके चूतड़ों को दबाया और उनका गाउन कमर तक उठाकर तौलिए में से अपना लंड निकला और पैंटी के ऊपर से ही उनकी चूत पर रखकर दबा दिया।
सीमा बोली- अभी जाने दो ! राजा रात को आऊंगी, दरवाजा खुला रखना।
मूल चंद और मैं जब रात को डिनर कर रहे थे तो सीमा बार बार गुनगुना रही थी- रस्ता हमारा तकना ! दरवाजा खुल्ला रखना !
इसका अर्थ सिर्फ मैं समझ पा रहा था। खाना खाकर अपने कमरे में आया तो तुरन्त नींद आ गई। जब से सीमा और पायल की पुंगी बजानी शुरू की थी, रात को नींद खूब आती थी। रात को लगभग १२ बजे मेरी नींद खुल गई, देखा सीमा मेरे बगल में लेटी है और मुझे सहला रही थी। मैंने उसे अपनी बाहों में ले लिया, नंगा किया और अपना लंड उसके हाथ में दे दिया, उसने पहले तो अपने हाथों से लंड को सहलाया, फिर अपने मुंह में ले लिया। थोड़ी देर चूसने के बाद जब लंड बहुत टाइट हो गया तो वह लेट गई, मैं उसकी टांगों के बीच आ गया, अपना लंड उसकी चूत के होठों पर रगड़ने लगा तो बोली- राजा, देर न करो ! बहुत भूखी है यह ! अब डाल दो।
मैंने देर नहीं की, एक तकिया उसकी गांड के नीचे रखकर अपने लंड का सुपाड़ा उसकी बुर के मुंह पर रखा और एक झटके में पूरा लंड अन्दर कर दिया तो मुझे चूमने लगी। डेढ़ घंटे तक चुदवा कर वो अपने घर चली गई।
अगले दिन से पायल ने स्कूल जाना शुरू कर दिया तो लंच के समय सीमा को चोदने में कोई दिक्कत नहीं थी। अब दिक्कत थी तो सिर्फ इस बात की कि पायल नहीं चुद पा रही थी, जिस वजह से मैं तो परेशान था ही, पायल मुझसे ज्यादा परेशान थी। आप खुद सोचकर देखिये १८ साल की जवान लड़की जो ८ दिनों में ३० बार चुदी हो और अब ४ दिन से उसने लंड का दीदार भी ना किया हो, वो परेशान होगी या नहीं?
मैंने इसका भी एक रास्ता निकाला, रात को खाना खाते समय मैंने पूछा- पायल तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है?
इससे पहले कि पायल कुछ जवाब दे, सीमा बोली- बाकी सब विषयों में तो ठीक है, लेकिन इसका गणित बहुत कमजोर है, डरती हूँ कहीं फ़ेल ना हो जाए।
मैंने कहा- आपको घबराने की कोई जरूरत नहीं है, मैं दो महीने पढ़ा दूंगा तो ८०% से ज्यादा नंबर लाएगी। बस समस्या समय की है, उसका भी कोई रास्ता निकल आएगा।
काफी देर के विचार विमर्श के बाद तय हुआ कि रात को खाना खाने के बाद १० से ११ बजे तक पायल मुझसे गणित पढ़ा करेगी और यह काम आज से ही चालू।
मैं खाना खाकर अपने कमरे में आ गया, करीब आधे घंटे बाद पायल आई और आते ही मुझसे लिपट गई। मैंने उसे अपने से दूर करते हुए कहा- एक दो दिन धैर्य रखो, अभी हो सकता है तुम्हारे घर वाले हम पर नज़र रख रहे हों !
मैंने उसे पढाना चालू किया, लगभग ११.३० बजे सीमा आई, दरवाजा खटखटाया, मैंने तुंरत खोला।
सीमा बोली- चलो बेटी ! बहुत देर हो गई, अब अंकल को सोने दो !
पायल ने कहा- बस ये सवाल कर लूं, फिर आती हूँ !
मैंने कहा- भाभी जी आप ५ मिनट रुकिए, इसका काम हो गया है।
दूसरे दिन रात के १२ बजे तक पायल पढ़ती रही तो सीमा आई और बोली- चलो बेटी, १२ बज गए, हमें सोना भी है।
तो पायल ने कहा- आप लोग सो जाओ। मैं यहीं दीवान पर सो जाऊंगी।
मैं तपाक से बोला- यहाँ कैसे सो जाओगी, यहाँ सोना है तो कल से सोना और अपना कम्बल लेकर आना, क्योंकि मेरे पास एक ही कम्बल है।
माँ बेटी दोनों हंस दीं और चली गईं।
अगले दिन शाम को मैं बैंक से लौटा तो चाय पीने सीमा के घर चला गया, कहने लगी- पायल पास तो हो जायेगी ना?
मैंने कहा- आप बिल्कुल फ़िक्र ना करें, अगर आप ना बुलाएं तो वो शायद २ बजे तक भी मुझे ना छोड़े, कहे पढ़ाते रहिये।
सीमा बोली- आज उसे एक कम्बल दे दूँगी, जब तक पढ़े, पढ़े, उसके बाद वहीं दीवान पर सो जायेगी।
रात को खाना खाकर पायल आई, अपना कम्बल दीवान पर रखते हुए उसने मुझे शरारती नज़रों से देखा तो मैंने कहा- १२ बजे तक पढ़ो, फिर देखेंगे।
ठीक १२ बजे पायल बोली- सर, १२ बज गए आज की कोचिंग खत्म। अब आप के फीस लेने का टाइम हो गया।
मैंने ड्राइंग रूम की लाइट बंद की और पायल को गोद में उठाकर अपने बेडरूम में ले आया। उसके कपड़े उतार कर नंगा कर दिया और अपने कपड़े उतारने लगा तो बोली- मैं एक मिनट में सुसू कर के आ रही हूँ !
मैंने कहा- रुको, मैं भी चलूँगा, मुझे भी सुसू आई है !
कहने लगी- मैं आपके सामने सुसू नहीं करूंगी ! मुझे शर्म आएगी !
मैंने खुले शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा- जिस चूत में मेरा लंड लेते हुए शर्म नहीं आती उसमें से मेरे सामने सुसू करने में शर्म आती है?
मैंने उसका हाथ पकड़ा और दोनों बाथरूम में घुस गए, बाथरूम काफी बड़ा था। सुसू करने के बाद मैंने वहीं उसकी एक टांग उठाकर अपने हाथ में ली और अपने लंड का सुपाड़ा उसकी चूत पर रख दिया।
पायल कसमसाते हुए कहने लगी- जान बेड पर ले चलो।
मैंने लंड को चूत के अन्दर किया और उसी हालत में उसे बेड पर ले आया।
उस रात के बाद से मेरा टाइम टेबल सेट हो गया- दिन के १ बजे सीमा की चूत और रात के १ बजे पायल की चूत।
श्री श्री मूल चंद जी मनवानी जब पहली तारीख को किराया लेते हैं तो उन्हें मालूम ही नहीं होता कि इस किराये के बदले में मैं क्या क्या सुविधा ले रहा हूँ।
आशा है आपको मेरी कहानी पसंद आई होगी। Antarvasna
मेरा नाम सुरेश है और मैं बहादुरगढ़ Hindi Sex Stories में रहता हूँ। मैंने अब तक की अंतर्वासना की सारी कहानियाँ पढ़ी हैं। आज मैं भी पहली बार आप सब को अपनी एक सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ। हमारे सामने वाले घर में एक परिवार रहता है, पति पत्नी और उनके 3 बच्चे।
सॉरी दोस्तो! मैं अपने बारे में तो बताना भूल ही गया।
मैं 27 साल का 6 फ़ीट लंबा और ठीकठाक दिखने वाला लड़का हूं और मेरा लण्ड 9″ लंबा और 3″ मोटा है।
घर के सामने वाली आंटी का नाम रिया है। वैसे वो ज्यादा उमर की नहीं है, 37 या 38 की है। दिखने में वो थोड़ी मोटी है। उनका फिगर 38-38-40 है। मैं अक्सर उनके घर जाने के बहाने ढूंढता रहता हूं. क्योंकि मैं आंटी को बहुत पसंद करता हूँ।
उन के पति का प्रोपर्टी का काम करते हैं और वो ज्यादातर घर पे लेट आते हैं, हमेशा नशे में रहते हैं और कई बार तो आंटी की पिटाई भी करते हैं। जब वो आंटी को मारते हैं तो मेरा दिल करता है कि मैं उनकी जम के पिटाई करूँ।
एक दिन अंकल ने आंटी की जम के पिटाई की। अगले दिन जब अंकल घर से चले गए तो मैं उन के घर गया। आंटी लेटी हुई थी। वो हमेशा सलवार-कमीज़ पहनती हैं। जब मैं वह पहुँचा तो उनकी आँखे बंद थी और उन का कमीज़ उनके पेट के उपर तक उठा हुआ था। मैं वहाँ खड़ा थोड़ी देर तक उनको देखता रहा। थोड़ी देर बाद जब वो थोड़ा हिली तो मुझे उनकी कमर पर कुछ निशान दिखे। तब तक आंटी ने भी मुझे देख लिया था कि मैं उनको घूर रहा हूँ। उन्होंने झट से अपना कमीज़ नीचे कर लिया और पूछा- तुम कब आए?
मैंने कहा- बस थोडी देर हुई है, आप सो रही थी तो मैंने आप को उठाया नहीं, क्योंकि मैंने कल रात भी आप के घर से झगड़े की आवाजें सुनी थी।
यह बात सुन कर आंटी ने अपना सर नीचे कर लिया। फ़िर मैंने कहा- मैंने अभी आप की पीठ पर कुछ निशान देखे हैं।
तो वो खड़ी हो गई और बोली- कुछ नहीं है, वो तो बचपन से ही हैं।
तो मैंने पूछा- कैसे लगे थे?
तो वो थोड़ा सोचने लगी।
तभी मैं बोला- ये बचपन के नहीं, कल रात के हैं।
उन्होंने फ़िर से कहा- नहीं बचपन के हैं!
मैंने कहा- दिखाओ, मैं देखना चाहता हूँ कि कब के हैं!
तो वो मना करने लगी, मैंने जबरदस्ती उनको पकड़ कर दूसरी तरफ़ घुमा दिया और उनका कमीज़ ऊपर उठाने लगा, वो मना करने लगी पर मैं कहा मानने वाला था बिना देखे!!
जब मैंने देखा तो अंकल ने उन्हें अपनी बैल्ट से मारा था।
मैंने पूछा- ये बैल्ट के हैं?
तो वो रोने लगी और मेरे गले लग गई। मुझे आंटी पर दया आ रही थी और अच्छा भी लग रहा था कि जिसे मैं इतने दिनों से अपनी बाहों में लेना चाहता था वो आज मेरी बाहों में थी चाहे किसी भी कारण से!
फ़िर मैंने आंटी को सोफे पर बिठाया और पूछा- यह क्यों हुआ?
तो वो और ज्यादा रोने लगी। मैं उनके पास बैठ गया और उनके चेहरे को पकड़ कर पूछने लगा तो वो बोली- क्या बताऊँ, यह तो रोज का काम है!
मैंने पूछा- बात क्या है?
तो वो बोली- मैं यह बात तुम्हें कैसे बताऊँ?
तो मैंने कहा- आप मेरे ऊपर विश्वास कर सकती हो!
तो वो बोली- मैं तुम पे विश्वास करती हूँ पर कैसे बताऊँ! मैंने ज्यादा जोर दिया तो वो बताने के लिए तैयार हो गई। वो कहने लगी- तेरे अंकल हर रोज रात को लेट आते हैं, नशे में होते है और वो रात में मेरी चुदाई करते हैं और जल्दी ही झड़ जाते है। जब मैं उन को यह कहती हूँ कि इतनी जल्दी हो गया तो मेरी पिटाई करते हैं। न तो वो मेरा पूरा करवाते हैं और ऊपर से पिटाई भी करते हैं। अब तुम ही बताओ मैं क्या करूँ?
और वो फ़िर से रोने लगी। मैंने उन को गले से लगा लिया और कहा- आंटी अगर आप गुस्सा न करें तो इस काम में मैं आप की मदद कर सकता हूँ!
वो मेरे सीने से लगी लगी पूछने लगी- किस काम में?
तो मैंने कहा- जो अंकल नहीं कर पाते! फ़िर आप की पिटाई भी नहीं होगी!
आंटी ने मेरे गले से लगे लगे ही कहा- तुम तो मेरे से बहुत छोटे हो!
मैंने कहा- तो क्या हुआ! मैं आपको बहुत पसंद करता हूँ। आंटी की पकड़ धीरे धीरे टाइट होती जा रही थी। मैंने भी आंटी की कमर पे हाथ घुमाना शुरु कर दिया था, उनको भी मजा आने लगा था, मेरी लाइन साफ़ थी। मैंने आंटी के चेहरे को हाथों में पकड़ लिया, आंटी ने आँखे बंद कर ली थी, मैंने अपने होंठ उनके मुलायम होठों पर रख दिए। आंटी ने मुझे कस के पकड़ लिया और मेरी किस का पूरा जवाब देने लगी।
मैं आंटी के कूल्हों को पकड़ कर दबाने लगा। फ़िर आंटी को सोफे पे लिटा कर उनके ऊपर लेट गया और उनके दोनों स्तनों को दबाने लगा। आंटी पूरी तरह मस्त हो गई थी। मैं आंटी को 20 मिनिट तक किस करता रहा। उसके बाद आंटी ने कहा- मैं दरवाजा बंद करके आती हूँ, कोई आ गया तो?
आंटी दरवाजा बंद कर के जैसे ही वापस आई, मैं एक बार फ़िर से उन पे टूट पड़ा और उनके सारे कपड़े निकाल दिए। उन्होंने भी मेरे सारे कपड़े निकाल दिए। आंटी मेरे लण्ड को देख कर एकदम बोली- इतना बड़ा लण्ड!!
मैंने कहा- आंटी! ज्यादा बड़ा थोड़े ही है! सारा का सारा तुम्हारी चूत में आ जाएगा!!
तो वो बोली- आराम से करना! नहीं तो मैं मर जांऊगी, बहुत दर्द होगा।
हम दोनों बेड पर लेट गए और फ़िर से किस करने लगे। आंटी मेरे हथियार से खेल रही थी ओर मैं अपनी ऊँगली से उनको चोद रहा था और एक हाथ से उनकी चूची दबा रहा था और किस कर रहा था। आंटी की चूत पूरी गीली हो चुकी थी। अब मैं उनकी चूची चूस रहा था और वो जोर जोर से मेरा लण्ड हिला रही थी। थोड़ी देर बाद उन्होंने मेरा लण्ड मुँह में ले लिया और लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। मुझे बड़ा मजा आ रहा था।
5 मिनट लण्ड चूसने के बाद वो बोली- बस अब नहीं रहा जाता, जल्दी से अंदर डाल दो!
तो मैं उन की टांगो के बीच में आ गया और उन के उपर लेट गया और किस करने लगा। तो आंटी ने अपने पैरों से मेरी कमर को जकड़ लिया और मेरा लण्ड पकड़ कर अपनी चूत में डाल लिया। मैंने एक जोर को धक्का दिया और आधे से ज्यादा लण्ड उनकी चूत में घुस गया और उन के मुँह से आह निकल गई।
वो बोली- थोड़ा धीरे!
पर मैं कहा सुनने वाला था, मैंने एक और धक्का मारा और पूरा लण्ड आंटी की चूत में चला गया। उन्होंने मुझे जोर से पकड़ लिया.और कहा कि थोड़ा रुक जाओ।
मैंने उनकी एक न सुनी और धक्के पे धक्के मारने लगा। थोड़ी देर बाद वो भी चुदाई का पूरा आनंद लेने लगी।
थोड़ी देर बाद वो बोली- जल्दी जल्दी करो! मैं झड़ने वाली हूँ!
तो मैंने अपने स्पीड बढ़ा दी और आंटी झड़ गई। वो बहुत खुश लग रही थी। फ़िर मैंने अपना लण्ड निकाल लिया और आंटी को कुतिया वाले स्टाइल में आने को कहा, तो वो बेड के किनारे पे झुक गई कुतिया की तरह।
अब मैं आंटी के पीछे से डाल रहा था और वो भी आगे पीछे हो रही थी। मैंने अपनी ऊँगली उनकी गांड में डाल दी तो वो बोली- यहाँ कुछ नहीं करना!
लगभग 15 मिनट बाद मैंने आंटी की चूत में अंदर तक डाल कर अपना सारा माल उनकी चूत में डाल दिया। उस दौरान आंटी भी दो बार झड़ चुकी थी। मैं आंटी को वैसे ही उलटी लेटा कर उन के उपर लेट गया बिना अपना लण्ड निकाले। मैं 15 मिनट तक आंटी के ऊपर लेटा रहा। फ़िर मुझे लगा कि मेरा हथियार फ़िर से खड़ा हो रहा है।
मैं आंटी के उपर से उठा तो वो मेरे लण्ड को देख के बोली- यह तो फ़िर से तयार हो रहा है! आज के लिए इतना ही बस, बाकी कल!
मैंने कहा- बस एक बार और!
पहले तो आँटी मना करती रही फ़िर वो मान गई। फ़िर हमने मजे किए। मैंने आंटी की गांड भी मारी। बाद में हमने क्या क्या किया यह मैं अगली कहानी में बताऊंगा। आपको यह कहानी कैसी लगी, जरुर बताना!
मैं कॉल बॉय टाइप लड़का बनाना चाहता हूँ। Hindi Sex Stories
अजय अपनी गर्ल फ़्रेन्ड Antarvasna Stories को साथ लेकर चोदने के लिये गेस्ट हाऊस पहुँचा, अपने कमरे की चाबी लेकर जाने के लिये सीढ़ियाँ चढ़ ही रहा था कि सामने से आते युगल पर उसकी नजर पड़ी। सामने उसके दोस्त की बहन राधिका किसी अजनबी के साथ बाहर आ रही थी। अजय की समझ में आ चुका था कि राधिका चुदवा कर आ रही है। अजय को देख कर राधिका का चेहरा फ़क हो गया। मगर अजय जैसे कुछ भी ना देखने का अभिनय करते हुये अपनी गर्ल फ़्रेन्ड को ले कर कमरे में आ गया। वे दोनों लगभग दो घण्टे तक चुदाई करके होटल से बाहर निकले।
अजय लखनऊ से दिल्ली आ कर नौकरी कर रहा था। राधिका भी दिल्ली में किसी सोफ़्ट्वेयर कम्पनी में काम कर रही थी। दिल्ली में उन्होंने एक दूसरे को पहली बार देखा था, जबकि अजय का लखनऊ में राधिका के घर आना जाना था। राधिका का भाई अजय का दोस्त था।
अजय और उसकी गर्ल फ़्रेन्ड जब होटल से निकले तो उसने देखा कि राधिका रिक्शा स्टेण्ड के पास खड़ी उसी को देख रही थी। अजय ने राधिका को देखा और मुस्करा दिया।
राधिका भी मुस्करा दी और बोली,”मुझे तुमसे बात करनी है… प्लीज इधर आओ !”
“ओह, क्यों नहीं, बताओ कि तुम कैसी हो और दिल्ली में कहाँ रहती हो?”
“एक सहेली के साथ एक फ़्लेट किराये पर लिया है… ”
“चलो, कहीं कॉफ़ी पीते हैं, वहीं बातें करेंगे।”
दोनों एक कॉफ़ी हाऊस में पहुँच गये।
अजय बताने लगा,”मै भी तुम्हारी तरह एक दोस्त के साथ किराये पर मधुवन सोसाइटी में एक फ़्लैट में रहता हूँ, यहाँ से दो किलोमीटर दूर है।”
“और वो लड़की … ?”
“उह्ह्ह, वो तो मेरी एक दोस्त है, घर पर मेहमान आये हुये थे तो हम दोनों यहाँ आ गये। देखो किसी को घर में बताना मत !”
राधिका ने अजय की आँखों में झांका, उसे कुछ अपनापन सा लगा।
“अजय मैं तुम्हारा अहसान मानूंगी, प्लीज मेरी भी कोई बात घर में किसी को मत बताना, बोलो ना, मानोगे मेरी बात?”
“अरे राधिका, मै कोई तुम्हारा दुशमन थोड़े ही हूँ, अगर मेरी वजह से तुम पर कोई आंच आये तो लानत है मुझ पर, मैं भी चोर, तू भी चोर !”
“थैन्क्स अजय, तुमने मेरे दिल का बोझ उतार दिया !”
बातों बातों में राधिका थोड़ा खुलने लगी थी। वो भी अभी चुद कर आई थी, सो अजय ने सोचा कि ये तो पट सकती है। वैसे भी राधिका को घर में उसकी भारी और चौड़ी गाण्ड देख कर उसका लण्ड जोर मारने लगता था। उसे लग रहा था कि उसे चोदना अब और आसान है और राधिका भी जान चुकी थी कि वो रंगे हाथ पकड़ी गई है। उसे लगा कि अब फ़ासला अधिक नहीं है।
“हम दोनों यहाँ पहली बार मिले मिले हैं, चलो आज मैं तुम्हें खाना खिलाऊंगा, घर पर तो तुमने कई बार खिलाया है।”
“पर कहाँ चलें… ?” राधिका थोड़ा सा हिचकचाई।
“होटल में तो मजा नहीं आयेगा, खाना लेकर फ़्लैट पर चलें, अच्छा रहेगा ना … फिर किसी की नजर में भी नहीं आयेंगे !”
“तुम्हारा दोस्त क्या कहेगा… ?” वो भी कुछ कुछ आश्वस्त हो चुकी थी।
“वो तो अपने जीजू और बहन के साथ चार दिन के लिये अब तक तो जा चुका होगा।”
“तो चलो, मैं अपनी सहेली को फोन कर देती हूँ कि मुझे आज देर हो जायेगी।”
“हाँ ये भी कह देना कि आज रात ना भी आ पाऊँ तो चिन्ता मत करना।”
राधिका ने मुझे तिरछी नजरों से देखा और मुस्करा दी। अजय भी यह देख कर मुस्करा दिया। दोनों ने एक दूसरे के दिल की बात समझ ली थी।
अजय सामने के होटल में जाकर दो तन्दूरी चिकन और कुछ चपातियाँ ले आया, रास्ते से उसने एक व्हिस्की की बोतल भी ली और फिर दोनों घर पहुंच गये।
अजय ने खाने का सामान राधिका को दे दिया और कहा,”मै अभी स्नान करके आ रहा हूँ… तब तक तुम खाना लगाओ।”
“हाँ पहले तुम नहा लो, फिर मैं भी पानी डाल लूंगी। कितनी गर्मी है ! है ना?”
“अरे तो फिर क्या बात है… आ जाओ, साथ ही नहा लेते हैं… तुम अपना मुख उधर कर लेना और मैं दूसरी तरफ़ कर लूँगा।”
“धत्त … तुम देख लोगे !” उसकी तिरछी नजर कह रही थी कि नहीं देखोगे तो मैं बुरा मान जान जाऊँगी।
“तुम्हारी कसम, नहीं देखूँगा !” उसने भी जैसे आँख मार कर बता दिया था कि एक बार कपड़े तो उतारो…
“तो ठीक है चलो… ! ” उसने अपने कपड़े उतार दिये और ब्रा और पेन्टी में आ गई।
अजय ने भी कपड़े उतार लिये और मात्र छोटे से अंडरवियर में आ गया। राधिका ने एक नजर अजय के लण्ड पर डाली। उसे देख कर उसे वो बहुत बड़ा लगा। अजय भी राधिका के मस्त उभारों को देखने लगा था। उसका हाल तो राधिका की जवानी देख कर ही खराब हो गया था।
“ना… ना… कोई जरूरत नहीं है मुँह उधर करने की… !” राधिका की नजर अब भी उसके मोटे फ़ूले हुये लण्ड पर थी। अजय ने उसका मतलब भांप लिया और उसे एक झटके में फ़व्वारे के नीचे ले लिया। दोनों भीगने लगे थे, पर उनके दिलों में आग भड़कने लगी थी। अजय ने राधिका के गीले बदन को अपनी बाहों में ले लिया और उसे सहलाने लगा। इसी बीच राधिका की ब्रा का एक भाग कंधे से उतर गया और उसका एक स्तन बाहर निकल पड़ा। जोश में अजय ने उसके स्तन भींच दिये। जवाब में बस राधिका के मुख से एक सिसकारी निकल पड़ी।
अजय का भारी लण्ड तन कर सीधा खड़ा हो गया। राधिका ने भी तड़प कर उसे खींच कर अंडरवियर से उसे बाहर निकाल लिया। उसे तो वो एनाकोन्डा जैसा मोटा लगा,”अजय, यह तो ! हाय राम ! कितना मोटा है ! बिल्कुल एनाकोन्डा की तरह !”
“बस तुम्हारा ही है, इसे एक बिल चाहिये समाने के लिये !”
“चलो फिर कोशिश करते हैं इसे बिल में समाने की !” राधिका मचलते हुये बोली।
दोनों ही हंस पड़े। वे दोनों नहा कर बाहर आ गये और वैसे ही आधे नंगे से गीले ही बैठ गये। अजय ने व्हिस्की के दो पेग बनाया और पी गये। कुछ ही देर में दोनों में दारू की तरावट आने लगी।
“राधिका, वहाँ होटल में तुम चुदाने गई थी ना?”
“जब मालूम है तो पूछते क्यों हो… जब प्यास लगे तो बुझानी तो पड़ती है ना !”
“उस मादरचोद को तो मजा आ गया होगा, भेन का लौड़ाऽऽ मेरी राधिका को चोद गया !”
“धत्त, ऐसे क्या कहते हो, चूत को चुदानी ही पड़ती है ना … तू भी चोद ले … ”
“वो तो भोसड़ी की, चुदेगी ही, मेरा लण्ड देख कितना जोर मार रहा है !”
“जरा पास ना , हाय तेरे एनाकोन्डा को मै अपनी चूत में छुपा लूँ… तू भी कितना चिकना है… साले के चिकने गालों को काट खाऊँऽऽ … ”
“तेरी मां की भोंसड़ी, आ बैठ जा मेरे एनाकोण्डा पर… ”
अजय का मन राधिका के चूतड़ों पर आ चुका था, दूसरा पेग पीते हुये उसकी पिछाड़ी को उसने दबा दिया। उसकी पसन्द की थी उसकी मोटी गाण्ड ! उसे खींच कर उसके चूतड़ों पर अजय ने अपने दांत गड़ा दिये। राधिका भी अपने चूतड़ों को बार बार दांत से कटवा कर मस्ती से मचल रही थी।
“हाय राधिका, तेरी गाण्ड ने तो मेरा जीना दुश्वार कर दिया था, आज मिली है, कसम से पूरी तबीयत से मारूँगा, गाण्ड मरवाओगी ना मेरी जान?”
राधिका अपनी गाण्ड मटकाते हुए बोली,”आह्ह्ह, नेकी और पूछ पूछ ! मारो मेरे चोदू बालमा, तुम्हें कसम है जानू ! मेरी चूत को अपने दोस्त की नहीं, दुश्मन की चूत समझ कर चोदना !”
“सोच लो रानी ! फिर मुकर मत जाना?” अजय अपने एमाकोन्डा जैसे लण्ड को हाथ में लेकर गरूर से बोला।
“मुकर भी जाऊँ तो भी तुम मुझ पर रहम मत करना, एक राण्ड की तरह फ़ोड़ना मुझे !” राधिका इठलाती हुई बोली।
“हाय मेरी रण्डी यह हुई बात, चल झुक जा भेन की लौड़ी, तेरी गाण्ड में मेरा लण्ड घुसे तो चैन आए !” यह कहते हुये राधिका को फ़र्श पर खड़ा करके बेड पर पर उसे झुकाते हुये लण्ड को गाण्ड के छेद पर प्यार से टिकाया।
“अब तक कितने लण्ड पिलवाये हैं गाण्ड में मेरी रानी?”
“हाय राम , अब क्या कहूँ मैं, जिससे भी चुदवाती हूँ, हर एक ने मेरी को बजाये बिना नहीं छोड़ा… ”
“मैं भी नहीं छोड़ने वाला रण्डी, मां की भोसड़ी… ” कहते हुये अजय ने जो करारा थाप मारा कि पूरा लण्ड बिना थूक या तेल के गाण्ड में चाकू की तरह धंस गया।
आह्ह्ह्ह की चीख के साथ राधिका उछल कर बेड पर जा गिरी,”हाय मार डाला साले, भेन चोद, मेरी जान ही निकाल दी… ”
“मेरी रानी, इतना मस्त शॉट मारा था, इतनी दमदार गाण्ड ले कर किसी कमसिन की तरह चीखती हो।”
राधिका अपनी गाण्ड सहलाते हुये बोली,”सुनो मिस्टर, मैंने तुम्हें अपनी गाण्ड चोदने को कहा था, गाण्ड की मां चोदने को नहीं कहा था ! साले हरामजादे तुम तो मेरी गाण्ड को फ़ाड़ डालने पर आमदा हो?”
“कमाल करती हो रानी, तुम्हारी गाण्ड बिल्कुल नहीं फ़टेगी, पूरा चिकन तन्दूरी खा गई और मेरे लौड़े से घबरा गई?”
“मुर्गा तो मैंने, भोसड़ी के, मुँह से खाया था, गाण्ड से नहीं, समझे?”
“अब खा लिया है तो निकलेगा तो गाण्ड ही से ना, मेरी रण्डी !”
“लगता है मेरी गाण्ड को फ़ाड़ कर ही मुर्गा निकालोगे, क्यों है ना?”
“ओह्ह्ह हो, डार्लिंग अब कायदे से मारूंगा !” कह कर वो तेल की शीशी उठा लाया और अपने लण्ड पर और राधिका की गाण्ड में उसे अच्छी तरह से लगा दिया।
फिर लण्ड के लाल सुपारे को छिद्र पर सेट कर फिर से हौले धक्का मारा। लण्ड राधिका की गाण्ड में ऐसे उतर गया जैसे मक्खन पर में छुरी घुसती है, दूसरे शॉट में पूरा लण्ड उसकी गाण्ड में फ़ंस गया। राधिका के चूतड़ों पर सने तेल के कारण लण्ड हर एक थाप पर चप-छपक की आवाज कर रहा था। दोनों हाथों से उसके स्तनों को तेल से मसलते हुये अजय गाण्ड का पूरा मजा ले रहा था,”कैसी हो मेरी रण्डी … गाण्ड चुदने का मजा आ रहा है ना?”
“मार दे रे हारामजादे, फ़ाड़ डाल इन चूतड़ों कोऽऽ ! बजा दे गाण्ड का बाजाऽऽ आ ऽऽ ह !”
राधिका की आंखों में दोगुना नशा था, एक तो अजय की पिलाई हुई व्हिस्की का, और दूसरा उसकी गाण्ड में फ़ंसे हुये एनाकोन्डा का… !
राधिका बिस्तर के सामने लगे आईने में देख कर रण्डी नम्बर एक जैसे भाव दिखा रही थी।
“हाय और मारो राजा, मेरे चोदू छैला, जोर से मारो मेरी गाण्ड, हाय रे तेरा मस्त लौड़ा, मैं तो हारामजादे रण्डी बन गई, हाय अजय मुझे गालियाँ दे ! भेनचोद, रण्डी, चुदैल, छिनाल बुला मुझे साले ! तेरी मां की चूत !”
अजय भी जोर जोर से मस्त करारे थाप मार रहा था।
“ले खा भोसड़ी की, मेरा लौड़ा खा जा, साली कुतिया तुझे तो एक दिन अपने रूममेट के साथ मिल कर चोदूंगा, भेन की लौड़ी, तुझे तो तेरी माँ के सामने चोद चोद कर तेरी चूत का भोंसड़ा बना दूँगा, तेरी मां दी फ़ुद्दी… हाय क्या गाण्ड है तेरी तो साली, तुझे तो कॉल गर्ल होना चाहिये था छिनाल !”
राधिका भी बेशरमाई पर उतर आई थी। शराब का नशा, तिस पर चुदाई, वो तो बेहयाई पर आ चुकी थी,”गाण्डू, साले मुझे मेरी मां के सामने चोदेगा तो मम्मी भी नंगी हो कर तेरे नीचे लेट जायेगी, तेरे लण्ड को देख कर वो भी रण्डी बन कर तेरा लौड़ा खायेगी, मादरचोद साले चोद मुझे पटक पटक कर, रन्डी बना कर चोद सजना, आज हलाल कर दे मुझे, जैसे कसाई बकरे को हलाल करता है, तड़पने दे मुझे, तेरी तो भेन की चूत ! तेरी बहन चुदवा दूंगी तेरे लौड़े से !”
अजय इस प्रकार की बातों से मदहोश हो रहा था, उसकी रफ़्तार बढ़ गई। राधिका उसके नीचे मछली की भांति तड़प रही थी। वो राधिका के चूतड़ों से चिपट कर उसकी गाण्ड तबीयत से मार रहा था, लण्ड पेल रहा था। इतनी तन्दरुस्त और सुंदर भारी गाण्ड पर रहम करना उसकी बेवकूफ़ी ही होती।
राधिका भी उसे ऐसा कोई मौका नहीं दे रही थी कि वो उसकी गाण्ड को चोदना छोड़ दे। हर बात पर वो तो नहले पर दहला मार कर अपनी त्रिया चरित्र की मां चोद रही थी।
अचानक अजय ने राधिका के दोनों हाथ पकड़ कर पीछे खींच लिये और उसके ही दुपट्टे से ही बांध दिया और बोला,”देख मेरी राधिका, मेरी रण्डी, मेरी छिनाल, तुझे अब मैं कैसे हलाल करके चोदता हूँ, मेरी जान, मेरी दोस्त मुझे माफ़ कर देना !”
राधिका आंखे नचा कर और चूतड़ों को मटका कर बोली,”मेरे भैया की तरफ़ से मैं तुझे माफ़ करती हूँ। मेरे सरताज़, बस अब लगा दो पूरा जोर, मुझे कुतिया बना कर चोद दो और कुत्ते की तरह लण्ड गाण्ड में फ़ंसा दो, बरबाद कर दो मुझे, रण्डी से भी गई गुजरी कर दो हाय रे, मेरे चोदू रण्डवे, ऐसा चोदना कि गाण्ड और चूत में कोई फ़रक करना मुश्किल हो जाये !”
उसके बालों को पकड़ कर अजय ने अपनी ओर खींच लिया, और इस बार का शॉट करारा था। राधिका को लगा कि जैसे अजय के एनाकोन्डा ने उसकी गाड फ़ाड़ कर रख दी है। उसके मुख से एक चीख निकल पड़ी, उसे लगा कि कोई आग का गोला गाण्ड की गहराई को भी फ़ोड़ता हुआ भीतर सुलग उठा हो। उसकी चीख को नजर-अन्दाज करते हुए उसका दूसरा भरपूर शॉट फिर से लगा।
वो तड़प उठी,”भोसड़ी के, मार डालेगा क्या … साला लौड़ा है कि लोहे का गरम रॉड … धीरे कर हरामी… मेरी मां चोद दी इस लण्ड ने तो !”
“चुप रह, कुतिया, अरे लण्ड लेना है तो लपक लपक कर ले, साली ऐसे चीख रही है कि जैसे तेरी माँ को चोद रहा हूँ !”
अब अजय ने अपना मोटा लण्ड को खुला छोड़ दिया और उसकी गाण्ड पर पूरे जोर से पटकने लगा। कुछ ही देर में वो फिर से मस्त हो उठी और उसकी चूत लपलपाने लगी।
“बहुत हो गया मादरचोद … मेरी चूत तेरा बाप चोदेगा क्या ?”
“ओह हाँ ! थोड़ा बहुत माल चूत के लिये भी तो बचाना पड़ेगा ना… चल अब सीधी हो जा !”
“नहीं, बहुत चोद लिया तूने ! अब मेरी बारी है … चल मेरे नीचे हो कर चुद अब तू !”
राधिका ने अजय को अपने नीचे दबा लिया,”मादरचोद मेरी गाण्ड का तो तूने हलवा बना दिया, अब देख साले ! तैयार हो जा… मेरी चूत में कितना दम है तू ही देख ले !”
राधिका उसकी टांगों के बीच बैठ गई। उसका हाथी की सूण्ड जैसा लण्ड उसने हिलाया। लाल सुपारा पूरे उफ़ान पर था, उस पर रह रह कर वीर्य की बूंदें उभर आती थी। यह देख कर वो मुस्कराई। उसने लण्ड जोर से अपनी चूत के द्वार पर थपथपाया और मुठ में भर कर उसे अपने योनि-द्वार में फ़ंसा लिया।
“तेरी मां की चूत, हो जा तैयार… देख तेरे लण्ड का कमाल मेरी चूत में… !” और उसने उसे चूत में घुसेड़ लिया। उसे एक झटके से भीतर उतार लिया और सिसक उठी। लण्ड के भीतर गहराई में फ़ंसने के बाद राधिका ने बदला लेने की गरज से कहा,”ओ मेरी भेन के लौड़े, तैयार है चुदने के लिये… ?”
“ओह्ह्हो, बड़ा दम मार रही हो, मेरे एनाकोन्डा के सामने सब फ़ेल हो जाते हैं !”
“देखूँ तो सही… फिर लण्ड पकड़ कर हाय हाय मत करना ? !!”
और राधिका ने अपनी कला दर्शा दी। उसने अपनी चूत जोर से भींच ली।
“मजा आ रहा है ना मेरे सजना ? इस कड़क चूत का… !”
“आह, कैसी मीठी मीठी सी चुदाई है !”
भींची हुई चूत उसने ऊपर खींची। अजय चीख पड़ा… “अरे लण्ड की चमड़ी फ़ट जायेगी… तेरी माँ की बहन को चोदूँ, भोसड़ी की… आह !”
राधिका ने अपनी भिंची चूत से अन्दर एक धक्का मारा। वो फिर से कराह उठा।
“अरे मेरी मां, ठीक से चोद ना !”
“मेरी कैसी फ़ाड़ी थी … कुछ याद आया… ?”
राधिका को भी अन्दर चोट पहुंच रही थी, पर अजय को सबक तो सिखाना था ना ! उसने उसी अन्दाज में तीन चार धक्के लगाये, अजय निढाल सा हो गया।
“बस मेरे राजा… अब मजा लो !” राधिका ने भी अपनी जिद छोड़ दी। उसे भी तो मजा लेना था ना !
और राधिका ने मस्ती की फ़ुहार छोड़ दी और भचाभच उसके लण्ड पर चूत मारने लगी। अजय बहुत अधिक नहीं सह पाया और उसका वीर्य छूटने को हो गया।
तभी राधिका का रज निकल पड़ा… वो उससे लिपट कर अपना रज निकालने लगी… पर उसने होश नहीं खोये। उसने तुरन्त अजय का लण्ड चूत में से निकाल लिया और धीरे धीरे मुठ मारने लगी। उसके सुपारे पर उसने अपने अधर खोल कर रख दिये।
अजय ने वीर्य छोड़ने से पहले एक हुंकार सी भरी और तीर की भांति उसकी पहली धार राधिका के हलक तक पहुंच गई। उसने लल्दी जल्दी लण्ड को मसला और बाकी का ढेर सारा वीर्य अपने मुख में चूस लिया। अजय झड़ कर निढाल पड़ा था। दारू का नशा भी उस पर पूरा था। राधिका भी थक कर पास में लेट गई। कुछ ही देर में व्हिस्की ने अपना असर दिखा दिया और दोनों गहरी नींद में सो गये।
कमरे में मात्र खर्राटों की आवाजे आ रही थी। जहाँ जहाँ वीर्य के कतरे पड़े थे वो वहीं सूख गये थे। जब उठे तो शाम ढल चुकी थी। दोनों ने फिर से स्नान किया और एक एक करके व्हिस्की के कई जाम दोनों ने पी लिये और बचा हुआ तन्दूरी मुर्गा साफ़ कर गये। व्हिस्की का नशा उन दोनों पर एक बार और चढ़ गया … और फिर कुछ ही पलों में कमरे में सिसकारियाँ गूंज उठी। Antarvasna Stories
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