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Sex stories- मेरा नाम सुमित है. मैं मुंबई में रहता हूँ. मैं आज से एक साल पहले मुंबई आया था. मैने जहा पर रूम किराये पर लिया था वहा एक आंटी भी रहती थी. मेरी आंटी से दोस्ती हूँ गई. आंटी की दो लडकियां थी. एक का नाम सुनीता और एक का नाम सिम्मी था. दोनों बहुत सेक्सी थी. एक थोडी मोटी थी जिसका नाम सुनीता था. बड़ी वाली एकदम सेक्सी और स्लिम थी. दोनों चोदने वाली चीजे थी. दोनों दूध की तरह गोरी थी. मैं रात दिन उनकू चोदने के बारे मैं सोचता रहता. कई बार मैं उनकू याद करके नगन करके ख्यालू मैं चोदता रहता था. उनकू याद करके मैं दिन मैं एक बार मुठ जरूर मरता था
एक दिन मेरी किस्मत खुल गई. मैने सिम्मी को उसके बॉय फ्रेंड के साथ गार्डन मैं फ्रेंच किस करते देख लिया. मैं वही पर उनका पीछा करते रहा. मैने मोबाइल से उनके फोटो भी ले लिए. शाम को जब वो घर वापिस आ रही थी तू मैने उसको रास्ते मैं रूक लिया. मैने उसे कहा पैदल जा रही हो आओ बाईक पे घर छोड़ दू पहले तो वो मन करती रही पर जोर डालने पर वो मान गई. मैने उसे बिठा लिया. रास्ते मैं मैने पूछा गार्डन मैं क्या कर रही थी. वो घबरा गई और कहने लगी कुछ नही. मैने कहा ज्यादा बनो मत मेरे पास तुम्हारे फोटो हैं. वो डर गई और मान गई. वो मेरी मिन्नतें करने लगी की घर पर मत बताना. मैने कहा एक शर्त पर नही बताऊंगा अगर तुम मेरे से चुदवाओगी. उसने कहा यह नही हो सकता. मैने कहा तो मैं बता दूंगा. वो मान गई और मुझे अपना मोबाइल नम्बर दिया और कहने लगी कल जहा कहोगे आ जाऊगी.
मैं खुश हो गया. रात भर कल का इंतज़ार करता रहा. सुबह होणे पर मैने अपनी दोस्त से रूम की चाबी ली. मेरा दोस्त सुबह जॉब पर जाता था और रात को घर आता था. मैने सिम्मी को फ़ोन करके वहीं बुला लिया. दोपहर को १२ बजे का मैने टाइम रखा. वो कॉलेज जाने की बजाये सीधे मेरे पास आ गई.. मैने उसे रूम मैं बैठाया. सबसे पहले उसे कोल्ड ड्रिंक पिलाया. उसने नीले रंग की जींस और टॉप पहन रखा था. जिसमें वो सेक्स सिम्बोल लग रही थी. मैं उसे उठा कर बेड पर ले गया उसे वहा लिटा दिया और साथ ख़ुद भी लेट गया. मैने उसको कस कर बाहों मैं ले लिया और पूरे बदन पर किस करने लगा. फिर मैने उसके मखमल जैसे ममे हाथो में लिए और धीरे २ दबाने लगा. वो सिसकिया भरने लगी आआया…. आया…. ह्ह्छ.. .मेरी मस्ती और बढ गई. बाद में मैं उसे समूच करने लगा. मैने उसे गोद मैं बिठाया और स्मोच और गहरा कर दिया. मैं कभी उसके मुँह मैं जीब डालकर उसे कसता कभी वो मेरे मुँह मैं अपनी जीभ डालती और उसे चूसता. १५ मिनट हम यही करते रहे.
वो पूरी तरह गरम हो चुकी थी. मैने कहा चल साली अब तेरे को नग्न करू और तेरे ममे पियू और तेरे को चोदूं. मैने उसे नग्न कर दिया. अब उसके बदन पर काले रंग की ब्रा और पेंटी थी. मैं उसके रूप को देख कर पागल हो गया और पूरे बदन को उसके चूमने लगा. मैं उसके पेट पर चुम्बन चोदता रहा और उसे सिस्क्किया देता रहा. मैने उसके पूरे बदन पर हाथ और मुह फेरता रहा.वोह स्स्स्स.. आःछ…….आआस्स्स्स….करती रही. उसके गोरे बदन पर गले मैं चैन और काली ब्रा और पेंटी उसे गजब रूप दे रही थी. फिर मैने उसकी पेंटी और ब्रा उतारी. अब वो पूरी तरहे नंगी थी. मैने उसके मम्मों को हाथ मैं भर लिया वो कड़क हो चुके थे. मैने उसके एक ममे को हाथ मैं लिया और दोसरे हाथ से उसके निपल को प्यार से दबाने लगा. वो पागल हो गई और सिसकिया भाते हुए मेरे साथ चिपट गई.
मैने कहा आज तेरे को चोद कर तेरे जुड़वा बच्चे पैदा करूगा. बोल कितनी बच्चे पैदा करेगी. वो कहने लगी प्लीज़ ऐसा मत करना मोहल्ले में मेरी बेइस्ती हो जायेगी. मैं हस पड़ा और कहने लगा फिकर मत कर तुझे प्रेग्नैन्सी पिल खिला दूगा. बाद मैं मैने कहा तेरे बॉय फ्रेंड ने कितनी बार तेरे को चोदा है. उसने कहा कभी नही. मैने कहा क्या २ किया उसने तेरे साथ. उसने उत्तर दिया सिर्फ़ पहला फ्रेंच किस जब तुमने देख लिया. मैं खुश हो गया की कुवारी फ़ुद्दी मिलेगी आज तो. मैं उसके ममे हाथ मैं लेकर निप्पल चूसने लगा. उसके गोरे म्मो पर काले निप्पल मस्त थे. मैं १५ मिनट मम्मे चूसता रहा और वो सिसकिया भरती रही. वो मेरे अंडरवियर से मेरा लंड टटोल रही थी. मैने अंडरवियर उतार दिया. मेरा लंड बाहर आ गया. वो मेरे लंड से खेलने लगी.
मैने उसे मुँह मैं लेने को कहा. वो मना करती रही. मैने उसके बालो से पकडा और मुँह में लंड घुसा दिया. बाद में वो उसे चूसने लगी अब उसे ७ इंच लंबा और मोटा लंड अच्छा लगा और वो उसे लोलीपोप की तरहे चूसने ली. मैने उसके सर को पकड़ा और मूह में ही वीर्य निकाल दिया. अब वो गुस्सा हो गई पर बाद में मैने कहा ऐसा नही करुंगा तो वो मान गई.फिर में उसके बदन से खेलता रहा और लंड के खडे होने का इंतज़ार करने लगा. लंड १० मिनट बाद दोबारा खड़ा हुआ. अब में उसकी फुदी को चाटने लगा. उसकी फुदी फूल गई तो मैने अपनी लंड को उसके मुँह में दे कर गीला किया, फिर फुदी पर रखा और जोर से झटका मारा और लंड फिसल गया. उसकी फुदी छोटी थी.
मैने दुबारा उसकी फुदी को खोला और लंड रखा और जोर से झटका मारा. आधा लंड अन्दर घुस गया.वो दर्द से तड़फ़ने लगी. कहने लगी मुझे माफ़ कर दो प्लीज़. मैं हंस पड़ा और एक और झटका देकर पूरा लंड अन्दर धकेल दिया. वो रोने लगी और कहने लगी मेरी गलतियां माफ़ कर दो मुझे छोड़ दो. मैं उसके ऊपर लेट गया और उसे समूच करने लगा और ममे चूसने लगा. अब दर्द कम होने लगा था . मैने दोबारा चोदना सुरु किया अब उसे मजा आने लगा. सिम्मी भी अब मेरा साथ देने लगी. कुछ देर बाद वो झड़ गई.में नही झडा. मैं लगातार लगा रहा वो छुटने का यतन कर रही पर में उसे पेलता रहा. में आधे घंटे बाद उसके झड़ने के बाद झड़ा. मैने उस दिन तीन बार अलग २ ऐन्गल से उसको चोदा. सिम्मी को मेरे दोस्त और मैने मिल कर कैसे चोदा और सुनीता की चुदाई की कहानी में अगली बार लिखूंगा.
तो दोस्तों कैसी लगी मेरी Sex stories मुझे लिखे
मेरा नाम कुसुम है। मैं मुम्बई में नौकरी करती हूं। मैं Antarvasna और मेरा भाई सुमित दोनों जुड़वां हैं. मैं बचपन से ही पढने में तेज थी तो इस वजह से घर में मेरे भाई को हमेशा डांट पड़ती थी कि देख तेरी बहन कितनी तेज है और तू नालायक …
मैं मुंबई में अकेली रहती थी एक बी एच के हाउस में मलाड में, एक साल बाद मेरे भाई का भी मुंबई में जॉब लग गया ..मम्मी पापा ने उसे मेरे पास ही रहने को कहा, हम दोनों साथ रहते थे मगर हमारे अंदर कोई ग़लत फीलिंग नहीं थी …
मैं कभी कभी जब ज्यादा चुदाने के लिए भूखी हो जाती थी तो शायद होश नहीं रहते थे और भाई का अंडरवियर लेकर उसे अपने चूत में ऊँगली से डालती थी … मुझे पता नहीं था कि मेरा भाई मेरे बारे में क्या सोचता है। कुछ दिनों बाद मैंने नोटिस किया कि मेरी ब्रा और पैंटी कभी भी मेरे रखे हुई जगह पे नहीं मिलती थी और उन पे सिलवटें भी बहुत होती थी. मुझे शक हो गया था कि मेरा भाई भी मेरी ब्रा पैंटी प्रयोग करता है मुठ मारने के लिए … फ़िर भी हम चुप रहते …अब असली कहानी …
मैं अपने बॉस से पहले चुदवा चुकी थी और वही था मेरे एक साल में दो प्रमोशन का राज … मेरे बॉस की उमर ४० की थी और उसका बॉस ५० का था … मैं २६ की थी …
क्यूँकि अभी मेरा भाई मेरे घर पे रहता था तो बॉस को बहुत दिनों से मौका नहीं मिला था मुझे चोदने का .. तो वो मुझसे काफी नाराज रहता था और मुझे कभी कभी डांटता भी था ऑफिस में …
मेरा भाई अपने दफ्तर के काम से पुणे जा रहा था दो दिन के लिए ..
मौके का फायदा उठाते हुए मैंने अपने बॉस को कहा कि आज कुसुम आपकी है, मेरा भाई दोपहर को ही घर से निकलने वाला था, मैं शाम को जब घर आई तो मुझे लगा मेरा भाई जा चुका है .. मैंने अपने बॉस को फ़ोन लगाया और बातें करने लगी … मेरा भाई उस वक्त बाथरूम में था .. उसे मेरे बॉस की आवाज़ तो नहीं पर मेरी आवाज़ साफ साफ सुने दे रही थी … मैंने अपने बॉस से कहा .. आज कुसुम को चुदवाना है अपने डार्लिंग से.. कुसुम की चूत बहुत दिनों से प्यासी है…मैं थक गई हूं अपने भाई का अंडरवीयर अपनी चूत में डाल डाल कर.. मुझे लण्ड चाहिएप्लीज़ जल्दी से आ जाओ और मुझे जम कर चोदो…
उधर मेरा भाई मेरी बातें सुनकर गरम हो गया था.. वो नहा कर बाहर निकला तो उसका लण्ड तन कर खड़ा था टॉवेल के ऊपर से ही दिख रहा था … मैं समझ गई कि इसने सब सुन लिया फ़िर भी नाटक कर के बोली- तुम गए नही अब तक … तो उसने कहा नही मेरे पेट में दर्द है, मैंने कहा कुछ दवा ले लो, उसने कहा नही मम्मी ने जो तेल दिया है उस से मालिश कर के सो जाऊँगा … फ़िर मैं समझ गई कि आज भी मेरी चूत भूखी रह जायेगी क्यूँकि मेरा भाई नहीं जाने वाला …
मेरा भाई नाटक कर रहा था .. उसके दिमाग में सिर्फ़ मेरी बातें घूम रही थी … वो भी अपनी प्यास मेरी चूत से मिटाना चाह रहा था … उसने मुझसे कहा , कुसुम प्लीज़ इस तेल से मेरे पेट पर मालिश कर दो ना … मैंने कहा ठीक है .. वो अपना बनियान उतर कर बेड पर लेट गया .. मैंने उस वक्त बस नाईटी पहनी थी मैंने ना ही पैंटी ना ब्रा पहनी थी क्यूँ कि मुझे लगा था थोडी ही देर में मेरे बॉस आयेंगे और मुझे सब उतरना पड़ेगा …
मैं उसके पेट पे तेल मालिश कर रही थी, उसके नाभि के नीचे बहुत सरे बाल थे जो जैसे जैसे नीचे जाते थे और ज्यादा थे … मेरे थोड़ी देर मालिश करने पे वो बहुत गरम हो चुका था क्यूँकि उसके पायजामे के ऊपर से उसका तना हुआ लंड दिखाई देने लगा था फ़िर भी मैं चुप चाप मालिश करती रही …
थोडी देर बाद उसने कहा- पायजामा थोड़ा नीचे सरका कर थोड़ा नीचे तक मालिश करो न …
मैंने वैसा ही किया … अब मुझसे भी रहा नहीं जा रहा था … मैं भी सोच रही थी कि कब अपनी प्यास मिटाऊँ अपने सगे भाई के लंड से … इतने में वो बोल पड़ा हाथ अंदर डाल न … मैंने कहा कहाँ अंदर .. उसने कहा पायजामे के अंदर .. मैंने मना कर दिया .. . मन तो बहुत कर रहा था मगर वो मेरा भाई था इसलिए मैंने ना कह दिया … उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और जबरदस्ती अपने लंड पे ले गया, मैंने एक झटके से उसका हाथ दूर कर दिया …फ़िर वो बेड से उठ गया और मुझे जकड लिया और बोला सिर्फ़ अपने बॉस से चुदवाओगी … कब तक तेरे ब्रा और पैंटी से मुठ मारता रहूँगा … मेरे लंड ने क्या पाप किए हैं?.. मैं ये सब सुन कर दंग रह गई … उसने कहा मैं किसी को कुछ नहीं कहूँगा .. बस तू वो कर जो मैं कहता हूँ …
फ़िर …
अगले भाग में पढिये…
कि कैसे पहले मेरे भाई ने फ़िर मेरे बॉस ने फ़िर मेरे बॉस के बॉस ने मुझे चोदा, उसके बाद मेरे भाईसुमित ने अपने बॉस से भी मुझे चुदवा कर अपना प्रमोशन लिया ! Antarvasna
इससे पहले मैं अपनी कुछ कहानियाँ Hindi Sex Stories भेज चुका हूँ। मेरी एक कहानी का नाम था “कैसे मैं बन गया गांडू “
चलो खैर दोस्तो ! वो सब कुछ मैंने बता दिया था कि किस तरह बचपन से लड़की होने के लिए भगवान् को कोसता रहा और आखिर भगवान् ने वो तो नहीं लेकिन लड़की जैसा जिस्म दे डाला। मेरी छाती और शरीर की बनावट काफी हद तक लड़कियों जैसी है, पोले पोले मम्मे आकर्षक निप्पल गोल-मोल गांड !
आज मैं आपको एक और नवीनतम लौड़े के बारे बताऊंगा।
हुआ यूँ कि मैं याहू पर चैट कर रहा था। मैंने एक लड़की का आईडी बना रखा था। उस पे मैं कई मर्दों से बातें करता रहता। एक दिन मुझे अपने ही शहर का एक मर्द मिला जिससे खूब चैट की मैंने ! उससे पूछा कि कभी अपनी पत्नी की गांड मारी है?
वो बोला- मेरी घरवाली गांड पे लौड़ा तक नहीं रखने देती, लेकिन मुझे गांड मारने में बहुत मजा आता है।
वो बोला- क्या हम मिल सकते हैं?
उसने मेरा मोबाइल नंबर माँगा।
मैंने कहा- मेरे पास है ही नहीं मोबाइल ! अपना दे दो !
उसने अपना नंबर दे दिया। मैंने कोई कॉल नहीं की।
अगले दिन वो फिर जब चैट पर आया, उसने कहा- आपने फ़ोन नहीं किया?
मैंने कहा- नहीं हो सका, सॉरी !
कोई बात नहीं- वो बोला- आज मेरी पत्नी और बच्चे घर में नहीं हैं, वो अपने मायके गई है। मुझे मिल सकती हो ?
मेरा भी नया लौड़ा लेने का दिल था, आखिर कितने दिन से मेहनत की थी। लेकिन क्या करता ! था तो गांडू ! लड़की नहीं !
मैंने अपना वेबकैम लगाया, सबसे पहले अपनी गाण्ड दिखाई। मेरी गाण्ड देख किसी का भी लौड़ा खड़ा जाता। मैंने वेबकैम के सामने गाण्ड गोल-गोल मटका के दिखाई और फिर अपना ऊपर का हिस्सा छाती !
वो बोला- चूत दिखाओ !
मैंने कहा- वो है ही नहीं !
क्या ?
मैं गांडू हूँ !
बोला- नहीं ऐसी गांड, मम्मे किसी लड़के के नहीं हो सकते ! क्यूँ मज़ाक करती हो?
मैंने उसको चेहरा दिखाया और बोला- मेरी गांड मारनी हो तो बोल दो, अभी आ जाऊंगा।
तू बी-ब्लाक मार्केट में गुरु नानक बेकरी के बाहर आ जा ! मैं काले रंग की लैंसर में आऊंगा ! ठीक है?
मैं बहुत गर्म था, जल्दी से पैन्ट डाली, टीशर्ट पहनी और वहां जा खड़ा हो गया।
उसके वहां आते ही मैं गाड़ी में बैठ गया। उसने बरमूडा पहना हुआ था, बोला- बेफकूफ बनाया मुझे इतने दिन से?
सब शिकायेतें दूर कर दूंगा बिस्तर में !
बहुत चिकना है तू यार !
मैंने उसकी जांघ पर हाथ फेरते हुए बरमूडा में हाथ डाल लिया- हाय ! क्या लौड़ा मिला है !
वो बोला- एक बार टीशर्ट उतारो !
मेरी ब्रेस्ट देख बोला- तू माल कमाल का है, कितनों से चुदा है?
वो कार चलाता रहा, मैंने नीचे जाकर, बाहर निकाल, लौड़ा मुँह में ले लिया। वह ओह यार !
जुबां से चाट कर उसको गर्म किया, इतने में घर आ गया। सीधी कार अन्दर ! मुझे अपने बेडरूम में ले गया, दो ग्लास ठंडी बियर के ले आया। मैं एक बार में ही पी गया। ऐसे तीन मग पीने के बाद सरूर आने लगा।
उसने मुझे नंगा कर दिया और मेरे निपल चूसने लगा। मैं उसके लौड़े को हाथ में लिए मुठ मार रहा था। मैंने फिर उसका लण्ड मुँह में लिया और चूसने लगा।
वाह राजा ! ऐसी तो कोई लड़की नहीं मिली जो तुम कर रहे हो ! लड़की भी नहीं करती और चूस ! चूस ! छूटने वाला हूँ ! अह अह अह करते हुए उसने सारा पानी मेरे मुहं में निकाल दिया।
मैंने चाट कर उसका लौड़ा साफ़ किया।
कैसा लगा माल?
बहुत स्वादिष्ट !
वो मेरी गांड से खेलने लगा। मैंने फिर से मुँह में लिया, वो मेरी गांड में जुबान डाल कर चाटता !
अब चोदो !
पास में पैन्ट से उसको कंडोम दिया, अपने हाथ से चढ़ा दिया, दोनों टांगें चौड़ी करते हुए उसको इशारा किया, उसने धक्का मारा, बहुत मोटा था पर मैंने सह लिया। ऐसे करते करते पूरा घुस गया और वो रफ़्तार पकड़ने लगा।
और चोद मुझे ! अह अह और फाड़ मेरी ! तेरी रांड बन कर रोज़ चुदने आउंगी ! अह अह !
उसने मुझे घोड़ी बना लिया और पीछे से मारने लगा।
हाय राजा ! क्या चोदता है तू ! उई फाड़ डाल !
बीस मिनट वो अलग तरीकों से चोदता हुआ झड़ गया। मैंने कंडोम खोल उसका लौड़ा मुँह में डाल लिया, गांड से निकल कर आया था, बहुत गर्म था।
वाह मेरे राजा ! मेरा बच्चा ! कल सुबह आना वहीं ! ठीक है?
अगले दिन जाकर फिर चुदा।
उसके बाद उसको जगह नहीं मिल रही थी।
एक दोस्त के घर लेकर गया, वहां क्या हुआ, वो सब अगली बार ! Hindi Sex Stories
हमारे देश में यौन, खास तौर से Masturbation के प्रति बहुत सी भ्रांतियाँ हैं जो कि या तो अनपढ़ लोगों ने या फिर निहित-स्वार्थ से प्रभावित लोगों ने समाज में फैलाई हुई हैं। पर जैसे जैसे समाज में शिक्षा फैली है और इस विषय पर शोध हुआ है इनमें से कई भ्रांतियों का पर्दा-फाश हुआ है।
दुर्भाग्यवश, इसके बारे में जानकारी केवल पढ़े-लिखे और समृद्ध लोगों तक ही सीमित है और इसका प्रचार अंग्रेजी तथा यूरोपीय भाषाओं में ही हुआ है। हमारे देश में अभी भी ढोंगी लोग (जो कि डॉक्टर, तांत्रिक, हकीम, वैद या स्वामी के रूप में फैले हुए हैं) इस अज्ञान का फ़ायदा उठा कर मासूम और अबोध लड़के-लड़कियों को गुमराह कर रहे हैं और उन्हें उपचार देने के बहाने उनसे पैसे लूट रहे हैं।
अन्तर्वासना की कोशिश है कि यौन-सम्बन्धी विषयों पर हिंदी-प्रार्थी समुदाय को सही व उचित ज्ञान प्राप्त हो जिससे वे इस अत्यंत आवश्यक, अत्यंत निजी और अत्यंत आनन्ददायक प्राकृतिक उपलब्धि का पूरा लाभ उठा सकें। यह लेख इसी अभियान की एक कड़ी है।
हस्तमैथुन Masturbation एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है जिसे यौन सन्तुष्टि के लिए पुरुष और स्त्री दोनों ही करते हैं। इसे केवल युवा ही नहीं बल्कि हर आयु के लोग स्वेच्छा से करते हैं। हस्तमैथुन, यानि हस्त+मैथुन, मतलब हाथ से किया जाने वाला मैथुन (सम्भोग) अर्थात अपने यौनांगों को इस तरह से छूना, रगड़ना, सहलाना या उनमें कोई कृत्रिम चीज़ डालना जिससे करने वाले को चरम आनन्द प्राप्त हो।
यहाँ अपने हाथ (हस्त) को पुरुष स्त्री की योनि के एवज में और स्त्रियाँ अपनी ऊँगली पुरुष के लिंग के एवज में प्रयोग करती हैं। इसे तब तक करते हैं जब तक पूरी तरह उत्तेजित ना हो जाएँ और परम आनन्द महसूस ना कर लें।
हालांकि हस्तमैथुन को हमारे समाज में अभी भी हेय दृष्टि से देखा जाता है, किन्तु सर्वेक्षण से पता चला है कि लगभग सभी स्त्री-पुरुष अपने जीवन में कभी न कभी हस्तमैथुन करते ही हैं। कब करते हैं और कितना करते हैं- यह तो बहुत से कारकों और हालातों पर निर्भर करता है इसलिए हस्त-मैथुन की कोई ‘सामान्य-दर’ नहीं है।
कुछ लोगों की यौन इच्छा औरों के मुक़ाबले प्रबल होती है, जैसे जवान लड़के-लड़की, तो किन्हीं के हालात ऐसे होते हैं कि वे अपनी यौन-इच्छा की तृप्ति नहीं कर पाते हैं जैसे मोर्चे पर तैनात सैनिक, जेल में बंद कैदी, किसी बीमारी से त्रस्त मरीज़ या फिर किसी भी कारण से बिछड़े हुए दाम्पत्य जोड़े।
ऐसे लोग ज्यादा हस्त-मैथुन करते हैं। कुछ लोग में यौन-इच्छा कुदरतन कम होती है या उनको सामान्य सम्भोग के अवसर मिलते रहते हैं… इस तरह के लोग हस्त-मैथुन कम बार करते हैं।
मतलब, हस्तमैथुन करने की दर दिन में दो-तीन बार से लेकर महीने में दो-तीन बार हो सकती है।
यह भी देखा गया है कि यौन-इच्छा एक बहुत ही शक्तिशाली और प्रबल ताक़त है जिस पर सामान्य लोगों का जोर नहीं चलता। जब किसी स्त्री-पुरुष में यौन-इच्छा उत्पन्न हो जाती है तो उसकी तृप्ति के लिए वह हर संभव प्रयत्न करने के लिए विवश हो जाते हैं।
यह एक प्राकृतिक ज़रूरत है जिसके अभाव में इस सृष्टि की रचना ही डाँवाडोल हो सकती है… अतः यौन-इच्छा का प्रबल होना और इसकी तृप्ति के लिए त्रस्त होना ना केवल मानव-जाति के लिए अपितु अधिकाँश जानवरों के लिए भी अनिवार्य है।
ऐसे में जब भी किसी स्त्री-पुरुष में इस इच्छा की प्रवृत्ति होती है उसका सम्भोग के लिए विवश होना स्वाभाविक है। अगर ऐसे कामोन्मुक्त व्यक्ति को सम्भोग के लिए कोई साथी ना मिले तो उसके पास हस्त-मैथुन ही एक ऐसा सहारा रह जाता है जिससे वह सुरक्षित, कानूनी एवं परिपूर्ण तृप्ति प्राप्त कर सकता है।
कोई और सहारा या तो सुरक्षित नहीं होगा, या कानूनी नहीं होगा या फिर परिपूर्ण सुख नहीं देगा।
इस लिहाज़ से जो लोग हस्तमैथुन को बुरा मानते हैं या इसके झूठे दुष्परिणामों की अफवाहें फैलाते हैं, वे एक तरह से वेश्यावृति, देह शोषण जैसे यौन-अपराधों को पैदा करने में मदद करते हैं।
अगर सभी यौन-उत्तेजित पुरुष अपनी तृप्ति हस्त-मैथुन से कर लें और ऐसा करने में उन्हें कोई व्यक्तिगत हानि का गलत डर ना हो तो समाज में लड़कियों और बहु-बेटियों की सुरक्षा अपने आप सुधर जाए।इसी तरह अगर स्त्रियाँ भी अपनी कामवासना की प्यास हस्त-मैथुन से बुझा लें तो कई सामाजिक और वैवाहिक तनाव से मुक्ति मिल सकती है।
अर्थात हस्तमैथुन के फायदे ही फायदे हैं… फिर भी ना जाने क्यों इसके प्रति इतनी गलतफ़हमियाँ और दुष्प्रचार फैला हुआ है।
हस्तमैथुन के प्रति गलत भ्रांतियाँ
हालांकि हस्तमैथुन के प्रति कई भ्रांतियाँ हैं पर लगभग सभी भ्रांतियाँ पुरुषों पर लागू होती हैं। क्योंकि ये भ्रांतियाँ अनपढ़ और स्वार्थ-निहित लोग फैलाते हैं उन्हें शायद यह नहीं पता कि हस्त-मैथुन स्त्रियों में भी उतना ही प्रचलित है जितना मर्दों में;
बल्कि स्त्रियाँ पुरुषों के मुक़ाबले ज्यादा हस्त-मैथुन का सहारा लेती हैं क्योंकि एक तो पुरुषों के बनिस्पत उन्हें सम्भोग की तत्परता दर्शाने की समाज इजाज़त नहीं देता और दूसरे सम्भोग के बाद भी जहाँ लगभग सभी पुरुष अपनी यौन पिपासा शांत कर लेते हैं वहीं लगभग 80% स्त्रियाँ पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो पातीं और ना ही अपनी असंतुष्टि ज़ाहिर कर पाती हैं।
ऐसी हालत में वे हस्त-मैथुन के द्वारा ही चरमोत्कर्ष प्राप्त करती हैं।
इस पृष्ठभूमि के चलते हस्त-मैथुन के बुरे परिणामों का असर केवल पुरुषों पर होना अपने आप में एक भ्रान्ति है। अगर हस्त-मैथुन से शरीर पर बुरा असर पड़ता है तो स्त्रियों के शरीर पर क्यों नहीं? असल में ये भ्रांतियाँ पुरुषों के लिए इसलिए पनपी हैं क्योंकि पुरुष, स्त्रियों के मुकाबले, यौन सम्बन्धी विषयों पर बातचीत करने के लिए ज्यादा मुखातिब होते हैं।
सामाजिक बंधनों के चलते लड़कियाँ व औरतों अपनी यौन-सम्बंधित समस्याओं और प्रश्नों का ना तो खुल कर समाधान ढूंढ सकती हैं और ना ही किसी से विचार-विमर्श कर सकती हैं। यह छूट केवल लड़कों और पुरुषों को है। अतः यौन सम्बन्धी भ्रांतियाँ एवं दुर्प्रचार आदमियों (खास तौर से लड़कों) के लिए ही संभव थे। आइये, कुछ भ्रांतियों पर एक नज़र डालें :
देखा गया है कि हस्त-मैथुन कच्ची उम्र से शुरू होकर वृद्धावस्था तक चलता है और इसे हर तबके के लोग- अमीर-गरीब, पढ़े-लिखे या अनपढ़, स्त्री एवं पुरुष, बूढ़े और जवान- सभी करते हैं।
विवाहित होने का अर्थ यह भी नहीं कि स्त्री-पुरुष को सम्भोग सुविधा और अवसर सदैव मिलते रहे। कई कारणों से वे सम्भोग से वंचित रह सकते हैं और ऐसी हालत में उन्हें अविवाहित जोड़ों के मुकाबले ज्यादा तड़प होती है।
असल में ये एकदम सामान्य विकार हैं जो लगभग सभी लड़के-लड़कियों को किशोरावस्था में होते हैं… यह वही उम्र होती है जब युवाओं को अपने यौनांगों के प्रति जागरूकता पनपती है और वे हस्त-मैथुन करना शुरू करते हैं। ऐसे में ढोंगी लोगों को मासूम युवाओं को यह समझाने में मुश्किल नहीं होती कि उनके विकार हस्त-मैथुन के कारण हो रहे हैं।
उनके दिमाग में हस्त-मैथुन को एक गलत क्रिया और पाप की संज्ञा देकर उनको बहकाया जाता है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने इन भ्रमों को नष्ट कर दिया है। असल में जवानी में कदम रखते युवाओं में जो सामान्य शारीरिक बदलाव आते हैं या जो मानसिक रूप से उनके लिए चिंता का विषय होते हैं, ऐसी बातों का ही स्वार्थ-निहित लोग नाजायज़ फायदा उठाते हैं।
अक्सर यौन सम्बन्धी समस्याएँ बच्चे, शर्म के कारण, अपने माँ-बाप से छुपाकर अपने दोस्तों या अनजान लोगों से पूछना बहतर समझते हैं… इस विषय पर स्कूल या कॉलेज में भी कोई विधिवत चर्चा नहीं होती… यही कारण है कि युवा लड़के-लड़कियों को सही ज्ञान नहीं मिला पाता।
सच तो यह है कि हस्त-मैथुन एक सुरक्षित और सेहतमंद क्रिया है जिसे करना प्राकृतिक भी है और अनिवार्य भी। इसको करने से कोई दुष्परिणाम नहीं होते बल्कि इसके परहेज़ से कई शारीरिक व मानसिक दुष्प्रभाव हो सकते हैं।
स्वप्नदोष जैसे अनियंत्रित स्खलन से तो हस्त-मैथुन द्वारा आनंद लेकर वीर्योत्पात करना समझदारी का काम है। इससे कोई कमजोरी नहीं आती और ना ही कोई विकार पैदा होते हैं।
हाँ, यह सच है कि हस्त-मैथुन के कुछ प्रभाव ज़रूर होते हैं, जैसे कि
पर ये सब तो अच्छे प्रभाव हैं… इसलिए बेझिझक और दिल भर कर हस्त-मैथुन करना चाहिए। यह आपके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। हाँ, जैसे कोई भी अच्छी क्रिया अत्याधिक मात्रा में की जाये तो हानिकारक हो सकती है… तो हस्त-मैथुन भी उपयुक्त समय और उपयुक्त मात्रा में करना ही उचित है। इसके प्रति आसक्त होना या इसको सम्भोग के एवज में करना ठीक नहीं है।
हस्त-मैथुन कैसे करते हैं?
हस्त-मैथुन सम्भोग क्रिया का ही अनुकरण है। तो भले ही वह पुरुष हो या स्त्री, हस्त-मैथुन करते समय अपने यौनांगों को इस तरह इस्तेमाल करते हैं जिससे उन्हें सम्भोग-क्रिया जैसा सुखी अनुभव हो।
पुरुष का लिंग योनि में प्रवेश करके जिस घर्षण का अनुभव करता है वही घर्षण पुरुष अपने लिंग को अपने हाथ से देने का प्रयास करता है।
इसी प्रकार से सम्भोग के दौरान जिस तरह स्त्री की योनि तथा भगनासा को मर्दाना लिंग रगड़ता है और योनि में प्रवेश होकर अंदर-बाहर होता है, वही रगड़ हस्त-मैथुन के द्वारा स्त्री अपनी योनि और भगनासा को देने की चेष्टा करती है।
पुरुष कैसे करते हैं?
सभी पुरुष मूल रूप से समान हस्त-मैथुन करते हैं, जिसमें अपने लिंग को हाथ में पकड़कर दबाना या लिंग के ऊपर हथेली चलाना सबसे सामान्य और प्रचलित तरीका है।
कभी-कभी वे हथेली पर चिकनाई लगाकर हथेली को गीली योनि का प्रारूप देने की कोशिश करते हैं जिससे उन्हें अपार आनन्द की अनुभूति होती हैं। हस्त-मैथुन वे तब तक जारी रखते हैं जब तक उनका वीर्यपात नहीं हो जाता।
इसके अतिरिक्त, पुरुष दो तकियों के बीच अपना उत्तेजित लिंग घुसा कर धीरे-धीरे आगे-पीछे धक्का देते हैं, मानो स्त्री की योनि में अपना पुरुषांग प्रविष्ट कर रहे हों।
अब तो कई प्रकार के खिलौने बन गए हैं जो कि योनि और गुदा की तरह बने होते हैं और जिनका इस्तेमाल पुरुष आसानी से कर सकते हैं। ये खिलौने ऐसे पदार्थ से बने होते हैं कि लगभग महिला जननांग जैसा ही अनुभव देते हैं।
आधुनिक तकनीक के चलते अब ऐसी गुड़ियाँ बन गई हैं जो छूने से त्वचा छूने जैसा अनुभव देती हैं और जिनके अंग एक लड़की के अंगों की तरह हिलाए तथा मोड़े जा सकते हैं। इन गुड़ियाओं की योनि और गुदा के आलावा इनके मुँह को भी इस तरह बनाया जाता है कि उसे मौखिक मैथुन के लिए पुरुष प्रयोग कर सकते हैं।
कुछ पुरुष ऐसी गुड़ियाओं को लड़कियों से भी ज्यादा अच्छा समझते हैं क्योंकि इनके साथ जब चाहे सम्भोग किया जा सकता है और इनमें लड़कियों वाली कोई समस्या नहीं होती।
ये गुड़ियाँ महँगी होती हैं और हमारे देश में इनका प्रचलन इतना व्याप्त नहीं है। प्रोस्टेट एक ऐसी ग्रंथि है जो पुरुषों में वीर्य के लिये तरल पदार्थ पैदा करती है। यह गुदा के अन्दर स्थित होती है और इसे गुदा में उँगली डालकर महसूस किया जा सकता है।
ऐसा करने से आनन्द मिलता है; अत: यह भी हस्तमैथुन का एक तरीका है। कुछ ऐसे मसाज पार्लर होते हैं जहाँ लड़कियाँ पुरुषों की प्रोस्टेट ग्रंथि की मसाज करके
उन्हें उन्मादित करती हैं।
स्त्रियाँ कैसे करती हैं?
स्त्रियों के लिए सबसे सामान्य हस्त-मैथुन का तरीका अपनी भगनासा को ऊँगली के सिरे से सहलाना और मलना पाया गया है। अधिकांश लोग सोचते हैं कि लड़कियाँ हस्त-मैथुन के लिए अपनी योनि में कोई लिंग के आकार की वस्तु डालकर उसे अंदर-बाहर करती होंगी।
हालांकि, स्त्रियाँ यह भी करती हैं पर यह इतनी प्रिय क्रिया नहीं है… शायद इसलिए कि एक तो इसे करने के लिए उचित लिंगाकार वस्तु ज़रूरी होती है जो हर समय उपलब्ध नहीं होती और दूसरे, ऐसा करने के लिए उन्हें जो आसन ग्रहण करने होते हैं वे हमेशा संभव नहीं होते।
स्त्रियों को हस्त-मैथुन बड़ी गोपनीयता और कम समय में करना होता है और इस कारण वे अपनी ऊँगली से अपनी भगनासा, जो कि मानव शरीर का सबसे मार्मिक और उत्तेजनशील अंग है, को सहला कर और अपनी योनि के होठों को मसल कर तृप्ति प्राप्त कर लेती हैं।
इसके अलावा वे अपने भगोष्ठ के साथ अपनी तर्जनी या मध्यमा अँगुली से खेलती हैं तो कभी योनि के अन्दर एक या दो अँगुलियाँ डालकर मैथुन का अनुकरण करती हैं। अगर समय का अभाव ना हो और उपयुक्त एकांत भी हो तो हस्तमैथुन के लिये सब्जियॉं, जैसे लम्बे बैंगन, खीरा, गाजर, मूली, ककडी आदि अपने जननांग में प्रविष्ट कराकर सन्तुष्टि प्राप्त कर लेती हैं।
सब्जियों के आलावा कुछ घरेलु लिंगाकार चीज़ें जैसे मोटा कलम, मोमबत्ती, बेलन का हत्ता इत्यादि का प्रयोग भी होता है। यह भी देखा गया है कि कुछ महिलायें पलंग के किनारे अथवा किसी मेज के किनारे से अपने यौनांग रगड़ कर भी यौन-सुख प्राप्त कर लेती हैं।
कुछ महिलाएँ केवल विचार और सोच मात्र से तो कुछ अपनी टाँगें कसकर बन्द करके योनि पर इतना दबाव डालती हैं कि उन्हें यौन-सुख अनुभव हो जाता है।
ये काम वे सार्वजनिक स्थानों पर भी बिना किसी की नजर में आये कर लेती हैं।
इस क्रिया को महिलाएँ बिस्तर पर सीधी या उल्टी लेटकर, कुर्सी पर बैठकर या उकडूँ बैठकर भी कर सकती हैं। लेकिन ऐसी कोई भी क्रिया जिसे बिना हाथ के सम्पर्क के पूरा किया जाता है हस्तमैथुन की श्रेणी में नहीं आती।
जिस तरह मर्दों के यौन-सुख के लिए खिलोने बने हुए हैं, स्त्रियों के सुख के लिए भी तरह तरह के खिलोने (डिल्डो) बन गए हैं। ये मूल रूप से बड़े लिंग के आकार के होते हैं जिनपर हाथ में पकड़ने की जगह होती है और जिनको औरतें अपनी योनि या गुदा में घुसा कर मैथुन सुख प्राप्त कर सकती हैं।
तकनीकी उन्नति के चलते इन कृत्रिम लिंगों में काफी विकास हुआ है और अब ये तरह तरह के आकार, पदार्थ और सुविधाओं से लैस होते हैं। इनमें बैटरी से थरथराहट (वाईब्रेटर) पैदा की जा सकती है।
कुछ कृत्रिम लिंगों की बनावट दुमुही होती है जिनसे एक स्त्री एक साथ अपनी योनि और गुदा दोनों को भेद सकती है और साथ ही भगनासा को कुरेदने के लिए उचित उभार बने होते हैं।
ऐसे दुमुही लिंग को योनि और गुदा में घुसाने के बाद जब उसमें बिजली से थरथराहट शुरू की जाती है तो स्त्रियों को असीम बहुतिक आनंद मिलता है जो अक्सर असली लैंगिक सम्भोग से भी नहीं मिलता।
हालांकि, मर्दों के लिए गुड़ियाँ बन चुकी हैं, महिलाओं के लिए इस तरह के गुड्डे मुनासिब नहीं समझे गए हैं क्योंकि निर्जीव गुड्डा हिल-डुल नहीं सकता और ऐसी हालत में वह स्त्रियों को सम्भोग सुख नहीं दे सकता।
स्त्रियों को कृत्रिम सम्भोग-सुख दिलाने के लिए कुछ ऐसी मशीनें बनायीं गयी हैं जिनमें कृत्रिम लिंग को एक पिस्टन पर लगाया होता है जो कि बिजली से आगे-पीछे होता है।
ये मशीनें तरह तरह के आकारों और सुविधाओं के साथ मिलती हैं जिनका उपयोग महिलाएं अपनी इच्छानुसार लेट कर या बैठकर कर सकती हैं। इनमें पिस्टन की गति, स्ट्रोक की लम्बाई और लिंग का आकार स्वेच्छा से नियंत्रित या बदला जा सकता है। ऐसी मशीनें उन महिलाओं के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध हुई हैं जिनके पति या प्रेमी शीघ्रपतन के कारण उन्हें सम्भोग से उत्कर्ष तक नहीं पहुंचा पाते… या फिर कुछ स्त्रियाँ देर से ही उत्कर्ष को प्राप्त होती हैं।
ये मशीनें भी, सेक्स-गुड़ियाओं की तरह, हमारे देश में आसानी से उपलब्ध नहीं हैं।
परस्पर-हस्तमैथुन
इसमें स्त्री-पुरुष एक दूसरे का हस्तमैथुन करते हैं। आमतौर पर इसे सम्भोग-पूर्व अपने साथी को उत्तेजित करने के लिए या फिर जब सम्भोग की इच्छा ना हो या किसी कारण सम्भोग मुनासिब ना हो, तब प्रेमी जोड़े परस्पर हस्त-मैथुन करके एक दूसरे को चरमोत्कर्ष तक पहुंचाते हैं।
इसको करने के लिए स्त्री अपने साथी पुरुष का लिंग अपने हाथ में लेकर उसको उसी तरह हिलाती या रगडती है जैसे हस्त-मैथुन के समय पुरुष करता है और साथ ही उसके शरीर के मार्मिक स्थलों को छू कर, सहला कर तथा खरोंच कर उसे उत्तेजित करती है।
साथ ही पुरुष उस स्त्री की योनि और भगनासा पर अपनी उँगलियों से मर्दन करके और उसके स्तनों, स्तानाग्रों और बदन के अन्य संवेदनशील अंगों, जैसे गुदा, चूतड़, पेट, गाल, गर्दन इत्यादि को छू कर, सहला कर अथवा मसल कर उसे उत्तेजित करता है। यह क्रिया भी एक दूसरे के चरमोत्कर्ष तक की जाती है।
प्रायः देखा गया है कि इस क्रिया में पुरुष आनंद-शिखर पर महिलाओं से पहले पहुँच जाते हैं और उन्हें वीर्य-स्खलन के बाद भी अपनी प्रेमिका का हस्त-मैथुन जारी रखना होता है जिससे वह भी पूर्णतया तृप्त हो सके। परस्पर-हस्त-मैथुन एक बहुत ही प्रेम-भरी क्रिया है जिसे सभी जोड़े निःसंकोच कर सकते हैं क्योंकि इससे सम्भोग जैसा ही सुख दोनों को मिलता है और साथ ही सम्भोग से सम्बंधित किसी परेशानी या भय, जैसे गर्भ-धारण, कौमार्य-खनन, यौन-विकार इत्यादि की चिंता नहीं होती।
हस्तमैथुन पर शोध
हस्तमैथुन के कारण स्त्री-पुरुषों के लिए अनेकों व्यक्तिगत लाभ तो हैं ही, पर इस विषय पर शोध से यह निष्कर्ष निकला है कि इस अत्यंत निजी क्रिया के कई सामाजिक फायदे भी हैं। अमेरिका और यूरोपीय देशों के सामाजिक-शास्त्री अब यह मानने लगे हैं कि हस्तमैथुन करने वाले 15 साल के युवक-युवतियों से लेकर वृद्धावस्था तक के लोगों में अपराध करने की प्रवृत्ति कम पायी जाती है।
इस कारण बाल-शोषण और देह शोषण जैसे जघन्य अपराधों को रोकने में मदद मिलती है। हस्तमैथुन करने वाले लोग कम विचलित और ज्यादा संतुलित रहते हैं जिनसे समाज में स्थिरता एवं अनुशासन पनपता है। वे ना केवल अपराध कम करते हैं, वे अपराध करने वालों को रोकने में भी योगदान देते हैं।
हस्तमैथुन से समाज को जो अप्रत्यक्ष लाभ होते हैं उनमें किशोरियों में अवांछित गर्भावस्था को रोकना, यौन रोगों (एस0टी0डी0) को कम करना और नारी को सम्मान देना प्रमुख माना गया है। कई विकसित देश, जैसे ब्रिटेन, नीदरलैंड, डेनमार्क आदि किशोरावस्था में लड़के-लड़कियों को दैनिक हस्तमैथुन करने के लिए प्रोत्साहित करने लगे हैं।
‘प्रतिदिन एक वीर्योत्पात’ उनकी स्वास्थ्य-निर्देश पुस्तिका में एक अधिकार के रूप में सम्मिलित किया गया है। यूरोपीय संघ के अन्य सदस्य देश भी इस तरह के प्रोत्साहन की योजना बना रहे हैं। हमारे देश में भी इस अत्यंत निजी परन्तु साथ ही साथ अत्यंत सामाजिक विषय पर अधिकाधिक विचार-विमर्श करने की जरूरत है तथा इसे गोपनीयता के दायरे से बाहर निकाल कर प्रत्यक्ष रूप से प्रोत्साहित करने के आवश्यकता है।
ऐसा नहीं करने से हमारे देश में यौन-अपराधों की घिनौनी घटनाएँ निरंतर बढ़ती ही जाएँगी और निर्भया जैसी अनेकों लड़कियाँ यौन-त्रस्त युवकों की बलि चढ़ती जाएँगी। हस्तमैथुन Masturbation-0 एक लाभदायक क्रिया
एक दिन ऑफिस में शाम को जब Hindi Sex Stories काम खतम हो गया तो मीना मेरे पास आयी और बोली, “सर! मेरे भाई का कॉलेज में एडमिशन हो गया है…… इससे घर के खर्चे बढ़ गये हैं, इसलिये मैं अपसे एक रिक्वेस्ट करने आयी हूँ।”
“अगर तुम तनख्वाह बढ़ाने की बात लेकर आयी है तो मैं पहले से ही ना कर रहा हूँ।”
“नहीं सर! तनख्वाह की बात नहीं है, अगर आप मेरी माँ को नौकरी दे सकें तो मेहरबानी होगी, मैंने सुना है एच.आर डिपार्टमेंट में जगह खाली है, मेरी मम्मी वहाँ कुछ साल काम कर चुकी है।”
“मैं इस बारे में सोचुँगा”, मैंने हँसते हुए कहा, “तुम्हारी मम्मी काम के बारे में तो जानती है लेकिन क्या वो कंपनी कि दूसरी पॉलिसी के बारे में जानती है?”
“तो क्या आप मेरी मम्मी को भी चोदेंगे?” मीना ने चौंकते हुए पूछा।
“तुम्हें पता है कि कंपनी की पॉलिसी क्या है और कंपनी का डी.एम.डी होने के नाते मैं पॉलिसी नहीं बदल सकता”, मैंने जवाब दिया, “लेकिन तुम अभी अपनी मम्मी से कुछ ना कहना…… मुझे पहले एम-डी से बात कर लेने दो।”
मैंने एम-डी को फोन लगाया और बताया। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!
“उसे रखना है तो रख लो! काफी मेहनती औरत है और चोदने के लिये भी अच्छी है। तुम्हें उसे चोदने में मज़ा आयेगा। मैंने कई बार उसे चोदा है और दोबारा भी चोदना चाहुँगा, पर मीना को क्या कहोगे?” एम-डी ने कहा।
“सर! मैं मीना को बता चुका हूँ कि अगर वो यहाँ पर कम करेगी तो मुझे उसे चोदना पड़ेगा।”
“ठीक है! तुम उसे कल बुला लो”, एम-डी ने फोन रखते हुए कहा।
शाम को जब मैं घर पहुँचा तो प्रीती घर पर नहीं थी। जैसा कि हफ़्ते में दो तीन बार होता था…. प्रीती जरूर किसी क्लब में गुलछर्रे उड़ा रही थी। देर रात वो नशे में धुत्त लड़खड़ाती हुई कार से उतरी तो मैंने कुछ बात करना मुनासिब नहीं समझा। सुबह जब वो उठी तो मैंने कहा, “प्रीती! तुम्हारे लिये एक खबर है।”
“तुम्हारे लिये भी मेरे पास एक खबर है, लेकिन पहले तुम बोलो!” प्रीती बोली।
“मीना ने सिफ़ारिश की है कि मैं उसकी माँ को काम पर रख लूँ…… एम-डी ने भी हाँ कर दी है।”
“जाहिर है तुम उसे चोदोगे!” प्रीती ने हँसते हुए कहा।
“तुम्हें कंपनी की पॉलिसी का तो पता है!”
“सुनील! मैं देख रही हूँ कि इन दिनो तुम चुदी हुई चूतों की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हो, इसमें कहीं मुझे ना भूल जाना”, प्रीती हँसी।
“तुम्हें और तुम्हारी चूत को कैसे भूल सकता हूँ, तुम तो मेरे लिये स्पेशल हो। तुम तो जानती हो कि मुझे चोदने में कितना मज़ा आता है। अगर मेरे पास साठ साल की बुढ़िया भी काम माँगने आये तो मैं उसे भी बिना चोदे काम नहीं दूँ। हाँ… अब तुम बताओ क्या खबर है?”
“घर से खत आया है…. राम और श्याम की शादी पक्की हो गयी है”, प्रीती खुश होते हुए बोली।
“मुबारक हो तुम्हें! क्या वो दो बहनों से शादी कर रहे हैं?”
“नहीं दोनों अलग परिवार कि लड़कियाँ हैं”, प्रीती बोली।
“तुम कितने दिन के लिये जाना चाहती हो?” मैंने पूछा।
“एक महीना तो लग ही जायेगा।” इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!
“एक महीना! इतने दिन मैं तुम्हारे बिना कैसे रह सकुँगा।”
“ऑफिस में इतनी सारी लड़कियाँ हैं चोदने के लिये, एक महीना कहाँ बीत जायेगा कि तुम्हें एहसास भी नहीं होगा”, प्रीती मुस्कुराते हुए बोली।
“लड़कियाँ तो आज भी हैं…. पर तुम तो जानती हो कि रात को मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता।”
“मेरे बिना या मेरी चूत के बिना!” प्रीती मुस्कुराते हुए बोली।
“प्रीती! अब ये अच्छी बात नहीं है….” मैंने नाराज़गी जाहिर की।
“अरे बाबा! नाराज़ मत हो….. मैं जानती हूँ, इसलिये मैंने रजनी से कह दिया है कि वो रोज़ शाम को तुम्हारे पास आ जाया करेगी और कभी-कभी रात को भी रुकेगी।”
“ठीक है!!! कब जाना चाहती हो?”
“मैंने कल सुबह की फ्लाइट की टिकट बुक करा ली है”, प्रीती ने जवाब दिया।
दूसरे दिन प्रीती को एयरपोर्ट छोड़ कर मैं ऑफिस पहुँचा तो मिसेज महेश को मेरी वेट करते देखा, “आयेशा!! जरा मिसेज महेश को मेरे केबिन में भेजना?”
मिसेज महेश वाकय काफी आकर्शित महिला थी। उनकी उम्र पैंतालीस के आसपास होने के बावजूद शरीर गठीला था, भरे हुए मम्मे और लंबे बाल। उन्होंने काली रंग की साड़ी, मैचिंग का ब्लाऊज़ और काले ही रंग के बहुत ही ऊँची ऐड़ी के सैंडल पहन रखे था। दिखने में काफी सुंदर लग रही थी।
मैं उनके सर्टिफिकेट्स देखने लगा। इतने में एम-डी ने केबिन में कदम रखा।
“हाय अनिता! कैसी हो? कई दिनों से तुम्हें नहीं देखा”, एम-डी ने कहा। मिसेज महेश एम-डी से मिलने के लिये उठीं तो एम-डी ने उन्हें बाँहों में भर लिया और उनकी छाती दबा दी।
“अनिता! सुनील तुम्हारे सर्टिफिकेट्स देख चुका है, अब वो तुम्हारी चूत देखना चाहता है। चलो कपड़े उतारो और सोफ़े पर लेट जाओ जिससे इंटरव्यू शुरू किया जा सके”, एम-डी ने हँसते हुए कहा।
“क्या आप हर केंडिडेट का इंटरव्यू उसे चोद के लेते है?” अनिता ने मुस्कुराते हुए कहा।
“ये हमारी कंपनी की पॉलिसी है, चलो अब झिझको मत…. वैसे भी तुम बगैर कपड़ों में और ज्यादा सुंदर दिखती हो और मुझे पता है तुम्हारी चूत चुदाई के लिये हमेशा तैयार रहती है”, एम-डी ने कहा। अनिता थोड़ा शर्माते हुए अपने कपड़े उतारने लगी और अचानक वो रुक गयी।
“तो इसका मतलब है, मीना को नौकरी देने से पहले आप लोग……?” अनिता ने पूछा।
“हाँ अनिता!!! खूब अच्छी तरह चोद-चोद कर ही मीना को काम पर रखा है, चलो अब तुम भी तैयार हो जाओ, आज तुम्हें एक ऐसे लौड़े से चुदवाने को मिलेगा जो तुम्हारे स्वर्गवासी पति के लौड़े से भी बड़ा है।”
“तब तो मैं जरूर देखुँगी!!!” अनिता ने तेजी से अपने कपड़े उतारे और सैंडलों के अलावा बिल्कुल नंगी हो गयी। थोड़ी देर में हम तीनों ही नंगे हो चुके थे। “ओहहह…ऊऊऊ सर! ये तो वाकय में बहुत मोटा है”, अनिता मेरे लंड को पकड़ सोफ़े पर लेटती हुई बोली।
“सर! ज़रा धीरे से चोदियेगा”, मैंने अपने पति के मरने के बाद इतने बड़े लंड से नहीं चुदवाया है।
“जैसा तुम कहोगी मेरी जान!” कहकर मैंने एक ही धक्के में अपना लंड उसकी चूत की जड़ तक पेल दिया।
“ऊऊऊऊऊऊ मर गयीईईई… अनिता चींखी, सर धीरे से चोदिये ना।”
मैं धीरे-धीरे लंड को अंदर बाहर करने लगा, “हाँ सर! ऐसे ही…” अनिता भी अपने चूतड़ उछाल कर मज़े लेने लगी।
एम-डी हम दोनों की चुदाई देख रहा था। उसने फोन उठाया और कुछ कहा। थोड़ी देर में मीना केबिन में आयी। एम-डी ने उसे शाँत रहने को कहकर कपड़े उतारने का इशारा किया।
थोड़ी देर में एम-डी ने नंगी मीना को मेरे बगल में लिटा कर उसकी चूत में अपना लंड पेल दिया। “ऊऊऊह सर! थोड़ा धीरे से, मीना सिसकी।”
अपनी बेटी की आवाज़ सुन कर अनिता ने मुँह घुमा कर देखा कि मीना भी उसे ही देख रही थी। दोनों माँ बेटी एक दूसरे को देख रही थीं और हम दोनों उन्हें चोद रहे थे।
थोड़ी देर में ही वो अपने कुल्हे उछाल कर हमारी थाप से थाप मिला रही थीं। उनके मुँह मादक आवाज़ें निकल रही थी।
“हाँ सर!!!!! मुझे जोर से चोदो”, अनिता ने मुझे जोर से बाँहों में भरते हुए कहा, “हाँआँआँ ऐसे ही!!!!!! हाँ और जोर से!!!!!!!!”
“ओहहहहहह हाँआँआँ……. हाँआँ…… ऊऊऊहहहह….” मीना भी चिल्लाये जा रही थी, “हाँ सर चोदो मुझे!!!!! जोर से!!!!!! मेरा छूटने वाला है!!!!”
एम-डी ने सच कहा था, अनिता की चूत सही में चुदक्कड़ थी, वो एक अनोखे अंदाज़ में अपनी चूत की नसों से लंड को जकड़ लेती थी। मुझे अपने लंड के पानी में उबाल आता दिखा और मुझसे रुका नहीं जा रहा था। मैंने एक एक्सप्रेस ट्रेन की तरह अपने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी।
अनिता ने भी महसूस किया और बोल पड़ी, “ओहहहह सुनील सर! रुकिये मत….. चोदते जाइये!!!!! डाल दो अपना पानी मेरी चूत में…. मैं भी झड़ने वाली हूँ।” मैं ज्यादा देर रुक नहीं पाया और अपने वीर्य की पिचकारी उसकी चूत में छोड़ दी। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!
“ओहहहहह कितना अच्छा लग रहा है”, वो सिसकी जैसे ही मेरी पहली पिचकारी छूटी, “मेराआआआआ भी छूट रहा है…… हाँआँआँआँ”, अपना बदन ढीला छोड़ कर वो अपनी साँसें संभालने लगी।
वहाँ बगल में मीना अपने कुल्हे उछाल कर एम-डी का साथ दे रही थी, “ओहहहह….. सर!!! मेरा छूटाआआ!!!!” और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया। एम-डी ने भी दो चार धक्के लगा कर अपने वीर्य की बरसात उसकी चूत में कर दी। हम चारों अब ढीले पड़े अपनी साँसें काबू में कर रहे थे।
“मम्मी मुझे माफ़ कर दो, मुझे आपको पहले बता देना चाहिये था”, मीना ने अनिता से माफी माँगते हुए कहा।
मुझे समझ में नहीं आया कि वो अपनी चुदाई की माफ़ी माँग रही थी या अपनी माँ की चुदाई पर। “कोई बात नहीं मीना!!! जो होना था सो हो गया”, अनिता ने मीना को बाँहों में भरते हुए कहा।
“ओह मम्मा!!!! मुझे उम्मीद है आपको यहाँ काम करके मज़ा आयेगा”, मीना बोली।
“जरूर मज़ा आयेगा!!!! जब सुनील जैसा लंड मिल जाये चुदवाने के लिये तो किस औरत को मज़ा नहीं आयेगा”, अनिता ने बेशर्मी से कहा।
“चलो बहुत हो गया”, एम-डी ने कहा, “अब यहाँ आओ और हमारा लौड़ा चाट कर साफ़ करो।”
दोनों रेंग कर हमारे घुटनों के बीच आ कर अपनी जीभ से हमारा लौड़ा चाटने लगीं और फिर मुँह में ले उसे जोरों से चूसने लगी।
अनिता चुदवाने में ही माहिर नहीं थी, बल्कि लंड चूसने में भी उसका जवाब नहीं था। वो अपने मुँह को पूरा खोल कर लौड़े के जड़ तक ले जाती और जोरो से चूसते हुए अपने मुँह को ऊपर उठाती। बहुत ही दिलकश नज़ारा था। दोनों माँ बेटी का सिर हमारे लौड़े पर हिल रहा था।
मेरा लंड फिर एक बार झड़ने के लिये तैयार था, “अनिता जोर जोर से चूसो…….. मेरा छूटने वाला है।” मेरी आवाज़ सुन कर अनिता और जोरों से चूसने लगी। “मेराआआआ छूट रहाआआआ है!!!!!” मैं चिल्लाया।
अनिता मेरे लंड का सारा पानी पी गयी और एक बूँद भी उसने बाहर नहीं गिरने दी। अभी भी वो मेरा लंड चपड़-चपड़ कर के चूस रही थी। उधर एम-डी ने भी अपना पानी मीना के मुँह में छोड़ दिया।
“सुनील! जरा आयेशा को ड्रिंक्स लाने के लिये बोलना”, एम-डी ने कहा।
थोड़ी देर में आयेशा चार ग्लास, बर्फ और व्हिस्की की बोतल लेकर आयी। एम-डी ने उसे अपनी गोद में खींच लिया और उसके मम्मे दबाते हुए कहा, “सुनील! ये तो बहुत चुदासी लग रही है…… लगता है तुम इसे आजकल चोदते नहीं हो?” इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!
“नहीं सर! इसे अपनी चुदाई का हिस्सा बराबर मिलता रहता है, लेकिन ये चुदाई को दवाई समझती है कि खाना खाने के बाद दिन में तीन बार लेनी चाहिये”, मैंने हँसते हुए जवाब दिया।
“लगता है इसकी चूत की प्यास मुझे ही बुझानी पड़ेगी!” एम-डी ने उसकी सलवार नीचे खिसका कर उसकी चूत में अँगुली डालते हुए कहा।
“सर! ये तो बहुत अच्छी बात है, आप मुझे अभी चोदेंगे या बाद में?” आयेशा खुश होते हुए बोली।
“अभी मुझे कुछ काम है, तुम ऐसा करो… शाम को पाँच बजे आ जाओ”, एम-डी ने कहा।
आयेशा के जाने के बाद मैंने और एम-डी ने बाकी का इंटरव्यू अनिता और मीना की गाँड मार कर पूरा किया। अपने कपड़े पहनते हुए अनिता बोली, “अब मैं समझी कि क्यों महेश इंटरव्यू मिस नहीं करना चाहता था।”
समय गुज़रने लगा, मेरी चुदाई भी हमेशा कि तरह चल रही थी, ऑफिस में लड़कियाँ थी और घर पर रजनी शाम को आ जाती थी। कभी-कभी शबनम और समीना भी घर आ जाती थीं।
एक दिन अनिता ने मुझसे कहा, “सर! क्लर्क की पोस्ट के लिये नयी लड़की रखनी पड़ेगी।”
“क्यों पहले वाली कहाँ गयी?” मैंने पूछा। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!
“दो दिन हुए उसने नौकरी छोड़ दी।”
“मुझे क्यों नहीं बताया कि वो छोड़ के जा रही है, कम से कम आखिरी बार उसकी चूत तो चोद लेता।”
“सर! छोड़ने के पहले वो आपके ही साथ थी।”
“मुझे नहीं मालूम!!! आगे से ये तुम्हारी जवाबदारी है कि कोई लड़की नौकरी छोड़े तो मैं उसकी चूत गाँड और मुँह अपने वीर्य से भर दूँ। अब नयी लड़की के लिये पेपर में इश्तहार दे दो।”
“वो सब मैं कर चुकी हूँ और एक लड़की को सलैक्ट भी कर लिया है। आप सिर्फ़ इतना बता दें कि उसका इंटरव्यू कब लेना है… सो मैं उसे समझा कर ले आऊँ”, अनिता ने आँख मारते हुए कहा।
“ठीक है! कल शाम पाँच बजे उसे बुला लो और एम-डी को भी इंटरव्यू के बारे में बता देना”, मैंने जवाब दिया।
दूसरे दिन अनिता एक २५-२६ साल की लड़की को साथ लिये ऑफिस में दाखिल हुई। मैंने लड़की को ऊपर से नीचे तक देखा, वो सही में सुंदर थी, गोरा रंग, नीली आँखें, पतली कमर, लंबी टाँगें और उसके मम्मे काफी बड़े थे। ऐसा लग रहा था अभी उसके कुर्ते को फाड़ कर बाहर आ पड़ेंगे।
“सर! ये ज़ुबैदा है!!! अपने एच-आर डिपार्टमेंट में क्लर्क की पोस्ट के लिये…” अनिता ने परिचय कराया।
इतने में एम-डी ने भी केबिन में कदम रखा। “अनिता अब तुम शुरू कर सकती हो!” एम-डी ने कहा।
अनिता ने ज़ुबैदा के सर्टिफिकेट दिखाने शुरू किये। ज़ुबैदा अपने पिछले काम के एक्सपीरियेंस बता रही थी कि इतने में अनिता ने ज़ुबैदा से पूछा, “क्या तुम कुँवारी हो?”
ज़ुबैदा को ऐसे प्रश्न की आशा नहीं थी, “हाँ! मैं बिल्कुल कुँवारी हूँ।”
“देखो ज़ुबैदा! सच-सच बताना, कारण…. हमारी कंपनी अपने हर एम्पलोयी का मेडिकल चेक अप कराती है…… सो अगर तुम झूठ बोल रही होगी तो तुम्हारा झूठ वहाँ पकड़ा जायेगा”, अनिता ने कहा।
ज़ुबैदा कुछ वक्त सोचती रही और फिर धीमी आवाज़ में कहा, “नहीं!!! मैडम मैं कुँवारी नहीं हूँ।”
“तुमने अपनी कुँवारी चूत को कब और कैसे चुदवाया?” अनिता ने पूछा।
“मैडम, ये मेरा पर्सनल मामला है, इससे आपको क्या करना है?” ज़ुबैदा ने जवाब दिया।
“हमारी कंपनी का असूल है कि वो अपने करमचारी की हर बात की जानकारी रखती है….. सो डरो मत…… बताओ!!” अनिता ने कहा।
“ये कुछ साल पहले की बात है, मेरे अम्मी और अब्बा घर पर नहीं थे। मेरा बॉयफ्रेंड उस दिन मेरे घर पर आया और जबरदस्ती मेरी कुँवारी चूत चोद दी”, ज़ुबैदा ने जवाब दिया।
“क्या तुम्हें चुदवाने में मज़ा आया।”
“पहली बार तो बहुत दर्द हुआ था और मज़ा भी नहीं आया। लेकिन बाद में मज़ा आने लगा। तीन महीने तक हम पागलों की तरह चुदाई करते रहे पर एक दिन वो मुझसे झगड़ा कर के चला गया और आज तक वापस नहीं आया”, ज़ुबैदा ने कहा।
“तुमने कभी अपनी गाँड मरवायी है?” अनिता ने पूछा।
“यही तो झगड़े की जड़ थी, एक दिन वो मेरी गाँड मारना चाहता था….. मैंने मना किया तो उसने मेरे साथ जबरदस्ती करनी चाही पर मैंने उसे अपनी गाँड नहीं मारने दी, वो झगड़ कर चला गया और आज तक वापस नहीं आया”, ज़ुबैदा ने बताया।
“तुम्हें चुदवाने का दिल करता है?” अनिता ने पूछा।
“हाँ मैडम! बहुत करता है।” ज़ुबैदा ने शर्माते हुए कहा।
“तो क्या करती हो!” अनिता ने पूछा।
“जी मोमबत्तियों और खीरे-बैंगन से काम चाला लेती हूँ बस!” ज़ुबैदा ने जवाब दिया।
“तो ठीक है अपने कपड़े उतारो और सोफ़े पर लेट जाओ।”
“क्या सर मुझे चोदेंगे?” ज़ुबैदा ने मेरी तरफ देखते हुए पूछा।
अनिता ने उसके कंधों पर हाथ रख कर कहा, “ज़ुबैदा मैंने तुमसे कहा था ना कि तुम्हें तन मन से काम करना होगा, तो तुम्हारा तन मैनेजमेंट के लिये बहुत स्पेशल है”, इतना कह कर अनिता भी अपने कपड़े उतारने लगी।
ज़ुबैदा अपने कपड़े उतार कर नंगी हो गयी थी। वो अपने सैंडल उतारने लगी तो अनिता ने उसे रोक दिया। अनिता उसकी झाँटों को पकड़ कर बोली, “ज़ुबैदा! कल ऑफिस आओ तो ये झाँटें तुम्हारी चूत पर नहीं होनी चाहिये, तुम्हारी चूत एक दम चिकनी और सपाट होनी चाहिये मेरी चूत की तरह…. और हमेशा हाई-हील के सैंडल पहने रखना….. जैसे आज पहने हुए हो।”
“हाँ मैडम!” ज़ुबैदा ने जवाब दिया। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!
“ठीक है अब बिस्तर पर लेट जाओ!” अनिता ने उसे कहा, और एम-डी की तरफ पलटते हुए बोली, “सर! अब ये अपने फायनल इंटरव्यू के लिये तैयार है।”
“सुनील! तुम इसकी चूत चोदो….. मैं बाद में इसकी गाँड फाड़ुँगा”, एम-डी ने कहा।
जब ज़ुबैदा सोफ़े पर लेट गयी तो मैं भी अपने कपड़े उतार कर नंगा हो गया। मेरे खड़े लंड को देख कर ज़ुबैदा बोली, “मैडम! इनका लंड कितना बड़ा है!”
मैंने उसकी टाँगें उठा कर मेरे कंधों पर रख लीं और एक ही झटके में पूरा लंड उसकी चूत में घुसा दिया, “आऊऊऊऊ सर!!!! धीरे…. लगता है”, वो सिसकी। मैं धीरे-धीरे उसे चोदने लगा।
थोड़े धक्कों में उसे मज़ा आने लगा और वो सिसकारी भरने लगी, “ओहहहहहह आआआआहहहहहह।”
“क्यों अच्छा लग रहा है ना?” अनिता ने पूछा।
“हाँ मैडम!!! बहुत अच्छा लग रहा है, ऐसा लग रहा है कि मैं जन्नत में पहुँच गयी हूँ”, वो सिसकते हुए बोली।
उसकी बात सुनकर मैं पूरी ताकत से उसे चोदने लगा। मैंने रफ़्तार भी बढ़ा दी।
“हाँआँआँ सर!!!! ऐसे ही चोदो, और जोर से सर!!!! हाँआँआँ आआआहहहहह ऊऊऊओओहहहहह”, वो सिसक रही थी। मैं भी जोर से चोद रहा था और हमारी साँसें फूल रही थीं।
“ओहहहहह मैडम!!!!!! कितना अच्छा लग रहा है…….. मैं तो गयीईईईईई”, वो चिल्ला रही थी और मैं अपने आपको ना रोक सका और उसे अपनी बाँहों में भींचते हुए उसकी चूत में पिचकारी छोड़ दी। थोड़ी देर एक दूसरे को चूमने के बाद हम अलग हो गये।
“क्यों अच्छा था ना?” अनिता ने पूछा।
“हाँ मैडम!!!! बहुत अच्छा लगा, इतना मज़ा मुझे पहले कभी नहीं आया”, ज़ुबैदा ने जवाब दिया।
“ठीक है… अब घोड़ी बन जाओ और अपनी गाँड मरवाने के लिये तैयार हो जाओ।”
“नहीं मैडम!!!!! प्लीज़ मेरी गाँड में नहीं”, ज़ुबैदा मिन्नत करते हुए बोली।
“मुँह बंद करो और मैं जैसा कहती हूँ वैसा करो”, अनिता ने उसे डाँटते हुए कहा, “अपना सिर नीचे कर और चूतड़ों को थोड़ा उठा दे।” ज़ुबैदा ने बात मान ली। अनिता झुक कर उसकी गाँड चाटने लगी और दो-तीन मिनट तक उसकी गाँड में अपना थूक भर दिया।
“सर!!! इसकी गाँड अब तैयार है”, अनिता ने एम-डी से कहा। ज़ुबैदा का शरीर काँप रहा था। एम-डी ने उसके पीछे आकर उसकी टपकती चूत में अपना लंड डाल दिया। ज़ुबैदा का शरीर थोड़ा संभला तो एम-डी ने अपना लंड उसकी चूत से निकाल कर उसकी गाँड के छेद पे रख के थोड़ा दबा दिया।
“ओह सर!!!! प्लीज़ नहीं, सर बहुत दर्द हो रहा है, रुक जाइये प्लीज़ वरना मैं मर जाऊँगी।” मगर ज़ुबैदा की बात पे ध्यान ना देते हुए एम-डी ने और जोर से अपना लंड उसकी गाँड में घुसा दिया।
“ओओओहहहह मैडम!!!! आआआ…आप ही इन्हें रोकिये ना!!!” ज़ुबैदा चींखती रही और चिल्लाती रही पर एम-डी अब तेजी से उसकी गाँड मारने लगा। और तब तक मारता रहा जब तक उसका पानी नहीं छूट गया। ज़ुबैदा का मुँह दर्द के मारे लाल हो गया था और आँखों से आँसू बह रहे थे।
“बहुत अच्छे!!!! अब तुम कंपनी में काम करने लायक हो गयी हो”, अनिता ने ज़ुबैदा का हाथ पकड़ कर उसे सोफ़े पर से खड़ा करते हुए कहा, “ज़ुबैदा अब तुम सुनील सर का लंड चूसो और इनका पानी निगल जाना समझी!!!”
ज़ुबैदा मेरे पैरों के बीच आ गयी और मेरा लंड जोर से चूसने लगी।
“सर! मैं ड्रिंक्स मंगा लूँ?” अनिता ने एम-डी से पूछा। एम-डी ने गर्दन हिला कर हाँ कर दी।
“आयेशा! चार ग्लास और व्हिस्की लाना”, अनिता ने इंटरकॉम पर कहा।
“अभी लायी मैडम!” आयेशा ने जवाब दिया। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!
“ओहहहहह ज़ुबैदा….. जोर-जोर से चूसो….. मेरा छूटने वाला है….” मैंने कहा।
जब ज़ुबैदा मेरे लंड से छूटे पानी को पी रही थी उसी समय आयेशा व्हिस्की लिये केबिन में आयी। मैंने देखा कि वो एक दम नंगी थी। आयेशा ने कुछ कहना चाहा तो अनिता ने उसे चुप रहने का इशारा करके केबिन से जाने के लिये कहा।
आयेशा व्हिस्की और ग्लास रख कर केबिन से चली गयी।
“ज़ुबैदा! तुमने देखा आयेशा ने क्या पहन रखा था?” अनिता ने पूछा।
“मैडम!! वो तो बिल्कुल नंगी थी, उसने हाई-हील सैंडलों के अलावा कहाँ कुछ पहन रखा था”, ज़ुबैदा ने जवाब दिया।
“अच्छा है…. तुमने देख लिया। ये यहाँ का नियम है….. कोई भी हायर मैनेजमेंट से तुम्हें बुलाये तो तुम्हें इसी तरह आना है।”
ज़ुबैदा कुछ देर तक सोचती रही फिर हँसते हुए बोली, “हाँ मैडम, मैं समझ गयी। आप कहें तो मैं ओ~फिस में हर वक्त ऐसे ही बिल्कुल नंगी सिर्फ हाई-हील के संडल पहने रहने को तैयार हूँ!”
“वेरी-गूड! ऑय लाइक योर स्पिरिट!” अनिता हंसते हुए बोली।
हम चारों जब दो-दो पैग व्हिस्की पी चुके तो अनिता ने कहा, “ज़ुबैदा! अब तुम एम-डी के ऊपर लेट कर उनका लंड अपनी चूत में ले लो, और पीछे से सुनील सर तेरी गाँड मारेंगे।”
“पर मैडम! सुनील सर का इतना बड़ा लंड मेरी छोटी गाँड में कैसे जायेगा?” ज़ुबैदा बोली। उसकी नीली आँखें नशे में बोझल थीं।
“वैसे ही जायेगा जैसे वो मेरी गाँड में, आयेशा की गाँड में और कंपनी की हर लड़की की गाँड में घुस चुका है। तुम लेकर तो देखो…. दो-दो लंड से एक साथ चुदवाने में ज्यादा मज़ा आयेगा।” अनिता ने उसे समझाते हुए कहा।
एम-डी सोफ़े पर लेट चुका था। ज़ुबैदा उसके ऊपर चढ़ कर अपने हाथों से एम-डी का लंड पकड़ के अपनी चूत के छेद पे लगाकर बैठती हुई आगे को झुक गयी। एम-डी का लंड उसकी चूत में पूरा घुस चुका था।
मैंने ज़ुबैदा के पीछे आकर अपना लंड उसकी गाँड के छेद पे रख के थोड़ा सा अंदर घुसाया तो वो जोर से चिल्लायी पर मैंने और एम-डी ने उसे दोनों तरफ से चोदना ज़ारी रखा। थोड़ी देर में ही हमारा पानी झड़ गया। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!
“कुछ और सर?” अनिता ने एम-डी से पूछा।
“नहीं! अभी कुछ नहीं”, एम-डी ने जवाब दिया।
“ठीक है ज़ुबैदा! तुम कपड़े पहन कर बाहर इंतज़ार करना…. मैं तुम्हें ऑफिस का काम समझा दूँगी”, अनिता ने कहा। ज़ुबैदा जब कपड़े पहन कर जाने लगी तो एम-डी ने उससे पूछा, “ज़ुबैदा! अब जबकि तुम दो-दो लंड का स्वाद चख चुकी हो तो अब चाहोगी कि तुम्हारा बॉयफ्रेंड वापस आ जाये?”
“सर! जब इतने शानदार दो लंड हैं तो मुझे उसके पिद्दु जैसे लंड की कोई जरूरत नहीं है”, ज़ुबैदा ने जवाब दिया और अपनी सैंडल खटखटती बाहर निकल गयी। व्हिस्की के सुरूर के कारण उसकी चाल में थोड़ी सी लड़खड़ाहट थी।
ज़ुबैदा के जाने के बाद एम-डी ने कहा, “अनिता! तुम कमाल की हो, क्या कहते हो सुनील?”
“हाँ सर! मुझे लगता है कि आज के बाद हर इंटरव्यू में हमें अनिता को शामिल करना चाहिये, और इसे इनाम भी देना चाहिये”, मैंने एम-डी से कहा।
मेरी बात सुनते ही अनिता खुशी से उछल पड़ी और बोली, “सर! मैं अपनी चूत ले कर अपना इनाम लेने कब हाज़िर होऊँ?”
“आज नहीं! कल शाम को आना और ज़ुबैदा को भी साथ में लाना”, मैंने कहा।
दूसरे दिन अनिता ज़ुबैदा के साथ दाखिल हुई। दोनों ने कपड़े नहीं पहन रखे थे, सिर्फ हाई-हील के सैंडल पहने हुए थीं। आज ज़ुबैदा की चूत एक दम चिकनी और सपाट दिख रही थी। बालों का कहीं भी नामो निशान नहीं था। मैं और एम-डी ने दो घंटे तक दोनों की चूत और गाँड मारते रहे।
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