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सबसे पहले गुरु जी को मेरा Antarvasna Sex Stories कोटि-कोटि प्रणाम ! गुरु जी का क्या कहना ? क्या वेबसाइट लॉन्च की है,जिसमे लोगों की चुदाई के किस्से पढ़ के चूत गीली हुए बिना नहीं रहती !
मेरा नाम रेखा (काल्पनिक) है ! दोस्तो, मैं २६ बरस की एक जवान औरत हूँ ! वैसे तो मैंने एम. कॉम तक पढ़ाई की हुई है लेकिन मेरे पति देव नहीं चाहते कि मैं जॉब करूँ ! मेरी सुन्दरता को लेकर उनके दिमाग में मेरे प्रति गंदे ख्याल आते हैं ! शादी को तीन साल हो चुके हैं लेकिन अभी तक कोई बच्चा नहीं हुआ ! हाँ, इस वक़्त मैं पेट से हूँ ! शादी से पहले मेरी गिनती चालू गर्ल्स में रही है !
मेरी पहली चुदाई 18 साल की उम्र में हुई थी, जब मैं 12वीं की फाइनल पेपर दे कर अपने नानके गई हुई थी ! वहां मैं एक लड़के से इश्क लड़ा बैठी और उसने मेरा काम तमाम कर दिया ! एक महीने में कई बार चुदी ! फिर तो बस मुझे लड़कों का चस्का लग गया और मेरे न जाने कितने लड़कों से एफेअर चले ! मैंने उनमें से कुछ से शारीरिक सम्बन्ध स्थापित किये ! मेरे फिसलते क़दमों को मेरी माँ ने भांप लिया और एक रिश्ता ढूँढ मेरी भी शादी करवा दी !
पति का अच्छा बिज़नस है लेकिन उनमें वैसी सेक्स पॉवर नहीं है जैसी मुझे चाहिए थी ! कई बार बिना पानी की मछली की तरह बिस्तर पर तड़फती ! पति हफ्ते में सिर्फ तीन बार सेक्स करते जिससे मेरी प्यास बढ़ गई थी ! मैंने कहा कि मुझे जॉब मिल रही है लेकिन मेरे खसम ने ऐसा नहीं होने दिया ! उसको अपनी कमजोरी का डर था ! वो यह भी जानता था कि उसकी बीवी में कितनी आग है !
मेरे जेठ के बड़े लड़के ने बारहवीं कक्षा में कामर्स रखा लेकिन गाँव में कोई टयूशन नहीं पढ़ाता !
जेठानी जी ने मुझे कहा,”छोटी बहू, प्लीज़ इसको एक दो घंटे पढ़ा दिया कर !”
मैंने कहा,”ठीक है !”
अगले ही दिन समीर मेरे पास पढ़ने आने लगा ! उसका ध्यान मेरे मस्त मम्मों पर रहता ! गहरे गले के सूट से तो मेरा यौवन डुल-डुल जाता ! कई बार नोटिस किया कि उसके लौड़े वाला भाग फूला फूला सा रहता !
एक रोज़ सभी रात की शादी पर गए थे ! यहाँ पर भी मेरे पति को मैं सुरक्षित नहीं लगी! मुझसे बोला,”उसके दोस्त की शादी ही है ! “
जब मैंने कहा कि बाकी सब क्यूँ जा रहे हैं ?
तो बोले कि बचपन से उनका परिवार माँ बापू को जानते हैं ! मुझे कहा गया कि तुम रुको और समीर रुक जायेगा !
समीर भी रुक रहा था इसलिए पहले से सेक्सी कपड़े पहन रखे थे ! नाईटी में से मेरा जिस्म साफ़ दिखता ! पैंटी-ब्रा सब कुछ! आज समीर ने मुझे देखा तो देखता रह गया ! मैंने उसको बिठाया और बोली,” चलो पढ़ाई करें !”
“जी ,चाची ………! ”
एक बहुत मुश्किल गणित का सवाल था ! मैंने कहा,” इधर मेरे पास ही बैठ जाओ !”
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मैंने भी अब उसका लौड़ा निकाल लिया ! वाह ! क्या लौड़ा था !!!!!! छोटी उम्र से यह हाल था तो आगे क्या होगा ? मैंने भी उसका लौड़ा मुँह में ले लिया और खूब चूसने लगी ! वो आहें भर भर के कह रहा था,” मेरी रखैल चुदासी चाची, आज तुझे मसल दूंगा !”
“वाह ! पट्ठे ! वाह ! मसल दे मुझे ! रौंद दे मुझे ! फाड़ दे मेरी चूत ! मत छोड़ना इसको !”
“अभी ले ,चाची ! कमीनी, कितना दिखा दिखा के तड़फाया मुझे !”
वो बखूबी खेल रहा था वॉलीबाल के साइज़ के मेरे मम्मे के साथ !
मैंने कहा,” बहन चोद ! मार मेरी !”
“अभी ले, रंडी !” कहते हुए उसने टांगें खोल कर अपना लम्बा मोटा लौड़ा मेरी चूत में घुसा दिया !
“वाह ! और तेज़ ………और तेज़…… और तेज़ मार ……..! ” उसका जोश बढाने के लिए मैं अप-शब्द बोल रही थी !
“मादरचोद, बहनचोद ! तेरे चाचा से मेरी जवानी नहीं संभाली जाती ! मुझे अपनी बना ले !”
मैं झड़ने के करीब थी इस लिए और जोर-जोर से चूतड़ उठा के उसका लौड़ा ले रही थी !
वो बोला,”चाची, मैं झड़ने वाला हूँ !”
“अन्दर डाल दे समीर ! अपना गरम माल ! डाल दो अपना बीज मेरी कोख में !”
देखते ही देखते उसने सारा माल मेरी चूत में भर दिया और लौड़ा निकाल कर मुंह में डाल दिया ! मैंने उसको चाट-चाट कर साफ़ कर दिया !
“वाह ! मेरे राजा ! ” मैंने कहा ! उस रात हम नंगे बिस्तर पे रहे ! तीन बार उसने मुझे अलग अलग मुद्रा में ठोका !
उस रात के बाद चुदने के लिए हमें जगह नहीं मिल रही थी ! उसने मुझे कहा,” चाची, मेरा एक दोस्त अकेला रहता है ! उसका परिवार अमेरिका में है ! वहीं चला करो ! ” मैंने हामी भर दी और उसके साथ वहां गई। ?????????????????
इंतज़ार का फल मीठा होवे …………….!
कहानी कैसी लगी ? बताओ ताकि आगे लिख सकूँ ! बाय ………………………… Antarvasna Sex Stories
लेकिन मुझे इस संबंध में बहुत सारे ईमेल आये जिसमें पाठकों ने कहा था कि वे मेरी कहानियों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
इसलिए मुझसे भी रुका न गया और मैंने फिर से अपनी चुदाई की कहानी लिखना शुरू किया।
तो फ्रेंड्स, शादी के बाद मैंने चुदाई के खूब मजे लिए हैं, मेरे पति ने मुझे जमकर चोदा है।
मुझे कभी किसी चीज की कमी नहीं होने दी।
मेरे पति एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करते हैं इसलिए काम के कारण कई दिनों तक भी शहर के बाहर रह जाते हैं।
जितने दिन वो घर पर नहीं होते हैं, मेरी चूत को लंड भी नहीं मिल पाता है और मैं तड़प जाती हूं।
मेरी आज की हॉट अंकल Xx कहानी इसी बारे में है।
बात तब की है जब हमारे घर के बगल वाले घर में एक परिवार रहने के लिए आया था।
उस फैमिली में एक अंकल, आंटी और उनका बेटा था।
वो अंकल वन विभाग में काम किया करते थे।
जॉब के चलते उनका ट्रांसफर होता रहता था और अब वो हमारे साथ वाले घर में आकर रह रहे थे। हमारी छतें मिली हुई थी.
उनका बेटा एक बैंक में काम करता था।
चूंकि वो हमारे पड़ोसी थे तो धीरे-धीरे बातचीत भी होने लगी; धीरे-धीरे आपस में आना-जाना भी होने लगा।
ऐसे ही एक दिन मैं छत पर सुबह-सुबह जल्दी कपड़े सुखाने चली गई।
मैंने देखा कि अंकल और उनका बेटा दोनों वहां योग, एक्सरसाइज वैगरह कर रहे थे।
मेरी नजर उन पर पड़ी तो हट नहीं पाई।
दोनों ने बदन पर बस शॉर्ट्स डाले हुए थे।
उन दोनों की छाती नंगी थी और जांघें भी नंगी थीं।
मेरा ध्यान कपड़े सुखाने में कम और उनके शरीर पर ज्यादा लगा हुआ था।
पांच मिनट बाद उनका बेटा उठा और ऑफिस का बोलकर वहां से चला गया।
मेरी नज़र बार-बार अंकल की तरफ ही जा रही थी।
कुछ देर बाद शायद अंकल ने मुझे देखा होगा तो उन्होंने मुझे गुड मॉर्निंग बोलकर विश किया।
मैंने भी मुस्कराते हुए उन्हें गुड मॉर्निंग विश की।
वो बोले- रोमा, आज इतनी सुबह-सुबह तुम यहाँ छत पर?
मैने कहा- हाँ अंकल, आज सुबह ही कपड़े धुल गए थे तो मैं इन्हें सुखाने के लिए तार पर डालने चली आई। आप क्या रोज इसी तरह यहाँ योग और एक्सरसाइज करते हैं?
(माफ करना दोस्तो, मैंने आप लोगों को अंकल का नाम नहीं बताया, अंकल का नाम अशोक राठौर था.)
अशोक अंकल- हाँ, मैं और मेरा बेटा, हम दोनों ही रोज सुबह योग और एक्सरसाइज करते हैं। ये हमारी दिनचर्या का हिस्सा है।
मैं- अंकल, आप की उम्र क्या होगी?
अशोक अंकल- मैं 48 साल का हूँ।
मैं- आपको देख कर लगता नही अंकल कि आप 48 साल के होंगे।
अशोक अंकल- क्या लगता है तुम्हें, मेरी उम्र क्या होगी?
मैं- यही कोई 38-40 साल की।
अशोक अंकल- नहीं, मैं 48 का ही हूँ। मेरा बेटा 25 साल का हो गया है। मैंने अपने आपको शुरू से ही काफी मेंटेन किया हुआ है योग और एक्सरसाइज करके, यही मैं अपने बेटे को भी सिखाता आ रहा हूँ।
मैं- सच में आप 48 के तो लगते ही नहीं हो।
अशोक अंकल- ठीक है, चलो तुम्हारी बात भी मान लेते हैं। अब मैं भी चलता हूँ, मुझे ऑफिस जाना है।
अंकल का गठीला बदन अब मेरी आंखों में बस गया था, मेरी चूत में आग लग गई थी।
मैं नीचे आकर अपने कमरे में आई तो पति सो रहे थे।
मैंने उनको सहलाकर जगाया और चोदने के लिए गर्म किया।
पति गर्म हो गए और उनका मूड भी अपनी प्यासी बीवी की चुदाई करने का बन गया।
वो मुझे नीचे लिटाकर मेरे ऊपर चढ़ गए।
लंड चूत में अंदर बाहर होने लगा तो मुझे बहुत मजा आने लगा।
मगर यहां चुदाई मेरे पति कर रहे थे और मैं ख्यालों में अंकल को सोच रही थी कि वो ही मुझे चोद रहे हैं।
उनके गठीले बदन को याद कर चुदने में और ज्यादा रस मिल रहा था मेरी चूत को!
अंकल के लंड को मैं कल्पना में ही सोच रही थी कि बदन इतना गठीला है तो लंड भी कितना मस्त होगा उनका!
कुछ दिन बाद मेरे हस्बेंड को अपने ऑफिस के काम से कहीं जाना पड़ गया।
कुछ दिन तो मेरे बिना चुदाई करवाए निकल गए लेकिन फिर मेरी चुदाई की वासना बढ़ने लगी।
अब मेरा मन मचलने लगा था।
रह-रहकर अब मेरे अंदर चुदाई की प्यास जग रही थी।
मुझे बस अब किसी का लंड चाहिए था।
तो फिर अब मेरे अंदर अंकल से चुदने का ख्याल आने लगा।
एक दिन मैं कुछ काम से अंकल के घर गई तो उनके घर का दरवाजा खुला हुआ ही था और अंदर से कुछ आवाजें आ रही थीं जो चुदाई की लग रही थीं।
मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा था।
मैंने किसी तरह की आवाज किए बिना आगे कदम बढ़ाए।
आवाजें अंकल के कमरे से ही आ रही थीं।
मैं दबे पैर कमरे के पास गई और देखा तो कमरे का दरवाजा भी खुला हुआ था।
अंदर का नज़ारा देख मेरे होश उड़ गए।
अंकल-आंटी आपस में बहुत ही जबरदस्त चूमा चाटी कर रहे थे और दोनों बहुत ही रोमांटिक मूड में थे।
यह देख मुझे तो वहाँ से चले जाना चाहिए था लेकिन मुझे मजा आने लगा।
ऊपर से मेरे अंदर अंकल का लंड देखने की प्यास भी लगी थी।
अंकल-आंटी पूरे नंगे थे।
इस तरह उन्हें पूरा नंगा देख मुझे उत्तेजना हो रही थी।
इधर मेरी भी चूत गीली होने लगी थी।
अंकल का मुंह आंटी की तरफ था तो अंकल की मुझे सिर्फ गांड ही दिख रही थी, अंकल का क्या गठीला शरीर था, एकदम मस्त! आंटी नीचे बैठ कर उनका लंड चूस रही थी।
कुछ देर बाद आंटी ने कहा- चलो अब चोदो मुझे!
तो अंकल कहने लगे- इतनी भी क्या जल्दी है! अभी मजे तो लेने दो!
फिर अंकल ने आंटी को बिस्तर पर लिटा दिया और उनकी चूत चाटने लगे।
मुझे अभी तक अंकल के लंड के दर्शन नहीं हुए थे।
कुछ देर बाद अंकल ने आंटी की चुदाई चालू कर दी।
दोनों खूब मजे ले कर चुदाई कर रहे थे।
इधर मेरी चूत भी पूरी गीली हो चुकी थी।
मैं भी अपनी साड़ी उठाकर अपनी चूत को रगड़ने लगी।
चुदाई देख कर मुझे मज़ा आने लगा था।
कुछ देर बाद अंकल आंटी की चुदाई पूरी हो गई।
फिर जैसे ही अंकल मेरी तरफ मुड़े, मुझे उनके लंड के दर्शन हुए।
लंड काफी बड़ा था लेकिन अब वो कुछ ढीला हो गया था।
मगर ढीला होने के बाद भी लंड साइज में काफी बड़ा और मोटा था।
अंकल कमरे से बाहर आने के लिए दरवाजे की तरफ आये और मैं दरवाजे पर ही साड़ी ऊपर उठाए हुए चूत को रगड़ रही थी।
जैसे ही अंकल की नज़र मुझ पर पड़ी, मैंने भी उनको देख लिया और मैं तुरंत वहां से भागी।
जब मैं घर आई तो मेरी सांसें फूल रही थीं और मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।
मैं थोड़ी घबरा गई थी क्योंकि मुझे अंकल ने देख लिया था।
अब क्या होगा ये सोचते हुए मैं बिस्तर पर लेट गई और थोड़ा रिलेक्स होने की कोशिश करने लगी।
फिर सोचने लगी कि अब मैं अंकल के सामने कभी नहीं जाऊंगी, और उनसे नज़रें भी नहीं मिलाऊंगी।
मगर फिर मैंने सोचा कि इसमें मेरी क्या गलती थी।
अगर वो लोग दरवाजा बंद किए बना चुदाई कर रहे थे तो इसमें उनकी ही गलती है।
मेरी जगह कोई और होता तो वो भी देख ही लेता।
वैसे भी लाइव चुदाई देखने का मौका कौन छोड़ता है।
फिर मैं तीन-चार दिन तक अंकल के घर नहीं गई, न ही उनसे मैंने नजरें मिलाईं।
कई दिन बाद छत पर अंकल-आंटी बैठे हुए चाय पी रहे थे।
मुझे देखकर उन्होंने चाय पीने का न्यौता दिया।
मैं बोली- नहीं, आप लोग पीजिए, मैं बस छत पर घूमने आई हूं, मौसम बहुत अच्छा है।
अंकल बोले- हां, मौसम तो है ही मस्त, इसलिए मैं और तुम्हारी आंटी यहां चाय पीने का मजा ले रहे हैं।
कुछ देर बाद आंटी वहाँ से चली गई.
तो अंकल ने मुझे बुलाया और पूछा- उस दिन तुम कुछ काम से आई थी क्या? फिर बिना कुछ बोले ही भाग गई?
ये सुन कर मैं घबरा गई।
मैं बोली- हां, आंटी से कुछ काम था।
अंकल बोले- तो क्या तुमने हमें सब कुछ करते हुए देख लिया था?
अंकल बहुत खुलकर सवाल कर रहे थे और मैं पसीना पसीना हो रही थी शर्म से!
फिर किसी तरह मैंने भी हिम्मत की और बोली- हां, मैंने आप लोगों को वो सब करते हुए देखा था। आप तो काफी स्टेमिना रखते हो। बहुत देर से मैं देख रही थी।
अंकल बोले- ओह्ह, तभी तो तुम चूत रगड़ने लगीं थी! लगता है कि तुम्हारी चूत ने पानी भी छोड़ दिया होगा।
मैंने भी हां में सिर हिला दिया।
धीरे-धीरे अंकल और मैं अब खुल गए और हमने खुलकर बातें कीं।
अब हम दोनों हंस रहे थे।
इतने में ही आंटी वहां आ गईं।
तभी अंकल ने बात को घुमा दिया।
अंकल से सेक्स की बात करने के बाद मेरी अब चूत चुदवाने की इच्छा और ज्यादा तीव्र हो गई थी।
मैंने सोच लिया था कि जैसे ही मौका मिलेगा, मैं अंकल से चुदाई करवा लूंगी।
अब मेरा ध्यान अंकल में रहने लगा था।
अगली सुबह मैं जानबूझकर कपड़े सुखाने छत पर गई।
रोज की तरह अंकल और उनका बेटा वहां योग-व्यायाम कर रहे थे।
मैं उन दोनों को बहाने से देखने लगी।
दोनों ने सिर्फ शॉर्ट्स पहन रखे थे।
कुछ देर बाद अंकल की नजर भी मेरे ऊपर गई।
मैंने पहले ही साड़ी को अपनी नाभि से नीचे बांध लिया था ताकि अंकल मेरी पतली कमर का नजारा ले सकें।
मैंने जानबूझकर ब्लाउज के अंदर ब्रा नहीं पहनी थी ताकि चूचियों की शेप और निप्पलों का आकार अंकल को सही से दिख जाए।
मैं अब ध्यान दे रही थी कि अंकल अब मेरी ओर ज्यादा देख रहे थे और अपने व्यायाम पर कम ध्यान दे रहे थे।
कुछ ही देर बाद मैंने नोटिस किया कि अंकल का लंड टाइट हो गया था।
उनके शॉर्ट्स में से लंड नजर भी आने लगा था।
अंकल अब जानबूझकर अपने लंड के आसपास सहला रहे थे और देख रहे थे कि मेरी नजर भी उनके लंड पर है या नहीं!
इधर मैं भी अंकल की हरकतों को पूरे ध्यान से देख रही थी।
अंकल का लंड पूरा टाइट होकर अब तना हुआ अलग से दिखने लगा था।
हम दोनों अब एक दूसरे को पूरी लाइन दे रहे थे।
दोनों के मन में ही शायद चुदाई का ख्याल चल रहा था।
कुछ देर बाद उनका बेटा उठकर चला गया।
मैं भी इसी पल के इंतजार में थी।
बेटे के जाते ही अंकल ने मुझे आवाज देकर पास बुला लिया।
पास पहुंची तो उन्होंने गुड मॉर्निंग कहा और मैंने भी जवाब दिया।
फिर वो बोले- क्या कर रही हो?
मैंने कहा- कपड़े सुखाने आई थी अंकल!
वो बोले- लेकिन यहां तो कुछ गीला हो गया रोमा!
कहकर अंकल ने अपने लंड को सहला दिया।
मेरा चेहरा शर्म से लाल हो गया और मैं मुस्करा कर हंसने लगी।
फिर वो बोले- कल की बात अधूरी रह गई थी।
मैंने कहा- कौन सी बात अंकल? (मुझे अच्छी तरह याद था कि कल चुदाई की बात हुई थी, लेकिन फिर भी मैं जानबूझकर अनजान बन रही थी)
वो बोले- वही बात, जब तुमने मुझे और तुम्हारी आंटी को चुदाई करते हुए देख लिया था!
मैंने शर्माते हुए कहा- तो अंकल जब कोई दरवाजा खोलकर बिना किसी की परवाह किए ऐसे चुदाई करेगा तो सामने वाले की नजर कैसे नहीं जाएगी! वैसे भी आपका बदन इतना गठीला और जवान लगता है कि मैं भी देखने से रोक नहीं पाई। आपको देखकर तो मेरी भी (चूत) गीली हो गई थी।
इस बात पर वो हँस दिए।
फिर बोले- तो कैसा लगा तुम्हें वो सब देखकर?
मैंने कहा- बहुत अच्छा, बड़ा मजा आ रहा था आप दोनों की चुदाई देखकर! जब आंटी की दोनों टांगें आप कंधों पर रखवाकर जोर-जोर से शॉट मार रहे थे, और आंटी मजे लेकर चुद रही थी तो बहुत मजा आ रहा था। लेकिन …
इतना कहकर मैं रुक गई।
अंकल बोले- लेकिन क्या …
मैंने कहा- कुछ नहीं।
वो बोले- बताओ ना रोमा … ऐसी कौन सी बात है जो छुपा रही हो!
मैं बोली- अंकल … मैंने आपकी पूरी चुदाई देख ली, लेकिन लंड नहीं देख पाई। मुझे बस आपके चूतड़ ही दिख रहे थे। तभी आप मेरी ओर मुड़ गए थे और मैं वहां से भाग आयी थी।
अंकल इस बात पर हंसने लगे।
फिर उन्होंने जो किया, मुझे उस पर यकीन नहीं हुआ।
उन्होंने यहां-वहां देखा और एकदम से अपने शार्ट्स को नीचे खींच दिया।
उनका लंड एकदम से फनफना रहा था।
मैं लंड देखकर जैसे सुन्न सी हो गई।
फिर मैं साथ ही घबरा भी गई।
वो बोले- डरो नहीं, कोई नहीं है देखने वाला … आराम से देख लो!
अंकल का लंड देखकर मेरे मुंह में पानी आने लगा।
लंड बड़ा ही दमदार, मोटा और एकदम से सख्त था।
इससे पहले मैं कुछ बोलती, उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे नीचे खींच लिया और एक हाथ से मुझे आगोश में समाते हुए मेरा हाथ अपने लंड पर रखवा दिया।
उनके लंड को छूते ही मेरे बदन में करंट दौड़ गया।
लंड एकदम से रॉड जैसा सख्त हो गया था।
लेकिन मैं बहुत घबरा रही थी और उठने लगी।
वो बोले- अरे कहां भाग रही हो, कोई नहीं है यहां, तुम्हें अच्छा नहीं लग रहा क्या इसे छूकर? देखो कैसे तड़प रहा है तुम्हारे लिए!
मुझे अंकल का लंड पकड़ने में बड़ा मजा आ रहा था लेकिन मैं कुछ कह नहीं रही थी।
फिर उन्होंने मेरे हाथ को पकड़ कर अपने लंड पर ऊपर नीचे करना शुरू किया।
मैं भी अंकल के लंड पर हाथ ऊपर नीचे चलाने लगी।
इससे अंकल को भी मजा आने लगा और वो आहें भरने लगे।
मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।
डर तो बहुत लग रहा था लेकिन मजा भी बहुत आ रहा था।
मैं और जोर जोर से अंकल का लंड हिलाने लगी।
उनकी सिसकारियां तेज हो गईं।
वो अब कहने लगे- आह्ह … रोमा … क्या नर्म हाथ हैं तुम्हारे, और जोर से चलाओ हाथ … आह्ह … हाय … मेरी जान!
अंकल का हाथ मेरी पीठ पर से होता हुआ दूसरी तरफ मेरी चूची तक पहुंच कर उसे दबाने की कोशिश कर रहा था।
मेरा भी मन कर रहा था कि ब्लाउज उतार कर अंकल से यहीं चूचियां भिंचवा लूं लेकिन छत पर इतना रिस्क नहीं ले सकती थी।
दो मिनट के बाद ही अंकल के लंड ने माल फेंक दिया और मेरा पूरा हाथ उनके वीर्य में सन गया।
अंकल ने जल्दी से पास पड़े हैंड टावल से मेरा हाथ पौंछा और अपना लंड भी साफ कर लिया।
मैं भी फटाक से वहां से उठी और बाल्टी उठाकर नीचे आ गई।
मेरी चूत में पानी आ गया था।
मुझे चूत में गीलापन बिना हाथ लगाए ही महसूस हो गया था।
अब चूत को लंड लेने की खुजली मची थी।
यह Antarvasna स्टोरी एक महीने old है। हाय फ़्रेंड्स आई एम प्रीत फ़्रोम भोपाल। आप लोगों ने मेरी कहानी चाची से प्यारा कौन पढ़ी। काफ़ी अच्छा रिस्पोंस आया अच्छा लगा।
अब मैं आप लोगों को एक नयी कहानी बताने जा रहा हूँ।
अब हम लोग भोपाल में ही शिफ़्ट हो गये थे। जैसा कि आप लोगों को मालूम है कि चाची को चोद कर मुझे चोदने का शौक लग गया था तो लंड चोदने के लिये तड़पता रहता है। हमारे घर में पार्ट-टाइम नौकरानियां काम करती हैं। लेकिन कोई भी सुंदर नहीं थी। मम्मी बड़ी होशियार थीं। सब काली कलूटी और भद्दी भद्दी छांट छाँट कर रखती थीं। जानती थी लड़का बहुत ही चालु है। आखिर में जब कोई नहीं मिली तो एक लड़की को रखना ही पड़ा जो बीसेक साल की मस्त जवान कुंवारी लड़की थी। साँवला रंग था और क्या जवान, सुंदर ऐसी कि देख कर ही लंड खड़ा हो जाए। मम्मे ऐसे गोल गोल और निकलते हुए कि ब्लाउज़ में समाए ही नहीं।
बस मैं मौके की तलाश में था क्योंकि चोदने के लिये एकदम मस्त चीज़ थी। सोच सोच कर मैंने कई बार मुठ मारा। बहुत ज़ोर से तमन्ना थी कब मौका मिले और कब मैं इसकी बुर में अपना लंड घुसा दूं।
वो भी पैनी निगाहों से मुझे देखती रहती थी। और मैं उसके बदन को चोरी चोरी से नापता रहता था। मन ही मन में कई बार उसे नंगी कर दिया। उसकी गुलाबी चूत को कई बार सोच सोच कर मेरा लंड गीला हो जाता था और खड़ा होकर फड़फड़ा रहा होता। हाथ मचलते रहते कब उसकी गोल गोल चूचियों को दबाऊं। एक बार चाय लेते समय जब मैंने उसे छुआ तो मानो करेंट सा लग गया और वो शरमाते हुए खिलखिला पड़ी और भाग गयी। मैंने कहा मौका आने दे, सीमा तुझे तो खूब चोदुंगा। लंड तेरी चिकनी बुर में डाल कर भूल जाऊंगा। चूची को चूस चूस कर प्यास बुझाउंगा और दबा दबा कर मज़े लूंगा। होठों को तो खा ही जाउंगा। सीमा उसका प्यारा सा नाम था।
कहते हैं उसके घर में देर है पर अंधेर नहीं। इतवार था उस दिन और मेरे लंड देव तो उछल गये। मैं मौका चूकने वालों में से नहीं था। लेकिन शुरु कैसे करूँ। अगर चिल्लाने लगी तो? गुस्सा हो गयी तो? दोस्तो, तुम यह जान लो कि लड़कियां कितना ही शरमाये लेकिन उनके दिल में लालसा होती है कि कोई उनको छेड़े और चोदे।
मैंने सीमा को बुलाया और उसे देखते हुए कहा- सीमा, तुम कपड़े इतने कम क्यों पहनती हो?
वह बोली- क्यूं साहब, क्या कम है?
मैंने जवाब दिया- देखो, ब्लाउज़ के नीचे कोई ब्रा नहीं है। सब दिखता है। लड़के छेड़ेंगे तुझे।
वो बोली- बाबुजी, इतने पैसे कहां कि ब्रा खरीद सकूं। आप दिलवाओगे?
मैंने कहा- दिलवा तो मैं दूँगा … लेकिन पहले बता कि क्या आज तक किसी लड़के ने तेरे बदन को छेड़ा है?
उसने जवाब दिया- नहीं साहबजी।
मैंने कहा- इसका मतलब कि तू एकदम कुंवारी है?
“जी साहबजी।”
“अगर मैं कहूं कि तू मुझे बहुत अच्छी लगती है, तो तू नाराज़ तो नहीं होगी?”
“नाराज़ क्यों होने लगी साहबजी? आप बहुत अच्छे हैं।”
बस यही उसका सिगनल था मेरे लिये। मैंने हिम्मत करके पूछ लिया- अगर मैं तुझे थोड़ा सा प्यार करूं तो तुझे बुरा तो नहीं लगेगा?
अपने पैर की उंगलियों को वो ज़मीन पर मसलती हुई बोली- आप तो बड़े वो हो साहब।
मैंने आगे बढ़ते हुए कहा- अच्छा अपनी आँखें बंद कर ले और अभी खोलना नहीं।
उसने आँखें बंद की और हल्के से मुँह ऊपर की तरफ़ कर दिया। मैंने कहा- बेटा लोहा गर्म है, मार दे हथौड़ा। आहिस्ता से पहले मैंने उसके गालों को अपने हाथों में लिया और फिर रख दिये अपने होंठ उसके होंठों पर। हाय क्या गज़ब की लड़की थी। क्या टेस्ट था। संसार की महंगी से महंगी शराब उसका मुकाबला नहीं कर सकती थी। ऐसा नशा छाया कि सब्र के सारे बांध टूट गये।
मेरे होंठों ने कस कर उसके होंठों को चूसा और चूसते ही रहे। मेरे दोनों हाथों ने ज़ोर से उसके बदन को दबोच लिया। मेरी जीभ उसकी जीभ का टेस्ट लेने लगी। इस दौरान उसने कुछ नहीं कहा। बस मज़ा लेती रही।
अचानक उसने आँखें खोली और बोली- साहबजी, बस, कोई देख लेगा।
मैंने कहा- सीमा, अब तो मत रोको मुझे। सिर्फ़ एक बार।
“एक बार, क्या साहब?”
मैंने उसके कान में फुसफुसा कर कहा- अपनी बुर चुदवाएगी मुझसे? एक बार अपनी बुर में मरा लंड घुसवायेगी? देख मना मत करना। बहुत खूबसूरत है तू … मेरा दिल आ गया है तुझ पर!
यह कह कर मैंने सीमा को कस के पकड़ लिया और दायें हाथ से उसकी बायीं चूची को दबाने लगा। मुँह से मैं उसके गालों पर, गले पर, होंठों पर और हर जगह पर चूमने लगा पागलों की तरह। क्या चूची थी, मानो सख्त संतरे। दबाओ तो चिटक चिटक जाये। उफ़, मलाई थी पूरी की पूरी।
सीमा ने जवाब दिया- साहब जी, मैंने यह सब कभी नहीं किया। मुझे शर्म आ रही है।
उखड़ी सांसों से मैंने कहा- हाय मेरी जान सीमा, बस इतना बता, अच्छा लगा या नहीं। मज़ा आ रहा है या नहीं? मेरा तो लंड बेताब है जाने मन। और मत तड़पा।
“साहबजी, जो करना है जल्दी करो, कोई आ जायेगा तो?”
बस मैंने उसके फूल जैसे बदन को उठाया और बिस्तर पर ले गया और लिटा दिया। कस कर चूमते हुए मैंने उसके कपड़ों को उतारा। फिर अपने कपड़ों को जल्दी से निकाला। सात इंच लम्बा मेरा लंड फड़फड़ाते हुए बाहर निकला। देख कर उसकी आँखें बड़ी हो गयी, बोली- हाय यह क्या है? यह तो बहुत बड़ा है।
“पकड़ ले इसे मेरी जान।” कहते हुए मैंने उसके हाथ को अपने लंड पर रख दिया।
उसके बदन को पहली बार नंगा देख कर तो लंड ज़ोर से उछलने लगा। चूची ऐसी मस्त थी कि पूछो मत। चूत पर बाल इतने अच्छे लग रहे थे कि मेरे हाथ उसकी तरफ़ बढ़ ही गये। क्या गर्म चूत थी। उंगली आहिस्ता से अंदर घुसाई। रस बह रहा था और उसकी बुर गीली हो गयी थी। गुलाबी गुलाबी बुर को उंगलियों से अलग किया, और मैंने अपना लंड आहिस्ता से घुसाया। हाथ उसकी चूचियों को मसल रहे थे। मुँह से उसके होंठों को मैं चूस रहा था।
“आह, साहब जी, धीरे … दुःख रहा है।”
“सीमा मज़ा आ रहा है ना?”
“साहबजी, जल्दी करिये न जो भी करना है।”
“हाय मेरी जान, बोल क्या करूं?”
“डालिये न। कुछ करिये न।”
“सीमा, बोल क्या करूं?” कहते हुए मैंने लंड को थोड़ा और घुसाया।
“अपना यह डाल दीजिये।”
“बोल न, कहाँ डालूं मेरी जान, क्या डालूं?”
“आप ही बोलिये न साहबजी, आप अच्छा बोलते हैं।”
“अच्छा, यह मेरा लंड तेरी चिकनी और प्यारी बुर में घुस गया और अब ये तुझे चोदेगा।”
“चोदिये न, साहबजी।”
उसके मुँह से सुन कर तो लंड और भी मस्त हो गया- हाय सीमा, क्या बुर है तेरी, क्या चूची है तेरी। कहां छुपा कर रखा था इतने दिन। पहले क्यों नहीं चुदवाया।
“साहबजी, आपका भी लंड बहुत मज़ेदार है। बस चोद दीजिये जल्दी से।” और उसने अपने चूतड़ ऊपर कर लिये।
अब मैंने उसकी दाहिनी चूची को मुँह में लिया और चूसने लगा। एक हाथ से दूसरी चूची को दबाते हुए, मसलते हुए, मैं उछल उछल कर ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा। जन्नत का मज़ा आ रहा था। ऐसा लग रहा था बस चोदता ही रहूँ, चोदता ही रहूँ इस प्यारी प्यारी चूत को। मेरा लंड ज़ोर ज़ोर से उसकी गुलाबी गीली गर्म गर्म बुर को चोद रहा था।
“हाय, सीमा चुदवाने में मज़ा आ रहा है न। बोल मेरी जान, बोल।”
“हां साहब, मज़ा आ रहा है। बहुत मज़ा आ रहा है। साहब आप बहुत अच्छा चोदते हैं। साहब, यह मेरी बुर आपके लंड के लिये ही बनी है। है न साहब। साहब, चूची ज़ोर से दबाइये न। साहब, ऊऊओह, मज़ा आ गया, ऊऊह्हह्ह।”
अचानक, हम दोनों साथ साथ ही झड़े। मैंने अपना सारा रस उसकी प्यारी प्यारी बुर में घोल दिया। हाय क्या बुर थी। क्या लड़की थी। गर्म गर्म हलवा। नहीं उससे भी ज्यादा टेस्टी।
मैंने पूछा- सीमा, तेरा महीना कब हुआ था री?
शरमाते हुए बोली- परसों ही खत्म हुआ। आप बड़े वो हैं। यह भी कोई पूछता है।
बांहों में भर कर होंठों को चूमते, चूचियों को दबाते हुए मैंने कहा- मेरी जान, चुदवाते चुदवाते सब सीख जायेगी।
एकदम सेफ़ था। प्रग्नेंट होने का कोई चांस नहीं था अभी। दोस्तो, कह नहीं सकता, दूसरी बार जब उसे चोदा, तो पहली बार से ज्यादा मज़ा आया। क्योंकि लंड भी देर से झड़ा। चूत उसकी गीली थी। चूतड़ उछाल उछाल कर चुदवा रही थी साली। उसकी चूचियों को तो मसल मसल कर और चूस चूस कर निचोड़ ही दिया मैंने। जाने फिर कब मौका मिले। आज इसकी बुर चूस ही लो। बुर का स्वाद तो इतना मज़ेदार था कि कोई भी शराब में ऐसा नशा नहीं। चोदते समय तो मैंने उसके होंठों को खा ही लिया। “यह मज़ा ले मेरे लंड का मेरी जान। तेरी बुर में मेरा लंड – इसी को चुदाई कहते हैं सीमा। कहां छुपा रखी थी यह चूत जानी।” कहते हुए मैं बस चोद रहा था और मज़ा लूट रहा था।
“चोद दीजिये साहबजी, चोद दीजिये। मेरी बुर को चोद दीजिये।” कह कह कर चुदवा रही थी मेरी सीमा।
दोस्तो, चुदाई तो खत्म हुई लेकिन मन नहीं भरा, उसे दबोचते हुए मैंने कहा- सीमा, मौका निकाल कर चुदवाती रहना। तेरी बुर का दिवाना है यह लंड। मालामाल कर दूंगा जाने मन। Antarvasna
यह कह कर मैंने उसे दो सौ रुपये दिये और चूमते हुए मसलते हुए विदा किया।
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