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Antarvasna Stories

मेरा नाम राहुल Antarvasna Stories है, मेरी उम्र २२ साल है। मैं ६ फ़ुट २ इंच लम्बा सांवला लड़का हूँ। मेरे लण्ड का साइज़ ७ इंच है। मैं आपको अपने पहले सेक्स के बारे में बताने जा रहा हूँ. मैंने अपना पहला सेक्स अपनी पड़ोसन अंजलि आंटी के साथ किया था। यह उन दिनों की बात है जब मैं ग्यारहवीं में पढ़ता था। अंजलि आंटी बहुत सेक्सी थी। उनकी उस समय नई नई शादी हुई थी। उनका पति चालीस साल का था और वो केवल पच्चीस साल की ही थी। उनका गोल-मटोल बदन, उनके उभरे हुए वक्ष देख कर कोई भी अपना काबू खो दे !

मैंने मन ही मन उन्हें चोदने का सोचता था लेकिन शुरुआत कैसे की जाए यह मुझे समझ नहीं आ रहा था। उनका पति शाम की पारी में काम करके आधी रात को घर आता था और रात को अंजलि आंटी की चुदाई करता था।

एक बार उनका पति रात को एक बजे आया, मैं उस वक्त जगा हुआ था, अचानक आह आह की आवाज सुनाई दी। मैंने बाहर जाकर देखा तो उनके घर से आवाज आ रही थी। उस समय बहुत अँधेरा था और रात में कुछ दिखाई भी नहीं दे रहा था तो मैंने हिम्मत करके उनकी खिड़की में झांकने की कोशिश की।

खिड़की में छेद थे और पर्दा लगा हुआ था जिससे मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। तो मैंने डंडी से खिड़की का पर्दा हटाया, अंदर जीरो-बल्ब की रोशनी थी। अन्दर का नजारा देख कर मैं तो एकदम दंग रह गया। मैंने अन्दर देखा कि अंकल अंजलि आंटी के स्तन दबा रहे थे और वो आहऽ आहऽऽ की आवाज निकाल रही थी। कुछ देर के बाद अंकल अंजलि आंटी के ऊपर चढ़ गए और एक जोरदार धक्के के साथ अपना काला लिंग उनकी योनि में डाल दिया। अंकल दो-तीन धक्कों के बाद झड़ गये और आंटी के ऊपर सो गए। आंटी अभी पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुई थी, उनकी कामना उनकी चेहरे से मुझे साफ़ नजर आ रही थी। अंकल की ज्यादा उम्र होने के कारण आंटी संतुष्ट नहीं हो पाती थी।

तब उनकी शादी को एक साल बीत चुका था लेकिन आंटी को बच्चा नहीं हो रहा था। शायद अंकल की ज्यादा उम्र के कारण ऐसा हो रहा था। इस बात से आंटी हमेशा परेशान रहती थी। और उनकी परेशानी उनके चेहरे से साफ नजर आती थी।

एक दिन आंटी को बाजार जाना था, आंटी और मेरी खूब जमती थी। हम दोनों एक दूसरे से मजाक-मस्ती किया करते थे और नॉन-वेज़ चुटकले मारा करते थे। वो मुझसे केवल ३ साल ही बड़ी थी लेकिन अंकल की उम्र ज्यादा होने के कारण मुझे भी उन्हें आंटी कहना पड़ता था।

उस दिन मैं उनको मार्केट में शॉपिंग कराने ले गया। मार्केट में काफी भीड़ थी तो कई बार धक्के की वजह से मेरे हाथ उनके वक्ष से छू जाते थे, लेकिन उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं की। मेरे साहस और बढ़ गया, मैंने जानबूझ कर उनकी गांड पर हाथ फ़िराया- वोह आह…. करके रह गई। लेकिन मुझे कुछ नहीं कहा। मैं आंटी के मन की इच्छा समझ चुका था। मार्केट से शॉपिंग करने के बाद वो घर पर आई, उन्होंने मुझे उनके साथ आने के लिए धन्यवाद कहा। अब उस पल के बाद तो मैं एक दम बेकाबू सा हो गया था।

मैंने एक दिन साहस करके उन्हें अपने दिल की बात बता दी। पहले तो उन्होंने इंकार किया लेकिन बाद में मान गई। उनके घर में टीवी नहीं था, वो अक्सर सीरियल देखने के लिए मेरे घर आया करती थी।

मेरे बीच वाले कमरे में टीवी था और वो हॉल में बैठ कर टीवी देख रही थी। दोपहर का समय था, मेरी बहन अन्दर वाले कमरे में टीवी देख रही थी जहां टीवी रखा हुआ था और वो हॉल में बैठकर टीवी देख रही थी उस समय घर में कोई नहीं था। मैंने दरवाजा बंद कर दिया जिससे घर में थोड़ा अँधेरा हो गया।

फिर मैं आंटी के पास गया और उन्हें चुम्बन देने के लिए कहा। पहले तो वो हिचकिचाई लेकिन मेरी जबरदस्ती के आगे उन्होंने हार मान ली और धीरे से एक चुम्बन दिया। हाय क्या जादू था उस चुम्मे में ! मैं तो एकदम बेकाबू हो गया।

दूसरे दिन मैं उनके घर पर गया, वो सोई हुई थी। जैसा कि मैंने आपको बताया कि उनका पति दिन भर कम करता था और रात को लेट ही आता था जिससे घर में दोपहर को वो अकेली ही होती थी। उनको सोता देख मैं उनके पास गया, मेरी आहट सुनकर वो जग गई। मैं झट से उनके ऊपर आ गया और उनके होटों पे अपने होंठ लगा दिए। उन्होंने भी मेरा साथ देना शुरु किया। मैंने अब उनके स्तन दबाने शुरु किया- हाय, क्या गोल-गोल चूचे थे !

वो अब आह.. आह………. की सिसकारियाँ भर रही थी। उन्होंने कहा- मैं दरवाजा बंद कर देती हूँ, फिर जो करना हैं वो करना !

उन्होंने दरवाजा बंद किया और मुझसे आकर लिपट गई। मैंने उनको अपनी बाहों में भर लिया। उन्होंने भी मुझे जोर से जकड़ लिया। मैंने उन्हें बिस्तर पर लेटा दिया और उन्हें चूमने लगा. मैं उनके पूरे बदन पर पागलों की तरह चूमने लगा। फिर मैंने उनके बदन से एक एक करके कपड़े उतारने शुरु कर दिए। जब मैंने उनकी ब्रा को उनसे अलग किया तो उनके स्तन बाहर आ गए, उन्हें देखकर मैं और बेकाबू हो गया और उनके गोरे-गोरे चूचों को जोर जोर से दबाने लगा। फिर मैंने उनकी साड़ी को उतारा। उन्होंने काले रंग की पैंटी पहन रखी थी। मैंने पैंटी के ऊपर से हाथ फेरा तो वो आह…………….. करके आवाज निकालने लगी। फिर मैंने उनकी पैंटी को उनसे जुदा किया। उसके बाद का नजारा देख कर मैं तो एकदम दंग हो गया। उनकी चूत एकदम गुलाबी थी और हल्के-हल्के बाल थे।

मैंने उनसे पूछा- आपके तो बाल ही नहीं आये हैं?

तो उन्होंने जवाब दिया- मैं हमेशा इन्हें साफ़ करती रहती हूँ।

फिर मैंने उनके पेट पर चूमना शुरु किया तो वो एकदम मदहोश हो कर सिसकारियाँ लेने लगी। वो एकदम से गर्म होती जा रही थी। फिर मैंने उनकी चूत पे हाथ फ़िराया तो वो और रोमांटिक मूड में आ गई और जोर जोर से सिसकारियाँ भरने लगी। पूरा कमरा आह………… आह की आवाजों से गूँज रहा था। अब वो एकदम सुलग चुकी थी, उन्होंने मुझे कहा- राहुल अब नहीं बर्दाश्त होता, अब मेरी प्यास बुझा दो !

लेकिन मैं धीरे धीरे सब करना चाहता था इसलिए मैं उन्हें और गर्म कर रहा था। वो अब जोर जोर से सिसकारियाँ मार रही थी। अब मैं समझ चुका था कि वो अब चरम सीमा पर पहुँच चुकी है। तो मैंने अपनी पैंट उतार दी। अब मैं उनके सामने अंडरवीअर में था। उन्होंने मेरा अंडरवीयर सरकाया, जिससे मेरा ७ इंच लम्बा लण्ड बाहर आ गया। मेरा लण्ड ७ इंच लम्बा और चार इंच चौड़ा हो गया था।

मेरा लण्ड देख कर वो थोड़ी सहम गई। मैंने पूछा- क्या हुआ आंटी ?

तो उन्होंने कहा- तुम्हारा लण्ड कितना मोटा और लम्बा है ! तुम्हारे अंकल का तो छोटा और पतला है।

फिर मैंने उनको सीधा बेड पर लिटा दिया और किस करने के लिए कहा। उन्होंने मेरा लण्ड हाथ में लिया और हिलाने लगी। मुझ बहुत मजा आ रहा था। थोड़ी देर के बाद मैंने उनकी चूत में अपनी एक ऊँगली डाल दी तो वो चिल्ला उठी- हाई…मर गई रे. !

मैं अब अपनी ऊँगली अन्दर-बाहर करने लगा और वो सिसकारियाँ भरने लगी।

उन्होंने कहा- अब बस राहुल ! अब बर्दाश्त नहीं होता ! अब मेरी प्यास बुझा दे !

तो मैंने अपना लण्ड उनकी चूत पर रखा और एक धक्का लगाया, लेकिन मेरा लण्ड अन्दर नहीं जा रहा था। फिर मैंने एक जोरदार झटका लगाया और पूर लण्ड अन्दर चला गया और वो चिल्ला उठी- हाई मर गई रे ! निकाल इसे जल्दी ! मेरी चूत फट गई रे ! कितना मोटा लण्ड है तेरा !

तो मैं कुछ देर के लिए रुक गया और फिर धीरे धीरे धक्के लगाना शुरु किया। अब उन्हें भी मजा आ रहा था, वो भी अपनी गांड उठा उठा कर मुझसे चुदवा रही थी। तक़रीबन २५ मिनट की चुदाई के बाद मैं अब झड़ने वाला था। मैंने उन्हें बताया कि मैं अब झड़ने वाला हूँ तो उन्होंने कहा कि बाहर मत गिराना ! सारा का सारा मेरे अन्दर ही गिरा दो ! मुझे गर्भवती बना दो ! मुझे तुम्हारे बच्चे की माँ बना दो !

मैंने वैसा ही किया, मैंने अपना सारा पानी उनकी चूत में गिरा दिया और उनके ऊपर सो गया।

हाय क्या चूत थी उनकी ! एकदम आग थी उनकी चूत में जिससे मैं जल्दी झड़ गया। उनकी चूत मेरे वीर्य के कारण पूरी गीली हो चुकी थी। मैंने उनसे एक बार फिर सेक्स करने के लिए कहा तो उन्होंने मुझे एक बार फिर गरम किया और मेरा लण्ड तन गया।

इस बार मैंने उन्हें कुतिया स्टाइल में झुकने के लिए कहा। वो झुक गई और मैंने अपना लण्ड पीछे से उनकी चूत में डाल दिया। चूत गीली होने की वजह से जल्दी से घुस गया। अब मैं अपने धक्कों की रफ़्तार तेज करने लगा और जोर जोर से उनको चोदने लगा।

वोह आः………आह आह……..करके चिल्ला रही थी, मुझे बहुत मजा आ रहा था। करीब आधे घंटे की चुदाई के बाद मैं झड़ गया इस दरमियान वो तीन बार झड़ चुकी थी।

फिर हम दोनों एक दूसरे में उलझ कर सो गए।

उस रात को हमने छः बार चुदाई की।

अब जब भी हमें मौका मिलता, हम चुदाई की खेल खेला करते थे।

मेरी चुदाई से वो गर्भवती हो गई और ९ महीने बाद उन्हें लड़का हुआ।

अब भी हम चुदाई का खेल खेलते रहे और दो साल के बाद वो फिर गर्भवती हुई, इस बार उन्हें लड़की हुई।

इस तरह मैंने पड़ोस वाली आंटी को गर्भवती बनाया।

अगर आपको मेरी कहानी पसंद आई तो मुझे अपने विचार मेरी ईमेल पर भेजें। Antarvasna Stories

Sex Stories

सभी अंतर्वासना पाठकों Sex Stories व गुरु जी को मस्त चूत के साथ नमस्ते!

अंतर्वासना पर यह मेरी पहली कहानी नहीं है। गुरु जी की दया से मेरी मेहनत पे अंतर्वासना ने कभी पानी नहीं फिरने दिया और मुझे अनन्त प्यार मिला और मिलेगा भी इतने बढ़िया उत्तर मिले इमेल के ज़रिये, चेट के ज़रिये!

दोस्तो! मुझे गैर मर्दों की बाँहों में सुख मिलता है, यह मैं पहले भी बता चुकी हूँ!

पति के पास कनाडा आकर भी मुझे वो सुख नहीं मिल पाया और मुझे यहाँ पर भी गैर मर्द की बाँहों में जाना पड़ा।

मैं यहाँ तो आ गई और पति के पास रहने लगी लेकिन यहाँ मुझे भी काम करना पड़ता था मेरे आने की वजह से पति अपने दोस्तों से अलग रहने लगे। मैंने तो कहा था कुछ दिन उनके साथ रुकते हैं। लेकिन फ़ोन का बिल, गैस का बिल, पानी का बिल, हर महीने घर की किश्त जाती।

मुझे जिस पब में काम मिला था, वहाँ मेरी दोस्ती पीटर से हुई। जल्दी ही यह दोस्ती शारीरिक सबंधों में तबदील हो गई। उसके बाद पीटर ने मुझे खूब चोदा, अपने दोस्त के साथ मिलकर मेरा बाजा बजाया, उसके बाद दोंनो ने मुझे चार हज़ार अमरीकी डॉलर भी दिए। उसके बाद हम नीचे पब में वापिस आ गए और मैं उनको ड्रिंक सर्व करती रही।

जाते हुए अपना मोबाइल नंबर दिया और टिप की तौर पे 500 अमरीकी डॉलर दिए मुझे पैसों की जरूरत थी। इंडिया में मैंने बहुत ऐश की थी और अब मेरे सर पर काम करने का बोझ था इसके बिना यहाँ कोई गुजारा नहीं था सो तभी जब मैंने पीटर को कॉल लगाई और बात की उसने मुझे एक व्यस्क मूवी में काम करने की ऑफर दी। उसके दोस्त ने कहा कि एक इंडियन लड़की की मूवी इंडियन मार्केट में धमाल मचा देगी। उसने मुझे कहा कि फिल्म डबल एक्स होगी और उसकी अच्छी कीमत देने को तैयार है लेकिन मैंने बदनामी के डर से सोचने के लिए कहा। फिर सोचा कि वैसे भी तो मैं करवाती हूँ।

मैंने उनके सामने शर्त रखी कि मेरे चेहरे को इस कदर तरीके से मेक-अप किया जाए, मतलब आँखों पे स्टीकर, गालों पे स्टीकर!

वो मान गया।
मैंने 70,000 डॉलर लेने को बोला।
वो मान गया।

मैंने उसे कहा- यह फिल्म टोरंटो में नहीं, कहीं और बनाओ!

एडबर्ग में फ़िल्म बनाना निश्चित हुआ। नाम था- पेओर इंडियन स्लाट विद इग्लिश मेंस

सी हाउस रेंट लिया गया।

वहाँ पहुंची। पीटर के साथ मुझे बिकनी दी गई और मेरा पहला सीन था सनबाथ!

मैं वहाँ अकेली बीच पे लेट गई। मेरे हाथ में मोबाइल था जिसपर मैं लेटी हुई ब्लू क्लिप्स देखते हुए अपने बूब्स मसलने लगती हूँ और फिर पेंटी में हाथ डाल चूत को!

कैमरे के सामने थोड़ा नर्वस थी।

तभी वहाँ तीन आदमी आये, एक नीग्रो था और दो गोरे!

तीनों आकर जब मुझे चूत, मम्मे मसलते देखते हैं और मुझे कहते हैं- बेबी एनी प्रॉब्लम?

मेरी चूत को देखते हुए थोड़ी स्माइल देते हैं, बिना कुछ कहे मैं भी स्माइल पास करती हूँ! ऐसा करते ही तीनों मुझे वहाँ से गोदी में उठाते हुए सी हाउस में लेकर जाते हैं।

आर यू इंडियन?
येस!
ओके! नीड हेल्प?

यम! मैं फिर से स्माइल देती हूँ, एक गोरा मेरी पेंटी उतार देता है और अपने मुँह को चूत पे रखते हुए चातने लगा मेरे सर पे खड़े दो मर्द! दोनों ने कुछ नहीं पहना था। उनके लौड़े देख देख कर चूत चटवा रही थी मैं!

नीग्रो का लौड़ा मुँह में ले लिया और गोरे का हाथ में!
वो बोला- हे बिच! व्हाट्स योउर एज?
27!

ओह वो इंग्लिश में बोल रहे थे। मैं आपको हिंदी में बताती हूँ!

मैं सताइस साल की हूँ!
पहली बार कब चुदी?
नौ साल पहले!
तुझे हमारे लौड़े कैसे लगे?
यम! बहुत अछे लगे!
बोले- आज तेरे दोनों छेदों को एक साथ चोदेंगे! पसन्द करोगी?
हाँ चोदो मुझे!

और कैमरा मैन ने कंडोम की डिब्बी फेंकी। मैंने उसके लौड़े पे कंडोम चढ़ा दिया और उसने अन्दर डाल दिया।
हाय क्या लौड़ा था!

उसने रफ़्तार पकड़ी। मैंने भी अब एक धन्धे वाली कॉल-गर्ल की तरह अपने आपको बेशर्म कर दिया। लौड़े का तो मुझे पहले से बहुत चस्का था। नीग्रो का लौड़ा देख कर मैं पागल हो गई। इतना बड़ा लौड़ा!
डर भी लगता था!

गोरा रुक गया। नीग्रो ने कंडोम डालते हुए मुझे लौड़े पे बैठने को कहा। इतना बड़ा लौड़ा, लेकिन देखते ही मैंने पूरा अन्दर ले लिया और उसका लौड़ा अन्दर मेरे गर्भाशय से टकराता तो मुझे जन्नत दिखने लगती!
वाह क्या लड़की है!
बिच है!

गोरा पीछे आया और मेरी गांड के छेद को चाट करके उंगली डालते हुए जगह सी बनाई।

एक लौड़ा चूत में था। मुझे उसकी चेस्ट की तरफ नीचे दबाते हुए गोरे ने मेरी गांड को खोलते हुए उस पे लौड़ा रख कर धक्का मारा और उसका आधा लौड़ा गांड में समां गया। दर्द से मैं तड़पने लगी। लेकिन देखते ही दोनों के लौड़े में खुद बोल बोल कर डलवाने लगी। इतना मजा एक लौड़ा मेरे मुँह में दो मेरे अन्दर!

उसने कहा- तू अपनी भाषा में गरम बातें कर! ताकि लोग इसको और खरीदें!

आह चोद मुझे मादरचोद! फाड़ डालो मेरी चूत! बना दो भोंसड़ा! हाय मेरे राजा! चोदो! कमीने तू मुंह में डाले रख!

अब उनमें से एक ने अदला बदली कर ली और जिसका चूस रही थी अब उसने डाल लिया और तेजी से चोदने लगे। करीब पन्द्रह मिनट की चुदाई के बाद तीनों ने एक साथ अपने लौड़िं का सारा पानी मेरे चेहरे, होंठ हर जगह उगल दिया और मैं उनके पानी से तर हो गई। रहता हुआ पानी मैंने चाट के साफ़ कर दिया।

वे बोले- एन्जॉय बेबी?
येस!

दोस्तो, अभी तो फिल्म का पहला सीन वहाँ फ़िल्माया गया। उसके बाद अगला सीन मुझे होटल में करना था जिसमें दोनों बन्दे नीग्रो थे और उनके लौड़े कैसे होंगे यह अनुमान लगाओ और बताओ कैसी लगी मेरी चुदाई?

दोस्तो, हर कोई पूछता है- यह असली है?
हाँ! यह असली है!

कनाडा में मेरी सर्विस के लिए मुझे इ-मेल कर दो अब मेरे पास एक बी.एम.डबल्यू, एक मरसिडीज़ और एक पोश कार है। मैं एक हाई प्रोफाइल कॉल गर्ल बन चुकी हूँ और एक अडल्ट क्लब अपना है।

लेकिन उस फिल्म के अगले सीन के बारे में ज़रूर लिखूंगी। प्लीज़ मेरी चुदाई के हर किस्से को छाप देना गुरु जी!

एक बार फिर से धन्यवाद! Sex Stories

Antarvasna

आसाम की हरी भरी वादियों में यदि आप जायें Antarvasna तो आपका मन झूम उठेगा। मैं अपने पति के साथ आसाम के एक ओयल फ़ील्ड में हूं। 15 दिनों तक लगातार यहाँ फ़ील्ड में रहना होता है। केम्प से 3 किलोमीटर दूर ड्रिलिंग मशीन काम कर रही है। उसके लिये उन्हें लाने ले जाने के लिये वाहन की व्यवस्था है।

दिन भर बस दिल कुछ करने को चाहता है। अकेलेपन का अभी कोई साथी नहीं है।

इनके एक अच्छे दोस्त है, मैं उनका असली नाम नहीं बताऊँगी, हम उन्हें करण कहेंगे। 25 वर्ष का हट्टा कट्टा नौजवान है! अभी तक उसकी शादी नहीं हुई है। वो कभी कभी शाम को इनके साथ ड्रिन्क करने आ जाता है। मेरी तरफ़ बडी हसरत भरी निगाहों से देखता रहता है कि शायद कभी कोई इशारा मिल जाये।

मैं समझ कर भी उसे टाल जाती हूं। पर देखिये तो … मौसम की मार … दिल भटकने लग जाता है.

सब कुछ पास में है, फिर भी ये दिल मांगे मोर … मोर …और मोर …

आखिर दिल हार बैठी … मैं करण की ओर देख कर मुस्करा उठी.
उसकी तो जैसे बांछें खिल उठी।

हंसी तो फ़ंसी के आधार पर हमारी गाड़ी आगे बढ़ चली।
जब भी वो शाम को आता तो मैं उसका दरवाजे पर इन्तजार करती, पर वो समझ कर भी हिम्मत नहीं कर पा रहा था।

मैं इन्तज़ार करती रही.
पर कब तक … वो तो आगे ही नहीं बढ रहा था।

मैंने उसे अन्त में एक कागज का टुकड़ा लिख के उसे थमा ही दिया।

वो पहले तो घबरा ही गया, फिर उसने मुझे देखा … मेरी आंखों में उसे बस लाल लाल वासना के डोरे दिखे।

‘सुनील कहाँ है?’

‘अन्दर है… आ जाओ… नहा रहे हैं…’ मैंने उसे आंख मार कर इशारा किया।
जैसे ही वो अन्दर आया, मैंने उसका हाथ पकड़ लिया … मैंने लाज शरम छोड दी.
वो कांप उठा।

‘लड़की हो क्या … ऐसे क्यों कांप गये?’
‘जी… पहली बार किसी ने छुआ है ना!’
‘कल सुनील के जाने के बाद आओगे ना?’

उसने कहा कुछ भी नहीं … बस हाँ में सर हिला दिया।

आज उसकी रात बेचैनी में गुजरी. मेरी भी हालत उत्तेजना के मारे वैसी ही थी।

सुनील के ओफ़िस जाते ही करण आ गया.
कल की उसकी घबराहट देख कर नहीं लग रहा था कि वो आयेगा।

मैंने दरवाजा खोला और उसका हाथ पकड़ कर जल्दी से अन्दर खींच लिया, और फिर से दरवाजा बन्द कर लिया।

‘करण… हाय… तुम आ गये!’ उसका मुख सूखने लगा था।
‘जी…जी… आप ने लिख कर बुलाया था ना…’ करण अटकता हुआ बोला।
‘नहीं तो… कब लिखा था…’
‘ये… है ना…’ वो झेंप गया… और कागज का टुकडा निकाल कर मुझे दिखाया।

मैंने कहा- अरे हाँ … ये तो मैंने ही लिखा है.’ उसे मैंने पढ़ा … और उसे फाड़ कर फ़ेंक दिया.
उसे देख कर लगा कि मुझे ही बेशरमी पर उतरना पडेगा।

‘करण कागज़ क्या है… मैंने तो खुद ही तुम्हें बुलाया था ना…’ मेरी आंखों में फिर वासना के डोरे खिंचने लगे… उसे सामने देख कर मेरी चूचियाँ कड़ी होने लगी।

‘ नेहा जी… आप बहुत अच्छी है… सुन्दर हैं!’
‘सच… फिर से कहो…’ मैं खुश हो उठी… उसे पास बुला कर सटा लिया और उसके गले में हाथ डाल दिया।
‘नेहा जी…मैं आपसे प्यार करता हूं…’
‘अच्छा… तो फिर चलो प्यार ही करो ना… या मैं ही सब कुछ करूं…’ मेरे स्वर में वासनामय विनती थी.

उसने हरी झन्डी पाते ही मुझे धीरे से लिपटा लिया।
मेरे नर्म होंठों पर उसके होंठ रगड़ खाने लगे। मेरा काम सफ़ल हो गया।
अब एक कुँवारा लण्ड मुझे चोदने के लिये तैयार था।

उसने मेरे निचले होंठ को चूमना और चूसना चालू कर दिया।
उसका लण्ड बुरी तरह से फ़ड़क रहा था, इतना कठोर हो गया कि लगता था कि पैन्ट फ़ाड देगा।

‘करण… देखो तुम्हारा नीचे से पैन्ट फ़ट जायेगा… लण्ड तो बाहर निकाल लो!’
‘क्… क्… क्या कहा… लण्ड… हाय’ वो मेरी भाषा से उत्तेजित हो गया…
‘हाँ… देखो तो कितना जोर मार रहा है… मेरी चूंची दबा दो करण…’
‘हाय… नेहा जी… आप कितना सेक्सी बोलती हैं… लण्ड चूची … नेहा जी चूत भी है ना…’

वो मेरी चूची बेदर्दी से दबाने लगा… चूची में दर्द हुआ…पर अनाड़ी का मजा कहीं ज्यादा होता है… मैंने उसका लण्ड पैन्ट से बाहर निकाल दिया… मैं उसे देख कर ही मस्त हो गयी… लम्बा और मोटा सुनील की तरह ही था। मैंने उसके लण्ड को देखा उसकी सुपारे की झिल्ली सही सलामत थी… मैंने जोश में उसे मसलना चालू कर दिया… कस कस कर उसे मुठ मारने लगी।

‘नेहा जी… आऽह हा… बस बस… हाय…’ और ये क्या… उसका वीर्य निकल पड़ा… वो जोर लगा कर वीर्य निकालने लग गया। और हाँफ़ने लगा। मेरी आंखो में वासना के डोरे और खिंच गये… वो मुझसे लिपट पड़ा।

‘नेहा जी… माफ़ करना… ये कैसे हो गया?’
‘पहले कभी लड़की को नहीं चोदा क्या?’

‘नहीं… ये पहली बार आपके साथ मजा आया है.’ उसने सर झुका लिया।

उसकी मासूमियत पर मुझे प्यार आ गया- कोई बात नहीं पहली बार ऐसा होता है… देखना दूसरी बार तुम मुझे पूरा चोद दोगे!
मैं उसे ताबड़तोड़ चूमने लग गयी।
इतना कुँवारा … कि किसी ने उसे छुआ तक नहीं।

मैं तो ये सोच कर ही आनन्दित हो रही थी कि फ़्रेश माल मिल गया है … कोई सेकन्ड हेण्ड नहीं।

मैंने उसका पैन्ट उतार दिया और उसे पूरा नंगा कर दिया।
वो अपना लण्ड छुपा कर सोफ़े पर बैठ गया। उसका सिर नीचे झुका हुआ था।

उसकी एक एक अदा पर मुझे प्यार आने लगा। कुंवारे लण्ड और अनछुए जिस्म का मजा पहले मैं लूंगी… ये सोच सोच कर ही मेरी चूत पानी छोड़े जा रही थी।

‘नेहा जी आप भी तो… कपड़े …’ मेरी बेशर्मी उसे भा रही थी.

मैं मुसकरा उठी … मैंने कमीज़ ऐसी स्टाईल से उतारी कि मेरे बोबे उछल कर बाहर आ गये… फिर जीन्स उतार कर एक तरफ़ रख दी.

मुझे इस तरह नंगी देख कर उसकी आंखें फ़टी की फ़टी रह गयी। उसके मुँह से एक आह निकल पड़ी।

मैं भी चुदने को उतावली हो रही थी।
मैंने उसके पास आकर उसका लण्ड पकड़ लिया… उसे फिर से अच्छी तरह से देखा … सुपारे की चमड़ी धीरे से ऊपर कर दी… सच में उसका मोटा लाल सुपारा और उसकी लगी हुयी स्किन उसकी कुंवारेपन को दर्शा रही थी.

मैंने उसका लण्ड अपने मुँह में भर लिया… और उसका मर्द जाग उठा… टन से उछल कर खड़ा हो गया… जैसे मैं चूसती, उसका लण्ड मोटा होता जा रहा था… बेहद टाईट हो कर फ़ुंफ़कार उठा… मैंने बेशरमी से उसे न्योता दिया…

‘करण… आओ बिस्तर हमारा इन्तजार कर रहा है… चलें…’
‘जी…जी… क्या करेंगी… बिस्तर पर…’
‘अरे… क्या बुद्धू हो…’ मैं हंस पड़ी ‘चलो चुदाई करते है…’
‘जी… मैंने कभी किया नहीं है ऐसा… सुनो बाद में करेंगे…’

‘क्या… क्या कहा… हाय मर जाऊँ… मेरे राजा…’ मैं उसकी अदा पर बिछ गयी… उसके ऐसा कहने से मैं तो और उत्तेजित हो गयी… उसका हाथ पकड़ कर उसे मैंने बिस्तर पर लिटा दिया।

‘बस पड़े रहो ऐसे ही… तुम कुछ मत करो… ‘

उसके बिस्तर पर सीधे लेटते ही उसका लण्ड ऐसे खड़ा हो गया जैसे कोई लोहे की रोड हो। मैं करण के ऊपर आ गयी… और अपनी चूत को उसके मुख पर रख दिया… और हल्के से चूत दबा दी… मेरी गीली चूत ने उसके होंठ गीले कर दिये-

‘ये तो गीली है… चिकना पानी है.’ उसने अपना मुख एक तरफ़ कर दिया।
‘चाट जाओ करण… पीते जाओ और… जीभ घुसा दो…’ मैंने फिर से चूत को उसके मुख पर चिपका दिया।

मेरा हाथ पीछे लण्ड पर गया… हाय कितना बेचैन हो रहा है… उसने अब मेरी चूत अच्छे से चूसना चालू कर दिया।

मैं भी अब अपनी चूत को उसके होठों पर रगड़ने लगी थी.

अचानक करण ने मेरी चूतड़ों की फ़ान्कों को पकड़ लिया और सहलाने लगा.
उसकी उंगलियां चूतड़ों की दरार में घुसने लगी… अब उसकी एक उंगली मेरी गाण्ड में घुसने लगी थी.

मैं मदहोश होने लगी। मैंने अपनी गाण्ड ढीली छोड़ दी.

उसने पूरी उंगली अन्दर घुसा दी। मैं हौले हौले से अपनी चूत उसके होंठों पर रगड़ रही थी। उसका लण्ड झूम रहा था। उसकी उंगली मेरी गाण्ड को अन्दर घुमा घुमा कर चोद रही थी।

मुझ पर मस्ती चढ़ने लगी थी। उसकी जीभ मेरी चूत में अन्दर बाहर हो रही थी। मैंने उसका लण्ड पकड़ लिया… एक दम कड़क… टन्नाया हुआ… अनछुआ लण्ड।

अब मैंने अपनी चूत धीरे से हटा ली…

‘करण… मेरी गाण्ड से उंगली निकाल लो प्लीज़ …’
उसने धीरे से अपनी उंगली बाहर निकाल ली…

मैंने अब उसकी कमर के दोनों ओर अपने पैर करके उसके लण्ड पर धीरे से बैठ गयी। उसका लण्ड भी चिकना पानी छोड़ रहा था… मेरी चूत तो वैसे ही चिकनी और गीली हो रही थी।

करण से रहा नहीं गया… उसने नीचे से अपनी चूतड़ उछाल कर लण्ड को मेरी चूत में घुसेड़ दिया… मैंने भी साथ ही ऊपर से जोर लगा कर अन्दर तक बैठा दिया… उसकी चीख निकल पड़ी… उसके लण्ड की चमड़ी फ़ट चुकी थी…
‘नेहा… जलन हो रही है…हटो ना… ‘

‘कुछ नहीं है… करण … सब ठीक हो जायेगा … हाय रे मेरे राजा…’ उसका कुँवारापन टूट चुका था… उसका दर्द मुझे असीम खुशी दे रहा था… उसके कुंवारेपन की कराह मुझे मदहोश कर रही थी।

मैंने उसकी बात अनसुनी कर दी… और ऊपर से धक्के चालू रखे… वो कराहता रहा…मैं मजे लेती रही…मैंने अब चूतड़ों को उसके लण्ड पर तेजी से मारना चालू कर दिया… अब उसकी कराह खुशी की सिसकारी में बदलने लगी… उसने मेरे बोबे भींच लिये… और अब नीचे से उसके चूतड़ भी उछलने लगे… मैं सातवें आसमान पर पहुंच गयी।

‘मेरे करण… मजा आ रहा है…क्या मस्त लण्ड है… चोद दे रे…’
‘नेहा…मेरी रानी… हाय पहली बार किसी ने…मुझे इतना प्यार दिया है…’
‘मेरे राजा…’
‘नेहा…जोर से धक्के मारो ना…हाय… मुझे ये क्या हो रहा है…’

मैंने भी अब अपनी चूत को भींच भींच कर और टाईट करके चोदने लगी… उसकी चरमसीमा आने वाली थी… मैंने अपनी चूत को उसके लण्ड पर जोर से दबा डाला… मेरी चूत में एक बार तो लण्ड जड़ तक पहुंच गया.

मैंने लण्ड को दबाये ही रखा…और मैंने एक अंगड़ाई ली और करण पर बिछ गयी… मैं झड़ रही थी… मेरी चूत में लहरें उठने लगी थी… और झड़ती जा रही थी… करण का लण्ड भी चूत से भींचा हुआ था… कब तक बचता… उसने भी नीचे से जोर लगाया… और एकबारगी उसका पूरा शरीर कांप गया…

और फिर उसके लण्ड ने चूत की गहराई में अपना वीर्य छोड़ना चालू कर दिया… उसके लण्ड का फ़ूलना पिचकना… और रस छोड़ना बड़ा ही आनन्द दे रहा था.

मैं उस पर थोड़ी देर लेटी रही.
जब हम दोनों पूरे ही झड़ गये तो मैं उस पर से उठी और बिस्तर से नीचे आ गयी.
उसका वीर्य थोड़े से खून के साथ मेरे तौलिये पर गिरने लगा।

लाल लाल खून भरा वीर्य मुझे बहुत सन्तोष दे रहा था।
मैंने कपड़े पहन लिये और करण को निहारती रही।
आखिर वो भी उठा और कपड़े पहन कर तैयार हो गया.

‘नेहा जी… आज आपने मुझे सही मर्द का दर्जा दे दिया… बहुत मजा आया.’
‘आओ एक बार प्यार कर लो… फिर शाम को तो मिलोगे ही!’
‘नेहा जी… कल दिन को…’
‘अभी अपने लण्ड को ठीक तो कर लो… फिर मजे तो करेंगे ही!’

करण ने हाथ हिला कर विदा ली.
मैं आज की चुदाई से खुश थी. Antarvasna

प्रेषक : राकेश Hindi Sex Stories

दोस्तो, जैसा कि आप सभी जानते हैं मेरा Hindi Sex Stories नाम राकेश है और मैं दिल्ली से हूँ। मैंने अपनी पिछली कहानी छवि की चुदाई में बताया था अपने बारे में जो कि वास्तविक कहानी थी। इस बार भी मैं हाज़िर हूँ अपनी एक नई कहानी लेकर और आशा करता हूँ कि यह भी आप लोगों को पसंद आयेगी, हर बार की तरह आपका प्यार और इमेल मिलते रहेंगे।

बात पॉँच साल पुरानी है और मैंने अपनी स्नातिकी पूरी की थी और नौकरी के लिए रोज़ ही प्रयास करता था जिससे कि जल्द से जल्द मेरा काम कहीं सेट हो जाये। इसी प्रयास में चार महीने निकल गए लेकिन कहीं बात नहीं बनी। दिन पर दिन खर्चे होने ही थे लेकिन पैसे थे ही नहीं। मेरे परिस्थिति से मेरा मकान मालिक परिचित था सो किराए का कुछ नहीं बोलता। लेकिन अब तो मुझे भी शर्म आ रही थी, बिना किराए के कितना दिन माकन मालिक के मेहरबानी पर रह सकता था। अंत में हार कर सोचा कि क्यों न ट्यूशन पढ़ाया जाये। यह सोच कर मैंने अपने मकान- मालिक से बोला कि अंकल कोई ट्यूशन पढ़ने वाला हो तो बताना, मैं शाम में ट्यूशन पढ़ा दिया करूँगा।

मेरी बात सुन कर गुप्ता जी (मकान मालिक) बोला- मेरी सपना भी तो दसवीं क्लास में पहुँच गई है, इसे मैथ और साइंस पढ़ा दोगे तो मेरे घर से ही शुरु कर दो, जैसे जैसे समय थोड़ा और निकलेगा तो तुम्हें आस-पास के कुछ और टयूशन मिल जायेंगे।

मैं थोड़ा निश्चिंत हुआ कि चलो कम से कम रहने खाने का इंतजाम हुआ, अब आगे की आगे देखेंगे।

अब मैं सपना के बारे में बता दूँ, सपना देखने में साधारण सी लड़की थी लेकिन पढने में साधारण न ज्यादा तेज न ज्यादा भोंदू, हमारी क्लास ठीक ठाक चल रही थी। मेरे नजर में उसे देख कर कोई गलत विचार कभी नहीं आये, पढ़ने का असर दो महीने में ही दिखने लगा। एग्जाम में उसे पहले से ज्यादा अंक मिले जिससे हर किसी ने मेरी तारीफ की। अब मैं भी उसके घर खुल कर आता जाता, कोई रोक टोक नहीं थी।

एक रोज़ रात को मैं सपना से बायलोजी की किताब लेने गया। शनिवार की बात है। किताब लेकर मैंने कुछ नोट बनाये, कुछ विधार्थियों को देने थे। मैं किताब पढ़ कर नोट बना रहा था कि किताब से मुझे एक खत मिला जिसे पढ़ कर मैं अन्दर तक हिल गया। वो पत्र सपना के बॉयफ्रेंड का था और उसमें दोनों के स्कूल में के बाथ रूम में स्तन दबाने की और लंड चूसने की बातें लिखी हुई थी। सपना का पत्र पढ़ कर उसके वक्ष मेरे सामने घूमने लगे।

मेरा भी मन उसे चोदने को होने लगा, रात में दो बार मैंने मुठ भी मारी क्योंकि वही एक साधन है हम लोगों के पास कि जब चाहो प्रयोग कर लो, वो भी बिना किसी खर्चे के ! वर्ना आप समझ सकते हैं…………..

दूसरे रोज रविवार था, और आमतौर पर गुप्ता जी इतवार को फिल्म देखने जाते हैं, यह रूटीन मुझे पहले से पता था। गुप्ता जी के जाने के बाद मैं सपना को किताब वापिस करने गया तो देखा की सपना कमरे में नहीं थी, फिर मुझे ध्यान आया कि कहीं रसोई में कुछ खाने का इंतजाम कर रही हो। लेकिन वो रसोई में नहीं थी। अब मैंने निराश होकर वापिस आने को कदम बढ़ाया, सोचा था कि सपना के बॉयफ्रेंड के पत्र जरिये ही सपना को डरा कर उसकी चूत-चोदन करूँगा लेकिन सपना मिली ही नहीं तो क्या?

वापिस गैलरी से होकर आ रहा था तो देखा की बाथरूम की बत्ती जल रही है। मेरे कदम वहीं रुक गए, बाथरूम से हल्की सी कुछ आवाज़ भी आ रही थी। मेरे मन को थोड़ी शका हुई, एक बार को सोचा कि छोड़ो यार कुछ भी तो क्या ! फिर ख्याल आया कि सपना बाथरूम में अवश्य कुछ कर रही होगी। यह सोच कर मैं अंदर से रोमांचित हो गया, दिल थाम कर दरवाज़ा खोल कर अंदर की तरफ देखा ………….

देख कर मेरी आंख फटी की फटी रह गई ………….

अंदर सपना अपने चूत के बाल साफ कर रही थी, वो भी अपने पूरे कपड़े निकाल कर एक दम नंगी ! आज से पहले मैंने किसी भी लड़की या औरत को पूरी तरह से नंगा नहीं देखा था, यह देख कर तो मेरा पप्पू एक दम खड़ा हो गया, सपना की नजर मुझसे मिली तो उसके तो होश उड़ गए, हम दोनों की हालत शायद एक जैसी ही थी। सपना चूत एक दम साफ थी, बगल में एक क्रीम की शीशी रखी थी, उसके स्तन उतने बड़े भी नहीं थे लेकिन इतने बड़े जरुर हो गए थे कि उसे आराम से दबाया जा सके, 18-19 साल की लड़कियों का साइज़ उससे बिलकुल मैच करता था। मेरे दिमाग में तुंरत ध्यान आया- बेटा, सही मौका है इसे कैश कर ले वर्ना इंतजार ही करता रह जायेगा।

मैंने आगे बढ़ कर सपना के होठों को चूम लिया, सोचा कि देखूँ इसकी क्या प्रतिक्रिया है।

वो तुंरत अलग हो गई, बोली- मुझे छोड़ दो, वर्ना पापा को बोल दूंगी !

मैं बोला- अगर तुम अपने पापा को बोल दोगी तो मैं तेरा पत्र जो तेरी किताब में था उसे दिखा दूंगा।

थोड़ी देर को सपना सोचने लगी, फिर बोली- आप क्या चाहते हो?

मैं तेरा चूत चोदना चाहता हूँ………..

नहीं……….नहीं…………मैंने आज तक किसी से नहीं किया है………

तू घबरा मत ! तुझे कुछ नहीं होगा और मजा भी आयेगा।

सच सच………..?

हाँ डार्लिंग !

फिर आगे बढ़ कर सपना के होठ चूसने लगा, वो भी ऐसा ही कर रही थी।

फिर मैंने अपनी जीभ उसकी चूत में लगाई तो वो तड़प उठी- सर, प्लीज छोड़ दो , अह्ह्ह्ह्……. आह……. आह………….

फिर मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए, मेरा सात इंच का लंड देख सपना बोली- क्या यह पूरा घुस जायेगा?

डार्लिंग फिकर मत करो लंड कितना भी बड़ा क्यों न हो और चूत छोटी, लेकिन हर चूत बड़े आराम से लंड को खा जाती है !

सपना को बाथरूम के फर्श पर लिटा कर 69 पोजीशन में उसकी चूत का स्वाद लेने लगा, सपना पहले तो मना कर रही थी लेकिन थोड़ा सा प्रयास करने पर वो मेरा साथ देने लगी, मेरे लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। दस मिनट तक मजा लेने के बाद उसे लिटा कर उसके चूत में ढेर सारा थूक लगाया और चूत के मुँह पर लाकर एक धक्का मारा, लेकिन चूत इतनी कसी थी कि मेरा लंड अंदर घुस नहीं पाया, सपना भी अंदर लेने को बेचैन थी।

फिर उसके पैरों को थोड़ा फैलाया जिससे उसकी चूत का मुँह खुल गया, और जोर का धक्का मारा, इस बार मेरे लंड का आधे से ज्यादा हिस्सा उसकी चूत के अंदर चला गया।

छोड़ गया तो केवल- हाय मैं मर गई….. तुमने मेरे चूत को फाड़ डाला……

वो दर्द से कराह उठी, मैं समझ गया कि इसकी चूत की आज पहली बार चुदाई हो रही है।

दूसरा धक्का बिना देर किये मैंने मार दिया जिससे मेरा लंड सपना की चूत की गहराइयों को नाप गया।

हाय आह………..आह……..

वोह…आह……..वोह………

कुछ देर वैसे ही रहने के बाद मैं धीरे धीरे अपने लंड आगे पीछे कर उसे चोदने लगा, थोड़ी देर बाद उसे भी आनंद आने लगा. और सपना भी मेरा साथ देने लगी।

काफ़ी देर तक चुदाई अलग अलग तरह से मैंने किया…….. कभी डौगी तो कभी दीवार पर टिका कर, सपना भी मुझे खूब साथ दे रही थी, फिर उसकी बदन अकड़ने लगा, थोड़ी देर में मैंने भी पस्त होकर उसकी चूत में ही अपना सारा माल छोड़ दिया। फिर हम साथ साथ नहाये, नहाते वक्त भी मैंने उसकी चुदाई की।

चुदाई के बाद भी मुझसे पढ़ने आती रही और हम एक दूसरे का मजा लेते रहे। अब तो उसकी इतनी लंड लेने की आदत हो गयी है उसे जब भी मौका मिलता है कैश कर लेती है।

दोस्तो, यह थी मेरी सपना !

कृपया अपनी राय मुझे जरुर भेजना !दोस्तो, जैसा कि आप सभी जानते हैं मेरा नाम कोमल है और मैं दिल्ली से हूँ। मैंने अपनी पिछली कहानी छवि की चुदाई में बताया था अपने बारे में जो कि वास्तविक कहानी थी। इस बार भी मैं हाज़िर हूँ अपनी एक नई कहानी लेकर और आशा करता हूँ कि यह भी आप लोगों को पसंद आयेगी, हर बार की तरह आपका प्यार और इमेल मिलते रहेंगे।

बात पॉँच साल पुरानी है और मैंने अपनी स्नातिकी पूरी की थी और नौकरी के लिए रोज़ ही प्रयास करता था जिससे कि जल्द से जल्द मेरा काम कहीं सेट हो जाये। इसी प्रयास में चार महीने निकल गए लेकिन कहीं बात नहीं बनी। दिन पर दिन खर्चे होने ही थे लेकिन पैसे थे ही नहीं। मेरे परिस्थिति से मेरा मकान मालिक परिचित था सो किराए का कुछ नहीं बोलता। लेकिन अब तो मुझे भी शर्म आ रही थी, बिना किराए के कितना दिन माकन मालिक के मेहरबानी पर रह सकता था। अंत में हार कर सोचा कि क्यों न ट्यूशन पढ़ाया जाये। यह सोच कर मैंने अपने मकान- मालिक से बोला कि अंकल कोई ट्यूशन पढ़ने वाला हो तो बताना, मैं शाम में ट्यूशन पढ़ा दिया करूँगा।

मेरी बात सुन कर गुप्ता जी (मकान मालिक) बोला- मेरी कोमल भी तो दसवीं क्लास में पहुँच गई है, इसे मैथ और साइंस पढ़ा दोगे तो मेरे घर से ही शुरु कर दो, जैसे जैसे समय थोड़ा और निकलेगा तो तुम्हें आस-पास के कुछ और टयूशन मिल जायेंगे।

मैं थोड़ा निश्चिंत हुआ कि चलो कम से कम रहने खाने का इंतजाम हुआ, अब आगे की आगे देखेंगे।

अब मैं कोमल के बारे में बता दूँ, कोमल देखने में साधारण सी लड़की थी लेकिन पढने में साधारण न ज्यादा तेज न ज्यादा भोंदू, हमारी क्लास ठीक ठाक चल रही थी। मेरे नजर में उसे देख कर कोई गलत विचार कभी नहीं आये, पढ़ने का असर दो महीने में ही दिखने लगा। एग्जाम में उसे पहले से ज्यादा अंक मिले जिससे हर किसी ने मेरी तारीफ की। अब मैं भी उसके घर खुल कर आता जाता, कोई रोक टोक नहीं थी।

एक रोज़ रात को मैं कोमल से बायलोजी की किताब लेने गया। शनिवार की बात है। किताब लेकर मैंने कुछ नोट बनाये, कुछ विधार्थियों को देने थे। मैं किताब पढ़ कर नोट बना रहा था कि किताब से मुझे एक खत मिला जिसे पढ़ कर मैं अन्दर तक हिल गया। वो पत्र कोमल के बॉयफ्रेंड का था और उसमें दोनों के स्कूल में के बाथ रूम में स्तन दबाने की और लंड चूसने की बातें लिखी हुई थी। कोमल का पत्र पढ़ कर उसके वक्ष मेरे सामने घूमने लगे।

मेरा भी मन उसे चोदने को होने लगा, रात में दो बार मैंने मुठ भी मारी क्योंकि वही एक साधन है हम लोगों के पास कि जब चाहो प्रयोग कर लो, वो भी बिना किसी खर्चे के ! वर्ना आप समझ सकते हैं…………..

दूसरे रोज रविवार था, और आमतौर पर गुप्ता जी इतवार को फिल्म देखने जाते हैं, यह रूटीन मुझे पहले से पता था। गुप्ता जी के जाने के बाद मैं कोमल को किताब वापिस करने गया तो देखा की कोमल कमरे में नहीं थी, फिर मुझे ध्यान आया कि कहीं रसोई में कुछ खाने का इंतजाम कर रही हो। लेकिन वो रसोई में नहीं थी। अब मैंने निराश होकर वापिस आने को कदम बढ़ाया, सोचा था कि कोमल के बॉयफ्रेंड के पत्र जरिये ही कोमल को डरा कर उसकी चूत-चोदन करूँगा लेकिन कोमल मिली ही नहीं तो क्या?

वापिस गैलरी से होकर आ रहा था तो देखा की बाथरूम की बत्ती जल रही है। मेरे कदम वहीं रुक गए, बाथरूम से हल्की सी कुछ आवाज़ भी आ रही थी। मेरे मन को थोड़ी शका हुई, एक बार को सोचा कि छोड़ो यार कुछ भी तो क्या ! फिर ख्याल आया कि कोमल बाथरूम में अवश्य कुछ कर रही होगी। यह सोच कर मैं अंदर से रोमांचित हो गया, दिल थाम कर दरवाज़ा खोल कर अंदर की तरफ देखा ………….

देख कर मेरी आंख फटी की फटी रह गई ………….

अंदर कोमल अपने चूत के बाल साफ कर रही थी, वो भी अपने पूरे कपड़े निकाल कर एक दम नंगी ! आज से पहले मैंने किसी भी लड़की या औरत को पूरी तरह से नंगा नहीं देखा था, यह देख कर तो मेरा पप्पू एक दम खड़ा हो गया, कोमल की नजर मुझसे मिली तो उसके तो होश उड़ गए, हम दोनों की हालत शायद एक जैसी ही थी। कोमल चूत एक दम साफ थी, बगल में एक क्रीम की शीशी रखी थी, उसके स्तन उतने बड़े भी नहीं थे लेकिन इतने बड़े जरुर हो गए थे कि उसे आराम से दबाया जा सके, 18-19 साल की लड़कियों का साइज़ उससे बिलकुल मैच करता था। मेरे दिमाग में तुंरत ध्यान आया- बेटा, सही मौका है इसे कैश कर ले वर्ना इंतजार ही करता रह जायेगा।

मैंने आगे बढ़ कर कोमल के होठों को चूम लिया, सोचा कि देखूँ इसकी क्या प्रतिक्रिया है।

वो तुंरत अलग हो गई, बोली- मुझे छोड़ दो, वर्ना पापा को बोल दूंगी !

मैं बोला- अगर तुम अपने पापा को बोल दोगी तो मैं तेरा पत्र जो तेरी किताब में था उसे दिखा दूंगा।

थोड़ी देर को कोमल सोचने लगी, फिर बोली- आप क्या चाहते हो?

मैं तेरा चूत चोदना चाहता हूँ………..

नहीं……….नहीं…………मैंने आज तक किसी से नहीं किया है………

तू घबरा मत ! तुझे कुछ नहीं होगा और मजा भी आयेगा।

सच सच………..?

हाँ डार्लिंग !

फिर आगे बढ़ कर कोमल के होठ चूसने लगा, वो भी ऐसा ही कर रही थी।

फिर मैंने अपनी जीभ उसकी चूत में लगाई तो वो तड़प उठी- सर, प्लीज छोड़ दो , अह्ह्ह्ह्……. आह……. आह………….

फिर मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए, मेरा सात इंच का लंड देख कोमल बोली- क्या यह पूरा घुस जायेगा?

डार्लिंग फिकर मत करो लंड कितना भी बड़ा क्यों न हो और चूत छोटी, लेकिन हर चूत बड़े आराम से लंड को खा जाती है !

कोमल को बाथरूम के फर्श पर लिटा कर 69 पोजीशन में उसकी चूत का स्वाद लेने लगा, कोमल पहले तो मना कर रही थी लेकिन थोड़ा सा प्रयास करने पर वो मेरा साथ देने लगी, मेरे लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। दस मिनट तक मजा लेने के बाद उसे लिटा कर उसके चूत में ढेर सारा थूक लगाया और चूत के मुँह पर लाकर एक धक्का मारा, लेकिन चूत इतनी कसी थी कि मेरा लंड अंदर घुस नहीं पाया, कोमल भी अंदर लेने को बेचैन थी।

फिर उसके पैरों को थोड़ा फैलाया जिससे उसकी चूत का मुँह खुल गया, और जोर का धक्का मारा, इस बार मेरे लंड का आधे से ज्यादा हिस्सा उसकी चूत के अंदर चला गया।

छोड़ गया तो केवल- हाय मैं मर गई….. तुमने मेरे चूत को फाड़ डाला……

वो दर्द से कराह उठी, मैं समझ गया कि इसकी चूत की आज पहली बार चुदाई हो रही है।

दूसरा धक्का बिना देर किये मैंने मार दिया जिससे मेरा लंड कोमल की चूत की गहराइयों को नाप गया।

हाय आह………..आह……..

वोह…आह……..वोह………

कुछ देर वैसे ही रहने के बाद मैं धीरे धीरे अपने लंड आगे पीछे कर उसे चोदने लगा, थोड़ी देर बाद उसे भी आनंद आने लगा. और कोमल भी मेरा साथ देने लगी।

काफ़ी देर तक चुदाई अलग अलग तरह से मैंने किया…….. कभी डौगी तो कभी दीवार पर टिका कर, कोमल भी मुझे खूब साथ दे रही थी, फिर उसकी बदन अकड़ने लगा, थोड़ी देर में मैंने भी पस्त होकर उसकी चूत में ही अपना सारा माल छोड़ दिया। फिर हम साथ साथ नहाये, नहाते वक्त भी मैंने उसकी चुदाई की।

चुदाई के बाद भी मुझसे पढ़ने आती रही और हम एक दूसरे का मजा लेते रहे। अब तो उसकी इतनी लंड लेने की आदत हो गयी है उसे जब भी मौका मिलता है कैश कर लेती है।

दोस्तो, यह थी मेरी कोमल !

कृपया अपनी राय मुझे जरुर भेजना ! Hindi Sex Stories

Hindi sex stories

रमेश, दोस्तो Hindi sex stories , लड़की को उत्तेजित करके चोदने में बड़ा मज़ा आता है। बस उत्तेजित करने का तरीका ठीक होना चाहिये।

मैंने अपनी घर की नौकरानी को ऐसे ही उत्तेजित कर खूब चोदा।

अब सुनो उसकी दास्तान।

मेरा नाम है रमेश।
मैं लखनऊ यू पी का हूं, मेरे घर में ऊल-ज़ुलूल नौकरानियों के काफ़ी अरसे बाद एक बहुत ही सुंदर और सेक्सी नौकरानी काम पर लगी।
22-23 साल की उमर होगी।
सांवला सा रंग था।
मीडियम हाईट की और सुडौल बदन,
फ़ीगर उसका रहा होगा 33-26-34

शादी शुदा थी।
उसका पति कितना किस्मत वाला था, साला खूब चोदता होगा।

बूब्स यानि चूचियाँ ऐसी कि बस दबा ही डालो।
ब्लाउज़ में समाती ही नहीं थी।
कितनी भी साड़ी से वो ढकती, इधर उधर से ब्लाउज़ से उभरते हुई उसकी चूचियाँ दिख ही जाती थी।

झाड़ु लगाते हुए, जब वो झुकती, तब ब्लाउज़ के उपर से चूचियों के बीच की दरार को छुपा न सकती।

एक दिन जब मैंने उसकी इस दरार को तिरछी नज़र से देखा तो पता लगा कि उसने ब्रा तो पहना ही नहीं था।

कहां से पहनती, ब्रा पर बेकार पैसे क्यों खर्च किये जायें।

जब वो ठुमकती हुई चलती, तो उसके चूतड़ हिलते और जैसे कह रहे हों कि मुझे पकड़ो और दबाओ।

अपनी पतली सी सूती साड़ी जब वो सम्भालती हुई सामने अपने बुर पर हाथ रखती तो मन करता कि काश उसकी चूत को मैं छू सकता।

करारी, गर्म, फूली हुई और गीली गीली चूत में कितना मज़ा भरा हुआ था।

काश मैं इसे चूम सकता, इसके मम्मे दबा सकता, और चूचियों को चूस सकता।

और इसकी चूत को चूसते हुए जन्नत का मज़ा ले सकता।

और फिर मेरा तना हुआ लौड़ा इसकी बुर में डाल कर चोद सकता।

हाय! मेरा लंड ! मानता ही नहीं था।

बुर में लंड घुसने के लिये बेकरार था।

लेकिन कैसे।

यह तो मुझे देखती ही नहीं थी।
बस अपने काम से मतलब रखती और ठुमकती हुई चली जाती।

मैंने भी उसे कभी एहसास नहीं होने दिया कि मेरी नज़र उसे चोदने के लिये बेताब है।

अब चोदना तो था ही।

मैंने अब सोच लिया कि इसे उत्तेजित करना ही होगा।

धीरे धीरे उत्तेजित करना पड़ेगा वरना कहीं मचल जाये या नाराज़ हो जाये तो भांडा फूट जायेगा।

मैंने उससे थोड़ी थोड़ी बातें करनी शुरु की।

उसका नाम था नीरू।

एक दिन सुबह उसे चाय बनाने को कहा।

चाय उसके नर्म नर्म हाथों से जब लिया तो लंड उछला।

चाय पीते हुए कहा- नीरू, चाय तुम बहुत अच्छी बना लेती हो।

उसने जवाब दिया- बहुत अच्छा बाबूजी।

अब करीब करीब रोज़ मैं चाय बनवाता और बड़ाई करता।

फिर मैंने एक दिन कोलेज जाने के पहले अपनी शर्ट प्रेस करवाई।

‘नीरू, तुम प्रेस भी अच्छा ही कर लेती हो।’

‘ठीक है बाबूजी!’ उसने प्यारी सी आवाज़ में कहा।

जब कोई नहीं होता, तब मैं उससे इधर उधर कि बातें करता, जैसे- नीरू, तुम्हारा आदमी क्या करता है?

‘साहब, वो एक मिल में नौकरी करता है।’

‘कितने घंटे की ड्युटी होती है?’ मैंने पूछा।

‘साहब, 10-12 घंटे तो लग ही जाते हैं। कभी कभी रात को भी ड्युटी लग जाती है।’

‘तुम्हारे बच्चे कितने हैं?’ मैंने फिर पूछा।

शरमाते हुए उसने जवब दिया- अभी तो एक लड़की है, 2 साल की।

‘उसे क्यों घर में अकेला छोड़ कर आती हो?’ मैं पूछता रहा।

‘नहीं, मेरी बूढ़ी सास है न। वो सम्भाल लेती हैं।’

‘तुम कितने घरों में काम करती हो?’ मैंने पूछा।

‘साहब, बस आपके और एक नीचे घर में।’

मैंने फिर पूछा- तो क्या तुम दोनो का काम तो चल ही जाता होगा?

‘साहब, चलता तो है, लेकिन बड़ी मुश्किल से। मेरा आदमी शराब में बहुत पैसे बर्बाद कर देता है।’

अब मैंने एक हिंट देना उचित समझा।

मैंने सम्भलते हुए कहा- ठीक है, कोई बात नहीं, मैं तुम्हारी मदद करूंगा।

उसने मुझे अजीब सी नज़र से देखा, जैसे पूछ रही हो – क्या मतलब है आपका?

मैंने तुरंत कहा- मेरा मतलब है, तुम अपने आदमी को मेरे पास लाओ, मैं उसे समझाऊंगा।

‘ठीक है साहब!’ कहते हुए उसने ठंडी सांस भरी।

इस तरह, दोस्तो, मैंने बातों का सिलसिला काफ़ी दिनों तक जारी रखा और अपने दोनो के बीच की झिझक को मिटाया।

एक दिन मैंने शरारत से कहा- तुम्हारा आदमी पागल ही होगा। अरे उसे समझना चाहिये, इतनी सुंदर पत्नी के होते हुए, शराब की क्या ज़रूरत है।

औरत बहुत तेज़ होती है दोस्तों।
उसने कुछ कुछ समझ तो लिया था लेकिन अभी एहसास नहीं होने दिया अपनी ज़रा सी भी नाराज़गी का।

मुझे भी ज़रा सा हिंट मिला कि ये तस्वीर पर उतर जायेगी।

मौका मिले और मैं इसे दबोचूं तो चुदवा लेगी।

और आखिर एक दिन ऐसा एक मौका लगा।

कहते हैं ऊपर वाले के यहां देर है लेकिन अंधेर नहीं।

रविवार का दिन था।
पूरी फ़ैमिली एक शादी मैं गयी थी।

मैं पढ़ाई में नुकसान की वजह बताकर नहीं गया।

माँ कह कर गयी थी- नीरू आयेगी, घर का काम ठीक से करवा लेना।

मैंने कहा- ठीक है!

और मेरे दिल में लड्डू फूटने लगे और लौड़ा खड़ा होने लगा।

वो आयी, दरवाज़ा बंद किया और काम पर लग गयी।

इतने दिन की बातचीत से हम खुल गये थे और उसे मेरे ऊपर विश्वास सा हो गया था इसी लिये उसने दरवाज़ा बंद कर दिया था।

मैंने हमेशा कि तरह चाय बनवाई और पीते हुए चाय की बड़ाई की।

मन ही मन मैंने निश्चय किया कि आज तो पहल करनी ही पड़ेगी वरना गाड़ी छूट जायेगी।

कैसे पहल करें?

आखिर में ख्याल आया कि भाई सबसे बड़ा रुपैया।

मैंने उसे बुलाया और कहा- नीरू, तुम्हे पैसे की ज़रूरत हो तो मुझे ज़रूर बताना। झिझकना मत।

‘साहब, आप मेरी तनख्वाह से काट लोगे और मेरा आदमी मुझे डांटेगा।’

‘अरे पगली, मैं तनख्वाह की बात नहीं कर रहा। बस कुछ और पैसे अलग से चाहिये तो मैं दूंगा मदद के लिये। और किसी को नहीं बताऊंगा। बशर्ते तुम भी न बताओ तो।’

और मैं उसके जवाब का इन्तज़ार करने लगा।

‘मैं क्यों बताने चली। आप सच मुझे कुछ पैसे देंगे?’ उसने पूछा।

बस फिर क्या था।
कुड़ी पट गयी।

बस अब आगे बढ़ना था और मलाई खानी थी।

‘ज़रूर दूंगा नीरू… इससे तुम्हे खुशी मिलेगी न!’ मैंने कहा।

‘हां साहब, बहुत आराम हो जायेगा।’ उसने इठलाते हुए कहा।

अब मैंने हल्के से कहा- और मुझे भी खुशी मिलेगी। अगर तुम भी कुछ न कहो तो। और जैसा मैं कहूं वैसा करो तो? बोलो मंज़ूर है?

ये कहते हुए मैंने उसे 500 रुपये थमा दिये।

उसने रुपये टेबल पर रखा और मुसकुराते हुए पूछा- क्या करना होगा साहब?

‘अपनी आंखें बंद करो पहले।’ मैं कहते हुए उसकी तरफ़ थोड़ा सा बढ़ा- बस थोड़ी देर के लिये आंखें बंद करो और खड़ी रहो।

उसने अपनी आंखें बंद कर ली।

मैंने फिर कहा- जब तक मैं न कहूं, तुम आंखें बंद ही रखना, नीरू। वरना तुम शर्त हार जाओगी।

‘ठीक है, साहब!’ शरमाते हुए आंखें बंद कर वो खड़ी थी।

मैंने देखा कि उसके गाल लाल हो रहे थे और होंठ कांप रहे थे।

दोनो हाथों को उसने सामने अपनी जवान चूत के पास समेट रखा था।

मैंने हल्के से पहले उसके माथे पर एक छोटा सा चुम्बन किया।

अभी मैंने उसे छुआ नहीं था।
उसकी आंखें बंद थी।
फिर मैंने उसकी दोनो पल्कों पर बारी बारी से चुम्बन रखा।
उसकी आंखें अभी भी बंद थी।
फिर मैंने उसके गालों पर आहिस्ता से बारी बारी से चूमा।
उसकी आंखें बंद थी।
इधर मेरा लंड तन कर लोहे की तरह कड़ा और सख्त हो गया था।
फिर मैंने उसकी थुड्ठी पर चुम्बन लिया।

अब उसने आंखें खोली और सिर्फ़ पूछते हुए कहा- साहब?

मैंने कहा- नीरू, शर्त हार जायोगी। आंखें बंद।

उसने झट से आंखें बंद कर ली।

मैं समझ गया, लड़की तैयार है, बस अब मज़ा लेना है और चुदाई करनी है।

मैंने अब की बार उसके थिरकते हुए होंठों पर हल्का सा चुम्बन किया।

अभी तक मैंने छुआ नहीं था उसे।

उसने फिर आंखें खोली और मैंने हाथ के इशारे से उसकी पल्कों को फिर ढक दिया।

अब मैं आगे बढ़ा, उसके दोनो हाथों को सामने से हटा कर अपनी कमर के चारों तरफ़ घुमाया और उसे अपनी बाहों में समेटा और उसके कांपते होंठों पर अपने होंठ रख दिये और चूमता रहा।

कस कर चूमा अबकी बार।
क्या नर्म होंठ थे मानो शराब के प्याले।

होंठों को चूसना शुरु किया और उसने भी जवाब देना शुरु किया।

उसके दोनो हाथ मेरी पीठ पर घूम रहे थे और मैं उसके गुलाबी होंठों को खूब चूस चूस कर मज़ा ले रहा था।

तभी मुझे महसूस हुआ कि उसकी चूचियाँ जो कि तन गयी थी, मेरे सीने पर दब रही हैं।

बायें हाथ से मैं उसकी पीठ को अपनी तरफ़ दबा रहा था, जीभ से उसकी जीभ और होंठों को चूस रहा था, और दायें हाथ से मैंने उसकी साड़ी के पल्लू को नीचे गिरा दिया।

दायाँ हाथ फिर अपने आप उसकी दायीं चूची पर चला गया और उसे मैंने दबाया।

हाय हाय क्या चूची थी। मलाई थी बस मलाई।

अब लंड फुंकारे मार रहा था।

बायें हाथ से मैंने उसके चूतड़ को अपनी तरफ़ दबाया और उसे अपने लंड को महसूस करवाया।

शादीशुदा लड़की को चोदना आसान होता है क्योंकि उन्हे सब कुछ आता है, घबराती नहीं हैं।

ब्रा तो उसने पहनी ही नहीं थी, ब्लाउज़ के बटन पीछे थे, मैंने अपने दायें हाथ से उन्हे खोल दिया और ब्लाउज़ को उतार फेंका।
चूचियाँ जैसे कैद थी, उछल कर हाथों में आ गयी।

एकदम सख्त लेकिन मलाई की तरह प्यारी भी।

साड़ी को खोला और उतारा।

साया बस अब बचा था।

वो खड़ी नहीं हो पा रही थी।

मैं उसे हल्के हल्के खींचते हुए अपने बेडरूम में ले आया और लिटा दिया।

अब मैंने कहा- नीरू रानी, अब तुम आंखें खोल सकती हो।

‘आप बहुत पाजी हैं साहब!’ शरमाते हुए उसने आंखें खोली और फिर बंद कर ली।

मैंने झट से अपने कपड़े उतारे और नंगा हो गया।

लंड तन कर उछल रहा था।

मैंने उसका साया जल्दी से खोला और खींच कर उतारा।

उसने कोई अंडरवेअर नहीं पहना था।

मैंने बात करने के लिये कहा- ये क्या, तुम्हारी चूत तो नंगी है। चड्ढी नहीं पहनती।

‘नहीं साहब, सिर्फ़ महीना में पहनती हूं।’ और शरमाते हुए कहा- साहब, पर्दे खींच कर बंद करो न। बहुत रोशनी है।

मैंने झट से पर्दों को बंद किया जिससे थोड़ा अंधेरा हो और उसके ऊपर लेट गया।

होंठों को कस कर चूमा, हाथों से चूचियाँ दबाई और एक हाथ को उसके बुर पर फिराया।

घुंगराले बाल बहुत अच्छे लग रहे थे चूत पर।

फिर थोड़ा सा नीचे आते हुए उसकी चूची को मुंह में ले लिया।

आहा, क्या रस था। बस मज़ा बहुत आ रहा था।

अपनी एक उंगली को उसकी चूत के दरार पर फिराया और फिर उसके बुर में घुसाया।

उंगली ऐसे घुसी जैसे मक्खन में छूरी।
गर्म और गीली थी।

उसकी सिसकारियाँ मुझे और भी मस्त कर रही थी।

मैंने छेड़ते हुए कहा, नीरू रानी, अब बोलो क्या करूं?

‘साहब, मत तड़पाइये, बस अब कर दीजिये।’ उसने सिसकारियाँ लेते हुए कहा।

मैंने कहा- ऐसे नहीं, बोलना होगा, मेरी जान।

मुझे अपने करीब खींचते हुए कहा- साहब, डाल दीजिये न।

‘क्या डालूं और कहां?’ मैंने शरारत की।

दोस्तों चुदाई का मज़ा सुनने में भी बहुत है।

‘डाल दीजिये न अपना ये लौड़ा मेरे अंदर।’ उसने कहा और मेरे होंठों से अपने होंठ चिपका लिये।

इधर मेरे हाथ उसकी चूचियों को मसलते ही जा रहे थे। कभी खूब दबाते, कभी मसलते, कभी मैं चूचियों को चूसता कभी उसके होंठों को चूसता।

अब मैंने कह ही दिया- हां रानी, अब मेरा ये लंड तेरी बुर में घुसेगा… बोलो चोद दूं।

‘हां हां, चोदिये साहब, बस चोद दीजिये।’

और वो एकदम गर्म थी।

मैंने कहा- ऐसे नहीं, बोलना होगा, मेरी जान !

फिर क्या था, मैंने लंड उसके बुर पर रखा और घुसा दिया अंदर।

एकदम ऐसे घुसा जैसे बुर मेरे लंड के लिये ही बनी थी।

दोस्तों, फिर मैंने हाथों से उसकी चूचियों को दबाते हुए, होंठों से उसके गाल और होंठों को चूसते हुए, चोदना शुरु किया।

बस चोदता ही रहा।

ऐसा मन कर रहा था कि चोदता ही रहूं।

खूब कस कस कर चोदा।

बस चोदते चोदते मन ही नहीं भर रहा था।

क्या चीज़ थी यारों, बड़ी मस्त थी। उछल उछल चुदवा रही थी।

‘साहब, आप बहुत अच्छा चोद रहे हैं, चोदिये खुब चोदिये!’

चोदना बंद था, टांगे उसने मेरे चूतड़ पर घुमा रखी थी और चूतड़ से उछल रही थी।

खूब चुदवा रही थी और मैं चोद रहा था।

मैं भी कहने से रुक न सका- नीरू रानी, तेरी चूत तो चोदने के लिये ही बनी है। रानी, क्या चूत है। बहुत मज़ा आ रहा है। बोल न कैसी लग रही है ये चुदाई।

‘साहब, रुकिये मत, बस चोदते रहिये, चोदिये, चोदिये, चोदिये।’

इस तरह हम न जाने कितनी देर तक मज़ा लेते हुए खूब कस कस कर चोदते हुए झड़ गये।

क्या चीज़ थी, एकदम चोदने के लिये ही बनी थी शायद।

दोस्तों मन नहीं भरा था।

20 मिनट बाद मैंने फिर अपना लंड उसके मुंह में डाला और खूब चुसवाया।

हमने 69 पोसिशन ली और जब वो लंड चूस रही थी मैंने उसकी चूत को अपनी जीभ से चोदना शुरु किया।

खास कर दूसरि बार तो इतना मज़ा आया कि मैं बता नहीं सकता क्योंकि अब की बार लंड बहुत देर तक चोदता रहा।

लंड को झड़ने में काफ़ी समय लगा और मुझे और उसे भरपूर मज़ा देता रहा।

कपड़े पहनने के बाद मैंने कहा- नीरू रानी, बस अब चुदवाती ही रहना। वरना ये लंड तुम्हे तुम्हारे घर पर आकर चोदेगा।

‘साहब, आप ने इतनी अच्छी चुदाई की है, मैं भी अब हर मौके में आपसे चुदवाउंगी। चाहे आप पैसे न भी दो।’

कपड़े पहनने के बाद भी मेरे हाथ उसकी चूचियों को हल्के हल्के मसलते रहे। और मैं उसके गालों और होंठों को चूमता रहा।
एक हाथ उसके बुर पर चला जाता था और हल्के से उसकी चूत को दबा देता था।

‘साहब अब मुझे जाना होगा।’ कह कर वो उठी।

मैंने उसका हाथ अपने लंड पर रखा- रानी, एक बार और चोदने का मन कर रहा है। कपड़े नहीं उतारूंगा।

दोस्तों, सच में लंड खड़ा हो गया था और चोदने के लिये मैं फिर तैयार।

मैंने उसे झट से लिटाया, साड़ी उठाई, और अपना लौड़ा उसके बुर में पेल दिया।

अबकी बार खचखच चोदा और कस कर चोदा और खूब चोदा और चोदता ही रहा।

चोदते चोदते पता नहीं कब लंड झड़ गया और मैंने कस कर उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया।

चूमते हुए चूचियों को दबते हुए, मैंने अपना लंड निकाला और उसे विदा किया। Hindi sex stories

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