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वैसे मैं पुणे से हूँ.
मैं दिल्ली यूपीएससी की तैयारी करने गया था.
वहां गए हुए मुझे एक ही महीना हुआ था कि मैं बीमार पड़ गया था.
मुझे वहां का खाना हजम नहीं हो रहा था और बार बार पेट खराब हो रहा था.
जब डॉक्टर से चेकअप करवाया तो पता चला पेट में इन्फेक्शन हुआ है.
इसलिए मैं वापस घर चला गया.
जैसे ही घर वापस आया तो घरवालों ने कहा- अगर ऐसी तबीयत खराब करनी है तो पढ़ाई मत करो.
मेरा शरीर इतना दुबला हो गया था कि लग रहा था कि मुझे कोरोना होकर गया हो.
मैंने पापा से कहा- पापा, मुझे वहां का खाना बिल्कुल पसंद नहीं आया. खाना पच ही नहीं रहा.
वैसे बता दूँ कि हमारा परिवार संयुक्त परिवार है.
हमारा एक घर पुणे में है और एक पुणे के पास गांव में है.
मेरे चाचा-चाची, दादाजी और दादीजी गांव वाले घर में रहते हैं और पुणे वाले फ्लैट में मम्मी-पापा, भाई, मेरा चचेरा भाई और चचेरी बहन रहते हैं.
मेरे भाई और बहन पुणे में रह कर अपनी कॉलेज और स्कूल की पढ़ाई करते हैं.
मैंने पापा से जब यह कहा कि वहां का खाना मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगा.
तब पापा ने कहा- ठीक ही और उधर किसी दूसरी जगह रह कर ट्राई करके देख ले, अगर पसंद आया तो ठीक … वरना वापस आ जाना और यहां से पढ़ाई कर लेना.
मैं जब वापस गया तब मैंने एक हफ्ते में 5 जगह जाकर उनकी मेस को ट्राई किया.
पर मुझे कोई पसंद नहीं आया.
मेरी पढ़ाई भी अच्छी तो नहीं कहूँगा, हां पर ठीक हो रही थी … तो वापस जाने का बिल्कुल मन नहीं था.
मेरे दादाजी ने पापा से कहा- अगर उसकी पढ़ाई उधर से ठीक हो रही है, तो उसकी चाची को उसके पास भेज देना. इससे उसका खाना भी अच्छा हो जाएगा और तबीयत भी ठीक रहेगी. यहां मेरा खाना उसकी दादी बना लेगी. इधर दो ही लोगों का खाना तो लगेगा.
जब ये बात पापा ने मुझे बताई, तब मैंने हामी भर दी क्योंकि वहां पढ़ाई का बहुत सही माहौल था.
मैंने एक फ्लैट देख लिया और जो जो जरूरी सामान लगने वाला था, वह सब चाँदनी चौक से खरीद लिया.
इसलिए सब कुछ बहुत सस्ते में निपट गया.
लगभग 15 दिन बाद मेरी चाची दिल्ली आ गयी थीं और दस ही दिन में हमारा सब कुछ सैट हो गया था.
मैं सुबह नाश्ता करके 9 बजे लाइब्रेरी चला जाता था.
दोपहर में एक बजे खाना खाने आता था और रात का खाना लगभग साढ़े सात बजे होता था.
अच्छे से दिन गुजर रहे थे. कभी कभार मोमोज वगैरह खाने चाची के साथ चला जाता था.
हमारे फ्लैट में मैंने वाईफ़ाई लगवाया था, तो कभी कभार रूम पर ही पढ़ाई कर लेता था.
बीच बीच में मेरा हस्तमैथुन भी हो जाता था. सब कुछ बहुत सही चल रहा था. तीन महीने तक मेरे किसी भी विचार में चाची नहीं आई थीं.
एक बार की बात है, जब मैं लंड हिला रहा था तो चाची ने मुझे देख लिया था.
मुझे तब पता नहीं लगा था, बाद में चाची ने बताया था.
एक बार ऐसे ही गूगल पर सर्फिंग करते समय मुझे अन्तर्वासना का पता चला था.
वहां एक सेक्स कहानी में मैंने मामी की चुदाई पढ़ी थी.
तब ऐसा खास कुछ ध्यान नहीं गया था पर मेरी नज़र चाची के मम्मों को देखने लगी थी.
अब मैंने ध्यान दिया था कि चाची के बूब्स बहुत बड़े है. हमारी बातें सामान्य ही होती रहती थीं.
अन्तर्वासना की कहानियों में मेरी रुचि बढ़ने लगी थी और साथ ही चाची की चूचियों को देखने का लगाव, सब इतनी तेज़ी से हुआ कि क्या बताऊं.
अब चाची को देखने का मेरा नज़रिया पूरी तरह से बदल गया था.
उसी चक्कर में मैं ज़्यादा समय फ्लैट पर बिताने लगा था.
एक बार चाची ने कहा कि मुझको कुछ कपड़े लेने हैं तो बाजार चलते हैं.
मैंने कहा- ठीक है, सरोजिनी मार्केट चलते हैं.
दो दिन बाद हम दोनों बाजार चले गए.
हम दोनों मेट्रो से गए थे.
वहां चाची ने कुछ कपड़े ले लिए.
उनको अपने लिए कुछ अन्दर पहनने वाले कपड़े खरीदने थे पर वे मेरी वजह से थोड़ा झिझक रही थीं.
मुझे समझ में आ गया क्योंकि वे बार बार मेरी तरफ देख रही थीं.
मैं- चाची आपको कुछ और लेना है क्या?
चाची ने झिझकते हुए कहा- नहीं … अभी और कुछ … नहीं लेना … बस जरा …
मैंने पहले ही फ्लैट पर देखा था कि चाची की ब्रा एक साइड से थोड़ी फट सी गयी थी.
पर मैं भी बात करने में थोड़ा डर रहा था.
लेकिन इतनी दूर आ गए थे और थोड़ी समझदारी भी आ चुकी थी, तो हिम्मत करके मैंने बात को आगे बढ़ाई- चाची, आप देख लीजिए. यहां और भी बहुत कुछ मिलता है … और बहुत सस्ता मिलता है.
चाची- नहीं राज … मुझे और कुछ नहीं लेना!
वे अभी भी थोड़ा अटक अटक कर बात कर रही थीं.
मैं- अरे कपड़ों से याद आया, मुझे अंडरवियर और बनियान लेना है. वह सब और ले लेते हैं, फिर वापस चलते हैं.
चाची- ठीक है.
जब मैंने मेरी अंडरवियर और बनियान ले लिए.
तो ऐसे ही मैंने चाची से थोड़ा खुल कर बात करने की कोशिश की और कामयाब भी हो गया- अरे चाची आपको भी अगर इनरवियर्स लेने हो, तो आप भी ले सकती हैं. यहां सब मिलता है.
चाची पहले तो एकदम से हक्की बक्की होकर देखने लगीं पर कुछ समय बाद वे भी बोलने लगीं- अरे हां, वह भी लेना है.
मैं- ठीक है, आप लेकर आओ. मैं यहीं हूँ शायद आपको मेरा वहां आना सही ना लगे.
चाची- ऐसा कुछ नहीं, तुम भी चलो. इनसे मोलभव कौन करेगा?
जब हम वहां गए तो चाची ने उस दुकानदार से कहा कि उन्हें 30 की ब्रा चाहिए.
तो दुकानदार चाची के चूचे देखता हुआ बोला- जी आपको 30 नहीं 32 साइज़ आएगा!
तभी पता नहीं मुझे क्या हो गया, मैंने बोल दिया- हां, तभी तो पहले वाली ब्रा फट गई है!
पर ये सब मैंने बहुत धीरे बोला, सिर्फ़ चाची को सुनाई दिया था.
यह सुनकर वे भी एकदम से मेरी तरफ देखने लगी थीं.
मुझे लगा अब वे गुस्सा करेंगी.
पर उन्होंने कुछ भी नहीं कहा और 32 की ब्रा ले लीं.
चाची ने 3 पीस ले लिए थे.
फिर अब हम दोनों वापस आने लगे.
मेट्रो स्टेशन से थोड़ा पैदल चलना पड़ता है तो मैंने एक ई-रिक्शे को रोक लिया और हम दोनों उस पर बैठ गए.
जब हम दोनों रिक्शे में थे तो उधर का रास्ता थोड़ा खराब था.
रिक्शा अपना संतुलन खो रहा था और वह पूरी तरह से एक तरफ को झुकने लगा था.
चाची ने खुद को संभालने के लिए मेरी जांघ पर हाथ रखा और जोर से पकड़ लिया.
जब रिक्शा ठीक हुआ, तब मुझे लगा कि अब चाची हाथ उठा लेंगी.
पर उन्होंने अपना हाथ वहीं लगाए रखा.
मुझे ऐसा महसूस हो रहा था कि वे अपना हाथ धीमे धीमे वहीं पर सरका रही थीं.
उनका लक्ष्य शायद मेरा लंड था.
यह सोच कर ही मेरे अन्दर तो एकदम से झटका सा लगा और अन्दर तक सनसनी सी फैल गई.
मेरा लंड खड़ा होने लगा.
धीरे धीरे उनका हाथ भी लंड के बहुत करीब आने लगा था.
अब तो उनका हाथ सिर्फ़ नाम के लिए जांघ पर था, बाकी तो मेरे लौड़े से टच होने लगा था.
शायद उनको भी लंड की तपिश महसूस हुई होगी और उसकी हलचल का भी अहसास हो गया था.
उन्होंने मुझे देखा और एकदम अलग सा भाव दिया.
उनके चेहरे पर थोड़ी अलग सी मुस्कान स्माइल आ गई थी.
पर उसके बाद चाची ने अपना हाथ हटा लिया था.
हम दोनों मेट्रो से सफर करने के बाद कुछ ही देर बाद अपने फ्लैट पर पहुंच गए.
मैंने चाची से कहा- चाची दुकान पर जो हुआ, उसके लिए सॉरी!
चाची- क्या हुआ? किस बारे में बोल रहे हो तुम?
मैं- अरे चाची, वह आपकी ब्रा फट गई है, मैंने उस बारे में बोल दिया था न!
चाची- अरे राज उसमें क्या है. सच पूछो तो मैं खास उसी की वजह से शॉपिंग के लिए गयी थी. आज पर तुम्हारे सामने कैसे कहूँ, इस वजह से मुझे शर्म आ रही थी.
मैं- अरे उसमें क्या है यार, हम दोनों इतनी बातें तो कर ही सकते हैं. वैसे भी हम लोग एक ऐसे शहर में हैं, जहां यह सब एक साधारण सी बात है. हम लोग इतनी बातें तो कर ही सकते हैं.
चाची- हां सही है राज!
ऐसे ही कुछ दिन बीत गए.
अब हम दोनों आपस में थोड़ा खुल कर बातें कर लेते थे.
एक दिन चाची बाहर सब्जी लेने गयी, तो मुझे लगा कि उनको आने में अभी वक्त लगेगा.
मेरा भी हिलाने का बहुत मूड था.
मैंने अन्तर्वासना पर कहानी पढ़ना चालू किया और कहानी पढ़ कर एकदम से मूड बन गया.
मेरा नहाना भी रह गया था तो मैं कच्छे में ही हो गया था.
मैं अपने बेडरूम में बैठ कर अपने लंड को सहला रहा था.
मैंने अपने 6.5 इंच के लंड को बाहर निकाला और धीरे धीरे हिलाने लगा.
मुझे पता ही नहीं चला कि चाची कब अन्दर आ गई थीं.
मेरा ध्यान जैसे ही उन पर गया, मैं एकदम से बौखला गया.
चाची ने यंग बॉय मास्टरबेशन का नजारा देख लिया था.
उस वक्त मुझे कुछ नहीं सूझा और मैं तुरंत बाथरूम में भाग गया.
मैं बहुत ज्यादा डर सा गया था.
मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि कैसे उनको मुँह दिखाऊं.
उस वक्त हुआ यह था कि चाची पैसे लेकर जाना भूल गयी थीं, इसलिए वे वापस आ गयी थीं.
मैं नहा कर तुरंत लाइब्रेरी चला गया और उनको मैसेज कर दिया कि दोपहर का मेरा खाना मत बनाना चाची, मैं दोस्त के साथ खाना खाने बाहर जा रहा हूँ.
उन्होंने मेरा मैसेज बस देखा और बिना कुछ कहे रह गईं.
अब मेरी और ज्यादा फटी.
रात को जब मैं फ्लैट पर गया तब चाची मोबाइल चला रही थीं.
मैं जाकर चुपचाप अपने बेड पर बैठ गया.
चाची ने मेरी तरफ देखा तो मुझे लगा कि अब वे बहुत गुस्सा करेंगी.
चाची- क्या हुआ राज … सुबह के गए अब आ रहे हो?
मैं चुप रहा.
चाची- बोलो कुछ!
मैं- सॉरी चाची.
चाची- अरे यार वह तो सब नॉर्मल है … तुम इतना क्यों टेंशन ले रहे हो.
मैं- मैं बहुत डर गया था इसलिए दोपहर में भी नहीं आया.
चाची- पागल हो यार तुम … इतना डरने की क्या बात है इसमें! तुम्हीं ने तो कहा था कि हम दिल्ली में रह रहे हैं, यहां ये सब नॉर्मल है. तुम लोगों को हफ्ते में 2 से 3 बार तो हिलाना ही चाहिए. उसी वजह से तुम्हारा मूड भी फ्रेश हो जाता है और पढ़ाई में भी कोई ग़लत असर नहीं पड़ता.
ये सब बातें सुनकर तो मेरे कान बजने लगे थे और मैं एकदम से किसी और दुनिया में खो गया था.
चाची मेरे कंधे को हिलाती हुई बोलीं- राज तुम किसी भी फालतू चीज़ का टेंशन मत लो … तुम बेवजह टेंशन ले रहे हो!
मैं- फिर से सॉरी चाची!
चाची- हां चल ठीक है … कोई बात नहीं, वैसे तुम पर अगर गुस्सा करना होता तो तभी कर देती जब तुम रात को अपने चादर के अन्दर हिला रहे थे, मैं तब भी जागी हुई थी.
मैं- अरे यार मतलब आप पहले ही मुझे पकड़ चुकी हैं?
हम दोनों थोड़ा सहज होकर हल्का हल्का सा हंसने लगे.
चाची मेरे साथ थोड़ा और खुल कर बातें करने लगीं.
मैं एक इन्टरमीडिएट कालेज में अध्यापिका हूं। ये मात्र 12 वीं कक्षा तक का कालेज है। शाम को अक्सर मैं अपनी सहेली के साथ भोपाल ताल के किनारे घूमने निकल जाती हूं।
ऐसे ही एक दिन मैं अपनी सहेली के साथ ताल के किनारे घूम रही रही थी। 12वीं कक्षा की एक छात्रा और एक छात्र मिल गये। ये दोनों मेरी कक्षा में नहीं थे। दूसरे सेक्शन में थे।
मैंने उनसे उनका नाम पूछा तो उन्होंने अपने नाम सोनल और किशोर बताए।
सोनल ने मुझे कहा कि उसे बायलोजी विषय में कुछ पूछना है।
मैंने उसे कहा कि कल घर आ जाना, मैं बता दूंगी। किशोर और सोनल दूसरे दिन घर पर आ गये।
मुझे लगा कि इनकी प्रोब्लम कुछ और ही है। मैंने पूछा- ‘सोनल ये किशोर तुम्हारा दोस्त है क्या…?’
‘हाँ मैम… इसे भी आपसे कुछ पूछना था…’ वो कुछ शरमाती सी बोली।
मैं एकदम भांप गई कि मामला प्यार का है।
‘या कुछ और बात है… कह दो…मैं भी तुम्हारी उम्र से गुजरी हूं’ मैंने अंधेरे में तीर छोड़ा। पर सही लगा…
‘हाँ… मैम वो… हम तो आपके पास इसलिए आये थे कि हम दोनों ज्यादा से ज्यादा समय साथ रहे!… प्लीज मैम नाराज मत होना…’ उसके चेहरे से लगा कि वो मुझसे विनती कर रही हैं।
‘पर ये कोई मिलने की जगह है?’
‘मैम वो… निशा मैम ने बताया था कि आप हमें मदद कर देगीं…’
ओह तो ये बात है… निशा भी अपने बोय फ़्रेंड के साथ एक बार चुदवाने आई थी तो मैंने भी उसी से चुदवा लिया था। मेरे मन में भी एक हूक सी उठी… ये दोनों अपनी जिस्म की प्यास बुझाने आये हैं… क्यों ना मैं भी इस बात का फ़ायदा उठाऊँ।
‘तो तुम मिलना चाहते हो… मेरा क्या फ़ायदा होगा इसमें…’ मैंने तिरछी निगाहों से उसे परखा।
‘मैम मुझे मालूम है… निशा जी ने मुझे सब बता दिया है… इसीलिये तो मैंने आपसे सब कह दिया… आपकी सारी शर्तें इसे भी और मुझे भी मन्जूर है…’ उसने अपना सर झुकाये सारी बातें मान ली।
‘तो ध्यान रहे…शर्तें… कल दिन को स्कूल के बाद सीधे ही यहाँ आ जाना…’ मैंने उसे मुस्कुराते हुए कहा।
सोनल खुशी से उछल पड़ी… मैंने सोनल को चूम लिया…
मैंने कहा-‘किशोर तुम भी आओ जरा…’
मैंने किशोर के होंठ पर एक गहरा चुम्मा ले लिया… मेरे बदन में तरावट आने लगी… किशोर ने भी जोश में मुझे किस कर लिया।
दूसरे दिन किशोर और सोनल स्कूल में मेरे चक्कर लगाते रहे… मैं उन्हें मीठी सी मुस्कान दे कर उनका हौंसला बढ़ाती रही… सच तो ये था कि मेरी चूत में भी कुलबुलाहट मचने लग गई थी… सोच सोच कर ही रोमांचित हो रही थी कि 19 साल के जवान लड़के के लन्ड से चुदवाने को मिलेगा।
मैंने स्कूल से आते ही एयर कंडीशन चला दिया। लंच करके मैं आराम करने लगी। मैं जाने कब सो गई।
अचानक मुझे लगा सोनल ने मेरे हाथ पकड़ लिए और किशोर ने मुझे उल्टी लेटा कर मेरी चूतड़ की फ़ांकों को खोल दिया और अपना लन्ड मेरी गान्ड में घुसाने लगा। पर उसका लन्ड छेद में घुस ही नहीं रहा था। वो बहुत जोर लगा रहा था… मेरी गान्ड में इस जोर लगाने से गुदगुदी लगने लगी थी। सोनल चीख उठी… मार दे गान्ड मैम की…छोड़ना मत… उसकी चीख से मैं अचानक उठ बैठी… ओह… मैं सपना देखने लगी थी।
वास्तव में दरवाजे पर बेल बज रही थी…दिन को करीब 3 बजे थे…वो दोनों आ गये थे। मैंने अपना मुख धोया और हम तीनों कमरे में ही बैठ कर थोड़ी देर तक बातें करते रहे। उन दोनों की बैचेनी देखते ही बनती थी…
‘मैम… मुझे किशोर से कुछ बातें करनी है…’
‘हाँ हाँ… जरूर करो… पर बातें कम करना… और…’ मैंने मजाक किया।
और सोनल को बेड रूम में ले गई और सब बता दिया। किशोर को भी मैंने अन्दर आने का इशारा किया। सोनल तो बेड रूम देखते ही खुश हो गई… और बिस्तर पर लोट गई।
इधर किशोर को मैंने बुला कर उसकी कमर में हाथ डाल कर उसके होंठो को चूमना चालू कर दिया। उसने भी मेरी कमर मे अपना हाथ कस दिया। उसके लौडे की चुभन मेरे चूत के आस पास होने लगी। मैंने धीरे से उसका लन्ड पकड़ लिया। उसके हाथ मेरे बोबे पर जम गये और उन्हें दबाने लगे। सोनल जल्दी से आई और किशोर को खींचने लगी…
‘किशोर… आओ ना…’ किशोर खिंचता हुआ चला गया…पर मेरे बदन की गर्मी का अह्सास किशोर को मिल गया था। उसने किशोर को अपने से लिपटा लिया।
‘अरे… क्या ऐसे ही करोगे… कपड़े तो उतार दो…चुदाई का मजा नहीं लोगे क्या…’ मैंने उन्हे कहा.
‘नहीं…नहीं… चुदाई नहीं… बस ऐसे ही ऊपर से…’ सोनल ने कहा तो मुझे आश्चर्य हुआ।
‘तब क्या मजा आयेगा… क्यों किशोर…’
किशोर ने मेरा साथ दिया और हम दोनों ने मिल कर सोनल को नंगी कर दिया… किशोर ने भी अपने कपड़े उतार दिये। उन्हें देख कर मैंने भी अपना गाऊन उतार दिया और नंगी हो गई। किशोर का जवान लन्ड देख कर मेरी चूत में पानी उतरने लगा।
सोनल भी जवान लड़की थी… उसके जवान जिस्म को देख कर कोई भी पिघल सकता था। किशोर सोनल से लिपट गया। और उसे बिस्तर पर पटक दिया। उसके ऊपर चढ गया और बेतहाशा चूमने लगा। दोनों का जोश देखते ही बनता था। एक दूसरे मे समाने की पूरी कोशिश कर रहे थे। पर हाँ सोनल अपनी चूत से उसके लन्ड को दूर रख रही थी। किशोर जैसे ही अपना लन्ड उसकी चूत पर दबाता वो चूत को झटका दे कर हटा देती थी।
ये सब देख कर मेरी वासना बढती जा रही थी। मैंने अपनी चूत में दो अंगुलियाँ डाल ली और अपनी चूत चोदने लगी। मेरे मुख से सिसकारी निकल पड़ी। अब मैंने सोचा कि पहले इन्हें निपटा दूं। मैं उठी और दोनों को सहलाने लगी। फिर मैंने सोनल के चूत का दाना धीरे धीरे मलना शुरु किया। सोनल को और मस्ती चढने लगी। मैं घिसती रही…मलती रही… इतने में सोनल झड़ने लगी… मैंने हाथ हटा लिया… उसकी चूत में से पानी आ रहा था… इसी दौरान किशोर का लन्ड मैंने सोनल की चूत पर रख दिया। किशोर तो जोश में था ही… उसका लन्ड सोनल की चूत में उतर गया…
सोनल तड़प उठी…’अरे ये क्या… हटो…हटो… उसने जल्दी से उसका उफ़नता हुआ लन्ड चूत से निकाल दिया…
किशोर भी तडप उठा… उसे तो अब चूत चाहिये थी… सोनल अलग हट कर उठ गई।
‘देखो…मैम…मैंने मना किया था…तब भी इसने क्या कर डाला…’
‘कोई बात नहीं सोनल…ला मैं इसे सम्भालती हूं…’ मैंने अपनी बारी सम्हाली और किशोर को दबोच लिया और उसे अपने नीचे दबा लिया… उसके खड़े लन्ड पर मैंने अपनी चूत रख कर दबा दी… आऽऽऽऽऽअह्ह्ह्ह्ह…लन्ड मेरी चिकनी चूत मे धंसता चला गया… किशोर ने भी अपने चूतड़ ऊपर की ओर उठा दिए… और उसका लन्ड पहले झटके में ही जड़ तक बैठ गया। मेरे मुख से आनन्द के मारे सिसकारी निकल पड़ी…
ना जाने कब से मैं इस चुदाई का इन्तजार कर रही थी। मैंने अपने चूतड़ थोड़े से ऊपर उठाये और दूसरा झटका दिया…फ़च की अवाज के साथ लन्ड गहराई तक चोद रहा था। किशोर आनन्द के मारे नीचे से झटके मार रहा था। दोनों ही हर झटके पर आहें भरते थे… सोनल भी हमे देख कर उत्तेजित होने लगी थी… शायद उसने ऐसी चुदाई पहली बार देखी थी। उसने अपनी एक अंगुली मेरी गान्ड में फ़ंसा दी और गोल गोल घुमाने लगी। मैं तो इस डबल चुदाई से मस्त होने लगी। दोनों तरफ़ से मजा आने लगा था।
‘सोनल…मजा आ रहा है…क्या मस्त लन्ड है…’
‘मैम आपकी चूत बड़ी प्यारी है… देखो ना लन्ड सटासट अन्दर बाहर जा रहा है…’
‘चोदे जा मेरे राजा… हाय… मैं तो मर जाऊँगी राम…’
किशोर ने मेरी चूंचियाँ मसल मसल कर बेहाल कर दी थी… अब मैं अति उत्तेजना का शिकार होने लगी… मुझे लगा कि अब मैं झड़ जाऊँगी। मेरे धक्के अब जोर से और अन्दर तक दबा कर जा रहे थे। और अचानक मेरा बदन लहरा उठा… और मेरा रस निकलने लगा। मैंने उसके लन्ड पर अपनी चूत गड़ा दी…और उस पर पूरी झुक गई।
‘सोनल प्लीज… मेरी गान्ड से अंगुली निकाल दे…’ सोनल ने अंगुली बाहर निकाल दी। मैंने किशोर से अपने बोबे जोर लगा कर छुड़ा लिये। पर मुझे वो छोड़ने को तैयार नहीं था…
‘किशोर… देख सोनल तेरा इन्तजार कर रही है… अब छोड़ दे मुझे…’ सोनल के नाम ने उस पर जादू सा असर किया।
उसने सोनल का नाम सुनते ही मुझे छोड़ दिया… और प्यार से वो दोनों एक बार फिर से लिपट गये। पर सोनल ये भूल गई थी कि किशोर की चुदाई पूरी नहीं हुई थी। किशोर ने प्यार से सोनल को चिपका लिया और पलटी मार कर अपने नीचे दबोच लिया… चिड़िया फ़ड़फ़ड़ाती रह गई…
सोनल जब तक कुछ समझती तब तक मैंने किशोर का लन्ड सोनल की चूत के छेद पर रख दिया था। किशोर ने धक्का मारा तो सीधा गहराईयों में उतरता चला गया। दूसरे धक्के में लन्ड जड़ तक बैठ गया था। सोनल के मुख से चीख निकलती उससे पहले मैंने उसके मुख पर तौलिया रख दिया।
उसकी झिल्ली फ़ट चुकी थी। सोनल को मालूम हो गया था कि उसका कौमार्य जाता रहा था। मैंने अब उसके मुँह से तौलिया हटा लिया था। उसके आंखों में आंसू आ गये थे। मैंने तौलिया अब सोनल की चूत के नीचे रख दिया था। खून बाहर आने लगा था। मैं उसे पोंछती जा रही थी।
किशोर इन सभी बातों से बेखबर तेजी से चुदाई कर रहा था… किशोर अब हाँफ़ने भी लगा था… सोनल भी अब सामान्य होने लगी थी। उसे भी अब मजा आने लगा था। मैंने देखा कि अब सोनल के चूतड़ भी धीरे धीरे उछलने लगे थे और चुदाई में साथ दे रहे थे…
मैंने सोनल कि चूंचियाँ मसलनी चालू कर दी… उसके निपल को भी घुमा घुमा कर हल्के से खींच रही थी। सोनल की सिसकरियाँ निकलने लगी थी। उसकी आहें तेज हो गई थी। वो बार बार किशोर को अपनी ओर खींच रही थी। इतने में सोनल चरमसीमा पर पहुंचने लगी। उसके मुख से अस्पष्ट शब्द निकलने लगे थे।’मांऽऽऽऽऽऽरी… मर जाऊँगी… हाय चोद दे… राम रे…’
मैं उसकी चूंचियों को और जोर से मसलने लगी… सोनल के चेहरे का रंग बदलने लगा… अपने होंठ बार बार काट रही थी… अचानक उसका शरीर ने एक ऐठन ली और आहाऽऽऽऽऽ करते हुए वो झड़ने लगी…मैंने उसकी चूंचियाँ छोड़ दी।
किशोर भी अब गया! तब गया! हो रहा था… अचानक उसने भी अपने लन्ड का जोर चूत पर लगा कर पिचकारी छोड़ दी… दोनों ही साथ साथ झड़ रहे थे… किशोर और सोनल दोनों ने आपस मे एक दूसरे को जोरों से जकड़ लिया था। कुछ ही समय बाद दोनों ही निढाल पड़े थे। और हाँफ़ रहे थे। सोनल की चूत में से अब धीरे धीरे वीर्य निकलने लगा था… मैंने तौलिया उसकी चूत के नीचे घुसा दिया… किशोर बिस्तर से नीचे उतर आया और अपने कपड़े पहनने लगा। सोनल थोड़ी गम्भीर लग रही थी।
‘दीदी मेरी तो झिल्ली फ़ट गई ना… अब क्या होगा…’
‘क्यो घबराती है…झिल्ली फ़टने के बहुत से कारण होते हैं…’ मैंने उसे बताया… खेलने से… साईकल चलाने से… किसी एक्सीडेन्ट से झिल्ली फ़ट सकती है…इसलिये डरने की कोई बात नहीं है।
‘और फ़िर तुम्हारी उमर अब चुदाने की हो गई है… तो अब इसे फ़ट जाने दो और जिंदगी का मजा लो…’
‘मैम हम क्या आपके पास रोज़ ट्यूशन पढने आ सकते हैं…?’ सोनल ने घुमा कर प्रश्न पूछा।
‘हा… जरूर अगर पढ़ना हो तो फ़ीस लगेगी एक की 500 रू और अगर आज जैसी पढाई करनी हो तो 250 रू…’
मैं राहुल जैन जयपुर Hindi Sex Stories में पढ़ाई कर रहा हूँ और मैं यहाँ किराये पर रहता हूँ। मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ।
मैं आपको अपनी पहली कहानी बताने जा रहा हूँ कि मैंने अपने दोस्त की भाभी को कैसे चोदा!
अन्तर्वासना की आदत मेरे एक दोस्त ने डाली और मुझे भी इसमें मजा आने लगा। मैं उसकी ही भाभी को चोदने के सपने देखने लगा। मैं उसमें सफल भी रहा।
मेरे दोस्त का फार्म-हाउस जयपुर से बाहर है, हम अकसर उनकी खेती बाड़ी देखने के लिए वहाँ जाते रहते हैं। उसकी भाभी बहुत सुन्दर है और सेक्सी है। उसकी गांड के उभार देख कर मेरा लण्ड तन जाता है।
एक बार मेरे दोस्त के फार्म हाउस पर एक कार्यक्रम था। तो उसके सभी घर वाले वहाँ काम सम्हलाने के लिए वहीं थे, उसके घर पर उसकी भाभी और भैया ही थे।
मेरे दोस्त का फोन मेरे पास आया- यार मेरी भाभी को शाम को फार्म हाउस पर लेकर आ जायेगा क्या?
तो मैंने उसको पूछा- भैया नहीं हैं क्या?
तो उसने कहा- भैया तो दुकान पर हैं और वो तो रात को सात बजे तक आयेंगे।
मैंने तुरन्त हाँ कर दी और पूछा- भाभी को कब तक लेकर आना है?
उसने कहा- चार बजे तक उसके लेकर रवाना होना है!
मैं उसके घर पर दो घंटे पहले ही पहुँच गया और देखा कि भाभी जाने की तैयारी कर रही हैं पर खुद तैयार नहीं हुई हैं।
भाभी ने गाउन पहन रखा था।
भाभी मेरे लिए पानी लेकर आई और चाय के लिए रसोई में चली गई। मैं भी उनके पीछे-पीछे रसोई में चला गया और उनसे बातें करने लगा।
भाभी ने मुझसे पूछा- तुम मुझे अकसर घूरते क्यों रहते हो?
तो मैंने कहा- भाभी, आप बहुत सैक्सी हो!
भाभी की गांड देखते ही मेरा लण्ड खड़ा हो चला था। भाभी चोरी-छुपे मेरे लण्ड की तरफ देख रही थी, मैंने भाभी को कहा- क्या देख रही हो?
तो वो घबराने लगी, उन्होंने कहा- कुछ नहीं!
भाभी ने कहा- मैं तैयार होकर आती हूँ फिर अपन चलते हैं!
भाभी तैयार होने के लिए कमरे में चली गई। भाभी जब तैयार हो रही थी तो मैं उनको रोशनदान में से देख रहा था। उनके गोरे बदन को पैन्टी और ब्रा में देखकर मेरी हालत खराब हो रही थी, मेरा दिमाग केवल उनको चोदने के बारे में सोच रहा था।
तभी भाभी की नजर मेरे ऊपर पड़ गई, उन्होंने कहा- क्या देख रहे हो?
मैंने कहा- भाभी मैं आपको चाहता हूँ।
तो भाभी बोली- सोचते बहुत हो! आ जाओ फटाफट और प्यार करो मुझे!
मैं उनके कमरे में गया और उनके गोरे बदन को अपनी बाहों में भरकर उनके गालों को, होंठों को चूमने लगा। उन्होंने भी मेरा पूरा साथ दिया और कहा- मैं तुमसे कई दिनों से चुदने के बारे में सोच रही थी लेकिन मौका नहीं मिल पा रहा था। आज मौका मिला है तो मेरी चूत को और गाण्ड दोनों को चोद दो।
मैंने उनकी पैंटी और ब्रा खोलकर अलग कर दी और उनके नंगे बदन के दर्शन किए। मेरी जिन्दगी में पहली बार नंगी लडकी या औरत को मैंने देखा था। मैं तो उनकी सफाचट चूत को देखकर पागल हो गया। मुझसे रहा नहीं गया और उनको बिस्तर पर बिठाकर उनकी टांगें चौड़ी करके उनकी चूत को चाटने लगा। उनको चूत चटवाने में बड़ा मजा आ रहा था।
उन्होंने कहा- मुझे भी तुम्हारा लण्ड चूसना है।
फिर हम दोनों 69 की दशा में आकर एक दूसरे को पागलों की तरह चाटने लग गये। मैंने उसकी भाभी के जोकि एकदम गोरी चिटटी थी, खूब मजे लिए। चाटते चाटते उसने मेरा और मैंने उनका पानी पी लिया।
फिर उन्होंने कहा- राजा अब फटाफट मेरी चूत में लण्ड डाल के चोद दो मुझे!
फिर मैंने उनकी दोनों टांगों को चौड़ा करके लण्ड को उनकी चूत पर रख दिया और एक झटके में उनकी चूत में मेरा लण्ड घुस गया। मेरा लण्ड पहली बार किसी की चूत के दर्शन कर रहा था।
मुझे तो जैसे स्वर्ग मिल गया हो, मैं कितना भाग्यशाली हूँ कि मुझे पहली बार में ही इतनी चिकनी चूत चोदने के लिए मिली।
मैंने मेरी पहली चुदाई दस-पन्द्रह मिनट तक की और उनके गोरे-गोरे स्तनों को खूब दबाया।
चूंकि हम जल्दी में थे इसलिए पहली बार इतनी सी चुदाई करके हमको संतुष्ट होना पड़ा।
फिर हम तैयार होकर मेरे दोस्त के फार्म हाउस पर पहुँचे। रास्ते में गाड़ी में मैंने उनकी चूत पर कई बार हाथ फिराया और बोबे भी दबाये।
उस कार्यक्रम में मैंने उनके कई बार बोबे दबाये। अब अक्सर जब भी मैं मेरे दोस्त के घर जाता हूँ तो मौका पाकर मैं उनके बोबे दबा देता हूँ।
इसके बाद तो मुझे चुदाई का ऐसा चस्का लगा कि मैंने अब तक पांच-सात लड़कियों और औरतों का चोदा है। मेरे टीचर की बहु को मैंने कैसे चोदा, अगली कहानी में लिखूंगा।
आपको मेरी पहली कहानी कैसी लगी, मुझे मेल अवश्य करें। Hindi Sex Stories
यह Sex Stories कहानी उस वक्त की है जब मैं कॉलेज में पढ़ता था।
मध्यप्रदेश के जबलपुर में चौधरी चाल में मैं रहता हूँ। हमारे चाल में कविता, रेशमा, और पिंकी ये तीन लड़कियाँ रहती हैं। जब वे स्कूल में थी तब उनका मेरे घर में आना जाना रहता था। अब वे 18 साल की हो चुकी हैं। जब स्कूल में थी, उस वक्त से मैं उन तीनों बहुत चाहता हूँ। उनको मैंने कैसे चोदा, यही कहानी हैं।
एक दिन की बात है, उस वक्त मेरे घर में मैं अकेला था, और मैं कम्प्यूटर पर ब्ल्यू फिल्म देख रहा था। तभी कविता, रेशमा और पिंकी मेरे घर चली आई। उन्हें देखते ही मैंने फिल्म बंद कर दी। वे मुझे सुहास नाम से बुलाती हैं।
सुहास.. तू घर पर अकेले क्या कर रहा है? ऐसे कविता ने पूछा।
मैंने कहा- कुछ नहीं ! कम्प्यूटर पर काम कर रहा था…
पर आज तुम तीनों मेरे घर अचानक.. एक साथ ? क्या कुछ काम था..? मैंने पूछा तो पिंकी ने कहा- कॉलेज को छुट्टी है तो तुम्हारे साथ कुछ खेल खेले ऐसा सोचकर हम चली आई ! तू भी तो अकेला है…
क्या खेलें…..?
तो रेशमा बोली- आँख मिचौली खेलते हैं…
मैंने भी कहा- ठीक है….
वैसे मेरा घर बहुत बड़ा है, चाल में हमारा घर ही बड़ा है, एक बेडरुम, किचन और हॉल – ऐसे तीन कमरे थे, जिनमें हॉल सबसे बड़ा है।
कविता बोली- राज कौन लेगा….
तो मैंने कहा- हम लॉटरी निकालते हैं….
ठीक है- तीनों ने माना।
फिर मैंने परची डाली और पिंकी से कहा- इनमें से एक उठाओ ! जिसका नाम आयेगा वो राज लेगी….
ठीक है !
पिंकी ने परची उठाई तो रेशमा पर राज आई।
उस वक्त उन तीनों ने स्कूल की ड्रेस पहनी थी। घर में भी वे तीनों अक्सर स्कूल ड्रेस ही डाला करती थी। रेशमा ने उस वक्त चॉकलेटी रंग का पेटिकोट और अंदर से शर्ट पहना हुआ था, पिंकी ने पंजाबी ड्रेस की तरह नीले रंग का कुरता और आसमानी रंग का पज़ामा पहना था, ऊपर से दुपट्टा लिया था और कविता ने पीले रंग का स्कर्ट और टॉप पहना था।
मैं उस वक्त बरमुडा और टी-शर्ट में था।
पिंकी बोली- रेशमा पर राज आया है ! उसकी आँखों पर पट्टी बांधो….
मैंने कहा- पिंकी, मेरे पास तो पट्टी नहीं है….
तो कविता बोली- अरे सुहास ! पिंकी का दुपट्टा कब काम आयेगा….
पिंकी बोली- ठीक है… दुपट्टा ही बांधती हूं….
पिंकी ने अपना दुपट्टा निकाला और और रेशमा की आँखों पर बांधा।
रेशमा जिसे छुएगी उसको फिर राज लेना होगा… ऐसे पिंकी ने कहा और खेल शुरू हुआ। हम तीनों इधर उधर भागे, आँख पर पट्टी बंधी रेशमा हम तीनों को खोजने लगी। मैं रेशमा को हाथ लगा कर पीछे हट जाता था। वैसे ही पिंकी और कविता ने शुरु किया।
अचानक मेरा हाथ रेशमा के स्तनों पर लग गया और उस वक्त मैं पकड़ा गया। अब मेरे बारी थी। मेरे आँखों पर पिंकी ने पट्टी बांधी। पट्टी बांधते समय पिंकी के स्तन मेरे पीठ पर छू रहे हैं, ऐसा मुझे महसूस हुआ। तभी मेरा लंड खड़ा हुआ। अब मैं तीनों को खोज रहा था।
अचानक कविता बोली, अरे सुहास तुम्हारी जेब ऐसे फ़ूली क्यों है, कुछ जेब में है क्या….?
मैं घबरा गया- नहीं नहीं ! कुछ नहीं ! यह तो ककड़ी है जो मैं रोज खाता हूँ….
अच्छा मुझे भी चाहिए ! कविता बोली और जिद करने लगी।
देता हूँ…. खेल तो पूरा होने दो !
नहीं पहले दो ! नहीं तो मैं निकाल लूंगी ! पिंकी तो जिद पर आ गई।
मैं बोला- पास मत आना पिंकी ! आऊट हो जाओगी…
पर पिंकी नहीं मानी, उसने रेशमा और कविता से कुछ छुपी बातें की।
सुहास ! तुझे छूने ही नहीं दूंगी तो कैसे आऊट होऊँगी? खेल शुरु रख कर भी मैं ककड़ी निकाल सकती हूँ… पिंकी बोली।
उस वक्त मैं कुछ नहीं समझा मैं तीनों को ढूँढ रहा था कि अचानक रेशमा और कविता ने मेरे हाथ कस के पकड़ लिए।
मैं बोला- अरे यह क्या कर रही हो…?
तो कविता बोली- सुहास, तू हमें छू नहीं सकता क्योंकि हमने तुम्हारे हाथ पकड़े हैं…
मैं उस वक्त डर गया। तभी पिंकी ने मेरे जेब में हाथ डाला. और ककड़ी खींचने लगी… पिंकी ने ककड़ी नहीं, मेरा लंड पकड़ लिया था पर उसे कुछ नहीं पता था। इधर दोनों ने मुझे कस कर पकड़ लिया था।
रेशमा बोली- पिंकी ककड़ी निकालो…
पिंकी बोली- नहीं निकल रही है…
कविता बोली- अरे शायद सुहास ने अंदर में ककड़ी रखी होगी…. ऊपर वाली पैंट उतारो…
कविता झट से बोल गई तो पिंकी शरमा गई।
अरे, क्या शरमाना ! सुहास तो अपना दोस्त है….
अब मेरा भांडा फ़ूटने वाला है, मैं बहुत घबरा गया क्योंकि मैंने अंडरवीअर नहीं पहना था, सिर्फ बरमुडा पहना था।
तभी पिंकी ने मेरा बरमुडा खींचना शुरु किया। मैं हलचल करने लगा पर आखिर में पिंकी ने मेरा बरमुडा खींच ही लिया। बरमुडा नीचे आते ही मेरा सात इंच का लंड तीनों को सलामी देने खड़ा हुआ था। तीनों दंग रह गई। रेशमा चिल्लाई- बाप रे ! कितना बड़ा है सुहास तेरा लंड….
नहीं, यह इतना बड़ा नहीं है, यह तो तुम तीनों को देखकर बड़ा हो गया है….
अब मैंने हथियार डाल दिए और सच सच बातें करने लगा।
रेशमा, पिंकी कविता सुनो ! मैं तुम तीनों को चाहने लगा हूँ ! तुम्हारी जवानी का रस पीने की कोशिश कर रहा हूँ !
कविता बोली- कौन सा रस…?
तब मैंने कविता से कहा- बुरा नहीं मानेगी तो मैं साफ बात करुँ….?
तभी पिंकी बोली- अरे सुहास ! तू बिदांस बात कर…. कुछ मदद चाहिए वो भी हम देंगे….
तब मैंने खुलकर बातें करना शुरू किया, मैं बोला- मैंने तुम तीनों के बहुत बार स्तन दबाये हैं और अपना लंड तुम्हारे शरीर को छुआया है। तभी मेरा लंड ऐसे ही खड़ा हो जाता है…. अभी तुम्हारे स्तन देखकर इन्हें चूसने का मन कर रहा है ! और..
रेशमा बोली- सुहास और क्या….
तो मैंने कहा- मेरा लंड तुम तीनों चूसें ! ऐसी मेरी इच्छा है…. और मेरा लंड तुम्हारी चूत में डालने की इच्छा है….
तो कविता बोली- तो उसमें क्या है सुहास ! अभी तक तो तूने हम तीनों से ऊपरी-ऊपरी मज़े लिए, अब सच में इस नये खेल का हम आनंद उठाते हैं….
रेशमा और पिंकी ने कहा- हाँ सुहास…. तुम जैसे चाहे हमें चोद सकते हो ! शादी के बाद तो हमारा पति हमें चोदेगा, उससे पहले कैसे चोदते हैं यह सीख लिया तो शादी के बाद परेशानी नहीं होगी।
कैसे शुरुआत करें….? कविता बोली।
मैंने फिर परची डाली और रेशमा को कहा- एक एक कर के तीनों को उठाओ।
रेशमा ने उठाई तो पहली परची में पिंकी का नाम था, दूसरी में रेशमा का और तीसरी में कविता का नाम आया।
मैंने कहा- देखो, परची में जैसे नाम आएँ हैं, वैसे ही मैं एक एक को चोदूँगा….
ठीक है ! तीनों मान गई।
पिंकी, तेरा नाम पहले आया है, तू तैयार है ना….?
पिंकी बोली- हाँ, मैं तैयार हूँ, मुझे क्या करना होगा?
पिंकी तू कुछ नहीं करेगी ! करुंगा तो मैं, जब करना हो तो मैं बोलूँगा। बाद में तुम खुद ही करोगी, ऐसा ही यह खेल है…. पिंकी चलो, बेडरुम में चलते हैं…. मैंने कहा।
तभी रेशमा बोली- सुहास, क्या हम भी आ जायें ?
हाँ चलो, तुम भी देख लो कि कैसे चोदते हैं।
हम चारों बेडरुम में चले गये। मैंने पिंकी को बिस्तर पर लिटाया और उसके गाल चूमना शुरु किया। पिंकी ने थोड़ी हलचल की क्योंकि यह सब वह पहली बार महसूस कर रही थी। मैंने पिंकी के ओंठ पर अपने ओंठ रखे, फिर गले का चुंबन लेने लगा, फिर और नीचे आकर उसके स्तन को चूमने लगा, कपड़ों के ऊपर से मैंने उसके स्तन दबाना शुरु किए। फिर मैं पिंकी का कुर्ता उतारने लगा। पिंकी अब ब्रा पहनती थी, कुर्ता उतारते ही उसके स्तन उभर कर आगे आये।
पिंकी तुम्हारे स्तन तो आम जैसे पक गये हैं ! मैंने कहा।
पिंकी बोली- अब रस पी जाओ भी ?
तभी मैंने पिंकी की ब्रा भी उतारी, अब स्तन पूरे खुले गये थे। मैं स्तन देखकर उन पर लपक पड़ा। पिंकी के स्तन मैंने दबाना शुरु किए। फिर एक स्तन मैंने मुँह में लिया उसके निप्पल चूसने लगा और दूसरा स्तन दबाने लगा।
पिंकी ! तुम जिसे ककड़ी समझ रही थी, वो मेरा लंड था। तुम मेरा लंड हाथ में लेकर मसलना शुरु करो।
तब पिंकी ने मेरा लंड मसलना शुरु किया। सुहास, तेरी इच्छा थी ना कि तेरा लंड मैं मुँह में लूँ और चुसूँ ! तो अपनी इच्छा पूरी कर !
हाँ पिंकी, आय लव यू, फिर मैंने अपना लंड पिंकी के मुँह में दिया। पिंकी मेरा सात इंच का लंड मुँह में चूसने लगी। उधर कविता और रेशमा हमारा खेल देखकर गरम हो रही थी।
तभी रेशमा बोली- सुहास ! अरे, पिंकी को चोदना भी शुरु करो ! मुझे कुछ हो रहा है !
हाँ रेशमा डार्लिंग ! अभी चोदता हूँ ! मैंने पिंकी का पजामा उतार दिया। अब पिंकी पूरी नंगी थी, अपने बोबे दिखा कर बोली- सुहास … इन्हें दबाओ ! … और दबाओ !
मैं फिर टूट पड़ा। फिर मैंने पिंकी की चूत के पास अपना लंड ले गया। पिंकी ने मेरा लंड का पकड़ कर चूत के सामने रखा। मैंने कहा- पिंकी, अब मैं तुझे चोदने जा रहा हूं….
हाँ तैयार हूँ !
फिर मैंने जोर का धक्का देकर लंड पिंकी के चूत में धकेल दिया। लंड चूत में जाते ही आऽऽ आऽ आहह्हह्ह ! पिंकी चिल्ला उठी।
फिर थोड़ी देर बाद मैं लंड अंदर-बाहर करने लगा। पिंकी मदहोश होकर चुदाई का आनंद ले रही थी।
पिंकी अब बस करो ! अब रेशमा को चोदने दो… वो तरस रही है !
ठीक है ! पिंकी बोली और कविता के बगल में जा बैठी।
रेशमा डार्लिंग आओ.. मैंने कहा।
रेशमा तुरंत बिस्तर पर लेट गई…
रेशमा ने स्कूल पेटिकोट और शर्ट पेहना था। मैंने उसके ओंठ के चुंबन लेकर रेशमा का पेटीकोट उतारना शुरु किया फिर मैंने उसका शर्ट खोल दिया। उसने ब्रा नहीं पहनी थी। जैसे ही मैंने शर्ट खोला तो उसके दूध उछल के बाहर आ गये, मैं उन्हें दबाने लगा। कितने दिनों के बाद इसके पूरे के पूरे स्तन देखने को और दबाने को मिले। फिर मैंने उसके निप्पल को मुंह में लिया और चूसने लगा। रेशमा आ आह्हह्ह हा आआ आऽऽह्हह्हह कर रही थी। मैं उसे चूसता ही रहा। थोड़ी देर बाद मैंने उसकी पैन्टी उतार दी। पिंकी की चुदाई देखकर रेशमा की चूत बहुत गरम हो गई थी। मैं उसकी चूत को फैला कर चाटने लगा। वो सिसकारी भर रही थी- अहाऽऽआआ असऽऽ स्सहस आआअह्ह्हस् स्सशाआ आआहस्सह्हस्स अह्हह्हह ह्ह्हह हस्साआ आअह्ह ह्हहा ह्ह्हाआ ह्हाहहवो !
वो मेरे लंड को हाथ में लेकर खींच रही थी- सुहास अरे लंड मुझे चूसने दो ना….
हाँ रेशमा…
और मैंने लंड रेशमा के मुँह में दिया। वो आयस्क्रीम की तरह उसे चूसने लगी। फिर रेशमा ने कमर को ऊपर उठा लिया और मेरे तने हुए लंड को अपनी जांघों के बीच लेकर रगड़ने लगी। वो मेरी तरफ़ करवट लेकर लेट गई ताकि मेरे लंड को ठीक तरह से पकड़ सके। उसकी चूची मेरे मुँह के बिल्कुल पास थी और मैं उन्हें कस कस कर दबा रहा था। अचानक उसने अपनी एक चूची मेरे मुंह में ठेलते हुए कहा- सुहास, चूसो इनको मुंह में लेकर।
मैंने उसकी चूची को मुंह में भर लिया और जोर जोर से चूसने लगा। थोड़ी देर के लिये मैंने उसकी चूची को मुँह से निकाला और बोला- मैं हमेशा तुम्हारी कसी चूची की सोचता था और परेशान होता था, इनको छूने की बहुत इच्छा होती थी और दिल करता था कि इन्हें मुँह में लेकर चूसूँ और इनका रस पीऊं। पर डरता था पता नहीं तुम क्या सोचो और कहीं मुझसे नाराज़ न हो जाओ। तुम नहीं जानती कि तुमने मुझे और मेरे लंड को कितना परेशान किया है !
अच्छा तो आज अपनी तमन्ना पूरी कर लो, जी भर कर दबाओ, चूसो और मज़े लो ! मैं तो आज पूरी की पूरी तुम्हारी हूं जैसा चाहे वैसा ही करो ! रेशमा ने कहा।
फिर क्या था, हरी झंडी पाकर मैं जुट पड़ा रेशमा की चूची पर। मेरी जीभ उसके कड़े निप्पल को महसूस कर रही थी। मैंने अपनी जीभ को उठे हुए कड़े निप्पल पर घुमाया। मैं दोनों अनारों को कस के पकड़े हुए था और बारी बारी से उन्हें चूस रहा था। मैं ऐसे कस कर चूचियों को दबा रहा था जैसे कि उनका पूरा का पूरा रस निचोड़ लूंगा। रेशमा भी पूरा साथ दे रही थी। उसके मुँह से ओह! ओह! अह! सी, सी! की आवाज निकल रही थी। मुझसे पूरी तरह से सटे हुए वो मेरे लंड को बुरी तरह से मसल रही थी और मरोड़ रही थी। उसने अपनी बाईं टांग को मेरे कंधे के ऊपर चढ़ा दिया और मेरे लंड को अपनी जांघों के बीच रख लिया। मुझे उसकी जांघों के बीच एक मुलायम रेशमी एहसास हुआ। यह उसकी चूत थी। उसने पैंटी नहीं पहन रखी थी और मेरे लंड का सुपाड़ा उसकी झांटों में घूम रहा था। मेरा सब्र का बांध टूट रहा था।
रेशमा ने तब हाथ में मेरा लंड लेकर निशाने पर लगा कर रास्ता दिखाया और रास्ता मिलते ही मेरा लंड एक ही धक्के में सुपाड़ा अंदर चला गया। इससे पहले कि वो सम्भले या आसन बदले, मैंने दूसरा धक्का लगाया और पूरा का पूरा लंड मक्खन जैसी चूत की जन्नत में दाखिल हो गया।
रेशमा चिल्लाई- उईई ईईईइ ईईइ माआआ हुहुह्हह्हह ओह , ऐसे ही कुछ देर हिलना डुलना नहीं, सुहास…हाय ! बड़ा जालिम है तुम्हारा लंड। मार ही डाला !
पहली बार जो इतना मोटा और लम्बा लंड उसकी बुर में घुसा था। मैं अपना लंड उसकी चूत में घुसा कर चुपचाप पड़ा था। उसकी चूत फड़क रही थी और अंदर ही अंदर मेरे लौड़े को मसल रही थी। उसकी उठी उठी चूचियां काफ़ी तेज़ी से ऊपर नीचे हो रही थी।
मैंने हाथ बढ़ा कर दोनों चूचियों को पकड़ लिया और मुँह में लेकर चूसने लगा। रेशमा को कुछ राहत मिली और उसने कमर हिलानी शुरु कर दी। मेरा लंड धीरे धीरे चूत में अंदर-बाहर करने लगा। मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और तेज़ी से लंड अंदर-बाहर करने लगा। रेशमा को पूरी मस्ती आ रही थी और वो नीचे से कमर उठा उठा कर हर शोट का जवाब देने लगी। रसीली चूची मेरी छाती पर रगड़ते हुए उसने गुलाबी होंठ मेरे होंठ पर रख दिये और मेरे मुंह में जीभ ठेल दिया।
इधर चुदाई जोरदार शुरु थी उधर कविता तड़फ रही थी। सुहास, बस भी करो अब मुझे कब शांत करोगे… कविता बोली।
कविता डार्लिंग ! हाँ अब तुन्हें ही चोदना है ! रेशमा अब बस करो ! कविता मुझे घूर-घूर कर देख रही है !
ठीक है सुहास ! तुम कवितो को चोदो !फिर रेशमा पिंकी के साथ जा बैठी।
कविता मेरी जानेमन ! आओ ! ऐसे कहते ही कविता तुरंत बिस्तर पर आ गई।
कविता, तुम स्कर्ट-टॉप में बहुत सुंदर दिखती हो ! तुम्हो बोबे भी अब पिंकी और रेशमा की तरह बड़े हो गये हैं।
सुहास ! अब तो बड़े हो गये हैं और तुम्हें बुला रहे हैं…
फिर मैं कैसे रुक सकता था। मैंने धीरे से कविता के टॉप के हुक खोल दिए और उसकी ब्रा उतार दी। अब वह एकदम परी लग रही थी। मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया।, उसकी चिकनी चूचियाँ मैं चूसने लगा, उसकी घुंडियाँ कड़ी हो रही थीं और वह कह रही थी- सुहास बहुत मज़ा आ रहा है !
फिर मैं होंठ चूसने लगा, इस बीच कविता का एक हाथ मेरे लंड को पकड़ चुका था। कविता मेरा लंड मसलने लगी। तभी मैं उसके बोबे दबाने शुरु किया, उसकी चूचियाँ चूसने लगा- कविता, तेरा दूध पीने की बहुत इच्छा है !
अरे सुहास ! अभी तो मेरी शादी नहीं हुई, शादी के बाद माँ बन जाऊंगी तो जरुर मेरा दूध पीना !
सच कविता..? और मैं फिर कविता की चूचियाँ जोर-जोर से चूसने लगा। उउउउउउऊऊऊऊऊ… .आआआआआहहहहह… उसके होंठों पर किस किया और दोनों हाथों से उसकी चूचियों को धीरे-धीरे दबाया। अब मैं उसकी स्कर्ट उतारने लगा। उसने काले रंग की पैन्टी पहन रखी थी।
तभी उसने कहा- सुहास अब रहा नहीं जाता, मुझे दे दो, मुझे चाहिए !
अब मैंने भी उसके सारे कपड़े उतार दिए। मेरा लंड खड़ा था। मैंने कविता की पैन्टी अपने मुँह से उतारनी शुरु की। वहाँ बाल बहुत कम थे। उसकी पैन्टी उतार कर मैंने उसको बीच में से सूँघा। गज़ब की खुशबू थी। उसकी चूत की लाईन चाटने लगा। मेरा लंड बिल्कुल खड़ा हो चुका था। कविता ने मेरे लंड को पकड़ लिया और उसके सुपाड़े की चमड़ी को ऊपर नीचे करने लगी। मैं भी दोनों हाथों से कविता की गोल चूचियां दबा रहा था। मैं भी गरम हो रहा था, कविता ने मेरा लंड पकड़ के मुँह में भर लिया और सटासट चाटने लगी.. वो मेरा सारा रस पी गई। कविता ने चूस-चूस कर फिर से मेरा लंड खड़ा कर दिया….
कविता बोली- सुहास, जान अब और न तड़पाओ ! अपनी रानी को चोद दो ! मेरी प्यास बुझा दो..
मैं तो तैयार था।उसने मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत के मुहाने पर रखा और कहा- धक्का मारो !
मैंने भी बहुत जोर से पेल दिया पर चूत बहुत टाइट थी, लंड घुसा ही नहीं तो उसने लंड पकड़ कर ढेर सारा थूक मेरे सुपाड़े पर पोत दिया…..
अबकी बार मैंने धीरे धकेला तो आधा लंड अंदर चला गया….
वो दर्द से पागल हो गई, बोली- निकालो ! बाहर करो ! मैं नहीं सह पाऊँगी !
पर अब मैं कहाँ मानने वाला था, मैंने कविता की कमर से पकड़ कर पूरे जोर से एक धक्का मारा और लंड उसकी चूत की गहराइयों को छू गया……वो दर्द से रोने लगी पर मैं धीरे धक्के लगाने लगा। थोड़ी देर में कविता को भी मजा आने लगा, उसके मुँह से आवाज निकलने लगी थी- चोदो….और जोर से…..आह…आह….मेरे राजा…..मुझे जन्नत की सैर कराओ….और अंदर डालो …आह ….सी…सी ….आह….
मैं पूरे जोर से पेले जा रहा था- हाँ रानी… ले… खा ले … पूरा मेरा खा जा … ले … ले … पूरा ले …
आह …राजा….मैं गई….सी….थाम लो….मुझे…..आह….
मैं समझ गया कि वो झड़ने वाली है तो मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी….. थोड़े धक्कों के बाद हम दोनों साथ ही झड़ गये..
कुछ देर बात कविता, पिंकी, रेशमा ने साथ-साथ मुझसे चुदवाया। जब मैं रेशमा के स्तन दबाता और चूसता तब पिंकी मेरा लंड चूसती। जब मैं कविता के स्तन दबाता और उसकी चूचियाँ चूसता, तब रेशमा मेरा लंड मुँह में लेकर उसे चूसती। जब मैं पिंकी के स्तन दबाता और चूचियाँ चूसता तो कविता मेरा लंड मुँह में लेकर उसे चूसती। कुछ देर बाद मेरा लंड पिंकी की चूत में जाकर उसे चोदता तब रेशमा अपने स्तन और चूचियाँ मुझसे दबवाती और चुसवाती। जब मैं रेशमा की चूत में मेरा लंड डालकर उसे चोदता तब कविता अपने स्तन मुझे दबाने को देती।
इस तरह यह चोदा-चोदी हमने दो घंटे की।
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