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कामवासना

मैं उन दिनों अपने चाचा के कामवासना यहाँ आई हुई थी। मैं एम ए की छात्रा थी। चाचा बिजनेस के सिलसिले में कुछ दिनों के लिये दिल्ली गये हुए थे।

चाची घर पर ट्यूशन पढ़ाती थी। चाची का नाम सपना था। उनकी उम्र 35 वर्ष की थी। उसके पास कोलेज दो के छात्र पढ़ने आते थे।
राजू और सोनू नाम था उनका। दोनों ही 20- 21 वर्ष के थे। मुझे पहले दिन से ही वो हाय हेल्लो करने लगे थे। उन दोनों से मेरी जल्दी ही दोस्ती हो गयी थी।
ऊपर का कमरा खाली था सो सपना उन्हे वहीं पढ़ाया करती थी।

एक बार जब सपना ट्यूशन पढ़ा रही थी तब मैं किसी काम से ऊपर कमरे में गयी। जैसे ही मैं कमरे के पास पहुचीं तो मुझे सिसकारी की आवाज सुनायी पडी। मैं सावधान हो गयी।

तभी मुझे फिर से हाऽऽय की आवाज सुनायी पडी। मैंने धीरे से खिडकी से झांक कर देखा। वो लडके सपना की चूचियाँ दबा रहे थे। सपना ने पेन्ट के ऊपर से ही एक का लण्ड पकड रखा था। सपना बार बार आनन्द से सिसकारियाँ भर रही थी। मैं दबे पांव पीछे हट गयी और नीचे उतर आई।

मेरे सारे शरीर में सनसनी फ़ैल गयी थी। मैं अपने कमरे में आकर बिस्तर पर लेट गयी। मेरी सांसे तेज चल रही थी। मेरे मन में उत्तेजना भरने लगी थी।

मुझसे रहा नहीं गया… मैं फिर से दबे पांव ऊपर गई… मैंने फिर से झांक कर देखा… मुझे पसीना छूटने लग गया। कमरे में सभी नंगे थे… राजू ने अपना लण्ड सपना की चूत में डाल रखा था… और तबियत से चोद रहा था… सोनू ने अपना लण्ड सपना के मुँह में दे रखा था…

मैं फिर नीचे आ गयी… मेरी चूत भी गीली हो चुकी थी… मैं अपनी चूत दबा कर बैठ गयी। मैं भी जवान थी… मेरे पास भी जवानी का पूरा खजाना था। मेरे मन में भी चुदवाने तेज इच्छा उठने लगी। मेरी चूंचियाँकड़ी होने लगी… जवानी का जोश हिलोरें मारने लगा।

मैं मन मार कर कमरे से बाहर निकल आई… पास की दुकान से अपना मोबाईल रीचार्ज करवाने लगी। जब मैं वापस आई तो उनका कार्यक्रम समाप्त हो चुका था। राजू और सोनू जाने की तैयारी में थे।

मुझे देख कर कर वो दोनों ही मुसकराये, मैंने भी उन्हे तिरछी निगाहों से मुसकरा कर देखा। वो दोनों चले गये और मैं सपना की किस्मत पर जल उठी… जो कि दो जवान लण्डों की मालकिन थी। मेरे मन में हलचल हो रही थी… मन अशान्त था… मुझसे सपना की चुदाई बरदाश्त नहीं हो पा रही थी।

रात के करीब 10 बज रहे थे… मैंने कमरे की लाईट बन्द कर दी और सोने के लिये लेट गयी। पर नींद कहाँ थी। रह रह कर सपना की चुदाई की याद आ रही थी। मैंने अपनी पेन्टी उतारी, रात को मैं ब्रा नहीं पहनती थी। मैंने सोचा कि चूत में ऊँगली करके झड़ जाती हूं…

पर मुझे उसी समय बाहर कुछ आवाज आई… मैंने दरवाजे से झांक कर देखा तो राजू और सोनू सपना के कमरे की तरफ़ जा रहे थे।

मैंने अपने कमरे के दरवाजे के छेद में आंखे गडा दी, यह दरवाजा चाचा के कमरे में खुलता था, और सुनने का प्रयास करने लगी।
मुझे ये सुन कर हैरानी हुई कि सपना उन दोनों के साथ मेरी चुदाई का प्रोग्राम बना रही थी… पर कैसे…?

वे तीनों मेरे कमरे की ओर आने लगे। मैं भाग कर अपने बिस्तर पर आकर लेट गयी। मुझे लगा कि वो तीनों मेरे कमरे के बाहर आ गये है…

तभी मेरे कमरे का दरवाजा खुला… मैंने देखा सपना पहले अन्दर आयी… फिर दोनों उनके पीछे पीछे आये… मैंने सोने का बहाना किया। सोनू ने दरवाजा अन्दर से बन्द कर दिया।

पर तीनों मेरे साथ क्या करेंगे… क्या देह शोषण… यानि मेरी चुदाई… मेरा मन खुशी के मारे उछलने लगा… बिना कुछ किये मन की मुराद पूरी हो जाये तो… फिर ऊपर वाले का धन्यवाद करो…

मेरा सोचना बिल्कुल सही निकला। राजू ने लाईट जला दी… मुझे देख कर उन दोनों के मुंह में पानी आ गया। मैंने पेन्टी और ब्रा वैसे भी नहीं पहन रखी थी। स्कर्ट भी जांघों से उपर आ चुका था। अन्दर से मेरी चूत झांक रही थी।

राजू ने बिस्तर पर पास बैठ कर मेरी छोटी सी कमीज़ को ऊपर कर दिया। मेरे नंगी चूचियाँ उसके सामने तनी हुयी खडी थी।

मेरे शरीर में रोमांच भर आया… मुझे लग रहा था कि मेरी चूंचियाँ पकड कर मसल दे… लेकिन उसने बडे प्यार से मेरे स्तन सहलाये… मेरी नोकों को हौले हौले से पकड कर मसलते हुये घुमाया।

इतने में सोनू ने मेरे स्कर्ट को ऊँचा करके मेरी चूत नंगी कर दी। अचानक मुझे मेरी चूत पर गीलापन लगा… सोनू की जीभ से थूक मेरी चूत पर टपका कर उसे चाट लिया था… मैं तड़प उठी… पर मुझे ज्यादा इन्तजार नहीं करना पडा।

सपना ने मेरे दोनों हाथ ऊपर कस कर पकड़ लिये। सोनू ने मेरी टांगे चीर कर फ़ैला दी। और मेरी टांगों के बीच में आ गया। अब मुझे लग गया कि मैं चुदने वाली हूं… तो मैंने नाटक शुरु कर दिया… मैंने जाग जाने का नाटक किया…

‘अरे ये क्या… छोडो मुझे… चाची…’

‘चुप हो जा… कुतिया… मजे ले अब…’

‘चाची… नहीं प्लीज़…’

इतने में सोनू का लण्ड मेरी चूत में घुस गया। मन में मस्ती छा गयी। चूत को लण्ड मिल गया था… तेज गुदगुदी सी उठी।

‘सोनू… ये क्या कर दिया तूने… मुझे छोड दे… मत कर ना… मादरचोद… ‘

‘रीता रानी… ऐसी मस्त जवान लड़की को तो चुदना ही पड़ता है… देख क्य टाइट चूत है… अब हम तेरी बहन चोद देंगे।’ सोनू मस्त हो कर बोला।

राजू मेरे चूंचकों को चूस रहा था… सपना ने खुद के कपड़े उतार फ़ेंके… वो पूरी नंगी हो गयी। हम सभी को पता था कि कार्यक्रम सफ़ल हो चुका है। सपना ने राजू की पेन्ट और कमीज़ उतार कर उसे नन्गा कर दिया। सोनू पहले ही नंगा हो चुका था। चाची मुझे समझा रही थी

‘देख रीता… लण्ड तो तेरी चूत में फ़िट हो ही गया है… अब मजा ले ले… ना’

‘चाची… प्लीज़… मत करो ना… देखो मैं मर जाऊगीं… ‘ मैंने फिर नाटक किया। चाची ने मेरे होंठ चूमते हुये कहा

‘अच्छा… दो मिनट के बाद छोड देंगे… मजा नहीं आये… तो नहीं सही… बस’

चाची समझ चुकी थी… कि मैं यूं ही ऊपर से कह रही हूं और वास्तव में मुझे मजा आ रहा है।

‘सोनू… मत करो… इसे अच्छा नहीं लग रहा है… चलो मेरी मां चोद दो… ‘

अरे ये क्या हो गया… मैंने तुरन्त पासा पलटा…
‘चाची… तुम बडी खराब हो… एकदम हरामी… मां की लौड़ी’

मैंने नीचे से सोनू को नीचे से चूतड़ उछाल कर एक तेज धक्का दिया… और राजू का लण्ड पकड कर अपने मुख में डाल दिया। मेरी फ़ुर्ती देख कर दोनों को मस्ती आ गयी। दोनों सिसकारियाँ भरने लगे। चाची ने राजू और सोनू को रोक दिया।

‘अब देखो कोई जबरदस्ती नहीं करना है… ये मादरचोद तो… रीता राज़ी है… ‘

सभी बिस्तर पर बैठ गये… मेरे बचे हुये शरीर के कपडे भी उतार दिये। फिर सपना सभी को बताने लगी कि उन्हे क्या करना है… मैंने अपनी बात रख दी,’पहले सोनू को मेरे पर चढने दो… उसका लण्ड मेरी चूत में रहने दो… फिर बात करो… ‘

‘चलो सोनू तुम रीता को चोद डालो… राजू तुम मुझे चोदो… फिर बदल लेंगे… ‘

सोनू मुझसे लिपट गया… मुझे बुरी तरह से चूमने चाटने लगा… उस ने मुझे तुरन्त मुझे घोड़ी बनाया… और अपना कड़क लण्ड मेरी गान्ड पर मारने लगा।
तो सोनू अब मेरी गान्ड चोदेगा।

मेरी गान्ड में उसने ढेर सारा थूक लगाया और लण्ड को छेद पर रख कर अन्दर दबा कर घुसा दिया… उसका लाल सुपाडा फ़क से अन्दर घुस गया। मैं आनन्द से निहाल हो उठी…

दूसरे धक्के में आधा लण्ड अन्दर था… तीसरा धक्का लण्ड को पूरा जड़ तक ले गया… गान्ड मैंने कई बार चुदाई थी… इसलिये मुझे इसमें बहुत मजा आता है… उसका गान्ड में फ़ंसा हुआ मोटा सा लण्ड मुझे बहुत ही आनन्द दे रहा था।

सोनू अब धीरे धीरे धक्के तेज़ करने लगा… उधर राजू और सपना मेरे साथ ही आ गये… शायद राजू को मैं अधिक पसन्द आ रही थी… राजू ने मेरी चूंचियाँ पकड कर मचकानी चालू कर दी… सपना ने भी अपनी कला दिखाने लगी… उसने अपनी दो ऊँगलियों को मेरी चूत में घुसा दी।

मेरे मुख से आनन्द की हंसी और सिस्कारियाँनिकलने लगी। सोनू की धक्के मारने की गति तेज हो गयी थी… उसके मुख से आनन्द की सीत्कारें तेज हो उठी थी। मेरे चूतड अपने आप उछले जा रहे थे। मुझे ऐसे गान्ड मरवाने में बडा मजा आता था।

सोनू के धक्के बढने लगे… उसका शरीर अकडने लगा।

अचानक सपना ने मेरी चूत से दोनों ऊँगलियाँ निकाल दी और सोनू के दोनों चूतडों को कस कस के दबाने लगी। तभी सोनू के लण्ड ने मेरी गान्ड के अन्दर ही अपना वीर्य तेजी से छोड दिया।

सपना उसके चूतडों को दबाती ही रही जब तक कि उसका पूरा वीर्य नहीं छूट गया। तब राजू ने उसकी जगह ले ली। राजू बिस्तर पर लेट गया उसका खडा लण्ड मेरी चूत को आमन्त्रण दे रहा था… मैं राजू पर चढ गयी और उसके लण्ड को सीधे चूत पर टिका दिया… और फिर हौले से लण्ड पर दबा दिया…

‘आऽऽऽह… चुद गयी रे… चाची…’

‘चुद जा… रीता… तेरी किस्मत अच्छी है कि पहली बार में ही तुझे दो दो लण्ड बिना कुछ किये ही मिल गये… चुद जा छिनाल अब… ‘

‘चाची… आई लव यू… आप दिल की बात जानती हैं… आप बडी हरामी हैं… ‘ मेरी बात सुन कर सपना मुस्करा उठी…

‘अब चुदने में मन लगा… रन्डी… मजा आयेगा…’

‘हाय चाची… चुद तो रही हू ना… देखो ना कैसे मोटे तगडे जवान लण्ड हैं… मेरी तो मां चोद देंगे ये… ‘

अब सोनू ने सपना के उरोज पकड लिये… और लण्ड सपना की गान्ड में घुसाने लगा… वह फिर से तैयार हो चुका था। सपना हंस कर बोली-‘देखा सोनू को… गान्ड मारने में माहिर है… इसे सिर्फ़ गान्ड मारना ही अच्छा लगता है… ‘

मैं अब राजू पर लेट गयी थी… राजू नीचे से चुदाई का मजा ले रहा था। मैं उपर से उसे जबर्दस्त झटकों से चोद रही थी। मेरी गान्ड से सोनू का वीर्य निकल कर उसके लण्ड को तर कर रहा था।

‘मेरे राजा… हाय… क्या लण्ड है… मेरी चूत फ़ाड दे… राजा… ‘ कहते हुये उसके खुले हुये मुख में मैंने अपना मुख चिपका दिया… मेरे थूक से उसका चेहरा गीला हो गया था… पर मैं उसे चाटे जा रही थी। मुझे कुछ भी होश नहीं था। मेरा पूरा जोर उसके लण्ड पर था।

फ़च फ़च की मधुर आवाजे माहोल को और सेक्सी बना रही थी। चूत के धक्कों से फ़च फ़च कि आवाज के साथ वीर्य के छीटें भी उछल रहे थे। उधर सोनू सपना की गान्ड चोदने में लगा था।

अचानक राजू ने अन्गडाई ली… उसका लण्ड कडकने लगा… बेहद टाइट हो गया… उसका चेहरा लाल हो गया… दान्त भिंच गये…

‘मैं गया… रानी… निकला… हाऽऽऽऽय्… गया…’

मैंने धक्कों की रफ़्तार बढा दी… अपनी चूत टाइट कर ली… और मेरा भी निकलने को तैयार हो गया। मैंने चूत टाइट कर के दो धक्के खींच के मारे… तो उसकी और मेरी उत्तेजना चरम सीमा को पार कर गयी-‘राजा… मैं तो पूरी चुद गयी… गयी मैं तो… निकला मेरा… हाऽऽऽऽय…’

उधर राजू को झटके लगने चालू हो गये थे… उसका वीर्य झटके मार मार कर पिचकारी छोड रहा था। मैं भी झडने लगी थी… हम दोनों ने एक दूसरे को कस कर पकड लिया। हमारा माल निकलता रहा… अब हम पूरे झड चुके थे। हम ऐसे ही पडे सुस्ताते रहे… फिर में बिस्तर पर से उतर गयी।

सोनू भी झडने वाला था। उसका लण्ड सपना की चूत चोद रहा था। मैं और राजू ने तुरन्त उनकी मदद की… सपना के चूचकों को मैंने खींचना और मरोडना चालु कर दिया। राजू ने सोनू के चूतडों को जोर जोर से दबाने लगा… सपना अचानक धीरे से चीख उठी… ‘रीतू… छोड मेरी चूंची को… मैं गयी… हाय… बस कर सोनू… ‘

पर सोनू तो चरम सीमा पर पहुन्च गया था… चूतडों के दबाते ही उसका लण्ड बरस पडा… सारा वीर्य सपना की चूत में भरने लगा। मैंने सोनू के चूतडों को थपथपाया… और प्यार कर लिया…
राजू, मैं, सपना वहीं बिस्तर पर लेट गये… और बातें करने लगे। मैं बोली-‘चाची… आज तो कस कर चुद गयी… थेन्क यू… चाची॥’

‘मैंने तुझे देख लिया था… फिर जब दूसरी बार आयी तो मैं समझ गयी… कि तू चुदना चाहती है… ‘

‘चाऽऽऽची… जब मालूम था तो वहीं पकड कर क्यों नहीं चोद दिया… ‘

‘नहीं रीतू रानी… बिना तडप के… चुदाई की कोई कीमत नहीं होती है…’

‘नहीं चाची… आप मुझे पकड के चुदवा देती… तो भी मुझे चुदना तो था ही ना॥’

‘और अब चुदने में ज्यादा मजा आया ना…’
‘आय… हाय चाची… मन शान्त हो गया… चूत की खुजली मिट गयी…’

सोनू और राजू बिस्तर के एक कोने में नन्गे पडे ही खर्राटे भर रहे थे… हम दोनों भी न जाने कब बातें करते करते सो गये थे… कामवासना

Hindi Sex Stories

आर्यन और सायरा एक दूसरे को Hindi Sex Stories चूमे जा रहे थे कि रूही कमरे में दाखिल हुई। “ये, यहाँ पर सब क्या हो रहा है?” रूही थोड़ा गुस्से में बोली।

“म… मैडम… मै… म…” सलमा घबराने का नाटक करते हुए बोली।
“हाय अल्लाह!!! ये तो मैडम हैं… आर्यन बाबा! उठो मुझ पर से”, सायरा चिल्लाती हुई उसे अपने ऊपर से हटाने लगी।

“नहीं! मैं तुम्हें एक बार और चोदना चाहता हूँ!” आर्यन उसे जोर से अपनी बाँहों में भरते हुए बोला।
“पहले मुझ पर से उतरो… फिर बताती हूँ!” कहकर सायरा उसे उठाने में अपना पूरा जोर लगने लगी।

“क्या कोई मुझे बतायेगा कि ये सब क्या हो रहा है?” रूही फिर से बोली। सलमा की समझ में नहीं आ रहा था कि रूही के दिमाग में क्या है, इसलिये वो चुप रही।

सायरा उठ कर पलंग पर बैठ गयी और रोने लगी।

“सायरा! मैंने तुम्हें यहाँ कपड़े धोने के लिये रखा है ना कि मेरे बेटे के साथ चुदाई करने के लिये!” रूही थोड़ा गुस्सा करते हुए बोली।

सुबकते और रोते हुए सायरा धीरे से इतना ही कह पायी, “म… म… मुझे पता नहीं क्या हो गया था मैडम।”

“प्लीज़ मम्मी! मैं इसे एक बार और चोदना चाहता हूँ।” आर्यन बीच में बोला।

“अपना मुँह बंद रखो और चुपचाप बैठे रहो”, रूही ने उसे डाँटते हुए कहा।

आर्यन अपना मुँह खोल कर कुछ कहने जा रहा था कि सलमा ने खींच कर अपने पास किया और कान में फुसफुसायी, “आर्यन बाबा! प्लीज़ आप चुप रहिये।”

“तुम्हारे अम्मी-अब्बा क्या कहेंगे जब मैं उन्हें बताऊँगी कि कैसे तुमने मेरे बेटे की वासना को भड़का कर उससे चुदवाया है”, रूही उसे डराते हुए बोली। सायरा और जोर-जोर से रोने और सुबकने लगी।

तभी सलमा बीच में बोली, “सायरा! मैडम के पैरों पे पड़ कर अपनी गलतियों की माफी माँग लो, ये तुम्हें माफ़ कर देंगी।”

“मैडम! आप मुझे जो चाहे सज़ा दे दीजिये पर मेरे घर वालों को कुछ मत बताइयेगा”, सायरा रूही के पैरों को पकड़ते हुए बोली, “इसके लिये आप जो कहेंगी मैं करने को तैयार हूँ।”

“पहले उठकर खड़ी हो जाओ!” रूही ने धीमे से कहा, “और मुझे ये बताओ कि तुमने ऐसा किया क्यों?” इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“मैडम, मुझे सही पता नहीं कि मैंने ऐसा क्यों किया, सलमा तुम क्यों नहीं मैडम को बताती हो। आबिदा तुम तो बताओ… ओहह मैं अपने आपको संभाल नहीं पायी। पता नहीं क्यों मेरी चूत में जोरों की खुजली हो रही थी”, सायरा अपनी चूत को रगड़ते हुए बोली।

“सलमा! इसे मेरे कमरे में लेकर आओ”, रूही ने हुक्म दिया, “फिर देखते हैं कि इसकी खुजलाती हुई चूत के साथ क्या कर सकते हैं।”

“चलो अपने कपड़े पहन लो”, सलमा ने सायरा से कहा।

“नहीं! इसे इसी हालत में लेकर आओ। और तुम दोनों भी जिस तरह हो… उसी तरह इसके साथ आओ,” रूही ने कहा। रूही अपने कमरे में दाखिल हुई और उसके पीछे तीनों लड़कियाँ और आर्यन।

“सायरा अब इन तगड़े और शानदार लंडों को देखो। इनमें से किस लंड से पहले तुम अपनी कसी चूत चुदवाना चाहोगी जिससे तुम्हारी चूत की खुजली मिट सके?” रूही ने पूछा।

“प…प… पर मैडम???” सायरा इतने सारे लंडों को निहारते हुए हकलायी।

“मैं कुछ भी नहीं सुनुँगी, तुमने वादा किया है कि जो मैं कहुँगी… तुम करोगी। अब लंड अपनी चूत में लेने को तैयार हो जाओ… विजय तुम पहले इसे चोदोगे”, रूही ने जैसे हुक्म दिया।

फिर जिस तरह हम सब ने टीना के जन्मदिन पर किया था वैसा ही किया। सब मिलकर सामुहिक चुदाई कर रहे थे। कोई चूत में लंड डाले हुए था तो कोई किसी की गाँड में। कोई चूत चाट रहा था तो कोई लंड चूस रही थी। इसी तरह शाम हो गयी।

“अब बताओ तुम्हारा दिन कैसा गया?” रूही ने सायरा से पूछा।

“मैडम! पहले तो मैं बहुत डरी हुई थी पर बाद में बहुत मज़ा आया”, सायरा ने मुसकराते हुए जवाब दिया।

“आज तुमने मुझे खुश कर दिया। ये लो तुम्हारा इनाम”, इतना कहकर रूही ने उसे एक हीरे का पेंडेंट दे दिया और साथ में पाँच हज़ार रुपये।

“मैडम ये क्या मेरा कुँवारापन खोने की कीमत है? मैं कोई वेश्या नहीं हूँ!” सायरा उदास होते हुए बोली।

“तुम वेश्या नहीं हो… मैं जानती हूँ”, रूही ने नम्रता से कहा, “ये पेंडेंट मैं तुम्हें इसलिये दे रही हूँ कि आज मेरे बेटे ने पहली कुँवारी चूत की चुदाई की है। तुमने उसे लड़के से मर्द बना दिया… और ये रुपये इसलिये हैं ताकि तुम कुछ अच्छे कपड़े, सैंडल और मेक-अप वगैरह का सामान खरीद सको… आबिदा और सलमा इसमें तुम्हारी मदद कर देंगी… अब से इस घर में आओ तो तुम भी इन दोनों की तरह ही टिप-टॉप बन कर आओ।”

“शुक्रिया मैडम! पर ये पेंडेंट तो बहुत कीमती लगता है”, सायरा पेंडेंट को ऊपर से नीचे देखते हुए बोली, “अगर मेरे घर वाले इसे देखेंगे तो समझेंगे कि मैं इसे चुरा के लायी हूँ।”

“तुम इसकी चिंता मत करो! ऐसा नहीं होगा”, रूही हँसते हुए बोली, “आबिदा तुम्हें घर तक छोड़ आयेगी और तुम्हारे घर वालों को बता देगी कि ये रुपये और पेंडेंट मैंने तुम्हें दिया है।”

“चलो सायरा! अब घर चलते हैं”, आबिदा दरवाजे की ओर बढ़ते हुए बोली।

जैसे ही सायरा जाने के लिये मुड़ी, आर्यन ने पूछा, “सायरा! अब हम फिर चुदाई कब करेंगे?”

“शुक्रवार को!” उसने शरमाते हुए कहा और आबिदा के पीछे भाग गयी!

जब आबिदा वापस लौटी तो रूही ने उससे पूछा, “उसके अम्मी-अब्बा से तुमने क्या कहा?”

“यही कि ये आपने उसे आर्यन बाबा के जन्मदिन पर इनाम दिया है”, आबिदा ने जवाब दिया।

“क्या उन्होंने तुम्हारी बात पर विश्वास कर लिया?” रूही ने पूछा।

“हाँ कर लिया… और मुझसे ये भी पूछा कि क्या मुझे भी कोई तोहफ़ा मिला है”, आबिदा हँसी।

“तो तुमने क्या जवाब दिया?” रूही बोली।

“मैंने कहा कि मुझे तो मेरा तोहफ़ा दो दिन पहले ही मिल गया था, है ना आर्यन बाबा?” आबिदा आर्यन की ओर देखते हुए बोली।

दूसरे दिन आयेशा ने प्रीती से वही स्पेशल दवाई माँगी। “तुम्हें क्यों चाहिये?” प्रीती ने पूछा।

“मैं इसे पीकर इसका असर देखना चाहती हूँ”, आयेशा ने जवाब दिया।

“नहीं इसे मत देना! इसकी चूत पहले से ही इतनी भूखी है और अगर इसने ये दवाई पी ली तो ये तो हमारे लंड से चुदवा चुदवाकर हमें मार डालेगी!” सब लड़के चिल्लाये।

“आयेशा! मुझे लगता है कि ये लड़के सही कह रहे हैं। ये दवाई तो लड़की की चूत को गरमाने के लिये है। अल्लाह ने तो तुम्हारी चूत को पहले से ही इतना गरमा रखा है कि तुम्हें इस दवाई की जरूरत नहीं है”, प्रीती ने उसे समझाया।

“तुम लोगों में कोई नहीं चाहता कि मैं भी थोड़ा मज़ा लूँ!” आयेशा ने हँसते हुए शिकायत की।

हमारे अगले दो दिन खूब मौज मस्ती में गुजरे, बल्कि ये कहो कि चुदाई में गुजरे। जब हम सब रूही से विदाई ले रहे थे तो मैंने रूही को हमारे यहाँ आने की दावत दी। “शुक्रिया, मुझे जैसे ही टाईम मिलेगा मैं जरूर आऊँगी”, रूही ने जवाब दिया।

“रूही इस शनिवार को क्यों नहीं आ जाती हो? हम भी सोमवार को अपने घर वापस जाने वाले हैं। अगर आ जाओगी तो आखिरी बार हमारा मिलना हो जायेगा”, जय ने कहा।

“हाँ ये अच्छा रहेगा। फातिमा और आर्यन को भी अपने साथ ले आना”, मैंने कहा।

रूही कुछ देर तक सोचती रही। “ठीक है! रवि भी दो दिन बाद चला जायेगा फिर मैं फ़्री हूँ”, रूही बोली, “ठीक है हम शनिवार कि शाम तक पहुँच जायेंगे।”

जब हमारा सामान गाड़ी की डिक्की में रखा जा रहा था तो मैंने देखा कि आयेशा हम सब के बीच नहीं थी। “ज़ुबैदा! तुम्हें पता है कि आयेशा कहाँ है?” मैंने पूछा।

“वो मुझसे बोली थी कि वो रवि और आर्यन को गुड-बॉय बोल कर आ रही है”, ज़ुबैदा ने जवाब दिया।

“गुड-बॉय करके तो मुझे आधा घंटा हो गया”, रवि ने कहा। इतने मैं आयेशा और आर्यन हँसते हुए आ गये। “हरामी साले, लगता है कि तेरा चुदाई से जी नहीं भरा अभी तक?” रूही ने आर्यन को धीरे से एक थप्पड़ लगाते हुए कहा। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“ओह मम्मी! मैं आयेशा को कुछ दे रहा था जिससे वो मुझे याद रखे”, आर्यन ने शर्माते हुए कहा।

“कहीं देने के चक्कर में इसे प्रेगनेंट तो नहीं कर दिया… जिससे ये तुम्हें ज़िंदगी भर याद रखे?” रूही हँसते हुए बोली।

“आर्यन डरो मत! मैं प्रेगनेंट नहीं होऊँगी पर हाँ मैं तुम्हें हर वक्त हर पल याद रखुँगी”, आयेशा ने उसे कहा।

जब हम घर पहुँचे तो मैंने जय से पूछा, “अच्छा बताओ जब रूही यहाँ आयेगी तो तुम किस तरह की पार्टी करना चाहोगे।”

जय कुछ कहता उससे पहले विजय बोल उठा, “मुझे तो कुँवारी चूत चोदने में मज़ा आता है।”

“विजय तुम चुप बैठो। पिछली बार हम तुम्हारी बात मान चुके हैं। अब जय की बारी है।” मैंने जवाब दिया।

“और हमारा क्या, तुम हमसे नहीं जानना चाहोगे कि हमें क्या पसंद है?” राम और श्याम साथ-साथ बोले।

“नहीं! मैं जरूरी नहीं समझता!” मैंने थोड़ा गुस्से में कहा।
“दीदी! तुम ही जीजाजी को समझाओ ना।”

प्रीती हँसते हुए बोली, “तुम लोग सुनील का बुरा मत मानो। ये मज़ाक कर रहा है। आखिर जय और विजय इस घर के दामाद हैं, इसलिये उनका स्थान पहले है।”

“तो क्या हुआ? हम भी तो इनके साले हैं।” वो कहावत भूल गयी क्या, “सारी खुदाई एक तरफ जोरू का भाई एक तरफ?” राम ने कहा।

“हाँ तुम दोनों ठीक कह रहे हो। मैं तो मज़ाक कर रहा था। ऐसा है पहले जय की पसंद देख लेते हैं, फिर तुम दोनों की”, मैंने कहा।

“मेरा तो सपना है कि एक माँ की चुदाई उसकी बेटी के साथ करूँ!” जय ने कहा।

“अच्छा सपना है… मैं भी यही ख्वाहिश रखता हूँ”, राम ने कहा।

“और मैं तो विजय की तरह किसी कुँवारी चूत को चोदना चाहुँगा।”

थोड़ी देर सोचने के बाद मैं बोला, “ठीक है! मैं सब इंतज़ाम कर लूँगा। मैं एक जोड़ी माँ बेटी की भी ले आऊँगा जिसे तुम लोगों ने नहीं चोदा होगा।”

आगले दो दिन मैं अपने बचे हुए काम पूरा करने में लगा हुआ था। तीसरे दिन आयेशा ने मुझसे कहा, “सर मैंने सुना ही कि शनिवार की रात को आपके यहाँ एक पार्टी है?”

“हाँ है!” मैंने जवाब दिया, “किसने बताया तुम्हें।” इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“विजय ने!” आयेशा ने कहा, “क्या मुझे नहीं बुलायेंगे?”

“नहीं मैं तुम्हें नहीं बुला सकता क्योंकि ये सिर्फ़ माँ-बेटी की पार्टी है”, मैंने जवाब दिया।

मेरी बात सुनकर वो उदास हो गयी। मैंने उसे अपने पास खींचा और कहा, “आयेशा समझने की कोशिश करो… वैसे भी तुम्हारी चुदाई तो होती रहती है।”

“कहाँ होती है… देखिये ना”, कहकर उसने मेरा हाथ अपनी चूत पे रख दिया। मैंने देखा कि उसकी चूत पूरी तरह से गीली हो चुकी थी।

“आयेशा, मेरी जान! पार्टी के अलावा जो तुम कहो मैं करने को तैयार हूँ”, मैंने उसे बाँहों में भरते हुए कहा।

“आप सच कह रहे हैं? मुकर तो नहीं जायेंगे?” उसने मेरे होंठों को अपने होंठों के बीच लेते हुए कहा।

“ना नहीं कहुँगा, तुम कह कर तो देखो।”

“तो आज पूरा दिन मुझे इस सोफ़े पर चोदते रहिये!” आयेशा ने कहा।

“मेरा बहुत काम पेंडिंग पड़ा है… इसलिये पूरा दिन तो नहीं, हाँ! दो बार तुम्हारी चुदाई करूँगा और फिर तुम छुट्टी लेकर विजय और दूसरों से चुदवाने जा सकती हो”, मैंने कहा।

“ठीक है, जब आपकी यही मरज़ी है तो…” उसने थोड़ा निराश होते हुए कहा।

जब मैं दूसरी बार उसकी चूत में अपना लंड डाल रहा था उसी वक्त फोन कि घंटी बजी। मैं फोन उठाना चाहता था पर आयेशा ने मुझे रोक दिया।

“डार्लिंग! जरूरी फोन भी हो सकता है”, मैंने कहा।

“इस समय मेरी चूत से जरूरी कोई काम नहीं है! बस मुझे इसी तरह चोदते जाइये”, आयेशा ने अपने कुल्हे उछालते हुए कहा, “हाँ सर! इसी तरह जोर से अपना लंड घुसाते रहिये।” फोन दो चार बार बज कर बंद हो गया।

ऑफिस के दरवाजे पर हल्की सी दस्तक हुई और नसरीन ऑफिस में आ गयी। “सर! आपको डिस्टर्ब करने के लिये माफी चाहती हूँ पर एम-डी आपको अर्जेंटली बुला रहे हैं।”

“कह दो कि ये नहीं आ सकते”, आयेशा ने झल्लाते हुए कहा, “तुम देख नहीं सकती कि ये बीज़ी हैं।”

“नहीं नसरीन! तुम ये मत कहना। कहना कि जैसे ही मुझे काम से फ़ुर्सत मिलेगी मैं आ जाऊँगा”, मैंने कहा। फिर मैंने आयेशा से कहा, “क्या तुम चाहती हो कि मैं अपनी नौकरी से हाथ धो बैठूँ?” बदले में वो शरारत से मुस्कुरा पड़ी।

थोड़ी देर में एम-डी मेरे केबिन में आया। “मुझे पहले ही समझ जाना चाहिये था कि तुम चुदाई में व्यस्त हो, इसलिये समय नहीं मिल रहा”, एम-डी हँसा, “सुनील! मुझे मिस्टर खोसला के साथ हुई तुम्हारी मीटिंग की डिटेल्स चाहिये।”

“क्या आपने वो रिपोर्ट देखी नहीं?” मैं चौंक पड़ा था। फिर आयेशा की ओर देखते हुए मैंने पूछा, “मैंने तुम्हें मिस्टर खोसला की रिपोर्ट डिकटेट करायी थी, वो कहाँ है?”

“अगर आपने डिकटेट करायी होती तो मैं उसे टाईप ना कर देती। मैं अपने काम में पूरी तरह पाबंद हूँ”, आयेशा अपनी बात पे जोर देती हुई बोली।

करीब दस मिनट के बाद एम-डी ने कहा, “नसरीन इसकी डेस्क पूरी तरह देख चुकी है… वो वहाँ नहीं है।”

“आयेशा! ये तुमने क्या किया, जरा अपने दिमाग पे जोर दो”, मैंने फिर कहा।

“मैं कैसे सोचूँ… जब एक लंड मेरी चूत को इतनी जोर से चोदे जा रहा है”, आयेशा ने शिकायत की।

“आयेशा या तो अपने दिमाग पे जोर दो नहीं तो मैं तुम्हारी चूत को चोदना बंद कर दूँगा”, मैंने उसे धमकाते हुए कहा।

“नहीं सर! ऐसा मत करना, मुझे याद आ रहा है… मैंने वो रिपोर्ट मीना मैडम को दी थी”, आयेशा ने कहा।

“सर आपको तकलीफ हुई… उसके लिये माफी चाहता हूँ”, मैंने एम-डी से कहा।

“मिस्टर खोसला दो बजे ऑफिस आने वाले हैं, कांट्रैक्ट साइन करने कि लिये, मैं चाहता हूँ कि उस समय तुम भी वहाँ मौजूद रहो”, एम-डी ने कहा और केबिन के बाहर चले गये।

शनिवार कि सुबह ही रूही, फातिमा और आर्यन के साथ मेरे घर पहुँच गयी। एक दूसरे को नमस्ते करने के बाद आर्यन ने लड़कियों को अपनी बाँहों में ले लिया, “आओ मैं तुम्हें बताता हूँ कि तुम लोग पूरे हफ़्ते क्या मिस करती रही हो।” हँसते और खिलखिलाते हुए वो लड़कियाँ आर्यन को बेडरूम में घसीट के ले गयीं।

लड़के भी पीछे नहीं थे। “फ़ातिमा खाने से पहले क्या तुम एक स्पेशल कॉकटेल पीना पसंद करोगी जिसमें हमारे लंड का पानी मिला हो?” उन्होंने दूसरे बेडरूम की ओर इशारा करते हुए कहा। “हाँ फिर तो मज़ा आ जायेगा”, फातिमा चहकते हुए बोली।

“आर्यन को तो अब एक ही शौक रह गया है, चोदना, चोदना और सिर्फ़ चोदना। जबसे तुम लोग गये हो, आबिदा और सलमा, दोनों रात में उसके साथ सोती हैं। वो रात को तो उनको चोदता ही है पर दिन में जब भी मौका मिलता है अपना लंड उनकी चूत में पेल देता है”, रूही ने आर्यन की ओर देखते हुए कहा।

“मज़े करने दो उसे! क्या शुक्रवार को सायरा आयी थी?” प्रीती ने पूछा।

“हाँ आयी थी। आर्यन उसका इंतज़ार कर रहा था और जैसे ही वो आयी उसे अपने कमरे में ले गया। वो शाम को घर जाने के समय ही बाहर आयी”, रूही ने हँसते हुए जवाब दिया।

“फिर उसके काम का क्या हुआ?” प्रीती ने पूछा।

“मैं ये बर्दाश्त नहीं करती कि काम बाकी पड़ा रहे। उसका काम आबिदा और सलमा को करना पड़ा”, रूही ने जवाब दिया।

“क्या उन्हें बुरा नहीं लगा?” प्रीती ने पूछा।

“नहीं… वो दोनों आर्यन से बहुत मोहब्बत करती हैं। आबिदा से तो मुझे ये भी पता चला कि सायरा की तीन छोटी बहनें हैं। और जब वो बड़ी हो जायेंगी तो सायरा पहली बार आर्यन से ही उनकी चुदाई करवायेगी”, रूही ने जवाब दिया।

“क्यों ना खाने के पहले ड्रिंक्स और थोड़ी चुदाई कर ली जाये?” मैंने रूही से पूछा।

“मुझे तो लग रहा था कि तुम पूछोगे ही नहीं”, रूही हँसते हुए बोली।

जब हम रूही की चुदाई कर चुके थे तो रूही ने पूछा, “क्या तुम्हारे एम-डी आ रहे हैं?”

“हाँ! वो आ रहे हैं। मैंने उन्हें तुम्हारे बारे में बताया था। वो तुम्हें चोदने की फ़िराक में है”, मैंने जवाब दिया।

“अगर वो तुम्हें चोदे तो तुम्हें बुरा तो नहीं लगेगा?” प्रीती ने पूछा।

“नहीं! बुरा क्यों लगेगा? मैं तुम्हारे एम-डी को बरसों से जानती हूँ। वो कई सालों से मेरे पीछे पड़ा हुआ है। जब भी मैं अपने शौहर के साथ क्लब में उससे मिलती तो वो मुझे छेड़ने से बाज़ नहीं आता था। पर अब जब कि मैं बेवा हो चुकी हूँ तो मैं भी उससे चुदवाना चाहुँगी”, रूही ने जवाब दिया।

“उससे चुदवाकर तुम्हें पछतावा नहीं होगा। एम-डी जानता है कि औरतों को खुश कैसे किया जाता है”, प्रीती ने हँसते हुए कहा।

“उम्मीद है ऐसा ही होगा! उसे चुदाई की काफी प्रैक्टिस है”, रूही बोली।

पार्टी रात को सात बजे शुरू होने वाली थी। साढ़े छः बजे दरवाजे की घंटी बजी। “इस समय कौन हो सकता है?” प्रीती ने पूछा।

“आयेशा ही होगी!” मैंने जवाब दिया।

“मैंने तो सोचा था कि तुम उसे नहीं बुलाने वाले हो!” प्रीती ने कहा।

“पहले मैं उसे नहीं बुलाना चाहता था। पर जो खेल आज की रात के लिये मेरे दिमाग में है, उसके लिये एक लड़की कम पड़ रही थी… सो मैंने उसे बुला लिया”, मैंने प्रीती को समझाया।

“कैसा खेल?” रूही ने उत्सुक्त में पूछा।

“उसके लिये तुम्हें थोड़ा इंतज़ार करना होगा”, मैंने आयेशा को अंदर लेते हुए कहा।

हमेशा की तरह आयेशा बहुत ही सुंदर लग रही थी। उसने बहुत ही अच्छा मेक-अप किया हुआ था और आसमानी नीले रंग का बहुत ही सैक्सी सलवार-कमीज़ और उससे मैचिंग सफ़ेद रंग के हाई-हील के सैंडल पहन रखे थे। “आओ आयेशा! तुम्हारा स्वागत है”, प्रीती ने कहा। “मेरे करीब तो आओ जरा ताकि मैं तुम्हें अच्छी तरह निहार सकूँ।”

एक प्यारी मुस्कान के साथ आयेशा प्रीती के सामने एक मॉडल की तरह खड़ी हो गयी। “बहुत सुंदर लग रही हो… एक दम किसी अप्सरा की तरह”, प्रीती ने उसे गले लगाते हुए कहा, “लेकिन तुम्हारी आँखें सुर्ख क्यों हैं, क्या तुम रोती रही हो?”

उसकी आँखों में तुरंत ही आँसू आ गये और उसने गर्दन हिला दी, “हाँ!”

“क्या हुआ…? बताओ मुझे”, प्रीती ने पूछा।

“उन्हें सब मालूम पड़ गया है! ऑफिस में क्या होता है और आपके घर पर क्या-क्या होता है”, उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे।

“ओह गॉड! फिर तो तुम्हारे अब्बा ने जमकर डाँट लगायी होगी तुम्हें?” मैंने कहा।

“हाँ! उन्होंने जरूर मेरी ठुकाई की होती अगर अम्मी ने उन्हें रोक ना दिया होता”, आयेशा ने नज़रें झुकाते हुए कहा।

“तुम्हारी अम्मी ने उन्हें रोका???” मैं आगे कहना चाहता था कि आयेशा हँस पड़ी, “सर! ये मगरमछी आँसू थे। पर ये सच है कि उन्हें सब पता चल गया है।”

“आयेशा थोड़ा सीरियस होकर सब सच-सच बताओ”, मैं थोड़ा जोर से बोला।

“सर! जब मैंने अब्बा से आज की रात को आने के लिये उनकी इजाज़त चाही तो वो मुझ पर बरस पड़े। कहने लगे कि वो सब जानते हैं कि वहाँ ऑफिस में और आपके घर पर क्या होता है।”

“वो इतना गुस्से में थे कि फिर अम्मी को बीच में आना पड़ा और उन्होंने सब उन्हें शुरू से बता दिया।”

“पर तुम्हारी अम्मी को कैसे पता चला?” प्रीती ने पूछा।

“जब एक महीने मुझे महावारी नहीं हुई थी तो उन्हें शक हो गया था। तब मैंने अम्मी से कहा था कि वो सच कह रही हैं, और मैंने उन्हें बताया कि कैसे प्रीती जी ने मेरा खयाल रखा था। तब अम्मी ने मुझसे कहा कि जो हो चुका है वो वापस नहीं आ सकता… बस मैं एक बात का खयाल रखूँ कि घर की बदनामी ना हो।”

“बस फ़िर क्या था… मैं तुरंत तैयार हुई और यहाँ चली आयी। सॉरी मैं थोड़ा जल्दी ही आ गयी।” आयेशा ने अपनी कहानी पूरी करते हुए कहा।

हम लोग बातों को और आगे बढ़ाते कि दरवाजे की घंटी बजी। “रुको मैं देखता हूँ”, कहकर मैं दरवाजे की ओर बढ़ा।

जैसे ही मैंने दरवाजा खोला मैंने रूही को प्रीती से कहते सुना, “मैं अभी दो मिनट में आती हूँ।”

मैं एम-डी और उनके परिवार को अंदर लेकर आ गया। साथ ही अनिता और मीना भी आ गये। इस तरह सभी मेहमान आ चुके थे। आपस में परिचय और स्वागत के बाद एम-डी ने मुझसे पूछा, “सुनील! रूही कहाँ है?”

“हाय सुनीलू! मैं तुम्हारे पीछे खड़ी हूँ”, रूही ने कहा। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“हाय रूही मेरी जान!” एम-डी ने उसे गले लगाते हुए कह।, “तुम पहले से भी कहीं ज्यादा खूबसूरत और जवान लग रही हो।”

“तुम पहले से जरूर थोड़े उम्र में बड़े लग रहे हो पर आज भी कोई भी औरत तुम्हारी ख्वाहिश कर सकती है”, रूही ने जवाब दिया।

“दोस्तों! इससे पहले कि हम बातचीत का दौर आगे बढ़ायें, क्यों ना हम सब अपने कपड़े उतार कर एक दूसरे से घुल मिल जायें”, मैंने घोषणा करते हुए कहा।

सब लोग अपने कपड़े उतार कर नंगे हो गये और ड्रिंक्स पीते हुए आपस में बातें करने लगे। औरतों ने सिर्फ अपने ऊँची ऐड़ी के सैंडल पहने हुए थे।

रूही के नंगे बदन को अपनी गिरफ़्त में लेकर एम-डी ने उसके मम्मों को मसल दिया। “रूही! आज मैं तुम्हें दिल भर के चोदूँगा। याद है मैंने तुमसे कहा था कि एक दिन मैं तुम्हें जरूर चोदूँगा।”

“उन दिनों का तो मुझे पता नहीं कि तुम मुझे चोद पाते कि नहीं… हाँ! आज जब मैं बेवा हो गयी हूँ तो जिससे मेरा मन करे उससे चुदवा सकती हूँ”, कहकर रूही ने जोर से एम-डी के खड़े लंड को भींच दिया, “आज मैं तुम्हारे लंड से एक-एक बूँद निचोड़ लूँगी।”

“सुनील कह रहा था कि तुम्हारी चूत काफी कसी हुई और गरम है!” एम-डी ने उसके मम्मों को मसलते हुए कहा।

“चोद कर खुद देख लो!” रूही हँसते हुए उसके लंड को और रगड़ने लगी।

“रूही! क्या तुम उस लड़की को जानती हो जो आयेशा से बात कर रही है?” एम-डी ने पूछा।

“वो मेरी बेटी फातिमा है”, रूही ने जवाब दिया।

“क्या उसकी भी चूत तुम्हारी चूत की तरह गरम है?” एम-डी ने पूछा।

“उसकी भी चूत को चोद के देख लो…” रूही ने हँसते हुए जवाब दिया।

“हाँ! मैं चोद के जरूर देखूँगा। लेकिन पहले तुम्हारी चूत को और फिर तुम्हारी बेटी की चूत को”, एम-डी जोर-जोर से उसकी चूचियों को मसलते हुए कहा।

“फातिमा! जरा यहाँ तो आना”, रूही ने आवाज़ लगायी। फातिमा अब तक काफी शराब पी चुकी थी और ऊँची ऐड़ी के सैंडलों में लड़खड़ाती उनके पास आयी। रूही ने उसका परिचय कराया, “इनसे मिलो! ये हमारे परिवार के पुराने जान पहचान वालों में से हैं और तुम्हारी सहेली रजनी के अंकल भी… मिस्टर सुनीलू।”

“सलाम सर!” फातिमा ने थोड़ा सा सर झुका कर उसे सलाम किया।

“मेरे पास आओ!” एम-डी ने कहा, “जरा तुम्हारे बदन की गरमाहट को महसूस करने दो।” फिर एम-डी ने फातिमा की चूचियों को जोर से मसलते हुए कहा, “तुम्हारी चूचियाँ कितनी भरी भरी हैं। लगता है कि तुम्हें चोद कर मुझे काफी आनंद आयेगा।”

“उम्मीद करती हूँ कि आपके लंड में इतना पानी हो कि वो हम दोनों की चूत कि प्यास बुझा सके”, कहकर फातिमा ने एम-डी के लंड को जोर से मसल दिया।

“प्लीज़ सब लोग मेरी बात पर ध्यान दें…” मैंने जोर से चिल्लाते हुए कहा, “आज की पार्टी का थीम है माँ-बेटी। पहले मैं आप सबसे उन चूतों का परिचय करा दूँ जो आज की रात माँ-बेटी की जोड़ी बन कर आयी हैं। पहली जोड़ी है मिली और टीना की!” कमरे में जोर की ताली बजने लगी।

“दूसरी जोड़ी है योगिता और रजनी की, तीसरी है अनिता और मीना की, और आखिरी है रूही और फातिमा की। उसके बाद हमारे बीच हैं, दो सगी बहनें, अंजू और मंजू और उनका साथ दे रही हैं मेरे सालों की बीवियाँ सिमरन और साक्षी। और आखिर में है मेरी बीवी प्रीती और और सुंदर आयेशा। प्लीज़ सब इनका जोर से ताली बजा कर स्वागत करें।”

कमरे में जोर की तालियों की गड़गड़ाहट गूँज पड़ी। शराब पानी की तरह पी जा रही थी और सब नशे और मस्ती में चूर थे। “आज की रात हम एक खेल खेलेंगे। हर मर्द अपने पसंद की जोड़ी चुनेगा। वो जोड़ी को अदल-बदल नहीं कर सकता”, मैंने कहा।

“मैं रूही और फातिमा को चुनता हूँ!” एम-डी थोड़े उतावले स्वर में बोला।

“सर! आप थोड़ा सब्र कीजिये। आपकी बारी बाद में आयेगी। पहली बारी जय की है। माँ -बेटी की जोड़ी को इस पार्टी में बुलाया जाये, ये सुझाव उसका था और इसलिये पहला हक उसका बनता है। जय के चुनने के बाद उम्र को महत्व दिया जायेगा। जय तुम किसे चुनना चाहोगे?” मैंने कहा।

“एम-डी को अपनी पसंद लेने दो! मैं अनिता और मीना को चुनता हूँ”, जय ने उन दोनों को अपनी बाँहों में भरते हुए कहा।

एम-डी के बाद मैं ही उम्र में बड़ा था। सो मैंने मिली और टीना को अपनी बाँहों में भर लिया। उसके बाद पसंद चलती रही और परिणाम ये था कि राम ने योगिता और रजनी को चुना। श्याम ने अंजू और मंजू दोनों बहनों को। विजय ने अपने आपको सिमरन और साक्षी के साथ कर लिया। आर्यन अपनी पुरानी दो प्रेमिकाओं, प्रीती और आयेशा को पाकर खुश था।

“सुनील तुमने ये नहीं बताया कि खेल क्या है?” अनिता ने जय के लंड को अपने ग्लास में डालकर शराब में नहलाते हुए पूछा।

मेरे लिविंग रूम के कोने में बने बार की तरफ इशारा कर मैंने कहा, “जो भी चाहे बार से ड्रिंक ले सकता है। जी भर कर पीजिये और मैं खेल और उसके नियम आप सबको १५ मिनट बाद बताऊँगा। सो प्लीज़ आप सब इंजॉय करें और १५ मिनट का इंतज़ार।” Hindi Sex Stories

हैलो दोस्तो! Hindi Porn Stories

मेरा नाम राहुल है। यह मेरी Hindi Porn Stories पहली कहानी है। मैं ईजिन्यीरिंग के तीसरे सेमिस्टर में हूँ। यह कहानी तब की है जब मैं दूसरे सेमिस्टर में था।

मुझे होस्टल में रहना पसंद नहीं था, इस वजह से मैं एक घर में पी जी बन कर रहता था। मेरा कमरा पहले माले पे था। मैं खाना उसी घर में खाता था। उस मकान मालिक की 18 साल की लड़की थी। उसका नाम कोमल था। वो आर्ट कोलेज में पढ़ती थी। मेरी उसपर पहले से ही बुरी नजर थी। मैं उससे बात करने का एक भी मौका छोड़ता नहीं था। वो मुझसे काफ़ी घुल-मिल गई थी। मैं कई बार उसके बदन को जानबूझ कर छूता था, फ़िर भी वो कोई प्रतिकार नहीं करती थी। शायद वो भी मुझसे चुदवाना चाहती थी।

एक बार मकान मालिक के दूर के रिश्तेदार की शादी थी। मुझे खाने की परेशानी न हो इस बहाने कोमल घर पर ही रुक गई।

मैं समझ चुका था कि कोमल मुझसे चुदवाने के लिए ही रुकी थी।

शाम 4:00 बजे मकान मालिक, उसकी बीवी और बेटा निकल गये। अब कोमल उसके कमरे मे अकेली थी। मैं उसके कमरे में गया तो उसने कहा कि मैं खाना बना देती हूं, आज हम जल्दी खाना खायेंगे।

मेरे मन में लड्डू फ़ूट रहे थे। फिर भी मैं अपने लंड पे काबू रखे था। शायद मैं ग्रीन सिगनल की राह देख रहा था।

5:00 बजे हम दोनों खाना खाने बैठे। जब वो मुझे खाना दे रही थी तब मैंने कहा- बस ! ज्यादा नहीं !

तब उसने कहा- खा लो ! पूरी रात गुजारनी है।

यह सुनकर मेरा लंड खड़ा हो गया। उसने मेरे लंड की ओर देखा फ़िर वो मुस्कुराई और खाना खाने लगी। खाना खाने के बाद वो सीधा किचन में जाकर बर्तन धोने लगी।

मैं फ्रेश होने के बहाने बाथरुम में गया और जानबूझ कर अपना तौलिया भूलने का नाटक किया। थोड़ी देर बाद मैंने कोमल को आवाज लगाकर तौलिया दे जाने को कहा। जैसे ही उसने तौलिया देने के लिये हाथ बढ़ाया, मैंने फिल्मी हीरो की तरह उसका हाथ पकड़ कर उसे बाथरुम में खींच लिया और खुद दरवाजे के सामने खड़ा रह गया ताकि वो भाग न सके।

वो मुझे सिर्फ अंडरवीयर में देखकर शरमा गई। शावर चालू होने की वजह से वो पूरी भीग गई थी। उसका ड्रेस उसके बदन से चिपक गया था। उसकी काली ब्रा साफ दिखाई दे रही थी। मैंने अपने हाथ उसके चूतड़िं पर रख कर उसे अपनी और खींचा। वो मुझसे आकर कस कर लिपट गई। उसकी धड़कनें तेज हो चुकी थी। मैंने उसका कुर्ता निकाल दिया। मैं आगे बढ़ा और उसके दोनों हाथों को पकड़ के उसके गुलाबी होंठों पर अपने होंठ रख कर उसे चूमने लगा। एक हाथ से मैं उसकी चूत पायजामे के ऊपर से सहलाने लगा, दूसरे हाथ से ब्रा के हुक खोल दिये। उसके गोरे स्तनों के चुचूक मुँह में लेकर चूसने लगा। कई बार मैं चुचूकों को काट देता था और उसके मुँह से ऊऊउ….ह की आवाज आती थी। उसने अपना पायजामा और पेन्टी भी निकाल दी।

हम दोनों बाथ-टब में बैठे। मैंने अपने लंड को उसके चूतड़ों के बीच सेट कर दिया और दोनों हाथों से उसके स्तनों को दबाने लगा। वो भी अपने चूतड़ों को मेरे लंड पे रगड़ने लगी।

जैसे ही कोमल मेरे पेट पर बैठ गई, तभी मेरा लँड उसकी जांघों के बीच खड़ा हो गया। वो मेरे लंड को सहलाने लगी। हम दोनों एंजोय कर रहे थे।

मैं उसे उठा कर बेडरुम में ले गया। हम दोनों एक दूसरे को चूमने लगे। मैं उसकी टांगों के बीच बैठ के चूत में उँगली डालने लगा। उसके मुँह से आआआ….ह,ऊ उ…ह की आवाजें आ रही थी। चूत में मुझे चिकनाई सी महसूस हुई। वो पूरी गरम हो चुकी थी। मैं उसके उपर लेट गया और उसे एक लम्बा चुम्बन किया।

मैंने उसको बेड के किनारे लेटाया और उसकी टाँगों को अपने कंधो पर रख लिया। अभी उसका शील भंग नहीं हुआ था। उसकी चूत फ़ूल चुकी थी। चूत में से पानी निकल कर बेड पर टपक रहा था। मैं चूत पे अपना लंड रख के धीरे से अंदर धकेलने लगा, मगर थोड़ा ही अंदर जा पाया। मैंने उसके चूतड़ों को पकड़ के जोर से धक्का लगाया, मेरा पूरा लँड अंदर चला गया। वो जोर से चिल्लाई। मैंने उसके सर को पकड़ के उसके होंठों पर लम्बा चुम्बन किया ताकि वो फ़िर से चिल्ला न सके। मुझे लँड पर कुछ गरम महसूस हुआ, चूत में से खून निकल रहा था।

थोड़ी देर बाद मैं लंड को अंदर-बाहर करने लगा। अब उसे भी मजा आ रहा था, वो अपनी कमर हिला कर मेरा साथ दे रही थी। दस मिनट बाद मैं झड गया, अब तक वो 3 बार झड़ चुकी थी।

वो उठ कर बाथरूम गई और अपनी चूत धो कर आई, मैं बैड पर नंगा लेटा हुआ था। वो मेरे लंड के साथ खेलने लगी। उसके छूते ही मेरा लंड फ़िर से खड़ा हो गया। वो डोगी स्टाईल में बैठ गई। उसकी गाण्ड का छेद साफ दिखाई दे रहा था। मैंने उसके चूतड़ों को सहलाते हुए लँड को उसकी गाण्ड में डाला। बहुत मुश्किल से अंदर गया, वो चिल्ला उठी। मैंने लंड को धीरे से बाहर निकाला। मेज़ पर हेयर-ऑयल की बोतल थी, मैंने लंड पर तेल लगा लिया। अबकी बार लंड आसानी से अंदर चला गया।

मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी।

उसके मुँह से आअऊउ…ह, ओओ….ह की आवाजें निकल रही थी। मैंने अपना सारा माल उसी में छोड़ दिया।

वो सीधा लेट गई। मैंने अपना लंड उसकी चूत में डाल के उसे बाहों में ले लिया। हम दोनों काफ़ी थक चुके थे। हम वैसे ही नंगे एक दूसरे से लिपट कर सो गये।

सुबह 6:00 बजे मेरी आंख खुली, तब वो सो रही थी। मैंने उसे जगाया और उसे एक लम्बा चुम्बन किया। हम दोनों साथ में बाथरूम में नहाने गये। वहाँ मैंने उसकी दो बार गाण्ड मारी।

नाश्ते के बाद मैंने उसकी 10:00 बजे से ले कर 12:00 बजे तक दो घंटे जमकर चुदाई की।

शाम 4:00 मकान मालिक और उसका परिवार वापस आ गये।

दो महीने बाद कोमल की शादी हो गई। मैंने भी वो घर छोड़ दिया। Hindi Porn Stories

प्रेषक : सैम Antarvasna Stories

मैं सबसे पहले अन्तर्वासना Antarvasna Stories का धन्यवाद करता हूँ जो मेरी सच्ची कहानी छापी। मुझे यह सब कहानियाँ तब सच्ची लगी जब मेरे खुद के साथ यह सब हुआ, जो मुझे उम्मीद नही थी ! अब तो मैं गुरु जी का फ़ैन बन गया जिन्होंने हम सबकी प्यास सबके (जो हम जैसे हैं) सामने लाने का एक उचित रास्ता निकला !

मैं एक पंजाबी लड़का हूँ और मेरा नाम राजीव है। मेरी उम्र चौबीस साल है, एक अच्छे घर से हूँ। मेरा रंग गोरा, मेरी लम्बाई 5’8″ है और सुंदर हूँ। मेरे दोस्त कहते है कि मैं किसी मॉडल से कम नहीं ! यह कहानी तब की है जब मैं कॉलेज में पढ़ा करता था। मैं ट्यूशन पढ़ा करता था जहा कई लड़कियाँ और लड़के पढ़ते थे। वहाँ एक लड़की जिसका नाम मीनू था, मुझे बहुत सुंदर लगती थी। वहीं पर हम एक दूसरे के पास पास आ गए। हम एक दूजे को मिलने लगे। अब यहीं से मेरी असली कहानी शुरू होती है!

बात बहुत बढ़ चुकी थी, एक दूसरे को पसंद करने लगे। मैं और मेरी सहेली छुप कर मिला करते थे। हमने पहली बार एक दूसरे का चुम्बन किया। हम एक थिएटर में मूवी देखने गए जिसका नाम ‘हम तुम’ था ! उसके बाद हमने बहुत बार सेक्स किया और उसकी तसल्ली भी करवाई। हम दोनों कई बार दो दिन तक साथ रहे। हम दोनों में कुछ भी छुपा नहीं था। अकले में हम पति पत्नी की तरह रहते थे।

एक बार वह अपनी सहेली हरलीन के साथ आई। हरलीन एक सुंदर पञ्जाबी लड़की थी। उसके बाद हम तीनों बहुत बार साथ साथ मिले। अगर मीनू के घर कुछ प्रॉब्लम होती तो वह अपना संदेश हरलीन को दे देती और हरलीन मुझे कॉल कर देती, जिसके कारण हरलीन मेरे साथ काफी खुल चुकी थी। मुझे कई बार एहसास हुआ कि हरलीन भी मुझे मन ही मन चाहती है। वह मुझे फ़ोन करती, एस एम एस तो हर रोज किसी न किसी तरह जरूर करती ! कई बार वह मुझे अश्लील एस एम एस भी कर देती ! वो मेरे सामने कुछ ना कुछ ऐसा करती थी कि मेरा लण्ड खड़ा हो जाता था। वो शरीर में भरी पूरी थी और बदन गदराया हुआ था। उसके सुडौल स्तन बहुत ही मनमोहक थे और थोड़े भारी थे। मुझे उसके बोबे और मटके जैसे चूतड़ बहुत अच्छे लगते थे।

एक बार मुझे हरलीन का फ़ोन आया और कहा- मुझे आपसे कोई जरुरी काम से मिलना है। यह बात मीनू को मत बताना और हम मीनू को एक सरप्राईज़ देंगे !

उसने मुझे एक होटल में मिलने को बुलाया। हम दोनों एक पॉइंट पर मिले, मैने उसे वहाँ से लिया और होटल में चले गए। उस दिन उसने जींस-शर्ट पहनी हुई थी। मैं उसे देख कर दंग रह गया और उसके साथ सेक्स के लिए सोचने लगा।

शायद वह मेरे से भी ज्यादा बेताब थी। दरवाजे की कुण्डी लगते ही मुझे उसने बाहों में ले लिया और आइ लव यू ! बोलने लगी।

और इससे पहले कि मैं कुछ बोलता, वो अपने होंठ मेरे होंटों पर रख कर चूमने लगी। मैं भी गर्म हो चुका था। फिर मैं उसको उठा कर बिस्तर पर ले गया और पहले उसके होंटों को बहुत प्यार से चूमा, उसके बाद उसके गालों को खूब चूमा। धीरे धीरे हम दोनों पूरे नग्न हो गए। मैं उसके स्तनों को चूम रहा था और वो पागल हो रही थी। उसने मेरे बालों को जोर से पकड़ा हुआ था और जोर जोर से बोल रही थी- डाल दो अन्दर !

लेकिन मैं कहाँ मानने वाला था, चूमता हुआ मैं उसकी चूत पर आ गया, जो शेव की हुई थी बिल्कुल गुलाब की पंखुरी की तरह, और चूमने लगा। उसने अपनी टाँगें खोल ली थी और चिल्ला रही थी- जान फाड़ दो ! मुझे आज पता चला मीनू तुम से इतनी खुश क्यों रहती है !

मैं उसकी चूत चाट रहा था। फिर मैंने अपना लण्ड उसके मुँह में दे दिया। वो उसको पागलों की तरह चूस रही थी।

फिर मैंने अपना लंड उसकी फुद्दी में डाल दिया और झटके देने लगा। इसी बीच उसका पानी छूट गया पर मैं झटके दे रहा था। थोड़ी देर बाद मैं भी शांत हो गया।

यह मुझे बाद में उसी ने बताया कि वो एक बहुत आमीर खानदान से है। उसके बाद उसने कई बार मुझे अपने घर भी बुलाया। हमने वहाँ जमकर मस्ती की।

उसके बाद मैं काल-बॉय की तरह काम करने लगा और कई तरीकों से नए शिकार खोजने लगा। मैंने कई भाभियों को भी खुश किया है जो अपने पति से खुश नहीं होती, पूरी पूरी रात मजे किये !

मुझे जरूर बतायें कि मेरी कहानी आप को कैसे लगी। मुझे इस पर मेल करें Antarvasna Stories

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वह मेरे दूसरे चुचूक Hindi Sex को अपने हाथ के नाखून से जोर जोर से कुरेद रही थी। एक तो चुचूक चूसे जाने की मस्ती दूसरा चुचूक कुरेदे जाने की वजह से होता दर्द ! इससे मैं तो स्वर्ग में पहुँच गया था। इस बेइंताह मस्ती के कारण मेरे मुँह से आह ओह की आवाज निकल रही थी। मैंने अपने हाथ उसकी पीठ और एक बाँह पर रख रखा था। एक हाथ से उसकी बाँह मसल रहा था और दूसरा हाथ उसकी पीठ और कमर पर फेर रहा था।

वो करीब 3-4 मिनट तक ऐसे ही करती रही। फिर रीमा बायाँ चुचूक छोड़ कर दायाँ चुचूक चूसने लगी और बाएँ चुचूक को नाखून से कुरेदने लगी।

दूसरे चुचूक को अच्छी तरह से चूसने के बाद ही उसने मेरे को छोड़ा। फिर मेरी ओर देख कर आँखो में आँखे डाल कर पूछा- कैसा लगा बेटा माँ का तुम्हारा चुचूक चूसना?

मैं बोला- क्या बताँऊ माँ ! बस इतना कह सकता हूँ कि तुम्हारे इस बेटे को तुमसे बहुत कुछ सीखना है। सीखाओगी ना माँ अपने इस अनाड़ी बेटे को?

रीमा बोली- जरूर बेटा, आखिर माँ होती किस लिये है। माँ का तो यह कर्तव्य है कि उसके बेटे की शादी से पहले उसे सेक्स की पूरी शिक्षा दे, प्रेक्टिकल के साथ जिससे कि उसकी पत्नी सुहागरात को यह ना कह सके कि उसकी माँ ने उसको कुछ भी नहीं सिखाया।

उसके मुँह से यह बात सुन कर मैं बोला- माँ, तुम्हारे विचार कितने उत्तम हैं। अगर तुम जैसी सबकी माँ हो तो किसी भी बेटे को रंडी के पास जाने की जरूरत ही नहीं।

सुन कर उसने मेरे होंठों को चूम लिया और बोली- तुम बिल्कुल मेरे बेटे कहलाने के लायक हो। चलो मैं अब तुम्हारा लंड पैन्ट से बाहर निकाल देती हूँ। यह भी मुझको गाली दे रहा होगा कि बात तो लंड को बाहर निकालने की कर रही थी और चुचूक को मजा देने लगी। कह रहा होगा कितनी निर्दयी है तुम्हारी माँ।

नहीं माँ, मेरा लंड तो बहुत खुश है कि मेरी माँ तुम हो। वह तो कह रहा है कि जिस तरह से तुम मेरी माँ हो, तुम्हारी चूत उसकी माँ हुई और जब तुम इतनी मस्त हो तो उसकी माँ और भी मस्त होगी । वो भी अपनी माँ से मिलने और उसकी बाँहों में जाने के लिये बेचैन है।

रीमा बोली- उसके लिये तो उसको थोडा इंतजार करना पड़ेगा। पहले मैं अपने बेटे को और उसके लंड को तो जी भर के प्यार कर लूँ और अपने बेटे से अपने आप को और लंड की माँ को प्यार करा लूँ, तब कहीं जाकर वो अपनी माँ से मिल सकता है ! समझे?

मैंने कहा- हाँ माँ, तुम ठीक कह रही हो।

इतना कह कर रीमा ने मेरी पैन्ट खोलनी शुरु कर दी। जब रीम मेरी पैन्ट खोल रही थी तो उसकी नजर मेरी तरफ थी। वह मेरी तरफ देख कर मन्द मन्द मुस्कुरा रही थी। सबसे पहले उसने मेरी बेल्ट को निकाल कर फेंक दिया, फ़िर मेरी पैन्ट का बटन खोलने लगी। बटन ओर चैन खोल कर उसने कमर से पकड़ कर एक ही झटके में मेरी पैन्ट नीचे कर दी और साथ में खुद भी नीचे बैठ गई। मैंने भी अपने पैर उठा कर पैन्ट निकालने में उसकी मदद की।

उसने पैन्ट निकाल कर उसको भी एक कोने में फेंक दिया। मैंने अन्डरवीयर पहन रखा था। रीमा का मुँह बिल्कुल मेरे लंड के सामने था। मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा था जो कि मेरे अन्डरवीयर के उभार से पता चल रहा था। उसने मेरी तरफ़ देखा और अपनी जीभ बाहर निकाल कर अपने होठों पर फिराने लगी जैसे कोई बहुत ही स्वादिष्ठ चीज देख ली हो।

और फिर एक दम से आगे बढ़ कर मेरे लंड को अन्डरवीयर के ऊपर से चूमने लगी। अन्डरवीयर की इलास्टिक से लेकर नीचे जाँघो के जोड़ तक।

फिर रीमा ने मेरे अन्डरवीयर की को कमर से पकड़ कर एक ही झटके में खींच कर उतार दिया।

मेरा लंड उत्तेजना के कारण मस्त होकर बुरी तरह से खड़ा हो गया था। जैसे ही रीमा ने मेरा अन्डरवीयर उतारा, मेरा लंड उसके मुँह के सामने एक लम्बे साँप की तरह फुँफ़कार मारते हुए नाचने लगा। मेरा लंड देख कर रीमा बोली- हाय रे ! इतना बडा लंड है मेरे बेटे का ?

फिर उसने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ लिया। जैसे ही उसने मेरे लंड को अपने कोमल हाथो में पकड़ा, मुझे ऐसा लगा 440 वोल्ट का करंट लगा हो। मेरे लंड का यह हाल तब था जबकि उसने अभी तक एक भी कपड़ा अपने बदन से नहीं उतारा था।

मैं सोचने लगा कि जब मैं उसको नंगा देखूंगा तो मेरा क्या हाल होगा।

रीमा मेरे लंड को अपनी एक हथेली में रख कर दूसरे हाथ से उसको सहला रही थी जैसे किसी बच्चे को प्यार से पुचकारते हैं। थोड़ी देर तक इसी तरह मेरे लंड को पुचकारने के बाद रीमा उठ कर खड़ी हो गई और बोली- लो निकाल दिया मैंने तुम्हारे लंड को बाहर। अब हम चल कर बैठते हैं और थोड़ी प्यार भरी बातें करते हैं।

फिर मैं सोफे पर बैठ गया और रीमा से बोला- आओ माँ, मेरी गोदी में बैठ जाओ।

हम लोग जब चैट किया करते थे तब भी सबसे पहले मैं रीमा को अपनी गोदी में बिठा लेता था। रीमा थोड़ी सी मुस्कुराई और आकर मेरी गोदी में बैठ गई।

रीमा इस तरह से मेरी गोदी में बैठी थी कि मेरा लंड उसकी गाँड की दरार में फंसा था, जैसा कि मुझको मेरे लंड पर महसूस हो रहा था। उसने अपनी पीठ मेरे कंधे से लगा ली थी और अपनी गोरी दाईं बाँह मेरे गले के पीछे से निकाल कर दूसरे हाथ से पकड़ ली और मैंने पीछे से अपने हाथ उसके कमर में डाल कर उसके नंगे पेट को पकड़ लिया। उसके इस तरह से बैठने के कारण उसकी भारी भरकम चूचियाँ मेरे मुँह के सामने आ गई। साथ ही साथ उसके मस्ताने चूतड़ों का दवाब मेरे लंड पर पड़ रहा था। मैं अपने आपको बडा ही खुशकिस्मत समझ रहा था कि इतनी मस्तानी औरत मेरी गोद में बैठी थी।

मेरी नजर उसकी बड़ी-बड़ी गोलाइयों की तरफ़ थी। चूचियों के बीच की दरार ऐसी थी जैसे कि निमंत्रण दे रही हो कि आओ और घुसा दो अपना मुँह इस खाई के अन्दर।

फिर रीमा ने पूछा- अब बताओ बेटा, कैसी लगी तुमको अपनी यह बेशर्म माँ?

मैंने कहा- बहुत ही मस्तानी, सेक्सी, महा-चुदक्कड़ चुदासी और रस से भरपूर !

इस पर रीमा मुस्कुरा दी और बोली- ऐसे शब्द कोई भी औरत किसी मर्द से अपने बारे में सुने तो बस निहाल हो जाये और तुमने तो ये सब मेरे लिये कहा, अपनी माँ के लिये, सुनकर मेरा दिल गदगद हो गया। इसका मतलब है की मैं तुमको रिझाने में सफ़ल रही।

तुमने मुझको बताया था कि तुम्हारी उम्र 48 साल है पर देखने से तुम उससे दस साल छोटी दिखती हो।

यह तो तुम्हारी मुझे देखने की नजर है बेटा ! नहीं तो उम्र तो मेरी 48 ही है। लेकिन तुम्हारे मुँह से अपनी तारीफ सुन कर मुझे बड़ा अच्छा लगा।

फिर मैं बोला- माँ, तुमसे एक बात पूछना चाहता हूँ।

रीमा बोली- पूछो !

मैं जब से आया हूँ, मैंने गौर किया है कि तुम्हारा ब्लाउज़ काफी तंग है, जिसकी वजह से तुम्हारी चूचियाँ ब्लाउज को फाड़ कर बाहर आने को तैयार हैं। लगता है कि एक हफ़्ते मुम्बई में रह कर चूचियाँ मसलवाने से बड़ी हो गई हैं जिसकी वजह से तुम्हारा ब्लाउज़ छोटा हो गया है।

मेरी बात सुनकर रीमा खिलखिला कर हँस पड़ी और बोली- नहीं बेटा ! ब्लाउज़ तो मेरा एक दम नया है। मुम्बई आने से पहले सिलवाया है। मैंने जानबूझ कर एक इन्च छोटा बनवाया था जिससे मैं इसे तुमको रिझाने के लिये इस्तमाल कर सकूँ। जिससे मेरी चूचियाँ और भी बड़ी-बड़ी लगें। मुझे पता है कि तुमको ब्लाउज़ में से झाँकती चूचियाँ कितनी पंसन्द हैं। इसीलिये गले का कट भी थोड़ा ज्यादा रखा है। इस ब्लाउज़ को पहन कर मैं बाहर तो जा ही नहीं सकती, नहीं तो लोग मेरा सड़क पर ही देह शोषण कर देंगे। यह तो खास ब्लाउज़ है जो मैंने अपने बेटे के मस्ती बढ़ाने के लिये बनवाया है।

ओह माँ ! तुम अपने बेटे का कितना ख्याल रखती हो !

रीमा ने कहा- अगर माँ अपने बेटे का ख्याल नही रखेगी तो कौन रखेगा।

फिर मैंने कहा- कि तुम ठीक कह रही हो माँ। मैंने तुम्हारे काँख के बाल भी देखे, ऐसा लग रहा है कि जैसा तुम एक महीने पहले छोटे कराने को कह रही थी पर तुमने छोटे किये नहीं।

रीमा बोली- बेटा, मैं छोटे करना तो चाहती थी पर 2-3 दिन मेरे बॉस के कुछ कलाइन्ट आ रहे थे, तो मुझे उनको खुश करना था। इसलिये काट नहीं पाई, फिर मेरे बॉस ने बोला कि मुम्बई जाने का प्रोगाम बन सकता है, तो मैंने सोचा कि फिर तुमसे भी मिलना हो सकता है तो क्यों ना और बढ़ा लूँ। वैसे भी तुमको मेरे काँख के बाल बहुत पसन्द हैं और इतने बड़े बाल देख कर तो तुम बहुत खुश होगे।

हाँ माँ ! मैं बहुत ही खुश हूँ कि तुमने बाल नहीं काटे। माँ तुम्हारे होंठ भी बडे सुन्दर हैं, तुमने कभी बताया नहीं कि तुम्हारे होंठ बड़े-बड़े और इतने उभारदार हैं। मुझको इस तरह के होंठ बहुत पसन्द हैं। रीमा बोली- मैं सोचती थी कि सब मर्दों को पतले होंठ पसन्द होते हैं। अगर मैं तुम को बता दूंगी तो शायद तुम मुझसे बात करना पंसन्द करो या नहीं। तुम जैसे बेटे कहाँ मिलते हैं। मैं तुमको खोना नहीं चाहती थी इसलिये नहीं बताया।

मैंने पूछा- यह भी तो हो सकता था कि मैं यहाँ आकर तुम्हारे होंठ पसन्द नहीं करता और चला जाता।

रीमा ने कहा- मुझे उसका थोड़ा सा डर था इसलिये ही मैंने तुमको लुभाने के लिये कसा हुआ ब्लाउज़ बनवाया था। तुमको बुरा लगा क्या बेटा ? आई एम सॉरी बेटा।

ऐसा कह कर उसने अपनी आँखे नीची कर ली और उसका चेहरा उदास हो गया।

मैंने कहा- माँ, इसमें इतना उदास होने की बात क्या है। तुमको तो खुश होना चाहिये कि मुझे तुम्हारे होंठ पसन्द आये।

उसने मेरी तरफ़ देखा और मुस्कुरा दी और मुझको गले से लगा लिया और बोली- बेटा, तुम्हारी माँ अपनी असली जिन्दगी में चाहे जितनी भी बड़ी रंडी हो, पर तुमको बहुत प्यार करती है। मेरे अपना तो कोई बेटा है नहीं, लेकिन मैंने तुमको ही अपना बेटा माना है। अपनी माँ से कभी भी नफ़रत मत करना बेटा।

नहीं माँ ! कभी नहीं !

कह कर मैंने भी रीमा को अपनी बाँहो में जकड़ लिया और उसकी पीठ पर हाथ फेरने लगा।

अब तक मैं यही सोच रहा था कि हम दोनों के बीच सिर्फ वासना का रिश्ता पनप रहा है। लेकिन मुझे आज पता चला कि चाहे हम दोनों एक दूसरे के पास वासना कि वजह से आये हों पर रीमा सच में मुझे एक बेटे की तरह प्यार करने लगी थी और असली जिन्दगी में वह बहुत ही अकेली थी। अकेली होने की वजह से ही शायद इस समाज से लड़ने के लिये वो अपने बॉस की रंडी बनी हुई थी। मैंने भी सोच लिया था कि इन चार दिन में उसको इतना प्यार दूंगा कि वो इन दिनों को कभी भी नहीं भूल पायेगी।

फिर रीमा पहले की तरह बैठ गई और बोली- मैं भी क्या बात ले कर बैठ गई ! तुमको मेरे होंठ पसन्द आये, मैं बहुत खुश हूँ। और बताओ मेरे शरीर में और क्या क्या तुमको अच्छा लगता है।

मैंने कहा- माँ, मुझे तुम ऊपर बालों से लेकर पैरों तक पूरी की पूरी अच्छी लगती हो।

रीमा बोली- तो फिर बताओ हर अंग के बारे में ! तुम्हारे मुँह से मुझको अपनी तारीफ अच्छी लग रही है।

तुम्हारी ये गोरी गोरी माँसल बाँहे मुझे अच्छी लगती हैं ! इतना कह कर मैंने उसकी बाँहो हो कोहनी के ऊपर से चूम लिया। ऐसा ही मैंने दूसरी बाँह के साथ भी किया।

मुझे तुम्हारी ये बड़ी-बड़ी आँखें अच्छी लगती है, कितनी गहरी हैं और इन आँखो में मेरे लिये प्यार और वासना झलकती है। माँ के प्यार के साथ छुपी हुई एक अधेड़ उम्र की औरत की वासना इनको और भी रहस्यमयी बना देती है और मेरा मन करता है कि इनको प्यार करूँ।

रीमा ने कहा- तो कर लो प्यार ! कौन मना कर रहा है।

यह कह उसने अपनी आँखें बंद कर ली। फिर मैंने पहले दाईं आँख पर चूमा फिर बाईं आँख पर।

और फिर रीमा ने अपनी आँखें खोली और मेरे गाल पर चूम लिया और बोली- तुम बहुत ही प्यार बेटे हो।

फिर मैंने कहा- मुझे तुम्हारा यह नंगा पेट भी अच्छा लगा क्योंकि तुमने साड़ी नाभि के नीचे पहनी है और तुम्हारी बड़ी गहरी नाभि दिखाई दे रही है जो मेरी मस्ती को और भी बढ़ा रही है और मेरा लंड तुम्हारी गाँड के बीच में फंसा तड़प रहा है जैसे मछली पानी के बाहर तड़पती है।

इस पर रीमा ने कहा- ओह मेरे प्यारे बेटे, मैं तुम्हारे लंड को इस तरह से तड़पाना तो नहीं चाहती पर क्या करूँ अभी उसके मजा लेने का वक्त आया नहीं है। उसे तो अभी तड़पना होगा मेरे लिये क्योंकि मेरे को तो अभी अभी ही थोड़ा-थोड़ा मजा आना शुरू हुआ है। लेकिन अगर तुम कहोगे तो मैं तुम्हारे लंड को तड़पाउँगी नहीं। लेकिन अगर तुम मेरे कहे अनुसार चलोगे तो मैं तुमसे वादा करती हूँ कि तुमको बहुत मजा आयेगा।

मैंने कहा- माँ तुमको वादा करने की जरुरत ही नहीं है, मुझको पता है कि तुम मुझको बहुत मजा दोगी और मुझे उस में कोई शक नहीं है।

मेरी बात सुनकर वो बहुत खुश हुई और बोली- मुझे खुशी है कि तुम इस बात को समझते हो कि जल्दबाजी से ज्यादा मजा देर तक धीरे धीरे प्यार करने में आता है। चलो शुरू हो जाओ फिर से।

मैं धीरे से मुस्कुराया और बोला- मुझे तुम्हारा इस तरह बेशर्मी से गंदी गंदी बातें करना भी अच्छा लगता है।

इस पर रीमा ने कहा- मेरे बेटे, ये बातें गंदी कहाँ हैं, ये तो दुनिया की सबसे अच्छी बातें हैं। अगर दुनिया में सब लोग सबकुछ भूल कर सिर्फ सेक्स की बात करें तो यह दुनिया कितनी सुखी हो जाये।

पर बेटा तुम चिन्ता मत करो, तुम्हारी यह माँ तुमको बेशर्म बनना सिखा देगी। तब तुम भी ऐसी ही गंदी गंदी बातें कर सकते हो।

माँ, मुझे चुदाई करते वक्त गलियाँ देना और सुनना पंसन्द है।

रीमा बोली- बेटा, यह तो बहुत ही अच्छी बात है क्योंकि गालियाँ तो मस्ती में हम उसी को देते हैं जिससे सबसे ज्यादा प्यार करते हैं। जितनी बड़ी और गंदी गाली, उतना ही ज्यादा प्यार झलकता है। समझ गया रंडी की औलाद?

उसके मुँह से गाली सुन कर मेरे लंड को एक झटका सा लगा जोकि उसकी चूतड़ों की दरार के बीच फंसा हुआ था।

क्रमशः… Hindi Sex

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