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मैंने शादी में देखा था कि मेरी मामी बहुत सुंदर लग रही थीं.
चूंकि वे काफी सीधी-सादी हैं तो उनकी सादगी उनकी खूबसूरती में चार चाँद लगा रही थी.

कहने का आशय यह कि खूबसूरत महिलाओं के नखरे आदि जैसी बात मामी में नहीं थी इसलिए उनकी सरल सी मुस्कान किसी का भी दिल मोह लेने के लिए काफी थी.
मेरे मामा का घर हमारे पास में ही था.
हम लोग उनकी शादी समारोह का मजा ले रहे थे.
शादी के बाद मामी जी घर में आ गईं और धीरे धीरे सब कुछ सामान्य होने लगा.

जैसे-जैसे शादी को वक्त गुजरता गया, उन दोनों पति पत्नी के बीच झगड़े होने लगे.

चूंकि हम लोगों के घर एक ही मुहल्ले में थे तो मैं देखता था कि मेरे मामा के घर में आए दिन किसी ना किसी बात को लेकर लड़ाई होती रहती थी.

मामा अक्सर मामी पर गुस्सा होते रहते थे.
मेरी मामी बहुत सीधी-सादी होने के कारण उनसे कुछ नहीं कहती थीं.

जबकि मामा जी अक्सर गुस्से में मामी को पीट दिया करते थे.
यही सब देखते-देखते मैं 20 साल का हो हो गया था.

मुझे अपनी मामी पर बहुत तरस आता था.
और मुझे अपने मामा पर बहुत गुस्सा आता था, मगर मैं कुछ नहीं कर सकता था.

फिर मैंने मामी से नजदीकियां बढ़ाने की सोची और अक्सर जब मामा बाहर जॉब पर जाते थे तो मैं मामी से बात करने चला जाया करता था.
धीरे-धीरे मैंने मामी से दोस्ती कर ली और उनके साथ उनका दुख बांट लिया करता था.

वे अक्सर बात करते करते ही मेरे सामने रो दिया करती थीं.
धीरे-धीरे मुझे अपनी मामी से प्यार होने लगा था और शायद मामी को भी मुझसे.

फिर एक दिन मैंने अपनी मामी से पूछा- आप यह सब कैसे सहन कर लेती हैं?
इस पर उन्होंने कहा- मैं कर भी क्या सकती हूं!

मैंने कहा- क्यों आप जब तक कुछ विरोध नहीं करेंगी, तब तक मामा जी को कुछ भी समझ में आने वाला नहीं है!
वे कहने लगीं- मैं क्या कर सकती हूँ, मुझे कुछ समझ में ही नहीं आता है.

मैंने उनसे बोल दिया- मैं आपको बहुत पसंद करता हूं. आप विरोध के लिए एक कदम आगे बढ़ाएंगी, तो मैं आपके साथ दो कदम आगे चलूँगा. मैं आपसे प्यार करता हूँ.

मेरी इस बात को लेकर वे बहुत नाराज हो गईं और बोलीं- आज के बाद मुझसे कोई बात नहीं करना. मैं तुम्हें अपना अच्छा दोस्त मानती थी पर तुम मेरे बारे में यह सोचते हो. मुझे तुमसे ये उम्मीद नहीं थी!
मैं चुप रहा और वहां से चला आया.

कुछ दिन बाद ही दोबारा से मामा और मामी की लड़ाई हो गई.
मामा ने मामी को बहुत मारा.

यह सब होने के बाद में 2 दिन बाद गया.
मैं जब मामी के पास गया तो मामी अचानक से मेरे सीने से लग कर रोने लगीं.

पहले तो मैं सकपका गया कि यह क्या हुआ.
फिर मैंने उन्हें तसल्ली दी और उन्हें बहुत समझाया.

मेरे मनाने पर वे चुप हो गईं और मुझसे बात करने लगीं.

मैंने मौके का फायदा उठाकर उनसे फिर से कहा कि मैं आपको बहुत पसंद करता हूं, लेकिन आप हो कि मेरी तरफ देखती ही नहीं हो!
इस बात पर वे थोड़ी देर चुप रहीं, फिर बोली- पसंद तो मैं भी तुमको बहुत करती हूं, लेकिन तुम्हारे मामा से डरती हूं कि कहीं उन्हें पता लग गया तो मैं घर से भी निकाल दी जाऊंगी. मैं उस सूरत में अपने घर पर भी नहीं जा पाऊंगी, उधर क्या मुँह दिखाऊंगी सबको?

मैंने उनसे कहा- ऐसा कुछ नहीं होगा. मैं आपका बहुत ध्यान रखूंगा. आपसे हमेशा प्यार करता रहूंगा. आपको कभी धोखा नहीं दूंगा.
वे चुप हो गईं.

उसके बाद मैं अपने घर आ गया.
अब धीरे-धीरे हमारी फोन पर बातें होने लगीं.

मामी की बातों से मुझे यह मालूम चला कि मामा से सेक्स सही से नहीं हो पाता है.
जब मैंने मामी से मामा जी की चुदाई को लेकर कुछ खुल कर पूछना चाहा तो मामी जी चुप हो गईं और उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि वक्त आने पर तुम सब कुछ जान जाओगे.

तब मैं उनकी इस बात का मर्म समझ ही न सका.
मैं लगभग हर बार मामी जी से मामा के साथ हुई चुदाई को लेकर बात करने की कोशिश करता, पर वे हर बार उस बात का जबाव देने से बच जाती थीं.

एक दिन मैंने उनसे कहा- मुझे आपसे अकेले में मिलना है. जब आपके घर पर कोई नहीं हो, तब बता देना.
उन्होंने कहा- ठीक है.

फिर अगले दिन मामा जॉब पर गए, तब उनका मैसेज आया कि तेरे मामा जॉब पर चले गए हैं. मैं तुम्हारे लिए चाय बना रही हूं, आ जाओ.
मैं चला गया.

वहां पर जाकर बैठा, हम दोनों ने साथ में चाय पी और बातें करने लगे.
बातें करते करते मैंने उनका हाथ पकड़ लिया.

उन्होंने कुछ नहीं बोला.
कुछ पल बाद उन्होंने उठकर टीवी ऑन कर दिया.
टीवी में किसिंग वाला एक हॉट सीन आ रहा था.
उसे देखकर मैं उनकी तरफ देखने लगा.

मामी थोड़ा शर्माने लगीं.
मैं उनके थोड़ा नजदीक हो गया और उन्हें हग करने लगा और उन्हें प्यार करने लगा.

वे भी धीरे-धीरे मुझसे प्यार करने लगीं और मेरा विरोध ना करते हुए मेरा साथ देने लगीं.
मामी मेरी बांहों में एकदम से झूल सी गई थीं और वे काफी सुकून महसूस कर रही थीं.

मैंने मामी के गाल पर चुम्मी ली तो वे मदहोशी भरी नजरों से मेरी आंखों में देखने लगीं और उन्होंने अपने लरजते हुए होंठों को मेरे होंठों पर रख दिए.
हम दोनों लिप किस करने लगे.
किस करते-करते मामी गर्म होने लगीं और मुझे भी सेक्स चढ़ने लगा.

मैं उन्हें गोदी में उठा कर उनके ही रूम में ले गया और हम पागलों की तरह एक दूसरे को किस करने लगे थे.

मामी के होंठों को किस करते-करते मैं उनके बूब्स दबा रहा था.
वे और ज्यादा चुदासी होने लगीं और उनकी सांसें बहुत तेज चलने लगी थीं.

मैंने अब उनके कुर्ते को उतार दिया और वे मेरे सामने ब्रा में आ गई थीं.
फिर मैंने उनकी गर्दन को चूमते हुए उनकी ब्रा भी खोल दी और उनके बूब्स को पीने लगा.

मामी की सांसें और तेज होने लगीं.
वे मुझे अपने दूध पिलाती हुई सर को सहलाने लगी थीं.

मैं भी उनके एक दूध के निप्पल को अपने होंठों के बीच दबा कर खींचने लगा … साथ ही दूसरे दूध को हाथ से दबाते हुए उन्हें मीठा दर्द देने लगा.

वे भी मुझे अपने मम्मों से खेलने के लिए कहे जा रही थीं- आह आह … और जोर से दबा लो मेरे दूध चूस लो.
कुछ देर बाद मैंने उनके दूध से मुँह हटाया तो उन्होंने भी मेरे कपड़े उतारने चालू कर दिए.

मैंने भी देर न करते हुए उनकी सलवार उतार दी.
अब वे मेरे सामने सिर्फ पैंटी में थीं.

मैंने उनके बदन को जीभर के चूमना चालू कर दिया और मैंने उनके पूरे शरीर को चूम चाट कर गीला कर दिया.
कुछ देर बाद मैंने उनकी पैंटी भी उतार दी और उनकी चुत को किस करने लगा.

वे मेरे सिर को पकड़ कर अपनी चुत पर दबाने लगीं.
कुछ देर बाद मैंने मामी से अपना लंड चूसने को कहा.

कुछ पल आनाकानी करने के बाद मामी मान गईं और वे मेरे लंड को चूसने लगीं.
वे लंड को बहुत अच्छी तरह से चूस रही थीं.

मैं बता नहीं सकता कि मुझे मामी से अपना लंड चुसवाने में कितना ज्यादा मजा आ रहा था.
मैंने उनकी चूचियों को दोबारा किस करना चालू कर दिया.

इस बार वे कहने लगीं- प्लीज अपने लंड को मेरी चुत में डाल दो, मुझसे अब रहा नहीं जा रहा है.
मैंने उनकी दोनों टांगों को फैला दिया और अपने लंड को उनकी चुत पर सैट करके जैसे ही धक्का मारा, मेरा आधा लंड उनकी चुत में घुस गया.

वे चिल्ला उठीं- आह मर गई … प्लीज रहने दो … बहुत दर्द हो रहा है आह ओह!
मामी दर्द भरी सिसकारियां ले रही थीं. यह देख कर मैं थोड़ा सा रुक गया और उन्हें दोबारा किस करने लगा.

थोड़ी देर बाद में वे सामान्य हो गईं और मैंने धीरे धीरे करके अपना पूरा का पूरा लंड उनकी चुत में उतार दिया.
इस बार वे पहले की तरह नहीं चिल्लाईं, पर उन्हें थोड़ा दर्द हुआ.
इंडियन लेडी सेक्स करती हुई आह आह कर रही थीं.

कुछ देर बाद जब वे लौड़े से मजा लेने लगीं.
तब मैंने उन्हें डॉगी स्टाइल में खड़ी करके पीछे से लंड पेल कर चोदा.
मैंने उन्हें बहुत देर तक चोदा.

काफी देर तक चले इस सेक्स में वे दो बार झड़ चुकी थीं.

मैं झड़ने के बाद शिथिल होकर लेट गया और अपनी सांसें नियंत्रित करने लगा.

थोड़ी देर आराम करने के बाद मामी जी उठ कर अपनी कुर्ती पहन कर मेरे लिए चाय बनाने चली गईं.

हम दोनों ने चाय पी और मैंने फिर से उनके साथ मस्ती करना शुरू कर दी.
मैंने जल्दी ही उन्हें गर्म कर दिया और दोबारा से चोदा.

वे मुझसे कहने लगीं- कहीं तुम मुझे धोखा तो नहीं दे दोगे?
मैंने उनसे कहा- मैं आपको हमेशा जिंदगी भर प्यार करूंगा, कभी धोखा नहीं दूंगा.

वे मुझसे कहने लगीं- मैं तुम पर बहुत भरोसा करती हूं और प्यार भी करती हूं. मेरा भरोसा कभी मत तोड़ना.
उसके बाद से अब हम दोनों रोजाना सेक्स करने लगे थे.

Xxx फ्रेंड सेक्स कहानी में मैं अपनी बीवी की सहेली को चोदना चाह रहा था कि एक बार वह मेरे साथ ट्रेन में लंबा सफ़र करने वाली थी. मैंने ट्रेन में ही जुगाड़ बनाया.

फ्रेंड्स, मैं आपको अपनी बीवी की सहेली मधुलिका की ट्रेन में चुदाई की कहानी सुना रहा था.

कहानी के पहले भाग
बीवी की सहेली को चोदने की तमन्ना
में अब तक आपने पढ़ा था कि मधुलिका मेरे साथ सेक्स करने के लिए राजी हो गई थी.

अब आगे Xxx फ्रेंड सेक्स कहानी:

मैंने आगे बढ़ कर उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए.
उसकी गर्म आहें और भारी सांसें मेरी सांसों से टकरा रही थीं.

उसके होंठों को मैंने अपने होंठों में भर लिया.

अब वह मछली की तरह मेरी बांहों में मचल उठी और तुरंत अपना हाथ निकाल कर किसी चुदासी कुतिया की तरह मुझसे चिपट गई.
वह मुझे चूमने चाटने लगी.

मेरे पूरे बदन में सिहरन सी होने लगी.
मैं भी मचलने लगा.

उसने कहा- जीजा प्यारे … और गर्म करो मुझे … बड़ा मज़ा आ रहा है. इतनी देर तक तो मेरे पति ने मुझे कभी गर्म नहीं किया.
इसके बाद मैं उसके चूचों को दोनों हाथों से दबाने लगा.

उसने झट से अपनी टी-शर्ट उतार दी.
टी-शर्ट के हटते ही उसके दो बॉल जैसे चिकने गोरे चूचे, काले रंग की 34B ब्रा से झांकने लगे.

मैंने उसकी जींस का बटन खोल दिया और जींस उतार दी.
अब उसका संगमरमर जैसा सफ़ेद चिकना बदन सामने था.
वह सिर्फ एक काली पैंटी ब्रा पहने हुई थी.

उसका यह रूप मुझे पूरी तरह उत्तेजित कर गया था.

इसके बाद वह खड़ी हो गई और उसने मेरे सारे कपड़े जल्दी जल्दी उतार दिए.
अब मैं केवल अंडरवियर में था जिसके ऊपर से मेरे लौड़े का उभार साफ़ नज़र आ रहा था.

उसने मेरे नंगे भरे बदन को देख कर कहा- जीजा प्यारे … पहले पता होता कि तुम इतने सेक्सी हो तो मैं कब का तुमसे चुद चुकी होती!
Xxx फ्रेंड सेक्स के लिए उतावली लग रही थी.

मैंने कहा- जानेमन, मुझे भी यह अगर पहले पता होता कि तुम चुदासी कुतिया हो … तो मैं कब का तुमको चोद चुका होता … चल अब तू मुझसे चुद ले मादरचोदी.

उसने अपने कोमल हाथों से मेरी चड्डी के ऊपर से मेरा लंड मसलना शुरू कर दिया.

मेरा लंड खड़ा होकर सख़्त गर्म रॉड की तरह हो गया.
लंड मसलते हुए उसने मेरी छाती का निप्पल अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी.

अब मेरे लंड के साथ मेरी गोलियां भी टाइट होने लगी थीं.
मेरे बदन से हल्का हल्का पसीना बाहर आ रहा था.

इसके बाद उसने झट से मेरी चड्डी नीचे करके मेरे लंड को मुँह में भर लिया और लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी.

उसके मुँह से उम्म उम्म उम्म की आवाज़ आने लगी.
मैं तो पहले ही बहुत गर्म हो गया था.

लंड चूसते चूसते वह मेरी गोलियां चूसने लगी.
मैंने उससे कहा- तुमको गर्म करने का बहुत अनुभव है!

तो उसने कहा- हां सब पोर्न देख देख कर सीखा है. पर अपने भोसड़ पति को इतना गर्म करने की जरूरत ही नहीं पड़ती. वह साला एक मिनट में ही फुच्च फुच्च हो जाता है.
मैं हंस दिया.

वह मेरे लंड की गोलियां चूसती गई और मेरे लंड से एक तरल कामुक व चिकना द्रव्य स्रावित होने लगा जिसे मधुलिका ने जीभ से चाट कर खा लिया.

अब मैं जंगली शेर की तरह उस पर झपटा और उसकी ब्रा का हुक खोल कर उसे अलग फेंक दिया.

उसकी ब्रा को खोलते ही उसके 34 साइज के दूध और भूरे व तने हुए निप्पल देख कर मैं पागल सा हो गया.

मैंने झट से उसके दूध पूरी ताक़त से दबाए और उसके एक निप्पल को मुँह में भर कर चूसने लगा.
उसकी चीख निकल गई- उई माँ मर गई … मुझे लग रही है कुत्ते … धीमे कर.

लेकिन मैंने नहीं छोड़ा और जी भर कर उसके दोनों मम्मों को चूसा.
दूध चूसने के बाद मैंने उसकी पैंटी उतार दी.

अब उसको बर्थ पर लेटा कर उसकी टांगों को हल्का सा फैलाया और टांगों के बीच में अपना सर घुसेड़ दिया.
मैंने उसकी चूत को देखा, तो चूत ज़्यादा फटी नहीं थी, अभी भी गुलाबी रंग की चूत ही थी.

उसका पति अभी तक उसकी चूत का भोसड़ा नहीं बना पाया था.
मैंने मधुलिका से कहा- तुम्हारी अभी ज़्यादा फटी नहीं है!

उसने कहा- हां, मेरे पति का खड़ा होने के बाद भी 5 इंच का ही होता है और उसका तुम्हारे लंड जितना मोटा भी नहीं है. साला दो मिनट में ही झड़ जाता है. आज मुझे यक़ीन हो रहा है कि तुम इसको ज़रूर भोसड़ा बना दोगे!
मैंने कहा- क्यों नहीं जानेमन, अभी लो … भोसड़ा बनाने के लिए ही तो मैं मरा जा रहा हूँ.

मैंने उसकी गुलाबी चूत को अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया.
वह गर्म आहें भरने लगी- उम्म उम्मह उम्म और चाटो जीजा प्यारे … आह मेरी चूत का रस पी लो और अपनी प्यास बुझा लो … उम्म उम्म!

अपनी साली की चूत को चाटते हुए उसकी बुर में एक बीच वाली उंगली डाली और कुरेद तो आराम से चली गई.
दूसरी डाली तो आधी ही गई.

फिर दोनों उंगली निकाल कर उसके मुँह में डाल दीं और थूक से चिकनी करके फिर से जोर लगा कर डालीं, तो घप से चली गईं.

उसके मुँह से आह निकल गई.
मैं उंगली अन्दर बाहर करने लगा.

मैंने उससे कहा- चल, अब कुतिया बन!
उसने कहा- क्यों पहले गांड चोदोगे क्या?
मैंने कहा- हां.
उसने कहा- नहीं, दर्द होगा. मैंने पीछे कभी नहीं चुदवाया है.

मैंने कहा- मैं आराम से करूँगा, तुम भरोसा करो.
उसने कहा- नहीं. आगे की लो.

वह नहीं मान रही थी … लेकिन मेरा मन उसकी गांड मारने का ही ज़्यादा था क्योंकि उसकी गांड ही लंड खड़ा कर देती थी.
मैंने कहा- अच्छा सीधी लेट जाओ.

मैंने उसे सीधी लेटा दिया और अपने सामान से निरोध निकाल कर उसे पकड़ा दिया.
उसने पैकेट फाड़ा और निरोध को मेरे लंड पर अच्छे से चढ़ा दिया.

वह लंड मुँह में लेकर चूसने लगी.

कुछ देर चूसने के बाद उसने कहा- मेरा फ़ैवरेट फ्लेवर लाए हो!
मैंने कहा- और क्या … मुझे पता है तुम्हारा टेस्ट.

इसके बाद मैंने उसकी टांगें उठाईं और अपने लंड के सुपारे को उसकी चूत की फांकों पर घिसने लगा.

वह गर्म होकर लंड लेने को छटपटा रही थी.
उसके मुँह से आहें निकल रही थीं- आह आह उम्म उम्म.

तभी मैंने झटके से लंड से प्रहार किया.
मेरा लंड चूत फाड़ते हुए पूरा अन्दर चला गया.
वह चीख पड़ी- आह मादरचोद … मर गई.

उसकी आंख से आंसू निकल आए और मेरी आंख से भी … क्योंकि उसकी चूत टाइट थी और मैंने बहुत जोर से पेला था.

फिर मैंने धीरे धीरे अन्दर बाहर करना शुरू किया.
अब उसे आनन्द आने लगा.

मुझे भी ऐसा लग रहा था कि लंड किसी गर्म भट्टी की दीवार से रगड़ रहा है.

वह आहें भरती हुई कह रही थी- आह आह उम्म उफ उफ़ … चोद डाल चोद डाल मुझको … जीजा भोसड़ी वाले … चोद मुझे … मेरा सारा पानी निकाल दे … आज बुझा दे मेरी प्यास और तेजी से चोद बहन के लौड़े!

मैंने अपने लंड की गति को और बढ़ा दिया और तेज तेज अन्दर तक झटके देने लगा.

उसकी चूत से पक पक की अवाज आने लगी और वह खूब मचलने लगी.

मैं दोनों हाथ चूचियों पर रख कर मसलने लगा, निप्पल मींजने लगा.

वह और तेज़ आहें भरने लगी- आह उफ़्फ उफ़ … फाड़ दी तूने चूत … मादरचोद आह आह मैं झड़ रही हूँ … आह आह मेरा पानी निकल रहा है.

इतने में उसका ख़ुशबूदार काम रस बाहर आ गया.
चूत के रस की सुगंध क्या मस्त सुगंध थी.

मैंने कहा- मैं अभी नहीं झड़ा हूँ, चल कुतिया बन!
उसने कहा- नहीं, मैं गांड नहीं चुदवाऊंगी … दर्द होगा.

मैंने कहा- रंडी रोना नहीं … चुपचाप चुदवा ले छिनाल कहीं की.
उसने कहा- नहीं.

मुझे गुस्सा आ गया.
मैंने कहा- अगर नहीं चुदवाया तो इस चुदाई का वीडियो मैं अभी तुरंत तुम्हारे पति को भेज दूँगा क्योंकि मैंने यहां स्पाई कैम लगा दिया है और सारी रिकॉर्डिंग मेरे फ़ोन में सेव हो रही है.

उसने कहा- नहीं नहीं ऐसा मत करो … मैं तैयार हूँ लेकिन आराम से करना, दर्द होगा.
मैंने कहा- दर्द तो पहली बार सील तुड़वाने में भी हुआ होगा, लेकिन बाद में मजा तो आया होगा ना!

उसने कहा- हां.
मैंने कहा- बस वैसे ही इसमें भी है.

मैंने अपने लंड से निरोध निकाल कर नीचे फेंका और दूसरा निरोध निकाल कर पकड़ा दिया.
मधुलिका ने अपने हाथों से निरोध मुझे पहनाया.

मैंने उसे कुतिया बनाया और उसकी मख़मली गांड पर एक थप्पड़ मारा.
उसकी गांड लाल हो गई.

फिर उसकी गोरी गांड को फैलाया तो भूरे रंग का गांड का छोटा सा छेद दिखा.
मैं उसके छेद की सिलवटों पर जीभ को फिराने लगा.

मधुलिका को अच्छा लगने लगा.
वह कहने लगी- गांड चटवाने में मुझे चूत चटवाने से भी ज़्यादा उत्तेजना हो रही है … आह और चाटो मेरे छेद को.

मैं छेद को चाटते हुए उसके छेद में अपनी जीभ को घुसेड़ने लगा और उसकी गांड के छेद का नमकीन स्वाद मुझे कामुक बनाने लगा.
मैंने अपने कसे हुए रॉड जैसे लंड टोपे पर अपना थूक लगाया और ढेर सारे थूक से मधुलिका की गांड के छेद को नहला दिया.

फिर लंड के टोपे को उसकी गांड के छेद पर रख कर धीरे धीरे जोर लगाने लगा.
मेरे लंड का टोपा धीरे धीरे उसकी गांड में जाने लगा.

उसकी चीख निकलने लगी- उयी मम्मी … मर गई … हाय उफ़ आह आह जीजा मर जाऊंगी … एक तो तुम्हारा मोटा लंबा लंड है … ऊपर से तुमने डॉटेड निरोध पहना है साले ऐसा लग रहा है जैसे नागफनी का पत्ता घुसा दिया है.

मैंने कहा- साली मादरचोद यह जो तू 36 इंच की फूली हुई गांड लेकर चलती ना … आज इसको फाड़ कर रख दूँगा मैं … ले माँ की लौड़ी रंडी.
इतना कह कर मैं ट्रेन की रफ़्तार में झटके देने लगा.

फट्ट फट्ट फट्ट की आवाज़ उसकी गांड से आती रही और मेरे झटके इतने जोर के होने लगे थे कि मेरा निरोध अन्दर फट गया.
वह चीखती रही.

मैं उसी स्पीड में उसे चोदता रहा और मैं उसकी गांड में ही झड़ गया.
सारा गाढ़ा ढेर सारा माल उसकी गांड में ही भर दिया.

वह पूरी तरह से थक के टूट गई थी.
उसने कहा- तुम्हारा सड़का मेरी गांड में भर गया है, इसे निकाल साले!

मैंने अपना हाथ तुरंत उसकी गांड के नीचे किया.
उसने जोर लगाया, तो एक जोड़ की आवाज़ पुर्र पुर्र पुर्र के साथ सारा सड़का मेरे हाथ में आ गया.

मैंने उसे दिखाया.
उसने कहा- बहुत ही गाढ़ा माल है, मैं इसे पियूँगी.

मैंने उसे अपना माल तुरंत अपने हाथों से उसे पिला दिया और हम दोनों चिपक कर सो गए.

अगले दिन ग्यारह बजे हमारी ट्रेन गोरखपुर पहुंच गई और हमने शादी अटेंड की.

तब से आज तक इस बात को दो साल हो गए हैं.
किसी को पता भी नहीं चला है.

आज भी जब मौक़ा मिलता है, वह घर में अकेली होती है तो उसको जाकर चोद आता हूँ.

मज़े की बात बताऊं कि ट्रेन में गांड मरवाने बाद से आज तक वह सबसे ज़्यादा मुझसे गांड ही मरवाती है.

दोस्तो, अब विदा लेता हूँ. मुझे उम्मीद है कि आप सबको सेक्स कहानी ज़रूर पसंद आयी होगी.

अपनी अगली सेक्स कहानी के साथ मैं जल्द आपसे मिलूँगा.
और हां, यह Xxx फ्रेंड सेक्स कहानी कैसी लगी, आप कमेंट में रिप्लाई ज़रूर करें.

Hindi Sex Stories

जिम आजकल का फ़ैशन Hindi Sex Stories हो गया है, क्या लड़के या लड़कियां, अधेड़ और यहाँ तक कि 60 वर्ष के बूढ़े जवान भी अब जिम का महत्त्व समझने लगे है। मेरे पिता ने यह जिम 15 वर्ष पहले स्थापित किया था। अब यह शहर का नामी जिम है। नाम और मशीनों के अनुरूप मेरे जिम की फ़ीस भी ज्यादा थी। उसके लिये हमारे पास ट्रेनर थे। जो अलग अलग समय पर अलग अलग उम्र के लोगों को कसरत कराया करते थे।

पहले लड़कों का समय अलग था और लड़कियों का समय अलग था, पर मैंने अपनी आमदनी बढ़ाने के लिये उनका समय एक ही कर दिया था। परिणाम बढ़िया रहा। मैंने अपना भी ध्यान विशेष रूप से रखा। अधेड़ उम्र की शादीशुदा महिलाओं के लिये 10 से 2 बजे का समय रखा था। इसका खास कारण भी था। वह ये कि कम उम्र की लड़िकयाँ वैसे पटती तो बहुत जल्दी हैं पर जबान की कच्ची होती हैं, जरा में शिकायत हो जाती है। अधेड़ महिलाएँ जो करती हैं सोच समझ कर करती हैं। और यदि उनकी कोई इच्छा पूरी हो रही हो तो वो फ़ीस भी अधिक दे देती हैं।

जिम में आशिकों की तादाद बढ़ती जा रही थी। दिन में दो दो के ग्रुप में अधेड़ महिलाएँ भी आने लगी थी, भरे जिस्म की, जिनके चूतड़ थोड़े भारी थे। बोबे भी बड़े थे पर ठीक थे। उन्हें कसरत कराना मेरा काम था। इनकी ड्रेस भी जिम से ही दी जाती थी। ये पहनने में हल्की होती थी और उनका फ़िगर उसमें सेक्सी दिखता था। कसरत करते समय पजामा उनके चूतड़ों में घुस सा जाता था। उनके बोबे उस ड्रेस में खूब हिलते थे, जिनका भरपूर आनन्द मैं लिया करता था। कितनी बार मेरा लण्ड तक खड़ा हो जाता था। मैं दिखने में बहुत ही सुन्दर था और मेरा शरीर भी जिम के कारण कसा हुआ भी था इसलिये मुझे औरतें बहुत पसन्द करती थी।

मिसेज़ सोनल तो मुझे बार बार बुला कर मेरी मदद हमेशा लिया करती थी। सोनल की पीठ से मैं चिपक जाता था और उसे डम्बल से कसरत कराता था। मिसेस देविका भी देखा देखी मेरी मदद लेती थी। दो कसरतें करने के बाद मैं उन्हे ज्यूस पिलाने अपने चेम्बर में ले जाता था और हम वहाँ पर बातें करते थे। सोनल का मेरे प्रति रुझान था यह मैं जानता था। कसरत करते समय वो जान करके जब लेटती थी तो उसकी चूत का नक्शा उभर कर साफ़ दिखता था। मुझे भी ऐसा लगता था कि उसकी चूत को हल्के से दबा दूँ और मन की निकाल लूँ।

एक दिन ऐसा आ ही गया जब सारा मामला खुल गया और सोनल मुझ से चुदा बैठी… उस दिन देविका की माहवारी आ रही थी इसलिये वो जिम नहीं आई थी। मैं सोनल के साथ अपने चेम्बर में सोफ़े पर बैठा हुआ ज्यूस पी रहा था।

सोनल ने पहल की और कहने लगी- जो, आप मुझे लेटने वाली कसरत को ठीक से कराये… मुझसे होती नहीं है!
“अभी करोगी क्या?”
“हां सीखना तो है ही ना!”

मैंने उसे सिखाना आरम्भ किया। सोनल को सीधा लेटा दिया… आज उसके बोबे जरा कड़े लग रहे थे। वो उत्तेजित लग रही थी। मैंने सोचा मौके का फ़ायदा उठाना चाहिए… मैंने उसके हाथ को पूरा फ़ैला दिया और उसके हाथ में 5 किलो के डम्बल दे दिये और उसके सर के पास खड़े हो कर उसे कसरत कराने लगा।

फिर उसे आराम करने को कहा और बताया हाथों को कैसे रखना चहिये, इस बहाने उसके शरीर को छूता जा रहा था। बीच बीच में उसके बोबे के निप्पल भी छू लेता था। वो इससे उत्तेजित होने लगी। उसकी चूत उभर कर अपना नक्शा दर्शा रही थी।

अब मैंने उसे पांव उठाने कहा और उसकी मदद करते समय उसकी जांघो को भी अच्छी तरह से छुआ और सहलाया भी।
“जो आपके यहाँ मसाज भी करते हैं ना?”
“हां! पर सिर्फ़ लड़कों का होता है!”
“मेरा भी मसाज कर दिया करो, मैं मसाज की फ़ीस अलग से दे दूंगी!”
“पर मेरे यह कोई लड़की नहीं है…”
“नहीं आप ही से मसाज करवाना है…”
“अच्छा तो आइये अन्दर… आप वहाँ लेटिये, मैं मसाज आयल ले कर आता हूँ!”

सोनल ने अपने कपड़े उतारे और छोटी सी पेन्टी और छोटी सी ब्रा में ही उल्टी लेट गई। मैं समझ गया था कि लोहा गर्म है, इसे अब काबू में कर लेना चहिये।

मेरे मसाज शुरू करते ही उसके शरीर में झुरझुरी आने लगी, मेरे हाथ उसकी पीठ पर हल्की गुदगुदी करते हुए और चूंचियों के पास के स्थानों को पीछे की तरफ़ खींच कर मसाज करने लगा। मेरे हाथ उसकी गोल गोल चूतड़ों पर भी चलने लगा।

वो मदहोश सी होने लगी। और वही हुआ जिसकी उम्मीद थी, उसका सब्र टूट गया और सीधी हो कर उसने मुझे अपनी ओर खींच लिया।
“बस जो! अब ओर नहीं, मुझे ये सब नहीं चाहिये, प्लीज, मेरी छातियाँ मसल दो…”
“मिसेज़ सोनल, फिर मुझे भी कुछ हो जायेगा!”
“होने दो ना… मैं तो शादीशुदा हूँ… कुछ भी होने दो… मुझे क्या फ़र्क पड़ेगा!”

“मतलब, सोनल… अगर वो भी हो जाये तो?”
“मैं तो जिम आती ही इसलिये हूँ कि कुछ मजा मिले… प्लीज़!”
मैंने सोनल की ब्रा और पेन्टी उतार दी और मसाज जैसे हल्के से उसके बोबे मलने लगा।

“जो, प्लीज कुछ ओर भी करो ना…”
मैं भी अब ज्यादा सह नहीं पा रहा था, मैंने अपना एक हाथ उसकी चूत पर रख दिया और जोर से दबा दी, और उसके होंठो को जोर से चिपका दिये।
“आह जो, अब मजा आया… और करो… मेरी चूची भी मसलो…”

मैं उसके अंगों को दबाने और मसलने लगा। उसके मुख से सिसकारियाँ निकलने लगी। मैंने अपना पजामा उतार दिया और उसके मुँह के पास अपना तन्नाया हुआ लण्ड रख दिया। मुझे जरा भी इन्तज़ार नहीं करना पड़ा। लण्ड उसने अपने मुख में भर लिया, और चूसने लगी। मुझे तेज मजा आया… उसने मेरा लण्ड पकड़ कर मुठ भी मारती जा रही थी और मुख मैथुन भी जारी था।

“सोनल मेम, चुदोगी क्या… या बस…”
“तुम भी ना जो!… मेरी इच्छा तो चुदाने की है… यहाँ मैं इसीलिये तो आती हूँ… देविका भी यहाँ चुदाने ही तो आती है, उसे भी चोद देना प्लीज़!”

“जी हाँ जरूर…” मैंने उसे अपने नरम फ़ोम के बिस्तर पर ले जा कर लेटा दिया… और उस के पास लेट गया।

सोनल से रहा नहीं गया अब… वो मेरे ऊपर चढ़ गई और लण्ड को चूत पर रखा और अन्दर घुसा लिया। एक प्यारी सी सिसकारी उसके मुँह से फ़ूट पड़ी और लन्ड पर सारा जिस्म का भार डाल कर बैठ गई। लण्ड गहराइयों में उतरता हुआ हुआ पेन्दे पर जाकर लग गया।

उसके मुख से सन्तुष्टि भरी एक आह निकल गई- हाय अब आया ना जिम का मजा… बस, जो कुछ मुस्टंडे रख ले हमारे लिये जो हमें जम के चोद दें!
“सोनल… आप मुझे ही मौका देना, मैं तो अभी तक कुंवारा हूँ, सभी को चोद सकता हूँ!”

अब वो धीरे धीरे लण्ड पर ऊपर नीचे होने लगी और मेरे लण्ड में मीठी मीठी सुरसुरी होने लगी। उसने मेरे हाथों को अपनी चूचियों पर रख लिया- जानू, मसलते भी जाओ… चूत में मजा आता है!
“सोनल, आपकी और सहेलियों को भी चुदवाने को बोलो ना…! मैं उनको देख देख कर कितनी बार मुठ मारता हूँ!”
“अरे जो राजा, यहा पर अधिकतर चुदवाने ही आती हैं… बस एक कमरा और खोल दे…”

उसकी गति बढ़ती जा रही थी, लगता था कि वो अति-उत्तेजित हो चुकी थी। मेरे पर झुक कर और पोजिशन लेकर, कमर जोर से हिलाने लगी। मैंने भी मौके की नजाकत देखी और उसकी निप्पल को खींच खींच कर घुमाने लगा। उसका बदन ऐंठता हुआ, कड़ा हो गया और”हाय मैं मर गई… जोऽऽऽ” और उसका पानी निकल पड़ा। वो झड़ने लगी। मेरा लण्ड अभी भी तन्नाया हुआ था।

“सोनल, आप तो गई, अब मेरा लण्ड?”
“चुप… रुक जा…” वो एक बार फिर सीधे लण्ड पर बैठ गई- राजा! मैं शादीशुदा हूँ, सब तरीके जानती हूँ!

मेरे लण्ड को उसने सहलाया और थोड़ा सा उठ कर उसे गाण्ड की छेद पर लगा लिया।
“अब छेद नम्बर दो का मजा लो… ऽअह्ह्ह… मस्त लण्ड है रे…” उसका लण्ड सीधे ही गाण्ड में घुस गया। मुझे ऐसे मजा नहीं आ रहा था।
“सोनल घोड़ी बन जा, तब ठोकने में जोर भी लगेगा और मजा भी आयेगा!”

उसने गाण्ड में से लौड़ा निकाला और उछल कर घोड़ी बन गई।
अब देरी किस बात की बात थी… मैंने हाथ से लण्ड पकड़ा और गाण्ड में रख कर जोर लगाया तो आराम से घुस पड़ा।
“गाण्ड तो नरम है… अन्दर से गरम भी है।”
“अरे मेरे आदमी का लण्ड मेरी गाण्ड देख कर ही तो खड़ा होता है… गाण्ड मार मार कर देखो ढीली कर डाली है। पर गाण्ड चोदने में आराम हो जाता है ना, लगती नहीं है।”
“चल अब चुप हो जा… पेलने दे… क्या रसीली, चिकनी मस्त ग़ान्ड है।”
“हाय ऐसे ही कहता रह… कितना अच्छा है तू… साली को चोद मार…!”

सोनल गाण्ड मराने में एक्स्पर्ट थी। मेरा लण्ड मानो चूत में पेल रहा हो… सटासट चल रहा था। सोनल भी मस्त हो कर तबियत से मरवा रही थी। गाण्ड की दीवार भी लण्ड को लपेट रही थी या उसमें लहरें चल रही थी। उससे और मस्ती आ रही थी। मेरा लण्ड अब खिंचने लगा था। सारा जिस्म का रस लण्ड में भरने लगा था। मेर वीर्य छुटने ही वाला था… और… और… हाय रे गान्ड की गहराईयों में लावा उबल पड़ा।
“हाय जो… ये हुई ना बात… कैसा निकल रहा है… सारा छेद लबालब भर गया है।”

मैंने पूरा जोर लगा कर सारा वीर्य उसकी गाण्ड में निकाल दिया। अब लन्ड सिकुड़ कर अपने आप बाहर आने लगा।

“जो, हाय देखो कैसा सरसरा कर बाहर निकल रहा है।”
सोनल एक एक पल का आनन्द उठा रही थी।

मैंने तौलिया लिया और हल्के हाथ से सारा वीर्य पोंछ डाला। पर जैसे ही वो खड़ी हुई… वीर्य की बूंदे गान्ड से निकल कर बहने लगी।
“बहने दे यार… मालूम तो हो कि चुदी हूँ!” और हंस पड़ी।
“थन्क यू सोनल… आज आपने मेरे दिल की इच्छा पूरी कर दी!”
“चुदने की इच्छा तो मेरी हो रही थी… इसलिये आओ आज ज्यूस मेरी तरफ़ से!”
जिम का मजा लेकर सोनल चली गई। मेरी तरकीब कामयाब रही। शादीशुदा औरतें चुदवाने में शरम नहीं करती हैं। अपनी इच्छा से चुदवा लेती हैं और किसी को खबर तक नहीं लगने देती।

आप सभी का मेरे जिम में स्वागत है… Hindi Sex Stories

सवाल: मैं एक 26 वर्षीय collagge student हूं। मैं तीन साल से अपने बॉयफ्रेंड के साथ लिव इन रिलेशनशिप में हूं और हम लगातार सेक्स करते रहते हैं। हालांकि हम हमेशा सेफ सेक्स करते हैं। फिर भी मुझे सेक्स संबंधी कुछ आम धारणाओं को लेकर उलझन रहती है। इसलिए कृपया मुझे सेफ सेक्स के बारे में समुचित जानकारी दें।

जवाब: सुरक्षित तरीके से किया जाने वाला सेक्स न सिर्फ आपको सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिसीज़ (sexually transmitted diseases) से बचाता है, बल्कि आप अनवॉन्टेड प्रेग्नेंसी से भी सुरक्षित रहती हैं। मैं आपको सेफ सेक्स के कुछ तरीके बता रही हूं, इन्हें आजमाकर आप हैप्पीली सेक्स को एन्जॉय कर सकती हैं।

सेफ सेक्स (Safe Sex) का मतलब है कि आप सेक्स करते समय गर्भावस्था प्राप्ति और सेक्स संबंधित बीमारियों से सुरक्षित रहें। सेफ सेक्स के माध्यम से, आप खुद को और अपने साथी को नकारात्मक प्रभावों से बचा सकते हैं। यहां कुछ सेफ सेक्स के तरीके और सुझाव दिए गए हैं:

  1. सेफ सेक्स के लिए कंडोम को सबसे बेहतरीन उपाय माना जाता है। इसलिए अपने बॉयफ्रेंड को कंडोम का इस्तेमाल करने को कहें। कंडोम न सिर्फ अनवांटेड प्रेग्नेंसी से बचाता है, बल्कि इंफेक्शन, एचआईवी/एड्स या अन्य सेक्सुअल डिजीज से भी आपका बचाव करता है।

2. सेक्स के दौरान लुब्रिकेटेड कंडोम का इस्तेमाल करें, तो ज़्यादा अच्छा है। लुब्रिकेशन न केवल कंडोम को फटने से बचाता है, बल्कि इसे इस्तेमाल करना भी आसान होता है।

3. प्रजनन नियंत्रण के औषधियां: यदि आप गर्भावस्था से बचना चाहते हैं, तो आप प्रजनन नियंत्रण के औषधियों का उपयोग कर सकते हैं। डॉक्टर से सलाह लें और उनके सुझाव का पालन करें।

4. सेक्सुअल रिलेशनशिप में अपने पार्टनर के साथ ईमानदार रहकर न केवल आप अपनी सेक्सुअल लाइफ अच्छी तरह से एंजॉय कर सकते हैं, बल्कि सेक्सुअल डिजीज के ख़तरों को भी कम कर सकते हैं।

5. पीरियड्स के दौरान सेक्स करना सेफ माना जाता है, क्योंकि इस दौरान कंसीव करने के चांस कम होते हैं। लेकिन इसके लिए अपने पीरियड्स सायकल को समझते हुए दिनों को कैलकुलेट करके सेक्स करने से ही अनवांटेड प्रेग्नेंसी से सुरक्षित रह सकती हैं।

6. इमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव पिल का सेवन केवल इमरजेंसी में ही करें, क्योंकि इनका नियमित रूप से इस्तेमाल करना नुक़सानदायक हो सकता है। असुरक्षित सेक्स के 72 घंटों यानी 3 दिनों के अंदर तक इसका इस्तेमाल प्रभावकारी होता है। वैसे आप जितनी जल्दी इसका इस्तेमाल करेंगी, फ़ायदा उतना ही जल्दी होगा।

7. सेफ सेक्स करने के लिए पुरुष एक ऐसा भी तरीका अपनाते हैं, जिसमें मेल पार्टनर ऑर्गेज़्म के समय बाहर ही स्पर्म को डिस्चार्ज कर देता है। लेकिन यह तरीक़ा ज्यादा सुरक्षित नहीं है। इसमें पुरुष को इस बात का विशेष ध्यान रखना पड़ता है कि वीर्य योनि के अंदर न गिरे, अन्यथा प्रेग्नेंसी हो सकती है।

8. हार्मोनल कॉन्ट्रासेप्शन के लिए कॉन्ट्रासेप्टिव इंजेक्शन का इस्तेमाल कर सकती हैं, यह 3 महीने में एक बार लगाया जाता है।

9. यदि आप गर्भनिरोधक के रूप में कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स ले रही हैं, तो इसे कभी भी लेना न भूलें। प्रतिदिन इसे नियत समय पर लें। यदि कभी एक दिन पिल्स लेना भूल जाएं, तो दूसरे दिन दो पिल्स एक साथ ले लें। फिर दोबारा नियमित रूप से पिल्स लेती रहें।

10. ओरल सेक्स से बचें, क्योंकि इससे कई तरह के इंफेक्शन्स होने का ख़तरा रहता है। कई ऐसे उदाहरण भी सामने आए हैं, जब ओरल सेक्स से व्यक्ति को कैंसर व सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज हुई हैं।

Antarvasna

मैं अंतर्वासना की Antarvasna नियमित पाठिका हूँ और रहूंगी क्यूंकि मुझे इस प्यार हो गया है। मैं इसमें छपने वाली एक-एक कहानी को आराम से बैठ कर पढ़ती हूँ और आज मैं अपनी पहली कहानी अन्तर्वासना को भेज रही हूँ। और उम्मीद है कि जल्द ही आपके सामने आयेगी।

मेरा नाम सोनू है, मैं पंजाब से अमृतसर की एक बेहद कमसिन हसीना हूँ, मैं भरे हुए यौवन की पिटारी हूँ जिसको हर मर्द अपने नीचे लिटाना चाहता है, पांच फ़ुट पांच इंच लंबी, जलेबी जैसा बदन, किसी को भी अपनी ओर खींचने वाला वक्ष, पतली सी कमर, मस्त गद्देदार गांड, गुलाबी होंठ, गोरा रंग!

अपने से बड़ी लड़कियों के साथ मेरा याराना है। मैंने इसी साल बारहवीं क्लास की है और नर्सिंग के तीन साल के कोर्स में मैंने दाखला लिया है। मेरी माँ की शादी सोलहवें साल में हो गई थी और बीस साल तक पहुंचते दो लड़कियो की माँ बन गई, सुन्दर औरत है, पांच बच्चे जन चुकी है लेकिन अभी भी कसा हुआ जिस्म है।

मेरी माँ के कई गैर मर्दों के साथ रिश्ते थे जिससे मेरा बाप माँ के साथ झगड़ा करता। पापा ने काफी जायदाद माँ के नाम से खरीदी थी। आखिर दोनों में तलाक हो गया, तीन बच्चे पापा ने रखे और हम दो माँ के साथ रहने लगीं।

माँ को जवान लड़कों का चस्का था, लड़कों हमारे पीछे बुलवा कर चुदवाती जिसका असर हम पर होने लगा। माँ के नक्शे कदम पर बड़ी बहन ने पैर रख दिए, मेरा भी एक लड़के के साथ चक्कर चल पड़ा.

एक दिन मैं घर में अकेली थी। माँ दिल्ली किसी काम से गई हुईं थी। इसलिए दीदी ने उस रात अपने किसी बॉय-फ्रेंड के साथ चली गई क्यूंकि उनकी फ़ोन पर बात हो रही थी मैंने दूसरी तरफ से फ़ोन उठाया हुआ था। मैं और मेरा प्रेमी पम्मा भी चोरी छिपे सिनेमा और पार्कों में मिलते और बात चूमा चाटी तक ही रह जाती थी। ज्यादा से ज्यादा सिनेमा में में उसके लौड़े को सहलाती उसकी मुठ मारती, चूसती थी।

उस रात मैंने पम्मा को बुलवा लिया, करीब रात के दस बजे पम्मा आया, मेरे कमरे में जाते ही हम एक दूसरे से लिपट गए। उससे ज्यादा मैं लिपट रही थी। उसने मेरा एक एक कपड़ा उतार दिया, मैंने उसका!आखिर में मैंने नीचे झुकते हुए उसके लौड़े को मुँह में ले लिया। उसने खूब मेरी चुचियाँ दबाई और चुचूक चूसे, 69 में आकर चूत चाटी।

उसने अपना लौड़ा जब मेरी टांगों के बीच में बैठ चूत पर रखा- हाय डालो न राजा!
उसने कहा- ज़रा मुँह में लेकर गीला कर दे!
उसने फिर से रखा!
अब डालो भी!
उसने झटका दिया और मेरी चीख निकल गई- छोड़ो ऽऽ! निकालोऽऽ!

उसने मुझ पर पहले से शिकंजा कसा था, उसने बिना कुछ कहे पूरा लौड़ा डाल दिया।
हाय मर गई ईईईईइ माँ! फट गई!
कुछ पल बाद मैं खुद चुदवाने के लिए गांड उठा कर करवाने लगी। उसने अब पकड़ ढीली की।
हाय राजा मारते रहो!

करीब पन्दरह मिनट के बाद दोनों झड़ गए। उस रात मेरी सील टूटी, पूरी रात चुदवाती रही, मैं कली से फूल बन चुकी थी।

जब तक माँ नहीं आई हर रात वो मुझे चोद देता। एक रात उसने अपने एक दोस्त को साथ बुलाया और मिलकर मेरी चूत मारी।

जिस दिन माँ वापस आई, उसके साथ एक हट्टा कट्टा जवान लड़का था। माँ की मांग में सिंदूर था और नया मंगल सूत्र!

माँ ने हम दोनों बहनों को बुलाया और बताया कि माँ ने दूसरी शादी कर ली है।

उसकी उम्र पैन्तीस-छत्तीस साल के करीब होगी, माँ चवालीस साल!

दोनों रात होते कमरे में घुस जाते, फिर चुदाई समरोह चलता!

एक दिन मैंने दिन में ही माँ के कमरे का पर्दा सरका दिया। रात हुई, मैंने अन्दर देखा- माँ बिल्कुल नंगी थी अकेली बिस्तर पर लेटी चूत मसल रही थी, अपने हाथ से अपना मम्मा दबा रही थी। माँ ने ऊँगली के इशारे से मेरे सौतेले बाप को पास बुलाया, नीचे की ओर चूत पर दबाव दिया और चूत चटवाने लगी। मेरी चूत गीली होने लगी। मैं अपनी चूत में ऊँगली करते हुए सब देख रही थी।

माँ उसका मोटा लौड़ा मुँह में डाल कुतिया की तरह चाट रहीं थी- हाय मेरे राजा! तेरे लौड़े को देखकर मैंने तुझे खसम बना लिया है।

वो सीधा लेट गया, माँ ने थूक लगाया और उस पर बैठ गई।

मैं वहाँ से आई और कमरे में जाकर अपनी चूत में ऊँगली करने लगी।

कुछ दिनों में मेरा सौतेला बाप मेरे जवानी पे ध्यान देने लगा लेकिन मैं उससे ज्यादा बात नहीं करती थी। जब वो सामने आता, मेरे आँखों में उसके लौड़े की तस्वीर घूमने लगती। रात को माँ को सिर्फ अपनी चुदाई से वास्ता था। यह नहीं सोचा कि दो जवान बेटियों पर क्या असर होगा। दीदी तो इस आजादी से खुश थी।

माँ का बहुत बड़े स्केल की बूटीक है, मेरे सौतेले बाप को पैसे देकर वर्कशॉप खोली और नई कार खरीद कर दी। हमें पैसे देते वक्त चिल्लाती- इतने पैसे का क्या करती हो?

मैंने माँ को सबक सिखाने की सोची।

सौतेला बाप खाना खाने दोपहर घर आ जाता। मैं उसके साथ घुलमिल सी गई, पहले से ज्यादा बात करती! वो भंवरे की तरह मेरी जवानी का रस चूसने के लिए बेताब था।

एक दोपहर अपने कमरे के ए.सी की तार निकाल दी और उनके आने से पहले उनके कमरे का ए.सी चालू कर वहाँ लेट गई। मैंने एक जालीदार और पारदर्शी गाऊन, गुलाबी और काली कच्छी-ब्रा डाल उलटी तकिये से लिपट सोने का नाटक करने लगी।

आज तक मैं उसके सामने ऐसे नहीं आई थी। जब वो आये, मुझे मेरे कमरे में ना पाकर मायूस से होकर अपने ही कमरे में आये। मैंने थोड़ी से आंख खोल रखी थी, मुझे देख वो खुश हो गया, बाहर गया, सारे लॉक लगा वापस आया। दूसरे बेड पर बैठे हुए उसने अपना हाथ मेरी रेशम जैसे पोली-पोली गांड पर फेरा। मैं गर्म होने लगी, वहाँ से हाथ पेट तक गया, उसका मरदाना हाथ अपना पूरा रंग दिखा रहा था।

उसने मेरा गाऊन खिसका दिया। मैंने पलट कर उसको अपने ऊपर गिरा लिया। वो पहले से ही सिर्फ कच्छे में था, आगे से फटने हो आया हुआ था।

उसने मुझे यानि अपनी सौतेली बेटी को नंगी कर दिया, बोला- रानी! क्या जवानी है तेरी! तुम दोनों बहनें साली रंडियाँ हो! तेरी माँ ने जब परिवार की तस्वीर दिखाई थी, उसे देख मैंने उससे शादी कर ली।

मैंने जिस दिन से आपका लौड़ा देखा है, चुदवाने को तैयार थी!

हम दोनों एक दूसरे को पागलों जैसे चूमने लगे, तूफ़ान आ चुका था।
ओह मेरी जान!

मैंने उसका लौड़ा मुँह में ले लिया और कुतिया की तर जुबान निकल निकाल चाटने लगी। वो भी मेरा साथ देने लगा, वो भी अपनी जुबान जब मेरे दाने पर फेरता तो मैं उछल उठती- अह अह करने लगती!

बहुत ज़बरदस्त मर्द खिलाड़ी था! एक एक ढंग था उसके तरकश में लड़की चोदने के लिए!
साली कितनों से चुदी है?
काफी चुदी हूँ! लेकिन मुझे अब तड़पाओ मत और मेरी चूत मारो!
आह मसल दे मुझे! कमीने रगड़ दे! मेरे जिस्म को पेल डाल अब बहन के लौड़े!
छिनाल, कुतिया, गली की रंडी! तेरी माँ चोद दूंगा!
आज तेरी हूँ मैं तेरी! जो आये करो!
आह!

उसने मेरे बालों को पकड़ मेरे मुँह में लौड़ा घुसा कर उसे निकलने नहीं दे रहा था। मैं खांसने लगी, मैंने टांगें खोल ली और वो बीच में आया, मैंने हाथ से पकड़ चूत पे टिकाया, उसने जोर से झटका मारा और उसका आधा लौड़ा घुस गया। थोड़ी सी दर्द हुई लेकिन मैंने चिल्लाने का काफी नाटक किया। सांस खींच चूत कसी, उसके दूसरे झटके में पूरा लौड़ा उतर चुका था।

और आह फक मी! चोद और चोद साले, दिखा दे दम!

ले कुत्ती कहीं की!

दस मिनट ऐसे चोदने के बाद बोला- कुतिया की तरह झुक जा!

वो मेरे पीछे आया, उसने लौड़े पर थूक लगाया और पेल दिया।
हाय मेरे राजा! मेरे सांई!

उसने रफ्तार पकड़ ली। हाय, उसने मेरा बदन खड़का दिया। नीचे से मेरे कसे हुए बड़े बड़े मम्मों को इस तरह मसल रहा था जैसे कोई गाय का दूध निकाल रहा हो। मैं झड़ गई लेकिन वो अभी भी मस्ती से चूत मार रहा था।मैंने कहा- मेरा काम तमाम हो गया!

तो उसने बिना कुछ कहे लौड़े खींचा, मेरी गांड पर रख झटका मारा। मैं तैयार नहीं थी उसके इस वार के लिए!

दर्द से कराह उठी मैं!

वो नहीं माना और पूरा लौड़ा घुसा के ही दम लिया और तेजी से मारने लगा। जैसे मुझे कुछ राहत मिली, मैं अपनी चूत के दाने को चुटकी से मसलने लगी। पांच मिनट बाद उसने अपना पूरा माल मेरी गांड के अन्दर छोड़ दिया और बाहर निकाल मेरे होंठों से रगड़ दिया। मैंने जुबान निकाल सब कुछ साफ़ कर दिया।

शाम तक उसने मुझे दो बार चोदा। रोज़ दोपहर में मुझे चोदता।
मुझे सोने का सेट, पायल का जोड़ा, खुला खर्चा देता।

एक दिन उसने बताया कि वो दोस्तों के साथ घूमने शिमला जा रहा है। मेरे कहने पर उसने मुझे साथ लेकर जाने का फैसला किया। मैंने कॉलेज टूर का प्रोग्राम बताया। उसने अपनी वर्कशॉप के लिए दिल्ली से कुछ सामान!

उसके साथ उसके तीन दोस्त थे, मैं अकेली!

मैंने वहाँ और रास्ते में जो मजे लिए चार मर्दों के साथ, वो सब अगली बार लिखूंगी। Antarvasna

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