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Hindi Porn Stories

जीजाजी के जंगल Hindi Porn Stories की ओर जाते ही राहुल और बंटी ऊपर कमरे में आ गए।आते ही बंटी बोला – ‘ तुम तो साहब की औरत के भाई हो, उनसे यह क्या करवाते हो? ‘

‘क्या …? ‘ मैं हड़बड़ाया।

‘ बनो मत … हमें सब मालूम है कि तुमने साहब से क्या क्या करवाया है। ‘

‘ क्या करवाया है? ‘ मैं डरते हुए बोला।

‘ अभी हम बताते है… ‘ बंटी ने मेरे हाथ पकड़ लिए और राहुल ने मेरी नेक्कर नीचे खींच दी। मैं पूरी तरह नंगा हो गया। जीजाजी ने रात में चार बार गाण्ड मारी थी इसी कारण मैंने अंडरवियर पहना ही नहीं था।

‘ यह क्या कर रहे हो? ‘ मैं चिल्लाया।

‘ वही जो तुमने रात भर अपने जीजा से कराया है ! ‘ कहते हुए राहुल ने मेरे पोंड के छेद में अपनी बड़ी वाली उंगली घुसा दी। मेरी गाण्ड का छेद वैसे भी फूला हुआ था इसलिए मुझे बहुत तकलीफ हुई।

‘ इसके हाथ बाँध दो ! यह ऐसे नहीं मानेगा ! ‘ बंटी ने कहा।

राहुल ने रूमाल से मेरे हाथ बाँध दिए। मैं नंगा तो पहले ही हो चुका था, उन्होंने मेरी शर्ट भी उतार दी।

राहुल मेरी मुत्तु सहलाने लगा तथा बंटी मेरे पोंड फैला कर गाण्ड के छेद को देखने लगा।

‘ इसकी गाण्ड तो बहुत फूली हुई है ! साहब ने बड़ी बेरहमी से इसकी गाण्ड मारी है ! ‘ बंटी बोला – ‘हम इसे राहत पहुंचाएंगे !’

बंटी मेरे पीछे नीचे बैठ गया तथा मेरे पोंड पकड़ कर सहलाने लगा, राहुल मेरी मुत्तु से खेलने लगा। मेरी मुत्तु धीरे धीरे खड़ी होने लगी। जैसे ही मुत्तु बड़ी हुई, राहुल ने लपक कर उसे अपने मुंह में ले लिया और लालीपॉप सा चूसने लगा। बंटी मेरे पीछे बैठ कर मेरे पोंड के छेद में अपनी जीभ फिराने लगा। पोंड के छेद में बंटी अपनी जीभ थोड़ा अन्दर तक डालने की कोशिश कर रहा था। सामने से राहुल मेरी मुत्तु को चूस रहा था।

मुझे बड़ा आनंद आने लगा। गाण्ड का दर्द भी कम हो गया। पहली बार किसी ने मेरी मुत्तु को चूसा था। मुझे बड़ा ही मजा आया। लगभग १५ मिनट बाद मेरी मुत्तु से कुछ रस सा निकालने लगा। मैं डर गया क्योंकि पहली बार मेरे साथ ऐसा हुआ था।

राहुल ने तब मुझे समझाया – गाण्ड तो मराते हो पर लण्ड के बारे में कोई जानकारी नहीं है, इसमें से यह निकलता ही है, इसके निकल जाने के बाद ही पूरा मजा आता है।

मेरी गाण्ड को चाटते चाटते बंटी का लण्ड खड़ा हो गया। उसने जल्दी से अपनी नेक्कर उतारी और अपना तना हुआ लण्ड मेरी गाण्ड में घुसा दिया। हालाँकि उसका लण्ड जीजाजी से काफी छोटा था पर मुझे काफी दर्द हुआ। वह खड़े खड़े ही मेरी गाण्ड के छेद में लण्ड घुसा कर धक्के लगा रहा था पर वह ठीक से नहीं लगा पा रहा था। उसने मुझे आधा पलंग पर और आधा नीचे लटका कर लिटा दिया।

अब उसका लण्ड अच्छी तरह से मेरी गाण्ड में अन्दर बाहर हो रहा था। मेरी गाण्ड फूली हुई थी फिर भी मुझे आनंद आ रहा था। थोड़ी देर में वह झड़ गया लेकिन मेरा लण्ड अब तन्ना गया था।मैने राहुल की गाण्ड मारने की इच्छा जताई, वह तैयार हो गया।

मैने भी उसे घोड़ी बन जाने को कहा, ऐसी पोसिशन में उसकी गाण्ड का छेद काफी खुल गया। मैने अपना लण्ड धीरे से उसकी गाण्ड के छेद में घुसाया, फिर एक धक्का मारा, मेरा लण्ड पूरी तरह अन्दर घुस गया। उसकी गाण्ड का छेद काफी बड़ा था। जब मैने पूछा तो उसने बताया कि तुम्हारे जीजाजी ने उसकी गाण्ड मार मार कर उसका भुरता बना दिया है।

अब मैं भी अपना लण्ड उसकी गाण्ड के छेद में अन्दर बाहर करने लगा। मेरे लिए किसी की गाण्ड मारने का यह पहला मौका था। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, मानो मैं ज़न्नत में पहुँच गया हूँ। थोड़ी देर बाद मैं झड़ गया पर मुझे गाण्ड मारने में बहुत ही आनन्द आया।

दोनों के साथ मैंने तीन नए अनुभव लिए। मैंने पहली बार किसी से अपना लण्ड चुसवाया था, किसी ने पहली बार मेरी गाण्ड में जीभ फ़ेरी थी और मैंने पहली बार किसी की गाण्ड मारी थी।

जीजाजी शाम तक के लिए गए थे अतैव हम तीनों ने बारी बारी से एक दूसरे की गाण्ड मारी।

उस दिन सही मायनों में मैंने गाण्ड मारने और मराने का मजा लिया। वो दोनों मेरे दोस्त बन गए। उन्होंने बताया कि जब भी साहब यहाँ आते हैं तो वह हम दोनों की कई कई बार गाण्ड मारते हैं। हम दोनों भी आपस में एक दूसरे की गाण्ड मारते रहते हैं, बहुत मजा आता है।

उस दिन हम तीनों ने दो बार एक दूसरे की गाण्ड मारी तथा मराई, मेरी गाण्ड का दर्द भी गायब हो गया।

इसी बीच जीजाजी कब आ गए और हमारा खेल देखते रहे, हमें पता ही नहीं लगा। उन्होंने मुझे बंटी की गाण्ड मारते देख लिया था पर वह बोले कुछ नहीं। वह अनजान बने कमरे में आए और चाय बना कर लाने का आर्डर देकर लेट गए। लेकिन बाद में क्या हुआ जानने के लिए इन्तजार करें अगली कहानी का …. Hindi Porn Stories

Hindi Sex Stories

चतुर्थ भाग में मैंने लिखा था कि Hindi Sex Stories किस प्रकार मैं सीमा दीदी की ससुराल गया और वहाँ रीना और टीना के साथ मस्ती की !

बाथरूम से आने के बाद मैं तो एक तरह से निढाल हो चुका था पर वो दोनों एक दम चुस्त लगती थी ! हो क्यों ना ? मेहनत तो मुझे ही करनी पड़ी थी !

वो कह रही थी- देख बहनचोद, अब क्या हालत होती है तेरी !

उनके मुँह से गाली सुनकर अजीब सा लगा पर अच्छा भी लग रहा था ! इतनी बिंदास थी दोनों कि गाली पर गालियाँ दिए जा रही थी। अब मेरे से भी नहीं रहा गया, मैंने भी कहा- साली रंडियों, देख तेरा भाई कैसे आराम से सो रहा है और तुम दोनों ने मुझको ही मुर्गा बना रखा है ! साली अपने भाई का भी कुछ ख्याल करो !

टीना ने कहा- उससे तो हम रोज ही चुदते हैं और भाभी आने के बाद भी चुदेंगी पर तू कहाँ फिर मिलेगा !

मैंने कहा- यह कोई समस्या नहीं है, जब भी तुम लोग याद करोगे, मैं हाज़िर हो जाऊंगा !

फिर दोनों ने मिलकर पाउडर लेकर मेरे सारे बदन पर ढेर सारा लगा दिया केवल लंड और मेरे निपल को छोड़ कर !

मैं कुछ समझ नहीं पाया कि वो क्या कर रही हैं ! इस तरह वो दोनों मुझसे लिपट कर लेट गई ! मैं फिर से उत्तेजित होने लगा क्योंकि टीना मेरे चुचूक को चूस रही थी और रीना मेरा लंड चूस रही थी! हम लोगों के बदन पावडर की वजह से इस तरह रगड़ रहे थे कि मालूम ही नहीं होता था कि बदन से बदन रगड़ रहे हैं ! मैं मन ही मन सोच रहा था कि हम लोगों ने इतने दिन बेकार ही किये ! जो मजा आज मिला मानो मुझे स्वर्ग ही मिल गया ! मैंने सोच लिया कि आगे हम लोग भी इसी तरह का लुफ्त उठाएंगे !

इसके बाद हम लोगों ने एक बार जमकर चुदाई की। तब तक तीन बज चुके थे और हम सो गए !

दूसरे दिन जीजू ऑफिस नहीं गए, हम लोग मस्ती कर ही रहे थे कि जीजू ने कहा कि वो अभी आते हैं, और चले गए !

जब वापस आये तो साथ में बीयर की बोतलें और एक बोतल व्हिस्की की थी। जीजू ने कहा कि चलो सब बीयर पीते हुए चुदाई का मजा लेते हैं, रात को व्हिस्की पीकर चुदाई करेंगे!

फिर क्या था- बीयर की बोतल खुल गई और हम सब बीयर पीते हुए आपस में छेड़खानी करते करते एक दूसरे के कपड़े उतारने लगे। सबसे ज्यादा पहल टीना कर रही थी !

जैसे ही कपड़े उतरे, टीना मेरी गोद में और रीना जीजू के गोद में बैठ गई ! दोनों लंड से खेल रही थी हम उनकी चूचियों से !

अचानक टीना को क्या हुआ मेरी गोद से उतर गई, मैंने पूछा- क्या हुआ ? कहने लगी- साले, चुप भी रहेगा कि नहीं ! देख मैं क्या करती हूँ !

कहकर मेरे लंड पर बीयर डालकर चूसने लगी। मैं भी कहाँ कम था, तुंरत उसकी चूचियों पर बीयर डाल कर मजा लेने लगा !

इधर जीजू और रीना क्या कर रहे थे, उसका हमें होश नहीं था !

और हमे करना भी क्या था ! बीयर पीते पीते एक राउंड चुदाई का हुआ ! फिर कुछ देर आराम करके फिर चुसाई-चुदाई में लग गए !

टीना और रीना कह रही थी- संजय, तेरा लौड़ा इतना मस्त है कि जी चाहता है हर समय चूत में घुसाकर ही रखूँ !

मैंने कहा- हम तो आपके गुलाम हैं ! आप जैसा चाहेंगी, वही होगा !

उन्होंने कहा- साले यहीं आकर रह जा और दिन रात हम लोगों की चूत की सेवा कर !

पर यह मुश्किल था, मैंने कहा- दीदी के आ जाने बाद तो आना जाना लगा ही रहेगा तुम लोगों की सेवा करने !

इसके बाद एक जबरदस्त चुदाई का राउंड हुआ और हम सब सो गए ! रात को जीजू ने अपने पापा मम्मी को कहा- आप लोग खाना खाकर सो जाओ, हम देर से खाना खायेंगे !

वो बेचारे क्या समझते, खाना खाकर सो गए ! फिर चालू हुआ हम लोगों का प्रोग्राम ! फिर व्हिस्की की बोतल खुली, एक एक पैग सबने आपस में चुहलबाजी करते हुए पिया। फिर तो थोड़ा सरुर आते ही एक दूजे से भिड़ गए !

फिर व्हिस्की पीते हुए लंड चुसाई और चुदाई चालू हो गई ! टीना ने कुछ जायदा ही पी ली थी इसलिए वह बहुत मस्ती से बढ़-बढ़ कर चुदवा रही थी, साथ ही साथ कह रही थी- ऐसा कोई मर्द नहीं जो टीना को ठंडी कर सके !

मुझे गुस्सा तो बहुत आ रहा था पर कोई उपाय नहीं था !

खैर रात भर चुदाई के बाद सुबह रवाना होने के पहले मैंने टीना को कहा- इस बार जब आऊंगा तो ऐसा चोदूंगा दोनों को कि दोनों जिन्दगी भर याद रखोगी !

उसने कहा- तेरे जैसे बहुत देखे हैं !

जाते जाते दोनों ने मुझे चुम्मियों से भर दिया और एक बार मेरा अमृतरस पीने की इच्छा प्रकट की। भला मैं उन्हें निराश कैसे कर सकता था !

दोनों ने चूस चूस कर मेरा रस मजे ले ले कर पिया और मैं उनकी चूचियाँ दबा कर चल पड़ा।

उन्होंने कहा- संजय, तुम्हारी बहुत याद आएगी !

मैंने कहा- मैं तुम दोनों को कैसे भूल सकता हूँ, जल्द ही आने की कोशिश करूँगा !

इस प्रकार दो दिन मस्ती से गुजार कर घर लौट आया ! घर आकर मैंने सीमा दीदी और विजय भैया को सारी बातें बताई और हम तीनों ने कई दिनों तक उसी तरीके से काफी मजे किये !

आपको कैसी लगी कृपया मुझे मेल करें ! Hindi Sex Stories

मेरी पत्नी और मेरा एक दोस्त एक ही ऑफिस में काम करते हैं।

कई बार ऑफिस से वापस आते वक्त मेरा दोस्त मेरी पत्नी को घर ड्रॉप करता है।

जिस दिन पत्नी को ऑफिस से आने में देर हो जाती है तो मैं उससे कहता हूँ कि मैं उसे पिक कर लूंगा तो वह कहती है कि आप परेशान मत होइए मैं उसके (मेरे दोस्त) साथ आ जाऊँगी।

मैं अपनी पत्नी पर शक नहीं कर रहा हूँ लेकिन आजकल मुझे यह बात खटकने लगी है।

उन दोनों का ऑफिस से साथ आना मुझे पसन्द नहीं आता, या यों कहूँ कि मैं उन दोनों के साथ साथ होने पर भरोसा नहीं कर पा रहा हूँ।
क्या मेरा इस तरह से सोचना सही है कि उन दोनों के बीच कुछ चल रहा है।

या मुझे इस बात को ज्यादा गम्भीरता से न लेते हुए भूल जाना चाहिए।

क्या यह मेरा वहम है?

क्या मैं अपनी बीवी को लेकर कुछ ज्यादा पोजैसिव हो रहा हूँ?

मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि मैं क्या करूँ?

अगर आपके पास कोई सुझाव, कोई सलाह हो तो जरूर बतायें।

हो सकता है, आपकी एक छोटी-सी राय हमारी जिंदगी की दिशा बदल दे।

Hindi Sex Stories

प्रेषिका : सोनू वर्मा

मैं अपना पहला सेक्स का अनुभव लिख रही हूं। उस समय मैं बी ए के दूसरे साल में पढती थी। सहेलियों की बातों से मुझे भी लड़कों से बात करने की इच्छा होने लगी थी। मैं दूसरी लड़कियों की तरह बनने संवरने लगी थी, मेक अप भी करने लगी थी। जब मैं कोलेज में पैन्ट पहन कर जाती थी तो उसमें से मेरे चूतड़ों की गोलाइयां बड़ी चिकनी और सुन्दर उभर कर दिखती थी। लड़के चोरी चोरी तिरछी निगाहों से मेरी गाण्ड को निहारते थे। जीन्स में मेरे बदन के कटस उतने उभर कर नहीं आते थे। लड़कों को इस तरह उकसाने में मुझे मज़ा भी आता था। मेरे मन में भी चुदाने की इच्छा होती थी कि सभी सहेलियां तो मज़े लेती हैं और मैं सिर्फ़ सुनती हूं।

मुझे कम्प्यूटर टीचर बहुत अच्छे लगते थे। वो नए नए आए थे, सुन्दर थे। उनके बाल हवा में उड़ते थे तो मैं देखती रह जाती थी। मैं उनके पास पास रहने की कोशिश करती थी। उन्हें सभी लोग अजय सर कह कर बुलाते थे। मेरी अदाओं को अजय समझता तो था, कहता कुछ नहीं था। पर चोरी चोरी मेरे स्तनों के उभार को और चूतड़ों की गोलाइयों को देखता था। मुझे लगा कि ये सर तो पट जाएंगे…थोड़ी कोशिश तो करनी पड़ेगी ही।

एक दिन मैंने उनसे पूछा- सर ! मैं आपसे ट्यूशन पढना चाहती हूं, क्या आप मुझे कम्प्यूटर सिखाएंगे?

“हाँ हाँ जरूर ..अपने पापा को बता देना…”

“पापा ने ही कहा है ..”

“कब से आऊँ ”

“कल से…मोर्निंग 8.30 पर ”

“ थैंक यू सर ”

मैं दूसरे दिन छोटी स्कर्ट पहन कर और अन्दर एक छोटी सी पेंटी पहन कर बड़ी तैयारी के साथ इंतज़ार करने लगी. पेंटी इतनी छोटी थी कि झुकने पर पूरी चूतड दिख जाती थी. टॉप ढीला सा ..जो ऐसा था कि आधे बूब्स तो जरा सी कोशिश करने से ही नज़र आ जाते थे. मुझे लगा अजय के लिए इतना बहुत था.

अजय सर 8.30 पर आ गए. मेरे पापा ने उन से बात की…फिर मुझे बैठक मैं बुला लिया.

पापा मम्मी ऑफिस की तैयारी करने लगे. अजय ने मुझे देखा तो वो देखता ही रह गया.

उसे घूरते देख कर मैं मन ही मन मुस्करा उठी. तीर निशाने पर लगा था.

मैंने कहा – “सर, आज कहाँ से शुरू करें…”

“हाँ हाँ बैठो ..पहले बुक्स ले आओ ..”

“मैं बुक लेकर आयी और सर के सामने उसे गिरा दिया. फिर उसे उठाने के लिए मैंने चूतड अजय की तरफ़ कर दिए और झुक गयी. मेरी गांड की दोनों गोलाईयां और छोटी सी पैंटी उसे दिखने लगी होगी. मैंने उसे तिरछी नज़र से देखा…तो मेरे चूतड की तरफ़ ही देख रहा था… उसे पसीना आ गया था… मेरा दिल भी ये सोच कर धड़कने लगा कि उसने पूरा देख लिया है. मैंने टेबल पर किताब रख दी.

मेरी नज़र उसकी पेंट पर चली गयी, जहाँ उसका लंड खड़ा हो रहा था. वो उसे दबा कर छुपाने लगा. उसने पढाना शुरू किया फिर मुझे कंप्यूटर के पास ले गया. उसने कहा “अब कंप्यूटर पर प्रैक्टिकल कर के बताता हूँ… सीट पर बैठो…”

छोटा गोल स्टूल रखा था, मैं थोडी सी गांड पीछे कि तरफ़ निकाल कर बैठ गयी.

वो कंप्यूटर पर कुछ कुछ बताता जा रहा था, पर मेरा ध्यान अजय पर था. अजय समझ गया था कि मेरा ध्यान पढ़ाई में नहीं है. वो मेरी अदाओं से समझ गया था कि मैं उस से कुछ और ही चाहती हूँ. वो भी गरम होने लगा था. अब उसके इरादे साफ़ नज़र आने लगे थे. उसने अपनी टांगो से बार बार मेरे चूतडों को टच करना शुरू कर दिया.

मैं सिहर उठी…अब मैं जान गयी थी कि अजय मूड में आ गया है. अब वो मेरे हाथ के ऊपर हाथ रख कर और छू कर की बोर्ड और मोउस पर बताने लग गया था. अचानक मेरी नज़रें उसके चेहरे पर पड़ी तो देखा कि वो तो मेरी ढीली टॉप में से मेरे बूब्स को झांक कर देख रहा था. मैंने थोड़ा और अपना एंगल ऐसा कर दिया कि उसे देखने में कठिनाई न हो.

मैंने उसके लंड कि तरफ़ देखा तो वो भी खड़ा हो चुका था. अब वो कभी कभी मेरे कंधे के पास अपना लंड दबा देता था. मैं उसे ये सब करने दे रही थी. उसके लंड का मोटापन और साइज़ तक महसूस होने लगा था. ये सब जान कर मेरे बदन में कांटे खड़े होने लगे. मैंने भी अपना कन्धा ऐसे उछाला कि उसका लंड मेरे कन्धों से भिंच गया. उसके मुंह से आह निकल गई।

इतने में पापा ने आवाज़ लगाई- “हम जा रहे हैं…कोलेज़ जाओ तो घर ठीक से बंद कर देना।”

मैं उठी और बाहर खिड़की पर आकर उन्हें कार में जाते देखने लगी। अब घर में और कोई नहीं था, यह सोच कर मेरे दिल की धड़कन बढ गई। अजय भी खिड़की पर आ गया था। वो मुझे ही गहरी नज़रों से निहार रहा था. उसकी आंखों में सेक्स के डोरे नज़र आ रहे थे। मैंने सोचा अभी ये गरम है…मौका नहीं छोड़ना चहिए। पर हिम्मत नहीं हो रही थी।

अजय मेरे पास खड़ा हो कर अब इस तरह बाहर झांकने लगा कि उसका एक हाथ मेरे चूतड़ों पर आ गया था। उसने अपना हाथ हटाया नहीं। मुझे लगने लगा… हाय ! मेरे चूतड़ दबा दे ! मैं रोमांचित होने लगी। मैंने सोचा कि करने दो उसे…अजय ने शुरूआत कर दी थी, इसलिए मैं चुप ही खड़ी रही। मैंने उसकी तरफ़ मुस्कुरा के देखा। उसने भी नज़रें मिला दी और लगातार देखता ही रहा। उसकी हिम्मत भी बढी। उसने मेरी गाण्ड की गोलाइयों को सहलाना शुरू कर दिया।

मुझे मज़ा आने लगा था। मेरी इच्छा हो रही थी कि अजय कस के मेरे चूतड़ दबा दे। हम दोनो की नज़रें एक दूसरे में डूबने लगी। अजय भी मुस्कुराने लगा।

अचानक उसने नीचे से मेरी स्कर्ट में हाथ डाल कर मेरा एक चूतड़ पकड़ लिया।

मैंने अजय की तरफ़ एक बार प्यार भरी नज़र से देखा्। वो भी मुझे देख कर और पास आने लगा। आंखों आंखों में इशारे होने लगे। फ़िर उसने मुझे खिड़की से अन्दर खींच लिया… और मैं उसकी बाहों में खिंचती चली गई। उसने धीरे से कहा,” नेहा…अब मुझ से सहा नहीं जा रहा है।”

उसने अपने होंठ मेरे नरम नरम होंठों पर रख दिए। उसके होंठ भी नरम नरम थे। वो मेरे होंठ चूसने लगा।

मैंने अपनी अदाएं भी दिखानी शुरू कर दी। मैंने कहा, ” यह क्या कर रहें हैं सर आप ! सर ! मुझे छोड़ो ना…! अब नहीं करो…शरम आ रही है मुझे…”

मेरी बात अनसुनी करके उसने अपनी बाहें मेरी कमर में डाल कर मेरी गाण्ड की दोनो गोलाइयों को पकड़ लिया और जोर जोर से दबाने लगा।
“आह… नहीं… नहीं करो…बस करो अब… सी स्स्…बस अजय…!

मैं मुड़ कर जाने लगी तो फ़िर पीछे से खींच लिया… और मेरी छोटी सी स्कर्ट उठा कर कमर से कस लिया… उसके दोनों हाथ मेरे स्तनों पर आ गए और उनको मसलने लगे। उसका कड़क लण्ड मेरी गाण्ड में घुसा जा रहा था। मैं काम-पिपासा से जल उठी। मेरी पैन्टी तो नहीं के बराबर थी।

उसके लण्ड क स्पर्श चूतड़ों में बड़ा आनन्द दे रहा था।

मुझे पता चल गया था कि अब मैं चुदने वाली हूं। इसी समय के लिए मैं ये सब कर रही थी और इस समय का इन्तजार कर रही थी। उसके हाथ मेरे कठोर अनछुए स्तनों को सहला रहे थे, बीच बीच में मेरे चूचकों को भी मसल देते थे और खींच देते थे।

“आह्… सी सी मैं मर जाऊंगी… सर ! ”

“मुझे सर नहीं अजय कहो… तुम्हारे निप्पल कैसे सीधे और कड़े हैं… ”

अजय को उभरी जवानी मसलने को मिल रही थी… और वो आनन्द से पागल हुआ जा रहा था।

उसका लण्ड और जोर मारने लगा और लगभग मेरी गाण्ड के छेद पर पहुंच चुका था। मेरी छोटी सी पैन्टी उसके लण्ड को रोकने में कामयाब नहीं हो पा रही थी। मैं चुदवाने को तड़प उठी। वो तो मदमस्त हो कर ठोकर पर ठोकर मारे जा रहा था। उसने मेरी पैन्टी नीचे खींच दी और अपनी पैन्ट भी उतार दी और अपना लण्ड मेरी गाण्ड के छेद पर लगा दिया। मैंने उसकी तरफ़ देखा। फ़िर आंखों ही आंखों में इशारे हुए। उसकी अनकही भाषा मैं समझ गई। मैं घोड़ी बन गई। उसका लण्ड मेरी गाण्ड के छेद पर दबाव डालने लगा… मैं खुशी में झूम उठी। मेरी गाण्ड चुदने वाली थी। उसकी आंखें नशे में बंद हो गई थी। अब मैंने अपने आप को उसके हवाले कर दिया। वो मेरे बूब्स भींच रहा था। मैं मस्त हुए जा रही थी…आंखें बंद कर ली और दूसरी दुनिया में आ गई।

उसी समय मेरी गाण्ड पर कुछ ठण्डा ठण्डा लगा। मैं समझ गई कि उसने मेरी गाण्ड में थूक लगाया है। मैं सोच रही थी कि अब मेरी गाण्ड पहली बार चुदेगी… इतना सोचा ही था कि उसने जोर लगा कर अपनी सुपारी मेरे छेद में घुसा दी। मेरे मुंह से आनन्द और दर्द भरी चीख निकल गई।उसने सुपारी निकाल कर फ़िर जोर से धक्का मार दिया। इस बार और अन्दर गया।

“अजय ! दर्द हो रहा है…”

उसने कुछ नहीं कहा और थोड़ा सा निकाल कर जोर से धक्का मारा। उसका लण्ड पूरा मेरी गाण्ड में समा गया। मैं चीख उठी,” अजय बाहर निकालो… जल्दी… बहुत दर्द हो रहा है… ”

पर उसने तेजी से धक्के मारने चालू कर दिए। मैं कहती रही पर उसने मेरी एक ना सुनी। अब मुझे मज़ा आने लगा। उसने अब लण्ड निकाल कर पीछे से खड़े खड़े ही मेरी गीली चूत में घुसा दिया। पहली बार कोई लण्ड मेरी चूत में घुसा था। मुझे इसी का इन्तजार था। मुझे सच में मज़ा आने लगा और मेरे मुंह से निकल ही गया- अजय ! आह… मज़ा आ रहा है… जरा जोर से चोदो ना…

“हां हां मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा है… ये लो…”

उसने एक धक्का जोए से मारा, मेरे मुंह से फ़िर चीख निकल गई,” हाइ अजय मैं मर गई”

और जमीन पर थोड़ी खून की बूंदें टपक गई। मैं घबरा गई…”अजय ये क्या हुआ…! ये खून…?”

उसने प्यार से मेरी पीठ सहलाई और कहा,” नेहा ! मैं तो समझा था कि तुमने पहले चुदवा रखा है… पर तुम तो पहली बार चुदी हो… सोरी ! मुझे पता होता तो मैं धीरे धीरे ही करता…”

मुझे लगा कि कहीं राजु मुझे चोदना बंद ना कर दे, मैंने एकदम कहा- “नहीं नहीं मज़ा आ रहा है… चोद दो ना… हाय रे…अब आगे तो बढो कुछ्…”

“हां दर्द तो अभी ठीक हो जाएगा।”

अजय ने फ़िर से अपना लण्ड मेरी चूत में डाल दिया और हौले हौले धक्के मारने लगा। मुझे अब चूत में मीठी मीठी गुदगुदी होने लगी- मेरे मुंह से निकल गया- अजय… लगा ना जोर से धक्का… और जोर से… अब मज़ा आ रहा है।

अजय भी तेजी से करना चाहता था। उसने मुझे गोदी में उठाया और बिस्तर पर पटक दिया और कूद कर मेरे ऊपर चढ गया। मेरी चूत बहुत ही चिकनी हो गई थी और बहुत सा पानी भी छोड़ रही थी। उसका लण्ड फ़च से अन्दर घुस गया और घुसता ही चला गया। मेरे मुंह से सिसकारी निकल गई- आह्…घुस गया से… स्…स्… अब रूकना नहीं… चोद दो मुझे…

अजय ने अपनी कमर चलानी शुरू कर दी। मैं भी नीचे से अपने चूतड़ों को उछाल उछाल कर चुदवाने लगी।

हाय से मज़ा आ रहा है… लगा… जोर से लगा… ओई उ उईई

हाँ…मेरी रानी…ये ले…येस…येस…पूरा ले ले… सी…सी…”

“अजय…मेरे अजय…हाय…फाड़ दे…मेरी चूत को… चोद दे…चोद ..दे… सी…

सी…आअई ईएई… ऊऊ ऊऊ ओएई ईई…”

“कैसा मज़ा आ रहा है… टांगे और ऊपर उठा लो…हाँ…ये ठीक है…”

उसने अपने आप को और सही पोसिशन में लेते हुए धक्के तेज कर दिए…

मेरे चूतड़ अपने आप ही तेजी से उछल उछल कर जवाब दे रहे थे .

जोश के मारे मैं उसके चूतड हाथ से दबाने लगी। मैं उसे अपने से चिपका कर थोडी देर के लिए उसके होंट चूसने लगी। साथ ही मैन अपनी एक उंगली उसकी गांड के छेड़ मैं घुसा दी.

…धीरे से… डालना…”वो हांफता हुआ बोला… मैंने और उंगली अन्दर घुसेड दी… और अन्दर बाहर करने लगी। मैंने महसूस किया…कि उंगली गांड में करने से उसकी उत्तेजना बढ गयी थी… मुझे महसूस हुआ कि उसका लंड चूत के अन्दर ही और कड़कने लगा था। मैंने धीरे से अपनी चूत सिकोड़ ली ..उसका लंड मेरी चूत में भिंच गया

…वो सिसक उठा…“नेहा… हा…मेरा निकल जाएगा…”

“तो फिर चोदो ना… रुक क्यूँ गए…”

“ पहले मेरा लंड तो छोडो…हाय…निकल जाएगा ..ना…”

मैंने चूत ढीली छोड़ दी…मैंने उसकी गांड से उंगली भी बाहर निकल दी। उसने अब मेल इंजन की तरह अपना लंड पेलना शुरू कर दिया .
मुझे भी अब तेज गुदगुदी उठने लगी…हाय ..हाय…मर गयी…हाय…चुद गयी… मेरे रजा… चोद दे… अरे…अरे… लगा .. जोर से… मेरे रजा .. फाड़ डाल…अआया…आ अ अ…एई एई एई…मैं गयी…”

“रुक जाओ…अभी नही…”

“मैं गयी… मेरा पानी निकला…निकला…निकला…हाय ययय ययय… हाय राम…”मेरी साँस फूल गयी…और मैंने जोर से पानी छोड़ दिया…

“अरे नही…ये क्या… तुम तो ..हो गयी…”

उसने मुझे तुंरत उल्टा करके…मेरी गांड पर सवार हो गया…मुझे थोडी ही देर मैं लगा कि उसका लंड मेरी गांड के छेद पर था. उसने जोर लगाया और लंड गांड कि गहराइयों में उतरता चला गया.

मेरी चीख निकल गयी…“अजय…ये क्या कर रहे हो…निकाल लो प्लीज ..”

प्लीज्… करने दो… मैं झड़ने वाला हूं…

नहीं नहीं लण्ड निकालो…

उसने सुनी अनसुनी कर दी और धक्के लगाता ही गया। मैं दर्द से चीखती ही रही“ बस बस छोड़ दो मुझे, छोड़ दो ना… छोड़ दो…”

मुझे मालूम था…वो मुझे ऐसे नहीं छोड़ने वाला है, मैं तकिये में मुंह दबा कर टांगें और खोल कर पड़ गई। वो धक्के मारता रहा, मेरी गाण्ड चुदती रही। फ़िर…“ आह मेरी… रानी… मैं गया… मैं गया… हाऽऽऽ स्स निकला आ आ आह म्म्म हय रए…”

मेरी गाण्ड में उसका गरम गरम लावा भरने लगा। वो मेरी पीठ पर निढाल हो कर गिर गया…मैंने नीचे से अपनी गाण्ड हिला कर उसका ढीला हुआ लण्ड बाहर कर दिया। उसका सारा माल मेरी गाण्ड के छेद से निकल कर बिस्तर पर बहने लगा। अजय करवट लेकर बगल में आ गया।मैं उठी और देखा, उसका पूरा लण्ड मेरे पानी और उसके वीर्य से चिपचिपा हो गया था… मेरी गाण्ड भी वीर्य से लथपथ थी…

मैं सुस्ती छोड़ नहाने चली गई। जब तक नहा कर आई तो अजय जा चुका था। एक कागज की स्लिप पर कुछ लिखा था-

“सोरी नेहा…मुझे माफ़ कर देना…मैं अपने आप को रोक नहीं पाया… अगर माफ़ कर दो तो कोलेज में मुझे माफ़ी की मन्जूरी दे देना…अजय”

मैं मुस्कुरा उठी। उसे क्या पता था कि ये उसकी गलती नहीं थी…

मैं खुद ही उस से चुदवाना चाहती थी। बस डर लग रहा था कि ये पहली चुदाई है…जाने क्या होगा.. पर अब मुझे लग रहा है कि ये तो जिन्दगी का लुत्फ़ उठाने का एक शानदार तरीका है।

पाठको ! यह कहानी कैसी लगी?

प्रेषक : मोहित Antarvasna Sex Stories

मैं मोहित उम्र 37 साल Antarvasna Sex Stories गुड़गाँव निवासी एक बार फिर आपके सामने अपनी नई कहानी के साथ हाजिर हूँ।

जैसे कि मैंने आपको बताया था कि मेरा अपनी पत्नी के साथ महीने में लगभग एक या दो बार सैक्स हो पाता है। इसलिए मैं और मेरा एक दोस्त देवेन्द्र कभी-कभी घर में दिन में लड़की लाकर या कभी-कभी बाहर किसी काल-गर्ल के साथ सैक्स करते थे। मेरा दोस्त देवेन्द्र एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में सेल्स-मेनेजर है। वो हफ्ते में अकसर 3-4 दिन बाहर रहता है।

सोनिया से मेरी मुलाक़ात उसी ने करवाई थी। मेरे दोस्त को सोनिया बस में मिली थी। बस में ही उनका परिचय हो गया। रात काफी हो गई थी, इसलिये मेरे दोस्त ने सोनिया को घर तक छोड़ दिया। अगले दिन उसने मुझे सोनिया के बारे में बताया और यह भी बताया कि सोनिया की शक्ल मेरी एक पुरानी गर्ल-फ़्रेंड से मिलती है। मैं सोनिया से मिलने को बेचैन हो गया। मैंने मेरे दोस्त को सोनिया से मिलवाने के लिये कहा।

उसने सोनिया को फोन किया। सोनिया ने शाम को मार्केट में मिलने का वादा किया। शाम को हम दोनों सोनिया से मार्केट में मिलने गये। सोनिया को देख कर मैं वाकई हैरान रह गया। उसकी शक्ल मेरी एक पुरानी गर्ल-फ़्रेड रेखा से मिलती-जुलती थी। अगले दिन मैंने सोनिया को फोन किया और उसे मिलने को कहा। वो मिलने आई और हमने काफी देर बातचीत की और गाड़ी में घूमे। धीरे-धीरे सोनिया से मेरी मुलाक़ातें बढ़ने लगी। एक दिन मैंने सोनिया को फोन करके घर बुलाया।

सोनिया घर आई। हम दोनों ड्राइंगरूम में बैठ कर बाते करने लगे। फिर मैंने सोनिया से कुछ लेने को कहा। सोनिया ने मना किया तो मैंने सोनिया को कहा कि थोड़ी-थोड़ी बियर लेते है। सोनिया मान गई। मैंने बेडरूम में बियर व स्नैक्स का इंतजाम कर दिया। फिर हम दोनों बेडरूम में बैठ कर बियर पीने व बातचीत करने लगे। सोनिया ने जीन्स व टी-शर्ट पहनी थी। जीन्स की वजह से उसे बैड पर बैठने में दिक्कत हो रही थी। बार-बार वो अपने पैर इधर-उधर कर रही थी।

मैंने सोनिया को कहा कि जीन्स उतार कर आराम से बैठ जाए। सोनिया मना करने लगी। मैंने ज़िद की और लगभग जबरदस्ती उसकी जीन्स उतार दी। सोनिया लाल रंग की पैंटी में अपने पैर सिकोड़ कर बैठ गई। हम दोनों फिर से बियर पीने व बातचीत करने लगे। एक बियर खत्म होते ही मैं दूसरी खोलने लगा। सोनिया ने मना किया तो मैंने सोनिया को कहा कि थोड़ी-थोड़ी और लेते है। सोनिया मान गई।

जब दूसरी बियर की बोतल भी खत्म हो गई तो मैंने स्नैक्स की प्लेटें उठा कर अलग रख दी और सोनिया को छेड़ने लगा।

सोनिया ने कहा- क्या कर रहे हो?

मैं बोला- मौके का फायदा उठा रहा हूँ।

मैंने सोनिया को खींच कर अपनी गोद में लिटा लिया। फिर मैं सोनिया के बालों में हाथ फिराने लगा। फिर मैं उसके गालों पर हाथ फिराने लगा। फिर मैं उसकी टी-शर्ट के ऊपर से उसके स्तन दबाने लगा। सोनिया ने अपनी आंखे बंद कर रखी थी। फिर मैं उसकी टी-शर्ट के गले के अन्दर से हाथ डाल कर उसके सख्त हो चुके स्तन दबाने लगा।

फिर मैं उसकी टी-शर्ट को उतारने लगा तो सोनिया बोली,”क्या करते हो? प्लीज इसे मत उतारो। मुझे डर लगता है।”

मैंने कहा,”डरने वाली क्या बात है।” कह कर मैं फिर उसकी टी-शर्ट को उतारने लगा।

सोनिया बोली,”कोई आ जाएगा?”

मैंने कहा,”कोई नहीं आएगा !” कह कर मैंने ज़िद की और लगभग जबरदस्ती उसकी टी-शर्ट उतार दी।

सोनिया के गोरे-गोरे वक्ष गुलाबी ब्रा में फँसे थे। मैंने उठ कर मेन-दरवाज़ा बंद कर दिया। फिर मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिये और सिर्फ जौकी में सोनिया से लिपट गया। मैंने सोनिया का हाथ पकड़ कर उसे अपने साथ लिटा लिया। फिर मैंने लाईट बंद कर दी। कमरे में लाल रंग का नाइट लैम्प जल रहा था।

मैंने सोनिया को अपनी बाँहो में भर लिया। मैंने अपनी टांगे सोनिया की टांगों पर रख दी और मैंने अपने जलते हुए होंठ सोनिया के होंठों पर रख दिए। फिर मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। सोनिया ने मुझे अपनी बाँहो में कस लिया। मेरे हाथ सोनिया के जिस्म पर फिर रहे थे। कुछ देर बाद मैंने सोनिया को बैड पर सिधा लिटा दिया। फिर उसके चिकने पेट पर अपने जलते हुऐ होंठ रख दिए।

फिर मैं उसके नरम-नरम गोरे-गोरे पेट को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। सोनिया के मुँह से आह निकलने लगी। लगा। फिर मैं उसकी ब्रा के ऊपर से उसकी चूचियों को दबाने लगा। सोनिया ने अपनी आंखें बंद कर रखी थी। फिर मैंने उसकी ब्रा के अन्दर से हाथ डाल दिया।

कुछ देर बाद मैंने उसकी ब्रा भी उसके तन से जुदा कर दी। सोनिया ने कोई विरोध नहीं किया, उसके गुलाबी निप्पल को हल्के-हल्के मसलने लगा, फिर मैं अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। सोनिया के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी। फिर मैं उसके पेट पर हाथ फिराते हुए उसकी पैन्टी के ऊपर से पाव रोटी की तरह उभरी हुई उसकी चूत को दबाने लगा। सोनिया ने अपनी आंखें बंद कर रखी थी। मैं उसकी पैन्टी के अन्दर से हाथ डाल कर उसकी चिकनी और क्लिन-शेव चूत पर हाथ फिराने लगा।

थोड़ी देर बाद मैं उसकी पैन्टी को उतारने लगातो सोनिया बोली “प्लीज इसे मत उतारो।” सोनिया ने मेरा हाथ पकड़ लिया, बोली “नहीं इसे मत उतारो !”

मैंने कहा,”देखो सोनिया हम कुछ करेंगे नहीं ! बस कपड़े उतार कर नंगे एक दूसरे से लिपट कर लेटेंगे और प्यार करेंगे !” कह कर मैंने उसकी पैन्टी उतार दी।

सोनिया का नंगा बदन और उसकी चिकनी चूत लाल रौशनी में नहाकर लाल हो गये। मेरा लण्ड तन कर खड़ा हो गया था और जौकी को फ़ाड़ कर बाहर आने को हो रहा था। मैंने जौकी उतार कर फेंक दी। फिर मैं सोनिया से लिपट गया।

मैंने सोनिया को अपने साथ सटा कर लिटा लिया। मेरा लण्ड तन कर सोनिया की चिकनी चूत से टकरा रहा था। मैं सोनिया की चिकनी टांगों पर हाथ फिराने लगा। फिर मैं सोनिया की चूत पर हाथ फिराने लगा। फिर हाथ फिराते-फिराते मैंने अपनी उँगलियाँ सोनिया की चूत के अन्दर डाल दी। फिर उंगलियों से सोनिया की चूत की फाँक को खोलने और बन्द करने लगा। फिर सोनिया की चूत के दाने को रगड़ने लगा। सोनिया के मुँह से सिसकियां निकलने लगी।

मेरा लण्ड सोनिया की जांघों से रगड़ खा रहा था। मैंने सोनिया का हाथ पकड़ कर अपने लण्ड पर रख दिया। सोनिया ने मेरा लण्ड अपने हाथ में थाम लिया। वो मेरे लण्ड को अपने हाथ में दबाने लगी। मेरा लण्ड तन कर और भी सख्त हो गया था। सोनिया मेरे लण्ड को मुठ्ठी में भर कर उपर-नीचे और आगे-पीछे करने लगी। मैं सोनिया की चूत मारने को बेताब हो रहा था।

मैंने सोनिया को कहा “सोनिया जरा सा इसे ऊपर घिस लूं क्या ? बहुत मन हो रहा है !”

सोनिया कुछ नहीं बोली। मैंने इसे ही सोनिया की हाँ समझ लिया। मैं सोनिया के ऊपर लेट गया। सोनिया का नंगा जिस्म मेरे नीचे दबा हुआ था।

मैं अपने लण्ड को मुठ्ठी में भर कर सोनिया की चूत के दाने के उपर-नीचे करके रगड़ने लगा। फिर मैं अपने लण्ड को पकड़ कर सोनिया की चूत के अन्दर डालने की कोशिश करने लगा। सोनिया ने मेरा लण्ड अपने हाथ में थाम लिया। वो मेरे लण्ड को अपने हाथ में दबाने लगी। फिर सोनिया मेरे लण्ड को मुठ्ठी में भर अपनी चूत के दाने के ऊपर रगड़ने लगी। कुछ देर बाद सोनिया की चूत से कुछ चिकना-चिकना सा निकलने लगा था।

शायद उसको यह करना अच्छा लग रहा था। वो मेरे लण्ड को अपनी चूत से रगड़े जा रही थी। मुझे बहुत ज्यादा उत्तेजना हो रही थी। इसी उत्तेजना में मैंने सोनिया का हाथ पकड़ लिया।

मैंने सोनिया को कहा,”कुछ करें क्या ? बहुत मन हो रहा है। लाओ मैं करता हूँ।”

सोनिया कुछ नहीं बोली।

उसके मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी थी। वह बोली,”प्लीज ऐसे ही करते रहो !”

मेरा लण्ड तन कर और भी सख्त हो गया था। मैं सोनिया को चोदने को बेताब हो रहा था। सोनिया की चूत से फिर से कुछ चिकना-चिकना सा निकलने लगा था। फिर मैं अपने लण्ड को पकड़ कर सोनिया की चूत के अन्दर डालने की कोशिश करने लगा।

सोनिया ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली।”प्लीज कंडोम तो लगा लो ! मुझे डर लगता है।”

मैंने बैड की दमोहित में से कंडोम निकाल कर अपने लण्ड पर लगा लिया। सोनिया ध्यान से मुझे कंडोम लगाते देख रही थी। फिर मैं सोनिया के ऊपर लेट गया। सोनिया का नंगा जिस्म मेरे नीचे दब गया। फिर मैंने अपने जलते हुऐ होंठ सोनिया के होंठों पर रख दिए और मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। उसने भी मुझे अपनी बाँहो में भर लिया। मेरा लण्ड सोनिया की जांघों के बीच फंसा हुआ था। कुछ देर बाद मैंने अपने लण्ड को सोनिया की चूत के सुराख पर लगा दिया और फिर मैंने हल्का सा ज़ोर लगाया। मेरे लण्ड का सुपाड़ा सोनिया की चिकनी चूत में घुस गया। सोनिया के मुँह से आह निकली। उसने मुझे अपनी बाँहो में कस लिया और अपनी आँखें कस कर बन्द कर ली।

मैंने थोड़ा और जोर लगाया। मेरा लगभग आधा लण्ड सोनिया की चूत में घुस गया। सोनिया के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी। फिर मैंने तीसरा और आखिरी धक्का दिया तो मेरा पूरा लण्ड सोनिया की चूत में समा गया। सोनिया के मुँह से जोर से आह निकली और उसने मुझे अपनी बाँहो में पूरी ताकत से कस लिया। मैंने भी सोनिया को अपनी बाँहो में भर लिया। मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा ताकि वो अपना दर्द भूल जाए। मेरा पूरा लण्ड सोनिया की चूत के अन्दर समाया हुआ था। हम दोनों ने एक दूसरे को इस कदर अपनी बाँहो में जकड़ा हुआ था कि हवा भी हम दोनों के बीच से पास नहीं हो सकती थी। सोनिया का नंगा जिस्म मेरे नंगे जिस्म के नीचे दबा हुआ था। मेरी टांगें सोनिया की टांगों के बीच में फँसी हुई थी। मैं सोनिया के माथे पर, फिर आँखों पर तथा फिर गालों को किस करने लगा। सोनिया भी मेरे गालों को किस करने लगी।

कुछ देर हम दोनों इसी तरह से एक-दूसरे को चूमते रहे। फिर मैंने अपने लण्ड को धीरे से सोनिया की चूत से थोड़ा सा बाहर निकाला और फिर अपने लण्ड को धीरे से उसकी चूत में अन्दर घुसा दिया। फिर मैं अपने लण्ड को धीरे-धीरे से उसकी चूत के अन्दर-बाहर करने लगा। कुछ देर बाद सोनिया ने अपनी टांगें ऊपर की तरफ मोड़ ली और मेरी कमर के दोनों तरफ लपेट ली। मैं अपने लण्ड को धीरे-धीरे सोनिया की चूत के अन्दर-बाहर कर रहा था। धीरे-धीरे मेरी रफ़्तार बढ़ने लगी।

हम दोनों बियर के तथा सैक्स के नशे में चूर हो रहे थे। सोनिया को भी मजा आने लगा था। वो मेरे हर धक्के का स्वागत कर रही थी। उसने मेरे हिप्स को अपने हाथों में थाम लिया। अब वो भी नीचे से मेरे धक्कों के साथ-साथ अपने हिप्स उपर-नीचे कर रही थी। जब मैं लण्ड उसकी चूत में से बाहर खींचता तो वो अपने हिप्स ऊपर उठा देती। जब मैं लण्ड उसकी चूत के अन्दर घुसाता तो वो अपने हिप्स पीछे खींच लेती। मैं तेज-तेज धक्के मार कर सोनिया को चोदने लगा।

मैं बैड पर हाथ रख कर सोनिया के ऊपर झुक कर तेजी से उसकी चूत मारने लगा। अब मेरा लण्ड उसकी चिकनी चूत में तेजी से आ-जा रहा था। वो भी अब आँखें खोल कर चुदाई का भरपूर मजा ले रही थी। मैं सोनिया को पागलों की तरह से चोद रहा था। अब मैं पूरी तेजी से सोनिया के ऊपर कूद-कूद कर उसे चोद रहा था। सोनिया इस चुदाई तथा बियर के नशे से मदहोश हो रही थी।

मैंने रुक कर सोनिया से कहा “सोनिया अच्छा लग रहा है क्या?”

सोनिया बोली,”प्लीज रुको मत। तेज-तेज करते रहो।”

सोनिया के मुँह से यह सुन कर मैंने अपनी रफ्तार और बढ़ा दी। मैंने सोनिया के हिप्स को हाथों से जकड़ लिया और छोटे-छोटे मगर तेज-तेज शॉट मार कर सोनिया को चोदने लगा।

सोनिया के मुँह से मस्ती में “ओह्ह्ह्ह्ह्होहोहोह सिस्स्स्स्स्स्सह्ह्ह्ह्ह्ह्ह हाहाह्ह्हआआआआ हा-हा करो-करो ऽअआह हाहअआ प्लीज तेज-तेज करो।”

मैं सोनिया के ऊपर लेट गया और मैंने सोनिया को अपनी बाँहो में भर लिया। फिर मैंने अपने होंठ सोनिया के होंठों पर रख दिए और मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसते हुऐ उसे और तेजी से चोदने लगा। सोनिया भी अपने होंठों से मेरे होंठों को चूसती हुई मजे से चुदाई का मजा ले रही थी। लगभग 5 मिनट तक हम दोनों एक दूसरे के होंठों को चूसते हुऐ चुदाई का मजा लेते रहे।

फिर अचानक सोनिया ने मुझे कस कर अपनी बाँहो में भर लिया। उसने अपने होंठ मेरे होंठों से अलग करके एक जोर से आह भरी। मैं समझ गया कि सोनिया डिस्चार्ज हो गई है। मैं भी डिस्चार्ज होने वाला था, इसलिये मैं तेज-तेज धक्के मार कर सोनिया को चोदने लगा। सोनिया आँखें बंद करके मेरे डिस्चार्ज होने का इंतजार कर रही थी। लगभग 2 मिनट तक सोनिया को तेज-तेज चोदने के बाद मैं सोनिया की चूत के अन्दर कंडोम में डिस्चार्ज हो गया।

कुछ देर तक मैं सोनिया के ऊपर लेटा रहा और अपनी तेज-तेज चल रही सांसों को काबू में आने का इंतजार करता रहा। सोनिया मेरे नीचे आँखें बंद करके लेटी हुई थी। कुछ देर बाद मैंने अपना लण्ड सोनिया की चूत में से बाहर खींच लिया।

फिर उठ कर अपने लण्ड पर से कंडोम उतार कर डस्टबिन में फेंक दिया। फिर अपने अन्डरवियर से अपना लण्ड साफ करके सोनिया की बगल में लेट गया। सोनिया आँखें बंद करके लेटी हुई थी। कमरे की लाल रौशनी में उसका गोरा और नंगा बदन लाल हो कर चमक रहा था। कुछ देर बाद सोनिया मेरी तरफ करवट ली और अपनी टांग मेरी टांगों पर रख दी। फिर वो मेरी छाती के बालों पर हाथ फिराने लगी।

फिर सोनिया बोली,”हो गई तुम्हारे मन की।”

मैंने कहा,”हाँ बहुत अच्छा लगा। मजा आ गया !” कह कर मैंने करवट ले कर सोनिया को अपनी बाँहो में भर लिया। फिर कुछ देर तक हम ऐसे ही लिपटे हुऐ बातचीत करते रहे।

तो दोस्तो, कैसी लगी मेरी यह कहानी ? मुझे मेल करेंगे ना ? Antarvasna Sex Stories

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