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Massage Girl in Shahjahanpur: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Shahjahanpur who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Shahjahanpur that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Shahjahanpur massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Shahjahanpur who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Shahjahanpur massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Shahjahanpur massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Shahjahanpur who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Shahjahanpur employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Shahjahanpur helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Shahjahanpur

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Shahjahanpur at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

Read Our Top Call Girl Story's

रीना अपने घर चली गई। Antarvasna

फिर मैंने रात को Antarvasna रीना के नाम पर दो बार मुठ मारी, बहुत मजा आया… मैं उसी के बारे में सोचता सोचता सो गया… सुबह उठा तो मुझे कमजोरी महसूस हुई जो मुठ मारने के कारण हुई थी..
फिर मैंने अपने सवेरे के सारे काम किये और पढ़ाई करने लगा…

मुझे आज का दिन कैसे भी करके निकलना था क्योंकि कल मुझे रीना को अपने ही घर में चोदना था…
आज शाम को मुझे छोड़ कर घर के बाकी सभी लोग मौसी के घर तीन दिनों के लिए जा रहे थे…

जब सब लोग चले गए तो… मैंने रीना को फ़ोन लगाया और बोला- जान, अभी आ जाओ… अभी मस्ती करेंगे !
बोली- धीरे बोलो ! बॉस पास ही है… हम रात को बात करते हैं..
मैं बोला- ठीक है…
फिर रात को मैंने उसे फ़ोन किया तो पता चला रीना के घर पर सब लोग सो गए, मैंने सोचा तब तो मस्त वाली सेक्सी बातें करुंगा।
फिर मैं बोला- जान, घर पर कोई नहीं है… तुम मेरी रात की पार्टनर बन कर आ जाओ, खूब मस्ती करेंगे…

रीना- जानेमन, तुम आज कल बहुत शैतान हो गए हो… कल तुम्हें बताती हूँ, पार्टनर बन कर दिखाऊँगी… मेरी तो चूत कल से तड़प रही है जबसे तुमने इसे फाड़ा है… कई बार पानी छोड़ चुकी है।
मैं बोला- जानू, मेरा लौड़ा है ही बड़ा मस्त.. तू देखती जा कल क्या मजे आते हैं !

और भी बहुत सारी बाते हुई जो मैं आप लोगों को नहीं बताउंगा… अंत में मैंने पूछा- कल कितने बजे आओगी?
बोली- ऑफिस टाइम दस बजे !
मैं बोला- यार, घर पर यह बोल कर आना कि सहेली के घर जाना है…आठ- साढ़े आठ तक आ जाओ ना ! मैं लेने आ जाउंगा…
रीना- ठीक है आ जाउंगी… बाय !

रात भर मैं रीना के बड़े बड़े स्तनों और उसकी गांड के बारे में सोचता रहा, सोचते सोचते नींद आ गई…
सुबह हुई, मैं जल्दी से तैयार हो गया और रीना को फ़ोन लगाया, उसने फ़ोन नहीं उठाया।
मैंने सोचा कि शायद कोई आस पास होगा…

फिर 15 मिनट बाद फ़ोन आया- 5 मिनट में निकल रही हूँ ! आ जाओ…
मैं उसे लेने चला गया…
हम दोनों घर आ गये घर को मैंने लॉक किया और रीना को उठा कर बेडरूम में ले गया !
वहाँ उसे लेटा कर एक मस्त सा जोरदार चुम्बन लिया..
वो बहुत टाइट जींस और टॉप पहन कर आई थी.. बहुत सेक्सी लग रही थी…

मैंने जल्दी से उसके स्तनों को उसके टॉप और ब्रा से आजाद कर दिया..
फिर उन्हें मुँह में लेकर चूसने लगा…
उसे बड़ा मजा आ रहा था, बोली- करते रहो जान…
मैं बोला- ये ले मेरी जानेमन, तुझे अभी बहुत मजे करवाने हैं !

करीब दस मिनट इस तरह करने पर मैंने उसकी जींस खोल दी, मैंने देखा कि उसकी पैंटी गीली थी…मैं समझ गया कि रीना झड़ चुकी है…
फिर मैं उसकी गीली पैंटी से ही उसकी चूत के छेद में हाथ डालने लगा।
वो बोली- यार, बड़ा मजा आ रहा है…अह आः ओह्ह्ह ऐसी आवाजें आने लगी..

मैं बीच-बीच में उसे चूमने लगा ..
थोड़ी देर बाद वो उठी और उसने मुझे पूरा नंगा कर दिया।
वो मेरा सीना चाटने लगी…
बहुत मजा आ रहा था…

फिर उसने मेरा पूरे आकार में खड़ा हुआ लंड हाथ में लिया और बोली- जान यह तो बड़ा मस्त लग रहा है ! बड़ा मजा आने वाला है !
फिर उसने मेरा लंड अपने हाथ में लेकर उसे मुँह में लिया, फिर वो मुँह में लेकर उसे ऊपर नीचे करने लगी।
थोड़ी देर बाद बोली- यार तेरा कितना बड़ा है ! मेरे मुँह में ही नहीं आ रहा है..

मैं बोला- जान, अभी तेरी चूत को इस बड़े लंड से ही मजे आने वाले हैं…
वो फिर से लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी…

बहुत मजा आ रहा था.. मैं उसके स्तन दबा देता, उसकी चूत में ऊँगली भी डाल रहा था…
15 मिनट बाद रीना बोली- तेरा लंड है या कुछ और? मैं कितनी देर से तेरे पानी का इंतजार कर रही हूँ लेकिन ये है कि निकलता ही नहीं..
मैं बोला- यह मर्द का लंड है ! इतनी जल्दी हार नहीं मानेगा..

करीब दस मिनट बाद मैं झड़ गया और उसने मेरा पानी चाट लिया।
मैं बोला- अब खुश…?
बोली- हाँ ..
फिर मैं बोला- अब तेरी चूत की बारी है…
वो बोली- कब से मैं इसका इंतजार कर रही हूँ ! चलो शुरू हो जाओ…

फिर मैंने उसकी चूत में अपना लंड एक झटके में डाल दिया, वो चिल्लाई- आई माँ ! मर गई ऽऽऽ
मैं बोला- क्या हुआ?
बोली- इतनी तेज़ नहीं घुसाना चाहिए था ! तेरा है भी कितना मोटा और बड़ा…
फिर मैंने बहुत तेज़ गति में उसे चोदना शुरू कर दिया…
वो बोली- बहुत अच्छा लग रहा है !

फिर मैं अपनी गति में उसे चोदने लगा…उसके स्तन भी एक साथ दबाने लगा..
थोड़ी देर बाद वो झड़ गई, बोली- तुम चालू रखो…
करीब बीस मिनट बाद मैं भी झड़ गया।
आगे की कहानी बाद सुनाउंगा..
मुझे मेल करते रहें… Antarvasna

नमस्कार दोस्तो व भाईयो, Antarvasna

आप लोगों के आशीर्वाद और मुस्कान Antarvasna भाभी की दया और प्यार से मैं चोदना सीख गया, पर अभी तक सिर्फ तीन उंगली से उसकी बुर को और लंड से उसकी मुँह को चोदा था। पर दूसरे दिन उसने बुर की चुदाई सिखानी थी। दूसरे दिन उसने मुझे सारा काम जल्दी निपटाने को कहा और अपनी बेटी को भी जल्दी पढ़ा लेने को कहा, क्योंकि मुझे महसूस हो चुका था कि वो साली भोंसड़ी कल से ही गरमाई हुई थी और उस छिनाल की चूत में शायद ज़ोरों की खुज़ली हो रही ती। अतः वह मेरे लंड से चुदवाने को आतुर थी। मैंने भी अपना सारा काम जल्दी कर लिया। शाम में जल्दी उसकी बेटी को पढ़ाया पर लौटते वक्त उसने धीरे से कहा- जल्दी आईएगा, मैं दरवाजा खुला रखूँगी।’

मैं रात में जब उसके घर गया तो वह अपने कमरे में सिर्फ ब्लाउज़ तथा पेटीकोट में लेटी थी। मेरे भीतर जाते ही दरवाजा बन्द कर लिया। मुझे खींच कर अपने बिस्तर पर अपने साथ लिटा लिया और मेरे कपड़े उतारने लगी।
तब मैंने कहा- क्यों भाभी जान, इतनी जल्दी क्यों? क्या बुर में ज़ोरों की खुजली हो रही है क्या? पर पहले तो मैं तेरी चूचियों को दबा-दबा कर फुलाऊँगा और तेरा दूध पीऊँगा। फिर तुम चुदवाना।

पर उसने कहा- पर मेरे प्यारे देवर राजा, देखो ना इस साली बुर को, कैसे तेरे लंड को देखते ही हर-हर करके पानी छोड़ रही है।
इतना कहकर उसने मेरे एक हाथ अपनी पेटीकोट ऊपर करके अपनी बुर पर रख दिया। मैंने देखा, आज उसकी बुर काफी चिकनी लग रही थी। उस पर झाँटें भी नहीं थीं, बुर पूरी गीली थी। मैंने भी अपनी 2 उंगली बुर के भीतर ठेल दिया और एक हाथ से उसकी चूचियाँ ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगा। वह आह मेरे राजा… ज़ोर से… और ज़ोर से… इस बुर में उंगली घुसाओ… आहहहह्! ओहह्ह! आआआस्स सस्सस करने लगी। अब देर मत करो, आओ, मुझे चोदो। प्लीज़ मुझे चोदो।

पर मैं उसे थोड़ा तड़पाना चाहता था और यह जानता था कि चुदाई के समय गन्दी बातें कहने से औरत की काम-वासना और तीव्र हो जाती है; अतः मैंने कहा- भोंसड़ी, साली रंडी, छिनाल, अभी भी तुझे ही अपनी बुर चुदवाने का मन करता है? पर अब तो तेरी बेटी की चुदवाने की उमर है। कभी देखी है गौर से उसकी चूचियाँ, ओह, क्या मस्त है गोल-गोल उसकी चूचियाँ! उसकी बुर भी काफ़ी मस्त होंगी। मेरे लण्ड का दिल तो तेरी बेटी की बुर पर आ गया है। साली छिनाल, पहले वादा करो कि अगली बार अपने साथ अपनी बेटी को भी मुझसे चुदवाओगी, तभी मैं तुम्हें पेलूँगा।

“हाँ मेरे राजा, उस हरामज़ादी की बुर को भी तेरी ही लंड की रंडी बनाऊँगी। अगली बार हम माँ-बेटी दोनों एक साथ तेरे लण्ड से चुदवाएँगी, पर पहले मुझसे ट्रेनिंग लेकर अपने लंड को घोड़े जैसा तो बना लो।”

“आज तेरी चूत तो चोदूँगा ही पर तेरी गांड भी मारूँगा और अपना वीर्य तेरी गांड में ही गिराऊँगा। सुना है कि गांड मरवाने में औरतों को अधिक आनन्द आता है।”

“हाँ मेरे राजा, तुझे जो-जो मन करके करना, पर पहले अपने लंड को मेरी बुर में घुसाओ, अब मत तड़पा, अब सहा नहीं जाता।” यह कहकर उसने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और जल्दी से मेरे खड़े लंड को अपने बुर की छेद पर लगा कर धक्का दिया।

धक्का देते ही मेरा पूरा लंड एक ही बार में उसकी बुर की जड़ तक चला गया। उसने अपनी बुर को सिकोड़ने के लिए पाँव पर पाँव चढ़ा लिया- वाह…!!! आहह्ह… ओहहह! आहहह! आसस्ससस! अब चोदो मेरे राजा, अब देखूँ, कुँवारे लंड में कितनी ताक़त है। मुझे ज़ोर-ज़ोर से हुमच्च-हुमच्च कर चोदो और मेरे बुर का छेद बड़ा कर दो।’ आहहहह! ओहहहह मेरे प्यारे देवर राजा, अपने भर्तार से चुदवा-चुदवा कर इस चूत से 6 को पैदा किया, पर इतना मजा कभी नहीं आया रे, ओहहहह! सचमुच तेरे लंड ने मेरे बुर को धन्य कर दिया। अब तुम पढ़ाई के साथ चुदाई में भी दक्ष हो गए। आह, मेरे राजा, मैं तो झड़ने वाली हूँ। और ज़ोर से उछल-उछल कर चोदो।

मैं चोदने लगा और उसने मुझे ज़ोर से जकड़ लिया और कहा- राजा, मैं तो गईईईईई।
वो कुछ देर में शान्त पड़ गई पर मेरा जोश कम नहीं हुआ था- साली, रण्डी, भोंसड़ी, अब मैं तुझे कुतिया बनाकर तेरी गांड मारूँगा। चल मेरी प्यारी रंडी चुदक्कड़ भाभी, जल्दी से अब तुम कुतिया बन जाओ।

फिर मैं उसे पीछे घुमाकर उसकी गांड में और अपने लंड पर तेल लगाकर, उसकी गांड में घुसा दिया, पर वह चीख़ पड़ी- उईईई आआआआ, धीरे, आज पहली बार गांड मरवा रही हूँ।
पर मैंने यह सुनकर और भी ज़ोरों का झटका देकर पूरा लंड उसकी गांड में ठोंक दिया। वह चीखने लगी, पर उसका मुझ पर कोई असर न हुआ। मैंने उसका मुँह अपने हाथ से बन्द कर चोदना जारी रखा। पर कुछ ही देर में वह मस्ती में आ गई, और अपनी गांड आगे-पीछे करने लगी।
वह बोली कि गांड तो ज्यादा मजा देता है। फाड़ कर मेरी गांड को मेरी चूत से भी बड़ी कर दो।
पर कुछ देर में मेरा भी वीर्य निकलने वाला था, मैंने कहा- भाभीजान, मेरा भी माल निकलने वाला है, इसे तेरी गांड में ही डाल देता हूँ।

मैंने अपना सारा वीर्य उसकी गांड में ही डाल दिया। अब हम दोनों कुछ देर तक एक दूसरे को जकड़े रहे। फिर उसने पानी से मेरा लंड, अपनी बुर, और गांड साफ कर दिया।
वह बोली- राजा, अभी जाने नहीं दूँगी। अभी मन नहीं भरा है।
“रानी, मैं अभी नहीं जाऊँगा।”
और मैंने सारी रात उसे चोदा। Antarvasna

Sex Stories

मेरी यह कहानी एकदम Sex Stories सच्ची है जो आप लोगो को एकदम अपने करीब लगेगी। मेरा अगला सैक्सपिरियन्स चाँद के साथ था। फिर नीना, फिर शैलजा, फिर कल्पना और फिर साक्षी के साथ मेरा सैक्सपिरियन्स हुआ।

पर आज ना जाने क्यों मुझे साक्षी बहुत याद आ रही है। इसलिये मैं चाँद, नीना, शैलजा और कल्पना को साईड करते हुए पहले साक्षी के साथ हुए सैक्सपिरियन्स को आप लोगो के साथ शेयर करता हूँ। उस वक़्त मैं 20 साल का और साक्षी 19 साल की थी।

मेरे माता-पिता दोनों टीचर थे। मेरी एक बडी बहन है। जो मेरे से लगभग दो साल बड़ी है। मेरी बहन की शादी बनारस में हुई।

मेरे जीजाजी एक मल्टी-नैशनल कम्पनी में परचेज़ मैंनेजर हैं। बी.एस सी के बाद मैंने बनारस युनिवर्सिटी में बी.फ़ार्मेसी में प्रवेश लिया। मैं होस्टल में रहने लगा। फिर दीदी ने अकेले होने की वजह से मुझे अपने साथ ही रहने को कहा। मैं होस्टल छोड़ कर दीदी-जीजाजी के साथ में रहने लगा।

दीदी के पड़ोस में एक दुमंज़िला मकान था। जहाँ दो बहनें रहा करती थी। ऊपर बड़ी बहन जो कि मकान मालकिन भी थी और नीचे यानी ग्राउंड-फलौर पर छोटी बहन।
बड़ी बहन लगभग 55 साल की थी और छोटी बहन लगभग 50 साल की थी।

हम उन्हें ऊपर वाली आन्टी और नीचे वाली आन्टी कहते थे। ऊपर वाली आन्टी के तीन बच्चे थे। दो लड़के और एक लड़की। लड़की सबसे बड़ी थी।

तीनों बच्चों की शादी हो चुकी थी और सभी बाहर रहते थे। इसलिये उपर वाली आन्टी-अकल ने अपनी सबसे बड़ी लड़की की लड़की को अपने साथ रखा हुआ था। उसका नाम लीनू था। लीनू बनारस महिला कॉलेज़ में बी.ए. प्रथम वर्ष में पढ़ती थी।
लीनू बहुत ही ख़ूबसूरत थी। खैर वो बाद में…

नीचे वाली आन्टी के भी तीन ही बच्चे थे। दो लड़के और एक लड़की। लड़की सबसे बड़ी थी। तीनों बच्चे पढ़ रहे थे। लड़की का नाम मीनाक्षी था। घर में सब उसे साक्षी कहते थे। साक्षी लगभग 19 साल की थी और बनारस महिला कॉलेज़ में ही बी. एस सी. (बायो) अन्तिम वर्ष में पढ़ती थी।

साक्षी भी बहुत ही ख़ूबसूरत थी मगर लीनू से कुछ कम। मेरी बहन ने भी बी.एस सी. (बायो) की थी। इसलिये साक्षी मेरी बहन से कभी-कभी पढ़ने आती थी। जब मैं दीदी-जीजाजी के साथ में रहने लगा तो दीदी साक्षी को मेरे से पढ़ने के लिये कह देती। साक्षी को मेरा समझाना अच्छा लगता था, इसलिये वो अकसर मेरे से पढ़ने आने लगी।

धीरे-धीरे मैं और साक्षी एक दूसरे को बहुत पसन्द करने लगे। साक्षी से मेरी मुलाक़ातें बढ़ने लगी। ये मुलाक़ातें धीरे-धीरे प्यार में बदल गई।

फिर एक दूसरे को बाँहो में भरना, किस करना, फिर एक दूसरे के अंगों को छूना भी शुरु हो गया। मैं साक्षी के स्तनों को दबाने और सलवार के उपर से उसकी चूत को दबाने और फिर सलवार के अन्दर हाथ डाल कर चूत पर हाथ फिराने तक पहुँच गया। साक्षी भी मेरी पैंट की ज़िप खोल कर मेरा लण्ड निकालने और दबाने तक पहुँच गई।

एक दिन साक्षी घर आई। उसे मुझ से केमिस्ट्री में कुछ पढ़ना था। हम दोनों ड्राइंगरूम में पढ़ने लगे। हमें पढ़ते देख कर मेरी बहन बोली कि तुम लोग पढ़ाई करो और मैं मार्केट हो कर आती हूँ। दो-तीन घंटे तक आ जाउँगी। कह कर वो चली गई। बहन के जाते ही मैं साक्षी को छेड़ने लगा।

साक्षी ने कहा- क्या कर रहे हो।
मैं बोला- मौके का फायदा उठा रहा हूँ।

मैंने साक्षी को खींच कर अपनी गोद में लिटा लिया।

मैं साक्षी के बालों में हाथ फिराने लगा। फिर मैं उसके गालों पर हाथ फिराने लगा। मैं उसके कुरते के ऊपर से उसके स्तन दबाने लगा। साक्षी ने अपनी आंखें बंद कर रखी थी। फिर मैं उसके कुरते के गले के अन्दर से हाथ डाल कर उसके सख्त हो चुके स्तनों को दबाने लगा। फिर मैं उसके कुरते को उतारने लगा।

साक्षी बोली- क्या करते हो! दीदी आने वाली होंगी।

मैंने कहा- वो दो-तीन घंटे तक नहीं आँएंगी। कह कर मैं फिर उसके कुरते को उतारने लगा।

साक्षी बोली- प्लीज़! कोई आ जाएगा।

मैंने उठ कर दरवाज़ा बंद कर दिया। फिर मैं साक्षी का हाथ पकड़ कर उसे बेडरूम में ले आया। मैंने साक्षी को अपनी बाँहो में भर लिया, अपने जलते हुए होंठ साक्षी के होंठों पर रख दिए। फिर मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा।

साक्षी ने मुझे अपनी बाँहो में कस लिया। मेरे हाथ साक्षी के जिस्म पर फिर रहे थे। कुछ देर बाद मैंने साक्षी को बैड पर लिटा दिया। फिर साक्षी का कुरता उपर करके उसके चिकने पेट पर अपने जलते हुए होंठ रख दिए। फिर मैं उसके नरम-नरम गोरे-गोरे पेट को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। साक्षी के मुँह से आह निकलने लगी।

फिर मैं उसके कुरते को उतारने लगा। साक्षी ने कोई विरोध नहीं किया। मैंने उसका कुरता उतार कर फ़ेंक दिया। साक्षी के गोरे-गोरे स्तन गुलाबी ब्रा में फँसे थे। फिर मैं उसकी ब्रा के ऊपर से उसके स्तनों को दबाने लगा। साक्षी ने अपनी आंखें बंद कर रखी थी।

कुछ देर बाद मैंने उसकी ब्रा भी उसके तन से जुदा कर दी। फिर मैं उसके गोरे-गोरे सख्त स्तन दबाने लगा। साथ-साथ उसके गुलाबी निप्पल को हल्के-हल्के मसलने लगा। फिर मैं उसके नरम-नरम गोरे-गोरे स्तनों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। साक्षी के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी।

फिर मैं उसके पेट पर हाथ फिराते हुए उसकी सलवार के अन्दर ले गया। मैं उसकी सलवार का नाड़ा खोलने लगा तो साक्षी ने कोई विरोध नहीं किया।

मैंने उसकी सलवार उतार कर फेंक दिया। साक्षी ने गुलाबी पैन्टी पहनी हुई थी। फिर मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिये और सिर्फ जॉकी में साक्षी से लिपट गया।

फिर मैं उसकी पैन्टी के ऊपर से पाव रोटी की तरह उभरी हुई उसकी चूत को दबाने लगा। साक्षी ने अपनी आंखें बंद कर रखी थी। फिर मैं उसकी पैन्टी के अन्दर से हाथ डाल कर उसकी चूत के बालों पर हाथ फिराने लगा। कुछ देर बाद मैंने उसकी पैन्टी भी उसके तन से जुदा कर दी।

मेरा लण्ड तन कर खड़ा हो गया था और जॉकी को फाड़ कर बाहर आने को हो रहा था। मैंने जॉकी उतार कर फेंक दी। मैं साक्षी की चिकनी टांगों पर हाथ फिराने लगा। फिर मैं साक्षी की चूत के बालों में हाथ फिराने लगा। फिर हाथ फिराते-फिराते मैंनें अपनी उँगलियॉ साक्षी की चूत के अन्दर डाल दी।

फिर उंगलियों से साक्षी की चूत के फाँको को खोलने और बन्द करने लगा। फिर मैं साक्षी की चूत के जी-पॉन्यट को रगड़ने लगा।

साक्षी के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी। साक्षी ने मस्त होकर अपनी आंखें बंद कर ली। मेरा लण्ड साक्षी की जांघों से रगड़ खा रहा था। साक्षी ने मेरा लण्ड अपने हाथ में थाम लिया। वो मेरे लण्ड को अपने हाथ में दबाने लगी।

मेरा लण्ड तन कर सख्त हो गया था। साक्षी मेरे लण्ड को मुठ्ठी में भर कर उपर-नीचे और आगे-पीछे करने लगी। मैं साक्षी की चूत मारने को बेताब हो रहा था।

मैंने साक्षी को कहा- साक्षी! बहुत मन हो रहा है। कर लें क्या!

साक्षी कुछ नहीं बोली।
मैंने इसे साक्षी की हाँ समझ लिया। मैं साक्षी के उपर लेट गया।

साक्षी का नंगा जिस्म मेरे नीचे दबा हुआ था। मैं अपने लण्ड को मुठ्ठी में भर कर साक्षी की चूत के जी-पॉन्यट के उपर-नीचे करके रगड़ने लगा। फिर मैं अपने लण्ड को पकड़ कर साक्षी की चूत के अन्दर डालने की कोशिश करने लगा।

साक्षी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली- हमें डर लगता है। प्लीज़! कंडोम के बिना कुछ नहीं करेंगे। प्लीज़! कंडोम हो तो लगा लीजिए।

मैंने एक बार दीदी के साथ साफ-सफाई में हाथ बँटाते हुए बैड की दराज में कंडोम देखे थे। मैंने फौरन उठ कर बैड की दराज में से कंडोम निकाल कर अपने लण्ड पर लगा लिया। साक्षी ध्यान से मुझे कंडोम लगाते देख रही थी। कंडोम लगा कर मैं फिर से साक्षी के ऊपर लेट गया। साक्षी का नंगा जिस्म मेरे नीचे दब गया।

फिर साक्षी मेरे लण्ड को मुठ्ठी में भर अपनी चूत के ऊपर रगड़ने लगी और बोली- प्लीज़! ऐसे करते रहिए। अपने आप चला जाएगा।

साक्षी की चूत से कुछ चिकना-चिकना सा निकलने लगा था। शायद उसको यह करना अच्छा लग रहा था। वो मेरे लण्ड को अपनी चूत से रगड़े जा रही थी। मुझे बहुत ज्यादा उत्तेजना हो रही थी। इसी उत्तेजना में मैंने साक्षी का हाथ पकड़ लिया। इससे पहले मैं कुछ समझ पाता मैं साक्षी की चूत के ऊपर झड़ गया।

कंडोम लगे लण्ड को चूत से रगड़ने की वजह से कंडोम फट गया था और मेरा वीर्य साक्षी की चूत के बालों में भर गया था। मैं साक्षी के बगल में लेट गया।

साक्षी उठ कर बाथरुम चली गई। कुछ देर बाद वो बाथरुम से अपनी चूत साफ करके आकर मेरी बगल में लेट गई। कुछ देर हम चुपचाप लेटे रहे।

थोड़ी देर बाद साक्षी ने मेरी तरफ करवट ले कर अपनी टांगों को मेरी टांगों पर रख लिया। मैंने भी करवट ले कर साक्षी को अपनी बाँहो में भर लिया।

मैंने अपने जलते हुए होंठ साक्षी के होंठों पर रख दिए। फिर मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। उसने मुझे अपनी बाँहो में कस लिया। मेरे हाथ साक्षी के गोरे-गोरे और चिकने-चिकने जिस्म पर फिर रहे थे। साक्षी भी अपने हाथों को मेरी पीठ पर फिर रही थी। कुछ देर मैं साक्षी के होठों को चूसता रहा। फिर मैं साक्षी के ऊपर लेट गया।

फिर मैं साथ-साथ उसके गुलाबी निप्पल को हल्के-हल्के मसलने लगा। मेरा लण्ड फिर से तन कर खड़ा हो गया था और साक्षी की चूत के बालों से रगड़ खा रहा था। मैं साक्षी की चिकनी टांगों पर हाथ फिराने लगा।

मेरा लण्ड साक्षी की जांघों के बीच फंसा हुआ था। साक्षी ने मेरा लण्ड अपने हाथ में थाम लिया। मैं साक्षी को चोदने को बेताब हो रहा था। साक्षी की चूत से फिर से कुछ चिकना-चिकना सा निकलने लगा था। फिर कुछ देर बाद मैं अपने लण्ड को पकड़ कर साक्षी की चूत के अन्दर डालने की कोशिश करने लगा।

साक्षी ने फिर से मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली- प्लीज़ कंडोम लगा लीजिए।

मैंने फौरन फिर से बैड की दराज में से कंडोम निकाल कर अपने लण्ड पर लगा लिया। कंडोम लगा कर मैं फिर से साक्षी के उपर लेट गया। मैंने अपने को साक्षी की टांगों के बीच में सैट कर अपने लण्ड को पकड कर साक्षी की चूत के अन्दर डालने की कोशिश करने लगा। साक्षी ने मेरा लण्ड अपने हाथ में थाम लिया और अपनी चूत के सुराख पर लगा दिया और बोली- अब धीरे से डालिए।

मैंने हल्का सा ज़ोर लगाया। मेरे लण्ड का सुपाड़ा साक्षी की चूत में घुस गया। साक्षी के मुँह से आह निकली।

उसने मुझे अपनी बाँहो में कस लिया और अपनी आँखें कस कर बन्द कर ली। मैंने थोड़ा ओर जोर लगाया। मेरा लगभग आधा लण्ड साक्षी की चूत में घुस गया। साक्षी के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी। फिर मैंने तीसरा और आखिरी धक्का दिया तो मेरा पूरा लण्ड साक्षी के कौमार्य को चीरता हुआ चूत में समा गया। साक्षी के मुँह से जोर से आह निकली। उसने मुझे अपनी बाँहो में पूरी ताकत से कस लिया।

मैंने भी साक्षी को अपनी बाँहो में भर लिया और मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा ताकि वो अपना दर्द भूल जाए।

मेरा पूरा लण्ड साक्षी की चूत के अन्दर समाया हुआ था। हम दोनों ने एक दूसरे को इस कदर अपनी बाँह में जकड़ा हुआ था कि हवा भी हम दोनों के बीच से पास नहीं हो सकती थी।

साक्षी का नंगा जिस्म मेरे नंगे जिस्म के नीचे दबा हुआ था। मेरी टांगें साक्षी की टांगों के बीच में फंसी हुई थी। मैं साक्षी के माथे पर, फिर आँखों पर तथा गालों को किस करने लगा। साक्षी भी मेरे गालों को किस करने लगी।

कुछ देर हम दोनों इसी तरह से एक-दूसरे को चूमते रहे। फिर मैंने अपने लण्ड को धीरे से साक्षी की चूत से थोड़ा सा बाहर निकाला और फिर अपने लण्ड को धीरे से साक्षी की चूत में अन्दर घुसा दिया। फिर मैं अपने लण्ड को धीरे-धीरे से साक्षी की चूत के अन्दर-बाहर करने लगा।

कुछ देर बाद साक्षी ने अपनी टांगें ऊपर की तरफ मोड़ ली और मेरी कमर के दोनों तरफ लपेट ली। मैं अपने लण्ड को धीरे-धीरे साक्षी की चूत के अन्दर-बाहर कर रहा था। धीरे-धीरे मेरी रफ़्तार बढ़ने लगी। अब मेरा लण्ड साक्षी की चूत में तेजी से अन्दर-बाहर हो रहा था।

मैं साक्षी की चूत में अपने लण्ड के तेज-तेज धक्के मार रहा था। हम दोनों सेक्स के नशे में चूर हो रहे थे। साक्षी को भी मजा आने लगा था। वो मेरे हर धक्के का स्वागत कर रही थी।

उसने मेरे हिप्स को अपने हाथों में थाम लिया। अब वो भी नीचे से मेरे धक्कों के साथ-साथ अपने हिप्स ऊपर-नीचे कर रही थी।

जब मैं लण्ड उसकी चूत में से बाहर खींचता तो वो अपने हिप्स ऊपर उठा देती। जब मैं लण्ड उसकी चूत के अन्दर घुसाता तो वो अपने हिप्स पीछे खींच लेती। मैं तेज-तेज धक्के मार कर साक्षी को चोदने लगा। मैं बैड पर हाथ रख कर साक्षी के उपर झुक कर तेजी से उसकी चूत मारने लगा। अब मेरा लण्ड साक्षी की चिकनी चूत में तेजी से आ-जा रहा था।

साक्षी भी अब आँखें खोल कर चुदाई का भरपूर मजा ले रही थी। मैं साक्षी को पागलों की तरह से चोद रहा था। अब मैं पूरी तेजी से साक्षी के उपर कूद-कूद कर उसे चोद रहा था। साक्षी इस चुदाई के नशे से मदहोश हो रही थी।

मैंने रुक कर साक्षी से कहा- साक्षी अच्छा लग रहा है क्या?
साक्षी बोली- हां बहुत अच्छा लग रहा है। करो ना। तेज-तेज करते रहो।

साक्षी के मुहँ से ये सुन कर मैंने अपनी रफ्तार और बढ़ा दी। मैंने साक्षी के हिप्स को हाथों से जकड़ लिया और छोटे-छोटे मगर तेज-तेज शॉट मार कर साक्षी को चोदने लगा।

साक्षी के मुँह से मस्ती में “ओह्ह्ह्ह होहोह सस्स्स ह्ह्ह हाहाह्ह्ह आआ हा-हा करो-करो ऽअआह हाहअआ प्लीज़ राज, तेज-तेज करो ना।”

मैं साक्षी के उपर लेट गया और मैंने साक्षी को अपनी बाँहो में भर लिया। फिर मैंने अपने होंठ साक्षी के होंठों पर रख दिए और मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसते हुए उसे ओर तेजी से चोदने लगा। मेरा लण्ड सटासट साक्षी की चूत में तेजी से अन्दर-बाहर हो रहा था।

अब मैं साक्षी की चूत में अपने लण्ड के तेज-तेज धक्के मार रहा था। हम दोनों सेक्स के नशे में चूर हो रहे थे। साक्षी भी अपने होठों से मेरे होठों को चूसती हुई मजे से चुदाई का मजा ले रही थी। मैं साक्षी को काफ़ी देर तक ऐसे ही चूमते हुए कस कर चोदता रहा। लगभग 5 मिनट तक हम दोनों एक दूसरे के होठों को चूसते हुए चुदाई का मजा लेते रहे। फिर अचानक साक्षी ने मुझे कस कर अपनी बाँहो में भर लिया।

उसने अपने होंठ मेरे होठों से अलग करके कहा- ओह राज, मैं तो होने वाली हूँ। प्लीज़ तुम भी हो जाओ। दोनों साथ-साथ होंगे। जब तुम होने लगो प्लीज़ तो इसे मेरे अन्दर से बाहर निकाल लेना। कंडोम का भी कोई भरोसा नहीं होता है। प्लीज़ बाहर ही होना।

मैंने कहा- ठीक है साक्षी।

और यह कह कर मैं तेज-तेज धक्के मार कर साक्षी को चोदने लगा।

लगभग 2 मिनट बाद अचानक साक्षी ने एक जोर से आह भरी और अपने हिप्स और अपनी चूत को थोड़ा ऊपर की तरफ उठाया और फिर बैड पर अपने पैर पसार दिये। मैं समझ गया कि साक्षी डिस्चार्ज हो चुकी है।

मैं भी डिस्चार्ज होने वाला था, इसलिये मैं बैड पर हाथ रख कर साक्षी के उपर झुक कर तेजी से उसकी चूत मारने लगा। अब मेरा लण्ड साक्षी की चिकनी चूत में तेजी से आ-जा रहा था। साक्षी आँखें बंद करके बैड पर सपाट लेट कर मेरे डिस्चार्ज होने का इंतजार कर रही थी।

लगभग 2 मिनट तक साक्षी को तेज-तेज चोदने के बाद जब मैं डिस्चार्ज होने लगा तो मैंने साक्षी के कहने के मुताब़िक, अपना लण्ड साक्षी की चूत में से बाहर खींच लिया और साक्षी की चूत के बाहर कंडोम में ही डिस्चार्ज हो गया।

फिर मैं साक्षी के उपर लेट गया। साक्षी का नंगा जिस्म मेरे नीचे दब गया। मेरा लण्ड कंडोम में सिकुड़ा हुआ साक्षी की झाटों के ऊपर पडा था। कुछ देर तक मैं साक्षी के ऊपर लेटा रहा और अपनी तेज-तेज चल रही सांसों को काबू में आने का इंतजार करता रहा। साक्षी भी मेरे नीचे दबी हुई अपनी आँखें बंद करके लेटी हुई थी।

कुछ देर बाद मैंने उठ कर अपने लण्ड पर से कंडोम उतार कर एक अखबार के कागज़ में लपेट कर डस्टबिन में फेंक दिया। फिर अपने अन्डरवियर से अपना लण्ड साफ करके साक्षी की बगल में लेट गया। साक्षी आँखें बंद करके लेटी हुई थी। कमरे की हल्की रोशनी में उसका गोरा और नंगा बदन चमक रहा था।

कुछ देर बाद मैंने साक्षी की तरफ करवट ली और अपनी टांग साक्षी की टांगों पर रख दी। फिर उसके स्तनों पर हाथ फेरने लगा।

साक्षी बोली- हो गई तुम्हारे मन की!
मैंने कहा- हाँ साक्षी, बहुत अच्छा लगा। मजा आ गया।

कह कर मैंने करवट ले कर साक्षी को अपनी बाँहो में भर लिया।

कुछ देर तक हम ऐसे ही लिपटे हुए बातचीत करते रहे। फिर साक्षी बोली- चलो अब उठो। दीदी आने वाली होंगी।

मैंने कोई खास नखरा नहीं किया और साक्षी के कहते ही मैंने उठ कर अपने अन्डरवियर से अपना लण्ड फिर से साफ किया और अपने कपड़े पहन लिये। साक्षी ने भी उठ कर अपने कपड़े पहन लिये। फिर हम दोनों ड्राइंगरूम में बैठ कर बातें करने लगे। हमने कुछ देर बातचीत की।

फिर साक्षी बोली- मैं चलती हूँ। दीदी के आने से पहले मेरा चले जाना ही ठीक रहेगा। वरना दीदी को खामख्वाह शक होगा।

कह कर साक्षी घर जाने लगी। मैंने उसका हाथ पकड़ लिया।

फिर मैंने उससे कहा- प्लीज़ कुछ देर ओर रुको ना।
वो अपना हाथ छुड़ाने लगी और बोली- क्या करते हो। दीदी आने वाली होंगी। मैं जा रही हूं।

वो जाने लगी। मैंने उसे खींच कर अपनी गोद में लिटा लिया।

साक्षी बोली “क्या करते हो। दीदी आने वाली होंगी। प्लीज़ छोड़ो मुझे।

मैंने उसे छोड़ने की बजाय अपने सीने से चिपका लिया। फिर मैं अपने हाथ को नीचे ले जाकर उसके कुरते के ऊपर से उसके स्तन दबाने लगा।

मैं साक्षी से बोला- साक्षी, एक बार फिर करने का मूड़ हो रहा है। एक बार फिर करें क्या?

यह सुनते ही वो एकदम छिटक कर अलग हो गई और बोली- पागल तो नहीं हो गये हो। दीदी आने वाली होंगी। मैं जा रही हूं। ओ.के बाय!

उसने हाथ हिला कर बाय किया। फिर वो दरवाजा खोल कर तेजी से अपने घर जाने लगी। मैं उसे जाते हुए देखता रहा।

तो यह था मेरा साक्षी के साथ ये मेरा पहला सैक्सपिरियंस। इसके बाद मौका मिलने पर लगभग एक साल में हमने 18 बार खुलकर सेक्स किया। हर बार सेक्स करने का अन्दाज और मजा अलग ही था। अगर समय मिला तो साक्षी के साथ बाकी के 18 में से कुछ खास-खास सैक्सपिरियंस के बारे में भी जरुर बताऊँगा।

साक्षी के साथ इसके बाद लगभग एक साल तक ही सेक्स हो पाया। क्योंकि साक्षी की मम्मी और मौसी की आपस में अनबन हो गई और उन्होंने मकान बदल लिया। फिर जीजाजी ने भी बनारस वाली कम्पनी छोड़ कर फरीदाबाद में एक दूसरी कम्पनी ज्वाईन कर ली। मैं फिर से होस्टल में शिफ्ट हो गया। मकान बदलने के बाद, दीदी-जीजाजी के जाने के बाद मैं साक्षी से मिलने उसके घर तो कई बार गया तथा साक्षी से मिलना भी हुआ। मगर सेक्स ना हो सका।

फिर मेरे बी.फ़ार्मा अन्तिम वर्ष के पेपर शुरु हो गये। पेपर दे कर मैं साक्षी से मिलने उसके घर गया और साक्षी से जल्द मिलने का वादा करके गुड़गाँव वापस आ गया।

लगभग 3 महीने बाद मैं अपना रिजल्ट लेने फिर बनारस गया। चूंकि मैं होस्टल छोड़ चुका था, इसलिये मैं होटल में ठहरा था।

रिजल्ट लेकर मैं साक्षी से मिलने उसके घर पास होने की खुशी में मिठाई ले कर गया। साक्षी और उसके घरवालों ने मेरा जोर-शोर से स्वागत किया।

मैं काफी देर वहां रुका। वहीं लन्च किया। फिर लन्च के बाद जब मैं चलने लगा तो साक्षी मुझे मेन-गेट पर छोड़ने के बहाने आ गई।

मैंने गेट पर साक्षी को कहा- साक्षी, परसों मैं वापस गुड़गाँव जा रहा हूँ। अब ना जाने कब मुलाकात होगी। मैं सम्राट होटल में रूम न:11 में ठहरा हूँ। क्या तुम कल मुझसे मिलने वहां आ सकती हो? प्लीज़ साक्षी, प्लीज़ जरूर आ जाना। मैं पूरा दिन तुम्हारा इन्तज़ार करुंगा। ओके! बाय!

यह कह कर मैं साक्षी की हां या ना सुने बगैर चल दिया। मैं जानता था कि साक्षी जरुर आएगी और ऐसा हुआ भी।

अगले दिन साक्षी लगभग 12 बजे होटल आई। मैं होटल लॉबी में उसका इन्तज़ार कर रहा था। फिर साक्षी को साथ लेकर मैं होटल के कमरे में आ गया।

उस दिन हमने होटल के कमरे में और फिर बाथटब में कुल 3 बार सेक्स किया। बड़ा मजा आया। अगले दिन मैं गुड़गाँव वापस आ गया फिर चाहते हुए भी हम दोबारा नहीं मिल सके और हमारे प्यार की कहानी यहीं खत्म हो गई।

एक बार साक्षी का भाई मेरे पास गुड़गाँव में मेरे घर पर आया। उसने बताया कि साक्षी की शादी हो गई है और वो गुड़गाँव में ही किसी काल-सेन्टर में जॉब कर रही है। उसके दो बेटे है। उसका पति दिल्ली में किसी न्यूज़ चैनल में जॉब कर रहा है।

मैंने साक्षी के भाई को अपना मोबाईल नम्बर दिया और कहा कि साक्षी को कहना कि मेरे से बात करे। मगर आज इस बात को लगभग तीन साल हो गये है। मगर साक्षी का आज तक फोन नहीं आया। या तो उसके भाई ने उसे मेरा नम्बर दिया ही नहीं। या फिर वो चूंकि अब शादीशुदा है, इसलिये वो शायद मुझसे बात ना करना चाहती हो। खैर जो भी हो।

सो साक्षी आज तुम कहाँ हो। अगर तुम यह कहानी पढ़ोगी, तो जरूर मुझे पहचान लोगी।

तो दोस्तो, कैसी लगी मेरी ये कहानी। Sex Stories

चार दिन आरामे से बीते। Hindi Porn Stories

काजल के साथ ताश के बहाने नंगापने के Hindi Porn Stories खेल के बादि सुमित और अनवर इस बीच घर नहीं आए, पर फोन पर हमेशा मुझसे पूछा कि मैंने अब तक काजल को चोदा या नहीं।

मुझे इतना होने के बाद भी हिम्मत नहीं हो रही थी काजल से सेक्स के लिए कहने की। काजल भी ऐसे थी जैसे उस दिन कुछ हुआ ही ना हो।

खैर, जब सुमित ने अल्टिमेटम दे दिया कि अगर आज मैंने काजल को नहीं चोदा तो वो उसे पटा के मेरे सामने चोदेगा तब मुझे भी जोश आ गया, और शाम में डिनर टेबल पर मैंने काजल से कहा,’काजल, आज रात मेरे साथ सो जाओ ना प्लीज, उस दिन के बाद से मुझे बहुत बेचैनी हो रही है।’

यह बात मैंने अपना सर नीचे करके खाना खाते हुए कहा।

मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी कि मैं काजल से नजरें मिलाऊँ।

काजल ने मेरे झिझक या शर्म को समझ लिया और फिर मेरे पास आ कर मेरे सर को उठाया और कहा,’आज नहीं, दो-तीन दिन बाद!’

और मेरे होंठ चूम लिए।

मुझमें अब हिम्मत आ गई और मैंने पूछा,’आज क्यों नहीं, दो-तीन दिन बाद क्यों?’

अब काजल मुस्कुराते हुए मेरे कान के पास फ़ुसफ़ुसा कर बोली,’थोड़ा समझा करो संजीव भैया! अभी पीरियड्स चल रहे हैं, इसीलिए कह रही हूँ दो-तीन दिन बाद। तब तक इससे खेलो!’

कहते हुए उसने अपने स्तनों पर मेरा हाथ रख दिया। मैं खुश हो गया कि चलो अब दो-तीन दिन बाद काजल जैसी एक मस्त लौंडिया मिलेगी चोदने को।

तीसरे दिन जब मैं ऑफ़िस से लौटा तो काजल एकदम फ़्रेश लग रही थी, मुझसे बोली,’संजीव भैया! आज कहीं बाहर चलिए डिनर के लिए।’

वो तैयार थी। करीब एक घंटे बाद हम लोग एक चाईनीज रेस्ट्रां में बैठे थे। वो मेरे साथ ऐसे व्यवहार कर रही थी जैसे वो मेरी गर्लफ़्रेंड हो। मुझे भी मजा आ रहा था। करीब 9 बजे जब हम लौट रहे थे तब काजल ने मुझसे कहा,’रास्ते में कहीं से कन्डोम खरीद लीजिएगा संजीव भैया।’

यह सुनके मेरा लण्ड गरम होने लगा। मैंने बात हल्के से लेते हुए पूछा,’क्यों, आज रात मेरे साथ सोना है क्या?’

और मैंने उसका हाथ जोर से दबा दिया।

वो एक कातिल मुस्कान के साथ बोली,’आपके साथ बेड पे जब मैं रहूँगी, तब आप सोएँगे या जागेंगे?’

मैंने उसको घूरते हुए कहा,’बहुत गहरी चीज हो काजल तुम, एकदम कुत्ती चीज़ हो भई।’

वो भी पूरे मूड में थी, बोली,’आप और आपके दोस्तों का किया है सब, वर्ना मैं जब आपके पास आई तब तक मुझे हेयर रिमूवर तक यूज करना नहीं आता था।’

मैंने उसके चूतड़ पे एक चपत लगाया और कहा,’हाँ, वोह तो उस दिन तेरी झांट देख कर पता चल गया है। तुम चिंता ना करो, बिना कन्डोम भी मैं जब करुंगा तो अपना माल भीतर नहीं बाहर निकालूँगा।’

और हम दोनों घर आ गए।

काजल बोली- आप चलिए, मैं तैयार हो कर आती हूँ।

पर मेरे लिए अब रुकना मुश्किल था, बोला,’इसमें तैयार क्या होना है, नंगा होना है बस।’

और मैं अपने शर्ट के बटन खोलने लगा। कुछ समय में ही मैं सिर्फ़ अपने फ़्रेंची अंडरवीयर में था।

काजल पास खड़ी देख रही थी, बोली,’बहुत बेचैनी है क्या?’

वो मुझे चिढ़ाने के मूड में थी। मैं उसकी ये अदा देख मस्त हो रहा था, पर उपर से बोला- ‘अब जल्दी से आ और प्यार से चुदवा ले, वर्ना पटक के चूत चोद दूंगा। साले यार लोगों ने रोज़ पूछ पूछ कर कान पका दिया है।’

काजल अब सकपकाई और पूछा,’क्या आप अपने दोस्तों से मेरे बारे में बात करते हैं?’

उसके चेहरे से चिंता दिखी तो मैंने सच कह दिया,’सुमित और अनवर रोज़ पूछते हैं, उस दिन का ताश का खेल भी मेरे और तुम्हारे बीच यही करवाने के लिए ही तो था। असल में, जब से तुम आई हो उस दिन से वो दोनों तेरे बदन के पीछे पड़े हैं।’

काजल अब सामान्य हुई,’अच्छा वो दोनों, मुझे लगा कि कोई और दोस्त को भी आपने बताया हैं। क्या आप आज रात की बात भी उनको बताएँगें?’

मैंने देखा कि अब सब ठीक है, सो सच कह दिया- ‘जरूर, वो जरूर पूछेंगे, और तब मैं बता दूंगा!’

और मैंने काजल को पास खींच कर अपने सीने से लगा लिया और उसके होठों का रस पीने लगा।

काजल भी सहयोग कर रही थी, हम लोग कोई 5 मिनट तक सिर्फ़ होठ ही चूसते रहे। काजल की साँस थोड़ी गहरी हो गई थी।

मैंने काजल को कहा,’चलो अब बेड पर चलते हैं।’ उसने एक बच्चे की तरह मचलते हुए कहा,’मैं खुद नहीं जाऊँगी, गोदी मे ले चलो मुझे। मैं तुमसे छोटी हूँ या नहीं।’

उसे बच्चों की तरह मचलते देख मुझे मजा आया, बोला,’साली, नखरा कर रही है, छोटी है तू, अभी दो मिनट में जवानी चढ़ जायेगी!’ और उसको मैंने गोदी में उठा लिया।

वो मेरे सीने से लग गई और बोली,’ऐसे कभी गोदी लेते क्या आप, अगर मैं न कहती!’

मैंने जवाब दिया,’अरे तेरे जैसी मस्त लौंडिया अगर बोले तो अपने सर पे बिठा के ले जाऊँ उसे!’

मैंने उसको अपने बेड पे ला कर पटक दिया। मुझे पेशाब आ रही थी, तो बाथरूम जाते हुए मैंने कहा,’अब उतार अपने कपड़े, और नंगी हो जा, जब तक मैं आता हूँ’।

मैं जब लौटा तब भी काजल अपने पूरे कपड़ों में बेड पर दिखी। मैं थोड़ा चिढ़ गया इस बात पर। मैं बोला- ‘क्या साली नखरे कर रही है, मेरा लण्ड खड़ा करके। मेरे से कपड़े उतरवाना है तो आ जरा लण्ड चूस मेरा।’

वो भी थोड़ा तुनक कर बोली,’अच्छा, तो अब मैं आपकी साली हो गई। आप दो बार मुझे साली बोल चुके हैं!’

फ़िर मुस्कुराने लगी।

मैंने हँसते हुए कहा,’तो क्या तुम मुझे बहनचोद बनाना चाहती हो?’

इस बार वह सेक्सी अंदाज़ में बोली,’आप मुझे रंडी बना रहे हो तो कोई बात नहीं और मैं आपको बहनचोद भी ना बनाऊँ?’

और वो मेरे से सट गई। मैंने उससे नज़र मिला के कहा,’मैं तो तुम्हें अपनी रानी बना रहा हूँ जान, रन्डी नहीं। पर तुम्हारे लिये बहनचोद, क्या तू जो बोल वही बन जाऊँगा मेरी प्यारी काजल।’

मैं फ़िर उसके होंठ, गाल चूमने लगा। वो साथ देते हुए बोली,’थैंक्स संजीव भैया, पर मुझे तो रन्डी बनना पड़ेगा अब। आपके दोनों दोस्त मुझे ज्यादा दिन छोड़ेंगे ही नहीं!’

मैंने उसकी हाँ में हाँ मिलाई,’यह बात तो है, काजल, पर कोइ बात नहीं एक-दो बार से ज्यादा वो लोग नहीं करेंगे। मैं जानता हूँ उनको!’

काजल थोड़ा गरम होने लगी थी, बोली,’अब छोड़ो ये सब बात और चलो शुरु करो संजीव भैया!’

मुझे यह सुनकर मजा आया,’क्या शुरु करे तुम्हारा संजीव भैया, जरा ठीक से तो कहो मेरी छोटी बहना।’

मेरा हाथ अब उसकी दाहिनी चुची को कपड़े के उपर से ही मसल रहा था। एक बार फ़िर मैंने पूछा,’बोल न मेरी बहना, क्या शुरु करे तुम्हारा भैया! बात करते हुए ज्यादा मजा आयेगा मेरी जान। इसलिए बात करती रहो, जितना गंदा बात बोलोगी, तुम्हारी चूत उतना ज्यादा पानी छोड़ेगी। अब जल्दी बोलो बहन, क्या शुरु करूँ मैं?’

उसकी आँखें बन्द थी, बोली- ‘मेरी चुदाई’

चुदाई या तेरे चूत की चुदाई?

‘मेरी चूत की चुदाई’, वह बोली।

मेरे दोनों हाथ अब उसके चूतड़ों पर थे, मैं हल्के हल्के उन्हें दबा रहा था।

फ़िर मैंने उसको बेड पर बिठा दिया, और उसकी कुर्ती धीरे धीरे सर के ऊपर से निकाल दी। इसके बाद मैंने उसकी सलवार खोल दी। अब काजल मेरे सामने एक सफ़ेद ब्रा और काली पैंटी में थी।

मैंने कहा,’अब ठीक है, आओ लण्ड चूस कर एक पानी निकाल दो!’

काजल अब मजाक के मूड में थी, अपनी गोल गोल आँख नचाते हुए बोली,’किसका लण्ड चुसूँ, मुझे तो कोई लण्ड दिख नहीं रहा।’

मुझे उसकी ये अदा भा गई, मैंने गन्दे तरीके से कहा,’अपने प्यारे भैया का लण्ड निकालो और फ़िर उसको मुँह से चूसो, मेरी रन्डी बहना! अपने भैया को सैंया बना के चुदवाओ अपनी चूत और फ़िर अपनी गांड भी मरवाओ!’

मैं सीधा लेट गया। काजल ने मेरा लण्ड चूसना शुरु कर दिया। मैंने उसको लण्ड से खेलना सिखाया और वो जल्दी ही समझ गई और मुझे मजे देने शुरु कर दिये।

कोई 10 मिनट चुसाने के बाद मेरा लण्ड जब झरने वाला था, मैंने काजल को कहा कि वो तैयार रहे और फ़िर मैं उसके मुँह में झर गया। मेरे कहने से उसने मेरा सारा वीर्य पी लिया।

अब मैंने उसकी ब्रा और पैन्टी खोल दी। काली काली झांटों से भरी हुई उसकी चूत का एक बार फ़िर दर्शन कर मैं निहाल हो गया। जैसे ही मेरे हाथ काजल की चूत की तरफ़ गये, वो बोली,’भैया, कुछ होगा तो नहीं। डर लग रहा है, कहीं बदनामी ना हो जाए।’

मैंने समझाते हुए कहा,’कुछ नहीं होगा। आज तक जब तुम्हारी बदनामी नहीं हुई तो अब क्यो डर रही हो?’

उसका जवाव सुन के मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वो बोली थी,’आज पहली बार करवाऊँगी, इसीलिए डर रही हूँ।’

मैं बोला-‘क्या, क्या तुम कुँवारी हो अब तक?’ उसके हाँ कहने पर मुझे विश्वास नहीं हो रहा था। मैंने बोल ही दिया,’मुझे विश्वास नहीं हो रहा। एक कुँवारी लड़की होते हुए तुम उस दिन तीन तीन जवान लड़कों के सामने नंगी हो कर खेल रही थी?’

वो हँसते हुए बोली,’इसमें विश्वास न करने वाली बात क्या है? आप तीनों मुझ पर लाईन मार रहे थे कई दिन से, सो उस दिन मैं भी सोचा कि चलो आज लाईन दे देती हूँ, बस। आप लोग को मजा आया तो मुझे भी तो मजा आया।’

मैं हँस दिया,’बहुत कुत्ती चीज है तू बहना। चल लेट, जरा तेरी चूत की जाँच करूँ, कैसी कुँवारी कली है तू!’

और मैंने उसकी चूत की फ़ाँक खोल करके भीतर की गुलाबी झिल्ली की जांच की। साली सच में कुँवारी थी। सांवले बदन की काजल की चूत थोड़ी काली थी, जिससे उसके चूत का फ़ूल ज्यादा ही गुलाबी दिख रहा था।

करीब 10 मिनट तक उसकी चुची और चूत को चुमने चाटने के बाद मैंने उसकी टांगों को चौड़ा कर के उसकी चूत को खोल दिया और खुद बीच में बैठ के लण्ड को काजल की चूत की फ़ाँक पर सेट कर लिया।

मजे से काजल की आँख बन्द थी। वह अब सिर्फ़ आह-आह-आह सी सी सी जैसा कर रही थी।

मैंने काजल से पूछा,’तैयार हो काजल रानी चुदवाने के लिए? मेरा लण्ड तुम्हारी चूत को चुम्मा ले रहा है। कहो तो पेल दूँ भीतर और फ़ाड़ दूँ तुम्हारी चूत की झिल्ली? बना दूँ तुम्हें लड़की से औरत? कर दूँ तुम्हारे कुँवारेपन का अंत? बोलो जान, बोलो मेरी रानी, बोल मेरी बहना, चुदवाएगी अपने भैया के लण्ड से अपना बूर?’

अब उससे रहा नहीं जा रहा था, वह बोल पड़ी,’हाँ मेरे भैया, चोद दो मेरी बूर अपने लण्ड से। बना दो मुझे औरत। अब मुझे कुँवारी नहीं रहना।’

मैं अपना लण्ड पेलने लगा वो थोड़ा कसमसाई, शायद उसको दर्द हो रहा था। पर मैं नहीं रुका, उसकी गीली बूर में लण्ड ठाँसता चला गया।

काजल इइइस्स्स्स आह करती जा रही थी और बोलती जा रही थी,’कर दो मेरे कुँवारेपन का अंत आज। मेरी बूर को जवानी का मजा दो मेरे भैया, लूट लो मेरे जवानी को और चोद कर बना दो मुझे रन्डी। चोदो मुझे भैया, खूब चोदो मुझे। मेरी जवानी का रस लूटो संजीव भैया।’

मैं जोश में चोदता जा रहा था। हम दोनों साथ साथ बोलते जा रहे थे।

मैं बोल रहा था,’चुद साली चुद। अब फ़ट गई तेरे बूर की झिल्ली। गया तेरा कुँवारा पन। लूटो मजा अपनी जवानी का। साली अभी थोड़ी देर पहले बच्ची बनी हुई थी। गोदी में घूम रही थी। अब इसी चूत से बच्चे पैदा करेगी तू मेरी बहना। मैं तुम्हें चोद कर बच्चे पैदा करुँगा। चुदो साली चुदो, खूब चोदवाओ।’

काजल भी बड़बड़ा रही थी,’अभी बच्चा नहीं। अभी मुझे अपने बूर का मजा लूटना है। खूब चुदवाऊँगी। जवानी का मजा लूटूँगी। फ़िर बच्चे पैदा करुँगी। आआआहह चोदो और चोदो मुझे। रन्डी बना के चोदो। बीवी बना के चोदो। साली बना के चोदो। बहन बना के चोदो, नहीं बहन तो हूँ ही। और आप बहनचोद हो। संजीव भैया, बहनचोद भैया, चोदो अपनी छोटी बहन को।’

मैंने अब उसको पलट दिया और पीछे से उसकी बूर में लण्ड पेल दिया और एक बार फ़िर चुदाई चालू हो गई। अब वोह थक कर निढाल हो गई थी, मैंने 8-10 जोर के धक्के लगाये और फ़िर मैं भी झर गया। मैंने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया था, मेरा माल उसके नितम्बों पर फ़ैल गया।

काजल मेरे नीचे पेट के बल बेड पे थी और मैं उसके ऊपर था। मेरा लण्ड उसके गांड की दरार पर चिपका था। हम दोनों जोर जोर से हाँफ़ रहे थे, जैसे मैराथन दौड़ कर आये हों।

तभी घड़ी ने 11 बजे का घंटा बजाया।

मैंने काजल से कहा,’अब?’

वोह हाँफ़ते हुए बोली,’अब कुछ नहीं, बस सोना है’

और उसने करवट बदल ली। हम दोनों नंगे ही सो गये।

आप सब को यह कहानी कैसी लगी, बताना साथ ही यह भी बताना कि मुझे काजल के साथ और क्या-क्या हुआ वो लिखना चाहिए या नहीं। Hindi Porn Stories

मेरा नाम यश है मैं आँगनवा जोधपुर का रहने वाला हूँहूँ. मेरी उम्र अभी इक्कीस साल है और मेरे लंड का साइज़ सवा छह इंच है, लंड की मोटाई तीन इंच है.

ये मेरी और मेरी बेस्ट फ्रेंड की चुदाई की कहानी है जो पिछले महीने की बात है.

शुरूआत में वैसे तो मेरे मन में उसके लिए कोई खराब विचार नहीं थे, पर ये सिलसिला उसके ब्वॉयफ्रेंड की वजह से शुरू हुआ. वो अक्सर ये कहती थी कि उसका बीएफ रोमांटिक नहीं है. थोड़े दिन ऐसी ही बातों का दौर चला. चूंकि वो मेरी अच्छी दोस्त थी, तो एक बार वो मुझसे मेरी सेक्स लाइफ के बारे में पूछने लगी.

पहले तो मैंने भी उसे वैसे ही समझते हुए बताया, जैसे दो दोस्त आपस में बात करते हैं. मैंने उसे मेरा पहला सेक्स अनुभव बता दिया. मैंने इस सबको बड़ी ही साधारण तरीके से बताया था, पर वो मेरी बात को बड़ी तफसील से जानना चाहती थी. वो मेरी इस पहली चुदाई की एक एक बात के बारे में बड़ी गहराई से पूछ रही थी. जैसे मैंने लड़की के ब्रेस्ट कैसे चूसे थे … फिर चूत कैसे लिक की … वग़ैरह वग़ैरह!
उसके ऐसे बर्ताव की वजह से मुझे शक हुआ कि कहीं ये सेक्स की बातों के बहाने मुझसे सेक्स तो नहीं करवाना चाहती.

मैं आपको अपनी इस फ्रेंड के बार बता देता हूँ. उसका नाम ऋषिका है. उसका फिगर 34-26-36 का है. ऋषिका हर रोज जिम जाती है, तो फिगर काफी अच्छा संवारा हुआ है. वो कहीं से भी ढीली पोली नहीं लगती. उसके बदन का हर हिस्सा एकदम चुस्त और मस्त लगता था.

उसकी सेक्स की बात को लेकर मैंने उससे ज्यादा तो कुछ नहीं कहा बस उसकी जानकारी को जितना खुल कर बता सकता था, उतना मैंने उसको बता दिया.
खैर … बात आई गई हो गई. लेकिन मैं अब उसकी कामना को समझने की कोशिश करने लगा था.

दो दिन बाद हम दोनों साथ में बाइक से कॉलेज जा रहे थे, तो मैंने चैक करने के लिए जानबूझकर जोर से ब्रेक मारा. जिससे उसकी मनोदशा मालूम की जा सके कि वो मुझमें किधर तक इंटरेस्टेड है.

झटका लगा तो वो उछल कर आगे को आ गई और मेरे बम्प से सट कर बैठ गयी. उसने झटके के बाद अपनी पोजीशन को भी नहीं बदला. उस टाइम उसके कड़क मम्मे मेरी पीठ से टच कर रहे थे. मैंने पीठ पीछे करके उसके मम्मों की सख्ती का मजा लिया. लेकिन इस पर भी वो पीछे को नहीं हुई. जब वो पीछे नहीं खिसकी तो इससे मेरा शक यकीन में बदल गया. मैं पीठ उसकी चूचियों से ही सटाए. मैंने महसूस किया कि उसके निप्पल एकदम कड़क हो गए थे और मम्मे भी तन गए थे.

मैं अपनी पीठ से उसके मम्मों को रगड़ रहा था, फिर भी वो मजे से उसी स्थिति में बैठी रही.

बस उस दिन इतना ही हो पाया. अब मैं ये तो समझ गया था कि वो चुदने को बेताब है, पर मैं उसे तड़पाना चाहता था, इसलिए दूसरे दिन मैं उसकी स्कूटी से गया. फिर जब एक स्पीड ब्रेकर आया तो उसने भी ब्रेक लगे और स्कूटी उछलने से हम दोनों भी उछले. इस झटके से मैं जानबूझ कर आगे को खिसक कर उससे चिपक गया. मैं इस तरह से बैठ गया ताकि मेरा कड़क लंड उसकी गांड को टच होने लगे.

जब मेरा लंड उसकी गांड को टच हुआ तो आह … मजा ही आ गया. क्या बताउं आपको कि मुझे इस वक्त कितना मजा आ रहा था. उसकी एकदम मुलायम रुई जैसी गांड और ऊपर से गांड की गर्माहट मिली, तो मेरा लंड तो एक ही झटके में पूरा तन गया. मेरा लंड गांड का स्पर्श पाकर झटके मारने लगा था.

जब मेरा कड़क लंड उसकी गांड की दरार को छूने लगा, तो शायद उसको भी पता लगा गया. पर आश्चर्य कि वो वैसे ही गांड से लंड दबाए बैठी रही. मेरा लंड गांड में गड़ने से भी उसने कोई विरोध भी नहीं किया था, जिससे मुझे लंड को झटके देने का मजा मिलना शुरू हो गया था.

वो भी मस्ती से लंड का अहसास करते हुए आराम से अपनी स्कूटी चला रही थी. स्कूटी के झटकों से वो मेरे लंड पर अपनी मस्त गर्म गर्म और नर्म नर्म गांड भी घिस रही थी. इस सबसे मेरा लंड इतना कड़क हो गया था कि जैसे लोहे का लंड हो गया हो. उस पर ऊपर से उसकी गांड का घिसाव भी मेरा लंड चरम की अवस्था में आ गया था और लावा उगलने को तैयार हो गया था. वो तो अच्छा हुआ कि कॉलेज आ गया और मेरा पैन्ट गीला होने से बच गया.

जब वो स्कूटी रख कर आयी, तो उसने मेरी पेन्ट में बना तंबू देखा. वो मुस्कराने लगी … ये सब उसने जानबूझ कर जो किया था.

उसने उसी दिन अपने बीएफ से ब्रेकअप कर लिया. वैसे भी वो ऋषिका के साथ ओरल शुरू करते ही झड़ जाता था, ऐसा ऋषिका ने मुझे बताया था.

ब्रेकअप के बाद ऋषिका मेरे और करीब आ गयी थी. मेरे साथ में चिपक कर बैठना, फिर स्कूटी वाला खेल खेलना, ये सब आम बात हो गई थी.

मैं जब रिसपोन्स नहीं देता था, तो भी वो अपने मम्मे मेरी पीठ से टच कराने लगती थी, मेरे लंड से अपनी गांड घिसना, ये सब करने का मजा लेती रहती थी. मैं सब समझ रहा था, लेकिन उसके बोलने का इन्तजार कर रहा था. वो भी खुल कर नहीं बोल रही थी कि मुझे तुमसे चुदवाना है.

फिर एक दिन कि बात है, जब मैंने आगे बढ़ने की सोची और एक योजना बनाई. योजना के मुताबिक मैं उसको लांग ड्राइव पर ले गया. फिर एक गुप्त सी लगने वाली सुनसान जगह पर ले जाकर गाड़ी को रोक दिया. इधर अक्सर मैं अपनी जीएफ के साथ चुदाई करता रहता था. उस जगह की खास बात ये थी कि शाम को 7 बजे के बाद वहां कोई नहीं आता जाता है. ये जगह मेरे दोस्त के खेत पर बना एक फार्म हाउस का कमरा था, इसलिए कोई आ भी जाए, तब भी किसी तरह का बवाल होने जैसी सम्भावना नहीं थी.

वहां पहुंच कर जब ऋषिका ने सुनसान एरिया देखा तो वो बोली- बाप रे इतना सुनसान इलाका … यहां क्या काम है … मुझे इधर क्यों ले कर आए?
मैं- इरादा तो नेक ही है, बस तुमसे अकेले में बात करनी थी तो ले आया.
ऋषिका - अकेले में? तो फिर फोन से भी तो हो सकती थी ना?
मैं- जो मजा मिलके बात करने में आता है … वो मजा फोन में कहां?
ऋषिका - बातें बनाना तो कोई तुमसे सीखे … चलो अब आ ही गए हैं तो बताइए जनाब अकेले में क्या गुफ्तगूं करनी है आपको?

मैं उससे पीछे से जाकर चिपक गया. जैसे कि मैंने पहले बताया था कि ऐसे चिपकना हमारे बीच आम बात थी. तो उसको कुछ अजीब नहीं लगा. पर मैंने इस तरह उसके कंधे पर अपना सिर रखा कि मेरी गर्म सांसें उसकी कान की लौ और गरदन को छूने लगीं.

यह बात तो आप जानते ही होंगे कि नारी का ये हिस्सा कितना सम्वेदनशील होता है. मैंने जैसे ही ये किया और मेरी गर्म सांसों ने उसकी गरदन को छुआ, वो एकदम से सिहर उठी.

चूंकि हम खड़े थे, उसके ठीक सामने लगभग चार पांच कदम की दूरी पर गन्ने का खेत था, जो पानी से भरा हुआ था. तो उस तरफ से बह कर आने वाली हवा एकदम ठंडी थी, जो हम दोनों को छू कर जा रही थी. इस स्थिति की आप कल्पना कर सकते हो, जब मेरी गर्म सांसें उसकी गरदन को छू रही होंगी और सामने से ठंडी हवा उसको सिहरा रही होगी, तो सेक्स उसपर किस कदर हावी हुआ होगा.

वो इस माहौल से एकदम से कांप उठी और एक बार फिर से उसकी थिरकती हुई गांड मेरे लंड को छूने लगी. मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया और उसकी गांड को छूने लगा, जिससे उसकी चुदास और बढ़ गयी. इसी के साथ उसकी गांड मेरे लंड पर रगड़ने की वजह से मेरा लंड भी खड़ा हो गया था.

चूंकि मेरा लंड उसकी गांड में चुभ रहा था, जिससे उसकी हालत खराब हो रही थी और मुझे भी अब रहा नहीं जा रहा था. तभी मैंने उसकी गरदन पर कई किस कर दिए, जिससे वो चिहुंक उठी और मुझसे और भी सट कर चिपक गयी.

मैंने धीरे से उसके कान में कहा- मुझे इस तरह की बात करनी है. क्या आपकी इजाजत है मेरी प्यारी ऋषिका रानी?
वो शरमा गयी, फिर मीठी स्माइल करके उसने हां में सिर हिला दिया. वो एकदम से घूम कर मुझसे कसके गले लग गयी.
आह … उस वक्त वो अहसास को मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकता.

उसक़ी गर्म सांसें मेरी गर्दन को लग रही थीं, उसके सख्त मम्मे मेरे सीने से टच हो रहे थे. फिर मैंने उसका चेहरा अपने हाथों में ले लिया और उसके माथे पर, गालों पे किस करता चला गया. आखिर में मैंने उसके कोमल रसीले होंठों पर अपने होंठों को रख दिया और उसके होंठों से बह रहे अमृत को पीने लगा.

सच में आज जब मैं ये कहानी लिख रहा हूँ, वो एहसास मुझे अभी भी हो रहा है. क्या मस्त स्वाद था उसके गुलाब की पंखुड़ियों जैसे नर्म और रसभरे होंठों का …

फिर ये किस से शुरू हुआ कब लम्बे स्मूच में बदल गया, पता ही नहीं चला. मैं उसकी जुबान चूस रहा था और वो मेरी जीभ चूसे जा रही थी.
जबरदस्त किसिंग का यह दौर लगभग 15-20 मिनटों तक चला होगा. उस दरमियान में उसके मम्मे भी दबा रहा था. उसके मम्मे इतने कड़क हो गए थे … मानो अभी ब्रा फाड़ कर बाहर आ जाएंगे.

फिर मैंने उसको उठा लिया और अपनी कार के बोनट पर बिठा दिया. किसिंग फिर से शुरू हुई और इस बार मैं उसे एक स्मूच करते करते नीचे को आने लगा. मैंने उसके गले को किस किया, जिससे वो अपनी आंखों को बंद करके मेरे गर्म होंठों को अपनी गर्दन को चूमता हुआ महसूस कर रही थी. इसके साथ ही ऋषिका और भी ज्यादा गर्म हो रही थी.

फिर मैंने उसे उठा कर कार की पिछली सीट पर सीधा लिटा दिया.

इसके बाद मैंने ‘दे दनादन’ फ़िल्म का वो गाना ‘गले लग जा …’ को स्लो वोल्यूम पे लगा दिया और फिर से उसके होंठों को चूसने लगा. उसको अपनी ओर घुमा कर अपनी गोद में बिठा लिया. उससे ये हुआ कि उसकी चुत मेरे लंड पर घिस रही थी. चूंकि मेरा लंड एकदम कड़क था, तो उसकी चुत की गर्मी महसूस कर रहा था. वैसे ही मेरे लंड की गर्मी वो भी महसूस कर रही थी.

फिर मैंने उसकी टी-शर्ट धीरे से निकाली. उसने भी बिना वक्त गंवाए तुरंत हाथ ऊपर करके मेरी मदद की.

उसने टी-शर्ट के नीचे जालीदार ब्रा पहन रखी थी जिसमें उसके मम्मे बहुत ही सुंदर लग रहे थे. चूंकि उसके जिस्म की खुशबू से मैं पहले ही पागल हो चुका था. ऊपर से मेरे सामने उसके दो तने हुए मम्मे मुझे ललचा रहे थे, जिनके ऊपर जालीदार ब्रा उसके आमों की खूबसूरती में चार चांद लगा रही थी.

बस मुझसे रहा नहीं गया और मैं ब्रा के ऊपर से ही उसके मम्मों को पीने लगा. ऋषिका भी अत्यंत चुदासी थी, वो मेरे सिर को अपने मम्मों पर दबाने लगी. मैंने मम्मों को ब्रा के ऊपर से ही चूसते हुए उसकी ब्रा निकाल दी. उसके दो तने हुए मम्मे हवा में फुदकते हुए आजाद हो गए. उसके मम्मे एकदम गोल थे, उनके ऊपर गुलाबी निप्पल जैसे मुझे चूसने के लिए बुला रहे थे कि आओ हमारा रस पी लो.

मैं तो पागलों की तरह बारी बारी से उसके दोनों मम्मों को चुसकने लगा. मैं उसके एक आम को चूसता, तो दूसरे को दबा कर मजा ले रहा था. ऋषिका खुद पागल हो गई थी. वो चुदास में कामुक सीत्कार निकाल रही थी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह… ये क्या कर दिया … हां बस ऐसे ही यस यस बेबी चूस लो इन्हें … आह … न जाने ये इस पल के लिए कब से तड़प रहे थे’
वो अपनी चुदास में न जाने क्या क्या बड़बड़ाती रही और मैं भी उसके मम्मों को चूसता और मसलता रहा.

मैंने दस पन्द्रह मिनट तक उसके आम खूब दबा दबा कर चूसे. फिर किस करते करते उसकी नाभि तक जा पहुंचा. चूंकि उसने एकदम टाइट जीन्स पहन रखी थी, तो मैंने उसे खींच कर उतार दिया. अब वो सिर्फ एक ब्लैक कलर की पेन्टी में रह गई थी. वो इस वक्त ऐसी लग रही थी मानो जन्नत की कोई हूर खड़ी हो.

उसके लम्बे खुले हुए काले बाल … लाली से सजे हुए होंठ … गुलाबी गाल … तीखे नयननक्श … एकदम उठे हुए एकदम गोल मम्मे … पतली कमर. पेट पे गहरी नाभि … भरी हुई चिकनी जांघों से दमकता हुआ उसका शरीर मेरी कामवासना को अधिकता की हद से भी ज्यादा भड़का रहा था. इस लाजबाव यौवन से लदी ऋषिका के तन पर सुंदर झांझर और नेल पॉलिश से सजे हुए पैर उसकी कामुकता को किसी प्लेब्वॉय की मॉडल सा झलका रहे थे. शायद रब ने भी उसे बहुत मेहनत और समय देकर बनाया होगा.

उसका हर अंग एकदम बराबर था. फिर मैंने उसे यूं ही सिर्फ पेंटी पहने हुए अपनी गोद में उठाया और फार्म हाउस के कमरे के अन्दर ले गया. कमरे के अन्दर ले आकर उसकी उफान मारती जवानी को चूसने का समय आ गया था.

उसने बिस्तर पर आने से पहले खुद ही अपनी पेंटी को उतार दिया. मैं उसकी चिकनी चमेली चूत को देख कर मदमस्त हो गया और एकदम से उसके ऊपर चढ़ने को हो गया.

वो भी मुझसे कपड़े उतारने को कहने लगी. मैंने झट से खुद को मादरजात नंगा किया और लंड हिलाते हुए उसकी चूत को निहारने लगा. उसने अपनी टांगों को फैला कर मुझे आमंत्रित किया. मैंने देर नहीं लगाई और उसके ऊपर आ गया. मैंने उसकी टांगों को फैला कर उनके बीच में खुद को सैट किया और लंड को अपने हाथ से पकड़ कर उसकी चुत की फांकों में लगा दिया.

लंड के सुपारे से टपकता प्रीकम उसकी चूत के रिसते पानी से मिला, तो हम दोनों गनगना उठे. बस मैंने फांकों में सुपारा फंसाया और उसके ऊपर झुकते हुए उसके होंठों को अपने होंठों में दबा लिया. हालांकि वो चुदी हुई थी, तब भी मुझे लगा कि इसके बताए अनुसार इसके पुराने ठोकू का लंड जल्दी झड़ने के साथ साथ शायद मुझसे छोटा भी हो, तो ये मेरे लंड से चिल्ला न दे.

मैंने होंठ जकड़ कर उसकी चूची को जोर से दबाया तो उसने एकदम से अपनी गांड उठा दी. इधर मैंने लंड का दबाव उसकी चूत में दे दिया. बस मेरा लंड उसकी चूत को चीरता हुआ अन्दर धंस गया.

उसकी चीख निकलने को हुई, वो तड़फने लगी. मैंने बाज की तरह उसको चिरैया सा दबोचा हुआ था. वो हिल भी न सकी और मेरा लंड उसकी चूत के अंतिम सिरे तक घुसता चला गया. इसके बाद मैं एक मिनट के लिए यूं ही रुक गया. उसकी सांस तेज हो गई थीं. वो बिन पानी मछली सी तड़फ रही थी.

मैंने उसके होंठों को अपने होंठों दबाए रखा और हाथ से उसके मम्मों को सहलाने लगा, उसके निप्पल मींजने लगा. कुछ ही देर में मेरे लंड ने उसकी चूत में जगह बना ली थी और उसका दर्द कम होता चला गया. उसने नीचे से अपनी कमर को हल्का सा उठाया तो मैंने उसके होंठ छोड़ दिए.

वो मेरी तरफ देख कर मुस्कुराने लगी. मैंने भी एक झटका मार दिया. बस चुदाई का खेल शुरू हो गया. पूरे बीस मिनट तक ताबड़तोड़ चुदाई का मंजर चला. इस बीच वो एक बार झड़ भी गई. बाद में मैं उसकी चूत में ही झड़ गया और उसके ऊपर ही लम्बलेट हो गया.

झड़ने के चूमाचाटी होने लगी और कुछ ही देर में मैं फिर से चार्ज हो गया और दुबारा चुदाई का खेल शुरू हो गया.

इस चुदाई से उसे खूब मजा आया था और वो मुझसे बहुत खुश हो गई थी और अब तो गाहे बगाहे उसकी चुदास को मेरा लंड शांत करने लगा था.

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