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Hi mera naam alok h
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मैं देविका हूँ, उम्र 24 वर्ष और Hindi Porn Stories लम्बाई 5 फ़ुट 3 इन्च। मैंने अपने बॉब हेयर कट करवा रखे थे। मैं दुबली पतली पर आकर्षक लगने वाली युवती हूँ। मैं मुम्बई की एक निजी कम्पनी में पीए हूं। आईये आपको मैं बताती हूँ कि मुझे कम्पनी में कैसे प्रोमोशन मिला।

मेरी नौकरी के लिये जब इन्टरव्यू हुआ था तब कम्पनी का मालिक एक बुजुर्ग इन्सान था और उसने मेरी काबलियत पर मुझको रखा था। पर वो अब कम्पनी नहीं चलाते थे। उनका बेटा अंकित जो 28 वर्ष का था और उसका एक खास दोस्त रोहित, तो कम्पनी का पार्टनर भी था, कम्पनी का काम काज देखते थे।

मुझे इस कम्पनी में काम करते हुए सात माह हो चुके थे… मुझे अंकित और रोहित दोनों ही बहुत पसन्द थे। दोनों स्टाफ़ के साथ घुल मिल कर काम करते थे। समय समय पर रीसोर्ट में सभी को पार्टी देते थे और पिकनिक भी ले जाते थे।

अंकित की नजरें शुरु से ही मुझ पर थी। मुझ पर, शायद खूबसूरत और मोडर्न टाईप की दिखने पर, लाईन मारता था। मैं उसकी लाईन को इज्जत से स्वीकार करती थी, और एक मतलबी मुस्कान बिखेर देती थी। मेरी अदाओं पर मर कर आखिर एक बार उसने मुझे अपने केबिन में बुला ही लिया…

“देविका… तुम्हारा काम हमें बहुत पसन्द आया है… रोहित चाहता है कि तुम्हारा प्रोमोशन हो और वेतन सात से बढ़ा कर बारह हज़ार कर दिया जाये।”

“आपका बहुत बहुत धन्यवाद सर… मैं हमेशा आपकी आभारी रहूंगी सर…!” मैंने खुश हो कर अंकित से हाथ मिलाते हुए कहा।

“आप तो खुश हो गई ना … अब हमें भी खुश कर दो…” अंकित मुस्करा कर बोला…और मेरा हाथ दबा दिया।

“जी…अभी पार्टी की तैयारी करती हूँ…” मैंने भी उनका हाथ दबाते हुए कहा।

‘तो पहले बाबा को कॉफ़ी के लिये कहो…और मेरे निजी कमरे में आ जाओ…” अंकित ने आज्ञा देते हुए कहा। और उठ कर अपनी आराम करने के कमरे में चले गये… कुछ ही देर में बाबा कॉफ़ी ले आया… हम तीनो कॉफ़ी पीने लगे… रोहित कॉफ़ी पी कर चला गया।

“देविका… देखो प्रोमोशन को सेलेब्रेट करना चाहिये… मेरे पास आ जाओ…!”
“जी… पास क्या…कहां…” मैं थोड़ा सा हिचक गई।
“यहा…मेरे पास… सोफ़े पर…”
“जी…”

मैं जैसे ही सोफ़े पर बैठने को हुई… अंकित ने मुझे खींच कर अपनी गोदी में बैठा लिया।

“यहाँ पर…आओ…” उसके अचानक इस हमले को मैं समझ नहीं पाई… मैंने देखा कि वहां कोई नहीं था… तो मैंने गोदी में बैठे रहना ही उचित समझा।
“सर…कोई देख लेगा…”मैं शर्माते हुए और उठते हुए बोली।
“देविका डरो मत… यहां कोई नहीं आयेगा… फिर मैं तुम्हें सच बताऊँ तो तुम मुझे बहुत ही अच्छी लगने लगी हो…”

“जी…आप ये क्या कह रहे हैं? मैं एक साधारण परिवार से हूँ और आप …” मैंने अपनी मजबूरी दिखाई पर मन ही मन में मेरे लड्डू फ़ूट रहे थे… कि अंकित ने लिफ़्ट तो दी… मैं उसकी गोदी से उठने की नाकाम कोशिश करती रही।

“देविका…कुछ मत कहो… बस प्यार की बातें करो… तुम्हारी अदाएँ मुझे तुम्हारी तरफ़ खींचती हैं…” उसने अपनी गोदी में मुझे जकड़ते हुए कहा।

मेरे चूतड़ो के स्पर्श से उसका लण्ड खड़ा होने लगा था। लण्ड का कड़ापन का मुझे नीचे अहसास होने लगा था।

“सर… सच आप मुझसे प्यार करते हैं…” मुझे पता था कि ये तो मुझे चोदने का एक बहाना है… फिर भी मैंने भी अंकित की तरह ही बोलना शुरु कर दिया।

“हां …सच देविका…तुम्हारा ये सेक्सी जिस्म … तुम्हारे ये उभार लिये हुए सीना … तुम्हारी कमर और ये मांसल जांघें… मुझे दीवाना बना देता है…देखो मेरा नीचे क्या हाल है…”
“हाय अंकित … आप कितने अच्छे हैं…”मैं भी अपना चेहरा उनके चेहरे के पास ले आई।

उसने धीरे से अपने होंठ मेरे होंठो से लगा दिये… उसके हाथ मेरे सीने की ओर बढ़ चले… कुछ ही क्षणों में उसके हाथ मेरी गोल गोल से उन्नत उरोज़ों को सहला रहे थे। उसका लण्ड मेरी गाण्ड में घुसने को तड़प रहा था, दरारों में अपनी जगह ढूंढ रहा था। मैं वासना में मदहोश होती जा रही थी। उसके होंठ मेरे होंठो को चूस रहे थे…बीच बीच में उसकी जीभ मेरे मुख के अन्दर भी जायजा लेती जा रही थी।

तभी रोहित भी आ गया…”अरे भई…ये क्या हो रहा है… मैं जाऊ क्या?”
मैं एकदम से घबरा उठी। अंकित ने मुझे कस कर पकड़ रखा था।

“आओ…रोहित… आज प्यार का मौसम है…इसलिये प्यार हो रहा है…” अंकित ने शरारत से कहा। और उसके सामने ने मेरे बोबे सहलाते हुए मसलने लगा।
मैं शरमा गई,”सर प्लीज…छोड़िये ना…!” मैं अपने आपको छुड़ाने लगी।
रोहित भी मुझे रंगीन नजरो से निहारने लगा,” तो क्या हमारा नम्बर भी आयेगा… प्यार करने में …देविका जी…?”
“जी क्या कह रहे आप…मैं तो अंकित को प्यार करती हूं…”

“देविका जी…जरा रोहित को भी एक किस तो दे ही दो…प्लीज… प्रोमोशन तो रोहित ने ही दिया है…” मुझे छोड़ते हुए अंकित ने कहा। मेरे उठते ही रोहित ने प्यार से मुझे अपनी तरफ़ खींच लिया। और मेरे होंठो को चूमने लगा। मुझे तरावट आने लगी…यहां तो एक छोड़ दो दो मिल रहे थे…
रोहित ने अपना हाथ मेरे चूतड़ो पर रख कर दबा दिये… उसके हाथ मेरे शरीर को सहलाते हुए बोबे को कभी चूत को मसल रहे थे।

तभी बाहर से एक कॉल आया… अंकित उठ कर चला गया। रोहित ने मुझे छोड़ते हुए कहा,”जाओ अपने ऑर्डर ले आओ और शाम को हमारे साथ आपका होटल में डिनर है…घर पर बोल देना कि आपको रात में देर हो सकती है…!”

शाम को ठीक 8 बजे मेरे घर के आगे उनकी कार खड़ी थी… मैं सजधज के कार में बैठ गई। वहां जो होने वाला था उसकी शुरुआत तो ऑफ़िस में हो ही चुकी थी। मैंने अपने आप को इसके लिये पहले ही तैयार कर लिया था। घर पर मैंने अच्छी तरह से चूत की शेव कर ली थी… चूत में और गाण्ड की छेद में बढ़िया सी चिकनी क्रीम अन्दर तक मल ली थी। ब्यूटी पार्लर पर बाल ठीक करा कर और फ़ेशियल करा कर चेहरा और मुलायम कर लिया था।

गाड़ी एक शानदार होटल में रुकी… शायद 5 स्टार होटल था। दरबान ने मुझे झुक कर सलाम किया और मेरे आगे आगे चला…और एक खाली चेम्बर में सोफ़े पर बैठा दिया। ये अंकित और रोहित का स्थाई बुक किया हुआ चेम्बर था। कुछ ही देर बाद एक अटेन्डेन्ट आया और मुझे लिफ़्ट से एक कमरे में लेगया। वहां अंकित और रोहित दोनों ही थे… खाने टेबल लगी थी… मेरे आते ही उन्होने मेरा स्वागत किया… शायद रोहित को जल्दी थी… उसने आते ही मुझे लिपटा कर प्यार कर लिया।

“प्रोमोशन की बधाई स्वीकार करो … !!” रोहित ने मुझे एक लिफ़ाफ़ा दिया। मैंने रोहित की तरफ़ प्रश्न भरी निगाहों से देखा।

“हां हां देख लो देविका…” रोहित मुस्कुराया।

“और ये मेरी तरफ़ से है…” अंकित ने एक ओर लिफ़ाफ़ा दिया। ये कम्पनी की ओर से रहने के लिये एक बड़ा फ़र्निश्ड क्वार्टर था… मैं तो जैसे स्वर्ग में पहुँच गई। मैं झूम उठी … दोनों ने मुझे हवा में उठा लिया और मैं अंकित बाहों में झूल गई। मेरे कपड़े हवा में उछल गये… कुछ ही देर में हम तीनों नंगे थे। उन दोनों ने शराब की बोतल उठा ली और तीन गिलास बना लिये। अंकित ने अपनी दूसरी पीए को फोन कर दिया कि घर पर सूचना दे दो कि घर दूर होने की वजह से देविका अपनी सहेली के यहा रात को रुक जायेगी इसलिये इंतज़ार नहीं करें।

जाम छलक उठे… कमरे में वासना का नंगा नाच शुरू हो गया। मैं भी उनके साथ वासना में बह निकली…मस्त हो उठी। चूत गीली होने लगी… मैं कभी एक की गोदी में तो कभी दूसरे की गोदी में उनके लण्ड पर बैठ कर मजे लेती रही। वो भी मेरे जिस्म से खेलने लगे। मेरे बोबे, मेरे चूतड़ों को, चूत को सहलाते और दबाते रहे। सरूर चढ़ता गया… रोहित बिस्तर पर लेटा हुआ था…। उसका तन्नाया हुआ लण्ड देख कर मुझसे रहा नहीं गया और उछल कर उसके लन्ड पर बैठ गई।

मेरे चूत लपलापाने लगी… फ़ड़क उठी। लण्ड चूत में घुसेगा ये सोच के मैं तड़प उठी। मैंने अपनी चूत उठाई और निशाने पर रखी और दबा दिया लण्ड पर… लण्ड मेरी चूत में सरसराता हुआ घुस गया। मैंने अपने चूतड़ उठा कर ज्योंही धक्का मारा…कि पीछे से अंकित ने दोनों हाथों से मेरे चूतड़ थाम लिये… और बिस्तर पर चढ़ गया। मेरी गाण्ड उसके लण्ड का निशाना थी। मैं तो आनन्द से भर उठी कि मेरे दोनों छेदों में एक साथ लण्ड पिरोये जायेंगे।

अब मेरी चिकनी गाण्ड में पीछे से अंकित का लण्ड उतरने लग गया। मैंने अपनी गाण्ड में क्रीम लगा कर पहले ही तैयारी कर ली थी। बस अब तो मजा लेने की बारी थी। चूत में रोहित का लण्ड पहले से ही घुसा हुआ था। दोनों के बीच में मैं भिंच गई… मेरी चुदने की इच्छा भी पूरी होने लगी।
कहते है कि जिन्दगी में ऐसे मौके बहुत कम आते है जबकि दोनों छेद में दो व्यक्तियों के दो लण्ड एक साथ जायें और गांड और चूत दोनों चुद जाये। मेरी अच्छी तकदीर थी कि मुझे ऐसा मौका आज मिल गया।

दोनों ओर से लण्ड धक्के मार रहे थे मेरी चूत और गाण्ड दोनों चुद रही थी। डबल मजा… रोहित नीचे से उछल उछल कर चोद रहा था और अंकित का मोटा लण्ड मेरी गाण्ड को मस्त किये दे रहा था। खास कर मुझे मजा यूं भी आ रहा था कि मेरी भी किस्मत खुल गई थी और मुझे मुम्बई जैसी जगह में एक बढ़िया मकान मिल गया था और एक गोआ के ट्रिप… । जिससे चुदने को मेरी साथ की सहेलिया तड़पती रहती थी… उसी से आज मैं जी भर के एक तरफ़ नहीं बल्कि दोनों तरफ़ से चुदवा रही थी।

मेरा तन और मन आज खिल उठा था। जोरदार धक्के पर धक्के दोनों मार रहे थे… मेरे मुख से सिसकारियाँ निकली जा रही थी… मेरे बोबे अंकित बुरी तरह भींच रहा था… मैं भी आखिर मजा कितना उठाती… जिस्म ने साथ नहीं दिया और मेरा बदन जैसे बिजलियों से भर उठा और चूत कसकने लगी…
फिर

“रोहित… प्लीज बस… अब नहीं …मैं गई… हाय…” मेरा जिस्म कांप उठा और मैंने रोहित को जकड़ लिया और मेरा पानी छूट पड़ा। मैं झड़ने लगी… इतने में रोहित ने भी वीर्य छोड़ दिया… अंकित जरा दमदार था…टाईट गांड ने अभी तक लण्ड पेल रहा था…पर कुछ ही समय में उसकी पिचकारी भी निकल पड़ी… मेरी चूत और गाण्ड दोनों ही वीर्य से भर चुकी थी।

अब हम तीनों ही बिस्तर पर निढाल पड़े थे… दोनों के लण्ड मुरझा चुका थे… मैं भी चुद कर शान्त हो चुकी थी। उठ कर हमने अपने आप को ठीक किया। मैंने भी मेकअप ठीक किया फिर कुछ ही देर बाद हमने डिनर मंग़ा लिया। रोहित डिनर करके चला गया था… खाना खा कर मैं फिर ताजा दम हो गई थी।
“अंकित… मेरे साथ गोआ कौन जायेगा…” मैंने अपने साथी के बारे में पूछा।

“ये तुम्हारी मर्ज़ी पर है कि अपने बॉय फ़्रेन्ड को ले जाओ या रोहित को या चाहो तो मुझे… हम तुम्हारी पसन्द की इज्जत करेंगे…”
“जी मेरा तो बॉय फ़्रेन्ड नहीं है … आप जैसा चाहे… !” ये सुन कर अंकित खुश हो गया।

“फिर ठीक है…कोई तुम्हारी सहेली बताओ… जो रोहित के लायक हो…उसे भी एक प्रोमोशन मिल जायेगा…” उसे मैं पसन्द आ गई थी अब वो शायद रोहित के लिये सोच रहा था।
“जी…” मैं खुशी से उछल पड़ी…”सर सुमन को प्रोमोशन दे दीजिए… वो रोहित के सपने में खोई रहती है।” मेरे मुख से अचानक निकल पड़ा।

अंकित मेरे पर झुका जा रहा था। उसके कपड़े उतर चुके थे… मैं भी अपने कपड़े उतार चुकी थी… उसने मुझे चूमना चालू कर दिया था…मेरी चूत गीली होने लगी थी। अंकित मेरे ऊपर छा चुका था। उसका लण्ड मेरी चूत पर गड़ा जा रहा था।
मेरी चूत के दोनों पट लन्ड ने खोल दिये और वह गहरी गुफ़ा में उतरने लगा… मैं एक बार फिर से मस्ती में खोने लगी… आनन्द में बहकने लगी…शरीर कसमसाने लगा… और लण्ड चूत की तह में जा पहुंचा…अब अंकित ने मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया और धीरे धीरे उसकी कमर चलने लगी… मैं सुख के सागर में गोते खाने लगी…

यह थी मेरी प्रोमोशन की दास्तान। मेरे बॉस ने मेरी दिल की इच्छा भी पूरी की और साथ में गिफ़्ट, प्रोमोशन और रहने एक बड़ा मकान भी दिया… अब मुझे अपने बॉस को खुश करने का तरीका भी आ गया है… आज मैं अपनी काबलियत के बल पर सीईओ के पद पर हूँ…ये काबलियत नहीं तो और क्या है? हां, पर मैं अपने साथ की सहेलियों का ध्यान भी रखती हूँ… अगर वो बॉस के लिये कुछ मन में फ़न्तासी रखती है तो उसका रास्ता मैं निकाल देती हूँ… इससे मेरा वेतन भी बढ़ जाता है…और स्टाफ़ में मेरी इज्ज्त भी बढ़ जाती है…

बस नुक्सान एक ही है…

जब कोई बिजनेस डील होती है तब हमें और मेरी प्रोमोटेड सहेलियो को उन सेठों के बीच में मीटिन्ग में आकर सेक्सी स्टाईल मारनी पड़ती है, फिर उनकी डिमांड पर उन्हें स्टाईल और नखरे दिखा कर घरेलू शरीफ़ औरत बन कर चुदना पड़ता है… पर बदले में वो भी खासा पैसा भी इनाम में दे जाते हैं… Hindi Porn Stories

प्रेषक : राहुल Antarvasna

प्यारे दोस्तो, मैं राहुल कोटा Antarvasna से एक बार फिर से आया हूँ एक मजेदार सच्ची कहानी लेकर। आशा है कि कोटा की सभी लड़कियों को पसंद आएगी ! तो इसी आशा के साथ मैं अपनी सच्ची कहानी शुरू करता हूँ।

यह घटना है पिंकी की जिसका एक और नाम पूजा भी है। पूजा हमारी ही जाति की है। आज से करीब चार साल पहले उसकी शादी हो चुकी है और अभी उसके दो बच्चे भी हैं। देखने में थोडी सांवली है पर नाक नक्श तो ऐसे तराशे हुए है जैसे पूरे जिस्म को सोच समझकर बनाया गया हो।

उसकी शादी से पहले मेरी और उसके रिश्ते की बात चली थी पर हम दोनों की कुंडली नहीं मिल पाने के कारण हमारी शादी नहीं हो पाई थी। उसकी शादी के बाद हम दोनों का बात करना और मिलना सब बंद हो गया था।

अभी लगभग पंद्रह दिन पहले की बात है, हमारे समाज में एक शादी थी, वो भी हमारे घर से कुछ ही दूरी पर। मैं एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूँ, शाम को छ: बजे मैं घर पर आया तो मेरी मम्मी ने कहा कि मैं उनको शादी में छोड़ आऊं।

मम्मी को शादी में छोड़कर मैं सीधा घर पर आ गया। इस समय मेरे सिवा घर पर कोई भी नहीं था। मैं टीवी देखने लग गया। कुछ देर बाद किसी ने दरवाजा खटखटाया। मैंने दरवाजा खोला तो देखा कि सामने पूजा और मेरे मामा का लड़का खड़ा था। मैं उसको देखकर चौंक गया कि यह कैसे आ गई।

मैंने उनको बिठाया और पानी पिलाया। उसने मुझसे कहा कि उस शादी में वो भी आई है। उसने मम्मी से मेरे बारे में पूछा होगा तो मम्मी ने बताया कि वो घर पर ही है, और वो मुझसे मिलने घर पर आ गई। वो केवल पांच मिनट ही बैठी और जाने लगी। वो बाहर निकली ही थी कि वापस अन्दर आई और मुझसे मेरे मोबाइल नंबर देने को कहा तो मैंने दे दिया। तब उसने मुझे कॉल करने को कहा। उस दिन की वो बात ख़त्म हो गई।

दो तीन दिन बाद मेरे मोबाइल पर किसी नंबर से मिस कॉल आया। मैंने दुबारा उसी नंबर पर कॉल किया तो पता चला कि वो नंबर पूजा का है। बस उस दिन से हमारे बीच बातचीत फिर से शुरू हो गई। उस दिन से मेरे अन्दर का सेक्स भी उसके लिए जाग गया था।

कुछ दिन बाद उसका जन्मदिन था तो मैंने उसे कॉल करके विश किया और उससे पूछा कि बताइए आपको क्या चाहिए।

तो उसने कहा- जो आपका दिल हो दे देना !

तो मैंने कह दिया- फिर जो भी मैं देना चाहूँ, वो आपको लेना पड़ेगा !

तो उसने हाँ बोल दिया।

मैंने कहा- फिर मैं कब आ सकता हूँ आपके यहाँ?

पूजा ने कहा- सुबह आठ से लेकर शाम को सात बजे तक कोई भी नहीं होता है घर पर ! तो आप इस बीच किसी भी समय पर आ जाना। उसके इस तरह से कहने का मतलब शायद मैं समझ चुका था इसलिए एक दिन शनिवार को मैं घर से दस बजे निकलकर उसके घर पर चला गया।

उसने मुझे बिठाया और चाय पिलाई। वो थोड़े गरीब लोग थे और घर में छोटे छोटे केवल दो ही कमरे थे। एक कमरे में उसके बच्चे सोये हुए थे। कुछ देर बाद मैंने उससे कहा कि मुझे दूसरा कमरा भी देखना है तो वो मेरे साथ दूसरे कमरे में आ गई। वहाँ पर लाइट नहीं थी इसलिए अँधेरा था। उसने आगे होकर मुझसे पूछ लिया कि बताओ आप क्या देना चाहते थे मुझे !

तो मैंने बिना शर्म किये सीधे बोल दिया- मैं तुमको किस करना चाहता हूँ और मैं तुमको बहुत पसंद भी करता हूँ !

पहले तो उसने मना किया और जाने लगी पर मैंने उसका हाथ पकड़कर अपनी ओर खींच लिया। उसने दूर होने की कोशिश नहीं की। मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए और किस करने लगा, वो भी मेरा साथ दे रही थी। तब मुझे लगा कि वो भी यही चाहती है। मैं उसे करीब दस मिनट तक किस करता रहा।

उसने साड़ी पहन रखी थी पर मैंने पहले उसके ब्लाउज के हुक खोल दिए और ब्रा को भी उतार दिया। इसका उसने थोड़ा विरोध तो किया पर उसमें उसकी मर्जी भी शामिल थी। फिर मौका देखकर मैंने अपनी जींस खुद ही उतार दी और अंडरवियर भी। बहुत देर तक मैं उसके स्तनों को चूसता रहा। सही में दोस्तो, इतना दूध भरा था उनमें कि मैं तो मस्त हो गया। फिर मैंने उसको अपना लंड चूसने के लिए कहा तो उसने साफ़ साफ़ मना कर दिया।

मैंने कहा- लंड तो तुमको चूसना ही पड़ेगा !

उसने मुझे कहा कि लंड तो उसने आज तक उसके पति का भी नहीं चूसा। तो मैंने कहा कि मैं तुम्हारा पति नहीं हूँ ! लंड तो तुमको मुंह में लेना ही पड़ेगा !

बहुत देर के बाद वो केवल कुछ सेकंड के लिए मेरे लंड को मुंह में लेने को तैयार हुई। मैंने उसको अपने पैरों पर बिठाया और लंड को उसके होंठों से लगा दिया। जैसे ही उसने लंड को मुंह में लिया, मैंने पीछे से उसके सर को पकड़कर आगे के तरफ धक्का दिया जिससे पूरा लंड उसके मुंह में चला गया और लंड को कस कर उसके मुंह में डालकर रखा। उसने दूर हटने की बहुत कोशिश की पर मैंने उसके सर को कसकर पकड़ रखा था और उसके मुंह को चोद रहा था।

मैं करीब दस मिनट तक उसके मुंह को चोदता रहा और उसके मुंह में ही झड़ गया। मैंने उसका सर अभी भी अपने लंड से अलग नहीं होने दिया। इस कारण से उसको मेरा सारा वीर्य पीना पड़ा। उसकी आँखों से आंसू आ रहे थे। फिर मैंने उसको चूमना शुरू कर दिया। थोड़ी देर बाद जब मैं फिर से सेक्स के लिए तैयार हो चुका था तो मैंने उसे जमीन पर पटक कर चूमना शुरू किया और धीरे धीरे उसको उसकी साड़ी से आजाद कर दिया और पेंटी भी उतार दी।

पहले तो मैंने उससे ऐसे ही पूछा- नीचे तो डाल सकता हूँ न लंड को?

तो उसने तपाक से जवाब दिया कि उन्होंने (उसके पति ने) पहले ही इसको चौड़ा कर रखा है, अगर तुम डाल भी लोगे तो क्या हो जाएगा ! अब डाल भी दो, बहुत बेचैनी हो रही है।

मैंने अपने लंड को उसकी चूत के मुंह पर रखा और एक धक्का मारा तो वो सीधा चूत की गहराइयों में चला गया। सच में लंड के अन्दर जाने का तो मुझे एहसास ही नहीं हुआ। तब मुझे पता लगा कि साला उसका पति उसे कितना चोदता होगा। पर मुझे क्या ! मुझे तो केवल हल्का होना था। मैंने उसकी चूत में लंड के धक्के मारना शुरू कर दिया. करीब आधे घंटे तक मैं उसे चोदता रहा। फिर लंड को निकाल कर उसके वक्ष के बीच की दरार में रगड़ने लगा। दोस्तो, इसका भी एक अलग ही आनंद है। और फिर कुछ देर बाद मैंने अपना वीर्य उसके वक्ष पर छोड़ दिया। इस सारे प्रोग्राम के बाद वो कुछ ज्यादा ही खुश लग रही थी, पर जाने क्यूँ मुझे अच्छा नहीं लगा और वहां केवल पांच मिनट रुक कर वापस घर आ गया।

अब वो मुझे रोज कॉल करती है, पर मैं सोचता हूँ कि हमारे बीच जो भी हुआ वो हम दोनों की गलती थी। पर मैं अब क्यूँ उसकी शादीशुदा जिन्दगी को बर्बाद करूँ। इसलिए मैं उसका फ़ोन रिसीव नहीं करता हूँ। हांलांकि मेरे ऑफिस और उसके घर के बीच में ज्यादा से ज्यादा दो किलोमीटर की दूरी होगी पर फिर भी मैं वहां नही जाना चाहता हूँ।

कई बार वो मुझे मैसेज भी करती है कि वो मुझसे लाइफ टाइम सेक्स चाहती है पर वो मेरी ही जाति की होने के कारण मुझे डर सा लगता है। इससे पहले मैं नहीं जानता था कि किसी लड़की में सेक्स को लेकर इतना क्रेज भी होता है।

तो दोस्तो, यह थी मेरी और पूजा की कहानी। इस कहानी में जैसा कि सब बताते है कि चोदते वक़्त लड़की के मुंह से जोर जोर से सिसकारियां निकलती रही, मैंने ऐसा कुछ नहीं बताया है। क्यूंकि उस समय ऐसा कुछ हुआ ही नहीं ! हाँ थोड़ा उसको दर्द जरुर हो रहा था पर इतना नहीं कि वो चिल्लाती रहे। मैंने उसको न तो घोड़ी बनाकर चोदा और ना ही कुतिया बनाकर !

ये कह सकते है कि वो केवल एक सधारण सेक्स था।

आपके संदेशों के इन्तजार में आतुर ! Antarvasna

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Sex Stories

मैं सुरेश एक ऐसी कहानी बता Sex Stories रहा हूँ। मैंने अपनी बहु, छोटे भाई की बीवी को चोदा!

छोटे भाई की बीबी थी देखने में गोरी और नाटे शरीर की! गोरी इतनी कि देखने से ही लंड खड़ा हो जाए!

मैंने उसकी आँखों में एक वासना देखी जो मेरे लिए अच्छी थी।

भाई घर पर कम रुकता था। मैं रोज रात में घर जाता हूँ।

एक रात मैं किसी काम से बाहर गया था। रात को १-१.३० बजे आया। मैं मूतने के लिए गया, उसके कमरे को देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया। मैंने उसकी कुण्डी धीरे से हिलाई ताकि मेरी बीवी न जगे। मेरा व उसका कमरा पास-पास में था।

उसने कुण्डी की आवाज सुन कर दरवाजा खोल दिया। उसको मालूम था मैं ही रात को आउँगा। वो मुझसे बोली- जल्दी अन्दर आ जाओ!

मैं तुंरत अन्दर गया।

और दरवाजा बंद कर दिया उसने!

मेरे लंड मैं खुजली होने लगी।

वो तुंरत लेट गई कहने लगी- जल्दी कर लो नहीं तो कोई जान जाएगा।

मैंने कहा- कोई यह नहीं जानता कि मैं घर आ गया हूँ।

वो इत्मिनान से लेट गई। उसकी धोती जांघों के ऊपर थी। उसकी गोरी जांघों को देख कर मेरा लंड पानी छोड़ने लगा।

मैंने उसकी धोती उतार दी। उसके बड़े बड़े दूध, जो ब्लाउज के अन्दर थे, देख कर मैं और उत्तेजित हो गया।

उसने मेरे लंड को पैंट के ऊपर से पकड़ लिया। करीब पौन फ़ुट लंबा लंड पकड़ कर वो खुश हो गई। उसने मेरी पैंट की बेल्ट को खोल डाला और मेरे अन्डरवीयर में हाथ डाल कर लंड को बाहर निकाला, उसमें से पानी चू रहा था। उसने उस पानी को अपनी जीभ से चाट लिया। अब मैंने उसका ब्लाउज उतार दिया। वो ब्रा पहने थी। कोई भी ब्रा उसकी चूचियों को अपने अन्दर समेट कर नहीं रख सकती, इतनी बड़ी थी।

मैंने ब्रा उतार दी। अब वो पेटीकोट पहने थी। मैंने पेटीकोट का नाड़ा पकड़ कर खींचा तो बुद की आवाज कर के खुल गया।

उसकी झांटें बड़ी बड़ी थी। अब मैंने अपने कपड़े उतार दिए, दोनों लोग नंगे हो गए थे उसने मेरे लंड को मुँह में रख कर चूसना शुरु कर दिया।

मैं थोड़ी देर बाद उसके मुँह में मूतने लगा, मुझे मुतास तो लगी थी ही! आधा लीटर मूत पीने के बाद उसकी प्यास कम हुई।

तब वो अपनी ताल जैसी चूत फैला कर लेट गई। उसकी गोरी बुर में लाल लाल देख कर बुर का पानी चाटने का मन होने लगा। मैंने उसकी बुर खूब चाटी। उसने हाथ रख कर मेरे सर को दाब लिया उसकी चूत नहीं, भोसड़ी नहीं, भोसड़ा था। मेरा आधा मुँह घुस गया।

तब मैं उठा और उसकी बुर को फैला कर उसके ऊपर लेट गया।

उसने मेरे लंड को पकड़ कर बुर पर रखा।

मैंने कहा- रखने की कोई जरुरत नहीं! अपने आप घुस जाएगा!

तो उसने कहा- छोटी उम्र से ही चोदी जा रही हूँ! मेरे फूफा मुझे खूब चोदते थे लेकिन उनका लंड तुमसे छोटा था। अब जल्दी लंड पेलो!

मैंने तुरंत उसकी ताल जैसी भोसड़ी में लंड डाल दिया। उसने टागें फैला दी थी जिससे उसकी चूत और भी चोड़ी हो गई थी व उसके बच्चेदानी पर हच-हच मेरे लंड का सुपाड़ा लगने लगा। वो जोर जोर से नीचे से ठोकर मार मार कर १००-१०० ग्राम पानी छोड़ने लगी।

मेरा लंड उसकी चूत में फच फच होने लगा। वो कह रही थी- बच्चेदानी तक भी मेरी फाड़ डालो!

मैंने उसे बहुत चोदा। वो तीन बार झड़ी। बाद में मैं 6-7 पिचकारी छोड़ कर ढेर हो गया।

उसने मेरे लंड को अपने मुँह से चाट चाट कर साफ कर के मुझे रवाना किया।

मुझे और उसको बहुत मजा आया।

अब जब भी मौका मिलता है मैं उसे चोद डालता हूँ।

कहानी लिखने के एक दिन पहले भी चोदा Sex Stories

पति सेक्स कहानी में पढ़ें कि मेरा पति मुझ पर शक करने लगा था कि मैं बाहरी लंडों से चुदती हूँ। तो एक रात मैं पति से चुदने के मूड में घर गयी. वहां क्या ड्रामा हुआ?

दोस्तो, मैं सिमरन, फिर से अपनी हॉट सेक्स स्टोरी के साथ लौट आई हूं।

पिछले कुछ दिनों से मैं अपने ऑफिस के काम में इतनी व्यस्त हो गई थी कि चुदाई के बारे में सोचना जैसे बंद ही कर दिया था मैंने!
दिमाग की दही हो गई थी।
मेरे अंदर की सारी फीलिंग्स जैसे सूख गईं थी।

मेरे साथ काम करने वाले लोगों को लगने लगा था कि मैं पागल हो चुकी हूं।
लेकिन मेरे पति को लगता था कि मैं दूसरे लड़कों के साथ चुदाई करवाकर उसको धोखा दे रही हूं।

वह मुझे कभी भी कॉल कर देता था, यह देखने के लिए कि कहीं मैं किसी के पास चुदाई तो नहीं करवा रही!
इन बेवजह की कॉल्स ने मेरे दिमाग का बैलेंस खराब कर दिया था।

इन दिनों मुझसे फोन पर बात करते हुए वह बताता था कि मेरा पति सेक्स करते हुए किन डर्टी पोजीशन में वह मुझे चोदना चाहता है।
दारू के नशे में कई बार तो वह मुझे रंडी कहता था जो अपने पति को भूल चुकी है।

इसलिए अपना काम खत्म करके एक छोटी सी ऑफिस पार्टी के बाद मैं अब चुदाई का पूरा मजा लेना चाहती थी।

तो सबसे पहली चीज जो मैंने की वो ये कि मैं पार्लर गई और अपनी बॉडी (जरूरी जगहों पर) के सारे बाल साफ करवा दिए।
मैंने एक नया लुक कैरी किया।

जब मैं शीशे के सामने आई तो देखकर हैरान रह गई कि मैं थोड़ी मोटी होने के बाद कितनी सेक्सी लग रही थी!

मेरा बदन अब विद्या बालन जैसा लग रहा था।
अगर आपको विद्या बालन की ‘डर्टी पिक्चर’ याद है तो मैं बिल्कुल ‘सिल्क’ जैसी ही लग रही थी।

मैं अपने हस्बेंड को सरप्राइज देने और उसके लंड को खुश करने घर पहुंची।
लेकिन घर पहुंचने के बाद उसके बदले हुए तेवरों से मैं ही सरप्राइज हो गई।

मैं- हो क्या गया है तुम्हें! तुम तो मुझे चोदने के लिए मरे जा रहे थे तो अब क्यों नहीं चोद रहे हो?
पति के सामने मैं पारदर्शी नाइटी में खड़ी थी, मैंने अंदर से सफ़ेद ब्रा पैंटी पहनी थी ताकि पति सेक्स के लिए उत्तेजित हो जाए.

हस्बेंड (नशे में)- फक ऑफ बिच! (निकलो यहां से, रंडी!)
मुझसे यह बर्दाश्त नहीं हुआ।

मैंने उसके फुस्सी लंड पर खूब ताने मारे जो अब उठना बंद हो चुका था।

रात के 11.30 बज रहे थे।
वह बेड से उठा और घर से बाहर निकल गया।

मैंने अपने कॉलेज वाले यार को कॉल किया लेकिन वह फोन नहीं उठा रहा था।

तो मैंने अपना वाइब्रेटर लिया और हार्ड सेक्स के बारे में कल्पनाएं करने लगी।

मेरे पति ने फोन पर जो सेक्सी बातें की थी, मैं उन सबके बारे में सोचने लगी।
पति सेक्स की सोचते हुए ही मैं गर्म होने लगी।

मैं अपनी गांड पर तमाच मारने लगी; चूचियों को चांटें लगाने लगी और निप्पलों को खींचने लगी।

अपनी चूत को भी मैं थ्रीसम सेक्स घटनाओं के बारे में सोचते हुए जोर से रगड़ने लगी।

अब किसी मर्द को अपने इशारों पर नचाने की फीलिंग मुझे नहीं आ रही थी क्योंकि इस वक्त मुझे सेक्स चाहिए था।
चूत चुदवाने के लिए मरी जा रही थी मैं!

ऐसा पहली बार हो रहा था जब लंड न मिलने पर मैं झुंझलाने लगी थी।
यहां तक कि मैं अपनी बिल्डिंग में रहने वाले एक दो कॉलेज के लड़कों को बुलाने तक के बारे में भी सोचने लगी थी।

हालांकि वे दोनों रोज मेरी बॉडी को ताड़ते थे और मुझे रोज चोदने के ख्यालों में डूबे रहते थे।

किस्मत से मेरे बॉयफ्रेंड का फोन मेरे पास आ गया।
मैं उसकी आवाज सुनकर बहुत खुश हो गई।
उसको भी पता चल गया होगा कि मुझे उसकी कितनी जरूरत महसूस हो रही है।

वह बोला- क्या हुआ रंडी! लग रहा है लंड की जरूरत है तुझे!

मुझे नहीं पता उसे क्या हो गया था।
नशे में होने के बाद भी वह मुझसे ऐसे बात नहीं करता था।

मैंने थोड़ा घबराते हुए उसे याद दिलाया कि ये मैं थी।
वह बोला- हां जानता हूं, ये तुम ही हो, सिमी! मैंने तुझे रंडी इसलिए बुलाया क्योंकि तुम मुझे तभी कॉल करती हो, जब तुम्हें लंड चाहिए होता है, जैसे कि मैं ही तुम्हारी रंडी हूं।

मैं जानती थी कि वह ये सारी बातें सच ही बोल रहा था।
लेकिन उस वक्त वही था जो मेरी चूत को लंड दे सकता था।
और मैं इस वक्त कोई भी चांस नहीं लेना चाहती थी अपनी चूत की प्यास मिटाने के लिए।

मैं- मैं सेक्सी साटिन की नाइटी में तुम्हारा इंतजार कर रही हूं। मेरा फुद्दू पति घर पर नहीं है। इसलिए बकवास बंद करो और जल्द से जल्द मेरे घर आ जाओ।

आधे के बाद मेरे घर की डोरबेल बजी।
मैं दरवाजे की ओर बढ़ी।

दोनों तरह के विचार मेरे मन में आ रहे थे।

सोच रही थी कि अगर मेरा हस्बेंड हुआ तो चोरी छिपे चुदाई करने का मेरा सारा प्लान खराब हो जाएगा।
मैंने दरवाजा खोला तो देखकर मैं चौंक गई।

मेरा बॉयफ्रेंड मेरे पति के साथ था और पति पूरा नशे में डूबा था।

मैं तो यह भी नहीं समझ पा रही थी कि ये दोनों आखिर मिले कहां?
सड़क पर या किसी बार में!

मैंने उन दोनों को अंदर लिया और दरवाजा बंद कर दिया।
मेरा पति चलने की हालत में नहीं था तो बॉयफ्रेंड ने उसको सोफे तक घसीट कर बिठा दिया।

अब मैं और मेरा बॉयफ्रेंड दोनों ही पति के सामने खड़े थे।
वह समझ नहीं पा रहा था कि आखिर उसके साथ हो क्या रहा है।

उसके सामने ही मेरा बॉयफ्रेंड मेरे चूतड़ों को भींचते हुए उन पर चिकोटी काटने लगा।

मेरा मूड अब खराब हो चुका था लेकिन वो कोशिश कर रहा था कि मैं फिर से गर्म हो जाऊं।

पति (जैसे चिल्लाते हुए)- जान, तुम जानती हो ये कौन है?

मैंने सोचा कि ऐसा तो हो ही नहीं सकता कि मेरे बॉयफ्रेंड ने बता दिया होगा कि वो मेरा पुराना यार है। उधर मेरे बॉयफ्रेंड के चेहरे का आत्मविश्वास देखकर मैं सोच में पड़ गई थी कि आखिर कौन सा सरप्राइज मेरे सामने आने वाला है।

पति- इसका नाम प्रेम है, यह जवान लड़के-लड़कियों के लिए एक लव गुरू है। मुझे लगता है कि तुम्हें भी इसके साथ हमारी मैरिड लाइफ के बारे में बात करनी चाहिए। आह … अह … मैं चलता हूं.

मेरा पति एकदम से उठा और टॉयलेट की ओर लपका, उसे पेशाब लगी थी क्योंकि उसने बार में काफी दारू पी ली थी।

उधर मेरे बॉयफ्रेंड ने उसके वॉशरूम में घुसने का इंतजार भी नहीं किया।
वह सोफे पर बैठा और मुझे खींचकर अपनी गोद में बिठा लिया।

मैं उसके लंड पर अपनी गांड को रगड़ने लगी।
वह बदले में मेरी गांड को भींचने और खींचने लगा।

हम दोनों पागलों की तरह एक दूसरे के होंठों को चूस और खींच रहे थे।

उसने मुझे जल्दी से डॉगी पोजीशन में झुका लिया और मेरी चूत और गांड को चाट चाटकर खाने लगा।

हम अपने में इतने खो गए थे कि दोनों में से किसी ने ध्यान भी नहीं दिया कि मेरा पति रूम में से झांक रहा है।
उसने मुझे मेरी गांड को मेरे बॉयफ्रेंड के मुंह पर रगड़ते देख लिया।

पति- नहीं-नहीं … तुम गलत समझ गई प्रेम को … उसके चेहरे पर से अपनी गांड को हटाओ, रंडी!

वह आया और उसने बॉयफ्रेंड का मुंह मेरी गांड से हटा दिया।
उसने मुझे सोफे पर धकेल दिया।

दरअसल वह जब नशे में होता है तो उसमें काफी हिम्मत आ जाती है।
पति- प्रेम तुम मुझे बताओ कि इस मोटी रंडी औरत को कैसे कंट्रोल करना है। देखो, वह मुझे कंट्रोल करने की कोशिश कर रही है!

मेरे पति से अब खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था, ना ही कुछ ढंग से बोला जा रहा था।
वह समझ रहा था कि मेरा बॉयफ्रेंड कोई मैरिज काउंसलर है।

उसने मेरी चूत को पकड़ लिया और उसके सामने खड़ी कर दिया।
मैं उससे दूर जाने की कोशिश करती तो वो मेरी गांड पर थप्पड़ मार देता और चूत को कसकर भींच देता।

पति- देखो प्रेम, मुझे इस रंडी को अभी के अभी तमीज सिखानी है। बताते रहना मैं सही कर रहा हूं क्या …

अब उसने एकदम से अपना तना हुआ लंड मेरी सूखी चूत में सरका दिया।
उसने मुझे चोदना शुरू कर दिया।
मैं उसकी पकड़ से छूट भी नहीं पा रही थी।

मैंने अपने बॉयफ्रेंड को ही इशारा किया कि वो इसे मुझसे दूर लेकर जाए।
बॉयफ्रेंड- ये सही तरीका नहीं है, आप पूरी तरह से गलत कर रहे हो, छोड़ दो इसको!

बॉयफ्रेंड ने पति को अब सोफे पर धकेल दिया और मुझे अपने कंट्रोल में ले लिया।

उसने सोचा कि पति अब इसके लिए उसको डांटेगा, लेकिन बजाए डांटने के … मेरा पति अब मुझे उसके लव गुरू के चंगुल में देखकर लंड की मुठ मारने लगा था।

इस सब आपाधापी में मेरी नाइटी नीचे गिर चुकी थी।
मैं अब पारदर्शी ब्रा-पैंटी में खड़ी थी।
इससे मेरे पति की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ चुकी थी।

दूसरी तरफ मेरे बॉयफ्रेंड का लंड भी पूरा तना हुआ था।
वह अपने लंड को मेरी गांड में धकेलने लगा था। वह सोच रहा था कि पति को वहां से कैसे हटाया जाए, या फिर ऐसा कोई तरीका निकाला जाए कि वो मुझे मेरे पति के सामने ही चोद सके।

मेरा पति काफी नशे में था। उसका ध्यान हटाना अभी बहुत मुश्किल था।

बिना किसी चेतावनी के वो मुझपर चढ़ आया।
उसने मेरे बॉयफ्रेंड को सोफे पर धकेला और मुझे अपने कंट्रोल में ले लिया।

पति- मुझे नहीं पता तुम इसको सबक कैसे सिखाओगे, लेकिन ये मेरा तरीका है!

कहकर वो मेरी गांड पर तमाच मारने लगा, मेरी चूत के होंठों को खोलने लगा।
अब मैं लंड के लिए मरी जा रही थी और विरोध करने का मेरा कोई इरादा नहीं था।

मेरा पति मेरे बूब्स पर तमाचे मार रहा था और मुझे इसमें बड़ा मजा आ रहा था।
वह मुझे बार बार रंडी-रंडी कहकर बुला रहा था।

पति- देख, मेरा लंड अब तेरी इस छोटी सी टाइट चूत के साथ क्या करता है, अड़ियल रंडी!

मेरे पति ने मेरी चूत पर थूका और मेरे चूतड़ों को थामते हुए अपना तना हुआ लंड मेरी चूत में सरका दिया।
अब कुतिया बनी हुई मैं अपने बॉयफ्रेंड के सामने चुद रही थी।

वह मेरी गांड में उंगली घुसा रहा था, मेरी सिसकारियां निकलवा रहा था, मेरे चूतड़ों पर तमाचे मार रहा था।
साथ ही वह मेरे बॉयफ्रेंड पर भी ध्यान लगाए था।

मैंने अपने और अपने पति के बीच में इस तरह के दर्दभरे सेक्स की कभी कल्पना नहीं की थी, और वो भी मेरे बॉयफ्रेंड के सामने!

कुछ देर मेरी चूत चोदने के बाद मेरा पति मेरे ऊपर ढेर हो गया और उसने मुझे मेरे बॉयफ्रेंड के ऊपर गिरा दिया।
फिर खुद नीचे फर्श पर लेट गया।

मेरा पति सेक्स के बाद सुबह तक चैन की नींद सोता रहा।

उधर मैं अपने बॉयफ्रेंड की गोद में पड़ी थी और मेरी चूत से पति का वीर्य बहकर बाहर आ रहा था।

तब मैंने देखा कि उसकी आंखों में कोई शरारती प्लान चल रहा था।
मैंने उससे पूछा भी लेकिन उसने कुछ बताया नहीं।

लेकिन बाद में उसके जवाब ने मुझे उत्सुक कर दिया.
बॉयफ्रेंड- सिमी, अब अपनी मैरिड लाइफ का एक नया फेज एंजॉय करने के लिए तैयार हो जाओ!

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