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मेरा नाम राहुल है। मैं Antarvasna Sex Stories अपनी बहन radha के साथ एक किराये के घर में रहता था। हम दोनों कॉलेज में पढ़ते थे। हमारे बहुत से दोस्त हो गये थे, अधिकतर दोस्त तो radha के कारण थे। वह बहुत ही मस्त लड़की थी, लड़कों और लड़कियों से एक सी दोस्ती रखती थी। खास कर वो लड़कों से सेक्स की बातें अधिक करती थी।
हम दोनों भी अक्सर घर में radha के दोस्तों की बातें करते थे। बातें करते समय मुझ में उत्तेजना भर जाती थी। कभी कभी वो लड़कों के बारे ऐसा कुछ कह जाती थी कि मेरा लण्ड खड़ा हो जाता था। यह उसे भी पता था कि सेक्स की बातों से मेरा लण्ड खड़ा हो जाता है, तब वो मेरा भी मजा देखा करती थी।
उसका ज्यादा झुकाव विनोद की तरफ़ था। विनोद की नजरें भी उस पर थी। radha इस बात को जानती थी। वह नजरें पहचानती थी पर ऐसा भी नहीं था कि मेरी बहन मेरी गंदी नजरों को नहीं पहचानती थी। वो मेरी हर हरकत को देखती थी और मुसकराती थी। पर मैं ही इस मामले पीछे था, बस उसके नाम का मुठ मार लेता था और अपना वीर्य टपका देता था।
सवेरे सवेरे यह बहुत होता था कि मेरी नींद मेरे खड़े लण्ड की वजह से खुल जाती थी और मैं उल्टे लेट कर लण्ड पर चूतड़ों का जोर लगा कर बिस्तर से दबा दबा कर माल निकाल देता था। एक बार दीदी ने मुझे ऐसा करते हुये पकड़ भी लिया था।
वो सो कर उठी ही थी और मैं अपना चेहरा दूसरी ओर किये हुये लण्ड को चूतड़ों से दबा रहा था। बड़ी मीठी मीठी सी गुदगुदी भरा अहसास हो रहा था। मेरा लण्ड मेरी जांघ के जोइन्ट पर बिस्तर पर दबा पड़ा था और दबाने पर एक साईड से बाहर आता था और एक मिठास भर देता था। दीदी मेरे पास खड़ी यह सब देख रही थी।
मेरे चूतड़ों का दबना उसे बहुत भा रहा था शायद। उसने मेरे चूतड़ों पर हाथ फ़ेरा, पर मैं उस समय चरम सीमा पर था, झड़ने ही वाला था, उसका हाथ मुझे बहुत ही सुहाना लग रहा था। मेरे चूतड़ के उभरे हुये गोल गोल भाग को वो
सहला रही थी। तभी मेरा वीर्य छूट पड़ा। मैं चूतड़ो से लण्ड को दबा दबा कर वीर्य निकालता रहा। तभी मैंने radha के होने के अहसास का नाटक किया।
‘अरे दीदी आप… !’
‘बहुत मजा आ रहा था क्या…’
‘आ…आप क्या कह रही हैं…?’
‘ये पजामे पर इतना सारा माल… सारा पाजामा गीला कर दिया है…तुम बहुत गन्दे हो भैया !’
‘सॉरी दीदी… ‘ मैं शरमा गया और जल्दी से बाथ रूम में भागा। radha खिलखिला कर हंस पड़ी। शायद मेरे चूतड़ को छूने का अहसास उसे हो रहा होगा… क्योंकि मुझे भी उसके हाथों का स्पर्श जिस्म में अभी भी सनसनी पैदा कर रहा था। शरम के मारे ना तो मैंने कुछ कहा और ना ही radha ने कुछ कहा। पर हम दोनों के मन में एक दूसरे लिये एक कसक सी मन में रह गई।
एक दिन विनोद ने मुझसे radha के बारे में कह ही दिया,’यार राहुल… radha से मेरी दोस्ती करा दे ना…!’
‘क्यों… ऐसा क्या है? वैसे भी तुम उसके दोस्त तो हो ना…!’
‘नहीं यार… वैसी दोस्ती नहीं… तुम्हारी अनुमति से मैं उसे चोदना चाहता हूँ, वो भी ऐसा चाहती है !’
‘जब मियां-बीवी राजी तो क्या करेगा भैया जी !’ मैंने उसे कहा कि अब वो मेरे घर आना जाना शुरू कर दे… रोज मिलोगे तो जरूर बात बन जायेगी।
मेरी बात मान कर उसने अब मेरे घर पर आना जाना आरम्भ कर दिया। पहले तो मैंने उनकी दोस्ती और गहरी कर दी। जब दोनों आंखों ही आंखों में इशारा करने लगे तब मैंने उन्हें अकेला छोड़ दिया। विनोद के आने का समय होता तो मैं उस समय बाहर चला जाता था।
आगे क्या हुआ… अब सुनिये मुझे जैसा विनोद ने बताया।
आज विनोद अपने साथ व्हिस्की की एक बोतल लाया था। उस समय क्रिकेट के किसी मैच का री-प्ले आ रहा था। विनोद और radha दोनों ही उस मैच का मज़ा ले रहे थे। पर radha की निगाहें तो विनोद पर ही जमी थी। यह विनोद को भी पता था। वो उसके समीप ही बैठी थी। तभी धोनी का छक्का पड़ा… विनोद खुशी के मारे radha से लिपट गया। radha भी उसकी बाहों में सिमटती चली गई। अब विनोद ने कोई विरोध नहीं देख कर उसे चूम लिया। radha बस विनोद की तरफ़ टकटकी लगाये देखती रही।
‘ओह माफ़ करना… बुरा मत मानना…’ विनोद ने यूं ही झेंपने का नाटक किया।
radha खिलखिला कर हंस पड़ी,’बड़ी मस्ती आ रही है…?’
‘ये दारू का कसूर है… मेरा नहीं !’
‘अच्छा तो मुझे भी इसका अनुभव कराओ… देखें तो दारू पीने से कितनी मस्ती आती है !’
उसने radha को एक पेग बना कर दिया। जिसे वो धीरे धीरे पूरा पी गई। फिर उसने दूसरा पेग भी धीरे धीरे करके पूरा पी लिया। इतनी देर में radha को अच्छा नशा चढ़ गया था।
‘दारू कड़वी जरूर होती है पर देखो कितना मजा आ रहा है…!’ विनोद ने radha को अपनी ओर खींचा और radha जान करके उसकी गोदी में बैठ गई। विनोद radha की नरम गाण्ड में अपना कड़क लण्ड दबाता हुआ उसे प्यार करने लगा। उसके कड़क लण्ड का अह्सास पा कर उसने अपनी गाण्ड को उसके लण्ड पर ठीक से सेट कर लिया। दोनों ही अब कुछ करने के मूड में थे। टीवी कोई नहीं देख रहा था। विनोद के हाथ radha की चूंचियों पर मचल उठे। radha के मुख से आह निकल पड़ी।
उसने radha का टॉप उतारना आरम्भ कर दिया। radha ने दबा हुआ सा विरोध किया पर ज्यादा समय तक अपने आप को नहीं सम्भाल पाई। उसके मन भी वासना का तूफ़ान उठा हुआ था। उसकी चूत गीली हो चुकी थी। नशे में भला कितना विरोध करती।
विनोद ने उसके दुबले पतले शरीर को हाथों में ले लिया। radha ने भी अपनी बाहें उसके गले में डाल दी। दोनों एक दूसरे को चूमते हुये अन्दर बेड रूम मे आ गये। विनोद radha का टॉप तो पहले उतार चुका था। ब्रा का हुक खोल कर उसकी चूंचियों को आज़ाद कर दिया। विनोद ने अपने कपड़े उतारे और अब radha का तंग पजामा भी उतार दिया।
radha तो बिस्तर पर पड़ी अपनी दोनों टांगें खोले हुये नशे में पड़ी हुई थी। विनोद ने अपना लण्ड सहलाया और उसके ऊपर जाकर लेट गया। उसकी चूंचिया दबा कर मसलने लगा। उसकी चूत के पट खोल कर अपने लण्ड को बीच में रख दिया औए लण्ड को दबाते हुये अन्दर घुसेड़ दिया और उसके ऊपर लेट गया। radha के मुख से एक सिसकारी निकली और और विनोद को कमर से पकड़ कर अपनी ओर खींच लिया। लण्ड चूत की गहराई में उतर चुका था।
radha के मुख से स्वर की मालाये निकल उठी,’आह्ह्ह्… विनोऽऽऽद चोद दो मुझे… हा रे…’
‘कुछ मत कहो radha… मेरा लण्ड भी बेताब हो रहा है…’ उसने चूत में लण्ड दबाते हुये कहा।
‘हाय रे इतना मस्त… मोटा लण्ड… कहा छुपा रखा था रे…’
‘हं… हं… बस ना बोलो… लण्ड का मजा लो…’ उसने धक्के लगाने शुरू कर दिये थे। दोनों ही नशे में चूर चुदाई कर रहे थे। उनके शरीर की गर्मी बढ़ती जा रही थी। दूसरे कमरे में क्रिकेट की कमेन्ट्री चल रही थी और यहां चुदाई लाईव चल रही थी। कुछ ही देर में दोनों ने पल्टा मारा और अब radha विनोद को चोद रही थी। उसके लण्ड पर बैठ कर अपनी चूत में पूरा ठोक रही थी और चीखती भी जा रही थी। उसकी बच्चेदानी पर विनोद का मुलायम टोपा बार बार रगड़ मार रहा था… और radha की मस्ती बढ़ती जा रही थी।
उसके उछलते हुये बोबे के निपल विनोद दोनों अंगुलियों से मसक रहा था। जो उसे दुगना मजा दे रहा था। अब वो विनोद के ऊपर धीरे से लेट गई और अपनी चूत लण्ड पर पटकने लगी। तभी विनोद ने उसे दबा कर एक पल्टी और मारी और एक बार फिर से radha पर चढ़ गया। इस बार विनोद के धक्के कहर बरपा रहे थे, कस कस जोरदार धक्के मार रहा था। शायद चरम सीमा पर पहुँच गया थ वो।
‘मेरी जान… तेरी भोसड़ी… हाय रे… मर गया… ले ले और चुद जा साली… हारामी… खा मेरा लण्ड !’
‘मार दे मेरी चूत… राजा मैं तो गई… चोद इस रण्डी चूत को… मां मेरी… विनोऽऽऽद… गई मैं तो… आआईईईऽऽऽ… ओह्ह्ह विनोऽऽऽद’ और radha हांफ़ती हुई झड़ने लगी। तभी विनोद का लण्ड भी छूटने लगा… उसने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया उसने और एक तेज लहर लण्ड में से निकल पड़ी।
फ़ुहारें radha के जिस्म पर फ़ैलने लगी। रुक रुक कर फ़ुहारों से समापन समारोह होने लगा। दोनों पूरी तरह से झड़ चुके थे। विनोद उसके ऊपर से उठ गया और बिस्तर से नीचे आ गया। तौलिये से radha का बदन साफ़ किया और अपने कपड़े पहने लगा। नशे में radha ने उसे और चोदने के लिये बुलाना चाहा पर उसने एक चादर मुझे ओढ़ दी और बाहर चला गया।
मेरे दरवाजे पर औटोमेटिक लॉक लगा था। सो उसके जाते ही दरवाजा बन्द हो गया। अभी मुझे आने में घण्टे भर की देर थी… सो radha ने सोचा अभी थोड़ी देर में उठ कर फ़्रेश हो लूंगी पर नशे में आंखे बंद होती गई और वो सो गई।
मैं अपने निर्धारित समय पर घर आ गया था। दरवाजा खोल कर मैं अन्दर आया तो देखा टीवी चल रहा था और कमरे में कोई नहीं था। मैं अन्दर बेडरूम में गया तो देखा कि radha बिस्तर पर एक करवट पर पड़ी मदमस्त नंगी सो रही थी। पास मे ही चादर ढुलकी हुई पड़ी थी। उसके मस्ताने चूतड़ देख कर मैं तो पगला गया।
चाहे वो मेरी बहन थी पर अभी तो जवानी से भरी पूरी एक नवयौवना थी। मेरा लण्ड ठनक उठा… फ़ड़फ़ड़ा गया… सुपाड़े में से गीलापन बाहर आ गया। पास जाकर देखा तो उसके मुख से दारू की खुशबू आ रही थी। मैंने भी बची हुई दारू पी और काजू चबाने लगा। मैंने अपने कपड़े भी आराम से धीरे धीरे उतार दिये। पूरी दारू समाप्त करके मैंने अपने शरीर को निहारा। मेरा लण्ड कड़क हो रहा था।
मैंने उसकी चादर पूरी हटा दी और नंगा हो कर उसकी पीठ से चिपक गया। उसके नंगे शरीर का स्पर्श पा कर मेरा जिस्म एक बारगी झनझना गया। वो नशे मे थोड़ा सा हिली। मैंने पास पड़ी क्रीम अपने लण्ड पर लपेट ली और उसकी गाण्ड के छेद पर लगा दिया। अब मैंने उसके बोबे पकड़ लिये और उसे प्यार से दबाना चालू कर दिया। मैंने अपना लण्ड उसकी गाण्ड में दबा दिया।
उसने नशे में मुड़ कर पीछे मुझे देखा और मुसकराई…’भैया… आह्ह्ह… आप हो… क्या करोगे… जरा धीरे मसलो…’ उसे मालूम हो गया कि उसे अब और मस्ती मिलने वाली है।
‘दीदी… विनोद ने आपको चोद दिया ना… मजा आया…’ मैंने उसे उकसाने की कोशिश की।
‘तेरा दोस्त बड़ा प्यारा है… मस्त है… देखो ना ! चोद कर कैसा बेहाल कर गया है… अरे हाय रे नीचे तू बड़ी गुदगुदी कर रहा है… देख तो घुसा जा रहा है !’ नशे में कराहती सी बोली।
‘अब दीदी… गाण्ड चुदा ले… मेरा लण्ड भी देख कितना फ़ड़क रहा है… मैंने तेरे नाम के जाने कितने मुठ मारे होंगे !’
‘जानती हूँ ना रे भैया… पर मुठ मत मारा कर, मैं तो हू ना तेरे ही पास… दोनों प्यास बुझा लिया करेंगे… देख तो तेरा प्यारा लण्ड पाने को मैं कितनी आतुर थी… पर तू तो बुद्धू है।’
‘ओह… मेरी प्यारी दीदी…’ और मेरे लण्ड का जोर उसकी गाण्ड की छेद पर बढ़ गया। और एक मिठास भरी गुदगुदी के साथ छेद में घुस गया।
‘तेरी प्यारी सी, मोटी सी गाण्ड मार कर तो मुझे मजा आ जायेगा, दीदी फिर चूत का मजा भी देगी ना?’
‘चल गाण्ड तो मार ना… चूत का तो तेरे पास देखना ढेर लगा दूंगी, मेरी सारी सहेलियाँ तुझ से ही चुदने आयेंगी, देखना तो !… हाय… मार दी रे मेरी प्यारी सी गाण्ड…’ मेरा लण्ड उसकी गाण्ड की गहराइयों में घुसता चला गया।
‘सच मेरी दीदी… मुझे तेरी सहेलियों की चूत मिलेगी ना…’ उसकी बातें मेरे दिल में गड़ी जा रही थी। मुझे चूतें ही चूतें नजर आने लगी और मेरा लण्ड भी उफ़ान पर आ गया।
‘तेरी गाण्ड है कि चूत… लण्ड को लपक लपक कर ले रही है !’ मैंने आह भरते हुये कहा।
‘क्या करूं रे… मोमबत्ती से मेरी गाण्ड का छेद बहुत बड़ा हो गया है… साली कठोर पत्थर जैसी थी… लण्ड जैसी कोमलता उसमें कहां… चल पेल दे लण्ड… चोद दे मेरी गाण्ड…’ उसने अपनी गाण्ड के नीचे अब उसने तकिया भी घुसा लिया था।
radha की मस्त गाण्ड मारने का मजा आ रहा था।
‘मैंने पहली बार किसी लड़की की गाण्ड मारी है दीदी !’ मैंने गाण्ड चुदाई के नशे में कहा।
‘इसके लिये तुझे दीदी ही मिली थी क्या? अच्छा चूत कितनों की मारी है?’ दीदी ने हंस कर पूछा।
‘वो भी पहली बार आपकी ही मारनी है… ‘ मैंने कुछ चुलबुलेपन से कहा।
‘अच्छा चल निकाल और चूत भी मार ले मेरी…’ radha ने प्यार से कहा।
मैंने लण्ड गाण्ड से निकाल दिया और और उसे सीधा लेटा दिया और तकिया एक तरफ़ कर दिया। हम दोनों फिर से लिपट गये और चूत लण्ड को और लण्ड चूत को टटोलने लगी। जल्दी ही रास्ता ढूंढ कर एक दूसरे में समा गये। हमारे अधर आपस में जुड़ गये और मनोहर चुदाई चालू हो गई। दोनों के मुख से दारू की महक के भभके निकल रहे थे… पर वासना में सब कुछ चलता है।
दोनों की कमर मटकने लग़ी और radha बड़े ही सरल तरीके से सौम्यता से चुदने लगी। radha ने अपने दोनों पांव मेरी कमर से लपेट लिये और चूत पूरी खोल दी। अब सब कुछ प्यार से हो रहा था। नशे में दोनों ने आंखे मूंद रखी थी और चूतड़ ऊपर नीचे एक लय मे चल रहे थे। अचानक radha की चूत का कसाव बढ़ गया और उह… उह… मुख से बोल फ़ूटने लगे… और फिर उसने मुझे ऐसा जोर से जकड़ा कि मेरा वीर्य भी चूत की कसावट के मारे छूट पड़ा।
हम दोनों ही चूतड़ों का जोर लगा कर अपना अपना माल निकालने में लगे हुये थे।
चूत के आस पास दोनों का यौवन रस एकत्र हो गया था और चिकनापन और चिपचिपापन हो गया था। चादर गीली हो गई थी। radha नशे में थी सो झड़ने के बाद वह गहरी नींद मे सो गई थी। मैं भी उठा और अपने बिस्तर पर जा कर लेट गया। मेरे मन में अनेक लड़कियों को चोदने का प्लान बना रहा था, पर दारू के नशे ने मुझे अधिक नहीं सोचने दिया… और गहरी और सन्तुष्टि की नींद में खोने लगा… और जाने कब निंदिया रानी ने मुझे दबोच लिया… Antarvasna Sex Stories
मेरे प्रिय पाठकों और Hindi Sex Stories पाठिकाओं को मेरा नमस्कार। मेरा नाम एलिस है। मैं भी आपकी ही तरह अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ। मुझे इस साईट की कहानियों को पढ़कर बहुत मजा आता है। मुझे ये सभी कहानियाँ बहुत अच्छी लगी और मैं पुरानी वाली कहानियाँ भी पढ़ना चाहता हूँ इसलिये मैंने भी अपनी आपबीती आप लोगों के सामने पेश करने का इरादा अन्तर्वासना के जरिये किया है। यह मेरी पहली कहानी है, अगर आपकी कृपा हुई तो मुझे आगे भी और कहानियाँ भेजने का मौका मिलेगा।
मैं जिस लड़की के बारे में बताने जा रहा हूँ, उसका नाम स्नेहा है। वो मेरे पड़ोस में रहती है। उसका कद करीब 5’6″ है, रंग गोरा है और बदन का क्या कहना ! साली क्या मस्त लगती है कि जो भी देखे तो उसका लंड तो खड़ा हो ही जाता है। उसके मम्मे करीब 34″ के होंगे और उसके गांड करीब 38″ की होगी।
बात उन दिनों की है जब मैं कोचिंग में पढ़ा करता था और छुट्टियाँ होने पर मैं घर जाता था। वो एक अमीर घराने की माडर्न ख्याल की लड़की थी और शायद इसीलिए वो ज्यादातर जींस व टी-शर्ट में रहती थी। इस कारण उसके शरीर के सारे उभारों का अच्छी तरह से प्रदर्शन होता था और यह देख सभी लड़के उस पर फ़िदा रहते थे। पड़ोस में होने के कारण वो मुझे भाई जैसा मानती थी और मैंने भी कभी उसे गलत नजर से कभी नहीं देखा था। पर मुझे पता था कि भाई-भाई करके वो मुझे लाइन देती थी।
बात गर्मियों की है जब छुट्टियाँ हुई और मैं घर गया। मुझे लग रहा था कि इस गर्मियों की छुट्टियों का मैं पूरा आनंद लूँगा। एक दिन मैं अपने नए साल के सत्र के लिए पढ़ाई कर रहा था, वो आई और कहने लगी,”मेरे घर पर सब मेरी मौसी के यहाँ शादी में जा रहे हैं इसलिये मैं आज यहाँ ही सोउंगी।”
वो बहुत खुश नजर आ रही थी और मेरी किस्मत भी देखो यारो कि पापा-मम्मी को भी उसकी मौसी के यहाँ से आग्रहपूर्वक न्योता आया कि आप भी आओ और एलिस को भी ले आना। पर पापा स्नेहा के यहाँ होने से उसे अकेला छोड़ नहीं सकते थे और मुझे पढ़ना भी था, सो मैं यहीं रुक गया और पापा-मम्मी दोनों गेराज से गाड़ी निकाल कर चले गए। मम्मी ने जाने से पहले बहुत हिदायतें दी कि दरवाजे खुले रख कर मत सोना, दोनों एक ही कमरे में सो जाना और बेड अलग अलग रखना। और हम आज रात में भी आ सकते हैं या कल आ जायेंगे वगैरह-वगैरह। मैंने भी हर आज्ञा का पालन किया, सिर्फ एक को छोड़कर, बेड अलग अलग वाला।
रात के नौ बज चुके थे और हम सोने की तैयारी कर रहे थे। उसका आज मूड कुछ बदला-बदला लग रहा था। वैसे मैं उस समय शरीफ बच्चा था। ऊपर के दरवाजे जांचने के लिए हम दोनों ऊपर गए, क्योंकि मुझे रात में अकेले डर लगता है। हम नीचे न आकर वहाँ पर ही बातें करने लग गए। वह वो मुझे बार-बार स्पर्श कर रही थी और गन्दी-गन्दी मतलब यौन सम्बन्धी बातें करने लगी। उसी समय बिजली चली गई। अब तो वो बोलने लगी कि अगर नीचे जायेंगे तो मुझे भी डर लगेगा सो हम वहीं रुक गए और बातें करने लगे। मेरा तो लंड वहीं खड़ा हो गया पर शायद अँधेरा होने के कारण उसे दिखाई नहीं दिया होगा। मैं भी जवाब में थोड़ी-थोड़ी खुलकर बातें करने लग गया। अब दोनों में कुछ-कुछ होने लगा था, हम दोनों वहाँ चिपकने लगे थे। हम दोनों गर्म होने लगे थे और वहाँ आस-पास में कोई न होने के कारण हमने आखिर एक चुम्बन तो कर ही लिया। इतने में बिजली आ गई और वहाँ हमें कोई देख लेता, उससे पहले हम दरवाज़े जाँच कर नीचे आ गए।
उसने नीचे आते ही मेरा एक लम्बा चुम्बन किया। मैंने स्नेहा को अपनी बाँहों में भर लिया, अपनी टांगें स्नेहा की टांगों से चिपका दी और मैंने अपने जलते हुए होंठ स्नेहा के होंठों पर रख दिए। फिर मैं उसके नर्म-नर्म होंठों को अपने होंठों में भर कर चूमने लगा। स्नेहा ने मुझे अपनी बाँहो में कस लिया। मेरे हाथ स्नेहा के जिस्म पर फिर रहे थे। कुछ देर बाद मैंने स्नेहा को बिस्तर पर सीधा लिटा दिया और मैं उसके ऊपर आ गया। हम दोनों फिर से किस करने लगे और मेरे हाथ उसके शरीर पर कहाँ-कहाँ फिर रहे थे, कुछ पता नहीं।
करीब दस मिनट की चुम्मा-चाटी के बाद वो पूरी गर्म हो गई और मेरे कपड़े उतारने लगी। मेरा भी लंड अब जैसे अन्दर ही पैंट फाड़ने लगा और जल्द ही उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिए। उसने अपने हाथों से मेरे लंड को मसलना शुरू कर दिया। मैं भी उसके मम्मे दबाने में व्यस्त था। मैंने भी देर ना करते हुए उसके कपड़े उतार दिए। मैंने उसको खेलने के लिए अपना लंड दे दिया। मैंने उसे बिसतर पर लेटा दिया और फिर उसकी गोरी चूत अपनी जीभ से चाटने लगा। चूत बिलकुल साफ़ थी यानि एक भी बाल नहीं था।
वो बोली,”आज पूरी तैयारी करके आई हूँ !”
स्नेहा के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी। मैं तो मानो स्वर्ग की सैर कर रहा था।
आप तो उसे देखते ही पागल हो जाते और जंगली सेक्स चालू कर देते। पर जैसे कि मैंने कहा था कि मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ, तो मैंने सेक्स करने के नियम पढ़ रखे थे जो किसी सज्जन ने अन्तर्वासना को भेंट किये थे। मैंने बस अपने को नियंत्रित किया।
उसके गुलाबी चुचूकों को हल्के-हल्के मसलने लगा, फिर अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। स्नेहा के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी। बाद में वो मेरा लौड़ा चूसने लग गई, दो-तीन मिनट में ही मेरी हालत ख़राब हो गई तो मैंने उसे रोका। फिर मैं उसकी चूत चाटने लगा। दो-तीन मिनट बाद वो झड़ गई तो मैं उसका अमृत-पान करने लगा। वाह ! एक अजीब मजा आ रहा था। वास्तव में वो मजा आ रहा था जो जिन्दगी में पहले कभी नहीं लिया। फिर मैं स्नेहा की चूत पर हाथ फिराने लगा। हाथ फिराते-फिराते मैंने अपनी उँगलियाँ स्नेहा की चूत के अन्दर डाल दी और अन्दर-बाहर करने लगा।
वो और जोश में आ गई और तड़पते हुए बोलने लगी,”बस अब और मत तड़पाओ मेरे राजा !”
फिर मैं उसे ज्यादा न तड़पाते हुए उसकी चूत का श्री गणेश करने को तैयार था।
स्नेहा ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली,”प्लीज, कंडोम तो लगा लो ! मुझे डर लगता है।”
मैंने बैड की दराज में से कंडोम निकाल कर अपने लण्ड पर लगा लिया। स्नेहा ध्यान से मुझे कंडोम लगाते देख रही थी। फिर अपना लंड उसकी बुर पर रख दिया। लंड धीरे धीरे अन्दर चला गया पर काफी मेहनत करनी पड़ी हमको पहली बार में। वो दर्द से तड़पने लगी थी, मैंने और जोर लगाया तो उसकी बुर से थोड़ा खून निकला। खून मेरे लंड पर व उसकी जांघों पर व थोड़ा चादर पर भी गिरा था। वो पहले तो यह देख कर घबरा गई पर वो जानती थी कि पहली बार में यह सब होता है, उससे उसे काफी हिम्मत मिली।
मैं थोड़ा रुका और उसके होंठ चूसने लगा। थोड़ी देर बाद उसका दर्द कम हुआ, हमने खून साफ़ कर फ़िर शुरु किया। तब मैंने फिर से उसे चोदना चालू कर दिया। मैं उसके नर्म-नर्म होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा ताकि वो अपना दर्द भूल जाए और करीब 15 मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों एक साथ झड़ गए।
बाद में तो मुझे लग रहा था कि उसकी चूत खुल गई। फिर हमने किस किया और उसके बाद वो मेरे लौड़े को चूसने लग गई ताकि फिर से मेरा लौड़ा खड़ा हो जाये। जल्द ही मेरा लंड एक बार फिर से चुदाई करने के लिए तैयार था। इस बार फिर से चूत को ही अलग-अलग आसनों से चोदने लगा।
स्नेहा बोली,”मुझे कुछ हो रहा है, लगता है मेरी चूत से पानी निकलने वाला है। खूब ज़ोर-ज़ोर से धक्का लगाओ।”
मैं समझ गया कि वो झड़ने वाली है। मैंने बहुत ही तेज़ी के साथ उसकी चुदाई शुरू कर दी ।
उसके मुख से आवाजें आने लगी,”आआआ!!! मैंऽऽऽ आआआऽऽऽ रहीऽऽऽ हूँऽऽऽ और तेज़ ऽऽऽ और तेज़ ऽऽऽ”
उसकी चूत से पानी निकलने लगा और मेरा सारा लंड भीग गया। मैं भी बिना रुके उसे आँधी की तरह चोदता रहा। लगभग बीस मिनट तक चोदने के बाद मैं उसकी चूत में ही झड़ गया। इस दौरान वो भी तीन बार झड़ चुकी थी। लंड का पूरा पानी उसकी चूत में निकल जाने के बाद मैं हट गया।
अब उसकी गांड की बारी थी पर वो बोलने लगी,”आज नहीं, फिर कभी इसका भी नंबर आएगा, थोड़ा सब्र करो ।”
पर मैं ऐसा मौका नहीं छोड़ना चाहता था इसलिये उसकी एक न सुनी और गांड के लिए नीचे तकिये रखने लगा और फिर से उलटा लिटा कर गांड का पूरा मज़ा लिया। अब भी ऐसा मौका मिलता है तो छोड़ता नहीं हूँ और वो भी नहीं छोड़ना चाहती। जब भी समय मिलता है, मम्मे दबाकर और चूम कर मजे लेता हूँ, अब तक कई बार चोद चुका हूँ और औरों के भी मजे लिए हैं, वो मैं आपको बाद में कहानी के रूप में लिखता रहूँगा। अब तो कहना पड़ेगा कि “वाह ! क्या रात थी”
आप मेरी कहानी के बारे में अपनी राय जरुर दें और मेरी गलतियाँ भी बताएँ ताकि मैं उनको सुधार सकूँ। अच्छा अब के लिए इजाजत चाहता हूँ। Hindi Sex Stories
दोस्तों ! सबसे पहले मैं Antarvasna Sex Stories आप सभी का धन्यवाद करना चाहूँगा कि आपने मेरी पिछली कहानी “इब तो बाड़ दे” का पहला भाग बहुत पसंद किया । मैंने उस कहानी में आपको बताया था कि कैसे मैंने अपने साथ ट्यूशन पढ़ने वाली मोना को चोदा था। उसकी चुदाई करने के बाद जब हम घर से बाहर निकले थे तो हमें ट्यूशन पढ़ाने वाली मास्टरनी अनीता सांगवान सामने से आती मिली थी। जिस तरह से वो हमें घूर रही थी मुझे लगा उसे पूरा शक हो गया है कि हमने उस मौके का भरपूर फायदा उठाया है।
मैंने मोना को मज़ाक में कह तो दिया था कि साली मास्टरनी को भी पटक कर रगड़ दूंगा पर वास्तव में मैं अन्दर से बहुत डरा हुआ था। सच पूछो तो मेरी गांड तो इस डर से फटी जा रही थी कि अगर मास्टरनी ने वो गीली चद्दर देख ली तो मैं तो मारा ही जाऊँगा। अब तो बस गोपी किशन का ही सहारा बचा था। अगले 2 दिन मैं ट्यूशन पर ही नहीं गया।
तीसरे दिन जब मैं शाम को उसके घर गया तो मास्टरनी ड्राइंग रूम में ही बैठी जैसे हमारा इंतज़ार कर रही थी। काँता आंटी भी पास बैठी थी। जिस तरीके से वो दोनों खुसर फुसर करती मुझे घूर रही थी मुझे लगा जैसे उनकी नज़रें नहीं कोई एक्स-रे मशीन से मेरी स्क्रीनिंग कर रही हैं। काँता आंटी उठ खड़ी हुई और मेरी और रहस्यमयी ढंग से मुस्कुराते हुए अपने घर चली गई। अब मास्टरनी मेरी ओर मुखातिब हुई।
“हम्म … तुम कल नहीं आये जीत ?”
“वो … वो …” मेरे गले से तो कोई आवाज ही नहीं निकल रही थी।
“हम्म …?”
“वो … दरअसल मेरी तबियत खराब थी “
“क्यों तुम्हें क्या हुआ था ?”
“ब…. ब … बुखार था ?”
“वाइरल तो नहीं था ?”
“हाँ हाँ वही था !”
“तो एक दिन में ठीक कैसे हो गया ?”
“वो…. वो …” मैं क्या बोलता। मैंने अपनी मुंडी नीचे कर ली।
“उस छोरी न के हुआ ?”
“कौन … ?”
“हाय मैं मर जावां ? मैं उस छमक छल्लो मोना की बात कर रही हूँ ?”
“ओह … वो… वो … ओह … मुझे क्या पता ?” मैंने सर झुकाए ही कहा। मैं सोच रहा था अगर मैंने नज़रें मिलाई तो मास्टरनी पहचान लेगी।
“तन्नै ते नी कुछ कर दीया था उसतै ?”
“न … नहीं … नहीं मैंने कुछ नहीं किया !”
मुझे लगा मेरा गला सूख गया है। मेरे चेहरे से तो हवाइयां ही उड़ रही थी। लगता है हमारी चुदाई की पोल खुल गई है।
“तन्नै किस बात का डर मार रया फ़ेर ? (तो तुम इतना डर क्यों रहे हो ?)” मास्टरनी ने फिर पूछा।
“न… नहीं तो … मैं भला क… क्यों … डरूंगा… ?” मैंने थोड़ी हिम्मत करके जवाब दिया। मैंने देखा मास्टरनी मेरी पतली हालत देख कर मंद मंद मुस्कुरा रही है।
“एक बात बता तू मन्नै !”
“क्या ?”
“यो चद्दर गील्ली कीकर होई ?”
“वो… वो …?”
अब शक की गुन्जाइश नहीं रह गई थी। मास्टरनी को पता चल गया है। मैं मुंडी नीचे किये खड़ा रहा।
“कहीं पानी का गिलास तो नहीं गिरा दिया था ?”
मैं चुप रहा। थोड़ी देर बाद मास्टरनी ने फिर पूछा “पानी ढंग से पिया या केवल चद्दर पर ही गिराया ?”
“वो … वो … ?
“केवल तुमने ही पिया था या उस कमेड़ी ने भी पिया था ?”
“हाँ उसने भी पिया था “
“हम्म… उसको भी पानी अच्छा लगा ?”
पता नहीं मास्टरनी क्या पूछे जा रही थी। मुझे लगाने लगा कि मैं थोड़ा बच सकता हूँ। मेरी जान छूट सकती है। एक बार अगर बच गया तो हे गोपी किशन फिर कभी उस कमेड़ी की ओर देखूंगा ही नहीं पक्की बात है। मैं अपने खयालों में खोया हुआ था।
मास्टरनी ने फिर बोली “या छोरी तो घनी चुदक्कड़ निकली रै? ….. इसके तो बड़े पर निकल आये साली अभी से लण्ड खाने लगी है आगे जाकर पता नहीं क्या गुल खिलाएगी ?”
मुझे बड़ा आश्चर्य हो रहा था कि मास्टरनी इस तरह के शब्द प्रयोग कर रही है। वो अपनी चूत को पाजामे के ऊपर से मसल और खुजला रही थी। आज उसने पतला सा कुरता और पाजामा डाल रखा था। उसकी साँसें तेज हो रही थी और आँखों में लाल डोरे से तैर रहे थे।
“उस कमेड़ी को ठीक से रगड़ा या नहीं ?” वह मेरी और देख कर हंसने लगी फिर बोली “मैं जानती थी जिस तरीके से वो अपनी गांड मटका कर चलती थी जरुर लण्डखोर बनेगी”
अब मेरी जान में जान आई। इतना तो पक्का है की मास्टरनी यह सब घर वालों को तो कम से कम नहीं बताएगी। मैं चुप उसे देखता ही रहा।
उसने फिर पूछा “उसे खून निकला या नहीं ?””वो … वो … हाँ आया था चद्दर पर भी लग गया था इसीलिए … वो… गीली …”
“हम्म … तेरे तो मज़े हो गए रे जीत … मैं तो तने बड़ा भोला समझ रई थी तू तो गज़ब का गोला निकला रे ?”
“वो दरअसल मैं आपका ही तो चेला हूँ ना ?” मैंने कह दिया।
“रै बावले चेला इस तरह थोड़े ही बना जावे सै?”
“तो कैसे बना जावे है ?”
“पहले गुरुदक्षिणा देनी पड़ी सै ?’
“आप जो मांगो दे दूंगा ?”
“हम … लागे सै इब तू बावली बूच नई रिया बड़ा सयाना हो गया ?”
मेरा दिल तो जोर जोर से धड़कने लगा था। लगता है मास्टरनी के मन में भी जरुर कुछ चल रहा है। हे गोपी किशन अगर मास्टरनी पट जाए तो बस मज़ा ही आ जाए। फिर तो बस दोनों हाथों में लड्डू क्या पूरी कन्हैया लाल हलवाई की दूकान ही हाथों में होगी।
उसने इशारे से मुझे अपनी और बुलाया। मैं उसके पास सोफे पर बैठ गया। उसने मेरी जांघ पर हाथ रख दिया और बोली “अच्छा चल सारी बात शुरू से बता कुछ छुपाने की जरुरत ना है। कैसे उस कमेड़ी के साथ खाट-कब्बडी खेली ? मैंने तो तुम्हें पूरे ढाई तीन घंटे दिए थे मज़े करने को ?” और कहते हुए उसने मेरी और आँख मार दी। मेरा राम लाल तो उछलने ही लगा था। और उसका उभार पैन्ट के अन्दर साफ़ दिखने लगा था। मास्टरनी ने अपनी जांघें आपस में कस रखी थी और एक हाथ से अपनी चूत को जोर जोर से मसल रही थी।
मैंने पूरी बात बता दी। इस दौरान मास्टरनी ने मेरा लण्ड पैन्ट के ऊपर से ही मसलने लगी। मेरा लण्ड तो खूंटे की तरह हो चला था अब। मास्टरनी की साँसें तेज होने लगी थी और मेरा शेर तो जैसे पैन्ट फाड़ने को तैयार था। अचानक मास्टरनी ने मेरी पैन्ट की जिप खोल दी और नीचे फर्श पर उकड़ू होकर बैठ गई। मुझे बड़ी शर्म भी आ रही थी और मेरी उत्तेजना भी बढती जा रही थी। मास्टरनी ने फिर पैन्ट के अन्दर हाथ डाल कर मेरे खूंटे जैसे खड़े लण्ड को बाहर निकाल लिया। उसकी तो आँखें फटी की फटी रह गई। मेरा लण्ड 7’ लम्बा मोटा ताज़ा लण्ड देख कर वो तो मस्त ही हो गई। आप तो जानते ही हैं कि मेरे लण्ड में एक ख़ास बात है उसका टोपा (क्राउन) बहुत बड़ा है। बिलकुल मशरूम की तरह है। मेरी भी उतेजना बढती जा रही थी और राम लाल तो मास्टरनी के हाथों में ऐसे उछल रहा था जैसे कोई चूहा किसी बिल्ली के पंजों में फसा अपनी जान बचाने को तड़फ रहा हो।
“वाह जीत तेरा राम लाल तो बहुत बड़ा और शानदार है ?” इतना कहकर मास्टरनी ने उसका एक चुम्मा ले लिए। राम लाल ने एक ठुमका लगाया। मास्टरनी ने उसे कस कर अपनी मुट्ठी में जकड़े रखा। “साली वो कबूतरी कैसे झेल गई इस मर्दाने लण्ड को ?”
एक बार फिर से उसने उस पर पुच्च किया और फिर उसे गप से मुँह में ले लिया। मैं तो जैसे सातवें आसमान पर ही था। जिस तरीके से मास्टरनी उसे चूस और चूम रही थी मुझे लगता है ये मास्टरनी भी एक नंबर की चुदक्कड़ है। चलो मेरी तो पौ बारह है। मैंने अपनी पैन्ट को ढीला कर दिया और अपने कूल्हे थोड़े से उठा कर पैन्ट नीचे कर दी। इससे मास्टरनी को सुविधा हो गई। और वो जोर जोर से मेरा लण्ड चूसने लगी। कभी मेरे अण्डों को मसलती कभी उन्हें भींचती कभी पूरा लण्ड मुँह में ले लेती और कभी उसे मुँह से बाहर निकल कर ऊपर से नीचे तक चाटती। उसकी गर्म साँसें मेरे पेट और पेडू पर पड़ती तो मैं रोमांचित हो जाता और मेरा शेर ठुमके पर ठुमके लगाने लगता। मास्टरनी तो बिना रुके उसे चूसे ही जा रही थी पता नहीं कितने दिनों की भूखी थी।
“य़ा … ….” मेरी सीत्कार निकलने लगी और राम लाल झटके पर झटके खाने लगा। मुझे लगा कि मेरा तो मोम पिंघल ही जाएगा। मास्टरनी मेरी इस हालत को जानती थी। उसने मेरा लण्ड पूरा का पूरा मुँह में भर कर मेरे कूल्हे पकड़ लिए। मेरा तनाव अपनी चरम सीमा पर पहुँच चुका था। मैंने कस कर उसका सर पकड़ लिया। मेरी बंद आँखों में तो सतरंगी तारे से जगमगाने लगे थे और फिर मेरी पिचकारी छूट गई। गर्म लावे से उसका मुँह भर गया। मास्टरनी गटागट उसे पीती चली गई। उसने तो जैसे मुझे पूरा का पूरा निचोड़ लेने की कसम खा रखी थी। उसने एक भी बूँद इधर उधर नहीं गिरने दी।
लण्ड अब सिकुड़ने लगा था। मास्टरनी ने एक आखिरी चुस्की लगाई और अपने होंठों पर जीभ फिराती हुई बोली,”वाह जीत, आज तो मज़ा ही आ गया एक कुंवारे लण्ड की गाढ़ी और ताज़ी मलाई तो बड़ी ही मजेदार थी। वाह … जियो मेरे सांड …?” कहकर मास्टरनी ने मुझे चूम लिया।
मुझे बड़ी हैरानी हुई कि इस नाम से तो मुझे मोना डार्लिंग पुकारा करती है इसे कैसे पता ?
“मैडम आपने तो मज़ा ले लिया पर मैं तो सूखा ही रह गया ना ?” मैंने उलाहना दिया।
“रे बावली बूच क्यूं चिंता कर रिया सै… अभी बड़ा टेम बाकी सै ? चिंता ना कर !” कहते हुए मास्टरनी बाथरूम में चली गई। मैंने अपनी पैन्ट पहन ली और उसका इंतज़ार करने लगा।
मास्टरनी कोई दस मिनट के बाद बाथरूम से बाहर आई। उफ़ … उसके बाल खुले थे। उसने अपने वक्ष पर लाल रंग का तौलिया लपेट रखा था जो उसकी चिकनी मोटी मोटी संग-ए-मरमर जैसी जाँघों और अमृत कलशों के अनमोल खजाने को छिपाने की नाकाम कोशिश कर रहा था। बस अगर तौलिया एक दो इंच छोटा होता तो उसकी रस भरी (चूत) का नज़ारा साफ़ दिख जाता। उसने तौलिये को नीचे से कस कर पकड़ रखा था। धीरे धीरे अपने नितम्बों को मटकाती और अपने दांतों में निचला होंठ दबाये मेरे पास आकर खड़ी हो गई। उसके होंठ काटने की कातिलाना अदा और चूतड़ों की थिरकन से तो मेरे राम लाल को जैसे फिर से जीवनदान मिल गया । वो तो फिर से सर उठाने लगा था। मैं तो उसके इस अंदाज़ को बस मुँह बाए देखते ही रह गया। उसका गदराया शरीर तो ऐसे लग रहा था जैसे कोई सांचे में ढली मूर्ति हो। वैसे तो मैं उसे रोज़ ही देखता था पर इस रूप में तो आज ही देखा था। उसके शरीर की गर्मी मैं अच्छी तरह महसूस कर रहा था। मुझे लगा जैसे मैं किसी आग की भट्टी के सामने खड़ा हूँ। मेरी तो जैसे साँसें ही जम गई मुझे लगा मेरा पप्पू फिर से घुड़सवारी के लिए तैयार होने लगा है।
“ओह … तन्नै फ़ेर या पैन्ट सी पऽऽन ली ? इब इसका के काम सै ? तार दे इसने !”
“आपने भी तो तौलिया लपेट रखा है ?”
“ओह …. रै मेरी बात और सै चल … सैड़ देसी अपणी पैन्ट और कमीज नै तार दे !”
मैंने थोड़ा शर्माते हुए पैन्ट कमीज उतार दी पर अपने राम लाल के ऊपर हाथ रख लिया। मैंने बनियान और कच्छा तो पहना ही नहीं था। मास्टरनी बोली “तुमने कभी सहस्त्रधारा का जल पिया है?”
सच पूछो तो मेरे कुछ समझ नहीं आया। मैंने गंगाजल और ब्रह्म सरोवर का जल तो सुना था पर यह नया जल पहली बार सुना था। जब कुछ समझ नहीं आया तो मैंने अपनी मुंडी ना में हिला दी।
मुझे लगा मास्टरनी मुझे फिर से मोटी बुद्धि का कहेगी या फिर ताऊ तो जरुर ही कहेगी पर मास्टरनी हंस पड़ी। मोती जैसे चमकते दांत और उसकी कातिलाना मुस्कान और होंठो को काटने की अदा ने तो मुझे अन्दर तक रोमांच से भिगो दिया था। मेरा मन कर रहा था कि उसे कस के अपनी बाहों में भर लूं और पटक कर अपना किल्ला गच्च से उसकी रसीली चूत में ठोक दूं पर मैं रुका रहा।
“हाय मैं मर जावां … मेरे बुद्धू बालम …” कह कर मास्टरनी ने मेरी और अपनी बाहें फैला दी। ऐसा करने से उसके चूंचियों पर अटका तौलिया खुल कर नीचे गिर गया और उसके मोटे मोटे कसे हुए गोल गोल चूचे अनावृत्त हो गए। उसकी घुन्डियाँ मूंगफली के दाने जितनी गुलाबी रंग की थी और एरोला कोई दो इंच का गहरे लाल रंग का। गोल गोल चूचे थोड़े से नीचे लटके से थे वर्ना तो वो मोना को भी पानी भरवा देती।
मैंने झट से उसे बाहों में भर लिया। उसकी साँसें तेज हो रही थी। उसने मेरा सर अपने हाथों में पकड़ लिया और मेरे होठों से अपने होंठ लगा दिए। मैं तो उन गुलाब की पंखुड़ियों को चूसने में मस्त ही हो गया। मेरा एक हाथ उसकी पीठ पर था और एक हाथ से उसके नितम्ब सहला रहा था।
वो तो बेसाख्ता मेरे होंठों को चूसे ही जा रही थी। मैंने अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी तो वो उसे कुल्फी की तरह चूसने लगी। यह तो अनोखा आनंद था। कभी वो अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल देती कभी मैं अपनी जीभ उसके मुँह में डाल देता।
मैं तो इस चूसा-चुसाई में इतना खो गया था कि मेरा ध्यान उसकी चूत की ओर गया ही नहीं। यह तो भला हो मेरे राम लाल का कि वो अपनी तंद्रा से जग कर उसे सलाम बजाने लगा था। अब मैंने अपना एक हाथ उसके चूत पर फिराया। छोटे छोटे बालों से ढकी उसकी चूत पूरी गीली हो चुकी थी। मैंने जैसे ही उसकी चूत में अपनी एक अंगुली डालने की कोशिश की वो थोड़ा सा चिहुंकी।
“ऊईइ … मां …”
“क्या हुआ ?”
“ओह…. ऐसे नहीं चलो, उस पलंग पर चलो !”
“ओह…. हाँ …”
मुझे फिर अपनी बुद्धि पर तरस आने लगा। हम दोनों अब पलंग पर आ गए। पलंग पर नई चद्दर बिछी थी। मास्टरनी पलंग पर लेट गई। पर पता नहीं क्यों उसने अपनी चूत पर दोनों हाथ रख लिए और अपनी जांघें कस कर बंद कर ली। मुझे बड़ा अटपटा लगा कि अब शर्माने की कहाँ गुन्जाइश रह गई है। पर सयाने ठीक कहते हैं औरत कितनी भी काम के वशीभूत हो अपनी स्त्री सुलभ लज्जा नहीं छोड़ती।
खैर अब उसे चुदना तो हर हाल में ही था, थोड़ी देर या नखरे और सही। मेरा राम लाल तो हिलोरें ही मारने लगा था। मैं उसकी बगल में लेट गया और उसके चूचों पर हाथ फिराने लगा। मैंने एक चूची के अग्र-भाग पर अपनी जीभ फिराई तो उसकी हल्की सीत्कार ही निकालने लगी। अब मैंने उसे चूसना चालू कर दिया। एक हाथ से उसकी एक चूची को दबाता और दूसरे को जोर जोर से चूसता।
वो तो मस्त ही हो गई। आंखें बंद किये सीत्कार पर सीत्कार करने लगी। मैंने एक एक करके दोनों आमों को चूसना चालू रखा। फिर मैंने धीरे से अपना एक हाथ उसकी चूत की तरफ बढ़ाया। मोटी मोटी फांकें सूजी हुई सी लग रही थी। मैंने थोड़ा नीचे खिसकते हुए अब अपनी जीभ उसके उरोजों की घाटियों से लेकर नीचे पेट और नाभि तक चाटना चालू कर दिया।
जैसे ही मेरी जीभ ने उसकी चूत को छुआ तो उसकी एक किलकारी ही निकल गई। उसकी बंद जांघें स्वतः ही खुलने लगी और रस भरी दो पंखुड़ियां मेरी आँखों के सामने फ़ैल गई। उसके अन्दर वाली पत्तियाँ जरुर काली सी थी पर बाहरी फांकें गोरी गोरी थी जिन्हें छोटे छोटे काले घने झांटों ने ढक रखा था। मैंने एक चुम्मा उस पर ले ही लिया। मेरे नथुनों में एक मादक गंध भर उठी। और मास्टरनी की एक मादक सीत्कार निकल गई।
मास्टरनी आँखें बंद किये लेटी आह उन्ह… करने लगी। अब मैंने दोनों हाथों से उसकी चूत की फांकों को चौड़ा किया। अन्दर से चूत एक दम गुलाबी रंग की थी और उसके अन्दर का गीलापन तो ऐसे लग रहा था जैसे इसमें से पानी की सैंकड़ों धाराएं निकल रही हों। ओह … अब मेरी मोटी बुद्धि में सहस्त्रधारा का अर्थ समझ आया था।
मैंने अपने जलते होंठ उसकी फांकों के बीच लगा दिए। आह … नमकीन और कसैला सा स्वाद तो ठीक वैसा ही था जैसा मोना की चूत का था बस थोड़ी सी गंध अलग थी। मैंने अपनी जीभ को नुकीला बनाया और उसकी चूत की दरार पर ऊपर से नीचे तक फिराया। उसका दाना तो चेरी की तरह बिलकुल लाल था। मैंने अपनी जीभ उस पर फिराई और फिर उसे हल्का सा दांतों से दबाया तो मास्टरनी की उत्तेजना में एक चींख सी निकलते निकलते बची।
“रे ताऊ … ओह … जीत … चूस….. और जोर से चूस….. आह … य़ाआअ ईईईईईईईईई………………”
मैंने झट से उसकी चूत को मुँह में भर लिया और जोर जोर से चूसने लगा। मास्टरनी रोमांच में कांपने लगी थी। कभी वो अपने पैर उठाती और कभी नीचे पटकती। उसने मेरा सर कस कर अपने हाथों में पकड़ा था। और जोर जोर से अपनी चूत की ओर दबाने लगी। वह तो सीत्कार पर सीत्कार किये जा रही थी।
उसका शरीर एक बार थोड़ा सा अकड़ा और उसने मेरा सर इतने जोर से अपनी चूत पर दबाया कि मेरी तो साँसें ही कुछ क्षणों के लिए रुक सी गई। इसके साथ ही उसकी चूत ने 3-4 चम्मच गाढ़ा सा तरल द्रव्य छोड़ दिया। मैं तो उस सहस्त्रधारा के जल को पीकर निहाल ही हो गया।
मास्टरनी पता नहीं नशे जैसी हालत मन क्या क्या बड़बड़ा रही थी। पता नहीं उसे अचानक क्या सूझा वो मुझे परे धकेल कर उठ खड़ी हुई और इस से पहले कि मैं कुछ समझूं उसने मुझे धकेलते हुए चित लेटा कर अपने दोनों पैरों को मेरे कूल्हों के दोनों तरफ कर के एक हाथ में मेरा तना हुआ लण्ड पकड़ लिया और अपनी चूत पर घिसने लगी।
जैसे ही मेरे लण्ड का सुपड़ा उसकी चूत के छेद से टकराया मास्टरनी ने बिना देरी किये एक झटका सा लगाया और गच्च से मेरे लण्ड के ऊपर बैठ गई। पूरा का पूरा लण्ड जड़ तक एक ही झटके में उसकी चूत में समां गया। मास्टरनी की एक चीत्कार सी निकल गई।
“आईईईईईईईईईईईईईईई…………………………………………”
मास्टरनी ने लण्ड पूरा का पूरा अन्दर तो ले लिया पर मुझे लगा वो ज्यादा जोश में गलती कर बैठी है। उसे थोड़ा सा दर्द भी जरुर हुआ होगा पर वो मेरे सामने कमजोर नहीं पड़ना चाहती थी। उसने अपनी आँखें बंद कर ली और चुपचाप ऊपर ही बैठी रही। कुछ समय बाद जब वो थोड़ी सामान्य हुई तब उसने नीचे झुक कर मेरे होंठों को चूमा और बोली,”रे जीत … तू तो पूरा सांड सै मेरी तो जान ही काड़ दी तन्नै !”
“क्यों … मास्टरजी का इतना बड़ा नहीं है क्या ?”
“अरै छोड़ …. वो तो पूरा नन्दलाल ही है। किसी काम का नहीं है। मैं तो इस चूत में अंगुली कर कर के कमली ही हो गई हूँ और वो देहरादून के जंगलों में फोरेस्ट अफसर बना अपनी गांड मरवा रहा है साला चूतिया कहीं का !”
मास्टरनी को ज्यादा जोश आ गया और फिर उसने जोर जोर से ठुमके लगाने शुरू कर दिए। उसके गोल गोल कसे हुए चूतड़ तो उसके झटकों के साथ थिरकने ही लगे थे। मैंने उसकी चूचियों को पकड़ कर मसलना चालू कर दिया तो वो थोड़ा सा नीचे हो गई और अपने उरोज मेरे मुँह पर लगाने लगी। मैं इतना भी मोटी बुद्धि का नहीं था मैंने झट से उसे मुँह में ले लिया और चूसने लगा। मास्टरनी की फिर से सीत्कार निकालने लगी।
“आह … आज कितने दिनों बाद एक मस्त लण्ड मिला है … या … जीवो मेरे सांड तूने तो मुझे निहाल ही कर दिया उम्म्म्म …” और एक बार फिर मास्टरनी ने मेरा सर पकड़ कर होंठों को चूम लिया।
ऐसा नहीं था कि सिर्फ वो ही धक्के लगा रही थी। मैं भी नीचे से अपने चूतड़ उठा उठा कर उसके धक्कों के साथ ताल मिलाने की कोशिश कर रहा था। मैंने अपने हाथ उसके नितम्बों पर फिराने चालू कर दिए। मास्टरनी कभी ऊपर उठती कभी झटके के साथ नीचे आ जाती। कभी थोड़ी देर के लिए मेरे ऊपर लेट सी जाती। तब मुझे उसके नितम्ब सहलाने का मौका मिल जाता।
मेरी बड़ी इच्छा हो रही थी कि एक बार अगर मुझे ऊपर आ जाने दे तो मैं इसके इन नितम्बों और कमर को पकड़ कर ऐसे झटके मारूं कि इसकी तो बस टैं ही बोल जाए। अचानक मेरी एक अंगुली उसकी गांड के छेद से टकरा गई। मैंने मस्तराम और अन्तर्वासना की कई कहानियों में गांड मारने के बारे में भी पढ़ा था। मैंने मन में सोचा मास्टरनी अगर एक बार मुझे भी गांड मार लेने दे तो हे गोपी किशन मैं तो बस सीधा बैकुंठ ही पहुँच जाऊं।
पर मास्टरनी तो अपनी ही धुन में अपनी चूत को मेरे लण्ड पर घिसे जा रही थी। पता नहीं उसे मेरे हलके हलके नुकीले झांटों से अपनी फांकों को रगड़ने में क्या मज़ा आ रहा था। मैंने उसकी गांड में अपनी तर्जनी अंगुली डाल दी। शायद उसकी चूत का रस फ़ैल कर उसकी गांड को भी गीला कर चुका था। अंगुली गच्च से अन्दर चली गई और मास्टरनी की हलकी चीत्कार निकल गई,”रे… ओह….. रे ताऊ यो के कर रिया सै …?
“क्यों क्या हुआ ?” मैंने पूछा।
“न … ना इस छेद को इबी ना छेड़ … इसका नंबर बाद मैं ? तू चिंता ना कर मैं दोनों छेदों में एक साथ भी डलवाऊँगी?”
चलो ठीक है। मुझे तसल्ली हुई कि बाद में ही सही मौका तो जरुर मिलेगा। मास्टरनी ने अब जोर जोर से धक्के लगाने चालू कर दिए। वो अपनी चूत को इस तरह से सिकोड़ रही थी जैसे अन्दर से चूस रही हो। मैंने सेक्स स्टोरीज में पढ़ा था कि बहुत ही अनुभवी और चुद्दकड़ औरतें ऐसा करती है। इससे उनको और अपने साथी को दुगना आनंद आता है और ढीला लण्ड भी अन्दर ठुमके लगाने लगता है। और मास्टरनी तो पूरी उस्ताद थी इस मामले में।
हमें कोई 20-25 मिनट तो जरुर हो ही गए थे। मुझे लग रहा था अब मैं खलास होने वाला हूँ। मैं ऊपर आने की सोच रहा था पर मास्टरनी ने मुझे नीचे दबोच रखा था। अब मास्टरनी ने जोर जोर से सीत्कार करना चालू कर दिया था और मुझे लगा मेरा लण्ड उसकी चूत ने इतनी जोर से अन्दर भींच लिया है जैसे गन्ना पेरने वाली मशीन गन्ने का रस निचोड़ लेती है। उसने एक किलकारी मारी और मेरे ऊपर ढेर हो गई।
मैंने उसकी कमर पकड़ ली और एक पलटी मारी तो मास्टरनी नीचे और मैं ऊपर हो गया। अब मुझे थोड़ा सांस आया। मैंने दोनों हाथों से उसकी कमर पकड़ कर दनादन धक्के लगाने चालू कर दिए। मास्टरनी आँखें बंद किये लेटी रही। मैं भी अंतिम पड़ाव पर था कितनी देर रुकता। मेरा भी ज्वालामुखी फट पड़ा और वीर्य की फुहारें अन्दर निकलती चली गई। मास्टरनी की ठंडी आहें निकलने लगी और उसकी अकड़न मंद पड़ने लगी। पर उसने अपनी बाहों की जकड़न ढीली नहीं होने दी।
कोई 10 मिनट हम इसी अवस्था में पड़े रहे। अब मेरा लण्ड सिकुड़ गया था और बाहर फिसल आया। उसकी चूत से वीर्य और कामरज बाहर निकल कर चद्दर को भिगोने लगा था। मास्टरनी ने मुझे उठ जाने का इशारा किया तो मैं उठ बैठा। मेरे लण्ड के चारों और भी वीर्य और उसकी चूत से निकला कामरज लगा था। मैं उसे धोने बाथरूम में चला गया।
जब मैं अपने लण्ड को साफ़ करके और उस पर थोडा सा सरसों का तेल लगा कर वापस आया तब भी मास्टरनी उसी मुद्रा में लेटी थी। वो अपनी चूत धोने बाथरूम में नहीं गई। मैंने उसे बाथरूम जाने को पूछा तो उसने मना कर दिया और बोली,”एक बार और मज़ा लेना है अभी !”
मेरा राम लाल तो दो बार निचुड़ चुका था। पर मेरा भी मन अभी नहीं भरा था। सच पूछो तो मास्टरनी ने मुझे चोदा था। मज़े तो उसने लिए थे। मैं एक बार उसे घोड़ी या डॉगी स्टाइल में चोदना चाहता था। मैं उसके नजदीक जाकर पलंग पर बैठ गया तो वो सरक कर मेरी जाँघों पर सर रख कर लेट गई और मेरे राम लाल को हाथ में पकड़ कर एक चुम्मा ले लिया। राम लाल तो अलसाया सा था। मुझे डर लगाने लगा था कि यह दो बार निचुड़ चुका है कहीं धोखा ही ना दे जाए।
पर कहते हैं औरत के हाथ में जादू होता है। जो लण्ड तीन इंच का होता है खूबसूरत औरत के हाथों में आते उम्मीद से दुगना हो जाता है भला मेरा क्यों ना होता। मास्टरनी ने उसे मसलना चालू कर दिया और फिर से अपने मुँह में लेकर चूसने लगी। राम लाल धीरे धीरे अपने रंग में आने लगा।
मेरे सारे शरीर में सनसनी सी होने लगी और लण्ड तनकर अपनी औकात में आ गया। मास्टरनी ने उसे मुँह से निकाल कर आज़ाद करते हुए कहा,”रे जीत, ले तेरा घोड़ा तो फेर तैयार हो गया सवारी करने को ?”
मुझे डर लगाने लगा कहीं मास्टरनी फिर से मुझे ना दबोच कर अपने नीचे ले ले। मैंने कहा,”तो आप घोड़ी बन जाओ ना मैं सवारी करता हूँ ?”
उसने मेरी और टेढ़ी आँखों से इस तरह देखा जैसे मैं मोटी बुद्धि का ना रह कर कालिदास बन गया हूँ। मास्टरनी झट से अपने घुटनों के बल हो गई और अपने गांड हवा में ऊपर उठा दी। उसने अपना सर तकिये पर रख लिया। अब मैं उसके पीछे आ गया। गोरी गोरी मुलायम जाँघों के बीच उसकी चूत की फांकें सूज कर मोटी मोटी हो गई थी। गांड का सुनहरा सा छेद कभी खुल और कभी बंद हो रहा था। उसकी दर दराई सिलवटें तो मुझे उसी में अपना लण्ड डाल देने का आमंत्रण दे रही थी।
मैंने अपने लण्ड को उसकी फांकों के बीच लगाया और उसकी कमर पकड़ कर जोर से एक धक्का लगा दिया। चूत पहले से ही गीली थी पूरा का पूरा लण्ड बिना किसी रुकावट के अन्दर चला गया।
मास्टरनी की चींख सी निकल गई। वो बोली “रे ताऊ थोड़ा सबर कर धीरे … के जल्दी सै ?”
मैं अब कहाँ रुकने वाला था। मैंने धक्के लगाने शुरू कर दिए। धक्कों के साथ उसके भारी चूतड़ हिलते तो मेरा उत्साह दुगना हो जाता। मैंने उन पर जोर जोर से थप्पड़ लगाने चालू कर दिए। मास्टरनी तो सीत्कार पर सीत्कार करने लगी। मैं कहीं पढ़ा था कि जब कोई औरत उम्र में थोड़ी बड़ी हो तो उसे चोदते समय अगर उसके चूतड़ों पर हलकी चपत लगाई जाए या उसके होंठ या चूत की फांकों को दांतों से काटा जाए तो उसे दर्द के स्थान पर मीठी कसक के साथ और भी मज़ा आता है।
मैंने अपनी घुड़सवारी और एड लगानी चालू रखी। हर धक्के के साथ मेरा लण्ड उसकी बच्चे दानी तक चला जाता और मास्टरनी की आह … उन्ह … निकलने लगती।
“या … आह … उइईई ……मा … और जोर से … आज सारे कस बल निकाल दे इस चूत के … आह … बहोत तंग किया है इसने मुझे … आह …”
मेरा शेर तो इस समय खूंखार बना था। मैंने धक्कों की गति बढ़ा दी। 10-15 मिनट की इस दूसरी चुदाई में ही मास्टरनी के पसीने निकलने लगे। मेरा भी यही हाल था। पर राम लाल तो उसी तरह खड़ा था। सच कहूं तो चुदाई का असली मज़ा तो मुझे आज ही मिला था। उस कमेड़ी की चुदाई के समय तो हम दोनों ही डरे हुए थे और वो भी बस सारी चुदाई में आह…. उईइ…. हाई…. करती कसमसाती रही थी।
मास्टरनी की आँखें बंद थी। मास्टरनी जब निढाल हो गई तो उसने अपना जानामाना फ़ॉर्मूला आजमाया और अपनी चूत का संकोचन करने लगी। आप तो अनुभवी हैं जानते ही हैं कि जब चुदाई के दौरान औरत ऐसा करती है तो आदमी बहुत जल्दी अपनी चरम सीमा पर पहुँच जाता है। हमें 15-20 मिनट तो इस बार भी हो ही गए थे। मैं मास्टरनी की हालत जानता था इसलिए अब मैंने भी जोर जोर से धक्के लगा कर अपना तनाव ख़तम करने का सोच लिया।
उसके चूतड़ों की खाई और गांड के छेद को देख कर मुझ से रुका नहीं गया और मैंने अपनी एक अंगुली उसकी गांड में डालने की फिर से कोशिश की तो मास्टरनी बोली,”रे ताऊ, इब खिलवाड़ बंद कर … बस निकाल दे अपना माल मैं तो गई … उईईईइ…… म़ा …?”
मुझे लगा मास्टरनी झड़ गई है। अब तो उसकी चूत बिलकुल ढीली पड़ गई थी। मैंने 4-5 धक्के बिना रुके लगा दिए और उसके साथ ही मेरे लण्ड ने भी मुक्ति की राह पकड़ ली। मास्टरनी धीरे धीरे नीचे होती गई और मैं उसके ऊपर ही पसर गया। हम दोनों ने ही ध्यान रखा कि लण्ड बाहर ना निकले। मैंने अपने हाथ नीचे करके उसके चुचों को पकड़ लिया और अपनी टांगें उसके चूतड़ों के गिर्द कस ली।
पता नहीं कितनी देर हम इसी तरह लेटे रहे। मेरा लण्ड धीरे धीरे बाहर निकल आया। उसकी चूत से वीर्य और कामरज का मिलाजुला मिश्रण बाहर निकल कर चद्दर पर फ़ैल गया। हम दोनों ही अब उठ खड़े हुए। हमने देखा 8-10 इंच के गोल घेरे में चद्दर पर वो मिश्रण फैला है।
मास्टरनी ने मेरी ओर मुस्कुराते हुए देखा और बोली,”रे हरियाने के सांड ! देख तूने चद्दर को फिर से खराब कर दिया। जा इब इसे बाथरूम में गेर दे !” “वो क्यों ?””रे ताऊ ! वो हरामजादी कान्ता कभी भी आ सकती है पूरे दो घंटे हो गए हैं ?””ओह … ?” मेरी भी हंसी निकल गई।
“वो कल का क्या प्रोग्राम है ?” मैंने पूछा।
“कल की कल देखेंगे !”
मास्टरनी चद्दर उठा कर बाथरूम में चली गई और मैं अपने कपड़े पहन कर घर की ओर भागा। मैं सोच रहा था कि मास्टरनी की दोनों छेदों में एक साथ लण्ड डलवाने वाली बात का क्या मतलब था ?
मै एक गाना एक गाना गुनगुनाता हुआ अपनी मस्ती और ख़ुशी में जा रहा था कि
आज मैं ऊपर आसमान नीचे
जल्दी से घर पहुंचा और नहाया और खाना खा कर पलंग पर लेट कर सोचने लगा आज जो हुआ और कल क्या होगा उसका इन्तजार करने लगा।
अगले दिन जब मैं मास्टरनी के घर पहुंचा तो किसी के बात करने की आवाज आ रही थी मास्टरनी किसी से बात कर रही थी मैं जब अन्दर पहुंचा तो वहां का नजारा देख कर तो मेरे पाँव के नीचे से जमीन ही निकल गई….
कहानी अभी बाकी है दोस्तो ! मैंने मास्टरनी के घर ऐसा क्या देखा यह आपको अगली कहानी मैं लिखूंगा. लेकिन तब जब आप लोग मुझे मेल करेंगे. लेकिन इतना बता देता हूँ कि जो भी देखा वो कम से कम मेरे लिए किसी 1000 वाट के कर्रेंट से कम नहीं था।
मेरी यह चुदाई आपको कैसी लगी ? मुझे यह तो जरुर बताना। Antarvasna Sex Stories
मैं गुप्ता बहुत समय से Sex Stories अन्तर्वासना की कहानियाँ पढ़ रहा हूँ. कई बार सोचा कि अपने जीवन की घटनाओं के बारे में लिखूँ. पर पता नहीं हिम्मत नहीं हो रही थी. आज जब एक बार फिर से मैं अन्तर्वासना की साईट पर गया तो फ़ैसला किया कि एक बार तो अपना अनुभव मैं भी लिखूँ.
मैं आज चालीस साल का हूँ पर सेक्स का खुमार तो अभी भी बहुत है. एक तो वैसे ही मेरा जॉब घूमने वाला है और मैं भारत में घूमता रहता हूँ और हफ्ते में केवल दो तीन दिन के लिए ही घर जा पाता हूँ इसलिए जब घर जाता हूँ तो मेरी बीबी तो थक ही जाती है.
अब मैं अपनी पहली चुदाई के बारे में बताता हूँ.
उस समय मैं 18 साल का था, मेरी दूर की नज़र थोड़ी कमजोर थी. उस समय दिल्ली में एक डॉक्टर आया जो इलाज से चश्मा उतरवा देता था. बस मैं भी उसके पास पहुच गया. वहाँ पर एक हफ्ते तक रहना था. मेरे साथ वाले पलंग पर एक छोटी लड़की भी इलाज़ करवा रही थी. मेरे चश्मे का नंबर तो केवल -1 था पर उसका नंबर उस समय -3.5 था. उसके साथ उसकी मम्मी रहती थी.
यह दूसरी रात की बात है, जब सब सो रहे थे कि अचानक मुझे अपने पैर पर किसी का हाथ महसूस हुआ. मैंने धीरे से आँख खोल कर देखा तो पता चला कि लड़की की माँ जो मेरे पैरों की तरफ मुँह करके सो रही थी वो मेरे पैरों को सहला रही थी.
मैं कुछ नहीं बोला, चुपचाप सोने का बहाना करता रहा. हम दोनों के पलंग में केवल 6′ का फासला था. थोड़ी देर में उसने मेरा पैर पकड़ कर अपने पास खींच लिया और अपने सीने पर दबा दबा कर रगड़ने लगी. अब मेरा लंड भी खड़ा हो गया लेकिन मैं फिर भी आराम से लेटा रहा क्योंकि यह मेरा पहला मौका था इसलिए मेरी गांड फट रही थी.
पर थोड़ी देर बाद मैंने हिम्मत करके अपने पैर के अंगूठे से उसके मोमों को रगड़ना शुरु कर दिया. इतने में अचानक उसने अपना ब्लाऊज़ ऊपर करके अपने मोमे बाहर निकाल लिए. उसने ब्रा भी नहीं पहनी थी. इस अचानक हुए परिवर्तन ने मेरी हवा निकाल दी. मुझे डर लग रहा था कि अगर कोई आ गया या कोई उठ गया तो क्या होगा!
पर वो आराम से मेरे पैर से अपने मम्मे मलवा रही थी.
धीरे धीरे मेरे हिम्मत भी बढ़ गई और मैं थोड़ा नीचे को सरक गया और पूरा जोर लगा कर अपने पैरों से उसके स्तन मलने लगा. उसने धीरे से अपना हाथ आगे करके मेरे लंड को पकड़ लिया और जोर से मलने लगी. मेरी तो जैसे जान ही निकल गई. फिर मैंने अपनी साइड बदल कर उसकी तरफ मुँह कर लिया और उसके मोमे जोर जोर से दबाने लगा. उसके मोमे बहुत ही नर्म-मुलायम थे. फिर धीरे से मैंने आगे को झुक कर उसके चुचूक को मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगा. मैंने इतनी जोर से चूसा कि उसकी आह निकल गई. मैंने पहली बार किसी के मोमे चूसे थे इसलिए मैं तो पागल हुआ जा रहा था.
फिर मेरी हिम्मत और बढ़ गई और मैं चूसने के साथ साथ उसके मोम्मों को कस कस कर दबाने लगा.
वो बोलने लगी- और दबा जोर जोर से!
दस मिनट तक हम ऐसे ही मजे लेते रहे. वो मेरा लंड दबा रही थी और मैं उसके मोमे चूस रहा था और दबा रहा था. लेकिन जगह कम होने की वजह से हम और कुछ नहीं कर सकते थे. फिर मैंने उसकी साड़ी ऊपर करके उसकी चूत में उंगली डाल दी और जोर जोर से अन्दर बाहर करने लगा और वो मस्ती में मेरे लंड को रगड़ने लगी. कुछ देर बाद हम दोनों का माल निकल गया.
कुछ देर तो हम दोनों आराम से लेटे रहे, फिर वो बोली- मजा आया?
मैंने कहा- बहुत मजा आया!
तो वो बोली- कभी किसी को चोदा है?
मैंने कहा- नहीं!
तो वो बोली- कभी मेरे घर आना, तो बहुत मजे दूँगी और तुम्हें चोदना भी सिखा दूँगी.
अगले दिन जब मैं, वो उसकी बेटी सब एक साथ बैठे थे, तो उसने सेब निकाले और सब को काट कर खिलाने लगी. बाद में जब सब अपने पलंग पर चले गये तो मैंने उससे कहा- ये क्या छोटे छोटे सेब खिला रही हो!
तो वो बोली- अगर बड़े सेब खाने हैं तो घर आना पड़ेगा! फिर तुम्हें असली मुलायम और बड़े सेब खिलाऊँगी.
मैंने कहा- फिर तो पक्का तुम्हारे घर आना ही पड़ेगा.
उसने अपना पता और फोन नम्बर मुझे दे दिया. फिर कुछ दिनों के बाद हम अस्पताल से अपने अपने घर चले गये.
एक दिन मैंने सोचा कि चलो देखे कि वो कितना सच बोल रही थी और मैंने उसे फोन किया तो उसने मुझे अपने घर पर आने के लिये बोला.
वो बोली- सुबह 11 बजे मेरे पति काम पर चले जाते हैं, फिर घर पर अकेली हूंगी.
अगले दिन मैं ठीक 11 बजे उसके घर पर पहुँच गया. मैंने उसके घर की घन्टी बजाई तो उसने ही दरवाजा खोला. उस समय उसने गाउन पहाना हुआ था. मुझे देखते ही वो बहुत खुश हुई और जोर से बोली- वेलकम.
मेरी तो गान्ड फट रही थी, क्योंकि यह मेरी पहली बार थी. खैर मैं उसके घर के अन्दर चला गया. जैसे ही मैं अन्दर गया उसने दरवाजा बन्द कर दिया.क्योंकि मैं डर रहा था इसलिये पहले मैंने पूरे घर का एक चक्कर लगाया यह कह कर कि पहले तुम्हारा घर तो देख लूँ. फिर जैसे ही मैं उसके बेडरूम में पहुँचा, उसने कहा- देख लिया! घर पर कोई नहीं है.
मैं कुछ नहीं बोला, बस उसकी तरफ देख कर मुस्करा दिया. तो वो हंसने लगी और मुझे पकड़ कर एक जोरदार पप्पी कर दी.
बस फिर क्या था, मैंने भी उसे कस कर पकड़ लिया और चूमने लगा. उसने एक दम से मुझे पलंग पर गिरा दिया, मेरे ऊपर लेट गई और कहने लगी- तुझे बड़े बड़े सेब खाने थे ना? ले आज जी भर कर खा ले!
और उसने अपना गाउन नीचे को करके अपना एक मोमा मेरे मुँह में दे दिया जिसे मैं कस कर चूसने लगा. वो जोर जोर से आह आह करने लगी. उसकी आह सुन कर मेरा लन्ड जोर जोर से फड़कने लगा. मैंने एकदम से पल्टी ली और उसको नीचे दबा लिया और एक हाथ से उसके एक मोमे को कस कर दबाने लगा और दूसरे को चूसते हुए नीचे कपड़ों के ऊपर से ही लन्ड को उसकी चूत पर रगड़ने लगा.
वो भी एकदम गरम हो गई और उसने मेरे सारे कपड़े एक मिनट में उतार दिये और अपना गाउन भी उतार दिया. जैसे ही उसने अपना गाउन उतारा, मेरी तो हालत ही खराब हो गई क्योंकि मैं पहली बार किसी औरत को एकदम नंगा देख रहा था. मेरा लन्ड फटने को तैयार था. इतने में ही उसने मेरे लन्ड को पकड़ कर दबा दिया. मेरी हालत बिल्कुल पागलों वाली हो रही थी.
उसने मुझे पलंग पर गिरा दिया और एकदम से मेरे लन्ड पर बैठ गई और पूरा का पूरा लन्ड अन्दर ले लिया.
लन्ड अन्दर जाते ही क्या सकून मिला… बता पाना बहुत मुशकिल है! पहली बार मेरा लन्ड किसी चूत में गया था. मैं तो बस स्वर्ग में पहुँच गया था और मेरे साथ साथ उसे भी शायद मजा आया. मैं नहीं जानता था कि ऐसा मजा भी होता है! मैं तो बस उड़ रहा था और यह शायद उसे भी समझ आ रहा था इसलिये वो बस आराम से बैठी थी.
फिर एक मिनट के बाद वो बोली- क्या हुआ रा…जा? यह तो बस शुरुआत है!
अब तक मैं भी अपने होश में वापस आ चुका था. मैंने कहा- चिन्ता मत करो और शुरु हो जाओ.
बस फिर क्या था, उसने ऊपर से धक्के लगाने शुरु कर दिये. मैं तो बस मजे से लेटे लेटे मजे ले रहा था, कि वो एकदम से बैठ गई और अपनी चूत को मेरे लन्ड पर कस लिया.
मैंने पूछा- क्या हुआ?
तो वो बोली- मैं तो गई!
इस पर मैंने कहा- अभी तो शुरुआत है!
तो वो हंसने लगी और बोली- अब तू धक्के लगा!
फिर क्या था, मैंने पल्टी लगाई और उसको नीचे दबा लिया. अब तक मैं भी समझ चुका था कि चुदाई कैसे होती है.
बस सबसे पहले तो उसके मोटे मोटे मोमों को दबाने लगा फिर एक एक को मुँह में ले कर बारी बारी से चूसने लगा. वो भी फिर से मस्ती में आने लगी और कहने लगी- बहुत मजा आ रहा है और जोर से चूस… काट कर खा जा बस!
मैंने उसके कहने के साथ ही उसके निप्प्ल को हल्के से काट लिया. वो आ…ह कर उठी और बोली- चू…स खा…ली कर दे! काट! सेब क्या इतने आराम से काटते हैं?
यह सुन कर मुझे भी जोश चढ़ गया और मैं जोर जोर से उसके मोमों को चूसने और काटने लगा. इधर मेरे लन्ड की हालत खराब हो रही थी. तभी वो बोली- अपना लन्ड भी घुसा दे और फाड़ दे मेरी चूत!
बस फिर मैंने एकदम से लन्ड उसकी चूत में पेल दिया और धक्के लगाने लगा. अभी दस मिनट ही हुए थे, कि वो बोली- तेज और तेज!
मैंने जोरदार धक्के लगाने शुरु कर दिये. तेज और तेज कहते कहते उसने मेरा सर अपने मोमों पर जोर से दबा दिया और अपनी टाँगें मेरी कमर पर कस ली और नीचे से उछल उछल कर धक्के लगाने लगी.
इस जोरदार चुदाई से 5 मिनट में हम दोनों स्खलित हो गये और मैं उसके ऊपर लेट गया. हम दोनों अपनी सांसों को सम्भाल कर कुछ देर बाद उठे तब तक बारह बज चुके थे.
वो बोली- अब मेरी बेटी स्कूल से आने वाली है इसलिए फिर कभी!
हम उठ गये और अपने कपड़े पहनने लगे तो वो बोली- मजा आ गया! मेरा पति तो बस 20-25 धक्कों में ही झड़ जाता है. फिर कब मिलोगे?
मैंने कहा- तुमने मुझे पहला सेक्स अनुभव कराया है! तुम जब बोलोगी, मैं हाजिर हो जाऊँगा.
अब तक हम अपने कपड़े पहन चुके थे और वो बाहर जाने के लिये तैयार थी. ज़ब हम गेट के पास पहुँचे तो उसने फिर से मुझे पकड़ लिया और एक प्यारी सी पप्पी दी और बोली- अगली बार और मजे करेंगे.
उसके बाद हम और भी कई बार मिले और सेक्स किया. अगर वक्त मिला तो बाकी के किस्से भी लिख़ूंगा. Sex Stories
सीमा को अलवर गए हुए Antarvasna एक हफ्ता बीत चुका था और इस एक हफ्ते में मैंने वो नजारे देखे थे जिनकी जीवन में कभी उम्मीद नहीं की थी। पायल जैसी हसीन और जवान लड़की मुझसे चुदवायेगी, मैंने सोचा न था।
खैर अगले दिन सुबह नाश्ता करके मैं बैंक चला गया और दोपहर को जब लंच करने आया तो पहले पायल की चूत मारी फिर खाना खाया और बैंक वापस चला गया। शाम को घर आया और कपड़े उतार कर सीधे नहाने के लिए बाथरूम घुस गया।
अभी नहाया ही था कि किसी ने दरवाजे पर दस्तक दी, मैंने जल्दी से तौलिया लपेटा और दरवाजा खोलने आ गया। दरवाजा खुलते ही देखा कि मेरी सीमा डार्लिंग हाथ में मिठाई और फ्रूट से भरी थाली पकड़े खड़ी थी, जो वह अलवर से लाई थी और मेरा हिस्सा मुझे देने आई थी। मैं दरवाजा खुला छोड़कर अपने कमरे की तरफ चल दिया मेरे पीछे पीछे वो भी मेरे कमरे में आ गई, सीमा ने थाली को पलंग पर रखा और मेरे सीने से लगकर मुझे चूमने लगी। मैंने अपने दोनों हाथों से उनके चूतड़ों को दबाया और उनका गाउन कमर तक उठाकर तौलिए में से अपना लंड निकला और पैंटी के ऊपर से ही उनकी चूत पर रखकर दबा दिया।
सीमा बोली- अभी जाने दो ! राजा रात को आऊंगी, दरवाजा खुला रखना।
मूल चंद और मैं जब रात को डिनर कर रहे थे तो सीमा बार बार गुनगुना रही थी- रस्ता हमारा तकना ! दरवाजा खुल्ला रखना !
इसका अर्थ सिर्फ मैं समझ पा रहा था। खाना खाकर अपने कमरे में आया तो तुरन्त नींद आ गई। जब से सीमा और पायल की पुंगी बजानी शुरू की थी, रात को नींद खूब आती थी। रात को लगभग १२ बजे मेरी नींद खुल गई, देखा सीमा मेरे बगल में लेटी है और मुझे सहला रही थी। मैंने उसे अपनी बाहों में ले लिया, नंगा किया और अपना लंड उसके हाथ में दे दिया, उसने पहले तो अपने हाथों से लंड को सहलाया, फिर अपने मुंह में ले लिया। थोड़ी देर चूसने के बाद जब लंड बहुत टाइट हो गया तो वह लेट गई, मैं उसकी टांगों के बीच आ गया, अपना लंड उसकी चूत के होठों पर रगड़ने लगा तो बोली- राजा, देर न करो ! बहुत भूखी है यह ! अब डाल दो।
मैंने देर नहीं की, एक तकिया उसकी गांड के नीचे रखकर अपने लंड का सुपाड़ा उसकी बुर के मुंह पर रखा और एक झटके में पूरा लंड अन्दर कर दिया तो मुझे चूमने लगी। डेढ़ घंटे तक चुदवा कर वो अपने घर चली गई।
अगले दिन से पायल ने स्कूल जाना शुरू कर दिया तो लंच के समय सीमा को चोदने में कोई दिक्कत नहीं थी। अब दिक्कत थी तो सिर्फ इस बात की कि पायल नहीं चुद पा रही थी, जिस वजह से मैं तो परेशान था ही, पायल मुझसे ज्यादा परेशान थी। आप खुद सोचकर देखिये १८ साल की जवान लड़की जो ८ दिनों में ३० बार चुदी हो और अब ४ दिन से उसने लंड का दीदार भी ना किया हो, वो परेशान होगी या नहीं?
मैंने इसका भी एक रास्ता निकाला, रात को खाना खाते समय मैंने पूछा- पायल तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है?
इससे पहले कि पायल कुछ जवाब दे, सीमा बोली- बाकी सब विषयों में तो ठीक है, लेकिन इसका गणित बहुत कमजोर है, डरती हूँ कहीं फ़ेल ना हो जाए।
मैंने कहा- आपको घबराने की कोई जरूरत नहीं है, मैं दो महीने पढ़ा दूंगा तो ८०% से ज्यादा नंबर लाएगी। बस समस्या समय की है, उसका भी कोई रास्ता निकल आएगा।
काफी देर के विचार विमर्श के बाद तय हुआ कि रात को खाना खाने के बाद १० से ११ बजे तक पायल मुझसे गणित पढ़ा करेगी और यह काम आज से ही चालू।
मैं खाना खाकर अपने कमरे में आ गया, करीब आधे घंटे बाद पायल आई और आते ही मुझसे लिपट गई। मैंने उसे अपने से दूर करते हुए कहा- एक दो दिन धैर्य रखो, अभी हो सकता है तुम्हारे घर वाले हम पर नज़र रख रहे हों !
मैंने उसे पढाना चालू किया, लगभग ११.३० बजे सीमा आई, दरवाजा खटखटाया, मैंने तुंरत खोला।
सीमा बोली- चलो बेटी ! बहुत देर हो गई, अब अंकल को सोने दो !
पायल ने कहा- बस ये सवाल कर लूं, फिर आती हूँ !
मैंने कहा- भाभी जी आप ५ मिनट रुकिए, इसका काम हो गया है।
दूसरे दिन रात के १२ बजे तक पायल पढ़ती रही तो सीमा आई और बोली- चलो बेटी, १२ बज गए, हमें सोना भी है।
तो पायल ने कहा- आप लोग सो जाओ। मैं यहीं दीवान पर सो जाऊंगी।
मैं तपाक से बोला- यहाँ कैसे सो जाओगी, यहाँ सोना है तो कल से सोना और अपना कम्बल लेकर आना, क्योंकि मेरे पास एक ही कम्बल है।
माँ बेटी दोनों हंस दीं और चली गईं।
अगले दिन शाम को मैं बैंक से लौटा तो चाय पीने सीमा के घर चला गया, कहने लगी- पायल पास तो हो जायेगी ना?
मैंने कहा- आप बिल्कुल फ़िक्र ना करें, अगर आप ना बुलाएं तो वो शायद २ बजे तक भी मुझे ना छोड़े, कहे पढ़ाते रहिये।
सीमा बोली- आज उसे एक कम्बल दे दूँगी, जब तक पढ़े, पढ़े, उसके बाद वहीं दीवान पर सो जायेगी।
रात को खाना खाकर पायल आई, अपना कम्बल दीवान पर रखते हुए उसने मुझे शरारती नज़रों से देखा तो मैंने कहा- १२ बजे तक पढ़ो, फिर देखेंगे।
ठीक १२ बजे पायल बोली- सर, १२ बज गए आज की कोचिंग खत्म। अब आप के फीस लेने का टाइम हो गया।
मैंने ड्राइंग रूम की लाइट बंद की और पायल को गोद में उठाकर अपने बेडरूम में ले आया। उसके कपड़े उतार कर नंगा कर दिया और अपने कपड़े उतारने लगा तो बोली- मैं एक मिनट में सुसू कर के आ रही हूँ !
मैंने कहा- रुको, मैं भी चलूँगा, मुझे भी सुसू आई है !
कहने लगी- मैं आपके सामने सुसू नहीं करूंगी ! मुझे शर्म आएगी !
मैंने खुले शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा- जिस चूत में मेरा लंड लेते हुए शर्म नहीं आती उसमें से मेरे सामने सुसू करने में शर्म आती है?
मैंने उसका हाथ पकड़ा और दोनों बाथरूम में घुस गए, बाथरूम काफी बड़ा था। सुसू करने के बाद मैंने वहीं उसकी एक टांग उठाकर अपने हाथ में ली और अपने लंड का सुपाड़ा उसकी चूत पर रख दिया।
पायल कसमसाते हुए कहने लगी- जान बेड पर ले चलो।
मैंने लंड को चूत के अन्दर किया और उसी हालत में उसे बेड पर ले आया।
उस रात के बाद से मेरा टाइम टेबल सेट हो गया- दिन के १ बजे सीमा की चूत और रात के १ बजे पायल की चूत।
श्री श्री मूल चंद जी मनवानी जब पहली तारीख को किराया लेते हैं तो उन्हें मालूम ही नहीं होता कि इस किराये के बदले में मैं क्या क्या सुविधा ले रहा हूँ।
आशा है आपको मेरी कहानी पसंद आई होगी। Antarvasna
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