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मेरा नाम खुशबू है। अभी मैं २२ वर्ष की हूँ। इसी Sex Stories साल मैंने एम ए किया था। मेरे कॉलेज समय में यानि एक साल पहले मैं एक क्लास में पढ़ने वाले साथी के साथ प्यार कर बैठी थी, यह जानते हुए भी कि मेरी सगाई हो चुकी है।
आलोक एक सुन्दर और व्यवहारिक लड़का था। वो जिम में जाने वाला कसे जिस्म का लड़का था। मैं उसकी शरीर के कट देख कर उस पर मर मिटी थी। जब मैं उससे अधिक बात करने लगी तो वो भी मेरी तरफ़ आकर्षित हुआ। धीरे धीरे ये निकटता में बदल गई और एक दिन उसने मुझे प्रोपोज कर ही दिया। मैं तो पहले ही उस पर मरती थी। उसके प्यार को मैंने तुरन्त स्वीकार कर लिया। अब हम छुप छुप कर गार्डन में, झील के किनारे, लाइब्रेरी में या रेस्टोरेन्ट में मिलने लगे थे पर कॉलेज में सावधान रहते थे कि कही बदनाम ना हो जाये।
अभी तक बस उसने मेरा हाथ ही पकड़ा था। पर मेरी इच्छा तो अपनी हवस पूरी करने की थी, बस जिस्म की जरूरत को पूरा करना चाहती थी। मैं उसे हर तरह से उत्तेजित करती रहती थी कि वो मौका मिलते ही मेरी छातियाँ दबाये और मेरे दूसरे अंगों को मसल दे। कभी ऐसा भी हो जाये कि मुझे अकेले में चोद दे और मेरी प्यास बुझा दे। पर वो मेरे अंगो को हाथ लगाने से भी डरता था। वैसे मुझे चुदाई का कभी भी मौका नहीं मिला था। मैं एक दम अनछुई कली थी, जो खिलने को बेताब थी।
एक दिन आलोक ने मुझे बताया कि शाम को उसके मम्मी पापा एक दिन के लिये मथुरा जा रहे है। शाम को घर पर आ जाना। मेरे दिल में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। मुझे लगा कि आज मौका है, सारी इच्छायें पूरी कर लूंगी। मेरा जिस्म तरावट से भर उठा। मेरे बदन में झुरझुरी सी आने लगी, चुदाई की सोच से मैं बैचेन होने लगी, सपनों में डूबने लगी।
बड़ी मुशकिल से शाम हुई। मैंने मोबाईल से पता किया, उसके मम्मी पापा जा चुके थे। मैंने अपनी स्कूटी उठाई और आलोक के घर पहुंच गई। जैसे ही मैं उसके घर पहुंची, उसके चेहरे पर खुशी झलकने लगी। अन्दर आते ही उसने मेरा गर्म जोशी से स्वागत किया। फिर हम एक सोफ़े पर बैठ गये। उसने धीरे से मेरा हाथ अपने हाथों में ले लिया और बातें करने लगी। पर मेरे दिल में तो कुछ और ही था। मेरा तो जिस्म ही जल रहा था। मैं चाह रही थी कि आज हम दोनों अकेलेपन का भरपूर फ़ायदा उठायें। वो सब कर डालें जो हमारे मन में है।
मैंने ही पहल करना उचित समझा… आलोक तो बस अपना प्रेमालाप ही करता रहा। मैंने उसकी जांघों पर हाथ रख कर उसे दबाया और उसकी काम वासना को जगाने की कोशिश की। उसके जिस्म की कंपकंपी मैंने महसूस कर ली। वो बोलता रहा, मेरी आँखें बन्द होने लगी और जाने कब वो मेरे कब्जे में आ गया। उसके होंठ मेरे होंठो से लग गये और उसका बोलना बन्द हो गया। पुचकारी की आवाजें गूंजने लगी। जीभ मुँह में अन्दर बाहर आने जाने लगी। उसका लण्ड खड़ा हो गया और मेरा काम बन गया।
उसने मुझे चूमते हुए सोफ़े पर गिरा दिया और मेरे जिस्म पर उसका बोझ आ गया। मेरे सीने पर उसके हाथ घूमने लगे। मेरी दिल इच्छा पूरी होने लगी। मुझे सोफ़े में तकलीफ़ हो रही थी। मैंने उसे कहा कि मुझे बिस्तर पर ले चलो। उसने मुझे अपनी बाहों में एक खिलौने की तरह उठा लिया। उसके बाहों की ताकत मुझे मालूम हो गई। उसने मुझे बिस्तर पर लेटा दिया और मेरे जिस्म पर अपना बोझ डाल दिया।
उसकी काया मेरी काया से चिपकी जा रही थी और लण्ड नीचे मेरी चूत पर दबाव डाल रहा था। बिस्तर में मुझे सहजता लग रही थी। उसके हाथ मेरे स्तन दबाने लगे थे और मुझे असीम आनन्द दे रहे थे। मेरी चूत पनीली हो चुकी थी। मेरा जिस्म अब चुदाई मांग रहा था, पर कैसे कहूँ? मैंने इशारों से काम लेना बहतर समझा। मैंने उसका लण्ड पकड़ लिया और दबाने लगी।
इसका तेज असर हुआ और उसने अपनी पेन्ट उतार फ़ेंकी और नंगा हो गया। मैंने जानबूझ कर शरमाने की एक्टिंग की और उसे नंगा देख कर कहने लगी,’ये क्या आलोक? क्या कर रहे हो? ‘
‘प्लीज खुशबू, मुझे मत रोको… वर्ना मैं पागल हो जाऊंगा !’
‘नहीं, आलोक नहीं, देखो मेरी सगाई हो चुकी है, ये ठीक नहीं है?’ पर इतनी देर में वो मेरे कपड़े खींच चुका था। मैंने भी सरलता से उसे उतारने दिये, चुदना जो था।
‘बस खुशबू अब चुप हो जाओ, इस अन्तर्वासना की लजन में कुछ सही गलत नहीं होता है !’ कह कर वो मेरे ऊपर फिर से चढ़ गया।
मैंने अपनी दोनों टांगें खोल ली और चूत का द्वार खोल दिया। पहले तो वो मेरा जिस्म दबाता, मसलता रहा। फिर उसका लण्ड मेरी चूत में घुस पड़ा और उसने चूतड़ों का पूरा जोर लगा कर अन्दर तक उतार दिया। मेरे मुख से जोर की चीख निकल पड़ी। साथ में वो भी कराह उठा। जल्दी से उसने अपना लण्ड निकाल लिया।
‘हाय रे मुझे लग गई है… ! ‘ उसके लण्ड के सुपाड़े के पास की झिल्ली फ़ट गई थी। मेरी चूत में से भी खून निकल आया था।
‘अरे ये खून !’ मैंने भी घबरा गई, मुझे भी अन्दर दर्द हो रहा था। सारा नशा काफ़ूर हो गया था। हम दोनों बाथरूम की ओर भागे। पानी से साफ़ करने लगे, मैंने देखा तो उसके लण्ड की पतली सी स्किन थी, जो सुपाड़े के आस पार से चिर गई थी, साफ़ नजर आ रही थी। मेरी चूत में से बून्द बून्द करके अभी भी खून बह रहा था। मैं घबरा उठी। यह तो मैं जानती थी कि झिल्ली होती है और पहली बार चुदने पर वो फ़ट जाती है पर नहीं मालूम था कि उसके बाद क्या करना चाहिये।
मैंने तो अपने बेग में से सेनेटरी नेपकिन निकाला और नीचे लगा दिया। हमारा पहला अनुभव था इसलिये कुछ समझ में नहीं आया तो मन मार कर मैंने चुदाने का विचार अभी छोड़ दिया। हम दोनों आपस में यही सोचते रहे कि अब क्या करें। कुछ देर बाद मैं घर चली आई। दर्द अभी भी था।
सुबह मैंने पैड हटा कर देखा तो सभी कुछ सामान्य थ, दर्द भी नहीं था। कॉलेज जाने से पहले मैं आलोक के घर गई कि उसे बता दू कि मैं अब ठीक हूँ। उसने भी भी बताया कि वह भी अब ठीक है।
उसने कहा- क्या अब फिर से ट्राई करें?
मैंने सोचा- अगर दर्द नहीं हुआ तो ठीक है वर्ना नहीं करेंगे।
हम जल्दी से बिस्तर पर आ गये। आलोक ने और मैंने जल्दी से कपड़े उतार लिये। कपड़े उतारते ही हम एक दूसरे को देखते ही रह गये। आज तो मैं होश में थी, उसका नंगा जिस्म, मसल्स उभरी हुई, लण्ड मदमस्त सा लहराता हुआ मेरे होश उड़ाने के लिये काफ़ी था। मेरे सेक्सी बदन को देख कर उसका हाल भी बुरा होने लगा। हम भाग कर एक दूसरे से लिपट गये। दो जवान जिस्म टकरा उठे, आग बरसने लगी। उसका मर्द मेरी गहराईयों को ढूंढने लगा। हम बिस्तर पर गिर पड़े और एक दूसरे को ऊपर नीचे लोट लगाने कर मचलने लगे। मन चुदने के लिये मचल उठा।
लोट लगाते हुए वो मेरे ऊपर आ गया और अब उसके चूतड़ मेरी चूत पर अपने लण्ड को दबाने लगे… आश्चर्य हुआ कि इस बार बिना किसी तकलीफ़ के उसका लण्ड मेरी चूत में उतर गया। मेरी पनीली चूत ने सहजता से लण्ड को अपना लिया। मुझे मीठे से अहसास के साथ खुमारी चढ़ने लगी। आज लगा कि लड़कियाँ चुदने के लिये इतना मरती क्यूँ हैं। मैंने भी अपनी चूत का पूरा दबाव उसके लण्ड पर डाल दिया।
धक्के चल पड़े। आलोक की कमर आगे पीछे होने लगी। हम मस्ती की सीढ़ियाँ चढ़ने लगे। सिसकारियाँ निकलने लगी… आलोक का भी यह पहला अनुभव था और मेरा भी। धक्कों की तेजी बढ़ती गई। हम दोनों आनन्द की दुनिया में मस्त हो गये। चूत-लौड़े की मीठी मीठी आग में हम जलते रहे।
‘हाय मेरे राजा, मस्त कर दे मुझे… चोद दे… जरा और … हाय रे !’
‘मेरी जानू, मस्त है रे तू… कितना मजा आ रहा है !’ हम चुदाई करते रहे और कुछ कुछ मस्ती में बोलते भी जा रहे थे।
कुछ ही देर में मैं चरमसीमा पर आ गई। और मस्ती के मारे मेरा रस छूटने लगा। मैं झड़ने लगी। मेरी आंखें बन्द हो गई। झड़ने का सुहाना आनन्द आने लगा। कुछ ही देर में आलोक ने भी अपना लण्ड बाहर खींच लिया और मेरी छाती पर अपना वीर्य छोड़ने लगा। मुझे बड़ा गन्दा सा लगा। मैंने उसे कहा कि वो दूसरी तरफ़ अपना रस गिराये। मैंने पानी से साफ़ किया और हम अब सुस्ताने लगे। इस के बाद मैं कॉलेज चली गई।
इसके बाद हमारा इस तरह का कार्यक्रम कभी मौका मिलने पर ही होता था।
मेरी पढ़ाई पूरी हो चुकी थी। एक साल बीतने को आ गया था। हम दोनों कितनी ही बार घर से भाग कर शादी करने का प्रोग्राम भी बना चुके थे। पर हममें इतनी हिम्मत ही नहीं थी। मेरी एम ए की डिग्री भी मिल चुकी थी। मेरी शादी भी कुछ दिनों बाद हो गई। मैं अपने पति के साथ एक अलग घर में रहने चली गई थी।
एक बार दिन को आलोक मेरे घर आ गया। मेरे पति काम पर गये हुए थे। उसने बताया कि टीचर की कुछ जगह निकली है, आवेदन भर दो। तब मैंने अपने पेपर टटोले और सभी निकाल कर आवेदन जमा करा दिया। आलोक ने एकान्त पाकर मुझसे एक बार चुदाई के कहा तो मैं मान गई। मेरा मन फिर मचल गया। आलोक का लण्ड ही इतना प्यारा था कि मन चुदने को बेकरार हो उठा।
हम दोनों ने अपने कपड़े उतारे और चुदाई में लग गये। मस्ती का सफ़र चल ही रहा था कि जैसे बिजली गिर पड़ी। आलोक का लण्ड मेरी चूत में ही था और मेरा पति सामने खड़ा था। हमारा सारा नशा गायब हो गया। आलोक तुरन्त उछला और अपनी पेन्ट पहनने लगा। मेरा पति आपे से बाहर हो चुका था। उसने पास में पड़ी कुर्सी उठा कर आलोक को दे मारी। वो पेन्ट पहन भी नहीं पाया था कि कुर्सी का वार उस पर आ पड़ा। वो बुरी तरह से गिर कर घायल हो गया। पर उसकी फ़ुर्ती गजब की थी। मेरा पति दूसरा वार करता उसने अपनी पेन्ट ठीक की और एक तरफ़ हो गया। दूसरे ही पल आलोक ने लपक कर उसे पकड़ लिया और उसके पेट पर जबर्दस्त घूंसा मारा और साथ में दूसरे हाथ से उसके चेहरे पर वार कर दिया। मेरा पति आलोक से कमजोर था। वो लहरा कर गिर पड़ा। आलोक ने फ़ुर्ती से छलांग लगाई और वहाँ से भाग खड़ा हुआ।
मेरा पति जब उठा तो उसका चेहरा खून से भरा था। उसने डंडा उठाया और मुझे बुरी तरह से मारना चालू कर दिया। मैं जोर जोर से रो कर उससे पांव पड़ कर माफ़ी मांगती रही पर उस पर तो जैसे खून सवार था। मैं रोती रही, मेरे जिस्म पर डण्डों की मार से नील पड़ चुकी थी। मेरे बालों का एक गुच्छा टूट कर वहाँ पड़ा था। पीठ में असहनीय दर्द हो रहा था। मुझे उसने एक कमरे में बन्द कर दिया। मैं दरवाजा भड़भड़ाती रही और माफ़ी मांगती रही। वो मुझे माँ बहन की गालियाँ देता रहा। अचानक उसके बाहर जाने की आवाज आई। मेरी नजर खिड़की पर पड़ी, मैंने जल्दी से पट खोला और कूद कर बाहर निकल आई। भाग कर बाहर आई तो दो-तीन पड़ोसी बाहर खड़े थे। मेरी चीख पुकार से शायद वो वहाँ आ गये थे।
पड़ोसी ने कहा,’खुशबू बेटी, वो शायद पुलिस थाने गये हैं !’
मैं और डर गई। आलोक के बारे में वहाँ कोई कुछ नहीं जानता था। मुझे लगा अब मुझे यहाँ रहने में खतरा है। मैंने तुरन्त अन्दर गई और और एक एयर बैग में सलवार, कुर्ते जल्दी जल्दी भरे, तभी मेरी नजर मेरे सर्टिफ़िकेट्स पर पड़ी, उन्हें भी मैंने रखा और कमरे में जहाँ मैं पैसे रखती थी, रुपये पैसे लिये और अपने गहने उठा लिये, फिर पति कि अलमारी से उसके पैसे निकाले और बाहर आ गई। तब तक घर के बाहर आठ दस लोग इकठ्ठे हो गये थे।
मैंने कहा,’भाई साहब ! मैं मायके जा रही हूँ… और पिटाई नहीं सह सकती हूँ !’ पड़ोसियों मेरी मदद की और पास में जा रहे टूसीटर को रोका और मां के घर की तरफ़ रवाना हो गई। फिर मुझे लगा कि वो तो वहां भी आ जायेगा। आगे जाकर मैं टूसीटर से उतर गई। वही खड़ी खड़ी सोचती रही। मुझे अपनी जिन्दगी इस छोटी सी गलती के कारण अन्धकारमय नजर आने लगी थी।
मैंने एक बड़ा कदम उठाने का निश्चय कर लिया और रेलवे स्टेशन पहुंच गई। दिल्ली की ट्रेन खड़ी थी। टिकट लिया और बैठ गई। गाड़ी जाने में एक घंटा का समय और था। मैं एक कोने में चुन्नी सर पर डाल कर मुँह छुपाये हुए थी। दिमागी परेशानी के मारे मुझे पता ही नहीं चला कि ट्रेन कब चल दी और मैं दिल्ली कब आ गई। बिना किसी लक्ष्य के मैं निजामुद्दीन से बाहर आ गई। सवेरे का समय था। एक रेस्टौरेन्ट में चाय बिस्किट खाये और फिर मैं आगे बढ़ी। थक कर एक चर्च के बाहर बैठ गई। मुझे नहीं पता था कि दो नजरें मुझे कब से देख रही हैं। बैठे बैठे मेरी झपकी लग गई। अचानक मेरे सर पर किसी का हाथ लगा। मैं चौंक गईऔर घबरा गई। नींद से जाग गई।
‘उठो, बेटी, ये जीजस का घर है… सभी दुखियारों का आसरा… !’
सामने चोगा पहने कोई पादरी था। मुझे प्यार भरी नजरों से देख रहा था। मुझे लगा कि ये दया का फ़रिश्ता कौन है।
‘आ जाओ… मेरे साथ… ‘ उसने अपना हाथ बढ़ा दिया। उसके बूढ़े हाथों को मैंने थाम लिया और मेरी रुलाई अब जोर से फ़ूट पड़ी… ।
‘रो लो बेटी, मन हल्का हो जायेगा।’ मेरी रुलाई कम हुई तो मन मजबूत करके मैं उनका हाथ थामे चर्च परिसर में प्रवेश कर गई।
खुशबू जिंदगी के किस मोड़ पर पहुंची … पढ़े भाग 2 में Sex Stories
मैं 31 वर्ष का 6 फीट लंबा Antarvasna शादीशुदा पुरूष हूँ।मेरी सबसे बड़ी कमजोरी चोदने की मेरी तीव्र इच्छा है।
मेरी पत्नी भी इससे परेशान रहती है क्योंकि शायद ही कोई रात ऐसी होती है जिसमें मैं उसे चोदे बिना सोने देता हूँ।
उसके नहीं रहने पर मैं अपने कमरे में बैठ कर ब्लू फ़िल्म देखते हुए मुठ मार कर अपने 7 इंच मोटे लंड की तड़प शांत करता हूँ।
यह घटना पिछले महीने की है।
मेरी पत्नी मायके गई थी और रात में करीब 10 बजे मैं अपने बिस्तर पर लेटा डीवीडी में एक ब्लू फ़िल्म की सीडी डालकर अपने लंड को सहला रहा था।
फ़िर मैंने बगल में पड़ा मोबाइल उठाया और मेरी पत्नी सुनीता को फोन लगाने लगा।
सामने ब्लू फ़िल्म चल रही थी और उसमें एक मर्द एक औरत की चूत चाटने में लगा हुआ था।
मेरे कानों में उधर से रिंग होने की आवाज आ रही थी फ़िर उधर से आवाज आई- हेल्लो!
मैं मूड में बोलने लगा- सुनीता डार्लिंग! तुम वहां मायके में आराम से हो और यहाँ मेरा लंड तुम्हारे लिए बेकरार है। सामने ब्लू फ़िल्म में मस्त चुदाई का सीन चल रहा है और मैं अपने कड़कते लंड को सहला रहा हूँ। आओ न और अपने चूत में इसे लेकर इसकी तड़प को शांत कर दो।
इतना कहकर मैं सुनीता की आवाज सुनने को रुका.
पर उधर से कोई आवाज नहीं आई और तब मैंने मोबाइल को कान से हटा कर उसके स्क्रीन पर देखा और मेरे होश उड़ गए।
मैं सुनीता के नहीं बल्कि अपने पड़ोस में रहने वाले सुनील जी के घर के फ़ोन पर बातें कर रहा था और वह हेल्लो की आवाज सुनीता की नहीं बल्कि उनकी पत्नी रूबी की होगी जिन्हें मैं भाभी कहता था।
अब मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ?
मेरे लंड की उत्तेजना जा चुकी थी और मैंने डीवीडी बंद कर दिया।
मैंने फ़िर कुछ विचार करने के बाद पुनः सुनील जी के यहाँ फ़ोन किया, रूबी भाभी ने फ़ोन उठाया तो मैंने कहना शुरू किया- सॉरी भाभी, मैं सुनीता को फ़ोन लगा रहा था पर फ़ोन में सुनील जी और सुनीता का नम्बर आस पास होने के कारण आपका नम्बर लग गया और मैंने बिना ध्यान दिए उल-जुलूल बातें कह दी। प्लीज मुझे माफ़ कर दें!
रूबी भाभी ने कुछ नहीं कहा और फ़ोन रख दिया।
मैं चिंतित सा था और समझ नहीं पा रहा था कि क्या करूँ।
खैर मैंने सोने का निर्णय लिया पर नींद नहीं आ रही थी।
लगभग 10 मिनट बाद मेरा मोबाइल बज़ने लगा, वह सुनील जी का नम्बर था।
मैंने रिसीव किया, उधर से रूबी भाभी थी- देखो देवर जी, तुमने गलती तो की है और इसकी सजा भी भुगतनी पड़ेगी, तुम जरा मेरे घर में आओ अभी फ़िर मैं सोचती हूँ कि क्या सजा दूँ!
“अभी आया” मैंने इतना कहा ही था कि रूबी भाभी ने फ़ोन काट लिया था।
मैं गंजी और तौलिया में था सो मैं बिस्तर से बाहर आया और पजामा और टी-शर्ट निकाल कर पहनने लगा।
दोस्तो, अब जरा रूबी भाभी के बारे में बता दूँ।
सुनील जी मेरे पड़ोसी हैं और रूबी भाभी उनकी पत्नी हैं।
रूबी भाभी की उम्र 36-38 वर्ष होगी और वो एक 10 साल के बच्चे की माँ हैं।
उनका बेटा होस्टल में रहकर पढ़ाई करता है और यहाँ सुनील जी और रूबी भाभी रहते हैं।
मैं कभी-कभार उनके घर जाता था।
रूबी भाभी का कद ज्यादा नहीं है वो कुछ 5’3″ के आस पास होंगी पर उनकी चूचियां बहुत बड़ी थी और वो 38 या 40 साइज की ब्रा अवश्य पहनती होंगी।
उनकी फिगर लगभग 38-32-38 होगी।
ठंड के कारण मैंने ऊपर से जैकेट डाला और फ़िर अपने मकान का बाहरी दरवाजा बंद कर रूबी भाभी के मकान की ओर चल पड़ा।
मैंने वहाँ पहुँच कर देखा कि उनका दरवाजा हल्का सा खुला हुआ था सो मैंने काल बेल न बजाकर धीरे से दरवाजा खटखटाया।
रूबी भाभी कि आवाज आई- आ जाओ!
मैं अन्दर गया।
रूबी भाभी सामने नाईटी के ऊपर शाल लपेटे खड़ी थी।
मैंने पूछा- सुनील जी कहाँ हैं?
तो उन्होंने बताया कि वो काम के सिलसिले में बाहर गए हुए हैं और चार दिनों बाद लौटेंगे।
मैंने फ़िर कहा- भाभी! वो मैं सुनीता को फोन लगा रहा था पर गलती से!
रूबी भाभी ने मेरी बात काटते हुए कहा- चलो मान लिया! पर अब जब तुमने मुझसे इस तरह बात की तो इसकी तुम्हे कुछ तो सजा मिलेगी ही, तुम्हें मेरा एक काम करना होगा!
“क्या काम?” मैंने पूछा।
इस पर उन्होंने जबाब दिया- सुनीता ने मुझे बताया है कि तुम बहुत अच्छा मसाज करते हो, मेरा शरीर बहुत दर्द कर रहा है सो मुझे एक मसाज चाहिए!
मैं समझ गया कि रूबी भाभी मेरी बातों को फोन पर सुनकर उत्तेजित हो चुकी हैं और शायद चुदना चाहती हैं।
दरअसल मैं पत्नी के साथ सेक्स के दौरान नई-नई तरकीबें आजमाता रहता हूँ।
मसाज का तरीका भी एक है, बेबी आयल का प्रयोग कर मैं पीठ से मसाज प्रारम्भ कर फोरप्ले की शुरुआत करता हूँ।
मेरा लंड अब रूबी भाभी की चुदाई के बारे में सोच कर खड़ा हो चुका था।
“क्या सोच रहे हो? चलो बेडरूम में!” रूबी भाभी ने कहा और आगे बढ़ गई।
मैं पीछे चल पड़ा।
बेडरूम में पहुंचकर उन्होंने शाल हटा दिया और नाइटी के भीतर बिना ब्रा की बड़ी चूचियों का आभास मुझे हो गया।
मैंने भी जैकेट उतार दिया।
तब मैंने बेबी आयल के बारे में पूछा तो उन्होंने अपने ड्रेसिंग टेबल में से निकाल कर दिया।
कमरे में हीटर होने के कारण ठंड नहीं लग रही थी।
मैंने भाभी को पेट के बल लेटकर नाइटी को ऊपर करने को कहा।
उन्होंने ऐसा ही किया और उनकी चिकनी गोरी पीठ देखकर मेरी उत्तेजना बढ़ गई थी।
नीचे पेटीकोट उनके चूतड़ों को ढके जरूर था, पर उनकी गोलाई और बड़े आकार का स्पष्ट आभास हो रहा था।
खैर मैंने उनकी पीठ पर बेबी आयल डाला और धीरे-धीरे मसाज शुरू किया और कुछ ही मिनटों बाद उनके पेटीकोट के फीते को खोल दिया.
मसाज करते हुए ही पेटीकोट को आधे चूतड़ों तक खिसका दिया और उनके चूतड़ों के ऊपरी हिस्से का मसाज करने लगा।
पुनः अपने हाथों में तेल लेकर उनकी दबी हुई चुचियों के बाहर निकले हिस्से पर हाथ ले गया और रूबी भाभी ने अपने शरीर को हल्के से ऊपर उठा कर मेरे हाथ चूचियों तक पहुँचने दिया।
मैंने पीछे से ही उनकी चूचियों की मालिश शुरू की।
फ़िर नीचे आते हुए उनके पेटीकोट को धीरे से बाहर निकलने लगा तो उन्होंने चूतड़ों को ऊपर उठा कर पेटीकोट निकालने में मदद की।
मैंने भी अपना टी-शर्ट खोल दिया और अब पाजामा और बनियान में था और रूबी भाभी केवल नाइटी में जो ऊपर की ओर सिमटी थी और उनकी पीछे का सारा सेक्सी भाग मेरे सामने था।
अब मैंने उनके चूतड़ों के बीच की घाटी के ऊपरी छोर पर तेल की एक धार डाली और वह उनकी गांड की घाटी में बह चली।
मैंने अपनी दो उँगलियों को उस धार के साथ नीचे सरकाया तो उन्होंने पैरों को फैला कर रास्ता दिया।
मेरी उंगलियाँ तेल के साथ उनकी गांड के छेद को सहलाते हुए चूत की छेद तक पहुँच गई और इससे पहले कि मेरी उंगलियाँ कुछ छेड़-छाड़ करती रूबी भाभी पलट गई और उनकी बड़ी-बड़ी चूचियाँ और हल्के झाँटों वाली चूत मेरे सामने थी।
वो बोली- क्या केवल पीछे ही मसाज करोगे या आगे भी?
मैंने धीरे से उनकी नाइटी खोल दी और अपने बनियान को भी!
तो वह पाजामा खोलने का इशारा करने लगी सो मैंने उसे भी खोल दिया और नीचे कुछ नहीं होने के कारण मैं भी नंगा हो चुका था।
रूबी भाभी ने मेरे लंड को अपने हाथो में जोर से पकड़ कर दबाना शुरू किया और मेरा लंड अत्यन्त कठोर हो चुका था।
मैं उनकी निपल्स को उँगलियों से सहलाने लगा और वो एकदम कड़ी हो चुकी थी।
मैंने थोड़ा सा तेल उनकी चूचियों के बीच डाला और थोड़ा नाभि में और फ़िर एक हाथ से चूचियों का मसाज करना शुरू किया जबकि दूसरे हाथ की उंगली नाभि में डालकर धीरे से घुमा रहा था।
बेबी आयल की चमक से रूबी भाभी का गोरा शरीर दमक रहा था और मेरा मजा भी बढ़ता जा रहा था पर मुझे पता था कि सेक्स में धैर्य चुदाई के मजे को दूना-चौगुना कर देता है।
वह बीच-बीच में सिसकारी भी भर रही थी।
मैंने नाभि से उंगली निकाली और उनके चूत के बालों को सहलाने लगा।
और फ़िर अपने हाथ को और नीचे ले जाने लगा तो रूबी भाभी ने अपने पैरों को घुटने से मोड़ते हुए हल्का सा फैला लिया और उनकी फूली हुई रसदार चूत मेरे सामने थी।
मैंने चूत के बाहरी होठों को अपनी उंगली से रगड़ना शुरू किया और वो चूतड़ उचकाते हुए आह … सी … सी … की आवाज निकाल रही थी।
फ़िर मैं उनकी चूत के सामने बैठ गया और उनकी चूत में अपनी ऊँगली डालकर गोल-गोल घुमाने लगा।
चूत पूरी तरह गीली हो चुकी थी।
अब मैंने ऊँगली निकाली और बैठे हुए चूत के और करीब आया तथा लंड के सुपारे से रूबी भाभी की शिश्निका को रगड़ने लगा।
वो कह रही थी- आह! चोद दो मेरी चूत को अपने लंड से … प्लीज चूत में लंड डालो न!
मैंने लंड को चूत में डाला और उनकी कमर पकड़ कर अपनी ओर खींचा जिससे मेरा आधा लंड चूत में घुस चुका था और मैंने दोनों हाथों से उनकी चूचियां मसलना शुरू किया।
रूबी भाभी धक्का मरवाना चाहती थी पर मैंने धक्का नहीं दिया और उनकी पीठ के नीचे हाथ डालकर उन्हें सामने खींच कर बिठा दिया पर लंड को चूत में से निकलने नहीं दिया।
अब मैंने उनके निप्पल को चूसना शुरू किया।
एक निप्पल मुँह में और दूसरा मेरी उँगलियों में।
फ़िर अपनी जीभ को उनके मुँह में डाल दिया वो इसे चूसने लगी।
मैंने उनको अपनी बाँहों में भरा और मैंने पीछे की ओर लुढ़क गया नतीजा मैं नीचे था और रूबी भाभी ऊपर।
मैंने नीचे से धीरे धीरे चुदाई शुरू की तो उन्होंने भी ऊपर से अपने कमर को ऊपर नीचे करके साथ देना शुरू कर दिया।
इसी अवस्था में करीब 20-25 धक्कों के बाद मैंने रूबी भाभी को पकड़ा और करवट ले लिया।
अब मेरा लंड उनकी चूत से निकल चुका था और वो मेरे बगल में पड़ी थी।
वो बोली- आह, ये क्या किया चोदो ना!
मैंने कहा- भाभी, तुम बस मजे लेती रहो और मेरा जादू देखो!
और मैंने उठकर उनकी टांगों को घुटने से मोड़ दिया और उनकी चूत के होठों के फैला कर शिश्निका को अपने होठों से चूसने लगा।
वो छटपटाने लगी।
मैंने अपनी जीभ को चूत में घुसा दिया और गोल-गोल घुमाने लगा, वह अपने चूतड़ उचकाने लगी और चोदने के लिए गिड़गिड़ाने लगी।
मैंने उनकी जांघों के इर्द-गिर्द अपने बाजू कस लिए और चूत के बाहरी होठों के जोर जोर से चूसने लगा।
वह आह … आह … ससी. सी… कर रही थी.
चूत रस से लबालब भर चुकी थी चूत का रस चूत से लगातार बह रहा था।
फ़िर मैंने ज्यादा तड़पाना ठीक नहीं समझा और बेड से उतर कर खड़ा हो गया।
रूबी भाभी को धीरे से खींच कर उनके चूतड़ों को बेड के किनारे पर लाया और उनके नीचे एक तकिया लगाया।
अब उनकी चूत मेरे लंड के सामने थी, उनके पैरों को अपने कंधे पर रखते हुए लंड उनकी चूत में अन्दर तक पेल दिया।
और वो एक बार तो चीख पड़ी पर साथ ही अपने गांड को हिलाने लगी तो मैंने धक्के देने शुरू कर दिए।
कमरे में फच फच की आवाज फ़ैल चुकी थी साथ ही भाभी की सीत्कार और आहों से कमरा गूंज रहा था।
थोड़ी ही देर में चुदाई के दौरान उन्होंने अपने पैरों को कंधे से उतार कर मेरी कमर के चारों ओर लपेट लिया और मेरे हाथों को पकड़ने के लिए अपने हाथ बढ़ाये।
मैं समझ गया कि अब वो चरम पर पहुँच चुकी हैं।
मैंने चुदाई की रफ्तार बढ़ा दी और उनकी चूत में झड़ने लगा।
मैं झुका और उनकी निप्पल को चूसने लगा, हम दोनों झड़ चुके थे और अब मैं उनके मुख को चूम रहा था।
उन्होंने अपनी आँखें बंद की हुई थी पर हांफ रही थी और मैंने भी पसीने से तर हांफ रहा था।
लगभग दो मिनट बाद मैंने धीरे से लंड को चूत में से निकालना शुरू किया तो उन्होंने अपनी आँखें खोली।
मैंने धीरे से लंड बाहर निकाला और फ़िर तौलिया लेकर उनकी चूत से बह रहे अपने लंड और उनकी चूत के रसों के मिश्रण को धीरे-धीरे पौंछना शुरू किया तो उन्होंने भी अपने पेटीकोट से मेरे लंड को पौंछने का काम शुरू किया।
अगली बार नए तरीके से चुदाई की घटना!
अपनी राय मुझे अवश्य दें! Antarvasna
आज मैं एक असली कहानी सुनाने जा Indian Sex Stories रहा हूँ। यह घटना मेरे साथ १ साल पहले घटी थी जब मेरी उमर २१ साल थी। दरअसल बात मेरे भइया की शादी से शुरू होती है जो कि जबलपुर में थी। वैसे तो मैं भोपाल शहर का रहने वाला हूँ। पर अपने भाई की शादी होने की वजह से मैं जबलपुर गया था जहाँ हमारे सारे रिश्तेदार आए थे। जिनमें से एक थी किरण चाची। वैसे तो वो मेरी दूर की रिश्तेदार थी पर उनके साथ मैं घुल मिल गया था।
वो दिल्ली की रहने वाली थी, पर उनके पति का देहांत कई सालों पहले हो हो चुका था। किरण चाची की उमर करीब ३०-३२ साल है । पर देखने में वो बला सी खूबसूरत हैं। उनका जिस्म देख के सारे शरीर मैं कंपकपी होने लगती है। उनका फिगर ३६-२४-३६ है। और वो हमेशा थोड़ा पतले कपड़े का बलाउज़ पहनती हैं जिसमें से उनकी ब्रा साफ़ साफ़ दिखती थी।
शादी को अभी २ दिन बाकी थे और घर में भीड़ होने की वजह से कुछ लोगों ने तय किया कि वो छत पे सोयेंगे। उन लोगों में से मैं भी एक था। छत पे हम सिर्फ़ ६ लोग सो रहे थे। जब रात के २ बजे मेरी नींद खुली और मैं दूसरी तरफ़ पेशाब करने गया तो मैंने पाया कि वहां पलंग पे कोई औरत सोई हुई थी जिसका पेटीकोट उसके घुटने के ऊपर तक आ गया था। उसको देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया और मैं ख़ुद को उस औरत के पास जाने से रोक नहीं सका। जब मैं उसके नजदीक पहुँचा तो पाया कि वो कोई और नहीं बल्कि किरण चाची थी। उनको देखते ही मेरा लंड मेरे पायजामे में से बाहर आने लगा था। मैंने फैसला कर लिया था कि आज तो मैं इनके बदन को छू के ही रहूँगा।
मैं सबको देख कर आया कि कहीं कोई उठा तो नहीं है। पर सब गहरी नींद में सो रहे थे। शायद किरण चाची भी गहरी नींद में सो रही थी तो मेरी हिम्मत और बढ़ गई और मैं उनके पलंग के बाजू में जाकर बैठ गया और धीरे धीरे उनके पेटीकोट को ऊपर की तरफ़ सरकाने लगा। थोड़ी ही देर में उनका पेटीकोट बिल्कुल ऊपर तक आ चुका था। शायद वोह चड्डी नही पहनती थीं, जिस कारण उनकी चूत मुझे साफ़ साफ़ दिखाई दे रही थी जिस पर हलके से बाल थे।
उनकी चूत देखकर मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उनकी जांघ पे धीरे धीरे हाथ फेरना शुरू कर दिया और उनके जिस्म के भी रोंगटे खड़े हो गए थे, थोड़ी ही देर में उन्होंने करवट ले ली और अब उनकी चूत के दर्शन मुझको साफ़ तरीके से होने लगे थे। तो मैंने भी देर ना करते हुए उनके गड्ढे में अपनी एक ऊँगली डालना शुरू कर दी पर उनकी चूत बहुत ही टाईट थी जिस वजह से मैं और पागल हो चुका था और थोड़ी देर में मैंने एक ऊँगली से दो उँगलियाँ उनकी चूत में अन्दर बाहर करना शुरू कर दी।
मैं इतना जोश मैं आ चुका था कि मैं चाची के ऊपर चढ़ गया और उनकी चूची को दबाने लगा ऊपर से ही। पर तब तक वो जाग चुकी थी। उनकी आँख खुली देखकर मैं एकदम डर सा गया, चाची ने मुझे एक चांटा लगाया और फ़िर रोने लगी और मुझसे चिपक गई, मुझे भी एक दम से कुछ समझ नहीं आया था पर उनके बदन की गर्मी से मैं पागल हो गया और उनके होंठो को मैंने चूमना शुरू कर दिया। धीरे धीरे उनके दूध दबाने लगा और वो भी मेरा बराबरी से साथ देने लगी जिससे हमारे बीच सेक्स का मज़ा दोगुना हो गया।
अब मैंने पेटीकोट को हटा दिया और उनकी चूत पर अपना मुँह रख दिया जिससे चाची परेशान हो गई और चुदने के लिए अपनी चू्त को उछालने लगी। मैं खीर को धीरे धीरे खाना चाहता था, इस वजह से मैंने उनके छेद में अपनी जीभ डाल के अन्दर बाहर करना शुरू कर दी और उनके झड़ने का इंतज़ार करने लगा।
जैसे ही चाची झड़ने वाली थी मैंने सब कुछ एकदम से रोक दिया जिस वजह से चाची झड़ नहीं पाई और वो और भी ज्यादा गरम हो गई और मुझसे कहने लगी कि आज तक इतना सुखद अनुभव उसको कभी नहीं हुआ, उसके पति के जाने के बाद से वो प्यासी थी, आज मैं उसकी प्यास बुझाऊं।
मैंने भी देरी ना करते हुए अपने ९ इंच का लंड चाची के हाथ में दे दिया और चाची ने भी बुद्धिमानी दिखाते हुए मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया और उसे चूसना शुरू कर दिया और जब मेरी झड़ने की बारी आई तो चाची ने सब रोक दिया जैसा कि मैंने उनके साथ किया था।
अब बारी थी असली मज़ा करने की। मैंने चाची के छेद के ऊपर अपना सु्पाड़ा रखा और थोड़ा सा धक्का लगाया और कुछ ही देर में मेरा लंड उनकी चूत में समां चुका था फ़िर मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और अन्दर बाहर करने लगा। फ़िर थोड़ी देर के लिए चाची मेरे ऊपर आई और अपने दूध मेरे मुँह के सामने रख दिए तो मैंने भी उसकी चुचियों को अपने दांतों में रख के धीरे धीरे दबाना शुरू कर दिया और अन्दर से उस पे जीभ फेरना भी शुरू कर दिया।
चाची अब पागलों की तरह मेरे पूरे बदन पे हाथ फेरने लगी थी और फ़िर बारी आई चाची को निढाल करने की। तो अब मैंने चाची को अपने ऊपर चढ़ाया और धीरे धीरे उसे ऊपर नीचे होने के लिए कहा। और चाची भी एक्सपर्ट थी जैसा कहा बिल्कुल वैसा ही करती रही और कुछ ही देर में हम दोनों साथ झड़ गए और एक दूसरे की बाहों में करीब ३० मिनट तक लिपटे रहे और मेरा पूरा वीर्य चाची की चूत में ही था। अब सुबह होने को थी तो मैं अपने बिस्तर पे चला गया।
उसके बाद मुझको चाची के साथ सेक्स करने का मौका नहीं मिल पाया। पर हमारी बात होती रहती है और वो मेरे साथ और सेक्स करना चाहती हैं।
अब मैं जून मैं दिल्ली जाऊंगा तब चाची को अपना और करिश्मा दिखाऊंगा। Indian Sex Stories
तुम्हारी सेक्सी मेल्स पढ़कर मुझे इतना मज़ा Antarvasna आता है कि मैं बता नहीं सकती। जितना मज़ा तुम्हारी मेल ने दिया है उतना शायद ही कभी मुझे मिला हो। जैसा कि तुम मुझे कह रहे थे, मैं भी तुमको यह सेक्सी मेल लिख रही हूँ। होप यू एन्जॉय।
जहाँ तुमने छोड़ा था उसके आगे से लिख रही हूँ।
तुम मेरे पास आगरा आए थे और होटल के रूम में बुला कर तुमने मुझे खूब चोदा।
(हाय मैं इतना गन्दा सोच रही हूँ )
तीन बार करने के बाद तुम पूरी तरह निढाल होकर मेरी चूत में अपना लंड डाल कर मेरे ऊपर ही सो गए। सुबह उठकर तुम वापिस चले गए।
एक हफ़्ते बाद तुम वापिस आए इस एक हफ़्ते में मैं तुम्हारी याद में हस्त मैथुन करती रही।
तुम सुबह 10 बजे मेरे रूम पे आए, तुमने दरवाज़ा खटखटाया, मैं सन्डे होने के कारण थोड़ी देर पहले ही सो के उठी थी। मैंने जैसे ही दरवाज़ा खोला, तुम अन्दर आ गए, पीछे से दरवाज़ा बंद करके मुझे अपनी बाहों में भर लिया और बेतहाशा चुम्बन करने लगे।
तुमने कहा- मैं पूरे एक हफ्ते से प्यासा था, आज मेरी प्यास बुझा दो !
मैंने मजाक में कहा- लो पानी पी लो, फिर कोल्ड ड्रिंक भी देती हूँ।
तुमने हँसते हुए पानी पी लिया और कहा- कोल्ड ड्रिंक मैं गिलास से नहीं पियूँगा।
मैंने पूछा- फ़िर कैसे?
तुमने आगे आकर मुझे किस किया और मेरे मम्मों को दबाते हुए बोले- नए स्टाइल में पियूँगा !!!
मैंने पूछा- कौन सा नया स्टाइल?
तुमने कहा- अभी बताता हूँ।
मैंने क्रीम रंग की नाईटी पहनी थी, नीचे काली ब्रा और पैंटी !
“तुम बैठो मैं अभी नहा कर आती हूँ !”
तुम- चलो, मैं तुम्हें नहलाता हूँ !
मैं- धत्त ! बेशर्म ! मुझे शर्म आती है।
तुम- जब मैं तुम्हारी मारता हूँ तब तो शर्म नहीं आती?
“अरे नहीं ! आती तो है पर उस समय मैं इतनी गर्म होती हूँ कि मुझे होश ही नहीं रहता।”
” तो चलो ठीक है, मैं तुम्हें गरम करके नहलाता हूँ और कोल्ड ड्रिंक पीने का नया तरीका भी तो बताना है तुम्हें। सच्ची तुम्हें बहुत मज़ा आएगा !”
“ऐसा है तो चलो।”
और हम दोनों बाथरूम में घुस जाते हैं।
बाथरूम में घुसते ही तुम मुझे पकड़ के कस के चूमते हो और मेरे मम्मे और मेरे गान्ड पर हाथ फ़ेरते हो। मुझे मज़ा आने लगता है। तुम शावर खोल देते हो और मैं भीगने लगती हूं। तुमने टी-शर्ट और जीन्स पहन रखी हैं। भीगने से मेरी नाईटी मेरे शरीर से चिपक जाती है और मेरे मस्त मम्मे ब्रा में ढके हुए और मेरी पैन्टी साफ़ दिखने लगती है। यह देख कर तुम गरम हो जाते हो और मुझे अपनी तरफ़ खींचते हो। नीचे घुटनों के बल बैठ कर मेरी नाईटी ऊपर उठा कर मेरी टांगों और जांघों को चूमते हुए मेरी पैन्टी तक पहुँच जाते हो !!
“स्स्स्स्स्स्स श्ह्ही अआया आआः मज़ा आआया आया आ आ रहा है !”
तुम दोनों हाथ मेरी पैन्टी के अन्दर डाल देते हो और दाएं हाथ से मेरी गान्ड को और बाएं हाथ से मेरी चूत को सहलाने लगते हो !
“आआया आया अआया आआअह्ह्ह मज़ा आ आ आआया आआया रहा है।”
यह करते हुए तुम मुँह से मेरी पैन्टी का एलास्टिक पकड़ कर उसको धीरे धीरे नीचे उतारते हो।
मेरी गरम चूत देखते ही तुम्हारे मुँह में पानी आ जाता है और तुम मेरी क्लिटोरिस को चूमने और चाटने लगते हो, मैं आ आया आ आआ अआय आ आआया अह आ आआया आआ अआः करती हूँ, तुम्हारा सर पकड़ कर अपनी चूत पे दबाती हूं, तुम्हारे हाथ मेरे गान्ड के छेद पे होते हैं।
इस तरह से मैं पहली बार ओर्गास्म हो जाआआताआ है, “आआअह मैं मर गई !”
तुम कहते हो यह तो शुरुआत है। मेरे चूत का जूस अपने होठों पे लेकर मेरी नाईटी और ऊपर उठाते हो और मेरी ब्रा को खोल कर मेरे मम्मे ज़ोर ज़ोर से दबाते हो और मेरे सख्त निप्प्ल पर मेरी चूत का जूस मेरे होठों से लगा देते हो। मेरी ब्रा खुल कर नीचे गिर जाती है, मैं नाईटी उतार देती हूं और पैन्टी से पैर निकाल कर बाहर आ जाती हूं।
मैं तुम्हारे लन्ड की तरफ़ देखती हूं जो एकदम टाईट हो रहा है और तुम्हारी जींस फाड़ कर बाहर आने को बेताब है।
“अरे जान इसको क्यूँ सज़ा दे रहे हो, इसको तो बाहर आने दो !”
“हाँ यह तो बाहर आएगा ही वरना मज़ा क्या आएगा।”
और हम दोनों हँसते हैं।
तुम- अच्छा तुम जाओ ज़रा चिल्ड कोल्ड ड्रिंक लेकर आओ !
मैं- अरे कोल्ड ड्रिंक का क्या करोगे अभी?
तुम- जाओ न, मुझे प्यास लगी है मुझे पीना है !
“अच्छा बाबा लाती हूँ पर तुम कपड़े तो उतारो।”
“नहीं कपड़े तुम उतरना मेरे, तब असली मज़ा आएगा।”
अच्छा !
मैं जल्दी से पूरी नंगी हालत में भाग के गई और फ्रीज से सुपर-चिल्ड कोल्ड ड्रिंक-फ़ैंटा निकाल के ले आई।
भाग के जाने से मेरी साँस फूलने लगी और मेरे मम्मे ऊपर नीचे होने लगे।
तुम- जान तुम्हारे मम्मे कितने अच्छे हैं ! अच्छा अब मैं थोडी देर बाद कोल्ड ड्रिंक पियूँगा और तुम लोलीपोप चूसना।
मैं- लोलीपोप? मैं कोई बच्ची तो नहीं हूँ जो लोलीपोप चूसूंगी !
“मना ना करो, तुम्हारे लिए बहुत टेस्टी लोलीपोप लाया हूँ।”
“अच्छा ! कहाँ है दो।”
“पहले तुम अपनी आँखें बंद करो।”
“मैं अपनी आँखें बंद करती हूं।”
अब तुम अपना लन्ड निकाल कर उस पर थोड़ा सा कोल्ड ड्रिंक गिरा के मुझसे कहते हो- जानू अपना मुँह खोलो !
मैं अपना मुँह खोलती हूं और तुम अपना लन्ड मेरे मुँह में दे देते हो।
मैं जीभ से टेस्ट करती हूँ- अरे यह तो ओरंज फ्लेवर लोलीपोप है।
तुम्हें अच्छी लगी !
“हाँ !”
तुम- तो आंखें खोलो और चूसो !
मैं आँखें खोलती हूं और तुम्हारा लन्ड देखती हूं- तो यह लोलीपोप है?
हाँ, अब चूसो !
मैं तुम्हारा जींस का बटन खोल कर अंडरवीअर नीचे करके घुटने तक तुम्हारा लन्ड चूसने लगती हूं।
तुम मेरे सर के पीछे से पकड़कर कस के चुसवाने लगते हो। तुम्हारा लंबा मोटा लन्ड मेरे मुँह में पूरा नहीं जा पा रहा होता है, तुम मुझे पकड़कर अपने लन्ड को ज़ोर से मेरे मुँह में डाल देते हो। मुझे दर्द होता है लेकिन अब तक तुम्हारे हाथ मेरे मम्मों को दबाने लगते हैं और मुझे मज़ा आने लगता है। मैं तुम्हारा पूरा लन्ड लोलीपोप की तरह चूसने लगती हूं।
तुम आ आआया आआह्ह हह्ह्ह्छ ओऊ ऊऊ ऊऊओ ऊह ऊऊ ऊऊ उफ ! करते हो।
“बस रुक जाआआओ ! वरना मैं झर जाऊँगा।”
“तो झर जाओ !”
तुम- नहीं ! मुझे अभी तुम्हारी चूत और तुम्हारी गान्ड मारनी है।
मैं हँसते हुए हट जाती हूं। अब तुम अपने कपड़े उतार के आ जाते हो और बोलते हो कि अब मुझे कोल्ड ड्रिंक पीनी है
मैं- वो कैसे?
तुम मुझे अपने सामने खड़़ा करते हो और मेरे नंगे शरीर को देख कर कहते हो- यह है न ग्लास।
मैं- मतलब?
तुम कोल्ड ड्रिंक की बोतल लेकर अपने होठों से शुरू करके अपने मम्मों, अपनी नाभि अपनी चूत, अपनी गांड जांघों और टांगों पर कोल्ड ड्रिंक डालो धीरे धीरे और मैं पीता जाऊँगा !
“वाओ, यह तो बहुत बढ़िया तरीका है।” है न?
और मैं अपने होठों से कोल्ड ड्रिंक गिरा कर धीरे धीरे नीचे बढती जाती हूं। ठंडी कोल्ड ड्रिंक से बदन में सिहरन उठती है लेकिन तुम्हारे चाटने से मज़ा आऽऽऽऽ हऽऽ आऽऽऽ रहा है। तुम ऐसे ही चूसते और कोल्ड ड्रिन्क पीते जाते हो, मेरे मम्मों पर, चूत में से, गान्ड में से नीचे तक।
मैं- अब मेरी बारी !
अब तुम खड़े हो जाते हो और मैं घुटनों के बल तुम्हारे आगे बैठ जाती हूं और तुम्हारे लन्ड पर कोल्ड ड्रिन्क डाल डाल कर पीती रहती हूं और साथ ही तुम्हारा लन्ड, तुम्हारे टट्टे भी चूसती जाती हूं। अब तुम बिल्कुल गर्म हो जाते हो। मैं जैसे ही कोल्ड ड्रिन्क की बोतल रखने के लिये पलटती हूं, तुम मुझे पीछे से पकड़ कर मेरे मम्मे नोच लेते हो।
मेरी चीख निकल जाती है। इस समय तुम्हारा लन्ड मेरी गान्ड के छेद के पास गड़ रहा होता है। तुम मुझे ऐसे अपनी बाहों में उठा लेते हो कि तुम्हारा लन्ड मेरी गान्ड से रगड़ रहा होता है और उठा के मुझे बेड के पास ले जाते हो।
वहाँ पहुंच कर तुम मुझे बेड पे दोनों हाथ और पैर पे बैठने को कहते हो और वैसलीन की शीशी उठा लाते हो। मेरी गान्ड के छेद को खूब चूसते हो और उस पर वैसलीन लगाते हो, और अपने लन्ड पर भी !
मैं- आज क्या पहले गान्ड मारोगे?
“हाँ !”
“तो ठीक है ऐसे मारना मेरी गान्ड फ़ाड़ देना ! ठीक है?”
तुम पहले दो उंगलियों से मेरी गान्ड का छेद बड़ा करते हो, फ़िर धीरे से अपना सख्त लन्ड मेरी गान्ड पर लगाते हो और धीरे से मेरी गान्ड मारना शुरू करते हो। धीरे धीरे धक्के देते जाते हो, तुम्हारे हाथ मेरे मम्मों पर आ जाते हैं और तुम उन्हें दबाने लगते हो, बीच बीच में दो उंगलियों से मेरे चूत में भी फ़िन्गरिन्ग करते हो आऽऽऽहऽऽ आआऽऽ मज़ा आऽऽ रहाऽऽ है… और जोर से और जोर से
” मुझे धीरे में मज़ा नहीं आ रहा, जोर से मारो मेरी गान्ड फ़ड़ दो आज” मैं हवस के बहाव में बोलने लगती हूं।
तुम जोश में आ जाते हो, मेरी जांघें पकड़ कर अपनी तरफ़ खींचते हो और एक झटके में अपना पूरा लन्ड मेरी गान्ड में डाल देते हो।
मेरी चीख निकल जाती है- आऽऽऽऽह ऽऽआअऽऽऽऽ अऽऽऽऽ मर गई !
इससे पहले कि मैं सम्भल पाती, तुम मेरी गान्ड जोर जोर से मारने लगते हो, पूरा लन्ड बाहर निकाल कर जोर से एक झटके में अन्दर बाहर करने लगते हो।
“मुझे बहुत दर्द हो रहा है लेकिन मज़ा भी आ रहा है !”
तुम अपनी स्पीड बढ़ाते जाते हो !
मैं कहती हूं- रुक जाओ प्लीज बस !
तुम- नहीं आज सचमुच में तुम्हारी गांऽऽऽऽड फ़ाड़ के रहूंगाऽऽऽ”
“मज़ाऽऽऽ आऽऽऽ रहाऽऽऽ है नाऽऽऽ.?”
“हाँऽऽऽऽऽ!
तुम फ़िर मेरी गान्ड के पट्टों पर थप्पड़ मारते हो सटाक सटाक !
मुझे बहुत मज़ाऽऽऽ आऽऽऽ रहा है, मेरे चूतड़ बिल्कुल लाल हो गये और मेरी गांड का बुरा हाल हो गया, लेकिन तुम रुकने का नाम ही नहीं ले रहे हो !
मेरे बहुत कहने पर तुम रुके पर एक शर्त पर कि मैं तुम्हारे लन्ड पर बैठ कर कूदूंगी क्योंकि तुम्हें अभी मेरी गान्ड और भी मारनी है !
मैं अच्छा बाबा ! अच्छा ! कह्ती हूं और तुम नीचे लेट जाते हो मैं तुम्हारे लन्ड पर तुम्हारी तरफ़ मुंह करके बैठ जाती हूं और कूदना शुरू कर देती हूं। अब तुम्हें बहुत मज़ा आने लगता है।
आऽऽहऽऽ आऽऽऽऽऽआअ, मेरे लन्ड पर ऐसे ही कूदती रहो !
इस पोजीशन में तुम्हारा लन्ड बहुत अन्दर तक जा रहा होता है। एक हाथ से तुम बारी बारी मेरे मम्मों को मसल रहे होते हो और दूसरे से मेरी चूत को !
मेर क्लाईमैक्स आ रहा होता है आऽऽहऽऽ आऽऽऽऽ आअ आऽऽऽहऽऽ आअऽऽ अऽऽऽऽ मर गई।
उफ़्फ़्फ़्फ़ ! मेरी चूत के जूस तुम्हारे हाथ पर और तुम्हारे पेट पर फ़ैल जाते हैं.’ मैं थक गई कूद कूद के”
“अच्छा तो हट जाओ !”
तुम मेरी चूत क जूस मेरे मम्मों पे लगा देते हो और जोर जोर से चूसते हो। मेरे मम्मों के बीच टिशु पेपर लगाकर अपना लन्ड रगड़ते हो और साफ़ कर लेते हो”
तुम मुझे पेट के बल लेटने को कहते हो और तीन तकिये मेरे पेट के नीचे रख देते हो।
मैं डर जाती हूं- क्या अभी और गान्ड मारने का इरादा है?
“नहीं जान, अब तुम्हारी चूत की बारी है।”
“अरे चूत तो आगे से मारी जाती है।”
“यह नया स्टाईल है !”
“अच्छा कैसे?”
तुम तकिये मेरे पेट के नीचे रखकर मेरी चूत पर हाथ फ़ेरते हो और मेरी टांगें फ़ैला देते हो। फ़िर एक झटके में अपना लन्ड मेरी चूत में डाल देते हो।
मेरी फ़िर से चीख निकल जाती है- हाऽऽऽऽय आऽऽज क्या जान निकालने का इरादा है?
“नहीं, लेकिन जब दर्द होता है तभी तो मज़ा आता है !”
“हाँ, वो तो है।”
और तुम जोर जोर से मेरी चूत मारने लगते हो। तुम दोनों हाथों की उन्गलियों के बीच में मेरे सख्त चूचकों को दबा दबा के खींच रहे हो और जीभ से चाट और चूस भी रहे हो। मैं मुँह नीचे कर के देखती हूं। तुम्हारा लन्ड पिस्टन की तरह मेरी चूत में जा रहा होता है।
यह देख कर मेरा फ़िर से पानी निकल जाता है, मैं पूछती हूं, तुम्हारा एक बार भी नहीं झड़ा?
तुम कहते हो- नहीं ! आज जी भर चोदने के बाद ही झड़ूंगा।
फ़िर तुम मुझे घसीट के बेड के किनारे पर ले आते हो, खुद जमीन पर खड़े हो जाते हो और मेरी टांगें चौड़ी करके अपने कन्धों पे रख लेते हो और पूरी गति में चोदने लगते हो। इस स्थिति में तुम्हारा लन्ड पूरा मेरी चूत में बहुत अन्दर तक जा रहा है। तुम जोर से झटका मारते हो और मेरी चूत में कुछ गरम गरम लगता है।
मैं पूछती हूं- ये क्या है, क्या तुम्हारा निकल गया?
तुम- नहीं, मैंने तुम्हारी चूत में मूत दिया है, तुम्हें मज़ा आ रहा है ना?
मुझे इतना मज़ाऽऽऽ आऽऽ रहाऽ है कि मेरा एक बार और निकल जाता है। 10 मिनट तक ऐसे ही चोदने के बाद तुम मुझे उठा के मेज़ के किनारे पर बैठा देते हो और मेरी टांगें अपनी पीठ में गोल घेरे के रूप में बांध लेते हो और जोर के झटकों के साथ मुझे चोदने लगते हो।
“पूरी ताकत से पूरी ताकत से चोदो ! फाड़ दो मेरी चूत को भी !”
और तुम वास्तव में राजधानी एक्सप्रेस की तरह फुल स्पीड में मेरी चूत की बेदर्दी से चुदाई करते जा रहे हो और मेरे मम्मों से खेल रहे हो।
अब तुम्हारी साँसें तेज़ होने लगती हैं।
तुम आ आआअह उफ़ फ्फ्फ्फ़ फ्फ्फफ्फ़ मर गया आआअ मेरा निकलने वाला है चिल्लाने लगते हो !
मैं अपनी टांगों का घेरा बना कर तुम्हें अपनी तरफ़ ज़ोर ज़ोर से खीच रही हूं। तुम अचानक मुझे अपनी बाहों में उठा लेते हो इस तरह की मेरी चूत मैं तुम्हारा लन्ड घुसा हुआ है और मेरे मम्मे बुरी तरह उछल रहे हैं।
5 मिनट मुझे हिलने को कहते हो और मुझे ज़ोर ज़ोर से इसी पोजिशन में उछालते जाते हो। तुम्हारी स्पीड बढ़ती जाती है और मुँह से आ आआह आया आय आआअह ईईइ ईई आआ आआ ऊऊह्ह्ह्ह्ह की आवाजें आती जाती हैं।
मुझे ऐसे ही उछलाते तुम एक ज़ोर का झटका मारते हो और तुम्हारा गर्म सफ़ेद जूस तुम्हारे मोटे सख्त लन्ड से निकल कर सीधा मेरी चूत की आग को शांत करते हुए गिर जाता है। मेरी चूत में से एक बार और जूस निकलता है।
तुम मुझे लेकर बेड पर पास आ जाते हो और मेरे और तुम्हारे जूस बेड पर टपकते हैं।
हम कुछ देर इसी तरह पड़े रहते हैं।
फ़िर उठ कर मैं तुम्हारे और अपने लिए खाना बनाती हूँ।
और हम खाना खाते हैं।
इस पूरे दौरान मैं और तुम पूरे नंगे रहते हैं।
खाना खाकर हम दोनों एक दूसरे की बाहों में सो जाते हैं, दो घंटे बाद उठके फ़िर अलग अलग जगह और पोज में खूब चुदाई करते हैं।
रात को भी एक बार चुदाई का दौर चलता है और तुम अपना लन्ड मेरी चूत में डाल कर ही मुझे अपनी बाहों में भर कर सो जाते हो।
सुबह उठकर हम लोग एक दूसरे को 69 पोसिशन में ओरल सेक्स करते हैं।
तुम कहते हो- एक दिन में इतना मज़ा मैंने ज़िन्दगी में कभी नहीं किया और शायद तुम्हारे बिना कर भी नहीं पाता।
मैं भी कहती हूं- हाँ, वास्तव में जितने प्यार से और मज़े से तुमने मेरी चूत और गान्ड मारी है शायद ही कोई और मारता।
आई लव यू जानू !
तुम तैयार होते हो जाने के लिए तो मैं उदास हो जाती हूं।
तुम कहते हो- चिंता मत करो, मैं जल्दी ही आऊँगा और अपने साथ एक दोस्त को भी लाऊँगा, हम दोनों मिलकर तुम्हारी मारेंगे। सोचो एक लन्ड तुम्हारी चूत में और एक तुम्हारी गान्ड में एक साथ हो तो कितना मज़ा आएगा।
मैंने कहा- हाँ ! फ़िर मैं अपनी सहेली को भी बुला लूंगी और हम सब मिलकर ग्रुप सेक्स करेंगे।
इसी वादे के साथ तुम चले जाते हो !
जानू यह तुम्हारी मेल और तुम्हारी चैट का नतीजा है जो मैंने यह मेल लिखी है, तुम्हें कैसी लगी?
अब तुम इससे भी सेक्सी और लम्बी मेल मुझे लिखना !
तुम्हारे लंड की प्यासी Antarvasna
सेक्स टेस्ट चेंज कहानी में पढ़ें कि जब पति पत्नी एक दूसरे के साथ सेक्स करके बोर होने लगे तो उन्होंने अपने यौन जीवन में नवीनता लाने के लिए क्या किया?
मेरा नाम संजना है. मेरी उम्र 25 साल की है. मैं शादीशुदा हूँ.
मेरे पति 30 साल के हैं.
मैं बहुत ही सुन्दर हूँ और मेरे पति भी बहुत आकर्षक दिखते हैं.
हम लोग मध्यम वर्गीय हैं … न ज़्यादा अमीर हैं और न ही गरीब हैं.
हमारी ज़िंदगी में सब कुछ अच्छा चल रहा था. मेरे पति भी बहुत अच्छे हैं.
हमारी शादी के 4 साल हो गए हैं.
हम दोनों एक दूसरे से बहुत खुश भी रहते हैं. हम दोनों में कभी लड़ाई झगड़ा नहीं होता है.
मैं भी अपने पति से खुश रहती थी.
बहुत ही शर्मीली लड़की थी मैं … कोई मुझसे कुछ कह देता था तो मैं बुरा मान जाती थी और कोई मुझे टच करे तो मैं उससे लड़ जाती थी.
मेरे पति भी ऐसे ही हैं.
मुझे सेक्स करने में बहुत रूचि है क्योंकि ज़िंदगी में अगर सेक्स न हो तो हर किसी की लाइफ में उदासी छा जाती है.
यहीं से हमारी सेक्स टेस्ट चेंज कहानी शुरू हुई.
एक दिन को बात है, मैं और मेरे पति रात को खाना खाकर अपने कमरे में बात कर रहे थे.
बातों ही बातों में ‘वाइफ एक्सचेंज विद अदर पर्सन’ की बात होने लगी.
यह बात धीरे धीरे कुछ ज़्यादा ही बढ़ गई.
मैंने अपने पति से पूछा- ये लोग कैसे कर लेते हैं … अजीब लोग हैं?
तो पति ने कहा- जाने दो, हमें क्या करना है. हम लोग तो वैसे नहीं हैं न!
ऐसे ही कुछ दिन बीत गए.
हमारी जिंदगी में एक दो साल के बाद सेक्स धीरे धीरे कम हो गया.
अब कभी 10 दिन में एक बार सेक्स होने लगा था.
कभी 15 दिन में एक बार होता.
धीरे धीरे हमारे अन्दर भी सेक्स की भूख कम होती नज़र आने लगी थी.
ऐसे ही दिन बीत रहे थे.
एक दिन मैं अपनी एक सहेली शिखा से बात कर रही थी.
उसने पूछा- कैसी हो?
मैंने कहा- ठीक हूँ.
उसने आगे कहा- और मज़ा तो आ रहा है न जीजा के साथ!
मैंने कहा- हां, ठीक ही है.
इस पर शिखा ने कहा- क्यों … इतनी उदास होकर क्यों बोल रही हो?
मैंने कहा- पहले सेक्स में बहुत मज़ा आता था, पर पता नहीं क्यों … अब धीरे धीरे सब कम हो गया है.
शिखा ने कहा कि मैं एक राय दूँ?
मैंने कहा- हां बोल न!
उसने कहा- अगर तुम दोनों में किसी वजह से सेक्स कम हो गया है, तब तो कोई बात नहीं. वैसे एक तरीका है. यदि बुरा न मानो तो बताऊं?
मैंने कहा- मैं किसी बात का बुरा नहीं मानूँगी, तू बता.
मेरी सहेली ने कहा- एक बार एक रात के लिए हज़्बेंड चेंज करके देख लो, हो सकता है पहली बार दूसरे मर्द के साथ तुम्हारे अन्दर वह जोश फिर से आ जाए और सेक्स में तुम्हारी रुचि बढ़ जाए. क्योंकि ऐसा होता है जब एक ही मर्द के साथ रोज रोज सब होता है. तो बस वही जैसे रोज मगर दूसरा मर्द जब एक दिन के लिए आता है न, तो न जाने किस हिसाब से करता है और अपने सेक्स लाइफ में एक दिन में ही भरपूर मज़ा देता है. वह एक ही रात के लिए आएगा तो तुम्हारे लिए भी अलग होगा. उसके लिए भी अलग होगा. इसलिए एक बार करके देख लो. शायद जिंदगी में बात बदल जाए.
मैंने कहा- नहीं यार, इसमें किसी को पता चल गया तो गड़बड़ हो जाएगी!
शिखा बोली- किसी को पता नहीं चलता यार, क्योंकि जब तुम किसी को बताओगी नहीं, तो दूसरा जानेगा कैसे?
मैंने कहा- अच्छा और यह सब कैसे होगा?
सहेली ने कहा- तेरा मतलब कि ऐसे इंसानों का जोड़ा कहां मिलेगा?
मैंने पूछा- हां … और यह भी बता कि क्या तूने ऐसा किया है?
उसने कहा- हां, एक साल पहले हुआ था. वे दोनों पुणे के एक कपल थे. हम लोग नेट से जुड़े, फिर बात बन गई. इसी बहाने हम दोनों एक नए शहर में भी घूमे और एक रात के लिए एंजाय भी किया. सही बोलूं तो उस दिन सेक्स का भरपूर मज़ा आया था.
मैंने कहा- पर मैं यह नहीं कर पाऊंगी … मेरे उनको बुरा लगा तो?
शिखा बोली- हां पहले तुम अपने अपने पति को इस बात के लिए राज़ी करो. अगर वे राज़ी हो जाएं तो मुझे बताना.
मैंने कहा- कैसे बात करूँ?
वह बोली- तुम अपने पति से ज़्यादातर वाइफ स्वैपिंग की बात करना. जब बात करोगी … तो एक न एक दिन उनके मन में भी ऐसा महसूस होगा कि क्यों न एक बार स्वैपिंग करके देखी जाए.
कुछ देर इसी मुद्दे पर चर्चा के बाद फोन कट हो गया.
अब मैं अपने काम में जुट गई.
दो चार दिन बीत गए.
मैं हिम्मत करके भी उनसे बात नहीं कर पा रही थी.
फिर एक दिन वह जब ऑफिस के सिलसिले से 15 दिन के लिए दूसरे शहर गए.
वे 4 दिन बाद मुझे वहां के माहौल के बारे में बताने लगे कि ये शहर ऐसा है. यहां पर ऐसा होता तो सब कुछ है, पर किसी को कोई खबर भी नहीं होती.
मैंने पूछा- कौन सी बात?
उन्होंने वाइफ स्वैपिंग की बात कही.
मैंने जानबूझ कर थोड़ा सा नाटक किया- इस तरह की बातें क्यों कर रहे हैं आप?
इस पर उन्होंने बात बंद कर दी.
मगर मेरे मन में आया कि बात जब कर रहे थे तो अच्छा लग रहा था.
पर बात को वापस कैसे शुरू की जाए.
दो दिन बाद मैंने ही यही बात पुन: उनसे शुरू की.
‘एक बात बताइए, ये जो वाइफ स्वैपिंग होती है, इसे कैसे करते हैं? किसी को पता नहीं चलता क्या?’
उन्होंने कहा- नहीं, कैसे पता चलेगा. उधर के हज़्बेंड और वाइफ और इधर के वाइफ हज़्बेंड किसी एक के घर पर ही सब करते हैं. वे दुनिया की नज़र में रिश्तेदार होते हैं, जो एक दिन के लिए आए और चले गए.
यह सुनकर मैंने कहा- कितना अजीब लगता होगा न!
उन्होंने कहा- अजीब तो तब लगेगा जब कोई जबरदस्ती करेगा. लेकिन इसमें सारा कुछ एक दूसरे की रजामंदी से होता है. अगर चारों की रज़ामंदी हो, तो कुछ भी गलत या अजीब नहीं … यह बस मस्ती वाला खेल हुआ और सब अपने अपने घर चले गए. कोई रोज रोज तो होता नहीं है!
मैंने कहा- इससे होता क्या है?
“कुछ खास नहीं … लेकिन लोगों के अन्दर सेक्स की भूख जो सुस्त हो गई होती है, वह फिर से ताज़ा हो जाती है.”
इतनी सब बातें करके उन्होंने फोन काट दिया और अपना काम पूरा करके घर वापस आए.
उस दिन मुझे काफी ज्यादा सेक्स की भूख थी तो रात में पति के साथ शरीर सहलाने के दौरान बातों बातों में उन्होंने मुझसे पूछा- क्या हुआ तुम बहुत उदास दिख रही हो?
मैंने कुछ नहीं कहा.
उनका सेक्स करने का मन भी नहीं हुआ था तो हम दोनों ने कुछ भी नहीं किया.
बस चुपचाप सो गए.
चार दिन ऐसे ही चलता रहा.
पांचवें दिन वे मुझसे कहने लगे कि हम लोगों में अब पहले जैसा सेक्स नहीं हो पाता है … ऐसा क्यों है?
मैं चुप रही.
उन्होंने ही फिर से कहा- पता नहीं मैं करता तो हूँ, पर मजा नहीं आता.
फिर मैंने कहा- जैसे लोग वाइफ स्वैपिंग करते हैं, उसमें तो मजा आता है. ऐसा क्यों?
उन्होंने कुछ बोला नहीं.
पर अगले दिन उन्होंने मुझसे कहा कि अगर तुम्हारा मन हो तो स्वैपिंग के लिए कोशिश की जा सकती है!
यह सुनकर मैं भी एक्सचेंज करने के लिए तैयार हो गई.
उन्होंने कहा- कौन करेगा, यह देखना पड़ेगा?
मैंने कहा- देखेंगे, आप किसी से बात करके देखिए. मैं भी कुछ कोशिश करती हूँ.
उन्होंने कहा- चलो ठीक है.
अब हम दोनों थोड़ा खुश हुए.
उनके चेहरे पर भी मस्त मुस्कान थी.
पति की आंखों में दूसरी चुत मिलने की खुशी साफ जाहिर हो रही थी.
अगले दिन मैंने शिखा से बात की.
उसने कहा- चलो ठीक है. अब अगर तुम चाहो तो हम दोनों ही एक दूसरे से एक्सचेंज कर सकते हैं. यह सब तुम्हारे घर पर या तुम चाहो तो हमारे घर पर किया जा सकता है!
मैंने कहा- ओके, मैं अपने पति से बात करके बताऊंगी. अगर वे मान गए तो मैं तुम्हें रात को मैसेज करूँगी.
शिखा ने कहा- ठीक है.
रात 11 बजे थे.
मैंने अपने पति से स्वैपिंग की बात को छेड़ा तो बात शुरू हो गई.
उन्हें मैंने बताया कि शिखा रेडी है.
वे भी बोले- ठीक है. पर वह लड़की दिखने में कैसी है?
मैंने कहा- बहुत सुन्दर है.
उन्होंने कहा- और उसका पति?
तो मैंने कहा- उसके पति को मैंने नहीं देखा है. हां उसका नंबर है, कहिए तो मैसेज करके पिक मंगवा लूं?
उन्होंने कहा- हां ठीक है, मंगवा लो!
मैंने शिखा को मैसेज किया कि अपने पति के साथ वाली अपनी पिक भेजो.
उसने झट से भेज दी.
उसका पति भी बहुत स्मार्ट दिख रहा था और शिखा तो हॉट थी ही.
मेरे पति को लड़की पसन्द आ गई और उधर मुझे भी उसका पति जँच गया.
मैंने हामी भर दी.
शिखा ने भी मुझसे हमारी जोड़ी वाली पिक माँगी.
मैंने भी भेज दी.
वे लोग भी राजी हो गए, डन कर दिया.
फिर एक दिन तय हुआ जब सेक्स टेस्ट चेंज करने का अनुभव लेना था.
हम सब हमारे घर पर ही उस तय तारीख को मिलने वाले थे.
उस दिन वे दोनों सुबह सुबह ही आ गए.
पहले पहल तो मेरा दिल घबरा रहा था.
पर एक खुशी भी मन में थी कि आज वह सब होगा जो मन चाहता है.
शाम हुई तो हम लोग बात करने के लिए तय प्रोग्राम के अनुसार अलग अलग कमरे में चले गए.
मेरे पति भी शिखा को अलग कमरे में लेकर चले गए.
मैं शिखा के पति के सामने थी और शर्मा रही थी; कुछ डर भी रही थी.
शिखा के पति ने कहा- लाइट ऑफ कर दीजिए.
मैंने लाइट ऑफ कर दी और बिस्तर पर बैठ गई.
थोड़ी देर के बाद उन्होंने मुझे पीछे से पकड़ा तो मेरे शरीर में अजीब सी सिहरन हुई. ऐसा लगा जैसे आज न जाने कितना मज़ा आने वाला है.
तभी वे मुझे किस करने लगे.
मैं भी उनका साथ देने लगी.
फिर वे अपने कपड़े उतारने लगे और कुछ ही पलों में उन्होंने पूरे कपड़े उतार दिए.
उनका लंड एकदम मोटा और जबरदस्त मूसल जैसा था.
मैं देख कर हैरान रह गई.
सच में बहुत मोटा लंड था और लंबा भी काफी था.
धीरे धीरे सेक्स की शुरुआत हुई.
उन्होंने मुझसे लंड चूसने के लिए कहा.
मैंने उनका मान रखने के लिए सुपारा चाटा.
एक बार चाटने से अच्छा लगा तो लौड़े को मुँह में भर लिया और खूब चूसा.
उन्होंने भी मेरी चुत को चाटा.
फिर चुदाई शुरू हुई.
मेरी चुत उनके लंड से चुद कर निहाल हो गई.
उन्होंने भी मेरे दूध खूब चूसे और दूध चूसते हुए ही मेरी जबरदस्त ली.
एक बार में मेरा मन नहीं भरा था तो दूसरी बार की चुदाई मैं उनके लौड़े पर उछल उछल कर चुदी.
इस तरह से उन्होंने मुझे रात भर में 4 बार कई तरीकों से चोदा.
मुझे भी बहुत मज़ा आया.
सच में इतना मज़ा मुझे कभी नहीं आया था. यह बहुत प्यारा अहसास था.
फिर सुबह हुई.
मेरे पति भी बहुत खुश थे उन्होंने मुझसे पूछा- कैसा रहा?
मैंने भी खुश होकर कहा- बहुत अच्छा … और आपका?
उन्होंने कहा- मेरा भी.
तब से मैं बहुत खुश रहती हूँ और मेरे पति भी मुझसे खुल कर चुदाई करते हैं.
हम दोनों चुदाई में गैर मर्दों और स्त्रियों की खुल कर चर्चा करते हैं.
इस बात को दो साल हो गए हैं.
मेरे पति ने ऐसा एक बार और करने का कहा है कि स्वैपिंग करते हैं.
इस बार हम दोनों बाहर किसी अनजान शहर में करने का सोच रहे हैं.
देखते हैं कि कौन मिलता है, जिससे बात बन जाए.
सच कह रही हूँ कि इसमें बहुत आनन्द आता है.
बस एक रात के लिए किसी दूसरे का लेकर देखना … आह आई लव स्वैपिंग.
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