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दोस्तो, मैं मोहन एक Indian Sex Stories बार फिर आपकी सेवा में हाज़िर हूँ। मुझे बहुत खुशी हुई कि आप सबने मेरी पहली कहानी किराएदार और उसकी बेटी की काफी सराहना की और इसी के कारण मैं आप के सामने एक बार हाज़िर हूँ एक नई कहानी लेकर। आशा करता हूँ कि आप सब इसे काफी पसन्द करेंगे।
मेरे बड़े भाई की शादी को 3 साल हो गए हैं। मेरी भाभी उत्तर प्रदेश की हैं, और काफ़ी सुन्दर हैं। उनकी फिगर किसी हिरोइन से कम नहीं है और जब से वो मेरे घर में आई, तभी से मेरा लण्ड उनकी चूत में घुसने के लिए काफ़ी परेशान रहने लगा। मैं कभी-कभी उनकी चूत की कल्पना करके मुट्ठ भी मारने लगा। यह सिलसिला काफ़ी दिनों तक चला। पर एक दिन ऐसा आया जिसके कारण मेरी दिली तमन्ना पूरी हो गई।
हुआ यूँ कि एक बार भाभी अपने मायके गई हुईं थीं और काफ़ी दिनों तक वहाँ रहीं। भैया की नौकरी दूसरे जिले में होने के कारण वो भी बाहर ही थे और भाभी को वापस लाने के लिए पापा ने मुझे ही कहा। मैं भाभी को लेने के लिए उनके मायके गया। वहाँ मेरा काफ़ी स्वागत-सत्कार हुआ।
जब मैं उनके घर पहुँचा तो भाभी नहा रहीं थीं। बाथरूम घर के अन्दर ही था। बाथरूम के ठीक बाहर मैं कुर्सी पर बैठा था। कुछ ही देर में बाथरूम का द्वार खुला। मैंने उन्हें देखा तो मेरी नज़रें उन्हें देखती ही रह गईं। क्योंकि वो उस वक्त केवल पेटीकोट में थीं। उन्हें पता नहीं था कि बाहर कोई बैठा है। उन्होंने मुझे देखते ही दरवाजा बन्द कर लिया, फिर कुछ देर में पूरे कपड़े पहन कर बाहर निकलीं।
मुस्कुरा कर मुझसे पूछा- अरे देवरजी, आप कब आए?
‘अभी आधा घण्टा पहले’- मैंने उत्तर दिया।
फिर उन्होंने मुझे खाना खिलाया और आराम करने के लिए मेरा बिस्तर छत पर लगा दिया। मैं छत पर सोने के लिए चला गया। बिस्तर पर पड़ते ही मुझे वह क्षण याद आया जब भाभी नहाकर निकलीं थीं। उसी क्षण को याद करके मैंने मुट्ठ मारी और कुछ ही देर में सो गया।
शाम को करीब चार बजे मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि भाभी मेरे सामने खड़ी हैं और मुस्कुरा कर कहती हैं- अरे देवरजी, उठो शाम हो गई है।’ मैं तुरंत उठकर खड़ा हो गया, और तैयार होने लगा। इतने में भाभी ने कहा- अरे देवरजी, यह चादर में अकड़न कैसी है?’ मैं घबरा गया, पर वह मुस्कुरा कर नीचे चली गईं।
मैं समझ गया कि भाभी को सब पता चल गया है। कुछ देर बाद मैं भी नीचे चला आया। भाभी ने नाश्ता दिया। कुछ देर बाद भाभी ने कहा- चलिए मैं आपको गाँव का मेला दिखा लाती हूँ।’
मैं तैयार हो गया। भाभी और मैं मेले की ओर चल पड़े। रास्ते में भाभी के खेत पड़ते थे जो कि काफ़ी दूर तक फैले हुए थे। वहीं पर एक झोपड़ी भी थी। मैंने पूछा कि ये झोपड़ी किसकी है, तो भाभी बोलीं कि मेरे पिताजी की। वो कभी-कभी यहाँ रात में सोते हैं। हम झोपड़ी की ओर बढ़ गए क्योंकि हम कुछ थक गए थे।
वहाँ पड़ी चारपाई पर मैं लेट गया और भाभी मेरे पास बैठ गईं। कुछ ही देर के बाद मुझे ऐसा लगा कि वो रो रही हैं। मैंने उठकर देखा तो उनकी आँखों से आँसू गिर रहे थे। मैंने चौंक कर उनसे पूछा तो उन्होंने कहा- क्या बताऊँ देवरजी, जबसे मेरी शादी आपके भैया से हुई है, ऐसा लगता है कि जैसे मेरी क़िस्मत ही फूट गई है।’
‘कैसे?’- मैंने कारण जानना चाहा।
‘एक औरत अपने पति से क्या चाहती है… प्यार। लेकिन मेरी किस्मत में तो प्यार है ही नहीं। आपके भैया हमेशा बाहर ही रहते हैं जिस कारण से मेरे प्यार करने की चाह पूरी नहीं हो पाती है। अब आप ही बताइए कि मैं क्या करूँ?’
‘ये आप कैसी बातें कर रहीं हैं?’
‘क्यों, अपने भाई की बुराई सुनी नहीं जाती। अगर ऐसा है तो तुम ही मेरी इच्छा पूरी क्यों नहीं कर देते!’
‘ये आप क्या कह रहीं हैं? कैसी इच्छा पूरी करूँ मैं? मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा।’
भाभी ने तब मुस्कुराते हुए कहा- अच्छा, अभी तो अंजान बन रहे हो, पर चादर में जो अकड़न थी, वो मुझे पता है कि वह कैसे हुआ था। अरे देवरजी अपने लंड का पानी बेकार में क्यों बहा रहे हो? उसे उसकी सही जगह में बहाओ।’
‘अभी तो सही जगह मिली ही नहीं, तो मैं क्या करूँ?’- मैंने तपाक से कहा।
‘चलो, अब मैं आपको सही जगह बता देती हूँ। आप अपना पानी इस चूत में बहाओ’ यह कहते हुए उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर अपनी चूत के ऊपर रख दिया। उसमें से पहले से ही गरम पानी निकल रहा था, जिससे मेरा हाथ गीला हो गया। भाभी ने अन्दर कुछ भी नहीं पहन रखा था।
अब भाभी ने मेरे पैंट की ज़िप खोल दी और मेरे तन्नाए हुए लंड को पकड़ कर बाहर निकाल लिया जो कि साँप की तरह फुँफकार रहा था। उसे उन्होंने तुरन्त अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगीं। मुझे मजा आने लगा। कुछ ही देर में मेरे लंड ने अपना पानी गिराना चाहा तो मैंने भाभी को कहा कि अपने मुँह से मेरा लंड निकाल दे। लेकिन उन्होंने चूसने की गति और बढ़ा दी, जिससे मेरा पानी उनके मुँह में ही गिर गया, जिसे भाभी ने बड़े चाव से गटक लिया।
उन्होंने अब भी मेरा लंड मुँह से बाहर नहीं निकाला, और चूसती रहीं। कुछ देर में मेरा लंड वापस तैयार हो गया। फिर भाभी ने मुझे खड़ा किया और ख़ुद चारपाई पर चित्त लेट गईं और कहा- अब चोद दो देवरजी। अब मैं पूरी तरह से तैयार हूँ। मेरी चूत की खुजली मिटा दो।’
मैंने अपने लंड को भाभी की चूत की छेद पर रखकर एक क़रारा झटका मारा जिससे मेरा आधा लंड भाभी की चूत को चीरता हुआ अन्दर घुस गया। भाभी चिल्लाई- अअअअआआआआआ… मरी… मेरे… रा…जाआआआ…
मैंने पूछा- ‘क्या हुआ भाभी?’
तो उन्होंने कहा- आज पहली बार, इतना मोटा लंड मेरी चूत में घुसा है, दर्द हो रहा है।’
‘अब क्या करूँ, बाहर निकाल लूँ?’
‘नहीं… मेरी चूचियों को चूसो।’
मैंने ऐसा ही किया। कुछ ही देर में भाभी ने अपनी गांड उछालनी शुरू कर दी। मेरी समझ में आ गया कि अब भाभी तैयार हैं। मैंने अपनी गति बढ़ा दी और तेज़ी के साथ भाभी की चुदाई करने लगा। वह भी नीचे से अपनी गांड उछाल-उछाल कर मेरा साथ देने लगी। मुझे काफ़ी मजा आ रहा था और भाभी भी बड़े मज़े से अपनी चुदाई करवा रहीं थीं।
कुछ देर के बाद भाभी ने अपनी गांड उछालने की रफ़्तार को और बढ़ाया और कहा- ‘अब मैं झड़ने वाली हूँ। और तेज़ देवरजी, और तेज़। आज तो मैं निहाल हो जाना चाहती हूँ… चोदो मेरे मोहना… चोदो… फाड़ दो मेरी चूत को… भुर्त्ता बना दो इस मादरचोद का।’
मैंने अपनी गति और भी बढ़ा दी और फिर हम दोनों एक साथ झड़ गए। मेरे लंड को भाभी ने अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगीं तो मैंने पूछा- अब क्यों चूस हो रही हो मेरा लंड?’
‘अभी चुदाई पूरी कहाँ हुई है, अभी तो मेरी गांड भी प्यासी है, उसे कौन मारेगा?’- भाभी ने समझाया।
‘ठीक है, चलो, अब कुतिया बन जाओ, मैं तुम्हारी गांड मारने के लिए तैयार हूँ।’
वह तुरंत कुतिया बन गई और मैं उसके पीछे आ गया और उसकी गांड में पहले थूक लगाई, फिर गांड को फैलाकर अपना लंड उसकी गांड की छेद पर रखकर एक धक्का मारा तो मेरे लंड का सुपाड़ा उसकी गांड में घुस गया। वह चीख पड़ी, पर मैंने कोई रहम नहीं किया और एक और ज़ोरदार धक्का मार दिया। मेरा लंड पूरा का पूरा जड़ तक उसकी गांड में घुस गया। फिर मैंने तेज़ी के साथ उसकी गांड मारनी शुरु कर दी।
कुछ देर के बाद उसने भी अपनी गांड को आगे-पीछे करना शुरु कर दिया। मैंने करीब 10 मिनट तक उसकी गांड मारी और अपना पानी उसकी गांड के अन्दर ही गिरा दिया, फिर हम एक-दूसरे से लिपटकर सो गए। करीब एक घण्टे के बाद हमारी नींद खुली तो हम तैयार होकर घर की ओर वापस चले आए।
उस दिन के बाद जब भी मुझे मौक़ा मिलता मैं भाभी की ख़ूब चुदाई करता।
आपको यह कहानी कैसी लगी, मुझे ज़रूर मेल कीजिए। Indian Sex Stories
नमस्ते दोस्तो ! मेरा Hindi Sex Stories नाम खुश है, मैं आपसे अपना पहला सेक्स अनुभव बाँटने जा रहा हूँ।
अभी तो मैं मोदीनगर में रहता हूँ, लेकिन यह बात तब की है जब मैं मुज़फ्फरनगर से ग्रेजुएशन कर रहा था।
मेरी गर्लफ्रेण्ड का नाम कशिश है। वो ५ फीट ५ इंच की गोरी, लम्बी, सुडौल बदन, फिगर ३४-२४-३६ है, और मुझे जो सबसे अच्छा लगता है, वो है उसके होंठ, बिल्कुल एन्जेलेना जॉली जैसे हैं, जिनसे मैं खेलता रहता और चूसता रहता।
मैं भी कम स्मार्ट नहीं हूँ दोस्तों। मैं ६ फीट लम्बा, गोरा और हैंडसम हूँ। मैं अपने कॉलेज का प्लेब्वॉय हुआ करता था। किसी भी लड़की को कोई भी काम पड़ता, मुझे ही याद करती, “कहाँ है मेरा खुश ?”
जब मेरा प्रथम वर्ष पूरा हुआ तो मेरी नज़र में एक जूनियर आई, उसका नाम कशिश था, जैसा नाम वैसी शक्ल और खूबसूरती भगवान ने दी थी उसे! मैंने सोच लिया, मैं उसकी अपनी गर्लफ्रेण्ड बनाऊँगा, और मैंने बनाया भी।
जो भी हमारे अन्तर्वासना के पाठक मुज़फ्फरनगर से हैं, वो सभी रामलीला ग्राउंड का नाम ज़रूर जानते होंगे, ये एक जंगली इलाका है जो पर्यटक-स्थल भी है, वहाँ जंगली जानवर आदि भी हैं। रामलीला ग्राउंड प्रेम-परिन्दों के लिए यानि कि युगलों के लिए स्वर्ग है। लड़के-लड़कियाँ दिनभर वहाँ जोड़े बनाकर प्रेमालाप में तल्लीन रहते हैं – बिना रोक-टोक ! कोई पूछने वाला नहीं होता, कौन क्या कर रहा है और क्यों कर रहा है।
मैं भी अपनी जानेमन को लेकर रामलीला ग्राउंड गया। बाईक पार्क करने के बाद हम प्रेम-परिन्दे अपने लिए एक घोंसला तलाश करने लगे। काफ़ी ऊपर जाने के बाद मुझे एक जगह मिली, जहाँ मैं आराम से अपनी कशिश के साथ अपने प्यार के ग़ुल को ग़ुलिस्ता बना सकता था, और वहाँ किसी को पता भी नहीं चलता, कि कोई बैठा भी है। मैं उसे अपनी बाँहों में लेकर बैठ गया। हम दोनों इधर-उधर की बातें करने लगे, और धीरे-धीरे मैं अपने हाथों से उसकी चूचियाँ दबाने लगा। वो भी मेरे हाथों को पकड़ कर अपनी चूचियाँ और ज़ोरों से दबवाने लगी।
फिर मैंने पीछे से उसके गले और कंधों पर चूमने लगा और उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं। फिर मैंने उसका टॉप उतार दिया, वो गुलाबी रंग की ब्रा में थी, सच में क्या क़यामत लग रही थी वो उस समय, जैसे स्वर्ग की कोई अप्सरा धरती पर आ गई हो। मैंने उसकी दोनों चूचियों को अपने दोनों हाथों में भर लिया और मसलने लगा।
वो मेरी बाँहों में कसमसाने लगी, इसके बाद मैंने ऊपर से ही उसकी चूचियों को चूम लिया और घुण्डियों को चूसा और काटा। फिर उसने मुझसे मुँह से ब्रा खोलने के लिए बोला, और मैंने अपने दाँतों से उसकी ब्रा की स्ट्रिप खोली और एक तरफ फेंक दी। अब मेरे सामने उसकी उभरती जवानी थी जिसे मैंने अपने हाथों और मँह में भर लिया। एक हाथ से मैं उसकी बाईं ओर की चूची को दबाने लगा और दाईं तरफ की चूची को अपने मुँह में भर कर चूसने लगा। उसके मुँह से और ज़ोरों की आवाज़ें निकलने लगीं।
फिर मैं अपनी जीभ से उसकी घुण्डियों को सहलाने लगा, उसे ज़ोर का झटका लगा और मैंने उसकी घुण्डियों को दाँतों से पकड़ लिया और हल्के से काट लिया और दूसरी घुण्डी को ज़ोर से मसल दिया।
वो मेरी बाँहों में तड़प उठी।
अब उसने मेरी शर्ट के बटन खोलने चालू किए। मैंने अन्दर बनियान नहीं पहनी थी। फिर वो पागलों की तरह बेतहाशा मेरे छाती पर चूमने लगी, बालों से खेलने लगी, और फिर अपने होंठों से मेरे निप्पलों को चूसने लगी। मैं अब उत्तेजित हुआ जा रहा था और वो अपने गीले होंठों से मुझे चूमे जा रही थी।
मैंने उसे ज़ोर से अपनी बाँहों में भर लिया।
इसके बाद मैंने उसे अपने नीचे लिटा दिया और उसके होंठों को चूसने लगा। हम दोनों के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं। उसने अपनी आँखें बन्द कर लीं और हम ऐसे ही आनन्द लेते रहे। फिर मैं अपनी जीभ उसके मुँह में ले गया और वो उसे चूसने लगी – ज़ोरों से !
मैं अपनी जीभ उसके मुँह में चारों ओर फिरा रहा था और फिर उसकी जीभ पर घुमाने लगा। इससे अजीब नशा छा रहा था हम दोनों पर ! दोनों डूबे जा रहे थे एक-दूसरे में ! साथ-साथ में मैं उसकी चूचियों को भी दबाए जा रहा था, जिससे वो और भी ज़्यादा उत्तेजित हो गई थी।
इस तरह हमने क़रीब 15 मिनट तक खूब प्यार किया।
फिर मैंने उसके कान के लटकन से खेलना शुरु किया, उसे अपने दाँतों में लिया, अपनी जीभ से चाटा और फिर धीरे-धीरे नीचे आने लगा। अब मैं उसकी चूचियों के ऊपरी हिस्सों पर किस करते हुए चूचियों के बीच की घाटी पर चूम रहा था। फिर नीचे उसकी नाभि पर चूमने लगा। इतनी देर में ही वो काफ़ी गरम हो गई थी, और सेक्सी आवाज़ें निकालने लगी थी।
फिर मैंने उसकी जीन्स की ज़िप खोल कर जीन्स उतार दी। अब उसके पूरे बदन पर कपड़े के नाम पर बस एक पैन्टी रह गई थी, वो भी ब्रा की तरह ही गुलाबी रंग की थी। मैं पैन्टी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा। पैन्टी पूरी गीली हो चुकी थी, मैंने पैन्टी को निकाला और उसकी चूत के आस-पास सहलाने लगा। क्या चूत थी ! बिल्कुल गुलाबी, एक भी बाल नहीं। मन कर रहा था, खा जाऊँ उसकी चूत को ! उसे देखकर मुँह में पानी आ गया।
वो बोलने लगी- प्लीज़ ! अब मत तड़पाओ।
मैंने कहा, “अभी तो बहुत समय है स्वीटहार्ट ! थोड़ा सब्र करो, और पहले इन्हीं बातों से आनन्द उठाओ, तभी सेक्स का पूरा मज़ा आएगा।”
फिर मैं उसकी चूत को चूमने लगा, और अपनी जीभ से सहलाने लगा, और उसके दाने को जीभ से उठाने लगा। वो काफ़ी उत्तेजित हो गई। फिर मैंने उसकी चूत पर अपने होंठ लगा दिए और ज़ोर से चूसना शुरु किया, वह ज़ोर से तड़पी और बोली- क्या कर रहे हो?
अब मैं अपनी जीभ को उसकी चूत में अन्दर-बाहर करने लगा और जीभ से ही उसे चोदने लगा।
अब तक वो चिल्लाने लगी थी, “यस… कम ऑन, फक्क मी…!”
मैंने बोला- इतनी भी क्या ज़ल्दी है, आराम से करेंगे। तुम मेरे लंड से नहीं खेलना चाहती क्या?
फिर मैंने अपना ९ इंच लम्बा और ३ इंच मोटा लण्ड उसके हाथों में पकड़ा दिया। पहले वो उससे खेलने लगी, फिर सुपाड़े की चमड़ी को पीछे कर अपनी जीभ से सहलाने लगी और अपने मुँह में भर कर लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। धीरे-धीरे मेरा लंड और मोटा और टाईट होता जा रहा था। मैं उसको सिर से पकड़ करक उसका मुँह ही चोदने लगा और क़रीब 25-30 झटकों के बाद में उसके मुँह में ही झड़ गया और अपना पूरा वीर्य उसके मुँह में उगल दिया, जिसे वह आसानी से चाट-चाट कर निगल गई।
इसके बाद हम दोनों 69 की मुद्रा में आ गए और मैं उसकी चूत का रस पीने लगा, वो मेरे लण्ड से खेलने लगी। धीरे-धीरे मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया और उसकी चूत मारने को तैयार हो गया।
अब मैंने उसे सीधा लिटाया और उसकी टाँगों को मोड़ कर फैला दिया, ताकि चूत का मुँह खुल जाए और लंड आसानी से चला जाए। वैसे भी चूत अभी तक इतनी गीली हो चुकी थी कि लण्ड उसमें आसानी से चला ही जाता।
अब मैंने अपने लंड को चूत के मुँह पर रखा और धीरे-धीरे अन्दर डालने लगा, इस विधि से लंड घुसाने पर उसे दर्द भी कम हुआ और मज़ा भी आया। अब तक मेरा लंड आधा अन्दर जा चुका था।
अगले झटके में मेरा पूरा-का-पूरा लंड अन्दर चला गया और वो चिल्ला उठी।
फिर मैंने उसके होंठों को अपने होंठों से दबा लिया और चूसने लगा।
धीरे-धीरे जब उसका दर्द कम हुआ तो वो अपनी कमर हिलाने लगी, मैं समझ गया अब वो तैयार है पूरी तरह से।
अब मैंने अपने लंड को अन्दर-बाहर करना शुरु किया और झटके लगाने लगा। वह भी कमर हिला-हिला कर झटकों का उत्तर झटकों से देने लगी।
ऐसे ही क़रीब 15 मिनटों तक चुदाई चलती रही। फिर मैंने उसे अपने गोद में उठा लिया और ऊपर उछाल-उछाल कर चोदने लगा, इससे हर बार मेरा लंड चूत की दीवार छू लेता, जिससे पूरा मज़ा आ रहा था। इतनी देर में वो तीन बार झड़ चुकी थी, और अब मैं झड़ने वाला था।
मैंने उसे नीचे किया और उसकी चूत में अपने वीर्य की पिचकारी छोड़ दी।
काफ़ी देर तक मेरा लंड धार मारता रहा। तब तक मेरी जानेमन भी एक बार झड़ गई मेरे साथ ही। ऐसे ही हम एक-दूसरे की बाँहों में पड़े रहे और फिर उठकर कपड़े पहन कर तैयार हो गए।
तो दोस्तों, कैसी लगा मेरा पहला अनुभव? Hindi Sex Stories
मैं 26 साल का लड़का हूं. ये मेरी दूसरी Sex Stories कहानी है अन्तर्वासना पर.
उस दिन बारिश में रितु और आरती को चोदने के बाद मैं अपने घर चला गया और अगले दिन रितु का फोन आया. उसने कहा कि मुझे आप के साथ बहुत मजा आया और मेरी भाभी आप से चुदवाना चाहती है. तो क्या आप मेरी भाभी को चोद देंगे तो वो आप को 2000/- रुपये देगी.
मैंने झट से हाँ कर दी और उसके बताये हुए पते पर 2 बजे दोपहर पहुंच गया.
वो भी एक आलीशान कोठी थी. मैंने जैसे ही डोरबेल बजाई पहले रितु ने दरवाजा खोला और मुझे अंदर बुलाकर सोफ़े पर बिठाया और उसने उसकी भाभी को पानी के लिये आवाज़ लगायी.
तो उसकी भाभी जैसे ही पानी लेके आयी मैं तो उसे देखते ही खड़ा हो गया. क्या मस्त जवान, गोरी, सुन्दर और बड़े बूब्स वाली औरत थी.
फिर रितु ने कहा कि राजेश ये मेरी भाभी मोहना है तो आप दोनों एन्जॉय करो मैं चलती हूं.
और रितु उठकर चली गयी फिर मोना मुझे अपने बेडरूम में ले गयी.
अंदर जाते ही वो मुझ से लिपट गयी और मुझे अपनी बाहों में लेकर मुझे चूमने लगी. वो मेरे लिप्स को बड़ी जोर जोर से किस करने लगी तो मैंने उसे कहा कि आराम से करो तो बहुत मजा आयेगा.
मैंने उसे पूछा कि आप का पति कहाँ है तो उसने कहा कि मेरी शादी दो साल पहले हुई थी. तब से लेकर आज तक मेरे पति ने कभी भी मुझे संतुष्ट किया नहीं. उसका लंड 3′ का है और चूत में जाने से पहले ही झड़ जाता है. मेरी फ़ीगर 38-28-36 होने के बावजूद उसका लंड खड़ा नहीं होता और कल जब मेरी ननद ने मुझे आप के बारे में बताया तो मैंने ही उसे कहा कि मुझे भी एक बार आप से मिलाये ताकि मैं आपसे चुदवा सकूँ.
उसके बाद मैंने धीरे धीरे उसकी साड़ी और पेटीकोट निकाल दिया. अब वो सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में थी. उसे देख कर मेरा लंड झट से टाइट हो गया और मैं गर्म होने लगा. अब मैंने उसे धीरे से उसके होंठ को किस करने लगा 10 मिनट के बाद मैंने उसकी ब्रा खोल दी और उसके बूब्स चूसने लगा और वो आह आह आह आअह आह आह करने लगी और उसकी सांसे तेज हो गयी.
फिर उसने मेरे सारे कपड़े उतार के मुझे नंगा कर दिया और वो मेरे लंड को चूसने लगी. 15 मिनट के बाद मैं उसकी चूत पर हाथ फेरने लगा और अपनी जीभ से चाटने लगा और वो एकदम मस्त होने लगी.
फिर उसने कहा कि अब आप अपना लंड डाल दो तो मैंने उसकी दोनों टांगे उठा के मेरा 7′ का लंड उसकी चूत में डालने लगा लेकिन उसकी चूत टाइट होने के कारण 3′ तक ही गया और वो चीखने लगी. फिर थोड़ी देर बाद मैंने एक जोर का शोट मारा कि मेरा पूरा लंड चूत में चला गया. अब उसको भी बहुत मजा आने लगा और मैं जोर जोर से उसे चोदने लगा और वो मजा लेने लगी. करीब 30 मिनट चोदने के बाद में झड़ गया. इस बीच वो दो बार झड़ चुकी थी. और मैं झड़ने के बाद थोड़ी देर उसके ऊपर लेटा रहा.
बाद में फिर से मेरा लंड खड़ा हो गया और इस बार मैंने उसे डौगी स्टाइल में चोदा.
फिर मैं अपने कपड़े पहनकर तैयार हो गया. फिर उसने मुझे 2000/- रुपये दिये और मैं चला गया. Sex Stories
फिर मैंने रात को Antarvasna रीना के नाम पर दो बार मुठ मारी, बहुत मजा आया… मैं उसी के बारे में सोचता सोचता सो गया… सुबह उठा तो मुझे कमजोरी महसूस हुई जो मुठ मारने के कारण हुई थी..
फिर मैंने अपने सवेरे के सारे काम किये और पढ़ाई करने लगा…
मुझे आज का दिन कैसे भी करके निकलना था क्योंकि कल मुझे रीना को अपने ही घर में चोदना था…
आज शाम को मुझे छोड़ कर घर के बाकी सभी लोग मौसी के घर तीन दिनों के लिए जा रहे थे…
जब सब लोग चले गए तो… मैंने रीना को फ़ोन लगाया और बोला- जान, अभी आ जाओ… अभी मस्ती करेंगे !
बोली- धीरे बोलो ! बॉस पास ही है… हम रात को बात करते हैं..
मैं बोला- ठीक है…
फिर रात को मैंने उसे फ़ोन किया तो पता चला रीना के घर पर सब लोग सो गए, मैंने सोचा तब तो मस्त वाली सेक्सी बातें करुंगा।
फिर मैं बोला- जान, घर पर कोई नहीं है… तुम मेरी रात की पार्टनर बन कर आ जाओ, खूब मस्ती करेंगे…
रीना- जानेमन, तुम आज कल बहुत शैतान हो गए हो… कल तुम्हें बताती हूँ, पार्टनर बन कर दिखाऊँगी… मेरी तो चूत कल से तड़प रही है जबसे तुमने इसे फाड़ा है… कई बार पानी छोड़ चुकी है।
मैं बोला- जानू, मेरा लौड़ा है ही बड़ा मस्त.. तू देखती जा कल क्या मजे आते हैं !
और भी बहुत सारी बाते हुई जो मैं आप लोगों को नहीं बताउंगा… अंत में मैंने पूछा- कल कितने बजे आओगी?
बोली- ऑफिस टाइम दस बजे !
मैं बोला- यार, घर पर यह बोल कर आना कि सहेली के घर जाना है…आठ- साढ़े आठ तक आ जाओ ना ! मैं लेने आ जाउंगा…
रीना- ठीक है आ जाउंगी… बाय !
रात भर मैं रीना के बड़े बड़े स्तनों और उसकी गांड के बारे में सोचता रहा, सोचते सोचते नींद आ गई…
सुबह हुई, मैं जल्दी से तैयार हो गया और रीना को फ़ोन लगाया, उसने फ़ोन नहीं उठाया।
मैंने सोचा कि शायद कोई आस पास होगा…
फिर 15 मिनट बाद फ़ोन आया- 5 मिनट में निकल रही हूँ ! आ जाओ…
मैं उसे लेने चला गया…
हम दोनों घर आ गये घर को मैंने लॉक किया और रीना को उठा कर बेडरूम में ले गया !
वहाँ उसे लेटा कर एक मस्त सा जोरदार चुम्बन लिया..
वो बहुत टाइट जींस और टॉप पहन कर आई थी.. बहुत सेक्सी लग रही थी…
मैंने जल्दी से उसके स्तनों को उसके टॉप और ब्रा से आजाद कर दिया..
फिर उन्हें मुँह में लेकर चूसने लगा…
उसे बड़ा मजा आ रहा था, बोली- करते रहो जान…
मैं बोला- ये ले मेरी जानेमन, तुझे अभी बहुत मजे करवाने हैं !
करीब दस मिनट इस तरह करने पर मैंने उसकी जींस खोल दी, मैंने देखा कि उसकी पैंटी गीली थी…मैं समझ गया कि रीना झड़ चुकी है…
फिर मैं उसकी गीली पैंटी से ही उसकी चूत के छेद में हाथ डालने लगा।
वो बोली- यार, बड़ा मजा आ रहा है…अह आः ओह्ह्ह ऐसी आवाजें आने लगी..
मैं बीच-बीच में उसे चूमने लगा ..
थोड़ी देर बाद वो उठी और उसने मुझे पूरा नंगा कर दिया।
वो मेरा सीना चाटने लगी…
बहुत मजा आ रहा था…
फिर उसने मेरा पूरे आकार में खड़ा हुआ लंड हाथ में लिया और बोली- जान यह तो बड़ा मस्त लग रहा है ! बड़ा मजा आने वाला है !
फिर उसने मेरा लंड अपने हाथ में लेकर उसे मुँह में लिया, फिर वो मुँह में लेकर उसे ऊपर नीचे करने लगी।
थोड़ी देर बाद बोली- यार तेरा कितना बड़ा है ! मेरे मुँह में ही नहीं आ रहा है..
मैं बोला- जान, अभी तेरी चूत को इस बड़े लंड से ही मजे आने वाले हैं…
वो फिर से लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी…
बहुत मजा आ रहा था.. मैं उसके स्तन दबा देता, उसकी चूत में ऊँगली भी डाल रहा था…
15 मिनट बाद रीना बोली- तेरा लंड है या कुछ और? मैं कितनी देर से तेरे पानी का इंतजार कर रही हूँ लेकिन ये है कि निकलता ही नहीं..
मैं बोला- यह मर्द का लंड है ! इतनी जल्दी हार नहीं मानेगा..
करीब दस मिनट बाद मैं झड़ गया और उसने मेरा पानी चाट लिया।
मैं बोला- अब खुश…?
बोली- हाँ ..
फिर मैं बोला- अब तेरी चूत की बारी है…
वो बोली- कब से मैं इसका इंतजार कर रही हूँ ! चलो शुरू हो जाओ…
फिर मैंने उसकी चूत में अपना लंड एक झटके में डाल दिया, वो चिल्लाई- आई माँ ! मर गई ऽऽऽ
मैं बोला- क्या हुआ?
बोली- इतनी तेज़ नहीं घुसाना चाहिए था ! तेरा है भी कितना मोटा और बड़ा…
फिर मैंने बहुत तेज़ गति में उसे चोदना शुरू कर दिया…
वो बोली- बहुत अच्छा लग रहा है !
फिर मैं अपनी गति में उसे चोदने लगा…उसके स्तन भी एक साथ दबाने लगा..
थोड़ी देर बाद वो झड़ गई, बोली- तुम चालू रखो…
करीब बीस मिनट बाद मैं भी झड़ गया।
आगे की कहानी बाद सुनाउंगा..
मुझे मेल करते रहें… Antarvasna
दोस्तों मेरे नाम सुनील है, मैं एक Hindi Porn Stories प्रोफेशनल एकाउंटेंट हूँ। मैंने अन्तर्वासना पर लगभग सभी कहानियाँ पढ़ी हैं।
मेरे मन में भी विचार उत्पन्न हुआ कि क्यों न मैं भी अपनी कहानी लिखूं कि किस तरह मैंने जीवन में पहली बार सेक्स सम्बन्ध बनाए।
यह बात उन दिनों की है जब मैं 20 वर्ष का था। हमारा घर दो मंजिल का बना हुआ है, जिसमें ऊपर की मंजिल में मैं, मेरे मम्मी-पापा और मेरा छोटा भाई रहते थे और नीचे की मंजिल पर आगे के दो कमरों को गोदाम के रूप में किराये पर दे रखा था और पीछे के दो कमरों में मेरे दूर के रिश्ते के मामा-मामी रहते थे। मेरे पापा और मामा एक ही कंपनी में काम करते थे जिसकी पूरे देश में कई शाखाएँ थी, इस कारण वे लोग ज्यादातर टूर पर ही रहते थे।
मेरी मम्मी एक कुशल गृहणी होने के साथ-साथ एक कुशल समाज-सेविका भी हैं। घर के काम-काज निबटाकर वे सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक समाज-सेवा में व्यस्त रहती हैं, छोटा भाई नेवी में कोस्ट-गार्ड की ट्रेनिंग के लिए विशाखापत्तनम गया हुआ था और में कॉलेज में बी.कॉम. अन्तिम वर्ष की पढ़ाई कर रहा था।
एक दिन सुबह ८ बजे मैं कॉलेज जाने के लिए निकला और बस पकड़ी, आधे रास्ते में याद आया कि लायब्ररी की किताब तो मामी ने पढ़ने के लिए ली थी, आज वापिस करने की आखिरी तारीख है। घर जाकर किताब लेकर वापिस समय पर कॉलेज पहुँच सकता हूँ, यह सोचकर रास्ते में बस छोड़ दी और वापसी की बस पकड़कर घर आ गया।
दहलीज पार करके जैसे ही मामी के कमरे के पास पहुंचा तो मुझे कुछ खुसफ़ुसाने की आवाजें सुनाई दी। मैं ठिठककर रुक गया और ध्यान लगाकर सुनने लगा।
मामी किसी से कह रही थी- अभी तुम परसों ही तो आये थे, इतनी जल्दी कैसे?
किसी आदमी की आवाज सुनाई दी- मेरी जान, आज तो तुम्हारे पिताजी यानि मेरे ताऊजी ने भेजा है ये सामान लेकर, और सच कहूँ ! मेरे मन भी बहुत कर रहा था। कल शाम जब से ताऊजी ने बोला कि श्याम कल ये सामान उर्मिला को दे आना। तब से बस यही मन कर रहा था कि कब सवेरा हो और मैं उड़ कर तुम्हारे पास पहुंचूं और तुम्हारी गुद्देदार चूचियों को मुंह में लेकर चूसूँ और अपनी प्यास बुझाऊँ।
मामी बोली- अभी परसों ही तो चोद कर गए हो, इतनी जल्दी फिर !
श्याम बोला- अरे जालिम ! तेरी चूत है ही इतनी प्यारी ! अगर मेरा बस चले तो मैं तो अपना लंड हर वक्त इसी में डाले पड़ा रहूँ !
मामी और श्याम की बातें सुनकर मैंने अंदाजा लगा लिया था कि घर में कोई न होने सबसे ज्यादा फायदा इन लोगों ने ही उठाया है।
मैं कुछ और सोचता, इससे पहले मामी की आवाज सुनाई दी- सुनो श्याम, आज जरा चूसा-चासी न करके जल्दी करना, जीजी आज जल्दी वापिस घर आएँगी क्योंकि जीजाजी और ये (मामा) टूर से आज वापिस आने वाले हैं।
श्याम बोला- मेरी रानी तुम हुक्म तो करो, तुम जैसे चाहोगी वैसे ही चुदाई का कार्यक्रम बना दिया जायेगा।
मैंने मन में ठान ली कि आज तो ब्लू फिल्म का लाइव टेलीकास्ट देख कर ही मानूंगा। मैं बिना कोई आहट किये बगल वाली खिड़की के पास चला गया, वह थोड़ी सी खुली हुई थी, शायद उन लोगो को इस बात का एहसास भी नहीं होगा कि कोई भी घर पर आ सकता है, उस जगह से अन्दर का सब साफ़ दिखाई पड़ रहा था।
मामी काले रंग के ब्लाउज पेटीकोट में थी, सिर पर तौलिया लपेटा हुआ शायद अभी नहाकर आई थी, तभी यह श्याम आ गया होगा। श्याम खड़े-खड़े ही दोनों हाथों से मामी की चूचियों से खेल रहा था।
धीरे-धीरे उसने मामी के ब्लाउज के हुक खोलकर उसे शरीर से अलग कर दिया, मामी अन्दर ब्रा भी काले रंग की पहन रखी थी उसने उसे भी उतार दिया।
इस बीच वह मामी के शरीर को चूमता भी जा रहा था। फिर उसने पेटीकोट भी उतार दिया, मामी उसके सामने बिलकुल निर्वस्त्र खड़ी थी।
मामी का मांसल शरीर ३८-२६-३८ का था। श्याम ने उन्हें पकड़कर धीरे से पलंग पर लिटाया और फ़टाफ़ट से अपने सारे कपड़े उतार दिए। फिर उसने मामी की टांगों को चौड़ा किया, टाँगें चौड़ी होते ही उसके मुंह से निकला, “क्या बात है जानेमन ! आज तो तुमने बड़ी सफाई कर रखी है? परसों तो यहाँ पर जंगल उगा हुआ था।
मामी बोली- आज ये आने वाले है न इसीलिए अभी-अभी साफ़ करके आई हूँ, कर कुछ नहीं पाते पर सफाई पूरी चाहिए।
श्याम बोला- कोई बात नहीं मेरी जान ! हम तो है न तुम्हारी सेवा में ! अभी तुम्हारी खुजली मिटाते हैं !
कहते हुए अपना मुंह चूत पर ले गया और जीभ से मामी की चूत की फांको का रस चूसने लगा। इस चुसाई से मामी मस्त होने लगी और कमर को धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करने लगी।
श्याम उठा और अपने अध-खड़े लंड को मामी की चूत पर घिसने लगा जिससे उसका लंड एकदम से टाइट हो कर खड़ा हो गया। उसने जल्दी से उसे चूत के मुहाने पर लगा धक्का मारा। एक ही झटके में पूरा का पूरा लंड मामी की चूत में समां गया।
मामी ने हलकी सी सित्कारी भरी, धीरे-धीरे वो भी श्याम के धक्कों का जवाब धक्कों से देने लगी।
15-20 धक्कों के बाद ही श्याम बोला- मेरी रानी, अब मैं झड़ने वाला हूँ, संभालो !
मामी बोली- आजा मेरे राजा ! एक बूँद भी बाहर नहीं निकलने दूँगी !
इतने में श्याम ने आखरी झटका मारा और पस्त होकर मामी के ऊपर ही लेट गया। फिल्म की समाप्ति होते-होते मेरा हथियार भी पैन्ट में तन कर खड़ा हो गया था। मन तो कर रहा था कि अभी अन्दर जाऊँ और श्याम को हटाकर मैं भी जुट जाऊं पर मैंने वहां से निकल लेने में ही भलाई समझी।
घर से निकल कर कॉलेज गया पर वहाँ पर मन नहीं लगा। आँखों के सामने वही सीन घूम रहा था। अंत में मैं घर वापिस आया, देखा कि मामी ने कपड़े बदल लिए थे। अब वो हरे रंग की साड़ी पहने हुए थी, मम्मी भी घर में ही थी।
मैं चुपचाप ऊपर चढ़ा और अपने कमरे की ओर चल दिया। मम्मी रसोई में कुछ बना रही थी, एकदम पलटी तो मुझे देखकर बोली- अरे संजू क्या हुआ ? तू जल्दी कैसे आ गया, अभी तो २ ही बजे हैं?
मैं बोला- कुछ नहीं मम्मी ! एक तो प्रोफ़ेसर नहीं आये थे और मुझे भी कुछ कमजोरी सी महसूस हो रही थी। रात को देर तक पढ़ा था ना, मैं तेरे लिए चाय बनाकर लाती हूँ।
चाय पीकर मैं लेट गया, आँखे बंद करते ही फिर वही सीन मेरी आँखों के आगे तैरने लगे। आँख लगने ही जा रही थी कि मम्मी की आवाज सुनाई दी- उर्मिला !(मेरी मम्मी मामा से काफी बढ़ी थी इसी कारण वो मामी को उनके नाम से ही बुलाती थी) मैं जरा बाहर जा रही हूँ, ५ बजे तक आ जाउंगी, संजू की तबियत ठीक नहीं है तुम जरा उसके पास ही बैठना।
मामी बोली- अच्छा जीजी।
यह सब सुनते ही मेरे मन का शैतान जग उठा। यही मौका है मामी को सेट करने का।
मैंने फ़ौरन कपडे उतारे, सिर्फ लुंगी बनियान में पलंग पर लेट गया। थोड़ी देर में मामी आ गई, बोली- क्या हुआ संजू?
मैं बोला- कुछ नहीं मामी, सिर बड़ा दर्द कर रहा है और शरीर भी टूट रहा है।
मामी सिरहाने पर बैठती हुई बोली- आ मैं तेरा सिर दबा देती हूँ।
कहते हुए उन्होंने मेरा सिर अपनी गोदी में रख लिया और सहराने लगी कुछ देर बाद ही मैंने धीरे से एक हाथ उठाकर उनकी गर्दन पर रख दिया। मेरी कोहनी उनकी चूचियों से टकरा रही थी, उन्होंने कुछ नहीं कहा, मेरी हिम्मत बढ़ी, मैंने हाथ धीरे-धीरे सरका कर उनकी चूचियों पर टिका दिया और अंदाजे से उनके निप्पल को मसल दिया।
वो शायद सोते से जागी, मेरा हाथ हटाते हुए बोली- क्या कर रहे हो संजू? बहुत बदतमीज हो गए हो आने दो तुम्हारी मम्मी को उन्हें बताउंगी।
एक बार तो मैं डर गया, लेकिन एकदम से हिम्मत करके बोला- तुम क्या बताओगी आज तो मैं ही तुम्हारे और श्याम के बीच में पकने वाली खिचड़ी का पर्दाफाश कर दूंगा, मैंने सुबह सब देखा और सुना थ।
यह सुनकर मामी के होश उड़ गए, वो धम से पलंग पर बैठ गई। मैंने अपना तीर निशाने पर लगता देखा, पास जाकर बोला- यदि तुम मुझे खुश कर दोगी तो मैं मम्मी को या किसी और को कुछ नहीं बताऊंगा!
मामी मेरी बात पता नहीं सुन रही थी या नहीं, वो तो एकदम से निर्जीव होकर बैठी हुई थी, मेरे सिर पर तो शैतान सवार था, मैंने उस बात को मौन स्वीकृति समझ उनकी चुचियों से खेलना शुरू कर दिया, ब्लाउज के हुक खोलकर ब्रा ऊपर उठाकर मैंने चूचियों को चूसना शुरू कर दिया। फिर धीरे से मैंने उनके शरीर से सारे कपड़े उतार दिए, उन्होंने कपड़े उतारने में मेरा साथ साथ दिया एक चाबी वाली गुडिया की तरह।
मैंने उन्हें सीधा लिटा दिया और श्याम की तरह उनकी चूत चाटने लगा। शुरू में तो बड़ा अजीब लगा पर धीरे-धीरे स्वाद आने लगा। इस बीच मेरा लंड तनकर खड़ा हो गया था। मैंने लंड को उनकी चूत पर टिकाया और धक्का मार दिया।
मेरा लंड श्याम की अपेक्षा ज्यादा मोटा और लम्बा था, एक बार में आधा ही जा पाया। मामी सीत्कार उठी पर चुपचाप लेटी रही। मैं अपनी धुन में धक्के लगाता रहा, पहली बार सेक्स का मजा लूट रहा था, वो भी एकतरफा।
20-25 धक्को में ही मैं झड़ गया और लंड को अन्दर डाले हुए ही लेटा रहा। पांच मिनट बाद उठा और बाथरूम में जाकर सफाई करने लगा। बाहर आया तो देखा मामी चुपचाप कपड़े पहन रही थी, मैं पलंग पर जाकर लेट गया। मामी कपड़े पहन कर वहीं पलंग पर बैठ गई। मैं काफी थक चुका था मेरी आँख लग गई।
शाम को ६ बजे मेरी आँख खुली, मम्मी आ चुकी थी मुझे देख कर बोली- अब कैसी तबियत है?
मैं बोला- अब ठीक है !
रात को ९ बजे पापा और मामा टूर से लौट आये। अगले दिन रविवार था, सब घर पर ही थे। मैं नीचे गया तो मामा बाहर बैठे अखबार पढ़ रहे थे और मामी रसोई में कुछ बना रही थी।
आज वो बहुत खुश दिखाई दे रही थी। मैंने पास जाकर धीरे से उनकी चूचियों को मसल दिया, वो कुछ नहीं बोली, बस चुपचाप अपने काम में लगी रही। उस दिन के बाद मुझे जब मौका मिलता- मैं कभी उनकी चूचियों को, कभी गालों को मसल देता था पर वो कुछ भी नहीं कहती थी।
हफ्ते भर बाद शनिवार को सुबह मम्मी-पापा को एटा एक शादी में जाना था, मामा एक दिन पहले ही टूर पर चले गए थे। मैं कॉलेज गया और दोपहर को 2 बजे घर लौटा। घर आकर देखा मामी ने फिरोजी रंग की साड़ी पहन रखी थी, हल्का सा मेक-अप भी कर रखा था, मुझे देखते ही बोली- आ गए संजू ! चलो हाथ मुंह धोलो, साथ बैठकर खाना खायेंगे।
मैं उनके बदले हुए रूप को देख कर चकित रह गया क्योंकि जबसे मैंने उनकी चुदाई की थी तबसे वो मुझसे बात नहीं करती थी। मैं फ्रेश हो कर नीचे आया तो देखा कि खाना भी मेरी पसंद का था।
हमने खाना शुरू किया, मामी बोली- देखो संजू बुरा मत मानना ! तुम्हारे मामा मुझे तृप्त नहीं कर पाते इसीलिए मैं श्याम से चुदाई करवाती थी पर उस दिन चाहे तुमने मुझे जबरदस्ती चोदा पर मुझे तुम्हारा लम्बा और मोटा लंड बहुत पसंद आया और उस दिन के बाद तुम जब मर्जी मुझे छेड़कर चले जाते थे, मैं तड़फ कर रह जाती थी, अब दो दिन तक मैं तुम्हारी हूँ तुम चाहे जैसे मर्जी मुझे चोद सकते हो !
इस बीच खाना पूरा हो चुका, मैं उठते हुए बोला- फिर देर किस बात की? चलो एक शिफ्ट तो अभी लगा लेते हैं !
मामी बोली ठीक है, तुम बाहर वाले दरवाजे का कुंडा लगा कर आओ, मैं भी ये साफ़ करके आती हूँ।
मैं फ़टाफ़ट कुंडा लगा कर कमरे में आ गया, इतने में मामी भी आ गई। देखते ही मैंने उनको अपनी बाँहों में जकड़ लिया, वो भी मुझसे लिपट गई। धीरे-धीरे मैंने उनके और उन्होंने मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिए। उसके बाद मैं लेकर पलंग पर आ गया, हम लोग 69 की अवस्था में लेट गए।
मैं उनकी चूत को खीर की कटोरी समझ कर चाटने लगा। उन्होंने मेरे लंड को लॉलीपोप की तरह चूसना शुरू कर दिया। मामी मेरे लंड को चूसती जा रही थी और कहती जा रही थी “चूसो जोर से चूसो, खा जाओ”
काफी देर तक यही चलता रहा। मामी की चूत ने पानी छोड़ दिया जिसे मैं चाट गया। इतने में मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ जब तक कुछ कहता मेरे लंड ने पानी छोड़ दिया। मामी सारे रस को शहद समझ कर चाट गई।
उसके बाद हमने दो दिनों तक 8 से 10 बार चुदाई की। उसके बाद भी जब मौका लगता हम लोग अपनी प्यास बुझा लेते थे।
दोस्तों यह मेरी पहली कहानी है और जो असलियत है वो इस कहानी में लिखा है।
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