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मेरा नाम सूरज है। यह मेरी एक Antarvasna आज तक की सबसे अच्छी गुज़री रात है। मैंने उस एक रात अपनी बीवी (रानी) और उसकी शादीशुदा सहेली (रजनी) जिसका पति मेरी दोस्त भी है, को एक ही रात चोदा।
रानी ५ फीट ४ इंच लम्बी है और उसका फ़िगर ३२-२८-३२ है। रजनी भी उतनी ही लम्बी और कद-काठी की है पर उसकी चूचियाँ और भी बड़ी और आकर्षक हैं।
मैं और रानी अक्सर ही एक-दूसरे से अलग-अलग लड़कियों या लड़कियों के साथ चुदाई करने की बात किया करते थे। एक दिन रजनी को मजबूरी में हमारे घर रूकना पड़ा, क्योंकि उसके पति को ऑफिस के काम से बाहर जाना था।
उस दिन खाना खाने के बाद हम तीनों मिलकर बेडरूम में फिल्म देख रहे थे जिसमें बहुत ही सेक्सी सीन अचानक ही आ गया। उसके बाद मुझे कुछ हो गया और मैं रानी को किस करने लगा। रजनी फिल्म देखने में व्यस्त थी। फिर मैंने रानी को प्यार करते हुए उसके कान में धीरे से कहा कि मैं उसे और रजनी को एक साथ चोदना चाहता हूँ। रानी ने मेरी तरफ देखा और फिर एकदम से रजनी के पास जाकर उसके कान में कुछ कहा। उसके बाद रजनी बाहर चली गई और रानी मेरे पास आकर मुझे चूमने लगी। मैंने उससे पूछा कि तुमने रजनी से ऐसा क्या कहा है जो वह बाहर चली गई?
रानी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया- सब्र कर लो थोड़ी देर !
उसके बाद मैं रानी को नंगा करके उसकी चूचियों को अपने मुँह में लेकर पीने लगा और उसकी चूत में ऊँगली करने लगा।
अचानक ही दरवाज़ा खुला और रजनी एक काले रंग के गाऊन में अन्दर आई और आकर मेरे पास बैठ गई। उसके बाद मैंने रानी की तरफ देखा तो उसने मुस्कुराते हुए कहा कि आज हम दोनों तुम्हारे हैं।
इसके बाद तो मैं झपट कर रजनी को चूमने लगा और उसका गाऊन खोल दिया। फिर मैं रजनी की चूचियों को पीने लगा तो वह तड़पने लगी और मेरे सिर को अपने सीने में ज़ोर से दबा दिया।
इधर नीचे रानी मेरे लण्ड को बड़े मज़े से चूस कर रजनी की चूत के लिए तैयार कर रही थी। उधर मैं रजनी के पूरे बदन को चूम लेने के बाद उसकी चूत को चाटने लगा तो वह सिसकने लगी, रानी ने भी उसे और उत्तेजित करने के लिए उसकी चूचियाँ चूसनी शुरू कर दी।
फिर मैंने अपने गरमा-गरम लण्ड पर रजनी को बैठा दिया और उसे कुदाने लगा, और रानी इधर मेरे मुँह पर बैठ कर अपनी चूत मुझसे चटवाने लगी।
इस तरह मैंने दोनों को बारी-बारी से चोदा और वह रात हमारे लिए यादगार बन गई। उसके बाद से हम लोगों को जब भी मौक़ा मिलता है हम लोग समूह में सेक्स करते हैं। Antarvasna
दूसरे दिन मैं सवेरे नहा धो Anatrvasna कर निपटा ही था कि मुझे अपने कमरे के बाहर एक सुन्दर सी परी नजर आई। मेरी आंखें चकाचौंध हो गई। भरी जवानी लिये एक नवयौवना मेरे द्वार पर खड़ी थी।
‘कौन है आप, अन्दर आईये !’ उसने सर हिला कर मना कर दिया और अपनी बड़ी बड़ी आँखों से मुझे निहारने लगी। मेरे दिल पर जैसे सैकड़ों बिजलियां गिर पड़ी। मैं एकबारगी तो कांप गया। ऐसी बला की सुन्दरी मेरे घर पर !? यकीन नहीं हो रहा था। उसके भारी स्तन उसके कुर्ते में से झांक रहे थे। भरा मदमस्त बदन, गोल गोल उभरे हुए सुन्दर चूतड़, जवानी जैसे छलकी पड़ रही थी। इतने में मीना लहराती हुई अन्दर आई।
‘यह राधा दीदी हैं ! पसन्द आई?’ मीना ने परिचय कराया।
‘इतनी सुन्दर ! मीना, ये तो खुदा की कलाकृति है !’
‘है ना ! इसे आज आपके लिये सजाया है, इसे सब कुछ सिखाना है… दीदी ! ये सिखायेंगे !’
राधा शर्म से नीचे देखने लगी।
‘चल ना… वापस चल !’ राधा कुछ नर्वस नजर आ रही थी।
‘अरे दीदी, सुबह से तो अंकल जी का नाम जप रही थी, अब क्या हुआ?’ मीना ने उसकी पोल खोलते हुए कहा।
‘मीना, चल ना, मैं तो मर जाऊंगी !!’ राधा शर्म से लाल हो रही थी।
‘अंकल जी इसे अन्दर तो ले जाईये !’ मीना ने राधा को अन्दर मेरे सामने धकेल दिया।
मैंने जैसे ही उसका हाथ पकड़ा। मुझे और उसे जैसे बिजली के झटके से लगे। मेरे हाथ लगाते ही वो सिमट गई, जैसे छुईमुई हो। मैंने हिम्मत करके उसकी बांह थाम ली और उसे प्यार से दुल्हन की तरह अन्दर लाया। और बिस्तर पर बैठा दिया।
‘अंकल इसे प्यार से चोदना, देखो मजा आना चाहिये। मैं जितने घर का काम निपटाती हूँ !’
‘मीना मत जा, रुक जा।’ उसकी आंखो में विनती थी। वो नर्वस हो रही थी।
‘मेरे सामने चुदायएगी क्या?’ मीना ने फ़ूहड़ तरीके से कहा।
‘हाय मीना, मत बोल ऐसा !’ वो शरम से सिमटती जा रही थी। मैंने मीना को इशारा किया कि वो जाये।
‘मीना, देखो सुहागरात को तुम्हारा मर्द तुम्हें चोदेगा, तुम्हें सब आना चाहिये, मत चिन्ता करो, मैं हूँ ना, सब सिखा दूंगा !’ मैंने उसे तसल्ली दी।
‘अंकल, कुछ होगा तो नहीं ना? !!’ वो शरम से मुँह छिपाने लगी।
‘राधा, सुनो वो तुम्हारे वक्ष से शुरू करेगा, और उसे दबाते हुए तुम्हरा कुर्ता उतारेगा !’ मैंने उसके स्तनों पर हाथ डालते हुए कहा। उसके बोबे नरम और नाजुक से लगे। निपल कड़े हो चुके थे। मैं कुर्ता ऊपर खींचने लगा।
‘सुहागरात को कुर्ता नहीं, मैं ब्लाऊज पहनूंगी !’ उसने कुछ हिचकिचाते हुए कहा। मुझे हंसी आ गई।
‘अच्छा तो ये कुर्ता तो उतारो… ‘
‘ नहीं , पहले आप उतारो !’ उसने शरमाते हुए कहा। उसकी शर्म दूर करना जरूरी था। मैंने अपना पजामा उतार दिया। मेरा तन्नाया हुआ लण्ड बाहर उछल कर आ गया। वो लण्ड देखते ही शरमा गई।
‘उई मां, यह तो बहुत बड़ा है, और ऐसा लोहे जैसा?’ उसकी आह निकल गई।
‘अब तो उतार दो ना, देखो मैंने भी उतार दिया है !’
शरमाते हुए राधा ने भी अपने कपड़े उतार दिये। उसका तराशा हुआ चिकना बदन, लुनाई से भरा हुआ, चमकता हुआ, मेरी धड़कने बढ़ाने लिये काफ़ी था। मैं उसके समीप आ गया, मेरे बिना कुछ कहे उसने मेर लण्ड पकड़ लिया, सुपाड़ा बाहर निकाल लिया और मुठ में भर लिया और दबा लिया।
‘आह, अंकल जी, जब यह अन्दर जायेगा तो मर ही जाऊंगी !’ और उसने मेरा लण्ड जबर्दस्त दबा दिया। मेरे मुख से आह निकल गई। राधा मेरे लण्ड को दबाती चली गई और आह भरती गई। मेरी उत्तेजना बहुत तेज हो उठी। एक परी जैसी नवयौवना मेरा लण्ड दबा रही थी।
‘कितना कठोर लण्ड है, मां रीऽऽऽ, मस्त है !’ उसका हाथ कसता गया। मेरे शरीर में जैसे रंगीन फ़ुलझड़ियाँ छूट पड़ी। सारा पानी जिस्म में सिमटता सा लगा। और… और हाय… मेरा वीर्य बाहर आने की तैयारी में था।
‘मीना मैं तो गया, मेरा निकला !’ मीना भाग कर आई और गिलास को मेरे लण्ड की टोपी पर रख दिया।
‘अरे अंकल जी, ये क्या… निकल गया माल?’ मीना हंस पड़ी। वीर्य पिचकारी बन कर फ़व्वारे की तरह लण्ड से बाहर आने लगा और गिलास में उसे मीना ने एकत्र करने लगी।
‘लो सभी इसे टेस्ट करो !’
राधा अपनी अंगुली तर करके वीर्य चाटने लगी। मीना ने भी वीर्य चाटा, राधा ने एक अंगुली में भर कर मेरे मुँह में भी डाल दिया। मुझे तो वीर्य का स्वाद कुछ खास नहीं लगा, पर वे दोनों पूरा चट कर गई।
‘ये सब राधा के रूप और यौवन का कमाल है, मैं इसकी जवानी सह नहीं पाया !’ मैंने राधा की जवानी की तारीफ़ की। वो भी शरमा गई। मुझे थोड़ी शर्मिन्दगी सी लगी पर अपनी कमजोरी लावा बन कर बाहर निकल चुकी थी।
‘अंकल जी, मुझे सिखाओगे नहीं क्या?’ राधा ने फिर से विनती की। मेरा अंग अंग फिर से फ़ड़क उठा। उसके गाण्ड की गोलाईयां को मैंने दबा कर अपनी ओर खींच लिया। उसका नरम नरम जिस्म मेरे शरीर में आग भरने लगा। मेरा लण्ड फिर से जाग उठा। उसकी चूत से मेरा लण्ड टकराने लगा। मीना भी उसकी चूचियाँ दबाने लगी। हम दोनों ने मिल कर राधा को बिस्तर पर लेटा दिया।
‘तू जा ना अब, तेरे सामने मुझे शरम आयेगी !’
‘आहाऽऽ ! बड़ी आई शरमाने वाली ! रेशमा से तो खूब खेलती है? अब मुझसे शरमायेगी !’
‘जा ना मीना, चुदते हुए मुझे शरम आयेगी !’ इतने में ऊपर आ चुका था और राधा के जिस्म को कब्जे में कर रहा था। मेरा लण्ड अब उसकी चूत पर दब रहा था।
‘मीना, अब जा नाऽऽऽ… आह… मीना घुस गया रे !’
‘चोद दो अंकल इसे ! जरा भी मत रहम करना !’ मीना ने राधा को छेड़ते हुए कहा।
मेरा लण्ड थोड़ा सा और अन्दर गया और राधा बोल पड़ी,’धीरे से, मेरी चूत अभी तक कुंवारी है, झिल्ली धीरे से तोड़ना !’ राधा ने मुझे लिपटाते हुए कहा।
मैंने हल्के से लण्ड अन्दर सरकाया। पर मीना ने शरारत कर दी। उसने मेरे दोनों चूतड़ों को सहलाते हुए जोर से धक्का दे दिया। लण्ड फ़च से अन्दर तक बैठ गया। राधा चीख उठी।
‘हाय रे अंकल ! कहा था ना धीरे से… !’ उसकी आंखों से दर्द के मारे आंसू निकल आये।
‘राधा ! यह धक्का मीना ने दिया है !’ मैंने प्यार से उसे चूम कर शान्त किया।
पर मीना ने फिर से मेरे चूतड़ को जोर से एक धक्का और दे दिया। लण्ड फिर से जड़ तक घुस गया। वो फिर से चीख उठी।
‘मजा आया ना दीदी, तेरी फ़ुद्दी में मोटा लौड़ा फंस गया है अब !’
‘साली, हरामजादी ! मुझे लग रही है और तुझे मजाक सूझ रहा है ! अंकल जी लौड़ा धीरे मारो ना !’
‘झिल्ली फ़ुड़वायेगी ना, तो दर्द का भी मजा ले, अंकल ने कल मेरी झिल्ली भी फ़ोड़ डाली थी… खूब मजा आया था… अंकल चोद मारो ना साली को !’ मीना शरारत करने में जरा भी पीछे नहीं हट रही थी।
मैंने धीरे धीरे लण्ड अन्दर बाहर करना चालू कर दिया। मीना ने अंगुली में थूक लगा कर राधा की गाण्ड में सरका दी। मीना मेरी गोलियों से भी खेल रही थी। राधा के बोबे मैंने मसलने चालू कर दिये थे, उसके निपल कड़े हो चुके थे, उसे रबड़ की तरह ऊपर खींच कर छोड़ रहा था। कुछ ही देर में राधा तैयार हो चुकी थी, गाण्ड में अंगुली का मजा भी ले रही थी।
‘हाय मीना, सच में तेरे अंकल जी ने तो मुझे चोद चोद कर मस्त कर दिया है, मस्त लौड़ा है रे, मीना गाण्ड में जल्दी जल्दी अंगुली कर ना !’
मेरे धक्के भी अब तेज हो चुके थे। राधा भी उछल उछल कर चुदवा रही थी। मेरा बिस्तर खून के धब्बों से लाल हो गया था। राधा अपनी गाण्ड और खोल कर अंगुलि अन्दर ले रही थी। अब राधा बल खाने लगी थी। सिसकारियाँ तेज हो उठी । उसकी बाज़ारू भाषा निकल पड़ी थी।
‘मीना, हाय रे, हरामी लण्ड ने मुझे पेल दिया, हाय रे चुद गई मैं तो… आहऽऽ मैं गई… राजाऽऽऽ चोद… चोद रे, मैया रीऽऽऽ !’
‘मेरी बहना आज मौका है, फ़ुड़वा ले अपनी चूत… अंकल गन्डमरी को लौड़ा मार मार कर चोद दे !’
‘अंकल जी, हाय चूत मार दी रे, मेरी फ़ुद्दी चुद गई, आह्ह मेरा माल निकला रे , हरामजादी… मेरी चूत फ़ोड़ डाली रे…’ और उसने अपनी चूत सिकोड़ ली। राधा झड़ने लगी, उसका पानी निकलने लग गया था।
‘अंकल जी इसकी गाण्ड मारो, जल्दी करो… !’ मीना ने मेरा कड़क लण्ड बाहर निकाला और अंगुली निकाल कर उसकी जगह लण्ड रख दिया। मैंने जरा सा जोर लगाया और लण्ड गाण्ड में घुसता चला गया। राधा फिर से चीख उठी।
‘हाय री, बस ना, दर्द हो रहा है, अब मेरी गाण्ड फ़ाड़ोगे क्या !’
‘अरे वाह, खुद तो झड़ गई, अंकल प्यासे रह जायेंगे क्या, अंकल जी चोद दो राधा गाण्ड को… साली की फ़ाड़ दो !’ मीना अपनी देसी भाषा में मेरी तरफ़दारी कर रही थी।
मेरा लण्ड फूल कर तन्ना रहा था। मैं राधा को कैसे छोड देता, मेरा जिस्म तरावट में मस्त हो रहा था। मेरा लण्ड उसकी गाण्ड को अन्दर तक चोद रहा था। मीना को यह देख कर मजा आ रहा था कि राधा आज पूरी तरह से चुद गई है। मीना ने अब मुझे झाड़ने के लिये मेरी गाण्ड में भी अंगुली डाल दी। मुझे अंगुली घुसते ही दुगना मजा आ गया।
‘मीना, अंगुली से मेरी गाण्ड और चोद दे, बड़ा मजा आ रहा है।’ मैंने मीना को और उकसाया। पर मेरी हालत झड़ने जैसी होने लगी। उसकी अंगुली मेरी गाण्ड में तेज मजा दे रही थी और मैं अब उस आनन्द को झेल नहीं पा रहा था। मुझे अचानक लगा कि बस अब पूरा हो गया।
‘राधा, बस मैं आ गया, हाय निकल रहा है… आह्ह्ह !’
‘अंकल, निकाल दो अपना माल, लगाओ जोर !’
‘हाय निकला रे… मीना !’ मैं राधा से लिपट पड़ा। मीना ने मेरा लण्ड उसकी गाण्ड में से निकाल लिया और अपने हाथ से मुठ मारने लगी। मेरी पिचकारी छूट पड़ी और मीना ने लण्ड को अपने मुँह में ले लिया। मेरा वीर्य झटके खा खा कर निकल रहा था। मीना उसे पीती जा रही थी। अन्त में मेरा लण्ड पूरा निचोड़ कर साफ़ कर लिया और मेरे लण्ड को लटकता छोड़ दिया। राधा चुद कर मस्त हो गई थी। हमारी चुदाई पूरी हो चुकी थी।
राधा धीरे से उठी और अपने कपड़े पहनने लगी। मैंने भी अपने कपड़े पहन लिये। मीना चाय बना लाई थी। आराम से हम सभी ने चाय नाश्ता किया। मैंने अपनी जेब से सौ रुपए राधा को दिये और पचास रुपए मीना को दिये। राधा खुश हो गई, मीना को बिना चुदे ही पैसे मिल गये थे।
‘अंकल राधा को सौ क्यों दिये?’
‘उसकी मस्त भरी जवानी के, मस्ती भरी चूत के, फिर गाण्ड भी तो मरवाई थी ना !’
‘और मुझे पचास क्यो दिये, आपने मुझे तो चोद ही नहीं है?’
‘तुमने आज मेरी गाण्ड में अंगुली डाल कर जो मस्त मजा दिया था, ये उसके हैं !’
राधा आज खुश थी, उसे चुदाना आ गया था साथ में पैसे भी मिल गये थे।
‘अंकल कल भी आऊँ मैं, मुझे सौ रुपए दोगे?’ राधा ने कुछ अविश्वास से मुझे पूछा।
‘जरूर, पर चुदाने के साथ साथ गाण्ड भी मरवानी होगी सौ रुपए में, आज की तरह !’
‘हाँ, हाँ ! आप कितने भले है अंकल जी !’
राधा ने मुझे चूम लिया। मैंने मीना और राधा के बोबे दबाये और उन्हें कल आने का न्योता दे दिया।
मीना और राधा दोनों खुश हो कर जा रही थी और मुझे मुड़ मुड़ कर हाथ हिला रही थी। Anatrvasna
दोस्तों मेरे नाम सुनील है, मैं एक Hindi Porn Stories प्रोफेशनल एकाउंटेंट हूँ। मैंने अन्तर्वासना पर लगभग सभी कहानियाँ पढ़ी हैं।
मेरे मन में भी विचार उत्पन्न हुआ कि क्यों न मैं भी अपनी कहानी लिखूं कि किस तरह मैंने जीवन में पहली बार सेक्स सम्बन्ध बनाए।
यह बात उन दिनों की है जब मैं 20 वर्ष का था। हमारा घर दो मंजिल का बना हुआ है, जिसमें ऊपर की मंजिल में मैं, मेरे मम्मी-पापा और मेरा छोटा भाई रहते थे और नीचे की मंजिल पर आगे के दो कमरों को गोदाम के रूप में किराये पर दे रखा था और पीछे के दो कमरों में मेरे दूर के रिश्ते के मामा-मामी रहते थे। मेरे पापा और मामा एक ही कंपनी में काम करते थे जिसकी पूरे देश में कई शाखाएँ थी, इस कारण वे लोग ज्यादातर टूर पर ही रहते थे।
मेरी मम्मी एक कुशल गृहणी होने के साथ-साथ एक कुशल समाज-सेविका भी हैं। घर के काम-काज निबटाकर वे सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक समाज-सेवा में व्यस्त रहती हैं, छोटा भाई नेवी में कोस्ट-गार्ड की ट्रेनिंग के लिए विशाखापत्तनम गया हुआ था और में कॉलेज में बी.कॉम. अन्तिम वर्ष की पढ़ाई कर रहा था।
एक दिन सुबह ८ बजे मैं कॉलेज जाने के लिए निकला और बस पकड़ी, आधे रास्ते में याद आया कि लायब्ररी की किताब तो मामी ने पढ़ने के लिए ली थी, आज वापिस करने की आखिरी तारीख है। घर जाकर किताब लेकर वापिस समय पर कॉलेज पहुँच सकता हूँ, यह सोचकर रास्ते में बस छोड़ दी और वापसी की बस पकड़कर घर आ गया।
दहलीज पार करके जैसे ही मामी के कमरे के पास पहुंचा तो मुझे कुछ खुसफ़ुसाने की आवाजें सुनाई दी। मैं ठिठककर रुक गया और ध्यान लगाकर सुनने लगा।
मामी किसी से कह रही थी- अभी तुम परसों ही तो आये थे, इतनी जल्दी कैसे?
किसी आदमी की आवाज सुनाई दी- मेरी जान, आज तो तुम्हारे पिताजी यानि मेरे ताऊजी ने भेजा है ये सामान लेकर, और सच कहूँ ! मेरे मन भी बहुत कर रहा था। कल शाम जब से ताऊजी ने बोला कि श्याम कल ये सामान उर्मिला को दे आना। तब से बस यही मन कर रहा था कि कब सवेरा हो और मैं उड़ कर तुम्हारे पास पहुंचूं और तुम्हारी गुद्देदार चूचियों को मुंह में लेकर चूसूँ और अपनी प्यास बुझाऊँ।
मामी बोली- अभी परसों ही तो चोद कर गए हो, इतनी जल्दी फिर !
श्याम बोला- अरे जालिम ! तेरी चूत है ही इतनी प्यारी ! अगर मेरा बस चले तो मैं तो अपना लंड हर वक्त इसी में डाले पड़ा रहूँ !
मामी और श्याम की बातें सुनकर मैंने अंदाजा लगा लिया था कि घर में कोई न होने सबसे ज्यादा फायदा इन लोगों ने ही उठाया है।
मैं कुछ और सोचता, इससे पहले मामी की आवाज सुनाई दी- सुनो श्याम, आज जरा चूसा-चासी न करके जल्दी करना, जीजी आज जल्दी वापिस घर आएँगी क्योंकि जीजाजी और ये (मामा) टूर से आज वापिस आने वाले हैं।
श्याम बोला- मेरी रानी तुम हुक्म तो करो, तुम जैसे चाहोगी वैसे ही चुदाई का कार्यक्रम बना दिया जायेगा।
मैंने मन में ठान ली कि आज तो ब्लू फिल्म का लाइव टेलीकास्ट देख कर ही मानूंगा। मैं बिना कोई आहट किये बगल वाली खिड़की के पास चला गया, वह थोड़ी सी खुली हुई थी, शायद उन लोगो को इस बात का एहसास भी नहीं होगा कि कोई भी घर पर आ सकता है, उस जगह से अन्दर का सब साफ़ दिखाई पड़ रहा था।
मामी काले रंग के ब्लाउज पेटीकोट में थी, सिर पर तौलिया लपेटा हुआ शायद अभी नहाकर आई थी, तभी यह श्याम आ गया होगा। श्याम खड़े-खड़े ही दोनों हाथों से मामी की चूचियों से खेल रहा था।
धीरे-धीरे उसने मामी के ब्लाउज के हुक खोलकर उसे शरीर से अलग कर दिया, मामी अन्दर ब्रा भी काले रंग की पहन रखी थी उसने उसे भी उतार दिया।
इस बीच वह मामी के शरीर को चूमता भी जा रहा था। फिर उसने पेटीकोट भी उतार दिया, मामी उसके सामने बिलकुल निर्वस्त्र खड़ी थी।
मामी का मांसल शरीर ३८-२६-३८ का था। श्याम ने उन्हें पकड़कर धीरे से पलंग पर लिटाया और फ़टाफ़ट से अपने सारे कपड़े उतार दिए। फिर उसने मामी की टांगों को चौड़ा किया, टाँगें चौड़ी होते ही उसके मुंह से निकला, “क्या बात है जानेमन ! आज तो तुमने बड़ी सफाई कर रखी है? परसों तो यहाँ पर जंगल उगा हुआ था।
मामी बोली- आज ये आने वाले है न इसीलिए अभी-अभी साफ़ करके आई हूँ, कर कुछ नहीं पाते पर सफाई पूरी चाहिए।
श्याम बोला- कोई बात नहीं मेरी जान ! हम तो है न तुम्हारी सेवा में ! अभी तुम्हारी खुजली मिटाते हैं !
कहते हुए अपना मुंह चूत पर ले गया और जीभ से मामी की चूत की फांको का रस चूसने लगा। इस चुसाई से मामी मस्त होने लगी और कमर को धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करने लगी।
श्याम उठा और अपने अध-खड़े लंड को मामी की चूत पर घिसने लगा जिससे उसका लंड एकदम से टाइट हो कर खड़ा हो गया। उसने जल्दी से उसे चूत के मुहाने पर लगा धक्का मारा। एक ही झटके में पूरा का पूरा लंड मामी की चूत में समां गया।
मामी ने हलकी सी सित्कारी भरी, धीरे-धीरे वो भी श्याम के धक्कों का जवाब धक्कों से देने लगी।
15-20 धक्कों के बाद ही श्याम बोला- मेरी रानी, अब मैं झड़ने वाला हूँ, संभालो !
मामी बोली- आजा मेरे राजा ! एक बूँद भी बाहर नहीं निकलने दूँगी !
इतने में श्याम ने आखरी झटका मारा और पस्त होकर मामी के ऊपर ही लेट गया। फिल्म की समाप्ति होते-होते मेरा हथियार भी पैन्ट में तन कर खड़ा हो गया था। मन तो कर रहा था कि अभी अन्दर जाऊँ और श्याम को हटाकर मैं भी जुट जाऊं पर मैंने वहां से निकल लेने में ही भलाई समझी।
घर से निकल कर कॉलेज गया पर वहाँ पर मन नहीं लगा। आँखों के सामने वही सीन घूम रहा था। अंत में मैं घर वापिस आया, देखा कि मामी ने कपड़े बदल लिए थे। अब वो हरे रंग की साड़ी पहने हुए थी, मम्मी भी घर में ही थी।
मैं चुपचाप ऊपर चढ़ा और अपने कमरे की ओर चल दिया। मम्मी रसोई में कुछ बना रही थी, एकदम पलटी तो मुझे देखकर बोली- अरे संजू क्या हुआ ? तू जल्दी कैसे आ गया, अभी तो २ ही बजे हैं?
मैं बोला- कुछ नहीं मम्मी ! एक तो प्रोफ़ेसर नहीं आये थे और मुझे भी कुछ कमजोरी सी महसूस हो रही थी। रात को देर तक पढ़ा था ना, मैं तेरे लिए चाय बनाकर लाती हूँ।
चाय पीकर मैं लेट गया, आँखे बंद करते ही फिर वही सीन मेरी आँखों के आगे तैरने लगे। आँख लगने ही जा रही थी कि मम्मी की आवाज सुनाई दी- उर्मिला !(मेरी मम्मी मामा से काफी बढ़ी थी इसी कारण वो मामी को उनके नाम से ही बुलाती थी) मैं जरा बाहर जा रही हूँ, ५ बजे तक आ जाउंगी, संजू की तबियत ठीक नहीं है तुम जरा उसके पास ही बैठना।
मामी बोली- अच्छा जीजी।
यह सब सुनते ही मेरे मन का शैतान जग उठा। यही मौका है मामी को सेट करने का।
मैंने फ़ौरन कपडे उतारे, सिर्फ लुंगी बनियान में पलंग पर लेट गया। थोड़ी देर में मामी आ गई, बोली- क्या हुआ संजू?
मैं बोला- कुछ नहीं मामी, सिर बड़ा दर्द कर रहा है और शरीर भी टूट रहा है।
मामी सिरहाने पर बैठती हुई बोली- आ मैं तेरा सिर दबा देती हूँ।
कहते हुए उन्होंने मेरा सिर अपनी गोदी में रख लिया और सहराने लगी कुछ देर बाद ही मैंने धीरे से एक हाथ उठाकर उनकी गर्दन पर रख दिया। मेरी कोहनी उनकी चूचियों से टकरा रही थी, उन्होंने कुछ नहीं कहा, मेरी हिम्मत बढ़ी, मैंने हाथ धीरे-धीरे सरका कर उनकी चूचियों पर टिका दिया और अंदाजे से उनके निप्पल को मसल दिया।
वो शायद सोते से जागी, मेरा हाथ हटाते हुए बोली- क्या कर रहे हो संजू? बहुत बदतमीज हो गए हो आने दो तुम्हारी मम्मी को उन्हें बताउंगी।
एक बार तो मैं डर गया, लेकिन एकदम से हिम्मत करके बोला- तुम क्या बताओगी आज तो मैं ही तुम्हारे और श्याम के बीच में पकने वाली खिचड़ी का पर्दाफाश कर दूंगा, मैंने सुबह सब देखा और सुना थ।
यह सुनकर मामी के होश उड़ गए, वो धम से पलंग पर बैठ गई। मैंने अपना तीर निशाने पर लगता देखा, पास जाकर बोला- यदि तुम मुझे खुश कर दोगी तो मैं मम्मी को या किसी और को कुछ नहीं बताऊंगा!
मामी मेरी बात पता नहीं सुन रही थी या नहीं, वो तो एकदम से निर्जीव होकर बैठी हुई थी, मेरे सिर पर तो शैतान सवार था, मैंने उस बात को मौन स्वीकृति समझ उनकी चुचियों से खेलना शुरू कर दिया, ब्लाउज के हुक खोलकर ब्रा ऊपर उठाकर मैंने चूचियों को चूसना शुरू कर दिया। फिर धीरे से मैंने उनके शरीर से सारे कपड़े उतार दिए, उन्होंने कपड़े उतारने में मेरा साथ साथ दिया एक चाबी वाली गुडिया की तरह।
मैंने उन्हें सीधा लिटा दिया और श्याम की तरह उनकी चूत चाटने लगा। शुरू में तो बड़ा अजीब लगा पर धीरे-धीरे स्वाद आने लगा। इस बीच मेरा लंड तनकर खड़ा हो गया था। मैंने लंड को उनकी चूत पर टिकाया और धक्का मार दिया।
मेरा लंड श्याम की अपेक्षा ज्यादा मोटा और लम्बा था, एक बार में आधा ही जा पाया। मामी सीत्कार उठी पर चुपचाप लेटी रही। मैं अपनी धुन में धक्के लगाता रहा, पहली बार सेक्स का मजा लूट रहा था, वो भी एकतरफा।
20-25 धक्को में ही मैं झड़ गया और लंड को अन्दर डाले हुए ही लेटा रहा। पांच मिनट बाद उठा और बाथरूम में जाकर सफाई करने लगा। बाहर आया तो देखा मामी चुपचाप कपड़े पहन रही थी, मैं पलंग पर जाकर लेट गया। मामी कपड़े पहन कर वहीं पलंग पर बैठ गई। मैं काफी थक चुका था मेरी आँख लग गई।
शाम को ६ बजे मेरी आँख खुली, मम्मी आ चुकी थी मुझे देख कर बोली- अब कैसी तबियत है?
मैं बोला- अब ठीक है !
रात को ९ बजे पापा और मामा टूर से लौट आये। अगले दिन रविवार था, सब घर पर ही थे। मैं नीचे गया तो मामा बाहर बैठे अखबार पढ़ रहे थे और मामी रसोई में कुछ बना रही थी।
आज वो बहुत खुश दिखाई दे रही थी। मैंने पास जाकर धीरे से उनकी चूचियों को मसल दिया, वो कुछ नहीं बोली, बस चुपचाप अपने काम में लगी रही। उस दिन के बाद मुझे जब मौका मिलता- मैं कभी उनकी चूचियों को, कभी गालों को मसल देता था पर वो कुछ भी नहीं कहती थी।
हफ्ते भर बाद शनिवार को सुबह मम्मी-पापा को एटा एक शादी में जाना था, मामा एक दिन पहले ही टूर पर चले गए थे। मैं कॉलेज गया और दोपहर को 2 बजे घर लौटा। घर आकर देखा मामी ने फिरोजी रंग की साड़ी पहन रखी थी, हल्का सा मेक-अप भी कर रखा था, मुझे देखते ही बोली- आ गए संजू ! चलो हाथ मुंह धोलो, साथ बैठकर खाना खायेंगे।
मैं उनके बदले हुए रूप को देख कर चकित रह गया क्योंकि जबसे मैंने उनकी चुदाई की थी तबसे वो मुझसे बात नहीं करती थी। मैं फ्रेश हो कर नीचे आया तो देखा कि खाना भी मेरी पसंद का था।
हमने खाना शुरू किया, मामी बोली- देखो संजू बुरा मत मानना ! तुम्हारे मामा मुझे तृप्त नहीं कर पाते इसीलिए मैं श्याम से चुदाई करवाती थी पर उस दिन चाहे तुमने मुझे जबरदस्ती चोदा पर मुझे तुम्हारा लम्बा और मोटा लंड बहुत पसंद आया और उस दिन के बाद तुम जब मर्जी मुझे छेड़कर चले जाते थे, मैं तड़फ कर रह जाती थी, अब दो दिन तक मैं तुम्हारी हूँ तुम चाहे जैसे मर्जी मुझे चोद सकते हो !
इस बीच खाना पूरा हो चुका, मैं उठते हुए बोला- फिर देर किस बात की? चलो एक शिफ्ट तो अभी लगा लेते हैं !
मामी बोली ठीक है, तुम बाहर वाले दरवाजे का कुंडा लगा कर आओ, मैं भी ये साफ़ करके आती हूँ।
मैं फ़टाफ़ट कुंडा लगा कर कमरे में आ गया, इतने में मामी भी आ गई। देखते ही मैंने उनको अपनी बाँहों में जकड़ लिया, वो भी मुझसे लिपट गई। धीरे-धीरे मैंने उनके और उन्होंने मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिए। उसके बाद मैं लेकर पलंग पर आ गया, हम लोग 69 की अवस्था में लेट गए।
मैं उनकी चूत को खीर की कटोरी समझ कर चाटने लगा। उन्होंने मेरे लंड को लॉलीपोप की तरह चूसना शुरू कर दिया। मामी मेरे लंड को चूसती जा रही थी और कहती जा रही थी “चूसो जोर से चूसो, खा जाओ”
काफी देर तक यही चलता रहा। मामी की चूत ने पानी छोड़ दिया जिसे मैं चाट गया। इतने में मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ जब तक कुछ कहता मेरे लंड ने पानी छोड़ दिया। मामी सारे रस को शहद समझ कर चाट गई।
उसके बाद हमने दो दिनों तक 8 से 10 बार चुदाई की। उसके बाद भी जब मौका लगता हम लोग अपनी प्यास बुझा लेते थे।
दोस्तों यह मेरी पहली कहानी है और जो असलियत है वो इस कहानी में लिखा है।
आपको यह कहानी कैसी लगी? जरूर बताएँ। Hindi Porn Stories
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