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Antarvasna

अंश और अभिनव दोस्त हैं. अंश अपनी बहन उषा के साथ Antarvasnaअभिनव के गाँव गया है वहाँ अभिनव की छोटी बहन सपना उन से मिलती है अभिनव सुमन नाम की नौकरानी को अक्सर चोदता आया है अंश भी सुमन को चोदना चाहता है दीवाली के दिन होने से अभिनव की माताज़ी ने महेमान घर की सफ़ाई का काम निकाला है महेमान घर गाँव से बाहर है उषा और सपनासुमन के साथ वहाँ गयी है. अभिनव और अंश महेमान घर जा पहुँचते हें और उषा और सपना को चाय नाश्ता लेने बड़े घर भेज देते हें.सुमन अकेली रह जाती है दोनों दोस्त एक साथसुमन को चोदते हें.
चुदाई चालू है आगे पढ़िए:

अभिनव सुमन के सर के पास बैठ गया और अपना लंड उस के मुँह में धर दिया.सुमन को अपना मुँह पूरा खोलना पड़ा अभिनव का मोटा लंड अंदर लेने के लिए इधर मैंने उसकी जांघें फैला के लंड भोस पर टिका दिया और एक धक्के से सारा का सारा लंड चूत में घुसेड़ दिया. उधर अपने हिप्स हिला कर अभिनव सुमन का मुँह चोदने लगा तो मैं धीरे धक्के से उस की टाइट चूत चोदने लगा.सुमन के मुँह से उन न न न न आवाज़ आने लगी और उसके चुतड़ घूमने लगे.

थोड़ी ही देर में उसकी चूत ने फटाके मारने शुरू किया. मैंने लंड को पूरा बाहर निकल कर क्लाइटोरिस पर रगडा. अचानक सुमन का बदन अकड़ गया और रोएँ खड़े हो गये मैंने झट से लंड चूत में डाला और तेज़ रफ़्तार से चोदने लगा.सुमन की चूत ने सिकोड़ कर मेरा लंड निचोड़ लिया. जब उस का ओर्गेज़्म शांत हुआ तब हमने लंड निकाले. दोनों लंड कड़े ही थे क्योंकि हममें से कोई झड़ा नहीं था.
पद्मा बोली : हाय दईया, ऐसी चुदाई तो कभी नहीं करवाई.

हम दोनों ने कन्डोम लगाए. मैं पलंग पर लेट गया. अभिनव ने सुमन को मेरी जांघों पर बिठाया. मैंने लंड सीधा पकड़ रखा.सुमन ने लंड के मत्थे पर चूत टिकाई. जैसे उसने नितंब गिराए मेरा लंड स र र र करता चूत में घुसने लगा. जब मोन्स से मोन्स टकराई तब मूल तक का लंड चूत में पैठ गया था.
अभिनव ने कहा: अंश, अभी ज़रा रुकना, धक्के मत देना.सुमन, तू आगे झुक और गांड उधर कर.
मैं देख नहीं पाता था लेकिनसुमन के कराहने की आवाज़ से समझ गया कि अभिनव उसकी गांड में लंड डाल रहा था. जब पूरा लंड डाला गया तब अभिनवसुमन की पीठ पर झुका और बोला: अंश, मैं गांड मार रहा हूँ औरसुमन भी हिप्स हिलाएगी वैसे ही तेरा लंड चूत में आता जाता रहेगा तुझे धक्के लगाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी.

अभिनव उपर से सुमन की गांड मारने लगा. उस के धक्के सेसुमन के नितंब आगे पीछे हिलते थे. बिना कुछ किए मेरा लंड चूत में आता जाता था. जब सुमन गांड सिकॉड़ती थी तब साथ साथ चूत भी सिकुड़ती थी और मेरा लंड दब जाता था. अभिनव ने शुरुआत धीरे धक्के से की थी लेकिनसुमन की उत्तेजना तेज़ी से बढ़ने लगी अभिनव ने धक्के की रफ़्तार बढ़ाई पीछे से हाथ डाल कर अभिनव नेसुमन के स्तन थाम लिए थे. मैं उसका मुँह चूम रहा था. मैंने एक हाथ हमारे बदन बीच से भोस पर लगा दिया.सुमन की सारी भोस गीली हो गयी थी. जैसे मैंने उसकी कड़ी क्लाइटोरिस को छुआ वैसे उसको ओर्गाज़्म हो गया. हमने धक्के लगाने रोक लिए.

ओर्गाज़्म के फटाके शांत हुए तब अभिनव ने कहा :सुमन, प्यारी, तू कहे तो हम दोनों जगह बदल कर चुदाई करें?सुमन मुँह से बोली नहीं, छूट सिकोड़ कर जवाब दिया.

हमने जगह की अदला बदली की. गांड मारने का ये मेरा पहला अनुभव था. चूत के बजाय गांड इतनी टाइट होती है वो मैंने पहली बार जाना.

गांड में लंड डालने की तकनीक अलग है जो मुझे अभिनव ने सिखाई. जब मेरा लंडसुमन की गांड में पूरा बैठ गया तब अभिनव ने मुझे फिर चित लेटाया. अपनी गांड में मेरा लंड लिएसुमन ऊपर आ गयी उसने जांघे चौड़ी कर दी. अभिनव उपर चढ़ गया. एक ही धक्के से उसने अपना लंड चूत में घुसेड़ दिया. पाँच सात धक्के मार कर वो रुक गया और बोला : अंश, अब तेरी बारी. तू धक्के लगाएगा तब मैं स्थिर रहूँगा.

मैंने धीरे धक्के से गांड मारनी शुरू की. दोस्तो, चूत और गांड में बहुत फ़र्क है उसे चोदने का आनन्द भी अलग अलग है हाथ की मुट्ठी में पकड़ा हो वैसेसुमन की गांड ने मेरा लंड पकड़ा था, मानो कि वो गांड से मुठ मार रही थी. जब वो चूत सिकॉड़ती थी तब उसकी गांड भी सिकुड़ जाती थी और लंड और ज़ोर से भिंच जाता था. लंड में इतनी गुदगुदी होती थी कि वहाँ से निकल कर सारे बदन में फैल जाती थी.

थोड़ी देर बाद मैंने और अभिनव ने एक साथ धक्के लगाने शुरू किए. मैं अब पूरी ताक़त सेसुमन की गांड मारने लगा. अभिनव भी ऐसे ही उसकी चूत मार ने लगा. दूसरी दस मिनट तक चुदाई चली तबसुमन बोली : मैं तीन बार झड़ चुकी हूँ अब तो बस कीजिए.

हम दोनों ने तेज़ी से धक्के लगाए और एक साथ झड़े.सुमन भी एक बार और झड़ी.. लंड निकाल कर हम उतरे.

थकी हुईसुमन थोड़ी देर पड़ी रही, बाद में उठ कर बाथरूम में चली गयी हमने भी सफ़ाई की और कपड़े पहन लिया. आगोश में ले कर अभिनव नेसुमन को किस किया और पूछा : तुझे लगा तो नहीं न? मजा आया?
वो बोली : बहुत मजा आया
अभिनव : कैसा लगा मेरे दोस्त का लंड? फिर से चुदवायेगी?
धत्त कह केसुमन ने हलकी चपत लगाई और अपने आपको छुड़ा कर भाग गयी

पद्मा के जाने के बाद हम अगले कमरे में गये वहाँ सपना और उषा चाय नाश्ता साथ हमारी राह देख रही थी. हमें देख वो खिल खिल हँसने लगी अभिनव ने पूछा : कब की आई हो तुम? और ऐसे हँस क्यों रही हो?
एक दूजे की ओर देख कर वो दोनों फिर से हँसने लगी
मैं: चाय लाई हो या नहीं?
जवाब में उषा ने चाय नाश्ता लगाया. हम चारों ने नाश्ता किया. बाद में बातें चली.

उषा : अभिनव भैया, सपना कहती है कि आप दोनों को दूध पीना चाहिए.
अभिनव :क्यूं भला?
अपने मुँह पर हाथ रख कर सपना हँसती हुई बोली: इतना जो दूध अभी आपने निकाल दिया वो दूध पीने से नया बन जाएगा.
उषा : सपना, भैया ने जो निकाला वो दूध कहाँ था? क्रीम था क्रीम, दूध इतना खट्टा कहाँ होता है?
थोड़ी देर अभिनव सोच में पड़ गया, बोला: कितना क्रीम निकाला ये तुम्हें कैसे मालूम?
उन दोनों की हँसी बढ़ गयी.
अभिनव: समझा, अब मैं समझा. तुम दोनों ने हमारी चुदाई देख ली है सही ना? सपना?

सपना शर्म से हमसे नज़र नहीं मिला सकती थी. बोले बिना उस ने हाँ कही.
अभिनव: अंश, इन दोनों ने हमारी चुदाई देख ली है क्या करेंगे उनका?
सपना : दूध ले आ?
सपना ज़ोर से हँस पड़ी.

अभिनव : उषा, दूध की ज़रूरत नहीं है जहाँ क्रीम बनता है वो फेक्टरी ओवर टाइम काम करती है अभी काफ़ी क्रीम पड़ा है चाहिए तुझे?
उषा ने अपना चेहरा ढक दिया. आश्चर्य से सपना की आँखें फट गयी वो बोली : मैंने कहा था ना? अभिनव भैया को मत उकसाना? सुन लिया जवाब?
मैं: मेरे पास भी काफ़ी क्रीम है किस को चाहिए?
लड़कियों के मुँह से सेक्स की बातें सुन कर हमारे लौड़े खड़े होने लगे थे. उन दोनों की नज़रें बार बार उस तरफ़ जाती थी. दोनों के चेहरे लाल लाल हो गये थे.
मैं बनावटी मुँह लंबा कर के बोला : अभिनव ये तो बुरा हुआ. उषा तो कँवारी नहीं है उस के लिए चुदाई नयी चीज़ नहीं है लेकिन सपना?
अब की बारी थी अभिनव की खड़ खड़ हँसने की. वो बोला: सपना, तू कँवारी है?
सपना नज़र नीची कर बोली: ऐसे भी क्या पूछ रहे हैं भैया? आप जानते तो हैं.

ज़ाहिर हुआ कि सपना को भी किसी ने चोदा था. मैं मन ही मन ख़ुश हुआ कि चलो इस लड़की को चोदना आसान होगा. मैंने प्रार्थना की हे! भगवान एक मौक़ा दे दे मुझे इस कुड़ी को चोदने का.
अभिनव : उषा, ये बता कि तुझे किसने चोदा पहली बार?
सपना ने मेरी ओर इशारा कर दिया. अभिनव बोला: अच्छा तो ये है बहन चोद. कहाँ और कब?
उषा: मंजुला भाभी के घर उसी वक़्त.

अभिनव: उसी वक़्त? वाह रे मेरे शेर, तूने दो दो चूत मार दी एक साथ. लेकिन बदमाश, तू तो कहता था कि तूने अकेली भाभी को चोदा था.
मैं: मैं क्या करता? मुझे भाभी को चोदते देख उषा गर्म हो गयी और…
अभिनव: …और तूने उसे भी चोद लिया. शाबाश.
मैं: बात ये है कि… बताऊँ उषा?
उषा ने हाँ कहा.

मैं: बात ये है कि बचपन से ही उषा जल्दी गर्म हो जाती है मैंने तो तब जाना जब एक दिन…

एक दिन उषा के घर कुछ मेहमान आए तांगा लिए जैसे तांगा रुका, घोड़े ने अपना दो फुट लंबा लंड निकाला और पेशाब किया. अंश और उषा वहाँ मौजूद थे. बारह साल की उषा घोड़े का लंड देख उत्तेजित होने लगी उसकी पीकी गीली हो गयी वो अपनी पीकी खुजलाने लगी. रात को जब माताज़ी और पिताजी सो गये तब वो अंश के पास जा कर बोली : भैया, मेरी पीकी तो देखो, कितनी सूज गयी है और गीली भी हो गयी है.
अंश ने उस दिन पहली बार अपनी बहन की भोस देखी. उषा के बदन में जवानी खिल रही थी. सीने पर बड़े नींबू की साइज़ के स्तन उभर आए थे. भोस पर काले झांट उग निकले थे. अंश को मालूम था क्या करना. उषा को लेटा कर उसने उगालियों से भोस सहलाई और क्लाइटोरिस मसली. उषा बोली : भैया बहुत गुदगुदी होती है दो पाँच मिनट में उषा को ओर्गेज़्म हो गया. इसके बाद बैठकर अंश ने उसे समझाया कि लंड क्या है चूत क्या है चुदाई क्या है वग़ैरह.
मैं : याद है उषा तेरा वो पहला ओर्गेज़्म?

अभिनव : तब से ओर्गेज़्म का मजा लेती हो तुम?
उषा : शुरू शुरू में इतने ज़ोरदार नहीं होते थे.
अभिनव : अब कैसे होते हैं?
उषा : मैं क्या कहूँ? आप ही देख लीजिए न.

अभिनव ख़ुश हो गया. उसके लंड ने पाजामा का तंबू बना दिया.
अभिनव : सपना तो लंबे अरसे तक बेख़बर रही थी, क्यूं सपना?
मैं : आख़िर किस ने ज्ञान करवाया?
अभिनव : एक बार ऐसा हुआ कि…
एक बार सपना को साइकिल पर बिठा कर अभिनव कहीं जा रहा था कि रास्ते में एक गधी दौड़ आई. उसके पीछे गधा पड़ा था. जैसी गधी उनके पास आकर खड़ी हो गयी वैसे ही गधा ऊपर चढ़ गया और चोदने लगा. उसका दो फुट का लंड गधी की चूत में आता जाता सपना और अभिनव दोनों देखते रहे. सपना घबरा गयी और बोली : ये क्या कर रहा है? गधी मर जाएगी?
अभिनव ने सपना के कान में कहा : घर जा कर सब समझाऊँगा.

गधे गधी की चुदाई देख कर अभिनव का लंड तो खड़ा हो गया लेकिन सपना पर कोई असर पड़ा नहीं. घर पहुँचे तब घर में कोई था नहीं. अभिनव बहुत एक्साइट हो गया था. सपना की मौजूदगी की परवाह किए बिना वो बाथरूम में गया और मुठ मारने लगा. ताज्जुब हो कर सपना देखती रही. उस ने पहली बार बालिग लंड देखा था, बोली : भैया इतना तेज़ी से घिसते हो तो कहीं लग जाएगा.

अभिनव जवाब देने के मूड में नहीं था. फ़च्छ फ़च्छ करती वीर्य की चार पाँच पिचकारियाँ छोड़ कर वो झड़ा. अभिनव ने उस वक़्त सपना को समझाया कि चुदाई क्या है लोग क्यों करते हैं. सुनकर सपना बोली: चलो ना भैया, हम दोनों चुदाई करें?

अभिनव: न, अभी तू छोटी हो. तेरी चूत सिकुड़ी है तू ज़रा बड़ी हो जाए, तेरी महवारी शुरू हो जाए बाद में तू चुदवा सकेगी, इनसे पहले नहीं.
सपना: ऐसा? लेकिन भैया, जब मैं बड़ी हो जाऊँ तब आप ही मुझे पहली बार चोदना!
अभिनव: ऐसा हुआ भी सही, क्यों सपना?
उषा: अभिनव भैया, पूरी कहानी कही ये. कब, कहाँ, कैसे? आपने हमारी तो सुन ली है अब आपकी सुनाईये.

अभिनव: वक़्त आने पर कहूँगा. फिलहाल मैं देख रहा हूँ कि अंश के बदन में क्रीम का प्रेशर बढ़ गया है उसका कुछ करना पड़ेगा वरना बेचारे की गन फट जाएगी
अभिनव सच कह रहा था. मेरा लंड तन कर लोहे जैसा हो गया था.
मैं: उषा, हमारी चुदाई देख तुझे कुछ नहीं हुआ?
उषा: भैया, कैसी बात करते हैं आप? मैं पत्थर की बनी हूँ क्या?
मैं: तो अब तक तू राह किसकी देख रही है? निमंत्रण चाहिए तुझे? देखती नहीं है अभिनव का…
अभिनव बीच में बोला: अंश, उषा लड़की है बुलाए बिना नहीं आएगी, क्यूं उषा?

अभिनव उठकर उषा के पास गया. उसने बाहें लंबी की, उषा ने उसके हाथ पकड़ लिए खींचकर उषा को उसने खड़ा कर दिया और अपनी बाहों में भर लिया. उन दोनों के मुँह किस में जुट गये.
मैं सोफ़े पर बैठा था. हाथ लंबे करके मैंने सपना को बुला लिया. सपना मेरे पास चली आई और खड़ी हो गई. वो शरमा रही थी. दाँत से उंगली काट रही थी. उसका चेहरा लाल लाल हो गया था. दो तीन बार मुझसे आँख चुरा कर उसने अभिनव और उषा की ओर देखा. उन दोनों को चुंबन में लगे हुए देख सपना ज़्यादा शरमाई. बहुत प्यारी लग रही थी वो. उसने रेशमी चोली, घाघरी और ओढ़नी पहनी थी. चोली छोटी होने से उसकी गोरी गोरी कमर और सपाट पेट का काफ़ी हिस्सा खुला था. मैंने उसे कमर से थाम लिया. उसने अपनी बाहें मेरे गले में डाल दी. मैंने उसे पास खींच लिया. मेरा सिर उसके सीने से दब गया. सिर हिला कर मैंने उसके स्तन टटोला. ऐसे में ओढ़नी का पल्लू थोड़ा खिसक गया. खुले हुए गोरे पेट पर मैंने किस कर दिया. गुदगुदी से वो छटपटाई. उसे पकड़ कर मैं किस करता रहा.

आख़िर मेरे बाल पकड़ कर उसने मेरा सिर हटा दिया. बोली: मुझे बहुत गुदगुदी होती है
मैं: ये तो तेरा पेट है यहाँ (भोस पर हाथ रखते हुए) किस करूँगा तब क्या होगा?
उसने तुरंत मेरा हाथ हटा दिया. एक उंगली मेरे होठों पर रख कर बोली: धत्त, ऐसा नहीं बोलते.

मैंने होंठ खोल उंगली मुँह में ली और चूसने लगा. मेरा दूसरा हाथ कमर पर से उतार कर उसके भरे भरे नितंब पर जा पहुँचा. मैंने कूल्हे सहलाए और दबाए. उसने मेरे मुँह से उंगली निकाल ली और सिर झुकाकर अपने होंठ मेरे होंठ से लगा दिए जांघें चौड़ी कर मैंने उसे मेरी बाई जाँघ पर बिठा दिया. हमारे होंठ किस में जुटे हुए थे. बंद होंठ से ही मैंने उसके कोमल होंठ रगड़े. मुँह खोल मैंने उसके होंठ मेरे होंठ भींच लिए और जीभ से चाटे. फूल की पंखुड़ी जैसे कोमल उसके होंठ मुझे इतने मीठे लगे कि मेरा लंड अकड़ने लगा.
जीभ से मैंने होंठ टटोले तब वो फिर छटपटा गयी.

मैंने कहा : मुँह खोल तो ज़रा.
थोड़ी हिचकिचाहट के बाद उसने मुँह खोला. मेरी जीभ अंदर जाकर चारों ओर घूम चुकी और उसकी जीभ से खेलने लगी. मैंने जीभ लंड जैसी कड़ी बनाई. कड़ी जीभ अंदर बाहर करके मैंने सपना का मुँह चोदा. जब मैंने मेरी जीभ वापस ले ली तब उसने अपनी जीभ से वो सब किया जो मैंने किया था. हम दोनों एक्साइट होने लगे.

उधर अभिनव ने उषा को पलंग की धार पर लेटाया था और ख़ुद ज़मीन पर बैठ उसकी भोस सहला रहा था. भोस के होठ चौड़े करके वो जीभ से क्लाइटोरिस टटोल रहा था. उसकी दो ऊँगलियाँ उषा की चूत में डाली हुई थी जो उस के जी स्पोट का मर्दन कर रही थी. अचानक अभिनव ऊँगलियाँ तेज़ी से अंदर बाहर करके उषा की चूत को चोदने लगा. उषा के कूल्हे हिलने लगे. वो मुँह से सी सी सी आवाज़ करने लगी, अभिनव क्लाइटोरिस चूसता रहा और ऊँगलियों से चूत मारता रहा. किस चालू ही थी कि मेरा हाथ सपना के पेट पर चला गया. ओढनी का पल्लू हटा कर मैंने पेट सहलाया. उसकी बाहें मेरे गले में थी इसलिए दोनों स्तन खुले थे. पेट पर से मेरा हाथ चोली में क़ैद सपना के स्तन पर गया. पहले मैंने हलके स्पर्श से स्तन सहलाया, बाद में दबाया. चोली पतले कपड़े की थी और लो कट भी थी. मेरी ऊँगलियों ने कड़ी निप्पल ढूँढ निकाली. दो ऊँगलियों से टटोलने के बाद मैंने निप्पल चिपटी में ली.

सपना ने मेरी कलाई पकड़ ली और हाथ हटाने का प्रयत्न किया. मुट्ठी में स्तन भर के मैंने हटाने दिया नहीं. उधर फ़्रेंच किस की मस्ती में वो अपना स्तन भूल गयी चिपटी में पकड़ी हुई निप्पल मैंने मसली और खींची. उसकी बाहों की पकड़ ज़्यादा ज़ोरदार हो गयी निप्पल छोड़ मेरी ऊँगलियों स्तन के खुले हिस्से पर घूमने लगी मैंने चोली के अंदर उगली डालने का प्रयत्न किया लेकिन डाल न सका क्योंकि चोली छोटी और टाइट थी. किस करते करते मैंने एक एक कर चोली के सब हुक खोल डाले. चोली हटते ही उसके नंगे स्तन मेरी हथेलियों में क़ैद हो गये. सपना के स्तन इतने बड़े तो नहीं थे जितनेसुमन के थे. लेकिन संपूर्ण गोल और कठोर थे. दबाने से दबे नहीं जाते थे. अनजाने में मुझसे ज़रा ज़ोर से स्तन दब गया. सपना कराह उठी. किस छोड़ कर उसने अपना सिर मेरे कंधों पर रख दिया और बोली: मुझे दर्द होता है
मैंने स्तन सहलाया और कहा: जब तक तेरे स्तन बढ़ते रहेंगे तब तक उसे दबाने से दर्द होता रहेगा. पूरे विकसित हो जाने पर दर्द नहीं होगा.

अब मैंने उसकी ओढनी और चोली निकाल दिए उसने शर्म से आँखें बंद कर दी. उसके प्यारे प्यारे स्तन मैं अच्छी तरह देख सका. क्या स्तन पाए थे उस लड़की ने? इतने ख़ूबसूरत स्तन की मुझे उम्मीद नहीं थी. गोरे गोरे गोल गोल छोटे श्रीफ़ल की साइज़ के उसके स्तन कड़े थे. चिकनी मुलायम चमड़ी के नीचे ख़ून की नीली नसे दिखाई दे रही थी. स्तन की चोटी पर बादामी कलर की दो इंच की एरोला थी. एरोला के मध्य में कि के दाने जैसी कोमल छोटी सी नीपल थी. उस वक़्त एक्साइटमेंट से एरोला उभर आई थी और निप्पल कड़े हो गये थे. मैंने पहले हलके स्पर्श से सारा स्तन सहलाया, बाद में मुट्ठी में लिया. निप्पल को चिपटी में लेकर मसला. सपना के मुँह से आह निकल पड़ी.

स्तन साथ खेलते हुए मैंने सपना का हाथ लंड पर रख दिया. पाजामा के आर पार मेरे तने हुए लंड को छूते ही उसने हाथ हटा लिया.
मैं: पकड़ ले, डरती क्यूं हो? काटेगा नहीं.
उसे हँसी आ गयी मैंने फिर लंड पकड़ाया. इस वक़्त उसने मुट्ठी में लिया और होले से दबाया. लंड ने ठुमका लगाया.
मेरे आश्चर्य की हद न रही जब वो मेरे कान में बोली: इतना बड़ा और मोटा? मुझे मुँह में लेना है ले सकती हूँ?

इसके बाद क्या हुआ? कैसे सपना और उषा की चुदाई हुई? ये जानने के लिये अगला भाग अवश्य पढ़ें…
कहानी का अगला भाग : हम पाँच : बहनों की अदला बदली-2 Antarvasna

यह मेरी पहली सेक्स कहानी मेरी पड़ोसन मिस रेणु के साथ सेक्स की है एक दिन मेरे माता-पिता को दादी जी का फ़ोन आया कि दादा जी को दिल का दौरा पड़ा है और उन्होंने तुरंत गांव जाने का फ़ैसला किया। जबकि मेरी अंतिम परीक्षा थी, इसलिए उन्होंने मुझे हमारी पारिवारिक मित्र श्रीमती रेणु जी के पास भेजने का फ़ैसला किया।क्योंकि वह शहर के एक प्रतिष्ठित स्कूल में शिक्षिका हैं। उन्होंने भौतिकी में डॉक्टरेट की है और वह मेरी पढ़ाई में भी मेरी मदद कर सकती हैं। इसके अलावा वह मुझसे बहुत प्यार करती हैं क्योंकि उनका कोई बच्चा नहीं है। वह बहुत अच्छी सैलरी वाली हैं। माँ ने श्रीमती रेणु को फोन किया और सारी बात बताई और मेरे माता-पिता जल्दी में थे और हवाई अड्डे के लिए निकलते समय उन्होंने मुझे उनके घर पर छोड़ दिया। मैंने घंटी बजाई। श्रीमती रेणु ने दरवाजा खोला और उन्होंने मेरा स्वागत किया। हमने करीब 1 घंटे बात की और वो बहुत खुश लग रही थी। इस बीच मुझे पता चला कि अपने पति की मौत के बाद वो बहुत अकेला महसूस कर रही है। उस दिन वो अपने घर पर मेहमान को देखकर बहुत खुश थी और हमने खाना खाया और आंटी को गुड नाइट कहा क्योंकि मैं अगले दिन की परीक्षा के लिए पढ़ाई करना चाहता था। उन्होंने मुझे अपने बेडरूम के बगल में एक कमरा दिया। मैंने अपना बैग अलमारी में रखा और शॉवर लेकर अपना बॉक्सर पहन लिया। मैंने अपनी किताब करीब 2 घंटे पढ़ी और फिर सो गया। सुबह मैं जल्दी उठ गया और थोड़ा व्यायाम किया और अपनी परीक्षा के लिए तैयार हो गया। आंटी ने मेरे लिए नाश्ता बनाया। परीक्षा के बाद मैं अपने दोस्त के घर चला गया और शाम को घर वापस आया। आंटी मेरा इंतज़ार कर रही थी। जब मैं वापस आया तो उसने दरवाज़ा खोला। उसने लोअर और टी-शर्ट पहनी हुई थी। वह बहुत आकर्षक लग रही थी। मैंने नमस्ते कहा और लिविंग रूम में सोफे की ओर चल दिया। वह मेरा पीछा कर रही थी। “कैसे हो हर्ष। तुम्हारी परीक्षा कैसी रही” उसने पूछा “अच्छी रही आंटी” “परीक्षा के बाद तुम कहाँ थे” उसने पूछा। “मैं अपने दोस्त के घर गया था” मैंने कहा। उसने पूछा “तुमने दोपहर का खाना खाया, हर्ष ? “हाँ मैंने कहा ” यह बहुत बढ़िया है, तो क्या तुम एक कप कॉफी पीना चाहोगे, हर्ष। हाँ आंटी हमने साथ में कॉफी पी और अच्छी बातचीत की। फिर वह रसोई में चली गई और बर्तन धोने लगी। जब मैं पानी का गिलास लेने रसोई में गया तो वह खाना बना रही थी। वह पसीने से लथपथ थी और उसकी टी-शर्ट पसीने से भीगी हुई थी। उसके शरीर की गंध ने मुझे उत्तेजित कर दिया। उसके उभरे हुए स्तन बहुत अच्छी झलक दे रहे थे। लेकिन मैंने अनदेखा किया और एक गिलास लिया और उसमें पानी भरकर पी लिया। लेकिन मैं आंटी के बगल में खड़े होकर उसके शरीर की गंध को सूंघ सकता था जिससे मैं थोड़ा सख्त हो गया। मैं रसोई से बाहर आया और टीवी देखने लगा। फिर आंटी ने मुझे खाने के लिए डाइनिंग टेबल पर बुलाया। हमने खाना खाया और मैंने उनसे शिकायत की कि मेरे कमरे में ए.सी. ठीक से काम नहीं कर रहा है। उसने इसके लिए माफ़ी मांगी और कहा कि उसने कभी उस कमरे का इस्तेमाल नहीं किया क्योंकि वह अकेली रहती है और रात में उसके घर कोई नहीं आता। फिर उसने मुझे अपने बेडरूम में सोने के लिए कहा। लेकिन मैंने मना कर दिया “लेकिन मुझे लगता है कि मेरे कमरे में सोने में कोई बुराई नहीं है” उसने कहा मुझे पता है आंटी, लेकिन मुझे लगता है कि हम दोनों को थोड़ी गोपनीयता की ज़रूरत है। है न” “यह ठीक है हर्ष” उसने कहा। “लेकिन तुम्हें पता है कि जब मैं तुम्हारे घर पर रहती थी तो तुम मेरे साथ कई बार सोए थे। तुम उन दिनों को भूल गए” हाँ मुझे अभी भी आंटी याद है” मैंने जवाब दिया। शायद उन दिनों तुम अपने बॉक्सर में पेशाब करते थे और मुझे भी गीला कर देते थे" वह मुस्कुराई। मुस्कुराते हुए चेहरे के साथ मैंने कहा "तुमने मुझे कुछ परियों की कहानियाँ भी सुनाईं और मुझे अपनी गोद में ऐसे उठाया जैसे कोई प्रेमिका अपने प्रेमी को उठाती है।" वह अपनी हंसी नहीं रोक पाई "तुम्हारा मतलब है कि मैं उन दिनों तुम्हारी प्रेमिका थी" मुझे लगा क्योंकि तुमने मुझे कसकर गले लगाया और प्यार से चूमा।" मैंने जवाब दिया। "ओह तुम छोटे आदमी, तुम बहुत प्यारे हो" उसने कहा ठीक है जवान आदमी अगर तुम मेरे कमरे में सोना चाहते हो तो तुम्हारा स्वागत है। और मेरे कमरे में एक टीवी है अगर तुम चाहो तो हम फिल्म देखेंगे और कुछ बातें करेंगे। चूंकि कल रविवार है इसलिए मैं देर से उठूंगी।" वह अपने बेडरूम की ओर चली गई। बिना सोचे मैं भी उसके पीछे उसके बेडरूम में चला गया। मैंने खुद को उसके बिस्तर पर उसके बगल में बैठा लिया। उसने टीवी चालू कर दिया और हम टीवी देख रहे थे और गपशप कर रहे थे। जैसा कि मैं उसके बगल में बैठा था, मैं उसके शरीर की गंध को सूंघ सकता था। जो मुझे उत्तेजित करता है और मैं थोड़ा उत्तेजित हो गया। कुछ समय बाद हमने एक-दूसरे को शुभ रात्रि कहा। मैं आंटी के बगल में लेटा हुआ था और परेशान था और लगातार स्थिति बदल रहा था। वह गहरी नींद में थी। उसने अपने माथे पर अपना हार्म लगाया और उसकी बगल के बाल मंद रोशनी में दिखाई दे रहे थे। बगल की पसीने की गंध अच्छी थी। मैं पहले से ही कामुक था और इससे उसके साथ सेक्स करने की मेरी इच्छा बढ़ गई। उसकी गहरी गर्दन वाली टी-शर्ट में उसका क्लीवेज भी दिखाई दे रहा था। मैंने अपना हाथ अपने बॉक्सर के अंदर डाला और हस्तमैथुन करने की कोशिश की। (इससे पहले मैंने पोर्न देखने के बाद अपने घर पर भी हस्तमैथुन करने की कोशिश की थी लेकिन यह मेरे लिए बहुत दर्दनाक था इसलिए मैंने उसके बाद कभी हस्तमैथुन नहीं किया लेकिन आज मैं खुद को नियंत्रित नहीं कर सका इसलिए मैं फिर से कोशिश कर रहा था)। लेकिन इस बार मैं फिर से असफल रहा क्योंकि जब मैं अपनी चमड़ी खींचता था तो दर्द होता था। मैं पूरी तरह से परेशान था। मुझे फीमोसिस नामक बीमारी थी, जिसमें लिंग की चमड़ी पीछे नहीं जाती पूरी रात मैं अपनी आंटी के बारे में सोचता रहा और परेशान था। आखिरकार नींद आ गई। अगले दिन जब मैं उठा तो वह रेणु आंटी नाश्ता तैयार कर रही थी। जब मैं लिविंग रूम में आया तो उसने मुझे एक कप कॉफ़ी थमा दी, मेरे लिंग में दर्द हो रहा था और मैं रसोई में बैठा था। क्या तुम ठीक हो हर्ष” आंटी ने पूछा हाँ मैं ठीक हूँ “मुझे लगता है कि तुम रात को अच्छी नींद नहीं ले पाए हो न?” उसने पूछा हम्म…” लेकिन सब ठीक है आंटी” हर्ष, मुझे लगता है कि तुम मुझसे कुछ छिपाने की कोशिश कर रहे हो।” आंटी ने कहा “नहीं आंटी, मैं ऐसा नहीं कर रहा हूँ” मैंने जवाब दिया। “मैंने देखा कि तुम्हारा हाथ लगातार वहाँ जा रहा था” उन्होंने मेरे लिंग की ओर इशारा किया। मैं बस उसे देख रहा था ” और सुबह मैंने देखा कि यह कठोर था और आपके बॉक्सर का तम्बू बना रहा था। उसने कहा। ठीक है आंटी” मैं मैनेज कर सकता हूँ। ठीक है हर्ष‘लेकिन अगर आपको कोई समस्या है तो आप मेरे साथ साझा कर सकते हैं। मैं चुप हो गई टॉम…देखो मैं तुमसे बड़ी हूँ, मैंने तुम्हें बचपन से ही कई बार नंगा देखा है। अगर तुम चाहो तो अपनी समस्या मुझसे साझा कर सकते हो। मैंने वादा किया था कि तुम मुझ पर भरोसा कर सकते हो। ठीक है आंटी, असल में मुझे वहां दर्द हो रहा है। "ओह मेरे छोटे लड़के क्या तुमने इसे चोट पहुंचाई? उसने पूछा। नहीं आंटी।” मैंने जवाब दिया। "वास्तव में ...वास्तव में.." मैं चुप खड़ा रहा। हम्म…हम्म तुम मेरे साथ बात कर सकते हो छोटे लड़के। शर्मिंदा मत हो” उसने जवाब दिया। “आंटी असल में जब मैं हस्तमैथुन करता हूँ तो दर्द होता है” मुझे शर्म आ रही थी और मैंने कहा। ओह..वह चिल्लाई। “तो क्या तुम हस्तमैथुन करने की कोशिश कर रहे हो?” “नहीं..मेरा मतलब है हाँ आंटी” मैंने जवाब दिया। “क्या तुमने कोई गंदी चीज़ देखी है,उसने सवाल किया। नहीं आंटी मैंने कहा तो फिर आप अपने लिंग को क्यों चोट पहुँचाना चाहते हैं” उसने सवाल किया। मैं अवाक रह गया।“ठीक है..किसी अच्छे डॉक्टर को दिखाओ।” उसने कहा। “मैंने दिखाया’ मैंने जवाब दिया “डॉक्टर ने बताया कि यह टाइट फोरस्किन की वजह से है। मुझे बस अपनी त्वचा को पीछे की ओर खींचने की कोशिश करनी है। और जितना मैं ऐसा करूँगा, मुझे राहत मिलेगी” “ठीक है, क्या इससे मदद मिलती है” उसने पूछा नहीं मैंने जवाब दिया. “जब मैं इसे पीछे की ओर खींचता हूँ तो दर्द होता है” वह मेरी तरफ देख रही थी और उसके मन में यह विचार आया कि गूगल पर इसके बारे में पता लगाया जाए.मैं सहमत हो गया और हम कंप्यूटर के सामने बैठ गए और टाइप किया 'लिंग की टाइट चमड़ी' सैकड़ों परिणाम सामने आए, हम बारी-बारी से क्लिक कर रहे थे और अंत में हमने कुछ लोगों की टिप्पणियाँ पढ़ीं जो इससे पीड़ित हैं एक व्यक्ति ने लिखा कि वह पोर्न वीडियो देखता था जिससे उसे सबसे अधिक उत्तेजना मिलती थी और परिणामस्वरूप वह उत्तेजना में दर्द को भूल जाता था। फिर आंटी ने मुझे वही तरीका अपनाने को कहा। उसने मुझे उसके कंप्यूटर पर कुछ पोर्न देखने को कहा। और हस्तमैथुन करने को कहा। मैंने सहमति जताई। वह कमरे से बाहर चली गई और मैंने कुछ पोर्न देखना शुरू कर दिया। मेरा लिंग कठोर हो गया था और मुझे दर्द हो रहा था। कमरे का दरवाज़ा खुला था। जैसे ही मैंने हस्तमैथुन करने की कोशिश की, मुझे दर्द हुआ और मैं रोने लगा। आंटी तुरंत कमरे में आईं और मुझसे पूछा कि क्या हुआ। मेरा हाथ मेरे 6 इंच के सख्त लिंग पर था और आँखें बंद थीं क्योंकि मैं दर्द से रो रहा था। उसने अपना हाथ मेरे बाएँ कंधे पर रखा और पूछा कि क्या मैं ठीक हूँ। मेरी आँखों से आँसू निकल आए। मैंने उसकी तरफ़ देखा। उन्होंने भी मेरी तरफ देखा और सांत्वना देने की कोशिश की और मेरे खड़े लिंग को देखा। वह उसे घूर रही थी। मैं उसे छुपाने की कोशिश कर रहा था। उसने मेरे बालों में हाथ घुमाया और मुझसे पूछा कि क्या तुम्हें कोई आपत्ति नहीं है हर्ष , क्या मैं जांच करूँ? "अरे नहीं मुझे शर्म आ रही है" मैंने कहा तुम छोटे लड़के हो मैंने तुम्हें बचपन से कई बार नग्न देखा है। और हमारी उम्र में भी बहुत अंतर है। मैं तुमसे बड़ी हूँ। इसलिए शर्मीले मत बनो बेबी" उसने कहा। वह मेरे करीब आई और मुझे अपना लिंग दिखाने के लिए कहा। मैंने भी हिचकिचाते हुए वैसा ही किया। उसने मेरा लिंग देखा, यह मेरे हाथ से लगातार रगड़ने से लाल हो गया था। "तुम इसे बहुत रगड़ते हो हर्ष" उसने कहा। "मुझे लगता है कि पोर्न काम नहीं करता।" मैं चुप था। उसने मेरे लिंग को पकड़ा और त्वचा को पीछे खींचने की कोशिश की। उसने देखा कि यह कड़ा है, इसलिए उसने पास की अलमारी से कुछ मालिश ली और मेरे टोपे पर थोड़ी मात्रा में वैसलीन लगाई। उसने मुझे नरम हाथ से अच्छी मालिश की, लेकिन त्वचा टाइट थी। दूसरी ओर कंप्यूटर पर पोर्न वीडियो चल रहा था। मैंने उससे कहा कि यह मुझे दर्द दे रहा है। वह बस मेरे लिंग को देख रही थी। मैंने फिर से उससे कहा कि यह मुझे दर्द दे रहा है, कृपया इसे बंद करो। उसने मेरी तरफ देखा और मुझसे पूछा कि क्या यह पोर्न तुम्हें उत्तेजित करने में अब भी मदद करता है। मैंने कहा हाँ थोड़ा सा। मैंने उससे इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए मेरी मदद करने का अनुरोध किया क्योंकि मैं आँसू में था। वह एक दयालु महिला थी। और मेरे लिंग को देखने के लिए भी कामुक थी क्योंकि उसने पिछले कुछ सालों से सेक्स नहीं किया था। थोड़ी देर की खामोशी के बाद उसने मुझसे फिर से पूछा ” ठीक है हर्ष मुझे बताओ कि तुम्हें सबसे ज्यादा क्या उत्तेजित करता है। ” मैं चुप था। उसने मुझसे फिर से पूछा। मैंने कहा महिला शरीर की गंध। वह आश्चर्यचकित थी और बोली कि इसीलिए तुम रात में बेचैन हो क्योंकि मैं तुम्हारे बगल में सो रही थी और तुम्हें उत्तेजित कर रही थी” वह मुस्कुरा रही थी। “क्या अब तुम उत्तेजित महसूस कर रहे हो क्योंकि अब तुम मेरे शरीर की गंध सूंघ सकते हो। मैंने कहा “हाँ” उसने कहा ठीक है वह इसे बेहतर तरीके से करेगी लेकिन इसके बारे में किसी को मत बताना। मैंने कहा ठीक है। लेकिन तुम क्या करने जा रही हो। उसने कहा। ” ठीक है अगर तुम्हें कुछ और अधिक उत्तेजित करने वाला दिखाया गया तो मुझे लगता है कि तुम अपना सारा दर्द भूल जाओगे। मैंने कहा ठीक है। कृपया जो तुम करना चाहती हो करो। वह पीछे की ओर गई और अपना टॉप उतार दिया और फिर अपनी ब्रा का हुक खोल दिया। उसके दूधिया 34 के उभरे हुए स्तन और बड़े गहरे भूरे रंग के एरोला बहुत सुंदर और कामुक थे। मैं सारा दर्द भूल गया और उसके नज़ारे में पूरी तरह खो गया। उसने उन्हें अपने दोनों हाथों से हिलाया। मैंने कभी किसी नग्न महिला को नहीं देखा था। मैं पूरी तरह से जादुई दुनिया में खो गया था। मैं स्वर्ग में था। मैं पूरी तरह से उत्तेजित हो गया था और सारा दर्द भूल गया था। वह मेरे करीब आई और मेरे लिंग को धीरे से पकड़ लिया। मुझे भी कुछ प्रोत्साहन मिला और मैंने अपना हाथ उसके बाएं स्तन पर रखा और धीरे से दबाया। यह मेरा पहला मौका था जब मैंने स्तनों को छुआ और मैं पूरी तरह से पागल हो गया। वह हंसी और अपने शरीर को थोड़ा मोड़ा, विनम्रता में। उसके स्तन मेरी अपेक्षा से अधिक दृढ़, भरे हुए और बहुत बड़े थे।मुझे बिलकुल भी पता नहीं था कि वो क्या करने जा रही थी। मैं बस उसके खूबसूरत स्तन को देख रहा था और फिर उसने अपने तैलीय हाथ से मेरे लिंग की मालिश की। वो मेरे चेहरे को देख रही थी। मेरी आँखें बंद थी क्योंकि मैं बहुत अच्छा महसूस कर रहा था। मेरे मुँह से एक हल्की सी कराह (आह..) निकली जैसे ही मैंने अपनी आँखें खोली मैंने देखा कि उसका चेहरा मेरे करीब आ गया है और उसने अपने होंठ मेरे ऊपर रख दिए हैं। ये सब चीजें मेरे लिए नई थीं। मैं उसके होठों की गर्माहट महसूस कर सकता था। उसने मेरे होठों को अलग किया और चूसने लगी मैंने भी जवाब दिया। कुछ ही सेकंड में हमारी जीभें आपस में जुड़ गईं। हम एक दूसरे को चूसते हैं। साथ-साथ वो मेरे लिंग को धीरे से रगड़ रही थी। जैसे ही हमारा लिप लॉक टूटा मैंने अपने लिंग को देखा। मेरी चमड़ी अब पीछे की ओर चली गई थी और मेरी ग्रंथि साफ दिखाई दे रही थी। मैं बहुत उत्साहित था। वो झुकी, मुझे गले लगाया और अपना निप्पल मेरे मुँह में रख दिया । मैंने अपना हाथ उसके पायजामे में डाला और उसके चूतड़ दबाये। उसका पायजामा थोड़ा नीचे चला गया। उसने अंदर पैंटी नहीं पहनी थी। वह मेरे दबाने का आनंद ले रही थी और उसकी कराह मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही थी। मैंने उसका पायजामा नीचे खींचा और वह मेरे सामने नंगी थी। उसके जघन बाल छोटे थे। यह मेरा पहला मौका था और मैंने कभी चूत नहीं देखी थी। मैं उसकी चूत देखने के लिए नीचे झुका। वह मेरी प्रतिक्रिया से हैरान थी। क्या हुआ हर्ष, आंटी ने कहा। "कुछ नहीं आंटी, मैंने कभी चूत नहीं देखी" मैंने जवाब दिया। वह मुस्कुराई "ओह मेरे छोटे बेटे, थोड़ी देर रुको मैं वह सब दिखाऊँगी जो एक महिला के पास होता है।" मैं मुस्कुराया उसने अपना पायजामा उतार दिया और अपनी बाईं टांग मेरी कुर्सी के दाहिने आर्मरेस्ट पर रख दी जिससे मुझे उसकी चूत साफ दिखाई दे रही थी। “ठीक है, बेबी चलो बिस्तर पर चलते हैं।” उसने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे अपने बिस्तर पर ले गई। हम दोनों बिस्तर के एक तरफ एक दूसरे के बगल में बैठे थे। एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे। उसने मेरा हाथ छुआ और कहा “क्या तुम तैयार हो, बेबी” “हाँ आंटी” मैंने जवाब दिया। उसने मेरे लिंग को पकड़ा और कुछ सेकंड के लिए उसे ऊपर-नीचे हिलाया फिर वह मेरे सामने आई और अपने पैरों पर बैठ गई और मेरे लिंग को अपने मुँह में ले लिया। उसने मुझे एक अच्छा मुखमैथुन दिया। मैं कुछ ही मिनटों में उसके मुँह में स्खलित हो गया। वह मेरे वीर्य को अपने मुँह पर देखकर दंग रह गई। लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। मैं अब नरम हो गया था लेकिन मेरे बगल में एक नग्न सेक्सी शरीर को देखकर अभी भी उत्तेजित था। उसने एक कपड़े से उसे साफ किया और मुझे कठोर बनाने के लिए फिर से मुखमैथुन दिया। फिर उसने कहा कि अब सावधान रहना और जब तुम वीर्यपात के करीब होगे तो मुझे पहले ही बता देगी। मैं सहमत हो गया। लेकिन उसने मुझे फिर से चेतावनी दी कि अब मैं तुम्हारे लिए कुछ खास कर रही हूँ लेकिन अगर तुम मेरे अंदर वीर्यपात करोगे तो यह हमारे लिए हानिकारक होगा। इसलिए सावधान रहना। मैं उलझन में था कि वह क्या करने जा रही थी। मैं अपनी पीठ के बल लेटा था और उसने अपने दोनों पैर मेरे दोनों तरफ रखे और मेरे लिंग पर बैठ गई। उसने अपने दाहिने हाथ से मेरे लिंग को पकड़ लिया और उसे अपनी योनि की ओर निर्देशित किया। मैंने उसकी योनि की गर्मी महसूस की। मेरा लिंग उसकी योनि के रस की मदद से अंदर सरक गया। यह मेरे लिए एक सनसनीखेज एहसास था। वह लगातार अपनी गति बढ़ाते हुए खुद को ऊपर-नीचे कर रही थी। कमरा उसके नितंबों और मेरी जांघों की तालियों से घिरा हुआ था। वह आह्ह्ह आह्ह्ह कर रही थी। कुछ मिनटों के बाद मैं वीर्यपात के करीब था और मैंने उसे बताया लेकिन उसने परवाह नहीं की और मैं उसके अंदर वीर्यपात कर दिया। तो इस तरह मेरी फाइमोसिस की बीमारी को मिस रेणु ने दूर किया
सेक्सी पड़ोसन आंटी और उनकी ननद की मस्त चुदाई- antarvasna0

antarvasna sotries दोस्तो, मैं जयपुर से 18 वर्षीय एक नई जवानी से झूमता हुआ मस्त लौंडा हूँ. अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज साईट का एक नियमित पाठक हूँ और मुझे हिंदी में देसी चुदाई की कहानी पढ़ना बहुत पसंद हैं.

यह घटना मेरे पड़ोस में रहने वाली एक आंटी और मेरे बीच की चुदाई की है. शुरूआत मैं मुझे उनको देखना भी पसंद नहीं था, पर जब से लंड ने अंगड़ाई लेना शुरू की, लड़कियों भाभियों और आंटियों के उठे हुए मम्मे और गांड ने मुझे आकर्षित करना शुरू कर दिया. तभी से मुझे आंटी कयामत दिखने लगीं, उनका मदमस्त फिगर मेरी समझ में आने लगा.

आंटी का लड़का मेरे छोटे भाई का दोस्त था, जिसको पढ़ाने के लिए आंटी ने मुझसे कहा और इसी के चलते मेरा उनके घर आना जाना शुरू हो गया.
धीरे धीरे आंटी और मैं आपस में खुलते चले गए. वयस्कों जैसे हंसी मजाक होने लगा और अंगों को छेड़ने की मस्ती भी शुरू हो गई.

कभी कभी मैं आंटी के पीछे भी हाथ रख देता था. उनके सामने अपना लंड खुजा लेता था. धीरे धीरे सेक्स की बात भी होनी शुरू हो गई. मैं मौका देख कर उनके मम्मों में हाथ डाल देता था या फिर कभी गांड पर हाथ फेर देता था.

फिर एक मौका ऐसा आया, जब मैंने आंटी को झूठ बोल दिया कि मेरी 4 गर्ल फ्रेंड्स हैं जो कि मेरे साथ सेक्स करती हैं.
वो मेरी बात को सच मान गईं.
फिर मुझको पता चला कि उनकी शादी के इतने साल हो गए हैं और उनके पति उनके साथ कभी कभार ही सम्भोग किया है. पिछले काफी समय से तो उन्होंने चुदाई की ही नहीं!
मैं बोला- ये तो बड़ा गम्भीर मामला है आंटी.
उन्होंने बोला- हाँ मैं तो सारी कोशिश करती थी, उनका लंड जब घुसता था.. तो अच्छा लगता था मगर क्या करूँ वो अब चुदाई का मजा ही नहीं लेना चाहते हैं.
मैंने उनको लंड और चुदाई की बात बोलते सुना तो मैं समझ गया कि आंटी की चुत चुदाई के लिए फड़क रही है.

मैं आंटी से बोला- मैं आपकी बिस्तर में कुछ हेल्प करूँ?
वो हंस पड़ीं और मेरी बात को टाल गई.

फिर मुझे पता लगा कि आंटी का कोई बॉयफ्रेंड है, उससे आंटी फोन पर बात करती हैं. शायद आंटी उस से चुदती होंगी या चुदवाना चाहती होंगी, इस लिए मुझे कुछ कम भाव दे रही थी.

लेकिन इसके बाद से मुझे आंटी को चोदने की और इच्छा होने लगी. अब जब भी मैं उनके घर जाता, उनके बेटे को कह देता था कि मेरे भाई के साथ खेलने जा ताकि हम दोनों को एकांत मिले और मुझे मौक़ा मिले.

वो जब चला जाता तो मैं कपड़ों के ऊपर से ही उनकी गांड पर लंड फेर देता था. वे भी कुछ नहीं कहती थीं. ये सब मुझको बड़ा अच्छा लगता था.

फिर मेरी मम्मी ने सुबह सुबह 10 बजे से 1.30 दोपहर तक के बाहर जाना शुरू किया. इस दौरान आंटी हमारे घर जानबूझ कर आ जाती थीं, कभी फोन करने का बहाना लेकर आती तो कभी यूं ही मुझसे बात करने की कह कर आ जाती थीं.
यह घटना तब की है जब मोबाइल फोन नए नए आये थे और आम आदमी की पहुँच से बाहर थे. लैंड लाइन फोन भी हर घर में नहीं होते थे.

एक बार जब वो आईं, तो मम्मी बाहर गई थीं. उनको मेरे घर के फोन से अपने फोन की कम्प्लेंट करनी थी. मैंने जान बूझ कर दूसरा खराब वाला फोन लगा दिया था.
फिर उन्होंने बोला- मुझ से नहीं लग रहा, तुम मिला के दो.
फोन मिलाने के बहाने से मैं उनसे चिपट गया.
उन्होंने बोला कि ये इधर अच्छा नहीं लग रहा है, तेरी मम्मी आ सकती हैं.. तू मेरे घर आ जा.
मैंने बोला- कुछ नहीं होगा आंटी थोड़ा करते हैं न!

मगर फिर वो मुझे अपने घर आने की कह कर मेरे घर से चली गईं.

कुछ देर बाद मैं उनके घर गया तो उसके घर पर कोई नहीं था और वो चादर सही कर रही थीं. इस वक्त आंटी डॉगी स्टाइल में थीं, मैं पीछे से उनकी गांड से लग गया.
उन्होंने बोला- जल्दी कर ले, कोई मेहमान आने वाला है.
तो मैंने बोला कि बस आज मुझे एक बूंद टपका लेने दो.

फिर उन्होंने कुछ नहीं कहा.

कपड़ों को ऊपर से करके ही मैं उनके साथ सेक्स कर रहा था. कुछ देर चुत चोदने के कल्पना में मेरी बूंदें टपक गई.

उन्होंने बोला- हो गया तेरा काम? अब खुश हो गया?
मैं कुछ नहीं बोला और चला आया.

फिर वो एक बार फोन करने आईं. मैंने उनको गर्म करते हुए बोला कि आप कैजुअल पजामा में अच्छी लगती हो.
वो ब्लैक कलर का पजामा पहन कर आई थीं. उन्होंने मुझे आँख मार कर कुछ करने का इशारा करते हुए फोन उठा लिया.

मैंने आंटी के पजामा के अन्दर हाथ डाल कर उनकी गांड पर हाथ लगाया और चूतड़ों को सहलाने लगा. आंटी ने अपने पैर और खोल दिए तो मैंने आंटी की चूत में उंगली फेर दी.

शायद वो अपने ब्वॉयफ्रेंड से बात कर रही थीं. उन्होंने चुत में उंगली पाकर भी कुछ नहीं बोला. लेकिन मेरी हरकतों से उन्हें कुछ होने लगा.

जब मैंने उंगली चूत के अन्दर घुसेड़ी और उंगली से आंटी की चुत को चोदा तो चुत ने पानी छोड़ दिया. फिर मैंने उंगली बाहर निकाल कर उनके सामने ही चाट लिया.
वो बोलीं- तुमने अपनी उंगली क्यों चाट ली?
मैंने बोला- कोई बात नहीं, आई लव यू आंटी.

वो मुस्कुरा दीं तो मैं उनको चूमने लगा. आंटी ने मुझे अपनी बांहों में ले लिया. कुछ देर बाद मैंने उनके कपड़े उतारे और ब्रा का हुक खोल दिया. मैंने उनको गोद में लेकर बेड पर पटक दिया मगर मेरी किस्मत ने साथ नहीं दिया, उनका छोटा बेटा आ गया, वो बाहर से दरवाजे खड़का रहा था. हम दोनों ने कपड़े पहन लिए, उन्होंने मुझसे सॉरी बोला.
मैंने उनके होंठ चूम लिए.

फिर कुछ दिन बाद मेरे पेरेंट्स को 5 दिन के लिए आउट ऑफ़ स्टेशन जा पड़ा. मैं उनके साथ नहीं गया था. तो मॉम मेरी देखभाल के लिए आंटी को बोल गई थीं कि ख्याल रखना.
मैं उनके घर नहीं जा सकता था क्योंकि उनकी विवाहिता ननद आई हुई थीं.

पता नहीं आंटी को क्या हुआ… आंटी ने एक रात को खुद से फोन करके कहा कि मैं उनके घर आ जाऊं. मैं घर गया तो उन्होंने ब्लैक कलर का गाउन पहना था. आंटी ने मुझे अपने कमरे में आने को कहा, मैं चला गया.
आंटी कमरे में आईं, मैंने दरवाजा बंद किया. बस हम दोनों लग गए. मैंने उनके कपड़े उतारे और हम दोनों नंगे हो गए थे.

मैंने पहले उनके मम्मों को चूसा, फिर उनको लंड चुसवाया. पूरे रूम में लंड के रस की महक फ़ैल गई. उनकी चूत में से टप टप करके रस निकल रहा था. मैंने उनकी चुत में अपना मुँह लगा दिया और चुत रस को चाटने लगा.

मैंने फिर चुत में लंड घुसाया, वो चीख पड़ीं और मुझ को कस के पकड़ लिया.
आंटी बोलीं- आज तुम सब कर दो..

मैंने आंटी की चुत में पूरा लंड घुसाना शुरू किया. चुत गीली हो गई थी और फच्च फच्च की आवाज आ रही थी. हम चुदाई करते हुए एक दूसरे को किस करने में लगे हुए थे.

आंटी की चुत चुदाई के बाद फिर मैंने जब गांड चोदने के लिए उनको घुमाया तो पता चला कि उसकी ननद खिड़की से हम दोनों को देख रही है और अपने मम्मों को दबा रही है.
एक बार तो मैं डर गया लेकिन फिर जब देखा कि खुद चुदासी हो रही है तो मैंने उसको भी अन्दर बुला लिया. वो अंदर आ गई, आंटी उसे देख कर हड़बड़ा गई. लेकिन जब देखा कि उनकी ननद भी चुदने को आतुर हो रही है तो आंटी ने पहले तो अपनी गांड को बुरी तरह से चुदवाया फिर हमने मिल कर आंटी की ननद की चुत का भी चोदन कर दिया.

मैंने आंटी की ननद की चुत चाटी, वो चिल्ला रही थी, फिर खूब जम के सेक्स किया और माल उसकी चुत में ही छोड़ दिया. आंटी को लगा कि वो कहीं प्रेग्नेंट ना हो जाए. उन्होंने ननद को सलाह दी कि तू अपने पति के साथ बिना कंडोम के सेक्स कर लेना ताकि उसको कोई शक न हो.

फिर अगली बार जब आंटी की ननद का बच्चा हुआ और वो अपने बच्चे को लेकर आंटी के घर आई तो मैंने उसका दूध पिया और उसे खूब चोदा.
ये सब दो साल से अब तक चल रहा है. इसके बाद आंटी ने अपनी बहन को भी मुझसे चुदवाया. उनके यहाँ एक नौकरानी आती थी, उसके साथ भी सेक्स करवाया और इसी तरह हम सेक्स करते रहे.

अब भी आंटी और मैं खूब मजा करते हैं.
मेरी antarvasna सेक्स कहानी कैसी लगी, मुझे comments से बतायें!

प्रेषक : कुमार Antarvasna

मेरी पत्नी रीति जिसकी Antarvasna उम्र अब बयालीस वर्ष है और मैं पैंतालीस का हूँ। करीब चार वर्ष पहले हम लोगों ने एक बड़ा ही नया अनुभव किया। आज अन्तर्वासना डॉट कॉंम पर इतनी कहानियाँ पढ़ने के बाद सोचा कि मन की बात बता ही दूँ। कुछ विवरण और वार्तालाप थोड़े काल्पनिक हैं, इस कहानी को रोचक बनाने के लिए, लेकिन हुआ सब कुछ वैसा ही जैसा लिखा है।

उस समय रीति 38 वर्ष की थी। हमारा यौन-जीवन काफी आनंदमय था और शादी के इतने सालों बाद बहुत ही खुल गए थे। शादी के चौदह वर्षों के बाद नए तरीकों से सेक्स जिंदगी को आनंदमय बनाने का प्रयास करते, जैसे कि रीति का कभी कभी अंग प्रदर्शन, साथ ब्लू फिल्म देखना, जब घर में अकेले हों तो नंगा रहना और वैसे ही खाना खाना साथ में, देर रात को अँधेरे में बालकॉनी में रीति का लगभग नग्न साथ बैठना इत्यादि।

हम सम्भोग के समय बिल्कुल खुली बातें करते, तीसरे पुरुष और स्त्री के बारे में फंतासी करते, एक दूसरे को प्यार भरी गंदी गालियाँ देते और एक दूसरे के अंगों के लिए गंदी बातें करते। लेकिन कभी भी हमने तीसरे पुरुष या स्त्री के साथ सेक्स करने के लिए प्रयास नहीं किया, हम ऐसे ही बहुत खुश थे। हम कभी कभी रात को खाने के बाद गाड़ी में दूर तक चक्कर लगाते और शहर के बाहर हाईवे पर जाते, शहर का नाम नहीं बताऊँगा।

रीति जो काफी भर-पूरे शरीर की है और स्तन जिसके ज्यादा बड़े तो नहीं लेकिन बहुत ही गुदाज और उन्नत हैं, मेरे कहने पर ब्लाऊज़ से निकाल लेती और उनकी घुंडियों तक उन्हें बाहर कर लेती। हमें एक अजीब प्रकार का आनंद प्राप्त होता यह सोच कर कि नजदीक से गुजरने वालों की नजर उन स्तनों पर पड़ती है और रीति और मैं दोनों सेक्स की गर्मी महसूस करते और घर आकर बहुत ही रोमांचक चुदाई का मजा लेते।

एक दो बार हमने देखा कि बाहर सड़क पर चलने वालो की नजर रीति के अधखुले स्तनों पर पड़ी तो उनकी आँखें फटी की फटी रह गई। रीति के उरोज तो उन्नत थे ही, सबसे ज्यादा सेक्सी थी उसकी जांघें और मोटे नितम्ब। जांघ जैसे कि मोटी शिला की तरह बिल्कुल चिकनी, गोरी और नितम्ब 39 इंच। उन कूल्हों को देख कर किसी का भी मन ख़राब हो सकता है आज भी।

एक दिन देखा कि एक चने वाला अपना सामान समेट कर जाने ही वाला था, तभी रीति ने कहा- हम चना खायेंगे !

मैंने गाड़ी रोकी और उससे मसाला चना लिया जो काफी स्वादिष्ट था। मैंने पूछा- क्या रोज यहाँ आते हो ?

तो उसने बताया- करीब दो हफ्ते से ठेला यहाँ लगा रहा हूँ, उसके पहले कहीं दूसरी जगह लगाता था।

चने वाला अंदाज़ 35 साल का होगा लेकिन शरीर से हट्टा कट्ठा था और बहुत ही साफ़ सुथरा जैसे कि रोज शरीर पर तेल मालिश करता हो, कुछ-कुछ पहलवानों जैसा सुडौल शरीर।

मैंने नाम पूछा तो बताया- सरजू !

हम चना लेकर चले आये। रात को जब रीति के साथ सम्भोग करते हुए उस चने वाले की याद आई तो मैंने अपनी पत्नी से पूछा- सरजू कैसा लगा?

रीति ने कहा- फालतू की बातें मत करो ! और हंसने लगी।

मैंने कहा- कल जब जायेंगे तो उसे भी अपने उरोजों के दर्शन कराना ! पागल हो जाएगा !

रीति ने कहा- चलती गाड़ी में बात और है, गाड़ी रोक कर मैं अपने चूचों को नहीं दिखाऊंगी, कोई गड़बड़ हो गई तो क्या होगा?

मैंने कहा- क्या उसका शरीर तुम्हें मस्त और मजबूत नहीं लगा?

तो वो मुझे चूमने और काटने लगी। मैं जानता था कि चने वाले की बात याद करके उसे मजा आ रहा था।

हम दो तीन दिन बाद फिर उस तरफ निकलने लगे, रीति से मैंने कहा- तुम्हारी सबसे छोटी और काली वाली जालीदार ब्रा पहनो !

रीति ने पहन तो लिया पर चूचों को दिखाने से मना कर दिया, कहा- गाड़ी रोक कर ऐसा करना खतरनाक होगा !

मैंने कहा- चलो तो !

जाते हुए देखा कि चने वाला ठेला लगाये खड़ा था, लौटते हुए मैंने रीति से कहा कि अपने चूचे बाहर कर ले ! पहले तो तैयार नहीं हुई पर जोर देने पर मान गई, कहा- अगर वहाँ भीड़ होगी तो नहीं खोलूंगी !

रीति अपनी चूचियों को बाहर कर लेती थी लेकिन उन पर साड़ी का पल्लू ढांप कर रखती थी और जब भी मौका दीखता, साड़ी का पल्लू हटा अपने उरोजों का प्रदर्शन करती ! अगर भीड़ बहुत होती तो फिर से ढक लेती।

मैंने दूर से देखा कि ठेले पर कोई नहीं है और सिर्फ चने वाला और उसके साथ एक छोटा लड़का खड़ा है, रोशनी भी वहाँ ज्यादा नहीं थी, रीति ने झिझकते हुए अपने स्तनों को ब्रा से निकाल बाहर किया और साड़ी के पल्लू से ढक लिया।

मैंने गाड़ी रोकी और चने वाले को बुलाया नजदीक और रीति को इशारा किया, रीति ने थोड़ा सा पल्लू हटाया और किनारे से उसके गोरे-गोरे बाएँ तरफ के उरोजों ने हलकी सी झलक दी। शायद चने वाले ने भी देखा।

ऐसा तीन चार बार हमने किया और धीरे धीरे रीति ने अपने उरोजों पर का पल्लू करीब करीब एकदम ही हटाना शुरू कर दिया, अब उसके अधनंगे गोरे और ऊंचे स्तन साफ़ दिखते थे, दिखावा ऐसे करती थी जैसे उसे पता ही नहीं और पल्लू खिसक गया हो।

शायद चने वाला कुछ-कुछ समझ रहा था, अब जब भी गाड़ी वहाँ खड़ी करता, चने वाला दौड़ा आता और चने देने के बहाने वहाँ खड़ा होकर मेरे और रीति से इधर उधर की बातें करने लगता, हम भी थोड़ा निडर हो गए और आनंद लेने लगे।

रीति की झिझक कम हो रही थी, वो पहले से ज्यादा उरोजों का प्रदर्शन चने वाले के लिए करने लगी। अब तो लगभग एक तरफ के चूचे को पूरा ही बाहर निकाल कर उसे दिखाने लगी, चने वाले का ठेला उस तरफ ही होता था जिस ओर रीति बैठती थी यानि कि रीति की बाईं ओर !

चने वाला भी अब समझ गया था।

मैं और मेरी पत्नी चुदाई का बहुत मज़ा ले रहे थे, सरजू का जिक्र होते ही रीति गर्म हो जाती थी और मैंने देखा कि उसकी बूर पानी से भर जाती थी, मुझे दांतों से काटने लगती और सिसकारी भी लेती। हालाकिं किसी दूसरे समय बात करता तो मुझ पर गुस्सा दिखाती।

एक दिन जब गाड़ी रोकी तो देखा कि सरजू चने लेकर आया और उसने मेरी रीति की ओर का दरवाजा खोल कर चने रीति और मेरे हाथ में दिए, पहले वो खिड़की से ही देता था।

मैंने कुछ नहीं कहा, वो रीति से काफी सटकर खड़ा था। अब वो दो-अर्थी भाषा में भी बोलने लगा और रीति को सीधा ही संबोद्धित करता, जैसे एक दिन बोल पड़ा- मेमसाब, मेरा चना आपके लिए स्पेशल तैयार किया है गरमा गरम दिखाऊँ क्या?

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Hindi Sex Stories

चतुर्थ भाग में मैंने लिखा था कि Hindi Sex Stories किस प्रकार मैं सीमा दीदी की ससुराल गया और वहाँ रीना और टीना के साथ मस्ती की !

बाथरूम से आने के बाद मैं तो एक तरह से निढाल हो चुका था पर वो दोनों एक दम चुस्त लगती थी ! हो क्यों ना ? मेहनत तो मुझे ही करनी पड़ी थी !

वो कह रही थी- देख बहनचोद, अब क्या हालत होती है तेरी !

उनके मुँह से गाली सुनकर अजीब सा लगा पर अच्छा भी लग रहा था ! इतनी बिंदास थी दोनों कि गाली पर गालियाँ दिए जा रही थी। अब मेरे से भी नहीं रहा गया, मैंने भी कहा- साली रंडियों, देख तेरा भाई कैसे आराम से सो रहा है और तुम दोनों ने मुझको ही मुर्गा बना रखा है ! साली अपने भाई का भी कुछ ख्याल करो !

टीना ने कहा- उससे तो हम रोज ही चुदते हैं और भाभी आने के बाद भी चुदेंगी पर तू कहाँ फिर मिलेगा !

मैंने कहा- यह कोई समस्या नहीं है, जब भी तुम लोग याद करोगे, मैं हाज़िर हो जाऊंगा !

फिर दोनों ने मिलकर पाउडर लेकर मेरे सारे बदन पर ढेर सारा लगा दिया केवल लंड और मेरे निपल को छोड़ कर !

मैं कुछ समझ नहीं पाया कि वो क्या कर रही हैं ! इस तरह वो दोनों मुझसे लिपट कर लेट गई ! मैं फिर से उत्तेजित होने लगा क्योंकि टीना मेरे चुचूक को चूस रही थी और रीना मेरा लंड चूस रही थी! हम लोगों के बदन पावडर की वजह से इस तरह रगड़ रहे थे कि मालूम ही नहीं होता था कि बदन से बदन रगड़ रहे हैं ! मैं मन ही मन सोच रहा था कि हम लोगों ने इतने दिन बेकार ही किये ! जो मजा आज मिला मानो मुझे स्वर्ग ही मिल गया ! मैंने सोच लिया कि आगे हम लोग भी इसी तरह का लुफ्त उठाएंगे !

इसके बाद हम लोगों ने एक बार जमकर चुदाई की। तब तक तीन बज चुके थे और हम सो गए !

दूसरे दिन जीजू ऑफिस नहीं गए, हम लोग मस्ती कर ही रहे थे कि जीजू ने कहा कि वो अभी आते हैं, और चले गए !

जब वापस आये तो साथ में बीयर की बोतलें और एक बोतल व्हिस्की की थी। जीजू ने कहा कि चलो सब बीयर पीते हुए चुदाई का मजा लेते हैं, रात को व्हिस्की पीकर चुदाई करेंगे!

फिर क्या था- बीयर की बोतल खुल गई और हम सब बीयर पीते हुए आपस में छेड़खानी करते करते एक दूसरे के कपड़े उतारने लगे। सबसे ज्यादा पहल टीना कर रही थी !

जैसे ही कपड़े उतरे, टीना मेरी गोद में और रीना जीजू के गोद में बैठ गई ! दोनों लंड से खेल रही थी हम उनकी चूचियों से !

अचानक टीना को क्या हुआ मेरी गोद से उतर गई, मैंने पूछा- क्या हुआ ? कहने लगी- साले, चुप भी रहेगा कि नहीं ! देख मैं क्या करती हूँ !

कहकर मेरे लंड पर बीयर डालकर चूसने लगी। मैं भी कहाँ कम था, तुंरत उसकी चूचियों पर बीयर डाल कर मजा लेने लगा !

इधर जीजू और रीना क्या कर रहे थे, उसका हमें होश नहीं था !

और हमे करना भी क्या था ! बीयर पीते पीते एक राउंड चुदाई का हुआ ! फिर कुछ देर आराम करके फिर चुसाई-चुदाई में लग गए !

टीना और रीना कह रही थी- संजय, तेरा लौड़ा इतना मस्त है कि जी चाहता है हर समय चूत में घुसाकर ही रखूँ !

मैंने कहा- हम तो आपके गुलाम हैं ! आप जैसा चाहेंगी, वही होगा !

उन्होंने कहा- साले यहीं आकर रह जा और दिन रात हम लोगों की चूत की सेवा कर !

पर यह मुश्किल था, मैंने कहा- दीदी के आ जाने बाद तो आना जाना लगा ही रहेगा तुम लोगों की सेवा करने !

इसके बाद एक जबरदस्त चुदाई का राउंड हुआ और हम सब सो गए ! रात को जीजू ने अपने पापा मम्मी को कहा- आप लोग खाना खाकर सो जाओ, हम देर से खाना खायेंगे !

वो बेचारे क्या समझते, खाना खाकर सो गए ! फिर चालू हुआ हम लोगों का प्रोग्राम ! फिर व्हिस्की की बोतल खुली, एक एक पैग सबने आपस में चुहलबाजी करते हुए पिया। फिर तो थोड़ा सरुर आते ही एक दूजे से भिड़ गए !

फिर व्हिस्की पीते हुए लंड चुसाई और चुदाई चालू हो गई ! टीना ने कुछ जायदा ही पी ली थी इसलिए वह बहुत मस्ती से बढ़-बढ़ कर चुदवा रही थी, साथ ही साथ कह रही थी- ऐसा कोई मर्द नहीं जो टीना को ठंडी कर सके !

मुझे गुस्सा तो बहुत आ रहा था पर कोई उपाय नहीं था !

खैर रात भर चुदाई के बाद सुबह रवाना होने के पहले मैंने टीना को कहा- इस बार जब आऊंगा तो ऐसा चोदूंगा दोनों को कि दोनों जिन्दगी भर याद रखोगी !

उसने कहा- तेरे जैसे बहुत देखे हैं !

जाते जाते दोनों ने मुझे चुम्मियों से भर दिया और एक बार मेरा अमृतरस पीने की इच्छा प्रकट की। भला मैं उन्हें निराश कैसे कर सकता था !

दोनों ने चूस चूस कर मेरा रस मजे ले ले कर पिया और मैं उनकी चूचियाँ दबा कर चल पड़ा।

उन्होंने कहा- संजय, तुम्हारी बहुत याद आएगी !

मैंने कहा- मैं तुम दोनों को कैसे भूल सकता हूँ, जल्द ही आने की कोशिश करूँगा !

इस प्रकार दो दिन मस्ती से गुजार कर घर लौट आया ! घर आकर मैंने सीमा दीदी और विजय भैया को सारी बातें बताई और हम तीनों ने कई दिनों तक उसी तरीके से काफी मजे किये !

आपको कैसी लगी कृपया मुझे मेल करें ! Hindi Sex Stories

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