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प्रिय पाठको को मेरा नमस्कार, Sex Stories

मेरी कहानी का Sex Stories अगला भाग : मैडम के साथ आखिरी बार जो हुआ वो मुझे बड़ा अजीब लगा, मुझे देखने की उनकी नज़र बदलने लगी थी, शायद वो मुझे सही में चाहने लगी थी।
यह शायद मेरा वहम था मगर अगर यह सच होता तो मेरे लिए बहुत बड़ी परेशानी हो सकती थी क्योंकि वो एक शादीशुदा औरत थी और समाज में इस रिश्ते को बड़ी ही गन्दी नज़र से देखा जाता और मेरी बदनामी होती सो अलग।

कुछ लोगों ने बातें बनानी चालू तो कर भी दी थी, इसीलिए मैंने उनसे किनारा करने का सोच लिया, मगर वो शायद मुझे भुला नहीं पा रही थी, रोज़ उनके फ़ोन मेरे पास आते थे, और जैसे ही उनके पति चले जाते थे वो मुझे बुला लेती थी, मेरे लाख मना करने पर भी नहीं मानती थी।

मुझे घर बुला के मेरी गोद में बैठ कर मुझे उन्हें प्यार करने को कहती थी, शरीर की ऐसी भूख मैंने अभी तक मैंने किसी लड़की या औरत में नहीं देखी थी, मैंने हर कोशिश की कि मैं उन्हें नाराज़ किये बिना उनसे किनारा कर लूँ मगर ऐसा होने में वक़्त लगना लाज़मी था, तो मुझे थोड़ा इंतज़ार करना पड़ा और मुझे उसका मौका जल्दी ही मिल गया।

कुछ समय बाद एक दिन उन्होंने मुझसे कहा- मैं और मेरे पति लखनऊ जा रहे हैं चार दिन के लिए, तुम मुझे वहाँ मिलो!

पहले तो मैंने मना कर दिया, आखिर इन्सान हूँ, मेरा भी मन करता है। मगर वो नहीं मानी और मैंने उनसे कहा- बस यह आखिरी बार बार होगा!

वो बोली- ठीक है!

पाँच दिन बाद मैं और वो लोग अलग अलग लखनऊ पहुँच गए। वो अपने बच्चे को किसी रिश्तेदार के घर छोड़ आये थे क्योंकि उनके पति का मूड भी काम के बाद कुछ और करने का ही था।

मैंने उनके होटल के पास ही एक होटल ले लिया। उनके पति को उसी दिन सुबह अपने काम से जाकर अगले दिन दोपहर में वापस आना था, तो हमारे पास पूरा दिन और पूरी रात थी।

उनके पति के निकलने के बाद मेरे पास उनका फ़ोन आया और मैं उनके होटल में उनके कमरे में चला गया। चूंकि वो एक पंच-तारा होटल था तो इसीलिए कोई किसी से मतलब नहीं रखता था, हमने कमरा अन्दर से लॉक कर लिया।

वो मुझे बिस्तर पर बैठने के लिए बोलकर बाथरूम चली गई और अन्दर शावर में नहाने लगी।
दस मिनट के बाद वो नाईटी में बाहर आई और मेरे पास आकर बैठ गई।

उस वक़्त वो औरत क़यामत लग रही थी, गीले बाल, होठों पे लाली, रंग ऐसा लग रहा था कि एकदम दूध जैसा! उनकी नाईटी गीली थी और उसमें से उनके शरीर के उभार एक दम साफ झलक रहे थे।

उसके बाद उन्होंने मेरा एक हाथ अपनी टांग के नीचे दबा लिया और दूसरा हाथ अपने होठों पर फिराने लगी। और फिर धीरे धीरे मेरा हाथ वो अपनी छाती के पास ले जाने लगी, मेरे रोंगटे खड़े हो गए थे, मेरा लंड तन गया था।

उन्होंने मेरे हाथों से अपने मम्मे सहलाये और फिर अपना हाथ अपनी चूत के छेद में दे दिया, उन्होंने पैंटी नहीं पहनी थी और उन्होंने अपनी चूत शेव कर रखी थी। उनकी चूत पूरी तरह से गीली थी।

उसके बाद उन्होंने मेरा हाथ अपने मुँह में लिया और चूसने लगी। उस वक़्त वो मुझसे अपने मन की करवाना चाहती थी।

और मैं उनकी हरकतें देख के यह भी जान चुका था कि उन्होंने अभी अभी कोई इंग्लिश ब्लू फिल्म देखी है और उनका मन उसे कॉपी करने का है।

और जैसा कि मैं पहले भी बता चुका कि किसी औरत की तरफ मैं सिर्फ उसके होंठ और मम्मे देख कर ही आकर्षित होता हूँ, मुझे उकसाने के लिए किसी भी औरत के पास ये दोनों चीज़ें बड़ी और सुन्दर होनी बहुत ज़रूरी है। फिर चाहे उसकी शकल ठीक ठाक ही हो।

मैंने तुरंत उनकी नाईटी का एक भाग उतार दिया, उनके कंधे पर चूम किया और फिर धीरे उनकी गर्दन पर चूमना चालू किया और उसका कान काट लिया।

उन्होंने मुझे अपने से लपेट लिया और मैं उन्हें लिटा के उनके ऊपर लेट गया। धीरे हम दोनों एक दूसरे के आगोश में जाते चले गए। फिर थोड़ी देर उन्हें चूमने के बाद मैंने उनकी नाईटी कमर तक उतारी और उनके मम्मे चूसने चालू किये जो कि मेरी कमजोरी हैं।

मैं उनके मम्मे चूस रहा था और वो मेरा सर और जोर से अपने मम्मों में दबा रही थी। मुझे जन्नत का एहसास हो रहा था मगर उस समय तक मैंने कई बार नीचे जाने की कोशिश की मगर वो मुझे जाने ही नहीं दे रही थी।

थोड़ी देर बाद मैं उठा और मुझे ध्यान आया कि मैं अपना कैमरा लाया था। मैंने उनसे पूछा कि मैं अपने इन हसीं पलों की कुछ यादगार अपने साथ रख लूँ क्योंकि यह हमारा आखिरी बार था। थोड़ी न-नुकुर के बाद वो मान गई और मैंने उनकी कई नग्न तस्वीरें निकाली।

तस्वीरें लेने के बाद मैंने अपनी पैन्ट और फ्रेंची उतारी, फिर मैंने उन्हें पकड़ के मेज पर टिका दिया और उनकी गांड मारने की तैयारी करने लगा क्योंकि वो अभी आगे का काम नहीं करवाना चाह रही थी।

मैंने थोड़ा तेल लगाया अपने लंड पर और उनकी गांड के छेद पर टिकाया, धीरे धीरे अपना लंड उनकी गांड में घुसाया। वो दर्द से कराहने लगी और मुझे इसी चीज़ को देख के मज़ा आने लगा। 2-3 झटकों बाद वो ज्यादा चिल्लाने लगी तो मैंने उनके मुँह अपनी में अपनी फ्रेंची ठूस दी ताकि शोर बाहर न जा सके।

फिर बहुत सारे धक्के मारने के बाद जब मुझे लगा कि कहीं अब यह बिदक न जाये, मैंने उन्हें थोड़ा विराम दिया और उनकी गांड से लंड बाहर निकाल लिया। उनका मुँह एकदम लाल हो गया था।

मैं बाथरूम गया और अपना पसीना साफ़ करने के लिए शावर लेने लगा। जब मैं बाहर निकला तो देखा की मैडम बिस्तर पर पड़ी हैं अपनी चूत में खुजली कर रही थी बड़े जोर से। उस औरत की अन्तर्वासना उस समय एकदम चरम पर थी।

मैंने तुरंत उनके पास जाकर उनके हाथ हटा के अपनी ज़बान उनकी चूत पर लगा दी और उसे चूसने लगा। उस समय उनकी चूत का स्वाद किसी गर्म आइस क्रीम से कम नहीं लग रहा था, मैं अपनी जीभ उनकी चूत में फिराता रहा और वो सिसकियाँ लेती रही।

मैं हैरान था कि अब तक उनके मुँह से सिसकियों के अलावा एक भी शब्द नहीं निकला था, मगर तभी वो बोली- बस अब नहीं रुक सकती मैं! फक मी नाओ!

मैं तो इसी पल का इंतज़ार कर रहा था, एकदम उनके ऊपर चढ़ गया, उनकी टाँगें अपने कंधे पर रखी और सुपारा चूत पर लगाकर एक बार में पूरा अन्दर दे दिया।

(मैंने कंडोम पहना था, इसमें शर्म नहीं करनी चाहिए)

वो आहें भरने लगी और मैं अपनी गति बढ़ाता चला गया, कई धक्के मारने के बाद मैं थोड़ा रुका, और फिर उनकी टांगे नीचे छोड़ के उनके ऊपर से उनकी चूत में लंड डाला और उसके होठों पे अपने होंठ रख दिए। मैडम ने मुझे जकड़ लिया और मेरे कंधे पर जोर के काट लिया।

मैंने उनके जिस्म का भरपूर आनंद लिया और उस औरत के साथ हर वो चीज़ की जिसके बारे में मैं अपने सपने में सोचता था। मैंने उसको हर तरीके से चोदा, हर चीज़ करवाई उससे, अपने अंड चुसवाए, अपनी गांड चटवाई, कम से एक बार तो सब कर ही लिया उसके साथ।

रात होने वाली थी और हम काफी थक चुके थे तो मैंने थोड़ा ब्रेक लेने का सोचा, मैंने उससे कहा- चलो कहीं घूम आते हैं!

मगर उसने मना कर दिया और फिर रंजना मैडम बोली- जानू, एक काम करते हैं, एक ब्लू फिल्म देखते हैं तुम्हारी पसंद की!

मैंने कहा- यह भी ठीक है!

मैंने अपना लैपटॉप खोला और उसमें एक ब्लू फिल्म चला दी। उसमें लड़के ने लड़की की गज़ब तरीके से ली है। उसमें हिंसा बहुत थी, लड़की के हाथ बांध कर उस लड़की को खूब मारा और उसकी चूत लगभग फाड़ ही दी।
मैंने वो दृश्य रंजना को दिखाया और उससे ऐसा करने में मेरा साथ देने को कहा।

वो डर गई और मना करना लगी।

मगर मैंने उससे कहा- तुम्हारा पति तो कुछ करेगा नहीं, खाली लोटे में डंडी घुमाता रहेगा! मेरे साथ ही कुछ नया कर लो!

वो मान गई मगर मुझे सावधान रहने को कहा। मगर वो जानती नहीं थी कि मैं उसका क्या हाल करने वाला था।

मैंने उसके हाथ बिस्तर से बांध दिए और उसके मुँह में अपनी फ़्रेन्ची ठूंस दी। फ़िर फिर मैंने फ्रिज से बर्फ के कुछ टुकड़े निकाले और एक उसकी चूत के अन्दर घुसा दिया ताकि वो थोड़ा तड़पे और उसकी चूत कस जाये।

वही हुआ, वो छटपटा गई। मगर मैंने उसे पहले ही बोला था कि यह आसान नहीं होगा।

फिर मैंने बर्फ का एक टुकड़ा उसके मम्मों पर फिराया जिससे उसके चुचूक एक दम सख्त हो गए और फिर मैंने उसके मुँह पर 3-4 थप्पड़ रसीद कर दिए जिससे उसका मुँह एक दम लाल हो गया।

यही हाल मैंने उसके चूचों का भी किया। मैं उसे बेहाल और बेबस कर देना चाहता था। उसकी आँखों में डर दिखने लगा था कि अब उसके साथ पता नहीं क्या होने वाला है।

मैंने फिर उसके चूचे चूसने चालू किये और उन पर जोर से काट लिया और फिर उसके मम्मों पर मैंने अपने दांतों के निशान बनाये जिससे वो तड़प सी गई।

बीच बीच में मैं उसको थोड़ा सहलाता भी जा रहा था ताकि वो शांत रहे।

मैंने फिर उसकी चूत में अपना हाथ देना चालू किया। मेरा हाथ बहुत बड़ा था उसके छेद के सामने। वो तड़पने लगी मगर मैंने अपना पूरा हाथ धीरे-धीरे रंजना की चूत के अन्दर दे दिया। वो मचलती रही और मैं उसकी चूत में अपना हाथ हिलाता रहा।

मैंने अचानक देखा कि उसकी चूत के टाँके टूट गए थे मेरे हाथ के ज्यादा अन्दर जाने से! मैंने एकदम घबरा कर अपना हाथ उसकी चूत से बाहर निकाल लिया।

मैंने सोचा- अब बस!

मैंने पहले उसके हाथ खोले तो वो एकदम से तड़प के अपनी चूत को देखने लगी और सहलाने लगी। मैंने उससे सॉरी बोला और उसे बताया कि ऐसा तो होना ही था।

उसने अपने मुँह से कपड़ा निकाला और कराहने लगी।

मैंने उसका मुँह पकड़ा और उसके होठों पर अपने होंठ लगा दिए और बीच में 2-3 बार सॉरी कह दिया।

थोड़ी देर में वो भी मान गई। फिर मैंने उसे सोने को कहा और मैं उसे सुला के होटल से निकल गया।

मगर जो भी हुआ, एक बात तो पक्की थी कि अगली बार वो मुझे बुलाने से पहले सौ बार सोचेगी। मैं जो चाहता था अनजाने में वही हो गया और उस मैडम से मेरा पीछा छूट गया। अभी तक तो उन मैडम का फ़ोन आया नहीं है, आएगा तो ज़रूर बताऊँगा आपको अगली कहानी में! Sex Stories

हेल्लो दोस्तो, Hindi Porn Stories

मैं आपका प्यारा Hindi Porn Stories मेजस्टी, जिसकी कहानियाँ आप सब बहुत पसंद करते हैं।

शायद इसलिये कि मेरी कहानियों में ज्यादातर लड़की या औरत मेरी करीबी होती है, जैसे मम्मी, बुआ या छोटी बहन।

बहन से याद आया कि मेरी कहानी ¨छोटी बहन के साथ¨ को पसंद करने के लिए सबका शुक्रिया करता हूँ।

इस बार मैं अपनी मम्मी और मौसी की चुदाई से शुरु करता हूँ।

क्योंकि लड़कियों को मेरी मम्मी की चुदाई की कहानियाँ बहुत पसंद हैं तो भला मैं इन कुँवारी नाजुक चूत वालियों का दिल भला कैसे तोड़ सकता हूँ, अब बात छोड़ कहानी शुरु करता हूँ..

बात उन दिनों की है जब मेरी ३५ वर्षीय मौसी अपने ३ बच्चों के साथ सहारनपुर से आई थी। उनकी शादी १६ साल पहले एक सरकारी कर्मचारी की साथ हुई थी।

सपना मौसी अपने फिगर का बहुत ख्याल रखती थी। उनका रंग गोरा, गाल गुलाबी थे, पर चुँचियां बहुत बड़ी नहीं थी। पर हां ! उनकी गांड बहुत जबरदस्त थी, जब वो चलती थी तब मेरा ध्यान अक्सर उनकी गांड पर अटक जाता और वो साड़ी ही पहना करती थी! कसम से वो साड़ी में कयामत लगती थी, उनका साड़ी बांधने का अंदाज भी अलग था।

वो नाभि के काफी नीचे साड़ी बांधती थी और सदा गहरे गले का ब्लाउज पहना करती थी जिससे से वो जब भी झुकती थी तो उनकी दूध डेयरी का नजारा मैं बहुत आराम से देख करता था।

मै अपनी मम्मी, बुआ व बहन की चुदाई करने के बाद काफी चुदक्कड़ हो गया था।

मैने एक रात मम्मी को चोदते हुए मौसी की तारीफ की तो मम्मी ने कहा- साले ! मादरचोद ! मुझे पहले ही पता था कि तू मेरी बहन को बिना चोदे नहीं छोड़ेगा, क्योंकि मैं तुझे उसकी दूध डेयरी में झांकते हुए अनेक बार देख चुकी हूँ और जब भी तू उसके चूतड़ों की तरफ देखता है तो मै समझ जाती हूँ कि तू उसकी गांड भी मारेगा और वो छिनाल भी ऐसा ब्लाउज पहनती है कि सारी चूँचियां बाहर ताकती रहती हैं, रंडी ऊपर के हुक भी नही लगाती…

कई बार तो तेरे पिता जी भी मुझसे उसको सही ढंग से कपड़े पहनने के लिए कहने को कहते।

वो कहते- समझा लो मेरी साली को, वरना बाद में ना कहना कि मैंने उसकी चूँची दबा दी !

और मैं हंस कर टाल देती थी। लेकिन अब तू अपनी मौसी को चोदने को कह रहा है, तू भी बहुत हरामी हो गया है।

आप सब जानते ही होंगे कि मम्मी को चुदवाते वक़्त गालियों से बात करना बहुत अच्छा लगता है।

तभी मैं जो इतनी देर से मम्मी की बकबक सुन सुने जा रहा था, उनके बड़े-2 ब्लैडर जैसे स्तन दबाते हुए बोला- तो साली हर्ज ही क्या है जो अपनी बहन को मेरा लौड़ा खिला देगी तो उसको भी तेरे जैसे मजा आ जाएगा, वो तो वैसे भी तुझ से छोटी है और वैसे भी मौसा जी ज्यादातर घर से बाहर ही रहते हैं, उसकी चूत भी प्यासी ही रहती होगी। कसम से जब मेरा लौड़ा उसकी टाइट चूत में जायेगा तब बहुत मज़ा आयेगा। मम्मी प्लीज़ ! एक बार चुदवा दो न !

तब मम्मी ने कहा- अच्छा-2 अब अभी तो मेरी चुदाई कर !

उसके बाद मैने मम्मी की चूत को चाट कर उनकी बुर में बहुत ही ज़ोरदार ढंग से अपना पूरा 9″ का लौड़ा धंसा कर बहुत बेरहमी से पेला।

मम्मी ने थोडी देर बाद ही चूत से पानी छोड़ दिया। फ़िर मैने एक बार पलट कर उनकी गांड मारी जिससे मेरी माँ बहुत थक गई और फ़िर हम दोनों सो गये।

दूसरे दिन जब मैं नहा रहा था तब मैंने मम्मी की आवाज़ सुनी, वो सपनी मौसी से कह रही थी- सपना तुम उदास लग रही हो ?

तो मौसी ने न-नुकर करने के बाद बताया- क्या बताऊँ दीदी ! आजकल रिंकू के पापा मेरी ओर बिल्कुल भी ध्यान नहीं देते, पहले वो मेरे साथ लगभग रोज़ ही सम्भोग करते थे(इतने में मैं नहा कर कमरे मे आ गया था)।

फ़िर माँ ने कहा- मैं तेरी परेशानी समझ गई, तू यही कहना चाह्ती है कि आनंद तेरी ठीक तरह से चुदाई नहीं करता। पर इसमें परेशान होने की कोइ बात नही क्योंकि वो तुम्हारे लिए ही काम कर रहा है, अब सारा वक्त तो तेरी चूत मारने में नहीं लगा सकता। चल कोई बात नहीं ! आज मैं तेरी प्यास बुझा दूंगी !

तब मौसी ने कहा- किससे? क्या मोमबत्ती से?

तो मम्मी बोली- नहीं पूरे 9″ का लौड़ा घुसवाउंगी आज तेरी चूत में।

मम्मी की बात सुन कर मैं खुश हो गया।

थोड़ी देर बाद ही मैने सुना कि मम्मी मौसी से बोली- देख सपना, मैं तुझे चुदवा तो दूंगी, पर एक शर्त है !

मौसी बोली- वो क्या?

मम्मी बोली- तुझे चूत और लंड की बातें खुल कर किसी रंडी की तरह करनी होंगी !

मौसी मान गई।

मौसी ने पूछा- आप मुझे चुदवाओगी किससे?

मम्मी ने कहा- यह तो रात को ही पता चलेगा।

रात होते सबके सोने के बाद मम्मी मेरे कमरे में आई और मेरे होंठों पर किस करते हुए बोली- चल मेरे चोदू राजा ! आज अपनी मौसी की चूत भी चेक कर ले, तूने ऐसी माँ कभी नहीं देखी होगी जो खुद के साथ अपनी बहन को भी चुदवाए !

तब मैंने कहा- मम्मी, मौसी को बता दिया कि उसकी चूत कौन मारेगा?

मम्मी बोली- बेटा, अभी नहीं बताया ! तू जब करेगा तो खुद ही देख लेगी।

मैं बोला- उसको बुरा नहीं लगेगा?

मम्मी ने कहा- अरे, बुरा कैसे मानेगी? साली की बुर में खुद ही कीड़े काट रहे हैं, और जब कोई औरत एक बार चुदाई कराने का सोचती है तो फ़िर वो किसी से भी चुदवा सकती है।

फ़िर मैं मम्मी के साथ उनके कमरे में चला गया। तब मौसी मम्मी के बेड पर बैठी थी और मुझे देख कर संभल कर बैठ गई।

मम्मी बोली- देख ले अपने चोदू को … आज यही तेरी चूत मरेगा !

यह सुनकर मौसी का मुख लाल हो गया।

वो झपाक से बोली- हाय दीदी ! मैं भला अपने भांजे से कैसे सम्भोग कर सकती हूँ?

तब मम्मी ने कहा- जब मैं अपने सगे बेटे से चुदवा सकती हूँ और इसको अपने सामने ही अपनी बेटी की चूत भी मरवाने का मज़ा दे चुकी हूँ, तब तुझे क्या मुश्किल है?

मौसी बोली- हाय दीदी, आप कितनी निर्लज्ज हो, भला अपने बेटे से भी कोई चुदवाता है।

मम्मी बोली- तू बोल- तुझे चुदवाना है या मैं अपनी चूत की खुजली मिटा लूँ तेरे सामने चुदवा कर ! साली नाटक करती है !और इससे तो घर की बात घर में ही रहेगी।

मौसी के नखरे दिखाने पर मम्मी ने उसकी साड़ी के ऊपर से ही उसकी बुर के पास चिकोटी काटते हुए कहा- रानी एक बार लंड घुसवा लेगी तो ससुराल जाना भूल जाएगी।

यह बोलते हुए मम्मी ने मौसी की साड़ी उतार दी, अब वो सिर्फ़ ब्लाउज़ और पेटीकोट में रह गई। अब मैं बर्दाश्त से बाहर हो रहा था, मैंने मम्मी की चूँची दबाते हुए कहा- पहले एक बार आप चुदवा लो, फ़िर मौसी को देख लेंगे !

मम्मी ने कहा- अब तू अपनी मौसी को ही चोद ! इतने दिनों से तूने रट लगा रखी थी।

मम्मी ने मेरी लुंगी झटके से खोलते हुए मेरा अधखड़ा लंड हाथ मे लेकर मौसी की तरफ़ बढ़ाते हुए उसे हाथ में लेकर लंड की गर्मी महसूस करने को कहा और बोली- साली ले और जल्दी से इसे चूस !

मम्मी ने अपने सारे कपड़े उतार दिए।

मौसी अभी भी शरमा रही थी लेकिन मम्मी ने उसके कान के पास चुम्बन लेते हुए उसे शर्म छोड़ने को कहा।

मैं झट से मौसी की चूंची दबाने लगा … वाह … बहुत मज़ेदार थी उनकी चूंचियां ! बिल्कुल टाईट ।

उनके गज़ब के चुचूकों को मैं हाथों से रगड़ रहा था, मम्मी पीछे से उसकी पीठ पर अपनी छाती रगड़ रही थी।

मौसी ओह…… ओफ़्फ़्फ़्… की सिसकियां निकाल रही थी। तब मैंने अपना हाथ साईड से उनकी पेटीकोट में डालकर धीरे से नाड़ा खोल दिया और पेटीकोट निकाल दिया।

अब मौसी बिल्कुल नंगी थी, पर उसने दोनों हाथों से अपनी बुर को छिपा लिया था।

मम्मी ने जल्दी से पीछे से उसके दोनों हाथ पकड़ लिए और मुझसे बोली- राज ! चल अब अपनी मौसी को चूत चाटने का मज़ा दे !

ये सुन कर मैं मौसी की बिना बालों वाली फ़ूली हुईं गुलाबी चूत पर हाथ फ़ेरने लगा, उसकी फ़ांके बहुत ही सुंदर थीं।

मैं अपना हाथ फ़ेरने लगा और मेरा हाथ अपनी चूत पर पाकर मौसी चिहुंक पड़ी और उसके मुँह से एस्स्स्स …स्स्स सिसकारियां निकलने लगीं। तभी मैंने अपने हाथों से उसकी फांकों को फ़ैला कर उसकी चूत का करीब से नज़ारा देखा।

उसके अंदर का गुलाबी भाग बहुत ही खूबसूरत था और उसकी भीनी-2 सुगंध आई।

मैंने जैसे ही अपनी ज़बान निकाल कर मौसी की चूत पर रखी, वो एकदम से उछल पड़ी और आईईई…एस्स्स्स्स हाय्य्य्य राज …उफ़्फ़्फ़्फ़्…क्या करते हो? बहुत गुदगुदी होती है !

तभी मौसी ने मेरा सर पकड़ कर अपनी चूत पर मेरा मुँह दबाने लगी।

कुछ देर चाटने के बाद मैंने उसकी चूत में अपनी ज़बान घुसा दी। वो ज़ोर से फ़िर उछल पड़ी … हाय राम ! दीदी यह राज कितना गंदा है … उफ़्फ़्फ़्फ़ बहुत मज़ा आ रहा है !

मम्मी बोली- अभी तो ये सिर्फ़ तेरी चूत को चूस और चाट ही रहा है पर जब अपने खड़े लंड के झूले पे बिठाकर झुलाएगा, तू फिर देख्ना कितना दम है इसके लंड में !

और यह कह कर मम्मी ज़ोर-2 से मौसी मे स्तन और चुचूक मसलने लगी … कभी अपने होंठों से मम्मी उसकी चूँची को चूस रही थी।

अब तो मौसी के बदन मे आग लग चुकी थी और वो सारी लाज-शर्म भूल कर बोली- आओ मेरे चोदू राज …॥ आईईईइ…इस्स्स्स इस तरह का मज़ा तो तेरे मौसा ने भी कभी नहीं दिया आह्ह्ह्ह्हह्ह,……

और वो अपनी चूत उचकाने लगी और मैं भी उनकी चूत की दरारों को फ़ैला कर उनकी टांगें अपने कंधों में फंसा कर बहुत ही ज़ोरदार तरीके से उसकी चुसाई कर रहा था …

मेरी छिनाल मम्मी ! आज तो तेरी बहन की चूत चाटने मे बहुत मज़ा आ रहा है ! मैं बोला।

मम्मी बोली- मादरचोद अब जल्दी से इसकी चूत से पानी निकाल ! इतनी देर से घुसा पड़ा है।

मैंने कहा- इसकी चूत इतनी चुदी नहीं है और आज पहली बार तो इसकी चुसाई हो रही है, भला इतनी जल्दी पानी कैसे छोड़ेगी ! अब तेरी बात तो अलग है, तेरा तो भोसड़ा बन चुका है !

इससे मम्मी तप गई और मेरे सर पे एक चपत मारते हुए बोली- अब मेरी चूत मारना ! तेरी गांड पे लात मारूंगी।

इतने में मौसी बोली- बात ही करते रहोगे या मेरा पानी भी निकालोगे, मैं झड़ने वाली हूँ… जल्दी… जल्दी जबान चलाओ ! मेरी बुर में ज़ोर से धक्का मारो …

कहते हुए अपनी चूत को उचकाने लगी और उनके मुँह से उईईईईईईईई आअ ह्ह्ह्ह्ह्ह, जल्दी करो…राज्ज्ज्ज…

और तभी मौसी ने पानी छोड़ दिया। उनका ढेर सारा रस मेरे मुँह पे पड़ गया, मैने बहुत ही चाव से सारा कामरस पी लिया।

झड़ने के बाद मौसी एक तरफ बेड पर गिर गई। उसके बाद मैंने अपनी मम्मी की गांड मारी और मौसी को उस रात मैंने चार बार चोदा।

उसका ज़िकर अगली बार करुंगा …

अब इज़ाज़त दीजिए…पर हर बार की तरह मुझे आपकी मेल का इंतज़ार रहेगा… Hindi Porn Stories

प्रेषक : अमन Hindi Sex Stories

मैं अमन इलाहबाद से हूँ। मेरी Hindi Sex Stories उम्र २४ साल है मेरा लंड ७ लम्बा है ३ चौड़ा है। मैं आपको अपने पहले सेक्स के बारे में बताने जा रहा हूँ।

बात ६ साल पुरानी है। तब मैं १२वीं में था और हम लोग जहाँ रहते हैं उसके सामने वाली बिल्डिंग में एक औरत रहने आई थी। उसके पति दुबई में जॉब पर थे और उसकी एक लड़की थी, वो लड़की १८ साल की थी।

जब मैंने उस लड़की को पहली बार बिल्डिंग के नीचे देखा तो मेरे होश ही उड़ गए। वो दुकान में कैडबरी लेने आई थी और मैं भी उसी दुकान में रेज़र लेने आया था। मैंने उसे देखा तो मैं देखता ही रह गया।

उसने नीली रंग का स्कर्ट पहना था जोकि घुटनों तक ही था और पीले रंग की शर्ट पहनी थी। शर्ट के ऊपर से उसके छोटे छोटे दो मुसम्बी साफ साफ दिखाई दे रहे थे। वो कमाल की थी।

मै सोचने लगा अगर यह लड़की मुझे चोदने को मिले तो बहुत ही मज़ा आएगा और मैंने उससे दोस्ती करने का फैसला किया।

मैंने उसको बोला,”हई !

उसने सामने से उत्तर देते हुए ‘हय’ कहा फिर मेरी हिम्मत बढ़ी और मैंने उसको नाम पूछा तो उसने बताया “फ़िज़ा”

मैंने फिर उसे अपना नाम बताया और कहा कि मैं उस सामने वाली बिल्डिंग में रहता हूं ! तो उसने भी कहा कि मैं तुम्हारे सामने वाली बिल्डिंग में रहती हूँ।

फिर मैंने उसको पूछा,”फ़्रेंड्स ?”

वो हाथ सामने करती हुई बोली,”फ़्रेंड्स !”

फिर हम दोनों अपने अपने घर गये। उसके बाद वो मुझसे मिलती रही और कभी कभी मैं उसके घर भी जाता था। इस बीच मुझे एक बात का पता चल गया कि उसकी कमजोरी कैडबरी है और मैं जब भी उससे मिलने जाता तो उसे कैडबरी ले कर जाता।

उस दिन रविवार था। मैं उसके घर गया, देखा तो उसकी माँ एक रिश्तेदार के पास गई हुई थी और फ़िज़ा घर में अकेली थी। मैं सोफे में बैठ के टी.वी. देख रहा था और वो मेरे साथ मजाक करने लगी, मुझे चिड़ाने लगी और मारने लगी। तो मैं भी उसे मारने लगा। ऐसे ही उसने एक बार मेरी छाती पर मारा तो मैंने भी जानबूझ कर उसकी छाती पर मारा। फिर उसने मेरे पेट पर मारा तो मैंने भी उसके पेट पर मारा। फिर उसने मेरे लंड पर मारा तो मैंने भी उसकी चूत पर मारा।

उस वक़्त मैंने पहली बार किसी लड़की के दूध और चूत को छुआ था।

मैं समझ गया कि फ़िज़ा को क्या चाहिए।

जब उसने फिर से मेरी छाती पर मारा तो मैंने उसके दूध को पकड़ लिया और दबाने लगा।

तो वो पूछने लगी- तुम क्या कर रहे हो?

मैं उसकी दूध दबाते हुए बोला- जो तुझे चाहिए !

और वो कुछ नहीं बोली, चुपचाप बैठी रही। उसने लाल रंग का स्कर्ट और पीले रंग का टी-शर्ट पहना था। मै उसके वक्ष दबाते दबाते उसके होंठों को चूसने लगा।

मैंने उसको पूछा- कभी किसी से दबवाया है क्या ?

तो उसने शरमाते हुए न कहा तो मैं समझ गया कि फ़िज़ा अभी तक कुंवारी है। उसके स्तन एकदम मस्त थे। मैं फिर उसके दूध की घुंडी दो उंगलियों से मसलने लगा तो वो सिसक उठी- अ अ ह ह ह

फिर मैंने उसे उठाया और बेडरूम में ले गया और बेड पे लिटा दिया। फिर मैंने अपना शर्ट उतार दिया और पैन्ट की जिप खोल कर पैन्ट उतार दी। मैं अब बस अंडरवियर में था और मेरा लण्ड लोहे की तरह सख्त हो गया था, मेरे अंडरवियर का तम्बू (टेंट) बना हुआ था। मैं उसके पास लेट गया और उसे नजदीक लेते हुए उसके रसीले होंठ चूसने लगा। मैंने अपने दोनों हाथ उसकी मुसम्बी पर रखे और धीरे धीरे सहलाने लगा।

कुछ देर बाद मैं अपना एक हाथ उसकी टी-शर्ट में ले जाकर उसके बूब्स दबाने लगा। उसने ब्रा पहनी थी। फिर मैं उसका टी-शर्ट उतारने लगा तो उसने हाथ ऊपर करते हुए मेरी मदद की। उसने काले रंग की ब्रा पहनी थी। फिर मैं ब्रा के ऊपर से ही वक्ष दबाने लगा। कुछ देर के बाद मैं अपना एक हाथ उसके पीछे लेते हुए उसकी ब्रा का हूक खोल दिया और उसकी ब्रा निकाल के बेड पर फेंक दी। अब वो मेरे सामने नंगी बैठी थी। मैं उसे फिर लिटाते हुए उसके ऊपर लेट गया और उसके दूध चूसने लगा।

कभी कभी मैं उसके निप्प्ल दाँत के बीच ले कर उसे काटता तो वो चिल्लाती थी। मैं एकदम मदहोश हो गया था क्योंकि मैं आज पहली बार किसी लड़की को चोदने जा रहा था।

थोड़ी देर बाद मैंने अपना एक हाथ नीचे ले जाते हुए उसकी स्कर्ट में डाल दिया। मेरे हाथ को उसकी नरम नरम चड्डी लगी। मैं उसकी चड्डी के ऊपर से ही उसकी चूत सहलाने लगा। जैसे ही मेरा हाथ उसके चूत पे लगा, वो सिसक उठी- अ अ अ ह ह ह ह ह ह ह !

फिर मैंने उसकी स्कर्ट का हूक खोल दिया और उसकी स्कर्ट निकाल दी। उसने पीले रंग की चड्डी पहनी थी और चड्डी गीली हुई थी। मैं उसकी चूत चड्डी के ऊपर से ही सहलाने लगा। थोड़ी देर बाद मैं बैठ गया और उसकी चड्डी निकालने लगा। तभी वो इंकार करने लगी तो मैंने पूछा- क्या हुआ?

तो वो बोली- मुझे शर्म आती है !

तो मैं बोला- अभी तो मेरे सामने नंगी हो ! अब काहे की शर्म और वैसे भी तेर पति के सामने तुझे नंगा होना ही है तो अभी क्यों नहीं !

ऐसा कहते हुए मैंने उसकी चड्डी निकाल दी। अब वो मेरे सामने पूरी तरह नंगी थी। वो शरमा रही थी और उसने अपने दोनों पैर एक के ऊपर एक रख लिए। मैंने उसके पैर अलग कर के फैला दिए और उसकी बुर देखने लगा। वाह क्या बुर थी उसकी ! एकदम कुंवारी !

मै तो पागल हो उठा था क्योंकि मैं पहली बार किसी लड़की की चूची और चूत देख रहा था। वो शरमा रही थी। मैंने अपनी एक ऊँगली उसकी बुर में डालने लगा। उसकी बुर एकदम कसी थी, मैं जोर लगा के अपनी ऊँगली उसकी बुर में घुसाने लगा।

तभी वो- ह ई इ ई ई इ र इ इ इ इ सो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ कर के सिसक उठी।

फिर मै घुसाने की कोशिश करने लगा। कुछ देर के बाद मेरी दो उंगलियां उसकी बुर में गई। अब मैं उंगलियाँ उसकी चूत में अन्दर-बाहर करने लगा। उसको मज़ा आने लगा और वो मस्त होकर सिसक उठी- अ अ अ अ ह ह ह ह ह ह ह अअह !

कुछ देर बाद मैंने अपना अंडरवीयर उतार दिया। तभी मेरा ७” लम्बा और ३” मोटा लण्ड स्प्रिंग की तरह उछल कर बाहर आ गया। वो मेरा लण्ड देख के हैरान हो गई और अपनी बुर को देखती हुई बोली “अमन, इतना बड़ा तेरा लण्ड मेरी चूत में कैसे घुसेगा? मेरी चूत का छेद तो इसके सामने काफी छोटा है ! यह मेरी चूत में गया तो मैं तो मर जाउंगी !”

तभी मैं बोला,”टेंशन मत लो ! यह तो तेरे छेद में आराम से जायेगा ! पहले पहले दर्द होगा लेकिन फिर मज़ा आएगा और फिर जब बच्चा होता है तो इसी छोटे से छेद से निकलता है न “

ऐसा कहते हुए मैंने उसको मेरा लण्ड चूसने को कहा तो वो मना करते हुए बोली,”चीईई, मैं नहीं चूसुंगी इसे !”

मैंने पूछा,”क्यों ?”

तो उसने बोला,”मुझे गन्दा लगता है !”

तब मुझे याद आया, मैं उसके लिए एक कैडबरी लाया था और उसे देना ही भूल गया था। मैंने झट से अपनी पॉकेट से कैडबरी निकाली और उसे खोल दी। वो कैडबरी थोड़ी सी पिघल गई थी। मैंने वो कैडबरी अपने लण्ड पे लगाई और उसके मुँह में मेरा लण्ड घुसाते हुए बोला,”कैडबरी तो चाट सकती हो ना ?”

और मैंने उसका सर पकड़ के रखा। पहले वो छुड़ाने की कोशिश करने लगी लेकिन छुड़ा न पाई। फिर मैं अपनी कमर आगे पीछे करने लगा। अब उसे भी मज़ा आने लगा और वो मेरा लण्ड पकड़ के खुद ही चूसने लगी। मैंने हाथ उसके सर से हटाते हुए कहा,”कैसी लगी कैडबरी ?”

उसने लण्ड को मुंह से निकालते हुए कहा,”ये कैडबरी तो तेरे लण्ड के सामने कुछ भी नहीं है !” और वो मेरा लण्ड फिर से मुंह में लेकर चूसने लगी।

थोड़ी देर बाद मैंने उसे पैर फैला के लेटने को कहा। वो पैर फैला के लेट गई। उसकी गीली चूत मुझे साफ साफ दिखाई दे रही थी।

मैंने उसे पूछा,”घर में मक्खन है?”

उसने कहा,”हाँ फ्रीज़ में रखा है !”

और मैं मक्खन ले के आया। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मैं मक्खन क्यों लाया।

फिर मैंने खूब सारा मक्खन उसकी चूत के अन्दर डाला और अपना लण्ड उसकी बुर के मुंह पर रखा। जैसे ही मैंने लण्ड उसकी बुर पे रखा, वो सिसक उठी, “आह्ह आः जल्दी करूऊऊ नहीं तो माँ मर जाउंगी !”

मैंने एक धक्का देते हुए अपना लण्ड उसकी चूत में डाल दिया, उसकी चूत से खून निकलने लगा और वो चिल्लाने लगी,”ऊउईईई मा आ या मैं मर गई आआअह्ह्ह्ह्ह्ह !”

मैं थोड़ी देर शान्त हो कर लेट गया। थोड़ी देर रुकने के बाद दूसरा धक्का लगाया और वो फिर से चिल्ला उठी,”प्लीज़ अमन ! लण्ड बाहर निकालो ! नहीं तो मैं मर जाउंगी !”

मैंने कहा,”कुछ नहीं होगा, बस थोड़ी देर और सहन कर लो !”

और उसको किस करते हुए और एक धक्का लगाया इस वक्त मेरा पूरा लण्ड उसकी चूत में चला गया था और वो चिल्लाने वाली थी पर उसका मुँह मैंने अपने मुंह में ले के बंद किया था। उसकी सील टूट चुकी थी और वो रो रही थी और मछली की तरह तड़प रही थी। थोड़ी देर तक ऐसे ही रहा। फ़िर मैं अपनी कमर धीरे धीरे हिलाने लगा। तब तक उसको भी मज़ा आने लगा था और वो भी अपनी कमर ऊपर नीचे करती मुझे सहयोग दे रही थी।

फिर मैंने भी अपनी रफ्तार बढ़ाई और जोर जोर से कमर हिलाने लगा। इस दौरान वो दो बार झड़ चुकी थी। करीब १५ मिनट बाद मैं भी झड़ गया और उसके चूत में ही अपना वीर्य डाल दिया। कुछ देर तक ऐसे ही सोने के बाद वो उठी और अपने कपड़े उठाने लगी।

तभी मैंने देखा उसकी चूत पूरी तरह से गीली थी। उसकी चूत में मेरा वीर्य, उसका पानी और बहुत सा खून भी था। वो उठ के बाथरूम गई और पेशाब करने के बाद उसने अपनी चूत साफ की और अपनी चड्डी पहन ली और बाद में अपनी ब्रा पहनी और फिर टी शर्ट पहन के उसने स्कर्ट कमर पे चढ़ाई और बाहर आ गई।

उस दिन के बाद मैंने उसे बहुत बार चोदा। Hindi Sex Stories

Xxx मेड फक कहानी में मैं मुठ मार के गुजरा करता था. हमारी काम वाली आंटी को पता चल गया, उन्होंने मेरी गर्लफ्रेंड के बारे में पूछा. तो मैंने आंटी को ही मदद करने को कहा.

दोस्तो, मेरा नाम जीत है. मैं यूपी का रहने वाला हूं.
मेरी उम्र अभी 25 साल है, हाइट 5 फुट 7 इंच है और मेरा लौड़े का साइज 6 इंच है.

यह Xxx मेड फक कहानी एकदम सच्ची है.

यह बात एक साल पहले की है.

हमारे घर पर एक काम वाली आंटी काम करने आती थीं.
उन आंटी का नाम कोमल था.
उनका रंग सांवला था.
आंटी थोड़ी मोटी भी थीं, लेकिन बहुत ही सेक्सी फिगर की थीं.

एक दिन मैं अपने दोस्तों के साथ घूम रहा था तो हम दोनों हस्तमैथुन की बात करने लगे.

बातचीत के दौरान उसने कहा- मैं तो लंड पर कंडोम पहन कर मुठ मारता हूँ और वैसे ही अपने लौड़े को कंडोम पहनाए हुए ही सो जाता हूँ.
मैंने कहा- इसमें क्या खास बात है?

वह बोला- खास-वास कुछ नहीं है, बस उस वक्त जो नशा चढ़ता है ना तो लगता है कि कौन लंड धोने जाए … बस ऐसे ही पड़े रहो. बिस्तर के कपड़े भी खराब नहीं होते और मजा भी पूरा आआ है. तू कैसे मुठ मारता है?

मैंने कहा- मैं तो मुठ मार कर टिश्यू पेपर से लंड पौंछ लेता हूँ.
वह कुछ नहीं बोला.

फिर उसने कहा- अरे यार, मुझे तो डॉटिड कंडोम में हाथ चलाने में मजा आता है.
उसकी यह बात सुनकर मुझे भी लगा कि एक बार तो कंडोम लगा कर देखना चाहिए कि कैसा लगता है.

कुछ देर बात करने के बाद उस दोस्त ने मुझे अपने पास से एक कंडोम का पैकेट दे दिया और कहा- ट्राई करके देख.
मैंने भी वह कंडोम का पैकेट अपनी जेब में रख लिया.

मैं शाम को अपने घर आया तो मैंने सोचा कि मैं इस कंडोम को यूज कर लेता हूँ.
मेरा कमरा अलग था तो अपने कमरे में गया और दरवाजा बंद कर दिया.

मैंने अपने कपड़े उतार दिए और अपने लौड़े पर कंडोम चढ़ाने लगा.
पर लंड तो ढीला था तो मैंने सोचा कि पहले इसको कड़क करता हूँ.

मैंने अपने लौड़े पर थूक लगा कर हिलाना शुरू कर दिया.

कुछ देर बाद मेरा लंड सख्त हो गया.
अब मैंने कंडोम का रैपर फाड़ा और उसे अपने लौड़े पर चढ़ा दिया.

उसके बाद मैंने कुछ देर तक मुठ मारी और झड़ गया.
सच में बड़ा मजा आया.
न साला हाथ धोना पड़ा और ना लंड.

फिर मैं बिना कंडोम निकाले यूं ही ही सो गया.
बड़ी गहरी नींद आई.

सुबह सुबह कोमल आंटी की आवाज आई- जीत बेटा दरवाजा खोलो.
मैं एकदम से हड़बड़ा कर उठा और अपने लंड को देख कर मैंने कहा- हां आंटी, बस अभी आया … आप एक मिनट रुको.

मैंने झट से लंड से कंडोम निकाला और बेड के गद्दे के नीचे घुसा दिया.
फिर मैंने जल्दी से अपने कपड़े पहने और दरवाजा खोल दिया.

कोमल आंटी ने कहा- 8 बज रहे हैं … उठना नहीं था क्या?
कोमल आंटी मुझसे थोड़ा फ्रेंडली थीं तो मैंने कहा- आपके ही उठाने का इंतजार कर रहा था.
वे हंसने लगीं.

फिर मैं फ्रेश होने चला गया.

जब मैं अपने कमरे में आया तो देखा कि साला कंडोम तो आधा ही गद्दे के नीचे घुसा हुआ है और कोमल आंटी भी उसी के सामने पौंछा लगा रही हैं.

मैंने जैसे ही कंडोम को अन्दर घुसाने की कोशिश की, आंटी ने मुझे देख लिया.

आंटी मुझसे बोली- यह कंडोम यहां क्या कर रहा है?
जैसा कि मैंने आपको बताया कि कोमल आंटी मुझसे थोड़ा फ्रेंडली थीं.

तो मैंने मुस्कुराते हुए कहा- कुछ नहीं आंटी, यह गलती से रह गया था.
आंटी ने कहा- इसे तो तुरंत ही फेंक देना चाहिए था ना!

मेरी जगह कोई और होता तो शायद तुरंत उनकी बात को पकड़ लेता कि वे क्या कहना चाहती हैं.
लेकिन मैंने कहा- आंटी यह तो अभी निकाला है, इसलिए मैंने यहीं रख दिया था.

आंटी आश्चर्य से बोलीं- क्या तूने यह अभी यूज़ किया है?
मैंने कहा- नहीं, यूज़ तो रात को किया था … पर इसे लगा कर ही सो गया था. अब निकाल कर रखा था.

वह बोलीं- छी: तेरे कच्छे में तो बास भी भर गई होगी!
मैंने कहा- अरे ऐसे कैसे कच्छे में बास भर गई होगी? चाहे तो आप सूंघ लो.

आंटी हंसने लगीं और बोलीं- किसी को लेकर भी आया था … या अपने हाथ से ही काम चलाया था?
मैंने कहा- ऐसी किस्मत कहां है मेरी, जो कोई मेरे साथ सेक्स करे!

कोमल आंटी ने कहा- दिखने में तो इतने हैंडसम हो, फिर भी तुझे हाथ से काम चलाना पड़ रहा है!
मैंने कहा- क्या करूँ आंटी … आप भी तो मेरे लिए कुछ नहीं सोचतीं.

यह सुनकर आंटी ने मेरे हाथ से एकदम कंडोम छीन लिया और बोलीं- जीत, ज्यादा मत बोला करो … मैं तुम्हारी आंटी हूँ … तुम्हारे पास मेरे लायक लंड भी नहीं होगा.
मैंने उनके मुँह से लंड शब्द सुना तो समझ गया कि आंटी लंड के नीचे आने को राजी हैं.

मैंने कहा- बड़े छोटे से कुछ नहीं होता आंटी … लंबी रेस का घोड़ा होना चाहिए.

तभी आंटी ने कंडोम को सीधा किया और हैरानी से बोलीं- क्या तुम्हारा इतना बड़ा है या तुमने इसे खींच कर लंबा कर दिया?
यह कह कर वे हंसने लगीं.

इतनी सेक्सी बात सुनते सुनते मेरा लंड खड़ा हो गया था.

मैंने आंटी का हाथ अपने लौड़े पर रखा और कहा- खुद ही देख लो आंटी … मेरा हथियार आपकी फटी हुई चुत को मजा दे सकता है!
आंटी ने एकदम से लौड़े से हाथ हटाया और बोलीं- हट बदतमीज, कोई देख लेगा.

अब मुझ पर अपना काबू नहीं रहा.
मैंने आंटी की एक चूची पकड़ कर भींच दी.
आंटी ‘आउच.’ कह कर उचक गईं.

मैंने आंटी से कहा- आंटी, मुझे अब आपके साथ सब कुछ करना है.
वे बोलीं- कोई आ जाएगा, अभी मुझे जाने दो … मैं जा रही हूं.
आंटी मुझसे छूट कर चली गईं.

मैंने आंटी के जाने के बाद उनकी चूचियों का अहसास करते हुए मुठ मार ली.

मैं समझ गया था कि आंटी को लंड के नीचे लाना कोई बड़ी बात नहीं है. साली चुत चुदवाने के कुछ पैसे ही तो लेगी.

उस दिन आंटी चली गईं.
उसके बाद से जब भी आंटी मेरे कमरे में आतीं, मैं उनके ब्लाउज में सौ का नोट फंसा देता कि आंटी एक बार चूसने दो ना.

आंटी हँसती हुई मुझसे अपने दूध दबवा लेतीं और कभी कभी मैं उनके ब्लाउज को उठा कर निप्पल चूस भी लेता.
हर बार आंटी को सौ का नोट मिलता तो वे और ज्यादा प्यार से चूचे दबवा लेतीं.

कभी कभी मैं उनकी टांगों के बीच में भी हाथ डाल कर उनसे चुत चुदवाने की बात कर लेता तो वे कुछ नहीं कहतीं.
कुछ दिनों तक ऐसे ही चलता रहा.

एक दिन घर के सभी लोग एक फंक्शन में दो दिन के लिए गए हुए थे.
मैं नहीं गया था.
मैंने सोच लिया था कि आज आंटी की लेना ही है.

शाम को आंटी आईं और बोलीं- सभी लोग कहां पर हैं?
मैंने कहा- वे सभी एक-दो दिन के लिए एक रिश्तेदार के यहां गए हैं.

आंटी मुस्कुराने लगीं.
मैंने कहा- यहां पर सिर्फ आप और मैं ही रह गए हैं.

वे बोलीं- तो क्या करूँ?
मैंने लंड सहला कर कहा- आंटी, आज आप कुछ नहीं करोगी. आज मैं आपकी चुत चुदाई करूंगा.

आंटी ने हँसते हुए झाड़ू लगाना शुरू कर दिया.
मैंने उनकी गांड को देखा तो मेरा लंड मचलने लगा था.
पीछे से उनकी गांड मुझे मदहोश कर रही थी.

मैंने एकदम से आंटी को पीछे से पकड़ लिया और उनके मोटे मोटे चूचे दबाने लगा.
कोमल आंटी ने कहा- जीत, यह तुम क्या कर रहे हो … ऐसा मत करो.

मैंने आंटी को बेड पर गिरा लिया और कोमल आंटी की चूची दबाते हुए उनके होंठों चूसने लगा.
आंटी ने भी मेरे लौड़े को अपने मुलायम हाथों से भींच लिया.

कुछ 5 मिनट तक हम ऐसे ही करते रहे.
आंटी ने मेरे कपड़े निकाल दिए.
तो मैंने भी आंटी की साड़ी और ब्लाउज निकाल दिए.

आंटी जितनी मोटी थीं, उतनी ही बिल्कुल टाइट चूचियां थीं.
उनकी ब्रा सफेद रंग की ओर कच्छी नीले रंग की थी.

आंटी मेरे लौड़े को पकड़ कर हिलाती हुई बोलीं- आगे को आ जाओ.
उन्होंने मेरे लौड़े को अपने मुँह में भर लिया.
अब आंटी मेरे लौड़े को चूस रही थीं.

तभी मैंने आंटी की ब्रा उतार दी.
आंटी के निप्पल काले थे.
मैं उनके निप्पल दबाने लगा.

आंटी को मेरा लंड को चूसते चूसते 15 मिनट हो गए थे.
तब आंटी ने कहा- अब तुम मेरी चाटो.

मैं आंटी की किस करते-करते नीचे आ गया.
मैंने आंटी की पैंटी निकाल दी.

आंटी की चूत पर काली झांटें थीं.
मैंने अपनी उंगली से आंटी की चूत खोली और चूत में उंगली डाल दी. फिर जीभ से चाटने लगा.

आंटी ने मेरे सर को पकड़ कर अपनी चूत पर दबा लिया.
मैं अपनी उंगली जोर-जोर से अन्दर बाहर कर रहा था.

आंटी की चूत पूरी तरह से गीली थी.
वे सिसकारियां भरने लगीं- उई आ अम्म चाट जीत चाट मेरे भोसड़े को.
उनकी झांटें मेरे चेहरे पर लग रही थीं.

अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था.
मैंने आंटी से कहा- आंटी, अपने पैर चौड़े कर लो.
आंटी ने अपने पैर चौड़े कर लिए.

फिर मैंने अपना सख्त लौड़ा उनकी चूत पर रखा और हल्का सा धक्का लगाया तो मेरा लंड अन्दर घुस गया.
आंटी अपनी दोनों आंखें बंद करके अपनी चूची दबाने लगीं.

मैं तेज तेज धक्के मारता हुआ आंटी की चूत चोदने लगा.
मैंने आंटी से कहा- आंटी, आप मेरे लौड़े के ऊपर आ जाओ.

मैं बेड पर लेट गया.
अब आंटी ने मेरे लौड़े को अपनी चूत में डाल लिया और ऊपर नीचे होने लगीं.

आंटी थोड़ी मोटी थीं तो वे कुछ ही देर में थक गईं.
वे बोलीं- मुझसे नहीं हो पा रहा, अब तुम करो.

मैंने आंटी को घोड़ी बना लिया.
आंटी की झांटें बहुत बड़ी थीं इसलिए चूत खोल कर अपना लंड पूरा एक ही बार में डाल दिया.

आंटी- उई आह थोड़ा आराम से करो.
मैंने जैसे ही धक्के देने चालू किए, आंटी के चूतड़ मेरी जांघों पर लगने लगे थे.

Xxx मेड फक करने में मुझे बहुत मजा आ रहा था.
मैं झड़ने वाला था तो मैंने लौड़े को गर्म चूत से बाहर निकाला और आंटी की गांड से कमर तक अपने माल की बूंदें गिरा दीं.

फिर हम दोनों शान्त हो गए.
मैं आंटी के ऊपर ऐसे ही लेट गया.

आंटी बोलीं- मैं इतने दिनों से काम कर रही हूं, ये काम तो तुझे पहले ही कर देना चाहिए था!
मैंने कहा- आंटी कोई बात नहीं, अब से तो शुरू हो गया!

उसके बाद मैंने कहा- आज आप यहीं रुक जाओ. रात भर चुदाई का मजा लेंगे.
वे कुछ देर सोचने के बाद राजी हो गईं।

उन्होंने अपने घर फोन कर दिया कि आज रात वे मेरे घर रुकेंगी.

बस फिर क्या था … मैं और आंटी ने सारी रात चुदाई का मजा लिया.
मैंने आंटी की चुत की झांटें साफ कीं और जबरदस्त चुदाई की.

दोस्तो, यह मेरी सच्ची सेक्स कहानी है. आपको कैसी लगी प्लीज बताएं.

मेरी अभी कुछ सेक्स कहानी और भी हैं जो एकदम सच्ची हैं. उनको मैं Xxx मेड फक कहानी पर आपके कमेंट्स पढ़ने के बाद लिखूँगा.

Antarvasna


बनारस में कहावत है कि Antarvasna किसी जवान लड़की की गाण्ड देख कर अगर लौड़ा खड़ा नहीं हुआ तो वो बनारसी नहीं है। यहाँ लोग गाण्ड के दीवाने होते हैं। कोई चिकना लौण्डा हो तो भी लण्ड फ़ड़फ़ड़ा उठता है। फिर मैं और नसीम तो जवान, कम उम्र, और सुपर गोल गाण्ड वाली लड़कियाँ थी, किसी की नजर पड़ गई तो समझो लण्ड से नहीं तो उनकी नजरों से तो चुद ही जाती थी। हम दोनों ऐसी नजरें खूब पहचानती थी।

मैं और मेरी रिश्ते की बहन नसीम, जो मेरी अच्छी सहेली भी थी, हम दोनों बाल्कनी में खड़ी बाते कर रही थीं। नीचे ही देख रही थी कि मुझे दो लड़के नज़र आये।

“नसीम, ये दो नये लौण्डे कौन हैं?”

“वो तो अनवर है और ये जीन्स वाला फ़िरोज़ है, अपने ही रिश्ते में है।”

“यार, मस्त लौण्डे हैं, आज इनको पटाते हैं…”

“यार, तेरी तो बहुत जल्दी फ़ड़कने लगती है बानो…”

“सच कह रही हूँ, मुझे इन चिकने लौण्डों से चुदवाने में बड़ा मजा आता है…”

“हाय, दो सहेलियां खड़ी खड़ी, दोनों चुदायें घड़ी घड़ी …”

हम दोनों खिलखिला कर हंस पड़ी। नीचे से दोनों ने हंसी सुन कर ऊपर देखा और दोनों हमें देखते ही रह गये। फिर दोनों ने एक दूसरे को मुस्कुरा कर देखा।

“लगा तीर दिल पर…!” मैंने कहा,”अब ये तो गये काम से…समझ लो आज रात का काम बन गया !”

नसीम मुझे हैरानी से देखने लगी…”देख, वो फ़िरोज़ मेरा वाला है…!”

“भेनचोद, तुझे लण्ड चाहिये या शकल… जो पट जाये वही ठीक है… चल अब एक्टिंग शुरू करें !”

नसीम भी पटाने की अपनी तरह से तैयारी करने लगी। मैंने भी अपना मूड बना लिया और अन्दर जा कर तंग काली वाली कैप्री पहन ली और एक नीचे गले वाला छोटा सा स्लीवलेस टॉप डाल लिया। ऐसा टॉप था कि जरा सा पास आने से चूंचियो के दर्शन हो जाते थे। थोड़ा सा मेक-अप किया और कंटीली नार बन कर नीचे उतर कर आ गई। उनमें से एक युवक अन्दर की ओर आ रहा था। मैंने आव देखा ना ताव, सीधे उससे टकरा गई।

“हाय अल्लाह, आह्ह्ह, …” मैंने कराहते हुए उसे देखा।

“सॉरी…सॉरी… लगी तो नहीं…?” उस युवक ने कहा।

“हाय अम्मी… आप देख कर नहीं चलते…?” मैंने अपनी बड़ी बड़ी आंखे धीरे से उठाई… उसने ज्योंही मुझे देखा … उसका दिल धक से रह गया… आंखे फ़ाड़ फ़ाड़ कर मुझे देखने लगा…

“या खुदा… रहम कर… ये हूर… आप कौन हैं…?”

उसके मुख से आह सी निकली। लगा कि काम बन गया।

“मैं… मैं.. शमीम बानो… ” नाटक चालू था… मैंने अपनी आंखे धीरे से झुका ली… और जान करके उसके और पास आ गई। उसके दिल पर कई कांटे गड़ चुके थे। उसकी नज़र मेरे पास आते ही मेरे टॉप के अन्दर पड़ गई, जहाँ मेरे उभार उसकी आंखो को रस पिलाने के लिये बेताब हो रहे थे। उसे समय दिये बिना डोरे डाले जा रही थी।

“सुभान अल्लाह… ये जिस्म है या जादू … !!” मेरा अगला तीर भी निशाने पर बैठा। मेरी नजर अचानक नसीम पर पड़ी तो बराबर हाथ हिला कर कुछ कहना मांग रही थी, पर मैं मौके की नजाकत को समझ रही थी, मुर्गा फ़ंसने को तैयार था…

“हाय… ये क्या कह रहे है आप…” मैं हाथ से छूटे कपड़े उठाने के लिये यूं झुकी कि कैप्री में से चूतड़ की दोनों गोलाईयां उभर कर उसके चेहरे के सामने आ गई। दोनों चूतड़ खुल कर खिल उठे… उसकी नजर ने इसका पूरा जायजा लिया, मेरे उठते ही काप्री मेरे चूतडों की दरार में घुस गई… उसके मुख से आह पर आह निकलती गई। तीर जिगर में धंसते चले गये।

“बानो, मैं फ़िरोज़… आपने तो जाने क्या जादू कर डाला ?” मैं नसीम का इशारा अब समझी। पर काम तो हो चुका था। मैंने तुरन्त उसकी तरफ़ कंटीली चिलमन से मुसकरा कर देखा।

“जादू… देखो आपने तो मुझे चोट लगा दी…” मैंने तिरछी नज़रों का एक वार और कर डाला।

“और मुझे जो चोट लगी है वो…?” घायल सा वो बोला।

“ओह… सॉरी… कहां लगी है…बताईये तो…!” मैंने अनजान बनते हुए कहा। उसका लण्ड का उठान शुरू हो चुका था, और पैंट में से उभर रहा था।

“यहां पर…!” उसने अपने दिल पर हाथ रख कर कहा।

“धत्त… हाय अल्लाह… !!” मैं कह कर नसीम वाले कमरे में भाग आई। फ़िरोज वहीं घायल सा तड़फता खड़ा रह गया। जाने कितने तीर लग चुके थे उसके दिल पर…।

नसीम ने मुझे देखते ही नाराजगी जाहिर की…”वो तो मेरा वाला था… साला बेईमान निकला… देखा नहीं तुझे देख कर मादरचोद ने लण्ड हिलाना चालू कर दिया।”

“अभी तो लण्ड हिला रहा है…देखना भेनचोद रात को यही लण्ड खड़ा मिलेगा… फिर क्या तेरी चूत और क्या मेरी चूत… सबको चोद देगा !”

“बानो, तू बड़ी खराब है… अब अनवर को मुझे पटाना पड़ेगा…!”

“सॉरी नसीम… साला वो पहले सामने आ गया… इरादा तो अनवर को पटाने का ही था!”

मैं ऊपर अपने कमरे में चली आई… । फ़िरोज मेरा पीछा कर रहा था। मेरे पीछे पीछे फ़िरोज भी आ गया। मैं कपड़े बदल चुकी थी और सिर्फ़ एक गाऊन जान करके डाल रखा था, अन्दर कुछ नहीं पहना था। पर अब तक वो आया क्यूं नहीं। उसने दरवाजा खटखटाया और अन्दर झांका… मैं उसके अचानक आने का मैंने घबराने का नाटक किया।

“आप… फ़िरोज जी…”

“खुदा कसम… मन नहीं माना… तो आपके पास आ गया…।”

“कहिये… क्या हुआ…” मुझे पता था कि हरामी का लौड़ा खड़ा हो रहा होगा… तो पीछे पीछे आ गया आशिकी झाड़ने। पर मुझे तो उसका पूरा आनन्द जो लेना था। सोचा चलो शुरुआत अभी कर लेते है…रात को चुदवा लेंगे। मेरी तैयारी पूरी थी, अन्दर से मैं पूरी नंगी थी, बस काम चालू होते ही मेरे नंगे जिस्म को मसल देगा वो…।

“बानो… आप मेरे मन को भा गई है… देखिये खुदा के लिये इन्कार मत करना…”

मैंने अपना मुख दोनों हाथों से ढक लिया…और शर्माने का भरपूर नाटक करने लगी।

“ऐसे मत कहिये… खुदा की मार मुझ पर… आप तो मेरे लिये खुद ही खुदा है…”

“क्या कहा… कबूल है… ओह्ह मेरी किस्मत… अल्लाह रे… आपने बन्दे की सुन ली…”

साला मरा जा रहा था मेरे पर… पर मुर्गा इतनी जल्दी लपेटे में आ जायेगा यकीन नहीं हो रहा था। मेरा जिस्म फ़ड़कने लगा कि अब उसके हाथ मेरे तन को सहलायेंगे। इतना सुन्दर, गोरा, लम्बा और सुडोल शरीर वाला लड़का… बिलकुल जैसे खजाने में से निकाला हो, नया नया जवान … 18-19 साल का… हाय… बेचारा गया काम से। आगे बढ़ कर मेरे हाथो को उसने पकड़ लिया। मैंने जैसे कांपने का नाटक किया।

“हाय अल्लाह, ना छुओ … मैं मर जाऊंगी” मैंने शरमाने का भरपूर नाटक किया। उसने जोश में मेरा मुख चूम लिया और उसके हाथ मेरी चूंचियों पर आकर उसे नापने लगे। मैंने शरम से झुक गई और उसे दूर हटाने लगी… “फ़िरोज… बस करो… छोड़ दो मुझे…”

“पहले वादा करो, रात को मेरे कमरे में मिलोगी ना…”

“बस करो ना… हाँ आ जाउंगी ना… बस” कहते ही फ़िरोज ने मुझे छोड़ दिया। मुझे निराशा हुई कि मेरा बदन तो कोरा ही रह गया। लेकिन नहीं … वो इतनी जल्दी मानने वाला नहीं था। फिर से नजदीक आया और मुझे लिपटा लिया। गाऊन के अन्दर उसके हाथ पहुंचने लगे। मेरा तन पिघल उठा। मेरा अंग अंग नपा तुला सा दबा जा रहा था। सभी उभारों को उसने एक कली की तरह मसल दिया। मेरी सिसकियाँ गूंज उठी। चूत पानी टपकाने लगी। मैं उसकी बाहों में तड़प उठी। फिर धीरे से उसने छोड़ दिया। मैंने अपना गाऊन ठीक किया। वो मुझे प्यार से निहारते हुए जाने लगा।

“तो फिर रात को…। बाय …बाय…” वो जैसे ही मुड़ा तो मुझे लगा कि मैंने तो उसे झटका दिया ही नहीं।

“फ़िरोज, रुको तो…” जैसे ही वो रुका , मैं उसके पास आ गई और उससे चिपक गई। वो कुछ समझता मैंने उसका लण्ड पकड़ लिया और दबाने लगी।

“बानो… मैं मर गया… छोड़ दे रे…”

“फ़िरोज प्लीज… दबाने दो… मेरी बहुत इच्छा थी इसे हाथ में लेकर दबाने की… बहुत मोटा और लंबा है?”

उसका लण्ड तन्ना उठा। वो तड़प उठा। मेरा हाथ हटाने लगा पर मैं कोई कच्ची खिलाड़ी थोड़े ही थी। जम के उसक लौड़ा पकड़ा और मसलने लगी। उसका डन्डा था भी लम्बा और हाथ में ऐसे फ़िट आया कि उसका मुठ ही मार दिया। वो लहरा उठा…

“बानो, अरे मेरा लण्ड तो छोड़ दे, हाय रे”

“प्लीज फ़िरोज… बहुत अच्छा है… मसलने दे ना” मैंने जिद करके मसलना चालू रखा। कुछ ही पलों में पेण्ट में एक काला धब्बा उभर आया। उसका वीर्य निकल पड़ा था। मेरा काम हो गया था। उसके मुंह से एक आह निकली…

मैंने कहा,”फ़िरोज… शाम को मेरा निकाल देना बस…” और हंस पड़ी।

“मेरी तो मां चोद दी बानो… तुझे भी नहीं छोड़ने वाला… तेरी भी फ़ोकी चोद डालूंगा देखना !” फ़िरोज़ भी झड़ने से थोड़ा शर्मिन्दा हो गया था।

रात के एक बज रहे थे। मेरे मोबाईल का अलार्म बज उठा, सुस्ती के मारे उठने का मन नहीं कर रहा था। पर फ़िरोज़ के मोटे लण्ड का ख्याल आते ही जिस्म तरावट से भर गया। मैं झट से उठी। मैंने नसीम के कमरे में झांक कर देखा और धीरे से उसे जगाया। हम दोनों ही दबे पांव कमरे से बाहर आ गये। हम दोनों ही रात के सोने वाले वाले कपड़े पहने थे। बस एक झीना सा पजामा और एक उटंगा सा कुर्ता…

“चल यार चुदना ही तो है क्या मेक-अप करना…” मैंने कहा और सीढ़ियां चढ़ कर फ़िरोज के कमरे के बाहर आ गई।

“अभी तू बाहर से देखना, फिर मैं तुझे बुला लूंगी” मैंने नसीम को तरकीब बताई।

“नहीं, मैं अनवर को बुलाती हूँ… तू जा…”

“पर अनवर… “

“मैंने उसे पटा लिया है… दिन को एक बार चुदा भी चुकी हूँ।” नसीम में फ़ुसफ़ुसा कर कहा। मुझे जलन हो उठी… साली भोसड़ी की… मेरे से पहले ही चुदा लिया। मैं तो चाह रही थी कि अनवर पर भी लाईन मार कर उसे फ़ंसा लेती और उससे भी खूब चुदाती…।

नसीम साईड वाले कमरे में अनवर के पास चली गई। मैंने फ़िरोज़ का दरवाजा खोला। मुझे किसी ने अचानक ही पीछे से दबोच लिया। सामने फ़िरोज़ खड़ा था… तो फिर मेरी गाण्ड में ये लण्ड किसका गड़ा जा रहा था।

“आज तो बानो की मां चोदनी है… साली ने मेरा दिन को मेरा माल निकाल दिया था” फ़िरोज़ ने मुस्करा कर कहा।

“चल तू क्या चोद रहा है…” ये आवाज अनवर की थी… मेरा मन मयूर नाच उठा… अनवर तो बिन पटाये ही लण्ड लिये हुए खड़ा है।

“मैं इसकी चूत चोदता हूँ और तू गाण्ड चोद इस… नमकीन की…” फ़िरोज़ बोला।

“साला हरामी, चोदने का मुझे वादा किया और चूत बानो की चोदेगा…” कमरे में अनवर को नहीं पा कर नसीम आ चुकी थी। मैं एक बार फिर ईर्ष्या से जल उठी। ये माँ की लौड़ी यहाँ कैसे मर गई। दो दो लण्ड की आश खत्म हो गई थी। फ़िरोज़ ने ज्योंही नसीम को देखा , वो उसकी ओर लपक उठा…

“अनवर , मेरे दिल की रानी आ गई…” और नसीम को अपनी बाहों में उठा कर बिस्तर पर आ गया। फ़िरोज़ का लण्ड देखते ही बनता था, नसीम को देखते ही वो फ़नफ़ना उठा था। मैं अब और निराश हो चली थी कि ये हरामी तो नसीम का आशिक निकला।

“मेरा पजामा मत फ़ाड़ना… नहीं तो नीचे नहीं जा पाउंगी !” नसीम में खुद ही अपना पजामा उतार दिया। मुझे भी अपना पजामा उतारने में भलाई ही लगी। अब कौन हमें छोड़ता… फ़िरोज़ ने नसीम को दबा डाला और लण्ड चूत में घुसेड़ दिया। नसीम ने फ़िरोज़ को जोर से कस लिया और सिसक उठी। मुझे नीचे पड़े बिस्तर पर अनवर ने प्यार से लेटाया और अपना खड़ा लण्ड मेरी चूत पर हौले हौले घिसने लगा। डबलरोटी की तरह फ़ूली हुई मेरी चूत के पट खुलने लगे। दोनों फ़ांकें खुल गई। बीच की पलकें जो हल्की भूरी सी, टेढी मेढी सी लहराती हुई मांसल चमड़ी और बीच में पानी का गीलापन और फिर झाग से बुलबुले से भरी मेरी रसीली चूत पर अनवर मर मिटा। उसके होंठ मेरी चूत से लग गये और उनका रसपान करने लगा। मेरी चूत से लगा मेरा दाना फ़ड़क उठा, उसके होंठ बार बार मेरे दाने को भी चूस लेते थे…

“अनवर मियां… मैं मर जाउंगी… प्लीज फ़िरोज की तरह चोद डालो ना…”

“नहीं, बानो… चोदेगा तो तुम्हें फ़िरोज ही, मैं तो गाण्ड का दीवाना हूँ…”

मुझे फिर थोड़ी सी निराशा हुई, पर कुछ ही देर में नसीम को चोद कर फ़िरोज़ मेरे पास हाज़िर हो चुका था। चूस चूस कर लगा था कि झड़ना बाकी है। पर मैंने अपने आप को कंट्रोल किया। फ़िरोज़ का खड़ा लण्ड, सुपाड़े की चमड़ी कटी हुई, सच्चा मुसलमान लग रहा था… उसकी मर्दानगी भी एक पठान की तरह लग रही थी। अनवर सामने से हट गया और फ़िरोज़ ने कमाण्ड सम्हाल ली। वो मेरे पर चढ़ गया और मुझे नीचे दबा लिया। मेरा सारा जिस्म कसमसा उठा। उसका भार बड़ा प्यारा लग रहा था। कुछ ही क्षणों में उसका गरम गरम लण्ड मेरे जिस्म के भीतर समाने लगा। मैं तड़प उठी।

“मेरे खसम… मजा आ गया… पूरा समा दे अन्दर… हाय…” उसने मेरा मुख अपने मुख से दबा लिया और निचले होंठ दबा कर चूसने लगा। अब उसका लण्ड अन्दर बाहर होने लगा। उधर नसीम की गाण्ड को अनवर लण्ड घुसेड़ कर चोद रहा था। नसीम भी मेरी ही तरह गाण्ड चुदाने में माहिर थी।

“बानो, आज आई है नीचे तू… तेरी आस तो मुझे कब से थी रे…अब तो चोद ही दिया !”

” हाय रे मेरे जिगर… तेरे नाम से ही मर मिटी थी जानू…मेरे दिल, मेरी जान… आह रे…” मैं भी अपने मन के लड्डू फ़ोड़ रही थी… साला ऐसा जवां मर्द कहाँ मिलेगा मुझे।

“मैंने कहा था ना तेरी फ़ोकी चोद कर मजा लूंगा… मस्त भोसड़ी है !”

“बस कुछ मत बोल, बस जोर से चोद दे…” मेरी बेताबी बढ़ती जा रही थी, पर मेरी चूत को और गहरी चुदाई चाहिये थी। उसके धक्के तेजी से चल रहे थे। मुझे भी वासना की आग घेर चुकी थी। जिस्म आग में सुलगने लगा था। मीठी मीठी आग तन को जला रही थी। पर मुझे और दबा कर चुदना था। मुझे लगा कि अभी लण्ड पूरा दम लगा कर नहीं चोद रहा है। बिना हल्के दर्द के कैसा चुदना। मैंने दांत भींचते हुये फ़िरोज को दबाया और पलटी मार कर उसके ऊपर आ गई।

“मादरचोद… लौड़े में दम नहीं है क्या… लौड़ा तो साले का मस्त दिखता है…” मैंने फ़िरोज़ को दबाते हुये चूत में उसका सुपाड़ा फ़ंसा लिया और उस पर सीधे बैठ गई और चूत पर पूरा जोर लगा कर लण्ड को अन्दर समा लिया। मुझे लगा कि अब सुपाड़ा की गद्दी ने जड़ में ठोकर मार दी है तब मैंने कस कस कर उसके लण्ड पर अपनी चूत पटक पटक कर मारनी चालू कर दी। हर बार मेरे मुख से आह निकल जाती… चूत की गहराई को उसका लण्ड और गहरा कर रहा था। गहराई की चोट एक अलग ही मजा दे रही थी, थोड़ा सा दर्द और खूब सारा मजा…। उसका लण्ड फ़ूलता सा लगा उसकी पकड़ मजबूत होने लगी। तभी अनवर ने मेरी गाण्ड थपथपा कर इशारा किया। मैं फ़िरोज पर लेट गई और गाण्ड ऊंची कर ली। मेरी गाण्ड में अनवर का लण्ड सरसराता हुआ घुस पड़ा। अनवर के लण्ड के झटके, मेरी चूत को फ़िरोज के लण्ड पर मार कर रहे थे।

फ़िरोज तो झड़ने के कगार पर था… और तभी फ़िरोज के मुख से सिसकारी निकल पड़ी और उसके लण्ड ने वीर्य छोड़ दिया। उसके बलिष्ठ हाथों ने मुझे जकड़ लिया। उसका लण्ड मेरी चूत में गरम गरम लावा भरने लगा… तभी मेरा शरीर भी गर्मी पा कर लहरा उठा और मेरा रज भी छूट पड़ा। मैंने अनवर को धक्का मार कर पीठ पर से उतार दिया और

फ़िरोज के ऊपर लेट कर सुस्ताने लगी। तभी अनवर अपना मुठ मार कर अपना वीर्य मुझ पर उछालने लगा। मेरा चेहरा और बदन उसके वीर्य से भीग उठा……

फ़िरोज़ ने मुझे अलग कर दिया और बाथ रूम में चला गया। मैंने भी सुस्ती छोड़ी और उठ खड़ी हुई, नसीम सो चुकी थी, उसको उठाया और हम दोनों ने अपने चूतडों और चूत के आस पास लगे वीर्य को धो कर साफ़ कर लिया। थोड़ा सा पानी से मैंने अपनी पीठ और सामना साफ़ कर लिया।

“शब्बा खैर… मेरे जानू…” फ़िरोज़ और अनवर ने मुसकरा कर हमें विदा किया। पर नसीम मुड़ मुड़ कर चुदासी आंखों से उन्हे निहार रही थी… मुझे हंसी आ गई…

“अरे कल फिर और चुदा लेना… अब चल साली, नहीं तो सुबह हो जायेगी…”

हम दोनों भारी मन से चुदने की इच्छा लिये दरवाजे से दोनों को एक बार और देखा और अंधेरे में कदम बढ़ा दिये…। Antarvasna

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