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हाय ! मेरा नाम अजय है Sex Stories और मेरी उम्र 21 साल है, मैं मुम्बई में रहने वाला एक सुन्दर लड़का हूँ। मैं अन्तर्वासना के माध्यम से अपनी एक सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ।
मेरा मन कामुक कथाएं पढ़ने का बहुत करता है इसलिए मैं बहुत सारी सेक्स-कहानियों की किताबें अपने साथ रखता हूँ।
अब कहानी शुरू करता हूँ..
यह करीब एक साल पहले की बात है, मेरी कक्षा में एक सेक्सी लड़की ने प्रवेश लिया। वो एक सेक्सी शरीर की मालकिन थी।
सारे लड़के उसे देखते तो उनके मुंह से आह निकलती थी।
उसके स्तन तो ऐसे थे कि ब्रा में समाते ही नहीं थे और हमेशा उसके अन्दर चहकते रहते..और काजल की टाईट जींस के अन्दर उसकी तरबूज़ जैसी गाण्ड ऐसी लगती थी कि अभी इसकी चुदाई कर दूँ…
क्लास के सभी लड़के काजल के पीछे पड़े थे..मैं एक शर्मीला लड़का हूँ इसलिए मैं दूर रहता था। लेकिन क्लास में होने की वज़ह से हमारी दोस्ती हो गई। लेकिन मैं भी उसे चोदना चाहता था और मुझे मौका मिल ही गया।
वो मेरे घर की तरफ़ ही रहती थी, इस वज़ह से वो मेरे साथ ही आती जाती थी। मैं रिक्शे में हमेशा हमेशा चांस मारता था, कभी उसके बूब्स पे हाथ मार देता तो कभी मज़ाक में उसकी गाण्ड पे हाथ मार देता। वो भी कुछ नहीं बोलती थी।
बारिश का मौसम था। उस दिन बारिश की वज़ह से हम काफ़ी भीग चुके थे। गीले कपड़ों में उसके स्तन पूरे आकार में दिख रहे थे और मेरा लण्ड खड़ा हो गया था।
मैंने उसे आज ही चोदने का मन बना लिया था।
वो मुझे अपने घर ले गई। हम दोनों को ठण्ड लग रही थी, वो अपने कपड़े बदल कर आई, तब तक मैं अपना शर्ट निकाल चुका था..
काजल जैसे ही बाहर आई तो मैं उसे पकड़ के किस करने लगा। वो कुछ समझी ही नहीं पाई या फ़िर ना समझने का नाटक कर रही थी।
मैं किस करते करते उसके बूब्स को दबाने लगा, वो कुछ नहीं बोली।
मेरी हिम्मत और बढ़ गई और मैंने उसकी ब्रा के अन्दर हाथ डाल दिया। अब तक वो भी पूरी आपे से बाहर हो चुकी थी, उसने मेरा लण्ड पकड़ लिया, मैं समझ गया कि काजल को मेरा लण्ड चाहिए।
मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए और उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिए। मैं अपना लण्ड उसके मुँह में देने लगा, पहले तो उसने मना किया लेकिन बाद में वो राज़ी हो गई। वो मेरे लण्ड को लोलीपोप की तरह चूसने लगी।
हम दोनों 69 की पोज़िशन में आ गए। मैं उसकी गुलाबी चूत को जीभ से चाटने लगा। उसके मुंह से ..ऊह या पंकज़ याह ऊऊह प्लीज़ चोदो मुझे… मुझे तुम्हारा… बड़ा सा लण्ड चाहिए ओ येस की आवाज़ निकाल रही थी।
हम दोनों बेकाबू हो गए और एक दूसरे के मुँह में झड़ गए।
15 मिनट तक हम एक दूसरे के ऊपर लेटे रहे, उसके बाद वो फ़िर से चुदाई के लिए तैयार हो गई, लेकिन इस बार जीभ से नहीं मेरे लण्ड से चुदाने के लिए तैयार थी।
मैं उसे कुतिया स्टाईल में चोदने के लिए तैयार हो गया लेकिन वो पहली बार चुदाने जा रही थी इसलिए उसकी चूत काफ़ी टाईट थी।
मैंने उसे क्रीम लाने को बोला, और उस पे लगाया, फ़िर एक जोर का झटका दिया और वो चिल्लाने लगी- निकालो-निकालो !
फ़िर मैं रुक गया, थोड़ी देर बाद उसका दर्द कम हुआ और वो भी मचलने लगी।
फ़िर मैंने और एक झटका दिया और मेरा लण्ड पूरी तरह उसकी चूत के अन्दर हो गया और उसके मुँह से अजीब आवाज़ें निकलने लगी- ओह अजय ! प्लीज़ मेरी चूत को फ़ाड़ दो प्लीज़ ओ ओह यस… मैं ज़न्नत में हूँ… तुम पहले क्यों नहीं मिले..आई लव यू पंकज़ !
और मैं तो जैसे स्वर्ग में था, अब हम दोनों पूरे जोर से एक दूसरे को चोद रहे थे।
अब हम दोनों झड़ने वाले थे, वो बोली-अन्दर मत गिराना… मैं तुम्हारे पानी को पीना चाहती हूँ..
मैंने बाहर निकाल के उसके मुंह में गिरा दिया… वो सारा पानी पी गई… उसके बाद हम दोनों ने अलग अलग ढंग से दो बार और चुदाई की।
वो मेरे साथ एक साल रही, लेकिन अब वो कोलकाता चली गई है.. और मैं अकेला पड़ गया हूँ..
मेरी कहानी कैसी लगी, मुझे मेल करें! Sex Stories
मेरा नाम अभय है। मैं Antarvasna दिल्ली का रहने वाला हूँ। मेरी उम्र २० साल की है। मैं एक बड़ी कंपनी मैं जॉब करता हूँ। मेरा वेतन २५००० रुपए महीना है। मेरा दिल्ली में अपना फ्लैट भी है और मैं अकेला रहता हूँ। मुझे घर पर काम करने वाली एक नौकरानी चाहिये थी जो मेरे घर का सारा काम करे। इसके लिए मैंने अख़बार में विज्ञापन छपवा दिया। कुछ दिनों बाद मेरे यहाँ कई लड़कियाँ और औरतें आईं। मैंने कई से बात करने के बाद एक औरत पसंद किया जो ३५ साल की थी। लेकिन वो अभी जवान दिख रही थी। वो अकेली थी और उसका पति नहीं था। मैंने उसे काम पर रख लिया।
अगले दिन से वो काम पर आ गई और मैंने उसे एक कमरा दे दिया। उस कमरे में मैंने टीवी रखवा दिया। मैंने उसे बाज़ार से चिक्केन लाने को कह दिया। वो चिक्केन लेकर आई, तो मैंने उसे बट्टर-चिक्केन और रोटी बनाने को कहा। उसने खाना बनाने के बाद मेज़ पर खाना सजा दिया। इसके बाद हम दोनों मिल कर खाना खाने लगे। मैं उससे उसके बारे में पूछने लगा। वो अपने बारे में सब बातें बताने लगी। इसके बाद यह सिलसिला चलता रहा।
मेरी नौकरानी साड़ी पहनती थी, जो मुझे नहीं पसंद था। मैं बाज़ार से उसके लिए अच्छे कपड़े और नाइट-ड्रेस लेकर आया और उसको पहनने को दे दिया। उसको शुरु-२ में परेशानी हुई, लेकिन बाद में उसको ठीक लगने लगा। वो खाना अच्छा बनाती थी। इस बात से मुझे बहुत ख़ुशी मिलती थी। अब वो मेरे से घुल-मिल गई। इतवार को मैंने उसे मार्केट घूमाने का प्लान बनाया। मैं उसके लिए बाज़ार से अच्छी साड़ी खरीद कर लाया। वो तैयार हो गई, इसके बाद हम दोनों मिल बाज़ार घूमने निकल गये। मैंने उसके लिए बाज़ार से जींस, टी-शर्ट, घड़ी, सैंडल, और भी चीजें ख़रीदी। इसके बाद हम दोनों ने पिज्जा हट में जाकर पिज्जा खाया।
हम दोनों थक गये थे। खास कर वो बहुत थक गई थी। मैंने उससे पूछा- भूख लगी है?
तो वो बोली- भूख लगी है लेकिन मेरे शरीर में बहुत दर्द हो रहा है।
मैंने बोला- कोई बात नहीं ! मैं होटल से खाने का आर्डर दे देता हूँ !
इसके बाद मैंने खाने का आर्डर दे दिया और उसके पास जाकर बैठ गया और उससे पूछने लगा- तुम्हारे शरीर में बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है?
वो बोली- हाँ।
इसके बाद मैं उसका पैर हाथ में लेकर दबाने लगा। उसने घबरा कर पैर हटा लिया और कहने लगी- आप ये क्या कर रहे हैं?
मैंने बोला- मैं तुम्हारा शरीर दबा रहा हूँ क्यूंकि तुम्हारे शरीर में दर्द हो रहा हैं।
वो बोली- आप मेरे मालिक हैं और आप मेरा शरीर दबायेंगे !
मैंने कहा- कोई बात नहीं, तुम्हारे शरीर का दर्द मिटना जरूरी है और इसमें मालिक और नौकर की कोई बात नहीं।
इसके बाद मैंने उसका शरीर दबा कर ठीक कर दिया। फिर थोड़ी देर बाद खाना आ गया, और हम मिल कर खाना खाने लगे।
कुछ दिनों बाद मैं उसको ब्यूटी-पार्लर लेकर गया और ब्यूटी -पार्लर में उसका मेक-अप, बॉडी-मसाज़, हेयर-स्टाइल और बहुत कुछ करवा दिया। इसके बाद वो गज़ब की लग रही थी। फिर घर पर आये और मैंने उसे जींस और टी-शर्ट, सैंडल, घडी, चश्मा पहनने को बोला। वो मना करने लगी क्यूंकि वो उसे पहली बार पहन रही थी। मेरे बहुत जोर देने पर उसन पहना। इसके बाद वो बहुत अच्छी लग रही थी। मैंने उसे हमेशा पहनने के लिए बोल दिया। अब वो हमेशा जींस पहनती थी। फिर कुछ दिनों बाद वो बीमार पड़ गई। मैंने उसका इलाज़ हॉस्पिटल में करवाया। फिर कुछ दिनों बाद वो ठीक हो गई। अब वो मुझे पसंद करने लगी थी। मैं भी उसे पसंद करने लगा।
फिर कुछ दिनों बाद उसका जन्मदिन आया। मैं बर्थडे का सारा इंतजाम करने लगा। मैं उसे सरप्राइज़ देना चाहता था। मैंने घर को अच्छी तरह से सजवाया। केक और खाने का आर्डर दे दिया। शाम को मैंने उसे हैप्पी बर्थडे बोला। और मैंने उसे एक गले का सोने हार दिया। वो हार को देखकर खुश हो गई और मेरे गले से लिपट गई। मुझे अच्छा लगा। फिर थोड़ी देर बाद हम दोनों ने ड्रिंक लिया। पहले तो वो मना कर रही थी, फिर मेरे कहने पर उसने थोड़ी सी ले ली। इसके बाद मैंने उसे डांस करने के लिए बोला। तो फिर वो मना करने लगी। दुबारा मेरे कहने पर वो मेरे साथ डांस करने लगी। बहुत देर तक हम नाचते रहे। इसके बाद हम दोनों खाना खाया और सो गये।
कुछ दिनों बाद एक दिन वो नहा रही थी। उसका तौलिया बाहर छूट गया था। उसने मेरे से तौलिया मांगा तो मैंने उसे तौलिया देने के लिए दरवाज़ा ख़टखटाया तो उसने दरवाज़ा खोला। मैंने अंदर हाथ डाल कर तौलिया दिया तो उसने झटके से मेरा हाथ पकड़ कर अंदर खींच लिया। अंदर मैंने उसको देखा तो पागल हो गया, वो सिर्फ ब्रा और पैन्टी में थी। मैं तो सिर्फ उसे देखता रह गया। फिर अचानक होश आया कि यह गलत है।
मैंने उससे बोला- यह गलत है, मैं आपके साथ ऐसा कुछ नहीं कर सकता।
वो बोली- देखो अभय, मैं बहुत प्यासी हूँ, तुम मेरी प्यास बुझा दो। मैं तुम्हारा एहसानमंद रहूंगी। मैं तुमसे प्यार करती हूँ और तुम भी तो मुझसे प्यार करते हो।
मैंने बोला- यह गलत है, अगर आपको कुछ हो गया तो।
तो वो बोली- मुझे कुछ नहीं होगा। बस तुम मेरी प्यास बुझा दो।
मैं बोला- ठीक है।
इसके बाद मैं उसके शरीर पर साबुन मलने लगा। पहले मैंने साबुन को हाथ से शुरु किया, इसके बाद उसकी चूची पर लगाया। उसके शरीर में करंट दौड़ गया। फिर मैंने साबुन को उसको पेट पर लगाते हुए उसके पैर पर लगाया। फ़िर पीठ पर ! इसके बाद उसकी बुर में साबुन लगाया। फिर वो मेरे को साबुन लगाने लगी। जैसे-२ मैंने उसको साबुन लगाया था, वैसे-२ वो मेरे को साबुन लगाने लगी। फिर मैंने उसका शरीर अपने हाथ से मला। उसके बाद उसको नहलाया, उसने मेरे को नहलाया।
फिर मैंने उसका शरीर तौलिये से पौंछा, उसको ब्रा, पैन्टी, जींस टी-शर्ट पहनाई। इसके बाद मैंने उसको चूम लिया। फिर थोड़ी देर बाद वो खाना बनाने लगी, मैं भी उसका साथ देने लगा। अगले दिन रात को खाना खाने के बाद हम दोनों ऊपर छत पर बातें करने लगे। फिर थोड़ी देर बाद हम दोनों सोने के लिए जाने लगे। मैंने बोला- आज के बाद हम दोनों साथ में सोयेंगे।
वो खुश हो गई। इसके बाद हम दोनों साथ में सो गये। आधी रात बाद वो जगी और मेरा लंड सहलाने लगी। मेरी नींद खुल गई। वो डर गई।
फिर मैंने उसकी आँखों में देखते हुए उसे चूमने के लिए मैंने अपना ओंठ उसके ओंठ पर रख दिए। वो सिहर गई। बहुत देर तक हम दोनों अपने ओंठों को एक दूसरे से चिपकाते हुए किस करते रहे। मैंने अपनी जीभ उसकी जीभ से भिड़ा दी। इसके बाद में उसका नाईट-ड्रेस उतार दिया। मैं उसका शरीर देखता रह गया। उसकी बड़ी-२ चूची ! मज़ा आ गया।
मैं उसकी चूची अपने हाथ से दबाने लगा। वो सिसकारी भर रही थी। मैं अपने मुँह में उसकी चूची चूसने लगा। एक हाथ से मैं उसकी एक चूची दबा रहा था और मुँह से दूसरी चूची का रसपान कर रहा था। फिर मैंने उसके शरीर को जीभ से चाटा। जीभ से चाटते-२ मैंने अपनी जीभ उसकी बुर में डाल दी। वो सिहर गई और उसके मुँह से आवाज़ निकल गई। मैं अपनी जीभ उसकी बुर में डाल कर खूब हिला रहा था। वो आवाज़ निकाल रही थी। फिर थोड़ी देर में उसका रस निकल गया और मैं उसका सारा रस पी गया।
इसके बाद वो मेरा लंड चाटने लगी। मुझे भी बड़ा मजा आ रहा था। बहुत देर तक उसने लण्ड चूसा। इसके बाद मैंने अपना वीर्य उसके मुँह में छोड़ दिया। उसने सारा वीर्य पी लिया। इसके बाद मैं उसकी गांड पर काटने लगा, जीभ से उसकी गांड चाट रहा था। फिर उन्गली डाल कर उसकी गांड के छेद को बड़ा करने लगा। इसके बाद मैं अपना लंड उसकी गांड में डालने लगा। वो चिल्ला उठी और बोली- बहुत दर्द हो रहा है।
फिर मैं उसके ओंठ अपने ओंठ से चाटने लगा। फिर मैंने धीरे से धक्का लगाया। वो फिर चिल्ला उठी। लेकिन इस बार मैंने रहम नहीं खाया और जोर से धक्का दिया। वो इतनी जोर से चिल्लाई कि रोने लगी। उसके आंख से आँसू आने लगे। मैं उसके ओंठ को किस करने लगा। फिर थोड़ी देर में वो शान्त हो गई। फिर मैं धीरे-२ अपना लंड अंदर बाहर करने लगा। उसको मज़ा आने लगा । मैं उसे किस करते हुए उसकी गांड मार रहा था। कुछ देर बाद मैं झड़ गया। वो मेरा लंड चूसने लगी। फिर थोड़ी देर बाद मेरा लंड टाइट हो गया। मैं अपनी जीभ उसकी बुर में डाल कर चूसने लगा। फिर मैंने जीभ निकला और अपना लंड उसकी बुर में डालने लगा। आधे घंटे तक उसकी बुर मारता रहा। फिर हम दोनों झड़ गये। फिर सारी रात हम दोनों अपना लंड और बूर एक दूसरे में डाल सो गये।
अब हम हर रोज़ नई स्टाइल में सेक्स करते हैं। मैं उसे अब अपनी पत्नी मानता हूँ और वो मेरे को पति। बाय ! Antarvasna
आज मैं आपको पहली बार hindi sex stories गाण्ड के अलावा कोई नया किस्सा सुना रहा हूँ।
बात 2006 की है मैं कानपुर में ही रहता और नौकरी करता था। मैंने गोविन्द नगर में एक फ्लैट किराये पर लिया था जिसमें आगे की तरफ माकन मालिक और पीछे के रास्ते से मेरा फ्लैट था जो कि दो कमरों का अच्छा सेट था। मैं कब आऊँ, कब जाऊँ किसी को कोई मतलब नहीं था। पीछे के दरवाज़े की एक चाभी भी मेरे पास रहती थी। कभी कभी मकान मालिक का बेटा ही उस तरफ आता था जो मुझसे काफी बड़ा था। या कभी मकान मालिक अपने पोतों के साथ आते थे।
इस मकान को लेने के बाद मुझे ऐसा लगा कि गलती कर दी क्यूंकि कोई भी माल नज़र नहीं आ रहा था। कुछ एक जो थे वो काफी दूर रहते थे और कोई जुगाड़ बन नहीं रहा था। करीब डेढ़ महीने बाद एक भाभी जी करीब 30 साल की होगी, सामने के मकान में आई। उनके परिवार में 3 बच्चे और उनके पतिदेव थे। बच्चे भी ठीक ठीक उम्र के थे एक लड़की करीब 10 साल की, एक लड़का 6 साल का और एक 3 साल का।
पहले कुछ दिन तो मैंने ध्यान नहीं दिया और अपने ऑफिस आता जाता रहा लेकिन एक दिन शाम को जब मैं चाय पी रहा था तो देखा कि भाभी जी छत पर खड़ी हैं और घूर घूर कर मुझे देख रही हैं।
मैं थोड़ा सा झेंप गया लेकिन सोचा कि शायद नए हैं इसीलिए देख रही होंगी कि कौन कौन आस पास रहता है। पर फिर ये ही मंज़र रोज रोज होने लगा वो छत पर आती और घूरती रहती थी।
वैसे मेरी और उनकी खिड़की भी लगभग आमने सामने ही थी और दरवाज़ा भी, लेकिन मेरा फ्लैट उनके फ्लैट से थोड़ा ऊंचाई पर बना था तो मैं तो आराम से देख सकता था कि उनके कमरे में क्या हो रहा है पर वो नहीं देख सकती थी। अगर मैं खिड़की पर खड़ा होता तभी नज़र आता।
उनके पति जो करीब 44-46 साल के थे दरअसल एक सरकारी विभाग में थे और सुबह जल्दी जाते थे और शराब के शौकीन थे इसलिए रात को देर से ही आते थे।
एक दिन मकान मालिक को कुछ काम था और उनका बेटा भी घर पर नहीं था, तो उन्होंने मुझसे कहा- बेटा तुम्हारे सामने जो नए लोग आए हैं उन्हें जरा ये सरकारी पेपर दिखा लाओ और पूछो कि इसमें क्या कर सकते है।
मैंने कहा- ठीक है !
और पेपर लेकर मैं उनके घर गया घंटी बजाई तो भाभी जी ने दरवाजा खोला और अन्दर बुलाया। मैंने भाई साहब यानि उनके पति के बारे में पूछा तो बोली कि वो तो देर से आएंगे, मैं उन्हें ही बता दूँ !
मैंने पेपर दिखा कर जानकारी ली, उन्हें जो कुछ मालूम था मुझे बताया और कहा कि मैं रात को उनके पति से मिलकर पूरी बात समझ लूँ।
मैं उठने लगा तो बोली- बैठिये न ! आप तो पड़ोसी हैं !
फिर वो चाय नाश्ता वगैरह लाई और बातें करने लगी।
वो बोली- मैं तो इतने दिनों से आपको आते जाते देखती हूँ, पर आप कभी इधर देखते ही नहीं।
मैं क्या कहता, मैंने कहा- बस अपने ही काम में व्यस्त रहता हूँ !
लेकिन अन्दर ही अन्दर मैं जानता था कि सच्चाई क्या है। दरअसल भाभी जी बड़ी सेक्सी थीं, वो हलकी सांवली इकहरे बदन की थी, साथ ही एक दम कसा हुआ ब्लाउज पहनती थी, जिससे उनके गोल गोल उभार नज़र आते थे और मेरे मकान मालिक के बेटे की नज़र भी उन पर थी। साथ ही साड़ी का पल्लू भी लटकता था जिससे सब कुछ साफ था, पर मैं चुप ही रहा।
बात बात में उन्होंने मेरा नाम पूछा और मैंने उनका !
तो उन्होंने बताया कि उनका नाम सुगंधा है और उन्होंने यह भी कहा कि मैं शाम को चाय उनके यहाँ ही पिया करूँ और उनके बच्चों को पढ़ा भी दिया करूँ !
तो मैंने कहा- पढ़ाना तो मुश्किल है क्यूंकि मेरे पास फिक्स टाइम नहीं है पर जब भी जरुरत हो बता देना, मैं आकर उन्हें मदद कर दूंगा।
धीरे धीरे वो रोज ही मिलने लगी। जब मैं शाम को ऑफिस से लौटता तो वो सड़क पर ही खड़े होकर बात करने लगती।
लोगों की नज़र में भी कुछ गलत नहीं था क्यूंकि मैं अक्सर उनके बच्चो को सड़क पर ही किताब से सवाल समझा देता या वो मेरे पास आकर पूछ लेते, और मेरे और भाभी के बीच करीब 8-9 साल का अंतर भी था।
एक दिन मैं उनके घर गया तो वहां कोई नहीं था। अन्दर तक देखने पर कोई नहीं दिखा तो मैंने आवाज़ दी- भाभी जी !
फिर भी कोई जवाब नहीं आया मुझे लगा कि शायद छत पर होंगी और मैं लौटने लगा और फिर आवाज़ दी तो बोली- इधर आ जाओ ! मैं यहाँ हूँ !
मैं उस तरफ गया तो कोई नहीं दिखा। अचानक से उनके बाथरूम का दरवाज़ा खुला और मैं सकपका गया। वो बिल्कुल गीले बदन नहाई हुई मेरे सामने खड़ी थी और बदन पर सिर्फ एक झीने से कपड़े की चुन्नी थी।
मैं घूमने लगा तो बोली- शरमा गए क्या शर्मा जी? लगता है तुमने आज तक कोई नंगी लड़की या औरत नहीं देखी !
बात भी सच थी कि मैंने गांड तो बहुत मारी थी और नंगी लड़कियाँ किताबों और इन्टरनेट पर देखी थी पर सामने कोई नहीं।
मैंने कहा- शर्माने की ही बात है, मुझे माफ़ कीजिये, मुझे पता नहीं था, मैं बाहर इन्तज़ार कर रहा हूँ !
वो बोली- इन्तज़ार में कहीं गाड़ी न छूट जाये ! और मेरा हाथ पकड़ लिया।
उन्हें देख कर मेरे लंड से पानी चूने लगा था। वो बोली- जब मैं लड़की होकर नहीं शरमा रही, तो तुम क्यों शरमा रहे हो !
और उन्होंने मुझे अपने करीब घसीट लिया। अब मेरे और उनके बीच में सिर्फ 6 इंच की दूरी थी। सर नीचे करता तो निगाहें उनकी चुचियों पर जाती और ऊपर करता तो उनकी आँखों की हवस मुझे खाए जा रही थी। मेरा लण्ड भी तन रहा था और धीरे धीरे उनकी नाभि से टकराने लगा।
उसे देख कर वो बोली- तुम शरमा रहे हो पर तुम्हारा ये नहीं शरमा रहा ! देखो कैसे मेरे बदन को सलामी दे रहा है !
और उन्होंने मेरा लंड पकड़ लिया। फिर तो ऐसा लगा कि अभी झड़ जायेगा। मैंने बड़ी मुश्किल से अपना लण्ड छुड़ाया और उनसे पूछा- आपको क्या चाहिए?
वो बोली- वही जो अभी पकड़ा था।
मैंने कहा- मेरे पास कंडोम नहीं है !
वो बोली- कोई बात नहीं, डरो मत ! मैं भी कोई ऐसी वैसी नहीं हूँ सिर्फ अपने पति से ही खुश हूँ, लेकिन तुम्हें देख कर मेरे मन में फिर से चुदाई के बादल उमड़ने घुमड़ने लगे हैं और मैं यह भी जानती हूँ कि तुम भी छुप छुप कर अपने खिड़की से मुझे देखते हो।
जब बात खुल ही गई थी तो मैंने भी कह दिया- हाँ, आप मुझे अच्छी लगती हो !
उन्होंने मुझे जोर से भींच लिया और मेरा सर झुकाकर अपनी चुचियों में दबा लिया। मैंने भी उनकी चूचियां चूसनी चालू कर दी।
तो वो बोली- यहीं करोगे या बिस्तर पर?
फिर मैं उनके बेडरूम में गया, जहाँ उन्होंने चुन्नी हटा दी और मुझे नंगा करने लगी। वैसे भी उन्हें ज्यादा दिक्कत नहीं हुई क्यूंकि मैंने एलास्टिक वाला निक्कर और टी-शर्ट पहनी थी। उसे उतार कर उन्होंने मेरे कच्छे पर भूखी शेरनी जैसी निगाह डाली और एक ही बार में उसे नीचे कर दिया। मेरा लंड तन चुका था। उन्होंने तुंरत उसे चूसना शुरू किया और 2 मिनट बाद मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ, तभी मैंने उसे निकाल लिया।
वो बोली- क्या हुआ? फ़ुस्स हो गए क्या?
मैंने कहा- नहीं ! हो जाऊंगा !
वो बोली- कोई बात नहीं ! मुझे मालूम है कि तुम्हारा लण्ड अभी कुंवारा है इसीलिए मैं तुम्हें प्रैक्टिस करा रही हूँ जिससे तुम्हारी बीबी को दिक्कत न हो।
वो फिर चूसने लगी और मैंने उनके मुँह में ही सारा माल टपका दिया और वो बड़े प्यार से उसे निगल गई।
अब तो मेरा पौने सात इंच का लण्ड सिकुड़ कर सिर्फ ढाई इंच का ही रह गया था तो मैं शरमाने लगा। वो बोली- शरमाओगे ही या कुछ और भी करोगे?
मुझे लगा कि अब तो इसकी चूत का भोसड़ा बनाना ही पड़ेगा। अब यह वो वक़्त था जब मेरा गांड मारने का अनुभव काम आता।
मैंने उसकी चुचियों को चूसना शुरू किया और उनसे खेलने लगा। पहले दाईं वाली फिर बाईं वाली और कभी कभी दोनों ! चूसते दबाते करीब आधा घंटा हो गया था। उसकी दोनों चुचियाँ सांवले से लाल रंग की हो गई थी और चूचुक ऐसे लग रहे थे जैसे उनसे अभी खून टपक जायेगा। वो बोली- क्या हाल कर दिया है तुमने इनका !
मैंने कहा- सॉरी ! अभी नया नया हूँ न !
तो वो मुस्कुरा उठी और फिर मेरा लंड चूसने लगी। अब तो मेरा लंड अखाड़े में खड़े दारा सिंह जैसा हो गया था। सारी नसें खून से भरी थी और लग रहा था कि अभी शायद पौने सात से बढ़कर 10 इंच का हो जायेगा। आखिर पहली बार चूत का स्वाद जो मिल रहा था। वो मेरे लंड को मुँह में लेकर अन्दर बाहर कर रही थी। कभी कभी मैं उसका सर दबा देता तो वो उसके गले के अन्दर तक धंस जाता और वो खांसने लगती।
करीब 10 मिनट बाद मैंने कहा- अब मेरी बारी !
मैंने उसकी टांगे फैलाईं और किताबों में पढ़े हुए अनुभव आजमाने लगा। उसकी चूत पर हलके हलके जीभ फिराने लगा और फिर अन्दर बाहर करने लगा। उसकी भगनासा फूल कर मोटी हो गई थी। उसकी चूत को दस मिनट तक ऐसा चूसा कि वो सूज गई और अचानक से भाभी अपनी कमर उचकाने लगी, ऊपर-नीचे, ऊपर-नीचे !
मैंने कहा- क्या कर रही हो ! चूसने तो दो !
वो बोली- बहुत चूस चुके, अब जरा असली काम करो !
तो मैंने अपने लंड को सहलाया और सुपाड़े के ऊपर से खाल को पीछे सरका कर उनकी चूत के मुँह पे रख दिया। उनकी चूत एक दम कुंवारी लड़की जैसी टाइट थी, वो बोली- डाल दो !
क्यूंकि अब वो बहुत गरम थी, लेकिन मैं नहीं चाहता था कि वो इतनी जल्दी झड़े। मैं उनकी चूत के ऊपर अपना लंड घिसने लगा और 1 मिनट बाद सिर्फ सुपाड़ा ही अन्दर सरकाया तो वो कराह उठी। मैंने कहा- तुम्हें तो अनुभव है, फिर क्यों चिल्ला रही हो?
वो बोली- करीब तीन साल से एक भी बार सेक्स नहीं किया है, जबसे छोटा बेटा हुआ है, क्यूंकि कम उम्र में ही शादी हो गई थी और तब मैं 18 साल की थी और तुम्हारे भैया करीब 34 साल के ! गाँव की शादी थी, उन्होंने तब चोदा था जम के। फिर पहला बच्चा होने के बाद हमारे बीच में सम्बन्ध न के बराबर ही बने सिर्फ गिनती के। शराब के कारण मैं उन्हें मुँह नहीं लगाती और कभी कभी वो लंड खड़ा करने की गोली खाकर आते थे तब चुदाई होती थी। लेकिन अब जब वो करीब तीस की थी और भैया हो चुके थे। 44-45 के तो भैया के लंड में दम नहीं रह गया था और वो सही से खड़ा भी नहीं होता था।
मैंने कहा- सारी कहानी अभी बता दोगी या चुदवाओगी भी?
वो बोली- आराम आराम से करो !
फिर तो मैंने उस कुंवारी जैसी चूत को कुंवारा जैसा ही चोदा।
धीरे धीरे 5-7 मिनट हलके से ही सिर्फ सुपाड़ा ही अन्दर बाहर करके पहले रास्ता बनाया फिर एक हल्का झटका देकर करीब आधा लंड अन्दर किया तो उनके आँखों में संतुष्टि नज़र आई और फिर स्पीड बढ़ाई और करीब 2 मिनट बाद एक ही झटके में अपनी फतह का झंडा जैसे ही उनकी चूत की जमीन पे फहराया तो उनकी आँखों से आंसू निकालने लगे, वो बोली- बाहर करो !
मैंने कहा- भाभी अब तो ये बोफोर्स तोप झंडा फहरा कर ही वापस आयेगी !
भाभी की आँखों से आंसू बह रहे थे जो उनकी चूत के कुंवारे होने का सुबूत दे रहे थे। तभी भाभी की आँखों के आंसू थमने लगे और और वो जोर जोर से सिसकियाँ लेने लगी। अचानक से उन्होंने मुझे बड़ी जोर से पकड़ा और चूत उछालने लगी और मुझसे लिपट गई।
मैंने कहा- क्या हुआ भाभी?
वो बोली- बस, अब रुक जाओ !
मैंने कहा- वो तो ठीक है लेकिन अभी तोप में गोले बाकी हैं ! इन्हें कहाँ करूँ?वो बोली- मेरे मुँह में कर दो !
मैंने कहा- वो तो हो चुका, अब जरा कुछ और !
वो बोली- क्या?
तो मैंने उनकी गांड में ऊँगली डाल दी।
वो बोली- नहीं !
तो मैंने कहा- फिर मैं गुस्सा हो जाऊंगा और दोबारा फिर ये कभी नहीं होगा।
आखिर वो भी मजबूर थी और मान गई।
अब मैंने उनकी टांगे अपने कन्धों पे रक्खी और एक ही बार में पूरा लंड उनकी गांड में पेल दिया। उनकी तो गांड फट गई, वो चिल्लाने लगी जैसे मैं उनका गला दबा रहा था।
मैंने कहा- चिल्लाओ मत ! और उनका मुँह अपने हाथ से बंद किया और 2-3 मिनट तक अपने लंड वैसे ही उनकी गांड में पड़े रहने दिया। फिर जब वो थोडा संभली तब मैंने फिर से चोदना शुरू किया और 3-4 मिनट में ही भाभी अपनी गांड भी चूत की ही तरह उछालने लगी।
फिर मैं भी थक गया था, स्पीड बढा दी और कुछ ही देर में मैंने उनके अन्दर अपना वीर्य छोड़ दिया। भाभी अब काफी संतुष्ट थी। फिर मैं भी अपने लंड पर इतरा रहा था और भाभी भी उसकी मर्दानगी की प्रशंसा कर रही थी।
फिर मैं घर आ गया और इसी तरह कई बार जब वो अकेले में होती तो उन्हें जमकर चोदा, कभी कुत्ते वाली स्टाइल में तो कभी 69 पोजीशन में और जो भी उलटी सीधी पोजीशन किताबों में दिखी उसमें ! क्यूंकि वो तो मुझे प्रैक्टिस करवा रही थी और मैं उनका शिष्य था।
फिर एक बार भाभी को पार्क में भी चोदा और एक बार नाव में !
इसकी कहानी मैं आपको आगे सुनाऊंगा।
मेरी सभी कहानियाँ मेरी जिन्दगी में मेरे साथ हुई सत्य घटनाओ पर आधारित हैं। अगर आपको मेरी कहानी पसंद आई तो मुझे इ-मेल कीजिये। hindi sex stories
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