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Massage Girl in Chitrakoot: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Chitrakoot who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Chitrakoot that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Chitrakoot massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Chitrakoot who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Chitrakoot massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Chitrakoot massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Chitrakoot who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Chitrakoot employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Chitrakoot helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Chitrakoot

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Chitrakoot at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

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Antarvasna

दोस्तो, आप ही की तरह मैं भी अन्तर्वासना का एक Antarvasna रेगुलर पाठक हूँ, मैंने अन्तर्वासना में बहुत सी कहानियाँ पढ़ी हैं.
इन कहानियों को पढ़ कर मैंने सोचा क्यूँ न मैं भी आपके साथ अपने कुछ अनुभव शेयर करूं!

मैं अपनी कॉलेज की छुट्टियों में अपनी सबसे छोटी चाची के घर गया हुआ था.
मेरे चाचा जी आर्मी में थे साल में सिर्फ़ कभी कभार ही घर आया करते थे. उन दिनों में सेकंड इयर के एक्जाम दे चुका था. इसलिए मेरी जवानी अपने सुरूर पर थी.

मेरी चाची को अभी कोई बच्चा नहीं था, उनकी शादी को अभी दो साल ही हुए थे.
लेकिन चाचा शादी से पहले ही आर्मी में थे इसलिए चाची के साथ ज्यादा टाइम साथ नहीं रह पाए थे.

पहले मैंने कभी अपनी चाची को ग़लत नजर से नहीं देखा था.

लेकिन एक दिन चाची बाज़ार गई हुई थी कि तभी अचानक बारिश शुरू हो गई.

मैं टी वी पर मूवी देख रहा था, मूवी में कुछ सीन थोड़े से सेक्सी थे. जिन्हें देख कर मन के ख्याल बदलना लाजमी था.
उस टाइम मेरे मन में बहुत उत्तेजना पैदा हो रही थी. मैं धीरे धीरे अपने लंड को सहलाने लगा.

तभी डोर बेल बजी, मैं अचानक घबरा गया, मुझे लगा जैसे किसी ने मुझे देख लिया हो!
लेकिन मुझे याद आया कि घर में तो कोई है ही नहीं… मैं बेकार में डर रहा था.

मैंने जाकर दरवाजा खोल दिया.

बाहर चाची खड़ी थी, उनका बदन पूरी तरह पानी से भीगा हुआ था और वो आज पहले से भी ज्यादा जवान और खूबसूरत लग रही थी.

मैंने दरवाजा बंद कर दिया और जैसे ही पीछे मुड़ा तो मेरी नज़र चाची की कमर पर पड़ी जहा पर उनकी गुलाबी साड़ी के बलाउज से उनकी काले रंग की ब्रा बाहर झांक रही थी.

चाची ने सामान सोफे पर रखा और मुझसे बोली- सावन, मेरा पूरा बदन भीग चुका है इसलिए तुम मुझे अंदर से एक तौलिया ला दो?

मैं तौलिया ले आया तो चाची मुस्कुराते हुए बोली- सामान हाथों में लटका कर लाने से मेरे हाथ दर्द करने लग गए हैं. इसलिए तुम मेरा एक छोटा सा काम करोगे?
मैंने पूछा- क्या काम है?
चाची बोली- जरा मेरे बालों से पानी सुखा दोगे?
मैंने कहा- क्यूँ नहीं!

चाची सोफे पर बैठ गई.
मैंने देखा बालों से पानी निकल कर उनके गोरे गालों पर बह रहा था.

मैं चाची के पीछे बैठ गया और उनको अपने पैरों के बीच में ले लिया और बालों को सुखाने लगा.

चाची का गोरा और भीगने के बाद भी गर्म बदन मेरे पैरो में हलचल पैदा कर रहा था.

बाल सुखाते हुए मैंने धीरे से उनके कंधे पर अपना हाथ रख दिया.
चाची ने कोई आपत्ति नहीं की.

धीरे से मैंने उनकी कमर सहलानी शुरू कर दी.
तभी अचानक चाची कहने लगी- मेरे बाल सूख गए हैं, अब मैं भीतर जा रही हूँ.

वो कमरे में चली गई पर मेरी साँस रुक गई, मैंने सोचा शायद कि चाची को मेरे इरादे मालूम हो गए.

कमरे में जाकर चाची ने अपने कपड़े बदलने शुरू कर दिए.

जल्दी में चाची ने दरवाजा बंद नहीं किया वो ड्रेसिंग मिरर के सामने खड़ी थी उन्होंने अपना एक एक कपड़ा उतार दिया.

मैंने अचानक देखा कि चाची बड़ी गौर से अपने बदन को ऊपर से नीचे तक ताक रही थी.

मेरा दिल अब और भी पागल हो रहा था और उस पर भी बारिश का मौसम.
जैसे बाहर पड़ रही बूँदें मेरे तन बदन में आग लगा रही थी.

अबकी बार चाची ने मुझे देख कर अनदेखा कर दिया.
शायद यह मेरे लिए ग्रीन सिग्नल था.

मैं कमरे में अन्दर चला गया.
चाची बोली- अरे सावन, मैंने अभी कपड़े नहीं पहने, तुम बाहर जाओ.

मैं बोला- चाची, मैंने तुम्हें कपड़ों में हमेशा देखा लेकिन आज बिन कपड़ों के देखा है, अब तुम्हारी मर्ज़ी है तुम मेरे सामने ऐसे भी रह सकती हो.
और कहते हुए मैंने उनको बांहों में ले लिया.

उन्होंने थोड़ी सी न नुकर की लेकिन मैंने जयादा सोचने का टाइम नहीं दिया और बिंदास उनको किस करनी शुरू कर दी.

मैंने देखा कि उसने आँखें बंद कर ली.
इसमें उनकी सहमति छुपी थी.

मैं दस मिनट तक उसे किस करता रहा इस बीच गर्म होंट उसके गोरे बदन के ज़र्रे ज़र्रे को चूम गए.

अचानक चाची ने मुझे जोर से धक्का दिया और मैं नीचे गिर गया.
एक बार को में फ़िर डर गया लेकिन अगले ही पल मैंने पाया कि चाची मेरे ऊपर आकर लेट गई थी और मेरे सारे कपड़े उतार दिए.

हम दोनों के बीच से कपड़ों की दीवार हट चुकी थी. मेरा लंड पूरी तरह तैनात खड़ा था.

तभी उसने मेरे ऊपर आकर मेरे लंड को अपने नर्म होंटो से छुआ और अपने मुँह में ले लिया.
वो मेरे ऊपर इस तरह बैठी थी की उसकी चूत बिल्कुल मेरे होंठों पर आ टिकी थी.

मैंने चूत को बिंदास चाटना शुरू कर दिया.

उसके मुँह से मेरा लंड आजाद हो गया था और आआह्छ…आआ… ऊऊ… ऊओफ्फ की आवाज उसके मुख से आने लगी थी.

और तभी उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया.
वो मुझ से बोली- ऊह … मेरे सेक्सी सावन मेरी चूत तुम्हारे इस सुडोल लंड को लिए बिना नहीं रह सकती प्लीज सावन, अपने इस प्लेयर को मेरी चूत के प्ले ग्राउंड में उतार दो ताकि ये अपना चुदाई गेम खेल सके.

चाची अब मेरे लंड को लेने के तड़पने लगी थी.

मैंने भी उसी वक्त चाची को बांहों में भरा और उठा कर बेड पर लिटा दिया.
चाची की चूत रसीली हो रखी थी.

मैं चाची के ऊपर लेट गया मेरा लंड चाची के चूत के दरवाजे पर दस्तक दे रहा था.

चाची ने चूत को अपने दोनों हाथो से खोल दिया और मैंने धीरे से चाची की चूत में अपना लंबा लंड डालना शुरू कर दिया.

काफी दिनों से चाची की चुदाई नहीं हुयी थी इसलिए चाची की चूत एक दम टाईट थी.

मैंने जोर से झटका लगाया और लंड पूरी तरह चूत की आगोश में समां चुका था.
चाची के मुँह से आआह्ह्छ मार डाला की आवाज़ निकल गई और मुझे थोड़ी देर हिलने से मना कर दिया कुछ देर बाद वो नीचे से हल्के हल्के झटके लगाने लगी.

अब मुझे भी चूत का मजा आने लगा और मैंने चाची की चुदाई शुरू कर दी जितनी में अपनी चाची की चुदाई करता वो उतनी सेक्सी सेक्सी आवाज़ निकलने लगी- आह्ह… आःछ… ऊऊ… ईशहश… आआ… ऊऊ ओफ़ फफफ… ऊऊ फफफ फ… अआआछ ह्ह्ह. धीरे धीरे चूत लूस होने लगी.

हम दोनों ने कम से कम आधे घंटे तक चुदाई की.
आधे घंटे बाद अचानक चाची मुझसे जोर से लिपट गई और उसकी चूत थोड़ी देर के लिए टाईट हो गई.

कुछ और झटके लगाने के बाद मेरे लंड ने अपना वीर्य चूत में छोड़ दिया ओर चाची फ़िर से मुझे लिपट गई.

मैं इसी तरह दस मिनट तक चाची के ऊपर लेटा रहा.

उस दिन की बरसात से लेकर और अब तक ये आपका सेक्सी सेक्सी सावन अपनी चाची के प्यासे बदन पर हर रोज़ बरसता रहा है और इतना ही नहीं उस दिन के बाद मेरी चाची और ज्यादा सेक्सी और खूबबसूरत लगने लगी है.

अब अपनी चाची के अलावा आपका सेक्सी सावन बहुत सी फिमेल की प्यास मिटा चुका है. Antarvasna

Desi girlfriend first time sex – हेलो दोस्तों, मेरा नाम अर्जुन है। मैं 24 साल का हूँ और ये कहानी तब कि हैं जब में 12वीं में पढ़ता था। मेरी गर्लफ्रेंड का नाम प्रियंका है, वो भी 24 साल की है और मेरे साथ ही 12वीं में पढ़ती थीं। हम दोनों के घर पास ही हैं। मेरे घर में कुल 5 लोग हैं – मम्मी, पापा, मैं और मेरे दो छोटे भाई। प्रियंका के घर में भी 5 लोग हैं – उसकी मम्मी, पापा, प्रियंका और उसकी एक बहन और एक छोटा भाई। आज मैं आपको प्रियंका के साथ मेरे पहले सेक्स की कहानी सुनाने जा रहा हूँ, जो आज से 2 साल पहले की बात है। प्रियंका और मैं पिछले 3 साल से रिलेशनशिप में हैं। शुरू-शुरू में मैं बहुत शर्मीला था, इसलिए हम दोनों ज्यादा खुलकर बात नहीं करते थे। बस नॉर्मल सी बातें होती थीं, जैसे स्कूल, पढ़ाई और दोस्तों की बातें। धीरे-धीरे समय बीतता गया और हम एक-दूसरे के साथ थोड़ा फ्रैंक होने लगे। हम रोज़ शाम को मिलने लगे। हमारे मोहल्ले में एक अपार्टमेंट बन रहा था, जो शाम को खाली रहता था। हम वहाँ मिलते थे, क्योंकि वहाँ कोई नहीं आता था। वह जगह हमारी मुलाकातों का अड्डा बन गया था। रिलेशनशिप के 8 महीने बाद मैंने प्रियंका को पहली बार किस किया। वो भी बस उसके गाल पर। मेरे दिल की धड़कन इतनी तेज़ थी कि मुझे लगा मेरा दिल बाहर निकल आएगा। उसने भी हल्के से मुस्कुराते हुए मेरे होंठों पर किस किया। फिर मैंने भी हिम्मत करके उसके होंठों को चूमा। उस दिन हमने पहली बार लिपलॉक किया। मैं तो सातवें आसमान पर था, लेकिन प्रियंका मुझसे भी ज्यादा खुश थी। उसकी आँखों में एक अलग सी चमक थी, जो मैं आज तक नहीं भूल पाया। उसके बाद जब भी हम मिलते, किसिंग तो जैसे हमारा रूटीन बन गया। हम एक-दूसरे के होंठों को चूमते, हल्का-फुल्का गले लगाते, और हर बार थोड़ा और करीब आते। 2 महीने बाद, एक दिन जब मैं प्रियंका को किस कर रहा था, मेरा हाथ गलती से उसके बूब्स को छू गया। मुझे डर लगा कि वो नाराज़ हो जाएगी, लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। बस हल्का सा मुस्कुराई और मेरी तरफ देखने लगी। अगली बार जब हम मिले, मैंने जानबूझकर उसके बूब्स को छुआ। इस बार भी उसने कुछ नहीं कहा, बल्कि और ज्यादा मुस्कुराने लगी। मुझे समझ आ गया कि वो भी चाहती है कि मैं आगे बढ़ूँ। फिर मैंने हिम्मत करके उसके बूब्स को दबाना शुरू किया। प्रियंका के बूब्स मीडियम थे , लेकिन मुलायम और गुदगुदे। मैंने उसकी टी-शर्ट में हाथ डाला, तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और धीरे से बोली, “अभी नहीं, बाद में। कोई देख लेगा।” मैंने तुरंत अपना हाथ बाहर निकाल लिया, लेकिन मेरा मन अब बेकाबू हो रहा था। उस रात मैं प्रियंका के बारे में सोचते-सोचते पागल हो गया। मेरा मन कर रहा था कि प्रियंका के साथ और आगे बढ़ूँ। रात के 1 बज रहे थे। मैंने प्रियंका को फोन किया। अर्जुन: “प्रियंका, मुझे तुमसे अभी मिलना है।” प्रियंका: “सुबह मिल लेना, अभी कैसे आ सकती हूँ?” अर्जुन: “तुम्हारे घर में कौन-कौन जाग रहा है?” प्रियंका: “सब सो रहे हैं।” अर्जुन: “मैं आता हूँ, तुम अपना रूम खुला रखना।” प्रियंका: “नहीं, प्लीज़ मत आओ। मम्मी-पापा घर पर हैं।” अर्जुन: “ठीक है, कल मिलते हैं।” अगले दिन शाम को हम फिर अपार्टमेंट में मिले। मैं थोड़ा डरते हुए बोला, “प्रियंका, मुझे तुम्हारे साथ सेक्स करना है।” वो हल्का सा मुस्कुराई और बोली, “फाइनली तुमने बोल तो दिया। मैं तो रिलेशनशिप के पहले हफ्ते से ही तुमसे सेक्स करना चाहती थी, लेकिन मैं लड़की हूँ ना, मैं बोल नहीं सकती थी। मुझे डर था कि तुम बुरा मान जाओगे। आज मैं बहुत खुश हूँ।” उसकी बात सुनकर मेरा डर खत्म हो गया। उसने कहा, “टेंशन मत लो। आज रात मेरे घर आ जाना। पापा बाहर गए हैं, और मेरे भाई बहन जल्दी सो जाते हैं।” मैंने कहा, “ठीक है, तुम रूम खुला रखना। मैं 11 बजे आऊँगा।” शाम को घर वापस आने के बाद मैंने मम्मी-पापा से कहा कि मैं अपने दोस्त के घर रात को रुकने जा रहा हूँ। उन्होंने हाँ कह दिया। मैंने 9 बजे खाना खाया और 10 बजे घर से निकल गया। एक घंटे तक सड़कों पर घूमता रहा, ताकि समय पास हो जाए। ठीक 11 बजे मैं प्रियंका के घर पहुँचा। उसकी मम्मी अपने रूम में सो रही थीं। प्रियंका ने मुझे चुपके से अपने रूम में बुला लिया। प्रियंका के रूम में घुसते ही मेरे दिल की धड़कनें तेज़ हो गईं। कमरे में हल्की सी रौशनी थी, और प्रियंका ने एक टाइट टी-शर्ट और स्कर्ट पहनी थी। वो मुझे देखकर मुस्कुराई और धीरे से मेरे पास आई। मैंने उसे अपनी बाहों में लिया और धीरे-धीरे उसके होंठों को चूमने लगा। उसकी साँसें तेज़ थीं, और मैं उसकी गर्माहट को महसूस कर रहा था। मैंने उसके बूब्स को हल्के से दबाया, और वो सिहर उठी। मैंने उसकी टी-शर्ट को धीरे से ऊपर उठाया और उसे उतार दिया उसने पिंक कलर की ब्रा पहनी थीं। उसे इस रूप में देखकर मेरा तो लंड खड़ा हो गया. मैंने उसके दोनों मम्मों को पकड़ लिया और बुरी तरह से मसलने लगा. इसके बाद मैंने उसकी ब्रा का हुक खोल दिया. हुक खोलते ही उसकी ब्रा छिटक कर नीचे गिर गई और उसके दोनों कबूतर आज़ाद हो गए. शर्म के मारे वो एक हाथ से अपना चेहरा और एक हाथ से अपने उभारों को ढकने की नाकाम कोशिश करने लगीं. अब मेरा बहुत बुरा हाल हो गया तो मैंने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए और अपना लम्बा लंड उसके मुँह के सामने ले आया, जिसे देखकर प्रियंका ने अपनी आँखें बंद कर लीं, पर मैं कहाँ रुकने वाला था. मैंने पहले उसके दोनों हाथ उठा कर ऊपर कर दिए और उसके मम्मों पर टूट पड़ा. जैसे मैंने अपनी जीभ उसके निप्पलों पर फिराई, उनके मुँह से आह निकल गई और वो मेरा मुँह वहाँ से हटाने लगीं. पर मैं कहाँ मानने वाला था. मैंने उसको बेड पर अपने नीचे दबोच लिया और उसके दोनों हाथ ऊपर करके दोनों मम्मों को एक साथ पकड़ कर बुरी तरह चूसने लगा और जीभ फिराने लगा. मेरी इस हरकत से प्रियंका ज़ोर से सिसकारियां लेने लगीं- आआऊऊ.. ऊओह्ह.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… ह्ह्ह.. ह्ह्ह ह्ह्हम्म ऊओ म्मम्म प्लीज़ मत करो आह.. कुछ मिनट तक प्रियंका के मम्मों को चूस कर मैं नीचे प्रियंका की चूत की ओर बढ़ने लगा. मेरे बुरी तरह चूसने की वजह से प्रियंका के चूचे एकदम लाल हो गए थे. प्रियंका की साँसें और तेज़ हो गईं। वो बोली, “अर्जुन, आज रात बस बूब्स ही चूसते रहोगे या कुछ और भी करोगे?” मैंने हँसते हुए कहा, “अरे, इतनी जल्दी में क्यों हो? मैं तो 18 महीनों का इंतज़ार आज पूरा करने वाला हूँ।”प्रियंका ने मेरी पैंट की ज़िप खोली और मेरा लंड पकड़ लिया। उसका हाथ मेरे 6 इंच के लंड पर था, और वो उसे सहलाने लगी। मैंने उसकी स्कर्ट उतार दी। उसने पिंक कलर की पैंटी पहन रखी थी. उसकी ये पैंटी इतनी पतली थी कि उसकी चूत की दरार मुझे साफ़ दिखाई दे रही थी. मन तो कर रहा था कि काट कर खा जाऊं. मैंने उसकी पैंटी नीचे की तरफ खींचा,अब हम दोनों पूरी तरह नंगे थे। मैंने प्रियंका की जांघों पर हाथ फेरना शुरू किया, और धीरे-धीरे उसकी चूत तक पहुँचा। आह … अन्दर का क्या मस्त नजारा था. किसी जन्नत से कम नहीं था. इतनी गोरी चिकनी चूत पहली बार देख रहा था, कोई भी पहली बार देखता, तो पागल हो ही जाता. मुझसे रहा नहीं गया मैंने झट से अपना मुँह उसकी चूत पर लगा दिया और चूसने लगा. एकदम ठंडा नमकीन जैसा, मुझे तो बहुत ही मजा आ रहा था. जी तो कर रहा था, बस चूसता ही जाऊं. वह मस्ती में एक हाथ से अपने चूचे को दबा रही थीं और एक हाथ में मेरे सर को सहला रही थीं. उसकी चूत गीली थी, और जैसे ही मैंने अपनी एक उंगली अंदर डाली, वो सिहर उठी। मैंने धीरे-धीरे उंगली अंदर-बाहर की, और प्रियंका की सिसकारियाँ तेज़ हो गईं। “आह… अर्जुन… और करो…” वो धीरे-धीरे कह रही थी। मैंने दूसरी उंगली भी डाल दी, और अब वो पूरी तरह गरम हो चुकी थी। उसकी चूत से पानी निकल रहा था, और वो बेकाबू हो रही थी। 10 मिनट तक उंगली करने के बाद प्रियंका पूरी तरह जोश में थी। उसने कहा, “अर्जुन, अब और मत तड़पाओ। डाल दो…” मैंने उसे बेड पर लिटाया और उसके पास तेल की बोतल देखी। मैंने अपने लंड पर और उसकी चूत पर तेल लगाया। उसकी चूत बहुत टाइट थी, क्योंकि ये हम दोनों का पहला सेक्स था। मैंने धीरे से अपना लंड उसकी चूत पर रखा और अंदर धकेलने की कोशिश की। लेकिन उसकी चूत इतनी टाइट थी कि लंड अंदर नहीं जा रहा था। मैंने थोड़ा और ज़ोर लगाया, और मेरा लंड का सुपारा अंदर चला गया। प्रियंका को दर्द हुआ, और वो बोली, ऊई … मां … मर गई … आह सी … सी …’ “आह… धीरे करो, दर्द हो रहा है।” मैं रुक गया और उसके होंठों को चूमने लगा, ताकि उसका ध्यान दर्द से हटे। थोड़ी देर बाद मैंने फिर से धीरे-धीरे लंड अंदर डाला। इस बार तेल की वजह से मेरा पूरा लंड उसकी चूत में चला गया। प्रियंका ज़ोर से चीखी, और उसकी आँखों से आंसू निकल आए। मैंने तुरंत उसके होंठों को चूम लिया और उसे शांत किया। थोड़ी देर रुकने के बाद मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए। प्रियंका अब मज़े में थी। वो सिसकारियाँ ले रही थी, “आह… आह… अर्जुन… और ज़ोर से…” ‘आह आह आह …’ कर रही थीं. तभी प्रियंका की जोर की सिसकारी निकली- आहह हहहह ऊईईई ईईईई मर गई ऊईई. उसकी आवाज़ मुझे और जोश दिला रही थी।आहह हहह ऊईई ईईई ऊईई मां … मर गई अर्जुन प्लीज धीरे धीरे करो. मगर मैंने झटकों की रफ़्तार तेज ही रखी और उसकी कमर पकड़ कर तेज़ी से चोदने लगा. ‘आहह ऊईईई ईई आहह ऊईईई …’ मैंने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी, और अब कमरे में सिर्फ हमारी साँसों और चुदाई की आवाज़ें गूँज रही थीं – थप-थप-थप। मैंने प्रियंका को पलटा और उसे घोड़ी बनाया। इस पोजीशन में उसकी चूत और टाइट लग रही थी। मैंने फिर से लंड अंदर डाला और धीरे-धीरे धक्के मारने लगा “आहह हऊ हह ऊईईई ऊईई मां बचाओ … मर गई … मेरी चूत फट गई … मां बचाओ … अर्जुन निकाल लंड.” मैं चुप रहा और धीरे धीरे उसकी चूचियों को मसलने लगा, उन्हें चूमने लगा प्रियंका की सिसकारियाँ अब और तेज़ हो गई थीं, “आहह अर्जुन चोद मुझे … और चोद आहह आहह फ़ाड़ दे … आहह हहह चोद मुझे … ले ले मेरी आहह.” “आह… आह… अर्जुन, चोदो मुझे… और ज़ोर से…” उसका ये गंदा बोलना मुझे और उत्तेजित कर रहा था। मैंने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी, और अब हम दोनों पूरी तरह चुदाई के नशे में डूबे थे। करीब 20 मिनट तक चुदाई करने के बाद मुझे लगा कि मेरा निकलने वाला है। प्रियंका ने कहा, “अर्जुन, मेरी चूत में मत झड़ना।” लेकिन मुझे इतना मज़ा आ रहा था कि मैंने उसकी बात नहीं सुनी और उसकी चूत में ही झड़ गया। प्रियंका थोड़ा नाराज़ हुई और बोली, “ये क्या किया? मैंने बोला था बाहर निकालो।” मैंने कहा, “सॉरी, प्रियंका। मैं कंट्रोल नहीं कर पाया। मैं कल तुम्हें i-पिल ला दूँगा।” वो बोली, “ठीक है।” अब मैं प्रियंका को हर महीने 3-4 बार चोदता हूँ। एक बार तो प्रियंका प्रेग्नेंट भी हो गई थी, लेकिन हमने उसका अबॉर्शन करवा दिया। अब उसकी चूत इतनी ढीली हो गई है कि उसमें दो लंड भी आराम से चले जाएँ। लेकिन मैं प्रियंका से बहुत प्यार करता हूँ। आपको मेरी कहानी कैसी लगी? कमेंट में ज़रूर बताएँ या मुझे मेल करें arjunx359@gmail.com।
Antarvasna

कहानी श्री विनोद शर्मा, ग्वालियर Antarvasna पर आधारित है, अपनी ये खूबसूरत आप बीती अपने ही शब्दों में उन्होंने भेजी थी, कहानी के रूप में आपके समक्ष प्रस्तुत है…

मेरी नई नौकरी थी और मेरा पहला पद स्थापन था. मुझे जोइन किये हुए तीन दिन हो चुके थे. मेरे ही पद का एक और साथी ऑफ़िस में अपनी पत्नी के साथ रुका हुआ था. मेरी पहचान के कारण मुझे वहाँ मकान मिल गया. मकान बड़ा था सो मैंने अपने साथी राजेश और उसकी पत्नी को एक हिस्सा दे दिया. हमने चौथे दिन ही मकान में शिफ़्ट कर लिया था. राजेश की पत्नी का नाम सोना था. वह आरम्भ से ही मुझे अच्छी लगने लगी थी. उसका व्यवहार मुझसे बहुत अच्छा था. मैं उसे दीदी कहता था और वो मुझे भैया कहती थी.

पर मेरे मन में तो पाप था, मेरी नजरें तो हमेशा उसके अंगों को निहारती रहती थी, शायद अन्दर तक देखने की कोशिश करती थी. धीरे धीरे वो भी मेरी नजरें भांप गई थी. इसलिये वो भी मुझे मौका देती थी कि मैं उससे छेड़खानी करूँ. वो अब मेरी उपस्थिति में भी पेटीकोट के नीचे पेंटी नहीं पहनती थी. ब्रा को भी तिलांजलि दे रखी थी.

उसके भरे हुए पुष्ट उरोज अब अधिक लचीले नजर आते थे. चूतड़ों की लचक भी मन को सुहाती थी. उसके चूतड़ों की दरार और उसके भरे हुए और कसे हुए कूल्हे का भी नक्शा बडा खूबसूरत नजर आता था. राजेश की अनुपस्थिति में हम खूब बातें करते थे. अपने ब्लाऊज को भी आगे झुका कर अपने स्तन के उभार दर्शाती थी. कभी कभी बात अश्लीलता की तरफ़ भी आ जाती थी. पर इसके आगे वो शरमा जाती थी और उसे पसीना भी आ जाता था. मुझे लगा कि अगर सोनू को थोड़ा और उकसाया जाये तो वो खुल सकती है, शायद चुदने को भी राजी हो जाये.

उसका शरमाना मुझे बहुत उत्तेजित कर देता था. लगता था कि उसके शरमाते ही मैं उसके बोबे दबा डालूँ और वो शरमाते हुए हाय राम कह उठे. पर यह मेरा भ्रम ही था कि ऐसा होगा.

आज शाम की गाड़ी से राजेश लखनऊ जा रहा था. मुझे मौका मिला कि मैं सोनू को बहका कर उसे थोड़ा और खोलूँ ताकि हमारे सम्बन्धों में और मधुरता आ जाये. शाम को सोनू हमेशा की तरह कुछ काजू वगैरह लेकर मेरे साथ छत पर टहलने लगी. जब बात कुछ अश्लीलता पर आ गई तो मैंने अंधेरे में तीर छोड़ा कि शायद लग जाये.

‘सोनू, अच्छा राजेश रात को कितनी बार करता है… एक बार या अधिक…?’
‘वो जब मूड में आता है तो दो बार, नहीं तो एक बार!’ बड़े भोलेपन से उसने कहा.
‘क्या तुम रोज़ एंजोय करते हो…?’
‘अरे कहाँ विनोद… सप्ताह में एक बार या फिर दो सप्ताह में…’
‘इच्छा तो रोज होती होगी ना…’
‘बहुत होती है… हाय राम… तुम भी ना…’ अचानक वो शर्म से लाल हो उठी.
‘अरे ये तो नचुरल है, मर्द और औरत का तो मेल है… फिर तुम क्या करती हो?’
‘अरे चुप रहो ना!’ वो शरमाती जा रही थी.
‘मैं बताऊँ… हाथ से कर लेती हो… बोलो ना?’

उसने मेरी ओर शरमा कर देखा और धीरे से सिर हाँ में हिला दिया. धीरे धीरे वो खुल रही थी.
‘शरमाओ मत… मुझसे कहो दीदी… तुम्हारा भैया है ना… एकदम कुंवारा…!’
मैंने सोनू का हाथ धीरे से पकड़ लिया. वो थरथरा उठी. उसकी नजरें मेरी ओर उठी और उसने मेरे कंधे पर सर टिका दिया.
‘भैया, मुझे कुछ हो रहा है… ये तुम किस बारे में कह रहे हो…?’ उसकी आवाज में वासना का पुट आता जा रहा था.
‘सच कहू दीदी, मैं कुंवारा हूँ… आपको देख कर मेरे मन में भी कुछ कुछ होता है!’ मैंने फिर अंधेरे में तीर मारा.
‘हाय भैया… होता तो मुझे भी है…!’

मैं धीरे से सरक कर उसके पीछे आ गया और अपनी कमर उसके चूतड़ों से सटा दी. मेरा उठता हुआ लण्ड उसके चूतड़ों की दरार में सेट हो गया और उसके पेटिकोट के ऊपर से ही चूतड़ों के बीच में रगड़ मारने लगा. वह थोड़ा सा कसमसाई… उसे लण्ड का स्पर्श होने लगा था.
‘दीदी आप कितनी अच्छी हैं… लगता है कि बस आपको…’ मैंने लण्ड उसकी गाण्ड में और दबा दिया.
‘बस…!’ और हाथों से अपना चेहरा ढक लिया और लहराती हुई भाग गई.

लोहा गरम था, मैं मौका नहीं चूकना चाहता था. मैं भी सोनू के पीछे तुरन्त लपका और नीचे उसके कमरे में आ गया. वो बिस्तर पर लेटी गहरी सांसें भर रही थी. उसके वक्ष धौंकनी की तरह चल रहे थे. मुझे वहाँ देख कर शरमा गई- भैया… अब देखो ना… मेरे सिर में दर्द होने लगा है… जरा दबा दो…’

मेरा लण्ड जोर मारने लगा था. मैंने सोचा सर सहलाते हुए उसकी चूचियाँ दबोच लूंगा. तब तो वो मान ही जायेगी.

‘अभी लो दीदी… प्यार से दबा दूंगा तो सर दर्द भाग जायेगा.’ मैं उसके पास जाकर बैठ गया और उसके कोमल सर पर हाथ रख कर सहलाने लगा. बीच बीच में मैं उसके चिकने गाल भी सहला देता था. उसने अपनी आंखें बंद कर ली थी. मैंने उसके होंठों की तरफ़ अपने होंठ बढ़ा दिये. जैसे ही मेरे होंठों ने उसके होंठ छुए, उसकी बड़ी-बड़ी आंखें खुल गई और वो शरमा कर दूसरी तरफ़ देखने लगी.

‘हाय… हट जाओ अब… बस दर्द नहीं है अब…’
‘यहाँ नहीं तो इधर सीने में तो है…!’
मैंने अब सीधे ही उसके सीने पर हाथ रख दिये… और उसकी चूचियाँ दबा दी. उसके मुख से हाय निकल पड़ी. उसने मेरे हाथ को हटाने की कोशिश की, पर हटाया नहीं.
‘दीदी… प्लीज, बुरा मत मानना… मुझे करने दो!’
‘आह विनोद… यह क्या कर रहे हो… मुझे तुम दीदी कहते हो…?’
‘प्लीज़ दीदी… ये तो बाहर वालों के लिये है… आप मेरी दीदी तो नहीं हो ना.’ मैंने उसके अधखुले ब्लाऊज में हाथ अन्दर घुसा कर दोनों कबूतरों को कब्जे में लिया.

उसने कोई विरोध नहीं किया और मेरे हाथों के ऊपर अपना हाथ रख कर और दबा लिया.
‘ओह्ह्ह्… मैं मर जाऊँगी विनोद…!’ वो तड़प उठी और सिमटने लगी. मैंने उसे जबरदस्ती सीधा किया और उसके होंठो पर अपने होंठ दबा दिये. वो निश्चल सी पड़ी रही. मैं धीरे से उसके ऊपर चढ़ गया. मेरा लण्ड पजामे में से ही उसकी चूत में घुसने की कोशिश कर रहा था. मैंने अपना पजामे का नाड़ा ढीला कर लिया और नीचे सरका लिया. मेरा लण्ड बाहर आ गया. मैंने उसके पेटिकोट का नाड़ा भी खींच लिया और उसे नीचे सरकाने लगा. सोनू ने हाथ से उसे नाकाम रोकने की कोशिश की- भैया… ये मत करो… मुझे शरम आ रही है… मुझे बेवफ़ा मत बनाओ!’ सोनू ने ना में हाँ करते हुए कहा.
‘सोनू, शरम मत करो अब… तुम बेवफ़ा नहीं हो… अपनी प्यास बुझाने से बेवफ़ा नहीं हो जाते!’
‘ना रे… मत करो ना…!’

पर मैंने उसका पेटीकोट नीचे सरका ही दिया और लण्ड से चूत टकरा ही गई. लण्ड का स्पर्श जैसे ही चूत ने पाया उसमें उबाल आ गया. सोनू की चूत गीली हो चुकी थी. लण्ड चिकनी चूत के आस पास फ़िसलता हुआ ठिकाने पर पहुंच गया. चूत के दोनों पट खुल गये और चूत ने लण्ड का चुम्बन लेते हुए स्वागत किया. सोनू तड़प उठी और शरमाते हुए अपनी चूत का पूरा जोर लण्ड पर लगा दिया. चूत ने लण्ड को अपने में समेट लिया और अन्दर निगलते हुए जड़ तक बैठा लिया.

‘आह भैया… आखिर नहीं माने ना… अपने मन की कर ली… हाय… उह्ह्ह्ह!’ सोनू ने मुस्करा कर मुझे जकड़ लिया.
‘दीदी सच कहो… आप को अच्छा नहीं लगा क्या…?’
‘भैया… अब चुप रहो ना… ‘ फिर धीरे से शरमाते हुए बोली…’चोद दो ना मुझे…हाय रे!’
‘आप गाली भी… हाय मर जाऊँ… देख तो अब मैं तेरी चूत को कैसी चोदता हूँ!’
‘ऊईईई… विनोद… चोद दे मेरे भैया… मेरी प्यास बुझा दे…’ उतावली सी होती हुई वो बोली.
‘मेरा लण्ड भी तो प्यासा है कब से… प्यारी सी सोनू मिली है, प्यारी सी चूत के साथ…आह्ह्हऽऽऽ!’
‘मैया री… लगा… और जोर से… हाय चोद डाल ना…मेरी चूची मरोड़ दे आह्ह्ह!’

मैं उससे लिपट पड़ा और कस लिया लण्ड तेजी से फ़चा फ़च चलने लगा. मेरा रोम रोम जल उठा. मेरी नसों में जोश भर गया. लण्ड फ़डफ़डा उठा. चूत का रस मेरे लण्ड को गीला करके उसे चिकना बना रहा था. उसका दाना मेरे लण्ड से धक्के मारते समय रगड़ खा रहा था. मैंने अपना लण्ड निकाल कर कई बार उसके दाने पर रखा और हल्के हल्के रगड़ाई की. वो वासना में पागल हुई जा रही थी. उसकी आँखें गुलाबी हो उठी थी.

‘मेरे राजा… मुझे रोज चोदा करो… हाय रे…मुझे अपनी रानी बना लो… मेरे भैया रे…’
उसकी कसक भरी आवाज मुझे उतावला कर रही थी.
‘भैया… माँ रे… चोद डाल… जोर से… हाय मैं गई… लगा तगड़ा झटका… ईईईई… अह्ह्ह्ह..’
‘अभी मत होना… सोनू… मैं भी आया… अरे हाय… ओह्ह्ह्ह’

हम दोनों के ही जिस्म तड़प उठे और जोर से खींच कर एक दूसरे को कस लिया. चूत और लण्ड ने साथ साथ जोर लगाया. लण्ड पूरा चूत में गड़ चुका था और आह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह्ह वीर्य छूट पडा… सोनू ने अपनी चूत जोर से पटकने लगी और उसका भी यौवन रस निकल पडा. हम आहें भरते रहे और झड़ते रहे. मेरा सारा वीर्य निकल चुका था. पर सोनू की चूत अब भी लपलपा रही थी और अन्दर लहरें चल रही थी. कुछ ही देर में दोनों निश्चल से शान्त पड़े थे.
‘अब उठो भी… आज उपवास थोड़े ही है… चलो कुछ खा लो!’
हम दोनों उठे और कपड़े पहन लिये. हम दोनों ने खाना खाया और सुस्ताने लगे.

फिर अचानक ही सोनू बोली- विनोद… तुम्हारा लण्ड मस्त है… एक बार और मजा दोगे?’
‘जी हाँ, सोनू कहो तो , कल ही लो…’
‘कल नहीं , अभी… सुनो, बुरा तो नहीं मानोगे ना… मैं कुछ कहूँ?’
‘दीदी, आप तो मेरी जान हो… कहो ना!’
‘मुझे गाण्ड मरवाने का बहुत शौक है… प्लीज!’
‘क्या बात है दीदी… गाण्ड और आपकी… सच में मजा आ जायेगा!’
‘मुझे गाण्ड मराने की लत पड़ गई है, आपको, देखना, भैया बहुत मजा आयेगा…’ मुझे दीदी ने प्रलोभन देते हुए कहा. पर मुझे तो एक मौका और मिल रहा था, मैं इस मौके को हाथ से क्यों जाने देता भला.
‘दीदी, तो एक बार फिर अपने कपड़े उतार दो.’ मैंने अपने कपड़े उतारते हुए कहा. कुछ ही पलों हम दोनों एक दूसरे से बिना शरमाये नंगे खड़े थे. सोनू ने पास में पड़ी क्रीम मुझे दी.
‘इसे अपने लण्ड और मेरी गाण्ड में लगा दो… फिर लण्ड घुसेड़ कर मजे में खो जाओ.’ सोनू इतरा कर बोली और हंस दी.

मैंने अपने लौड़े पर क्रीम लगाई और कहा- सोना, घोड़ी बन जाओ… क्रीम लगा दूँ!’ सोनू मुस्करा कर झुक गई.
उसने अपनी गोरी और चमकदार गाण्ड मेरी तरफ़ घोड़ी बन कर उभार दी. मैंने उसके चूतड़ों की फ़ांक चीर कर उसके गुलाबी छेद को देखा और क्रीम भर दी.
‘विनोद, देखो…बोबे दबा कर चोदना… तुम्हें खूब मजा आयेगा!’ सोनू ने वासना भरी आवाज में कहा.

मेरा लण्ड तो गाण्ड देख कर ही तन्नाने लगा था. मैंने लण्ड का सुपारा खोला और उसके छेद में लगा दिया. उसने अपनी गाण्ड उभार कर जोर लगाया और मैंने भी छेद में लण्ड दबा दिया… फ़च से गाण्ड में सुपारा घुस गया. मेरा लण्ड मिठास से भर उठा. उसकी गाण्ड सच में नरम और कोमल थी. लगा कि लण्ड जैसे चूत में उतर गया हो. मैं जोर लगा कर लण्ड को चिकनी गाण्ड में घुसेड़ने लगा. लण्ड बड़ी नरमाई से अन्दर तक उतर गया. ना उसे दर्द हुआ ना मुझे हुआ.
‘आह, भैया… ये बात हुई ना…अब लग जा धन्धे पर… लगा धक्के जोरदार…!’
‘मस्त हो दीदी… क्या चुदाती हो और क्या ही गाण्ड मराती हो…!’
‘चल लगा लौड़ा… चोद दे अब इसे मस्ती से…और हो जा निहाल…’

उसकी चिकनी गाण्ड में मेरा लण्ड अन्दर बाहर होने लगा. उसकी चूचियाँ मेरे हाथों में कस गई और मसली जाने लगी. सारे बदन में मीठी मीठी सी कसक उठने लगी. मैंने हाथ चूत में सहलाते हुए उसका दाना मलना चालू कर दिया. सोनू भी कसमसाने लगी. लण्ड उसकी गाण्ड को भचक भचक करके चोदने लगा.
‘हाय रे सोनू… तेरी तो मां की… साली… क्या चीज़ है तू…’
‘हाय रे मस्ती चढ़ी ना… चोद जोर से…’
‘आह्ह्ह भेन की चूत… मेरा लौड़ा मस्त हो गया है रे तेरी गाण्ड में!’
‘मेरे राजा… तू खूब मस्त हो कर मुझे और गाली दे… मजे ले ले रे…’
‘सोनू साली कुतिया… तेरी मां को चोद डालूँ… हाय रे दीदी… तेरी गाण्ड की मां की चूत… कहा थी रे साली अब तक… तेरा भोसड़ा रोज़ चोदता रे…’
‘मेरे विनोद… मादरचोद मस्त हो गया है रे तू तो…मार दे साली गाण्ड को…’
‘अरे साली हरामी, तेरी तो… मैं तो गया… हाय रे… निकला मेरा माल… सोनू रे… मेरी तो चुद गई रे… साला लौड़ा गया काम से… एह्ह्ह्ह ये निकला… मां की भोसड़ी…हाय ऽऽऽ ‘

और लण्ड के गाण्ड से बाहर निकलते ही फ़ुहार निकल पडी. मैंने हाथ से लण्ड थाम लिया और मुठ मारते हुए बाकी का वीर्य भी निकालने लगा. पूरा वीर्य निकाल कर अब मैंने सोनू के दाने तरफ़ ध्यान दिया और उसे मसलने लगा. वो तड़प उठी और अपनी चूत को झटके देने लगी. दाना मसलते ही उसके यौवन में उबाल आने लगा. चूचियाँ फ़डक उठी, चूत कसने लगी, चूत से मस्ती का पानी चूने लगा.

‘हाय रे मेरे राजा… मेरा तो निकाला रे… मैं तो गई… आह्ह्ह्ह्ह्ह’ और सोनू की चूत ने पानी छोड़ दिया. मैंने दाने से हाथ हटा दिया और चूत को दबा कर सहलाने लगा. उसकी चूत हल्के हल्के अन्दर बाहर सिकुड़ रही थी और झड़ती जा रही थी.

कुछ ही देर में हम दोनों सामान्य हो चुके थे… और एक दूसरे को प्यार भरी नजरों से देख रहे थे… हम दो बार झड़ चुके थे…पर तरोताजा थे… थोड़ी देर के बाद हमने कपड़े पहने और फिर मैं अपने कमरे में आ गया. बिस्तर पर लेटते मुझे नींद ने आ घेरा…और गहरी नींद में सो गया. जाने कब रात को मेरे शरीर के ऊपर नंगा बदन लिये सोनू फिर चढ़ गई. दोनों के जिस्म एक बार फिर से एक होने लगे… कमरे में हलचल होने लगी… सिसकारियाँ गूंजने लगी…एक दूसरे में फिर से डूबने लगे… Antarvasna

Antarvasna

दोस्तो ! मैं सेक्सी कहानियाँ सात महीनों Antarvasna से पढ़ रहा हूँ। मैं २५ साल का शादीशुदा मिडल परिवार का राजस्थान के एक छोटे से कसबे का सेक्सी लडका हूँ। मैं कम्प्यूटर इन्जीनियर हूं। मैं मेरी शादी को दो साल हो गये है।

आपने मेरी कहानी “कुंवारी सलहज को प्रेगनेंट किया” पढ़ी और बस एक मेल ही आया। दोसतो ये कहानी आपको लगता है पसंद नही आई। दोस्तो ! मैने वो पहली बार कहानी लिखी थी।

अब एक बार फिर हाज़िर हूँ अपने दोस्तो के लिए एक मसाले से भरी कहानी लेकर !

२००४ के दिसम्बर की छुट्टियों में मेरे मामा की लडकी हमारे घर १०-१५ दिन के लिए आई। वो २४ साल की थी. बहुत सुंदर है, उसका फिगर २८-२४-२८, ऊंचाई ५’३”, वो बहुत सेक्सी है. जब भी मैं उसके बारे मे सोचता तो उसको जमकर चोदने का मन करता लेकिन मैं कुछ नही कर पाता,वो मुझे तिरछी नजर से देखती थी।

बस तो सरदियों के दिन थे। सब लोग {परिवार वाले} रजाई ओढ़ के रात को बातें करते थे। वो मेरी वाली साईड में बैठ गयी। मैने धीरे से उसकी टांग पे हाथ फ़ेरना शुरु किया। वो मेरी तरफ़ देख के मुस्करायी तो मुझे ग्रीन सिगनल मिल गया। मैने उसके बुबस दबाने शुरु किये वो मस्त हो रही थी। वो कहने लगी- मुझे कम्प्यूटर सिखाओ !

मैने कहा क्लास लगेगी, वो भी रात के ९ बजे के बाद !

वो कहने लगी ठीक है। मैं डिनर करके आपके कमरे में आ जाऊगी। वो रात को मेरे कमरे में आयी। गांव में सब ८:३० बजे तक सब सो जाते है। हमारा घर बहुत बड़ा था। मैने उसे कम्प्यूटर ओन करके दिया। उसको गाने चलाना, ओफ़ीस ,सीडी चलाना बताने लगा। मैं उसको बताते हुए छू रहा था। उसे अजीब सी मस्ती चढ़ रही थी। उसका ध्यान मेरी ओर हो गया। धीरे से मैं सेक्सी फ़िल्म पर क्लिक करके सोने का नाटक करने लगा। उसने वो फ़िल्म एक दम डर के बंद कर दी और फ़िर कुछ देर तक वो कम्प्यूटर चलाने के बाद सोने को जाने लगी। लेकिन उसका मन उस फ़िल्म को देखने का था तो वो उठ कर मेरी ओर देखा तो मैं सोने का नाटक करने लगा। वो इत्मिनान से फ़िल्म देखने लगी।

फ़िल्म देखने के बाद वो गरम हो गई। वो अपने बूबस को मसलने लगी। मैने धीरे से उसको किस किया तो वो चोंक गयी। मैं उसे अपने बैड पर उठा लाया तो वो बोली- भैईया यह क्या कर रहे हो?

मैने कहा जो तुम्हें चाहिए वो दे रहा हूं। मैं उसके बूबस दबाने लगा वो मस्त होती जा रही थी। और मैं होठ किस भी करने लगा। वो बोली ये नीचे मेरे से एक डंडा सा क्या है इतने में उसने मेरे लंड पे हाथ फ़ेरना शुरु किया। मुझे भी मस्ती चढ़ रही थी। मैने धीरे से उसकी सलवार को खोल दिया अब मैं सलवार को पैर से उतारने लगा वो बोली किसी को पता चल गया तो?

मैने कहा तुम बताओगी?

वो बोली- नहीं। मैने उसके और अपने सारे कपड़े उतार दिये। हम दोनो एकदम नंगे थे। मैं उसे बेसबरी से चूम रहा था। वो भी मुझे ‘चूमते रहो’ कह रही थी, इतने दिन पहले क्यों नहीं मिले। मेरा ९” का लंड एकदम खडा था। वो बेसबरी से उसे देखने लगी ओर बोली- इतना बडा पहली बार देखा है।

वो एकदम नंगी मस्त दिख रही थी उसकी छोटी छोटी चूचियाँ पूरी कसी हुई थी। मैने पहली बार उसे नँगी देखा था। मैं उसकी चूचियाँ चूसने लगा। वो मस्त हो कर तडफ़ रही थी। मैं उसके पूरे शरीर को चूमता हुआ उसकी चूत को चूसने लगा। बाद में हम लोग ६९ पोजीसन में आ गये। वो मेरे लण्ड को चूस रही थी,मैं उसकी गोरी साफ़ चूत को जीभ से चूस रहा था।

‘चूसो मेरी चूत को……आ.आ..आआया.आआआआआअ..आआआ..उ.ऊउऊ.ऊ.ईई.ऊई..ऊई आह आआह्ह्छ’ वो मस्त हो रही थी। अब मैं झड़ने वाला था वो भी इस दौरान दो बार झड़ गई थी। मैं उसका नमकीन रस पीता रहा। मेरा रस उसके मुँह में झड़ गया। वो सारा रस मस्ती से पी गई।अब मैं फ़िर उसकी चूचियाँ चूसने लगा। वो बहुत खुश थी। मैने एक उँगली उसकी चूत में डाली। वो मेरे लँड को फ़िर चूसने लगी और मेरा ९” का लँड खडा हो गया।

अब वो बोली कि मुझे कुछ हो रहा है जल्दी करो, मेरी प्यास बुझाओ।

मैने कहा- इतनी भी जल्दी क्या है? मैने कहा दर्द बहुत होगा ! झेल लोगी?

वो बोली- चाहे मेरी चूत फ़ट जाये, मैं चाहे जितना भी चिल्लाऊँ, छोडना मत, बस अब जल्दी करो, चोद डालो, फ़ाड डालो मेरी चूत, जल्दी करो।

मैने ९” के लंड पर तेल लगाया और थोड़ा सा उसकी चूत पर लगा के, चूत पर लंड रखा और धक्का दिया तो लंड २” अंदर ही गया था कि वो चिल्लाने लगी- छोड दो, बस करो, मर जाऊगी।

मैं रुक गया और फिर वो शाँत हो गयी। मैने एक जोर से झटका मारा और चूत की सील तोड़ते हुए अँदर घुस गया। वो चिल्लाती रही, मैं रुक गया और उसके बूब्स चूसने लगा। वो मस्त हो रही थी। थोड़ी देर में मैंने झटके लगाने शुरु किये। वो भी मेरा साथ देने लगी थी। वो चूतड़ उठा उठा के चुद रही थी। २००-२५० झटके लगाने के बाद मैं झड़ गया, इस दौरान वो तीन बार झड़ चुकी थी।

वो रात ३१ दिसम्बर २००४ की रात थी, मैने उसे नये साल के जश्न में पूरी रात में लगभग १५ बार चोदा। वो अब पूरी तरह से टूट चुकी थी। उससे उठना ही मुश्किल हो गया था। सुबह के ६ बज चुके थे। वो उठ के अपने कमरे में चली गयी। ये सिलसिला १० दिन तक चलता रहा। वो पूरी पूरी रात मस्त होकर चुदवाती थी। १० दिन बाद वो अपने घर चली गयी। पर जब भी मौका मिलता था वो चुदने को तैयार रहती थी।

आपको कहानी कैसी लगी ? Antarvasna

मुझे लिखें !

Antarvasna

जब से मेरी बीवी को पीएसी Antarvasna के जवानों और उसके जीजा ने पेला था उसकी चुदवाने की भूख और बढ़ गई थी। इसी दौरान मेरी बदली प्रतापगढ़ हो गई थी। नीलू की बुर की आग एकदम चरम पर थी। अब चुदवाते वक़्त वो खुल के गालियों का प्रयोग करती। वो अब पूरी रंडी हो चुकी थी। उस रंडी की चुदाई जितनी भी हो, कम ही थी

मेरी ड्यूटी एक प्राइवेट कंपनी में थी। एक दिन मुझे कुछ काम से पटना जाना था। हम दोनों की ट्रेन रात के साढ़े ग्यारह बजे थी। खाना खाकर हम ऑटो से स्टेशन पर पहुंचे। स्टेशन पर बिल्कुल सन्नाटा था। बहुत कम लोग या यूँ कहें कि इक्का दुक्का लोग दिखाई दे रहे थे। ट्रेन थोड़ी लेट थी। हम वहीं बैठ कर बातें कर रहे थे।

तभी न जाने कहाँ से कुछ पुलिस वाले आ गए। वो हमसे पूछताछ करने लगे। मैंने उन्हें अपना कार्ड दिखाया पर वो नहीं माने और हमें एक केस में फरार पति-पत्नी साबित करने लगे। मैं उनको समझाता रहा पर वो नहीं माने।

दरोगा बोला- साले, मादरचोद ! हमें समझाओगे? पहले तो अपने माँ-बाप का खून करते हो और भागने की प्लानिंग करते हो ! ले चलो इनको थाने फिर बात करते हैं !

इतना कहकर वो सब हम दोनों को ले जाने लगे। एक सिपाही नीलू से बोला- साली चल अपना सामान उठा ! तुझसे तो लगता है साहब ही बात करेंगे ! साली की जवानी तो देखो ! अगर साहब बोल दें तो यहीं पटक कर चोद दूं !

नीलू बोली- क्या बदतमीजी कर रहे हो? एक औरत से इस तरह बात करते हैं?

दूसरा सिपाही बोला- तब कैसे बात करते हैं बुरचोदी रंडी? ज्यादा बोल मत ! नहीं अभी तेरे मर्द के सामने साहब त्तुम्हें अपने लंड पर नचवाएंगे ! समझी?

यह सब सुनकर नीलू चुप हो गई पर उन सब की बुरी नज़र उस पर पड़ चुकी थी। वो सब हमें लेकर ड्यूटी-रूम में गए। वहाँ पर उस दरोगा ने पता नहीं किसे फ़ोन लगाया। बात करने के बाद वो मुस्कुराने लगा। उसने अपने तीनों सिपाहियों से कुछ बात की और उसके बाद वो सब हमें गाडी में स्टेशन के दूसरी ओर ले जाने लगे। तो मैंने पूछा- हमें कहाँ ले जा रहे हैं?

तो बोला- अभी पता चल जायेगा !

थोड़ी देर बाद हम एक मकाननुमा ऑफिस में पहुंचे। उन्होंने हमें उतारा और अन्दर ले गए। वहां कोई नहीं था। दरअसल यह वीआईपी गेस्ट-रूम था। वहां पहुँच कर दरोगा बोला- अब बोल साले ! छुटना चाहता है या दफा ३०२ लगवाना चाहता है? अब हम चाहें तो तुम्हें छोड़ भी सकते हैं पर इसके लिए तुझे कुछ देना होगा ! देगा?

मैं बोला- क्या?

वो बड़ी बेशर्मी से बोला- तेरी माल ! यानि तेरी बीवी !

मैं गुस्से में उससे बोला- जबान सम्हाल कर बात कर साले ! तू मुझे नहीं जानता, मैं तुम्हें जेल भिजवा सकता हूँ !

वो बोला- भिजवा दे ! पर वो तो तू तब करेगा जब तू यहाँ से बच कर जायेगा?

इतना कहकर उसने नीलू को दबोच लिया। बाकी के सिपाहियों ने मुझे दबोच कर मेरे मुँह में कपड़ा ठूंस कर मेरा मुँह बंद कर दिया और फिर मुझे रस्सी से खूब मजबूती से बांध कर एक कमरे में छोड़ दिया।

अब आगे की कहानी नीलू के शब्दों में-

उस दरोगा ने पीछे से मुझे कसकर पकड़ लिया, फिर बोला- रानी, आज तो तुझे हमारे लौड़ों पर नाचना होगा !

मैंने चिल्लाते हुए कहा- छोड़ो मुझे ! मैं तुम लोगो की बात नहीं मानूंगी किसी भी कीमत पर !

तब दरोगा बोला- फिर ठीक है, हम तेरे पति का एनकाउंटर कर देंगे, उसके बाद तुझे भी चोद कर रंडीखाने भेज देंगे। जहाँ तेरी जवानी का भुरता बन जायेगा। मान जाओ !

मैं बोली- ठीक है ! मुझे सोचने दो !

मैंने सोचा कि अगर मैं इन सब की बात मान लेती हूँ तो ज्यादा से ज्यादा ये मेरी चुदाई ही करेंगे और अगर नहीं मानी तो ये मेरे पति को जान से तो मारेंगे ही साथ में मुझे भी बर्बाद कर देंगे। यह सोचकर मैंने कहा- ठीक है, मुझे मंजूर है ! पर सुबह तुम लोगों को हमें इज्जत के साथ वापस छोड़ना होगा !

दरोगा बोला- जो तुम बोलो रानी, सब मंजूर !

अब मेरा दिमाग चुदाई की बात सोचते ही धुकधुकाने लगा।

एक सिपाही बोला- साहब क्या मस्त प्लान बनाया है, कई दिनों से किसी की मारी नहीं थी, आज सारी कसर निकालूँगा !

दूसरा बोला- अबे अब इस हरामजादी को चुदाई वाले कमरे में तो ले के चल !

यह कह कर उसने मेरी गांड सहला दिया। वो सब अब मुझे ऊपर लेकर जाने लगे। रास्ते में कोई मेरी चुचियों को सहलाता, कोई गांड पर, तो कोई गाल पर !

हाय ! मैं तो इतने लोगों से चुदने की बात सुनकर ही मस्त हो गई थी। आज फिर मुझे अपने पीएसी वाले जीजा की टक्कर का लौड़ा जो मिलने वाला था।

अन्दर पहुंचते ही दरोगा बोला- चल री मादरचोद, अपने कपड़े उतार ! कसम से साली एकदम कंटीली है ! आज तो तुझे जमकर चोदूंगा ! खोल बुरचोदी ! आज तुझे पुलिस का डंडा दिखाऊंगा। अरे तुम लोग देख क्या रहे हो? गरम करो रंडी को ! आज इसे दिखायेंगे कि पुलिस का लौड़ा जब घुसता है तो क्या होता है ! साली का गांड भी पेलूँगा !

हाय …….. आह! ऐसे मत करो ! छोड़ो मेरी चुचियों को ! आह सी… दर्द हो रहा है ! कभी चूचियां नहीं दबाई क्या? जब मैं चुदने को तैयार हूँ तब मेरे साथ जबरदस्ती क्यों कर रहे हो?

साली रंडी ! तू ऐसी माल है कि बिना ऐसे किए चोदने का मज़ा ही नहीं आएगा ! खोल स्साली पहले अपना जलवा तो दिखा ! यह कहकर दरोगा ने साड़ी के ऊपर से ही मेरी बुर को मींज़ दिया।

हाय, क्या कर रहे हो। छोड़ो ना! मैं बोली।

तब उसने मुझे कपड़े उतारने का इशारा किया। अब मेरी समझ में आ गया था कि चाहे मेरी चूची हो या बुर या गांड सबकी बैंड बजेगी। मैं अन्दर ही अन्दर खुश भी थी। काफी दिनों के बाद मेरी जवानी की बैंड फिर से बजने वाली थी। हाय जीजू ! क्या बना दिया तूने मुझे ?

अब मैंने एक-एक करके अपने कपड़े उतार के एक तरफ रख दिए क्योंकि मैं जानती थी कि ये सब मेरी मां-बहन सब चोद सकते हैं तो मैं अपने कपड़े क्यों ख़राब करूँ !

उन सबने भी अपने कपड़े मुझसे पहले ही उतार दिए। उनके लौड़ों को दख कर तो मन किया कि उनका मुँह चूम लूँ ! सब एक से बढ़ कर एक ! दरोगा का सबसे मस्त ! मेरी बुर तो पानी देने लगी, साली कुछ देर का इन्तज़ार भी नहीं करवा सकती।

दरोगा ने पीछे से मुझे पकड़ लिया और लण्ड मेरी गांड से सटाते हुए बोले- रानी तैयार हो ना ! अगर नहीं तो तेरे पति को तैयार करूँ !

मैं तो मस्त थी पर कुछ नहीं बोली। सब मेरे ऊपर टूट पड़े, मेरे दोनों 32 साइज़ की चुचियों को दबा-दबा कर लाल कर दिया।. दरोगा मेरे होंठों को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा। एक मेरी बाईं और एक मेरी दांई चूची के चुचूक चूसने लगे। एक मेरे गांड के दरारों को अपने जीभ से चाटने लगा। सब तरफ से मैं फँसी थी। मेरी बुर तो रिसने लगी। करीब ५ मिनट तक ऐसा करने के बाद एक उंगली मेरी बुर को सहलाते-सहलाते अन्दर घुस गई। हाय मेरा तो बुरा हाल था।

वो उंगली दरोगा की थी। वो चीखा- सालों ! इस रंडी मादरचोद को भी मज़ा आ रहा है ! यह देखो इसकी बुर का रस !

कहकर वो अपनी उंगली चाटने लगा। सब मेरे ऊपर हंसने लगे और एक बोला- हरामजादी, तुझे तो सारी पुलिस-फ़ोर्स भी चोदे तब भी आग न बुझे !

मैं भी बेशर्मी से बोली- साले रंडी हूँ रंडी की तरह चोदोगे तभी मज़ा दूंगी ! मेरी बुर सस्ती रंडी वाली बुर नहीं है ! समझे ? पीएसी के लौड़ों पर दौड़ चुकी हूँ। देखती हूँ तुम्हारे में कितने दम है !

दरोगा ने मेरे कान के लौ को चूसते हुए धीरे से फुसफुसाते हुए कहा- रानी, सही कहूँ तो एकदम मस्त माल हो ! ये सब तो परम पेलू हैं पर सही में अगर तुम मज़ा लेकर यहाँ से जाना चाहती हो तब हम जैसा कहें वैसा करना होगा !

मैं भी नशीली आवाज में बोली- मेरे राजा, आज बुर का दरवाज़ा खोल तो अपने डंडे से ! मैं तो बिल्कुल तैयार हूँ ! जैसे चाहो वैसे पेलो ! तुम लोगो की रंडी हूँ ना, सब तरफ से फाड़ डालो मेरी ! मेरी बुर तुम्हारे लौड़े का स्वागत ही करेगी, इतना जीभर के पेलवाउंगी कि तुम भी क्या याद करोगे।

दरोगा बोला- क्या नाम है तुम्हारा रानी?

मैं बोली- नीलू !

हाय बड़ा मस्त और रंगीन नाम है। चल रानी अब हमारे लौड़ों को अपने बुर के लिए तैयार कर ! दरोगा बोला।

मैं अब उनके मस्त खड़े लौड़ों को चाटने लगी। एक बोला,” साली मस्त है ! सब आता है इसे ! लगता है इसका पति इसे सब सिखा कर रखता है। लंड को चाट रंडी साली ! ले पी मादरचोद !

उधर मैं उनके लौड़े चूसने में मस्त थी, इधर दरोगा ने मेरी प्यारी सी चोट्टी बुर पर हाथ लगाया और फिर मुँह भी लगा दिया। फिर तो एक ने मेरी गांड में उंगली कर दी। मैं और मेरी जवानी पूरी उफ़ान पर आ चुके थे और थोड़ी देर में मेरी जवानी के रस का फव्वारा निकल गया। दरोगा पूरा का पूरा माल चाट गया और बोला- रानी तेरी बुर भी तेरी मुंह की तरह नमकीन है ! मज़ा आ गया, अब तो तुम्हारी असली तीसरी डिग्री शुरु होगी।

इतना कहकर उसने मुझे कुतिया की तरह उल्टा कर दिया। उसके बाद थूक लगा लगा कर जो उनके 9-9 इंच के लौड़ों ने मेरी पेलाई की पूरे आधे घंटे तक बिना रुके !

पेल-पेल के उन्होंने मेरी बुर में ही अपना सारा का सारा माल डाल दिया। मेरी बुर से उनका पानी टपकते हुए नीचे फर्श पर गिर रहा था। हाय मैं तो पूरी तरह मस्त हो गई थी, सभी मुझको एक-एक बार चोद चुके थे।

अब मैं दरोगा की गोद में थी। वो मेरी चुचियों से खेल रहा था। उसने मुझसे पूछा- रानी मज़ा आया?

मैं उसके लंड को सहलाते हुए बोली- पूरा राजा ! तुम लोगों ने तो मेरी बुर को एकदम मस्त कर दिया ! इस समय तो दो चार लंड और भी होते तो मैं आराम से चुदवा लेती। कसम से पहली बार पीएसी ने और इस बार पुलिस ने पेल-पेल कर मुझे पूरा रंडी बना दिया। हाय ! अगला राउंड कब शुरू करोगे राजा?

दरोगा ने पीएसी वाली चुदाई के बारे में पूछा तो मैंने सारा किस्सा बता दिया शोर्ट में। उसने मेरे जीजा का नाम पूछा तो मैंने बता दिया। जीजा का नाम सुनते ही वो हंसने लगा। दरअसल मेरे उस जीजा की ड्यूटी वहीं प्रतापगढ़ में ही लगी थी। उसने मुझसे पूछा- तू कहे तो तेरे जिज्जू को यहीं बुला दूं?

मैंने कुछ नहीं कहा। तब उसने अपने सेलफोन पर बात करके मेरे जीजा को आने को कहा- यार आओ यहाँ एक मस्त रंडी तुम्हारा इन्तज़ार कर रही है।

मैं तो जीजा के आने की बात सोच कर सिहर गई। अब उन लोगों के लंड फिर से मेरी कहानी सुनकर तैयार हो गए थे।

एक बार फिर मेरे बुर में लौड़े घुसने लगे। अबकी बार एक सिपाही ने मेरी गांड को निशाना बनाया और मेरी दोनों तरफ से जबरदस्त कुटाई हुई। मैं तो पूरा निहाल हो गई ! मेरी गांड लंड ले-ले के पूरी लाल हो गई। चारों ने जगह बदल-बदल के मुझे चोदा। हाय मेरा रंडीपन मेरे ऊपर हावी हो गया था। मैं तो मदहोश हो गई थी। याद भी न रहा कि मेरे पतिदेव बगल वाले कमरे में बंद हैं। सबने मुझे चोद-चोद कर मेरी बुर को एकदम खोल दिया। इस बार सबने एक साथ मेरे मुंह में अपना पानी दिया। मुझे न चाहते हुए भी उसे पीना पड़ा।

तभी नीचे गाड़ी रुकने की आवाज़ आई, मैं समझ गई कि जिज्जू आ गया है ! मेरी बुर जो आठ-दस बार झड़ चुकी थी, एक बार फिर पानी देने लगी।

तभी दरवाज़े पे जीजा आया, वो मुझे देखकर सन्न हो गया। मैं दौड़ कर उससे लिपट गई। वो सब समझ गया। तुंरत उसने अपने कपरे उताड़े और दरोगा से बोला- अरे यार ! इस हरामजादी रंडी को कहाँ से पकड़ लिया।

अरे नीलू रानी कैसे यहाँ?

तब मैंने उसे सारी बात बताई तो वो हंसने लगा और बोला- साली कोई मर्डर नहीं हुआ है शहर में ! ये तो तू इनको भा गई होगी और ये तेरे को फंसा के यहाँ अपने लौड़ों पर नचवा रहे हैं ! चलो ठीक भी है ! तेरी जैसी मादरचोद रंडी की इसी तरह गांड मारी जानी चाहिए। अरे यार ! नीचे मेरा अर्दली होगा, उसे भी बुला ले, वो भी इसे देखेगा तो मस्त हो जायेगा। चल साली, पहले मेरा लौड़ा तो चाट !

कसम से मैं इस समय खुद को एक रंडी ही समझ रही थी और खुल कर अपनी खुजली शांत करना चाहती थी। मैं भी खुल के उनके लौड़े चाटने लगी। जीजा का अर्दली भी मुझे देख कर मस्त हो गया।

अब कमरे में केवल मैं जीजा, दरोगा और वो अर्दली थे। तीनों मुझे फिर से नोचने लगे और गन्दी गन्दी गालियां देने लगे। मुझे भी मज़ा आ रहा था।

उन तीनों के लंड चूसने के बाद मैं बोली- जीजा, राजा, मेरा मन कर रहा है कि एक साथ तुम सब के लौड़े मेरे तीनों छेद को भर दें ! कसम से पिछला चोदन याद दिला दो !

जीजा बोला- अरे हरामजादी, तू चिंता मत कर ! सुबह तक तू अपने पैरों पर नहीं जा सकेगी ! साली मैं तो तेरा गांड मरूँगा !

दरोगा बोला- मैं तो इसके मुंह को चोदूँगा !

अर्दली बोला- साहब लोग थैंक्यू ! इस साली की बुर तो एकदम ताजी लौंडिया की तरह फूली है ! मैं तो इसी में अपना डंडा डालूँगा ! आज इसे मालूम होगा कि पुलिस और पीएसी जब मिल के मारते हैं तो क्या होता है।

फिर क्या, उनके मूसल मेरी गांड, बूर और मुँह में घुस कर उधम मचाने लगे। मैं तो एकदम से मस्ता गई। हाय, क्या चुदाई थी !

जगह बदल बदल कर तीनों ने सारी रात मेरी पति की जमानत का पूरा इस्तेमाल किया। हाय रे जीजा का काला लंड ! उफ्फ ये दरोगा मुआ तो सारी रात मुझे पेलता ही रहा, कभी मुंह में, कभी बुर में तो कभी गांड में ! सारी रात सब मेरी जवानी को रौंदते रहे और मै रंडियों की तरह चुदती रही। हाय रे जवानी- उफ्फ्फ ये उफनती जवानी केवल दस इंच के लौड़ों से ही मस्त रहती है, वैसे तो मेरे पति का भी नौ इंच का है, पर वो जब भी पेलते हैं तो अकेले ! हाय, यहाँ तो कई सारे मिल के मेरी बच्चेदानी को फाड़ डालते हैं।

किसी तरह पेलवाते- पेलवाते सुबह हुई। रात भर मैं आह,उच्च, आउक्च,उफ्फ, आई, हाय,सीईईईई. उई मां और न जाने कौन सी मस्ती वाली सिस्कारें मारती रही।

मैंने अपने पूरे कपड़े पहने। जीजा जल्दी चला गया, दरोगा ने मेरे पति को सख्त ताकीद देकर कहा- अगर किसी से कहा तो जान से तो जाओगे ! तेरी बीवी की बुर में डंडा भी पेलेंगे ! Antarvasna

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