Important Notice: Post Free Ads Unlimited...🔥🔥🔥

Massage Girl in Etah Book Professional Massage Services Online

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

Read Our Top Call Girl Story's

हाय दोस्तो, Antarvasna

खासकर प्यारी-प्यारी महिलाओ, आज Antarvasna मैं अपने जीवन के एक यादगार हसीन दिन की दास्तान सुना रहा हूँ … आशा ही नहीं पूरा विश्वास है कि आप सब गीले और मस्त हो जायेंगे।

यह बात सन 1996 के दिसम्बर के पहले सप्ताह की है। मैं उन दिनों लख्ननऊ में रहता था और अक्सर बनारस के पास अपने गाँव जाया करता था, वहाँ मेरा लंगोटिया यार डी पी रहता था। हम जब भी मिलते खाने-पीने का दौर चलता।

उस रात को उसने बताया कि कुछ दिन पहले वह और उसके गाँव का एक लड़का चंदौली की नीलम नाम की एक लड़की को अपने फ़्लैट पर स्कूटर से ले आये थे और दिन भर में दोनों ने 3-3 बार चुदाई की थी। लड़की मस्त थी और जम के चुदवाई कराई थी। अगर मैं चाहूँ तो वो कोशिश करके उसको ला सकता है, पर इसके लिये हमें अपनी मारुति कार से चन्दौली चलना पड़ेगा, कार देखकर वह आसानी से तैयार हो जायेगी। (उन दिनो मारुति का क्रेज़ था)।

डी पी ने बताया कि लौण्डिया बहुत ही चुदक्कड़ है तथा थोड़ा बहुत व्हिस्की भी पीती है, थोड़ी व्हिस्की पीकर बहुत ही मज़ा देगी। यह सुनकर मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। अगले दिन हम दोनों चन्दौली गये और मुझे गली में छोड़कर वह नीलम से मिलने उसके घर चला गया। किसी तरह मौका पाकर उसने मेरे बारे में बताया और साथ में बनारस चलने को कहा। उसने अगले दिन सुबह चलने को कहा तो हम लोग पास ही स्थित अपने गाँव चले गये। नीलम को मैं देख तो पाया नहीं था पर अगले दिन उसके साथ मस्ती की कल्पना से ही मुझे रात भर नींद नहीं आई और रात भर लण्ड महाराज तने ही रहे। दरअसल कई सालों से बीबी के अलावा कोई दूसरी लड़की या औरत मिली ही नहीं थी … स्वाद बदलने की कल्पना से ही मैं बेचैन था।

खैर अगले दिन हम दोनों दोस्त चन्दौली गये और पिछले शाम की तरह मैं गली में अपनी कार में बैठा रहा और डी पी उसके घर में चला गया। करीब आधे घण्टे बाद वह बाहर आया और बोला कि एक समस्या आ गई है। दरअसल नीलम को कुछ बहाना बना के घर से जाना था तो उसका छोटा भाई जो दसवीं में पढ़ता था वह भी कार देखकर साथ चलने की जिद करने लगा तो घर वालों ने कहा उसको भी लेती जाओ। नीलम ने डी पी को इशारा किया कि लेते चलो कोई रास्ता निकल आयेगा ।

उसने कहा कि थोड़ा रिस्क तो है पर चलते हैं कोई न कोई रास्ता तो निकलेगा ही।

कुछ देर बाद हम चारों चल दिये। डी पी नीलम के साथ कार में पीछे बैठा और रास्ते में ही उसने मेरे बारे में बताकर साथ रात गुजारने की पेशकश की तो वह झट तैयार हो गई (बाद में उसने बताया कि मेरा भव्य व्यक्तित्व देखकर उसका मन खुद ही मुझसे चुदवाने को मचलने लगा था) वैसे वह तो जान ही रही थी कि डी पी इसी काम के लिये बनारस ले जा रहा है। हाँ उसने साफ़ कह दिया कि उस दिन की तरह दोनों को नहीं झेल पायेगी, दरअसल वह मुझसे पूरी मस्ती के मूड में थी। डी पी ने भी उसे बता दिया कि मैं काफ़ी शौकीन हूँ तथा किसी अच्छे होटल में ही रात गुजारूँगा, अच्छा खाना … अच्छी शराब और नीलम का शबाब … बस मस्ती ही मस्ती … ।

उन दोनों ने योजना बनाई कि डी पी अपनी दुकान पर पाण्डेपुर उतर जायेगा और हम तीनों दिन भर सारनाथ घूमेंगे तथा शाम को डी पी नीलम के भाई को अपने फ़्लैट पर यह कह कर लेता जायेगा कि मुझे नीलम को किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति से किसी जरूरी काम के सिलसिले में मिलाना है। दरअसल नीलम उन दिनों थोड़ी-2 राजनीति और समाजसेवा में शुरुआत कर रही थी तथा उसके अभिभावक भी उसके बाहर आने-जाने तथा कभी-2 रात में भी बाहर रुक जाने पर आपत्ति नहीं करते थे। रात बाहर रुकने के लिये वह कोई न कोई बहाना बना देती थी और हम दोनों उन्हें छोड़ कर किसी होटल में जाकर रात गुजारेंगे, उसके भाई को डी पी कुछ बहाना बना कर हमारे फ़्लैट पर न लौटने का कारण बता कर फ़ुसला लेगा।

नीलम करीब 22 साल की दुबली पतली सी गोरी लड़की थी, उसका चेहरा मोहरा औसत ही था वह देखने में कोई खास तो नहीं लग रही थी पर बुरे काम के लिये बुरी नहीं थी … और डी पी ने उसके चुदवाने की जो तारीफ़ की थी तथा जिस बाँकी नज़र से वो मुझे देख रही थी … आ … ह … ह … ह … मेरा दिल तो बल्ले-बल्ले कर रहा था।इधर कई सालों से बस अपनी धर्मपत्नी के साथ धर्म की चुदाई ही करता रहा, कभी स्वाद बदलने का मौका ही नहीं मिला, इसलिये भी मैं अत्यन्त उत्तेजित था … बस अब मन्जिल कुछ घण्टों की दूरी पर थी … बस एक काँटा नीलम का भाई था, डी पी के बनाये प्लान के मुताबिक शाम को वह सेट हो जाये तो रात अपनी थी।

हम तीनों दिन भर सारनाथ घूमते रहे। बीच-2 में उसके भाई को कहीं किसी बहाने से भेजकर हम सम्भावित मस्ती की बातें भी कर ले रहे थे। दोनों का ही इन्तज़ार में बुरा हाल था। एक बार तो उसको कहीं भेज कर हम दोनों कार लेकर फ़ुर्र हो गये और करीब आधे घण्टे बाद लौटे और बहाना बना दिया कि आशापुर चले गये थे सर दर्द की दवा लेने।

नीलम ने बड़ी ही बेबाकी से बताया कि उसे सेक्स की बड़ी प्यास रहती है परन्तु अच्छे साथी तथा मौका नहीं मिल पाता। मेरे यह कहने पर कि तने लण्ड के कारण मेरा बुरा हाल है, वह बोली कि मेरी भी तो पैण्टी गीली हो रही है, क्या करूँ?

मैंने पूछा कि गरम होने पर कैसे शान्त होती हो तो वो बोली- जब कोई उपाय नहीं होता तो काफ़ी देर तक ठण्डे पानी से नहाती हूँ तो तन की गरमी शान्त हो जाती है।

लन्च के समय वह मेरे बगल में बैठी तथा अपनी जाँघों से मेरी जाँघ रगड़ती रही तथा मौका पाकर पैण्ट के उपर से मेरे लण्ड को सहला देती। उसकी हरकतों से मैं तो पागल हो रहा था और शाम होने का इन्तज़ार बहुत खल रहा था। यही हाल कमोबेश नीलम का भी था। मन तो कर रहा था कि नीलम को लेकर सारनाथ के आस पास के किसी अरहर या गन्ने के खेत में घुस जाँऊ … और …

तो भैया किसी तरह दिन ढला और शाम हुई और हम वापस पाण्डेपुर पहुँचे और डी पी उसके भाई को लेकर अपने फ़्लैट पर चला गया और मैं नीलम को लेकर होटल की तलाश में। चूँकि शाम हो चुकी थी अतः 2-3 होटलों में जगह नहीं मिलने के बाद कैन्टोमेन्ट के एक अच्छे होटल में अपने बज़ट में कमरा मिल गया। तकरीबन आठ बजे हम कमरे में चेक-इन किया और दरवाजा बन्द करते ही नीलम मुझसे जोर से चिपट गई और लगी मुझे चूमने … वाह क्या चीज थी नीलम भी … क्या प्यास था उसकी आँखों में … क्या उत्तेजना थी … मैं तो एकदम गरमा गया और उसे जोर से अपने सीने में भींच कर उसके गालों पर चुम्बनों की बौछार कर दी।

वह भी दोगुने जोश से पलटवार कर रही थी … यानि मेरे गालों पर और होठों पर अपने चुम्बनों की बौछार शुरू कर दी … खड़े-खड़े ही हम दोनों गुत्थम-गुत्था होकर एक दूसरे के होंठ चूसने लगे … दोनों मानो एक दूजे के होंठों को खा जाना चाहते हों। होठों का ज्वार कुछ कम हुआ तो दोनों बिस्तर पर आये और मैंने उसकी चूँचियों को ऊपर से दबाना शुरू किया। नीलम की चूँचियाँ छोटी-2 थी, पर उत्तेजना से कड़ी हो गई थी। मैंने उसकी शमीज उतार दी, अन्दर वह किशोरियों वाली अन्डर-शमीज पहने थी … कोई जवान की तरह ब्रा नहीं पहने थी, यह देख कर मुझे हँसी आ गई तो उसने पूछा- हँस क्यों रहे हो ?

मैंने कहा- तुम्हारी अन्डर-शमीज देख कर मुझे लग रहा है कोई स्कूल की छोकरी को फ़ुसला कर गलत काम कर रहा हूँ।

इस पर नीलम बोली- चूँचियाँ छोटी-2 हैं, अतः ब्रा नहीं पहनती, परन्तु आपको मुझसे पूरी मस्ती मिलेगी ! मैं कोई कुवाँरी नहीं हूँ, खेली-खाई हूँ, चूँचियों की कसर मेरे निप्पल चूस-2 कर निकाल लीजिये … चाहे जितने जोर से चूसिये, मैं उफ़्फ़ नहीं करूँगी … चाहो तो निप्पल काट लो मेरे राजा … अब देर मत करो मेरे ठाकुर साहब ..

यह कह कर उसने अपना निप्पल मेरे मुँह में घुसा दिया … और मैं लगा चूसने ! उसकी घुण्डियों को दाँतो से हौले-2 काटता हुआ !

और नीलम उत्तेजना से पागल हो के मेरा पैण्ट खोल के अण्डरवीयर से लण्ड बाहर निकाल कर हाथों से सहलाने लगी … मैं भी सलवार के ऊपर से उसकी पैण्टी के अन्दर उसके गरम होती चूत को सहलाने लगा … ओफ़्फ़् … सहलाते ही नीलम मचल उठी और जोर-2 से मेरे लण्ड को दबाने लगी और मेरे कपड़े उतरने लगी। और बोली- अब नहीं सहा जाता ! जल्दी से मेरी बुर में अपना लण्ड पेल कर मेरी बुर की प्यास बुझाइये मेरे सरकार … अब और नहीं सहा जाता !

मैंने उसकी सलवार और पैन्टी उतार के उसे पूरा नंगा किया और उसको सीधा लिटा कर दोनों टाँगें उठा कर बुर को ऊपर उठा कर उसकी बुर के मुँह पर अपना टनटनाया लण्ड रगड़ने लगा … नीलम तो जैसे पागल हो गई … मेरे गले में बाँहें डालकर जोर से मेरा एक चुम्मा लेकर बोली … अब पेलो नाऽऽऽऽ आऽऽऽऽआ … क्यों तड़पा रहे हो राजाऽआऽआऽआ …

मैंने उसकी चूत के मुँह पर लण्ड रखा और लण्ड को घुसाया …

सुपाड़ा जाते ही वो सिसकारी मारते हुए बोली … आआ आआहह हहह … रुको मत मेरे दोस्त ,पूरा लौड़ा पेल दो एक साथ … ओह … ह … ह … ह … चिन्ता मत करो राजा मैं देखने में बच्ची जरूर लगती हूँ पर कोरी नहीं हूँ, पेल दो जोर से … भले ही फ़ट जाये नीलम की बुर … बस क्या था, मैं तो बौखला गया और एक ही धक्के में पूरा लण्ड उसकी चूत में पेल दिया …

उसने उफ़्फ़ करके मुझे जकड़ लिया और मेरे सीने से चिपट गई और मेरे निप्पल को चाटने लगी। मैं थोड़ी देर वैसे ही लण्ड देव को चूत की गुफ़ा में डालकर विश्राम करने लगा, जब एकाध मिनट तक कोई हरकत नहीं हुई तो नीलम खुद ही अपनी चूत को हिलाने लगी और मेरे गालों को सहलाते हुए कान में बोली- राजा जी, अब और ना तड़पाओ … अब चोद डालो नीलम को … मारो धक्का … अब मत रुको जानू …

बस भैय्या, मैं तो शुरू हो गया और दे दनादन धक्का लगा कर नीलम की बुर को चोदने … हचा … हच् … हच् … हच् … हच् … फ़च् … फ़च् … फ़चा … फ़च् … फ़च् … फ़च् … सटा-सट् … सट … पूरा कमरा फ़च-फ़च और नीलम की सिसकरियों से गूंज उठा … वो जोर-2 से अपने चूतड़ उठा कर मुझे जकड़ कर मेरे होंठ चूसने लगी और मुझे ललकारते हुए अपनी बुर को फ़ाड़ देने के लिये उकसाने लगी।

बड़ी देर तक मैं नीलम की बुर की चुदाई करता रहा। कमरे में बस हमारे साँसो तथा फ़चा-फ़च … और बीच-2 में उसकी सिसकारियों की आवाज आ रही थी। ज्यादा गीली होने पर मैंने तौलिये से अपना लण्ड और उसकी चूत साफ़ की और फ़िर से चोदना शुरू किया..

काफ़ी देर बाद हम दोनों ही लगभग एक साथ झड़े और उसने मुझे जकड़ लिया और हम दोनों लस्त-पस्त होकर सो गये।

शेष अगले भाग में ! Antarvasna

sex stories in hindi

ये बहुत साल पुरानी sex stories बात है। मैं इंडियन आयल नगर, अंधेरी, बम्बई मैं रहता था। मैं १८ साल का था। वो मेरी पड़ोसी, उसका नाम राधिका था पर प्यार से उसे उसके परेंट्स सिया कहते थे।

मैं उसकी और पहले दिन से आकर्षित हुआ था। मुझे कैसे भी करके उसे हासिल करना था। सिया बहुत ही गोरी, स्लिम और सुंदर लड़की थी। और बहुत ही शर्मीली। जब भी हमारी नज़रें मिलती थी वो मुझे बहुत स्वीट स्माईल दे।

मुझे धीरे धीरे ये एहसास होने लगा कि वो भी मुझे चाहने लगी है। हमारे परिवारों में अच्छे रिश्ते थे। इसलिये वो हमारे घर रोज आया करती थी। वो यु पी के माथुर फ़ैमिली से थी और मैं महाराष्ट्रियन। लेकिन फिर भी हमारे परिवार में अच्छे रिश्ते थे।

गर्मी की छूट्टियाँ करने वो अपने बड़े भाई राकेश के साथ दिल्ली अपने मामा के घर जाने वाली थी। मेरी मम्मी मे सिया और उसके भाई को लंच के लिये बुलाया। लंच से पहले हमने चेस कैरम खेले। मेरी नज़र सिया पे ही थी। उसे भी इस बात का पता चला और वो और भी शर्माने लगी।

उसने ब्लू कलर की स्लीवेलेस और स्कर्ट पहनी थी और उसमे और भी फेयर और सुंदर लग रही थी। मैं ने शोर्ट्स और टी-शर्ट पहनी थी। मैं थोड़ा मोटा था। पर उसे फिर भी मैं बहुत पसंद था। वो मेरी और देख कर ही मुस्करा रही थी।

उसे देख कर शोर्ट के अंदर मेरा लंड टोवर जैसा खड़ा हुआ। मैं अपने आप पर कंट्रोल नहीं कर पा रहा था। लंच के बाद मैं ने उसे अपने कॉमिक्स, स्टोरी बुक्स रीडिंग के लिये दिये। उसका भाई राकेश को नींद आने लगी और वो अपने घर चला गया।

मेरी मम्मी बेडरूम मैं आराम करने गयी। मैं और सिया अकेले थे डिन्निन्ग हॉल में। मैं उसके करीब सोफ़ा सेट पे बैठा था। उसे मैं भूखी निगाहों से देख रहा था।

उसने अचानक मुझे कहानी के बारे में कुछ सवाल पूछा और मैं ने उस पल का लाभ लेकर उसके पास गया और उसके दायें गाल को किस किया। उसको किस करने पर मुझे लगा के मैं जन्नत में हूं। उसने अपनी आंखें बंद की और मैं ने उसे फिर से चूमा किया। अब की बार जोश और जोर से.

अब मेरे होश उड़ रहे थे। मैने उसे अपनी बाहों में लिया और उसे सोफ़े पे लिटाया। वो भी बहुत एक्साइटेड थी। हमारे दोनो के लिये पहली बार था।

उसने बहुत प्यार से मेरे बाल को अपने हाथों से संवारा और मेरे माथे को चूमा। बस उसके बाद हम दोनो पर ऐसा जुनून छा गया कि शब्द ही नहीं है बयान करने के लिये। मैं उसके ऊपर लेता और उसे चूमने चाटने लगा।

उसने मेरी शोर्ट्स के अंदर हाथ डाला और मेरा लंड को अपने नाजुक हाथों में लिया और उसके साथ खेलने लगी। मैने अपनी शोर्ट उतार दी और मेरा लंड उसके मुंह में डाल दिया। वो उसे सक करने लगी। मैने उसके मुंह में ही किया जिसे वो पी गयी। अब उसे और भी नशा चढ़ा।

मैने धीरे से उसका स्कर्ट निकाल दिया, उसकी ब्रा भी उतार दी और उसके बूब्स को चूसने लगा। वो बहुत ही एक्साइट हो रही थी और आवाज़ें कर कह रही थी “ओह अजय माय डार्लिंग!

मैं उसके बदन के हर हिस्से हो किस कर रहा था। अब मैं उसके चूत की और आया और उसे कस कर किस किया। मैं उसकी चूत को पागलों की तरह चाट रहा था। वो अब ओर्गास्म के करीब पहुंच हो रही थी। मैं ने अपनी उंगली से उसकी चूत में डाली और वो एकदम से झड़ गयी।

अब मैने अपना लंड उसकी चूत के अंदर डाला। उसका छेद बहुत ही छोटा था क्योंकि वो एकदम कुंवारी थी. वो बहुत तेज़ चिल्लाने लगी। उसे दर्द हो रहा था।
मैने उसे शांत किया और रिलेक्स होने दिया। धक्के देकर मैं धीरे धीरे अपने बड़े से लंड को उसकी चूत में अंदर डाला। वो आनंद से चिल्लायी और मुझे किस करती रही। मैं भी चिल्लाने लगा “मैं तुम्हारे लिये कुछ भी करूंगा”।

उसके बाद हम दोनो एक घंटे तक एक दूसरे की बाहों में सोये और फिर उसकी मम्मी ने जब उसे आवाज़ दी तो वो जल्दी से कपड़े पहन कर के निकल पड़ी। ये था मेरे पहला नशा पहला खुमार पहला जवां प्यार मेरी खूबसूरत पड़ोसन के साथ।sex stories

Antarvasna

मैं अपना लंड हाथ में पकड़ कर Antarvasna उसके होठों को छुआने लगा और जैसे ही वो कुछ बोलने लगी मैंने झट से उसका मुँह पकड़ कर लंड अंदर डाला और उसको बोला- प्लीज़ एक बार इसको चूसो!

और मैं निर्मला के बाल को पकड़ कर धक्का मारने लगा और मैं भी खुद आगे पीछे होने लगा. मैंने उसकी मुँह चुदाई चालू कर दी. करीब दस मिनट के बाद मैंने सारा लंडरस उसके मुँह में डाल दिया और उसके पास लेट गया.

करीब पाँच मिनट के बाद उसका एक हाथ को पकड़ कर अपने लंड पर रख मैं खुद उसका हाथ पकड़ कर आगे पीछे करने लगा और उसकी चूत को मसलने और उंगली से चोदने लगा.

तो उसने कहा- भैया प्लीज़ मुझे जाने दो.
मैंने कहा- निर्मला, असली काम अब चालू होगा!
तो वो बोली- क्या?
हाँ, मैं तुझे अब चोदूँगा!
उसने कहा- नहीं आप मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकते!

मैंने कहा- निर्मला, ऐसा हर लड़की और लड़का चोदते हैं और चुदवाते हैं जैसे कि तुम्हारी मम्मी पापा से चुदवाती है, तुम्हारी भाभी भैया से चुदवाती है, मेरी पत्नी मेरे से चुदवाती है, फिर तुम क्यों मना कर रही हो!

उसका हाथ मेरे लंड पर रखते ही मेरा लंड टाइट होने लगा था और वो भी गरम हो गई इन सब बातों से, और बोली- भैया मैंने पहले कभी भी नहीं किया है!

(दोस्तो, मैं उसकी शरम मिटाना चाहता था और मैंने कल की तरह उस टॉपिक छेड़ दिया)

मैंने उससे पूछा- कल तो तुमने इतना नाटक नहीं किया, आज अचानक इतना नाटक क्यों?
वो बोली- भैया, कल जो हुआ वो एक हादसे की तरह था!
मैंने कहा- ठीक है!
मैंने उससे पूछा- कल तुमने अपनी मम्मी-डैडी की चुदाई देखी या नहीं?
तो बोली- भैया, नहीं!
मैंने कहा- क्यों?
बोली- मैं ऐसी लड़की नहीं हूँ!

मैंने उसको कहा- मैंने कब कहा कि तुम ऐसी लड़की हो! मैं तो तुझे बता रहा था कि तुम सिर्फ एक बार देखो और तुमको सीखने को भी मिलेगा! खैर कल नहीं देखी तो तुम आज देखना और मुझे बताना कि कैसी है! ठीक है? और मैंने चूत में उंगली आगे पीछे करना ज़ाऱी रखा और वो मेरे लंड को हिलाने लगी.

मैं अब उसके ऊपर आया और उसकी टाँगों को थोड़ा अलग किया और उसकी गीली चूत पर लंड को और मुँह पर मुँह को रख कर दोनों हाथों को उसकी गांड के नीचे रख कर एक ज़ोऱ का धक्का मारा, उसकी चीख मेरे मुँह में ही रह गई और लंड एक इन्च अंदर चला गया. मैं दोनों हाथों को नीचे से निकाल कर उसकी दोनों चूची के चूचुक मसलने लगा, साथ में चुम्बन भी कर रहा था. लंड अंदर रखा और धीरे धीरे उसको चोदने लगा.

थोड़ी देर के बाद मैंने फिर एक ज़ोऱ का झटका मारा और लंड 3 इंच अंदर घुस गया और वो मेरी पीठ पर मारने लगी क्योंकि उसकी चीख मेरे मुँह में ही रह गई और उसकी झिल्ली भी फट गई. वो एक दम कुंवारी थी, खून निकलने लगा और वो तड़पने लगी, मेरे बालों को खींचने लगी. मैंने मुँह को हटाया और बोला- क्या हुआ?

वो बोली- भैया! मुझे बहुत दर्द हो रहा है!
मैंने कहा- निर्मला, मुझे भैया मत कहो और मेरे नाम से ही पुकारो! ऐसा दर्द पहली बार करने से होता है, तुम घबराओ मत, मैं हूँ ना!

और मैंने लंड बाहर निकाला और उसके मुँह पर हाथ रखा और एक हाथ से लंड को पकड़ कर उसकी चूत पर रख और ज़ोऱ का झटका मारा, इसके साथ ही मेरा लंड 6 इंच उसकी चूत में चला गया.

मैंने उसके मुँह से हाथ हटाया और चूची मसलने लगा- निर्मला, तेरी चूत तो कमाल की है!
वो बोली- भैया, प्लीज़ आप बाहर निकालो, मुझे बहुत जलन हो रही है और दर्द भी बहुत हो रहा है!
मैंने कहा- क्या निकालूँ रानी?
भैया, आप इतने गंदे हो, इधर मैं मरी जा ऱही हूँ और आप मज़ाक के मूड में हो!
मैंने कहा- निर्मला, प्लीज़ एक बार कहो कि क्या निकालूँ!
वो बोली- प्लीज़ भैया! मैं नहीं कहूँगी, आप बाहर निकालो!
मैंने कहा- ठीक है, जब तक तुम नहीं कहोगी, मैं बाहर नहीं निकालूँगा!

और इसके साथ ही उसको धीरे धीरे चोदने लगा और उससे बोला- तुम कितनी अच्छी हो, तुम्हारे बूब्स कितने प्यारे हैं, तुम्हारी चूत का कोई जवाब नहीं!

इतना कहने के बाद मैं उसकी चूची चूसने लगा साथ में धीरे धीरे चोदने लगा. थोड़ी देर के बाद उसको मजा आने लगा तो बोली- भैया प्लीज़ आप और अंदर मत डालना! नहीं तो मैं मर जाऊँगी!

मैंने कहा- क्या अंदर नहीं डालूँ?

और मैंने लंड को बाहर निकाला और एक झटका मारा, मेरा फिर 6 इंच तक अंदर गया. निर्मला सिसकारी लेने लगी- ऊऊऊवीई ईईईई ईम्म्म्म् म्म्म्मा आआआ! मार डाला इस पागल ने! मैंने कहा था कि अंदर मत डालो! फिर डाल दिया!

मैंने कहा- क्या डाल दिया?
तो बोली- भैया, मैं सिर्फ एक बार ही कहूँगी!
मैंने कहा- ठीक है, बोलो!

इसके साथ ही मैं उसको धीरे धीरे चोदने लगा और वो भी पूरी गरम हो गई और बोली- भैया, आप भाभी के साथ भी ऐसे ही करते हैं?
मैंने कहा- नहीं!
तो मेरे साथ में ऐसा क्यों?
मैंने कहा- मेरी बीवी तो मेरे साथ खुलकर पेश आती है, तुम्हारे जैसे नहीं है, जब मैं चोदने के मूड में नहीं होता हूँ तो मेरे पास आकर बोलती- जी आप मुझे चोदिए ना! देखो मेरी चूत कितनी तड़प रही है तुम्हारे लंड के लिए!

भैया आप झूठ बोल रहे हैं!
मैंने कहा- तुम एक काम करो, मेरी पत्नी से कभी भी पूछ लेना!
भाभी को शरम नहीं आती?
मैंने कहा- तुमको कल ही बता दिया था- सब तेरी मम्मी ने ही सिखाया है, जब चुदाई करते हैं तो हम लोगों को गंदी भाषा बोलनी चाहिए, इससे प्रेम बढ़ता है और जीवन भर प्यार रहता है आपस में!

अब मैंने लंड को पूरा बाहर निकाला और फिर जोर का झटका मारा तो मेरा पूरा लंड चूत को चीरता हुआ अंदर चला गया और मैं उसके ऊपर लेट गया.
निर्मला बोली- भैया प्लीज़ बाहर निकालो! बाहर निकालो!
मैंने कहा- जब तक तुम नहीं कहोगी मैं तुझे ऐसे ही चोदता रहूँगा और रगड़ता रहूंगा!
तो बोली- भैया, मुझे शरम आती है!
मैंने कहा- अपनी आंख बंद करके एक बार कहो- प्लीज़ लंड को बाहर निकालो!
तो बोली- भैया मैं नहीं कह पाऊँगी!
मैंने कहा- एक बार बोल लोगी तो टईक रहेगा, नहीं तो जिंदगी भर नहीं बोल पाओगी! और कुछ नहीं जल्दी से बोल दो!
तो बोली धीरे से- भैया प्लीज़ लंड को बाहर निकालो!
मैंने कहा- क्या निकालूँ?
तो बोली- लंड को!

मैंने लंड को बाहर निकाला और वापस ज़ोऱ से अंदर डाला और धीरे धीरे से चोदने लगा साथ में चूची को मुँह में लेकर चूसने लगा.
मैंने उससे पूछा- कैसा लग रहा है?
तो बोली- प्लीज़ आप मुझे मत पूछो!
मैंने उससे कहा- निर्मला, तुमको आज मैंने एक बहन से पत्नी बना दिया है, तुम्हारी आज प्रमोशन हुई है, तुझे चोदने में बहुत मजा आ रहा है, ऐसा मजा तो मुझे कभी नहीं आया!
मैं ऐसे ही उसे गरम करके चोद रहा था और वो भी मेरा खुल्लम-खुल्ला साथ देने लगी थी.

दोस्तो मुझे इसको चोदने में इतना मजा आया कि आपको नहीं बात सकता! आप समझ लीजिए कि मुझे जन्नत मिल गई थी!
मैं उसकी चूत से धीरे धीरे लंड बाहर निकालता और अंदर चूत में डाल कर चोद रहा था, बीच बीच में ज़ोऱ से शॉट भी लगाता था और वो हर शॉट के साथ वो सिहर उठती और मुझे बोलती -भैया, मुझे कुछ हो रहा है!
मैंने उसकी चूची को रगड़ते हुए पूछा- क्या हो रहा है रानी?
तो बोली- मैं नहीं बता सकती!

मैं अब उसे ज़ोऱ ज़ोऱ से चोदने लगा और दोनों हाथों से उसकी चूची को मसलते हुए बोला- ले मेरी रानी, मेरा लंड ले! और ले! अभी तेरी चूत को भी मजा आ रहा है! तू मुझे नहीं बताएगी तो तेरी चूत बताएगी!
मेरे हर शॉट का जवाब उसकी ओओ… आआईईई! जल्दी! प्लीज़ जल्दी करो! ओओ आआआ! में था.

मैं उसे ऐसे ही चोदने लगा और पूरे कमरे में पच पच और उसकी आवाज़ें गूंज रही थी. मैंने निर्मला को करीब़ 10 मिनट और चोदा!
वो कितनी बार झड़ी, मुझे नहीं मालूम! जब मैं झड़ने को हुआ तो मैंने पूछा- निर्मला, मैं अब झड़ने वाला हूं, कहाँ निकालूं मेरा प्रेम रस? तेरी चूत में या फिर तेरे मुँह में?
वो बोली- भैया चूत में मत डालना! आप बाहर ही निकाल लो!

मैंने लंड को चूत से बाहर निकाला और उसके मुँह के पास लेकर उसको बोला- रानी मुँह खोलो!
वो ना करने लगी और अपने मुँह पर हाथ रख लिया. मैंने उसका हाथ हटाया और लंड को मुँह में डालकर मुँह चोदने लगा और कुछ ही देर में मेरे लंड ने पिचकारी छोड़ी और मैंने उसे प्रेम-रस पिला दिया. जब मेरा लंड सिकुड़ गया तो मैंने बाहर निकाला. निर्मला के मुँह से लंड निकालते ही वो बेड पर निढाल हो गई और मैंने बाथरूम ज़ाकऱ शॉवर लिया और बाहर निकल अपने कपड़े पहनने लगा, साथ में निर्मला को आवाज़ लगाई- निर्मला, उठो!

तो वो उठ नहीं पा रही थी, मैंने उसको सहारा दिया और बाथरूम ले गया और उसको मूतने के लिए बोला. वो बैठ कर मूतने लगी और मुझसे बोली- भैया तुम बाहर बैठो!
मैंने कहा- अब मेरे से शरम कैसी! अब तो हम पति-पत्नी की तरह हैं!

कैसी लगी मेरी कहानी, अपनी राय मुझे लिखें! Antarvasna

जब मैं इंटरमीडिएट में पढ़ती थी तो पूरी तरह जवान हो चुकी थी उम्र से भी और शरीर से भी!
मेरा बदन पूरा भर चुका था।
मेरे स्तन बड़े बड़े और सुडौल हो चुके थे.
मेरी कमर पतली और चूतड़ थोड़ा बड़े बड़े हो गए थे।

मेरी खुली खुली बांहें बड़ी सेक्सी दिखतीं थीं.
मुझे डांस करने का बड़ा शौक था तो मैं ठुमके खूब लगाती थी.
जो देख ले वो मदहोश हो जाए.

मेरी जाँघें मोटी मोटी हो गईं थीं और उनके बीच की चूत के तो कहने ही क्या …

मैं एक चुलबुली लड़की थी, पढ़ने में भी बहुत अच्छी थी और हंसी मजाक करने में भी सबसे आगे!

मेरा नाम रीतिका है दोस्तो!

मैं एक चंचल शोख़ और बिंदास लड़की हूँ.
मेरा कद 5′ 3″ का है, रंग गोरा है और चेहरा गोल है.

इंटर करने के बाद मुझे मेरे माता पिता ने शहर में मेरी बुआ जी के घर भेज दिया।
मैं उनके घर रह कर पढाई करने लगी।

मेरी बुआ जी का नाम श्रीमती साधना है और मेरे फूफा जी का नाम संजय है।

मेरे फूफा जी एक नेक सज्जन और शरीफ़ इन्सान हैं।
वे मेरी देख भाल अच्छी तरह करने लगे, मेरी पढ़ाई पर बहुत ध्यान देते थे, मेरी हर जरूरत को पूरा करते थे।

मेरी बुआ जी भी बड़ी अच्छी और मधुर स्वाभाव की थी और मुझे बहुत प्यार करती थीं।
मैं भी उन दोनों के साथ घुलमिल गयी थी।

मेरी पढ़ाई अच्छी चल रही थी साथ ही साथ कॉलेज में मेरी मस्ती भी हो रही थी।

मैं अपने सहेलियों से खुल कर बातें करने लगीं थीं।

मेरी सहेलियां अधिकतर लण्ड की बातें करतीं थीं. लण्ड के साइज और लण्ड के रंग की बातें।
कोई कहती- मेरे भाई का लण्ड बड़ा मोटा है.
तो कोई कहती- मेरे जीजू का लण्ड बड़ा लम्बा है.
कोई कहती- मेरे अब्बू का लौड़ा काला है और 8″ का है.
और कोई कहती- मेरे मौसा का लण्ड खड़ा होने पर तलवार की तरह हो जाता है।

मैंने तो कोई लण्ड न कभी देखा था और न कभी पकड़ा था तो उनकी बातें सुनकर मेरी झांटें सुलगने लगतीं थी।
लेकिन मेरी चूत जरूर गीली हो जाती थी।

अब मुझे गन्दी गन्दी बातें करना बड़ा अच्छा लगता था.
नॉन वेज चुटकुले तो मेरी जबान पर रखे ही रहते थे।
मैं अब अपनी दोस्तों के बीच खूब खुल कर बोलती थी लण्ड, चूत, गांड, भोसड़ा कहने में मुझे कोई शर्म नहीं आती थी।

एक दिन जब मैं रात में लेटी थी तो मेरे दिमाग में लण्ड की बातें घूम रहीं थीं।
मैं करवटें बदलते बदलते रात गुज़ारती रही।

तब तक रात के 12 बज चुके थे।

मैं बाथरूम जाने के लिए उठी.
बाथरूम से जब मैं वापस आ रही थी तो देखा कि बुआ जी के कमरे की धीमी धीमी लाइट जल रही है।
लाइट वैसे रात में तो जलती नहीं थी।

मैं उत्सुकता बस कमरे की खिड़की से अंदर झांक कर देखने लगी.
अंदर जो हो रहा था, उसे देख कर मैं दंग रह गयी।

मैंने देखा कि फूफा जी बिल्कुल नंगे चित लेटे हुइ हैं।
उनके पास बुआ जी भी बिल्कुल नंगी बैठी हुई हैं.

बुआ जी लण्ड मुठ्ठी में लेकर ऊपर नीचे कर रही हैं और लण्ड का टोपा भी चूम चाट रही हैं।

लण्ड पूरा तो नहीं दिखा पर जितना दिखा उससे लग रहा था कि लण्ड बड़ा मोटा था और सख्त भी।

ऐसे में मेरी चूत गीली हो गयी और मैं चूत में उंगली करने लगी, दूसरे हाथ से अपने मम्मे दबाने लगी।
Xxx अंकल सेक्सी भतीजी चुदाई की कहानी भी यहीं से शुरू हुई.

मुझे लगा कि अब बुआ की चुदाई होगी।
मैं चुदाई होने का बड़ी बेकरारी से इंतज़ार करने लगी।

अचानक बुआ ने अपनी टाँगें फैला दीं तो उनकी छोटी छोटी झांटों वाली चूत मुझे दिख गई.
इतने में फूफा जी बुआ के ऊपर चढ़ बैठे और लण्ड गच्च से एक ही झटके में पूरा घुसा दिया।

उसके बाद मैंने बुआ की पूरी चुदाई देखी।
फूफा जी को पीछे से चोदते हुए देखा और बुआ को झड़ता हुआ लण्ड चाटते हुए देखा।

इस तरह मैं हर रोज़ रात में बुआ फूफा की चुदाई देखने लगी और अपनी चूत में उंगली डाल डाल उत्तेजित होने लगी।
कई बार मेरी इच्छा हुई की मैं अंदर जाकर फूफा का लण्ड पकड़ लूँ पर मेरी हिम्मत नहीं हुई।

एक दिन बुआ ने कहा- रीतिका बेटी, मैं अपने मायके जा रही हूँ। क्या तुम चलोगी?
मैंने कहा- नहीं बुआ जी, मेरे एग्जाम चल रहे हैं, मैं नहीं जा सकती।

बुआ जी चली गई तो घर में हम दो, यानि मैं और फूफा जी रह गए।

रात में मैं अपने कमरे में और फूफा जी अपने कमरे में सोते थे।

एक दिन रात के 12 बजे फूफा जी उठ कर बाहर आ गए।

मैं जाग ही रही थी, उठ कर बाहर आ गई.
मैंने पूछा- क्या फूफा जी कुछ चाहिए?

वे बोले- नहीं बेटी, चाहिए कुछ नहीं, बस नींद नहीं आ रही है। तेरी बुआ जी भी चली गईं।
मैंने कहा- हां फूफा जी, नींद मुझे भी नहीं आ रही है।

उन्होंने पूछा- तुम्हें नींद क्यों नहीं आ रही बेटी?
मैंने कहा- अब क्या बताऊँ फूफा जी, आपको मुझे बताने में शर्म आ रही है।

वे बिना कुछ बोले अपने कमरे में चले गए।

ऐसे ही दिन बाद मैं अपने कमरे में अधनंगी लेटी हुई थी।
मेरे चूतड़, गांड खुली हुई थी, मेरे बूब्स दोनों खुले थे लेकिन चूत छिपी हुई थी।

फिर एकदम से फूफा जी कमरे में आ गए।
मैं सोने का बहाना किये लेटी रही और कनखियों से उन्हें देखती रही।

वे दो मिनट तक अपना लण्ड सहलाते हुए मेरे नंगे बदन को देखते रहे और फिर चले गए।
मेरी एक बार फिर झांटें सुलग गईं।
मैंने मन में कहा कि कितना बढ़िया मौका था … मुझे नंगी नंगी पकड़ क्यों नहीं लिया? पकड़ लेते तो मुझे आज लण्ड जरूर मिल जाता।

मैं लण्ड के लिए तड़पती हुई सो गयी।

फिर दूसरे ही दिन रात को 11 बजे मैं अपने आप को रोक नहीं सकी और फूफा जी के कमरे में चली गई।

मैंने देखा कि फूफा जी एकदम नंगे लेटे हुए अपना खड़ा लण्ड सहला रहे हैं और दूसरे हाथ से मोबाइल देख रहे हैं.
मैं समझ गयी कि वे मोबाइल पर पोर्न देख रहे हैं।

वे मुझे नहीं देख सके.
उनका लण्ड धीरे धीरे कड़क होता जा रहा था.

मैंने आहिस्ते से हाथ बढ़ाकर उनका लण्ड पकड़ लिया और कहा- फूफा जी, यह काम मेरा है आपका नहीं! लण्ड हिलाना, चूसना, चाटना मेरा काम है।

वे एकदम से बोले- अरे बेटी रीतिका तुम? सॉरी सॉरी मैं बस ऐसे ही …
मैंने कहा- मैं जानती हूँ फूफा जी, अपने आप को अकेला मत समझो मैं हूँ न!
ऐसा कह कर मैंने लण्ड मुंह में भर लिया और चूसने लगी, पेल्हड़ भी चाटने लगी.

फिर मैं बोली- बड़ा मोटा, हैंडसम और प्यारा लौड़ा है आपका, फूफा जी! मुझे इससे प्यार हो गया है।

मैं मस्ती से नंगी नंगी लण्ड चूसती रही, उनके नंगे बदन पर हाथ भी फिराती रही।

उन्हें भी मज़ा आने लगा।
वे भी मेरा नंगा जिस्म बड़े गौर से देखने लगे।

मैंने लण्ड चूसने की स्पीड बढ़ा दी तो लण्ड ने जल्दी ही उगल दिया वीर्य जिसे मैं बड़े प्यार से चाट गयी।

फिर उन्होंने मुझे अपने बेड पर नंगी बड़ी देर तक लिटा कर रखा।
इस तरह मैं हर रोज़ रात को फूफा जी का लण्ड चाटने और चूसने लगी।

मैं चाहती थी कि वे लण्ड पेलें मेरी चूत में और चोदें मुझे … पर वे शरीफ़ इतने थे कि मैं उनसे कुछ कह नहीं सकी.
शायद वे मुझे बर्बाद नहीं करना चाहते थे।

ऐसे में 2 दिन इंतज़ार में और गुज़र गए।

चौथे दिन जब मैंने उसका नंगा नंगा लण्ड पकड़ा तो बोली- अरे फूफा जी, आज तो आपका लण्ड कुछ ज्यादा ही मोटा लग रहा है? बिल्कुल लोहे की तरह कड़क हो गया है।
उन्होंने पलट कर कहा- रीतिका बेटी, तुमने ही इसे चूस चूस कर इतना मोटा कर दिया है।

मैं समझ गयी कि फूफा जी आज कुछ ज्यादा ही रोमांटिक मूड में हैं.
तब मैंने कहा- आज आपका लण्ड कुछ ज्यादा ही फुफकार मार रहा है फूफा जी … क्या बात है? क्या करने वाला है आपका यह बहनचोद लण्ड?

ऐसा बोल कर मैंने लण्ड गप्प से मुंह में डाला और चूसने लगी।
मुझे कुछ ज्यादा ही मज़ा आने लगा।
मैं लण्ड बार बार अंदर डालती और बाहर निकालती।

तभी एकाएक फूफा जी बेड के नीचे उतर कर खड़े हो गये, मुझे किनारे घसीट लिया मेरी गांड के नीचे तकिया लगा कर अपना लण्ड मेरी चूत पर रगड़ने लगे।

फिर अचानक लण्ड गच गचा से घुसा दिया अंदर और बोले- आज मैं तुझे चोदूँगा रीतिका। तेरी चूत आज फाड़ूंगा मैं, पूरा लण्ड घुसेड़ दूंगा तेरी चूत में, रंडी की तरह चोदूँगा मैं तुझे!

मैं समझ गयी कि फूफा का कई दिन का गुबार आज निकल पड़ा।
इससे मैं मन ही मन बड़ी खुश हुई।

फिर क्या … वे सच में घपाघप चोदने लगे मुझे और मेरी इच्छा पूरी होने लगी।

मैं भी मस्ती में बोली- चोद लो मुझे जितना चोदना चाहते हो, उतना चोद लो। यह चूत आपके लिए ही है यार!
फूफा जी को मैं यार कह कर बोलने लगी।

मुझे मज़ा आया तो बोली- हाय रे, पूरा लौड़ा पेल के चोदो मेरे राजा! आज मैं आपकी गर्लफ्रेंड हूँ। आप मेरे बॉयफ्रेंड हो! आपका लण्ड मुझे बड़ा मज़ा दे रहा है। फाड़ डालो मेरी चूत!

फिर मुझे और जोश चढ़ा, मैं उनको गालिया देने लगी- साले कुत्ते कमीने … भोसड़ी के … आज तू ले ले पूरा मज़ा मेरी चूत का!

वे वास्तव में मेरी टांगें अपने कंधों पर रख कर मुझे तूफान मेल की तरह चोदने लगे और मैं गांड उठा उठा के चुदवाने लगी।

मैं मस्ती करने लगी, मेरी सिसकारियां निकलने लगी- उई माँ … बड़ा अच्छा लग रहा है … क्या मस्त लौड़ा है! क्या मस्त चुदाई है! ऊऊऊ ऊओ ऊऊऊ हहा हाआआ आह ही हेहेह आहां … फट गई मेरी चूत, फूफा तूने मुझे रंडी बना दिया, यार! मैं कहीं मुँह दिखाने के काबिल नहीं रही!

इतने में उसने मुझे घोड़ी बना दिया और पीछे से पूरा पेल दिया लण्ड मेरी चूत में, बोला- अब मैं तुझे कुतिया की तरह चोदूंगा रीतिका!
मैंने भी जोश में कहा- चोद ले साले कुत्ते, कमीने, हरामी तेरी बहन का भोसड़ा … तेरा जैसे मन हो वैसे चोद ले, मैं कहीं नहीं भागने वाली! तेरे लण्ड का कीमा बनाऊंगी मैं!

इस तरह वह मेरी कमर अपने दोनों हाथों से पकड़ कर मुझे चोदे जा रहा था और मैं भी उसका साथ देती जा रही थी, अपनी गांड हिला हिला कर चुदवा रही थी।
मैं मस्ती में चूर थी।

और फिर एकदम से मेरी चूत ने छोड़ दिया पानी और मैं खलास हो गई.
लेकिन उसका लण्ड साला अभी भी तना हुआ था।

तब मैंने घूम कर लण्ड मुट्ठी में लिया और आगे पीछे करने लगी।
10 / 12 बार करने पर ही लण्ड से निकल पड़ी कई पिचकारियां!
मेरा मुंह वीर्य से सन गया।
थोड़ा बहुत मेरे स्तन पर गिरा और बाकी मैं खुद चाट गयी।

फिर हम दोनों बाथरूम में गए, खूब मजे से नंगे नंगे हम दोनों ने एक दूसरे को नहलाया फिर उसने मुझे गोद में उठा कर बेड पर पटक दिया और खुद मेरे बगल में नंगा लेट गया।

फूफा बड़े रोमांटिक मूड में थे।
लग ही नहीं रहा था कि ये पहले वाले फूफा जी हैं।
वे बिल्कुल मेरे दोस्त बन गए।

मैंने जैसे ही प्यार से लण्ड हिलाया, उसे चूमा तो उन्होंने मुझे अपने बदन से चिपका लिया और बोले- रीतिका, मैं तुम्हें एक बार फिर चोदूंगा।

पर फूफा जी ने मेरे जवाब का इंतज़ार नहीं किया, बस गच्च से लण्ड पेल दिया मेरे अंदर!
मैं तो चाहती ही थी चुदना … तो मजे से चुदने लगी।

Xxx अंकल सेक्सी भतीजी चुदाई जोर जोर से झटके मार कर करने लगे और मैं हर झटके का जवाब झटके से देने लगी।

मैंने कहा- यार तुम तो मुझे 24/25 साल के लड़के की तरह चोद रहे हो। मुझे नहीं मालूम था कि तुम्हारे लण्ड में इतनी आग है.
वे बोले- अरे रीतिका, मेरे लण्ड का तुम्हारी बुआ ने कभी इतनी अच्छी तरह से इस्तेमाल नहीं किया जितनी तरह से तुम कर रही हो। तुम लेती रहो मेरे लण्ड का असली मज़ा!

फिर उन्होंने सोफा पर बैठ कर मुझे अपने लण्ड पर बैठा लिया और दनादन चोदने लगे।

इस बार फूफा जी ने मुझे इतना चोदा कि उनके लण्ड ने उगल दिया पूरा का पूरा वीर्य.
मैंने फिर झड़ता हुआ लण्ड बड़े प्यार से चाटा।

उसके बाद वे मुझे रोज़ सुबह, शाम, दोपहर और रात में खूब चोदने लगे।
मैं भी बड़ी मस्ती से चुदने लगी।

जब तक बुआ जी अपने मायके से वापस आईं तब तक मैं जाने कितनी बार फूफा से चुद चुकी थी।

Sex Stories

वक़्त इंसान से कुछ Sex Stories भी करवा सकता है! इस बात का अंदाजा मुझे अभी कुछ दिनों पहले ही हुआ है!

मैं तेईस वर्षीय युवक हूँ!! अविवाहित हूँ तो शायद इसीलिए दिमाग में हमेशा एक ही चीज़ रहती है- सेक्स!!

मैं 18 साल का था जब मेरे सबसे छोटे चाचा की शादी हुई! मुझे शायद इस शादी से कोई फर्क नहीं पड़ता अगर मेरी चाची इतनी ख़ूबसूरत और गठीली न होती! उनके आते ही सारे परिवार में उनकी खूबसूरती के चर्चे तेजी से फैलने लगे थे!!
मुझे आज भी याद है कि कैसे मैं उन्हें देखकर उनके बारे में सोचता रहता था ‘किस तरह मैं उनका चुम्बन करूँगा, वो बिना कपड़ों के कैसी लगेंगी, अगर मैं उनकी नंगी कमर पर हाथ रखूँगा तो वो क्या करेंगी..’ वगैरा वगैरा… इन्हीं सब ख्यालात के साथ मैं हमेशा चाची क बारे में सोचता रहता था।

इन सभी बातों को अब काफी अरसा बीत चुका है और इस दौरान चाची की ज़िन्दगी में कुछ ऐसा हो गया जो नहीं होना चाहिए था!! इतनी ख़ूबसूरत बीवी मिलने के बावजूद चाचा किसी और के चक्कर में लग गए और चाची और अपनी छोटी बेटी को छोड़कर चले गए!! यह बात कुछ महीने पहले की ही है!!

यह सब होने के बाद चाची और उनकी बेटी की ज़िम्मेदारी मेरे पापा ने उठाई और उन्हें अपने साथ रहने के लिए कहा!! चाची जी को हमारे घर का ऊपर वाला कमरा दे दिया गया!! इस दौरान कभी मेरे दिमाग में ऐसा कोई ख्याल नहीं आया कि मैं चाची के साथ ऐसा कुछ करूँ!!

लेकिन अभी कुछ दिनों पहले ही दिल्ली में बहुत तेज़ बारिश हुई. पापा बिज़नेस के काम से बाहर गए हुए थे और माँ भी नानी के घर पर थी. चाची की बेटी भी स्कूल में थी!
ऐसे में मैं घर पर अकेला था, न जाने क्यूँ मेरा दिल हुआ कि आज बारिश में नहाया जाए!
मैं नहाने के छत पर पहुंचा तो देखा चाची भी बारिश के मज़े ले रही थी. न जाने क्यूँ मेरी नज़र उनके पेट पर गई, जो कि कपड़े गीले होने बाद साफ़ नज़र आ रहा था. शायद मेरे ख़यालात थोड़े बदल से रहे थे.

मुझे देखते ही चाची ने अपने आपको थोड़ा संभाला और कहा- काफी दिनों बाद इतनी अच्छी बारिश हुई है!
मैंने पूछा- आपको शायद बहुत अच्छा लगता है बारिश में नहाना!!
तो उन्होंने कहा- हाँ नहाना भी, बारिश में नाचना भी..

इस बात पर मैंने हंसते हुए बारिश का कुछ पानी उनके मुँह पर फैंका तो उन्होंने भी बदला लेने के लिए ऐसा ही किया.. देखते ही देखते हम दोनों एक दूसरे के साथ बारिश में ही खेलने लगे। फिर ना जाने कैसे अचानक चाची का पाँव फिसला और वो सीधी मेरे ऊपर आकर गिरी!! उन्हें गिरने से बचाने के लिए मैंने अपने दोनों हाथों से उन्हें पकड़ना चाहा तो मेरे हाथ उनकी कमर पर रुके लेकिन हम दोनों ही नीचे गिर पड़े!

चाची मेरे ऊपर थी और मेरे हाथ उनकी कमर पर, वो लम्हा मेरी ज़िन्दगी का सबसे मुश्किल लम्हा था!! पता नहीं क्यूँ मेरे हाथों ने कमर पर से हटने की बजाय अपनी पकड़ और मज़बूत कर ली! हम दोनों की आँखें एक दूसरे की आँखों में ही देख रहे थे और मुझे उन आँखों में कोई रुकावट नज़र नहीं आ रही थी! शायद इसीलिए मैंने उनकी नंगी गर्दन पर चूम लिया!!

वो थोड़ा घबराई और उठने की कोशिश करने लगी, मगर मेरी पकड़ काफी मजबूत थी, मैंने एक करवट ली और अब मैं उनके ऊपर था। यह सब कुछ खुली छत पर तेज़ बारिश में हो रहा था!!

बारिश का पानी हम दोनों के बदन को गीला कर चुका था.. लेकिन तब भी मैं उनके बदन की गर्मी को महसूस कर सकता था! मेरी आँखें उनकी आँखों में ही देख रही थी, मेरे हाथ उनके दोनों हाथों को संभाले हुए थे, मेरे पैर उनके पैरों में लिपटे हुए थे, हम दोनों के बदन एक दूसरे से सटे हुए थे!

मैंने उन्हें और चूमना शुरू किया, उनकी गर्दन पर, उनके होठों पर… अब उनका ऐतराज़ करना भी बंद हो चुका था, लेकिन वो खामोश ही थी!

मेरे हाथों ने उनके बदन पर चलना शुरू किया, मेरा एक हाथ उनके पेट पर था और दूसरा उनकी गर्दन पर!! तभी मैंने अपने हाथ से उनकी सलवार के कमरबंद को ढीला कर दिया और उनकी सलवार को बदन से अलग कर दिया!!

उनकी केले जैसी चिकनी जांघ देखकर मैं पागल सा होने लगा था, मैंने उन्हें चूमना शुरू कर दिया और तभी मैंने चाची की पहली कराह सुनी- आआआ अह्ह्ह्ह!!

वो अपने हाथ से मेरे सिर को पीछे धकेलने लगी.. मैंने दोनों जाँघों को हाथ में पकड़ कर कमर पर चूमना शुरू किया और धीरे धीरे उनकी कमीज़ को भी उतार दिया!

अब एक ऐसा नज़ारा मेरे सामने था जिसके लिए मैंने हजारों मन्नत की थी.. चाची का गोरा चिकना गठीला बदन मेरी आँखों के सामने था और वो भी उस हालत में जिसमें मैं सिर्फ सोच सकता था.. उन्होंने अपनी आँखों को बंद कर लिया!

उन्होंने काली ब्रा और पेंटी पहनी हुई थी.. जोकि उनके गोरे बदन के ऊपर और भी खूबसूरत लग रही थी।

मैंने उनकी छाती पर हाथ फेरना शुरू किया और उनकी कड़क चूचियों को दबाने लगा.. अब शायद उन्हें आजाद करने का समय आ गया था। मैंने उनकी ब्रा का हुक खोल कर उन्हें भी आजाद कर दिया..

उनकी चूचियों को देखकर मैं मदहोश सा हो रहा था.. मैंने उन्हें चूसना शुरू किया तो चाची सिसक उठी.. उनकी सिसकियाँ अब तेज़ होती जा रही थी!! उनकी आआआ आआआह्ह ह्ह्ह आआआ अह्ह्ह सुनकर मुझे एक अलग सी ताक़त मिल रही थी!!

मेरे हाथ उनके पूरे बदन पर चल रहे थे.. और तभी मैंने हाथ उनकी पेंटी के अन्दर घुसा दिया और वो जैसे पागल सी हो गई..

मेरी एक उंगली ने उनकी पेंटी के अन्दर हरकत शुरू कर दी थी.. उनके दोनों हाथ मेरी कमर को खरोंच रहे थे..

अब तक उन्होंने भी मुझे कपड़ों से अलग कर दिया था और मेरे बदन पर सिर्फ मेरा अंडरवियर ही बचा था!

तभी उन्होंने अपने नाज़ुक हाथों से मेरे लण्ड को पकडा और उसे सहलाने लगी.. मैं पागल हो रहा था..

यह सभी कुछ हम बारिश में गीली छत पर ही कर रहे थे और मुझे लगा काम को आखिरी अंजाम देने के लिए हमे बेड पर जाना ही पड़ेगा..

मैंने चाची को उसी हालत में उठाया और अंदर उनके कमरे के बेड पर लिटा दिया.. वो बुरी तरह सिसक रही थी.. लेटते ही मैंने उन्हें बुरी तरह चाटना शुरू किया और एक झटके में उनकी पेंटी उतार दी.. मैंने उन्हें जोर से जकड़ लिया..

उनकी चूचियों को मसलते हुए मैंने अपना लण्ड उनकी दरार में घुसा दिया.. वो थोड़ा सा चिल्लाई, मगर फिर अपने आपको सँभालते हुए उनके हाथों ने मेरे चूतडों को दबाना शुरू किया!

उनकी इस हरक़त से मुझे काफी जोश मिला और मैंने झटके लगाने और तेज़ कर दिए.. झटके लगाते लगाते वो मुझे काट रही थी, मुझे जकड़ रही थी.. सिसकियाँ ले रही थी.. मैंने भी बुरी तरह से उनकी चूचियों को मसलना शुरू कर दिया..

वो बिल्कुल पागल हो चुकी थी.. बार बार अपनी गांड उचका रही थी..

मैं खड़ा हो गया और उन्हें गोदी में लेकर चोदने लगा.. वो भी उछल उछल कर मेरा पूरा साथ दे रही थी.. और लगभग पाँच मिनट बाद मेरा ज्वालामुखी फूटा और उनकी दरार ने भी पानी छोड़ दिया.. हम लोग नन्गे बदन काफी देर तक एक दूसरे के ऊपर पड़े रहे.. और चूमते रहे..

चाची की चूत चुदाई का यह सिलसला आज भी जारी है..
वसीम सैफ़ Sex Stories

TOTTAA’s Disclaimer & User Responsibility Statement

The user agrees to follow our Terms and Conditions and gives us feedback about our website and our services. These ads in TOTTAA were put there by the advertiser on his own and are solely their responsibility. Publishing these kinds of ads doesn’t have to be checked out by ourselves first. 

We are not responsible for the ethics, morality, protection of intellectual property rights, or possible violations of public or moral values in the profiles created by the advertisers. TOTTAA lets you publish free online ads and find your way around the websites. It’s not up to us to act as a dealer between the customer and the advertiser.

 

👆 सेक्सी कहानियां 👆