Find Related Category Ads
To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.
Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.
You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.
It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.
Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.
मेरा नाम राहुल Antarvasna Stories है, मेरी उम्र २२ साल है। मैं ६ फ़ुट २ इंच लम्बा सांवला लड़का हूँ। मेरे लण्ड का साइज़ ७ इंच है। मैं आपको अपने पहले सेक्स के बारे में बताने जा रहा हूँ. मैंने अपना पहला सेक्स अपनी पड़ोसन अंजलि आंटी के साथ किया था। यह उन दिनों की बात है जब मैं ग्यारहवीं में पढ़ता था। अंजलि आंटी बहुत सेक्सी थी। उनकी उस समय नई नई शादी हुई थी। उनका पति चालीस साल का था और वो केवल पच्चीस साल की ही थी। उनका गोल-मटोल बदन, उनके उभरे हुए वक्ष देख कर कोई भी अपना काबू खो दे !
मैंने मन ही मन उन्हें चोदने का सोचता था लेकिन शुरुआत कैसे की जाए यह मुझे समझ नहीं आ रहा था। उनका पति शाम की पारी में काम करके आधी रात को घर आता था और रात को अंजलि आंटी की चुदाई करता था।
एक बार उनका पति रात को एक बजे आया, मैं उस वक्त जगा हुआ था, अचानक आह आह की आवाज सुनाई दी। मैंने बाहर जाकर देखा तो उनके घर से आवाज आ रही थी। उस समय बहुत अँधेरा था और रात में कुछ दिखाई भी नहीं दे रहा था तो मैंने हिम्मत करके उनकी खिड़की में झांकने की कोशिश की।
खिड़की में छेद थे और पर्दा लगा हुआ था जिससे मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। तो मैंने डंडी से खिड़की का पर्दा हटाया, अंदर जीरो-बल्ब की रोशनी थी। अन्दर का नजारा देख कर मैं तो एकदम दंग रह गया। मैंने अन्दर देखा कि अंकल अंजलि आंटी के स्तन दबा रहे थे और वो आहऽ आहऽऽ की आवाज निकाल रही थी। कुछ देर के बाद अंकल अंजलि आंटी के ऊपर चढ़ गए और एक जोरदार धक्के के साथ अपना काला लिंग उनकी योनि में डाल दिया। अंकल दो-तीन धक्कों के बाद झड़ गये और आंटी के ऊपर सो गए। आंटी अभी पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुई थी, उनकी कामना उनकी चेहरे से मुझे साफ़ नजर आ रही थी। अंकल की ज्यादा उम्र होने के कारण आंटी संतुष्ट नहीं हो पाती थी।
तब उनकी शादी को एक साल बीत चुका था लेकिन आंटी को बच्चा नहीं हो रहा था। शायद अंकल की ज्यादा उम्र के कारण ऐसा हो रहा था। इस बात से आंटी हमेशा परेशान रहती थी। और उनकी परेशानी उनके चेहरे से साफ नजर आती थी।
एक दिन आंटी को बाजार जाना था, आंटी और मेरी खूब जमती थी। हम दोनों एक दूसरे से मजाक-मस्ती किया करते थे और नॉन-वेज़ चुटकले मारा करते थे। वो मुझसे केवल ३ साल ही बड़ी थी लेकिन अंकल की उम्र ज्यादा होने के कारण मुझे भी उन्हें आंटी कहना पड़ता था।
उस दिन मैं उनको मार्केट में शॉपिंग कराने ले गया। मार्केट में काफी भीड़ थी तो कई बार धक्के की वजह से मेरे हाथ उनके वक्ष से छू जाते थे, लेकिन उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं की। मेरे साहस और बढ़ गया, मैंने जानबूझ कर उनकी गांड पर हाथ फ़िराया- वोह आह…. करके रह गई। लेकिन मुझे कुछ नहीं कहा। मैं आंटी के मन की इच्छा समझ चुका था। मार्केट से शॉपिंग करने के बाद वो घर पर आई, उन्होंने मुझे उनके साथ आने के लिए धन्यवाद कहा। अब उस पल के बाद तो मैं एक दम बेकाबू सा हो गया था।
मैंने एक दिन साहस करके उन्हें अपने दिल की बात बता दी। पहले तो उन्होंने इंकार किया लेकिन बाद में मान गई। उनके घर में टीवी नहीं था, वो अक्सर सीरियल देखने के लिए मेरे घर आया करती थी।
मेरे बीच वाले कमरे में टीवी था और वो हॉल में बैठ कर टीवी देख रही थी। दोपहर का समय था, मेरी बहन अन्दर वाले कमरे में टीवी देख रही थी जहां टीवी रखा हुआ था और वो हॉल में बैठकर टीवी देख रही थी उस समय घर में कोई नहीं था। मैंने दरवाजा बंद कर दिया जिससे घर में थोड़ा अँधेरा हो गया।
फिर मैं आंटी के पास गया और उन्हें चुम्बन देने के लिए कहा। पहले तो वो हिचकिचाई लेकिन मेरी जबरदस्ती के आगे उन्होंने हार मान ली और धीरे से एक चुम्बन दिया। हाय क्या जादू था उस चुम्मे में ! मैं तो एकदम बेकाबू हो गया।
दूसरे दिन मैं उनके घर पर गया, वो सोई हुई थी। जैसा कि मैंने आपको बताया कि उनका पति दिन भर कम करता था और रात को लेट ही आता था जिससे घर में दोपहर को वो अकेली ही होती थी। उनको सोता देख मैं उनके पास गया, मेरी आहट सुनकर वो जग गई। मैं झट से उनके ऊपर आ गया और उनके होटों पे अपने होंठ लगा दिए। उन्होंने भी मेरा साथ देना शुरु किया। मैंने अब उनके स्तन दबाने शुरु किया- हाय, क्या गोल-गोल चूचे थे !
वो अब आह.. आह………. की सिसकारियाँ भर रही थी। उन्होंने कहा- मैं दरवाजा बंद कर देती हूँ, फिर जो करना हैं वो करना !
उन्होंने दरवाजा बंद किया और मुझसे आकर लिपट गई। मैंने उनको अपनी बाहों में भर लिया। उन्होंने भी मुझे जोर से जकड़ लिया। मैंने उन्हें बिस्तर पर लेटा दिया और उन्हें चूमने लगा. मैं उनके पूरे बदन पर पागलों की तरह चूमने लगा। फिर मैंने उनके बदन से एक एक करके कपड़े उतारने शुरु कर दिए। जब मैंने उनकी ब्रा को उनसे अलग किया तो उनके स्तन बाहर आ गए, उन्हें देखकर मैं और बेकाबू हो गया और उनके गोरे-गोरे चूचों को जोर जोर से दबाने लगा। फिर मैंने उनकी साड़ी को उतारा। उन्होंने काले रंग की पैंटी पहन रखी थी। मैंने पैंटी के ऊपर से हाथ फेरा तो वो आह…………….. करके आवाज निकालने लगी। फिर मैंने उनकी पैंटी को उनसे जुदा किया। उसके बाद का नजारा देख कर मैं तो एकदम दंग हो गया। उनकी चूत एकदम गुलाबी थी और हल्के-हल्के बाल थे।
मैंने उनसे पूछा- आपके तो बाल ही नहीं आये हैं?
तो उन्होंने जवाब दिया- मैं हमेशा इन्हें साफ़ करती रहती हूँ।
फिर मैंने उनके पेट पर चूमना शुरु किया तो वो एकदम मदहोश हो कर सिसकारियाँ लेने लगी। वो एकदम से गर्म होती जा रही थी। फिर मैंने उनकी चूत पे हाथ फ़िराया तो वो और रोमांटिक मूड में आ गई और जोर जोर से सिसकारियाँ भरने लगी। पूरा कमरा आह………… आह की आवाजों से गूँज रहा था। अब वो एकदम सुलग चुकी थी, उन्होंने मुझे कहा- राहुल अब नहीं बर्दाश्त होता, अब मेरी प्यास बुझा दो !
लेकिन मैं धीरे धीरे सब करना चाहता था इसलिए मैं उन्हें और गर्म कर रहा था। वो अब जोर जोर से सिसकारियाँ मार रही थी। अब मैं समझ चुका था कि वो अब चरम सीमा पर पहुँच चुकी है। तो मैंने अपनी पैंट उतार दी। अब मैं उनके सामने अंडरवीअर में था। उन्होंने मेरा अंडरवीयर सरकाया, जिससे मेरा ७ इंच लम्बा लण्ड बाहर आ गया। मेरा लण्ड ७ इंच लम्बा और चार इंच चौड़ा हो गया था।
मेरा लण्ड देख कर वो थोड़ी सहम गई। मैंने पूछा- क्या हुआ आंटी ?
तो उन्होंने कहा- तुम्हारा लण्ड कितना मोटा और लम्बा है ! तुम्हारे अंकल का तो छोटा और पतला है।
फिर मैंने उनको सीधा बेड पर लिटा दिया और किस करने के लिए कहा। उन्होंने मेरा लण्ड हाथ में लिया और हिलाने लगी। मुझ बहुत मजा आ रहा था। थोड़ी देर के बाद मैंने उनकी चूत में अपनी एक ऊँगली डाल दी तो वो चिल्ला उठी- हाई…मर गई रे. !
मैं अब अपनी ऊँगली अन्दर-बाहर करने लगा और वो सिसकारियाँ भरने लगी।
उन्होंने कहा- अब बस राहुल ! अब बर्दाश्त नहीं होता ! अब मेरी प्यास बुझा दे !
तो मैंने अपना लण्ड उनकी चूत पर रखा और एक धक्का लगाया, लेकिन मेरा लण्ड अन्दर नहीं जा रहा था। फिर मैंने एक जोरदार झटका लगाया और पूर लण्ड अन्दर चला गया और वो चिल्ला उठी- हाई मर गई रे ! निकाल इसे जल्दी ! मेरी चूत फट गई रे ! कितना मोटा लण्ड है तेरा !
तो मैं कुछ देर के लिए रुक गया और फिर धीरे धीरे धक्के लगाना शुरु किया। अब उन्हें भी मजा आ रहा था, वो भी अपनी गांड उठा उठा कर मुझसे चुदवा रही थी। तक़रीबन २५ मिनट की चुदाई के बाद मैं अब झड़ने वाला था। मैंने उन्हें बताया कि मैं अब झड़ने वाला हूँ तो उन्होंने कहा कि बाहर मत गिराना ! सारा का सारा मेरे अन्दर ही गिरा दो ! मुझे गर्भवती बना दो ! मुझे तुम्हारे बच्चे की माँ बना दो !
मैंने वैसा ही किया, मैंने अपना सारा पानी उनकी चूत में गिरा दिया और उनके ऊपर सो गया।
हाय क्या चूत थी उनकी ! एकदम आग थी उनकी चूत में जिससे मैं जल्दी झड़ गया। उनकी चूत मेरे वीर्य के कारण पूरी गीली हो चुकी थी। मैंने उनसे एक बार फिर सेक्स करने के लिए कहा तो उन्होंने मुझे एक बार फिर गरम किया और मेरा लण्ड तन गया।
इस बार मैंने उन्हें कुतिया स्टाइल में झुकने के लिए कहा। वो झुक गई और मैंने अपना लण्ड पीछे से उनकी चूत में डाल दिया। चूत गीली होने की वजह से जल्दी से घुस गया। अब मैं अपने धक्कों की रफ़्तार तेज करने लगा और जोर जोर से उनको चोदने लगा।
वोह आः………आह आह……..करके चिल्ला रही थी, मुझे बहुत मजा आ रहा था। करीब आधे घंटे की चुदाई के बाद मैं झड़ गया इस दरमियान वो तीन बार झड़ चुकी थी।
फिर हम दोनों एक दूसरे में उलझ कर सो गए।
उस रात को हमने छः बार चुदाई की।
अब जब भी हमें मौका मिलता, हम चुदाई की खेल खेला करते थे।
मेरी चुदाई से वो गर्भवती हो गई और ९ महीने बाद उन्हें लड़का हुआ।
अब भी हम चुदाई का खेल खेलते रहे और दो साल के बाद वो फिर गर्भवती हुई, इस बार उन्हें लड़की हुई।
इस तरह मैंने पड़ोस वाली आंटी को गर्भवती बनाया।
अगर आपको मेरी कहानी पसंद आई तो मुझे अपने विचार मेरी ईमेल पर भेजें। Antarvasna Stories
वर्जिन बॉय फर्स्ट Xxx स्टोरी में मैं पढ़ाई केर लिए किराये के कमरे में रहता था. माकन मालकिन की भतीजी उनके पास रहने आई तो वह मुझसे घुल मिल गयी और एक दिन उसने सेक्स की पहल की.
दोस्तो, कैसे हैं आप सभी … मेरा नाम संदीप यादव है. मैं बिहार का रहने वाला हूं.
मैं अन्तर्वासना का 6 साल से फैन हूं. यहां की लगभग सभी सेक्स कहानियां मैंने पढ़ी हैं.
इस कारण से मुझे पेलाई का पूरा ज्ञान तो हो गया था, पर कभी चुदाई करने का मौका नहीं मिला था.
मैंने सोचा कि जब भी चुदाई करने का मौका मिलेगा, तो मैं उसे आप सभी के साथ साझा करूंगा.
ये मेरी पहली सेक्स कहानी है … मेरी वर्जिन बॉय फर्स्ट Xxx स्टोरी एकदम सच है.
दोस्तो, जब ये वाकया हुआ था, तब मेरी उम्र 26 साल की थी. मेरी हाईट 5 फुट 6 इंच है और रंग भी काफी गोरा है.
बचपन से ही मेरा खानपान अच्छा रहा है, जिससे मेरा स्वास्थ भी काफी अच्छा है.
अपने घर में सबसे छोटा होने की वजह से घर और बाहर के सभी काम मैं ही करता था, जिससे काफी फिट और मजबूत भी हूं.
साथ ही पढ़ाई में भी अच्छा हूँ और आज्ञाकारी होने की वजह से सबका दुलारा भी हूँ.
मेरा अब तक किसी भी लड़की से कोई प्रेम संबंध भी नहीं था, पर कोचिंग की कई लड़कियां मुझे पसंद करती थीं क्योंकि पढ़ाई के साथ साथ मेरा व्यवहार भी अच्छा था.
मैं सबके डाउट्स भी क्लियर कर देता था.
किसी से प्रेम संबंध न होने की वजह से तब तक मेरे लौड़े का टांका भी नहीं टूटा था.
मेरे लंड का आकार भी मस्त है.
यह साढ़े छह इंच लम्बा और ढाई इंच मोटा था. मेरा लंड किसी को भी संतुष्ट कर सकता था.
यह बात मुझे उसी लड़की ने बताई थी जिसकी चूत में पहली बार मेरे लौड़े ने घुस कर चुदाई की शुरुआत की थी.
उस लड़की का नाम लाली था.
उस वक्त मेरे लंड के टोपे पर खाल चढ़ी थी; उसे थोड़ा भी पीछे खिसकाने पर काफी दर्द होता था.
चुदाई के समय वह खाल फट गई थी और काफी दिन तक जख्म ठीक नहीं हुआ था.
मेरी स्नातक की पढ़ाई पूरी होने के कुछ साल बाद मेरे घर वालों ने मुझे आगे की तैयारी करने के लिए दिल्ली भेज दिया था जहां मैं बहुत मन लगाकर अपनी पढ़ाई में लग गया.
जहां मैं रहता था, वह एक पांच माले की बिल्डिंग थी.
उसमें मैं चौथे माले पर सिंगल और अटैच बाथरूम वाले कमरे में रहता था.
वहीं ग्राउंड फ्लोर पर किराए से एक 42 साल की आंटी रहती थीं जो टिफिन सप्लाई करती थीं व अपने घर में ही बैठा कर सबको खाना खिलाती थीं.
उन्होंने अपने घर से ही टिफिन सेवा का छोटा सा बिजनेस सैट कर रखा था.
उनके घर कई लड़के खाने आते या टिफिन मांगते.
उनकी अपने पति से बिल्कुल भी नहीं बनती थी. वे दोनों हमेशा अलग ही रहते थे.
जब मेरा मन होता तो वैसे ही खाना खा लेता था और आंटी की भी थोड़े पैसे से या फिर और भी किसी तरह से मदद कर दिया करता था.
मेरी इस बात से आंटी से मेरी काफी अच्छी दोस्ती हो गई थी.
वे अपने सारे सुख दुख व्हाट्सएप पर मुझसे शेयर करने लगी थीं.
फिर कुछ दिन बाद उनकी भतीजी लाली आ गई.
उसकी उम्र 21 साल थी.
वह थोड़ी दुबली पतली और सांवली सी थी.
लाली अपनी चाची के घर कुछ दिनों के लिए रहने आई थी.
मेरा ये वाकया उसी के साथ हुआ था.
वह भी अपनी चाची के घर आते ही काम में मदद करने लगी थी. वह काफी सारे लोगों से और मुझसे भी घुल-मिल गई थी.
अब तो वह कभी कभी कुछ बहाने से मेरे रूम में भी आ जाती थी.
लेकिन मुझे पता नहीं चला कि वह मेरे पास क्यों आती है … और ना ही मैंने उस पर कभी ज्यादा ध्यान दिया.
फिर एक दिन जब दोपहर में मेरे अगल बगल वाले कमरे में कोई नहीं था.
मैं सिर्फ तौलिया लपेटे और बनियान पहने अपनी पढ़ाई कर रहा था.
तब वह अचानक से मेरे कमरे में आ गई और बोली- मैं कपड़े सुखाने आई थी. नीचे सब सो रहे हैं और मुझे नींद नहीं आ रही थी, तो मैं आ गई. तुम्हें कोई दिक्कत तो नहीं है?
मैं बोला- नहीं, कोई दिक्कत नहीं है.
वह मेरे बगल में बैठ कर पूछने लगी- क्या पढ़ रहे हो?
मैंने उसे अपनी किताब दिखा दी.
वह हंस कर बोली- मुझे कुछ समझ नहीं आएगा.
शायद वह ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं थी, पर काफी समझदार थी.
वह यह सब बोल कर मुझसे चिपकती जा रही थी.
मैं उससे दूर होने लगा, तो उसने मेरा तौलिया पकड़ लिया और मुझे बेड पर धकेल कर मेरे पास बैठ गई.
मैं- तू पागल हो गई है क्या?
वह- हां, मैं पागल ही हो गई हूं आपको देख कर … मैं आपको कब से लाइन दे रही हूं और आज बड़ी मुश्किल से मौका मिला है. इसलिए आपके पास आ गई हूं. पर आप समझते ही नहीं हैं.
यह बोल कर लाली नाराज़ सी हो गई.
मैं सब समझ रहा था.
अब तक मेरा लंड भी फन मारने लगा था.
तब भी मैं अंजान बना रहा.
मैं- अरे तो तू ऐसे नाराज़ क्यों हो रही है? अच्छा तू बता … क्या चाहिए तुझे … पैसे चाहिए क्या?
वह गुस्से से देखते बोली- नहीं, आप दूध पीते बच्चे नहीं हो, जो हर एक बात मैं ही बताऊं.
यह बोल कर वह मेरा हाथ अपने सीने के पास ले जाने लगी और मेरी जांघों पर लेटने सी लगी.
अब स्थिति मेरे आपे से बाहर जाने लगी. मैं भी इतना सीधा नहीं था कि कुछ समझ ही न पाऊं.
मैं फटाक से उठ गया और दरवाजे बंद करने आ गया.
मैंने देखा कि दरवाजे के बाहर उसकी चप्पलें पड़ी थीं. मैंने इधर उधर देखा और उसकी दोनों चप्पलों को उठा कर अन्दर करके दरवाजा लगा लिया.
उसकी चप्पलों से किसी को ये शक हो सकता था कि मेरे अन्दर से बंद कमरे में कोई लड़की है.
कोई बवाल न हो जाए तो मैंने जल्दी से यह सब किया और दरवाज़ा बंद कर दिया.
वापस आकर मैं लाली से लिपट गया और उसे चूमने लगा.
यह तो आप भी जानते हैं कि लड़की खुद से पहल कर रही थी और मैं बंद कमरे में उसके साथ था.
ऐसी स्थिति में बुर चुदने को रेडी हो, तो किसी भी लड़के का मूड बन जाएगा.
बस कोई प्यार और इज्जत से मजा लेता है तो कोई धोखा या पैसा देकर चूत चुदाई कर लेता है.
मुझे भी बुर चाहिए थी लेकिन इज्जत और सम्मान से.
अब हमारे होंठ आपस में कब मिल गए, हमें पता ही नहीं चला.
मुझे जो भी करना था, जल्दी करना था क्योंकि हमारे पास ज्यादा समय नहीं था.
जल्द ही उसको ढूंढते हुए उसकी चाची की दस साल की लड़की कभी भी आ सकती थी.
मैं लाली के होंठों को दस मिनट तक चूसता रहा.
वह भी मेरे लंड के आसपास हाथ घुमाती रही.
मैं उसके बूब्स दबाने लगा जो कि मध्यम आकार के थे.
मुझे उसके दूध दबाने में बड़ा मजा आ रहा था.
यह मेरा पहली बार का मामला था, जब मैंने किसी के मम्मों को ऐसे पकड़ा था.
कुछ देर बाद मैंने उसको अपने आप से अलग किया और गद्दे को बेड से निकाल कर नीचे फर्श पर बिछा दिया.
ऐसा इसलिए किया था कि मेरा बेड चूं चूं करता था और उस पर कबड्डी खेलता, तो ज्यादा आवाज होने लगती.
मैंने उसको नीचे लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गया.
मैं उसके कपड़े उतारने लगा, तो वह शरमा कर मना करने लगी.
पर अब तो मेरे मुँह को खून लग चुका था और मैं उसे छोड़ना भी नहीं चाहता था.
जैसे तैसे करके मैंने उसके कपड़े खोल कर दूर फेंक दिए.
मेरे सामने लाली सिर्फ पैंटी में थी और मैं जांघिया में था.
मेरा जाँघिया आगे से मेरे कामरस से काफी भीग गया था. मैंने ऊपर बनियान पहनी हुई थी.
इस धक्का मुक्की में मेरा तौलिया कब नीचे को सरक गया था, मुझे पता भी नहीं चला.
मैंने उसकी एक चूची को अपने मुँह में भर लिया और खींचते हुए चूसने लगा.
साथ ही एक हाथ से मैं उसकी पैंटी के ऊपर से ही बुर को सहलाने लगा.
उसकी बुर काफी गर्म और गीली हो चुकी थी.
मुझे उसकी बुर चाटने का बड़ा मन था पर समय न होने के कारण उसकी पैंटी को खोल कर सूंघा और उसे दूर फेंक दिया.
फिर मैंने उसकी नमकीन बुर पर एक गहरा चुम्बन किया और अपना जांघिया भी उतार दिए.
अब मैंने उसके मुँह के पास अपने लौड़े को ले गया.
मैंने लंड को उसके होंठों के ऊपर रखा, तो वह मेरी इच्छा समझ गई.
उसने मुँह खोल दिया और लंड का चूसन कांड शुरू गया.
उस वक्त मैं सिर्फ एक बनियान में था.
मेरा लंड अपनी पूरी सख्ती पर था और उसके होंठों पर लार टपका रहा था.
वह अपनी जीभ से लंड से टपकने वाले शीरा को चाट कर मेरे रस का स्वाद लेने लगी.
मेरे लंड को देखते ही उसकी आंखें बड़ी हो गई थीं.
फिर वह सामान्य होकर सुपाड़े को मुँह में भरकर चूसने लगी.
वह सुपारे को अपने होंठों में दबा कर रगड़ रगड़ लंड की मां बहन करने लगी.
उसकी इस हरकत से मैं जल्दी झड़ जाने के डर से हटने लगा.
वह मेरे लंड को पकड़ कर उसे बार बार मुँह में लेने की कोशिश करने लगी.
मैं लंड हटा कर नीचे हो गया और चुदाई की पोजीशन में उसके ऊपर चढ़कर उसके होंठों को चूसने लगा.
उस वक्त मैं अपनी कमर हिला हिला कर अपने सख्त और मोटे लंड को उसकी गर्म गीली बुर पर रगड़ने लगा.
यह उसे भी अच्छा लगने लगा. उसने भी अपनी टांगें खोल दीं और अपनी चूत को लंड से रगड़वाने लगी.
अब हमारे कामरस आपस में मिल कर एक अलग ही लुब्रीकेंट का काम करने लगे थे.
इस क्रिया से मेरे अंडे भी गीले हो गए थे.
वह बोली- अब डाल दो अन्दर … मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा.
मैं बोला- थोड़ा दर्द होगा तो बर्दाश्त कर लेना!
उस समय तक मुझे नहीं पता था कि वह कुंवारी है या नहीं. मुझे इससे मतलब भी नहीं था क्योंकि मुझे पहली बार बुर का स्वाद मिलने जा रहा था.
उसने अपनी मौन स्वीकृति दे दी.
अब मैं भी जल्दी से अपने लौड़े के सुपारे को उसकी गीली चिकनी बुर की फांक में रगड़ने लगा.
उसकी बुर पर थोड़ी झांटें थीं, जबकि मैं अपने लंड को एकदम चिकना करके रखता था.
चिकने लौड़े को हाथ से पकड़ कर वह मेरी तरफ देख रही थी और एक अर्थ भरी मुस्कान देती जा रही थी.
मैंने पूछा- कैसा है?
वह बोली- एकदम चिकना है!
मैंने कहा- और तेरी चूत जंगली है.
वह हंस दी और बोली- कल से साफ मिलेगी.
अब मैंने उसकी बुर पर लंड सैट कर दिया और जैसे ही अन्दर पेलने के हिसाब से दबाया तो कुछ अधिक ही चिकनाई की वजह से लौड़ा फिसल गया.
वह हंसने लगी और बोली- चिकना है ना!
उसकी इस टिप्पणी से मेरी झांटें सुलग गईं.
मैंने फिर से कोशिश की तो इस बार मेरा आधा सुपारा एक गीली तंग सुरंग में फंस सा गया.
अब वह सिसकारी मारने लगी.
कुछ सेकेंड के बाद मैंने फिर से एक झटका मारा तो मेरा पूरा मोटा सुपारा उसकी बुर में घुस गया.
उसके हाथ में हाथ, होंठों पर होंठ रखने की वजह से न वह हिल पा रही थी और न ही आवाज कर सकी.
फिर मैंने उसके पैरों को अपनी गांड पर लपेटवा लिया जिससे लौड़े को घुसने में आसानी हो.
कुछ क्षण बाद मैंने एक और धक्का दिया ही था कि उसकी बुर में मेरा पूरा लौड़ा जड़ तक घुसता चला गया.
यह ऐसे हुआ, जैसे अंजाने में कोई सही काम पूरा हो जाता है.
उसकी झांटें मेरे लंड की जड़ में चुभने लगीं.
उसको तो जो दर्द हुआ सो हुआ और वह भी कुंवारी थी, तभी मुझे ये बात पता चली.
उस वक्त मुझे ऐसा लगा जैसे लौड़े को किसी ने अपनी मुट्ठी में दबोच रखा हो.
साथ ही ऐसा भी लगा जैसे मेरा सुपारा उसकी बच्चेदानी में घुस गया था.
मेरा भी टांका टूटने से बहुत दर्द होने लगा.
लेकिन मुझे पता था कि ये दर्द मुझे एक न एक दिन होना ही है, तो आज ही सही.
जैसे ही मुझे पता चला कि उसका भी पहली ही बार था. तो यह जान कर मुझे बहुत अच्छा लगा कि कंडोम की यहां कोई जरूरत नहीं थी.
क्योंकि वैसे भी मेरे पास उस समय नहीं था.
जैसे ही उसके होंठ को छोड़कर मैंने उसके चेहरे का भाव देखना चाहा, तो वह चिल्लाने ही वाली थी कि मैंने वापस से उसके होंठों को अपने होंठों से लॉक कर दिया.
उसकी घुटी सी आवाज निकली- साले मादरचोद फट गई मेरी … आह.
पर उसकी यह गाली भरी आवाज मेरे मुँह में ही दबकर रह गई.
मेरा मन हंस रहा था और यह कहने को आतुर था कि हां साली कुतिया मेरा लंड चिकना है न!
लेकिन मैंने अपना मुँह उसके मुँह से नहीं हटाया.
ये सेक्स कहानी लिखते हुए अभी भी मुझे दो बार मुठ मारनी पड़ी थी.
कुछ देर बाद वह अपनी कमर हिलाने लगी, तो मैं समझ गया कि इसको अब पेलाई चाहिए.
मैं भी फिर धीरे धीरे धक्के लगाने लगा और धक्कों की गति कब चौथे गियर पर चढ़ गई, मुझे भी पता नहीं चला.
मैं उसकी चूचियों को दबाते हुए उसकी बुर में धक्के पर धक्का लगाने लगा, जिससे गच गच … फच फच … चट चट गप गप … और न जाने कैसी कैसी आवाजें आने लगीं.
यह हमारे मिले-जुले कामरस का कमाल था, जिससे मेरे अंडे और लंड की जड़ सब गीले हो चुके थे.
मेरा गद्दा भी उसके और मेरे टांके के खून से सन गया था.
मुझे अभी भी अहसास हो रहा था कि मेरा कामरस अभी भी निकल निकल कर उसकी बुर में गिर रहा था.
उसकी चूचियां हिल हिल कर अपनी ख़ुशी जाहिर कर रही थीं.
इससे हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था.
फिर रुक रुक कर लंबे धक्के मार मार कर करीब 20-25 मिनट तक चोदने के बाद मैं झड़ने को हो गया था.
तब तक वह दो बार झड़ चुकी थी.
उसने मुझे भी बांहों में जकड़ रखा था और उसके पैर अभी भी मेरी कमर से लिपटे हुए थे.
मैंने काफी दिनों से मुठ भी नहीं मारी थी जिससे मेरा काफी रस इकट्ठा हो गया था.
इतनी लंबी चुदाई होने के बाद अब मेरा रुकना असंभव था तो उसकी बुर में जड़ तक लौड़ा ठांस के झड़ने लगा.
उसके बाद 1, 2, 3, 4 … न जाने कितनी लंबी पिचकारियां मेरे लंड से निकल कर उसकी बुर के रास्ते बच्चेदानी में गिरने लगीं.
मैं आंखें बंद करके न जाने कितनी देर तक उसके अन्दर झड़ता रहा.
मेरे साथ वह भी झड़ गई थी.
हम दोनों की सांसें ट्रेन की तरह दौड़ रही थीं.
दोनों अभी भी एक-दूजे की बांहों में चिपके पड़े थे.
कुछ मिनट बाद मैंने उसकी बुर से लौड़े को धीरे धीरे निकाला.
मेरा लंड अभी भी पूरे वेग से खड़ा था.
मैं दूसरा राउंड भी लगाता लेकिन हमारे पास समय बिल्कुल भी नहीं था.
मेरे लौड़े की चमड़ी पूरी खिसक कर नीचे आ गई थी.
मेरी और उसकी जांघों पर काफी खून भी लगा था.
यह नजारा देख वह घबरा गई.
फिर मेरे समझाने पर समझ भी गई.
उसकी बुर की पुत्तियां भी फैल कर सूज गई थीं.
मेरे अंडे भी पूरे गीले हो गए थे और गद्दा भी खून से सना था.
मेरे और उसके मिले हुए रस के कतरे बाहर आने लगे थे.
उसने मेरे रूमाल से सब साफ़ करके रूमाल को अपने पास रख लिया.
मैं भी कुछ नहीं बोला कि शायद वह अपनी पहली चुदाई की निशानी रखना चाहती हो.
उसके चेहरे पर एक दर्द भरी मुस्कान थी, जिसे देख मुझे भी सुकून मिला.
फिर मैंने पूछा- क्या तुम्हें यही चाहिए था?
यह कह कर मैंने आंख मार दी, तो वह मुस्कुरा कर अपने कपड़े पहन कर नीचे चली गई.
अब जब भी उसका मन होता, तो वह मेरे रूम में किसी बहाने से आ जाती या फिर मैं ही इशारे से उसे अपने कमरे में आने की कह देता.
वह आ जाती और मैं उसको जमकर पेलता.
बाद में मैंने उसकी गांड का भी उद्घाटन किया.
अगर वह रंगीन सेक्स कहानी भी आपको जानना हो, तो मुझे मेल करें.
उसके बाद मैंने अपनी इच्छा को पूरा किया. उसकी बुर चाटकर और अपना पूरा लौड़ा और आंड चुसवाकर मजा लिया.
वह लगभग 3 महीने वहां रही और लगभग हर दो तीन दिनों में हमारा काम लगने लगा था.
इससे मेरा लौड़ा और मजबूत और मस्त हो गया था.
उसकी पूरी खाल नीचे आकर पूरा सुपारा खुलने लगा था.
लाली गर्भ से न हो जाए इसलिए उसको बीच बीच में गोली भी देता रहा लेकिन मैंने कभी कंडोम इस्तेमाल नहीं किया.
अब उसकी चूत पूरी तरह से मैंने खोल दिया था.
यह बात किसी को भी पता नहीं चल पाई थी.
पर शायद आंटी समझ गई थीं.
उन्होंने भी कुछ नहीं कहा था तो मैं अब लाली को बिंदास चोदने लगा था.
कुछ समय बाद मैं कुछ दिनों के लिए अपने घर चला गया.
जब वापस आया तब तक वह भी अपने घर चली गई थी.
मैं बहुत उदास हो गया था.
लाली के बाद आंटी मेरे लौड़े का सहारा कैसे बनी, यह मैं अगली कहानी में बताऊंगा.
एक साल बाद मेरी भी एक अच्छी सरकारी नौकरी लग गई और मैं भी वहां से चला आया.
वह लड़की वहां पर फिर से आ गई थी पर अब मैं वहां नहीं था.
हॉट कजिन स्टोरी में लॉक डाउन में मैं गुरुग्राम में एक बढ़िया फ्लैट में अकेला रह रहा था. तभी मेरी बुआ की बेटी का फोन आया. वह दिल्ली में थी और लॉकडाउन में घर जाकर कैद नहीं होना चाहती थी.
अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा नमस्कार!
मेरा नाम नीलेश शुक्ला है, मैं 27 वर्ष का हूँ और मूल रूप से इलाहबाद से हूँ.
मेरे परिवार वाले मुझे ‘नीलू’ कह कर ही पुकारते हैं अक्सर!
मैं काफी समय से अन्तर्वासना का पाठक हूँ, और सत्य अनुभव पर आधारित यह कहानी लिखने की प्रेरणा मेरे कुछ प्रिय लेखक हैं, जिनकी लेखन शैली इतनी उत्कृष्ट और आकर्षक है कि पाठक पढ़ते हुए स्वयं को उस कहानी के अंदर महसूस करता है.
अतः मैंने भी सोचा कि मैं भी अपनी इस सत्य कथा के माध्यम से आपसे अपनी आप बीती हॉट कजिन स्टोरी साझा करूँ.
इस लेख की भाषा में मैंने अधिकतर हिंदी और हिंगलिश के शब्दों का प्रयोग किया है, जो मेट्रो शहरों में बातचीत का आम लहज़ा बन गया है.
यह मेरी पहली रचना है, अतः कोई भी त्रुटि या कमी के लिए पहले ही पाठकों से माफ़ी चाहता हूँ.
वर्तमान में पुणे में एक मल्टीनेशनल कंपनी में उच्च पद पर कार्यरत हूँ.
लगभग 6 फ़ीट की हाइट और कसरती बदन के साथ एक आकर्षक व्यक्तित्व का मालिक होने के कारण मेरे आज तक काफी लड़कियों के साथ सम्बन्ध रहे हैं.
किन्तु कुछ अनुभव ऐसे होते हैं जिनकी अपनी एक अलग कसक, एक अलग खनक और एक अलग स्वाद होता है और वे जीवन में अपनी एक अमिट छाप छोड़ जाते हैं.
अपने जीवन के एक ऐसे ही ख़ास अनुभव को मैं आपसे साझा कर रहा हूँ जिसने मुझे बहुत हद तक बदल कर रख दिया.
अपने जीवन की जिस घटना का उल्लेख मैं करने जा रहा हूँ वह 2020 में घटित हुई थी.
उस समय मैं अपनी इंजीनियरिंग की सफल पढ़ाई के पश्चात गुरुग्राम में एक कंपनी में बतौर सॉफ्टवेयर डेवलपर काम कर रहा था.
काम करते हुए मुझे लगभग 2 साल हो गए थे.
2019 में अपने रहने के लिए मैंने अपने एक मित्र अखिल के साथ गुड़गाँव शहर के थोड़ा बाहरी इलाक़े में सोहना हाईवे की तरफ एक बहुमंजिला सोसाइटी में एक 2BHK फ्लैट किराये पर ले लिया था.
हम दोनों में गहरी मित्रता थी और खूब पटती थी.
हमारे बीच पार्टियों से लेकर लड़कियों की बेशर्मी से चर्चा होती थी.
अखिल भी गुड़गाँव में एक अन्य कंपनी में सेल्स लीड की भूमिका में कार्यरत था.
हमारा फ्लैट उन्नीसवीं मंजिल पर था.
सोसाइटी मुख्य शहर से दूर होने के कारण पूर्णतः फर्निश्ड लक्ज़री फ्लैट के बाद भी उसका किराया काफी कम था.
बाइपास और फारेस्ट एरिया से पास होने के कारण हमारे इलाके में खूब हरियाली और न के बराबर शोरगुल था.
ऑफिस से थोड़ा दूर था, परन्तु मानसिक शांति के परिप्रेक्ष्य से उस इलाक़े का कोई मुक़ाबला न था.
मकान मालिक कनाडा में रहता था और कोई हस्तक्षेप नहीं करता था.
हम भी समय पर किराया पंहुचा दिया करते थे.
सोमवार से शुक्रवार काम में व्यस्त रहने के बाद उस फ्लैट पर एक अलग ही सुकून मिलता था.
मास्टर बैडरूम मैंने और दूसरा बैडरूम अखिल ने ले लिया था.
इसके अतिरिक्त फ्लैट में फ्लैट में एक छोटा स्टडी रूम था जिसकी हमें तब तक ज़रूरत नहीं पड़ी थी, अतः हम स्टोररूम जैसे ही उसका उपयोग करते थे.
खाने और सफाई के लिए हमने एक नौकरानी भी लगवा ली थी.
उस समय गुड़गाँव में मेरी एक गर्लफ्रेंड भी थी श्रद्धा … जिसको डेट करते हुए मुझे लगभग डेढ़ साल हो गया था जबकि अखिल सिंगल था.
कुल मिलाकर हम दोनों मित्र नौकरी करते हुए मस्ती से अपना बैचलर जीवन जी रहे थे.
दिसंबर 2019 में अखिल ने बुझे बताया कि उसका बैंगलोर में एक बड़ी कंपनी में सफल इंटरव्यू हुआ है, बढ़ोतरी के साथ नयी नौकरी मिल गयी है और उसे जनवरी से ही ज्वाइन करना होगा.
20 जनवरी के आसपास अखिल अपना अधिकतर सामान लेकर बैंगलोर के लिए निकल गया.
किंतु चाबी मेरे हाथ में थमाते हुए अपनी कार यहीं छोड़ गया यह कहकर कि एक-आध महीने में बैंगलोर में अपना डेरा जमाने के पश्चात वह वापस आएगा और अपनी कार लेकर जाएगा.
चूँकि फ्लैट का किराया अधिक नहीं था इसलिए मैंने अकेले ही फ्लैट रखने का निश्चय किया यह सोचकर कि यदि कोई ऐसा मित्र मिले जिससे समन्वय बने तो वह अखिल की जगह रह सकेगा.
अखिल के जाने के बाद उस आलीशान फ्लैट में मैं अकेले रहने लगा.
फरवरी 2020 मध्य से कोरोना वायरस की खबरें (जो अबतक लोग हल्के में ले रहे थे) रफ़्तार पकड़ने लगी और फरवरी अंत तक समाचार का मुख्य हिस्सा बन गयी.
मार्च के पहले हफ्ते में जब कोरोना के फैलने की खबरें चरम पर थी, मेरे ऑफिस ने सुरक्षा के परिप्रेक्ष्य से अनिश्चितकालीन ‘वर्क फ्रॉम होम’ की घोषणा कर दी.
मैंने अपने फ्लैट में स्टडीरूम को अपना ऑफिस बना लिया और मास्टर बैडरूम पहले से मेरे पास ही था.
बस अखिल का कमरा था जो खाली था.
7 या 8 मार्च की बात है.
दोपहर के समय मैं ऑफिस के काम में व्यस्त था.
अचानक से मेरा मोबाइल फ़ोन बजा, जो नाम स्क्रीन पर चमका उसको देखते ही मैं थोड़ा सा चौंका.
“Moni Di Kanpur”
मोनी, जिसका पूरा नाम मोनिका भारद्वाज था, मेरी कानपुर वाली बुआ की लड़की थी और मुझसे पांच साल बड़ी थी.
मोनिका ने मास्टर्स तक की पढ़ाई कानपुर से ही की थी और अगस्त 2019 में दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के एक कॉलेज में पी०एच०डी में दाखिला ले लिया था.
साथ ही साउथ दिल्ली में ही एक गर्ल्स पीजी में कमरा ले लिया था.
मोनिका जब दिल्ली शिफ्ट हुई थी, तब उसका एक बार फ़ोन आया था और हमारी बात हुई थी.
किन्तु अब तक मिलने का अवसर नहीं मिला था; सच कहूँ तो मैंने प्रयास भी नहीं किया था, मैं नहीं चाहता था की मेरी रिश्तेदारी में किसी को भी मेरे बैचलर जीवन और मॉडर्न रहन-सहन का किसी को भी पता चले क्योंकि समस्त परिवार में मेरी छवि एक प्रतिभाशाली और परिश्रमी छात्र की थी.
अतः मैं परिवार के लोगों से और रिश्तेदारी में काफी रिज़र्व रहता था.
मोनी और मैं बचपन में छुट्टियों में काफी बार मिलते थे, कभी इलाहबाद में तो कभी कानपुर में.
हमारी अच्छी पटती थी लेकिन मोनी के हाई-स्कूल के पश्चात से हम बराबर संपर्क में नहीं थे.
मिले थे तो बस पारिवारिक शादी-ब्याह और अन्य पारिवारिक समारोह पर.
लगभग साढ़े तीन- चार साल पहले हम एक पारिवारिक फंक्शन में आखिरी बार मिले थे.
खैर, इन सब विचारों के बीच मैंने फ़ोन उठाया.
दूसरी तरफ से वही पहचानी हुई, चुलबुली आवाज़, तंज कसते हुए- नीलू!! कभी बहन को भी याद कर लिया कर!
मैंने कहा- दीदी, इतने दिनों बाद कैसे याद किया? कैसी हो आप? क्या हाल चाल है?
मोनी ने कहा- तेरी सवाल पे सवाल पूछने की आदत गयी नहीं अब तक! हाल चाल सब बढ़िया है, पी जी में हूँ फिलहाल. लेकिन कुछ दिक्कत हो गयी है. इसीलिए तुझे फ़ोन किया!
“दिक्कत? क्या हो गया ऐसा दीदी?”
“अरे तू न्यूज़ नहीं देखता क्या!? पता नहीं ये कोरोना वायरस क्या बला है. शुरुआत में तो मैंने ज़्यादा ध्यान नहीं दिया लेकिन कल कॉलेज से नोटिस आया कि कॉलेज बंद हो रहा, पता नहीं कब तक. सारी क्लासेज और रिसर्च का काम सब ऑनलाइन चलेगा. भाई मुझे तो सच में टेंशन हो रही. पी.जी. की लड़कियाँ खाली करने की बात कर रहीं. मेरी रूममेट दिव्या के तो घर से आज फ़ोन आया था, उसके पापा उसको लेने आ रहे 2 दिन में सारे सामान के साथ. समझ नहीं आ रहा क्या करूँ … सब कुछ इतना अचानक से हो रहा!”
“सारी न्यूज़ देख रहा मैं दीदी, कोरोना की वजह से यूरोप, खासकर इटली में बुरा हाल है … वायरस तेजी से फ़ैल रहा. मेरे ऑफिस ने तो बीते हफ्ते से ही वर्क फ्रॉम होम कर दिया है सबका!”
“तो तेरा क्या प्लान है … घर निकलने का सोच रहा?”
“नहीं दीदी … मैं तो यहीं रुक रहा अपने किराये के फ्लैट में!”
मोनी ने लगभग हँसते हुए कहा- वाह भाई! गज़ब कॉन्फिडेंस है तेरा. कोई गर्लफ्रेंड है क्या जिसकी वजह से रुका हुआ है?
“क्या दीदी आप भी ना न… कुछ नहीं है ऐसा; फ्लैटमेट था, वह भी 2 महीने पहले चला गया, अकेला ही रहता हूँ. लेकिन 2 दोस्त दूसरी सोसाइटी में 15-20 मिनट दूर रहते हैं, तो मिलजुल कर देख लेंगे जो भी होगा!”
“तेरा तो सही हिसाब है भाई. ऐसे ही नहीं तेरी तारीफों के पुल बांधते हैं सब मेरी फैमिली में. पढ़ाकू तो तू था ही, तेज भी हो गया इतना यहाँ आकर. गुरुग्राम रह रहा ना तू?”
“हाँ दीदी गुरुग्राम में ही, लेकिन मेन गुरुग्राम से थोड़ा बाहर है. ये सब छोड़ो, आप बताओ कि बुआ फूफ़ा क्या बोल रहे?”
“यार, वे तो घर आने को बोल रहे हैं. चौदह तारीख की टिकट भी करवा दी है. लेकिन ये कोरोना इतनी तेज़ी से फ़ैल रहा और इतनी अफरा तफरी भी है. पता नहीं सेफ होगा या नहीं इस तरह अचानक से जाना!”
“अब दीदी, बुआ फूफा ने बोल ही दिया है तो ऑप्शन भी क्या है और. मास्क वगैरह लगा कर जाना, आई थिंक सेफ रहेगा सब. ज़्यादा टेंशन मत लो!”
“हम्म … सही कह रहा यार … चल मैं पैकिंग वगैरह देखती हूँ.” मोनी ने बुझे मन से कहा.
“ओ.के. दीदी, अपना ध्यान रखना आप, और कुछ मदद चाहिए हो तो बेझिझक कॉल करना!”
“हाँ नीलू, तू भी ध्यान रख और बाहर ज़्यादा मत निकलना. नयी बीमारी का कुछ पता नहीं. चल मैं रखती हूँ … बाय!” कहते हुए मोनी ने फ़ोन रख दिया.
लगभग एक हफ्ता बीता.
13 तारीख की बात है, रात में साढ़े 11 बजे मेरे पास मोनिका का फ़ोन आया.
“नीलू! सो तो नहीं गया था?”
“नहीं दीदी, क्या हुआ? सब ठीक तो है न?”
“अरे यार … अभी मैसेज आया मेरे पास irctc का. ट्रेन कैंसिल हो गयी है. मैंने पता किया तो बहुतेरी ट्रेनें कैंसिल हो रहीं!”
“ओह इतने अचानक से? अब क्या दीदी?”
“समझ नहीं आ रहा यार, दिव्या भी चली गयी है. पीजी में 3 -4 लड़कियाँ बची हैं, लगता है वो भी चली ही जाएँगी कल परसों में!”
“दीदी बस का टिकट देखा? उसमे शायद मिल जाये आपको …”
“भाई ए.सी. बस में एक भी टिकट नहीं है और नार्मल बस से मैं सफ़र नहीं कर सकती, मेरी तबियत ख़राब हो जाती है. ऊपर से कितने सारे लोग भी होंगे बस में. इन्फेक्शन का चांस भी ज़्यादा है.”
“दीदी अब तो एक ही विकल्प बचा है. इंटरसिटी कैब या टैक्सी कर लो. थोड़ा महंगा पड़ेगा लेकिन और कोई रास्ता भी तो नहीं!”
“अबे, तू भाई है या कसाई है … . मुझे घर भेजकर ही दम लेगा??” मोनी ने लगभग चिल्लाते हुए कहा.
“मतलब … समझा नहीं दीदी?”
“समझा नहीं मतलब क्या? तुझे नहीं पता घर जाकर मेरी ज़िन्दगी जेल जैसी हो जाएगी … सारी मौज मस्ती बंद … पहले से ही दुखी हूँ इतनी!”
“ओह … तो ये बात है … क्या सोच रही हो आप फिर? दिल्ली में ही रुकोगी?”
“यार सारी सहेलियों और दोस्तों से बात करके देख लिया … इस वक्त किसी के पास रुकने का जुगाड़ नहीं … तेरे पास कुछ व्यवस्था हो सकती है कुछ दिनों के लिए?” मोनी ने आशा भरी आवाज़ में पूछा.
सच तो यह था कि मैं भी अकेला ही था. मेरी गर्लफ्रेंड श्रद्धा जो अक्सर आती रहती थी, वह होली के समय घर गयी थी और उसके परिवार ने उसको माहौल ठीक होने तक वहीं रोक लिया था. केवल मेरे दो मित्र देवेश और सुमित थे, जो पास की एक सोसाइटी में रहते थे.
मैंने भी सोचा, एक-आध हफ्ते की तो बात है, मैनेज हो जाएगा सब.
“दीदी मैं तो गुरुग्राम रहता हूँ … साउथ दिल्ली से दूर पड़ेगा, लगभग सवा घण्टा. मुझे क्या समस्या होगी, फ़्लैट में एक कमरा भी खाली है, आप आ जाओ अगर आपको ज्यादा दूर न पड़े तो!”
मेरे इतना कहते ही मोनी की आवाज़ में राहत और प्रसन्नता का सैलाब आ गया- भाई … पक्का आ जाऊं ना? कोई प्रॉब्लम तो नहीं है न तुझे?
“अरे कम ऑन दीदी … इतनी फॉर्मेलिटी?”
“हाय मेरे प्यारे नीलू!! तूने बचा लिया मुझे … बस यही उम्मीद थी मुझे तुझसे … सुन, एक काम करती हूँ. पी.जी. खाली ही कर देती हूँ, तेरे साथ 2 -3 हफ्ते रुक लूंगी, और थोड़ा माहौल ठीक होते ही नया पी.जी. ढूंढ लूंगी. तू एक काम कर, मुझे लोकेशन भेज दे, मैं 3-4 दिन में सारा सामान पैक करके आती हूँ.”
“ठीक है दीदी … पहुँचने में कोई दिक्कत हो तो बताना … मैं लोकेशन व्हाटसऍप करता हूँ!” कहकर मैंने फ़ोन काट दिया.
अगले 3 दिन मैं काम में काफ़ी व्यस्त रहा तो मोनी से बात करने की तरफ ध्यान नहीं गया.
19 तारीख को मेरे पास सुबह लगभग 9:30 बजे मोनी का फ़ोन आया- नीलू, मैं निकल रही हूँ बस 10 मिनट में. कल ही आ जाती लेकिन सिक्योरिटी मनी फंसा हुआ था, वही लेने रुक गयी. गूगल मैप पर दिखा रहा एक-सवा घंटे में पहुंच जाऊंगी. तू फ्लैट पर ही रहेगा ना?
“हाँ दीदी, आप आराम से आ जाओ, मैं फ्लैट पर ही रहूँगा.”
“तेरी सोसाइटी का नाम क्या बताया था तूने?”
“दीदी सोसाइटी का नाम रीगल कासा है. और टावर का नाम ऐमीरेट्स है. आप गार्ड से बात करा देना मेन गेट पर!”
मोनी ने शरारत भरे फ़िल्मी लहज़े में पूछा- स्वागत नहीं करोगे हमारा?”
“हाहा … अरे बिलकुल दीदी … आप पहुँचो बस. फ्लैट इतना आलीशान है. उसको देखकर ही स्वागत हो जाएगा!”
मोनी ने उत्साह से भरपूर आवाज़ में कहा- हाय सच में क्या! मेरा छोटा भाई कितना बड़ा आदमी बन गया है … अब तो इंतज़ार नहीं हो रहा नीलू … चल मेरी कैब आ गयी, पहुंच कर कॉल करती हूँ”
कहते हुए फ़ोन काट दिया.
लगभग 11 बजे मेरे इण्टरकॉम पर गार्ड का फ़ोन आया- गुड मॉर्निंग सर … मैडम आयी हैं टैक्सी से, आपसे मिलने. सामान भी है साथ में!”
मैंने गार्ड को आदेश दिया- फ़ौरन उनको मेरे टावर पर भेज दो. वो मेरी कज़िन सिस्टर हैं.”
“जी सर, बिल्कुल!”
मैंने लिफ्ट ली और जब तक मैं नीचे पंहुचा, मोनी की कैब मेरे टावर के नीचे पहुंच गयी थी.
पीछे डिक्की से ड्राइवर कुछ सामान निकाल रहा था.
और एक सूटकेस मोनी पीछे वाली सीट से निकल रही थी.
क्योंकि हम सोशल मीडिया पर जुड़े हुए नहीं थे, मोनी को इतनी दिनों बाद देख रहा था मैं, 2 मिनट तक तो मेरी आँखें टिक गयी उस पर!
और टिकें भी क्यों न …
5′ 6″ से 5′ 7″ की हाइट, हल्का सांवला सुनहरा रंग, बॉटल ग्रीन रंग का चुस्त टॉप, जिसमें से मोनी के 36C के स्तन फाड़ के बाहर निकलने को हो रहे थे.
नीचे सफ़ेद रंग के हॉट-पैंट शॉर्ट्स जो सिर्फ चालीस प्रतिशत के लगभग चिकनी सुनहरी जांघों को ढक रहे थे.
मोनी की चिकनी टांगों पर एक भी बाल का नामोनिशान न था.
ऊपर से तीखे नैन-नक्श, बड़ी बड़ी आँखें, मेकअप, सनग्लासेस, जूते, मॉडर्न बॉडी लैंग्वेज.
अट्ठाइस-उनतीस साल की उस उम्र में मोनिका का वो यौवन से परिपूर्ण बदन डेवलपमेंट के चरम पर था.
10 सेकंड के लिए तो मैं उसे पहचान ही नहीं पाया.
मोनी डी०यू० की एक आइटम, पटाका माल लग रही थी.
देख कर साफ़ पता लग रहा था कि बहना को दिल्ली की हवा बहुत ज़बरदस्त लगी है. सच कहूं तो दो पल के लिए मेरा ईमान डगमगा गया.
दोस्तों मेरा नाम रॉकी Hindi Sex Stories है, दिल्ली का रहने वाला हूँ। मैं आपके सामने एक घटना बताने जा रहा हूँ जो मेरे साथ घटी है, यह सब मुझसे गलती से हुआ था।
मेरे पड़ोस में एक परिवार रहता था, जिसमें दो लड़कियाँ और एक लड़का था। दोनों लड़कियाँ लड़के से बड़ी थी, बड़ी वाली का नाम स्नेहा था। यह कहानी उसके और मेरे बारे में है।
अब मैं थोड़ा स्नेहा के बारे में बताता हूँ, वो लड़की एक दम गोरी थी, उसके आँखें नीली थी और होंठ गुलाबी ! उसका फिगर तो पूरा मस्त था यारो ! 36-26-36, और सबसे बड़ी बात वो मुझसे दो साल बड़ी थी। पर बड़ी लड़की के साथ ही सेक्स करने में मज़े आते हैं।
हम दोनों दस सालों से दोस्त थे मतलब बचपन से ही जब वो गयारह साल की थी और मैं नौ साल का ! और आज वो इक्कीस साल की है और मैं उन्नीस साल का और मेरा लंड 7″ लम्बा और 4″ मोटा है।
अब मैं आगे बताता हूँ-
हुआ ऐसे कि मेरे बड़े भाई की शादी हो रही थी तो उनके पूरे परिवार को भी आना था, इसलिए मम्मी ने स्नेहा को बुला लिया था काम करवाने के लिए।
सर्दियों के दिन थे, एक रात को उसने नीली जींस और गुलाबी टॉप पहना हुआ था, बहुत मस्त लग रही थी। हम दोनों एक ही रजाई में बैठे थे और स्नेहा मेरे मोबाइल में वीडियो गाने देख रही थी तो समय बिताने के लिए मैं भी देखने लगा उसके साथ।
अचानक मेरे मोबाइल में अगले वीडियो के बाद ब्लू फिल्म की क्लिप्पिंग शुरू हो गयी और मुझे डर लगने लगा कि कहीं यह अब मम्मी से न बोल दे।
मैंने उससे मोबाइल माँगा बंद करने के लिए पर उसने कहा- चलने दो ! अच्छा लग रहा है !
और मुझे क्या चाहिए था ! मैं खुश हो गया कि चलो आज काम बन जायेगा !
पर एक दो क्लिप्पिंग देखने के बाद मेरा भाई आकर मोबाइल ले गया। अब मैं अपनी किस्मत को गाली दे रहा था फिर हम दोनों लेट गए और करीब पन्द्रह मिनट बाद मैंने डरते हुए अपना एक पैर उसके पैर से लगाया। उसने कुछ नही बोला। फिर धीरे-धीरे मैंने अपना एक हाथ उसके चूचों पर लगा दिया और दूसरे हाथ से उसकी गर्दन पकड़ कर अपने होंठ उसके होंठों पर रख कर चूमने लगा। बहुत मीठे होंठ थे यारो उसके !
फिर मैंने उसका टॉप कमर पर से पकड़ कर ऊपर दिया क्योंकि उतारने में डर था कि कोई आ न जाए ! फिर मैंने अपने होंठ उसके चूचों पर लगा कर उन्हें चूसने लगा। और चूसते-2 मैंने अपने एक हाथ से उसके जींस की बटन खोल कर उसका जींस घुटनों तक कर दिया और उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को रगड़ने लगा। उसकी पैंटी पूरी गीली हो चुकी थी। फिर मैंने अपनी एक ऊँगली उसकी चूत के अन्दर डाल दी।
वो धीरे से चिल्ला पड़ी, बोलने लगी- लग रही है !
मैंने कहा- जान, अभी तो ऊँगली ही गई है, जब यह व्हार इन्च मोटा जायेगा तो क्या करोगी ?
वो मेरी इस बात से डरने लगी।
मैंने उससे कहा- डरो मत ! मैं दर्द नहीं होने दूंगा।
फिर मैंने उसके चूचों को चूसते हुए अपनी जींस भी उतार दी और उसका हाथ ले कर अपने लंड पर रख दिया।
वो बोली- रोक्स, बहुत मोटा और लम्बा है !
मैंने कहा- जान, तभी तो मज़ा आएगा !
और मैंने फिर उसको कमर से पकड़ कर अपने पेट से लगा लिया जिसकी वजह से मेरा लंड उसकी चूत को छूने लगा। और फिर मैंने उसकी पैंटी नीचे करके अपना लंड उसकी चूत में डालने लगा। दोस्तो, आप सोच सकते हो जींस घुटने तक उतर कर कोई कैसे ये काम कर सकता है मैं उसके पैरों के बीच मैं आ गया जिसकी वजह से मेरे लंड का निशाना सीधे उसकी चूत हो गई। फिर मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर रख कर एक हल्का सा झटका मारा जिसकी वजह से वो दर्द की वजह से चीखने वाली थी पर नही चिल्लाई। फिर मैंने उसके मुँह पर हाथ रख कर एक ऐसा झटका दिया कि मेरा लंड पाँच इन्च तक चला गया और फिर वो मेरा हाथ अपने मुँह से हटाने की कोशिश करने लगी पर मैंने नहीं हटाया। और फिर मैं पाँच मिनट तक ऐसे ही रहा। जब लगा कि वो अब ठीक है, तब मैंने धीरे आगे-पीछे करना चालू कर दिया जिसकी वजह से स्नेहा को भी मज़े आने लगे।
मैंने कहा- जान, एक बार और सम्भाल लेना !
और मैंने एक और झटका दिया और मेरा पूरा लंड उसकी चूत में चला गया और वो फिर दर्द से तड़पने लगी पर थोड़ी देर बाद वो ठीक हो गई और मेरा साथ देने लगी।
फिर मैं उसी अवस्था में उसको झटके मारने लगा और वो भी मेरा साथ देने लगी। करीब दस मिनट बाद वो हड़ गई पर मैं अभी भी चालू था ।
वो बोली- तुम कब तक करोगे?
मैंने कहा- जान, मैं थोड़ा ज्यादा समय लेता हूँ !
और करीब 15 मिनट बाद मैंने उसकी जांघों पर वीर्यपात कर दिया और फिर मैंने उसको एक लम्बा चुम्बन दिया और फिर हमने अपने कपड़े ठीक किये पर उसने मेरा लंड नही छोड़ा और बोली- तुम्हारा लंड बहुत दमदार और अच्छा है।
दोस्तो, मेरे लंड पर वो फ़िदा हो गई। Hindi Sex Stories
आप सब ने मेरी पहली कहानी Antarvasna‘मेरा पहला सेक्स था भाभी की चुदाई-1‘ तो पढ़ी ही होगी।
आपके उत्तर भी आए, धन्यवाद!
अब उसके आगे की कथा सुनिए:
मैं भाभी की चुदाई करने के बाद तुरन्त घर गया और सोचता रहा कि क्या मुझसे सही हुआ या फ़िर मैंने गलत कर दिया। पर चुदाई के आगे किस की चलती है!
मुझे फ़िर कुछ दिनों बाद बहुत अच्छा मौका मिला। घर के सभी सदस्य शादी में शहर से बाहर गए हुए थे, मम्मी भाभी को घर की देखभाल के लिए छोड़ गई थी। मेरे पेपर चल रहे थे। मैं पेपर करते समय भी भाभी की चूत के बारे में ही सोचता रहा था।
बस एक घण्टे बाद मैं घर पहुँच गया। भाभी नहाने के लिए जा रही थी। घर पहुँचते ही मैंने भाभी को अपनी बाहों में ले लिया, मेरी साँसें बहुत तेज़ चल रही थी। मुझे मालूम था कि आज मेरी प्यास जरूर बुझ जाएगी।
फ़िर क्या था, मैंने भाभी के होंठों को चूमना शुरू कर दिया! लग रहा था कि मानो वो होंठ नहीं गुलाब की पंखुड़ियाँ हों। धीरे धीरे मेरा लण्ड मिनार की तरह खड़ा हो गया।
फ़िर मैंने उनके स्तनों को हल्के हल्के मसलना चालू किया। फ़िर मैंने उनके स्तन अनावृत किए- इतने गोरे गोरे! चोटी से चुचूक!
मैं हब्शी की तरह उन पर टूट पड़ा, ऐसे जैसे कि किसी ने बरसों से खाना ना खाया हो। भाभी के स्तनों को मैं इतने ज़ोर ज़ोर से दबा रहा था कि वि बुरी तरह काम्प रही थी।
कभी स्तनों से दूध पीता तो कभी उनके होंठों को चूसता और दूसरे हाथ से स्तनों को मसल रहा था। मैं उनके स्तन को पूरा अपने मुँह में भर लेना चाहता था पर मेरी किस्मत! स्तन बड़े थे और मेरा मुँह छोटा। पर कोई बात नहीं!
फ़िर मैंने उनके मुंह में अपना प्यारा और सेक्सी लण्ड रख दिया और 69 की अवस्था में हो गया। उनकी चूत पे एक भी बाल नहीं था। मैं उनकी चूत इतने प्यार से चूस रहा था कि कि भाभी का एक बार तो निकल भी गया।
मैंने भाभी की चूत की दोनों पंखुड़ियों को अलग करके ऐसा चाटा जैसे कोई बिल्ली दूध को चाट जाती है। फ़िर धीरे धीरे मैंने उनकी चूत में ऊँगली घुसा दी। भाभी ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ ले रही थी और बीच बीच में कभी मेरे लण्ड को जोर से काट भी लेती। मैं जल्दी जल्दी भाभी की चूत में ऊँगली कर रहा था, बस भाभी और मैं साथ साथ ही गए।
फ़िर भाभी ने मेरे लण्ड को दोबारा मिनार बनाया। मैंने उन्हें मेज़ पर बैठाया और अपनी मिनार को उनकी कोमल सी चूत में डाल दिया। बस कुछ देर बाद मैं नीचे हो गया और भाभी मेरे ऊपर जोर जोर से झटके मारने लगी। ऐसा मज़ा मेरे जीवन में कभी नहीं आया था।
फ़िर मैंने भाभी की चुदाई कुतिया वाले स्टाइल में की, फ़िर हम दोनों ही पस्त हो गए। थोड़ी देर में भाभी नहाने के लिए चली गई और मैं भी उनके साथ गया था बाथरूम में। बस ये पल ही विशेष क्षण बन गए मेरे जीवन में!
अब आप सोचेंगे कि क्या?
देखो?
अब मैं यह रहस्य यहीं छोड़ता हूँ। Antarvasna
The user agrees to follow our Terms and Conditions and gives us feedback about our website and our services. These ads in TOTTAA were put there by the advertiser on his own and are solely their responsibility. Publishing these kinds of ads doesn’t have to be checked out by ourselves first.
We are not responsible for the ethics, morality, protection of intellectual property rights, or possible violations of public or moral values in the profiles created by the advertisers. TOTTAA lets you publish free online ads and find your way around the websites. It’s not up to us to act as a dealer between the customer and the advertiser.