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अगले दिन फिर कॉल आया। "रिया, पैसे जुटा रही है?" "हाँ, कोशिश कर रही हूँ। थोड़ा टाइम दे," रिया ने कहा। "याद है ना, कैसे तू मेरे नीचे कराहती थी? वो दिन लौट सकते हैं," साहिल ने गंदी बात करते हुए हँसा। "साहिल, ये मत कर," रिया ने मिन्नत की। "मज़ाक कर रहा हूँ। तू मेरी दोस्त थी ना," साहिल नरम पड़ा। तीन दिन बाद, "रिया, कितना जुटा?" "साहिल, अभी 2 लाख ही हुए। और टाइम चाहिए," रिया बोली। "ठीक है, पर जल्दी कर। ब्याज लगेगा," साहिल ने हँसते हुए कहा। एक हफ्ते बाद, "रिया, अब तक कितना?" "4 लाख। साहिल, बस थोड़ा और टाइम," रिया ने कहा। "रिया, तू अभी भी वैसी ही है। वो रातें याद हैं ना?" साहिल ने पूछा। "साहिल, प्लीज़। मुझे परेशान मत कर," रिया की आवाज में गुस्सा था। "ठीक है, लेकिन जल्दी कर," साहिल ने कहा। ब्लैकमेल और होटल: अंधेरे की गहराई महीने के बाद, रिया ने हिम्मत जुटाकर कहा, "साहिल, 5 लाख ही जुटा पाई।" "रिया, इतना काफी नहीं। दो रास्ते हैं—रोहन को बता दूं, या मेरे दोस्त अजय के साथ सो," साहिल ने धीरे और ठंडे स्वर में कहा। "साहिल, ये क्या बोल रहा है?" रिया चिल्लाई। "मजबूरी है। सोच ले," साहिल ने फोन काट दिया। कई दिन सोचने के बाद, रिया ने कहा, "साहिल, ठीक है। लेकिन ये आखिरी बार।" "गुड गर्ल। लॉज पर मिल," साहिल ने पता भेजा। लॉज के कमरे में अजय ने कहा, "रिया, डर मत। मज़ा आएगा।" उसका चेहरा कठोर और आँखें चमक रही थीं। "अजय, बस जल्दी खत्म करो," रिया की आवाज में थकान थी। "क्या माल है तू। साड़ी उतार," अजय ने कहा। "अजय, ये गलत है," रिया ने मना किया। "चुप रह। मज़ा ले," अजय ने उसकी छाती को दबाया और उसकी साड़ी खींच दी। "तेरी चूत चाटूँ?" "जल्दी करो," रिया चुप रही। अजय ने उसे बिस्तर पर धकेला और उसका शरीर भोगा। "मज़ा आया?" उसने पूछा। "बस खत्म करो," रिया उठी और बाहर निकल गई। साहिल का घर आना: जुनून और डर का चरम कुछ दिन बाद साहिल फिर रिया के घर आया। "रिया, बस तुझसे मिलने आया," उसने दरवाजे पर खड़े हुए कहा। "साहिल, अब क्या चाहिए?" रिया ने डरते हुए पूछा। "क्या माल है तू, रंडी। आज तेरी चूत और गांड फाड़ूँगा, कुतिया," साहिल ने हँसते हुए कहा और अंदर घुस आया। "साहिल, जा ना," रिया पीछे हटी। "चुप, कुतिया। तू मेरे लंड की भूखी है," साहिल ने उसे सोफे पर धक्का दिया। "रिया, साड़ी उतार," साहिल ने हुक्म दिया। "साहिल, मत कर," रिया ने मिन्नत की। "उतार, रंडी, वरना तस्वीरें वायरल कर दूंगा," साहिल ने धमकाया। "साहिल, बस एक बार?" रिया ने काँपते हुए पूछा। "हाँ, फिर देखते हैं," साहिल ने हँसा। "साली, तेरी चूचियाँ गजब हैं," साहिल ने उसकी छाती को चूसा। "मज़ा आ रहा है?" "साहिल, धीरे," रिया कराही। "चूस, कुतिया," साहिल ने अपना लंड उसके मुँह में डाला। "हाँ, रंडी, ऐसे चूस।" "साहिल, जल्दी कर," रिया बोली। "तेरी चूत गीली है, कुतिया। और करूँ?" साहिल ने उसकी जाँघों को चाटा। "हाँ, साहिल, और कर," रिया कराही। "ले, रंडी, चिल्ला," साहिल ने उसकी चूत में लंड डाला। "और जोर से!" रिया चिल्लाई। "साली, तेरी गांड मारूँगा," साहिल ने उसकी गांड में लंड डाला। "हाँ, मज़ा आ रहा है!" रिया बोली। "रिया, तुझे मज़ा आता है ना मेरे साथ?" साहिल ने हाँफते हुए पूछा। "हाँ, साहिल। लेकिन ये गलत है," रिया हाँफ रही थी। "गलत-सही छोड़, मज़ा ले," साहिल ने उसकी चूत में माल छोड़ा। "अगली बार फिर आऊँगा, रंडी।" रोहन का आना: सस्पेंस का चरम उसी शाम रोहन घर लौटा। "रिया, क्या हुआ?" उसने रिया के उदास चेहरे को देखकर पूछा। "कुछ नहीं, थक गई हूँ," रिया ने झूठ बोला। "आज तुझसे प्यार करूँ?" रोहन ने उसे चूमा। रिया के होंठों पर साहिल का स्वाद था। " र की राहें, जुनून की गहराइयाँ: नया मोड़ दो महीने का जुनून: रिया की नई दुनिया पिछले दो महीनों से रिया की जिंदगी बदल चुकी थी। साहिल का डर अब उसकी कमजोरी नहीं, बल्कि एक अजीब सा नशा बन गया था। हर बार जब साहिल उसके घर आता, रिया पहले डरती, फिर उस जंगली जुनून में खो जाती। एक शाम, साहिल ने दरवाजा खटखटाया। रिया ने उसे देखते ही कहा, "साहिल, फिर आ गए? रोहन कभी भी आ सकता है।" "अरे, डर मत, रंडी। तेरा शौहर अभी ऑफिस में होगा। आज तेरी चूत और गांड दोनों फाड़ूँगा," साहिल ने हँसते हुए कहा और उसे सोफे पर धकेल दिया। "साहिल, धीरे करो," रिया ने कराहते हुए कहा, लेकिन उसकी आँखों में अब डर कम और मस्ती ज्यादा थी। "चूस, कुतिया," साहिल ने अपना लंड उसके मुँह में डाल दिया। रिया ने उसे चूसा, और साहिल ने उसकी चूत में उंगलियाँ डालकर कहा, "गीली हो गई, साली। मज़ा आ रहा है ना?" "हाँ, साहिल… और कर," रिया की साँसें तेज थीं। साहिल ने उसे घुमाया, उसकी गांड पर थप्पड़ मारा और लंड अंदर डाल दिया। "चिल्ला, रंडी!" उसने कहा। "हाँ… साहिल… और जोर से!" रिया चिल्लाई। उनकी ये रातें अब रिया के लिए एक गुप्त आनंद बन गई थीं। साहिल और विकास की मुलाकात: तस्वीरों का खेल एक रात साहिल और विकास की पुरानी दोस्ती फिर से जागी। दोनों एक सस्ते बार में शराब पी रहे थे। नशे में साहिल ने अपना फोन निकाला और हँसते हुए कहा, "विकास, देख ये क्या है। रिया की चूत में मेरा लंड, राहुल उसकी चूचियाँ दबा रहा है। साली कितना मज़ा लेती है मेरे साथ।" विकास ने तस्वीरें देखीं। पहले तो वह हँसा, "साहिल, तू सच में गजब है। रिया को ऐसा बना दिया?" लेकिन शराब का नशा उतरते ही उसके मन में पुरानी यादें ताजा हो गईं—रिया के साथ बगीचे की वो रात, झरने के पास का प्यार। उसे अजीब सी बेचैनी हुई। "साहिल, ये गलत है। रिया पहले मेरी थी," विकास ने धीरे से कहा। "अब तेरी नहीं, मेरी रंडी है। मज़े ले, भूल जा," साहिल ने हँसा। लेकिन विकास का दिल भारी हो गया। अगली सुबह, विकास ने रोहन को फोन किया। "रोहन, भाई, तुझसे कुछ कहना है। रिया के बारे में सावधान रह। कुछ ठीक नहीं चल रहा।" "क्या मतलब, विकास?" रोहन का स्वर सख्त हो गया। "बस इतना कह रहा हूँ, नजर रख। बाद में मत कहना मैंने बताया नहीं," विकास ने फोन काट दिया। रोहन का शक और कैमरा: सच्चाई की तलाश विकास की बात रोहन के दिमाग में घूमने लगी। पहले तो उसे यकीन नहीं हुआ—रिया, उसकी प्यारी बीवी, ऐसा कैसे कर सकती है? लेकिन फिर उसने छोटी-छोटी बातें याद कीं—रिया का अचानक फोन बंद करना, उसकी उदासी, और होंठों पर वो अजीब स्वाद। कई रात सोचने के बाद, रोहन ने फैसला किया। उसने रिया की गैरहाजिरी में घर में छुपे हुए कैमरे लगाए—लिविंग रूम में, बेडरूम में, और किचन के पास। "अगर कुछ गलत है, तो मुझे सच जानना होगा," उसने खुद से कहा। कई दिन तक कुछ खास नहीं हुआ। रोहन हर शाम ऑफिस से लौटकर रिकॉर्डिंग चेक करता, लेकिन रिया बस रोज की तरह घर का काम करती दिखती। फिर एक दिन साहिल आया। साहिल का आना और राहुल का झटका: रिकॉर्डिंग का सच उस दिन रोहन ऑफिस में था। दोपहर को साहिल ने दरवाजा खटखटाया। रिया ने उसे देखते ही कहा, "साहिल, आज जल्दी क्यों?" "अरे, रंडी, तुझसे मिलने का मन किया। आज तुझे चोदकर ही जाऊँगा," साहिल ने हँसते हुए उसे अंदर खींचा। उसने रिया की शॉर्ट्स उतारी और कहा, "क्या माल है तू, साली। चूस मेरा लंड।" रिया ने हँसते हुए कहा, "साहिल, तू रुकता ही नहीं।" उसने साहिल का लंड चूसा, और साहिल ने उसकी चूत में उंगलियाँ डालकर कहा, "गीली हो गई, कुतिया। तैयार है?" "हाँ, साहिल… कर ना," रिया कराही। साहिल ने उसे सोफे पर पटककर चोदा। "चिल्ला, रंडी!" उसने कहा। "हाँ… और जोर से!" रिया की आवाज कमरे में गूँज रही थी। शाम को रोहन ने ऑफिस से लौटकर रिकॉर्डिंग देखी। उसका दिल धड़क रहा था। स्क्रीन पर साहिल और रिया का वो जंगली खेल देखकर वह सन्न रह गया। लेकिन अभी सस्पेंस खत्म नहीं हुआ था। साहिल का दोस्त और तांडव: लाइव नजारा कुछ दिन बाद, शाम को साहिल फिर आया। रोहन उस दिन ऑफिस से जल्दी निकल चुका था और अपनी कार में घर के पास छुपा बैठा था। उसने फोन पर कैमरे की लाइव फीड खोली। साहिल ने रिया को अंदर खींचते हुए कहा, "आज तुझे दो-दो लंड का मज़ा दूंगा, रंडी।" "साहिल, क्या मतलब?" रिया ने चौंककर पूछा। "रुक, मेरा दोस्त आ रहा है," साहिल ने फोन निकाला और अपने दोस्त को बुलाया। दस मिनट बाद एक नया शख्स आया—उसका नाम था अजय। अजय ने रिया को देखते ही कहा, "साहिल, ये तो कमाल की माल है। आज इसे चोदकर मजा लेंगे।" "साहिल, ये क्या कर रहा है? रोहन कभी भी आ सकता है," रिया डर गई। "चुप, कुतिया। मज़ा ले," साहिल ने उसकी शॉर्ट्स फाड़ दी और उसे बेड पर पटक दिया। "चूस, रंडी," उसने अपना लंड उसके मुँह में डाला। अजय ने पीछे से उसकी चूत में उंगलियाँ डालीं और कहा, "साली, कितनी गीली है। तैयार है।" "हाँ… करो," रिया कराही। साहिल ने उसकी चूत में लंड डाला, और अजय ने उसकी गांड में। "चिल्ला, कुतिया!" साहिल चिल्लाया। "हाँ… और जोर से… साहिल… अजय!" रिया की चीखें कमरे में गूँज रही थीं। दोनों ने उसे बारी-बारी चोदा, और साहिल ने कहा, "तेरी चूत और गांड दोनों फाड़ दी, रंडी। मज़ा आया?" "हाँ… साहिल," रिया हाँफ रही थी। रिया को डर था कि रोहन कभी भी घर आ सकता है, लेकिन उसे क्या पता कि रोहन कार में बैठा लाइव सब देख रहा था। उसकी आँखें गुस्से और दर्द से लाल थीं। साहिल और अजय हँसते हुए चले गए। रोहन का आना: गुस्सा और बदला रोहन ने कार से उतरते ही खुद को संभाला। वह घर के अंदर गया। रिया शॉर्ट्स में बेड पर लेटी थी, उसका चेहरा थका हुआ था। "रोहन, तुम कब आए?" उसने हड़बड़ाते हुए पूछा। "अभी," रोहन ने ठंडे स्वर में कहा और उसे पास खींच लिया। उसने रिया को चूमा—उसके होंठों पर साहिल और अजय का स्वाद था। "आज तुझसे प्यार करने का मन है," जुनून में बदल गया। विकास ने उसे चोदा, और रिया की चीखें कमरे में गूँज रही थीं। रोहन का दूसरा झटका: विकास का सच रोहन ने उस दिन फिर से कैमरे की रिकॉर्डिंग देखी। विकास और रिया का वो पल देखकर वह फिर से सन्न रह गया। उसका गुस्सा अब हद पार कर चुका था। अगले दिन उसने विकास को फोन किया। "विकास, तूने क्या किया? उसे चोदा?" विकास ने ठंडे स्वर में कहा, "हाँ, रोहन। सब उसे चोद रहे हैं, तो मैं क्यों नहीं? वो मेरा पहला प्यार थी।" "विकास, तूने मुझे धोखा दिया!" रोहन चिल्लाया। "धोखा? रिया अब किसी की नहीं रही। साहिल, अजय, राहुल… मैंने बस वही किया जो सब कर रहे हैं। तू कुछ कर नहीं सकता," विकास ने कहा और फोन काट दिया। रोहन अकेला बैठा रहा। उसका मन टूट चुका था, लेकिन गुस्सा अभी भी जल रहा था। "रिया, तूने सब कुछ बर्बाद कर दिया," उसने खुद से कहा। यहाँ कहानी को नया मोड़ दिया गया है। रोहन का गुस्सा छुपा हुआ है, विकास का पुराना प्यार फिर से जागा, और रिया की सच्चाई सबके सामने आ गई। रोहन का नया खेल: रिया के साथ जुनून विकास की बातों ने रोहन के मन में आग लगा दी थी। उसने फैसला किया कि वह अब चुप नहीं रहेगा, लेकिन रिया को सीधे कुछ नहीं बताएगा। उस रात, जब रिया सो रही थी, रोहन उसके पास गया। उसने रिया की शॉर्ट्स उतारी और उसे जगाया। "रिया, आज तुझसे प्यार करना चाहता हूँ," उसने कहा, लेकिन उसकी आवाज में एक अजीब सख्ती थी। "रोहन, इतनी रात को?" रिया नींद में बड़बड़ाई। "हाँ, रंडी। ले," रोहन ने उसे बेड पर पटका और उसकी चूत में लंड डाला। उसने पहले से कहीं ज्यादा जोर लगाया। "चिल्ला, साली," उसने कहा। "रोहन… धीरे… क्या हो गया तुझे?" रिया कराही। "चुप, कुतिया। मज़ा ले," रोहन ने उसकी चूत को जोर-जोर से चोदा और फिर उसमें झड़ गया। रिया हाँफ रही थी, लेकिन रोहन का मन शांत नहीं हुआ। उसने रिया को हर रात चोदना शुरू कर दिया—कभी सोफे पर, कभी किचन में, कभी बाथरूम में। "तेरी चूत मेरी है," वह हर बार कहता। रिया को समझ नहीं आ रहा था कि रोहन में ये बदलाव क्यों आया, लेकिन वह चुप रही। रोहन का प्रस्ताव: बॉस के साथ रात कुछ दिन बाद, रोहन ने रिया से कहा, "रिया, मेरा बॉस तुझसे मिलना चाहता है। उसके साथ एक रात बितानी होगी।" "क्या? रोहन, तू पागल हो गया है?" रिया ने चौंककर कहा। "ये मेरे लिए जरूरी है। ऑफिस में प्रमोशन मिलेगा," रोहन ने ठंडे स्वर में कहा। "नहीं, रोहन। मैं ऐसा नहीं कर सकती," रिया ने साफ मना कर दिया। लेकिन रोहन ने हार नहीं मानी। कई दिनों तक वह रिया को मनाता रहा। "रिया, बस एक बार। मेरे लिए कर दे। तुझे कुछ नहीं होगा," उसने कहा। रिया को शक नहीं था कि रोहन को उसकी सच्चाई पता है। आखिरकार, एक दिन उसने हामी भर दी। "ठीक है, रोहन। लेकिन ये आखिरी बार," उसने कहा। अगले दिन रिया तैयार हुई। उसने लाल साड़ी पहनी, होंठों पर लिपस्टिक लगाई, और होटल के लिए निकल गई। रोहन ने उसे विदा किया, लेकिन उसकी आँखों में एक चमक थी। रात को जब रिया लौटी, उसका चेहरा थका हुआ था। "हो गया?" रोहन ने पूछा। "हाँ," रिया ने धीरे से कहा। "गुड। अब देख, मेरा प्रमोशन पक्का है," रोहन ने हँसते हुए कहा। कुछ ही दिनों में रोहन को ऑफिस में तरक्की मिल गई। बॉस और दोस्तों का खेल: पैसा और जुनून रोहन का बॉस, रमेश, अब रिया का दीवाना हो गया था। उसने अपने दोस्तों से कहा, "रोहन की बीवी कमाल की माल है। इसे फिर से चोदना चाहता हूँ।" उसके दोस्तों ने भी रुचि दिखाई। एक दिन रमेश ने रोहन से कहा, "रोहन, रिया को घर बुला। हम चार लोग हैं। हर बार ढेर सारा पैसा देंगे।" रोहन ने सोचा—रिया ने सबके साथ सोया, तो अब इससे क्या फर्क पड़ता है? उसने हामी भर दी। "ठीक है, सर। लेकिन रिया को मत बताना कि मुझे सब पता है," उसने कहा। एक शाम रमेश अपने तीन दोस्तों—विजय, संजय, और अखिल—के साथ रोहन के घर आया। रिया ने दरवाजा खोला और उन्हें देखकर घबरा गई। "रोहन, ये क्या है?" उसने पूछा। "रिया, ये मेरे बॉस और उनके दोस्त हैं। थोड़ी देर रुकेंगे," रोहन ने शांत स्वर में कहा। रमेश ने रिया को पास खींचा। "क्या माल है तू, रंडी। आज तेरी चूत फाड़ देंगे।" उसने रिया की साड़ी उतार दी। रिया रोने लगी, "रोहन, ये क्या हो रहा है?" "चुप, कुतिया। मज़ा ले," विजय ने उसकी चूचियाँ दबाते हुए कहा। संजय ने उसकी चूत में उंगलियाँ डालीं, और अखिल ने उसका मुँह पकड़कर अपना लंड अंदर डाल दिया। "चूस, साली," उसने कहा। "रोहन, मुझे बचा," रिया चिल्लाई, लेकिन रोहन चुपचाप कोने में खड़ा देख रहा था। रमेश ने रिया को बेड पर पटका और उसकी चूत में लंड डाला। "ले, रंडी। चिल्ला!" उसने कहा। "हाँ… धीरे…" रिया कराही, उसकी आँखों में आँसू थे। विजय ने उसकी गांड में लंड डाला, और संजय ने उसकी चूचियाँ चूसते हुए कहा, "क्या मस्त चूत है तेरी।" चारों ने उसे बारी-बारी चोदा। रिया रो रही थी, लेकिन उसका शरीर जवाब दे रहा था। रोहन का खुलासा: सच्चाई और ताला जब रमेश रिया की चूत में जोर-जोर से चोद रहा था, रोहन अचानक पास आया। उसने रिया की आँखों में देखा और कहा, "रिया, मुझे सब पता है। साहिल, राहुल, अजय, विकास… तू सबके साथ सोई। अब मेरे लिए काम कर, रंडी।" "रोहन… तुझे पता था?" रिया सन्न रह गई। "हाँ, कुतिया। हर बार जब तू चिल्लाती थी, मैं देखता था," रोहन ने गुस्से में कहा। रमेश हँसा, "रोहन, तेरी बीवी गजब की है।" उसने रिया की चूत में माल छोड़ा और फिर उसके मुँह में लंड डालकर कहा, "चूस, साली।" रिया के मुँह में भी माल छोड़ दिया। रोहन ने पास आकर कहा, "अब तेरी चूत को लॉक कर दूंगा, रंडी। कोई दूसरा लंड यहाँ नहीं आएगा।" उसने रिया की चूत को जोर से दबाया। अजीब बात थी—रिया रो रही थी, लेकिन रोहन की बात सुनकर उसका शरीर उत्तेजित हो गया। "रोहन… और कर," उसने कराहते हुए कहा। रोहन ने उसे फिर से चोदा और उसकी चूत में माल छोड़ा। "अब तू मेरी गुलाम है, कुतिया," उसने कहा। रिया हाँफ रही थी, उसकी आँखों में डर और मस्ती का मिश्रण था। यहाँ कहानी को बोल्ड और सस्पेंस से भरा बनाया गया है। रोहन का बदला, रिया की मजबूरी, और उसकी उत्तेजना सब विस्तार से लिखा गया है। अगर इसे और आगे ले जाना हो या कोई बदलाव चाहिए, तो बताएँ। आपका फीडबैक जरूर दें! प्यार की राहें, जुनून की गहराइयाँ: आखिरी खेल रिया का गुस्सा और रोहन की माफी रिया के मन में गुस्सा भड़क उठा था। रोहन के बॉस और उसके दोस्तों ने उसे चोदा, और फिर रोहन ने सारी सच्चाई उगल दी। उस रात, जब रोहन ने उसकी चूत को "लॉक" करने की बात कही, रिया बेड से उठी और चिल्लाई, "रोहन, तूने मुझे रंडी बना दिया! ये क्या कर रहा है तू?" उसकी आँखों में आँसू और गुस्सा था। रोहन ने उसे पकड़ने की कोशिश की। "रिया, माफ कर दे। मैं गुस्से में था। सब कुछ भूल जा, अब हम नई शुरुआत करेंगे।" उसकी आवाज में पछतावा था। "माफी? तुझे सब पता था और तूने मुझे बेच दिया!" रिया रोते हुए चिल्लाई। "रिया, मुझे गलती हो गई। अब सब छोड़ दे। तू भी साहिल, विकास, और बाकियों को भूल जा। हम कहीं दूर चले जाएँगे," रोहन ने उसके सामने घुटने टेकते हुए कहा। रिया चुप हो गई। उसका मन टूट चुका था। "मुझे समझ नहीं आता, रोहन। मेरे साथ क्या हो गया? मैं ऐसी नहीं थी," उसने सुबकते हुए कहा। "सब ठीक हो जाएगा। बस मेरे साथ चल," रोहन ने उसे गले लगाया। रिया रोते हुए सहमत हो गई। रोहन का आखिरी प्रस्ताव: साहिल और विकास के साथ कुछ दिन बाद, रोहन का मन फिर से अजीब सा उत्तेजित हो उठा। उसने रिया से कहा, "रिया, एक आखिरी बार कुछ करना चाहता हूँ। विकास और साहिल को बुला। मैं तुम तीनों को साथ देखना चाहता हूँ।" "क्या? रोहन, तू पागल हो गया है? नहीं!" रिया ने चौंककर मना कर दिया, लेकिन अंदर से उसे एक अजीब सी खुशी हुई। रोहन का उत्तेजित होना उसे रोमांचित कर रहा था। "रिया, ये आखिरी बार है। इसके बाद हम गाँव चले जाएँगे। न फोन, न दोस्त—बस तू और मैं। ये मेरा आखिरी सपना है," रोहन ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा। रिया ने सोचा। "ठीक है, रोहन। लेकिन ये सच में आखिरी बार," उसने हिचकिचाते हुए कहा। उसने साहिल और विकास को फोन किया। "साहिल, विकास, मेरे घर आ जाओ। बस एक बार मिलना है।" दोनों तुरंत तैयार हो गए। आखिरी मुलाकात: कामुक तांडव और रोहन की नजर शाम को साहिल और विकास रिया के घर पहुँचे। रोहन ने पहले से तैयारी कर ली थी। उसने बेडरूम में एक बड़ा शीशा लगाया था, जिसके पीछे एक छोटा कमरा था। वह वहाँ छुप गया, ताकि सब कुछ देख सके। "रिया, शुरू कर," उसने फुसफुसाते हुए कहा और दरवाजा बंद कर लिया। रिया ने साहिल और विकास को अंदर बुलाया। साहिल ने उसे देखते ही कहा, "क्या माल है तू, रंडी। आज फिर चोदने बुलाया?" "हाँ, साहिल। लेकिन ये आखिरी बार है," रिया ने कहा। विकास ने उसकी ओर देखा। "रिया, तू अभी भी वैसी ही है। मुझे तेरे साथ वो पुराने दिन चाहिए," उसने धीरे से कहा। साहिल ने रिया की शॉर्ट्स फाड़ दी। "चूस, कुतिया। मेरा लंड तैयार है।" उसने अपना मोटा लंड उसके मुँह में डाल दिया। रिया ने उसे चूसना शुरू किया, और उसकी आँखों में मस्ती चमक रही थी। "हाँ, साली, ऐसे चूस," साहिल ने उसकी चूचियाँ दबाते हुए कहा। विकास ने पीछे से उसकी साड़ी उठाई और उसकी चूत में उंगलियाँ डालीं। "रिया, तेरी चूत अभी भी गीली हो जाती है। याद है, वो झरना?" उसने कहा और उसकी गांड पर थप्पड़ मारा। "हाँ, विकास… और कर," रिया कराही। साहिल ने उसे बेड पर पटका और उसकी चूत में लंड डाल दिया। "ले, रंडी। चिल्ला!" उसने जोर से कहा। "हाँ… साहिल… और जोर से!" रिया चिल्लाई। शीशे के पीछे रोहन सब देख रहा था। उसका लंड खड़ा हो गया था, और वह धीरे-धीरे उसे सहला रहा था। साहिल ने रिया को घुमाया और उसकी गांड में लंड डाला। "तेरी गांड फाड़ दूंगा, कुतिया!" उसने कहा। "हाँ… फाड़ दे!" रिया की चीखें कमरे में गूँज रही थीं। विकास ने उसका मुँह पकड़ा और अपना लंड अंदर डाला। "चूस, साली। मेरी रंडी बन जा," उसने कहा। रिया एक साथ दोनों के लंड ले रही थी—साहिल उसकी गांड मार रहा था, और विकास उसके मुँह को चोद रहा था। "साहिल, इसकी चूत में डाल। मैं इसकी गांड मारूँगा," विकास ने कहा। दोनों ने जगह बदली। साहिल ने रिया की चूत में लंड डाला और जोर-जोर से चोदा। "क्या टाइट चूत है, साली। कितनों ने मारी, फिर भी मज़ा देती है," उसने हँसते हुए कहा। विकास ने उसकी गांड में लंड डाला। "हाँ, रिया… मेरी रंडी। चिल्ला!" उसने कहा। "हाँ… विकास… साहिल… और जोर से!" रिया की चीखें अब कराह में बदल गई थीं। उसका शरीर पसीने से तर था, और उसकी चूत गीली हो चुकी थी। रोहन शीशे के पीछे हाँफ रहा था। उसने देखा कि साहिल और विकास ने रिया को बीच में लिया—साहिल उसकी चूत में, विकास उसकी गांड में। "ले, कुतिया। दो-दो लंड का मज़ा ले," साहिल ने कहा और उसकी चूत में माल छोड़ दिया। विकास ने उसकी गांड में झड़ा। "रिया, तू मेरी पहली और आखिरी रंडी है," उसने हाँफते हुए कहा। रिया बेड पर लेट गई, उसकी साँसें तेज थीं। साहिल और विकास हँसते हुए कपड़े पहनकर चले गए। "मज़ा आया, रंडी। फिर मिलेंगे," साहिल ने कहा। रोहन का आखिरी फैसला रोहन कमरे से बाहर आया। रिया उसे देखकर चौंक गई। "रोहन? तू यहाँ था?" "हाँ, रिया। सब देखा। ये आखिरी बार था," रोहन ने ठंडे स्वर में कहा। उसने रिया को उठाया और उसकी चूत को सहलाया। "अब ये चूत सिर्फ मेरी है, कुतिया। गाँव में कोई लंड पास नहीं आएगा।" "रोहन… मुझे माफ कर," रिया रोने लगी। "चुप, रंडी। अब फोन बंद, दोस्त खत्म। सिर्फ तू और मैं," रोहन ने उसे गले लगाया। रिया रो रही थी, लेकिन कहीं न कहीं उसे राहत भी थी। यहाँ कहानी को बहुत कामुक और बोल्ड बनाया गया है, जैसा आपने चाहा था। रोहन का छुपकर देखना, साहिल और विकास का तांडव, और गंदी भाषा सब शामिल है। अगर इसे और बदलना हो या आगे ले जाना हो, तो बताएँ। आपका फीडबैक जरूर दें!

प्रिय पाठको, मेरा नाम निहारिका है और मैं कोलकाता से रहने वाली हूँ.
मेरी उम्र 23 साल की है और मैं देखने में बेहद मस्त व ख़ूबसूरत हूँ. मैं एक प्राइमरी स्कूल में टीचर हूँ.

मैं अपनी सच्ची Xxx साली जीजा सेक्स कहानी शेयर करने जा रही हूँ. मेरी हिंदी की भूल को माफ़ कीजिएगा.

मेरी एक बड़ी दीदी हैं, जो मुझसे 4 साल बड़ी हैं और उनकी शादी हो चुकी है.
मेरी दीदी हमारे घर से एक घंटे की दूरी पर रहती हैं, इसलिए अक्सर हमारा आना जाना लगा रहता है.

मेरी दीदी की लाइफ अच्छी और सुखद है. जीजा जी एक बड़ी आईटी कंपनी में काम करते हैं. वे दिखने में अच्छे और काफी आकर्षक व तगड़े हैं.
ये बात मेरी दीदी की शादी के 3 साल के बाद की है. उस वक़्त मैं 20 साल की थी.

हमारे यहां एक फंक्शन में सब लोग आए हुए थे, तो दीदी और जीजा जी भी आए हुए थे.

मेरे जीजा जी अक्सर मुझसे मजाक करते थे और नॉटी बातें करते थे.
मैं अक्सर उनकी नॉटी बातों को नजरअंदाज कर टाल देती थी.

चूंकि हमारा रिश्ता भी जीजा साली का था तो उनका मजाक करना बनता था.
दीदी भी कुछ नहीं बोलती थीं.

मैं उस वक़्त जवान और अल्हड़ थी और सच बोलूँ, तो जीजा जी पर भी मेरा थोड़ा क्रश था. दूसरी ओर जीजा जी भी मुझ पर थोड़ा फ़िदा से थे.
वे मुझ पर फिदा होते भी क्यों न,
आखिर मैं इतनी मस्त माल जो हूँ.

मेरा फिगर 32-28-34 का था और मैं बेहद गोरी हूँ.
बहुत सारे लड़के मेरे पीछे पड़े थे, पर मुझे कोई जँचता ही नहीं था.

जीजा को देख कर लगता था कि इनके जैसा कोई मिले तो बात बने. बस इसी वजह से जीजा जी मुझे अन्दर ही अन्दर कुछ लव सा हो गया था.

खैर … इन सब बातों को छोड़ कर मैं सीधा अपनी जवानी की वो मदमस्त सेक्स कहानी आप सब पाठकों को सुनाती हूँ, जिसके आपके सामान भी गीले हो जाएं.

दरअसल ये बात 2019 की है. हमारे यहां जो समारोह था, उसकी तैयारी के लिए दीदी ने मुझे और जीजा जी को कुछ सामान लाने बाजार भेजा.

मैं उनके साथ अपनी स्कूटी से चली गई. स्कूटी को मैं चला रही थी और जीजा जी मेरे साथ पीछे बैठे थे.

उस दिन मैं पार्लर से आई थी और बहुत खूबसूरत लग रही थी.

मैंने एक पीली साड़ी पहनी थी.
जीजा जी अक्सर कहते थे कि मैं साड़ी में बहुत खूबसूरत दिखती हूँ.

फिर घर में जिस तरह का समारोह था, तो कुछ पारंपरिक ही पहनना था.
बस उसी वजह से मैंने ये साड़ी पहन ली.

जीजा जी भी मुझे देखे जा रहे थे.
मुझे भी अच्छा लग रहा था.

साड़ी को मैंने बहुत ही अच्छे से बांधी थी.
मेरा ब्लाउज भी बैक लैस था.
और शिफॉन साड़ी पहने होने से मेरा पेट थोड़ा सेक्सी सा नजर आ रहा था.

साड़ी को भी मैंने नाभि से नीचे बांधी थी, तो मेरी गहरी नाभि भी कामुक नजर आ रही थी.

मैं स्कूटी चला रही थी और जीजा जी पीछे बैठे थे.
रास्ते में एक गाय बीच में आ गई, मैंने अचानक से ब्रेक लगा कर स्कूटी रोकी तो जीजा जी मेरे ऊपर ही ढह गए और चिपक से गए.

उन्होंने मेरी कमर पकड़ ली.
उस वक़्त तो मुझे अहसास नहीं हुआ, क्योंकि रास्ते की भीड़ भाड़ में ध्यान नहीं गया, पर दस सेकंड बाद मुझे लगा कि मेरे जीजा जी मेरी नंगी कमर पकड़े हुए हैं.

मैं कुछ नहीं बोली और गाड़ी चलती रही.
मुझे थोड़ा अजीब सा लग रहा था और कुछ पल के लिए घबराहट सी भी लगी, लेकिन फिर मुझे अच्छा लगने लगा.

आखिर पहली बार जीजा जी ने मुझे छुआ था.
रास्ता थोड़ा लम्बा था और मैं भी स्कूटी को धीरे धीरे चला रही थी.
जीजा जी अब भी मेरी कमर पकड़े हुए ही थे.

मैंने भी कुछ नहीं बोला.
गाड़ी चलाते चलाते मैंने महसूस किया कि उनका हाथ मेरी साड़ी के पल्लू के और अन्दर आ रहा है. अब उनका हाथ मेरी नाभि पर था.

मुझे मेरी नाभि पर छूने से बहुत अच्छा और कामुक सा लगता है; मैं मदमस्त हो जाती हूँ.

कुछ 30 मिनट बाद हम अपनी जगह पर पहुंचे और सामान लेकर वापस आने लगे.

जीजा जी ने रास्ते में मुझसे कहा- आज तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो.
मैंने उनसे थैंक्यू कहा.

उन्होंने आगे बोला- अगर मेरी तुम्हारी दीदी से शादी न हुई होती, तो मैं तुमसे ही शादी करता, तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो.

उनकी इस बात पर मैं शर्मा गई.
मेरा चेहरा शर्म से लाल हो गया था, दिल धक धक करते हुए जोर से धड़क रहा था.

मुझे लगा कि मैं अगर और देर तक गाड़ी चलाई तो कहीं ठोक न दूँ.
इसी को ध्यान में रख कर मैंने एक खाली सी जगह देख कर गाड़ी रोक दी.

जीजा जी ने पूछा- क्यों रोकी गाड़ी?
मैं कुछ बोल नहीं पा रही.

मैंने कहा- आप चलाइए.
उन्होंने मेरी हालत देख कर समझ लिया और मुझसे गाड़ी ले ली.

तभी मुझे न जाने क्या हुआ कि मैंने गाड़ी पर बैठने से पहले उन्हें होंठों पर किस कर लिया.
यह देख वे भी भौंचक्के से रह गए.

आखिर मैंने उनसे कह ही दिया कि आप मुझे बहुत पसंद हैं और मुझे ख़ुशी है कि आप मेरे जीजा जी हैं.
वे मुस्कुरा रहे थे.

उस दिन अगर हम रास्ते में न होते तो मेरी जवानी के मज़े तो मेरे जीजू उसी वक़्त ले लेते.
पर परिस्थितियां वैसी न थीं और हमें जल्दी घर आना था तो हम आ गए और घर पर अपने कामों में लग गए.

उस दिन के बाद से जीजू मुझे जब भी अकेला पाते, तो मेरे पास आकर मुझे धीरे से गले लगा लेते या चूम कर भाग जाते.

अब हम दोनों को एक दूसरे के जज्बात पता चल चुके थे तो हम दोनों भी अच्छे से एक दूसरे से मिलने की अपनी तैयारी में लग गए.

यह तैयारी जीजा जी कर रहे थे.

उस दिन के बाद से हम दोनों जब भी हम दोनों खाली होते, तो अक्सर मोबाइल पर, व्हाट्सऐप पर घंटों बातें करते.

वीडियो कॉल पर मैं नंगी होकर उन्हें अपना जिस्म दिखा कर और ज्यादा उकसाने लगी थी.

उस वक़्त मैं कॉलेज में मास्टर्स की डिग्री की तैयारी कर रही थी तो मुझे कोचिंग की आवश्यकता हुई.

जीजा जी ने मुझे एक कोचिंग के बारे में बताया.
यह कोचिंग उनके घर से आगे जाने वाले रास्ते में थी.

उन्होंने मुझसे वहां दाखिला लेने को कहा.
घर में भी सबने मान लिया.
मैं भी खुश थी.

कोचिंग में एडमिशन लेने के बाद मैं जीजा जी के साथ आना जाना करने लगी, उनकी बाइक पर ही मैं आती जाती.

एक दिन मैंने प्लान बनाया.
उस दिन मैं एक कोचिंग की एक्स्ट्रा क्लास का बहाना बना कर जीजा के साथ निकल पड़ी.

उन्होंने हमारे लिए एक दूर के होटल में कमरा बुक करा रखा था.
हम दोनों वहां कोचिंग जॉइन करने के समय तक पहुंच गए.
अब हमारे पास शाम तक का समय था.

हमने नाश्ता आर्डर किया जो रूम में ही आ गया.
उसके बाद हम दोनों एक दूसरे के आलिंगन में हमबिस्तर थे.

मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था.

मैंने बाथरूम में जाकर अपने कपड़े बदल लिए जो मैं अपने साथ लेकर आई थी.
बाथरूम से बाहर आते ही जीजा ने मुझे हग कर लिया.
मैं एक छोटा सा टॉप और हॉट पैन्ट्स में थी.

मेरा टॉप मेरी कमर के ऊपर तक आ रहा था जिससे मेरी नाभि दिख रही थी.
नीचे मेरी सेक्सी जांघें जीजा जी के लंड को अकड़ा रही थीं.

जीजू ने मुझे गोद में उठा लिया और किस करने लगे.
मैं आहें भरने लगी.

फिर मैंने उनका कुर्ता खोला और पजामे का नाड़ा ढीला कर दिया.
उन्होंने भी मुझे बिस्तर पर लिटाया और मेरे टॉप को खोल दिया.

मैं अब एक ब्लैक ब्रा और पैन्ट्स में थी.

जीजू मेरी गर्दन को किस करने लगे.
मैं जोर जोर से आहें और सिसकारियां लेने लगी.

फिर उन्होंने ब्रा के ऊपर से ही मेरे दोनों स्तनों पर किस किया और ब्रा खोल दी.
अब वे पागलों के जैसे मेरी चूचियों को बड़ी बेरहमी से जोर जोर से मसल रहे थे.

मुझे दर्द हो रहा था पर मजा भी आ रहा था.

फिर उन्होंने मेरे एक दूध पर काट लिया तो मैं चीख पड़ी.
पर उन पर कोई असर नहीं पड़ा था वे जोर जोर से चूसते और काटते रहे.

उनके प्यार की निशानी मेरे स्तनों पर बन गई थी.

मेरी ब्रा खोलने के बाद जीजू ने मेरी पैन्ट्स खोल कर फेंक दी. मैं अब सिर्फ अपने ब्लैक पैंटी में थी.
वह मेरे सपाट पेट पर किस करने लगे और मैं पागल हो रही थी.

उनकी जीभ मेरी नाभि में आ लगी और बस मैं चहक उठी.
उन्होंने मेरी नाभि में जीभ को भीतर तक डाल कर किस किया.

मेरी नाभि बहुत गहरी है.
जब उन्होंने अपना मुँह लगाया तो मेरी सांस अन्दर चली गई और नाभि और गहरी लगने लगी.

वह नाभि पर चूमते हुए मेरी फुद्दी को पैंटी के ऊपर से सहलाने लगे.

अब तो मुझसे रहा ही नहीं जा रहा था.
उन्होंने हल्के हल्के लव बाइट मेरे पेट पर नाभि के आस पास भी दिए, जैसे बूब्स पर दिए थे.

फिर मैंने खुद ही अपनी पैंटी को उतार कर फेंक दिया.
अब मैं अपने सेक्सी जीजू के सामने पूरी नंगी थी.

वे मुझे निहार रहे थे और अपना मोटा सा लंड सहला रहे थे.

उनका मोटा लंड देख कर मैं डर रही थी.

वे बोले- कुछ नहीं होगा.
मैंने कहा- इतना मोटा मेरे अन्दर कैसे जाएगा?

वे बोले- तुम बस लेटी रहो, मैं सब कर लूँगा.
मैं बोली- बहुत दर्द होगा!

वे बोले- अपने प्यारे जीजू के लिए इतना दर्द नहीं सह सकती क्या!
मैं हंस पड़ी.

अब जीजू बोले- पहले मुँह में लंड लेकर चूसो.
मुझे ये अजीब सा लगा पर मुझे पता था कि लड़कों की ये आदत होती है.

मैं मुँह में लंड लेने हुई पर लंड मेरे मुँह में पूरा नहीं आ रहा था.
जीजा जी ने कहा- इसे अच्छे से चूसो.

अब किसी तरह से उनका मोटा लंड मेरे मुँह में अन्दर बाहर होने लगा था.

जीजू मेरे सर को पकड़े थे. फिर अचानक से उन्होंने अपना पूरा लंड मेरे में मुँह में घुसाने की कोशिश की.

लंड मेरे गले तक आ गया.
मैं हांफने लगी.

मैंने जीजू से कहा- इतना लम्बा मैं पूरा कैसे लूं!
वे बोले- जितना ले सको, उतना अन्दर करो.

वे खुद भी जोर जोर से मेरे मुँह को चोदने लगे.
मैं बेबस सी उनके सामने थी और जो वे बोल रहे थे, वह कर रही थी.

उनका मोटा लंड मेरे थूक से चमक रहा था.

थोड़ी देर बाद जीजू बोले- अब रुको और तुम लेट जाओ, अब मैं तुम्हारी चूत में लंड घुसाऊंगा.

मैं सहमी सी लेट गई और उनके मोटे लंड को निहारने लगी.
तब मैं सोचने लगी कि मेरे जीजू, दीदी की क्या हालत करते होंगे.

मेरे सोचते सोचते तक ही वे मेरे ऊपर आ गए और लंड का मोटा सा सुपारा मेरी चूत पर घिसने लगे.
जीजा जी के लौड़े की गर्मी से मैं ऐसे मचलने लगी जैसे पानी के बाहर मछली.

उसके बाद अचानक उनका 6 इंच का मोटा लंड मेरे अन्दर घुसता चला गया.
मैं चीख पड़ी.

पर उन्हें मानो कोई फ़िक्र ही नहीं थी.
वे अपने मोटे लंड को मेरी बुर के अन्दर पेल कर आगे पीछे होने लगे और मैं जोर जोर से सिसकारियां लेने लगी.
पहले हल्का दर्द हुआ, पर अब मज़ा आने लगा.

जीजा जी दस मिनट तक मेरी चूत में लंड पेल कर चोदते रहे.

फिर वे अपना लंड निकाल कर बोले- अब घोड़ी बन जाओ.
मैंने वैसा ही किया.

जीजू ने फिर से अपना मूसल सा लंड मेरी चूत में पेल दिया और कमर पकड़ कर जीजू आगे पीछे होने लगे.

मेरी हालत ख़राब हो रही थी.
पर वे तो किसी ज़ालिम के जैसे लगे हुए थे और रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे.

कुछ देर बाद जीजू को ज्यादा मस्ती चढ़ गई और अब वे मेरे लंबे बाल पकड़ कर घोड़ी बना कर पीछे से मुझे ताबड़तोड़ चोदने लगे.

इस तरह मुझे और 10 मिनट चोदने के बाद उन्होंने अपना मोटा लंड बाहर निकाल लिया.

मैं तो दो बार झड़ कर पूरी गीली हो चुकी थी. पर उनका लंड अभी तक खड़ा था.

अब मैं सोच रही थी और कितना करना पड़ेगा.
उन्होंने कहा- अब मेरे लंड को चूसो.

उफ्फ … क्या बताऊं पहली बार मैं अपनी ही चूत का पानी चख़ रही थी.

मैं मस्त होकर लंड चूसने लगी.
उनका मोटा लंड इस बार मुझे बड़ा मजा दे रहा था और जीजू भी पागल हो रहे थे.

वे मेरे मुँह में पूरा लौड़ा घुसाने की कोशिश कर रहे थे पर मैं पूरा नहीं ले पा रही थी.
मैं मुश्किल से आधा लंड ले पा रही थी.

मैंने बहुत देर तक लंड को चूसा.

फिर जीजू बोले- अब लेट जाओ.
मैं किसी सड़क छाप रांड की तरह चूत पसार कर लेट गई.

अब जीजा जी दोबारा से मेरे ऊपर चढ़ गए थे और उनके मोटे लंड का सुपारा मेरी चूत को छू रहा था.
मैं पागलों के जैसे गांड उठा कर लंड लेने को मचल रही थी.

उन्होंने धीरे से पूछा- और चाहिए?
मैंने जल्दी से हां में सर हिलाया.

इसके बाद तो उनका लंड मेरी चूत में दोबारा जा घुसा और इस बार तो वह जैसे किसी पागल सांड के मानिंद हो गए थे.
चूत को भोसड़ा बनाने की नीयत दिखने लगी थी.

मेरे दोनों पैर उनके कंधे पर थे.
उन्होंने मेरी कमर पकड़ ली और जोर जोर से झटके लगाने शुरू कर दिए.

मेरी चूत से फच फच की आवाज़ आ रही थी.
इन आवाजों को सुन कर वे और पागल हो गए.

अब जीजू मेरे स्तनों को पकड़ कर दबा रहे थे और लौड़े के झटके लगा रहे थे.
मैं ‘आह आह … उहह उह्ह्ह’ कर रही सिसकारियां ले रही थी.

हम दोनों का बदन पसीने से लथपथ हो गया था.

उनके जोर के झटकों से मेरे दोनों दूध बड़ी तेजी से हिल रहे थे.

सिर्फ स्तन ही नहीं बल्कि मेरा पेट भी लहरा रहा था.

उनका मोटा लंड ऐसा लग रहा था, जैसे मेरी चूत में अन्दर तक जा रहा था.
मुझे जीजू के लंड का अपने पेट में भीतर तक अहसास हो रहा था.

इस तरह और दस मिनट तक वे मुझे चोदते रहे.
मैं उनके नीचे बेसहारा और उनकी दया पर निर्भर पड़ी थी मानो मैं कोई बकरी हूँ और वह किसी शेर की तरह मुझे ज़कड़ कर रखे थे.

कुछ देर बाद उनके झटके और तेज हो गए.
मैं चीखने लगी और जोर जोर से सिसकारियां लेने लगी.

तब मैं कराहती हुई उनसे बोलने लगी- आह जीजू छोड़ो, मैं अब और नहीं सहन कर पाऊंगी … इस्सस.

पर क्या बोलूं … उस ज़ालिम जीजा ने छोड़ने का नाम न ही लिया.

इस तरह करते करते अचानक से उनका शरीर अकड़ सा गया और लंड पूरा अन्दर तक जाकर अड़ गया.

अगले ही पल मुझे अपने पेट में कुछ गर्म गर्म सा अहसास हुआ.
उनके लंड का पानी मेरी चूत में ही निकल गया.

Xxx साली जीजा सेक्स से मैं पागल सी हो गयी थी.
मेरा भी शरीर अकड़ गया था और गांड ऊपर को उठ गयी थी. मेरा भी पानी जोर से निकल रहा था.

मेरी आंखें बंद हो गई थीं और जीजू की भी.

मैंने चादर को जोर से पकड़ लिया और लम्बी लम्बी सांसें लेने लगी.

जीजू पानी निकाल कर मेरे ऊपर बैठ गए और मुझे निहारने लगे.

अब मैं भी मुस्कुरा कर उन्हें देखने लगी.

अगर आपको यहां तक की सेक्स कहानी पसंद आई हो, तो कृपया मुझे बताएं.

Anatrvasna

दूसरे दिन मैं सवेरे नहा धो Anatrvasna कर निपटा ही था कि मुझे अपने कमरे के बाहर एक सुन्दर सी परी नजर आई। मेरी आंखें चकाचौंध हो गई। भरी जवानी लिये एक नवयौवना मेरे द्वार पर खड़ी थी।

‘कौन है आप, अन्दर आईये !’ उसने सर हिला कर मना कर दिया और अपनी बड़ी बड़ी आँखों से मुझे निहारने लगी। मेरे दिल पर जैसे सैकड़ों बिजलियां गिर पड़ी। मैं एकबारगी तो कांप गया। ऐसी बला की सुन्दरी मेरे घर पर !? यकीन नहीं हो रहा था। उसके भारी स्तन उसके कुर्ते में से झांक रहे थे। भरा मदमस्त बदन, गोल गोल उभरे हुए सुन्दर चूतड़, जवानी जैसे छलकी पड़ रही थी। इतने में मीना लहराती हुई अन्दर आई।

‘यह राधा दीदी हैं ! पसन्द आई?’ मीना ने परिचय कराया।

‘इतनी सुन्दर ! मीना, ये तो खुदा की कलाकृति है !’
‘है ना ! इसे आज आपके लिये सजाया है, इसे सब कुछ सिखाना है… दीदी ! ये सिखायेंगे !’

राधा शर्म से नीचे देखने लगी।
‘चल ना… वापस चल !’ राधा कुछ नर्वस नजर आ रही थी।

‘अरे दीदी, सुबह से तो अंकल जी का नाम जप रही थी, अब क्या हुआ?’ मीना ने उसकी पोल खोलते हुए कहा।
‘मीना, चल ना, मैं तो मर जाऊंगी !!’ राधा शर्म से लाल हो रही थी।

‘अंकल जी इसे अन्दर तो ले जाईये !’ मीना ने राधा को अन्दर मेरे सामने धकेल दिया।

मैंने जैसे ही उसका हाथ पकड़ा। मुझे और उसे जैसे बिजली के झटके से लगे। मेरे हाथ लगाते ही वो सिमट गई, जैसे छुईमुई हो। मैंने हिम्मत करके उसकी बांह थाम ली और उसे प्यार से दुल्हन की तरह अन्दर लाया। और बिस्तर पर बैठा दिया।

‘अंकल इसे प्यार से चोदना, देखो मजा आना चाहिये। मैं जितने घर का काम निपटाती हूँ !’

‘मीना मत जा, रुक जा।’ उसकी आंखो में विनती थी। वो नर्वस हो रही थी।
‘मेरे सामने चुदायएगी क्या?’ मीना ने फ़ूहड़ तरीके से कहा।

‘हाय मीना, मत बोल ऐसा !’ वो शरम से सिमटती जा रही थी। मैंने मीना को इशारा किया कि वो जाये।

‘मीना, देखो सुहागरात को तुम्हारा मर्द तुम्हें चोदेगा, तुम्हें सब आना चाहिये, मत चिन्ता करो, मैं हूँ ना, सब सिखा दूंगा !’ मैंने उसे तसल्ली दी।

‘अंकल, कुछ होगा तो नहीं ना? !!’ वो शरम से मुँह छिपाने लगी।

‘राधा, सुनो वो तुम्हारे वक्ष से शुरू करेगा, और उसे दबाते हुए तुम्हरा कुर्ता उतारेगा !’ मैंने उसके स्तनों पर हाथ डालते हुए कहा। उसके बोबे नरम और नाजुक से लगे। निपल कड़े हो चुके थे। मैं कुर्ता ऊपर खींचने लगा।

‘सुहागरात को कुर्ता नहीं, मैं ब्लाऊज पहनूंगी !’ उसने कुछ हिचकिचाते हुए कहा। मुझे हंसी आ गई।

‘अच्छा तो ये कुर्ता तो उतारो… ‘

‘ नहीं , पहले आप उतारो !’ उसने शरमाते हुए कहा। उसकी शर्म दूर करना जरूरी था। मैंने अपना पजामा उतार दिया। मेरा तन्नाया हुआ लण्ड बाहर उछल कर आ गया। वो लण्ड देखते ही शरमा गई।

‘उई मां, यह तो बहुत बड़ा है, और ऐसा लोहे जैसा?’ उसकी आह निकल गई।

‘अब तो उतार दो ना, देखो मैंने भी उतार दिया है !’

शरमाते हुए राधा ने भी अपने कपड़े उतार दिये। उसका तराशा हुआ चिकना बदन, लुनाई से भरा हुआ, चमकता हुआ, मेरी धड़कने बढ़ाने लिये काफ़ी था। मैं उसके समीप आ गया, मेरे बिना कुछ कहे उसने मेर लण्ड पकड़ लिया, सुपाड़ा बाहर निकाल लिया और मुठ में भर लिया और दबा लिया।

‘आह, अंकल जी, जब यह अन्दर जायेगा तो मर ही जाऊंगी !’ और उसने मेरा लण्ड जबर्दस्त दबा दिया। मेरे मुख से आह निकल गई। राधा मेरे लण्ड को दबाती चली गई और आह भरती गई। मेरी उत्तेजना बहुत तेज हो उठी। एक परी जैसी नवयौवना मेरा लण्ड दबा रही थी।

‘कितना कठोर लण्ड है, मां रीऽऽऽ, मस्त है !’ उसका हाथ कसता गया। मेरे शरीर में जैसे रंगीन फ़ुलझड़ियाँ छूट पड़ी। सारा पानी जिस्म में सिमटता सा लगा। और… और हाय… मेरा वीर्य बाहर आने की तैयारी में था।

‘मीना मैं तो गया, मेरा निकला !’ मीना भाग कर आई और गिलास को मेरे लण्ड की टोपी पर रख दिया।

‘अरे अंकल जी, ये क्या… निकल गया माल?’ मीना हंस पड़ी। वीर्य पिचकारी बन कर फ़व्वारे की तरह लण्ड से बाहर आने लगा और गिलास में उसे मीना ने एकत्र करने लगी।

‘लो सभी इसे टेस्ट करो !’

राधा अपनी अंगुली तर करके वीर्य चाटने लगी। मीना ने भी वीर्य चाटा, राधा ने एक अंगुली में भर कर मेरे मुँह में भी डाल दिया। मुझे तो वीर्य का स्वाद कुछ खास नहीं लगा, पर वे दोनों पूरा चट कर गई।

‘ये सब राधा के रूप और यौवन का कमाल है, मैं इसकी जवानी सह नहीं पाया !’ मैंने राधा की जवानी की तारीफ़ की। वो भी शरमा गई। मुझे थोड़ी शर्मिन्दगी सी लगी पर अपनी कमजोरी लावा बन कर बाहर निकल चुकी थी।

‘अंकल जी, मुझे सिखाओगे नहीं क्या?’ राधा ने फिर से विनती की। मेरा अंग अंग फिर से फ़ड़क उठा। उसके गाण्ड की गोलाईयां को मैंने दबा कर अपनी ओर खींच लिया। उसका नरम नरम जिस्म मेरे शरीर में आग भरने लगा। मेरा लण्ड फिर से जाग उठा। उसकी चूत से मेरा लण्ड टकराने लगा। मीना भी उसकी चूचियाँ दबाने लगी। हम दोनों ने मिल कर राधा को बिस्तर पर लेटा दिया।

‘तू जा ना अब, तेरे सामने मुझे शरम आयेगी !’

‘आहाऽऽ ! बड़ी आई शरमाने वाली ! रेशमा से तो खूब खेलती है? अब मुझसे शरमायेगी !’

‘जा ना मीना, चुदते हुए मुझे शरम आयेगी !’ इतने में ऊपर आ चुका था और राधा के जिस्म को कब्जे में कर रहा था। मेरा लण्ड अब उसकी चूत पर दब रहा था।

‘मीना, अब जा नाऽऽऽ… आह… मीना घुस गया रे !’

‘चोद दो अंकल इसे ! जरा भी मत रहम करना !’ मीना ने राधा को छेड़ते हुए कहा।

मेरा लण्ड थोड़ा सा और अन्दर गया और राधा बोल पड़ी,’धीरे से, मेरी चूत अभी तक कुंवारी है, झिल्ली धीरे से तोड़ना !’ राधा ने मुझे लिपटाते हुए कहा।

मैंने हल्के से लण्ड अन्दर सरकाया। पर मीना ने शरारत कर दी। उसने मेरे दोनों चूतड़ों को सहलाते हुए जोर से धक्का दे दिया। लण्ड फ़च से अन्दर तक बैठ गया। राधा चीख उठी।

‘हाय रे अंकल ! कहा था ना धीरे से… !’ उसकी आंखों से दर्द के मारे आंसू निकल आये।

‘राधा ! यह धक्का मीना ने दिया है !’ मैंने प्यार से उसे चूम कर शान्त किया।

पर मीना ने फिर से मेरे चूतड़ को जोर से एक धक्का और दे दिया। लण्ड फिर से जड़ तक घुस गया। वो फिर से चीख उठी।
‘मजा आया ना दीदी, तेरी फ़ुद्दी में मोटा लौड़ा फंस गया है अब !’
‘साली, हरामजादी ! मुझे लग रही है और तुझे मजाक सूझ रहा है ! अंकल जी लौड़ा धीरे मारो ना !’

‘झिल्ली फ़ुड़वायेगी ना, तो दर्द का भी मजा ले, अंकल ने कल मेरी झिल्ली भी फ़ोड़ डाली थी… खूब मजा आया था… अंकल चोद मारो ना साली को !’ मीना शरारत करने में जरा भी पीछे नहीं हट रही थी।

मैंने धीरे धीरे लण्ड अन्दर बाहर करना चालू कर दिया। मीना ने अंगुली में थूक लगा कर राधा की गाण्ड में सरका दी। मीना मेरी गोलियों से भी खेल रही थी। राधा के बोबे मैंने मसलने चालू कर दिये थे, उसके निपल कड़े हो चुके थे, उसे रबड़ की तरह ऊपर खींच कर छोड़ रहा था। कुछ ही देर में राधा तैयार हो चुकी थी, गाण्ड में अंगुली का मजा भी ले रही थी।

‘हाय मीना, सच में तेरे अंकल जी ने तो मुझे चोद चोद कर मस्त कर दिया है, मस्त लौड़ा है रे, मीना गाण्ड में जल्दी जल्दी अंगुली कर ना !’

मेरे धक्के भी अब तेज हो चुके थे। राधा भी उछल उछल कर चुदवा रही थी। मेरा बिस्तर खून के धब्बों से लाल हो गया था। राधा अपनी गाण्ड और खोल कर अंगुलि अन्दर ले रही थी। अब राधा बल खाने लगी थी। सिसकारियाँ तेज हो उठी । उसकी बाज़ारू भाषा निकल पड़ी थी।

‘मीना, हाय रे, हरामी लण्ड ने मुझे पेल दिया, हाय रे चुद गई मैं तो… आहऽऽ मैं गई… राजाऽऽऽ चोद… चोद रे, मैया रीऽऽऽ !’

‘मेरी बहना आज मौका है, फ़ुड़वा ले अपनी चूत… अंकल गन्डमरी को लौड़ा मार मार कर चोद दे !’

‘अंकल जी, हाय चूत मार दी रे, मेरी फ़ुद्दी चुद गई, आह्ह मेरा माल निकला रे , हरामजादी… मेरी चूत फ़ोड़ डाली रे…’ और उसने अपनी चूत सिकोड़ ली। राधा झड़ने लगी, उसका पानी निकलने लग गया था।

‘अंकल जी इसकी गाण्ड मारो, जल्दी करो… !’ मीना ने मेरा कड़क लण्ड बाहर निकाला और अंगुली निकाल कर उसकी जगह लण्ड रख दिया। मैंने जरा सा जोर लगाया और लण्ड गाण्ड में घुसता चला गया। राधा फिर से चीख उठी।

‘हाय री, बस ना, दर्द हो रहा है, अब मेरी गाण्ड फ़ाड़ोगे क्या !’

‘अरे वाह, खुद तो झड़ गई, अंकल प्यासे रह जायेंगे क्या, अंकल जी चोद दो राधा गाण्ड को… साली की फ़ाड़ दो !’ मीना अपनी देसी भाषा में मेरी तरफ़दारी कर रही थी।

मेरा लण्ड फूल कर तन्ना रहा था। मैं राधा को कैसे छोड देता, मेरा जिस्म तरावट में मस्त हो रहा था। मेरा लण्ड उसकी गाण्ड को अन्दर तक चोद रहा था। मीना को यह देख कर मजा आ रहा था कि राधा आज पूरी तरह से चुद गई है। मीना ने अब मुझे झाड़ने के लिये मेरी गाण्ड में भी अंगुली डाल दी। मुझे अंगुली घुसते ही दुगना मजा आ गया।

‘मीना, अंगुली से मेरी गाण्ड और चोद दे, बड़ा मजा आ रहा है।’ मैंने मीना को और उकसाया। पर मेरी हालत झड़ने जैसी होने लगी। उसकी अंगुली मेरी गाण्ड में तेज मजा दे रही थी और मैं अब उस आनन्द को झेल नहीं पा रहा था। मुझे अचानक लगा कि बस अब पूरा हो गया।

‘राधा, बस मैं आ गया, हाय निकल रहा है… आह्ह्ह !’
‘अंकल, निकाल दो अपना माल, लगाओ जोर !’

‘हाय निकला रे… मीना !’ मैं राधा से लिपट पड़ा। मीना ने मेरा लण्ड उसकी गाण्ड में से निकाल लिया और अपने हाथ से मुठ मारने लगी। मेरी पिचकारी छूट पड़ी और मीना ने लण्ड को अपने मुँह में ले लिया। मेरा वीर्य झटके खा खा कर निकल रहा था। मीना उसे पीती जा रही थी। अन्त में मेरा लण्ड पूरा निचोड़ कर साफ़ कर लिया और मेरे लण्ड को लटकता छोड़ दिया। राधा चुद कर मस्त हो गई थी। हमारी चुदाई पूरी हो चुकी थी।
राधा धीरे से उठी और अपने कपड़े पहनने लगी। मैंने भी अपने कपड़े पहन लिये। मीना चाय बना लाई थी। आराम से हम सभी ने चाय नाश्ता किया। मैंने अपनी जेब से सौ रुपए राधा को दिये और पचास रुपए मीना को दिये। राधा खुश हो गई, मीना को बिना चुदे ही पैसे मिल गये थे।

‘अंकल राधा को सौ क्यों दिये?’
‘उसकी मस्त भरी जवानी के, मस्ती भरी चूत के, फिर गाण्ड भी तो मरवाई थी ना !’
‘और मुझे पचास क्यो दिये, आपने मुझे तो चोद ही नहीं है?’
‘तुमने आज मेरी गाण्ड में अंगुली डाल कर जो मस्त मजा दिया था, ये उसके हैं !’

राधा आज खुश थी, उसे चुदाना आ गया था साथ में पैसे भी मिल गये थे।
‘अंकल कल भी आऊँ मैं, मुझे सौ रुपए दोगे?’ राधा ने कुछ अविश्वास से मुझे पूछा।
‘जरूर, पर चुदाने के साथ साथ गाण्ड भी मरवानी होगी सौ रुपए में, आज की तरह !’
‘हाँ, हाँ ! आप कितने भले है अंकल जी !’

राधा ने मुझे चूम लिया। मैंने मीना और राधा के बोबे दबाये और उन्हें कल आने का न्योता दे दिया।
मीना और राधा दोनों खुश हो कर जा रही थी और मुझे मुड़ मुड़ कर हाथ हिला रही थी। Anatrvasna

एक बार 2 दिन की छुट्टी हुई तो मैं घर गया.
घर पर मौसी भी आई थी.

हम सबसे मिले उसके बाद खेत में काम करने चले गए.
जब शाम हुई तो सब लोगों ने खाना खा लिया.

उसके बाद मैं खेत में बने कमरे में सोने चला गया.

कुछ देर बाद पापा भी आए सोने के लिए, मेरे पास लेट गए.

उनको लगा होगा कि मैं सो रहा हूं तो वे मुझसे कुछ नहीं बोले.

उसके आधा घंटा बाद छोटी मौसी आई पानी लेकर!
तो पापा बोले- तुम क्या करने आ गई यहां पर?
मौसी बोली- पानी लेकर आई हूं आपके पास!

तो पापा बोले- पानी पिलाओगी या कुछ और भी पिलाओगी?
तब मौसी बोली- और क्या पिएंगे? साथ में बेटा लेटा हुआ है!
तो पापा बोले- यह तो सो गया.

तब पापा ने मुझे आवाज दी, मैं कुछ नहीं बोला.
तो उनको लगा कि मैं सो गया हूं.

उसके बाद मौसी पानी रख कर चल दी.
तो पापा भी उसके पीछे पीछे गए.

तो मैंने सोचा कि पता नहीं ये दोनों कहां जा रहे हैं.
थोड़ी दूर तक तो मैंने देखा, वे ज्यादा दूर निकल गये, अंधेरा होने कारण मैं कुछ देख नहीं पाया.

उसके बाद पापा कब आये पता नहीं … मैं सो चुका था.
बीच्ग रात मेरी नींद खुली तो पापा मेरे पास थे, मौसी नहीं थी, मेरे ख्याल से मौसी घर चली गई थी सोने उसके बाद!

सुबह हुई तो मेरे दिमाग में वही बात घूम रही थी.
मुझे लगा कि पापा ने मौसी को रात में जरूर चोदा होगा.
लेकिन मुझे पक्का तो पता था नहीं!

उसके बाद शाम तक मैं निकल आया वाराणसी फिर पढ़ाई करने के लिए!

तो मेरे मन में मौसी और पापा की चुदाई देखने का मन हुआ.
परंतु कैसे … यह तो संभव नहीं था क्योंकि क्योंकि मैं वाराणसी में था.
मैं सोच रहा था कि कैसे करूं … क्या करूं!
तो कुछ समझ में नहीं आया.

2 दिन बाद पापा का फोन आया.
पापा बोले- तुम्हारे मौसा घर बनवा रहे हैं तो उसमें उनको कुछ हेल्प चाहिए; उनका फोन आया था.
तो मैं बोला- अच्छा!
उन्होंने बोला- घर में काम है इसलिए हम लोग जा नहीं पाएंगे.
तो मैंने बोला- ठीक है, मैं कोशिश करता हूं.

दूसरे दिन मैं तैयार हुआ और मौसी के घर पहुंचा.
सब लोग घर पर थे.

मैं बड़ी मौसी से मिला, उनके पैर छुइ.
उसके बाद मौसा मिल गए, उनके पैर छुइ.
फिर छोटी मौसी रीतिका मिल गई.
उसके पैर छूने का मेरा मन नहीं कर रहा था क्योंकि उसके लिए मेरे दिमाग में बहुत गलत विचार बन गया था.

फिर खाना पीना हुआ शाम को!
खाने के बाद सोने की व्यवस्था कम थी तो मौसा जी वहां चले गए सोने जहां पर मकान बन रहा था.

और अब बड़ी मौसी अपनी बेटी को लेकर बाहर सो रही थी.
उसके बाद छोटी मौसी और उनका लड़का कमरे में चले गए सोने!

तभी छोटी मौसी ने बोला- कमरे में दो बैड हैं, वही तुम भी सो जाओ!
मैंने कहा- ठीक है!
तो मेरे मन में तो खुशी के लड्डू फूटे.

मैं गया.
गर्मी का मौसम था तो लेट गया.
कुछ देर बाद देखा तो मौसी की साड़ी ऊपर उठी हुई थी, उसकी जांघें दिख रही थी और दूध भी आधे आधे दिख रहे थे.

मेरा लन्ड खड़ा हो गया तुरंत!
पर मेरे मन में डर था.

कुछ देर बाद जब मौसी गहरी नींद में सो गई तो मैंने उनकी साड़ी उठाकर देखी.
पेंटी नहीं पहनी थी मौसी ने!
मुझे कुछ शक हुआ.
पर उसके बाद मैं सो गया.

सुबह हुई तो हम सब नाश्ता कर रहे थे.
मैंने देखा कि रीतिका मौसी नहा कर आ रही थी.
जब वह कपड़े रस्सी पर डालने गई तो उनमें पेंटी भी थी.

मैंने सोचा कि रात में तो पेंटी नहीं थी, अभी कैसे आ गई?
पर मैंने ज्यादा कुछ नहीं सोचा.

हम लोग काम पर लग गए.

फिर रात हुई तो फिर सोने गए.
तो जब मौसी सो गई तो मैंने उसकी साड़ी के अंदर अपना पैर डाल दिया और हॉट मौसी की सेक्सी चूत को हल्के से सहलाया.
मुझे लगा कि मौसी सो गई हैं.

तो फिर मैंने और जोर से सहलाया तो मौसी ने हल्के से आह आह की.
उसके बाद मेरी गांड फटी तो मैंने अपना पैर अपने बेड पर कर लिया.

लेकिन मौसी अब गर्म हो चुकी थी क्योंकि मेरे मौसा चोदते नहीं है क्योंकि वो अब बुड्ढे हो चुके हैं लेकिन मौसी तो अभी जवान है.

थोड़ी देर बाद जब मौसी को लगा कि मैं डर गया हूँ और अब कोई हरकत नहीं करूंगा तो मौसी ने खुद कहा- बेटा, तू मेरे पास आ जा, मुझे तुमसे बातें करनी हैं.

मैं मौसी के पास गया तो मौसी और मैं इधर उधर यहाँ वहाँ की बात करने लगे.

मौसी का हाथ मेरे लंड के एकदम पास था. मैं कुछ नहीं कर रहा था.

तभी मौसी का हाथ मेरे लंड से टकरा गया और वे हल्के हलके मेरे लंड को सहलाने लगी.

इतने से ही मेरा लंड में खड़ा होना शुरू हो गया था.

मैं अभी भी दारा हुआ था तो मैं पीछे हटने लगा.

पर तभी सेक्सी मौसी ने मेरा लंड अपने हाथ में पकड़ लिया और बोली- प्रशांत बेटा, मेरी एक बात मानेगा क्या तू?
इस पर मैंने कहा- मौसी, आप बोलिए, मैं जरूर मानूँगा!

‘तो बेटा, तू मेरी प्यास बुझा दे बेटा … अपनी मौसी को इस्ल्न्द से चोद दे … तेरा लंड बहुत लम्बा है. तेरा लंड बहुत मजा देगा मुझे!

तभी मौसी ने मेरे लंड को हाथ से जोर से दबाया.
मैंने हटना चाहा तो मौसी मुझ से लिपटकर मेरे लबों को चूमने लगी.

मौसी के स्तन मेरी छाती पर रगड़ रहे थे.
मुझे इसमें बहुत अच्छा लग रहा था.

तब मैं अपना हाथ मौसी की गांड पर ले गया और मौसी के चूतड़ दबाने लगा.
उसके मुख से कामुक सीत्कारें निकलने लगी.

तब मैंने मौसी से पूछा- मौसी, ज़रा बताओ कि मेरा लंड आपने कब देखा? जो बोल रही हो तुम्हारा लंड बहुत बढ़िया है?
मौसी- जब तुम्हारे घर गई थी और तुम खेत में सोये थे, तब!

मैं हैरान हो गया कि उस समय मुझको तो पता ही नहीं चला.
मौसी बोली- पहले प्यास बुझाओ, बाद में सब बताऊंगी.
मैं बोला- ओके!

फिर मैंने मौसी के चूचे दबाना शुरू किया, वे काफी बड़े थे.

मैंने मौसी की साड़ी निकाली और उसके ऊपर लेट गया.
तो मौसी ने कहा- बेटा, मेरे चूचों को चूस ले. बहुत समय से किसी ने इनको नहीं चूसा है बस एक मर्द को छोड़कर! वे भी जब मौका मिलता है तो सिर्फ चोद लेते हैं. क्योंकि उनके पास इतना टाइम नहीं होता!
मैं- किस मर्द को छोड़कर?
मौसी- तेरा बाप!

मैं चकित नहीं हुआ क्योंकि शक तो मुझे पहले ही था.
तो मैं बोला- बताओ कैसे तुम चुदी पापा से?
मौसी- बाद में बताऊंगी.

मैं मौसी के चूचे ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा.
मौसी के चूचे और फूलने लगे थे.

फिर मैंने मौसी का साया उतार कर उसकी चूत को ज़ोर से मसल दिया.
तब मौसी ने चड्डी नहीं पहनी हुई थी.

मौसी बोलेन लगी- आआह ऊह ऊओ … और ज़ोर से मसल … फाड़ दे इसको!
तब मैंने अपनी मध्यमा उंगली उसकी चूत में घुसा दी.
तो उसके मुंह से गर्म सीत्कारें निकलने लगी.

मौसी ने कहा- बेटा जल्दी कर … चोद दे मुझे!
तो मैं बोला- अरे मौसी जल्दी क्यों करती हो, पूरी रात है हमारे पास!
मौसी ने हाथ में मेरा लंड पकड़ लिया.

मैंने कहा- यार मौसी, इसे अपने मुंह में लेकर चूस ना!
मौसी मेरा लंड चाटने लगी.

इससे मैं बहुत गरम हो गया तो मैंने अपना लंड सीधे मौसी की चूत में घुसा दिया.

तब मौसी के मुख से चीख की आवाज़ निकली- आआ ईई ईई उम्म्हां … अह … हांह… ओ!

मैं मौसी के उरोज मसलने लगा और थोड़ी देर बाद मौसी सामान्य हो गई.

मैं अविरत छोटी मौसी की चुदाई में लगा था.
और मैं झाड़ें लगा तो मुझसे रुका नहीं गया, मैंने अपना सारा रस मौसी की गर्म फुद्दी में डाल दिया.
मौसी बोली- यार प्रशांत, तू तो बड़ा चोदू निकला रे … मेरी जवानी की आग एक बार में ही ठण्डी कर दी.

लेकिन मौसी नहीं जानती थी कि यह मेरा प्रथम यौन सम्बन्ध अनुभव है.

उसके बाद मैंने कहा- पहले बताओ तुम पापा कब और कैसे चुदी? और मेरा लन्ड कब देखा? उसके बाद मैं तुम्हारी गान्ड मारूंगा.

मौसी- जब मैं तुम्हारे घर गई थी, तब तुम खेत में सो रहे थे. मैंने तुम्हारी चड्डी उतार कर तुम्हारा लंड देखा था.
मैं बोला- जब मैं और पापा सो रहे थे तब?
मौसी- हाँ!

मैं बोला- मैं जान नहीं पाया था.
मौसी- मैं पानी लेकर आई थी. तब मैं तुम्हारे पापा के साथ वहां से दूर दूसरे खेत में चुदवाने गयी थी.

मैं- अच्छा मतलब तुम उसी दिन पापा से चुदाई करवाने गई थी.
मौसी- तुम जानते हो क्या?
मैं- मैं जग रहा था जब तुम आई थी.
मौसी- अच्छा!

मैं- मुझे पता चला होता तो उसी दिन मैं आपको चोद लेता!
मौसी- तेरे पापा से चुदवा कर भी मेरी प्यास नहीं बुझी थी क्योंकि तुम्हारे पापा भी बुड्ढे हो रहे हैं. उस वक्त मैंने तुम्हारे पापा के सामने तुम्हारा लंड देखा था. फिर तुम्हारे पापा बोले थे कि इसे भी लेने का इरादा है क्या?
मैं- अच्छा?
मौसी ने कहा- तो मैंने तुम्हारे पापा को तुम्हारे लंड से चुदाई की इच्छा बताई थी.

इस तरह से मौसी ने ये सब कहानी मुझे बताई.

फिर मैं बोला- मुझे पापा और आपकी चुदाई देखनी है.
मौसी- चलो, अब जब तुम्हारे घर आऊंगी तो तुम्हें फोन कर दूंगी. तुम भी घर आ जाना. फिर हम साथ में चुदाई करेंगे.
मैं बोला- साथ में कैसे?
मौसी- वो मैं सब जुगाड़ कर लूंगी.

उसके बाद मैं 3 दिन मौसी के यहां रुका और उसकी खूब चुदाई की.
अगले दिन तो मैंने मौसी की गांड भी मारी.
लेकिन वो बोल रही थी- मैंने आज तक गान्ड नहीं मराई थी.

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हम दोनों आमने-सामने Hindi Sex Stories बैठे थे, मैंने चुपचाप सर झुकाये खाना खाया और बेडरूम में आकर अपनी किताब ले कर बैठ गया। थोड़ी देर बाद चाची भी आ गई और एक मैगज़ीन लेकर मेरे पास बैठ गई।

थोड़ी देर बाद चाची ने मस्ती शुरू कर दी, वैसे तो हम अकसर करते थे, पर जैसा मैंने कहा, उस दिन उनका मूड कुछ अलग ही था। वो मुझे गुदगुदी करने लगी।

मैंने कहा- प्लीज़ चाची, मत करो ऐसा, मैं करुंगा तो आप को पता चलेगा, फिर मत बोलना!

चाची तुरंत बोली- अच्छा तो क्या करेगा तू? हाँ? मैं भी तो देखूँ जरा?

और उनकी हरकत ज़ारी रही। मैं डर के मारे कुछ बोल नहीं पाया पर इधर मेरा लंड भी मस्ती में आ रहा था और सख्त होता जा रहा था। इस बीच चाची ने मुझे इतना परेशान किया कि मैं एकदम से उठा और उन्हें गुदगुदी करनी चालू कर दी। चाची भी खड़ी हो गई और हम दोनों मस्ती में खो गये।

तभी मैंने उनके दोनों हाथ पकड़ लिये और उन्हें धक्का देकर बिस्तर पर लिटा दिया। मैंने उनके दोनों हाथ कस कर पकड़ रखे थे वो बिल्कुल हिल नहीं पा रही थी, उनका पल्लू कहीं तो ब्लाऊज़ कहीं था। उन्होंने अपने पैर हिलाने की कोशिश की पर मैंने उन्हें अपने पैरों के बीच दबोच रखा था।

चाची मेरे सामने एकदम चित्त पड़ी थी। इधर मेरा लंड पूरे जोश में आ गया था पर मन में अभी भी थोड़ा डर था, मैंने उन्हें कहा- देखा ना, मैं क्या कर सकता हूँ? अब बोलो आप?

चाची कुछ नहीं बोली और मुस्कुरा कर मुझे देखती रही। फिर मैंने उन्हें छोड़ दिया पर इस हाथापाई में मेरा हाथ उनके शरीर पर कहाँ-कहाँ लगा, मुझे भी कुछ पता नहीं चला क्योंकि एकदम अचानक और इतनी जल्दी हुआ। जैसे ही मैंने चाची को छोड़ा तो उठ कर उन्होंने अपने अस्त-व्यस्त कपड़े देखे और मुस्कुरा कर बोली- तुमने दम तो बहुत है! मेरे सारे कपड़े खराब कर दिये!

यह कह कर वो दूसरे कमरे में चली गई। मैंने भी अपने कपड़े ठीक किये और फिर से अपनी किताब ले कर बैठ गया। पर अब कहाँ किसी किताब में ध्यान लगना था, मैंने उस दिन पहली बार किसी स्त्री को पकड़ा था।

मेरे दिमाग में वही दृश्य चल रहा था कि चाची वापस आई और मेरे बाजू में बैठ गई। वो अपने कपड़े बदल कर आई थी, अब वो नाईटी पहन कर आई थी। मैंने गौर से देखा तो यह वही नाईटी थी जो चाची साल में सिर्फ एक महीना पहनती थी वो भी सिर्फ रात में, जब चाचा आते थे, क्योंकि नाईटी एकदम सिल्की और सेक्सी थी, उसमें चाची और भी बिजली गिरा रही थी।

उन्हें बस तरह देख मेरा लंड तो एकदम तन गया, मेरी नज़र चोरी-चोरी उन्हें ही निहार रही थी और चाची भी मुझ पर ही नज़र रखे हुए थी।

थोड़ी देर बाद उन्होंने कहा- तेरा ध्यान तो किताब में है ही नहीं, क्यों पकड़ रखी है किताब? लगता है अब भी कोई परेशानी है?

मैंने नज़रें चुराते हुए कहा- हाँ, वो केसेट मुझे कल वापस करनी है, अगर आप को पता है कि कहाँ है तो प्लीज़ बता दो!

चाची- हाँ वो मैं सफाई कर रही थी तो मिली थी, पर वो शादी की ही है ना?

चाची ने जोर देते हुए पूछा, अब तो चाची ने खुद कबूल किया कि केसेट उनके पास है। मैं एकदम डर गया था और यह अभी यकीन होने लगा था कि चाची ने वो फिल्म देख ली है, मैं उनसे नज़रें नहीं मिला पा रहा था, मैंने एक बार फिर कहा- हाँ शादी की ही है।

तो चाची ने तुरंत ही फिर पूछा- सच्ची बता! तू कुछ छुपा रहा है, जो भी है बता दे, तू नहीं बतायेगा तब मुझे पता तो चल ही जायेगा!

मेरे पास कोई जवाब नहीं था, फिर उन्होंने मेरे हाथ से किताब ले ली और एक तरफ़ रख दी और एक सेक्सी मुस्कान देते हुए कहा- घबरा मत! मुझे सब पता है, मैं किसी को नहीं बताऊँगी।

चाची के मुँह से यह सुनते ही मुझे थोड़ी राहत हुई, मैंने चाची को धन्यवाद कहा और उन्हें एक टक देखता रहा।

चाची बोली- अच्छी थी वैसे फिल्म, पसन्द अच्छी है तुम्हारी!

यह सुनते ही मन तो किया कि दबोच लूं चाची को पर उस वक़्त हिम्मत नहीं हुई, वो मेरा हाथ धीरे धीरे सहला रही थी, मेरे पूरे शरीर में जैसे करंट दौड़ने लगा था।
पहली बार था इसलिये मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था, मैंने अपना हाथ वापस खींच लिया, तो वो बोली- क्या हुआ? अच्छा नहीं लगा? इतने प्यार से सहला रही हूँ।

मैंने कहा- अच्छा तो बहुत लगा पर!
उन्होंने तुरंत कहा- पर क्या? बोलो तो सही, डरो मत!
मैंने कहा- आप नाराज़ हो जायेंगी!

चाची- अरे ऐसा बिल्कुल नहीं है, मैं क्यों नाराज़ होऊँगी? तुम कुछ भी कहो, कुछ भी करो, तुम्हें तो छूट है!

चाची के मुँह से ये शब्द सुन कर मुझे भी थोड़ा जोश आ रहा था। चाची मुस्कुराने लगी, अब मुझे यकीन होने लागा था कि चाची को वाकई में मुझसे चुदवाने का मन है। बस इसी यकीन से मैं चाची के करीब गया और उनका हाथ पकड़ कर प्रेम से सहलाने लगा और मेरी नज़र उनके गोरे गोरे स्तनों पर थी जो सिल्की नाईटी में एकदम तने हुए नज़र आ रहे थे।

तभी चाची ने कहा- क्या देख रहे हो इतने ध्यान से? कुछ दिखा?

मुझे उनकी बातों से और आत्मविश्वास आता जा रहा था। मैंने भी उनकी तरह शब्दों के वाण छोड़ना शुरु किया और कहा- अभी तक को कुछ नहीं दिखा, और कुछ नहीं मिला! बस कोशिश जारी है, पर यकीन है कि जल्द ही सब कुछ मेरे पास होगा।

मेरे निरंतर स्पर्श से चाची मदहोश होती जा रही थी, मैंने मौका देख कर धीरे धीरे उनके वक्ष पर हाथ फेरना चालू कर दिया। तभी चाची ने कातिल अंदाज़ में मुझे देखते हुए कहा- जय, तू बड़ा छुपा-रुस्तम निकला, मैं तो तुम्हें छोटा बच्चा समझती थी पर तुम तो कुछ और ही निकले!

मैंने कहा- बस आप साथ दो तो मेरी और भी खूबी दिखाऊँ!

फिर चाची ने मेरा हाथ पकड कर अपने वक्ष पर रख दिया और एक लम्बी सांस ली।
बस फिर क्या था, मुझे तो हरी झंडी मिल गई। मैं दोनों हाथों से उनके सख्त स्तन मसलने लगा। इससे चाची एकदम मदहोश होती जा रही थी और मेरा लंड भी अंडरवीयर फाड़ रहा था।

फिर चाची ने मेरे लंड पर हाथ रखा और पैंट के ऊपर से ही सहलाने लगी, उनके स्पर्श से मेरे पूरे शरीर में मानो एक करन्ट सा लगा, किसी ने पहली बार मेरे लंड को छुआ था और मैंने उनके स्तनों को पूरे जोर से निचोड़ दिया जिससे उनकी चीख निकल पड़ी- अ आअ आह।

हम दोनों पूरे जोश में थे, सब कुछ भूल चुके थे कि हम कहाँ हैं, हमारा रिश्ता क्या है और समय क्या हुआ है।

मैं उनके वक्ष को सहलाते-सहलाते उन्हें चूमने लगा, उनके गोरे गालों पर, गले पर हर जगह! चाची भी मेरा पूरी तरह साथ दे रही थी, वो भी मुझे चूमने लगी। उनके मुँह से निरंतर सिसकियाँ निकल रही थी- ओह.. अह. हुम्म… आह!

फिर मैंने उन्हें सोफे पर ही लिटा दिया और उनके पूरे शरीर को दबोचने लगा। चाची भी पूरे जोश में थी और मेरे बालों में तो कभी मेरे हाथों को सहलाती। अब चाची चुदने के लिये बिल्कुल तैयार हो चुकी थी, वो ऐसे तड़प रही थी जैसे सालों से भूखी हों।

मैं उनकी नाईटी खोलने लगा कि अचानक दरवाज़े पर घण्टी बजी, घण्टी की आवाज़ सुनते ही हम दोनों घबरा गये और रुक गये। तभी हमरी नज़र सामने लगी घड़ी पर पड़ी, शाम के 5.30 बज चुके थे, चाची ने कहा- उठ, मैं देखती हूँ! बच्चे स्कूल से आ गये होंगे।

मेरा मन तो नहीं था उनको छोड़ने का, पर मजबूरी थी, मैं उठ कर एक ओर बैठ गया, चाची मुस्कुराते हुए उठी और अपने कपड़े और बाल बराबर करने लगी और जाकर दरवाजा खोला। दोनों बच्चे आ गये थे, मेरी नजर अभी चाची पर टिकी हुई थी, मैं वहीं से चाची को देख रहा था और मेरा लंड था कि शांत होने का नाम ही नहीं ले रहा था। एक तो पहला मौका वो भी अधूरा रह गया।

चाची बच्चों के साथ दूसरे कमरे में चली गई। मैं भी उनके पीछे वहाँ पहुँच गया और दरवाजे से टिक कर खड़ा उन्हें देखता रहा। बीच-बीच में उनकी भी प्यासी नज़र मुझे देखती।

थोड़ी देर बाद चाची मेरे पास आई और मेरे पैंट में टावर को देख हाथ फेरा और बोली- अभी इसे सुला दे, थोड़ा आराम करने दे, इसे, बाद में बहुत काम करना है।

और वो रसोई में चली गई और अपने काम में लग गई। मैं भी वापस अपने कमरे में आकर बैठ गया, पर दिमाग में तो वही दोपहर वाला दृश्य चल रहा था, अब मैंने तय कर लिया था कि जो भी हो चाची को जल्द से जल्द चोदना है, क्योंकि मैं उनकी प्यास और तड़प देख चुका था।

इन्हीं ख्यालो में समय बीत गया और 8.00 बज गये। चाची ने खाना खाने को आवाज़ लगाई, हम खाना खाने बैठे पर मेरी नज़र चाची से हट ही नहीं रही थी। चाची भी मेरी तरफ देखती और हमारी नज़र एक होती तो वो नज़र घुमा लेती।

खाना खा कर मैं और दोनों बच्चे हाल में टीवी देखने बैठ गये, चाची अपना काम कर रही थी, मेरा ध्यान तो किसी और दुनिया में ही घूम रहा था। थोड़ी देर में चाची अपना काम निपटा कर मुस्कुराते हुए आई और मेरी बगल में बैठ गई और दोनों बच्चो से कहा- चलो आज हम दादा दादी के कमरे में सोयेंगे और जय अकेला सो जायेगा।

(दादा दादी के नहीं होने के कारण हम सब एक ही कमरे में सोते थे)

यह सुनकर मैं एकदम दंग रह गया, मुझे लगा कि शायद चाची मुझसे दूर रहना चाहती हैं, मुझे कुछ समझ नहीं आया कि चाची के दिमाग में क्या चल रहा था.

वो दोनों बच्चो को लेकर दूसरे कमरे में चली गई। उनके जाते ही मैंने अपने कपड़े बदल लिये .. हाफ पैंट और बनियान जो मैं अक्सर रात में पहनता हूँ। और वापस आकर बैठ गया। दिमाग अभी भी उन्हीं ख्यालों में खोया था।

रात के दस बजे होंगे, मैंने देखा कि चाची कमरे से निकली और बाहर से दरवाजा बंद कर रही थी। अब मुझे चाची की योजना समझ आने लगी थी। उन्होंने वही सिल्की नाईटी पहनी थी, बहुत सेक्सी लग रही थी। वो आकर मेरे बाजू में बैठ गई। मन तो कर रहा था कि बदोच लूँ पर सोचा- जल्दबाजी में कहीं काम ना बिगड़ जाये!

उन्होंने मुस्कुरते हुए पूछा- क्या कर रहा है? सोया नहीं अब तक?
मैंने कहा- टीवी देख रहा हूँ।
उन्होंने तुरंत रिमोट से टीवी बंद कर दिया और कहा- टीवी में ध्यान तो है नहीं तेरा!

मैंने कहा- दोपहर के बाद से मेरा ध्यान कहीं और ही घूम रहा है!मैं समझ गया था कि चाची अब मुझ से चुदवा कर ही रहेंगी।

मैं वहाँ से उठ कर अपने कमरे में आ गया, मेरे पीछे ही चाची भी आ गई। दोनों के सब्र का बांध टूटता जा रहा था। चाची ने अंदर आते ही बत्ती बुझा दी और आकर बिस्तर पर मेरे पास बैठ गई और कहा- मैंने कहा था तो बराबर सुलाया ना (लंड को) आराम कर लिया ना?

मैंने कहा- भूखे शेर को भला नींद कैसे आएगी, वो बिना शिकार किए कहाँ आराम करेगा?

चाची का हाथ मेरे लंड पर घूमने लगा। उनकी इस हरकत को देख मैंने उन्हें अपने ऊपर खींच लिया, अपनी बाहों में समेट लिया और उनकी चूचियाँ दबाता, चूमता तो कभी उनकी ग़ाण्ड पर हाथ फेर उसे दबाता। हम दोनों फिर पूरे जोश में आ रहे थे। चाची फिर सिसकियाँ भर रही थी- ओह्ह अह्हा उफ्फ्फ ईई!

फिर मैंने उनके होंठ पर अपने होंठ रख दिये और चूमने लगा। उनकी जीभ मेरे मुँह में घूमने लगी और उनके हाथ मेरे बालों में!

मैंने उनकी नाईटी निकलनी शुरु की, सारे बटन खोल दिये और नाईटी निकाल फेंकी। अब उनका हाथ मेरे अन्डरवीयर में था। बड़े प्यार से मेरा लंड सहला रही थी चाची!

दोनों पूरी तरह एक दूसरे में खोये हुए थे, लेकिन अंधेरे की वजह से मुझे उनके सेक्सी बदन को देखने का आनंद नहीं मिल रहा था। फिर मैंने उनकी ब्रा भी उतार फेंकी और अब मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उठ कर बत्ती जला दी। जैसे ही मैंने चाची के बदन को देखा, मेरे होश उड़ गये, गोरा बदन, सेक्सी फिगर, गोरे गोरे कसे हुए स्तन और खड़े चुचूक!

चाची की शादी को भले ही आठ साल हो गये थे पर उन आठ सालों में वो बहुत कम चुदी थी, इस वजह से उनका फिगर कुंवारी लड़की से कम नहीं था। चाची बिस्तर पर सिर्फ पैंटी में लेटी थी, मैंने भी अपनी बनियान और निकर उतार दिये और चाची के ऊपर आ गया और उनके गोरे बदन से खेलने लगा। कभी स्तन चूसता तो कभी तो कभी उनके पूरे बदन को चूमता।

फिर मैंने उनकी पैंटी में हाथ डाला, एक दम चिकनी और सफ़ाचट थी। मैंने अपनी ऊँगली निशाने पर रख दी और धीरे से अंदर की और धकेला। चाची तो जैसे सातवें आसमान पर पहुँच गई थी, उनकी निरंतर सिसकियाँ निकल रही थी- ओह्ह अह्हा उफ्फ्फ मूह्ह्ह

मेरी ऊँगली अंदर जाने लगी और उनकी सिसकियाँ भी तेज़ होने लगी- अह्ह्ह अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह अह्ह्हा

उनकी चूत एक दम गीली थी, मेरी ऊँगली अंदर-बाहर होने लगी। तभी चाची ने मुझे कस कर अपनी बाहों में पकड़ लिया और कहा- जय प्लीज़, मुझे और मत तड़फ़ाओ, जल्दी से मेरी प्यास बुझाओ!

मैंने कहा- अब आप कभी प्यासी नहीं रहोगी! मैं आपको कभी भी प्यासा नहीं रहने दूंगा!

और मैंने उनकी पैटी उतार दी, अब मस्त टाईट चूत मेरे सामने थी। मैंने अपना अंडरवीयर भी उतार दिया और अब हम दोनों निर्वस्त्र एक दूसरे से लिपटे हुए थे। मेरी ऊँगली उनकी चूत में और उनके चुचूक मेरे मुँह में और मेरा लंड उनके हाथ में!

उनकी सिसकियाँ और तेज़ होती जा रही थी- अह्ह्ह्ह आआह्ह्ह ओह्ह्ह्ह ऊऊफ्फ्फ

फिर मैंने चाची से कहा- मेरा लंड अपने मुँह में लेकर चख तो लो!

और लंड उनके मुँह में रख दिया और वो बड़े प्यार से मेरे लंड को चूसने लगी। अब मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था, मैंने उनके बालों में हाथ डाला और पकड़ कर उनका मुँह मेरे लंड की ओर खींचने लगा। फिर मैंने उनके वक्ष को चोदना शुरु किया। दोनों हाथों से दोनों स्तनों को पकड़ा और अपना लंड बीच में डाल कर चोदने लगा।

(मैंने कई फिल्में देखी थी इसलिये थ्योरी तो पूरी आती थी आज प्रेक्टिकल करना था सो पूरा मजा ले रहा था)

और इधर चाची का बुरा हाल था- आआह्ह्ह ओह्ह्ह्ह उह्ह्ह्ह मह्ह्ह्ह अहाआअ फिर मैंने उनकी दोनों टांगे फैलाई और बीच में आ गया। तभी चाची ने मुझे कोंडोम दिया और कहा- इसे लग लो, सावधानी रखना अच्छा है!

और मैंने उनकी बात मान ली और अपना लंड उनकी रसीली चूत पर रख दिया और धीरे धीरे अंदर डालने लगा।

उनकी सिसकियाँ और बढ़ गई- आआह्ह ओह्ह ओफ्फ्फ उम्म्म म्म्म अह्ह्ह्हाअ

उनकी चूत इतनी गीली थी कि मेरा लंड हर धक्के के साथ अंदर समाता जा रहा था, थोड़ी ही देर में मेरा पूरा लंड अंदर समा गया। फिर मैं थोड़ी देर उनसे लिपट कर यों ही पड़ा रहा और उनकीचूचियों से खेलता रहा।

चाची ने मुझे कस कर पकड़ रखा था, फिर मैंने धीरे धीरे चोदना शुरु किया, दोनों टाँगों को पकड़ा और अपनी स्पीड तेज़ की। चाची सातवें आसमान में थी और पूरे जोश में भी! और लगातार सिसकियाँ भर रही थी।

मेरी गति तेज़ होती जा रही थी और चाची के सिसकियाँ भी!

अब चाची ने मुझे अपनी बाहों में कस कर जकड़ लिया पर मेरी चोदने के रफ्तार बढ़ती ही गई और कुछ ही समय में मैं झड़ गया और उनके ऊपर ही लेट गया।

उस रात मैंने चाची को दो बार चोदा और बारह दिन घर पर कोई नहीं था तो रोज़ दिन में और रात में जब भी मन करे तब चोदता।

पर दादा-दादी के वापस आ जाने के बाद तो दिन में कोई मौका नहीं मिलता पर रात में हर दूसरे-तीसरे दिन चाची को चोदता।

और हाँ, दिन में भी अगर घर पर कोई नहीं हो तो कोई मौका नहीं छोड़ता और चाची भी मेरा पूरा साथ देती थी। यह सिलसिला करीब चार साल चला। फिर मैं अपने शहर सूरत आ गया और यहीं का होकर रह गया।

पर यहाँ आकर भी मैंने चाची जैसी दो स्त्रियों की प्यास बुझाई और आज भी जारी है।

अब मेरा कहना बस इतना है कि जो भी करो, जिसके भी साथ करो, हमेशा कोंडोम इस्तमाल करो- सुरक्षित रहो।

मेरी कहानी आपको कैसी लगी मुझे जरूर मेल करें! Hindi Sex Stories

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