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हेल्लो फ्रेंड्स, मेरा नाम मोहित है Hindi Porn Stories और मैं 22 साल का हूँ। मैं पुणे में रहता हूँ और यह मेरी अन्तर्वासना को भेजी पहली कहानी है।
ये बात तब की है जब मैं 12वीं कक्षा में पढ़ता था। हमारे घर के पास ही मेरे भैया (कज़न) अपने परिवार के साथ रहते थे।
उनकी 2 बेटियाँ थी, जिनमे से बड़ी वाली का नाम प्रिया और छोटी का नाम अदिति था। प्रिया 18 साल की थी।
यूँ तो मेरे अपनी दोनों भतीजियों के साथ अच्छे रिश्ते थे पर प्रिया के साथ मैं ज्यादा नजदीक था।
प्रिया भी मुझसे काफी घुल मिल रखी थी और मैं भी।
वो मुझे अपने भाई की तरह मानती थी।
वैसे जब तक मैं 12वीं कक्षा में नहीं आया था तब तक मैंने प्रिया की तरफ किसी ऐसी वैसी नज़र से नहीं देखा था पर 12वीं में आने के बाद वो मुझे अचानक ही बहुत अच्छी लगने लगी, शायद यह उसके बढ़ते हुए उभारों की वजह से था।
एक दिन मैं घर पर अकेला था, गर्मियों के दिन थे, मैने हाफ पैन्ट और टी-शर्ट पहनी थी । मैं काफ़ी बोर हो रहा था तो मैने सोचा क्यों ना प्रिया से मिलने चलूं !
यह सोचकर मैं उसके घर गया और मैने बेल बजाई । शायद मेरी किस्मत अच्छी थी, प्रिया ने दरवाज़ा खोला तो मैने देखा कि उसने काला स्लीवलेस टॉप और लाल रंग की कॅप्री पहन रखी थी, और वो अत्यंत सेक्सी लग रही थी।
मैने पूछा क्या कर रही थी?
तो उसने बोला- कुछ खास नहीं, ऐसे ही !
हम दोनों अंदर गये तो मैने पूछा- भैया भाभी कहाँ हैं?
तो उसने बताया कि वो तो अदिति को ले कर बाज़ार गये हैं। उसके बाद हम दोनों पढ़ाई की बातें करने लगे और एकदम से हम बाय्फ्रेंड और गर्लफ्रेंड की बातों पर भी आ गये (असल में हम दोनों एक दूसरे के बीच काफ़ी फ़्रैन्क थे)
हम बात कर ही रहे थे कि उसने चाय के लिए पूछा और मैने कहा ठीक है।
प्रिया चाय बनाने किचन में चली गयी।
मैं भी उसका साथ देने रसोई में चला गया, पर जैसे ही मैं रसोई में घुसा, मेरा ध्यान प्रिया की मोटी गाण्ड की तरफ गया और मैं आकर्षित हो गया।
तभी प्रिया मेरी तरफ मुंह करके बोली- चीनी कितनी लोगे?
मैने साहस जुटाया और प्रिया के पास गया और बोला प्रिया क्या तुम मेरी एक बात मानोगी?
प्रिया ने पूछा- कौन सी बात?
तो मैंने कहा- मैं एक बार तुम्हारे चोचे दबाना चाहता हूँ।
इस बात पर वो सहम गयी और बोली- यह क्या कह रहे हो?
तो मैंने कहा- किसी को पता नहीं चलेगा क्यूंकि हम दोनों के घर वाले घर पर नहीं है और शाम तक नहीं आने वाले।
इस पर उसने कहा- ठीक है, तू मेरा चाचा लगता और मैं तेरी भतीजी हूँ तो हम दोनों के बीच इतना रिश्ता तो हो ही सकता है।
मैं खुश हो गया और प्रिया को गोदी में उठा कर बेडरूम में ले गया।
वहाँ मैने पहले तो उसके होठों पे किस किया जिसका उसने भी जवाब दिया, उसके बाद मैने उसका लाल टॉप उतार फेंका और उसके चोचे उसकी ब्रा के बाहर से ही दबाने लगा, इतने में वह गरम हो गयी।
उसके तुरंत बाद मैने अपनी टी-शर्ट उतार दी तो प्रिया कहने लगी- मोहित तुम क्यों अपने कपड़े उतार रहे हो?
तो मैने कहा- क्या इससे तुम्हें कोई परेशानी है?
तो प्रिया ने कहा- नहीं !
और धीरे से मुस्कुरा दी।
मैं समझ चुका था की रास्ता साफ है।
इसके बाद मैने प्रिया की ब्रा उतार दी और पागलों की तरह उसके चोचे चूसने लगा, प्रिया भी मज़े ले रही थी और आ आ की आवाज़ निकल रही थी।
मैने ज़्यादा देर नहीं की और उससे पूछा क्यों ना हम चुदाई करें?
तो प्रिया ने जवाब दिया जैसा मर्ज़ी वैसा करो पर किसी तो पता नहीं चलना चाहिए तो मैने उसे निश्चिंत होने के लिए कहा।
बस फिर क्या था, मैने प्रिया की कैप्री और चड्डी भी उतार दी और अपना भी अंडरवीयर उतार दिया मेरा लण्ड टंकार खड़ा हो गया कम से कम 7 इंच तक।
मेरे लण्ड को देखकर प्रिया ने उसे अपने मुंह में ले लिया और जम के चूसने लगी, यह सिलसिला 10 मिनिट तक चला।
इसके बाद मैने अपना लण्ड प्रिया की चूत पे लगाया और एक ही झटके में उसकी चूत में घुसा दिया, इस पर वह ज़ोर ज़ोर से आ आ की आवाज़ें निकालनें लगी।
मैने कहा- चिंता मत करो।
उसके बाद तो हमने एक दूसरे के साथ करीब 20 मिनट तक कभी डोगी स्टाइल में तो कभी घोड़ी बनकर सेक्स किया।
उसके बाद मैने प्रिया से पूछा कि तुमने आज तक कितनी बार चुदाई कराई है तो उसने कहा 4-5 बार कराई थी पर मेरे चाचा जैसा मज़ा किसी ने नहीं दिया जिस पर मैं मुस्कुराए बिना नहीं रह सका।
उस दिन के बाद जब भी हम दोनों के घर पर कोई नहीं होता है हम दोनों एक दूसरे में खो जाते है और एक दूसरे की प्यास बुझाते हैं। Hindi Porn Stories
यह बात हैं कुछ 12-14 साल Sex Stories पुरानी, तब मैं 19 साल का एक हट्टा- कट्टा नौजवान था।
मैं मध्य प्रदेश के एक छोटे से गाँव “सिवामुलिक” में रहता था। हमारे गाँव में हर साल सावन में मेला लगता था और हम सारे दोस्त उस मेले में जाते थे, बहुत मज़े करते थे। मेला काफी प्रसिद्ध था इसलिए आस-पड़ोस के 5-7 गाँव के भी लोग वहाँ आते थे।
मैंने तब तक किसी भी लड़की को चोदा तो क्या नंगा भी नहीं देखा था। मगर हाँ, मेरे दोस्तों ने मुझे किताबों में लड़कियों की नंगी तस्वीरें दिखाई थी। उसमें अनगिनत लड़कियों की तस्वीरें थी, अलग अलग पोज़ेज़ में ! कहीं एक लड़की दो-दो लड़कों के साथ चुदवा रही थी, तो कहीं तीन लड़कियाँ एक लड़के के लौड़े के लिए लड़ रही थी, सभी कुछ सपना सा लगता था और मैं उन्हें देख कर मुठिया मारा करता था।
खैर, उस मेले में जाने का मुख्य तात्पर्य चोदना था, हम हर बार इसी उद्देश्य से वहाँ जाते थे, इस बार भी हम गए।
इस बार का मेला कुछ अलग ही था, इस बार बहुत सी नई दुकानें थी, झूले थे और काफी सुन्दर लड़कियाँ !
एक लड़की मुझे भी भा गई और मैं उसका पीछा करने लगा। वो जहाँ जाती, मैं वहाँ चला जाता, कभी गुबारा लेने तो कभी चूड़ियाँ लेने !
मेरे मामा की भी वहाँ एक चूड़ियों की दूकान थी, वो वहाँ जा पहुंची और भी वहाँ उसके पीछे पीछे मैं भी चला गया।
मुझे आता देख मामा जी ने कहा,” मुन्ना, अच्छा हुआ तू आ गया, आधे घण्टे के लिए दूकान संभाल ! मुझे ज़रा कुछ काम है !
मौका पाकर मैं वहाँ बैठ गया और उसे चूड़ियाँ दिखाने लगा।
उसके गोरे-गोरे हाथ अपने हाथों में लेकर उनमें चूड़ियाँ पिरोने लगा। कभी कोई टाइट चूड़ी से उसे दर्द होता तो वो अपना दर्द अपने होटों को काट कर दर्शाती। यह सब देख-महसूस कर के मेरा तो लौड़ा ही खड़ा हो गया।
मैंने कहा,” आपके हाथ काफी कोमल हैं, मानो रेशम के बने हों !”
और वो शरमा गई। मुझे लगा कि उसे भी मैं अच्छा लगता हूँ।
धीरे धीरे मैं उसका हाथ अपने लौड़े के पास लाते गया, शायद उसने यह महसूस कर लिया और मुझसे कहा,” क्या आप मुझे घर तक छोड़ सकते हैं, रात काफी हो गई है और मेरी सहेलियाँ भी नहीं दिख रही !”
मैं फट से तैयार हो गया, मामाजी आये तो उनसे सायकिल ली और चल पड़ा उसके साथ।
रास्ते में उससे उसका नाम पूछा।
“रति” उसने जवाब दिया।
काफी देर चलने के बाद हम एक सुनसान जगह पर पहुँचे, मैंने उसका हाथ पकड़ा और उसे पास के खेत में ले गया।
उसके होठों को अपने हाथ से छुआ, उन पर शबाब की बूंदें मानो शहद लग रही थी, मैंने हलके से उसके होठों पर अपने होठ रखे और अपनी जबान को उसके मुँह के अन्दर फ़िलाने लगा। उसके हाथ भी मेरे शरीर पर घूमने लगे, कभी वो मेरी गर्दन को चूमती तो कभी मेरे कान को अपनी जुबान से सहलाती।
मेरे अंग-अंग में रोमांच भर गया, मैंने उसकी चोली निकाली तो उसके स्तन बाहर छलक पड़े, उनका आकार बहुत बड़ा था, मेरे हाथ से भी बड़ा !
मैंने एक को मुँह में लिया और चाटने लगा, उसके चुचूक खड़े हो गए। मैं अपनी जुबान से उसके चुचूक के इर्द गिर्द गोला बनाने लगा, उससे उसको बहुत अच्छा लगा “आ…आया…ऊऊओह्ह्ह्ह” की आवाज़ से मेरे लौड़ा पैन्ट फाड़ने को तैयार हो गया।
मैंने उसे नीचे लिटाया, उसका घगरा निकला और फिर उसकी चड्डी। उसकी गोरी गोरी टांगें देखकर तो मेरे मुँह में पानी आने लगा। मैंने जल्दी से अपनी पैन्ट और चड्डी निकली और उसकी चूत चाटने लगा। उसकी चूत में मेरी जुबान अन्दर तक जा रही थी। वो अपना आनंद ” और ….और जोर से …..आह…” की आवाज़ से जता रही थी।
फिर वो हट गई और मुझे लिटा दिया, वो मेरी टांगों की बीच बैठ गई और मेरे खड़े लौड़े को देखने लगी।
” बाप रे ९ इंच ! बहुत बड़ा हैं यह तो ! क्या मेरी चूत में जा पायेगा?”
मैं भी सोच में पड़ गया। मगर उसने मुझे सोचने का वक़्त नहीं दिया, और फट से मेरे लण्ड को अपने गरम होठों के बीच ले लिया, अपने सिर को ऊपर-नीचे करने लगी, लौड़े के सर पर जुबान से गोले बनाने लगी। ख़ुशी के मारे मैं चिल्लाने लगा,” हाँ, हाँ और जोर से…..और जोर से……रति…….रांड और अन्दर ले …”
इतने में मेरा चीक(वीर्य) निकल गया, वो हँस पड़ी, उसने मेरा पूरा चीक खा लिया।
मेरा लौड़ा छोटा हो गया। वो उसे हाथ में पकड़ कर हिलाने लगी, मेरी छाती को चूमने लगी, मेरे चुचूकों को चाटने लगी। वो फिर मेरी गोटियों को अपने मुँह में लेकर खेलने लगी। थोड़ी देर में मेरा लौड़ा खड़ा हो गया।
“चल अब डाल दे !” रति बोली।
मैंने कहा,” मैंने कभी किया नहीं, क्या आप मुझे बताएंगी कि कहाँ डालना है !”
उसने मेरे खड़े लौड़े को अपने हाथ में लिया और अपनी चूत के दरवाज़े पर रख दिया।
“चल अब डाल !” वोह बोली।
और मैंने डाल दिया, थोड़ा सा दर्द हुआ मुझे, पहली बार था ना !
“अब अन्दर-बाहर कर अपने लौड़े को, फिर देख क्या मजा आता है !”
मैं वैसा ही करने लगा, उसके स्तनों को काटने लगा, उसके होठों को चूमने लगा, उसके उभार लाल लाल हो गए थे, उनमें मेरे हाथों के निशाँ भी पड़ गए थे। मैंने अपने धक्कों को गति बढ़ा दी।
” डालो और जोर से डालो, मेरी चूत कब से एक लौड़े के लिए प्यासी थी…. रणजीत… अपने हाथों से मेरी गांड भी दबाओ… !”
मैंने फिर उसके पैर अपने कंधे पर रख लिए और फिर से धक्के देना चालू किया, उसे पैरों को काटता तो कभी चूमता !
मेरे धक्कों के उसके स्तन यूं झूलते मानो आंधी में लालटेन !
” रणजीत, अपने लौड़े की वर्षा से एक बार फिर मेरे चेहरे को नहला दो, जोर से डालो अन्दर……आअह्ह…..ऊऊऊउऊऊऊह्ह्ह्ह्ह्ह……मेरे राजा…..बड़ी तेज़ हैं तेरी गाड़ी…….फाड़ डाल मेरी चूत को………आ …और और और…..हाँ हाय हाँ हाँ हाँ…” वो बड़ी ही रोमांचित थी और मैं भी !
मैं फिर से निकलने वाला था, मैंने अपना लौड़ा बाहर निकाला और उसके मुँह की तरफ रख कर हिलाने लगा … एक-दो बार हिलाने के बाद मेरा पूरा चीक निकल गया,”ओह , आ आ….ले…पूरा ले मुँह में रांड……ले ले मेरे लौड़े को !” मैं बोला।
उसके बाद हमने कपड़े पहने और फिर उसे उसके घर छोड़ दिया।
इस घटना के बाद मैंने कई बार कोशिश की उससे मिलने की, मगर वो कहीं नहीं मिली………
आप बताइए, आपको मेरी कहानी कैसी लगी? Sex Stories
यह मेरी पहली कहानी है। जब Hindi Sex Stories मेरी उम्र 18 साल की थी, मैं अपने गाँव में शादी में गया हुआ था। वहां पर रजनी भी आई हुई थी लेकिन उससे मेरी कभी बात नहीं होती थी। उसके स्तन मुझे बहुत हो प्यारे लगते थे जो मैंने नहाते समय देख लिए थे- जब वो नहाने के लिए बाथरूम में गई तो थोड़ी देर बाद में ही घुस गया क्योंकि बाथरूम के गेट में कुण्डी नहीं थी वो केवल पैंटी में ही थी।
मई का महीना चल रहा था, गर्मियों के दिन थे। सभी लोग रात में छत पर सोते थे। घर में भी मेहमान आये हुए थे। एक दिन रजनी अनजाने में मेरे बगल में आकर लेट गई। तब रात के 11 बज रहे थे, मुझे अब नींद नहीं आ रही थी। एक बज चुका था, सभी लोग सो चुके थे, वो भी सो गई थी। उसने फ़्रॉक पहनी हुई थी और सोते समय उसकी फ़्रॉक काफी ऊपर आ गई थी। अब उसे देख कर मेरा लंड खड़ा होने लगा। मैंने डरते हुए उसकी पैंटी को छुआ तो कोई हलचल नहीं हुई क्योंकि वो सो रही थी। अब मेरी हिम्मत और बढ़ गई। अब मैंने उसकी चूत को पैन्टी के ऊपर से सहलाना शुरू कर दिया। उसकी कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई तो मैंने उसकी पैन्टी के अन्दर हाथ डाला। उसकी चूत के ऊपर बाल थे। अब मैं उसकी चूत को सहला रहा था और उसके छेद में ऊँगली डालने की कोशिश कर रहा था लेकिन उसकी चूत बहुत कसी हुई थी।
तभी उसने एकदम करवट ली, मैं एकदम डर गया और सोने का नाटक करने लगा। लेकिन वो अब भी सो ही रही थी। थोड़ी देर बाद मैं मुठ मार कर सो गया।
सुबह जब मेरी नींद खुली तो वो मुझसे पहले उठ चुकी थी। अब मेरा दिन नहीं कट रहा था और रात का इंतजार कर रहा था।
जब रात हुई तो वो कल की तरह ही सोने के लिए आई लेकिन उसके और मेरे बीच में मेरे ताउजी की बेटी राधा आकर लेट गई। राधा मुझसे एक साल बड़ी थी। मैं रात को सोना नहीं चाहता था। रजनी सो चुकी थी और राधा भी।
तभी मैंने राधा के ऊपर से हाथ डाल कर जैसे ही रजनी को छुआ तो राधा के स्तन मेरे हाथ से दब रहे थे। इसी वजह से राधा की नींद खुल गई और वो सोने का नाटक करने लगी थी। अब मैंने जैसे ही रजनी की पैन्टी में हाथ डाला तो राधा ने अपनी आँखे खोल दी। उसे जगता देखकर मैं डर गया लेकिन उसने कुछ नहीं कहा और थोड़ी देर बाद वो उठकर मेरी दूसरी तरफ आ गई अब मैं समझ गया कि वो क्या कहना चाहती है। उसने मेरा रास्ता साफ कर दिया। अब मैं आसानी से रजनी की चूत सहला रहा था।
लेकिन थोड़ी देर बाद राधा ने अपना हाथ मेरे लंड के ऊपर रख दिया। मुझे यह समझते देर नहीं लगी कि वो क्या चाहती है। अब राधा मुझसे चिपक गई थी और वो काफी गरम लग रही थी। उसने अपना कमीज़ खुद ही ऊपर कर दिया लेकिन वो मेरी बहन थी इसलिए मुझे बहुत डर लग रहा था। पर उस वक्त मुझे केवल चूत ही दिख रही थी। मैं राधा की चूत को सलवार के ऊपर से सहला रहा था और उसके स्तन चूस रहा था क्योंकि उसने अपना कुर्ता खुद ही ऊपर कर लिया था।
थोड़ी देर बाद मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोला तो राधा ने पैन्टी नहीं पहनी थी। उसने कहा कि वो सूट के साथ पैन्टी नहीं पहनती है। उसकी भी चूत पर बहुत बाल थे। अब मैं उसकी चूत के दाने को सहला रहा था, बीच बीच मैं उसके छेद में उंगली भी डाल देता था। उसकी चूत रजनी की तरह कसी हुई नहीं थी। तो उसने बताया कि वो चुपचाप मोमबत्ती अन्दर डालती थी।
थोड़ी देर बाद उसकी चूत में से पानी निकलने लगा। अब उसने मुझसे कहा कि उसकी चूत को अब लंड की जरुरत है।
राधा ने अपनी सलवार और नीची कर दी और अब मैं उसके ऊपर था और अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ रहा था लेकिन वो बहुत ही उतावली हो रही थी चुदने के लिए !
मैंने अपना लंड उसकी चूत में डाला तो उसके मुँह से अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह की आवाज निकली और मैं उसको लगातार चोदने में लगा हुआ था। थोड़ी देर बाद वो झड़ गई और मैंने भी अपना पूरा वीर्य उसकी चूत में छोड़ दिया। फिर हम लोगों ने अपने कपड़े सही किये और बातें करने लगे। रात के तीन बज चुके थे।
अचानक रजनी ने करवट बदली और उसका एक पैर मेरे ऊपर था वो भी बहुत गरम हो रही थी। मैंने फिर रजनी की चूत को सहलाना शुरू कर दिया।
तब राधा ने कहा- मैं तुझे रजनी की चूत भी दिलवाऊंगी।
अब तो मेरी ख़ुशी का ठिकाना न था। थोड़ी देर तक हम लोग चूमा-चाटी करके सो गए।
सुबह राधा ने मुझे कहा- मैं रजनी को दोपहर में ऊपर के कमरे में ले आऊअगी और तुम कमरे में छुप जाना। जब मैं इशारा करूं तो तुम बाहर निकल आना !
वही हुआ। दोपहर में मैं कमरे में छुप गया तो वो दोनों कपड़े बदलने लगी। यह सब राधा का नाटक था।
उसने रजनी को कहा- हमें कहीं जाना है इसीलिए ऊपर कमरे में कपड़े बदल ले !
जब रजनी ने अपने कपड़े उतारे तो मैं उसका बदन देखकर दंग रह गया। उसका शरीर तो मानो एकदम मक्खन की तरह लग रहा था। वो सिर्फ ब्रा और पैन्टी में ही थी।
तभी राधा ने उसकी एक चूची को दबा किया। इस पर उसने भी राधा की दोनों चूचियां मसल दी। राधा तो यही चाहती थी कि रजनी यह सब करे।
अब वो दोनों एक दूसरे के स्तन दबा रही थी कि तभी राधा ने रजनी की पैन्टी उतार दी और खुद भी नंगी हो गई। अब वो दोनों एक दूसरे की चूत में ऊँगली डाल रही थी।
तभी रजनी ने कहा- काश ! यहाँ कोई लड़का होता तो कितने मजे आते !
तो राधा ने मुझे इशारा किया तो मैं बाहर आ गया। मुझे वह देखकर रजनी को शर्म आने लगी और अपनी चूत को अपने हाथों से छुपाने लगी। लेकिन तब तक वो मेरी बाहों में थी और मैं उसको गालों और होंठों को चूम रहा था। मेरा एक हाथ रजनी के वक्ष पर था और दूसरा उसकी चूत पर !
उसकी चूत से पानी निकल रहा था। मैं समझ गया कि वो चुदाने के लिए तैयार है।
अब मैंने उसको बेड पर लिटाया और उसकी चूत पर लंड रगड़ने लगा। फिर जैसे ही मैंने अपने लंड को झटका दिया तो वो थोड़ा सा उसकी चूत में चला गया। वो रोने लगी और बोली- प्लीज, बाहर निकालो बहुत दर्द हो रहा है !
मैं उसकी एक नहीं सुन रहा था। थोड़ी देर में मेरा पूरा लंड उसकी चूत में था। मैं बिल्कुल शांत था ताकि उसका दर्द कुछ कम हो जाये।
जब वो कुछ शांत हुई तो मैंने उसको चोदना शुरू किया। उसे भी अब अच्छा लग रहा था। राधा भी अपनी चूत में उंगली डाल के शांत हो गई थी।
थोड़ी देर में मैंने वीर्य से उसकी चूत भर दी थी। जब मैंने देखा तो वहाँ पर खून पड़ा था और रजनी की चूत भी खून से लाल थी।राधा ने बाद में यह सब साफ किया।
फिर जब भी मौका मिलता तो मैं अपनी बहन राधा की चुदाई करता।
2-3 दिन में रजनी अपने घर जा चुकी थी लेकिन उसको मैंने 3-4 बार चोद लिया था।
हम लोग भी अपने घर पर आ गए। राधा और मेरा चुदाई का सिलसिला आज भी है।
आपको मेरी सच्ची कहानी कैसी लगी? मुझे जरूर बतायें ! Hindi Sex Stories
मेरी उम्र 28 वर्ष है और मैं पिछले दो साल से दिल्ली में जॉब कर रही हूँ.
मेरे पिताजी फौज में थे और जब मैं अबोध थी, तभी कश्मीर में वो शहीद हो गए थे.
उसके बाद से मुझे मेरी मां ने ही पाला.
मैं एक अच्छे घर से हूं लेकिन मैंने काफी छोटी उम्र से ही अपनी मां की चुदाई देखी है इसलिए चुदाई के नाम से मेरा दिल मचल उठता है.
जैसी चुदक्कड़ मेरी मां है, आज मैं भी वैसी ही चुदक्कड़ हूं.
मैं आज आपको अपने द्वारा देखी पहली सच्ची घटना बता रही हूं.
इसके बाद मैं खुद के साथ घटी घटनाओं को भी लेकर आऊंगी, अतः आप सभी से अनुरोध है कि कृपया मुझे Xxx डॉक्टर सेक्स कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दीजिएगा.
मैं बिल्कुल नयी हूं, इसलिए लिखने में अगर कोई भूल हो जाए तो उसे नजरअंदाज कर दीजिएगा.
यह बात काफी पुरानी है लेकिन मुझे यह बात आज तक बिल्कुल सही सही याद है.
मैं और मेरी मां, जिनका नाम विमला है.
हम हमारे नये घर में रहते थे. हमारा घर नया था और शहर से थोड़ा बाहर के इलाके में बना था.
हमारे घर के आस-पास उस वक्त केवल 3 घर और थे.
उनमें से एक घर में कोई नहीं रहता था और एक में एक अंकल और आंटी रहते थे.
एक अन्य घर में मेरी सहेली मेघा और उसके पापा, जो पेशे से डॉक्टर थे, वो रहते थे.
उसकी मम्मी नहीं थीं.
मेघा मेरे साथ ही स्कूल में पढ़ती थी और ज्यादा समय मेरे पास ही रहती थी.
मेघा के पापा का नाम सुरेन्द्र था.
वो जब भी अपने क्लिनिक जाते तो मेघा को मेरे घर पर ही छोड़ जाते थे.
सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन उस दिन से मेरी जिंदगी एक अलग मोड़ लेने वाली थी.
मेरी मां की तबियत कुछ दिनों से खराब चल रही थी तो सुरेन्द्र अंकल ने उन्हें अपने क्लिनिक पर चेकअप के लिए बुलाया.
मां ने मुझे कहा- मैं थोड़ी देर में आ जाऊंगी, मेरी तबियत ठीक नहीं है. मैं दवाई लेकर आ जाऊंगी.
यह सुनकर कि वो शहर तरफ जाने वाली हैं, मैं भी उनसे साथ चलने को कहने लगी.
पहले तो मां ने मना कर दिया मगर मैं जिद करने लगी तो बाद में वो मान गईं और मुझे और मेघा को अपने साथ स्कूटी पर बैठाकर ले गईं.
हम लोग दोपहर के करीब दो बजे सुरेन्द्र अंकल के क्लिनिक पर पहुंचे.
वहां केवल एक मरीज था तो अंकल ने हमें बाहर बैठने को कहा और रेशमा आंटी, जो अंकल की सहयोगी थीं, उनको क्लिनिक बंद करके घर जाने को कहा.
वो क्लिनिक बंद करके पांच मिनट बाद चली गईं.
कुछ देर बाद वो मरीज भी वहां से चला गया और अंकल ने क्लिनिक को अन्दर से बंद कर दिया.
उसके बाद वो मेरे और मेघा के लिए कुछ चिप्स और बिस्किट लाने चले गए.
थोड़ी देर बाद अंकल खाने की ढेर सारी चीजें लेकर आए और हमें खाने को दे दीं.
फिर मम्मी बोलीं- बेटा, मैं चेकअप करवा कर आती हूं, आप लोग यहीं बैठो.
इतना कहकर मम्मी वहां लगे टीवी में एक कार्टून चैनल लगाकर अन्दर चली गईं.
मैं और मेघा खाने और कार्टून देखने में व्यस्त हो गए.
धीरे धीरे काफी समय बीत गया और मेघा टीवी देखते हुए सो गई.
मैंने कुछ देर टीवी देखा, फिर सोचा कि बहुत देर हो गई, मम्मी अभी तक नहीं निकलीं, एक बार जाकर बुलाती हूं.
यह सोचकर मैं अन्दर चेम्बर के तरफ जाने लगी.
जैसे ही मैं गेट के पास पहुंची, तो मैंने जो देखा, वो मुझे आज तक याद है.
मैंने देखा कि मेरी मां की सलवार और पैंटी नीचे जमीन पर गिरी हुई थी और मेरी मां अपनी टांगें फैलाए कुर्सी पर बैठी हुई थीं.
उनकी चूत में अंकल अपनी उंगली पेल रहे थे.
उस वक्त मैं बहुत छोटी थी. ये सब मेरे समझ में बिल्कुल नहीं आ रहा था कि चल क्या रहा था.
मैंने वहीं से आवाज लगाई- मम्मी क्या हुआ आपको?
मेरी आवाज सुनकर मेरी मां और अंकल दोनों अकबका गए.
मां ने मेरी तरफ देखा और घबराहट में बोलीं- कुछ नहीं बेटा, अंकल मेरा चेकअप कर रहे हैं और इलाज करेंगे, आप बाहर जाकर बैठो.
मां के इतना कहते ही अंकल झट से उठकर आए और मुझे केबिन से बाहर ले आए.
वहां अंकल ने मुझे कुछ चॉकलेट आदि दिए और समझाने लगे- बेटा, मैं मम्मी का इलाज कर रहा हूँ, इसमें थोड़ा टाइम लगेगा. तब तक आप कार्टून देखो और ये चॉकलेट खाओ.
इतना कहकर अंकल ने मुझे टीवी के सामने बिठा दिया और खुद वापस अन्दर चले गए.
उन्होंने केबिन का दरवाजा अन्दर से बंद कर लिया.
मैं दुबारा कार्टून देखने में व्यस्त हो गई. मैं इस बात से बिल्कुल अनजान थी कि अन्दर अंकल मेरी मां चोदने वाले हैं.
कुछ देर तक सब कुछ सामान्य रूप से चलता रहा, मगर इधर मैं बिल्कुल अकेली पड़ गई थी.
मैंने सोचा कि जरा एक बार जाकर देखूं कि मां का इलाज हुआ या नहीं.
जब मैं वहां गई, तो दरवाजा बंद था.
तब मैंने बाहर से आवाज भी लगाई मगर अन्दर से कोई जवाब नहीं आया.
मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ.
तभी मैंने सोचा कि एक बार खिड़की से देखती हूँ कि अन्दर क्या चल रहा है.
यह सोचकर मैं खिड़की के पास गई और देखने कि कोशिश की, मगर खिड़की ऊंची थी.
तब मैंने इधर-उधर देखा तो मुझे मोटी मोटी किताबें एक शेल्फ में रखी दिखाई दीं.
मैंने उनमें से कुछ किताबों को निकालकर एक के ऊपर एक करके सीढ़ी जैसी बनाई और खिड़की से अन्दर देखने लगी.
इस बार का नजारा तो पहले से काफी अलग था. वहां पर मेरी मां पेशेंट वाले बेड बिल्कुल ही नंगी लेटी थीं और अंकल जोर जोर से मेरी मां को चोद रहे थे.
यह सब मेरे सामने पहली बार हो रहा था मगर पता नहीं क्यों, मुझे यह पसंद आ रहा था.
मेरी मां का गोरा जिस्म किसी परी के जैसे मखमली था.
अंकल काफी जोश के साथ मेरी मां को चोदे जा रहे थे.
कुछ देर ऐसे ही चोदने के बाद उन्होंने मेरी मां को कस कर पकड़ लिया और उनके जिस्म पर लेट गए.
मां ने अंकल को अपने ऊपर से हटाया और उठ कर खड़ी हो गईं.
अब वो अपने कपड़े पहनने लगीं.
यह देख मैं भी वहां से नीचे उतर गई और सारी किताबों को उनकी जगह पर रखने लगी.
दो किताबें अभी भी मेरे हाथ में ही थीं. तभी अचानक से पीछे से मेरी मां की आवाज आई- क्या कर रही हो बेटा?
उनकी आवाज सुनकर मैं घबराहट में बोली- कुछ नहीं मां, अंकल की बुक देख रही थी. ये किताब भी न कितनी मोटी है, मुझसे गिर गई थी. वापस रख रही हूँ.
मां ने कहा- तुम छोड़ दो, अंकल रख लेंगे.
मैं दौड़कर मां के पास गई और बोली- अब घर चलो.
उनको देखकर ऐसा नहीं लग रहा था कि वो अभी अभी चुद कर आ रही थीं.
थोड़ी देर बाद अंकल भी बाहर निकले और बोले- ऐसे ही इलाज कराओगी, तो जल्दी ठीक हो जाओगी.
मैं बोल पड़ी- हां अंकल, आप मम्मी का इलाज अच्छे से कीजिए.
यह सुनकर मां मुस्कुराती हुई बोलीं- आज रात खाना आप हमारे घर पर ही खा लीजिए डॉक्टर साहब!
यह सुनकर अंकल मुस्कुराते हुए बोले- मैं तो मीट खाऊंगा, वो भी लाल लाल!
यह सुनकर मां हंसती हुई बोलीं- आपको जो खाने का मन हो, खा सकते हैं. कोई रोक नहीं है.
यह कह कर मां ने मुझसे चलने का कहा.
मैं और मां वहां से निकल गए.
मेघा वहीं रूक गई.
उस दिन मां बहुत मुस्कुरा रही थीं. मुस्कुराएं भी क्यों न, आखिर चुद कर जो आई थीं.
इसके बाद रास्ते में मुझे बहुत सारी चीजें बिना बोले ही मां ने दिला दीं.
रात के लिए मीट लेकर हम लोग वापस घर आ गए.
उनको भनक तक नहीं लगी थी कि मैंने उनकी चुदाई देख ली थी.
मैं भी चुप रही क्योंकि मेरी समझ में भी उस वक्त कुछ खास नहीं आया था.
रात को ठीक आठ बजे अंकल और मेघा हमारे घर आ गए.
मैं मेघा को लेकर अपने कमरे में चली गई.
उस वक्त मेरी मां बाथरूम में नहा रही थीं.
मैंने मां को आवाज दी कि मां, डॉक्टर अंकल और मेघा आए हैं.
कुछ देर बाद मां ने मुझे और मेघा दोनों को आवाज लगायी कि तुम दोनों बहनें खाना खाने नीचे आ जाओ.
यह सुनकर हम दोनों नीचे हॉल में आ गए.
तब मैंने देखा कि मां किसी परी की तरह सफेद ड्रेस में सजकर तैयार थीं.
उनके पूरे बदन से परफ्यूम की अच्छी खुशबू आ रही थी.
अंकल ने मां की तारीफ की और कहा- आप बहुत सुंदर दिख रही हैं.
हमने साथ बैठकर खाना खाया.
खाने के बाद मैं मेघा के साथ अपने कमरे में, जो ऊपर की तरफ था, वहां चली गयी और उसे अपने खिलौनों से खेलने देने लगी.
कुछ देर खेलते खेलते हम दोनों की आंख लग गई.
बहुत रात को मुझे प्यास लगी तो मेरी नींद खुली.
मैंने देखा कि मेघा मेरे बाजू में सोयी हुई है. मैंने सोचा कि नीचे किचन में जाकर पानी पी लेती हूँ.
यह सोचकर मैं धीरे धीरे सीढ़ियों से उतरकर हॉल में आई और वहां पानी पिया.
मैं जब पानी पी रही थी, तब मैंने देखा कि मेरी मम्मी के कमरे की लाईट अभी तक जल रही थी, जबकि मम्मी लाइट बंद करके सोती थीं.
तो मैं लाइट्स बंद करने जाने लगी तो वहां मैंने बुदबुदाने की आवाज सुनी.
वो आवाज मेरी मां की थी.
मैंने पर्दे के पीछे से झांक कर देखा, तो मेरे सामने बिल्कुल दोपहर वाला नजारा था.
मां और डॉक्टर अंकल दोनों बेड पर नंगे लेटे हुए थे और मां डॉक्टर अंकल से कह रही थीं कि दोनों बच्चियां जाग जाएं, इससे पहले आप मुझे जी भर के चोद दो.
इतना कहकर मां डॉक्टर अंकल को चूमने लगीं.
वो दिसम्बर का ठंडा महीना था. कमरे में गर्म वाला ब्लोअर चल रहा था, जिससे अन्दर का वातावरण अनुकूल था.
चुदाई की कह कर मेरी मां ने अपनी गोरी टांगों को फैला दिया और उनकी एकदम गुलाबी चूत मेरी आंखों के सामने आ गई थी.
अंकल मां के ऊपर चढ़े और बोले- साली छिनाल, तीन बार चुदवाकर भी मन नहीं भरा तेरा?
इस पर मेरी मां वासना भरे स्वर में बोलीं- मैं बहुत प्यासी हूं … मेरी इस मादरचोद चूत को एक बार और रगड़कर चोद दो.
इतना सुनते ही अंकल ने मेरी मां को अपनी ओर खींचा और दोनों टांगों को कस कर फैला कर चोदना शुरू कर दिया.
मेरी मां के मुँह से निकलने लगा- आ आह आह … और चोदो मेरी जान … ऐसे ही … आह ये चूत तुम्हारी ही है.
उनकी मादक आवाजें निकलने लगीं.
अंकल- अब तुम्हारी जवानी लंड के लिए नहीं तरसेगी विमला रानी.
ये कहकर अंकल मेरी मां को धकापेल चोदे जा रहे थे.
पूरा कमरा फच्च फच्च की आवाजों से गूंज उठा था.
ऐसे ही काफी देर तक और चोदने के बाद अंकल ने मेरी मां की खूबसूरत चूत में अपना सारा रस डाल दिया.
मेरी मां और अंकल दोनों काफी हांफ रहे थे. दोनों एक दूसरे को चूमने और चाटने लगे.
अंकल मेरी मां से बोले- तुम्हारी चूत बेहद खूबसूरत है विमला, मैं तो इसका दीवाना हो गया. जिंदगी में मैंने पहले कभी इतनी प्यारी चूत नहीं चोदी थी.
यह सुनकर मेरी मां मुस्कुराती हुई बोलने लगीं- क्या आप भी डॉक्टर साहब … मुझे तो शर्म आ रही है.
इस पर शायद अंकल भड़क गए और कड़क आवाज़ में मेरी मां को देखते हुए बोले- साली छिनाल, चार बार चुदवाने में तुझे शर्म नहीं आई … और अब तुझे शर्म आ रही है. साली आज तुझे इतना चोदूंगा कि तू शर्माना भूल जाएगी.
मेरी मां घड़ी की ओर देखती हुई बोलीं- डॉक्टर साहब, साढ़े तीन बजने वाले हैं. बच्चियां जाग गईं, तो दिक्कत हो जाएगी. आप कल या परसों फिर चोद लेना, मैं आज बहुत थक गई हूं. और वैसे भी कौन सा मैं कहीं भागी जा रही हूं.
इस पर अंकल बोले- तुम बच्चियों की चिंता मत करो. सुबह 5 बजने से पहले मैं तुम्हें चोद कर निकल जाऊंगा. तुम चुदने के लिए ही बनी हो, अपनी चूत के साथ अन्याय मत करो. इसे जी भरके चुद लेने दो.
यह बोलते ही अंकल मेरी मां के ऊपर फिर से चढ़ गए.
अब वो अपने लंड को धीरे से मेरी मां की चूत में डालने लगे.
मेरी मां मुस्कुराती हुई बोलीं- बड़े मादरचोद हो आप डॉक्टर साहब!
अंकल बोले- काश तुम मेरी बीवी होती.
मेरी मां उनको चूमते हुए बोलीं- अभी तो आपकी ही बांहों में हूँ, तो बीवी समझ कर ही मजा लीजिए.
यह कहकर दोनों एक दूसरे को चूमने लगे और Xxx डॉक्टर अंकल ने भी चुदाई तेज कर दी.
मेरी मां फिर से कराहने लगीं- ओह डॉक्टर साहब, बहुत मजा आ रहा है … ऐसे ही चोदो डॉक्टर साहब.
ये बातें सुनकर अंकल ने रफ्तार और बढ़ा दी … और वो मेरी मां को बहुत जोर जोर से चोदने लगे.
मुझे ये सब देखने में बहुत मजा आ रहा था.
अंकल बोलने लगे- कैसा लग रहा है?
मां बोलीं- बस ऐसे ही चोदते रहो डॉक्टर साहब.
दोनों चुदाई में इतने मगन थे कि उन्हें कोई दीन दुनिया का कोई होश ही नहीं था.
जल्द ही फिर से पूरा कमरा फच्च फच्च की आवाजों से गूंज उठा.
चोदते चोदते अंकल कभी मां के चूचों को दबाते, तो कभी उन्हें अपने मुँह में भरकर चाटने लगते.
मां भी उनका पूरा साथ दे रही थीं और किसी रंडी की तरह धकापेल लंड खाए जा रही थीं.
ऐसे ही बहुत देर तक ताबड़तोड़ चुदाई चलती रही.
तभी अंकल ने रफ्तार बहुत तेज कर दी और एक झटके में सारा वीर्य मेरी मां की चूत में टपका दिया.
अब वो निढाल होकर मेरी मां के ऊपर ही लेट गए और मां ने भी उन्हें कसकर जकड़ लिया.
कुछ देर तक दोनों एक दूसरे से चिपके रहे.
फिर अंकल ने धीरे से अपना लंड मेरी मां की चूत से बाहर निकाला और बोलने लगे- विमला, तुम्हें चोदने में बहुत मजा आया.
मां ने समय देखा और बोलीं- चोदते चोदते एक घंटा से ज्यादा हो गया. बच्चियां जाग जाएंगी, अब आपको जाना चाहिए.
अंकल बोले- हां विमला, अब मैं निकलता हूं. लेकिन वादा करो कि दुबारा फिर चोदने दोगी.
इस पर मेरी मां मुस्कुराती हुई बोलीं- मैं कहां भागी जा रही हूं. आपका जब मन करे, तब आप मुझे चोद सकते हैं. मेरी चूत का ख्याल तो अब आपको ही रखना है.
अंकल ने कहा- तुम फिक्र मत करो, तुमसे ज्यादा ख्याल मैं तुम्हारी चूत का रखूंगा.
यह कहकर वो उठ कर अपने कपड़े पहनने लगे.
कपड़े पहनकर वो मां को किस करके बोले- विमला, अब तुम भी अपने कपड़े पहन लो.
मेरी मां बोलीं- मेरा अभी मन नहीं है. बाद में पहन लूँगी.
अंकल बोले- तुम समय निकालकर क्लिनिक आ जाना, मैं तुम्हारी नसबंदी करवा दूँगा. उसके बाद तुम्हें कोई दिक्कत नहीं होगी और उसके बाद हर शनिवार रात मैं तुम्हें ऐसे ही चोदूंगा.
मां ने हां कहकर सिर हिलाया और कंबल के अन्दर नंगी ही लेट गईं.
मैं भागकर मेघा के पास आ गई और सोने का नाटक करने लगी.
मुझे अभी तक समझ नहीं आया था कि आखिर अंकल ने मेरी मां के साथ क्या किया.
थोड़ी देर बाद अंकल मेघा को लेने आए.
जैसे ही वे हमारे पास आए, तो उनके शरीर से वही परफ्यूम की खुशबू आ रही थी जो मेरी मां ने शाम को अपने जिस्म में लगाई थी.
वो मुझे बिना जगाए मेघा को गोद में उठाकर चले गए.
जब वो दोनों चले गए तो मैं भी नीचे उतरकर मां के कमरे की तरफ चली गई.
अब वहां कोई लाइट नहीं जल रही थी और काफी अंधेरा था.
मैं अन्दर गई और एक डंडे से लाईट का बटन चालू किया.
मां सोयी हुई थीं, तो मैं भी धीरे से बेडपर जाकर कंबल में घुसकर उनके बगल में लेट गई.
मेरी मां के जिस्म से मस्त खुशबू आ रही थी.
थोड़ी देर बाद मैंने मां की जांघों पर अपनी टांग को रख दिया और मां से लिपट गई.
मेरे मन में वो सब चल रहा था, जो मैंने देखा था.
मैं जानना चाहती थी कि आखिर हुआ क्या?
यही जानने के चक्कर में मैंने अपना हाथ मां के पेट पर रख दिया और धीरे धीरे हाथ को नीचे की तरफ ले जाने लगी.
कुछ देर में ही मेरे छोटे हाथ मेरी मां की चूत तक पहुंच गए. उनकी चूत बहुत ज्यादा चिपचिपी थी और सारा माल मेरे हाथों में लग गया.
मैंने धीरे से अपने हाथों को मां की झांटों में रगड़कर साफ कर लिया.
अब मैंने सोचा कि ये क्या चीज थी, जो मेरी मां की सुसु में अंकल ने डाल दी.
यह जानने के लिए जैसे ही मैंने अपनी दो उंगलियां उनकी चूत में डालीं, वैसे ही झट से उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया और उंगली को बाहर कर दिया.
वो घबराहट में बोलीं- हंषु बेटा, तुम यहां क्या कर रही हो?
मैं भी घबराकर बोली- मम्मी मुझे आपके पास रहना है.
यह कहकर मैं अपनी मां से लिपट गई और रोने लगी.
मां मुझसे पूछने लगीं- क्या हुआ बेटा, रो क्यों रही हो?
मैं रोती हुई बोली- मां अंकल ने आपके सुसु में क्या डाला?
यह सुनते ही मां के होश उड़ गए. वो समझ गईं कि मैंने सब कुछ देख लिया था.
वो कुछ देर के लिए बिल्कुल चुप रहीं. शायद उनको समझ नहीं आ रहा था कि क्या जवाब दूं.
वो सोचने लगीं और तब उन्होंने मुझसे पूछा- तुमने क्या देखा?
मैंने सब कुछ सच सच बता दिया.
मेरी मां समझ गईं कि मैंने उनकी चुदाई देख ली.
अब मां को ये डर था कि कहीं मैं किसी को ये सब न बता दूं.
कुछ देर सोचने के बाद मां बोलीं- बेटी, तुम ये बात किसी से मत बताना.
मैं जिद करने लगी कि पहले आप बताओ, अंकल ने आपके साथ क्या किया?
इस पर वो मुझे समझाती हुई बोलीं- हंषु बेटा, तुमको तो पता हैं कि मां की तबियत कितनी खराब थी. जब आज हम लोग चेकअप के लिए गए, तब अंकल ने मुझे चेक करके बताया कि मुझमें प्रोटीन की कमी है. मेरे पैरों में और पेट में बहुत कम प्रोटीन है, इसलिए मुझे प्रोटीन शेक लेना होगा. तो अंकल मेरा इलाज कर रहे थे और मुझे प्रोटीन दे रहे थे बेटा.
ये सुनकर मुझे लगा कि हां अंकल मेरी मां का इलाज कर रहे होंगे.
मैंने पूछा- मगर वो आपकी सुसु करने वाली जगह से क्यों प्रोटीन दे रहे थे?
मां मुस्कुराती हुई बोलीं- वो इसलिए बेटा, क्योंकि सुसु वाली जगह से मेरा पेट और पैर पास में है न. उधर से वहां तक जल्दी प्रोटीन पहुंच जाएगा और मैं जल्दी ठीक हो जाऊंगी.
मैं खुश होकर बोली- अच्छा तो ये प्रोटीन दवाई है और आप इससे जल्दी ठीक हो जाओगी?
मां ने कहा- हां बेटा, ऐसे ही अंकल मेरा फिर से इलाज करेंगे, तो मैं जल्दी ठीक हो जाऊंगी. लेकिन तुम ये किसी को मत बताना वर्ना सब तुम्हें ये बोलकर चिढ़ाएंगे कि तुम्हारी मां बीमार है.
मैंने कहा- ठीक है मां, मैं किसी को नहीं बताऊंगी.
यह कहकर मैं अपनी मां की बांहों में लेट गई.
इसके बाद तो लगभग हर बार मैंने अपनी मां को चुदते देखा … और हर बार अंकल मेरी मां को ऐसी ही बेरहमी से चुदाई करते थे.
पिछले बीस सालों से वो मेरी मां को चोद रहे हैं. मेरी मां अब भी दिखने में काफी सेक्सी हैं, तभी तो अंकल अभी भी उन्हें जमकर चोदते हैं.
दोस्तो, आज मैं आपको वो बताने जा रहा हूँ, जो आपने पहले शायद कभी न सुना हो।
मेरा नाम अमित है और मैं नासिक में रहता हूँ। मेरा अपना बिज़नेस है। जब काम थोड़ा बढ़ा तो मैंने अपनी एक ब्रांच पुणे में भी खोल ली, वहाँ मेरा भाई रहता है जो मेरा काम संभालता है।
काम के सिलसिले में मुझे अक्सर नासिक और पुणे आना जाना लगा रहता है, कभी ट्रेन से तो कभी अपनी कार से।
एक बार की बात है मैं अपने काम से नासिक से पुणे आ रहा था। रात के करीब साढ़े गयारह बज रहे थे, अभी नासिक से कोई 50-60 किलोमीटर ही आया था कि मैंने देखा सुनसान सड़क पर एक औरत सफ़ेद साड़ी में खड़ी मुझे हाथ का इशारा कर रही है।
पहले तो मेरी फट गई कि कहीं यह कोई भूत-वूत तो नहीं। मगर मैंने देखा, उसके पास ही एक टोयोटा कार खड़ी थी और उस लड़की ने भी पूरा मेकअप किया हुआ था, पूरे गहने पहने थे, शक्ल से तो भूत नहीं लग रही थी।
मैंने हिम्मत करके कार रोक ली।
वो मेरे पास आई और खिड़की के पास आकर थोड़ा झुकी, जब झुकी तो उसके गोरे गोरे बूब्स के दर्शन हुये, उसने मुझे ताड़ते देख लिया मगर बड़ी मीठी मुस्कान के साथ बोली- एक्सयूज मी, क्या आप मुझे थोड़ा आगे तक लिफ्ट दे सकते हैं, मेरी गाड़ी खराब हो गई है और आस पास कोई गैरेज भी नहीं है।
मैंने भी पूछा- इतनी रात को आप अकेली इस सुनसान रास्ते पे क्या कर रही हैं?
वो बोली- दरअसल मैं फिल्मों में असिस्टेंट आर्ट डाइरेक्टर हूँ, हमारी फिल्म की शूटिंग चल रही है और मैं वहीं जा रही थी।
मुझे बड़ी खुशी हुई, वैसे वो खुद भी किसी हेरोईन से कम नहीं थी, मैंने पूछा- कौन सी फिल्म की शूटिंग है, कौन कौन है फिल्म में?
वो मुस्कुरा कर बोली- चलते चलते बात करें?
मुझे बड़ा फील हुआ- अरे सॉरी, प्लीज़ आइये।
मेरे कहने पे वो मुझे उंगली से एक मिनट रुकने का इशारा करके अपनी कार के पास गई और कार में से अपना, पर्स, मोबाइल और एक बड़ा सा पैक उठा लाई, सामान कार में रख कर बोली- चलिये।
मैंने गाड़ी चला ली- इस बैग में क्या है? मैंने पूछा।
‘वो हमारी शूटिंग का समान है।’ उसने कहा।
‘ओके…’ मैंने कहा- क्या मैं आपका नाम जान सकता हूँ?
वो बोली- मेरा नाम रेखा है, और आपका?
मेरी हंसी निकल गई और हंस कर बोला- अमित…
सुन कर वो भी हंस पड़ी।
‘तो रेखा जी, कौन सी फिल्म की शूटिंग कर रही हो आप?’
वो बोली- अमित जी, अब हर किसी की किस्मत रेखा जी जैसी तो नहीं होती, मैं तो छोटी मोटी फिल्मों में काम करती हूँ।
मुझे हैरानी हुई- छोटी मोटी फिल्में, मतलब?
‘मतलब, बी ग्रेड फिल्में…’ वो थोड़ा शर्मा के मुस्कुरा के बोली।
‘ओ हो, तो शीला की जवानी, कच्ची कली, गुलाबी जिस्म, ऐसी फिल्में?’ मैंने थोड़ा शरारती अंदाज़ में पूछा।
‘जी बिल्कुल!’ वो बोली।
‘तो क्या आप फिल्मों में एक्टिंग भी करती हो?’ मैंने पूछा।
‘जी नहीं, मैं सेट डिज़ाइनिंग का काम करती हूँ’ उसने कहा।
‘ओके, तो आप वो बिस्तर सजाती हैं, जिस पर हीरो और हेरोइन प्रेम लीला रचाते हैं।’ मेरे ऐसा कहने पर वो झेंप गई पर बोली कुछ नहीं।
‘बाई द वे, आप एक्टिंग क्यों नहीं करती, आप तो माशा अल्ला खुद भी बहुत खूबसूरत हो, जवान हो, और क्या कहूँ, सब कुछ हो?’ मैंने उसके गोल गोल स्तनों की तरफ घूर कर देखते हुये कहा।
साड़ी के पल्लू में से झाँकता उसका यौवन जैसे मुझे अपनी तरफ खींच रहा था, मेरा मन किया कि पकड़ के इसके दोनों स्तन दबा दूँ, मगर मैंने अपने आप को काबू करके रखा।
वो बोली- मैंने एक फिल्म में काम किया है।
‘अच्छा, कौन सी?’ मैंने चहक कर पूछा।
‘गुलाबी रातें!’ वो बोली।
‘अरे नहीं, कब आई यह फिल्म, मुझे तो पता ही नहीं चला, मैं ज़रूर देखना चाहूँगा।’ दरअसल मैं तो उसके नंगे बदन को देखने की ख़्वाहिश मन में पाले बैठा था।
‘कोई फायदा नहीं, मैं उसमें हीरो की बहन बनी थी और मेरा फिल्म में सिर्फ 2 मिनट का रोल था, वैसा कुछ नहीं जैसा आप सोच रहे हैं।’
उसकी बात सुन कर हम दोनों हंस पड़े।
कुछ देर बातें करने के बाद मैंने सिगरेट निकली और उसे ऑफर की, उसनें डिब्बी से एक निकली और अपने होंठों में दबा ली।
मैंने कहा- अपनी सुलगाइएगा तो मेरी भी सुलगा दीजिये।
उसने दो सिगरेट अपने होंठों में ली और लाईटर से दोनों जला दी, मेरी सिगरेट पे उसके लिपस्टिक के निशान बन गए।
मैंने उसे देखते हुये पहले उसके लिपस्टिक के निशान को चूमा और फिर सिगरेट का कश लगाया।
वो मुस्कुरा कर बोली- आप तो, लगता है, ज़्यादा ही लट्टू हो गए मुझ पर?
मैंने कहा- अरे रेखा और अमित की आशिक़ी के किस्से तो सारी दुनिया में मशहूर हैं।
वो हंसी और बोली- न तो आप वो अमित हैं, और न मैं वो रेखा हूँ।
‘हाँ, वो वाले नहीं हैं, मगर खुद को वो समझ तो सकते हैं।’ मैंने कहा।
तो उसने बड़ी गहरी निगाह से मुझको घूरा।
खैर बातें चलती रही और गाड़ी भी हम दोनों एक दूसरे से लगातार बातें करते रहे, मैंने उसके और उसने मेरे बारे में एक दूसरे को बहुत कुछ बताया और हम दोनों बातों बातों में एक दूसरे के बहुत अच्छे दोस्त बन गए। हमने बहुत खुल कर बातचीत की, मगर मैंने एक मर्यादा से बाहर जाकर कुछ नहीं किया।
एलीफेंटा पहुँच कर मैंने गाड़ी रोकी और उस से पूछा- रेखा क्या लोगी?
वो भी मस्ती में बोली- कुछ मर्ज़ी ले आओ यार।
मैं दुकान से कोल्ड ड्रिंक, सोडा, नमकीन वगैरह ले आया, शराब मेरे पास गाड़ी में थी।
मैंने गाड़ी बढ़ाई और काफी आगे जा कर जब रास्ता सुनसान सा हो गया, गाड़ी रोक दी।
मैंने बोतल खोली और दो पेग बनाए- किसके साथ लोगी, कोल्ड ड्रिंक, सोडा, पानी?
वो बोली- सोडा और पानी मिक्स!
मैंने दोनों पेग बनाए, एक उसको दिया- अपनी दोस्ती के नाम!
‘दोस्ती के नाम…’ कह कर हम दोनों ने एक एक घूंट पिया।
उसके बाद तो बातों का जो दौर शुरू हुआ, पूछो मत।
हम दोनों आधी से ज़्यादा बोतल गटक गए, सुरूर दोनों को पूरा हो गया था, बेवजह बात बात पे हंसी, ठहाके चल रहे थे।
बात करते करते उसकी साड़ी का पल्लू गिर गया और उसके ब्लाउज़ के लो कट से उसके आधे स्तन बाहर दिखने लगे।
वो अपना पल्लू ठीक करने लगी तो मैंने रोक दिया- मत कर यार, फिर गिर जाएगा, तू फिर ठीक करेगी, यह फिर गिर जाएगा।
तो वो बोली- इसका मतलब यह कि मैं तुझे अपनी छातियाँ बाहर निकाल के दिखाऊँ, या तू खुद इन्हें देखना चाहता है?
‘जैसा तू ठीक समझे!’ मैंने कहा- अगर दिखाना चाहती है तो दिखा दे, मुझे कोई ऐतराज नहीं!’ मैं उसे आँख मार के बोला।
‘भोंसड़ी के, छातियाँ मेरी, तू कौन होता है ऐतराज करने वाला’। मुझे उसके मुँह से गाली थोड़ी अजीब लगी, मगर बुरी नहीं लगी।
‘अरे यार, अगर तू फिल्म में एक्ट्रेस होती तो भी तो दिखाती, अब दिखा दे।’ मैंने कहा।
‘तू देखेगा?’ उसने पूछा।
‘अरे लवड़े की… दिखाएगी भी या बातें ही बनाएगी?’ मैंने भी उसे गाली दे ही दी।
उसने मेरी तरफ देखा और बोली- ले देख, हारामी, ठरकी साले!
कह कर उसने अपने ब्लाउज़ के हुक खोले, और ब्लाउज़ ब्रा दोनों उतार दिये।
वाह… क्या शानदार चूचे थे उसके, एकदम मस्त, गोल, भरे हुये और तने हुए।
मैंने देखते देखते उसके दोनों बूब्स अपने हाथों में पकड़ लिए- ओह रेखा, तुम बहुत लाजवाब हो।
कह कर मैंने उसके निप्पल को मुँह लिया और चूसने लगा।
वो व्हिस्की पीती रही और मैं उसके बूब्स चूसता रहा। बूब्स चूसते चूसते मैंने उसके पेट, बगलों, गर्दन और जहाँ तक हो सका, उसे चूमा भी और अपनी जीभ से चाटा भी।
उसकी साँसों की रफ्तार से मुझे पता चल रहा था कि वो भी पूरी गर्म हो चुकी है। अब मैं सोच रहा था कि इससे पूछूं कि आगे का क्या प्रोग्राम है।
तभी वो बोली- अमित, लेगा मेरी?
अरे मुझे तो मुँह मांगी मुराद मिल गई थी, मैंने कहा- अब इतनी आगे आकर पीछे मुड़ने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता।
कह कर मैं अपनी शर्ट के बटन खोलने लगा तो वो बोली- यहाँ नहीं, रुको ज़रा, बाहर चलते हैं।
‘बाहर कहाँ?’ मैंने पूछा।
उसने अपनी साड़ी का पल्लू अपनी कमर में ठूँसा और कार पिछली सीट पे रखा पैक उठाया और बोली- मेरे पीछे आओ।
मैंने भी कार को लॉक किया और उसके पीछे पीछे चल पड़ा। हम दोनों सड़क छोड़ कर पैदल ही सुनसान वीराने में चलते गए।
सड़क से काफी दूर एक बड़े से झाड़ के पीछे जाकर उसने पैक खोला, उसमें बिस्तर सा था, बिस्तर बिछाया और उस पर लेट कर बोली- आ जाओ।
यह तो जन्नत का नज़ारा था।
मैंने झट से अपने सारे कपड़े उतार फेंके और बिल्कुल नंगा होकर मैं उसके ऊपर लेट गया। मेरे लेटते ही उसने मेरा सर पकड़ा और अपने होंठ मेरे होंठों से लगा दिये।
होंठ क्या, मैंने साथ की साथ अपनी जीभ भी उसके मुख में डाल दी, जिसे वो बड़े मज़े से चूसने लगी।
जब उसने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाली तो मैंने भी जी भर के उसकी जीभ को चूसा और दोनों हाथों से उसके स्तन भी दबा रहा था। खुले आसमान के नीचे सेक्स करने का अपना ही मज़ा है।
‘अब सब्र नहीं होता जानेमन, अब तो यह साड़ी भी उतार दो।’ मैंने कहा तो रेखा ने अपनी साड़ी और पेटीकोट दोनों उतार दिये।
चाँदनी रात में उसका गोरा बदन चमक रहा था। मैंने उसके दोनों जांघों को अपने हाथों से सहलाया, अपने होंठों से चूमा, दांतों से काटा और उसकी चूत पे चुम्बन भी लिया।
उसने अपने टाँगें फैला दी- अमित, चाटो इसे! उसने कहा और मेरा सर पकड़ कर अपनी चूत से सटाया।
मैंने बिना कोई हील हुज्जत किए अपनी जीभ से उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया।
थोड़ा सा चटवाने के बाद वो बोली- घूम जाओ अमित, मैं तुम्हारा लवड़ा चूसना चाहती हूँ।
मैंने वैसे ही किया, उसने मेरा लण्ड अपने होंठों में पकड़ा और चूसने लगी। कितनी देर हम एक दूसरे को ऐसे ही चूसते रहे, फिर मैंने कहा- अब असल मुद्दे पे आया जाए!
वो बोली- नहीं, मेरे फुद्दे पे आया जाए!
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और खिलखिला कर हंस पड़ी।
मैंने अपना लौड़ा उसकी चूत पर रखा और धीरे से अंदर धकेल दिया।
आह क्या एहसास था, इतना चाटने के बाद भी उसकी चूत बिल्कुल सूखी पड़ी थी, मैंने कहा- तुम तो बिल्कुल ड्राई पड़ी हो?
‘वो बोली- हाँ, पता नहीं क्यों और औरतों की तरह मेरे पानी नहीं छूटता, मेरा बॉय फ्रेंड भी यही कहता है, इसी लिए उसका 2-3 मिनट में ही हो जाता है, तुम्हें देखती हूँ, कितना टाइम लगाते हो।
उसने कहा तो मेरा तो प्रेस्टीज़ इशू बन गया, जो मैं सोच रहा था कि आराम आराम से करूंगा, अब तो मैं पूरा लण्ड उसके अंदर तक डाल कर बाहर निकाल रहा था और जब अंदर डालता था तो कोशिश करता था कि अंदर ज़ोर से चोट करूँ।
मगर वो तो मुझसे भी दमदार थी, मेरी हर चोट कर जवाब वो ऐसे सिसकारी भर के देती जैसे उसे बहुत ही आनन्द आ रहा हो।
और कोई औरत होती तो शायद मना ही कर देती। दूसरा मेरा ध्यान घड़ी पर था, दो मिनट हुये, तीन मिनट हुए, पांच मिनट भी हो गए, करते करते नौ मिनट हो चले थे, मगर न तो वो झड़ रही थी और न ही मैं झड़ रहा था।
हाँ मेरे लिए करना अब मुश्किल होता जा रहा था, मैं सोच रहा था मैं इसकी फाड़ दूँगा, मगर अब तो मेरी फट रही थी। मुझे ऐसे लगने लगा था जैसे मेरा तो लण्ड ही छिल जाएगा। मैं और ज़्यादा बेदर्दी से उसके स्तनों को दबा रहा था, अपने दाँतों से काट रहा था और वो ‘ओह अमित, कम ऑन फक मी फक मी’ कर रही थी।
एक बार तो मैंने सोचा, कि गेम बीच में छोड़ देता हूँ, मगर वो इतने जोश से मुझे हौंसला दे रही थी कि मेरा बीच में छोड़ने का मन ही नहीं कर रहा था।
हर थोड़ी थोड़ी देर बाद मैं ऊपर से थूक कर अपने लण्ड को गीला कर रहा था। मगर लण्ड तो जैसे… खैर उसकी तेज़ चीख़ों और कराहटों के बीच मैं करीब 12 मिनट उसकी चुदाई करने के बाद झड़ गया।
झड़ा क्या, मैं तो फारिग होकर कटे पेड़ की तरह एक तरफ को गिर गया।
उसके बाद मुझे कुछ होश नहीं रहा।
सुबह जब आँख खुली तो देखा के मैं सड़क से काफी दूर, वीराने में नंग धड़ंग लेटा पड़ा हूँ, मेरे सारे बदन और मुँह के अंदर तक रेत घुसी हुई थी, रेखा का या उसके सामान का कोई पता नहीं था, शायद वो चली गई थी, मगर कब और किसके साथ?
मैं उठा तो दर्द से बिलबिला उठा, मेरा लण्ड सूजा पड़ा था और लण्ड के हर तरफ खरोंचें ही खरोंचें पड़ी हुई थी।
मैंने सबसे पहले कपड़े पहने, अपना मुँह हाथ धोये और गाड़ी में बैठ कर सीधा पुणे की तरफ दौड़ा।
मेरी हालत बहुत खराब थी, पुणे पहुँच कर मैं सीधा अपने डॉक्टर दोस्त के पास पहुंचा।
जब मैंने उसको सबसे पहले अपना लण्ड निकाल के दिखाया तो वो छूटते ही बोला- तो मिल आए तुम भी रेखा से?
मुझे बड़ी हैरानी हुई, मैंने पूछा- तुम्हें कैसे पता?
वो बोला- तुम पहले आदमी नहीं हो, मेरे पास तुम से पहले भी कई आ चुके हैं।
‘मतलब?’ मैंने पूछा।
वो बोला- रेखा एक भूत है और अक्सर सड़क पे आने जाने वाले अकेले मर्दों को अपनी हवस का शिकार बनाती है, और जो तुम सोच रहे होगे कि तुमने उसको चोदा है, दरअसल उसके मायाजाल में उलझे तुम पत्थर या रेत पे ही अपना लण्ड घिसाते रह होगे, इसीलिए इसकी यह हालत हुई है।
मैं तो हैरान रह गया, मतलब मैंने एक भूत को चोदा या भूत ने मुझको चोदा?
कानों को हाथ लगा लिए तभी कि आज के बाद मैं न रात को किसी अकेली लड़की को लिफ्ट दूँ।
आप अपना देखना, अगर भूत की लेनी है तो रोक लेना गाड़ी।
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