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मेरा नाम राजेश है। मैं बड़ा सेक्सी ३० साल का लड़का हूं। मेरा Antarvasna लंड ८ इंच लम्बा है जो किसी भी चूत को फाड़ सकता है। मैं एक ओरिजिनल कहानी आपको बता रहा हूं। आज से दो साल पहले मेरे भाई के लड़के की शादी में मेरे मामा की लड़कीसोनम आयी थी। उसकी उम्र २६ साल थी, उसके एक बेटा था। देखने मेंसोनम की काफ़ी बड़ी बड़ी चूचियां थी। एक चूची इतनी बड़ी कि एक हाथ से पकड़ी न जाये। हर समय उसकी चूची उसके ब्लाउज़ से झांकती रहती थी। उसकी गांड का तो जवाब नहीं था, देखते ही मुँह में पानी आ जाए। साली को जब से देखा था मेरा लंड बेचैन हो गया था उसकी चूत मारने के लिये। उसकी चूत मेरे आँखों के सामने घुमती थी।
शादी सर्दियों की थी इस लिये एक कमरे में सब लोग सोते थे ज़मीन पर। मैने किसी तरह उसके पास सोने का इन्तजाम कर लिया। रात को मैने अपना एक हाथ उसकी चूची पर रख दिया और देखने लगा कि हरामजादी कुछ बोलती तो नहीं है। लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। मैं धीरे धीरे उसकी चूची को दबाने लगा, उसने फिर भी कुछ नहीं बोला। मेरी तो लोटरी खुल गयी। मैने उसके ब्लाउज़ का बटन खोल दिया और उसकी नंगी चूची को जोर जोर से दबाने लगा। वो पलट कर मेरी तरफ़ मुँह करके सो गयी। उसकी चूची मेरे मुँह के सामने थी। मैने उसकी चूची को चूसने लगा और उसका निप्पल टाइट होता गया। उसके मुँह से सिसकारी निकलने लगी। मैने उसके होंठों को चूसा। उसकी दोनो चूचियों का मर्दन करने लगा।
उसने जोर से मुझे पकड़ लिया, मैने उसकी साड़ी उठा दी कमर के ऊपर और अपना हाथ उसकी गरमागरम चूत पर रख दिया। उसकी चूत तो भट्टी की तरह गरम थी और गीली भी। मैने अपनी एक उंगली उसके चूत में घुसेड़ दी और अंदर बाहर करने लगा। वो पागलों की तरह मेरे को पकड़ ली और धीरे से बोली “राजा बहुत मजा आ रहा है, एक और उंगली डालो, एक से मेरा क्या होगा।” मैने उसकी चूत में अपनी चार उंगली डाल दी और चूत में उनको घुमाने लगा।सोनम सिहर उठी “अरे मेरे राजा जोर जोर से मेरी चूत को मारो, साले फाड़ दे इस चूत को, इसकी भूख खतम नहीं होती है। अ अ अ अ अ हा हा हा इस इस इस आ आ आ रे रे रे रे मीईएरीई राजा। मेरी चूत की चटनी बना दो। मैं मर जाउंगी। साले बोल मौका मिलेगा तो इस चूत को चोदेगा और इसकी भूख मिटायेगा। मादरचोद जोर जोर से कर”
उसने लुंगी के भीतर हाथ डाल कर मेरा लंड पकड़ लिया। “अरे तेरा लंड है या कुतुबमिनार, ये तो मेरी चूत को तार तार कर देगा। राजा वादा करो इस कुतुबमिनार को मेरी चूत में डालोगे” मैने बोला “अरे रंडी मैं तो तेरी चूत और गांड दोनो फाड़ुंगा, मैं तो मौका ढूंढ रहा हूँ, तेरी चूत तो पूरा इंडिया गेट है और इसको कुतुबमिनार जैसे लंड से ही चोदना होगा”। उसकी चूत में मेरा हाथ तेजी से अंदर बाहर हो रहा था और वो पूरे जोर से झड़ गयी। उसने मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर लोली पोप की तरह चाटने लगी और आखिर में मेरे लंड ने अंदर का सारा माल उसके मुँह में गिरा दिया और वो सारा पी गयी और बोली “राजा इसमें विटामिन होता है, इससे सारी बिमारियां दूर होती हैं। तुम समय देख कर मेरे चूत का विटामिन पीना, बड़ा मजा अयेगा” मेरी तो एक ही इच्छा है कि तेरा लोहे की तरह का लंड मेरी चूत को चोद चोद के उसकी चीथड़े कर दे, साली की भूख मिटती ही नहीं है”
दोस्तों शादी का घर था, ये अपना रोज रोज का प्रोग्राम हो गया था, मौका पा कर मैनेसोनम की चूत और गांड दोनो को मैने जी भर के मारा, जिसकी दास्तान आपको अगली बार बताउंगा। Antarvasna
हैलो Antarvasna, मैं विक्रम सिंह इंदौर से हूँ. आप सभी को मेरा नमस्कार. मैं इस साईट का बहुत पुराना पाठक हूँ. मुझे लगा कि मुझे भी अपने अन्य अनुभव आप लोगों से साझा करना चाहिए.
मेरी एक कहानी पहले भी आ चुकी है. दोस्त की बीवी की चुदाई. ये मेरी दूसरी सेक्स स्टोरी है.
मैं 23 साल का जवान लौंडा हूँ. मेरी हाईट 5 फिट 6 इंच है. मैं आकर्षक, गोरा हूँ.. भरा हुआ शरीर है.. पूरे 7 इंच का लम्बा और 2.5 इंच मोटा लंड है.
मेरे पास वाले फ्लैट में एक नई फैमिली आई है. उस फैमिली में सिर्फ पति पत्नी दो ही बन्दे रहते हैं. उनकी शादी अभी हाल में हुई है. मेरी उनसे बहुत अच्छी पहचान हो गई है. पति का नाम सुनील है और वो एक सेल्स मैनेजर है.. भाभी का नाम खुशबू है. सुनील भैया मुझे अपने भाई की तरह मानते हैं. उनका कोई भी सगा भाई या बहन नहीं है. खुशबू की और मेरी बहुत अच्छी दोस्ती हो गई है. हम कई बार अकेले रहते थे. सुनील भैया तो अपने काम के सिलसिले में महीने में कम से कम 15-18 दिन आउट ऑफ़ सिटी रहते थे. वो मेरे भरोसे पर खुशबू को अकेले रहने देते थे.
मैं और खुशबू एक दूसरे से हंसी मजाक भी खूब करते हैं. खुशबू बहुत ही शरारती लड़की है. खुशबू की उम्र अभी केवल 20 साल है और उसका फ़िगर 34-28-36 का है. एकदम दूध सा गोरा रंग और गुलाबी होंठ है. खुशबू बहुत ही सेक्सी लगती है. मैं कभी उसे छू भी लेता तो वो मुझे कभी मना नहीं करती थी.
एक बार खुशबू ने मुझे शाम को खाना खाने बुलाया. उस समय सुनील भैया दस दिनों के लिए टूर पर गए थे. मैं शाम को करीब 6:30 खाना खाने गया तो खुशबू खाना बना रही थी. उसने क्रीम कलर का गाउन पहना हुआ था, जिसमें उसकी ब्रा और पेंटी साफ़ नजर आ रही थी.
मैंने तो जिस दिन से उसे देखा था, उसे चोदने के लिए बेकरार था, लेकिन बस मौक़ा न मिल पाने के कारण अब तक कुछ नहीं कर पाया था.
उसने मुझसे बोला कि शिवा तुम कपड़े चेंज कर आओ, फिर आराम से बैठो.. अभी खाने में 30 मिनट लगेंगे.
मैं अपने फ्लैट में गया और कपड़े चेंज करके आ गया. फ़िर मैंने उससे पूछा कि मैं कोई मदद करूँ?
तो वो मुस्कुराते हुए बोली कि आज तो मुझे तुम्हारी हेल्प की ज्यादा जरूरत पड़ने वाली है.
मैंने पूछा- हां बताओ मुझे क्या करना है?
तो वो मुस्कुराते हुए बोली कि बता दूंगी.
मैं समझ गया कि आज तो ये चुदवाने के मूड में दिख रही है.
मैं टीवी ऑन करके मूवी देखने लगा. थोड़ी देर के बाद वो खाना लेकर टेबल पर लगा गई और मुझसे बोली- बस दो मिनट और.. मैं कपड़े चेंज करके आती हूँ.
वो अन्दर गई और ब्लू कलर का एक स्लीवलेस गाउन पहन कर आ गई, जिसमें वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी. इस गाउन में ऐसा लग रहा था कि उसके मम्मे ब्रा फाड़कर बाहर आना चाहते हों.
मैं उसे ललचाई नजरों से देखने लगा. वो मुस्कुरा दी. फिर दोनों ने खाना शुरू किया.. खाना खाते समय मैं उसके मम्मों को तिरछी निगाहों से देख रहा था. ये उसे भी समझ आ रहा था कि मैं उसके मम्मों को देख रहा हूँ. वो थोड़ी सी और झुकी तो उसके आधे मम्मे दिखने लगे. मेरी तो जैसे सांस हलक में आ गई.
वो मुस्कुराते हुए बोली कि ऐसे क्या देख रहे हो?
तो मैंने बोला- कुछ भी नहीं.
फ़िर वो बोली- मैं सब जानती हूँ.
ये कह कर वो मुस्कुराने लगी. हम दोनों ने खाना खाया और फ़िर थोड़ी देर टीवी देखने के बाद 8 बजे मैंने अपने कमरे में जाने का बोला.
तो वो बोली कि आज यहीं सो जाओ मुझे अकेले डर लगता है और आज सुनील भी नहीं है.. प्लीज़ यहीं सो जाओ ना.
मैंने कहा- ठीक है, लेकिन मैं कहां सोऊंगा?
तो वो बोली कि तुम यहीं इसी बेड पर मेरे साथ सो जाना.
मैंने बोला- ठीक है.
हम दोनों 10 बजे तक टीवी देखते रहे और बातें करते रहे. फ़िर मुझे पता ही नहीं चला कि कब मुझे नींद आ गई. रात को मुझे बाथरूम लगी तो मैं जाने के लिए उठा. तो मैंने देखा कि खुशबू भी मेरे पास ही सो गई है.
ये देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया. मैंने सोचा कि आज तो इसे चोद कर ही रहूँगा. मैं बाथरूम से आने के बाद वापस लेट गया और एक हाथ उसके मम्मे पर रख दिया. वो सो रही थी, फ़िर मैं उसके मम्मों को सहलाने लगा. वो तब भी नहीं जागी तो मैं उसकी जाँघों को सहलाने लगा. अब उसने मुझे देख लिया.
उसकी आँखें खुलते ही मैं चुपचाप सो जाने का नाटक करने लगा. तो वो कुछ नहीं बोली और फ़िर से सो गई.
थोड़ी देर के बाद उसने मेरे लंड पर अपना हाथ रख दिया और लंड सहलाने लगे. मैं ऐसे ही लेटा रहा और जब उसे लगा कि मैंने सो गया हूँ तो जरा मस्ती से लंड पर अपना हाथ चलाने लगी.
अब मैं अपने आप को रोक नहीं पाया. उसे अपनी बांहों में ले लिया और उसके गुलाबी होंठों को चूमने लगा. वो भी मेरा साथ देने लगी.
थोड़ी देर के बाद वो बोली- मुझे तुमसे प्यार हो गया है.. मुझे तुम्हारा लंड बहुत पसंद है.
हम दोनों एक दूसरे को चूमते चाटते रहे. उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिए. सिर्फ मेरी अंडरवियर रह गई थी. मैंने उसे मना कर दिया. फ़िर मैंने भी उसे पूरी तरह से नंगा कर दिया. उसके कमरे के नाईट लैम्प के रोशनी में मैंने उसका गोरा बदन देखा, बिल्कुल हीरे की तरह चमक रहा था. उसने भी मुझे पूरा नंगा कर दिया और मेरे लंड देख कर बोली- तुम्हारा लंड तो बहुत मोटा और लम्बा है. मेरे पति का लंड तो आपके लंड से आधा ही होगा. वो मुझे कभी भी संतुष्ट नहीं कर पाया शिवा.. आज तुम मेरी प्यास बुझा दो.
ये कहते हुए उसने मेरा लंड पकड़ लिया और प्यार करने लगी. मैंने भी उसके दोनों दूध थाम लिए और दूध चूसते हुए खुशबू को प्यार करने लगा. हम दोनों बिल्कुल मदहोश हुए जा रहे थे. उसके 34 इंच के दूध बड़े मस्त थे. एक दूध मेरे मुँह में था और एक हाथ में था. वो मेरे लंड को सहलाए जा रही थी. हम दोनों ने काफी देर तक चूमा चाटी की. उसने मेरा लगभग पूरा बदन चूमा. मैंने भी उसके पूरे बदन बड़ी बेताबी से चूमा.
इसके बाद जब चुदास चरम पर आने लगी तो मैंने उसके दोनों पैरों को फैलाया और उसकी चुत को चाटने लगा. उसकी चुत पर एक भी बाल नहीं था. मैंने उसकी चुत को चाट चाट कर गुलाबी कर दिया. वो भी चूत चटवाने से एकदम गरम हो गई थी और उसने अकड़ते हुए अपना पानी छोड़ दिया. मैं उसकी चूत का पूरा रस पी गया.
वो कुछ देर के लिए ठंडी हो गई थी. लेकिन लगातार चूत चाटते रहने से वो फिर से भड़क उठी और बोलने लगी- प्लीज़ शिवा जल्दी करो.. मैं अब और नहीं रुक सकती.
मैंने कहा- यार मैंने चूत चाटी है.. प्लीज़ तुम भी एक बार मेरा लंड चूसो न.
वो बोली- मैंने आज तक कभी लंड को मुँह में नहीं लिया है.
मैंने कहा कि आज मेरे लंड को अपने मुँह में ले लो.
उसने मेरे लंड मुँह में ले लिया. धीरे धीरे उसे भी लंड चूसने में मज़ा आने लगा. अब तो वो लंड को बड़े मजे से चूसने चाटने लगी. थोड़ी देर के बाद मैंने अपना सारा रस उसके मुँह में डाल दिया.
वो भी लंड चूसने में इतनी मस्त थी कि वो पूरा का पूरा रस पी गई और फ़िर मुस्कुराते हुए बोली- मुझे तुम्हारा रस बहुत ही अच्छा लगा.
अब हम दोनों फ़िर से 69 की पोजीशन में हो गए. मैं उसकी चुत को चूसने लगा और वो मेरे लंड को फ़िर से चूसने लगी. कुछ ही देर के बाद मेरा लंड फ़िर से खड़ा हो गया. मैंने सीधे होकर उसके दोनों पैरों को फैलाया और उसकी चुत पर अपना लंड रख दिया.
मेरे लंड का सुपारा बड़ा मोटा है और इसलिए सुपारे को चूत की फांकों में लगाने से ही उसकी चुत ढंक चुकी थी. कुछ पल मैं उसकी आँखों में आँखें डाल कर उसकी चुत पर अपना लंड ऐसे ही रगड़ता रहा.
दो पल में ही वो बेचैन होकर बोली- शिवा प्लीज़ जल्दी से मेरी चुत में अपना लंड डाल दो.
मैंने उसकी गांड के नीचे एक तकिया लगाया और थोड़ा सा ही जोर लगाया तो मुझे समझ आ गया कि उसकी चुत एकदम कसी हुई है. अब मैंने थोड़ा जोर लगाया और लंड के अन्दर जाने के बाद उसको देखा तो वो थोड़ा दर्द झेलती हुई सी लगी. मैंने उसे पकड़ा और एक जोरदार धक्का मार दिया. मेरे इस तगड़े शॉट से भी उसकी चुत में मेरा लंड सिर्फ 3 इंच ही घुस पाया.
उसी वक्त उसके मुँह से जोरदार चीख निकल पड़ी- आआह.. ऐईईईईइ मार डाला.. प्लीज़ निकाल लो.. मैं मर जाऊंगी.
लेकिन मैं नहीं रुका और मैंने जोर जोर से 3-4 धक्के दे मारे. इस कारण मेरा लंड उसकी चूत में 5 इंच तक अन्दर कर दिया.
वो और जोर से चीख पड़ी- आआआह.. आईईई.. माँआ.. माआअर डाला शिवा.. मेरी चुत फट गई.
मैंने बोला- कोई बात नहीं डार्लिंग.. थोड़ी देर रुको.
लेकिन वो दर्द से तड़फ रही थी. वो बोली- प्लीज़ निकालो पहले.
उसकी चुत से खून बाहर आ रहा था. मैं एक बार तो चौंक गया कि क्या इसके पति के पास लंड ही नहीं है. फिर मैंने सोचना बंद कर दिया. अब मैं उसके मम्मों को सहलाने लगा और उसके होंठों को चूमने लगा. थोड़ी देर तक मैं इसी तरह से शांत लेटा रहा.
फ़िर मैंने धीरे धीरे लंड को उसकी चुत के अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया. बस थोड़ी देर के बाद वो सामान्य हो गई और मेरा साथ देने लगी. अब वो भी अपनी गांड नीचे से उछाल उछाल कर चुदवाने लगी.
मैंने उसको आँख मारी तो फिर वो मुस्कुराते हुए मुझसे बोली- तुमने तो मुझे मार ही डाला था.. तुम्हारा लंड तो बहुत ही मोटा और लम्बा है.
फ़िर मैंने बोला- अभी पूरा अन्दर नहीं गया है.. अब पेल रहा हूँ.
अभी वो कुछ कहती कि मैंने उसको पकड़ा और एक जोरदर धक्का दे मारा. वो फ़िर से चीख पड़ी- ऊऊईईई माँआ मर्रर्रर्रर्र गई.. फाड़ दी मेरी चुत.. शिवा धीरे करो ना..
मैंने कहा- अब पूरा चला गया.
फ़िर मैं लंड को अन्दर बाहर करने लगा. थोड़ी देर के बाद उसे भी मजा आने लगा और वो भी मेरा साथ देने लगी. थोड़ी देर चोदने के बाद उसका पानी निकल गया. चिकनाई हो जाने के कारण बड़े मजे से लंड अन्दर बाहर सटासट हो रहा था. मैंने उसको चोदने को रफ्तार बढ़ा दी.
फ़िर 20-25 मिनट के बाद मैंने भी अपना पूरा का पूरा रस उसकी चुत में ही छोड़ दिया. हम दोनों एक दूसरे को चूमने चाटने लगे. मैं उठा और बाथरूम में जाने लगा.
वो बोली- शिवा मुझसे भी साथ ले चलो क्योंकि मैं चल नहीं पा रही हूँ.
मैं उसे अपनी गोद में उठाकर बाथरूम में ले गया. उसकी चुत पूरी खून से लथपथ थी. मेरा लंड भी लाल हुआ पड़ा था. उसने मेरे लंड को पानी से साफ़ किया और मैंने उसकी चुत को साफ़ किया.
हम दोनों फ़िर से बिस्तर पर जाकर लेट गए. थोड़ी देर के बाद वो मुझे चूमने चाटने लगी. मुझसे कहने लगी- शिवा मुझे तुम्हारा लंड बहुत पसंद आया है.. और तुम बहुत अच्छे से चोदते हो.
ये कह कर वो मेरे लंड को प्यार करने लगी और मुँह में लेकर चूसने लगी. हम दोनों फिर से 69 की पोजीशन में हो गए. थोड़ी देर तक मैं उसकी चुत चूसता रहा. उसने जल्दी ही अपना पानी छोड़ दिया.
कुछ देर रुकने के बाद मैंने उसे डॉगी स्टाइल में चोदना शुरू कर दिया. मैंने पीछे से उसकी चुत पर अपना लंड रखा और एक जोरदार धक्का दे मारा.
इस झटके में मेरा लंड 4 इंच अन्दर चला गया.
उसकी जोर से चीख निकल उठी- आआआह.. आऐईईइ मार ही डालोगे क्या.. धीरे धीरे करो ना..
मैं उसके मम्मों को सहलाने लगा और उसके शांत होते ही मैंने फ़िर से एक और जोरदार धक्का दे मारा. इस धक्के ने मेरे पूरे लंड को उसकी चूत के अन्दर पेल दिया था.
वो फ़िर से चीख उठी- ऊऊऊ ऊईईईईईईई म्मम्म आआआह.. मअर्रर्र गई.
मैं उसे चोदने लगा और फ़िर धीरे धीरे वो भी सामान्य हो गई और मेरा साथ देने लगी. दस मिनट चोदने के बाद उसका पानी निकल गया.
लेकिन मैं उसे इसी तरह चोदता रहा. फ़िर मैंने आसन बदला और अब उसे अपने ऊपर ले लिया. वो अपने दोनों पैर फैला कर मेरे लंड पर बैठ गई. मैंने नीचे से धक्का मार कर अपना पूरा लंड चूत के अन्दर फिट कर दिया.
उसकी फ़िर से चीख निकली- ऊऊईईईई माँआ.. मर्रर्रर्रर्र गई.
मैं उसके चूचों को सहलाने लगा और बोला- कैसा लग रहा है?
तो वो बोली- मुझे तो जन्नत की सैर होती सी लग रही है. ऐसा मज़ा तो मुझे मेरे पति कभी नहीं दिया.
मैंने अपने लंड को एक ठोकर मारी तो वो ऊह.. करते हुए मुस्कुराई और बोली- शिवा मुझे चोद डालो फाड़ दो मेरी चुत को.. आह.. और जोर से चोदो मुझे..
मैं उसे तेजी से चोद रहा था. फ़िर मैं उसके मम्मों को और होंठों को चूसते हुए चोदने लगा. उसे भी मम्मे चुसवाते हुए चुदने में मजा आ रहा था.
इसी तरह मैं उसे देर तक चोदता रहा. वो फिर से झड़ गई. मैं उसे 30-40 मिनट तक चोदता रहा और फ़िर मेरा भी रस निकल गया. मेरे रस से उसकी पूरी चुत लबालब भर गई. हम दोनों दो बार की चुदाई से थक गए थे, इसलिए थोड़ी देर नंगे ही सो गए. रात भर में मैंने उसे 4 बार चोदा.
फ़िर सुबह वो उठी तो मुझसे बोली- शिवा मैं ठीक से चल नहीं पा रही हूँ.. मुझे नहाना है.
हम दोनों ने साथ में ही नहाया. मैंने उसके पूरे बदन पर साबुन लगाया और उसने मेरे बदन पर साबुन लगाया. हम दोनों एक दूसरे को चूमने चाटने लगे. वो मेरे लंड को सहलाने लगी. मैं भी उसकी चुत को सहलाने लगी. वो नीचे झुक कर मेरा लंड चूसने लगी.
थोड़ी देर तक लंड चूसने के बाद मैंने उसको बाथरूम में ही डॉगी स्टाइल में चोदना शुरू कर दिया और 20-25 मिनट चोदने के बाद हम दोनों झड़ गए.
फिर हम नहाए और बाहर आ गए. वो नाश्ता बनाने चली गई. उसने सिर्फ लाल रंग की ब्रा और पेंटी पहनी थी, जिसमें वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी. मैंने उसके किचन में ही उसकी ब्रा और पेंटी निकाल कर उसको नंगा कर दिया और उसके मम्मों को चूसने लगा. वो फिर से गरम हो गई. मैंने उसे किचन की स्लैब पर बिठा दिया और फ़िर उसके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख कर उसकी चुत पर लंड रख दिया. इसके बाद 3-4 धक्कों में ही मैंने पूरा लंड उसकी चूत में अन्दर पेल दिया. इस आसन में लंड ने हाहाकार मचा दिया था.
उसके मुँह से चीख निकल गई- ऊऊऊऊ उईईईई म्मम्मर गई.. आआह.. उम्मम्मा.. आआह.. धीरे शिवा धीरे करो ना..
लेकिन मैं उसे चोदता रहा और 20 मिनट तक हचक कर चोदने के बाद ही रुका. वो अब तक 3 बार झड़ चुकी थी.
फ़िर हम दोनों ने नाश्ता किया और थोड़ी देर आराम करने के बाद मैं बाजार से एक ब्लू फिल्म की सीडी लाया. हम दोनों ने साथ में मूवी देखना शुरू की. मूवी चले दो मिनट भी नहीं हुए थे कि हम दोनों एक दूसरे को रोक नहीं सके. हम दोनों ने एक दूसरे को नंगा कर दिया और चूमने चाटने लगे.
खुशबू मेरे लंड को चूसने लगी. फ़िर मैंने उसे डॉगी स्टाइल में उसकी गांड में अपना लंड पेलने लगा. उसे बहुत ज्यादा दर्द हो रहा था. वो मना करने लगी. मैंने उसे जैसे तैसे मनाया और धीरे धीरे उसकी गांड में लंड डालना चालू किया.
अभी सिर्फ मेरे लंड का टोपा ही अन्दर गया था कि वो चीखने चिल्लाने लगी और बोली- मुझे नहीं मरवाना गांड.
मैंने उसके मम्मों को पकड़ा और जोर जोर से धक्के देता चला गया. मैंने पूरा का पूरा लंड उसकी गांड में डाल दिया
उसके मुँह से जोर से चीख निकल गई- आआआहह.. आऐईईईइ मर गई.. आआह मार डाला शिवा.. मैं मर गई.. ऊऊऊ ऊऊईईई ईईईई माँआअन्न.. मार डाला.
फिर 10-12 मिनट के बाद वो चुप हो गई और मेरा साथ देने लगी. इस तरह मैं उसकी गांड मारने लगा.
करीब 20-30 मिनट तक मैं उसकी गांड मारता रहा. फिर लंड को गांड से निकाल कर पीछे से ही चूत में लंड पेल दिया. पांच मिनट तक उसकी चुत चोदने के बाद मैंने उसकी चुत में ही पानी छोड़ दिया. दिन में 2 बजे तक मैंने उसकी गांड को 3 बार मारा.
फ़िर हम दोनों सो गए. शाम को खाना खाने बाहर चले गए. रात को 8 बजे से हम दोनों नंगे ही लेट गए और बातें करने लगे.
फ़िर कुछ देर बाद हम दोनों ने एक दूसरे को चूमना चाटना शुरू कर दिया.
मैंने उस रात खुशबू को 4 बार चुत तरफ से चोदा और 2-3 बार उसकी गांड मारी. सुबह फ़िर से मेरे ऊपर चढ़ कर उसने मेरा लंड अपनी चूत के अन्दर ले लिया. लेकिन वो इतनी चुदाई के बाद ठीक से लंड अन्दर नहीं ले पा रही थी. उसे थोड़ा दर्द हो रहा था.
मैंने उसका साथ दिया और उसकी चुत पर स्ट्रोक लगाने शुरू कर दिए.
वो मादक सिसकारियां लेते हुए ‘स्ससीईईईई ईइस्स स्सस उफ़्फ़फ़ उफ़्फ़ क्या लंड है शिवा.. काश मैंने तुमसे शादी की होती.. उईईई माँआआन्न मार डाला शिवा.. और ज़ोर से चोदो मुझे..’
इस तरह खुशबू को चोदते चोदते मैंने रस उसकी चुत में ही डाल दिया.
हम दोनों ने साथ में नहाने के बाद आराम किया और खाना खाया.
फ़िर हम दोनों सो गए और शाम को 4 बजे हम दोनों एक दूसरे को चूमने चाटने के साथ ही फिर से चुदाई का प्रोग्राम चालू कर दिया.
खुशबू इसनी मस्त थी कि वो चुदते हुए मादक सिसकारियां ले रही थी- उफ़्फ़फ़ उफ़्फ़ क्या लंड है शिवा तुम्हारा.. दिल करता है तुमसे दिन रात चुदवाती रहूँ.
मैंने उसे शाम से लेकर सुबह तक कई बार चोदा और 3 बार उसकी गांड भी मारी.
वह बोली- आज तुमने मुझे वो मज़ा दिया है, जिसके सपने मैंने बचपन से देखे थे.. आई लव यू शिवा..
इस तरह मैं उसे 12 दिन तक चोदता रहा. उसके बाद सुनील जब भी बाहर गया हम मजा लेना शुरू कर देते.
Antarvasna stories...
मैं एक बार लिफ्ट लेने के Antarvasna लिए खड़ा था, मैंने कई लोगों से लिफ्ट माँगी, पर मिली नहीं। तो मैं एक गाना गुनगुनाते हुए आगे बढ़ चला, तभी थोड़ी देर में एक स्कूटी से एक बेहद स्मार्ट लड़के ने मुझे लिफ्ट दी। मैं बैठ गया, दोनों में बातें होने लगीं।
उसने पूछा कहाँ जाना है, मैंने कहा कि मुझे किसी शराब की दुकान तक जाना है, उसने पूछा कि आप कौन सी ब्राँड पीते हैं? और फिर ब्राँड को लेकर हमारे बीच बातें होने लगीं। तभी मैंने देखा कि वो एक हाथ से स्कूटी चला रहा है, मैंने सोचा, कि उसका एक हाथ किधर है?
कुछ देर बाद मैंने महसूस किया कि उसका दूसरा हाथ मेरे लण्ड को पकड़ने की कोशिश कर रहा था, जब वो छू नहीं पाया तो वो बोला- ठंड लग रही है, थोड़ा और आगे हो जाओ। मैं उसके इरादे समझ चुका था, मैं उसके बेहद नज़दीक सटकर बैठ गया, तभी वो मेरे पैन्ट की चेन खोलने की कोशिश करने लगा, थोड़ी ही देर में वह कामयाब भी हो गया। उसने मेरा लण्ड पकड़ लिया और उत्तेजित करने वाली बातें करने लगा।
उसने पूछा- तुमने कभी किसी को चोदा है या नहीं।
मैंने उत्तर दिया- अभी तक तो नहीं किया।
‘क्या तुम चोदना चाहोगे?’
‘क्यों नहीं!’
‘मेरी गाण्ड मारना पसन्द करोगे?’ उसने प्रश्न किया।
‘आज तक तो नहीं मारी!’ मैंने उत्तर दिया।
‘कोई बात नहीं!’ कहकर उसने मेरा लौड़ा पकड़ लिया
मैंने कहा- यहाँ बहुत से लोग आ-जा रहे हैं, कहीं दूर चलते हैं!
तो उसने एक सुनसान इलाके में ले जाकर गाड़ी रोकी, मैंने कहा- मैं पेशाब करूँगा!
और मैं गाड़ी से उतरकर ज्यों ही पेशाब करने लगा, तब तक वो भी आ गया और मेरा लौड़ा देखकर वो बोला- कितना लम्बा है!
मैं आपको बताना भूल गया कि मेरा लण्ड 9 इन्च लंबा और 3 इन्च मोटा है।
तभी उसने पूछा- क्या तुम अकेले रहते हो?
मैंने उत्तर दिया- हाँ!
‘अगर तुम चाहो तो हम वहीं चलें?’ उसने योजना बताई।
‘अच्छा विचार है!’ मैंने भी हामी भर दी.
हम दोनों दारू लेकर कमरे में चले आए, और दारू पीने लगे। उसने दारू पीते-पीते ही मेरी पैन्ट की ज़िप खोल दी और लण्ड पकड़ लिया और दारू पीना छोड़कर मेरा लौड़ा चूसने लगा।
थोड़ी देर में मैं भी जोश में आ गया। मेरे मन की बात समझते हुए उसने अपनी पैन्ट उतार दी।
उसकी गाण्ड देखकर मेरा लण्ड उसकी गाण्ड में जाने के लिए बेक़रार हो गया।
मैं उसे किस करते हुए, उसकी गाण्ड में ऊँगली करने लगा। उसके बाद मैं उसकी गाण्ड मारने लगा। मैंने 20-25 मिनट तक उसकी गाण्ड मारी।
जब मैं उसकी गाण्ड मार रहा था तो वह बहुत आवाज़ें कर रहा था और आआहहहह सीसीसस्स्स्सी की आवाज़ें उसके मुँह से आ रहीं थीं। उस दिन बहुत मज़ा आया।
मैंने पूछा कि ‘चूत का इन्तज़ाम नहीं कर सकते हो?’ तो उसने कहा कि ‘इन्तज़ाम हो सकता है। मेरी बीवी है जो मुझसे खुश नहीं रहती है, मैं उसे खुश नहीं रख सकता हूँ। तुम दोनों का काम कर सकते हो। मेरी गाण्ड और बीवी की चूत चोदते रहना।’
उस दिन के बाद कई बार उसके घर गया, पहले उसे खुश करता था, तब वो मुझे उसकी बीवी के पास जाने देता था। मैंने उसकी बीवी को कई बार चोदा, उसका भी दिल खुश हो गया। तो बाद में वह भी बहुतों बार मेरे कमरे पर आई और मैंने उसकी जमकर ठुकाई की।
कुछ महीनों के बाद मैं भोपाल चला गया, वो दोनों भी कहीं चले गए, वैसे मैं कई बार पहले सेक्स कर चुका हूँ, पर गाण्ड मारने में मुझे बहुत मज़ा आता है। Antarvasna
मैं संजू जगदलपुर, बस्तर, छत्तीसगढ का Sex stories रहने वाला हूं। मैं कुछ माह से या कहें कि साल भर से शहर में नहीं हूं, इसलिये मैं अपने साथ बीते कुछ हसीन पल आप लोगों के समक्ष नहीं रख पा रहा था। मगर इस बीच मैंने दूसरे शहर में खूब मज़ा लिया। हर दूसरे तीसरे दिन कोई ना कोई नया माल मिल जाता था, जिसकी मैं जम कर चुदाई करता था।
मगर मेरे शहर में जो भाभी मेरे लन्ड का सपना देख रही थी, उससे मैं वाकिफ़ नहीं था। आज से १७ दिन पूर्व में ९ माह १० दिन तथा १२ घण्टे पूरे कर जब मैं जगदलपुर अपने घर पहुंचा तो मेरे पड़ोस में रहने वाली रजनी भाभी मुझे देख कर मुस्कुराने लगी। मैं भी उनकी खुशी के लिये थोड़ा मुस्कुराया।
अगले दिन सुबह जब घर के बाहर ब्रश कर रहा था तो वो मुझे देख देख कर मुस्कुराने लगी। मैं रजनी भाभी को कभी उस नज़र से नहीं देखता था। मगर मैं एक नम्बर का चोदरा तो जरूर हूं। न जाने ९ महीने बाद भाभी ने मुझ में ऐसा क्या देख लिया। लम्बी छुटटी के बाद मैं सुबह १० बजे आफ़िस के लिए निकला। महज १६० मीटर की दूरी पर रजनी भाभी का घर है। उन्होने मुझे रोका और कहा कि अब तक कहां थे? मैंने बताया कि भाभी मैं टरेनिंग पर था। भाभी ने कहा- ठीक है। लम्बा समय बाहर बिता कर आ रहे हो, किसी दिन खाने पर आओ। मैंने हामी भर दी मगर ये नहीं कहा कि कब। एक सप्ताह बीत गया, रोज जब मैं सुबह ब्रश करता, वो मुझे खिड़की से देख देख कर मुस्कुराती। चूंकि मेरी आदत है कि ब्रश मैं घर के बाहर ही करता हूं। मेरे जहन में यह सवाल उठता था कि वो क्यों मुस्कुराती है जबकि मैं उसे उस नज़र से नहीं देखता।
रविवार का दिन था। मैं तैयार हो कर आफ़िस के लिए निकला। रजनी भाभी मुझे देख कर अपने घर के मेन गेट के सामने खड़ी हो गई और मुझे आवाज़ देकर बुला कर खाने पर आने को कहा। मैने जवाब दिया कि भाभी मैं कुछ काम पूरा कर के आता हूं।
लगभग ११:३० बजे होंगे जब मैं भाभी के घर पहुंचा। भाभी गेट पर ही खड़ी थी और उन्होने मुझे अन्दर चलने को कहा। मैने चलते चलते भाभी से पूछा कि घर में कौन कौन है, तो भाभी भावुक होकर बोली कि घर में कोई नहीं है हम दोनो को छोड़ कर।
फ़िर भाभी ने अपना फ़िगर दिखाना शुरू किया तो मैं उत्तेजित हो गया और बिना दरवाजा बंद किए भाभी के बूब्स मसलने लगा। काफ़ी बड़े बड़े बूब्स हैं उनके। उसके बाद से तो मैं उन पर टूट पड़ा। जिस महिला को कभी उस नज़र से नहीं देखा था, वो इतनी सेक्सी होगी, मुझे मालूम नहीं था। कुछ देर बाद हम शांत हुए और दरवाजा बंद करके उनके बेडरूम में चले गये। वहां भाभी ने बताया कि उनके पति दो हफ़्ते के लिए बाहर गए हैं और मेरा लन्ड लेने की उनकी इच्छा कब से है।
खैर उस दिन भाभी के बेडरूम में जाने के बाद खाना खाने की भूख तो नहीं लगी, जिस्म की ही भूख ज्यादा थी तब।
भाभी अपने आप पूरी तरह नंगी हो गई, मैं कपड़े पहने था। मैं कुछ जल्दी में था तो फ़टाफ़ट अपने कपरे उतार कर भाभी की जम कर चुदाई की और निकल गया वहां से। उसके बाद मेरा रास्ता हमेशा के लिए खुल गया और अकसर हम मज़ा करते हैं कभी दिन तो कभी रात को। आगे की कहानी फ़िर कभी। Sex stories
“ओह … मीनू … सच Antarvasna कहता हूँ मैं इन तीन दिनों से तुम्हारे बारे में सोच सोच कर पागल सा हो गया हूँ। लगता है मैं सचमुच ही तुम्हें पर … प्रेम … ओह … चाहने लगा हूँ। पर ये सामाजिक बंधन भी हम जैसो की जान ही लेने के लिए बने है !” भैया की आवाज कांप रही थी।
“भैया क्या आपने कभी सोचा कि मैं आपके बारे में क्या सोचती हूँ ?”
“क… क्या मतलब ?” अब उनके चौंकने की बारी थी।
“हाँ भैया मैं भी आपसे प्रेम करने लगी हूँ !” मैंने अपनी नजरें झुका ली।
“ओह… मेरी मीनू मेरी मैना मेरी जान” और भैया मुझ से लिपट ही गए। उन्होंने मुझे अपने बाहों में भर लिया और मेरे होंठों पर एक चुम्बन ले लिया। आह … वो प्यार का पहला चुम्बन मुझे अन्दर तक रोमांच से भिगो गया। मेरा तन मन सब कुछ तो उसी एक छुवन की लज्जत से सराबोर हो गया। मैंने भी अपने जलते होंठ उनके होंठों पर रख दिए।
मुझे नहीं पता कितनी देर हम लोग इसी तरह एक दूसरे को चूमते रहे। हम तो जैसे अपनी सुधबुध ही खो बैठे थे। मैं तो उनसे ऐसे लिपटी थी जैसे कोई लता किसी पेड़ से। बाहर जोर की बिजली कड़की तब हमें होश आया। भैया ने झट से उठ कर कमरे का दरवाजा बंद किया और फिर वापस आकर मुझे अपने आगोश में भर लिया।
“मीनू कहीं हम गलत तो नहीं कर रहे ?”
“ओह … भैया अब कुछ मत सोचो। इस रात और इन हसीन लम्हों को यादगार बना लो। छोड़ो इन पुरानी दकियानूसी बातों को !”
और फिर ……………….
उन्होंने मुझे कस कर अपनी बाहों में भर लिया और मेरी लुंगी को खींचने लगे। मैंने कहा “नहीं पहले लाइट बंद करो !”
उन्होंने झट से लाइट बंद कर दी और मुझे अपनी बाहों में भर लिया। खिड़की से हलकी रोशनी आ रही थी। अब उन्होंने अपने और मेरे कपड़े निकाल फेंके। अब हम दोनों ही एक दम नंगे थे। मेरी मुनिया तो कब की पानी छोड़ छोड़ कर पीहू पीहू कर रही थी। मैंने शर्म के मारे अपने दोनों हाथ अपनी मुनिया के ऊपर रख लिए।
“मीनू मेरी जान ! अब शर्म छोड़ो ! मुझे अपनी इस प्यारी मुनिया को प्रेम करने दो !”
प्रेम ने मेरे हाथ परे कर दिए। मैं चित्त लेटी थी। मेरी जांघें आपस में कसी हुई थी। एक अनजाने डर और रोमांच से मैं तो लबालब भरी हुई थी। उन्होंने अपना एक हाथ धीरे से मेरी पिक्की की केशर क्यारी पर फिराया। और फिर अपने जलते हुए होंठ मेरी मुनिया के होंठो पर जैसे ही रखे मेरी एक हलकी सी किलकारी निकल गई। फिर अपनी जीभ से मेरी मुनिया की गुलाबी पंखुडियों को चूम लिया और फिर उसे चाटना शुरू कर दिया तो मेरी बंद जांघें अपने आप खुलने लगी।
फिर उन्होंने अपने दोनों हाथों से मेरी पिक्की की दोनों फांकों को चौड़ा किया। शहद की कुप्पी जैसी लाल गुलाबी रंगत वाली प्रेम रस में सराबोर हुई अनछुई पिक्की हलकी ‘पुट’ की आवाज के साथ खुल गई। उन्होंने अपनी जीभ से उसे चाटना शुरू कर दिया। मेरे मुंह से सहसा निकल पड़ा “उई ……. माँ …….” अरे अभी तो उन्होंने दो तीन बार ही जीभ फिराई थी मेरी पिक्की तो निहाल ही हो गई और अपने प्रेम रस की 4-5 बूंदें उन्हें समर्पित कर दी। वो तो मस्त होकर उसे चाट ही गए। मैं सीत्कार पर सीत्कार करने ली। मेरे पैर अपने आप ऊपर उठ गए और मैंने उनकी गर्दन के चारों और लपेट लिया। वो कभी मेरे नितम्बों को सहलाते कभी मेरे गोल मटोल उरोजों को दबाते। मैं तो सातवें आसमान पर थी।
“ओह… प्रेम बस करो ! मुझे कुछ होता जा रहा है।”
मेरा शरीर अकड़ने लगा और साँसे तेज होने लगी। मुझे लगा जैसे कहीं मैं अनजाने खुमार और उन्माद में डूब रही हूँ। मैंने उनके सिर के बालों को जोर से पकड़ लिया और अपनी पिक्की की और दबा दिया। और उसके साथ ही मेरी किलकारी निकल गई और मेरी पिक्की ने गरम गरम प्रेम रस की जैसे बौछार ही चालू कर दी। आह … इतना मजा तो कभी हस्तमैथुन करके भी नहीं आया था। शमा सच कह रही थी इस लज्जत (स्वाद) से अब तक मैं तो अनजान ही थी। प्रेम पूरा का पूरा रस चटखारे लेकर पी गया।
“ओह मेरी मैना ! मेरी जान ! मजा ही आ गया ” प्रेम ने उठते हुए कहा। मेरा शरीर अब भी रोमांच से काँप रहा था। वो मेरे ऊपर आ गए। और मेरे होंठों को चूसने लगे। उनके होंठों पर लगे मेरे प्रेम रस का नमकीन और कुछ खट्टा सा स्वाद मुझे भी मिल ही गया। वो कभी मेरे गालों को कभी मेरे होंठो को कभी गले को कभी उरोजों को चूमते ही जा रहे थे। फिर उन्होंने अपना मुंह मेरे अमृत कलशों (उरोजों) पर लगा दिया और उनकी चने के जितनी बड़ी निप्पल्स को चूसना चालू कर दिया। कभी वो एक उरोज को पूरा मुंह में भर लेते और चूसते और कभी दूसरे को। मेरी तो सीत्कार ही निकलती जा रही थी।
अचानक मेरा हाथ उनके ‘उस’ से टकराया। ओह… मुझे शर्म आ रही है उसका नाम लेते हुए। आप समझ रहे हैं ना। लगभग 7” लम्बा और 1 ½ “ मोटा उनका पप्पू तो अकड़ कर जैसे लोहे की रॉड ही बना था। उसका रंग सांवला सा था। वो तो ऐसे खड़ा था जैसे किसी बन्दूक की मोटी सी नाली हो और बस घोड़ा दबाने का इंतज़ार कर रहा हो. और सुपाड़ा तो जैसे कोई लाल टमाटर ही हो । मैंने आज पहली बार किसी का “वो” इतने नजदीक से देखा था। मैंने प्यार से उसे छुआ तो वो तो फुफ्कारे ही मारने लगा। मैंने धीरे धीरे प्यार से उसे सहलाना शुरू कर दिया तो उसने भी ठुमके लगाने चालू कर दिए। मैंने जब सुपाड़े पर अंगुली फिराई तो मुझे कुछ लेसदार सा चिपचिपा सा महसूस हुआ। शमा बताती है ये प्री कम होता है। कुछ नमकीन सा होता है और इसका स्वाद बहुत ही मजेदार होता है। मेरा जी तो कर रहा था कि उसे मुंह में ले लूं पर शर्म के मारे मैं उसे मुंह में नहीं ले पाई।
“मीनू मेरी जान क्या तुम तैयार हो ?” उन्होंने मेरे होंठ चूमते हुए पूछा।
“किसके लिये ?”
“ओह ये भी बताना पड़ेगा क्या ?”
“हाँ बताये बिना तो मैं कैसे समझूंगी ?”
“अब चुदाई करनी है मेरी मैना !” उन्होंने मेरी नाक पकड़ते हुए मेरे होंठों पर एक चुम्बन ले लिया।
“ओह… भैया आप बहुत गन्दा बोलते हो ?”
“अब चुदाई को तो चुदाई ही कहा जाएगा और क्या बोलूँ ?”
“नहीं …ये गन्दा शब्द है हम इसे प्रेम मिलन कहेंगे ‘वो’ नहीं ?”
“वो क्या ?”
“ओह भैया आप फिर… नहीं मुझे शर्म आती है” मैंने अपने दोनों हाथों से अपना चेहरा ढांप लिया।
अब वो कहाँ रुकने वाले थे। उन्होंने मुझे जोर से अपनी बाहों में भर कर मेरे होंठ चूम लिए। और फिर एक हाथ बढा कर उन्होंने बेड की साइड ड्रावर से वैसलीन की डब्बी निकाली और एक अंगुली में क्रीम भर कर मेरी पिक्की के होंठो पर और छेद में लगा दी। मैं तो सिहर ही उठी रोमांच से। उन्होंने धीरे धीरे अपनी अंगुलियों से मेरी पिक्की की फांकों को मसलना शुरू कर दिया। फिर एक अंगुली मेरे रति-द्वार के छोटे से छेद में डाल दी। “ऊईई …. माँ.. आ ….” मुझे गुदगुदी सी हो रही थी। उन्होंने अब अंगुली अन्दर बाहर करनी शुरू कर दी। मैं तो जैसे मदहोश ही हो गई। मेरे मुंह से तो बस आह … ओईई … ही निकलते जा रहा था। फिर उन्होंने अपने पप्पू को भी क्रीम से तर कर लिया और उसे मेरी पिक्की के मुंह पर रख दिया। वो तो बेचारी कब की तरस रही थी। उन्होंने कोई जल्दी नहीं की। मुझे बड़ी हैरानी हो रही थी ये इतनी देर क्यों कर रहे हैं। शमा तो कहती है की गुल तो एक ही झटके में अपना पूरा लंड उसकी चूत में उतार देता है।
प्रेम ने एक हाथ मेरी कमर के नीचे लगा लिया और एक हाथ मेरी गर्दन के नीचे। उसने मेरे होंठ अपने होंठों में भर लिए। मेरी मुनिया तो कब की पीहू पीहू कर रही थी। उन्होंने एक जोर का सांस लिया और धीरे से एक धक्का लगाया। मेरी प्यारी मुनिया को चीरता हुए उनका पप्पू 3 इंच तक मेरी पिक्की में घुस गया और उसके साथ ही मेरी घुटी घुटी चीख निकल गई। मुझे लगा जैसे किसी ने लोहे की गरम सलाख मेरी पिक्की में ठोक दी हो। मुझे ऐसे लगा जैसे मेरी पिक्की की चमड़ी किसी ने चाकू से चीर दी है। मैं कसमसाने लगी। और जैसे ही मेरे होंठ उनके मुंह से छूटते मेरी हलकी सी चींख निकल गई। “ओह भैया…. मैं मर गई ……. म… म… मम्मी !”
“बस बस मेरी मैना अब दर्द ख़त्म ! बस थोड़ा सा बर्दाश्त कर लो ! अब आगे मजा ही मजा है !”
“नहीं भैया बाहर निकाल लो प्लीज … मैं मर जाउंगी बहुत दर्द हो रहा है !”
“बस एक मिनट की बात है। प्लीज चुप करो। बस अब दर्द ख़त्म ! ”
हम लोग कोई 3-4 मिनट ऐसे ही एक दूजे की बाहों में लिपटे पड़े रहे और फिर तो जैसे कमाल ही हो गया। मेरा दर्द कम होता चला गया। आह ….. अब तो बस मजा ही मजा था। प्रेम धीरे धीरे धक्का लगाने लगे पर पूरा अन्दर नहीं किया।
मैंने कहा, “अब मत तरसाओ ! पूरा डाल दो !”
“क्या डाल दूँ ?”
“ओह भैया आप तो मुझे बेशर्म ही कर के छोडोगे। नहीं मैं इसका नाम नहीं ले सकती !”
“प्लीज बोलो ना ?” उन्होंने मेरा चेहरा अपने दोनों हाथों में ले लिया और मेरी आँखों में झांकते हुए पूछा।
“ये तो मेरा प्यारा मिट्ठू है बस अब तो आप खुश हैं ना ?” कहते हुए मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं।
मेरा दिल जोर जोर से धड़क रहा था और साँसें बेकाबू होती जा रही थी। मेरा तो रोम रोम ही पुलकित हो गया था। मैं तो जैसे मस्ती के सागर में ही डूबी थी।
अचानक उन्होंने मुझे जोर से अपनी बाहों में भींच लिया। मैंने भी अपने नितम्ब उछालने शुरू कर दिए। पर मुझे क्या पता था अभी तो असली काम बाकी था। प्रेम एक मिनट के लिए रुका और फिर बोला “देखो मेरी जान थोड़ा सा दर्द और सहन करना होगा !”
“ओह प्रेम अब कुछ मत पूछो अब डाल दो पूरा अन्दर ! अब दर्द की चिंता मत करो ! तुम्हारे लिए मैं सब सहन कर लूंगी !”
फिर उन्होंने मुझे कसकर अपनी बाहों में भर लिया और एक जोर का धक्का लगाया। उनका 7” लम्बा पप्पू मेरी मुनिया की झिल्ली को रोंदता हुआ अन्दर समा गया। मेरे मुंह से जोर की चीख और आँखों से आंसू दोनों एक साथ निकल पड़े। प्रेम तो पक्के गुरु थे। इस से पहले कि मेरी चीख हवा में गूंजे, उन्होंने मेरा मुंह अपने हाथ से ढक दिया और मैं तो बस गूं गूं करती ही रह गई। बाहर बहुत जोर से बिजली कड़की लेकिन मुझे लगा कि मुझे जितने जोर का झटका लगा है वो उस बिजली से कम नहीं था। मुझे लगा मेरी पिक्की से गरम गरम सा कुछ निकल रहा है। मुझे तो बाद में पता चला वो तो मेरी पिक्की की सील टूटने से निकला खून था जो पूरी बेडशीट को ही भिगो गया। मैंने उनकी पीठ पर अपने नाखून गड़ा दिए जिससे उनका हल्का सा खून निकल आया। पर इस खून और दर्द की किसे परवाह थी।
कोई 4-5 मिनट हम इसी तरह शांत पड़े रहे। फिर जब उनका ‘वो’ (अरे यार पप्पू) अन्दर एडजस्ट हो गया तो मेरी पिक्की ने भी रोना धोना बंद करके प्रेम रस बहाना चालू कर दिया। मेरी पिक्की अब संकोचन करने लगी थी। उनका पप्पू भी अन्दर मस्त हुआ ठुमके लगाने लगा। अब प्रेम ने धीरे धीरे धक्के लगाने चालू कर दिए। मैं भी अपने नितम्ब उठा उठा कर उनका साथ देने लगी। पता नहीं कितनी देर वो अपने पप्पू को अन्दर बाहर करते रहे। समय की परवाह किसे थी। मैं तो बस यही चाह रही थी हमारे प्रेम के ये सुनहरे पल कभी ख़तम ही न हों। मेरे मुंह से आह… ओईई …. या.. आ.. आ.. की आवाजें निकालने लगी थी और मेरी पिक्की से फच फच की आवाजें आनी शुरू हो गई थी। मेरा शरीर एक बार फिर अकड़ने लगा और इस से पहले की मैं कुछ समझती या करती मेरी पिक्की ने पानी छोड़ दिया।
प्रेम धक्के लगता जा रहा था। मैंने अपने पैरों को ऊपर उठा कर प्रेम की कमर से कैंची की तरह जकड़ लिया। अब वो धक्के नहीं लगा पा रहे थे। वो कुछ देर ऐसे ही मेरे ऊपर पड़े रहे। मैं तो प्रेम रस में डूबी रोमांच के सागर में गोते लगा रही थी। फिर मैंने धीरे धीरे अपने पैर नीचे कर लिए। हमें कोई 15 मिनट तो जरूर हो गए होंगे। प्रेम ने फिर जोर जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। उनके मुंह से अजीब सी गुरर्र.. गु….र…र्र की आवाज निकलने लगी थी। मेरी पिक्की से भी अब फच .. फच .. की आवाजें आनी शुरू हो गई थी। इस मधुर संगीत को सुनकर मैं तो तृप्त ही होती जा रही थी। इस अनोखे स्वाद से अब तक तो मैं अनजान ही थी। इसके बदले में अगर स्वर्ग भी मिले तो मैं ना जाऊं।
“मेरी मैना अब मैं भी जाने वाला हूँ !” उनके धक्को की रफ़्तार अचानक तेज हो गई।
मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं और उन्हें जोर से अपनी बाहों में जकड़ लिया। और इसके साथ ही उनके पप्पू ने एक… दो.. तीन.. चार… न जाने कितनी पिचकारियाँ छोड़ दी। मेरी पिक्की तो उनके गरम और गाढ़े वीर्य से लबालब भर गई। मेरी पिक्की भला क्यों पीछे रहती उसने भी एक बार फिर काम रस छोड़ दिया।
बाहर बारिश अब बंद हो गई थी। मैं शर्ट और लुंगी पहन कर नीचे भाग आई।
प्रेम तो मुझे मीनल से मैना बना कर चले गए पर मैं आज भी उन लम्हों को याद करके रोमांच से भर जाती हूँ। लेकिन बाद में मेरे दिल में एक हूक सी उठती है और मेरी आँखों से आंसू छलक पड़ते हैं। आप शायद इन बातों को नहीं समझेंगी। प्रेम की याद में मैं कितना रोती और तड़फती हूँ आप क्या जाने। वो तो बस सावन में आग लगा कर चला गया। काश कोई मेरे इन आंसुओं की कीमत समझे और इस आने वाले सावन में मेरे भीगे बदन को अपने सीने से लगा ले।
क्या आप मेरे लिए “आमीन” (भगवान् करे ऐसा ही हो) नहीं बोलेंगे ? मेरी आपबीती आपको कैसी लगी मुझे और प्रेम को मेल करेंगे ना ???
मैना का विशेष आग्रह :
इस कहानी पर आप अपने विचार प्रकट करना चाहें तो अन्तर्वासना फ़ोरम के “कहानियों पर आपकी राय” कोलम में जाकर रजिस्टर करके अपनी राय दे सकते हैं यह बड़ा आसान है आपको
बस अपना नाम, पास वर्ड और मेल एड्रेस देना है आपका रजिस्ट्रेशन हो जाएगा. उसके बाद आप अपनी राय लिख सकते है जिसे सभी पाठक भी आपकी राय पढ़ सकते हैं.
धन्यवाद ! Antarvasna
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