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Sex Stories

अन्तरवासना के सभी रीडर्स को प्यार भरा प्रणाम। मैं दिल्ली से Sex Stories राहुल हूँ। मेरा लंड सात इंच लम्बा और तीन मोटा है। मैं आज मेरे एक और सेक्स के बारे में बताने जा रहा हूँ।
मेरी पिछली कहानी अन्तरवासना पे पब्लिश करके एक हफ़्ता हो गया था और मुझे कहानी के बारे में मेल्स आ रहे थे।

एक दिन मेल्स चेक करते समय मैंने देखा किसी पायल (नाम बदला) नाम की लड़की का मेल आया है। मैंने वो मेल खोला और पढ़ने लगा। वो दिल्ली में रहती थी।
उसने लिखा था- मैंने आपकी स्टोरी पढ़ी और मुझे बहुत अच्छी लगी बस ऐसे ही आप स्टोरी लिखते रहो और मेरे ईमेल आईडी पे भेजा करो प्लीज। मुझे ऐसी कहानियाँ बहुत पसंद है। आप मुझसे कल मैसेंजर पर चार पांच बजे के बीच मिलो।
अगले दिन जब मैं सवा चार बजे पर अपनी आईडी ओन किया तो वो ओनलाइन थी।

चैट का मैंने जवाब दिया मैंने उससे पूछा- आप दिल्ली में कहाँ की रहने वाली है और आप की एज क्या है?
तो उसका जवाब आया- मैं जी के पार्ट-2 में रहती हूं और मेरी एज 22 साल है.
फ़िर मैंने उससे पूछा- कभी किसी के साथ सेक्स किया है?
तो उसने जवाब दिया- नहीं!
मैंने पूछा- क्यों? कभी मन नहीं करता सेक्स करने के लिये?
तो उसने कहा- मन तो बहुत करता है पर मुझे डर लगता है, कहीं सेक्स करने के बाद घर पर पता न चल जाए!
फिर मैंने उसे बताया- इस मामले में मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूँ, अगर तुम मन जाओ तो!
वो बोली- कैसे?

तो मैंने बताया- मैं तुम्हारे साथ सेक्स करने को तैयार हूँ और मैं किसी को कुछ भी नहीं बोलूंगा, ये मेरा वादा है.
उसने कहा- लेकिन ये कैसे सम्भव होगा, तुम मुझे किधर मिलोगे और हम लोगों को ऐसी जगह किधर मिलेगी जहाँ हम दोनों के सिवा तीसरा कोई न हो?
मैंने लिखा- हम लोग रिज़ोर्ट जायेंगे वहाँ एक रूम लेंगे और पूरा दिन मजा मारेंगे.
उसने लिखा- नहीं, मुझे डर लगता है, कहीं उल्टा सीधा हो गया तो?
मैंने लिखा- ऐसे कुछ नहीं होगा, मैं कन्डोम चढ़ा लूंगा अपने लंड पे, तो फ़िर कुछ नहीं होगा। तुम मुझे फ़्राइडे को सी पी रीगल पर मिलो सुबह नौ बजे!
उसने कहा- ठीक है!

और वो फ़्राइडे को मुझसे चुदवाने के लिये तैयार हो गयी। मैंने अभी तक उसको देखा भी नहीं था, न ही उसकी आवाज सुनी थी। मैं फ़ुल एक्साइटेड था कि मुझे फ़्राइडे एक सील पैक चूत मिलने वाली थी सील तोड़ने के लिये।
और वो दिन आ गया मैं पौने नौ बजे ही वहाँ चला गया और मेडिकल की दुकान से दो कोहिनूर कन्डोम लिये और उसका इन्तजार करने लगा.

उसने कहा था- मैं पिंक कलर का सलवार कमीज़ पहन के आऊँगी.
और मैंने कहा था- मैं ब्लैक टी शर्ट और ब्ल्यु जीन्स और जैकट पहनूँगा।
इससे हम एक दूसरे को पहचान सकते थे।

करीब बीस मिनट बाद एक लड़की मेरे सामने आयी और पूछा- राहुल?
मैंने कहा- हाँ, तुम पायल हो?
उसने हाँ कहते हुए अपनी गर्दन नीचे की।
वो एकदम खूबसूरत थी, हाइट लगभग पांच फीट चार इंच, फ़ीगर 36-30-36, दिखने में एकदम सेक्सी थी। उसने पिंक कलर का सलवार कमीज़ पहना था, कमीज़ के ऊपर से उसके वो दो बॉल साफ दिखाई दे रहे थे, वो पूरे माल्टा के शेप में थे। उसकी चूचियां देख कर ही मेरा लंड खड़ा हुआ।

मैं उसको लेकर पहाड़ गंज के एक होटल में गया और वहाँ एक रूम लेकर हम उस रूम में चले गये। रूम में जाते ही देखा कि वहाँ एक बेड था और टोइलेट बाथरूम भी था। मैंने दरवाजा बंद करके कड़ी लगा दी. वो बेड पर बैठी थी.
मैं बाथरूम जाकर फ़्रेश हो कर आया और उसे फ़्रेश होने को कहा. वो उठ कर बाथरूम चली गयी। थोड़ी देर बाद वो बाथरूम से बाहर आई.

वैसे ही मैंने उसको अपनी बाहों में भर लिया और उसको धीरे धीरे किस करने लगा।
वो शरमा कर अपने आप को छुड़ाने लगी, मैं बोला- क्या हुआ?
वो बोली- मुझे शर्म आती है।
मैं बोला- हम लोग यहाँ मजे करने आये हैं और अगर तुम ऐसे शर्माओगी तो न तुम मजा ले पाओगी और न ही मुझे मज़ा आयेगा। सो प्लीज़ डोंट अपोज़ मी। जस्ट लव मी!

और मैं उसकी गर्दन पे, होंठों पे किस करने लगा। बीच बीच में मैं उसके कान को भी चूमता। इस सब से वो भी उत्तेजित हो गयी और मुझे रिस्पोंस देने लगी मैं अपना एक हाथ आगे की ओर लाते हुए उसके चूचे पे रख दिया और मेरी उंगलियां उसकी चूची के ऊपर से धीरे धीरे गोल गोल घुमाने लगा।
वो एकदम सिहर गयी और मुझे कहने लगी- प्लीज़ ऐसा करो, उसे जोर से दबाते रहो।

मैं कुछ देर बाद उसे फिर धीरे धीरे दबाने लगा। वाह! क्या माल्टा थी। एकदम टाइट।
फिर मैंने अपना दूसरा हाथ भी आगे लाते हुए उसकी दूसरी चूची पे रख दिया और धीरे धीरे उसकी दोनों चूचियां दबाने लगा। थोड़ी देर के बाद मैंने अपना एक हाथ नीचे ले जाते हुए उसकी चूत पे रख दिया।
जैसे ही मेरा हाथ उसकी चूत पे गया, वो वहाँ से मेरा हाथ निकालने की कोशिश करने लगी।

मैंने उसे कहा- पलीज़!
तो वो मान गयी और दोनो हाथों से उसने मुझे जकड़ लिया।
मैं सलवार के ऊपर से ही उसकी चूत सहलाने लगा। फिर थोड़ी देर बाद मैंने उसकी सलवार के अंदर हाथ डाला और उसकी चूत सहलाने लगा।

वो मुँह से आवाज़ निकालती रही- आअहह ऊऊफ़्फ़ फ़्फ़्फ़… ज़ोर ससेईई।
फिर मैंने वही हाथ ऊपर ले जाके उसके कमीज़ के नीचे से उसकी चूचियां दबाने लगा। उसने अन्दर ब्रा पहनी थी, मैं ब्रा के ऊपर से ही उसकी चूचियां एक एक करके दबाने लगा।
थोड़ी देर बाद मैंने दूसरे हाथ से उसके कमीज़ की चैन खोल दी और उसकी कमीज़ ऊपर करके निकाल दी। अब वो मेरे सामने सफ़ेद ब्रा में खड़ी थी वो कमाल की सुन्दर लग रही थी। मैं ब्रा के ऊपर से उसके बूब्स दबाने लगा और फिर दोनों हाथ पीछे ले जाकर उसके ब्रा का हुक खोल दिये और उसकी ब्रा उसके हाथों से अलग कर दी।

वाह! क्या दूध थे उसके… पूरे गोल शेप में! न ही छोटे और न ही बड़े, बिल्कुल मीडियम साइज़ के थे उसके बूब्स! बूब्स के ऊपर पिंक कलर के दो दाने थे।
क्या खूबसूरत नज़ारा था… मैंने मेरी ज़िंदगी में पहली बार इतने अच्छे बूब्स देखे थे, ऐसे बूब्स तो शायद ही किसी के होंगे।
मैं तो पागल हो गया था.

मैं उसके दोनों माल्टा हाथ में लेकर दबाने लगा। क्या कसाव था उनमें। वाह! मैं तो बस उसे दबाते ही रह गया। ऐसे लग रहा था इन्हें छोड़ कर कहीं न जाऊँ।

कुछ मिनट के बाद मैंने एक हाथ नीचे ले जाकर फिर से उसकी चूत सहलाने लगा और फिर धीरे से उसके सलवार का नाड़ा खींचा वैसे ही उसकी सलवार नीचे गिर गयी। Sex Stories

कहानी अगले भाग में जारी रहेगी.
कहानी का अगला भाग : दिल्ली की वरजिन गर्ल की चुदाई-2

Hindi Sex Stories

मैंने जवानी Hindi Sex Stories की दहलीज़ पर कदम रखा ही था कि मेरे सामने मेरी जवानी का लुफ़्त उठाने के लिये लोगों की नजरें उठने लग गई थी। उनकी नजरें जैसे मेरे उभारों को मसल कर रख देना चाहती थी। जिसे देखो उसकी नजरें मेरी उभरती हुई चूंचियों पर ही पड़ती थी, मानो अन्दर मेरी नंगी चूंचियों को टटोल रही हो। फिर उनकी नजरें सीधी मेरी टाईट जीन्स में चूत को ढूंढती थी, कि शायद वहां कुछ नजर आ जाये। सबसे अधिक मेरे सुडौल चूतड़ों को लोगों की नजरें सहलाती थी। क्या बच्चे, क्या जवान और फिर बूढ़े तो कमाल ही करते थे, उनकी आंखों में चमक आ जाती थी और बड़ी आस भरी नजरों से मेरी जवानी को ताकते थे।

उनकी इस कमजोरी को मैं जानती थी, और जान कर के मैं इस बात का आनन्द उठाती थी। मैं भी उसके लण्ड की ओर चुपके से देखा करती थी और उसके उठान को देख कर मेरी चूत भी फ़डक उठती थी। उनके ढीले पेण्ट में से कुछ तो हिलते हुये दिख ही जाता था। बूढों में ये खास बात होती है कि वे लड़कियों की बात अपने मन में ही रखते हैं और युवा और जवान इसे सभी को बताते हैं।

घर पर आकर मैं वासना की मारी मोमबत्ती को ऊपर से लौड़े का शेप देकर उसे कभी गाण्ड में तो कभी चूत में घुसा लेती थी। इसी चक्कर में मेरी चूत की झिल्ली फ़ट चुकी थी, पर मैंने यह मोमबत्ती चूत और गाण्ड में घुसेड़ना बन्द नहीं किया। पर मुझे इसको घुसेड़ने से पत्थर जैसा अह्सास होता था। चूत का दाना मल कर और चूंचियों की घुन्डियाँ मसल मसल कर अपना रति-रस निकाल ही लेती थी। मेरी उमर के जवान युवक युवतियाँ इस बात को समझते होंगे कि जवानी मात्र एक बला है और ये सभी को चोदने या चुदवाने को प्रेरित करती है। पर लण्ड कोई मिलता ही नहीं था। बस मर्द कहने को ये मेरे शर्मा अंकल ही थे जिनसे मैं चुदने का भरकस प्रयत्न कर रही थी। उनकी पत्नी लगभग तीन वर्ष पहले एक बीमारी में चल बसी थी। तब से वो कुंवारा सा जीवन यापन कर रहे थे।

उन्हीं बूढ़ों में से … बूढ़े तो नहीं पर हां… उसके नजदीक ही थे… मेरे मकान मालिक भी थे। कहने को तो वो मुझे बेटी कहते थे पर जवान लड़कियों में मर्दों को पहचानने की एक खास नजर होती है। मैं भी उन्हें खूब पहचानती थी। उनके बेटी कहने का अन्दाज मेरे दिल को घायल कर देता था। क्योंकि कहीं पे निगाहे कहीं पे निशाना रहता था। मुझे लगता था कि अंकल की यह वासना भरी कभी तो उन्हें मुझे चोदने पर विवश करेगी। शायद यही रिश्ता बना कर मेरे नजदीक रहना चहते थे। मेरे कॉलेज से आने के बाद मुझे वो खाना खिलाते थे फिर मैं सो जाती थी। शाम को शर्मा अंकल कार में घूमने जाते थे और मुझे जरूर पूछते थे।

झील की पाल पर वो दूसरे बुजुर्ग लोगों के साथ घूमते थे और मैं जवान लडकों के झुण्ड के बीच इठलाती हुई टहलती थी। अधिकतर तो यह होता था कि कोई ना कोई मेरी क्लास का साथी मिल जाता था, और अन्य लड़के बेचारे आह भरते हुए मेरी अदा पर फ़्लेट हो जाते थे। मेरे उभरे हुए मटके जैसे गोल-गोल चूतड़ उनके दिल में कहर ढाते थे। मुझे याद है कि एक बार मेरे पीछे एक मेरा क्लास का साथी पिट भी चुका था… यानि मेरे पीछे झगडा…।

उन जवान बूढों के बीच भी मैं खूब इतराया करती थी और उनकी चहेती बन गई थी। वे तथाकथित बूढ़े कभी कभी मुझे बेटी कहकर मेरे गालों पर प्यार भी कर लेते थे और उनकी तबीयत फिर से रंगीन होने लगती थी। मुझे मालूम था कि यह प्यार नहीं है, उसमें मुझे वासना की महक आती थी। फिर आता था दौर सामने बनी दुकानों पर आईसक्रीम या चाट खाने का, अंकल मुझ पर खूब खर्चा करते थे। वहां से सीधे घर पर आते थे। जब कभी मैं अंकल के साथ नहीं होती थी तो वो मुझे जरूर पूछा करते थे।

अंकल घर पर आकर मुझे कमरे में छोड़ने आते थे, फिर मैं उन्हें एक गरमा-गर्म चाय पिलाती थी। इस दौरान मैं उनकी दिल की इच्छा पूरी कर देती थी। उन्हीं के सामने मैं अपने कपड़े बदलती थी, उन्हें जानबूझ के अपने जवान सुडौल चूतड़ पेण्टी के ऊपर से दिखाती थी। शमीज के ऊपर से ही उन्हें मेरे छोटे छोटे उभरते हुये मम्मे भी दर्शाती थी और घर के कपड़े पहन लेती थी। उन्हें यह दर्शाती थी कि जैसे मुझे सेक्स के बारे में कुछ नहीं मालूम। पर उन्हें क्या पता था कि मैं उन्हें मजबूर करके चुदवाऊंगी और साथ में पैसे भी वसूलूंगी। और एक दिन ऐसा आ ही गया कि शर्मा अंकल ने मुझे लपेटने की कोशिश की और मैं झम से उनकी गोदी में जा गिरी और हो गया वासना का गर्मा-गर्म खेल। फिर तो मैं खूब चुदी और आज तक उन्हें नहीं छोड़ा है। जानते हो इसका राज… जी हां वो मेरी सारी जरूरतें पूरा करते थे।

आज भी मैं शर्मा जी के सामने कपड़े बदल रही थी। हमेशा की तरह उनका लण्ड खड़ा हो गया। मेरी जवानी की गहराईयों और उभारों को वो बडी बेदर्दी से नजरें जमा कर अन्दर तक देख रहे थे। वासना के मारे मेरी भी चूत के पास पेण्टी गीली हो गई थी। मैंने जानकर अपनी चूत का गीलापन उन्हें दिखाया। गीलापन देख कर उनकी आंखे चमक उठी। अब शायद उनके मन में आया होगा कि इस पार या उस पार। उन्होंने अचानक ही कहा “अरे नेहा बेटी, देख ये तेरे पांव पर क्या लगा है…!”

उनका नाटक मुझे मालूम था। मैं जान कर के उनके बहुत पास चली आई कि उन्हें मेरे शरीर का स्पर्श भी हो जाये। पहले तो मुझे शरम सी लगी, फिर मैंने अपना दिल कड़ा करके अपनी छोटी सी स्कर्ट जांघ तक उठा कर कहा,” ये यहां…?”

और उन्होंने मेरी जांघ सहला दी। उनका लण्ड खड़ा हो कर सलामी दे रहा था।

“अंकल ये तो तिल है… ये देखो यहाँ पर भी है… ये देखो !” मैंने अपना स्कर्ट और ऊंचा करके चूतड़ तक उठा दिया। ऐसा करने में मुझे बहुत शरम आई। मेरे गोरे गोरे चूतड़ देख कर उनसे रहा नहीं गया। मैंने उन्हें जानकर के उकसाया। उन्होंने अपना हाथ मेरे तिल पर फ़ेरते हुये एक चूतड़ पर भी घुमा दिया। चूतड़ पर हाथ लगते ही मेरा पूरा शरीर जैसे झनझना गया। मुझे लगा कि ये बुड्ढा तो अब मुझे चोद के ही मानेगा। मैंने अपनी चूंची पर तिल भी अपनी कमीज पूरी ऊपर उठा कर दिख दी। और मेरा दिल जोर से धड़क उठा। मेरे छोटे छोटे चूचुक देख कर अंकल तो पागल से हो गये। मैंने आंखे बंद कर ली, बस इन्तज़ार था चूचियों के पकड़े और दबाये जाने का… जैसे इन्तज़ार सफ़ल हुआ… उन्होने इस बार भी चूची के तिल को मेरी चूंची के साथ सहला दिया। उनका लण्ड पूरे उफ़ान के साथ पटकियाँ मार रहा था।

“अरे हां रे तेरे तो बहुत से तिल हैं…” उनकी आंखे फ़टी जा रही थी और लण्ड पैण्ट में ही तम्बू बना रहा था।

“अंकल और हाथ से सहलाओ ना… मुझे तो अच्छा लगने लगा है।” मैंने घायल पंछी के गले पर जैसे चाकू रख दिया। शर्मा जी अब बदहवास से होने लगे। उन्होने मुझे अपनी जांघो पर बैठा लिया और मेरी चूंचियां बड़े प्यार से सहलाने लगे। पंछी फ़ड़फ़ड़ा उठा…

“बेटी, तुम्हारे मम्मे तो बड़े प्यारे प्यारे हैं, रोज ही मुझसे मालिश करवा लिया करो!”

मेरी चूत में गीलापन और बढ़ गया। मैं अंकल की गोदी में बैठ गई। बैठते ही उनका खड़ा लण्ड मेरी गाण्ड से टकरा गया। मै उस पर अपनी गाण्ड दबा कर बैठ गई। अंकल कुत्ते की तरह लण्ड को बार बार उठाकर यहाँ-वहाँ मारने लगे। अब तो अंकल का लण्ड लग रहा था कि चूत में घुस ही जायेगा। पंछी अब काबू में था, अब कही नहीं जा सकता था वो।

“नेहा बिटिया, जरा ठीक से बैठ ना… अभी लग रही है !” अंकल में कसमसाते हुये कहा।

“अंकल मजा आ रहा है… और आप भी है ना इस उम्र में भी शरमाते हो !” मैं चोट पर चोट किये जा रही थी।

” ओहो… तू तो कितनी शरारती है… ये ले … बस अब तो मुझे भी मजा आया ना?”

शर्मा जी ने अपनी पैण्ट की जिप खोल दी और अपना तन्नाया हुआ नंगा लण्ड मेरी नंगी चूतड़ों की दरार में फ़िट कर दिया। मुझे उनके भारी लण्ड का नक्शा चूतड़ों के बीच महसूस होने लगा। मुझे दिल में एक मीठी सी गुदगुदी हुई और मैंने अपने अपने बदन को उनके ऊपर ढीला छोड़ दिया। जोश में अंकल ने मेरे होंठो को अपने होंठो से चूम लिया। मुझे विरोध ना करते देख कर अंकल के होंठ फिर से मेरे होंठो पर जम गये और मेरे नरम नरम अधरों का रसपान करने लग गये। मुझसे भी रहा ना गया, मैंने अपनी आंखे बंद कर ली और स्वर्ग जैसे सुख को भोगने लगी। आनन्द से भर उठी।

अंकल का लौड़ा मेरी गाण्ड में जोर मारने लगा था। मेरी गाण्ड में बड़ी तेज गुदगुदी सी होने लगी थी। मुझे मोमबत्ती की तरह उनका लण्ड गाण्ड में घुसता नजर आया।

“नेहा बेटी, आज मुझे आण्टी की याद आ गई… वो भी मेरी गोदी में मेरे लण्ड को ऐसे ही गाण्ड में घुसेड़ कर बैठती थी।” अंकल के लण्ड की टोपी पर चिकनाई की कुछ बूंदे निकल आई थी।

“अंकल, क्या मैं पेण्टी उतार दूँ… पूरा ही लण्ड गाण्ड में घुसेड़ दीजिये… मन में मत रखिये। आपका तो इतना चिकना हो रहा है !”

जाने कैसे मेरे मुख से यह निकल पड़ा। अंकल ने मुझे प्यार से खड़ा किया और आधी उतरी हुई पेण्टी नीचे खींच कर उतारने लगे।

” ये पेण्टी तो गीली हो गई है … क्या बहुत मजा आ रहा था ना।” अंकल ने चोदने के मूड़ में कहा।

“हाय अंकल … ऐसे मत कहिये ना… बस मुझे आण्टी वाला आनन्द दे दीजिये !” मैं उनके ये कहने से वास्तव में शरमा गई थी।

“नेहा, एक राज की बात बताऊं, आण्टी तो सालों से ठण्डी ही रहती थी, उनके जिस्म को हाथ भी नहीं लगाने देती थी, आखिर के दिनों में तो यूँ समझो कि हम भाई बहन की तरह रहते थे, भले ही वो मुझे राखी ही बांध दे !”

यह उनका मजाक था या वास्तविकता थी, पर उनका यह कथन उनके दिल की पीड़ा दर्शा रहा था। पर मैं तो मात्र लण्ड की भूखी थी। मैंने हंस कर उनकी बात टालते हुये उन्हें फिर से रूमानी दुनिया में ले आई। अंकल ने अपना लण्ड बाहर ही रखते हुये अपना पैण्ट और चड्डी उतार दी।

“लण्ड से खेलोगी…?”

“कैसे अंकल?”

“इसे हिलाओ, इसे मुठ मारो, इसकी चमड़ी ऊपर नीचे करो, मेरे लाल लाल सुपाड़े को सहलाओ, उसे प्यार करो, चूसो, टट्टों की चमड़ी को चुटकियों से मसलो, गोलियों को धीरे धीरे सहलाओ… ”

“इससे मजा आता है क्या …?”

“हां बहुत आनन्द आता है, लण्ड फ़ूल कर कड़क हो जाता है और फिर इसे चूत में लेने से असीम आनन्द आता है !”

“अरे वाह … यह तो मुझे मालूम ही नहीं था…” मेरा दिल खुशी के मारे उछलने लगा था। हाय इस अंकल की तो मैं…

“तो आओ बिस्तर पर आराम से सब कुछ करेंगे…” अंकल बिस्तर पर जा कर लेट गये।

मैंने कूलर चला दिया और साथ में सीलिंग फ़ेन भी। नंगे शरीर पर मस्त ठण्डी हवा आग का काम रही थी। मैंने अलमारी से अपनी लण्ड के आकार वाली मोमबती भी निकाल ली। अंकल यह सोच सोच कर ही अपना लण्ड कड़क किये जा रहे थे कि उन्हें अब सालों बाद शारीरिक सुख मिलने वाला है। मुझे उनकी इस हालत पर दया आ गई। उनके कहे अनुसार मैं एक एक करके उनके लण्ड के साथ खेलती रही। बीच बीच में उन्हें चूम भी लेती थी, उनकी गाण्ड में अंगुली भी कर देती थी। उनके टट्टों के साथ खेलने लगती थी, फिर हाथ में लेकर लण्ड पर मुठ मारने लगती। मैंने उनका लण्ड फ़िल्मों की तरह मुख में ले लिया और मुठ मार मार कर चूसने लगी। उनके चूतड़ भी ऊपर उठ उठ कर जैसे मुख को चोदने लगे। तभी मैंने मोमबत्ती को अपने थूक से गीला किया और उनकी गाण्ड में घुसाने लगी।

“अरे, ये क्या कर रही हो…? अच्छा धीरे से घुसाना… तो मजा आयेगा”

“अंकल आपने कभी ऐसा किया है?”

” नहीं मोमबत्ती तो नही, पर जवानी में मैंने कई बार गाण्ड मरवाई है और मारी है !”

और मैंने धीरे से उनकी गाण्ड में मोमबत्ती घुसेड़ दी। और लण्ड पर मुठ मारने लगी। लण्ड को चूसती भी जा रही थी। वो ज्यादा देर तक खेल को सह नहीं पाये और हाय कहते हुये उन्होंने अपना वीर्य छोड़ दिया। सारा वीर्य मेरे मुख में भरने लगा, मुझे बड़ी घिन आई, पर फ़िल्मों में जैसा देखा था मैंने उसे पीने की कोशिश की… सफ़ेद सफ़ेद सा, चिकना सा, लसलसा सा… पर एक बार तो मैं गटक गई। फिर किसी छिनाल की तरह उनका लण्ड पूर साफ़ कर दिया।

अंकल 50 वर्ष के थे… सो थक गये थे और उन्हें नींद आ गई। उनका शरीर अच्छा था, मुझे लगा कि 50 वर्ष शायद अधिक नहीं होते है… उनका बलिष्ठ लण्ड अभी भी किसी घोड़े की तरह ठुमक रहा था । मैं बाथ रूम में जाकर नहाई और फ़्रेश हो कर बाहर आ गई और कम्प्यूटर पर बैठ गई। रात को ग्यारह बजे उनकी नींद टूटी। उन्होंने उठ कर मुझे खाना खाने को कहा और अपने कमरे में चले गये। वहाँ से वो नहा धो कर खाना खाने बैठ गये। डिनर के बाद उन्होने मेरी बांह पकड़ी और अपने बेड रूम की तरफ़ ले चले। मैं खुशी से झूम उठी…

“अंकल अब क्या करोगे?… ठहरो मोमबत्ती तो ले लूं !” यह बात सुन कर अंकल मुस्करा उठे।

“अभी तक किया ही क्या है… अब सुहागरात के मजे ले लें !”

“ये सब नहीं यार अंकल, अब तो बस वही हो जाये…”

“हां उसी को तो सुहाग रात कहते हैं…!”

“क्या… चुदाई को सुहागरात कहते हैं … सीधे सीधे चुदाई की रात नहीं कहते?”

मेरे और अंकल के कपड़े एक एक करके उतरते जा रहे थे। अब दोनों ही मदरजात नंगे खड़े थे और हां साथ में उनका लण्ड भी खड़ा था। उनकी हालत देख कर मेरी हालत भी बिगड़ती जा रही थी। अंकल ने मुझे मुस्करा कर देखा और अपने हाथ खोल दिये, मैं पगली सी उनकी बाहों के घेरे में आती चली गई। अंकल के मुख से ठण्डी सी आह निकली। उनकी बाहें मेरी कमर पर कसती चली गई। उनका लोहे जैसा लण्ड मेरी चूत में गड़ने लगा। मैं अपनी चूत धीरे से सेट करके लण्ड लीलने का प्रयत्न करने लगी।

मेरी हालत किसी बिन चुदी कुतिया की तरह हो रही थी… चूत लण्ड मांग रही थी। चूंचियां कठोर हो गई थी। निपल कड़े हो गये थे। शरीर में तरावट आ चुकी थी। अंगुलियों की चुटकियां मेरे कड़े निपल में च्यूटी भर रही थी। पर करण्ट चूत में आ रहा था। चूत पानी से लबालब भर चुकी थी। मेरी आंखे भारी हो चली थी। मन में पहली बार लौड़ा लेने के अहसास से बदन लहक रहा था। मेरी ऐसी हालत देख कर अंकल ने प्यार से मुझे बिस्तर पर लेटा दिया और मेरी टांगें ऊपर की ओर उठने लगी।

“अंकल वो मोमबत्ती देना…!”

“अब इसकी जरूरत नहीं है… ये मेरा मोमबत्ता जो है !”

“नहीं अंकल, ये तो आपकी गाण्ड के लिये है…” अंकल हंस पड़े… वो समझ गये थे कि उन्हें भी ये मोमबत्ती अपनी गाण्ड में घुसानी पड़ेगी।

मैंने मोमबत्ती हाथ में ली और अंकल से कहा,”अंकल प्लीज… अब मत तड़पाओ…” अंकल एक जवान की तरह उछल कर मेरी टांगों के बीच में आ गये और उनका लण्ड हाथ में पकड़ कर चूत की पलकों पर रख दिया। मैंने भी चूत की पलकें खींच कर खोल दी। लण्ड ने गुलाबी चूत को देख कर फ़ुफ़कार भरी और अपना सर झुका कर आदर सहित टोपा अन्दर कर लिया। लण्ड का पहला प्यारा सा अहसास … मुझे मदहोश कर रहा था।

अंकल ने अपने तने हुये भारी लण्ड को जोर लगा कर अन्दर सरकाया। चिकनी चूत लण्ड पा कर लहलहा उठी। मैंने भी अपनी चूत ऊपर उठा कर लण्ड का तहे दिल से स्वागत किया। अंकल का पूरा लण्ड लीलने में मुझे कोई परेशानी आई।

“नेहा… तुम तो चुदी चुदाई लगती हो…!”

“हां अंकल… इस मोमबती ने मेरी चूत चोद चोद कर इण्डिया गेट बना दिया है !”

अंकल ने चूत को इण्डिया गेट नामकरण का मुस्कराते हुये स्वागत किया और अपना शरीर का सारा भार मेरे ऊपर डाल दिया। लण्ड जड़ तक बैठ चुका था। उनका हर एक धक्का बच्चे दानी पर ठोकर मार रहा था। उनका भारी जिस्म मुझे हल्का लग रहा था। लोहे जैसा लौड़ा मेरे बदन में घुसा हुआ सब सहने की ताकत दे रहा था। मेरी टांगें उनकी कमर में उठी हुई कस चुकी थी। मेरे मुख से बराबर मस्ती भरी चीखें और आहें निकल रही थी। मुझे लण्ड के द्वारा पहली चुदाई का आनन्द भरपूर आ रहा था। उनके हाथ मेरे कठोर चूंचियों को मसल मसल कर मीठी सी तरावट भरी गुदगुदी कर रहे थे। तभी मेरा हाथ उठा और अंकल के पिछवाड़े पर आ गया और उनकी गाण्ड के छेद में मैंने मोमबती घुसेड़ दी, जिसे अंकल ने एक खिलाड़ी की तरह सिसकारी भरते हुये झेल लिया। मैंने थोड़ी और कोशिश करके आधी से अधिक मोमबत्ती उनकी गाण्ड में घुसेड़ दी।

“आह्ह्ह मेरी नेहा, मेरी गाण्ड में मोमबत्ती और चुदाई का तालमेल कितना कितना ज्यादा मजा देता है…” अंकल का लण्ड और फ़ूल गया था। गाण्ड में फ़ंसा लण्ड उन्हें भी गुदगुदा रहा था। जोश में आ कर उन्होने अब अपना लण्ड कस कस कर चूत पर मारना आरम्भ कर दिया। हम दोनों की हाल एक जैसी थी। मैं पहली बार चुद रही थी और अंकल का लण्ड भी कई वर्षों बाद किसी चूत को चोद रहा था। सारा जिस्म चुदाई की मधुर कसक भरी मिठास से लबरेज हो चुका था। रति-रस बाहर आने को तड़प रहा था। मेरे दांत भिंचे जा रहे थे… शरीर में कसावट आने लगी थी। गरम चूत धुंआ सा उगलने लगी थी। शर्मा जी की सांसे जोर जोर से चल रही थी। पसीना सा छूटने लगा था। मैंने अंकल की गाण्ड में घुसी मोमबत्ती को जोर से पकड़ लिया और जोर लगा दिया। मोमबत्ती गाण्ड की गहराईयों में और धंसती चली गई।

“अंकल जीऽऽऽऽऽ, मारो लौड़ा कस कर मारो … हाय रे मेरी तो निकली रे… अंकल जी … अरे अरे रे अऽऽऽह्ह्ह्ह्ह्ह, उईईईईईऽऽऽऽऽ”

और मेरी चूत मचल उठी। रति-रस छूट गया। मैं जोर से झड़ गई। मेरा कसाव मोमबत्ती पर बढ़ता ही गया। अंत में अंकल के मुख से हाय निकल गई और उनके लण्ड ने यौवन रस की बाढ़ ला दी। उन्होंने अपना लण्ड बाहर खींच लिया था और अब भरपूर पिचकारियों की बौछार कर रहे थे। मैंने मोमबत्ती उनकी गाण्ड से निकाल दी। उनके लण्ड से ढेर सारा वीर्य निकला … उनका लण्ड अभी भी वीर्य निकालने के लिये जोर मार रहा था और दो एक बूंदे तो फिर भी निकलती ही जा रही थी। उनका बिस्तर वीर्य और मेरी चूत के पानी से काफ़ी गीला हो चुका था। अंकल मेरे जिस्म से हट कर एक तरफ़ निढाल से लुढ़क गये। उनकी सांस धौंकनी की तरह चल रही थी। दिल की धड़कन बहुत तेज थी। मुझे अंकल की संतुष्टि पर बहुत चैन आया… उन पर प्यार भी बहुत आया। मेरे मन के भीतर कहीं लग रहा था कि उन्हें अभी भी उनके भीतर वासना भरी कसक छुपी हुई है। उन्हें एक औरत की बेहद जरुरत है, बहन की नहीं… अंकल थकान से फिर भर चुके थे। रात बहुत निकल चुकी थी। मैं भाग कर अपने कमरे में चली आई। कोई देखने वाला, सुनने वाला कोई नहीं था, नंगी ही धम्म से बिस्तर पर कूद पड़ी और तकिया दबा कर सोने के लिये आंखे बंद कर ली…

जवान हो या बुड्ढा… लण्ड सभी के होता है … कहते हैं ना बड़े बूढे ज्यादा समझदार होते हैं … इसी का फ़ायदा उठाओ और उनसे खूब चुदो … आपको चिन्ता करने की आवश्यकता नहीं है… उन्हें इस बात की अधिक चिन्ता रहती है… तो मेरी सहेलियों… इन्हें भी अपना साथी बनाओ… ना… ना… जीवन साथी नहीं … सिर्फ़ चुदाई का साथी Hindi Sex Stories

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सभी अन्तर्वासना रीडर्स को मेरा नमस्ते! Sex Stories
मेरा नाम सोहन है, मैं 27 साल का हूँ, मेरी फिजिक काफी अच्छी है।
यह मेरी पहली कहानी है और मेरा ये पर्सनल एक्सपीरियन्स है।

बात उस समय की है जब मैं 24 साल का था। मैं अपनी मौसी के लड़के की शादी में गया था वहाँ पर मेरे दूर के रिश्ते की मौसी आयी हुई थी बहुत ही खूबसूरत थी वो। उनके बूब्स काफ़ी बड़े थे। वो मुझे बहुत अच्छी लग रही थी। काले रंग के ब्लाउज़ से उनकी चूची बाहर आ रही थी। मैं उनके भरे हुए शरीर से खेलना चाहता था।
उनके हाव भाव से लग रहा था कि वो भी मेरी तरफ़ अकार्षित हो रहीं थी।

खैर आप लोगों को ज्यादा बोर नहीं करूंगा और मैं आगे कहानी बताता हूं। बारात में सभी लोग अपने अपने काम में व्यस्त थे। सरदी की रात थी सभी लोग एक साथ लेटे हुए थे, ज्यादा खाट न होने के कारण सभी लोग जमीन पर लेटे हुए थे मैं भी एक उचित स्थान देखकेर लेट गया मेरे बगल में वहीं दूर के रिश्ते की मौसी लेटी हुई थीं.

मैंने उस समय तो ध्यान नहीं दिया पर रात में जब मैं पेशाब के लिये उठा तो उनकी साड़ी और पेटीकोट उनके घुटनों के ऊपर चढ़ गया था उनकी चिकनी जांघें शीशे की तरह चमक रही थी।

मुझसे रहा नहीं गया मैंने धीरे से उनकी जांघों पर हाथ रखा उन्होंने कुछ नहीं कहा मेरी हिम्मत और बढ़ी मैंने उनकी साड़ी और पेटीकोट ऊपर खिसका दिया चूंकि कमरे में अंधेरा था इसलिये मेरी इस हरकत का किसी को पता नहीं चल पा रहा था।

मुझे ऐसा लग रहा था कि वो भी मेरी इस हरकत का मजा ले रही हैं। मैंने उनकी साड़ी और पेटीकोट उनकी कमर तक खिसका दिया। ओह माई गोड उनकी होंठों तक फूली हुई बुर मेरे हाथों में थी उनकी बुर से थोड़ा थोड़ा पानी निकल रहा था मैंने उनकी शेव्ड बुर पर हाथ फेरना चालू कर दिया.

उन्होंने कुछ नहीं कहा बल्कि वो सीधी लेट गई जिससे उनकी बुर पूरी तरह से खुल कर मेरे सामने आ गई मैंने उनकी जांघों को चूमते हुए उनकी गर्म बुर पर अपने होंठ लगा दिये, वो अब तड़प उठीं, उन्होंने धीरे धीरे आवाज़ निकालना चालु कर दिया था. वो मेरे सर को सहला रही थी.

मैंने जी भरकर उनको बुर को चाटा और अपनी जीभ से चोदा, वो भी अपनी गांड उठा उठा कर मेरा सहयोग कर रही थी।
मौसी की चूत से नमकीन पानी निकल रहा था वो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था मैंने करीब आधे घंटे उनकी चूत को चाटा.

दूसरे दिन जैसे कि पहली रात में हम दोनो (मैं और मेरी दूर के रिश्ते की मौसी) एक साथ लेटे थे उसी तरह से दूसरे दिन भी भीड़ होने के कारण हम दोनो कमरे के एक कोने में लेट गये चूंकि मौसी तो पहले दिन से ही तैयार थी इसलिये उस दिन उन्होंने मैक्सी पहनी हुई थी।

हम दोनो अब एक ही रजाई में लेटे हुए थे मुझे कंट्रोल नहीं हो रहा था मैंने झट से उनकी मैक्सी पर से जांघों पर हाथ रख दिया।
उन्होंने कहा थोड़ा सब्र करो आज पूरी रात मैं तुम्हारी ही हूं।

खैर रात काफ़ी हो गयी सभी लोग सो चुके थे पर हम दोनो को नींद कहां थी मैंने उनके बूब्स पर हाथ रखा तो वो बोली पहले कपड़े तो उतार दो।

इतना इशारा मिलते ही मैंने उनकी मैक्सी ऊपर कर दी उन्होंने मैक्सी के नीचे कुछ भी नहीं पहना था, मैक्सी उतरते ही वो पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी।

उनके भरे हुये बदन को देखकर मुझे नशा छा रहा था।

अब उन्होंने मेरे कपड़े उतारने चालु कर दिये, थोड़ी ही देर में मैं भी उनकी तरह से ही नंगा हो गया, मेरा 8 इंच का लंड रोड की तरह गर्म हो रहा था, वो इतना कड़ा था कि छूने पर लोहे का लग रहा था।

उन्होंने बड़े प्यार से मेरे लंड को सहलाया फिर धीरे -2 नीचे खिसक गयी और मेरे लंड को मुँह मेँ लेकर चूसने लगी।

ज्यों ज्यों उनकी जीभ मेरे लंड पर घूम रही थी मेरे लंड का तनाव बढ़ता ही जा रहा था।

मैंने उनके खुले हुए बाल पकड़ लिये और वो तेजी से अपना सर ऊपर नीचे करने लगीं।

फिर मैंने उनसे कहा कि मौसी अब आप लेट जाओ वो लेट गयीं और मैं उनके ऊपर आकर अपने लंड को उनकी फ़ूली हुई बुर मैं डालने लगा धीरे-2 मैंने उनकी बुर में अपना लंड डाल दिया।

अब मैंने चुदाई करनी शुरु कर दी दोनो को ही बड़ा मजा आ रहा था उनकी सिसकी भी निकल रही थी। इस्सस इस्स ओहह वव्वव्वूऊऊ नाआआ धह्हहीईई
इस तरह की आवाजें उनके मुँह से निकल रही थीं।

मैंने करीबन 25 मिनट उनकी चुदाई की वो मेरे गठीले और बालों से भरी हुई छाती हो सहला रहीं थीं और चूम रही थी अचानक उन्होंने बड़ी तेजी से मुझे जकड़ कर पकड़ लिया मैं समझ गया कि वो अब झड़ गयीं हैं।

मैंने भी थोड़ी देर बाद उनकी बुर में ढेर सारा माल डाल दिया।

इस तरह उस रात हमने तीन बार मजे लिये मौसी मेरी चुदाई की कायल हो चुकी थी।

खैर आपको मेरी ये सच्ची कहानी कैसी लगी? Sex Stories

(Abbu Aur Bhai- Part 2) Antarvasna


हेल्लो Antarvasna के पाठकगण, मैं आपकी फ़ेवरेट आरज़ू। माफ़ी चाहती हूँ कि कल मैं अपनी कहानी पूरी नहीं कर पाई क्योंकि एक अरजेन्ट कॉल आया था

सो आज मैं अपनी कहानी वहीं से दोबारा शुरू करती हूं जहां से अधूरी छोड़ी थी।

जैसा कि मैं बता चुकी हूं कि मैंने ब्ल्यू फ़िल्म देख कर अब्बू से ज़िद करी कि मुझे भी चार आदमियों से एक साथ चुदाना है. तब अब्बू ने कहा कि अभी तो तेरा भाई और मैं ही हूं, हां ! कल ज़रूर तूझे चार आदमियों से चुदवा दूंगा और उसके बाद अब्बू ने नये तरीके से मेरी बुर चूसी. जो आप पार्ट एक में पढ़ सकते हैं।

अब बात आगे बढ़ाती हूं।
तो अब मैं अब्बू के कन्धे पर अपने दोनों पैर लपेटे उनका लण्ड चूस रही थी और अब्बू मेरी चूत को चूस रहे थे और वही किनारे मेरा भाई अपने लण्ड को हाथ में लेकर खड़ा था. तब अब्बू ने मुझे नीचे लेटा दिया और भाई से कहा- आओ बेटे, आज इस साली की चूत की दोनों बाप बेटे मिलकर धज्जियाँ उड़ा देते हैं. साली ब्ल्यू फ़िल्म देख कर चार लोगों से एक साथ चुदाने की ज़िद कर रही है तो आज तो हम दोनों ही चार के बराबर चुदाई कर देते हैं बाकि कल इस चूत मरानी को चुदाता हूं चार मुस्टण्डों से!

और फ़िर अब्बू मेरी चूत के मु्ंह पर अपने लण्ड को रगड़ने लगे और भाई मेरे सर के पास मेरे मुँह पर आया और अपने लण्ड को मेरे हाथ में देकर चूसने को बोला।

तब मैं भाई के तगड़े लण्ड को हाथ से सहलाने लगी. और अब्बू जी ने अचानक मेरी बुर पर चिकोटी काट ली और मेरी बुर के दाने के साथ छेड़खानी करने लगे. आज वाकई अब्बू के साथ अलग ही तरह का मज़ा मिल रहा था जो पहले कभी नहीं मिला था।

उधर भाई ने अपना लण्ड मेरे मुँह में डाल दिया और मैं मज़े से चूसने लगी. अब्बू जान भी अब मेरी जवान बुर पे अपनी जबान रख कर चाटने लगे. फ़िर मैं भी अपने चूतड़ नीचे से उचकाने लगी अब मेरे मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी- आआह्हह्ह आआअह्हह अब्बू जान, बहुत मज़ा आ रहा है चूस डालो मेरी बुर को … पी जाओ साली को! बहुत खाज मचती है इसमें! आआह्हह्ह आज अपनी बेटी की चूत की सारी खाज मिटा दो!

अब अब्बू ने अपनी जबान किसी लण्ड की तरह मेरी चूत के अन्दर धकेल दी और मथनी की तरह मथने लगे मेरी बुर को। अब मुझे दो तरफ़ा मज़ा मिल रहा था; एक तरफ़ भाईजान लण्ड अपनी बहन के मुँह में डाले था और अब्बू मेरी चूत को चूस रहे थे.
तब ही मैं ‘आआह्ह आआअह्ह …’ करते हुए झड़ गई और अब्बू मेरे सारे रस को बड़े मज़े से चाट गये. और फ़िर भाई भी जोरदार धक्के मेरे मुँह में लगाते हुए झड़ गया. उसके बाद थोड़ी देर तक हम लोग सुस्त से पड़े रहे।

करीब 20 मिनट बाद अब्बू ने कहा- अब बेटा, इस माँ की लोड़ी की चुदाई करनी है. वो भी इस तरह कि साली ब्ल्यू फ़िल्म की चुदाई भूल जाये!
और ये कहकर अब्बू ने मेरी चूची को कसकर दाब दिया और भाई मेरी पीठ के पीछे से चिपक गया. अब मैं अब्बू और भाई के बीच में पिसी जा रही थी।

आगे से अब्बू अपने सीने से कसकर मेरी दोनों चूची दाबे हुए मेरे लबों को चूस रहे थे और पीछे से मेरा भाई अपने दोनों हाथ से मेरी बुर की दरार को कुरेद रहा था और उसका 7″ का कड़ा लण्ड मैं अपनी गाण्ड पर साफ़ महसूस कर रही थी।

तब ही भाई ने गप्प से अपनी एक अंगुली मेरी चूत में डाल दी और अब्बू तो अब बकायदा मेरी एक चूची के निप्पल को मुँह में दाब कर अपने होंठ से मसल रहे थे और दूसरी चूची को हाथ से बहुत बेदर्दी से दबा रहे थे।
मैं सिसक रही थी- आआह्हह अब्बू … ज़रा धीरे धीरे दबाइये, बहुत दर्द हो रहा है, रहम कीजिए अपनी बेटी पर!

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और फ़िर अब्बू ने कहा- बेटा, अब ज़रा आसन लगाने दे, आज एक साथ दो लण्ड तेरी बुर में डलवाऊँगा.
तब मैंने कहा- अब्बू जी, आपके पास तो एक ही है।
अब्बू ने कहा- अरी मेरी छिनाल बिटिया रानी! ज़रा सबर तो कर और पीछे देख! तेरे भाई का लण्ड भी तो है!
और ये कहकर वो बेड पर लेट गये उनका लण्ड किसी सांप की तरह फ़ुफ़कार रहा था।

इस उम्र में भी अब्बू का लण्ड बहुत मोटा और लम्बा था मेरा दिल अन्दर से डर रहा था कि आज मेरी नन्ही सी चूत का क्या होगा?

तब अब्बू ने कहा- मेरी प्यारी बेटी, तू अपनी चूत को मेरे लण्ड पे रख कर बैठ जा!
और मैं अपने दोनों पैर छितरा कर उनके लण्ड पर बैठ गई और फ़िर उनका लण्ड थोड़ा सा मेरी चूत में घुस गया।
तब अब्बू ने कहा- अब तू मेरी तरफ़ झुक जा!

और जैसे ही उनका पूरा लण्ड मेरी चूत में घुस गया और मैं जब झुकी तो अब्बू ने अपने दोनों हाथ से मुझे अपनी तरफ़ खींच लिया और मेरे होंठ को चूसने लगे.
अब अब्बू ने पीछे से भाई को इशारा किया कि तू भी अपना लण्ड इसकी चूत में घुसेड़ दे.
पर भाई इतना समझदार नहीं था, वो अपने लण्ड को मेरी गाण्ड के छेद में घुसेड़ने लगा।

तब मैंने कहा- अब्बू … भाई तो गाण्ड में मारने जा रहा है.
भाई ने कहा- साले बहनचोद … मैं कह रहा हूं कि बहन की चूत में डाल … और तू है कि बहन की गाण्ड के पीछे पड़ा है?
तब भाई ने कहा- इसमें तो आप डाले हुए हैं, मैं कहां से डालूं?
अब्बू ने कहा- साले आजकल के लड़के तो बस चूत मारना और गाण्ड मारना जानते हैं, साले बस लड़की की टांग उठाई और लगे चोदने! अरे साले हरामी, जिसमें मैं डाले हूं, उसी में तू भी अपना लण्ड डाल।

तब अब्बू ने मुझसे कहा- बेटी, तू ज़रा अपनी बुर और ऊपर कर दे ताकि इस बहनचोद को साफ़ साफ़ नज़र आये तेरी चूत!
और फ़िर मैंने अपनी चूत और ऊपर उठा दी।

अब भाई अपने लण्ड को मेरी चूत पे रख कर घिसने लगा. पर मेरी समझ में खुद भी नहीं आ रहा था कि जब अब्बू का लण्ड मेरी चूत में घुसा है, तब भाई का लण्ड कैसे जायेगा मेरी चूत में? हां अगर अंगुली पेलनी होती तो वो जा सकती थी.
पर मैं खमोश थी.

आखिर भाई ने बहुत ज़ोर देकर अपने लण्ड की टोपी मेरी चूत में डाल ही दी और तब मुझे बहुत दर्द हुआ- आआअह्हह ऊऊओह्हह अम्मीईई … अब्बू बहुत दर्द हो रहा है।
तब अब्बू ने कहा- क्या भाई का पूरा लण्ड चला गया अन्दर?
मैंने कहा- नहीं, अभी तो सिर्फ टोपी ही गई है.
तब भाई ने एक धक्का और मारा और अब भाई का करीब चार इन्च लण्ड उसकी बहन की चूत के अन्दर घुस गया था।

मैं चीख रही थी- आआअह्हह अब्बूऊऊ जीईई पलज़्ज़ रहम कीजिये, मैं मर जाऊंगी ईई आआह्ह्ह!
तब अब्बू मेरी चूची को दबाते हुए बोले- बेटी, अभी तुझे बहुत मज़ा आयेगा, जब दो लोगों का लण्ड एक साथ बुर में जाता है तब बहुत मज़ा आता है क्यूंकि मैंने तेरी अम्मी को भी इस तरह से तेरे चचा के साथ चोद चुका हूं!

और तब ही मेरे भाई ने एक और धक्का मारा और मेरा बेलेन्स बिगड़ गया और मैं अब्बू के सीने पर गिर गई और मेरी आंख से आंसू निकलने लगे और मेरी सिसकियाँ बंध गई।
अब भाई और अब्बू का पूरा पूरा लण्ड मेरी चूत में था और एक दूसरे के लण्ड से रगड़ खा रहा था और मेरी चूत की दरार फ़ैलती जा रही थी. अब मुझे भी दर्द की जगह मज़ा आने लगा था और मैं धीरे धीरे उन दोनों का साथ देने लगी थी- आआह्हह आआअह्ह ह्हह … अब्बू … भाई … बहुत अच्छा लग रहा है. और अन्दर कीजिये … आअह्ह ह्हह ऊऊफ़्फ़ … कसम से बहुत मज़ा आ रहा है!

और अब दोनों बहुत ही जोरदार धक्के लगा रहे थे साथ साथ मेरी दोनों चूची को भी मसल रहे थे. तभी मेरे बाप या भाई में से एक का लण्ड मेरी चूत में झड़ा. पर मैं समझ नहीं पाई कि किसका पानी मेरी चूत में गिरा है!
फ़िर कुछ देर बाद मैंने अपनी चूत में एक बार फ़िर से पानी की फ़ुहार महसूस की और फ़िर दोनों के लण्ड ढीले हो गये.

पर मैं अभी झड़ी नहीं थी, तब मैंने अब्बू से कहा- साला बेटी चोद कर अपना पानी तो आप लोगों ने निकाल लिया पर मेरा तो अभी पानी भी नहीं निकला. साले अगर जल्दी ही मेरी प्यास नहीं बुझाई तो तुम दोनों का लण्ड काट लूंगी।

तब अब्बू ने मुझे झट से अपने लण्ड पर बैठा लिया और मेरी चूची को चूसते हुए बोले- मेरी बिटिया रानी, ऐसे बात ना करो, आज देखो मैंने तुमको कितना मज़ा दिया है और अभी तुम्हारा पानी भी निकाल देता हूं.
और फ़िर मुझसे कहा- तुम ऐसा करो कि भाई से एक बार गाण्ड मरवा लो, तुम्हारा पानी भी निकल जायेगा।

तब मैंने कहा- अबे जाहिल … कहीं गाण्ड मरवाने से भी पानी निकलता है बेटीचोद? मेरी बुर में खाज है और तू गाण्ड मरवाने की बात कर रहा है।

तब अब्बू ने कहा- बेटी, मैं तेरी मारुंगा, भाई गाण्ड मारेगा.
और उसके बाद भाई ने मेरी जम कर गाण्ड मारी और आगे से अब्बू मेरी चूत में अपना लण्ड पेले जा रहे थे, अब मुझे दो तरफ़ से मज़ा मिल रहा था।

एक साथ बुर और गाण्ड मरवाने का थोड़ी देर बाद ही मैं झड़ गई और मेरी चूत से फ़स फ़स की अवाज़ आने लगी।

तो दोस्तो, कैसे लगी मेरी Antarvasna कहानी?

नेहा वर्मा Antarvasna

रोशन और राम नये नये कॉलेज Antarvasna में आये थे और शहर में ही कॉलेज के पास उन्होंने एक कमरा किराये पर ले रखा था। जवानी का नया नया जोश भी था और वो जवानी का पूरा लुत्फ़ भी उठाना चाहते थे। उन्हें स्वतन्त्र माहौल मिल गया था। मां बाप का कोई डर नहीं, यहां कोई भी कुछ कहने वाला नहीं था। सबसे पहले उन्होंने लुत्फ़ शराब का उठाया। वे दोनों लगभग रोज शाम को एक आधी बोतल ले आते थे और पीते थे। कुछ दिनों के बाद उन्होंने एक सी डी की दुकान से ब्ल्यू फ़िल्म भी किराये पर लाना आरम्भ कर दिया था। एक दिन…

शाम के आठ बजे थे। नहा धो कर वे दोनों ही बोतल खोल कर पीने बैठ गये थे। टिफ़िन आ चुका था। राम ने टी वी खोल कर कर किराये पर लाई हुई सीडी प्लेयर पर लगा दी और दारू का दौर चलने लगा। ब्ल्यू फ़िल्म भी चल रही थी। एक के बाद एक चुदाई के सीन आने लगे थे। रोशन और राम पर भी रंग चढ़ने लगा।

‘भेनचोद अन्ग्रेज औरतें क्या मस्त होती हैं…’ गर्म होता हुआ बोला।

‘हाँ यार, साली की चूत तो देख… लगता है अभी चोद डालूं…!’ राम अपना लण्ड पजामे के ऊपर से मसलता हुआ बोला। रोशन ने राम को देखा, राम का लण्ड खड़ा हुआ था। उसे देख कर रोशन का लण्ड भी जोर मारने लगा। पहले तो वो शरमा कर लण्ड दबा रोशनरहा था, पर राम को देख कर वो भी अपना लण्ड को हल्के हाथों से उपर नीचे करने लगा।

– अन्ग्रेजों का लण्ड भी देख कितना मोटा और लम्बा होता है… अपना तो उनके सामने कुछ भी नहीं है। रोशन ने अपना लण्ड सहलाते हुए कहा।
‘तो क्या हुआ, लण्ड तो तेरा भी बहुत जोर मार रहा है ‘ राम ने उसके लण्ड को मसलता हुआ देख कर कहा।
‘अरे ! ये मादरचोद… लण्ड को कैसे चूस रही है… ! हाय मेरा लण्ड भी ये मां की लौड़ी चूस ले…! ‘ रोशन ने अपना लण्ड दबाते हुए कहा।

‘उसे मां चुदाने दे…तू कहे तो…तेरा मसल दूं?’ कहते हुए राम ने उसकी जांघ पर हाथ रख दिया। रोशन एकबारगी सिहर गया। उसका हाथ हटाते हुए कहा- मत कर यार ! गुदगुदी होती है।

गुदगुदी तो होगी ही, पर मजा भी तो आता है, राम ने अपना हाथ लण्ड के पास रोशन के हाथ पर रख दिया और लण्ड पकड़ने की कोशिश करने लगा। पहले तो रोशन को अच्छा नहीं लगा, पर उसके हाथ की रगड़ से उसे मजा आने लगा। धीरे धीरे रोशन ने विरोध करना बंद कर दिया। अब लण्ड राम की गिरफ़्त में आ गया। पाजामे के ऊपर से ही वो लण्ड को सहलाने लगा। रोशन को मजा आने लगा। उसका लण्ड अब फ़ड़फ़डाने लगा।

राम, तेरा कैसा है?…लगता तो मस्त है! कैसे पजामे में से बाहर निकलने को बैचेन हो रहा है!’ रोशन ने अपना हाथ राम के लण्ड पर रख दिया और उसे दबा दिया। राम के मुख से आह निकल पड़ी। उसने कोई विरोध नहीं किया।
दोनो नशे में मदहोश थे। आंखें लाल हो चुकी थी। दोनों धीरे धीरे पास आने लगे और एक दूसरे को नशीली निगाहों से देखने लगे। रोशन के पाजामे का नाड़ा खुल चुका था। राम ने रोशन का लण्ड बाहर निकाल लिया। पास में देसी घी का डब्बा पड़ा था, राम ने उसमें से थोड़ा सा घी निकाल कर रोशन के लण्ड पर मल दिया और उसे चिकना कर दिया।

अब चिकने लण्ड पर मुठ मारने में राम को भी आनन्द आने लगा था। रोशन भी आहें भरने लगा था। अचानक राम ने रोशन को चूम लिया और चूमते हुए उसके होंठों तक आ गया। रोशन भी अपना आपा खो बैठा और और उसके होंठो से अपने होंठ मिला दिये और एक दूसरे को चूमने लगे।

– रोशन, आई लव यू…यार !
– राम, चूमते रह, मजा आ रहा है ! इतने दिन तक तू कहाँ था भोसड़ी के?
– मुठ मारने में कितना मजा रहा है, रस निकाल दे मेरे लौड़े का !

– हाँ रे ! बहुत मजा आ रहा है… और घिस दे यार…माँ चोद दे मेरे लण्ड की !’ दोनो के पजामे उतर चुके थे। लण्ड की घिसाई चल रही थी। दोनों के लण्ड फ़ड़फ़ड़ा रहे थे। मुठ अब जोर जोर से मार रहे थे। अचानक राम ने रोशन को जोर का धक्का दिया और वहीं चित लेटा दिया और उसका लण्ड अपने मुंह में भर लिया और जोर जोर से सुपाड़े को चूसने लगा। रोशन तड़प उठा और राम को खींचने लगा। राम ने इशारा समझा और 69 पोजिशन में आकर अपना लन्ड उसके मुँह में डाल दिया।

दोनो तरफ़ से कस कर लण्ड की चुसाई हो रही थी। इतने में रोशन का शरीर कसमसाया और उसके लण्ड ने लावा उगल दिया। राम ने तुरन्त मुँह हटा दिया और हाथ में वीर्य भर लिया। पर साथ में उसका लण्ड मसलता ही रहा। उसके लण्ड के आस पास उसका वीर्य फ़ैल गया था। इतने में राम भी छूट गया और रोशन का मुख वीर्य से भर उठा।

रोशन ने वीर्य को मुख से निकाल दिया और गले के पास से बहता हुआ नीचे बिस्तर पर गिरने लगा। दोनों ही झड़ चुके थे। ब्ल्यू फ़िल्म पर किसी का भी ध्यान नहीं था। पास में पड़ा तौलिया उठा कर दोनों ने अपने लण्ड और मुख साफ़ किये और नंगे ही बैठ गये। माहौल गर्म हो गया था। उन दोनों ने अब अपनी बनियान भी उतार कर मरजात नंगे हो गये थे। पंखे की हवा उनके शरीर को सहला रही थी। दोनों के जवान चिकने शरीर और उनकी कसी हुई मसल्स उभरी हुई दिख रही थी।

– मजा आ रहा है ना राम…
-हाँ यार, इसमें इतना मजा आता है मुझे तो पता ही नहीं था।
-देख घी लगा कर कितना चिकना लग रहा है तेरा लण्ड, रोशन।
– तू भी लगा ले यार…चल मैं लगा देता हूँ…

रोशन घी निकाल कर राम के लन्ड पर मलने लगा। राम का लण्ड फिर से तन्ना उठा। राम ने रोशन का लण्ड फिर से पकड़ लिया। दोनो फिर से झूम उठे। दोनों एक बार फिर एक दूसरे का मुठ मारने लगे।

अचानक राम बोला- रोशन मेरी गाण्ड में खुजली होने लगी है, शान्त कर दे यार ! राम ने अपनी गाण्ड रोशन की तरफ़ करते कहा।
रोशन ने घी के डब्बे में से घी निकाल कर उसकी गाण्ड के छेद पर लगाया और घिसने लगा। राम के मुख से सिसकारी निकल पड़ी।
‘रोशन यार पेल दे लौड़ा गाण्ड में, मजा आ जायेगा !
– सच ! पेल दूँ क्या?

राम घोड़ा बन गया। रोशन ने अपना कड़कता लण्ड उसकी गाण्ड की छेद पर रख दिया। उसकी चिकनी मस्कुलर गाण्ड पर हाथ फ़ेरा और लण्ड गाण्ड के फ़ूल पर दबाने लगा। छेद चिकना था, लण्ड अन्दर घुस पड़ा।

-मजा आ गया रोशन, चोद डाल साली हरामी गाण्ड को। रोशन ने जोर लगाया और लन्ड घी की सहायता से अन्दर घुसने लगा।
राम दर्द से भरे स्वर में बोला- तेरी तो टाईट गाण्ड है… मेरे तो लण्ड की भी मां चुद जायेगी यार, कहीं छिल ना जाये?
-हाय रे, रोशन, दर्द होता है, पर पेल दे लण्ड, इस की तो मां दी फ़ुद्दी।

रोशन ने लण्ड बाहर निकाल कर फिर से अन्दर पेल दिया। और अब धक्के चल निकले। राम की गाण्ड चुदने लगी। रोशन का लौड़ा फूलने लगा और कड़कने लगा। राम को भी अब दर्द कम हो रहा था। पर उसे गाण्ड मराने में मजा आ रहा था। राम का लण्ड भी नीचे फ़ुफ़कारे भर रहा था, लन्ड नीचे लटकता हुआ फ़ड़क रहा था। कुछ ही देर में रोशन का वीर्य छूट पड़ा और राम की गान्ड में भरने लगा। रोशन झड़ चुका था।

अब दोनों ने अपना पोज बदला और राम का कड़कता लण्ड रोशन की गाण्ड में टिका था। रोशन की गाण्ड टाईट नहीं थी, फिर देसी घी का असर, लण्ड फ़क से रोशन गाण्ड में घुस गया, रोशन एक बार तो दर्द से कराह उठा पर सम्भल गया।
राम अपना लण्ड रोशन की गाण्ड में पेलने लगा। रोशन गान्ड चुदाई को एन्जोय कर रहा था। वो धीरे से नीचे पांव पसार कर पेट के बल लेट गया और अपनी आन्खे बंद कर ली और गाण्ड मराने क भरपूर आनन्द लेने लगा।
राम रोशन की पीठ पर लिपट कर लण्ड पेल रहा था। गाण्ड के फ़ूल की चमड़ी लण्ड के साथ साथ बाहर निकल रही थी और अन्दर जा रही थी। दोनों के चिकने शरीर एक दूसरे में समाने की कोशिश कर रहे थे।

अचानक राम के लण्ड ने पिचकारी छोड दी और वीर्य निकल पड़ा। राम हाय कह कर रोशन की पीठ से चिपक गया और वीर्य रोशन की गान्ड में भरने लगा। राम अब पूरा झड़ चुका था। उसका लण्ड अपने आप बाहर आ गया था। अब राम और रोशन आराम से बैठ गये। उन्होंने शराब का अन्तिम जाम बनाया और आज के मजे के नाम पर चीअर्स करके पीने लगे।

आज दोनों जवानी का पूरा लुत्फ़ उठा कर सन्तुष्ट थे। जाम समाप्त हो चुका था और अब टिफ़िन की तैयारी हो रही थी।

वो दोनों इस बात से अन्जान थे कि उन्हें किसी जगह से मेरी दो आंखें उन्हें ये सब करते हुए देख रही थी। इस दौरान मैं दो बार अपनी भोसड़ी में अंगुली डाल कर रस निकाल चुकी थी।… हमेशा की तरह मैं उन दोनों से चुदने का कोई बढ़िया प्लान बना रही थी… उन्हें अपने चक्कर में लेकर दो दो लण्ड का मजा लेने का प्लान। Antarvasna

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