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Xxx लड़की नाईट सेक्स कहानी में पड़ोस की एक लड़की मुझे अच्छी लगी तो मैंने उससे दोस्ती बढ़ाई. गर्मियों में हमारा और उसका परिवार छत पर एक साथ सोते थे.

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम मोहन है.
मैं एक शादीशुदा लड़का हूँ. मैं सूरत गुजरात का रहने वाला हूँ.

मेरी हाइट पाँच फुट आठ इंच है और मेरे लंड का साइज़ छह इंच है.
मैं देखने में गुड लुकिंग हूँ और ज्यादा मस्ती वाला मिज़ाज़ का हूँ.

वैसे तो मुझे तरह तरह की लड़कियां और भाभी पसंद हैं.
खास कर बड़े मम्मे और बड़ी गांड वाली भाभियां और लड़कियां ज्यादा पसंद आती हैं.

मैं अन्तर्वासना का एक नियमित पाठक हूँ.

अन्तर्वासना पर यह मेरी पहली सेक्स कहानी है.

आज मैं अपने साथ हुई एक घटना आपके साथ साझा करना चाहता हूँ.
मैं आशा करता हूँ कि आपको मेरी Xxx लड़की नाईट सेक्स कहानी पसंद आएगी.

तब मेरी शादी नहीं हुई थी और पढ़ाई खत्म हुए 6 महीने हो चुके थे.

गर्मी की छुट्टियों की बात है.
उन दिनों हम लोग रात को छत पर सोने जाया करते थे.

हमारे वाले अपार्टमेंट में एक लड़की रहती थी.
उसका नाम एकता (बदला हुआ नाम) था.

एकता का फिगर 32-28-34 का था. उसे देख कर लगता था कि बनाने वाले ने बड़ी ही फुरसत से उसे बनाया हो.
क्या मस्त पीस थी यार … देखने में थोड़ी सांवली जरूर थी मगर बहुत सुंदर दिखती थी.

उसके बूब्स बहुत ही जानलेवा थे.
मैं तो उसके दूध देखते ही गदगद हो जाता था.

उसकी हरकतों से लगता था कि साली चूत में बहुत गर्मी भरी थी.
वह भी अपने परिवार के साथ छत पर सोने आया करती थी.

एकता हमारे बाजू वाले फ्लैट में किराये पर रहने आई थी.
वे लोग नए नए आए थे, तो हम लोग उनसे ज्यादा बात नहीं करते थे.

कुछ दिन तक मैंने उसे देखा तो वह भी मेरी तरफ देखने लगी थी.
कुछ दिन तक यूं हम दोनों एक दूसरे को बस देख कर हल्की सी स्माईल देकर घूम जाते थे.

वह देखने में तो सीधी सादी लग रही थी पर ऐसे किसी को कैसे समझा जा सकता था.

कुछ ही दिनों में कुछ ऐसा हुआ कि मैं उससे बात करने के लिए तड़पने लगा था.
मैंने बहुत हिम्मत जुटा कर जैसे तैसे उससे बात करने की कोशिश की.

वह भी सहज भाव से मुझसे बात करने लगी.
अब धीरे धीरे हम लोगों की दोस्ती हो गई और बातचीत भी होने लगी.
हम दोनों अब जब भी छत पर एक दूसरे को देखते तो थोड़ा मस्ती मजाक भी कर लिया करते थे.

जैसा कि मैंने बताया कि यह गर्मी के दिनों की बात है. उन दिनों हम लोग छत पर सोने जाया करते थे.
हमारी बिल्डिंग के कई सारे लोग सोने के लिए छत पर आ जाते थे.

उसमें एकता, उसके माता पिता और उसका छोटा भाई भी सब लोग सोने के लिए छत पर आ जाया करते थे.

हम दोनों में पहले से ही बोलने का व्यवहार था, तो हम लोग सोने से पहले थोड़ी बहुत बात कर लिया करते थे.
थोड़ी मस्ती मजाक भी कर लिया करते थे और सो जाते थे.

धीरे धीरे हम लोग और करीब आने लगे थे.
वह भी मेरे साथ बात करने का कोई ना कोई बहाना ढूंढ़ती रहती थी और मैं भी उससे बात करने का कोई न कोई बहाना ढूंढता रहता था.

हम दोनों जहां पर सोते थे, वह जगह पानी की टंकी की आड़ में थी.
मेरे बाजू में ही एकता का बिस्तर लगता था.

हम दोनों सोने से पहले मोबाइल में लूडो खेलते थे.
खेल में एकता, उसका छोटा भाई और मैं … हम तीनों खेलते थे.

खेलने के दौरान मैं किसी ना किसी बहाने से उसे छूने की कोशिश करता रहता था.
वह भी समझती थी, तो मेरे स्पर्श का मजा लेती थी.

एक दिन उसका छोटा भाई अपनी छुट्टियां बिताने के लिए अपने मामा के घर गया था.
उसके मामा का घर गांव में था.
उसी वजह से आज मैं और एकता अकेले थे.

रोज की तरह हम दोनों ने लूडो खेलना चालू किया.
आपको तो पता ही है कि मुझे जो चाहिए था, वह मुझे मिलने वाला था.

अन्दर ही अन्दर मेरे मन में लड्डू फूटने लगे थे.
आज एकता भी कुछ अलग सा व्यवहार कर रही थी.
पता नहीं क्यों आज उसके चाल चलन भी कुछ ठीक नहीं लग रहे थे.

रोज की तरह हम दोनों ने लूडो खेलना चालू किया.
आज हम दो ही थे.

हम दोनों ने थोड़ी देर तक लूडो खेला.
मगर पता नहीं क्यों, आज हम दोनों को खेलने में मजा नहीं आ रहा था.

एकता भी आज कुछ अजीब सी हरकत कर रही थी.
आज उसने एकदम छोटी वाली सॉर्टी और गंजी ही पहन रखी थी.

उसने अन्दर ब्रा नहीं पहनी थी, वह साफ साफ समझ आ रहा था.
उसके निप्पल उसकी गंजी से कड़क से साफ दिख रहे थे.

मेरी नजरें उसके नट्स पर ही टिकी थीं.
वह भी मेरी नजरों को भांप कर बार बार अपनी चूचियों को सहला रही थी.
आज वह मुझे इतना भाव दे रही थी कि साफ लग रहा था कि आज टांगें खोलने के लिए एकदम राजी है.

उसने मुझसे आज तक ऐसे कभी बर्ताव नहीं किया था.
वह बार बार पूरी नीचे झुक कर अपने गोल गोल संतरे मुझे दिखा रही थी.

आज उसका खेलने में जरा सा भी ध्यान नहीं था; वह कुछ और खेलना चाहती थी.
बात बात में वह मेरा हाथ भी पकड़ ले रही थी और जोर से मेरे हाथ पर च्यूँटी काट देती थी.

फिर बड़े प्यार से मेरे हाथ में किस कर देती थी.
थोड़ी देर बाद मुझे भी पता चल गया कि आज इसे क्या चाहिए है.

हम दोनों ने आज बहुत देर तक ऐसा किया.
हमारा खेल तो बस एक बहाना था. हमें तो कुछ और ही खेलना था.

मगर करें तो करें क्या … कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि शुरुआत कैसे करें.
उसकी हरकतें देख कर मेरा लंड भी तन कर तंबू बना चुका था.

वह एकता को भी मालूम पड़ गया था.

पूरी छत में सब लोग सोये हुए थे.
एकता के मम्मी पापा भी उसके बाजू में ही सोये हुए थे.

बहुत देर हो गई थी तो उसके पापा ने उसको सो जाने का बोला.

हम दोनों लेट गए मगर पूरी रात नींद नहीं आयी. हम दोनों अपनी अपनी जगह पर सो गए.

सोते सोते एक दूसरे को देखा रहे थे और इशारों में बात कर रहे थे.
उस वक्त रात के लगभग दो बज रहे होंगे.

मैंने उसे इशारा करते हुए कहा कि नीचे चलो.
वह आजू बाजू देख कर तुरंत वॉशरूम के बहाने नीचे चली गई.

थोड़ी देर बाद मैं भी अपने तकिया को चादर उढ़ा कर उठ गया और वॉशरूम के बहाने उसके पीछे पीछे नीचे आ गया.

वह नीचे भूखी कुतिया की तरह मेरा सीढ़ियों पर ही इंतज़ार कर रही थी.

हमारे अपार्टमेंट में कोई लिफ्ट नहीं है केवल सीढ़ियां ही हैं.
एकता सीढ़ियों के बीच बनी बाल्कनी में मेरा इंतजार कर रही थी.

मैं नीचे आया तो उसने मुझे इशारे से अपनी ओर बुलाया.
तो मैं झट से उसके पास पहुंच गया.

अब मैं बाल्कनी में जाकर खड़ा हो गया और चारों ओर देखा कि कोई हमें देख तो नहीं रहा है.

बाद में वह मेरे पास आई.
उसने हल्के से मेरे गाल पर पप्पी दी और उसने कहा- आज मुझे तुमसे चुदवाना है!

बस फिर क्या था … मैं भी सालों से चूत का भूखा उसको अपनी बांहों में कसके पकड़ लिया और जोर जोर से उसके होंठों को अपने होंठों से रगड़ने लगा.
वह भी इतनी गर्म हो चुकी थी कि वह भी मेरा जोर जोर से साथ दे रही थी.

थोड़ी देर बाद उसने मेरे सर के बाल पकड़ लिए और मेरा मुँह अपने मम्मों पर रख कर बोली- चूसो.
मैं उसके मम्मों को जोर जोर से चूसने का मजा लेने लगा.

लगभग बीस मिनट तक हम लोग यूं ही चुम्मा-चाटी ही करते रहे.

उस वक्त एकता ने चूंकि ब्रा और पैंटी नहीं पहनी थी तो मैंने झट से उसकी छोटी सी टी-शर्ट उठा कर ऊपर कर दी और उसकी शॉर्टी को भी सरका कर नीचे कर दी.
हम दोनों को यह सब करते हुए बहुत डर लग रहा था कि कहीं कोई आ न जाए.

इसी लिए हम दोनों ने पूरे कपड़े नहीं उतारे थे.
मैंने भी छोटा सा बॉक्सर पहन रखा था, उसे भी मैंने नीचे सरकाने का इशारा किया.

उसने भी झट से मेरा बॉक्सर नीचे कर दिया और बैठ कर मेरा लंड चूसने लगी.

साली ने लंड को लॉलीपॉप समझ लिया था. वह लौड़े को मुँह से रगड़ रही थी.
मुझे तो ऐसा लग रहा था मानो मैं जन्नत की सैर कर रहा हूँ.

वह एकदम अनुभवी रांड सी लग रही थी.
साली जैसे कई सालों से किसी का लंड मुँह में लेती आई हो.

खैर मुझे इससे क्या … मुझे तो आनन्द मिल रहा था, तो मैं क्यों ज्यादा सोचूं.
वैसे भी किसी ने सही कहा है, आम खाओ गुठलियां मत गिनो.

मैं भी आनन्द ले रहा था और वह मेरा लंड रगड़ रगड़ कर चूस रही थी.
मेरा छूटने वाला था, तो मैंने उसे बताया कि मैं छूटने वाला हूँ.
वह इशारे से बोली- कोई बात नहीं … मेरे मुँह में ही छोड़ दो.

क्या गजब मजा आ रहा था, सच बोलूँ तो आज तक किसी भी लड़की को मैंने मुँह में नहीं दिया था.
आज तो मानो जन्नत की सैर पर ही था.
ऐसा अहसास हो रहा था.

थोड़ी देर तक लॉलीपॉप चुसवाने के बाद मैंने उसे पलट कर खड़े होने को बोला और चारों ओर देखा कि कोई आ तो नहीं रहा है.
सब तसल्ली करने के बाद उसे दीवार पकड़कर खड़े होने को कहा.

वह पलट कर खड़ी हो गई.
बाद में उसके पीछे से डालने की कोशिश की, मगर उसकी चूत इतनी टाइट थी कि मैं पीछे से लंड पेल ही नहीं पाया.

यह बाद में समझ में आया कि चुदी चुदाई चूत को ही पीछे से पेलना आसान होता है.
पहली बार में तो चित लिटा कर ही चुदाई संभव है.

उसके बाद मैंने उसे बाल्कनी की दीवाल पर बिठाया और धीरे से अपने लंड का सुपारा उसकी चूत पर रख कर रगड़ने लगा.

उसकी चूत गीली हो गई थी और लंड लीलने को खुल गई थी.

थोड़ी देर बाद मैंने हल्का सा झटका दिया, तो मेरा आधा लंड अन्दर चला गया.
वह दर्द के मारे एकदम से तड़प उठी और मुझसे छूटने की कोशिश करती हुई माँ बहन की गालियां देने लगी.

मगर मैंने उसके मुँह पर हाथ रख कर उसे जकड़ लिया था.
वरना उसकी चीख से सब लोग उठ जाते और इज्जत की कायदे से माँ चुद जाती.

बाद में थोड़ी देर तक मैं उसको चूमता रहा.
उसका दर्द कम हो गया था.

मैंने एक और जोर का झटका दिया तो मेरा पूरा लंड अन्दर घुस गया था.
वह फिर से तड़प उठी.

मैंने वैसे ही बिना हिले उसकी चूत में लंड घुसा रहने दिया और उसके मम्मों से खेलना चालू कर दिया.
उसकी आह निकलना बंद हुई तो मैंने उसके होंठों को चूसना चालू कर दिया.

मैं उससे इधर उधर की बातें करने लगा ताकि उसका दर्द से ध्यान भटक जाए.

थोड़ी देर बाद मैं लंड को धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा.
उसका भी दर्द कम हो गया था और Xxx लड़की नाईट सेक्स का मजा लेने लगी थी.

जैसे जैसे वक्त निकलता गया, वैसे वैसे मैं अपनी स्पीड बढ़ाता गया.
वह चुदाई का मजा लेने लगी थी.

तकरीबन 15 मिनट तक हम दोनों ने सेक्स किया.
बाद में मैंने उसे पलट कर दीवार को पकड़कर खड़े होने को कहा.
मगर उसने साफ साफ मना कर दिया कि मैं पीछे से नहीं करने दूंगी.

बहुत मनाने के बाद उसने पीछे से करवाने का मन बनाया.

उसके बाद जैसे ही वह गांड खोल कर खड़ी हुई, मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर रख दिया.
वह डर के मारे घूम गई.

बहुत समझाने के बाद वह वापस घूमकर खड़ी हुई. इस बार जरा सी भी देर किए बिना मैंने अपना लंड उसकी चूत में पेल दिया.
जैसे ही लंड पेला, तो उसे बहुत ज्यादा दर्द होने लगा था. वह दर्द सह रही थी और उसकी आंखों से पानी निकलने लगा था.

आज मैं उस पर तरस खाता, तो वापस ये मौका कभी नहीं आता.
जैसे तैसे मैंने उसको शांत किया और लंड को धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा.

एकता के मुँह पर दर्द साफ दिखाई दे रहा था मगर वह भी मजे ले रही थी और मेरा साथ भी दे रही थी.
कुछ पल बाद मुझे ख्याल आया कि एकता को छोड़ दूँ.

जैसे ही मैं उसको छोड़ने लगा तो उसके चेहरे पर उदासी छा गई.
मैं समझ गया कि वह भी दर्द होने का नाटक कर रही है, इतना हार्ड सेक्स करके अब उसे भी मजा आ रहा है.

बस फिर क्या … मुझे जो चाहिए था उसकी हरी झंडी मिल गई थी तो मैं किसी की भी सुनने वाला नहीं था.
मैं और जोर जोर से उसे चोदने लगा.

सच कहूँ तो पीछे से चोदने में जो मजा आता है, वह किसी भी स्टाइल में नहीं आता है.

वह चिल्लाना चाहती थी मगर सब लोगों के जागने के डर की वजह से वह अन्दर ही अन्दर चिल्ला रही थी और तेज तेज चोदने का कह रही थी.

मैंने स्पीड बढ़ा दी थी और जोर जोर से झटके दे रहा था.

वह सेक्स के दौरान दो बार झड़ चुकी थी.
अब मैं झड़ने ही वाला था इसलिए मैंने उसके दोनों चूचे पकड़ कर अपनी स्पीड और बढ़ा दी.

उसे भी चूत में बहुत दर्द हो रहा था, मगर क्या करे … चिल्ला भी नहीं पा रही थी.
मैं उसकी चूत में ही झड़ गया. तब जाकर उसने सुकून की साँस ली.

मैंने उसे अपनी बांहों में कसके पकड़ लिया और उसने भी मुझे अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया.
हम दोनों एक दूसरे की बांहों में खड़े रहे.

जैसे ही उसने मेरी तरफ देखा तो लगा कि वह आज मेरी जान ही लेकर मानेगी.
मैंने उसके माथे पर किस की और हम दोनों अपने अपने कपड़े पहन कर छत पर आ गए.

उधर हम अपनी अपनी जगह सो गए.
दूसरे दिन सुबह एकता जब मेरे सामने आई तो मैंने देखा कि वह थोड़ी लंगड़ा कर चल रही थी.

मैंने पूछा- क्या हुआ?
वह इतराते हुए बोली- एक कुत्ते ने जबरदस्ती काट लिया.

मैं अन्दर ही अन्दर हंसने लगा और वह Xxx लड़की लंगड़ाती हुई चली गई.
फिर उसके बाद हम दोनों ने कई बार सेक्स किया.

sex stories

हाय! रीडर्स मेरा नाम मनीष है। sex stories और मैं मनीषकोट (गुजरात) में रहता हूं, मेरे घर में तीन लोग हैं, मैं,पापा और मां मेरी मां बहुत खूबसूरत हैं और कोई भी मर्द उसे देखे तो उस का दीवाना हो जाये उसके। उसके दोनों दूध इतने बड़े है कि कभी भी उसके ब्लाउज़ में नहीं आते और बाहर से उसकी सत देखती है

हमारा जो भाजी वाला है वो मां से पैसे भी नहीं लेता क्योंकि जेब मां सब्जी खरीद ने जाती है तो वो झुकती है और उसके दोनों चूची बिल्कुल उसके सामने देखते है और उसकी धोती में उसका डंडा खड़ा हो जाता है… ये तो हुई रोज़ की बात लेकिन में अब आप को जो कहानी सुनाने जा रहा हूं वो सब कुछ मेरी आंखों के सामने हुआ है…

मैंने 12वीं पास कर लिया है अब मुझे बोम्बे की युनिवर्सिटी मे पढ़ाना था वहाँ मेरे अंकल रहते हैं, पापा ने उनसे बात की वो घर आये और सब कुछ समझने के बाद पापा ने मुझे वहाँ जाने के लिये हाँ कहा मैं वहाँ चला गया और थोड़े दिनों बाद घर से मां का फोन आया और मुझसे पूछा कि तु खुश है तो मैंने कहा हाँ फ़िर मां ने कहा जरा अंकल को फोन देना तो मैंने दिया और चला गया

तभी मुझे याद आया कि मुझे अपने दोस्त को फोन करना था मैंने दूसरी लाइन से फोन करने वाला था मैंने जैसे ही रिसीवर उठाया अभी मां और अंकल बातें कर रहे थे मैं वो बातें सुनने लगा

अंकल ने मां से पूछा तुम कब आ रही हो तो मां बोली थोड़े दिनो में!

तब अंकल ने कहा- तुम्हारी गांड, पिकी और बोबले केसे हैं?
ये सुनकर मैं सुन्न हो गया.

तब मां ने जवाब दिया वहाँ आ रही हूं तब सब देख लेना तो अंकल ने कहा तुम्हारा पति नहीं आ रहा?
तो मां मुस्कुरा कर बोली- नहीं।
मां ने कहा- मेरे आने के बाद मुझे मौज कराओगे?
अंकल ने कहा हाँ क्यों नहीं तुम देखना तुम्हारी चुदाई में कोई कसर नहीं होगी!
फ़िर दोनों ने फोन रख दिया…

थोड़े दिनो में मां वहाँ आयी और अंकल उनको देख कर खुश हो गये वो तो मैं वहाँ खड़ा था इसलिये अंकल में कुछ रिएक्शन नहीं देखा था थोड़ी देर के बाद अंकल ने मां के सामने देख कर अपने लौड़े पर हाथ फ़िराया मां ने हाँ में सिर हिलाया फ़िर मां ने मुझसे कहा तुम ऊपर जाओ मुझे अंकल से कुछ बातें करनी है

मैं भी समझ गया था कि आज मां अपनी चुदाई करवाने वाली है
जैसे ही मैं गया दरवाजा बंद हो गया तो मैं वापस आया और की होल में से देखने लगा और बात चीत सुनने लगा…।

मां: क्या आप रात तक नहीं रुक सकते, आज लड़के को पता चल गया तो वो आप के भाई को बता देगा,

अंकल: मेरी रानी उसे कुछ नहीं पता चलेगा, तू चल अपने कपड़े उतार

मां: मुझे शरम आती है,

अंकल:अरे कितनी बार तो तुझे चोद चुका हूं मुझसे कैसी शरम डार्लिंग

मां: अगर मेरा बेटा नीचे आया तो…

अंकल: नहीं आयेगा चलो चलो…

फ़िर अंकल मां के पीछे आये और पीछे से मां की साड़ी और पेटीकोट कमर तक ले गये मैंने देखा कि मां की गांड दिख रही थी थोड़ी देर अंकल ने उसे सहलाया मां के मुंह से अजीब आवाज आ रही थी आअह्हह… आअह्हहा आह्हहा अह्हह ऊऊउह्ह हहाआआ…

मां के कहा- चलो ना डाल दो ना’ तो देर तक मुझे समझ नहीं आया क्या डाल दो फिर अंकल ने अपनी लुंगी में से अपना बड़ा लौड़ा निकाला और मां को देखते हुए बोले ले चाट ले…… मां बिना कुछ कहे चाट ने लगी जब मां चाट रही थी तब अंकल ने उनकी ऊँगली मां की गांड में घुसा दी मां उछल पड़ी और मुंह से आवाज निकल गयी आआहह ह्हहाह और बोली ‘क्या कर रहे हो, बता ना तो चाहिये’ तो अंकल मुस्कुराते हुए बोले ‘बता तो तुम यूं थोड़ी उछलती’ फ़िर अंकल बहुत उत्तेजित हो गये थे और उसने मां के कपड़े उतारने के बदले फ़ाड़ने शुरु कर दिये मां भी उत्तेजित हो चुकी थी फ़िर उस ने मां को आगे की तरफ़ झुकाया और मां की गांड में अपना लौड़ा डालने लगे लेकिन जा नहीं रहा था तब मां ने उनकी हेल्प की, अपने दोनों हाथों से अपनी गांड फ़ैलाते हुए बोली ‘चलो ये रास्ता क्लीयर है’ अंकल ने एक ही झटके में अपना लौड़ा डाल दिया और मां के मुंह से आआअ… अ…अअ…ह ह्हह्हह हह मार डाला आअ आआ आआअ… ह्ह दर्द कर रहा है आअ अहहहहा अह…अह… अह… अहह…अ हा अहा ह

फ़िर अंकल अपना लौड़ा अंदर बाहर करने लगे और तेजी से मुंह से आआअ… अ… अअ…ह ह्हह्हह की आवाज चल रही थी 15 मिनट के बाद दोनों शांत पड़ गये

तब मुझे लगा कि अंकल ने अपना वीर्य मां की गांड में छोड़ दिया है फ़िर दोनों थोड़ी देर ऐसे ही पड़े रहे फ़िर 5 मिनट के बाद अंकल उठे और अपना लौड़ा मां के मुंह में रख दिया और मां भी उसे लोलीपोप समझकर चूस ने लगी 15 मिनट तक ऐसा ही हुआ फ़िर शायद अंकल फ़िर तैयार हो गये उसने मां की चूत पर हाथ फ़िराते हुए कहा ‘अब इस की बारी है’

तो मां बोली- हाँ, चलिये!
अंकल ने कहा ‘काफ़ी साफ़ है’
तब मां बोली ‘कल ही साफ़ की है’

फ़िर अंकल मां के ऊपर चढ़ गये और अपने लौड़े को अंदर डाल दिया और मां मुंह से आआअ… अ…अअ… ह्हह की आवाज शुरु हो गयी और बोली थोड़े देर रुकिये दर्द हो रहा है
लेकिन अंकल ने सुना नहीं और शोट लगाते गये और मां चिल्लाती गयी, मां के मुंह से आआअ… अ…अअ…ह ह्हह्हह हहह… हहह

आधे घंटे तक ऐसा चला फ़िर दोनों शांत पड़ गये 15 मिनट के बाद दोनों ने कपड़े पहने मां ठीक से चल भी नहीं पा रही थी लेकिन अंकल को और चोदने की इच्छा थी वो मां को पकड़ कर चूमने लगे

तब मां ने कहा- अब रात के लिये तो कुछ रखो, रात को मैं तुम्हारे पास ही आऊँगी!
अंकल ने कहा- ठीक है!
और वो दोनों दरवाजे की तरफ़ आये तो मैं ऊपर चला गया फ़िर मां ऊपर आइ मां कोई गीत गा रही थी मैंने मां को इतना खुश कभी नहीं देखा जब पापा मां की चुदाई करते हैं… और उस रात कि चुदाई sex stories फ़िर कभी बताऊँगा बाय बाय!!

Antarvasna

हाय दोस्तो! मैं राजू फ़िर कोलकाता से. Antarvasnaमेरी पिछली दो कहानियाँ
‘एक सच्ची कहानी’
और
‘पति के सामने बीवी की चुदाई‘
आप लोंगों ने जरूर पढ़ी होगी. ये दोनों कहानियाँ मेरे सच्चे अनुभव पर आधारित थीं.

इन दोनों कहानियों को पढ़़कर बहुत से लोगों ने मुझे मेल किया. उनमे से एक जिसका नाम मनु था उसने लिखा कि वो भी इस तरह का सेक्स करना चाहता है. उसकी उम्र 32 वर्ष और उसकी बीवी नीतू की 28 वर्ष है. मनु ने मुझसे कहा कि नीतू एक समय में दो- तीन मर्दों के साथ सेक्स करना चाहती है. ये लोग भी कोलकाता के रहने वाले हैं. लेकिन मनु की इच्छा स्वैपिंग की थी. मनु ने मुझसे कहा कि पहले तुम और मैं मिलकर नीतू को चोदेंगे फ़िर बाद में पूजा(मेरी बीवी को). लेकिन पूजा तैयार नहीं थी. इसलिए मैंने उनका परिचय सोनाली और सिया से करा दिया. जो लोग सोनाली और सिया के बारे में नहीं जानते उन्हें थोड़ा परिचय करा दूँ.
सोनाली- उम्र- 30, गोरा, लंबा
सिया- उम्र- 27, सुंदर, 34-25-32

ये दोनों पति- पत्नी हैं कोलकाता से ही. ये लोग तो वैसे पार्टनर बदल कर सेक्स करने के एक्सपर्ट हैं. लेकिन मैंने और सोनाली ने मिलकर एक दिन सिया को चोदा था. सिया बहुत ही हॉट और सेक्सी है. इसके बाद दोनों ने बताया की उन्होंने पार्टनर बदलकर सेक्स किया और उन्हें खूब मजा आया.

मेरी मुलाक़ात अभी तक नीतू और मनु से नहीं हुई थी. फ़ोन पर सोनाली और मनु ने मुझे सब बताया अपनी चुदाई के बारे में.

ये सब सुनकर मेरी भी इच्छा हो रही थी लेकिन मैं मजबूर था. क्योंकि मेरी बीवी तैयार नहीं हो रही थी.

कुछ दिनों के बाद एक दिन सोनाली ने मुझे फ़ोन किया कि तुम एक दिन का समय सकते हो? मैंने पूछा कि क्यों? तो सोनाली ने बताया कि सिया और मैंने तुम्हारी चुदाई की तारीफ मनु और नीतू के सामने की है और मैं और मनु चाहते हैं की एक ग्रुप का प्रोग्राम बनाया जाए.

ये सुनकर मैंने कहा की ठीक है लेकिन मैं अकेले ही शामिल हो पाऊँगा क्योंकि मेरी बीवी तैयार नहीं होगी. सोनाली ने कहा कि ठीक है हम प्रोग्राम बना रहे हैं. इसके कुछ दिन के बाद सोनाली का फ़ोन आया की शुक्रवार को चलना है. कोलकाता से करीब 100 किलोमीटर दूर एक रिसॉर्ट है वहीँ पर चलना है सुबह 7 बजे घर से निकलना है. मैंने कहा ठीक है. मैंने इसके लिए अपनी बीवी को एक दिन पहले ही मायके भेज दिया.

शुक्रवार को सोनाली ने सुबह 6 बजे फ़ोन किया और कहा कि तुम कहाँ पर रहोगे? मैंने एक जगह का नाम बताया. सोनाली के पास कार थी. ठीक जगह पर पहुँच मैं उन लोगों से मिला. मनु और नीतू से पहली बार मिला. सोनाली गाड़ी चला रहा था. बगल में मनु बैठा था. मैं पीछे नीतू और सिया के साथ बैठ गया. फ़िर मैंने नीतू को ध्यान से देखा. क्या माल थी यार? बूब्स- 36”, कमर- 34” और रंग गोरा, आँखें नशीली, देख कर जैसे चुदाई की भूख कभी शांत ही नहीं होती है.

फ़िर मैंने सिया को देखा करीब 6 महीने के बाद. वो पहले से भी ज्यादा सेक्सी लगी. फ़िर सोनाली ने मनु और नीतू से मेरा परिचय कराया. सिया कार में बांये यानि मनु के ठीक पीछे बैठी थी. नीतू बीच में और मैं दाहिनी तरफ़. मनु पहले सिया को चोद चुका था इसलिए वो दोनों खुलकर बातें कर रहे थे. करीब दो घंटे के बाद हम रिसॉर्ट में पहुंचे. इस बीच रास्ते में अच्छी तरह से बाते हुई. नीतू मुझसे खुलकर बातें करने लगी. रिसॉर्ट के बगल में एक पर्यटन स्थल था इसलिए वहाँ कमरा मिलना मुश्किल था लेकिन सोनाली ने पहले से ही एक डीलक्स रूम, डबल बेड का बुक करा लिया था. हम रूम में पहुँच कर पहले बारी- बारी से फ्रेश हुए .फ़िर नाश्ते का आर्डर दिए.

नाश्ता करने के बाद हम सभी बेड पर बैठ कर बातें करने लगे. फ़िर मनु और सोनाली ने अपनी चुदाई की कहानी चालू की. कैसे मनु ने सिया को चोदा और कैसे सोनाली ने नीतू को. इसे सुनकर हम सभी धीरे-धीरे उत्तेजित हो रहे थे. मनु ने कहा कि तुम और सोनाली मिलकर पहले नीतू को चोदों मैं और सिया बैठकर देखेंगे. मेरी बहुत दिन से इच्छा है कि नीतू को दो लोग मिलकर मेरे सामने चोदे. नीतू ने उस समय साडी पहनी थी. मनु सिया के साथ बेड से उठकर सोफे पर चले गए.

मैंने नीतू का हाथ पकड़ कर खड़ा किया और उसके पीछे जाकर लो कट ब्लोउज से निकली हुई नंगी पीठ को चूमने लगा. उसकी ऊँचाई मुझसे थोडी ही कम थी. उसके साथ उसकी दोनों चूचियों को भी हाथ से पकड़ कर दबाने लगा. क्या चूची थी! एक दम कठोर. फ़िर सामने से सोनाली आकर उसके होठों को चूसने लगा. फ़िर मैंने नीतू का मुंह थोड़ा सा तिरछा कर उसके होठों को चूसने लगा सोनाली उस समय उसकी चूचियाँदबा रहा था फ़िर मैंने एक हाथ नीचे ले जाकर उसके बड़ी गांड को ऊपर से सहलाने लगा.

इस बीच मनु उठकर आया और नीतू की साडी उतार दी और कहा कि जल्दी से चोदों इसको. फ़िर वो वापस चला गया सिया के पास. सिया के भी कुछ कपडे उतर गए थे. लेकिन हम लोगों के पास उधर देखने कि फुर्सत नहीं थी. फ़िर मैंने नीतू के ब्लोउज के हुक खोलकर उतार दिया. भीतर उसने काले रंग की ब्रा पहनी थी जिस्मी उसकी बड़ी-बड़ी चूचियाँ आधी बाहर निकली थी. सोनाली ने उसके पेटीकोट का नाडा धीरे से खोल दिया और पेटीकोट को उसकी बड़ी गांड से उतार दिया. भीतर उसने काली पेंटी पहनी थी. उसकी बुर के पास भीगा हुआ था जो की पेंटी के ऊपर से ही दिखाई दे रहा था.इसके बाद हमने पोजीशन बदल ली. मैं नीचे की ओर गया और पेंटी से झनकती हुई गांड पर जीभ फिराने लगा. सोनाली ने उसकी ब्रा भी उतार दी और उसके पूरी तरह तने हुए निप्पल को एक -एक कर चूसने लगा.

नीतू की आँखें उस समय बंद थी और वो पूरी तरह उत्तेजित हो गई थी. फ़िर मैंने उसके पेट, नाभि, जांघों को चूमते हुए उसकी पेंटी उतारनी शुरू की. क्या मस्त बुर थी उसकी! एक दम साफ़ जैसे चुदाई के लिए तैयार की गई हो! मैंने बुर के ऊपर जीभ फिराना चालू किया तो वो बेड पर बैठ गयी. मैंने जमीन पर बैठ कर ही उसके टांगो को चौडा किया और उसकी बुर को चूसना शुरू किया. वो अपनी बुर को जैसे मुझे पूरा खिला देगी वैसे कर रही थी.

ऊपर सोनाली बेड पर बैठ उसकी चूचियाँ, होंठ, निप्पल बारी-बारी से दबा/ चूस रहा था. नीतू उत्तेजना के मारे धीरे-धीरे बड़बड़ाने लगी… या…आ…ई ईई… मजा… आ रहा है. वो पूरी तरह से उत्तेजित हो गयी थी. मैंने अपने पूरी जीभ उसकी बुर के भीतर तक घुसा दी थी. और एक अंगुली से उसकी क्लिट को रगड़ रहा था. वो बोलने लगी- हाँ… ऐसे… ही… आई…आ…जीभ चोदते रहो… सोनाली… तुम… मेरी चूचियों को और जोर से… और जोर से… दबाओ…

मनु अब बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था वो भी पूरी तरह से नंगा था.वो नीतू के पास आया और उसकी चूचियों को दबाने लगा. तब तक सोनाली ने अपने कपड़े उतार कर नीतू को अपना तना हुआ लंड पकड़ा दिया था. वो उसे जोर से सहला रही थी.

मैंने भी अपने कपडे उतारे और अपने लिंग पर एक कंडोम चढाया. और नीतू को डौगी स्टाइल में बेड पर औंधे लिटा दिया. यानि कमर के ऊपर का हिस्सा बेड के ऊपर. मैंने उसके पीछे से आकर उसकी रिसती हुई बुर में एक ही धक्का में अपना पूरा लंड घुसा दिया और जोर-जोर से चोदने लगा. बेड पर नीतू की मुंह की तरफ़ सोनाली बैठा था और उसका लंड नीतू मुंह में लेकर चूस रही थी. मैं जितना जोर से धक्का मारता वो उतना ही सोनाली का लंड अपने मुंह में भर लेती.

मनु पास में ही बैठ कर हमें और जोर से चोदने के लिए उसका रहा था. सिया भी पूरी तरह से नंगी होकर पास में ही बैठी थी मैंने कुछ देर तक उसे चोदा और झड़ गया. फ़िर सोनाली ने उसे बेड पर लिटाकर नोर्मल स्टाइल में चोदा. झड़ने के बाद वो भी बगल में आकर लेट गया.

शेष कहानी यानि हम पाँचों की एक साथ चुदाई अगले भाग में.

यह ग्रुप सेक्स स्टोरी आपको कैसी लगी जरूर बताना. Antarvasna

Sex Stories

मैंने अन्तर्वासना की लगभग सारी Sex Stories कहानियाँ पढ़ी हैं। यह साईट मुझे बहुत पसन्द है, मुझे लगा कि मुझे भी अपनी कहानी भेजनी चाहिए। तो मैं यह कहानी भेज रहा हूँ, अगर आप लोगों को पसन्द आए तो आपलोग मुझे मेल करें- अच्छे-अच्छे और अगर पसन्द ना आए तो भी मेल करें- बुरे-बुरे, ताकि मैं अपनी लेखन-शैली में बदलाव करूँ और आप अगली कहानी पसन्द करें। ठीक है, अब मैं अपनी कहानी शुरू करता हूँ।

मैं 28 वर्ष का विवाहित युवक हूँ। मेरा 2 साल का एक बच्चा भी है। मैं लखनऊ का रहने वाला हूँ। ये बात उन दिनों की है जब मेरी बीवी की डिलीवरी होने वाली थी और मेरी साली मेरे घर अपनी दीदी की देखभाल करने आई थी। यूँ तो मेरी बीवी बहुत सुंदर है, सेक्सी है, उसकी बड़ी-बड़ी चूचियाँ हैं, पतली कमर है। गर्भवती होने से पहले मैं हर रात उसकी लेता था, पर फिर उसने देना बन्द कर दिया था। इसलिए मैं परेशान रहता था।

साली के आने से मैं खुश हो गया, मुझे लगा कि अब मेरे लंड की भूख शांत हो सकेगी। मेरी साली भी बहुत सेक्सी थी, उसकी छोटी-छोटी दो चूचियाँ और एकदम पतली कमर थी। पहले मेरी बीवी के भी ऐसे ही थे लेकिन मैंने दबा-दबा कर बड़े कर दिए थे। साली को देखकर मेरा लंड जाग गया और मैं उसे चोदने की योजना बनाने लग गया।

एक-दो दिन ऐसे ही निकल गए लेकिन अवसर नहीं मिला। पर जल्दी ही एक दिन मौक़ा हाथ लग गया। मेरी पत्नी को डॉक्टर के पास जाना था, तो मैंने उससे कहा कि तुम मम्मी के साथ चली जाओ (मम्मी यानि मेरी माँ)। मेरी बीवी अच्छी है, मेरे कहने से माँ के साथ चली गई।

मैंने साली को पटाने का यह मौक़ा अच्छा समझा, वैसे मैं उससे थोड़ी-बहुत छेड़खानी पत्नी के सामने भी कर लेता था, ऊपर ऊपर से ही, पर आज अन्दर से करने का मन था। माँ और पत्नी के जाने के बाद मैं घर के भीतर आ गया और द्वार बन्द कर लिया, क्योंकि मैं जानता था कि अब कोई नहीं आएगा। कामवाली चली गई थी, पिताजी भी जा चुके थे। घर पर मैं और मेरी साली ही थे।

मेरे अन्दर आते ही साली ने कहा कि जीजू मैं आपके लिए चाय बना लाती हूँ, आप चाय पीजिए। फिर मैं नहाने जाऊँगी। यह कह कर वह रसोईघर में चली गई। उसके जाने के बाद मैं उसे चोदने की योजना बनाने लगा। फिर मुझे एक विचार आया, मैंने बाथरूम में जाकर अपने कपड़े उतार लिए, और लुंगी-बनियान पहन कर कमरे में आ गया। थोड़ी देर में साली चाय लेकर आ गई, मैं कुर्सी पर बैठ गया। वो मुझे चाय देने लगी, मैंने धीरे से हाथ मार कर चाय ज़मीन पर गिरा दी।

वो पूछ बैठी- जीजू ये क्या हुआ?’
मैंने कहा- चाय गिर गई।’
तो वह कहने लगी- दीदी के जाने से आप इतने दुःखी हो गए!’
तो मैंने कहा- नहीं तुम इतनी सेक्सी हो, तुम्हें देखकर मैं स्वयं को सँभाल नहीं सका।’
यह सुनकर वो शरमा कर अन्दर वाले कमरे में चली गई।

मैं भी वहाँ पहुँच गया और उसे पकड़ कर पीछे से किस करने लगा। गर्दन के पास, कान के पीछे अपनी गरम साँसें देने लगा। ऐसा करने से वह गरम होने लगी। मेरा लंड भी खड़ा हो गया। फिर मैं अपने अपने एक हाथ से उसकी चूची दबाने लगा। ऊपर ही ऊपर उसे अच्छा लग रहा था, उसकी चूचियाँ कड़ी हो गईं थीं। मेरा 8 इन्च का लंड उसकी कमर से चिपका हुआ था। उसे मेरी लंड का अनुभव अपनी गाँड पर हो रहा था। वह कोई ऐतराज़ नहीं जता रही थी, मेरी हिम्मत बढ़ गई। मैंने उसकी ब्रा के अन्दर हाथ डाल दिए और चूचियों को पहले की अपेक्षा कहीं जोरों से मसलने लगा।

जब मैंने देखा कि वह पूरी तरह से गरम हो गई है, तो उसे बिस्तर पर लिटा दिया। उसका कुरता उतार कर ब्रा के ऊपर से चूचियों को दबाने लगा, साथ अपनी जीभ उसके मुँह में डाल कर चूसने लगा। अब वह पूरी तरह से गरम हो चुकी थी, फिर मैंने उसकी सलवार भी उतार दी। वो सिर्फ ब्रा-पैंटी में थी, और बहुत सेक्सी लग रही थी- एकदम दूध की भाँति सफ़ेद। फिर मैं उसकी ब्रा खोल कर एक चूची को चूसने लगा और दूसरी को हाथ से दबाने लगा।

10 मिनट तक ऐसा ही करते रहने के बाद मैंने अपनी लुंगी और बनियान भी उतार दी। वह मेरा लंड देखकर डर गई, बोली- धीरे-धीरे करना जीजू, किसी को बताना मत, दीदी से भी मत।’

‘तुम्हारी कसम, नहीं बताऊँगा।’- मैंने कहा।

मैंने अपना लंड उसके हाथ में पकड़ा दिया और सहलाने को कहा। वह लंड पकड़ कर उससे खेलने लगी। इसके बाद मैंने उसकी पैंटी भी उतार दी। अब हम दोनों एकदम नंगे थे। उसकी बुर एकदम चिकनी थी, जैसे दो-तीन दिनों पहले ही झाँटें साफ की गईं हों। मैंने पूछा, तो उसने बताया- मैं जानती थी जीजू कि आप मुझे चोदना चाहते हैं, लेकिन आपको चांस नहीं मिल पा रहा। लेकिन मैं जानती थी कि इस बार मैं आपके लंड से नहीं बच पाऊँगी, सो मैं तैयारी से आई थी।’

यह सुनते ही मेरा लंड और भी कड़ा हो गया, फिर मैंने उसे बुर खोलने को कहा, और मुँह से उसकी बुर चाटने लगा। उसके मुँह से आआाहहह… अहहहह.. आहहह… आआआ… अहहह की आवाज़ें आ रही थीं। फिर मैंने उसे अपना लंड चूसने को कहा, वह सहमत हो गई। अब हम 69 की स्थिति में आ गए, मैं उसकी बुर चाटने लगा, वो मेरे लंड का टोपा चूसने लगी।

हम यह लगभग 25 मिनट तक करते रहे और दोनों 2 बार छूट भी गए। हमने एक दूसरे की मलाई चाट ली। अब मैं उसे चोदना चाहता था, मैंने उससे कहा- अब मैं तुम्हारी बुर में लंड डाल के बुर-लंड का मिलन करवाऊँगा।’
उसने कहा- ‘जीजू, इस समय नहीं, रात को जब दीदी सो जाएगी, तो मैं आपके पास आ जाऊँगी, तब चुदाई का कार्यक्रम करेंगे- पूरी रात। अभी दीदी आनेवाली होंगी।’

मैंने कहा- ठीक है, रात को तुम्हें ख़ूब चोदूँगा।’ उसके बाद हमने अपने-अपने कपड़े पहन लिए, और अपने-अपने काम पर लग गए। रात होने का इन्तज़ार करने लगे। थोड़ी देर के बाद माँ और पत्नी दोनों आ गए।

फिर हम लोगों ने 120 दिनों तक ख़ूब चुदाई की। मेरा बेटा हुआ था। मेरी पत्नी को हम लोगों पर शक हुआ। पूरी कहानी आप लोगों की मेल आने के बाद बताऊँगा कि मैंने अपनी साली को 3 दोस्तों के साथ मिलकर कैसे चोदा। Sex Stories

प्रेषक : राहुल Antarvasna

प्यारे दोस्तो, मैं राहुल कोटा Antarvasna से एक बार फिर से आया हूँ एक मजेदार सच्ची कहानी लेकर। आशा है कि कोटा की सभी लड़कियों को पसंद आएगी ! तो इसी आशा के साथ मैं अपनी सच्ची कहानी शुरू करता हूँ।

यह घटना है पिंकी की जिसका एक और नाम पूजा भी है। पूजा हमारी ही जाति की है। आज से करीब चार साल पहले उसकी शादी हो चुकी है और अभी उसके दो बच्चे भी हैं। देखने में थोडी सांवली है पर नाक नक्श तो ऐसे तराशे हुए है जैसे पूरे जिस्म को सोच समझकर बनाया गया हो।

उसकी शादी से पहले मेरी और उसके रिश्ते की बात चली थी पर हम दोनों की कुंडली नहीं मिल पाने के कारण हमारी शादी नहीं हो पाई थी। उसकी शादी के बाद हम दोनों का बात करना और मिलना सब बंद हो गया था।

अभी लगभग पंद्रह दिन पहले की बात है, हमारे समाज में एक शादी थी, वो भी हमारे घर से कुछ ही दूरी पर। मैं एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूँ, शाम को छ: बजे मैं घर पर आया तो मेरी मम्मी ने कहा कि मैं उनको शादी में छोड़ आऊं।

मम्मी को शादी में छोड़कर मैं सीधा घर पर आ गया। इस समय मेरे सिवा घर पर कोई भी नहीं था। मैं टीवी देखने लग गया। कुछ देर बाद किसी ने दरवाजा खटखटाया। मैंने दरवाजा खोला तो देखा कि सामने पूजा और मेरे मामा का लड़का खड़ा था। मैं उसको देखकर चौंक गया कि यह कैसे आ गई।

मैंने उनको बिठाया और पानी पिलाया। उसने मुझसे कहा कि उस शादी में वो भी आई है। उसने मम्मी से मेरे बारे में पूछा होगा तो मम्मी ने बताया कि वो घर पर ही है, और वो मुझसे मिलने घर पर आ गई। वो केवल पांच मिनट ही बैठी और जाने लगी। वो बाहर निकली ही थी कि वापस अन्दर आई और मुझसे मेरे मोबाइल नंबर देने को कहा तो मैंने दे दिया। तब उसने मुझे कॉल करने को कहा। उस दिन की वो बात ख़त्म हो गई।

दो तीन दिन बाद मेरे मोबाइल पर किसी नंबर से मिस कॉल आया। मैंने दुबारा उसी नंबर पर कॉल किया तो पता चला कि वो नंबर पूजा का है। बस उस दिन से हमारे बीच बातचीत फिर से शुरू हो गई। उस दिन से मेरे अन्दर का सेक्स भी उसके लिए जाग गया था।

कुछ दिन बाद उसका जन्मदिन था तो मैंने उसे कॉल करके विश किया और उससे पूछा कि बताइए आपको क्या चाहिए।

तो उसने कहा- जो आपका दिल हो दे देना !

तो मैंने कह दिया- फिर जो भी मैं देना चाहूँ, वो आपको लेना पड़ेगा !

तो उसने हाँ बोल दिया।

मैंने कहा- फिर मैं कब आ सकता हूँ आपके यहाँ?

पूजा ने कहा- सुबह आठ से लेकर शाम को सात बजे तक कोई भी नहीं होता है घर पर ! तो आप इस बीच किसी भी समय पर आ जाना। उसके इस तरह से कहने का मतलब शायद मैं समझ चुका था इसलिए एक दिन शनिवार को मैं घर से दस बजे निकलकर उसके घर पर चला गया।

उसने मुझे बिठाया और चाय पिलाई। वो थोड़े गरीब लोग थे और घर में छोटे छोटे केवल दो ही कमरे थे। एक कमरे में उसके बच्चे सोये हुए थे। कुछ देर बाद मैंने उससे कहा कि मुझे दूसरा कमरा भी देखना है तो वो मेरे साथ दूसरे कमरे में आ गई। वहाँ पर लाइट नहीं थी इसलिए अँधेरा था। उसने आगे होकर मुझसे पूछ लिया कि बताओ आप क्या देना चाहते थे मुझे !

तो मैंने बिना शर्म किये सीधे बोल दिया- मैं तुमको किस करना चाहता हूँ और मैं तुमको बहुत पसंद भी करता हूँ !

पहले तो उसने मना किया और जाने लगी पर मैंने उसका हाथ पकड़कर अपनी ओर खींच लिया। उसने दूर होने की कोशिश नहीं की। मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए और किस करने लगा, वो भी मेरा साथ दे रही थी। तब मुझे लगा कि वो भी यही चाहती है। मैं उसे करीब दस मिनट तक किस करता रहा।

उसने साड़ी पहन रखी थी पर मैंने पहले उसके ब्लाउज के हुक खोल दिए और ब्रा को भी उतार दिया। इसका उसने थोड़ा विरोध तो किया पर उसमें उसकी मर्जी भी शामिल थी। फिर मौका देखकर मैंने अपनी जींस खुद ही उतार दी और अंडरवियर भी। बहुत देर तक मैं उसके स्तनों को चूसता रहा। सही में दोस्तो, इतना दूध भरा था उनमें कि मैं तो मस्त हो गया। फिर मैंने उसको अपना लंड चूसने के लिए कहा तो उसने साफ़ साफ़ मना कर दिया।

मैंने कहा- लंड तो तुमको चूसना ही पड़ेगा !

उसने मुझे कहा कि लंड तो उसने आज तक उसके पति का भी नहीं चूसा। तो मैंने कहा कि मैं तुम्हारा पति नहीं हूँ ! लंड तो तुमको मुंह में लेना ही पड़ेगा !

बहुत देर के बाद वो केवल कुछ सेकंड के लिए मेरे लंड को मुंह में लेने को तैयार हुई। मैंने उसको अपने पैरों पर बिठाया और लंड को उसके होंठों से लगा दिया। जैसे ही उसने लंड को मुंह में लिया, मैंने पीछे से उसके सर को पकड़कर आगे के तरफ धक्का दिया जिससे पूरा लंड उसके मुंह में चला गया और लंड को कस कर उसके मुंह में डालकर रखा। उसने दूर हटने की बहुत कोशिश की पर मैंने उसके सर को कसकर पकड़ रखा था और उसके मुंह को चोद रहा था।

मैं करीब दस मिनट तक उसके मुंह को चोदता रहा और उसके मुंह में ही झड़ गया। मैंने उसका सर अभी भी अपने लंड से अलग नहीं होने दिया। इस कारण से उसको मेरा सारा वीर्य पीना पड़ा। उसकी आँखों से आंसू आ रहे थे। फिर मैंने उसको चूमना शुरू कर दिया। थोड़ी देर बाद जब मैं फिर से सेक्स के लिए तैयार हो चुका था तो मैंने उसे जमीन पर पटक कर चूमना शुरू किया और धीरे धीरे उसको उसकी साड़ी से आजाद कर दिया और पेंटी भी उतार दी।

पहले तो मैंने उससे ऐसे ही पूछा- नीचे तो डाल सकता हूँ न लंड को?

तो उसने तपाक से जवाब दिया कि उन्होंने (उसके पति ने) पहले ही इसको चौड़ा कर रखा है, अगर तुम डाल भी लोगे तो क्या हो जाएगा ! अब डाल भी दो, बहुत बेचैनी हो रही है।

मैंने अपने लंड को उसकी चूत के मुंह पर रखा और एक धक्का मारा तो वो सीधा चूत की गहराइयों में चला गया। सच में लंड के अन्दर जाने का तो मुझे एहसास ही नहीं हुआ। तब मुझे पता लगा कि साला उसका पति उसे कितना चोदता होगा। पर मुझे क्या ! मुझे तो केवल हल्का होना था। मैंने उसकी चूत में लंड के धक्के मारना शुरू कर दिया. करीब आधे घंटे तक मैं उसे चोदता रहा। फिर लंड को निकाल कर उसके वक्ष के बीच की दरार में रगड़ने लगा। दोस्तो, इसका भी एक अलग ही आनंद है। और फिर कुछ देर बाद मैंने अपना वीर्य उसके वक्ष पर छोड़ दिया। इस सारे प्रोग्राम के बाद वो कुछ ज्यादा ही खुश लग रही थी, पर जाने क्यूँ मुझे अच्छा नहीं लगा और वहां केवल पांच मिनट रुक कर वापस घर आ गया।

अब वो मुझे रोज कॉल करती है, पर मैं सोचता हूँ कि हमारे बीच जो भी हुआ वो हम दोनों की गलती थी। पर मैं अब क्यूँ उसकी शादीशुदा जिन्दगी को बर्बाद करूँ। इसलिए मैं उसका फ़ोन रिसीव नहीं करता हूँ। हांलांकि मेरे ऑफिस और उसके घर के बीच में ज्यादा से ज्यादा दो किलोमीटर की दूरी होगी पर फिर भी मैं वहां नही जाना चाहता हूँ।

कई बार वो मुझे मैसेज भी करती है कि वो मुझसे लाइफ टाइम सेक्स चाहती है पर वो मेरी ही जाति की होने के कारण मुझे डर सा लगता है। इससे पहले मैं नहीं जानता था कि किसी लड़की में सेक्स को लेकर इतना क्रेज भी होता है।

तो दोस्तो, यह थी मेरी और पूजा की कहानी। इस कहानी में जैसा कि सब बताते है कि चोदते वक़्त लड़की के मुंह से जोर जोर से सिसकारियां निकलती रही, मैंने ऐसा कुछ नहीं बताया है। क्यूंकि उस समय ऐसा कुछ हुआ ही नहीं ! हाँ थोड़ा उसको दर्द जरुर हो रहा था पर इतना नहीं कि वो चिल्लाती रहे। मैंने उसको न तो घोड़ी बनाकर चोदा और ना ही कुतिया बनाकर !

ये कह सकते है कि वो केवल एक सधारण सेक्स था।

आपके संदेशों के इन्तजार में आतुर ! Antarvasna

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