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Hindi Sex Stories

मास्टरजी क्योंकि पीठ की Hindi Sex Storiesमालिश में मग्न थे, सुलेखा की योनि गीली होने का दृश्य नहीं देख पाए। उनकी नज़र पीठ की तरफ और ध्यान चूतड़ों से स्पर्श करती अपनी निकर पर था जिसके कारण उनका लिंग कठोर से कठोरतर होता जा रहा था।

उन्हें याद नहीं आ रहा था कि इससे पहले उनका लंड इतनी जल्दी कब दुबारा सम्भोग के लिए तैयार हुआ हो!! उन्हें अपने आप पर गर्व होने लगा पर साथ ही चिंता भी होने लगी कि इस अवस्था से कैसे निपटें? वे नहीं चाहते थे कि सुलेखा को उनका विराट लंड दिख जाये। उन्हें डर था वह घबरा कर भाग न जाए।

स्थिति पर काबू पाने के लिए वे सुलेखा के ऊपर से हट गए और उसकी बगल में बैठ कर उसकी गर्दन और कन्धों को सहलाने लगे। उन्होंने सुलेखा के निचले शरीर पर चादर भी उढ़ा थी।

सुलेखा के कामोत्तेजन को जैसे अचानक ब्रेक लग गया। उसे थोड़ा बुरा लगा पर राहत भी महसूस की। उसे अपने ऊपर गुस्सा भी आ रहा था कि अपने ऊपर संयम क्यों नहीं रख पा रही है।
उसे लगा कि मास्टरजी क्या सोचेंगे अगर उन्हें पता लगा कि उसके शरीर में कैसी कशिश चल रही है। वे तो उसका इलाज करने में लगे हैं और वह किसी और प्रवाह में बह रही है!

अपने ऊपर सुलेखा को शर्म आने लगी और मन ही मन मास्टरजी का धन्यवाद किया कि वे उसके ऊपर से उठ गए और उसको ढक दिया। अब उन्हें सुलेखा की योनि की अवस्था का पता नहीं चलेगा, जो कि सम्भोग के लिए तत्पर हो रही थी।

थोड़ी देर में मास्टरजी का लिंग मायूस हो कर सिकुड़ गया और सुलेखा की योनि भी बुझ सी गई। दोनों को इससे राहत मिली।

सुलेखा नहीं चाहती थी कि मास्टरजी को उसकी कामोत्तेजना के बारे में पता चले। कहीं वे उसे बुरी और बदचलन लड़की न समझने लगें।
उधर मास्टरजी नहीं चाहते थे कि सुलेखा उनके लिंग के विराट रूप को देख ले। उन्हें डर था सुलेखा डर के मारे भाग ही न जाए। वे सुलेखा के साथ अपने रिश्ते को धीरे धीरे विकसित करना चाहते थे और एक लम्बा सम्बन्ध बनाना चाहते थे।

मास्टरजी को जब यकीन हो गया कि उनका लंड नियंत्रण में आ गया है और उनकी निकर के आकार को नहीं ललकार रहा तो वे उठ खड़े हुए और सुलेखा को चित लेट जाने का आदेश दे कर कमरे से बाहर चले गए।

सुलेखा एक आज्ञाकारी शिष्या कि भांति चादर के नीचे ही करवट बदल कर सीधी हो गई। हालाँकि वह चादर के नीचे थी, फिर भी सहसा उसने अपने हाथों से अपने स्तन ढक लिए ताकि उसके वक्ष की रूपरेखा चादर पर न खिंचे।

वहाँ मास्टरजी ने गुसलखाने में जाकर अपने नटखट लंड को नियंत्रण में लाने के लिए एक बार फिर मामला हाथ में लिया और हस्त मैथुन करने लगे।
वे दुबारा अपने आप को ऐसी स्थिति में नहीं लाना चाहते थे जहाँ उन्हें सुलेखा से हाथ धोना पड़े। कुछ देर के प्रयास के बाद मास्टरजी का लंड एक बार फिर लावा उगलने लगा, पर इस बार पहले की भांति का ज्वालामुखी नहीं था। एक फुलझड़ी के मानिंद था।

मास्टरजी को इस राहत से तसल्ली मिली और वे एक नए भरोसे के साथ सुलेखा के पास आ गए। उनका लिंग एक भीगी बिल्ली की तरह असहाय सा निकर में लटक रहा था और गवाएँ हुए दो मौकों का अफ़सोस कर रहा था।

सुलेखा के चित्त लेटने से एक समस्या यह खड़ी हुई कि अब दोनों एक दूसरे को देख सकते थे। पर दोनों ही एक दूसरे से आँख नहीं मिलाना चाहते थे क्योंकि दोनों के मन में ग्लानि भाव था। एक अजीब सी चुप्पी का वातावरण छा गया था।

इतने में सुलेखा ने अपने हाथ चादर से बाहर निकाल कर अपनी आँखों पर रख लिए और आँखें मूँद लीं। उसे शायद ज्यादा शर्म महसूस हो रही थी क्योंकि नंगी तो वह थी!!!

उसकी इस हरकत से दो फायदे हुए। एक तो दोनों की आँखों का संपर्क टूट गया और दूसरे सुलेखा के वक्ष स्थल से उसके हाथों का बचाव चला गया।

सुलेखा की साँसें उसकी छाती को ऊपर नीचे कर रहीं थीं जिस से उसके स्तनों के ऊपर रखी चादर ऊपर नीचे खिसक रही थी। इस चादर की रगड़ से उसकी चूचियों में गुदगुदी हो रही थी और वे उभर कर खड़ी हो गई थीं। उसके वक्ष की रूप रेखा अब चादर पर स्पष्ट दिखाई दे रही थी। मास्टरजी को यह दृश्य बहुत अच्छा लगा।

मास्टरजी ने अपने काम पांव की तरफ से आरम्भ किया। वे सुलेखा की छाती पर पड़ी चादर को नहीं छेड़ना चाहते थे। उन्होंने सुलेखा के पांव से लेकर जांघों तक की चादर उघाड़ दी और तेल की मालिश करने लगे।

तलवे तो पहले ही हो चुके थे फिर भी उन्होंने तलवों पर कुछ समय बिताया क्योंकि वे सुलेखा को गुदगुदा कर उसकी उत्तेजना को कायम रखना चाहते थे। तलवों के विभिन्न हिस्सों का संपर्क शरीर के विभिन्न अंगों से होता है और सही जगह दबाव डालने से कामेच्छा जागृत होती है। इसी आशा में वे उसके तलवों का मसाज कर रहे थे।

सुलेखा को इसमें मज़ा आ रहा था। कुछ देर पहले उसकी कामुक भावनाओं पर लगा अंकुश मानो ढीला पड़ रहा था। मास्टरजी की ऊँगलियाँ उसके शरीर में फिर से बिजली का करंट डाल रही थीं।

धीरे धीरे मास्टरजी ने तलवों को छोड़ कर घुटनों के नीचे तक की टांगों को तेल लगाना शुरू किया। यह करने के लिए उन्होंने सुलेखा के घुटने ऊपर की तरफ मोड़ दिए।
चादर पहले ही जाँघों तक उघड़ी हुई थी। घुटने मोड़ने से सुलेखा की योनि प्रत्यक्ष हो गई। सुलेखा ने तुंरत अपनी टाँगें जोड़ लीं। पर इस से क्या होता है!?

उसकी योनि तो फिर भी मास्टरजी को दिख रही थी हालाँकि उसके कपाट बिल्कुल बंद थे।

मास्टरजी ने खिसक कर अपने आप को सुलेखा के और समीप कर लिया जिस से उनके हाथ सुलेखा की जांघों तक पहुँच सकें।

सुलेखा की साँसें और तेज़ हो गईं और उसने अपने दोनों हाथ अपनी आँखों पर और कस कर बांध लिए।

मास्टरजी ने सुलेखा के घुटनों से लेकर उसकी जांघों तक की मालिश शुरू की। वे उसकी जांघों की सब तरफ से मालिश कर रहे थे और उनके अंगूठे सुलेखा की योनि के बहुत नज़दीक तक भ्रमण कर रहे थे।

सुलेखा को बहुत गुदगुदी हो रही थी और वह अपनी टाँगें इधर उधर हिलाने लगी। ऐसा करने से मास्टरजी के अंगूठों को और आज़ादी का मौका मिल गया और वे उसकी योनि के द्वार तक पहुँचने लगे।

सुलेखा ने शर्म से अपनी टांगें सीधी कर लीं और आधी सी करवट ले कर रुक गई। उसने अपनी टाँगें भी जोर से भींच लीं।

मास्टरजी ने उसकी इस प्रतिक्रिया का सम्मान किया और कुछ देर तक कुछ नहीं किया। सुलेखा की प्रतिक्रिया उसके कुंवारेपन और अच्छे संस्कारों का प्रतीक था और यह मास्टरजी को अच्छा लगा।

उनकी नज़र में जो लड़की लज्जा नहीं करती उसके साथ सम्भोग में वह मज़ा नहीं आता। वे तो एक कमसिन, आकर्षक, गरीब, असहाय और कुंवारी लड़की का सेवन करने की तैयारी कर रहे थे और उन्हें लगता था वे मंजिल के काफी नज़दीक पहुँच गए हैं।

थोड़े विराम के बाद उन्होंने सुलेखा को करवट से सीधा किया और बिना टांगें मोड़े उसकी मालिश करने लगे। उन्हें शायद नहीं पता था कि सुलेखा की योनि फिर से गीली हो चली थी और इसीलिए सुलेखा ने इसे छुपाने की कोशिश की थी।

सुलेखा ने अपने होंट दांतों में दबा रखे थे और वह किसी तरह अपने आप को क़ाबू में रख रही थी जिससे उसके मुँह से कोई ऐसी आवाज़ न निकल जाए जिससे उसको मिल रहे असीम आनंद का भेद खुल जाए।

मास्टरजी ने स्थिति का समझते हुए सुलेखा की जांघों पर से ध्यान हटाया। उन्होंने उसके पेट पर से चादर को ऊपर लपेट दिया और उसके पतले पेट पर तेल लगाने लगे।

सुलेखा को लग रहा था मानो उसका पूरा शरीर ही कामाग्नि में लिप्त हो गया हो। मास्टरजी जहाँ भी हाथ लगायें उसे कामुकता का आभास हो।
यह आभास उसकी योनि को तर बतर करने में कसर नहीं छोड़ रहा था और सुलेखा को समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे!!
उसे लगा थोड़ी ही देर में उसकी योनि के नीचे बिछी चादर गीली हो जायेगी।

मास्टरजी को शायद उसकी इस दशा का भ्रम था। कुछ तो वे उसकी योनि देख भी चुके थे और कुछ वे सुलेखा के शारीरिक संकेत भी पढ़ रहे थे। उन्हें पुराने अनुभव काम आ रहे थे।

सुलेखा के पेट पर हाथ फेरने में मास्टरजी को बहुत मज़ा आ रहा था। इतनी पतली कमर और नरम त्वचा उनके हाथों को सुख दे रही थी।
वे नाभि में अंगूठे को घुमाते और पेट के पूरे इलाके का निरीक्षण करते।
उनकी आँखों के सामने सुलेखा की योनि के इर्द गिर्द थोड़े बहुत घुंघराले बाल थे जो योनि को छुपाने की नाकाम कोशिश कर रहे थे।
सुलेखा ने अपनी टाँगें कस कर जोड़ रखी थीं जिससे योनि ठीक से नहीं दिख रही थी पर फिर भी मास्टरजी की नज़रों के सामने थी और उनकी नज़रें वहाँ से नहीं हट रही थीं।

अब मास्टरजी ने सुलेखा की छाती पर से चादर हटाते हुए उसके सिर पर डाल दी। अब वह कुछ नहीं देख सकती थी और उसके हाथ भी चादर के नीचे क़ैद हो गए थे।

मास्टरजी को यह व्यवस्था अच्छी लगी। इसकी उन्होंने योजना नहीं बनाईं थी। यह स्वतः ही हो गया था। मास्टरजी को लगा भगवान् भी उसका साथ दे रहे हैं।

मास्टरजी ने पहली बार सुलेखा के स्तनों को तसल्ली से देखा। यद्यपि वे इतने बड़े नहीं थे पर मनमोहक गोलनुमा आकार था और उनके उभार में एक आत्मविश्वास झलकता था। उनके शिखर पर कथ्थई रंग के सिंघासन पर गौरवमई चूचियाँ विराजमान थीं जो सिर उठाए आसमान को चुनौती दे रही थीं।

सुलेखा की आँखें तो ढकी थीं पर उसे अहसास था कि मास्टरजी उसके नंगे शरीर को घूर रहे होंगे। यह सोच कर उसकी साँसें और तेज़ हो रही थीं उसका वक्ष स्थल खूब ज्वार भाटे ले रहा था।

मास्टरजी का मन तो उन चूचियों को मूंह में लेकर चूसने का कर रहा था पर आज मानो उनके लिए व्रत का दिन था।
तेल हाथों में लगाकर उन्होंने सुलेखा के स्तनों को पहली बार छुआ।

इस बार उन्हें बिजली का झटका सा लगा। इतने सुडौल, गठीले और नरम वक्ष उन्होंने अभी तक नहीं छुए थे। उनका स्पर्श पा कर स्तन और भी कड़क हो गए और चूचियाँ तन कर और कठोर हो गईं।

जब उनकी हथेली चूचियों पर से गुज़रती तो वे दबती नहीं बल्कि स्वाभिमान में उठी रहतीं। मास्टरजी को स्वर्ग का अनुभव हो रहा था।
इसी दौरान उन्हें एक और अनुभव हुआ जिसने उन्हें चौंका दिया, उनका लिंग अपनी मायूसी त्याग कर फिर से अंगडाई लेने की चेष्टा कर रहा था।
मास्टरजी को अत्यंत अचरज हुआ।
उन्होंने सोचा था कि दो बार के विस्फोट के बाद कम से कम 12 घंटे तक तो वह शांत रहेगा। पर आज कुछ और ही बात थी।
उन्हें अपनी मर्दानगी पर गरूर होने लगा।
चिंता इसलिए नहीं हुई क्योंकि सुलेखा का सिर ढका हुआ था और वह कुछ नहीं देख सकती थी।

मास्टरजी ने अपने लिंग को निकर में ही ठीक से व्यवस्थित किया जिस से उसके विकास में कोई बाधा न आये।

जब तक सुलेखा की आँखें बंद थीं उन्हें अपने लंड की उजड्ड हरकत से कोई आपत्ति नहीं थी।
वे एक बार फिर सुलेखा के पेट के ऊपर दोनों तरफ अपनी टांगें करके बैठ गए और उसकी नाभि से लेकर कन्धों तक मसाज करने लगे।
इसमें उन्हें बहुत आनंद आ रहा था, खासकर जब उनके हाथ बोबों के ऊपर से जाते थे।

कुछ देर बाद मास्टरजी ने अपने आप को खिसका कर नीचे की ओर कर लिया और उसके घुटनों के करीब आसन जमा लिया। अपना वज़न उन्होंने अपनी टांगों पर ही रखा जिससे सुलेखा को थकान या तकलीफ़ न हो।

इधर सुलेखा को यह आँख मिचोली का खेल भा रहा था। उसे पता नहीं चलता था कि आगे क्या होने वाला है। यह रहस्य उसके आनंद को बढ़ा रहा था।

मास्टरजी के मसाज से उसकी योनि में तीव्र चंचलता पनप रही थी और वह किसी तरह योनि की कामना पूरी करना चाहती थी। पर लज्जा और मास्टरजी के डर से लाचार थी।

उस भोली को यह समझ नहीं आ रहा था कि मास्टरजी से डरने की तो कोई बात ही नहीं है। वे तो खुद इसी इच्छा पूर्ति के प्रयास में लगे हैं।

लज्जा का अब सवाल कहाँ उठता है? वह इस से ज्यादा नंगी थोड़े ही हो सकती है, भला! पर उसका विवेक तो वासना के भंवर में नष्ट हो गया था।

मास्टरजी को अपना नया आसन बहुत लाभदायक लगा। यहाँ से वे पैरों को छोड़ कर सुलेखा के पूरे जिस्म को निहार भी सकते थे और ज़रुरत पड़ने पर छू भी सकते थे।

उन्होंने जानबूझ कर अभी तक सुलेखा के चरम गुप्तांगों पर हाथ नहीं लगाया था। यह सुख वे अंत में लेना चाहते थे।

अब वे सुलेखा की योनि और गुदा का मसाज करने वाले थे। इस विचार के आने से उनके लंड में फिर से रक्त भरने लगा और वह तीसरी बार उदयमान होने लगा।

मास्टरजी ने मसाज की दो क्रियाएँ शुरू कीं। एक तो वे अपने हाथ सुलेखा की जाँघों से लेकर ऊपर कन्धों तक ले जाते और वापस आने पर अपने अंगूठों से उसकी योनि के चारों तरफ मसाज करते।
पहली बार जब उन्होंने ऐसा किया तो सुलेखा उछल पड़ी। उसकी योनि को आज तक किसी और ने नहीं छुआ था।

अचानक मास्टरजी के हाथ लगने से उसको न केवल अत्यंत गुदगुदी हुई, उसका संतुलन और संयम भी लड़खड़ा गया। उसके उछलने से हालाँकि उसके चेहरे से चादर नहीं हटी पर मास्टरजी का तना हुआ लंड ज़रूर उसकी योनि और नाभि को रगड़ गया।
यद्यपि लंड निकर के अन्दर था फिर भी उसका संपर्क सुलेखा को निश्चित रूप से पता चला होगा।

मास्टरजी ने सुलेखा से पूछा- क्या हुआ सुलेखा? मुझ से कोई गलती हुई क्या?
सुलेखा ने जवाब दिया- नहीं मास्टरजी, मैं चौंक गई थी। आप इलाज जारी रखिये!

यह कह कर वह फिर से लेट गई इस बार उसकी टांगें अपने आप थोड़ी खुल गई थीं।

मास्टरजी बहुत खुश हुए। उन्हें पता था कि सुलेखा पर काम वासना ने कब्ज़ा कर लिया है। वह अब उनके हाथों की कठपुतली बन कर रह गई है।

अब मास्टरजी निश्चिंत हो कर सुलेखा की नाभि से लेकर उसकी योनि तक का मसाज करने लगे।
उन्होंने धीरे धीरे योनि के बाहरी होटों को सहलाना शुरू किया और फिर अंदरूनी छोटे होंट सहलाने लगे।
योनि का गीलापन उनको मसाज में मदद कर रहा था।

सुलेखा की देह किसी लहर की तरह झूमने लगी थी। थोड़ी थोड़ी देर में उसकी काया सिहर उठती और उसका जिस्म डोल जाता।

अब मास्टरजी ने अपनी एक ऊँगली सुलेखा की चूत में थोड़ी सी सरकाई।

सुलेखा के मुँह से एक आह निकल गई।
वह कुछ भी आवाज़ नहीं निकालना चाहती थी फिर भी निकल गई।

मास्टरजी योनिद्वार पर और उसके आधा इंच अन्दर तक मसाज करने लगे। सुलेखा एक नियमित ढंग से ऊपर नीचे होने लगी।
प्रकृति अपनी लीला दिखा रही थी। काम वासना के सामने किसी की नहीं चलती तो सुलेखा तो निरी बालिका थी।

मास्टरजी अब एक ऊँगली लगभग पूरी अन्दर बाहर करने लगे। उनकी ऊँगली किसी हद तक ही अन्दर जा रही थी।
सुलेखा के कुंवारेपन का सबूत, उसकी झिल्ली, ऊँगली के प्रवेश का विरोध कर रही थी।

मास्टरजी को इस अहसास से अत्यधिक संतोष हुआ। अगर सुलेखा कुंवारी नहीं होती तो मास्टरजी को ज़रूर दुःख होता।

अब तो उनके हर्ष की सीमा नहीं थी। वे एक कुंवारी योनि का उदघाटन करेंगे इस ख्याल से उनके लंड ने एक ज़ोरदार सलामी दी और जा कर मास्टरजी के पेट से सट गया।

मास्टरजी ने हाथ बढा कर सोफे पर से एक तकिया खींच लिया और सुलेखा के चूतड़ों के नीचे रख दिया। इस से सुलेखा की गांड भी अब मास्टरजी के अधीन हो गई।

उन्होंने दोनों हाथों में तेल लगाकर एक हाथ से चूतड़ों पर मालिश शुरू की तथा दूसरे से उसकी चूत की। वे इस बात का ध्यान रख रहे थे कि उनकी ऊँगली से गलती से सुलेखा की झिल्ली न भिद जाए।

यह सौभाग्य तो वे अपने लंड को देना चाहते थे। इसलिए चूत की मालिश बहुत कोमलता से कर रहे थे। उन्होंने अपनी ऊँगलियाँ हौले हौले योनि के ऊपर स्थित मटर के पास ले गए जो कि स्त्री की कामाग्नि का सबसे संवेदनशील अंग होता है।

उसे छूते ही सुलेखा के मुँह से एक मादक चीख निकल गई। उसका अंग प्रत्यंग हिल गया और योनि में से 2-3 बूँद द्रव्य रिस गया।

मास्टरजी ने उसके योनि-रस में ऊँगलियाँ भिगो लीं और उन गीली उँगलियों से उसकी गांड के छेद की परिक्रमा करने लगे।

एक हाथ उनका मटर के दाने के आस पास घूम रहा था। सुलेखा आनंद के हिल्लोरे ले रही थी। अब उसकी देह समुद्र की मौजों की तरह लहरें ले रही थी उसका ध्यान इस दुनिया से हट कर मानो ईश्वर में लीन हो गया था।

अब उसे किसी की परवाह नहीं थी।
वह बेशर्मी से मास्टरजी का सहयोग करने लगी थी और निडर हो कर आवाजें भी निकाल रही थी।

उसकी योनि में सम्भोग की तीव्र ज्वाला भड़क उठी थी। उसका तड़पता शरीर भरपूर शक्ति के साथ मास्टरजी की ऊँगली को चूत में डलवाने के प्रयास में लगा था।
और अगर मास्टरजी सावधान नहीं होते तो सुलेखा मास्टरजी की ऊँगली से ही अपने कुंवारेपन को लुटवाने में कामयाब हो जाती।

मास्टरजी ने अवसर का लाभ उठाते हुए एक गीली ऊँगली सुलेखा की गांड के छेद में दबा दी। जैसे ही उन्होंने दबाव डाला उनके दरवाज़े की घंटी बज गई।
वे एकदम चौंक गए।
उन्हें लगा उनके दरवाज़े की घंटी का बटन सुलेखा की गांड में कैसे आ गया!!

उधर सुलेखा भी हड़बड़ा कर उठ गई और अपने कपड़े ढूँढने लगी। उसे अचानक शर्म सी आने लगी।

मास्टरजी ने उसे इशारे से दूसरे कमरे में जाने को कहा और खुद कपड़े पहनते हुए कमरे को सँवारने लगे।
इस दौरान उनका लंड भी मुरझा गया था जो कि अच्छा हुआ।

जब कमरा ठीक हो गया वे दरवाज़े की तरफ जाने लगे पर कुछ सोचकर रुक गए और सुलेखा के पास जा कर उसे पीछे के दरवाज़े से निकाल कर घर जाने को कह दिया।

उन्होंने उसके कान में कल फिर इसी समय आने को भी कह दिया। सुलेखा ने सर हिला कर हामी भर दी और चुपचाप घर को चल दी।

वे नहीं जानते थे कौन आया है और कितनी देर रुकेगा।

इसके आगे क्या हुआ, अन्तर्वासना में पढ़िये अगले अंक में!!!

आपको यहाँ तक की कहानी कैसी लगी मुझे ज़रूर बताइए। आपके पत्रों और सुझावों का मुझे इंतज़ार रहेगा, ख़ास तौर से महिला पाठकों का क्योंकि लड़कियों के दृष्टिकोण का मुझे आभास नहीं है। उनके परामर्श मेरे लिए ज़रूरी हैं। Hindi Sex Stories

Antarvasna

रात के बारह बज़ चुके Antarvasna थे। छोटे से गाँव राजापुर में बहुत ही सन्नाटा छ गया था। राजापुर गरीब की बस्ती है। इसी बस्ती के एक कोने में हरिया का घर है। हरिया की उमर 45 साल की है। और उसकी बीबी की उमर 40 साल की है। हरिया एक गरीब किसान है।

हरिया अपने घर के एक अँधेरी कोठरी में रोज़ की तरह अपनी बीवी की चुदाई में मशगूल था। हरिया अपनी बीबी की चूत में लंड डाल कर काफ़ी देर तक उसकी चुदाई कर रहा था। उसकी बीबी मुन्नी बिना किसी उत्तेजना के अपने दोनों पैर फैला कर यूँ ही पड़ी थी जैसे कि उसे हरिया के बड़े लंड की कोई परवाह ही न हो या फिर कोई तकलीफ़ ही न हो रही है। केवल हर धक्के पर आह आह की आवाज निकल रही थी।
मुन्नी की बुर कब का पानी छोड़ चुकी थी। थोड़ी ही देर में हरिया के लंड से माल निकलने लगा तो उसने भी आह आह कर के मुन्नी की चूची पर अपना मुँह रख दिया। मुन्नी की बेजान चूची को वो मुँह में ले कर चूसने लगा। उसने अपना लंड मुन्नी के बुर से निकाला और मुन्नी के बगल में लेट गया।

उसने अपनी बीडी जलाई और पीने लगा। मुन्नी ने उसके लटक रहे लंड को अपने हाथों में ले लिया और उसको खींच-तान करने लगी। लेकिन अब हरिया के लंड में कोई उत्साह नही था। वो एक बेजान लता की तरह मुन्नी के हाथों का खिलौना बना हुआ था।

मुन्नी ने कहा- जानते हो जी ! आज क्या हुआ?
हरिया ने कहा- क्या?

मुन्नी ने कहा- रोज़ की तरह आज मैं और मालती ( मुन्नी की बहू) सुबह शौच करने खेत गए । वहाँ हम दोनों एक दूसरे के सामने बैठ कर पाखाना कर थे…
तभी मैंने देखा कि मालती अपनी बुर में ऊँगली घुसा कर मुठ मारने लगी।
मैंने पूछा- यह क्या कर रही है तू?

तो उसने मेरी पीछे की तरफ़ इशारा किया और कहा- जरा उधर तो देखो अम्मा।
मैंने पीछे देखा तो एक कुत्ता एक कुतिया पर चढ़ा हुआ है।
मैंने कहा- अच्छा, तो यह बात है।

मालती ने कहा- देख कर बर्दाश्त नहीं हुआ इसलिए मुठ मार रही हूँ।
मैंने कहा- जल्दी कर, घर भी चलना है।
मालती ने कहा- हाँ अम्मा, बस अब निकलने ही वाला है।

और एक मिनट हुआ भी ना होगा कि उसकी बुर से इतना माल निकलने लगा कि एक मिनट तक निकलता ही रहा।
मैंने पूछा- क्यों री, कितने दिन का माल जमा कर रखा था?
उसने कहा- कल दोपहर को ही तो निकाला था।
मैंने भी सोचा- कितना जल्दी इतना माल जमा हो जाता है।

हरिया ने कहा- वो अभी जवान है ना। और फिर उसकी गर्मी शांत करने के लिए अपना बेटा भी तो यहाँ नहीं है ना। कमाने के लिए परदेस चला गया। अरे मैं तो मना कर रहा था। तीन महीने भी नहीं हुए उसकी शादी को और अपनी जवान पत्नी को छोड़ कमाने बम्बई चला गया। बोला, अच्छी नौकरी है। अभी बताओ चार महीने से आने का नाम ही नहीं है। बस फोन कर के हालचाल ले लेता है। अरे फोन से बीबी की गर्मी थोड़े ही शांत होने वाली है? अब उसे कौन कहे ये सब बातें खुल के?

थोड़ी देर शांत रहने के बाद मुन्नी फिर से हरिया के लंड को हाथ में ले कर खेलने लगी।

हरिया ने मुन्नी से पूछा- क्या तुम रोज़ ही उसके सामने बैठ के पाखाना करती हो?
मुन्नी ने कहा- हाँ।
हरिया- तब तो तुम दोनों एक दूसरे की बुर रोज़ देखती होगी।

मुन्नी- हाँ, बुर क्या पूरा गांड भी देखी है हम दोनों ने एक दूसरे की। बिल्कुल ही पास बैठ कर पाखाना करते हैं।
हरिया- अच्छा, एक बात तो बता। उसकी बुर तेरी तरह काली है या गोरी?

मुन्नी- पूरी गोरी तो नहीं है लेकिन मेरे से साफ़ है। मुझे उसकी बुर पर के बाल बड़े ही प्यारे लगते हैं। बड़े बड़े और लहरदार रोएँ की तरह बाल। एक बार तो मैंने उसके बाल भी छुए हैं।

हरिया- बुर कैसी है उसकी?
मुन्नी- बुर क्या है लगता है मानो कटे हुए टमाटर हैं। एकदम फुले फुले लाल लाल।

अचानक मुन्नी ने महसूस किया कि हरिया का लंड खड़ा हो रहा है। वो समझ गई कि हरिया को मज़ा आ रहा है। वो बोली- अच्छा, एक बात तो बताओ।

हरिया बोला- क्या?
मुन्नी- क्या तुम उसे चोदोगे?
हरिया- यह कैसे हो सकता है?

मुन्नी- क्यों नहीं हो सकता है? वो जवान है, अगर गर्मी के मारे किसी और के साथ भाग गई तो क्या मुँह दिखायेंगे हम लोग गाँव वालों को? अगर तुम उसकी गर्मी घर में ही शांत कर दो तो वो भला किसी दूसरे का मुँह क्यों देखेगी। जब वो किसी कुत्ते-कुतिया को देख कर मुठ मार सकती है तो वो किसी के साथ भी भाग सकती है। कितना नजर रख सकते हैं हम लोग? थोड़े दिन की तो बात है, फिर हमारा बेटा मोहन उसे अपने साथ बम्बई ले जाएगा तब तो हमें कोई चिंता करने की जरूरत तो नहीं है।

हरिया- क्या मालती मान जायेगी?

मुन्नी ने कहा- कल रात को मैं उसे तुम्हारे पास भेजूंगी। उसी समय अपना काम कर लेना।

हरिया का लंड पूरा जोश में आ गया। उसने मुन्नी की बुर में अपना लंड डालते हुए कहा- तूने तो मुझे गरम कर दिया रे।

मुन्नी ने मुस्कुरा कर अपनी दोनों टांगें फैला दी और आह आह की आवाज़ निकालने लगी। इस बार वो जोर जोर से आवाज निकाल रही थी। हालंकि उसे कोई ख़ास दर्द नहीं हो रहा था लेकिन वो जोर जोर से बोलने लगी- आह आह, धीरे धीरे करो ना। दर्द हो रहा है।

यह आवाज़ बगल के कमरे में सो रही उसकी बहू मालती को जगाने के लिए काफ़ी थी। चुदाई की मीठी दर्द भरी आवाज़ सुन कर मालती की बुर चिपचिपी हो गई। उसने अपने पिया मोहन के लंड को याद करके अपनी बुर में ऊँगली डाली और दस मिनट तक ऊँगली से ही बुर की गत बना डाली।

सुबह हुई, दोनों सास-बहू खेत गई, दोनों एक दूसरे के सामने बठी कर पाखाना कर रही थी।

मालती अपनी सास मुन्नी की बुर देख कर बोली- अम्मा, तुम्हारा बुर कुछ सूजी हुई लग रही है।

मुन्नी ने हंसते हुए कहा- यह जो तेरे ससुर जी हैं न, बुढापे में भी नहीं मानते। देख न कल रात को इतना चोदा कि अभी तक दुःख रहा है।

मालती ने कहा- एक बात पूछूं अम्मा?
मुन्नी- हाँ, पूछ न।
मालती- बाबूजी का लंड खड़ा होता है अभी भी?

मुन्नी- हाँ री। खड़ा क्या? लगता है बांस है। जब वो मुझे चोदते हैं तो लगता है कि अब मेरी बुर तो फट ही जायेगी। एक हाथ बराबर हो जाता है उनका लंड खड़ा हो के।
मुन्नी ने देखा कि मालती ने अपनी ऊँगली अपने बुर में घुसा दी है।

मुन्नी ने पूछा- क्या हुआ तुझे? क्या फिर कोई कुत्ता है यहाँ?

मालती बोली- नहीं अम्मा, मुझे तुम्हारी बातें सुन के गर्मी चढ़ गई है। इसे निकालना जरूरी है।

मुन्नी बोली- सुन, तू एक काम क्यों नहीं करती? आज रात तू अपने ससुर के साथ अपनी गर्मी क्यों नहीं निकाल देती?
मालती चौंक कर बोली- यह कैसे हो सकता है? वो मेरे ससुर हैं।

मुन्नी बोली- अरे तेरी जरूरत को समझते हुए मैंने ऐसा कहा। तुझे इस समय किसी मर्द की जरूरत है। अब जब घर में ही मर्द मौजूद हो तो क्यों नहीं उसका लाभ उठाया जाए।

मालती का मन अब डोल चुका था, वो बोली- कहीं बाबूजी नाराज हों गए तो?

मुन्नी बोली- अरे तू रात को उनके पास चले जाना। मैं बहाना बना के भेज दूँगी। धीरे धीरे रात के अंधेरे में जब तू उनको छुएगी ना तो तू भूल जायेगी कि तू उनकी बहू है और वो भूल जायेंगे कि वो तुम्हारे ससुर हैं।

यह सुन कर मालती की बुर में मानो तूफ़ान आ गया। उसकी बुर से इतना पानी निकलने लगा कि मुन्नी को लगा कि यह पेशाब कर रही है। अब मुन्नी खुश थी। दोनों तरफ़ मामला सेट था।

रात हुई, खाना-वाना ख़त्म कर मुन्नी हरिया के कमरे में गई और बता दिया कि मैं मालती को भेज रही हूँ। उसको भी समझा दिया है। तुम सिर्फ़ थोड़ी पहल करना। वो तो कुत्ते से भी चुदवाने के लिए तैयार बैठी है। तुम तो इंसान ही हों।

कह कर वो बाहर चली आई और जोर से बोली- बहू, ओ बहू, सुन आज मेरी तबीयत कुछ ठीक नहीं है। तू जरा अपने ससुर जी को तेल तो लगा दे।

फिर दरवाजे के बाहर से हरिया को बोली- सुनते हो जी, मैं जरा छत पर सोने जा रही हूँ। मालती बहू से तेल लगवा लेना।

मालती जैसे ही दरवाजे के पास आई, मुन्नी ने उससे धीरे से कहा- देख मैं बहाना बना कर तुम्हें उनके पास भेज रही हूँ। मालिश करते करते उनके लंड तक अपना हाथ ले जाना। शरमाना नहीं। अगर उनको बुरा लगे तो कह देना कि अंधेरे में दिखा नहीं। अगर कुछ नहीं बोले तो फिर हाथ लगाना। जब देखो कि कुछ नहीं बोल रहे हैं तो समझना कि उन्हें भी अच्छा लग रहा है। ठीक है ना? अब मैं चलती हूँ।

कह कर मुन्नी छत पर चली गई। इधर मालती हाथ में तेल की शीशी लिए हरिया के कमरे में आई।

हरिया ने कहा- आजा, वैसे तो तेल मालिश की जरूरत नहीं थी, लेकिन आज मेरा पैर थोड़ा सा दर्द कर रहा है इसलिए मालिश जरूरी है।

मालती हरिया के बिस्तर पर बैठ गई। कमरे में एक छोटी सी डिबिया जल रही थी। जो की पर्याप्त रोशनी के लिए अनुकूल नहीं थी।

मालती ने कहा- कोई बात नहीं, मैं आपकी अच्छे से मालिश कर देती हूँ। आप ये लूंगी उतार ले।
हरिया ने कहा- बहू, जरा ये डिबिया बुझा दे क्योंकि मैंने लूंगी के अन्दर छोटी सी लंगोट ही पहन रखी है।

मालती ने डिबिया बुझा दी। अब वहां घुप अँधेरा छा गया। सिर्फ़ बाहर की चांदनी रात की हल्की रोशनी ही अन्दर आ रही थी। हरिया ने लूंगी उतार दी। मालती की सांसें तेज़ हों गई। वो तेल को हरिया के पैरों में लगाने लगी। धीरे धीरे वो हरिया की जांघों में तेल लगाने लगी। धीरे से वो जानबूझ कर हरिया के लंड तक अपना हाथ ले गई। हरिया ने कुछ नहीं कहा। मालती ने दुबारा हरिया के लंड पर हाथ लगाया।

हरिया ने कहा- बहू, तुम्हें गर्मी लग रही होगी। तुम अपनी साड़ी खोल दो ना। वैसे भी तेल लगने से साड़ी ख़राब हों सकती है।

मालती ने कहा- बाबूजी, साड़ी के नीचे मैंने पेटीकोट नही पहना है। सिर्फ़ पैंटी पहन रखा है। इसलिए मैं साड़ी नहीं खोल सकती।

हरिया ने कहा- तो क्या हुआ? वैसे भी अंधेरे में मैं तुम्हें देख थोड़े ही पा रहा हूँ जो तुम यूँ शरमा रही हों?

मालती तो यही चाहती थी, उसने अपनी साड़ी खोल कर एक किनारे रख दी और तेल को वो जांघों और लंड के बीच लगाने लगी। जिससे वो बार बार हरिया के अंडकोष पर हाथ लगा सकती थी। हरिया ने जब देखा कि बात लगभग बन चुकी है, उसने अपनी लंगोट की डोरी को कब खोल दिया, मालती को पता भी ना चला। धीरे धीरे जब वो हरिया के अंडकोष पर हाथ फेर रही थी तो उसी के हाथ से उसकी लंगोट हट गई।

लंगोट हटने पर मालती पूरी गरम हो गई। अब वो हरिया के लंड को छूने की कोशिश कर रही थी। धीरे धीरे उसने लंड पर हाथ लगाया और हटा लिया। हरिया का लंड सोया हुआ था। लेकिन ज्यों ही मालती ने हरिया का लंड छुआ, मालती के जिस्म में एक सिरहन सी दौड़ गई। अब वो दुबारा अपना हाथ हरिया के दूसरे जांघ पर इस तरह ले गई जिससे उसकी कलाई हरिया के लण्ड को छूती रहे। हरिया भी पका हुआ खिलाड़ी था। उसका लंड जल्दी खड़ा होने वाला नहीं था, वो बोला- बहू, तू थक गई होगी। आ जरा लेट जा।

उसने लगभग जबरदस्ती बहू को पकड़ कर अपने बगल में लिटा दिया और उसके चूची पर हाथ रख के बोला- इसे खोल दे ! बहुत गर्मी है।

मालती ने अपने ब्लाउज का हुक खोल दिया। हरिया ने ब्लाउज को मालती के चूची पर से अलग कर दिया और चूची को छूने लगा, बोला- अरे तुमने अन्दर ब्रा नही पहन रखा है? खैर कोई बात नहीं, अब गर्मी तो नहीं लग रही है न?

वो मालती के चूची को मसलने लगा, बोला- तेरी चूची तो एक दम सख्त है। मैं तेरी चूची छू रहा हूँ, तुझे बुरा तो नहीं लग रहा है न?

मालती बोली- नहीं, आप मेरे साथ कुछ भी करेंगे तो मैं बुरा नहीं मानूंगी।
हरिया ने कहा- शाबाश बहू, यही अच्छी बहू की निशानी है। बोल तुझे क्या चाहिए?
मालती- बाबूजी, मुझे कुछ नही चाहिए, सिर्फ़ आपका लंड छूना चाहती हूँ।
हरिया- एक शर्त पर। तू भी मुझे अपनी बुर छूने देगी।

मालती ने आव देखा ना ताव, एक झटके में अपना पैन्टी उतार फेंकी। हरिया ने नीचे जा कर मालती की बुर को पहले तो छुआ फिर मुँह में लेकर चूसने लगा।

मालती बोली- ऐसे मत चूसिये, मैं मर जाऊंगी।

हरिया उठ खड़ा हुआ और मालती के हाथ में अपना लंड थमा दिया। मालती के हाथ मानो कोई खजाना लग गया हो। वो हरिया के लंड को कभी चूमती कभी खेलती। काफी देर यह करने के बाद बोली- बाबूजी, इसको मेरी बुर में एक बार डाल दीजिये न।

हरिया ने अपने लटके हुए लंड को हाथ से पकड़ कर मालती के बुर में घुसा दिया। मालती की बुर में हरिया का लंड जाते ही फुफकार मारने लगा और मालती की बुर में ही वो खड़ा होने लगा। मालती- बाबूजी ये क्या हो रहा है? जल्दी से निकाल दीजिये।

हरिया- कुछ नहीं होगा बहू।

अब हरिया का लंड पूरी तरह से टाइट हो गया। मालती दर्द से छटपटाने लगी। उसे यह अंदाजा ही नहीं था कि जिसे वो कमजोर और बूढ़ा लंड समझ रही थी, वो बुर में जाने के बाद इतना विशालकाय हो जाएगा।

हरिया ने मालती को चोदना चालू किया। पहले दस मिनट तक तो मालती बाबूजी बाबूजी छोड़ दीजिये कहती रही। लेकिन हरिया ने नहीं सुना, वो धीरे धीरे उसे चोदता रहा। दस मिनट के बाद मालती की बुर थोड़ी ढीली हुई। अब उसे भी अच्छा लग रहा था। दस मिनट और हरिया ने मालती की जम के चुदाई की। तब जाकर हरिया के अन्दर का पानी बाहर आने को हुआ तो उसने अपना लंड मालती की बुर से निकाल के मालती के मुँह में लगा दिया, बोला- पी जा।

मालती ने हरिया के लंड को मुंह में ले कर ज्योंही दो-तीन बार चूसा कि हरिया के लंड से तेज़ धार निकली जिससे मालती का पूरा मुँह भर गया। मालती ने सारा का सारा माल गटक लिया।

आज जाकर मालती की गर्मी शांत हुई। उसके बाद वो रोज़ ही अपने ससुर के साथ ही सोने लगी। हाँ दो-तीन दिन में उसकी सास मुन्नी भी साथ सोने लगी। अब हरिया एक तरफ करवट ले कर बीबी को चोदता तो दूसरी तरफ़ करवट ले कर अपनी बहू मालती को। Antarvasna

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Sex Stories

गुरुजी को सबसे पहले Sex Stories और फिर अंतर्वासना के पाठक-समूह को मेरी तरफ से यानि कि आंचल की तरफ से बहुत बहुत प्यार- दुलार !

इस वेबसाइट पर प्रकाशित होने वाले किस्से पढ़-पढ़ कर मुझे अपनी प्यास बुझाने का रास्ता मिला।

मेरी उम्र 28 साल की है, मैं पंजाब की रहने वाली हूँ। मेरे ब्रा का नाप है छत्तीस, कमर अठाईस और गांड छत्तीस !

मैं एक गरीब परिवार से लेकिन सपने आसमान छूने के थे। हम तीन बहने हैं। मैं चौदह साल की थी जब मेरे पापा ने आत्महत्या कर ली थी। तीन बच्चों की माँ होने के बाद भी मेरी माँ में इतनी आग थी, कसा हुआ जिस्म जिसको सम्भालने के लिए मर्द भी ज़बरदस्त चाहिए था। इससे आगे मैं क्या कहूँ आप समझदार हो !

पिता की मौत के बाद बड़ी बहन को नानी ले गई, उसकी शादी, पढ़ाई की जिम्मेदारी ली, अपने किसी अमीर यार से मिलकर उसके खर्चे पर दूसरी वाली को बोर्डिंग में डाल दिया।

रह गई मैं ! मुझे कमरे में सुला कर माँ दूसरे कमरे में रंगरलियाँ मनाती, ऐश करती !

मैं भी जवानी की दहलीज़ पर थी। आए दिन उसका नया आशिक पैदा हो जाता, मैं छुप कर देखती तो पहले पहले मुझे माँ पर बहुत गुस्सा आता, फिर सब देख मुझे अजीब जा एहसास होने लगा, मेरे छोटे-छोटे चूचक तन जाते, पैंटी गीली होने लगती। अब मेरा भी दाना कूदता था। मेरे कदम डोलते वक़्त नहीं लगा।

माँ जवान लड़कों, कॉलेज के लड़कों को भी अपने हुस्न-जाल में फंसाती। उनमे से एक लड़का बबलू जिसकी असल में आँख मुझ पर थी, माँ मुझ तक आने का जरिया थी।

एक दिन वो उस समय आया जब उसे मालूम था कि माँ घर में नहीं है। अन्दर आते ही कुण्डी लगा ली और मुझे दोनों कन्धों से पकड़ कर दोस्ती करने के लिए कहने लगा। मेरी बदन में कर्रेंट सा लगा। इससे पहले मैं कुछ बोलती, उसने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए, मना करने का मौका नहीं दे रहा था। उसने मुझे उठाया और सीधा माँ के कमरे में ले गया और बिस्तर पर डाल मुझे पर छा गया। उसने मेरा एक-एक कपड़ा उतार दिया और खुद के भी सारे कपड़े उतार दिए। फ़िर मेरे मुँह में लौड़ा डालने लगा तो मैं काफी छटपटाई, टांगे मारी लेकिन उसमें बहुत दम था। उसने मुझे इस कदर जकड़ लिया कि मैं हिल नहीं पाई, मुझे उसका चूसना पड़ा और मेरी चूत पर थूक लगाते हुए उसने मेरी सील बंद चूत पर मेरे ही थूक से गीला लौड़ा रख दिया। उसका एक हाथ मेरे मम्मे पर था। सेब जैसे छोटे मम्मे तन गए थे। जब उसने लौड़ा मेरी चूत पर रगड़ा तो मुझे मजा आने लगा।

अचानक एक ज़बरदस्त वार हुआ और फड़क की आवाज़ से चीरता हुआ उसका आधे से ज्यादा लौड़ा मेरी चूत में खून से लथपथ !

मेरा मुँह उसने अपने हाथ से दबा रखा था। कुछ पलों के लिए मुझे लगा कि आज मेरा इस दुनिया में आखिरी दिन है। मैं रोने लगी, उसके तरले, मिन्नतें करने लगी। तभी उसने एकदम लौड़ा मेरी चूत से निकाल लिया और पास पड़ी मेरी पैंटी से उसने खून साफ़ किया।

अपने लौड़े को भी थूक लगा फिर घुसा दिया उसने !

कुछ मिनट बाद मैं सामान्य होने लगी और अब वही लौड़ा मुझे मजे देने लगा, खुद चुदवाने लगी। दोनों एक साथ झड़ गए और हांफने लगे। उसने मुझे औरत बना डाला। उसने मुझे एक बार फिर से ठोका।

अब आये दिन मौका देख वो आता, मुझे बजाता, चला जाता !

फिर कुछ और लड़कों से मेरे संबंध बने, जिनकी चर्चा होने लगी !

मेरी जवानी एकदम से आग उगलने लगी, किसी का भी लौड़ा ले लेती थी मैं ! अपनी माँ पर गई थी मैं !

सर्दियों के दिन थे, घना कोहरा पड़ता था। मैं सुबह स्कूल से पहले ट्यूशन पढ़ने जाती थी। मेरे पीछे एक चमकती कार आने लगी और आखिर मेरा भी दिल करता कि मैं भी ऐसे घर जाऊं और एक रोज़ उसकी खिड़की ठीक मेरे पास आकर खुली और मुझे बिठा कर कार चल पड़ी। उसने मुझे अपने बारे में बताया, मेरे बारे में पूछा, मेरा नंबर लिया और फ़िर रोज़ आता।

एक दिन वो कार साइड पर लगा मेरे जिस्म से खेला। उसने मुझे कहा- मैं तुझसे शादी करना चाहता हूँ, उसके बाद ही कुछ करेंगे !

वो मुझसे उम्र में काफी बड़ा लगता था, उसके शॉपिंग मॉल, रेस्टोरेंट थे। वो सरदार था और उसकी गाँव में बहुत ज़मीन थी, उसके बाल कटे हुए थे।

जल्दी किसी ने माँ को बता दिया की तेरी छोरी रोज़ किसी की कार में बैठती है।

माँ ने मुझे बिठाया और पूछा।

मैंने सब कुछ बताया।

माँ ने जब देखा कि कितने अमीर घर में उसकी बेटी जा सकती है तो उसके वारे-न्यारे थे।

एक रोज़ वो घर आया और माँ से मेरा हाथ माँगा।

माँ ने कहा- इतनी जल्दी शादी कैसे कर पाऊँगी?

उसने कहा- मुझे कुछ नहीं चाहिए, तीन कपड़ों में ले जाना है !

चुन्नी चढ़ाई हुई और चार फेरे लेकर मैं उसकी हो गई। शादी के चार दिन बाद उसने एक बहुत बड़ी रेसेप्शन पार्टी रखी जिसमें उसने अपने सारे रिश्तेदारों, दोस्तों को बुलाया। मुझ जैसी कातिल हसीना से शादी कर स्टेज पर बैठ कर बहुत खुश था !

अब वो मेरे साथ चिपका रहता लेकिन मेरी तसल्ली नहीं कर पा रहा था। मैं सिर्फ ऊपर से खुश थी लेकिन उसका लौड़ा वैसा नहीं था जिसकी मुझे आदत थी।

एक दिन मुझे पता चला कि वो पहले से शादीशुदा था, उसका तलाक हो चुका था। मैंने कुछ नहीं कहा। उसने मेरे लिए आलिशान घर बनवा दिया, कई चमकती कारें, नौकर-चाकर सोने से लदी-फ़दी रहती।

दिन बीत रहे थे लेकिन यौन-जीवन से मैं खुश नहीं थी। गाँव में काफी ज़मीन ज़ायदाद थी, जिसपर खूब फसल होती थी। हफ्ते में एक-दो बार गाँव जाते, वहां भी एक आलीशान फार्म-हाउस था और उसकी देखरेख दो नौकर करते थे। मुझे देख उनकी आंखें चमक उठती और वासना साफ़ दिखती थी उनकी आंखों में !

वो थे तो नौकर लेकिन हट्टे कट्टे अच्छी मर्दानगी के मालिक थे। उनकी प्यासी और वासना भरी आँखें देख मेरा दाना कूदने लगता।

फार्म-हाउस में घर के सामने टयूबवेल लगा हुआ था जिसके आगे सीमेंट का बहुत बड़ा टब जैसा था। रात को मैं भी उसमें नहाने चली जाती।

एक बार मैं खिड़की में खड़ी बालों में कंघी कर रही थी और सामने टब में नहा रहे उस नौकर को देख रही थी- चौड़ी छाती, घंने बाल, मजबूत जांघें ! उसका अंडरवीयर गीला होकर चिपका हुआ था, उसका लौड़ा देखने में काफी सोलिड सा लग रहा था।

उसने मुझे खड़ी देख लिया। मैं अपने होंठ चबाने लगी। उसने इधर-उधर देखा और अपना अंडरवीयर नीचे कर दिया साबुन लगाने के बहाने ! उसका काले रंग का लौड़ा देख मेरी हालत खराब होने लगी। वो अनजान बन कर लौड़ा सहलाने लगा, देखते ही उसका तन कर पूरा खड़ा हो गया। मेरा हाथ अपनी कच्छी में चला गया और दूसरा हाथ मम्मे दबाने लगा।

मैंने उसको इशारे से कुछ कहा कि अन्दर आ जा !

वो जल्दी से टब से निकला, तौलिए से बदन पौंछा। तभी कार का होर्न बज गया, मेरे पति आ गए !

हम दोनों उदास हो गए। मुझे लेकर वो वापस शहर आ गए लेकिन मैं दिल वहीं छोड़ चुकी थी, बस मौका तलाश करने लगी !

और फिर आगे आगे क्या-क्या हुआ, जानने के लिए इसका दूसरा अंक पढ़ना अन्तर्वासना पर ! Sex Stories

प्रेषक : सुनील Antarvasna

मैं आप लोगों को एक गर्म सच्ची कहानी Antarvasna बता रहा हूं अपने दोस्त की बीवी की चुदाई की !

मेरा एक बचपन का दोस्त है। हम दोनों एक साथ बड़े हुए और उसकी शादी हो गई। शादी के कुछ दिनों बाद वो हमेशा अपनी बीवी की चुदाई कैसे करता है, बताता रहता था। जिसे सुनकर मेरा मन भी चुदाई करने को करता था और मैं सोचता था कि वो कैसे भाभी को चोदता होगा और भाभी कैसे चुदवाती होगी।

एक दिन मैंने उसे कहा- यार ! मेर मन चुदाई के लिए करता है और मेरे पास कोई जुगाड़ भी नहीं है। उसने कुछ नहीं कहा, लेकिन अगले दिन उसने मुझे कहा कि मैं उसकी बीवी को चोदना चाहूं तो चोद सकता हूं, उसे कोई परेशानी नहीं। मैंने कहा कि भाभी क्या चुदाई के लिए मान गई

तो उसने कहा- नहीं, लेकिन मान जाएगी क्योंकि उसे ग्रुप सेक्स की कहानियाँ सुनने में अच्छी लगती हैं और मैं उसे तुम्हारे बारे में कुछ नहीं बताऊंगा। आज रात को जब मैं उसे ग्रुप सेक्स की कहानी सुना कर उसकी आंखों पर पट्टी बांध कर चोदूंगा, तभी तुम भी चोद लेना। बाद में उसे बताएंगे कि तुमने भी उसकी चुदाई की है।

रात को मैं उसके कमरे में छुप गया। फ़िर भाभी आई और बोली कि तुम्हारा दोस्त गया क्या?

तो वो बोला- हाँ ! गया।

तो भाभी ने दरवाज़ा बंद कर लिया और बोली- कोई सेक्सी नग्न फ़िल्म दिखाओ ना !

मेरे दोस्त ने XXX फ़िल्म लगा दी। भाभी फ़िल्म देखते देखते गरम हो गयी और मेरे दोस्त के कपड़े उतारने लगी। फ़िर अपने कपड़े भी उतार दिए। मैं तो भाभी का जवानी से भरा बदन देख कर पागल हो गया- क्या फ़ीगर थी उनकी ३६-२६-३४ उनकी चूत पर एक भी बाल नहीं था, उनकी इतनी खूबसूरत चूत छूने के लिए मेरा मन मचलने लगा। मेरे दोस्त ने भाभी की आंखों पर पट्टी बांध कर मुझे पास आने के लिए इशारा किया और भाभी के बदन से लिपट गया। सामने भाभी को नंगी देख कर मेरे लंड में तूफान आ गया।

फिर मेरा दोस्त भाभी की चूत घोड़ी बना कर लेने लगा थोड़ी देर में उसने अपना लंड निकाल लिया और मुझे इशारा किया कि मैं लंड डाल दूँ। मैंने तुंरत ही अपना लंड भाभी की चिकनी चूत में डाल दिया।

लंड जाते ही भाभी बोली- अचानक तुम्हारा लंड इतना मोटा क्यों लग रहा है? तो मेरे दोस्त ने उसकी आंखों पर से पट्टी खोल दी तो भाभी ने पलट कर मुझे देखा तो मुस्कराई और कहा कि मुझे अच्छा लग रहा है मैं भी यही चाहती थी कि मेरी चुदाई दो दो लंड से हो, मुझे आज खूब जोर जोर से चोदो।

फिर क्या था मैं तो भाभी को खूब मस्ती में चोदने लगा और भाभी आहें भरने लगी। मैं कभी भाभी की कमर पकड़ता तो कभी चूची। फिर थोड़ी देर बाद मैंने लंड निकल लिया और भाभी को लेटा दिया और कहा कि तुम बहुत सेक्सी लग रही हो और भाभी की चूत को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा भाभी सिसकने लगी और मैं चूत को अपने होटों से जोर जोर से चूमने लगा। भाभी एक दम तड़पने लगी और कहा कि मेरी प्यासी चूत में अपना मोटा लंड डाल कर इसकी प्यास बुझा दो।

फिर मैंने भाभी के उप्पर चढ़ कर चूत में लंड डाल दिया और चूची मुंह में लेकर स्वर्ग का मजा लेने लगा उस समय मेरे दोस्त ने भाभी से कहा कि मैं तो पहले ही जानता था कि तुम चुदवा लोगी क्योकि ग्रुप सेक्स की कहानी सुन कर तुम बहुत जोशीली हो जाती थी। आज तुम्हें चुदते हुऐ देखने में बड़ा मज़ा आ रहा है, लेकिन तुम दोनों मेरे सामने ही चुदाई करना ! नहीं तो लोगों को शक हो सकता है।

तो भाभी ने कहा कि अगर किसी को न पता लगे तो हर औरत चुदवाना चाहती है और यहाँ तो आप मुझे चुदवा रहें हैं, अब तो मैं हर रात आप दोनों से चुदवाना चाहती हूँ।

फिर रात भर मैंने और मेरे दोस्त ने मिल कर भाभी को खूब चोदा उसके पूरे बदन को खूब प्यार किया फिर हर दो तीन दिन में हम तीनो साथ साथ चुदाई करने लगे। फिर एक दिन मेरे दोस्त की बदली पुणे हो गई और हम लोग अलग हो गए। आज कल मेरा मन चुदाई के लिए तड़पता है दिल करता है कि भाभी वापस आ जाए लेकिन ये हो नहीं सकता। Antarvasna

नमस्कार मित्रांनो,आज मी तुम्हाला माझ्यासोबत लहानपणी घडलेले काही खरे किस्से सांगणार आहे.माझे नाव सूरज आहे.मी नाशिक मधील सटाणा या गावी राहतो.माझे वय 14 वर्षे आहे पण माझ्या कमी उंचीमुळे आणि बारीक शरीरयष्टी मुळे मी 9 वर्षाच्या मुलासारखा दिसतो.आमच्या घरात मी ,आई आणि बाबा राहतात.मी नेहमी त्यांचा लाडका होतो.आता मला उन्हाळी सुट्टी लागली होती.म्हणून मी मस्त उशिरा उठायचो.मला नागडे राहायला खूप आवडायचं,पण माझ्या बाबांच्या कठोर स्वभावामुळे मी 10 वर्षांचा असताना च नागडे राहणे बंद झाले होते.माझी एक इच्छा होती,की दिवसभर मस्त नागडे राहावे आणि तसेच सगळ्या गोष्टी कराव्या. मला सुट्ट्या लागून 1 दिवस झाला होता तेव्हा दुसऱ्या दिवशी आमच्या घराच्या मागील बाजूस असणाऱ्या 2 रुमच्या घरासाठी एक भाडेकरू आले.त्यांनी मग त्या खोलीत समान टाकले.त्यांच्याकडे काहीच जास्त समान नव्हते.ते एक जोडपे होते आणि त्यांना 3 वर्षांचा एक मुलगा होता.त्या बाईचे वय जवळपास 30 होते.त्यांचे शरीर एकदम गोरे आणि कमनीय होते.त्यांचे मिस्टर ट्रक ड्रायव्हर होते आणि त्यामुळे ते नेहमी बाहेरगावी फिरतीवर राहायचे. 2 दिवसांनी आमची चांगली ओळख झाली.त्यांचे नाव सुजाता होते मी त्यांना काकू म्हणायचो.तेव्हा त्या मला म्हणाल्या,”बाळा,मी तुझी मावशी आहे त्यामुळे मला मावशी म्हणत जा.”मी हो बोललो.आता मी त्यांच्या लहान मुलासोबत खेळत असे.त्याचे नाव स्वप्नील होते पण मावशी त्याला लाडाने सोनू म्हणायची.आता मी खऱ्या गोष्टीवर येतो.माझी आणि सुजाता मावशीची चांगली गट्टी जमली होती.मी आता जास्त वेळ सुजाता मावशी च्या रूम मध्ये जाऊन सोनुसोबत खेळायचो.मी एक गोष्ट बघितली की सुजाता मावशी अजूनपण सोनूला त्यांचे दूध पाजायच्या.मला खूप आश्चर्य वाटायचं कारण मी फक्त 2 वर्षाच्या मुलाना दूध पिताना पाहिलं होतं.सुजाता मावशी सोनूला फक्त घरी असताना दूध पाजायची.आता तर सुजाता मावशी मी त्याच्या घरी समोर बसलेलो असलो तरी सोनूला जवळ बोलवायची आणि माझ्यासमोर त्यांच्या ब्लाऊज मधून एक स्तन बाहेर काढून सोनुच्या तोंडात द्यायची.ती सुरवातीला दूध पाजताना तिच्या साडीने सोनूला आणि तिच्या स्तनाला झाकून घ्यायची पण आता 2 दिवसापासून ती माझ्यासमोर स्तन बाहेर काढून बिनधास्त पणे माझ्याशी बोलत सोनूला दूध पाजयाची.सोनू बऱ्याच वेळेला घरात नागडा च असायचा आणि तसाच नागडा दूध प्यायचा. मला आता सोनुचा हेवा वाटू लागला होता.मला पण सोनुसारखा नागडा राहून मावशीचे दूध चोखून प्यायची इच्छा होत होती.त्यामुळे मी सुजाता मावशी चे स्तन बघायला मिळतील म्हणून नेहमी त्यांच्या रूम वर जायचो. आता सुजाता मावशी माझ्यासोबत खूप बिनधास्त राहत होती.मग एक दिवस अचानक संध्याकाळी आमच्या आजींची तब्येत बिघडली म्हणून त्यांना तातडीने मुंबई ला हलवले.माझ्या बाबांनी आणि आईने लगेच बॅग भरल्या.आता माझ्या आईला टेन्शन आले की मला तिथे मुंबईत हॉस्पिटल मध्ये कसे घेऊन राहावे.तेव्हा सुजाता मावशी आल्या.आईने सगळी गोष्ट त्यांना सांगितली.तेव्हा सुजाता मावशी आईला म्हणाल्या,”अहो,ताई एवढं का टेन्शन घेता,होईल सगळं चांगलं.तुम्ही जा ,सूरजला मी सांभाळून घेईल.तो पण माझ्या मुलासारखा आहे.त्याला राहू द्या माझ्याजवळ. “मग आई मला बोलली,”मी येते हा बाळा आजीला बरं वाटलं की,तू रहा मावशी कडे.मी मावशीला तुझ्या कपड्यांची बॅग देते.तू जा सोनू जवळ.”मी आईला हो म्हणालो आणि सुजाता मावशीच्या घरी गेलो.इकडे आईने मावशिसोबत थोड्या गप्पा मारल्या आणि मग aai-baba लगेच मुंबईला निघून गेले.मी तेव्हा सुजाता मावशीच्या घरी आलो.आता मी सुजाता मावशीच्या घरी राहणार होतो.मला आता खूप आनंद झाला.थोड्या वेळाने सुजाता मावशी आली.मग रात्र झाली आणि आम्ही जेवण केले.रात्री मग 9:30 ला सुजाता मावशी ने खाली गादी टाकली.आता गादीवर उजवीकडे मी,मध्ये सुजाता मावशी आणि त्यांच्या डाव्या बाजूला सोनू झोपला.झोपण्याच्या आधी सुजाता मावशीने सोनुने कपडे काढून त्याला नागडे केले.मी मावशीला असे का केले म्हणून विचारलं तर त्या म्हणाल्या,”अरे तो रात्री सू करतो कधी कधी,मग सगळे कपडे ओले होऊन जातात.”मग सुजाता मावशी झोपल्या.मला आता झोप येत नव्हती कारण मला रोज फक्त अंडरवेअर झोपायची सवय होती. मी त्यामुळे चुळबुळ करत होतो.तिकडे सुजाता मावशीने डावीकडे कुस बदलली आणि ब्लाऊज चे खालचे हुक उघडुन एक स्तन सोनुच्या तोंडात दिला.सोनू आता दूध पित पित झोपुंन गेला.मग मावशी ने त्यांचा स्तन परत ब्लाऊज मध्ये टाकून माझ्याकडे कुस बदलली आणि माझी तळमळ बघून मला म्हणाल्या,”झोप ना बाळा,असा काय तळमळतो आहे.झोप नाही येत आहे का.काही प्रोब्लेम आहे का?”मी तेव्हा मावशींना सांगितलं तर सुजाता मावशी हसून बोलल्या,”अरे मग काढ ना कपडे,तुला कोणी अडवले आहे.”मी लगेच झोपल्या अवस्थेतच माझा T-shirt आणि Half पँट काढून बाजूला टाकल्या आता मी फक्त underwear वर झोपलो होतो.तेव्हा सुजाता मावशी जे बोलल्या ते ऐकून मला खूप आश्चर्य आणि आनंद पण झाला.सुजाता मावशी,”बाळा ,ती underwear पण काढून टाक ना.रात्री मोकळं झोपायच कधीही.”मी मावशीला नाही म्हणालो. तेव्हा मावशी मला म्हणाली,”अरे एव्हढा काय लाजातो.उलट नागडा झोपल्याने चांगली झोप लागते.काढ ती underwear.”असं बोलून सुजाता मावशीने माझी underwear काढली आणि मला पूर्णपणे नागडा केलं.मला तर खूपच आनंद झाला कारण मी 4 वर्षा नंतर पहिल्यांदा असा नागडा झोपणार होतो.मला आता नागडं होऊन खूप मस्त वाटत होतं.मग मी झोपलो.सकाळी मला जाग आली तेव्हा सुजाता मावशी उठलेल्या होत्या.त्यांनी मला उठलेलं बघितलं आणि म्हणाल्या,”उठला का बाळा,चल ब्रश करून घे.मी आपल्याला चहा करते.”मी तेव्हा म्हणालो,”मला चहा नाही आवडत,मी रोज सकाळी दूध पितो.” सुजाता मावशी:- ” चांगलं आहे ना मग,दूध खरंच चांगलं असतं.मी दूध देते हा तुला.” मग मी तसाच नागडा उठलो,सोनू अजून पण झोपलेला होता.मला असं सकाळी नागडं राहून खूप आनंद होत होता.तेव्हा सुजाता मावशी ने मला ब्रश करून झाल्यावर 1 कप दूध दिले.मी ते पिऊन घेतले.मग सुजाता मावशी ने कपडे धुतले.कपडे धुऊन झाल्यावर मावशी घरात आल्या.तेव्हा मावशीने मला गरम पाणी काढून दिले.सुजाता मावशीच्या घरात किचन मध्ये बाथरूम म्हणजे फक्त एक सिमेंट च छोटा चौकट केली होती आणि पाणी जायला एक पाईप बाहेर जात होता.मी मग त्या उघड्या बाथरूम मध्ये गेलो.मी अंगावर पाणी टाकून आंघोळ करत होतो आणि मावशी तिथेच किचन मध्ये स्वयंपाक करत होत्या.मी पहिल्यांदा असा आंघोळ करत होतो.तेव्हा सुजाता मावशी मला म्हणाल्या,”बाळा ,नीट कर हा आंघोळ,का मी घालू का तुला आंघोळ?” मी नागडी आंघोळ करताना म्हणालो,”नाही मावशी,मी करतो आंघोळ चांगली” चांगली आंघोळ कर नाहीतर तुझी आईल मला म्हणेल की माझ्या सूरज ची काळजी नाही घेतली तुम्ही” मी तसाच नागडा साबण लावून आंघोळ केली.मावशी मला आंघोळ करताना बघत होत्या.आंघोळ झाल्यावर सुजाता मावशी ने मला टॉवेल दिला.मी माझे अंग पुसले आणि हॉल मध्ये जाऊन माझे कपडे ची बॅग शोधू लागलो.मला माझी बॅग नाही सापडली म्हणून मी मावशीला आवाज देऊन माझी बॅग कुठे आहे म्हणून विचारलं.तेव्हा सुजाता मावशी हॉल मध्ये येऊन मला म्हणाल्या,”अरे देवा” मी :- काय झालं मावशी? सुजाता मावशी :- “अरे बाळा,तुझ्या आईने तुझ्यासाठी कपड्याची बॅग भरून ठेवली होती पण मला ती बॅग आणायची आठवण पडली.तुझी बॅग आता तुझ्या बंद घरात आहे.” मी :- मग आता मी काय करू.मावशी तुम्ही माझे काळाचे कपडे द्या.आता तेच घालतो मी. सुजाता मावशी :- अरे बाळा ,मी तर तुझे सगळे कपडे धुऊन टाकले. मी :- मग आता मी काय घालू? सुजाता मावशी:- “अरे बाळा,रहा की असच नागडा.” मी :- नाही मावशी,कोणी आलं तर हसेल मला. सुजाता मावशी :- “अरे ,कोणी नाही येत इथे.रहा असाच. मग मावशी किचन मध्ये गेल्या. खरतर मला पण हेच पाहिजे होतं.मला आता दिवसभर मस्त नागडा राहता येणार होते.मी मस्तपणे माझा नागडेपणा एन्जॉय करू लागलो.थोड्या वेळाने सोनुपण उठला.मग मावशीने त्याला आंघोळ घातली.सोनू आणि मी मग नाश्ता केला.मी पहिल्यांदा असा नागडा घरात नाश्ता करत होतो.नाश्ता झाल्यावर मी आणि सोनू सोबत खेळू लागलो.दुपारी मग आम्ही जेवण केलं.मला असं नागडा जेवण करताना खूप मस्त वाटत होते.जेवण झाल्यावर मावशीने भांडे घासले .मग मावशी आम्हाला बोलल्या,”चला, बाळांनो,आता झोपून घ्या.” मी आणि सोनू मावशीच्या दोन्ही बाजूला नागडे झोपलो.मावशीने मग सोनुच्या बाजूला कुस केली आणि ब्लाऊज चे हुक उघडुन सोनूला दूध पाजले.मला पण इकडे झोप लागली.मी संध्याकाळी उठलो तर सोनू आणि मामी उठलेल्या होत्या.मी उठून फ्रेश झालो आणि सोनुसोबत खेळू लागलो.रात्री मग आम्ही जेवण केलं.जेवण झाल्यावर मावशीने भांडे घासले.सगळं आवरल्यावर आम्ही गादीवर झोपलो.तेव्हा अचानक लाईट गेली.सोनू घाबरून मावशीला बिलगला.आता घरात गरम होऊ लागले.तेव्हा सुजाता मावशी बोलली,”खूप गरम होतं आहे रे.” मी :- “हो ना मावशी,खूपच गरम होतं आहे.” मावशी तेव्हा उठल्या आणि घराचा दरवाजा उघडून बाहेर आल्या तर बाहेर गडद अंधार पसरला होता. सुजाता मावशी आम्हाला म्हणाल्या,”बाळांनो,बाहेर या आपण गच्चीवर जाऊ.मी मावशींना म्हणालो,”मावशी ,नका ना ,मी नागडा आहे,कोणी बघेल मला.” सुजाता मावशी:- अरे कोणी नाही बघणार,सोनू बघ बाहेर उभा आहेच ना नागडा.” मी :- तो अजून लहान आहे मावशी. सुजाता मावशी:- ” मग तू कुठे मोठा आहेस,तूनपन लहानच आहे अजून,आणि असा पण बाहेर अंधार आहे.कोणाला काही दिसणार नाही. मग मी घराच्या बाहेर आलो.बाहेर खरंच खूप गडद अंधार पडला होता.आम्ही मग गच्चीवर आलो.मी पहिल्यांदा असा नागडा घराबाहेर आलो होतो.थंड वाऱ्याची झुळूक माझ्या नागड्या शरीरावर येत होती.मला आता खूप छान वाटत होते.सुजाता मावशीने तिथे बसून सोनूला मांडीवर घेतले आणि त्याला माझ्यासमोर दूध पाजू लागल्या.मग आम्ही तिथे गप्पा मारल्या.थोड्या वेळाने आम्ही घरात परत आलो.आणि लगेच लाईट आली. मग आम्ही झोपून गेलो.सकाळी मी उठलो तेव्हा मी ब्रश केला.मग मावशीने मला दूध प्यायला दिले.मी ते दूध गरम असल्याने थंड होण्याची वाट बघत तिथेच बसलो.तेव्हा सुजाता मावशी ने जे केलं ते बघून मी चाट पडलो.कारण मावशी आता आंघोळ करायची तयारी करत होती.मावशीने तिथेच उभे राहून त्यांची साडी सोडली.मी ते बघून तिथून उठायला लागलो तर मावशी बोलली,”अरे बाळा ,कुठे चालला.थांब ना इथे.मी आंघोळ करते.तू माझ्याशी गप्पा मारत दूध पिऊन घे.” मी नाही बोललो,तेव्हा मावशी बोलली,”अरे लाजू नको,तू माझा बाळच आहेस” मग मी तिथेच बसलो. आता सुजाता मावशी बाथरूम मध्ये गेल्या आणि त्यांनी त्यांचे परकरचा नाडा खोलला.मग त्यांनी त्यांचे ब्लाऊज उघडून परकर छातीवर बांधला.मग त्या आंघोळ करू लागल्या.त्यांनी अंगावर पाणी टाकलं आणि माझ्यासोबत गप्पा मारू लागल्या.मी दूध फुंकून पिऊ लागलो.मावशीने मग अंगाला साबण लावला.आणि अचानक त्यानी चक्क त्यांचा परकर सोडून काढून टाकला.आता सुजाता मावशी चक्क माझ्यासमोर निकरवर होत्या.त्यांचे शरीर खूप कमनीय होते.त्यांची फिगर खूप मेन्टेन होती.मी आता त्यांचे दुधाने भरलेल्या स्तना कडे बघू लागलो.आता माझे मावशीच्या बोलण्याकडे लक्षच लागत नव्हते.मी पहिल्यांदा एक सुंदर स्त्री ला आंघोळ करताना बघत होतो.मावशी आता मस्त त्यांच्या सुंदर स्तनांना साबण लावून चोळत होत्या.मला ते बघून खूप छान वाटत होते.त्या मला त्यांच्याकडे असं बघताना हसत होत्या.मग त्यांनी त्यांच्या सुदंर स्तनांवर पाणी टाकले.मावशीचे स्तन मी आज पहिल्यांदा पूर्णपणे मोकळे बघत होतो.मावशीचे स्तन मस्त गोलाकार आणि गोरे होते.त्यांच्या निप्पल चा कलर फिकट तपकिरी होता.त्या वेळी त्यातून दूध टपकत असताना मी बघितले.तेव्हा मावशी ने मला बघून म्हणाल्या,”बाळा, असं का बघतो आहे.कधी कोणत्या स्त्रीला आंघोळ करताना नाही बघितलं का?” मी काहीच बोललो नाही.माझा चेहरा लाजेने लाल झाला होता. मग मावशीने त्यांच्या नग्न अंगावर पाणी टाकले आणि त्या उभ्या राहिल्या.माझे दूध पिऊन झाले होते.मावशीने मग त्यांचे शरीर टॉवेलने पुसले आणि त्यांच्या कमरेवर टॉवेल गुंडाळून निकर काढून टाकली.मावशीचे स्तन अजून पण उघडे होते.मग त्यांनी परकर घातला आणि नंतर ब्लाऊज घातले.साडी नेसून त्या बाहेर गेल्या. मी आंघोळ केली आणि बाहेर आलो तेव्हा मावशी बोलली,”अरे थांबायचं ना बाळा, मी आंघोळ घालणार होते तुला आज.” मी :- नाही मावशी,मी करतो माझी आंघोळ सुजाता मावशी:- ” नको हा,मी बघितलं काल तुला,तू नीट आंघोळ नाही करत.आता तू माझ्याकडे असे पर्यंत मीच तुला आंघोळ घालणार.” मला आता मी आंघोळ केल्याचा राग येत होता.मग मी माझे कपडे घालू लागलो तेव्हा मावशीने मला अडवले आणि म्हणाली,”अरे बाळा,रहा की असा नागडा.कशाला कपडे घालतो.दे ते इकडे.तू आता इथे असे पर्यंत कपडे नाही घालायचे.” मला हे ऐकून खूप आनंद झाला.आता मी मस्तपणे नागडा घरात फिरत होतो.मग दुसऱ्या दिवशी सकाळी पुन्हा मावशी माझ्यासमोर आंघोळ करू लागल्या.मावशींनी मग मला बाथरूम मध्ये बोलावले आणि म्हणाल्या,”बाळा ,माझ्या पाठीला थोडा साबण लाऊन दे.” मी मग मस्तपणे त्यांच्या पाठीला साबण लावून चोळू लागलो.मला आता खूप छान वाटत होतं.मी त्यांचे पाठीला साबण लावून पाण्याने स्वच्छ केली.त्यांनी मग मला जवळ ओढले आणि माझ्या गालावर एक पप्पी देऊन मला thank you म्हणल्या.मी मग बाहेर आलो.थोड्या वेळाने मावशीने मला बाथरूम मध्ये बोलावले आणि मग माझ्या अंगावर पाणी टाकून मला आंघोळ घालू लागल्या.मला आता मावशीच्या मऊ हातानी आंघोळ करताना खूप उत्तेजना मिळत होती.मावशीने माझ्या पाठीवर साबण लाऊन मस्त चोळली.मग त्यांनी माझ्या पोटाला आणि गळ्याला साबण लावून मस्त धुतले.आता त्यांनी साबण हातात घेऊन मस्त फेस केला आणि माझ्या लवड्या ला पकडून चोळू लागली.मला आता खूप मस्त वाटत होते.मग त्यांनी माझ्या लवड्याला आणि वृषण ला साबण लावून मस्त धुतले.मला आता त्यांच्या हाताने आंघोळ करताना मजा येत होती.माझी आंघोळ झाल्यावर सुजाता मावशीने माझे अंग टॉवेल ने पुसले.त्या दिवशी रात्री मला 1 वाजता अचानक जाग आली.मी डोळे उघडले तर एकदम शॉक झालो कारण माझे तोंड चक्क सुजाता मावशी च्या उघड्या स्तनांमध्ये होते.मावशी मला पूर्ण बिलगून झोपल्या होत्या.माझ्या ओठांना त्यांच्या मऊ स्तनाचा स्पर्श होत होता. त्यांचे ब्लाऊज पूर्ण उघडे होते आणि माझे तोंड दोन्ही स्तनांमध्ये होते.मला त्यांच्या स्तनाचा स्पर्श खूप छान वाटला.म्हणून मी हळूच त्यांच्या स्तनाला तोंडाने किस केलं.आणि मग झोपून गेलो.सकाळी मला जाग आली तर तेव्हा 6 वाजले होते.सुजाता मावशी अजून पण मला बिलगून झोपल्या होत्या.त्यांचे स्तन माझ्या तोंडाला लागलेले होते.त्यांच्या निप्पल मधून दुधाचे थेंब पडत होते.मी हळूच माझ्या जिभेने ते दुधाचे थेंब चाखले.खरंच,दुधाची चव अतिशय गोड होती.मला तर ते दूध पिऊन खूप मस्त वाटलं.मग मी हळूच माझे तोंड उघडे करून सुजाता मावशी चा उजवा स्तन तोंडात घेऊन निप्पल ला तोंड लावले.आता मझ्या छातीची जोर जोरात धडधड होत होती.पण मावशीचे चवदार दूध माझ्या तोंडात जात होते.मग मावशीची हालचाल झाली. म्हणून मी हळूच माझे तोंड काढून झोपेचे नाटक करू लागलो.थोड्या वेळात सुजाता मावशीना जाग आली.तेव्हा त्यांनी बघितले की माझे तोंड त्यांच्या स्तनाला लागले आहे आणि त्यांचे दूध माझ्या गालावर ओघळत आहे.मग त्या उठल्या आणि त्यांनी हळूच माझ्या गलावरचे दूध पुसले.मग त्या तश्याच ब्लाऊज उघडे असताना उठून बाथरूम मध्ये गेल्या.मग त्यांनी ब्रश केला.नंतर मी उठलो तेव्हा मावशी आंघोळीची तयारी करत होत्या.मग त्यांनी माझ्यासमोर नागडी आंघोळ केली.असे जवळपास अजून 5 दिवस चालले.मी या पाच दिवस मस्त नगडेपणा एन्जॉय केला.नंतर माझे आई बाबा परत आले.आणि मी आमच्या घरी गेलो. आता सुजाता मावशीने त्यांचे रूम सोडली आणि त्या आमच्या घरापासून 20 km लांब घर बारीपाडा या छोट्या खेड्यात भाड्याने घर घेऊन राहू लागल्या.मी त्यांना घर शिफ्ट करण्यात खूप मदत केली.तेव्हा त्या मला म्हणाल्या,"सूरज बाळा,येत जा मला भेटायला,हे पण तुझेच घर आहे हा" मी सुजाता मावशीच्या घरून माझ्या घरी येऊन एकच दिवस झाला होतं.मी त्या दिवशी माझा मित्र आनंद च्या घरी गेलो.आनंद च्या घरी त्याची आई आणि बहीण राहत होती.आनंदचे वडील 5 वर्षपुवी मेले होते.त्यांचे घर वडिलांच्या पेन्शन वर चालायचे.मला आनंद च्या घरी जायला खूप आवडायचे कारण आनंद घरात एकुलता मुलगा असल्याने त्याचे खूप लाड होत असत.आनंद आणि मी नेहमी सेक्स विषयी गप्पा मारत असू.आनंद अजून पण त्याच्या घरी नागडा झोपायचा आणि नागडी आंघोळ पण करायचा.मला त्याचा खूप हेवा वाटायचा.मी त्याला एकदा बोललो पण होतो की मलापण तुझ्यासारख नागडा राहायचं आहे आणि झोपायचे आहे रे.तेव्हा तो मला म्हणाला,"मी करेल तुझ्यासाठी नक्की काहीतरी" आनंद ची आई आणि बहिण त्याला अजुंनपण लहानच समजायचे. मला आनंद ची मोठी बहिण निशा खूप आवडायची.ती खूपच सुंदर होती.तिचे स्तन खूप मोठे आणि सुडौल होते.मी आनंद च्या घरी गेल्यावर निशा नेहमी माझे गाल ओढत त्यांची पप्पी घ्यायची.ती नेहमी माझ्यासोबत बिनधास्त पणे बोलायची. मी आनंदला घेऊन त्यांच्या गच्चीवर गेलो आणि मी सुजाता मावशीच्या घरी 7 दिवस कसा नागडा राहिलो,ते सांगितलं.तेव्हा तो मला तू वेडा आहेस असं बोलला. मी :-"का रे ,मी वेडा कसा काय?" आनंद:-"अरे,तुला एवढी चांगली संधी आली होती आणि तू त्याचा फायदा घेतला नाही म्हणून तू वेडा." मी:-"काय बोलतो आहे तू?" आनंद:-"अरे सूरज,तू सुजाता मावशीचे दूध प्यायला पाहिजे होते.तुला त्यांनी नक्की दूध पाजले असते त्यांचे." मी:-"काहीपण हा,त्या कशाला मला त्यांचे दूध पाजतील?" आनंद:-"मी जे सांगतो तसं करशील आणि वागशील तर तुला त्या स्वतःहून त्यांचे दूध पाजतील" मला हे ऐकून खूप आतुरता लागली.मी लगेच आनंद ला विचारले,"यार,सांग ना मला,मी तसाच वागेल नक्की." आनंद:-"आता काय उपयोग,तू थोडी आता त्यांच्या घरी राहणार आहे?" मी :-"ही रे,मी खरंच वेडा आहे" नंतर मी माझ्या घरी आलो. दुसऱ्या दिवशी मला माझ्या आई आणि वडिलांनी सांगितले की ते 1 महिन्यासाठी तीर्थस्थळ दर्शन करत फिरायला जाणार आहेत.तू पण चल आमच्यासोबत. तेव्हा मला idea आली की आता सुजाता मावशीच्या घरी राहायला चांगली संधी आहे,कारण सुजाता मावशीचे पती पण ट्रक ड्रायव्हर असल्याने उत्तर भारतात गेले होते.ते पण जवळपास 1-2 महिन्यांनी घरी येणार होते.त्यामुळे सुजाता मावशी घरी फक्त सोनुसोबतच होत्या.मी तेव्हा माझ्या आई बाबांना सांगीतले,"मला नाही यायचं तुमच्यासोबत.तिथे मोठ्या माणसासोबत मला बोअर होईल." माझ्या घरच्यांना पण ते पटले.तेव्हा माझ्या आईने लगेच सुजाता मावशीला फोन केला. फोन वर बोलणे झाल्यावर आई मला म्हणाली,"आम्ही परवा निघतो आहे.तू आता महिनाभर सुजाता मावशीकडे थांबायचे.त्यांना तू त्यांच्यासोबत राहणार हे ऐकून खूप आनंद झाला.आम्ही तुला परवा सकाळी त्यांचेकडे सोडून जाऊ." मला हे ऐकून माझ्या आनंदाला पारावार उरला नाही.मी लगेच दुसऱ्या दिवशी दुपारी आनंद कडे गेलो आणि त्याला सगळं सांगितलं.तेव्हा मी त्याला बोललो,"यार,सांग ना मला की मिं काय करू ज्याने सुजाता मावशी स्वतः मला दूध पाजेल.?" आनंद हसून बोलला :-,"ठीक आहे सांगतो,पण माझी एक अट आहे" मी ,"काय अट आहे पटकन बोल" आनंद:-,"तुला जर मावशीचे दूध प्यायला मिळाले,तर नंतर मी जे सांगेल ते करावे लागेल हा" मी :- "यार,मी तुला प्रॉमिस करतो,जर मला सुजाता मावशीने दूध पाजले तर तू जे सांगशील ते मी करेल" आनंद :-,"ठीक आहे ऐक मग,मी आज संध्याकाळी तुला माझ्या एका मित्राचे वडील डॉक्टर आहेत, त्यांच्या जवळ स्त्रीचे दूध वाढवणाऱ्या आयुर्वेदिक गोळ्या आहेत,त्या आणून देईल." मी ,"पण तुला हे कसं माहीत,आणि तू त्या गोळ्या कसा आणशील." आनंद:-,"माझ्या त्याच मित्राने मला एकदा त्या गोळ्याबद्दल सांगितले होते.त्या गोळ्या घेतल्याने स्त्रीला खूप जास्त दूध येते." मी :,"मी काय करू मग" आनंद ,"तू त्या गोळ्या रोज एक याप्रमाणे सुजाता मावशीच्या चहा नाहीतर जेवणात मिसळून देत जा.एक - दोन दिवसातच त्यांच्या स्तनात खूप दूध तयार व्हायला लागेल तेव्हा त्यांचे स्तन दुखतील.त्या वेळी त्यांना एक तर त्यांचे दूध सोनूला पाजावे लागेल नाहीतर हाताने दाबून बाहेर काढावे लागेल.पण सोनू जास्त दूध पिणाऱ् नाही आणि हाताने दूध काढताना त्यांना खूप दुखेल.तेव्हा त्यांना तूच एक आसरा राहशील.तेव्हा त्या बरोबर तुला दूध प्यायला सांगतील." मी:-," खरंच, असं होईल का रे?" आनंद :-,"हो नक्कीच,फक्त तू जोपर्यंत गोळ्या देशील तो पर्यंतच त्यांना जास्त दूध येईल.गोळ्या देणं थांबलं की दूध आपोआप कमी होईल.आणि हो या गोळ्या एका दिवसात 2 पेक्षा जास्त देऊ नको,नाहीतर याने थोडी नशा पण येते हा." मी,"ठीक आहे" आनंद :-,"या 3 गोळ्या घे.जेव्हा तुला मावशीचे दूध बंद करायचे असेल तेव्हा तू या 3 गोळ्या त्यांना दे.यामुळे त्यांचे स्तनातले दूध हळू हळू बंद होईल." मी त्या गोळ्या घेऊन लगेच तिथून निघालो.संध्याकाळी आनंद ने मला 100 गोळ्यांचे एक पाकीट आणून दिले.त्या गोळ्या खूप लहान होत्या.मी ते पाकीट माझ्या बॅगेत ठेवले.आणि झोपून गेलो.सकाळी मग मला आई बाबांनी 6 वाजताच झोपेतून उठवले आणि तसेच सुजाता मावशीच्या घरी सोडले.जाताना त्यांनी मावशीला माझी काळजी घ्यायला सांगितली. मला आता परत सुजाता मावशीच्या घरी येऊन खूप छान वाटत होते.सोनू झोपलेला होता.सुजाता मावशीने लगेच मला प्रेमाने त्यांचा जवळ ओढले आणि माझ्या गालाची पप्पी घेत म्हणाल्या,"बाळा ,आता तू आल्यामुळे मला खूप छान वाटले आहे.चल आता ब्रश करून घे.मी नंतर तुझी आंघोळ करेल.मी मग ब्रश घेऊन त्यांच्या घराच्या अंगणात आलो.सुजता मावशीचे हे घर पाड्याच्या वेशीवर होते.मावशीचे घराला 2 रूम होत्या.वर जायला आतून पायऱ्या होत्या. त्यांच्या घराच्या जवळपास एकपण घर नव्हते.घराच्या समोर थोड्या अंतरावर रेल्वेचा रूळ होता.त्या वरून फक्त मालगाडी च जात असे तेपण खूप कमी वेळेस.घराच्या आजूबाजूला खूप सारे झाड लावले होते. मी तिथे अंगणात ओट्यावर उभा राहून ब्रश केला.ब्रश करून घरात आल्यावर मावशीने मला दूध प्यायला दिले.मावशी मग त्यांच्यासाठी चहा बनवू लागली.मी लगेच दूध पिऊन माझ्या बॅगेतून एक गोळी काढली.मावशी गॅस वर चहा तापायला ठेऊन बाहेर गेली तेव्हा मी पटकन त्या गोळीला चहा मध्ये टाकून दिले.गोळी चहा मध्ये टाकताच विरघळून गेली.मावशी मग घरात आल्यावर त्यांनी तो चहा पिला.मी हॉल मध्ये गेलो तर सोनू अजूनपन नागडा झोपलेला होता.त्याला नागडा बघून मला पण आता नग्न व्हावेसे वाटू लागले. मग मी घराच्या मागे मोकळ्या जागेत गेलो.तिथे सुजाता मावशी कपडे धुवत होत्या.मावशीने मला तिथे जवळ बसवले आणि घरातून बादलीत गरम पाणी घेऊन आल्या.तेव्हा मी मावशीला बोललो,"मावशी,मी घरात बाथरूम आहे ना,तिथे आंघोळ करतो ना" तेव्हा मावशी बोलली,"अरे इथेच कर आंघोळ,आता कुठे घरात जातो. मग मी माझे कपडे काढून underwear वर बसलो.मावशी मग माझ्या अंगावर पाणी टाकून माझी आंघोळ घालू लागल्या.त्या माझ्या अंगाला साबण लावू लागल्या आणि मग त्यांनी माझी पॅन्ट काढायला हात लावला तर मी घराबाहेर मोकळ्या जागेत असल्याने मुद्दाम लाजण्याचे नाटक करू लागलो पण मला लवकर नागडं व्हायचं होतं.तेव्हा मावशी मला म्हणाली,"अरे इथे का लाजत आहे.काढू दे ना पँट". मी लाजून म्हणालो,"मावशी इथे कोणीपण येईल ना.नका ना" लागलो. तेव्हा मावशी बोलल्या," बाळा ,काय लाजत आहे तू पण आणि येऊ दे कोणाला पण, तू लहान बाळच आहेस अजून,लहान मुले नागडं असले तर कोणी काही नाही बोलत.चल पटकन आता. असे बोलून मावशीने माझी पॅन्ट काढून मला नागडं केलं.आता मी घराच्या बाहेर मोकळ्या जागेत पूर्णपणे नागडा बसलो होतो.मी पहिल्यांदा असा दिवसा सकाळी 7 वाजता घराबाहेर नागडा झालो होतो.मला आता नागडं होऊन खूप मस्त वाटू लागलं.मावशी मग माझ्या अंगाला साबण लावू लागल्या.मावशी माझ्या नागड्या शरीराकडे बघत होत्या.तेव्हा मावशीने माझ्या चेहऱ्यावर साबण लावला.आता माझे डोळे साबणाने बंद झाले होते.मग मामी मला बोलल्या,"बाळा, थोडा वेळ थांब,मी आले हा." आता मी डोळे बंद करून बाहेर नागडा बसलो होतो.लगेच मावशी आल्या आणि त्यांनी माझ्या अंगावर पाणी टाकून माझे अंग नीट चोळू लागल्या.त्यांनी मला उभे केले व लवड्या ला आणि ढुंगणाला साबण लावून मस्त धुतले.मग त्यांनी चेहऱ्यावर पाणी टाकले.साबण निघाल्यावर मी डोळे उघडले तर समोर चक्क एक बाई मला नागडा बघत होती.ते बघून मला लाज वाटू लागली आणि एक बाई मला नागडं बघत आहे.ती बाई मावशीला म्हणाली,"झालं का आवरून तुझं,हा तुझा भाचा आहे का?" मावशी:-,"हो ताई,आता सुट्ट्या आहेत म्हणून माझ्याकडे आला आहे." ती बाई :-,"ठीक आहे ,येते मी"असे बोलून ती बाई मला नागडं बघून हसत निघून गेली.मी तेव्हा मावशीला मुद्दाम नाटक करत बोललो,"मावशी,मी तुम्हाला बोललो होतो ना,की कोणी बघेल.ती बाई बघ मला बघून कशी हसत होती. तेव्हा मावशी बोलल्या,"अरे,काय झालं मग बघितलं तर.तू अजून लहानच आहे ना.आता रोज मी तुला इथेच आंघोळ घालणार आहे,म्हणजे तुझे हे मुलीसारखं लाजणे बंद होईल".मला हे ऐकून खूप आनंद झाला.मग त्यांनी माझ्या अंगावर पाणी टाकून माझी आंघोळ पूर्ण केली. मग मावशी मला म्हणाली :- "चल सूरज बाळा पटकन अंग टॉवेल ने पुसून घे." माझे अंग टॉवेल ने पुसून झाल्यावर मी घरात हॉल मध्ये गेलो.मला आता इथे या घरात नागडं होऊन मला मस्त वाटत होते.मग मी मुद्दाम मावशिसमोर माझे कपडे घालू लागलो तेव्हा मावशीने मला अडवले आणि म्हणाली,”अरे बाळा,रहा की असा नागडा.कशाला कपडे घालतो.दे ते इकडे.तू मागच्या वेळेस जसा नागडा राहिला आता तसाच रहा इथे. आता इथे असे पर्यंत कपडे नाही घालायचे.” मला हे ऐकून खूप आनंद झाला.आता मी मस्तपणे नागडा घरात फिरू लागलो.थोड्या वेळानं 9 वाजता सोनू पण उठला.त्याला मला बघून खूप आनंद झाला.मी मग त्याचेबरोबर गप्पा मारल्या.मावशीने मग सोनुचा ब्रश केला आणि त्याला घरात आंघोळ घातली.तेव्हा मी मावशीला म्हणालो,"मावशी तुम्ही सोनू ला पण बाहेर आंघोळ घालायचा ना?"तो पण लहानच आहे ना अजून." मावशी:,"बाळा ,आता बाहेर किती उन आहे त्याला चटके बसतील ना."आंघोळ झाल्यावर मावशींनी आमच्यासाठी नाश्ता केला.मी परत असा नागडा घरात नाश्ता करत होतो.नाश्ता झाल्यावर मी आणि सोनू सोबत खेळू लागलो.दुपारी मग आम्ही जेवण केलं.मला असं नागडा जेवण करताना खूप मस्त वाटत होते.जेवण झाल्यावर मावशीने भांडे घासले .मग मावशी आम्हाला बोलल्या,”चला, बाळांनो,आता झोपून घ्या.” मी आणि सोनू मावशीच्या दोन्ही बाजूला नागडे झोपलो.मावशीने मग सोनुच्या बाजूला कुस केली आणि ब्लाऊज चे हुक उघडुन सोनूला दूध पाजले.मला पण इकडे झोप लागली.मी संध्याकाळी उठलो तर सोनू आणि मामी उठलेल्या होत्या.मी उठून फ्रेश झालो आणि सोनुसोबत खेळू लागलो.रात्री मग आम्ही जेवण केलं.जेवण झाल्यावर मावशीने सगळं आवरल्यावर आम्ही गादीवर झोपलो. रात्री मग मावशी सोनूला दूध पाजू लागल्या तेव्हा तो नाटकं करू लागला,पण मावशी त्याला सारखं सारखं पी ना बाळा म्हणत होती.तेव्हा शेवटी नाईलाजाने सोनुने मावशीच्या उजव्या स्तन मधून दूध पिले.मग मावशीने ब्लाऊज बंद केला आणि सोनूला झोपवले.सोनू झोपल्यावर मावशी माझ्याशी गप्पा मारू लागल्या तेव्हा त्यांच्या छातीत दुखू लागले.मी तेव्हा मावशीला म्हणालो,"काय झालं मावशी ,काही त्रास होती आहे का? मावशी,"हो रे बाळा ,मला त्रास होतो आहे." मी :,"मावशी तुम्हाला काय त्रास होतो आहे." तेव्हा मावशी मला म्हणाली,"बाळा ,सोनू आता माझे दूध पिण्यास टाळाटाळ करत आहे.त्याला आता माझे दूध आवडत नाही.त्यामुळे माझ्या छातीत दूध जास्त राहिल्यामुळे दुखत आहे."जाऊ दे तू.झोपून घे बाळा आता." आम्ही मग झोपलो.रात्री मला अचानक गालाला काहीतरी ओलसर पणा जाणवला म्हणून मला जाग आली.मी डोळे उघडले आणि घड्याळात पाहिलं तर रात्रीचे 2 वाजले होते.मग मी समोर बघितलं तर मला खूपच धक्का बसला.मावशी मला चक्क बिलगून झोपल्या होत्या.त्यांचे ब्लाऊज पूर्णपणे उघडे होते.आणि माझे तोंड चक्क त्यांच्या दोन्ही स्तनांच्या मध्ये होते.त्या वेळेस त्यांचा डावा हात माझ्या पाठीवर होता.त्यांच्या उजव्या स्तनांच्या निपलमधून दुधाचे थेंब बाहेर येऊन माझ्या गालावर ओघळत होते.मला तर ते बघून मामीच्या स्तनाला तोंड लाऊन दूध प्यावेसे वाटत होते.मी हळूच माझ्या जिभेने ते दुधाचे थेंब चाखले.खरंच,दुधाची चव अतिशय गोड होती.मला तर ते दूध पिऊन खूप मस्त वाटलं.मग मी हळूच माझे तोंड उघडे करून सुजाता मावशी चा उजवा स्तन तोंडात घेऊन निप्पल ला तोंड लावले.आता मझ्या छातीची जोर जोरात धडधड होत होती.पण मावशीचे चवदार दूध माझ्या तोंडात जात होते.मी हळू हळू मावशीचे निप्पल तोंडात धरून चोखू लागलो.अचानक मावशीची हालचाल झाली.मी माझे तोंड त्यांच्या निप्पल वरून काढणार पण तेवढ्यात त्यांनी माझ्या पाठीवर हात टाकून मला जवळ ओढले आणि त्यांचा स्तन माझ्या तोंडात घातला.मी बघितलं तर त्या गाढ झोपेत होत्या आणि झोपेतच बोलल्या,"पी माझ्या सोनू बाळा आणि झोप ". मग मी पुन्हा हळू हळू मावशीचे निप्पल तोंडात धरून चोखू लागलो.मावशीचे दूध खूप गोड आणि गाढ होते.मी मावशीचे निप्पल दूध संपेपर्यंत चोखले आणि मग हळूच माझे तोंड निप्पल वरून काढले.मला तर मावशीचे दूध पिऊन खूप छान वाटले.मी मग मुद्दाम मावशीच्या विरुद्ध बाजूला तोंड करून झोपून गेलो.सकाळी मला जाग आली तेव्हा सकाळी मला जाग आली तेव्हा सकाळचे 6 वाजले होते.मावशी अजुंनपण माझ्याजवळ उघड्या झोपलेल्या होत्या.मी मावशीचे उघडे स्तन बघू लागलो.मावशीचे स्तन आता रिकामे झाल्यामुळे loose पडले होते.परंतु त्यांचे गोरे स्तन बघून मला परत ते चोखन्याची इच्छा होत होती.मग मावशीची हालचाल झाली म्हणून मी सरळ होऊन झोपेचे नाटक करू लागलो.मावशी मग उठल्या आणि मग त्यांनी त्यांच्या दोन्ही हातांनी त्यांचे स्तन दाबून बघितले आणि एक सुटकेचा निःश्वास सोडला.मग त्या तश्याच उठल्या आणि बाथरूम मध्ये गेल्या.मला आता स्वतःवर विश्वास होत नव्हता की मी रात्री मावशीचे दूध पिले.मावशीची आंघोळ झाल्यावर मी मुद्दाम डोळे चोळत उठलो.तेव्हा मावशी मला म्हणाली,"उठला माझा बाळ,झोपायचे ना अजून,आता कुठे शाळा आहे तुझी " पण मी काहीच न बोलता उठलो.तेव्हा मावशीने मला त्यांच्या जवळ प्रेमाने ओढले आणि माझ्या केसांवरून हात फिरवून माझ्या गालाची पप्पी घेतली आणि म्हणाल्या,"चल बाळा ब्रश करून घे मग मी तुला दूध पाजते." मला हे ऐकून रात्रीच्या आमु मामी च्या दुधाची आठवण आली. मग मी ब्रश घेतला आणि बिनधास्तपणे घराच्या पुढे ओट्यावर नागडा उभा राहून ब्रश करू लागलो.मी मस्त मोकळ्या अंगणासमोर नागडा उभा होतो.ब्रश करून मी घरात आलो.तेव्हा मावशीने मला दूध प्यायला दिले.मावशी मग पुन्हा त्यांच्यासाठी चहा करू लागल्या.मावशी मग पुन्हा बाहेर गेली तेव्हा आज त्यांच्या चहा मध्ये डायरेक्ट 2 गोळ्या टाकून दिल्या. कारण मला आता मावशीचे दूध लवकर प्यायचे होते.मी दूध पिले आणि मावशीने चहा पीला .आता मावशी मला म्हणाली,"चल बाळा ,उन वाढायच्या आत आंघोळ करून घे."असे बोलून मावशीने माझा हात पकडुन मला मागच्या बाजूला मोकळ्या जागेत आणले.मी आता पुन्हा घराबाहेर मोकळ्या जागेत आंघोळ करणार होतो.मावशीने मला खाली बसवले आणि त्या पाटावर बसल्या.त्यांनी मग माझ्या अंगावर पाणी टाकले आणि माझ्या शरीरावर साबण लावू लागल्या.मला आज पण असं नागडी आंघोळ ते पण घरा मोकळ्या जागेत करताना खूप मजा येत होती.मग माझी आंघोळ झाल्यावर मावशी मला म्हणाल्या,"अरे बाळा,मी तर तुझं टॉवेल घरातच विसरून आली.तू जा आत आणि पुसून घे.मी पण आली लगेच.तेव्हा सोनू बाहेर आला.मामींनी मला थांबायला सांगितले आणि त्याला म्हणाल्या,"सोनू,आतून तुझा आणि सूरजचा घेऊन ये इकडे,चल पटकन आंघोळ करून घे."मी आता कंपाऊंड मध्ये ओल्या अंगाने नागडा उभा होतो.मला ओल्या अंगाने असं नागडं राहण्यात मज्जा येत होती.सोनू पण नागडा होता,तो बाहेर टॉवेल घेऊन आला.मी माझे अंग टॉवेल ने पुसले आणि तसाच नागडा बाहेर उभा राहिलो.सोनू ला मावशीने आंघोळ घालायला सुरुवात केली तेव्हा तो माझ्या अंगावर पाणी उडवू लागला.मी पण लगेच मग्यात पाणी टाकले आणि त्याच्या अंगावर उडवले.तेव्हा त्याने पण माझ्या अंगावर पाणी टाकले.मी आता परत ओला झालो.तेव्हा मावशीने आम्हाला थांबवले आणि सोनुची आंघोळ केली.आता आम्ही तिघेजण घरात गेलो.मी आणि सोनू लगेच तसेच नागडे टीव्ही बघू लागलो.मामींनी पोहे बनवले आणि आम्ही तसेच नागडे खाली बसून पोहे खाल्ले.दुपारी आम्ही जेवण केले.दुपारी सगळं आटोपल्यावर मावशीने सोनूला दूध पाजले.सोनू आता पण दूध प्यायला नाटक करत होता.त्या दिवशी संध्याकाळी मी उठलो तेव्हा सोनू झोपलेला होता.मी उठून किचन कडे जाऊ लागलो. मी घराचे मागच्या रूम मध्ये गेलो तर तिथे मावशी चक्क ब्लाऊज उघडुन बसल्या होत्या मी लगेच दाराआड लपलो आणि त्यांना बघू लागलो.मावशी एक छोटे पातेले हातात घेऊन त्यांचे स्तन दाबून त्या पातेल्यात त्यांचे दूध काढत होत्या.त्यांचे स्तनाच्या निप्पल मधून दुधाच्या धारा येत होत्या. त्यांच्या स्तनांमधून येणारे दूध बघून माझ्या तोंडाला पाणी सुटले.मग त्यांनी स्तन दाबून दूध काढले. आणि ते दूध ग्लास मध्ये टाकले.मी पटकन हॉल मध्ये झोपून गेलो.नंतर मी 5 वाजता उठलो तेव्हा सोनू आणि मावशी चहा पीत होते.चहा पिऊन झाल्यावर सोनू बाहेर गेला.मला बघून मावशीने मला जवळ बोलावले.मी जवळ गेलो तर मावशी मला म्हणाली,"ये माझ्या बाळ" असे म्हणत त्यांनी मला त्यांच्या मांडीवर बसवले.मला मांडीवर बसवलं. सुजाता मावशी मला म्हणाली,"बाळा ,तुला दूध देऊ का प्यायला." मी लगेच हो म्हणालो.तेव्हामवशिने मला दूध दिले.मी बघितलं तर हा तोच ग्लास होता ज्यात सुजाता मावशीने त्यांचे दूध काढले होते.मला तो ग्लास बघून खूप आनंद झाला कारण मला आता कळलं होतं की मावशी मला आता त्यांचे दूध पाजणार होत्या.मी तो ग्लास तोंडाला लाऊन दूध पिले,आणि मुद्दाम मावशीला म्हणालो,"मला अजून दूध प्यायच आहे ,द्या ना अजून" हे ऐकून आमु मामी आनंदाने म्हटल्या,"बाळा ,तुला एवढे आवडले दूध?" मी :-,"हो मावशी,मला असे वाटते की हे दूध पितच राहावं" तेव्हा मावशी आनंदाने माझ्या गालाच्या 2 ते 3 पप्पी घेत म्हणाली,"बाळा ,आज रात्री पासून मी तुला हे दूध देणार,पण तुला ते प्यावेच लागेल हा." मला कळून चुकले की आज मावशी मला त्यांचे दूध पाजनार आहे ते म्हणून मी मुद्दाम म्हणालो :,"मामी ,तुम्ही म्हणाल तर मी डायरेक्ट पिशवी लाच तोंड लावूनच दूध संपवतो ते." मावशी ,"मी तुला दुधाची पिशवीच तोंड लावायला देईल.तू फक्त ते पी" मी नंतर सोनुसोबत खेळू लागलो.आज मी मावशीकडे बघत होतो तेव्हा त्या खूप वेळा त्यांच्या दोन्ही स्तन ला हलवत होत्या.गोळीच्या मुले आता मावशीचे स्तन दुधाने भरून गेले होते आणि त्यामुळे त्यांना त्रास होत होता.रात रात्री 8 ला आमचे जेवण झाले.मावशीने घाई घाईने भांडे घासले.मी आणि सोनू घरात खेळत होतो.मग 9:30 ला मावशी आणि सोनू आणि मी हॉल मध्ये झोपलो.सोनू आज थकल्यामुळे लवकर झोपला.सोनू झोपल्यावर मावशीने मला उठवले आणि बोलल्या,"चल बाळा,आपण गच्चीवर जाऊ.मी आणि मावशी मग गच्चीवर गेलो.मी त्यांना विचारलं,"आज तुम्ही सोनूला ला दूध नाही पाजलं" तेव्हा मावशी हसून बोलल्या,"तो आता दूध नाही पिणार" मावशी मग तिथे खाली बसल्या.तिथे खूप छान हवा येत होती.मी पूर्ण नागडा असल्याने माझ्या अंगाला मस्त हवा लागतं होती.मावशीने मग मला त्यांचे जवळ घेतले.आणि त्यांच्या मांडीवर लहान बाळा सारखे झोपवले. .मग मावशीने माझ्या गालाची आणि मग मानेची पप्पी घेतली तेव्हा मला गुदगुल्या झाल्या.मावशी माझ्या शरीरावर हात फिरवू लागल्या.मला त्यांचा तो स्पर्श खूप आवडला.मग त्यांनी मला त्यांचे काही मजेदार जोक सांगितले आणि आम्ही खूप हसलो.तेव्हा मावशी मला म्हणाली,"बाळा ,तुला दूध नाही प्यायचे का आज?". मी,"हो मामी,मला दूध द्या ना प्यायला.मला आज आठवणच राहिली नाही." मावशी मग मला म्हणाली,"मी पाजते हा माझ्या बाळाला दूध" तेव्हा मावशीने मला मांडीवर पकडुन ठेवले आणि त्यांनी त्यांच्या ब्लाऊज चे हुक एक एक करून उघडले.आता त्यांचे दोन्ही मोठे गोरे स्तन माझ्या समोर होते.त्यांनी मग त्यांचा उजवा हात माझ्या डोक्याच्या खाली लाऊन मला आधार दिला आणि मग त्यांचा उजवा स्तन माझ्या तोंडाला लावायला लागल्या.त्यांचे स्तनाचे बोंड रबरसारखे इकडे तिकडे जाऊ लागलो.तेव्हा त्या मला म्हणाल्या,"अरे घे ना तोंडात.तुला दूध पाहिजे ना मग पी ना." मी मुद्दाम नाटक करत ," नाही मावशी,मला ते ग्लास मध्ये देतात ना तेच गोड दूध पाहिजे." आमु मामी त्यांचं उजवा स्तन माझ्या तोंडाला लावत हसून बोलल्या,"अरे बाळा,तू आधी तोंडात तर घेऊन बघ."असं बोलून त्यांनी त्यांचा उजवा स्तनाचे बोंड माझ्या तोंडात टाकलं आणि त्या त्यांचा स्तन दाबू लागल्या.त्यांचे निप्पल मधून गोड दूध माझ्या तोंडात यायला लागले.ते गोड दूध माझ्या तोंडात जाताच मी निप्पल ला माझ्या ओठांनी पकडून चोखू लागलो.लगेच स्तनातून खूपच गोड चवदार दूध यायला लागले.मला तर आता स्वतःवर विश्वास च बसत नव्हता की मी मावशी मला त्याचं दूध पाजत आहे..मी त्यांचे निप्पल आणि एरोला पूर्ण तोंडात घेऊन दूध पिऊ लागलो.सुजाता मावशी त्यांचा एका हाताने माझ्या डोक्याला वर करून स्तनावर दाबत होत्या आणि त्यांचा दुसरा हाताने त्यांनी माझा उजवा हात त्यांच्या डाव्या स्तनावर ठेवला.मी त्यांचे डावे स्तनाचे निप्पल हातात घेऊन त्याच्याशी खेळू लागलो.त्यातले दूध आता माझ्या अंगावर पडत होते.मावशीला आराम मिळतो होता म्हणून त्या हळू आवाजात " आह आह " करू लागल्या.त्या माझ्या केसावर हात फिरवत म्हणाल्या,"चोख बाळा ,पिऊन टाक तुझ्या मावशीचे दूध. सगळं तुझंच आहे.खूप आराम भेटतो आहे मला आता".मी एका लहान बाळा सारखं नागडा मावशीच्या च्या मांडीवर झोपून दूध पीत होतो. थोड्या वेळाने मावशीच्या उजव्या स्तन मधून दूध येणं बंद झालं तेव्हा मी माझे तोंड त्यांचे निप्पल वरून हटवलं. मावशीने माझ्या चेहऱ्यावर हात फिरवत मला विचारलं,"अजून प्यायच का माझ्या बाळाला दूध?" मी लगेच हो म्हणालो.तेव्हा मावशी म्हणाली,"चल बाळा,आपण खाली घरात जाऊ आता.मावशी आणि मी मग खाली जाऊ लागलो.खाली येताना मावशीचे उघडे स्तन मस्त हलत होते. खाली आल्यावर मावशीने मला गादीवर झोपवले.त्यांनी साडी सोडली आणि ब्लाऊज पूर्णपणे काढून त्या वरून नग्न झाल्या.मावशी माझ्या शेजारी झोपल्या.मग त्यांनी मला त्यांच्या छातीजवळ ओढले आणि त्यांचा डावा स्तन माझ्या तोंडाला लावला. मी लगेच निप्पल तोंडात धरला आणि त्यातून दुधाच्या धारा माझ्या तोंडात येऊ लागल्या.मावशीचा डावा स्तन खूप दुधाने भरलेला होता त्यामुळे त्यातून खूप दूध बाहेर येत होते.माझ्या तोंडात जास्त दूध आल्याने ,थोडे दूध माझ्या तोंडाच्या कडेने गालावरून ओघळू लागले.मला दूध पाजताना मावशी आता खूपच उत्तेजित होत होत्या.त्या माझ्या अंगावरून हात फिरवू लागल्या.मी पण माझा डावा हात आणि पाय त्याच्या अंगावर टाकून त्यांना अजून बिलगलो.मी आता मस्त स्तन चोखत होतो.मला आता मावशीचे दूध पिऊन खूप छान वाटत होते.स्तनात दुध संपल्यावर मी माझे तोंड निप्पल वरून काढले.तेव्हा मावशीने माझी पप्पी घेतली आणि मला म्हणाल्या,"कसं वाटलं बाळाला दूध? पोट भरलं ना माझ्या बाळाचे?" तेव्हा सुजाता मावशी बोलल्या,"नुसतं मस्त नसतं,तर तब्येती साठी चांगलं पौष्टिक पण असतं ते बाळा.चल आता झोपू आपण,आणि हो बाळा ,तुला आता रोज माझं दूध प्यावं लागेल हा.सोनू आता दूध नाही पित माझे,आता तूच माझा दूध पिणारा बाळ आहे आणि बाळा,ही गोष्ट फक्त आपल्या दोघातच राहू दे हा,कोणाला सांगू नको.नाहीतर लोकं हसतील हा तुला." मग मावशीने मला त्यांचे स्तनात ओढले आणि मी मग त्यांच्या स्तनावर तोंड लावून झोपून गेलो.मला आज स्वर्गसुख घेतल्यासारखे वाटत होते.सकाळी मला जाग आली तेव्हा सकाळचे 5 वाजले होते.मावशी अजुंनपण माझ्याजवळ उघड्या झोपलेल्या होत्या.मला तेव्हा दूध पिण्याची इच्छा झाली म्हणून मी मावशीचा उजवा स्तन तोंडात घेऊन त्याचे बोंड हळू हळू चोखू लागलो. मावशीला जाग येऊ नये म्हणून मी खूप हळू हळू निप्पल चोखून दूध पीत होतो.काय मस्त दूध होते ते.मला तर असं वाटतं होतं की जणू मी लस्सी च पित आहे.मला निप्पल चोखत चोखत कधी झोप लागली कळलच नाही.मग मला थोडी हालचाल झाली तेव्हा जाग आली.मी हळूच झोपेचं नाटक करू लागलो कारण मी अजूनपन मावशीचा उजवा निप्पल माझ्या तोंडात धरून झोपलो होतो. तेव्हा मावशींनी हळूच माझ्या तोंडातून निप्पल बाहेर काढले तर माझ्या ओठावर दुधाचे काही ठेव पडले.मग त्यांनी माझ्या कपाळाची पप्पी घेतली.आणि ब्लाऊज घालून उठून गेल्या.त्या पुढचे घरात गेल्यावर मी हळूच उठलो आणि आनंदाने उड्या मारू लागलो.मी आता मनातल्या मनात आनंद ला खूप धन्यवाद देत होतो. थोड्या वेळानं सुजाता मावशी घर झाडू लागल्या.मी तेव्हा उठून मावशीकडे गेलो.मला बघून मावशी म्हणाली,"चल बाळा,ब्रौह करून घे लवकर."मावशी चहा ठेऊन घर झाडू लागल्या.मी गुपचूप 2 गोळ्या मावशीच्या चहात टाकून दिल्या.मी पटकन मागे जाऊन ब्रश केला.मावशी मग घरात आल्या आणि त्यांनी चहा घेतला.मी बाथरूम मध्ये ब्रश ठेवला तेव्हा मावशी बाथरूम मध्ये आल्या आणि खाली बसल्या. त्या आंघोळ करणार म्हणून मी उठून जाऊ लागलो तर त्या म्हणल्या,"कुठे चालला बाळा,बस ना इथेच.मी आंघोळ करताना आपण गप्पा मारुया." मावशी आता माझ्यासमोर आंघोळ करणार होत्या.मग मावशीने त्यांचे ब्लाऊज काढले.मावशी आता फक्त परकर वर होत्या.त्यांचे दोन्ही स्तन मस्त दुधाने भरलेले असल्याने खूप मोठे वाटत होते.मग त्या माझ्याशी गप्पा मारत आंघोळ करू लागल्या.त्यांनी मग त्यांच्या स्तनावर साबण लावला आणि त्या दोन्ही स्तनांना चोळू लागल्या. त्यांच्या शरीरावर साबण लावून आंघोळ करत होत्या तेव्हा मला पण त्यांच्या स्तनांना साबण लावून त्यांच्या सोबत आंघोळ करावी अशी इच्छा होत होती.मग त्यांनी आंघोळ केली आणि त्या तशाच उठून मला म्हणाल्या,"बाळा चल आता.मी कपडे घालून लगेच तुझी आंघोळ करते हा.मग मावशी घरात गेल्या.आता मला परत घराबाहेर नागडी आंघोळ करायची होती.थोड्या वेळाने मावशी ब्लाऊज आणि साडी नेसून बाथरूम मध्ये आल्या आणि मला म्हणाल्या,"चल बाळा बाहेर आंघोळ करायला ". मी मुद्दाम नाटक करत म्हणालो,"नाही ना मावशी,मी इथेच बाथरूम मध्ये आंघोळ करतो ना.मला बाहेर लाज वाटते हो." मावशी,"नाही हा बाळा,तू बाहेरच आंघोळ करायची रोज." असे बोलून त्यांनी मला हात धरून उठवलं.मावशी मला घराच्या मागच्या बाजूला मोकळ्या जागेत घेऊन आल्या आणि तिथे बसवले. मी तेव्हा मुद्दाम मावशीला म्हणालो :- "मावशी मी काय लहान आहे का आता" आमु मामी :- मग,तू आहेच माझा लहान बाळ." मी ,"नाही मावशी,मी आता मोठा झालो आहे." तेव्हा मावशी मला हसून म्हणली,"नाही हा.तू अजून लहानच आहे हा. बघ बरं तू आता इथे बाहेर लहान बाळासारखा नागडा बसला आहे.तसच तू रोज लहान बाळा सारखे दिवसभर नागडा राहतो,जेवण करतो, झोपतो आणि आता तर लहान बाळाप्रमाणे माझे दूध पण पितो आहे.मग आहे की नाही तू अजून माझा लहान बाळ.चल आता मला आंघोळ घालू दे तुला." असे बोलून मावशी मला आंघोळ घालू लागल्या.त्या परत मला बोलल्या,"बाळा ,तू कितीही मोठा झाला ना,तरी माझ्यासाठी माझं दूध पिणारा बाळच राहशील तू" मावशी मला आंघोळ घालत होत्या तेव्हा अचानक ती बाई तिथे आली.ती मावशीसोबत गप्पा मारू लागली.मी तेव्हा मावशीला म्हणालो,"माझी पाहिले आंघोळ करा ना" मावशी:-,"थांब बाळा,मला यांच्यासोबत थोडं बोलू तर दे" मी,"मावशी,कोणी येईल ना.मला लाज वाटते आहे" तेव्हा ती बाई मला म्हणाली,"एवढं काय झालं पोरा लाजायला.तू लहान आहेस अजून.लहान मुले नागडी राहिली तर काय झालं लाजयला." तेव्हा मावशी बोलली,"अहो ताई,तो खूप लाजत असतो मुलीसारखं" तेव्हा ती बाई बोलली,"काय एवढं लाजायच त्याने.तो लहान आहे अजून."मग त्यांनी अजून गप्पा मारल्या.ती बाई मग निघून गेली.आता मावशीने मला पाणी टाकून माझ्या लवड्याजवल मस्त साबण लाऊन माझ्या लवड्या ला धुतले आणि मग माझे डोके पण धुवून दिले आंघोळ झाल्यावर त्यांनी माझे अंग टॉवेल ने पुसले.आम्ही घरात आलो.तेव्हा मावशी बोलल्या,"बाळा ,दूध चल पटकन दूध पिऊन घे माझं,नाहीतर सोनू उठून जाईल.त्यने बघितलं तर तो लहान आहे,कोनालापण सांगेल की तू माझे दूध पितो ते.." मी,"द्या लवकर, मला खूप भूक लागलीच होती" सुजाता मावशी :- "बाळा ,मग सांगायचं ना,चल ये इकडे माझ्याकडे." मी मावशी कडे गेल्यावर त्यांनीं मला त्यांच्या मांडीवर झोपवले आणि त्यांचं ब्लाऊज चे खालचे 2 हुक उघडुन डावा स्तन बाहेर काढला.आणि माझ्या डोक्याला खालून हात टाकून थोडे वर केले.मग त्यांनी डाव्या स्तनाचे निप्पल माझ्या तोंडाला लावले.मी लगेच स्तनाचे बोंड तोंडात घेतले आणि त्याला चोखू लागलो.मावशीच्या स्तन मधून लगेच गोड दूध यायला लागले.मावशी माझ्या केसांवरून हात फिरवत म्हणाली,"आरामात पी माझ्या बाळा,तुझंच दूध आहे ते."दूध पिताना मला आता काहीच भान राहिलं नव्हतं.मला आता फक्त मावशीच्या स्तना मधले गोड आणि चवदार दूध प्यायचे होते.मी हळू हळू निप्पल चोखत दूध पीत होतो.सुजाता मावशी आता खूप उत्तेजित होत होत्या आणि माझ्या सर्वांगावर हात फिरवत होत्या. डावा स्तन मधून दूध संपल्यावर मी उठलो.तेव्हा आमु मामी बोलल्या,"बाळा ,अजून पी ना दूध" असं बोलून त्यांनी ब्लाऊज चे बाकी हुक उघडले आणि उजवा स्तन हातात धरला. आमु मामी:-" हे बघ ,यात अजून दूध आहे.पी ना हे पण." मग मी मावशीच्या उजव्या बाजूला मांडीवर झोपलो आणि त्यांचा उजवा स्तन तोंडात घेऊन निप्पल चोखू लागलो.आता माझे पोट भरत आले होते.पण मला स्तन चोखणे सोडू वाटत नव्हते.मी हळू हळू 15 मिनिट स्तन चोखुन त्यातले दूध संपवले.दूध संपल्यावर मी माझे तोंड निप्पल वरून काढले.आता मावशीचे दोन्ही स्तन रिकामे झाल्यामुळे सैल झाले होते. मी :- "मावशी माझं पोट भरलं आता.मी नंतर पितो दूध. आमु मामी :- चालेल बाळा,तू दूध पील्यामुळे मला खरच आराम मिळतो आहे.तुला जेव्हा दूध प्यावेसे वाटेल तेव्हा सांग मला." असे बोलून मावशींनी त्यांचे स्तन ब्लाऊज मध्ये टाकले आणि त्यांचे घरातले काम आवरू लागल्या.थोड्या वेळाने सोनू उठला.मावशीने मग त्याची आंघोळ घातली. दुपारी आम्ही जेवण केले.मी मुद्दाम कमी जेवलो कारण मला मावशीचे जास्तीत जास्त दूध प्यायचे होते.दुपारी 1 वाजता मावशीने सोनूला झोपवले आणि लगेच मला म्हणाली,"सूरज बाळ,इकडे ये लवकर" मी मावशीच्या जवळ गेलो तेव्हा त्यांनी मला त्याच्या जवळ झोपवले आणि लगेच ब्लाऊज चे हुक उघडुन स्तन बाहेर काढले.मावशीने लगेच माझ्या समोर त्यांचा उजवा स्तन धरला.तेव्हा त्या स्तनातून खूप दूध बाहेर टपकु लागले.मी तिकडे बघितले तर लगेच मावशी बोलल्या,"बाळा बघतो काय,ते बोंड तोंडात घेऊन चोख ना.लवकर दूध पी." मी लगेच मावशीचे निप्पल तोंडात घेऊन चोखू लागलो. स्तनात दुध जास्त असल्यामुळे दुधाच्या धारा माझ्या तोंडात येत होत्या.मावशी मला म्हणाली,"बाळा तू दोन्हीकडचे दूध पिऊन घे.मी झोपते आहे.असे बोलून मावशी झोपून गेल्या.माझ्या मते आज मावशी जास्त थकल्या असल्याने गाढ झोपून गेल्या होत्या.मी परत त्यांचे उजवे निप्पल ओठात पकडुन चोखू लागलो.सर सर करत दूध माझ्या तोंडात येऊ लागले.मी स्तन चोखत असताना चोखण्याचा चू चू आवाज येऊ लागला.तेव्हा मी खूप उत्तेजीत झालो.मी हळू हळू निप्पल पूर्ण तोंडात घेऊन दूध पिऊ लागलो. मावशीचे स्तन आता खूपच मऊ झाले होते आणि निप्पल पण आता एका लांबट द्राक्ष एवढे झाले होते.मी मस्त निप्पल ओढू लागलो.उजव्या स्तनाचे दूध संपल्यावर मी लगेच माझे तोंड डाव्या स्तनाला लावणार तेव्हड्यात मावशीने कुस बदलली आणि त्या पाठीवर सरळ झोपल्या.आता त्यांचे स्तन छातीवर पसरून मस्त गोलाकार झाले होते.मला अजून दूध प्यायचे होते.म्हणून मी डायरेक्ट मावशीच्या वर आलो व हळूच त्यांचे डावे स्तनाचे निप्पल तोंडात धरून चोखू लागलो.डाव्या स्तनात कमी दूध येत होते. त्यांचा डावा स्तन लवकर रिकामा झाला.मी तरी मावशीचा चा डावा स्तन तोंडात धरून फक्त चोखन्याचा आनंद घेऊ लागलो.नंतर मग अचानक सुजाता मावशीने परत कुस बदलली आणि त्या उजव्या बाजूला वळल्या.मी तसाच निप्पल तोंडात धरून त्यांचे सोबत उजव्या बाजूला झोपलो.आणि माझा हात त्यांच्या नरम उघड्या पोटावर ठेवला.निप्पल चोखत चोखत मलापण कधी झोप लागली कळलच नाही.मला संध्याकाळी जाग आली तेव्हा मावशी तिथे नव्हत्या.मी उठून बसलो घराबाहेर आलो तर मावशी आंगण झाडत होत्या.मावशींनी मला बघितलं आणि म्हणाल्या,"उठला का बाळा,चल फ्रेश होऊन घे बरं". मी घराचे मागे गेलो आणि हात पाय चेहरा धुवून फ्रेश झालो.मावशी मला बोलली,"बाळा तू बाहेर खेळ मी घरात आवरून स्वयंपाक करते."मी आणि सोनू मग नागडेच घराच्या मागे खेळू लागलो. संध्याकाळी 7 ला आम्ही घरात आलो आणि हात पाय धुऊन फ्रेश झालो.मी मावशीला बोललो,"मला पण भूक लागली आहे." मावशीने मग मला त्याच्या जवळ ओढले आणि माझी पप्पी घेऊन विचारलं,"काय करू मी बाळा तुझ्यासाठी?तू सांग ते जेवण बनवते मे आज."तेव्हा मी त्यांना बोललो, तुम्हाला जे आवडतं ते बनवा" मावशी :- ठीक आहे बाळा. सोनू हॉल मध्ये टीवी बघू लागला. मी तिथेच घरात बसून मावशीसोबत गप्पा मारू लागलो.मावशीने मग डाळ भात केला.आम्ही दाळ भात खाऊन झाल्यावर मावशीने भांडे घासले. थोड्या वेळानं मावशीने सोनूला झोपवले.आता मला मावशीचे दूध प्यायच होतं.मी मावशीला दूध प्यायच बोलणार इतक्यात मावशी बोलली,"बाळा आज खूप गरम होतं आहे रे.चल आपण थोड्या वेळ गच्चीवर जाऊ.मी आणि मावशी गच्चीवर गेलो.तिथे मस्त थंडी हवा लागत होती.तेव्हा मावशी बोलल्या,"ये बाळा इकडे माझ्याजवळ बस."मी मावशीच्या जवळ बसलो तेव्हा त्यांनी माझी पप्पी घेतली आणि माझ्याशी गप्पा मारू लागल्या.त्या मला त्यांचे बालपणीचे किस्से सांगत होत्या.ते ऐकून मला खूप हसू येत होते.तेव्हा अचानक गप्पा मारता मारता त्यांनी त्यांचे ब्लाऊज चे हुक उघडुन दोन्ही स्तन मोकळे केले.आणि तश्याच मला गोष्टी सांगता सांगता माझे डोके धरून त्यांच्या डाव्या स्तनाला लावले.मी आता तसाच त्यांच्या मांडीवर बसून त्यांच्या डाव्या स्तनाच्या निप्पल ला तोंडात घेऊन दूध पिऊ लागलो.थोड्या वेळाने लगेच त्यांनी माझे डोके धरले आणि डाव्या निप्पल वरून माझे तोंड काढले आणि उजव्या स्तनाच्या निप्पल ला लावले.त्या असं करताना पण मला न थांबता गोष्ट सांगत होत्या.मी दूध पिता पिता हू हु करत होतो.मग दूध पिऊन झाल्यावर मी माझे तोंड निप्पल वरून काढले तेव्हा त्यांचे दोन्ही स्तन दूध संपल्यामुळे सैल झाले.ते बघून सुजाता मावशी मला बोलल्या,"चावट ,माझे दोन्ही दूध चाटून पुसून रिकामे करून टाकले.खूप बरं वाटलं आता."मग आम्ही खाली येऊ लागलो.तेव्हा मावशी ब्लाऊज न लावता तसच खाली येत होत्या.त्यांचे दोन्ही स्तन खाली उतरताना मस्त खाली वर हलत होते.खाली घरात मी आणि मावशी जवळ झोपलो.तेव्हा मावशीने चक्क माझ्या ओठांवर पप्पी घेतली आणि बोलल्या,"माझा,गोड दूध पिणारा बाळ" असे बोलून मी त्यांच्या दोन्ही स्तनात तोंड घुसवले आणि त्यांना बिलगून झोपून गेलो.मला त्या स्तनांच्या मऊ स्पर्शाने लगेच झोप लागली. सकाळी मला जाग आली तेव्हा मावशी उठलेल्या होत्या.तेव्हा सकाळचे 6 वाजले होते.मी उठून घरात बघितलं तर सुजाता मावशी वरून अर्धनग्न होत्या.त्यांनी फक्त परकर घातलेला होता.त्या तश्याच घर झाडत होत्या.घर झाडताना त्याने दोन्ही स्तन मस्त हलत होते.आता त्यांचे स्तन रात्रीत दूध भरल्यामुळे कडक झालेले दिसत होते.मला बघून त्या म्हणाल्या,"अरे बाळा एवढा लवकर का उठला ,झोपायच ना तू." मग मी उठून बाहेर ब्रश करू लागलो.तोपर्यंत मावशींनी घरात आंघोळ केली.आंघोळ झाल्यावर मावशी मला म्हणाली,"चल बाळा दूध पिऊन घे." मी तसच तोंड धुऊन मावशीच्या मांडीवर झोपलो.मावशीने मला त्यांच्या दोन्ही स्तन मधून दूध पाजले.आता घड्याळात 7 वाजले होते.मावशीने मग मला सांगितले की,"बाळा,आज आपल्याला जवळच्या विहिरीवर कपडे धुवायला जायचे आहे.तू आता लगेच माझ्यासोबत चल.मी तिथेच तुला आंघोळ पण घालून देईल."मला मावशीचे बोलणे ऐकून आश्चर्य वाटले आणि मनातल्या मनात आनंद पण झाला.मी मुद्दाम मावशीला बोललो,"नाही हा मावशी,तुम्ही जा कपडे धुवायला.मी नाही येत,मला लाज वाटते." मावशी ,"बाळा,ठीक आहे नको आंघोळ करू,पण माझ्यासोबत तर चल तिथे." मग मी कपडे घातले आणि मावशीसोबत जायला तयार झालो.तेव्हा मी मावशीला म्हणालो,"मावशी ,सोनू ला उठवा ना.तो घरात एकटा कसा राहील?" मावशी:-,"अरे बाळा ,झोपू दे त्याला .तो 9 वाजेपर्यंत नाही उठणार.विहीर जवळच आहे.आपण एक तासात येऊन जाऊ." मग मी आणि मावशी निघालो.जवळपास दीड किमी अंतर चालल्यावर आम्ही विहिरीजवळ आलो.तिथले दृश्य बघून मी शांतच झालो.विहिरीजवळ 8-10 स्त्रिया होत्या.त्यातल्या काही कपडे धुवायला आल्या होत्या आणि काही पाणी भरत होत्या.सगळ्यात आश्चर्य म्हणजे तिथे विहिरीजवळ माझ्या जवळपास वयाची 5-6 मुले चक्क नागडी आंघोळ करत होते.त्यातल्या 3 मुलांच्या आया त्यांना आंघोळ घालत होत्या.मला आता त्या मुलांचा हेवा वाटू लागला.मला माझाच राग आला की मी मावशीला आंघोळीला नाही म्हणालो. आता मावशीने मला एका ठिकाणी बसवले आणि त्या बाकी बायांसोबत गप्पा मारू लागल्या.मी आता त्या नागड्या मुलांना मस्तपणे आंघोळ करताना बघू लागलो.आंघोळ झाल्यावर 3-4 मुले त्यांच्या आयांसोबत चक्क नागड्या अवस्थेत रस्त्याने घरी जात होते.त्या स्त्रियांच्या कपड्यावरून ते खूप गरीब लोक आहेत असे दिसत होते. मावशीचे थोडे कपडे धुतले आणि आता 2 -3 कपडे बाकी होते तेव्हा त्यांनी मला जवळ बोलावले.मी मावशीच्या जवळ गेल्यावर मावशीने मला तिथे एका दगडावर बसवले आणि माझा टीशर्ट काढायला लागली.मला तेव्हा कळून चुकले मी मावशी आता माझी नागडी आंघोळ घालणार इथे.पण मी मुद्दाम मावशीला नाही म्हणू लागलो. मावशी मला म्हणाली,"बाळा ,करून घे ना इथे आंघोळ" तेव्हा शेजारची एक बाई मला म्हणाली,"अरे पोरा ,कर की आंघोळ ,काय झालं तुला आंघोळ न करायला?" मावशी त्या बाईला म्हणाली,"तो खूप लाजत आहे हो" ती बाई,"अरे काय लाजत आहे एवढा,ते बघ तिकडे ती मुलं कशी नागडी आंघोळ करत आहे.ते पण आहेतच ना नंगे.कर पटकन आंघोळ" आता सुजाता मावशीने लगेच माझा टीशर्ट काढला आणि मग मला उभं करून माझी पँट काढून टाकली.आता मी त्या लोकांमध्ये पूर्णपणे नागडा झालो होतो.मला आता खूप मस्त वाटत होते.तिथे आता पाणी भरण्यासाठी सुमारे ६-८ लोक उपस्थित होते, त्यात सर्व महिला होत्या आणि हातपंपाजवळून रस्त्याने जाणारे बरेच लोक होते. ते सर्व मला नग्न पाहू शकत होते आणि मला ते खूप आवडले.मावशीने मग तिथेच एका स्त्री कडून बादली घेतली आणि त्यात पाणी भरून माझ्या अंगावर पाणी टाकून मला आंघोळ घालू लागल्या.आंघोळ झाल्यावर मावशीने माझे अंग टॉवेलने पुसले.आणि मला तिथे विहिरीजवळ उभं राहायला सांगितलं.मावशी आता उरलेले कपडे धुवायला लागल्या.तो पर्यंत मी तिथे नागडा फिरू लागलो.तेथील स्त्रिया मला नागड्या बघत होत्या तसेच रस्त्यावर येणारे जाणारे लोक सुध्दा. त्यांना त्याचे काहीच वाटत नव्हते पण मला खूप छान वाटत होतं.मावशीचे कपडे धुवून झाल्यावर त्यांनी मला आवाज दिला आणि बोलल्या,"सूरज बाळा,चल आपल्याला घरी जायचं आहे"मी मावशीकडे गेलो आणि त्यांना म्हणालो,"मावशी माझे कपडे द्या.ते कुठे आहेत." मावशी,"कपडे का पाहिजे तुला?" मी :,"आता घरी जायचं आहे ना.मग कपडे नको का घालायला." सुजाता मावशी,"बाळा,मी तुझे कपडे धुऊन टाकले.आता असाच (नागडा) चल घरी." मी ,"मावशी,नका ना रस्त्यावर लोकं बघतील ना मला" तेव्हा मावशी मला म्हणाली,"कोणी काही बोलत नाही इथे,चल आता पटकन"मी आता मावशीसोबत नागडा च घरी येऊ लागलो.मला असं रत्याने नागडं चालताना खूपच मस्त वाटू लागलं.रस्त्याने जाणारे लोकं मला नागडा बघत होते.घराजवळ आल्यावर मी मुद्दाम हळू चालत नागडेपणाचा आनंद घेऊ लागलो.घरात आल्यावर मामी मागच्या घराचे पाठीमागे दोरीवर कपडे टाकण्यासाठी गेल्या.मला आज खूप आनंद झाला कारण मी आज चक्क लोकांमध्ये नागडा झालो होतो.मला ते आठवून आठवून खूप मस्त वाटत होते.मि आता ठरवले की रोज सकाळी मावशीसोबत विहिरीवर आंघोळ करायला जायचे ते पण नागड्या अवस्थेत.थोडया वेळाने मावशी घरात आली.त्यांनी सोनूला उठवले आणि त्याची आंघोळ केली.आमचा नाश्ता झाल्यावर मावशी आम्हाला म्हणाली,"बाळांनो,आज आपल्याला जवळच्या ताईंनी जेवायला बोलावले आहे.आपल्याला दुपारी त्यांच्या घरी जायचे आहे हा.मला आता त्या बाईच्या घरी नागडेच जायचे होते.दुपारी 12 वाजता मावशी आम्हाला म्हणाली,"चला बाळांनो,आपल्याला जायचे आहे जेवायला." सोनू तसाच नागडा निघायला लागला पण मी तेव्हा मुद्दाम कपडे घालू लागलो.तेव्हा मावशी माझ्या जवळ आल्या आणि त्यांनी माझे कपडे काढून बाजूला टाकले व मला म्हणाली,"आता कशाला कपडे घालतो,चल असाच.जवळच शेजारीच आहे त्यांचे घर." मग मी आनंदाने मावशी आणि सोनुसोबत नागडा त्या बाईच्या घरी पोहचलो. शेजारच्या बाईचे घर शेतात होते. त्या घरात एक म्हातारे आजी बाबा ,त्यांची सून (ती बाई) आणि त्यांचा एक 12 वर्षाचा नातू राहतं होते. आम्ही घरात गेल्यावर त्यांनी आम्हाला पाणी दिले .तिथे सगळेजण गप्पा मारू लागले.त्या बाईच्या मुलाने जेव्हा आम्हाला नागडं बघितलं तेव्हा त्याने लगेच त्याचे कपडे काढले आणि तो पण नागडा झाला.त्याला असं बघून सगळे हसायला लागले. थोड्या वेळाने आम्ही जेवण केले.मला असे दुसऱ्याच्या घरी नागडं जेवण करताना मज्जा आली.जेवण झल्यावर मी त्यांचा नातूसोबत बाहेर येऊन खेळू लागलो. घर रस्त्यालगत असल्याने येणारे जाणारे लोकं आम्हाला नागडं खेळताना बघत होते.तो मुलगा जरी माझ्यापेक्षा वयाने 3 वर्ष लहान होता तरी उंची आणि शरीराने चांगला असल्याने माझ्यापेक्षा मोठा वाटत होतं. खेळून घरात आल्यावर त्या घरातल्या आजीनंमाझ्याकडे बघून मावशीला बोलल्या,"सुजाता याला चांगलं खाऊ पिऊ घाल ना .कसा बारीक आहे हा." मावशी :- "रोजच त्याला खाऊ घालते पण त्याची तब्येत नाही सुधारत" त्या आजी :- "अगं,रोज त्याला सकाळ संध्याकाळ एक ग्लास दूध पाजत जा.आणि हो त्याला केळी पण खाऊ घाल." आमु मामी माझ्याकडे पाहून हसत म्हणल्या,"आजी,मी त्याला रोजच दूध देते.आणि तो आवडीने पितो पण.आता बघा मी कशी त्याची तब्येत सुधारते." थोड्या वेळ अजून गप्पा मारल्यावर आम्ही परत घरी आलो.तेव्हा रात्री मावशीने स्वयंपाक करायला सुरुवात केली.मी त्या रात्री खूप कमी जेवण केले.करणं आज दुपारी मी मावशीचे दूध न पिल्यामुळे त्यांचे स्तन नक्कीच दुधाने भरलेले होते.मला ते सगळं दूध प्यायचे होते.मावशी सगळं आवरून घरात आल्या.सोनू आज आधीच झोपून गेला होता.त्याला झोपलेलं बघून मावशीने सुटकेचा निःश्वास सोडला.त्यांनी लगेच माझा हात धरून मला गच्चीवर नेले.आज आकाशात खूप पावसाचे वातावरण होते त्यामुळे बाहेर काळाकुट्ट अंधार पडला होता.मावशीने लगेच त्यांची साडी सोडली आणि ब्लाऊज उघडुन दोन्ही स्तन बाहेर काढले.मावशीच्या स्तनांतून दूधच दूध ओघळत होते.मावशी मला बोलल्या,"चल बाळा,पटकन दूध पिऊन घे.आज दुपारी तू दूध न पिल्यामुळे माझे स्तनात खूप दूध भरले आहे.हे बघ ते किती कडक झाले आहेत."असं बोलून त्यांनी माझे हात त्यांचे स्तनांवर ठेवले.तर खरंच त्यांचे स्तन खूप कडक लागत होते.आता मला पण खूप भूक लागली होती.म्हणून मी लगेच मावशीच्या उजव्या स्तनाला पकडुन त्याचे निप्पल तोंडात घेऊन चोखू लागलो.आज मावशीच्या स्तन मधून खूप दूध बाहेर येत होते.दुसऱ्या स्तनात जास्त दूध झाल्याने त्यातील थेंब माझ्या पोटावर पडत होते.मी मावशीच्या मांडीवर झोपून मस्त दूध पीत होतो.आता पावसाचे बारीक बारीक थेंब येत होते.विजा चमकत होत्या.विजांच्या उजेडात मावशीचे स्तन खूप छान दिसत होते.मी लगेच दूध पिता पिता मावशी ना विचारलं,"मावशी आज दूध खूप गाढ आणि जास्त चवदार लागतं आहे.मला खूप आवडलं हे दूध."आज मला खूप जास्त दूध आलं म्हणून गाढ असेल कदाचित.आणि बाळा ,आता मला खूप जास्त दूध येत आहे,त्यामुळे तू आता जेवण कमी करायचं आणि माझं दूध जास्त प्यायच.मग बघ कशी तुझी तब्येत सुधारते."असे बोलून आमु मामी मला दूध पाजू लागल्या.आता पाऊस वाढू लागला होता ओला होऊ नये म्हणून मी उठू लागलो तर मावशीने मला हाताने झोपवले आणि उजवा स्तन माझ्या तोंडात दिला.आता पाऊसाचे पाणी आमच्या दोघांच्या अंगावर पडून आम्ही ओले व्ह्यायला लागलो.मावशी आणि मी आता पावसाने पूर्ण भिजलो होतो.पावसाचे पाणी आता मावशीच्या स्तनावर पडून दुधासोबत माझ्या तोंडात येत होते.मला ओले स्तन चोखताना खूप मज्जा येऊ लागली. उजवा स्तन रिकामा केल्यावर मी निप्पल वरून माझे तोंड काढले.तेव्हा मावशी मला बोलल्या,"बाळा,आता डाव्या बाजूचे पण दूध पी"मग मावशींनी मला उठवले आणि त्यांचा ब्लाऊज व परकर काढून टाकला.आता मावशी फक्त निकरवर बसल्या होत्या.मावशीने मला पावसातच त्यांच्या डाव्या बाजूला झोपवले आणि त्यांचा डावा स्तन हाताने पकडून माझ्या तोंडाला लावला.मी मग बोंड तोंडाला लावून दूध प्यायला लागलो.त्या गोड आणि गाढ दुधामुळे मला जास्त जोर आला.मी जोरा जोरात सुजाता मावशीचे निप्पल ओढून चोखू लागलो त्यामुळे त्यांना त्रास होऊ लागला.तेव्हा मावशी मला म्हणाली,"अरे हळू पी ना बाळा,तुझेच आहे ते दूध."मग मी हळू हळू निप्पल चोखू लागलो.आता मावशीने मला मध्येच उठवले.आम्ही आता पावसात गच्चीवर उभे होतो.मावशीने आणि मी आता खाली घरात आलो.घरात आल्यावर मावशीने मला टॉवेल दिला.मी टॉवेलने माझे अंग पुसले.तिकडे मावशीने त्यांचे स्तन आणि बाकी शरीर टॉवेलने पुसले.त्यांनी त्यांचे केस पण नीट कोरडे केले.मावशीने मग बाथरूम मध्ये जाऊन निकर काढली आणि एक परकर घातला.मावशी मग माझ्याजवळ आली आणि मला घेऊन गादीवर झोपली.मी परत मावशीच्या डाव्या स्तन च्या निप्पल ला तोंडात धरुन चोखू लागलो.मावशीला आता गाढ झोप येत होती.थोड्या वेळानं मावशी गाढ झोपून गेल्या.डाव्या स्तनाचे दूध पण कमी यायला लागले.मला आत्ता पोट भरल्यामुळे गाढ झोप यायला लागली.मी तसाच निप्पल तोंडात धरून दूध पिताना झोपून गेलो सकाळी मला जाग आली तेव्हा मावशी तश्याच उघड्या अंगाने घर झाडत होत्या.मी लगेच उठलो..मी मुद्दाम डोळे चोळत त्यांच्या समोर गेलो.तेव्हा त्यांनी मला त्यांच्या उघड्या शरीराला कवटाळले.आणि बोलल्या,"झाली का झोप माझ्या बाळाची.माझ्या बाळा ला आता भूक लागली असेल.चल मी पाहिले चहा पिते,तू तोपर्यंत ब्रश करून घे. मग मला आंघोळ करायची आहे.मी लगेच ब्रश करू लागलो आणि हळूच दोन गोळ्या मावशीच्या चहात टाकून दिल्या.मावशी आता माझ्यासमोरच अर्धनग्न अवस्थेत चहा पिऊ लागल्या.चाह पिऊन झाल्यावर मावशी आंघोळीला बसल्या.मी तेव्हा त्यांच्या समोर बसलो.आता मावशी माझ्यासमोर आंघोळ करू लागल्या.मावशीने मग त्यांच्या सर्व अंगाला साबण लावून चोळायला सुरवात केली.माझ्यासमोर मावशी मस्त आंघोळ करत होत्या.तेव्हा त्यांनी मला आवाज दिला आणि बोलल्या,"बाळा,माझ्या पाठीला जरा साबण लाऊन दे ना. मी मावशीच्या गोऱ्या पाठीला साबण लावून चोळू लागलो.तेव्हा मावशी मला बोलल्या,"बाळा पुढे पण साबण लावून दे." मी लगेच मागून हात टाकून त्यांचे स्तन पकडून त्यांना साबणाने चोळू लागलो.तेव्हा मावशीचे स्तन दुधाने भरलेले असल्याने कडक लागत होते.मी स्तन साबण लावून चोळत असल्याने मावशी खूप उत्तेजित झाल्या.मग मी मावशीच्या अंगावर पाणी टाकले.आंघोळ झाल्यावर मावशी टॉवेल गुंडाळून आत गेल्या. मी पण त्यांच्या मागे गेलो.तेव्हा त्यानी निकर घातली आणि मग परकर ,ब्लाऊज घातला.आता मावशी मला म्हणाली,"चल बाळा ,आपल्याला विहिरीवर कपडे धुवायला जायचे आहे.तू जा पुढे मी आली लगेच" मी लगेच नागडा घराबाहेर निघून रस्त्याने उड्या मारत विहिरीजवळ गेलो.तिथे मी नागडाच बाकी मुलांसोबत खेळू लागलो.5 मिनिटांनी मावशी आल्या.त्यांनीं कपडे धुवायला सुरुवात केली.आज विहिरीवर बऱ्यापैकी लोकांची गर्दी होती.त्यात जवळपास 15 स्त्रिया मला नागडं बघत होत्या.मला त्या लोकांमध्ये नागडं राहून मस्त वाटत होतं.कपडे धुवून झाल्यावर मावशीनी तिथेच मला नागडी आंघोळ घातली.आणि आम्ही घरी आलो.घरी आल्यावर मावशी लगेच कपडे बाहेर दोरीवर वाळायला टाकून माझ्याजवळ आल्या आणि त्यांनी लगेच घराचे दार बंद करून पटापट साडी सोडली.मी मावशीकडे बघितलं तर त्यांचे ब्लाऊज निप्पल जवळ पूर्ण ओले झाले होते आणि त्यातून दुध मोठ्या प्रमाणात ओघळत होतं.आनंद ने दिलेल्या गोळ्यांमुळे आता मावशीच्या स्तनात अती प्रमाणात दूध तयार होत होते. दुधामुळे मावशीची साडी पण वरून भिजली होती. मावशीने लगेच मला जवळ ओढले आणि त्यांचा ब्लाऊज उघडायला सुरुवात केली.ब्लाऊज चे शेवटचे हुक काढताच त्यांचे दोन्ही स्तन बाहेर आले. निपलमधुन खूप प्रमाणात दूध ओघळत होते.मावशीने लगेच उभ्या उभ्यानेच मला पकडून माझे डोके त्यांचा स्तनाला लावले.मी लगेच त्यांच्या डाव्या स्तनाचे बोंड तोंडात पकडुन चोखू लागलो.मावशीच्या निप्पल मधून आज खूपच दूध येत होते. निप्पल चोखायला सुरुवात करताच मावशींनी सुटकेचा निःश्वास सोडला.दूध अती प्रमाणात माझ्या तोंडात येत असल्याने माझ्या ओठाच्या कडेवरुन दूध बाहेर माझ्या नागड्या अंगावर ओघळत होते. मी उभा राहून दूध पिऊ लागलो.मावशीने लगेच मला तसेच दोन्ही हातानी उचलून बेडवर टाकले.त्या बेड वर आल्या आणि लगेच त्यांनी त्यांचा उजवा स्तन माझ्या तोंडात दिला.मी आता त्यांच्या उजव्या स्तना च्या निप्पल ला तोंडात धरून दूध पिऊ लागलो.आज दूध खूप मोठ्या प्रमाणात येत होते.दूध थोडे गाढ होते पण खूप चवदार लागत होतं.मी अर्धा तास सुजाता मावशीचे दोन्ही स्तन चोखुन त्यातले दूध संपवले.मी माझे तोंड त्यांच्या स्तनावरुन हटवलं आणि मावशीकडे बघितलं तर त्या झोपलेल्या होत्या.माझ्या सुजाता मावशी फक्त पारकर वर झोपल्या होत्या.त्यांचे दोन्ही स्तन आता रिकामे झाले होते.आज माझे दुधाने पोट भरून गेले होते.मी लगेच उठून बसलो.अर्ध्या तासाने मावशीला जाग आली.त्या तश्याच अर्धनग्न अवस्थेत उठल्या आणि त्यांनी मला त्यांच्या जवळ बोलावून त्यांच्या मांडीवर बसवले. मावशी मला प्रेमाने गोंजारत म्हणल्या,"धन्यवाद माझ्या बाळा,तुझ्यामुळेच मला आराम मिळतो आहे." त्या दिवशी दुपारी मी जेवण केले नाही.दुपारी सोनू झोपल्यावर मावशीने परत मला दूध पाजले.संध्याकाळी मी आणि सोनू बाहेर अंगणात खेळू लागलो खेळून झाल्यावर आम्ही घरात आलो.तेव्हा मावशी वरण भात बनवत होत्या.आम्ही जेवण केले. रात्री मग झोपताना आज मावशी सोनूला दूध पाजत होत्या तेव्हा मी त्यांचेकडे बघत होतो.सोनुने थोडं दूध पिले आणि तो दूध पित पिताच झोपून गेला.तो गादीवर झोपल्यावर मावशी मला म्हणाली,"तुलापण दूध प्यायच आहे का?" मी लगेच हो म्हणालो. मावशी मुद्दाम चेष्टेने हसून बोलल्या,"सकाळीच तर पिलं ना तू दूध,मग आता कशाला पाहिजे?" मी लगेच नाराज झालो.पण काहीच बोललो नाही. तेव्हा सुजाता मावशी बेडवर झोपल्या आणि माझ्याकडे बघत म्हणाल्या," ये माझ्या बाळा..” असं म्हणत मावशीने मला कवेत घेतलं आणि आम्ही तिथेच बेडवर आडवे झालो.मावशीने आता दुसरा पण स्तन हाताने दाबून बाहेर काढला. माझ्या तोंडासमोर आता दुधाची भरलेली दोन स्तन होती. मी एकाला धरून चाटु लागलो. “आह….” सुजाता माझ्या डोक्याखाली हात सारत रिलॅक्स होत उद्गारली. मी वर पासून खालपर्यंत तिचा पूर्ण स्तन चाटु लागलो, सगळीकडे जीभ फिरवू लागलो. “असा काय नवीन असल्यासारखा करतोयस?” मावशी हसत कुजबुजली, “ते बोन्ड चोख ना..” सुजाता मावशीने दुसऱ्या हाताने माझ्या तोंडासमोर स्तन पुढे केला. मी वेड्यासारखा तिच्या निप्पलवर तुटून पडलो. सरळ दात रोवत मी आवेशाने निप्पल चोखू लागलो. हाताने स्तन दाबू लागलो. “स्स्स्सस्स्स्स……” करत मावशीने माझं डोकं आपल्या स्तनावर आजूनच घट्ट दाबलं. तेवढ्यात दुधाची एक चिळकांडी माझ्या दातांच्या फटीतून गालावरून खाली गेली. मी पटकन ओठ आवळून धरले आणि “च्चू… च्चू…च्चू….” आवाज करत मावशीचे दूध प्राशन करू लागलो. तिचा दुसरा स्तन माझ्या गालावर विसावला होता. मी इकडे दूध पीत त्याला पण हाताने दाबू लागलो. मावशीने सुद्धा “हुश्श….” करत एक उश्वास सोडला आणि ती पाठीवर सरळ होत झोपली.मावशी आनंदाने माझ्या डोक्यावरून हात फिरवत होती. “बाळा ,ही गोष्ट कोणालाच नाही सांगायची हा” तिने मला समजावलं. “हम्मम… च्चू..च्चू..च्चू..” करत मी एक पाय मावशीच्या मांडीवर टाकला. मावशीने सुद्धा माझा पाय तिच्या मांड्यांत दाबला. माझ्या जणू सर्वांगातून सुखाची लहर जात होती. तोंडात स्तन आणि खाली सुजाता मावशीची मऊ मांडी. मी दोन्ही हातांनी एक स्तन दाबत त्याचे बोंड ओठांनी पुढे ओढू लागलो.या स्तनातलं दूध संपल म्हणून मी क्षणाचा ही विलंब न करता दुसरा स्तन अधाशासारखा तोंडात कोंबला. मावशी हसत कपाळावर हात मारून घेत माझ्याकडे मला बोलली,"अरे हळू हळू चोख ना दूध,मी थोडेच कुठे चालली आहे,तुझेच आहे हे दूध"पण मी त्यांचे बोलण्याकडे दुर्लक्ष करत तिचे निप्पल चोखत जोरात दूध पित होतो.मावशीने माझा एक पाय तिच्या मांड्यांमध्ये आधीच दाबून धरला होता.मी मग त्यांचे दूध पिता पिताच झोपून गेलो.सकाळी मी उठलो आणि लगेच मावशीला जाऊन बिलगलो.मावशीने प्रेमाने गोंजारत माझ्या गालाची पप्पी घेतली.मग त्या मला विहिरीवर घेऊन गेल्या आणि तिथे माझी आंघोळ केली.मावशीने मग मला नाश्ता म्हणून साधा भात बनवला.मी तेव्हा मावशी ना म्हणालो."मावशी ,मला साधा भात नाही आवडत,मला त्याच्याबरोबर काहीतरी द्या." तेव्हा सुजाता मावशी म्हणाली,"काय देऊ आता भातासोबत?रात्रीचे वरण नाही आता." लगेच त्यांना idea आली .त्यांनी लगेच माझ्या हातातून भाताची डिश घेतली.त्यांनी मग त्यांचे ब्लाऊज उघडले.ब्लाऊज उघडल्यावर मावशी त्यांचे निप्पल चिमटीत पकडून ओढू लागल्या.तेव्हा निप्पल मधून दुधाच्या धारा भातावर पडू लागल्या.मावशीने मग माझा हात धरून त्यांच्या स्तनावर ठेवला आणि मला त्यांचे दूध डिश मध्ये सोडायला सांगितले.मी आता माझ्या दोन्ही हातानी मावशीचे निप्पल ओढून त्यांचे दूध भाताच्या डिश मध्ये टाकू लागलो.10 मिनिटात भाताची डिश मावशीच्या दुधाने पूर्ण भरली.तेव्हा मावशी माझ्याकडे भाताची डिश देत मला म्हणाली,"बाळा ,आता खाऊन घे तुझ्या मावशीच्या गोड दुधाचा भात" मी मग आवडीने मावशीच्या दुधाचा भात खाल्ला. त्या दिवशी दुपारी मावशी मला आणि सोनूला म्हणाली,"बाळा ,आज रात्री आपल्याला सोलापूर ला जायचे आहे,माझ्या ओळखीतल्या ताईंच्या मुलीचे लग्न आहे.त्यांनी मला लहानपणी खूप सांभाळले आहे.आपल्याला रात्री जायचे आहे आज.संध्याकाळी आम्ही बस ने नंदुरबार ला आलो.आता रात्रीचे 7 वाजले होते.सोलापूर ला जाणारी ट्रॅव्हल बस 9 वाजता होती.आम्ही तिघांनी तिथे जवळच हॉटेल मध्ये जेवण केले.प्रवास करायचा असल्याने मी खूप कमी जेवण केले.रात्री आमची ट्रॅव्हल बस आली आम्ही बस मध्ये चढलो.बस वाल्याने आम्हाला आमची जागा दाखवली.आम्ही तिथे झोपलो.9 वाजता बस निघाली.बस चालू झाल्यावर मावशीने आमच्या कोच चा पडदा लाऊन घेतला आणि त्याला कोच च्या गाडीत अडकवला.आता आम्ही कोच च्या आता अंधारात होतो.सोनू लगेच झोपून गेला.मावशीने मग त्याला पडद्याच्या बाजूला झोपवले.आता मी बस च्या खिडकीच्या बाजूला झोपलेलो होतो.मी पण आता झोपू लागलो.थोड्या वेळाने मला मावशी कण्हत असल्याचा आवाज आला.मी उठून मावशीला विचारलं,"मावशी,काय झालं,तुम्हाला काही त्रास होतो आहे का?" तेव्हा मावशी मला हळू आवाजात म्हणाली,"हो रे माझ्या बाळा, बरं झालं तू उठला ,मला दुधामुळे खूप त्रास होतो आहे रे.तू झोपला होता म्हणून मी तुला उठवले नाही.आज दुपारी तुला दूध पाजता आले नाही त्यामुळे त्यात खूप दूध भरले आहे.बस हलत असल्याने माझे स्तन आणखी दुखत आहेत.चल पटकन दूध पिऊन घे." मी मावशीला म्हणालो,"नको मावशी,कोणी बघितलं तर" मावशी:,"इथे एवढं अंधार आहे.तरीपण मी माझ्या आणि तुझ्या अंगावर शाल पांघरून घेते म्हणजे कोणी बघितलं तरी त्यांना कळणार नाही." मी लगेच मावशीच्या छातीजवळ तोंड केले.तेव्हा मावशी मला म्हणाली,"बाळा मी शाल घेते तो पर्यंत तू माझे ब्लाऊज खोल.मी लगेच माझ्या हातानी मावशीचे ब्लाऊज चे हुक हळूच उघडू लागलो.मावशीच्या ब्लाऊज चे सगळे हुक उघडल्यावर मध्ये मावशीने ब्रा घातली होती.मावशी मग खाली झोपली आणि त्यांनी त्यांच्या हाताने ब्रा वर सरकवून दोन्ही स्तन बाहेर काढले.खिडकीतून बाहेरच्या लाईट च्या उजेडात मला मावशीचे स्तन खूप मोठे आणि भरलेले दिसले.मी आधी डाव्या स्तनाला हळूच तोंडात घेऊन चोखू लागलो.खूपच मोठ्या प्रमाणात दूध माझ्या तोंडात येऊ लागले.मी आता चालू बस मध्ये मावशीचे स्तन चोखुन गोड आणि गाढ दूध पिऊ लागलो.मी मावशीचे दोन्ही स्तन आळीपाळीने तोंडात घेऊन निप्पल चोखू लागलो.त्यामुळे त्यांच्या दोन्ही स्तन मधून दूध कमी होऊ लागले. मावशीला आता आराम मिळू लागला.त्या माझ्या केसांवर हात फिरवू लागल्या.जवळपास अर्धा तास मी मावशीचे दोन्ही स्तन आळीपाळीने चोखू त्यातले दूध संपवले.आता मावशी खूप निवांत झाल्या होत्या.त्यांनी मग माझ्या ओठावर किस केला आणि ब्लाऊज लाऊन घेत साडी नीट केली.मी मावशीच्या स्तनात डोके लाऊन झोपून गेलो.सकाळी मावशीने आम्हाला 6 ला उठवले.आम्ही उठल्यावर 6:00 ला बस सोलापूर ला पोहचली. तिथे उतरल्यावर आम्ही फ्रेश झालो आणि मावशिसोबत घोडतांडा या खेड्यावर जाणाऱ्या बस मध्ये चढलो.जवळपास अर्धा तासानतर आम्ही. घोडातांडा खेड्यात उतरलो.तिथे पोहचल्यावर आम्ही मावशीच्या ओळखीच्या ताईंच्या घरी पोहचलो.त्या ताईंचे घर गावाच्या सुरवातीला रस्त्याच्या कडेला होते.तिथे लग्नाचा मंडप टाकलं होता.त्या घरात भरपूर नातेवाईक लोकं आलेले होते.तसेच त्यांनी लोकांना राहण्यासाठी समोरचे घर पण राखीव ठेवले होते.मावशीच्या ताईंनी आम्हाला बघितले आणि त्यांना खूप आनंद झाला.त्यांनी मावशीला मिठी मारली व म्हणाल्या,"आली का सुजाता तू. बरं वाटलं मला.चल पटकन फ्रेश होऊन घ्या,प्रवास करून थकल्या असणार तुम्ही.मग नाश्ता करू सगळेजण.मावशीने मग आमच्या बॅग समोरच्या घरात ठेवल्या.मावशी आम्हाला त्या घरात बसून आंघोळीला गेल्या.त्यानी लग्न घरात आंघोळ केली.मावशीला गर्दी असल्याने बाथरूम भेटायला 1 तास वाट पाहावी लागली.आंघोळ झाल्यावर मावशी आमच्याकडे आल्या.त्यांनी मग आम्हाला घराच्या बाहेर मोकळ्या जागेत कपडे धुण्याच्या जागेवर आणले.तिथेच मावशीने सोनूला नागडं केलं.आता सोनू त्या लोकांच्या गर्दीत रस्त्याजवळ नागडा होता.मला पण आता त्याला बघून इतक्या लोकांमध्ये नागडा व्हावेसे वाटू लागले.मावशीने मग त्याला आंघोळ घातली.आंघोळ केल्यावर सोनू नागडा च उभा होता.मावशी मला म्हणाली,"चल बाळा ,तू पण इथे आंघोळ करून घे.घरात बाथरूम मध्ये खूप गर्दी आहे आंघोळीसाठी." असं बोलून मावशीने मला तिथेच कपडे काढून नागडं केलं.तिथे सगळे लोकं मला नागडं बघत होते.मला आता खूप छान वाटत होते.मावशीने मला तिथेच आंघोळ घातली.आंघोळ करताना मावशीच्या ओळखीची एक तरुण स्त्री तिथे आली.ती स्त्री आता माझ्या नागड्या शरीराकडे बघत होती.माझी आंघोळ करताना मावशीने तिच्याकडे पाहिलं आणि आनंदाने म्हणाली,"आशा, अगं तू कधी आलीस?किती वर्षांनी भेटतो आहे आपण.चल मी यांची आंघोळ आवरते मग आपण गप्पा मारुया.मावशी आता परत माझी आंघोळ करू लागल्या.आंघोळ झाल्यावर मावशीने मला आणि सोनूला समोरच्या घरात नेले.तिथे आशा काकू बसलेल्या होत्या.त्यांच्या हातात एक 4-5 महिन्यांचे बाळ होते.त्या साडीने स्तन झाकून त्या बाळाला दूध पाजत होत्या.आता मी आणि सोनू मावशी सोबत घरात आशा काकुसमोर नागडं उभे होतो.मावशी तिच्यासोबत बोलत बोलत आम्हाला कपडे देऊ लागली.आम्ही आता कपडे घातले.तेव्हा मावशी आशा काकूला म्हणाली,"अगं आशा,तू आज काय करते आहे?" आशा:,"काही नाही ग सुजाता,मला तर नुसतं बोअर होतं आहे. इथे माझ्या ओळखीचं कोणीच नाही.आई पण लग्नाचा कामात मदत करते आहे.म्हणून मी बसली आहे इथे एकटी,आणि असं पण मला माझ्या बाळा मुळे कुठे जाता येत नाही." मावशी :-,"मला पण लग्नाच्या कामात मदत करायची आहे.तू आज दिवसभर या दोघांना सांभाळशिल का?" आशा :-,"हो नक्कीच.तुम्ही जा ,मी घेईल त्यांची काळजी." तेव्हा सोनू मावशिसोबतच राहण्याचा हट्ट करत रडू लागला.तेव्हा मावशी मला आशा काकुजवळ सोडत म्हणाली,"बाळा ,तू आज आशासोबत रहा.आणि आशा सूरज ला दुपारी जेवण झालं की झोपवून दे कोणाकडे पण" आशा म्हणाली,"नक्की सुजाता,मी घेईल त्यांची काळजी". आता मावशी सोनूला घेऊन गेल्या.तेव्हा आशा माझ्या जवळ बसली आणि म्हणाली,"काय नाव आहे तुझं? मी :- सूरज आशा काकू :- शाळेत जातो का? मी :- हो, आशा काकू:- कोणत्या इयत्ता मध्ये जातो? मी मुद्दाम तिला लहान वाटावं म्हणून आता 6 वी ला गेलो असे सांगितले. आशा काकू :- माझं नाव आसावरी आहे.पण सगळे मला आशा म्हणतात.मी रत्नागिरीला राहते." असे बोलून त्यांनी माझ्या गालाला हाकून पकडुन बोलली,"तू खूप क्युट दिसतो रे. असं बोलून तिने चक्क माझ्या गालाची पप्पी घेतली.मी लगेच लाजलो.तेव्हा आशा काकू हसल्या आणि मला बोलल्या,"लाजतोस काय रे तू."मला आता खूप अवघडल्यासारखं होत होते.आता त्या घरातल्या वरच्या बेडरूम मध्ये फक्त मी आणि आशा काकू होत्या.तेव्हा आशा काकू मला म्हणाली,"बाळा,दरवाज्याला आतून कडी लावून घे.मला माझ्या बाळाला दूध पाजायाचे आहे" मी दरवाजा आतून बंद केला.तेव्हा आशा काकू बाळाला दूध पाजू लागल्या. माझे संपूर्ण लक्ष आणि लक्ष आशा आंटीच्या बुब्सवर होते. त्यांचे स्तन खूपच गोरे होते.त्यांचे स्तनाचे गडद गुलाबी रंगाचे मोठे अरिओला होते. स्तनाग्र देखील गडद गुलाबी रंगाचे होते.मी पहिल्यांदा गुलाबी रंगाचे निप्पल बघत होतो कारण सुजाता मावशीचे निप्पल गडद तपकिरी रंगाचे होते.आशा काकुंचे स्तन सुजाता काकूंच्या स्तनापेक्षा खूप सुंदर ,मोठे आणि गोलाकार होते.सुजाता काकुचे स्तनाग्र 3 सेमी पर्यंत उभे होते.आता त्यांचे बाळ स्तनपान करू लागले. अचानक आशा आंटी ने बाळाला दूध पाजत असताना मी तिच्या बुब्सकडे बघत असताना पकडले. त्या मला म्हणाल्या "काय झालं बेटा. तु कधीही स्त्रीला स्तनपान करताना पाहिले नाही का?” मी काहीच बोललो नाही.तेव्हा आशा काकू मला म्हणाली,"बस बाळा,तू पण माझ्या मुलासारखा च आहे.दुपारी मग आशा काकूनी बाळाला आणि मला रूम मध्ये सोडून माझ्यासाठीे जेवण आणले.मी तिथेच जेवण केले.माझे जेवण झाल्यावर आशा काकूने सगळं आवरले.थोड्या वेळाने आशा काकू मला म्हणाली,"सूरज तू झोपून घे आता.मी जेवण करून आले."मग मी आशा काकूंच्या बाळा सोबत बेडवर झोपलो.मला तेव्हा झोप येऊ लागलीच होती की.लगेच सुजाता मावशी तिथे आल्या आणि त्यांनी सोनूला बेडवर झोपवले.सोनू झोपल्यावर मावशीने दरवाजा आतून बंद केला आणि माझ्याकडे पाहून म्हणाली,"बाळा ,चल पटकन आशा काकू यायच्या आत दूध पिऊन घे.मला खूप त्रास होती आहे."मी लगेच मावशीच्या मांडीवर झोपलो.मावशीने ब्लाऊज उघडुन स्तन बाहेर काढले.मी जोरा जोरात त्यांच्या दोन्ही स्तनातले दूध आळीपाळीने निप्पल चोखत पिले.तेवढ्यात आशा काकू ने दरवाजा पलीकडून आवाज दिला.मी पटकन उठून बेडवर झोपलो.मावशीने त्यांचे स्तन ब्लाऊज मध्ये टाकले आणि साडी नीट करून दरवाजा उघडला.तेव्हा आशा काकू बोलली,"काय ग सुजाता ,दरवाजा लवकर उघडायचा ना. काय करत होती आत तू."मी आता झोपून गेलो.मला जेव्हा जाग आली तेव्हा आशा काकू आणि सुजाता मावशी गप्पा मारत होत्या.मी झोपायचे नाटकं करत त्यांच्या गप्पा ऐकू लागलो.तेव्हा आशा काकूंच्या छातीत दुखू लागले.म्हणून मावशी बोलली,"काय झालं ग,दुखते आहे का?" आशा काकू:- "हो ग,माझ्या स्तनात दुध जास्त बनत आहे आणि माझा बाळ एव्हढ दूध नाही पिऊ शकत,मला दूध जास्त भरल्यामुळे खूप त्रास होतो आहे.सुजाता तुझ्या पण स्तनात दूध आहे.तुला नाही का त्रास होत." सुजाता मावशी,"होतो ग,पण सोनू दूध पितो त्यामुळे मला खूप आराम मिळतो." तेव्हा आशा काकू अचानक म्हणाली,"सोनू नाही सूरज?" आता मावशी आश्चर्यचकित होऊन बोलली,"सूरज नाही सोनू ग" आशा काकू परत बोलली,"सूरज पितो तुझं दूध,म्हणून तुला एव्हढा आराम मिळतो." सुजाता मावशी,"तू काय बोलते आहे,तुला कळते आहे का?" आशा काकू,"एव्हढ काय लपवते आहे.मी जेव्हा दुपारी रूम मध्ये आले तेव्हा तुझा ब्लाऊज निप्पल जवळ ओला होता आणि त्याच वेळी सुरजचे तोंडाला दूध लागलेले होते.तेव्हाच मला कळून चुकलं की तू सूरज ला तुझे दूध पाजते." आता सुजाता मावशी बोलली,"काय करू मग मी आशा,हा माझा मुलगा सोनू आता माझे दूध पित नाही.माझ्या स्तनात अजूनही खूप दूध तयार होते.तुला तर माहीतच आहे किती त्रास होतो दूध जास्त झाल्याने.मला तेव्हा सूरजला दूध पाजण्याशिवाय काहीच पर्याय दिसला नाही.आता जवळपास 20 दिवसापासून सूरज माझे दूध पितो आहे.त्यामुळे मला आता रोज खूप आराम मिळतो." तेव्हा आशा काकू बोलली,"बरं झालं तू सूरज ला दूध पाजले ते.मला पण असं दूध पाजायला भेटलं तर मलाही आराम मिळेल या दुखण्यातून." चल आता आपण आराम करूया.संध्याकाळी हळदीला आम्ही सगळे तयार झालो.रात्री हळद लागल्यावर आम्हीं जेवण केले.त्या रात्री 10 पर्यंत आम्ही नाचलो.10 वाजता मला आणि सोनूला मावशीने रूम मध्ये आणले.मावशीने मग सोनू आणि आशा काकूंच्या बाळाला बेडवर झोपवले.मला तेव्हा मावशी बाहेर येऊन पायऱ्या जवळ मला बोलली,"बाळा तू खाली गादीवर झोप.मी रात्री आले की तुला आणि मला शाल पांघरून घेईल तेव्हा तू माझे दूध पिऊन घे नक्की म्हणजे मला आराम मिळेल.मी जर झोपली तरी माझे दूध पिऊन घे." मी मावशीला हो म्हणालो. मावशी गेल्यावर मी खाली गादीवर झोपलो.आता रूम मध्ये गडद अंधार पडला होता.मी आता मावशीची वाट पाहू लागलो.पण मला झोप लागून गेली.रात्री मला अचानक जाग आली तेव्हा दरवाजा उघडला आणि मावशी माझ्याजवळ येऊन झोपली.मी आता झोपेच्या धुंदीत होतो.आता मावशी माझ्याजवळ सरकली.त्यांचा श्वास आता माझ्या कपाळावर जाणवत होता.मग मावशीने हळूच त्यांचे दोन्ही हातानी ब्लाऊज चे हुक काढले.मला अंधारात काहीच नीट दिसत नव्हते.त्यांनी मग माझे डोके हाताने धरून त्यांचा एक स्तन माझ्या तोंडाजवळ आणलं.मावशी आता डाव्या हाताचा अंगठा, तर्जनी आणि मधले बोट यांच्या मदतीने त्यांचे स्तनाग्र माझ्या तोंडाच्या आत ढकलत होती.मी त्यांचे स्तनाग्र माझ्या ओठांनी पकडून ओढले. माझ्या तोंडात अचानक दुधाची धार येऊ लागली.मी उत्साहात स्तन जोरात चोखून दूध पिऊ लागलो.आज मावशीचे दूध नेहमीपेक्षा खूप गोड आणि चविष्ट लागत होते मावशीचे निप्पल पण मला थोडे मोठे वाटत होते.पण मी त्याकडे दुर्लक्ष करत दूध पिऊ लागलो.एक स्तन मधून दूध संपल्यावर मावशीने लगेच दुसरा स्तन माझ्या तोंडात कोंबला.मी लगेच निप्पल ओढून दूध पिऊ लागलो.मावशीचे दूध आज मला जास्त चवदार लागत होते.मला ती चव खूप आवडली.मी त्यामुळे त्यांचे स्तन जोरात चोखू लागलो.मावशी आता माझ्या नागड्या अंगावर हात फिरवत होत्या.त्या माझ्या डोक्याला मागून धरून त्यांच्या स्तनावर दाबू लागल्या.दोन्ही स्तनातून दूध संपले तरी मी त्यांचे निप्पल तोंडात धरून चोखत होतो.मला निप्पल चोखत चोखत केव्हा झोप आली ते कळालेच नाही.सकाळी मला जाग आली तेव्हा मावशी आणि आशा तयारी करत होत्या.मी आणि सोनू उठल्यावर मावशीने मला आणि सोनूला आज परत बाहेर आंघोळ घातली.आंघोळ झाल्यावर आम्ही घरात आलो.सोनुने कपडे घातले तेव्हा आशा काकू आणि सोनू खाली नाश्ता करायला गेल्या.मावशीने त्यांना आमचा नाश्ता आणायला सांगितले.आशा काकू आणि सोनू गेल्यावर मावशीने मला तसाच नागडा त्यांचे मांडीवर झोपवले आणि त्यांचा उजवा स्तन माझ्या तोंडात दिला.मी आता परत त्यांचे दूध पिऊ लागलो.तेव्हा मावशी मला म्हणाली,"बाळा, थोडं लवकर पी दूध" मी मावशीला म्हणालो,"मावशी,रात्री उशिरा तुमचं दूध पिल्यामुळे मला आता जास्त भूक नाही आहे.मी आता फक्त तुमचं दूध पितो.मला नाश्ता नको." तेव्हा मावशी म्हणाली,"काय?,मी काल रात्री तुला कुठे दूध पाजलं?मी तर थकल्यामुळे झोपून गेली होती.तू खरंच रात्री माझं दूध पिले का?" मी सुजाता मावशीला म्हणालो,"हो ना मावशी,कल रात्री तुम्हीच तर माझ्याजवळ झोपल्या आणि मला स्वतः दूध पाजले. काल रात्री तुमचे दूध जास्त छान लागत होते .म्हणून मी तुमचं सगळं दूध संपवले." तेव्हा मावशी विचार करू लागल्या.मी त्यांना हटकले तेव्हा त्या भानावर येत म्हणाल्या,"बाळा ,मी काल जास्त थकली असल्याने मला रात्रीचं एवढं आठवत नाही आहे.जाऊ दे तू पटकन दूध पी." मी मग मावशीचे स्तन चोखुन त्यातून दूध पिऊन संपवले. दुपारी मग लग्न झाल्यावर आम्ही रूम मध्ये आलो.रूम मध्ये आल्यावर मावशी आम्हाला म्हणाली,"बाळांनो,झोपून घ्या आता .रात्रीं आपल्याला परत आपल्या गावी जायचे आहे."मीं आणि सोनू झोपून गेलो.आता सुजाता मावशी थोड्या वेळाने आम्ही झोपलो याची खात्री करून आशा काकू ला बोलली,"आशा ,तू हे चांगलं नाही केलं?" आशा म्हणाली,"मी काय केलं ग" सुजाता मावशी,"तू काल रात्री काय केलं हे मला माहीत आहे." तेव्हा आशा काकू बोलली,"मग काय झालं त्यात?" सुजाता मावशी,"तू काल रात्री सूरजला तुझे दूध का पाजलं?" मी मावशीचे हे बोलणे ऐकून शॉक झालो. तेव्हा आशा काकू बोलली,"सॉरी ग सुजाता ,काल रात्री पायऱ्यांवर जेव्हा तू सूरजला रात्री दूध पाजेल असं सांगत होती तेव्हा मी ते ऐकले.म्हणून मी रत्रिंतुझ्या आधी घरात येऊन सूरज जवळ झोपले.मलापण तुझ्यासारख सूरजला दूध पाजण्याची इच्छा होत होती.सूरज खरंच खूप छान स्तन चोखतो.त्याने रात्री मला तू समजुन माझे सगळे स्तन चोखुन त्यातले दूध संपवले.मला त्यामुळे खूप खूप आराम मिळाला." सुजाता मावशी," अगं,तो बिचारा खूप भोळा आणि निरागस आहे गं.तू त्याच्या निरागस पणाचा फायदा घेतला." तेव्हा आशा काकू बोलली,"अग,तो पण माझ्यासाठी मुलासारखा च आहे.काय झालं त्याने तुझे दूध पिले तर.सोड आता हा विषय." मग त्या दोघी त्यांच्या बॅग भरू लागल्या.मला आता खूप आनंद झाला , कारण काल रात्री मी आशा काकुचे स्तन चोखुन दूध पिले होते.मग रात्री 8 ला आम्ही सोलापूरला परत आलो.सोलापूर ला रात्री 10 च्या नंदुरबार ट्रॅव्हल्स मध्ये आम्ही झोपलो.मावशीने या वेळी परत कोच चा पडदा लाऊन घेतला.तरी 11 ला मावशीने मला चालत्या ट्रॅव्हल बस मध्ये त्यांचे दूध पाजले.मी रात्री त्यांचे स्तन चोखून रिकामे केले.सकाळी आम्ही परत मावशीच्या गाव बारीपाडा ला आलो.घरी आल्यावर मावशीने माझ्यासमोर आंघोळ केली.मग मावशी मला आणि सोनू ला घेऊन विहिरीवर कपडे धुवायला घेऊन गेल्या.तिथे सगळ्या लोकांसमोर मावशीने माझे आणि सोनुचे कपडे काढून आम्हाला नागडं केलं.आता मावशी आमचे कपडे धुवत होत्या.आणि इकडे मी सोनुसोबत नागडा विहिरीजवळ फिरत होतो.मग मावशीने आम्हाला आवाज दिला.आम्ही मावशी जवळ आल्यावर मावशीने पहिले सोनूला आंघोळ घातली तो पर्यंत मी तिथे नागडा फिरू लागलो.तेथील स्त्रिया मला नागड्या बघत होत्या पण त्यांना त्याचे काहीच वाटत नव्हते पण मला खूप छान वाटत होतं. सोनुची आंघोळ झाल्यावर मावशीने मला तिथेच आंघोळ घातली.आंघोळ झाल्यावर आम्ही तसेच नागडं मावशी सोबत घराकडे नागडं आलो.घरी आल्यावर आता मी रोज मावशीच्या चहात दूध वाढीच्या 2 गोळ्या टाकायचो.त्यामुळे सुजाता मावशीच्या स्तनात दुध बनत राहिले.मावशीच्या घरी मी महिनाभर नागडा राहिलो.मावशी मला रोज दिवसातून 3 वेळा सोनू झोपलेला असताना दूध पाजायची.मावशीच्या स्तन मधून पौष्टीक दूध पिल्या मुळे माझी तब्येत पण थोडी सुधारली.मग शेवटी मी मावशीच्या चहात सलग 3 दिवस दूध बंद होण्याच्या गोळ्या टाकल्या.त्यामुळे 3 - 4 दिवसानंतर मावशीच्या स्तनात दुध येणे कमी झाले.8 व्या दिवसापासून मावशीच्या स्तनात दुध येणे पूर्णपणे बंद झाले .तरीपण मावशी दुपारी आणि रात्री झोपताना मला त्यांचे स्तन तोंडात घेऊन चोखायला द्यायच्या.मी अजून 5 दिवस त्यांचेकडे नागडा राहिलो.पुढच्या दिवशी माझे आई बाबा मला घ्यायला आले.मी मावशीला आणि सोनूला गुड बाय केले तेव्हा मावशी मला म्हणाली,"बाळा ,परत सुट्ट्या लागल्या की नक्की ये माझ्याकडे." मी मावशीला हो म्हणालो आणि परत माझ्या घरी नंदुरबार ला आलो.समाप्त.

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