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मेरा नाम
Sex Stories

यह मेरी पहली कहानी है। मैं Sex Stories अपने जीवन की उस घटना के बारे में बता रही हूँ जिसे मैंने आज तक किसी को नहीं बताया। आज मैं एक शादीशुदा स्त्री हूँ और अपने पति के साथ रहती हूँ। लेकिन अपनी पहली चुदाई को आज तक नहीं भुला पाई हूँ जो कि मेरे भाई के साथ थी।

बात उस समय की है जब मैं बी.ए. प्रथम वर्ष में पढ़ती थी। मेरी उम्र 18 साल थी। मुझे चुदाई के बारे में ज्यादा नहीं पता था, बस इतना जानती थी कि लड़का और लड़की कुछ करते हैं जिसमे बहुत मज़ा आता है। यहाँ तक कि मैंने किसी लड़के का लंड भी नहीं देखा था।

इस उम्र में चुदाई के लिए तड़पना एक सामान्य बात थी तो मैं भी तड़पती थी लेकिन घर की बंदिशों के कारण कोई ब्वॉयफ्रेंड नहीं था इसलिए मैं अभी तक कुँवारी थी। मैंने यह कभी भी नहीं सोचा था, मेरी पहली चुदाई मेरे बड़े भाई (बुआजी के लड़के) के साथ होगी। मेरे घर में मेरे अलावा मेरी माँ, मेरा एक छोटा भाई है।

अब मैं सीधे अपनी कहानी पर आती हूँ, हुआ यूँ कि मेरी नानी की तबियत अचानक ख़राब हो गई जो कि शहर से लगभग पचास किलोमीटर दूर एक गाँव में रहती थीं।

शाम के 7 बज रहे थे मम्मी को वहाँ जाना था लेकिन मम्मी को मेरी चिन्ता हो रही थी कि मुझे घर में अकेला कैसे छोड़े, क्योंकि सुबह मेरी एक विषय की परीक्षा थी। मम्मी सोचने लगी किसको मेरे साथ छोड़ कर जाए?

उन्होंने सबसे पहले चाचाजी को फ़ोन लगाया लेकिन चाचाजी उस समय शहर से बाहर थे और सुबह से पहले वापस नहीं आ सकते थे तब उन्होंने मेरे भैया (बुआ जी के लड़के) को फ़ोन लगाया जो कि शहर में ही दुकान करते थे।

मम्मी ने उनको सारी बात बताई तो वो आने के लिए तैयार हो गए। मेरी चिन्ता समाप्त होने के बाद मम्मी मुझे जरुरी हिदायत देकर मेरे छोटे भाई के साथ चली गई।

रात के 9 बज गए, मैं भैया का इंतज़ार कर रही थी। सर्दियों का समय होने के कारण रात जल्दी गहरा गई। चारो तरफ़ एकांत महसूस कर मुझे डर लगने लगा। मैंने भैया को फ़ोन लगाया और कहा- जल्दी आओ !

मुझे डर लग रहा है। भैया ने मुझे 10 मिनट का कहकर फ़ोन रख दिया। मैं उनका इंतज़ार कर ही रही थी कि अचानक लाइट चली गई। अब मुझे और डर लगने लगा। मैं भगवान से प्रार्थना कर रही थी कि भैया जल्दी आएँ, २० मिनट और गुजर गए लेकिन भैया नहीं आए। अब मैं रोने लगी। तभी दरवाजे से भैया की आवाज़ आई मैं जल्दी से उठी और दरवाजा खोलते ही भैया से लिपट के रोने लगी।

भैया ने कहा- क्या बात है क्यों रो रही हो?

मैंने कहा- सुनील भैया आपने आने में देर क्यों कर दी मेरा तो डर के मारे बुरा हाल था।

उन्होंने कहा दुकान पर थोड़ा काम था इसलिए देर हो गई। अब मैं आ गया हूँ अब डरने की कोई ज़रूरत नहीं।

सुनील भैया मुझसे उम्र में 5 साल बड़े थे लेकिन बचपन से ही साथ-साथ रहे थे इसलिए काफी हद तक दोस्त थे। उनके आने के बाद मैंने उनको खाना खिलाया और खाना खाने के बाद भैया हॉल में जाकर टी.वी. देखने लगे। मैं अपना काम निपटाकर उनके पास आकर पढ़ने लगी। उस समय तक मेरे मन बिल्कुल ख्याल नहीं था कि मैं भैया से चुदवाऊँ।

रात के 11:30 बज चुके थे। भैया अभी तक टी.वी. देख रहे थे। मुझे नींद आने लगी थी इसलिए मैं कपड़े बदलने के लिए दूसरे कमरे में चली गई। कमरे का बल्ब फ्यूज़ होने के कारण कमरे में अँधेरा था। मोमबत्ती की रोशनी में मैंने अपनी नाईटी उठाई और कपड़े बदलने लगी।

मैंने सबसे पहले अपनी कमीज़ उतारी और उसके बाद ब्रा क्योंकि मुझे रात में ब्रा पहनकर सोने की आदत नहीं थी। मैंने अपनी सलवार का नाड़ा खोला ही था कि अचानक एक चूहा कहीं से फुदकता हुआ मेरे ऊपर आ गया और मेरी चीख निकल गई।

मेरी चीख सुनकर भैया तुरन्त मेरे कमरे में आए। मुझे कुछ नहीं सूझा और डर के मारे चूहा-चूहा कहते हुए उनसे चिपक गई।
मुझे इतना भी होश नहीं रहा कि इस समय मैं सिर्फ़ पैंटी में थी।

मेरे नंगे जिस्म का एहसास जब भैया को हुआ तो उनका लंड खड़ा हो गया जिसका एहसास मुझे मेरी कमर पर होने लगा। मैं एकदम उनसे अलग हुई और उनसे जाने को कहा। लेकिन भैया एकटक होकर देखते रहे। मोमबत्ती की मद्धिम रोशनी में उनको मेरे जिस्म के स्पष्ट दर्शन हो रहे थे। उनकी आँखों में वासना उतरती नज़र आने लगी।

उनके इस तरह देखने से मेरा जिस्म भी गरम होने लगा और मैं मन ही मन अपनी चुदाई के सपने देखने लगी। मैं नज़रें नीची कर ख्यालों में उनके लंड को अपनी चूत में महसूस करने लगी। इतना सोचने से ही मुझे महसूस हुआ कि मेरी पैंटी गीली हो चुकी है। मैंने नज़र उठाकर भइया कि तरफ़ देखा तो चौंक गई। वो जा चुके थे और मेरी चुदाई के सपने पल भर में टूट चुके थे।

रात के 12:00 बज चुके थे। मैं अपने बिस्तर पर लेटी हुई थी लेकिन अब मुझे नींद नहीं आ रही थी। भइया अभी भी हॉल में टी.वी. देख रहे थे। मेरा जिस्म अभी भी गरम था और चुदाई के पहले एहसास ने मेरे रोम-रोम में सेक्स भर दिया था। मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ?

यही सोचते-सोचते कब मेरा हाथ मेरी पैंटी में चला गया पता ही नहीं चला। अब मेरी उँगलियाँ मेरी चूत के साथ खेल रहीं थीं।

मैं अपनी उँगलियों से चुदाई करके अपने आपको संतुष्ट करने लगी। लेकिन उँगलियों से मुझे कुछ खास मज़ा नहीं आ रहा था इसलिए मैं किसी मोटी चीज़ की तलाश में अपने बिस्तर से उठी। मैंने मोमबत्ती के पैकेट में से एक नई मोमबत्ती ली और अपने रूम में आ गई। रूम में अभी भी मोमबत्ती जल रही थी।

मैंने अपनी पैंटी उतार कर फेंक दी, अब मैं सिर्फ़ नाईटी पहने थी उसके नीचे ना तो ब्रा थी ना ही पैंटी। मैंने अपनी एक टांग टेबल पर रखी और दीवार के सहारे स्थिति बनाकर अपनी नाईटी ऊपर कर मोमबत्ती को अपनी चूत में डालने लगी।

मोमबत्ती काफी मोटी थी और मेरी चूत बिल्कुल कुंवारी थी इसलिए मोमबत्ती अन्दर नहीं जा रही थी। लेकिन मेरे ऊपर तो चुदाई का भूत सवार था सो मोमबत्ती को जबरदस्ती अपनी चूत में पेल दिया।

मोमबत्ती के अन्दर जाने से मुझे काफी दर्द हुआ और मेरे ना चाहते हुए भी एक घुटी सी चीख मेरे मुंह से निकल गई। दो मिनट तक मोमबत्ती को अपनी चूत में डाले मैं वैसे ही खड़ी रही। फिर मैंने मोमबत्ती को अन्दर-बाहर करना शुरू किया। अह्ह्ह … उह्ह्ह… मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं, मुझे मोमबत्ती से चुदाई करने में मज़ा आने लगा।

मैं कल्पनाओं में खोई हुई मोमबत्ती को सुनील भइया का लंड समझने लगी और बड़बड़ाने लगी ‘हाँ… सुनील भइया, जोर से डालो अपना लंड, आज मेरी प्यास बुझा दो, जाने कितने दिनों से प्यासी है मेरी चूत आज इसको जी भर के चोदो और अपने लंड की ताकत से इसके दो टुकड़े कर दो, फाड़ दो, हाँ… फाड़ दो… मेरी चूत को … अह्ह्ह … उम्म्ह्ह्ह… मेरी सिसकारियाँ तेज़ होती जा रही थीं।

अब मुझे मोमबत्ती से चुदाई करने में अत्यन्त मज़ा आ रहा था। मेरा हाथ तेज़ गति से मोमबत्ती को मेरी चूत में पेल रहा था। मैं मदमस्त होकर पूरा आनंद ले रही थी। मैं अपने चरम पर पहुँच चुकी थी। मेरे शरीर से पसीना आने लगा था और मेरी टाँगे काँपने लगी थीं। मेरा इस स्थिति में खड़ा होना मुश्किल हो रहा था लेकिन मुझे इस स्थिति में बहुत मज़ा आ रहा था इसलिए मैं अपनी स्थिति बदलना नहीं चाह रही थी।

मेरा हाथ मुझे पूरी तरह से संतुष्ट करने के लिए बहुत तेज़ गति से चलने लगा। आह्ह्ह…. उह्ह्हह … उम्महह…. और आखिरकार वो पल आ ही गया, मेरा शरीर पूरी तरह जकड़ने लगा, अब मैं फर्श पर गिर पड़ी, अपनी दोनों टाँगे फैलाकर मोमबत्ती को फिर से डालने लगी और एक तेज़ आह्ह्ह के साथ मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया जो फर्श पर फैल गया। अब मैं शांत हो चुकी थी, मेरी चूत की प्यास काफी हद तक बुझ चुकी थी। लेकिन मेरी असली चुदाई तो अभी बाकी थी।

सुनील भइया दरवाज़े पर खड़े थे। उनको देखकर मेरे होश उड़ गए।

मैं फर्श से उठकर खड़ी हो गई और भइया को देखने लगी। भइया रूम में अन्दर आ गए और उन्होंने अपनी टी-शर्ट व हाफ-पैंट उतार दिया, अब वो सिर्फ़ अपनी फ्रेंची चड्डी में मेरे सामने थे जिसमे उनका तना हुआ लंड साफ़ दिखाई दे रहा था। वो पास आए और अपनी चड्डी में से अपना लंड निकालकर मेरे हाथ में रखकर बोले, “आयुषी, जरा चेक करो ये मोमबत्ती से मोटा है या नहीं?”

उनके लंड को देखकर मेरी आँखें फटी की फटी रह गई। लंड वाकई में बहुत मोटा था और उसका सुपाड़ा तो कुछ ज्यादा ही मोटा था।

मैंने भइया से पूछा, “भइया, लंड इतना मोटा होता है?”
भइया ने कहा, “नहीं, आयुषी हर किसी का इतना मोटा नहीं होता है।”
मैंने फिर भइया से पूछा, “इसका, सुपाड़ा इतना मोटा है, ये चूत में अन्दर कैसे जाता होगा?”
भइया ने कहा, “अभी थोड़ी देर में पता चल जाएगा, ये अन्दर कैसे जाता है।”

और भइया ने इतना कहकर अपनी चड्डी उतार दी अब वो मेरे सामने बिल्कुल नंगे थे। उनका लंड किसी लोहे की रोड की तरह तना हुआ खड़ा था। मेरी नज़र उससे हट ही नहीं रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे मैं कोई अजूबा देख रही हूँ और क्यूँ ना लगे, लंड पहली बार जो देख रही थी। खामोशी को तोड़ते हुए भइया ने मुझे घुटनों पर बैठने को कहा और मैं बैठ गई।

फ़िर भइया मेरे पास आए और अपने लंड को मेरे होठों से लगाते हुए बोले, “इसे अपने मुंह में डालो।”
मैंने कहा, “नहीं, भइया ये बहुत मोटा है मेरे मुँह में नहीं जाएगा।”
भइया को अब थोड़ा गुस्सा आ गया और गुस्से में बोले, “मुँह में लेती है या सीधा तेरी चूत में डालूँ?”
मैंने कहा, “नहीं भइया चूत में नहीं, वो फट जायेगी, मैं मुँह में लेती हूँ।”

ऐसा कहकर मैंने उनका लंड अपने मुँह में लिया। लंड का सुपाडा बड़ा होने के कारण मुँह में फँस रहा था और मैं लंड को मुँह में लिए उसे चूस नहीं पा रही थी लेकिन भइया के इरादे कुछ और थे उन्होंने मेरे बाल पकड़े और मेरे मुँह में धक्के देने लगे।

मैं कुछ नहीं बोल पा रही थी और मेरी आँखों से आँसू निकलने लगे थे। भइया पूरी तरह से वहशी हो गए थे और मेरे बालों को खीचते हुए मेरी मुँह को चूत समझकर चोदने लगे थे।

मेरी हालत बहुत ख़राब हो रही थी और आँसू भी लगातार बह रहे थे लेकिन भइया के धक्के लगातार तेज़ हो रहे थे। वो मेरे बालों को इस तरह खींच रहे थे जैसे मैं उनकी बहन नहीं कोई रण्डी हूँ। भइया का मुँह लाल पड़ गया था और उनके मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थीं।

मैं अपनी हालत से सचमुच में रोने लगी थी लेकिन उनको मेरे ऊपर जरा भी तरस नहीं आ रहा था। वो तो किसी जानवर की तरह मेरे मुंह को चोदते जा रहे थे, कभी वो मेरे बाल खींचते तो कभी मेरे गाल पर चपत लगाते, वो इतने वहशी हो गए थे कि मुझे उनसे डर लगने लगा था।

मैं मन ही मन भगवान से प्रार्थना कर रही थी, मुझे बचा लो। और भगवान ने मेरी सुन ली, भइया शायद झड़ने वाले थे इसीलिए उन्होंने अपना लंड मेरे मुँह से बाहर निकाल लिया। मैंने एक गहरी साँस ली और सिर पकड़कर बैठ गई। भइया बोले, “आयुषी ज़रा अपनी जीभ से मेरे लंड को चाटकर इसका पानी निकाल दो।”

मैंने भइया के लंड की तरफ़ देखा वो अब भी तना हुआ खड़ा था, उनके लंड को देखकर मेरा शरीर गरमा गया, मैं घुटनों पर चलती हुई भइया के लंड के पास पहुँची और उसे हाथ में लेकर जीभ से चाटने लगी। मेरे चाटने से भइया की सिसकारियाँ निकलने लगीं और वो बोलने लगे, “शाबाश, मेरी प्यारी बहना ! चाट और चाट, अभी रसमलाई निकलेगी उसे भी चाटना।”

इतना कहकर भइया ने एक जोर की अह्ह्ह्ह… के साथ वीर्य मेरे मुंह पर छोड़ना शुरू कर दिया, मेरा मुंह पूरी तरह से उनके वीर्य से नहा गया, कुछ मेरे होठों पर भी रह गया जिसे मैंने जीभ से चाट लिया और उसके बाद भइया के लंड को भी चाटकर साफ़ कर दिया।

भइया ने मुझे खड़ा किया और तौलिए से मेरा मुंह साफ़ कर होठों से होंठ मिलाकर चूमना शुरू कर दिया। पांच मिनट के उस किस ने मेरे सेक्स को चरम पर पंहुचा दिया और मेरी चूत लंड खाने के लिए बेकरार होने लगी। भइया शायद इस बात को समझ गए थे इसलिए उन्होंने किस करते हुए ही मेरी नाईटी उठाकर अपना एक हाथ मेरी चूत पर ले गए और उसे सहलाने लगे।

मेरी बेकरारी भइया का स्पर्श अपनी चूत पर पाकर और बढ़ गई और मैं भइया से कहने लगी, “भइया, अब और सहन नहीं होता है, मेरी चूत में अपना लंड डालो प्लीज़ मुझे चोदो और बताओ चुदाई क्या है?”

भइया बोले, “आयुषी, चिंता मत करो पूरी रात अपनी है आज मैं तुझे वो मज़ा दूँगा जिसे तू जिंदगी भर याद रखेगी।”

ऐसा कहकर भइया ने अपनी एक उँगली मेरी चूत में डाल दी। मैं उनकी उँगली को चूत में पाकर कसमसा गई और सिसकारियाँ लेने लगी। भइया अपनी उँगली को मेरी चूत में अन्दर बाहर करने लगे उन्हें शायद मेरी नाईटी से दिक्कत हो रही थी इसलिए उन्होंने चूत में उँगली डालते हुए ही मुझसे नाईटी को उतारने के लिए कहा और मैंने किसी आज्ञाकारी बच्चे की तरह उनकी बात मानकर अपनी नाईटी को सिर के ऊपर से उतारकर फ़ेंक दिया।

भइया की उँगली मुझे पूरा आनंद दे रही थी और मैं सिसकारियाँ लेकर मज़ा ले रही थी। मुझे मज़ा लेते देख भइया ने अपनी दूसरी ऊँगली भी मेरी चूत में डाल दी। और स्पीड से अन्दर बाहर करने लगे साथ ही अपने अंगूठे से मेरी चूत के ऊपरी हिस्से को रगड़ने लगे।

उनकी उँगलियाँ भी मुझे इतना मज़ा दे रही थी कि मुझे जन्नत का अनुभव हो रहा था, मुझे लग रहा था कि मैं आसमान में कहीं उड़ रही हूँ। भइया की उँगली-चुदाई ने मुझे एक बार फिर झड़ने के लिए मजबूर कर दिया, मेरी चूत ने अपना पानी छोड़ दिया और मैं एक बार फिर निढाल होकर फर्श पर गिरने लगी लेकिन इस बार भइया ने मुझे अपनी बाँहों में थाम लिया।

भइया ने मुझे उठाकर बेड पर लिटा दिया और मुझे चूमने लगे, भइया का एक हाथ अभी भी मेरी चूत को सहला रहा था। उनका ध्यान पहली बार मेरे वक्षस्थल पर गया उन्होंने अपना मुँह मेरे 34 साइज़ की चूचियों पर रख दिया और बुरी तरह से मेरी घुंडियों को चूसने लगे, उनका हाथ बराबर मेरी चूत को सहला रहा था।

भइया काफी एक्सपर्ट थे वो अच्छी तरह जानते थे कि लड़की को कैसे गरम किया जाता है वो ये सब मुझे फिर से गरम करने के लिए कर रहे थे और वो इसमे सफल भी हो रहे थे क्योंकि धीरे-धीरे मेरे अन्दर सेक्स फिर से जागने लगा था।

वो मेरी चूचियों को छोड़कर मेरी कमर पर आ गए, नाभि के आस-पास चुम्बन देते हुए वो सीधे मेरी चूत पर पहुँच गए और उन्होंने अपने होंठ मेरी चूत के होंठो पर रख दिए। उनके होठों का एहसास पाकर मेरे मुंह से सिसकारी निकल पड़ी, भइया ने मेरी चूत चाटना शुरू कर दिया।

हाय… मैं क्या बताऊँ आपको उस समय मुझे ऐसा लगा मानो स्वयं कामदेवता मेरी चूत को चाट रहे थे और मेरी नस-नस में सुधा भर रहे थे, मेरी चूत के होंठ सेक्स की प्रबलता से हिलने लगे थे, मैं भइया से लगभग भीख माँगते हुए बोली,” प्लीज़ भइया अपना लंड डालो नहीं तो मैं मर जाउँगी।”

भइया ने मुझसे कहा, “बस मेरी जान अब तुझे और इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा।”

ऐसा कहकर उन्होंने मेरी दोनों टाँगे उठाकर अपने कंधे पर रखा और अपने लंड का सुपाडा मेरी चूत पर रगड़ने लगे, लंड को अपनी चूत पर पाकर मैं तड़प उठी और भइया से गाली देती हुई बोली,” बहनचोद क्यों तड़पा रहा है, डालता क्यों नहीं?”

मेरी बात सुनकर भइया ने जोश में एक जोरदार धक्का दिया और उनका आधा लंड मेरी चूत चला गया। मैं दर्द के मारे छटपटाते हुए भइया से लंड को बाहर निकालने के लिए बोलने लगी तो भइया ने जोरदार चांटा मेरे गाल पर रसीद कर दिया और बोले, “साली, घंटे भर से चिल्ला रही थी डालो-२ ! अब डाल दिया तो चूत फट गई।”

एक और जोरदार धक्के के साथ भइया ने अपना पूरा लंड मेरी चूत में पेल दिया। मैं बुरी तरह से हाथ-पैर पटक कर भइया की कैद से छूटने की कोशिश करने लगी और चिल्लाने लगी, “भइया, प्लीज़ मैं मर जाउँगी, मेरी चूत फट जाएगी अपना लंड बाहर निकालो।”

लेकिन भइया ने मेरी अनसुनी करते हुए एक और तेज़ धक्का दिया तो मेरे मुंह से चीख निकल गई। मेरी चीख सुनकर भइया ने मेरा मुँह अपने एक हाथ से बंद कर दिया और धक्के देने शुरू कर दिए।

5 मिनट तक भइया के जोरदार धक्के सहने के बाद मुझे मज़ा आने लगा और मेरे मुँह की चीखें कामुक सिसकारियों में बदलने लगीं।

अब मैं भइया को अपनी कमर उचका कर सहयोग करने लगी, भइया के धक्के लगातार तेज़ होते जा रहे थे और मेरी सिसकारियाँ और कामुक होती जा रहीं थीं। दस मिनट के बाद मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया लेकिन भइया अभी भी नहीं झड़े थे और धक्के मार-मार कर मेरी चूत का पूरा आनंद ले रहे थे।

चुदाई क्या होती है, चुदते समय मुझे मालूम हो गया, जितना मज़ा चुदाई में है उतना किसी और चीज़ में नहीं। भइया के धक्कों की रफ़्तार शताब्दी एक्सप्रेस को भी मात कर रही थी और मैं कामुक अंदाज़ में भइया के लंड की तारीफ़ कर रही थी। “भइया, तुम्हारे लंड में बहुत दम है, मोमबत्ती का मज़ा इसके सामने कुछ नहीं, प्लीज़ भइया आज मुझे जी भर चोदो, मेरी चूत की प्यास को ठंडा कर दो।”

भइया ने मेरी बात का जवाब मुंह से ना देते हुए अपने लंड से दिया, धक्कों की गति को दोगुना करते हुए भइया ने मेरी रेल बना दी, कुछ देर के बाद मुझे महसूस हुआ की मेरी चूत में कुछ गरम-गरम गिर रहा है, मैं समझ गई कि यह भइया का वीर्य है और उनके साथ मेरी चूत ने भी एक बार फिर पानी छोड़ दिया और इस तरह मेरी पहली चुदाई पूरी हुई।

भइया मेरी चूत में ही लंड डाले हुए मेरे ऊपर लेट गए। कुछ देर आराम करने के बाद मैंने किचन में जाकर चाय बनाई और हम दोनों बैठकर चाय पी, इस दौरान हम दोनों पूरी तरह से नंगे ही रहे। रात के ३ बजने के बाद मैंने भइया से सोने के लिए कहा तो भइया ने एक बार फिर चुदाई करने की इच्छा ज़ाहिर की। मैं भी राजी हो गई और भइया ने इस बार मुझे फर्श पर कुतिया बनाकर चोदा उसके बाद हम दोनों नंगे ही सो गए।

सुबह 6 बजे उठकर मैं जल्दी-जल्दी तैयार हुई और पौने सात बजे भइया को उठाया तो मुझे काली टॉप और काली लॉन्ग स्कर्ट में देखकर भइया का लंड एक बार फिर खड़ा हो गया और उन्होंने केवल मेरी पैंटी उतारकर किचन में दीवार के सहारे ही चोद डाला।

भइया ने मुझे परीक्षा-केन्द्र पर छोड़ा और परीक्षा देकर जब मैं लौटी तो मम्मी आ चुकी थी। इसके बाद आज तक मुझे कभी मौका नहीं मिला कि मैं भइया से चुदाऊँ हालाँकि आज मेरी शादी हो चुकी है तो मेरी चुदाई हर रात होती है लेकिन भइया के लंड के लिए मैं आज भी बेकरार हूँ। Sex Stories

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दोस्तो ! सबसे पहले गुरु जी Hindi Sex Stories को कोटि-कोटि प्रणाम, जिनकी दया दृष्टि से मुझ जैसे नाचीज़ की चुदाई के किस्से अन्तर्वासना में छपे और मुझे लोगों का इतना प्यार प्राप्त हुआ ! चैट पर मुझे कई लौड़ों ने संपर्क किया और मुझे से कई प्रश्न पूछे गए ! सो दोस्तों और सभी पाठकों को मेरी तरफ से बहुत-बहुत प्यार ! सभी कह रहे हैं,”सनी यार ! अपनी किसी और चुदाई के बारे लिखो !” मुझे पाठकों को निराश नहीं करना है क्यूंकि मैं गांड तो खूब मरवाता हूँ लेकिन हर किस्सा तो नहीं बताया जा सकता ! फिर भी मैं आपको नवीनतम चुदाई के बारे में अब बताने जा रहा हूँ !

मुझे शिक्षा बोर्ड में किसी काम से अपने नाम को दरुस्त करवाने जाना पड़ा ! मुझे अपना काम निपटाते हुए मोहाली में ही शाम के पांच बज गए ! मैं बस स्टैंड पहुंचा तो कुछ राहत मिली कि रात्रि सेवा के तहत रात की सर्विस थी ! मैंने विडियो कोच का टिकेट लिया और बस में बैठ गया ! वहां से बस पूरी भर कर चली ! मैंने टू सीटर सीट ली! मेरे साथ एक अच्छा खासा मर्द बैठा ! मेरी नज़र बार बार उस पे जा रही थी, उसके लौड़े वाले स्थान पर !

थोडा अँधेरा सा हुआ ! मैं बहुत चिकना हूँ और मुझे वो मर्द बहुत पसंद आया ! अब उसने भी नोट किया कि मेरी निगाहें उसके फूले हुए हिस्से पर जा रुकती हैं ! अब मुझे लगा कि वक़्त आ गया है अपना जाल बिछाने का !

मैंने कहा,”आप कहाँ जा रहे हो? क्या करते हो?”

ऐसे ही उसने भी मुझ से कुछ सवाल पूछें ! मेरे बोलने का स्टाइल और चेहरा वो पढ़ रहा था ! जैसे ही बस नवां शहर पहुंची, काफी बस खाली हो गई और इस बस में रास्ते की सवारी नहीं लेते थे ! मैंने देखा कि अब सामने वाली सीट खाली है ! किसी की नज़र अब मेरे पर नहीं पड़ने वाली ! मैंने उसके साथ फिर से बातें करनी शुरू की ! अब बाहर पूरा अँधेरा छा गया था ! इस बार मैंने कुछ और ही विषय चुना !

मैंने कहा,”आप बहुत हैण्डसम हो ! आपकी बीवी भाग्यशाली होगी !”

वो बोला,”अच्छा ???”

मैंने कहा,”बिलकुल !”

फिर मैंने अपना हाथ उसकी जांघ पर रखते हुए कहा,” और नहीं तो क्या ! इतनी बरदस्त बॉडी है, मजबूत जांघें हैं ! और क्या चाहिए किसी को ?”

वो कुछ नहीं बोला ! मैंने अपना हाथ उसके फूले हुए स्थान पर रखते हुए कहा,”आपका तो यह भी बहुत कड़क लगता है ! और क्या चाहिए किसी को ??”

मैंने पैंट के ऊपर से ही उसको सहलाना शुरू किया ! अब उसने अपना हाथ मेरे गले में डाल दिया ! मैंने अब आराम से उसके लौड़े को सहलाते हुए पूछा,” कैसा लग रहा है?”

उसने कहा,”बहुत अच्छा !”

मैंने उसकी जिप खोल कर अपना हाथ अन्दर डाल दिया और लौड़े के सर पर हाथ फेरते हुए जड़ तक उसका मुआयना किया ! मैंने कहा,”बहुत सॉलिड पीस है आपका ! “

उसने पूछा,”अच्छा लगा ?”

मैंने कहा,” बहुत अच्छा ! “

हम आगे बढ़ने लगे, तभी लुधियाना आ गया ! बस रुकी और कंडक्टर ने सबको कहा,” अगर किसी ने खाना वगैरा खाना है तो खा लो ! बस ३० मिनट रुकेगी ! “

सभी यात्री उतर गए ! न वो उठा न मैं ! अचानक वो सबसे पिछली सीट पे जाने के लिए उठा ! बोला,”यह पैसे पकड़ और नीचे से कोल्ड ड्रिंक के साथ प्लास्टिक ग्लास ले कर आ !”

उसके पास विस्की का पौवा था ! ज्यादा लोग नहीं थे बस में ! उसने दो पैग डाले और दोनों ने डकार लिए ! मैंने अब दिल खोल कर उसके पप्पू को निकाला और देखता रह गया ! सांवला लौड़ा मेरी कमजोरी है ! मैंने लौड़े को सहलाते हुए चेहरा झुकाया और चूसने लगा ! वो मस्त होने लगा ! तभी सीटी की आवाज़ सुन हम सीधे हो गए ! बस चल पड़ी ! सिर्फ दस के करीब सवारी बचीं थी ! उनमें से ४ तो शादीशुदा जोड़े थे ! सभी बैठ गए ! कंडक्टर आगे ड्राईवर के पास बैठ चुका था ! उसका काम अब ख़त्म था ! सभी जोड़े एक दूसरे से चिपक रहे थे ! हम अन्तिम सीट पे थे ! पूरी लम्बी की लम्बी सीट !

नशे के सरूर ने मुझे पागल कर दिया ! मैं घुटनों के बल बैठ गया और उसका लौड़ा निकाल कर चूसने लगा ! सफ़र की वजह से मैंने सिर्फ लोअर डाला था ! उसने मेरा लोअर नीचे खिसकाते हुए मेरी गांड पे हाथ फेरा तो मेरी प्यास बढ़ गई ! उसने अपनी ऊँगली गीली करके मेरी गांड में डाल दी और वो ऊँगली-बाज़ी करने लगा ! मैं उसका लौड़ा चूसने लगा ! इतने में जालंधर आ गया !

वो बोला,”तू मेरे साथ चल ! मुझे तेरी गांड मारनी है !”

“लेकिन कहाँ ?” मैंने पूछा !

वो बोला,”यहीं पास ही मेरे दोस्त ने कमरा लिया हुआ है ! वो दिल्ली से यहाँ पढ़ने आया है ! अकेला रहता है, चलो चलते हैं !”

मैंने कहा,”ठीक है !”

हमने रिक्शा किया और पहुँच गए उसके दोस्त के घर ! बाहर रुक कर उसको मोबाइल किया और मेरे बारे में बताया ! उसका दोस्त भी बहुत हैण्डसम था ! मेरे साथ आया व्यक्ति बोला,”यह सनी है ! बस में इसके साथ दोस्ती हुई है और इसको खुश करना है !”

वो बोला,”ओह ! समझ गया दोस्त ! आ जाओ, घर में दारू पड़ी है !”

हमने दो दो पैग लगाये ! नशा आते ही मैं बेशर्म बन गया और उसका एक एक कपड़ा उतार दिया ! मैं उसका लौड़ा चूसने लगा ! दूसरे वाले ने मेरा लोअर खींच दिया और मेरा अंडरवियर नीचे खिसका कर मेरी गांड सहलाने लगा ! पहले वाले ने खींच कर मेरी शर्ट उतार दी ! मेरे लड़की जैसे मम्मे देख दोनों दंग रह गए ! वो सीधा लेट गया ! मैं उसके लौड़े पर बैठा हुआ उसको पूरा अंपनी गांड की गहराई तक पहुंचा लिया और खुद आगे पीछे हो चुदने लगा ! वो साथ में मेरा मम्मा मुँह में डाल कर चूस रहा था !

उसका दोस्त मेरे पास आया ! मैंने उसका लौड़ा निकाल लिया! क्या सॉलिड था वो भी ? गुलाबी लौड़ा ????? मेरे तो मुँह में पानी आ गया और मैंने झट से उसके लौड़े को चूसना चालू किया ! पहला वाला धनाधन मेरी गांड पे वार करने लगा ! मैं घोड़ी बन गया ! मैंने उनकी ओर अपनी गांड घुमाई! पहले वाले ने थूक लगा के अपना लौड़ा फिर से अन्दर डाल दिया ! उसका दोस्त मेरे सामने घुटनों के बल खड़ा अपना लौड़ा चुसवा रहा था ! दो-दो लौड़े देख कर मुझे सेक्स चढ़ने लगता !

वो बोले,” साले ! तू तो लड़की जैसा है ! कितना नाज़ुक और चिकना है तेरा बदन ?? ऊपर से यह मम्मे ? कोई १७ साल की लड़की जितने होंगे !”

“सालो ! दबवा -दबवा कर हुये हैं ! चोदो बस मुझे !” मैंने कहा !

“अभी ले साले ! दो लौड़े एक साथ डालेंगे तो फट जायेगी तेरी ! देखता जा बस ! ” उनमें से एक बोला !

वो गया और फ्रिज में से काफी मोटा खीरा ले कर आया ! उसने अपने दोस्त को दिया और पास में पड़ी बियर की बोतलें उठाई ! उसने अपना लौड़ा निकाला और पहले बियर की बोतलें घुसा दीं और मुझे उसी से चोदने लगा ! मैंने दोनों के लौड़े बारी-बारी चूस रहा था ! उसने बोतलें दूसरी तरफ रख कर खीरा मेरी गांड में घुसा दिया ! काफी मोटा था ! थोड़ा सा तेल लगा कर करीब ५ मिनट दोनों ने खीरे से मुझे चोदा ! देखते ही देखते मैंने पूरा खीरा अन्दर डलवा लिया !

एक दम से दोनों ने कंडोम अपने लौड़ों पर डाल लिए ! वो सीधा लेट गया और मैं उसके लौड़े पर बैठ गया ! पूरे का पूरा लौड़ा मेरी गांड में घुस गया ! साथ में उसने अपनी दो ऊँगली भी डाल ली ! पूरा घुसने पर उसने मुझे अपने साथ चिपका लिया ! अब पीछे से मेरी गांड चौड़ी हो गई ! दूसरा व्यक्ति मेरे पीछे बैठ गया और ऊँगली निकाल उसकी जगह अपना लौड़ा रखते ही दबाया ! दूसरे का लंड-मुंड भी मेरी गांड में घुस गया !

मेरी चीख निकल गई,”छोड़ दो, पलीज़……….! ” मैंने कहा,” एक- एक करके लो !”

किन्तु वो नहीं माना और आधे से ज्यादा लौड़ा मेरी गांड में घुसा कर रगड़ने लगा ! मेरा बुरा हाल था ! धीरे धीरे मुझे सुकून मिला और वो धक्के लगाने लगे !

एक बार दोनों ने मेरी गांड में दो लौड़े डाल कर दिखा दिया ! फिर एक ने निकाल लिया और दूसरे ने तेजी से गांड मारते हुए अपना माल कंडोम में छोड़ दिया ! दूसरा मेरे ऊपर चढ़ गया और उसने भी कुछ देर मेरी गांड फाड़ने के बाद एक दम कंडोम उतार दिया और पेल दिया ! तीनों हांफने लगे ! दोनों मुझे चूमा-चाटी करते रहे और मैं उनके लौड़े सहलाता रहा ! उन दोनों के लौड़े आधे घंटे में फिर से तन गए और फिर शुरू हुआ दूसरा राउंड !

दो-दो बार चोदने के बाद हम नंगे वहीं सो गए ! सुबह ११ बजे मेरी आंख खुली ! मैं झट से उठा लेकिन उसके दोस्त ने मेरी बाजू पकड़ कर रोक लिया ! बोला,”छोड़ ! कितनी गर्मी है बाहर ! कल सुबह-सुबह निकल जाना ! एक रात और रुक जा ! रात को तुझे और मजे दिलवाऊंगा अपने दो नए दोस्तों के साथ ! “

मुझे ग्रुप सेक्स का शौक था ! वो बोले,” पास में दो और गांडू रहते हैं ! साथ-साथ करेंगे ! “

मैं मान गया और फिर हम मिल कर नहाने लगे ! बाथरूम में फिर से ठुकाई हुई मेरी !!!

उसके बाद क्या हुआ रात को यह अगली बार लिखूंगा ! बाय !!! Hindi Sex Stories

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मैं आप लोगों को आज Hindi Sex Stories अपने जीवन की एक सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ।। मेरा नाम राहुल है और मैं एक बिज़नसमैन हूँ। मेरे घर में हम चार लोग हैं- पिताजी, माँ, मैं, और मेरी छोटी बहन !

बात आज से 4 साल पहले की है जब मैं बारहवीं कक्षा में था, मेरी बहन दसवीं में थी। मेरे पिताजी अक्सर घर देर से ही आते थे क्योंकि बिज़नस की वज़ह से उन्हें देर हो जाती थी और माँ ज्यादातर अपने घर के काम में या फिर टीवी देखने में व्यस्त रहती थी। मेरी बहन जिसका नाम रिया है अधिकतर पढ़ाई करती रहती थी।

मैंने कभी उसे गलत नज़र से नहीं देखा था। मगर एक दिन मैं अपने कंप्यूटर पर ब्लू फिल्म देख रहा था कि एकदम से रिया मेरे कमरे में आ गई मैंने उसको देखते ही कंप्यूटर बंद कर दिया मगर उसने सब देख लिया था लेकिन वो कुछ बोली नहीं। मैं उससे कुछ नहीं कह पाया, वो हिम्मत करके मेरे पास आई और बोली- भईया मुझे यह सवाल नहीं आ रहा, इसको हल करने में मेरी मदद करो। मैंने कहा- ठीक है !

लेकिन मैं उससे नज़रें नहीं मिला पा रहा था। मैंने उसका सवाल हल कर दिया। फिर वो जाने लगी तो मैंने उससे बोला- जो भी तुमने देखा है, वो किसी को मत बताना !

तो वो बोली- भईया, मैं किसी को नहीं बताउंगी पर यह सब अच्छी चीज़ नहीं हैं, आप मत देखा करो !

मैंने उससे कहा- ठीक है !

फिर वो चली गई लेकिन उस दिन मुझे उसे देख कर कुछ अजीब सा महसूस हुआ, मेरे दिल में उसके लिए गलत ख्याल आने लगे। मैं आपको बता दूँ कि रिया देखने में बहुत ही सेक्सी है। उसका फिगर 34-26-34 है, रंग हल्का साँवला है। जो भी उसको एक बार देख ले, उसका लंड अपने आप ही खड़ा हो जाए।

दो दिन बाद दोपहर के वक़्त माँ घर का काम निपटा कर सो रही थी और मैं अपने कमरे में पढ़ रहा था। इतने में रिया आई और बोली- भईया उठो, मुझे एक सवाल समझ नहीं आ रहा, मुझे समझा दो।

तो मैं उठ कर उसे सवाल समझने लगा। लेकिन आज उसके मेरे पास बैठने से मुझे कुछ-कुछ हो रहा था, उसकी खुशबू मेरी साँसों में भर रही थी। मैं सवाल पर ध्यान नहीं लगा पा रहा था कि इतने में वो बोली- भईया, क्या बात है ?

तो मैं बोला- मुझे बहुत नींद आ रही है इसलिए मैं यह सवाल नहीं कर पा रहा हूँ !

तो वो बोली- भईया, नींद तो मुझे भी आ रही है ! ऐसा करते है ख़ी कुछ देर के लिए सो जाते हैँ, बाद में सवाल कर लेंगे।

इतना कह कर वो आपने कमरे की तरफ जाने लगी तो मैंने उससे कहा- रिया, कहां जा रही है? यहीँ पर सो जा ! थोड़ी देर में तो उठ कर सवाल करना ही है।

तो वो बोली- ठीक है !

फिर वो मेरे बगल में आकर सो गई। मैं भी सोने का नाटक करने लगा। लेकिन नींद तो आ ही नहीं रही थी। थोड़ी देर ऐसे ही रहने के बाद मैंने आपना एक हाथ हिम्मत करके उसके चूचों पर रख दिया और कोई हरकत नहीं की ताकि उसको ऐसा लगे कि गलती से नींद में रखा गया हो।

थोड़ी ही देर में उसकी साँसें तेज चलने लगी। फिर मैंने हिम्मत करके उसकी टांग के बीच अपनी टांग फंसा दी। अब वो मेरी पकड़ में थी, उसकी साँसे बहुत तेज चल रही थी पर उसने अभी तक कोई विरोध नहीं किया तो मेरी हिम्मत बढ़ गई।

मैंने अपने हाथ से उसके चूचे मसलना चालू कर दिया, कुछ देर बाद वो बोली- भईया, यह क्या कर रहे हो?

तो मैंने उससे साफ़ साफ़ कह दिया- मैं तुझे प्यार करता हूँ और जब भी तू मेरे सामने आती है तो मैं अपने होश खो बैठता हूँ।

वो बोली- भईया, यह सब सही नहीं है ! अगर किसी को पता चल गया तो? और वैसे भी हम भाई-बहन हैं।

मैंने उससे कहा- किसी को पता नही चलेगा ! और भाई-बहन हैं लेकिन हैं तो लड़का-लड़की ! इतना तो सब में ही चलता है ! आखिर एक दिन तो तुम्हें किसी न किसी से चुदना ही है तो अपने भाई से ही क्यों नहीं !

इतना कह कर मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया और पैंटी के अन्दर हाथ डाल कर उसकी चूत सहलाने लगा। वो सिसकारियाँ लेने लगी और साथ में हल्का सा विरोध भी कर रही थी। तो मैंने उससे कहा- तुम मेरा साथ दो तो तुम्हें बहुत मज़ा आएगा और घर की बात घर में ही रहेगी।

तो उसने करवट ली और मेरे चेहरे के सामने अपना चेहरा ला दिया और बोली- ठीक है, लेकिन किसी को पता नहीं चलना चाहिए !

मैंने उससे कहा- तू फिक्र मत कर !

फिर उसने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और दस मिनट तक हम एक दूसरे के होंठ चूसते रहे। फिर उसके बाद मैंने उसका कुरता उतार दिया और फिर ब्रा भी उतार दी।

क्या क़यामत लग रहे थे उसके चूचे !

मैंने एक चूचे को मुँह में ले लिया और दूसरे को हाथ से मसल रहा था और उसकी सिसकारियाँ बढ़ती ही जा रही थी। फिर उसने मेरी पैंट खोल कर मेरा लंड पकड़ लिया और उसे अपने हाथ से दबाने लगी। मुझे लगा जैसे कि मैं जन्नत में पहुँच गया।

इतनी में मैंने उसकी जींस और पेंटी नीचे सरका दी। फिर उसने मेरी टी-शर्ट भी उतार दी। अब हम दोनों बिल्कुल नंगे एक दूसरे के बगल में लेटे थे। मैंने देर न करते हुए उसे अपनी बाहों में समेट लिया और कहा- मैं तुम्हारे बदन की गर्मी लेना चाहता हूँ, इसका अहसास लेना चाहता हूँ !

रिया बोली- केवल आप ही नहीं मैं भी यही चाहती हूँ !

उसका इतना कहना था कि मैं तो खुशी से पागल हो गया। फिर मैंने अपनी जीभ से उसका पूरा बदन चाटा, फिर मैं उसकी टांगों के बीच गया और उसकी गुलाबी पंखुड़ी वाली चूत मेरी आँखों के सामने थी। उसकी चूत में हल्के-हल्के बाल थे। मैंने जैसे ही अपनी जीभ उसकी चूत पर रखी, वो तो जैसे पागल ही हो उठी और उसके पूरे शरीर में एक करंट सा दौड़ गया।

वो बोली- भईया, मैं मर जाउंगी !

और मैंने उसकी चूत के अन्दर अपनी जीभ घुसा दी तो वो बोली- भईया, मुझे भी आपका लंड चूसना है !

तो हम 69 की मुद्रा में आ गए। अब हम दोनों 10 मिनट तक एक-दूसरे को ऐसे ही चूसते रहे और फिर हम दोनों एक एक करके झड़ गए। इसके बाद हम दोनों एक दूसरे के ऊपर लेट गए। थोड़ी ही देर में हम फिर से गर्म हो गए और मैं उसकी चूत में ऊँगली करने लगा तो वो बोली- भईया, अब नहीं रहा जाता ! अपना लंड अन्दर डाल दो !

मैं उसकी टांगो के बीच आ गया, उसकी चूत अभी कुँवारी थी और मैं उसे दर्द नहीं पहुँचना नहीं चाहता था, इसलिए मैंने पहले अपने लंड पर थोड़ा सा थूक लगाया, फिर उसकी चूत पर भी थूक से मालिश कर दी। मेरा लुंड सात इंच लम्बा और तीन इंच मोटा है।

उसके बाद मैंने अपना लंड रिया की चूत पर लगाया और हल्के-हल्के लंड को अन्दर करने लगा, पर जा नहीं रहा था इसलिए मैंने एक हल्का सा धक्का लगा दिया तो रिया जैसे तड़प सी गई और उसके मुँह से आह की आवाज़ निकल गई। मेरे लंड का सुपारा अन्दर जा चुका था। फिर मैं थोड़ी देर के लिए रुक गया और उसके चूचे मुँह में लेकर चूसने लगा। फिर थोड़ी देर बाद मैंने हल्के-हल्के लंड अन्दर डालना चालू किया और बीच बीच में हल्का सा धक्का भी मार देता था जिससे कि उसकी चीख निकल जाती थी। लेकिन मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख रखे थे जिससे उसकी चीख बाहर न जाये। अब तक मेरा पूरा लंड उसकी चूत में जा चुका था। उसकी चूत बहुत ही कसी थी और मैं हल्के-हल्के अपने लंड को अन्दर-बाहर करने लगा। शुरु में तो उससे थोड़ा दर्द हुआ पर फिर उसे भी मज़े आने लगे और वो अपनी गांड उठा उठा कर मेरा साथ देने लगी।

अब हम दोनों चुदाई का पूरा आनंद ले रहे थे। वो कह रही थी- भईया और जोर से !

मैं भी रिया से कह रहा था- देख ! बहन को अपने भाई से चुदने में कितना मज़ा आता है !

वो बोली- हाँ भईया, सही में बहुत मज़ा आ रहा है ! यह तो सबको करना चाहिए ! लेकिन दुनिया के ये झूठे रिवाज़ हमें रोके रखते हैं। भईया, मैं तो ये सोचती हूँ कि कोई भी किसी के साथ भी चुदाई कर सकता है। इससे क्या फर्क पड़ता है कि वो रिश्ते में क्या लगते हैं, आखिर वो हैं तो मर्द और औरत ही !

और हम ऐसे ही बातें करते करते चुदाई का आनंद लेते रहे। शायद रिया एक बार झड़ चुकी थी, अब मैं भी चरम सीमा तक पहुँच चुका था और फिर उसके बाद हम दोनों एक साथ एक दूसरे में समां गए और अपना अपना पानी एक दूसरे में मिला दिया और एक दूसरे को पूरी ताकत से पकड़ लिया।

फिर हम दस मिनट तक ऐसे ही पड़े रहे और उसके बाद बाथरूम में जा कर एक दूसरे को साफ़ किया। हम लोग उस वक़्त भी बिलकुल नंगे थे, मुझे रिया के चूतड़ दिखाई दिए बिल्कुल गोल-गोल और मुलायम ! बिल्कुल गोरे-गोरे और चिकने !

मेरा लंड फिर से जोर मारने लगा। मैं उसके पास गया और उसे अपनी बाहों में उठा लिया और ले जाकर उसे फिर से बिस्तर पर डाल दिया।

वो बोली- भईया, अब क्या?

मैंने उससे कहा- बहन, मुझे तेरी गांड मारनी है !

तो वो बोली- नहीं भईया ! मुझे बहुत डर लगता है, गांड मरवाने में तो बहुत दर्द होगा !

तो मैंने उससे कहा- मैं दर्द नहीं करूँगा, आराम आराम से करूँगा !

वो बोली- भईया, मार लेना मेरी गांड, लेकिन अभी नहीं, अभी बहुत देर हो गई है और माँ भी उठने वाली होगी हम गांड का प्रोग्राम किसी और दिन करेंगे।

मैं मान गया और उसके होठों का एक लम्बा चुम्मा लिया और उसके चूचे भी दबाये। फिर हम दोनों ने अपने कपड़े पहने और फिर रिया चाय बनाने चली गई।

मैंने और रिया ने मिलकर चाय पी। फिर वो अपने कमरे में चली गई।

मैंने रिया की गांड कैसे मारी, यह मैं अगली कहानी में बताऊंगा।

आप मुझे बताइए कि आपको मेरी कहानी कैसी लगी? Hindi Sex Stories

Skip to content Free Hindi Sex Stories अन्तर्वासना की हॉट हिंदी सेक्स कहानियाँ ☰ श्रेणियाँ आपकी कहानी भेजिए Live Cams XXX videos 3Sex Instagram ज्वार के खेत में कुंवारी बुर को लंड से खोला by शैलेश शर्मा 31-03-2022 542,618 हरियाणा सेक्स कहानी हिंदी में पढ़ें कि लॉकडाउन में मैंने अपने पड़ोस की कुंवारी लड़की को अपनी चाची की मदद से पटा कर खेतों में बुलाकर चोद दिया. दोस्तो, मेरा नाम शैलेश है। (काल्पनिक नाम) मैं हरियाणा में रोहतक के पास एक गांव है, वहाँ का रहने वाला हूं। मेरी उम्र 21 साल है और हम तीन भाई हैं जिनमें मैं सबसे बड़ा हूं। मैं देखने में ठीक ठाक हूं, मेरा कद 5’6″ है और मेरे लन्ड का साइज 6 इंच है। मुझे अन्तर्वासना बहुत पसंद है. यह हरियाणा सेक्स कहानी तब की है जब मैं अपना डिप्लोमा करके अपने गांव में 2 साल बाद वापिस आया था। मेरे पड़ोस में एक निकिता नाम की एक लड़की रहती है, वह दिखने में बहुत ही सैक्सी है। मैं कभी उस पर ध्यान नहीं देता था। वो भी कॉलेज में बी. काम की पढ़ाई करती है, उसकी उम्र 19 साल है। उसका फिगर 32-28-32 होगा क्योंकि वो कुंवारी है। उसका गोरा रंग मानो किसी को भी मोह ले। उसके घर में उसके मम्मी पापा और उसके दो बड़े भाई थे जिनमें से एक लव मैरिज करके दिल्ली में सेटल हो गया था। उसके पापा ट्रक ड्राइवर हैं तो अक्सर बाहर ही रहते हैं। घर में उसका बीच वाला भाई और उसकी मम्मी और वो ही रहते है। शुरू से हम दोनों साथ में ही खेला करते थे। 2020 मार्च में लॉकडाउन लगने के कारण वो भी घर पर ही रहने लगी। वह कई बार मेरे घर पर आती तो मुझे अजीब तरह से देखती. पर मैं उस पर ध्यान नहीं देता था। एक दिन वो मेरे घर पर आई तो उस टाइम मेरे घर पर मैं अकेला था और फोन में यूट्यूब पे वीडियो देख रहा था। उसने पूछा- शैलेश, तुम्हारी मम्मी कहाँ है? तो मैंने कहा- वो तो बाहर गई हुई हैं. अगर कुछ काम है तो बता दो, मैं बता दूंगा। वो बोली- नहीं उन्हीं से काम था। मैं बोला- ठीक है! वो बोली- फोन में क्या करता रहता है सारा दिन? मैंने कहा- कुछ नहीं. ऐसे ही मूवी देखता रहता हूं. उसने पूछा- कोई गर्लफ्रेंड बनाई बाहर जाकर? मैंने कहा- गर्लफ्रेंड कहाँ है हमारी किस्मत में! उसने बोला- हो जायेगी। यह बात उसने थोड़े अजीब ट्रिक से की. मैं समझ गया कि ये लडकी कुछ चाहती है। हमारे पड़ोस में चाची रहती है। उससे मैं बहुत खुला हुआ हूँ जिससे मैं अपने सारी बातें बताया करता था। तो एक दिन मैंने उस चाची सारी बात बताई और बोला- चाची, निकिता से मेरी सेटिंग करवा दो। पहले तो उसने मना किया। फिर मेरे बहुत कहने पर उसने हामी भर दी। उसने कहा- मैं पूछ कर बताती हूं। उस रात मुझे नींद नहीं आई क्योंकि आज तक मैंने किसी लड़की को टच नहीं किया था। 2 दिन बाद चाची घर पर आई और बोली- मैंने तेरा काम करवा दिया है. और उसने मुझे निकिता का नंबर लाकर दे दिया। मेरी खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। चाची ने बताया- शाम को वो कॉल करेगी। मैंने कहा- ठीक है। शाम को करीब 6 बजे उसका एक अज्ञात नंबर से मुझे फोन आया. मैंने पिक अप किया. तो वह निकिता का ही फोन था। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं उससे कैसे बात करूं; मेरे मन में घबराहट सी हो रही थी। फिर मैंने उससे पूछा- क्या तुम भी मेरे से बात करना चाहती थी? उसने कहा- हां, मैं तो तुम्हें बहुत दिन से लाइन दे रही थी. पर तुमने कभी नोटिस ही नहीं किया। मैंने कहा- अच्छा जी, ऐसी बात है क्या! उस दिन सिर्फ हमारी नॉर्मल बातें हुई। उसने बताया- कॉल मैं खुद करूंगी, तुम मत करना. मेरा भाई मेरा फोन चेक करता रहता है। मैंने कहा- ठीक है। फिर हमारी डेली बातें होने लगी। बीच बीच में मैं गंदी बातें भी करता था. उससे उसे भी मजा आने लगा। और कभी हम घर पर अकेले होते तो सेक्स चैट भी करते थे। वो कितनी देखने में सुंदर थी, उतनी ही ज्यादा सेक्सी बातें भी करती थी। एक दिन उसका फोन आया तो मैंने उसे एक मैंने कहा- आज तुम किसी अलग कमरे में सोना. आज रात हम वीडियो कॉल पर बात करेंगे. उसने बोला- ठीक है। फिर रात को उसकी वीडियो कॉल आई। मेरे मन में मानो खुशी की कोई हद ही नहीं थी। मैंने कुछ देर तो ऐसे ही बात की. फिर मैंने उससे पूछा- आज तक तुमने कभी सेक्स किया है? तो उसने मना कर दिया, बोली- नहीं, मैंने आज तक सेक्स नहीं किया। मैंने कहा- तुम मुझे अपनी चूची दिखा दो! पर उसने मना कर दिया. फिर मेरे 2-4 बार कहने से वो मान गई, उसने अपना शर्ट ऊपर करके मुझे चूची दिखाई। निकिता की नंगी चूची देख कर मेरा लन्ड खड़ा हो गया. मैंने उसे अपना लन्ड दिखा दिया. मेरा खड़ा लंड देखकर उसकी आंखें खुली की खुली रह गई और बोली- हाय राम … इतना बड़ा? मैंने उससे कहा- अपनी चूत के दर्शन और करा दे! फिर उसने अपने सलवार उतार अपनी चूत दिखाई. उसकी चूत बिल्कुल गुलाबी थी और उसने अपनी झांटें कुछ दिन पहले ही काटी थी. अब मैंने कहा- अपनी चूचियों को दबाओ! वो अपने उरोज दोनों हाथों में पकड़ कर दबाने लगी. कुछ देर बाद उसकी सांसें तेज होने लगी। मैंने उससे कहा- रूम की लाइट ऑन कर ले! अब वो पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी तो उसने लाइट ऑन की. तब मैंने उसके सारे कपड़े उतरवा दिए. वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी थी. अब मैंने उसे उसकी चूत में उंगली करने को बोला. वो अपनी चूत में धीरे धीरे उंगली डालने लगी। मैंने तेज करने को बोला तो कहने लगी- दर्द हो रहा है! अब मुझे पता चल गया कि वो वर्जिन है। “आह आ … दर्द हो रहा है आ …” वह सिसकारियां भर रही थी। फिर वो एकदम ढीली पड़ने लगी. मैं समझ गया कि अब वो झड़ गई है. और उस रात मैंने भी मुठ मारी और फिर हम सो गए। अगले दिन उसका दिन मैं फोन आया. तो मैंने पूछा- रात को तुझे मजा आया? वह खुश होकर बोली- मुझे क्ल रात बहुत मजा आया। मैं समझ गया कि अब ये कुंवारी लड़की अपनी बुर चुदाई के लिए तैयार है। पर उस टाइम लॉकडॉउन लगा हुआ था तो कहीं बाहर भी नहीं जा सकते थे। मैंने कहा- अगर तुम्हें मजा आया तो क्यों ना हम दोनों कहीं बाहर मिलें? तो उसने हां कर दिया. अब वो भी बुर चुदाई के लिए उत्सुक हो रही थी. उसने बोला- कल मेरी मम्मी मेरे मामा के घर पर जा रही हैं। क्यों ना हम हमारे खेत में मिलें? उनके खेत गांव से 2 किलोमीटर दूर हैं। उसने कहा- कल मैं अकेली जाऊंगी ज्वार लेने! मैं जाने से पहले तुम्हें कॉल करूंगी। तुम मुझे वहीं पर मिलना। मुझे शुरू में तो डर लगा। पर चूत भी तो चाहिए थी. तो सोचा इतना रिस्क को लेना ही पड़ेगा। मैंने कहा- ठीक है। मैं उससे पहले ही उसके खेत में जा कर बैठ गया। मैंने उससे दूर से ही आती देख लिया. उसे देखते ही मेरा लन्ड खड़ा हो कर सलामी देने लगा। उसने भी मुझे देख लिया और उसके चहरे पर एक हल्की सी मुस्कान आ गई। मैंने चारों तरफ देखा और मैं उसे ज्वार के खेत में ले घुसा। वह अपने साथ एक ओढ़नी भी लाई थी ज्वार बांधने के लिए! उस ओढ़नी को हमने नीचे बिछा लिया। अब हम पूरी तरह से तैयार थे। मैं सीधा उसके गुलाबी होंठों को पागलों की तरह चूमने लगा. वो भी मेरा साथ देने लगी. फिर मैं अपनी जीभ को उसके मुंह में डाल देता कभी उसकी जीभ मेरे मुंह में आ जाती! साथ के साथ उसके बोबे भी दबा रहा था। उसके हाथ मेरे बालों में थे। अब मैंने उसका एक हाथ लिया और अपने लन्ड पर रख दिया। उसकी आंखें एकदम चौंधिया गई. और फिर वो मेरे लन्ड को सहलाने लगी। अब मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोला और चूत को सहलाने लगा. साथ साथ मैं उसे किस भी कर रहा था। उसने काले रंग की ब्रा और पैंटी पहन रखी थी … मानो वो परी जैसी दिख रही हो। उसकी चूत गीली हो चुकी थी। अब मैंने उसके सारे कपड़े निकलवा दिये और अपने भी सारे कपड़े निकाल दिए। हम दोनों बिलकुल नंगे थे। मैंने उसे लन्ड मुंह में लेने को बोला. उसने मेरे लन्ड के टोपे को मुंह में ले लिया. मैंने पहली बार लन्ड को किसी के मुंह में डाला था. मुझे तो लगा कि मानो मैं स्वर्ग में चला गया हूं। उस दिन वह चूत बिल्कुल साफ करके आई हुई थी। अब मैंने भी उसकी चूत चाटनी थी तो हम 69 की पोजिशन में आ गए. वह मेरा लन्ड चूस रही थी और मैं उसकी कुंवारी बुर चाट रहा था। मैं उसकी चूत को अपनी जीभ से चोद रहा था और उसके मुंह से हल्की हल्की सिसकारियां भी निकल रही थी। अब हम दोनों झड़ने वाले थे। 2 मिनट बाद हम झड़ गए. मैं उसकी चूत का सारा पानी पी गया. उसकी चूत का स्वाद नमकीन था. और उसने मेरा सारा वीर्य पी लिया। अब हम दोनों लीप किस करने लगे. थोड़ी देर बाद मेरा लन्ड फिर उठ खड़ा हुआ। फिर मैंने उसे ओढ़नी पर लेटाया और उसके ऊपर आ गया। मेरा लन्ड उसकी चूत में जाने के लिए तैयार हो गया था. मैंने अपना लन्ड उसकी चूत के ऊपर शुरू कर दिया. वो मानो पागल सी हो रही थी जोर जोर से सिसकारियां ले रही थी। फिर वो बोली- अब रहा नहीं जा रहा … डाल दो मेरी चूत में! तभी मैंने उसकी चूत पर अपना गर्म लंड रखा. पर उसकी चूत टाइट होने के कारण अंदर नहीं जा रहा था. फिर मैंने थूक लगाया और जोर लगा कर एक झटका मारा. मेरे लन्ड का टोपा उसकी चूत में चला गया. वर्जिन होने की वजह से उसे बहुत दर्द हो रहा था और उसकी चूत से खून भी निकल रहा था. मैं समझ गया कि उसकी सील टूट चुकी है पर मेरे लंड में भी दर्द होने लगा था. मैंने एक और झटका मारा तो आधे से ज्यादा उसकी चूत में मेरा लन्ड जा चुका था क्योंकि उसकी चूत बिल्कुल गीली हो रही थी। इतने वो चिल्लाने की कोशिश करती, मैंने उसके होठों से अपने होंठ चिपका दिए और तीसरे झटके में मेरा 6 इंच का लन्ड उसकी चूत में समा गया. उसकी आंखों से आंसू निकल रहे थे. पर मैं उस पर ध्यान न देते हुए अपना लंड धीरे धीरे उसकी फटी चूत में आगे पीछे करने लगा। मैं अपने दोनों हाथों से उसकी चूची दबाता रहा। उसकी चूची मुझे मानो मक्खन जैसी लग रही थी. अब उसका दर्द कम होने लगा था तो उसे भी मजा आने लगा. अब वो भी मेरा कमर उठा उठा कर मेरा साथ देने लगी, जोर जोर से सिसकारियां भी भरने लगी- आह शैलेश … फाड़ दो मेरी चूत! मैं भी बोला- बहन की लोड़ी … आज मैं तेरी चूत बिल्कुल फाड़ दूंगा। और मैं जोर जोर झटके मार रहा था। अब मैंने उसे अपने ऊपर ले लिया और उससे बोला- मेरे लौड़े पर बैठ जा! वो मेरे लन्ड पर बैठ गई और मजे से उछल रही थी. मैं मानो जन्नत में था। वो अब दूसरी बार झड़ने वाली थी पर मेरा अभी बाकी था. करीब 10 मिनट तक चली जबरदस्त चुदाई के बाद मैं भी झड़ने वाला था, मैंने अपना सारा गाढ़ा माल उसकी चूत में ही निकाल दिया। 5 मिनट तक मैं उसके नंगे जिस्म के ऊपर ही लेटा रहा और उसके बोबे चूसता रहा। अब मैंने उससे उसकी गांड मारने को बोला. पर उसने मना कर दिया, बोली- मुझे पहले ही बहुत दर्द हो रहा है. अब अगर पीछे गांड में भी करोगे तो मुझसे चला भी नहीं जायेगा. और मुझे भैंसों के लिए चारा भी तो लेकर जाना है. तब मैंने कहा- ठीक है। और मैंने देसी लड़की की गांड चुदाई का विचार फिलहाल के लिए छोड़ दिया. मेरा लन्ड फिर खड़ा हो गया और मैंने 20 मिनट तक फिर से उसकी चूत चुदाई की। फिर हम दोनों ने कपड़े पहने, उसे खड़ी होने में थोड़ी दिक्कत आ रहा थी। उसने कहा- अब तुम घर जाओ. कहीं किसी ने देख लिया तो गलत हो जायेगा. मैं तुम्हें घर जाकर फोन करती हूं. और फिर मैं अपने घर पर आ गया. करीब 30 मिनट बाद उसका फोन आया तो मैंने उसे पूछा- तुझे मजा आया आज की चुदाई में? तो वो शर्मा गई और हंस पड़ी. मैं समझ गया कि मैंने उसे आज अच्छी तरह से खुश कर दिया। उसके बाद हमने बहुत बार चूत चुदाई के मजे किए। अब जब भी वो कभी शहर जाती तो मुझे बता देती और हम बार बार चुदाई के मजे लेते। आगे की बात मैं अपनी अगली स्टोरी में बताऊंगा। मेरी हरियाणा सेक्स कहानी पसंद आई होगी. मुझे मेल करके जरूर बताएं। धन्यवाद! 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