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अंतर्वासना के नियमित पाठको Antarvasna फड़कती हुई चूतों और मोटे मोटे लंडो को मेरा सलाम !
मैं सुनील अलवर से फिर एक बार हाज़िर हूँ अपने दोस्तो के लिए एक मसाले से भरी कहानी लेकर !
पिछली कहानी के लिए मुझे बहुत सी मेल आई। मुझे बहुत अच्छा लगा।
शायद आपको कुछ बताने की ज़रूरत नहीं कि मैं एक स्मार्ट और क्यूट लड़का हूँ। जो कहानी मैं आप सबको बताने जा रहा हूँ यह एक विवाहित लेकिन असंतुष्ट पत्नी की जो अपने पति के लण्ड से अपनी चूत की प्यास ना बुझा पाई और उसने मुझे याद किया।
पिछले महीने मैं अपने कम्प्यूटर पर काम कर रहा था कि मुझे एक काल आई। वहाँ से एक औरत की आवाज़ आई उसने मुझसे मेरे बारे में पूछा ओर मुझे कहा कि वो मुझसे मिलना चाहती है. उस वक्त मैं व्यस्त था तो मैने उस से बाद में बात करने को कहा. उसी रात उसका फिर से फोन आया. तब उसने मुझे बताया कि उसकी शादी को ३ साल हो गये है लेकिन वो अपने पति से खुश नही है और वो मुझसे मिलना चाहती है. फिर हमने मिलने की जगह तय की और मैं २ दिन बाद उस से मिलने उसके घर पहुचा.
मैंने बेल बजाई तो एक काम वाली ने दरवाजा खोला. उसने मुझे ड्रॉयिंग रूम में बिठाया और अपनी मालकिन को बुलाने चली गयी। कुछ देर बाद मैंने देखा कि एक २५-२६ साल की औरत गुलाबी रंग की साड़ी में आ रही है. वो देखने में बला की खूबसूरत थी. उसका फिगर ३६-२६-३६ था. मैंने मन ही मन अपनी किस्मत पर गर्व किया कि इतनी खूबसूरत अप्सरा ने मुझे बुलाया है और कुछ ही देर में वो मेरी बाहों में होगी.
उसने आकर मुझसे हाथ मिलाया और अपना नाम रेखा बताया. वो मेरे पास बैठ गयी और हम दोनो बातें करने लगे. कुछ देर बाद उसकी काम वाली चली गयी. फिर वो मुझे अपने बेडरूम में ले गयी. वहाँ हम दोनो ने ड्रिंक्स ली और उसके बाद वो नहाने क लिए बाथरूम में चली गयी.
इतनी देर में तो मेरे लण्ड ने मेरे जीन्स को फ़ाड़ना शुरू कर दिया. वो तो बाहर निकलने को तैयार था. १५ मिनट के बाद जब वो बाथरूम से बाहर निकली तो मेरे होश ही उड़ गये. उसने एक हल्के गुलाबी रंग की पारदर्शी नाइटी पहनी थी और अंदर कुछ भी नहीं था. उसके मोटे मोटे बूब्स और गुलाबी निपल्स साफ दिखाई दे रहे थे. उसकी प्यारी सी चूत, जिस पर एक भी बाल नहीं था जैसे वो अभी साफ करके आई हो, दिखाई दे रही थी. वो मेरे पास आई, मुझे मेरे होठों पे हल्के से किस किया और मेरे पास बैठ गयी. मैने उसे अपनी बाहों में समेट लिया. ओर उसके गुलाबी होठों को अपने होठों में दबा लिया. उसके बाद मैंने उसके मुँह में अपनी जीभ डाल दी। वो भी पूरा सहयोग दे रही थी. वो बहुत ही गर्म लग रही थी जैसे काफ़ी समय से उसने सेक्स ना किया हो. फिर मैने उसकी नाईटी को उतार दिया और उसने मेरे कपड़ो को उतार दिया. उसके दोनो कबूतर अब मेरे हाथो में थे. जिन्हें मैं कस कस के दबा रहा था. कमरे में बड़ी ही सेक्सी आवाज़ें गूँज रही थी… वो मदहोश हो गयी थी.
मैने उसके एक चूचे को मुँह मे ले लिया और पीने लगा। वो ज़ोर ज़ोर से उउऊहह आआहह करने लगी. पूरा कमरा उसकी आवाज़ो से गूंजने लगा. अब मैंने जैसे ही उसकी चूत को छुआ, वो तड़प उठी और मुझसे ज़ोर से लिपट गयी. फिर उसने मेरा लण्ड अपने मुँह में ले लिया ओर उसे ज़ोर से चूसने लगी. थोड़ी देर बाद हम दोनों ६९ की पोज़िशन में थे ओर वो मेरे लण्ड को और मैं उसकी चूत को चूस रहा था. थोड़ी देर बार वो फ्री हो गयी ओर मैंने उसका सारा रस पी लिया और ५ मिनट बाद मैं भी फ्री हो गया, उसने भी मेरा सारा रस भी लिया।
अब मैं उसके बूब्स क साथ खेलने लगा। वो भी मेरे लण्ड के साथ खेल रही थी। कुछ देर बाद मैं फिर से तैयार हो गया। अब वो तड़प रही थी और मुझे भी नहीं बर्दाश्त हो रहा था। मैने अपने लण्ड उसकी चूत पे रखा और एक ही बार में पूरा का पूरा घुसा दिया. वो एक दम से चिल्ला पड़ी उसकी चूत बड़ी टाइट थी. फिर मैने ज़ोर ज़ोर से झटके लगाने शुरू किया. उसने अपनी दोनो टांगें मेरी कमर के चारो तरफ लपेट ली एक नागिन की तरह. अब कमरे में फुउऊउउस्स्स् फुस स्स्स्स की आवाज़ें गूँज रही थी. कुछ देर में हम दोनों फ्री हो गये. ओर एक दूसरे क साथ लेट गये. फिर मैं उसे उठा के उसके बाथरूम में ले गया और शावर क नीचे हमने फिर से एक बार सेक्स किया उस दिन मैं उसके साथ पूरा दिन रहा और हमने ५-६ बार सेक्स किया. अलग अलग स्टाइल्स में. वो बहुत ही खुश हुई. उसके बाद मैं वापिस चला गया. कुछ दिनों बाद उसने मुझे फिर से बुलाया और इस बार उसकी एक फ्रेंड भी उसके साथ थी…
इस बारे में आपको अगली बार बताउंगा…
सो अलविदा दोस्तो और प्यारी प्यारी सेक्सी सेक्सी यौनियो !
फिर से ये राहुल आपकी सेवा में हाज़िर होगा…
राहुल आपकी सेवा में तत्पर है…
आपका प्यार ही मुझे आपके पास लाया है. म्म्म्म मम्मूऊऊ उऊहहाआआ Antarvasna
मेरा नाम सुरेंद्र है। मैं कॉलेज में Antarvasna अन्तिम वर्ष में पढ़ता हूँ। मेरी उम्र 24 है। मैं बीच की छुट्टियों में मेरे गाँव गया। गाँव में हमारा बड़ा घर है। वहाँ मेरी माँ और पापा रहते हैं। मेरे पापा एक बिल्डर हैं, और माँ एक गृहिणी। हम बहुत अमीर घराने से हैं। हमारे घर में नौकर-चाकर बहुत हैं।
मैं मेरे गाँव गया। दोपहर में मेरे घर पहुँचा। खाना हुआ और थोड़ी देर सोया। शाम को माँ के साथ थोड़ी बातें कीं और गाँव घूमने चला गया। रात क़रीब मैं 8 बजे घर आया। माँ का मूड ठीक नहीं था। मैंने माँ को पूछा- माँ, पापा कहाँ हैं?
माँ ने कुछ जवाब नहीं दिया। मेरी माँ बहुत गुस्से वाली है। वह जब गुस्से में होती है तब वह गन्दी गालियाँ भी देती है। लेकिन वह नौकरों के साथ ऐसा नहीं करती, गालियाँ नहीं देती।
माँ ने कहा- चल, तू खाना खा ले… आज अपना बेटा आया, फिर भी यह घर नहीं आए… तू खा… हम बाद में फार्म-हाउस पर जाएँगे… वहाँ पर तेरे पापा का काम चल रहा है…’
मैंने खाना खाया और हम निकले। पापा ने मेरी माँ को स्कूटर दी थी। हमारा फार्म-हाउस हमारे घर से एक घन्टे पर ही था। माँ ने स्कूटर निकाली, मैं माँ के पीछे बैठ गया। हाँ मेरे माँ का नाम रीमा है, उसकी उम्र 45 है लेकिन वो सुन्दर है, वो एक सामान्य गृहिणी है… सेहत से तन्दरुस्त… थोड़ी मोटी सी।
‘चलो चलें…’ माँ ने पंजाबी पोशाक पहनी थी… मैं माँ के पीछे था… हम चल दिए… मैंने मेरे हाथ से स्कूटर के पीछे टायर को पकड़ रखा था। माँ बीच-बीच में कुछ कह रही थी लेकिन कुछ सुनाई नहीं दे रहा था। शायद बहुत ही गुस्से में थी.
एक घन्टे में हम फार्म-हाउस पर पहुँच गए। फार्म-हाउस के दरवाज़े पर चौकीदार था। उसने माँ को टोका… और कहा- साहब यहाँ नहीं हैं… वो शहर गए हैं।’ वह हमें दरवाज़े के अन्दर जाने से रोक रहा था।
माँ ने कहा- ठीक है।
और स्कूटर चालू की… हम थोड़ी ही आगे गए और माँ ने स्कूटर रोक दी। उसे कुछ शक हुआ… उसने मुझसे कहा- तू यहीं रुक, मैं आती हूँ।
माँ बंगले की तरफ चली गई। और चौकीदार का ध्यान बचाकर अन्दर चली गई। बंगले में जाकर खिड़कियों में ताक-झाँक करने लगी। मैंने देखा कि माँ क्यों नहीं आ रही है, और मैं भी वहाँ चला गया। मैंने देखा- माँ बहुत देर तक वहाँ खड़ी थी और खिड़की से अन्दर देख रही थी। वह क़रीब 10-15 मिनट वहीं खड़ी थी। मैं थोड़ा आगे गया। माँ ने मुझे देखकर कहा- साले तुझे वहीं रुकने को कहा था तो तू यहाँ क्यों आया? चल वापिस चल, हमें घर जाना है।’ माँ को इतने गुस्से में मैंने कभी नहीं देखा था।
मैं फिर से स्कूटर पर बैठ गया। रास्ते में बारिश चालू हुई। मेरे हाथ पीछे टायर पर थे। गाँव में रास्ते में लाईट नहीं थी। तभी माँ की गांड मेरे लण्ड को लगने लगी। मैं थोड़ा पीछे आया। लेकिन माँ भी थोड़ा पीछे आई और कहा- ऐसे क्यों बैठा है, ठीक से मुझे पकड़ कर बैठ।’
मैंने मेरे दोनों हाथ माँ के कन्धों पर रखे, लेकिन ख़राब रास्ते के कारण हाथ छूट रहे थे।
माँ ने कहा- अरे, पकड़, मेरी कमर को, और आराम से बैठ!
मैंने माँ के कमर पर पकड़ा, लेकिन धीरे-धीरे मेरा हाथ उसकी चूचियोँ पर लगने लगे। वाह! उसकी चूचियाँ… क्या नरम-नरम मुलायम मखमल की तरह लग रहे थे। और मेरा लण्ड भी 90 डिग्री तक गया। वो मेरी माँ की गांड से चिपकने लगा। माँ भी थोड़ी पीछे आई। ऐसा लग रहा था कि मेरा लण्ड माँ की गांड में घुस रहा है।
हमारा घर नज़दीक आया। हम उतर गए। क़रीब रात 11:45 को हम घर आए। माँ ने कहा- तू ऊपर जा… मैं आती हूँ।
माँ ऊपर आई… वो अभी भी गुस्से में लग रही थी। मालूम नहीं, वो क्यों बीच-बीच में कुछ गालियाँ भी दे रही थी। लेकिन वो सुनाई नहीं दे रहा था।
माँ ने कहा- आ, मैं तुझे बिस्तर लगा दूँ।
उसने उसकी चुन्नी निकाली और वह मेरे लिए बिस्तर लगाने लगी। मैं सामने खड़ा था। वह मेरे सामने झुकी और मैं वहीं ढेर हो गया। उसकी चूचियाँ इतनी दिख रहीं थीं कि मेरी आँखें बाहर आने लगीं। उसकी वो चूचियाँ देखकर मैं पागल हो उठा। उसने काली ब्रा पहन रखी थी। उसकी निप्पल भी आसानी से दिख रही थी।
तभी माँ ने अचानक देखा और कहा- तू यहाँ सो जा।
लेकिन मेरा ध्यान नहीं था। वो सामने झुकी… और मेरा ध्यान उसकी चूचियों पर था। वो यह बात समझ गई और ज़ोर से चिल्लाई- सुरेंद्र, मैंने क्या कहा! सुनाई नहीं देता क्या? तेरा ध्यान किधर है? साले मेरी चूचियाँ देख रहा है?
यह सुनकर मैं डर गया लेकिन मैं समझ गया कि माँ को लड़कों की भाषा मालूम है।
उसने बिस्तर लगाया और कहा- मैं आती हूँ अभी!
वह नीचे गई। मैंने देखा उसने हमारे बंगले के चौकीदार को कुछ कहा और ऊपर मेरे कमरे में आ गई। हम दोनों अभी बारिश की वज़ह से गीले थे। माँ मेरे कमरे में आई, दरवाज़े की कड़ी लगाई और उसने अपनी पंजाबी पोशाक की सलवार निकाल कर बिस्तर पर रख दी, मैं मेरी कमीज़ निकाल ही रहा था, इतने में माँ मेरे सामने खड़ी हो गई।
माँ ने मेरी शर्ट की कॉलर पकड़ी और मुझे घसीट कर मेरे बाथरूम में ले गई। मेरे कमरे में ही एक बाथरूम था। माँ फिर बाहर गई और मेरे कमरे की बत्ती बन्द करके मेरे सामने आ के खड़ी हो गई। उसने मेरी तरफ देखा, एक कपड़ा लिया और मेरे बाथरूम की खिड़की के शीशे पर लगा दिया। इसके पीछ वज़ह होगी कि बाथरूम में रोशनी थी और खिड़की से कोई अन्दर ना झाँक सके।
फिर से उसने मेरी ओर देखा… वो अभी भी गुस्से में लग रही थी। तुरन्त ही उसने मेरे गालों पर एक ज़ोर का तमाचा मारा… मैं माँ की तरफ ही गाल पर हाथ रख कर देख रहा था। लेकिन तुरन्त ही उसने मेरे गालों को चूमा और अचानक उसने उसके होंठ मेरे होंठों पर लगा कर मुझे चूमना चालू कर दिया… मैं थोड़ा हैरान था लेकिन मैंने भी माँ की वो बड़ी-बड़ी चूचियाँ देखीं थीं और माँ के साथ मेरे विचार गन्दे हो चुके थे। चूमते-चूमते उसने फिर से मेरी ओर देखा, वो रुक गई… फिर अपनी पूरी ताकत लगा कर उसने अपनी ही ड्रेस फाड़ डाली। फिर तुरन्त उसने मेरी कमीज़ भी खोल दी।
जब उसने अपनी ड्रेस फाड़ी… ओओओहहह… मैं तो सोच भी नहीं सकता था कि माँ की चूचियाँ इतनी बड़ी होंगीं। वो तो उसकी ब्रा से बाहर आने के लिए आतुर दिख रहीं थीं। फिर वो मुझे चूमने-चाटने लगी..
उसने मुझे चड्डी उतारने को कहा… ‘साले, अपनी चड्डी तो उतार!’
मैंने अपनी चड्डी उतार दी, और मैं अपनी माँ पर चढ़ गया… मैं भी उसकी चूचियों को चाटने लगा-चूमने लगा और ज़ोरों से दबाने लगा… मैंने भी माँ की ब्रा फाड़ डाली। मैं भी एकदम पागलों की तरह माँ की चूचियाँ दबाने लगा.
माँ के मुँह से आहें निकलने लगीं… ‘आआआ ओओओ ईईईमम ओओओ… साआआआलेएए आआआ… ओओओईईईएए’
इतने में उसने मुझे धक्का दिया और एक कोने में छोटी बोतल पड़ी थी उसमें उसने साबुन का पानी बनाया और शावर चालू किया और कहा- मैं जैसा बोलती हूँ… वैसा ही कर!
वह पूरी तरह से ज़मीन पर झुकी और दोनों हाथों से अपनी गांड को फैलाया और कहा- वो पानी मेरी गांड में डाल।
मैंने वैसा ही किया। साबुन का पानी माँ की गांड में डाला। माँ उठी और मेरे लंड को पकड़ा और साबुन लगाया। दीवार की तरफ मुँह करके खड़ी हुई और कहा- साले, भड़वे, चल तेरा लंड अब मेरी गांड में घुसा।
जैसा आप पहले पढ़ चुके हैं कि मेरी माँ कभी-कभी गालियाँ बहुत देती है। मैंने मेरा लंड माँ की गांड पर रखा और जोर का झटका मार दिया।
माँ चिल्लाई- आआआआ म्म्म्मउऊऊ… आआआआ, साले भँड़वे बता तो सही तू डाल रहा है!
साबुन की वज़ह से मेरा लंड पहले ही आधे से अधिक घुस गया, और मैं भी माँ को ज़ोरों के झटके देने लगा। माँ चिल्लाई… ‘साले, भड़वे… आआआ… उउऊऊऊ… उईईई… आआआ’
मैं भी थोड़ा रुक गया।
माँ बोली- दर्द होता है, इसका मतलब यह नहीं कि मजा नहीं आताआआआआआ… मार और ज़ोर से मार… बहुत मजा आता है… भँड़वे बहुत सालों के बाद मैं आज चुदाई के मज़े ले रही हूँ… आआआईईई आआईईई… आआउऊऊ… मार… मार… मार… आआआ’
वो भी ज़ोरों से कमर हिला कर मुझे साथ दे रही थी और मेरे झटके एकदम तूफ़ानी हो रहे थे। मेरा क़द 5.5 और माँ का 5… हम खड़े-खड़े ही चोद रहे थे… उसकी गांड मेरी तरफ, मैं उसकी गांड मार रहा था… उसका मुँह उस तरफ और हाथ दीवार पर थे… मैं एक हाथ की उंगली उसकी चूत में डाल रहा था.. और दूसरी ओर दूसरे हाथ से उसकी चूचियाँ दबा रहा था।
तभी उसने मेरी तरफ मुँह किया और एक हाथ से मेरे गाल पकड़े और मेरे होंठों पर उसके होंठ लगाए। हम कामसूत्र के एक आसन में खड़े थे। वह भी मेरे होंठों को चूम कर बोली… ‘तू… थोड़ी देर पहले मेरी चूचियाँ देख रहा था ना… मादरचोओओओद… हाय रे तू… मैं अभी तुझे पूरा मादरचोद बनाऊँगीईईई… .आआआ…’
तभी मैं माँ को बोला… ‘आज इतने गुस्से में क्यों हो?’
माँ बोली… ‘साले… सब मर्द एक जैसे ही होते हैं। आआईईई उउओओओउऊऊ… जानता है… जब हम फार्म-हाऊस पर गए… ओओईईईई… मैंने क्या देखा… खिड़कीईईईई…ईईई सेएएए…’
मैं एक तरफ झटके दे रहा था इसलिए माँ बीच-बीच में ऐसी आवाज़ें निकालती हुई बात कर रही थी।
मैंने पूछा ‘क्या देखा तूने?’
माँ ने कहा- तेरा बाप किसी और औरत को चोद रहा था। ईईई ओओओओओ… आआआआ… मैं हमेशा इन्तज़ार करती थी… अब मुझे समझ आया… वो बाहर चोद लेता है… आआआ… ईईईई… ओओओओओओ’
मैं रुक गया। वह बोली ‘तू रुक मत… चोद मुझे भँड़वे… अपनी माँ को चोद। आज से तेरी माँ… हमेशा के लिए तेरी हो गई है। आज़…’
मैंने चोदना चालू कर दिया, माँ कहती रही- ‘ओओआआईईम्म तू ही मेरा सामान है… आआओओ ओईईम्म्म… अच्छा लग रहा है।’
तभी मैंने माँ की गांड में ओर ज़ोर का झटका मारा… वो भी उसकी गांड ज़ोरों से आगे-पीछे हिला रही थी… आख़िर में मैंने ज़ोर का झटका दिया और मेरे लंड का पानी माँ की गांड में डाल दिया… माँ चिल्लाई… ‘आआओओओम्म्म ईईई… कितना पानी है तेरे में… खत्म ही नहीं हो रहा है। आआउउऊऊ… क्या मस्त लग रहा है… साआआआला मादरचोद… सही चोदा तूने मुझे।’
थोड़ी देर हम एक-दूसरे से ऐसे ही चिपके रहे और फिर पलंग पर चले गए और सो गए।
थोड़ी देर के बाद मेरी नींद खुली… माँ मेरे पास ही सोई थी। हम दोनों अभी भी नंगे ही थे। मैं माँ की चूत में उंगली देने लगा।
तभी माँ की नींद खुली और वो बोली- क्या फिर से चोदेगा?
मैंने कहा- मुझे तेरी चूत चाहिए, तेरी गांड तो मिल गई, लेकिन तेरी चूत चाहिए…
और फिर से उसकी चूत में उंगली डालने लगा, उसे सहलाने लगा।
मुझसे नियंत्रण नहीं हुआ, मैंने माँ के दोनों पाँव ऊपर किए और मेरा लंड माँ की चूत पर रखा और ज़ोर से धक्का मारने लगा। मैंने झटके देना चालू किया। तभी माँ भी कमर हिला कर मुझे साथ देने लगी।
मेरे झटके बढ़ने लगे… माँ चिल्लाने लगी… ‘आआहह चोद.. और चोद.. फाड़ डाल मेरी चूत… तेरे बाप ने तो कभी चोदा नहीं… लेकिन तू चोद… और चोद… मज़े ले मेरीईईई चूत के… आआओउऊ… ईईईई… और तेज़…, और तेज…, आआआईईई मईईईओओआ… आआआ… ओओओ…’
माँ भी ज़ोरों से कमर हिलाने लगी और मैं माँ की चूचियों और ज़ोरों से दबा रहा था। माँ बोली ‘चोद रे… मादरचोद, और चोद… दबा मेरी चूचियाँ… और दबा… और चाट और काट मेरी चूचियों को… और उन्हें बड़े कर दे, ताकि वे मेरी ब्लाऊज़ से बाहर आ जाएँ। दबा और दबा… चल डाल पानी अब… भर डाल अपनी माँ की चूत… पानी से… आआओओ… तेरे गरम पानी से… आआओओ…’
तभी मैंने ज़ोर का झटका दिया और मेरे लंड का पानी माँ की चूत में डाल दिया। माँ चिल्लाई… ‘आआआ… ईईई… क्याआआआ गरम पानी है… जैसे असली जवानी… आज से तू मेरा बेटा नहीं… मेरा ठोकया है… आज से तू मुझे ठोकेगा… आआओओईई… क्या पानी है… सालों बाद मिलाआ… आज के बाद अच्छी हो गई… तेरे पाप उस रण्डी के साथ गए… लेकिन उनकी ही वज़ह से मुझे मेरा ठोकया मिल गया…’ आज से तू ही मुझे ठोकेगा…’
थोड़े दिनों के बाद मैं शहर चला गया और मेरे कॉलेज में रम गया। माँ और मैं छुट्टियों की प्रतीक्षा करते, और मौक़ा मिलते ही हम एक-दूसरे की चुदाई करते। Antarvasna
मदर इन लॉ Xxx फक स्टोरी में पढ़ें कि कैसे सासू माँ हमारे घर आई तो उनकी बेटी को चोद रहा था. उन्होंने देख लिया. तभी लॉक डाउन लग गया. उन दिनों में मेरी सास मुझसे चुद गयी.
‘उन्ह आन्ह मर गई …’ मेरी बीवी मोना घोड़ी बनी चिल्ला रही थी, मैं पीछे से उसकी चूत में लंड पेले हुए उसे ताबड़तोड़ चोद रहा था.
मैंने उसकी आंखों पर काली पट्टी बांध रखी थी.
तभी मैंने देखा, कमरे के दरवाजे पर मेरी सास श्वेता खड़ी थीं.
मैं और मोना घर पर अकेले थे, बाहर मेनडोर लॉक किया था इसलिए बेडरूम का दरवाजा खुला था.
लेकिन सासु मां के पास हमारे फ्लैट की एक चाबी थी, शायद उसी से वो अन्दर आ गई थीं.
मैं सासू माँ को देख कर रूका … पर वो मुझे ‘कैरी ऑन’ का इशारा करके चली गईं.
तब मैं जल्दी से खलास हुआ.
सासू माँ बाहर निकल गईं. उन्होंने बाहर जाकर फिर से डोरबेल बजाई.
मैं मोना को नंगी छोड़कर, बेडरूम का दरवाजा बंद करके बाहर आ गया.
सासू माँ दरवाजे पर थीं.
उनके चेहरे पर मुस्कान थी.
मैं अपनी पत्नी को आवाज देते हुए बोला- मोना, मम्मी जी आई हैं.
मोना की आवाज आई- ठीक है, मैं आती हूँ.
वो गाउन पहन कर बाहर आ गई.
माँ बेटी गले मिलीं.
उस वक्त दोपहर के 4 बजे थे.
मोना बोली- मम्मी, कॉफी बना रही हूँ.
सासू माँ ने हामी भरी- ठीक है.
घर पर दूध नहीं था, मैं नीचे जाकर लाने को हुआ तो मोना बोली- मैं खुद जा रही हूँ. मुझे नीचे दुकान वाली आंटी से कुछ पुराना हिसाब करना है.
यह कह कर मोना नीचे चली गई.
मैं और सासू माँ घर पर अकेले रह गए थे. मैं उनसे नज़रें नहीं मिला पा रहा था.
वे बोलीं- सॉरी … मुझे ऐसे अचानक नहीं आना चाहिए था.
मैं बोला- कोई बात नहीं मम्मी जी, आपका ही तो घर है.
वे मंद मंद मुस्कुराती हुई बोलीं- शर्माओ मत ज़्यादा, मैं मोना से कुछ नहीं कहूंगी.
हम दोनों शांत बैठे रहे.
मोना कॉफी बना लाई.
सासू माँ, मेरे हाल में स्वर्गवासी हुए ससुर जी की कुछ प्रोपर्टी और बैंक के काम से यहां आई थीं.
कल मुझे उन्हें ले जाना था.
उस रात मैंने और मोना ने सेक्स नहीं किया.
अगले रोज देश भर में लॉक डाउन लग गया; कोई कहीं नहीं जा सकता था.
हमारी अपार्टमेंट भी कोरोना के कारण सील कर दी गई.
सासू माँ अब यहीं फंस गई थीं.
शुरू के 4-5 दिन तो जैसे तैसे कटे, फिर ऊब शुरू हो गई.
हम टीवी देखते रहते, मोबाइल देखते रहते. मैं घर में पूरे कपड़े पहने रहता, सासू माँ साड़ी.
मोना ज़रूर हल्के कपड़े पहने रहती.
मेरे फ्लैट में दो ही कमरे थे.
एक में मैं और मोना रहते, दूसरे में सासू माँ.
एक हॉल था, जहां टीवी लगी थी.
मोना को चोदे हुए सात दिन हो गए थे, अब मेरा लंड तन्ना रहा था.
सासू माँ जब बाथरूम में थीं, तब मैंने मोना को धर दबोचा.
वो छटपटा उठी- मम्मी हैं अभी!
मैं मुँह बना कर वापस आ गया. मैं फिर मोना से बोला ही नहीं.
पहले बॉलकनी में बैठा रहा मैं … फिर अन्दर कमरे में आ गया.
मेरा फ्लैट टॉप फ्लोर पर था तो छत पर घूम आया जबकि ऊपर जाने की मनाही थी.
मोना समझ रही थी कि मैं नाराज़ था, वो भी क्या करती.
एक दिन मुझसे रहा नहीं गया.
सुबह के दस बजे थे, रामायण खत्म हुई.
मैंने सासू माँ के सामने ही मोना को गोद में उठाया, बेडरूम में जाकर दरवाजा बंद किया.
मोना चिल्लाती रह गई- ये क्या बदतमीजी है?
मैंने उसकी गाउन ऊपर चढ़ा कर उसकी चूत में लंड पहुंचा दिया.
दो मिनट में वो भी मेरा साथ देने लगी.
प्यासी वो भी थी 7 दिनों से … साली खुल कर चिल्लाई, सिसकारियां ले लेकर खूब चुदी वो!
सासू माँ शर्तिया बाहर से सुन रही थीं.
बाथरूम होकर मैं केवल अंडरवियर पहने बाहर गया.
सासू माँ कुछ बेचैन सी बैठी टीवी देख रही थीं.
मैं अधिकार से बोला- आप खाना बना लेना और हमें भी पहुंचा देना. आज दिन भर आपकी बेटी के साथ यही होगा.
मोना मेरे पीछे आकर बोली- ये क्या बदतमीजी है सुंदर, मेरी मम्मी से ऐसी बात कर रहे हो?
मैं पलटा और मोना को फिर बेडरूम में ले गया, उसकी गाउन उतार दी और ब्रा भी.
उसे बेड के सिरहाने टिका कर घोड़ी बनाया और फिर से चोदने लगा.
मैं बोला- भोसड़ी की, आज दिन भर चुदेगी तू … तो खाना कब बनाएगी?
मोना को फिर मज़ा आने लगा था.
अबकी बार मैंने कमरे का दरवाजा भी नहीं बंद किया था, मैं पूरे दम से चोद रहा था.
अबकी बार 20 मिनट मैंने मोना को चोदा.
वो निढाल पड़ी थी.
मैं बाहर निकला.
सासू माँ खाना बना रही थीं.
मेरे बदन पर केवल अंडरवियर था.
अन्दर मोना नंगी पड़ी थी.
मैं टीवी देखने लगा.
थोड़ी देर में गाउन पहन कर मोना भी बाहर आई.
सासू माँ साड़ी में ही थीं.
जब वे खाना लाईं, तब मैं बोला- आई एम सॉरी सासू माँ. मैं खुद पर काबू नहीं रख पाया.
वे मुस्कुरा कर बोलीं- कोई बात नहीं. मैं टिपिकल कंजरवेटिव सासू माँ नहीं हूँ. कॉन्वेंट में इंग्लिश टीचर हूँ, फ्रांस, इटली और डेनमार्क रही हूँ. बगैर सेक्स के इतने दिन कैसे रहोगे, अभी तो ये लॉक डाउन कम से कम दो महीने रहेगा.
मैंने आज गौर से सासू माँ को देखा.
सामान्य से लम्बा कद, थोड़ा मांसल शरीर, सुंदर चेहरा, हमेशा मुस्कुराती रहती थीं.
स्टाइलिश साड़ी पहनती थीं. फिगर श्वेता तिवारी से कम नहीं था और उनका नाम भी श्वेता तिवारी ही था.
मेरी सासु मां श्वेता तिवारी 43 साल की लखनऊ के टॉप कॉन्वेंट स्कूल में इंग्लिश टीचर थीं.
उनके पति का खेती के अलावा सरकारी टीचर थे, स्वर्गलोक सिधार गए थे.
बड़ी बेटी टीना 22 साल की विशेष नाम के एक बिजनेसमैन से शादीशुदा थी.
छोटी बेटी मोना मेरी बीवी थी. वो 20 साल की है.
श्वेता अपनी दोनों बेटियों से ज़्यादा सुंदर और सेक्सी दिखती थीं.
मैंने पूछा- आप फ्रांस कब गई थीं?
“हनीमून पर तुम्हारे पापा ले गए थे. शादी के पहले फैशन कॉम्पटीशन में पार्टिसिपेट किया था. मैं मिस इंडिया में तीसरे नम्बर पर थी, मॉडल थी.”
मैं बोला- तभी आप इतनी स्टाइलिश हो, कमाल की दिखती भी हो.
श्वेता बोलीं- मैं पहले ही दिन से कहना चाह रही थी कि तुम लोग खुल कर रहो. मेरा लिहाज मत करो. तीन महीने कम से कम हम फ्लैट से नहीं निकल पाएंगे. सो हमें खुलना ही पड़ेगा.
एक पल रुक कर उन्होंने मुझे देखा और आगे कहा- मनोरंजन के नाम पर टीवी मोबाइल लूडो … और करने के नाम पर खाना पीना सेक्स ही तो बचे. अगर तुम दोनों की इजाज़त हो तो मैं भी साड़ी पहनना छोड़ दूँ! मैं घर पर कभी साड़ी नहीं पहनती, मोना को पता है.
मोना बोली- इट्स ओके मॉम.
मैं भी बोला- हां मुझे क्या दिक्कत है!
श्वेता बोलीं- ठीक है.
वो अन्दर गईं फिर जब थोड़ी देर बाद वो बाहर आईं तो मेरी आंखें फ़टी की फटी रह गईं.
सासु मां के शरीर पर एक हद से ज़्यादा छोटी जिम शॉर्ट्स और स्पोर्ट्स ब्रा थी.
वो मुश्किल से उनके चूतड़ ढाँप रही थी. ऊपर ब्रा से उनके दूध छलक रहे थे
मेरे गले में कुछ फंस सा गया; मैं बोल नहीं पा रहा था.
वे आकर हम दोनों के सामने खड़ी हुईं- अब रिलैक्स लग रहा है. मैं साड़ी पहने पहने परेशान थी.
काले रंग के प्यूमा के इस लेडीज़ एथलेटिक्स ड्रेस में वो कमाल लग रही थीं.
लम्बी चिकनी टांगें, पतली कमर, भारी चूचे, बड़े बड़े हिप्स.
वो बोलीं- उफ्फ … अब आराम मिला. मैं साड़ी पहने पहने मरी जा रही थी.
मोना बोली- मम्मी घर पर इसी ड्रेस में रहती हैं… किसी के आने पर ऊपर गाउन डाल लेती हैं, बस!
सासू माँ मुस्कुराती हुई बोलीं- क्या हुआ … शॉक हुए सुंदर?
मैं कुछ न बोला.
उस दिन एक बार शाम को मोना को फिर से चोदा और उस वक्त मैंने अपनी सासू मां की चूचियों को याद करके उसे चोदा.
अचानक से एक दिन हमारे घर पर कोरोना टीम आई.
पूरे अपार्टमेंट में केस बढ़े थे इसलिए हमारी चैकिंग हुई और मोना को कोरोना पॉजिटिव बता दिया गया.
हमारे अपार्टमेंट के नीचे एक अस्थायी कोरोना हॉस्पिटल चालू किया गया था.
मोना को उसमें जाना पड़ा.
अब घर पर केवल मैं और सासू माँ थे.
दोपहर में मोना नीचे शिफ्ट हुई, शाम को मैं परेशान बैठा था.
सासू माँ कॉफ़ी लाईं- परेशान मत हो, डॉक्टर बोला है हल्के लक्षण हैं… बस 14 दिन रखेंगे.
वो अभी साड़ी में थीं.
हम लोगों ने 8 बजे डिनर किया.
फिर मैं टीवी देखने लगा.
सासू माँ अब केवल शॉर्ट्स ब्रा में थीं. उन्होंने मुझसे रिमोट लेकर नेटफ्लिक्स लगाया और उस पर एक वेब सीरीज़ लगा दी.
दस मिनट बाद ही उसमें चुदाई का सीन आने लगा.
माहौल में तनाव बढ़ रहा था.
मैं उठ कर अपने कमरे में चला गया और लेट गया.
मोना की वजह से मेरा मूड खराब था.
पता नहीं कब सो गया.
गर्मी थी, मैं अधजगा था.
आज सुबह मेरा लंड अचानक टन्ना गया था.
मैं फ्रेंचकट ब्रीफ पहने था.
मैंने आंखें खोलीं, सासू माँ मेरे लंड पर झुकी लंड को बहुत गौर से देख रही थीं.
उन्होंने मेरी चाय लाकर बेड के पास की रैक पर रखी थी.
वो बेड के नीचे बैठी लंड को घूर रही थीं.
उनका चेहरा मेरे खड़े लंड से थोड़ी ही दूर था.
मेरे दिमाग में शैतान आ गया था. मैंने एक हाथ उनके सर पर ले जाकर उनका सर अपने लंड पर झुका दिया.
उनके मुँह से ब्रीफ के ऊपर से लंड टच हुआ, तो वो हड़बड़ा उठीं.
मैं उनके बाल पकड़े पकड़े बोला- रिलैक्स सासू माँ, रिलैक्स.
वो मेरी तरफ देख नहीं रही थीं.
मैंने लेटे लेटे अपनी ब्रीफ के एक कोने से लंड बाहर निकाल दिया और ज़बरदस्ती सासू माँ का मुँह अपने लंड पर झुकाया.
मैं बोला- ले लो सासू माँ … अब शर्माओ मत!
वो मेरा हाथ अपने सर से हटाकर वहां से बाहर चली गईं.
उनकी बदन पर शॉर्ट्स ब्रा ही थी बस!
मैंने बस एक पल सोचा और फिर उठा. ब्रीफ उतार कर एक हाथ से अपना लंड पकड़े मैं बाहर आया.
सासू माँ बाहर किचन में खड़ी चाय पीने जा रही थीं.
मैं अपना लंड लेकर उनके सामने पहुंचा.
सासू माँ कहते हुए मैंने उनके हाथ से चाय ली, एक सिप लगाया और उन्हें घूरा.
मैं दरवाजे पर रास्ता खड़ा था तो वो बाहर नहीं निकल सकती थीं.
वे घूम गई थीं.
‘सासू माँ.’ मैंने उनके चूतड़ थपथपा दिए- चाय मैं पी लूँगा. आज आपको आपका लॉलीपॉप चूसना है.
वे चुपचाप खड़ी थीं.
मैं बोला- देखिए, मैं औरतों की बहुत इज़्ज़त करता हूँ. कभी ज़बरदस्ती नहीं करता. मुझे आप पसन्द हैं अगर आपको भी मैं पसन्द हूँ तो बाहर आकर अपना लॉलीपॉप ले लीजिए. वरना आज मैं भी नीचे हॉस्पिटल में क्वारन्टीन हो जाऊंगा.
मैं वापस जाने को हुआ कि वो पलटीं.
उनके चेहरे पर स्माइल थी.
नज़रें झुका कर उन्होंने मुझे देखा, फिर मेरे आगे घुटनों के बल बैठ गईं और मेरा लंड पकड़ कर मेरी आंखों में झांका.
इतना सब किया मगर वो बोलीं कुछ नहीं.
मैंने प्यार से उनके सिर पर हाथ फेरा और दोनों हाथों से उनका सर पकड़ कर अपने लंड पर लगा दिया.
‘उम्म पुच्च..’ उन्होंने मेरा लंड चूमा और फिर मुँह में भर लिया.
आह… मैंने संतुष्टि से आंखें बंद कीं और वो मेरा लंड चूसने लगीं.
मैं दोनों हाथों से उनका चेहरा पकड़े लंड उनके मुँह में अन्दर बाहर कर रहा था.
कुछ मिनट में ही मेरा लावा उबला और उनके मुँह में मेरा वीर्य भर गया.
वो पी गईं, थोड़ा पौंछ लिया.
फिर वो उठ कर बाथरूम में गई और मुँह धोकर लौट आईं.
उन्होंने शिकायत की- मैं नहा चुकी और तुम फ्रेश भी नहीं हुए!
तो मैं बोला- अब जा रहा हूँ न!
मैं नहा कर लौटा.
मेरे बदन पर ब्रीफ और बनियान थी.
हमने नाश्ता किया, मोना से मिलकर आए.
अब 10 बजे थे.
आते ही सासू माँ ने साड़ी उतार दी.
अगले कुछ पलों में वो अपनी पसन्दीदा शॉर्ट्स ब्रा में थीं.
मैं भी ब्रीफ में आ गया था.
वो मुझे देख रही थीं.
मैंने उन्हें बांहों में भरा और चूमने लगा.
मैं चूमता हुआ बोला- उफ्फ सासू माँ यू आर टू हॉट … आई जस्ट लव यू!
वे भी मुझसे चिपटती हुई बोलीं- प्लीज लव मी सुंदर. लव मी प्लीज … और मुझे श्वेता कहो, सासू माँ नहीं.
वे फुसफुसा रही थीं.
‘ओह श्वेता माय डॉल.’ मैंने कहके उनकी ब्रा खोल दी.
उनके बड़े बड़े चूचे अब मेरे सामने एकदम नंगे थे.
मैंने उनके एक निप्पल को मुँह में भर के चूसना शुरू किया.
उनकी मादक आहें और कराहें घर को मादक बनाने लगीं.
मैं उनको गोद में उठाकर बेडरूम के अन्दर लाया और उन्हें बेड पर औंधा लिटा दिया.
मैंने पीछे से आकर उनकी शॉर्ट्स उतार दी.
अब वो मादरजात नंगी थीं.
मैंने उनके उठे हुए गोल गोल चूतड़ों पर किस किया और कहा- सासू माँ, आपके जितने अच्छे हिप्स आज तक नहीं देखे. मस्त फिगर आपका, पतली कमर चौड़े चूतड़.
सासू माँ कुछ ऐसा बोलीं- उम्ममह लव यू!
मैंने उन्हें पलट दिया.
उनकी चूत शेव्ड थी, लगता था कल ही चिकनी की थी.
मैंने उनकी चूत को प्यार से थपथपाया और उनकी चूत में एक उंगली घुसेड़ दी
‘आह…’ वो सिसकारियां भरने लगीं.
मैंने कुछ देर उंगली से उनकी चूत खोदी.
वे तड़पती रहीं, बोलीं- प्लीज अब करो ना!
मैंने अपनी ब्रीफ उतारी और उनकी टाँगों के बीच आ गया.
उनकी चूत गीली थी, मैंने लंड उनकी चूत पर टिकाया.
वे बोलीं- क्रीम लगा लो.
मैंने क्रीम ले ली, उनकी चूत में भरी, अपने लंड पर भी लगाई.
उनकी टाँगें ऊपर उठा कर चौड़ी कीं.
चूत पर लंड सैट किया और अन्दर धकेल दिया.
‘आन्ह…’ वो चिहुंकी.
थोड़ा सा लंड अन्दर घुस गया था.
उनकी चूत मुझे एकदम कसी लग रही थी.
मैं दांत पर दांत भींच कर लंड उनकी चूत में घुसेड़ता गया.
वो चीख ही पड़ीं. उनकी आंखों में आंसू थे.
‘बस बस.’
मैंने उन्हें पुचकारा, चूमा और उनकी चूची को चूमने लगा चूसने लगा.
उनकी चूत बहुत ज़्यादा कसी लग रही थी.
मैं बोला- आपकी चूत बहुत कसी है सासू माँ. मोना से भी ज़्यादा!
वे मुझे देखती हुई बोलीं- हां कुदरती है. लेकिन मुझे सासू माँ नहीं, श्वेता कहो.
‘ओके श्वेता. लेकिन तुमको श्वेता नहीं कहूंगा सासू माँ, आज से तुम्हें अपने दिए नाम से पुकारूँगा.’
मैंने उन्हें चूमा.
उन्होंने पूछा- क्या नाम दोगे?
‘छम्मक छल्लो … छमिया, मेरी छमिया.’
मैं उन्हें होंठों पर चूमते हुए बोला.
मैं उनकी चूची पकड़ कर लगातार उन्हें चोद रहा था.
‘आह ओह …’ वो भी सिसकारियां भर भर कर मुझे उकसा रही थीं.
कुछ देर बाद मैंने उन्हें ऊपर किया, उनके गोल चूतड़ हाथों में पकड़े और उन्हें अपने लंड से उछालने लगा.
वो रूक रूक कर मेरे मुँह में अपने निप्पल भर दे रही थीं.
‘आह मेरी छमिया, तेरी चूत बहुत प्यारी है रे … उछल कुतिया, लंड पर उछल मेरे!’ मैं अंडबंड बक रहा था.
‘ले ले मादरचोद, चोद ले अपनी छमिया.’ वो गाली देती हुई मेरे लंड पे उछल रही थीं.
थोड़ी देर में वो थक गईं.
मैंने उन्हें नीचे किया.
कुछ ही देर में वीर्य का फव्वारा मैंने उनकी चूत में उड़ेल दिया.
वे संतुष्ट थीं.
मैं थक कर सो गया था.
दो बजे उठा, हमने खाना खाया.
शाम को हम दोनों फिर से मोना मिले.
डिनर के बाद मैं छत पर टहलने गया.
लौटा तो देखा सासू माँ मेरे बेड पर बिना कपड़ों के घोड़ी बनी हुई थीं,
वे अपने चूतड़ हिलाते बोलीं- कम ऑन बच्चे, आई एम वेटिंग!
मैंने उनके गोल गोरे चूतड़ सहलाये, चूमे फिर उनके पीछे आकर उनकी चूत में लंड घुसेड़ा.
वे Xxx फक में सिसकारी लेती हुई बोलीं- आह पागल … बहुत सीधा है रे तू!
मैं बोला- क्या हुआ?
उन्होंने पलट कर मुझे चूमा- मैं समझती थी, तू मेरी गांड मारेगा.
वे बोलीं और मुझे इनविटेशन दे रही थीं.
‘तो अभी क्या हुआ? ये बोलकर मैंने चूत से लंड निकाला, उनकी गांड में क्रीम लगाई और अपना लंड गांड में घुसेड़ दिया.
‘आह …’
वो केवल हल्के से चीखीं.
मेरा लंड उनके गांड में आसानी से घुस गया था.
मैं बोला- सासू माँ, आपकी गांड में बहुत ईजिली घुस गया!
‘हां, बेटा.’ वो हंसी.
ऐसे ही इन हिप्स की ये शेप नहीं आई है. मेरे सारे लवर्स अपना सारा प्यार मेरी गांड में ही घुसेड़ते थे. मुझे भी आदत हो गई.
सासू माँ बोलीं- तुम्हारे पापा भी इसी के शौकीन थे. अब तुम भी मज़े लो.
मैं आराम से हल्के हल्के धक्के दे रहा था.
वे बोलीं- अभी कच्चे खिलाड़ी हो बेटे, तुम्हें बहुत कुछ सिखाना पड़ेगा. गांड मारी जाती है. चोदी नहीं जाती.
फिर वो पलट कर मेरी आंखों में देखकर फुसफुसाती हुई बोलीं- एक बात और सुनो. बिस्तर पर औरत पर रहम खाने वाले लोग मुझे पसन्द नहीं आते. यही वो जगह होती है, जहां मर्द औरत को उसकी जगह दिखाता है. एंड आई लव डर्टी टाक.
‘अच्छा मेरी रानी …’ कह कर मैंने उन्हें नीचे किया और उनको कायदे से घोड़ी बनाया, मुँह नीचे चूतड़ ऊपर करके और दोनों चूतड़ पकड़ कर दे दनादन उनकी गांड में लंड पेलने लगा.
साथ ही मैं रह रह कर उनके चूतड़ों पर चपत मारता, उनके बाल पकड़े खींचता.
मैं बोल रहा था- देख भोसड़ी की, देख … गांड मरवा रही है अपने दामाद से तू कुतिया. तेरी माँ की चूत, साली रंडी, मादरचोदी, तेरी बेटी चोद दी, अब माँ को लगा दिया.
वो चूतड़ पीछे करके लगातार जवाब दे रही थीं- मेरी माँ भी चोद देगा हरामी तू, गांड भी मारेगा न सासुचोद साले!
पन्द्रह मिनट तक मैंने उनकी गांड मारी फिर उनकी गांड में वीर्य छोड़ दिया.
चौदह दिन मोना कवरन्टीन रही और 14 दिनों तक मैंने मदर इन लॉ Xxx फक का मजा लिया.
मोना के आने के बाद सासू माँ अपने घर चली गईं.
मेरी सास और मेरे यौन सम्बन्धों का मोना को कुछ पता नहीं चला था.
मेरे और मेरी चाची के Antarvasna बीच के सेक्स का ये राज सुनो !! यह हसीन ख्वाब तब से चालू होता है जब से मेरी चाची मेरे चाचा से शादी करके हमारे घर आई। मेरे चाचा एक सुस्त प्रकृति के इंसान हैं, दुबले-पतले मुरझाये से देख के तो यही लगता है कि नपुंसक हैं !
उनकी शादी के समय तो ऐसा कुछ नहीं हुआ पर जब शादी के बाद एक दिन मैंने चाची को कपड़े बदलते देखा तो मैं पागल सा हो गया। चाची उस समय २९ साल की थी और मैं १८ साल का। मेरे लंड ने नया-नया उठना सीखा था। उनको ब्रा-पैंटी में देखकर मेरा लंड कुमार तो बिलकुल आपे से ही बाहर हो गया ! इच्छा हुई उसी वक़्त जाकर योनि क दर्शन कर आऊं।
कुछ दिन तो सब सामान्य रहा, फिर एक दिन जब चाची अपने कमरे में अकेली थी तो मैं उनके कमरे में यह देखने गया कि आखिर यह माल कर क्या रहा है !
मैंने देखा कि वो नंगी लेटी हुईं थी और एक बैंगन को अपनी चूत में डाल रही थीं। मेरा लौड़ा फिर से खड़ा हो गया। मैं आँख बंद करके उस मालजादी को चोदने के सपने देखने लगा !
इतने में ही मेरा ध्यान भंग हुआ एक आवाज से, यह आवाज मेरी चाची की ही थी, वो बोलीं- सनी बाहर क्यूँ खड़े हो? अंदर आ जाओ !
मैं एकदम से डर गया- अरे इसने कैसे देख लिया मुझे ?
अंदर गया तो चाची ने तब तक एक गाऊन पहन लिया था ! हाय उस गाऊन में भी क्या लग रही थीं वो ! उफ्फ्फ्फ़ एकदम बम्पर माल !सांवला-सलोना शरीर ! उस पर ये बड़े बड़े दूध ! मस्त चौड़ी गांड और गोल गोल जांघें ! पूरे बदन से यौवन टपक रहा था जैसे ! मैं तो दीवाना हो गया था !
तभी चाची मुझसे बोली- क्या देखते रहते हो सनी तुम मेरे कमरे के बाहर खड़े होकर?
मैं बोला- कुछ नहीं चाची जी ! बस ऐसे ही खड़ा हुआ था !
वो बोली- अगर तू ऐसे ही खड़ा हुआ था तो तेरा यह हथियार क्यूँ इतना खड़ा हुआ है?
मैं यह सुनकर एकदम सकपका गया लेकिन हिम्मत जुटाकर बोला- हथियार ? कौन सा हथियार ?
चाची बोली- अरे मेरे मिटटी के माधव ! हथियार मतलब तुम्हारा पप्पू ! याने कि तुम्हारा लंड !
मैं- नहीं चाची जी ! कैसी बात कर रही हैं आप ? मैं तो बस .. यूँही .. . और कुछ नहीं !
चाची- सुन रे लौंड़े ! जल्दी से बता दे- क्या कर रहा था? नहीं तो सब को बुलाकर बोलूंगी कि यह साला मेरी इज्जत लूटना चाहता है !
मैं तो घबरा गया एकदम से फिर मैं बोला- मैंने आपको नंगा देख रहा था, आप बहुत सुंदर हो ! मुझसे चुदवाओगी क्या आप ?
चाची- हाँ मेरे राजा ! मैं तो कब से चाह रही थी कि कोई माँ का लवड़ा फंसे तो कुछ अपनी भी प्यास शांत हो जावे ! ये तेरा चाचा तो बड़ा थकेला इंसान हैं , साला न चुम्मा लेता हैं न दूध दबाता है और न चूत चाटता है, साला मुझे भी लंड चूसने नहीं देता ! यहाँ तक कि बहनचोद कोई गन्दी बात भी नहीं करता है! शादी को दो महीने हो गए लेकिन इस भोसड़ी वाले ने सिर्फ दो बार चोदा है ! चोदा क्या है, दो मिनट मे लंड हिला के सो जाता है साला ! तू अच्छा हट्टा-कट्टा है ! तेरे से तो कुतिया के जैसे चुदुंगी मैं !
क्यूँ नहीं मेरी रानी ! बिलकुल संतुष्ट कर दूंगा, तुझे तो मैं ऐसा चोदूँगा कि तू साली बीच सड़क मे भी चुदवाने के लिए राजी हो जायेगी ! ऐसा माल जैसा शरीर लेकर अभी तक प्यासी बैठी है ? पर अब तेरी गांड को मैं अपने लंड के प्यार से सराबोर कर दूंगा ! एक काम करते हैं, यह चाचा कल जा रहा है बाहर ! तू तो यहीं रहेगी और तेरा कमरा भी घर से थोड़ा हट के है, मैं किसी बहाने से रात को तेरे कमरे में आ जाऊंगा, फिर बहनचोद दोनों मिल के सेक्स का आतंक मचाएंगे !
चाची- प्लान तो मस्त है ! तू एक काम करना, एक अद्धा दारू और एक बटर चिकन भी ले आना ! मस्त दारू पी के मूड बनायेगा ! और हाँ मादरचोद सिगरेट लाना मत भूलना ! साला पूरे तीन महीने हो गए दारू को हाथ लगाये ! इतना सीधा पति मिला है कि साला चूत को भी नहीं देख पाता ! पर आज अभी थोड़ा सा सेक्स तो कर ही लेते हैं ! तेरा लंड तो मैं आज ही चाखुंगी लौंड़े !
फिर मैंने धीरे धीरे चाची के दूध सहलाना चालू कर दिए चाची ने भी मेरे लंड को मसलना शुरू कर दिया ! मैंने चाची के गाऊन को उतार दिया और उनके बटले पीने लगा ! साली रंडी ऐसी आवाजें निकाल रही थी जैसे ब्लू फिल्म में मालू राण्डें निकालती हैं- हाय ! उफ़ सनी मादर चोद ! उफ़ साले और मसल हां हा हाय …. उफ़ ..उफ्फ्फ साले फ़ोड़ दे आज तो तू इनको ! फिर उसने झट से मेरा लौड़ा अपने मुँह मे ले लिया !
और मैं जन्नत में पहुँच गया ! वो खींच खींच कर मेरे लौड़े को चूसने लगी मैं भी उसकी फ़ुद्दी को सहलाने लगा ! आह आह क्या मजा आ रहा था ! आह, लौड़ा तो पूरा टाइट हो गेला था ! फिर सुपाड़े को चूसने लगी मेरी चाची !
फिर मुझसे बोली- अब चल गांडू मेरी बुर चाट तू !
मैं झुका और देखा तो आज क्या दर्शन हुए हैं योनि देवी के ! वाह वाह मजा आ गया- हलकी गुलाबी बुर थी चाची की पर एकदम टाइट न थी। ऐसा लग रहा था कि बहुत चुद चुकी है।
मैंने पूछा- एक बात बता रंडी ! मेरी चाची बनाने से पहले कित्तों से खेली-खाई हैं तू ?
वो बोली- छः महीने तक तो एक बॉयफ्रेंड था, उसने चोदा ! लेकिन इस सील को तोड़ने का श्रेय तो मेरे जीजाजी को जाता है ! वो बहुत अय्याश इंसान हैं ! मेरी दीदी को अलग अलग तरीके से चोदते हैं ! अबकी बार मैं उनके यहाँ जाउंगी तो तू भी चलना ! मेरी दीदी, जीजाजी, जीजाजी के भाई, उनकी पत्नी, जीजाजी की बहन और बहनोई मिलकर ग्रुप सेक्स करते हैं ! हम भी शामिल हो जायेंगे !
फिर मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया ! उसके बाद मैंने अपना लौड़ा उसकी चूत में डाल दिया और धक्के पे धक्का मारने लगा ! वो भी मस्ताती जा रही थी ! आह आह …उफ़ …हे …आह आह मेरे राजा ! मेरे जानेमन ! मुझे कुत्ते के जैसे चोदो ! आहऽऽ फाड़ डालो आज इस बुर को ! चूत के चिथड़े उड़ा डालो आज ! आज आह आज ……. ऐसा चोदो की बस मजा आ जाये !
मैंने चाची को दस मिनट तक चोदा और झड़ गया !
चाची संतुष्ट हो गई थी आज ! बोली- कल रात को चार-पाँच बार चोदना ताकि मेरी ये छिनाल बुर भी पानी छोड़ दे !
फिर मैं बाहर आ गया !
भाई लोग मेल करो कि कहानी कैसी लगी !
अगली कहानी में अगली रात की चुदाई का वर्णन करूँगा ! अगर मेरी चाची आपको पसंद आई हो तो उसके बारे में भी लिखें। Antarvasna
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