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मेरा नाम राहुल है, जी यह मेरी Sex Stories अन्तर्वासना में पहली दास्तान है।सभी अन्तर्वासना-पाठकों को मेरा सलाम और गुरूजी को मेरी तरफ़ से प्रणाम !
मैं +२ में पढ़ता हूँ, गोरा, चिकना, बड़ी-बड़ी गोल-मोल गांड ! अभी मेरे शरीर में बाल नहीं आए, चिकना चुपड़ा बदन है मेरा, मेरी चाल भी लड़कियों जैसी है। मेरे कुछ सीनियर लड़कों ने मुझ से खाली क्लासरूम में खाली समय में अपने लौड़ों की मुठ मरवाई, एक दो बार मैंने उनके लंड भी चूसे।
अकेला घर में होता तो बहन की अलमारी से उसके ब्रा, पैंटी, टॉप पहन शीशे में देखता रहता। एक रोज़ उसकी अलमारी में मैंने एक व्यस्क-पत्रिका देखी जिसमें लड़के को लड़के से गांड मरवाते देखा और लड़की को लड़की के साथ करते देख मेरा दिल भी गांड मरवाने को करने लगा।
एक दिन शाम को सब बैठ चाय वगैरा पी रहे थे कि तभी गाँव से फ़ोन आया मेरे पापा के चचेरे भाई यानि मेरे चाचा का देहांत हो गया। मेरे पेपर नज़दीक थे, मैं और दादी रुक गए, और सभी गाँव चले गए, साथ वाले अंकल को रात हमारे घर रहने को कह गए।
अंकल बहुत ठरकी थे, यह सभी लोग बताते हैं। वो अकेले घर रहते थे पीछे से वो तो कामवाली को नहीं छोड़ते। मैंने और दादी ने खाना वगैरा खाया। मैं ब्रश करने की सोच रहा था कि अंकल ने बेल बजाई। उनको अन्दर आने को कह मैं गेट लॉक करके उनके पीछे ही अन्दर गया। मैंने अंकल को कहा- आप लॉबी वाला कमरा ले लो, मैंने बिस्तर लगा दिया है।
कह मैं अपने कमरे में गया। गर्मी की वजह से मैंने निकर पहन ली और सोचा कि सोने से पहले नहा लूँ। पसीना आया था, अच्छी नींद आयेगी।
दरवाज़ा खुला ही छोड़ मैंने कपड़े उतार डाले, सिर्फ़ चड्डी पहने शावर के नीचे खड़ा नहाने लगा। पानी से मेरी चड्डी गांड से चिपक गई। तभी पीछे से किसी ने मेरी दोनों गांड के चूतड़ों को सहला डाला, पीछे से जफ्फी डाल ली।
मैंने मुड़ कर देखा तो अंकल मुझे बाँहों में लेकर पीछे मेरे साथ चिपके हुए थे।
यह क्या कर रहे हो अंकल ?
तेरे साथ नहाने का मन है, शावर एक ही है, इसलिए सोचा कि तुझसे चिपक नहा लूं ! वैसे तू बहुत चिकना है, गांड बहुत सेक्सी है, ऐसे चूतड़ तो किसी लड़की के भी न होंगे। मुझे अपनी तरफ़ घुमा के मेरी छाती देख बोले- यार ! यह तो लड़की की तरह पोली पोली है और साले यह निपल तो लड़कियों जैसे हैं।
कहते ही पानी से भीगे मेरे निपल को चूसना चालू किया। मेरी गांड में कुछ कुछ होने लगा, मुझ से रुका नहीं गया। जब अंकल मुझे गरम कर रहे थे तो मेरा हाथ भी उनके लंड पे गया, मैं सहलाने लगा।
अंकल बोले- मसल थोड़ा !
मुझे नीचे कर मेरे मुँह में लंड डाल दिया। गीला लंड, गीला बदन वो मेरे सर को पकड़ आगे पीछे करने लगे। शावर बंद कर मैंने उनके बदन पर साबुन लगते हुए उनकी चड्डी उतार डाली, लंड पे साबुन लगा दिया और ख़ुद उनके शरीर से अपने बदन को रगड़ कर साबुन लगवा लिया। वो गांड में ऊँगली करने लगे, साबुन की वजह से उनकी दो ऊँगलियाँ कब घुस गई मालूम न पड़ा।
शॉवर में साबुन उतार अंकल तौलिए से पोंछ मुझे बिस्तर पे ले आए और बोले- लंड चूस ! मुठ मार !
मेरी दोनों टाँगे कंधों पे रख लंड मेरी गांड पे रगड़ते हुए धक्का मारा, फट से लंड घुस गया मेरी गाण्ड में। अंकल ने मुझे मजबूती से पकड़ रखा था। मुझे मालूम था कि शुरू में दर्द होगा, मैंने अपने हाथ से अपना मुँह बंद कर रखा था। दूसरे धक्के में उनका आधा लंड घुस गया, मैं छटपटाने लगा दर्द से, टीस निकल रही थी कि तीसरे धक्के से लंड पूरा घुस गया।
लण्ड मेरी गाण्ड में फंस चुका था, अंकल ने निकाल के फ़िर डाला, तीन चार बार जब निकाल के डाला तो मुझे मजा आने लगा और उन्होंने मुझे छोड़ दिया। अब मैं नीचे से गांड उठा उठा उठा के चुदवाने लगा।
अंकल ने मुझे रात में तीन बार चोदा। सुबह मुझसे ठीक से चला नहीं गया, गांड पे सरसों का तेल लगाया फ़िर ठीक हुआ।
मैं स्कूल गया। शाम को पापा और अन्य लोग न लौटे तो अंकल को फ़िर रुकना था। दो रात में अंकल ने मुझे गांडू बना डाला। उसके बाद मौका मिलते में झट से उनके घर चला जाता, खूब चुदवाता, मौका रोज़ ही मिल जाता।
अंकल ने मुझे इतना चोदा कि मुझे उसके बाद गांड मरवाने का चस्का लग गया। आंटी के दुनिया से जाने के बाद ही अंकल को यह सब करना पड़ा था।
दोस्तो यह थी मेरी गांड में घुसे पहले लंड की ठुकाई !
मेरी गांड में दूसरा लंड किसका घुसा वो अगली बार लिखूंगा !
कभी अलविदा न कहना !
चलते चलते कोई लंड मिल जाए तो उसे गांड में डलवाना। Sex Stories
मैं अन्तर्वासना की Sex Stories नियमित पाठिका हूँ और खाली समय में अक्सर मैं कहानियाँ पढ़ती हूँ।
मेरा नाम ममता है मैं वैसे तो हिमाचल की रहने वाली हूँ पर आज कल हम पंजाब में रहते हैं। मैं चार भाई बहनों में दूसरे नम्बर पर हूँ। मेरा कद 5 फीट 2 इंच है रंग गोरा है। मैं बचपन से ही थोड़ी मोटी हूँ और काफी सेक्सी विचार रखती हूँ। मैं और मेरी छोटी बहन रात को एक साथ सोते है, मैं अक्सर अपनी बहन का चुम्बन आदि कर लेती थी।
पढ़ाई पूरी होने के बाद मैं नौकरी तलाशने लगी। तभी मेरे भईया के एक दोस्त ने बताया कि रेडीमेड के एक शोरूम में मैनेजर की जगह खाली है। मैंने अप्लाई कर दिया, मेरी सेलेक्शन हो गई और मैंने काम पर जाना शुरू कर दिया। वहीं मेरे साथ एक लड़का काम करता था जिसका नाम रमन था, वो हमेशा मुझे गन्दी निगाह से देखता था। मन ही मन वो भी मुझे अच्छा लगता था पर मैं चाहती थी वो ख़ुद कहे।वो हमेशा ही मेरे साथ बात करने के बहाने तलाशता रहता था। काम करते वक्त वो कभी कभी मुझे छू लेता तो मैं कुछ नही बोलती थी। इससे उसका हौंसला बढ़ गया और वो कभी कभी मेरे वक्ष भी दबा देता था या फिर मेरी गांड में ऊँगली दे देता था। मैं ऊपर से नाराज होती पर यह सब मुझे भी अच्छा लगता था।
कुछ दिन बाद मेरी बुआ के लड़के की शादी थी, हम सब गाँव जा रहे थे। मम्मी पापा सुबह चले गए, मैंने और बड़े भैया ने शाम को जाना था। हमें शाम छः बजे जाना था। मैंने दो बजे छुट्टी ले ली और रमन को कहा कि मुझे घर छोड़ आए क्योंकि मेरे पास कोई साधन नहीं था, रमन के पास मोटरसाइकिल थी। मैंने उसके पीछे बैठ गई और हम घर पहुंचे। भईया घर नहीं थे। मैंने फ़ोन करके पूछा तो भईया ने कहा- मैं अभी दो-तीन घंटे बाद आऊंगा।
तो मैंने रमन को कहा- थोड़ी देर रुक जाओ, चाय पी कर चले जाना !
वो बैठ गया। मैंने जाकर पहले अपने कपड़े बदले, मैंने जानबूझ कर टी-शर्ट और पायजामा पहन लिया और नीचे से कुछ भी नहीं पहना। मैं रसोई में जाकर चाय बना लाई और रमन को पकड़ा दी। वो लगातार मुझे देखे जा रहा था।
मैंने पूछा- क्या देख रहे हो?
तो वो फट से बोला- आप बहुत सेक्सी लग रहे हो !
मैंने जानबूझ कर कहा- तुम झूठ बोल रहे हो !
तो वो उठ कर बिल्कुल मेरे करीब आ गया। इससे पहले कि मैं कुछ बोलती उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया।
मैं भी यही चाहती थी सो मैंने उसे रोकने की कोशिश नहीं की।
मैंने कहा- ज़रा रुको, मैं दरवाजा बंद कर दूँ !
मैं बाहर दरवाजा बंद करने गई और गेट अच्छे से बंद करके वापिस आई तो देखा कि रमन अपना 8 इन्च का लंड हाथ में पकड़ कर बैठा था। मुझे देखते वो एकदम आया और मुझे उठा कर सोफे पर ले गया और मेरे स्तन मसलने लग गया। मैंने उसके लंड को पकड़ लिया और उसे ऊपर नीचे करने लगी। फिर उसने मुझे कपड़े उतारने के लिए कहा। मैंने पायजामा और टी-शर्ट उतार दी और एकदम नंगी हो गई।
अब मैंने उसे कहा- तुम कब कपड़े उतारोगे?
उसने भी अपने कपड़े उतार लिए। मैं सोफे पर लेटी हुई थी और उसका लंड मेरे मुँह के सामने था। उसने मुझे अपना लंड चूसने के लिए कहा पर मैंने मना कर दिया।
उसने कहा- कोई बात नहीं !
और मेरी टांगों के बीच बैठ गया और अपनी जबान मेरी फुद्दी में डाल दी और अंदर बाहर करने लगा।
मैं पागल हुए जा रही थी तो मैंने कहा- मुझे भी तुम्हारा लंड चूसना है !
हम दोनों 69 की पोजीशन में हो गए। मैंने जिंदगी में पहली बार लंड का स्वाद चखा था, नमकीन सा था उसका स्वाद ! पर मुझे एकदम शहद जैसा लग रहा था ! मैं लोलीपॉप के जैसे उसके लंड को चूस रही थी। हम दस मिनट इसी पोजीशन में रहे, तभी रमन हांफने लगा और एक तेज पिचकारी मेरे मुँह में मारी और फिर मेरे मुँह से लंड निकाल कर बाकी पानी मेरे मम्मों पे गिरा दिया।
मैंने कहा- तुम्हारा तो काम हो गया ! अब क्या होगा?
उसने कहा- मैडम जी, आप चिंता क्यों करते हो? अभी खड़ा हो जाएगा।
वह मेरी टांगो के बीच बैठ गया और दो उंगलियों से मुझे चोदने लगा। दो तीन मिनट बाद मेरी फुद्दी से हल्का हल्का पानी आने लगा। मेरी फुद्दी एकदम गीली हो गई थी। अब तक उसका लंड फिर तैयार हो गया था। अब मेरे को भी आग लगी हुई थी कि जल्दी से जल्दी वह मेरी फुद्दी में अपना लंड डाले। वह खड़ा हुआ, मैं सोफे पर थी, उसने मेरी टाँगें अपने कंधे पर रखी और अपना लंड का सुपारा मेरी फुद्दी के मुँह पर रखा।
चूंकि यह मेरी पहली बार थी तो मैं काफी डरी हुई थी, पर रमन ने कहा- घबराने की कोई बात नही है !
उसने आराम से धक्का लगाया और उसका लंड आधे थोड़ा कम मेरी फुद्दी में चला गया।
मेरी जान गले में आ गई, मेरी आंखों के सामने अँधेरा सा आ गया। मैंने सोचा- शायद मैं आज नहीं बचूंगी !
पर वह पागलों की तरह धक्के लगाये जा रहा था। 5 मिनट बाद सब सामान्य हो गया, मुझे भी मज़ा आने लगा। अब मैं भी चूतड हिला हिला कर उसका साथ देने लगी।
तभी मुझे लगा कि मेरी फुद्दी से पानी जैसा कुछ निकल रहा है। मैं झड़ गई थी।
मैंने रमन को कहा- अब बस करो ! मुझे दर्द हो रहा है !
पर वह रुक नहीं रहा था और बोला- मेरा काम कैसे होगा ?
तभी उसने अपना लण्ड मेरी फुद्दी से निकाल लिया और मुझे सीधी होकर लेटने के लिए कहा।
मैं लेट गई। अब वो मेरे स्तन पकड़ कर उनके बीच अपने लंड से चोदने लगा। पूरे पाँच मिनट बाद एक गर्म पानी की पिचकारी मेरे गाल पर पड़ी। उसका झड़ चुका था, वह अपने लंड को खींच-खींच कर मेरे मम्मों पर अपना वीर्य गिरा रहा था। मैं बहुत खुश थी क्योंकि मैंने जिंदगी में पहली बार सेक्स किया था।
रमन थोड़ी देर मेरे पास लेटा रहा। मैं उठ कर बैठ गई। मैंने देखा कि रमन के लंड पर थोड़ा वीर्य लगा हुआ था।
मैं पागलों जैसे उसके लंड को चूसने लगी। फिर हम दोनों बाथरूम गए। हम दोनों ने एक दूसरे को नहलाया।
मैंने घड़ी देखी तो 5 बजने वाले थे। भईया के आने का समय हो गया था। हम दोनों ने कपड़े पहने। मैं रमन को छोड़ने के लिए दरवाजे तक आई, उसने मुझे होंठों पर चूमा और बाय कह कर चला गया। आधे घंटे बाद भईया आ गए। हम तैयार हो कर स्टेशन पहुंचे और ट्रेन में बैठे। ट्रेन में मेरी फुद्दी में बहुत दर्द हो रहा था पर एक सुखद एहसास हो रहा था !
आपको मेरी कहानी कैसी लगी, मुझे मेल जरुर करें ! Sex Stories
शहर में तीन साल की पढ़ाई Hindi Porn Stories के बाद मैं बिल्कुल ही बदल चुका था, लेकिन मेरे पड़ोसी बिरजू काका की बेटी रनिया मुझे पहले जैसा लल्लू ही समझती थी। मैंने इंटर तक पढ़ाई गांव में ही की थी। तब तक खेती और पढ़ाई के अतिरिक्त दुनियादारी को मुझे कोई समझ नहीं थी। गांव के सिवान पर हमारे और रनिया के खेत थे। मैं स्कूल से वापस आने के बाद सीधे खेत में चला जाता। वह भी स्कूल से आकर अपनी बकरियां लेकर वहीं आ जाती। मेरे पहुंचने पर बिरजू काका गांजा पीने के लिए चले जाते।
जब मैंने बारहवीं के बाद गांव छोड़ा तो वह सातवीं में थी। मैंने जब बी ए पास किया तो वह दसवीं में आ गयी। उसकी नीबू के आकार की चूचियां सेब के आकार में बदल गयीं। होस्टल के जीवन ने मेरी काया ही पलट दी थी। मुट्ठ मारना मैंने वहीं आकर सीखा। उस समय मेरे सामने रनिया का ही चेहरा होता। मैं उसी की चुदाई की कल्पना करके मुट्ठी मारता। मुट्ठी मारते मारते मेरा लन्ड थोड़ा टेढ़ा भी हो गया था। सुपाड़े की चमड़ी खुल गयी थी। कभी कभी तो हम तीन लड़के एक साथ ही मुट्ठी मारते।
हर बार मुट्ठी मारते मैं यही सोचता कि बस यह अन्तिम बार है, अब जाकर साक्षात ही उसे चोदूंगा। वह मेरे सामने ही जवान हो रही थी, लेकिन अवसर ही नहीं मिला। पहले साल के बाद मैं जब दूसरे साल मैं यह सब जान सका तो वह गरमियों की छुट्टियों में अपने ननिहाल चली गई। उसके बाद बीच में ऐसा अवसर ही नहीं मिला कि मैं कोशिश करुं।
फाइनल की परीक्षा के बाद दैवयोग से वह अवसर मिल गया। मैं जानता तो नहीं था कि उसके मन में क्या है लेकिन एक दिन बाबू जब मुकदमें के सिलसिले में बाहर चले गये तो मैं दोपहर का खाना खाने के बाद खेत में चला गया। वहां मेरे ट्यूबवेल के पास आम का घना पेड़ था।
मैंने माई से कहा कि मैं जाकर वहीं कुछ पढ़ूंगा और सो जाऊंगा।
मेरे ट्यूबवेल से बिरजू काका अपने गन्ने में पानी लगा रहे थे। चिलचिलाती दुपहरिया थी। उनका खेत निकट ही था। वह पानी खोलकर वही मेरे ट्यूबवेल के घर में रखी खटोली पर लेटे थे। मुझे देखकर उठ गये। बातें करने लगे। पता चला कि रनिया अब खाना लेकर आती ही होगी।
यह सुनकर न जाने मेरा मन क्यों खिल उठा। मेरी छठी इंद्री ने कहा अभी बिरजू काका खाना खाकर गांजा पीने जायेंगे। आज बिना चोदे छोड़ूंगा नहीं!
मेरा सोचा सही हुआ। पानी का काम बस दो-तीन घंटे में पूरा होने वाला था। वह रनिया को पानी देखने के लिए कहकर मुझसे बोले कि काम होने के बाद पंप बन्द कर दूं तब यह चली जायेगी, मुझे देर हो जायेगी।
रनिया खेत का एक चक्कर लगाकर आकर वहीं भूमि पर बिछे एक बोरे पर बैठ गई।
मैंने उसे गौर से देखा। उसने छींट की सलवार और कुरती पहने थी। उसकी चूंचियां सेब से भी बड़ी थीं। नीचे केवल शमीज थी, ब्रा नहीं। इसलिए उनका पूरा आकार मेरी आंखों में था। शरीर भरा था।
वह चुप ही बैठी थी। मैंने बात आरम्भ की, ” तुम काफी बड़ी हो गयी हो। “
वह चुप ही रही। मैंने फिर कहा, ” खूबसूरत हो गयी हो। “
” हट ” वह बोली।
” भगवान कसम!” मैंने कहा।
उसने कोई उत्तर नहीं दिया तो मेरी समझ में नहीं आया कि क्या कहूं। थोड़ी देर तक चुप रहने के बाद मैंने कहा, ” आओ चारपाई पर बैठ जाओ। क्यों जमीन पर बैठी हो? “
” यहीं ठीक है। ” उसने कहा।
मैंने चारों तरफ देखा, सन्नाटा था। सूरज बिल्कुल सिर के ऊपर आ गया था। गांव की तरफ गन्ने के खेत थे। पेड़ की आड़ भी थी। मैं हिम्मत सजोकर उठा और उसका हाथ पकड़ कर खींचते हुए कहा, आओ पास बैठो। अच्छा नहीं लग रहा है।”
उसने विरोध किया तो मैंने और जोर लगाया। वह खड़ी हो गयी। मैंने उसे अपनी तरफ खींचा तो वह चारपाई पर गिरते-गिरते बैठ गयी। संम्भवतः उसे मेरी नीयत का आभास हो गया था। उसकी सांसे लम्बी हो गयीं।
मै एक बार फिर इधर उधर देखकर उससे सट कर बैठ गया और उसका हाथ पकड़ लिया।
रनिया बोली, ” लल्लू भैया छोड़ो, अभी कोई देखेगा तो क्या कहेगा? “
उसका यह कहना था, मैं तो निश्चिन्त हो गया। उसे अपनी भुजाओं में कसकर जकड़ लिया और कहा,” आज मैं तुम्हें छोड़ूंगा नहीं। मेरी नीयत बहुत दिनों से तुम्हारे ऊपर है। ” फिर मैं उसकी दाहिनी चूची को शमीज के ऊपर से पकड़कर मलने लगा।
वह घोड़ी की तरह हिनहिनाने लगी, ” छोड़ दो! छोड़ दो! “
मैंने उसकी आवाज को बन्द करने के लिए उसके मुंह पर अपना मुंह लगाकर पहले होंठ को किस किया फिर मुँह में जीभ डालकर उसकी जीभ को चूसने लगा।
वह अभी भी छुड़ाने का हल्का सा प्रयास कर रही थी, लेकिन वह शक्ति नहीं थी जो छुड़ाने के लिए होनी चाहिए थी।
थोड़ी देर उसकी जीभ चूसने के बाद मैंने उसके मुंह से अपना मुंह हटाकर फिर उसकी चूचियों पर आ गया। इस बार उसकी कुरती को शमीज के साथ ऊपर करके दोनों चूचियों को नंगा कर दिया। उसके चूचियों की ढेंपी कड़ी हो गयी थी।
एक चूची को मलते हुए दूसरी पर जब मुंह लगाया तो वह अहक कर बोली, ” चलों किसी खेत में “
” इसका मतलब है कि तुम पहले ही करवा चुकी हो? “
” भगवान कसम नहीं ! “
” तब तुमने कैसे कहा कि चलो खेत में? “
” यहां कोई देख लेगा तो जान मार देगा “
कोई नहीं देखेगा, कहकर मैंने एक हाथ से उसकी चूची को मसलते हुए दूसरे को अपने लन्ड पर रख दिया। लुंगी के नीचे जांघिया में मेरा लंड खड़ा हो गया था।
उसने हाथ हटा लिया।
मैंने फिर खींचकर हाथ रक्खा और कहा, “सहलाओ न मजा आयेगा। यह तो जान ही लो कि आज बिना चोदे छोड़ने वाला नहीं।”
” अभी तो! “कहकर उसने मेरा लंड पकड़ लिया।
मीजते हुए मैंने देखा कि उसकी चुचियां फूलने लगीं। वह अकड़ने भी लगी थी।
उसे वहीं चारपाई पर लिटाकर सलवार का नाड़ा खोलकर देखा तो उसकी चूत झांटों से भरी थी।
मैंनें कहा, ” इसे साफ नहीं करती? “
वह बोली, ” मुझे डर लगता हैं। बालसफा साबुन भी तो कौन लाये। यहां गांव में औरतें गरम राख से बनाती हैं। “
मैंने देखा कि अब उसकी चूत पूरी तरह पनिया गयी है इधर मेरे बाबू जी अब काबू से बाहर हो रहे थे। वह मस्ती में बेसुध होने लगी तो मैंने कहा चलो ट्यूबेल वाले कमरे में।
वह उठकर सलवार पकड़े इधर उधर देखते अन्दर चली गयी। मैं भी गया और अपनी जांघिया निकालकर उसकी जांघों से एक मोहरी निकालकर उसकी टांगे चीरकर लंड को उसकी पनियाई बुर के मुहाने पर रखकर उसकी दोनों टांगों को फैलाकर उसके ऊपर छा गया। कसते ही सट से लंड उसके अन्दर चला गया।
उसने कहा, ” आह! “
फिर मैं घपाघप धक्के मारने लगा। उसने मेरी पीठ को ऊपर से कस लिया और नोचने लगी।
मैंने चोदते हुए उससे पूछा, ” रनिया तूने किसी और से तो नहीं चुदवाया क्योंकि तू तो मजे ले रही है।”
वह बोली, “तुम्हारी कसम नहीं। दर्द वाली बात झूठी होती है। मैं सायकिल चलाती हूं एक दिन मेरी झिल्ली फट गयी। अब गांव में भी लड़कियां मूठ मारती हैं।”
बातें करने में मेरा ध्यान बंट गया। तो थोड़ा समय और लग गया। मैं कमर चलाता रहा। वह नीचे से अपनी कमर हिलाती रही। मैं एकाएक फड़फड़ाकर झड़ गया और उसे छाप लिया। झड़ने के बाद भी मेरा लंड खड़ा था। उसकी बुर की पुत्ती फूल गयी थी। मेरा बीज उसकी बुर से होता हुआ जांघों तक फैला था। मैंने अपने जांघिये से उसे साफ किया।
वह उठी और सलवार बांधकर धीरे से कमरे से बाहर चली आयी थोड़ी देर बाद मैं भी निकल आया।
फिर तो मैं सारी छुट्टी उसे पत्नी की तरह चोदता रहा। हम दोनों ही प्रयत्न करते कि खेत में कोई काम रहे।
बिरजू काका की उपस्थिति में ही हम लोग चुदाई पेलाई की बात करते रहते। वह सारे गांव की कहानी बताती।
उसने अपनी एक सहेली की और बुर भी दिलावाई। उसकी कहानी फिर कभी। Hindi Porn Stories
जब मैं कुवांरी थी तब मेरी चुदने Antarvasna Sex Stories की इच्छा कम होती थी। क्यूंकि मुझे इस बारे में अधिक नहीं मालूम था। आज मेरी शादी हुये लगभग पांच साल हो चुके हैं, मैं बेशर्मी की हदें पार करके सभी तरीको से अपने पति से चुदवा चुकी हूँ।
जी हां ! बिल्कुल अनजान बन कर ! भोली बन कर ! और मासूम बन कर … ! जैसे कि मैं सेक्स के बारे में कुछ नहीं जानती हूं। यही भोलापन, मासूमियत उनके लण्ड को खड़ा कर चोदने पर मजबूर कर देती थी। आप ही बताईये, लड़कियां जब भोली बन कर, अनजान बनकर और मासूम सा चेहरा लेकर लण्ड लेती हैं तब पति को लगता है कि मेरी बीवी सती सावित्री है …
पर वो क्या जाने, हम लोग भोली बनकर ऐसे ऐसे मोटे मोटे और लम्बे लण्ड डकार जाती हैं कि उनके फ़रिश्तों तक को पता नहीं चल पाता है।
पर अब बड़ी मुश्किल आन पड़ी है। वो छ्ह माह के लिये कनाडा चले गये हैं … मुझे यहां अकेली तड़पने के लिये। पर हां ! यह उनका उपकार है कि मेरी देखभाल करने के लिये उन्होंने अपने दोस्त के बेटे दीपू को कह दिया था कि वह मेरा ख्याल रखे।
जानते हैं आप, उसने कैसा ख्याल रखा … मुझे चोद चोद कर बेहाल कर दिया … नए नए तरीकों से ! मुझे खूब चोदा …
क्या हुआ था आप जानना चाहेंगे ना …
मेरे पति के कनाडा जाने के बाद रात को दीपू खाना खा कर मेरे यहां सोने के लिये आ जाता था।
गर्मी के दिन थे … मैं अधिकतर छत पर ही अकेली सोती थी। कारण यह था कि रात को अक्सर मेरी वासना करवटें लेने लगती थी। बदन आग हो जाता था। मैं अपना जिस्म उघाड़ कर छत पर बेचैनी के कारण मछली की तरह छटपटाने लग जाती थी। पेटीकोट ऊपर उठा कर चूत को नंगी कर लेती थी, ब्लाऊज उतार फ़ेंकती थी। ठण्डी हवा के मस्त झोंके मेरे बदन को सहलाते थे। पर बदन था कि उसमें शोले और भड़क उठते थे। मुठ मार मार कर मैं लोट लगाती थी … फिर जब मेरे शरीर से काम-रस बाहर आ जाता था तब चैन मिलता था।
आज भी आकाश में हल्के बादल थे। हवा चल रही थी … मेरे जिस्म को गुदगुदा रही थी। एक तरावट सी जिस्म में भर रही थी। मन था कि उड़ा जा रहा था। उसी मस्त समां में मेरी आंख लग गई और मैं सो गई। अचानक ऐसा लगा कि मेरे शरीर पर पानी की ठण्डी बूंदे पड़ रही हैं। मेरी आंख खुल गई। हवा बन्द थी और बरसात का सा मौसम हो रहा था। तभी टप टप पानी गिरने लगा। मुझे तेज सिरहन सी हुई। मेरा बदन भीगने लगा। जैसे तन जल उठा।
बरसात तेज होती गई … बादल गरजने लगे … बिजली तड़पने लगी … मैंने आग में जैसे जलते हुये अपना पेटीकोट ऊंचा कर लिया, अपना ब्लाऊज सामने से खोल लिया। बदन जैसे आग में लिपट गया …
मैंने अपने स्तन भींच लिये … और सिसकियाँ भरने लगी। मैं भीगे बिस्तर पर लोट लगाने लगी। अपनी चूत बिस्तर पर रगड़ने लगी। इस बात से अनजान कि कोई मेरे पास खड़ा हुआ ये सब देख रहा है।
“रीता भाभी … बरसात तेज है … नीचे चलो !”
मेरे कान जैसे सुन्न थे, वो बार बार आवाज लगा रहा था।
जैसे ही मेरी तन्द्रा टूटी … मैं एकाएक घबरा गई।
“दीपू … तू कब आया ऊपर … ” मैंने नशे में कहा।
“राम कसम भाभी मैंने कुछ नहीं देखा … नीचे चलो” दीपू शरम से लाल हो रहा था।
“क्या नहीं देखा दीपू … चुपचाप खड़ा होकर देखता रहा और कहता है कुछ नहीं देखा” मेरी चोरी पकड़ी गई थी। उसके लण्ड का उठान पजामें में से साफ़ नजर आ रहा था। अपने आप ही जैसे वह मेरी चूत मांग रहा हो। मैंने उसका हाथ पकड़ कर उसे अपनी ओर खींच लिया और उसे दबोच लिया … कुछ ही पलों में वो मुझे चोद रहा था। अचानक मैं जैसे जाल में उलझती चली गई। मुझे जैसे किसी ने मछली की तरह से जाल में फ़ंसा लिया था, मैं तड़प उठी … तभी एक झटके में मेरी नींद खुल गई।
मेरा सुहाना सपना टूट गया था। मेरी मच्छरदानी पानी के कारण मेरे ऊपर गिरउ गई थी। दीपू उसे खींच कर एक तरफ़ कर रहा था। मेरा बदन वास्तव में आधा नंगा था। जिसे दीपू बड़े ही चाव से निहार रहा था।
“भाभी … पूरी भीग गई हो … नीचे चलो … ” उसकी ललचाई आंखे मेरे अर्धनग्न शरीर में गड़ी जा रही थी। मुझ पर तो जैसे चुदाई का नशा सवार था। मैंने भीगे ब्लाऊज ठीक करने की कोशिश की … पर वो शरीर से जैसे चिपक गया था।
“दीपू जरा मदद कर … मेरा ब्लाऊज ठीक कर दे !”
दीपू मेरे पास बैठ गया और ब्लाऊज के बटन सामने से लगाने लगा … उसकी अंगुलियाँ मेरे गुदाज स्तनों को बार बार छू कर जैसे आग लगा रही थी। उसके पजामे में उसका खड़ा लण्ड जैसे मुझे निमंत्रण दे रहा था।
“भाभी , बटन नहीं लग रहा है … “
“ओह … कोशिश तो कर ना … “
वह फिर मेरे ब्लाऊज के बहाने स्तनों को दबाने लगा … जाने कब उसने मेरे ब्लाऊज को पूरा ही खोल दिया और चूंचियां सहलाने लगा। मेरी आंखे फिर से नशे में बंद हो गई। मेरा जिस्म तड़प उठा। उसने धीरे से मेरा हाथ लेकर अपने लण्ड पर रख दिया। मैंने लण्ड को थाम लिया और मेरी मुठ्ठी कसने लगी।
बरसात की फ़ुहारें तेज होने लगी। दीपू सिसक उठा। मैंने उसके भीगे बदन को देखा और जैसे मैं उस काम देवता को देख कर पिघलने लगी। चूत ने रस की दो बूंदें बाहर निकाल दी। चूंचियां का मर्दन वो बड़े प्यार से कर रहा था। मेरे चुचूक भी दो अंगुलियों के बीच में सिसकी भर रहे थे। मेरी चूत का दाना फ़ूलने लगा था। अचानक उसका हाथ मेरी चूत पर आ गया और दाने पर उसकी रगड़ लग गई।
मैं हाय करती हुई गीले बिस्तर पर लुढ़क गई। मेरे चेहरे पर सीधी बारिश की तेज बूंदे आ रही थी। गीला बिस्तर छप छप की आवाज करने लगा था।
“रीता भाभी … आप का जिस्म कितना गरम है … ” उसकी सांसे तेज हो गई थी।
“दीपू … आह , तू कितना अच्छा है रे … ” उसके हाथ मुझे गजब की गर्मी दे रहे थे।
“भाभी … मुझे कुछ करने दो … ” उसका अनुनय विनय भरा स्वर सुनाई दिया।
” कर ले, सब कर ले मेरे दीपू … कुछ क्यों … आजा मेरे ऊपर आ जा … हाय, मेरी जान निकाल दे … “
मेरी बुदबुदाहट उसके कानो में जैसे अमृत बन कर कर उतर गई। वो जैसे आसमान बन कर मेरे ऊपर छा गया … नीचे से धरती का बिस्तर मिल गया … मेरा बदन उसके भार से दब गया … मैं सिसकियाँ भरने लगी। कैसा मधुर अनुभव था यह … तेज वर्षा की फ़ुहारों में मेरा यह पहला अनुभव … मेरी चूत फ़ड़क उठी, चूत के दोनों लब पानी से भीगे हुये थे … तिस पर चूत का गरम पानी … बदन जैसे आग में पिघलता हुआ, तभी … एक मूसलनुमा लौड़ा मेरी चूत में उतरता सा लगा। वो दीपू का मस्त लण्ड था जो मेरे चूत के लबों को चूमता हुआ … अन्दर घुस गया था।
मेरी टांगे स्वतः ही फ़ैल गई … चौड़ा गई … लण्ड देवता का गीली चूत ने भव्य स्वागत किया, अपनी चूत के चिकने पानी से उसे नहला दिया। दीपू लाईन क्लीअर मान कर मेरे से लिपट पड़ा और चुम्मा चाटी करने लगा … मैं अपनी आंखें बंद करके और अपना मुख खोल कर जोर जोर से सांस ले रही थी … जैसे हांफ़ रही थी। मेरी चूंचियां दब उठी और लण्ड मेरी चूत की अंधेरी गहराईयों में अंधों की तरह घुसता चला गया। लगा कि जैसे मेरी चूत फ़ाड़ देगा। अन्दर शायद मेरी बच्चेदानी से टकरा गया। मुझे हल्का सा दर्द जैसा हुआ। दूसरे ही क्षण जैसे दूसरा मूसल घुस पड़ा … मेरी तो जैसे हाय जान निकली जा रही थी … सीत्कार पर सीत्कार निकली जा रही थी। मैं धमाधम चुदी जा रही थी … दीपू को शायद बहुत दिनों के बाद कोई चूत मिली थी, सो वो पूरी तन्मयता से मन लगा कर मुझे चोद रहा था। बारिश की तेज बूंदें जैसे मेरी तन को और जहरीला बना रही थी।
दीपू मेरे तन पर फ़िसला जा रहा था। मेरा गीला बदन … और उसका भीगा काम देवता सा मोहक रूप … गीली चूत … गीला लण्ड … मैं मस्तानी हो कर लण्ड ले रही थी। मेरे
शरीर से अब जैसे शोले निकलने लगे थे … मैंने उसके चूतड़ों को कस लिया और उसे कहा,”दीपू … नीचे आ जाओ … अब मुझे भी चोदने दो !”
“पर रीता भाभी, चुदोगी तो आप ही ना … ” दीपू वर्षा का आनन्द लेता हुआ बोला।
“अरे, चल ना, नीचे आ जा … ” मैं थोड़ा सा मचली तो वो धीरे से मुझे लिपटा कर पलट गया। अब मेरी बारी थी, मैंने चूत को लण्ड पर जोर दे कर दबाया। उसका मूसल नुमा लण्ड इस बार मेरी चूत की दीवारों पर रगड़ मारता हुआ सीधा जड़ तक आ गया। मेरे लटकते हुये स्तन उसके हाथ में मसले जा रहे थे। दीपू की एक अंगुली मेरे चूतड़ों की दरार में घुस पड़ी और छेद को बींधती हुई गाण्ड में उतर गई।
मैं उसके ऊपर लेट गई और अपनी चूत को धीरे धीरे ऊपर नीचे रगड़ कर चुदने लगी। बारिश की मोटी मोटी बूंदें मेरी पीठ पर गिर रही थी। मैंने अपना चेहरा उसकी गर्दन के पास घुसा लिया और आंखें बन्द करके चुदाई का मजा लेने लगी। हम दोनों जोर जोर से एक दूसरे की चूत और लण्ड घिस रहे थे … मेरे आनन्द की सीमा टूटती जा रही थी। मेरा शरीर वासना भरी कसक से लहरा उठा था। मुझे लग रहा था कि मेरी रसीली चूत अब लपलपाने लगी थी। मेरी चूत में लहरें उठने लगी थी। फिर भी हम दोनों बुरी तरह से लिपटे हुये थे। मेरी चूत लण्ड पर पूरी तरह से जोर लगा रही थी … बस … कितना आनन्द लेती, मेरी चूत पानी छोड़ने लिये लहरा उठी और अन्ततः मेरी चूत ने पानी पानी छोड़ दिया … और मैं झड़ने लगी। मैं दीपू पर अपना शरीर लहरा कर अपना रज निकाल रही थी।
मैं अब उससे अलग हो कर एक तरफ़ लुढ़क गई। दीपू उठ कर बैठ गया और अपने लण्ड को दबा कर मुठ मारने लगा … एक दो मुठ में ही उसके लण्ड ने वीर्य छोड़ दिया और बरसात की मूसलाधार पानी के साथ मिल कहीं घुल गया। हम दोनों बैठे बैठे ही गले मिलने लगे … मुझे अब पानी की बौछारों से ठण्ड लगने लगी थी। मैं उठ कर नीचे भागी। दीपू भी मेरे पीछे कपड़े ले कर नीचे आ गया।
मैं अपना भीगा बदन तौलिये से पोंछने लगी, पर दीपू मुझे छोड़ता भला। उसने गीले कपड़े एक तरफ़ रख दिये और भाग कर मेरे पीछे चिपक गया।
“भाभी मत पोंछो, गीली ही बहुत सेक्सी लग रही हो !”
“सुन रे दीपू, तूने अपनी भाभी को तो चोद ही दिया है , अब सो जा, मुझे भी सोने दे !”
“नहीं रीता भाभी … मेरे लण्ड पर तो तरस खाओ … देखो ना आपके चूतड़ देख कर कैसा कड़क हो रहा है … प्लीज … बस एक बार … अपनी गाण्ड का मजा दे दो … मरवा लो
प्लीज … “
“हाय ऐसा ना बोल दीपू … सच मेरी गाण्ड को लण्ड के मजे देगा … ?” मुझे उसका ये प्रेमभाव बहुत भाया और मैंने उसके लण्ड पर अपनी कोमल और नरम पोन्द दबा दिये। उसका फिर से लण्ड तन्ना उठा।
” भाभी मेरा लण्ड चूसोगी … बस एक बार … फिर मैं भी आपकी भोसड़ी को चूस कर अपको मजा दूंगा !”
“हाय मेरे राजा … तू तो मेरा काम देवता है … “मैंने अपने चूतड़ों में से उसका लण्ड बाहर निकाल लिया और नीचे झुकती चली गई। उसका लण्ड आगे से मोटा नहीं था पर पतला था, उसका सुपाड़ा भी छोटा पर तीखा सा था, पर ऊपर की ओर उसका डण्डा बहुत ही मोटा था। सच में किसी मूली या मूसल जैसा था। मैंने मुठ मारते हुये उसे अपने मुख में समा लिया और कस कस कर चूमने लगी। मुझे भी लग रहा था कि अब दीपू भी मेरी भोसड़ी को चूस कर मेरा रस निकाले। मैंने जैसे ही उसका लण्ड चूसते हुये ऊपर देखा तो एक बार में ही वो समझ गया। उसने मुझे बिस्तर पर लेटा दिया और मेरी चूत पर उसके होंठ जम गये। उसकी लपलपाती हुई जीभ मेरी चूत के भीतरी भागों को सहला रही थी। जीभ की रगड़ से मेरा दाना भी कड़ा
हो गया था। मैं सुख से सराबोर हो रही थी। तभी दीपू ने तकिया लेकर कहा कि अपनी चूतड़ के नीचे ये रख लो और गाण्ड का छेद ऊपर कर लो।
पर मैंने जल्दी से करवट बदली और उल्टी हो गई और अपनी चूत को तकिये पर जमा दी। मैंने अपनी दोनों टांगे फ़ैला कर अपना फ़ूल सा भूरा गुलाब खिला कर लण्ड़ को हाज़िर कर दिया। उसका मूसल जैसा लण्ड चिकनाई की तरावट लिये हुये मेरे गुलाब जैसे नरम छेद पर दब गया। मैंने पीछे घूम कर उसे मुस्करा कर देखा। दूसरे ही क्षण लण्ड मेरी गाण्ड पर घुसने के लिये जोर लगा रहा था। मैंने अपनी गाण्ड को ढीला छोड़ा और लण्ड का स्वागत किया। वो धीरे धीरे प्यार से अंधेरी गुफ़ा में रास्ता ढूंढता हुआ … आगे बढ़ चला। मेरी गाण्ड तरावट से भर उठी। मीठी मीठी सी गुदगुदी और मूसल जैसा लण्ड, पति से गाण्ड मराने से मुझे इस लण्ड में अधिक मजा आ रहा था। उसके धक्के अब बढ़ने लगे थे। मेरी गाण्ड चुदने लगी थी।
मैं उसे और गहराई में घुसाने का प्रयत्न कर रही थी। मेरे चूतड़ ऊपर जोर लगाने लगे थे। दीपू ने मौका देखा और थोड़ा सा जोर लगा कर एक झटके में लण्ड को पूरा बैठा दिया। मैं दर्द से तड़प उठी।
“साला लण्ड है या लोहे की रॉड … चल अब गाड़ी तेज चला … “
वो मेरी पीठ पर लेट गया। उसके हाथ मेरे शरीर पर चूंचियाँ दबाने के लिये अन्दर घुस पड़े … मैंने जैसे मन ही मन दीपू को धन्यवाद दिया। दोनों बोबे दबा कर उसकी कमर मेरी गाण्ड पर उछलने कूदने लगी। मैं खुशी के मारे आनन्द की किलकारियाँ मारने लगी। सिसकी फ़ूट पड़ी … । उसके सेक्सी शरीर का स्पर्श मुझे निहाल कर रहा था। मेरी चूंचियाँ दबा दबा कर उसने लाल कर दी थी। उसका लण्ड मेरी गाण्ड की भरपूर चुदाई कर रहा था। मेरी चूत भी चूने लग गई थी। उसमें से भी पानी रिसने लगा था। मेरी गाण्ड में मनोहारी गुदगुदी उठ रही थी, अब तो मेरी चूत में भी मीठी सी सुरसराहट होने लग गई थी। मेरी चूत लण्ड की प्यासी होने लगी। हाय … कितना अच्छा होता कि अब ये लण्ड मेरी चूत की प्यास बुझाता … मैंने गाण्ड मराते हुये घूम कर दीपू को आंख से इशारा किया।
“आह्ह नहीं रीता भाभी … तंग गाण्ड का मजा ही जोर का है … पानी निकालने दो प्लीज !”
“हाय रे फिर कभी गाण्ड चोद लेना, अभी तो मेरी चूत मार दे दीपू !”
“तो ये ले भोसड़ी की … हाय भाभी सॉरी … गाली मुँह से निकल ही गई !”
“नहीं रे चुदाते समय सब कुछ भला सा लगता है … ” फिर मेरे मुख से सीत्कार निकल पड़ी। उसने अपना लण्ड मेरी चूत में जोर से घुसेड़ दिया था … बस लण्ड का स्पर्श जैसे ही चूत को मिला … मेरी चूत फ़ड़क उठी। लड़कियों की चूत में लण्ड घुसा और वो सीधे स्वर्ग का आनन्द लेने लगती है। मेरी चूत की कसावट बढ़ने लगी … वो मेरे पीठ पर सवार हो कर चूत चोद रहा था। उसने मुझे घोड़ी बनने को कहा … शायद लण्ड को अन्दर पेलने में तकलीफ़ हो रही थी। मेरी गाण्ड ऊंची होते ही उसका लण्ड चूत में यूं घुस गया जैसे कि किसी बड़े छेद में बिना किसी तकलीफ़ सीधे सट से मोम में घुस गया हो। मेरी चूत बहुत गीली हो गई थी। किसी बड़े भोसड़े की तरह चुद रही थी … उसने मेरे स्तन एक बार फिर से पकड़ते हुये अपनी ओर दबा लिये। मुझे चुचूकों को दबाने से और चूत में मूसल की रगड़ से मस्ती आने लगी। उसका लण्ड मेरी चूत को तेजी से झटके मार मार कर चोद रहा था। अचानक उसका चोदने का तरीका बदल गया। करारे शॉट पड़ने लगे। मेरी चूत मे तेज आनन्द दायक खुजली उठने लगी। लगा कि चूत पानी छोड़ देगी।
“मां … मेरी … दीईईईपूऊऊऊ चोद मार रे … निकाल दे फ़ुद्दी का पानी … हाय राम जीऽऽऽऽ … मेरी तो निकल गई राजा … आह्ह्ह्ह” और मैंने अपना पानी छोड़ दिया …
उसका हाथ स्तनों पर से खींच कर हटाने लगी …
“बस छोड़ दे अब … मत कर जल रही है … ” पर उसे कहाँ होश था … मैं दर्द के मारे चीख उठी और दीपू … उसका माल छूट गया … उसकी चीख ने मेरी चीख का साथ दिया …
उसका लण्ड बाहर निकल आया और अपना वीर्य बिस्तर पर गिराने लगा। कुछ देर तक यूं ही माल निकलने का सिलसिला चलता रहा। फिर उस बिस्तर से उठे और हम दोनों दूसरे बिस्तर पर नंगे ही जाकर लेट गये … और फिर जाने कब हम दोनों ही सो गये।
मुझे लगा कि कोई मुझे बुरी तरह झकझोर रहा है … मेरी आंख खुल गई … सवेरा हो चुका था … पर ये दीपू … मेरी चूत में अपना लण्ड घुसाने का प्रयत्न कर रहा था … मुझे हंसी आ गई … मैंने अपने दोनों टांगें पसार दी और उसका लण्ड अपनी चूत में समेट लिया। उसे अपने से कस कर सुला लिया। मैं सुबह सवेरे फिर से चुद रही थी … मुझे अपनी सुहागरात की याद दिला रही थी … सोना नहीं … बस चुदती रहो … सुबह चुदाई, दिन को चुदाई रात को तो पूछो मत … शरीर की मां चुद जाती थी … हाय मैंने ये क्या कह दिया … Antarvasna Sex Stories
हैलो दोस्तो, मैं सोनू एक बार फिर Hindi Sex Stories आपके लिये एक नई कहानी लेकर आया हूँ। मेरी पिछली कहानियाँ
स्कूल में मस्ती
आपने पढ़ी और उनके बारे में मुझे मेल किये, इसके लिये आपका धन्यवाद। इस बार में स्कूल के बाहर की कहानी बताने वाला हूँ।
काव्या और अंजलि को चोदने के एक साल बाद मैंने वो स्कूल छोड़ दिया और नई नौकरी की तलाश करने लगा।
इसी चक्कर में मैं एक बार इन्टरव्यू देने दिल्ली गया। मैंने दिल्ली जाकर अपना इन्टरव्यू दिया और उन्होंने मुझे अगले दिन आने को कहा। मैं रात को किसी होटल में रूकने की सोच रहा था, तभी मेरे चाचाजी का फोन आया और उन्होंने मुझे रति के यहाँ रूकने को बोला और कहा कि मैंने उससे बात कर ली है और उसे कोई दिक्कत नहीं है।
रति मेरे चाचा जी की साली थी। मैं रति से केवल एक बार चाचाजी की शादी में ही मिला था, तब उसकी उम्र लगभग १९ साल थी और उसका रंग साँवला था, देखने में भी वो ज्यादा सुन्दर नहीं थी। रति ने एम.बी.ए. कर रखा था और दिल्ली में ही जॉब करती थी, वो दिल्ली में अकेली ही रहती थी और उसने वहाँ पर एक फ़्लैट किराये पर ले रखा था।
मैंने चाचाजी से रति के घर का पता व टेलिफोन नम्बर लिये और उसे फोन किया तो उसने बताया कि वो अभी ऑफिस में है और वो करीब शाम को ८ बजे घर आयेगी, तुम चाहो तो ऑफिस आकर घर की चाबी ले जा सकते हो।
उस वक्त ४ बज रहे थे और मैं दिल्ली में किसी को जानता भी नहीं था, इसलिये मैंने उससे ऑफिस का पता लिया और उसके ऑफिस चला गया। ऑफिस पहुँच कर मैंने रति को फोन किया तो वो ऑफिस के बाहर ही आ गई। मैंने रति को देखा तो देखता ही रह गया, ४ सालो में रति बहुत ही बदल गई थी, एकदम साफ रंग, कमर तक लम्बे बाल, बड़े बड़े स्तन ! एक बार तो मैंने उसको पहचाना भी नही। मेरा लंड पैन्ट के अन्दर ही हलचल करने लगा। उससे हाय हैलो की और घर की चाबी लेकर मैं उसके घर चला आया।
उसका फ़्लैट डबल बेडरूम और काफी बड़ा था। मैं पहले तो नहाकर फ्रेश हुआ और फिर टी.वी. देखने लगा, लेकिन मेरे मन में बार बार रति का ही ख्याल आ रहा था और मैं उसको चोदने के ख्वाब देखने लगा। मेरा लंड काफी तन गया था और पैन्ट फाड़ने पर उतारू हो गया था। मैंने सोचा मुठ मारकर अपनी आग शांत कर लेता हूँ और मैं बाथरूम में चला गया और मुठ मारने लगा।
तभी मेरी नजर गेट के पीछे वाले हुक पर गई, वहाँ पर रति की ब्रा और पैन्टी लटकी हुई थी, मैंने उसकी ब्रा और पैन्टी को उठाया और चूमने लगा, रति की ब्रा और पैन्टी में से मदहोश कर देने वाली खुशबू आ रही थी। मैंने ब्रा और पैन्टी को चूमते हुए अपनी आग शांत की और फिर बाहर आकर फिर से टी.वी. देखने लगा, उस वक्त शाम के ६ बजे थे और रति को आने में अभी भी २ घंटे बाकी थे।
टी.वी. देखने में मेरा मन नहीं लग रहा था, इसलिये मैं गेट को लॉक करके बाहर घूमने निकल आया। थोड़ी देर सड़क पर इधर उधर घूमने के बाद मेरी नजर एक बार पर गई। मैं बार में चला गया और धीरे धीरे ड्रिंक लेने लगा, दो तीन ड्रिंक लेने के बाद मेरी नजर घड़ी पर पड़ी, शाम के ७.४५ हो गये थे, मैंने जल्दी से पेमेंट किया और बाहर निकल आया। बाहर आकर मैंने माउथ फ्रेशनर खाया और घर की तरफ चल दिया, घर जाकर देखा कि रति मेरा इंतजार कर रही थी। उसने मुझसे पूछा कि कहाँ गये थे, तो मैंने कहा कि यहीं थोड़ी दूर घूमने गया था।
थोड़ी देर बाते करने के बाद रति फ्रेश होने चली गई। नहाने के बाद वो और भी खूबसूरत दिख रही थी। उसके भीगे हुए कमर तक लम्बे बालों से वो और भी ज्यादा आकर्षक लग रही थी। उसने लाल रंग का लोवर व हल्के आसमानी रंग की टी-शर्ट पहन रखी थी। फिर वो खाने की तैयारी करने लगी और मैं भी खाना बनाने में उसकी मदद करने के बहाने उसके शरीर को छूने की कोशिश करने लगा।
खाना खाने के बाद हम बाते करने लगे, तब रति ने कहा- क्या तुम ड्रिंक करते हो?
मैंने कहा- क्यों?
तो उसने कहा- तुम्हारे मुँह से बदबू बा रही है।
तो मैंने कहा- कभी कभी, लेकिन प्लीज तुम चाचाजी को मत बताना !
तो उसने कहा- ठीक है, नहीं बताऊंगी।
बाते करते करते १० बज गये थे तो हम सोने चले गये। वो दूसरे कमरे में थी और मैं दूसरे कमरे में, लेकिन मेरे उपर शराब का पूरा सरूर चढ़ चुका था और मेरे दिमाग में रति को चोदने के ही ख्याल आ जा रहे थे, नींद मेरे आँखो से कोसों दूर थी।
रात करीब १२ बजे मैं हिम्मत करके उठा और रति के कमरे में चला गया, रति गहरी नींद में सो रही थी और उसने दूसरी तरफ मुंह कर रखा था। मैं रति के पीछे जा कर लेट गया, रति के शरीर से मदहोश कर देने वाली खुशबू आ रही थी। थोड़ी देर ऐसे ही लेटे रहने के बाद मैंने अपना एक पांव उसके पांवो पर रख दिया और रगड़ने लगा, फिर एक हाथ उसकी कमर पर रख दिया और कमर सहलाने लगा।
थोड़ी देर ऐसे ही सहलाने के बाद रति ने अचानक करवट बदली तो मैं घबराकर पीछे हट गया, लेकिन रति ने कोई प्रतिक्रिया नहीं की, वो नींद में ही थी। फिर मैं हिम्मत करके उसके पास सरक गया और अपना हाथ उसके उरोज पर रख दिया, उसने अन्दर ब्रा नहीं पहन रखी थी। मैं धीरे धीरे रति के उरोज दबाने लगा और दूसरा हाथ उसकी चूत पर रख कर सहलाने लगा। फिर हाथ को उसके पजामे में डाल कर उसकी चूत को मसलने लगा, इतने में रति हल्की हल्की सिसकियाँ भरने लगी, मुझे पता चल गया कि रति सो नहीं रही थी, वो सोने का नाटक कर रही थी।
इससे मेरी हिम्मत और बढ़ गई, मैंने रति से कहा- जब तुम जाग रही हो तो ये सोने का नाटक क्यों कर रही हो? क्यों नहीं तुम इस खेल का पूरा आनन्द उठाती?
तो रति ने कहा- मैं देखना चाहती थी कि तुम क्या क्या करते हो।
मैंने कहा- यह तो तुम जाग कर भी देख सकती हो, लो मैं तुम्हे बताता हूँ कि मैं क्या करता हूं। इतना कह कर मैंने रति की टीशर्ट खोल दी और उसके उरोजो को जोर जोर से मसलने लगा और रति के होठों से अपने होठ सटा दिये और किस करने लगा। हम अपनी जीभ एक दूसरे के मुंह में डाल कर चूस रहे थे। थोड़ी देर बाद मैंने उसके एक उरोज को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगा, बीच बीच में उसके गुलाबी रंग के चूचुक को काटता भी जा रहा था, जिससे कि रति की उत्तेजना और बढ़ जाये।
फिर मैंने उसके पाजामे को भी खोल दिया, रति की चूत काफी सुन्दर थी, मैं रति की चूत को मसलने लगा, थोड़ी देर बाद मैंने अपनी एक अंगुली रति की चूत में डाल दी, उसकी चूत काफी टाईट थी। मैं अंगुली को धीरे धीरे अन्दर-बाहर करने लगा, इससे रति को मजा आने लगा क्योंकि वो कामुक सिसकारियां लेने लगी थी।
फिर मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिये और अपना लंड रति को पकड़ा दिया, वो मेरे लंड को धीरे धीरे सहलाने लगी। फिर मैंने उसको मेरे लंड को मुंह में लेने को कहा तो थोड़ी ना नुकर करने के बाद उसने लंड को अपने मुँह में ले लिया, और उसको धीरे धीरे चूसने लगी। मैं उसके मुंह को पकड़ कर लंड को अन्दर-बाहर करने लगा। फिर हम दोनों ६९ की पोजिशन में आ गये, मैं रति की चूत को अपनी जीभ से कुरेदने लगा और वो मेरे लंड को अपने मुंह में ले कर चाटने लगी।
थोड़ी देर ऐसे ही करने के बाद मैंने रति को सीधा लिटा दिया और उसकी टांगो को ऊपर उठा कर अपना लंड उसकी चूत से सटा दिया, फिर एक जोर से धक्का मार कर लंड को आधा अन्दर सरका दिया। रति इस धक्के को सहन नहीं कर पाई और चीखने लगी, अगर मैंने उसको जोर से पकड़ा नहीं होता तो मेरा लंड उसकी चूत से बाहर निकल आता।
उसके बाद मैं उसको सहलाने लगा, उसके शरीर को चूमने लगा, इससे उसका दर्द कुछ कम हुआ और वो भी नीचे से कमर उचकाने लगी। थोड़ी देर बाद मैंने एक और जोरदार धक्के से अपना पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया, रति के मुंह से चीख निकल गई, लेकिन मैं अब रूका नहीं और जोर जोर से धक्के मारने लगा।
थोड़ी देर में रति भी मेरा साथ देने लगी और अपने नितम्ब को उछालने लगी। वो उत्तेजना में बड़बड़ाये जा रही थी, और जोरररररररररररर सेएएएएएएएएए हां ऐसे हीहीहीहीहीहीही औरररररररररररर जोर से चोदोओओओओ बहुत मजाआआआआ आ रहा है, फाड दो मेरीइइइइइइइ चूत को आजजजजज, और जोर से चोदो।
करीब १५ मिनट तक चोदने के बाद रति और मेरा पानी एक साथ छुटा। मैं रति के उपर ही पड़ गया, कुछ देर ऐसे ही रहने के बाद मैं उठ गया और देखा कि रति की चूत से हम दोनों के वीर्य के साथ खून भी निकल रहा था, रति इसको देखकर घबरा गई, तो मैंने उसे समझाया कि पहली बार ऐसा होता है अब आगे नहीं होगा। फिर हम दोनो सो गये और अगले दिन से रति ने ३ दिन की ऑफिस से छुटी ले ली। हम दोनों ने तीनों दिन खूब सेक्स का आनन्द उठाया।
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