Important Notice: Post Free Ads Unlimited...🔥🔥🔥

Male Escorts in Agra Premium Companionship and Escort Services

Read Our Top Call Girl Story's

हाय दोस्तो, मैं शाहिद… Sex Stories

मैं एक बार फिर आप लोगों के Sex Stories सामने आया हूँ अपनी नई कहानी के साथ। मेरी पहले की कहानी कुंवारी छोकरी
और
विदेशी माल
को आप लोगों ने बहुत पसंद किया, उससे मुझे बहुत ख़ुशी हुई। आशा है आप लोग मेरी यह कहानी भी पसंद करेंगे। तो सभी लड़कियों और लड़कों से कहना है कि अपने-अपने औजार संभाल लें क्योंकि मैं कहानी शुरू करता हूँ।

दो महीने पहले की बात है जब मेरे इलाके में कोई सरकारी टीचर अपने परिवार के साथ रहने आये। सब उन्हें मिश्रा जी कहते थे। उनके परिवार में उनकी पत्नी और उनकी एक बेटी थी।

हम सब दोस्त अपने घर के बाहर बाते कर रहे थे कि अचानक मिश्राजी ने हम सभी को सामान घर के अन्दर रखने के लिए मदद मांगी। हम सबने जाकर उनकी मदद की।

जब वापस आ रहे थे तो उनकी बेटी ने मुझे कुछ अलग नजरों से देखा तो मैं समझ गया कि वह मुझ पर फिदा हो गई है। पर मैंने उस पर ध्यान नहीं दिया। अब जब भी मैं घर के बाहर रहता तो वह मुझे देखकर मुस्कुराती रहती, मैं अनदेखा कर देता। आप सभी लोग सोच रहे होंगे कि मैं ऐसा क्यों करता था। उसकी वजह थी उसका रंग। वह बिल्कुल काली थी। उसका नाम सोनी था। ( बदला हुआ नाम )

अब मैं उसके बारे में बताता हूँ की वह कैसी थी। वह बिल्कुल काली थी पर उसकी फिगर बहुत ही सेक्सी थी। उसकी उम्र 18 साल की होगी। उसकी चूची ज्यादा बड़ी नहीं थी। यह सब कुछ दिनों तक चला तो दोस्तों ने मुझे चिड़ाना शुरू कर दिया था। मैंने उन्हें बताया कि ऐसा कुछ नहीं है तो दोस्तों ने कहा कि उससे तुझे क्या लेना है, अगर वह आती है तो आने दो! काम होने पर चलता करना!

मुझे उनकी बातें शुरू में अच्छी नहीं लगी फिर मैंने सोचा कि इसमें हर्ज़ ही क्या है। मैंने भी दाना डालना शुरू कर दिया। यह सब देख कर उसे बहुत अच्छा लग रहा था। यह सब कुछ दिनों तक चला तो मेरे दोस्तों ने मुझसे पूछना शुरू कर दिया कि कुछ किया भी या ऐसे ही चल रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ कर यार।

बातों ही बातों में एक बार सोनी ने बताया कि मैं दो बार चुदवा चुकी हूँ।

मैंने कहा- तब मुझे कब खिला रही हो?

उसने कहा- चार दिन बाद मेरी माँ अपनी किसी रिश्तेदार के यहाँ शादी में जा रही है, मुझे भी साथ ले जा रही थी पर मैं पढाई का बहाना बनाकर नहीं जा रही हूँ। पापा भी स्कूल चले जाते हैं। तुम मेरे घर आना, मैं तुम्हारे लिए तुम्हारी पसंद का खाना बनूंगी(बनाऊँगी)।

मैं उसका मतलब समझ चुका था। उस दिन जैसे ही उसके पापा घर से बाहर गए, वो घर से बाहर आकर मुझे घर के अन्दर आने के लिए इशारा कर गई। मैं भी मौका देख कर उसके घर के अन्दर चला गया।

घर के अन्दर जाते ही उसने मुझे बिठाया और किचन में चली गई वहाँ से उसने मुझे खीर लाकर दी। वो मुझे अपने हाथों से खीर खिलाने लगी, मैं भी खीर खा रहा था और बस उसे ही देखे जा रहा था। वह भी मेरे आँखों में देखती जा रही थी।

मैंने कहा- अब मैं तुम्हें खिलाऊंगा!
उससे चम्मच लेकर मैं उसे खिलाने लगा। खिलाते-खिलाते उसके मुंह के बजाय उसके कपड़ों के अन्दर खीर डाल दी। वह उठकर दूसरे कमरे में चली गई।

मैं समझ गया कि वह कपड़े बदलने गई है, मैं भी उसके पीछे जाकर उसे देखने लगा। मैंने देखा कि वह केवल सफेद ब्रा में ही है। मैंने कुछ हिम्मत करके उसे पीछे से पकड़ लिया। वह कुछ घबराई और कहने लगी- आज नहीं फिर कभी!

मैंने कहा- आज नहीं तो कभी नहीं।

कहते हुए मैं उसके गले पर चूमने लगा। वह नहीं-नहीं कहे जा रही थी। पर मैं कुछ और इरादा कर के आया था। मैं बस लगा रहा। मैं उसे पीछे से ही पागलों की तरह चूमने लगा। धीरे-धीरे उसकी ब्रा क हुक भी खोल दिया और पीछे से ही उसके दोनों चुचियों को पहले धीरे-धीरे फिर बाद में उसे कस-कस कर मसलने लगा। उसकी मुंह से सी… सी … की आवाजें निकलने लगी।

मैं समझ गया कि वह भी गरम हो चुकी है। मैं बस चुम्बन लिये जा रहा था और उसकी चुचियों को मसले जा रहा था।

अचानक उसने मेरे खड़े लण्ड को हाथ पीछे करके पकड़ लिया। मुझे अजीब सा लगा। मैंने उसका मुंह अपनी ओर किया और उसे किस करने लगा। उसके होंठों को अपने होंठों से जोरदार किस किये जा रहा था।

वह बिल्कुल पागल सी हो गई थी। वह अपने घुटनों पर बैठ कर मेरे लण्ड को आगे पीछे करने लगी। मैंने उसे अपने मुंह में लेने के लिए कहा तो उसने मुंह में ले लिया और चाटने लगी। जब वो अपने फ़ूल से कोमल होंठो मेरे लण्ड को चाट रही थी तो मेरे तन बदन में मानो आग सी लग रही थी।

मैंने कहा- अब मेरी बारी है!

मैंने फट से उसे नंगा कर दिया और उसे बिस्तर पर लिटा कर उसकी बुर को देखा तो एक दम चौंक गया, पूरा बदन काला था मगर उसकी बुर लाल नज़र आ रही थी। बुर पर एक भी बाल नहीं था। शायद उसे पता था कि मैं जब आऊंगा तो उसे जरुर ही चोदूंगा, इसलिए वह पूरी तरह से तैयार थी। जैसे ही उसकी बुर को करीब से देख रहा था तो मानो उसकी बुर काँप रही हो। जब मैंने उसकी बुर पर अपनी जीभ लगाई तो उसके बदन में हलचल से हो गई।

अब मैं उसकी कोमल बुर को धीरे-धीरे चाट रहा था। उसकी आवाज़ में एक कम्पन्न सी हो रही थी। बुर-रस और मेरे थूक से उसकी बुर एक दम गीली हो गई थी। मेरा लण्ड भी कब तक इंतज़ार करता, वह कह रहा था कि मुझे भी जन्नत की सैर करनी है।

जब मैंने अपना लण्ड को उसकी बुर पर रखा और अन्दर डालना चाहा तो अन्दर नहीं जा रहा था। यह देखकर मैं चौंक गया कि उसकी बुर एकदम टाइट थी। मैंने कहा- अरे तुम्हारी बुर तो एक दम टाइट है?

तो उसने कहा- हाँ, मैं पहली बार करवा रही हूँ। मैंने तुमसे झूठ इसलिए कहा क्योंकि मैं तुमसे सेक्स करना चाहती थी। अगर मैं तुमसे नहीं कहती कि मैं दो बार चुदवा चुकी हूँ तो तुम डर जाते, क्योंकि मैं जानती हूँ कि तुम मुझसे शादी नहीं करोगे। कहाँ मैं और कहाँ तुम। इसलिए तुम्हें एहसास हो जाये कि मैं एक चुदासी लड़की हूँ। जिससे तुम जल्द ही तुम मेरे साथ सेक्स करने के लिए राजी हो जाओ।

यह सब सुनकर मुझे लगा कि अब मैं उसे नहीं चोदूंगा पर मैं अपने आपको नहीं रोक सका।
तभी उसने कहा- क्या सोच रहे हो? जल्दी चोदो ना!

मैंने भी एक बार फिर अपना लण्ड बुर पर रखा और धीरे-धीरे करके उसे बुर के अन्दर डालने लगा। वह अपनी जीभ को दांतों तले दबाये थी। फिर एकाएक मैंने जोरदार धक्का दिया जिससे मेरा पूरा लण्ड बुर में चला गया। उसकी चीख जोरदार होने के कारण मुझे उसका मुंह बंद करना पड़ा। दिन का समय था कोई भी घर में आ सकता था।

कुछ मिनट बाद मैंने असली चुदाई शुरू की। मैं धक्के पर धक्के लगाये जा रहा था। फच -फच की आवाजे चारों ओर गूंजने लगी थी। उसे भी मस्ती आ रही थी। वह भी खूब मजे लेकर चुदाई का आनंद उठा रही थी। उसके दूसरी बार झड़ने के बाद मैं भी उसकी बुर में झड़ गया और उसके बगल में लेट गया।

कुछ समय बाद वह उठी और लड़खड़ाते हुए बाथरूम की ओर जाने लगी। मैंने बिस्तर पर देख तो खून ही खून था। कुछ खून उसके जाँघों पर लगा था। जब वह बाथरूम से आई तो मुस्कुरा रही थी।

मैंने पूछा- यह तुम पहली बार कर रही थी, पर तुम्हारे अंदाज़ से तो मुझे कभी भी नहीं लगा कि यह पहली बार थी?

उसने कहा- क्योंकि मैं ब्लू फिल्म कई बार देख चुकी हूँ। जिससे बहुत कुछ सीख गई थी। लेकिन यार काली लड़कियों की बुर एकदम कमाल की होती है। कभी कोशिश करके देखो। एकदम मक्खन जैसा बुर। मज़ा आ जायेगा। अगर लड़कियां पढ़ रही होगी तो माफ करना, लेकिन क्या यह झूठ है।

मैंने जाते-जाते उससे पूछ लिया- तो अगली बार कब?

वह मुस्कुराते हुए बोली- जब तुम चाहो।

पर अफसोस, दूसरी बार यह मौका नहीं मिला अब तक। दुआ करो कि यह मौका जल्द ही मिल जाये।

तो मेरी कहानी आपको कैसी लगी आप लोग जरुर मेल करें, आपके मेल से ही हम सभी लेखकों को हौंसला मिलता है।

अगली कहानी के लिए आप प्रतीक्षा कीजिये। Sex Stories

Hindi Sex Stories

मेरा नाम डा. मीनू वर्मा है। मैं विज्ञान के कोलेज Hindi Sex Stories में रीडर हूं। मेरी उम्र अभी 33 वर्ष की है। मेरी शादी हो चुकी है मेरे दो बेटे भी हैं। मेरे पति एक बिजनेस मैन है। हमारा एक सुखी परिवार है।
शादी के हमें लगभग 12 वर्ष बीत चुके हैं। अब सेक्स का वो पहले जैसा जोश नहीं रह गया है… पर कभी कभी ऐसा लगता है कि कोई मुझे पहले जैसा मजा दे। मन भटकने लगता है … मचलने लगता है… जिस्म टूटने लगता है। फिर नजरें किसी मर्द की ओर उठने लगती है। शायद किसी नये मजे के लिये … नये मोटे और लम्बे लन्ड से नयी चुदाई का मजा लेने के लिये। ऐसे ही एक बार मेरा मन भटक गया था … और फिर मेरा बांध टूट गया। मैं चुदने को आतुर हो उठी।

मेरे कोलेज में विजय नाम का एक सहायक प्रोफ़ेसर था। नया ही आया था। भोपाल में सेमिनार आयोजित की गयी थी। उसमें मेरा भी पेपर था। मुझे और मेरे सहायक रूप में विजय को मेरे साथ जाना था। हम दोनों ने रात की गाड़ी में रिजर्वेशन करवा लिया था। मेरे पति ने मेरा वहां पर एक अच्छे रेस्ट हाऊस में रिजर्वेशन करवा दिया था।

वहीं पर दूसरे वैज्ञानिक भी रुके थे। मुझे पता था कि विजय नया है और उसे रिजर्वेशन के बारे में कोई अनुभव नहीं था। मेरे मन में चूंकि बेईमानी थी इसलिये मैंने चुपचाप से अपने ही कमरे में उसका रिजर्वेशन करवा दिया था। मैंने अपना नाम डा. के. सक्सेना और साथ में विजय का नाम लिखवा दिया था।

सवेरे भोपाल में यूनिवर्सिटी की तरफ़ से गाड़ी आ गयी थी। हम सभी रेस्ट हाऊस में पहुंचे। मैंने जानबूझ कर तुरन्त गाड़ी से उतर कर रेस्ट हाऊस के कमरे की चाबी ले कर कमरे में आ गई। थोडी देर में विजय भी आ पहुंचा। कमरे में मुझे देख कर चौंक गया। मैंने उसे बताया कि डा. के. सक्सेना मैं ही हूँ।

विजय हंस पडा… ‘मैंने सोचा कि जाने ये डा. के. सक्सेना कौन है… ‘
‘क्यों… मेरा नाम नहीं पता था क्या?’
‘नहीं… मुझे किसी पुरुष का नाम लगा… पर ये तो आप ही निकली… लेकिन आप ओर मैं एक ही कमरे में… ?’
‘कोई कमरा खाली नहीं है … इसलिये मैंने मेरे साथ ही आपका नाम लिखवा दिया… ‘

थोड़ी ही देर में चाय नाश्ता आ गया। हम दोनों ने नाश्ता करके थोड़ा आराम किया… विजय इतनी देर में नहा कर आ गया… वो सफ़ेद पाज़ामे और कुर्ते में अच्छा लग रहा था। उसका कसा हुआ शरीर मुझे आकर्षित कर रहा था। मैं भी फ़्रेश हो गयी… और फिर हम दोनों पेपर चेक करने लगे।

सेमिनार में मेरा पेपर 1 बजे पूरा हो गया था। विजय मेरे पेपर सम्हालने के बाद मेरे पास आ कर बैठ गया। 2 बजे लन्च ब्रेक हुआ … हम दोनों वापस कमरे में आ गये।

शाम को खाना खा कर हम बाहर यूं ही टहलने लगे। मैंने धीरे से शुरूआत की… और मै उसके हाथ से हाथ को छूने लगी। बात बात में उसके बाहों में हाथ मारने लगी। मुझे पता चल गया था कि उसे भी छूने में मजा आ रहा था।

मैंने मौका देख कर शादी की बात छेड़ दी… विजय अपनी गर्ल फ़्रेंड की बातें बताने लगा। मैंने उससे उसकी गर्ल फ़्रेंड के साथ सेक्स के बारे में पूछा… तो उसने बताया कि वो उसे कुछ भी नहीं करने देती है। मुझे लगा कि विजय सेक्स की बातों से कुछ उत्तेजित हो गया था। मैं तो यही चाहती थी। अब हम दोनों ऊपर वापस कमरे में आ गये।

मैंने रात को पहनने वाला अपना हल्का सा पज़ामा पहन लिया और उस पर एक छोटा और ऊँचा सा कुर्ता डाल लिया। विजय ने भी अपना सफ़ेद पाज़ामा पहन लिया था। मैंने कमरे की लाईट बन्द कर दी और हम दोनों बाहर बालकनी पर आकर खड़े हो गये। हल्की हल्की हवा चल रही थी।

विजय भी पास में खड़ा था, पर उसका मूड कुछ और ही था। उसके पज़ामे में से उसका जोर मारता हुआ लन्ड नजर आ रहा था। मैं भी बहाने से हाथ हिला कर कभी कभी उसके लन्ड को छू लेती थी । कुछ देर हम बातें करते रहे फिर विजय से रहा नहीं गया… वो अटकते हुये कुछ कहने की कोशिश करने लगा । मै सब समझ रही थी। उसका लन्ड पज़ामे में से उठा हुआ साफ़ दिख रहा था।

‘मैं आपसे कुछ कहूं… बुरा तो नहीं मानेंगी ना… ‘ उसके कहने के अन्दाज़ से ही लग रहा था की अब वो मुझे पटाने की कोशिश करेगा…

‘हां… हां… कहो… ऐसा क्या है… ‘ वो कुछ और मेरे नजदीक आ गया। मुझे भी लगा कि अब कुछ होने वाला है। मैं मन ही मन मुस्करा उठी… लगा कि फ़ंसा… ।

‘वो… आप मुझे बहुत अच्छी लगती है… ।’ मैं सुन कर मन ही मन आनन्द से भर गयी।

‘अच्छा… क्या अच्छा लगता है… ?’ मैंने उसे और उकसाया। मेरे मन की धड़कन बढने लगी। उसने मेरी कमर में हाथ डाल दिया। मुझे लगा कि लोहा गरम है … पिघल रहा है… अभी मौका है… । उसने मुझे थोड़ा सा अपनी ओर खींचा… मैं जान करके उसके पास सट गयी। मेरा दिल धक से रह गया… उसका लन्ड मेरे कूल्हे से टकरा गया, एक दम कड़क और तना हुआ।

मेरी सांसे बढ़ गई… दिल की धड़कने तेज हो गयी। चेहरा लाल होने लगा। उसने मुझे कमर से दबाया… मैं बिना कोई मौका खोये उससे लिपट गयी… विजय के होंठ मेरे नरम होंठों से छूने लगे… और फिर धीरे से दोनों आपस में मिल गये।

मेरी चूत को साथी मिलने वाला था। मैं उसे पीछे धक्का देते हुये बालकनी से कमरे में ले आई। उसने मेरे बोबे दबाने शुरू कर दिये। मेरे शरीर में सनसनी फ़ैलने लगी… मेरे उरोज कड़े हो गये … चूत पानी छोड़ने लगी। मेरी हालत उत्तेजना से बुरी हो गयी … तभी उसने मेरी चूत रगड़नी चालू दर दी… अब सब कुछ मेरी सहनशक्ति से बाहर हो गया… मैंने हाथ बढ़ाकर उसका लन्ड पकड़ लिया।
एकबारगी उसका मोटा और लम्बा लन्ड देख कर मेरा मन चुदाने को करने लगा। मैंने उसका पजामा नीचे खींच दिया … अब उसका लन्ड मेरे गिरफ़्त में आ गया। मैं उसका लन्ड जोर जोर से दबाने लगी। वो मेरी चूत को मसले जा रहा था…

‘आऽऽऽह विजय… मैं मर गयी… हाय रे… … धीरे… मेरी छूट जायेगी… ‘ मैं आनन्द के मारे झुकने लग गई।

‘मेरा लन्ड मसल डालो… सीऽऽऽ आआऽऽऽ … मजा आ रहा है… ‘ उसका मैंने मस्ती में जोर से मसल दिया। उसने मेरी गान्ड की गोलाईयां मसल डाली। मेरी चूतड़ों की दरारों को घिस डाला। चूत को अब भी मसले जा रहा था… मेरा दाना पिघल उठा… मेरी चूत ने अब जोर मारना शुरु कर दिया।

मुझे लगा कि मैं झड़ने वाली हूं। पर उत्तेजना चरम सीमा पर पहुंच चुकी थी। मैं विजय से चिपकती जा रही थी। हाय रे… मेरा पानी छूटने लगा … मैं झड़ने लगी… । पर ये क्या… अचानक मेरे हाथ भीग गये… विजय के लन्ड ने थोडा जोर लगाया और उसका वीर्य निकल पड़ा। उसके वीर्य की पिचकारी मेरी चूत पर पडी… और फिर मेरे पजामे को गीला कर दिया।

कुछ देर हम दोनो ऐसे ही लिपटे और चिपके रहे… फिर अलग हो गये। मै शरम के मारे वहीं बैठ गयी। मैंने अपना मुँह छुपा लिया। विजय ने तुरन्त अपना तौलिया लपेटा… और मेरा तौलिया मेरे ऊपर डाल दिया।

मैं उठी और भाग कर बाथरूम में चली गयी… मैंने सफ़ाई की और मन ही मन अपनी सफ़लता पर खुश हो उठी। मुझे मालूम था कि इतना कुछ होने के बाद अब चुदने में समय नहीं लगेगा… सबसे पहले मैंने अपनी गान्ड में क्रीम लगा ली… क्योंकि मर्द से गान्ड मरवाने मुझे बहुत मजा आता है। चूत को भी पानी से अच्छी तरह से साफ़ कर लिया।

मैंने तौलिया लपेटा और बाहर आ गयी… विजय भी बाथरूम में साफ़ होने को चला गया। रात के 11 बज रहे थे। मैं बिस्तर पर आकर लेट गयी और तौलिया खोल कर पास में रख लिया। टोप भी उतार दिया और नंगी हो कर सो गयी। चादर ऊपर तक ओढ़ ली। विजय भी सिर्फ़ तौलिया लपेटे हुये बाहर आया और सोफ़े पर लेट गया।

मैंने उसे बडी अदा से मुस्करा कर कहा,’बिस्तर बहुत बड़ा है, यहीं पर सो जाओ।’

उसे तो शायद बुलावे का इन्तेज़ार ही था। वो तुरन्त उठा और लपक कर आ गया। पहले तो वो मेरे पास लेटा रहा… फिर बोला,’थोडी सी चादर मुझे भी दे दो… ‘

‘अच्छा… एक ही चादर में आओगे … इरादे तो नेक है ना… ‘ मुझे तो चुदने की लग रही थी… मैंने अपनी चादर उसके ऊपर डाल दी। उसने अपना तौलिया पता नहीं कब उतार दिया था। हम दोनों के नंगे शरीर का स्पर्श हो गया…

‘विजय… हाय … तुम तो नंगे हो… ‘
‘तुम भी तो नंगी हो… ‘
‘हाय रे … मै मर गयी… विजय… ‘

… एक बार मैं फिर उससे चिपकने लगी। उसके हाथ मेरे शरीर पर रेन्गने लगे। मेरे शरीर में उत्तेजना भरने लगी। मेरे अंग कड़े होने लगे… फिर से वासना भड़क उठी। मै उसके जिस्म को सहलाती जा रही थी… और लन्ड को भी मसलती जा रही थी। नंगे बदन एक दूसरे से रगड़ खाने लगे… दो जवान जिस्म सुलग उठे। विजय का लन्ड कठोर होता जा रहा था… उसका उफ़नता हुआ लन्ड मेरे शरीर में घुसने को बेकरार हो उठा।

मेरी चूत पानी छोड़ने लगी। विजय ने करवट बदली। मेरी पीठ से उसका जिस्म सट गया। जैसा सोचा था वही हुआ … मेर मन खुशी से नाच उठा… उसका लन्ड मेरी गान्ड चोदने के लिये बेकरार हो रहा था। मुझे गान्ड चुदवाना बहुत ही अच्छा लगता है… क्योकि देर तक चुदाई कराना मुझे अच्छा लगता है।

उसका लन्ड मेरी चूतड़ों की दरारों में फ़िसल रहा था। शायद गान्ड के छेद को ढूंढ रहा था। मुझे तेज सिरहन होने लगी थी। चूतड़ों की दोनों गोलाईयां खुलने को तैयार थीं… उसके हाथ धीरे से मेरी चून्चियो पर कब्जा जमा चुके थे। मेरी चूंचिया कड़ी हो गयी थी।

उसने मेरी चूंचियो को दबाते हुए लन्ड का दबाव मेरी चूतड़ों कि दरारों में डाला… मेरी चिकनी दरारों के बीच लन्ड सरकता हुआ मेरे गान्ड के द्वार पर आ पहुंचा था। मैंने बेचैनी से उसे देखा। विजय ने प्यार से मेरी चूंचियों को जोर से दबा कर गाण्ड का दरवाजा खोल दिया और सुपाड़ा अन्दर घुसा दिया। मेरे मुख से सिसकारी निकल पड़ी। मैंने अपने चूतड़ों को और पीछे की ओर उभार दिया और उसके लन्ड के साथ साथ जोर लगाने लगी…

उसका लन्ड मेरी सिस्कारियों के साथ आगे बढ चला। फिर एक और धक्का और लन्ड पूरी गहराईयों तक उतर गया। मैंने अपनी एक टांग उपर उठा दी और उसकी टांगों पर रख कर गान्ड को और खोल दी। अब उसका लन्ड मेरी गान्ड को सरलता से चोद रहा था। उसका हाथ अब चूंचियों पर से हट कर चूत पर आ गया था।

उसने अपनी एक उन्गली चूत में घुसा दी और लन्ड के धक्कों के साथ उंगली भी अन्दर बाहर कर रहा था। उसके धक्के तेज होने लगे। मेरी चिकनी गान्ड में भी मीठा मीठा सा मजा आने लगा था। मेरी चूतड़ भि हिल हिल कर गान्ड चुदाने में मेरा साथ दे रहे थे। मेरा अंग अंग उत्तेजना से भर उठा था। विजय की सिसकारियां बढ गयी।

अचानक उसने अपना लन्ड गान्ड में से निकाल लिया। मुझे उल्टा लेटा कर मेरे नीचे तकिया लगा दिया। मैं अपनी बाहों की कोहनियों पर हो गयी और सामने से ऊपर उठ गयी। तकिया लगाने से मेरी चूत थोड़ी सी ऊपर हो गयी। मेरी टान्गों के बीच में आकर उसने अपना लन्ड मेरी चूत के छेद पर लगा कर उसे दबा दिया।

मैं चिहुंक उठी। लन्ड का स्पर्श पाते ही चूत का द्वार अपने आप ही खुल गया… लन्ड का स्वागत हुआ … और सुपाड़ा फ़क से अन्दर घुस गया। चूत पूरी गीली थी… । एक दम चिकनी … मैंने भी जोश में चूतड़ उछाल दिया। नतीजा ये हुआ कि लन्ड फ़च की आवाज करता हुआ पूरा अन्दर तक पहुंच गया।
खुशी और आनन्द के मारे मैं चीख उठी… ‘मेरे राजा… मजा आ गया … पूरा घुसेड़ दो अपना लन्ड… हाऽऽऽय… ‘

उत्तर में विजय ने मेरी दोनों चूंचिया दोनों हाथों से दबा दी। और अपनी तेजी बढा दी। उसका लन्ड इंजिन के पिस्टन की तरह फ़काफ़क अन्दर बाहर चलने लगा। स्तनो को अच्छी तरह से दबा कर चोद रहा था।

‘मर गयी राजा… चोद दे रे… हाय ओऽऽऽह … मां चोद दे मेरी…’

‘हां… मेरी रानी… तुझे छोड़ूगा नहीं … पूरा चोद डालूंगा… मेरी कुतिया…’

‘हां रे ऽऽऽऽ… मेरी चूत का भोसड़ा बना दे … मेरे राजा… हाय रे… ‘

‘आऽऽऽह्ह्ह… रे… तेरी चूत मारूं… बहन चोद… कुतिया… रन्डी… ले… और ले… लन्ड्… ‘

‘राजा… चूत फ़ाड़ डाल… मां के लौड़े … मार लन्ड को चूत पे… तेरी भोसड़ी… के ‘

दोनो तरफ़ से वासना भरी गालियों की बौछारों के बीच चुदाई चरमसीमा पर पहुन्च रही थी। मेरे से तो अब नहीं रहा जा रहा था … लग रहा था कि अब गयी… अब गयी… मै रोकना चाह रही थी पर… वासना की तेजी… उत्तेजना की तेजी… उबल रही थी… ।

‘मादरचोद… भोसड़ी के … मैं तो गयी रेऽऽऽऽऽ … चोद … चोद… जोर लगा… फ़ाड़ दे… बहनचोद… ‘

‘अभी रुक जा छिनाल … मेरी भी मां चुदने वाली है… मै भी आया… मां की लौड़ी… ‘

‘हाऽऽऽय रे… मरीऽऽऽ … निकला पानी रे… हाय रे चुद गयी… चुद गयी… निकल गया रे… ‘

मैं धीरे धीरे झड़ने लगी… पर उसके झटके चूत में चलते रहे। मैं निढाल होने लगी। मैंने अपनी चूंचियों से उसका हाथ हटा दिया। अब विजय ने भी अपना मोटा और लम्बा लन्ड चूत से बाहर निकाल लिया।

उसने मुझे सीधा किया और अपना लन्ड मेरे मुंह पर रख दिया। मैं हंस पड़ी,’अब एक छेद तो छोड़ दो…’

‘प्लीज… थोड़ा सा रह गया है…’

और उसने अपना लन्ड मेरे मुख में घुसा दिया। पहले मैं उसे चूसती रही पर उसने मेरे मुँह को ही चोदना चालू कर दिया। उसका लन्ड मेरे गले तक को छू रहा था। मैंने तुरन्त उसका लन्ड अपनी मुठ मे ले कर… उसे जोर से भीन्च कर मुठ मारने लगी…

बस इतना तो उसके लिये काफ़ी था… उसके लन्ड ने वीर्य की पिचकारी मेरे मुख में ही छोड़ दी। चूतड़ों और लन्ड के जोर से पिचकारी… जोर से छूट रही थी… मुझे पता नहीं कितना पी गयी और कितना मेरे चेहरे पर बिखर गया। लन्ड पूरा चूस कर साफ़ कर दिया…

अब विजय बिस्तर से उतर गया। हम एक बार फिर बाथरूम में गये… पानी से साफ़ करके बाहर आये… बाथरूम के बाहर हम आपस में एक दूसरे को नंगे निहारने लगे… मुझसे रहा नहीं गया… मुझे उस पर प्यार आने लगा, मैंने अपनी बाहें फ़ैला दी… हम फिर से एक दूसरे के गले लग गये…

रात के 12 बज रहे थे। हम दोनों बिस्तर पर नंगे ही लेट गये। एक दूसरे से लिपट कर प्यार किया और उसकी बाहों पर सर रख कर और उसकी कमर पर अपनी टांगे डाल कर चिपक कर सो गयी।

अचानक रात को मेरी नीन्द फिर खुल गयी… मेरी चूत में विजय का लन्ड घुसा हुआ था… मैं चुपचाप सोने का बहाना करती रही… वो चोदता रहा… मैं अपने आपको ज्यादा देर नहीं रोक सकी… उसके बदन को कसती गयी… उसने मेरी चूंचियां फिर से कस कर दबा दी… अब मैंनें भी उससे लिपट कर चूत के झटके मारने चालू कर दिये… Hindi Sex Stories

Hindi Sex Stories

मेरा नाम राहुल है, मेरी उम्र २२ Hindi Sex Stories साल है ! मेरा शरीर मजबूत है क्यूंकि मैं बॉडी बिल्डिंग भी करता हूँ। मैं अन्तर्वासना की कहानियां हर सुबह पढ़ता हूँ ! मैं अपने जीवन की एक सच्ची कहानी लिख रहा हूँ !

हमारे घर के सामने नई नई एक शादी हुई ! मैं उनकी शादी में तो नहीं गया था ! इसलिए मैं उनके घर नहीं जाया करता था, परन्तु मैं अपनी गली में किसी की बात नहीं मोड़ता था, जिसकी वजह से सब लोग मुझे ही काम के लिए बुलाते थे।

एक दिन उस नई भाभी ने भी मुझे बुलाया और मैंने उनका जो काम था कर दिया। इस तरह मेरी उनसे बातें होने लगी।

धीरे-२ मैंने उनको कहा- मेरी किसी लड़की से बात करवा दो !

तो उन्होंने कहा- किस से?

मैंने कहा- किसी से भी !

उसने कहा- ठीक है, मैं देखती हूँ !

कुछ दिनों तक मैं उनके घर नहीं गया क्यूँकि मेरे दोस्त की उनके रिश्तेदार से लड़ाई हो गई! फिर कुछ साल बीतने के बाद मेरी भाभी से बात हुई पर तब तक तो उनके दो बच्चे हो चुके थे। मैंने भाभी से कहा- मिली कोई लड़की ?

तो उसने कहा- एक थी ! पर उसका रिश्ता हो गया है !

मेरी दिल में एक बात आई और मैंने कहा- नहीं भाभी, ऐसी कोई भी लड़की नहीं है, वो सिर्फ आप हो !

तो मैंने हिम्मत करके उनका हाथ पकड़ लिया ! उसने कहा- राहुल तुम्हें यह कैसे पता लगा कि मैं तुमसे प्यार करने लगी हूँ?

कुछ दिन बीत गए ! मैं उनसे नहीं मिला ! एक दिन उनके घर पर कोई नहीं था ! (मैं आपको बताना भूल गया कि उनके परिवार में उनका पति, देवर, सास, देवरानी और दो बच्चे हैं !) मैंने अंदर से दरवाज़ा बंद कर लिया ! भाभी ने कहा- यह क्या कर रहे हो !

मैंने कहा- कोई हमारी बातें न सुन ले !

तो उसने कहा- ठीक है, बोलो !

मैंने कहा- बोलना क्या है, एक पप्पी तो दे दो !

उसने थोड़ा दूर होते हुए मना कर दिया। मैं उठ कर गया और ज़बरदस्ती उसे चूमने लगा। थोड़ी देर बाद वो भी मेरा साथ देने लगी !

मैंने उससे कहा- नीचे की चीज़ कब दे रही हो?

उसने कहा- मम्मी आ रही होंगी, हम यह सब किसी और दिन करेंगे।

मैं वहाँ से चला आया ! वो रोज किसी काम से मुझे अपने घर अपनी सास के सामने बुलाती और पीछे के कमरे में मेरा साथ चूमा-चाटी करती।

फिर एक दिन मैंने उससे कह दिया- जब मुझे चूत दोगी तभी मुझे बुलाना !

एक दिन उसका फ़ोन आया, उसने कहा- कोई काम है तुम आ जाओ !

मैं उसके घर गया तो उसने बोला- कापियाँ ला दे !

मैंने कहा- पहले मुझे वो दो !

उसने कहा- आकर कर लेना !

मैंने कहा- कर के ही जाउंगा !

वो लेट गई, मैंने उसकी सलवार उतारी और उसे हाथों से चोदना शुरू कर दिया ! वो सिसकियाँ लेने लगी ! मैंने उसका कमीज उतारा और उसकी चूचियाँ दबाने और चूसने लगा।

वो कहने लगी- अब जाओ !

मैंने कहा- अभी तो इसे चूसो !

उसने मना कर दिया, कहने लगी- मुझे उलटी आती है।

फिर मैंने उसे ज्यादा मजबूर नहीं किया, अपना लंड उसकी गीली चूत पर रखा, वो एक दम से अन्दर चला गया, मुझे मज़ा नहीं आया तो मैंने उसकी टांगों को एक दूसरे पर तिरछा कर दिया। अब मुझे मज़ा आने लगा और वो चिल्लाने लगी- बस अब और नहीं मारो !

मैं कहाँ मानने वाला था, मैंने उसको उल्टा किया और उसके ऊपर लेट गया।

उसने कहा कि वो गांड नहीं देगी।

मैंने कहा- मैं चूत ही मारूंगा !

उसने कहा- देखो, गांड मत मारना !

मैं उसकी गर्दन आगे करके बीच में बैठ गया और एक झटके से उसकी गांड में लंड पेल दिया, वो तड़पने लगी क्यूंकि मैंने उसकी लातों को बांध दिया था जिसका उसे पता नहीं लगा। वो रोने लगी और मुझे हंसी आ रही थी, मैंने कहा- क्यूँ साली, बहुत तड़पाया है तूने !

जब मेरा छुटने को आ रहा था तो मैंने लंड बाहर निकाला और उसकी चुचियां गीली कर दी।

उसने कहा- यह तुमने ठीक नहीं किया राहुल !

मैंने कहा- कॉपी लेनी है या नहीं !

वोह कहती- यह सब करने में १ घंटा लग गया और तुमने कहा था सिर्फ पांच मिनट !

मैंने सॉरी कहा और अपने दोस्त की दुकान से कॉपियाँ लाकर दे दी।

वो मुझ से नाराज़ होने का नाटक करने कगी तो मैंने उसे मनाने के लिए ५ रुपये की चोकलेट लाकर दे दी। उसने कहा कि वो नहीं खायेगी!

मैंने कहा- तुम मुझे प्यार नहीं करती तो मैं जा रहा हूँ !

उसने मेरा हाथ पकड़ा और चोकलेट अपने मुंह में डाल कर मेरे आगे कर दी। मैंने चोकलेट खाते हुए उसे बहुत चूमा और अगली बार का कह कर घर चले आया।

अब मैं उसकी देवरानी को अपने चक्कर मैं ले रहा हूँ। Hindi Sex Stories

Sex Stories

रात के ११ बज़ रहे Sex Stories थे। मौसी के कमरे में ए. सी. चल रहा था मैं और मोनी वहां एक नेकर पहन कर बैठ गई। मौसी आई और वहां लेट गई और हमें अगल बगल में चिपका कर लिटा मेरे चूतड़ों पर हाथ लगा कर बोली,”अब चुदने को तैयार हो जा !”

मौसी ने फ़ोन उठाया और बोली,”मोंटी साहब कैसे हो ? कब आ रहे हो? नई रंडी आई है इसकी चूत का उदघाटन करवाना है। मोनी कुतिया भी तुम्हारा लौड़ा खाने को बेताब हो रही है !”

कुछ देर बात हुई फिर मौसी ने फ़ोन रख दिया और बोली,”मोंटी साहब आधे घंटे में आ रहे हैं, चोद चोद कर तुझे मस्त कर देंगे। चल ! तब तक तू मेरी चूत में यह मोटा केला कर और मोनी मेरी चूचियाँ सहलाएगी !”

मौसी ने मेरे हाथ में एक १० इंच लम्बा और ४ इंच मोटा केला पकड़ा दिया। मौसी की चूत भोंसड़ा हो रही थी। उनकी चूत में केला बिलकुल फिट बैठ रहा था। मैंने मौसी की चूत में केला आगे पीछे करना शुरू कर दिया। मोनी उनकी चूचियाँ दबा रही थी। मौसी हल्की हल्की सिस्कारियाँ लेने लगी थी।

मौसी के कमरे में कुछ हल्ले की आवाज़ सी सुनाई दी। मौसी ने राजू को बुलाया और पूछा,”क्या बात है? हल्ला क्यों हो रहा है?”

राजू बोला,”ये सीमा है, साली बिकी तो १००० में है, ग्राहक गांड मारना चाह रहा है तो लड़ रही है।”

मौसी बोली,”कुतिया, एक तो सही रेट पर बिक नहीं रही, ऊपर से आज साली के रेट ठीक लगे हैं तो कोठे का माहौल ख़राब करती है। तू ऐसा कर पहले ग्राहक को बुला, फिर कुतिया को नंगी करके भेज और सामने सीमा बाई के कोठे से हब्शी को बुला ले। आज साली की गांड हब्शी से फड़वाती हूँ !”

राजू ने ग्राहक को अंदर भेज दिया। मैं और मोनी मौसी की चूत में केला कर रहे थे। सामने मौसी चूत चोड़ी कर के लेटी हुई थीं ग्राहक को देख कर मैं रूक गई। मौसी बोली,,”कुतिया रुक क्यों गई अपना काम जारी रख।”

मौसी ग्राहक से बोली,”अरे साहब क्यों नाराज हो रहे हो ? मेरे कोठे पर चुदाई का मज़ा न मिले ऐसा हो ही नहीं सकता। टॉप की रंडी दूँगी, बिलकुल फ्री। दोनों छेद फाड़ दियो कुतिया के।”

मौसी ने राजू से पूछा,”कोई लोंडिया खाली हुई या नहीं?”

राजू बोला,”शोभा खाली है इस समय !”

मौसी ने कहा,”शोभा को इसे सौंप और उससे कहना कि मौसी के स्पेशल ग्राहक हैं, पूरे मजे देना है, जैसे ये चाहें। चल राजा जा मजे कर और राजू तू सीमा को नंगी कर के मेरे पास भेज इस को मजा मैं चखाती हूँ।”

राजू और पिंटू सीमा को ले आया। सीमा पूरी नंगी थी। मौसी ने हम दोनों को हटाया। मौसी उठी और उन्होंने सीमा के गाल पर तीन चार थप्पड़ जड़ दिए और उसे धक्का देकर नीचे गिरा दिया उसके चूतड़ों पर ४-५ लातें मारी। मौसी चिल्ला रही थी,”हरामिन रंडी है तू, सारे छेदों में लंड खाना पड़ेगा तुझे कुतिया ! गांड मरवाने में नखरे करती है। आज तेरी इतनी गांड फड़वाती हूँ कि तू जिन्दगी भर याद रखेगी !”

सीमा रो रही थी। मौसी मेरी और मोनी की तरफ देखकर बोली,”तुम दोनों राजू और पिंटू के लौड़े चूस कर खड़े करो इस की गांड में घुसवाउंगी। साली हिरोइन बनती है !”

मौसी लकड़ी के डंडे से सीमा को पीट रही थी। मौसी ने उसके बाल खींचे और बोली,”चल घोड़ी बन। तेरी गांड में लंड डलवाती हूँ !”

सीमा डर के घोड़ी बन गई। मौसी ने उसकी गांड पर ढेर सारा थूक डाल दिया। मौसी के भयानक रूप से मैं भी डरी हुई थी और राजू का डर कर लपालप लौड़ा चूसे जा रही थी। मौसी ने राजू को इशारा किया और बोली इसकी गांड का छेद चोड़ा कर फिर हब्शी आ रहा है उससे फड़वाती हूँ। राजू ने मेरे मुँह से लौड़ा निकला और घोड़ी बनी हुई सीमा की गांड पर लगा दिया और उसकी गांड में अपना मोटा नंगा लंड लगाकर जोर से झटका दिया। आधा लंड गांड में घुस गया। सीमा जोर से चिल्ला उठी,”मर गई ! उई मर गई ! छोड़ कुत्ते छोड़ ! मुझे मत चोद !” लेकिन राजू ने जोर से लंड उसमें पूरा ठोंक दिया और अपने लंड को तेजी से उसकी गांड में आगे पीछे करने लग रहा था।

थोड़ा चिल्लाने के बाद सीमा सिसकारी लेती हुई गांड मरवाने लगी । सीमा की सिस्कारियाँ निकल रही थीं। मौसी ने राजू से कहा तू अब लंड निकाल और इसकी गांड वाला लंड इसके मुँह में डाल। सीमा के मुँह पर ले जाकर राजू ने अपना लंड रख दिया लेकिन सीमा मुँह नहीं खोल रही थी। मौसी ने पिंटू के मुँह से सिगरेट ले कर सीमा की गांड में छुला दी बोली,”कुतिया तेरी जैसे हजारों मैंने रंडी बना दीं और तू हिरोइन बन रही? चुपचाप लंड चूस ! वरना तेजाब से मुँह और जला दूँगी !”

सीमा के चीखने की आवाज़ नीचे गली तक गई होगी। उसने मुँह खोल के राजू का लंड मुँह में ले लिया और चूसने लगी। इस बीच मौसी ने पिंटू को सीमा की गांड मारने का आदेश दे दिया। पिंटू एक वफादर कुत्ते की तरह सीमा की गांड मारने लगा।

सीमा की गांड का ठुकना जारी था तभी एक अफ्रीकन हब्शी कमरे में आया। मौसी ने हब्शी को अपनी बाँहों में ले लिया और बोली,” राजा मेरे कोबरा ! आज तू इस कुतिया सीमा को बजा ! साली रंडी मेरा कहना नहीं मानती।”

मेरी तरफ देखकर मौसी मुझसे बोली,” कुतिया, जरा मेरे कोबरा का लौड़ा चूस !”

हब्शी का नाम कोबरा था। उसने अपनी पैन्ट उतार दी। नीचे कुछ पहन नहीं रखा था। उसका ठंडा लौड़ा भी ६ इंच लम्बा होगा पूरा काला लंड था। मैं मौसी का भयानक रूप देखकर बहुत डरी हुई थी। मैंने झुककर कोबरा का लौड़ा अपने मुँह में डाल लिया और उसे आगे पीछे मुँह कर के चूसने लगी। थोड़ी देर में ही लंड ने बड़ा विकराल रूप ले लिया वो बहुत लम्बा हो गया था और ४ इंच से जयादा मोटा हो रहा था। मेरा मुँह लंड से बुरी तरह भर गया था। लंड १० इंच से ऊपर लम्बा हो रहा था। पूरा मेरे मुँह में नहीं आ रहा था। कोबरा मेरे चूतड़ दबा रहा था। मुझसे बोला- ऊपर ऊपर चूस तू कुतिया बहुत चिकनी है, तेरा माल बिलकुल ताजा है। कोबरा का लंड ११ इंच लम्बा और ५ इंच मोटा होगा। मैं यह सोच कर काँप रही थी कि अगर इस हब्शी का लंड मेरी चूत में घुस गया तो मैं तो मर ही जाउंगी ।

मौसी ने कोबरा को बुला लिया और बोली इस सीमा की चूत और गांड बजा ! साली को बताती हूँ रंडी क्या होती है। मौसी ने पिंटू को हटा दिया और सीमा को सीधा खड़ा कर दिया। सीमा की आँखों के आगे हब्शी का प्रचंड लंड लहरा रहा था।

मौसी मुस्कराते हुए बोली,”घुसवाने के लिए तैयार हो जा ! पूरे २० दिन में तूने २०००० भी कमा के नहीं दिए। सोच रही होगी २-३ दिन में दूसरे कोठे पर भाग जायेगी। कुतिया मौसी के कोठे पर धंधा न करने और ग्राहकों को तंग करने का मज़ा चखाती हूँ।”

सीमा मौसी के पैरों पर गिर गई,” मौसी मुझे माफ़ करो, मुझे छोड़ दो ! जैसा तुम कहोगी वैसा करूंगी।”

मौसी कुटिलता से मुस्करा रही थी। हब्शी ने पीछे आकर सीमा की चूत में लौड़ा लगा दिया और एक झटके में लौड़ा ३-४ इंच घुसा दिया। सीमा जोर से चिल्ला उठी- उई मर गई… मर गई… मर गई।

लेकिन हब्शी और मौसी मुस्करा रहे थे। हब्शी ने जोर से झटका मारा और लंड ८-९ इंच अंदर पेल दिया सीमा के चीखने की आवाजें तेज हो गई, वो चिल्ला रही थी,” मर गई, मर गई, उई मत चोदो राजा ! लौड़ा निकालो ! फट गई फट गई उई उई !!!! बहुत दर्द हो रहा है छोड़ो ! मुझे छोड़ो! मुझे मत चोदो मर गई मर गई बहुत दर्द हो रहा है।”

मौसी ने मेरे चूतड़ों पर हाथ मारा और बोली,”साली की जब गांड फटेगी तब देखियो कैसे रोती है अभी तो चुद रही है तब इतना चिल्ला रही है !”

हब्शी ने कस कर सीमा की कमर पकड़ रखी थी और उसको बुरी तरह से ठोंके जा रहा था। मौसी बोली,”कोबरा, कुतिया की गांड़ मार ! आज इस हरामिन की चूत और गांड दोनों का भोंसड़ा करवा के ही छोडूंगी।”

हब्शी ने लंड बाहर खींच लिया और उसकी गांड पर लंड रख दिया सीमा चिल्ला उठी- नहीं मौसी ! मुझे छोड़ दो नहीं… नहीं। लेकिन रंडी कब तक खैर मनाएगी और आज साली का दिन ख़राब था। हब्शी ने ३ इंच लंड उसकी गांड में घुसा दिया और उसकी चूचियाँ कस कस कर मसल दीं। कोबरा पूरा गरम हो रहा था उसने गांड पर कस कर झटका मारा और अपना लंड और अंदर उसकी गांड में घुसा दिया। सीमा चिल्ला रही थी, अभी कोबरा अपना आधा लंड अंदर डाल कर ही सीमा की गांड मार रहा था। सीमा की दर्द भरी आवाज़ कमरे में गूँज रही थी। मुझे पता चल गया था कि औरत के लिए रंडी सबसे बड़ी गाली क्यों होती है.. मुझे सीमा पर दया आ रही थी लेकिन डर के मारे मैं कुछ नहीं कह पा रही थी।

कुछ देर बाद मौसी ने हब्शी से कहा,”अब इसे छोड़ दे ! अब ये कभी ग्राहक से बद्तमीजी नहीं करेगी।”

सीमा दर्द से जमीन पर लेट गई। मौसी पिंटू से बोली,”साली को बाहर खटिया पर डाल दे और हकीम को बुलाकर इसकी गांड पर लेप लगवा दियो ! कुतिया साली हिरोइन बन रही थी।”

हब्शी का लंड लोहे की रॉड की तरह ११ इंच लम्बा खड़ा हुआ था। मौसी हब्शी से बोली- थोड़ा हमारी इस नई कुतिया की चूत और गांड पर अपना लंड फिरा दे। मैं डर गई मैं बोली,”नहीं मौसी नहीं ! मेरी चूत में इस राक्षस का लंड मत डलवाओ ! मैं मर जाउंगी !”

मौसी मेरे चूतड़ों पर हाथ फेरती हुई बोली,”तुझे मरने थोड़ी दूँगी ! तू तो दूध देने वाली गाय है, अभी तो तुझे चुदने के लिए भी बैठाना है ! चल जरा झुक तो, बड़ा मजा आएगा !”

मैं डर के मारे झुक नहीं पा रही थी। मौसी ने वहां पड़ी एक लकड़ी उठाई और जोरों से मेरे चुत्तड़ों पर मारी और गुर्राकर बोली,”कुतिया घोड़ी बनती है या नहीं?”

हब्शी मुस्करा रहा था। मैं मौसी के डर से झुक गई। मेरा बदन पूरा पसीने पसीने हो रहा था। हब्शी ने पीछे से आकर मेरी चूचियाँ अपने हाथों मैं पकड़ लीं और धीरे धीरे मसलने लगा। उसका मोटा लंड मेरी चूत पर फिर रहा था। उसने आधा इंच लंड का सुपाड़ा मेरी चूत में घुसा दिया। मेरी आँखों के आगे तारे घूम गए। मैं जोर से चिल्ला उठी,”उई उई…. उई मर गई…. मर गई…..”

मौसी ने हब्शी को उठा दिया और बोली- साली की फट गई तो रेट अच्छे नहीं मिलेंगे ! तू ऐसा कर, इसकी गांड पर लंड फिरा। हब्शी अपने हाथ से लंड पकड़ कर मेरी गांड में फिराने लगा अचानक से मेरी गांड में कुछ घुसा, मैं जोर से चिल्ला उठी- उई मेरी फट गई। सब लोग जोरों से हंस पड़े, मौसी बोली,”कुतिया चल उठ !”

मैंने उठकर देखा तो मौसी एक पतली मोमबत्ती लिए खड़ी थीं जिसे उन्होंने मेरी गांड में डाल दिया था। मौसी बोली,”अब असली धंधे के लिए तैयार हो जा रंडी। तुझे मैं खास ग्राहकों से चुदवाऊँगी ! अगर नखरे किये तो हब्शी का लंड सीमा की तरह तेरी गांड और चूत में घुसेगा !”

मैं समझ गई कि मौसी ने यह नाटक इसलिए किया था ताकि मैं अब चुदते समय नखरे न करुँ।

मौसी बोली- कोबरा मेरे राजा ! थोड़ा मुझे चोद दे ! अब तो बस तेरे लौड़े से ही चुदवाने में मजा आता है। मौसी पलंग पर लेट गई और अपनी दोनों टाँगें फ़ैला दीं। मौसी की चूत अंदर तक खुली दिख रही थी। हब्शी ने आगे बढ़कर अपना लौड़ा मौसी की चूत में पेल दिया और मौसी को चोदना शरू कर दिया। कोबरा का लंड इतना तगड़ा था कि मौसी भी हलके हलके सिसकारी ले रही थीं और चिल्ला रही थी,” राजा मजा आ गया ! और चोद जोरों से चोद मेरे शेर ! तेरे से ही चुदने में मजा आता है अब ! चोद ! मादर चोद चोद ! बहुत मजा आ रहा है।”

मैं और मोनी मौसी की साइड में लेटकर मौसी के बूब्स दबा रहे थे। कोबरा १५ मिनट तक मौसी की चूत चोदता रहा। मौसी बोली,”राजा, अपने लंड का रस मेरे मुँह में पिलायियो ! क्या मस्त लौड़ा है तेरा कुत्ते !”

हब्शी मौसी को जोर जोर से धक्के मार रहा था कुछ देर बाद हब्शी ने अपना लौड़ा निकाल लिया और मौसी के मुँह पर जाकर दो झटके मारे, मौसी ने पूरा मुँह खोल दिया, हब्शी के गाढ़े वीर्य ने मौसी के मुँह को पूरा भर दिया। मौसी ने इशारे से कोबरा को मेरे और मोनी के मुँह में भी लंड रस डालने को कहा।

हम दोनों मौसी की कुतिया थी ही। मैंने और मोनी ने अपने मुँह खोल दिए। कोबरा ने मेरे और मोनी के मुँह भी अपने वीर्य से भर दिए। मौसी लपालप उसका पूरा रस पी गई। मैंने और मोनी ने लंड रस मिल्क शेक की तरह मुँह में ले लिया। मुझे हब्शी के लौड़े का रस बहुत स्वादिष्ट लगा। इसके बाद मौसी ने अपने चेहरे पर गिरा हुआ रस भी हम दोनों से चटवाया।

मौसी उठी और हब्शी को गले से लगा कर बोली- राजा तूने मस्त कर दिया ! और उन्होंने अपने पलंग के नीचे से निकाल कर १००० रु हब्शी को पकड़ा दिए और बोली- ले राजा तेरा इनाम !

हब्शी बोला- मौसी गांड तो नहीं मरवानी?

तो मौसी बोली,”कुत्ते, मौसी से मजाक मत करा कर ! वर्ना साले चरस जेब में डाले घूमता रहता है, अभी जेल में डलवा दूँगी !”

कोबरा मौसी के पैरों में गिर पड़ा और बोला,”मौसी मुझे माफ़ करना, तू तो मेरी माँ जैसी है।”

मौसी कुटिल मुस्कराहट से बोली,”मादरचोद ! अब तू चुपचाप यहाँ से चला जा !”

थोड़ी देर बाद राजू अंदर आया और बोला- मौसी मोंटी साहब आ गए हैं, ऊपर कमरे में बैठे हैं।

मौसी बोली,”चल अब चुदने को तैयार हो जा ! अभी १२ बजने को हैं अब पूरी रात चुदवाईयो। बहुत अच्छी चूत बजाते हैं मोंटी साहब।”

मौसी ने एक ट्यूब निकल कर मेरी चूत में डालकर पिचका दी और बोली,”चल उलटी हो एक तेरी गांड में पिचका देती हूँ, चुदने में दर्द कम होगा।”

मौसी ने मुझे उल्टा किया और दूसरी ट्यूब मेरी गांड के अंदर डालकर पिचका दी और अपनी उँगलियों से मेरे दोनों छेदों की मालिश कर दी। मुझे और मोनी को एक एक पतली मैक्सी पहना दीं और बोली,”चलो अब अपने सेठों के पास जैसा मैंने बताया है वैसा करोगी तो मज़े करोगी नहीं तो दोनों के चूतड़ मार मार कर लाल कर दूँगी और हब्शी का लंड तुम दोनों की गांड और चूत में डलवाऊँगी !”

साथियों ! मौसी ने मुझे कोठे की रंडी बना दिया। अब इस सीरीज़ की आखरी कहानी,” चुद गई कुतिया कोठे पर” में शीघ्र ही पढ़िये कि आपकी प्यारी कुतिया की कैसे मौसी ने चूत और गांड फ़डवा कर भोसड़ी बना दी।

हालांकि यह कहानी काल्पनिक है पर मुझे यकीन है आपको जरुर पसंद आई होगी। आपको यह कहानी कैसी लगी मेल करें।

आपकी उषा मस्तानी Sex Stories

प्रेषक – अंकित सिंह Indian Sex Stories

बात उस समय की है जब मैंने एक Indian Sex Stories फ़ाईव स्टार होटल में नई नई नौकरी शुरू की थी। उस समय मै बाईस वर्ष का एक सुन्दर नौजवान था। होटल मेनेजमेन्ट करते समय मैं जिम जाता था उसके फ़लस्वरूप मेरा शरीर बेलेन्स और सुन्दर हो गया था। मेरी लम्बाई भी लगभग छ: फ़ुट और मेरा चेहरा-मोहरा बहुत ही आकर्षक था, कपड़े भी मुझे पर बहुत फ़बते थे।

मुझे लगता था कि मेरे साथ की लड़कियाँ भी मुझ पर मरती थी। मेरे साथी मुझे फ़िल्मो में कोशिश करने को कहते थे, शायद मैं उन सब बातों को मजाक समझता था।

मैं इस फ़ाईव स्टार होटल में फ़्रण्ट-ऑफ़िस में काम करता था और अधिकतर मुझे काऊन्टर पर अतिथि का स्वागत करना होता था, उन्हें उनके कमरे तक पहुंचाने का काम भी करना होता था।

मेरी यह आप बीती एक होलीवुड की अभिनेत्री के बारे में है। वो एक छब्बीस वर्ष की बेहद सुन्दर युवती थी। उसके लिये होटल में सबसे महंगा स्वीट बुक किया हुआ था।

यूं तो यहाँ कई भारतीय अभिनेत्रियां भी आई थी, पर उनमें वो बात नहीं थी, शायद कैमरे के सामने और मेकअप में ही वो सुन्दर लगती थी। उसमें सेक्स अपील जबरदस्त थी। उसका फ़िगर तराशा हुआ और ऐसा प्रतीत होता था कि भगवान ने उसे बनाने में बहुत समय लगाया होगा। उसका चेहरा, उसके होंठ, उसकी मुस्कान, उसकी आकर्षक आंखे हर बात में लाजवाब थी वो।

मै उसका असली नाम नहीं लेकर उसे लीज़ा कहूंगा। उसे यहाँ आये हुए दो दिन हो गये थे। जब वो शूटिन्ग से फ़्री होती थी तो मुझसे अवश्य ही बात करती थी। वो मेरा मन मोह लेती थी। पर वी आई पी गेस्ट होने के कारण मुझे ही नहीं सभी को उसकी हर एक बात का ध्यान रखना होता था, यहाँ तक कि उसके इशारों तक को समझना होता था।

आज वो लन्च के बाद फ़्री थी। उसने मेरे बॉस से कुछ बात की और मुझे शहर में घूमने के लिये साथ ले गई। वह एक बहुत ही सरल और मधुर स्वभाव की लड़की लगी। मुझसे बात करने में उसकी दिलचस्पी साफ़ झलकती थी, या वो थी ही इतनी सहज कि बात करने में अपनापन लगता था। मुझसे मेरे बारे में उसने सब कुछ पूछ लिया।

उसे यह पता चल गया था कि मैं एक साधारण परिवार से हूँ। शायद उसने मेरी इस बात का पूरा फ़ायदा उठाया या कहिये कि हर वक्त वो मुझे कुछ ना कुछ बख्शीश के रूप में देती थी, हर बात में वो मुझे बहुत रुपया देने लगी थी। कोल्ड ड्रिन्क हो या बोटिन्ग करना हो, जहा सौ रुपये लगते, वहाँ वो एक हजार का नोट दे देती थी, और बाकी का बचा हुआ पैसा वापिस भी नहीं लेती थी। शाम तक यूं ही मेरे पास लगभग पांच हजार रुपये जमा हो चुके थे।

मैं खुशी से फूला नहीं समा रहा था कि आज मेरे भाग्य से मैं दुनिया की सबसे सुन्दर हिरोईन के साथ था और पैसा भी बहुत मिल गया था।

शाम को वो मेरे बॉस से स्वीकृति ले कर मुझे अपने स्वीट में ले गई। वहाँ उसने मेरे साथ कुछ वाईन और स्नेक्स लिये, फिर वो स्विमिंग सूट पहन कर आ गई। स्विमिंग सूट क्या था एक बिलकुल छोटी सी ब्रा और एक ना के बराबर अडरवीयर जिसमें बस उसकी चूत छिपी थी। उसके तराशे हुए चूतड़ की दरार में एक डोरी सी थी जो दरार में ही कहीं खो गई थी। शायद ऐसा पहनना उसके लिये नई बात नहीं थी, क्योंकि वो इसमें भी बिल्कुल सामान्य व्यवहार कर रही थी।

(उससे बातचीत के अंश मैं कोशिश करके हिन्दी में रूपान्तर करके लिख रहा हूँ)

“आप मेरे साथ पूल में नहाना पसन्द करेंगे?” उसने मुस्कान भरी आवाज में प्रार्थना की।

सीधी सी बात थी उसने मुझे आज्ञा दी थी, यह मैं समझता था।

“जी पर मेरे पास नहाने के कपड़े नहीं हैं !” मैंने अपनी मजबूरी दर्शाई।

“आपने अन्दर अन्डरवीयर पहना है, यह काफ़ी है ! मेरे दोस्त तो नंगे ही मेरे साथ नहाते हैं !” उसने हंसते हुये कहा।

मैं शरमा गया। अन्डरवीयर भी पुरानी सी पहना हुआ था। मुझे झिझक आने लगी। पर मैंने कपड़े उतार दिये और मात्र अन्डरवीयर में खड़ा हो गया। उसने मेरे नंगे बदन को एक गहरी नजर से देखा और शायद अपने जहन में उतार लिया।

“थेंक्स मेरे प्यारे दोस्त !!! बहुत सुन्दर …. आओ चलें !” उसने मुझे गाल पर हल्का सा किस किया और वो मेरे आगे आगे चल पड़ी। उसकी चाल बला की मनमोहक थी। उसके दोनों चूतड़ो की गोलाईयाँ चलते समय ऊपर नीचे होती हुई गजब ढा रही थी। उसका कमाल का फ़िगर देख कर मेरा लण्ड जोर मारने लगा था, पर डर अधिक लग रहा था कि कहीं लण्ड का उभार उसे नजर ना आ जाये।

पर मैं गलत था, उसे सब पता था। पूल पर आ कर उसने मुझे पानी में खड़ा कर दिया और स्वयं सामने खड़ी हो गई।

“मुझे गोद में ले लो और मुझे धीरे धीरे पानी में गीला करना, ठीक है?” उसने मुझे समझाया।

मैंने उसे एक बच्चे की तरह बाहों में ले लिया। मुझे वो बिलकुल फ़ूल जैसी हल्की लगी। उसका जिस्म मेरी बाहों में आ गया। इतना कोमल और नरम बदन का स्पर्श पा कर मैं सिहर उठा। मेरी सिरहन तक उसे पता चल गई।

“तुम्हारा जिस्म बहुत अच्छा है, मुझे इससे प्यार है।”

मेरे बदन में चींटिया सी रेंगने लगी। उसने मेरे जिस्म की तारीफ़ की, मुझे पहली बार लगा कि जिम जाने से मेरा शरीर सुन्दर दिखता है। मेरा लण्ड पूरा खड़ा हो गया था। यह उसे भी पता था, वो अपना एक हाथ नीचे लटका कर मेरे लण्ड को भी छू लेती थी।

“क्या मैं तुम्हें चूम सकती हूँ….?” उसने बड़ी सहजता से पूछा और अपने होंठ मेरी तरफ़ बढा दिये। मै कुछ कहता उसके पहले उसके होंठ मेरे होंठो से मिल चुके थे। उसके चूमने का अन्दाज बेहद रोमांचित करने वाला था। मैंने भी जाने कब उसे चूमना और चूसना शुरू कर दिया।

उसने अपनी अधखुली आंखो से मुझे देखते हुए कहा,”तुम्हारा भारतीय स्टाईल बहुत अच्छा है, मुझे नीचे पानी में उतार दो !”

“जी ….जी…. थैंक्स मैम !”

“मुझे लीज़ा कहो, मैम नहीं ! तुम बहुत उत्तेजित हो रहे हो, क्या तुम मेरे साथ सेक्स करोगे?”

“लीज़ा, मुझे माफ़ करना, ये तो अपने आप ही ऐसा हो गया !” मेरा खड़ा लण्ड को मैंने नीचे दबाते हुए कहा।

“ये तो प्राकृतिक है, इसमें शरमाना कैसा …. और मुझे देख कर ये खड़ा नहीं हो, ये तो मेरे लिये अच्छी खबर नहीं है। मुझे अच्छा लगेगा अगर तुम मेरे साथ सेक्स करोगे तो…. मुझे भी इसे देख कर चुदाने की इच्छा होने लगी है !”

उसने पानी के अन्दर ही मेरा लण्ड सहलाया और उसे पकड़ कर सहलाने लगी। उसके लण्ड को सहलाने का अन्दाज, बस पानी निकालने देने वाला था। उसने मेरी अन्डरवीयर नीचे खींच दी।

“बहुत अच्छा है और सुन्दर है तुम्हारा लण्ड, तुम भी ! मेरे जिस्म को मसाज करो !”

वो भी हीट में आने लगी थी। मुझे चुदाई का कोई अनुभव नहीं था, पर फ़िलहाल इसमें बहुत मजा आ रहा था। उसने मेरी अंडरवीयर पूरी उतार दी और डोरे जैसी स्वयं की अंडरवीयर भी उतार दी। पानी में कुछ साफ़ दिखाई नहीं दिया।

उसने मुझे चूत देखते हुए देख लिया और हंसी। वो उछल कर पूल की दीवार पर बैठ गई और अपनी दोनों टांगे खोल दी- मेरी चूत देखना चाहते हो ना ? देखो ! और पास आकर इसे प्यार करो !”

मेरे बदन में एक सनसनी दौड़ गई। उसकी गुलाबी चिकनी चूत, शेव की हुई थी, पानी से गीली थी, दोनों उभरी हुई पंखुड़ियों के बीच एक दरार और उसमें से झांकता हुआ गुलाबी सा एक छेद।

“लीज़ा, इतनी सुन्दर और मोहक है, सच में चूम लूं क्या?”

“येस माई डार्लिंग, कम एण्ड सक इट !” उसने मेरे बाल पकड़ पर अपनी चूत से मेरा मुंह चिपका लिया। सुगंधित, रसीली, चिकनी लसलसी, उभरा हुआ गुलाबी दाना मेरे होंठो से टकरा गये। एक ही सांस में उसका सारा पानी जीभ से मैंने चाट लिया, उसकी चूत की गुहा में मैंने अपनी जीभ घुसा दी। मेरी नाक की नोक उसके दाने पर से रगड़ खा गई।

“ओह गॉड, सो स्वीट, आहऽऽऽ, यू आर टू गुड, ओह्ह सक माइ पूसी हार्ड !” वो सिसक उठी।

मेरे हाथ उसके सुडौल उरोजों पर आ गये। जैसे ही मैंने उसे दबाया तो कह उठी,”नाईस, ओह्ह्ह, स्लो डियर, दिस इस माइ फ़िगर बॉय, नाउ लीव इट !”

उसे मजा तो बहुत आ रहा था पर शायद चूंची दबाने से उसके उरोज ढीले ना पड़ जाये, उसने मेरा हाथ हटा दिया। अब वह पानी में कूद पड़ी, और मेरे से लिपट गई।

“अब तुम इस दीवार पर बैठ जाओ” मै उछल कर दीवार पर बैठ गया।

“प्लीज डोन्ट माइन्ड, यूअर कोक इस सो नाईस, मे आई लव इट?”

मुझे बहुत देर तक जगह जगह चूमती रही फिर मेरा लण्ड अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी।

“बहुत अच्छा है तुम्हारा लण्ड !” उसने मुझे जताया कि उसे भी थोड़ी बहुत हिन्दी आती है।

“ऐसा नहीं कहते लीज़ा, आप बहुत अच्छी है” काफ़ी देर तक वो लण्ड का मजा लेती रही, मेरी हालत झड़ने जैसी होने लगी।

“बस लीज़ा, अब नहीं !” उसने अपनी नशीली आंखे ऊपर उठाई, उसकी वासना का आलम चरम सीमा पर था। उसकी आँखे गुलाबी हो उठी थी। उसने मुझे प्यार से पानी में उतार लिया फिर मेरी ओर पीठ करके और चूतड़ उभार कर घोड़ी बन कर खड़ी हो गई। बेहद कशिश भरी आवाज में वो बोली,”फ़क माइ पूसी, माइ बॉय। डू इट नाउ, कम ऑन, लेट्स एन्जोय नाउ !”

मैंने अपने आपको रोक नहीं सका और अपना लण्ड पानी के अन्दर ही उसकी चूत से चिपका दिया। मै अब उसकी पीठ से चिपक गया और लण्ड का जोर लगाने लगा। लीज़ा ने हाथ का सहारे से लण्ड को अपनी चूत में डाल दिया और अपने चूतड़ मेरे लण्ड पर दबा दिया। मैंने भी जोश में जोर लगाया। लण्ड मक्खन की तरह उसकी चूत में पानी के भीतर ही घुस पड़ा।

“ओह्ह डार्लिन्ग, फ़क मी, इट इस टू गूऽड”

मेरे लण्ड में हल्की सी जलन हुई, मुझे चोट सी लगी, पर मैं उसे नाराज करने की स्थिति में नहीं था। फिर मेरी हालत भी ऐसी नहीं थी कि मैं उसे नहीं चोदता, वासना की तेजी मुझ पर भी थी। मैंने जलन सहते हुये लण्ड पूरा घुसा दिया। लीज़ा झूम उठी और मस्ती में कमर जल्दी जल्दी हिलाने लगी। उसकी चूत में लण्ड आराम से अन्दर बाहर आ जा रहा था, टाईट या कसी हुई चूत नहीं थी। इसलिये अब जलन भी कम होती जा रही थी।

मुझे भी उस रस भरी चूत का आनन्द आने लगा था। उसकी कोमल काया, मखमली बदन, फिर गोरी चमड़ी, गोरी चूत, गोरी गाण्ड। उसके सारे शरीर को सहलाते हुये धक्के मारने में असीम आनन्द आ रहा था। पानी में लहरे चलने लगी और छप छप की आवाज अने लगी। जोश में मैंने उसकी चूंचियाँ मसल ही दी और उसे दबा कर जोर से चोदने लगा।

“माई गॉड, फ़क मी हार्ड, माई बॉय, ऊऊईईईई, ओह्ह्ह, व्हॉट ए कॉक्….”

“हाय मैम, फ़ीलिंग नाईस, ओह्ह, तेरी तो…. साली मक्खन मलाई है !” मुझे भी आनन्द मारे मस्ती आ रही थी।

“यू मीन बटर…. आह लण्ड अच्छा है, फ़क मी !” उसके बोलते ही मुझे मालूम हो गया कि उसे मजा आ रहा है। उसने अपनी टांगे पानी में और फ़ैला ली और थोड़ा और झुक कर मेरे लण्ड को धक्का मारने लगी। फिर उसने अपना पोज बदल लिया। और सामने आकर मेरे से जोर से लिपट गई। लण्ड एक बार फिर अपने निशाने पर घुसता चला गया।

उसकी सिसकारियाँ बढ़ गई थी। उसकी चूत और मेरा लण्ड फिर से तेजी में आ गये। पर वो सामने से अच्छे झटके दे रही थी। दोनों सामने से एक दूसरे को धक्के मार मार कर चोद रहे थे। पानी में भी उबाल आ चुका था। लहरें चुदाई के कारण उछल उछल कर हमें भिगा भी रही थी। चूंकि मेरी यह पहली चुदाई थी सो मेरा शरीर जवाब देने लग गया था, मेरे लण्ड में गहरी मिठास भरने लगी थी। उधर लीज़ा का भी यही हाल था। उसकी तेजी बता रही थी कि अब जवानी का रस बाहर आने को बेताब है।

“माइ लव, आह्ह्ह, माई पूसी हेज गोन नाउ ऊईईई !”

“मैम, मेरा तो हाय, निकलने वाला है !” मै इंगलिश भूल गया और हिन्दी बोलने लगा।

“ओह्ह्ह कमिन्ग, ऊईईई…. फ़क मी हार्ड्…. कमिन्ग बॉय….” और उसने शायद पानी छोड़ दिया। मुझे उसने पीछे धक्का दे दिया और लण्ड निकाल दिया। मेरा लण्ड भींच कर पकड़ लिया और मुठ मारने लगी। कुछ ही क्षणो में मेरा वीर्य पानी में लहरा कर निकल पड़ा। मेरा वीर्य निकलते हुए वो देखती रही।

“ओह्…. सो नाईस, व्हॉट ए कलर, यूअर कम इस सो ब्यूटीफ़ुल, यु इण्डियन आर वेरी नाइस इन फ़किन्ग !” और स्वयं पानी के अन्दर डुबकी लगा गई। मैं भी उसके पीछे गोता मार कर तैरने लगा। कुछ ही देर में हम पानी से बाहर आ गये। दोनों नंगे ही कमरे के अन्दर भाग कर चले गये।

कुछ देर पश्चात मैं फिर से अपनी ड्रेस में था। शाम गहरी हो चुकी थी। उसके डिनर का समय हो गया था। मैंने लीज़ा से जाने की इज़ाज़त मांगी।

“ठहरो, मेरी तरफ़ से ये गिफ़्ट !”

उसने एक लिफ़ाफ़ा मुझे दिया। मैंने सर झुका कर उसका अभिवादन किया और लिफ़ाफ़ा ले कर बाहर आ गया। घर आ कर मैंने लिफ़ाफ़ा खोला तो उसमें एक हज़ार के पचास नोट थे। और एक इन्विटेशन कार्ड था, उसका पता लिखा हुआ था। उसमें एक सन्देश था,“आई लव यू ! जब भी जी चाहे मुझे फोन कर देना, और तुम यू.एस.ए. में होगे…….. लीज़ा”

मुझे एक बार सारी घटना फिर से आंखो के सामने घूम गई। एक प्यारी सी, गुड़िया सी, भली सी लगने वाली सुन्दरता की मूर्ति, मुझे जैसे कुछ यकीन ही नहीं हो रहा था……..मानो एक सपना देखा हो…. Indian Sex Stories

TOTTAA’s Disclaimer & User Responsibility Statement

The user agrees to follow our Terms and Conditions and gives us feedback about our website and our services. These ads in TOTTAA were put there by the advertiser on his own and are solely their responsibility. Publishing these kinds of ads doesn’t have to be checked out by ourselves first. 

We are not responsible for the ethics, morality, protection of intellectual property rights, or possible violations of public or moral values in the profiles created by the advertisers. TOTTAA lets you publish free online ads and find your way around the websites. It’s not up to us to act as a dealer between the customer and the advertiser.

 

👆 सेक्सी कहानियां 👆