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हॉट मौसी सेक्सी कहानी में मैंने रात को अपनी मौसी को पापा के साथ जाती देखा तो मुझे लगा कि दोनों चुदाई करने जा रहे हैं. बाद में जब मौसी ने मुझसे भी सेक्स किया तो …

मेरा नाम प्रशांत है.
मेरे पापा का नाम रमेश है.

पापा की उम्र 45 साल है.
मेरे मौसा की उम्र 50 साल है क्योंकि मेरे मौसा जी ने दो शादी की हैं.

पहली मौसी शांति जो कि बड़ी है और दूसरी मौसी का नाम रीतिका है, मेरी छोटी मौसी की उम्र 33 साल है.
छोटी मौसी अभी बहुत जवान है इसलिए उनके अंदर गर्मी बहुत है.

यह हॉट मौसी सेक्सी कहानी तब की है जब मैं 22 साल का था और वाराणसी में रहकर पढ़ाई करता था.

एक बार 2 दिन की छुट्टी हुई तो मैं घर गया.
घर पर मौसी भी आई थी.

हम सबसे मिले उसके बाद खेत में काम करने चले गए.
जब शाम हुई तो सब लोगों ने खाना खा लिया.

उसके बाद मैं खेत में बने कमरे में सोने चला गया.

कुछ देर बाद पापा भी आए सोने के लिए, मेरे पास लेट गए.

उनको लगा होगा कि मैं सो रहा हूं तो वे मुझसे कुछ नहीं बोले.

उसके आधा घंटा बाद छोटी मौसी आई पानी लेकर!
तो पापा बोले- तुम क्या करने आ गई यहां पर?
मौसी बोली- पानी लेकर आई हूं आपके पास!

तो पापा बोले- पानी पिलाओगी या कुछ और भी पिलाओगी?
तब मौसी बोली- और क्या पिएंगे? साथ में बेटा लेटा हुआ है!
तो पापा बोले- यह तो सो गया.

तब पापा ने मुझे आवाज दी, मैं कुछ नहीं बोला.
तो उनको लगा कि मैं सो गया हूं.

उसके बाद मौसी पानी रख कर चल दी.
तो पापा भी उसके पीछे पीछे गए.

तो मैंने सोचा कि पता नहीं ये दोनों कहां जा रहे हैं.
थोड़ी दूर तक तो मैंने देखा, वे ज्यादा दूर निकल गये, अंधेरा होने कारण मैं कुछ देख नहीं पाया.

उसके बाद पापा कब आये पता नहीं … मैं सो चुका था.
बीच्ग रात मेरी नींद खुली तो पापा मेरे पास थे, मौसी नहीं थी, मेरे ख्याल से मौसी घर चली गई थी सोने उसके बाद!

सुबह हुई तो मेरे दिमाग में वही बात घूम रही थी.
मुझे लगा कि पापा ने मौसी को रात में जरूर चोदा होगा.
लेकिन मुझे पक्का तो पता था नहीं!

उसके बाद शाम तक मैं निकल आया वाराणसी फिर पढ़ाई करने के लिए!

तो मेरे मन में मौसी और पापा की चुदाई देखने का मन हुआ.
परंतु कैसे … यह तो संभव नहीं था क्योंकि क्योंकि मैं वाराणसी में था.
मैं सोच रहा था कि कैसे करूं … क्या करूं!
तो कुछ समझ में नहीं आया.

2 दिन बाद पापा का फोन आया.
पापा बोले- तुम्हारे मौसा घर बनवा रहे हैं तो उसमें उनको कुछ हेल्प चाहिए; उनका फोन आया था.
तो मैं बोला- अच्छा!
उन्होंने बोला- घर में काम है इसलिए हम लोग जा नहीं पाएंगे.
तो मैंने बोला- ठीक है, मैं कोशिश करता हूं.

दूसरे दिन मैं तैयार हुआ और मौसी के घर पहुंचा.
सब लोग घर पर थे.

मैं बड़ी मौसी से मिला, उनके पैर छुइ.
उसके बाद मौसा मिल गए, उनके पैर छुइ.
फिर छोटी मौसी रीतिका मिल गई.
उसके पैर छूने का मेरा मन नहीं कर रहा था क्योंकि उसके लिए मेरे दिमाग में बहुत गलत विचार बन गया था.

फिर खाना पीना हुआ शाम को!
खाने के बाद सोने की व्यवस्था कम थी तो मौसा जी वहां चले गए सोने जहां पर मकान बन रहा था.

और अब बड़ी मौसी अपनी बेटी को लेकर बाहर सो रही थी.
उसके बाद छोटी मौसी और उनका लड़का कमरे में चले गए सोने!

तभी छोटी मौसी ने बोला- कमरे में दो बैड हैं, वही तुम भी सो जाओ!
मैंने कहा- ठीक है!
तो मेरे मन में तो खुशी के लड्डू फूटे.

मैं गया.
गर्मी का मौसम था तो लेट गया.
कुछ देर बाद देखा तो मौसी की साड़ी ऊपर उठी हुई थी, उसकी जांघें दिख रही थी और दूध भी आधे आधे दिख रहे थे.

मेरा लन्ड खड़ा हो गया तुरंत!
पर मेरे मन में डर था.

कुछ देर बाद जब मौसी गहरी नींद में सो गई तो मैंने उनकी साड़ी उठाकर देखी.
पेंटी नहीं पहनी थी मौसी ने!
मुझे कुछ शक हुआ.
पर उसके बाद मैं सो गया.

सुबह हुई तो हम सब नाश्ता कर रहे थे.
मैंने देखा कि रीतिका मौसी नहा कर आ रही थी.
जब वह कपड़े रस्सी पर डालने गई तो उनमें पेंटी भी थी.

मैंने सोचा कि रात में तो पेंटी नहीं थी, अभी कैसे आ गई?
पर मैंने ज्यादा कुछ नहीं सोचा.

हम लोग काम पर लग गए.

फिर रात हुई तो फिर सोने गए.
तो जब मौसी सो गई तो मैंने उसकी साड़ी के अंदर अपना पैर डाल दिया और हॉट मौसी की सेक्सी चूत को हल्के से सहलाया.
मुझे लगा कि मौसी सो गई हैं.

तो फिर मैंने और जोर से सहलाया तो मौसी ने हल्के से आह आह की.
उसके बाद मेरी गांड फटी तो मैंने अपना पैर अपने बेड पर कर लिया.

लेकिन मौसी अब गर्म हो चुकी थी क्योंकि मेरे मौसा चोदते नहीं है क्योंकि वो अब बुड्ढे हो चुके हैं लेकिन मौसी तो अभी जवान है.

थोड़ी देर बाद जब मौसी को लगा कि मैं डर गया हूँ और अब कोई हरकत नहीं करूंगा तो मौसी ने खुद कहा- बेटा, तू मेरे पास आ जा, मुझे तुमसे बातें करनी हैं.

मैं मौसी के पास गया तो मौसी और मैं इधर उधर यहाँ वहाँ की बात करने लगे.

मौसी का हाथ मेरे लंड के एकदम पास था. मैं कुछ नहीं कर रहा था.

तभी मौसी का हाथ मेरे लंड से टकरा गया और वे हल्के हलके मेरे लंड को सहलाने लगी.

इतने से ही मेरा लंड में खड़ा होना शुरू हो गया था.

मैं अभी भी दारा हुआ था तो मैं पीछे हटने लगा.

पर तभी सेक्सी मौसी ने मेरा लंड अपने हाथ में पकड़ लिया और बोली- प्रशांत बेटा, मेरी एक बात मानेगा क्या तू?
इस पर मैंने कहा- मौसी, आप बोलिए, मैं जरूर मानूँगा!

‘तो बेटा, तू मेरी प्यास बुझा दे बेटा … अपनी मौसी को इस्ल्न्द से चोद दे … तेरा लंड बहुत लम्बा है. तेरा लंड बहुत मजा देगा मुझे!

तभी मौसी ने मेरे लंड को हाथ से जोर से दबाया.
मैंने हटना चाहा तो मौसी मुझ से लिपटकर मेरे लबों को चूमने लगी.

मौसी के स्तन मेरी छाती पर रगड़ रहे थे.
मुझे इसमें बहुत अच्छा लग रहा था.

तब मैं अपना हाथ मौसी की गांड पर ले गया और मौसी के चूतड़ दबाने लगा.
उसके मुख से कामुक सीत्कारें निकलने लगी.

तब मैंने मौसी से पूछा- मौसी, ज़रा बताओ कि मेरा लंड आपने कब देखा? जो बोल रही हो तुम्हारा लंड बहुत बढ़िया है?
मौसी- जब तुम्हारे घर गई थी और तुम खेत में सोये थे, तब!

मैं हैरान हो गया कि उस समय मुझको तो पता ही नहीं चला.
मौसी बोली- पहले प्यास बुझाओ, बाद में सब बताऊंगी.
मैं बोला- ओके!

फिर मैंने मौसी के चूचे दबाना शुरू किया, वे काफी बड़े थे.

मैंने मौसी की साड़ी निकाली और उसके ऊपर लेट गया.
तो मौसी ने कहा- बेटा, मेरे चूचों को चूस ले. बहुत समय से किसी ने इनको नहीं चूसा है बस एक मर्द को छोड़कर! वे भी जब मौका मिलता है तो सिर्फ चोद लेते हैं. क्योंकि उनके पास इतना टाइम नहीं होता!
मैं- किस मर्द को छोड़कर?
मौसी- तेरा बाप!

मैं चकित नहीं हुआ क्योंकि शक तो मुझे पहले ही था.
तो मैं बोला- बताओ कैसे तुम चुदी पापा से?
मौसी- बाद में बताऊंगी.

मैं मौसी के चूचे ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा.
मौसी के चूचे और फूलने लगे थे.

फिर मैंने मौसी का साया उतार कर उसकी चूत को ज़ोर से मसल दिया.
तब मौसी ने चड्डी नहीं पहनी हुई थी.

मौसी बोलेन लगी- आआह ऊह ऊओ … और ज़ोर से मसल … फाड़ दे इसको!
तब मैंने अपनी मध्यमा उंगली उसकी चूत में घुसा दी.
तो उसके मुंह से गर्म सीत्कारें निकलने लगी.

मौसी ने कहा- बेटा जल्दी कर … चोद दे मुझे!
तो मैं बोला- अरे मौसी जल्दी क्यों करती हो, पूरी रात है हमारे पास!
मौसी ने हाथ में मेरा लंड पकड़ लिया.

मैंने कहा- यार मौसी, इसे अपने मुंह में लेकर चूस ना!
मौसी मेरा लंड चाटने लगी.

इससे मैं बहुत गरम हो गया तो मैंने अपना लंड सीधे मौसी की चूत में घुसा दिया.

तब मौसी के मुख से चीख की आवाज़ निकली- आआ ईई ईई उम्म्हां … अह … हांह… ओ!

मैं मौसी के उरोज मसलने लगा और थोड़ी देर बाद मौसी सामान्य हो गई.

मैं अविरत छोटी मौसी की चुदाई में लगा था.
और मैं झाड़ें लगा तो मुझसे रुका नहीं गया, मैंने अपना सारा रस मौसी की गर्म फुद्दी में डाल दिया.
मौसी बोली- यार प्रशांत, तू तो बड़ा चोदू निकला रे … मेरी जवानी की आग एक बार में ही ठण्डी कर दी.

लेकिन मौसी नहीं जानती थी कि यह मेरा प्रथम यौन सम्बन्ध अनुभव है.

उसके बाद मैंने कहा- पहले बताओ तुम पापा कब और कैसे चुदी? और मेरा लन्ड कब देखा? उसके बाद मैं तुम्हारी गान्ड मारूंगा.

मौसी- जब मैं तुम्हारे घर गई थी, तब तुम खेत में सो रहे थे. मैंने तुम्हारी चड्डी उतार कर तुम्हारा लंड देखा था.
मैं बोला- जब मैं और पापा सो रहे थे तब?
मौसी- हाँ!

मैं बोला- मैं जान नहीं पाया था.
मौसी- मैं पानी लेकर आई थी. तब मैं तुम्हारे पापा के साथ वहां से दूर दूसरे खेत में चुदवाने गयी थी.

मैं- अच्छा मतलब तुम उसी दिन पापा से चुदाई करवाने गई थी.
मौसी- तुम जानते हो क्या?
मैं- मैं जग रहा था जब तुम आई थी.
मौसी- अच्छा!

मैं- मुझे पता चला होता तो उसी दिन मैं आपको चोद लेता!
मौसी- तेरे पापा से चुदवा कर भी मेरी प्यास नहीं बुझी थी क्योंकि तुम्हारे पापा भी बुड्ढे हो रहे हैं. उस वक्त मैंने तुम्हारे पापा के सामने तुम्हारा लंड देखा था. फिर तुम्हारे पापा बोले थे कि इसे भी लेने का इरादा है क्या?
मैं- अच्छा?
मौसी ने कहा- तो मैंने तुम्हारे पापा को तुम्हारे लंड से चुदाई की इच्छा बताई थी.

इस तरह से मौसी ने ये सब कहानी मुझे बताई.

फिर मैं बोला- मुझे पापा और आपकी चुदाई देखनी है.
मौसी- चलो, अब जब तुम्हारे घर आऊंगी तो तुम्हें फोन कर दूंगी. तुम भी घर आ जाना. फिर हम साथ में चुदाई करेंगे.
मैं बोला- साथ में कैसे?
मौसी- वो मैं सब जुगाड़ कर लूंगी.

उसके बाद मैं 3 दिन मौसी के यहां रुका और उसकी खूब चुदाई की.
अगले दिन तो मैंने मौसी की गांड भी मारी.
लेकिन वो बोल रही थी- मैंने आज तक गान्ड नहीं मराई थी.

हेलो दोस्तो ! Antarvasna

मेरा नाम सुरेश है और ये कहानी मेरी और मेरे विधवा Antarvasna भाभी की है। ये कहानी मेरी एक दम सच्ची है।

जब हमारे घर पर सिर्फ़ हम दोनों ही थे क्योँकि हमारे माता पिता का दो साल पहले ही निधन हो गया था और उस के एक साल के बाद मेरे भाई ने शादी कर ली और हम घर में दो से तीन हो गये। मेरा भाई अक्सर काम के सिलसिले में शहर से बाहर जाता था और लौटने में काफी वक्त लगता था। मेरी भाभी एक अच्छी और सुशील लड़की थी और उन का फिगर था ३८ २८ ३८ । जब वो चलती थी तो उन की गांड देख कर हर कोई यही चाहता था कि उन की गांड मारे।

शादी के ६ महीने बाद मेरे भाई का एक्सीडेंट हो गया और वो उस एक्सीडेंट में मर गया और उस कारण भाभी थोडी से पागल सी हो गई थी और अब घर की ज़िम्मेदारी मुझ पर आ गई थी। मैंने अपनी पढ़ाई छोड़ कर नौकरी करना शुरू किया और देखते ही देखते मैंने भाभी का इलाज कर लिया और वो अब ठीक हो गई थी और फिर भाभी के घर वालों ने भाभी की दूसरी शादी की बात की तो भाभी ने मना कर दिया क्योँकि वो जानती थी कि अगर उन्होंने दूसरी शादी की तो मैं अकेला रह जाउंगा और इस वजह से उन्होंने दूसरी शादी नहीं की और हम लोग हसी खुशी रहने लगे।

पर एक दिन जब मैं जब काम से लौटा तो मैंने दरवाज़ा खुला पाया और जैसे मैंने अन्दर जाकर देखा तो भाभी कपड़े धो रही थी और उन की साड़ी काफ़ी ऊपर तक उठी हुई है और उन की सारे कपड़े भीग गए थे जिस से उनकी अंदर की ब्रा साफ़ दिखाई दे रही थी और जैसे ही मैंने उन की ब्रा देखी, मैंने देखा कि भाभी एक दम लो कट ब्लाउज़ पहने है और उनके बूब्स भी दिख रहे है, तो उसी वक्त मेरे लंड खड़ा हो गया

मैंने अपने रूम में जाकर उसे ठीक किया और फिर भाभी को आवाज़ लगा कर कहा कि चलो कहीं घूम कर आते है। वो राजी हो गई। हम लोग ट्रेन से गए। लौटते समय ट्रेन में काफी भीड़ थी, जिस के कारण मैंने भाभी को सामने किया और मैं उनके पीछे खड़ा हो गया और कुछ देर बाद मुझे किसी ने धक्का मारा, जिस के कारण मैं उन के करीब हो गया इतना करीब कि मेरा लण्ड उनकी गांड को हौले से टच करने लगा। उन्होंने ये महसूस किया और जैसे ही मेंने पीछे हटने की कोशिश की तो वो भी पीछे हट रही थी। मेंने सोचा कि शायद भीड़ के कारण वो पीछे हटी होंगी पर जब हम लोग घर पहुंचे तो मैंने महसूस किया कि भाभी का आज रंग कुछ बदला है और उन की चाल भी कुछ बदली हुई है।

और फिर हम लोग खाना खा कर अपने अपने रूम में चले गए पर रात को मुझे नींद नहीं आ रही थी जिस से मैंने टीवी रूम में बैठ कर टीवी चालू किया और टीवी देखने लगा। टीवी की आवाज़ सुनकर भाभी भी वहां आ गई और पूछा कि क्या तुम्हे नींद नहीं आ रही है जैसे ही मैंने उन को देखा तो मेरा लण्ड एक खंभे की तरह खड़ा हो गया क्योँकि उन्होंने एक दम मलमल जैसी पतली नाईटी पहन रखी थी जिसमें से उनकी ब्रा और उन की पैन्टी भी एक दम साफ़ दिखाई दे रही थी।

ये देख कर मेरा लण्ड अब फ़ड़फ़ड़ाने लगा था। जैसे ही वो मेरे पास आई और सोफे पर बैठे हुए उन्होंने कहा कि इतनी सर्दी में तुम्हें पसीने छूट रहे हैं तो मैंने डर गया और अपनी नज़र हटा ली।। हाथ मेरे लण्ड पर रख लिए और फिर कुछ नहीं कहा पर मेरी नज़र उनके बूब्स पर ही थी।

कुछ देर बाद भाभी ने मुझे कहा कि उन के सारे बदन में दर्द हो रहा है और उनको मालिश करनी है तो मुझ से पूछा कि क्या कोई है जिसे तुम जानते हो तो मैंने कहा कि नहीं पर मुझे मालिश करनी आती है तो वो पहले मुस्कुराई और कहा कि अच्छा और मेरे करीब आ गई और मुझे कहा कि क्या तुम मेरी मालिश करोगे?

तो मैंने हाँ में सर हिलाया और फिर वो मुझे अपने रूम में ले गई और लेट गई और कहा कि चलो अब मेरी मालिश करो मैंने पहले उन के पैर से शुरू किया ५ मिनट और फिर मैंने उन से कहा कि क्यों न आप अपनी गाऊन उतार दें, तो उन्होंने झट से उसे उतार दिया। अब भाभी सिर्फ़ ब्रा और पैंटी में थी और मैंने उन को ऐसे पहली बार देखा था और फिर मैंने तेल की बोटेल ली और उन की पीठ पर लगाना शुरू किया कुछ देर मालिश करने के बाद मेंने भाभी से कहा कि आप की ये ब्रा मुझे चुभ रही है तो उन्होंने कहा कि इसे भी खोल दो, तो मैने उसे भी खोल दिया और फ़िर मैंने भाभी को पीठ के बल लेटने को कहा जैसे ही उन्होंने करवट ली तो उनकी नज़र मेरे तने हुए लण्ड पर पड़ी तो उन्होंने कहा कि सुरेश ये क्या है तो मैने कहा कि ये मेरा हथियार है जैसा भाई के पास था बिल्कुल वैसे ही।

तो भाभी ने कहा कि चलो मैं अब अपनी पैंटी उतारती हूं और तुम अपना ये शोर्ट उतारो, तो मैंने पहले मना कर दिया पर भाभी ने कहा कि मैंने तो अपनी ब्रा और पैंटी उतारने में तो कुछ नही कहा और तुम सिर्फ़ अपना शोर्ट उतरने के लिए इतना सोच रहे हो। तो मैंने कहा की आप मेरी भाभी है तो उन्होंने कहा कि चलो आज से तुम मुझे मेरे नाम से बुलाना और उन का नाम पिंकी था और फिर उन के इतना कहने के बाद मैंने अपना शोर्ट उतार दिया।

जैसे ही मैंने अपना शोर्ट उतारा तो वो मेरे लण्ड को देख कर दंग रह गई और कहा कि तुम्हारा लण्ड तो वाकई बहुत बड़ा है उन्होंने पूछा कि ये कितना लंबा है तो मैंने कहा कि ये ९ इंच का है तो उन्होंने कहा कि तुम्हारे भाई का तो सिर्फ़ ५ इंच का था उन्होंने ख़ुद कहा था।

अब भाभी और मैं एक दम नंगे थे और फिर भाभी मेरे लण्ड को घूर रही थी और मैं उन की चूत को घूर रहा था। फिर भाभी ने कहा कि अब मेरे बूब्स की मालिश करो मैं उनके बूब्स को दबाने लगा था और भाभी ने मेरा लण्ड अपने हाथ में ले लिया और उस को सहलाने लगी और मुझे भी मज़ा आने लगा। कुछ देर बाद मैंने अपना सारा माल उन के हाथ और उन के बूब्स पर गिरा दिया। मैंने उन को सॉरी कहा पर उन्होंने कुछ नही कहा और जो मेरा माल गिरा था वो उसे चाटने लगी और बड़े मज़े से चाटने लगी। मेरे सामने ही अपनी चूत में ऊँगली डाल कर रगड़ने करने लगी और मुझे देखने लगी और वो कुछ अजीब सी आवाजें निकल ने लगी आआ ऊऊओ ईईए फिर कुछ देर बाद उन की चूत में से भी पानी निकल गया और वो शांत हो गई।

फिर मैंने भाभी से कहा कि भाभी! मैं सोने जा रहा हूं तो उन्होंने कहा कि मैंने तुम को कहा कि तुम मुझे नाम से बुलाना तो मेंने उनको नाम से बुलाना शुरू किया। फिर मैं अपने रूम में चला गया और जब सुबह को उठा तो मैंने देखा कि रात की उस सेक्स मसाज़ की वजह से मेरा लण्ड काफी बड़ा हो गया था मैंने सोंचा कि चलो अब पिंकी किचन में होगी तो मैंने कुछ नही पहना और किचन की ओर चला गया। देखा तो पिंकी वहीं थी।

जैसे ही उन्होंने मुझे देखा तो कहा कि तेरा लण्ड तो रात से भी ज्यादा बड़ा हो गया है। तो मैंने कहा कि ये सब आप ही मेहरबानी है तो वो हंसने लगी और कहा कि क्या तुम भी वही चाहते हो जो मैं चाहती हूं?

तो मैंने कहा कि इस के बारे में बाद में बात करते हैं और मैं बाथरूम में गया और कुछ देर बाद भाभी को आवाज़ लगाई। मैंने कहा कि पिंकी ज़रा साबुन देना। तो वो समझ गई और अपने सारे कपड़े उतार कर बाथरूम में आ गई और कहा कि आज हम दोनों मिल कर नहाएंगे। तो मैंने कहा कि ठीक है और उन्होंने साबुन अपने बदन पर साबुन लगाना शुरू किया और मैं उनको देखने लगा। उन्होंने पूछा- ऐसे क्या देख रहे हो? तो मैंने कहा कि मैं आप के…… आप के बूब्स और गाण्ड को देख रहा हूं, मुझे ये बड़े मस्त लगते है। तो उन्होंने कहा कि क्या तुम इन्हे छूना चाहते हो क्या तो मैंने हामी में सर हिलाया और वो मेरे करीब आइ और मेरे लण्ड को अपने हाथ में लिया और मुझे उनके बूब्स को दबाने को कहा।

और मैंने उन के बूब्स को दबाना शुरू किया और उनकी गांड को सहलाना शुरू किया। वाह दोस्तो, क्या गाण्ड एक दम सॉफ्ट। और मैंने देखा उनकी फ़ुद्दी पर एक भी बाल नही था। मेंने उन के बूब्स को मुँह में ले लिया और उन की फ़ुद्दी को अपनी हाथ से रगड़ने लगा और वो जोश में आकर आआऊऊश ह्श्श्श्श् कर ने लगी। तो मैं उन को बेडरूम में ले गया और उनको लिटा दिया और उन के बूब्स को चूसने लगा और उन की फ़ुद्दी को अपनी ऊँगली से चोदने लगा। फिर उन्होंने कहा कि सुरेश मेरी चूत को चाटो तो मैंने उनकी फुद्दी को चाटना शुरू किया, वो अभी जोश में आ गई और जोर से कराहने लगी आआऊऊ श्श्श्श्श्स ईई ऊऊ और चाटो और चाटो कह रही थी।

१० मिनट चाटने के बाद उन्होंने कहा कि मैं झड़ने वाली हूं तो मैंने कहा कि मैं आप का रस पीना चाहता हूं। इतना कहा ही था कि वो झड़ गई और मैंने उनका सारा रस पी लिया और फिर मैंने उनको उठाया और मेरा लण्ड उनके मुँह में दे दिया और उनको चूसने को कहा। उन्होंने खूब चूसा और अच्छा चूसा। १० मिनट के बाद जब मैंने उनसे कहा कि मैं झड़ने वाला हूं तो उन्होंने कहा कि मैं भी तुम्हारा वीर्य पीना चाहती हूं और मैंने अपना सारा वीर्य उनके मुँह में झाड दिया और उन्होंने मेरा सारा वीर्य पी लिया और फिर हम एक दूसरे से लिपट कर सोये रहे।

फिर ५ मिनट के बाद मेरा लण्ड फिर खड़ा हो गया और मैंने उन से कहा कि चलो अब मैं तुम्हारी चूत मारता हूं और उन को लिटा दिया और उनकी फ़ुद्दी के द्वार पर मेरा लण्ड रखा और एक धक्का मारा और मेरा आधा लण्ड उनकी फुद्दी में चला गया और वो दर्द के कारण चिल्लाई और मैंने उन से पूछा कि क्या आप को दर्द हो रहा है? तो उनहोने कहा की मेरी फ़ुद्दी ने ७ महीने से लण्ड नही खाया न इसीलिए दर्द हो रहा है। मैंने अपना काम जारी रखा और फिर एक और धक्का मारा और मेरा पूरा लण्ड उन की चूत में घुस गया और मैंने देखा कि उन की फुद्दी में से खून निकल रहा है तो मैंने कहा कि तु्म्हारी फुद्दी में से खून निकल रहा है तो उन्होंने कहा कि तु्म्हारा लण्ड इतना बड़ा है न।

और फिर मैंने धक्के लगाना चालू किया और कुछ धक्के मरने के बाद उनको भी मजा आने लगा और वो भी अपनी गांड उठा उठा कर अपनी चूत मरवा रही थी और फी ऊऊ श्श्श्शसह म्म्म्म्म्म और कह रही थी कि और डालो और डालो और डालो सुरेश, मेरी फुद्दी को फाड़ दो मेरी फुद्दी को फाड़ दो और हमारी ये चुदाई ४० मिनट तक चलती रही और बाद उन्होंने कहा कि अब बस करो पर मैं कहाँ मानने वाला था फिर उस के १० मिनट के बाद मेंने उन से कहा कि में झड़ने वाला हूं तो उन्होंने कहा कि मेरी फुद्दी में झाड दो और मैंने उन की फ़ुद्दी में झड़ गया और उन के ऊपर लेट गया. फिर हम दोनों वैसे ही लेटे रहे और फिर हमने पूरा दिन कम से कम ८ बार चुदाई की और फिर रात को भी हमने चुदाई की। अब भाभी मेरे बच्चे की माँ बनने वाली है और मैंने उन से शादी कर ली.Antarvasna

Antarvasna

रात का खाना खाने के Antarvasna बाद रोज की तरह मैं कंप्यूटर पर अपना काम कर रहा था कि मेरे मोबाइल पर मिस्ड कॉल आई, देखा तो कमलिनी की थी।

मैंने काल-बैक किया तो पूछने लगी- क्या कर रहे हैं?

मैंने झूठ बोल दिया- सिर में बहुत दर्द है, मैं सोने जा रहा हूँ।

मैंने झूठ इसलिए बोला था क्यूंकि आज मैं कमलिनी की चूत मारने की अपेक्षा उसकी माँ रागिनी की गांड मारना चाहता था, मुझे पूरा विश्वास था कि वो रात को गांड मराने जरूर आएगी। और वही हुआ भी, कमलिनी के फ़ोन के आधे घंटे बाद मेरे मोबाइल की घंटी फिर बजी, मैंने उठाया तो रागिनी भाभी बोलीं- क्या कर रहे हो देवर जी?

मैंने कहा- मेरे सिर में बहुत दर्द है, क्या करुँ ?

भाभी बोलीं- मैं आकर सिर दबा दूं ?

मैंने कहा- भाभी आप अगर छू लेंगी तो दर्द अपने आप ठीक हो जाएगा, आप तुंरत आयें, मैंने दरवाजा खोल दिया है।

दो ही मिनट बाद भाभी मेरे सामने आ पहुंचीं, उनका रूप देखकर मेरा लंड तन्नाने लगा और उनकी गांड फाड़ने के बारे में सोचने लगा। भाभी ने मेरे माथे पर हाथ रखा और बोलीं- गर्म तो नहीं है।

मैंने उनका हाथ पकड़ कर अपने तन्नाये हुए लंड पर रखते हुए कहा- यह तो गर्म है ?

शरमाते हुए बोलीं- बहुत शरारती हो।

मैंने पूछा- मुझसे कह रही हैं या मेरे लंड से ?

कहने लगीं- दोनों से।

इतना सुनते ही मैंने उनको अपनी बाहों में लिया और दीवान पर लिटा दिया। मैंने अपनी टीशर्ट उतारी, लोअर उतारा और क्रीम की शीशी खोलकर ढेर सा क्रीम अपने लंड पर लगा दिया। भाभी का गाउन उतारा, उनको घोड़ी बनाया और अपना लंड उनकी गांड के छेद पर रगड़ने लगा। थोड़ी देर तक गांड के छेद पर लंड रगड़ने से भाभी आनंदित होने लगीं तो मैंने पूछा- भाभी डालूँ ?

तो बोलीं- हाँ मेरे देवर राजा।

गांड के छेद पर अपने तन्नाये हुए लंड का सुपाड़ा रखकर मैं धीरे धीरे अंदर करने लगा, भाभी की गांड बहुत टाइट थी। मैंने जोर से दबाया तो लंड का सुपाड़ा गांड के अंदर हो गया, भाभी कराहते हुए बोलीं- बस करो राजा, फट गई।

मैंने उनके चूतड़ों को सहलाते हुए कहा- भाभी आप वाकई बहुत हिम्मत वाली हैं, आपने पूरा लंड अपनी गांड में ले लिया।

अब तक सिर्फ लंड का सुपाडा ही भाभी की गांड के अन्दर था और बाकी का लंड भाभी की गांड के अंदर जाने के लिए बेताब हो रहा था। मैंने भाभी को बातों में लगाकर उनके मम्मों से

खेलते खेलते लंड को धीरे धीरे अंदर करना शुरू किया और इस प्रकार आधा लंड उनकी गदराई हुई गांड में समा गया। अब लंड को अंदर-बाहर करने का काम शुरू हो चुका था जिसमें भाभी को मजा आने लगा था इस बीच पूरा लंड कब भाभी की गांड में चला गया। भाभी को पता ही नहीं चला। २०-२५ मिनट तक चोदने के बाद मैंने अपने लंड का वीर्य उनकी गांड में ही डिस्चार्ज कर दिया और पूछा- जिंदगी में पहली बार गांड मराकर कैसा लग रहा है भाभी?

तो अपनी ख़ुशी को ना छुपाते हुए बोलीं- टचवुड ! बहुत मजेदार।

मैंने कहा- एक राउंड और हो जाए ?

तो बोलीं- आज नहीं !

और अपने कपड़े ठीक करते हुए चली गईं। अब मेरा काम बढ़िया हो गया था, कमलिनी और उसकी माँ रागिनी दोनों को चोद कर मैं जवानी का आनंद ले रहा था। किसी रात को दोनों चुदवाने का मन बना बैठीं तो क्या होगा? यह सोचकर मैंने टाइम टेबल बना दिया और उनको भी समझा लिया।

अब सोमवार तथा गुरुवार को कमलिनी की चूत, बुधवार को रागिनी की गांड एवं शुक्रवार को रागिनी की चूत चोदने का कार्यक्रम होने लगा। बीच में कभी रेखा घर पर न हो तो दिन में रागिनी या कमलिनी कोई भी जो उपलब्ध हो जाए, चुद जाती थी।

बाकी कहानी अगली बार लिखूंगा, इंतज़ार करिए…. Antarvasna

प्रेषिका : दिव्या Antarvasna Sex Stories

गोवा में लड़कियाँ Antarvasna Sex Stories जल्दी जवान हो जाती है। उसका मुख्य कारण है कि यहाँ सभी लोग मांस खाने शौकीन हैं। यहाँ पर तरह तरह की मछलियाँ, सूअर और बडे का मांस भी बहुत शौक से खाया जाता है। ये सब तामसी भोजन हैँ, इससे लड़कियाँ जल्दी बड़ी दिखने लग जाती है। उनमें गर्मी भी बहुत होती है। जवान होते होते कितनी ही बार चुद चुकी होती हैं। मैं अब जवान हो चली थी, मेरे मम्मे भी थोड़े उभार ले चुके थे। एक लड़का मेरा दोस्त भी बन गया था। एक दिन उसने मुझे चोद भी दिया था। फिर उसने मुझे दो तीन बार और मौका मिलने पर चोदा फिर उसके पिता की बदली हो गई और वो यहाँ से चला गया। बस तब से मैं चुदने के लिये तरसती रही।

शाम को मैं और मेरा छोटा भाई रोज ही पास के गार्डन में घूमने जाते थे। मेरे भाई मुन्ना की उम्र भी लगभग मेरे बराबर ही थी, बस एक साल छोटा था मेरे से।

एक दिन एक प्यारी सी घटना हो गई। मैं कभी सुनहरे पल याद करती हूँ तो बस भैया से चुदने का मन हो उठता है।

हम हमेशा की तरह गार्डन में घूम रहे थे। शाम का धुंधलका बढ़ चला था। बगीचे की लाईटें जल उठी थी। हम दोनों एक छोटी तलाई के किनारे रेलिंग के सहारे खड़े हो कर बाते कर रहे थे कि अचानक मैंने झुरमुट में एक लड़का और लड़की को देखा। वो आपस में लिपटे हुये एक दूसरे को चूम रहे थे।

मैंने मुन्ना को कोहनी मारी …

“क्या है … ?”

“वो देख … वो क्या कर रहे हैं … ”

“अरे हां … ये तो चूमा चाटी कर रहे हैं … ”

“और भी ध्यान से देख ना … ”

“अरे … ये तो कुछ गड़बड़ कर रहे हैं”

“भैया, इसमें मजा आता है क्या … ”

“पता नहीं … हो सकता है !”

“कैसा लगता होगा … तूने कभी किया है ऐसे?” हालांकि मुझे पता था कि कैसा लगता है।

“नहीं किया तो नहीं है … कर के देखें … ?”

“सच्ची … मजा आयेगा तो और करेंगे !” मैंने उत्साहित हो कर भोलेपने से कहा।

“चल उस झाड़ी के पीछे चलते हैं … ” हम दोनों जल्दी से वहां गये तो वहाँ पर पहले से ही एक लड़का और लड़की लिपटे हुये थे। लड़का लड़की के चूतड़ों को दबा रहा था। हम उन्हें अनदेखा करते हुये दूसरी झाड़ी की ओर मुड़ गये। वहाँ कोई नहीं था।

“मुन्ना कैसे करें अब … ?” मैंने मासूमियत से कहा।

“मुझे क्या पता … अच्छा अपन एक दूसरे से लिपट जाते हैं जैसे कि वो कर रहे थे।” मुन्ना बोला।

“अच्छा आ जा … !” मुन्ना ने मुझे लिपटा लिया। मैंने जानबूझ करके अपने मम्मे उसकी छाती पर रगड़ दिये।

“अब चूमें क्या … ?” मैंने उसे उत्साहित किया। मैंने अपने होंठ उसकी ओर बढ़ा दिये। मुन्ना ने भी अपने होंठ मेरे होंठो से चिपका दिये। मुझे सनसनाहट सी होने लगी। तभी मुझे लगा कि मुन्ना का लण्ड खड़ा हो गया है। मैंने मुन्ना के चूतड़ पकड़ कर दबा दिये।

“मुन्ना ऐसे ही ना दबाते हैं … ” मैंने उसे अपनी ओर खींचते हुये कहा। उसके लण्ड का कड़ापन मेरी चूत में गड़ने लगा। उसने भी मेरे चूतड़ पकड़ कर दबा दिये।

“ठीक है ना गुड़िया … ऐसे ही दबाते है ना?” उसके लण्ड का कड़ापन मुझे बहुत ही सुहाना लग रहा था। मुझे तो लगने लगा कि बस अब मुन्ना मुझे चोद ही दे। मैंने सोचा कि मुन्ना को अब उत्तेजित करना चाहिये।

“मुन्ना ये नीचे क्या लग रहा है … ?” मैंने भोलेपन से पूछा।

वो शर्मा गया,”ये तो जाने कैसा हो गया है … ” मुन्ना शर्माता हुआ बोला।

“पर मजा तो आता है ना … मैं देखूँ क्या?” मुझे पता था कि वो मना कर देगा। इसलिये जवाब के पहले ही मैंने उसका लण्ड पकड़ लिया।

वो सी-सी कर उठा,”ये क्या कर रही है … ”

“ओह लग गई है क्या ?” मैंने लण्ड छोड़ दिया।

“नहीं नहीं … मजा आता है … !”

“ओह हो … मैं तो डर गई थी।” मैंने फिर से उसका लण्ड पकड़ लिया, पर इस बार उसे दबा भी दिया। मुन्ना ने मुझे कस कर लिपटा लिया और जोर जोर से चूमने लगा। यूं तो आस पास अंधेरा था पर खेल एक बार आरम्भ करना था, फिर बाद में तो हम ये खेल घर पर भी अकेले में खेल सकते थे। मैंने उसका लण्ड जोर जोर से मसल दिया ताकि उसे और मजा आये। कुछ देर तक मैं उसका लण्ड मसलती रही और उसे बहुत ही बैचेन कर दिया … अब मुझे लगने लगा था कि वो मुझे चोदे बिना नहीं छोड़ने वाला …

फिर बोली,”मुन्ना, कोई देख लेगा … बस अब घर चलते हैं … ”

“बस गुड़िया, थोड़ा सा और … ।” पर मैंने उसे मना कर दिया। वो भी मन मार कर मेरे साथ घर की तरफ़ चल दिया। रास्ते भर वो यही बात करता रहा … कि कितना मजा आया। मैं उसे और उत्तेजित करती रही। घर आते ही हमने खाना खाया और कमरे की तरफ़ चल दिये। मैंने अपनी किताबें खोली और पढ़ाई का बहाना करने लगी। मन में तो मुन्ना का लण्ड घूम रहा था। दूसरी मेज़ पर मुन्ना पढ़ रहा था। वो बार बार मेरी तरफ़ ही देख रहा था। रात गहरा गई थी। मम्मी पापा सो चुके थे। मुन्ना ने उठ कर दरवाजा बंद कर लिया और मुड़ कर मेरी तरफ़ देखा।

“चल गुड़िया … वो ही करें … ” मेरा दिल धड़क उठा। सवेरे तक अब हमे कोई छेड़ने वाला नहीं था। हम सुरक्षित भी थे।

“कपड़े तो बदल ले … बस पजामा ही पहनना !”

“आप भी दीदी … बदल लो” हमने दोनों ने कपड़े बदल लिये। मैंने एक ऊंचा सा पुराना स्कर्ट पहन लिया। ताकी बस उसे ऊंचा किया और चूत सामने आ जायेगी। मुन्ना ने बस कहे अनुसार अपना पजामा पहन लिया। उसका बैचेन लण्ड उसमें से साफ़ उभर कर नजर आ रहा था। उसने अपनी बाहें फ़ैला दी, मैं उसमें जाकर समा गई। उसने मुझे लिपटा लिया और मेरी चूत पर अपने लण्ड को दबा दिया। मैंने उसका पजामा नीचे खिसका दिया। उसका लण्ड बाहर आकर किसी मस्त सांड की तरह झूमने लगा। उसने मुझे चूमना चालू कर दिया। अब से उसका लण्ड पकड़ना आसान था। वो मेरे चूतड़ मसलता रहा। मैं भी उसके चूतड़ दबाने लगी। अब उसके लण्ड की बारी थी। मैंने उसे थाम लिया। मुझे वो मोटा लगा … पूरा लण्ड मैंने हाथ में भर लिया और उसकी मुठ मारने लगी। वो लिपट गया और सिसकारी भरने लगा।

अचानक मेरी तेज नजर उसके लण्ड पर पड़ी, मैं बुरी तरह चौंक गई। उसके लण्ड की सुपाड़े से लगी हुई स्किन फ़टी हुई थी।

ओह, तो यह मेरी ही तरह भोला बनने का नाटक कर रहा था। वो ये सब नाटक मजा लेने के लिये कर रहा था। मेरा मन खुश हो गया, कि चुदाई भरपूर होगी। वो तो अपने में मगन कह रहा था

“गुड़िया, इसमें तो बहुत मजा आ रहा है यार !”

“हां मुन्ना, मुझे भी आ रहा है, और दबा पीछे … ” मैं भी अब खुलने लगी।

“गुड़िया, तेरी सू सू कहा है … खड़ा ही नहीं हुआ” मैं धीरे से हंस पड़ी।

“अरे भैया, हमारे ये डण्डा जैसी सू सू नहीं होती है, जैसे कि तेरे मम्मे नहीं है ना”

“अरे हां … तेरे मम्मे तो बता … ” उसने मेरे मम्मे पर हाथ घुमा दिया, फिर कुर्ते के अन्दर हाथ डाल दिया। और उसे टटोलने लगा। मुझे बहुत ही आनन्द आने लगा। मैंने भी तबियत से मम्मे उसके हवाले कर दिये और मसलवाने लगी।

“भैया, थोड़ा जोर से दबा दे ना … ”

“उससे क्या होगा … ” उसने मेरे मम्मे दबा दिये। फ़िर घुण्डी भी घुमा दी। मैं मस्ती में झूम उठी।

“भैया, तुम्हारे डण्डे में जैसा मजा आता है ना, बस वैसा मजा आता है।”

“इतना ज्यादा मजा … निकाल तेरा डण्डा … ” और उसने मेरी चूत पर हाथ मार दिया। पर वहां कुछ होता तो तो पकड़ता ना … उसकी नाटक बाजी चलती रही। पता था कि ये सब तो उसे पता है।

“मुन्ना धीरे से … नाजुक जगह है … हां अब ढूंढ डण्डे को … जरा प्यार से, है ना” उसका हाथ मेरी चूत पर घूमने लगा, डन्डा तो मिला नहीं हां उसकी अंगुली चूत में जरूर घुस गई। मेरे मुख से आह निकल गई।

“मुन्ना खड़े खड़े थक गई, चल आराम से बिस्तर पर करते हैं !”

“गुड़िया कपड़े पूरे उतार दे, मजा आयेगा !” मैंने सहमति में सर हिला दिया। और कपड़े उतार दिये। अब हम दोनों बिस्तर में थे। मैंने अब खुलना ही बेहतर समझा। वर्ना नाटक में कही कोई कसर रह गई तो चुदाई में मजा नहीं आयेगा।

“मुन्ना एक बात कहूँ … सच बताना … तुझे मेरी कसम … !”

“पूछो दीदी … ”

“कभी किसी लड़की को तूने चोदा है तूने?” वो अब झेंप गया।

“नहीं तो दीदी … वो कैसे करते हैं … ?” बड़े भोलेपन से उसने पूछा।

मैंने उसे चूमते हुये कहा,”अरे मैं कुछ कह थोड़े रही हू … तेरा मामला है तू जाने … बता न !”

उसकी नजरें झुक गई। फिर कुछ सोच कर बोला,”नहीं तो दीदी … चल ना अपन मस्ती करें”

“मुझसे झूठ बोलता है … बता कौन थी वो … तेरा लण्ड कह रहा है तूने चोदी है, बड़ा भोला बनता है?” मैंने उसे जोर देकर कहा।

“हां गुड़िया, तेरी ही सहेली है … वो मुझसे बस चुदवाती है, प्यार नहीं करती है।”

“तो अब खुल कर मजे कर ना … आजा … ये देख मेरी चूत … मैं भी चुदा चुकी हूँ … ”

“अरे यार पहले क्यों नहीं बताया … ”

“यह नाटक तो खुलने के लिये किया था … अब तो मुझे चोद दे !”

मुन्ना सारी शरम छोड़ कर मुझे अपनी बाहों में लेकर बिस्तर पर लेट गया और हम अब खुल कर बेशर्मी से वासना का खेल खेलने लगे। मैंने भैया को नीचे चित्त लेटा दिया और उसका लण्ड मलने लगी। वो सिसकारियाँ भरने लगा, आह ऊह्ह करने लगा। मैं उसके ऊपर लण्ड के पास बैठ गई। उसका लौड़ा पकड़ कर मैंने अपनी चूत पर रख कर उसे अन्दर ले लिया। उसका लौड़ा मेरे बोझ से चूत के अन्दर उतर गया। कम चुदने के कारण मेरी चूत अभी पूरी खुली नहीं थी। मुन्ना का लण्ड तो मोटा और लम्बा था, मुझे लगा कि मेरी चूत को पूरी खोल देगा। उसका लण्ड कसता हुआ जैसे तंग गली में जा रहा था। चूत लण्ड की मोटाई के अनुसार फ़ैल कर लण्ड को अपने में समा रही थी। मुन्ना मस्ती में अपनी आंखे किये हुये था। धीरे धीरे लण्ड पूरा घुस गया। मुझे ना तो लगी और ना ही दर्द हुआ। चूत पानी छोड़ रही थी। अब मैंने हिम्मत करके धक्के तेज कर दिये। मैं बड़े आराम मैं चुद रही थी। भैया ने मेरे बोबे दबा डाले और वो अपने चूतड़ नीचे से हिलाने लगा। लण्ड मेरी चूत में असीम आनन्द देने लगा। मैं उसके ऊपर लेट गई और हम लिपट कर चुदाई करने लगे।

“भैया सच कहूँ, ये लण्ड क्या गाण्ड में भी घुस जाता है?”

“दीदी पता नहीं, मैंने कभी गाण्ड नहीं मारी … चल कोशिश करें … ?”

मैं इस एक नये अनुभव के लिये तुरन्त ही तैयार हो गई। तरह तरह से अंगों के इस्तेमाल की सोच ने मुझे रोमंचित कर दिया।

“गुड़िया, चल झुक जा, और गाण्ड मेरे सामने कर दे … मैं लण्ड घुसाने की कोशिश करता हूँ … ” मैं झुक गई, मेरे चूतड़ की दोनों फ़ांके खुल गई। उसे गाण्ड का छेद नजर आने लगा। मुन्ना ने छेद पर लण्ड रख दबाया तो कभी वो नीचे फ़िसल जाये या ऊपर आ जाये। बस थोड़ा सी गाण्ड खुलती पर लण्ड अन्दर नहीं जा पा रहा था।

“मुन्ना तेल लगा कर अंगुली से छेद चौड़ा कर दे … ” मुन्ना ने ऐसा ही किया। तेल लगा कर अंगुली अन्दर घुसेड़ दी। मेरे मुख से मीठी सी आह निकल गई। वो खींच खींच कर अन्दर अंगुली घुमाने लगा, फिर उसने दो अंगुली डाल दी। मुझे इसमें बड़ा मजा आ रहा था। अचानक छेद में लण्ड घुसता सा महसूस हुआ। मैंने अपनी गाण्ड का छेद ढीला कर दिया। मोटा लण्ड था लगा गाण्ड चिर जायेगी। मुझे अब दर्द होने लगा था। शायद उसे भी लग रही थी। उसने बहुत जोर लगाया और लण्ड फिर तो घुसता चला गया। मेरी आंखें उबल पड़ी।

“बस कर मुन्ना … फ़ट ज़ायेगी मेरी … अभी इतना ही काफ़ी है … कल फिर कोशिश करेंगे।”

“हां मुझे भी लग रही है … ” उसने खींच कर अपना कड़क लण्ड बाहर निकाल लिया। मुझे भी चैन की सांस आई। पर दूसरे ही क्षण मेरी चूत पर आक्रमण हुआ और लण्ड मेरी चिकनी चूत में सट से पूरा घुस गया। लण्ड अब फ़्री स्टाईल में चोदने लगा। मैं घोड़ी बनी चुदती रही। मेरे मम्मों की शामत आई हुई थी। बेचारे बेरहमी से मसले जा रहे थे। इस स्टाईल में लण्ड पूरा अन्दर तक चोद रहा था। बहुत देर तक चुदने के कारण मैं चरमसीमा पर पहुंच गई थी। मुझे बस खल्लास होना था। मैं छटपटा उठी, मेरा पानी निकलने को हो रहा था …

मुन्ना बड़ी तेजी से लण्ड चला रहा था। मेरा पानी बस निकला ही चाहता था। मैंने जोर से तकिया भींच लिया और आह कर उठी। मैं झड़ने लगी। पर वो चोदता चला गया। मैं झड़ती रही … और मैंने मुन्ना को रोक दिया।

“दीदी मेरा तो हुआ ही नहीं … ”

“चल खड़ा हो जा … और लण्ड दे मुझे … मुठ मार कर तेरा माल निकाल देती हूँ।” उसे मैंने सामने खड़ा किया और लण्ड मुँह में लेकर नीचे से उसका लण्ड पकड़ कर मुठ मारने लगी। वो तड़प उठा और मेरे मुँह में एक तेज पिचकारी छोड़ दी। मैंने मुठ मारना नहीं छोड़ा। मुठ मारती गई जब तक कि उसके लण्ड में एक भी बूंद रही। सारा वीर्य मैंने पी लिया। अब वो सन्तुष्ट था। उसने एक पांव मेरी कमर में डाला और सुस्ताने लगा। मैं भी उससे लिपटी पड़ी रही। मुझे अब उसके खर्राटे की आवाज आने लगी। मुन्ना सो चुका था। मैं मुस्कराई और उसे प्यार से चूम लिया। उसे चादर ओढ़ा दी और मैं जाकर मुन्ना के बिस्तर पर सो गई। आज की तरकीब और हिम्मत ने काम बना दिया था और अब हम हमेशा ही मजे कर सकते थे। मैंने चादर मुँह तक ओढ़ ली और सपनों में खो गई। Antarvasna Sex Stories

Antarvasna Sex Storie

अब पेश है दूसरा भाग : Antarvasna

करीब आधे घण्टे बाद हम Antarvasna दोनों जागे … दिन भर की बेताबी तो निकल चुकी थी, हम दोनों को होटल पहुँच कर फ़्रेश होने तक का ख्याल नहीं रहा, उस वक्त नौ बज चुके थे, हम दोनों बारी-2 से बाथरूम गये, चाय मँगाई, फ़िर सलाद और चिकेन चिल्ली, सोडा आदि का आर्डर किया, साथ ही डिनर भी मँगा लिया ताकि डिस्टर्ब न हों। मेरे पास एक अच्छे ब्राण्ड की व्हिस्की थी, हमने पैग बनाये और आपस में जाम टकराये … बातें करते रहे और दूसरा पैग भी खत्म कर दिये हमने आधे-पौन घण्टे में … अब तक शरीर में गरमाहट आ चुकी थी तथा पहली चुदाई की खुमारी भी उतर चुकी थी। नीलम मेरी गोद में आ के बैठ गई और लगी मेरा गाल सहलाने … छाती सहलाने और चूमने … दो पैग व्हिस्की उसकी आँखों से बोलने लगी थी … हम दोनों एक दूजे के होठों को किस करने लगे, हमारी गरमागरम साँसें आपस में टकराने लगी और वो बेतहाशा मेरे होठों को चूसने लगी … ओह्ह्ह्ह्ह्ह् … क्या मस्त होके मुझे प्यार कर रही थी नीलम … मेरा तो लौड़ा फ़िर फ़नफ़नाने लगा और मैं भी उसे जोर-2 से चूमने लगा और उसके होठों को चूसने और दाँतो से काटने लगा।

उसका एक हाथ मेरे लण्ड को सहलाने लगा और मैं उसकी चूँचियों को दबाते हुए बुर पर हाथ फ़ेरने लगा … और वह अपनी दोनों जाँघो के बीच मेरे हाथ को दबाने लगी … मैंने उसके निप्पल को मुँह में लिया तो वह उछल पड़ी और मुझे जोर से जकड़ लिया … उईईईईइ … राजा क्या करते हो??? मार ही डालोगे आज इस प्यासी आत्मा को ? … ओह्ह्ह्ह … क्या जादू है तुम्हारे मुँह में लेते ही मैं बेकाबू हो जाती हूँ मेरे दोस्त … मेरे सनम … काश मैं तुम्हारी बाँहो में हमेशा-2 के लिये कैद हो जाती ! पर जानती हूँ तुम बीबी-बच्चे वाले हो, तुम और तुम्हारा घर सलामत रहे ! मैं तो इतने प्यार से ही खुश हूँ मेरे राजा … फ़िर वह अचानक ही मेरे लण्ड को अपने मुँह के पास ले जाकर टिप को अपने मुँह में डालकर लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी … ओऽऽऽहऽऽह् … मैं तो बेहाल होने लगा, फ़िर वो मेरे लण्ड को अपने मुँह में पूरा भर कर जीभ से चाट-2 कर रस ले-ले कर चूसने लगी और मेरी आँखों में आँखें डाल कर नशीले अन्दाज में बोली- आप भी मेरी चूसिये ना प्लीज …

चूँकि वो बहुत सुन्दर नहीं थी अतः मेरा मन उसकी चूत चाटने का नहीं हुआ पर मैंने कहा- मुझे यह अच्छा नहीं लगता और मैंने आज तक किसी की चूत पर मुँह नहीं लगाया है, बस मैं लण्ड से चुदाई करता हूँ और मस्ती अनलिमिटेड … इस बार मैं तुम्हारे हवाले हूँ जैसे मर्जी हो वैसे चुदाओ ! समझी जानेमन …

इस पर वो बोली- अच्छा तो अब आप मेरे हवाले हैं ना ?
मैंने कहा- हाँ।
ठीक है जानू अब आप नहीं चोदियेगा मुझे ! मैं ही आपकी चुदाई करूँगी ! मन्जूर है?

मैंने कहा- चाहे छुरी खरबूजे पर चले या खरबूजा छुरी पर … कटना तो खरबूजे को ही है नीलम रानी !

इस पर उसने एक मोहक मुस्कान फ़ेंकते हुये मुझे लिटा दिया तथा मेरे लण्ड को सहलाते हुये अपनी चूत को मेरे लण्ड पर टिका कर दबाई तो थोड़ा सा अन्दर गया … उसने और दबाया तो आधा लण्ड उसकी बुर में घुस गया …

फ़िर उसने मेरे ऊपर झुक कर मेरे गालों पर एक जोरदार चुम्मा देते हुए मेरे होठों को चूसना शुरु किया और फ़िर एक जोर का धक्का मार कर मेरा पूरा लण्ड अपनी बुर में ले लिया …

मैंने भी उत्तेजना में उसको अपनी बाहों में जकड़ लिया और जोर-2 से उसके होठ चूसने लगा …

ओऽऽहऽ साली क्या चुम्मा लेती थी ओह … पूरी जीभ अन्दर डालकर जोर-2 से चूसते हुए वो लगी धका-धक अपने चूतड़ ऊपर-नीचे करने और कमरे में फ़च-फ़च-फ़च-फ़च की रसीली आवाज गूँजने लगी …

यारों क्या कमर हिला-2 के वो मुझे चोद रही थी और बीच-2 में झुक कर मेरे होठ चूसने लगती ! ओऽहह् … मैं भी उसकी चूँचियों को मसल रहा था … उसके चूतड़ सहला रहा था … कमर सहला रहा था और नीचे से धक्का भी मार रहा था, वाह क्या मस्ती और रिदम था नीलम की चुदक्करी में ! मुझे कभी लगता कि मैं लड़की हूँ और मुझे कोई लड़का उचक-उचक के चोद रहा है।

बहुत देर तक वो यूँ ही मुझे पेलती रही और मैं नीचे से धक्का लगाता रहा। एकाएक वो गनगना गई और जोर से मुझ पर गिर के मुझसे चिपक गई और बोलने लगी … आऽआऽ आऽहहह मेरे राजा आपकी नीलम तो गई काम से … ओह राजाऽ आऽऽऽआ आपने तो मेरा सोया हुआ नारित्व जगा दिया आज तो मैं झरने की तरह झर रही हूँ … ओऽह आपने तो मेरा मन मोह लिया जानू … आई लव यू … मैं तो बिन मोल बिक गई मेरे राजा ! आज तो आपने जिन्दगी में पहली बार इतना मजा दिया कि मन कर रहा है कि सारी जिन्दगी आपके लण्ड को अपनी बुर में ही रखे रहूँ मेरे सनम … मेरे दोस्त … उसने मेरे दोनों गालों पर बारी-2 से चुम्मा लिया … बल्कि यूँ कहिये कि दाँतो से काटा। फ़िर मेरे बालों को सहलाते हुए मुझे प्यार करने लगी और कहने लगी- आप कहें तो मैं सारी जिन्दगी आपकी सेवा करने को तैयार हूँ, मैं खुद अपने लिये कमा लूँगी, बस आप मुझे कभी-2 प्यार करते रहा करिये।

मैं बोला- अभी आज की बात करो यार … तुम तो दो बार झड़ चुकी हो, मेरा तो अभी एक ही बार गिरा है।

वह बोली- जानू चिन्ता मत करो ! अभी थोड़ी मोहलत दे दीजिये ठाकुर साहब … जल्दी ही मेरी मुनिया आपसे तिबारा चुदवाने को तैयार हो जायेगी … इस बार उसका कचूमर निकाल दो यार … फ़ाड़ डालो साली को … मुझे बड़ा तंग करती है, आज ऐसा चोदो कि फ़िर महीनो नाम ना ले चुदवाने का … मैं देखने में दुबली पतली जरूर हूँ पर हूँ बड़ी सेक्सी।

वह मुझसे चिपक कर मेरे बगल में लेट गई और दोनों एक दूसरे को प्यार करने लगे। मेरा लण्ड तो तना ही था वह उससे खेलने लगी … और मैं उसके होठो तथा निप्पल को चूसने लगा। अहिस्ता-2 नीलम फ़िर उत्तेजित होने लगी … उसकी साँसे तेज होने लगी, वो मेरे लण्ड को दबाते हुए अपनी बुर पर रगड़ने लगी।

अब मुझसे रहा नहीं गया और एक झटके में उसे पटक के मैं उस पर चढ़ गया और दोनों टाँगो को फ़ैला कर उसकी बुर को आसमान की ओर करके मुहाने पर लण्ड टिका कर तत्काल एक ही बार में पूरा लण्ड नीलम की बुर में पेल दिया … वह तड़प उठी और चिल्लाई … उईऽऽऽमाँऽऽऽ अरे आपने तो मार ही डाला … कहते हुए उसने मुझे जकड़ लिया और आँखें बन्द कर ली तथा अपनी बुर को इतना टाइट कर लिया क्या बताऊँ … लगा कि मेरे लण्ड का दम निकल जायेगा … ओऽह क्या सुखद अनुभूति थी ! लगा कि उसने मेरे लण्ड को लॉक कर दिया हो।

वह मुझे झुका कर धीरे से बोली- राजा थोड़ी देर इसे यूँ ही पड़ा रहने दो … अच्छा लगता है।

मैं भी उसी हालत में उसकी छाती आहिस्ता-2 सहलाने लगा, फ़िर दोनों चूँचियों को हौले-2 दबाने लगा, वह और उत्तेजित होने लगी … उसके काले चने के बराबर निप्पल कड़े हो गये और भाले के नोक की तरह तन गये … ओऽओऽहऽऽह् … पिया … ओऽ मेरे रंगीले साँवरिया … अब अपने इस मूसल से मेरी ओखली में दनादन कूटो मेरे राजा … वैसे ही जैसे हमारे क्षेत्र में धान कूटा जाता है, ऐसी कुटाई करो बलमू कि मेरी बुर से मांड़ का सोता बह निकले !!!!!!

अब क्या था … ऐसा खुला आमन्त्रण पाकर सिंह इज किंग हो गया और मेरा शेरू फ़ुफ़कारते हुये दे दनादन नीलम के बिल में अन्दर-बाहर करने लगा … नीलम भी मुझे ललकार रही थी और नीचे से अपनी चूतड़ उछाल-2 कर मेरे हर धक्के का इमानदारी से जवाब देने लगी एकदम एक लय-ताल में … बस हमारी आह-ऊह … ओह … फ़च् … फ़च् … फ़च् … फ़चा-फ़च … की सेक्सी आवाजें गूँज रही थी कमरे में, हम दोनों बस एक दूसरे में डूबकर अपने आप को भूल चुके थे … तकरीबन आधे घण्टे बाद सिर्फ़ उस जन्नत की मन्जिल पर पहुँच कर ही थोड़ा थमें जिसे आचार्य रजनीश ने “सम्भोग से समाधि” की अवस्था कहा है।

मैं तो लगा कि नीलम की बुर में अपना सर्वस्व ही बहा रहा हूँ एक गरम लावे के रूप में, और उसकी बुर स्खलित होने की प्रक्रिया में लगातार संकुचित और फ़ैल रही थी, उसने मुझे चिपक के जकड़ा हुआ था ऐसा कि साँस लेना भी मुश्किल था …

लगभग 10 मिनट तक हम यूँ ही पड़े रहे समाधि की अवस्था में, फ़िर अलग हुए तो देखा कि बिस्तर पर अच्छा खासा दाग लग गया है और नीलम की बुर से अभी भी मेरा वीर्य चू रहा था, उसने तौलिये से पौंछा और फ़िर मुझसे चिपट गई और प्यार से चूमने लगी और बोली- मैं तो कई साल से चुदवा रही हूँ, 4-5 लोगो से चुदाई हूँ, उनमें से एक का लण्ड आपसे भी बड़ा और मोटा था पर कसम खा के कहती हूँ जो आनन्द आपसे मुझे मिला वह कभी नहीं मिला … यह रात मुझे जीवन भर याद रहेगी, आज लगता है मैं सुहागिन बन गई और ये मेरी सुहागरात है … आपको मैं अपना पति मानती हूँ ऐसा कहते हुये वह मेरे पैरों पर अपना सिर रखकर प्रणाम करने लगी।

जब मैंने उसे उठाया तो देखा उसकी आँखे गीली हैं …

मैं भी भावुक होने लगा। फ़िर अपने को सम्भालते हुए व्यवहारिक बनते हुए बोला- पगली तुम जानती हो कि मैं एक शादी-शुदा बाल-बच्चेदार सम्मानित व्यक्ति हूँ, ऐसा सपना पूरा हो ही नहीं सकता, इसलिये यह सब सोचो ही मत, हाँ दुबारा मौका मिला तो फ़िर कभी मज़ा ले लेंगे।

मुझे बड़े जोर की भूख लग आई थी, देखा खाना ठण्डा हो चुका था, होता भी क्यों नही, रात के दो बज चुके थे। हम दोनों ने गरम-2 चुदाई के बाद ठण्डा-2 खाना खाया और नंग-धड़ंग कम्बल में घुस कर एक दूसरे को बाहों में ले के सो गये तो सुबह 8 बजे ही नींद खुली।

जागने पर वो फ़िर मुझसे चिपटने लगी, गरमाहट तो मुझमें भी आने लगी पर 9 बजे डी पी ने जगतगंज बस स्टैण्ड पर पहुँचने को कहा था ताकि नीलम और उसके भाई को चन्दौली की बस पर बैठा कर विदा किया जा सके।

मैंने कहा- जल्दी से तैयार हो जाओ ! चुदी हुई मत दिखो।

करीब नौ बजे हमने होटल छोड़ा, रास्ते में वह बोली- अभी जी नहीं भरा है, 2-3 दिन साथ रहते तो शायद मुझे भरपूर मस्ती मिलती।

और यह भी कहा कि मैं बस से नहीं जाऊँगी, जैसे इज्जत से लाये थे वैसे इज्जत से कार से ही छोड़िये।

मैंने हँस के कहा- तुम्हारी इज्जत अब बची कहाँ? रात भर तो मुझे लुटाती रही.
इस पर वह बनावटी गुस्से से मुझे मुक्के मारने लगी।
मैंने कहा- मेरा लखनऊ जाना आवश्यक है, रिजर्व आटो कर देता हूँ तुम दोनों चले जाओ।

फ़िर वो मान गई। बस स्टैण्ड पर डी पी उसके भाई के साथ इन्तजार करता मिला, हमने एक आटो तय किया और उसे किराया देकर नीलम को कार से निकालने मैं अकेला ही गया, चूँकि उसका भाई पास ही में खड़ा था अतः वह सिर्फ़ मेरा हाथ जोर से दबा कर उतर गई और आटो में बैठकर बोली- फ़िर मिलियेगा और अगली बार डी एम साहब से जरूर मुलाकात करवा दीजियेगा और धीरे से एक आँख मार कर मुस्करा दी … टा-टा करते हुए चल दी।

मेरी सत्यकथा आपको कैसी लगी, जरूर बताइयेगा. Antarvasna

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