Find Related Category Ads
बहुत अँधेरा है कमरेHindi Sex Storiesमें रौशनी कर दो ,
उतार दो यह पैराहन, चांदनी कर दो .
चली भी आओ मैं जकड़ूँगा तुम को बाँहों से ,
मैं पीना चाहता हूँ आज बस निगाहों से .
दिखा के अपना हुस्न मेरे होश गुम कर दो ,
कि आज प्यार की पहली पहल भी तुम कर दो .
चले भी आओ तड़प के हमारी बाँहों में ,
कि अपनी सांस मिला दो हमारी सांसों में .
मेरे जलते हुए होठों पे अपने लब रख दो ,
उतार दो ये कपडे पलंग पे सब रख दो .
मैं अपने लबों को रख दूँ तेरे रुखसारों पे ,
और अपने हाथ फिराऊँ तेरे उभारों पे .
तुझे सर से पाँव तक मैं चूमता ही रहूँ ,
तेरे कंधे , तेरी छाती को चूसता ही रहूँ .
मैं चाहता हूँ छेड़ना तेरे तेरे अंगारों को ,
दबा के चूस के पी लूँगा इन उभारों को .
तेरा वोह अंग जो दुनिया में सब से प्यारा है ,
मैं उसे जीभ से चाटूं तेरा इशारा है .
फिरा के हाथ बदन पे मैं सज़ा दूँ तुझको ,
फिर अपनी जीभ से ज़न्नत का मज़ा दूँ तुझको .
मेरे लिए भी तो यह काम एक बार करो ,
मुंह में लेके चूसो इसे और प्यार करो .
फिर आओ इसके बाद एक हो जाएँ हम तुम ,
मुझे अपने बदन में पूरा समा लेना तुम .
और इस खेल में आखिर में वोह मुकाम आये ,
मेरे बदन में जो भी कुछ है तेरे काम आये .
चले आओ मेरी खुशियों को सौ गुणी कर दो ,
बहुत अँधेरा है कमरे में रौशनी कर दो . “”Hindi Sex Stories
मै 35 साल का युवक हूँ, मेरा नाम Hindi Sex Stories राजेश है और अन्तर्वासना की कथाओं का नियमित पाठक हूँ। दोस्तों मै आज आप सभी को अपनी एक सच्ची कहानी भेज रहा हूँ।
बात करीब दो वर्ष पहले की है, मै अपने एक दोस्त की शादी में लखनऊ गया था। वहां मैंने एक खूबसूरत लड़की को देखा जिसकी उम्र 28 साल की होगी और उसका फिगर भी गजब का था, स्तन और गांड तो देखने लायक थे, उसको देखते ही मेरे मन में उसको चोदने का ख्याल आने लगा। फिर मैंने पता किया कि ये है कौन? पता चला कि ये मेरे दोस्त के बड़े भाई की साली है।
मैंने सोचा फिर तो ठीक ही है और उसको पटाने के लिए उसके पास जाकर उससे मेल जोल बढ़ाने के लिए बातचीत शुरू की और उसको बताया कि राजू जिसकी शादी हो रही है मेरा दोस्त है। और उससे उसका नाम पूछा तो उसने बताया- मेरा नाम प्रियांसी है।
मैंने कहा- मुझ को मालूम है कि तुम राजू के बड़े भाई की साली हो।
और पूछा कि तुम्हारा पति भी शादी में आया है?
तो प्रियांसी ने बताया- वो नहीं आए हैं ऑफिस के काम से बाहर जाना पड़ा है इसलिए नहीं आ सके।
बात करता हुआ मै प्रियांसी के बूब्स को देख रहा था। प्रियांसी भी समझ रही थी कि मै उसके स्तनों का जायजा ले रहा हूँ। तब प्रियांसी ने कहा- राजेश तुम बात तो हमसे कर रहे हो लेकिन नजरें तुम्हरी कहीं और हैं इरादा नेक है कि नहीं?
मै समझ गया कि प्रियांसी की भी इच्छा कुछ करने की है, मैंने कहा कि प्रियांसी तुम्हारी चूचियों के निप्पल तो बड़े बड़े लग रहे हैं तुम्हारे ब्लाउज के अंदर से निप्पल निकलने को बेकरार हैं।
तो प्रियांसी ने कहा- कैसी बातें करते हो?
मैंने कहा- जैसे तुमने पूछा कि नजरे कहाँ हैं तो मैंने बता दिया कि क्या देख रहा हूँ !
उसने हंस दिया तो मैंने कहा कि प्रियांसी तुमको देख कर चोदने का मन कर रहा है ! मै भी यहाँ अकेला ही आया हूँ, रात को शादी में शामिल होने के बाद कुछ मस्ती करने का इरादा है क्या?
तो प्रियांसी ने कहा कि किसी को मालूम हो गया तो हमारा घरवाला हमको निकल देगा !
मैंने कहा कि ऐसा करते हैं कि शादी की अगवानी की रस्म होने के बाद मेरे होटल में चलते हैं। मैंने लखनऊ जाकर एक होटल में कमरा ले लिया था क्योंकि शादी के घर में जगह नहीं होती है और मुझको बाथरूम में नंगे हो कर नहाने की आदत है, इसलिए कमरा लेना पड़ा था।
मैंने प्रियांसी से कहा कि रात में हमारे कमरे में रूक जाना, ऐसे समय में किसी को ध्यान नहीं होता कौन कहाँ है।
प्रियांसी ने कहा- देखा जायेगा !
फिर हम लोग अपने अपने काम से लग गए लेकिन मन ही मन सोच रहा था कि प्रियांसी चलेगी या नहीं?
लेकिन यह भी लग रहा था कि प्रियांसी का भी मन शायद चुदाई का है, नहीं तो वो दूसरे सुर में बात करती। खैर किसी तरह से शादी की अगवानी की रस्में पूरी हुई तो मैंने प्रियांसी से कहा- चलो जानेमन ! आज की रात हमारे लण्ड का भी मजा ले लो ! अभी तक तो तुमने अपने पति के लण्ड का ही मजा लिया होगा !
प्रियांसी भी चुदाने के पूरे मूड में थी, उसने कहा- बाहर चलो ! हम आते हैं !
और फिर 5 मिनट में ही प्रियांसी भी बाहर आ गई। हम और प्रियांसी एक ऑटो में बैठ कर होटल आ गए। कमरे में आते ही मैंने टीवी चालू कर दिया। रात का 1 बजा होगा, टी वी के चैनल बदलने में एक चैनल पर ब्लू फिल्म चल रही थी।
प्रियांसी ने कहा- यह क्या है?
मैंने कहा- ब्लू फिल्म ! अक्सर रात में डिस्क वाले लगा देते हैं, वही चल रही है।
तो उसने कहा- हमने तो कभी ब्लू फिल्म देखी ही नहीं है !
तो मैंने कहा- बड़े मौके से आ रही है, देख लो ! और टीवी चालू करके मैं बाथरूम में घुस गया, दरवाजा अंदर से बंद नहीं किया और नंगे होकर नहाने लगा।
उधर प्रियांसी ब्लू फिल्म देख कर गरम हो रही थी। फिल्म में एक लड़की को पॉँच आदमी चोद रहे थे, एक आदमी उसकी चूत में लण्ड डाले हुए था, दूसरा गांड में लण्ड डाले था, तीसरा मुंह में लण्ड डाले था और दो आदमी उसकी चुचियों को दबा रहे थे और वो लड़की उन दोनों आदमियों का लण्ड अपने हाथ में लेकर मुठ मारने में लगी थी।
यह सीन देख कर प्रियांसी बहुत गरम हो गई थी और उसने अपनी साड़ी खुद ही उतार दी। मेरा लण्ड भी यह देख कर डंडे जैसा तन गया और फिर मैं तौलिया लपेट कर बाहर आ गया। मेरा लण्ड तौलिये को फाड़कर बाहर आने को बेताब था।
प्रियांसी ने भी देखा कि मेरा लण्ड तना हुआ है, उसने उठ कर तुंरत मेरा तौलिया खींच दिया। अब मैं बिल्कुल नंगा हो गया, मेरा 8′ का लण्ड देख कर प्रियांसी तो ख़ुशी से उछल पड़ी, बोली- इतना लम्बा और मोटा लण्ड है? हमारे आदमी का तो 5′ का ही है ! आज पूरा मज़ा आयेगा !
मैंने कहा- जानी ! आज जैसा मज़ा तुमको पहले कभी नहीं मिला होगा !
और यह कह कर मैं उसको उठा कर बिस्तर पर ले गया और उसको किस करना शुरू कर दिया। मैंने उसके होंठों को किस करना शुरू किया तो उसने अपनी जीभ मेरे मुंह में दे दी। मैं उसको चूसता रहा और हाथों से उसके बूब्स को सहलाने लगा। और फिर धीरे धीरे उसका ब्लाउज उतार दिया, फिर उसके पेटीकोट का नाड़ा भी खोल दिया। अब प्रियांसी सिर्फ पैंटी और ब्रा में थी। उसकी चड्डी गीली हो रही थी, चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था।
मैं तो उसके बदन को देख कर दंग रह गया। बिल्कुल दूध की तरह गोरी थी प्रियांसी !उसको देख कर तो किसी का भी मन चोदने का हो जायेगा। मैंने तुंरत ही उसकी ब्रा का हुक खोल दिया और उसकी चूचियों को धीरे धीरे सहलाने लगा। फिर एक चूची को मुंह से चूसने लगा और फिर धीरे धीरे किस करते हुए उसकी नाभि तक आ गया।
प्रियांसी बहुत गरम हो रही थी उसने मेरा लण्ड पकड़ लिया था और उसको हिला रही थी। मैंने उसकी चड्डी भी उतार दी, लगता था कि उसने अपनी बुर के बाल कुछ दिन पहले ही साफ किए थे।
प्रियांसी ने बताया कि अभी 3 दिन पहले ही महीना ख़तम हुआ है इसलिए मन तो चुदवाने का कर ही रहा था क्योंकि महीना समाप्त होने के बाद चूत की प्यास बढ़ जाती है, लेकिन शादी में आना पड़ा।
मैंने कहा- मेरी जान ! आज मैं तुम्हारी चूत की पूरी प्यास बुझा दूंगा !
और फिर मैं उसकी बुर को चाटने लगा तो वो बोली- ये क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- क्या तुम्हारे आदमी ने कभी तुम्हारी बुर नहीं चाटी?
उसने कहा- नहीं तो !
मैंने कहा कि तब तो तुमने अभी तक चुदाई का असली आनंद लिया ही नहीं ! आज ले लो मेरी जान पूरा आनंद !
और यह कह कर मैं उसकी बुर को थोड़ा फैला कर जीभ से चाटने लगा। प्रियांसी के मुंह से सिसकारी निकल रही थी और बड़बड़ा रही थी- ऐसा तो पहले कभी मज़ा नहीं आया !
मैं फिर उसकी बुर की तिकोन को मुंह में भर कर चूसने लगा और फिर उसको जीभ से ही चोदने लगा। मैं अपने हाथों से उसकी चूचियों को मसलता रहा और गांड पर भी हाथ फिराता रहा।फिर मैंने 69 की पोसिशन बनाई और अपना लण्ड उसके मुंह के पास ले गया और प्रियांसी से कहा- इसको भी तो चूसो !
उसने कहा- लण्ड भी चूसा जाता है क्या?
मैंने कहा- चूसो मेरी जान ! आज चुदाई का पूरा मज़ा लो !
तब प्रियांसी ने मेरे लण्ड का सुपाड़ा खोल कर जीभ से चाटना शुरू किया। मैंने उसका सर पकड़ कर पूरा लण्ड उसके मुंह में डाल दिया और उसकी बुर चूसने लगा। उसकी बुर बहुत गीली हो रही थी और फिर थोडी देर में ही प्रियांसी कि बुर ने पानी छोड़ दिया।
मेरा लण्ड भी तन कर डंडा बना हुआ था तो फिर मैंने अपना लण्ड उसके मुंह से निकाला और उसको घोड़ी बनने को कहा तो वो बोली- घोड़ी बना के क्या करोगे?
मैंने कहा- पहले तुम्हारी गांड मारूंगा !
वो बोली- हमने कभी गांड नहीं मरवाई है, उसमें तो बहुत दर्द होगा !
मैंने कहा कि पहली बार बुर चुदाई में भी तो दर्द हुआ होगा बस वैसा ही होगा फिर मज़ा आने लगेगा।
उसने कहा- धीरे धीरे डालना ! कहीं मेरी गांड न फट जाये !
मैंने उसकी गांड पर थूक लगाया और फिर अपने लण्ड का सुपाडा उसकी गांड के छेद पर लगा कर हलके से धक्का दिया मेरा सुपाड़ा उसकी गांड में घुस गया।
वो धीरे से चिल्लाई- लग रहा है !
मैंने कहा- बस अब नहीं लगेगा ! और फिर एक धक्का दे दिया मेरा आधा लण्ड उसकी गांड में घुस गया।
उसको कुछ ज्यादा ही दर्द हुआ और बोली- लण्ड बाहर निकालो प्लीज़ ! लग रहा है !
मैं फिर उसकी पीठ पर चुम्बनों की बौछार करने लगा और लण्ड डाले डाले ही उसकी चूचियों को हाथ से पकड़ कर सहलाने लगा। थोड़ी देर में उसका दर्द कुछ कम हुआ। फिर मैंने अपने लण्ड का एक धक्का जोर से मारा, मेरा पूरा लण्ड उसकी गांड में घुस गया और फिर मैंने अपने धक्के तेज कर दिए अब तो प्रियांसी को भी मज़ा आने लगा और वो भी अपने चूतड़ उठा उठा के मेरा पूरा लण्ड अन्दर लेने लगी।
थोड़ी देर बाद मैंने अपना लण्ड निकाल कर उसकी चूत में पीछे से ही डाल दिया चूत बिल्कुल गीली थी आधा लण्ड उसकी चूत में घुस गया। फिर मैंने थोड़ा सा लण्ड बाहर निकाल कर एक जोर का धक्का मारा, मेरा पूरा लण्ड उसकी बुर में जड़ तक घुस गया।
वो चिल्लाई- मर गई ! धीरे धीरे करो ! तुम्हारा लण्ड बहुत बड़ा है !
मैंने फिर धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिए। अब प्रियांसी को भी मज़ा आने लगा था और वो भी चूतड़ उठा उठा कर धक्के लगाने लगी। करीब आधे घंटे की चुदाई में प्रियांसी दो बार झड़ चुकी थी और अब मेरा भी पानी निकलने वाला था। मैंने अपने लण्ड को प्रियांसी की बुर से बाहर निकाला और उससे कहा- मुंह खोलो !मेरा पानी पी लो ! मज़ा आ जायेगा !
और फिर उसने मेरा सारा पानी पी लिया और लण्ड को चाट चाट कर साफ़ कर दिया।
उस रात हम लोगों ने चार बार चुदाई की। प्रियांसी बहुत खुश थी, बोली- जिन्दगी में पहली बार ऐसा चुदाई का मज़ा आया है, अब हम कानपुर तुमसे मिलने जरुर आया करेंगे।
दोस्तो, मेरी कहानी कैसी लगी जरूर लिखियेगा। Hindi Sex Stories
मेरे मामा Indian Sex Stories जी की पत्नी यानि मेरी मामी का अकस्मात निधन हो गया था। मामाजी अट्ठाईस साल के खूबसूरत वयक्तित्व वाले हैं। उनकी पत्नी भी पढ़ी-लिखी सुंदर औरत थी। निधन के समाचार से मेरी मम्मी और परिवार के सभी सदस्यों को बहुत दुःख हुआ था। मामाजी की एक दो साल की लड़की थी।
थोड़ा अपने बारे में बता दूँ!
मेरी उम्र 18 से कुछ ज्यादा है, बला की खूबसूरत हूँ मैं! मुझे देखते ही आदमी की आह निकल जाती है। बी.कॉम की परीक्षा के बाद गर्मियों की छुट्टियों में मम्मी ने मामाजी की लड़की जॉली को सम्हालने के लिए मुझे इस वर्ष अकेले ही भेज दिया।
मामाजी के यहाँ पूरा परिवार छोटे मामाजी, नानी जी, नानाजी सभी जॉली को बहुत अच्छे से रखते हैं। मामाजी बिलकुल उदास और गमगीन रहते थे। वो अकसर कामकाज के सिलसिले में बाहर जाते थे, रात को देर सवेर घर पर आते थे।
एक रोज रात को मामाजी करीब साढ़े गयारह बजे घर पर आये। मैं जॉली को सुला रही थी, सोते वक्त जोली रोने लगी, मुझे बहुत दया आई और अपनी शर्ट को खोलकर जॉली को अपना चुचूक चुसाने लगी। चुसाते-पिलाते कब जाने नींद लग गई।
जब मेरी नींद उड़ी तो देखा मामाजी के हाथ मेरे स्तनों को धीमे धीमे सहला रहे थे, नींद उड़ते ही एकदम से मैं सन्नाटे में आ गई। पर सोचा कि आज चार माह हो गए मामीजी को मरे हुए, रोजाना सेक्स करने वालों की क्या हालत होती होगी। फिर सबसे बड़ी बात मेर गुलाबी चुचूकों पर मामाजी का हल्का स्पर्श पाकर मैं खुद रोमांचित हो गई। मैं नींद का बहाना करके सोई रही।
मामाजी ने धीरे धीरे शर्ट के चार बटन खोल दिए ब्रा को थोड़ा और ऊपर खिसका कर एक स्तन पर अपने होंठ रगड़ने लगे, दूसरे पर हल्का हल्का हाथ चला रहे थे। मेरे पूरे बदन में चिंगारियाँ फूटने लगी। वक्ष पर मामाजी की चलती हुई जबान से मेरी चूत कुलबुलाने लगी।
इधर मामाजी के पजामे के सामने ऐसा लगा जैसे टेंट खड़ा हो गया हो। धीरे से मामाजी का हाथ मेरी कमर से रेंगते हुए जींस तक पहुँच गया परन्तु तंग जींस होने से हाथ चूत तक नहीं पहुँच सका। फिर मामाजी जो भी हरकत कर रहे थे, बहुत डरते डरते से कर रहे थे। मैं आँख बंद कर आनंद ले रही थी पर डर मुझे भी लग रहा था। थोड़ी देर बाद मामाजी ने चुचूक चूसते चूसते पजामे में से अपना आठ-नौ इंच लम्बा लंड निकाल कर हाथ में ले लिया। वासना के वशीभूत हो के हाथ से लंड को जोर जोर से हिलाने लगे, दूसरे से मेरे स्तन दबाते रहे और मुँह में निप्पल लेकर लॉलीपॉप सरीखे चूसते रहे।
इच्छा तो मेरी भी बहुत हुई पर आंखे मींचे शर्म के मारे लेटी रही। थोड़ी देर बाद मामाजी के लंड ने पिचकारी मारी, जैसे होली पर रंग निकला हो, ढेर सारा वीर्य निकल कर बेडशीट पर जा गिरा। मामाजी जोर जोर से हांफ़ने लगे। सांसों को ठीक कर धीरे धीरे मेरी शर्ट के बटन लगाने लगे। सब कुछ सामान्य हो गया सिवा मेरे बदन के, आग लग गई उसमें!
एक घंटे बाद जब लगा कि मामाजी सो गए, मैं धीरे से उठकर अपने कमरे में चली गई। सीधे बाथरूम में जाकर पूरी नंगी होकर नहाई, नहाते हुए जमकर चूत में ऊँगली डाली, तब जाकर राहत मिली और सो गई।
अगले रोज मामाजी से मैं बराबर निगाह नहीं मिला पा रही थी, पर ऐसा जाहिर किया जैसे रात जो कुछ हुआ उसकी मुझे जानकारी न हो। परन्तु सारे दिन रात के वाकयात मेरी निगाहों से न निकले, रह रह कर रात वाली बात याद आती और कुदरन सेक्स करने की इच्छा होने लगी। इससे पहले हल्का फुल्का वक्ष को स्पर्श करवाना, बन-ठन कर रहना, लड़कों को कुत्ते की तरह पीछे दौड़वाने तक का खेल मैंने किया था पर सेक्स के मामले में विगत रात अब तक का मेरा उच्च स्कोर थी।
जैसे-तैसे दिन कटा, रात होते ही खुद-ब-खुद मेरे कदम मामाजी के कमरे की तरफ बढ़ने लगे, परन्तु आज बहाना न रहा! जॉली नानीजी के पास जो सो गई थी। मन मार कर मैं अपने कमरे में सो रही थी।
नौ बजे के करीब मामाजी आये, उनकी कमर में थोड़ा दर्द हो रहा था। नानीजी ने मुझे आवाज लगाई- बेटी निशा, मामाजी के कमर पर जरा तेल लगा देना!
मुझे जैसे मुँह मांगी मुराद मिल गई हो। आज मैंने नाईट-सूट पहन रखा था, वो भी बिना ब्रा और पेंटी के! मामाजी चादर ओढ़ कर लेटे थे। मैंने पूछा- मामाजी, कहाँ दर्द हो रहा है?
मामाजी ने कमर की बगल में इशारा किया वहाँ तेल लगाने के लिए मामाजी को पजामा खोलना पड़ता। उन्होंने पजामा और चड्डी खोलकर नग्न होकर चादर डाल ली। मैं चादर के अंदर हाथ डालकर आहिस्ता-आहिस्ता मालिश करती गई। दस मिनट बाद मुझे कंपकपी छूटने लगी। वासना से मेरा बदन जलने लगा।
एकाएक मामाजी जो बगल में होकर लेटे हुए थे, थोड़ा सीधा हो गए। सीधा होते से ही सांप की फुफकारता उनका लंड मेरे हाथ से टकराया। रिश्ते-नाते, उम्र सब भूलकर मैंने लंड को हाथ में पकड़ लिया। मामाजी भी सिसकारियाँ भरने लगे। मुझसे और बर्दाश्त न हुआ, लंड को मुँह में ले लॉलीपोप की तरह चूसने लगी। मामाजी मेरी ब्रा विहीन चूचियों को कस के दबाने लगे, चूसने लगे। बेतहाशा लिपट गए, चिपट गए!
इसके आगे क्या हुआ?
बाकी की कहानियों में आप लोग रोजाना पढ़ते ही हो!
मतलब मामा ने चोदा अपनी भानजी को
मेरी सच्ची कहानी अच्छी लगी हो तो मेल करें! Indian Sex Stories
मुझे बड़ी उमर की औरतें Hindi Sex Stories बहुत पसंद हैं। अक्सर ऐसी औरतें आसानी से नही मिलतीं। काफ़ी मेहनत से मिलती हैं। यह एक सच्ची घटना है।
मैं पुणे मे पेईंग गेस्ट बनकर एक घर में रहता था। घर के मालिक काफ़ी अच्छे थे लेकिन उनकी पत्नी हमेशा अकेली और उदास रहती थी। उसका नाम राधा था। जैसा नाम वैसे ही रूप। भगवान ने फ़ुर्सत में उसको बनाया था। बला की ख़ूबसूरती थी उसमें। उमर कोई 40-45 होगी। लेकिन चेहरे से मदमस्त मदमाती नशीली लगती थी जो कि रस से भरी हुई हो और उनके अंग-अंग से रस छलकता था।
उसके पति को उनमें कोई रूचि नहीं थी, ऐसा मुझे अक्सर लगता था। एक दिन राधा ने मुझे रात के खाने के लिए आमंत्रित किया। मैंने अपने व्यस्त होने का नाटक किया लेकिन उसके आग्रह करने पर मैं मान गया। दूसरे दिन शाम को मैं जल्दी ही ऑफिस से आ गया और मौक़े का इंतज़ार करने लगा।
रात के करीब साढ़े आठ बजे राधा ने मुझे खाने के लिए आवाज़ दी। मैंने कहा कि 5 मिनट में आता हूँ।
मैंने राधा के लिए एक प्यारा सा फूलों का गुलद़स्ता खरीदा था जो मैं लेकर उसके पास चल दिया। वहाँ पहुँचते ही मैंने पूछा कि अंकल (मकान मलिक) किधर हैं। इस बात पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। मैं समझ गया कि आज समय मुझ पर मेहरबान है। उन्होंने मुझे डिनर टेबल की तरफ इशारा कर बैठने को कहा और ख़ुद दूसरे कमरे में चली गईं।
डिनर टेबल कई तरह के पकवानों से सज़ा हुआ था। पर दोस्तों मुझे तो कोई और पकवान चाहिए था। थोड़ी देर मे वो एक पारदर्शी नाइट-गाउन पहन कर बाहर आई और मेरे सामने की कुर्सी पर बैठ गई।
उनको देखकर मेरा पप्पू सलामी के लिए अचानक तैयार हो गया। अचानक लण्ड खड़ा होने से मुझे बैठने मे दिक्कत होने लगी। ऐसा देखकर राधा ने पूछा कि क्या हुआ?
मैंने कहा- कुछ नहीं !
और फिर वो मुस्कुराने लगी और मेरे पीछे आकर खड़ी हो गई और मेरे सिर पर हाथ फेरने लगी, ऐसा करने पर मेरी साँसें तेज हो गईं।
सिर पर हाथ फेरते हुए उसने अचानक मेरे कानों को भी छू लिया। उसी समय मैंने उसके नाज़ुक हाथों को पकड़ लिया और उन हाथों को अपने होंठों से चूम लिया। ऐसा करते ही उसकी साँसें तेज़ हो गईं, बिना देरी किए मैं कुर्सी से उठा और उसको अपनी बाहों मे भर लिया।
वो भी मुझसे कस कर चिपक गई और फिर मैंने अपने होंठ उनके नर्म होंठों पर रख दिए। उसने मुझे और मैंने उसे चूमना शुरू कर दिया। मेरे हाथ उनके कबूतरों की तरफ बढ़ गए जो कि सदियों से किसी चाहने वाले के लिए बेताब थे।
मैंने बिना देर किए, उनको आज़ाद किया और मेरे हाथ उनसे खेलने लगे। उसने भी अपने हाथ मेरे पप्पू की तरफ बढ़ाए। मैंने अपने पैंट की ज़िप खोल दी। ऐसा करते ही मेरा पप्पू उसको सलामी देने को तैयार हो गया क्योंकि मैंने अंडरवीयर नहीं पहन रखी थी।
उसने मेरे पप्पू की सलामी ली और उसको नीचे झुक कर अपने मुँह में ले लिया और ऐसे चूसने लगी जैसे वो जन्मों की प्यासी हो। मैं भी उनके कबूतरों को दाना खिलाने लगा। थोड़ी ही देर में उन्होंने मेरी पैंट नीचे खींच दी और मेरे बदन से पैंट को अलग कर दिया।
अब पप्पू पूरी तरह से आज़ाद होकर उन होंठों का गुलाम हो गया। वह धीरे-धीरे मेरे पप्पू के चमड़े को ऊपर नीचे करने लगी। 5 मिनट में मुझे ऐसा लगा कि मैं किसी ज़न्नत में पहुँच गया हूँ।
मेरा पप्पू उसके मुख का स्वाद ले रहा था, अचानक उसने मुझसे कहा कि बेडरूम में चलो।
मुझे भी यही चाहिए था। वहाँ पहुँचते ही मैंने उसके गाउन को उतार दिया और उसके मख़मली ज़िस्म का दीदार करने लगा।
ऐसा करते देख कर उसने मुझसे कहा कि बुद्धू ऐसे ही देखते रहोगे या मुझे कुछ करोगे भी। आज की रात मैं तुम्हारी हूँ और मुझे प्यासमुक्त करो।
मैंने उसे अपनी बाँहों में उठाकर बेड पर लिटा दिया और फिर दोनों 69 की पोज़ीशन मे आ कर एक दूसरे के जननांगों को चाटने लगे। मैंने मेरी पूरी जीभ उनकी प्यारी सी पप्पी मे घुसा दी जिससे उनक पूरा बद़न सिहर उठा और उसने मेरे पप्पू को अपने मुख से अलग कर दिया और अजीब क़िस्म की आवाज़ें निकालने लगी। इसके बाद मैं और तेज़ी से उसके पप्पी की पूजा करने लगा।
इसी दौरान वो दो बार झड़ गई और मैंने उसका सारा रस पी लिया। फिर भी रस रिस-रिस कर पप्पी से बाहर आ रहा था। वो मुझे ज़ोर-ज़ोर से गालियाँ देने लगी और कहने लगी की मुझे तृप्त कर।
अब समय आ गया था कि मैं उसकी पप्पी का मिलन अपने पप्पू से करवा दूँ। पप्पू को मैंने पप्पी के मुख पर रखने से पहले राधा के मुख-चोदन का आनंद लिया और फिर पप्पी के मुख पर रख कर धीरे से एक हल्का धक्का दिया ऐसा करने से पप्पू थोड़ा अंदर गया लेकिन पप्पी टाइट थी, इस वजह से राधा दर्द से चिहुँक उठी।
उसी समय मैंने अपने हाथों से राधा के कबूतरों को धीरे-धीरे दबाना शुरू किया और पप्पू को भी धक्का देना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे पप्पू पप्पी में समा गया। पूरी तरह से पप्पी में समाने के बाद राधा ने अपनी चिकनी चूतड़ उपर उठा-उठा कर पप्पी के पप्पू से मिलन की खुशियाँ मनाने लगी।
बीस मिनट तक ऐसा करते रहने के बाद मेरा पप्पू अपनी मलाई निकालने की तैयारी करने लगा तो मैंने राधा को पूछा की वो पप्पू की मलाई पप्पी को खिलाएगी या खुद खाएगी। उसने कहा कि उनको पप्पू की मलाई खानी है, फिर मैंने मेरे पप्पू को पप्पी से जुदा कर राधा के मुख में डाल दिया और सारी मलाई उनके मुख में आ गई और उसने सारी मलाई एक ही झटके मे चट कर ली।
काफ़ी देर तक मैं और राधा नंगे बदन बिस्तर पर लेटे रहे और आधे घंटे बाद बाथरूम में जाकर साथ मे नहाया और उस दौरान भी पप्पू-पप्पी एक बार फिर मिल गए। बाद मे साफ हो कर हमने साथ में खाना खाया और फिर साथ में बेडरूम मे चले गये।
उस रात हमने 5 बार रसपान किया और करवाया। जब तक मैं पुणे में रहा उसको अच्छी सेवा देता रहा। आज भी मैं उसे बहुत याद करता हूँ।
आपकी बेबाक टिप्पणी का स्वागत है। ग़लतियों के लिए माफ़ करेंगे। Hindi Sex Stories
The user agrees to follow our Terms and Conditions and gives us feedback about our website and our services. These ads in TOTTAA were put there by the advertiser on his own and are solely their responsibility. Publishing these kinds of ads doesn’t have to be checked out by ourselves first.
We are not responsible for the ethics, morality, protection of intellectual property rights, or possible violations of public or moral values in the profiles created by the advertisers. TOTTAA lets you publish free online ads and find your way around the websites. It’s not up to us to act as a dealer between the customer and the advertiser.