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Antarvasna Stories

प्यारे दोस्तो, चंदा की Antarvasna Stories बेटी छवि की चुदाई तो उसी रात मैंने कर दी जिस रात चंदा को चोदने उसके घर गया था।

छवि की चूत चोद कर मुझे काफी संतुष्टि भी मिली लेकिन अभी भी मैं मौके की तलाश में था कि छवि की गांड कैसे मारूँ। हर समय मेरे आगे छवि का नंगा बदन घूमता रहता था। कभी-कभी सपने में भी लगता कि मैं छवि को चोद रहा हूँ। तो कभी लगता कि मैं छवि को कुतिया बना कर उसकी गांड में अपना लंड पेल रहा हूँ। मैंने सोच लिया कि अब चाहे कुछ भी हो जाये, छवि की गांड की सील तोड़नी है। इधर कुछ दिनों से चंदा का भी फोन नहीं आया कि मैं किसी तरह से छवि पर अपनी नजर गाड़ सकूँ। इसी उधेड़बुन में एक सप्ताह निकल गया और मैं छवि की गांड मारने के लिए बेकरार हो रहा था।

एक रोज रात के नौ बजे छवि के फोन से मिस कॉल मेरे फोन पर आया। मैंने तुंरत वापिस कॉल किया तो छवि ने मेरा फोन काट दिया। मैं निराश हो गया.

रात में दस बजे खाना खाकर यूँ ही गाड़ी लेकर निकल गया लेकिन बार बार छवि का चेहरा, छवि की चूत, छवि की कड़ी कड़ी चूचियाँ, छवि के चिकने चूतड़ मेरे सामने आ जाते थे। इसी तरह छवि की यादों में खोया जब मैं आई.टी.ओ. पहुंचा तो छवि की फोन दोबारा आया।

फोन उठाते ही सुरीली सी आवाज आई- हेल्लो राकेश … राकेश बोल रहो हो?
“हाँ… राकेश बोल रहा हूँ.”
“मैं छवि बोल रही हूँ… कुछ याद है या याद दिलाना होगा?”
“नहीं डार्लिंग मैं तुम्हें कैसे भूल सकता हूँ जानेमन … बताओ कब हाजिर हो जाऊँ आपकी सेवा में …”

छवि बोली- आज रात को मम्मी किसी पार्टी से मिलने बोम्बे जा रही हैं, और मैं घर पर अकेली हूँ। मूड कुछ करने का हो रहा है!
मैं कब आ सकता हूँ? मैं बोला- जब तुम बोलोगी, बन्दा हाज़िर हो जाएगा!
छवि बोली- साढ़े बजे के लगभग मम्मी निकलेंगी घर से! ग्यारह बजे के लगभग आ जाओ!

मैं आई टी ओ पर था ही! कुछ देर इंडिया-गेट के आस पास घूमता रहा और ठीक 11 बजे जा कर उसके घर पर घण्टी बजा दी।
छवि ने आकर गेट खोला, मुझे देख कर मुस्कराते हुए बोली- तुम समय के बड़े ही पक्के हो यार!
मैं भी हँसते हुए बोला- तुम्हारे जैसी सेक्सी आइटम बुलाये तो मैं तो दो घंटे पहले हाजिर हो जाऊँ!
हम दोनों एक साथ हँस पड़े…

छवि देखने में एकदम गोरी-चिट्टी तो है ही, आज उसका ड्रेस और उसे सेक्सी बना रहा था, एक हल्का पतले कपड़े का टॉप जिससे उसकी चूचियाँ एकदम तनी हुई दिख रही थी। किसी का लंड खड़ा कर दें, साले बुड्डे को भी जवान बना दें!

मैं तो 28 साल का जवान था। मेरा लंड तो उसके फोन आने के समय से खड़ा ही था। दरवाजे को बंद करके जब छवि मुड़ी तो मैंने उसे अपनी बाहों में दबोच कर एक किस कर दिया। बदले में छवि भी मुझे किस करने लगी … कभी होठों पर तो … तो कभी मेरे गालों पर, तो कभी माथे पर लगातार वो किस कर रही थी …

मैं समझ गया कि यह साली आज पूरा चुदवाने के लिए बेचैन हो रही है…

उसे बाहों में उठा कर वहीं सोफे पटक दिया और छवि के होंठ को अपने होठों से दबा कर उसका रसपान करने लगा। दस मिनट तक रसपान करने के बाद वो मेरे होंठ को अपने लाल लाल होठों से दबा कर पीती रही।

अब मैंने उसके छोटे से टॉप को निकाल कर अलग कर दिया, उसके दोनों स्तन आजाद थे, मानो जैसे कि कबूतर उड़ने को बेकरार हों! अब छवि को उठा कर अपनी जांघों पर बैठा कर उसके स्तनों को मसलने लगा और उसके मुँह से तरह-तरह की सेक्सी आवाज आने लगी… वोह… मेरे रजा आज जम कर मुझे चोदना … मेरी प्यास बुझा दो…मै कब से प्यासी हूँ … अपने लंड से मेरी प्यास बुझा दो ..

मैं अब उसकी चूचियों को चूस चूस कर पी रहा था जिससे वो और ज्यादा बेचैन ही रही थी।
अब छवि की पैंट-चड्डी को भी उससे अलग कर दिया, उसने भी मेरे कपड़े उतार दिए।

अब हम दोनों नंगे थे और एक दूसरे की बांहों में जवानी का पूरा मजे ले रहे थे। 69 की अवस्था में आकर छवि मेरा लंड चूस रही थी और मेरी जीभ उसकी चूत का रस चाट रही थी। बीच-बीच में अपनी ऊँगली से उसकी चूत के छेद चौड़ा कर रहा था क्योंकि आज वो दूसरी बार चुदवाने जा रही थी, चुदाई करने में शुरु के 5-6 बार दर्द तो होता ही है। यह अलग बात है कि कुछ दिन बाद चूत का छेद बड़ा हो जाने पर दर्द कम या नहीं होता है। सोच कर मैं बड़े आराम से सब कर रहा था क्योंकि आज घर पर उसकी माँ चंदा भी नहीं थी सो न डर, न जल्दबाजी! सब कुछ आराम से!
काफी देर तक एक दूसरे से खेलने के बाद अब चुदाई का समय आया।

मैंने थूक लगा कर उसकी दोनों टांगों को फैलाया और उसकी कमर के नीचे एक तकिया लगा दिया जिससे उसकी बुर का मुँह खुल जाए। अब उसकी चूत पर ढेर सा थूक लगा कर अपना सात इंच का लंड पेलना शुरु किया।

वो दर्द से परेशान जरूर हुई लेकिन आराम से पूरा लंड खा गई। थोड़ी ही देर में वो कमर हिला-हिला कर मजे से चुदवाने लगी। उसे भी मजा आ रहा था और मुझे भी! और उस कमरे को भी जहाँ पर ये आवाजें गूंज रही थी- फचक…फचक… वोह… अह..जोर से… फचक… अह…मुझे तो तुम्हारा लंड चाहिए … आज जम कर पेलो… फाड़ डालो मेरी बुर को … मेरे रजा आइ लव यू …राजा…अह…
लगभग एक घंटे की चुदाई के बाद हम दोनों अपनी मंजिल पर थे। दोनों का बदन अकड़ने लगा और एक झटके के साथ ही छवि की बुर मेरे रस से भर गई। 15 मिनट तक हम एक दूसरे से इसी तरह चिपके रहे।

जब वो अलग हुई तो बोली कि वो बाथ लेगी, मैं थोड़ा हैरान सा था क्योंकि माँ-बेटी की आदत काफी मिलती जुलती थी। मैं भी बाथ लेने उसके साथ ही बाथरूम में चला गया। मैं और छवि एक दूसरे से चिपक कर नहा रहे थे। कभी वो मुझे छेड़ रही थी, कभी मैं उसकी चूचियों को दबा-दबा कर छेड़ रहा था। इसी बीच वो फिर से गर्म हो गई और बाथरूम में ही चुदवाना चाह रही थी। फिर मैंने ढेर सा साबुन का झाग उसकी चूत पर लगा कर कुतिया के पोज में उसकी चूत के छिद्र में लंड को लगाकर जोर का झटका मारा जिससे मेरा लंड एक बार में ही उसकी चूत की गहराइयों को छू गया। छवि के मुँह से जोर से आवाज आई- आइ ओ माँ मर गई!

लेकिन कुछ ही देर में सामान्य हो कर मजे लेने लगी। थोड़ी देर में मैंने उसे उसकी गांड मारने की बात बताई तो उसे बड़ा ही अजीब लगा। लेकिन थोड़ी न-नुकर के बाद छवि गांड मराने को तैयार हो गई। मैं काफी खुश हुआ क्योंकि मुझे मेरे मन की तम्मना पूरी होने जा रही थी। डौगी स्टाइल में ही उसे बाथरूम की दीवार के सहारे झुकाया, छवि की गांड पर काफी सारा साबुन का झाग लगा कर लंड को पेलना चालू कर दिया। लेकिन मेरा लंड उसके गांड में घुस ही नहीं रहा था। छवि पहली बार गांड मराने जा रही थी इसलिए जाहिर था कि उसकी गांड का छेद बड़ा टाईट था। मेरा लंड घुस ही नहीं रहा था। अब साबुन के झाग के साथ उसकी गांड में ऊँगली पेल कर छेद को चौड़ा किया, साथ ही छवि को समझाया कि जब मेरे लंड का मुंड घुसेगा तो दर्द होगा, लेकिन एक बार बर्दाश्त कर लोगी तो फिर मजा ही मजा है।

छवि के हाँ करते ही फिर साबुन के झाग के साथ ही अपने लण्ड को छवि की गांड के छेद में लगाकर जोर का झटका मारा। झटके के साथ ही मेरा लंड छवि के गांड को फाड़ते हुए आधा घुस गया। बदले में दे गया- रुक साले!… तूने मेरी गांड फाड़ दी… मैं मर जाउंगी.. अपना लंड बाहर निकाल चूतिये! मुझे गांड नहीं मरानी…

इसके साथ ही छवि आगे की तरफ भागी जिसे मैं पहले ही जान चुका था। उसके कुछ करने के पहले ही उसकी कमर को जोर से पकड़ कर एक और जोर का धक्का मारा जिससे मेरा लंड उसकी गांड में पूरी तरह से फिट हो गया।

साथ ही गालियों की बौछार- हरामी… साले… कमीने… मेरी गांड फट गई…

जब धीरे धीरे वो शांत हुई तो फिर समझाया। साथ ही धीरे धीरे अपने लंड को आगे पीछे करते हुए छवि को चोदने लगा। दस मिनट आराम से चोदने के बाद उसे भी मजा आने लगा। अब छवि भी अपने मुँह से सेक्सी आवाज निकाल कर अपनी गांड में लंड पेलवा रही थी- अह वोह… हाय … मेरे राजा … खूब चोदो… म्माजा आ रहा है… आह… वोह… और जोर से…चोदो…

आधे घंटे चुदाई करने के बाद मैंने अपना सारा माल उसकी गांड में उडेल दिया। दोनों शांत होकर बाहर निकले, हमारे चेहरे पर संतुष्टि के भाव थे। दोनों ने एक दो दो पग व्हिस्की के लगाये। फिर हमारी चुदाई का कार्यक्रम चालू हो गया।

पूरी रात में तीन बार चूत और दो बार गांड में पेला। सुबह जब चलने लगा तो मेरे हाथों में हरे हरे पत्ते थे जिससे मैं समझ गया कि छवि को मेरा प्रोफाइल किसी तरह से मालूम हो गया था।
मैं भी खुश था क्योंकि एक अच्छी चूत के साथ गांड भी चोदने को मिला था साथ हरे हरे नोट भी।

दोस्तो, यह थी छवि की गांड की चुदाई।
कृपया अपने सुझाव मुझे भेजते रहें। Antarvasna Stories

Antarvasna

आज मैं आपको Antarvasna अपनी पड़ोसन आंटी की चुदाई की कहानी बताता हूँ कि कैसे मुझे एक 37 साल की माल आंटी को चोदने का मौका मिला।

तो अपने लंड को थाम के (अगर पास आपके चूत है तो उसमें ऊँगली डाल के ) तैयार हो जाइये एक हसीं दास्ताँ सुनने के लिए!

यह मेरा वादा है कि आपका लंड माल और आपकी चूत पानी छोड़ देगी, इससे पहले कि मेरी कहानी ख़त्म हो।

मेरे पड़ोस में एक परिवार रहता है जिसमें दो बच्चे, एक अंकल और एक आंटी हैं। अंकल बीएसएनएल में काम करते हैं और आंटी घर पर ही रहती हैं। उनका बड़ा लड़का बाहर नौकरी करता है और छोटा दसवीं में पढ़ता है। हमारे घर इतने पास-पास हैं कि एक छोटा सा बच्चा भी कूद कर हमारी छत से उनकी छत पर जा सकता है।

बात गर्मियों की दोपहर की है जब बाहर गर्म और तेज़ हवा चलने लगी, आंटी ज़ल्दी से उपर आ गई और सुखाये हुए कपड़े वापस नीचे ले जाने लगी ताकि कहीं ऐसा न हो कि कपड़े उड़ जाएँ!
पर आंटी ने जब देखा कि उनकी पैंटी उड़ कर हमारे घर में आ गिरी है, उन्होंने ऊपर से ही मेरी मम्मी को आवाज़ लगाई।

क्योंकि मम्मी उस वक़्त खाना बना रही थी इसलिए उन्होंने मुझे कहा कि मैं ऊपर जा के देखूं कि आंटी क्यों बुला रही हैं।

जैसे ही मैं ऊपर गया, मुझे आंटी की पैंटी दिख गई और मैं जैसे ही आंटी के पास पहुंचा, मैंने उस पैंटी के ऊपर पैर रख दिया और आंटी से अनजान बन कर पूछने लगा- आंटी! क्या बात है, आपने आवाज़ क्यों लगाई?

आंटी अब फंस चुकी थी, पर मरती क्या न करती, बोली- बेटा, मेरा एक कपड़ा तुम्हारी छत पर गिर गया है। ज़रा लौटा दो!

मैंने कहा- कौन सा कपड़ा आंटी जी?

तो वो बोली कि गलती से वो कपड़ा मेरे पैर के नीचे आ गया है। मैंने गलती होने का नाटक किया और बोल पड़ा- सॉरी आंटी जी! मुझे तो दिखा ही नहीं कि आपकी पैंटी यहाँ पर गिरी है।

मैंने पैंटी उठाई और उसे ठीक करने लगा तो आंटी बोली- यह क्या कर रहे हो? ऐसे ही दे दो ज़ल्दी से!

मैंने कहा- कोई बात नहीं आंटी जी! ठीक कर देता हूँ, मेरे से गलती हो गई।

आंटी को जानते हुए देर न लगी कि मेरे मन में क्या है। तो आंटी ने कहा- कपड़े ठीक करने का इतना ही शौक है तो मेरे घर आ जा, वहाँ बहुत बड़ा ढेर है, फिर मन भर के सफाई कर लेना!

मैंने कहा- मुझे कपड़े धोने नहीं आते, मैं तो बस छोटे कपड़े ही धोया करता हूँ!

आंटी ने कहा- छोटे कपड़े ही धो देना, मेरी बहुत मदद हो जायेगी!
मैंने कहा- क्या सचमुच आ जाऊँ?
तो आंटी ने कहा- अभी आ जा!

मैं नीचे आया और मम्मी से बोला कि आंटी का केबल ख़राब है, उन्होंने मुझे कहा है कि मैं ज़रा देख लूं तो क्या पता ठीक हो जाए।

मम्मी को बता कर मैं आंटी के घर चला गया। आंटी ने बिना दुपट्टे के सूट पहना हुआ था और उसकी गांड के दो टुकड़े अलग अलग दिख रहे थे। मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी गांड को देखूं या उसको ब्रा को फाड़ कर बाहर आने को तैयार उसकी चूचियों को देख कर रात की मूठ का इंतज़ाम करूँ।

तभी आंटी पानी ले आई और जैसे ही मैंने पानी लिया, वो मेरी बगल में बैठ कर मेरी पढ़ाई का हाल-चाल पूछने लगी।
मैंने बिना समय बर्बाद करते हुए कहा- आप कपड़े दिखाओ, मुझे और भी बहुत से काम हैं!

शायद आंटी भी बहुत दिनों से लंड के लिए तड़प रही थी, वो बोली- ऊपर के या नीचे के?
मैंने कहा- मैं दोनों काम कर लूँगा!

आंटी ने उसी वक़्त अपना कमीज़ उतार दिया और उनकी ब्रा से बाहर निकलते स्तनों को देख कर मेरा तो लंड खड़ा हो गया।

आंटी ने मेरा हाथ पकड़ कर अपने वक्ष पर रख दिया।
मैंने कहा- आंटी, आपकी चूचियों का आकार क्या है?
तो आंटी बोली- तुझे कितना लगता है?
मैंने तुक्का मार दिया- आंटी, चालीस?

आंटी बोली- लगता है, काफी लड़कियाँ चोद चुका है तू कॉलेज में! तूने तो एकदम सही साइज़ पहचान लिया।

तो मैंने कहा- आंटी, जब रात को कई बार आप कपड़े सुखा के चली जाती हो सोने, तो मैं चुपचाप छत पर जाकर आपकी ब्रा और पैंटी का नम्बर देखता था और आपकी पैंटी को ले जाकर उसमे मुठ मारता था।

आंटी ने मेरे मुँह पर एक थप्पड़ मारा और कहा- साले, कुत्ते, तेरी वज़ह से ही मेरी चूत में खुज़ली होती थी! मैं साफ़ पैंटी सुखा के जाती थी और सुबह उस पर दाग होता था! पर मुझे वही पैंटी पहननी पड़ती थी।

मैंने कहा- आंटी, आज आपकी चूत की सारी खुजली मैं दूर कर दूंगा!

मैंने आंटी को सामने मेज़ पर हाथ रख के कुतिया की तरह झुक जाने को कहा और उसकी सलवार और पैंटी को उतार कर अपनी नाक उसकी गांड में और जीभ उसकी चूत पे लगा दी।
उसकी चूत का स्वाद नमकीन था और मेरा लण्ड अब पूरी तरह तैयार था।

मैंने बिना समय ख़राब किये अपना लंड निकाल कर उस रंडी के मुँह में दे दिया।

5 मिनट की चुसाई के बाद मैंने लण्ड उसके मुँह से निकाल कर उसकी गांड में डाल दिया तो आंटी ने मना कर दिया और कहा- नहीं! डालना है तो चूत में डालो! और कहीं मुझे पसंद नहीं!

आंटी अन्दर कमरे में गई और अंकल का कंडोम ले आई और बोली- पिछले दो महीने से उस नामर्द ने यह तीन कंडोम का पैक ला के रखा है और अभी तक सिर्फ एक ही इस्तेमाल किया।

मैंने पूछा- पानी पियोगी या चूत में लोगी?

आंटी बोली- कुत्ते! चूत में डाल तो सही! लंड पानी तो बाद की बात है! कहीं तू भी उस नामर्द अंकल की तरह चूत के बाहर ही तो पानी नहीं छोड़ता?

अब मेरे अंदर का मर्द जाग गया और मैंने कहा- साली, रंडी, कुतिया! ले देख मर्द का लंड किसे कहते हैं!

उसकी बारह मिनट की चुदाई के बाद वो झड़ गई तो मैंने उसकी चूत से लण्ड निकाल कर सारा पानी उसके मुँह में डाल दिया और उस कुतिया को जबरदस्ती वो पानी पिलाया। अब हम दोनों थक कर बेड पर लेट गए।

मैंने अचानक आंटी से पूछा- अंकल को क्या कहोगी कि दूसरा कंडोम कहा गया?

आंटी बोली- मैं कहूँगी कि मैंने दोनों कंडोम बाहर फेंक दिए!
मैंने कहा- दोनों??

तो आंटी दूसरा कंडोम एक हाथ में लिए हुए मेरा लण्ड सहलाने लगी और बोली- गांड मरवा कर भी देख ही लेती हूँ!
…आह आह आह आह आह आह आह फच्च फच्च पिच पिच Antarvasna

फ्रेंड से अफेयर और सेक्स हाय फ्रेंड्स मेरा नाम मालविका हैं मेरी उम्र 27 साल हैं और मेरा फिगर 36-34-38 हैं। मेरे बड़े बड़े बूब्स और बड़ी गांड बहुत सेक्सी हैं। मेरे हसबैंड का नाम विजय हैं उनकी उम्र 29 साल हैं और वो बड़े पद पर नौकरी करते हैं। वो सुबह 9 बजे आफिस जाते हैं शाम को 6 बजे के बाद वापस घर आते हैं। उनके शनिवार संडे को छुट्टी रहती हैं तो हम उस समय बहुत एजोंय करते हैं। मेरी सेक्स लाइफ अच्छी हैं मेरे हसबैंड सप्ताह में तीन चार बार मेरे साथ चुदाई करते हैं। उनका लंड छ इंच लंबा और तीन इंच मोटा हैं। हम साथ में पोर्न देखते हैं सेक्स स्टोरी पढ़ते हैं। हसबैंड मुझे आगे पढ़ने के लिए मोटीवेट करते हैं इसलिए मैंने आगे तैयारी शुरु कर दी। फिर मैं दिन में तीन चार घंटे कोचिंग जाने लगी। मैं सुबह सुबह मार्निंग वॉक पर जाती हूं हसबैंड कभी कभार चलते हैं इसलिए मैं एक्टिवा लेकर जाती हूं। मैं हमेशा टाइट कपड़े पहनती हूं इस कारण लोग मुझे बहुत घूरते हैं। वहां मेरी फ्रेंड्स भी आती हैं और वो भी टाइट कपड़े पहनकर आती है ताकि लोग उन्हें देखे। एक बार मैं सुबह मार्निंग वॉक कर रही थी तभी मैंने नोटिस किया कि एक अंकल मुझे बहुत ज्यादा घूर रहे थे फिर जब मैं बेंच पर रिलेक्स होने के लिए बैठी तो वो मेरे पास आकर बैठ गए और बातें करने लगे। वो दिल्ली के बारे में पूछ रहे थे। मैं भी उनको बता रही थी वो बोले कि उनकी अभी यहां ट्रांसफर हुई हैं इसलिए वो ज्यादा जानते नहीं हैं। उन्होंने अपना नाम वी एस रामन बताया वो दिल्ली में एक बड़े इंस्टीट्यूट में बड़े अधिकारी थे उनकी उम्र 56 साल थी और उनकी पत्नी मुंबई में नौकरी करती हैं और फैमिली साउथ से है और वही रहती हैं। दिल्ली में वो अकेले रहते हैं। मार्निंग वॉक पर रोज उनसे बातें होने लगी उन्होंने मेरा नंबर लिया और मुझे रोज मैसेज करने लगे। फिर वो रोज मुझे फोन करते और बातें करते। फिर वो मुझे कोचिंग से घर छोड़ने लगे और हम साथ में बाहर लंच करते। वो घर छोड़ने आते तो जाते समय मेरे हाथ मिलाते। वो मुझे अक्सर महंगे महंगे गिफ्ट देते थे। एक बार उन्होंने कहा कि मालविका तुम मुझे अच्छी लगती हो तो मैंने कहा सर मैं समझी नहीं वो बोले क्या तुम मेरी फ्रेंड बन सकती हो मैंने कहा सर मैं आपकी बेटी जैसी हूं वो बोले मालविका प्यार में उम्र नहीं देखते। मैं बोली कि मैं मैरिड हूं वो बोले मैं भी मैरिड हूं पर मेरी वाइफ मुंबई में नौकरी करती हैं और साल में दो तीन बार ही मिल पाते हैं। तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो मैं तुमसे फ्रेंडशिप करना चाहता हूं। फिर वो जमीन पर घुटनों पर बैठ गए और मुझे रोज देने लगे मैंने रोज लेने से मना कर दिया तो बहुत रिक्वेस्ट करने लगे तो मैंने रोज ले लिया फिर उन्होंने मुझे एक गिफ्ट दिया तो मैंने उसे रख दिया फिर वो बोले इसे खोलकर देखो तो मैंने उसे खोला तो उसमें दो लाख रुपये थे मैंने कहा सर ये किस लिए तो कहा कि तुम्हारे लिए गिफ्ट हैं मैंने कहा इतने रुपये कि क्या जरुरत थी तो बोले कि तुम हसीना हो और तुम्हारे लिए ये गिफ्ट बहुत कम हैं। फिर बोले मैं कल तुम्हें लंच के लिए लेकर जाऊंगा। फिर वो चले गए। दूसरे दिन मैं कोचिंग से उनके साथ लंच के लिए चली गई वहां से वो मुझे शापिंग करवाने लेकर गए और महंगे कपड़े दिलवाए और सेक्सी ब्रा पेंटी भी दिलवाई। फिर वो मेरे साथ घर आए और घर आकर उन्होंने मुझे हग करके मेरे गाल पर किस किया। फिर वो बोले कि कल दिन में मैं आऊंगा तुम ये पहनकर तैयार होना मैं बोली ठीक हैं। फिर दूसरे दिन मेरे हसबैंड आफिस चले गए और मैं कोचिंग नहीं गई। दिन में एक बजे रामन सर ने फोन किया बोले तुम तैयार हो मैंने कहा हां मैं तैयार हूं वो बोले मैं आ रहा हूं मैंने कहा ठीक हैं फिर वो आधे घंटे में मेरे घर आए मैं भी सेक्सी ब्रा पेंटी और नाइटी पहनकर तैयार हो गई थी। उन्होंने घर में आते ही मुझे किस करना शुरु कर दिया। फिर हम हाल में सोफे पर बैठ गए मैं काफी बनाकर लाई और हमने काफी पी। फिर रामन सर बोले कि अब बैडरुम में चलो फिर हम मेरे बैडरुम में चले गए। रामन सर ने दरवाजा अंदर से बंद कर दिया और मुझे किस करने लगे। वो मेरे बूब्स और गांड दबा रहे थे। फिर उन्होंने कोई सेक्स टेबलेट ली और अपने कपड़े उतारने लगे वो सिर्फ अंडरवियर मैं मेरे सामने खड़े थे। उनका शरीर थोड़ा मोटा था और बहुत मजबूत था। उनका तना हुआ लंड अंडरवियर में से दिख रहा था। फिर उन्होंने मेरी नाइटी उतार दी और बोले कि मेरा लंड मुंह में लो। मैंने कहा ठीक हैं फिर मैं उनका लंड मुंह में लेकर चुसने लगी। फिर उन्होंने अपना अंडरवियर उतार दिया और नंगे हो गए। उन्होंने मुझे भी नंगा कर दिया। उनका लंड पांच इंच लंबा और तीन इंच मोटा था। उन्होंने लेपटाप पर एक पोर्न मूवी चला दी जिसमें दो काले अफ्रीकन एक गोरी लड़की की चुदाई कर रहे थे। फिर रामन सर ने मुझे बैंड पर लिटा दिया और मेरी चुत चाटने लगे। वो अंदर तक जीभ डाल रहे थे। फिर वो बैंड पर बैठ गए और मैं नीचे बैठकर उनका लंड चुसने लगी। वो मेरा सिर पकड़ कर लंड पर दबा रहे थे। पांच मिनट बाद उन्होंने मुझे बैड पर मिशनरी पोज में चोदना शुरू कर दिया वो धीरे धीरे मेरी चुदाई कर रहे थे और बोल रहे थे मालविका तुम्हारी चुत बहुत टाइट हैं। वो अपना लंड पुरा बाहर निकालते और अंदर डालते मुझे बहुत मजा आ रहा था। बार उन्होंने मुझे अपने लंड पर बैठा दिया और चोदने लगे कुछ देर बाद उन्होंने मुझे खड़ा किया और आगे से मेरी चुत की चुदाई कर रहे थे। पांच मिनट बाद उन्होंने अपना स्पर्म मेरी चुत में ही गिरा दिया और उनका स्पर्म मेरी चुत से बाहर आने लगा। मैंने स्पर्म साफ किया और बैड पर बैठ गई। रामन सर का लंड सेक्स टेबलेट के कारण तनाव हुआ था। थोड़ी देर बाद उन्होंने मुझे घोड़ी बनाया और पीछे से चोदने लगे पहले वो धीरे कर रहे थे फिर उन्होंने स्पीड बढ़ा दी और तेज धक्के लगाने लगे। मुझे दर्द हो रहा था। मैं - सर धीरे करो दर्द हो रहा हैं रामन- अभी तेरा दर्द मिटाता हूं और तेरी चुत का भौसडा बनाता हूं बार वो मेरी गांड पर अपने हाथ से मारने लगे इस कारण मुझे और दर्द होने लगा। मैं - सर धीरे करो रामन- अभी तुझे बहुत अच्छा लगेगा मैं - धीरे चोदना फिर उन्होंने स्पीड बहुत तेज कर दी और मेरी कमर पकड़ कर तेज स्पीड में मेरी चुत में धक्के लगाने लगे। मैं - आआआआआआ उहहहहहह ओओओओओओओ दर्द हो रहा हैं धीरे चोदो मुझे रामन- अब रुक नहीं सकता मेरी जान आज तुझे चोदकर तेरी चुत फाड़ दूंगा। मैं - धीरे चोदो मुझे रामन- अभी मैं धीरे करता हूं फिर उन्होंने स्पीड कम की और मेरे बूब्स को दबाने लगे फिर उन्होंने वापस स्पीड तेज कर दी मैं - आआआआआआ उहहहहहह ओओओओओओओ आईईईईईईई ओह ओह आ आ रामन- यह माय फकिंग बेब मैं - ओओओओओओओ आईईईईईईई ओह ओओओओ आहहहहह दस मिनट की चुदाई के बाद उन्होंने मेरी चुत में अपना स्पर्म गिरा दिया और बैड पर लेट गए। मैं उनके पास लेट गई। फिर वो उठे और नंगे ही किचन से चाकलेट लेकर आए और मुझे दी फिर हमने चाकलेट खाई और बातें करने लगे। फिर उन्होंने मेरी गांड में क्रीम लगाकर अंगुली डाल दी मैंने कहा गांड मत मारना तो बोले कि आज हमारी फ्रेंडशिप का सेलिब्रेशन है तो मैं मान गई। कुछ देर अंगुली करने के बाद उन्होंने अपना लंड क्रीम लगाकर मेरी गांड को चोदने लगे। टेबलेट के कारण उनका लंड तना हुआ था। मुझे गांड में दर्द होने लगा। वो पन्द्रह मिनट तक गांड चोदने के बाद मेरी गांड पर स्पर्म गिरा दिया। फिर उन्होंने कपड़े पहने और मैंने भी वापस नाइटी पहनी। उन्होंने जाते समय मुझे गिफ्ट दिया उनके जाने के बाद मैं गिफ्ट खोलकर देखने लगी उसमें तीन लाख रुपये थे। फिर मैं सो गई और शाम को पांच बजे उठकर कपड़े बदले और लोअर टी-शर्ट पहन लिए। रात में हसबैंड चोदना चाहते थे पर मैंने मना कर दिया। फिर रामन सर मुझे सप्ताह में दो तीन बार चोदने लगे और पैसे भी देने लगे। एक बार मेरे हसबैंड को पता चल गया दिन में रामन सर मेरे घर आए थे और हसबैंड भी उस दिन जल्दी आ गए उन्होंने घर के बाहर कार देगी और बाहर ही रुक गए। रामन सर के जाने के बाद वो घर आए और दो तीन बाद पूछा तो मैंने कहा कि कोई नहीं आया था तो उन्होंने अलमारी में से नाइटी निकाल कर कहा कि ये खांसने दिलवाई मैं बोली मैंने ली हैं तो कहा पहनती क्यों नहीं मैं बोली अब शुरु करुंगी तो बोले इसे तुम पहन चुकी हो बताओ किसके लिए पहनी फिर मुझे हसबैंड को सब बताना पड़ा पहले वो नाराज़ हुए बाद में मेरे बहुत मनाने पर मान गए। मैंने कहा मैं आपको मेरी फ्रेंड के साथ चुदाई करवाने दूंगी आप जो कहोगे करुंगी। फिर वो खुश हो गए। एक बार रामन सर का अमेरिका का फ्रेंड दिल्ली आया उसका नाम जैक था। सर ने मुझे भी उससे मिलवाया। दूसरे दिन सर ने कहा कि जैक तुम्हें चोदना चाहता हैं मैं बोली मैं तैयार नहीं हूं। सर बोले वो इसके लिए कुछ भी देने को तैयार हैं मैंने मना कर दिया। बार सर ने उसे फोन करके बता दिया कि मैंने मना कर दिया हैं। उसने सर को कहा कि वो दस लाख देने को तैयार हैं। सर ने कहा वो तुम्हे दस लाख देने को तैयार हैं तो फिर मैं मान गई। दूसरे दिन में दो बजे रामन सर के घर चली गई मैंने टाइट जींस और टी-शर्ट पहना था। रामन सर और जैक वहीं पर था। उसने मुझे देखा और पहले हाथ मिलाकर फिर हग किया और मुझे किस कर दिया। फिर थोड़ी देर बातें करने के बाद हमने काफी पी और रामन सर और जैक ने सेक्स टेबलेट ली फिर सर ने म्यूजिक लगा दिया और हम तीनों साथ में डांस करने लगे सर और जैक मेरे से चिपक कर डांस कर रहे थे मुझे भी मजा आ रहा था। सर मुझे किस करते हुए मेरे बूब्स और गांड दबा रहे थे जैक भी मुझे किस करते हुए मेरे बूब्स गांड दबा रहा था। फिर सर ने अपने कपड़े उतारने लगे और नंगे हो गए जैक भी नंगा हो गया उसकी उम्र 55 साल थी और उसका लंड नौ इंच लंबा तीन इंच मोटा था। फिर उन्होंने मुझे भी नंगा होने को कहा तो मैं भी अपने पुरे कपड़े उतार कर नंगी हो गई। फिर मैं बैंड पर बैठ गई सर ने मेरे मुंह में अपना लंड डाल दिया और जैक मेरी चुत चाटने लगा। वो मेरी दोनों टांगें फैलाकर चुत चाट रहा था। सर मेरा सिर अपने लंड पर दबा रहे थे मैं दोनों हाथों से उनका लंड पकड़कर चुस रही थी। मेरी चुत दो बार पानी छोड़ चुकी थी। जैक बैड पर लेट गया और डागी स्टाइल में उसका लंड चुसने लगी रामन सर ने पीछे से मेरी चुत में लंड डाल दिया। मैं जैक का मोटा लंड चुस रही थी और सर मुझे चोद रहे थे वो मेरी गांड पर मारते हुए मुझे चोद रहे थे। जैक - आहहह को आआआ ओओओ आहहह उसे लंड चुसवाने में मजा आ रहा था। पांच मिनट चुदाई के बाद सर ने मेरी चुत में ही स्पर्म गिरा दिया। जैक ने भी मेरी मुंह में स्पर्म गिरा दिया मेरा मुंह जैक के स्पर्म से भर गया वो बोला इसे पी जाओ मैं उसका स्पर्म पी गई। फिर हम बैठकर बातें करने लगे। थोड़ी देर में जैक ने मुझे मिशनरी पोज में लिटा दिया और चोदने लगा उसका लंड बहुत बड़ा था तो मुझे दर्द हो रहा था पर जैक बहुत तेज स्पीड से चुदाई कर रहा था। पांच छः मिनट इस पोजीशन में चोदने के बाद वो नीचे लेट गया मैं उसके लंड पर बैठ गई और चुदवाने लगी रामन सर ने मेरे मुंह में अपना लंड डाल दिया मैं उसका लंड चुसने लगी। थोडी देर बाद जैक ने मुझे डागी स्टाइल में किया और तेजी से चोदने लगा मुझे उसके बड़े लंड के कारण दर्द हो रहा था। रामन सर मेरे मुंह में लंड डालकर मेरे मुंह में लंड को दबा रहे थे। कुछ देर बाद जैक ने मेरी चुत में स्पर्म गिरा दिया तो रामन सर ने मेरे मुंह से लंड निकालकर चुत में डाल दिया और चोदने लगे तीन चार मिनट बाद उन्होंने भी मेरी चुत में स्पर्म गिरा दिया मेरी चुत स्पर्म से भर गई थी जब मैं खड़ी हुई तो उनका स्पर्म मेरी चुत से बाहर आने लगा मैं बाथरुम गई और स्पर्म साफ करके आई। फिर हमने चाकलेट खाई और रामन सर बोले कि आज तुम्हें मजा आ गया मैंने कहा सर मुझे दर्द भी हो रहा हैं। वो बोले दर्द में मजा भी आता हैं। थोड़ी देर बाद सर बैड पर लेट गए और मुझे अपने लंड पर बैठा दिया जैक ने मेरी गांड पर क्रीम लगाई और अपने लंड पर क्रीम लगाकर मेरी गांड में डाल दिया मुझे बहुत दर्द होने लगा तो वह कुछ देर रुका फिर अंदर बाहर करने लगा। रामन सर नीचे से चुत में धक्के लगा रहा था। कुछ देर बाद जैक ने मुझे गोद में उठाया और सामने से खड़े खड़े मेरी चुत में लंड डालकर चोदने लगा इस पोजीशन में मुझे बहुत मजा आ रहा था। कुछ देर बाद उसने मुझे घोड़ी बना दिया और पीछे से चोदने लगा वो मेरी कमर पकड़ कर तेज स्पीड से चोद रहा था और रामन सर बैड कर बैठकर मुझे अपना लंड मुंह में देकर चुसवा रहे थे जैक मेरी गांड पर मार रहा था और मुझे बहुत दर्द हो रहा था। इस तरह दस मिनट की लगातार चुदाई के बाद जैक ने मेरी चुत में स्पर्म गिरा दिया और रामन सर ने मेरे मुंह में स्पर्म गिरा दिया मैं उनका स्पर्म पी गई। फिर हम तीनों बैंड पर लेट गए और हमें नींद आ गई शाम को पांच बजे हम उठे। जैक ने मुझे गोद में उठाया और रामन सर ने मेरी चुत में लंड डाल दिया और जैक ने खड़े खड़े मेरी गांड में लंड डाल दिया वो मुझे खड़े खड़े चोद रहे थे मेरी चुत और गांड में दो लंड एक साथ घुस रहे थे। पन्द्रह मिनट तक चोदने के बाद उन्होंने मुझे ज़मीन पर बैठाया और मेरे मुंह पर अपना स्पर्म गिरा दिया। फिर मैं नहाने चली गई जैक और रामन सर भी मेरे साथ बाथरुम में आ गए नहाने के बाद मैं टावल में बैडरुम में आ गई। जैक ने कहा एक बार और चोदना है मैंने कहा मेरे हसबैंड आने वाले हैं। वो बोला मुझे चोदना हैं तो मैंने हसबैंड को फोन करके कहा कि आप मेरे लिए शापिंग माल से नाइटी लेकर आना वो मेरे लिए नाइटी लेने के लिए आफिस से शापिंग माल चले गए अब वो दो घंटे बाद आने वाले थे। जैक ने मेरा टावल हटाया और मुझे खड़ी करके आगे से चोदने लगा और रामन सर पीछे से मेरी चुत में लंड डालने लगे अब मेरी टाइट चुत में दो लंड एकसाथ अंदर बाहर हो रहे थे उन्होंने मेरी चुत में क्रीम लगाई और अपने लंड पर भी क्रीम लगाकर तेजी से एकसाथ अंदर बाहर करने लगे दस मिनट तक इस तरह चोदने के बाद जैक ने मुझे बैंड पर डागी स्टाइल में किया और तेज स्पीड से चोदने लगा उसने दस मिनट चोदने के बाद स्पर्म मेरी चुत में गिरा दिया। फिर रामन सर ने भी दस मिनट तक मुझे घोड़ी बनाकर चोदा और मेरी चुत में स्पर्म गिरा दिया। फिर जैक ने मुझे दस लाख रुपये दिए फिर वो दोनों कपड़े पहनकर चले गए। रात में हसबैंड आए तो उन्होंने पूछा क्या हुआ इतना थकी हुई क्यों हो तो मैं बोली कि आज काम ज्यादा था। फिर उस रात मैंने हसबैंड को चोदने नहीं दिया। मेरी चुत और गांड में दर्द हो रहा था। उसके दस दिन बाद मैंने हसबैंड को चोदने दिया। anubabita1@hotmail.com
Antarvasna Sex Stories

मेरी नौकरी शहर में लगने Antarvasna Sex Stories के कारण मेरे भैया ने मुझे शहर में बुला लिया था। मैं एक प्राईवेट संस्था में था जबकि भैया एक फ़ेक्ट्री में ऊंचे पद पर थे। मैं गांव से शहर आ गया था। भाभी ने मुझे अपने घर में बहुत ही प्यार से रखा था। मेरी शादी की बात चल रही थी। लड़की गुजरात से थी, उसका नाम प्रेरणा था। उसकी फोटो तो बहुत ही आकर्षक थी। अक्सर भाभी मुझे लड़की के बारे में कुछ कह कर छेड़ती रहती थी। यूं तो देवर भाभी की मजाक तो चलती ही रहती थी पर उस लड़की का जिक्र आते ही जाने क्यूँ मेरे मन में कोमल भावनायें जाग जाती थी। कितनी बार तो यह सोच सोच कर ही लण्ड खड़ा हो जाता था कि जब मैं उसे अपने नीचे दबा कर चोदूंगा तो कैसा लगेगा, उसकी चूंचियाँ दबाऊंगा तो…. मेरे दिल में इस तरह के विचार आते रहते थे। कभी कभी तो ऐसा लगने लगता था कि काश एक बार भाभी मान जायें तो मैं भी चोदने का मजा भरपूर ले लूँ। बहुत पहले मेरी पास ही रहने वाली पड़ोसन ने मुझे पटा कर चुदवाया था तब मुझे बहुत मजा आया था। पर वो कुछ ही दिन बाद दूसरे शहर चले गये थे। पर वो पड़ोसन मुझे चोदने का एक चस्का लगा गई थी।

मुझे अब भाभी से सेक्स की बाते करने में बहुत मजा आता था। भाभी भी रस ले लेकर सेक्स की बातें करती थी। अक्सर मुझसे भाभी प्रेरणा के बारे में पूछती रहती थी। मुझे मुझे ऐसा मह्सूस भी होता था कि भाभी शायद मुझे पटाना चाहती हैं क्योंकि वो आजकल अपने नीचे गले के ब्लाऊज पहनने लग गई थी। जिसमें से उनकी चूंचियां छलकी पड़ती थी। उनके गोल गोल मस्त उभार मुझे बेचैन कर देते थे। पर वो हमेशा अपने को इससे अन्जान दर्शाया करती थी। मेरा लण्ड कई बार कड़क उठता था। अब तो भाभी का अंग अंग मुझे चुदने को बेताब लगता था। पर ये सब शायद मेरे मन का भ्रम था। वो सब इससे अनजान ही थी। बस मुझे छेड़ने के लिये मुझसे ऐसी बाते करती थी, जाने यह सच था या नहीं ?

मैंने अब कई बार भाभी से पूछा भी था कि भाभी सुहाग रात कैसी होती है, उसमें क्या करते हैं।

भाभी कहती थी कि समय आयेगा तब तुम खुद ही सीख जाओगे। मैं भाभी को खोलने में प्रयास रत था। यह भी पूछ लेता था कि मुझे कुछ तो बताओ ना…. रात को क्या क्या करते हैं।

भाभी मुझे यूँ ही टाल देती थी कि सब बाद में बताउंगी, थोड़ा सबर रखो।

उन दिनों भैया कुछ दिनों के लिये लखनऊ गये हुये थे। आज तो भाभी की उत्तेजक सेक्स की बातें मुझे रात को सोच सोच कर नींद नहीं आ रही थी। मन बहुत बेचैन हो रहा था। मेरा लण्ड रह रह कर कड़क उठता था और मेरा पजामा तम्बू बन जाता था। मुझे लगता कि यदि भाभी चुदने के राजी हो जायें तो मेरा पूरा रस ही उनकी चूत में उतार दूँ। मेरा मन डोल उठा, जाने मेरे मन में क्या आया कि मैं चुपके से भाभी के कमरे की ओर बढ़ गया।

दरवाजा हमेशा की तरह खुला हुआ था। धीमी लाईट जल रही थी। भाभी एक पेटीकोट में सो रही थी जो अभी काफ़ी ऊपर उठा हुआ था। ब्लाऊज की जगह एक ढीला सा टॉप पहना हुआ था। मेरा लण्ड बहुत ही अधीर हो उठा था, पर मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी। मैंने अपना साहस बटोरा और कमरे में कदम रखा। तभी भाभी ने करवट ली, मेरी सांसे जैसे अटक गई। लण्ड ठण्डा सा होने लगा। पर कुछ ही पलों में मेरा लण्ड फिर से खड़ा होने लगा।

मैं भाभी के पलंग के पास आ गया, भाभी की चिकनी मांसल और गोरी जांघें कुछ हद तक दिख रही थी, उनके स्तन भी दोनों बाहों के बीच में भिंच कर बाहर आने को बेताब थे। मेरे हाथ बरबस ही उनकी जांघों पर आ गये और उन्हें सहलाने लगे। भाभी थोड़ी सी कसमासाई और दूसरी तरफ़ करवट ले कर सो गई। पेटीकोट फिर थोड़ा सा और उठ गया, मैंने नीचे झुक कर पेटीकोट के अन्दर झांका तो पीछे से उनकी चूत के दर्शन हो गये। मैं तो आंखे फ़ाड़े चूत को देखता ही रह गया।

“राजू, अरे वहां तू क्या कर रहा है….?” भाभी नींद से जाग गई थी, मैं घबरा गया।

“नहीं …. कुछ नहीं भाभी …. वो चू…. चू…. मेरा मतलब कोई कीड़ा था, हटा दिया मैंने !” मेरी मुख सूखने लगा था। पसीना छलक आया था।

“आ जा बैठ जा…. कुछ काम था क्या….”

“नहीं वैसे ही आ गया था।”

” मुझे तो नींद आ रही है…. तू भी मेरे पास ही लेट जा…. और जो तुझे कहना कह डाल !” भाभी ने फिर से दूसरी ओर करवट ली और पांव पसार कर लेट गई। भैया की जगह मैं लेट गया।

“चल लाईट बन्द कर दे …. और बता …. नींद नहीं आ रही है क्या?”

मैंने लाईट बन्द कर दी और भाभी की बगल में लेट गया। मैं भाभी को हल्के अंधेरे में देख रहा था। मेरा लण्ड फिर से तन उठा। कुछ देर तक तो मैं बेचैन सा रहा, फिर ना जाने मुझे क्या हुआ…. मैंने अपना सयंम खो दिया और पीछे से भाभी से लिपट पड़ा। भाभी इस अचानक हमले से घबरा गई। पर जल्दी ही सब समझ गई।

“राजू, क्या कर रहा है…. देख मैं तेरी भाभी हूँ ….!” भाभी ने कसमसाते हुये कहा।

“प्लीज भाभी, मुझसे रहा नहीं जाता है…. आप बहुत प्यारी लगती हैं…. !” मैं हांफ़ता हुआ बोला। मेरे दिल की धड़कन तेज हो उठी थी, भाभी की चूंचियाँ दोनों हाथों से दबा डाली। भाभी कराह उठी।

“अरे छोड़ मुझे …. चल हट जा….!” भाभी मुझे हटाती हुई कहने लगी। पर मुझे कहाँ होश था। भाभी जैसे ही मेरी तरफ़ पलटी, मैंने उनका पेटीकोट ऊंचा कर दिया और अपना लण्ड निकाल कर उनकी चूत पर दबा दिया। भाभी के चूतड़ बुरी तरह से दबा कर अपने लण्ड की ओर खींच लिया। मैं भाभी से लिपट पड़ा और अपना लोहे जैसा लण्ड चूत के आस पास मारने लगा। एक बार तो लण्ड चूत में घुस भी गया था पर भाभी ने एक झटके से उसे निकाल दिया। तभी मुझे एक तमाचा मार दिया। भाभी तमतमा उठी।

“साला जंगली ….! शरम भी नहीं आती …. इतनी चोट लगा दी !” तमाचा पड़ते ही मुझे जैसे होश आ गया और मैं भाभी के ऊपर से हट गया। मैंने शरम के मारे अपना मुख छुपा लिया।

मेरी आंखों में आंसू निकल आये। भाभी ने हाथ बढ़ा कर लाईट जला दी…. मुझे रोता देख कर उन्हें दया भी आई।

“तू यह क्या करने लगा था…. भला ऐसे भी कोई करता है?” भाभी ने प्यार से मुझे झिड़का। मैं उठ कर जाने लगा ।

“भाभी, माफ़ कर देना, मन में पाप आ गया था….” मैंने रोते हुये कहा। फिर मैं अपने आप ही ग्लानि में डूब गया और भाभी के कमरे से भाग कर अपने कमरे में आ गया। मेरे दिल में धुकधुकी लगी हुई थी कि अब जाने भाभी क्या करेंगी और मुझे मार पड़ेगी। मुझे अपनी नई नौकरी छोड़ कर वापस जाना पड़ेगा। मैं सबकी नजरों में गिर जाऊंगा …. मैं अनायास ही फ़फ़क कर रो पड़ा- हाय मैंने ये क्या कर दिया।

तभी भाभी कमरे में आ गई। मुझे रोता देख कर भाभी ने हाथ पकड़ कर मुझे पलंग पर ही बैठा लिया। “तू तो पागल है…. रो मत …. मर्द कभी रोते हैं …. ?” भाभी ने मेरे सर को अपनी छातियों में भींच लिया, जानकर के अपनी चूंचियों में मेरा चेहरा दबा दिया और बालो में हाथ फ़ेरते हुये बोली,”राजू, मैं तुझे इतनी अच्छी लगती हूँ….?” भाभी ने जैसे मुझे प्यार से बहलाया।

” हां भाभी, आप मुझे बहुत प्यार करती हैं ना…. बस दिल में पाप आ गया….!” उनकी छाती ने मेरा मन फिर से विचलित कर दिया। अपना चेहरा मैं धीरे धीरे उनके स्तनो से रगड़ने लगा। यह मन भी बहुत अजीब है …. अभी ग्लानि से भरा हुआ था अब फिर से वासना छाने लगी थी।

“आह…. तुम फिर से देखो कुछ कर रहे हो ना …. राजू तुम सुधरोगे नहीं !” भाभी ने एक तड़प भरी आह सी भरी। मैंने अपना चेहरा ऊपर उठाया तो भाभी ने आंखें बन्द कर रखी थी। उनका वासना से भरा चेहरा देख कर मेरा डोल उठा। अनायास ही मेरे होंठ भाभी के होंठों से चिपक गये। इस बार भाभी ने मेरे मुँह को अपने होंठों से भींच लिया और प्यार करने लगी। वो सिसक उठी,”अरे पागल…. भाभी तो तेरी ही हूँ ना…. सभी कुछ प्यार से नहीं कर सकता है क्या…. देख तूने मुझे चोट लगा दी…. फिर वहां से भाग के भी आ गया !” भाभी ने शिकायत की।

“भाभीऽऽऽऽ, आप तो गुस्सा हो रही थी ना….?” मेरा मन अब खुशी से भर उठा था।

“हां जंगलीपने से नाराज हो रही थी…. ऐसे ही प्यार से कर ना….तुझे भी मस्ती आयेगी और मुझे भी सुख मिलेगा !” मेरा मन हल्का हो गया। मन में खुशी भरने लगी। मेरा बदन अब वासना से भरने लगा था। लण्ड ने एक बार फिर से अंगड़ाई ली और सीधा खड़ा हो गया। जैसे कि ग्रीन सिग्नल का इन्तज़ार कर रहा हो।

“भाभी सच में आप बहुत ही अच्छी हैं…. आप जैसा कहेंगी वैसा ही करूंगा !” मैंने प्यार से भाभी की चूंचियां सहलाते हुये कहा। जीभ से बार बार भाभी के होंठो को चाट लेता था। भाभी की मस्त चूचियाँ कड़ी हो रही थी, चुचूक भी कठोर हो चुके थे।

“देवर जी, शरम आती है …. कहूँ क्या…. आप मेरी नीचे वाली को प्यार करेंगे?” भाभी वासना भरी आवाज में सकुचाते हुये बोली।

मुझे अब बदन में सनसनी सी होने लगी थी। मुझे भाभी की चूत देखने की तीव्र इच्छा होने लगी थी। भाभी के इस इशारे ने मेरा मन मोह लिया और मैंने भाभी का पेटीकोट ऊपर कर दिया और नीचे साफ़ और चिकनी चूत के पास अपने अधरों को धीरे से लाकर चूमने लगा। चूत में से एक महक आ रही थी, जैसे कि मुझे पास बुला रही हो, बुलावा स्वीकार कर के मैंने चूत को भी प्यार किया, दाना भी मुँह में लेकर चूसा। फिर जीभ चूत में घुसा कर नमकीन रस का आनन्द लेने लगा। भाभी ने अपना पेटीकोट ऊपर से खींच कर उतार दिया। मैंने भी अपना पजामा उतार दिया। वो अपनी चूत को धीरे धीरे आगे पीछे करके पूरा आनन्द ले रही थी। मेरी जीभ भी लपलपा कर सारी चूत को चाट रही थी।

फिर भाभी ने मुझे कहा,”देवर जी आपके केले में कितना रस भरा है…. जरा मुझे चखाओ ना….!” भाभी ने मेरे मोटे कड़क लण्ड की ओर इशारा किया। ये सब मैं पहली बार कर रहा था इसलिये एक नया मजा आ रहा था। मैंने अपना लण्ड देखा और पूछा,”भाभी…. साफ़ कहो ना …. क्या करना है….” मेरा लण्ड रह रह कर कड़क रहा था। भाभी ने अंगुली हिला कर मुँह में डाल दी। मैं शरमा गया। मैं धीरे से उठा और अपना लण्ड भाभी के मुख के पास ले गया। भाभी ने मेरे चूतड़ पकड़ कर अपनी ओर खींच कर लण्ड अपने मुँह में ले लिया। होंठो का नरम सा अहसास, जीभ की गुदगुदी मेरे सुपाड़े को आनन्द देने लगी। मेरा लण्ड और फ़ूल उठा।

भाभी ने मेरे लण्ड का डण्डा थाम कर पूरा सुपाड़ा मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगी। मेरे लण्ड में जैसे आग लग गई। मेरे चूतड़ आगे पीछे हो कर उनका मुँह चोदने लगे। मुझे बहुत ही मजा आने लगा,”भाभी…. आप सच में बहुत प्यारी हैं …. अब मुझे चोदने दो ना….!”

मेरी सीत्कार बढ़ गई थी। भाभी को भी चुदने की लगी थी, सो उन्होंने मुझे ऊपर से हटाया और अपनी दोनों टांगें ऊंची करके आंखें बंद करके चुदने का इन्तज़ार करने लगी।

जैसे ही मेरा लण्ड और भाभी की चूत मिली लगा आग से आग मिल कर और भड़क उठी…. लन्ड चूत को चीरता हुआ अन्दर जाने लगा और आग से जैसे पानी बरसने लगा…. दोनों मिलते ही जैसे एक दूसरे को निगलने लगे। मेरा लण्ड वासना भरी मिठास से भर उठा, और चूत मेरे लण्ड को जैसे लपेटने लगी। मुझे जैसे होश ही नहीं रहा। चूतड़ ऊपर उठ कर आगे पीछे चूत पर रगड़ खाने लगे। लण्ड जोर से अन्दर जाता और फिर बाहर आकर फिर से अन्दर जा कर अपना सर पटकता। भाभी सीत्कारें भरने लगी। मेरी भी सिसकारियाँ निकल पड़ी जैसे कि कमरे में कोई घमासान छिड़ा हुआ हो। भाभी ने मुझे कस कर लपेटा और मुझे नीचे धकेल कर खुद ऊपर आ गई और मेरे ऊपर चढ़ बैठी। ऊपर से भाभी ने बैठे बैठे ही एक जोरदार शॉट मारा और खुद ही चीख पड़ी। लण्ड को पूरा मजा आ गया था। भाभी की चूत में लण्ड गहरा बैठ गया था, शायद अन्दर तक चूत फ़ाड़ कर लण्ड का साईज़ ले लिया था। भाभी का ऐसा ही दूसरा धक्का आया और फिर से चीख उठी…. अरे ये तो आनन्द भरी चीख थी। मेरा लण्ड अन्दर तक ठूंस ठूंसकर ले रही थी, उसमें ही उनको मजा आ रहा था। उनके लगातार जोर से मचल मचक कर लण्ड लेने से मैं भी अति उत्तेजित हो गया था।

“देवर जी, अरे इतने दिन कहाँ रहे थे…. मेरी तो लगता है आज ही इच्छा पूरी हुई है !”

“भाभी…. और मारो ना झटके …. हाय मुझे तो देखो क्या हो रहा है…. और मारो चूत को!”

“साले, अब तो तुझे रोज ही चोदा मारुंगी…. हाय रे क्या लण्ड है…. खींच मेरी चूंची को खींच दे रे !” भाभी मस्ती में झूम रही थी। चुदने का पूरा मजा ले रही थी। मुझे भी ऐसा जोरदार मजा कभी नहीं आया था। अचानक भाभी मुझसे लिपट गई और चूत का पूरा जोर लण्ड पर लगाने लगी। जोर लगाते लगाते उनके मुँह से आह निकलने लगी और उनके होंठ मेरे होंठो से जोर से चिपक गये। इसका असर चूत पर हुआ और और उसमें लहरें चलने का अहसास होने लगा। वो बार बार चूत का जोर लण्ड पर लगाती और आह रे …. पानी छोड़ने लगी। भाभी झड़ रही थी।

मैं भी अपना लण्ड को चूत में पूरा घुसेड़ कर दबाने लगा और फिर अन्दर ही लण्ड ने अपना रस छोड़ दिया। अब हम दोनों आपस में जोर लगा कर अपना अपना वीर्य निकालने में लगे थे। भाभी मुझसे लिपटी हुई पड़ी थी और मैंने उन्हें अपनी बाहों में लपेट रखा था। दोनों ही अभी भी झड़ रहे थे, दोनों के चूतड़ एक दूसरे के चूत और लण्ड दबा रहे थे और अपना पूरा माल निकालने में लगे थे।

भाभी और मैं, दोनों ही नंग धड़ंग एक दूसरे से चिपके हुये बिस्तर पर पड़े हुये थे। कुछ ही देर में भाभी के खर्राटो से पता चल गया कि वो सो गई हैं। मुझे पूर्ण सन्तुष्टि हो चुकी थी, भाभी भी निहाल हो कर सो चुकी थी। मैंने भाभी के नंगे शरीर को देखा और मुस्करा उठा…. अब ये बदन मेरा था…. । मैं बिस्तर से उतरा और एक पतली साफ़ चादर भाभी के शरीर पर डाल दी और स्वयं कपड़े पहन कर सोफ़े पर जाकर सो गया। Antarvasna Sex Stories

पहले भाग से आगे : Sex Stories

अंकल उठकर Sex Stories पलंग के पास सोफा कुर्सी पर बैठ गए। मौसी ने मेरी चूत पे हाथ फिराया और बोली- तेरी मुनिया तो बड़ी चकाचक हो रही है। बड़े आराम से लेटी हुई है, लगता है जैसे कि हनीमून के मज़े ले रही हो ! चल उठ और धंधा कर साली ! जब तक तेरी मुनिया बुरी तरह से सुजेगी नहीं, तब तक चुद ! उसके बाद तुझे खुद ही नींद आ जाऐगी। चल उठ और ग्राहक के लिए ग्लास बना। मैं खड़ी हो गई। जानी पलंग पर बैठ गया।

मौसी मुस्कराई और अंकल से बोली- यह जानी है ! विदेशी हथियार की स्मगलिंग करता है, तुम्हारे साथ धंधा करना चाहता है ! क्यों पसंद है?

मेरी चूत और गांड में दर्द हो रहा था। मैं लंगड़ाते हुए चल रही थी। मैंने तीन ग्लास में दारू की बोतल से दारू डाली और एक एक अंकल मौसी और जानी की तरफ बढ़ा दिए। जानी कामुक नज़रों से मुझे देखे जा रहा था। उसने मेरे चूतड़ों पर दो तीन बार हाथ भी फेर दिया था। मौसी ने हम दोनों रंडियों को आँख मारी। मौसी ने मेरे को जानी की सेवा करने का इशारा किया। मोंटी अंकल नंगे थे ही ! शोभा मोंटी साहब का लंड चूसने लगी। मैंने पैंट खोल कर जानी का लंड निकाल लिया और चूसने लगी। जानी और मोंटी कुछ कोड भाषा में बातें करने लगे। कुछ देर बाद दोनों काफी खुश नज़र आ रहे थे, उनकी धंधे की बातें ख़त्म हो गई थीं जानी ने एक पांच की गद्दी मौसी को दी और बोला- मौसी तुम्हारा इनाम।

दोनों के लंड चूसने से खड़े हो गए थे।

मोंटी और जानी में कुछ इशारों इशारों में बात हुई। अंकल ने शोभा को उठा दिया और मेरे पीछे आकर मेरी चूत में अपना लंड घुसा दिया। अब मैं कुतिया बनी बिस्तर पर बैठे जानी का लंड चूस रही थी और अंकल मेरी पीछे से चूत मार रहे थे। मुझे बड़ा दर्द हो रहा था, मौसी मुस्करा रही थी और चिल्ला रही थी- अंकल, साली को आज इतना चोदना कि ये दस दस लंड आगे से एक रात में खा सके। टॉप की रंडी बनाना है मुझे इसको। कुछ देर बाद अंकल ने अपना लंड मेरी चूत से निकाल लिया। अंकल का लंड लोहे की राड की तरह खड़ा हुआ था। जानी ने भी अपना लंड निकाल लिया था। जानी ने मुझे उठाया और पलंग पर उल्टा करके मोटा लंड मेरी गांड में घुसा दिया अंकल ने मेरी गांड पहले ही फाड़ रखी थी इसलिए एक झटके में जानी का पूरा लंड मेरी गांड में घुस गया था।

मैं चिल्ला रही थी, जानी ने मेरी गांड में जोर के 10-15 शोट मारे उसके बाद जानी नीचे था और मैं उसके ऊपर सीधी लेटी थी उसने अपना लंड मेरी गांड में घुसा रखा था। उसने मेरी टाँगें फ़ैला दी और नीचे से धीरे धीरे गांड में धक्के मारने लगा। अंकल अपना लंड पकड़े सामने मुस्करा रहे थे। उन्होंने मेरी चौड़ी टांगों के बीच अपना सुपारा रख दिया और मेरी चूत में ऊपर से अपना लंड पेल दिया। अब मेरी गांड और चूत दोनों में लंड घुसे हुए थे, मैं जोर जोर से चिल्ला रही थी।

मौसी ताली बजा रही थी और बोल रही थी- अंकल, मज़ा आ गया ! वाकई साली कुतिया लग रही है ! चोद साली को ! याद रखेगी कि मौसी के कोठे पर चुदी थी !

मेरी गाड़ी बनी हुई थी, मेरे दोनों छेदों में लंड सरपट दौड़ रहे थे। अब मुझे पता चल रहा था कि कोठे की चुदाई क्या होती है। मैं अब पूरी तरह से कोठे की कुतिया बनी हुई थी। दस मिनट दोनों ने एक साथ मेरी चूत और गांड बजाई उसके बाद जानी ने मेरी चूत में और अंकल ने मेरी गांड में लंड घुसा कर मुझे सैंडविच बनाया और दुबारा मुझे दस मिनट तक चोदा। मौसी मेरी चुदाई का आनंद सिगरेट पीते हुए ले रही थी। इसके बाद दोनों ने एक एक करके पानी मेरी चूत में छोड़ दिया। मैं बिस्तर पर लुढ़क गई थी, मेरी चूत अब बुरी तरह से सूज रही थी और गांड भी बहुत दुःख रही थी।

रात के चार बज़ रहे थे। मौसी, जानी और मोंटी दारू पीने लगे, थोड़ी देर बाद दोनों नशे में झूम रहे थे। जानी मौसी से बोला- मौसी, साली की चूत कितनी सुंदर है, सूजी हुई तो और सुंदर लग रही है, एक चुम्मा लेकर आता हूँ !

जानी उठा और उसने मेरी चूत पे एक चुम्मा लिया और बोला- मोंटी साले, चुम्मा ले ! क्या स्वाद आता है !

मोंटी ने भी उठ कर एक चुम्मा मेरी चूत पर लिया। दोनों फिर मौसी के पास जाकर बैठ गए, इस तरह 10-12 बार उन्होंने कभी मेरी चूत पर कभी चुचकों पर चुम्मे लिए। कुछ देर बाद दोनों बोले- मौसी बजा तो बहुत लिया पर बजते हुए नहीं देखा। कुछ ब्लू सीन बनवाओ और जानी ने एक 100 की गडी मौसी के हाथ में दे दी। अंकल और जानी मेरे गले में हाथ डालकर बिस्तर पर बैठ गए। मौसी ने सोफा बिस्तर के पास खींच लिया। दोनों मेरी एक एक चूची पकड़े हुए थे और मसल रहे थे।

मौसी ने कमरे की घंटी बजा दी और राजू को कुछ कहा। थोड़ी देर में राजू, कालू, भूरा और टीनू कमरे में थे। मौसी उठी और शोभा से बोली- चल नंगी हो ! तेरी चुदाई का मुजरा कराती हूँ !

थोड़ी देर में शोभा पूरी नंगी थी।

मौसी गुंडों से बोली- अब तुम सब सोफे पर इसकी गाड़ी चलाओ !

राजू सोफे पर जाकर बैठ गया। उसका लंड कुतुबमीनार की तरह खड़ा हुआ था, शोभा उसके लौड़े के ऊपर जाकर बैठ गई और पूरा लौड़ा अपनी चूत में घुसवा लिया। राजू सोफे पर उछल उछल कर उसकी चूत चोदने लगा और उसकी गांड का छेद दोनों ऊँगली से चौड़ा कर दिया, जिसमें पीछे से भूरा ने अपना लंड घुसा दिया।

अब शोभा को राजू और भूरा साथ साथ चोद रहे थे। शोभा की ऊहं आह से कमरा गूंज रहा। शोभा पुरानी रांड थी, मज़े ले ले कर चुद रही थी और ऊहं आह की आवाज़ निकाल रही थी। शोभा का मुँह सोफे से बाहर निकल रहा था। टीनू ने पीछे जाकर अपना लौड़ा शोभा के मुँह में डाल दिया और उसे चुसवाने लगा। शोभा की चूत गांड और मुँह में धक्के जोरों से चल रहे थे। कालू अपना लंड निकाल कर सहला रहा था।मौसी ने शोभा का एक हाथ खींच कर कालू का लंड शोभा के हाथ में पकड़ा दिया दिया। चार चार लौड़ों से शोभा खेल रही थी। जानी ने मुझे पलंग पर अपने लौड़े पर बैठा लिया। अंकल ने मेरे हाथ में अपना लौड़ा पकड़ा दिया। मैं बेहोशी की सी हालत में थी और अंकल का लौड़ा धीरे धीरे मसल रही थी। अंकल ने पलंग पर खड़े होकर मेरे बाल जोर से खींच डाले और चिल्लाये भोसड़ी की, तुझे बड़ी नींद आ रही है? साली अभी तुझे भी इस रांड की जगह बैठाता हूँ ! ले पहले मेरा लौड़ा चूस।

उन्होंने मेरे मुँह में अपना लौड़ा ठूंस दिया। शोभा की गाड़ी जोरों से चल रही थी, गुंडे बार बार जगह बदल कर शोभा को चोद रहे थे। शोभा की चुदाई देखकर अंकल और जानी गरम हो रहे थे, उनके लंड मेरे मुँह और चूत में दौड़ रहे थे। कमरे की सारी लाइट जल रही थी और कमरा रौशनी से भरा हुआ था।

थोड़ी देर बाद अंकल और जानी ने अपने रस एक एक करके मेरे मुँह में उतार दिए और नशे में झूमते हुए कोठे से बाहर चले गए।

सुबह के पाँच बज़ रहे थे लेकिन मेरी तो अभी गाड़ी और बजनी थी। मौसी जाते जाते राजू से बोली- मैं तो सोने जा रही हूँ राजू, कालू को बुला ला और इसे बजाना हो तो तुम दोनों बजा लो ! जब से यह नई रांड आई है अपने लंड सहला रहे हो। जितना मन हो उतना चोदो कुतिया को, रांड तो अब यह बन ही गई है लेकिन नीचे मेरे पास वाले कमरे में चोदना।

राजू मुझे गोद में उठाकर नीचे कमरे में ले आया, जहाँ जमीन पर पुराने गद्दे पड़े हुए थे। थोड़ी देर में कालू भी उधर आ गया, राजू ने पीछे से मेरी फटी गांड में लंड घुसा दिया और कालू ने आगे से मेरी चूत में लंड डाल दिया। मैं अधमरी हालत में दोनों से चुदने लगी सुबह सात बजे तक दोनों ने मुझे बुरी तरह से नोचा और चोदा, उसके बाद मैं गहरी नींद में सो गई।

अगले दिन रात को नौ बजे मेरे चूतड़ों पर मौसी ने जोर से हाथ मारा और बोली- रंडी रानी ! उठ जाओ और कितनी देर तक लेटोगी।

मैं घबरा कर उठ गई। मौसी बोली- थोड़े कपड़े पहन लो और खाना खा लो।

मुझसे उठा नहीं जा रहा था, किसी तरह मैं उठी और मौसी से बोली- मौसी, मुझे वापस भेज दो !

मौसी मुस्कराई और बोली- वापस जाकर क्या करोगी? अभी तो तुम चल भी नहीं पा रही हो, ऊपर से तुम्हारी चूत और सूज रही है ! थोड़ी ठीक हो जाओ तब जाना। चल अच्छा फ्रेश हो, फिर बात करती हूँ।

किसी तरह मैं उठी और खाना खाया। उसके बाद दुबारा सो गई। मुझे काफी थकान महसूस हो रही थी। खा पीकर मुझे नींद आ गई। अगले दिन सुबह दस बजे मौसी आई उनके साथ छोटा खलील भी था। मौसी बोली- क्यों, बॉम्बे नहीं जाना है। ये छोटा खलील बॉम्बे जा रहा इसकी गाड़ी में चली जा। तुझे अपनी चंपा बार में नचवाएगा। नाच भी करियो और धंधा भी बहुत मज़ा आएगा। साले ने तुझे 5 लाख में खरीदा है।

छोटा खलील मुस्करा रहा था, मौसी से बोला- मौसी, दो घंटे साली को चोद लूँ फिर डालकर ले जाऊंगा।

मौसी मुस्कराई और बोली- लोंडी अब तेरी है दो क्या दस घंटे चोद ! तेरे गुरु मोंटी ने कल इसकी गांड और चूत दोनों सुजा दी हैं।

खलील मुस्कराया और उसने मेरी चुदाई शुरू कर दी। खलील ने दो बार मेरी चूत और दो बार मेरी गांड मारी। साथ ही साथ बोला- हरामजादी मौसी ने भी एक दिन में अच्छी खासी चूत का भोंसड़ा बना दिया है, डांस शो में कितना मज़ा आ रहा था तेरी मारने में और आज तेरी भोंसड़ी बनी हुई है।

बारह बजे तक उसने चोद चोद कर मुझे अधमरा कर दिया था। उसके बाद उसने मुझे गाड़ी में बांधकर डाला और मुंबई लेकर चल गया।

खलील ने मुझे चंपा बार में नाचने के लिए छोड़ दिया। मजबूर होकर मुझे यहाँ नाचना पड़ा। रात बारह बजे तक नाचती थी। उसके बाद एक-एक घंटे की मेरी चार बुकिंग होती थीं और सुबह छः बजे तक मैं चुदवाई जाती थी।

चार दिन बाद खलील और उसका एक साथी मुझे और दो लड़कियों को मस्ती के लिए खंडाला ले जा रहे थे, रास्ते में एक जगह गाड़ी रोककर सब लोग दारू पीने लगे और हम लड़कियों से अपने लंड चुसवाने लगे। थोड़ी देर बाद दूसरी पार्टी के लोग आ गये और गोलीबारी शुरू हो गई। खलील और उसके साथी को गोली लगी और वो वहीं ढेर हो गए। मैं गाडी के नीचे छुप गई। मेरे साथ वाली लड़की को दूसरी पार्टी के लोग उठा के ले गए। थोड़ी देर बाद मैं बाहर निकल कर आ गई और बस पकड़ के वापस अपने गाँव चली गई। आज मैं एक खुशहाल जिन्दगी जी रही हूँ। मेरी आप सबसे यह प्रार्थना है

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