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नमस्कार मेरे पाठक दोस्तो,मैं पंजाब से आकाश हूँ। मैंने यह antarvasna कहानी लिखी है क्योंकि मैं आप सभी को अपनी एक सत्य घटना बताना चाहता हूँ।
मैं अपनी थ्री ईयर आर्ट्स की पढ़ाई पूरी कर चुका हूँ और मै अभी आगे भी पढने की सोच रहा हूँ। लेकिन हमारा कॉलेज घर से बहुत दूर था। तो मैं अपने चाचा के घर रहने लगा था। उनका घर कॉलेज के नजदीक था। मेरे अंकल का लड़का विदेश गया हुआ था। मैं तो प्रातः कॉलेज जाता और संध्या को पांच बजे तक कॉलेज से वापस आ जाता था।
मेरे अंकल के पड़ोस में एक परिवार किराये पर रहता था। उनकी तीन लड़कियाँ थी रूही, कोमल और पिंकी। सबसे बड़ी लड़की रूही को देख कर मेरा मन उस पर लट्टू होने लगा था। वो थी ही इतनी सुन्दर।
उसकी छोटी बहन पिंकी कभी कभी अंकल के घर आया करती थी। मैंने उसके जरिये रूही से बात करने का इरादा बनाया। लेकिन डर रहता था कि वो मेरी मदद नहीं करे या किसी को बता दिया तो क्या होगा। मैंने हिम्मत करके एक पत्र लिख कर उसकी बहन को दे दिया कि वो पत्र रूही को दे देना।
मैं उसे जितना बच्चा या नासमझ सोचता था वो उतनी नहीं थी। वो समझ गई और बोली- आप खुद ही क्यों नहीं दे देते?
पर मैंने जैसे तैसे उसे मना लिया। अगले दिन मैं उसके जवाब का इन्तज़ार करने लगा। वो सात बजे हमारे घर आई और आंटी से बात करने लगी। मैं छत पर चला गया तो वो भी बहाना बना कर छत पर चली आई। मैंने उससे धीरे से पत्र के बारे में पूछा तो उसने पत्र का जवाब दिखा कर अपनी ब्रा में रख लिया और बोली खुद ही ले लो।
मैं उसकी बात सुन कर हैरान रह गया। अरे यह तो बहुत ही चालू लड़की है। मैंने उसकी कमीज में हाथ डाल दिया और पत्र निकालने के बहाने उसकी चूचियाँ दबाने लगा। तो वह बोली- क्या बात है रात रंगीन करने का इरादा है?
मैं उसकी बात सुन कर फिर से सुन्न सा रह गया कि अभी इसकी उम्र तो छोटी सी है और यह तो चुदने को भी राजी है।
मैंने हाँ कर दी तो बोली- चलते हैं किसी होटल में। मैंने अपनी बाईक ले ली और होटल की तरफ़ चल दिया।
वहाँ हम सारी रात एक दूसरे के साथ सेक्स करते रहे। उसने बताया कि उसने मेरे साथ पहली बार ही सेक्स किया है।
वो बहुत खुश थी, कहती थी कि बहुत मजा आया।
बाद में जब मैंने पत्र मांगा तो उसने मुझे दे दिया, लेकिन एक शर्त थी कि मैं उसे ऐसा मजा फिर से दूँ। मैंने उसे वहीं लिटा लिया।
उसने अभी अन्डरवियर नहीं पहना था। मैंने अपना लण्ड उसकी चूत में गाड़ दिया और बहुत अन्दर गहराई तक पेल दिया। वो सिसक रही थी ऊऊओह्हह् हह्हह हीईईईई और अंदर ह्हह हह्हह्ह ह्हह फ़ाड़ डालो। अहहह हह्हह।
लगभग आधे घण्टे बाद हम एक दूसरे से अलग हुए। उसने अपने कपड़े पहने और मैंने भी अपने कपड़े पहन लिये। उसके बाद मैंने वह पत्र पढ़ा तो मुझे हैरानी हुई कि उसकी बहन भी मुझ पर मरती है।
फिर उसने मुझे रात को अपने घर पर बुलाया।
पिंकी ने बताया कि आज रात को उसके घर में कोई नहीं होगा, तुम रात को आ जाओ। मैं उस दिन कॉलेज नहीं गया। रात को मैं उसके घर गया और कॉल बेल बजाई। पिंकी ने मुस्करा कर दरवाजा खोला।
फिर हम उसकी बहन के कमरे में चले आये और कहा कि मेरा इन्तज़ार करो। उसकी बहन पिंकी ने हम सभी के लिये खाना बनाया। भोजन के उपरान्त हम सभी ने ग्रुप सेक्स किया। मैं उस रात को बहुत खुश था फिर मैं वापस चला आया। अब तो जब भी हमें मौका मिलता है, हम सेक्स करते हैं।
मैं आगे की Antarvasna कहानी अगली बार लिखूंगा।
रात के बारह बज़ चुके Antarvasna थे। छोटे से गाँव राजापुर में बहुत ही सन्नाटा छ गया था। राजापुर गरीब की बस्ती है। इसी बस्ती के एक कोने में हरिया का घर है। हरिया की उमर 45 साल की है। और उसकी बीबी की उमर 40 साल की है। हरिया एक गरीब किसान है।
हरिया अपने घर के एक अँधेरी कोठरी में रोज़ की तरह अपनी बीवी की चुदाई में मशगूल था। हरिया अपनी बीबी की चूत में लंड डाल कर काफ़ी देर तक उसकी चुदाई कर रहा था। उसकी बीबी मुन्नी बिना किसी उत्तेजना के अपने दोनों पैर फैला कर यूँ ही पड़ी थी जैसे कि उसे हरिया के बड़े लंड की कोई परवाह ही न हो या फिर कोई तकलीफ़ ही न हो रही है। केवल हर धक्के पर आह आह की आवाज निकल रही थी।
मुन्नी की बुर कब का पानी छोड़ चुकी थी। थोड़ी ही देर में हरिया के लंड से माल निकलने लगा तो उसने भी आह आह कर के मुन्नी की चूची पर अपना मुँह रख दिया। मुन्नी की बेजान चूची को वो मुँह में ले कर चूसने लगा। उसने अपना लंड मुन्नी के बुर से निकाला और मुन्नी के बगल में लेट गया।
उसने अपनी बीडी जलाई और पीने लगा। मुन्नी ने उसके लटक रहे लंड को अपने हाथों में ले लिया और उसको खींच-तान करने लगी। लेकिन अब हरिया के लंड में कोई उत्साह नही था। वो एक बेजान लता की तरह मुन्नी के हाथों का खिलौना बना हुआ था।
मुन्नी ने कहा- जानते हो जी ! आज क्या हुआ?
हरिया ने कहा- क्या?
मुन्नी ने कहा- रोज़ की तरह आज मैं और मालती ( मुन्नी की बहू) सुबह शौच करने खेत गए । वहाँ हम दोनों एक दूसरे के सामने बैठ कर पाखाना कर थे…
तभी मैंने देखा कि मालती अपनी बुर में ऊँगली घुसा कर मुठ मारने लगी।
मैंने पूछा- यह क्या कर रही है तू?
तो उसने मेरी पीछे की तरफ़ इशारा किया और कहा- जरा उधर तो देखो अम्मा।
मैंने पीछे देखा तो एक कुत्ता एक कुतिया पर चढ़ा हुआ है।
मैंने कहा- अच्छा, तो यह बात है।
मालती ने कहा- देख कर बर्दाश्त नहीं हुआ इसलिए मुठ मार रही हूँ।
मैंने कहा- जल्दी कर, घर भी चलना है।
मालती ने कहा- हाँ अम्मा, बस अब निकलने ही वाला है।
और एक मिनट हुआ भी ना होगा कि उसकी बुर से इतना माल निकलने लगा कि एक मिनट तक निकलता ही रहा।
मैंने पूछा- क्यों री, कितने दिन का माल जमा कर रखा था?
उसने कहा- कल दोपहर को ही तो निकाला था।
मैंने भी सोचा- कितना जल्दी इतना माल जमा हो जाता है।
हरिया ने कहा- वो अभी जवान है ना। और फिर उसकी गर्मी शांत करने के लिए अपना बेटा भी तो यहाँ नहीं है ना। कमाने के लिए परदेस चला गया। अरे मैं तो मना कर रहा था। तीन महीने भी नहीं हुए उसकी शादी को और अपनी जवान पत्नी को छोड़ कमाने बम्बई चला गया। बोला, अच्छी नौकरी है। अभी बताओ चार महीने से आने का नाम ही नहीं है। बस फोन कर के हालचाल ले लेता है। अरे फोन से बीबी की गर्मी थोड़े ही शांत होने वाली है? अब उसे कौन कहे ये सब बातें खुल के?
थोड़ी देर शांत रहने के बाद मुन्नी फिर से हरिया के लंड को हाथ में ले कर खेलने लगी।
हरिया ने मुन्नी से पूछा- क्या तुम रोज़ ही उसके सामने बैठ के पाखाना करती हो?
मुन्नी ने कहा- हाँ।
हरिया- तब तो तुम दोनों एक दूसरे की बुर रोज़ देखती होगी।
मुन्नी- हाँ, बुर क्या पूरा गांड भी देखी है हम दोनों ने एक दूसरे की। बिल्कुल ही पास बैठ कर पाखाना करते हैं।
हरिया- अच्छा, एक बात तो बता। उसकी बुर तेरी तरह काली है या गोरी?
मुन्नी- पूरी गोरी तो नहीं है लेकिन मेरे से साफ़ है। मुझे उसकी बुर पर के बाल बड़े ही प्यारे लगते हैं। बड़े बड़े और लहरदार रोएँ की तरह बाल। एक बार तो मैंने उसके बाल भी छुए हैं।
हरिया- बुर कैसी है उसकी?
मुन्नी- बुर क्या है लगता है मानो कटे हुए टमाटर हैं। एकदम फुले फुले लाल लाल।
अचानक मुन्नी ने महसूस किया कि हरिया का लंड खड़ा हो रहा है। वो समझ गई कि हरिया को मज़ा आ रहा है। वो बोली- अच्छा, एक बात तो बताओ।
हरिया बोला- क्या?
मुन्नी- क्या तुम उसे चोदोगे?
हरिया- यह कैसे हो सकता है?
मुन्नी- क्यों नहीं हो सकता है? वो जवान है, अगर गर्मी के मारे किसी और के साथ भाग गई तो क्या मुँह दिखायेंगे हम लोग गाँव वालों को? अगर तुम उसकी गर्मी घर में ही शांत कर दो तो वो भला किसी दूसरे का मुँह क्यों देखेगी। जब वो किसी कुत्ते-कुतिया को देख कर मुठ मार सकती है तो वो किसी के साथ भी भाग सकती है। कितना नजर रख सकते हैं हम लोग? थोड़े दिन की तो बात है, फिर हमारा बेटा मोहन उसे अपने साथ बम्बई ले जाएगा तब तो हमें कोई चिंता करने की जरूरत तो नहीं है।
हरिया- क्या मालती मान जायेगी?
मुन्नी ने कहा- कल रात को मैं उसे तुम्हारे पास भेजूंगी। उसी समय अपना काम कर लेना।
हरिया का लंड पूरा जोश में आ गया। उसने मुन्नी की बुर में अपना लंड डालते हुए कहा- तूने तो मुझे गरम कर दिया रे।
मुन्नी ने मुस्कुरा कर अपनी दोनों टांगें फैला दी और आह आह की आवाज़ निकालने लगी। इस बार वो जोर जोर से आवाज निकाल रही थी। हालंकि उसे कोई ख़ास दर्द नहीं हो रहा था लेकिन वो जोर जोर से बोलने लगी- आह आह, धीरे धीरे करो ना। दर्द हो रहा है।
यह आवाज़ बगल के कमरे में सो रही उसकी बहू मालती को जगाने के लिए काफ़ी थी। चुदाई की मीठी दर्द भरी आवाज़ सुन कर मालती की बुर चिपचिपी हो गई। उसने अपने पिया मोहन के लंड को याद करके अपनी बुर में ऊँगली डाली और दस मिनट तक ऊँगली से ही बुर की गत बना डाली।
सुबह हुई, दोनों सास-बहू खेत गई, दोनों एक दूसरे के सामने बठी कर पाखाना कर रही थी।
मालती अपनी सास मुन्नी की बुर देख कर बोली- अम्मा, तुम्हारा बुर कुछ सूजी हुई लग रही है।
मुन्नी ने हंसते हुए कहा- यह जो तेरे ससुर जी हैं न, बुढापे में भी नहीं मानते। देख न कल रात को इतना चोदा कि अभी तक दुःख रहा है।
मालती ने कहा- एक बात पूछूं अम्मा?
मुन्नी- हाँ, पूछ न।
मालती- बाबूजी का लंड खड़ा होता है अभी भी?
मुन्नी- हाँ री। खड़ा क्या? लगता है बांस है। जब वो मुझे चोदते हैं तो लगता है कि अब मेरी बुर तो फट ही जायेगी। एक हाथ बराबर हो जाता है उनका लंड खड़ा हो के।
मुन्नी ने देखा कि मालती ने अपनी ऊँगली अपने बुर में घुसा दी है।
मुन्नी ने पूछा- क्या हुआ तुझे? क्या फिर कोई कुत्ता है यहाँ?
मालती बोली- नहीं अम्मा, मुझे तुम्हारी बातें सुन के गर्मी चढ़ गई है। इसे निकालना जरूरी है।
मुन्नी बोली- सुन, तू एक काम क्यों नहीं करती? आज रात तू अपने ससुर के साथ अपनी गर्मी क्यों नहीं निकाल देती?
मालती चौंक कर बोली- यह कैसे हो सकता है? वो मेरे ससुर हैं।
मुन्नी बोली- अरे तेरी जरूरत को समझते हुए मैंने ऐसा कहा। तुझे इस समय किसी मर्द की जरूरत है। अब जब घर में ही मर्द मौजूद हो तो क्यों नहीं उसका लाभ उठाया जाए।
मालती का मन अब डोल चुका था, वो बोली- कहीं बाबूजी नाराज हों गए तो?
मुन्नी बोली- अरे तू रात को उनके पास चले जाना। मैं बहाना बना के भेज दूँगी। धीरे धीरे रात के अंधेरे में जब तू उनको छुएगी ना तो तू भूल जायेगी कि तू उनकी बहू है और वो भूल जायेंगे कि वो तुम्हारे ससुर हैं।
यह सुन कर मालती की बुर में मानो तूफ़ान आ गया। उसकी बुर से इतना पानी निकलने लगा कि मुन्नी को लगा कि यह पेशाब कर रही है। अब मुन्नी खुश थी। दोनों तरफ़ मामला सेट था।
रात हुई, खाना-वाना ख़त्म कर मुन्नी हरिया के कमरे में गई और बता दिया कि मैं मालती को भेज रही हूँ। उसको भी समझा दिया है। तुम सिर्फ़ थोड़ी पहल करना। वो तो कुत्ते से भी चुदवाने के लिए तैयार बैठी है। तुम तो इंसान ही हों।
कह कर वो बाहर चली आई और जोर से बोली- बहू, ओ बहू, सुन आज मेरी तबीयत कुछ ठीक नहीं है। तू जरा अपने ससुर जी को तेल तो लगा दे।
फिर दरवाजे के बाहर से हरिया को बोली- सुनते हो जी, मैं जरा छत पर सोने जा रही हूँ। मालती बहू से तेल लगवा लेना।
मालती जैसे ही दरवाजे के पास आई, मुन्नी ने उससे धीरे से कहा- देख मैं बहाना बना कर तुम्हें उनके पास भेज रही हूँ। मालिश करते करते उनके लंड तक अपना हाथ ले जाना। शरमाना नहीं। अगर उनको बुरा लगे तो कह देना कि अंधेरे में दिखा नहीं। अगर कुछ नहीं बोले तो फिर हाथ लगाना। जब देखो कि कुछ नहीं बोल रहे हैं तो समझना कि उन्हें भी अच्छा लग रहा है। ठीक है ना? अब मैं चलती हूँ।
कह कर मुन्नी छत पर चली गई। इधर मालती हाथ में तेल की शीशी लिए हरिया के कमरे में आई।
हरिया ने कहा- आजा, वैसे तो तेल मालिश की जरूरत नहीं थी, लेकिन आज मेरा पैर थोड़ा सा दर्द कर रहा है इसलिए मालिश जरूरी है।
मालती हरिया के बिस्तर पर बैठ गई। कमरे में एक छोटी सी डिबिया जल रही थी। जो की पर्याप्त रोशनी के लिए अनुकूल नहीं थी।
मालती ने कहा- कोई बात नहीं, मैं आपकी अच्छे से मालिश कर देती हूँ। आप ये लूंगी उतार ले।
हरिया ने कहा- बहू, जरा ये डिबिया बुझा दे क्योंकि मैंने लूंगी के अन्दर छोटी सी लंगोट ही पहन रखी है।
मालती ने डिबिया बुझा दी। अब वहां घुप अँधेरा छा गया। सिर्फ़ बाहर की चांदनी रात की हल्की रोशनी ही अन्दर आ रही थी। हरिया ने लूंगी उतार दी। मालती की सांसें तेज़ हों गई। वो तेल को हरिया के पैरों में लगाने लगी। धीरे धीरे वो हरिया की जांघों में तेल लगाने लगी। धीरे से वो जानबूझ कर हरिया के लंड तक अपना हाथ ले गई। हरिया ने कुछ नहीं कहा। मालती ने दुबारा हरिया के लंड पर हाथ लगाया।
हरिया ने कहा- बहू, तुम्हें गर्मी लग रही होगी। तुम अपनी साड़ी खोल दो ना। वैसे भी तेल लगने से साड़ी ख़राब हों सकती है।
मालती ने कहा- बाबूजी, साड़ी के नीचे मैंने पेटीकोट नही पहना है। सिर्फ़ पैंटी पहन रखा है। इसलिए मैं साड़ी नहीं खोल सकती।
हरिया ने कहा- तो क्या हुआ? वैसे भी अंधेरे में मैं तुम्हें देख थोड़े ही पा रहा हूँ जो तुम यूँ शरमा रही हों?
मालती तो यही चाहती थी, उसने अपनी साड़ी खोल कर एक किनारे रख दी और तेल को वो जांघों और लंड के बीच लगाने लगी। जिससे वो बार बार हरिया के अंडकोष पर हाथ लगा सकती थी। हरिया ने जब देखा कि बात लगभग बन चुकी है, उसने अपनी लंगोट की डोरी को कब खोल दिया, मालती को पता भी ना चला। धीरे धीरे जब वो हरिया के अंडकोष पर हाथ फेर रही थी तो उसी के हाथ से उसकी लंगोट हट गई।
लंगोट हटने पर मालती पूरी गरम हो गई। अब वो हरिया के लंड को छूने की कोशिश कर रही थी। धीरे धीरे उसने लंड पर हाथ लगाया और हटा लिया। हरिया का लंड सोया हुआ था। लेकिन ज्यों ही मालती ने हरिया का लंड छुआ, मालती के जिस्म में एक सिरहन सी दौड़ गई। अब वो दुबारा अपना हाथ हरिया के दूसरे जांघ पर इस तरह ले गई जिससे उसकी कलाई हरिया के लण्ड को छूती रहे। हरिया भी पका हुआ खिलाड़ी था। उसका लंड जल्दी खड़ा होने वाला नहीं था, वो बोला- बहू, तू थक गई होगी। आ जरा लेट जा।
उसने लगभग जबरदस्ती बहू को पकड़ कर अपने बगल में लिटा दिया और उसके चूची पर हाथ रख के बोला- इसे खोल दे ! बहुत गर्मी है।
मालती ने अपने ब्लाउज का हुक खोल दिया। हरिया ने ब्लाउज को मालती के चूची पर से अलग कर दिया और चूची को छूने लगा, बोला- अरे तुमने अन्दर ब्रा नही पहन रखा है? खैर कोई बात नहीं, अब गर्मी तो नहीं लग रही है न?
वो मालती के चूची को मसलने लगा, बोला- तेरी चूची तो एक दम सख्त है। मैं तेरी चूची छू रहा हूँ, तुझे बुरा तो नहीं लग रहा है न?
मालती बोली- नहीं, आप मेरे साथ कुछ भी करेंगे तो मैं बुरा नहीं मानूंगी।
हरिया ने कहा- शाबाश बहू, यही अच्छी बहू की निशानी है। बोल तुझे क्या चाहिए?
मालती- बाबूजी, मुझे कुछ नही चाहिए, सिर्फ़ आपका लंड छूना चाहती हूँ।
हरिया- एक शर्त पर। तू भी मुझे अपनी बुर छूने देगी।
मालती ने आव देखा ना ताव, एक झटके में अपना पैन्टी उतार फेंकी। हरिया ने नीचे जा कर मालती की बुर को पहले तो छुआ फिर मुँह में लेकर चूसने लगा।
मालती बोली- ऐसे मत चूसिये, मैं मर जाऊंगी।
हरिया उठ खड़ा हुआ और मालती के हाथ में अपना लंड थमा दिया। मालती के हाथ मानो कोई खजाना लग गया हो। वो हरिया के लंड को कभी चूमती कभी खेलती। काफी देर यह करने के बाद बोली- बाबूजी, इसको मेरी बुर में एक बार डाल दीजिये न।
हरिया ने अपने लटके हुए लंड को हाथ से पकड़ कर मालती के बुर में घुसा दिया। मालती की बुर में हरिया का लंड जाते ही फुफकार मारने लगा और मालती की बुर में ही वो खड़ा होने लगा। मालती- बाबूजी ये क्या हो रहा है? जल्दी से निकाल दीजिये।
हरिया- कुछ नहीं होगा बहू।
अब हरिया का लंड पूरी तरह से टाइट हो गया। मालती दर्द से छटपटाने लगी। उसे यह अंदाजा ही नहीं था कि जिसे वो कमजोर और बूढ़ा लंड समझ रही थी, वो बुर में जाने के बाद इतना विशालकाय हो जाएगा।
हरिया ने मालती को चोदना चालू किया। पहले दस मिनट तक तो मालती बाबूजी बाबूजी छोड़ दीजिये कहती रही। लेकिन हरिया ने नहीं सुना, वो धीरे धीरे उसे चोदता रहा। दस मिनट के बाद मालती की बुर थोड़ी ढीली हुई। अब उसे भी अच्छा लग रहा था। दस मिनट और हरिया ने मालती की जम के चुदाई की। तब जाकर हरिया के अन्दर का पानी बाहर आने को हुआ तो उसने अपना लंड मालती की बुर से निकाल के मालती के मुँह में लगा दिया, बोला- पी जा।
मालती ने हरिया के लंड को मुंह में ले कर ज्योंही दो-तीन बार चूसा कि हरिया के लंड से तेज़ धार निकली जिससे मालती का पूरा मुँह भर गया। मालती ने सारा का सारा माल गटक लिया।
आज जाकर मालती की गर्मी शांत हुई। उसके बाद वो रोज़ ही अपने ससुर के साथ ही सोने लगी। हाँ दो-तीन दिन में उसकी सास मुन्नी भी साथ सोने लगी। अब हरिया एक तरफ करवट ले कर बीबी को चोदता तो दूसरी तरफ़ करवट ले कर अपनी बहू मालती को। Antarvasna
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आज मैं आपको एक Antarvasna अपनी ही जिंदगी की सच्ची घटना सुनाता हूँ।
बात उन दिनों की है जब मेरे छमाही इम्तिहान चल रहे थे, सॉरी मैं आपको अपने बारे में बताना भूल गया कि मैं बी.ई. इंदौर का छात्र हूँ। जब मेरी परिक्षाएँ चल रही थी तब मेरा दोस्त और मैं साथ में पढ़ा करते थे। तब अचानक बातों ही बातों में मैंने कहा- यार, कोई लड़की का नंबर हो तो दे समय बिताने के लिए !
तो वो मुझसे बोला- है तो एक नंबर ! मगर तू बात कैसे करेगा?
मैंने कहा- तू दे तो ! मैं कर लूँगा !
मैंने उस लड़की को एक गलत नाम से फ़ोन लगाया और फ़ोन पर उसकी बहुत तारीफ की। मैंने उसे देखा नहीं था कभी लेकिन फिर भी कल्पना से ही उसकी तारीफ की। उसे अच्छा लगने लगा। वो शायद मुझसे प्रभावित हो गई थी। अगर मैं फ़ोन काट देता था तो वो खुद फ़ोन लगा लेती थी। शायद उसे भी कोई चाहिए था।
कुछ दिनों तक बातों का सिलसिला यूँ ही चलता रहा। फिर एक दिन मैंने उससे उसकी फोटो मांगी ताकि मैं उसे देख सकूँ तो जब उसने उसकी फोटो मेल की मुझे, तो मेरे तो होश ही उड़ गए। क्या गज़ब फिगर था उसका 36-24-34 मैं तो उसे देख कर दंग रह गया। इतनी खूबसूरत बाला मैंने आज तक नहीं देखी थी। मेरी जितनी भी गर्लफ्रेंड आज तक बनी हैं, उनमें से सबसे बड़ी चूचियाँ इसी की थी। फिर मैं इसे कैसे बिना चोदे छोड़ देता।
मेरे दिमाग में एक विचार आया। सॉरी, मैं नाम बताना तो भूल गया। ऋतू नाम था उसका।
मैंने उसे डेट पर बुलाया। वो मुझसे प्रभावित तो हो ही चुकी थी, बस हमें बहाना चाहिए था मिलने का ! मैंने उसे ऐसी जगह मिलने बुलाया जहाँ पर कोई आता जाता न हो। वो जगह बहुत दूर थी इसलिए मैं उसे लेने उसके हॉस्टल गया। वो बी कॉम कर रही थी। वो मेरे घर से ज्यादा दूर नहीं रहती थी। मैंने अपनी कार उठाई और उसे डेट पर ले जाने के लिए चल पड़ा। जब मैं उसके हॉस्टल के नीचे पंहुचा तो मैंने होर्न दे कर उसे नीचे बुलाया। क्या मस्त मॉल लग रही थी वो ! उसने सलवार सूट पहना था और वो अपने स्तन तो चुन्नी से ढकने की नाकाम कोशिश कर रही थी। वो मुझे अपनी गोलाइयों के दर्शन करवाना चाहती थी।
हम चल पड़े। इंदौर के बाहर एक जंगल पड़ता है जहाँ कोई नहीं आता, बैठने और बातें करने की अच्छी जगह है वहाँ ! मैंने एक जगह पेड़ के नीचे गाड़ी रोक दी तो वो मुझसे कहने लगी- गाड़ी क्यों रोक दी तुमने? क्या चल रहा है तुम्हारे मन में ? ह्म्म्म बोलो बोलो !
मैंने कहा- मैं तुम्हें किस करना चाहता हूँ ! तुम मना तो नहीं करोगी ?
जब उसने कुछ नहीं कहा तो मैंने उसकी चुप्पी को उसकी हाँ समझी और उसे एक जबरदस्त चुम्मा दे दिया। एक सेकंड बाद हम अलग हो गए। फिर मैंने उससे कहा- तुमने कभी किसी को किस किया है ?
उसने कहा- नहीं !
तो मैंने पूछा- तुम्हें कितने प्रकार के चुम्बन आते हैं?
उसने कहा- वो अभी किया वैसे ही !
मैंने उसे कहा- मैं बताऊँ कि चुम्बन कितने प्रकार के होते हैं?
तो वो मान गई।
फिर मैंने उसे पाँच तरह के चुम्बन करके बताये- फ्रेंच, स्मूचिंग, लिप्स टचिंग, इंडियन, टंग राउन्डिंग ।
फिर हम दोनों के जिस्म गरम हो गए, वासना की आग बढ़ चुकी थी, हमारे जिस्म हमारे काबू में नहीं थे और फिर हमने जो किया उसकी तो कल्पना भी नहीं की जा सकती। आम तौर पर जब यौन-भावना जगती है तो लोग सेक्स करते वक़्त लड़की या लड़के के कपड़े उतारते हैं, बड़े प्यार से चूमा-चाटी करते हैं पूरे बदन को ! मगर हमारे किस्से में ऐसा कुछ नहीं हुआ। मैं तो हैरान हो गया था उसे देख कर !
वो पहले भी मेरे दोस्तों के साथ, जिन्होंने उसका नंबर दिया था, सेक्स कर चुकी थी। उसे अनुभव था। वो मुझ पर टूट पड़ी, मेरे शर्ट के बटन तोड़ दिए, मेरे कपड़े फाड़ दिए, बिल्कुल जंगली सेक्स चल रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे वो मेरा खून कर देगी ! उस पर सेक्स पूरी तरह से हावी हो चुका था। मैंने उसके कपड़े उतरने चाहे तो उसने खुद ही खींच-खींच के उतार दिए और कहने लगी- आज मुझे बहुत दिनों बाद चुदने का मौका मिला है, आज मेरी तन की आग बुझा दो मेरे ड्रीम बॉय !
मैंने भी फिर शर्म छोड़ दी और उसे अपने नीचे पटक कर अपना लौड़ा उसके मुँह में रख दिया। वो 5 रुपए वाली चोकोबार की तरह उसे चूसने लगी। मैंने उसकी पैंटी उतार कर उसकी चूत के दाने पर हाथ रखा तो वो मचल गई और चोदो मुझे-चोदो मुझे ! कहने लगी।
मैंने अपन लौड़ा उसके मुँह में से निकाल कर उसकी चूत पर रख दिया और एक ही धक्के में मेरा लंड उसकी चूत में समां गया। मैं सातवें आसमान पर था। इसका आनंद वही ले सकता है जिसने कभी चुदाई की हो। उसकी नशीली आवाज़ें मुझे रफ़्तार बढ़ाने पर मजबूर करने लगी।करीब बीस मिनट के बाद वो झड़ गई और मुझे कहने लगी- अपना वीर्य मेरे मुँह में डालना ! चूत में नहीं ! वरना गड़बड़ हो जाएगी !
मगर शायद गड़बड़ होनी ही थी, मुझे अपनी धक्कों की रफ़्तार में ध्यान ही नहीं रहा कि कब मेरा पूरा वीर्य उसकी चूत में भर गया। उसे भी राहत मिली और मुझे भी।
मगर जब होश आया तो उसने देखा कि उसकी चूत मेरे वीर्य से भरी हुई थी। वो रोने लगी, कहने लगी- यह क्या किया तुमने ? मैंने मना किया था ना? अब मैं प्रेग्नेंट हो जाउंगी, तुम मुझसे शादी करोगे अभी?
मैंने उसे दिलासा दिया और कहा- कुछ नहीं होगा, हम शादी करेंगे लेकिन अभी नहीं ! मुझ पर भरोसा रखो !
तो वो मान गई और अचानक कार के दरवाजे पर किसी ने ठक-ठक किया- ठक ठक – ठक ठक !
हम डर गए !
आगे क्या हुआ वो तो सोचा भी नहीं था। अचानक हुए इस ठक-ठक ने हमारे होश उड़ा दिए जिसके बारे में मैं आपको अगले भाग में बताऊंगा।
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मुझे मेल कीजियेगा। Antarvasna
अन्तर्वासना के सभी Antarvasna Stories पाठकों को मेरा सलाम। मेरा नाम सोनू हे और मैं जमशेदपुर का रहने वाला हूँ। आज मैं आप सबको अपनी सेक्स भरी जिन्दगी की शुरुआती बात बताने जा रहा हूँ।
बचपन से ही मुझे सेक्स करने की चाहत थी। जब मैं दस्वीं में गया तो मुठ मारने लगा पर हमेशा किसी की फ़ुद्दी मारने की सोचता था। पर फुद्दी सुजाने की शुरुआत दो साल पहले हुई।
तब मैं बारहवीं में था। मेरे घर के बिल्कुल सामने एक अंकल और आँटी रहते हैं। मेरी जानकारी के मुताबिक उनकी दो लड़कियाँ और एक लड़का था, लेकिन फिर एक दिन मैंने एक खूबसूरत लड़की को उनके घर पर देखा। क्या माल थी वो दोस्तो ! 5’3″ कद, गोरा रंग, घुँघराले बाल, बड़ी-बड़ी काली आँखें, लाल होंठ, बड़े-बड़े कसे हुए वक्ष, पूरी की पूरी सेक्स-पटाखा थी वो। फिर पता चला कि वो उनकी मझली लड़की है जो पहले अपनी नानी के यहाँ रहती थी पर अब यहीं रहेगी।
मैंने सोच लिया कि इसको पटाना है। उसका नाम पिंकी है। अब मैं अपने काम में लग गया। मेरी बालकोनी और उसकी बालकोनी आमने सामने है। मैं बालकोनी से उसको देखा करता। धीरे-धीरे वो मुझे देखने लगी, मुझे अच्छे परिणाम मिलने लगे।
फिर एक दिन हमारे घर में पूजा थी। शाम का वक्त था, वो भी आई। पूजा शुरु हुई तो काफी लंबी चल रही थी। मैं छ्त पर चला गया। थोड़ी देर बाद पिंकी अपनी छोटी बहन नंदिनी के साथ छ्त पर आई। मैं मोबाईल पर नेट कर रहा था। उसकी छोटी बहन मुझसे पूछने लगी- क्या कर रहे हो सोनू भईया ?
मैंने कहा- कुछ नहीं !
वो दोनों कुर्सी पर बैठ गई। मैने देखा तो पिंकी मेरी ही तरफ देख रही थी। कुछ देर बात करने के बाद उसकी बहन बोली- मैं जरा घर जा रही हूँ, चलो दीदी !
मैंने कहा- तुम जाकर आओ, हम दोनों बातें करते हैं।
वो चली गई फिर हम दोनों बातें करने लगे। कुछ देर इधर-उधर की बातें करने के बाद मैंने उसके सामने एकाएक अपने प्यार का इज़हार कर दिया। वो इसके लिये पहले से ही तैयार थी, सर झुकाकर उसने हाँ कर दी। मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था।
मैने जल्दी से उसके झुके सर को उठाया और उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिये और उसको पागलों की तरह चूमने लगा। वो भी मेरा साथ देने लगी। हम दोनों इतने खो गये कि कब उसकी छोटी बहन ऊपर आ गई, पता ही नहीं चला। उस पर ध्यान जाते ही मैंने चूमना बंद कर दिया और वो पिंकी को लेकर चली गई। अब तो हम ज्यादातर समय बालकोनी में एक दूसरे को देखने में बिताते, पर मेरे मन में तो कुछ ओर ही था। मैं तो उसको चोद के अपने लन्ड की सील तोड़ना चाहता था।
एक दिन सुबह मैं बालकोनी में खड़ा था तो उसके घर में काफ़ी सन्नाटा था। ( वो लोग दूसरे तल्ले पे रहते थे तो मेरी बालकोनी से उनका घर पूरा दिखता था)
कुछ देर बाद वो छ्त पर आई और इशारे से बोली कि मुझे फोन करो। मैंने फोन किया तो उसने कहा कि घर में कोई नहीं है, सिर्फ मैं और पापा हैं। पापा दस बजे काम पर चले जायेंगे, फिर अगर चाहो तो तुम आ जाना।
मैंने पूछा- सब कहाँ गये हैं?
तो वो बोली- किसी रिश्तेदार की शादी में गये हैं और चार दिन बाद आएंगे, पापा काम की वजह से नहीं गये और मैं उनको खाना बना के देने के लिये नहीं गई।
मेरी तो खुशी का ठिकाना नहीं था, कितने दिनों से इसी दिन का इंतजार कर रहा था। मैं जल्दी से नहा धो कर 11 बजे उसके घर पहुँच गया। घण्टी बजाई, उसने दरवाजा खोला और मुझे देखकर मुस्कुराई, मैं भी मुस्कुराया।
मैंने पूछा- पापा गये ?
वो बोली- हां !
फिर मैं तुरन्त उसके होंठों को चूमने लगा, वो भी मेरे होंठो को चूमने लगी। करीब दस मिनट की चूमा-चाटी के बाद मैने उसे अपने गोद में उठाया और बिस्तर पर ले गया। उसको लिटा कर फिर उसके होंठों को चूमने लगा और एक हाथ से उसके स्तन दबाने लगा। वो सिसकारियाँ निकालने लगी और दोनों हाथों से मेरी पीठ को सहलाने लगी, मेरी शर्ट के बटन खोलने लगी। फिर उसने मेरी शर्ट उतार दि। अब मैने भी उसके कुर्ते को खोल दिया। उसने ब्रा नहीं पहनी थी, सो मेरी थोड़ी सी मेहनत बच गई। फिर मैंने उसका पजामा भी उतार दिया।
उसने गुलाबी रंग की पैंटी पहनी थी, मैने वो भी उतार दी और मैं अपनी जीन्स उतारने जा रहा था तो उसने मुझे रोक दिया और बोली- तुमने मेरे कपड़े उतारे, मैं तुम्हारे उतारूंगी।
और उसने मेरी जीन्स उतारी और फिर मेरी चड्डी उतार दी। चड्डी उतारते ही मेरा 7″ का खड़ा लन्ड बाहर आ गया।
उसे देखकर वो बोली- तुम्हारा तो बहुत बड़ा है।
फिर मैने उसे बिस्तर पर लिटा दिया और उसके स्तन चूसने लगा। कुछ देर वक्ष के साथ खेलने के बाद मैं उसके पूरे बदन को चूमता हुआ उसकी चूत तक पहुँच गया। क्या चूत थी दोस्तो ! मैंने सोचा भी नहीं था कि मेरा चोदन-कार्यक्रम ऐसी चूत से शुरु होगा। उसकी चूत पूरी साफ थी, शायद शुबह को ही की होगी।
मैंने पूछा तो बोली- हाँ ! तुम्हारे लिए ही की है।
मैंने उसकी चूत को चाटना शुरु किया। गुलाबी फुद्दी जब मेरे मुँह में जाती तो वो जोर से सिसकारी मारने लगती और मुझे तो जैसे लग रहा था कि मैं स्वर्ग की अप्सरा के साथ हूँ।
मैं उसकी चूत में ऊंगली डालता तो वो कहती- दुखता है !
मैने कहा- अभी कहाँ दुखता है ? असली मजा तो कुछ देर बाद आएगा।
थोड़ी देर बाद वो बोली- छोड़ दो, कुछ निकल रहा है !”
मैंने कहा- निकलने दो।
फिर वो झड़ गई और मैं सारा रस चूस गया। फिर मैं उठा और बिस्तर के सामने खड़ा हो गया और उसको कहा- चूसो !
वो बिस्तर के ऊपर घोड़ी बनकर मेरे लन्ड को चूसने लगी। मैं भी उसके सर को पकड़ कर दबाने लगा। कुछ देर बाद मैं झड़ गया और सारा माल उसके मुँह में छोड़ दिया। उसने कुछ पी लिया और कुछ थूक दिया।
फिर मैं उसको बिस्तर पर लिटा के उसके स्तन मसलने लगा। फिर उसने मुझे पीठ के बल लिटा दिया और मेरे पूरे बदन को चूमने लगी। कुछ देर में मेरा लन्ड खड़ा हो गया। अब मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और अपना लन्ड उसकी चूत के मुँह में लगाया तो वो बोली,”अब चोदोगे क्या ?”
मैने कहाँ- हाँ !
तो वो बोली,”धीरे से करना ! पहली बार है !”
मैंने कहा- डरो मत ! मेरा भी पहली ही बार है। पहले थोड़ा दर्द होता है फिर बहुत मजा आता है।
फिर मैंने लन्ड पेलना शुरु किया पर लन्ड अन्दर जा ही नहीं रहा था। उसकी चूत बहुत ज्यादा टाईट थी। फिर मैंने ड्रेसिंग टेबल से क्रीम ली और अपने लन्ड पर लगाई और कुछ उसकी फुद्दी में डाल दी। फिर जोर लगाकर पेलना शुरु किया तो मेरा आधा लन्ड अन्दर चला गया, वो दर्द से तड़प उठी।
मेरा भी पहली बार होने से मेरे लन्ड की त्वचा फट गई और मुझे भी दर्द हुआ।
वो कहने लगी,”निकाल लो, बहुत दुख रहा है ! निकाऽऽ लो……… निकालो ………।
मैं थोड़ी देर रुक गया पर मैंने लन्ड निकाला नहीं। कुछ देर बाद जब वो थोड़ा शांत हुई तो मैं धीरे-धीरे लन्ड अन्दर पेलने लगा और कुछ ही देर में मेरा पूरा लन्ड उसकी चूत में था। अब मैं उसे चोदने लगा। धीरे-धीरे उसे भी मजा आने लगा और वो सिसकारियाँ मारने लगी। फिर मैने अपने धक्के तेज कर दिये। पूरा कमरा फच्च-आह,आह,आह, ओ मा, मर गई, आह, चोदो,चोदो,जोर से,और जोर से फच्च-फच्च आह-आह-आह-आह आवाजों से गूंज रहा था। मैं एक ओर अपनी पूरी ताकत से उसे चोद रहा था और दूसरी ओर उसके स्तन चूस भी रहा था। वो अपने दोनों हाथों से मेरे दोनों कूल्हों को दबा रही थी। अचानक उसने मुझे कसकर दबा लिया और फिर वो झड़ गई पर मैं अभी तक टाईट था। कभी उस पर लेटकर तो कभी उसके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रखकर जोर-जोर से मैं उसे चोदने लगा। करीब बीस मिनट की ताबड़-तोड़ चुदाई के बाद मैं उसकी चूत में ही झड़ गया और कुछ देर उसके ऊपर पड़े रहने के बाद मैं उसकी बगल में लेट गया। मैं काफी थक चुका था। और 15 मिनट यों ही पड़े रहने के बाद मैं बाथरुम गया जहाँ पिंकी पहले से ही थी।
बाथरुम में हम दोनों एक साथ नहाने लगे। मैने उसे पूरा भिगो दिया और उसके गीले स्तनों को चूसने और दबाने लगा। इस बीच मेरा लन्ड फिर तन गया।
अब मैने गाण्ड मारने की सोची। मैंने उससे कहा- अब मैं तुम्हारी गाण्ड मारना चाहता हूँ।
वो बोली- क्या ?
यह शायद वो नहीं जानती थी।
मैंने कहा- तुम बाथ-टब को पकड़ के घोड़ी बन जाओ।
उसने वैसा ही किया। मैंने अपने लन्ड पर साबुन लगाया और उसकी गाण्ड में डालने लगा तो वो मना करने लगी। मैंने कहा- तुम मुझसे प्यार करती हो या नहीं ?
वो बोली- बहुत प्यार करती हूँ, पर दुखेगा !
मैंने कहा- कुछ नहीं होगा !
फिर उसकी गाण्ड में लन्ड पेलने लगा। पहले दर्द हुआ फिर सब ठीक हो गया। 15 मिनट उसकी गाण्ड मारने के बाद मैं उसकी गाण्ड में ही झड़ गया।
और फिर नहाने के बाद मैं फिर उसे बिस्तर पे ले आया और इस बार घोड़ी बनाकर उसकी चूत मारी।
तो दोस्तो, इसके बाद तो मैंने उसकी बाकी दो बहनों को भी चोदा।
वो कहानी अगली बार अगर आपके इमेल मिले तो। Antarvasna Stories
हय फ्रेंड्स! मेरा नाम अजय है और मैं दिल्ली Hindi Porn Stories में रहता हूँ. मेरा लण्ड 6.5 इन्च का है और मेरी हाईट 6.2 फ़ीट शरीर सामान्य.
तो फिर बात ऐसी है कि मेरी कोई गर्ल-फ़्रेन्ड नहीं है और मैं अक्सर अपने फ्रेंड्स की गर्ल-फ़्रेन्ड को देख कर परेशान सा होया करता था कि भगवान् मेरी कब सुनेगा. लेकिन उसक घर देर है पर अंधेर नहीं है.
अचानक मेरी नजर एक लड़की पर पड़ी जोकि हाईट में मुझ से बहुत छोटी थी मैंने मन ही मन कहा कि क्या माल है लेकिन फिर कहा कि यार ये तो अभी छोटी है लेकिन मैं ग़लत था उसकी हाईट ही बस छोटी थी बाकि और सब बड़े बड़े कसे हुए थे. मैंने कहा यह लड़की अगर मेरी फ्रेंड बन जाए तो क्या बात है और इतिफाक से वोह मेरे घर की तरफ़ ही आ रही थी।
मैंने देखा उसकी क्या गांड थी मानो दो ढोल. बाद में पता चला कि वोह मेरे आंटी के यहाँ काम करने आती है फिर क्या था सरदार बहुत ही खुश हुआ. और चोदने के प्लान बनाने लगा।
एक दिन वोह मेरे घर से गुजर रही थी मैंने बड़ी हिम्मत कर के उससे उसके फिगर के बारे मैं कह दिया। वोह सुनकर स्माईल देकर चली गई।फिर क्या था- जो हँसी उसकी फटी. अगले दिन मैं उसका घर के बाहर वेट कर रहा था तो मैंने पाया कि आज कुछ अलग ही लग रही थी, देखा तो पाया कि वो टाईट सूट पहने वो आ रही है. मैं मुस्कुराया और वो भी।
मैंने कहा कि एक जगह काम करना है उसने कहा कि कहाँ? मैंने कहा- मेरे घर। उसने कहा कि ठीक है। मैंने कहा कि ओके ! तुम कल से काम पर लग जाओ, कल 10:00 बजे से।
“ओके” उसने सर हिलाकर मान लिया.
फिर क्या था वो आई मैंने गेट खोला तो पाया कि एक लाल रंग का टॉप और नीले रंग की जीन्स पहने वो खड़ी थी। मैं देख कर हैरान था। उसने कहा कि अन्दर नहीं आने दोगे?
इशारा करते मैंने मन में कहा कि आज तेरी मैया चुद गई. फिर क्या था… ???
मैंने उसे घर दिखाने के बहाने अपनी गोदी में उठा लिया था। क्योंकि वो मुझ से हाईट में छोटी थी न इसी लिए। और फिर उसे कमरे में ले जाने लगा।
वो बोली क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- कुछ नहीं और जल्दी से कमरे में लाकर कुण्डी लगा दी
वो रोने लगी और उसे देख कर मेरी भी गांड फटने लगी
मैंने कहा- मैं तुम्हारे साथ कुछ भी नहीं करूँगा अगर तुम मुझ से प्यार नहीं करतीं तो!
उसने कुछ नहीं कहा और मैं समझ गया था। मैंने उसे लेट जाने को कहा और कहा मैं तुम्हारे साथ करना चाहता हूँ
फिर उसने कहा कि तो करो न…
मैंने कहा कि ले मेरी जान !
मैंने उसका टॉप के ऊपर उसके 2 रसगुल्ले जैसे बूब्स दबाने शुरू किए और वोह सिसकियां लेने लगी।
फिर क्या था मैंने अपना हाथ उसकी ब्रा में डाल दिया। क्या मजा था यारो ! मानो- या- ना -मानो ! बहुत ही अच्छा लगा।
मैंने पहली बार बूब्स का स्वाद जो लिया था न
मैंने कहा तुम मेरे सारे कपड़े उतार दो।
वो हँसी और बोली पहले मेरे तो उतार दो।
मैंने कहा लो मेरी जान। और मैंने उसे नंगी कर दिया उस बिना झांट वाली चूत क्या लग रही थी।
फिर क्या था वोह भी मेरे सारे कपड़े उतारने लगी और जब उसका हाथ मेरे लण्ड पर गया तो वो सिहर सी गई।
मैंने कहा- क्या हुआ मेरी जान वो बोली कुछ नहीं !
फिर मैंने उसे लेट जाने को कहा, और उसने ठीक वैसा ही किया। मैंने पहले तो 20 मिनट तक उसकी बिना बाल वाली चूत चाटी और फिर मैंने अपना लन उसके मुह में पेल दिया उसे भी स्वाद सा आया फिर मुझे अचानक गुस्सा सा आया और मैंने अपना लण्ड उसकी चूत में डाल दिया और इतनी जोर से धक्के मारने लगा कि उसकी इतनी जोर से चिल्ली निकली कि मेरे दोनों कान फ़ट से गये। मैंने धक्के मारने बंद कर दिए और उसके बूब्स दबाने लगा और किस करने लगा।
फिर अचानक उसे भी मजा आने लगा। मैं समझ गया था और मैंने जोर से धक्के मारने फिर से शुरू कर दिए इतनी जोर से मैंने धक्के मारे कि सिर्फ़ 2 धक्कों में मैंने उसकी आई एस आई सर्टिफ़ाईड चूत फाड़ दी. और पूरे कमरे में फचा फच की आवाज आ रही थी। उस दिन घर वाले भी कहीं बाहर गए हुए थे। और फिर चोद-चुदाई 20 मिनट तक चली और उसके बाद हम दोनों एक साथ ही झडे मैंने अपना तेजाब उसके मुह में और उसने अपना जलजीरा मेरे मुह में छोड़ दिया. फिर हम दोनों नहाने गए और नहाते हुए हम दोनों तो बस आपस में एक दूसरे को किस करते रहे।
तो दोस्तों यह मेरी कहानी कैसी लगी? Hindi Porn Stories
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