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मेरा नाम भीम है। Antarvasna, मैं 22 साल का हूं। मेरी गर्लफ़्रेंड का नाम मैना है, वो 21 साल की है। और उसकी फ़ीगर तो ऐसी थी कि पूछो मत … वो बहुत ही सुंदर है, एकदम गोरी चिट्टी लम्बे लम्बे काले बाल, हाइट करीब 5’5″ और फ़ीगर 36-25-38 है। उसका फ़ीगर मस्त है।
यह करीब दो साल पहले की बात है जब हम दोनों घर से बाहर आगरा में एक ही रूम में रह कर पढ़ते थे। मैंने रूम में अपने पढ़ने के लिये मस्तराम की कुछ गंदी किताबें रखी हुई थी जो एक दिन मैना के हाथ लग गयी। इसलिये मैं अपने लंड और वो अपनी चूत की प्यास नहीं रोक सके।
वो बोली- मैं ही तुम्हारी वाइफ़ बन जाती हूं और मुझे अपनी ही समझो और मेरे साथ सेक्स करो।
वो जींस शर्ट में आयी और बोली- चलो शुरू हो जाओ।
उसने मुझे किस करना शुरु कर दिया मेरे लिप्स को वो बुरी तरह से किस करने लगी। मैं भी जोश में आ गया और उसको किस करने लगा, उसको अपनी बांहों में दबाने लगा। उसको मैंने खींच के बेड पे लिटा दिया और मैं उसके ऊपर आ गया और उसको चूमना शुरु कर दिया। दस मिनट तक मैं उसको चूमता रहा।
फिर मैंने उसका शर्ट खोल दिया। उसके बाद मैंने उसकी ब्रा भी खोल दी। जैसे ही मैंने उसकी ब्रा खोली तो उसके दूध उछल कर बाहर आ गये, मैं उन्हें देखकर उसको दबाने लगा। कितने दिनों के बाद इसके पूरे के पूरे बूब्स देखने को और दबाने को मिले.
फिर मैंने उसकी निप्पल को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगा. वो आआआह्ह ह्ह्हहाआआ आह्हह्हा ह्हह्ह कर रही थी।
मैं उसे चूसता ही रहा.
थोड़ी देर बाद मैंने उसकी जींस खोल कर उसको पैंटी में ला दिया. उसकी चूत बहुत गर्म हो गयी थी, पानी छोड़ रही थी तो उसकी पैंटी गीली हो चुकी थी। मैंने पैंटी को निकाल दिया और उसकी चूत को फैला के चाटने लगा।
वो सिसकारी भर रही थी- अहाआआ अस्सस्स शहस आअहह ह्हह स्सस स्सशाआ आहस्सह स्सस अह्हह ह्हह ह्हहह हस्साआ आअह्ह ह्हहा ह्ह्हाआ ह्हह्हा!
वो मेरे लंड को हाथ में लेकर खींच रही थी और कस कर दबा रही थी।
फिर मैना ने अपनी कमर को ऊपर उठा लिया और मेरे तने हुए लंड को अपनी जांघों के बीच लेकर रगड़ने लगी। वो मेरी तरफ़ करवट लेकर लेट गयी ताकि मेरे लंड को ठीक तरह से पकड़ सके। उसकी चूची मेरे मुंह के बिल्कुल पास थी और मैं उन्हें कस कस कर दबा रहा था।
अचानक उसने अपनी एक चूची मेरे मुंह में ठेलते हुए कहा- चूसो इनको मुंह में लेकर!
मैंने उसकी एक चूची मुंह में भर लिया और जोर जोर से चूसने लगा। थोड़े देर के लिये मैंने उसकी चूची को मुंह से निकाला और बोला- मैं हमेशा तुम्हारी कसी चूची के बारे में सोचता था और हैरान होता था। इनको छूने की बहुत इच्छा होती थी और दिल करता था कि इन्हें मुंह में लेकर चूसूँ और इनका रस पीऊं। पर डरता था कि पता नहीं तुम क्या सोचो और कहीं मुझसे नाराज़ न हो जाओ। तुम नहीं जानती मैना कि तुमने मुझे और मेरे लंड को कितना परेशान किया है.
“अच्छा तो आज अपनी तमन्ना पूरी कर लो, जी भर कर दबाओ, चूसो और मज़े लो; मैं तो आज पूरी की पूरी तुम्हारी हूं, जैसा चाहे वैसा ही करो! मस्तराम की कहानी जैसे मुझे चोद दो!” मैना ने कहा।
फिर क्या था, मैना की हरी झंडी पाकर मैं जुट पड़ा मैना की चूची पर … मेरी जीभ उसके कड़े निप्पल को महसूस कर रही थी। मैंने अपनी जीभ मैना के उठे हुए कड़े निप्पल पर घुमाया। मैं दोनों अनारों को कस के पकड़े हुए था और बारी बारी से उन्हें चूस रहा था। मैं ऐसे कस कर चूचियों को दबा रहा था जैसे कि उनका पूरा का पूरा रस निचोड़ लूंगा। मैना भी मेरा पूरा साथ दे रही थी। उसके मुंह से ओह! ओह! अह! सी सी! की आवाज निकल रही थी। मुझसे पूरी तरह से सटे हुए वो मेरे लंड को बुरी तरह से मसल रही थी और मरोड़ रही थी।
उसने अपनी एक टांग को मेरे कंधे के उपर चढ़ा दिया और मेरे लंड को अपनी जांघों के बीच रख लिया। मुझे उसकी जांघों के बीच एक मुलायम रेशमी अहसास हुआ। यह उसकी चूत थी। मैना ने पैंटी नहीं पहन रखी थी और मेरे लंड का सुपारा उसकी झांटों में घूम रहा था।
मेरा सब्र का बांध टूट रहा था, मैं मैना से बोला- मैना, मुझे कुछ हो रहा है और मैं अपने आपे में नहीं हूं, प्लीज मुझे बताओ मैं क्या करूँ?
मैना बोली- करो क्या … मुझे चोदो, फाड़ डालो मेरी चूत को।
मैं चुपचाप उसके चेहरे को देखते हुए चूची मसलता रहा। उसने अपना मुंह मेरे मुंह से बिल्कुल सटा दिया और फुसफुसा कर बोली- अपनी मैना को चोदो!
मैना हाथ से लंड को निशाने पर लगा कर रास्ता दिखा रही थी और रास्ता मिलते ही मेरा लंड एक ही धक्के में सुपारा अंदर चला गया।
इससे पहले कि मैना सम्भले या आसन बदले, मैंने दूसरा धक्का लगाया और पूरा का पूरा लंड मक्खन जैसी चूत की जन्नत में दाखिल हो गया।
मैना चिल्लाई- उईई ईईईइ ईईइ माआआ हुहुह्हह ओह रोहित, ऐसे ही कुछ देर हिलना डुलना नहीं, हाय! बड़ा जालिम है तुम्हारा लंड। मार ही डाला मुझे तुमने मेरे राजा।
मैना को काफ़ी दर्द हो रहा था। पहली बार जो इतना मोटा और लम्बा लंड उसकी बुर में घुसा था।
मैं अपना लंड उसकी चूत में घुसा कर चुपचाप पड़ा था। मैना की चूत फड़क रही थी और अंदर ही अंदर मेरे लौड़े को मसल रही थी। उसकी उठी उठी चूचियां काफ़ी तेज़ी से ऊपर नीचे हो रही थी। मैंने हाथ बढ़ा कर दोनों चूची को पकड़ लिया और मुंह में लेकर चूसने लगा। मैना को कुछ राहत मिली और उसने कमर हिलानी शुरु कर दी।
फिर मैना बोली- अब लंड को बाहर निकालो!
लेकिन मैं मेरा लंड धीरे धीरे मैना की चूत में अंदर-बाहर करने लगा। फिर मैना ने स्पीड बढ़ाने को कहा। मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और तेज़ी से लंड अंदर-बाहर करने लगा। मैना को पूरी मस्ती आ रही थी और वो नीचे से कमर उठा उठा कर हर शोट का जवाब देने लगी। रसीली चूची मेरी छाती पर रगड़ते हुए उसने गुलाबी होंठ मेरे होंठ पर रख दिये और मेरे मुंह में जीभ ठेल दिया।
चूत में मेरा लंड समाये हुए तेज़ी से ऊपर नीचे हो रहा था। मुझे लग रहा था कि मैं जन्नत पहुंच गया हूं। जैसे जैसे वो झड़ने के करीब आ रही थी उसकी रफ़्तार बढ़ती जा रही थी। कमरे में फच फच की आवाज गूंज रही थी मैं मैना के ऊपर लेट कर दनादन शोट लगाने लगा।
मैना ने अपनी टांग को मेरी कमर पर रख कर मुझे जकड़ लिया और जोर जोर से चूतड़ उठा उठा कर चुदाई में साथ देने लगी। मैं भी अब मैना की चूची को मसलते हुए ठकाठक शोट लगा रहा था। कमरा हमारी चुदाई की आवाज से भरा पड़ा था। मैना अपनी कमर हिला कर चूतड़ उठा उठा कर चुदा रही थी और बोले जा रही थी- अह्हह आअह्हह उनह्हह ऊओह्हह ऊऊह्हह हाआआन हाआऐ मीईरे रजज्जजा, माआआअर गययये रए, ललल्लल्ला चूऊओद रे चओद … उईई मीईईरीईइ माआअ, फआआअट गआआयीई रीईई शुरु करो, चोदो मुझे। लेलो मज़ा जवानी का मेरे राज्जज्जा!
और अपनी गांड हिलाने लगी।
मैंने लगातार 20 मिनट तक उसे चोदा। मैं भी बोल रहा था- लीईए मेरीई रानीई, लीई लीईए मेरा लौड़ा अपनीईइ ओखलीईए मीईए। बड़ाआअ तड़पयया है तूनेई मुझे ए लीईए लीई, लीई मेरीईइ मैना ये लंड अब्बब्ब तेराआ हीई है। अह्हह्ह! उह्हह्ह्ह क्या जन्नत का मज़ाआअ सिखयाआअ तुनीईए। मैं तो तेरा गुलाम हो ऊऊ गया अए।
मैना अपनी गांड उछाल उछाल कर मेरा लंड चूत में ले रही थी और मैं भी पूरे जोश के साथ उसकी चूचियों को मसल मसल कर अपनी मैना को चोदे जा रहा था।
मैना मुझको ललकार कर कहती- लगाओ शोट मेरे राज!
और मैं जवाब देता- ये ले मेरी रानी, ले ले अपनी चूत में।
“जरा और जोर से सरकाओ अपना लंड मेरी चूत में मेरे राज!”
“ये ले मेरी रानी, ये लंड तो तेरे लिये ही है।”
“देखो राज्जज्जा मेरी चूत तो तेरे लंड की दिवानी हो गयी, और जोर से और जोर से आआईईईए मेरे राज्जज्जजा। मैं गयीईईईईए रीई!” कहते हुए मेरी मैना ने मुझको कस कर अपनी बांहों में जकड़ लिया और उसकी चूत ने ज्वालामुखी का लावा छोड़ दिया।
अब तक मेरा भी लंड पानी छोड़ने वाला था और मैं बोला- मैं भी अयाआआ मेरी जाआअन!
और मैंने भी अपने लंड का पानी छोड़ दिया और मैं हांफ़ते हुए उसकी चूची पर सिर रख कर कस के चिपक कर लेट गया।
तो दोस्तो, यह थी मेरी गर्लफ्रेंड मैना की चुदाई की मस्तराम Antarvasna कहानी।
मैं अपनी फ़र्स्ट इयर की पढ़ाई कर Antarvasna रहा था। मुझे याद है उस समय बरसात का मौसम था…. पापा ने मुझे बताया कि दीदी के साथ उदयपुर जाना है। दीदी की उम्र करीब 27 वर्ष की थी। जयपुर में भी एक दिन रुकना है। मुझे घूमने का वैसे ही बहुत शौक था। मैंने तो तुरन्त हां कह दी। फिर दीदी मुझे कई चीजें भी देती थी। पापा ने हमारा बस में रिजर्वशन करवा दिया था।
दिन की बस थी सो हमने खाना वगैरह खा कर बस में बैठ गये…. दीदी खिड़की वाली सीट पर थी। बस के चलने के बाद थोड़ी ही देर में बरसात शुरु हो गई थी। रास्ते भर दीदी पर खिड़की से छींटे आते रहे और बार बार वो रुमाल से अपने हाथों को और बोबे को पोंछती जाती थी। मैंने भी उनकी मदद की और एक दो बार मैंने भी दीदी बोबे को अपने रूमाल से साफ़ कर दिया। उन्होने मुझे घूर कर देखा भी…. हाथ लगाते ही दीदी के उभार लिये हुए चिकने और नरम बोबे मेरे दिल में बस गये।
बस के हिचकोले से वो बार बार मुझ पर गिर सी जाती थी। एक बार तो उनका हाथ मेरे लण्ड पर भी पड़ गया। मुझे लगा कि दीदी जान कर के मुझे उकसा रही है। मैं भी जवान था, मेरे दिल में भी हलचल मच गई। शाम होते होते हम जयपुर पहुंच चुके थे। टूसीटर ले कर हम सामने ही होटल में रुक गये और वहीं से दूसरे दिन का उदयपुर स्लीपर का रिजर्वशन करवा लिया। दीदी काऊंटर पर गई और कमरा बुक करवा लिया। मैंने सारा सामान एक साईड में रख दिया।
हमने खाना जल्दी ही खा लिया और होटल के बाहर टहलने लगे। दीदी मुझे कभी आईसक्रीम तो कभी कोल्ड ड्रिंक पिला कर मुझे खुश कर रही थी। मुझे लगा मुझे भी दीदी के बदन को हाथ लगा कर खुश कर देना चाहिये। सो मैंने टहलते हुए मजाक में दीदी के चूतड़ पर हाथ मार दिया। उस हाथ मारने में मुझे उनके गाण्ड का नक्शा भी महसूस हो गया। दीदी की गाण्ड पर मेरा हाथ लगते ही वो चिहुंक गई….मुझे फिर से उसने मुस्करा कर देखा, मुझे इस से ओर बढ़ावा मिला। मुझे भी बहुत आनन्द आ रहा था इस सेक्सी खेल में।
“शैतान….मारने को यही जगह मिली थी क्या….?” मतलब भरी निगाहों से मुझे देखते हुए उसने कहा।
“दीदी….मजा आया ना….! नरम गद्देदार है….!” मैंने उसे छेड़ा।
“चल हट…. ” कह कर दीदी ने भी मेरी चूतड़ पर एक चपत लगा दी।
“दीदी एक और चपत लगाओ ना….” मैंने शरारत से कहा।
“क्यो तुझे भी मजा आया क्या ?” दीदी मुस्कराने लगी।
“हां….लगता है खूब मारो और बल्कि दबा ही दो !” मैं भी थोड़ा खुल गया।
“जानता है मुन्ना….मेरी भी हनीमून मनाने की इच्छा होती है !”
ये सुनते एकाएक मुझे विश्वास नहीं हुआ। मैंने अन्जान बनते हुए कहा,”ये कहां मनाते हैं? कैसे करते हैं?”
“होटल में और कहां….!” दीदी ने मेरी ओर देखते हुए कहा।
“होटल में….चलो ज्यादा से ज्यादा कुछ खर्चा हो जायेगा….पर तुम्हारी इच्छा तो पूरी हो जायेगी ना….”
“बुद्धू …. नहीं मालूम है क्या….?”
“दीदी….कोई बताये तो मालूम हो ना…. हाँ एक फ़िल्म आई थी….मैंने नहीं देखी थी !”
“पागल है तू तो …. तुझे सब सिखाना पड़ेगा…. बोल सीखेगा?” मुझे मालूम हो गया कि दीदी मुझसे चुदना चाहती है।
“हनीमून सीखने वाली बात है क्या?”
दीदी मेरी पीठ पर घूंसे मारने लगी।
रात के 9 बजने को थे। हम फिर से होटल के कमरे में आ गये और सोने की तैयारी करने लगे। अचानक मेरी नजर बिस्तर पर गई। एक ही सिंगल बिस्तर था। मुझे लगा दीदी ने जान बूझ कर के सिंगल बेड लिया है, मैंने अपना पजामा पहन लिया और अंडरवियर मैंने नहीं पहनी। मैं दीदी को अपना फ़ड़फ़ड़ाता लण्ड दिखाना चाहता था। मैंने झुक कर देखा तो पजामे में से मेरा झूलता हुआ लण्ड बाहर से ही नजर आ रहा था।
दीदी मेरी सब बातों को नोट कर रही थी और मुस्करा रही थी। मेरे झूलते हुए लण्ड को तिरछी नजरों से देख भी रही थी। मुझे भी अब शरीर में सनसनी होने लगी थी। लण्ड भी अब खड़ा होने लगा था। दीदी ने भी अपना नाईट गाऊन पहन लिया पर मेरी तेज निगाहों ने भांप लिया था कि अन्दर वो कुछ नहीं पहने थी। मुझे लगा कि दीदी आज सेक्सी मूड में हैं, और शायद हीट में भी हैं….दीदी ने अपने हाथों को उठा कर और अपनी चूंचियों को उभार कर एक भरपूर अंगड़ाई ली ….मुझे लगा कि मेरे दिल के सारे टांके टूट जायेंगे। मुझे महसूस हुआ कि मैं इसका फ़ायदा ले सकता हूँ। शायद मेरी किस्मत खुल जाये। दीदी बिस्तर पर लेट गई और बोली…”अरे मुन्ना….यहीं आजा तू भी….”
सुनते ही मेरा लण्ड कड़क गया। मैं भी लाईट बन्द करके दीदी की बगल में लेट गया। बिस्तर बहुत ही संकरा था। हम दोनों का बदन छू रहा था। मेरा हाथ उनके बदन पर यहाँ वहाँ लग जाता था पर वो कुछ नहीं कह रही थी। कुछ ही देर में वो सो गई। पर मेरे दिल में हलचल थी। लण्ड भी कड़ा हो रहा था।
अचानक दीदी ने नींद में अपना हाथ मेरे लण्ड पर रख दिया….मेरे जिस्म में झुरझुरी आ गई पर उसने किया कुछ नहीं। मैंने लण्ड को थोड़ा सा और कड़ा कर दिया और हिला दिया। पर दीदी ने कुछ नहीं किया। वो नींद में मेरे से और चिपक गई। उनका हाथ मेरे पेट पर से होता हुआ लण्ड पर था। मुझे दीदी के जवान जिस्म की अब महक आने लगी थी। मैंने भी अपनी हथेली उनकी चूचियों के ऊपर जमा दी और उनके सांस लेते समय उनकी उठती और गिरती छातियों को हल्के से दबा कर मजे ले रहा था।
शायद दीदी की नींद खुल गई थी या वो नाटक कर रही थी। उन्होने चुपके से मेरी तरफ़ देखा, और मेरी नजरें उनसे मिल ही गई। हम दोनों आपस में एक दूसरे को निहारने लगे। उसकी आंखों में निमंत्रण था, भरपूर वासना थी। मेरे हाथ उसने नहीं हटाये और ना ही मेरे लण्ड पर से उसका हाथ हटा। हम दोनों ने एक दूसरे की मौन स्वीकृति पा कर मैंने उसकी चूंची पर दबाव बढ़ा दिया और नीचे मेरे लण्ड पर उसके हाथ का कसाव बढ़ गया। दोनों के मुख से एक साथ सिसकारियाँ फ़ूट पड़ी।
मेरा लण्ड मसलते हुए बोल पड़ी,”मुन्ना क्या कर रहा है….छोड़ दे ना….”
“दीदी…. हाय….आप कितनी अच्छी है…!.” मैंने गाऊन के अन्दर हाथ डाल दिया और चूंचियों का जायका लेने लगा, और मसलने लगा।
“मुन्ना….हाय कितना शैतान है रे तू….मेरे तो बोबे ही मसल डाले रे….!” दीदी ने मेरा पजामा का नाड़ा खींच दिया और अन्दर हाथ डाल कर मेरा लण्ड पकड़ लिया।
“दीदी….जरा जोर से मसलो ना…. दबाओ और दबाओ….बहुत मजा आ रहा है….!”
“तू भी मेरे बोबे खींच खींच कर दबा डाल….हाय रे….तू अब तक कहां था रे….!” मैंने दीदी की चूंची निकाल कर मुख में भर ली और मैं दूध पीने लगा। मेरा दूसरा हाथ उनकी चूत पर पहुंच गया। मैंने उनकी चूत दबा दी।
वो तड़प उठी….”अरे छोड़ दे जालिम मेरी चूत….”
“दीदी….तू भी मेरा लण्ड छोड़ दे….हाय रे….!”
“मुन्ना….चल अपन दोनों हनीमून मना लें….!”
“कैसे….?”
मेरा गाऊन ऊपर करके मेरे से चिपक जा….हनीमून अपने आप हो जायेगा। “
“सच दीदी….” मुझे तो अब चोदने की लग रही थी। लण्ड बेकाबू होता जा रहा था। मैंने गाऊन ऊंचा करके लण्ड उसकी चूत पर गड़ा दिया। दीदी ने अपनी चूत का मुँह खोल कर मेरे लण्ड का चिकना सुपाड़ा अपनी गीली चूत में फ़ंसा लिया और जोर लगा कर लण्ड अपनी चूत में अन्दर सरकाने लगी।
“ये लो मुन्ना….बन गया हनीमून…. अ….अ….आह्….स्सीऽऽऽऽऽऽऽ ….अह्ह्ह्ह्ह्….” लण्ड गहराई में धंसता चला गया। मेरे लण्ड के सुपाड़े में मिठास आने लगी। मैंने भी अपने चूतड़ का जोर लगा कर पूरा अन्दर तक घुसा डाला। दीदी तो चुद्दकड़ निकली….इतनी गहराई तक लण्ड लेने के बाद तो उसे और मस्ती चढ़ गई…. वो मेरे से चिपकती गई। मैंने उसे अपने नीचे दबा लिया और उसके ऊपर चढ़ गया। और उसकी नरम नरम चूत को चोदने लगा…. वो नीचे दबी सिसकती रही…. मैं आनन्द के सागर में डूब चला था। दीदी के कड़कती चूचियों को मसलता जा रहा था।
दीदी जैसे चुदाते समय भी तड़प रही थी, जैसे उसकी सारी इच्छायें पूरी हो रही हों…. कुछ ही देर में उसकी शरीर में जैसे ताकत भर गई हो….मुझे उसने बुरी तरह से भींच लिया….और सिसकी लेती हुई झड़ने लगी। मुझे भी लगा कि जैसे सारा संसार मेरे में सिमट रहा हो…. मेरे जिस्म ने ऐठन के साथ ही लण्ड से सारा वीर्य निकाल दिया। सारा वीर्य उसकी चूत में भरने लगा….मेरा लण्ड बार बार रुक रुक कर वीर्य छोड़ रहा था….जैसे सारा जिस्म निचोड़ लिया हो। मैं निढाल हो कर एक तरफ़ चित लेट गया। हम दोनों ही जाने कब सो गये।
सवेरे उठते ही नहा धो कर हमने नाश्ता किया। और घूमने निकल पड़े…. दिन भर में सारा काम निपटाया और रात की बस में बैठ गये। बस लगभग खाली थी। ठीक साढ़े नौ बजे बस रवाना हो गई। बस के चलने के बाद बस की लाईटें बन्द हो गई। अभी हम नीचे सीट पर ही बैठे थे जिसे हमें अजमेर में खाली करके स्लीपर में जाना था। सीट के साथ लगे पर्दे मैंने खींच दिये।
अंधेरे का फ़ायदा मैंने उठाते हुए दीदी के बोबे मसलने चालू कर दिये, दीदी ने भी मेरा लण्ड बाहर निकाल कर झुक कर चूसना शुरू कर दिया। वो मेरे सुपाड़े के रिंग को खास तरह से चूस रही थी। मेरा लण्ड बेहद कड़ा हो गया था। साथ में मैं सावधानी से इधर उधर भी देख लेता था कि कोई हमें देख तो नहीं रहा है….पर सब अलसाये हुए से आंखे बन्द किये पड़े थे। मैंने अब दीदी का सर अपने लण्ड पर जोर से दबा दिया और लण्ड से उसका मुँह चोदने लगा। मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हू, तो मैंने लण्ड दीदी के मुँह से लण्ड निकालने की कोशिश की पर दीदी लण्ड छोड़ने को तैयार नहीं थी…. मेरा वीर्य उसके मुँह में ही छूट पड़ा…. मै उसके सर को पकड़ कर उस पर दोहरा हो गया। मेरा सारा रस वो पी चुकी थी। मेरा एक दम साफ़ सुथरा लण्ड उसके मुह से बाहर निकला। मैंने जल्दी से अपनी पेन्ट की ज़िप चढ़ा दी। दीदी भी ठीक से बैठ गई। उसकी आंखे अभी भी शराबी लग रही थी।
अजमेर के बस स्टेण्ड पर बस आ गई थी….समय किस तेजी से निकला पता ही नहीं चला। यात्री बस में चढ़ रहे थे कुछ उतर रहे थे। हम भी कोल्ड ड्रिंक लेने के लिये उतर गये। हम दोनढ़ एक दूसरे से नजर मिला कर देखे जा रहे थे। आंखो ही आंखो में बातें हो रही थी।
तभी कंडक्टर ने कर तन्द्रा भंग की,”साहब जी….चलो या यहीं रहना है….?”
हम दोनों मुस्करा पड़े और बस की तरफ़ चल दिये। बस पूरी भर चुकी थी। हम दोनों आगे की डबल स्लीपर पर चढ़ गये…. हमने अपना सारा हिसाब जमाया और लेट गये…. पर्दा अच्छी तरह से खींच दिया। बस चल पड़ी। कुछ ही देर में बस की लाईट बंद हो गई और हमारे दिल में शैतान एक बार फिर से जाग उठा। बाहर अब हल्की सी बरसात होने लगी थी। ठण्डक बढ़ गई थी। हमने एक चादर ओढ़ ली।
कुछ ही देर में चादर के अन्दर कयामत टूट पड़ी। दीदी ने अपना कुर्ता ऊपर कर लिया और सलवार नीचे खींच ली। मैंने भी अपनी पैन्ट नीचे खींच ली। हम दोनों के लण्ड और चूत नीचे से खुले हुए थे। मैंने दीदी के चूतड़ों की दरार में अपना लण्ड दबा दिया। उसके गोल गोल मांसल चूतड़ की फ़ांके लण्ड के दबाव से खुलने लगी। मेरा लण्ड उसकी गाण्ड के छेद से टकरा गया।
“भैया आज तो गाण्ड भी हनीमून मनायेगी….!”
“चुप रह दीदी…. तेरी गाण्ड फ़ाड़ने को मन कर रहा है….!”
“फ़ाड़ दे मेरे मुन्ना….”
उसकी गाण्ड के छेद पर लण्ड ने अपना पूरा दबाव डाल दिया। मेरे लण्ड का रिंग उस छेद में अन्दर जा कर फ़ंस गया। अब मैंने और दीदी ने आराम की पोजीशन बना ली दोनो एक दूसरे से सट गये। दीदी ने भी अपनी गाण्ड पीछे उभार कर ढीली छोड़ दी। मैंने दीदी के बोबे पकड़ लिये और लण्ड अन्दर सरकाने लगा। मेरा लण्ड फिर मिठास से भरने लगा। मैंने अब धीरे धीरे लण्ड को अन्दर बाहर करना शुरु कर दिया। मुझे मजा आने लग गया। बस के झटके और सहायता कर रहे थे।
काफ़ी देर तक तक मैं उसकी गाण्ड मारने का मजा लेता रहा ….फिर मुझे लगा कि दीदी तो बेचारी अब तक प्यासी ही है। ये सोचते हुये मैंने अपना लण्ड गाण्ड से निकाल कर पीछे से ही उसकी चूत में घुसेड़ दिया। आनन्द की तेज सिसकारी दीदी के मुँह से निकल पडी…. मैंने तुरन्त उसके मुँह को दबा दिया….दीदी की नरम नरम चूत एक बार फिर मेरे लण्ड में उत्तेजना भरने लगी। चूत में अन्दर बाहर करने से दीदी और मुझे असीम आनन्द आने लगा। मैंने अब धक्के जमा कर जोर से मारने शुरू कर दिये। दीदी का जिस्म मसकने लगा…. बल खाने लगा….उसे जबरदस्त मस्ती चढ़ने लगी….जिस्म थरथराने लगा….
‘मुन्ना….मुझे जकड़ ले बोबे मसल दे…. राम रे….!” और दोहरी होते हुए झड़ने लगी…. अचानक मेरे लण्ड ने भी जोर से पिचकारी छोड़ दी। हम दोनों लगभग साथ ही झड़ने लगे थे…. एक दूसरे को हमने भींच रखा था……..। हम शान्त होने लगे थे। दीदी की चूत के पास वीर्य फ़ैल रहा था। मैंने तुरन्त चादर खींच ली और साफ़ करने लगा। पर उसकी चूत से रह रह कर वीर्य आता ही जा रहा था। मैंने अपना साफ़ रूमाल निकाला और उसे दीदी की चूत के अन्दर थोड़ा सा डाल कर रख दिया। दीदी ने अपना सलवार कुर्ता ठीक कर लिया। मैं भी पैन्ट पहन कर लेट गया। सवेरे बस उदयपुर पहुंच चुकी थी…. हमने टूसीटर वाले से किसी होटल में ले जाने को कहा….अब हम होटल में चाय नाश्ता कर रहे थे….
“मुन्ना ….अपना तो ये हनीमून का सफ़र हो गया….”
“दीदी बहुत मजा आता है ना…. होटल में….बस में…. कितना चोदा….मजा आ गया….” हम दोनों आगे प्लान बनाने लगे….काम का कम और हनीमून का अधिक …. उदयपुर बहुत सुन्दर जगह थी इसलिये हमने अपना प्रोग्राम दो दिन और बढ़ा लिया था….साथ में हनीमून के दिन भी बढ़ गये….
दोस्तो यह मेरी पहली कहानी है….कृपया अपने विचार भेजें….धन्यवाद। Antarvasna
अंतर्वासना पढ़ने Antarvasna Sex Stories वाले हर शख्स को मेरी तरफ से बहुत बहुत प्यार !
मैं इस अन्तर्वासना की एक-एक कहानी को तहे-दिल से पढ़ती हूँ और अपनी कक्षा में जाकर अपनी सहेलियों को भी सुनाती हूँ, फ्री पीरियड में बैठ कर हम यह सब एक दूसरी से शेयर करती और एक दूसरी के मम्मे वगैरा भी दबाती हैं, हल्की-फुल्की छेड़खानी !
हम तीन सहेलियाँ हैं रोज़ी, पिंकी और मैं पायल !
मैं अपनी दोनों सहेलियों से एक साल बड़ी हूँ, बीमार होने की वजह से मेरी एक क्लास ड्राप हो गई थी। मुझे समय से पहले ही जवानी आने लगी है, अब तो मैं काफी बड़ी लगने लगी हूँ।
मैं अक्सर शाम को रोज़ी के घर चली जाती हूँ, उसमें अभी भी बचपना सा है। हम एक साथ खेलती, कूदती हैं। उसने घर की पीछे के हिस्से में बेडमिंटन का जाल लगा रखा है। राजेश अंकल रोज़ी के पापा हैं, वो देखने में ही ठरकी किस्म के हैं, उनकी नज़रें मेरी छातियो पर ज्यादा टिकती हैं और अब मैं यह जान चुकी थी कि वो मुझ में कुछ ज्यादा ध्यान देने लगे, मैं सब समझती थी क्यूंकि मैं भी रोज़ रात को कंप्यूटर पर बैठ चेटिंग,सर्फिंग, वेबसाइट्स देखती और पढ़ती हूँ, मुझे सब चीज़ों का पता है, हिंदी में इन सबको क्या कहते हैं, मैं सब नेट से जान चुकी हूँ।
मैं भी शाम को स्कर्ट पहन कर जाती थी, जब मैं उछलती तो स्कर्ट उड़ती, अंकल अखबार सामने रख चोरी-चोरी मेरी चिकनी जांघें देख अपना लौड़ा खुजलाते। वैसे अब बाहर भी कई लड़के मेरे चारों तरफ मंडराने लगे हैं, फिर तो अंकल बढ़ने लगे और मुझे कहते- तुझे खेलना सिखाता हूँ !
मुझे मालूम था कि वो क्या खेल सिखाना चाहते थे। बहाने से मुझे छूते। उनके स्पर्श से मुझे कुछ होने लगता। कभी रैकट पकड़ना सिखाने के बहाने पीछे से मेरी गांड पर अपना लौड़ा रगड़ते, अंकल को मालूम था कि मैं सब जानती हूँ क्यूंकि एक दिन जब वो मेरे पीछे आये थे तो मैंने खुद गांड पीछे दबा दी थी।
एक दिन शाम को जब मैं वहां गई तो रोज़ी घर पर नहीं थी, ना ही उसकी मम्मी और उसका छोटा भाई !
शनिवार था, वो अपने नानी के घर गई हुई थी, मैं वापस आने लगी तो अंकल बोले- आ जा ! मेरे साथ खेल ले बेडमिन्टन !
न जाने मुझे क्यूँ लगा कि अंकल ने आज जानबूझ कर सब को घर से भेजा है ताकि वो मुझ से मजे कर सकें !
नहीं अंकल ! कल आऊँगी ! कहकर मैं मुड़ने लगी ही थी कि उन्होंने मेरी कलाई पकड़ मुझे अपनी तरफ खींच लिया। एक झटके में मैं उनकी बाँहों में थी, मेरा चेहरा उनके चेहरे के बहुत करीब था, अंकल ने ताज़ी शेव की थी, उन्होंने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए !
मैं भी उनके चुम्बन का प्रत्युत्तर देने लगी। नीचे से उनका दूसरा हाथ मेरी स्कर्ट में था। मुझे बहुत मजा आ रहा था, अंकल ने मेरे होंठ छोड़ते हुए कहा- चल, बिस्तर में चलते हैं !
मैंने थोड़ा ड्रामा करते हुए कहा- नहीं ! यह सब ठीक नहीं है, मुझे जाने दो !
मुझे कस कर बाँहों में भर अंकल बोले- आज मौका है रानी, तुझे जन्नत दिखाता हूँ !
मुझे बाँहों में उठा अपने बेडरूम में ले गए और मेरी स्कर्ट खोल दी और पैंटी नीचे करते ही अपने होंठ मेरी कुंवारी चूत पर रख दिए।
बहुत ठरकी थे वो !
मुझे मजा आने लगा. वो इस तरह चूत चाट रहे थे जैसे बहुत मीठी हो ! मैं पूरी गर्म हो चुकी थी। अंकल ने ने अपना सब कुछ उतार दिया मुझे 69 की अवस्था में आने को कहा। मैं उनके ऊपर थी, उन्होंने पकड़ कर लौड़ा मेरे मुँह में डाल दिया और मैं चूसने लगी। बहुत मजेदार लौड़ा था उनका ! जो मैंने इन्टरनेट पर देखा था, सब वही खेल मेरे सामने था। अंकल की पूरी जुबान मेरी चूत में घुस जाती, जब वो अन्दर घुमाते तो मैं पागल होकर उनका लौड़ा चूसती !
कुतिया मज़ा आ रहा है? कभी पहले किसी ने चूसी है तेरी?
नहीं अंकल !
कोई यार बनाया है अभी तक तुम दोनों ने ?
क्या ऊँगली डालती हो तुम सहेलियाँ एक दूसरी की चूत में ?
नहीं अंकल ! नहीं डालती !
लौड़ा डलवाएगी मेरा ?
हाँ अंकल !
कुछ कुछ हो रहा है !
हाय मेरी जान ! देख बुड्ढे का लौड़ा है ! पसंद है तुझे ?
हां पसंद है जानू ! फक मी ! अब कुछ करो !
मैंने अब खुद पकड़कर मुँह में डाल लिया और चूसने लगी।
वाह मुन्नी वाह ! अंकल बोले- चल कर टांगें चौड़ी कर और देख जलवा !
अंकल ने लौड़ा चूत पर रखते हुए झटका दिया, उसका टोपा मेरी चूत की फांको में फंस गया।
दर्द से हिल गई मैं !
छोड़ दो अंकल ! अभी छोटी है मेरी ! यह नहीं सहेगी !
चल कुतिया ! रंडी साली ! मुझे सब मालूम है- एक साथ तीनों कमरे में घुस कर इन्टरनेट पर क्या क्या देखती हो !
थोड़ा तेल लगा अंकल ने झटका मारा, उनका आधा लौड़ा चूत में फंस गया। मैं बेहोश होने लगी। खून से उनका लौड़ा लथपथ हो चुका था, झिल्ली फट चुकी थी एक और झटके में पूरा जड़ तक घुस गया। अंकल ने मेरे होंठ नहीं छोड़े ताकि आवाज़ न निकले !
फिर सारा लौड़ा निकाल कर साफ़ किया, चूत को साफ़ किया, तेल लगाया और फिर से घुसा दिया !
अब थोड़ा आराम से घिसता हुआ चला गया। फिर निकाला और फिर से थोड़ा तेल लगा कर डाला और अब मजे से आगे पीछे होने लगा। मुझे अब सब दर्द भूल गया। नीचे से गांड अपने आप उठने लगी झटकों के साथ साथ !
वो कभी एक चुचूक चूसते कभी दूसरा ! कभी कभी पूरा मम्मा मुँह में डाल लेते ! मेरी आंखें मस्ती से बंद होने लगी ! अंकल की रफ़्तार बढ़ने लगी। मैं एक बार झड़ चुकी थी। मेरी गर्मी से उनका भी पिघल गया और तेज़ तेज़ झटकों के साथ उन्होंने मेरी चूत अपने रस से भर दी और मुझे चुदाई का सुख दिया। मैं मस्ती में इतनी पागल हो चुकी थी कि आंखें नहीं खुल रही थी। वो काफी देर मेरे नंगे जिस्म को सहलाते, दबाते रहे। उसके बाद अगले दिन सुबह ही आने को कहा।
उसके बाद क्या-क्या हुआ। यह जानने के लिए मेरे साथ जुड़े रहो और मुझे मेल करो !
जल्दी ही अगले भाग के साथ आपके सामने हाज़िर हूँगी ! Antarvasna Sex Stories
मैं आप लोगों को एक गर्म सच्ची कहानी Antarvasna बता रहा हूं अपने दोस्त की बीवी की चुदाई की !
मेरा एक बचपन का दोस्त है। हम दोनों एक साथ बड़े हुए और उसकी शादी हो गई। शादी के कुछ दिनों बाद वो हमेशा अपनी बीवी की चुदाई कैसे करता है, बताता रहता था। जिसे सुनकर मेरा मन भी चुदाई करने को करता था और मैं सोचता था कि वो कैसे भाभी को चोदता होगा और भाभी कैसे चुदवाती होगी।
एक दिन मैंने उसे कहा- यार ! मेर मन चुदाई के लिए करता है और मेरे पास कोई जुगाड़ भी नहीं है। उसने कुछ नहीं कहा, लेकिन अगले दिन उसने मुझे कहा कि मैं उसकी बीवी को चोदना चाहूं तो चोद सकता हूं, उसे कोई परेशानी नहीं। मैंने कहा कि भाभी क्या चुदाई के लिए मान गई
तो उसने कहा- नहीं, लेकिन मान जाएगी क्योंकि उसे ग्रुप सेक्स की कहानियाँ सुनने में अच्छी लगती हैं और मैं उसे तुम्हारे बारे में कुछ नहीं बताऊंगा। आज रात को जब मैं उसे ग्रुप सेक्स की कहानी सुना कर उसकी आंखों पर पट्टी बांध कर चोदूंगा, तभी तुम भी चोद लेना। बाद में उसे बताएंगे कि तुमने भी उसकी चुदाई की है।
रात को मैं उसके कमरे में छुप गया। फ़िर भाभी आई और बोली कि तुम्हारा दोस्त गया क्या?
तो वो बोला- हाँ ! गया।
तो भाभी ने दरवाज़ा बंद कर लिया और बोली- कोई सेक्सी नग्न फ़िल्म दिखाओ ना !
मेरे दोस्त ने XXX फ़िल्म लगा दी। भाभी फ़िल्म देखते देखते गरम हो गयी और मेरे दोस्त के कपड़े उतारने लगी। फ़िर अपने कपड़े भी उतार दिए। मैं तो भाभी का जवानी से भरा बदन देख कर पागल हो गया- क्या फ़ीगर थी उनकी ३६-२६-३४ उनकी चूत पर एक भी बाल नहीं था, उनकी इतनी खूबसूरत चूत छूने के लिए मेरा मन मचलने लगा। मेरे दोस्त ने भाभी की आंखों पर पट्टी बांध कर मुझे पास आने के लिए इशारा किया और भाभी के बदन से लिपट गया। सामने भाभी को नंगी देख कर मेरे लंड में तूफान आ गया।
फिर मेरा दोस्त भाभी की चूत घोड़ी बना कर लेने लगा थोड़ी देर में उसने अपना लंड निकाल लिया और मुझे इशारा किया कि मैं लंड डाल दूँ। मैंने तुंरत ही अपना लंड भाभी की चिकनी चूत में डाल दिया।
लंड जाते ही भाभी बोली- अचानक तुम्हारा लंड इतना मोटा क्यों लग रहा है? तो मेरे दोस्त ने उसकी आंखों पर से पट्टी खोल दी तो भाभी ने पलट कर मुझे देखा तो मुस्कराई और कहा कि मुझे अच्छा लग रहा है मैं भी यही चाहती थी कि मेरी चुदाई दो दो लंड से हो, मुझे आज खूब जोर जोर से चोदो।
फिर क्या था मैं तो भाभी को खूब मस्ती में चोदने लगा और भाभी आहें भरने लगी। मैं कभी भाभी की कमर पकड़ता तो कभी चूची। फिर थोड़ी देर बाद मैंने लंड निकल लिया और भाभी को लेटा दिया और कहा कि तुम बहुत सेक्सी लग रही हो और भाभी की चूत को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा भाभी सिसकने लगी और मैं चूत को अपने होटों से जोर जोर से चूमने लगा। भाभी एक दम तड़पने लगी और कहा कि मेरी प्यासी चूत में अपना मोटा लंड डाल कर इसकी प्यास बुझा दो।
फिर मैंने भाभी के उप्पर चढ़ कर चूत में लंड डाल दिया और चूची मुंह में लेकर स्वर्ग का मजा लेने लगा उस समय मेरे दोस्त ने भाभी से कहा कि मैं तो पहले ही जानता था कि तुम चुदवा लोगी क्योकि ग्रुप सेक्स की कहानी सुन कर तुम बहुत जोशीली हो जाती थी। आज तुम्हें चुदते हुऐ देखने में बड़ा मज़ा आ रहा है, लेकिन तुम दोनों मेरे सामने ही चुदाई करना ! नहीं तो लोगों को शक हो सकता है।
तो भाभी ने कहा कि अगर किसी को न पता लगे तो हर औरत चुदवाना चाहती है और यहाँ तो आप मुझे चुदवा रहें हैं, अब तो मैं हर रात आप दोनों से चुदवाना चाहती हूँ।
फिर रात भर मैंने और मेरे दोस्त ने मिल कर भाभी को खूब चोदा उसके पूरे बदन को खूब प्यार किया फिर हर दो तीन दिन में हम तीनो साथ साथ चुदाई करने लगे। फिर एक दिन मेरे दोस्त की बदली पुणे हो गई और हम लोग अलग हो गए। आज कल मेरा मन चुदाई के लिए तड़पता है दिल करता है कि भाभी वापस आ जाए लेकिन ये हो नहीं सकता। Antarvasna
आज मैं भी आपको Sex Stories अपनी कहानी सुनाना चाहती हूँ। इस समय मेरी उम्र लगभग २० वर्ष हो चुकी है। मैं बी.ए. द्वितीय वर्ष में पढ़ती हूँ। हमारा कालेज को-एड है। साथ की सभी लड़कियों/सहेलियों के बॉय-फ्रैण्डस थे सिवाय मेरे।
एक बार की बात है कि मेरे ग्रुप के सभी लड़के-लड़कियों का झील पर पिकनिक मनाने का प्रोग्राम बना। मेरा भी उनके साथ जाने को बहुत मन था, सो मैं भी उनके साथ चली गई। झील पर जाकर सब ग्रुप में नहाने लगे। मैं भी अपनी सहेलियों के साथ थीं। झील के चारों ओर घना जंगल था। सब एक-दूसरे से छेड़खानी और बहुत मजा कर रहे थे।
पहले तो लड़के लड़कियाँ अलग-अलग ग्रुप में थे पर जल्दी ही हम लोग आपस में मजे करने लगे थे। मेरी सहेलियों के साथी भी उन्हें आकर छेड़ने लगे थे।
छेड़छाड़ धीरे-धीरे बढ़ रही थी और कपड़ों के उतरने तक पहुँचने लगी थी। लड़के मेरी सहेलियों की चुचियाँ दबाने लगे थे और लड़कियाँ उनके लन्ड दबाकर मजे ले रही थीं। धीरे-धीरे वे अपने-अपने जोड़े बनाकर जंगल में जाने लगे। और मैं शायद अकेली रह गई थी। लेकिन सबको देखकर मेरी जवानी में भी आग लग रही थी।
तभी अचानक मेरे टाँगों पर मैंने किसी की पकड़ महसूस की। मेरी साँस ऊपर की ऊपर और नीचे की नीचे रह गई। अचानक नीचे ही नीचे उस अजनबी हाथ की उँगलियाँ मेरी पैंटी को हटाकर मेरी चूत में तेजी से घुस गई थीं। ऐसा लगा जैसे मेरी चूत में किसी ने कोई चाकू डाल दिया हो। तभी वह अजनबी साया खड़ा हुआ। उसने मुझे पीछे से पकड़ लिया और मेरी चुचियाँ दबाने लगा। मैने देखा तो मेरी ही क्लास का एक लड़का था। मैं विरोध करने की स्थिति में नहीं रह गई थी। मेरे सांसे भारी होती जा रहीं थीं। तभी उस लड़के की पूर्णतः नंगी गर्ल फ्रैण्ड़ वहां पर आ गई और उसे आवाज देकर कहने लगी कि अगर मुझे चोदना छोड़कर यहीं रहना हो तो मैं जा रही हूँ। तुम इसी के साथ रहो, यह सुनकर वह लड़का मुझे छोड़कर तुरन्त चला गया जैसे मेरी कोई अहमियत ही न हो।
मैं अपनी प्यासी जवानी के साथ फिर अकेली खड़ी रह गई। पर तब मुझे महसूस हुआ कि मेरी चूत में दर्द हो रहा है। मैने नीचे देखा तो हल्का सा खून दिखाई दिया। मैं डर कर सोच ही रही थी कि क्या किया जाये। कि तभी एक अजनबी आवाज ने मेरा ध्यान भंग कर दिया। मैने देखा कि एक छः फुट के लगभग एक जवान मेरे सामने खड़ा है। यद्यपि वो मेरे साथ बड़े अदब से बात कर रहा था। लेकिन मुझे एक तो उस लड़के और दूसरे अपनी कुंवारी चूत से होते दर्द के कारण बहुत गुस्सा आ रहा था सो मैं उस लड़के से बहुत बेरूखी से पेश आई।
तो वह बोला कि उसका पास ही में एक काटेज है और वो वहीं से मेरे साथ हुये एक-एक वाकये को देख रहा था। और जब उसने उस लड़के के जाने पर अपनी नाराजगी जाहिर की तो मुझे वो भी उस समय अपना दोस्त ही लगने लगा। उसने मुझसे कहा कि आपके निचले हिस्से से खून ज्यादा ही बह रहा है, आइये मेरे काटेज पर कुछ दवा लगा लीजिये, जब तक बाकी लोग फ्री हों आप आराम कर लीजियेगा।
मैं कुछ भी सोच नहीं पा रही थी सो वहीं खड़ी रह गई। उसने शायद मेरी स्थिति जान ली और अपने आप ही पानी में आकर मुझे अपनी गोदी में उठा लिया। कोई और मौका होता तो इस हरकत के लिये मैं उसे दो-चार तमाचे मार ही देती पर मेरी हालत आप समझ सकते हैं। जब वो मुझे कसकर पकड़कर अपने काटेज की ओर ले जा रहा था तो मेरी चुचियाँ उसके सीने पर और उसके हाथ मेरे चूतड़ों के नीचे थे।
खैर उसने रास्ते भर कोई गलत हरकत नहीं की। और गीले बदन ही मुझे काटेज में लेकर आ गया। जब उसने मुझे सोफे पर धीरे से लिटाया तो एक बुजुर्गवार से बोला कि बाबा, मेमसाहब कुछ देर आराम करेंगी, आप बाहर देखभाल करो कि कोई डिस्टर्ब न करे ! और अपना काम ध्यान से करना। वो बूढ़ा व्यक्ति तुरन्त ही वहाँ से चला गया। तभी उसने ध्यान दिलाया तो मैंने देखा कि चूत से खून कुछ ज्यादा ही तेजी से निकल रहा है। उसने तुरन्त पानी गर्म किया और मेरा नेकर और चड्डी उतारने लगा तो मैंने आपत्ति की पर वह बोला- मुझे डॉक्टर समझो और करने दो जो मैं कर रहा हूँ।
मैं चुप हो गई। उसने रूई के गरम फोहे से धीरे धीरे सारा खून साफ कर दिया पर मेरी आग को बहुत भड़का दिया। अब मेरी चूत चुदास की आग से जल रही थी। मुझे अन्दर से लग रहा था कि उस लड़के से आज पहली बार जी भर चुदवाना चाहिये। लेकिन मेरी हिचक अभी भी बाकी थी। वह शायद मेरी स्थिति भांप गया था, बोला- डरो नहीं इसे अपना ही घर समझो।
यह कहकर वह पीछे कुर्सी पर बैठ गया, लेकिन कभी मेरी चूचियों और कभी मेरी चूत को देखने लगा।
इतने में उसने उठकर टीवी और डीवीडी प्लेयर ऑन कर दिया। उस पर एक इंग्लिश ब्लू फिल्म चल रही थी। हम उस पिक्चर को देखने लगे। वह साथ में कोई इंग्लिश मैग्जीन भी पढ़ रहा था। उसके कवर पेज पर भी लड़कियों के नंगे चित्र छपे थे। एक कोने पर तो एक लड़की एक लड़के का लण्ड चूस रही थी तो दूसरे कोने पर चुदने-चोदने का सीन था। कुछ ऐसे ही सीन टी.वी. पर भी लगातार जारी थे।
ऐसे में मुझसे खुद पर काबू रखना असम्भव हो गया। मैं उठकर खुद ही उसके पास जाकर उसकी गोदी में बैठ गई। नीचे से तो मैं नंगी थी ही, बैठते ही चूत और गाँड के छेदों के बीच में कुछ सख्त डण्डा सा चुभता हुआ महसूस हुआ। मैं समझ गई कि यह उसका वही मस्ताना लण्ड है जो मेरी चूत का पहली बार उदघाटन करने वाला है। वह भी उत्तेजित हो चुका था। उसने मेरे होठों को अपने होठों से दबा लिया और लम्बा सा किस करने के साथ ही मेरे होठों को चूसने लगा। साथ ही मैने महसूस किया कि उसका हाथ मेरी चुचियों की तरफ बढ़ रहा था, वो भी उपर से नहीं, पठ्ठा सीधा अन्दर ही चला आ रहा था। मुझे वैसे तो गुदगुदी ही लगी लेकिन जैसे ही उसने तेजी से दबाना शुरू किया तो ऐसा लगा जैसे मेरी दोनो चुचियों में जबरदस्त दर्द हो रहा हो। मैं उससे और जोर जोर से दबाने को कहने लगी। पता नहीं क्यों मेरी सांसे भारी होती जा रही थीं। ऐसा लग रहा था जैसे मैं जन्नत की सैर कर रही हूँ।
तभी उसने अपना हाथ बाहर निकाला और मुझे पूरा नंगा करने लगा। बदले में मैने भी उत्तेजना में उसके कपड़े उतारने शुरू कर दिये। उसने मेरे कपड़े उतारने के बाद अपने कपड़े उतारने में भी मेरी मदद ही की। अब हम दोनों पूर्णतया नंगे थे। अब उसने मुझे नीचे लिटाकर मेरी चुचियों को चूसना शुरू कर दिया। मेरी लिये तो ये एक बहुत बैचेनी भरा अनुभव था। जब वो एक चूसता तो लगता कि दूसरी चूसे और जब दूसरी चूसता तो लगता कि पहली वाली को और जोर से चूसना शुरू कर दे।
अचानक उसने चुचियों को चूसना बन्द कर दिया। मुझे ऐसा लगा जैसे वो मेरा पता नहीं क्या छीनकर ले जा रहा है। लेकिन अगले ही मिनट उसने अपना मुंह जब मेरी चूत के मुँह के बीच में टिकाया और चाटा तो मुझे ऐसा लगा कि मेरी पूरी जान जैसे केवल चूत में सिमटकर रह गई हो। मेरी पूरी काया झनझना उठी। ये तो बिल्कुल जन्नत का नजारा था। वो तल्लीनता से मेरी चूत के रास्ते मेरी जान खींचने में लगा था और मैं बिन पानी की मछली की तरह तड़प रही थी।
अब मैं पूरी तरह से चुदवाने के लिये तैयार थी पर मेरे बार बार कहने पर भी वो चूत छोड़ने को तैयार नहीं था। अचानक मुझे एक रास्ता सूझा उससे अपनी चूत को मुक्ति दिलाने का। मैने उससे कहा- पिक्चर वाली लड़की की तरह मैं भी तुम्हारा लण्ड चूसना चाहती हूँ।
मेरी तरकीब काम कर गई, वो खड़ा हो गया और मैं उकड़ू बैठकर उसका लण्ड जोरों से चूसने लगी। वो मेरे सिर को पकड़कर ऐसे आगे पीछे करने लगा जैसे मुझे मुँह के रास्ते चोद रहा हो। अब मैने उससे कहा- मुझे जल्दी से चोदकर इस चुदास के दर्द से मुक्ति दिला दो।
इस पर उसने मुझे अपने ऊपर लिटाया और बोला कि लण्ड को चूत के छेद पर लगा कर के जोर लगाओ, चला जायेगा।
मैंने पूरा प्रयास किया लेकिन शायद अन्दर लेने की जल्दी में वो बार-बार फिसल जाता और दर्द दे जाता। तीन-चार बार असफल होने के बाद मैने उसकी तरफ तरसी निगाहों से देखा तो उसने मुझे नीचे लिटाकर लण्ड डालने का शायद नाटक किया। यह तो मुझे बाद में पता चला। उस वक्त तो उसने कहा- तुम्हारी चूत ज्यादा टाईट है इसिलिये अन्दर नहीं जा पा रहा। कई तरह से ट्राई करने के बाद उसने मुझसे कुतिया की तरह बैठने को कहा। तब तक मेरी हालत वाकई कुतिया से भी बदतर हो चुकी थी। सो उसने जैसे कहा मैने वैसे ही कर दिया। अब वो मेरे पीछे से ऊपर था और मैं कुतिया बनी उसके नीचे।
मेरे मुँह से तेजी से गर्म सांसे निकल रहीं थीं, मैं जैसे बुरी तरह हांफ रही थी। अब वो मेरे पीछे घुटनों के बल आकर बैठ गया। और अपना लन्ड मेरी चूत के मुँह पर रख दिया। उसका लण्ड गर्म सरिये की तरह गर्म हो रहा था। ऐसा लगा जैसे मेरी चूत किसी गर्म तवे से छू हो गई हो। मैं अभी यह सोच रही थी कि उसने अचानक पीछे से मेरी चूत में अपने टाइट लण्ड का जोरदार झटका दिया और शायद उसका आधा लण्ड पहली ही बार में मेरी कुंवारी चूत में चला गया।
मैं दर्द से बिलबिला उठी। ऐसा लगा कि कोई खंजर मेरी चूत के रास्ते मेरे अन्दर उतर गया। मेरी सारी चुदास उस दर्द के एक ही झटके में उतर गई। मैने उससे बचने को आगे भागने ही थी कि उसने मेरा इरादा भांप लिया और मुझे मेरी गाण्ड से पकड़कर नीचे गिरा लिया। अब मैं दर्द से बिलबिला रही थी लेकिन वो मुझे छोड़ने के बिल्कुल भी मूड़ में नहीं लग रहा था। मैंने रो-रोकर उससे छोड़ने की गुजारिश की लेकिन वो जालिम मुझे छोड़ नहीं रहा था।
मैं अभी पहले झटके से ही नहीं उबरी थी कि उसने मेरी कमर पकड़कर मुझे उठाया और दूसरा करारा झटका दे दिया। इस बार उसका पूरा का पूरा लण्ड मेरी चूत में उतर गया। मेरे चूतड़ उसकी जांघो से जा टकराये। अब तो दर्द बिल्कुल ही बर्दाश्त के बाहर हो गया। अब उसने पहली बार प्यार से मुझे पुचकारा और मेरी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया और उसकी इस चूचियों को जोर से दबाने और कमर चाटने की हरकत ने मेरा दर्द आश्चर्यजनक रूप से कम करना शुरू कर दिया।
उसका लण्ड यद्यपि मेरी चूत के अन्दर ही था पर अब उतना दर्द महसूस नहीं हो रहा था। अब उसने धीरे-धीरे अपने लण्ड को अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया। कुछ ही देर में मुझे भी तीखे दर्द के बावजूद मजा सा आने लगा। अब मैं उसे तेजी से धक्के लगाने को कहने लगी। उसने मेरा ध्यान रखते हुये धक्के तेजी से लगाने शुरू कर दिये। करीब १५-२० मिनट तक उसने अलग-अलग कोणों से मुझे चोदा और मुझे बहुत मजा दिया। तभी मुझे लगा जैसे मेरी चूत में से कुछ निकल रहा है। मैं डिस्चार्ज हो रही थी। कुछ धक्के लगाने के बाद वो भी डिस्चार्ज हो गया। लेकिन यह कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। मुझे बाद में पता चला कि ये तो केवल शुरूआत भर थी।
आगे ……………………….
फिर कभी। Sex Stories
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