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प्यासी भाभी की गर्मी यानि अन्तर्वासना ने उसे गैर मर्द की तरफ जाने को मजबूर कर दिया क्योंकि उसके पति में उसे खुश करने की ताकत नहीं बची थी. भाभी ने अपने पति के दोस्त की ओर कदम बढ़ाया.
‘आह उफ्फ जान … तेज आहहह और तेज.’
दीपिका के मुँह से मादक सिसकारियां निकल रही थीं.
अचानक सुभाष का शरीर ढीला पड़ गया.
तो दीपिका बोली- क्या हुआ?
सुभाष झिझकते हुए बोला- मेरा पानी निकल गया.
दीपिका गुस्से से बोली- अभी तो मजा आना शुरू हुआ था और आपका निकल गया!
सुभाष उदास हो गया और दीपिका की चूत से सुभाष का सिकुड़ा हुआ लंड बाहर निकल गया.
सुभाष लंड का पानी निकल जाने पर सुस्त होकर सो गया.
दीपिका अभी भी वासना की आग में जल रही थी. प्यासी भाभी की गर्मी अभी ठण्डी नहीं हुई थी.
उसकी चूत को कम से कम 15 मिनट चुदाई चाहिए होती थी और सुभाष ज्यादा से ज्यादा दो या तीन मिनट तक ही चूत में लंड रख पाता था.
रोज रात को यही होता.
आईए अब सेक्स कहानी की तरफ़ चलते हैं.
पंजाब के एक छोटे से शहर के रहने वाले सुभाष की उम्र लगभग 50 साल की है और दीपिका की उम्र 39 साल.
शादी के समय तो कुछ महसूस नहीं हुआ पर समय के साथ उम्र की ये असमानता दीपिका और सुभाष दोनों को महसूस होने लगी.
हालांकि दोनों की शादी को 21 साल हो गए थे और दोनों बच्चे भी काफी बड़े थे.
पर उम्र के मुताबिक दीपिका की शरीर की जरूरत को सुभाष अब अपनी उम्र के चलते पूरी नहीं कर सकता था.
खैर … रोज रात की तरह सुभाष लंड का पानी निकल जाने पर सो गया और दीपिका भी अपनी गर्म चूत को सहलाती हुई कब सो गई, उसको भी पता नहीं चला.
सुबह दोनों बच्चे स्कूल चले गए और सुभाष अपनी दुकान पर जाने के लिए तैयार हो गया.
जाते जाते सुभाष ने दीपिका को जल्दी दुकान आने को कहा क्योंकि उसको किसी जरूरी काम से जाना था.
सुभाष की शहर के प्रमुख चौराहे पर दवाईयों की दुकान थी.
अकेले होने के कारण दीपिका को भी दुकान पर बैठना पड़ता था.
करीब दो घंटे रोज दीपिका अकेले दुकान संभालती थी.
दीपिका ने घर के काम निपटाए और नाश्ता करने के बाद वह दुकान की तरफ़ चल दी.
दुकान पर जाने के बाद सुभाष अपने काम से निकल गया और दीपिका को बता गया कि उसे आने में देर लग सकती है.
सुभाष के जाने के बाद दीपिका के दिमाग में रात वाली बात चल पड़ी और वह बेचैन हो गई.
तभी दुकान पर सुभाष का दोस्त अनिल खन्ना आ गया और दीपिका उसके साथ बातचीत करने लगी.
रोजाना यही होता … अनिल खन्ना सुभाष का खास दोस्त था इसलिए दीपिका भी उसके साथ खुलकर हंसी मजाक कर लेती थी.
अनिल भी करीब 50 साल की उम्र का बंदा था.
उसके दो बेटे दूसरे शहरों में नौकरी करते थे और अनिल खन्ना को काफी पैसा खर्च के लिए भेजा करते थे. इस वजह से अनिल खन्ना को कोई काम करने की जरूरत नहीं थी.
दीपिका अनिल की तरफ़ आकर्षित हो गई थी.
दीपिका के दिल की बात अनिल समझता था पर वह ये भी समझ सकता था कि ये आकर्षण किस कारण से है.
वह खुद को इस लायक नहीं समझता था कि दीपिका की जरूरत पूरी कर सके इसलिए वह दीपिका से दूरी बना कर रखता था.
उस दिन अनिल ने दीपिका को उदास देख पूछा कि क्या हुआ उदास क्यों हो?
तो दीपिका बोली- ऐसा कुछ नहीं!
खन्ना ने कहा कि नहीं, कुछ तो बात है?
दीपिका बोली- अनिल जी, सच में कोई बात नहीं है.
अनिल ने कहा- नहीं बताना चाहती हो, तो जोर नहीं दूंगा. पर बताने से ही समस्या का समाधान निकाला जा सकता है.
दीपिका बोली- समस्या ही ऐसी है कि जिसका कोई समाधान नहीं है.
अनिल बोला- दीपिका, दुनिया में हर समस्या का समाधान हो सकता है, बस जरूरत होती है सही सलाह लेने की. तुम अपनी समस्या मुझे बताओ, मैं समाधान करने की कोशिश करूंगा.
दीपिका बोली- मेरी और सुभाष की उम्र में असमानता को अब मैं महसूस करने लगी हूं.
अनिल ने कहा- तो इसमें क्या समस्या है …. कोई हम उम्र दोस्त बना लो. जो तुझसे तेरे मुताबिक प्यार की बातें कर सकता हो और कभी कभी बिस्तर पर भी तुम्हारे अरमान पूरे कर दे.
दीपिका ने अनिल की तरफ़ हैरान होकर देखा.
तो अनिल बोला- दीपिका, इसमें गलत क्या है … और आजकल तो पति खुद पत्नी की मदद करता है!
तब दीपिका हंसती हुई बोली- तो आप बन जाओ ना मेरे दोस्त!
अनिल ने कहा- दीपिका, तुमसे प्यार करने वाला दोस्त तो मैं बनने के लिए तैयार हूं … पर बिस्तर पर मैं भी सुभाष की तरह कामयाब नहीं हो सकता क्योंकि इस उम्र में तुम्हारी छलकती हुई जवानी के उफान को मैं शायद नहीं सम्भाल सकता.
दीपिका बोली- अनिल जी, आपने तो मुझे दोराहे पर खड़ा कर दिया. मैं तो आपको पसंद करने लगी हूं.
तब अनिल ने कहा- दीपिका, मैं झूठ नहीं बोल सकता. जो बात सच है, मैं वही कह रहा हूँ.
दीपिका बोली- आपकी इस सच्चाई ने तो मेरे दिल में आपके लिए इज्जत पहले से भी ज्यादा हो गई. अब आप ही कहो मुझे क्या करना चाहिए. मैं आपको भी नहीं खोना चाहती पर …
अपनी बात को अधूरा कहकर दीपिका चुप हो गई.
अनिल ने कहा- दीपिका इसका एक और तरीका भी है.
दीपिका ने कहा- क्या तरीका है?
अनिल बोला- तुम बिस्तर पर संतुष्टि के लिए एक और दोस्त बना लो.
दीपिका थोड़े गुस्से में बोली- क्या मुझे हर बात के लिए अलग अलग दोस्त बनाने होंगे?
अनिल ने मुस्कुरा कर कहा- एक इंसान में सभी गुण नहीं होते मेरी जान … और तुम्हारी दो अलग-अलग इच्छाओं के लिए दो दोस्त बनते हैं, तो इसमें कोई बुराई नहीं है.
दीपिका कुछ सोच कर बोली- अब जब मैंने आपके सामने अपने दिल की बात खुलकर बता दी, तो अब आप ही मेरी मदद भी करो.
अनिल मुस्कुरा कर बोला- जब बंदा आपसे प्यार करने लगा है, तो मैं आपकी हर इच्छा पूरी करने की कोशिश करूंगा मेरी जान. मैं सोच कर बताता हूं कि कौन हमारे लिए ठीक रहेगा!
दीपिका मुस्कुरा कर बोली- हां, अब ये आपकी ही जिम्मेदारी है.
तभी सुभाष को आते देख कर दोनों चुप हो गए.
अनिल कुछ समय सुभाष के साथ बातचीत करने के बाद दुकान से चला गया.
दीपिका खुश हो गई कि उसकी चिंता करने वाला एक अच्छा दोस्त मिल गया.
तभी दीपिका के मोबाइल पर अनिल का मैसेज आया कि मुझसे मिलो.
दीपिका ने रिप्लाई किया- कहां?
‘चिमन दर्जी की दुकान पर.’
दीपिका ने रिप्लाई किया कि वह 10 मिनट में पहुंच जाएगी.
दीपिका सुभाष से घर जाने के लिए कहकर दुकान से चल पड़ी और चिमन दर्जी की दुकान पर पहुंच गई.
वहां अनिल और चिमन दर्जी ही थे.
उन दोनों के अलावा ना कोई ग्राहक था और ना चिमन की दुकान पर काम करने वाले कारीगर थे.
अनिल दीपिका को देख कर कहा- लो चिमन भाई, आप नाप ले लो.
दीपिका मुस्कुरा कर बोली- नाप किस लिए?
अनिल बोला- आपके लिए कपड़े सिलवाने हैं.
दीपिका मुस्कुरा दी.
चिमन दर्जी ने दीपिका को एक भरपूर नजर से देखा और दीपिका का नाप लेने लगा.
दीपिका का सपाट पेट और कमर को देख चिमन दर्जी बोला- भाभी जी आप अपने शरीर पर बहुत अच्छे से ध्यान देती हो. आपका शरीर देखकर तो आपकी उम्र का अंदाजा लगाया नहीं जा सकता है.
ये सुनकर दीपिका खुश हो गई.
नाप लेने के बाद चिमन ने अनिल से कहा- हो जाएगा अनिल जी.
अनिल बोला- ठीक है, मैं बात करके बताता हूं. कब तक काम हो सकता है?
चिमन बोला- आप जब कहोगे.
अनिल बोला- ठीक है.
ये कहकर अनिल दीपिका को चलने के लिए बोला.
दीपिका और अनिल दुकान से बाहर निकल घर की तरफ़ चल पड़े.
अनिल ने अब दीपिका से पूछा- कब का प्रोग्राम बनाना है?
दीपिका ने पूछा- किस बात का प्रोग्राम?
तो अनिल बोला- तेरी चुदाई का!
दीपिका हैरान होकर बोली किस के साथ?
अनिल ने कहा- चिमन के साथ.
दीपिका अचकचा कर बोली- नहीं नहीं … चिमन के साथ कैसे कर सकती हूं?
अनिल ने कहा- क्यों नहीं कर सकती हो?
दीपिका बोली- अरे चिमन को मैं जानती भी नहीं. उसके साथ ये सब कैसे कर सकती हूं?
तब अनिल मुस्कुरा कर बोला- तब तुम कोई अपना कोई जानकार बताओ जो तुझे चोद ले!
दीपिका बोली- क्या चिमन पर भरोसा किया जा सकता है?
अनिल बोला- तुम मेरे पर विश्वास कर सकती हो या नहीं?
दीपिका बोली- आप पर तो पूरा यकीन है मुझे!
अनिल बोला- ठीक है. मुझे उन लोगों पर यकीन है कि ना केवल वे तुम्हें अच्छी तरह से चोद कर संतुष्ट कर सकते हैं बल्कि उनके माध्यम से किसी दूसरे को ये बात कभी भी पता नहीं चलेगी.
दीपिका बोली- उन लोगों का क्या मतलब?
अनिल ने मुस्कुरा कर बताया- चिमन दर्जी और जुम्मन कसाई.
दीपिका ये सुनकर बहुत हैरानी से अनिल की तरफ़ देख कर बोली- ये आप क्या कह रहे हैं. मैं दो लोगों से कैसे कर सकती हूं.
अनिल बोला- क्यों नहीं कर सकती हो. तुम्हारी सोच जैसे दोस्त मिल जाएं तो दोनों को दोस्त बनाने में क्या समस्या है?
दीपिका के पास अनिल की बात का फिर से कोई जवाब नहीं था.
तो दीपिका बोली- मैं दो दोस्तों के लिए समय कैसे निकाल सकती हूं?
अनिल मुस्कुरा कर बोला- जैसे एक के लिए निकालोगी वैसे ही.
दीपिका बोली- वह कैसे?
अनिल बोला- एक बार मैं, जुम्मन और चिमन दर्जी दिल्ली गए थे. वहां हमारा दिल चूत चोदने का हुआ. हम तीनों ने एक कालगर्ल को बुलाया. उसके लिए 7000 तय हुए.
दीपिका- फिर?
‘फिर पहले मैंने उसको चोदा और बाहर आ गया. उसके बाद चिमन अन्दर गया. थोड़ी देर बाद जुम्मन के मोबाइल पर फोन आया और जुम्मन भी अन्दर चला गया.’
एक पल के लिए अनिल ने रुक कर दीपिका को देखा.
फिर उसने आगे कहना शुरू किया- करीब दो घंटे बाद दोनों बाहर आकर मेरे पैसे जो मैंने अपने हिस्से के दिए हुए थे, वो उसने मुझे वापस दे दिए.
मैंने पूछा- ये कैसे हुआ?
तब जुम्मन कसाई बोला- हमारी चुदाई से खुश होकर कालगर्ल ने सारे पैसे वापस कर दिए.
ये छोटी सी घटना सुनने के बाद दीपिका हैरानी से अनिल का मुँह देखने लगी.
अनिल बोला- दीपिका मैं चाहता हूं कि दोनों की जोड़ी तुझे एक साथ चोदे. ताकि तुम पूरी तरह से संतुष्ट हो जाओ.
दीपिका बोली- कोई समस्या तो नहीं होगी ना?
अनिल बोला- कोई समस्या नहीं होगी मेरी जान, मुझे पर यकीन करो.
तभी अनिल के मोबाइल पर चिमन दर्जी की कॉल आई.
अनिल ने फोन पर ‘हां, ठीक है. मैं बात करके बताता हूं.’ कहकर फोन काट दिया.
दीपिका ने पूछा- क्या हुआ कुछ बात हुई चिमन दर्जी से?
अनिल बोला- जुम्मन तुम्हें देखना और मिलना चाहता है.
दीपिका बोली- आप उन्हें शाम को दुकान पर बुला लो.
तो अनिल ने कहा- नहीं, दुकान पर ठीक नहीं होगा. तुम्हारे घर पर ठीक रहेगा.
तो दीपिका बोली- ऐसे सबके सामने कैसे घर पर बुला सकती हूं?
अनिल बोला- उसका भी एक उपाय है मेरे पास!
दीपिका बोली- क्या उपाय है?
अनिल बोला- जुम्मन कबाड़ का काम भी करता है. तुम घर का कुछ कबाड़ निकाल कर रखो, बाकी काम मेरा है.
दीपिका समझ गई कि क्या करना होगा.
उसके पास चुदाई का ये बेहतरीन मौका था क्योंकि उसके दोनों बच्चे गर्मी की छुट्टियों में अपने मामा के घर गए हुए थे और मकान मालिक का बेटा बहू भी बाहर घूमने गए थे.
घर पर मकान मालिक और उनकी पत्नी ही थे जो काफी बूढ़े थे.
ये मकान मालिक दरअसल अनिल खन्ना के बड़े भाई और भाभी ही थे.
इधर एक बात और बता दूँ कि अनिल का मकान भी बाजू में ही लगा हुआ था, दोनों घरों की छतें आपस में मिली हुई थीं.
दीपिका मकान के ऊपर वाले हिस्से में किराए पर रहती थी.
तब दीपिका ने अनिल से कहा- मैं घर जा रही हूँ. आप शाम को दुकान पर पहुंच जाना.
अनिल हंसते हुए बोला- ठीक है मेरी जान.
फिर दीपिका घर पर आकर सीधे स्टोर में गई और काफी कबाड़ निकाल कर बाहर रख लिया.
शाम को दीपिका जब दुकान पर पहुंची तो देखा अनिल आया हुआ था.
दीपिका अपने पति सुभाष से बोली- जी, घर पर काफी कबाड़ इकट्ठा हो गया है, आप कोई कबाड़ी को बुला लो तो सारे कबाड़ को बेच देते हैं.
सुभाष बोला- अब एकदम से कबाड़ी को कैसे बुलाऊं?
उसी वक्त अनिल बोला- अरे यार क्यों चिंता करते हो, जुम्मन कबाड़ी मेरा ख़ास दोस्त है. उसको कहे देता हूं, वह घर पर आकर सारा सामान देख लेगा.
सुभाष बोला- हां ये बात ठीक है. तुम उसको फोन कर दो … वह कल सुबह आकर सब देख लेगा.
अनिल ने तुरंत जेब से फोन निकाला और जुम्मन को फोन करके कहा- जुम्मन भाई, हमारे भाई सुभाष के घर पर आपके लिए कुछ सामान है, कल सुबह आकर आप देख लो.
जुम्मन कसाई ने जवाब दिया- हां ठीक है कल सुबह 8 बजे आ जाता हूं.
अनिल ने सोचा कि 8 बजे तो सुभाष भी घर पर होता है. उसने फोन पर ही बात को सम्भालते हुए कहा- ठीक है जुम्मन भाई, आप कल 11 बजे आ जाना … पक्का!
जुम्मन बात को समझते हुए बोला- ठीक है, मैं 11 बजे आ जाऊंगा.
अनिल ने फोन काट दिया और दीपिका से कहा- भाभी, वह 11 बजे आ जाएगा. आप सारा सामान निकाल कर रखना.
सुभाष दीपिका और अनिल की बातों से अनजान सरल भाव से बोला- मैं तो उस समय दुकान पर रहूँगा दीपिका. तुम ही दिखा देना.
अनिल बोला- सुभाष यार भाभी अकेली क्यों होंगी … मैं साथ रहूंगा ना!
फिर कुछ देर बातचीत करने के बाद अनिल सुभाष की दुकान से चला गया.
अगले दिन सुबह सुभाष अपनी दुकान पर चला गया और दीपिका उसके जाने के बाद सारे काम निपटा कर नाश्ता कर नहाने जाने लगी.
उसके दिमाग में ख्याल आया कि क्या कपड़े पहनना चाहिए.
उसने सोचते हुए अपनी अल्मारी खोली और उसमें कपड़े देखने लगी.
तभी उसके सामने एक हल्के हरे रंग की चिकन कपड़े की कुर्ती आई, जिसको पहली बार पहनने पर ही सुभाष ने दीपिका को ये पहनने से मना कर दिया था क्योंकि ये कुर्ती काफी पारदर्शी कपड़े की थी.
इस कुर्ती में आगे की तरफ 3 बटन लगे थे और बटन के दोनों तरफ और कन्धे वाली जगह पर हल्की कशीदाकारी ने कुर्ती को काफी आकर्षक बना दिया था.
दीपिका ने उसी कुर्ती को पहनने का सोच लिया और उसके साथ एक काले रंग की सिल्क की पजामी अलमारी से बाहर निकाल ली.
साथ पहनने के लिए दीपिका ने एक गुलाबी रंग की ब्रा और कच्छी निकाल ली.
तभी कुछ सोच कर दीपिका के होंठों पर एक मुस्कान आई और दीपिका ने गुलाबी ब्रा वापस रख एक सफेद रंग की ब्रा निकाल ली.
ये ब्रा आगे हुक वाली थी.
दीपिका मन ही मन खुश हो बाथरूम में जाकर नहाने लगी.
आगे होने वाले घटनाक्रम के सुखद विचार आने से दीपिका की चूत रसीली होकर पानी पानी हो रही थी.
दीपिका ने खुद को खुशबूदार साबुन से खूब रगड़ कर साफ किया और नहाकर एक तौलिया लपेट कर बाहर आ गई.
कमरे का दरवाजा बंद कर आईने के सामने खड़ी होकर उसने तौलिया हटा दिया.
उफ्फ … क्या मदमस्त जवानी है दीपिका की … सपाट पेट के कुछ ऊपर 36 साईज की नुकीली चूचियां, बलखाती पतली कमर और 38 साइज़ के बड़े बड़े चूतड़.
हल्की सांवली, लेकिन खुद की रसभरी जवानी को देख दीपिका खुद शर्मा गई.
तभी उसके मोबाइल की घंटी बजी, तो दीपिका जैसे नींद से जागी.
उसने फोन देखा तो अनिल का फोन आया था.
फोन उठाने पर अनिल ने पूछा- क्या कर रही हो?
दीपिका खुद को शीशे में देख शर्मा गई और बोली- बस तैयार हो रही थी.
अनिल बोला कि जुम्मन कसाई और चिमन थोड़ी देर में आने वाले हैं. मैं साथ आऊंगा. उनके सामने आराम से आना, घबराने की कोई बात नहीं है.
दीपिका बोली- आप साथ रहोगे तो घबराहट नहीं होगी.
अनिल बोला- तुम कहो तो उन्हें अभी बुला लेता हूं. उनका तो फोन आया था … आने को कह रहे थे. मैंने सोचा पहले तुमसे पूछ लूं!
दीपिका बोली- हां बुला लो आप!
अनिल बोला- ठीक है, हम सब 15 मिनट में आते हैं.
दीपिका बोली- ठीक है जी.
ये सुनकर अनिल ने फोन काट दिया और दीपिका जल्दी से कपड़े पहनने लगी.
मैं रजनी, तीस वर्ष की एक नर्स हूँ, सरकारी Hindi Sex Stories अस्पताल में काम करती हूँ। स्टाफ़ की कमी के कारण मुझे काफ़ी काम देखना पड़ता था। इन दिनों मेरी नाईट-शिफ़्ट चल रही थी। अचानक ही कोई वार्ड के बाहर दिखा। कोई जवान लड़का था। उसने अपना सामान दरवाजे के बाहर ही रख दिया। मैंने उसे घूर कर देखा- यह कौन सामान के साथ होस्पिटल में आ गया?
मैं तुरन्त गई और पूछा,”आप कौन हैं? …. इतना सामान….?”
“जी….मैं….राम…. मैं यहाँ ट्रान्सफ़र पर आया हूँ…. कम्पाऊंडर हूँ….”
“ओह….आईये….मेरा नाम रजनी है !” सामान एक तरफ़ रखवा कर मैंने उसे बताया कि ऑफ़िस में जाकर अपनी ड्यूटी जोईन कर ले और पता लगा ले कि ड्यूटी कहाँ है।
राम कुछ ही देर में वापस आ गया। उसे मेरे ही सेक्शन में लगाया था। उसका सामान रेस्ट रूम में रखवा दिया। मेरा जूनियर था…. नया था शायद पहली बार इस शहर में आया होगा…. उसके रहने का कोई ठिकाना नहीं था…. कुछ सोच कर मैंने उसे क्वार्टर मिलने तक मैंने अपने क्वार्टर में रहने को कह दिया। मैं अभी कुछ ही दूर किराये के मकान में रहती थी और पहली तारीख से अस्पताल के क्वार्टर में शिफ़्ट करना था। उसे मैं सामने ही होटल में खाने के ले गई…. मेरे पास अपना टिफ़िन था।
बातचीत में पता चला कि वो पास ही गांव का था। कुछ ही देर में हम दोनों घुल मिल गये थे। राम बहुत हंसमुख था। छोटी मोटी बातों का बुरा नहीं मानता था। मेरे से वो लगभग छ: वर्ष छोटा था। पर चूंकि गांव से था इसलिये उसका शरीर भी गठा हुआ और रफ़ भी था। पर पहली ही नजर में मुझे वो अच्छा लगने लगा था। वो भी मुझसे मिलकर बहुत खुश था। उसे मेरा जिस्म और फ़िगर को बार बार निहारने में अच्छा लग रहा था, बिलकुल वैसे ही जैसे कि एक साधारण लड़का लड़की के अंगो को निहारता है।
राम को मेरे साथ ही काम करना था। उसकी और मेरी ड्यूटी साथ ही लगती थी। आज मैंने उसे एक दिन आराम करने का मौका दिया और अगले दिन से उसे भी नाईट ड्यूटी पर आना था। कुछ ही दिनों में हम दोनों में अच्छी बनने लग गई थी। मेरी मुस्कान उसे बहुत अच्छी लगती थी। बार बार वो यही कहता था कि आप हमेशा मुस्कुराते रहिये….अच्छी लगती हैं।
कुछ ही दिनों में मेरी नजरें भी बदलने लग गई। वो मुझे सेक्सी लगने लगा। उसमे मुझे मर्द नजर आने लगा था। मेरी नजरें रह रह उसके कभी लण्ड पर जाती और कभी उसके सुडौल चूतड़ों पर जाती। मेरी मन की भावनाएँ मैली होने लगी। मुझे लगाता कि काश….मैं उससे चुदवा पाती….। ऐसा नहीं था कि मेरे पति मेरा ख्याल नहीं रखते थे….मैं उनके साथ बहुत खुश थी। मेरा एक लड़का भी था….पर शायद मुझे नया माल….नया लण्ड मिलने की चाह थी। राम भी मेरे अन्दाज़ को भांप गया था। उसकी शादी नहीं हुई थी…. उसे भी शायद किसी लड़की को चोदने की इच्छा हो रही होगी। मैं मजाक में कभी कभी आजकल उसके चूतड़ो पर हाथ भी मार देती थी। वो सिहर उठता था।
आज मैं राम के साथ कुछ कर गुजरने की नीयत से ही आई थी….मैं ना तो अन्दर पेन्टी पहनी थी और ना ही ब्लाऊज के भीतर ब्रा….। इससे मेरे अंगों की थिरकन अधिक नजर आ रही थी। हम नेत्र-विभाग में थे …. वैसे भी इन दिनों मरीज बहुत ही कम थे….डाक्टर भी नौ बजे राऊन्ड ले कर हिदायतें दे कर चला गया था। मरीज हॉल में कम ही थे….हम दोनों उन्हें चेक कर के बैठ गये थे….
लगभग सभी मरीज सोने की तैयारी कर रहे थे। राम बार बार मेरे आगे पीछे चक्कर लगा रहा था। शायद मौके की तलाश में था। मैंने जानबूझ कर उठ कर पास वाले चादर और कम्बल वाले कमरे में चादर लेने गई। राम भी पीछे पीछे आ गया,”मैं आपकी कुछ मदद कर दूँ….?”
“हाँ….राम मैं स्टूल पर चढ़ रही हूँ ….देखना स्टूल डगमगाये ना….!” मैंने अपनी शरारत शुरू कर दी…. उसे पटाना तो था ही….मैं सोच रही थी कि उस पर गिरने का बहाना करके उससे लिपट जाऊंगी…. पर चोर तो उसके दिल में भी था…. पहल उसने ही कर दी…. एक हाथ उसने मेरे चूतड़ पर रख दिया…. और एक हाथ कमर पर…. उसके हाथ लगाते ही बिना पेन्टी के मेरे चूतड़ मुझे नंगे से लगे। मुझे लगा कि मेरे नंगे चूतड़ ही उसने पकड़ लिये हों। मुझे कंपकंपी सी दौड़ गई। मैंने अपने होंठ भींच लिये। मुँह से आह निकलते निकलते रह गई।
“अरे….स्टूल पकड़ो….ये क्या पकड़ रखा है….?” मैंने अपने चूतड़ों को मटकाया। उसने मुझे हल्का सा खींच कर अपने ऊपर गिरा लिया। मैं कटी पतंग की तरह उसकी गोदी में आ गिरी….।
“कैसा रहा ये झटका….?” वो शरारत से बोला….
“क्या करता है राम….कोई देख लेगा ना….चल उतार मुझे….” मैंने मुस्करा कर कहा, उसने जानकर अपने चेहरे को मेरे चेहरे से जोश में आ कर भींच लिया।
“हाय रजनी जी….क्या जालिम मुस्कान है आपकी….!” मुझे आंख मारते हुए मेरे चूतड़ो को दबा दिया और नीचे उतार दिया।
“क्या करते हो ऐसे…. चलो हटो सामने से….” मैंने उसे धक्का दिया….पर उसने मेरा हाथ पकड़ कर मेरे साथ ही वो कम्बलों के ऊपर गिर पड़ा और मुझे दबा दिया। उसने गिरते ही उसने मेरे होंठों को अपने अपने होंठ से भींच लिया और उसके दोनों हाथ मेरे स्तनों पर आ गये। मैं आनन्द से भर उठी। वासना के मारे मैंने अपने होंठ दांतो से काट लिये। मैंने अपने पांव खोल कर कोशिश की कि उसका लण्ड मेरी चूत पर रगड़ मार दे। वो भी इधर उधर हो कर यही कोशिश कर कर रहा था। कुछ ही पलों में मेरी फूली हुई चूत उसके लण्ड से टकरा गई और ऊपर से उसने अपने लण्ड का जोर मेरी चूत पर डाल दिया। मैं भी अपनी चूत को ऊपर उभार कर उसके लण्ड से रगड़ खाने में सहायता करने लगी।
“छोड़ दो ना अब…. हाय….क्या कर रहे हो…. !!”
“प्लीज….करने दो ना….नीचे आपकी नरम नरम कितनी अच्छी लग रग रही है….!”
मैं पसीने में नहा उठी। मेरा अंग अंग वासना से जलने लगा….वो भी एक कुत्ते की तरह से अपनी कमर हिला हिला कर मेरी चूत पर अपने लण्ड को घिस रहा था। मेरी चूत में आग भड़क उठी थी। लण्ड लेने को मेरी चूत बेताब होने लगी। मैं चूत का और जोर लगाने लगी…. हाय रे…. कैसी मदहोशी है…. चूत गीली और चिकनी हो चुकी थी। मेरे दोनों स्तन उसके हाथों से बुरी तरह मसले जा रहे थे। ब्रा नहीं होने के कारण चूंचिया बाहर निकल पड़ी थी। चूचुक कड़े हो चुके थे….
अचानक बाहर किसी की आहट आई। राम उछल कर खड़ा हो गया और एक चादर मेरे पर खींच कर डाल दी। मैं आंखे बन्द किये हांफ़ती रही। अपने आपको संयत करने लगी। मैंने चादर अलग करके अपने को ठीक किया। अपनी ड्रेस को सम्हाल कर मैंने बाहर झांका। राम किसी दूसरी नर्स से बात कर रहा था। कुछ ही देर में वो नर्स चली गई। मुझे फिर से लगने लगा कि राम मेरे साथ फिर से वही करे….
जल्दी ही मौका मिल गया। रात की एक बज रहा था। सभी गहरी नींद में सो चुके थे। राम मुझे चोदने के इरादे से रेस्ट रूम में ले आया। जहां डॉक्टर चाय नाश्ता और रेस्ट वगैरह करते हैं। कमरे में आते ही उसने मेरे दोनों चूचक दबा दिये और कुछ देर मसलता ही रहा। आहें भर भर के मैं मसलवाती रही। मैं उसके चेहरे को प्यार से निहारती रही। अपने स्तनों को और उभार के उसके हाथो में भरने लगी। उसने अचानक ही अपना एक हाथ मेरी चूत पर रख दिया और दबाने लग गया। मेरे मुख से आह निकल पड़ी।
“राम… बस कर …. ऐसे नहीं….हाय रे….!” पर उसने चूत पर हाथ जमा लिये थे…. मेरी चूत को तरह तरह से सहलाने व दबाने लगा। मैं आनन्द के मारे दोहरी हो गई, तड़प उठी….हाय रे ये मेरी चूत में अपना लण्ड क्यों नहीं पेल दे रहा है…. मैंने भी अब सारी शरम छोड़ कर उसका लण्ड पकड़ लिया।
” राम …. ये पकड़ लूं….?”
“पकड़ ले….पर फिर तू चुद जायेगी ….” उसके मुँह से चुदना शब्द सुन कर मैंने भी होश खो दिये….
“राम …. क्या कहा? चोदेगा?….राम रे…. और बोल न…. तेरा लण्ड मस्त है रे…. सोलिड है….” मैंने पूरा जोर लगा कर उसके लण्ड को मरोड़ दिया…. वो सिसक उठा। मैंने उसे लगभग खींचते हुए कहा….” राम…. बस अब…. आह …. देर किस बात की है….मां री…. राम…. आजा….ऽऽऽ”
राम ने दरवाजे को पांव से धक्का दे कर बन्द कर किया और उसने अपनी पैन्ट खोल दी। उसका कड़कता हुआ लण्ड बाहर निकल कर सीधा तन गया। मैंने अपनी साड़ी उतार फ़ेंकी और ब्लाऊज भी उतार दिया और हाथ फ़ैला कर उसे बाहों में आने का न्योता दिया। मेरी चूत पर बड़ी और काली झांटे चूत की शोभा बढ़ा रही थी….मेरा नंगा जिस्म देख कर वो अपना होश खो रहा था।
वो धीरे से मेरे पास आ गया और मैंने उसका नंगा लण्ड अपने हाथ में थाम लिया। उसके लण्ड के ऊपर की काली चमकदार झांटे काफ़ी बड़ी थी। गांव का लण्ड…. मोटा…. खुरदरा …. बलिष्ठ….और मेरी शहर की नरम कोमल चूत….मैंने उसके लण्ड की चमड़ी उपर करके उसका चमकदार लाल सुपाड़ा निकाल लिया। उसकी झांटों के बाल मुझे खीचने में मजा आ रहा था…. मुझे लगा कि लण्ड कुछ ज्यादा ही मोटा है…. पर मैं तो चुदने के लिये बेताब हो रही थी।
मेरी कुलबुलाहट बढती जा रही थी। उसने मुझे बिस्तर पर लेटा दिया। मेरी टांगें स्वत: ही ऊपर उठ गई। राम मेरी दोनों टांगों के बीच में सेट हो चुका था। उसका चमचमाता लाल सुपाड़ा मुझे सैर पर ले जाने के लिये बैचेन हो रहा था। इन्तज़ार की घड़िया समाप्त हुईं…. सुपाड़ा चूत के द्वार पर दस्तक दे रहा था…. मेरी आंखे नशे में बन्द होती जा रही थी। मेरी झांटे को पकड़ कर उसने अपने लण्ड को मेरी चूत में दबा दिया। थोड़े से जोर लगाने के बाद उसका लण्ड मेरी चूत में सरसराता हुआ प्रवेश कर गया। गीली चूत ने उसका स्वागत किया और अपने में लण्ड को समेटते गई।
दोनों खुश थे….यानि मैं और राम और दूसरी ओर लण्ड और चूत….। लण्ड चूत की गहराईयों में डूबता चला गया…. मैं सिसकारी भरती हुई लण्ड को अपने भीतर समाने लगी। मेरे बोबे तन गये…. लण्ड जड़ तक उतर चुका था। उसके हाथ मेरे बोबे पर कसते चले गये…. उसका खुरदरा और मोटा लण्ड देसी चुदाई का मजा दे रहा था। मेरी चूत ने उसके लण्ड को लपेट लिया था और जैसे उसका पूरा स्वाद ले रही थी। बाहर निकलता हुआ लण्ड मुझे अपने अन्दर एक खालीपन का अहसास कराने लगा था पर दूसरे ही क्षण उसका अन्दर घुसना मुझे तड़पा गया। मेरी चूत एक मिठास से भर गई।
उसकी रफ़्तार बढ़ने लगी….चूत में मिठास का अहसास ज्यादा आने लगा। मेरा बांध टूटने लगा था। अब मैं भी अपनी चूत को जोर जोर से उछालने लगी थी। वासना का नशा….चुदाई की मिठास…. लण्ड का जड़ तक चुदाई करना….मुझे स्वर्ग की सैर करा रहा था। पति की चुदाई से ये बिल्कुल अलग थी।
चोरी से चुदाई…. देसी लण्ड…. और पराया मर्द….ये सब नशा डबल कर रहे थे। चुदाई की रफ़्तार तेज हो चुकी थी…. मैं उन्मुक्त भाव से चुदा रही थी। …. चरमसीमा के नज़दीक आती जा रही थी। शहर की बाला देसी लण्ड कब तक झेल पाती…. मेरा पूरा शरीर चुदाई की मिठास से परिपूर्ण हो रहा था…. बदन तड़क रहा था….कसक रहा था…. मेरा जिस्म जैसे सबकुछ बाहर निकालने को तड़प उठा……..
“अं ऽअऽअऽऽ ह्ह्ह्ह्ह्…. राम्……..हऽऽऽय …. चुद गई….ऐईईईइऽऽऽऽऽऽ….मेरा निकला रीऽऽऽ …. माई रीऽऽऽऽ …. जोर से मार रे…. फ़ाड़ दे मेरी….राऽऽऽज….” और मैं अब सिमटने लगी…. मेरे जिस्म ने मेरा साथ छोड़ दिया और लगा कि मेरा सबकुछ चूत के रास्ते बाहर आ जायेगा….मैं जोर से झड़ने लगी…. राम समझ गया था। वो धीरे धीरे चोदने लगा था। मुझे झड़ने में मेरी सहायता कर रहा था।
“रजनी…. मेरी मदद करो प्लीज…. ऐसे ही रहो….!”
मैंने अपने पांव ऊपर ही रखे….गांव का देसी लण्ड था , इतनी जल्दी हार मानने वाला नहीं था। अचानक मैं दर्द से छटपटा उठी। उसका ताकतवर लन्ड मेरी चूतड़ो को चीरता हुआ मेरी गाण्ड में घुस चुका था।
“नहीं…. नहीं राम….मैं मर जाऊंगी….!”
उसने मेरी एक नहीं सुनी….और जोर लगा कर और अन्दर घुसेड़ता चला गया….
“बस रजनी…. हो गया…. करने दे….प्लीज….”
“मेरी गाण्ड फ़ट जायेगी राम…. मान जा…. छोड़ दे नाऽऽऽ”
अब उसके लण्ड ने मेरी गाण्ड पर पूरा कब्जा कर लिया था। उसने धक्के बढ़ा दिये…. मैं झड़ भी चुकी थी….इसलिये ज्यादा तकलीफ़ हो रही थी। उसने मेरे बोबे फिर से खींचने चालू कर दिये। मेरी चूंचियाँ जलने लगी थी। लग रहा था जैसे मेरी गाण्ड में किसी ने गरम लोहे की सलाख डाल दी हो…. पर जल्दी ही दर्द कम होने लगा…. मेरी सहनशक्ति काम कर गई थी। अब मैं उसके लण्ड को झेल सकती थी। मैं फिर से गरम होने लगी थी। उसकी गाण्ड चोदने की रफ़्तार बढ चली थी।
“मैं मर गया….रजनी…. मै….मैं……..गया ….हाय….” उसने अपना लण्ड गाण्ड से बाहर खींच लिया। अचानक ही गाण्ड में खालीपन लगने लगा। मैं उसका लण्ड पकड़ कर जोर से दबा कर मुठ मारने लगी…. उसके लण्ड में एक लहर उठी और मैंने तुरन्त ही लण्ड को अपने मुख में प्यार से ले लिया। एक तीखी धार मेरे मुख में निकल पड़ी….फिर एक के बाद एक लगातार पिचकारी….फ़ुहारें….मेरे मुख में भरने लगी….मैंने सारा वीर्य स्वाद ले ले कर पी लिया….और अब उसके लण्ड को मुँह से खींच खींच कर सारा दूध निकाल रही थी। कुछ ही देर में वो मेरे पास पड़ा गहरी सांसे ले रहा था। मैंने भी अपने आप को संयत किया और उठ कर बैठ गई। राम भी उठ कर बैठ गया था।
जैसे ही हमारी नजर सामने उठी …. हम दोनों के होश उड़ गये…. सामने मेट्रन खड़ी थी…. मेरी तो हालत बिगड़ गई। हम दोनों भोंचक्के से मेट्रन को देखने लगे…. राम तुरन्त उठा….और नंगा ही डर के मारे मेट्रन के पैरों पर गिर पड़ा,”मेम….प्लीज हमे माफ़ कर दो….” राम गिड़गिड़ाने लगा।
मेरी तो रुलाई फ़ूट पड़ी ….चुदाई के चक्कर में पकड़े गये। नौकरी कैसे जाती है….सामने नजर आ रहा था….
“अब दोनों चुप हो जाओ….आगे से ध्यान रखो….दरवाजे की कुन्डी लगाना मत भूलो !….समझे? ….अब राम जरा मेरे कपड़े भी उतार दो….और रजनी तुम बाहर ध्यान रखना….कि कहीं कोई आ ना जाये….!”
मैं भाग कर मेट्रन से लिपट पड़ी….और उनके पांव पर गिर सी गई…. और माफ़ी मांगने लगी…. मेट्रन पचास वर्ष की होगी…थोड़े से बाल सफ़ेद भी थे….पर उसका मन कठोर नहीं था….
“पगली….मैं भी तो इन्सान हूँ…. तुम्हारी तरह मुझे भी तो लण्ड चाहिये….जाओ खेलो, और जिन्दगी की मस्तियाँ लो….” और अपने कपड़े उतार कर मेरी जगह लेट गई। राम उसके बगल में लेट चुका था। मैंने अपनी ड्रेस पहनी और कमरे से बाहर आकर स्टूल लगा कर बैठ गई…. अन्दर वासनायुक्त सिसकारियाँ गूंजने लगी थी ….शायद मेट्रन की चुदाई चालू हो चुकी थी। मेरी धड़कन अब सामान्य होने लगी थी। मुझे लगा कि बस…. ऊपर वाले ने हमारी नौकरी बचा ली थी। मेट्रन अन्दर चुद रही थी….और हम बच गये थे….वर्ना ये चुदाई तो हम दोनों को मार जाती। Hindi Sex Stories
दोस्तो, यह जिस्म, यह Antarvasna जवानी, यह नाज़ुक-नाज़ुक अंग सदा नहीं रहेंगे। आज हो कल नहीं ! यह किसने जाना है ! अगर भगवान् ने औरत और मर्द बनाए हैं, हर औरत एक जैसी नहीं होती, हर मर्द एक जैसा नहीं होता। लेकिन लौड़े की चाहत, चूत की चाहत किसको नहीं होती?
कौन कहता है कि कामवासना अपने हाथ में होती है ! जी नहीं ! मेरी थोड़ी कुछ अलग है। लगभग हर औरत की होगी।
मैं ऐसे माहौल में बड़ी हुई, बहुत उच्च वर्ग के परिवार से ताल्लुक रखती हूँ। मैं बी.सी.ए प्रथम वर्ष की छात्रा हूँ। मेरे माँ-बाप के पास मेरे लिए समय नहीं है। असल में किसी भी बच्चे के लिए समय नहीं था, पैसा अँधा था, होना भी चाहिए।
सोलहवें ही साल में मैंने सेक्स का सुख पा लिया था। अपनी मॉम, बहनों, पापा को अपने-अपने दोस्तों के प्रति चाहत थी। सातवीं कक्षा में थी जब मैंने अपने ही घर में अपनी मॉम को गैर-मर्द की बाँहों में झूलता देखा, वो भी पापा के बेस्ट फ्रेंड से ! उसके इलावा भी मैंने कई बार अपनी मॉम को अलग-अलग मर्दों की बाँहों में देखा था।
अपनी ही बहन को रात उसके बेडरूम, में आधी रात को चुदाई करते देखा।
पापा ज्यादातर घर से बाहर ही रहते थे, बिज़नस ही धर्म-करम सब कुछ था।
ऊपर से मेरी दोस्ती मध्यम वर्ग की कुछ लड़कियों से, जिनके एक नहीं, कई बॉय फ्रेंड थे। यह सब कुछ देख देख कर मेरा दाना भी फड़कने लगा, जवानी यार मांगने लगी, खुद को दबवाने के लिए, शांत करवाने के लिए ! लड़कों के गंदे-गंदे कटाक्ष अब अच्छे लगने लगे। उसके बाद शुरु हुआ मेरी जवानी का लुटाना ! पसंद के लड़कों से शुरु हुई जो अब बंद नहीं करना चाहती !
आखिर अपने इर्द-गिर्द मंडराने वाले भंवरों को अपना रस चखाने का फैंसला कर लिया और एक बहुत बड़े ट्रांस्पोर्टर के लड़के को मैंने हाँ कह दी। अपने लेवल, अपने स्टैण्डर्ड के ही लड़के को हाँ कही थी मैंने भी !
उसके साथ लॉन्ग-ड्राइव पर जाना, रात को डिस्को लेकर जाना ! आखिर एक दिन उसने मुझे अपना फार्म हाउस दिखाने लेकर गया। आलिशान सा फार्म हाउस मेरे लिए आम सा था। सीधा कार से उतर उसके बेडरूम में गए और उसने मुझे अपनी बाँहों में ले लिया। मैं भी बेल की तरहं उससे लिपट गई, वो पीछे से मेरे भरे-भरे गोल-मोल चूतड़ों को दबाने लगा और मेरे होंठ चूसने लगा। मैं भी गरम होती गई और नीचे से हाथ डाल उसके लौड़े को मसलने लगी। उसका खड़ा हो चुका था और मेरे हाथ में था।
उसने झट से मेरी टॉप उतार फेंका और फिर जींस खींच कर उतार दी।मेरी गोरी-चिट्टी जांघें देखकर उसका लौड़ा सख्त हो गया। उसने मेरी ब्रा उतार मेरा मम्मा मुँह में ले लिया और फिर मेरे चुचूक को चूसने लगा। जिससे में भड़क उठी और जोर से उसके लौड़े को मसलने लगी और फिर उसकी पेंट उतार ऊपर से उसका लौड़ा मसलने लगी। उसने मुझे नीचे दबाते हुए अपना लौड़ा मेरे होंठों पर टिका दिया और मैंने उसको मुँह में डाल दिया, उसके लौड़े को चूसने लगी।
अब उसने मेरी चड्डी उतार मेरी कोरी चूत पर जैसे ही मरदाना हाथ फेरा, वो पल मेरी जिंदगी का हसीन पल बन गया। वाह वाह ! क्या नज़ारा आया !
उसको मालूम हो गया कि चूत कोरी है ! उसने 69 में लिटा कर अपने होंट उसपर रख दिए जिससे वासना और भड़क उठी। मैं जोर-जोर से उसका लौड़ा चूसने लगी, वो मेरे दाने से खेल रहा था।
मैं अब आपे से बाहर होने लगी। यह देख उसने मुझे लिटाते हुए मेरी टांगें चौड़ी करवा दी और बीच में बैठ अपना लौड़ा चूत पे टिका दिया।
प्लीज़ घुसा दो इसको मेरे अन्दर !
उसने मेरी दोनों बाहें पकड़ ली और मेरे होंठ अपने होंठों में ले लिए और ज़बरदस्त झटका दिया। लौड़ा चूत चीरता हुआ अन्दर घुसने लगा। मैं चिल्लाना चाहती थी लेकिन वो खिलाड़ी था इस खेल का ! उसने पूरी मर्दानगी सीख रखी थी, पूरा घुसा कर उसने पूरा निकाल दिया, फिर से डाला, फिर निकाला ! मेरे खून से उसका लौड़ा भीगा पड़ा था।
यह देख मैं रोने लगी पर उसने मेरे होंठ नहीं छोड़े। जैसे ही मैं नीचे से चूतड़ उठाने लगी, उसने मेरे होंठ छोड़ दिए। मैंने चैन की सांस ली और उसकी छाती पर मुक्के मारे- अब और करो ! जोर-जोर से करो ! फाड़ डाली मेरी चूत ! लूट ली मेरी सील बंद चूत !
बोला- अच्छा लग रहा है?
मैंने कहा- बहुत अच्छा ! और मारो मेरी !
वो पटक पटक कर मेरी चूत मार रहा था, मैं नीचे से उठ-उठ कर उसे उकसा रही थी- आह !
उसने मुझे कुतिया की तरह घुटनों के बल कर पीछे से मेरी चूत में लौड़ा डाल कुत्ते की तरह चोदने लगा।
वाह ! इतना मजा आता है इस खेल में !
हां ! मजा आ रहा है ना ?
बहुत अच्छा लग रहा है ! फक मी ! फक मी फास्ट, यू रास्कल ! फक माय पसी फास्ट ! यः टेक इट ! अह अह उह उह !
उसने फिर से मुझे नीचे डाल लिया और मेरे ऊपर सवार होता चला गया। पम्प की तरह मेरी चूत चुद रही थी- यह ले साली, कुतिया ! गश्ती ! तू आज से मेरी हुई ! तोड़ डाली सील तेरी फुद्दी की !
हाय, मार मार मेरी लाल कर दे ! चोद हरामी चोद ! हरामी माँ बना दे मुझे ! कुंवारी माँ !
ले ! ले ! करते करते उसने अपना माल मेरे अंदर छोड़ दिया। उसका गरम-गरम माल वो भी इतना निकला कि बाहर गिरने लगा। उसने लौड़ा निकाल मेरे मुँह में डाल दिया, मैंने साफ़ कर दिया। उस पूरे दिन उसने मुझे तीन बार चोदा और मुझे कच्ची कली नहीं रहने दिया। मुझे भी सेक्स का इतना स्वाद आया और अब मौका मिलते हम दोनों चुदाई का मजा लेने लगे।
फिर वो इंग्लैंड में पढ़ने चला गया और मेरी चूत प्यासी रहने लगी।
मेरा अफेयर एक और लड़के के साथ चल निकला और मैंने उसको अपने घर बुलाया, वो बोला- रात को अकेला नहीं आऊंगा ! अपने कज़िन को साथ लाना पड़ेगा, तभी घरवाले रात को बाहर आने देंगे।
मैं मान गई। उसके बाद दो दो लौड़े मिले, उसके बारे में लिखूंगी अगली बार ! Antarvasna
मेरे प्रिय पाठकों और Hindi Sex Stories पाठिकाओं को मेरा नमस्कार। मेरा नाम एलिस है। मैं भी आपकी ही तरह अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ। मुझे इस साईट की कहानियों को पढ़कर बहुत मजा आता है। मुझे ये सभी कहानियाँ बहुत अच्छी लगी और मैं पुरानी वाली कहानियाँ भी पढ़ना चाहता हूँ इसलिये मैंने भी अपनी आपबीती आप लोगों के सामने पेश करने का इरादा अन्तर्वासना के जरिये किया है। यह मेरी पहली कहानी है, अगर आपकी कृपा हुई तो मुझे आगे भी और कहानियाँ भेजने का मौका मिलेगा।
मैं जिस लड़की के बारे में बताने जा रहा हूँ, उसका नाम स्नेहा है। वो मेरे पड़ोस में रहती है। उसका कद करीब 5’6″ है, रंग गोरा है और बदन का क्या कहना ! साली क्या मस्त लगती है कि जो भी देखे तो उसका लंड तो खड़ा हो ही जाता है। उसके मम्मे करीब 34″ के होंगे और उसके गांड करीब 38″ की होगी।
बात उन दिनों की है जब मैं कोचिंग में पढ़ा करता था और छुट्टियाँ होने पर मैं घर जाता था। वो एक अमीर घराने की माडर्न ख्याल की लड़की थी और शायद इसीलिए वो ज्यादातर जींस व टी-शर्ट में रहती थी। इस कारण उसके शरीर के सारे उभारों का अच्छी तरह से प्रदर्शन होता था और यह देख सभी लड़के उस पर फ़िदा रहते थे। पड़ोस में होने के कारण वो मुझे भाई जैसा मानती थी और मैंने भी कभी उसे गलत नजर से कभी नहीं देखा था। पर मुझे पता था कि भाई-भाई करके वो मुझे लाइन देती थी।
बात गर्मियों की है जब छुट्टियाँ हुई और मैं घर गया। मुझे लग रहा था कि इस गर्मियों की छुट्टियों का मैं पूरा आनंद लूँगा। एक दिन मैं अपने नए साल के सत्र के लिए पढ़ाई कर रहा था, वो आई और कहने लगी,”मेरे घर पर सब मेरी मौसी के यहाँ शादी में जा रहे हैं इसलिये मैं आज यहाँ ही सोउंगी।”
वो बहुत खुश नजर आ रही थी और मेरी किस्मत भी देखो यारो कि पापा-मम्मी को भी उसकी मौसी के यहाँ से आग्रहपूर्वक न्योता आया कि आप भी आओ और एलिस को भी ले आना। पर पापा स्नेहा के यहाँ होने से उसे अकेला छोड़ नहीं सकते थे और मुझे पढ़ना भी था, सो मैं यहीं रुक गया और पापा-मम्मी दोनों गेराज से गाड़ी निकाल कर चले गए। मम्मी ने जाने से पहले बहुत हिदायतें दी कि दरवाजे खुले रख कर मत सोना, दोनों एक ही कमरे में सो जाना और बेड अलग अलग रखना। और हम आज रात में भी आ सकते हैं या कल आ जायेंगे वगैरह-वगैरह। मैंने भी हर आज्ञा का पालन किया, सिर्फ एक को छोड़कर, बेड अलग अलग वाला।
रात के नौ बज चुके थे और हम सोने की तैयारी कर रहे थे। उसका आज मूड कुछ बदला-बदला लग रहा था। वैसे मैं उस समय शरीफ बच्चा था। ऊपर के दरवाजे जांचने के लिए हम दोनों ऊपर गए, क्योंकि मुझे रात में अकेले डर लगता है। हम नीचे न आकर वहाँ पर ही बातें करने लग गए। वह वो मुझे बार-बार स्पर्श कर रही थी और गन्दी-गन्दी मतलब यौन सम्बन्धी बातें करने लगी। उसी समय बिजली चली गई। अब तो वो बोलने लगी कि अगर नीचे जायेंगे तो मुझे भी डर लगेगा सो हम वहीं रुक गए और बातें करने लगे। मेरा तो लंड वहीं खड़ा हो गया पर शायद अँधेरा होने के कारण उसे दिखाई नहीं दिया होगा। मैं भी जवाब में थोड़ी-थोड़ी खुलकर बातें करने लग गया। अब दोनों में कुछ-कुछ होने लगा था, हम दोनों वहाँ चिपकने लगे थे। हम दोनों गर्म होने लगे थे और वहाँ आस-पास में कोई न होने के कारण हमने आखिर एक चुम्बन तो कर ही लिया। इतने में बिजली आ गई और वहाँ हमें कोई देख लेता, उससे पहले हम दरवाज़े जाँच कर नीचे आ गए।
उसने नीचे आते ही मेरा एक लम्बा चुम्बन किया। मैंने स्नेहा को अपनी बाँहों में भर लिया, अपनी टांगें स्नेहा की टांगों से चिपका दी और मैंने अपने जलते हुए होंठ स्नेहा के होंठों पर रख दिए। फिर मैं उसके नर्म-नर्म होंठों को अपने होंठों में भर कर चूमने लगा। स्नेहा ने मुझे अपनी बाँहो में कस लिया। मेरे हाथ स्नेहा के जिस्म पर फिर रहे थे। कुछ देर बाद मैंने स्नेहा को बिस्तर पर सीधा लिटा दिया और मैं उसके ऊपर आ गया। हम दोनों फिर से किस करने लगे और मेरे हाथ उसके शरीर पर कहाँ-कहाँ फिर रहे थे, कुछ पता नहीं।
करीब दस मिनट की चुम्मा-चाटी के बाद वो पूरी गर्म हो गई और मेरे कपड़े उतारने लगी। मेरा भी लंड अब जैसे अन्दर ही पैंट फाड़ने लगा और जल्द ही उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिए। उसने अपने हाथों से मेरे लंड को मसलना शुरू कर दिया। मैं भी उसके मम्मे दबाने में व्यस्त था। मैंने भी देर ना करते हुए उसके कपड़े उतार दिए। मैंने उसको खेलने के लिए अपना लंड दे दिया। मैंने उसे बिसतर पर लेटा दिया और फिर उसकी गोरी चूत अपनी जीभ से चाटने लगा। चूत बिलकुल साफ़ थी यानि एक भी बाल नहीं था।
वो बोली,”आज पूरी तैयारी करके आई हूँ !”
स्नेहा के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी। मैं तो मानो स्वर्ग की सैर कर रहा था।
आप तो उसे देखते ही पागल हो जाते और जंगली सेक्स चालू कर देते। पर जैसे कि मैंने कहा था कि मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ, तो मैंने सेक्स करने के नियम पढ़ रखे थे जो किसी सज्जन ने अन्तर्वासना को भेंट किये थे। मैंने बस अपने को नियंत्रित किया।
उसके गुलाबी चुचूकों को हल्के-हल्के मसलने लगा, फिर अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। स्नेहा के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी। बाद में वो मेरा लौड़ा चूसने लग गई, दो-तीन मिनट में ही मेरी हालत ख़राब हो गई तो मैंने उसे रोका। फिर मैं उसकी चूत चाटने लगा। दो-तीन मिनट बाद वो झड़ गई तो मैं उसका अमृत-पान करने लगा। वाह ! एक अजीब मजा आ रहा था। वास्तव में वो मजा आ रहा था जो जिन्दगी में पहले कभी नहीं लिया। फिर मैं स्नेहा की चूत पर हाथ फिराने लगा। हाथ फिराते-फिराते मैंने अपनी उँगलियाँ स्नेहा की चूत के अन्दर डाल दी और अन्दर-बाहर करने लगा।
वो और जोश में आ गई और तड़पते हुए बोलने लगी,”बस अब और मत तड़पाओ मेरे राजा !”
फिर मैं उसे ज्यादा न तड़पाते हुए उसकी चूत का श्री गणेश करने को तैयार था।
स्नेहा ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली,”प्लीज, कंडोम तो लगा लो ! मुझे डर लगता है।”
मैंने बैड की दराज में से कंडोम निकाल कर अपने लण्ड पर लगा लिया। स्नेहा ध्यान से मुझे कंडोम लगाते देख रही थी। फिर अपना लंड उसकी बुर पर रख दिया। लंड धीरे धीरे अन्दर चला गया पर काफी मेहनत करनी पड़ी हमको पहली बार में। वो दर्द से तड़पने लगी थी, मैंने और जोर लगाया तो उसकी बुर से थोड़ा खून निकला। खून मेरे लंड पर व उसकी जांघों पर व थोड़ा चादर पर भी गिरा था। वो पहले तो यह देख कर घबरा गई पर वो जानती थी कि पहली बार में यह सब होता है, उससे उसे काफी हिम्मत मिली।
मैं थोड़ा रुका और उसके होंठ चूसने लगा। थोड़ी देर बाद उसका दर्द कम हुआ, हमने खून साफ़ कर फ़िर शुरु किया। तब मैंने फिर से उसे चोदना चालू कर दिया। मैं उसके नर्म-नर्म होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा ताकि वो अपना दर्द भूल जाए और करीब 15 मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों एक साथ झड़ गए।
बाद में तो मुझे लग रहा था कि उसकी चूत खुल गई। फिर हमने किस किया और उसके बाद वो मेरे लौड़े को चूसने लग गई ताकि फिर से मेरा लौड़ा खड़ा हो जाये। जल्द ही मेरा लंड एक बार फिर से चुदाई करने के लिए तैयार था। इस बार फिर से चूत को ही अलग-अलग आसनों से चोदने लगा।
स्नेहा बोली,”मुझे कुछ हो रहा है, लगता है मेरी चूत से पानी निकलने वाला है। खूब ज़ोर-ज़ोर से धक्का लगाओ।”
मैं समझ गया कि वो झड़ने वाली है। मैंने बहुत ही तेज़ी के साथ उसकी चुदाई शुरू कर दी ।
उसके मुख से आवाजें आने लगी,”आआआ!!! मैंऽऽऽ आआआऽऽऽ रहीऽऽऽ हूँऽऽऽ और तेज़ ऽऽऽ और तेज़ ऽऽऽ”
उसकी चूत से पानी निकलने लगा और मेरा सारा लंड भीग गया। मैं भी बिना रुके उसे आँधी की तरह चोदता रहा। लगभग बीस मिनट तक चोदने के बाद मैं उसकी चूत में ही झड़ गया। इस दौरान वो भी तीन बार झड़ चुकी थी। लंड का पूरा पानी उसकी चूत में निकल जाने के बाद मैं हट गया।
अब उसकी गांड की बारी थी पर वो बोलने लगी,”आज नहीं, फिर कभी इसका भी नंबर आएगा, थोड़ा सब्र करो ।”
पर मैं ऐसा मौका नहीं छोड़ना चाहता था इसलिये उसकी एक न सुनी और गांड के लिए नीचे तकिये रखने लगा और फिर से उलटा लिटा कर गांड का पूरा मज़ा लिया। अब भी ऐसा मौका मिलता है तो छोड़ता नहीं हूँ और वो भी नहीं छोड़ना चाहती। जब भी समय मिलता है, मम्मे दबाकर और चूम कर मजे लेता हूँ, अब तक कई बार चोद चुका हूँ और औरों के भी मजे लिए हैं, वो मैं आपको बाद में कहानी के रूप में लिखता रहूँगा। अब तो कहना पड़ेगा कि “वाह ! क्या रात थी”
आप मेरी कहानी के बारे में अपनी राय जरुर दें और मेरी गलतियाँ भी बताएँ ताकि मैं उनको सुधार सकूँ। अच्छा अब के लिए इजाजत चाहता हूँ। Hindi Sex Stories
मैं हूँ विकास सिंह 5”10′ मस्त Hindi Sex Stories गोरा चिट्टा ! और लंड का आकार है 8 इंच और लड़की को चाहिए भी क्या?
ये बात तब की है जब मैं 11वीं में पढ़ता था। मेरे स्कूल में अंग्रेज़ी की अध्यापिका थी- मिस सोनिया दीक्षित !
क्या कयामत थी यार ! देखते ही मुँह में पानी आ जाता था ! मैडम को जो भी एक बार देख ले, उसकी पहली ख्वाहिश मैडम को चोदने की ही होगी।
वैसे मैडम का फिगर साइज़ 36सी-30-38 होगा।
अब बताता हूँ मैडम को चोदने की शुरुआत कहां से हुई।
मैं एक तो ग्वालियर में अकेला रहता था और अंग्रेज़ी में बहुत कमजोर था, यह बात मैडम को मालूम थी। उन्होंने मुझे एक दो बार घर पर पढ़ने की पेशकश की थी इसलिए मैं उनके घर पढ़ने जाया करता था। मेरा पढाई में कम और मैडम के स्तनों पर ध्यान ज्यादा रहता था। यह बात मैडम नोटिस कर चुकी थी, लेकिन कुछ बोलती नहीं थी बस हंस देती थी।
एक दिन मैडम ने कहा- आज जल्दी आ जाना !
मैंने भी हाँ बोल दी और 2 घंटे पहले पहुँच गया।
मुझे बाद में मालूम चला कि मैडम के घर वाले उस दिन भोपाल जा रहे थे दो-तीन दिन के लिए शादी में।
उनके जाने के बाद मैडम ने पढ़ाना शुरू किया। आधा घंटा निकला ही था कि मैडम बोली- चाय पियोगे?
मैंने हाँ में सर हिला दिया।
और मैडम चली गई। थोड़ी देर के बाद जब मैडम आई तो भाई विश्वास मानो, क्या लग रही थी !
क्योंकि वो हाथ में ट्रे लिए गुलाबी नाईटी में थी, सब कुछ साफ़ साफ़ दिख रहा था, मेरा भी खड़ा होने लगा था।
मैडम सामने बैठ गई और पढ़ाने लगी। लेकिन मेरा मन पढ़ाई में बिल्कुल भी नहीं लग रहा था।
मैडम भी समझ चुकी थी, वो खुद ही बोली- क्या बात है? आज पढ़ना नहीं है क्या?
मैंने मना कर दिया और कहा- अगर सामने इतनी सुन्दर लड़की बैठी हो तो कौन पढ़ना चाहेगा !
इस पर मैडम ने कहा- चलो ! आज मैं तुम्हें कुछ और पढ़ाती हूँ !
और मैडम मुझे अपने कमरे में ले गई और कहा- अपनी पैन्ट उतारो !
कसम से दोस्तों कुछ देर के लिए में सोचने पर मजबूर हो गया कि मिस सोनिया करने क्या वाली है? लेकिन थोड़ी से खुशी भी थी कि शायद आज कुछ और ही हो जाये !
मैंने पैन्ट उतार दी। अब मैं उनके सामने केवल अंडरवियर में था !
मैडम ने पास आकर कहा- यह क्या है?
मैंने बोला- सॉरी मैडम ! आपको देख कर कण्ट्रोल नहीं कर पाया !
इस पर मैडम ने कहा- कोई बात नहीं होता है !
फिर मैडम ने मेरा 8 इन्च लम्बा लौड़ा निकाला और दबाने लगी। मुझे मज़ा आ रहा था, फिर मैं मैडम के होठों पर किस करने लगा तो मैडम ने भी खुल कर साथ दिया, वो भी किस करने लगी। अब मेरा हाथ धीरे धीरे उनके स्तनों पर पहुँच गया था। 10 मिनट के बाद मैंने मैडम के कपड़े उतारना चालू किया। अब मैडम मेरा सामने केवल ब्रा और पैंटी पहने थी।
बिल्कुल सच कि एकदम दूध की तरह जिस्म था- एक दम गोरा-सफ़ेद !
फिर धीरे धीरे ब्रा और पैंटी भी उतार दी, अब मैडम मेरे सामने एक दम नंगी खड़ी थी, हम दोनों अब बिस्तर पर आ गए।
फिर मैं मैडम के स्तनों को बुरी तरह से मसल रहा था तो मैडम ने कहा- आराम से करो ! मैं कौन सा भागी जा रही हूँ ! .और 69 की अवस्था में थे
मैंने कहा- सॉरी मैडम !
तो उन्होंने फिर से डांट दिया और कहा- नो मैडम ! केवल सोनिया !
मैंने कहा- ठीक है सोनिया डार्लिंग ! सच में तुम बहुत सेक्सी हो, मैं ना जाने कब से तुम्हें चोदना चाहता था और आज मौका मिला है, आज नहीं छोडूंगा !
फिर सोनिया भी कहाँ चुप रहने वाली थी, वो बोल पड़ी- देखते हैं मादरचोद ! आज कौन किस को चोदता है?
फिर क्या था हम करीब 15 मिनट तक एक दूसरे को चूमते और सहलाते रहे। सोनिया के मुँह से आवाज आने लगी थी अऽऽ आऽऽऽ अऽऽऽइऽ इईऽऽऽइए… अ अऽऽऽस !
अब मैं समझ चुका था कि सोनिया चुदने के लिए मचल रही है। मैंने उनकी कमर के नीचे तकिया लगाया और लंड उनकी चूत पर रख कर अन्दर घुसाने लगा लेकिन हर बार फिसल जाता तो सोनिया बोली- क्यों पहले कभी किसी को चोदा नहीं है क्या?
मैंने मना कर दिया और कहा- नहीं चोदा ! केवल ब्लु फ़िल्म ही देखी है…
तो वो मुझे नीचे लिटा कर खुद ही ऊपर आ गई और अपनी चूत में मेरा लंड डालने लगी। पहली बार अपना केवल 2 इंच ही अन्दर गया और दो-चार शोट के बाद मेरा लंड उनकी चूत की गहराई नापने लगा था और करीब 10 मिनट तक सोनिया मुझे चोदती रही। जब वो थक गई तो उन्होंने मुझे चोदने के लिए बोला। इस बीच वो एक बार झड़ चुकी थी।
अब अपन ऊपर और वो नीचे थी। मैंने भी उन्हें पूरे दम से चोदा, पूरे कमरे फच फच अ अ अ अ अ अ…अफ अफा ऐया अ इ इ इ…की आवाजें आ रही थी। मैं उस वक़्त अपने आप को बहुत खुशनसीब समझ रहा था क्योंकि पूरा स्कूल उन्हें देखकर आहें भरता था और आज वो मेरे लंड के नीचे हैं।
मैंने उन्हें फिर डौगी स्टाइल में चोदा। अब सोनिया फिर से गालियाँ दे रही थी- मादरचोद ! फाड़ डाल मेरी चूत को ! भोसड़ा बना दे आज इसका ! बहुत परेशान करती है माँ की लौड़ी ! आजा मेरे राजा ! मेरी बांसुरी बजा दे !
जवाब में मैं भी गाली दे रहा था- हाँ मेरी रांड मैडम ! तुझे मैं ही चोदूंगा ! आजा तेरी प्यास ऐसी बुझाऊंगा कि खड़ी तक ना हो पायेगी !
और गाली देते देते सोनिया का शरीर ऐठने लगा और वो कहने लगी- मेरे राजा ! मैं आ रही हूँ ! मैं आई आई आई आहँ आह !
और वो झड़ गई अब मैं भी झड़ने वाला था और मुझे लगा कि अब मेरा निकलने वाला है तो मैंने लंड बाहर निकालने की कोशिश की लेकिन सोनिया ने मना कर दिया और कहा- मेरे 3 दिन पहले ही मासिक ख़त्म हुई है इसलिए तुम मेरी चूत में ही अपना पानी छोड़ो !
अब मैंने भी आखिरके 8-10 शोट पूरे दम से लगाये और उनकी चूत में ही झड़ गया और उन्हीं के ऊपर गिर पड़ा और बूब्स मसकने लगा।
सोनिया मुझे किस करने लगी और बाद मेरा लंड मुँह में लेकर साफ़ किया।
उसके बाद सोनिया सीधे बाथरूम में मूतने के लिए जा रही थी तो मैं भी साथ में चला गया और उन्हें मूतते हुए देखने लगा और में भी मूतने लगा ..
फिर हम दोनों साथ में बाहर आये तो सोनिया बोली- आज की क्लास कैसी लगी?
मैंने कहा- बहुत अच्छी !
और सोनिया को किस करने लगा…
उसके बाद में सोनिया के घर दो दिन तक रूका और ना जाने कितनी बार चोदा कब चोदा। क्योंकि हम दो दिन तक बिना कपड़ों के ही घर में रहे थे, जब भी लंड खड़ा होता या सोनिया की फ़ुद्दी में खुजली होती हम एक दूसरे में समां जाते…
तो दोस्तो, कैसी लगी मेरी कहानी?
मुझे जरूर बताना और उसके बदले में मैं आपको अपनी अगली कथा बताऊंगा। Hindi Sex Stories
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