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पायल!’ मेरे सम्पादक की आवाज सुनते Hindi Porn Stories ही मैं सम्भल गई।‘हाँ बोलिए!’ मैंने अपनी जुबान में मिठास घोलते हुए कहा। मेरे सम्पादक रजनीश से मेरा वैसे भी छत्तीस का आंकड़ा है। वो बुरी तरह चीखता है मुझपर।
‘तुम्हें किशनपुरा जाना है, अभी इसी वक़्त!’ उसके आदेश करने वाले लहजे को सुन कर दिल में आया कि सामने हो तो दो चार गालियाँ जरूर सुनाती।
क्यों?’ उसे शायद मुझसे इस तरह के सवाल की ही उम्मीद थी।
‘तुम्हें किशनपुरा के गुरू अचलानन्द का सम्पूर्ण-साक्षात्कार लेना है!’
‘क्या?’ मैं ख़ुशी से उछल पडी। काफ़ी दिनों से गुरूजी का साक्षात्कार लेना चाहती थी। बहुत सुन रखा था उनके बारे में। बहुत ही आकर्षक व्यक्तित्व के आदमी थे। किशनपुरा जो कि हमारे यहाँ से कोई बीस-बाईस किलोमीटर दूर एक छोटा सा गांव है। वहाँ काफी लम्बी-चौड़ी जगह में उनका आश्रम था। काफी भक्त भी थे उनके। बीच बीच में दबी जुबान में कभी कभी उनके रंगीले स्वभाव के बारे में भी अफवाह फ़ैल जाती थी।
‘उनके बारे में विस्तृत जानकारी एकत्र करनी है तुम्हें!’ रजनीश ने आगे कहा- कम से कम चार-पाँच सप्ताह की सामग्री हो जिसे हम हर रविवार विशेष बुलेटिन में जगह देंगे. इसके लिये तुम्हें कई दिन मन लगा कर काम करना होगा। यह तुम्हारी इच्छा है कि तुम वहीं रहो या प्रतिदिन वहाँ जाओ, लेकिन हमें सम्पूर्ण सूचनाएँ चाहिएँ, सुबह से शाम तक, गुरूजी के बारे में हर तरह की बातें, कुछ प्रवचन में भी ध्यान करना। सुन रही हो ना मेरी बातें?’
‘हाँ… हाँ सर! मैं आज से ही काम पर लग जाती हूँ!’
‘आज से ही नहीं अभी से!’ कह कर उसने फ़ोन रख दिया।
जरूर बुड्ढा गाली निकाल रहा होगा! लेकिन मैं तो काफ़ी दिनों से किसी बड़े प्रोजेक्ट के लिए तरस रही थी। मुझे ख़ुशी से चहकते देख मेरे पति जीवन ने मुझे बाँहों में भर कर चूम लिया। मैंने उन्हें सारी बात बताई, वो भी मेरी ख़ुशी में शरीक हो गए।
मैं अपने बारे में बताना तो भूल ही गई. मैं पायल, पायल लाल, 26 साल की एक सेक्सी महिला हूँ। मेरी शादी जीवन लाल से आज से चार साल पहले हुई थी। हम दोनों यहाँ लखनऊ स्टेशन के पास ही रहते हैं। मैं एक समाचारपत्र में वरिष्ठ सम्वाददाता के पद पर हूँ. हमारे समाचारपत्र की बहुत अच्छी प्रसार-संख्या है. मैं वैसे तो किसी विशेष केस को ही अपने हाथ में लेती हूँ. वरना आजकल सम्पादन का काम ही देख रही हूँ जो कि बड़ा ही बोरिंग काम है. घूमना-फिरना और नए-नए लोगों से मिलना मेरा शुरू से ही मनभावन कार्य रहा है।
हम दोनों के अलावा हमारे साथ मेरी सास रहती हैं, मेरे एक बच्चा है जो अभी एक साल का ही हुआ है। कामकाजी महिला होने के बावजूद मैं अपने बच्चे को जब भी मैं घर पर होती हूँ तो बच्चे को स्तनपान ही कराती हूँ लेकिन इससे मैं बहुत उत्तेज़ित हो जाती हूँ और फ़िर तो आप समझ ही गए होंगे कि जीवन साहब का क्या हाल होता होगा!
मेरे स्तन 38 आकार के हैं और दूध भरे होने के कारण एकदम तने रहते हैं। मेरे पति जीवन शादी के बाद से ही मुझे अंग-प्रदर्शन के लिए जोर देते थे। उन्हें किसी को मेरे बदन को घूरना बहुत अच्छा लगता है। इसके लिए मुझे हमेशा कसे हुए, बदन से चिपके हुए कपडे पहनने के लिए कहते हैं और ब्लाऊज़ का गला और पीठ तो इतनी गहरे होते हैं कि आधे वक्ष बाहर दिखें!. कभी कभी तो उनके कहने पर अर्ध-पारदर्शी कपडे पहन कर या बिना ब्रा के ब्लाऊज़ पहन कर भी बाहर जाती हूँ।
खैर अब उस बात पर लौटते हैं।
मैंने एक काफ़ी लो-कट कसी हुई टी-शर्ट पहनी और एक टांगों से चिपकी हुई जींस। गरमी का मौसम था इसलिए नीचे मैंने ब्रा नहीं पहनी थी। मेरे चूचुक बाहर से साफ दिख रहे थे।
‘कैसी लग रही हूँ?’ मैंने पूछा।
‘ह्म्म्म! हमेशा की तरह सेक्सी!’
‘अनीष का ख्याल रखना! हो सकता है लौटने में देर हो जाये, मैं कार ले जा रही हूँ।’
मैं अपनी कार पर किशनपुरा के लिए निकल गई। गरमी का मौसम था, कुछ ही देर में गर्म हवाएँ चलने लगी। मैं दस बजे तक किशनपुरा पहुंच गई।
गुरूजी का आश्रम बहुत ही विशाल था। अन्दर की सजावट देख कर मेरा मुँह तो खुला का खुला रह गया। मैं वहाँ गुरूजी से मिली। गुरूजी बहुत ही आकर्षक व्यक्तित्व के आदमी थे। उनके चेहरे में एक चमक थी, घनी दाढ़ी में चेहरा और भरा-भरा लग रहा था। कोई 6’2′ या 3′ कद होगा, चौड़ा बालों से भरा सीना किसी भी महिला को पागल करने के लिए काफ़ी था। उसने नंगे बदन पर एक लाल तहमद बाँध रखी थी और एक लाल दुपट्टा कंधे पर रख रखा था।
उन्होंने बिना कुछ बोले मुझे ऊपर से नीचे तक देखा। मेरे स्तनों को देखते हुये मुझे लगा कि उनकी आँखों में क्षण भर के लिए एक चमक सी आई फ़िर ओझल हो गई। मुझे हाथ से बैठने का इशारा किया। वो तब किसी पत्रिका के पन्ने पलट रहे थे। मैंने उनको अपने आने का मकसद बताया। उन्होंने मुझे बैठने को इशारा किया। मैंने अपना पहचान-पत्र उनके सामने कर दिया। उनके चहरे पर एक बहुत ही प्यारी सी मुस्कान सदा ही बनी रही थी. मेरे बारे में औपचारिक पूछताछ के बाद उन्होंने अपने एक शिष्य को बुलाया- इनको मेरे बगल वाला कमरा दिखा दो। कुछ सामान हो तो वो भी पहुँचा देना, ये हमारी खास अतिथि हैं, इनका पूरा ध्यान रखा जाए। मोनिका जी को इनके साथ रहने को कह देना, वो हमारे बारे में इनकी सारी जिज्ञासा शांत कर देंगी।’
धीरे-धीरे और मृदु स्वर में उन्होंने कहा, स्वर बहुत धीर और गम्भीर था।
‘गुरूजी अपके पाठ का समय हो गया है!’ उस आदमी ने उनसे कहा।
गुरूजी उठते हुये मेरे सिर पर हाथ फेरा तो लगा मानो एक चुम्बकीय शक्ति उनके हाथों से मेरे बदन में प्रवेश कर गई।
‘तुम आराम करो और चाहो तो आश्रम में घूम फ़िर कर देख भी सकती हो, मोनी तुम्हें सब जगह दिखा देगी।’ कह कर वो चले गए।
मोनी नाम की लड़की कुछ ही देर में आ गई। उसने लाल रंग का एक किमोनो जैसा वस्त्र पहन रखा था, जैसा पहाड़ी इलाके में लडकियाँ पहनती हैं, वो बहुत ही ख़ूबसूरत थी और बदन भी सेक्सी था। उसने मुझे एक कमरा दिखाया, कमरा काफ़ी खूबसूरती से सजा हुआ था, मानो कोई फाइव स्टार होटल का कमरा हो।
तभी एक युवती कोई शरबत लेकर आई. उसका स्वाद थोड़ा अजीब था, मगर उसे पीने के बाद तन-बदन में एक स्फूर्ति सी छा गई। मोनी ने पूरा आश्रम घुमाया, बहुत ही शानदार बना हुआ था। उसने फ़िर सबसे मेरी मुलाक़ात कराई। वहाँ 12 आदमी और 5 महिलाएं रहती थी। महिलाएं सारी की सारी खूबसूरत और सेक्सी थी। सबने एक जैसा ही गाऊन पहन रखा था, जो क़मर पर डोरी से बंधा था। उन्होंने शायद अन्दर कुछ नहीं पहन रखा था क्योंकि चलने फिरने से उनकी बड़ी-बड़ी छातियाँ हिलती डुलती थी। आदमी सब क़मर पर एक लाल लुंगी बाँधे थे।
दोपहर को खाना खाने के बाद गुरूजी कुछ देर विश्राम करने चले गए। शाम को उनका हॉल में प्रवचन था। मैं उनके संग रहने का कोई भी मौका नहीं छोड़ रही थी, बहुत ही अच्छा बोलते थे, मैं तो मंत्रमुग्ध हो गई।
शाम की आरती के बाद आठ बजे मुझे उन्होंने वार्तालाप के लिए बुलाया। मैं उनसे तरह तरह के सवाल पूछने लगी। वो बिना झिझक उनके जवाब दे रहे थे। उनके जवाब मैं वॉकमैन में रेकॉर्ड कर रही थी मैं उनके जवाब रेकॉर्ड करने के लिए उनकी तरफ झुक कर बैठी थी जिसके कारण मेरे टी-शर्ट के गले से बिना ब्रा के मेरे स्तन और चूचुक साफ दिख रहे थे। गुरूजी की नजरें उनको सहला रही थी। अचानक मेरी नजरें उनके ऊपर पड़ी, उनकी आँखों का पीछा किया तो पता चला कि वो कहाँ घूम रही हैं, मैं शरमा गई लेकिन मैंने अपने दूध की बोतलें छिपाने की कोई कोशिश नहीं की। मैंने अपने बातों की दिशा थोड़ी बदली- गुरूजी अपके बारे में तरह तरह की अफवाह भी सुनने को मिलती हैं?’ मैंने पूछा लेकिन उनके चेहरे पर खिली मुस्कराहट में कोई बदलाव नज़र नहीं आया।
‘जब भी कोई लोगों की भलाई के लिए अपना सब कुछ लगा देता है तो कुछ आदमी उस से जलने लगते हैं, अच्छे मनुष्य का काम होता है की बगुले की तरह सिर्फ मोती चुन ले और कंकड़ को वहीँ पडे रहने दे!’ उन्होंने बड़ी ही मधुर आवाज में मेरे प्रश्न का जवाब दिया। इसी तरह काफ़ी देर तक बातें होती रही।
उन्होंने बातों-बातों में मुझे कई बार उनके आश्रम से जुड़ने के लिए कहा।
रात के साढ़े नौ बजे मैंने उनसे अब घर जाने की इजाजत मांगी।
लेकिन तभी उनके एक शिष्य ने आकर बताया कि बाहर काफ़ी तेज़ बरसात शुरू हो गई है। मैं बाहर आई तो देखा बरसात काफ़ी तेज हो रही है। मैं अकेली और बाईस किलोमीटर का सुनसान रास्ता! कुछ देर तक मैं बरसात के रुकने का इंतज़ार करती रही मगर बरसात रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी। मैं अन्दर आ गई। अचलानन्द जी मुझे वापस आता देख खिल उठे। उन्होंने फौरन मोनी को बुलाया- इनके भोजन और ठहरने की व्यवस्था कर दो!’
मोनी ने मुझे अपने साथ आने का इशारा किया। मैं उसके साथ अपने कमरे में आ गई। उसने एक किमोनो मुझे लाकर दिया। वो मुझे लेकर बाथरूम में आ गई। बाथरूम की एक दीवार पर लम्बा चौड़ा आइना लगा हुआ था। वो तो बाद में पता चला कि वो एक एक-तरफ़ा शीशा था जिसके दूसरी तरफ से बाथरूम के अन्दर का सारा दृश्य साफ दिखता था।
‘अपने कपडे उतार कर इसे पहन लो!’ मेरा चेहरा उसकी ओर था और आइना मेरे पीछे की ओर था. मैंने अपने टी-शर्ट को पकड़ कर अपने बदन से अलग कर दिया। मेरे गोरे बदन पर तने हुये 38 आकार के स्तन देख कर उसकी आँखों में एक चमक आ गई- तुम बहुत ख़ूबसूरत हो’ उसने मेरे स्तन को हल्के से छूते हुये कहा।
मैंने अपनी जींस को खोल कर अपने पैरों के नीचे सरका दी, उसे अपने बदन से अलग कर के मोनी को थमा दिया। फ़िर मैंने उसके हाथ में थामे किमोनो को लेने की कोशिश की तो उसने अपने हाथ को दूर कर लिया- नहीं मैंने कहा था कि सारे वस्त्र खोल दीजिये, इसे पहनते समय शरीर पर और कोई अपवित्र वस्त्र नहीं होना चाहिए’ उसने मेरे बदन पर मौजूद एक मात्र पैन्टी के इलास्टिक की तरफ हाथ बढाया- अपनी पैन्टी को धीरे धीरे नीच करते हुये पीछे घूमो!’ कह कर वो आइने वाली दीवार की तरफ चली गई। मुझे तो समझ में नहीं आया कि वो ऐसा करने को क्यों कह रही है। लेकिन मुझे क्या पता था कि इस तरह से दीवार के उस तरफ मौजूद लोगों के लिए मैं अनावृत होकर गर्मागर्म अंग-प्रदर्शन कर रही थी। मैंने आइने की तरफ घूम कर नीचे झुकते हुये अपने पैरों से अपनी पैन्टी को निकाल दिया।
‘अब सीधी खड़ी हो जाओ!’
मैं सीधी हो गई, बिल्कुल नग्न!
‘वाह! क्या शानदार बदन है आपका!’ कह कर उसने मेरी योनि के ऊपर अपना हाथ फेरा।
मैं उसकी हरकतों से मुस्कुरा उठी, फ़िर मैंने उसके हाथों से वो किमोनो लेकर बदन पर पहन लिया।
फ़िर हम बाहर आ गए।
रात का भोजन करके मैंने जीवन को फ़ोन किया कि मुझे रात को यहाँ रुकना पड़ रहा है इसलिए बच्चे का ख्याल रखे।
फ़िर मैं अपने कमरे में आ गई। कमरा बहुत शानदार था, नर्म बिस्तर पर सफ़ेद रेशमी चादर माहौल को और अनुपम बना रही थी। एक दरवाज़ा बगल में भी था जो दूसरी तरफ से बंद था और उसमें मेरे कमरे की तरफ से बंद करने के लिए कोई कुण्डी नहीं थी। मैं बिस्तर पर लेट गई। भोजन के बाद मुझे एक ग्लास भर कर कोई जूस दिया था, पता नहीं उसकी वजह से या वहाँ के माहौल से मेरा बदन गर्म होने लगा।
मैं उठी और उस किमोनो को अपने बदन से अलग कर पूरी तरह नग्न बिस्तर पर लेट गई और एक रेशमी चादर अपने बदन पर ओढ़ ली। कुछ देर में मेरा बदन कसमसाने लगा, मेरी अन्तर्वासना जागृत होने लगी, कान-पिपासा से वशीभूत हो मैंने अपने हाथ अपनी योनि पर रख दिया और उसे ऊपर से दबाने लगी। मन कर रहा था कि कोई आ कर मुझे मसल कर रख दे। मेरे स्तनाग्र विराट रूप धारण करने लगे थे, मैं अपनी उँगलियों के पौरों से उन्हें मसलने लगी। मैं अपनी दो उँगलियाँ अपनी योनि के अन्दर-बाहर करने लगी।
मगर मेरी भूख थी कि बढ़ती ही जा रही थी। कोई आधे घंटे बाद हल्की सी आवाज आई। मैंने देखा- बिना आवाज के बगल वाला दरवाजा खुल रहा है। मैं चुपचाप चित्त हो कर लेट गई। हल्की सी आँखें खोल कर देखा कि कोई कमरे में आ रहा है, वो धीरे धीरे चलता हुआ मेरे बिस्तर के पास आया, उसने अपना हाथ उठा कर मेरे एक उभार पर रखा, उसे मेरी एक छाती पर रख कर दबाया बहुत धीरे से। फ़िर उसने चादर के किनारे को पकड़ कर मेरे बदन से हटाना शुरू किया, रेशमी चादर मेरे नाज़ुक चिकने बदन से सरकती रही और मैं पूर्ण अनावृत हो गई।
अब एक हाथ ने मेरे नग्न हो चुके चूचुक को धीरे से छुआ। उसने मुझे सोया हुआ जान कर अपना हाथ मेरे सिर पर रख कर धीरे धीरे नीचे सरकाना शुरू किया, इतना हल्का स्पर्श था मानो बदन पर कोई मोर-पंख फिरा रहा हो। हाथ धीरे धीरे सरकता हुआ जब योनि के ऊपर पहुँचा तो मेरा चुपचाप पड़े रहना मुश्किल हो गया, मेरे होंठों से एक दबी सी सिसकारी निकल गई, उसने अपना हाथ चौंक कर हटा लिया।
मैंने मानो नींद से जागते हुये कहा- कौन… कौन है?
मैं बिस्तर से उठ कर खड़ी हो गई।
‘मैं!’ एक हलकी सी आवाज आई और उसने मुझे खींच कर अपनी बाँहों में भर लिया। मैं भी किसी बेल की तरह उसके बदन से लिपट गई। मैं समझ गई कि आगंतुक गुरूजी ही हैं। उनका बदन भी पूरी तरह नग्न था, वे मेरे चहरे को अपने हथेलियों के बीच लेकर चूमने लगे। मेरा शरीर तो पहले से ही कामाग्नि में तप था, मैं भी उसके चुम्बनो का जवाब देने लगी। मैं उसके चहरे को बेतहाशा चूमने लगी। मैं एक शादीशुदा महिला, अपने पति, बच्चे सब भूल गई थी। याद रही तो एक आदिम भूख जो मेरे पूरे अस्तित्व पर हावी हो चुकी थी।
उसके होंठ मेरे होंठों को मथ रहे थे, मेरे निचले होंठ को उसने अपने दांतों के बीच दबा कर धीरे धीरे काटना शुरू किया। फ़िर उसने अपनी जीभ मेरे होंठों से बीच से सरका कर मेरे मुँह में डाल दी। मैं उनकी जीभ को ऐसे चूस रही थी जैसे कोई रसीला फल हो। कुछ देर तक हम यूँही एक दूसरे को चूमते रहे।
उसके बाद उनके होंठ फिसलते हुये मेरे एक चूचुक पर आकर रुके और अपने मुँह में लेकर जोर जोर से चूसने लगे। मेरे सारे बदन में एक सिहरन सी दौड़ने लगी और मेरे स्तनों से निकल कर उन फलों का रस गुरूजी के मुँह में जाने लगा। वो एक स्तन को अपने मुँह में लेकर उससे दूध पी रहे थे और दूसरे को अपनी उँगलियों में लेकर खेल रहे थे। मैं अपने सिर को उत्तेजना में झटकने लगी और उनके सिर को अपनी छाती पर जोर से दबाने लगी। एक स्तन का सारा रस पीने के बाद उन्होंने दूसरे स्तनाग्र को अपने मुँह में ले लिया और उसे भी चूसने लगे। मैंने देखा कि पहला चूचुक काफ़ी देर तक चूसने के कारण काफ़ी फूल गया है।
मैंने उत्तेजनावश अपना हाथ बढ़ा कर उनके लिंग को अपनी मुट्ठी में ले लिया। उनका लिंग तना हुआ था. काफ़ी बड़ा लिंग था. इतना बड़ा लिंग मैंने तो कभी किसी का नहीं देखा था, कोई 7-8″ लम्बा होगा।
गुरूजी ने दूसरे वक्ष का भी सारा दूध पीने के बाद मुझे अपने से अलग किया और एक हाथ बढ़ाकर बिस्तर के पास लगे बेड लैंप को रोशन कर दिया। हल्की सी रौशनी कमरे में फ़ैल गई। सारे कमरे में अँधेरा था सिर्फ़ हम दोनों के नग्न बदन चमक रहे थे। उस रौशनी मुझे अपने से अलग कर गुरूजी ने मेरे नग्न बदन को निहारा, मैंने भी उनके गठीले बदन को भूखी नजरों से देखा।
‘बहुत खूबसूरत हो!’ गुरूजी ने मेरे बदन की तारीफ़ की तो मैं एक दम किसी कमसिन लड़की की तरह शरमा गई. फ़िर उन्होंने मुझे कन्धों से पकड़ कर नीचे की ओर झुकाया। मैं उसके सामने घुटनों के बल बैठ गई। मैंने लैंप की रौशनी में पहली बार उनके लिंग को देखा। उसे देख कर मेरे मुँह से हाय निकल गई।
‘काफ़ी बड़ा है गुरुजी! मैं इसे नहीं ले पाऊँगी! फट जायेगी मेरी!!!’
‘अभी से घबरा गई! इसीलिए तो मैं कह रह था कि हमारे आश्रम की सदस्य हो जाओ। जो भी एक बार मेरे सम्पर्क में आती है वो मुझे छोड़ कर नहीं जा सकती और किसी लिंग से योनि नहीं फटती, योनि होती ही ऐसी है कि लिंग के हिसाब से अपना आकार बदल ले!’
मैं घुटनों के बल बैठ कर कुछ देर तक अपने चेहरे के सामने उनके लिंग को पकड़ कर आगे पीछे करती रही। जब हाथ को पीछे करती तो लिंग का मोटा सुपाड़ा अपने बिल से बाहर निकाल आता। उनके लिंग के छेद पर एक बूँद प्री-कम चमक रही थी. मैंने अपनी जीभ निकाल कर लिंगाग्र पर चमकते हुये उस प्री-कम को अपनी जिव्हाग्र पर ले लिया और मुख में लेकर उसका स्वाद लिया जो मुझे बहुत भाया। फ़िर मैंने अपनी जीभ उनके लिंग के सुपाड़े पर फिरानी शुरू कर दी।
वो आ आआ अह ऊ ओ ह्ह्ह करते हुये मेरे सिर को दोनों हाथों से थाम कर अपने लिंग पर दबाने लगे।
‘इसे पूरा मुँह में ले लो!!’ गुरूजी ने कहा।
मैंने अपने होंठों को हल्के से अलग किया तो उसका लिंग सरसराता हुआ मेरी जीभ को रगड़ता हुआ अन्दर चला गया। मैंने उनके लिंग को हाथों से पकड़ कर और अन्दर तक जाने से रोका मगर उन्होंने मेरे हाथों को अपने लिंग पर से हटा कर मेरे मुँह में एक जोर का धक्का दिया, मुझे लगा आज यह एक फ़ुट लम्बा लिंग मेरे गले को फाड़ता हुआ पेट तक जा कर मानेगा। मैं दर्द से छटपटा उठी, मेरा दम घुटने लगा था। तभी उन्होंने अपने लिंग को कुछ बाहर निकाला और फ़िर वापस उसे गले तक धकेल दिया. वो मेरे मुँह में अपने लिंग से धक्के लगाने लगे।
कुछ ही देर में मैं उनकी हरकतों की अभ्यस्त हो गई और अब मुझे यह अच्छा लगने लगा। कुछ ही देर में मेरा बदन अकड़ने लगा और मेरे चूचुक एकदम तन गए, गुरूजी ने मेरी हालत को समझ कर अपने लिंग की रफ़्तार बढ़ा दी।
इधर मेरा रस योनि से बाहर निकलता हुआ जांघों को भिगोता हुआ घुटनों तक जा बहा, उधर उसका ढ़ेर सारा गाढ़ा रस मेरे मुँह में भर गया। मैं इतने वीर्य को एक बार में सम्भाल नहीं पाई और मुँह खोलते ही कुछ वीर्य मेरे होंठों से मेरी छातियों पर और नीचे जमीन पर गिर पड़ा। जितना मुँह में था उतना मैं पी गई।
तभी कहीं से एक मधुर आवाज आई- नहीं लड़की! इनके प्रसाद का इस तरह अपमान मत करो!’
मैंने चौंक कर सिर घुमाया तो देखा कि मोनी अँधेरे से निकल कर आ रही थी। उसने वही लबादा ओढ़ रखा था। उसने मेरे पास आकर मेरे होंठों पर लगे वीर्य को अपनी जीभ से साफ किया, अपनी उँगलियों से मेरे स्तनों पर लगे वीर्य को उठा कर मुझे ही चटा दिया। फ़िर उसने मुझे झुका कर जमीन पर गिरी वीर्य की बूंदों को चटवा कर साफ कराया। Hindi Porn Stories
लॉकडाउन लगने पर मेरी बुआ की अविवाहित बेटी जो कॉलेज में पढ़ रही थी, मेरे किराए के फ्लैट में मेरे साथ रहने आ रही थी. मैं उसकी जवानी की ओर आकर्षित हुआ जा रहा था.
अब आगे सेक्सी कॉलेज गर्ल की कहानी:
मोनी ने सामान निकालते हुए, चहकते हुए कहा- अरे नीलू! तू इतना लम्बा है यार … बाप रे बाप! पाँच साल छोटा होकर भी मेरा बड़ा भाई लग रहा है!
“हे हे दीदी … आप न … बिल्कुल नहीं बदली!” मैंने झेंपते हुए कहा.
कहते हुए मैं सामान लेने मोनी के पास पंहुचा.
हम गले मिले, हमें गले लगते हुए टावर के गार्ड ने भी देखा.
“अरे वाह भाई … इतना हैंडसम हो गया है तू … और इतनी तगड़ी बॉडी शॉडी भी बना रखी है … सारी दिल्ली की लड़कियाँ पटाने का इरादा है क्या?” मोनी ने फिर मज़े से भरपूर लहजे में कहा.
“बस बस … बाकी की टांग ऊपर फ्लैट चलकर खींचना दीदी!” मैंने भी हँसते हुए जवाब दिया.
मोनी 3 बड़े सूटकेस में अपना सारा सामान पैक कर लायी थी.
हम दोनों ने मिलकर सामान खींचना शुरू किया और लिफ्ट की तरफ चल दिए.
मैंने कनखियों से देखा, टावर के गार्ड ने मोनी को नज़रें छुपकर ऊपर से नीचे तक पूरा चेक आउट किया.
खैर, हम सामान लेकर उन्नीसवीं मंजिल पर पहुंचे.
आलीशान कॉरिडोर से चलते हुए मोनी की आँखें बड़ी हो रही थी.
कुछ ही सेकंड में हम मेरे फ्लैट के सामने थे.
मैंने फ्लैट खोला और हमने अंदर कदम रखा.
मोनी के चेहरे पर जो मुस्कान थी, वो फ्लैट के अंदर घुसते हुए चौगुनी हो गयी.
ऐसा लग रहा था किसी बच्चे के हाथ उसका फेवरेट खिलौना लग गया हो. मोनी ने घूम घूम कर पूरे फ्लैट का जायज़ा लिया, खासकर बालकनी और वहां से मिल रहा व्यू देखकर तो वो मुग्ध हो गयी.
“वाह नीलू!! तू तो राजा की तरह रहता है, इतनी महंगी जगह पर … पहले कभी बुलाया क्यों नहीं मुझे? इतना सेक्सी फ्लैट हो तो मैं 3 घंटे भी सफर करके आती!”
मैंने ध्यान दिया, दीदी की भाषा में मॉडर्न शब्द बेपरवाह रूप से आये जा रहे थे.
“दीदी ये सब छोड़ो … ये बताओ क्या लोगी आप? चाय, कॉफ़ी, ठंडा?”
“बियर मिलेगी?”
“व्हाट!?”
मोनी ने एक ठहाका लगाया और बोली- तूने आज तक कुछ ट्राई नहीं किया? मुझे बेवकूफ मत समझ बेटा … तेरी बड़ी बहन हूँ मैं … इतने सालों से दिल्ली एन सी आर में रह रहा तू … संस्कारी किसी और के सामने बनना!
“हे हे दीदी … ट्राई तो बहुत कुछ किया है … बस आप मुँह मत खोल देना किसी के भी सामने इन सब बातों को लेकर … आप जानती ही हो कुछ चुगलखोर हैं हमारे खानदान में … काना-फूसी में सब बातें फैला देते हैं … फिर आपको पता ही है हमारी साइड की कम्युनिटी … काफी ऑर्थोडॉक्स और कन्सेर्वटिव है … तिल का ताड़ बन जाएगा.”
मोनी मुझे काटते हुए बोली- अरे पागल है क्या … मेरे मुँह से तो सपने में भी ये सब नहीं निकल सकता कानपुर में … भाई तू मत बोल देना गलती से भी कहीं भी … तू तो फिर भी लड़का है, बच जाएगा … मैं तो लड़की हूँ … तेरे बुआ फूफा कितने खतरनाक है तू भी जानता है … हिंट भी लगा तो मेरी लंका लग जाएगी … पी.एच.डी. वगैरह सब छोड़कर घर बिठा देंगे … क्या पता गुस्से में शादी ही करा दें!
मोनी एक सांस में बोलती चली गयी.
“अरे अरे … रिलैक्स रिलैक्स … कोई किसी को नहीं बोल रहा दीदी … मैं तो थोड़ा सतर्क था बस आपसे पहली बार बात हो रही इस बारे में इसलिए!”
मोनी के चेहरे पर मुस्कान आ गयी- हाँ भाई, जानती हूँ. तुझ पर अंधा विश्वास कर सकती हूँ मैं. बचपन से सारे भाई बहनों में हम दोनों की खूब पटती थी … पता नहीं क्यों मिलना जुलना काम हो गया … मेरी पढ़ाई तेरी पढ़ाई और पता नहीं क्या क्या … चल कोई नहीं, अब तो अच्छे से टाइम मिला है … दोनों भाई बहन खूब गप्पें मारेंगे!”
मैं कुछ बोलता इसके पहले मोनी सोफे से उठी- तू बैठ नीलू, चाय मैं बनाकर लाती हूँ. कड़क अदरक वाली मसाला चाय, अपनी बहन के हाथ की चाय पीकर देख आज, मज़ा न आये तो बोलना!
यह कहकर मोनी सीधे किचन में चली गयी, पीछे पीछे मैं भी.
किचन व्यवस्थित था तो कोई भी सामग्री ढूंढने में दिक्कत नहीं हुई.
मैं किचन में प्लेटफार्म पर ही बैठ गया.
मोनी ने गैस पर चाय चढ़ाई और हम दोनों गपशप करने लगे.
काफी बातें करने के बाद चाय बनने को थी ही तभी मोनी बोली- देख नीलू, अब मैं आ गयी हूँ तो किचन का दारोमदार तू मुझ पर छोड़ दे. तू बस आर्डर कर, जो भी तुझे खाना है वो गर्मागर्म मिलेगा, वो भी ऐसे ज़ायके का कि अपनी उंगलियाँ चाटता रह जाएगा.
“ऑब्वियस्ली दीदी, आपके हाथ के लज़ीज़ खाने का तो मैं कानपुर से ही दीवाना हूँ!”
बातें करने के बीच में भी रह रह कर मेरी नज़रें छुप -छुप कर मोनी के बदन का मुआयना कर रही थीं.
आखिर मर्द तो मर्द ही ठहरा, गदराया जिस्म देखकर तो ईमान डगमगाता ही है.
चाहे वो जिस्म बहन का ही क्यों न हो.
चाय के कप लेकर हम दोनों वापस लिविंग एरिया में आये और सोफे पर बैठे.
अब तक हम इतना सहज हो चुके थे कि मानो कॉलेज के दो दोस्त हों.
एक अनकहा भरोसा हो गया था आपस में … कि आपस की बातें आपस में ही रहेंगी.
मोनी ने कहा- देख नीलू, अब जब हम दोनों को साथ ही रहना है तो छुपने छुपाने का कोई फायदा नहीं … देख, मैं खुद 8 महीने से दिल्ली रह रही, मैं समझती हूँ मेट्रो सिटी में रहते हुए अपनी ही एक मॉडर्न लाइफस्टाइल की आदत हो जाती है.
अब तक मैं भी काफी सहज हो चुका था, मैंने चुटकी लेते हुए कहा- दीदी, बियर फिलहाल तो नहीं है. लेकिन आपको पसंद है तो ठेका (वाइन शॉप) ज़्यादा दूर नहीं. शाम को चल के ला सकते हैं!
सेक्सी कॉलेज गर्ल मोनी के चेहरे पर एक विजयी मुस्कान आ गयी- वाह भाई वाह … एक शर्त पर … अगर तू साथ देगा मेरा … तभी पियूँगी!
मैंने कहा- नेकी और पूछ पूछ?
हम दोनों ने ठहाका लगाया.
मैंने कहा- चलो दीदी, आपने शुरुआत करी तो मैं भी बताता हूँ. मुझे चाय के साथ सिगरेट पीने की आदत है … आपको अजीब न लगे तो जला लूँ एक?
मोनी ने मेरी आँखों में देखते हुए एक रहस्यमयी मुस्कान के साथ धीरे से अपने पर्स की तरफ हाथ बढ़ाया, उसमें से क्लासिक माइल्ड सिगरेट की एक डिब्बी निकली और मुस्कुराते हुए कहा- नीलू, तूने मेरे मुँह की बात छीन ली … तू तो पूरा मेरा ही भाई है रे … आदतें भी हम दोनों की एक सी हैं … लाइटर दे मुझे, मेरा वाला ब्रांड पियेगा?
मैंने पास के एक दराज़ से मार्लबोरो गोल्ड एडवांस सिगरेट की डिब्बी और साथ में एक चमचमाता हुआ स्टील का लाइटर निकाला।
एक सिगरेट निकाल कर मैंने जलाई और लाइटर मोनी को पास किया.
मोनी ने अपनी सिगरेट जलाई और चहकी- वाह भाई, एडवांस पीता है तू? कितनी हार्ड होती है ये. पूरी मर्दाना सिगरेट है. तेरी पर्सनालिटी को भी सूट करती है … मैं तो अल्ट्रा-माइल्ड या माइल्ड ही पीती हूँ!
सिगरेट की इतनी नॉलेज के साथ साथ अब तक मुझे भी समझ आ रहा था कि मोनी भी मेरे पूरे कसरती जिस्म को अपनी आँखों से तोल रही थी.
कुछ भी बात अजीब न लगे इसलिए हम हंसी-ठिठोली में सारी बातों को हल्का कर दे रहे थे.
चाय के साथ जिस तरह से मोनी सिगरेट के कश पर कश ले रही थी, उससे साफ़ दिख रहा था कि दिल्ली की मॉडर्न हवा सर उसके अंदर तक बस चुकी थी.
हम दोनों ने चाय ख़त्म की और मोनी दूसरे खाली पड़े कमरे में अपना सामान ज़माने में लग गयी.
मैं भी ऑफिस में व्यस्त हो गया.
ऑफिस का काम करते हुए मैं उस दिन एक अलग ही जोन में था.
मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि अपनी एक बड़ी बहन के साथ मैं सिगरेट पीकर आ रहा हूँ.
शाम को लगभग पांच बजे मैं अपने ऑफिस रूम से उठा और मोनी के कमरे में झाँका तो पाया कि वह सो रही है. दूर से आयी है थक गयी होगी समझकर मैं मोनी को नींद में छोड़कर मार्केट चला गया.
मैंने अंग्रेजी शराब के ठेके से एक पेटी स्ट्रांग बियर कैन की खरीदी, साथ में व्हिस्की, वोडका और रेड वाइन की भी बोतलें खरीदीं, कुछ और खरीददारी करी.
कुछ देर के लिए देवेश के फ्लैट गया, गप्पबाज़ी करी.
वापस आते आते साढ़े आठ बज गए.
आया तो देखा कि मोनी किचन में डिनर बनाने की तैयारी कर रही है.
मैंने शराब की बोतलें लिविंग रूम की एक अलमारी में रख दीं; बियर की पेटी लेकर किचन में गया और फ्रिज में सजा दीं.
रात्रि 10 बजे हमने भोजन किया.
भोजन के पश्चात बियर का एक-एक कैन पीते हुए हमने गप्पें मारी, साथ में सिगरेट के कश लगाए.
मोनी ने शॉर्ट्स और टॉप पहन रखा था.
अब तक हम दोनों के बीच पूर्ण रूप से सहजता आ चुकी थी.
हमारी भाषा में भी वह सहजता आ चुकी थी, दिल्ली की रेगुलर छोटी मोटी गालियां भी हमारी बातचीत का हिस्सा बन गयी थी.
हर बीतते पल के साथ हम और ज़्यादा दोस्ताना होते जा रहे थे.
और मित्रो, सच कहूं तो मोनी जैसी बड़ी बहन के साथ बियर पीने का मज़ा ही कुछ था.
बियर के सुरूर में हम गप्पें मार ही रहे थे, तब तक मैंने फ़ोन पर ख़बर देखी.
प्रधानमंत्री ने बाइस मार्च, रविवार को पूरे दिन के लिए ‘जनता कर्फ्यू’ की घोषणा कर दी थी.
साथ में ‘ताली बजाओ-थाली बजाओ’ के मीम भी आ रहे थे.
मैंने मोनी को भी वह खबर दिखाई और फिर हम दोनों ने कुछ प्लानिंग करी.
अगले दिन मैंने अखिल की कार निकाली और हम दोनों ने जाकर 3-4 महीने का राशन, किचन का सामान, आवश्यक दवाएं और फ्लैट के लिए अन्य आवश्यक सामान स्टॉक कर लिया.
शराब और बियर की पेटियां, और साथ में सिगरेट के 2-3 बड़े क्रैट का भी स्टॉक ले लिया.
यह आईडिया मेरा था, यह सोचकर कि सामान महंगा न हो और कालाबाज़ारी न होने लगे, इससे पहले स्टॉक कर लेते हैं.
लेकिन जो होने वाला था वह तो मैंने दूर दूर तक न सोचा था.
बाइस तारीख को ‘जनता कर्फ्यू’ लगा, और बहुत हद तक पूरा देश थम गया.
अगले दिन, तेइस मार्च, सोमवार को शाम पाँच बजे खबर आयी कि प्रधानमंत्री रात आठ बजे एक महत्वपूर्ण घोषणा करने वाले हैं.
और ठीक रात आठ बजे, प्रधानमंत्री ने पूरे भारत में इक्कीस दिन का सम्पूर्ण लॉकडाउन लगाने की घोषणा करी.
साथ में सभी प्रदेशों की सीमाएं भी सील होनी थी और आवागमन को कम से कम करना था ताकि कोरोना वायरस का फैलाव कम करने का प्रयास किया जा सके.
प्रचुर संख्या में पुलिस भी जगह जगह तैनात कर दी गयी.
लोगों को सख्ती से लॉकडाउन का पालन करने के निर्देश दिए.
लॉकडाउन में केवल आवश्यक सेवाएं ही चालू थीं, खान-पान की सामग्री, दवाइयाँ, दूध,फल, सब्ज़ी इत्यादि.
हम खबर देख रहे थे मेरे फ्लैट पर टीवी स्क्रीन के सामने!
मेरे और मोनी के साथ देवेश और सुमित भी मौजूद थे.
मोनी का मेरे दोनों मित्रों से परिचय उसी शाम को पहली बार हुआ.
उन दोनों ने भी मोनी को बड़ी बहन का सम्मान देते हुए दीदी कहकर ही सम्बोधित किया.
खबर देखने के पश्चात दोनों फटाफट भागे कि जल्दी से कुछ आवश्यकता की चीज़ें जाकर स्टॉक कर ली जायें.
मेरे दोस्तों के जाते ही मोनी ने फिर से टीवी पर चल रही न्यूज़ को देखा और उसके मुँह से निकला- फ़क बहनचोद!! क्या बाल बाल बची मैं!!
मैं बोला- दीदी, कितनों के तो लौड़े लग गए होंगे इस वक़्त!
“सच में यार नीलू … मेरी तो गांड फट गई ये न्यूज़ सुनकर!! थैंक गॉड मैं कानपुर नहीं गई यार!”
“आप सही टाइम पर आ गयी दीदी … इस टाइम अगर आप दिल्ली में होतीं तो यहाँ गुरुग्राम पहुंचना भी नामुमकिन होता. स्टेट बॉर्डर ही बंद हो रहा!!” मैंने सामने से कहा.
“नीलू, थैंक्स मेरे भाई, तूने एकदम सही टाइम पर प्लान बना कर सब सामान भी स्टॉक कर लिया. तू टेंशन मत ले अब किसी और चीज़ की. तू अपने ऑफिस पर फोकस कर, फ्लैट मेन्टेन करने, खाने पीने की पूरी ज़िम्मेदारी मेरी … वैसे भी कोई किराया तो दे नहीं रही मैं तुझे!”
“अरे यार मोनी दी, रिलैक्स ना … इतना फॉर्मेलिटी क्यों? भाई बहन के बीच सब चलता है!”
सुनकर मोनी ने मुझे एक स्माइल दी.
हमने डिनर किया, सुट्टा मारा और सो गए.
मेरा नाम मोहित है. मैं देहरादून में एक बड़े वकील साहब के ऑफिस में टाईपिस्ट हूँ.
उनके तीन जूनियर वकील अस्टिटेंट थे, उनमें से एक अतुल नाम का भी वकील था, जो मेरा बॉस होता था. मैं उसी के काम को करने के लिए रखा गया था.
वो एक-दो बार मेरे साथ मेरे घर आया था.
अतुल दिलफेंक टाईप का था और उसकी उम्र भी लगभग 45 साल की थी.
उसके काफी सारे अफेयर भी थे, लेकिन उस सबसे मुझे कोई वास्ता नहीं था.
अब मैं अपनी बीवी के बारे में बताऊं, तो मेरी बीवी का नाम किरण है. उसकी हाईट 5 फीट 5 इंच है और उसका शरीर भरा हुआ है.
वो किसी फिल्म की ऐक्ट्रेस की तरह दिखती है. उसका 34-28 36 का फिगर है.
उसे सेक्स में चूत चटवाना बहुत पसंद है.
लेकिन पहले मुझे चूत चाटना जरा भी पसंद नहीं था, अब हो गया है. या यूं कहूँ कि पहले नहीं था, इसीलिए मेरी बीवी के साथ ये मामला हो गया था.
हुआ कुछ यूं कि एक दिन मैं अपने ऑफिस में गया.
लेकिन उस दिन बड़े बॉस नहीं आए थे, उनके सारे जूनियर आए हुए थे.
तभी बड़े बॉस का फान आया कि वह आज नहीं आ रहे हैं.
यह सुनकर अतुल नाम का वही जूनियर वकील तुरन्त ही ऑफिस से निकल गया.
उसके निकलते ही बॉस का फोन फिर से आया और उन्होंने कहा कि हम सब भी ऑफिस बंद करके आज छुटटी लेकर घर चले जाएं.
ये सुनते ही हम सभी भी अपने-अपने घर को निकल गए.
मेरा मन था कि आज घर जाकर बीवी के साथ सेक्स का मजा लूँ.
मैं एक किराये के घर में रहता हूँ. उसमें एक कमरा व रसोई है. वो घर भी ऐसी जगह है कि कोई आए-जाए, कुछ पता नहीं चलता क्योंकि ये कॉलोनी से थोड़ा एक ओर हट कर है.
जब मैं अपने घर पहुंचा तो मुझे अतुल वकील की बाईक मेरे घर के बाहर खड़ी मिली.
मुझे कुछ शक हुआ लेकिन सोचा मिलने आया होगा, या किसी काम से आया होगा.
ये सोचकर मैं अन्दर चला गया.
अन्दर कमरे में कोई दिखाई नहीं दिया तो मुझे थोड़ा शक हुआ.
अब मैं दबे पांव रसोई की तरफ जाने लगा.
वहां मेरी बीवी किरण वकील साहब के लिए चाय बना रही थी और वह भी वहीं खड़ा था.
यह देखकर मुझे थोड़ा अजीब लगा कि ये आदमी रसोई में क्या कर रहा है.
मैं छुप कर उन दोनों की बातें सुनने लगा.
वह मेरी बीवी से बातें कर रहा था.
अतुल- जान, बहुत दिन से तुम्हारे दूध की चाय पीने का मन था, इसलिए चला आया. तुम्हें बुरा तो नहीं लगा न?
किरण- नहीं सर, मुझे बुरा नहीं लगा. लेकिन अगर वह घर आ गए तो वह गलत समझेंगे.
अतुल- अरे तुम इतना क्यों डर रही हो, वह तो ऑफिस में है, शाम तक घर नहीं आएगा.
इतना बोलकर अतुल मेरी बीवी के पिछवाड़े पर हाथ फेरने लगा जिस पर मेरी बीवी ने ऐतराज किया.
लेकिन अतुल बोला- अरे डार्लिंग, तुम्हारी चूत का रस तो मुझे पागल बना रहा है, मैं तो बस वह रस पीने आया था.
उसकी इस बात से मैं समझ गया कि इन दोनों के बीच कुछ चल रहा है.
लेकिन मेरी बीवी किरण बोली- सर, वो सब तो ऐसे ही हो गया था लेकिन अब नहीं … मुझे डर लगता है.
तो अतुल ने कहा- किरण डियर डरो मत, तुम्हारे मुँह में मेरा लंड बहुत मजा देता है. प्लीज़ एक बार लो ना!
बस इतना बोलकर अतुल ने पीछे से मेरी बीवी के 34 साइज के मम्मों को दबाना शुरू कर दिया.
इस बार मेरी बीवी ने ना ही अतुल को इंकार किया और न ही समर्थन.
अतुल मेरी बीवी के दूध सहलाता रहा और साथ ही उसने अपने एक हाथ को साड़ी के ऊपर से ही उसकी चूत पर रख दिया.
वो साड़ी के ऊपर से ही चूत में उंगली करने लगा.
उससे मेरी बीवी को शायद मजा आने लगा और उसके मुँह से मादक कराहें निकलने लगीं.
किरण- आह … रहने दो न यार … क्यों मेरी आग भड़का रहे हो?
वो मेरी बीवी के गाल चूमता हुआ बोला- सच में किरण मेरी जान, तुम मस्त माल हो. तुम्हारे दूध तो मेरी जान ही निकाल देते हैं.
किरण- एक बार तय कर लो कि मेरे दूध ज्यादा मजा देते हैं या चूत!
अपनी पत्नी किरण के मुँह से ये सुनकर मेरी समझ में आ गया कि किरण की चूत में आग लग चुकी है और वो अब चुदे बिना नहीं रह पाएगी.
उसकी बातों से मेरे लंड में भी तनाव आने लगा और मुझे भी अपनी बीवी की चुदाई होते देखने का मन करने लगा.
उन दोनों को देखकर साफ़ लग रहा था कि मेरी बीवी को अतुल के साथ काफी मजा आ रहा था.
तभी अतुल बोला- कमरे में चलो ना किरण, मुझे तुम्हारी चूत का रस पीना है.
इतना कह कर वो मेरी बीवी के होंठों को चूसने लगा.
वो बोली- अभी मेरे होंठ तो चूसो यार. क्या इधर मजा नहीं आ रहा है?
अतुल बोला- अरे मेरी जान, तुम्हारा हर अंग का रस पीने में मजा आता है. बस इधर जगह कम है न … इसलिए कह रहा हूँ कि कमरे में चलो.
इतना कह कर अतुल ने गैस बंद करके चाय बनाना बंद कर दिया और कहा- मैं चाय नहीं, तुझे पीने आया हूँ. अपने मातहत की बीवी की लेने में जो मजा आता है, वो और कहीं नहीं आता.
मेरी बीवी अतुल का लंड पकड़ कर सहलाने लगी.
अतुल ने भी मेरी बीवी की साड़ी ब्लाउज उतार कर वहीं गैस के बगल की स्लिप में ही रख दिया.
उससे रुका नहीं गया और वो मेरी बीवी को स्लिप पर बिठाकर उसके दोनों पैरों को खोलकर उसकी टांगों के बीच में आ गया.
मेरी बीवी भी मचलने लगी.
अतुल मेरी बीवी के पेटीकोट और पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत पर धक्के मारने लगा.
वो अपने हाथों से उसकी चूचियाँ दबाता रहा और साथ ही मेरी बीवी के रसीले होंठों को चूसने लगा.
अब इस सबसे मेरी बीवी को भी मजा आने लगा था और वह भी बोलने लगी थी- आपकी पैंट में उभरे लंड को देखकर ही मुझे पहली बार ही आपके साथ करने का मन होने लगा था लेकिन आप तो बड़े तेज निकले, जो नजर देखते ही पहचान गए. आपका चूत चाटना तो मुझे पागल ही कर देता है. मेरे हसबेंड तो मेरी टपकती चूत का रस कभी चखते ही नहीं हैं. मेरा कितना मन करता है कि जैसे मैं उनका लंड चूसती हूँ, वैसे ही वह मेरी चूत भी चाटें लेकिन वह नहीं करते. जब आपने मेरी चूत चाटी, तो मुझे समझो जन्नत मिल गयी.
फिर अतुल ने कहा- चलो ना किरण, अपनी टपकती चूत को लेकर कमरे में चलो, वहां आराम से चाटूंगा भी और तुझे अच्छे से तसल्ली से चोदूँगा भी!
किरण बोली- नहीं जी, आज तो आप यहीं स्लैब पर मेरी चूत को चाटोगे और चोदोगे भी. चलो अपने घुटनों पर आ जाओ और यहीं चाटो ना. देखो कितना पानी बह रहा है!
यह सुनकर अतुल अपने घुटनों के बल बैठ गया और मेरी बीवी किरण की चूत चाटने लगा.
किरण को भी मजा आने लगा और वो भी अतुल का सर पकड़ कर अपनी चूत पर रगड़ने लगी.
करीब 5 मिनट तक चूत चाटने के बाद अतुल खड़ा हो गया, उसने अपना लंड निकाल कर मेरी बीवी को दिखाना शुरू कर दिया.
उसका लंड लगभग 6-7 इंच का था और मोटा भी तीन से साढ़े तीन इंच का होगा.
वो लंड हिलाता हुआ मेरी बीवी किरण से बोला- चलो डार्लिंग, अब इसे अपने मुँह में लेकर मस्त चाटो ताकि अच्छे से गीला होकर आहिस्ता से तुम्हारी चूत में चला जाए. तुम्हें याद है ना पिछली बार सूखे लंड से तुम्हें कितना दर्द हुआ था?
मेरी बीवी किरण बोली- हां, पिछली बार आपने मेरी चूत बहुत छील दी थी. आज तो मैं इसे अच्छे से अपने थूक से गीला करूंगी, जिससे मुझे भी मजा आए. पिछली बार तो बस आप ही मजे लेकर चले गए थे.
फिर मेरी बीवी किरण घुटनों पर बैठकर अतुल का लंड चूसने लगी.
करीब 5 मिनट चूसने के बाद अतुल ने मेरी बीवी को स्लिप पर ही उसके पैर चौड़े करके बिठा दिया.
फिर उसने अपना लंड मेरी बीवी की चूत पर सैट करके एक धक्का दे मारा.
जिससे मेरी बीवी चिल्ला पड़ी, किरण बोली- आह यार थोड़ा आराम से चोदो ना! … आपका बहुत मोटा है.
लेकिन अतुल ने उसकी नहीं सुनी और उसके होंठों को चूसते हुए उसकी चूत में धक्के मारता रहा.
वो मेरी बीवी को चोदने के साथ साथ कह रहा था- तुझ जैसी कमसिन कली की चूत तो रगड़ कर मारने में ही मजा आता है मेरी जान!
मेरी बीवी किरण सिसकारती रही- आह प्लीज़ … थोड़ा तो रहम करो अपने मातहत की बीवी पर … आह आगे भी तो आपको यह चूत मारनी है … प्लीज़ आह यार प्लीज़ आराम से चोद लो.
थोड़ी देर बाद चूत ने भी उसके बड़े लंड को लेने के लिए अपना मुँह और खोल लिया.
इसके बाद मेरी बीवी किरण को भी मजा आने लगा और वो अतुल को अपनी तरफ खींचने लगी.
मेरी चीटिंग वाइफ सेक्स करती रही, साथ ही कहती भी रही कि आह और जोर से मारो मेरी … मजा आ गया … और जोर से आह और जोर से … आह!
ऐसे ही तकरीबन आधा घंटा तक मेरे बॉस ने मेरी बीवी की चुदाई की और उसके बाद अपना लंड बाहर निकाल लिया.
मैं सोच में पड़ गया कि इसने ऐसा क्यों किया.
उसने मेरी बीवी से कहा- चलो नीचे आ जाओ घुटनों पर, आज मैं तुमको अपना अमृतपान करवाता हूँ. पिछली बार रह गया था.
उसकी बात को सुनकर मेरी बीवी बैठ गयी और अतुल अपने लंड पर मुठ मारने लगा.
कुछ ही देर बाद उसने अपना वीर्य मेरी बीवी के मुँह में डाल दिया जिसको मेरी बीवी ने अपने मुँह में भर लिया.
अतुल ने भी जबरदस्ती मेरी बीवी के मुँह में झड़ने के बाद अपना लंड ठूंस दिया.
जिससे मेरी बीवी को रस पीना पड़ा.
उसको वीर्य पीने में मजा भी आया. यह उसके चेहरे को देखकर साफ़ समझ आ रहा था.
अब सब खेल खत्म हो चुका था और कहीं न कहीं मुझे भी यह अच्छा लगा था.
उसके बाद मैं वहां से निकल गया और मेरे दिमाग में भी कुछ और पकने लगा था.
चुदाई की ढेर Antarvasna सारी कहानियाँ अन्तर्वासना में पढ़ने के बाद मैंने भी सोचा कि एक सेक्सी कहानी पाठकों के साथ बाँट लूँ !
यह बात उस समय की है जब मैं भिलाई में रह कर आईटीआई की ट्रेनिंग कर रहा था।
मेरे आईटीआई का एक मित्र हमेशा अपने घर ले जाता और उसके घर वाले भी बहुत अच्छे से पेश आते थे।
घर से दूर रहने के कारण परिवार के माहौल में बहुत अच्छा लगता था। मेरे दोस्त का एक भाई था, उसके पापा अच्छी नौकरी में थे।
उनकी मम्मी भी बहुत अच्छी थी, जब भी घर जाता तो नाश्ता चाय के बगैर आने ही नहीं देती थी।
मलयाली परिवार से होने के कारण खाने में ढेर सी अच्छी चीजें मिलती थी। टीवी देखने के नाम पर ही मेरा वहाँ जाना ज्यादा होता था क्योंकि उस समय मुझे फिल्मों का बहुत शौक था।
एक बार मेरे दोस्त के भाई की नौकरी के लिए उनके पापा और भाई को चार दिनों के लिए पूना जाना पड़ा। दोस्त ने मुझे तब तक के लिए अपने घर पर ही सोने के लिए कहा।
उस रात का खाना भी दोस्त के ही घर पर हमने खाया। दस बजे दोस्त सोने अपने बेडरूम में चले गया, मैं टीवी देखने के नाम पर ड्राइंग रूम में ही सोने के लिए रूक गया।
रात के साढ़े ग्यारह बजे चैनल बदलते समय अचानक ही टीवी में ब्लू फिल्म आने लगी।
मैं बहुत ही खुश हो गया क्योंकि मुझे ब्लू फिल्म देखने में बहुत ही मजा आता है। दस मिनट बाद ही मेरा लण्ड सनसनाने लगा।
एक आदमी एक औरत की चूत को चाट रहा था और साथ ही में उसकी गाण्ड के छेद में अपनी एक उंगली डाल आगे पीछे कर रहा था।
अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था, मैने चड्डी उतार दी और लंड को पकड़ के सहलाने लगा। थोड़ी ही देर में सारा माल मेज़ के ऊपर ही गिर गया।
मैं बाथरूम में गया और लंड साफ कर लिया।
तभी मेरी नजर दोस्त की मम्मी की ब्रा और पैन्टी पर पड़ी।
मुझे फिल्म का सीन याद आ गया मैंने पहले कभी दोस्त की मम्मी के बारे में ऐसा गन्दा ख्याल नहीं किया था।
ब्रा और पैन्टी को छूते ही मेरा लंड फिर से तैयार होने लगा। ब्रा को सहलाते हुए आंटी को याद कर मैं मुठ मारने लगा।
जोश में आंटी की सेक्सी तस्वीर मन में आने लगी। मलयाली आंटी की मोटी गांड और मस्त बड़े बड़े दूध को याद करके मैं जोर जोर से मुठ मार ही रहा था कि आहट सी हुई पर जोश की अधिकता में मेरा माल आने ही वाला था और मैं अपने को रोक नहीं पाया और सारा माल आंटी की पैन्टी में ही निकल गया।
तभी बाहर से बाथरूम का दरवाजा खुल गया आंटी शायद बाहर खड़ी थी अचानक ही वो अन्दर आ गई। मैं हड़बड़ा गया।
आंटी मेरा हाथ पकड़ कर बोली- यह क्या कर रहा था?
मेरी आवाज़ ही नहीं निकल पा रही थी, मैं नज़रें नीचे झुकाए थर-थर कांप रहा था। आँटी ने गुस्से में पैन्टी छीनते हुए कहा- मादरचोद, मेरी फ़ुद्दी को याद कर लौड़ा घोंट रहा था !
मैं लगभग रोते हुए बोला- मुझे माफ़ कर दो आंटी !
आंटी ने कहा- बाहर टीवी में ब्लू फिल्म तूने ही लगाई है न ? कैसेट कहाँ से मिली ?
मैं हकलाते हुए बोला- वो तो केबल पर !
और चुप हो गया।
आंटी ने ओ..ह्ह्ह… कहा और चुप हो गई। मेरा लौड़ा आंटी की बदन की गरमी को महसूस कर अब ऊपर-नीचे होने लगा था।
मैं अभी तक नंगा था और आंटी अपने पैन्टी में लगे वीर्य की बूंदों को सूंघते हुए बोली- यह तूने मेरी पैन्टी को ख़राब किया है?
मैं इसे साफ़ कर देता हूँ आंटी !
और उनके हाथ से पैन्टी ले कर मैं उसे पानी में डुबा कर धोने लगा। आंटी मेरे हाथ पकड़ कर मुझे उसे धोने में मदद करते हुए बोली- जरा सी भी गन्दगी नहीं रहनी चाहिए !
और अपने बड़े बड़े दूधों को मेरे पीठ में रगड़ने लगी। मेरा लंड अभी भी नंगा था और पूरी तरह से तन कर तैयार हो गया था।
वो मुझसे बोली- लौड़े को हिलाने में बहुत मजा आता है क्या ?
मैं अ..ह…. ही कर पाया था। आंटी के झुके होने से उनके बड़े बाटलों की झलक साफ दिख रही थी।
अब मैं भी नंगे होने के बावजूद उनके बाटलो को घूर रहा था। आंटी समझ गई और बोली- दूध को क्या घूर रहा है बे ?
मैं एक पल को सकपका गया और नजर नीचे कर ली।
तभी आंटी मेरे लौड़े को अन्डकोषों के नीचे से सहलाते हुए बोली- वाह… कितना मस्त है रे.. !
मेरा लंड जैसे सलामी मारता हुआ उनकी चूत के नीचे जा कर रूक गया। वो हाथों से मेरे लंड को सहलाने लगी और बड़बड़ाने लगी- मादरचोद, इतना मस्त लौड़ा है और तू घोंट-घोंट कर गिरा रहा है !
अब मेरे से बर्दाश्त नहीं हो पा रहा था, मैं आंटी से लिपट गया और “अ..ह… आंटी मस्त लग रहा है” मेरे हाथ बिजली की तेजी से उनके शरीर को मसल रहे थे।
दो मिनट बाद ही आंटी अपने को कंट्रोल करते हुए मुझे खींचते हुए अपने बेडरूम की ओर ले चली।
बेडरूम अन्दर से बंद कर वो अपने कपड़े उतारने लगी। चंद पलों में ही वो पूरी नंगी मेरे सामने अपने दूध को मसल रही थी।
मैं उनकी गाण्ड से लेकर जान्घों तक पप्पियों की बरसात करने लगा।
उन्होंने मेरे मुँह को अपनी चूत के पास किया और गरजदार लहजे में कहा- चूस.. इसे …. !
मैं यंत्रचालित सा उनके चूत की ओर झुकता चला गया। पहली बार चूत की मादक खुशबू मुझे मदहोश कर दे रही थी।
मैं कस कर उनकी चूत को चूसते हुए उनकी गाण्ड को सहलाने लगा और जाने कब मेरा हाथ उनकी गांड के बीच की घाटी में घुस गया।
वो सिसकने लगी और मुझ पर झुकती हुई मेरे गांड को सहलाने लगी। उनके हाथ लगाने से मेरी हिम्मत बढ़ गई। मैंने एक उंगली उनकी गांड के छेद में घुसा दी और अन्दर बाहर करने लगा।
वो सी.. अह..ह… जान और जोर से छोड़ पूरा हाथ घुसा दे जान…. मेरी जान…. कह अपनी एक उंगली मेरे गांड के छेद में घुसाने लगी।
मुझे अनायास ही असीम आनंद की अनुभूति होने लगी। एक हाथ से आंटी गांड में उंगली कर रही थी और दूसरे हाथ से वो लौड़े को पकड़ कर जोर जोर से हिला रही थी …….
शेष अगले भाग में ! अभी मैं मुठ मार लेता हूँ आंटी की पहली चुदाई को याद कर ! अब रहा नहीं जा रहा है ! Antarvasna
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