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हमारे पड़ोस में एक भाभी रहती है, भाईसाहब की मृत्यु कोई चार वर्ष पहले हो गई थी। भाभी की उम्र कोई 45 के आस पास होगी, लेकिन फिगर अच्छा मेंटेन कर रखा था, इस उम्र में भी उन्हें कोई 35-36 से ज्यादा का नहीं कह सकता।

उनका लड़का एक लड़की को लेकर भाग गया, छोटी लड़की की अभी पिछले वर्ष ही शादी कर दी है। लड़की की शादी के बाद भाभी जी हर महीने गोवर्धन परिक्रमा लगाने के लिए जाती थी, उनके साथ मैं भी जाता था। वहीं का किस्सा मैं सुनाने जा रहा हूँ।

हर महीने की तरह जनवरी में हम लोग गोवर्धन के लिए निकले। भाभी को अगले दिन कहीं जाना था, सो उन्होंने कहा- आज जल्दी चलते हैं ताकि शाम के समय ही परिक्रमा पूरी कर लें और सुबह पहली बस पकड़ कर वापिस आ जायेंगे।

मैंने कहा- ठीक है !

हम लोग दोपहर की गाड़ी से निकल लिए। मथुरा पहुँच कर द्वारिकाधीश के दर्शन किये और वहाँ से टेंपो पकड़ कर गोवर्धन शाम को 6 बजे पहुँच गए। जिस धर्मशाला में हम रुकते थे, वहां सामान रखकर हम लोग परिक्रमा के लिए निकल गए। वापसी में बहुत तेज बारिश होने लगी। बचते-बचाते हम लोग धर्मशाला पहुंचे तो रात के 11 बज रहे थे और हम लोग पूरी तरह भीग चुके थे।

धर्मशाला पहुँच कर मैंने भाभी से कहा- आप अन्दर चलकर कपड़े बदल लो, फिर मैं बदल लूँगा।

भाभी अन्दर चली गई, कुछ देर बाद वो बोली- कपड़े तो हम एक ही जोड़ी लाये हैं, अगर बदल लिए तो सुबह पूजा के लिए क्या पहना जायेगा?

मैंने भाभी से कहा- आप मेरे कपड़ो में से लुंगी लेकर लपेट लो और रजाई में लेट जाओ। मैं देखता हूँ मेरा क्या होगा।

भाभी ने कहा- अच्छा !

और उन्होंने किवाड़ बंद कर लिए।

मैंने तौलिए से शरीर पोंछा और गरम चादर ओढ़ ली। मैंने दरवाजा खटखटाया और पूछा- मैं अन्दर आ जाऊँ?

तो उन्होंने कहा- हाँ !

एक तो ठण्ड, ऊपर से बारिश ! दांत कटकटा रहे थे। कमरे में देखा एक ही गद्दा रजाई थे। मैंने धर्मशाला वाले से पूछा तो उसने कहा- एक कमरे में एक ही गद्दा-रजाई मिलेगा।

मैं वापस आ गया। मैंने भाभी से कहा- आप सो जाओ ! मैं ऐसे ही सो जाऊंगा।

भाभी तो सो गई, कुछ देर तो मैं लेटा रहा पर ठण्ड थी कि वो हटने का नाम नहीं ले रही थी, मेरे दांत बजने लगे, तभी भाभी बोली- संजू तुम भी इसी रजाई में ही लेट जाओ ! ठण्ड बहुत है, नहीं तो तुम्हारी तबीयत ख़राब हो जायेगी।

पहले तो मैं झिझका क्योंकि मुझे पता था कि भाभी अन्दर नंगी लेटी हैं, पर मरता क्या न करता मैं उसी रजाई में एक साइड से घुस गया।

भाभी और मैं एक दूसरे की तरफ पीठ करके लेट गए। शरीर में थोड़ी सी गर्मी आई, पर ठण्ड अभी लग रही थी। मैंने करवट बदली और भाभी की पीठ की तरफ मुँह करके लेट गया। शायद मेरे ठंडे हाथ उनकी पीठ पर लगे होंगे, बोली- ला अपना हाथ दे !

कहकर मेरा हाथ अपने पेट पर रख लिया। भाभी के शरीर का गरम-गरम स्पर्श पाकर मेरे मन का शैतान जाग उठा। अगर आज भाभी की चुदाई करने का मौका मिल जाये तो मजा आ जाये।

पर मैंने कभी उन्हें इस नज़र से कभी देखा नहीं था इसीलिए शांत लेटा रहा, पर मेरा हथियार तैयार हो गया और उनके पिछवाड़े से टकराने लगा। मैं थोड़ा सा नीचे को सरक गया जिससे कि सही जगह लग सके।

वही हुआ, जैसे ही मैं नीचे को सरका, मेरा लंड उनकी गांड की दरार के बीच में जा टिका। पहले तो वो जरा कसमसाई पर फिर चुपचाप लेट गई। मैं भी बिलकुल चुप लेटा रहा। थोड़ी देर में मैंने महसूस किया कि उन्होंने अपनी टांग उठाई और लंड को बीच में दबाकर लेट गई। अब मेरी हिम्मत थोड़ी सी बढ़ी, मैंने अपना हाथ जो उनके पेट पर था, सरका कर उनकी बड़ी-बड़ी चूचियों पर रख दिया और उन्हें सहलाने लगा।

यह सब काम बिल्कुल चुपचाप हो रहा था। धीरे धीरे साँसें गरम होने लगी, वो मेरा हाथ पकड़ कर चूचियों को सहलाने में मेरा सहयोग करने लगी।

मैं तो तैयार था, झट से उन्हें सीधा लिटाया और अपना लंड उनकी मलाईदार चूत पर टिका दिया। चूत रस से भरी हुई थी। एक ही झटके में मेरा लंड चूत की गहराइयों में जा टिका। उनके मुंह से सिसकारी निकली, मैंने पूछा- दर्द हुआ क्या ?

वो बोली- हाँ, इतने दिनों बाद जो करवा रही हूँ ! पर तू रुक मत, शुरू हो जा ! आज मेरी प्यास बुझा दे !

मैं जोश में आ गया और जोर से धक्के लगाने लगा। वो भी अपनी कमर हिला कर मेरा साथ देने लगी। 8-10 धक्कों के बाद ही उन्होंने मुझे कस कर पकड़ लिया और बोली- मैं तो गई !

और वो झड़ गई पर मेरा तो अभी हुआ नहीं था। वो समझ गई और बोली- बाहर मत निकलना ! अन्दर डाले हुए ही लेटे रहो !

मैं उनकी चूत में ही लंड डाले लेटा रहा और उनकी चूचियों को चूसने लगा। कुछ ही देर में वो दोबारा तैयार हो गई। इस बार दोनों पूरे जोश में थे।

करीब 20-25 धक्कों के बाद मैं झड़ने लगा तो मैंने कहा- लो भाभी, संभालो ! मैं गया !

तो बोली- अन्दर मत झाड़ना ! मेरे मुंह में झाड़ना !

मैंने लंड चूत में से निकाल कर उनके मुंह में डाल दिया। वो सारा रस पी गई और जीभ से चाट चाट कर मेरे लंड को साफ़ कर दिया। फिर हम ऐसे ही सो गए। सुबह चार बजे उठकर एक दिहाड़ी और लगाई उसके बाद नहा धो कर पूजा करने चले गए। वहाँ से वृन्दावन आए, वहां पर दर्शन करने के बाद मैंने भाभी से कहा- अब बस पकड़कर दिल्ली चलते हैं।

तो भाभी बोली- नहीं, अभी यहीं एक धर्मशाला में किराये पर कमरा ले लेते हैं, शाम को चलेंगे !

दोस्तो, उस दिन मैंने उन्हें तीन-चार बार चोदा। उसके बाद हम रात को दिल्ली आ गए। अब जब कभी हम वहाँ जाते हैं तो एक बार तो जरूर चुदाई का प्रोग्राम बनता है।

हाय दोस्तो ! Sex Stories

मेरा नाम सुनील है, मेरी उम्र १८ साल Sex Stories है।मैं रामपुर का रहने वाला हूँ। मेरे पिताजी एक अध्यापक हैं जो कि दूसरे शहर में रहते हैं। मेरी माँ का नाम नेहा है और उसकी उम्र ३८ साल है परन्तु उसकी जवानी २२ साल की लड़की से कम नहीं है। चूँकि मेरे पिताजी महीने में एक बार आते हैं इसलिए मैं और मेरी माँ ही घर में रहते हैं।

एक रात जब मैं खाना खाकर सो रहा था परन्तु मुझे नींद नहीं आ रही थे, मैंने रात के एक बजे दरवाजे में हल्की सी दस्तक सुनी। मैंने माँ के कमरे की ओर देखा तो मेरी माँ चुपके से धीरे-२ दरवाजे पर गई और दरवाजा धीरे से खोला। रात के उन्धेरे में केवल जीरो पॉवर का बल्ब जल रहा था हाल में और गुलाबी रंग की मैक्सी में नेहा का आधा शरीर चमक रहा था।

दरवाजा खुलते ही नारायण ने अन्दर प्रवेश किया। नारायण की उम्र ३३ साल की होगी और वो हमारे मुहल्ले में बदमाश के नाम से जाना जाता था। मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ लेकिन मैं चुपचाप सब देखता रहा। अंदर आते ही नेहा ने दरवाजा बंद कर दिया था और इस बीच नारायण ने मेरे माँ की मस्त गाण्ड पर हाथ फेर दिया।

नारायण ने, जो कि नशे में था, अपनी जेब से दारू के एक बोतल निकाली और मेरी माँ ने हाल में ही रखे दो गिलास ले आई। दोनों दारू का रसपान करने लगे। बीच बीच में नारायण मेरी माँ के बड़े बड़े दूधों को दबा देता था और मेरी माँ को किस कर रहा था। नशे में तो वो बड़े प्यासी लग रही थी।

मैं चुपचाप सब देख रहा था।

पीने के बाद नारायण मेरी माँ को माँ के बेड-रूम में लेकर गया और मेरी माँ को बिस्तर में बैठा दिया और अपना पैंट की चेन खोलने लगा। इतने में नारायण का मोबाइल बजा और वो मेरे कमरे के पास आकर बात करने लगा। मेरी माँ बिस्तर पर नंगी बैठी अपनी बुर को सहला रही थी जैसे उसे लण्ड चाहिए।

नारायण फ़ोन पर कह रहा था- माल तैयार है, बस आ जाओ !

मेरी माँ ने नारायण से पूछा- किसका फ़ोन है?

उसने कहा- ऐसे ही दोस्त का ! और मेरे माँ के दूधों को दबाने लगा।

कुछ देर बाद दरवाजे में फिर दस्तक हुई। इस पर मेरी माँ ने नारायण की तरफ देखा, नारायण ने उससे बोला- मेरा दोस्त है शायद !

और दरवाजे की तरफ लपका। दरवाजा खुलते ही कल्लू भाई अन्दर आ गया, कालू भाई वहाँ का डॉन था, उसकी ऊंचाई ६’४” होगी और उसे अंदर आते हुए देख मेरी माँ ने कपड़े पहनना शुरू कर दिए। नारायण ने मेरी माँ को बोला- ये कालू भाई हैं ! ये सिर्फ़ आज ही के लिए आए हैं, तुम वही सब करो जो मेरे साथ करती हो।

मेरे माँ की तो जैसे दिल के मुराद पूरी हो गई हो- दो मर्द मिल गये थे उसे।

कालू भाई तो कहाँ रुकने वाले थे, वो झट से मेरे माँ को पकड़ कर उसका दूध दबाने लगा।

नारायण भी सब देख रहा था।

अब कल्लू भाई ने अपना लण्ड निकाल लिया और मेरी माँ के मुँह में डाल दिया। लण्ड देख कर मेरी माँ नेहा मुस्कुरा रही थी। उसका लण्ड ९ इंच का होगा काला और बहुत मोटा।

अब वो उसके लण्ड को चूसे जा रही थी और कालू भाई उसकी चूची मसल रहा था। नेहा बड़ी प्यासी लग रही थी, मैं चुपचाप सब देख रहा था।

पास में ही नारायण सिगरेट पी रहा था, मेरी माँ के मुँह से सिसकियाँ निकल रही थी- हूह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्छ. हाह !

मैं सब देख रह था।

अब वो बिलकुल गरम हो गई थी और बोल रही थी- अब बस नारायण इस चूत की आग बुझा दे आज तू !

और नारायण ने इशारा जान कर अपना ८ इंच का लण्ड मेरी माँ की चूत पर रख दिया। वो अपने हाथों से मेरे माँ का दूध दबा रहा था और मेरे माँ को किस कर रहा था।

दोनों माहिर खिलाड़ी लग रहे थे।

अब नारायण ने अपना लण्ड मेरे माँ की बुर में डाल दिया और वो सित्कारियाँ ले रही थी। अब नारायण ने अपनी स्पीड तेज कर दी और लण्ड को अंदर-बाहर करने लगा। मेरी माँ उसका पूरा साथ दे रही थी। मेरी माँ भी अपना गाण्ड को उछाल रही थे, कुछ देर के बाद नारायण ने अपना पानी मेरे माँ की बुर में छोड़ दिया और उसके ऊपर निढाल होकर गिर गया।

वो मेरी माँ के बड़े बड़े दूधों के दबा रहा था उसका पानी मेरे माँ की बुर से टपक रहा था। कुछ देर के बाद नारायण अलग हो गया।

मेरी माँ ने कालू का लण्ड मुँह में डाल लिया वो उसे चूसे रही थी। अब कालू भाई का लण्ड खड़ा हो गया था, उसने मेरी माँ को लेटाया और उसकी बुर पे अपना लण्ड रख दिया, नेहा के मुँह से आवाज़ आ रही थी- ओह्ह.. कालू चोद दो आज…. !

कालू ने अपना लण्ड पूरा का पूरा उसकी बुर में डाल दिया और धाप मारने लगा। अब नारायण ने भी अपना लण्ड मेरी माँ के मुँह में डाल दिया। अब वो दो दो लण्ड खा रही थी।

कुछ देर बाद नारायण का लण्ड फिर से तैयार हो गया।

अब नारायण ने मेरी माँ को ऊपर आने को बोला। अब मेरी माँ कालू के ऊपर आ गई। उसने कालू का लण्ड अपनी बुर में रखा और ऊपर हिलने लगी, कालू उसके दूध को दाबने लगा।

नारायण अपना लण्ड मेरे माँ की गाण्ड में रगड़ने लगा। मेरी माँ की गाण्ड बड़ी टाईट थी इसलिए नारायण का लण्ड अन्दर नहीं जा रहा था। मेरी माँ ने नारायण को वहीं रखा बोरोप्लस लाने को कहा। नारायण बोरोप्लस मेरे माँ की गाण्ड पर लगाने लगा। वो अपनी मस्त गाण्ड को हिला हिला कर उसका साथ दे रही थी।

अब नारायण ने थोड़ा बोरोप्लस अपने लण्ड पर भी लगाया और फिर से डालने की कोशिश की। अब उसका आधा लण्ड मेरी माँ की गाण्ड के अंदर चला गया था।

मेरी माँ सिसकियाँ ले लेकर बोल रही थी- ह्म्म्म्म्म्म. हाआह्ह्ह्ह्छ !

अब नारायण अपने लण्ड से उसकी गाण्ड मार रहा था, उसे भी मज़ा आ रहा था, मस्त गाण्ड जो मिली थी उसे !

अब दोनों जवानी का आनन्द ले रहे थे।

कुछ देर बाद नारायण का पानी छूटने लगा तो उसने अपना लण्ड निकाल कर मेरी माँ के मुँह में डाल दिया। वो उसके पानी को ऐसे पी रही थी जैसे शरबत।

कुछ ही देर में कालू ने अपना लण्ड बाहर निकाला और अपना पानी मेरे माँ के मुँह में डाल दिया।

थोड़ी देर के बाद कालू ने फिर अपना कार्यक्रम चालू किया। कालू ने अपना लण्ड मेरे माँ की गाण्ड पर रख दिया और उसकी चिकनी गाण्ड मारने लगा।

और वो हांऽऽहंऽऽ की आवाज निकाल रहे थे। अब कालू ने अपना पानी उसकी गाण्ड में छोड़ दिया था।

कुछ देर बाद कालू और नारायण ने कल फ़िर आने का वादा करके मेरी माँ की गाण्ड को सहलाया और उनके जाते ही मेरी माँ ने दरवाज़ा बंद करके अपनी बुर सहलाई। वो बड़ी खुश लग रही थी और हो भी क्यों नहीं- उसे दो लण्ड जो मिले थे आज ! Sex Stories

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सबसे पहले गुरुजी को शुक्रिया Sex Stories और प्रणाम, फिर समूचे अन्तर्वासना स्टाफ को प्रणाम, फिर पाठकों का जिन्होंने इतने इ-मेल किये, मुझे याहू चेट के ज़रिये संपर्क किया, मेरी पहली कहानी “रिक्शा वाले से गांड मरवाई” को बेहद पसंद किया। दोस्तो, उनके लौड़ों से चुदने के बाद मुझे वो वापिस कभी नहीं मिले न उनको मेरी पहचान रही न मुझे !एक रात में क्या पहचान होगी? जाता तो मैं रोज़ ही था अपनी बुआ के घर ! मेरे साथ एक रोज़ हादसा भी हुआ। मैं वहां से रिक्शा लेने के लिए खड़ा था कि एक बन्दे को देख मुझे लगा कि वो वही है। मैंने थोड़ी मुस्कान सी दी, वो वैसे ही मुस्कुरा दिया। मुझे लगा वो ही है। उस रात दारू का नशा था। मैंने फिर स्टेशन जाने को कहा। रास्ते से दारू पी, जैसे ही रिक्शा एक कालोनी से निकल रहा था, मैंने कहा- कैसे हो?

बोला- ठीक !

मैं सीट और उसकी सीट के गैप में पाँव के बल बैठ सा गया और अपना हाथ आगे ले जा कर मैंने अपना हाथ उसके लौड़े पर ले जा लुंगी के ऊपर से उसको मसल दिया और फिर सहलाने लगा। वो चुपचाप अपनी ही मस्ती में चलाता रहा, मैंने सोचा वो ही है।

अँधेरा देख उसने रिक्शा साइड पे लगा लिया। मैंने उसका लण्ड निकाल मुँह में ले लिया। वो बोला- किस्मत खुल गई ! कोई चूसेगा गरीब का, सोचा नहीं था !

तभी पीछे से किसी ने कहा- पकड़ो इनको !

मैंने वहां से भागने की सोची और भाग गया। उसके बाद मुझे लौड़े मिलने में मुश्किल आने लगी। अपने आस-पास मैं यह काम करना नहीं चाहता था इसलिए मैं बेचैन रहने लगा। तभी मेरे साथ मेरे यह घटना घटी।

मैं अपने मोटर साइकिल से जा रहा था, एक छोरे ने मेरे से लिफ्ट मांगी। कुछ पल आगे जाकर उसने अपना बैग डिग्गी पे रख लिया और मेरा लौड़ा पकड़ कर बोला- कभी किसी की ली है? शादी हुई या अभी नहीं?

उसने जिप खोल हाथ डाल दिया।

मैंने कहा- यह सब?

बोला- यार मैं ऐसे ही अपने लिए लौड़े चुनता हूँ, ऐसे ही लिफ्ट लेकर हाथ जमाता हूँ अगर अगले बन्दे का मूड बन जाये तो ठीक, वरना ज्यादा से ज्यादा उतार देगा और क्या कर लेगा?

मैंने कहा- मैं गांड नहीं मारता, बल्कि मैं खुद गांडू हूँ, इसलिए उतर जाओ प्लीज़ !

उसे उतार मैं आगे निकल गया। वहां एक पार्किंग में बाइक पार्क किया और खुद केन्ट रोड पर पहुंचा जहाँ कोई ऑटो और रिक्शा नहीं चलते !

मैं हूँ बहुत चिकना !

काफी इन्तज़ार के बाद बुल्लेट मोटर साइकिल से हेलमेट डाले दो बन्दे आते दिखे। आर्मी का था वो बुल्लेट ! मैंने लिफ्ट के लिए डरते डरते हाथ दिया, पहले ही दो थे, ऐ चिकने, यहाँ क्यूँ खड़ा है?

जी कोई सवारी नहीं मिल रही ! मैंने मुस्कुरा के होंठ चबाते हुए कहा।

चल छोड़ देते हैं !

मैंने कहा- लेकिन कैसे? पहले ही दो लोग हो ! मुझे लेकर क्यूँ तकलीफ लेते हो ?

बैठ बीच में ! वो बोले।

डरते हुए मेरा हाथ उसके लौड़े की ओर गया अनजान सा बनते हुए मैंने सहला दिया !!!

वो बोला- अबे ओये चिकने ! ठीक से मसल !

पीछे वाले को कुछ कुछ माजरा समझ आया, उसने पीछे से दबाव देना चालू कर दिया। उसका खड़ा होने लगा और दो मिनट में मुझे चुभने लगा। आगे वाले का मैंने पहले ही खड़ा कर दिया था।

दोनों बोले- मादरचोद, तुझे देख कर ही मैं जान गया था कि लिफ्ट काहे के लिए लिया गया !

उसका लौड़ा बहुत लंबा निकला। एक हाथ पीछे ले जाकर दूसरे के को पकड़ा, उसका भी काफी बड़ा निकला। दोनों गर्म थे। दोनों ने बाहर ही एक मकान किराए पर लिया हुआ था। सीधा जाकर वहीं रुके। पीछे वाले का नाम था रामशरण और दूसरे का पुरुषोत्तम था।

राम मुझे लेकर घर गया, उसकी उम्र ३३ साल थी और पुर्शोतम की ३६ साल ! वो बाईक पार्क करके अन्दर आया, ए.सी ऑन करने के बाद राम भी कमरे में आया, दोनों ने मिलकर मुझे नंगा कर दिया। सिर्फ अंडरवियर छोड़ा जिसमें मेरा लौड़ा बन्द था। मेरी छाती देख वो भी अन्य पहले मिले लोगों की तरह हैरान से हुए।

बहुत मस्त मॉल मिला है आज !

अब मेरी बारी थी। पहले मैंने एक की पैंट उतारी फ़िर दूसरे की ! फिर एक की शर्ट साथ में ही दूसरे की ! दोनों मेरे सामने सिर्फ कच्छों में थे, फूले हुए थे। मैंने पहले राम का कच्छा उतारा और लौड़ा मुँह में डाल लिया। उसके मुँह से अहऽऽ निकला। उसका चूसते हुए ही मैंने दूसरे का कच्छा उतारा, उसका आधा खड़ा लौड़ा पकड़ा।

राम बोला- पहले इसका खड़ा करवा !

दोनों ने पेनेग्रा नाम की आधी-आधी टेबलेट ली और मुझे तब तक मसलते रहे। कुछ पल में ही दोनों के लौड़े दहाड़ने लगे। उस टेबलेट से इतनी जल्दी इतना असर देख मैं भी हैरान था। राम फ़्रिज से तीन ठंडी बियर लाया। दोनों मेरे चेहरे के करीब बैठ गए मैंने अपना मग डकार लिया, उसको और डालने को कहा। दो मग अन्दर गए। कभी एक का चूसता कभी दूसरे का ! वो बियर पीते हुए मुझसे चुसवाते देख मस्त थे। मैं उनको पूरा खुश करना चाहता था। ताकि आगे से भी मुझे उनके लौड़े मिलते रहें।

वाह यार ! तू ग्रेट है !

मैंने नशे में रंडी का रूप ले लिया था और वैसे चूस रहा था, मैंने कहा- अब मेरी गांड खुश कर दो !

वो अपने मुँह से थूक निकाल लौड़े पर लगाते हुए बीच में आया। मैं पहले से ही अपनी गांड में उंगलियाँ डाल गीला कर चुका था। उसने लौड़ा रखा, आठ इंच का लौड़ा, उसने सोचा कि इसको दर्द होगा ! लेकिन मैंने उसे कहा- बेरहम हो जाओ साईं !

उसने झटका लगाया और उसका मोटा लंबा लौड़ा घुसता गया, देखते ही पूरा अन्दर डाल दिया और लगा चोदने ! एक लौड़ा मेरे मुँह में था। गुप गुप सी सी सिसकारियाँ ले ले में उनका जोश बढ़ाने लगा- और तेज़ औ औ अह अह और और तेज़ !

वो भी मशीनगन की तरह तेज़ होता गया और एक दो जोर से झटके लगाते हुए उसका माल मेरी गांड में गिरते ही मैंने आंखें मूँद ली। साफ़ पिचकारी महसूस की थी मैंने !

उसने निकाल कर मेरे मुँह में डाल दिया और पुरुषोत्तम ने गांड में घुसा दिया और अब वो लगा मेरी जलन पूरी तरह से ख़त्म करने !

मैंने राम का लौड़ा साफ़ कर दिया और दूसरे ने मेरी गांड पे ज़बरदस्त धक्के लगाने शुरु किये। उसको गांड मारने का असली तरीका पता था जिससे मुझे भी मजा आ रहा था। उसने मालूम नहीं क्या किया- मेरी गांड के अन्दर गांड की कोई गुठली पर लौड़ा रगड़ना शुरु किया जिससे मैं पागल हो गया, आसमान में उड़ने लगा। उसकी एक एक रगड़ मुझे औरत जैसा मजा देने लगी। इतना गर्म हुआ कि पास में बैठे राम के सोये हुए लौड़े को मुँह में लेकर चूसने लगा। दूसरे ने मुझे कहा- दीवार को पकड़ कर खड़ा हो !

मेरे पाँव के नीचे उसने कुछ रख लिया और खुद पीछे खड़ा हुआ उसका लौड़ा मेरी गांड के अन्दरूनी भाग में ऊपर वाले एरिया से घिसने लगा। एक एक रगड़ जब ऊपर घिसती, मेरी आंखें बंद हो जाती। उसने घोड़ा भी बनाया और लगा रौंदने !

मैंने फिर से सामने राम के लौड़े को मुँह में डाल लिया। पुरुषोत्तम तेज़ तेज़ धक्के देता हुआ पानी छोड़ गया और निकाल कर मुँह में डलवा साफ़ करवाया। फ़िर वो मुझे बाथरूम ले गए, शॉवर खोला, साथ नहाने लगे। मेरी गांड की धुलाई की और वहीं चुसवाने लगे। पानी के नीचे चूसने का मजा अलग था। जैसे ही दोनों के तन गए मुझे पौंछकर बिस्तर पे लिटा दिया।

राम सीधा लेट गया, मैं उसके लौड़े पर बैठ गया। उसने मुझे अपने और खींच सीने से लगाया और झटके देने रोक लिए। पुरुषोत्तम पीछे से आया, राम के लौड़े के साथ अपना लौड़ा लगा दिया। राम ने निकाल लिया, दोनों ने अपने अपने लौड़ों के सर जोड़ते हुए घुसा दिए।

मेरी फट गई- प्लीज़ रुक जाओ !

लेकिन दोनों नहीं माने ! राम ने तो पूरा घुसा लिया, पुरुषोत्तम का सिर्फ सर और थोड़ा हिस्सा घुसा। जब राम का आराम से हिलने लगा तो यह देख उसने भी झटका मारा और उसका भी पूरा घुस गया। मेरी फट चुकी थी, यह देख एक ने निकाल लिया और मुँह में दे दिया। राम तेज़ तेज़ रगड़ने लगा।

इस तरह यह नंगा नाच शाम तक चलता रहा। क्या सुख पाया था !

मैंने उनके मोबाइल नंबर लिए और वहाँ से कपड़े पहन राम ने मुझे वहीं छोड़ दिया जहाँ से लिया था। मुझे चलने में तकलीफ थी लेकिन जब मुझे चुदाई याद आती तो मेरा रोम रोम मस्ती से झूमने लगता। इस तरह मेरा लिफ्ट वाला आईडिया कामयाब हुआ।

उसके बाद क्या क्या हुआ, मैं अपनी गांड चुदाई के एक एक किस्से को सबके सामने लाता रहूँगा, मुझे प्यार देते रहना, इ-मेल, चेट करते रहना !

गुरु जी, प्लीज़, मेरे किस्से छापते रहना ताकि मैं लड़ीवार अपने किस्से भेजता रहूँ !

मुझे पूरा भरोसा है आप पर और अंतर्वासना पर !

एक बार फिर से प्रणाम ! Sex Stories

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हम दोनों आमने सामने Antarvasna Sex Stories ही खड़ी थी, जिमी ने बीच में वह डंडा फंसा कर उसका एक भाग अपनी चूत पर लगा कर और दूसरा मेरी चूत से सटा दिया।

यह नज़ारा बहुत ही रोमांटिक था, हम दोनों ने अपनी अपनी पोजीशन संभाल ली और एक दूसरे की चूचियाँ मसलते हुए अपनी कमर आगे झटकी, डंडे के दोनों सिरे हमारी आँखों से ओझल हो गए, मेरी उत्तेजना का कोई ठिकाना नहीं था, बस इसी तरह हम धीरे धीरे आगे बढ़ते गए और डंडा लुप्त होता गया, कुछ देर में हम दोनों के शरीर आपस में भिड़ गए।

जिमी का अंदाजा सही था, ठीक 6-6 इंच ही हम दोनों के हिस्से आया था, एक अजीब सी मस्ती हम दोनों पर छा गई, हम एक दूसरे की चूची मसलते हुए होंठ चूमने लगी, तभी दरवाजे पर आहट हुई।

‘लगता है बाबूलाल आ गया!’ मैंने खुश होकर कहा।

‘हाँ आहट तो उसी कमीने की है!’ कहते हुए जिमी ने एक झटके के साथ मुझे अपने शरीर से जुदा कर दिया, डंडा फिसलता हुआ मेरी चूत से बाहर हो गया मगर जिमी की चूत मे आधा वैसे ही फंसा था, मेरी आंखे फटी रह गई क्योंकि वह डंडा जिमी के शरीर का ही अंग लग रहा था, जिमी उसी हालत में अपनी चुचियाँ हिलाती हुई दरवाजे की तरफ बढ़ी।

जैसे ही दरवाजा खुला बाबूलाल लड़खडाता हुआ अंदर आ गया, उसकी आँखें सीधी उस डंडे पर जा टिकी- ऐसा लग रहा है यह तुम्हारा ही सामान है मैडम!
उसकी बात सुन कर मुझे हंसी आ गई।

‘अब जमाना आ गया है जब औरतों को डंडे लगवाने पड़ेंगे और तुम मर्दों को झुक कर खाने पड़ेंगे।’ जिमी ने दरवाजा बंद करते हुए कहा।

‘छोड़ो मैडम, यह जमाना अभी बहुत दूर है, आओ पहले तो हमी तुमको अपना डंडा खिलाते हैं।’ उसने अपना पजामा उतार कर एक तरफ रखते हुए कहा।

‘मैं तो बहुत बार खा चुकी हूँ, आज इसे खिलाना है, बेचारी बहुत दिनों से परेशान है।’ जिमी ने मेरी तरफ इशारा करते हुए कहा।

वो जैसे ही मेरी तरफ घूमा मेरा दिल जोर से धड़क उठा, उस समय उसके लंड में हल्की-हल्की उत्तेजना थी लेकिन आकार वही था जो जिमी ने बताया था। यह आदमी है या गधा, मैं यह सोचने को मजबूर हो गई।

‘यह हर परेशानी की दवा है मैडम!’ उसने अपना लंड मुझे दिखाते हुए हिलाया- अब यह आ गया है, सारी चिंता खत्म!

‘हूँ… पहले ही काफी देर हो चुकी है, चलो काम पर लगो!’ जिमी ने उसे मेरी तरफ धकेलते हुए कहा।

बाबूलाल एक ही झटके में मेरे पैरों पे आ गिरा, जिमी भी हंसती हुई मेरे पास आ खड़ी हुई, बाबूलाल औंधे मुंह गिरा था, जैसे ही उसने नजर उपर उठाई उसकी नजर सीधी मेरे चूत पर पड़ी- अरे… बाप… रे… इसमें से तो भाप निकल रही है मैडम!’
बाबूलाल चिल्लाया।

‘क्या मतलब है तेरा?’ जिमी ने अपने पैर से उसका सिर ऊपर उठाते हुए कहा।

‘मतलब साफ है मैडम, इसकी गर्मी से तो मेरा लंड पिघल जाएगा।’ वह हाथ झाड़ता हुआ खड़ा हुआ।

उसकी बात सुन कर मैं दंग रह गई, मैंने झुक कर अपनी चूत देखी मुझे तो कहीं भाप नहीं दिखी।

‘क्या बक रहा है तू?’ जिमी को गुस्सा आ गया, उसने बाबूलाल का लंड पकड़ कर इतनी जोर से झटका मारा कि बेचारा बाबूलाल दर्द से तड़प उठा- मईया… रे मैं तो जा रहा हूँ!
कह कर वो अपने कपड़े उठाने लगा।

उसे जाता देख मैं तो तड़प उठी- हाय… क्यों झगड़ा कर रही हो जिमी? वो जा रहा है!

‘अरे… मैं नहीं वो साला खुद झगड़ा कर रहा है, अगर भाप निकल रही है तो इसमे डरने की क्या बात है?’

‘ज़रा ऊँगली डाल कर देखो, खुद पता चल जाएगा कि मैं क्यों डर रहा हूँ!’

‘ठीक है इसका फैसला अभी हो जाता है!’ जिमी ने बाबूलाल की तरफ देख कर दांत भींचे- अगर तू यहाँ से भागा तो तेरी मूंछे उखाड़ कर तेरे पीछे घुसेड़ दूंगी!’ कहते हुए वो उसी कमरे में गई जहाँ से वो डंडा उठा कर लाई थी जो अब तक उसकी चूत में आधा फंसा हुआ था।

जब वह लौटी तो उसके हाथ में थर्मामीटर था जिससे डॉक्टर बुखार देखते हैं, जिमी ने मुझे बैठा कर मेरी जांघें फैलाई और थर्मामीटर मेरी चूत में आधा फंसा दिया, बाबूलाल भी आँखे फाड़े हुए सामने खड़ा हो गया, तभी एक अजीब बात हो गई, थर्मामीटर मेरी चूत से बाहर उछला और उसके टुकड़े टुकड़े हो गए, हम तीनों की आंखें फटी रह गई।

‘देख… क्या हाल हुआ है थर्मामीटर का! यही हाल इसका होने वाला था!’ बाबूलाल ने अपनी मोटे लंड की तरफ इशारा किया।

‘ओह्ह्ह… अब मेरा क्या होगा जिमी, मैं तो आज बड़ी आशा लेकर यहाँ आई थी यार!’ मैंने तड़प कर कहा।

‘मैंने तुझसे पहले ही कहा था पायल, यह पागल कुतिया की तरह लार टपका रही है।’

‘अब मैं क्या करूँ? कुछ सोच यार, नहीं तो मैं रो पडूँगी!’

‘नहीं…’ वो मेरा कन्धा पकड़ते हुए बोली- आज तुझे नहीं इस पगली को रोना पड़ेगा, इसके आंसू निकलवाना बहुत जरुरी हो गया है।’

उसने बाबूलाल की तरफ देख कर कहा- क्या बोलता है तू?

‘एक गाँधी का नोट और लगेगा मैडम!’ बाबूलाल बोला।

जिमी को गुस्सा आ गया। वो कुछ करती उससे पहले मैंने जिमी से कहा- तुम पैसे दे दो।

‘ठीक है बेटा ले ले तू पैसे, आज मैं भी तुझसे एक एक पैसे का हिसाब लेकर ही रहूंगी।’ जिमी अपने पर्स से रूपए निकाल कर उसे देती हुई बोली।

‘ठीक है.. ठीक है!’ कहता हुआ वह मेरी जांघों के नीचे फर्श पर बैठता हुआ बोला। उसने एक बार कुत्ते की तरह मेरी चूत को सुंघा फ़िर लम्बी जीभ निकाल कर चाटने लगा, उसका स्पर्श बेहद उत्तेजक था। मैं बिन पानी की मछली की तरह छटपटाने लगी।

जिमी मेरे पास बैठ गई, मेरी चूची दबाने लगी और होंठ और गाल चूमने लगी। फिर तो मैं आकाश में उड़ने लगी, मेरा अंग अंग झनझना उठा, मेरी चूत तड़पने लगी, वह मेरी चूत को हाथों से फैला कर चाट रहा था, जिमी ने मेरी चूचियाँ रगड़ डाली, वह उन पर उभरे निप्पल एक बच्चे की तरह चूसने लगी।

मैं मस्ती की वादियों में ऐसा खोई कि मैं अपना नाम पता तक भूल गई। पूरे बदन में मीठी मीठी गुदगुदी उठ रही थी जिसका अहसास मुझे पागल बना रहा था।

मैंने भी कसमसा कर जिमी की छातियों को रगड़ डाला।
उसने तड़प कर मेरे होंठ छोड़ दिये और मस्ती में कसमसा कर एक हाथ से डंडा हिलाने लगी जो बहुत देर से उसकी चूत में फंसा था।
देखते ही देखते आधे से ज्यादा डंडा उसकी चूत में घुस गया था, वह फिर भी उस डंडे को बहुत जोर जोर से हिला रही थी।

‘सी… ई… ई… क्या कर रही है पागल, ऐसे तो ये डंडा टूट जाएगा यार!’ मैंने उसके हाथों को पकड़ते हुए कहा।

‘हूँ… हाँ… छोड़ दे पायल, आज मैं इस डंडे को तोड़ कर ही दम लूंगी!’ उसने मेरा हाथ झटक दिया।

वासना का नंगा नाच शुरू हो चुका था, बाबूलाल ने मेरी चूत चाट चाट कर बहुत सारा रस निकाल दिया था, अब मुझे वहाँ कुछ ठंडक सी महसूस हो रही थी।
अब मैं चूत चटवाने से ऊब गई थी और बाबूलाल को वहाँ से हटा दिया, जब वह खड़ा हुआ तो उसका चेहरा देखने लायक था, उसके होंठ चिपचिपा रहे थे, उसकी मूंछें चूत के रस से भीग कर अकड़ गई थी।

‘हाँ… जी.. अब जरा इसका भी खयाल कर लो!’ वह अपने होंठ चाटता हुआ और अपना विकराल लंड हिलाता हुआ बोला।

‘अरे… इसे कौन छोड़ने वाला है!’ यह कह कर जिमी बेड से कूद गई, उसने इशारे से मुझे भी बुला लिया, मेरे होंठ तो पहले ही फड़फड़ा रहे थे क्योंकि मैंने तीन साल बाद लंड के दर्शन किये थे, हम दोनों पास पास बैठ गई और बाबूलाल का लंड बारी बारी से चाटने लगी।
मैं तो उसे अपने होंठ में दबा कर यह भी भूल जाती कि उसे छोड़ना भी है। जिमी जबरदस्ती खींच कर मेरे मुंह से निकालती।

पुच्च… पुच्च… की आवाज पूरे कमरे में गूँज रही थी, बाबूलाल भी खुल कर मैदान में आ गया।
वह लंड चुसाई का भरपूर आनन्द उठा रहा था, 10 मिनट बाद वह बोला- बस करो मैडम, अब इसे छोड़ दो, इस पर रहम करो तो अच्छा है।’

मैं भी अब यही चाहती थी कि जल्द से जल्द चुदाई-लीला शुरु हो जानी चाहिए।

मैंने फर्श पर हथेलियाँ टिकाई और घुटने मोड़ कर एक पशु की तरह झुक गई, बाबूलाल मेरी गांड के पीछे आ खड़ा हुआ, वो अपने लंड के सुपाड़े को मेरी गांड और चूत पर रगड़ने लगा, हम दोनों की चुसाई के कारण उसका लंड एकदम चिकना हो रखा था, चूत पर लंड रगड़ने से मेरी चूत से भी चिकना रस निकलने लगा, तभी उसने एक झटका मारा कि उसका लंड मेरी चूत के छोटे से द्वार में आ फंसा, ऐसा झटका लगा कि मैं उछल पड़ी।

मैंने बाबूलाल से कहा- अरे… भैया, थोड़ा धीरे पेलो! यह जिमी की चालू मशीन नहीं है जिसमें रोज तेल जाता है, यह मशीन तीन साल से बन्द है, पहले इसे ढीला कर लो फिर जैसे मर्जी हो चलाना।
मैंने कराहते हुए कहा।

‘मैडम जी, आप की सहेली मुझे भैया कह रही है?’ बाबूलाल अपना लंड आगे पेलते हुए बोला।

‘तुझे भैया बोल रही है तो तू बन जा इसका सैयाँ! इसकी चूत में ऐसा लंड पेल कि हरामजादी चुदवाना भूल जाये, साली को बहुत खुजली होती है! मिटा दे सारी खुजली।’ जिमी ने उसे और जोश में लाने के लिए बोला।

अब तो बाबूलाल बंदर की तरह उछलने लगा, उसका लंड मेरी चूत की गहराई में उतर कर ऐसी तैसी कर रहा था, ऐसी तैसी तो कर रहा था लेकिन मजा इतना आ रहा था कि उसका बयाँ मैं यहाँ नहीं कर सकती, मेरे शरीर के साथ साथ मेरी चूचियाँ भी हवा में झूल रही थी, मेरे मुंह से ऐसे शब्द फुट रहे थे- हूँ… सा… आ… आ… ..बाश… बाबूलाल, सी… ई… सी… ई… बस ऊँ… आह… मुझे ऐसे ही झूले की तलाश थी रे…!’

बाबूलाल भी मेरी तरह पागल आदमी था, उसने तो मेरा एक एक पुर्जा खोल कर रख दिया, वह बुरी तरह हाँफता हुआ मुझे मस्ती का झूला झुला रहा था, बेचारी जिमी सामने बैठी अपनी चूत मे फंसा डंडा हिला रही थी, अचानक वह उठी और बाबूलाल के पीछे जा खड़ी हुई।

‘ठहर जा बेटा!’ उसने यह कह कर ढेर सारा थूक अपने डंडे पर लगाया और बाबूलाल की थिरकती गांड से सटा दिया- मैं भी अभी तेरी ऐसी तैसी करती हूँ साले…!’

‘आ… आई… मार… दिया बेचारे पापड़ वाले को साली!’

बाबूलाल की दर्द भरी चीख सुन कर मुझे पूरा अंदाजा हो गया कि जिमी ने बाबूलाल के साथ क्या हरकत की है। यह तमाशा सारी रात चलता रहा।

पता नहीं उस बुड्ढे में क्या जादू है। हर रात मैं उसके पास खिंची चली आती हूँ, जिमी भी हमारे साथ होती है, अब मेरी जिन्दगी बड़े आराम से चुदवाते हुए गुजर रही है। Antarvasna Sex Stories

(Aunty Ki Chut Chudai Train me) Hindi sex stories

भाभी की Hindi sex stories बेटी को मैं बार बार किश कर उनको चुदासी कर रहा था जिसका असर उन पर हुआ भी और उनकी चूचियों को मसलकर और चूत में उंगली कर कर के उनके चूत का पानी निकाला..

ट्रेन में हसीना से मुलाकात
हाय मैं फिर से हाजिर हूँ।

अब मैं आपके सामने एक नई कहानी बताता हूँ। जब मैं बिलासपुर से तिरुवनन्तपुरम ट्रेन में यात्रा कर रहा था। इस भाभी की चुदाई तो बड़ी ही साधारण सी थी।

अब आप तो मुझे जान ही गए हैं। मैं 22 वर्षीय युवक हूँ। यह भाभी रायपुर से ट्रेन में चढ़ी थी। वह अपनी 2 वर्ष की बेटी के साथ इस कम्पार्टमेंट में चढ़ गई।

उसकी सीट बिल्कुल मेरे साथ की थी। यह सीट मात्र दो जनों के लिए पर्याप्त थी, मतलब आप समझ सकते हैं।

मैं जब रायपुर स्टेशन पर उतरा तो उसके पति से मिला। उसके पति ने मेरा मोबाईल नम्बर लिया और मुझे कहा कि, प्लीज! मेरी बात मेरी बीवी से समय समय पर करवाना।

मैं मान गया और अपना मोबाईल नम्बर उसे दे दिया। उसका नाम सुरेश था। वो उतना सुन्दर नहीं था, पर उसकी बीवी का नाम श्वेता था और, माँ कसम! बिल्कुल डेयरी मिल्क की तरह वो साफ़ सुथरी थी।

उसने उसी समय अपनी बीवी से मेरा परिचय करवाया। उसकी मुस्कान में जादू था। जैसे कि, एक नया फुल बाग में खिल रहा हो!

ठीक 12 बजे ट्रेन वहाँ से चल दी और उसके पति ने मुझे धन्यवाद कहा।

एकाएक भाभी की चूचियों को देखा
अब होना क्या था? मैंने उसकी बेटी को अपने गोद में लिया और खूब प्यार करने लगा। फिर श्वेता भाभी ने कहा कि, मैं कपड़े बदल कर आती हूँ तब तक आप मेरी बेटी ख्याल रखना!

जब वो कपड़े बदलकर आई तब मैंने देखा कि उसकी ब्रा थोड़ी पारदर्शी थी। मैं उसके बूब्स को देखता रह गया।

थोड़ी देर बाद मुझे जब होश आया तो मैंने उसका पूरा परिचय लिया तब जाना कि, वो चैनई में रहती है और उसके पति रायपुर के किसी बैंक में काम करते हैं और छुट्टी के वक्त वो चैन्नई आते थे।

मैंने तब तुरन्त सोचा कि यह शायद सेक्स नहीं करती होगी। अचानक! उसकी बेटी ने मेरे लिप्स को किश किया जिसका, मैंने भी उसे प्यार से उत्तर दिया।

वो हम दोनों के किश को बड़े प्यार से देख रही थी।

जब सोने का वक्त आया तो मैंने देखा, उसकी बेटी मेरे साथ सोने की जिद्द कर रही है तो श्वेता भाभी ने मुझे अपनी बेटी दे दिया।

भाभी को चुदासी इशारे किया
मैं ऊपर सो रहा था और श्वेता नीचे सो रही थी पर, मैं कहाँ सो पाता?

उसकी मस्त जवानी को देख देख कर मैं उसकी दो साल की बेटी को किश पे किश किए जा रहा था।

तब आधे घन्टे बाद श्वेता उठकर अपनी बेटी को उठा रही थी कि, तभी मैंने थोड़ा सा उदास होने का नाटक करने लगा।

मैंने कहा कि, प्लीज! अपनी बेटी को मेरे पास सोने दें, तभी उसने तुरन्त मुझे अपनी बेटी दे दी और वो नीचे थोड़ी देर बैठ कर चुपके से रोने लगी।

मैं तुरन्त नीचे उतरकर उनसे सॉरी! कहा, तो उसने कुछ नहीं कहा।

फिर मैंने थोड़ी सी हिम्मत करके उनका हाथ पकड़ कर मेरे गाल पर थोड़ा ज़ोर से थप्पड़ दिलवाया तो वो मुझे कहने लगी कि यह क्या कर रहे हो?

मैंने कहा कि, अगर मैं आपकी बेटी अपने साथ ना सुलाऊँ, तो ठीक है मुझे माफ़ करना! तो वो थोड़ा और रोने लगी।

मैं उस कम्पार्टमेंट के बारे में बता दूँ। वैसे तो हमारे बगल वाली खाली थी और हम ए सी में यात्रा कर रहे थें तो उसमें परदे लगे होते हैं, जिससे कोई हमें देख नहीं सकता था।

मैंने उसका हाथ पकड़कर पूछा कि, वो क्यों रो रही हैं?

तो उसने बताया कि, उसके पति उससे प्यार नहीं करते हैं और ना ही उसकी बेटी से।

तो मैंने कहा- ऐसा ना कहे, वो आपको ज़रुर याद करते होंगे!

भाभी ने चुदासी हो मेरा साथ दिया
फिर वह और रोने लगी, मैंने और थोड़ी सी हिम्मत करके उनके आँसू पोंछे तो उसने मेरे हाथ को पकड़ कर किश किया। जिससे मैं कुछ ना कह सका।

मैंने धीरे से उसके कान के पास जाकर कहा कि, मैं उसकी बेटी से और उसकी खूबसुरत माँ से बहुत प्यार करता हूँ! तो उसने आँखें बन्द करके मुझसे लिपट गई।

मैं उसके बूब्स को फ़ील कर रहा था तो उसने भी धीरे से जवाब दिया कि चलो, अब बेटी से प्यार ख़त्म हो गया हो तो उसकी माँ को प्यार करो!

मैंने पहले उसके माथे पर किश किया, फिर मैं उसके कानों को, फिर नाक को, फिर उसके गालों को, मैंने अच्छी तरह से चाटा और फिर उसके मुलायम से होंठ को किश करने लगा।

वो थोड़ी गर्म हो गई थी। मैंने उससे कहा कि, तुम सो जाओ।

तो उसने कहा- क्यों?

मैंने कहा- तुम पहले लेट जाओ, फिर देखो मेरा जादू!

वो तुरन्त मुस्कुराई और लेट गई। मैं तुरन्त बाथरूम गया और अपनी चड्डी निकाल कर सिर्फ़ अपनी लोवर पहनकर वापस आया।

वो मेरा बेसब्री से इन्तज़ार कर रही थी। मैं उसकी आंखो में प्यार की प्यास देख सकता था और मैं अन्दर बैठकर परदा गिरा दिया ताकि हमें कोई ना देख सके।

भाभी ने अपनी चूची मसलवाई
मैं अब धीरे से उसके बूब्स को मसल रहा था। वो बेचारी ज़ोर जोर से चिल्लाना चाहती थी पर वो चिल्ला ना सकी और अपने आवाज़ पर उसने कन्ट्रोल किया।

मैंने धीरे से उसके चूड़ीदार के अन्दर हाथ डालकर उसकी ब्रा खोल दी। उसने कहा कि, मुझे नंगी कर दो! यह बात सुनकर और गर्म हो गया।

मैंने बड़े आराम से उसकी चूड़ीदार को उतारा और उसके बूब्स और उसके लिप्स के साथ प्यार करता रहा।

मैंने भी अपने कपड़े उतारे तब मैं सिर्फ बनियान और अपने लोवर में था और वो सिर्फ अपने पजामे और पैन्टी के साथ थी।

मैं उसके बूब्स के साथ 15 मिनट तक प्यार करता रहा, फिर मैंने अपना हाथ उसके पजामे के अन्दर डालकर उसकी चूत को पैन्टी के बाहर से सहला रहा था।

भाभी की चूत के रस का रसपान
वो मुझे पागलो की तरह देख रही थी, फिर उसने मेरे लिप्स को प्यार से काटा जिससे, मैं और मेरा नटराज पेन्सिल और गर्म हो गए!!

मैंने अपनी हाथों से उसका नाड़ा खोला और उसकी पैन्टी को थोड़ा नीचे कर दिया और अब धीरे धीरे उसकी चूत के अन्दर अपनी उंगली घुसा रहा था।

उसकी चूत तो पहले से हाय! गीली थी। अब मैं अपने दोनों उंगली से उसके क्लिंट को टटोला, तो उसकी सांसे तेज़ हो गई और मुझे वो नज़ारा देखने में बड़ा मज़ा आ रहा था!

मैंने अचानक! तीन उंगलियाँ उसकी शरपनेर (चूत) में ज़ोर ज़ोर से अन्दर बाहर करने लगा अब तो वो बेकाबू हो गई थी।

वो मेरा साथ देने लगी थी। मैं उसे किश भी कर रहा था और एक हाथ से उसके बूब्स और निप्पल्स को मसल रहा था और दूसरा हाथ उसके चूत में ज़ोर ज़ोर से घुसा रहा था।

ठीक पांच मिनट के बाद उसने अपना जूस बाहर निकाला और मैं उसके सामने उसे चाटने लगा तो उसने कहा- ऐसे तो, मेरे पति भी नहीं करते हैं।

तो मैंने कहा, प्लीज! इस वक्त अपने पति को मत याद करो, तो वो थोड़ा मुस्कुराई और मैंने उसे कहा, अब मेरा क्या होगा?

तो उसने कहा- चलो, बाथरूम मे चलें! Continue Hindi sex stories

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