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अन्तर्वासना पर यह मेरी Antarvasna जिन्दगी से जुड़ी पहली घटना है जिसे मैं आप लोगों से बताना चाहता हूँ, खासकर उन आंटी और शादीशुदा महिलाओं को जो अपनी सेक्स लाइफ से संतुष्ट नहीं हैं।
मेरा नाम श्याम है उस समय मेरी उम्र 23 साल थी जब मेरे छोटे चाचा की शादी हुई थी। मैं घर कम ही जाता था क्योंकि उस समय मैं इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहा था, पर उन दिनों मेरे घर में दो शादियाँ थी एक मेरे चाचा जी की और दूसरी मेरे बुआ के लड़के की। इसलिए न चाहते हुए भी मुझे घर जाना पड़ा। पर मुझे क्या पता था कि वक़्त मेरी जवानी को नया रंग दिखलाना चाहता है।
मेरी घर में बहुत इज्जत है क्योंकि मैं पढाई में बहुत तेज हूँ और छोटे चाचा 8 क्लास के बाद नहीं पढ़े। जब मैं शादी में गया तो चाची को देखता ही रह गया। वो बहुत मस्त थी, उस समय उनका फिगर 32-28-34 था। चाचा और चाची की जोड़ी बिल्कुल नहीं जम रही थी, जैसे लंगूर के हाथ में अंगूर या हूर!
मन तो कर रहा था कि ये अंगूर मुझे खाने को मिल जाये!
घर में शादी के बाद एक रिवाज़ की वजह से पहली रात चाची को अलग सोना था। घर पर मेहमान काफी थे इसलिए मैं पहले से जा कर चाची के कमरे में सो गया। चाचा को बाहर ही सोना था।
रात में मेरी नींद खुली तो देखा कि चाची मेरे बगल में सोयी हैं, शायद शादी की वजह से उन्हें थकान बहुत थी इसलिए वो बेधड़क सो रही थी। उनका पल्लू सीने से हट गया था। उनकी काले रंग की ब्रा देख कर मेरा 7 इंच का लंड बेकाबू हो गया।
मैंने धीरे -2 उनके ब्लोउज के बटन खोल दिए। उनकी गोरी-2 चूचियाँ देख कर मेरा लंड फ़नफ़ना रहा था। मैंने हौले से उनकी ब्रा की पट्टी कन्धों से किनारे हटा दी और एक हाथ से चूची को हलके-2 दबाने लगा, दूसरी चूची को अपने मुँह में भर के चूसने लगा।
मुझे लगा चाची जाग गयी हैं पर सोने का बहाना कर रही हैं तो मैं धीरे से उनकी साड़ी को उपर खिसका कर उनकी चूत पर उपर से हाथ फरने लगा। थोड़ी देर में मुझे पैंटी में गीलापन महसूस हुआ। मुझे लगा चाची को मजा आ रहा है तो मैंने धीरे से उन्हें आवाज दी- चाची…!
उन्होंने कहा- कुछ मत बोलो बस करते रहो…!
यह सुनते ही मैं उनके उपर आ गया और उनके रसीले होटों को चूमने लगा..
अब चाची मेरा पूरा साथ दे रही थी…
उन्होंने मेरे पायजामे में हाथ डाल कर मेरे लंड को पकड़ लिया और उसकी सुपाड़े की चमड़ी को ऊपर नीचे करने लगी। मैं भी दोनों हाथो से उनकी गोल-2 चूचियाँ दबा रहा था। उनके मुँह से सेक्सी आवाजें आ रही थी- चोदो मुझे मेरे राजा… आज मेरी सुहागरात है… 18 साल से ये अनचुदी है आज इसकी प्यास बुझा दो मेरे राजा…
मैं भी गरम हो रहा था, मैंने उनकी पैंटी को उतार फेंका…और उनकी चूत में मुह लगा दिया। वो शायद एक बार झड़ चुकी थी। उनकी चूत से पानी निकल रहा था, मैं सब पी गया। मैंने दो ऊँगलियाँ उनकी चूत में डाल दी और अंदर बाहर करने लगा।
उन्हें मजा आने लगा…
उन्होंने भी मेरा लंड पकड़ के मुँह में भर लिया और सटासट चाटने लगी…
मैं उनके मुँह में ही झड़ गया, वो मेरा सारा रस पी गयीं। उन्होंने चूस-2 कर फिर से मेरा लंड खड़ा कर दिया…
वो बोली- जान अब और न तड़पाओ! अपनी रानी को चोद दो! मुझे मेरी प्यास बुझा दो…
मैं तो तैयार था, उसने मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत के मुहाने पर रखा और कहा- धक्का मारो!
मैंने भी बहुत जोर से पेल दिया पर चूत बहुत टाइट थी, लंड घुसा ही नहीं तो उसने लंड पकड़ कर ढेर सारा थूक मेरे सुपाड़े पर पोत दिया…
अबकी बार मैंने धीरे-2 धकेला तो आधा लंड अंदर चला गया…
वो दर्द से पागल हो गई, बोली- निकालो! बाहर करो! मैं नहीं सह पाऊँगी!
पर अब मैं कहाँ मानने वाला था, मैंने उसे कमर से पकड़ कर पूरे जोर से एक धक्का मारा और लंड उसकी चूत की गहराइयों को छू गया…
वो दर्द से रोने लगी पर मैं धीरे धक्के लगाने लगा। थोड़ी देर में उसे भी मजा आने लगा, उसके मुँह से आवाज निकलने लगी थी- चोदो… और जोर से… आह… आह… मेरे राजा… मुझे जन्नत की सैर कराओ… और अंदर डालो… आह… सी…सी…
आह… मैं पूरे जोर से पेले जा रहा था- हाँ रानी… ले… खा ले… पूरा मेरा खा जा… ले… ले… पूरा ले…
आह… राजा… मैं गई… सी… थाम लो…मुझे… आह…
मैं समझ गया कि वो झड़ने वाली है तो मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी…10-15 धक्कों के बाद हम दोनों साथ ही झड़ गये…
मैंने अपनी सारी गर्मी उसकी चूत में भर दी…
मैंने उठ कर देखा- खून से उसकी साड़ी लाल हो गई थी…
मुझे गम न था आज एक कुंवारी चूत का रसपान जो किया था…
उस रात मैंने उसे 4 बार चोदा… वो शायद सबसे हसीं रात थी…
आपको अपने जीवन की कुछ और घटनाओ से अगली कहानी में वाकिफ करूँगा।
तब तक आप मुझे जरूर बताएं कि ये मेरी पहली घटना कैसी लगी!
मुझे मेल करें सभी शादीशुदा और कुंवारी लड़कियाँ… Antarvasna
मेरा नाम अजय है, मैं बहुत दिनों से Hindi Porn Stories अन्तर्वासना की कहानियाँ पढ़ता हूँ। आज मैं आप लोगों के लिए सच्ची कहानी लिखने जा रहा हूँ।
बात उन दिनों की है जब मैं कॉलेज में पढ़ता था। मेरी उमर बीस साल थी और नेहा दीदी बाईस साल की थी। नेहा दीदी मेरे फ़ूफ़ा की लड़की है। फ़ूफ़ा बिज़नेस के सिलसिले में बाहर गए थे, घर में दीदी, फ़ूफ़ी और मैं ही थे।
गर्मी का महीना था, कोलकाता में गर्मी बहुत ज्यादा थी। रात को खाना खाकर हम लोग एक ही पलंग पर सो गए, दीदी बीच में फ़ूफ़ी फिर मै। मैं आप लोगो को बता दूँ कि नेहा दीदी को कभी मैंने ग़लत नजरो से नहीं देखा।
मैं गहरी नींद में सो रहा था और सपना देख रहा था करीना कपूर की चूची दबाने का, कि अचानक मेरे मुँह पर कुछ जोर से गिरा और नींद खुल गई, लाईट बंद थी और अँधेरा था मुझे लगा कि नेहा दीदी के दोनों पैर मेरे मुँह पर है। शायद फ़ूफ़ी को कोई परेशानी थी या गर्मी लग रही थी इसलिए वो नीचे चादर डाल कर सो गई थी।
मैंने अपने दोनों हाथों से दीदी के पैर हटाने चाहे तो पाया कि दीदी की टांगों पर कपड़ा नहीं था दरअसल रात को वो गर्मी के कारण पतली नाइटी पहन कर सोई थी, मैंने धीरे से उसके दोनों पैर अपने ऊपर से हटा कर बिस्तर पर कर दिए, करीना कपूर चूची दबाने का सपना ओर दीदी की नंगी टांगों के छूने से मेरा लंड में कसाव आने लगा और मेरी नीयत दीदी को छूने की होने लगी।
मैंने थोड़ी हिम्मत करके नेहा दीदी की टांगों पर हाथ रखा और धीरे धीरे ऊपर की ओर हाथों को सरकाने लगा। कमर तक पहुँचा तो पाया नाइटी नहीं है पर पैंटी पहनी हुई है। मैंने हिम्मत करके उसके पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को दबाने लगा। हाय क्या नरम मुलायम चीज़ थी और मुझे आनंद का अनुभव हो रहा था। मेरा लंड तो तन कर 8″ का हो गया।
मैं धीरे धीरे हाथ को ऊपर नाभि से लेकर छाती तक गया तो पाया कि नाइटी चूचियों के ऊपर ही है जिससे चूचियाँ ढकी है। मैंने धीरे से उंगलियों से नाइटी को हटाना शुरू किया और दीदी की चूचियाँ बाहर आ गई। मैंने धीरे धीरे सहलाना शुरू किया तो चूचियों के चुचूक कड़े होने लगे। मुझे लगा कि शायद दीदी की जवानी का जोश हिलोरें मारने लगा है।
मेरे शरीर में रोमांच भर आया… मन कर रहा था कि मैं दीदी की चूचियाँ पकड़ कर मसल दूं! लेकिन मैंने बड़े प्यार से दीदी के स्तन सहलाये… ओर नोकों को हौले हौले से पकड़ कर मसलते हुये घुमाया, अब मेरे इरादे बदलने लगे थे। मैंने अपनी टांगों से बार बार उसके चूतड़ों को छूना शुरू कर दिया। उसके पूरे के पूरे स्तन देखने को और दबाने को मिल रहे थे। फिर मैंने उसकी निप्पल को मुंह में ले लिया और धीरे से चूसने लगा।
अचानक मुझे लगा कि दीदी की नींद खुल चुकी है और चुपके से सोने का बहाना कर रही हैं। मेरी हिम्मत बढ़ने लगी। मैं भी अंजान बन कर निप्पल को धीरे से चूसने लगा। थोड़ी देर बाद मैं अपना हाथ उसकी पैंटी पे ले आया। उसकी चूत बहुत गरम हो गई थी तो उसकी पैंटी गीली हो चुकी थी और दीदी ने हलके से अपने पैरों को थोड़ा फैला दिया। मैंने दीदी की पैन्टी धीरे से नीचे खींच दी और पैन्टी को धीरे धीरे पैरों से अलग कर दिया और उसकी चूत पर हाथ रख कर रगड़ने लगा और फिर एक उंगली उसकी चूत में अन्दर बाहर करने लगा।
दीदी ने हलके से आपने पैरों को थोड़ा ओर फैला दिया। मैं उठ कर बैठा, उसने धीरे से खुद अपनी टांगें ऊपर कर ली, जिससे उसकी चूत खुल गयी। उसकी चूत देख कर मैं खुश हो गया । गुलाबी रस भरी चूत बड़ी प्यारी लग रही थी। उसकी चूत एक दम गुलाबी थी और चूत पर एक भी बाल नहीं था, उसकी चूत एक दम लाल सुर्ख हो गई थी ऐसी इच्छा हो रही थी कि उसकी चूत खा जाऊं।
मेरे मुंह में पानी आ गया। मैं उसकी चूत पर झुक गया। मादक सी गंध आ रही थी। मैंने धीरे से अपने होंठ उसकी चूत पर रख दिये वो तिलमिला उठी मैने अपनी जीभ उसकी चूत के होठों पर रख दी। वो हल्के से सिसक पड़ी। होले होले मैं उसकी चूत की पूरी दरार चाटने लगा। वो तिलमिलाने लगी, तड़फ़ने लगी। मैंने अपनी जीभ की नोक उसकी चूत के छेद मे डाली और अन्दर तक ले गया। वो तड़फ़ती रही। मैं जोर जोर से चूत रगड़ने लगा।
उसकी सिसकियां बढ़ने लगी, वो अब बहाना छोड़ कर दोनों हाथों से मेरे सर को अपनी चूत पर दबाने लगी। तभी वो काँपने लगी और उसने अपने चूत का पानी छोड़ दिया और मैं उसका सारा पानी पी गया।
मैंने देखा कि वो हांफ रही है और मेरी तरफ़ देख रही है, मैं उसके कान के पास जाकर फुसफुसा के कहा- कैसा लगा तो दीदी?
तो उसने कहा- हटो यहाँ से! तुम्हारा मेरा रिश्ता क्या है? तुम्हें पता है कि तुम क्या कर रहे हो? मैं तुम्हारी दीदी हूँ और यह सब पाप है!
मुझसे रहा नहीं गया मैंने फिर कहा- इतनी देर मेरे साथ मज़ा लेकर अब कह रही हो कि यह सब पाप है! मुझे तुमसे प्यार करना है तुम चाहो या न चाहो!
बोल कर मैंने उसकी बांई चूची मुंह में भर लिया और जोर जोर से चूसने लगा और अपनी लुंगी खोल कर दीदी के ऊपर लेट गया, अपना लंड उसके जांघों के बीच रख लिया।
मेरी जीभ उसके कड़े निप्पल को महसूस कर रही थी। मैंने अपनी जीभ को नेहा के उठे हुए कड़े निप्पल पर घुमाया। मैं दोनों अनारों को कस के पकड़े हुए था और बारी बारी से उन्हें चूस रहा था। मैं ऐसे कस कर चूचियों को दबा रहा था जैसे कि उनका पूरा का पूरा रस निचोड़ लूँगा। उसके मुंह से ओह! ओह! अह! सी, सी! की आवाज निकल रही थी। मुझसे पूरी तरह से सटे हुए वो मेरे लंड को अपनी जांघों से बुरी तरह से मसल रही थी और मरोड़ रही थी।
दीदी ने धीरे से कहा -‘भाई धीरे धीरे से जो करना है करो! तुम तो मान ही नहीं रहे हो! मुझे तो डर है कि कही माँ जाग न जाए!
फिर उसने मुझे किस करना शुरु कर दिया मेरे होंटों को वो बुरी तरह से चूमने लगी। मैं भी जोश में आ गया, उसको किस करने लगा और उसको अपनी बाहों में दबाने लगा। उसने मुझे बेड पे लिटा लिया और मेरी दोनो टांगो के बीच बैठ कर मेरा लन्ड चूसने लगी। मैं उसके मुलायम होठों को अच्छी तरह महसूस कर रहा था। ऐसा लग रहा था कि जैसे मैं किसी और दुनिया में हूं। मेरे जिस्म में चींटियां रेंगने लगी। उसने अपनी गति बढ़ा दी और जल्दी जल्दी लन्ड को चूसने लगी। थोड़ी देर में लन्ड से धड़ाधड़ पानी निकलने लगा जिसे उसने गड़प से पी लिया।
लन्ड कुछ देर शान्त बना रहा। मैं भी बेड पर निढाल सा पड़ा था।
वो उठ कर बोली- क्यों मर्द?… बस क्या?… या और कुछ करना है?
मैंने कहा- दीदी अभी तो पूरा रात बाकी है… बस एक मिनट… अभी तैयार हो जाता हूं!
वो हंसने लगी। मैं उससे लिपट गया, मैं उससे यूं लिपटा हुआ था जैसे उसके अन्दर ही समा जाउंगा। मैंने उसे बेड पे लिटा दिया। उसने खुद अपनी टांगे ऊपर कर ली, जिससे उसकी चूत खुल गयी। मैं चुपचाप उसके चेहरे को देखते हुए चूची मसलता रहा। उसने अपना मुंह मेरे मुंह से बिल्कुल सटा दिया और फुसफुसा कर बोली, अपनी नेहा दीदी को चोदो! दीदी हाथ से लंड को निशाने पर लगा कर रास्ता दिखा रही थी।
मैंने पूछा- दीदी तैयार हो क्या जन्नत की सैर करने के लिए?
तो वो बोली- ‘हाँ मेरे राजा भाई! आज इस चूत की खुजली मिटा दो, साली रात भर सोने नहीं देती हैं।
उसने कहा- प्लीज़ जल्दी से अपना मोटा सा लण्ड मेरी चूत में डाल दो।
फिर अपने लण्ड उसकी चूत पे रख कर उसे रगड़ने लगा। वो तो मानो पागल हो उठी। उसने मेरे बॉल खींच लिए और धीरे से बोली प्लीज़ मुझे और मत तड़पाओ, और जल्दी से अपना लण्ड अंदर कर दो। मैंने थोड़ा सा धक्का लगाया तो लण्ड का सुपाड़ा उसकी चूत पे जा कर अटक गया। और वो दर्द से तड़प कर बोली- आ…ह… उ…ई… बाहर निकालो प्लीज़।
उसकी आँखों में आंसू आ टपके। लेकिन मैं तो पूरे जोश में था। मैंने उसे अपने बाजुओं में कस कर पकड़ा और धीरे से प्रेशर देने लगा। फिर मैं रुक गया क्योंकि उसकी चूत काफ़ी टाइट थी और मुझे भी महसूस हो रहा था। मैं बस उतना सा ही घुसा कर उसके स्तन को चाटने लगा। थोड़ी देर बाद वो खुद ही अपनी गांड धीरे धीरे उचकाने लगी।
मैं समझ गया कि अब उसका दर्द ख़त्म हो गया है और वो अब पूरा लण्ड अपनी चूत के अंदर चाहती है। मैंने कुछ सोचा और थोड़ा सा लण्ड बाहर निकाल कर ज़ोर से धक्का मारा। फ़च्छ … की आवाज़ के साथ पूरा का पूरा लण्ड उसकी चूत में चला गया था। और दीदी ने अपने होंटों को दबा कर रोना शुरू कर दिया। मैंने उसके मुँह को अपने एक हाथ से ज़ोर से बंद किया और कहा कि अगर वो ज़ोर से चिल्लाएगी तो फ़ूफ़ी उठ जाएँगी और सारा मज़ा किरकिरा हो जाएगा। उसकी आँखो से आंसू छलक पड़े, लेकिन उसने आवाज़ निकालनी कम कर दी।
मैंने लण्ड को थोड़ा सा बाहर खींचा और धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा। वो अब मस्ती से कराहने लगी. आ…ह उम्म…ह… हाँ… ऐसे ही ठीक है…
मैं लण्ड की अंदर बाहर करने की स्पीड धीरे धीरे बढ़ाने लगा। उसे अब मज़ा आने लगा था। वो भी अब पूरा साथ दे रही थी अपनी गांड हिला हिला कर। मैंने स्पीड और बढ़ा दी। १० मिनट के बाद उसका ऑर्गेज़्म हो गया था। मैं उसकी चूत की लहरें महसूस कर सकता था। उसकी चूत का पानी निकल कर पूरी बेड शीट पर फैल गया था। मैंने उसकी टाँगे और फैला ली और लंबे लंबे धक्के लगाने लगा। वो आँखें बंद करके कराह रही थी।
थोड़ी देर बाद मैंने भी उसकी चूत के अंदर ही ढेर सारा वीर्य छोड़ दिया। हम दोनो इसी तरह आधे घंटे तक लेटे रहे। फिर मैंने धीरे से अपना लण्ड उसकी चूत से निकाला। वो काफ़ी टाइट से अटका था। फक्क की आवाज़ के साथ पूरा लण्ड बाहर आया तो उस पर मेरा वीर्य और थोड़ा खून भी लगा था। फिर दीदी धीरे से चुपचाप उठ कर चादर को लेकर बाथरूम चली गई।
दोस्तो, आपको मेरी कहानी कैसी लगी? Hindi Porn Stories
मैं उस समय लगभग hindi Sex Stories अट्ठारह साल की थी, तब का यह किस्सा है। मेरे माता-पिता किसी की शादी में बाहर गए हुए थे।
उस दिन मैं एक सेक्सी प्रोग्राम टीवी पर देख रही थी। उसमें एक लड़का लेटा था तथा एक लड़की उसके पास बैठ कर उसके बदन से मस्ती कर रही थी। फिर लड़की ने अपना कुरता खोल दिया, अब वो ब्रा में थी। फिर लड़के से उसने अपनी ब्रा का हुक खुलवा लिया। फिर लड़की ने लड़के के कमीज के सारे बटन खोल दिए। अब लड़का उसके स्तनों से खेलने लगा। लड़की को बड़ा मजा आ रहा था, लड़के का लंड भी उठ गया था तथा वो ऊपर को तन गया था। लड़के ने लड़की की सलवार का नाड़ा खोल दिया और उसकी पैंटी में हाथ डाल दिया। अब लड़की ने भी लड़के की पैंट के बटन खोल कर उसकी चड्डी में हाथ डाल दिया।
मैं यह सब देख रही थी तथा बहुत मजा आ रहा था। मेरी भी चूत अभी गीली हो रही थी। मैंने अपनी चूत में अंगुली डाली तो बड़ा मजा आया। मैंने सोचा कि बिस्तर पर लेट कर मजा लूँगी लेकिन इसी वक्त मुझे लगा कि मरे पीछे भी कोई टीवी देख रहा है। मैंने जल्दी से टीवी बंद किया और पीछे देखा। मेरे अंकल जो फौज में काम करते थे, वो भी देख रहे थे। मैं उनको देख कर मुस्करा दी और बिस्तर पर चली गई, मैं नींद का बहाना करने लगी।
आधे घंटे बाद मुझे लगा कि मेरे साथ कोई सोया हुआ है। मुझे समझते देर नहीं लगी कि यह फौजी अंकल ही होंगे। उन्होंने अपने शरीर को मेरे शरीर से छुआ दिया। मैंने नींद का बहाना जारी रखा। धीरे धीरे उन्होंने अपना हाथ मेरे वक्ष पर रखा। फिर थोड़ी देर के बाद वो अपने हाथ को फिराने लगे। एक चूची से दूसरी चूची तक धीरे धीरे हाथ फिराते रहे।
मुझे बहुत मजा आ रहा था लेकिन मैंने नींद का बहाना जारी रखा।
धीरे धीरे वो अपने हाथ को मेरी कमर पर ले गए और फिर वो अपना हाथ मेरी टांगों के बीच में ले गए। उन्होंने मेरी चूत पर अपना हाथ फेरा।
मुझे बहुत मजा आ रहा था लेकिन मैंने नींद का बहाना जारी रखा।
अब वो मेरी कुर्ती के अन्दर हाथ डालने की कोशिश करने लगे। वो अपने हाथ मेरी कमर के नीचे डाल कर मेरी कुर्ती की ज़िप तक पहुँचाना चाहते थे लेकिन कर नहीं पाए। मैं धीरे से टेढ़ी हो गई। इसका फायदा उन्होंने उठाया और जल्दी से मेरी कुर्ती की ज़िप खोल दी। इसके बाद उन्होंने मेरी कुर्ती को भी उतार दिया।
मैंने फिर भी नींद का बहाना जारी रखा।
अब मेरी कमर पे सिर्फ ब्रा थी। अंकल मेरी ब्रा में हाथ डाल कर मेरी चूची को दबाने लगे। अब मुझसे भी रहा नहीं जा रहा था, मेरे तन-बदन में आग लग रही थी।
इसी बीच मेरे हाथ के पास एक कड़क चीज थी, यह अंकल का लंड था। अंकल अपना हाथ मेरे नंगे बदन पर घुमाने लगे, मेरे बदन पर चूमने लगे। अब उनका हाथ मेरी सलवार तक पहुँच गया और वो मेरा नाड़ा खोलने की कोशिश करने लगे। उनसे नाड़ा खुला नहीं और उल्टा उलझ गया।
अब मैं सोचने लगी कि क्या किया जाए !
किस तरह नींद में रह कर नाड़े को खोला जाए?
मैंने नींद में ही कहा- दरवाजा खुला न रहे ! नहीं तो बिल्ली आकर सब दूध पी लेगी।अंकल जल्दी से उठ कर दरवाजा बंद करने चले गए. मैंने जल्दी से अपना नाड़ा खोल कर इस तरह थोड़ा सा बांध दिया कि आसानी से खुल सके।
अंकल दरवाज़ा बंद करके आये। थोड़ी देर बाद हाथ फिरा का मेरा नाड़ा भी खोल दिया। अभी सलवार उतारने के लिए मुझे फिर अंकल की मदद करनी जरुरी थी। अंकल ने मेरी सलवार को नीचे खिसकाना चालू किया तो मैं थोड़ा सा ऊपर हो गई ताकि मेरी सलवार आसानी से उतर सके। अब मैं सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी। अंकल का लंड भी बहुत बड़ा और कड़ा हो गया था जो कि मेरे बदन, जांघ से तथा मेरे हाथ से छू रहा था। अंकल कभी मेरी ब्रा में हाथ डालते तो कभी मेरी पैंटी में !
मैं अब तरपने लगी थी। अब अंकल ने अपने होंट मेरे होंठों पर रख दिए और मुझे चूमने लगे। अब मैंने भी अपनी आँखें खोल दी और उनको चूमने लगी।
अंकल ने पूछा- यह तुमको अच्छा लग रहा था?
मैंने कहा- बहुत अच्छा लग रहा था।
उन्होंने बोला- अब मैं जो करूँगा वो तुम्हें बहुत ज्यादा मजा देगा।
उन्होंने मेरी ब्रा और पैंटी उतार दी। फिर अपनी लुंगी भी खोल दी। उनका लंड एक दम कड़ा और लम्बा था। फिर उन्होंने मुझे पूछा- वैसलीन या घी कहाँ रखा है?
मैंने उनको पूछा- यह क्यों चाहिए?
तब उन्होंने बताया- तुम पहली बार चुदवा रही हो, इसलिए जरुरी है। इससे मेरा लंड तुम्हारी चूत में आराम से घुस जायेगा।
मेरी चूत तथा अपने लंड पर वैसलीन लगा कर वो मेरा चुम्मा लेने लगे तथा जोर जोर से मेरे वक्ष की मालिश करने लगे।
उन्होंने कहा- अब तुम अपने दोनों पांव फ़ैला लो !
मैंने दोनों पांव फ़ैला लिए।
उन्होंने अपना लंड मेरी चूत पर रख दिया, फिर धीरे धीरे उसे दबाने लगे। मुझे बहुत अच्छा भी लग रहा था तथा दर्द भी हो रहा था। फिर उन्होंने थोड़ा सा लंड और दबा दिया।
अंकल बोले- घबराओ नहीं ! पहली बार दर्द होता हैं लेकिन इतना मजा आता है कि पूछो मत !
सही था, मैं तो पूरा लंड लेना चाहती थी। थोड़ी सी देर में उन्होंने पूरा लंड मेरी चूत में डाल दिया। मुझे भी दर्द हुआ तथा खून भी निकला लेकिन इतना मजा आया कि पूछो मत।
अब अंकल ऊपर-नीचे होने लगे और मैं भी अपनी चूत को ऊपर-नीचे करने लगी। बहुत ज्यादा मजा आ रहां था…
कुछ मिनट तक ऊपर-नीचे करने के बाद अंकल एकदम अकड़ से गए और इसी बीच मेरे चूत के अन्दर भी जूस निकल गया।
इसके बाद तो अंकल मुझे एक जगह लेकर गए, वहाँ हमने चुदाई का बहुत मजा लिया। लेकिन यह सब अगली कहानी में लिखूंगी। hindi Sex Stories
नमस्ते दोस्तो ! मेरा Hindi Sex Stories नाम खुश है, मैं आपसे अपना पहला सेक्स अनुभव बाँटने जा रहा हूँ।
अभी तो मैं मोदीनगर में रहता हूँ, लेकिन यह बात तब की है जब मैं मुज़फ्फरनगर से ग्रेजुएशन कर रहा था।
मेरी गर्लफ्रेण्ड का नाम कशिश है। वो ५ फीट ५ इंच की गोरी, लम्बी, सुडौल बदन, फिगर ३४-२४-३६ है, और मुझे जो सबसे अच्छा लगता है, वो है उसके होंठ, बिल्कुल एन्जेलेना जॉली जैसे हैं, जिनसे मैं खेलता रहता और चूसता रहता।
मैं भी कम स्मार्ट नहीं हूँ दोस्तों। मैं ६ फीट लम्बा, गोरा और हैंडसम हूँ। मैं अपने कॉलेज का प्लेब्वॉय हुआ करता था। किसी भी लड़की को कोई भी काम पड़ता, मुझे ही याद करती, “कहाँ है मेरा खुश ?”
जब मेरा प्रथम वर्ष पूरा हुआ तो मेरी नज़र में एक जूनियर आई, उसका नाम कशिश था, जैसा नाम वैसी शक्ल और खूबसूरती भगवान ने दी थी उसे! मैंने सोच लिया, मैं उसकी अपनी गर्लफ्रेण्ड बनाऊँगा, और मैंने बनाया भी।
जो भी हमारे अन्तर्वासना के पाठक मुज़फ्फरनगर से हैं, वो सभी रामलीला ग्राउंड का नाम ज़रूर जानते होंगे, ये एक जंगली इलाका है जो पर्यटक-स्थल भी है, वहाँ जंगली जानवर आदि भी हैं। रामलीला ग्राउंड प्रेम-परिन्दों के लिए यानि कि युगलों के लिए स्वर्ग है। लड़के-लड़कियाँ दिनभर वहाँ जोड़े बनाकर प्रेमालाप में तल्लीन रहते हैं – बिना रोक-टोक ! कोई पूछने वाला नहीं होता, कौन क्या कर रहा है और क्यों कर रहा है।
मैं भी अपनी जानेमन को लेकर रामलीला ग्राउंड गया। बाईक पार्क करने के बाद हम प्रेम-परिन्दे अपने लिए एक घोंसला तलाश करने लगे। काफ़ी ऊपर जाने के बाद मुझे एक जगह मिली, जहाँ मैं आराम से अपनी कशिश के साथ अपने प्यार के ग़ुल को ग़ुलिस्ता बना सकता था, और वहाँ किसी को पता भी नहीं चलता, कि कोई बैठा भी है। मैं उसे अपनी बाँहों में लेकर बैठ गया। हम दोनों इधर-उधर की बातें करने लगे, और धीरे-धीरे मैं अपने हाथों से उसकी चूचियाँ दबाने लगा। वो भी मेरे हाथों को पकड़ कर अपनी चूचियाँ और ज़ोरों से दबवाने लगी।
फिर मैंने पीछे से उसके गले और कंधों पर चूमने लगा और उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं। फिर मैंने उसका टॉप उतार दिया, वो गुलाबी रंग की ब्रा में थी, सच में क्या क़यामत लग रही थी वो उस समय, जैसे स्वर्ग की कोई अप्सरा धरती पर आ गई हो। मैंने उसकी दोनों चूचियों को अपने दोनों हाथों में भर लिया और मसलने लगा।
वो मेरी बाँहों में कसमसाने लगी, इसके बाद मैंने ऊपर से ही उसकी चूचियों को चूम लिया और घुण्डियों को चूसा और काटा। फिर उसने मुझसे मुँह से ब्रा खोलने के लिए बोला, और मैंने अपने दाँतों से उसकी ब्रा की स्ट्रिप खोली और एक तरफ फेंक दी। अब मेरे सामने उसकी उभरती जवानी थी जिसे मैंने अपने हाथों और मँह में भर लिया। एक हाथ से मैं उसकी बाईं ओर की चूची को दबाने लगा और दाईं तरफ की चूची को अपने मुँह में भर कर चूसने लगा। उसके मुँह से और ज़ोरों की आवाज़ें निकलने लगीं।
फिर मैं अपनी जीभ से उसकी घुण्डियों को सहलाने लगा, उसे ज़ोर का झटका लगा और मैंने उसकी घुण्डियों को दाँतों से पकड़ लिया और हल्के से काट लिया और दूसरी घुण्डी को ज़ोर से मसल दिया।
वो मेरी बाँहों में तड़प उठी।
अब उसने मेरी शर्ट के बटन खोलने चालू किए। मैंने अन्दर बनियान नहीं पहनी थी। फिर वो पागलों की तरह बेतहाशा मेरे छाती पर चूमने लगी, बालों से खेलने लगी, और फिर अपने होंठों से मेरे निप्पलों को चूसने लगी। मैं अब उत्तेजित हुआ जा रहा था और वो अपने गीले होंठों से मुझे चूमे जा रही थी।
मैंने उसे ज़ोर से अपनी बाँहों में भर लिया।
इसके बाद मैंने उसे अपने नीचे लिटा दिया और उसके होंठों को चूसने लगा। हम दोनों के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं। उसने अपनी आँखें बन्द कर लीं और हम ऐसे ही आनन्द लेते रहे। फिर मैं अपनी जीभ उसके मुँह में ले गया और वो उसे चूसने लगी – ज़ोरों से !
मैं अपनी जीभ उसके मुँह में चारों ओर फिरा रहा था और फिर उसकी जीभ पर घुमाने लगा। इससे अजीब नशा छा रहा था हम दोनों पर ! दोनों डूबे जा रहे थे एक-दूसरे में ! साथ-साथ में मैं उसकी चूचियों को भी दबाए जा रहा था, जिससे वो और भी ज़्यादा उत्तेजित हो गई थी।
इस तरह हमने क़रीब 15 मिनट तक खूब प्यार किया।
फिर मैंने उसके कान के लटकन से खेलना शुरु किया, उसे अपने दाँतों में लिया, अपनी जीभ से चाटा और फिर धीरे-धीरे नीचे आने लगा। अब मैं उसकी चूचियों के ऊपरी हिस्सों पर किस करते हुए चूचियों के बीच की घाटी पर चूम रहा था। फिर नीचे उसकी नाभि पर चूमने लगा। इतनी देर में ही वो काफ़ी गरम हो गई थी, और सेक्सी आवाज़ें निकालने लगी थी।
फिर मैंने उसकी जीन्स की ज़िप खोल कर जीन्स उतार दी। अब उसके पूरे बदन पर कपड़े के नाम पर बस एक पैन्टी रह गई थी, वो भी ब्रा की तरह ही गुलाबी रंग की थी। मैं पैन्टी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा। पैन्टी पूरी गीली हो चुकी थी, मैंने पैन्टी को निकाला और उसकी चूत के आस-पास सहलाने लगा। क्या चूत थी ! बिल्कुल गुलाबी, एक भी बाल नहीं। मन कर रहा था, खा जाऊँ उसकी चूत को ! उसे देखकर मुँह में पानी आ गया।
वो बोलने लगी- प्लीज़ ! अब मत तड़पाओ।
मैंने कहा, “अभी तो बहुत समय है स्वीटहार्ट ! थोड़ा सब्र करो, और पहले इन्हीं बातों से आनन्द उठाओ, तभी सेक्स का पूरा मज़ा आएगा।”
फिर मैं उसकी चूत को चूमने लगा, और अपनी जीभ से सहलाने लगा, और उसके दाने को जीभ से उठाने लगा। वो काफ़ी उत्तेजित हो गई। फिर मैंने उसकी चूत पर अपने होंठ लगा दिए और ज़ोर से चूसना शुरु किया, वह ज़ोर से तड़पी और बोली- क्या कर रहे हो?
अब मैं अपनी जीभ को उसकी चूत में अन्दर-बाहर करने लगा और जीभ से ही उसे चोदने लगा।
अब तक वो चिल्लाने लगी थी, “यस… कम ऑन, फक्क मी…!”
मैंने बोला- इतनी भी क्या ज़ल्दी है, आराम से करेंगे। तुम मेरे लंड से नहीं खेलना चाहती क्या?
फिर मैंने अपना ९ इंच लम्बा और ३ इंच मोटा लण्ड उसके हाथों में पकड़ा दिया। पहले वो उससे खेलने लगी, फिर सुपाड़े की चमड़ी को पीछे कर अपनी जीभ से सहलाने लगी और अपने मुँह में भर कर लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। धीरे-धीरे मेरा लंड और मोटा और टाईट होता जा रहा था। मैं उसको सिर से पकड़ करक उसका मुँह ही चोदने लगा और क़रीब 25-30 झटकों के बाद में उसके मुँह में ही झड़ गया और अपना पूरा वीर्य उसके मुँह में उगल दिया, जिसे वह आसानी से चाट-चाट कर निगल गई।
इसके बाद हम दोनों 69 की मुद्रा में आ गए और मैं उसकी चूत का रस पीने लगा, वो मेरे लण्ड से खेलने लगी। धीरे-धीरे मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया और उसकी चूत मारने को तैयार हो गया।
अब मैंने उसे सीधा लिटाया और उसकी टाँगों को मोड़ कर फैला दिया, ताकि चूत का मुँह खुल जाए और लंड आसानी से चला जाए। वैसे भी चूत अभी तक इतनी गीली हो चुकी थी कि लण्ड उसमें आसानी से चला ही जाता।
अब मैंने अपने लंड को चूत के मुँह पर रखा और धीरे-धीरे अन्दर डालने लगा, इस विधि से लंड घुसाने पर उसे दर्द भी कम हुआ और मज़ा भी आया। अब तक मेरा लंड आधा अन्दर जा चुका था।
अगले झटके में मेरा पूरा-का-पूरा लंड अन्दर चला गया और वो चिल्ला उठी।
फिर मैंने उसके होंठों को अपने होंठों से दबा लिया और चूसने लगा।
धीरे-धीरे जब उसका दर्द कम हुआ तो वो अपनी कमर हिलाने लगी, मैं समझ गया अब वो तैयार है पूरी तरह से।
अब मैंने अपने लंड को अन्दर-बाहर करना शुरु किया और झटके लगाने लगा। वह भी कमर हिला-हिला कर झटकों का उत्तर झटकों से देने लगी।
ऐसे ही क़रीब 15 मिनटों तक चुदाई चलती रही। फिर मैंने उसे अपने गोद में उठा लिया और ऊपर उछाल-उछाल कर चोदने लगा, इससे हर बार मेरा लंड चूत की दीवार छू लेता, जिससे पूरा मज़ा आ रहा था। इतनी देर में वो तीन बार झड़ चुकी थी, और अब मैं झड़ने वाला था।
मैंने उसे नीचे किया और उसकी चूत में अपने वीर्य की पिचकारी छोड़ दी।
काफ़ी देर तक मेरा लंड धार मारता रहा। तब तक मेरी जानेमन भी एक बार झड़ गई मेरे साथ ही। ऐसे ही हम एक-दूसरे की बाँहों में पड़े रहे और फिर उठकर कपड़े पहन कर तैयार हो गए।
तो दोस्तों, कैसी लगा मेरा पहला अनुभव? Hindi Sex Stories
मेरा नाम राज है और मेरी उमर १९ साल Hindi Porn Stories की है। मेरी दीदी मुझसे दो साल बड़ी है लेकिन उनका रंग काला है। पर फ़िगर के मामले में करीना कपूर है- ज़ीरो फ़िगर ! लेकिन उनके काले रंग के कारण कोई कभी उनकी तरफ़ देखता ही नहीं है। इसी कारण वे हमेशा उदास रहती और ज्यादातर घर में ही रहती हैं और पढ़ती रहती हैं।
मेरा रंग साफ़ है और शरीर भी गठीला है। मैं इन्ज़िनीयरिंग के दूसरे साल में हूँ। मेरे कॉलेज़ में कई लड़कियाँ पढ़ती हैं। मैंने कई लड़कियों से मित्रता की पेशकश की पर कोई भी घास नहीं डालती और मैं सेक्स का भूखा लड़का हूँ। मेरे घर में मैं, दीदी और और मम्मी-पापा हैं। पापा एक दवाई की कंपनी में एरिया मेनेजर हैं जो हमेशा टूर पर ही रहते हैं। मम्मी हमेशा घर और बाहर के कामों में ही लगी रहती हैं। दीदी मुझे अपना एक अच्छ दोस्त समझती हैं और हर छोटी बड़ी बात, समस्या के बारे में मुझसे बात करती हैं।
उनके रंग के कारण उनका कोई दोस्त नहीं है तो वो मुझे ही अपना बॉयफ़्रेंड समझती हैं। मैं उनको शुरू शुरू में तो दीदी के रूप में ही देखा लेकिन कुछ दिनों में मेरे अन्दर कुछ बदलाव आ गया था। मैं उनकी सेक्सी जीरो फिगर का दीवाना हो गया था इसलिए मैं उनके साथ रहने के लिए उनको अकेलेपन का अहसास नहीं होने देता था और उनके साथ साथ ही रहता था। उनको भी अच्छा लगता था इसलिए उनको जहाँ कहीं भी जाना होता तो मुझे साथ लेकर जाती हैं। दीदी मेरे साथ बाइक पर हमेशा चिपक कर बैठती हैं लेकिन मैं उनका इस तरह बैठने की अदा को समझा नहीं। उनके स्तन मेरी पीठ से हमेशा चिपके रहते थे और वो इस बात पर कभी ध्यान नहीं देती थी। इस लिए मैं भी कुछ नहीं कहता था या करता था।
दीदी काफ़ी समय से अध्यापिका की नौकरी के लिए कोशिश कर रही थी और किस्मत से उन्होंने प्रवेश-परीक्षा पास भी कर ली। जिस दिन उनको परिणाम मिला, वो बहुत खुश थी, उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। खुशी में उन्होंने मुझे अपने सीने से लगा लिया और उनके स्तन मेरे सीने में गड़ गए। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।
थोड़ी देर के बाद मम्मी आईं तो दीदी ने उन्हें भी अपने सीने से लगा लिया तो मैंने इस बात को सामान्य हरकत समझा और भूल गया।
कुछ ही दिनों में उनका साक्षात्कार था, जिसके लिए उन्हें भोपाल जाना था। तो मम्मी ने मुझे उनके साथ जाने की जिम्मेदारी सौंप दी क्योंकि और कोई था ही नहीं जो उनके साथ जा सके। मैंने भी हाँ कर दी।
हमें कुल तीन दिन लगने थे। हम लोगों ने पूरी योजना बना कर अपने कपड़े वगैरह लेकर भोपाल के लिए रवाना हो गए। दीदी के साथ अकेले रहने का इससे अच्छा मौका और नहीं मिल सकता था इसलिए मेरी खुशी का कोई पारावार ना था।
हम लोग शाम के छः बजे भोपाल पहुँचे। वहाँ पहुँच कर हम कोई होटल ढूंढने लगे। करीब तीन घण्टे तक होटल खोज़ने पर भी किसी होटल में कमरा खाली नहीं मिला क्योंकि अध्यापकों की भर्ती की संख्या ज्यादा थी इसलिए बहुत अधिक लोग पहुँचे हुए थे साक्षात्कार के लिए।
अंत में हम दोनों बहुत थक चुके थे कि एक होटल में हमें एक ही कमरा मिला। मैंने दीदी को बताया तो वो कहने लगी कि यही ले लो, हम काम चला लेंगे।
मैं कमरा बुक करने लगा और मैंने दीदी को कमरे में जने को कहा क्योंकि दीदी बहुत ज्यादा थकी हुई थी। दीदी वेटर के साथ कमरे में चली गई और मैं होटल का रज़िस्टर भरने लगा।
सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद जब मैं चलने लगा तो रिसेप्शन पर बैठे व्यक्ति ने कहा- मैंने रज़िस्टर देखा है कि आप दोनों भाई बहन हैं इसलिए बता रहा हूँ कि रात को साढ़े दस बजे के बाद टीवी के चैनल ५ मत चलाईएगा क्योंकि तब इस पर केवल व्यस्कों के देखने लायक कार्यक्रम चलाए जाते हैं और आपके साथ आपकी दीदी हैं !
तो मैंने कहा- ठीक है ! धन्यवाद ! मैं अपने कमरे में आ गया। वहाँ वेटर दरवाज़े पर मेरा इन्तज़ार कर रहा था। मैंने उसे टिप दी तो उसने मुस्कुराते हुए कहा- हैपी हनीमून सर ! कुछ चाहिएगा तो मुझे याद कर लीज़िएगा सर !
वेटर तो बोल कर चला गया, मैं समझ गया कि वेटर हमें पति पत्नी समझ रहा है। फ़िर मैं कमरे में आया तो दीदी पलंग पर लेटी हुई थी।
मैंने कहा- दीदी ! तुम बहुत थक गई हो ! थोड़ा फ़्रेश हो लो। फ़िर हम खाना खाएंगे।
दीदी बोली- तुम ठीक ही कहते हो !
और दीदी ने बैग खोल कर अपने कपड़े निकाले और बाथरूम में चली गई।
मेरे मन में वेटर की बात घूम रही थी और मैं दीदी के साथ अपने ही बारे में सोचने लगा। बाथरूम से दीदी के नहाने की आवाज़ आ रही थी। मैं कल्पना करने लगा कि काश मैं और दीदी साथ साथ नहाते !
मुझे लगता था कि वेटर की बात सच हो सकती है। मैं इस बारे में योजना बनाने लगा तो मुझे रिसेप्शन वाले की व्यस्क फ़िल्म वाली बात याद आई। तभी मैंने घड़ी में देखा तो सवा दस बजे थे। तो मैंने ५ नम्बर का चैनल लगाकर बैठ गया और रिमोट को तकिए के नीचे छुपा दिया, साथ में खाने का ऑर्ड्र भी दे दिया।
५ मिनट के बाद दीदी बाहर आई। उन्होंने सेक्सी फ़िगर पर सफ़ेद रंग की नाईटी पहनी थी। मैंने कभी भी उनको ऐसी नियत से नहीं देखा था। आज वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी। उन्होंने कहा- जाओ तुम भी नहा लो !
दीदी दर्पण में बाल बनाने लगी थी। उनका ध्यान टीवी पर नहीं था।
मैं तुरन्त बाथरूम में घुस गया। मैंने बाथरूम में देखा कि दीदी की पैन्टी और ब्रा वहाँ सूख रही थी और मैंने उन्हें बैग से कपड़े निकालते देखा था तो उन्होंने पैन्टी नहीं निकाली थी, सिर्फ़ ब्रा ही थी। तो मैं समझ गया कि दीदी ने पैन्टी नहीं पहनी है। मुझे लगा कि दीदी थकी हुई हैं इसलिए फ़्री होकर सोना चाहती हैं इसलिए पैन्टी नहीं पहनी।
फ़िर मैंने उनकी पैन्टी को सूंघा, उसमें से एक अजीब सी खुशबू आ रही थी। मैंने मस्तराम की किताबों में पढ़ा था इसीलिए यह सब कर रहा था। लेकिन मेरा ध्यान टीवी पर था। तभी मुझे ब्ल्यू फ़िल्म चालू होने की आवाज़ आई। मेरा ध्यान से दीदी की हरकतों पर था। मुझे कुछ देर तो टीवी की आवाज़ आई लेकिन थोड़ी देर बाद टीवी की आवाज़ बंद हो गई।
मैं समझ गया कि दीदी ब्ल्यू फ़िल्म देख रही हैं। उन्होंने रिमोट ढूंढ कर टीवी की आवाज़ बंद कर दी थी ताकि मैं ब्ल्यू फ़िल्म से आती कामुक आवाज़ें ना सुन लूँ।
बाथरूम में मैंने दीदी के नाम से मुठ मारी और उनकी चड्डी को पूरी तरह गीला कर दिया, फ़िर मैंने उसे धोया। मैं सिर्फ समय बिता रहा था ताकि दीदी अच्छे से गर्म हो जाये। करीब १५ मिनट के बाद मैं बाथरूम से बाहर निकला और कमरे में गया। मैंने देखा कि दीदी का हाथ दीदी की चूत में है उनकी नाईटी उठी हुई है। मुझे देखते ही वो घबरा गयी और तुंरत खड़ी हो गयी। जल्दी में वो चैनल भी बदल नहीं पाई। मैंने टीवी की तरफ देखा तो लड़का लड़की को पलंग पर लेटकर उसकी चूत चाट रहा था।
दीदी की ऑंखें लाल हो गई थी और शर्म से सर झुका हुआ था। शर्म तो मुझे भी आ रही थी, फिर मैंने चैनेल बदल कर दिया। दीदी चुपचाप दर्पण पर अपने बाल बनाने लगी और मैं भी कपड़े पहनने लगा। फिर मैं कोई पत्रिका पढ़ने का नाटक करने लगा। कमरे में शांति का माहौल था, न उनको और न मुझको बोलने की हिम्मत हो रही थी।
और फिर डोर-बेल बजने की आवाज़ आई मैं उठा और दरवाज़ा खोला तो देखा कि वेटर खाना ले कर आया है। उसने खाना मेज़ पर रखा, फिर खाना लगाकर कहा,“ सर मैं इसे कल सुबह ले जाऊंगा।”
मैंने उसे टिप दी और वो हंसते हुए चला गया।
मैं और दीदी खाना खाने लगे। दीदी की सहेली नहीं होने के कारण उन्होंने शायद कभी भी ब्लू फिल्म नहीं देखी थी, उनकी यह पहली बार थी इसीलिए उनका शरीर गर्म हो गया था और दीदी को सेक्स के बारे में भी खुछ खास पता नहीं था। खाना खाने के बाद हम दोनों ने पेपर-नैपकिन से हाथ पोंछा लेकिन पेपर नैपकिन के नीचे कंडोम के ४-५ पैकेट थे जो कि देखने में सौंफ के पाउच लग रहे थे। दीदी ने उसे सौंफ का पाउच समझ कर फाड़ा लेकिन उसके अंदर से कंडोम निकला।
दीदी ने कभी कंडोम देखा नहीं था इसीलिए मेरी तरफ देख कर पूछा और टीवी वाली घटना के बाद पहली बार मुझसे बात की- भाई ! यह क्या है?
“दीदी ये कंडोम है !”
तो दीदी ने टीवी पर कंडोम के बारे में सुना था तो समझ गई, फिर शर्म से चुप हो गई, फिर पूछा,”वेटर हमारे खाने के साथ कंडोम क्यों लाया है?”
तो फिर मैंने दीदी को पूरी बात बताई तो हंसने लगी और बोली- तुझे पता था कि टीवी पर ब्लू फिल्म चलेगी तो तूने जानबूझ कर उसी चैनल पर टीवी चलाया था !
दीदी थोड़ी देर में मेरे साथ खुल गई और सेक्स की बातें करने लगी। मुझे समझ में आ गया था कि वो ब्लू फिल्म देखने के बाद सेक्स के लिए तड़प रही है। दीदी ने कहा- मैंने कभी भी ब्लू फिल्म नहीं देखी है !
तो मैंने तुरंत ही टीवी पर ब्लू फिल्म लगायी। उसमें एक लड़की को लड़का डौगी स्टाईल में चोद रहा था।
दीदी- ये सेक्स का कौन सा तरीका है?
तो मैंने कहा- दीदी इसे डौगी-सेक्स कहते हैं !
दीदी- तू बहुत जानता है रे ! कभी किसी के साथ सेक्स किया है क्या?
तो मैंने कहा- दीदी कोशिश बहुत की लेकिन कोई लड़की पटी ही नहीं !
तो मैंने हिम्मत करके कहा- दीदी तुम मेरे साथ सेक्स करोगी?
तो उसने मुझे बहुत ही बुरी तरह डांटा और कहा- तुझे अपनी दीदी से ऐसी बातें करते हुए शर्म नहीं आती !
फिर मैं चुप चाप सो गया लेकिन मेरी आँखों में नींद नहीं थी और न ही दीदी की आँखों में।
रात को १ बजे दीदी ने मुझ से पूछा- क्या तुझे सेक्स करना है?
तो मैंने कहा- हाँ दीदी !
वो बोली- मैं तो काली हूँ?
मैंने कहा- दीदी सेक्स का मजा काले या गोरे से नहीं, फिगर से आता है और तुम सेक्सी हो !
मेरी बातों से वो गर्माने लगी और फिर सेक्स के लिए तैयार हो गई। मैंने दीदी को पूरी नंगी कर दिया और उनकी बिना बालों की चूत को चाटने लगा। वो ब्लू फिल्म की एक्ट्रेस की तरह चिल्लाने लगी- आ अ अह ! उ ऊ ऊउउऊ !
मैं उनको झड़ने तक चूसता रहा, फिर उनकी कुंवारी चूत के नीचे तकिया लगाकर थोड़ा ऊपर किया, फिर अपना खड़ा लण्ड उनकी चूत में घुसाया। धीरे धीरे लण्ड अंदर जाने लगा, वो दर्द से चिल्लाने लगी। फिर थोड़ी देर के बाद शांत हो गई और सेक्स का पूरा मजा लेने लगी।
दीदी के साथ उस रात मैंने कई बार सेक्स किया और फिर मैं और दीदी तीन दिन तक होटल के कमरे में मियां बीवी की तरह ही रहे।
घर आकर भी हम मौका देख कर सेक्स करने लगे …… Hindi Porn Stories
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