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हाय ! मै गुजरात से सुनील २१ साल Antarvasna का हूं। आज मै आपको अपनी गर्ल फ़्रेंड सीमा जो २० साल की है, की एक सच्ची घटना बता रहा हूं।
हमारी दोस्ती को हुए १.५ साल हो गया था पर मैने उसे अब तक छुआ तक नहीं था। एक दिन जब हम रोक गार्डन गये हुए थे तो मैं उसे सिर्फ़ किस ही किया और जब मैं उसके बूब्स पर हाथ लगाने लगा तो वो गुस्सा कर गई और कम से कम एक महीने मुझसे बात नहीं की, आखिर मैने भी उसे एक दिन मना ही लिया और उसको कहा के ये सब तो चलता रहता है तो वो बोली के मेरे को ये सब अच्छा नहीं लगता तो मैने कहा के अच्छा नहीं लगता तो नहीं करूंगा, उस दिन के बाद हम दोनो मिलते तो थे पर किस तक ही सीमित थे, पर अब मेरे से सब्र नहीं होता था और मैं उसे चोदने की योजना बनाने लगा।
फिर एक बार जब मैं गरमियों में उससे मिलने गया तो वो बोली कि आज तुम ओफ़िस से छुट्टी कर लो आज बैठ के बातें करेंगे, तो मैने ओफ़िस फोन कर के बोल दिया के आज मैं नहीं आउंगा, उसके बाद हम दोनो कुछ देर उसके कोलेज में ही बैठे रहे। फिर मैने उससे पूछा कि कहीं चलते हैं तो वो भी मान गयी पर उस टाइम १२.४० बज रहे थे उस टाइम न तो हमें फ़िल्म का टिकट मिलना था न ही हम किसी गार्डन में जा सकते थे क्योंकि दिल्ली में अधिकांश १२:३० तक सारे सिनेमा में शो स्टार्ट हो जाते हैं और गार्डन में इसलिये नहीं जा सकते हैं क्योंकि वहां पर गर्मी बहुत होती है।
फिर मैने कहा के मेरे रूम पर चलते हैं पर वो मना कर रही थी कह रही थी कि मुझे डर लगता है कि कही कुछ हो गया तो, पर मैने उसे तसल्ली दी और कहा कि अगर तुम्हे मुझ से प्यार है और अगर तुम मुझ पर भरोसा करती हो तो चल सकती। इस पर वो बोली कि तुम मेरी कसम खाओ के तुम ऐसा वैसा कुछ नहीं करोगे मैने उसकी कसम खा ली और वो तैयार हो गई। रास्ते में सोचता रहा के कसम तो खा ली पर उसको चोदुंगा कैसे।
फिर जब मैं और वो मेरे रूम पर पहुंचे तो मैने दरवाजा बंद करने लगा, तो वो बोल पड़ी के दरवाजा क्यों बंद कर रहे हो मैने कहा कि अगर कोई देख लेगा तो क्या कहेगा कि कौन है और मैने दरवाजा बंद कर दिया। उसके बाद मैं बेड पर उसके साथ बैठ गया और बातें करने लगे, बातें करते करते मैने उसके कंधे पर हाथ रखा और उसके लिप्स पर किस करने लगा पर ये किस १५ मिनट तक चलता रहा और मैं उसकी छाती पर हाथ फिराना शुरु कर दिया उसने विरोध नहीं किया और धीरे धीरे मैं उसकी वेली से होता हुआ उसकी चूत को सलवार के ऊपर से हाथ सहलाने लगा। अब मेरे लिप्स उसके लिप्स से किस कर रहे थे और एक हाथ उसके बूब्स पर और एक हाथ उसकी चूत पर था। अब मैं धीरे धीरे उसकी गर्दन और उसके बाद उसके बूब्स को कमीज के ऊपर से चूसने करने लगा तो उसके मुंह से अजीब से आवाजें आने लगी तो मैं समझ गया कि अब वो गरम हो चुकी है उसके बाद मैने धीरे धीरे एक हाथ कमीज के अन्दर डाल दिया और ब्रा के ऊपर से उसके बूब्स को दबाने लगा।
बाद में मैने उसकी कमीज उतार दिया वो कुछ नहीं बोली क्योंकि वो पूरी तरह गरम हो चुकी थी। उसने सेक्सी लेस काली ब्रा पहन रखी थी और वो अपने बूब्स अपने दोनो हाथों से छुपाने लगी, मैं समय न गंवाते हुए उसे दोबारा किस करना शुरु कर दिया और उसकी ब्रा के ऊपर से बूब्स को सहलाता रहा फिर उसकी पीठ पर हाथ ले जा के उसकी ब्रा के हुक भी खोल दिये। अब वो मेरे सामने बिल्कुल टोपलेस थी। मैने उसे बेड पर लिटाया और उसके बूब्स चूसने लगा। २० मिनट तक उसके बूब्स चूसने के बाद मैने उसकी सलवार की तरफ़ हाथ बढ़ाया और उसका नाड़ा खोल दिया और उसके बूब्स को चूसना चालू रखा। उसके मुंह से अजीब अजीब से आवाजें आ रही थी, मैने सोचा कि कहीं पड़ोसी सुन लेंगे तो प्रोब्लम हो जायेगी इसलिये मैने उसके बूब्स चूसते हुए सीडी का बटन ओन कर दिया अब म्युज़िक जोर से बजने लगा और किसी को कुछ सुनाई देने का तो नाम ही नहीं था। अब मैने उसकी सलवार धीरे धीरे उतारनी शुरु कर दी। उसकी सलवार उतारने के बाद मैं उसकी चूत को उसकी काली पैंटी के ऊपर से चूमने लगा। तो वो और जोर से सिसकियां लेने लगी। धीरे धीरे मैने उसकी पैंटी को भी उतार दिया और उसकी चूत को चूमने लगा।
अब वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी पड़ी हुई थी और कुछ बोल भी नहीं रही थी। मैं लगभग १० मिनट तक उसकी चूत को चूसता रहा और जैसे ही उसकी चूत झड़ने वाली थी मैने चाटना छोड़ दिया तो वो बिना पानी की मछली की तरह तड़ओ उठी और खुद ही अपनी उंगली चूत में डालने लगी मैं उसके दोनो हाथ कस के पकड़ लिया तो वो मेरे आगे गिड़गिड़ाने लगी कि प्लीज़ मेरी चूत को चूसो तो मैने कहा सालि पहले तो बहुत अकड़ती थी आज क्यों नहीं अकड़ रही है, तो वो दोबारा गिड़गिड़ाने लगी। मैने उससे कहा कि मैने तुम्हारी चूत एक शर्त पर चूसुंगा पहले तुम्हे मेरा लंड चूसना होगा वो मान गयी.
मैने उसे मेरे कपड़े उतारने को कहा तो वो जल्दी जल्दी मेरे कपड़े उतार दिये और मेरे ७ इंच और ३.५ इंच मोटे लंड को देख कर बोली कि ये मेरे मुंह में कैसे आयेगा तो मैने कहा कि साली मैं बताता हूं और मैने अपना लंड उसके मुंह मैने थोड़ा सा डाल दिया उसके बाद धीरे धीरे वो खुद ही बढ़ाती गयी और मेरे पूरे लंड को मुंह में डाल के चूसने लगी। उसका एक हाथ मेरे बाल्स के साथ खेल रहा था। और मैं उसके बूब्स के साथ खेल रहा था। थोड़ी देर चूसने के बाद वो वोली कि अब तुम मेरी चूत चूसो तो मैने कहा कि चलो ६९ की पोजिशन में हो जाओ तो वो बोली के वो क्या होता है तो मैने उसे बताया कि ६९ क्या होता है और इस तरह हम दोनो ६९ की पोजिशन में आ गये और एक दूसरे को चूसने लगे। बीच बीच में उसकी चूत में उंगली भी डाल रहा था तो वो कह रही के दर्द होता है। और १० मिनट के बाद वो झड़ गयी और मैं उसका जूस पी गया। मुझे अच्छा लगा और मैं उसकी चूत को चूसता रहा, उसके बाद वो दोबारा गरम हो गई और जैसे ही मैने चूसना बंद किया तो वो दोबारा गिड़गिड़ाने लगी कि चूसो।
तो मैने कहा के अब मैं नहि चूसुंगा बल्कि तुम्हारी चूत में लंड डालुंगा तो वो कहने लगी कि इतना बड़ा मेरी चूत में कैसे जायेगा, मुझे तो तुम्हारी उंगली से भी दर्द होता है तो ये कैसे सहन करूंगी तो मैने उसे कहा कि तुम्हे डरने की जरूरत नहीं है थोड़ी देर दर्द होगा बाद में तुम भी एंजोय करोगी और मैने कहा कि ये औरतों की चूत का होल बहुत बड़ा होता है क्योंकि यहां से इतना बड़ा बच्चा निकल जाता है तो मेरा लंड तो आराम से आयेगा।
उसके बाद मैने तेल लेके थोड़ा से अपने लंड पर और बाकी उसकी चूत के लिप्स को हटा कर वहां पर लगा दिया। और अपना लंड उसकी चूत में अंदर डालने की बजाय लिप्स पर ही रगड़ने लगा तो वो थोड़ी देर में ही चिल्ला उठी प्लीज़ अंदर करो। उसके बाद मैने थोड़ा सा अन्दर किया तो वो दर्द से चिल्लाने लगी, तो मैने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिये और अपने लंड को वहीं पर रख कर थोड़ा सा हिलाने लगा जब वो एंजोय करने लगी तो मैने एक जोर से झटका दिया और मेरा लंड उसकी चूत में चला गया और वो दर्द से तड़पने लगी।
पर मेरे सब्र का बांध टूट चुका था और मैने उसकि परवाह न करता हुए अपने लंड को अन्दर बाहर करने लगा। वो थोड़ी देर दर्द महसूस करती रही पर बाद में वो भी एंजोय करने लगी और उसके मुंह से आवाजें आने लगी “आअह्हह्हह ओर जोर से चोदो सुनील और जोर से और अन्दर करो” तो मैने कहा क्यों ये सब तो तेरे को अच्छा नही लगता था साली अब लंड का स्वाद आ रहा है न। तेरी तो आज मैं पूरी फाड़ दूंगा। और लगभग १५ मिनट की चुदाई के बाद मेरा छूटने वाला था (इस बीच वो दो बार छुट चुकी थी)।
मैने उसको कहा कि मैं झड़ने वाला है और उससे पूछा कि अन्दर छोड़ु कि बाहर, तो उसने बोला के बाहर ही छोड़ना मैं प्रिगनेंट नहीं होना चाहती है और मैने उसकी चूत से लंड निकाल कर उसके मुंह में डाल दिया और चुदाई करने लगा। थोड़ी देर में मैं झड़ गया। उसका मुंह मेरे वीर्य से भर गया। कुछ तो उसने निगल लिया और बाकी बाहर उसके चेहरे से होता हुआ उसकी गरदन पर गिर गया। उसके बाद मैं थोड़ी देर उसके ऊपर लेट गया और उसको किस करता रहा और अपने माल को उसके बूब्स पे मलता रहा। लगभग १५ मिनट रेस्ट करने के बाद हम दोनो उठे और अब शाम होने लगी थी और उसने घर भी जाना था तो हम दोनो ने अपने आप को फ़्रेश किया। और उसको घर के पास छोड़ कर आ गया। आके मैने उसके खून और हम दोनो के रज से खराब हुई बेडशीट को साफ़ किया। Antarvasna
मेरे दोस्त की शादी थी। उसकी Hindi Porn Stories शादी की सारी तैयारियाँ उसका मामा देख रहा था जो करीब ४० साल का था। दोस्त होने के नाते मैं बी काम में उसका हाथ बँटाने लगा, उसके मामा से मेरी अच्छी पटने लगी।
दोपहर के दो बजे मैं मामा के साथ तैयारियों में लगा था तभी मैंने देखा कि ३२ या ३३ साल की एक औरत लाल साड़ी में मामा के पास आई जो बहुत ही गज़ब की लग रही थी, सेक्सी फ़िगर थी, साड़ी में भी उसकी गाँड उभरी हुई थी, और उसकी चूचियाँ तो जैसे दो पपीते लटक रहें हों। उस औरत को देखकर मेरा लण्ड ज़ोर मारने लगा, जैसे कह रहा हो इसको तो चोदना ही है। मेरे हाथ अपने आप लण्ड को सहलाने लगे।
तभी मामा ने मुझे आवाज़ दी, मैं उनके पास गया, उन्होंने कहा, इनसे मिलो ये तुम्हारी संगीता मामी है। एक सेकण्ड को हमारी नज़रें एक-दूसरे से टकराईं फिर मामी ने मुझे ऊपर से नीचे तकत बड़े ग़ौर से देखा। तभी मामा ने कहा, तुम्हारी मामी को अभी बाज़ार जाना है और मैं अभी शादी की तैयारियों में व्यस्त हूँ, क्या तुम अपनी मामी के साथ बाज़ार जा सकते हो। मैंने मन ही मन कहा, लगता है किस्मत साथ है।
मामा ने अपनी बाईक की चाभी मुझे दे दी और मैं मामी के साथ बाज़ार को निकल गया। हम बातें करते जा रहे थे, मैं बाईक धीरे-धीरे चला रहा था। तभी मामी ने पूछा, “तुम कितने साल के हो?”
२४ साल का – मैंने बताया।
मामी बोलीं,”फिर बाईक इतनी धीरे क्यों चला रहे हो?”
“वो आप बैठीं हैं ना, और आपने मुझे पकड़ा भी नहीं है, इसलिए धीरे चला रहा हूँ।” मैंने कहा।
“अच्छा तुम बाईक तेज़ चलाओ, मैं तुम्हें पकड़ लेती हूँ।”
मैंने बाईक की स्पीड बढ़ा दी।
मैंने मामी से पूछा,”आपको बाज़ार में क्या लेना है?”
“लेना कुछ नहीं, मुझे तो ब्यूटी-पार्लर जाना है। वहाँ जाने से पहले क्यों ना एक-एक कप कॉफी हो जाए।”
मैंने मामी से कहा, “ठीक है।”
“चलो’ – मामी ने भी कहा।
मैंने बाईक इंडिया कॉफी हाउस की ओर मोड़ दी, हमने कोने की टेबल पर कब्ज़ा कर लिया और दो कप कॉफी का ऑर्डर दिया। मैं और मामी बातें करने लगे, बातें करते-करते मेरी एक टाँग मामी की टाँग से टकरा गई, मैंने टाँग अलग की और सॉरी कहा।
“कोई बात नहीं।” मामी ने कहा और धीरे-धीरे मुस्कुराने लगीं।
कॉफी पीते-पीते मामी और मेरी नज़रें एक-दूसरे से कई बार टकराईं और हम दोनों ही एक-दूसरे की आँखों में देखते रहे।
कॉफी पीकर हम पार्लर की ओर चल पड़े।
मामी का हाथ मेरी कमर पर था, अचानक मैंने ब्रेक लगा दिया, मामी के दोनों स्तन एक साथ ज़ोर से मेरी पीठ से टकराए, और उसकी गुदगुदाहट का मुझे भी अहसास हुआ, और मामी के मुँह से आह निकल गई साथ ही उनका हाथ फिसल कर मेरे लण्ड पर आ गया। मामी ने भी मेरे लण्ड को दबा दिया, मेरे मुँह से भी आह निकल गई।
“अब आया मज़ा?” मामी बोलीं।
“अगर आप चाहो, तो ये मज़ा और भी बढ़ सकता है।”
“कैसे?” मामी ने पूछा।
मैंने बाईक किनारे रोक दी और मामी से कहा कि मामा को मोबाईल पर फोन करके कहो कि शादी के मौसम के कारण सभी ब्यूटी-पार्लरों पर भारी भीड़ है और मुझे दो से तीन घंटे लग जाएँगे।
मामी ने वैसा ही किया।
मामा ने कहा- ठीक है, वैसे भी नन्द तुम्हारे साथ है तो फ्री होते ही आ जाना।
“अब क्या करना है?” मामी ने पूछा।
“अभी तीन बज रहे हैं, क्यों ना कोई फिल्म देखने चलें?”
“नहीं वहाँ ठीक नहीं रहेगा, क्यों ना किसी होटल में चलें।”
“यही ठीक होगा।”
और हम एक होटल की ओर चल पड़े।
हमने ३०० रुपये में एक कमरा ले लिया। कमरे में जाते ही मैंने कमरे को अन्दर से बन्द किया। मैं जैसे ही पलटा, मामी मेरे ऊपर एक भूखे जानवर की तरह टूट पड़ी, इस पर मैं भी मामी पर टूट पड़ा।
मेरे होंठ मामी के होंठों को चूम रहे थे, कभी मामी अपनी जीभ मेरी मुँह में डाल देती, तो कभी मैं अपनी जीभ उनके मुँह में।
चूमते-चूमते मैं मामी के दूधों को ऊपर से ही कस-कस कर दबाने लगा। मामी दर्द से कराहने लगी।
कम से कम पाँच-दस मिनट हम एक-दूसरे को चूमते रहे और मैं मामी के बड़े-बड़े दूधों को दबाता रहा। फिर मैंने मामी की लाल साड़ी को मामी के शरीर से अलग कर दिया और मामी की पेटीकोट का नाड़ा भी खींच मामी की ब्लाउज़ के हुक खोल कर उसे भी मामी के शरीर से अलग कर गिया। अब मामी सिर्फ पैन्टी और ब्रा में मेरे सामने पड़ी थी।
मामी की मस्त फिग़र जैसे तराशा हुआ ताजमहल हो। मामी ३६ डी आकार के लाल रंग की ब्रा पहनी हुई थी जो दो बड़े बड़े पपीतों को बड़ी मुश्किल से सम्हाल पा रहे थे। २९ इंच की कमर, उसके नीचे अलग-अलग रंग के धब्बों वाली पैन्टी जिसके बगलों से मामी की झाँटों के बाल निकल रहे थे। मैंने मामी को अपनी ओर खींचा और ब्रा व पैन्टी को भी उनके शरीर से अलग कर दिया।
मैं जैसे ही मामी की चूत को चाटने के लिए झुका, मामी ने मुझे रोक दिया और कहा, अब मैं तुम्हारे कपड़े उतारूँगी। फिर उन्होंने मुझे बिस्तर पर धकेल दिया और मेरे ऊपर चढ़ गई और मेरी शर्ट के बटन खोलकर मेरी छाती को चूमने लगी, फिर मेरी बेल्ट को जीन्स से निकाल फेंका और जीन्स का बटन खोलकर एक झटके से जीन्स निकाल कर दूर फेंक दिया।
मेरी अण्डरवियर का तंबू बना हुआ था और वह कहाँ मेरे शरीर पर रहने वाला था, मामी ने उसे भी निकाल फेंका। मेरे ६ इंच के लण्ड को देख मामी बहुत उत्तेजित हो गई और मुँह मे लेकर लॉ़लीपॉप की तरह चूसने लगी। जब वह मेरे अण्डकोष से मेरे सुपाड़े तक अपनी जीभ को फेरती तो जन्नत का मज़ा आ रहा था।
थोड़ी देर में मैंने अपना माल मामी के मुँह में ही छोड़ दिया, और उन्होंने सारा का सारा पी लिया, और मेरा लण्ड सिकुड़ने लगा। फिर मैंने मामी को बिस्तर पर लिटाया और उनकी चूत को चाटने लगा। चूत बहुत ही गीली हो चुकी थी और चाटने में बहुत मज़ा आ रहा था। मैं मामी की चूत के गुलाबी दाने को हल्के-हल्के काटने लगा और मामी की सिसकियाँ निकलने लगीं। मामी आआआआहहहह आआआहहह करने लगी, उनकी ये सिसकियाँ पूरे कमरे में गूँज रहीं थीं। तभी मामी ने पूरे ज़ोर से मेरे मुँह पर अपना माल छोड़ दिया, मैंने भी सारा पानी पी लिया। तब तक मेरा मुरझाया हुआ लण्ड भी फौलाद की तरह सख्त हो चुका था।
“मामी अब मैं आपकी सवारी करने वाला हूँ…”
“नहीं मैं तुम्हारी सवारी करूँगी” मामी ने मेरी बात बीच मे ही काटकर कहा।
मैं बिस्तर पर लेट गया, मामी मेरे ऊपर आ गई और मेरे लण्ड को अपनी चूत की दरार पर रख कर आगे होने लगी, तभी मैंने नीचे से एक ज़ोर का झटका मारा, और हमारी झाँटे आपस में मिल गईं। मामी की चीख और आँसू निकल आए। वह बोली, “क्या मेरी चूत को फाड़ना है?”
“चूत फटेगी नहीं, इस पर तो अब गाज़ गिरने वाली है,” कहते हुए मैं एक झटके से पलट कर मामी के ऊपर आ गया, मामी को कुछ समझ ही नहीं आया कि क्या हो गया। मामी बोली – “तुम तो एकदम एक्सपर्ट लगते हो, पर शुरु में आहिस्ता करना, ठीक है?”
मैंने मामी के होंठ चूमते हुए पहला झटका मारा, पच्च की आवाज़ के साथ मेरा लण्ड आधा मामी की चूत में समा गया। मामी हल्के से चीखी… आहहहह और दूसरे झटके से मेरा पूरा लण्ड जड़ तक मामी की चूत में समा गया और मैंने हल्के-हल्के झटके मारने चालू कर दिए और मामी की सिसकारियाँ उसी के साथ बढ़ने लगीं।
मामी की सिसकारियाँ पच्च-पच्च की आवाज़ के साथ जुगलबन्दी कर रही थीं। तभी मैंने अपना लण्ड चूत से निकाल लिया। “ऐसा मत करो, मुझे चोदते रहो अपनी लण्ड से, इसे फाड़ डालो, आज पहली बार मुझको चुदाई का असली आनन्द आ रहा है। मेरा पति मादरचोद अभी तक मुझे ऐसा मज़ा नहीं दे सका जो तुमने आधे घण्टे में दिया है।”
“ठीक है, पर अब मैं जैसा कहूँ, आपको वैसा ही करना होगा मामी।”
“अब तो मुझे मामी कहना बन्द करो।”
“तो क्या कहूँ?”
“कुछ भी कहो, पर मामी नहीं।”
“तो अब आप को मैं राण्ड कहूँगा और आप मुझे गाली देती रहना।”
मामी बिस्तर पर चढ़कर कुतिया बन गई और मैं उसकी गाँड के पीछे खड़ा हो गया, अपने लण्ड को चूत की दरार पर रख कर मामी के दोनों स्तनों को दबाते और गालों को चूमते हुए लण्ड को दबाने लगा। लण्ड फिसलता हुआ चूत में समा गया और मेरे झटके चालू हो गए और साथ ही मेरी राण्ड की सिसकियाँ भी।
वह चिल्लाने लगी… “आआआआहहहह आआआहह… बहनचोओओओददद… चोद दे मुझे… फाड़ दे मेरी चूत… निकाल दे इसका पानी, बहा दे इससे गंगा जमुना…”
“गंगा जमुना दोनों बहेगी और मेरा लण्ड उसमें डुबकी भी लगाएगा” और मैंने झटकों की रफ्तार बढ़ा दी।
पूरे कमरे में फच्च-फच्च और फक्क-फक्क का संगीत बजने लगा।
पाँच मिनट बाद मैंने एक ज़ोर का झटका मारा और मामी पलंग पर पसर गई। मैं भी चूत में लंड डाले मामी के ऊपर ही गिर पड़ा। गिरने के कारण मेरा लंड और अन्दर समा गया और मामी की चीख निकलने से पहले मेरे हाथों ने उसका मुँह बन्द कर लिया और हल्के-हल्के झटके मारता रहा। थोड़ी देर में मामी सामान्य हो गई। मैंने हाथ हटा लिया और अपनी रफ्तार बढ़ा दी। मामी का शरीर अकड़ने लगा। मैं समझ गया कि यह झड़ने वाली है। मैं और तेज़ी से धक्के मारने लगा… तभी मामी झड़ गई।
मैंने लण्ड बाहर निकाला, मामी को सीधा किया और लण्ड मामी की चूत में फिर से पेल दिया।
मेरे झटकों से मामी के दोनों स्तन हिलने लगे, हिलते हुए स्तन बहुत प्यारे लग रहे थे। मैं झुका और एक को चूसते हुए झटके चालू रखे। मैं और मामी एक-दूसरे का भरपूर साथ दे रहे थे। मामी अपनी गाँड उचका-उचका कर मेरा साथ दे रही थी और मैं मामी को पूरे दम से चोद रहा था। गाँड हिलाते-हिलाते मेरा बुरा हाल हो गया था पर मैं रुका नहीं, झटके चालू रखे। थोड़ी देर बाद मेरा और मामी का शरीर अकड़ने लगा, मैं बोला,”मेरी राण्ड, मैं झड़ने वाला हूँ, कहाँ झड़ूँ?”
“अपने वीर्य से मेरी चूत भर दो, इसकी आग को अपने पानी से शान्त कर दो, मैं भी झड़नेवाली हूँ” मामी बोली।
और मैंने अपना वीर्य मामी की चूत में ४-५ झटकों के साथ छोड़ दिया। दोनों एक ही साथ झड़े थे। मैं मामी के ऊपर ही पस्त होकर पड़ा रहा। मामी मेरे बालों पर अपना हाथ फिरा रही थी और बोली, “ऐसा परम आनन्द मुझे पहले कबी नहीं मिला, मेरी चूत को तो अब तुम्हारे लण्ड का चस्का लग गया है। अब शादी भर जब भी मौक़ा मिलेगा, तुम मेरी चुदाई करना और मुझे ऐसे ही आनन्द देते रहना।”
तभी मामी के मोबाईल पर मामा का फोन आ गया, मामा ने कहा “तुम लोग जल्दा घर आ जाओ, दो घण्टे बाद बारात निकलने वाली है।”
“अभी ब्यूटी-पार्लर में मेरा नम्बर आने वाला है, हम थोड़ी देर से आते हैं” और मामी ने फोन बन्द कर दिया।
हमने अपने कपड़े पहने और ब्यूटी-पार्लर की ओर चल पड़े।
शादी में भी मैंने मामी को दो बार चोदा। कैसे, यह अगली कहानी में बताऊँगा। Hindi Porn Stories
मैं अन्तर्वासना का Antarvasna बहुत बड़ा प्रशंसक हूँ। आज मैं आप लोगों को अपनी पहली सेक्स कहानी सुनाने जा रहा हूँ। मुझे यकीन है कि आप सबको यह बहुत पसंद आएगी। कृपया अपने विचार मुझे मेल करें। अब आपका ज्यादा वक्त न लेते हुए मैं अपनी कहानी पर सीधे ही आ जाता हूँ।
मेरी उम्र बत्तीस साल है और मैं शादीशुदा हूँ। फ़िर भी मेरी यह अभी की घटना है जो आप लोगो को लंड और चूत को खुजलाने के लिए मजबूर कर देगी।
मैंने अहमदाबाद में नया रेस्तराँ खोला था जहाँ पर वो आया करती थी।
उसकी उम्र करीब 19 साल के रही होगी और वो एक छरहरे बदन वाली पतली और लम्बी सी लड़की थी।
वो हमेशा बहुत उदास लगती थी और बड़ी मुश्किल से उसके चेहरे पर हंसी देखने मिलती थी।
एक दिन वो अकेली ही आई और रोने लगी तो मुझसे रहा नहीं गया और मैं उसके पास गया।
मैंने उससे उसका नाम पूछा और उसके रोने की वजह भी।
तब तक मेरे मन में उसके लिए कोई सेक्स के विचार नहीं थे, मैं तो बस इंसानियत के नाते ही उसकी मायूसी की वजह पूछने यूं ही उसके पास चला गया था।
मेरे पूछने पर उसने अपना नाम झलक बताया और वो मुझसे लिपट कर रोने लगी।
मैंने उसे तब तो दूर हटा दिया लेकिन फ़िर उसे बाहर बुलाकर अपनी गाड़ी में बिठाकर उसके रोने की वजह पूछी तो उसने बताया कि किसी जॉनी नाम के लड़के ने उसका दिल दुखाया था जिससे वो कभी बहुत प्यार करती थी।
जबकि वो लड़का अब दूसरी लड़की के साथ घूम रहा है, जो उससे बर्दास्त नहीं हुआ और वो उस दिन से उदास रहने लगी थी।
मुझसे उसका रोना नहीं देखा गया तो मैंने ऐसे ही उसे कह दिया कि वो दुखी न हो और जो हुआ उसे भूल जाए क्योंकि आगे भी बहुत लम्बी जिंदगी पड़ी है, उसकी किस्मत में कोई और अच्छा लड़का लिखा होगा।
मैंने गाड़ी में ही उसका बदन सहलाया और उसे सांत्वना देने लगा।
अनजाने में ही मेरा हाथ उसकी पीठ पर चला गया जहां पर उसके ब्रा की पट्टी मेरे हाथों को छू रही थी।
वो मुझे कहने लगी- आप बहुत अच्छे हैं ! मुझे आपकी कंपनी बहुत अच्छी लगती है।
तो मैंने उसे कहा- जब भी मायूसी महसूस हो तो मुझसे फ़ोन पर कर लिया करना।
और हम दोनों ने अपने फ़ोन नंबर का आदान प्रदान किया।
अब वो मुझे अक्सर फ़ोन करने लगी और मैं भी उसे बच्ची समझ कर उसे खुश रखने के चक्कर में उससे बातें करने लगा।
एक दिन मैं उसे फ़िल्म दिखने ले गया जिसका नाम था किलर।
इमरान हाशमी के चुम्बन दृश्य देखकर मैं पलभर के लिए भूल गया कि वो मेरे सामने एक छोटी बच्ची है और मुझे उस नजर से नहीं देखती।
पर मुझसे नहीं रहा गया और मैंने उसे बाहों में लेकर उसके होठों का गहरा सा चुम्बन ले डाला।
तो वो मुझसे नाराज हो गई और कहने लगी- आप मुझसे उम्र में बहुत बड़े है और मैं आपकी बहुत इज्जत करती हूँ, ऐसी गिरी हुई हरकत की मैंने आपसे उम्मीद नहीं की थी।
तो मैं सकते में आ गया और पूरी मूवी उससे एक निश्चित अन्तर बनाकर बैठा रहा और उससे कोई बात नहीं की।
फ़िल्म ख़त्म होते ही मैंने उसे गाड़ी में बिठाया और एक बार सॉरी बोलकर फ़िर उसके साथ कोई बातचीत नहीं की।
पूरे रास्ते हम चुप ही रहे।
मैंने उसे उसके घर उतरने के समय पर फ़िर एक बार सॉरी कहा और सोचने लगा कि मुझसे ऐसी छोटी हरकत कैसे हो गई।
मुझे उसका चुम्बन याद आने लगा।
दो दिन तक उसका फ़ोन नहीं आया तो मैं समझा कि झलक मुझसे उस दिन की बात को लेकर नाराज़ हो गई है और मुझसे रिश्ता तोड़ दिया है, लेकिन फ़िर एक दिन वो मेरे रेस्तराँ पर आई और मेरे पास बैठ गई।
मैं उसे देखकर बहुत खुश हुआ लेकिन बहुत ही सावधानी बरतने लगा कि कहीं फ़िर से कोई गलती ना हो जाए ताकि वो मुझसे फ़िर से नाराज ना हो जाए।
अचानक वो बोली- क्या मुझे अपनी कार में लॉन्ग ड्राइव पर नहीं ले जाओगे?
मैंने हाल ही में एक नई इम्पोर्टेड कार ली थी सो उसे ले गया।
बारिश का मौसम था और वो मेरी ड्राइविंग सीट के बाजू में बैठी थी, उसने मुझसे कहा- उस दिन की घटना के बारे में मैंने बहुत सोचा और फ़िर मुझे लगा कि तुमने कोई गलती नहीं की थी और काफ़ी सोचने के बाद मुझे सिर्फ़ आपका मेरे लिए प्यार ही दिखाई दिया।
मैं यह भूल गई हूँ कि तुम मुझ से उम्र में इतने बड़े हो, मैं भी अब तुमसे प्यार करने लगी हूँ।
बातों बातों में ही वो आप से तुम पर उतर आई थी, यह मुझे अच्छा लगा और मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया और जोर से उसे चूमने लगा।
इस बार उसने कोई विरोध नहीं किया बल्कि मेरा साथ देने लगी।
मैंने बहुत ही लड़कियाँ चोदी थी लेकिन उसके जैसा चुम्बन का मज़ा मुझे कभी भी नहीं आया था सो मैं उसे करीब बीस मिनट तक चूमता रहा।
कार एक साइड पर रुकी हुई थी और बारिश की वजह से हाइवे पर भी कोई नजर नहीं आ रहा था तो मैंने उसे कार की पिछली सीट पर जाने को कहा और मैं भी पीछे चला गया।
इम्पोर्टेड कार की पिछली सीट एक बड़ा सा बेड बन जाती है सो मैंने उसे बड़ा करके उसे अपनी बाँहों में ले लिया और फ़िर उसके होंठ चूसने लगा।
इस बार उसने भी अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी और मुझे बेसब्री से चूमने लगी।
मेरे हाथ धीरे-धीरे उसके बदन पर रेंगने लगे थे।
मैंने उसकी टी-शर्ट ऊपर उठा दी और उसके स्तन एक हाथ से दबाने लगा तो वो मेरे और भी करीब आ गई, उसके मुँह से अब आहें निकलने लगी थी, उसका मुँह लाल हो गया था, उसकी आंखें बंद हो गई थी और वो मुझसे ऐसे लिपट गई थी जैसे कि कोई बेल पेड़ से लिपटी हो।
आखिर मैंने उसकी टी-शर्ट और ब्रा दोनों निकाल दिए। ओह माय गोड ! उसके स्तन क्या खूबसूरत थे ! छोटे से लेकिन बहुत ही ठोस !
अब उससे भी सब्र नहीं हो रहा था तो वो मुझे कहने लगी कि उसे कुछ हो रहा है।
उसका यह पहली बार था तो उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसे क्या हो रहा है।
मेरा भी वैसे तो इतनी कम उम्र की लड़की के साथ यह पहली बार ही तो था।
मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया जो फ़ूल कर एक सख्त लोहे की छड़ जैसा हो गया था।
पहले तो उसने उसे पकड़ने से मना किया लेकिन बाद में वो मान गई और उस पर हाथ लगाया।
लेकिन वो अभी भी शरमा रही थी और हाथों को कोई हरकत नहीं दे रही थी।
सो उसकी शर्म दूर करने के लिए मैंने आखिर में अपनी पैंट और अन्डरवीयर खोल कर पूरा लंड निकाल कर उसके हाथ में दे दिया जो कि अब तन कर करीब साढ़े सात इंच का हो गया था और फ़ूल कर तीन इंच के लोहे के पाइप जैसे सख्त भी हो गया था।
वो अभी भी हिचकिचा रही थी सो मेरे लंड पर हाथ रखकर बैठी रही।
अब मैंने देर न करते हुए उसकी जींस उतार दी।
उसने थोड़ी सी ना-नुकुर की, बाद में सहमत हो गई तो मैंने उसकी अन्डरवीयर भी निकाल दी।
अब हम दोनों नंगे थे।
मैंने उसके ठोस स्तनों को चूसना शुरू किया।
अचानक मैंने अपने लंड पर उसके हाथ का दबाव महसूस किया तो मेरे रोंगटे खड़े हो गए।
मैंने उसकी चूत के दर्शन करने के लिए अपना सर नीचे किया- क्या चूत थी उसकी ! हल्के से सुनहरे रोएँ ही आए थे उसके ऊपर ! और इतनी कसी हुई थी की मुश्किल से मेरी एक उंगली भी उसमें न जा सके।
मैंने उसकी चूत को एक हाथ से रगड़ना शुरु किया तो दूसरे हाथ से उसके स्तन दबाने लगा और मेरे होंठ अभी भी उसके होठों को चूस रहे थे।
वो भी मुझे बराबर का साथ दे रही थी।
उसकी आंखें नशे में बंद हो गई थी और वो बेसब्री से मेरे लंड को हाथों मे लिए अपनी चूत पर रगड़ने लगी।
मैंने लंड को चूत से छूने दिया तो मुझे वहाँ पर गीलापन महसूस हुआ।
मैंने उंगली से देखा तो उसकी चूत पानी छोड़ कर एक दम चिकनी और मस्त हो गई थी।
मैंने अब देर न करते हुए उसे लिटा दिया और उसके ऊपर आ गया।
मैंने उसे पूछा- कभी सेक्स किया है?
तो उसने मुझे ना कहा।
मैंने अब हल्के से अपने लंड का सुपारा उसकी चूत में घुसेड़ा तो वो दर्द के मारे तिलमिला उठी और मुझे अपने ऊपर से धकेलने लगी।
लेकिन मैंने उसे ठीक से पकड़ रखा था इसलिए वो हिल नहीं सकी।
अब मैं ज्यादा लंड अन्दर करने की बजाये उतना ही डाले हुए उसके स्तन दबाने लगा, साथ में उसे चूमने लगा।
थोड़ी देर में ही उसकी चूत के पानी की वजह से लंड के सुपारे ने उसकी चूत में जगह बना दी तो वो नीचे से अपने कूल्हे ऊपर नीचे करने लगी। अब मेरे तर्जुबे ने मुझे कहा कि चूत तैयार है, पेल दो।
तो मैंने हल्का सा धक्का मारा और मेरा आधा लंड उसकी पनियाई चूत में घुस गया और वो जोर से चिल्लाई।
मैंने नीचे देखा तो उसकी चूत की ज़िल्ली फट गई थी और उसमें से खून की दो बूंदे छलक आई थी।
पर मैंने उसका मुँह अपने होठों से फ़िर एक बार बंद किया और आधा ही लंड उसकी चूत में डाले फ़िर से अपने मोटे लंड के लिए जगह बनाने लगा।
उफ़ क्या कसाव था उसकी चूत में ! ऐसा लगता था कि मेरा लंड छिल जाएगा। एकदम कस के उसकी चूत की दोनों फ़ांकों ने उसे जकड़ रखा था।
उसकी चूत बुरी तरह से चौड़ी होकर फ़ैल गई थी और वो मेरे बाहों में से निकलने के लिए छटपटा रही थी लेकिन मैं कहाँ उसे छोड़ने वाला था अब।
आहिस्ता से उसके प्यारे और मासूम से चेहरे पर से दर्द की लकीरें कम होने लगी और वो अपनी गांड उछाल बैठी तो मैंने कस के जो एक धक्का मारा कि मेरा पूरा लंड उसकी चिकनी चूत में समां गया और उसकी बच्चेदानी से जा टकराया।
उसने फ़िर एक बार चिल्लाने की कोशिश की लेकिन मेरे होठों ने उसे रोक दिया।
अब मैं उसके ऊपर बिना कोई हरकत किए पड़ा रहा।
थोड़ी देर के बाद जब वो सामान्य हुई तो मैंने धक्के मारने चालू किए।
वो भी अब अपने दांतों को अपने होठों से भींच कर होने वाले दर्द को बर्दाश्त करने लगी।
फ़िर उसे दर्द का एहसास कम हुआ तो उसने अपना मुँह खोल दिया और अपनी आंखें बंद कर ली और प्यार से अपनी गांड उचकने लगी।
अब मैंने भी धक्के थोड़े से तेज कर दिए थे।
थोड़ी देर में ही उसने मुझे जोर से जकड़ लिया और गहरी सांसें लेने लगी तो मुझे पता चला कि उसका पानी निकल गया है।
उसे उसकी चूत मे बुरी तरह से फंसे मेरे मोटे लंड का एहसास फ़िर एक बार होने लगा और वो मुझसे अपना लंड निकालने को कहने लगी।
मैंने उसे ढांढस बंधाया कि थोड़ा सा दर्द होगा, पहली बार है इसलिए, लेकिन फ़िर मज़ा आएगा।वो बहुत छटपटा रही थी लेकिन मैंने उसे कस के रखा हुआ था जिससे वो निकल नहीं सकती थी।
मेरा लंड अभी भी उसकी चूत में बहुत कस के आ-जा रहा था।
इतनी टाइट चूत मुझे बहुत अरसे के बाद मिली थी और इधर मेरा लंड था कि पानी छोड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था।
इधर झलक की हालत बहुत ही ख़राब हो रही थी। मैंने अब जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए।
मेरे धक्कों से वो और मेरी कार दोनों बुरी तरह से हिल रहे थे।
60 से 70 धक्कों के बाद आखिर में मेरे लंड ने पानी उगलना शुरू किया तो जैसे कि उसकी चूत में सैलाब ही आ गया।
मेरे लंड ने इतना सारा पानी छोड़ा कि उसकी टाइट चूत से भी रिस कर बाहर आकर उसकी गांड के ऊपर से बहने लगा।
मेरा लंड अभी भी टाइट था और सिकुड़ने का नाम नहीं ले रहा था…
आगे की कहानी दूसरे भाग में,
आपको मेरी और झलक की कहानी कैसी लगी, जरुर बताइयेगा। Antarvasna
आज फिर से मैं नयी देशी भाभी चुदाई कहानी ले कर आया हूं।
उस गांव से मेरा ट्रांसफर 45 किलोमीटर दूर एक गांव में हो गया था।
यह गांव थोड़ा बड़ा था और यहां के लोग थोड़े पढ़े लिखे और सुखी सम्पन्न थे।
गांव के लोगों के पास खेती के लिए काफी बड़ी जमीनें थी और लोग राजकीय पहुंच भी रखते थे।
खैर जहां समृद्धि होती है वहां टकराव भी होता है.
तो इस गांव में ताकतवर लोगों के गुट बने हुए थे और ये गुट आपस में अक्सर लड़ते रहते थे.
तो यह गांव किसी भी कर्मचारी के कठिन पर माल वाला पोस्टिंग माना जाता था।
मुझे मेरे साथी कर्मचारियों ने इस गांव के बारे में यह सब बताया था- तुम जैसे सीधे सादे आदमी को इस गांव में नौकरी करना मुश्किल है। यहां के लोगों की पहुँच ऊपर तक होने से वे हमारे जैसे छोटे कर्मचारियों को दबा के रखते हैं।
अब मेरा इस गांव से पाला पड़ ही गया था तो सोचा कि जो होगा देखा जायेगा।
मैंने वहां के पुराने पटवारी से चार्ज लिया और काम देखने लगा।
दूसरे दिन गांव के सरपंच से मेरी मीटिंग थी।
सरपंच एक महिला थी.
उसने मिठाई का डिब्बा देकर मेरा स्वागत किया और कहा- आपको हम यहां कोई परेशानी नहीं होने देंगे. हम सब साथ मिल कर काम करेंगे. आप भी हमारा साथ दीजिएगा।
मुझे काफी अच्छा लगा और मैंने महसूस किया कि सरपंच काफी होशियार महिला थी।
बाद में जानने को मिला कि सरपंच तो भले दिल की और अच्छी है पर उसका पति गांव का बाहुबली था और सरफिरा भी!
उसका गुट काफी बड़ा और ताकतवर था और काफी लड़ाई झगडे के बाद उसे सरपंच का पद दिलवाया था।
अगले कुछ दिनों में गांव के बाकी गुट वाले भी मुझसे मिलने आये और उन सबकी मुझसे समर्थन के लिए मांग थी तथा अप्रत्यक्ष रूप से धमकी भी थी की मैं उन्हें ही समर्थन करूं।
इस गांव में शुरु से ही मैंने अच्छे से कामकाज चालू किया तो लोगों के काम समय से होने लगे।
मेरे पहले के पटवारी गांव के कोई ना कोई गुट में मिल जाते थे और काम कराने के पैसे भी लेते थे तो आम लोगों में नाराजगी रहती थी।
वैसे भी गांव के गुट वाले अपनी पसंद का ही पटवारी का गांव में पोस्टिंग करवाते थे।
मैं सभी का काम अच्छे से समय पर और बगैर पैसे लिए करने लगा तो एक दो महीने में ही मेरी गांव में काफी अच्छी छवि उभर आई थी।
दूसरी तरफ दो महीने से मुझे कोई चूत नहीं मिली थी तो मेरा बुरा हाल था।
रश्मि की बहुत याद आती थी, साथ में नम्रता की गोरी और फातिमा की काली चूत भी मुझसे भूली नहीं जा रही थी।
मैंने रश्मि को वचन दिया था तो मैं उस गांव की तरफ जाना नहीं चाहता था।
हालांकि नम्रता और फातिमा की चूत तो मुझसे चुदाने को आज भी तैयार थी।
पर मैंने अब इसी गांव में चूत ढूँढना का तय किया।
यह इस गांव के हिसाब से मुश्किल और मेरे लिए ख़तरनाक भी था क्योंकि पकड़ा गया तो इस गांव के लोग जान से भी मार सकते थे।
पर मेरे लिए इस गांव में किस्मत ने पहले से अच्छा तय करके रखा था।
मैं नयी जगह और कामकाज के चलते अब तक लोंडियाबाजी में नहीं पड़ पाया था. पर अब मैंने गांव में चूत ढूँढना शुरु किया।
पहले तो मैंने सरपंच के बारे में सोचा।
वह 35 साल की घरेलू महिला थी. ऐसे तो वह काफी गोरी थी थोड़ी सी मोटी पर उसका चेहरा खास मुझे प्रभावित नहीं कर पाया. वैसे भी वह मेरा छोटे भाई की तरह ख्याल बहुत रखती थी तो मेरी नीयत उसके लिए खराब नहीं हो पायी।
मैंने दूसरी भाभियों और लड़कियों के बारे में सोचा।
कुछ भाभियां और लड़कियां मेरे पास काम करवाने अक्सर आया करती थी तो उसमें ही जुगाड़ करने की फिराक में रहने लगा।
दो महीने बाद एक बार मैं ऑफिस के दूसरे कमरे की खिड़की खोल रहा था जिसे कभी कभार ही खोलते थे क्योंकि उस कमरे में पुरानी फाइलें और रेकोर्ड ही रखते थे।
मुझे एक पुरानी फाइल की जरूरत पड़ी थी तो मैं उस कमरे में गया और वहां की खिड़की खोली।
खिड़की से बाहर थोड़ी ही दूर एक जवान औरत कपड़े सुखाती दिखी।
उसकी पीठ मेरी तरफ थी पर मैं तो उसे देखता ही रह गया।
उसका बदन कसा हुआ गठीला और एकदम गुलाबी था जिससे मेरे पैंट में हरकत सी होने लगी।
काफी देर तक मैं उसे निहारता रहा।
फिर वह मेरे सामने घूमी तो देखा कि मैं इसे जानता था।
उसका नाम नाम रेखा था, वह मेरे पास कुछ काम के लिए तीन दिन पहले ही आयी थी।
रेखा सरपंच की रिश्ते में दूर की देवरानी थी और सरपंच के मायके के गांव की ही थी तो सरपंच से उसकी काफी बनती थी।
सरपंच ने मुझे उसका काम जल्दी निपटाने का अनुरोध भी किया था।
काम में व्यस्त होने की बजह से मैंने उस पर ध्यान नहीं गया था पर आज उसका कामुक बदन देख कर मेरे तो तोते उड़ गये थे।
मैंने तुरंत ही एक प्लान बनाया और सरपंच के जरिए उसे संदेश दिया कि उसके दिये कागज में एक दो कागज कम हैं.
तो वह दूसरे दिन ऑफिस आ गयी।
ऑफिस में कोई नहीं था, वह अपने छोटे बच्चे के साथ आयी थी।
मैंने उसे बहुत अच्छी तरह से निहारा।
आज उसने सर पर घूंघट नहीं निकाला था तो मैं जी भर कर उसे निहारता रहा।
शायद उसे भी इस बात का अंदेशा हो गया था।
मैंने उससे हंसते हुए काफी बातें की.
उसने कहा- अरे साहब, ऐसे छोट मोटे कामों के लिए थोड़ा बुलाते हैं आप खुद ही निपटा लेते ना!
वह भी थोड़ी बातूनी और मजाकिया स्वभाव की निकली।
शाम को घर आकर मुझे उसकी कल्पना करते हुए हाथ हिला के आग को शांत करना पड़ा।
रेखा छब्बीस साल की थी और उसका एक चार साल का बच्चा भी था.
उसका फीगर करीब 36-32-34 का होगा।
उसके नाक नक्श ऐसे कि बोलीवुड की हीरोइन से टक्कर ले सकें।
वह ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं थी पर काफी होशियार थी।
मैंने सोचा कि पति ने भी क्या किस्मत पायी थी।
अब मैं रोज उस कमरे की खिड़की से रेखा को निहारने लगा।
वह अपने पति और बच्चे के साथ अलग रहती थी, उसके घर से सट कर ही उसके ससुर और जेठ के भी घर थे।
उसका घर का मुख्य द्वार बिल्कुल मेरे ऑफिस के पीछे ही पड़ता तो मैं खिड़की से ही उसके घर में भी देख सकता था।
मैंने कई बार कपड़े सुखाते या झाड़ू निकालते समय उसकी ब्रा और क्लीवेज भी देखी थी।
अब उसकी चूत मिल जाए तो जन्नत मिल जाए।
ऐसे ही तीन चार महीने निकल गये।
उसे भी शायद पता लग गया था कि मैं खिड़की से उसे झांकता हूँ।
वह अब मेरे सामने मुंह रख कर कपड़े सुखाती थी और कभी मुस्कुराती भी थी।
बात यहीं आकर रुक गयी थी, कुछ आगे नहीं बढ़ पा रही थी।
उससे बात करने की मेरी हिम्मत भी नहीं हो रही थी।
फिर समय ने करवट बदली और वह एक बार शाम को पांच बजे के आसपास सरपंच से मिलने ऑफिस आयी।
सरपंच ने उसे पारिवारिक काम से बुलाया था।
वैसे मेरे ऑफिस में दोपहर के बाद ज्यादा काम नहीं रहता था पर सरपंच ने अब दोपहर के बाद ऑफिस में बैठना शुरू किया था।
अब यह सिलसिला चल पड़ा की वह सरपंच के साथ गप्पे लड़ाने ऑफिस आ जाती थी।
मेरा टेबल सरपंच के पास ही था तो मैं उसे देखते रहता था और उनकी बात सुनता था।
असल में सरपंच अपने छोटे भाई के लिए रिश्ता ढूँढ रही थी. उसी चक्कर में वह रेखा को बुलाती थी कि फलाना गांव में फलाने आदमी की बेटी अच्छी है।
सरपंच मुझे बहुत मानती थी तो उन दोनों की बातों में मुझे भी शामिल करती थी.
कभी कभी मज़ाक भी हो जाता था।
रेखा बहुत बातूनी थी और हमेशा मजाकिया बातें करती रहती थी।
मैं रेखा को टार्गेट करके बातों के शोट मारता तो वह भी मुझे करारे जवाब देती थी।
सरपंच हमारी बातों का मज़ा लेती थी।
तीन महीने तक ऐसा चलता रहा।
एक बार वह ऑफिस में आयी तो मैं अकेला ही था.
सरपंच किसी काम से बाहर गयी हुई थी.
तो वह वापिस जाने लगी.
उसी वक्त चाय वाला लड़का चाय लेकर आया.
तो मैंने रेखा को रोका और चाय पीने को बोला.
तो वह रुक गयी।
चाय पीते पीते वह बोली- विशाल जी, आपने अब तक सगाई क्यों नहीं की? कोई पसंद नहीं आयी क्या?
मैंने कहा- अभी मेरी उम्र ही क्या है … शादी वादी करके क्या फायदा!
ऐसे थोड़ी देर बात हुई.
फिर जाती हुई वह बोली- जल्दी से कोई ढूँढ लीजिए, कब तक आप यों ही खिड़की से झांकते रहोगे।
मैं कुछ समझ पाऊं … उससे पहले वह इतना बोल कर झट से चली गई।
मुझे समझ आ गया कि वह भी मुझे लाइन दे रही थी।
दूसरे दिन जब मैं खिड़की से उसे झांकने गया तो देखा कि आज वह मेरे सामने ही चेहरा करके मुस्कुराती हुई कपड़े सुखा रही थी।
जाते जाते बाल्टी में बचा पानी उसने जोरदार मुस्कान के साथ मेरी तरफ फेंका।
मैं समझ गया अब इसकी चूत दूर नहीं है।
अब वह खिड़की के पास आकर मुझसे मज़ाक भी कर लेती।
मैंने उसे कई बार शहर घूमने आने का न्योता दिया.
पर वह हमेशा अपने पति के साथ ही शहर आती थी।
एक बार उसने कहा- मेरी मौसी शहर में रहती हैं और मैं उनके घर चार पांच दिन के लिए रहने जाऊँगी.
मौसी के घर का जो पता उसने बताया, वह स्थान मेरे घर से आधा किलोमीटर दूर था।
उसी दौरान मेरी भी दो दिन की छुट्टी थी।
उसने कहा- चलो आप बहुत दिन से निमंत्रण दे रहे थे तो आपकी मेहमान नवाजी भी देख लेते हैं।
मैंने उसे शहर में पास वाले पार्क में मिलने के लिए कहा।
आखिर वह दिन भी आ गया.
वह पार्क में अपने बच्चे के साथ आयी हुई थी।
मैं भी सज-धज के वहां पहुंचा।
उसके बच्चे को अपनी गोद में लेकर मैं उससे बातें करने लगा।
फिर मैंने उसे रूम पर आने को बोला तो थोड़े नखरे दिखा कर वह मान गई।
रूम पर जाकर उसके बच्चे को मेरे बेड पर सुला दिया और हम नीचे चटाई पर बैठ गए।
उसने बताया कि उसकी शादी अठारह की उम्र में हुई थी। शुरू में उसका पति बहुत अच्छे से उसको रखता था फिर बाद में वह सरपंच के पति के संगत में आया और वह पैसों के पीछे पड़ा। वह ट्रांसपोर्ट का बिज़नस करता था जिसमें अच्छी कमाई हो जाती थी. पर अब वह और ज्यादा कमाने के चक्कर में पड़ गया था और राजनीति में भी बड़ा पद पाना चाहता था। सरपंच के पति के अच्छे बुरे सब कामों में वह शामिल रहता है. उस पर पुलिस केस भी चल रहे थे। महीने में करीब बीस दिन घर से बाहर ही रहता था और जब घर आता था तो भी अपने गुट वालों के साथ मीटिंग या पुलिस या कोर्ट वकील या प्रोपर्टी के कामों में व्यस्त रहता। आठ दस दिन घर आता उसमें भी दो तीन दिन ही वह पत्नी और बच्चे के लिए ठीक ठाक समय दे पाता।
दूसरी बात यह थी कि रेखा को अपनी खूबसूरती पर काफी नाज था।
वह चाहती थी कि हर कोई उसकी खूबसूरती का लोहा माने।
पर छोटी उम्र में ही उसकी शादी हो गई और उसके पति ने भी दो तीन साल ही उसकी खूबसूरती को भोगा था। अब वह घर पर होता तो खाली अपनी हवस बुझाने ही रात को रेखा के ऊपर चढ़ जाता और अपने आपको शांत कर के जल्दी ही उतर जाता।
उसमें भी कई बार तो नशे में चूर होकर रेखा को भोगता तो अब रेखा को संतुष्टि नहीं मिलती।
ना तो वह रेखा की तारीफ करता और न उसे समय दे पाता।
पर रेखा की जवानी अब भी बहुत कुछ मांग रही थी जो उसका पति उसे नहीं दे रहा था।
जब रेखा ने मुझे उसके पीछे लट्टू पाया तो उसके अरमान फिर से हरे भरे हो गये।
उसने सरपंच से मेरी काफी तारीफ सुन रखी थी तो वह भी मेरी तरफ आकर्षित हुई थी।
मैं उससे चिपक कर बैठ गया और बातों बातों में मस्के मारने लगा वह भी मुझे करारे जवाब दे रही थी।
वह मुझसे पांच साल बड़ी और एक बच्चे की मां थी आज मैं उसे चोदने जा रहा था।
मैंने उसका हाथ अपने हाथ में लिया और उसके कंधे पर भी एक हाथ रख दिया।
जब मैंने उसके गालों पर एक चुम्बन लिया तो वह दूर जाने लगी.
पर मैंने उसे पकड़े रखा और फिर उसके होंठों से अपने होंठ लगा दिए।
वह भी मेरा साथ देने लगी।
मैंने उसकी पीठ के खुले हिस्से को काफी सहलाया और चूमा भी!
इससे वह काफी गर्म हो चुकी थी.
फिर मैंने उसके बोबे पकड़ लिये और दबाने लगा।
उसके बोबे फातिमा से भी बड़े थे और वह नम्रता से भी ज्यादा गोरी थी तथा रश्मि की तरह गर्म थी।
उसने खुद ही ब्लाउज और ब्रा उतारी फेंकी।
वह बार बार विशाल कर रही थी.
मतलब था कि वह जल्दी मेरा लौड़ा अपनी चूत में चाहती थी.
पर मैं उसे थोड़ा तड़पाना चाहता था और धीरज के साथ उसकी खूबसूरती को पीना चाहता था।
मैं उसके स्तनों को चूसने और दबाने लगा.
वह भी मदहोश हो गई थी।
मैंने उसके पूरे शरीर को चूमा तो वह पागल सी हो गई और हांफने लगी।
वह बोली- विशाल जल्दी करो, अब सब्र नहीं होता है।
मैंने भी अपने कपड़े उतारे और उसने अपने बाकी बचे कपड़े उतार फेंके।
उसने मेरा लंड अपने हाथ में पकड़ा और सहलाने लगी, फिर टोपा चाटने लगी और फिर पूरा लंड चूसने लगी।
मैं तो जैसे जन्नत में पहुंच गया था क्योंकि एक परी मेरा लंड चूस रही थी।
थोड़ी देर बाद उसने मेरा लंड अपने मुंह से निकला और बेड पर सीधी लेट गई और मुझे कहा- विशाल जल्दी आओ, मुझसे रहा नहीं जाता।
मैं भी उसके उपर चढ़ गया और लंड उसकी चूत में डालने लगा।
उसकी गोरी चूत पर काफी काली झांटें थी तो मुझे चूत का छेद ढूंढने में तकलीफ हो रही थी.
पर उससे रहा नहीं गया और उसने मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत में सेट किया और बोली- अब धक्का मारो।
मैंने एक ही झटके में पूरा लौड़ा उसके अंदर घुसा दिया तो उसके मुंह से आह निकली।
मैं उसे धमाधम चोदने लगा.
वह विशाल आह आह और जोर से जोर से ऐसी आवाजें निकाल रही थी।
मैं भी बोल रहा था- मेरी रानी रेखा, तुम्हें जब से देखा तब से मेरे मन में शोले भड़क रहे थे। आज तू मिली है मेरी जान!
ऐसा बोलते हुए मैं उसे जोर जोर से चोद रहा था।
ज्यादा जोश के कारण दस मिनट में ही मेरा पानी छूटने को हुआ तो मैंने कहा- डार्लिंग, पानी कहां निकालूं?
उसने कहा- अंदर ही निकालो।
मैंने उसके अंदर ही अपना वीर्य निकाल दिया और उसके ऊपर ही लेटा रहा।
काफी देर बाद हम अलग हुए और कपड़े पहन कर एक दूसरे की बाहों में लिपट कर बैठ गये।
उसने कहा- काफी समय बाद किसी ने इतने प्यार से मुझे चोदा है। मेरा पति तो बस दारू के नशे में मुझ पर चढ़ जाता है और पांच ही मिनट में पानी छोड़ कर लुढ़क जाता है। मैं प्यासी ही रहती हूँ।
आधा एक घंटा हमने बातें की।
वह फिर से चुदना चाहती थी तो बार बार अपने बोबे मेरे मुंह पर घिसती और मेरे लंड को सहलाती.
तो मेरा लौड़ा भी अब खड़ा हो गया था।
हमने फिर कपड़े उतारे और फिर से चुम्माचाटी और बोबा दबाई की।
उसने मेरा लंड फिर से चूसा तो वह लोहे की छड़ की तरह खड़ा हो गया।
मैंने फिर से उसकी चूत में लौड़ा डाल दिया और चोदने लगा।
इस बार धैर्य के साथ चुदाई की तो आधा घंटा चोद सका।
फिर से मैंने उसकी चूत में अपना वीर्य छोड़ा।
इस चुदाई के बाद वह अपनी मौसी के यहां गयी।
वह अपनी मौसी के घर पांच दिन तक रुकी और मैंने भी अपनी ऑफिस में छुट्टी ले ली और हम रोज मिलते रहे और चुदाई करते रहे।
फिर गांव आ कर वही सिलसिला खिड़की से झांकने का चालू हुआ।
हम दोनों एक-दूसरे को फ्लाइंग किस करते तथा दिन में चार पांच बार खिड़की पर ही मिलन हो जाता।
ज्यादा कुछ नहीं कर पाते थे क्योंकि उसका पति उसके मौसी के घर से वापस आने के दूसरे दिन ही घर आ गया था।
एक हफ्ते बाद उसका पति वापस काम पर लौटा तो उसने मुझे दोपहर में अपने यहां खाने पर बुलाया।
हमने साथ में खाना खाया और खूब चुदाई की.
ऐसे दो महीने चलता रहा।
बाद में उसने मुझे बताया कि वह मां बनने वाली है और उसके बच्चे का बाप मैं ही हूं।
मेरी गांड फट गई.
मैंने कहा- अब क्या करेंगे?
वह हंसती हुई बोली- बिल्कुल फट्टू हो तुम. इसमें डरने की क्या बात है. यह तो खुशी की बात है।
मैंने कहा- किसी को पता चल गया तो क्या होगा?
उसने कहा कि उसने सोच समझ कर ही बच्चा रखवाया था। वह अपने पति की जगह मेरे बच्चे की मां बनना चाहती थी इसलिए उसने मुझे कभी कोंडोम इस्तेमाल नहीं करने दिया था और मेरा वीर्य अपनी चूत में डलवाती थी।
उसने कहा- तुम तो खुश हो. बस किसी को बताना मत कि यह बच्चा तुम्हारा है. यह बच्चा तो हमारे प्यार की निशानी है।
तब जाके मुझे भी राहत हुईं और मैं भी खुश हुआ।
नौ महीने बाद रेखा ने एक प्यारी सी बेटी को जन्म दिया।
रेखा ने मुझे कहा- यह तुम्हारी बेटी है तो तुम्हीं इसका नाम रखो।
मैंने उसका नाम प्रेरणा रखा।
बाद में मौका मिलने पर मेरी और देशी भाभी चुदाई चालू ही रही।
उसी ने मुझे गांव की कुंवारी चूत भी दिलाई जो आपको बाद में बताऊंगा।
लेखक के आग्रह पर उनकी ईमेल आईडी प्रकाशित नहीं की जा रही है।
यह देशी भाभी चुदाई कहानी आपको कैसी लगी, कमेंट्स में बताएं.
फर्स्ट लव वर्जिन सेक्स का मजा मैंने 19 साल की उम्र में कॉलेज के लड़के के साथ लिया. गाँव से निकल कर शहर के कॉलेज में प्रवेश लिया और जल्दी ही एक दोस्त बना लिया.
सभी को नमस्कार, मेरा नाम अनुक्ति है मुझे घर पर सभी अनु नाम से ही बुलाते हैं.
मैं मध्य प्रदेश से हूँ.
मेरे घर पर मैं, पापा और मम्मी हैं.
पापा और मम्मी दोनों सरकारी नौकरी करते हैं.
दोस्तो, इस वेबसाइट की सेक्स कहानियां मैं 2011 से पढ़ती आ रही हूँ पर आज पहली बार अपनी सेक्स कहानी लिख रही हूँ.
यह 2013 की बात है.
मैं स्कूल की पढ़ाई गांव से पूरी कर चुकी थी. मैं कॉलेज में पढ़ने के लिए शहर में आई थी.
शहर आते वक्त मेरे साथ स्कूल की दोस्त छवि ही थी जिसने मेरे कॉलेज में दाखिला लिया था.
बाकी सभी सहेलियां शहर में तो थीं पर अलग कॉलेज और कोर्स में थीं.
इधर कॉलेज के हॉस्टल में हम दोनों साथ में ही रहती थी.
कॉलेज में हमारे नए दोस्त बन गए थे.
क्लास में मेरी बहुत लड़कों से अच्छी दोस्ती हो गई थी.
मेरी क्लास में ही ऋषि भी था.
वह देखने में लंबा, तगड़ा और मिलनसार लड़का था.
मेरी दोस्ती ऋषि से थी.
हम बहुत कम समय में एक दूसरे से बहुत अच्छे दोस्त बन गए थे.
ऋषि और मैं फोन पर एक दूसरे को मैसेज भेज कर बातें करते थे.
हमारे बीच कभी कभी नॉनवेज बातें भी हो जाती थीं.
छवि भी इस बात को जानती थी.
उसने तो 3 महीनों में ही अपना एक ब्वॉयफ्रेंड भी बना लिया था.
इसी तरह से कॉलेज का एक सेमेस्टर निकल चुका था.
हर लड़की चाहती है कि उसे हर लड़का देखे.
मैं ज़्यादातर सलवार कमीज़ ही पहन कर कॉलेज जाया करती थी. मैं जानबूझ कर थोड़ा गहरे गले वाला कुर्ता पहनती थी ताकि जरा सा ही झुकने पर मेरा क्लीवेज दिख जाए.
ऋषि देखने में अच्छा लड़का था.
उसके पापा एक फैक्ट्री के मलिक थे.
उसकी एक छोटी बहन थी जो 12 वीं में थी.
उसकी मम्मी भी पापा के बिज़नेस में हाथ बंटाती थीं.
उसके पास पैसों की कोई कमी नहीं थी, यह बात हमें भी कुछ दिनों पहले ही पता चली थी जब हम सभी फ्रेंड्स ऋषि के बर्थडे पर उसके घर गए थे.
ऋषि के घर का वैभव देख कर साफ पता चलता था कि उसके पापा रईस आदमी हैं.
पर ऋषि ने कभी भी अपने धन का घमंड नहीं किया था.
वह दिल का साफ और अच्छा इंसान था.
ऋषि और मैं अक्सर क्लास बंक करके गार्डन में बातें करते रहते थे.
धीरे धीरे हमारे बीच नजदीकियां बढ़ती गईं.
वह मेरे करीब आने की कोशिश करता, मुझे छूने की कोशिश भी करता.
मैं भी उसे मना नहीं करती थी.
उसने वैलेंटाइन पर मुझे प्रपोज किया.
मैंने भी कुछ ज्यादा सोचा नहीं और हां कर दी.
ऐसे ही समय गुजरता रहा.
कभी कभी वो मुझे मौका पाकर छेड़ता, मेरी गांड को मसल दिया करता था.
उसका ये स्पर्श अब मुझे भी अच्छा लगने लगा था.
हम दोनों मौका मिलते ही एक दूसरे को किस भी कर लिया करते थे.
वह मेरे मम्मे दबाने का मौका भी कभी नहीं छोड़ता था.
फिर धीरे धीरे अब बात किस से बढ़कर बूब्स दबाने और चूसने तक आ चुकी थी.
मुझे कोई ऐतराज नहीं था. असल में मैंने ही फर्स्ट लव वर्जिन सेक्स का मजा ले लेना चाहती थी.
ऋषि चाहता था कि मैं लंड चूसूं … पर मैंने मना कर दिया, मैंने उसका लंड कभी नहीं चूसा था.
बस इसी तरह चल रहा था.
ऋषि सेक्स के लिए आतुर हुआ जा रहा था.
पर मैं एक अनजाने डर की वजह से उसे मना करके टाल दिया करती थी.
कुछ दिन बाद ऋषि ने कहा- आज रविवार है. पास में ही कहीं घूमने चलते हैं.
मैं भी फटाफट तैयार हो गयी.
वह मुझे लेने के लिए आया और हम दोनों बाइक पर घूमने के लिए निकल गए.
मैं छवि को बोल कर आई थी कि ऋषि के साथ में बाहर घूमने जा रही हूँ.
मैंने ऋषि से पूछा- कहां चलना है?
तो उसने बताया- शहर से पास में ही बहुत बड़ा तालाब है. वहां चारों ओर जंगल हैं, घने पेड़ हैं, प्रकृति का नज़ारा है. मजा आएगा, वहीं चलते हैं.
मैं राजी हो गई.
वहां जाकर देखा तो कुछ ही लोग थे.
उनमें भी ज़्यादातर कपल दिख रहे थे.
तालाब के दूसरी ओर पानी बह रहा था तो वहां कुछ लोग नहा भी रहे थे.
हम भी वहीं चले गए.
ऋषि ने कहा- क्या विचार है?
मैंने कहा- मैं नहीं आती.
वह मुझे ज़बरदस्ती खींच कर पानी में ले गया.
और हम दोनों पानी में मस्ती करने लगे.
वह मुझ पर पानी उड़ाता और गीला करने की कोशिश करता.
थोड़ी देर बाद हम दोनों थक कर वहीं पेड़ के नीचे बैठ गए और बातें करने लगे.
भीड़ कम होती गयी.
ऋषि ने कहा- अनुक्ति, चलो थोड़ा आगे आस-पास घूम कर आते हैं.
मैंने कहा- यहां क्या ही घूमेंगे?
पर वो नहीं माना और हम दोनों पैदल ही आगे बढ़ गए.
वहां कोई नहीं दिख रहा था.
थोड़ा और आगे गए तो एक बड़ी चट्टान के पीछे झाड़ियों में पेड़ के नीचे हमने एक कपल को देखा.
वो दोनों कपड़े पहन रहे थे.
उन्होंने हमें नहीं देखा.
फिर ऋषि ने कहा- चलो अनु, उनके निकलते ही वहीं चलते हैं.
मैं समझ गयी थी कि वहां पर जाने के बाद क्या होना है.
पर बिना कुछ कहे मैं भी चल दी.
वहां जाने के बाद ऋषि मेरे करीब आया और कहा- अनु यहां अच्छा मौका है.
मैंने कहा- यहां खुले में किसी ने देख लिया तो … नहीं बिल्कुल नहीं!
उसने कहा- ठीक है, पर किस तो कर ही सकते हैं.
इतने में उसने मेरे होंठों में अपने होंठों को डाल दिया.
उसके दोनों हाथ मेरे गर्दन को पकड़े थे और मेरे हाथ उसकी कमर को.
उसने अपनी जीभ मेरे मुँह के अन्दर तक डाल दी और मैंने भी.
मैं अपने बारे में बता दूँ कि मेरी उम्र उस समय 19 साल से थोड़ी ज़्यादा ही थी.
मेरी हाइट 5 फुट 7 इंच की थी और 32-27-34 का मेरा फिगर था.
मैं काले रंग का टॉप पहने थी. वह बटरफ्लाई आस्तीन वाला था और उसके साथ मैंने जींस पहनी थी.
ऋषि की हाइट 5 फुट 10 इंच की थी.
वह जिम करता था तो बॉडी भी अच्छी थी.
उसकी उम्र भी 20 के आस पास ही थी.
उसकी छाती पर हल्के बाल थे पर वह छाती को क्लीन नहीं करता था.
उसके लंड का साइज़ सच बोलूं तो 5.5 इंच का ही था.
बाकी सेक्स स्टोरी की तरह 8 या 10 इंच का नहीं था.
वह मुझे चूमने लगा.
करीब 5 मिनट के बाद उसने कहा- यहां जगह साफ़ है, आराम से बैठ जाओ.
मैंने कहा- नहीं, कपड़े खराब हो गए तो प्राब्लम हो जाएगी. हॉस्टल भी जाना है.
उसने कहा- ठीक है.
तब उसने मुझे किस किया और मेरे मम्मे दबाने लगा.
फिर उसने कहा- अनुक्ति आज तो लंड चूस लो प्लीज़.
उसके बहुत कहने पर मैंने कहा- ठीक है … पर तुम मुँह में नहीं झड़ोगे!
उसने कहा- ठीक है.
उसने अपनी जींस और अंडरवियर घुटनों तक उतार दी.
वह वहीं पेड़ के नीचे पत्थर पर टेक लेकर बैठ गया और उसने मुझे लंड चूसने के लिए इशारा किया.
मैंने अपने हाथ से उसके 5.5 इंच और 2.5 इंच मोटे लंड को पकड़ा.
तो ऋषि बोला- तुमने सेक्स क्लिप्स पॉर्न में देखा ही है.
मैंने हां में इशारा करते हुए मुँह में लंड को लिया और चूसने लगी. मुझे स्वाद कुछ अच्छा नहीं लगा.
फिर भी धीरे धीरे करके मैं मुँह से लंड चूसने लगी.
वह जैसे दूसरी दुनिया में चला गया हो, आंखें बंद करके सिसकारियां लेने लगा.
मैं भी उसके लंड को मुँह में पूरा ले लेती और बाहर करती तो जीभ से उसके टोपे को चाट लेती.
उसका रंग हल्का गुलाबी सा हो गया था.
फिर कुछ देर में उसने मेरे सर को धक्का देकर अलग किया और अपना सारा माल बाहर निकाल दिया.
उसने मुझसे कहा- टेस्ट करना चाहोगी?
मैंने कहा- नहीं.
उसने कहा- प्लीज एक बार देख लो, अच्छा लगे तो ठीक … नहीं तो कोई बात नहीं.
मैंने जीभ से थोड़ा चखा तो गर्म और नमकीन सा स्वाद आया.
अच्छा या बुरा कुछ समझ में नहीं आया.
ऋषि ने कहा- डार्लिंग लंड को थोड़ा सा चाट कर साफ कर दो प्लीज.
मैंने अपने मुँह से उसके लंड को चाट कर साफ कर दिया.
मुझे स्वाद ठीक लगा.
उसने अपने कपड़े पहन लिए.
तो मैंने कहा- अब चलते हैं.
उसने कहा- अनु अभी कहां, रुको तुमने आज तक अपनी चूत के दर्शन नहीं कराए हैं.
मैंने कहा- पर यहां खुले में नहीं बिल्कुल भी नहीं.
उसने मुझे खींच कर अपने करीब किया और मुझे किस करके कहा- अनुक्ति, प्लीज आज अपने मम्मे और चूत के दर्शन करा दो, यहां कोई नहीं है.
मैंने कहा- देखो कोई आ गया तो प्रॉब्लम हो जाएगी.
उसने कहा- कुछ नहीं होगा, मैं हूँ … सब संभाल लूंगा.
उसने मेरी जींस खोल दी और मेरे टॉप के ऊपर से ही बूब्स दबाने लगा.
वह उसमें ऊपर से हाथ डालने लगा.
मैंने कहा- ऐसे तो तुम टॉप फाड़ दोगे.
तब मैंने जींस को नीचे किया ही था कि उसने झटके से मेरी पैंटी को घुटनों तक नीचे खिसका दिया.
फिर उसने कहा- मम्मे चूसना है.
मैंने टॉप को ऊपर किया और साथ ही ब्रा को भी, जिससे बिना उतारे मेरे बूब्स वो चूस सके.
पहली बार उसने मेरे बूब्स को पूरी तरह ढंग से देखा था और चूत को भी.
चूत में हल्के हल्के बाल थे.
वह मेरे बूब्स को एक बच्चे की तरह पीने की कोशिश करने लगा.
मुझे भी मजा आने लगा.
मेरे दोनों बूब्स को चूसने के बाद उसने उन्ह हटाया ही था कि मैंने टॉप और ब्रा ठीक कर ली.
उसने कहा- अनु अब तुझे जींस उतारनी पड़ेगी.
मैं भी उतावली हो रही थी तो जींस उतार दी.
उसने कहा- अनु एक टांग पत्थर पर रखो.
वह मेरे नीचे आकर बैठ कर मेरी चूत को चाटने लगा.
उसकी खुरदुरी जीभ मेरे अन्दर आग लगा रही थी.
वह अपनी उंगली से मेरी चूत को अन्दर बाहर कर रहा था.
इसी तरह मेरी चूत ने पानी निकाल दिया और ऋषि ने उसे चाट कर चूत को साफ़ कर दिया.
फिर फटाफट कपड़े पहन कर हम दोनों वहां से निकल आए.
अब वासना की भूख दोनों को लग चुकी थी तो वापस हॉस्टल की ओर जाते समय ऋषि ने कहा- अनु, मुझे तुम्हारे साथ सेक्स करना है.
मैंने भी हामी भरी लेकिन फर्स्ट लव वर्जिन सेक्स के लिए कोई सेफ जगह चाहिए थी.
होटल के लिए मैंने मना कर दिया था.
ऋषि अपने दोस्त के फ्लैट के लिए जुगाड़ करने लग गया.
बस फिर जुगाड़ हो गया.
मैंने ऋषि से कहा- मैं बिना प्रोटेक्शन के नहीं करूंगी.
उसने कहा- ठीक है अनु.
उस दिन पहले रास्ते में रुक कर हम दोनों ने खाना खा लिया और उसने मेडिकल से प्रोटेक्शन के लिए कंडोम ले लिया.
फिर हम दोनों फ्लैट पर पहुंच गए.
दोस्त ने चाभी दी और कहा- फ्री हो जाओ तो कॉल कर देना.
वह किसी काम से बाहर चला गया.
ऋषि ने अन्दर से दरवाजा लॉक किया और मुझसे लिपट गया.
पहले उसने मेरे टॉप को निकाल दिया और मेरी नाभि को चूमा. ब्रा के ऊपर से ही बूब्स को दबाने लगा.
ब्रा को खोलने से पहले उसे ऊपर की ओर खिसका कर बूब्स को चूमने लगा और फिर खड़े खड़े ही मुझे दीवार पर टिकाते हुए पलटा दिया.
मेरी ब्रा को पीछे से खोल कर वहीं फेंक दी.
उसने अपने पूरे कपड़े उतार दिए.
उसका लंड खड़ा होने लगा था.
वह मुझे उठा कर अन्दर ले गया और पलंग पर आते ही मेरी जींस उतार दी.
फिर वह मेरे दूध अपने दोनों हाथों से मसलने लगा और उनका रसपान करते हुए निप्पल को काट देता, जिससे मुझे दर्द के साथ साथ उत्तेजना भी बढ़ जाती.
वह मेरे कान गले गर्दन गालों को भी चूमता जिससे मैं और उत्तेजित हो जाती.
मेरी नाभि को चूमते हुए उसने मेरी पैंटी को भी उतार दिया और मेरी चूत में उंगली डाल कर अन्दर बाहर करने लगा.
वह पूरी बॉडी पर किस करने लगा.
मेरे मुँह से हल्की हल्की आवाजें आ रही थीं.
उसने कहा- अनु अब 69 करते हैं.
मैंने कहा- ठीक है.
वह मेरी चूत चाटता और अपनी उंगली रगड़ने लगता.
इससे मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी, जैसे मेरे शरीर में करंट का झटका लग रहा हो.
मैं भी उसके लंड को चूस रही थी.
मेरी चूत गीली हो चुकी थी.
वह फिर उठा और जींस से कंडोम का पैकेट निकाल कर मुझे दे दिया.
मैंने पैकेट से कंडोम निकाल और ऋषि के लंड को पहना दिया.
बस उसने मुझे सीधा लेटाया और दोनों पैरों को अपने कंधे पर ले लिया, लंड को मेरी चूत के मुँह पर रगड़ने लगा.
जिससे मैं पागल सी हो गयी.
फिर उसने चूत को थोड़ा सा अपने हाथ से खोला और अपना लंड मेरी चूत पर सैट कर दिया.
मेरा दिल धक धक करने लग गया था क्योंकि वो कभी भी झटके से लंड अन्दर डालने वाला था.
उसने कहा- अनु रेडी!
मैंने इशारे में कहा- हम्म्म.
उसने झटके से लंड अन्दर किया.
वो अभी लगभग आधा ही गया था कि मेरी एकदम से जोरदार चीख निकली.
उसने लंड को झट से बाहर किया और अन्दर पूरी ताकत के साथ डाला.
इस बार शायद लगभग पूरा चला गया था.
उसने फिर से एक बार लंड निकाल कर अन्दर डाला और मुझे चूमा.
मेरी आंखों में आंसू आ गए थे.
उसने कहा- पहली बार में होता है अनु!
फिर वह लंड को धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा.
अब दर्द धीरे धीरे कम हो रहा था और मजा आने लगा था.
वह स्पीड में मुझे चोदता जा रहा था.
मुझे भी मजा आ रहा था.
वह मेरे मम्मे दबाता हुआ लंड को स्पीड से अन्दर बाहर कर रहा.
कुछ देर मैं पहले झड़ गयी और वो मेरे बाद.
वह मेरे ऊपर ऐसे ही लंड अन्दर डाल कर पड़ा रहा और मुझे किस करता रहा.
कुछ देर में उसका लंड छोटा सा हो गया और वह उसे बाहर निकाल कर बाथरूम में चला गया.
मैं बैठी और उंगली चूत की तरफ़ बढ़ाई तो उंगली पर लाल लाल खून सा था.
मेरी चूत फट चुकी थी.
तभी ऋषि आया और मेरी उंगली में लाल खून देखकर बोला- अब तुम वर्जिन नहीं रही.
मैं बाथरूम में गयी.
जब मैं वापिस आई तो मैंने देखा ऋषि मेरी ब्रा पैंटी अपने हाथ में लिए देख रहा था.
मैंने कहा- लाओ दो इधर.
उसने कहा- नहीं, ये मैं ले जाऊंगा. पहली निशानी है. इसमें तुम्हारी चूत की खुशबू है और ब्रा में भी.
मैंने कहा- फिर मैं!
उसने कहा- मैं तुम्हें दूसरी गिफ्ट कर दूंगा.
मैंने अपने कपड़े पहन लिए.
ऋषि बोला- अनु मजा आया?
मैंने कहा- आया तो सही, पर दर्द अब भी महसूस हो रहा है.
उसने कहा- ठीक हो जाओगी.
मैंने पूछा- मैं वर्जिन थी, तुम?
ऋषि ने कहा- मेरा भी पहला सेक्स था … बस मुठ मार लिया करता था.
मैं कुछ नहीं बोली.
उसने कहा- मैं तुम्हें फैशनेबल ब्रा पैंटी दूँ?
तो मैंने कहा- क्यों?
उसने कहा- थोड़ा सेक्सी पहनो.
मैंने कहा- घर?
उसने कहा- घर जाओ तो घर के हिसाब से … और यहां रहो तो यहां के हिसाब से.
मैंने कहा- ठीक है.
फिर उसने मुझे हॉस्टल छोड़ा और मेरी चाल देखकर छवि मुस्करा दी.
उसने कहा- अनु, आज तो चाल ही बदल गयी.
हम दोनों बेस्ट फ्रेंड थीं, एक दूसरे से कोई बात नहीं छुपाती थीं.
उसे मैंने बताया कि आज मेरी पहली चुदाई कैसे हुई.
वह खुश हुई और बोली- आगे अब तो चुदाई में मजे ही आने हैं.
क्योंकि वह चुद चुकी थी उसके ब्वॉयफ्रेंड से … तो उसे सब मालूम था.
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