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वे बोलीं- क्या हुआ हार्दिक?
मैं पहले कुछ नहीं बोला फिर उनसे कहा- आप एक मिनट आइए.

तब मैं एक रेस्टोरेंट में उनको ले गया और उनको बैठने को बोला.

वे कुछ बोलतीं, इससे पहले मैं ऑर्डर देने चला गया.
और वे एक टेबल से लगी कुर्सी पर बैठ गईं.

मैं उनका पसंदीदा कप केक लेकर आया. ये मैंने उनसे व्हाट्सैप पर उनकी पसंद पूछी थी, तभी पता चला था.

वे कप केक देख कर खुश हो गईं.
मैंने उनसे कहा- यहां का कप केक काफ़ी अच्छा है.

हम दोनों वे कप केक खाने लगे, जिससे उनके चेहरे पर थोड़ी स्माइल आ गई.

फिर मैंने उनसे पूछा- मैम एक बात बोलूँ!
वे बोलीं- हां बोलो.

मैंने कहा- मैम, आपको देख कर लगता नहीं कि आपका कोई बेटा भी होगा. इनफॅक्ट ऐसा भी नहीं लगता है कि आपकी शादी भी हुई है.
वे बोलीं- अच्छा जी, ऐसा क्यों?

मैं बोला कि बस आपको देख कर लगता है कि आप 21-22 साल की ही लड़की हो.
वे बोलीं- ऊओह ये बात!

वे ये कह कर हंस पड़ीं और कुछ देर वापस हम दोनों बाइक पर बैठ कर चल दिए.

मैंने उनको उनके घर पर ड्रॉप कर दिया.
वे मुझे अन्दर आने के लिए बोलने लगीं पर मुझे कुछ काम था तो मैंने मना कर दिया.

उन्होंने मुझे थैंक्यू बोला.
मैं वहां से चला गया.

अब मैं उनसे और ज़्यादा बातें करने लगा.
वे भी मुझसे खुल सी गई थीं.

फिर एक दिन वे मुझसे मेरी फैमिली के बारे में पूछने लगीं.
मैंने उनको अपनी फैमिली के बारे में बताया साथ ही ये भी बताया कि मेरी फैमिली की कंडीशन इतनी अच्छी नहीं है.

उन्होंने कहा- सब ठीक हो जाएगा … और हां कभी कुछ भी ज़रूरत हो, मुझसे बोल देना.
मैंने उनसे कहा कि कोई नहीं मेम.
वे बोलीं- क्या कोई नहीं?
फिर मैं कुछ नहीं बोला और उनको बस थैंक्यू बोला.

अब हमारी ऐसे ही बातें होती रहीं.
मैम मुझे अब अपनी बातें और कुछ काम भी बता दिया करती थीं और कभी कभी मेरे साथ कॉलेज जातीं.

फिर उन्होंने अचानक से मुझसे कॉलेज में बोलना बंद कर दिया और मुझसे अब मज़ाक भी नहीं किया.

मैंने शुरू में तो कुछ ध्यान नहीं दिया पर 5-6 दिन बाद मुझे जब ये महसूस हुआ.
तो मैंने उनसे फोन पर पूछा.
वे बोलीं कि कुछ नहीं बस तुमको ऐसे ही लग रहा है.

अगले दिन में कॉलेज गया और मैम ने मुझे लेक्चर के बाद अपने केबिन में बुलाया.
मैं वहां गया तो उन्होंने मुझसे कहा- हार्दिक, तुमको पता है कि क्लास में हमारे बारे में क्या चल रहा है?
मैं चुप रहा.

मुझे तो पता था कि क्लास में मेरे और मैम के बारे में बातें होती थीं.

वे बोलीं- बताओ?
मैंने कहा- मुझे नहीं पता मेम?
वे बोलीं- ज़्यादा सीधे मत बनो. अच्छा चलो तुम जाओ … और हां अब थोड़ा ध्यान रखो. इन सब बातों ने मेरा दिमाग़ खराब कर दिया है.

मैं बोला- मैम, मैं कुछ बोलूँ, बुरा ज़रूर लगेगा आपको!
वे बोलीं- हां बोलो!

मैंने उनसे कहा- आप बिना मतलब इन बातों पर ध्यान दे रही हैं.
वे बोलीं- क्या मतलब?

मैंने कहा- आप इन बातों को पहले सोचना छोड़ो … और सोचो क्लास में तो सबको फालतू बकने का काम करते हैं और अगर आप मुझसे बोलोगी भी नहीं तो भी भी क्लास में सब ये ही सोचेंगे, जो वे सोच रही हैं. पर कुछ टाइम बाद सब भूल जाएंगे. आपको इस बात से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ना चाहिए कि कोई आपके बारे में अच्छा सोचे या बुरा. वे उनकी सोच है, जिसमें हम कुछ नहीं कर सकते. वे अब आपके बारे में सोच रहे हैं … कल को किसी ओर के बारे में सोचेंगे.

फिर वे बोलीं- अच्छा बाबा ठीक है, चलो तुम अब अपनी क्लास में जाओ.
मैं क्लास में आया और सोचने लगा कि कहीं मैम मुझसे बातें करना बंद ना कर दें.

पर फिर मैम मुझसे फिर से अच्छे से बातें करने लगीं.

कुछ दिन बाद मैम का बर्थडे आया.
मैं पहले उनको विश करने की सोच रहा था लेकिन फिर मैंने नहीं किया.
मैंने उनको सर्प्राइज़ देने का सोचा.

मैं कॉलेज गया और मैम से बात भी हुई.
पर मैंने ऐसे रिएक्ट किया जैसे मुझे याद ना हो कि उनका आज बर्थडे है.

वे थोड़ा दुखी हो गईं.
मैं समझ गया कि क्या बात है.

एक तो मैंने भी उनको बर्थडे विश नहीं किया और दूसरा वे अपने बर्थडे पर अकेली थीं.
वे लेक्चर में भी चुप-चुप सी रहीं.
मैंने प्लान बनाया कि उनको सर्प्राइज़ देता हूँ.

जैसे ही मेरा कॉलेज खत्म हुआ और मैंने मैम को कॉल किया.
तब 4 बजे थे.

‘मैम आप फ्री हो क्या?’
वे बोलीं- क्यों, क्या हुआ?

मैंने उनसे झूठ बोला कि आज मेरी भाभी का बर्थडे है, तो उनके लिए कुछ गिफ्ट लेना है, लेकिन समझ नहीं आ रहा कि क्या लूँ.
वे बोलीं- देख लो, कुछ भी ले लो.

मैंने कहा- मैम मुझे समझ आता, तो आपको कॉल थोड़े ही करता.

मैंने उनसे जोर देकर कहा- प्लीज मैम चलिए ना प्लीज.
वे मान गईं, वे बोलीं- अच्छा ठीक है.

मैंने उनसे कहा- मैं 30 मिनट में आपको पिक करने आता हूँ.
उन्होंने ओके बोला और फोन कट कर दिया.

मैं तैयार होकर मैम के पास चला गया और उनको पिक करके हम दोनों एक मॉल में आ गए.

वहां के लेडीज सेक्शन में आए और उधर मैम ने एक पर्फ्यूम सिलेक्ट किया जिसकी खुशबू मैम को काफी अच्छी लगी.
वाकयी में खुशबू अच्छी थी.

मैंने परफ्यूम पैक करवा ली और हम वहां से निकल पड़े.

रास्ते में आते हुए मैंने एक रेस्टोरेंट के बाहर बाइक रोकी और मैम से कहा- कुछ खाते है, बहुत भूख लग रही है.
मैम ने कहा- मेरा मन नहीं है.

वे अभी भी थोड़ा सा अपसैट थीं पर मेरे ज़िद करने पर वे मान गईं.

हम अन्दर गए और मैंने वहां पहले से ही एक सेक्शन मैम के बर्थडे के लिए बुक किया हुआ था जो उनके लिए सर्प्राइज़ था.
वहां थोड़ी डेकोरेशन भी करवाई थी.

मैं मैम के साथ वहां गया और उनको बिठा कर मैं काउंटर पर बोल कर आया कि वे केक भेज दें.

मैंने थोड़ा बर्थडे बॉम्ब वगैरह का इंतजाम भी किया था और गाने चलाने के लिए भी होटल वालों को बोल दिया था.

उन्होंने प्यारे से सॉंग्स चलाए और मैम मुझे देख कर कुछ पूछने वाली थीं कि तभी वेटर केक लेकर आ गया और टेबल पर रख दिया.

मैंने मैम को बर्थडे विश किया.
मैं मैम के बराबर में ही बैठा था.
मैंने उनको केक कट करने के लिए बोला.
उनको बहुत अच्छा लगा.

जब वे केक कट करने लगीं, तो वहां वे बर्थडे बॉम्ब वगैरह भी फोड़े, जिससे उनको और ज्यादा खुशी मिली.

मैंने उनको एक बार और विश किया.
उन्होंने मुझे थैंक्स बोला और मुझे केक खिलाया.

मैंने उनको वे परफ़्यूम दिया तो वे बोलने लगीं- ये तो तुम्हारी भाभी के लिए था ना!
मैंने कहा- मैंने आपसे झूठ बोला था, जिससे मेरा सर्प्राइज़ खराब ना हो. मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या गिफ्ट दूँ तो ये बहाना बनाया था.

वे बोलने लगीं- इस सबकी क्या ज़रूरत थी. तुमने इतना सब क्यों किया?
मैंने कहा- ख़ास लोगों के लिए ख़ास चीजें ही की जाती हैं.

वे बोलीं- लेकिन फिर भी इतना सब … और तुम्हारी कंडीशन भी इतनी अच्छी नहीं है, फिर भी?
मैंने उनसे कहा कि मैंने आज के लिए अपनी पॉकेट मनी सेव की थी.

उनके कुछ बोलने से पहले मैं बोला कि अब आप केक भी कट कीजिए ना!
वे हंस दीं और उन्होंने केक कट करके मुझे खिलाया.

मैंने भी उनको खिलाया और बोला कि अब तो मूड ऑफ नहीं है आपका!
वे बोलीं कि मुझे इतना अच्छा सर्प्राइज़ कभी नहीं मिला.

उन्होंने मुझे फिर से थैंक्स बोला और मेरे गाल पर किस कर दिया.
वे अपना चेहरा नीचे करके बैठ गईं.

एक पल बाद उन्होंने मुझे सॉरी बोला.
अब मैं उनको क्या बोलता.

फिर हम दोनों ने वहां पर डिनर किया और मैंने उनको घर ड्रॉप कर दिया.

रात को मैं उनके बारे में सोचता रहा और वे किस याद करके अपना लौड़ा सहलाता रहा.

अगले दिन सब नॉर्मल था.
ऐसे ही कुछ दिन निकले. अब मेरी उनसे और ज़्यादा बातें होना शुरू हुईं.

एक दिन मैंने उनको प्रपोज़ करने का सोचा.
लेकिन हिम्मत नहीं हुई कि कहीं उनको बुरा लगा तो!

मैंने सोचा कि उनको व्हाट्सैप पर ही बोल देता हूँ.
उनसे व्हाट्सैप पर बात करते हुए मैंने कहा- मुझे आपको कुछ बोलना है!
वे बोलीं- हां बोलो.
मैंने मैसेज किया कि आई लव यू.

उन्होंने 2 मिनट तक कोई रिप्लाइ नहीं किया.
फिर कहा- अपनी पढ़ाई पर ध्यान दो, तुमको अभी बहुत कुछ करना है. कल से तुम्हारे पेपर भी हैं.

मुझे थोड़ा बुरा लगा और मैं उनकी बात समझा भी नहीं.

फिर बस मैंने अगले 12 दिन उनसे बातें नहीं की और अपने एग्जाम पर ही ध्यान दिया.
ये इंटर्नल एग्जाम थे.

बस मुझसे सवाल पूछा था, तो उससे रिलेटेड बातें हुईं.
एग्जाम खत्म हुए और मैं उनसे कॉलेज में अकेले में मिला.

मैंने उनसे सॉरी बोला, तो वे बोलीं- क्यों?
मैंने कहा कि उस दिन के लिए.

वे कुछ नहीं बोलीं और कहा कि छोड़ो इस बात को.
फिर इधर उधर की बातें हुईं और मैं घर आ गया.

पहले तो मैं उनको केवल हवस की निगाहों से देखता था और उनको चोदना चाहता था, इसलिए टीचर रोमांस कर रहा था लेकिन अब कहीं ना कहीं मेरे दिल में उनके लिए थोड़ी सी फीलिंग्स आ गई थी.
शायद इसका एक कारण ये भी था कि हम दोनों की कंडीशन सेम थी.

उनके पास इतना कुछ होते हुए भी वे अकेली थीं … और मेरे पास कुछ नहीं था इसलिए परेशान और अकेला था.

मैं रात को सोचने लगा कि लगता है पल्लवी मैम के मन में भी मेरे लिए कुछ है.
क्योंकि जब मैंने उनको प्रपोज़ किया तो उन्होंने हां नहीं की और मना भी नहीं की.

उनको यदि बुरा लगता तो वे मुझसे नाराज़ होतीं.

यह सोचते ही मैंने आगे सोचा कि मेरे बर्थडे के 3 दिन बाद वे फ्री हो जाएंगी, उनकी कॉलेज की टेंशन, जो पेंडिंग वर्क है, वे भी खत्म हो जाएगा, तभी उनसे तसल्ली से बात करना ठीक रहेगा.

ऐसे ही 3-4 दिन निकल गए.
वे मुझसे, इतना व्यस्त होने के बाद भी काफ़ी बातें करतीं और मुझे छेड़ भी देतीं.

मैं भी उनसे अब ज़्यादा हंसी मज़ाक करने लगा था.

अगले दिन जब मैं कॉलेज गया तो मेरे कुछ क्लासमेट मेरे बर्थडे की पार्टी की बात करने लगे.
पहले तो नॉर्मल ही रहा.

फिर पल्लवी मैम लेक्चर लेने आईं तो मैम ने उनकी बात सुन ली कि वे मुझसे पार्टी के लिए बोल रहे हैं.

वे भी मुझे कहने लगीं- हार्दिक, बर्थडे की पार्टी कहां दे रहे हो?
मैंने उनसे भी यही बोला कि देखते हैं मेम.

मैम और मेरे दोस्त दोबारा कहने लगे तो मैंने कह दिया- रेस्टोरेंट में चलते हैं. पर बर्थडे से अगले दिन का रखेंगे.

अब मैं उन्हें क्या बताता कि मुझे पैसों का भी इंतजाम करना था.

मैम भी बोलीं- हां ठीक है. उस दिन तो मैं भी फ्री हूँ.
सभी ने मेरे बर्थडे से अगले दिन का प्लान फिक्स किया.

अब मुझे पैसों का देखना था.
मैंने सोचा कि अपने फ्रेंड से मांग लेता हूँ बाद में दे दूंगा.

मेरा बर्थडे आया, मुझे मैम ने 12 बजे विश किया और कुछ प्यारी से कपल वाली केक कट करते हुए एक पिक सेंड की.

मैंने उनको थैंक्स बोला.
उन्होंने पूछा- तुम कल कॉलेज तो आ रहे हो ना!
मैंने कहा- हां मेम, आ रहा हूँ ना … क्यों क्या हुआ?

वे बोलीं- कुछ नहीं, बस ऐसे ही पूछा. वो कल शायद तुम्हारा असाइनमेंट होगा ना!
मैंने उनको ओके बोला और मैं सुबह कॉलेज गया.

मेरा बर्थडे हर बार की तरह सिंपल सा था.
मुझे पता था कि बस घर जाकर शाम को केक कट करना और बस घरवाले कुछ गिफ्ट देंगे शायद और बस खत्म.
मुझमें कुछ उत्साह नहीं था.

अब मैम का लेक्चर आया, वे क्लास में आईं … तो मैं उनको देखता ही रह गया.
वे आज ब्लैक साड़ी पहन कर आई थीं. वे आज से पहले कभी ब्लैक साड़ी में नहीं आई थीं.

जब वे क्लास में आईं तो मेरी तरफ आंख मारती हुई और अपनी कमर मटकाती हुई आईं.

मेरे नजदीक आकर मुझसे थोड़ा मादक सी आवाज़ में बोलीं- हैप्पी बर्थडे टू यू हार्दिक!
मैंने उनको थैंक्यू मैम बोला.

उन्होंने मुझे फिर से आंख मारी, पर मैं कुछ समझा ही नहीं क्योंकि मेरा ध्यान तो उस काली साड़ी में उनके गोरे टाइट जिस्म पर था, जिसे देख कर मेरा बुरा हाल हुआ जा रहा था.
मैं खुद पर किसी तरह कंट्रोल कर रहा था.

उनका लेक्चर खत्म हुआ और वे बाहर चली गईं.
मैंने तुरंत बाथरूम में जाकर हाथ चलाया, तब जाकर मुझे कुछ राहत मिली.

कुछ समय बाद जब छुट्टी हुई, तो मैम की कॉल आई कि मैं उनके केबिन में जाऊँ.
मैं वहां गया तो वे मुझसे बोलीं कि उनकी स्कूटी फिर से खराब हो गई है और उनको कुछ बुक्स घर लेकर जाना है, तो मैं उनको घर पर ड्रॉप कर दूँ.

वे अब मुझे कुछ भी बात अपने हक़ से बोलने लगी थीं, पहले की तरह नहीं कि प्लीज प्लीज कह कर कहें.
मैंने उनको ओके बोला.

उन्होंने कुछ बुक मुझे भी पकड़ा दीं और मैं उनके साथ नीचे पार्किंग तक आया.
फिर मैंने उनको वे बुक्स दे दीं और वे मेरे पीछे बैठ गईं.

मैं बाइक लेकर निकला, मैंने बाइक पर रास्ते में 4-5 बार ब्रेक मारे, जिससे वे मेरे ऊपर गिर जातीं और उनके 34 इंच के बूब्स मेरी पीठ में दब जाते.
वे आउच बोलतीं.
मैं उस पल का सुख लेता हुआ अपने नसीब को सराहता.

हम दोनों उनके घर आ पहुंचे.
मैंने बाइक रोकी और वे उतर गईं.

उन्होंने बुक्स मेरी बाइक पर ही रखी हुई थीं.
वे मुझे अन्दर आने के लिए बोलने लगीं.

मेरा उनको देख कर ही बुरा हाल हो रहा था.
यदि उनके घर में जाता तो पक्की कुछ न कुछ गड़बड़ हो जाती.

मैंने मना किया तो वे थोड़ा फोर्स करने लगीं और बोलीं- इतनी सारी बुक्स हैं, ये तो अन्दर रखवा दो.
तब मैंने उनको ओके बोला और बाइक को साइड में खड़ा करके उनके पीछे बुक्स लेकर चल दिया.

वे मेरे सामने अपनी गांड मटका मटका कर चल रही थीं.
वे घर खोलने के बाद एक रूम में गईं और मुझे भी बुलाया.

वे उनका बेडरूम था.
उन्होंने वहां टेबल पर बुक रखने को कहा.

मैंने वहां बुक्स रख दीं.
उन्होंने मुझे बैठने को बोला, मैं मना करता … उससे पहले ही उन्होंने फिर से बोल दिया- बैठ जाओ, ज़्यादा नखरे ना दिखाओ.

मैं उनके बेड पर बैठ गया.
वे मेरे लिए पानी लेकर आईं.

मैंने पानी पिया और ग्लास टेबल पर रख दिया.
मैं अब उनको देख रहा था और उनके रूम को भी.

वे मुझसे बोलीं- अपना ये बैग साइड में रख दो, कौन सा भागना है तुमको!
मैं चुप था.
मैंने उनको देखते हुए बैग रख दिया.

वे मुझसे पूछने लगीं- क्या देख रहे हो ऐसे?
मैं बोला- कुछ नहीं … सक्षम नहीं दिखाई दे रहा!

वे बोलीं- मैंने तुमको बताया था ना कि मेरे हज़्बेंड मुंबई में रहते हैं. सक्षम की अभी 2 महीने की छुट्टी है, तो वे अभी 3 दिन पहले ही अपने पापा के पास गया है.
मैंने ओके कहा.

वे मुझसे बोलीं- क्या लोगे … चाय कॉफी या कोल्ड ड्रिंक?
मैं बोला कि कुछ नहीं मेम. बस आज्ञा दीजिए, मैं चलता हूँ.

क्योंकि मेरा लंड काबू से बाहर हो रहा था. मेरा मन तो ये कर रहा था कि उनको अभी पकड़ कर चोद दूँ पर फिर उनकी लाइफ के बारे में सोचता, तो मेरा ये ख्याल चला जाता कि मेरी किसी हरक़त की वजह से उनको बुरा लग गया, तो उनकी लाइफ में रहेगा ही कौन … क्योंकि वे मुझसे ही बातें करती हैं बस.

वे बोलीं- अच्छा 2 मिनट रूको, मैं आती हूँ.

मैं हां में सर हिला कर बैठा रहा और वे रूम से बाहर चली गईं.

दोस्तो, मैम कमरे से बाहर जरूर चली गई थीं.
लेकिन जब वे वापस आईं तो मैं भौचक्का रह गया था.
मैंने उनसे जो चाहा था वे मुझे खुद ब खुद मिल गया था.
जी हां … मैम ने अपने आपको मेरे हवाले कर दिया था और मैंने उनकी तबियत से चुदाई की

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हेलो दोस्तों मैं पहली बार Hindi sex stories लिख रहा हून इस साइट पर मेरा नाम सोनू है और मेरी एज २४ साल है . बात उन दिनों की है जब मैं बीए क्लास में था और एक पड़ोस की लड़की मुझसे बहुत बहुत प्यार करती थी

पर उसने कभी बताया नही और वो भी मेरे साथ ही पढ़ती थी. उसके घर मैं जाता रहता था, एक बार रात में लाइट चली गयी तो मैं उनके घर घूमने चला गया पर उनके घर बिल्कुल अंधेरा था तो मैने आवाज़ लगाई की कोई है तो सामने से कोई आकर टकराया, तो पता लगा की वो वही थी.अंधेरे में कुच्छ न दिखने के कारण मेरा हाथ उसके बूब पर टकरा गया पर उसने कुच्छ नही बोला तब पता नही मुझे क्या होने लगा की मैने उसका हाथ पकड़ लिया और बोला आर्ची मैं तुमसे प्यार करता हून तो वो मुझसे लिपट गयी और कहने लगी मैं तो तुमसे बहुत पहले से प्यार करती हून पेर कभी हिम्मत नही हुए बताने की उसके बाद मैने उसको गाल पर किस किया और बोला की मैं चलता हूँ तो उसने बोला की सब लोग खाना खा कर घूमने गये है तुम थोड़ी देर रुक जाओ

मैं उसके पास ही बेड पर बैठ गया. वो मेरे हाथ को अपने हाट में पकड़े हुए थी तभी उसने अपना सिर मेरे कंधे पर रख लिया तो मुझसे यहा नही गया और उसको स्मूच करने लगा और थोड़ी ही देर में हम बाद पर लेट गये, मेरा हाथ उसके पेट पर था तो मैने तोड़ा और नीचे किया तो पता लगा की उसने स्कर्ट पहनी हुई है तब मैं स्कर्ट के ऊपर से हाथ घूमने लगा इतने में उसने मुझे बुरी तरह बाहों में भर लिया तो मे भी उसके बूब दबाने लगा जो की अभी बहुत बड़े नही थे.ये मैं पहली बार कर रहा था तो इतना पता भी नही था की कैसे करना होता है

अब मुझसे रहा नही गया तो स्कर्ट के नीचे से उसकी पैंटी निकल दी और अपनी पैंट की ज़िप खोल कर अपना लॅंड उसकी बिना बॉल की चू पर रख दिया और अंदर डालने लगा तो वो बहुत ज़्यादा चिल्लाने लगी और बोली प्लीज़ ज़्यादा मत डालो, और मुझे लग रहा था मेरा डिस्चार्ज होने वाला है तो मैने बहुत तेज धक्का मारा तो मेरा आधा लॅंड अंदर चला गया और वो रो पड़ी उसके बाद मैं आधा लॅंड ही अंदर बाहर करने तो वो थोड़ी शांत हुई फिर मैने एक एक और तेज धक्का मारा तो वो दाँत दबाकर रोने लगी फिर मैने सोचा अब ज़्यादा नही और मैने एक दो बार ही अंदर किया होगा की मेरा डिस्चार्ज हो गया और मैं खड़ा हो गया तभी लाइट भी आ गयी तो मैने देखा उसकी स्कर्ट पर काफ़ी ब्लड लग गया था और उसकी आँखें लाल हो गयी थी.

मैने उसको सॉरी बोला तो वो रोने लगी और बोली सॉरी तो मुझे बोलना चाहिए की मैं तुम्हारा सात नही दे पाई पर अगली बार तुम्हे कोई दिक्कत नही होगी और हम पूरा एंजाय करेंगे. फिर एक दिन मैं उसको अपने दोस्त के रूम पर ले गया जहाँ कोई नही रहता था और हमने टीन घंटे में चार बार किया पर उस दिन मुझे पहली बार में दिक्कत हुई बात टीन बार बहुत देर तक और एंजाय के साथ किया और वो बहुत खुश लग राग रही थी और उसने बताया उसका डिस्चर्ग तो अब भी हो रहा है तब मुझे और भी खुशी हुई. उसके बाद तो मैं उसको महीने में ६०-७० बार सेक्स करता था. अब उसकी शादी हो चुकी है और कभी कभी घर आती है तो सोचकर बहुत अच्छा लगता है की हमने कभी जमकर सेक्स किया था. ईवन शादी के बाद भी मैने उसके साथ सेक्स किया तो वो बोली तुम्हारे साथ सेक्स करने में मुझे बहुत ज़्यादा मज़ा आता है. Hindi sex stories

Antarvasna

मेरा नाम राहुल है, मैं Antarvasna जयपुर में रहता हूँ। मैं दिखने में सामान्य हूँ। हर लड़की को देख कर उसे चोदने का मन करता है मेरा।

मुझे एक लड़की पसंद थी लेकिन मैं कभी उसे कह नहीं पाया।

अब काम की बात हो जाए !

मुझे अपने पड़ोस में एक लड़की पसंद है। अक्सर वो मुझे देख कर मुस्करा जाती थी, मैं भी मुस्कुरा देता था, लेकिन कभी बात नहीं हो पाई थी। बस उसका नाम शेफाली है यही जान पाया था। करीब ४ महीने पहले वो मुझे बाज़ार में दिखी। मैंने उसे हाय किया और बात करनी शुरु कर दी।

मैंने उसी मित्रता का निमन्त्रण दिया और उसने स्वीकार कर लिया। हम दोनों एक दूसरे का मोबाइल नम्बर लेकर घर चले गए। मैं रात को भी सपनों में उसी को ही देखता था। अब हम फ़ोन पर बातें करने लगे, उसे भी ये सब अच्छा लगने लगा। हम लोग हर रोज़ घंटों फ़ोन पर बातें करने लगे।

एक दिन उसने मुझे अपने घर में बुलाया। मैं उसके घर गया तब वो घर में अकेली थी और जींस-टॉप में थी। क्या सेक्सी लग रही थी- उसे देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया। मैंने अपने आप को सँभालने की कोशिश की। शेफ (शेफाली) ने मेरा लंड देख कर अनदेखा कर दिया। हम इधर उधर की बातें करने लगे।

तभी मैंने उससे उसके बॉयफ़्रेन्ड के बारे में पूछा तो बोली- उसका कोई बॉयफ़्रेन्ड नहीं है। मुझे लगा अब तो कुंवारी चूत मिल जाएगी। लेकिन मैंने सम्हालते हुए बात जारी रखी। उसके बाद हम दोनों बाइक पर घूमने चले गए। वो मेरे पीछे बैठी थी तब उसके स्तन मेरी पीठ को लगते तो बड़ा मजा आता। मेरा लंड बार बार खड़ा होने लगा। मुझे सहन नहीं हो रहा था तब मैंने तय किया शेफ को आज तो जरुर करुँगा, उसकी चुदाई के मजे लूँगा।

पहले हम एक रेस्तराँ में गए। वहाँ खाने का आर्डर देने के बाद मैंने उससे कहा- मैं तुमसे एक बात कहना चाहता हूँ !

तो बोली- बोलो !

मैंने कहा- बुरा मत मानना !

वो बोली- ठीक है ! मैं बहुत कोशिश करके बोला- शेफ ! मैं तुमसे प्यार करता हूँ ! आय लव यू !

तो वो एक बार तो मुझे घूरती रही, मैं डर गया तो अचानक मुझे गले लगा कर बोली- आय लव यू ठू !

मैं बहुत खुश हुआ। उसके बाद हम दोनों अपने अपने घर चले गए।

अगले दिन भी उसके घर कोई नहीं था, मैंने उससे कहा कि मैं उसे चोदना चाहता हूँ !

वो खुश होकर बोली- मैं भी तो यही चाहती हूँ !

मैं उसे उसके कमरे में ले जाकर उसके स्तन चूमने लगा। फिर उसके वक्ष को पहले उसके टॉप फिर उसके ब्रा से आजाद किया।

क्या तो मस्त माल लग रही थी वो !

मैं उसके स्तन बहुत तेज़ दबाने लगा। वो चिल्लाने लगी- आआऽऽ आअह्ह्ह्ह्हऽऽ

मुझे भी मजा आ रहा था। वो मेरा लंड पकड़ कर दबाने लगी। मैं बोला- जान पहले जींस तो खोलने दो !

तो उसने एक बार में ही मेरी जींस खोल दी फ़िर मेरा बनियान उतारने लगी। अब मैं केवल अंडरवियर में था। मैंने भी उसकी जींस उतार कर फेंक दी और उसकी चूत को नंगा करने के लिए पैंटी भी उतार दी। अब वो पूर्ण-नग्न थी। उसकी चूत तो क्या मस्त थी, बाल से भरी हुई बिल्कुल नंगी चूत ! कुंवारी चूत ! जो अब चुदवाने वाली थी !

फिर उसने मेरी अंडरवियर खोल दी और मेरा ७ इंच का लौड़ा बाहर आ गया जो सिर्फ चूत को चोदना चाहता था।

मैं उसकी चूत को हाथ से चोदने लगा, वो आवाजें निकालने लगी- आऽऽ आहऽऽऽ मऽरऽ गऽऽऽऽईऽऽऽऽ रोहीईईईईईईत चोदू ऊओ !

मैं डर गया कि कहीं कोई आ न जाये तो मैंने उसको चुप कराया और चूत से हाथ निकाल लिया। थोड़ी देर बाद वो उठी और मेरा लंड पकड़ कर मुँह में लेने लगी।

मैंने कहा- अब चोदें?

तो बोली- जानू, चोदो, मगर धीरे से ! पहली बार कर रही हूँ…..

मैं बोला- अब दर्द नहीं होगा ! मैं ऐसा चोदूंगा कि कुछ पता ही नहीं चलेगा…

फिर मैं उसकी चूत में धीरे धीरे आराम से लण्ड डालने लगा, धीरे धीरे उसकी चूत फटने लगी……..

वो धीरे धीरे आवाजें निकाल रही थी….अहऽऽ ओहऽऽअ

लेकिन ज्यादा तेज़ नहीं…

कुछ देर बाद वो सामान्य होकर मेरा साथ देने लगी। अब मैंने स्पीड बढ़ा दी………….

वो बोली- राहुल फास्ट करो ! मुझे चोदो……… प्ल्ज्ज्ज्ज्ज्ज तेज्ज करओ ऊऽऽ

मैं बोला- अभी करता हूँ मेरी जानेमन !

फिर मैं तेज़ तेज़ उसे चोदने लगा

१५ मिनट बाद वो झड़ गई लेकिन मैं तेजी से चोद रहा था ….

वो बोली- रुको !

पर मैं मानने वाला कहाँ था, मैं तेजी से करता रहा…. करीब १० मिनट बाद मैं भी झड़ गया …. फिर २० मिनट बाद हम फिर शुरू हो गए…. उस दिन ६ बार उसको चोदा !

मज़ा आ गया दोस्तो….

आप सब बतायें कि मेरी कहानी कैसी लगी आपको…… Antarvasna

Hello
रोशन गिल Antarvasna

दोस्तों मेरा Antarvasna यानि की रोशन गिल का अन्तर्वासना के सभी पाठकों को प्रणाम !मैं भी अन्तर्वासना की बहुत बड़ी प्रशंसिका हूँ, हर रोज़ लोग-इन करते ही सबसे पहले अन्तर्वासना की साईट खोल के नई कहानियों को मजा ले ले कर पढ़ने के बाद मुझे ऊँगली भी करनी पड़ती है।

मैं एक बहुत बड़े बिजनेस-मैन की बेटी हूँ, जब मेरी मध्यम-वर्गीय लड़कियों से दोस्ती हुई। जब उनके घर में कोई नहीं होता था तो उनके साथ फिल्में देखती थी। कच्ची उमर में ही मुझे चुदवाई का चस्का लग गया, 18 साल की थी जब मैंने चुदाई का मजा लिया, उसके बाद मैं एक बिगड़ी हुई अमीर लड़की के लेबल से जानी जाने लगी।

मैं कई लड़कों के साथ मैं हमबिस्तर हुई हूँ। पापा बिजनस-टूअर पे ही रहते, मॉम किट्टी पार्टियों में लगी रहती और मैं लड़कों में !

मुझे संगीत का बहुत शौक है क्यूंकि मुझे संगीत वाले सर बहुत पसंद थे, जो चीज़ रोशन को अच्छी लगे, रोशन उसको पाने के बाद ही दम लेती है।

कॉलेज में पहुँच कर मैंने संगीत को एक विषय के रूप में ले लिया। सर की उम्र 34-35 साल होगी, लेकिन उनका व्यक्तित्व देख सभी लड़कियाँ उन पे फ़िदा थी।

संगीत की क्लास कॉलेज लगने से एक घंटा पहले सुबह लगती थी। सर जल्दी आ जाते थे। 6 फ़ुट लंबे, मजबूत शरीर, चौड़ी छाती देख मैं पागल हुई पड़ी थी। मैं जानबूझ कर उनके सामने झुक जाती, उनको अपने अनारों के दर्शन करवाती। धीरे धीरे वो मेरी तमन्ना समझने लगे। मैंने क्लास से आधा घंटा पहले आना शुरू कर दिया।

एक रोज़ मैं कॉलेज पहुँची, सर की कार नीचे खड़ी थी, सर कमरे में नहीं थे, मैं उनको देखने नीचे गई, दुबारा कमरे में आ गई। सोचा था आज सर को सब कह दूंगी क्यूंकि आज कॉलेज में छुट्टी थी, सिर्फ़ संगीत की क्लास के लिए ही सर ने बुलाया था।

आज ड्रेस में नहीं आना था इसलिए में कसा हुआ लाल रंग का टॉप जो लगभग मेरे बदन से चिपका हुआ था वो भी सिर्फ़ नेवेल तक जिस से पेट साफ़ दिख रहा था मैंने जींस भी नीचे बांधी थी, उनकी नज़र सुरों में कम मेरे चिकने पेट पे ज्यादा थीं , कसी जीन से चूतड साफ़ दिख रहे थे।
मैंने देखा- सर बार बार मेरी ब्रेस्ट को देखते। सर पता नहीं किस ख्याल में खोये हुए थे। मैंने कुछ पू्छना था, मैंने अपना हाथ उनकी जाँघ पे रखते हुए कहा- किन ख्याल में खो गए सर?

वो बोले- कुछ नहीं ! तुम करो !
मैंने हाथ ऊपर सरकाते हुए उनके लण्ड वाली जगह पे फेरते हुए कहा- बता दो न !
जवान लड़की, वो भी ऐसे लिबास में अकेली, कोई मर्द भी डोल जाये !
मैंने उनके लण्ड को मसल दिया उन्होंने मेरी कमर में हाथ डालते हुए मेरे पेट को सहला दिया।
कमरे में सिर्फ़ शांति थी। ना वो बोले, न मैं !

वो मुझे बाँहों में समेटे हुए मेरे होंठ चूसने लगे। साथ में मेरी टॉप में हाथ डाल मम्मों को दबाने लगे। मेरी सिसकियाँ पूरे कमरे में गूंज उठी।
सर बोले- इसी लिए तुम्हें अकेली को बुलाया था।
मैंने उनकी शर्ट के बटन खोल कर उनकी चौड़ी छाती पे होंठ रगड़ते हुए कहा- सर, मैं आपको बहुत चाहती हूँ !

उन्होंने मेरा टॉप उतार दिया, ब्रा खोल कर मेरे दोनों मम्मे चूसने लगे। मैं आहें भरने लगी। मैंने भी अपनी बेल्ट खोल फ़िर जीन खोल उतार डाली ख़ुद ही। अब मैं सिर्फ़ पैंटी में थी।

सर मुझ पर छाने लगे। मैंने उनके कच्छे में से लण्ड निकाल कर सहलाया, कितना बड़ा था ! सांवला, मोटा, ताज़ा लण्ड देख मेरे मुहं में पानी आ गया। मैंने झट से उस पर जुबान फेरते हुए मुँह में ले लिया और चूसने लगी। मैंने बहुत लण्ड चूसे थे लेकिन इसको चूसने में दिक्कत आने लगी क्योंकि यह तो बहुत मोटा था। फ़िर भी मैंने 69 में होकर लण्ड चूसना जारी रखा, सर मेरी चिकनी चूत चाटने लगे, मेरे दाने को मसलने लगे।

मैंने कहा- सर, अब चोद डालो मुझे !

वो मेरी नंगी टांगों के बीच में आकर आसन लगा कर लण्ड को चूत पे रख कर रगड़ने लगे। फ़िर एक धक्का मारा और उनका आधा लण्ड मेरी गीली चूत में घुस गया, थोड़ा दर्द हुआ लेकिन सह लिया।

सर बोले- तुम पहले से ही चुदी हुई हो?
मैंने कहा- जी !

उन्होंने एक और धक्का लगाकर अपना पूरा लण्ड मेरी चूत में पेल दिया। लण्ड काफी बड़ा था, इसीलिए बहुत कसा हुआ अन्दर जा रहा था। सर धक्के मारने लगे।

उईईईइऽऽऽ सीईईईऽऽ चोदो सर ! मुझे दबा दबा के चोदो !
मैं ज़न्नत की सैर करने लगी, मैंने सब कुछ बक डाला- हाय ! ऐसा मजा अभी तक मेरे 5 बॉय-फ़्रेन्ड्स ने भी कभी नहीं दिया ! सर चोदो ! फाड़ डालो इस कमीनी को ! ऐसा ही लण्ड चाहती थी मैं ! भोंसड़ा बना डालो इसका !

तभी उन्होंने अपना लण्ड मेरी चूत में से निकाल लिया और सीधे लेटते हुए मुझे ऊपर आने को बोले। मैं उनके लण्ड पर बैठ गई, पूरा लण्ड एक बार में ही मेरी चूत की गहराइयों में उतर गया। मैं उछलने लगी, मेरे बड़े बड़े मम्मे हिलने लगे। सर बोले- अभी +1 में हो और इतने बड़े करवा लिए ! तू सच में रंडी है ! ले खा मेरा लण्ड !

सर नीचे से उठ उठ के चोदने लगे मुझे।

हाय सर ! मेरा बस चलता तो पहले दिन ही आपके नीचे लेट जाती ! पहले मिले होते तो किसी और का लण्ड न खाती ! आपकी पत्नी धन्य है उसको यह निराला लण्ड मिला !

मैं एक बार स्खलित हो चुकी थी, लेकिन क्या ताकत थी सर में ! वो फ़िर मुझे पलट नीचे डाल बोले- टांगों को मेरी कमर से लपेट दे !

मेरी गाण्ड के नीचे गद्दी लगा मेरे ऊपर लेट के मुझे चोदते हुए बोले- साली ! औरत को नीचे लिटा के ही असली चुदाई मिलती है !

सर ने मेरे मम्मे खूब दबाये, चूसे।

जब सर झड़ने वाले थे तो मेरी चुदाई और तेज़ हो गई, लण्ड मेरे अन्दर थोड़ा चुभने लगा लेकिन मैं चुप रही और उसका साथ देती रही।

तभी तेज़ी से गरम गरम माल मेरी बच्चेदानी के आस पास निकलना शुरू हुआ, मैं फ़िर झड़ गई।

हम दोनों नंगे एक दूसरे से लिपटे रहे। मैंने दिल में कहा- रोशन, आज फ़िर तू जीत गई ! जो चाहा, आज पा के ही दम लिया।

उसके बाद हर शनिवार वो मुझे कॉलेज बुलाते। एक रोज़ हम चुदाई में मशगूल थे, पूरी दुनिया से बेखबर, हमें खेल-शिक्षक ने पकड़ लिया। वो जानता था कि मैं बहुत अमीर घर से हूँ। धमकी वो दे नहीं सकता था, इसी बीच सर वहां से रफ़ूचक्कर हो गए, मानो सब पहले से तय हुआ हो, मैं खेली खाई थी। खेल-शिक्षक उससे भी हट्टे-कट्टे थे, उनकी आयु 49-50 साल होगी, फ़िर भी वो बोले- रोशन ! एक बार मेरे नीचे लेट जा ! याद किया करेगी कि कभी किसी ने चोदा था !

वो पास आए और मुझे बाँहों में ले लिया। उसकी लड़की मेरी हम-उमर थी और उसी कॉलेज में पढ़ती थी। मैं बिल्कुल नंगी थी इसलिए क्या कहती !
ऊपर से जब उसने लण्ड निकाल के दिखाया तो मैं रोक नहीं पाई- 10 इंच का लण्ड था !!!
कैसी लगी चुदाई की दास्ताँ !

उसके बाद उसने मुझे कैसे कहाँ चोदा फ़िर बताऊंगी आपके जवाब पढ़ने के बाद !!
इंतजार करो !
अगर अन्तर्वासना ने मेरी कहानी नहीं छापी तो मैं वेबसाइट देखना छोड़ दूंगी। Antarvasna

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