Find Related Category Ads
To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.
Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.
You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.
It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.
Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.
मेरे दोस्तो Sex stories ,मैं मुंबई से हूं और मेरा नाम राजेश है। मैं अपनी सासू मां के साथ बीता एक सेक्स का सच्चा हादसा आपके साथ बांटना चाहता हूं।
मेरी शादी एक वर्ष पहले ही हुयी थी। मैं एक उनतीस वर्ष का सुन्दर और सेक्सी लड़का हूँ।
मेरी शादी एक आठरह वर्षीय लड़की के साथ हुयी है और वो बहुत ही खूबसूरत है। उसकी मां भी उतनी ही सुन्दर व सेक्सी है। उस समय मेरी सासू मां की उम्र पैंतीस वर्ष की थी और उनका भी विवाह मात्र सोलह साल की उम्र में ही हो गया था। उन्हे कोई नहीं कह सकता था कि वे पैंतीस साल की है, वे तो देखने में चौबीस-पच्चीस साल की लगती थी। वो एक विधवा थी, उनके पति दो वर्ष पूर्व ही चल बसे थे।
तीन जुलाई 2003 को मैं और मेरी पत्नी मेरे ससुराल को गये। वहां पर मेरी सास हमारा इन्तज़ार कर रही थी। उन्हें देख कर मैं बहुत खुश हुआ।
मैंने कहा- कैसी हैं सासू मां?
वो बोली- ठीक हूं बेटा।
मैंने मुस्करा कर कहा- आपकी उम्र और मेरी उम्र में कोई ज्यादा फ़र्क नहीं है।
सास ने जवाब दिया- तो क्या हुआ रिश्ते में तो तुम मेरे दामाद लगते हो।
मैंने कहा- हाँ, दुर्भाग्य से मुझे पैदा होने में थोड़ी देर हो गयी वर्ना मै तो आपसे ही शादी करता!
ये सुनते ही वो शर्मायी और कहने लगी- ठीक है बातें तो होती ही रहेगी, तुम लोग जरा फ़्रेश हो जाओ.
हम लोग वहां से बाथरूम फ़्रेश होने के लिये चले गये।
फिर सबने साथ में डिनर लिया। फिर मैं और मेरी पत्नी बेड रूम में चले आये। बेड रूम में एक खिड़की भी थी जो मेरी सासू मां के कमरे में खुलती थी।
थोड़ी देर मैंनें और मेरी पत्नी ने आराम किया। रात करीब एक बजे मेरी नींद खुल गयी और मैं अपनी पत्नी के कपड़े उतारने लगा। मेरी पत्नी जाग गयी और कहने लगी- आज नही, मुझे नींद आ रही है..
मैंने कहा- तुम सो जाओ और मुझे अपना काम करने दो.
फिर मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिये। वो मुझे बार बार रोक रही थी।
इस तरह हमारी तकरार से सासू मां भी जाग गयी। उन्होंने धीरे से हमारी खिड़की खोली और अन्दर हमें देखने लगी। मैंने अपना काम जारी रखा और और अपनी पत्नी को चूमने लगा।
पहले उसके नाजुक होंठ पर किस किया, फिर उसके मादक चूचियों पर और फिर उसकी रस भरी चूत पर्। इतने भर से मेरी पत्नी अब मूड में आ चुकी थी और फिर उसने मेरे ऊपर के सारे कपड़े उतार दिये।
हम दोनो एक दूसरे के जिस्म पर चूमा चाटी करते रहे और फिर मैंने अपना पेण्ट खोला और अपना आठ इंच से भी लम्बा लण्ड निकाला। ये सब मेरी सासू मां देख रही थी। मैंने खिड़की पर चुपके से देखा वो वहीं पर खड़ी थी। मुझे देख कर वो थोड़ा सा पीछे हट
गयी। मैंने लण्ड को पत्नी की चूत में धकेल दिया और फिर जोरदार धक्के मारने आरम्भ कर दिये। मेरी पत्नी भी बहुत आनन्दित होने लगी थी।
वो आआह्हह… ऊओह्ह… ऊम्मम… की आवाजे निकाल रही थी। कुछ देर बाद मैंने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया। वो सफ़ेद वीर्य से भरा हुआ था। मेरी पत्नी ने जल्दी से मेरा लण्ड अपने मुख में ले लिया और मस्त हो कर उसे चूसने लगी।
ये सब देख कर मेरी सासू मां के मुख से सीत्कार सी आवाज निकल गयी। मैंने उनकी आवाज को सुन लिया था। वो बहुत बेचैन हो गयी थी। मैंने और मेरी पत्नी ने कुछ देर बाद कपड़े पहन लिये थे।
कुछ देर बाद मेरी पत्नी सो चुकी थी। मैं अपनी पेण्ट पहन कर कमरे से बाहर निकला और बालकॉनी में आ कर खड़ा हो गया। मैंने कमीज नहीं पहन रखी थी और अपनी ही धुन में गुनगुना रहा था।
अचानक मुझे पीछे से किसी ने पकड़ लिया। इसके पहले कि मैं पलटता वो मुझसे लिपट गयी। मैंने समझा कि मेरी पत्नी है। लेकिन कुछ अजीब सा महसूस हो रहा था। उसके जिस्म से बहुत मधुर सी सुगन्ध आ रही थी जो मैंने अपनी पत्नी के जिस्म से कभी महसूस नहीं की थी। मैं परेशान था कि कौन है जो मुझसे आकर ऐसी लिपट गयी है।
मैं पलट कर उसका चेहरा नहीं देख सकता था। फिर उसके कांपते हाथ मेरी पेण्ट की जिप की तरफ़ बढे और मेरे लण्ड को पकड़ कर जोर जोर से सिसकते हुये दबाने लगी। मुझे बहुत अच्छा लगने लगा था। पर मुझे अभी तक पता नहीं था कि ये कौन है।
मैंने उसके हाथ को अपने लण्ड से हटाया तो देख कर दंग रह गया और मेरी आंखे खुली की खुली रह गयी। वो और कोई नहीं मेरी सासू मां थी।
मुझे देख कर वो कहने लगी- तुम्ही ने तो कहा था कि हमारी उम्र में कोई फ़र्क नहीं है और अगर तुम जल्दी पैदा हो जाते तो मुझसे ही शादी करते। अब समझ लो ना तुम जल्दी पैदा हो गये हो’
इसके पहले मैं कुछ कह सकूं सासू मां के मुख से फिर आवाज निकली- देखो मैं एक जवान विधवा हूं, मैं अपने पति के बिना रह रही हूं, जो कि बहुत मुश्किल काम है। तुम मेरी इस मुश्किल को दूर कर सकते हो, मेरी इस बेचैनी को कम कर सकते हो। मेरी जिंदंगी रंगीन बना सकते हो.
ये कहते हुये वो मुझे बेताहाशा चूमने लगी और मेरे हाथो को अपने कसे हुये उभारो पर यानि चूंचियों पर रख दिया। सासू मां का सीना दबते ही उनके मुख से एक मद भरी सिसकारी निकल पड़ी।
इसके बाद क्या हुआ वो बहुत उत्तेजक और दिलकश Sex stories है। लेकिन आपको कुछ और इन्तज़ार करना होगा।
मैं हूँ आपकी अंजू शर्मा ! मैं Antarvasna पच्चीस साल की हो चुकी हूँ। मैं आज आपको अपनी सच्ची कहानी अन्तर्वासना डॉट कॉम के माध्यम से बता रही हूँ कि मैंने अपने बड़े भाई से कैसे चुदवाया था।
मेरे बड़े भाई का नाम अजय है, वह सताईस साल का है। उसकी एक गर्लफ्रैंड भी है जिसका नाम शैली है। शैली मेरे साथ पढ़ चुकी है और मेरे घर से थोड़ी दूर ही रहती है। शैली अजय को पसंद करती है लेकिन शैली के कई दोस्त हैं। शैली एक चालू लड़की है। फ़िर भी अजय को शैली से अकेले में मिलने का कोई मौका नहीं मिल पा रहा था।
एक दिन मेरे पापा और मम्मी दो दिन के लिए एक शादी में जबलपुर जाने वाले थे, हम पढ़ाई का बहाना करके घर में ही रुके रहे। वैसे अजय मेरा बड़ा भाई है लेकिन हम दोस्तों की तरह रहते हैं। हम एक दूसरे से कोई बात नहीं छुपाते हैं और आपस में हर एक विषय पर खुल कर बातें करते हैं, यहाँ तक सेक्स की बात करने से भी हमें कोई शर्म नहीं आती है।
उस दिन अजय ने मुझसे कहा- अंजू, दो दिन तक हम लोग अकेले रहेंगे, अगर तुम किसी तरह शैली को दो दिन के लिए अपने घर रहने के लिए तैयार कर लो तो मैं तुम्हारी हर शर्त मान लूंगा।
मैंने भी अपनी शर्त रखी- मैं शैली को किसी भी बहाने अपने घर रुकने पर राजी कर लूंगी लेकिन तुम शैली के साथ जो भी करोगे मेरे सामने करना होगा।अजय बोला- लेकिन इसके लिए तुम्हें मेरा पूरा साथ देना पड़ेगा !
इस तरह हम दोनों के बीच शर्तें तय हो गईं।
शाम को मैंने शैली को फोन किया कि मुझे अपना एक प्रोजेक्ट बनाने के लिए उसकी मदद चाहिए और दो दिनों में प्रोजेक्ट पूरा करना है, घर में अकेली हूँ मेरे घर में कोई परेशानी नहीं होगी, मिल कर पढ़ाई और मस्ती करेंगे।
मैंने कहा- अजय भी हमारी मदद करेगा !
शैली भी फ़ौरन तैयार हो गई। शैली काफी चालाक है, वह सारा मामला समझ गई और एक घंटे के बाद ही घर आ गई। वह काफी सजधज कर आई थी।
दरवाज़े पर अजय ने ही उसका स्वागत किया। शैली आराम से सोफे पर बैठ गई और इधर उधर की बातें करने बाद अजय तीन व्हिस्की के पैग बना कर लाया। हम धीमे धीमे व्हिस्की की चुस्कियाँ लेने लगे। अजय खड़े खड़े हमारी बातें सुन रहा था।
तभी अजय ने झुक कर शैली को चूम लिया। शैली खड़ी हो गई और अजय की पैंट की जिप खोल कर उसका लण्ड चूसने लगी। शैली ने अजय का दस इंची लण्ड पूरा अपने मुँह में ले लिया। मैं भी अजय के लण्ड का लाल लाल सुपारा देख कर दंग रह गई। ऐसा लग रहा था कि जैसे गुस्से से लण्ड का मुँह लाल हो गया हो और चूत पर हमला करने वाला हो। शैली बड़े प्यार से लण्ड चूस रही थी और सारा लण्ड निगल लेना चाहती थी। यह देख कर मेरी चूत भी गीली हो रही थी। शैली लण्ड को अपने मुँह में अन्दर-बाहर कर रही थी, इससे लण्ड और सख्त और लंबा हो रहा था। लण्ड शैली के थूक से पूरी तरह से सना था।
तभी शैली ने अजय को बिस्तर पर लिटा दिया और उसके बाक़ी के सारे कपड़े निकाल दिए। अजय का लण्ड कुतुबमीनार की तरह सीधा खड़ा था। एक एक करके शैली ने अपने कपड़े भी उतार दिए। जब शैली ने अपनी पैंटी भी उतार दी तो मैं उसकी गोरी गोरी चूत देख कर मोहित हो गई। शैली ने अपनी चूत के बाल अच्छी तरह से साफ़ किए थे। चूत से सेक्सी खुशबू आ रही थी। मैंने शैली की चूत को चूम लिया। आख़िर वह मेरे भाई का इतना लंबा मोटा लण्ड लेने जा रही थी। और कोई लड़की होती तो अजय के लण्ड से उसकी चूत जरूर फट जाती।
फ़िर शैली उठी और अजय के लण्ड को निशाना बना कर उस पर अपनी चूत रख दी। लण्ड का सुपारा चूत पर था, शैली लण्ड पर बैठ गई। शैली के दवाब से लण्ड अन्दर घुसने लगा। जब लण्ड का सुपारा चूत में घुस गया तो चूत में लण्ड के लिए रास्ता बनता गया। लण्ड चूत को चीरते हुए भीतर जाने लगा।
मुझे भी बड़ा मजा आ रहा था। मैं लगातार शैली को हिम्मत दिलाती रही और कभी उसे चूमती और कभी उसके स्तन सहलाती रही। जैसे ही पूरा लण्ड शैली की चूत में समा गया, मैंने ताली बजा कर शैली को बधाई दी। शैली अपनी चूत में अजय का लण्ड इस तरह अन्दर-बाहर करने लगी जैसे वह अजय की आज ठीक से चुदाई करे बिना नहीं मानेगी।
कुछ देर बाद अजय शैली के ऊपर आ गया और उसका लण्ड गच से शैली की चूत में धंस गया। अजय शैली को लगातार चूम रहा था और उसकी चूत की भगनासा को मसल रहा था।
शैली मस्ती में बक रही थी- अजय जोर जोर से डालो, फाड़ दो मेरी चूत ! उफ़ मज़ा आ रहा है ! जोर से धक्के मारो ! मेरी पूरी चूत भर गई है चूत में अब जगह नहीं है। चोदो ! लगे रहो ! आज मैं जन्नत का मज़ा ले रही हूँ ! तुम्हारा लण्ड कमाल है।
करीब आधा घंटे के बाद अजय ने शैली को पलंग पर घोड़ी बनाकर अपना लण्ड उसकी चूत में पीछे से घुसा दिया और दनादन धक्के लगाना शुरू कर दिए। इस जबरदस्त चुदाई से शैली हाय हाय करने लगी। शैली हर धक्के पर अपनी चूत लण्ड की तरफ़ धकेल देती थी जिससे मजा दुगुना हो जाता था। शैली की चूत से पानी रिस रहा था, फ़िर भी वह लगातार चुदवा रही थी।
यह देख कर मुझे भी इसी तरह चुदवाने की इच्छा हो रही थी और मैं अपनी चूत में उंगली कर रही थी।
इसी तरह आधा घंटा और चोदने के बाद अजय ने मुझे बुला कर कहा- शैली की चूत काफी चुद गई है, अब मैं शैली की गाण्ड मारूंगा, तुम ज़रा पास आकर शैली की कमर जोर से पकड़े रहना और शैली की चूत और वक्ष मसलते रहना। अगर शैली को दर्द हो तो उसकी चूत चाटते रहना, इससे दर्द कम हो जाएगा। वरना वह मेरा इतना लंबा मोटा लण्ड सह नहीं पायेगी, उसकी गाण्ड भी फट सकती है, तुम अपने हाथों से शैली के चूतड़ फैलाते रहना।
फ़िर अजय ने दोबारा शैली को घोड़ी बनाया। मैंने थोड़ा सा तेल शैली की गाण्ड और अजय के लण्ड पर लगा दिया और अजय को गाण्ड जीतने का आशीर्वाद दे दिया। अजय ने उठ कर अपने लण्ड का सुपारा शैली की गाण्ड के छेद पर रख कर थोड़ा सा दवाब डाला। सुपारा गाण्ड में घुस गया, शैली चिल्लाई- मर गई ! ओह ओह उई उई ! धीमे ! ज़रा धीमे से ! यह लण्ड काफी मोटा है ! मैं सह नहीं पाऊँगी।
अजय ने कहा- हिम्मत रखो ! हम तुम्हारी गाण्ड नहीं फटने देंगे ! आराम से डालेंगे !
फ़िर अजय ने चौथाई लण्ड अन्दर घुसा दिया जो आसानी चला गया। फ़िर शैली के दर्द की परवाह किए बिना आधा लण्ड जब चला गया तो मैंने कहा- अब रुको नहीं ! बाक़ी लण्ड भी घुसा दो !
अजय ने एक ऐसा जोर का धक्का मारा कि गाण्ड को फाड़ते हुए गाण्ड में समा गया। शैली ने इतनी जोर की चीख मारी कि मुझे उसका मुँह बंद करना पड़ा।
अजय बोला- अब थोड़ा सा दर्द सह लो ! गाण्ड में लण्ड के लिए रास्ता बन चुका है !
कुछ देर बाद अजय ने लण्ड को अन्दर-बाहर करना शुरू किया तो लण्ड आसानी से घुसने लगा। शैली ने अपनी चूत मेरे मुँह पर रख दी, उसका दर्द गायब हो चुका था। मुझे ताज्जुब हुआ कि लण्ड कैसे फचा फच गाण्ड में जा रहा है और शैली मजे से गाण्ड मरवा रही है। मैं शैली की हिम्मत की दाद देने लगी, मैं बोली- तुम्हें तो गाण्ड मरवाने का ओलम्पिक मैडल मिलना चाहिए।
यह सुन कर अजय ने अपनी स्पीड तेज कर दी। जब उसका लण्ड से बाहर आता तो तो ऐसा लगता था कि लण्ड के साथ पूरी गाण्ड बाहर आ जायेगी क्योंकि लण्ड गाण्ड में पूरी तरह से कसा हुआ था।
शैली कभी मुझे और कभी अजय को चूम लेती थी। आधे घंटे की गाण्ड मराई के बाद अजय ने अपना गर्म गर्म वीर्य शैली की गाण्ड में छोड़ दिया जो गाण्ड से बाहर बहने लगा। अजय के लण्ड से शैली की गाण्ड काफी चौड़ी हो गई थी। लण्ड निकलने के बाद गाण्ड का गुलाबी चौड़ा छेद साफ़ दिखाई दे रहा था।
शैली ने अजय के लण्ड को चाट चाट कर साफ़ कर दिया और एक तरफ़ लेट कर साँस लेने लगी।
मैंने पूछा- कैसा लगा अजय का लण्ड?
शैली ने लण्ड को चूम लिया और उसे प्यार से सहलाने लगी। इससे लण्ड फ़िर से फड़कने लगा और कड़क होकर खड़ा हो गया। तभी शैली ने मुझे अपने पास पलंग पर गिरा लिया और मेरे मना करने के बावजूद मेरे कपड़े उतार दिए और अजय का लण्ड मेरी चूत पर रख दिया।
शैली ने कहा- अंजू चुदाई कुदरत का वरदान है ! दुनिया के सभी प्राणी चुदाई करते हैं ! एक बार लण्ड किसी की चूत में घुस जाता है तो सारे रिश्ते ख़त्म हो जाते हैं, सिर्फ़ चूत और लण्ड का रिश्ता बाक़ी रह जाता है। इसलिए किसी लण्ड का अपमान नही करना चाहिए, जो भी मिले, जैसा भी मिले, जहाँ भी मिले, लण्ड का मजा जरूर लेना चाहिए। तू तो किस्मत वाली है कि घर में ही इतना मजेदार लण्ड मौजूद है। फ़िर भी पुराने विचारों में अपना मजा बरबाद कर रही है। हर एक चूत को हर एक लण्ड से मजा मिलता है। देख, मैंने इसी सुख के लिए अजय के घोड़े जैसे लण्ड से तेर सामने चुदा लिया और गाण्ड भी मरवाई। यह एसा मजा है जिसमे कोई खर्चा नहीं लगता, सिर्फ़ हिम्मत चाहिए। चल उठ और मेरे सामने ही अजय से चुदा ले ! फ़िर तुझे भी पता चल जाएगा कि ऐसे लण्ड से चुदाने में कितना मजा आता है। तू फ़िर रोज चुदवाने लगेगी और मुझे याद करेगी।
उस दिन से अजय से कई बार लण्ड का मजा ले चुकी हूँ। शैली की बात सच है, आज रात मैं फ़िर चुदवाने वाली हूँ ! आप रात को क्या करने वाले हैं ? Antarvasna
सभी अन्तर्वासना पढ़ने वालों Sex Stories को सन्नी शर्मा का कोटि कोटि प्रणाम!
दोस्तो! अभी तक मैंने अन्तर्वासना में लड़के और लड़की के बीच हुई चुदाई के बारे ही पढ़ा है। मैं इस वक्त कंप्यूटर सॉफ्टवेयर का कोर्स कर रहा हूँ। मैं देखने में चिकना हूँ और सच पूछो तो मैं कहने के लिए लड़का हूँ मगर मेरे अन्दर एक औरत बचपन से घर कर चुकी है। मैं बचपन से ही लड़कियों के साथ गुड्डे-गुड़िया का खेल खेलता, चोरी चोरी मम्मी की ड्रेस पहनता और जब घर अकेला रहता तो लड़की की तरह सज-संवर कर तैयार होता था। इन हरक़तों से मुझे अलग सा आनंद मिलता!
मैं स्कूल में भी लड़कियों के साथ ही रहने की कोशिश करता। सभी लड़के स्कूल में मुझे लड़की कहते! बचपन से लड़कियों के साथ रहा था, उनके खाने-पीने में ध्यान देता, उनकी तरह गोलगप्पे-चाट वगेरह खाता। मेरे शरीर की बनावट लड़कियों जैसी है, मेरी छाती बहुत कोमल है, 16 साल की लड़की जितनी मेरी छाती है।
मैंने कई बार अपनी लड़की दोस्तों को उनके बॉय फ्रेंड के साथ अकेले में स्कूल के खाली कमरों में अश्लील हरक़तें करते देखा। लड़कियों में से पूजा से मेरे बहुत अच्छे से दोस्ती और बोलचाल है, वो अक्सर मेरे घर आती नोट्स के लिए। वो एक बहुत बड़े अमीर परिवार की छोरी है।
एक रोज़ मैं उसके घर चला गया, दोपहर का समय था, उस वक्त उसके घर कोई नहीं होता था। जब मैंने दरवाज़ा बंद देखा तो मैं दीवार से कूद कर अन्दर चला गया। हंसने के आवाजें सुन कर मैंने खिड़की के पास पहुँच कर देखा कि मेरे ही स्कूल का एक लड़का था, पूजा उसका लण्ड चूस रही थी, वो अपनी स्कर्ट में बार बार उसका हाथ डलवाती, कभी चुचियों में भी।
मैं वहाँ से चला आया। उस लड़के का लौड़ा देख मेरी गाण्ड में कुछ होने लगा, ना कि पूजा को नंगी देख कर।
उस दिन से मैंने भी किसी का लण्ड चूसने की सोची। स्कूल के लड़के से यह सब करके मेरी और बदनामी हो जाती, पहले ही सभी मुझे छेड़ते हैं।
मैं रोज़ शाम को ट्यूशन पढ़ने जाता था। रास्ते में एक नाशपाती का बाग़ है, वहाँ रोज़ एक मोची मुझे मिलता था, बिहार का था। वो मेरी गाण्ड को देख रोज़ अजीब इशारे करता। पहले मैं कुछ न कहता, लेकिन अब वो देखके लौड़ा खुजलाता। एक रोज़ वो नहीं मिला लेकिन जब मैं वापिस आ रहा था, तब अंधेरा हो चुका था। आज वो अपना सामान पहले ही पास में अपने कमरे में रख आया था। वो दिन में मोची का काम, रात को बाग के चौंकीदार का काम करता था। बीच बाग़ में उसका कमरा था। आज उसको देख मैंने कहा- क्या बात है भाई? तुम रोज़ मुझे क्यों देखते हो?
वो बोला- तेरी गाण्ड मारनी है!
मैंने कहा- चल हट!
बोला- तू क्यों देखता है?
मेरे पास जवाब नहीं था। वो थोड़ा पास आकर अपने हाथ मेरी गोल गाण्ड पे हाथ फेरने लगा।
सीईईईइ!
फ़िर मेरा हाथ पकड़ उसने अपने लौड़े पे रख दिया और पास आकार धीरे से बोला- चल कमरे में!
दोस्तो, जैसे उसने मुझे पेंडुलम दिखा बस में कर लिया हो, मैं बिना बोले उसके पीछे उसके कमरे में चला गया, उसने कुण्डी लगा दी। उसने अपनी पैन्ट उतार कर किल्ली पे टांग दी, फ़िर शर्ट भी। वो सिर्फ़ कच्छे में था, उसका लौड़ा खड़ा था। मोटा ताज़ा लौड़ा देख पूजा याद आई। उसने मेरी कमीज़, पैन्ट सब उतार दी और मुझे लिपटने लगा। मेरे अन्दर की लड़की जागी, वो मेरे निप्प्ल मसलने लगा, मम्मे दबाने लगा!
सीईईईइ क्या मजा था यार!
मैं घुटनों के बल बैठ उसके लौड़े को सहलाने लगा और अपने आप ही उसका 6 इंच का लौड़ा चूसने लगा, चूमने लगा।
वो बोला- साले दबा दबा के चूस!
साथ में वो मेरी गाण्ड थपथपा रहा था। उसने थूक से ऊँगली गीली कर मेरी गांड में डाली और आगे पीछे करने लगा और फ़िर दो ऊँगली!
वो भी पहली बार किसी से लौड़ा चुसवा रहा था। उसने अपना सारा माल मुँह में भर दिया, कुछ मेरी कोमल छाती पे भी गिरा। मैं कपड़े पहनने लगा तो उसने रोक दिया और बोला- चुदेगा तेरा बाप? गांडू! चल खड़ा कर दे! उसने ज़ोर से थप्पड़ मारा।
मैं भी रुक गया और उसके लौड़े को फ़िर मुंह में भर लिया। उसका फ़िर खड़ा हो गया, उसने मुझे घोड़ा बना लिया और सरसों का तेल अपने लौड़े पे लगा कुछ ऊँगली से मेरी गांड में भी लगा दिया और अपने लौड़े का टोपा मेरी मोरी पे रख धक्का दिया।
हाय, मर गया! छोड़ मुझे! प्लीज़ छोड़ दे!
दूसरे झटके से आधा लौड़ा अन्दर घुस गया। मैं दर्द से तड़फ रहा था, वो बिना रहम किए पूरा डालने में लगा था। मैं चिल्लाने लगा, लेकिन वहाँ कोई नहीं था। वो ज़ोर जोर से मुझे चोदने लगा। कुछ पल बाद मुझे थोड़ा आराम मिला और अब उसकी रगड़ मुझे अच्छी लगने लगी। उसके बाद उसने सीधा लिटा के अपने कंधों पर मेरी टांगें रख कर फ़िर लौड़ा मेरी गाण्ड में डाल दिया।
मुझे बहुत मज़ा आने लगा। किसी मर्द के नीचे लेट कर वो भी नंगे, वो साथ साथ मेरे मम्मे चूसने लगा और 6-7 मिनट बाद वो झड़ गया और मेरी सारी खुजली उसके गरम माल से मिट गई। वो मेरे ऊपर ही लुढ़क गया। हम दोनों नंगे एक दूसरे की बाँहों में लेटे थे।
वो कमरे में एक और बन्दे के साथ रहता था, वो बन्दा राज मिस्तरी का काम करता था। वैसे मोची के मुताबिक वो रात लेट आता था। तभी वो दूसरा बन्दा आ गया। कुण्डी ठीक से लगी नहीं थी वो सीधा कमरे में घुस आया और मुझे देख कर बोला- पुरषोत्तम! यह गाँडू कहाँ से आया?
उसकी आँखों में वासना के डोरे देख मैं घबरा सा गया।
वो बोला- चल तू भी जा जाकर खाना खा आ! मैं हूँ यहीं पे!
मोची चला गया। मैं अभी कपड़े पहनने लगा था कि उसने रोक लिया और बोला- मुझे खुश कर दे साले!
मैंने मना करने की बजाये बोला- नहीं देर हो गई है, पहले ही घर वाले परेशान होंगे।
वो बोला- साले! खींच के दूंगा कान के नीचे! चल पास आकर ख़ुद ही लण्ड निकाल!
मैं डरता हुआ पास गया और बोला- आज जाने दो! कल सुबह आऊँगा!
वो बोला- चल चूस ही दे थोड़ा, हाथ से निकल दे पानी!
बाप रे बाप! उसका लौड़ा देख मैं डर गया। बहुत सॉलिड था, मैं उसको पकड़ मुठ मारने लगा और फ़िर चूसने लगा। अंदर से मैं बहुत खुश था कि जिस लौड़े की मैं तलाश में था वो आज एक नहीं दो मिले!
करीब पाँच मिनट में मैंने उसके लौड़े को चूस चूस उसका माल निकाल दिया। उसने सारा माल मेरी नंगी गांड पे डाल दिया, झड़ने से पहले उसने मुँह से निकाल लिया था और गांड पे फव्वारा छोड़ दिया।
दोस्तो, कैसी लगी मेरी पहली चुदाई की दास्ताँ!
अगले दिन मैं उसके बताये समय के मुताबिक जब मोची निकल गया तो मैं अंदर घुस गया और फ़िर??
अपना चुदाई का यह किस्सा मैं अगले भाग में डालूँगा।
आपके जवाबों का इंतजार रहेगा! Sex Stories
The user agrees to follow our Terms and Conditions and gives us feedback about our website and our services. These ads in TOTTAA were put there by the advertiser on his own and are solely their responsibility. Publishing these kinds of ads doesn’t have to be checked out by ourselves first.
We are not responsible for the ethics, morality, protection of intellectual property rights, or possible violations of public or moral values in the profiles created by the advertisers. TOTTAA lets you publish free online ads and find your way around the websites. It’s not up to us to act as a dealer between the customer and the advertiser.