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मेरे ताऊ मेरे घर से दो किलोमीटर Hindi Sex Stories दूर ही रहते थे। जब भी कोई छुट्टी का मौका होता तो मैं वहाँ चला जाता था। और स्कूल की छुट्टी समाप्त होने तक वहीं रहता था। उसका एक कारण था….मेरी ताई मुझे बहुत प्यार करती थी। उनके प्यार में सेक्स का पुट अधिक होता था। चूंकि मैंने भी जवानी की दहलीज पर कदम रख दिया था इसलिए मेरे दिल में भी उमंगें अंगड़ाइयाँ लेने लगी थी।
अभी तक तो मैं सिर्फ़ ताई के नाम का ही मुठ मारता था क्योंकि अभी तक मेरे सम्पर्क में कोई लड़की नहीं थी। ताई ही मुझे अपनी ड्रीम-गर्ल लगती थी। मैं जब भी घर पहुंचता था वो मुझे चूमती थी और मुझे गले लगा लेती थी…. पर मुझे उसमें उनकी वात्सल्य कम, वासना वाला प्यार ज्यादा नजर आता था। यही वजह थी कि मैं बार बार वहां जाता था।
इन दिनों बस इतना बदलाव आया था कि वो अब अपनी छाती पर मेरा चेहरा दबा लेती थी …. उनके नरम नरम बोबे मेरे चेहरे पर जब लगते थे मुझे बहुत आनन्द आता था और मैं दोनों स्तनों के बीच की गहराई में अपना चेहरा और दबा लेता था।
वैसे ताई ज्यादा लम्बी नहीं थी, लगभग ५ फ़ुट ३ इंच की थी…. पर शरीर कसा हुआ था….चूतड़ भारी थे…. बोबे बड़े पर सधे हुए थे….जैसे कि कोई गुब्बारा तना हुआ होता है।
आज शाम को मैं ताऊ के यहाँ आ गया था। ताई मुझे देखते ही खिल गई। मुझे आते ही उन्होने मुझे गाल पर, होंठो पर चूमा और अपने से चिपका लिया। अपनी छाती से लगा लिया और हमेशा की तरह अपने बोबे के बीच मेरा चेहरा दबा लिया। मैं भी इसका मजा लेता रहा, अभी मुझे बच्चा रहने में ही भलाई लग रही थी। उनके बोबे का आनन्द लेता रहा। ताई भी मेरा पूरा मजा ले रही थी। मेरी कमर में हाथ डाल कर मुझे चिपकाये जा रही थी। उनका एक हाथ मेरे चूतड़ों को भी सहला देता था। फिर अलग करके मुझे कुछ खाने को दिया।
रात को खाने के बाद मैं बिस्तर पर लेट गया और टीवी चला दिया।
“आंटी…. मैं अपना रात का पजामा भूल गया….अब क्या करूँ….?”
“अरे इनका पहन ले…. ये तो वैसे नाईट ड्यूटी पर गये हैं….”
“नहीं आंटी…. मुझे अच्छा नहीं लगता ….!”
“तो फिर अंडरवियर में ही सो जा ना….! यहां कौन है देखने वाला….!”
मुझे उनकी ये बात ठीक लगी…. मैंने अपनी जीन्स उतारी और अंडरवियर में ही लेट गया। ऊपर से एक चादर ओढ़ ली। मैं बैठक में दीवान पर सोता था। इतने में आंटी भी आ गई….
“चल थोड़ी जगह दे…. मैं भी टीवी देखूंगी….”
मैंने थोड़ी सी जगह कर दी। आंटी बड़ी मुश्किल से किसी तरह से फ़िट हो गई। पर अब वो मेरे से लगभग चिपक सी गई थी। उन्होने मेरा सिर ऊंचा करके अपने बाहों पर रख दिया। इससे मेरा चेहरा उनकी चूंचियों के पास आ गया। उनके शरीर की गर्माहट और उनके प्यार से मुझे नींद सी आने लगी। उनके शरीर में जवानी की एक महक भी थी। मैंने करवट बदल कर आंटी की तरफ़ मुख कर लिया….और मेरी आँखें बन्द होने लगी…. आंटी भी थोड़ा तिरछी हो कर मेरी तरफ़ हो गई और मेरे बालों पर हाथ घुमाने लगी। पर इससे उनकी चूंचियां मेरे चेहरे से छूने लगी। मेरी नींद उड़ गई। मेरे शरीर में कुछ कुछ होने लगा।
“आंटी….आप मुझे मुझे बहुत प्यार करती है ना….!”
” हां बेटा …. तू मुझे बहुत प्यारा है….” कह कर उन्होने मुझे चूम लिया। मुझे ये साफ़ अहसास हो रहा था कि आंटी ने ना तो ब्रा पहन रखी थी और ना ही पेंटी। उनके शरीर के स्पर्श से साफ़ मालूम हो रहा था।
“आंटी मैं भी आपको प्यार कर लूँ….?”
“हां ….हां …. जरूर….!”
मैंने उनके गालों पर चुम्मा ले लिया…. मौका देखा ….आंटी की आंखे बंद थी…. मैंने उनके होंठ पर अपने होंठ जमा दिये और चूमने लगा।
“बस….बस…. अब कितना प्यार करेगा….!” पर इतने में तो मेरे में उबाल आ चुका था। मैंने उनका शरीर कस लिया। मेरा लण्ड खड़ा होने लगा था। शायद आंटी ने इसे भांप लिया था।
“आंटी…. आप कितनी अच्छी हैं…. कितनी प्यारी हैं….!”
आंटी ने देखा कि मैं प्यार में कम वासना में ज्यादा लिपट रहा हूँ…. तो उन्होंने भी मुझे होंठों पर चूमना करना चालू कर दिया। फिर अचानक वो उठी “अरे पहले घर तो बंद कर दूँ….!” कह कर बाहर का, पीछे का दरवाजा बन्द कर आई। और टीवी भी बंद कर दिया।
“ऐसा कर, सुनील…. तू मेरे कमरे में ही अन्दर सो जा, आज….ये तो है नहीं…. आजा….!”
मैं अंडरवीयर में ही उठ कर आंटी के साथ उनके बेडरूम में आ गया। आंटी मुझे और मेरे अंडरवीयर में उठे हुए लण्ड को देख रही थी। वो मुस्कुरा भी रही थी। शायद आज वो मुझसे चुदने के मूड में थी। आंटी ने अपने साथ ही मेरे सोने के लिये भी जगह कर दी। हम दोनों ही बिस्तर पर लेट गये। मुझे लग रहा था कि आज मुझे पता चलेगा कि वास्तव में चुदाई क्या होती है। आंटी के नाम के इतनी बार मुठ मारी, अब मेरा सपना साकार होने जा रहा था।
आंटी सरक कर मेरे पास आ गई। उनका पेटीकोट भी जांघो तक ऊंचा उठा हुआ था। मैंने भी यूं जताया कि मुझे आंटी से बहुत प्यार है। वस्तव में मैं उनके शरीर का स्पर्श चाहता था। सो उनके शरीर से लग कर सोने की कोशिश करने लगा। इसी बीच आंटी ने मुझे अपने सीने से लगा लिया।
“आंटी…. आपके साथ सोने में और प्यार करने में बहुत अच्छा लगता है….!”
“मेरे बेटे…. आ मेरे सीने से लग जा…. मुझे भी तुम पर बहुत प्यार आता है….!” कह कर अपने दोनो चूंचियो के बीच मेरे चेहरे को भींच लिया। मैंने उसकी गहराईयों अपना चेहरा गड़ा दिया।
“आंटी…. मेरी मम्मी मुझे यहा से दूध पिलाया करती थी….!”
“पियेगा क्या….? बोल ना….?”
“आंटी…….. मेरी प्यारी आंटी….!”
आंटी ने अपना ब्लाऊज खोल दिया…. अंधेरे में भी उनकी गोरी गोरी चूंची चमक उठी…. अपने चूचुक मेरे मुख पर उन्होंने रगड़ दिया। मेरा लण्ड खड़ा हो गया था। मैंने उनके कड़े निपल मुख में भर लिये और चूसने लगा। आंटी के मुख से आह निकल गई।
“पी ले मेरे बेटे…. दूध पी ले….!” उन्होने मुझे अपने से चिपटा लिया। और…. और…….. मेरा तन्नाया हुआ लन्ड उनकी जांघों के बीच टकरा गया। उन्हें तुरन्त पता चल गया कि मैं उत्तेजित हो चुका हूँ। उन्होने मुझे और भींच लिया। मेरा लण्ड अब उनकी चूत से भिंच गया था। अपना दूसरा चूचुक मेरे मुख में डालते हुये बोली,”अब इसे भी पी ले….अपनी प्यास बुझा ले….!” मैंने अब उनका दूसरा निपल भी चूसना शुरू कर दिया।
“आंटी…. आप मुझे ऐसे ही प्यार करोगी ना….?”
“हां …. इससे भी ज्यादा….!” कहते हुए वो मेरे शरीर के ऊपर पांव फ़ैला कर चढ़ गई। मेरा लण्ड उनकी चूत पर गड़ा जा रहा था।
मेरा ये पहला अनुभव था…. मुझे ये पता चल गया था कि आंटी के मन में मेरे लिये खूब वासना भरी थी और अब मेरे साथ वासना का खेल खेल रही थी। वो उत्तेजना में पूरी तरह से डूब चुकी थी। मेरी फ़्रेंची अंडरवियर की बगल में से लण्ड बाहर निकल चुका था। आंटी का गदराया हुआ जिस्म मेरे जिस्म से रगड़ खा रहा था। उनका जिस्म मेरे ऊपर पूरा हावी हो चुका था।
“सुन …. तू ये सब बातें इन से मत कह देना….कि तुम रात को यहा सोए थे ……..और…. और…. हमने प्यार किया था….!”
“आंटी ….नहीं….नहीं…. बिल्कुल नहीं कहूंगा…. पर आप इतना प्यार करेंगी….?”
“हां ….मैं और भी प्यार करुंगी….!” और उनके होंठ मेरे होंठ से जुड गये…. आंटी ने शरम छोड़ दी थी। मेरा लण्ड उनकी चूत में घुसा जा रहा था। आंटी का भारी शरीर भी अब मुझे फूलों जैसा हल्का लगने लगा था। मेरा छोटे से अंडरवियर में से मेरा लण्ड बाहर आ चुका था, पर तिरछा पड़ा था। शायद आंटी को पता नहीं चला।
“सुनील …. मुझे प्यार करने में तकलीफ़ हो रही है…. जरा अपना अंडरवियर तो नीचे कर दे….”
“आंटी कपड़े उतार कर प्यार करें….मजा आयेगा ना !” मुझे भी अब उनका नंगा शरीर चाहिये था। नंगा तो क्या आंटी तो पहले ही लगभग नंगी थी। उनका पेटीकोट तो वैसे ही कमर तक उठा था। नीचे से तो नंगी ही थी। ब्लाऊज सामने से मुझे दूध पिलाने के लिये पूरा खोल रखा था। मैंने अपनी बनियान उतार दी और छोटा सा अंडरवियर उतार दिया। आंटी ने भी अपने को अब पूरा नंगा कर लिया। फिर आंटी बिस्तर पर चित लेट गई।
“आजा…. मेरे ऊपर आजा….!” मेरे तन्नाये हुए कड़े लण्ड को उन्होने पकड़ लिया। अब मुझे उनका नंगा शरीर से अपना नंगा शरीर छुआ और शरीर पर उनका स्पर्श हुआ। मैं आनन्द से भर उठा। मैं उन पर सीधा लेट गया। उन्होने अपने दूध को मेरे हाथों में पकड़ा दिया। मैंने जान करके अपना लण्ड उनकी चूत पर रख दिया। मुझे नहीं पता था कि करना क्या है। बस मेरा कड़ा लण्ड आंटी की पेशाब की जगह के आस पास दब रहा था। पर कुदरत का खेल देखो….जाने कैसे अपने आप ही मेरा लण्ड किसी चिकनी जगह पर घुस गया। मुझे सुपाड़े पर एकदम से आनन्द की रगड़ महसूस हुई। आंटी के मुख से सिसकारी निकल पड़ी। और अब आंटी ने नीचे से अपने चूतड़ का कमाल दिखा दिया। एक नीचे से जबरदस्त ऊपर की ओर धक्का मारा। मेरे मुख से चीख निकल गई। मेरे लण्ड पर एक तीखा सा दर्द हुआ। मैंने अपना लण्ड बाहर निकालने की कोशिश की…. पर आंटी ने अपने दोनों पांवो को मेरी कमर पर कस लिया था। तभी दूसरा धक्का लगा। मेरी टीस और तेज हो गई।
“मुझे लग रही है आंटी…. छोड़ो ना मुझे….!”
“धक्के मार….! दो मिनिट के बाद वो ठीक हो जायेगा…. मार धक्के….!”
मैंने उनका कहा मान कर धक्के लगाना शुरु कर दिया। सच में मस्ती आने लगी….मैं जलन के बारे में भूल गया। और सारा ध्यान चोदने में लगा दिया। कुछ ही देर में आन्टी झड़ गई। शायद उमर का असर था या बहुत दिनों बाद चुदाया था, इसलिये जल्दी झड़ गई…. पर वो थक गई थी।
“बस …. अब नहीं…. ला….तेरा ला…. मैं निकाल दूं….” मैंने अपना लण्ड निकाल कर आंटी के हाथ में दे दिया…. पूरा लण्ड गीला हो रहा था…. उन्होने लण्ड को अपने मुँह में भर लिया…. और जोर जोर से चूसने लगी….
“आंटी…. बस करो…. मेरा निकलने वाला है….!” मेरा यह लण्ड चुसवाने का पहला अनुभव था…. मैं झड़ने से बचना चाह रहा था…. पर आंटी ने मेरा सुपाड़ा ऐसा कस के चूसा कि मेरी पिचकारी निकल पड़ी…. सारा वीर्य आंटी के मुख में भरने लगा। उन्होने पूरा वीर्य पी लिया और जोर जोर से चूस कर बाकी भी निचोड़ने लगी। मुझे लगा मैं बिलकुल खाली हो गया हूं। पर झड़ने से मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ा। लण्ड निकाल कर मैं बगल में आ गया।
“हाय सुनील…. तूने आज मुझे इतना प्यार दिया है कि मैं कभी नहीं भूल पाऊंगी….!”मुझे उन्होंने फिर से एक बार चूम लिया।
“आंटी…. मुझे नहीं पता था कि आप मुझे इतना प्यार करती हैं…. मैं तो अब आपके पास ही रहूंगा….!”
“अब सो जा…. ” पर सोना कहां था मेरा तो फिर से खड़ा हो गया था…. आंटी के प्यार का प्यासा था….उनका गदराया हुआ शरीर फिर से सहलाना था। मेरा लण्ड फिर से उसी प्यार को तरस रहा था…. पर आंटी का काम निकल चुका था…. वो खर्राटे भरने लगी थी…. मैं मन मार कर पास में सोने की कोशिश करने लगा…. Hindi Sex Stories
दोस्तो, मैं हाज़िर हूँ एक नई Hindi Porn Stories और दिलचस्प कहानी लेकर जो मेरे दोस्त और उसकी गर्लफ्रेंड की है और एक ब्लू सीडी की है जो उन दोनों पर बनाई गई।
बात उन दिनों की है जब मैं भुवनेश्वर में रह कर अपनी पढ़ाई कर रहा था। मेरा एक दोस्त था समीर ! वो देखने में उतना ख़ास नहीं था पर लड़कियाँ पटा कर चोदने में उस्ताद था। वो हर वक्त इसी फिराक में रहता कि कैसे कोई लड़की पटे और उसको नई चूत चोदने के लिए मिल जाए। वो लड़की पटाने के लिए किसी भी हद तक जा सकता था।
जब हमारा बी.एस.सी का अन्तिम वर्ष था तब एक नई लड़की हमारी ही क्लास में आई। उसके पिताजी का तबादला हमारे शहर में हो गया था। उसका नाम था श्रीजा। श्रीजा देखने में थी बला की खूबसूरत ! गोरा रंग, उस पर लंबे काले बाल, बाएँ गाल पर डिम्पल और होंठों के दाईं ओर एक छोटा सा तिल। फिगर ऐसा कि कोई मॉडल भी शरमा जाए। वो एक गजब की गायिका भी थी। वो कई सारे एल्बम में गा चुकी थी।
जिस दिन से उसको समीर ने देखा, उसी दिन से उसको चोदने के सपने देखने लगा। कई बार उसने मुझे भी अपने सपनों के बारे में बताया कि कैसे उसने श्रीजा को जमकर चोदा सपने में।
उसके बाद उसने श्रीजा के आगे पीछे घूमना शुरु कर दिया। श्रीजा तो पहले पहले किसी भी लड़के को भाव नहीं देती थी, लेकिन एक दिन अचानक समीर ने कुछ ऐसा किया कि वो उसके जाल में फंसती चली गई।
वो उसके लिए नोट्स ला देता, हमेशा उसकी कुछ ना कुछ मदद करता रहता। एक दिन तो हद ही हो गई- जब श्रीजा ने अपनी स्कूटी से एक बच्चे को ठोक दिया, तभी पास में जा रहा समीर वहाँ आकर श्रीजा का कसूर अपने सर ले गया कि स्कूटी असल में वो ही चला रहा था। उसको एक दिन जेल में बितानी पड़ी, मगर इससे उसको श्रीजा के दिल में एक ख़ास जगह मिल गई।
उसके बाद श्रीजा हफ़्ते में एक दो बार हमारे हॉस्टल में भी आने लगी। क्योंकि मैं समीर का रूममेट था इसलिए जब श्रीजा आने के लिए फ़ोन करती तो वो मुझे किसी बहाने से बाहर भेज देता। कुछ दिन बाद समीर ने श्रीजा को प्रोपोज़ कर दिया और श्रीजा मान भी गई। अब वो दोनों घंटो फ़ोन पर बातें करने लगे। अब तो समीर सिर्फ़ उसको चोदने के लिए मौके के इन्तजार में रहने लगा।
एक दिन जब श्रीजा समीर से मिलने हमारे हॉस्टल आई तो समीर ने मुझे बाहर जाकर बाहर से दरवाजा बंद कर देने को कहा और मैंने वैसा ही किया। मेरे मोबाइल पर दो घंटे बाद समीर का कॉल आया और मैंने दरवाजा खोल दिया और श्रीजा चली गई।
अगले एक महीने में ऐसा कई बार हुआ। तब मेरे मन में उत्सुकता बढ़ने लगी कि आख़िर ये लोग बंद कमरे में दो दो घंटे तक करते क्या हैं ?
तभी मेरे मन में एक योजना आई। मैंने मेरे एक दोस्त से एक हैन्डीकैम मांग कर अपने पास रख लिया। एक दिन जब समीर श्रीजा से फ़ोन पर बातें कर रहा था तब मुझे पता चला कि श्रीजा आज हॉस्टल आने वाली है। मैंने मौका मिलते ही समीर से छुपाते हुए कैम को सेट कर दिया जिससे कि समीर का बेड पूरा उस पर रिकॉर्ड हो सके। और उसे ऑन करके इन्तजार करने लगा।
कुछ देर बाद श्रीजा आई और पहले की तरह मैं बाहर चला गया और दरवाजा बाहर से बंद कर दिया।
करीब ढाई घंटे बाद समीर का कॉल आया, मैंने दरवाजा खोल दिया और श्रीजा चली गई।
कुछ देर बाद समीर भी उठा और कहीं घूमने चला गया। तब मैंने कैम निकाला और उस पर जो रिकॉर्ड हुआ था उसे देखते ही दंग रह गया।
श्रीजा उस दिन बला की सुंदर लग रही थी, काले रंग के टॉप पर टाइट जींस गजब ढा रहे थे। उसका गोरा बदन जैसे कि कोई सफ़ेद मोती धूप में रखा हो। उसके गुलाबी लब जैसे गुलाब की पंखुड़ियाँ सुबह की ओस में भीगे हुई ! उसके गोरे रंग पर काले घने बाल क़यामत लग रहे थे। उसके कसे टॉप से उसके स्तन झाँक रहे थे जैसे दो पहाड़ियों के बीच में एक खाई हो।
श्रीजा को पहले समीर ने बेड पर बिठाया और कुछ स्नैक्स खाने के लिए दिए। फिर पानी दिया। उसके बाद समीर उसकी पीठ की तरफ़ आ गया और पीछे से ही गले पर चूमने लगा। श्रीजा थोड़ी अंगडाईयाँ लेने लगी। फिर समीर ने उसका चेहरा अपनी तरफ़ घुमाया और उसके लबों पर अपने होंठ सटा लिए। श्रीजा ने अपने आँखें बंद कर ली और जोर-जोर से सांसें लेने लगी। इसी बीच समीर ने अपना हाथ धीरे से उसके पेट पर रखा जो कि संगमरमर की तरह लग रहा था।
फिर हाथ सरकाते हुए वो उसके वक्ष तक पहुँच गया और जोर जोर से टॉप के ऊपर से ही स्तन दबाने लगा। श्रीजा सिसकारियाँ भरने लगी।
फिर समीर ने उसके चेहरे को हर जगह चूमा-चाटा। कुछ देर बाद उसने अपने होंठ उसके गले की तरफ़ सरकाए और धीरे से बोबों के उभारों को चाटने लगा। फिर उसने अपना शर्ट उतार दिया और श्रीजा का भी टॉप ऊपर से खींच कर निकाल दिया। श्रीजा के स्तन ब्रा के बंधन में जकड़े हुए आजाद होने का इन्तजार करते हुए से लग रहे थे। फिर समीर ब्रा के ऊपर से ही उसके वक्ष को मसलता रहा और श्रीजा सिसकारियाँ लेती रही।
कुछ देर बाद समीर ने उसकी पीठ की तरफ़ हाथ लेजाते हुए उसकी ब्रा का हुक खोल दिया।
श्रीजा की चूचियाँ आजाद होकर झूम उठी। वो न तो बड़ी, न ही छोटी, सही आकार की और बिल्कुल ही मक्खन की तरह लग रही थी। बीच में गोलाकार चुचूक थे जो कि भूरे रंग के थे। श्रीजा के चुचूक ज्यादा बड़े नहीं थे लेकिन उन्हें देखकर ऐसा लग रहा था मानो उनमें से मधु निकल रहा हो और उसे पीने के लिए किसी का भी मन मचल उठे।
फिर समीर ने उन नाजुक बोबों को अपने दोनों हाथों में लिया और मसलने लगा। उसके हाथों की जकड़न से बोबे के आकार कई तरह से बदल रहे थे। श्रीजा इसी बीच जोर जोर से सिसकारियाँ भर रही थी। वो समीर के बालों में अपने हाथ फेरते हुए उसके चेहरे को अपने मोमों में दबा रही थी।
तभी समीर ने अपने हाथ नीचे सरकाए और श्रीजा की जींस की चैन खोलने लगा और कुछ ही देर में वो श्रीजा को सिर्फ़ पैंटी में ले आया। श्रीजा का गदराया बदन किसी अप्सरा सा लग रहा था। जी कर रहा थी कि तभी उसको अपनी बाँहों में भर लूँ।
श्रीजा ने समीर का लंड जींस के ऊपर से ही सहलाना चालू कर दिया था। समीर का लंड जींस को फाड़ कर बाहर आने को बेताब हो रहा था।
समीर ने फिर अपनी जींस खोल दी और अंडरवियर भी निकाल फेंका। उसका 6″ का लंड अब पूरे दम से खड़ा था। समीर ने अब श्रीजा की पैंटी भी उतार फेंकी। श्रीजा की चूत एक नन्हे गुलाब सी कोमल और रस से भरी हुई सी लग रही थी। वो दोनों अब एक दूसरे में समाने के लिए पूरी तरह से तयार थे।
तभी समीर नीचे सरक गया और श्रीजा के चूत में एक गहरा चुम्बन लिया। श्रीजा का पूरा बदन झूम उठा। फिर समीर ने अपने उंगली से श्रीजा की चूत को बहुत सहलाया और काफी देर तक दुलारता रहा। श्रीजा तो जैसे इस दुनिया में ना होकर किसी और ही दुनिया में चली गई थी।
समीर श्रीजा के सारे बदन को चूमता जा रहा था और श्रीजा उसके बालों को सहलाती जा रही थी।
श्रीजा जोर जोर से सिसकारियाँ भर रही थी और समीर उसके एक बोबे को चूमता और दूसरे को हाथ से पुचकार रहा था। उसके बाद श्रीजा का धीरज जवाब दे गया और उसने अपनी दोनों टांगों को फ़ैला कर समीर के लिए जन्नत का रास्ता खोल दिया और बोलने लगी- जानू, अब तो मेरे अन्दर समां जाओ जल्दी ! मैं और इन्तजार नहीं कर पाऊंगी !
समीर तब पूरी तरह से श्रीजा के ऊपर आ गया। अपना 7″ का लंड श्रीजा की चूत के ऊपर रखा और धीरे से धक्का दिया तो लंड धीरे धीरे अन्दर जाने लगा। श्रीजा के मुँह से आःह निकल पड़ी। फिर वो अपना लंड धीरे धीरे अन्दर- बाहर करने लगा। बीच-बीच में बोबों को चूम लेता और चूस लेता। कभी कभी लबों को चूम लेता। कुछ देर बाद समीर ने अपनी गति बढ़ाई और जोर जोर से चोदने लगा। श्रीजा अपने कमर को जुम्बिश देती समीर का भरपूर साथ देने लगी। करीब आधे घंटे बाद समीर और तेजी से चोदने लगा फिर अचानक अपना लंड निकाल के श्रीजा के पेट पर सारा माल गिरा दिया। फिर करीब पाँच मिनट तक वो दोनों चूमा-चाटी करते रहे।
फिर समीर उठा और एक कपड़े से श्रीजा के पेट से सारा माल पौंछ डाला। फिर दोनों ने कपड़े पहन लिए।
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तब से हर वक्त श्रीजा का गदराया बदन मेरे सामने नाचता रहता। मैं भी श्रीजा को चोदने के सपने देखने लगा।
इस कहानी का अगला भाग शीघ्र ही अन्तर्वासना डॉट कॉम पर प्रकाशित होगा। Hindi Porn Stories
मैं राजेश लुधियाना से Antarvasna आपको अपनी कहानी नहीं बल्कि हकीक़त बताने जा रहा हूँ जो मेरे साथ हुआ।
भैया की नई नई शादी हुई थी, हम सब बहुत खुश थे क्योंकि भाभी बहुत ही खुश मिजाज हैं। शादी के कुछ महीनों बाद हमारे माता पिता को किसी काम से आठ दस दिन के लिए कहीं जाना पड़ा, सो घर में हम तीनों ही रह गए। उस पर भैया को एक दिन ऑफिस के काम से जाना पड़ा।
उस दिन घर में हम दोनों अकेले थे, सो भाभी से कहा- भाभी, कहाँ अकेले मेरे लिए खाना बनाओगी! चलो कहीं बाहर घूम आते हैं, आपका दिल भी बहल जायेगा और बाहर से खाना भी खा आयेंगे।
तो भाभी झट से मान गई। हाँ! मेरी भाभी की उम्र 26 साल कद 5’3′ रंग गोरा और फिगर 36/28/34 है। उसने जींस और टॉप पहना और हम मूवी देखने गए। हमने मूवी देखी। मूवी थोड़ी रोमांटिक थी सो मुझे कुछ अलग महसूस हो रहा था।
हम ने खाना पैक करवाया और सोचा घर जाकर खायेंगे। खाना पैक करवा के घर आ गए और मैं भाभी से बोला- आप कपड़े बदल लो, फिर खाना खाते हैं।
भाभी ने अपनी नाईट ड्रेस पहन ली। ड्रेस पारदर्शक थी, उसमें से उसके शरीर का एक एक कट नज़र आ रहा था कि कहाँ से उसकी चूचियाँ शुरू होती हैं, कहाँ पर ब्रा है और कहाँ से कमर और कहाँ पर उसकी पेंटी है।
उसको ऐसे देख कर मेरे शोर्ट्स में मेरा लंड स्टील रॉड की तरह हो गया। मेरा बैठना मुश्किल हो गया, बड़ी मुश्किल से अपने लंड को नज़र छुपाकर कुछ ठीक किया।
उसके बाद हमने खाना खाना शुरू किया तो मैंने भाभी से कहा- तुम रोज सर्व करती हो, लाओ, आज मैं करता हूँ!
और मैं जैसे ही दाल भाभी की प्लेट में डालने लगा तो मेरा ध्यान हट गया और दाल भाभी की ड्रेस के ऊपर गिर गई। मेरी तो जान ही निकल गई कि अब भाभी मुझे डांटेगी। मैंने झट से पास पड़े कपड़े से उनकी ड्रेस साफ़ करनी शुरू कर दी। पहले तो मैं ड्रेस ही साफ़ कर रहा था पर अचानक मेरा ध्यान गया कि दाल उनकी चुचियों पर गिरी है और उनकी आँखें बंद हैं। शायद मेरे दाल साफ़ करने पर वो गरम हो रही थी तो मैंने दाल साफ़ करने के बहाने उनकी चुचियों को सहलाना चालू रखा।
उनकी चुचियाँ कड़ी हो रही थी और इधर शोर्ट्स मेरा लंड भी फड़क रहा था। भाभी की आँखें अभी भी बंद थी तो मैंने दूसरे हाथ से उनकी दूसरी चूची को सहलाना शुरू कर दिया और साथ में दबा भी रहा था। जब भाभी ने कुछ नहीं कहा तो मैं समझ गया कि वो भी गरम है। तो मैंने उसकी चुचियों को जोर से दबाना शुरू कर दिया तो उनके मुँह से आह्ह् अह्ह् उफ्फ्फ निकलने लगा। मैंने लोहा गरम जान कर उनकी नाइटी का फ़ीता खोल दिया। अब वो मेरे सामने सिर्फ ब्रा और पेंटी में थी। उनकी आँखें अभी भी बंद थी।
अब मैं उनकी चुचियाँ ब्रा के ऊपर से सहला रहा था। वाह, क्या सफ़ेद चुचियाँ थी! पहली बार इतनी पास से देख रहा था! दिल कर रहा था खा जाऊँ! उनको सहलाते सहलाते हाथ कभी पेट तक ले जाता और कभी नाभि तक! तो वोह सिसक पड़ती- आ आआ आह्ह्ह ह हम्म म्म्म्म!
एक हाथ से सहलाते हुए हाथ पीछे ले जाकर उसकी ब्रा खोल दी और उनकी ब्रा में टाइट हो रही चुचियों को आज़ाद कर दिया। भाभी की आँखें अभी भी बंद थी। मुझे लगा शायद वो आँखें खोलकर मेरे साथ नज़र मिलाना नहीं चाहती थी।
उनके चुचूक बिल्कुल छोटे थे पर एक दम सख्त थे और हल्के रंग के थे। उसके चुचूक देख कर लंड अब बाहर आने को बेताब था, लगता था कि अगर एक दो मिनट में नहीं निकला तो अंडरवियर को फाड़ देगा।
भाभी की आँखें बंद थी तो मुझसे रहा नहीं गया, मैंने झट से भाभी के चुचूक को मुँह में ले लिया और चूसना शुरू कर दिया। भाभी ने एकदम से मुझे पकड़ लिया और मेरे सिर को जोर से दबाना शुरू कर दिया और कहने लगी- आह्ह्ह्ह हाँ! ऐसे ही करो और जोर से आआआआह्ह्ह ह्ह्ह आज इनको नहीं छोड़ना! बहुत प्यासी है यह! इनको खूब अच्छे से चूसो! आ आह!
अब तो मैं दोनों चुचियों पर टूट पड़ा, मैं पागल हो रहा था भाभी की मस्त चुचियाँ देख कर! उनको मसल रहा था, चूस रहा था जैसे बच्चे चूसते हैं। कभी कभी काट भी लेता था तो वो चिल्ला उठती। पर मेरे सिर को दबाये जा रही थी। मैंने 8-10 मिनट तक भाभी की चुचियों को खूब चूसा, चूस चूस के लाल कर दी, कहीं कहीं तो दांतों के निशान पड़ गए थे।
अब मैंने भाभी को ऐसे ही अपनी गोद में उठाया और बेडरूम में ले गया, जाकर भाभी को बिस्तर पर गिरा दिया, मैं उन पर गिर पड़ा और भाभी को चूमना शुरू कर दिया। भाभी सिर्फ पेंटी में थी पर पेंटी पर निशान से पता लग रहा था कि भाभी स्खलित हो चुकी है।
मैंने भाभी को हर जगह चूमा, हर चुम्बन पर वह सिसक पड़ती। उसमें से आ रही मदमस्त खुशबू मुझे और पागल कर रही थी। अब वह भी मुझे पागलों की चूम रही थी। जब मैंने भैया का पूछा तो कहती- उनके पास समय नहीं है ऐसे प्यार करने का! उनको तो बस दो मिनट का सेक्स पसंद है, चूत में डाला और हो गया! उनको यह सब पूर्व-क्रीड़ा पसंद नहीं है। इसलिए आज सच में मजा आ रहा है! पहली बार किसी ने मुझे सेक्स से पहले वो मजा दिया जिसके लिए मैं तड़पती रही हूँ।
इतनी देर में मैंने भाभी की पेंटी भी उतार दी थी, वाह क्या मस्त चूत थी! आज तक ऐसी चूत तो मैंने ब्लू फिल्म में भी नहीं देखी थी, एक दम सफ़ाचट थी, चूत के होंठ गुलाबी थे और बिल्कुल छोटा सा चीरा था ऐसे लग रहा था जैसे अभी कुँवारी है। मुझसे रहा नहीं गया और मैंने झट से उसको चूसना शुरू कर दिया तो वह एक दम से उछल पड़ी। मैंने झट से उसकी चूत में जीभ डाल दी और उसका रस चूसना शुरू कर दिया। बहुत ही स्वादिष्ट थी उसकी चूत! उसकी चूत को चाट चाट कर साफ़ कर दिया मैंने!
वो बड़ी जोर से मेरा सिर दबा रही थी और कह रही थी- आऽऽ आह्ह उफ्फ्फ आअह्ह्ह ह्ह्हू ऊऊउल् मैं मर गई!
अब तक उसका हाथ मेरे लंड तक पहुँच गया था, वो उसको सहला रही थी निकर के ऊपर से! मैंने झट से अपनी निकर उतार दी। अब हम बिल्कुल नंगे थे। वह मेरा लंड देख कर हैरान रह गई, कहती- इतना बड़ा?
अब मैंने फिर से भाभी के चुचूक चूसना शुरू कर दिया और उनको जोर से मसल रहा था, तो कहती- हाँ राजेश! और जोर से कर! आआह्ह बहुत मजा आ रहा है!
फिर कोई 5 मिनट की चुसाई के बाद हम 69 पोज़ में आ गए। भाभी ने कहा- ला राजेश, अब मुझे भी मजा लेने दे! तेरे भैया तो चूसने ही नहीं देते! ना चूसते हैं, ना ही चुसवाते हैं!
भाभी ने झट से मेरा लंड मुँह में लिया और चूसने लगी। पर लौड़ा इतना बड़ा हो गया था कि उनके मुँह में नहीं आ रहा था। पर जितना आ रहा था, वो उतना बड़ी मस्ती से चूस रही थी। मेरी भी जान निकल रही थी, लगता था जैसे कहीं स्वर्ग में आ गया हूँ और मैं भाभी की चूत को बड़ी मस्ती से चूस रहा था। कभी उसके दाने को चूसता तो कभी होंठों से खींचता तो उछल पड़ती। कभी उसकी चूत में उंगली करता, कभी उसकी चूत में जीभ डालता। पूरी चूत की मस्ती से चुदाई कर रहा था जीभ से!
इस दौरान वो कम से कम तीन बार झड़ चुकी थी। अब मैं भी झड़ने के करीब था तो मैंने भाभी का सिर पकड़ लिया और जोर से उनके मुँह की चुदाई शुरू कर दी। वो ग्गू गुउउऊ कर रही थी उसकी आवाज़ नहीं आ रही थी। मैंने बालों से पकड़ कर पूरा लंड मुँह में डाल दिया तो लगता जैसे उसकी सांस रुक गई। वो मिचका रही थी पर मैंने पूरे जोश से उसके मुँह की चुदाई चालू रखी और 5-7 मिनट बाद उसके मुँह में ही झड़ गया। उसने भी सारा रस पी लिया, एक भी बूँद बाहर नहीं गिरने दी।
मैं झटके लेकर झड़ता रहा, लग रहा था कि जैसे आज वीर्य निकलना बंद नहीं होगा।
हम दोनों थक गए थे और ऐसे ही नंगे एक दूसरे के साथ चिपक कर सो गए।
उसके बाद अगले दिन क्या हुआ, वो आपके जवाब देने पर बताऊँगा। Antarvasna
Antarvasna पाठकों को मेरी प्यारी सी चूत की तरफ से बहुत सारा प्यार ! काफी सारी कहानियाँ पढ़ने के बाद मैं चाहती हूँ कि अपनी आप-बीती भी मैं आपको सुनाऊँ।
मेरा नाम बेला है, मैं मुज़फ्फरनगर से हूँ। मेरी शादी एक सीधे साधे चूतिया टाइप के इंसान से हुई है। शादी के बाद हम अपनी मधु चन्द्रिका मनाने मनाली गए पाँच दिनों के लिए। उन पाँच दिनों में ऐसा कुछ नहीं हुआ जिससे मुझे मज़ा आया हो ! आप शायद समझ गए ! प्रदीप (मेरे पति) ने मुझे ढंग से नहीं चोदा- मैं अनचुदी रह गई।
मैं वापस दिल्ली आ गई और ऑफिस के काम में लग गई।
एक रोज़ बॉस ने कहा- शनिवार को आना है !
मुझसे वैसे भी शनिवार काटे नहीं कटता था क्यूंकि प्रदीप का शनिवार को भी ऑफिस होता है। मैं तकरीबन ग्यारह बजे ऑफिस पहुँच गई। बॉस आ चुके थे। हम दोनों ने दो बजे तक डटकर काम किया। ऑफिस में सिर्फ मेरा बॉस, मैं और ऑफिस बॉय राजू था।
मैं अपने कंप्यूटर पर कुछ काम कर रही थी कि बॉस पीछे से आकर देखने लगे और समझाने लगे कि कैसे क्या करना है। मैं उनका निर्देश लेकर काम करती रही। चूंकि बॉस बहुत पास आकर देख रहे थे, मेरा एक गाल उनके बहुत ही नज़दीक हो गया था। उनको पता नहीं क्या सूझी, उन्होंने मेरे गाल पर एक पप्पी दे दी। मैं चौंक गई।
बॉस ने कहा- बेला, तुम बहुत सुन्दर हो और मुझे तुम अच्छी लगती हो।
मैं बस उनको देखती रह गई। फिर उन्होंने मेरी बाहों पर हाथ फेरना शुरु किया। हाथ फेरते फेरते उनके हाथ मेरे गले तक पहुंचे और वे मुझे प्यार करने लगे। इतने में राजू अन्दर आया। मैंने बॉस से कहा- सर, राजू को बाहर भेजिए पहले।
बॉस खुश। इसमें मेरी हाँ जो थी।
वे बाहर गए यह कहते हुए कि तैयार रहना। मैं समझ गई कि बॉस मुझे आज चोदेगा और मैं खुश हो गई। मैंने अपनी चूत से कहा- देख निगोड़ी ! सब्र का फल मीठा होता है। आज उछल कर चुदना।
मैं सीधे बाथरूम गई, खूब मूता और अपनी चूत को खूब साफ़ किया। हल्का सा स्प्रे लगाकर मैं बाहर आ गई। इतने में बॉस अन्दर आये। और उन्होंने मुझे दीवार से टिकाकर मुझे खूब चूमा। चूमते चूमते उन्होंने मेरा ब्लाऊज उतार दिया। अब मैं ब्रा और स्कर्ट में थी। मुझे अपनी गोद में बिठाया और मेरे होटों को चूसने लगे। मैं भी कहाँ पीछे हटने वाली थी। मैं भी मस्त हो कर उनसे झूल गई। क्यों ना झूलती ! मेरी चूत में भी तो कुछ कुछ हो रहा था।
उन्होंने मुझे खड़ा किया और मेरी स्कर्ट उतार दी। मैं अब सिर्फ चड्डी और ब्रा में थी। बॉस मुझे निहार रहे थे, मैंने इनकी टी-शर्ट उतार दी और फिर उनकी जींस। बॉस का लंड तो बाहर आने के लिए कुलांचे भर रहा था। मैंने उनका लंड पकड़ लिया। बॉस ने एक आह भरी और मुझे मेरी ब्रा से अलग किया। दोनों मम्मों को दबाने लगे और फिर मुझे गोद में उठाकर मेरी चड्डी अलग कर दी। इस वक़्त मैं बॉस की बाहों में पूरी की पूरी नंगी थी। बॉस मुझे इसी अवस्था में बोर्ड रूम ले गए और मुझे मेज़ पर लिटा दिया। मेरे दोनों हाथ ऊपर और दोनों टाँगे अलग अलग करके वे मेरी झांटों से खेलने लगे। मेरे होंठों पर उनके होंठ, उनका एक हाथ मेरी एक बांहों को सहला रहा था और दूसरे हाथ से वे मेरी चूत से खेल रहे थे। ऐसा सुख मुझे प्रदीप ने कभी नहीं दिया था। बॉस मुझे चूमते हुए मेरी नाभि तक पहुंचे और फिर मेरी चूत पर। चूत को चौड़ा कर उन्होने अपनी जीभ मेरे रति-छिद्र में डाल दी जिससे में दो फ़ुट ऊपर उछल गई।
इतने में मेरा मोबाईल बजा, अब मैं कैसे उठाती। बजते बजते बंद हो गया। फिर बजा। और उसके बाद फिर। मैं समझ गई प्रदीप ही होंगे। इतने में ऑफिस का फ़ोन बजा और चूंकि एक फ़ोन उस मेज़ पर ही था, मैंने अनायास उठा लिया।
प्रदीप ही थे, पूछ रहे थे- क्या कर रही हो डार्लिंग?
अब मैं क्या कहती – अपनी चूत चुसवा रही हूँ?
मैंने कहा- काम कर रही हूँ।
इतने में राज के चूसने से मैं झड़ने वाली थी। मेरे मुँह से एक लम्बी आह निकली।
प्रदीप ने पूछा क्या हुआ?
सोचा- बोल दूं कि झड़ने वाली हूँ, लेकिन कहा- एक जगह बैठे बैठे पांव सुन्न हो गया। हिल नहीं पा रही हूँ।
इतने में राज ने मेरी चूत से पानी निकाल दिया। मैंने फ़ोन रख दिया और जोर से हूँ-हाँ करने लगी। बॉस ने अब ऊँगली करनी शुरू कर दी और मैं फिर से झड़ गई। बॉस मुझे खूब चूमा और कहा- उठो।
मैं मेज़ से उठ नहीं पा रही थी। बॉस समझ गए। मेरे बदन को निहारते रहे।
पांच मिनट के बाद में उठी और बॉस के सामने खड़ी हो गई। अब बॉस मेज़ पर लेट गए। मैंने उनकी चड्डी उतार दी। उनका लंड तो एक भयानक किस्म का जीव लग रहा था। आठ इंच लम्बा और डेढ़ इंच मोटा। उनका सुपारा एकदम गुलाबी रंग का था और मैंने उस सुपारे को अपने नाख़ून से थोड़ा पिंच किया। मेरे बॉस के मुँह से एक दर्दनाक आह निकली। मैंने अपने दोनों हाथों से उनका लंड लिया। मेरे दोनों हाथों में नहीं समा पा रहा था वो। खैर मैंने एक हाथ से उसको हिलाना शुरू किया।
फिर बॉस ने अपनी टांगें चौड़ी की और कहा- टेबल पर आ जाओ !
मैं मेज़ पर चढ़ गई और उनका लंड चूसने लगी। मैंने खूब चूसा और खूब हिलाया। उनके टट्टे अपने मुँह में लेकर उनके लंड को ऊपर नीचे करने लगी। बॉस शायद झड़ने वाले थे। एक लम्बी आह भरी और बोले- बेला मेरा मट्ठा निकल रहा है ! चूस रानी चूस।
मैने भी उनके लंड को चूसकर सारा का सारा मट्ठा निकाला और पी गई। बॉस का लंड एक ओर लुढ़क गया। मैने उसे चूमा और बॉस के पास आकर लेट गई।
दस मिनट के बाद बॉस ने पूछा- तैयार हो?
मैं तो कब से तैयार थी, मैं बोली- हाँ ! और इनका लंड फिर से तैयार करने लगी।
बॉस मेरी चूत में ऊँगली करने लगे। मैं तो गीली हो गई थी। बॉस ने मुझे गोद में उठाया और सोफे की ओर ले गए। मुझे औंधा लिटा कर उन्होंने मेरे चूतड़ उठाये और फिर मेरी फुद्दी में अपनी एक ऊँगली डाल दी। मैं तैयार थी। इतने में बॉस ने अपना सुपारा मेरी चूत में डाला और एक जोर का झटका दिया। मैं चीख पड़ी। बॉस को कोई फर्क नहीं पड़ा। वे मेरी कमरिया को पकड़कर कभी मुझे अपनी ओर खींचते या फिर मुझे स्थिर रखकर अपने आप को धक्का देते। दोनों ही सूरत में मेरी फाड़ रहे थे। मैं तो बस चीखती रही। ये तो सहवाग की तरह बल्लेबाजी कर रहे थे। पता नहीं इनको क्या जल्दी थी। ऐसा उन्होने मेरे साथ तकरीबन पंद्रह मिनट तक किया और नीचे से मेरे मम्मों को भी दबा रहे थे।
मैं चिल्ला रही थी- बस करो बस करो, आह, ऊह, मर गई, मम्मीईई, मम्मीईईई !
मगर बॉस को कोई रहम नहीं आया। बॉस मुझे चोदते रहे और मैं चुदती रही। मेरी चूत का तो उन्होंने भोसड़ा बन दिया था। मन ही मन चाह रही थी कि प्रदीप देखें और सीखें कि किस तरह से एक चूत को चोदा जाता है। थोड़ी देर में बॉस झड़ने वाले थे। उन्होंने अपना लंड निकाला और मेरी गोरी पीठ पर रख दिया। एक गर्म एहसास हुआ पीठ पर और बॉस ने अपना सारा माल मेरी पीठ पर उड़ेल दिया और फिर मेरे बगल में बैठ गए। मैं बॉस की गोद में लुढ़क गई। मैं बहुत थक गई थी। मैंने शादी से पहले ऐसी चुदने की कल्पना भर की थी। प्रदीप ने यह सुख कभी ना दिया और ना ही कभी देगा। और बॉस ने तो मेरी ले ली।
उस रोज़ बॉस ने मुझे दो बार मेरी चूत को और चोदा और एक बार गांड भी मारी। शाम होते होते मैं बहुत पिद चुकी थी। इतनी चुदाई के बाद तो मैं खड़ी भी नहीं हो पा रही थी। बॉस ने मुझे उस रात घर तक छोड़ा। उसके बाद तो मैं बॉस से खूब खुलकर चुदने लगी। मैं हफ्ते में तीन चार बार तो बॉस से चुदती ही हूँ। अच्छा एक बात तो बताना ही भूल गई। मेरा प्रोमोशन हो गया है।
वैसे Antarvasna प्रदीप भी कभी कभी अपनी लुल्ली मेरे अन्दर डाल देता है। अब बर्फी खाकर गुड़ में मजा कहाँ रहता है?
यह घटना तब की है जब मेरी उम्र 22 थी, मैं अपनी पढ़ाई पूरी कर चुका था और एक ऑटोपार्ट्स की दुकान में काम करता था. मेरे बॉस दुकान के मालिक मुझे छोटू बुलाते थे, उनकी उम्र करीब 36 या 37 साल थी. उनकी पत्नी जिसका नाम मेघा था, उनकी उम्र करीब 30-31 की थी लेकिन वो अपने सुंदर चेहरे, सेक्सी बदन से दिखने पर ऐसी बिल्कुल भी लगती ही नहीं थी कि वो इतनी उम्र की भी हो सकती है, वो बहुत ही हॉट और सेक्सी औरत थी, उनकी एक बेटी भी थी.
मेरे बॉस ने अपनी शादी बहुत देर से की थी.
मुझे अपने बॉस की दुकान के काम के साथ साथ उनके घर के काम भी छोटे बड़े सभी करने पड़ते थे. जैसे कि बॉस का उनके घर से दिन में खाना लेकर आना, घर के लिए कोई भी सामान ले जाना… और भी बहुत कुछ… इससे मेरी और मेरे बॉस की बीवी की बहुत अच्छी बनती थी. उनका व्यव्हार भी मेरे लिए बहुत अच्छा था और मैं हमेशा उन्हें मजाक में बॉस ही बोलता था. लेकिन वो कभी भी मुझसे किसी भी बात पर नाराज नहीं होती थी. वो भी मुझे प्यार से छोटू ही बोलती थी.
जब भी मैं उनके घर पर काम से जाता तो हम बहुत देर तक मस्ती मज़ाक करते. मुझे उनके फिगर के साईज का तो पता नहीं हैं लेकिन वो भरे बदन की थी. उनका रंग भी बिल्कुल गोरा था. हमारा मजाक इतना होता था कि जब भी मैं अपने बॉस का खाना लेने जाता तो मैं उनसे मजाक में बोलता था- आपके पापा ने खाना मंगवाया है.
मेरे मुख से यह बात सुनकर ज़ोर से हँसने लगती और मुझसे कहती- तू बहुत बदमाश हो गया है. बहुत बड़ी बड़ी बातें करता है.
एक दिन मेरे बॉस ने मुझसे बोला- छोटू, मैं 20-25 दिन के लिए किसी जरूरी काम से अपने गाँव जा रहा हूँ तो तू क्या मेरे पीछे से दुकान सम्भाल लेगा?
मैं बोला- हाँ बॉस, कोई बात नहीं, आप आराम से बिना चिंता किए चले जाइये.
फिर बॉस मुझसे बोले- मैडम मेरे साथ नहीं जाएँगी क्योंकि बेटी का स्कूल है तो इसलिए तू दुकान बंद करने के बाद मेरे घर पर ही रहना.
मैं बोला- जी बॉस…
फिर बॉस बोले- मैं कल सुबह ही निकल जाऊंगा तो तू दुकान पर ठीक समय पर आ जाना.
दूसरा दिन आया, मैंने दुकान खोली तब तक बॉस जा चुके थे और मैं पूरे दिन बिल्कुल अकेला था.
फिर रात हुई और मैं अपने बॉस के घर पर गया और वहां पर पहुंचने के बाद मैडम ने मुझसे पूछा कि क्या तुमने दिन में खाना खाया था?
मैं बोला- जी बॉस, मैंने दिन में खाना खा लिया था.
फिर कुछ देर बाद मैडम ने खाना लगाया और हमने एक साथ ही बैठकर खाना खाया और उसके बाद हम तीनों खा पीकर सो गये.
मैं हाल में ही सोया था और ऐसे ही तीन दिन गुजर गये, सब कुछ एकदम ठीक ठाक था.
उसके अगले दिन रात के करीब 2:30 बज रहे थे और मुझे बहुत ज़ोर से पेशाब लगी तो मैं पेशाब करने उठा और जब मैं वापस आया तो मेरी नज़र मैडम के रूम की तरफ चली गई. मैंने देखा कि रूम का दरवाजा थोड़ा सा खुला हुआ था तो मैंने सोचा कि शायद मैडम जाग रही है तो इसलिए मैं रूम के बहुत करीब गया और जैसे ही मैंने अंदर देखा तो देखकर मेरे होश उड़ गये और मेरी दोनों आँखें फैल गई, क्योंकि उस समय मेरी बॉस मेक्सी के ऊपर से ही अपनी चूत को सहला रही थी और आअहह उउफफफ्फ़ हनमम्म कर रही थी.
मेरा मन किया कि मैं जाकर उनसे चिपक जाऊँ लेकिन मेरी इतनी हिम्म्त नहीं हुई और मैं किसी तरह अपने आप पर कंट्रोल करके या शायद उनसे डरकर मैं वापस आकर सो गया.
फिर सुबह हुई और हम नाश्ता कर रहे थे, मैं अब चोर नज़र से मैडम को ही बार बार देख रहा था और तभी मैडम मुझसे बोली- क्या बात है, आज तुम बहुत चुपचाप हो?
मैंने कहा- ऐसा कुछ नहीं है.
फिर मैं दुकान पर जाने के बाद पूरे दिन भर बॉस की बीवी की चुदाई के बारे में ही सोचता रहा और सोचते सोचते मेरा लंड टाईट हो जाता!
आज मैं रात को सोया ही नहीं, बस उनके बारे में ही सोचता रहा और रात को करीब दो बजे मैं फिर से उठा और मैडम के रूम की तरफ जाकर देखा, लेकिन आज दरवाजा अंदर से बंद था तो मैं करीब गया और वहीं पर बैठ गया और कुछ देर बाद अंदर से फिर वही सिसकारियों की आवाज़ आने लगी और मैं बाथरूम में जाकर मुठ मारने लगा.
ऐसे ही पूरे 6 दिन निकल गये.
मेरा मन अब बॉस की बीवी की चुदाई को चोदने का बहुत कर रहा था और फिर वो रात आ गई, रात के 1 बज रहे थे, मैं दरवाजे के बिल्कुल पास ही था और मैडम की आवाज़ सुन रहा था. मैंने अब दरवाजे पर ज़ोर से हाथ मार दिया और जिसकी वजह से दरवाजा खुल गया और मैं मैडम से बोला- क्यों आपकी तबीयत तो ठीक है ना?
मैडम बोली- हाँ क्या हुआ? मैं तो एकदम ठीक हूँ.
मैं बोला- जी मैडम!
और फिर मैं जाकर हॉल में बैठ गया.
थोड़ी देर बाद दरवाजा खुला और मैडम बाहर आई. मैं उस समय सोफे पर बैठा हुआ था तो वहीं पर मैडम भी आकर बैठ गई और वो बोली- क्या हुआ, क्यों चिल्ला रहे थे मैं डर गई थी?
फिर मैं बोला- मैडम, मैंने आपकी आवाज़ सुनी तो मैंने सोचा कि शायद आपकी तबीयत खराब है.
मैडम बोली- नहीं, मैं एक सपना देख रही थी.
मैंने पूछा- कैसा सपना?
मैडम बोली- वो एक बहुत डरावना सपना था.
अब मैं उनसे नाटक करने लगा- क्या मैडम आप भी सपनों से डरती हो?
अब वो कुछ नहीं बोली.
फिर मैंने उनसे पूछा- क्या हुआ मैडम, क्या आप ज़्यादा डर गई हो?
मैडम बोली- नहीं तो!
मैं बोला- फिर आप बिल्कुल चुप क्यों हो?
तो मैडम बहुत ही धीरे से बोली- मुझे बहुत प्यास लगी है.
मैं तुरंत समझ गया लेकिन फिर भी मैंने नाटक किया- हाँ ठीक है, मैं अभी पानी लाता हूँ!
और मैं उठकर पानी लाया, उनसे बोला- यह लीजिए!
तो मैडम ने देखा तो मुझे हँसी आ गई.
फिर मैडम मुझसे पूछने लगी- तुम ऐसे हंस क्यों रहे हो?
मैं उनसे बोला- लीजिए अपनी प्यास बुझा लीजिए!
तभी मैडम ने मेरा एक हाथ खींचकर मुझे सोफे पर बैठा लिया और वो मेरी गर्दन को दबाकर मुझसे बोली- क्या बात है, तुझे बहुत हंसी आ रही है? प्यास नहीं जानते तुम या नाटक कर रहे हो? और अब मैडम के बूब्स मेरी छाती से टकरा गये.
मैं और पीछे हुआ और मैडम बैठ गई.
फिर मैं बोला- मैडम, मुझे पता है कि आप क्या सपना देखती हो?
अब मैडम ने हल्की सी स्माईल की और बोली- क्या पता है?
मैं बोला- यही कि जो सपना आप देखती हो तो उससे आपको प्यास लग जाती है.
और फिर मैं ज़ोर ज़ोर से हँसने लगा.
मैडम ने फिर मेरी गर्दन को दबाया और बोली- ज्यादा हंस मत!
और इस बार उनके बूब्स मेरी छाती से पूरी तरह चिपक गये और मेरा लंड एकदम टाईट होने लगा. मेरी नज़र मैडम के बूब्स पर गई और तभी वो उठने लगी तो मैंने देर ना करते हुए उनके गाल पर एक किस कर लिया तो वो पहले थोड़ा सा शरमाई, फिर हंसकर मेरे होंठों को चूमने लगी और अब मैडम सोफे पर एकदम सीधा होकर मेरे ऊपर लेट गई.
मैंने अपने दोनों पैर फैला लिया, मैडम मेरे पैर के बीच में आ गई, मेरा लंड उनकी उभरी हुई गीली चूत से दब रहा था और वो खुद जान बूझ कर अपनी चूत को मेरे लंड पर दबा रही थी, मैं उन्हें ज़ोर से चिपकाए हुए था और हम दोनों ज़ोर से किस कर रहे थे.
तभी मैं अपना एक हाथ उनकी चूत पर ले गया और चूत को सहलाने लगा, मैंने धीरे से मैडम की चूत में एक च्यूंटी काट ली और जिसकी वजह से वो उछल गई और मैं हँसने लगा.
वो मुझसे बोली- कमीने रुक… मैं अभी तुझे बताती हूँ!
यह कह कर उन्होंने ज़ोर से मेरी छाती पर अपने दाँत से काट लिया, उस दर्द की वजह से मैं चिल्ला पड़ा तो उन्होंने तुरंत मेरे मुख पर अपना एक हाथ रख दिया, बोली- ज्यादा चिल्ला मत, वरना मैं और भी ज़ोर से काट सकती हूँ.
फिर हम दोनों सोफे से सीधे नीचे फर्श पर लेट गये, मैडम अब तक मेरे ऊपर चढ़ी हुई थी, वो लगातार मेरे लंड पर अपनी चूत को मसल रही थी और मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.
मैडम का वजन थोड़ा ज़्यादा था.
अब मैडम मेरे ऊपर से हटी, पास में आकर बिल्कुल सीधा लेट गई, हम ऐसे ही नीचे लेटे हुए थे.
फिर मैडम मुझसे बोली- तुम कभी किसी को कुछ भी मत बोलना!
तो मैंने उनसे कहा- आप बिल्कुल भी चिंता मत करो, कभी भी किसी को पता नहीं चलेगा!
मैडम मेरी तरफ मुस्कुराई और मैं उनके ऊपर चढ़ गया, अब मैं मैडम के ऊपर बिल्कुल सीधा लेटा हुआ था, मैं उस समय नाईट पैन्ट पहने हुए था जिससे मेरा लंड मैडम की चूत से होते हुए उनकी जाँघों के बीच में घुस रहा था.
अब हम किस कर रहे थे और मैं एक हाथ से मैडम का एक बूब्स बहुत ज़ोर से दबा रहा था, मैं मैडम की गर्दन को चूम रहा था और साथ ही एक बूब्स को दबा भी रहा था और जिसकी वजह से मैडम उह्ह्ह्ह ऑश आहह अफफफफफ छोटू अह्ह्ह्ह की आवाज़ निकाल रही थी.
अब मैडम ने मुझे अपने ऊपर से हटाया और वो सोफे पर बैठ गई, मैडम ने अपनी नाईट पैन्ट को उतार दिया, उन्होंने अंदर काली पेंटी पहनी हुई थी. उसने अपने दोनों पैर फैला दिए और फिर वो मुझसे बोली- चल अब आ जा, जल्दी से मेरी प्यास बुझा दे.
मैं सोफे के करीब गया और उनकी चूत पर पेंटी के ऊपर से हाथ फेरने लगा. फिर मैंने पेंटी के ऊपर से ही चूत पर एक किस किया तो मैडम ने उफ़फ्फ़ स्सीईईइ करके अपनी दोनों आँखों को बंद कर लिया.
फिर मैंने मैडम की पेंटी को उतारा और उनकी चूत को अपनी एक उंगली से सहलाने लगा, फिर मैंने अपनी उंगली को चूत में घुसा दिया, जिसकी वजह से मैडम सिसकारियाँ लेने लगी और आअहह उफ्फ्फ्फ़ करने लगी.
अब मैं उस बैचेन, तड़पती हुई, प्यासी चूत के पास अपना मुंह ले गया और अपनी जीभ से उनके चूत के दाने को सहलाने लगा.
मैडम मुझसे बोली- उफ्फ्फ्फ़ आह्ह्ह्ह छोटू तू यह क्या कर रहा आईईइ… है?
मैं उनकी चूत को चाटने, चूसने लगा और मैं अपनी जीभ को उनकी चूत में अंदर तक घुसाकर चाट रहा था.
मेरी मैडम अब मेरा सर पकड़कर अपनी चूत के ऊपर ज़ोर ज़ोर से दबा रही थी और वो आहह उम्म्ह… अहह… हय… याह… उफफ्फ़ उईईईई की आवाज़ निकाल रही थी.
थोड़ी ही देर में उन्होंने मेरा सर अपनी चूत पर और भी ज़ोर से दबा दिया और अब उन्होंने अपनी चूत का पानी मेरे मुँह पर निकाल दिया जिसको मैं चूसने लगा.
उसके बाद मैं उठा, अब हम दोनों पूरे नंगे हो गये, मेरा लंड पूरा टाईट था तो मैडम लंड देखकर बोली- साले कमीने, तेरा कितना बड़ा है?
मैंने कहा- हाँ, यह आपके लिए ही है.
मैडम बोली- अच्छा रुक, मैं अभी तुझे बताती हूँ!
और वो अब मेरा लंड पकड़ कर ज़ोर से ज़ोर मसलने लगी, मैं ऑश उफ्फ्फ बाप रे मैडम करने लगा.
मैडम मुझसे बोली- क्यों क्या हुआ बच्चू? दर्द हो रहा है?
मैं बोला- क्या आज इसे तोड़ ही दोगी क्या?
मैडम हँसने लगी.
फिर वो बहुत आराम से मेरे लंड से खेलने लगी और मैं उनके एक बूब्स को दबाने तो दूसरे को चूसने लगा.
कुछ देर बाद मैं रुका और मैडम से बोला- मैं एक मिनट में अभी वापस आता हूँ!
मैं जल्दी से पास वाले रूम में गया और दो तकिए लेकर आ गया. अब मैडम फर्श पर लेटी हुई थी, मैंने एक तकिए को मैडम की गांड के नीचे रख दिया, मैडम की चूत बहुत मोटी थी, बहुत मस्त चूत थी.
मैंने उनके दोनों पैर फैलाए और एक बार फिर से उनकी चूत को चाटने लगा.
मैडम सिसकारियाँ लेते हुए मुझसे बोली- तू चूत को बहुत अच्छा चाटता है.
मैं उनके मुँह से यह बात सुनकर और भी ज़ोर से उनकी चूत को चाटने लगा, लेकिन थोड़ी देर चूत चाटने के बाद मैडम मुझसे बोली- छोटू मैं गई!
मैं ज़ोर से चाटने लगा.
मैडम का पानी निकल गया जिसकी वजह से उनकी पूरी चूत गीली हो चुकी थी.
मैं अब मैडम के दोनों पैरों के बीच में बैठ गया और अपने लंड को उनकी चूत पर रगड़कर गीला करने लगा और मैडम बोलने लगी- उफफफ्फ़ आह्ह्ह्ह कमीने, जल्दी से इसे अंदर डाल दे, कुत्ते तू यह क्या कर रहा है? थोड़ा जल्दी से डाल दे… स्सीईईई आह्ह्ह… क्या बस ऐसे ही करता रहेगा?
मैंने उनकी तड़प को देखते हुए अपने लंड का सुपाड़ा मैडम की गीली नंगी चुत के मुँह पर रख दिया और एक ही ज़ोर के धक्के के साथ अपना पूरा लंड चूत के अंदर डाल दिया.
मैडम बोली- उईईई उफ्फ कुत्ते साले… तेरा बहुत बड़ा है! थोड़ा मेरे ऊपर रहम कर! आह्ह्ह्ह!
मैं थोड़ा रुककर ऐसे ही अपने लंड को डाले कुछ देर रुका रहा, फिर मैंने मैडम के दोनों बूब्स को एक एक हाथ में पकड़ा और बूब्स को दबाते हुए बूब्स के बीच में अपनी जीभ से चाटने लगा.
मैडम आअहह उफ्फ्फ्फ़ अर्ररर और हाँ तेज़ तेज़ सिसकारियाँ लेती हुई बोली- छोटू, मुझे किस करो!
मैं मैडम के ऊपर लेट गया और उनके गुलाबी होंठों को धीरे धीरे मज़े लेते हुए चूसने लगा.
अब मैंने लंड को धीरे से थोड़ा बाहर किया और फिर एक ज़ोर का धक्का देकर पूरा अंदर डाल दिया जिसकी वजह से मैडम की चीखने की आवाज़ मेरे मुँह में दबकर रह गई.
मैं लगातार धक्के देकर अपनी मैडम की चुदाई करने लगा, पूरे हॉल में छप छप की आवाज़ आ रही थी. मेरी मैडम ‘ऊऊहह एसस्स ऊओह मरी छोटू और ज़ोर से करो और उफ्फ्फ्फ़ मज़ा आ गया…’ बोलती रही.
करीब 20 मिनट तक हमारी चुदाई चलती रही, फिर हम एक साथ झड़ गये और मैं मैडम के ऊपर ही कुछ देर ऐसे ही पड़ा रहा, मेरा लंड अभी भी मैडम की चूत में ही था और धीरे धीरे सुकड़ कर छोटा हो रहा था.
फिर मैं उठा तो मैडम मुझसे मुस्कुरा कर बोली- क्या हुआ, थक गया?
मैं बोला- अभी कहाँ… अभी तो पूरी रात बाकी है.
फिर हम उठकर बाथरूम में चले गये, मैडम ने पेशाब किया और मैं उन्हें देख रहा था, मैंने अब पेशाब करते हुए ही उनकी चूत में अपनी एक उंगली को डाल दिया, जिसकी वजह से मैडम उछल पड़ी और हम हम दोनों हँसने लगे.
मैडम ने मुझे अपनी छाती से चिपका लिया और फिर हमने पानी चालू किया, अब हम भीगते हुए एक दूसरे को चूमने, चाटने लगे.
मैंने मैडम को अब फर्श पर सीधा लेटा दिया और फिर उनकी चूत को पागलों की तरह चाटने लगा जिसकी वजह से पानी मेरे ऊपर से गिरकर मैडम की चूत पर टपक रहा था और मैडम ऊओह्ह्ह आअहह ह्म्म्म्म कर रही थी.
अब मैंने अपनी मैडम के दोनों पैरों को पूरा फैलाकर चोदा और कुछ देर बाद मैडम मेरे ऊपर बैठकर मुझे चोद रही थी.
उस रात हमने सिर्फ़ दो बार चुदाई की.
अगले दिन से कई बार रात में हम चुदाई करते!
एक दिन मेरे बॉस का फोन आया कि उन्हें वापस आने में अभी 10-12 दिन और लगेंगे.
मेरे बॉस वहाँ पर नहीं थे, तब हम पति पत्नी की तरह रहने लगे.
हमने बहुत बार चुदाई के मज़े लिए और जब मेरे बॉस वापस आए तो भी मेरी मैडम मेरे बॉस को फोन करती और उनसे कहती- छोटू को घर पर भेज दीजिए, उससे मुझे कुछ सामान मंगवाना है. और इस बहाने से हम करीब 20-25 मिनट तक बहुत मज़े से चुदाई कर लेते थे.
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