Find Related Category Ads
To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.
Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.
You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.
It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.
Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.
हैलो डियर रीडर्स । मै सूरज २६ साल का लड़का भोपाल में Antarvasna रहता हूँ। मैं एम कोम फ़ाइनल इयर का स्टुडेंट हूं। अभी भी मैं अपने चाचा के यहां रह रहा हूं। मेरे चाचा मुझसे सिर्फ़ ९ साल बड़े हैं और उनकी शादी ४.५ साल पहले हुई थी। मेरी चाची बहुत खूबसूरत है ५.४ लम्बा कद खूबसूरत होंठ जूस से भरे हुए हिरनी जैसी आंखें पतली सी कमर और बड़े गोल मटोल बूब्स हैवी हिप शी लुक लाइक ए ब्युटी क्वीन। उसके बूब्स का साइज़ है ३८ /२७ /३६ ।
एक दिन मेरे चाचा घर वापस आये तो काफ़ी परेशान थे हमने (मैं और चाची) उनसे पूछा तो कहने लगे कि मुझे करोबार में बहुत नुकसान हुआ है और कुछ भी बाकी नहीं बचा फिर चाचा ने अपना सब कुछ बेंच दिया और बचने वाले रुपयों से मुम्बई चले गये और मेरे घर वालों से कहा कि सूरज को इधर ही चाची के पास रहने दें तो मैं चाची के साथ रहने लगा।
मैं रोज़ कोलेज़ जाता और वापस घर आता तो चाची मुझे खाना देती और फिर मैं खाना खा कर सो जाता और फिर शाम को उठ कर स्टडी के लिये चला जाता और फिर रात को वापस आता। एक दिन की बात है मैं कोलेज़ गया तो कोलेज़ बंद था क्योंकि कोलेज़ में झगड़ा हो गया था जिसकी वजह से कोलेज़ में स्ट्राइक थी तो मैं वापस घर आ गया मैं अपने कमरे मैं अपनी चीज़ें रख कर चाची के रूम की तरफ़ आया कि चाची को बता दूं कि मैं कोलेज़ से आ गया हूं अभी मैं कमरे के दरवाज़े पर पहुंचा ही था कि मैंने चाची को देख लिया वो अपने कपड़े बदल रही थी। मैं वापस होने लगा तो मेरा दिल चाहा कि मैं चाची को देखता ही रहूं तो मैं वापस आ कर दरवाज़े की ओट से चाची को देखने लगा चाची ने पहले अपना सूट उतारा फिर ब्रा भी उतार दी और शीशे के सामने खड़ी होकर खुद को देखने लगी
उफ़ कितना खूबसूरत बदन है चाची का क्या खूबसूरत बूब्स हैं और क्या पतली कमर है, मैं देखता ही रह गया और मेरा लंड खड़ा हो गया इससे पहले मैंने कभी इस बारे में नहीं सोचा था मगर आज अचानक ही मेरे दिल में ख्वाहिश जागी क्यों न मैं चाची की चूत का मज़ा लूं। सामने चाची नंगी खड़ी थी और मैं उसको देख रहा था और मैं उसको देखता ही रहा काफ़ी देर तक कभी चाची खुद को आगे से देखती कभी साइड से शायद वो अपनी फ़िटनेस देख रही थी फिर चाची अपने बूब्स को मसलने लगी और मैं अपने लंड को मसलने लगा। फिर वापस अपने कमरे में आ गया और कुछ देर के बाद मैं दोबारा चाची के कमरे में गया और उसको बताया के मेरा कोलेज़ बंद है इसलिये मैं वापस आ गया हूं। मैंने महसूस किया कि चाची की नज़रें आज कुछ बदली हुई हैं और आज उसने मुझे अजीब सी नज़रों से देखा। फिर कहने लगी कि अच्छा ठीक है।
रात को खाना खने के बाद मैं टीवी देखने लगा और फिर रात को काफ़ी देर तक टीवी देखता रहा और चाची के बारे में सोचता रहा चाची का जिस्म मेरी नज़रों में घूम रहा था फिर मैं सो गया अचानक रात को मुझे महसूस हुआ कि कोई मेरे कमरे में आया है मैंने उठ कर बेड लैम्प जलाया तो देखा कि चाची है तो मैंने उससे पूछा क्या बात है तो वो कहने लगी कि मुझे अकेले में डर लग रहा है मैं तुम्हारे पास सो जाऊं तो मैंने कहा कि हां आप इधर बेड पर सो जाओ मैं सोफ़े पर सो जाता हूं और मैं बेड से उठ कर खड़ा हो गया तो वो कहने लगी कोई बात नहीं तुम भी इधर ही बेड पर सो जाओ क्योंकि यह डबल बेड है और हम दोनो ही इस पर सो सकते हैं। तो मैं बेड की दोसरी साइड पर आ कर लेट गया अब मेरी नींद उड़ गई थी और मैं सोच रहा था कि कब चाची गहरी नींद सो जाये और मैं चाची के जिस्म को सही तरह देख सकूं।
काफ़ी देर मैंने इन्तज़ार किया, १ घंटे बाद मैंने चाची के जिस्म पर हाथ लगाया तो वो गहरी नींद में थी उसको कुछ पता नहीं लगा तो मैंने हाथ को फेरना चालू केर दिया आहिस्ता आहिस्ता मैंने हाथ को चाची के बूब्स की ब्रा खोल दिये और फिर मैंने चाची का एक बूब हाथ में ले लिया वो इतना बड़ा था कि मेरे हाथ में नहीं आया फिर मैंने आहिस्ता से चाची की कमीज़ के बटन को खोला और अब चाची के बूब्स साफ़ नज़र आ रहे थे उसने इस वक्त ब्रा नहीं पहना हुआ था। मैंने उसके मम्मे को हाथ लगाया तो वो टाइट हो गया। फिर मैं आहिस्ता से उस पर अपने होंठ रख दिये मैंने उसकी चूचियों को मुंह में ले कर आहिस्ता आहिस्ता चूसने लगा फिर मेरे दिल में आया कि मैं चाची के रस भरे होंठों पर किस करूं जब मैंने होंठों पर किस करने के लिये मुंह उठाया तो मुझे लगा कि जैसे मैं बर्फ़ का हो गया हूं क्योंकि चाची की आंखें खुली थी।
मैं चाची को जगता देख कर इस तरह हो गया जैसे मुझे सांप सूंघ गया हो और मेरे हाथों के तोते तो क्या चिड़िया कौव्वे तक भी उड़ गये हों। चाची ने मुझ को कहा यह क्या कर रहे हो? तो मैंने शरम से सर झुका लिया तो चाची ने मेरी थोड़ी से पकड़ कर मेरा चेहरा अपने चेहरे के सामने किया और कहने लगी जब तुम छुप छुप कर मुझे देख रहे थे तो तब भी मैंने तुम्हें देख लिया था यह तुम क्या कर रहे हो मैं तुम्हारे चाचा को बता दूंगी तो मैं बहुत डर गया और चाची से कहा कि आप चाचा को न बताना प्लीज़ मैं दोबारा ऐसी हरकत नहीं करूंगा। तो वो कहने लगी एक शर्त पर तुम्हारे चाचा को नहीं बताऊंगी तो मैंने कहा कि क्या शर्त है मुझे आपकी हर शर्त मंज़ूर है
तो चाची कहने लगी कि जो तुम कर रहे थे दोबारा करो, मैंने कहा के नहीं यह बात ठीक नहीं है चाची (वैसे मैं दिल में बहुत खुश हो रहा था) तो चाची ने कहा कि ठीक है मैं चाचा को बता दूंगी और तुमने कहा था कि तुम्हें मेरी हर शर्त मंज़ूर है तो मैंने चाची से कहा कि ठीक है और चाची को बाहों में ले लिया और उसके रस भरे होंठों को चूसने लगा तो चाची ने मुझे कहा कि तुम्हें तो किस करनी भी नहीं आती फिर चाची ने मुझे किस किया तो मेरे पूरे जिस्म में करेंट दौड़ गया और मैं ने चाची को ज़ोर से दबाया फिर चाची ने मुझे कहा कि मेरे कपड़े उतारो।
जब मैंने चाची की कमीज़ उतारी तो चाची के मम्मे पकड़ लिये और उनको मसलने लगा चाची को भी मज़ा आने लगा तो वो कहने लगी आआहह्ह ज़ोर से चूस ले आज मेरे मम्मों को और बुझा दे मेरी प्यास फिर चाची ने मेरी शर्ट के बटन खोल दिये और मेरी छाती पर किस करने लगी। मुझे भी मज़ा आने लगा फिर चाची ने मेरा ट्राउज़र भी उतार दिया और मेरे जिस्म पर हाथ फेरने लगी और फिर उसने मेरा लंड को पकड़ लिया और उसे मसलने लगी आआहह्ह कितना बड़ा है तेरा लंड गुड्डो यह तो बहुत बड़ा है रे अब मैं भी काफ़ी इज़ी महसूस कर रहा था क्योंकि अब बात खुल गई थी फिर मैं चाची के पूरे जिस्म पर हाथ फेरने लग गया। उसके मम्मों पर उसकी चूत पर उसकी गांड पर। मैंने एक उंगली डाली तो वो चीख उठी ओय उल्लू के पट्ठे क्या कर रहा है?
फिर मैंने चाची को कहा कि मुझे गाइड करो तो उसने मुझे कहा कि मैं उसकी टांगों के दरमियान आ जाऊं और उसकी टांगों को उठा कर कंधों पर रख लूं तो मैंने यह ही किया फिर उसने कहा कि अब अपने लंड को मेरी चूत में डालो फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा तो उसने नीचे से एक ज़ोरदार झटका लगाया और मेरा पूरे का पूरा लंड उसने अपनी चूत में ले लिया और फिर कहा कि अब मैं अपने लंड को उसकी चूत में अंदर डालूं और बाहर करूं तो मैं लंड को इन और आउट करने लगा। काफ़ी देर में चाची को इसी तरह चोदा फिर चाची ने मुझे कहा कि मैं थक गई हूं अब दूसरी तरह करो और फिर चाची ने डोगी स्टायल बना लिया और मैं चाची को डोगी स्टायल में चोदने लगा और चोदते चोदते मैंने चाची की चूत से लंड बाहर निकाल लिया और उसको चाची की गांड में डाल दिया।
जब मैंने गांड में डाला तो चाची चिल्लाने लगी अबे बहनचोद निकाल मेरी गांड से मुझे बहुत दर्द हो रहा है, अबे गांड से निकाल और उसको फुद्दी में डाल मैंने कहा कि आज गांड चोदने का मज़ा भी ले लो तो वो कहने लगी कि मेरी गांड तो कभी तेरे चाचा ने भी नहीं ली तो मैंने कहा कि मुझे तो तुम्हारी गांड लेनी है तो वो कहने लगी मुझे बहुत दर्द हो रहा क्या तुम आराम से नहीं कर सकते आआअहह्हह आराम से करो वर्ना मेरी गांड फट जायेगी हरामी, आराम से अबे मादर चोद कोई तेरी गांड में अपना लंड डाले तो तुझे पता चले कि कैसे दर्द होती है ओय तुझे मैं कह रही हूं आराम फिर उसने मुझसे अपना छुड़ा लिया और मेरा लंड उसकी गांड से बाहर निकल गया और वो बैठ कर अपनी गांड को दबाने लगी फिर मुझे कहने लगी तुम तो बिल्कुल ही वहशी हो। तुम्हें किसी के दर्द का कुछ ख्याल ही नहीं है। मुझा इतना दर्द उस वक्त नहीं हुआ जब मैं पहली बार चुदी थी जितना दर्द मुझे आज हुआ है
फिर कुछ देर बाद मैंने दोबारा चाची को चोदने लगा और फिर सारी रात हमने मज़े लिये और मैंने चाची को हर तरह से चोदा कभी डोगी स्टायल में तो कभी घोड़ी बना कर कभी सीधा लिटा कर तो कभी उसको अपने लंड पर बिठा कर, हर तरह से मैंने उसको चोदा। मैंने और चाची ने खूब चुदाई की और करवाई और अब हम रोज़ ही मज़े करते हैं लेकिन अब मुझे चाची को चोद कर पहले जैसा मज़ा नहीं आता क्यों अब उसकी चूत खुली हो गई है और जो मज़ा तंग चूत में है वो खुली चूत में कहां आप का क्या ख्याल है दोस्तों आप अपनी राय मुझे जरुर बतायें Antarvasna
मैं अन्तर्वासना की Sex Stories नियमित पाठिका हूँ और खाली समय में अक्सर मैं कहानियाँ पढ़ती हूँ।
मेरा नाम ममता है मैं वैसे तो हिमाचल की रहने वाली हूँ पर आज कल हम पंजाब में रहते हैं। मैं चार भाई बहनों में दूसरे नम्बर पर हूँ। मेरा कद 5 फीट 2 इंच है रंग गोरा है। मैं बचपन से ही थोड़ी मोटी हूँ और काफी सेक्सी विचार रखती हूँ। मैं और मेरी छोटी बहन रात को एक साथ सोते है, मैं अक्सर अपनी बहन का चुम्बन आदि कर लेती थी।
पढ़ाई पूरी होने के बाद मैं नौकरी तलाशने लगी। तभी मेरे भईया के एक दोस्त ने बताया कि रेडीमेड के एक शोरूम में मैनेजर की जगह खाली है। मैंने अप्लाई कर दिया, मेरी सेलेक्शन हो गई और मैंने काम पर जाना शुरू कर दिया। वहीं मेरे साथ एक लड़का काम करता था जिसका नाम रमन था, वो हमेशा मुझे गन्दी निगाह से देखता था। मन ही मन वो भी मुझे अच्छा लगता था पर मैं चाहती थी वो ख़ुद कहे।वो हमेशा ही मेरे साथ बात करने के बहाने तलाशता रहता था। काम करते वक्त वो कभी कभी मुझे छू लेता तो मैं कुछ नही बोलती थी। इससे उसका हौंसला बढ़ गया और वो कभी कभी मेरे वक्ष भी दबा देता था या फिर मेरी गांड में ऊँगली दे देता था। मैं ऊपर से नाराज होती पर यह सब मुझे भी अच्छा लगता था।
कुछ दिन बाद मेरी बुआ के लड़के की शादी थी, हम सब गाँव जा रहे थे। मम्मी पापा सुबह चले गए, मैंने और बड़े भैया ने शाम को जाना था। हमें शाम छः बजे जाना था। मैंने दो बजे छुट्टी ले ली और रमन को कहा कि मुझे घर छोड़ आए क्योंकि मेरे पास कोई साधन नहीं था, रमन के पास मोटरसाइकिल थी। मैंने उसके पीछे बैठ गई और हम घर पहुंचे। भईया घर नहीं थे। मैंने फ़ोन करके पूछा तो भईया ने कहा- मैं अभी दो-तीन घंटे बाद आऊंगा।
तो मैंने रमन को कहा- थोड़ी देर रुक जाओ, चाय पी कर चले जाना !
वो बैठ गया। मैंने जाकर पहले अपने कपड़े बदले, मैंने जानबूझ कर टी-शर्ट और पायजामा पहन लिया और नीचे से कुछ भी नहीं पहना। मैं रसोई में जाकर चाय बना लाई और रमन को पकड़ा दी। वो लगातार मुझे देखे जा रहा था।
मैंने पूछा- क्या देख रहे हो?
तो वो फट से बोला- आप बहुत सेक्सी लग रहे हो !
मैंने जानबूझ कर कहा- तुम झूठ बोल रहे हो !
तो वो उठ कर बिल्कुल मेरे करीब आ गया। इससे पहले कि मैं कुछ बोलती उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया।
मैं भी यही चाहती थी सो मैंने उसे रोकने की कोशिश नहीं की।
मैंने कहा- ज़रा रुको, मैं दरवाजा बंद कर दूँ !
मैं बाहर दरवाजा बंद करने गई और गेट अच्छे से बंद करके वापिस आई तो देखा कि रमन अपना 8 इन्च का लंड हाथ में पकड़ कर बैठा था। मुझे देखते वो एकदम आया और मुझे उठा कर सोफे पर ले गया और मेरे स्तन मसलने लग गया। मैंने उसके लंड को पकड़ लिया और उसे ऊपर नीचे करने लगी। फिर उसने मुझे कपड़े उतारने के लिए कहा। मैंने पायजामा और टी-शर्ट उतार दी और एकदम नंगी हो गई।
अब मैंने उसे कहा- तुम कब कपड़े उतारोगे?
उसने भी अपने कपड़े उतार लिए। मैं सोफे पर लेटी हुई थी और उसका लंड मेरे मुँह के सामने था। उसने मुझे अपना लंड चूसने के लिए कहा पर मैंने मना कर दिया।
उसने कहा- कोई बात नहीं !
और मेरी टांगों के बीच बैठ गया और अपनी जबान मेरी फुद्दी में डाल दी और अंदर बाहर करने लगा।
मैं पागल हुए जा रही थी तो मैंने कहा- मुझे भी तुम्हारा लंड चूसना है !
हम दोनों 69 की पोजीशन में हो गए। मैंने जिंदगी में पहली बार लंड का स्वाद चखा था, नमकीन सा था उसका स्वाद ! पर मुझे एकदम शहद जैसा लग रहा था ! मैं लोलीपॉप के जैसे उसके लंड को चूस रही थी। हम दस मिनट इसी पोजीशन में रहे, तभी रमन हांफने लगा और एक तेज पिचकारी मेरे मुँह में मारी और फिर मेरे मुँह से लंड निकाल कर बाकी पानी मेरे मम्मों पे गिरा दिया।
मैंने कहा- तुम्हारा तो काम हो गया ! अब क्या होगा?
उसने कहा- मैडम जी, आप चिंता क्यों करते हो? अभी खड़ा हो जाएगा।
वह मेरी टांगो के बीच बैठ गया और दो उंगलियों से मुझे चोदने लगा। दो तीन मिनट बाद मेरी फुद्दी से हल्का हल्का पानी आने लगा। मेरी फुद्दी एकदम गीली हो गई थी। अब तक उसका लंड फिर तैयार हो गया था। अब मेरे को भी आग लगी हुई थी कि जल्दी से जल्दी वह मेरी फुद्दी में अपना लंड डाले। वह खड़ा हुआ, मैं सोफे पर थी, उसने मेरी टाँगें अपने कंधे पर रखी और अपना लंड का सुपारा मेरी फुद्दी के मुँह पर रखा।
चूंकि यह मेरी पहली बार थी तो मैं काफी डरी हुई थी, पर रमन ने कहा- घबराने की कोई बात नही है !
उसने आराम से धक्का लगाया और उसका लंड आधे थोड़ा कम मेरी फुद्दी में चला गया।
मेरी जान गले में आ गई, मेरी आंखों के सामने अँधेरा सा आ गया। मैंने सोचा- शायद मैं आज नहीं बचूंगी !
पर वह पागलों की तरह धक्के लगाये जा रहा था। 5 मिनट बाद सब सामान्य हो गया, मुझे भी मज़ा आने लगा। अब मैं भी चूतड हिला हिला कर उसका साथ देने लगी।
तभी मुझे लगा कि मेरी फुद्दी से पानी जैसा कुछ निकल रहा है। मैं झड़ गई थी।
मैंने रमन को कहा- अब बस करो ! मुझे दर्द हो रहा है !
पर वह रुक नहीं रहा था और बोला- मेरा काम कैसे होगा ?
तभी उसने अपना लण्ड मेरी फुद्दी से निकाल लिया और मुझे सीधी होकर लेटने के लिए कहा।
मैं लेट गई। अब वो मेरे स्तन पकड़ कर उनके बीच अपने लंड से चोदने लगा। पूरे पाँच मिनट बाद एक गर्म पानी की पिचकारी मेरे गाल पर पड़ी। उसका झड़ चुका था, वह अपने लंड को खींच-खींच कर मेरे मम्मों पर अपना वीर्य गिरा रहा था। मैं बहुत खुश थी क्योंकि मैंने जिंदगी में पहली बार सेक्स किया था।
रमन थोड़ी देर मेरे पास लेटा रहा। मैं उठ कर बैठ गई। मैंने देखा कि रमन के लंड पर थोड़ा वीर्य लगा हुआ था।
मैं पागलों जैसे उसके लंड को चूसने लगी। फिर हम दोनों बाथरूम गए। हम दोनों ने एक दूसरे को नहलाया।
मैंने घड़ी देखी तो 5 बजने वाले थे। भईया के आने का समय हो गया था। हम दोनों ने कपड़े पहने। मैं रमन को छोड़ने के लिए दरवाजे तक आई, उसने मुझे होंठों पर चूमा और बाय कह कर चला गया। आधे घंटे बाद भईया आ गए। हम तैयार हो कर स्टेशन पहुंचे और ट्रेन में बैठे। ट्रेन में मेरी फुद्दी में बहुत दर्द हो रहा था पर एक सुखद एहसास हो रहा था !
आपको मेरी कहानी कैसी लगी, मुझे मेल जरुर करें ! Sex Stories
दोस्तो! मैंने अन्तर्वासना को पहले Antarvasna भी एक कहानी
बरसात में चाची की चुदाई
भेजी है। जिस कहानी को आप लोगों ने बहुत अच्छा रिस्पोंस दिया है।
तो दोस्तो, उसी रिस्पोंस के बदले आपका सेक्सी सावन फ़िर से आपके सामने हाजिर है अपनी एक नई कहानी लेकर!
उन दिनों मैं अपने मामा के घर पर गया हुआ था.
वही पर मेरी एक मौसी की लड़की भी अपनी सर्दियों की छुट्टियों में आई हुई थी।
उस वक्त मेरी उमर 21 साल थी और मौसी की लड़की जिसका नाम अनिता था उसकी उम्र कोई 19 साल के आसपास होगी.
हम दोनों अपनी पूरी जवानी की मस्ती में थे.
उसके बदन के उभरे हुए अंगों की गोलाई उसकी जवानी में चार चाँद लगा रही थी।
उसकी तारीफ मैं क्या करू खूबसूरती में कैटरीना कैफ जैसी थी।
लेकिन चूचियां उससे भी ज्यादा लगती थी उसे देख कर मेरी रातों की नींद गायब होने लगी.
एक रात में ख़ुद को रोक नहीं पाया और चुपके से जाकर मैंने उसकी रजाई हटा दी तो देखा कि उसकी चुन्नी चुचियों से इस तरह लिपटी हुई थी मानो कि काला नाग किसी खजाने की पहरेदारी कर रहा हो.
इससे पहले कि मैं उस जवानी के खजाने को छू पाता, सर्दी लगने की वजह से अनिता की आँख खुल गई।
आँख खुलते ही उसने मुझे देखा.
इससे पहले वो कुछ बोलती मैंने उसके मुंह पर हाथ रख दिया और चुपचाप चला गया.
लेकिन मैं डरा हुआ था की शायद वो किसी से कुछ कह न दे.
और फ़ैसला कर लिया कि अनिता का ख्याल छोड़ कर आज ही घर चला जाऊंगा.
स्टेशन से पहले ही अनिता का फ़ोन आया और वो बोली- आग लगा कर जाना अच्छी बात नहीं होती.
और फ़ोन काट दिया।
इतना सुनते ही मेरी हसरतें जवान होने लगी और वहीं से वापसी के लिए टैक्सी पकड़ी और एक घंटे मैं अपनी अनिता के पास पहुँच गया।
सभी ने पूछा- वापिस क्यों आ गया?
मैंने बहाना बनाया और कह दिया कि मेरे किसी दोस्त ने पापा की आवाज निकाल कर मजाक किया था.
अब तो मैं बेचैनी से रात होने का इंतज़ार करने लगा.
जैसे ही रात को सब सोने चले गए तो अनिता भी मामी के साथ उनके कमरे में चली गई.
मैं सब के सोने का इंतज़ार कर रहा था.
मैंने देखा सब सो गए है तो में चुपके से मामी के रूम में गया और जाकर अनिता को देखा तो मालूम हुआ वो भी नहीं सोयी थी।
मैंने पूछा- सोयी क्यों नहीं?
तो कहने लगी कि जब तन बदन में कोई आग लगा दे तो भला नींद कैसे आएगी.
मैंने उसे अपनी बाँहों में उठा लिया जैसे उसका फूल सा बदन मेरे बदन से छुआ तो मानो मेरे तन में बिजली सी लग गई हो.
ऊपर एक रूम हमेशा खाली रहता था, वो गेस्ट रूम था मैं अनिता को वहीं ले गया।
मैंने उसे बेड पर लिटा दिया और उसके मदमाते बदन को एकटक देखने लगा.
अनिता बोली- तुम्हारी बेशरम निगाहें मेरे बदन को और ज्यादा बेकरार कर रही हैं।
मैंने एक एक करके अनिता के सारे कपड़े उतर दिए उसके तन पर सिर्फ़ ब्लैक कलर की चोली (ब्रा ) और कच्छी (पैंटी ) थी.
उसने उठकर मेरे कपड़े उतार दिए.
अब मैं उसे मस्त अहसास से किस करने लग गया।
मैंने उसके अंग अंग पर अपने गरम होंठों से बहुत देर तक किस की.
अपने मुंह से मैंने अनिता की पैंटी को हटाया जो कि चूत के पानी से बिल्कुल गीली हो चुकी थी।
मगर उस पैंटी से अनिता की जवानी की खुशबू आ रही थी।
अब अनिता की वो मस्त और मोटी चूत मेरे सामने थी जिसे मैं सिर्फ़ अपने ख्यालों में ही सोचा करता था.
मैंने अनिता की ब्रा उतार दी तो उसकी बिंदास चूचियां अब मेरे होठों की गिरफ्त मैं आ गई थी।
मैंने जी भर के उन्हें चूसा तो अनिता तड़पने लगी.
अनिता के मुंह से मस्त मस्त आवाजें आ रही थी- अआया अ … ह्ह्ह … ऊऊ ऊ ऊफ. ईई ऊईई … श्सस सश्स … अह्ह्ह. उह … मेरे सावन … अब और न तड़पाओ. अब और न तड़पाओ मुझे.
मैं चूचियों को चूसता हुआ उसके तन को चूमने लगा
चूमते चूमते मैं अपने होंठों को अनिता की मस्त और सेक्सी चूत के पास ले आया.
अनिता और ज्यादा बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी इसलिए उसने मेरे लम्बे और मोटे लन्ड को अपने नरम नाजुक और गरम होंठों के बीच कैद कर लिया और बिंदास होकर चूसने लगी.
साथ ही साथ मैं उसकी चूत को अपनी जीभ से सहला रहा था.
10 मिनट तक हम दोनों इसी तरह करते रहे.
तभी अनिता की जवानी का रस उसकी चूत से निकल कर बाहर आ गया और मैंने उस रस की एक एक बूँद को अपने होंठों पर ले लिया.
सचमुच उस रस को पीकर तो कोई भी वासना का प्रेम पुजारी हो जाए.
तभी मेरे लन्ड के वीर्य ने अनिता की जवानी को भी भिगो दिया.
अनिता ने भी मेरे लंड के रस की एक एक बूँद का स्वाद चखा.
हम दोनों एक दूसरे को कस के पकड़े हुए थे, साथ साथ एक दूसरे के लन्ड और चूत को सहला रहे थे.
कुछ देर बाद हम दोनों फ़िर से तैयार थे.
मैंने बिना कोई देर किये अनिता को अपने नीचे कर लिया.
अब अनिता मेरे लन्ड को अपनी चूत में लेने के लिए बेकरार थी.
उसकी चूचियां और ज्यादा मोटी और टाइट हो गई थी और चूत की भी चमक इतनी बढ़ गई कि लन्ड चूत को देखकर उसमें समाने के लिए बेकरार हो रहा था.
हम दोनों में अब और इन्तज़ार का होसला नहीं था इसलिए मैंने लन्ड को चूत के दरवाजे पर टिका दिया और जोर से झटका लगाया.
इस झटके के साथ ही अनिता की चीख निकल गई.
लेकिन मैंने उसकी आवाज अपने होंठों से वही कैद कर दी.
मैंने बहुत सी लड़कियां चोदी हैं लेकिन जितनी टाइट चूत अनिता की थी उतनी शायद किसी की नहीं थी।
चार पांच बार कोशिश करने पर भी लन्ड चूत में समा नहीं पाया.
मुझे डर था कि इस तरह तो अनिता को बहुत परेशानी होगी. हो सकता है कि अनिता बेहोश भी हो जाए.
इसलिए मैं नीचे से कोल्ड क्रीम और एक पानी की बोतल ले आया.
अनिता को काफी दर्द हो रहा था.
मैंने कोल्ड क्रीम अनिता की चूत और अपने लन्ड पर लगा दी.
फिर लन्ड को चूत पर रख कर धीरे धीरे अंदर डालने लगा.
लन्ड जितना अंदर जाता, अनिता उतनी ही दर्द से कराह कर मुझसे लिपट जाती.
मैंने एकदम ज़ोर से झटका लगाया और पूरा लन्ड चट की आवाज के साथ चूत के अंदर चला गया।
अनिता की चीख निकल गई और खून चूत से बाहर आने लगा.
दर्द के कारण अनिता सह नहीं पाई और बेहोश हो गई।
मैंने अपना लन्ड चूत में ही रखा और ठंडे पानी के छींटे अनिता के मुंह पर मारे.
तब अनिता ने आँखें खोली.
अनिता मेरी तरफ़ देख रही थी कि मैंने तभी अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए और उन्हें चूसने लगा.
धीरे से मैंने अपने लन्ड को हिलाया तो चूत कुछ नर्म लगने लगी.
और अब अनिता के कराहने की आवाज आई- अह अआया … आह्ह सस … ईईश …. ऊफ़ ओह … सावन चोदो … मर गई मैं!
अब अनिता की चूत अपने वासना के जादू से मेरे लन्ड को अपने भीतर पागल कर रही थी.
मेरा लन्ड भी अनिता की चूत को जी भर कर चोद रहा था.
वास्तव में अनिता की चूत को चोदकर मैं स्वर्ग की किसी अप्सरा को चोदने का अहसास कर रहा था.
हम दोनों चूत लन्ड के इस खेल को आधे घंटे तक खेलते रहे.
तभी अनिता की पकड़ मुझ पर और ज्यादा हो गई और मैं समझ गया कि अनिता का सेक्स पूरा हो गया है।
उसकी चूत का गर्म पानी मुझे अपने लन्ड पर महसूस हुआ.
अब मेरे लिए भी ख़ुद को ज्यादा देर रोक पाना आसान नहीं था और मैंने भी अपनी वासना के बादलों को अनिता की चूत की प्यासी धरती पर बरसा दिया।
और इसके बाद हम दोनों एक दूसरे पर काफी देर तक लेटे रहे.
अनिता बोली- सावन, ये आज मेरी पहली सुहागरात है. आज रात मुझे जी भर के चोदो और लगा दो अपनी अनिता पर सावन की मोहर!
उस रात मैंने अपनी अनिता को चार बार चोदा.
लेकिन उस दिन अनिता की चूत पर बहुत सूजन आ गई.
साथ ही मेरे लन्ड में भी दर्द का अहसास हो रहा था क्योंकि चूत ज्यादा टाइट थी।
अनिता से चला नहीं जा रहा था.
मैंने उसे अपनी बांहों में उठाया और उसके बिस्तर पर लिटाया और उसे एक चुम्बन करके चला आया.
उस दिन के बाद जब तक मैं मामा के घर पर रहा, हम दोनों की सारी रात उसी गेस्ट रूम में गुजरती थी अकेले तन्हा एक दूसरे के आगोश में.
सचमुच चुदाई का मज़ा लेने के बाद कुछ ही दिनों में अनिता के चेहरे की चमक अपने आप बढ़ने लगी, वो और ज्यादा ख़ूबसूरत और सेक्सी हो गई।
तो दोस्तो, कभी अपने इस सेक्सी सावन को भी अपनी प्यास बुझाने के लिए याद कीजिये Antarvasna
मैं अन्तर्वासना का Sex Stories नियमित पाठक हूँ। यहाँ कहानियाँ पढ़ने के बाद मुझे लगा कि मुझे भी अपनी सेक्स अनुभव के बारे में आपको बताना चाहिए, जिसे पढ़ते हुए लड़के बार-बार मुठ मारने लगेंगे और लड़कियाँ, भाभियाँ और आन्टियाँ लण्ड की तलाश करने लग जाएँगी।
दोस्तो, मैंने कई कहानियाँ पढ़ी हैं। और सबको मेल भी किया वो सारी कहानियाँ बनावटी हैं। कोई भी आदमी इतनी आसानी से सेक्स के लिये औरतो को तैयार नहीं कर सकता, और किसी भी औरत को इतनी भूखी नहीं होती जितना वो अपनी कहानी में आपको बताते हैं। अगर है तो वो सब मेल का जवाब जरुर देती।
यह सब छोड़ो! हम आते हैं अपनी बात पर! हम कहानी पर आते हैं।
सबसे पहले मैं अपने बारे में बता दूँ, मैं 24 साल का हूँ, कद 5″7′ है और मैं एक सामान्य सा दिखने वाला लड़का हूँ। मैं वाराणसी (चौक) से हूँ।
बात करीब दो साल पहले की है, मेरे भैया की शादी थी, सारे रिश्तेदार, नातेदार सब आए हुए थे, उन सबमें मेरे गांव के चाचा की लड़कियाँ भी आई थी। उनमें से एक थी साधना। उसकी फ़िगर दोस्तो समझ लीजिये कयामत थी। स्वर्ग से उतरी अप्सरा जैसी तो नहीं थी, पर उससे कम भी नहीं थी।
मेरे खानदान में सब मेरी बहुत इज्जत करते हैं। वो लड़की भी मेरी बहुत इज्जत करती थी। शादी में दो दिन रह गये थे। मैं तो उसे देखकर पागल तो हो ही रहा था, सो मैंने उसे प्यार का इजहार करने का सोचा, मेरी गांड तो बहुत फट रही थी, लेकिन मैंने आखिर में हिम्मत जुटा ही ली। उस वक्त घर में कोई नहीं था, तो मैंने उससे चाय बनाने के लिये बोल दिया। थोड़ी देर में वो चाय बना कर लाई तो मैंने उससे उसकी चाय के बारे में पूछा तो उसने कहा कि मैंने अपनी चाय नहीं बनाई है।
तो मैंने उसे जबर्दस्ती कप मंगाकर चाय दी और उसे अपने पास बैठने को कहा। चाय पीते पीते मैंने उससे अचानक पूछा कि क्या मैं उसे अच्छा लगता हूँ?
तो उसने हाँ में जवाब दिया।
बस मैंने तपाक से अपने दिल कि बात कह डाली और अपनी आंखें बन्द कर ली।
उसने मुझसे कहा,”जान यह सुनने के लिये मैं कब से बेकरार थी, मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूँ।”
बस फ़िर क्या! मैंने अपना होंठ उसके होठों पर चिपका दिए और उसके गुलाबी होठों का रसपान करने लगा, वो भी मेरे होठों को पीने लगी जैसे कई जन्मों की प्यासी हो। मैं उसके कभी ऊपर के होठों को चूसता तो कभी नीचे के होठों को। करीब-2 दस मिनट तक मैं उसके होठों में चिपका रहा। जैसे ही मैं उसके होठों से दूर हुआ, वो रोने लगी। मैंने उसे बाहों में ले लिया और पीठ सहलाने लगा …
फ़िर धीरे-धीरे वो भी गर्म होने लगी, उसको छूते ही मेरा सामान एक्शन में आ गया। बस फ़िर मैंने उसके गले में किस करना शुरू कर दिया।
इस पर उसने कहा- क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- कुछ मत कहो, बस करने दो, बहुत दिनों से तुम्हारे बारे में सोचता रहता हूँ.
वो शरमा गई … और अपने चेहरे को दोनों हाथों से छिपा लिया। मैंने मौका देखा और … और … धीरे से उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया, नाड़ा खोलते ही उसकी सलवार उसकी कमर से अलग हो गई। अब मैंने उसकी नंगी जांघ पर हाथ रख दिया। उसकी पैन्टी के भीतर मेरा हाथ चूत की तरफ़ सरकने लगा। उसके बदन की झुरझुरी मुझे महसूस होने लगी। मेरा हाथ उसकी झांटों तक पहुंच गया था। उसने झट से अपने हाथ से मेरा हाथ थाम लिया।
“कमल … ना … ना … कर … मैं मर जाऊंगी … ” उसकी वासना भरी आंखे मुझे बुला रही थी … पर शरम उसका रास्ता रोक रही थी।
“साधना … प्लीज़ … मत रोको … तुम्हारा जिस्म आग है … मुझे जल जाने दो।”
“हाय कमल … नहीं … यह पाप है.”
“नहीं … यह तो मर्द और औरत की जरुरत है … इसे देखो तो … यह क्या मांग रहा है … ”
मैंने जान करके अपने पेंट की ज़िप खोल कर अपना बेकरार तन्नाया हुआ लण्ड बाहर निकाल कर उसे दिखाया।
“हाय रे … ऐसे नहीं करो … ना … इसे सम्हालो … ” उसने हाथ बढ़ा कर उसे प्यार से पकड़ लिया.
“इसे इसका साथी चाहिये … साधना … प्लीज़ … मिला दो ना …”
“कमलऽऽऽ हाय … मत करो न …” उसने मुझे अपने हाथों खींच कर अपने ऊपर गिरा लिया.
“होंठों पर ना है … पर दिल में हां है … तुम्हारा जिस्म आग हो रहा है … कपड़े जल जायेंगे … हटा दो इनको … ”
मैंने फिर से उठ कर उसका पैन्टी नीचे खींच लिया। उसकी गदराई जवानी निखर आई। उसकी चूत के आसपास की झांटे उसकी चूत को सजा रही थी … चूत की दोनों पन्खुड़ियाँ फ़ड़फ़ड़ा रही थी। पानी से पूरी गीली थी। मैंने भी अपनी पैन्ट और अन्डरवीयर उतार दी। अब मैंने उसकी समीज को भी उतार दिया। उसके दोनों बोबे छलक उठे … एकदम गोरे और भारी से … भूरे रंग के कड़े चूचक …
मैंने बिना किसी संकोच के उसके दोनों बोबे अपने हाथो में भर लिये।
“कमल … हाय रे …” वो तड़प उठी।
उसने मेरा लण्ड खींच के अपने हाथ से मेरे लन्ड का हस्त मैथुन करने लगी। मैं उत्तेजित हो उठा और साधना के हाथ को ही धक्के मार मार कर चोदने लगा। मेरा सुपाड़ा वो कस कस कर हिला रही थी। सुपाड़ा भी और फूल कर चिकना हो कर चमक उठा था।
इतने में साधना ने मेरा लण्ड छोड़ा और मुझे कहा,” कमल … देख आज मेरी चूत कितना तड़प रही है … मेरी चूत चोद दे …”
मैं उसकी चूत को अपने हाथों से सहलाने लगा और अपनी दो उन्गली झट से उसकी चिकनी चूत में सरका दी, वो मचल गई और स्स्स्स्स की आवाजें निकालने लगी।
मुझसे भी ज्यादा इन्तजार नहीं हो रहा था, मैने उसे अपनी गोद में उठाया और बिस्तर पर लेटा दिया। मैं उसकी चूचियों को अपने दोनों हाथों से मसलने लगा। उसके बाद हम फिर एक बार एक दूसरे के होठों में खो गये।
करीब 15 मिनट के बाद मैं उसके होठों से अलग हुआ और उसे नीचे लिटाकर मैंने उसकी टान्गें फैला दी, और उसकी चूत को अपने हाथों से फैला कर निरीक्षण करने लगा, मैं अपनी किस्मत पर बहुत खुश हो रहा था, मैंने अब देरी नहीं की और अपना 7.5″ लम्बा और 2.5″ चौडे लन्ड का सुपारा उसकी चूत के छेद पर टिका दिया और अन्दर सरका दिया।
साधना तो चीख पड़ी और बोली,”बस कमल अब निकालो इसे, नहीं तो मैं मर जाउंगी।
पर मैं कहाँ रुकने वाला था। मैंने कस कर एक और धक्का मारा और मेरा पूरा लन्ड उसकी चूत में समा गया। साधना दर्द के मारे तड़प रही थी, मैंने उसका दर्द कम करने के लिये थोड़ी देर उसकी चूत में ही लन्ड को छोड़ दिया, जब उसने चिल्लाना बन्द किया तो मैंने अपना लन्ड अन्दर-बाहर करना शुरु कर दिया।
क्या मजा आ रहा था, आ…ह आआआआ… हुम्म हुम्म्म्म, फच्च फच्च फच्च फच्च फच्च फच्च,
अब उसे भी मजा आने लगा था, और गान्ड उठा उठा कर मेरा साथ दे रही थी।
आखिर वो घड़ी आ ही गई, मेरा पूरा शरीर एक अद्भुत आनन्द में खो गया, और मैं शाट पे शाट दिये जा रहा था, फिर मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे शरीर में बिजली दौड़ गई हो और मेरे लन्ड में से कुछ निकलता हुआ महसूस हुआ, जो उसकी चूत में गिर रहा था। थोड़ी देर बाद मैं निढाल हो कर उसके ऊपर गिर गया, जैसे शरीर में जान ही खत्म हो गई हो।
थोड़ी देर में हम लोगों को होश आया तो हम लोग उठे और अपने अपने कपड़े पहने।
फिर उसने मुझे मुस्कुरा कर देखा और मुझे चूम लिया और बाथरूम में चली गई, जब वो आई तो मैंने उसे एक बार फिर चोदा, और इससे पहले कि कोई आ जाये, हम लोग अलग अलग कमरे में जा कर लेट गये।
उस रात मैं सोया नहीं और रात भर अपनी चुदाई के बारे में सोचता रहा। खैर उसके बाद भैया की शादी हो गई, और साधना भी अपने घर चली गई। उसके बाद हम कभी मिल नहीं पाये। और आज साधना की शादी हो चुकी है।
खैर आप लोगों को ये मेरी सच्ची घटना कैसी लगी, कमेंट्स में जरूर बताइयेगा। Sex Stories
The user agrees to follow our Terms and Conditions and gives us feedback about our website and our services. These ads in TOTTAA were put there by the advertiser on his own and are solely their responsibility. Publishing these kinds of ads doesn’t have to be checked out by ourselves first.
We are not responsible for the ethics, morality, protection of intellectual property rights, or possible violations of public or moral values in the profiles created by the advertisers. TOTTAA lets you publish free online ads and find your way around the websites. It’s not up to us to act as a dealer between the customer and the advertiser.