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Sex Stories

यह अन्तर्वासना Sex Stories पर मेरी पहली कहानी है, यह एक सच्ची घटना है।

मेरे पड़ोस में एक लड़की रहती थी रेखा। वह मुझसे एक साल छोटी है। उसकी माँ और मेरी माँ काफी अच्छी सहेलियाँ हैं। वह बचपन से ही मुझसे किताबों और पढ़ाई के मामले में मदद मांगती रही है। आंटी को इस चीज़ से कभी भी एतराज़ नहीं हुआ।

अब ज़रा अपनी छम्मक छल्लो यानी रेखा के बारे में बता दूँ। दिखने में तो वो बिलकुल ऐश लगती है पर है बहुत शांत किस्म की लड़की। जैसे जैसे वो बड़ी होती गई है, वैसे वैसे ही उसकी गांड का साइज़ घूरने लायक ही नहीं, बल्कि मज़े लेने लायक भी हो गया है। उसका वक्षस्थल तो मादरचोद ऐसे हो गया है कि अगर आपको भी किसी दिन मौका हाथ लगे तो उनके बीच अपना लंड फंसा दो और आगे पीछे करके उसके मुँह में ही झड़ जाओ।

अब उसकी शादी कर दी गई है और वो शहर से काफी दूर जा चुकी है।

इन बातों के बाद मैं अपना परिचय भी दे दूँ। मैं ६ फीट लम्बा एक शरीफ सा इंसान हूँ जिसको हफ्ते में कम से कम एक बार चूत तो चाहिए ही चाहिए। इसके लिए मैं पैसों की परवाह भी नहीं करता। मैंने अपनी इंजीनियरिंग ख़त्म कर ली है और एक छोटी सी कंपनी में लगा हुआ हूँ। बकचोदी के बाद मैं अपनी कहानी शुरू करता हूँ। बात उन दिनों की है जब मैं इंजीनियरिंग के पहले साल में था। तब मैं 19 साल का था और तब से ही मैंने चूत का स्वाद चखना शुरू किया था। हम सब दोस्त मिल कर सस्ती लडकियाँ कहीं न कहीं से लेकर आते थे।

रेखा के साथ मेरी लॉटरी उन्हीं दिनों खुल गई थी। वो मुझसे पढ़ाई के लिए सहायता मांगने आती और मैं उसके साथ शरारत करने की कोशिश करता रहता। हांलांकि चूत की कमी तो थी नहीं मेरे पास, पर मैं सोचता था कि अगर इसकी मिल जाए तो मज़ा ही आ जाये। ऊपर से परिवार का भी डर था। पर ज़िन्दगी में कुछ चीज़ें पाने के लिए रिस्क भी तो लेना ही पड़ता है ना।

मैं धीरे धीरे उसको अपने दायरे के अन्दर ले आने की कोशिश कर रहा था।

वह एक दिन आई, उसको मैंने थोड़ा सा पढ़ाया। जब वो जाने लगी तो मैंने उसको आँख मार दी। वो मुस्कुरा के चली गई। मुझे कुछ कुछ होने लगा। वो बाद में जब भी आती मैं उसको थोड़ा छू देता। वो फिर से मुस्कुरा देती। अब तो मैंने अपना हाथ उसकी जाँघों पे रखना शुरू कर दिया था। अब वो मेरे पास कुछ ज्यादा ही आने लगी थी, शायद उसको मेरी ठर्कियों वाली हरकतों से मज़ा आता था। देखने से तो ऐसा ही लगता था कि उससे भी नहीं रहा जा रहा।

वो अगली बार ऐसा मौका तलाश कर आई जब मेरे घर पर मेरे अलावा और कोई नहीं था। वो स्कर्ट में आई थी। क्या माल लग रही थी। बिलकुल ऐश। मैं तो देखता ही रह गया। पढ़ने के बहाने वो मुझसे चिपक कर बैठ गई। उसको पता था कि मैं उसकी जांघ पर हाथ ज़रूर रखूँगा। मैंने ऐसा ही किया। लेकिन अब जो हुआ उससे मेरा लंड गन्ने के जैसे खड़ा हो गया। उसने मेरा हाथ अपने हाथ में लिया और स्कर्ट के ऊपर से ही अपनी चूत पर रख दिया। क्या जन्नत थी उसकी चूत। स्कर्ट के ऊपर से बिल्कुत मखमल सी मुलायम लग रही थी। मुझे क्या था, मैं उसे सहलाने लगा। पढ़ाई लिखाई माँ चुदाये।

वो आँख बंद करके कुर्सी पर ही बैठी रही और मज़े लेने लगी। मुझको अब असली दर्शन करने थे। मैं उसको चूमते हुए अपनी बाहों में भर के बिस्तर तक ले आया। मैंने नीचे से ही शुरू किया। स्कर्ट को ऊपर कर के मैंने उसकी दोनों टांगों को चौड़ा दिया। उसकी सफ़ेद पैंटी गीली हो चुकी थी। उसकी पैंटी को मैंने एक तरफ सरकाया और बिना बालों वाली कुँवारी चूत के दर्शन किये। गज़ब की महक रही थी उसकी चूत।

पहले मैंने उसको ऊँगली से चोदना शुरू किया। उसने भी इसी बीच मेरा पजामा उतार दिया। वह मेरे लंड की तरफ बढ़ी और हाथ में ले लिया और मुठ मारने लगी। अब हम 69 में हो लिए। दोस्तों इसी को अन्तर्वासना कहते हैं। सब कुछ अपने आप होने लगता है। मैं उसकी फुद्दी चाट रहा था और वो मेरा लंड चूस रही थी। काफी देर तक ये करने के बाद जब मैं झड़ने वाला था और मुझसे रहा नहीं गया, तब मैं उसके ऊपर सीधे से आया और अपना लंड उसके दरवाज़े में डाल दिया। चूंकि मेरी सफ़ेद नदी छूटने ही वाली थी, दो तीन घक्कों में ही मैं पूरा छूट गया। उसके चेहरे के हाव-भाव से ऐसा लग रहा था की वो अभी तक संतुष्ट नहीं हुई थी।

मेरा लंड तो थक चुका था पर उसे भी खुश करना था। इसलिए मैंने अपने मुँह और ऊँगली दोनों से ही उसके प्यार के अंग को खुश किया। इसके बाद हम दोनों ने कपड़े पहन लिए। उसने कहा कि आगे से जब भी उसको अपनी चूत को ऊँगली करने का मन करेगा तो वो मेरे पास ही आ जाया करेगी। मैं तो ये सुन के हैरान ही हो गया कि रेखा की रेखा ऐसी रंडियों वाली हो सकती है।

ऐसे ही फिर मैंने कई बार उस बहन की लौड़ी की चुदाई करी। कभी उसके घर में तो कभी अपने घर में। पर 22 साल की उम्र में ही उसकी शादी कर दी गई। वो अब दूर है। तब से अब तक जब भी वो अपने घर आई है, हम मिलें तो काफी बार हैं पर चुदाई की नौबत कभी नहीं आई है।

दोस्तो, बताओ अब हमें फिर चुदाई का आनंद उठाना चाहिए या नहीं? Sex Stories

Antarvasna

मैंने रीता को तीन Antarvasna बार दिन और चार बार रात में चोदा। फिर एक दिन नीलम ने मुझ से चुदवा ही लिया।
पर कैसे?
वो आज मैं आपको बताता हूँ कि कैसे मैंने रीता के बाद नीलम को चोदा!

अगले दिन मैं जल्दी 5 बजे ही जगा, जब सब लड़कियाँ नहाती थी और खिड़की के पास बैठ गया। जब सविता आई तो उसने मेरे कमरे की तरफ झांका और बाथरूम में चली गई। और जाते ही उसने गीता की गांड पर हाथ मारा और कहा- क्या हाल है मेरी चुदक्क्ड़?

और मेरी खिड़की की तरफ मुँह करके पूरे कपड़े उतार कर नंगी हो गई और गीता से कहने लगी- यार गीता, मेरी चूत में बहुत आग लगी है, किसी असली लंड से इसको चुदवा दे!

और अपनी चूत के होठों को खोलते हुए उसे मेरी तरफ मुँह करके दिखाने लगी जिससे मुझे उसकी चूत अन्दर तक लाल दिखाई दी और मेरा हाथ अपने लंड पर चला गया।

इतने में गीता बोली- अपने राजेश के लंड से चुदवा ले ना!

इतने में बाथरूम में रीता घुसते हुए बोली- यार कौन राजेश से चुदवाना नहीं चाहता? सभी चाहती हैं पर चुदवाने का बहाना तो तलाश करो!

और रीता ने अपनी एक उंगली सविता की चूत में डाल दी तो इस पर सविता बोली- अब इसे तेरी उंगली की नहीं, राजेश के लंड की जरूरत है!

फिर सभी लड़कियाँ मस्ती से नहाकर अपने कॉलेज चली गई और मैं भी नहाकर अपने कॉलेज चला गया पर जब मेरा दिल नहीं लगा तो वापस कमरे पर आ गया।

वहाँ देखा कि नीलम बाथरूम में नंगी ही नहा रही है!

तो मैं भी कपड़े धोने के बहाने पूरे कपड़े उतार कर सिर्फ अंडरवीयर में बाथरूम में चला गया। नीलम मुझे देख कर बाथरूम में इधर-उधर चक्कर लगाये क्योंकि वो अपने कमरे से नंगी ही नहाने आई थी। तो मैंने कहा- क्या हुआ नीलम जी? आप ऐसे इधर उधर क्यों भाग रही हो? अब तो मैंने आपका सब कुछ देख लिया है, चूत भी चूचियाँ भी! बड़ी मस्त चूत और चूचियाँ हैं!

इतना सुनकर वो बोली- मेरा इतना देख कर भी अपना लंड इस टेंट में छिपा रखा है?

तो मेरा लंड निक्कर में फड़फड़ाने लगा। नीलम मेरी निक्कर नीचे सरका कर उसे चूसने लगी तो मेरा लंड एक लोहे की छड़ की तरह हो गया।

मैं बोला- साली, यदि तू मेरा चूस रही है तो कुछ मुझे भी चुसा!

और मैंने उसकी टांग पकड़ के उसकी टांग ऊपर उठा के उसे उल्टा लटका दिया और उसकी चूत चूसने लगा और वो मेरा लंड!

15 मिनट के बाद वो सी सी… करके अपनी टांग दबाने लगी और झड़ गई। मैं उसकी चूत का नमकीन और स्वादिष्ट रस पी गया। फिर मैंने उसे खड़े खड़े ही पल्टा और उसको लंड पर बिठा कर चूत में लंड घुसा दिया और चोदने लगा। वो भी मेरे कन्धों को पकड़ कर अपनी गांड हिलाने लगी। अब वो पूरी मस्ती में आ चुकी थी, बोली- राजेश, प्यारे मैं तुझे पहले ही दिन देख कर समझ गई थी कि तू ही मेरी चूत की आग बुझा सकता है। आज मेरी चूत की आग चोद-चोद कर बुझा दे।

मैं बोला- मैं तो तब ही समझ गया जब आपको मैंने बाथरूम में झांट काटते हुए देखा और आपकी गुलाबी चूत ने मेरा जीना हराम कर रखा था। यह लंड मुझे जीने नहीं दे रहा था, आज मुझे शांति मिली है जब मैंने तेरी चूत में इसे घुसा दिया है। अब रोज तेरी चूत की धज्जियाँ उड़ाया करूँगा।

फिर मैं उसे दबा कर चोदता रहा और वो भी मुझे खूब गांड हिला कर उकसाती रही। जब मैं उसे तीसरी बार चोद रहा था तो नीलम बोली- राजा, अब मुझे लंड पर बैठा कर चोदते हुए मुझे मेरे कमरे में ले चलो! यहाँ कोई आ जायेगा!

फिर मैं उसे लंड पर बिठा कर उसके कमरे में लाकर उसके बेड पर घोड़ी बना कर चोदने लगा। जब मैं नीलम को घोड़ी बना कर चोद रहा था तो अचानक रीता आ गई और वो बड़ी तेजी से कमरे में घुसी और घुसते ही रुक गई और हमें देखा तो मैंने उसे आँख मारी, वो समझ गई कि अपनी चुदाई की बात नहीं बतानी है।

वो नीलम पर बरस पड़ी- आप तो राजेश से चुदवा रही हैं और यहाँ हमरी चूत की फिकर ही नहीं है!

तो नीलम उसे अपने पास बुलाया और उसकी चूची दबा कर बोली- यार, तू क्या समझती है कि मुझे पता नहीं है कि तू कल कहाँ थी जब मैं और सविता आपस में प्लास्टिक के लंड से चुद रहे थे!

तो मैं अचानक चौंका- आपको कैसे पता चला?

तो नीलम बोली- जब हम चुदाई करते हैं और रीता होती है तो यह जरूर हमसे अपनी चूत में लंड डलवाने आती है और कल यह आई नहीं! और मैंने तुम्हें कमरे में घुसते हुए देख लिया था। फिर जब सविता मेरी चूत में प्लास्टिक के लंड से चुदाई कर रही थी तो मैंने देखा कि कोई तेरे लंड को नीचे बैठे चूस रहा है क्योंकि मुझे रीता के सर के बल दिखे और जब मैंने सविता को छोड़ा तो मैंने देख लिया था कि तुम रीता को घोड़ी बना कर चोद रहे थे।

इस पर रीता बोली- दीदी आपको आना चाहिए था असली लंड से चुदवाने!

नीलम बोली- मैंने सोचा कि अब मैं तो प्लास्टिक के लंड से चुदवा ही रही हूँ, चलो तुम ही चुदवा लो!

फिर मैंने नीलम को दो बार और रीता को एक बार चोद कर रात को चोदने का फैसला किया और इसके बाद सविता, गीता, मीरा को चोदा। Antarvasna

Sex stories
मैं मेरे नये दोस्तों को मेरा अपना परिचय करा Sex stories दूं। मेरा नाम सीता है, मेरी उमर 28 साल है, मेरी शादी हो चुकी है। मैं सेक्स की बहुत भूखी हूं। मेरे हबी संजू बड़े स्मार्ट और सेक्स में पावरफ़ुल हैं पर वो ज्यादातर समय बाहर ही गुजारते हैं और मुझमें सेक्स की भूख बहुत ज्यादा है इसलिये मैं हर वक्त नये लंड की तलाश में रहती हूं। अपनी पिछली कहानी में मैंने बताया था कि किस तरह मेरे ड्राइवर अमित ने मुझसे जबरदस्ती की थी।

आज मैं आपको अपनी एक नयी कहानी सुना रही हूं जिसमे मैंने और मेरी दोस्त (अब वो मेरी ननद है) सुमन ने किस तरह मनाली में चुदाई के साथ इनकम भी की। ये बात 1998 की है जब मैं और मेरी दोस्त चंडीगढ़ में बी ए के तीसरे साल की पढ़ाई कर रही थी। हम दोनों ही शुरु से चुदक्कड़ थी और अक्सर अपने ब्वायफ़्रेंड के साथ डेट पर जाती और चुदाई का मज़ा लेती।
एक बार मैं अपने दोस्त के साथ शिमला घूमने के लिये गयी हुई थी। वहां पर हमने 3 दिन तक खूब चुदाई का नज़ारा लिया। वहां जिस होटल में हम रुके हुए थे वो होटल पर अक्सर काल गर्ल आती रहती थी और उस होटल में लगभग हर टूरिस्ट इसी लिये आता था।

मैं एक दिन शाम के वक्त बार टेबल पर बैठी थी मेरा दोस्त अभी रूम से नीचे नहीं आया था तभी एक सांवले रंग का मजबूत बदन का मर्द मेरे पास आ कर बैठ गया। उसने मुझे काल गर्ल समझ लिया था। मेरे पास आ कर उसने मुझे ड्रिंक की पेशकश की जिसे मैंने नम्रता से ठुकरा दिया। उसके बाद उसने स्माइल पास करते हुए मुझे से नाम पूछते हुए अपना परिचय देने लेगा। कुछ देर बाद उसने असली बात पर आते हुए मुझे रात की ओफ़र की और इसके लिये उसने बिना मेरी तरफ़ देखे सौ रुपये के काफ़ी सारे नोट मेरी तरफ़ बढ़ा दिये।

एक बार तो मैं उसकी हरकत पर हैरान हो गयी और मुझे गुस्सा भी आया पर दूसरे ही पल मेरे दिमाग में एक नया विचार आया (हालांकि मैं भी बहुत रिच फ़ैमिली से हूं पर जैसा कि सभी पाठक जानते हैं कोलेज लाइफ़ में पोकेट मनी की प्रोब्लम रहती है) कि ये तो पैसे के साथ मजा और नये लंड के साथ बाहर घूमने का बड़ा अच्छा साधन है। पर उस वक्त मैं अपने दोस्त के साथ थी। मैंने उसे अपना पता देते हुए बाद में सम्पर्क करने को कहा।

कई दिन के बाद मुझे उसका सन्देशा मिला कि उसे 2 लड़कियां 5 दिन के लिये चाहिये। वो और उसका दोस्त अपनी आउटिंग को इस बार रंगीन करना चाहते हैं। मेरे पूछने पर बताया की उन लोगों को मनाली के अन्दर अपना होलीडे बिताना है। मैंने उससे उसका कोन्टेक्ट नम्बर ले लिया और बोला कि मैं आपको कल तक बता दूंगी।

मैं तो उसी वक्त तैयार थी पर अब उसे दो लड़कियों की जरूरत थी जबकि मैं अकेली थी। तभी मेरे मन में सुमन का ख्याल आया। वैसे भी हम अकसर इकट्ठी चुदायी पर जाती थी।

पहले तो सुमन ने इन्कार कर दिया पर मेरे समझाने पर वो राजी हो गयी। मैंने उसी शाम उसको फोन करके रुपये और टाइम की सेटिंग कर ली। हम लोगों ने 5 दिन के उनसे 20000 रुपये मांगे। २ दिन के बाद हम मनाली के लिये निकल पड़े। अब हम दोनों बहुत खुश थे। एक तो हमे २-२ नये लंड मिलने वाले थे दूसरा हमें 20000/- रुपये भी मिलने वाले थे मनाली बसस्टेंड पर ही वो दोनों हमें मिल गये। हम दोनों उनके साथ कर पर चल पड़े। उन लोगों ने होटल पिकडेली में रूम ले रखा था। हमने रूम में पहुंचते ही उन्होने हमें नंगा होने को कहा और खुद फोन कर के वेटर को खाने का ओर्डर दे दिया।

हम लोगों ने पहले बाथ लेने की इच्छा जतायी। सन्जू (उनमें एक का नाम) ने कहा ठीक है परन्तु पहले कुछ खा लो। इतने में वेटर कोफ़ी और कुछ स्नैक्स ले आया। कोफ़ी लेने के बाद हम नहाने के लिये बाथरूम में चले गये। जैसे ही सुमन ने बाथरूम का गेट बंद करना चाहा तो उसे श्याम ने रोक दिया और कहने लगा, अब कोई शरम नहीं, दरवाजा खुला रहने दो हम देखना चाहते हैं कि तुम कैसे एक दूसरे को नहलाती हो। क्योंकि इस वक्त हम उनकी पेड सेक्स थी इसलिये चुप-चाप उनकी बात मानते हुए नंगी नहाने लेगी।

कुछ समय के बाद सन्जू और श्याम भी बाथरूम के अंदर आ गये। वो दोनों बिल्कुल नंगे थे। सन्जू बोला- इकट्ठे नहाएँ?
मैंने उन्हें कहा- ओके।
सन्जू ने श्याम से कहा- चलो हम चारों सब साथ साथ ही नहा लेते हैं, फिर चुदाई करेंगे!
और हम सब बाथरूम में इकट्ठे नहाने लगे।

मैं सन्जू की तरफ़ देख कर मुस्कुरा रही थी। उसका खड़ा हुआ लंड देख कर मेरा हाथ अन्जाने में मेरी चूत पर चला गया और मैं अपनी चूत में उसके सामने ही उंगली करने लगी। ये देख कर श्याम बोला- अरे तुम क्यों अपनी चूत में उंगली कर रही हो। तुम तो अपने हाथ से सन्जू के लंड का मजा लो और फिर जम कर चुदवाओ।

सन्जू ने तभी एक हाथ से मेरी चूचियों को मसलना शुरु कर दिया और दूसरे हाथ की दो उंगलियां मेरी चूत में डाल दी। मुझसे रहा नहीं गया और मैं भी अपने एक हाथ से उसके लम्बे और मोटे लंड को कस के पकड़ कर आगे पीछे करने लगी। उसके लंड का सुपाड़ा काफ़ी बड़ा था और बिल्कुल काले रंग का था।

उधर सुमन और श्याम शोवर के नीचे एक दूसरे से चिपके हुए खड़े थे और सुमन श्याम के लंड को पकड़ कर खींच खींच कर हिला रही थी। श्याम एक हाथ से सुमन के दोनों नंगे चूतड़ों को मसल रहा था और दूसरे हाथ से उसकी चूत में उंगली से चोद रहा था।

मैंने भी सन्जू के तने हुए लंड को इतना चूसा कि उसके सुपाड़े से चिकना चिकना पानी निकलने लगा। हम दोनों वहीं बाथरूम फ़्लोर पर 69 के पोज में लेट गये। सन्जू की जीभ मेरी चूत में आग लगा रही थी। मैं सन्जू के लंड को हाथ से पकड़ कर खींच खींच के चूस रही थी।
तभी सन्जू मेरे मुंह में ही झड़ गया। मैं तो उसके लंड से निकले डिस्चार्ज की मात्रा देख कर ही हैरान रह गई। काफी सारा सफ़ेद सफ़ेद गाढ़ा गाढ़ा माल उसके लंड से निकला जो मेरे मुंह में भर गया। मैं धीरे धीरे उस सारे खट्टे खट्टे माल को अपनी जीभ से चाट चाट कर पी गयी। इससे पहले मैंने जितने भी देखे थे उनके लंड से तो इसका करीब आधा माल ही निकलता है।

मेरा मन अभी भरा नहीं था इसलिये उसके झड़े हुए लम्बे लटकते हुए लंड को मैंने फिर से चूसना शुरु कर दिया। सन्जू अभी भी मेरी चूत चाटने में लगा था। मैं तो ये सोच कर मजे में बिल्कुल पागल सी हो गयी कि ये लंड आगले 5 दिन के लिये मेरे पास रहेगा।

जब सन्जू से नहीं रहा गया उसने मुझे वहीं बाथरूम के फ़्लोर पर कुतिया की तरह पोज बना कर बिठा दिया और मेरी दोनों टांगे फैला कर पीछे से मेरी चूत में अपना ८ इंच लम्बा और ४ इंच मोटा गधे जैसा लंड पेल दिया और एक जोरदार धक्का लगाया। मेरी चूत चुदने के लिये बिल्कुल गीली हो कर इतना खुल गयी थी कि एक ही धक्के में सन्जू का पूरा लंड गपक गयी। उसके धक्कों में मुझे इतना मजा आ रहा था कि मैं भी अपने चूतड़ उछाल उछाल कर अपनी चूत में उसके लंड के धक्कों का मजा लेने लगी। दो तीन धक्कों में ही मेरी चूत फच फच करने लगी।

चार पांच धक्कों में ही मैं झड़ गयी। लेकिन सन्जू के लम्बे लंड के धक्के जारी थे और उसके बाद तो मैंने पहली बार मल्टीपल ओर्गास्म का मतलब जाना क्योंकि हर दूसरे धक्के पर मेरी चूत पानी छोड़ रही थी।
मुझे सन्जू से चुदाने में बहुत मजा आ रहा था कि मैं सिसकारियां भर रही थी, मैं एक्साइटमेंट में कई बार बोल भी पड़ी- मुझे और जोर से चोदो। पूरा लंड पेल दो। हाय, मेरी चूत फाड़ डालो।

करीब मुझे 15 मिनट तक सन्जू ने कई सारे पोज में कभी आगे से, कभी पीछे से, कभी खड़े खड़े और कभी अपने लंड पर बिठा कर वहीं पर श्याम और सुमन के सामने चोदा और मेरी चूत में अपना सारा माल एक बार फिर से निकाल दिया। हम दोनों अब थक कर अलग हो गये। मेरी चूत से सन्जू का सारा माल निकल निकल कर मेरी जांघों पर टपक रहा था।

सन्जू अभी भी मेरी चूचियां मसल रहा था। उसका लंड मेरी चूत के रस से गीला हो कर चमक रहा था और गधे के लंड की तरह नीचे लटक गया था।

कुछ समय के बाद मैं फिर से गर्म हो गयी। मैंने फिर से सन्जू के लंड को चूसना शुरु कर दिया। सन्जू भी मेरी चूत में उंगली डाल डाल कर और निकाल कर उंगली में लगे मेरे और उसके झड़े हुए माल को चाटने लगा। इतने जोर से झड़ कर भी मेरी चुदास शान्त नहीं हुई थी और मेरा मन कर रहा था कि मैं सारी रात सन्जू के उस मोटे और लम्बे लंड से मजे लेती रहूं।

तभी हम सभी बाथरूम से बाहर आ गये सन्जू का गधे जैसा लम्बा लंड चलते समय उसकी दोनों टांगों के बीच लटका हुआ ऐसे मस्ताना हो कर झूल रहा था कि मैं उसके लंड पर से नजर हटा ही नहीं पा रही थी। मैं अभी भी सन्जू के लटकते हुए लंड को देख रही थी।

उसके बाद तो फिर 5 रातों तक हम चारों एक ही कमरे में सारी बत्तियां जला कर एक ही बिस्तर पर अलग अलग स्ताइल से एक-दूसरे को चोदते। वो 5 रातों में मैंने जी भर कर ऐसी चुदाई करवाई कि मैं जीवन भर कभी भूल नहीं सकती।

आखिरी रात को सन्जू के उस लम्बे लंड से मैं पता नहीं कितनी बार झड़ी। श्याम ने भी मेरी चूत और मुंह में पता नहीं कितनी पिचकारियां मारी होंगी। मेरी चूत को तो 5 दिन के बाद उसके लंड ने खुला भोसड़ा बना दिया था।

आखिरी दिन जब हम जब वो दोनों जाने लगे तब भी मुझ से रहा नहीं गया और मैंने फिर से एक आखिरी बार सन्जू के लंड को चूस चूस कर इतना गर्म कर दिया कि वो मेरे मुंह में ही झड़ गया। उसका सारा सफ़ेद माल पी कर मैंने उसको बुझते हुए दिल से गुड बाय कहा।

हमें जाते वक्त उन्होंने 20000/- से अलग 2000/- और भी दिये और साथ में ब्रा-पैंटी के इम्पोरटेड सेट भी दिये।

अब चंडीगढ़ वापस आने के बाद हम दोनों उस रात की बात जरूर करते हैं और दोनों ही उत्तेजित हो कर एक दूसरे के साथ लेस्बियन करती। सन्जू का गधे जैसा मोटा और लम्बा लंड अभी भी आंखों के सामने आ जाता है। Sex stories

Antarvasna

आज मैं आपको Antarvasna अपनी पड़ोसन आंटी की चुदाई की कहानी बताता हूँ कि कैसे मुझे एक 37 साल की माल आंटी को चोदने का मौका मिला।

तो अपने लंड को थाम के (अगर पास आपके चूत है तो उसमें ऊँगली डाल के ) तैयार हो जाइये एक हसीं दास्ताँ सुनने के लिए!

यह मेरा वादा है कि आपका लंड माल और आपकी चूत पानी छोड़ देगी, इससे पहले कि मेरी कहानी ख़त्म हो।

मेरे पड़ोस में एक परिवार रहता है जिसमें दो बच्चे, एक अंकल और एक आंटी हैं। अंकल बीएसएनएल में काम करते हैं और आंटी घर पर ही रहती हैं। उनका बड़ा लड़का बाहर नौकरी करता है और छोटा दसवीं में पढ़ता है। हमारे घर इतने पास-पास हैं कि एक छोटा सा बच्चा भी कूद कर हमारी छत से उनकी छत पर जा सकता है।

बात गर्मियों की दोपहर की है जब बाहर गर्म और तेज़ हवा चलने लगी, आंटी ज़ल्दी से उपर आ गई और सुखाये हुए कपड़े वापस नीचे ले जाने लगी ताकि कहीं ऐसा न हो कि कपड़े उड़ जाएँ!
पर आंटी ने जब देखा कि उनकी पैंटी उड़ कर हमारे घर में आ गिरी है, उन्होंने ऊपर से ही मेरी मम्मी को आवाज़ लगाई।

क्योंकि मम्मी उस वक़्त खाना बना रही थी इसलिए उन्होंने मुझे कहा कि मैं ऊपर जा के देखूं कि आंटी क्यों बुला रही हैं।

जैसे ही मैं ऊपर गया, मुझे आंटी की पैंटी दिख गई और मैं जैसे ही आंटी के पास पहुंचा, मैंने उस पैंटी के ऊपर पैर रख दिया और आंटी से अनजान बन कर पूछने लगा- आंटी! क्या बात है, आपने आवाज़ क्यों लगाई?

आंटी अब फंस चुकी थी, पर मरती क्या न करती, बोली- बेटा, मेरा एक कपड़ा तुम्हारी छत पर गिर गया है। ज़रा लौटा दो!

मैंने कहा- कौन सा कपड़ा आंटी जी?

तो वो बोली कि गलती से वो कपड़ा मेरे पैर के नीचे आ गया है। मैंने गलती होने का नाटक किया और बोल पड़ा- सॉरी आंटी जी! मुझे तो दिखा ही नहीं कि आपकी पैंटी यहाँ पर गिरी है।

मैंने पैंटी उठाई और उसे ठीक करने लगा तो आंटी बोली- यह क्या कर रहे हो? ऐसे ही दे दो ज़ल्दी से!

मैंने कहा- कोई बात नहीं आंटी जी! ठीक कर देता हूँ, मेरे से गलती हो गई।

आंटी को जानते हुए देर न लगी कि मेरे मन में क्या है। तो आंटी ने कहा- कपड़े ठीक करने का इतना ही शौक है तो मेरे घर आ जा, वहाँ बहुत बड़ा ढेर है, फिर मन भर के सफाई कर लेना!

मैंने कहा- मुझे कपड़े धोने नहीं आते, मैं तो बस छोटे कपड़े ही धोया करता हूँ!

आंटी ने कहा- छोटे कपड़े ही धो देना, मेरी बहुत मदद हो जायेगी!
मैंने कहा- क्या सचमुच आ जाऊँ?
तो आंटी ने कहा- अभी आ जा!

मैं नीचे आया और मम्मी से बोला कि आंटी का केबल ख़राब है, उन्होंने मुझे कहा है कि मैं ज़रा देख लूं तो क्या पता ठीक हो जाए।

मम्मी को बता कर मैं आंटी के घर चला गया। आंटी ने बिना दुपट्टे के सूट पहना हुआ था और उसकी गांड के दो टुकड़े अलग अलग दिख रहे थे। मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी गांड को देखूं या उसको ब्रा को फाड़ कर बाहर आने को तैयार उसकी चूचियों को देख कर रात की मूठ का इंतज़ाम करूँ।

तभी आंटी पानी ले आई और जैसे ही मैंने पानी लिया, वो मेरी बगल में बैठ कर मेरी पढ़ाई का हाल-चाल पूछने लगी।
मैंने बिना समय बर्बाद करते हुए कहा- आप कपड़े दिखाओ, मुझे और भी बहुत से काम हैं!

शायद आंटी भी बहुत दिनों से लंड के लिए तड़प रही थी, वो बोली- ऊपर के या नीचे के?
मैंने कहा- मैं दोनों काम कर लूँगा!

आंटी ने उसी वक़्त अपना कमीज़ उतार दिया और उनकी ब्रा से बाहर निकलते स्तनों को देख कर मेरा तो लंड खड़ा हो गया।

आंटी ने मेरा हाथ पकड़ कर अपने वक्ष पर रख दिया।
मैंने कहा- आंटी, आपकी चूचियों का आकार क्या है?
तो आंटी बोली- तुझे कितना लगता है?
मैंने तुक्का मार दिया- आंटी, चालीस?

आंटी बोली- लगता है, काफी लड़कियाँ चोद चुका है तू कॉलेज में! तूने तो एकदम सही साइज़ पहचान लिया।

तो मैंने कहा- आंटी, जब रात को कई बार आप कपड़े सुखा के चली जाती हो सोने, तो मैं चुपचाप छत पर जाकर आपकी ब्रा और पैंटी का नम्बर देखता था और आपकी पैंटी को ले जाकर उसमे मुठ मारता था।

आंटी ने मेरे मुँह पर एक थप्पड़ मारा और कहा- साले, कुत्ते, तेरी वज़ह से ही मेरी चूत में खुज़ली होती थी! मैं साफ़ पैंटी सुखा के जाती थी और सुबह उस पर दाग होता था! पर मुझे वही पैंटी पहननी पड़ती थी।

मैंने कहा- आंटी, आज आपकी चूत की सारी खुजली मैं दूर कर दूंगा!

मैंने आंटी को सामने मेज़ पर हाथ रख के कुतिया की तरह झुक जाने को कहा और उसकी सलवार और पैंटी को उतार कर अपनी नाक उसकी गांड में और जीभ उसकी चूत पे लगा दी।
उसकी चूत का स्वाद नमकीन था और मेरा लण्ड अब पूरी तरह तैयार था।

मैंने बिना समय ख़राब किये अपना लंड निकाल कर उस रंडी के मुँह में दे दिया।

5 मिनट की चुसाई के बाद मैंने लण्ड उसके मुँह से निकाल कर उसकी गांड में डाल दिया तो आंटी ने मना कर दिया और कहा- नहीं! डालना है तो चूत में डालो! और कहीं मुझे पसंद नहीं!

आंटी अन्दर कमरे में गई और अंकल का कंडोम ले आई और बोली- पिछले दो महीने से उस नामर्द ने यह तीन कंडोम का पैक ला के रखा है और अभी तक सिर्फ एक ही इस्तेमाल किया।

मैंने पूछा- पानी पियोगी या चूत में लोगी?

आंटी बोली- कुत्ते! चूत में डाल तो सही! लंड पानी तो बाद की बात है! कहीं तू भी उस नामर्द अंकल की तरह चूत के बाहर ही तो पानी नहीं छोड़ता?

अब मेरे अंदर का मर्द जाग गया और मैंने कहा- साली, रंडी, कुतिया! ले देख मर्द का लंड किसे कहते हैं!

उसकी बारह मिनट की चुदाई के बाद वो झड़ गई तो मैंने उसकी चूत से लण्ड निकाल कर सारा पानी उसके मुँह में डाल दिया और उस कुतिया को जबरदस्ती वो पानी पिलाया। अब हम दोनों थक कर बेड पर लेट गए।

मैंने अचानक आंटी से पूछा- अंकल को क्या कहोगी कि दूसरा कंडोम कहा गया?

आंटी बोली- मैं कहूँगी कि मैंने दोनों कंडोम बाहर फेंक दिए!
मैंने कहा- दोनों??

तो आंटी दूसरा कंडोम एक हाथ में लिए हुए मेरा लण्ड सहलाने लगी और बोली- गांड मरवा कर भी देख ही लेती हूँ!
…आह आह आह आह आह आह आह फच्च फच्च पिच पिच Antarvasna

Hello , mera naam vishal hai ,mei kolkata ka rahne wala hoon , ye meri khani hai. Too baat hai jab mei kolkata mei college mei tha , 1 st year mei taab mei college bike se jata tha. Mei Kolkata mei akele rahta tha kyu ki humara ghar siliguri thi but mei studies ke leye kolkata mei ek flat mei rent pe rahta tha . Too jaab mei college ke 2 nd year mei paucha , taab humare flat mei ek family shift howi uss mei ek husband tha ek wife thi aur ek unkka chota ladka tha 5-6 saal ka . Jaab woo log shift howe , taab humhari pheli baar mulakat howi , woo husband ka naam yha Rahul , aur wife ka naam tha sheetal , too mei kada taar college mei classes subha taak karke dopeher taak flat laut aata tha , aur fir din bhar flat pe game kehlta tha , ek din jaab mei flat pe tha taab , door beel baji jaise mene khola , wahi bhabhi thi . 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