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जून 2006 की बात है जब Hindi Porn Stories मैं क्लास 12वीं में दिल्ली में पढ़ता था और दोस्तों से ढेर सारे किस्से सुनता था। कुछ दोस्तों की गर्ल-फ्रेंड थी और वो उनके मुम्मे दबाते थे या उनकी किस लिया करते थे। मुझे भी यह सब सुन कर बहुत ज़रुरत महसूस होती थी कि मैं भी किसी लड़की के साथ वो सब करूं। मैं मुठ तो मारता ही था तो शरीर की ज़रूरत तो पूरी हो जाती थी पर हमेशा एक जिज्ञासा बनी रही कि किसी लड़की के साथ वो सब करके कैसा लगेगा।
मेरे एक चाचा हैं जिनकी लड़की सीमा मेरी हम उम्र है और लड़का सोनू मुझ से 4 साल छोटा है। वो लोग जींद में रहते थे और अक्सर छुट्टियों में हम उनके घर जाते थे या फिर वो सब लोग हमारे घर आ जाते थे। गर्मियों की छुट्टियों में भी ऐसा ही होता था। चाचा ज्यादातर 2-3 दिन रूककर वापिस चले जाते थे और चाची, सोनू और सीमा हमारे साथ 3-4 हफ्ते बिताते थे। ऐसा काफी सालों से चल रहा था और हम सब आपस में बहुत घुल मिल गए थे।
यह बात 2006 की जून की हे। चाची विथ फॅमिली हमारे घर आई हुई थी। मैं सीमा से पूरे 2 साल के बाद मिल रहा था। मैंने नोटिस किया की वोह अब बड़ी हो गयी थी और उसके मम्मे भी बड़े साइज़ के हो गए थे। लेकिन मेरे मन में कोई बुरा विचार नहीं था। फिर भी मैं थोडा हैरान था कि 2 साल में उसके मम्मे कहाँ से आ गए।
पहले 2-3 दिन तो हम सब खेलते रहे- मोनोपोली, ताश, लूडो, लुका-छिपी वगैरह। हमारे घर के सामने कुछ नए गवर्नमेंट मकान बन रहे थे। लुका छिपी खेलते हुए हम लोग अक्सर उन्हीं मकानों में छुप जाते थे। वहाँ कुछ घर पूरे बन गए थे और कुछ आधे! किसी भी कमरे में दरवाज़े नहीं लगे थे तो खेलना आसान था। तो हम लोग कभी किसी स्टोर-रूम में, तो कभी किसी टंकी के पीछे, तो कभी दीवारें टाप कर खुद तो आउट होने से बचाते थे।
ऐसे ही एक दिन शाम को हम सब कालोनी के बच्चे लुका-छिपी खेल रहे थे। सीमा और मैं योजना बना कर के खेलते थे ताकि हम पकड़े न जाएँ। वो और मैं एक छोटे स्टोर रूम में छुप गए। वो स्टोर रूम एल आकार का था और हम उसके छोटे वाले कोने में थे। अचानक मैंने देखा कि जिस लड़के की बारी थी वो हमारी ही तरफ आ रहा था। मैं छुपने के लिए और साइड पे हो गया। मैंने इशारे से सीमा को बता दिया कि वो इसी तरफ आ रहा था। वो भी सांस खींच कर अन्दर को हो गई। मैं भी और पीछे होने लगा और अब मेरी कोहनी और हाथ उसकी साइड बॉडी से छू रहा था। मेरी बाजू को कुछ नर्म नर्म सा लगा और मुझे जानते हुए समय नहीं लगा कि उसके मम्मे मेरे हाथ से दब रहे हैं। उसने कुछ नहीं कहा और मैं भी ऐसे ही खड़ा रहा। वो लड़का कोई दो मिनट आस पास घूम कर चला गया पर उसे हम नहीं दिखे।
वो तो चला गया लेकिन मैंने अपनी जगह नहीं बदली। मैं उसके साथ ही चिपका रहा। मेरा दिमाग सुन्न हो गया था। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ। कुछ 5 मिनट के बाद मैंने कहा- लगता है कि अब वोह लड़का चला गया है। यह कह कर मैं बाहर आ गया। मैं सीमा से नज़र नहीं मिला रहा था क्योंकि मुझे लगा कि कहीं वो मेरी हालत समझ न जाए।
रात को मुझे नींद नहीं आई। बार बार वही नर्म-नर्म स्पर्श का ख्याल आ रहा था। बिलकुल अजीब सा अहसास था।
2-3 दिन ऐसे ही निकल गए और कुछ ख़ास नहीं हुआ। फिर एक रोज़ सीमा नहा रही थी और मेरी मेरी मम्मी और चाची बोली- हम ज़रा मार्केट जा रहे हैं।
सोनू जिद करने लगा कि मैं भी साथ जाऊँगा तो चाची ने उसे भी ले लिया। वो तीन घंटे से पहले नहीं आने वाले थे। अब मैं घर पे अकेला ही था और सीमा बाथरूम में नहा रही थी। उसे नहाने में पूरा एक घंटा लगता है। मैं बोर हो रहा था तो मैंने सीमा को बोला- मैं ज़रा अपने दोस्त के घर जा रहा हूँ और एक घंटे तक आऊँगा। बाहर से ताला लगा दूंगा। सीमा बाथरूम से ही चिल्ला कर बोली- ठीक है।
मैं अपने पड़ोस के दोस्त के घर गया पर उनके यहाँ ताला लगा हुआ था। मैं वापिस आ गया और कमरे में आकर लेट गया। सीमा दूसरे कमरे के बाथरूम में नहा रही थी और उस कमरे का दरवाजा खुला था। मेरे कमरे से ऐसा एंगल था कि मैं बाथरूम से निकलते हुए सीमा को देख सकता था। मैंने चादर ले रखी थी और आँखें आधी बंद थी तो ऐसा ही लगता था कि मैं सो रहा हूँ।
कुछ 20 मिनट बाद मैंने देखा कि सीमा ने बाथरूम का दरवाजा खोला। उनसे केवल ब्रा और पैंटी ही पहन रखी थी। उसने सोचा होगा कि कोई घर पर हैं नहीं तो सूट बाहर आकर पहन लेती हूँ। उसको ऐसा देख कर मेरा तो दिमाग हिल गया। मैं उसी पोजिशन में लेटा रहा ताकि उसे शक न जो जाए। सीमा ने मुझे लेटा देखा तो अचानक सकपका गई पर जब उसने देखा कि मैं सो रहा हूँ तो उसने दरवाजा बंद किया और अपना सूट पहन लिया। मैंने ज़िन्दगी में पहली बार किसी लड़की को इस रूप में देखा था।
उस रात फिर मुझे नींद नहीं आई और मैंने रात को उठ कर दो बार मुठ मारी। मेरे ख्याल में सीमा की नंगी काया ही थी। अगले पूरे दिन उसकी लम्बी टांगें और गोल-गोल मम्मे मेरी आँखों में घूम रहे थे। मैं सीमा को देख रहा था और उसके कपड़ों के ऊपर से ही उसके मम्मे और टांगों का नज़ारा ले रहा था।
शनिवार को हमारे घर मेरे मामा अपनी पूरी फॅमिली के साथ आ गए। उनके 3 बच्चे थे जो तक़रीबन हमारी ही उम्र के थे। मामा सपरिवार सिंगापुर जा रहे थे और उन्हें सोमवार को जाना था। वो दो रात को हमारे ही घर रुकने वाले थे। सोने के लिए यह फ़ैसला हुआ कि सब बच्चे ड्राइंग रूम में ही सोयेंगे। ड्राइंग रूम में एक बड़ा कूलर लगा हुआ था। हम सब बच्चे रात को 12 बजे तक खेल कर सो गए।
सीमा बिल्कुल कूलर के पास में सोई थी और मैं उसके साथ, फिर सोनू और फिर 3 बच्चे। लेटते साथ ही सभी को नींद आ गई क्योंकि हमने पूरे दिन बहुत मस्ती की थी। रात को मैं बाथरूम करने के लिए गया। कमरे में बाहर से थोड़ी रौशनी आ रही थी और अन्दर की चीज़ें साफ़ दिख रही थी। मैंने लाइट नहीं जलाई और वैसे ही बाथरूम हो आया। जब मैं वापिस आया तो मैंने देखा कि सीमा की चादर एक साइड से पूरी उठी हुई थी। उसकी स्कर्ट भी ऊपर उठ गई थी और उसकी एक टांग पूरी नंगी थी। यह देख कर मेरा एक दम खड़ा हो गया। मैं उस के साइड पर लेट गया पर आँखों में नींद नहीं थी। मैं बार बार आँख खोल कर उसकी टांग देख रहा था। थोडी देर में मैंने लेटे ही लेटे हिम्मत कर के उसकी स्कर्ट और ऊपर कर दी और चुपचाप फिर आँख बंद कर ली। दो मिनट के बाद आँख खोली तो देखा कि स्कर्ट उठी हुई ही है और उसकी पैंटी दिख रही है। मैंने 4-5 मिनट तक यह नज़ारा लिया। आँखों से नींद कोसों दूर थी। अब मैं सोच रहा था कि और क्या कर सकता हूँ कि पकड़ा न जाऊँ और कुछ और दिख भी जाए।
मैं फिर लेट गया और धीरे से उसकी चादर ऊपर से भी हटाने लगा। मैं सोच रहा था कि अगर सीमा जाग गई तो मैं बिलकुल पत्थर की तरह लेटा रहूँगा और उसे लगेगा कि चादर खुद ही ऊपर हो गई। कुछ 5 मिनट में उसकी चादर पूरी उतर गई थी। सीमा की स्कर्ट पैंटी तक ऊपर थी और उसने बटन वाला टॉप डाल रखा था। मैं पूरा नज़ारा लेने के लिए चुपचाप उठा और बाथरूम की तरफ जा कर खड़ा हो गया।
सीमा की नंगी टांगें और पैंटी देख कर मेरी हालत ख़राब हो रही थी। मैंने मुठ मारी और कर वापिस लेट गया। आधे घंटे तक तो मन शांत रहा पर फिर सीमा के साथ कुछ करने की इच्छा हुई। मैंने देखा कि वो अभी भी उसी हालत में है- चादर उतरी हुई और स्कर्ट ऊपर चढ़ी हुई। मुझे इत्मिनान हुआ की सीमा बहुत पक्की नींद में है। मेरी हिम्मत और बढ़ गई। मैंने उसकी बटन वाली टॉप को देखा और उसका एक बटन खोल दिया। उसमे से उसके मम्मे की झलक दिखने लगी। मैंने हिम्मत कर के एक और बटन खोला और शर्ट साइड पर की, उसने ब्रा पहन रखी थी। अब पूरा एक मम्मा दिख रहा था। मेरा मन मम्मे को छूने का कर रहा था।
मेरी हिम्मत बढ़ती जा रही थी। मैंने एक और प्लान सोचा। मैंने उसका एक बटन बंद किया और लेट गया। फिर मैंने इस करवट लेते हुए अपना हाथ उसके मम्मे पे रख दिया, ताकि अगर सीमा की नींद खुले तो उसे लगे कि यह नींद में ही हुआ। मेरा हाथ उसके मम्मे पे था और ऐसा एहसास कि मानो जन्नत! मैं उस हालत में कुछ 30 मिनट पड़ा रहा। मैं हिल भी नहीं रहा था कि कहीं उसकी नींद न खुल जाए।
कुछ देर के बाद सीमा हिली। मैंने अपनी आँखें बंद कर रखी थी कि जैसे मैं सो रहा हूँ। सीमा ने मेरा हाथ अपने ऊपर से उठाया और करवट ले कर सो गई। मुझे डर लगा और मैं सो गया। कुछ 1 घंटे बाद मैंने फिर वही प्लान आजमाया और करवट लेते हुए अपना हाथ उसके मम्मे पे रख दिया। अब की बार उधर से कोई हरकत नहीं हुई और मैंने खुद ही लगभग एक घंटे बाद हाथ हटा लिया क्योंकि सवेरा होने को था।
सुबह मैं सबसे लेट उठा और मैंने देखा कि सब उठ चुके हैं। मैं सीमा से बच रहा था और काफी डरा भी हुआ था कि रात वाली बात का कोई उल्टा असर न हो। नाश्ते की टेबल पे वो आमने सामने हो गई और बोली- तुम इतने चुप चुप क्यों हो।
मैं- ऐसे ही! बोल के उठ गया।
नहाते हुए मैं सोचने लगा कि शायद सीमा जाग रही हो और चुपचाप सोने का नाटक कर रही हो। खैर पूरा दिन हम सब बच्चे मस्ती करते रहे और रात को फिर सोने की बारी आई। सीमा बोली कि चलो सब लोग अपनी अपनी कल वाली पोजिशन पर सो जाओ। मेरे मन में लड्डू फूट रहे थे। इसका मतलब कल रात जो भी हुआ उसमें सीमा को भी मज़ा आया।
मैं चुपचाप आ कर लेट गया और सब के सोने का इंतज़ार करने लगा। एक एक मिनट एक घंटे के सामान लग रहा था। आखिर आधे घंटे बाद मैंने करवट ली और हाथ सीमा के मम्मे पे।
वो कुछ नहीं बोली। मैंने हिम्मत करके उसके दो बटन खोले और हाथ अन्दर घुसा दिया। नंगे मम्मे का एहसास कुछ और ही था। मैं धीरे धीरे मम्मे दबाने लगा क्योंकि मुझे मालूम था की सीमा को कोई ऐतराज़ नहीं। थोड़ी देर बाद मैंने दूसरा हाथ उसकी टांग पे रख दिया। मैंने दोनों हाथ धीरे धीरे फेर रहा था। सीमा की साँसे तेज़ चल रही थी और मैं महसूस कर रहा था। मैंने थोड़ी और हिम्मत कर के अपने होंठ उसके गालों को छू दिए। सीमा की तरफ से कुछ नहीं हुआ।
मैं समझ गया कि कोई प्रॉब्लम नहीं। अब मैंने अपने होंठ उसके होंठ पे रख दिए- ऐसा लगा जैसे करंट लग गया हो। सीमा भी थोड़ा सा कसमसाई। मैं कुछ 2-3 मिनट उसके होठों से चिपका रहा। अब मन कुछ और भी करने को हो रहा था। मैंने अपना एक हाथ उसकी पैंटी में डाल दिया। उँगलियों से मैं पैंटी के अन्दर टटोलने लगा। मुझे कुछ अंदाजा नहीं था कि क्या होगा। मैं बस उँगलियों से इधर उधर टटोल रहा था। अचानक कुछ गीला गीला लगा। मैं उस जगह ही मसलता रहा। मैंने अपनी आँखें खोल रखी थी लेकिन सीमा की आँख बंद थी। वो अभी भी सोने का नाटक कर रही थी। मैंने एक हाथ में अपना पकड़ा और एक हाथ से उसकी पैंटी और मम्मे मसलता रहा। बीच बीच में किस भी कर लेता था। आखिर में मैं जोरदार तरीके से झड़ गया। और यह हमारी शुरुआत थी। Hindi Porn Stories
सभी मेल फ़ीमेल को मेरा प्रणाम। आल रीडर्स आपको मेरी स्टोरी Antarvasna कैसी लगी जरूर मेल करना। मैं कसम खाता हूँ कि जितनी स्टोरी आपको दूंगा रियल दूंगा… स्टोरी पढ़कर आपको रियली मज़ा जरूर आयेगा। सभी आंटी भाभियों गर्ल्स की चूत से पानी जरूर आयेगा।
दोस्तों…….तैयार हो जाइये, मैं राजेश, २६, लखनऊ। “बात उन दिनो की है जब मैं १५ -१६ साल का था। मैं एक लड़की को चाहने लगा कब प्यार हुआ पता ही न चला। इतनी ज्यादा जनकारी भी नहीं थी स्कूल में मुझे सब हीरो जैसे अजय देवगन कहते थे। स्कूल में बहुत लड़कियों से दोस्ती थी लेकिन उनके लाइन देने के बाद भी मुझे उनसे प्यार नहीं था। मुझे प्यार सोना से हुआ जो कि मेरी ही कोलोनी में रहने आयी थी। वो महाराष्ट्र से आयी थी। मैं वहाँ पर क्रिकेट खेलने जाता था। ५’६” हाइट गोरा चिट्टा रंग कोलोनी के सब लड़के उसे लाइन मारते थे। नये साल पे मैने हिम्मत करके उसे लव लेटर दिया तो उसने जवाब दिया। आई एम सीनियर यू आर जूनियर। वो ११वीं में थी और मैं १०वीं में था लेकिन मुझे उससे प्यार हो गया। मैं उसे किसी भी कीमत पर प्यार करना चाहता था। मैने उसकी दोस्त जो देविका थी उससे कहा कि वो मुझसे रिश्ता बनाये चाहे जो भी रिश्ता, मुझसे बात करे। मैं रियली उसे प्यार करता हूँ, मेरी हालत पागलों से भी बदतर थी। मुझे न भूख लगे न प्यास। सिर्फ़ वही दिखती थी।
आखिर वो दिन आ ही गया जब उसने मुझे अपने घर बुलाया बात करने के लिये। एक बात बताऊं वो मेरी सीनियर थी मेरी गांड फ़ट रही थी कि कहीं मेरे घर में बता न दे। मैं टोपर स्टुडेन्ट था इसलिये मेरे सभी इज़्ज़त करते थे। अरे भैया। मैं उसके दरवाजे पर पहुँचा तो मुझे १०४ डिग्री फ़ीवर था। उसके छोटे भाई ने मुझे एक टुकड़ा कागज़ का दिया और बोला दीदी ने आपको देने को कहा है। जिस पर लिखा था” आई लव यू माई अजय देवगन” + इसके आगे हम और क्या कहें जानम समझा करो। शाम ६ बजे घर पर आना। कोई नहीं होगा। मैं आपको चाय पिलाऊंगी। प्लीज़ आ जाना ilu तुम्हारी सोना। अब तो मेरी खुशी का कोई ठिकाना ही नहीं था। शाम ६ बजे मैं उसके घर गया। उसने नीले रंग का सूट पहना हुआ था बहुत खूबसूरत थी मेरी सोना गोरा रंग ५’६” हाइट अच्छी फ़ीगर गोल चूचियां गोरी जांघे वो सबकुछ उसमे था जो किसी को भी पागल कर दे। लंड को टाइट कर दे हाथ मसलने को मजबूर कर दे १८ साल की कमसिन चुदायी वाली उमर। यहाँ तक कि अगर कह दे तो मैं किसी को भी गोली मार देता। उसने मुझसे नमस्ते किया तो मैं बोला सोरी आप मेरी सीनियर हैं वो बोली पहले सीनियर थी पर आप अब मेरे सबकुछ हो मुझे वो फ़ील हुआ जो मैं शब्दों में नहीं कह सकता हूँ
रियली शी इज़ माई फ़र्स्ट लव एवर एंड फ़ोरेवर, इट इज़ माई रियल सेक्स स्टोरी। प्रिय पाठकों, मैं उसे आज भी प्यार करता हूँ। अब आगे सुनिये उसने मेरा हाथ पकड़ा और कहा “डरो नहीं रियली आई लव यू” मैं भी आपको चाहती थी पर डरती थी कि कहीं आप नाराज न हो जायें इसलिये नहीं कहा। डियरराजेश जब तुम्हारे पास लड़कियां होती हैं तो मैं बहुत जलन फ़ील करती हूँ। मुझे दूर मर करना, इतना कहकर वो मेरे सीने से लिपट कर रोने लगी। मैं भी रो रहा था। पहली बार कोई लड़की मेरे सीने से लिपटी थी उसकी चूचियां मेरे सीने से चिपक रही थी मेरा लंड खड़ा होने लगा फ़िर उसने अपने गुलाबी होंठों से मेरे लिप्स को फ़्रेंच किस करने लगी मैं उसकी पीठ पर हाथ फ़ेर रहा था वो रो रही थी।
किस करते समय उसने अपनी जीभ से मेरी जीभ चाटने लगी ये मेरे लिये पहला एक्सपेरिएंस था मेरा लंड खड़ा हो गया और उसकी चूत के पास छूने लगा मुझे लगा वो बुरा मान जायेगी मगर वो धीरे से बोलीराजेश क्या पहले ही दिन ये सब ठीक रहेगा। मैं बोला क्यों क्या मतलब वो बोली अच्छा चलो कोई बात नहीं मैं तो तुम्हारी ही हूँ जो करना चाहो करो। अब मेरे समझ में न आये कि क्या करूं? कैसे करते हैं? वो बोली सामान तो दिखाओ और मैंने अपनी जीन्स की ज़िप खोल दी। उसके मुलायम गोरे हाथों से मेरा ७” इंच लम्बा मोटा लंड बाहर निकाला तो आँख मार कर बोली यार ये तो बहुत बड़ा है मैं अब पूरे जोश में था। मैं उसको बेड पर ले गया और जींस उतार दी सिर्फ़ अंडरवियर में था। मैने उसके होंठों को कसकर चूमने लगा। मेरे हाथ में उसके बूब्स थे गोरे गोरे गोल गोल भूरे रंग की भुंडी, ब्रा नही पहने हुए थी सलवार का नाड़ा पकड़ कर खोला। तो वो शरमाकर आँखें बंद कर ली। मैं बोला डियर अब काहे की शरम मैं आपका पति हूँ वो बोली तो मैं कुछ कह रही हूँ क्या……..अब आप ही मेरे सबकुछ हो…. मेरा सबकुछ आपका ही है जो चाहो करू……… उसे विश्वास था कि हम लोगों की शादी हो जायेगी क्योंकि हम एक ही जाति के थे
उसके मेरे बीच प्यार बहुत था…….. हम दोनो के ही पिता ओफ़िसर हैं इसलिये कोई प्रोब्लम का सवाल ही नहीं था… मैं भी शादी करना ही चाहता था। सलवार खोल कर अलग किया उसकी गोरी गोरी जांघें मेरा स्पर्श पाकर और भी गरम हो गयी उसकी पैंटी में थोड़ा छेद था देखा तो मैने उंगली डाली तो बोली अरे यार पैंटी दोनो गीली थी इसलिये ये पुरानी पहन ली थी। हँस कर बोली यार तुम तो मेरी गरीबी का मज़ाक बना रहे हो मैं बोला डियर आप बहुत ही मालदार हैं। बोली माल तो नीचे है मेरे सजना इस चड्ढी को फ़ेंक दो और अपने माल को ले लो इतना कहकर वो शरमा गयी….पैंटी उतारा तो उसकी बुर बिल्कुल गोरी उस पर भूरे छोटे बाल हल्के हल्के अब तो मैं पागल हो गया
बुर को छुआ तो लगा जैसे भट्टी हो गरम गरम बुर को मैं सहलाने लगा तो वो स्सस्सस्सस्स आह ओह्हह्हह्हह्हकया कर रहे हो प्लीज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़……मैने उसकी बुर की स्लिट में उंगली डाली तो बोली क्या उंगली ही डालेंगे आप वूऊऊऊ कहकर चुप हो गयीए……..मैने कहा रोको डार्लिंग अभी सब डालूंगा जी भर कर तुझे चोदूंगा पहले तेरी चूत चाट लूँ………जीभ से मैं उसकी चूत के दोनो हिस्सों को चाटकर चोदने लगा मैं उत्तेजित हो रहा था वो आह ओह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह मार डालोगे….. चोद दो प्लीज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ फ़िर मैने उसके मुंह में अपना लंड डाला तो बोली चाटो मज़ा आ रहा था ६९ की पोज़िशन में हम दोनो पागल हो रहे थे वो बोलीराजेश……..लंड धीरे से डालना प्लीज़ वरना मेरी खूबसुरत बुर फ़ट जायेगी ……….समझ रहे हो न……….मैने अब उसकी बुर पर सुपाड़ा रखा तो लंड बुर में नहीं गया फ़िसल गया तो………
हँस कर बोलि बुद्धु ऐसा न ही होगा…..और मुँह से थूक निकाल कर मेरे लंड पर डाल दिया और लंड को बुर के मुँह पर खींचा मैने हल्के से शोट दिया तो बुर में २ इंच अन्दर गया। वो बोली दर्द हो रहा है। अब मेरे लंड को चूत की गरमी मिल गयी थी मैं होंठों को चूसे जा रहा था धीरे धीरे ५-६ बार अन्दर बाहर किया अब उसे मजा आ रहा था नीचे से कमर भी हिला रही ….थी …….वो बोली आप इतना ही डालो …अब दर्द में भी मजा आ रहा है लेकिन मैं तो पूरा लंड इसकी बुर में डालना चाह रहा था मैं बोला देखो सोना अब तुम्हें पूरे लंड का मजा देता हूँ…दूसरा शोट लगाया तो मेरा लंड पूरा का पूरा उसकी बुर में घुस गया … वो इतनी तेज़ चिल्लायी कि मैं डर गया कि कोई पड़ोस से न आ जये………..अब जोर से मैने उसके शरीर पर दबाया कि वो उठ न जाये………बोली हटो मैं मर गयी प्लीज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ खून आ गया था………. मुझे छोड़ दो प्लीज़ बहुत दर्द हो रहा है……………. मैं जानता था कि अगर इसे छोड़ा तो फ़िर इस डर की वजह से कभी नही चुदवायेगीईईईए सो……..मैने धीरे धीरे ७-८ शोट लगाये तो उसका विरोध कुछ कम हुआ बोली मार डालोगे क्या हल्की मुस्कुराहट के साथ कमर भी हिलाने लगी…. बस। बाकी अब आप लोग खद ही समझ लो कि आगे क्या क्या हुआ। Antarvasna
मेरी शादी हुये लगभग Antarvasna Sex Stories चार साल हो चुके थे। कुछ अभागी लड़कियों में से मैं भी एक हूँ। शादी के दिन मैं बहुत खुश थी। लगा था कि जवानी की सारी खुशियाँ मैं अपने पति पर लुटा दूंगी। मैं भी मस्ती से लण्ड खाऊंगी… कितना मजा आयेगा। पर हाय री मेरी किस्मत… सुहाग रात को ही जैसे मुझ पर वज्र प्रहार हुआ। मेरा पति रात को दोस्तों के साथ बहुत दारू पी गया था। आते ही जैसे वो मुझ पर चढ़ गया। मेरे कपड़े उतार फ़ेंके और खुद भी नशे में नंगा हो गया। लण्ड देखा तो मामूली सा… शायद पांच इन्च का दुबला सा… जैसे कोई नूनी हो… एक दम कडक… मैंने भी लण्ड खाने के लिये अपनी टांगे ऊपर उठा ली… तेज बीड़ी की सड़ांध उसके मुख से आ रही थी जो दारू की महक के साथ और भी तेज बदबू दे रही थी। मैंने अपना चेहरा एक तरफ़ कर लिया, राह देखने लगी कि कब उसका लण्ड चूत में जाये और मेरी जवानी की आग बुझाये।
वो दहाड़ता हुआ मेरे से लिपट गया और अपना लण्ड घुसेड़ने की कोशिश करता रहा। जैसे तैसे उसका लण्ड घुस ही गया, मैं आनन्द से भर गई तभी मेरी चूत में जैसे कीचड़ सा भर गया। वो झड़ चुका था। मैं तड़प कर रह गई। मैंने उसे धक्का दे कर एक तरफ़ किया और उठ कर बाथरूम में जाकर अंगुली चला कर अपना पानी निकाल लिया। अब वो नशे में बेसुध पड़ा खर्राटे भर रहा था।
“साली… रण्डी… चोद कर क्या मिल गया… साली चुदी चुदाई है!” सवेरे मेरा पति मुझ पर गुर्रा रहा था। उसकी मां ये सब सुन रही थी। पर शायद वो उनके बारे में जानती थी।
“चुप रहो… ऐसी गन्दी बातें करते हुये शरम नहीं आती… “मैंने धीरे से उलाहना दिया।
“तो बता तेरे भोसड़े में से खून क्यों नहीं निकला रात को…?”
“वो तो आपका करते ही निकल गया था।” मेरी बात सुन कर उसकी मां सर नीचे करके चली गई।
बस अब दिन-ब-दिन यूं ही झग़ड़ा होने लगा। मैंने अपने पति के पास सोना बन्द कर दिया।
एक दिन वो बिना दारू पिये… और बिना बीड़ी पिये मेरे पास आये तो मुझे लगा शायद ये सुधर गये हैं। पर लण्ड घुसाते ही वो झड़ गये… अब वो मुझ पर हर रोज़ कोशिश करते, पर नहीं बना तो नहीं बना…
मैं अब जान गई थी कि ये काम के नहीं है। मैं मन ही मन सुलगती रहती थी। लगा मेरी जवानी यूँ ही चली जायेगी… यह कसक मन में उठने लगी थी। परिस्थितिवश मेरी निगाहें अब घर के बाहर उठने लगी थी।
मेरी सहेली मुमताज मेरी सभी बातें जानती थी। मेरे दिल की आग की लपटें वो भी महसूस करती थी।
“गौरी, मेरा चचेरा भाई आज आ रहा है… तू कहे तो तुझे उससे मिलवा दूँ!”
“नहीं, मम्मो… मुझे शरम आवेगी… जाने दे!”
मैं उसकी बातों से सकपका गई थी। पर वो जानती थी कि दबी चिंगारी से मैं कैसे जल रही थी।
दूसरे दिन सवेरे ही मोबाईल पर मुमताज ने मुझे खबर भेजी कि भैया आ गया है… बस एक मिनट के लिये मिलने आजा।
मैं सोच में पड़ गई, कि कैसा होगा… कहीं यह भी मेरे पति जैसा ना हो। इसी उधेड़बुन में मैं उसके यहाँ पहुंच गई।
“अल्लाह रे अल्लाह… ये… तेरा भाई है…?!!” यूनानी मूर्ति की तरह एक हसीन लौण्डा सामने मुस्कुरा रहा था। मैं तो उसे देखते ही जैसे घायल सी हो गई। मैंने अपने लिये इतने हसीन नौजवान की कल्पना तक नहीं की थी।
“चुप हो जा गौरी… मस्त लण्ड है इसका… जैसे मुझे चोदता है ना… तुझे भी भचक-भचक करके चोद देगा… देख है ना छः फ़ुटा… गोरा चिट्टा… पहलवान…!”
“मेरे मौला… इसकी पोन्द कितनी मस्त है… तू भी उससे चुदाती है ?”
“ऐसी मस्त चीज़ को भला मैं हाथ जाने देती… ये मेरी किस्मत का है गौरी!”
मम्मो मुस्करा उठी। उसकी कसी हुई जीन्स देख कर जैसे मैं तड़प उठी। यही है जिसकी बात मम्मो कर रही थी। ये तो मुझे पूरा लूट ही लेगा।
“ऐ मोडी… हां तू… इसे अन्दर रख दे…! ” साजिद ने पुकार कर कहा। मैंने अपनी तरफ़ अंगुली कर के कहा,”क्या मैं… ?” मैं झिझकते बोली।
“अरे… आप…! आप कौन है…! आं हां… नहीं मोहतरमा, मैं तो सुरैया को बुला रहा था।” उसने मुझे घूर कर देखा। मैं शर्मा सी गई। मैं तो दिल ही दिल में उस पर मर मिटी। वो धीरे धीरे चलता हुआ मेरे करीब आ गया… “आप तो बहुत खूबसूरत है… खुदा ने कैसा तराशा है…!” उसने मुझे नीचे से ऊपर तक देखा।
“हाय अल्लाह… तेरे अकेले पर ही जवानी फ़ूटी है क्या… “मैंने उसे गाली सी दी और हंस पड़ी।
“नहीं आप पर जवानी फ़ूट रही है… जरा कभी आईने में देखो… बला की खूबसूरती है आप में!” वो बेशर्मी से बोले जा रहा था।
“मर जा मरदूद… आग लगे तेरी जवानी को… ” मैं उसकी बेबाकी पर उसे गालियाँ देने लगी।
“अरे गौरी… साजिद का प्यार भरा पैगाम कबूल तो कर ले!” मम्मो ने मुझे बहलाया।
“हाय री मम्मो देख तो कैसी मुह-जोरी कर रहा है!” फिर मैंने एक तिरछी नजर की उस पर कटार चलाई। लगा कि तीर दिल पर चल गया है। मैंने मुस्करा कर उसे देखा। अब तो वही मेरा तारणहार था… उसे मेरा उदघाटन करना था… मेरा उद्धार करना था। मेरी मुस्कराहट को उसके मेरा जवाब समझ कर मुस्करा दिया।
तभी मुमताज उसके पास गई और उसके कान में कुछ कहा। उसने अपना सर हिलाया और वो मुमताज के पीछे पीछे चल दिया। मुमताज ने मुझे आंख मार कर इशारा कर दिया। मेरा दिल धड़क उठा। क्या मामला अभी… नहीं… नहीं… इतनी जल्दी कैसे होगा।
पर नजर का जादू चल जाये तो क्या जल्दी और क्या देर… मेरा घायल दिल और परेशां दिमाग… खुदा की मरजी… हाय मेरे दिलदार… मन की कश्ती मौजों से घिर गई। मेरे कदम मुमताज के कमरे की ओर बढ़ चले।
“दिल नर्म… जबां गरम… जिस्म शोला… जाने किस की जान लोगी!”
“हाय अल्लाह… ऐसे ना कहो…! ” मैं शर्म से जैसे लाल हो गई।
“जवानी बला की, खूबसूरती जहां की… तन तराशा हुआ… खुदा ने जवानी की यही तस्वीर बनाई है!” साजिद मेरे गुणगान में लगा था। मेरी उलझी हुई लटें मेरे चेहरे पर आ गई। जुल्फ़ों के बीच में से मैंने उसे देखा… वो जैसे तड़प उठा,” सुभान अल्लाह… ये हंसी चेहरा… जनाब का क्या इरादा है।”
साजिद को आशिकाना लहजे में देख कर मुमताज वहाँ से चली गई। साजिद मेरे करीब आ गया।
“आदाब… संजू जी!”
मैंने झुकी पलकों और चुन्नी में चेहरे को लपेटे शरमाते हुये कहा।
“आपने कहा आदाब… हमने कहा जनाब हमारी तकदीर… आ दाब दूँ!” उसकी शरारत मेरे दिल को चीर गई।
“धत्त… आपकी बातें बहुत मन को भाती है… “मैंने उसे बढ़ावा दिया।
नतीजा तुरन्त सामने आया। उसने मुझे अपने पास खींच लिया.
“गौरी… मम्मो ने मुझे आपके बारे में बताया है… आप फ़िक्र ना करें… आप मुझे लूट सकती हैं… ये मुजस्मां आपका ही है… जैसे चाहो… जहां चाहो… इसे अपने रंग में रंग लो!”
“हमें डर लगता है… कहीं उनको पता ना चल जाये…!” मेरे माथे पर पसीना छलक आया था।
“देखिये मोहतरमा… इश्क और मुश्क छिपाये नहीं छिपता है… ये तो तन की प्यास है कोई इश्क मुश्क नहीं… मम्मो को रोज चोदता हूँ… आप भी वहीं पर… ”
मैंने उसके अधरों पर अंगुली रख कर उसे चुप कर दिया। मैं उसकी बातों पर रीझ गई थी, शरम से लाल हो रही थी। वह तो बेहयाई से बोला जा रहा था।
“बस ऐसे ना कहो… शरम भी कुछ चीज़ है!”मैंने उसकी चौड़ी छाती पर अपना सर रख दिया।
“गौरी… ऊपर वाले कमरे में चले जाओ… मैं बाहर से ताला लगा देती हूँ… वहाँ बाथरूम भी है… संजू अभी जा रहे हो क्या ?” मुमताज ने हमें ऊपर का रास्ता बता दिया।
“आजा गौरी… ऊपर आ जा!” और हंसता हुआ वो छलांगें मारता हुआ ऊपर चला गया।
मैं मुमताज से शरम के मारे लिपट गई। मुमताज की आंखों में आंसू थे…
“जा मेरी गौरी… अपना सपना पूरा कर ले… मन भर ले… तेरी आज सुहागरात नहीं सुहाग दिन है ऐसा समझ ले… जा मेरी प्यारी सहेली… मैं तुझ पर सदके जाऊं!”
“मम्मो, मेरी जान… मेरी सच्ची सहेली, तुझ पर कुर्बान जाऊं… “मैंने प्यार से उसके होंठो को चूम लिया। मैंने अपने नजरें नीची की और चुन्नी चेहरे पर डाल ली और धीरे धीरे सीढ़ियाँ चढ़ने लगी… ।
मुमताज नीचे से ऊपर जाते हुये मुझे देखती रही। अन्तिम सीढ़ी चढ़ कर मैंने पलट कर मुमताज को देखा। मुमताज ने प्यार से हाथ हिला दिया। मैंने भी उसे हाथ से एक प्यार भरा बोसा दे दिया और शरमा गई।
मैंने दरवाजा खोला और कमरे के अन्दर समा गई। उसी समय बाहों के घेरे मेरी कमर से लिपट गये। मैं सिमट सी गई। मेरे गालों पर एक प्यार भरा चुम्बन भर दिया। मैंने पलट कर संजू को देखा। मैंने अपने आपको छुड़ाने की असफ़ल कोशिश की। उसकी आंखों में प्यार उमड़ रहा था। उसने मुझे गले से लगा लिया और मुख से मुख रगड़ खा गये। उसकी खुशबू भरी सांसें मेरे जिस्म में बसने लगी। उसके हाथ मेरे सर पर नरम बालों में अंगुलियों से मालिश से सहलाने लगे। उसकी शरीर की गर्मी मुझे पिघलाने लगी।
“मेरे मालिक… मेरे आका… मुझे अपनी दासी बना लो… अपने दिल में जगह दे दो” मैं उसके कदमो में झुक सी गई।
उसने मुझे सम्भालते हुये कहा,”हुस्न-ए-मलिका, तुझ पर बहार आई हुई है… तेरे ख्वाब अब मेरे हैं… इन्शा अल्लाह… आज से तू मेरी हुई… तुझ पर खुदा का फ़जल बना रहे… तू मेरी बने रहना… आज से तेरा दुख मेरा है और मेरी खुशी तेरी है… या मेरे अल्लाह…!”
मैं संजू के शरीर से लिपटती चली गई। एक मोहक सी वासना घर करने लगी। सुन्दर, मनमोहक, काम देवता सा कामुक रूप जैसे शरीर का मालिक था संजू।
मेरे नसीब में उसका सुख लिखा था। मेरी चूनरी मेरी छाती से ढलक गई थी। मेरे उन्नत उभार जैसे पहाड़ियों के तीखे शिखर उसके हाथों में मचल उठे। उसने मेरे ब्लाउज के बटन चट चट करके खोल डाले। मेरा गोरा तन उसकी आंखो में समा गया। मेरे उभार कठोर हो चुके थे। जिया धक धक करने लगा था। दिल जैसे उछल कर बाहर निकला जा रहा था। मेरी साड़ी उसने धीरे से उतार कर पास में रख दी। शायद मेरे पोन्द और चूत की कल्पना उसके दिल को बींध रही थी। ऐसे में उसने अपना जीन्स और चड्डी भी उतार दिया और अपना लण्ड मेरे सामने कर दिया।
“हुजूर की तमन्ना हो तो शौक फ़रमायें… आपकी सेवा में लण्ड हाजिर है!”
उसका मर्दाना लण्ड देख कर मैं एकबारगी सिहर गई। आह्ह्ह्… लण्ड इसे कहते हैं!!! मैं असली मर्द को देख कर शरमा गई। उसने बड़े सम्मान के साथ अपना लण्ड मेरे होंठों के आगे पेश कर दिया। मैं अपना बड़ा सा मुह फ़ाड़ कर उसे जैसे निगलने की कोशिश करने लगी। इतना बड़ा और मोटा था कि मुँह में भी ठीक से नहीं आ रहा था। थोड़ी देर तक लण्ड का रस पान किया, पर मैंने ऐसा कभी नहीं किया था।
“मेरे दिलवर, आपकी नजरे-इनायत चाहिये… बस मेरी गहराईयों में अब शहद भर दीजिये… मुझे जन्नत की सैर को जाना है… “मैंने शरमाते… और झिझकते हुये मन की बात कह दी।
“जनाबे आली, बिस्तर हाजिर है… इल्तिजा है आप अपने नरम और गरम चूतड़ों की तशरीफ़ यहां रखें!”
“धत्त्… आप तो मजाक करते हैं… ” उसके मजाक से मैं झेंप सी गई।
मैं बिस्तर पर लेटते हुये बोली,” नहीं, ये मजाक नहीं… सच है कि अब आपका दिल मैं खुश कर दूंगा!”
वो बिस्तर पर चढ़ आया। उसने मेरा पेटीकोट ऊपर उठा दिया और कमर तक नंगी कर दिया। मेरी नंगी चूत उसके सामने थी। उसके होंठ मेरी चूत से चिपक गये और झांट को अलग करके चूत खोल दी। मैंने अपनी आंखे बन्द कर ली। उसकी लपलपाती जीभ मेरी रसीली चूत का रसपान करने लगी।
मैंने अपना पेटीकोट शरम के मारे उसे ओढ़ा दिया। अब वो मेरे पेटीकोट के भीतर था। मेरी चूत का रस चूसने के बाद वो मेरी टांगो में बीच में सेट हो गया। उसने चमड़ी खींच कर सुपाड़ा बाहर निकाल लिया और उसे मेरी चिरी हुई धार के अन्दर घुसाने लगा। मुझे लगा कि यह अन्दर नहीं जा पायेगा। पर आश्चर्य हुआ कि थोड़ा जोर लगाते ही लाल सुपाड़ा अन्दर चूत की छेद में फ़ंस गया।
तभी बाहर से आवाज आई,”गौरी… ताला लगाना है… सुना क्या…?”
तभी मेरे मुख से एक आह निकल पड़ी। मुमताज ने सिसकी सुन ली और समझ गई कि चुदाई चल रही है… इसलिये उसने ताला बाहर से लगाया और चली गई।
साजिद भी अब बेकाबू होता जा रहा था। उसका लण्ड धीरे धीरे मेरी चूत में घुसता चला जा रहा था। दर्द बढ़ता ही जा रहा था। उसने एक जोर से धक्का देकर अपना मोटा लण्ड पूरा भीतर घुसेड़ दिया। मेरे मुख से एक जोर की चीख निकल गई। लगा कि चूत फ़ट गई। मैंने संजू को हटाने की कोशिश की, पर उसने मुझे जकड़ रखा था। तभी दूसरा भरपूर शॉट लगा। फिर एक चीख निकल पड़ी।
“उह्ह्ह… अम्मी जाऽऽऽऽन, अरे बस करो… लगता है फ़ट गई है…” मैं दर्द से तड़प उठी थी।
“गौरी, तुम तो शादी शुदा हो, फिर ये चीख, ये खून… पहली बार चुद रही हो?”
मेरी आंखों से आंसू निकल पड़े। मैंने हां में सर हिलाया।
“फिर मेरी जान, ये तो कभी तो होना ही था… आपका पर्दा हटा है… अब कोई परेशानी नहीं आयेगी!” वो मुझे फिर प्यार करने लगा। मुझे चूमने चाटने लगा। मेरे उरोज दबाने लगा। कुछ ही देर मुझे फिर से उत्तेजित कर दिया। पर इस बार वो मुझे बहुत धीरे धीरे और प्यार से चोद रहा था। मेरे शरीर में एक बार फिर से उन्माद भरने लगा। वासना भरने लगी। मेरी आंखों में नशा चढ़ने लगा।
“क्यो गौरी… चूत में मिठास भरी या नहीं…? ”
उसकी भाषा मेरे दिल पर कसकती हुई सी मिठास भर गई। मैं शरमा उठी। एक तो मेरा पति जब गालियाँ देता था तो मुझे ग्लानि होने लगती थी… पर यहाँ तो वही गाली मेरी उत्तेजना बढ़ा रही थी। उसकी चुदाई की रफ़्तार बढ़ने लगी थी। मैं मदहोश होती जा रही थी। प्यार भरी चुदाई ऐसी होती है, यह मुझे पहली बार अनुभव हुआ। मैंने अब मस्त हो कर चुदाना शुरू किया। नीचे से उसकी ताल में ताल मिलाने लगी… अपनी दोनों टांगें चौड़ा कर हाथ फ़ैला कर मस्तानी हो कर लेटी थी। आंखें बन्द करके रूमानी दुनिया की सैर करने लगी। कभी मेरी चूंचियाँ मसली जा रही थी, तो कभी उसका मोटा लण्ड मेरी चूत की पिटाई कर रहा था।
उसका लण्ड अब पूरी ताकत से चूत में अन्दर बाहर हो कर अपनी गुदगुदी शान्त करना चाह रहा था। जन्मों से प्यासी चूत लण्ड को गपागप निगले जा रही थी। चुचूक तो मरे रबड़ की तरह खिंचे जा रहे थे।
“या अल्लाह, चुद गई आज तो… इसे कहते हैं चुदाई… ” मेरी सिसकियाँ तेज हो उठी थी।
“मेरी जान, तेरी नई चूत का स्वाद मिला है आज तो, क्या तेरा आदमी तुझे हाथ भी नहीं लगाता था…?”
“संजू, वो तो हिजड़े की तरह है… उसका लण्ड तो छोटा सा है… और घुसते ही अपना माल निकाल देता है… चोदेगा कैसे भला… संजू… मुझे तो तेरा यह सदा बहार मुन्ना मिलेगा ना?”
“हट रे… ये इतना सोलिड तुझे मुन्ना लगता है… ये तो मदमस्त लौड़ा है… खायेगी तो मेरी गौरी इसे मांगेगी मोर… एण्ड वन्स मोर… ”
“अब जोर लगा के बजा दे राजा… ” मैं वासना से भरी उससे लण्ड मांगने लगी।
“गौरी, आज तो तेरी बजाने में ही मजा आ रहा है… मस्त झांटों भरी ओरिजनल चूत है!”
साला, कितना रसीला बोलता है… दिल और चुदाने को भड़क उठता है। मैं उसे अपनी ओर खींचने लगी और चिपटने लगी। मेरी चूत लपलपा उठी। मिठास से भर उठी।
तभी जैसे मेरी नसें चूत की ओर खिंचने लगी। मेरे तन में एक लहर सी उठने लगी। जैसे मैं तड़प गई… मेरा पानी उतरने लगा… मैं खाली सी होने लगी… झड़ने लगी… “सन्जू, मेरे मालिक… मुझे ये क्या हो गया है… मेरी मुनिया तो आह्ह्ह्ह… गई मैं तो… मेरे राजा… निकल गया पानी…!”
“अरे अभी नहीं, अभी तो शुरू ही किया है गौरी…!” संजू ने चुदाई ओर तेज कर दी।
“हाय मैं तो मर गई… सारा निकला ही जा रहा है…!” मेरी चूत पानी से फ़च फ़च करने लगी। मैं झड़ रही थी। उसने तभी अपना फ़ूला हुआ लौड़ा निकाला और मुझे पलटने को कहा। पहले तो मुझे समझ में नहीं आया कि इसका क्या मतलब है। मैं पलट कर उल्टी हो गई। संजू ने मेरे पोन्द को अपने हाथों से चीर दिया।
मेरा खूबसूरत गुलाब खिल उठा। उसने थूक का एक बड़ा लौंदा मेरे गुलाब पर टपकाया और फ़ूला हुआ सुपाड़ा छेद पर दबा डाला। मुझे मालूम हो गया कि ये गाण्ड मारने का शौकीन भी है।
“अरे सन्जू… नहीं रे… मैं मर जाऊंगी… ” उसका मोटा सुपाड़ा मेरी गाण्ड में अन्दर घुस कर फ़ंस सा गया।
“गाण्ड ढीली छोड़ ना… मुझे लग जायेगी… ” संजू का लण्ड दब सा गया।
मैंने अपनी गाण्ड ढीली छोड़ दी। लण्ड का डण्डा गाण्ड में उतरने लगा। मैं दर्द से तड़प उठी।
“बस कर मेरे मालिक… ये फ़ट जायेगी… “मैं रुआंसी हो गई, आज तो मेरा अंग अंग जैसे खूब पिट गया हो।
“एक दिन तो फ़टना ही है ना… ये पोन्द को तो मैं मारूंगा ही… साली ने मुझे बहुत तड़पाया है… तू मस्त रह… इसे कुछ नहीं होगा… बस चुद जायेगी… ”
“हाय अम्मी जान… बचा ले मुझे… मर गई मैं तो… ”
तभी उसने अपना लण्ड बाहर खींचा, मुझे राहत सी हुई… पर दूसरे ही पल भचाक से लण्ड गाण्ड में पूरा अन्दर तक बैठ गया। उसका हाथ मेरे मुख पर आ गया और मेरी चीख दब गई। उसने मेरा मुख दबा कर दो तीन शॉट्स और खींच मारे… हर बार मेरी चीख वो दबा देता…
“सहना सीखो मेरी जान… अब तो ये रोज का मामला है… मम्मो को देख, क्या चुदती है साली… मेरा तो पूरा माल जैसे निचोड़ कर पी जाती है… ”
उसने मेरे मुख से अब हाथ हटा दिया था और धीरे धीरे धक्के मार रहा था।
दर्द कम हो गया था। पर मैं निढाल सी हो गई थी… तभी उसका लण्ड छूट गया… ढेर सारा वीर्य मेरी पीठ पर फ़ुहारों के रूप में फ़ैल गया। मैं उल्टी लेटी निश्चल सी पड़ी हुई थी। मेरी लम्बी लम्बी सांसें अभी तक कन्ट्रोल में नहीं आई थी। साजिद ने बडे प्यार से मेरी चूत, गाण्ड और पीठ को साफ़ कर दिया।
“अब उठ जाओ… मजा आया?” साजिद ने मुस्कराते हुये पूछा।
मैंने धीरे से अपना सर हां में हिला दिया। वास्तविक चुदाई तो मेरी आज ही हुई थी। सारा जिस्म तोड़ कर रख दिया था। मेरी कमर, चूत, गाण्ड और चूचियाँ दर्द से जैसे कसमसा रही थी। हमने अपने कपड़े ठीक से पहन लिए और साजिद ने मोबाईल करके मुमताज को बता दिया कि सारा कार्यक्रम सफ़लता पूर्वक निपट गया है। तभी मुझे साजिद ने अपनी गोदी में बैठा लिया और प्यार करने लगा। उसके प्यार से मेरा दिल खिल उठा। काश…… मेरे नसीब में ऐसा प्यार होता… ”
तभी ताला खोल कर मुमताज़ अन्दर आ गई। मैंने उसकी गोदी से उठने की कोशिश की, पर साजिद ने मुझे नहीं छोड़ा।
“संजू! छोड़ो ना… देखो मम्मो देख रही है!” मैं उसकी गोदी में कसमसा गई।
“गौरी, तुम्हें प्यार की बहुत जरूरत है… प्यार कर लो… मुझसे क्या शरमाना… देखो रात को ये तुम्हारे सामने ही ये मुझे चोदेगा… अब मुझसे शरम छोड़ दो… मुझे तो अपनी बहन समझ ले!”
पर स्त्री-सुलभ-लज्जा कहाँ छूट पाती है, वह भी जब कोई तीसरा हो सामने तो… । मैं जोर लगा कर सिमट कर एक तरफ़ चेहरा छुपा कर खड़ी हो गई। मुमताज़ ने मेरी बांह पकड़ी और कमरे से बाहर ले आई। शरम मारे तो उससे आँख भी नहीं मिला पा रही थी।
“बस ना… बहुत शरमा ली अब… चल अब बेशरम हो जा… रोज रोज चुदना है तो ये सब नहीं चलेगा!” उसकी बात मेरे दिल पर किसी मीठे तीर की तरह लगी।
“हाय मम्मो… बडी बद्तमीज़ हो गई है!” उससे बांह छुड़ा कर कर मैं तेजी से भागी और सीढ़ियाँ उतरने लगी। वो हंस पड़ी। नीचे आकर मैंने ऊपर खड़ी मुमताज को देखा और खुशी में चुन्नी अपने मुख पर लपेट कर भाग ली। मुमताज की आंखों में मेरी खुशी देख कर आंसू के दो मोती उभर आये थे।
शाम तक मेरा शरीर किसी फ़ोडे के समान टीस रहा था। मेरे चुचूक सूज गये थे। चूचियों के गोले भीतर से दर्द से कसक रहे थे। ग़ाण्ड के फ़ूल पर भी सूजन थी… और चूत पर तो जैसे अभी तक कोई लोहा घुसा हुआ सा जान पड़ रहा था।
मेरे मौला, चुदाई क्या ऐसी होती है… तौबा मेरी… अब नहीं चुदना मुझे। पर मन में ये कैसी शान्ति सी थी। रात को मुझे बहुत ही प्यारी नींद आई थी। ऐसी संतुष्टि पहली बार महसूस की थी।
तीन चार दिन में जा कर मेरा दर्द ठीक हो पाया… तब मुझे साजिद फिर से याद आने लगा था… उसकी चुदाई मन को रोशन कर रही थी, मन में बस गई थी… रोज मैं मम्मो से पूछती… कि अब वो कब आयेगा… कब आयेगा… कब आयेगा. Antarvasna Sex Stories
अन्तर्वासना के एक एक Antarvasna पाठक को मेरी यानि कि गौरी का प्रणाम !यह मेरी आप सब के सामने पहली कहानी है, कहानी नहीं एक हकीकत है !
शादी से पहले से ही मेरा कई लड़कों के साथ अफेअर था और कई लड़कों से मैं चुदी थी। शादी हुई ससुराल चली गई, पहली रात निराशा हुई जब देखा पति का लौड़ा कोई खास नहीं था। दारु के नशे में था, मेरी चोरी पकड़ी नहीं गई थी, लेकिन वो मुझे ठंडी न कर पाया।
रोज़ रात को नशे में आता और पाँच-छह मिनट की चुदाई होती ! मुझे लौड़ा चूसना बहुत पसंद है लेकिन वो ज्यादा नहीं चूसने देता, जैसे ही खड़ा हो जाता, सीधा चूत में डाल देता। कुछ समय बाद उसने और ज्यादा पीनी शुरू कर दी, पीकर घर आकर वो मुझे पीट देता, गाली-गलौच करता। जिससे तंग आकर ससुर जी ने हमें अलग कर दिया। इस झटके से कुछ देर ठीक चला उसके बाद उसने फिर और ज्यादा पीनी शुरू कर दी।
मैं उससे बिल्कुल खुश नहीं थी। अब तो उनको उनके दोस्त घर छोड़ने के लिए आने लगे। उसको कोई होश ना रहती। उसको छोड़ने के बहाने वो मेरे दर्शन करने आते, मैं भी उनसे खुलने लगी। मुझे लौड़े के ज़रुरत थी।
वो तीनों बहुत हट्टे-कट्टे मर्द थे। उनके आने के समय पर मैं सेक्सी कपड़े पहनती, जिससे उनकी वासना भड़के। वो भी आने-बहाने मुझे छूने की कोशिश करते। मुझे देख तीनों के लौड़े खड़े हो जाते होंगे। मुझे उनमें से मनोहर जी सबसे अच्छे लगते। मैं उनकी ओर झुकने लगी, लेकिन वो जब भी आते तीनों इकट्ठे आते। मैं उन्हें हासिल करने के लिए मचलने लगी।
मेरी मुराद एक दिन पूरी होती दिखने लगी जब वो अकेले ही आये।
मैंने उसको बैठने को कहा और पानी देने के बहाने झुक कर अपने मम्मे दिखा दिए। उनकी नज़रें उनमें गड़ गई। मैं ग्लास रखने रसोई में गई, वो चाहते हुए भी कुछ नहीं बोल पाए, बस इतना कहा- मैं चलता हूँ भाभी !
वो मुड़े ही थे कि मैंने उनकी बांह पकड़ ली और बोली- बस ऐसे ही चले जाओगे? पहली बार अकेले मिले हो ! कह मैं उनसे लिपट गई।
उन्होंने भी मुझे कस कर बाँहों में भरते हुए कहा- मेरी जान ! मैं तो कई दिनों से इस पल के इंतजार में हूँ !
कहते ही उसने मुझे गोदी में उठाया और सीधा बिस्तर पे ले गए। वो मुझे जगह जगह चूमने लगे। एक एक करके हम दोनों नंगे हो गए उनका फौलादी लौड़ा देख मैं खुश हो गई। मैंने कहा- कुण्डी चढ़ा दो ! कहीं उनकी उतर गई और हम पकड़े गए?
मैंने उनके लौड़े को मुँह में भर लिया और पागलों की तरह चूसने लगी। वो आहें भर रहे थे। इतना मोटा लण्ड कसम से कभी नहीं पकड़ा था। कुछ देर में इतना सख्त हो गया कि चूसने में परेशानी होने लगी। फिर भी मैंने नहीं छोड़ा। उन्होंने तो मेरे मम्मों को मसल मसल कर चूस चूस कर लाल कर डाला फिर मुझे लिटा लिया और अपना फौलादी लौड़ा मेरी चूत में डालने के लिए चूत पे रख अन्दर किया।
दर्द से मैं कराहने लगी, इतने दिनों बाद इतना मोटा लौड़ा अंदर गया था। मैंने सब सहन कर लिया और देखते ही देखते उसने अपना नौ इंच का लौड़ा झड़ तक घुसा दिया।
हाय क्या माल हो भाभी जान !
फिर वो मुझे चोदने लगे।
हाय ! जोर से करो भाई साब ! फाड़ डालो ! कितने महीनों से आपसे चुदने को बेकरार थी, आज अपने नाकारा दोस्त की बीवी को अपनी रंडी बना कर चोदो ! मारो मेरी और जोर से मारो फाड़ डालो ! चूत फट जाने दो कामिनी को ! क्या मोटा लौड़ा है आपका !
ले कुतिया ! फाड़ डालूँगा ! कमीनी, तेरी माँ की चूत ! बहन की लौड़ी ! मादरचोद ! गली की कुत्तिया ! कुत्तों से चुद्वाऊंगा तुझे ! चल बहन चोद घोड़ी बन जा !
ले हरामी जात के ! बन गई घोड़ी ! घुसा दे अपना डंडा मेरे अन्दर !
ले साली !
दिल करता है एक साथ आगे से, पीछे से लौड़े ले लूँ !
बहन की लौड़ी ! तीन लौडे रोज़ तेरे पास आते हैं, पहले कहती तो रंडी, तुझे मिलकर चोद देते ! हाय !
मार अब !
आधे घंटे की चुदाई के बाद उसने अपने पानी को मेरे अन्दर डाल दिया। वो रात के तीन बजे तक मुझे चोदता रहा।
इस तरह मुझे लौड़ा मिल ही गया। कुछ दिन तक वो अकेला ही मेरी लेता रहा, लेकिन फिर मेरे कहने पर वो बाकी के दो को भी मेरे ऊपर चढ़ाने के लिए राज़ी हो गया और फिर एक रात ऐसी आई कि मेरे पति को उन्होंने सुला दिया फिर हम चारों ने दारु पी।
उसके बाद क्या हुआ?
वो आप सबके जवाब मिलने के बाद Antarvasna
नमस्ते दोस्तो! मेरा नाम Sex Stories नयन है, अब मेरी उम्र 31 साल है पर बात तब की है जब मैं अट्ठारह साल का था. मैं बारहवी में पढ़ रहा था.
मेरे बाजू वाले घर में वीणा रहती थी. हमारा उनके यहाँ आना जाना तो था, थोड़ी मस्ती भी करता था पर गलत इरादे न उसके थे न मेरे थे.
मुझे मेरे मामा के घर जाना था. गाँव का नाम बताना यहाँ ठीक नहीं होगा लेकिन रात भर का सफ़र था, वीणा को भी गाँव जाना था, उनके बच्चे छुट्टियों में गाँव गए थे उनको वापस मुंबई लाना था. उनका गाँव मेर मामा से गांव से नजदीक था तो वो भी मेरे साथ आने को निकल पड़ी. अब उनको भी अकेले जाने से अच्छा था कि मेरे साथ जाये!
बस में भरी भीड़ थी छुट्टियाँ जो थी. हमें मुश्किल से पीछे वाली दो सीट मिली, सामान रखने की भी जगह नहीं थी. तो वीणा ने अपनी सूटकेस अपने पाँव के नीचे रख लिया. मैं खिड़की के साथ में बैठा था. बस निकल पड़ी अपने मुकाम की तरफ.
रात के 10 बजे होंगे जब हम निकले. टिकट कटवाने के बाद बस की लाइट बंद हो गई और कब नींद आई पता ही नहीं चला.
नींद में ही मेरे हाथ साथ में बैठी वीणा को लगा और मेरी नींद खुल गई. वीणा की साड़ी कमर तक ऊपर आ गई थी. मैंने ध्यान से देखा तो पता चला कि सूटकेस रखने की जगह नहीं होने के कारण उन्होंने जो सूटकेस अपने पैरों के नीचे रखा था उस वजह से उनके पैर ऊपर हो गए थे और साड़ी फिसल के कमर तक आ गई थी. अब मेरी हालत देखने लायक थी. क्या करूँ समझ में नहीं आ रहा था.
तो मैंने भी नींद में होने का नाटक किया और धीरे धीरे मैं उनको हाथ लगाने की कोशिश करने लगा. डर तो बहुत लग रहा था कि कहीं उनकी नींद न खुल जाए. लेकिन जो आग मेरे अन्दर भड़कने लगी थी वो मुझे शांत कहाँ बैठने दे रही थी, तो मैंने भी नींद का नाटक कर के अपना हाथ चलाना चालू रखा. अब मेरा हाथ धीरे धीरे उनकी पेंटी को छूने लगा था. मेरी नजर हमेशा यही देख रही थी कि कहीं वो नींद से न जग जाय.
बस में काफी अँधेरा था और मैं एक नई रोशनी ढूंढ रहा था. मेरा हाथ अब उनकी जांघों पे फिसल रहा था. इतने में उन्होंने अपना सर मेरे कंधे पे रख दिया. मेरी तो डर के मारे जान ही निकल गई. मुझे लगा कि वो जग गई लेकिन वो तो गहरी नींद में थी. अब मैं थोड़ी देर वैसे ही रुका रहा.
लेकिन इस चक्कर में हम दोनों में जो दूरी थी वो और कम हो गई और इसको मैंने ऊपर वाले की मेहरबानी समझा. अब मेरी हिम्मत बढ़ने लगी थी और मेरा हाथ अब थोड़ी और सफाई से चलने लगा था लेकिन फिर भी सम्भाल के जांघों पे हाथ फेरने के बाद अब मैंने धीरे से उनकी पेंटी में हाथ घुसाया. बाल तो एकदम साफ किये हुए थे. अब मैं उनकी चूत को धीरे धीरे सहलाने लगा लेकिन एकदम संभल के.
थोड़ी ही देर में उनके बदन से अजीब सी खुशबू आने लगी थी और मेरी उंगली गीली हो गई थी, उनकी चूत अब पानी छोड़ने लगी थी. अब मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि वो सच में सोई है या उनकी नींद खुल गई है. लेकिन एक बात तो ध्यान में आ गई थी कि कोई भी औरत इतना सब करने के बाद भी सो नहीं सकती. अब मेरी हिम्मत तो बढ़ गई थी लेकिन मन में डर अब भी था. कही ओ सच में सोई हुई तो नहीं. लेकिन अब रुकना मेरे बस में नहीं था सो मिने भी सोचा जब उठ जायेगी तब देख लेंगे. वासना पे किसी का जोर नहीं चलता.
मैंने हिम्मत की और एक हाथ से उनकी चुत में उंगली करना चालू रखा और दूसरा हाथ उनकी चूची की तरफ बढ़ाया और धीरे से उन्हें मसलना चालू किया. मेरी जिंदगी का यह पहला अनुभव था और इतनी आसानी से मौका मिलेगा ये मैंने सोचा भी नहीं था. उनकी हलचल तो बढ़ गई थी लेकिन वो आँखें खोलने को तैयार नहीं थी. शायद अब उनका पानी निकलने को था. तो मैंने भी मेरी उंगली की रफ्तार बढाई और उन्होंने मेरी उंगली को अपनी चुत की फांकों से दबा कर रखा. शायद वो शांत हो गई थी. लेकिन मेरा तो लंड एकदम तना हुआ था. क्या करू समझ में नहीं आ रहा था. मैंने उनका हाथ उठाया और मेरी चैन खोल के लंड को बाहर निकला और उनके हाथ में दे दिया. लेकिन वो कुछ भी करने को तैयार नहीं थी.
तो मैंने फिर से उनकी चूची को दबाना चालू किया, चुत में उंगली भी डालना चालू रखा पर कुछ फायदा नहीं हुआ.
पूरी रात निकल गई जाने कितने बार ओ झड़ गई थी पर मेरे लंड से पानी नहीं निकला था. अब मेरे लंड में दर्द शुरू हो गया था. तो मैंने अपने हाथ से ही धीरे धीरे लंड हिलाना चालू किया 3-4 बार ही हिलाया था के मेरा भी पानी निकल गया. फिर नींद कब लग गई पता ही नहीं चला.
सुबह 8 बजे गाड़ी हमारे गांव में पहुँच गई. वीणा ने मुझे उठाया और हम बस से उतर गए.
यहाँ से हमारे रस्ते अलग होने थे. मुझे बड़ा दुःख हो रहा था कि जिंदगी का पहला सेक्स अनुभव और वो भी अधूरा ही रह गया. मैं देख रहा था कि उनके चहरे पे कोई भाव नहीं था. मैंने रात को उन के साथ कुछ किया हो ऐसा कुछ भी नहीं जता रही थी. जैसे कुछ हुआ ही नहीं… मैं उदास था कि अब मुझे अपने मामा के यहाँ जाना था और वो अपने बच्चो को ले कर वापस मुंबई जायेगी.
लेकिन एक बात तय थी कि वो सोई नहीं थी, सोने का नाटक कर रही थी. और मुझे इस बात की ख़ुशी थी कि आज भले ही मैं कुछ नहीं कर सका लेकिन मैं जब वापस मुंबई जाऊँगा तो शायद मेरा काम बन जाये… और मैं जिंदगी का पहला सेक्स वीणा के साथ ही करूँगा.
आगे की कहानी किसी दूसरे दिन बताऊँगा. अगर आप को मेरी आगे की कहानी जाननी है तो मुझे लिखे कि आपको मेरी ये कहानी कैसी लगी. Sex Stories
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