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शादी के बाद सुषमा अपनी Antarvasna ससुराल आई। उसके ससुराल में उसकी 45 साल की सास 50 साल का ससुर थे। उसका पति दब्बू किस्म का आदमी है, उम्र उसकी 22 साल और कद काठी से ठीक-ठाक था मगर लोग उसके पति को मीठा कह के पुकारते थे जबकि उसका नाम सुरेश है। उसकी एक ही ननद है जो शादी कर के ससुराल चली गई। गाँव में सुषमा का छोटा सा घर है और ज़मीन नहीं है। उसके सास ससुर गाँव के ज़मींदार के खेत पर काम करते हैं जबकि उसका पति एक दूध वाले की गायों की देख रेख करता है। शुरू-शुरू में वो घर के सारे काम करती और घर के पिछवाड़े बंधी अपनी तीन गायों की देखभाल करती और उनका दूध निकालती। घर वाले तडके घर से निकलते, फ़िर शाम को ही लौटते हैं।
एक दिन सुषमा ने सोचा कि वो अपने पति सुरेश को दोपहर में खाना दे आये। खाना बांधकर वो निकली तो पता चला कि सुरेश गायों को चराने के लिए गाँव से बाहर गया है। वो भी पूछते-पूछते उसी दिशा में चल पड़ी।
कोई दो कोस चलने के बाद उसे गाएँ दिखाई दी और एक झाड़ी के पास सुरेश के चप्पल और धोती दिखाई दी। उसने झाड़ी के पीछे देखा तो दंग रह गई। उसे समझ में नहीं आया कि यह क्या हो रहा है। सुरेश नंगा था और घोड़ी बना हुआ था, एक 17-18 साल का लड़का घुटनों के बल बैठ कर उसकी गांड मार रहा था। सुरेश की आवाज़ उसको साफ़ सुनाई दे रही थी- चोद मुझे जोर से यासीन ! चोद राजा, फाड़ दे मेरी गांड अपने मूसल जैसे लण्ड से ! और वो ऊह्ह आह करता जा रहा था।
सुषमा ने देखा कि वो लड़का कुत्ते की तरह उसके पति की गांड मार रहा था, उसका मोटा काला लण्ड बार-बार उसके पति की गांड से बाहर आकर अंदर जा रहा था। उसने देखा कि नीचे सुरेश की छोटी सी लुल्ली लटक रही थी जिसके पीछे चिपके हुए मूंगफली जैसे छोटे आंड थे। जबकि उसके पति को चोद रहे उस लड़के के अंडकोष किसी साण्ड के जैसे भरी भरकम थे। सुषमा के मुँह से चीख निकल पड़ी और उसको सुनते ही दोनों मुड़ गए, लड़के ने अपना लण्ड सुरेश की गांड से बाहर निकाला और सुरेश ने अपने हाथों से अपने गुप्तांग को ढक लिया।
क्या कर रहे थे आप ये ? सुषमा ने पूछा।
कुछ नहीं रानी, यह यासीन है मेरा दोस्त ! घबराया हुआ सुरेश बोला।
उधर सुषमा की नज़र उस लड़के के चिकने लण्ड से हट ही नहीं रही थी और यह देख कर उस लड़के को लगा कि मौका अच्छा है और उसने तुरंत आगे बढ़ कर सुषमा को दबोच लिया। सुषमा कुछ समझती, उससे पहले तो उसने उसको मसलना शुरू कर दिया और उसके होंठ खुद के होंठों में दबा लिए। एक झटके में उस लड़के ने सुषमा की सारी ऊपर कर दी। चड्डी तो वो पहनती नहीं थी और
उसकी चूत में ऊँगली करने लगा।
सुषमा के होश उड़ गए। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि यह क्या हो रहा है। सुषमा उस लड़के से अपने को छुड़ाने की कोशिश कर रही थी। तब तक सुरेश ने अपने कपड़े वापस पहन लिए थे और उसके सामने वो झुक कर उस लड़के का लण्ड चूस रहा था।
एक झटके में उस लड़के ने सुषमा को नीचे जमीन पर गिरा दिया, उसकी सारी ऊपर की और अपने लण्ड को उसकी चूत के मुँह पर अड़ा दिया। सुषमा की बालों वाली चूत के मुँह पर उसका मोटा काला कटा हुआ लण्ड दस्तक दे रहा था और सुरेश उसे पकड़ कर अपनी बीवी की चूत में घुसा रहा था।
घबराई हुई सुषमा एक झटके में उस लड़के की गिरफ्त से छूटी और भाग खड़ी हुई। सरपट दौड़ती हुई पाँच मिनट में हांफ़ती हुई घर पहुँच गई। सुषमा इतनी परेशान थी कि उसे कुछ समझ में नहीं आया कि यह क्या हुआ !
रात के आठ बजे तक उसका पति लौट कर घर नहीं आया। सुषमा से रहा नहीं गया, उसने घबराते हुए सास को चुपचाप सारी बात बताई।
बेटा, एक दिन तो तुझे यह सब पता चलना ही था ! सुषमा की सास रुक्मणि बोली।
रुक्मणि ने कहा- चिन्ता की कोई बात नहीं, सुरेश घर आ जायेगा।
रुक्मणि सुषमा को छत पर ले गई और बोली- बेटा अब मैं तुझे सारी कहानी बता देती हूँ।
रुक्मणि ने सुषमा को बताया- सुरेश उसके ससुर से पैदा नहीं हुआ बल्कि ज़मींदार के भाई का बच्चा है। शादी के बाद में ज़मींदार के घर का काम करने जाती तो ज़मींदारन मुझे रोज़ अपने कमरे में बुला कर अपनी चूत चटवाती और उसमे केला कद्दू वगेरह डलवाती। बाद में ज़मींदार के छोटे भाई की पत्नी रानी भी मुझसे यही सब करवाने लगी। ज़मींदार के छोटे भाई विकलांग थे और व्हील-चेयर पर बैठे रहते थे। मुझे बाद में उन लोगों ने छोटे मालिक की ज़िम्मेदारी दे दी। मैं उनको नहलाती, उनके कपड़े बदलती और उनका पाखाना, मूत वगेरह साफ़ करती। गरीबी में और कोई चारा भी नहीं था।
रुक्मणि कहने लगी- छोटे मालिक धीरे धीरे उसके स्तन दबाने लगते और उसको चूमने लगे। उनका शरीर कमर से ऊपर स्वस्थ था और वे मुझे बिस्तर के कोने पर लिटा कर मेरी चूत चाट कर मुझे मज़ा देते। धीरे-धीरे छोटे मालिक को नहलाते समय वो उनके सुस्त और नरम लण्ड की भी मालिश करती। एक बार एक वैद्य उनके लिए एक दवाई लाया और मुझे कहा गया कि मैं उसको छोटे मालिक के लण्ड पर दिन में तीन बार लगाऊँ।
रुक्मणि कहती रही- एक दिन मैं मालिश कर रही थी कि छोटे मालिक के निर्जीव लण्ड में हल्का सा तनाव आया और वो मुझे जोर जोर से उसको हिलाने को कहने लगे। मैंने उसको हिलाया तो दो चार बूंदें निकली मगर उनको बड़ा मज़ा आया। धीरे धीरे छोटे मालिक के लण्ड में तनाव आने लगा और मैं उनकी मुठ मारती रही। एक दिन उन्होंने मुझे नीचे लिटा कर ऊपर चढ़ कर लण्ड को अंदर डालने की कोशिश की मगर पूरी ताकत नहीं होने से वो डाल नहीं पाए। उनको बहुत गुस्सा आया। उन्होंने अपनी पत्नी और तेरे ससुर को बुलाया।
सुषमा अवाक् सी सब सुन रही थी, उसकी सास ने बताया – उसके बाद सुषमा के ससुर यानि लल्लू लाल जी रुक्मणि की चूत चाट कर गीली करते और छोटे मालिक की पत्नी छोटे मालिक का लण्ड चूस-चूस कर बड़ा करती, फिर लल्लू लाल रुक्मणि की टांगें चौड़ी करता और छोटी मालकिन अपने पति का लण्ड पकड़ कर अंदर डालती। ऐसे वो मुझे रोज़ चोदते रहे।
रुक्मणि बोली- छोटे मालिक ने सख्त हिदायत दे रखी थी कि जब तक मुझे गर्भ नहीं ठहर जाये, तब तक मेरा पति मुझे नहीं चोदेगा। कोई तीन महीने की इस चुदाई के बाद मुझे बच्चा ठहर गया, तब कहीं जाकर छोटे मालिक खुश हुए। बदले में उन्होंने मेरे पति यानि तेरे ससुर को छोटी मालकिन को चोदने की इजाज़त दी, लेकिन मेरा बच्चा गिर न जाये इसलिए वो मुझे छू भी नहीं सकते थे।
सुषमा सांस रोके ये सब सुन रही थी- इसका मतलब हमारे पति सुरेश ससुरजी के वीर्य से नहीं पैदा हुए ? उसने पूछा।
नहीं बेटी, सुरेश तो छोटे मालिक की ही औलाद है, रुक्मणि ने बताया।
रुक्मणि आगे का हाल बताने लगी- रात होते ही कमरे में में तेरे ससुर, छोटे मालिक और छोटी मालकिन कमरे में आ जाते फिर वो तेरे ससुर से भी अपनी गाण्ड मरवाते उससे पहले छोटी मालकिन तेल लगा कर उनकी गाण्ड के छेद को चिकना कर देती।
रुक्मणि बोली- तेरे ससुर जैसा लण्ड गाँव में शायद ही किसी का होगा बहू ! पूरा 9 इंच का मोटा और काला ! और एक बार किसी पर चढ़ जाएँ तो उसको आधे घंटे चोदे बिना नीचे नहीं उतरते और उनके आण्ड तो किसी साण्ड से कम नहीं ! एक बार वीर्य किसी चूत में डाल दें तो गर्भ तो ठहरा हुआ समझो बेटी !
यह सुन कर सुषमा की आँखों एक चमक आ गई।
रुक्मणि कहने लगी- तेरे ससुर लल्लू लाल की चुदाई से छोटी मालकिन को भी गर्भ ठहर गया और उनका बच्चा जो अब 18 साल का है। इसका नाम राहुल है, असल में तुम्हारे ससुर का बेटा है। रुक्मणि आगे बताने लगी- बड़े मलिक यानी ज़मींदार गाण्ड मरवाने के शौकीन थे और सुरेश के पिता उनकी गाण्ड मारा करते थे, बदले में वो भी उनसे अपनी पत्नी को चुदवाते थे। मालकिन को एक लड़का और एक लड़की हुए, वो दोनों भी तुम्हारे ससुर के वीर्य से ही पैदा हुए बेटी !
लेकिन सुरेश का लण्ड इतना छोटा कैसे?” सुषमा ने पूछा।
बेटी इसकी बड़ी दुखद कहानी है- एक दिन जब सुरेश 6 साल का था तो छोटी मालकिन उसे नहलाने के बहाने उसके छोटे लण्ड से खेलने लगी और छोटे मालिक ने देख लिया। वो गुस्से में आग-बबूला हो गये और कपड़े धोने की लकड़ी लाकर सुरेश के लण्ड पर ज़ोर से मारी और वो बेहोश हो गया। सुरेश बच तो गया मगर डॉक्टर ने कह दिया अब वो कभी बाप नहीं बन पाएगा। उसके आँड का कचूमर बन गया था।
सुषमा रोने लगी बोली- मेरा जीवन नरक क्यूँ बनाया? मेरी शादी नपुंसक से क्यूँ की?
रुक्मणि ने उसे गले लगाया और बोली- चिंता मत कर बेटी ! मैं हूँ ना ! तेरे ससुर मुझे बच्चा नहीं दे पाए तो क्या ! अपनी बहू को तो दे सकेंगे ! एक साथ वो बाप भी बनेंगे और दादा भी ! और घर की बात घर में रह जाएगी।
सुषमा को कुछ समझ नहीं आया, वो बोली- ऐसा कैसे हो सकता है? मैं .. ?
चिंता मत कर बेटी ! मैं हूँ ना ! और सुरेश की चिंता मत कर ! वो इस काम में सहयोग करेगा !
सुषमा चौंकी- सहयोग वो कैसे?
अब तुझसे क्या छुपाना बेटा ! सुरेश गाण्ड मरवाने का इतना आदि हो गया है कि उसने तुम्हारे ससुर का लण्ड भी नहीं छोड़ा। एक बार लिए बगैर रात में सोता तक नहीं वो ! रुक्मणि बोली।
क्या सच में? सुषमा ने पूछा।
हाँ बेटा, मेरे सामने ही तो होता है हर रोज़ ! रुक्मणि बोली- सुरेश मेरी चूत भी चाट लेता है कई बार ! तुम्हारे ससुर का लण्ड चूस कर मेरे लिए खड़ा करता है फिर मेरी चूत में भी डालता है और जब तुम्हारे ससुर मुझे चोदते हैं तो उनकी गाण्ड और आण्ड चाटता है। फिर उनके झड़ने के बाद मेरी चूत का सारा वीर्य चाट कर साफ कर देता है।
सुषमा को अब कुछ कुछ समझ आने लगा था।
आज रात तू नहा धो कर तैयार रहना ! तेरी सुहागरात आज तेरे ससुर के साथ ! रुक्मणि आँख मार कर बोली।
रात को खाना-वाना ख़ाने के बाद सुषमा ने नई साड़ी पहनी, परफ़्यूम लगाया और तैयार हो गई।
दस बजे उसकी सास उसके कमरे में आई और बोली- चल बेटी, घबराना मत ! मैं तेरे पास हूँ !
यह कह कर वो उसे ले गई। सुषमा अंदर गई तो देखा कि उसके ससुर बिस्तर पर नंगे लेटे हैं और सुरेश भी नंगा होकर उनकी तेल मालिश कर रहा है। सुषमा ने आँखें इधर फ़ेर ली।
रुक्मणि ने सुषमा को बिस्तर पर लिटाया और धीरे धीरे उसके सारे कपड़े उतार दिए और खुद भी नंगी हो गई। सुषमा आँखें मूंदे लेटी रही। थोड़ी देर में उसने देखा कि सुरेश उसकी तेल मालिश कर रहा है और बाद में वो उसकी चूत चाटने लगा। चूत एक दम गीली होने के बाद सुरेश ने उसमें खूब सारा तेल लगाया। सुषमा ने देखा कि नीचे चटाई पर रुक्मणि लल्लू का लण्ड चूस रही है और उस पर तेल लगा रही है। सुषमा की आँखें अपने ससुर के हथियार को देख कर फ़टी की फ़टी रह गई। सास सच कह रही थी कि यह लण्ड नहीं हथोड़ा है।
थोड़ी देर में रिक्मणि उसके पास आई और बोली- बेटी, तैयार हो जा !
लल्लू लाल भी बिस्तर पर आ गए और सुषमा के बड़े-बड़े, गोल-गोल स्तन सहलाने और दबाने लगे। उधर रुक्मणि ने सुषमा की टांगें चौड़ी कर दी। सुरेश उसकी चूत में पूरी जीभ डाल कर उसको कुत्तों की तरह चाट रहा था।
सुषमा आँखें बंद कर लेटी हुई थी, तभी उसको लगा उसके ससुर उसके ऊपर आ गये हैं। उसके होंट ससुर के होंटों से मिले और वो उसको पागलों की तरह चूमने लगे और अपने मज़बूत हाथों से सुषमा के बड़े बड़े स्तन दबाने और मसलने लगे। सुषमा के स्तन पहली बार कोई मर्द इस तरह दबा रहा था। उसकी चूत धीरे-धीरे गीली हो चुकी थी। ससुर को शायद इस बात का एहसास था, उन्होने अपने मोटे लण्ड को सुषमा की चूत के मुँह पर रखा और उस दिन की तरह सुरेश उसको पकड़ कर उसकी चूत में घुसाने लगा।
सुषमा की चूत के दरवाज़े पर जैसे ही लल्लू लाल का मोटा तगड़ा लण्ड पहुँचा, उसको दर्द महसूस हुआ मगर उसकी सास उसकी दोनों टाँगे पकड़े हुए थी और दर्द से बचना नामुमकिन था। उधर तेल की वजह से लल्लू का लण्ड भीतर सरकने लगा और सुषमा के होंट भिंचने लगे।
बेटा चिंता मत करो, सहयोग करो, एक दो बार का ही दर्द है, फिर मज़ा आएगा ! ससुर जी बोले।
रुक्मणि ने थोड़ी टाँगें और चौड़ी कर दी और ससुरजी से बोली- आप तो एक झटके में पूरा लण्ड पेल दो ! फिर कुछ नही होगा !
मगर ससुरजी धीरे धीरे लण्ड सरकाते रहे। सुषमा की चूत दर्द से फट रही थी, टाँगें दुखने लगी थी मगर लल्लू लाल अनाड़ी नहीं थे, चूमते रहे और धीरे-धीरे लण्ड सरकाते रहे, सुषमा चिल्लाती रही- ससुर जी रहम कीजिए ! फिर कर लीजिएगा ! मेरी चूत फट जाएगी !
मगर लल्लू लाल कहाँ रुकने वाले थे, 5 मिनट बाद उन्होंने अपने पूरा चिकना लण्ड बहू की चूत में पेल ही दिया, अब सिर्फ़ आँड बाहर रह गये। जैसे ही सुषमा का दर्द थोड़ा कम हुआ और वो सामान्य हुई, उन्होने लण्ड को अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। लल्लू लाल बहू की चूत के खून से रंगा लण्ड अंदर-बाहर करते रहे, सुषमा की चीखे सुनाई देती रहीं।
बेटा तू बापू की गाण्ड चाट ! मैं आँड चाटती हूँ, नहीं तो ये बहू को चोद चोद कर मार डालेंगे ! रुक्मणि बोली।
सुषमा ने देखा कि उसका पति उसके ससुर की गाण्ड चाट रहा था और सास ससुर के मोटे काले अंडकोष चाट रही थी। लल्लू लाल जी उत्तेजना के शिखर पर थे- बहू, भर दूँ तुम्हारी कुँवारी चूत अपने ताक़तवर वीर्य से? उन्होने पूछा।
सुषमा ने कुछ बोलना चाहा ही था कि वो गर्र-गर्र करते हुए झड़ गये।
ओह ! आपने तो कोई आधा कप पानी बहू की चूत में छोड़ दिया है, बच्चा होकर रहेगा ! रुक्मणि बोली।
शेष अगले भाग में Antarvasna
नमस्कार दोस्तो, मेरी कहानी को पढ़ कर बहुत Hindi Porn Stories लोगों ने मुझे मेल किया और मुझसे काजल के साथ और क्या सब हुआ, वो भेजने की माँग की।
जब एक बार काजल को मुझसे चुदाने का मजा मिल गया तब फ़िर क्या परेशानी होनी थी। हम दोनों उसके बाद खुल कर बेहिचक और बेझिझक एक दूसरे के साथ मस्ती करने लगे।
काजल होस्टल नहीं गई और मेरे साथ ही रहने लगी। पिछले चार महीने में हम दोनों ने सैकड़ों बार चुदाई का खेल खेला। कुछ नया ऐसा न हुआ कि आप सब को बताया जाए। मेरे दोनों दोस्त अनवर और सुमित भी आते तब भी कुछ खास न हुआ।
सुमित को एक नई लड़की मिल गई थी और वो उसके साथ व्यस्त था। अनवर ने भी काजल के साथ सेक्स करने की बात ना की, पर काजल अक्सर कहती कि पता नहीं कब आपके दोस्त लोग मेरे में अपना हिस्सा माँगेंगे। मैं
तब उसे समझाता कि वो ऐसे नहीं हैं, बहुत होगा तो एक दो बार वो तुम्हें कहेंगे पर अगर तुम ना कर दोगी तो वो जिद नहीं करेंगे।
पर अब करीब चार महीने बाद पिछले रविवार को सुबह ही अनवर मेरे घर आया। मैं अखबार पढ़ रहा था और काजल टीवी देख रही थी।
हम दोनों में से चाय कौन बनाए, यह अभी तय नहीं हुआ था। अनवर मेरे पास बैठ गया और इधर-उधर की बात करने लगा। फ़िर सुमित की बात आई कि वो कल रात भी अपनी गर्लफ़्रेंड के साथ था।
और तभी अनवर बोला- साले तुम दोनों की चाँदी है, रोज चूत से लण्ड की मालिश करते हो। अब मैं शादी ही कर लेता हूँ, मेरे साथ भी एक हमेशा रहेगी। आज एक महीना हो गया किसी को चोदे। ब्लू फ़िल्म देख कर मुठ मारता हूँ।
असल में पहले ऐसा नहीं था, तब हम तीनों के साथ कोई रेगुलर न थी। वो अब काजल को देख रहा था, पर कह नहीं पा रहा था।
मैंने काजल को कहा- सुन रही हो ना! कैसा बेचैन है! अब जरा बेचारे को चाय तो पिलाओ!
काजल मुस्कुराते हुए चाय बनाने चली गई।
वो अब मुझसे पूछने लगा- क्या काजल मुझे एक बार चाँस देगी?
मैंने भी कह दिया- खुद ही पूछ कर देख ले!
तभी काजल चाय ले कर आई। वो तब एक ढीली टी-शर्ट और बरमुडा पहने थी। नीचे कोई अन्तर्वस्त्र न था, इसलिए उसकी चुचियाँ चलने से फ़ुदक रही थी।
हम सब जब चाय पीने लगे तब वो बोला- काजल, प्लीज न मत कहना! बहुत मन हो रहा है, एक बार मेरे साथ कर लो ना!
वो एक दम से बोल गया था, सो काजल तुरंत जवाब न दे सकी।
अनवर ने फ़िर से काजल से कहा और तब काजल ने मुझे देखा।
मैंने भी तब कह दिया- मुझे कोई परेशानी नहीं है, अगर तेरा मन है तो हाँ कह दे।
अनवर अब काजल को देखे जा रहा था।
मुझे पता था कि काजल को भी एक बार का मन है कि देखे कि अलग लड़के से चुदवा के कैसा लगता है, क्योंकि वो अक्सर सेक्स करते समय ये सब बातें करती थी, और जब मैं कहता कि अलग अलग लड़की का स्वाद अलग अलग होता है, तब वो भी जोश में कहती कि वो भी अलग अलग लड़के का मजा लेगी।
काजल थोड़ा सोच कर बोली- ठीक है, जब भैया को एतराज नहीं है, तब एक बार आपके साथ कर लूंगी पर उसके बाद आप भी हमेशा मत कहिएगा। मैंने कई बार सुना है कि एक से करे रानी और बहुत से करे रंडी। आप रुकिए, नाश्ता कर के जाइएगा।
अनवर अब खुशी से चहक उठा- अभी नहीं कुछ, अब बस अभी करना है, उसके बाद ही नाश्ता-वाशता!
और जब तक कोइ कुछ समझे कहे, वो काजल के चेहरे को पकड़ उसके होंठ चूमने लगा।
काजल बस उम-उम कर रही थी, और अनवर उसके होंठों का रसपान कर रहा था।
मैं उसकी यह बेचैनी देख हँस पड़ा और कहा- ठीक है, भाई अब दोनों मस्ती करो, आज मैं नाश्ता ब्रेड-ऑमलेट तैयार करता हूँ, जल्दी तुम लोग खत्म करो ये सब!
अनवर एक बार बोला- थैंक्स!
और तब काजल का भी मुँह फ़्री हुआ और वो भी बोली- बाप रे! ऐसी बेचैनी का मुझे अन्दाज न था।
अनवर यह कहते हुए कि हाँ आज वह बहुत बेचैन है, एक बार फ़िर काजल से लिपट गया।
मैं अब वहाँ से उठ गया था, पर मुझे पता था कि अनवर को इस बात से कोई फ़र्क नहीं पड़ता, हम सभी दोस्त एक दूसरे के सामने पहले दो-चार बार भाड़े की लड़की यानि काल-गर्ल चोद चुके हैं।
मुझे काजल के मुँह से निकल रही सेक्सी आवाजें सुनाई दे रही थी। मुझे पता था कि अभी अनवर उसकी चूत को चूस रहा होगा।
हम तीनों में अनवर के चूसने की कला हमेशा ही लड़कियों को भाती रही है।
करीब 40-45 मिनट बाद मैं 10 स्लाईस ब्रेड और 3 ऑमलेट ले कर कमरे में आया। कमरे में आवाजें थोड़ी कम ही थी तो मुझे लगा कि अन्तर्वासना, बेचैनी के कारण अनवर एक बार फ़टाफ़ट चुदाई कर चुका होगा।
अब मेरे मन में भी था कि देखूँ कि काजल कैसे चुदवाती है। कम से कम अंत भी तो मैं देख सकता था।
पर जब कमरे में घुसा तब देखा कि अभी तो असल चुदाई शुरु भी नहीं हुई है। अनवर नीचे कालीन पर लेटा है और काजल उसके लण्ड को चूस रही है।
दोनों मादरजात नंगे थे। मेरी तरफ़ काजल की गाण्ड थी और वो झुकी हुई थी इसलिए उसकी गीली, गुलाबी चूत की धारी थोड़ी खुली हुई दिख रही थी।
मुझे भीतर आते देख काजल उठ गई और एक तरफ़ सिमट कर अपने दोनों जाँघों को भींच लिया तथा अपने हाथों से अपने चूचियों को ढकने लगी।
अनवर का 7′ का लण्ड अपने पूरे शवाब पर था। उसकी लाल सुपारी और सुडौलपन देखने लायक था। अनवर को तब पता नहीं चला कि मैं कमरे में आया हूँ।
वो बोला- आओ काजल जरा एक बार चूस कर मेरा झाड़ दो, उसके बाद चुदाई करुँगा। सिर्फ़ लण्ड चूसाने के लिए हीं मैं अपना झाँट साफ़ रखता हूँ ताकि किसी लड़की को इन बालों से परेशानी ना हो।
अब तक वो मुझे देख कर समझ गया कि काजल क्यों उसके लण्ड से हट गई है।
मुझे भी काजल का इस तरह मुझसे शर्माना अच्छा लगा। साफ़ था कि अभी भी काजल दिल्ली की आम लड़की की तरह राँड नहीं हुई थी, छोटे शहर के संस्कार अभी बाकी थे।
मैंने बात शुरु की- आओ अब पहले नाश्ता कर लो उसके बाद ये सब करना।
अनवर उठते हुए बोला- क्या साला! के एल पी डी हो गया, थोड़ा रुके क्यों नहीं संजीव यार?
मैंने हँस कर कहा- बहुत दिन बाद हुआ ऐसा के एल पी डी!
और तब वो भी हँसने लगा।
मैंने काजल को भी कहा- आ जाओ, अब तुम भी नाश्ता कर लो, फ़िर कर लेना ये सब।
अनवर ने उसका हाथ पकड़ कर उसे उठा दिया और फ़िर दोनों मेरे दाहिनी तरफ़ सोफ़े पर बैठ गये। काजल मेरे से दूर वाली तरफ़ थी।
अनवर ने अपने लण्ड को एक चपत लगाया और बोला- ले साले! के एल पी डी!
फ़िर काजल से बोला- समझी कुछ?
जब काजल ने न में सर हिलाया तब वो उसको समझा कर बोला- के एल पी डी माने- खड़े लण्ड पे धोखा!
अब यह सुन कर काजल भी मुस्कुराने लगी।
मैंने खाना शुरु कर दिया। काजल ने अपनी टी-शर्ट गोदी में रख ली जिससे उसकी चूत छुप जाए और एक स्लाईस उठा लिया।
अनवर ने भी खाना शुरु किया पर अपना हाथ बढ़ा उस कपड़े को काजल की गोदी से हटा दिया- मेरा के एल पी डी और तू शरमा रही है? यह नहीं चलेगा।
मुझे काजल का इस तरह शर्माना भा रहा था, सो मैंने भी थोड़ा कह दिया- यार अनवर, वो अपने भैया के सामने बैठी है, और अपनी एक आँख मारी।
अनवर खाते हुए बोला- चुप साले बहनचोद, रोज़ चोदते हो, गन्दी-गन्दी बात करते हो और अभी मेरे समय समझा रहे हो कि भैया के सामने बैठी है। जवानी का मजा लूटने दो साली काजल को!
मेरा अब मन कर रहा था कि मैं काजल को अनवर से चुदवाते देखूँ, सो मैं बोला- अबे साले भड़को मत, दो मजा उसको। मैं मना थोड़े कर रहा हूँ?
फ़िर मैंने काजल से कहा- हाँ काजल, बिल्कुल बिंदास हो कर लो मजा। अनवर लड़की की चूत खाने में माहिर है, साला 15 साल का था तब अपनी बुड्डी मामी की चूत चूसकर ही जवान हुआ। सौ से कम लड़कियाँ नहीं चोदी होंगी इसने, आज देखो कैसे बेचैन है।
अनवर ने हँस कर कहा- अरे 38-40 की थी मामी यार! ऐसी बूढ़ी नहीं थी।
मैंने भी कहा- अबे साले! काजल ने 19 भी पूरे नहीं किए हैं अभी!
काजल सब सुनते हुए खा रही थी। उसकी जाँघें अभी भी भिंची हुई थी जिससे उसकी चूत की फ़ाँक नहीं दिख रही थी, सिर्फ़ ऊपर के झाँट देख रहे थे।
यहाँ मैं आप लोगों को बता दूँ कि काजल के चूत और काँख पर खूब बाल हैं। (मैंने ये सब मस्तानी लौन्डिया में पहले लिखा था)
नाश्ता खत्म हुआ तब अनवर का लण्ड अपना आधा जोश खो चुका था, अनवर बोला- अब जल्दी से हाथ धो कर आ जाओ, तुमको फ़िर से मेरा लण्ड मस्त करना होगा, तभी सही मजा मिलेगा तुमको!
काजल सब प्लेट वगैरह ले कर बाहर निकल गई, तब मैंने अनवर से कहा- मैं सब देखना चाहता हूँ, पता नहीं काजल मानेगी या नहीं? देख नहीं रहे मेरे सामने कैसे चुप-चुप थी।
अनवर बोला- चिंता नहीं दोस्त, आज तुमको सब दिखेगा, साली को ऐसा मस्त कर दूंगा कि चौक पर पूरी दुनिया के सामने चुदवा लेगी, यहाँ तो बस तुम ही हो। बहुत मस्त लौन्डिया है काजल, इतना तो मुझे अभी तक समझ आ गया है। जब चुदेगी तब बिन्दास चुदेगी।
तभी काजल आ गई। उसने एक तौलिए को अपने वक्ष पर लपेट लिया था, जो उसकी आधी जाँघ भी ढ़के हुए था। अनवर फ़िर पहले की तरह काकीन पर लेट गया और लण्ड हाथ में ले हिला कर काजल को आने का न्योता दिया।
काजल भी पास बैठ तो गई पर सर नीचे किये हुए शायद मेरे जाने का इन्तजार करने लगी।
तभी अनवर सब भाँप बोला- आ काजल डीयर, देख तेरा खिलौना, तेरा लॉलीपॉप तेरे मुँह में जाने के लिए बेकरार है। अपने भैया की फ़िक्र छोड़ो और मस्ती करो।
मैंने भी काजल की हिम्मत बढ़ाई यह कहते हुए कि मैंने तुमको कई बार चोदा, पर आज तुमको किसी और से चुदवाते देखना चाहता हूँ!
उसके बदन से तौलिया खींच दिया। फ़िर मैंने उसकी दोनों चूचियों को मसल दिया और फ़िर वहीं सोफ़े पर काजल के बिल्कुल सामने बैठ गया।
अनवर ने काजल को अपने ऊपर खींच लिया और काजल को अपने पूरे बदन पर फ़ैला कर उसके होंठ चूसने शुरु कर दिये।
काजल अब भी अपने दोनों टाँगों को सटाए हुइ थी, उन दोनों के सर मेरी ओर थे। काजल की छाती अनवर के सीने पे दबी हुई थी।
अनवर अब काजल को वैसे ही चिपटाये हुए पलट गया और काजल अब उसके नीचे हो गई।
वो अब उसके चुम्मे का जवाब देने लगी थी।
अनवर 2-3 मिनट के बाद हटा और फ़िर उसकी दाहिनी चूची को चूसने लगा। वह अपने एक हाथ से उसकी बाँई चूची को हल्के से मसल भी रहा था।
काजल की आँखें बन्द थी और उसकी साँस गहरी हो चली थी। जल्द ही काजल अपने पैर को हल्के हल्के हिलाने, आपसे में रगड़ने लगी। उसकी चूत गीली होने लगी थी।
जैसे ही उसने एक सिसकारी भरी, अनवर उसके ऊपर से पूरी तरह हट गया और मुझे उसके पैरों की तरफ़ जाने का इशारा किया। मैं अब काजल की सर की तरफ़ से हट कर उसके पैरों की तरफ़ हो गया।
अनवर अब उसकी चूत पर झुका। होठों के बीच उसकी झाँटों को ले कर दो-चार बार हलके से खींचा और फ़िर उसकी जाँघ खोल दी।
उसकी चूत की फ़ाँक खुद के पानी से गीली हो कर चमक रही थी। अनवर अपने स्टाईल में जल्द ही चूत चूसने लगा और काजल के मुँह से आआअह आआअह ऊऊऊऊऊओह जैसी आवाज ही निकल रही थी।
अनवर चूसता रहा और काजल चरम सुख पा सिसक सिसक कर, काँप काँप कर हम लोगों को बता रही थी कि उसको आज पूरी मस्ती का मजा मिल रहा है।
जल्द ही वो निढ़ाल हो कर थोड़ा शान्त हो गई।
तब अनवर ने उसको कहा कि अब वो उसके लण्ड को चूस कर उसको एक पानी झाड़े। काजल शान्त पड़ी रही, पर अनवर उसके बदन को हलके हलके सहला कर होश में लाया और फ़िर उसको लण्ड चूसने को कहा।
काजल एक प्यारी से अदा के साथ उठी और फ़िर अनवर के लण्ड को अपने मुँह में ले लिया। वो अब मुझसे बिना शर्म किए खूब मजे लेने के मूड में थी। कभी हाथ से वो मुठ मारती, कभी चूसती और जल्द ही अनवर का लण्ड फ़ुफ़कारने लगा, फ़िर झड़ भी गया।
झड़ते समय अनवर ने पूछा- क्या वो माल खाएगी?
पर काजल ने ना में सर हिला दिया, तब अनवर तुरंत उठा और सारा माल काजल की चूची पर निकाल दिया।
झड़ने के बाद भी अनवर का लण्ड हल्का सा ही ढीला हुआ था, जिसको उसने अपने हथेली से पौंछ दिया और फ़िर काजल को कहा- अब इसको चूस कर फ़िर से तैयार कर!
काजल बोली- पानी से धो लीजिए ना थोड़ा, ऐसे तो सब मेरे मुँह में चला जाएगा!
मुझे पता था कि काजल ने अभी तक लण्ड के माल को चखा नहीं है। मैं सोच रहा था कि आज काजल को मर्द के माल का स्वाद मिल जाए तो मुझे भी मजा आएगा।
अनवर ने उसके अनुरोध की बिना परवाह किए कहा- चल आ जा अब, देर ना कर! नहीं तो अगली बार माल तेरी बुर में निकाल दूँगा!
फ़िर मेरी तरफ़ देख बोला- क्या यार बहन को अभी तक बताया नहीं कि मर्द का माल लौंडिया के लिये कैसा टौनिक है?
मैंने भी जड़ दिया- हाँ यार, यह साली बहन जी की बहन जी ही रहेगी, देख नहीं रहे हो आज तक झाँट भी साफ़ नहीं की, जबकि कई बार मैंने कहा भी कि मैं शेव कर दूँगा, पर देख लो! कहती है कि मम्मी कहती है कि कुँवारी लड़की को ये बाल नहीं साफ़ करना चाहिएँ, नहीं तो मर्द समझेगा कि बीवी अन्छुई नहीं है।
अनवर हँसने लगा- अब तक काजल अपने को कुँवारी समझ रही है, कमाल है? क्या इसकी माँ, जब यह घर जाएगी, तब इसको नंगा करके देखेगी?
और उसने अब काजल को नीचे लिटा दिया। फ़िर उसकी टाँगों को पेट की तरफ़ मोड़ दिया, खुद अपने फ़नफ़नाए लण्ड के साथ बिल्कुल उसकी खुली हुई बुर के पास घुटने पर बैठ गया। हल्के हल्के से लण्ड अब उसकी बुर के मुहाने पे दस्तक देने लगा था।
काजल अपनी आँख बन्द करके अपने बुर के भीतर घुसने वाले लण्ड का इन्तजार कर रही थी।
अनवर ने अपने लण्ड को अपने बाँए हाथ से उसकी बुर पर टिकाया और फ़िर उसको धीरे धीरे भीतर पेलने लगा।
काजल के मुँह से सिसकारी निकल गई और जब लण्ड आधा भीतर घुस गया, तब अनवर ने अपने वजन को बैंलेन्स करके एक जोर का धक्का लगाया और पूरा 7′ भीतर पेल दिया।
काजल हल्के से चीखी- उई ई ईईई ईईईए स्स्स्स्स् स माँ आआआह!
और काजल की चुदाई शुरु हो गई। जल्द ही वह भी अपनी बुर को अनवर के लण्ड के साथ ‘ताल से ताल मिला’ के अन्दाज में हिला हिला कर मस्त आवाज निकाल निकाल कर चुद रही थी।
साथ ही बोले जा रही थी- आह चोदो! वाह, मजा आ रहा है, और चोदो, जोर से चोदो, लूटो मजा मेरी बुर का, मेरी चूत का, बहुत मजा आ रहा है, खूब चोदो! खूब चोदो!
फ़िर जब अनवर ने चुदाई की रफ़्तार बढ़ाई, काजल के मुँह से गालियाँ भी निकलने लगी- आआह मादरचोद! ऊऊ ऊ ऊओह बहनचोद! साले चोद जोर से चोदो रे साले मादरचोद।
अनवर भी मस्त हो रहा था, यह सब सुन सुन कर मस्ती में चोदे जा रहा था और काजल की गाली का जवाब गाली से दे रहा था- ले चुद साली, बहुत फ़ड़क रही थी, देख आज कैसे बुर फ़ाड़ता हूँ। साली कुतिया, आज लण्ड से तेरी बच्चादानी हिला के चोद दूँगा। साली बेटी पैदा करके उसको भी तेरे सामने चोदूँगा इसी लण्ड से! देखना तू!
दोनों एक दूसरे को खूब गन्दी गन्दी गाली दे रहे थे और चुदाई चालू थी।
थोड़ी देर बाद अनवर थक गया शायद, और उसने अब लण्ड बाहर निकाल लिया। तब काजल ने उसको लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गई। वो अब ऊपर से उसके लण्ड पर कुद रही थी और मैं उसके सामने होकर देख रहा था कि कैसे लण्ड को उसकी बुर लील रही थी।
4-5 मिनट बाद अनवर फ़िर उठने लगा और फ़िर काजल को पलट कर उसको घुटनों और हाथों पर कर दिया फ़िर पीछे से उसकी बुर में पेल दिया, बोला- अब बन गई ना काजल तू कुतिया! साली चुद और चुद साली! मम्मी को अपना झाँट दिखा के बेवकूफ़ बना और यहाँ लण्ड खा गपागप गपागप गपागप। मादरचोद! भैया से चुदी, अब भतार से चुद चुद साली रन्डी। एक से चुदे बीवी, दो से चुदे कौन, बोल रन्डी, बोल साली कुतिया, बोल दो से चुदे कौन?
और वो बोल पड़ी- रन्डी रन्डी, साले बहनचोद तुम लोगों ने मुझे रन्डी बना दिया।
अनवर अब एक बार फ़िर लण्ड बाहर निकाल लिया और फ़िर उसको सीधा लिटा दिया। ऊपर से एक बार फ़िर चुदाई शुरु कर दी।
वो बोले जा रहा था- रन्डी,रन्डी, काजल कौन, काजल कौन?
काजल बोलती- काजल है रन्डी, काजल है रन्डी।
और करीब 30 मिनट के बाद काजल एक बार फ़िर काँपने लगी, वो फ़िर एक बार झर रही थी। तभी अनवर भी झरा- एक जोर का आआआआह और फ़िर पिचकारी काजल की झाँट पे। सारा सफ़ेद माल काली काली झाँटों पर फ़ैल गया।
दोनों निढ़ाल हो कर अब एक दम शान्त हो कर एक दूसरे के बगल में लेट कर शन्त हो गये। मेरा लण्ड भी यह सब देख अपना माल मेरी पैंट में निकाल चुका था। अब एक दम शान्ति थी।
करीब 5 मिनट तक वैसे ही रहने के बाद काजल उठी और अपने कपड़े ले कर बाथरुम में चली गई। अनवर भी अपने कपड़े पहनने लगा- यार बहुत मस्त माल है ये, थैंक्स!
मैंने कहा- हाँ यार, पर अब उसको परेशान नहीं करना, या चिढ़ाना मत।
अनवर बोला- क्या दोस्त, अभी तक तुझे लगता है कि मैं ऐसा कमीना हूँ? यार मुझे पता है कि लड़की को कैसे इज्जत देनी चाहिए।
काजल तब तक आ गई थी और बात भी सुनी थी, अनवर भी उसको बोला- हाँ, काजल तुम बिल्कुल दिल पर न लेना कोई बात। यह सब बस करते समय की बात है, जो भी मैं बोला! अब आगे से जैसा पहले था, वैसा ही रिश्ता रहेगा हम लोगों का!
काजल ने मुस्कुराते हुए कहा- मुझे पता है अनवर भैया, मैं चाय बनाती हूँ।
वो बाहर निकल गई, और हम दोनों दोस्त टीवी खोल कर बैठ इधर-उधर की बातें करते हुए चाय का इन्तज़ार करने लगे।
आपको यह कहानी कैसी लगी, बताना साथ ही यह भी बताना कि मुझे सिर्फ़ काजल के साथ किये गये मजे के बारे में लिखना चाहिए या कुछ और भी लिखना चाहिए?
वैसे अनवर के बारे में दो-चार बात है मजेदार बताने के लिए! Hindi Porn Stories
दोस्तो, आप सभी का बहुत बहुत Hindi Porn Stories धन्यवाद, कि आपने मेरी कहानियाँ ‘माला की चुदाई, मजा और मलाई, व जब गांड मारी जमके’ पढ़ी, आपने जो मेरा साथ दिया उसके लिये एक बार और धन्यवाद!
दोस्तो, आज नई कहानी लेकर आया हूँ।
मेरी पड़ोसन जिसका नाम रिहा है और उसकी उम्र भी १९-२० की है। रिहा बहुत ही खूबसूरत है, उसके स्तन बहुत ही शानदार, जैसे दो नारियल के बड़े गोले रखे हों, एकदम टाइट कहने का मतलब।
वो जब भी मेरे घर किसी काम से आती तो मुझे अलग कमरे में जाकर मुठ मारनी पड़ती, अब आप ही सोचो दोस्तो कि जब आपका ये चोदू संजय को मूठ मारनी पड़े तो उस नारी का क्या कहना।
ऐसा नहीं कि मैं ही उसे देखा करता था, वो भी जब भी मेरे घर आती तो उसकी आंखे कुछ ना कुछ तलाशती रहती, शायद मुझे!
मैं उसको चोदने का रास्ता तलाशने लगा।
एक रोज घर कोई नहीं था और वो मेरे घर आई। उस वक्त मैं अपने कमरे में टी.वी. पर बहुत गरमागरम चोदू पिक्चर देख रहा था। घर की घंटी बजी तो मैंने उठकर तौलिया लपेटा और दरवाजे को खोलने गया। दरवाजा खोलते ही मैंने देखा कि मेरी पड़ोसन रिहा खड़ी हैं। वो मुझे देखते ही मुस्करा पड़ी और पूछा- क्या बात है संजू ? नहाने जा रहे थे?
मैंने कहा- हां !
तो उसने कहा- मम्मी कहाँ गई?
तो मैंने कहा- बाहर गई हैं।
रिहा बात करते करते अन्दर आ गई और मैं भी टी.वी. पर चल रही नंगी पिक्चर के बारे में भूल गया क्योंकि उसकी आवाज तो मैंने पहले ही बंद कर रखी थी। मैंने कहा- रिहा ! क्या काम था?
तो उसने रसोई में से कोई चीज लेनी थी, तो मैं रसोई में उसका बताया सामान लेने गया और रिहा मेरे कमरे में कब चली गई मुझे पता ही नहीं चला। मैं जब रसोई से वापस आया तो रिहा को ना देख मैं उसे तलाशता हुआ अपने कमरे की तरफ गया तो देखा रिहा बेड पर बैठी बड़े गौर से टी.वी. पर चल रही पिक्चर को देख रही थी, रिहा को होश भी नहीं था कि मैं कमरे में आ गया हूँ।
इधर रिहा को पिक्चर देखते हुए मेरा लंड भी फटाफट बिस्तर छोड़ खड़ा हो गया और अंगड़ाई पर अंगड़ाई लेने लगा। चूंकि रिहा की पीठ मेरी तरफ थी तो उसे पता ही नहीं चला कि मैं कब आकर उसके पीछे खड़ा हो गया। रिहा पिक्चर देखते हुए गरम हो गई थी, वो अपने स्तनों को अपने ही हाथों से दबाती तो कभी अपनी चूत को अपनी उंगली से कुरेदने लगती तो कभी अपने होठों को अपने ही दांतो से काटने लगती।
लोहा गरम देख मैं घर का दरवाजा बंद कर रिहा के पीछे चुपचाप गया और पंलग पर बैठते हुवे पीछे से उसके स्तन दबाने लगा। एकदम से मेरे हाथ को देख वो डर गई। मगर मैं अब चुप रहने वाला थोड़े ही था, मैंने रिहा के होठों को अपने होठों से दबा लिया और चूसने लगा। कुछ देर तो रिहा मुझे दूर हटाने की कोशिश करती रही मगर रिहा तो खुद गरम हो चुकी थी।
धीरे धीरे मेरा एक हाथ उसके कुरते पर गया और उसके स्तन दबाने लगा। अब वह भी मेरा साथ देने लगी थी, उसका एक हाथ मेरी कमर पर गया और मेरी कमर को सहलाने लगी। अब मुझमें भी ताकत आ गई और मैंने रिहा का कुर्ता उतार दिया, कसम से मैं उसके तने चूचों को देखता ही रह गया। रिहा ने पूछा- क्या देख रहे हो?
तो मैंने कहा- रिहा डार्लिंग ! कसम से आज तक ऐसा हुस्न कहीं नहीं देखा।
नंगे स्तनों को मैं दोनों हाथों से दबाने लगा जैसे फिर कभी मौका मिले या ना मिले। रिहा का भी एक हाथ मेरे तौलिए पर गया और मेरे लंड को तलाशने लगा, वो कामयाब हो गई, आखिर मेरे लन्ड को तलाश ही लिया था।
उसने कुछ देर तक मेरे लन्ड को सहलाया, फिर बेड पर बैठ गई और मेरे लन्ड के सुपाड़े को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी, सच में मुझे एक ऐसी अनोखी यात्रा का आनन्द प्राप्त हो रहा था कि मैं शायद कहीं रास्ते में ही पंचर ना हो जाऊं।
मैंने रिहा से जबरदस्ती अपने लन्ड को छुड़ा कर उसकी सलवार पैन्टी समेत एक बार में ही उतार दी और उसकी चूत के दर्शन कर चूत को ऐसे चाटने लगा जैसे बिल्ली कटोरे में रखी मलाई को चाटती हो ! उसकी चूत को जीभ से ही चोदने लगा, रिहा का शरीर अकड़ने लगा था और अजीब सी आवाजें आने लगी- हाऽऽऽऽय सं……..जू बस करो ! मेरा पाऽऽऽनी निकऽऽऽल रऽऽऽहा हैं हाााााय मााााार डााालााााा।
मैंने लोहा गरम देखा और अपने लन्ड देव तो पहले से ही अंगड़ाइयाँ लेकर तैयार थे। लंड को सीधा रिहा की चूत पर रखा और उसके होठों को अपने होठों में लेकर चूसने लगा। रिहा भी मेरा पूरा साथ दे रही थी। साथ तो लन्ड देव भी गजब का दे रहे थे, अपने आप ही रिहा की चूत में धीरे-धीरे चुपके-चुपके जगह बनाने में लगे थे।
अब तक मेरा सुपाड़ा रिहा की चूत में जा चुका था, जिससे उसके चेहरे पर दर्द की शिकन आने लगी थी। मगर उसकी जुबान मेरे होठों की गिरफ़्त में थी इसलिये रिहा चाह कर भी चिल्ला नहीं पा रही थी।
मैंने हलका सा झटका दिया और मेरा ९ इंची का लौड़ा सीधा रिहा मैडम की चूत में आधा धंस गया। रिहा की चूत से निकल रहे चिकने पानी के कारण लंड को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो रही थी, मगर रिहा को थोड़ा बहुत तो दर्द हो ही रहा था। एक हाथ से मैं रिहा के बोबे सहला रहा था जिससे रिहा वापस मस्त हो रही थी, अब एक झटका और दिया तो लन्ड देव चूत रानी से गले जा मिला यानि मेरा लन्ड सीधा रिहा की बच्चेदानी को बजाने लगा जिससे रिहा को काफी दर्द होने लगा और अपने आप को छुड़ाने की नाकामयाब कोशिश करने लगी।
मैं कुछ देर रूक गया और उसे हर तरीके से सहलाने लगा। रिहा का दर्द जब कुछ कम हुआ तो धीरे धीरे लन्ड को आगे पीछे करने लगा। रिहा को भी मस्ती चढ़ने लगी और वह भी नीचे से मेरा साथ देने लगी। अब तो मैंने भी स्पीड पकड़ ली। रिहा की आवाजें नशीली होने लगी- उंमऽऽ हाययययय संज….उ……. मा…र…….डााााााा ला….. संजू डार्लिंग चोदो आज मेरी चूत को जैसे तुम चाहो जल्दी करो मेराााा हो रहा और १५-२० मिनट बाद ही हम दोनो ही का एक साथ पानी छुटा और एक दूसरे पर ढेर हो गये।
फिर तो मैंने और रिहा ने एक बार और सेक्स किया फिर रात को मिलने के वादे के साथ ही वो चली गई।
दोस्तो तुम्हारे पत्रों का मुझे बेदर्दी से इंतजार रहता हैं। Hindi Porn Stories
सभी दोस्तों को मेरा प्यार भरा नमस्कार। अपनी Hindi sex stories या आप बीती बताने से पहले मैं स्वय का परिचय देना उचित समझता हूँ। मेरा नाम रविंद्र है, मैं कोलकाता से हूँ। मैं विज्ञान में ग्रेजुएट हूँ।
कोई हादसा बताने से पहले उसका वातावरण और परिस्थितियां बताना आव्श्यक होता है, नहीं तो कहानी समझने में परेशानी होती है।
ये उस समय की बात है जब मैंने अपनी सीनीयर सेकेन्ड्री की परीक्षा दे कर कॉलेज में दाखिल हो चुका था।
मैं एक किराये के मकान में रहता था जो मेरे मौसा का ही था। हमारा खुद का मकान तब तक बन कर तैयार नहीं हुआ था। इस मकान में हम तीन लोग रहते थे। मैं पापा और मां दूसरी मंजिल पर रहते थे और मौसाजी चौथे फ़्लोर पर रहते थे। मौसा का रिश्ता हमारे से करीब का रिश्ता था। मौसा की बेटी मुझसे दो साल छोटी थी। उसके साथ मेरा ताल मेल अच्छा था। वो मेरी बहन भी थी और एक अच्छी दोस्त भी थी।
मैं उसे अपनी दिल की कर एक बात बताता था। वो मेरी हर बात को ध्यान से सुनती थी। रेखा मीना की करीब की सहेली थी मतलब बेस्ट फ़्रेन्ड थी, जो मीना के साथ एक ही क्लास में पढती थी। रेखा बहुत खूबसूरत थी ये तो मैं नहीं कहूंगा। लेकिन उसमे कोई बात थी, कोई कशिश थी जो मेरे दिल को छू जाती थी। स्कूल से छूटने के बाद वो रोज ही मिलने के लिये हमारे अपार्टमेन्ट में आती थी, क्यूंकि मीना के साथ रिश्ता बहुत अच्छा था। हम तीनो ही कभी कभी मूड होने पर खूब गप्पे मारते थे। कभी मौका मिलने पर मैं उन दोनो के साथ सिनेमा देखने भी जाता था।
इतना सब कुछ होने के बाद भी मैं रेखा के साथ खुल कर बात नहीं कर पाता था। धीरे धीरे मुझे महसूस होने लगा था कि मैं उसे प्यार करने लगा हूँ। मैं अपने दिल की बात रेखा को बताऊ, उससे पहले मैंने मीना से पूछ लेना उचित समझा। इसलिये एक दिन मैंने साहस करके अपने दिल की बात मीना को बता दी। पहले तो वो सुन कर हंस पड़ी, फिर सम्भलते हुये बोली – ये बहुत ही अच्छी बात है। फिर उसी से मुझे पता चला कि रेखा भी मेरे बारे में मीना से पूछताछ करती है। मीना ने मुझे खुद ही आगे बढ कर प्यार का इजहार करने की सलाह दी।
उसने बताया कि ये काम तो वो भी कर सकती है लेकिन मेरे स्वयं को रेखा को जाकर बताने से इसका असर बहुत अच्छा होगा। मीना की सलाह के मुताबिक मैंने एक दिन अपनी हिम्मत जुटाई और हमारे अपार्टमेन्ट के नीचे जाकर खड़ा हो गया और फिर रेखा के आने का इन्तज़ार करने लगा। पर हाय रे दिल ! मैंने जैसे ही रेखा को देखा मेरी जबान सूखने लगी, तालू से चिपक कर रह गई। पसीना निकल पड़ा। अब तो वो मेरे बिलकुल नजदीक आ चुकी थी। मेरा दिल जोर जोर से धड़कने लगा। मेरी हालत देख कर रेखा हंस पड़ी और नीचे खड़े होने की वजह पूछने लगी।
मुझे पता था कि ये प्यार के इजहार करने का सुनहरा मौका था। लेकिन मैं अन्दर से इतना बौखलाया हुआ था कि मैंने अपना यह सुनहरा मौका गवां दिया। मेरे मुख से निकल पड़ा – वो ,मेरा एक दोस्त आने वाला है इसलिये मैं उसके इन्तज़ार में नीचे खड़ा हूँ।
मेरे हकला कर बोलने से रेखा फिर से एक बार और हंस पड़ी। मेरी हालत ये थी कि मैं तो अपनी तक भी उससे नहीं मिला पा रहा था।
मैंने बाद में मीना को जो जो हुआ था सब बता दिया। उसे भी एक बार तो हंसी आ गई। फिर बोली उसे ये बात पता है, रेखा ने उसे ये सब खुद बताया था। मुझे बेहाल देख कर मीना ने फिर से कोशिश करने की सलाह दी।
देखते देखते तीन महिना गुज़र गया लकिन मैं हिम्मत नहीं जुटा पाया। इसी दौरान हमारा खुद का मकान पूरा बन चुका था। हम लोग नये घर में जाने की तैयारी कर रहे थे। एक रविवार के दिन मैं, मां, मीना मौसा और मौसी मिलकर घर का कुछ सामान और गृह प्रवेश काकुछ सामान भी लेकर नये वाले घर में गये। पापा हर रविवार को दादा, दादी, चाचा और चाची से मिलने के लिये अपने गांव जाया करते थे, इसलिये वो हमारे साथ नहीं थे।
उस रविवार को मेरे घर पर मेरा एक दोस्त आने वाला था, इसलिये मैं सामान रख कर जल्दी ही वहां से निकल गया था। तभी यकायक मेरे मन में एक ख्याल आया कि मीना और मौसी का तो नये घर में आने का कार्यक्रम तो सवेरे हू बना था। रेखा को तो ये पता नहीं था। वो तो हर दिन की तरह आज भी मीना से मिलने जरूर आयेगी। इस मौके को हाथ से नहीं जाने देना है। मैंने अपने दोस्त को फोन कर दिया कि मुझे आज नये घर मेजाना है इसलिये सोम वार को आना।
घर पहुंचते ही मुझे लगा कि यh मौका सुनहरा है। मैं ये मौका मिलने से बहुत रोमांचित होने लगा था। मौका को हाथ में लेने के लिये और प्यार का इजहार करने लिये मैं अपने आपको अलग ढंग से तैयार भी करने लगा। लेकिन जैसे ही रेखा के आने का समय नजदीक आने लगा मेरा कोंफ़ीडेन्स बढने के बजाय डगमगाने लगा। इसी समय किसी के ऊपर आने की आवाज सुनकर मैंने दरवाजे के होल पर आंख लगा दी। देखा तो रेखा मीना से मिलने के लिये ऊपर ही आ रही थी। जैसे ही वो ऊपर चली गई तो मैं अपना दरवाजा खोल कर उसके लौटने का इन्तज़ार करने लगा।
कुछ समय बाद वो नीचे उतर कर आई तो मुझे देख कर उसने मुझे मीना के बारे में पूछा। तो मैंने उसे कि वो मेरे पापा और मम्मी के साथ नये घर में गई हुई है। रेखा जैसे ही पीछे मुड़ कर लौट जाने के लिये मुड़ी तो मैंने उसे कहा कि वो मेरे घर पर मीना का इन्तज़ार कर ले। पहले तो ना करने लगी, पर मैंने उसे थोरा सा जोर दिया तो वो मान गई।
घर में घुसने के बाद मैंने उसे सोफ़ा पर बैठा दिया और खुद भी उसके सामने बैठ गया। पहले तो हम चुपचाप ही बैठे रहे, वो भी खामोश थी और मैं भी । फिर रेखा ने ही पूछा कि मैं खामोश क्यू बैठा हूँ। जवाब में मैं हिचकिचा गया और मुझसे कोई जवाब नहीं देते बना।
कुछ देर बाद उसने मुझे एक गिलास पानी के लिये कहा। मैं उठ कर पानी लेने चला गया और मन ही मन में सोचा कि जब वो पानी पीने के बाद गिलास वापस देगी तो मैं उसका हाथ पकड़ लूंगा और प्यार का इजहार कर दूंगा। फिर मैंने वैसा ही किया और गिलास लौटाते समय मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और मैंने उसे प्यार का इजहार कर दिया। इसके बाद हामरी बीच की बातचीत कुछ इस तरह से हुई।
मैं : रेखा, मैं तुम से प्यार करता हूँ। क्या तुम भी मुझ से प्यार करती हो?
रेखा : पता नहीं
मैं : देखो तुम कुछ तो बोलो ,तुम तो मुझे जानती हो, इस लिये प्लीज जो भी कहना हो मुझे बता दो।
यह बात सुनकर वो कुछ देर तक खमोश रही ओर उसके बाद उसने मेरे मन की बात ली और फिर वो मान गई। उसने बताया कि वो भी मुझसे प्यार करती है।
उसके बाद मैंने उसे अपनी बांहो में भर लिया और उसके होंठो को चूमने लगा। पांच मिनट तक हम एक दूसरे को जोश के साथ चूमते रहे। फिर मुझे ख्याल आया कि हमारे रूम की खिड़की खुली है। इसलिये मैं रेखा को लेकर बेड रूम में चला गया।
रेखा शर्माती और सकुचाती सी मेरे साथ चल पड़ी। मैंने उसे बेड पर लेटा दिया। वो झिझकती हुई बेड पर लेट गई। मैं भी धीरे से उसकी बगल में लेट गया। वो शर्मा कर मेरे से लिपट गई और मेरी छाती पर उसने अपना मुँह छुपा लिया। मैंने उसका चेहरा ऊपर करके उसे चूमना शुरू कर दिया था। उसकी सांसे उत्तेजना के मारे जोर जोर से चलने लगी थी। मैं समझ गया था कि वो भी मेरी तरह गरम हो चली है। मेरा लण्ड भी उसे चोदने के बेताब हो चला था। उसे खुली किताब की देख कर मेरा मन उसे चोदने को हो उठा । पर तभी मेरी नजर घड़ी पर पड़ी। मैं चौंक गया और झटपत उठ गया। पापा के लौटने का समय हो गया था। वो असंजस निगाहों से मुझे देखने लगी कि ये क्या हो गया । मैंने रेखा को समझा दिया। हमारे प्यार का सफ़र बीच में ही रुक गया।
उस दिन के बाद मैं और रेखा छुप छुप कर घूमने जाया करते थे। कभी कभी मीना भी हमारे साथ हो लेती थी।
Hindi sex stories
मेरा नाम अभिनव है, मैं गुजरात का रहने Hindi Sex Stories वाला हूँ और मैं अपनी एक कहानी बताने जा रहा हूँ जो काफ़ी दिलच़स्प है।
अब मैं मुख्य बात पर आ रहा हूँ। स्कूल के दिनों में मेरे साथ एक लड़का पढ़ता था जिसका नाम राहुल था। हमारे स्कूल में हमने एक समूह बना रखा था जो मौज-मस्ती करता था और साथ-साथ खेलते-कूदते भी थे। एक दिन राहुल आया और उसने हमसे पूछा कि मैं भी तुम्हारे समूह में सम्मिलित होना चाहता हूँ। पर हमने उसे मना कर दिया और वह वहाँ से चला गया।
उसने लगातार दस दिनों तक प्रयास किया कि वह हमारे साथ शामिल हो जाए पर उसे निराशा ही हाथ लगी। एक दिन राहुल ने मुझसे कहा कि तुमसे मेरी माँ मिलना चाहती है, तुम्हें बुलाया है। तो मैंने उसे टालने के लिए कह दिया कि ठीक है, मैं मिलकर आ जाऊँगा, पर मैं गया ही नहीं।
एक दिन मैं रास्ते पर जा रहा था कि सामने राहुल की मम्मी आती दिखीं, उन्होंने मुझसे कहा- मैंने तुम्हें बुलाया था, आते क्यों नहीं?
मैंने कहा- ठीक है, आज आ जाऊँगा।
और मैं चला गया।
उसके बाद मैं दोपहर को उसके घर गया तो राहुल घर पर नहीं था, उसकी मम्मी थी। उसने मुझे कुर्सी पर बिठाया और कहा कि तुम मेरे बेटे को अपने समूह में शामिल क्यों नहीं करते हो?
तो मैंने कहा- कुछ नहीं, बस ऐसे ही।
तो आंटी ने कहा- ऐसा नहीं करते, तुम उसे शामिल कर लो।
मैंने हामी भर दी।
फिर उसने मुझसे पूछा कि थम्स अप पीओगे?
तो मैंने हाँ कहा।
उसने उस समय क्रीम रंग की साड़ी और उसी रंग की ब्लाऊज़ भी पहन रखी थी। अन्दर काली ब्रा पहनी थी, वो भी साफ़ दिख रही थी और उसकी गांड इतनी मोटी और गोल-मटोल थी कि कोई देख ले तो पागल हो जाए।
वह किचन में चली गई, थम्सअप लाने के लिए।
जब वह थम्सअप लेकर आई तो मैं हैरान हो गया कि उसने साड़ी उतारकर सफेद पारदर्शी गाऊन पहना हुआ था और अन्दर काली ब्रा और काली पैन्टी साफ़ दिख रही थी, और भरा हुआ बदन जैसे संगमरमर का ताज़महल हो।
वह थम्सअप के दो गिलास लेकर मेरे पास बैठ गई और एक गिलास मुझे दिया और एक ख़ुद पीने लगी।
पीते-पीते मेरे जाँघों पर हाथ रख कर घुमा रही थी, मुझे गुदगुदी हो रही थी, लेकिन मुझे मज़ा भी आ रहा था, इसलिए कुछ नहीं बोला।
धीरे-धीरे उसका हाथ मेरे लण्ड के पास ले गई और पकड़ के मसलने लगी तो मैं खड़ा हो गया और कहा- मैं जा रहा हूँ।
तो उसने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे बिठा दिया, पूछा- क्या हुआ।
मैंने कहा- गुदगुदी हो रही है।
तो उसने कहा- आज तुझे कुछ सिखाऊँगी जो तेरे बहुत काम आएगा।
फिर मैं बैठ गया।
पहले तो उसने मुझे गाल पर किस किया और मेरी शर्ट उतार दी।
मैंने मना किया तो वह बोली- कुछ नहीं होगा, तुझे बहुत मज़ा आएगा।
फिर मैंने विरोध करना छोड़ दिया, उसने मेरी पैन्ट की चेन खोल कर मेरा लण्ड बाहर निकाल कर उसे किस्स किया और मुँह में लेकर कैण्डी की तरह चूसने लगी और मैं तो जैसे स्वर्ग में पहुँच गया था।
मेरे दोस्त की मम्मी 15 मिनट तक मेरा लंड चूसती रही, इसी दौरान मेरे सारे कपड़े भी उतार दिए। उसने मुझसे कहा कि मेरा गाऊन उतार दो!
तो मैंने उसका गाऊन उतार दिया और काली ब्रा-पैन्टी में जैसा आगरा का ताज़महल मेरे सामने आ खड़ा हुआ।
उसने कहा मेरी ब्रा भी उतार दो, तो मैंने वैसा ही किया।
ब्रा खोलते ही जैसे दो कबूतर आज़ाद होकर उछलकर बाहर आ गए।
उसने मेरा सिर पकड़कर मेरा मुँह उसकी चूचियों पर रख कर मुझे चूसने को कहा तो मैं जीभ घुमाने लगा और चूसने लगा। तब उसके मुँह से आआआ आआ… हहह हहह… निकने लगी। वह मेरा लण्ड पकड़कर दबाने लगी।
थोड़ी देर में वह काफ़ी गरम हो गई और मुझे नोचने-खसोटने लगी, उसने कहा- तुम्हारा लण्ड तो बहुत बड़ा है और मेरे पति का तो इसका आधा ही है।
मैं तो मानो अपने होश में ही नहीं था। वह जैसा कह रही थी मैं वैसे ही करता जा रहा था। मेरे अन्दर इतनी समझ नहीं थी मैं कुछ कर सकूँ।
फिर वह बिस्तर पर लेट गई और बोली- तुम मेरी भोस को चाटो!
तो मैं उसकी पाँवों के बीच में बैठ कर जीभ घुमा-घुमा कर चाटने लगा। वह मेरा मुँह दबा कर जोर से चिल्ला रही थी… चाटो… चाटो… चाटो… मुझे खत्म कर दे, खत्म कर दे।
उसी समय उसकी भोस से कुछ चिकना-चिकना क्रीम निकलने लगा वो मैं पी गया वह मुझे काफी मज़ेदार लगा, तो मैंने पूरा चाट लिया।
अब उसने कहा- अब उठो और मेरी भोस में डालो!
तब मैं पोज़ीशन लेकर उसकी पाँवों के बीच बैठ गया और लण्ड पकड़कर उसकी भोस पर रख कर थोड़ा धक्का दिया। चिकनाई की वज़ह से मेरा लण्ड सटाक से अन्दर चला गया।
उसने कहा- शाबास बेटे तुमने सिक्सर लगाया, चालू रख!
मैं तो धक्के पर धक्का लगा रहा था, वो खुशी से पागल हो रही थी, नीचे से गांड उठा उठाकर साथ दे रही थी.
थोड़ी देर बाद वह उठकर खड़ी हो गई और मुझसे कहा- मेरी गांड में डाल और फाड़ दे।
उसने मुझे क्रीम दी और कहा- पहली बार गांड में डलवा रही हूँ इलसिए मेरी गांड पर ये थोड़ा लगा, और थोड़ा अपने लण्ड पर भी लगाकर पेल दे।
मैंने ऐसा ही किया और उसकी गांड पर रख कर धक्का दिया तो उसकी एक लम्बी चीख निकल गई, और बोली, बाहर निकाल नहीं तो मैं मर जाऊँगी। लेकिन मैंने कुछ नहीं सुना और धक्के जारी रखे, उसकी गांड से थोड़ा सा खून भी निकला, मैं घबरा गया तो उसने कहा कि डार्लिंग, कुछ भी नहीं, तू चालू रख, ये खुशी का खून है।
कुछ देर तक धक्के मारने के बाद मैंने अपना लण्ड निकाल कर उसके मुँह में दे दिया और वह मेरा लण्ड चूसने लगी और मेरा क्रीम सारा उसके मुँह में चला गया और उसने पूरा पी लिया। फिर चाटकर मेरा लण्ड साफ कर दिया.
फिर उठकर कपड़े पहनने लगा तो उसने कहा- कल आना, मैं तुझे दूसरा मज़ा दूँगी जो तेरी शादी के बाद तुझे काम आएगा और तुझे तक़लीफ नहीं होगी और बहुत मज़ा आएगा।
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